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Detailed Chapter 15 राष्ट्रीय आय से सम्बन्धित समुच्चय RBSE Solutions for Class 12 Economics
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Class 12 Economics Chapter 15 राष्ट्रीय आय से सम्बन्धित समुच्चय RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Economics Chapter 15 अभ्यासार्थ प्रश्न
RBSE Class 12 Economics Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. राष्ट्रीय आय का विश्व में सबसे पहले प्रयोग किसने किया?
(अ) विलियम डिग्बी ने
(ब) साइमन कुजनेट्स ने
(स) फिशर
(द) डॉ. बी.के. आर.वी. राव
Answer: (ब) साइमन कुजनेट्स ने
In simple words: यह प्रश्न पूछता है कि दुनिया में सबसे पहले "राष्ट्रीय आय" शब्द का प्रयोग किसने किया। साइमन कुजनेट्स ने सबसे पहले इसका प्रयोग किया।
🎯 Exam Tip: आर्थिक इतिहास में प्रमुख व्यक्तियों और उनके योगदानों को याद रखें।
Question 2. राष्ट्रीय आय को भौतिक व अभौतिक वस्तुओं (सेवाओं) के शुद्ध उत्पादन का योग किसने बताया?
(अ) मार्शल ने
(ब) फिशर ने
Answer: (अ) मार्शल ने
In simple words: यह प्रश्न पूछता है कि राष्ट्रीय आय को भौतिक और अभौतिक वस्तुओं (सेवाओं) के शुद्ध उत्पादन का कुल योग किसने बताया। मार्शल ने इस तरह से इसकी परिभाषा दी।
🎯 Exam Tip: विभिन्न अर्थशास्त्रियों की परिभाषाओं पर ध्यान दें क्योंकि वे राष्ट्रीय आय के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती हैं।
Question 3. राष्ट्रीय आय में निम्न में से कौन-सी मद शामिल की जाती है?
(अ) पेंशन
(ब) बेरोजगारी भत्ता
(स) उपहार
(द) वेतन
Answer: (द) वेतन
In simple words: प्रश्न पूछता है कि राष्ट्रीय आय में कौन-सी मद शामिल की जाती है। वेतन को शामिल किया जाता है क्योंकि यह उत्पादक कार्य के लिए भुगतान है, जबकि पेंशन, बेरोजगारी भत्ता और उपहार हस्तांतरण भुगतान हैं।
🎯 Exam Tip: हमेशा कारक आय (उत्पादन के कारकों के लिए भुगतान) और हस्तांतरण भुगतानों (बिना वस्तु या सेवा प्रदान किए प्राप्त आय) के बीच अंतर करें, क्योंकि राष्ट्रीय आय में केवल कारक आय शामिल होती है।
Question 4. राष्ट्रीय आय की विशेषता नहीं है –
(अ) राष्ट्रीय आय एक वर्ष से सम्बन्धित होती है।
(ब) राष्ट्रीय आय प्रवाह होती है।
(स) इसकी गणना अन्तिम वस्तुओं व सेवाओं से होती है।
(द) अनुत्पादक क्रियाएँ शामिल होती हैं।
Answer: (द) अनुत्पादक क्रियाएँ शामिल होती हैं।
In simple words: यह प्रश्न पूछता है कि राष्ट्रीय आय की कौन सी विशेषता नहीं है। राष्ट्रीय आय में केवल उत्पादक गतिविधियाँ शामिल होती हैं; अनुत्पादक गतिविधियों को नहीं गिना जाता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि राष्ट्रीय आय केवल उत्पादक आर्थिक गतिविधियों से उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापती है।
Question 5. राष्ट्रीय आय का उपयुक्त माप है -
(अ) GNP
(ब) GDP
(स) NNP mc
(द) NNPE
Answer: (स) NNP mc
In simple words: यह प्रश्न राष्ट्रीय आय का सबसे उपयुक्त माप पूछता है। NNP बाजार लागत पर (NNP mc) को सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि यह उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के शुद्ध मूल्य को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: GNP, GDP, NNP के बीच के अंतर और राष्ट्रीय आय के मापन के लिए 'बाजार लागत' बनाम 'साधन लागत' के महत्व को समझें।
RBSE Class 12 Economics Chapter 15 अति लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. भारत की राष्ट्रीय आय के अनुमान प्रतिवर्ष किसके द्वारा प्रकाशित किये जाते हैं?
Answer: भारत की राष्ट्रीय आय के अनुमान प्रतिवर्ष केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (C.S.O) द्वारा प्रकाशित किये जाते हैं।
In simple words: भारत में, राष्ट्रीय आय के अनुमान हर साल केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (C.S.O.) द्वारा प्रकाशित किए जाते हैं। यह संगठन ऐसे महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों को इकट्ठा करने और जारी करने के लिए जिम्मेदार है।
🎯 Exam Tip: भारत में राष्ट्रीय आय के अनुमानों के लिए जिम्मेदार सरकारी निकाय का नाम याद रखें।
Question 3. अन्तिम उपभोग्य वस्तुओं व सेवाओं का अभिप्राय संक्षेप में बताइए।
Answer: अन्तिम उपभोग्य वस्तुएँ और सेवाएँ वे मदें हैं जिन्हें उत्पादन के किसी अन्य चरण से नहीं गुजरना होता है। उपभोक्ता उन्हें सीधे उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, तैयार कपड़े या एक बिस्तर अन्तिम वस्तुएँ हैं।
In simple words: अन्तिम उपभोग्य वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जिनका अब और उत्पादन नहीं करना होता। उपभोक्ता उन्हें सीधे उपयोग करते हैं।
🎯 Exam Tip: अन्तिम वस्तुओं को उन वस्तुओं के रूप में स्पष्ट रूप से परिभाषित करें जो उपभोक्ता द्वारा अंतिम उपयोग या निवेश के लिए तैयार हैं, उन्हें मध्यवर्ती वस्तुओं से अलग करते हुए।
Question 4. घरेलू आधार पर ज्ञात राष्ट्रीय आय की गणना को क्या कहा जाता है?
Answer: जब राष्ट्रीय आय की गणना किसी देश की सीमाओं के भीतर की गतिविधियों के आधार पर की जाती है, तो इसे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) कहा जाता है। GDP देश के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को मापता है।
In simple words: घरेलू आधार पर राष्ट्रीय आय की गणना को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) कहते हैं।
🎯 Exam Tip: समझें कि "घरेलू" भौगोलिक सीमाओं को संदर्भित करता है, जबकि "राष्ट्रीय" उत्पादकों की नागरिकता को संदर्भित करता है।
Question 5. देश की नागरिकता के आधार पर ज्ञात राष्ट्रीय आय की गणना को क्या कहा जाता है?
Answer: जब राष्ट्रीय आय की गणना किसी देश के नागरिकों द्वारा अर्जित आय के आधार पर की जाती है, चाहे वे दुनिया में कहीं भी हों, तो इसे सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) कहा जाता है। GNP उत्पादन के कारकों के स्वामित्व पर केंद्रित होता है।
In simple words: नागरिकता के आधार पर राष्ट्रीय आय की गणना को सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) कहते हैं।
🎯 Exam Tip: GDP (सीमाओं के भीतर उत्पादन) और GNP (नागरिकों द्वारा उत्पादन) के बीच अंतर करें।
RBSE Class 12 Economics Chapter 15 लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. निम्न को संक्षेप में समझाइये: बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद, साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद, बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद, बाजार कीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय-उत्पाद, साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय-उत्पाद, निजी आय, व्यक्तिगत आय, व्यक्तिगत खर्चयोग्य आय, प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय।
Answer:
बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू-उत्पाद (NDPMC)
बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद ज्ञात करने के लिए बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद में से घिसावट (मूल्य ह्रास) को घटाया जाता है।
\( NDP_{MC} = GDP_{MP} - D \)
साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDPFC)
साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद ज्ञात करने के लिए बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद में से अप्रत्यक्ष कर को घटाया जाता है और अनुदानों को जोड़ा जाता है।
\( NDP_{FC} = NDP_{MC} - IT + S \)
जहाँ \( IT \) = अप्रत्यक्ष कर
\( S \) = अनुदान
\( GNP_{MP} = C + I + G + NFIA + (X – M) \)
बाजार कीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय-उत्पाद (NNPMP)
वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन में स्थिर पूँजी का उपयोग होता है। उत्पादन प्रक्रिया के दौरान मशीनें घिस जाती हैं या उनमें टूट-फूट हो जाती है। कभी-कभी आविष्कार के कारण पुरानी मशीनें अनुपयोगी हो जाती हैं। इस प्रकार संसाधनों की उत्पादन क्षमता में कमी या ह्रास होने के कारण सकल राष्ट्रीय उत्पाद (\( GNP_{MP} \)) में से इस मूल्य को घटा दिया जाता है।
\( NNP_{MP} = GNP_{MP} - D \)
\( D \) = घिसावट
साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय-उत्पाद (NNPFC)
एक देश में उत्पादित होने वाली वस्तु सेवा के उत्पादन के लिए साधनों पर किया गया व्यय साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद होता है। सरकार द्वारा लगाया गया अप्रत्यक्ष कर घटाते हैं व सरकार द्वारा दी गई छूट या अनुदान जोड़कर साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद की गणना की जाती है।
\( NNP_{FC} = NNP_{MP} - IT + S \)
जहाँ \( IT \) = अप्रत्यक्ष कर
\( S \) = अनुदान
या \( NNP_{FC} = R + I + W + P \)
जहाँ \( R \) = लगान
\( I \) = ब्याज
\( W \) = मजदूरी
\( P \) = लाभ
निजी आय (Private Income)
निजी आय में सभी निजी क्षेत्रों द्वारा उत्पादित आय या अन्य किन्हीं स्रोत से प्राप्त आय एवं निगम करो द्वारा रखी गयी आय भी शामिल है। साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद में जिन मदों को शामिल किया जाता है वे हैं सरकार व विदेशों से प्राप्त हस्तान्तरण भुगतान (बेरोजगारी भत्ता, पेंशन) राष्ट्रीय ऋणों पर ब्याज, उपहार और अप्रत्याशित लाभ।
\( \text{Private Income} = (NNP_{FC}) + TP + IPD – CSS – PPU \)
जहाँ \( TP \) = सरकार व विदेशों से प्राप्त हस्तान्तरण भुगतान
\( IPD \) = सार्वजनिक ऋणों पर ब्याज
\( CSS \) = सामाजिक सुरक्षा अंशदान
\( PPU \) = सार्वजनिक उपक्रमों के अतिरेक लाभ
व्यक्तिगत आय (Personal Income)
उन सभी आय का योग होती हैं जो वास्तव में व्यक्तियों या घरेलू क्षेत्र द्वारा प्राप्त होती हैं। व्यक्तिगत आय को निम्नानुसार ज्ञात किया जाता है –
व्यक्तिगत आय \( (PI) = NNP_{FC} \) - अवितरित निगम लाभ – निगम-कर सामाजिक सुरक्षा अंशदान + हस्तान्तरण भुगतान + सार्वजनिक ऋण पर ब्याज
प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय (PCI)
किसी देश की राष्ट्रीय आय के साथ-साथ उसकी प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय का भी बहुत महत्व होता है। प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय का मूल्यांकन राष्ट्रीय आय को किसी देश की जनसंख्या का भाग देकर निम्नानुसार ज्ञात किया जाता है-
\[ \text{प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय (PCI)} = \frac { \text{राष्ट्रीय आय} }{ \text{देश की जनसंख्या} } \]
In simple words: यह प्रश्न राष्ट्रीय आय के विभिन्न घटकों को समझाने के लिए कहता है। शुद्ध घरेलू उत्पाद बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद में से घिसावट घटाकर मिलता है। साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद बाजार कीमत वाले शुद्ध घरेलू उत्पाद में से अप्रत्यक्ष कर घटाकर और सब्सिडी जोड़कर मिलता है। सकल राष्ट्रीय उत्पाद में निजी खपत, निवेश, सरकारी खर्च, विदेशों से शुद्ध कारक आय और शुद्ध निर्यात शामिल हैं। निजी आय में निजी क्षेत्र की सभी आय और हस्तांतरण भुगतान शामिल होते हैं। व्यक्तिगत आय वह आय है जो व्यक्तियों को वास्तव में मिलती है। प्रति व्यक्ति आय कुल राष्ट्रीय आय को जनसंख्या से भाग देकर निकाली जाती है। राष्ट्रीय आय को सही ढंग से मापने के लिए इन सभी अवधारणाओं को समझना महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक राष्ट्रीय आय अवधारणा को उसकी परिभाषा, सूत्र और घटकों के साथ समझना महत्वपूर्ण है, खासकर जब बाजार मूल्य और कारक लागत के बीच रूपांतरण की आवश्यकता हो।
Question 2. राष्ट्रीय आय के महत्व को संक्षेप में समझाइये।
Answer: राष्ट्रीय आय एक देश की अर्थव्यवस्था का दर्पण होती है। राष्ट्रीय आय का मूल्यांकन एक देश की सही आर्थिक जानकारी प्रस्तुत करता है। सरकारों को राष्ट्रीय-आय की गणना के द्वारा उचित आर्थिक नीतियाँ बनाने में मदद मिलती है। देश में राष्ट्रीय आय के आँकड़ों का उपयोग आय के समान वितरण, रोजगार में वृद्धि हेतु किया जाता है। एक देश के विभिन्न भागों की आर्थिक प्रगति में असमानता का पता राष्ट्रीय-आय के वितरण से चल सकता है। क्षेत्रीय असमानता दूर करने हेतु नीति बनाने में राष्ट्रीय आय के आँकड़ों का बहुत उपयोग होता है संसार के देशों की तुलना करने के लिए भी राष्ट्रीय आय का अध्ययन सहायक होता है। राष्ट्रीय आय के आँकड़ों के आधार पर कृषि व पशुपालन के समुचित विकास की रणनीतियाँ बनायी जाती हैं। प्रत्येक देश अपने उद्योग, व्यापार एवं अन्य वाणिज्यक क्रियाओं के विस्तार का मूल्यांकन राष्ट्रीय आय के आधार पर करता है। राष्ट्रीय आय के आँकड़े शोध हेतु उपयोगी होते हैं। आर्थिक नियोजन हेतु राष्ट्रीय आय के स्तर व संरचना से उपयोगी जानकारियाँ मिलती हैं। राष्ट्रीय आय की संरचना प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय का आधार प्रदान करती है।
In simple words: राष्ट्रीय आय किसी देश की अर्थव्यवस्था का एक आईना होती है। यह सरकारों को अच्छी आर्थिक नीतियां बनाने और आय के वितरण को समझने में मदद करती है। ये आंकड़े देशों की तुलना करने, देश के विभिन्न हिस्सों की वृद्धि देखने और कृषि और उद्योगों के लिए योजना बनाने में भी सहायक होते हैं। यह शोध और आर्थिक नियोजन के लिए बहुत उपयोगी है।
🎯 Exam Tip: नीति निर्माण, देशों के बीच तुलना और आर्थिक संरचना को समझने जैसे राष्ट्रीय आय डेटा के कई उपयोगों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 3. राष्ट्रीय आय के मापन की कठिनाइयों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: राष्ट्रीय-आय का माप करते समय विभिन्न प्रकार की कठिनाइयाँ आती हैं। कुछ कठिनाइयाँ सैद्धान्तिक होती हैं – प्रमुख कठिनाइयाँ निम्नलिखित प्रकार हैं –
1. स्वयं के रोजगार से प्राप्त आय की गणना कठिन कार्य है।
2. पुरानी, अन्तरिम वे मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्यांकन की कठिनाइयाँ।
3. अंशपत्र व ऋणपत्रों के बाजार के लेन-देन केवल कागजी क्रियाएँ होने से राष्ट्रीय आय में नहीं गिनी जाती हैं।
4. गैर-कानूनी क्रियाएँ व काला-बाजार की आर्थिक-क्रियाएँ भी सैद्धान्तिक कठिनाइयाँ पैदा करती हैं।
5. आराम के लिए अवकाश इत्यादि गणना कठिन कार्य है।
In simple words: राष्ट्रीय आय को मापना मुश्किल होता है। कुछ दिक्कतें सैद्धांतिक हैं। जैसे, स्वरोजगार से हुई कमाई को गिनना कठिन है। पुरानी या मध्यवर्ती वस्तुओं का सही मूल्य तय करना भी मुश्किल है। शेयरों की खरीद-बिक्री सिर्फ कागजी काम है, इसलिए इसे राष्ट्रीय आय में नहीं गिना जाता। गैर-कानूनी काम और काले बाजार की गतिविधियां भी मापना मुश्किल हैं। यहां तक कि आराम के समय को भी राष्ट्रीय आय में गिनना मुश्किल है।
🎯 Exam Tip: मापन की कठिनाइयों पर चर्चा करते समय, उन्हें वर्गीकृत करें (जैसे, वैचारिक, व्यावहारिक) और प्रत्येक के लिए विशिष्ट उदाहरण प्रदान करें।
RBSE Class 12 Economics Chapter 15 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. राष्ट्रीय आय व इसकी विशेषताओं को विस्तार से समझाइये।
Answer: आय के अनुमान के लिए एक राष्ट्रीय आय समिति का गठन प्रो. प्रफुल्ल चन्द्र महलनोबिस (1949) की अध्यक्षता में हुआ। उक्त समिति के सदस्य सलाहकार प्रो. साइमन कुजनेट्स थे।
राष्ट्रीय आय की विशेषताएँ – उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर राष्ट्रीय आय की निम्न विशेषताएँ हैं –
1. राष्ट्रीय आय का सम्बन्ध एक देश की अर्थव्यवस्था से होता है।
2. राष्ट्रीय आय का सम्बन्ध एक निश्चित अवधि जो सामान्यतः एक वित्तीय वर्ष की होती है, (भारत में एक अप्रैल से अगले वर्ष के 31 मार्च तक)।
3. राष्ट्रीय आय का सम्बन्ध एक देश के निवासियों की आर्थिक क्रियाओं से होता है किन्तु वर्तमान में देश के भौगोलिक क्षेत्र में निवासियों और गैर-निवासियों की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन भी इसमें शामिल होता है।
4. राष्ट्रीय आय का सम्बन्ध उत्पादक आर्थिक क्रियाओं से होता है अर्थात् इसमें अनुत्पादक-क्रियाओं को सम्मिलित नहीं किया जाता है।
5. राष्ट्रीय आय की गणना का सम्बन्ध अन्तिम उपभोग्य-वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन से होता है।
6. राष्ट्रीय आय की गणना प्रचलित बाजार कीमत पर की जाती है।
7. राष्ट्रीय आय की गणना देश की मुद्रा में व्यक्त की जाती है।
8. राष्ट्रीय आय की गणना विभिनन वस्तुओं व सेवाओं के मूल्यों का योग होती है।
9. राष्ट्रीय आय एक प्रकार का भण्डार/स्कन्ध (Stock) नहीं होता है।
10. राष्ट्रीय आय की गणना शुद्ध प्रवाह होता है के अनुसार की जाती है अर्थात् इसमें से घिसावट (मूल्य ह्रास) को घटाया जाता है।
In simple words: राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाने के लिए, 1949 में प्रोफेसर प्रफुल्ल चंद्र महालनोबिस की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी, जिसमें प्रोफेसर साइमन कुजनेट्स सलाहकार थे। राष्ट्रीय आय किसी देश की आर्थिक गतिविधि को एक वित्तीय वर्ष जैसी निश्चित अवधि में दिखाती है। इसमें निवासियों और कभी-कभी गैर-निवासियों की उत्पादक गतिविधियाँ शामिल होती हैं, जो अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं और बाजार कीमतों पर मापी जाती हैं। यह देश की मुद्रा में व्यक्त एक प्रवाह अवधारणा है, जो मूल्यह्रास को घटाकर शुद्ध मूल्य को दर्शाती है।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय की विशेषताओं को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें और अवधारणा की पूरी समझ दिखाने के लिए प्रत्येक बिंदु को संक्षेप में समझाएं।
Question 2. काल्पनिक संख्यात्मक उदाहरण की सहायता से राष्ट्रीय आय के विभिन्न घटकों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: भारत में राष्ट्रीय आय का संख्यात्मक उदाहरण – (i) बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDPMP) (ii) साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDPFC) (iii) बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNPMP) (iv) बाजार कीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP) (v) साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNPPC) (vi) निजी आय (PI) (vii) व्यक्तिगत आय (Personal Income) (viii) व्यक्तिगत खर्च योग्य आय (PDI) (ix) प्रतिव्यक्ति राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए।
**दिए गए आंकड़े:**
6. देश की जनसंख्या = 50 करोड़
7. सरकारी विभागों, जैसे रेल विभाग की आय = Rs. 5,000 करोड़
8. सरकारी गैर-विभाग; जैसे – स्टेट बैंक के लाभ = Rs. 5,000 करोड़
9. सरकारी कर्मचारियों द्वारा पेंशन इत्यादि हेतु चुकाया अंशदान = Rs. 2,500 करोड़
10. सरकार से व्यक्तियों को चालू वर्ष की प्राप्तियाँ = Rs. 2,500 करोड़
11. विदेशों से व्यक्तियों को चालू वर्ष की प्राप्तियाँ = Rs. 1,000 करोड़
12. सरकारी ऋणों पर ब्याज प्राप्तियाँ = Rs. 1,500 करोड़
13. निजी कम्पनी की बचतें = Rs. 5,000 करोड़
14. निजी कम्पनी के निगम कर = Rs. 7,500 करोड़
15. व्यक्तियों के आयकर = Rs. 5,000 करोड़
16. व्यक्तियों की फीस = Rs. 2,000 करोड़
17. जुर्माने = Rs. 1,000 करोड़
**हल:**
(i) **बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDPMP)**
\( NDP_{MP} = GDP_{MP} - D = 2,00,000 - 5,000 = \text{Rs. } 1,95,000 \text{ करोड़} \)
(ii) **साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDPFC)**
\( NDP_{FC} = NDP_{MP} - IT + S = 1,95,000 - 5,000 + 2,500 = \text{Rs. } 1,92,500 \text{ करोड़} \)
(iii) **बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय-उत्पाद (GNPMP)**
\( GNP_{MP} = GDP_{MP} + \text{शुद्ध विदेशी आय} = 2,00,000 + 5,000 = 2,05,000 \text{ करोड़} \)
(iv) **बाजार कीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP)**
\( NNP_{MP} = GNP_{MP} - D = 2,05,000 - 5,000 = \text{Rs. } 2,00,000 \text{ करोड़} \)
(v) **साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNPFC)**
\( NNP_{FC} = NNP_{MP} - IT + S = 2,00,000 - 5,000 + 2,500 = \text{Rs. } 1,97,500 \text{ करोड़} \)
(vi) **निजी आय (PI)**
\( PI = NNP_{FC} - (\text{सरकारी विभाग जैसे रेल विभाग की आय} + \text{सरकारी गैर विभाग जैसे स्टेट बैंक के लाभ} + \text{सरकारी कर्मचारियों द्वारा पेंशन इत्यादि हेतु चुकाया अंशदान}) + (\text{सरकार से चालू वर्ष की प्राप्तियाँ} + \text{विदेशों से चालू वर्ष की प्राप्तियाँ} + \text{सरकारी ऋणों पर ब्याज प्राप्तियाँ}) \)
\( = 1,97,500 - (5,000 + 5,000 + 2,500) + (2,500 + 1,000 + 1,500) = \text{Rs. } 1,90,000 \text{ करोड़} \)
(vii) **व्यक्तिगत आय (Per I)**
\( \text{व्यक्तिगत आय} = \text{निजी आय (PI)} - (\text{निजी कम्पनी की बचतें}) - (\text{निजी कम्पनी के निगम कर}) \)
\( = 1,90,000 - (5,000) - (7,500) = \text{Rs. } 1,77,500 \text{ करोड़} \)
(viii) **व्यक्तिगत खर्च योग्य आय (PDI)**
\( PDI = \text{व्यक्तिगत आय (Per I)} - (\text{व्यक्तियों के आयकर}) - (\text{व्यक्तियों की फीस} + \text{जुर्माने}) \)
\( = 1,77,500 - (5,000) - (2,000) - (1,000) = \text{Rs. } 1,69,500 \text{ करोड़} \)
(ix) **प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय (PCI)**
\( \text{प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय (PCI)} = \frac { \text{राष्ट्रीय आय (WI)} }{ \text{देश की जनसंख्या} } = \frac { 1,97,500 \text{ करोड़} }{ 50 } = \text{Rs. } 3,950 \text{ प्रति व्यक्ति} \)
In simple words: इस प्रश्न में विभिन्न राष्ट्रीय आय घटकों की गणना एक संख्यात्मक उदाहरण का उपयोग करके की गई है। हमने बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDPMP), साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDPFC), बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNPMP), बाजार कीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP), साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNPFC), निजी आय (PI), व्यक्तिगत आय (Personal Income), व्यक्तिगत खर्च योग्य आय (PDI), और प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय (PCI) की गणना की है। जीडीपीएमपी को 2,00,000 करोड़ रुपये मानकर गणना की गई। प्रत्येक चरण में संबंधित सूत्र का उपयोग करके मानों को घटाया या जोड़ा गया।
🎯 Exam Tip: संख्यात्मक प्रश्नों के लिए, सभी दिए गए डेटा और उपयोग किए गए सूत्रों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें। पूर्ण अंक प्राप्त करने के लिए गणना के प्रत्येक चरण को दिखाएं।
Question 1. राष्ट्रीय आय समिति का अध्यक्ष कौन था?
(अ) डॉ. वी.के. आर.वी
(ब) प्रो. प्रफुल्ल चन्द्र महलनोबिस
(स) फिण्डले शिराज
(द) विलियम डिग्बी
Answer: (ब) प्रो. प्रफुल्ल चन्द्र महलनोबिस
In simple words: प्रश्न पूछता है कि राष्ट्रीय आय समिति का अध्यक्ष कौन था। प्रोफेसर प्रफुल्ल चन्द्र महलनोबिस इस महत्वपूर्ण समिति के प्रमुख थे।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण आर्थिक समितियों और उनके संबंधित पदों से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों के नाम याद रखें।
Question 2. राष्ट्रीय आय समिति का गठन किस वर्ष किया गया?
(अ) 1921
(ब) 1935
(स) 1948
(द) 1949
Answer: (द) 1949
In simple words: प्रश्न पूछता है कि राष्ट्रीय आय समिति का गठन किस वर्ष किया गया था। इसका गठन वर्ष 1949 में किया गया था।
🎯 Exam Tip: आर्थिक समितियों और नीतियों से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियों को जानना आवश्यक है।
Question 3. किस वर्ष से केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) द्वारा राष्ट्रीय आय के अनुमान प्रकाशित किये जाते हैं?
(अ) 1930
(ब) 1948
(स) 1954
(द) 1956
Answer: (x) No answer found in source
In simple words: (स्रोत में कोई उत्तर नहीं मिला)
🎯 Exam Tip: केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) के गठन और उसके राष्ट्रीय आय अनुमानों के प्रकाशन की शुरुआत के वर्षों को ध्यान में रखें।
Question 4. "राष्ट्रीय आय समाज की वस्तुपरक आय का वह भाग है जो कि मुद्रा में मापा जा सकता है और इसमें विदेशों से प्राप्त आय भी सम्मिलित है।" यह परिभाषा किसकी है?
(अ) फिशर
(ब) पीगू
(स) मार्शल
(द) कीन्स
Answer: (x) No answer found in source
In simple words: (स्रोत में कोई उत्तर नहीं मिला)
🎯 Exam Tip: विभिन्न अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गई राष्ट्रीय आय की परिभाषाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि वे अवधारणा के विभिन्न पहलुओं पर जोर देते हैं।
Question 5. निम्न में से कौन-सा सत्य है –
(अ) कुल राष्ट्रीय उत्पाद = कुल घरेलू उत्पाद + घिसावट व्यय
(ब) शुद्ध घरेलू उत्पाद = कुल राष्ट्रीय उत्पाद + घिसावट व्यय
(स) शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद = कुल राष्ट्रीय उत्पाद – घिसावट व्यय
(द) कुल राष्ट्रीय उत्पाद = शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद + घिसावट व्यय
Answer: (x) No answer found in source
In simple words: (स्रोत में कोई उत्तर नहीं मिला)
🎯 Exam Tip: 'सकल' और 'शुद्ध' के बीच के संबंध को हमेशा याद रखें, जहाँ शुद्ध = सकल - घिसावट, और सकल = शुद्ध + घिसावट।
Question 7. क्या सत्य है?
(अ) GNP = GDP + घिसावट
(ब) GNP = NNP + घिसावट
(स) NNP = GNP – घिसावट
(द) NNP = GNP + घिसावट
Answer: (x) No answer found in source
In simple words: (स्रोत में कोई उत्तर नहीं मिला)
🎯 Exam Tip: सकल (Gross), शुद्ध (Net), घरेलू (Domestic), और राष्ट्रीय (National) अवधारणाओं के बीच के संबंधों को पूरी तरह से समझें।
Question 8. राष्ट्रीय आय की गणना के कितने आधार हैं?
(अ) दो
(ब) चार
(स) तीन
(द) पाँच
Answer: (अ) दो
In simple words: प्रश्न पूछता है कि राष्ट्रीय आय की गणना के कितने मुख्य आधार हैं। गणना के दो मुख्य आधार हैं।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय की गणना के विभिन्न दृष्टिकोणों (आय विधि, व्यय विधि, उत्पाद/मूल्य वर्धित विधि) को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 9. एक देश की राष्ट्रीय – आय का सर्वाधिक उपयुक्त माप कौन-सा है?
(अ) NNPFE
(ब) NNP mc
(स) GDPFC
(द) GDPMC
Answer: (अ) NNPFE
In simple words: प्रश्न पूछता है कि किसी देश की राष्ट्रीय आय का सबसे उपयुक्त माप क्या है। साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNPFC) को अक्सर सबसे अच्छा माप माना जाता है, क्योंकि यह उत्पादन के कारकों को होने वाली आय को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: समझें कि राष्ट्रीय आय के माप के रूप में NNP कारक लागत पर क्यों पसंद किया जाता है, क्योंकि यह उत्पादन के कारकों को होने वाली आय को दर्शाता है।
Question 10. निम्न में से कौन-सा हस्तान्तरण भुगतान है?
(अ) पेंशन
(ब) बेरोजगारी भत्ता
(स) उपहार
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: प्रश्न पूछता है कि दिए गए विकल्पों में से कौन-सा हस्तांतरण भुगतान है। पेंशन, बेरोजगारी भत्ता और उपहार सभी हस्तांतरण भुगतान के उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के हस्तांतरण भुगतानों को पहचानने में सक्षम हों, जो बिना किसी उत्पादक योगदान के प्राप्त आय होती है।
RBSE Class 12 Economics Chapter 15 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. भारत में राष्ट्रीय आय की गणना किस संस्था द्वारा की जाती है?
Answer: केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (C.S.O.) द्वारा की जाती है।
In simple words: भारत में, राष्ट्रीय आय की गणना केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (C.S.O.) द्वारा की जाती है। यह संगठन सभी आवश्यक डेटा एकत्र करता है और अनुमान प्रकाशित करता है।
🎯 Exam Tip: आर्थिक डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार विशिष्ट सरकारी एजेंसी की पहचान करें।
Question 2. मानवीय श्रम का पारिश्रमिक क्या है?
Answer: मजदूरी।
In simple words: मानव श्रम के लिए किया गया भुगतान मजदूरी कहलाता है। यह व्यक्तियों द्वारा अपने काम के लिए अर्जित आय है।
🎯 Exam Tip: उत्पादन के प्रत्येक कारक (जैसे, भूमि-लगान, श्रम-मजदूरी, पूंजी-ब्याज, उद्यम-लाभ) के अनुरूप कारक भुगतानों को सूचीबद्ध करें।
Question 3. यदि किसी अर्थव्यवस्था में अप्रत्यक्ष कर ₹25 करोड़ एवं उपदान ₹5 करोड़ है तो निवल अप्रत्यक्ष कर की गणना कीजिए।
Answer: निवल अप्रत्यक्ष कर = अप्रत्यक्ष कर – उपदान \( = \text{Rs. } 25 - 5 = 20 \text{ करोड़} \)
In simple words: यदि अप्रत्यक्ष कर Rs. 25 करोड़ और उपदान Rs. 5 करोड़ हैं, तो निवल अप्रत्यक्ष कर खोजने के लिए, आप अप्रत्यक्ष करों में से उपदान घटाते हैं। तो, यह Rs. 20 करोड़ है।
🎯 Exam Tip: सूत्र याद रखें: निवल अप्रत्यक्ष कर = अप्रत्यक्ष कर - उपदान।
Question 4. राष्ट्रीय आय लेखांकन प्रणाली का अर्थ बताइए।
Answer: यह राष्ट्रीय आय से सम्बन्धित लेखों को द्वि-अंकन प्रणाली में प्रस्तुत करने का तरीका है।
In simple words: राष्ट्रीय आय लेखांकन प्रणाली का अर्थ है राष्ट्रीय आय से संबंधित सभी चीजों का रिकॉर्ड दोहरी-प्रविष्टि प्रणाली का उपयोग करके रखना। यह सभी आर्थिक गतिविधियों को ट्रैक करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय लेखांकन को मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा के लिए अनुकूलित दोहरी-प्रविष्टि बहीखाता पद्धति की व्यापक अवधारणा से संबंधित करें।
Question 5. साधन आगतें किसे कहते हैं?
Answer: श्रम, पूँजी, भूमि, उद्यम आदि उत्पादन के साधनों की सेवाओं को साधन आगते कहते हैं।
In simple words: साधन आगतें उत्पादन के कारकों, जैसे श्रम, पूंजी, भूमि और उद्यमशीलता द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएँ हैं। ये वे चीजें हैं जिनका उपयोग वस्तुओं और सेवाओं को बनाने के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: उत्पादन के चार कारकों और उनके संबंधित कारक भुगतानों को समझें।
Question 6. आगत (Input) से क्या अभिप्राय है?
Answer: आगत (Input) से अभिप्राय उन सभी वस्तुओं व सेवाओं से है जिनका उपयोग उत्पादन प्रक्रिया में किया जाता है।
In simple words: आगत का अर्थ उन सभी चीजों, जैसे कच्चा माल या सेवाएँ, से है जिनका उपयोग अन्य वस्तुओं और सेवाओं को बनाने की प्रक्रिया में किया जाता है।
🎯 Exam Tip: एक आर्थिक संदर्भ में आगतों (उपयोग किए गए संसाधनों) और निर्गतों (उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं) के बीच अंतर करें।
Question 8. भारत में राष्ट्रीय आय की गणना का आधार वर्ष क्या है?
Answer: भारत में वर्ष 2004-05 को आधार वर्ष माना जाता है।
In simple words: भारत में, राष्ट्रीय आय की गणना के लिए आधार वर्ष 2004-05 माना जाता है। आधार वर्ष का उपयोग समय के साथ आर्थिक विकास की तुलना करने के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: भारत में राष्ट्रीय आय की गणना के लिए उपयोग किए जाने वाले वर्तमान आधार वर्ष को हमेशा जानें, क्योंकि यह बदल सकता है।
Question 9. घरेलू कारक आय राष्ट्रीय आय से कब अधिक होती है?
Answer: जब विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय ऋणात्मक होती है।
In simple words: घरेलू कारक आय राष्ट्रीय आय से तब अधिक होती है जब विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय नकारात्मक होती है। यह तब होता है जब विदेशी कारकों को किए गए भुगतान उनसे प्राप्त भुगतानों से अधिक होते हैं।
🎯 Exam Tip: घरेलू आय, राष्ट्रीय आय और विदेशों से शुद्ध कारक आय के बीच के संबंध को समझें।
Question 10. यदि घरेलू आय ₹ 600 करोड़ है तथा विदेशों से शुद्ध कारक आय (-) 6 करोड़ है तो राष्ट्रीय आय बताइए।
Answer: राष्ट्रीय आय = घरेलू आय + विदेशों से शुद्ध कारक आय \( = \text{Rs. } 600 - 6 = 594 \text{ करोड़} \)
In simple words: यदि घरेलू आय Rs. 600 करोड़ है और विदेशों से शुद्ध कारक आय ऋणात्मक Rs. 6 करोड़ है, तो राष्ट्रीय आय इन दोनों को जोड़कर पाई जाती है। तो, राष्ट्रीय आय Rs. 594 करोड़ है।
🎯 Exam Tip: घरेलू आय, राष्ट्रीय आय और विदेशों से शुद्ध कारक आय से संबंधित गणनाओं का अभ्यास करें, धनात्मक और ऋणात्मक चिह्नों पर विशेष ध्यान दें।
Question 11. उत्पादन के किन्हीं चार कारकों के नाम बताइए।
Answer:
1. पूँजी
2. श्रम
3. उद्यम
4. भूमि।
In simple words: उत्पादन के चार कारक पूंजी (पैसा और उपकरण), श्रम (मानव प्रयास), उद्यमशीलता (आयोजन करने और जोखिम उठाने की क्षमता) और भूमि (प्राकृतिक संसाधन) हैं। ये वस्तुएं और सेवाएं बनाने के लिए आवश्यक हैं।
🎯 Exam Tip: उत्पादन के चार कारकों और उनके संबंधित प्रतिफलों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।
Question 12. अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्र बताइए।
Answer:
1. प्राथमिक क्षेत्र
2. द्वितीयक क्षेत्र
In simple words: अर्थव्यवस्था को विभिन्न क्षेत्रों में बांटा गया है। प्राथमिक क्षेत्र कच्चे माल (जैसे कृषि) से संबंधित है, और द्वितीयक क्षेत्र विनिर्माण से संबंधित है। आमतौर पर, एक तीसरा क्षेत्र, तृतीयक या सेवा क्षेत्र भी इसमें शामिल होता है।
🎯 Exam Tip: अर्थव्यवस्था के तीन मुख्य क्षेत्रों (प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक) के बारे में जानें और प्रत्येक के लिए उदाहरण प्रदान करें।
Question 13. हस्तान्तरण आय से क्या आशय है?
Answer: वह आय जो किसी सेवा या वस्तु के प्रदान किए बिना प्राप्त होती है।
In simple words: हस्तांतरण आय वह पैसा है जो बिना किसी वस्तु या सेवा के बदले में मिलता है। यह एकतरफा भुगतान की तरह है।
🎯 Exam Tip: हस्तांतरण आय के उदाहरण दें जैसे पेंशन या छात्रवृत्ति ताकि अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझा जा सके।
Question 14. चालू कीमतों पर राष्ट्रीय आय से क्या आशय है?
Answer: जब राष्ट्रीय आय की गणना प्रचलित बाजार कीमतों पर की जाये।
In simple words: चालू कीमतों पर राष्ट्रीय आय का अर्थ है देश की आय की गणना उन कीमतों का उपयोग करके करना जो गणना के समय प्रचलित हैं। यह नवीनतम बाजार मूल्यों को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: चालू कीमतों (नाममात्र) और स्थिर कीमतों (वास्तविक) पर राष्ट्रीय आय के बीच अंतर करें, और समझाएं कि दोनों क्यों महत्वपूर्ण हैं।
Question 15. स्थिर कीमतों पर राष्ट्रीय आय से क्या आशय है?
Answer: जब राष्ट्रीय आय की गणना किसी आधार वर्ष की कीमतों के आधार पर की जाये।
In simple words: स्थिर कीमतों पर राष्ट्रीय आय का अर्थ है देश की आय की गणना एक निश्चित आधार वर्ष की कीमतों का उपयोग करके करना। यह मुद्रास्फीति के प्रभाव के बिना वस्तुओं और सेवाओं की वास्तविक वृद्धि को देखने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: समझें कि मुद्रास्फीति के प्रभाव को दूर करने और आर्थिक विकास की अधिक सटीक तस्वीर देने के लिए स्थिर कीमतों का उपयोग किया जाता है।
Question 16. क्या वृद्धावस्था पेंशन को राष्ट्रीय आय में शामिल किया जा सकता है?
Answer: यह हस्तान्तरण भुगतान है इसलिए इसे राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं कर सकते है।
In simple words: वृद्धावस्था पेंशन को राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जा सकता क्योंकि यह एक हस्तांतरण भुगतान है। यह बिना किसी वर्तमान वस्तु या सेवा के बदले में प्राप्त भुगतान है।
🎯 Exam Tip: स्पष्ट रूप से बताएं कि हस्तांतरण भुगतानों को राष्ट्रीय आय की गणना से क्यों बाहर रखा जाता है - वे नए उत्पादन का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
Question 17. तस्करी की आय को राष्ट्रीय आय में शामिल किया जाता है अथवा नहीं?
Answer: गैर-कानूनी आय होने के कारण राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं की जा सकती है।
In simple words: तस्करी से होने वाली आय को राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता क्योंकि यह गैर-कानूनी गतिविधियों से आती है। राष्ट्रीय आय केवल कानूनी और उत्पादक आर्थिक गतिविधियों की गणना करती है।
🎯 Exam Tip: समझाएं कि गैर-कानूनी गतिविधियों और काले धन के लेनदेन को उनकी प्रकृति और मापन में कठिनाई के कारण राष्ट्रीय आय की गणना से बाहर रखा जाता है।
Question 18. छात्रवृत्ति को राष्ट्रीय आय में शामिल करते हैं या नहीं?
Answer: यह एक हस्तान्तरण आय है इसलिए यह राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं की जाती है।
In simple words: छात्रवृत्तियों को राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता क्योंकि वे हस्तांतरण भुगतान हैं। वे छात्रों को बिना किसी वस्तु या सेवा के उत्पादन की आवश्यकता के प्रदान की जाती हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न हस्तांतरण भुगतानों (पेंशन, बेरोजगारी भत्ता, छात्रवृत्ति) के स्पष्ट उदाहरण प्रदान करें और बताएं कि उन्हें क्यों बाहर रखा गया है।
Question 19. द्वि-क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र बताइए।
Answer: परिवार क्षेत्र तथा फर्म क्षेत्र।
In simple words: दो-क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में मुख्य क्षेत्र परिवार और फर्म होते हैं। परिवार उत्पादन के कारक प्रदान करते हैं और वस्तुओं का उपभोग करते हैं, जबकि फर्म वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करती हैं।
🎯 Exam Tip: दो-क्षेत्रीय मॉडल में आय के बुनियादी चक्रीय प्रवाह का वर्णन करें, जिसमें परिवारों और फर्मों की भूमिकाओं पर प्रकाश डाला जाए।
Question 20. गैर-टिकाऊ वस्तुओं से आप क्या समझते हैं?
Answer: गैर-टिकाऊ वस्तुएँ वे वस्तुएँ होती हैं जिनका एक बार उपयोग करने पर ही उपभोग समाप्त हो जाता है; जैसे- भोजन, ईंधन, आदि।
In simple words: गैर-टिकाऊ वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जो एक या कुछ ही उपयोगों में पूरी तरह से खत्म हो जाती हैं। उदाहरणों में भोजन, पेय या ईंधन शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: टिकाऊ, गैर-टिकाऊ और अर्ध-टिकाऊ वस्तुओं के बीच अंतर करें, प्रत्येक श्रेणी के लिए उदाहरण प्रदान करें।
Question 22. बचत से क्या तात्पर्य है?
Answer: आय का वह भाग जो उपभोग पर खर्च नहीं किया जाता।
In simple words: बचत का अर्थ अपनी आय के उस हिस्से को अलग रखना है जिसे तत्काल उपयोग के लिए वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने पर खर्च नहीं किया जाता है। यह भविष्य की जरूरतों के लिए अलग रखा गया पैसा है।
🎯 Exam Tip: बचत को आय और उपभोग के बीच के अंतर के रूप में समझाएं, और निवेश के लिए इसके महत्व को बताएं।
Question 23. व्यक्तिगत आय से क्यों आशय है?
Answer: व्यक्तियों तथा परिवारों की सभी स्रोतों से वास्तव में प्राप्त होने वाली आय।
In simple words: व्यक्तिगत आय का अर्थ उस कुल धन से है जो व्यक्तियों और परिवारों को वास्तव में उनके सभी स्रोतों से प्राप्त होता है। इसमें मजदूरी, वेतन, किराया, ब्याज और हस्तांतरण भुगतान शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत आय को प्रत्यक्ष करों से पहले व्यक्तियों द्वारा वास्तव में प्राप्त आय के रूप में स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।
Question 24. उत्पादन से क्या तात्पर्य है?
Answer: वस्तुओं में उपयोगिता का निर्माण या उसमें वृद्धि करना।
In simple words: उत्पादन का अर्थ वस्तुओं में उपयोगिता बनाना या उनका मूल्य बढ़ाना है। यह मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए वस्तुओं और सेवाओं को बनाने की प्रक्रिया है।
🎯 Exam Tip: इस बात पर जोर दें कि उत्पादन में आगतों को निर्गतों में बदलना शामिल है, जिससे प्रक्रिया में उपयोगिता का निर्माण होता है।
Question 25. अप्रत्यक्ष कर के कोई दो उदाहरण लिखिए।
Answer:
1. बिक्री कर
2. उत्पादन शुल्क
In simple words: अप्रत्यक्ष करों के दो उदाहरण बिक्री कर और उत्पाद शुल्क हैं। ये कर वस्तुओं और सेवाओं की कीमत में जोड़े जाते हैं, और उपभोक्ता उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से भुगतान करते हैं।
🎯 Exam Tip: GST, बिक्री कर, उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क जैसे अप्रत्यक्ष करों के सामान्य उदाहरण प्रदान करें।
Question 26. सकल घरेलू उत्पाद से सकल राष्ट्रीय उत्पाद ज्ञात करने के लिए इसमें क्या जोड़ा जाता है?
Answer: सकल घरेलू उत्पाद में विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय को जोड़ा जाता है।
In simple words: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) प्राप्त करने के लिए, विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय को जोड़ा जाता है। यह देश के नागरिकों द्वारा विदेश में अर्जित आय को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: सूत्र को समझें: GNP = GDP + विदेशों से शुद्ध कारक आय।
Question 27. किन्हीं दो मदों के नाम बताइए जिन्हें राष्ट्रीय आय की गणना में शामिल नहीं किया जाता है?
Answer:
1. हस्तान्तरण भुगतान (जैसे पेंशन, छात्रवृत्ति)
2. गैर-कानूनी क्रियाओं से प्राप्त आय (जैसे काला-बाजार)
In simple words: राष्ट्रीय आय की गणना में शामिल नहीं होने वाली दो मदें हस्तांतरण भुगतान हैं, जैसे पेंशन या छात्रवृत्ति, और गैर-कानूनी गतिविधियों से होने वाली आय, जैसे काले बाजार के लेनदेन। ये नया उत्पादक उत्पादन का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय से सामान्य बहिष्करणों पर ध्यान केंद्रित करें, प्रत्येक बहिष्करण के पीछे के कारणों को समझाएं।
Question 29. बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDPMC) का सूत्र लिखो।
Answer: \( GDP_{MC} = C + I + G + (X - M) \)
In simple words: व्यय विधि का उपयोग करके बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDPMC) का सूत्र उपभोग (C), निवेश (I), सरकारी व्यय (G) और शुद्ध निर्यात (X-M) का योग है। यह सूत्र अर्थव्यवस्था में सभी खर्चों को जोड़ता है।
🎯 Exam Tip: बाजार कीमतों पर जीडीपी के लिए व्यय विधि सूत्र को याद करें और प्रत्येक घटक को समझाने में सक्षम हों।
RBSE Class 12 Economics Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न (SA-I)
Question 1. यदि एक राष्ट्र का कुल उपभोग व्यय (C) ₹1,000 करोड़, कुल निजी विनियोग (I) ₹400 करोड़ तथा सरकारी विनियोग (G) की राशि ₹600 करोड़ हो तो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का मूल्य ज्ञात कीजिए?
Answer: सकल घरेलू उत्पाद = कुल उपभोग व्यय + कुल निजी विनियोग + सरकारी विनियोग \( = 1000 + 400 + 600 = \text{Rs. } 2000 \text{ करोड़} \)
In simple words: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ज्ञात करने के लिए, हम कुल उपभोग व्यय (C), कुल निजी निवेश (I), और सरकारी व्यय (G) को जोड़ते हैं। दिए गए मानों के साथ, GDP Rs. 2000 करोड़ है।
🎯 Exam Tip: व्यय विधि का उपयोग करके जीडीपी गणनाओं के लिए, सुनिश्चित करें कि सभी घटकों (उपभोग, निवेश, सरकारी व्यय और शुद्ध निर्यात) को ध्यान में रखा गया है, भले ही कुछ शून्य हों या समस्या में स्पष्ट रूप से उल्लिखित न हों।
Question 2. सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) से क्या आशय है?
Answer: सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) एक अर्थव्यवस्था में एक वर्ष के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य है। यह देश के निवासियों द्वारा, घरेलू और विदेश दोनों में, बनाए गए उत्पादन को मापता है।
In simple words: सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) एक अर्थव्यवस्था में एक वर्ष के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य है। यह देश के निवासियों द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का माप है।
🎯 Exam Tip: GDP (एक देश की सीमाओं के भीतर उत्पादन) को GNP (एक देश के निवासियों द्वारा कहीं भी उत्पादन) से हमेशा अलग करें।
Question 3. निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) से क्या आशय है?
Answer: सकल राष्ट्रीय उत्पाद में से मूल्यह्रास को घटाने पर जो शेष बचता है उसे निवल (शुद्ध) राष्ट्रीय उत्पाद कहते हैं।
In simple words: निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) वह है जो सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) में से मूल्यह्रास घटाने के बाद बचता है। मूल्यह्रास पूंजीगत वस्तुओं के टूट-फूट को दर्शाता है। तो, NNP इस टूट-फूट को ध्यान में रखते हुए उत्पादन का शुद्ध मूल्य दिखाता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि 'शुद्ध' का अर्थ हमेशा 'सकल' माइनस 'मूल्यह्रास' होता है। यह राष्ट्रीय आय लेखांकन में एक मौलिक संबंध है।
Question 4. साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय आय (NNPFC) से क्या आशय है?
Answer: साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय आय (NNPFC) से अभिप्राय एक देश के सामान्य निवासियों द्वारा अर्जित सभी साधन आय के योग से है, जिसमें मजदूरी, लगान, ब्याज और लाभ शामिल होते हैं।
In simple words: साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNPFC), जिसे राष्ट्रीय आय भी कहते हैं, एक देश के भीतर उत्पादन के कारकों (जैसे मजदूरी, किराया, ब्याज और लाभ) द्वारा अर्जित सभी आय का योग है। यह कारकों की दृष्टि से उत्पादन की लागत का प्रतिनिधित्व करता है।
🎯 Exam Tip: NNPFC को कारक आय के योग और राष्ट्रीय आय के सच्चे माप के रूप में इसके महत्व के रूप में समझाएं।
Question 6. प्रयोज्य आय (DI) से क्या अभिप्राय है?
Answer: प्रयोज्य आय वह आय होती है जो वैयक्तिक आय में से सरकार को दिए गए सीधे करों और अन्य भुगतानों को घटाने के बाद बचती है. यह वह पैसा है जिसे व्यक्ति अपनी मर्जी से खर्च या बचा सकते हैं.
In simple words: यह वह आय है जो लोगों के पास सभी कर चुकाने के बाद बचती है, जिसे वे अपनी इच्छा अनुसार खर्च या बचा सकते हैं.
🎯 Exam Tip: प्रयोज्य आय को समझने के लिए, हमेशा याद रखें कि यह व्यक्तिगत आय से कर और अन्य अनिवार्य भुगतान घटाने के बाद बची हुई राशि होती है.
Question 7. आर्थिक सहायता (Subsidy) से क्या आशय है?
Answer: आर्थिक सहायता या सब्सिडी वह वित्तीय मदद है जो सरकार उत्पादकों को देती है ताकि वे वस्तुओं की कीमतें कम रख सकें. इसका उद्देश्य ग्राहकों के लिए उन वस्तुओं को सस्ता बनाना होता है.
In simple words: सब्सिडी वह सरकारी मदद है जो वस्तुओं को सस्ता बनाने के लिए दी जाती है.
🎯 Exam Tip: आर्थिक सहायता का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को राहत देना और किसी विशेष उद्योग को बढ़ावा देना होता है.
Question 8. प्रतिव्यक्ति आय (PCI) से क्या आशय है? अथवा प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) क्या है?
Answer: प्रति व्यक्ति आय का मतलब है कि एक देश में हर व्यक्ति औसतन कितनी आय कमाता है. इसे देश की कुल राष्ट्रीय आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर निकाला जाता है. यह अर्थव्यवस्था की औसत आय भी कहलाती है.
सूत्रानुसार,
\[ \text{प्रति व्यक्ति आय} = \frac { \text{कुल राष्ट्रीय आय} }{ \text{कुल जनसंख्या} } \]
In simple words: प्रति व्यक्ति आय यह बताती है कि देश में हर व्यक्ति कितनी कमाई करता है, यह औसत आय होती है.
🎯 Exam Tip: प्रति व्यक्ति आय किसी देश के लोगों के जीवन-स्तर और आर्थिक विकास को मापने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है.
Question 9. मूल्यह्रास (Depreciation) से क्या आशय है?
Answer: मूल्यह्रास का अर्थ है एक वित्तीय वर्ष में उत्पादन के दौरान पूंजीगत वस्तुओं (जैसे मशीनरी) के मूल्य में सामान्य टूट-फूट, घिसावट या पुरानी हो जाने के कारण आने वाली कमी. यह वस्तुओं के उपयोग या समय बीतने के साथ उनके मूल्य में गिरावट को दर्शाता है.
In simple words: मूल्यह्रास यानी मशीनों और उपकरणों का इस्तेमाल करने से या समय के साथ उनकी कीमत में कमी आना.
🎯 Exam Tip: मूल्यह्रास को अक्सर 'घिसावट व्यय' भी कहा जाता है, और यह सकल निवेश से निवल निवेश निकालने के लिए घटाया जाता है.
Question 10. साधन आय (Factor Income) किसे कहते हैं?
Answer: साधन आय वह आय है जो किसी व्यक्ति को उत्पादन के कारकों - भूमि, श्रम, पूंजी और उद्यम - के बदले में मिलती है. यह आय किसी वस्तु या सेवा के उत्पादन में योगदान के लिए प्राप्त होती है, जैसे मजदूरी, लगान, ब्याज और लाभ.
In simple words: साधन आय वह कमाई है जो लोग किसी चीज़ के उत्पादन में मदद करने के बदले में पाते हैं, जैसे सैलरी या किराया.
🎯 Exam Tip: साधन आय को हमेशा उत्पादन गतिविधियों से जुड़ा माना जाता है, न कि केवल धन के हस्तांतरण से.
Question 12. अप्रत्यक्ष करों (Indirect Taxes) का बाजार कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: अप्रत्यक्ष करों (जैसे बिक्री कर) में वृद्धि होने से वस्तुओं और सेवाओं की बाजार कीमतें बढ़ जाती हैं, क्योंकि यह कर उपभोक्ताओं से वसूला जाता है और फिर सरकार को दिया जाता है. इसके विपरीत, अप्रत्यक्ष करों में कमी आने पर वस्तुओं की बाजार कीमतें कम हो जाती हैं.
In simple words: जब अप्रत्यक्ष कर बढ़ते हैं, तो चीजें महंगी हो जाती हैं, और जब ये कर कम होते हैं, तो चीजें सस्ती हो जाती हैं.
🎯 Exam Tip: अप्रत्यक्ष करों का सीधा असर उत्पाद की अंतिम बिक्री कीमत पर पड़ता है, जिससे वे उत्पादकों से उपभोक्ताओं तक पहुंचते हैं.
Question 13. पूँजीगत हानि (Capital loss) से क्या आशय है?
Answer: पूंजीगत हानि का मतलब है कि अप्रत्याशित घटनाओं, जैसे प्राकृतिक आपदाओं या दुर्घटनाओं, के कारण अचल संपत्तियों (जैसे भवन या मशीनरी) के मूल्य में आने वाली कमी. यह वह हानि है जो संपत्ति को नुकसान पहुंचने या नष्ट होने के कारण होती है.
In simple words: पूंजीगत हानि तब होती है जब अचानक किसी घटना से किसी संपत्ति का मूल्य घट जाता है.
🎯 Exam Tip: पूंजीगत हानि सामान्य टूट-फूट (मूल्यह्रास) से अलग होती है क्योंकि यह अप्रत्याशित घटनाओं के कारण होती है, जबकि मूल्यह्रास अनुमानित होता है.
Question 14. चालू मूल्यों पर राष्ट्रीय आय (NI) किसे कहते हैं?
Answer: जब राष्ट्रीय आय की गणना किसी विशेष वर्ष की प्रचलित बाजार कीमतों पर की जाती है, तो उसे चालू मूल्यों पर राष्ट्रीय आय कहते हैं. यह आय वस्तुओं और सेवाओं के वर्तमान बाजार मूल्यों को दर्शाती है.
In simple words: जब हम राष्ट्रीय आय को आज की कीमतों के हिसाब से मापते हैं, तो उसे चालू मूल्यों पर राष्ट्रीय आय कहते हैं.
🎯 Exam Tip: चालू मूल्यों पर राष्ट्रीय आय से मुद्रास्फीति के प्रभाव को अलग नहीं किया जाता है, इसलिए यह वास्तविक आर्थिक वृद्धि का सटीक माप नहीं हो सकता है.
Question 15. स्थिर मूल्यों पर राष्ट्रीय आय किसे कहते हैं?
Answer: जब राष्ट्रीय आय की गणना किसी एक आधार वर्ष की कीमतों पर की जाती है, तो उसे स्थिर मूल्यों पर राष्ट्रीय आय या वास्तविक राष्ट्रीय आय कहते हैं. यह आय समय के साथ कीमतों में होने वाले बदलावों को हटाकर उत्पादन के वास्तविक परिवर्तन को दर्शाती है.
In simple words: जब राष्ट्रीय आय को एक पुराने निश्चित वर्ष की कीमतों के हिसाब से मापते हैं, तो उसे स्थिर मूल्यों पर राष्ट्रीय आय कहते हैं.
🎯 Exam Tip: स्थिर मूल्यों पर राष्ट्रीय आय का उपयोग अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि का आकलन करने के लिए किया जाता है, क्योंकि यह कीमतों में बदलाव के प्रभाव को दूर करती है.
Question 16. बचत को परिभाषित कीजिए।
Answer: बचत आय का वह हिस्सा है जिसे वर्तमान उपभोग पर खर्च नहीं किया जाता है, बल्कि भविष्य की जरूरतों के लिए या निवेश के लिए बचाकर रखा जाता है. यह खर्च न की गई आय है.
In simple words: बचत वह पैसा है जो हम अपनी कमाई से खर्च नहीं करते, बल्कि भविष्य के लिए बचाकर रखते हैं.
🎯 Exam Tip: बचत व्यक्तिगत, व्यावसायिक और सरकारी स्तर पर हो सकती है और यह निवेश और आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है.
Question 17. रॉयल्टी (Royalty) किसे कहते हैं?
Answer: रॉयल्टी वह भुगतान है जो कोई व्यक्ति या संस्था किसी मकान, दुकान, भूमि, मशीन या किसी बौद्धिक संपत्ति (जैसे किताब या संगीत) का उपयोग करने के बदले में उसके मालिक को देता है. यह एक प्रकार का किराया या शुल्क है.
In simple words: रॉयल्टी वह पैसा है जो किसी दूसरे की चीज़, जैसे जमीन या गाने, का इस्तेमाल करने के लिए उसके मालिक को दिया जाता है.
🎯 Exam Tip: रॉयल्टी भुगतान आमतौर पर उपयोग या बिक्री की मात्रा के आधार पर किया जाता है, और यह मालिक के लिए एक निष्क्रिय आय स्रोत होता है.
Question 19. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से क्या आशय है?
Answer: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश की भौगोलिक सीमाओं के अंदर एक साल में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को कहते हैं. यह उस देश की आर्थिक गतिविधियों का माप होता है.
In simple words: GDP किसी देश में एक साल में बनी सभी चीजों और सेवाओं का कुल पैसा होता है.
🎯 Exam Tip: GDP में केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं को शामिल किया जाता है ताकि दोहरी गणना से बचा जा सके.
Question 20. घरेलू कारक आय (Domestic Factor Income) से क्या तात्पर्य है?
Answer: घरेलू कारक आय वह आय है जो किसी देश की घरेलू सीमाओं के अंदर उत्पादन के साधनों (जैसे भूमि, श्रम, पूंजी और उद्यम) को उनकी सेवाओं के बदले प्राप्त होती है. इसमें निवासियों और गैर-निवासियों दोनों की आय शामिल होती है, बशर्ते यह देश की सीमा के भीतर उत्पन्न हुई हो.
In simple words: घरेलू कारक आय वह कमाई है जो देश के अंदर किसी भी उत्पादन के काम से होती है.
🎯 Exam Tip: घरेलू कारक आय किसी देश की आर्थिक गतिविधि को भौगोलिक सीमा के आधार पर मापती है, न कि नागरिकता के आधार पर.
Question 21. राष्ट्रीय आय (NI) तथा घरेलू आय में क्या अन्तर है?
Answer: राष्ट्रीय आय में विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय (Net Factor Income) को शामिल किया जाता है, जबकि घरेलू कारक आय में इसे शामिल नहीं किया जाता है. इसलिए, राष्ट्रीय आय में वह आय भी शामिल होती है जो देश के निवासी विदेशों में कमाते हैं, जबकि घरेलू आय केवल देश की सीमाओं के भीतर उत्पन्न आय को दर्शाती है.
In simple words: राष्ट्रीय आय में विदेशों से मिली कमाई जुड़ती है, जबकि घरेलू आय में नहीं.
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय और घरेलू आय के बीच का अंतर विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय के कारण होता है, जो निवासी विदेशी स्रोतों से कमाते हैं.
Question 22. राष्ट्रीय आय से कुल व्यय योग्य आय कैसे निकाली जाती है?
Answer: राष्ट्रीय आय से कुल व्यय योग्य आय निकालने के लिए, शेष विश्व से प्राप्त निवल आय को राष्ट्रीय आय में जोड़ा जाता है. फिर, इसमें से प्रत्यक्ष कर, शुल्क और जुर्माना घटाया जाता है. इससे वह राशि प्राप्त होती है जिसे निवासी अपनी इच्छा से खर्च या बचा सकते हैं.
In simple words: राष्ट्रीय आय में विदेशों से मिली आय जोड़ते हैं, और फिर कर व जुर्माने घटाते हैं, तो कुल खर्च करने लायक आय मिल जाती है.
🎯 Exam Tip: कुल व्यय योग्य आय उपभोक्ताओं की वास्तविक क्रय शक्ति का एक महत्वपूर्ण माप है, क्योंकि यह उनके पास खर्च करने के लिए उपलब्ध धन को दर्शाती है.
Question 23. व्यक्तिगत आय ज्ञात करने का सूत्र बताइए।
Answer: व्यक्तिगत आय को कई तरीकों से ज्ञात किया जा सकता है, लेकिन एक सामान्य सूत्र है:
\[ \text{व्यक्तिगत आय} = \text{अवितरित लाभ} - \text{परिवारों द्वारा दी गयी निवल ब्याज अदायगी} - \text{निगम कर} + \text{सरकार द्वारा फर्मों से परिवारों को की गयी अन्तरण अदायगी} \]
यह सूत्र दर्शाता है कि व्यक्तियों को कितनी आय वास्तव में प्राप्त होती है.
In simple words: व्यक्तिगत आय निकालने के लिए, राष्ट्रीय आय में से कंपनियों के लाभ और कर हटाकर, और सरकारी हस्तांतरण जोड़कर गणना की जाती है.
🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत आय वह आय है जो वास्तव में परिवारों और व्यक्तियों के हाथ में आती है, जो उनके खर्च करने की क्षमता को प्रभावित करती है.
Question 24. निजी आय व व्यक्तिगत आय में एक अन्तर लिखिए।
Answer: निजी आय में निगम कर और अवितरित लाभ को शामिल किया जाता है, जबकि व्यक्तिगत आय में निगम कर और अवितरित लाभ को शामिल नहीं किया जाता है. निजी आय में वे सभी आयें शामिल होती हैं जो निजी क्षेत्रों को मिलती हैं, वहीं व्यक्तिगत आय केवल व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त होने वाली आय है.
In simple words: निजी आय में कंपनियों का बचा हुआ मुनाफा और उनके कर शामिल होते हैं, लेकिन व्यक्तिगत आय में यह सब शामिल नहीं होता है.
🎯 Exam Tip: निजी आय एक व्यापक अवधारणा है जिसमें निजी क्षेत्र की कुल कमाई शामिल होती है, जबकि व्यक्तिगत आय व्यक्तियों की वास्तविक आय पर केंद्रित होती है.
Question 26. राष्ट्रीय आय की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: राष्ट्रीय आय की दो मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. राष्ट्रीय आय एक समग्र विचार होता है, जो पूरे देश की आर्थिक गतिविधियों को एक साथ दर्शाता है.
2. राष्ट्रीय आय एक प्रवाह है, जिसका संबंध समय की एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वित्तीय वर्ष) से होता है, न कि किसी एक बिंदु पर मापी गई मात्रा से.
In simple words: राष्ट्रीय आय पूरे देश की कुल कमाई है और इसे एक निश्चित समय (जैसे एक साल) के लिए मापा जाता है.
🎯 Exam Tip: विशेषताओं को याद रखने के लिए, राष्ट्रीय आय को हमेशा एक बड़े चित्र के रूप में सोचें जो समय के साथ बदलता रहता है.
Question 27. गैर-आर्थिक क्रियाओं के कोई चार उदाहरण लिखिए।
Answer: गैर-आर्थिक क्रियाएँ वे होती हैं जिनसे कोई मौद्रिक आय उत्पन्न नहीं होती और जिन्हें राष्ट्रीय आय की गणना में शामिल नहीं किया जाता है. इनके चार उदाहरण हैं:
1. पुरानी वस्तुओं को खरीदना-बेचना (क्योंकि ये वर्तमान उत्पादन का हिस्सा नहीं हैं).
2. सरकार द्वारा ऋणपत्र आदि को खरीदना-बेचना (ये केवल वित्तीय हस्तांतरण हैं, उत्पादन नहीं).
3. शेयर ऋणपत्रों को खरीदना-बेचना (ये भी वित्तीय परिसंपत्तियों का हस्तांतरण हैं).
4. गैर-कानूनी क्रियाएँ (जैसे कालाबाजारी) क्योंकि इनका हिसाब नहीं रखा जाता और ये कानूनी ढांचे से बाहर होती हैं.
In simple words: गैर-आर्थिक कामों में पुरानी चीजें बेचना, शेयर खरीदना और गैर-कानूनी काम शामिल होते हैं, जिनसे कोई कमाई नहीं होती.
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय की गणना में केवल उन गतिविधियों को शामिल किया जाता है जिनसे वस्तुओं और सेवाओं का वास्तविक उत्पादन होता है और जिनका कानूनी रूप से मौद्रिक मूल्य होता है.
Question 28. निजी आय से क्या तात्पर्य है?
Answer: निजी आय से तात्पर्य निजी क्षेत्र (व्यक्तियों और निजी उद्यमों) को सभी स्रोतों से प्राप्त होने वाली साधन आय, सरकार से प्राप्त हस्तांतरण आय और शेष विश्व से प्राप्त हस्तांतरण आय के कुल योग से है. इसमें वे सभी आयें शामिल होती हैं जो निजी व्यक्तियों और फर्मों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मिलती हैं.
In simple words: निजी आय वह कुल पैसा है जो निजी लोगों और कंपनियों को उनकी कमाई, सरकार से मिली मदद, और विदेश से मिली मदद से मिलता है.
🎯 Exam Tip: निजी आय राष्ट्रीय आय का एक महत्वपूर्ण घटक है जो निजी क्षेत्र की क्रय शक्ति और खर्च करने की क्षमता को दर्शाता है.
Question 29. व्यक्तिगत आय किस प्रकार ज्ञात की जाती है?
Answer: व्यक्तिगत आय निजी आय में से कुछ समायोजन करके प्राप्त की जाती है. इसे ज्ञात करने के लिए, निजी आय में से निगमों की बचत (अवितरित लाभ), निगम कर और विदेशी कंपनियों की शुद्ध निगम बचत को घटाया जाता है. यह वह आय है जो वास्तव में व्यक्तियों को प्राप्त होती है.
In simple words: व्यक्तिगत आय निकालने के लिए, निजी आय में से कंपनियों का बचा हुआ पैसा और उनके कर घटाए जाते हैं.
🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत आय परिवारों की खर्च करने और बचत करने की क्षमता का सबसे सीधा माप है, क्योंकि यह उनके हाथ में उपलब्ध वास्तविक आय को दर्शाती है.
Question 30. राष्ट्रीय आय के दो महत्व लिखिए।
Answer: राष्ट्रीय आय के दो प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं:
1. यह देश की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण सूचक होती है, जिससे पता चलता है कि अर्थव्यवस्था कितनी बढ़ रही है या सिकुड़ रही है.
2. राष्ट्रीय आय की गणना सरकारों को उचित आर्थिक नीतियां बनाने में मदद करती है, जैसे कि आय के वितरण, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने के लिए योजनाएं बनाना.
In simple words: राष्ट्रीय आय देश की तरक्की बताती है और सरकार को अच्छी नीतियां बनाने में मदद करती है.
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय के आंकड़े देश के विकास और लोगों के जीवन-स्तर को समझने के लिए मौलिक जानकारी प्रदान करते हैं.
Question 31. राष्ट्रीय आय की दोहरी गणना से क्या कठिनाई पैदा होती है?
Answer: राष्ट्रीय आय की गणना करते समय दोहरी गणना की कठिनाई तब उत्पन्न होती है जब वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को एक से अधिक बार शामिल कर लिया जाता है. इससे राष्ट्रीय आय का वास्तविक मूल्य कई गुना बढ़ जाता है, जिससे अर्थव्यवस्था के आकार का गलत और बढ़ा-चढ़ाकर अनुमान लगता है. यह आर्थिक प्रदर्शन का एक भ्रामक चित्र प्रस्तुत करता है.
In simple words: दोहरी गणना से राष्ट्रीय आय बहुत ज्यादा दिखती है, जिससे देश की कमाई का गलत हिसाब मिल जाता है.
🎯 Exam Tip: दोहरी गणना से बचने के लिए, राष्ट्रीय आय की गणना करते समय केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को ही शामिल करना चाहिए, या मूल्य-वर्धित विधि का उपयोग करना चाहिए.
Question 32. राष्ट्रीय आय तथा निजी आय में कोई एक अन्तर बताइए।
Answer: राष्ट्रीय आय में राष्ट्रीय ऋण पर दिए गए ब्याज को शामिल किया जाता है क्योंकि यह सरकार द्वारा किए गए उत्पादन के बदले में दिया गया भुगतान माना जाता है. वहीं, निजी आय में राष्ट्रीय ऋण पर दिए गए ब्याज को शामिल नहीं किया जाता है, क्योंकि इसे आमतौर पर हस्तांतरण भुगतान माना जाता है और यह किसी उत्पादन गतिविधि के बदले में नहीं होता है.
In simple words: राष्ट्रीय आय में सरकारी कर्ज पर दिया गया ब्याज गिना जाता है, पर निजी आय में नहीं.
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय और निजी आय के बीच के अंतर को समझने के लिए, हमेशा याद रखें कि राष्ट्रीय आय उत्पादन गतिविधियों पर केंद्रित है, जबकि निजी आय व्यक्तियों की वास्तविक प्राप्तियों पर.
Question 33. सकल घरेलू उत्पाद तथा सकल राष्ट्रीय उत्पाद में एक अन्तर बताइए।
Answer: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) केवल देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को दर्शाता है, भले ही इसे किसी निवासी या गैर-निवासी ने उत्पादित किया हो. वहीं, सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) में सकल घरेलू उत्पाद के साथ विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय की राशि को भी शामिल किया जाता है, यानी इसमें देश के निवासियों द्वारा विदेशों में अर्जित आय भी शामिल होती है.
In simple words: GDP सिर्फ देश के अंदर की कमाई है, जबकि GNP में देश के बाहर से निवासियों द्वारा कमाई गई आय भी जुड़ जाती है.
🎯 Exam Tip: GDP भौगोलिक सीमा पर आधारित है, जबकि GNP नागरिकता पर आधारित है, यह उनके बीच का मुख्य अंतर है.
RBSE Class 12 Economics Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न (SA-II)
Question 1. पूँजीगत वस्तुओं से क्या आशय है?
Answer: पूंजीगत वस्तुएँ वे उत्पादित वस्तुएँ होती हैं जो टिकाऊ और गैर-टिकाऊ दोनों प्रकार की हो सकती हैं, और जो वित्तीय वर्ष के अंत में उत्पादकों के पास स्टॉक के रूप में होती हैं. इनमें उत्पादकों की अचल संपत्तियां, वर्ष के अंत में बचा हुआ कच्चा माल, अर्द्धनिर्मित माल और तैयार माल का स्टॉक शामिल होता है, जिनका उपयोग आगे उत्पादन के लिए किया जाता है.
In simple words: पूंजीगत वस्तुएँ वे चीजें होती हैं जिन्हें आगे कुछ और बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जैसे मशीनें या कच्चा माल.
🎯 Exam Tip: पूंजीगत वस्तुएं निवेश का हिस्सा होती हैं और भविष्य में वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन क्षमता को बढ़ाती हैं.
Question 2. उपभोक्ता वस्तुओं (CG) से क्या आशय है?
Answer: उपभोक्ता वस्तुएँ वे वस्तुएँ होती हैं जिनका उपयोग अंतिम रूप से उपभोक्ताओं द्वारा अपनी इच्छाओं और जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है. इनमें आहार, वस्त्र जैसी भौतिक वस्तुएँ और मनोरंजन जैसी सेवाएँ शामिल होती हैं. इनका उपयोग तभी होता है जब ये वस्तुएँ और सेवाएँ अंतिम उपभोक्ता द्वारा खरीदी जाती हैं और आगे उत्पादन के लिए इस्तेमाल नहीं होतीं.
In simple words: उपभोक्ता वस्तुएँ वे चीजें हैं जो लोग अपनी जरूरतों के लिए सीधे इस्तेमाल करते हैं, जैसे खाना या कपड़े.
🎯 Exam Tip: उपभोक्ता वस्तुएं सीधे उपयोग के लिए होती हैं और राष्ट्रीय आय की गणना में अंतिम उपभोग व्यय का हिस्सा बनती हैं.
Question 4. स्टॉक निवेश तथा सकल स्थिर निवेश से क्या तात्पर्य है?
Answer: स्टॉक निवेश का अर्थ है वित्तीय वर्ष के अंत में उत्पादक इकाइयों के पास बचे हुए कच्चे माल, अर्द्धनिर्मित माल और तैयार माल के स्टॉक का कुल मूल्य. वहीं, सकल स्थिर निवेश का तात्पर्य स्थिर पूंजी संपत्तियों, जैसे मशीनरी और इमारतों के स्टॉक में होने वाली वृद्धि से है. यह अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता में दीर्घकालिक वृद्धि को दर्शाता है.
In simple words: स्टॉक निवेश का मतलब है कंपनी के पास बचा हुआ सामान, और सकल स्थिर निवेश का मतलब है नई मशीनें या इमारतें खरीदना.
🎯 Exam Tip: स्टॉक निवेश अल्पकालिक होता है और उत्पादन चक्र में उतार-चढ़ाव को दर्शाता है, जबकि सकल स्थिर निवेश दीर्घकालिक होता है और उत्पादन क्षमता को बढ़ाता है.
Question 5. निवल निवेश से क्या आशय है?
Answer: निवल निवेश (Net Investment) का मतलब है सकल निवेश में से वर्ष भर में पूंजीगत वस्तुओं में होने वाली टूट-फूट, घिसावट या मूल्यह्रास को घटाने के बाद बची हुई निवेश की राशि. यह अर्थव्यवस्था की वास्तविक पूंजी स्टॉक में वृद्धि को दर्शाता है. इसका कारण यह है कि हर साल जितना पूंजी निवेश होता है, उतनी वृद्धि कुल निवेश में नहीं हो पाती, क्योंकि पुरानी पूंजीगत वस्तुओं का मूल्यह्रास होता रहता है. अतः, निवल निवेश प्राप्त करने के लिए सकल निवेश में से मूल्यह्रास को घटाना आवश्यक है.
In simple words: निवल निवेश वह पैसा है जो नई संपत्ति खरीदने पर खर्च होता है, जिसमें से पुरानी संपत्ति के घिसने का खर्च घटा दिया जाता है.
🎯 Exam Tip: निवल निवेश वास्तविक पूंजी संचय को मापता है और यह आर्थिक वृद्धि के लिए अधिक सटीक संकेतक होता है क्योंकि यह घिसावट को ध्यान में रखता है.
Question 6. मूल्य ह्रास से क्या अभिप्राय है?
Answer: मूल्य ह्रास (Depreciation) का अर्थ है स्थिर पूंजी संपत्तियों, जैसे भवन, मशीनरी, परिवहन के साधन और अन्य उपकरणों के मूल्य में समय के साथ विभिन्न कारणों से आने वाली कमी. यह कमी सामान्य टूट-फूट, अप्रचलन (पुराना हो जाना) या दुर्घटनाओं के कारण हो सकती है.
In simple words: मूल्यह्रास मतलब समय के साथ मशीनों और बिल्डिंग जैसी चीजों का मूल्य कम हो जाना.
🎯 Exam Tip: मूल्यह्रास एक गैर-नकद व्यय है जो उत्पादन लागत का हिस्सा होता है और इसका आकलन परिसंपत्ति के उपयोगी जीवनकाल पर आधारित होता है.
Question 7. आय के वर्तुल प्रवाह का वर्णन कीजिए।
Answer: अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्र, जैसे परिवार, फर्म, सरकार और विदेशी क्षेत्र, आपस में एक-दूसरे से जुड़े होते हैं. इन क्षेत्रों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और आय का लगातार आदान-प्रदान होता रहता है. इसी निरंतर प्रवाह को आय का चक्रीय प्रवाह या वर्तुल प्रवाह कहा जाता है. यह दर्शाता है कि एक क्षेत्र का व्यय दूसरे क्षेत्र की आय बनता है.
In simple words: आय का वर्तुल प्रवाह दिखाता है कि कैसे पैसा और चीजें अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों में घूमती रहती हैं.
🎯 Exam Tip: आय के वर्तुल प्रवाह मॉडल से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के बीच निर्भरता और संतुलन को समझा जा सकता है.
Question 8. राष्ट्रीय आय किसे कहते हैं? इसकी विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: राष्ट्रीय आय किसी देश में एक वर्ष के दौरान उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को कहते हैं. यह देश की आर्थिक गतिविधि और प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण माप है. राष्ट्रीय आय की प्रमुख विशेषताएँ हैं: यह एक समग्र अवधारणा है, एक वित्तीय वर्ष की अवधि से संबंधित है, उत्पादन गतिविधियों को शामिल करती है, अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर आधारित है, प्रचलित बाजार कीमतों पर मापी जाती है, मुद्रा में व्यक्त की जाती है, और एक प्रवाह की अवधारणा है जिसमें मूल्यह्रास घटाया जाता है.
In simple words: राष्ट्रीय आय एक देश की साल भर की कुल कमाई है, जो उसके सभी उत्पादन को दिखाती है.
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय की परिभाषा और विशेषताओं को स्पष्ट रूप से समझें ताकि इसके महत्व और गणना के तरीकों को बेहतर ढंग से समझा जा सके.
Question 9. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) क्या है?
Answer: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश की घरेलू सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के बाजार मूल्यों का कुल योग है. इसमें विदेशी नागरिकों द्वारा देश में अर्जित आय शामिल होती है, लेकिन देश के नागरिकों द्वारा विदेशों में अर्जित आय शामिल नहीं होती है. यह एक भौगोलिक अवधारणा है.
In simple words: GDP किसी देश की सीमा के अंदर एक साल में बनी सभी अंतिम चीजों और सेवाओं का कुल मूल्य है.
🎯 Exam Tip: GDP का उपयोग आमतौर पर किसी देश की अर्थव्यवस्था के आकार को मापने के लिए किया जाता है, लेकिन यह लोगों के जीवन-स्तर का पूरी तरह से प्रतिनिधित्व नहीं करता.
Question 10. बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) से क्या आशय है?
Answer: बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) का अर्थ है एक वर्ष में किसी देश की घरेलू अर्थव्यवस्था के अंतर्गत उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के बाजार मूल्य का योग, जिसमें विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय को जोड़ा जाता है. यह देश के निवासियों द्वारा अर्जित कुल आय को दर्शाता है, चाहे वह देश के भीतर हो या बाहर.
सूत्र रूप में,
\[ \text{GNP} = \text{GDP} + \text{NFI} \]
जहाँ,
\[ \text{GNP} = \text{बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद} \]
\[ \text{GDP} = \text{बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद} \]
\[ \text{NFI} = \text{विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय} \]
In simple words: GNP देश के निवासियों की कुल कमाई है, जिसमें देश के अंदर और विदेश से मिली आय दोनों शामिल होती हैं.
🎯 Exam Tip: GNP किसी देश की नागरिकता के आधार पर आर्थिक प्रदर्शन को मापता है, जबकि GDP भौगोलिक सीमा पर आधारित है.
Question 11. घरेलू उत्पाद (DP) एवं राष्ट्रीय उत्पाद (NP) में मुख्य अन्तर बताइए। अथवा बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) के बीच अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: घरेलू उत्पाद (DP) किसी देश की सीमा के भीतर समस्त उत्पादकों द्वारा एक वर्ष में उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं के बाजार मूल्य को कहते हैं. यह भौगोलिक सीमा के भीतर की उत्पादन गतिविधियों को दर्शाता है. वहीं, राष्ट्रीय उत्पाद (NP) किसी देश के सामान्य निवासियों द्वारा देश की सीमा के अंदर और बाहर किए जाने वाले उत्पादन के बाजार मूल्य को कहते हैं. यह नागरिकता पर आधारित अवधारणा है.
In simple words: घरेलू उत्पाद देश की सीमा के अंदर की कुल कमाई है, जबकि राष्ट्रीय उत्पाद देश के निवासियों की कुल कमाई है, चाहे वह देश में हो या विदेश में.
🎯 Exam Tip: घरेलू उत्पाद और राष्ट्रीय उत्पाद के बीच का अंतर विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय के कारण होता है.
Question 12. बाजार कीमत पर निवल घरेलू उत्पाद (NDP) से क्या आशय है?
Answer: बाजार कीमत पर निवल घरेलू उत्पाद (NDP) का अर्थ है एक देश की घरेलू अर्थव्यवस्था के अंतर्गत एक वर्ष की अवधि में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का निवल बाजार मूल्य. निवल घरेलू उत्पाद की गणना करने के लिए वस्तुओं के बाजार मूल्य में से मूल्यह्रास को घटाया जाता है.
सूत्रानुसार,
\[ \text{NDP} = \text{GDP} - \text{D} \]
जहाँ,
\[ \text{NDP} = \text{बाजार कीमत पर निवल घरेलू उत्पाद} \]
\[ \text{GDP} = \text{बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद} \]
\[ \text{D} = \text{मूल्यह्रास} \]
In simple words: NDP देश के अंदर बनी सभी चीजों का वह मूल्य है जिसमें से पुरानी मशीनों के घिसने का खर्च घटा दिया गया हो.
🎯 Exam Tip: NDP देश की वास्तविक उत्पादन क्षमता का एक बेहतर माप है क्योंकि यह पूंजीगत वस्तुओं के घिसावट को ध्यान में रखता है.
Question 14. साधन लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) से क्या अभिप्राय है?
Answer: साधन लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPFC) का अर्थ है एक वर्ष में एक देश के सामान्य निवासी उत्पादक इकाइयों द्वारा साधन लागत पर किए गए कुल उत्पादन का योग. यह उत्पादन के कारकों को उनकी सेवाओं के बदले में मिलने वाली आय को दर्शाता है. इसकी गणना के लिए बाजार कीमत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP) में से अप्रत्यक्ष करों को घटाया जाता है और आर्थिक सहायता को जोड़ा जाता है.
सूत्र रूप में,
\[ \text{NNPFC}(\text{NI}) = \text{NNPMP} - \text{NIT} \]
यहाँ,
\[ \text{NIT} = \text{IT} - \text{S} \]
अतः,
\[ \text{NNPFC}(\text{NI}) = \text{NNPMP} - \text{IT} + \text{S} \]
जहाँ,
\[ \text{NNPFC} = \text{साधन लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद} \]
\[ \text{NNPMP} = \text{बाजार कीमत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद} \]
\[ \text{NIT} = \text{निवल अप्रत्यक्ष कर} \]
\[ \text{IT} = \text{अप्रत्यक्ष कर} \]
\[ \text{S} = \text{आर्थिक सहायता} \]
In simple words: साधन लागत पर NNP का मतलब है वह आय जो उत्पादन के कारकों को मिलती है, जिसमें कर घटाकर और सरकारी मदद जोड़कर गणना की जाती है.
🎯 Exam Tip: NNPFC राष्ट्रीय आय का सबसे शुद्ध रूप माना जाता है क्योंकि यह उत्पादन की वास्तविक लागत को दर्शाता है, जिसमें कर और सब्सिडी का प्रभाव शामिल नहीं होता है.
Question 15. निजी आय से क्या अभिप्राय है?
Answer: निजी आय से तात्पर्य निजी उद्यमों और परिवारों द्वारा अर्जित आय तथा सरकार और शेष विश्व से प्राप्त चालू हस्तांतरणों से है. इसमें देश के अंदर और बाहर से प्राप्त साधन आय दोनों शामिल होती हैं. इस आय में अवितरित लाभों को शामिल नहीं किया जाता है. निजी आय वह कुल आय है जो निजी क्षेत्र को सभी स्रोतों से प्राप्त होती है.
सूत्र रूप में -
निजी आय = साधन लागत पर निवल घरेलू उत्पाद – सरकारी प्रशासनिक विभागों की आय – गैर-विभागीय उद्यमों की बचत + विदेशों से शुद्ध साधन आय + सरकार से प्राप्त चालू अन्तरण भुगतान + शेष विश्व से प्राप्त शुद्ध चालू अन्तरण + राष्ट्रीय ऋण ब्याज।
In simple words: निजी आय वह कुल कमाई है जो निजी कंपनियों और परिवारों को अपनी मेहनत, सरकारी मदद और विदेश से मिलती है.
🎯 Exam Tip: निजी आय वह आय है जो सीधे निजी क्षेत्र के पास आती है, और इसमें उन आयों को शामिल नहीं किया जाता है जो सीधे परिवारों को वितरित नहीं होतीं (जैसे कि निगमों के अवितरित लाभ).
Question 17. वैयक्तिक प्रयोज्य आय से क्या आशय है?
Answer: वैयक्तिक प्रयोज्य आय वह आय होती है जो व्यक्तियों को समस्त स्रोतों से प्राप्त होती है और जिसका उपयोग वे अपनी इच्छानुसार खर्च या बचत करने के लिए कर सकते हैं. इसे ज्ञात करने के लिए वैयक्तिक आय में से व्यक्तिगत प्रत्यक्ष कर (जैसे आयकर) और गैर-कर भुगतान (जैसे फीस और जुर्माना) को घटाया जाता है.
सूत्रानुसार,
\[ \text{वैयक्तिक प्रयोज्य आय} = \text{वैयक्तिक आय} - \text{वैयक्तिक प्रत्यक्ष कर} - \text{गैर-कर भुगतान} \]
अथवा,
\[ \text{वैयक्तिक प्रयोज्य आय} = \text{उपभोग} + \text{बचत} \]
In simple words: वैयक्तिक प्रयोज्य आय वह पैसा है जो लोगों के पास सभी टैक्स चुकाने के बाद बचता है, जिसे वे अपनी मर्जी से खर्च या बचा सकते हैं.
🎯 Exam Tip: यह अवधारणा परिवारों की वास्तविक क्रय शक्ति को समझने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनके लिए उपलब्ध अंतिम आय को दर्शाती है.
Question 18. राष्ट्रीय प्रयोज्य आय से क्या अभिप्राय है?
Answer: राष्ट्रीय प्रयोज्य आय एक देश के निवासियों को समस्त स्रोतों से प्राप्त होने वाली वह कुल आय है जिसका उपयोग वे अपनी इच्छानुसार उपभोग पर व्यय कर सकते हैं या भविष्य के लिए बचत करके रख सकते हैं. इसमें न केवल उत्पादन से प्राप्त आय बल्कि चालू हस्तांतरण भी शामिल होते हैं.
सूत्रानुसार,
\[ \text{राष्ट्रीय प्रयोज्य आय} = \text{बाजार कीमतों पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद} + \text{शेष विश्व से प्राप्त निवल चालू अन्तरण} \]
अथवा,
\[ \text{राष्ट्रीय प्रयोज्य आय} = \text{साधन लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद} + \text{निवल अप्रत्यक्ष कर} + \text{शेष विश्व से प्राप्त निवल चालू अन्तरण} \]
In simple words: राष्ट्रीय प्रयोज्य आय पूरे देश की वह कुल आय है जिसका उपयोग सभी लोग खर्च या बचत के लिए कर सकते हैं.
🎯 Exam Tip: यह राष्ट्रीय आय से अधिक व्यापक अवधारणा है क्योंकि यह उत्पादन से प्राप्त आय के साथ-साथ एकतरफा हस्तांतरणों को भी शामिल करती है.
Question 19. मौद्रिक सकल घरेलू उत्पाद की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
Answer: मौद्रिक सकल घरेलू उत्पाद या बाजार कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद का अर्थ है एक अर्थव्यवस्था के अंतर्गत एक वर्ष में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के प्रचलित बाजार कीमतों पर मौद्रिक मूल्यों का कुल योग. यह मौजूदा कीमतों पर देश के कुल उत्पादन को दर्शाता है, जिसमें मुद्रास्फीति के प्रभाव शामिल होते हैं.
\[ \text{मौद्रिक सकल घरेलू उत्पाद} = \text{चालू वर्ष में वस्तु की मात्रा} \times \text{चालू वर्ष में वस्तुओं का मूल्य} \]
In simple words: मौद्रिक GDP आज की कीमतों पर देश में बनी सभी चीजों और सेवाओं का कुल पैसा है.
🎯 Exam Tip: मौद्रिक GDP से वास्तविक आर्थिक वृद्धि का सही अंदाजा नहीं लगता क्योंकि यह केवल कीमतों में वृद्धि के कारण भी बढ़ सकता है, भले ही उत्पादन न बढ़ा हो.
Question 21. व्यय योग्य आय एवं वैयक्तिक आय में क्या अन्तर है?
Answer: व्यय योग्य आय और वैयक्तिक आय दोनों ही व्यक्तियों की आय से संबंधित हैं, लेकिन उनमें एक महत्वपूर्ण अंतर है. वैयक्तिक आय वह कुल आय है जो एक वर्ष की अवधि में एक देश के सभी व्यक्तियों या परिवारों को वास्तव में प्राप्त होती है. वहीं, व्यय योग्य आय वह भाग है जो वैयक्तिक आय में से सरकार द्वारा लगाए गए वैयक्तिक करों को निकालने के बाद शेष बचता है. यह वह राशि है जिसे व्यक्ति अपनी इच्छानुसार खर्च या बचत कर सकते हैं.
In simple words: वैयक्तिक आय कुल मिली हुई कमाई है, जबकि व्यय योग्य आय वह कमाई है जो कर चुकाने के बाद खर्च करने के लिए बचती है.
🎯 Exam Tip: व्यय योग्य आय परिवारों की वास्तविक खर्च करने की क्षमता का अधिक सटीक माप है क्योंकि यह सभी अनिवार्य कटौतियों के बाद उपलब्ध धन को दर्शाती है.
Question 22. निजी आय तथा वैयक्तिक आय में अन्तर बताइए।
Answer: निजी आय और वैयक्तिक आय के बीच कुछ मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
1. निजी आय में निगम कर और अवितरित लाभ दोनों को जोड़ा जाता है, जबकि वैयक्तिक आय में इन दोनों को शामिल नहीं किया जाता है.
2. निजी आय की अवधारणा वैयक्तिक आय की अवधारणा से अधिक विस्तृत होती है, क्योंकि इसमें निजी क्षेत्र की सभी आयें शामिल होती हैं. वहीं, वैयक्तिक आय की अवधारणा अपेक्षाकृत संकुचित होती है और केवल व्यक्तियों को प्राप्त आय पर केंद्रित है.
3. निजी आय निजी उद्यमों और परिवारों को सभी स्रोतों से प्राप्त आय का योग है, जबकि वैयक्तिक आय केवल व्यक्तियों (परिवारों) को प्राप्त आय है.
In simple words: निजी आय बड़ी होती है और इसमें कंपनियों का लाभ और टैक्स शामिल होते हैं, जबकि वैयक्तिक आय छोटी होती है और सिर्फ लोगों को सीधे मिलने वाली आय होती है.
🎯 Exam Tip: इन अवधारणाओं के बीच के अंतर को समझने के लिए, हमेशा याद रखें कि निजी आय में कंपनियों के लाभ भी शामिल होते हैं, जो सीधे व्यक्तियों को नहीं मिलते, जबकि वैयक्तिक आय सीधे व्यक्तियों के हाथ में आती है.
RBSE Class 12 Economics Chapter 15 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. राष्ट्रीय आय की विभिन्न अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए। अथवा निम्न अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए -
1. सकल घरेलू उत्पाद (GDP)
2. सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP)
3. निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP)
4. कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPFC)
5. वैयक्तिक आय (PI)
6. व्यक्तिगत प्रयोज्य आय (PDI)।
Answer: राष्ट्रीय आय की गणना के लिए कई अवधारणाओं का उपयोग किया जाता है, जो अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को समझने में मदद करती हैं. ये अवधारणाएँ निम्नलिखित हैं:
1. सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product = GDP) – यह किसी अर्थव्यवस्था की घरेलू सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य होता है. इसमें विदेशियों द्वारा देश में अर्जित आय शामिल होती है, लेकिन देशवासियों द्वारा विदेशों में अर्जित आय शामिल नहीं होती.
सूत्र:
\[ \text{GDP} = \text{GNP} - (\text{निर्यात मूल्य} - \text{आयात मूल्य}) \]
2. सकल राष्ट्रीय उत्पाद (Gross National Product = GNPMP) – यह एक अर्थव्यवस्था के अंतर्गत एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का बाजार मूल्य और विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय का योग होता है. यह देश के निवासियों द्वारा अर्जित कुल आय को दर्शाता है.
सूत्र:
\[ \text{GNPMP} = \text{बाजार कीमत पर GDP} + \text{विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय} \]
3. निवल राष्ट्रीय उत्पाद (Net National Product = NNP) – यह किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के बाजार मूल्य के योग (GNPMP) में से मूल्यह्रास (Depreciation) और पुरानेपन के कारण होने वाले ह्रास (Obsolescence) को घटाने के बाद जो शेष बचता है, उसे निवल राष्ट्रीय उत्पाद कहते हैं.
सूत्र:
\[ \text{शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद} = \text{सकल राष्ट्रीय उत्पाद} - \text{मूल्य ह्रास या घिसावट} \]
4. निवल घरेलू उत्पाद (Net Domestic Product = NDPMP) - यह बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद है जो किसी राष्ट्र की घरेलू सीमा में एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के बाजार मूल्य (GDPMP) और मूल्यह्रास के बीच का अंतर है. यह देश की घरेलू उत्पादन क्षमता का शुद्ध माप है.
सूत्र:
\[ \text{शुद्ध घरेलू उत्पाद} = \text{बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद} - \text{मूल्य ह्रास} \]
5. साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय आय (Net National Income at Factor Cost = NNPFC) - यह एक वर्ष में साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद और विदेशों से प्राप्त शुद्ध आय का योग है. इसे राष्ट्रीय आय भी कहते हैं क्योंकि यह उत्पादन के कारकों को मिलने वाली वास्तविक आय को दर्शाता है.
सूत्र:
\[ \text{NNPFC} = \text{या NI} = \text{साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद} + \text{विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय} \]
6. प्रति व्यक्ति प्रयोज्य आय [Personal Disposable Income (PDI)] – यह व्यक्तिगत आय में से व्यक्तिगत प्रत्यक्ष कर (जैसे आयकर), फीस और जुर्माना आदि घटाने के बाद बची हुई बचत राशि है जिसे उपभोक्ता अपनी इच्छानुसार खर्च कर सकता है. यह परिवारों की वास्तविक क्रय शक्ति को दर्शाता है.
सूत्र:
\[ \text{व्यक्तिगत प्रयोज्य आय} = \text{वैयक्तिक आय} - \text{प्रत्यक्ष कर} - \text{फीस एवं जुर्माना} \]
7. प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income = PCI) – यह वह औसत आय है जो एक व्यक्ति एक वर्ष में अर्जित करता है. इसे देश की कुल राष्ट्रीय आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर प्राप्त किया जाता है और यह जीवन-स्तर का एक महत्वपूर्ण सूचक है.
सूत्र:
\[ \text{प्रति व्यक्ति आय} = \frac { \text{देश की राष्ट्रीय आय} }{ \text{देश की जनसंख्या} } \]
In simple words: राष्ट्रीय आय की अलग-अलग अवधारणाएँ हैं जो बताती हैं कि देश कितना कमा रहा है, लोगों के पास कितना पैसा है, और अर्थव्यवस्था कैसे चल रही है. ये GDP, GNP, NNP, PI और PDI जैसी चीजें हैं.
🎯 Exam Tip: इन सभी अवधारणाओं को उनके प्रमुख अंतरों (जैसे भौगोलिक बनाम नागरिकता, सकल बनाम निवल, बाजार कीमत बनाम साधन लागत) के साथ याद रखें.
RBSE Class 12 Economics Chapter 15 आंकिक प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित आँकड़ों से आय विधि तथा व्यय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए -
| मदें | Rs. करोड़ में |
|---|---|
| (i) निजी अन्तिम उपभोग व्यय | 2,000 |
| (ii) सरकार द्वारा अन्तिम उपभोग व्यय | 1,000 |
| (iii) कर्मचारियों का पारिश्रमिक | 1,200 |
| (iv) शुद्ध निर्यात | -20 |
| (v) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर | 370 |
| (vi) शुद्ध घरेलू पूँजी निर्माण | 800 |
| (vii) अचल पूँजी का उपभोग | 100 |
| (viii) विदेशों से शुद्ध कारक आय | -10 |
| (ix) ब्याज | 310 |
| (x) लगान | 200 |
| (xi) स्वनियोजितों की मिश्रित आय | 900 |
| (xii) लाभ | 800 |
आय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय की गणना:
आय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय = कर्मचारियों को पारिश्रमिक + विदेशों से शुद्ध कारक आय + ब्याज + लगान + स्वनियोजितों की मिश्रित आय + लाभ
\[ = 1,200 + (-10) + 310 + 200 + 900 + 800 \]
\[ = 3,400 \text{ करोड़} \]
व्यय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय की गणना:
व्यय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय = निजी अंतिम उपभोग व्यय + सरकार द्वारा अंतिम उपभोग व्यय + शुद्ध घरेलू पूंजी निर्माण + शुद्ध निर्यात - शुद्ध अप्रत्यक्ष कर + विदेशों से शुद्ध कारक आय (क्योंकि हमें राष्ट्रीय आय निकालनी है, सकल नहीं)
\[ = 2,000 + 1,000 + 800 + (-20) - 370 + (-10) \]
\[ = 3,800 - 370 - 10 = 3,420 - 10 = 3,410 \text{ करोड़} \]
(नोट: प्रदान किए गए हल में आय विधि और व्यय विधि के लिए राष्ट्रीय आय की गणना में थोड़ा अंतर है, जो आमतौर पर आंकड़ों के कारण हो सकता है. यहाँ, हमने व्यय विधि में शुद्ध अप्रत्यक्ष कर घटाया और विदेशों से शुद्ध कारक आय को शामिल किया ताकि राष्ट्रीय आय प्राप्त हो सके.)
In simple words: आय विधि से सभी तरह की कमाई (सैलरी, किराया, ब्याज, मुनाफा) को जोड़कर राष्ट्रीय आय निकाली जाती है. व्यय विधि से कुल खर्च को जोड़कर राष्ट्रीय आय निकाली जाती है.
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय की गणना करते समय, आय विधि और व्यय विधि दोनों से लगभग समान परिणाम आना चाहिए, मामूली अंतर डेटा की उपलब्धता या गणना के तरीकों के कारण हो सकता है.
Question 2. निम्नलिखित आँकड़ों से उत्पादन के मूल्य की गणना कीजिए -
| मदें | Rs. लाख में |
|---|---|
| (i) कारक लागत पर निवल वर्धित मूल्य | 100 |
| (ii) मध्यवर्ती उपभोग | 75 |
| (iii) उत्पादक शुल्क | 20 |
| (iv) आर्थिक सहायता | 5 |
| (v) मूल्य ह्रास | 10 |
उत्पादन का मूल्य = कारक लागत पर निवल वर्धित मूल्य + मध्यवर्ती उपभोग + उत्पादक शुल्क – आर्थिक सहायता + मूल्य ह्रास
\[ = 100 + 75 + 20 - 5 + 10 \]
\[ = 200 \text{ लाख} \]
इसलिए, उत्पादन मूल्य
\[ = 200 \text{ लाख} \]
In simple words: उत्पादन का कुल मूल्य निकालने के लिए, उत्पादन लागत, बीच में इस्तेमाल हुई चीजें, टैक्स, और घिसावट को जोड़ते हैं, फिर सरकारी मदद घटाते हैं.
🎯 Exam Tip: उत्पादन का मूल्य एक फर्म द्वारा एक अवधि में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाता है, जिसमें मध्यवर्ती खपत शामिल नहीं होती है.
Question 3. निम्नलिखित आँकड़ों से मध्यवर्ती उपभोग की गणना कीजिए -
| मदें | Rs. लाख में |
|---|---|
| (i) उत्पादन का मूल्य | 200 |
| (ii) कारक लागत पर निवल वर्धित मूल्य | 80 |
| (iii) बिक्री कर | 15 |
| (iv) आर्थिक सहायता | 5 |
| (v) मूल्य ह्रास | 20 |
मध्यवर्ती उपभोग = उत्पादन का मूल्य – कारक लागत पर निवल वर्धित मूल्य – शुद्ध अप्रत्यक्ष कर – मूल्य ह्रास
शुद्ध अप्रत्यक्ष कर = बिक्री कर – आर्थिक सहायता
\[ = 15 - 5 = 10 \text{ लाख} \]
अब, मध्यवर्ती उपभोग की गणना करें:
\[ = 200 - 80 - (10) - 20 \]
\[ = 200 - 80 - 10 - 20 \]
\[ = 200 - 110 = 90 \text{ लाख} \]
इसलिए, मध्यवर्ती उपभोग
\[ = 90 \text{ लाख} \]
In simple words: मध्यवर्ती उपभोग जानने के लिए, कुल उत्पादन के मूल्य में से उत्पादन लागत, टैक्स और घिसावट का खर्च घटा देते हैं.
🎯 Exam Tip: मध्यवर्ती उपभोग उन वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को संदर्भित करता है जिनका उपयोग किसी अन्य उत्पाद या सेवा के उत्पादन के लिए किया जाता है.
Question 4. निम्नलिखित आँकड़ों से कारक लागत पर निवल देशीय उत्पाद और सकल राष्ट्रीय प्रयोज्य आय की गणना कीजिए –
| मदें | Rs. लाख में |
|---|---|
| (i) निजी अंतिम उपभोग व्यय | 250 |
| (ii) सरकारी अंतिम उपभोग व्यय | 50 |
| (iii) सकल स्थिर पूंजी निर्माण | 40 |
| (iv) स्टॉक में परिवर्तन | -10 |
| (v) स्थिर पूंजी का उपभोग | 25 |
| (vi) निवल निर्यात | -10 |
| (vii) आर्थिक सहायता | 10 |
| (viii) निवल देशीय पूंजी निर्माण | 30 |
| (ix) अप्रत्यक्ष कर | 20 |
कारक लागत पर निवल देशीय उत्पाद (NDPFC) की गणना:
NDPFC = निजी अंतिम उपभोग व्यय + सरकारी अंतिम उपभोग व्यय + निवल देशीय पूंजी निर्माण + निवल निर्यात - अप्रत्यक्ष कर + आर्थिक सहायता
\[ = 250 + 50 + 30 + (-10) - 20 + 10 \]
\[ = 340 - 10 - 20 + 10 \]
\[ = 330 - 20 + 10 \]
\[ = 310 + 10 = 320 \text{ करोड़} \]
सकल राष्ट्रीय प्रयोज्य आय (Gross National Disposable Income - GNDI) की गणना:
GNDI = कारक लागत पर निवल देशीय उत्पाद (NDPFC) + विदेशों से शुद्ध चालू हस्तांतरण + शुद्ध अप्रत्यक्ष कर + स्थिर पूंजी का उपभोग + विदेशों से शुद्ध कारक आय
विदेशों से शुद्ध चालू हस्तांतरण = (सरकार से चालू वर्ष की प्राप्तियां + विदेशों से व्यक्तियों को चालू वर्ष की प्राप्तियां + सरकारी ऋणों पर ब्याज प्राप्तियां) - (सरकारी कर्मचारियों द्वारा पेंशन इत्यादि हेतु चुकाया अंशदान + सरकारी गैर विभाग जैसे स्टेट बैंक के लाभ)
यहाँ, GNDI = NDPFC + (अप्रत्यक्ष कर - आर्थिक सहायता) + मूल्य ह्रास + विदेशों से शुद्ध कारक आय + विदेशों से शुद्ध चालू हस्तांतरण
\[ = 320 + (20 - 10) + 25 + (-10) + \text{विदेशों से शुद्ध चालू हस्तांतरण} \]
(नोट: चूंकि 'विदेशों से शुद्ध चालू हस्तांतरण' का आंकड़ा सीधे नहीं दिया गया है, इसलिए हम इसकी गणना के लिए अन्य उपलब्ध आंकड़ों का उपयोग करेंगे. यदि यह उपलब्ध नहीं है, तो हमें अन्य विधि का उपयोग करना होगा. दिए गए हल में 5 को 'विदेशों से शुद्ध चालू हस्तांतरण' माना गया है.)
मान लें कि विदेशों से शुद्ध चालू हस्तांतरण = 5 (दिए गए हल से)
\[ = 320 + 10 + 25 - 10 + 5 \]
\[ = 350 \text{ करोड़} \]
In simple words: NDPFC देश की कमाई का शुद्ध माप है जिसमें कर और सब्सिडी शामिल नहीं होती. सकल राष्ट्रीय प्रयोज्य आय देश की कुल आय है जिसे खर्च किया जा सकता है, इसमें राष्ट्रीय आय के साथ-साथ विदेशों से मिली मदद भी शामिल होती है.
🎯 Exam Tip: न्यूमेरिकल्स में, सभी मदों को सही अवधारणा (सकल/निवल, बाजार कीमत/कारक लागत, घरेलू/राष्ट्रीय) के तहत वर्गीकृत करना और उपयुक्त सूत्र का उपयोग करना महत्वपूर्ण है.
Question 5. निम्नलिखित आँकड़ों से बिक्री की गणना कीजिए -
| मदें | Rs. लाख में |
|---|---|
| (i) कारक लागत पर निवल वर्धित मूल्य | 300 |
| (ii) मध्यवर्ती उपभोग | 200 |
| (iii) अप्रत्यक्ष कर | 20 |
| (iv) मूल्य ह्रास | 30 |
| (v) स्टॉक में परिवर्तन | -50 |
बिक्री = कारक लागत पर निवल वर्धित मूल्य – स्टॉक में परिवर्तन + मध्यवर्ती उपभोग + अप्रत्यक्ष कर + मूल्यह्रास
\[ = 300 - (-50) + 200 + 20 + 30 \]
\[ = 300 + 50 + 200 + 20 + 30 \]
\[ = 600 \text{ लाख} \]
In simple words: कुल बिक्री निकालने के लिए, उत्पादन की लागत, स्टॉक में बदलाव, बीच में इस्तेमाल हुए सामान का खर्च, टैक्स और घिसावट को जोड़ दिया जाता है.
🎯 Exam Tip: इस तरह की गणनाओं में, 'स्टॉक में परिवर्तन' (Inventory Change) को सही चिह्न के साथ (वृद्धि के लिए + और कमी के लिए -) शामिल करना बहुत महत्वपूर्ण है.
Question 6. निम्न आँकड़ों से सकल राष्ट्रीय प्रयोज्य आय एवं वैयक्तिक आय ज्ञात कीजिए –
| मदें | Rs. लाख में |
|---|---|
| (i) निजी अंतिम उपभोग व्यय | 2,000 |
| (ii) सरकारी अंतिम उपभोग व्यय | 1,000 |
| (iii) कर्मचारियों का पारिश्रमिक | 1,200 |
| (iv) शुद्ध निर्यात | -20 |
| (v) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर | 370 |
| (vi) शुद्ध घरेलू पूंजी निर्माण | 800 |
| (vii) अचल पूंजी का उपभोग (मूल्यह्रास) | 100 |
| (viii) विदेशों से शुद्ध कारक आय | -10 |
| (ix) ब्याज | 310 |
| (x) लगान | 200 |
| (xi) स्वनियोजितों की मिश्रित आय | 900 |
| (xii) लाभ | 800 |
| (xiii) निजी कंपनियों की बचते | 500 |
| (xiv) निजी कंपनियों के निगम कर | 750 |
| (xv) सरकार से चालू वर्ष की प्राप्तियाँ | 250 |
| (xvi) विदेशों से व्यक्तियों को चालू वर्ष की प्राप्तियाँ | 100 |
| (xvii) सरकारी ऋणों पर ब्याज प्राप्तियाँ | 150 |
| (xviii) सरकारी विभागों जैसे रेल विभाग की आय | 500 |
| (xix) सरकारी गैर-विभाग जैसे स्टेट बैंक के लाभ | 500 |
| (xx) सरकारी कर्मचारियों द्वारा पेंशन आदि हेतु चुकाया अंशदान | 250 |
पहले, राष्ट्रीय आय (NI) की गणना करते हैं (आय विधि से):
राष्ट्रीय आय = कर्मचारियों का पारिश्रमिक + ब्याज + लगान + लाभ + स्वनियोजितों की मिश्रित आय + विदेशों से शुद्ध कारक आय
\[ = 1,200 + 310 + 200 + 800 + 900 + (-10) \]
\[ = 3,400 - 10 = 3,390 \text{ करोड़} \]
सकल राष्ट्रीय प्रयोज्य आय (Gross National Disposable Income - GNDI) की गणना:
GNDI = राष्ट्रीय आय + शुद्ध अप्रत्यक्ष कर + मूल्यह्रास + शेष विश्व से प्राप्त शुद्ध चालू हस्तांतरण
शुद्ध अप्रत्यक्ष कर = 370 करोड़
मूल्यह्रास = 100 करोड़
शेष विश्व से प्राप्त शुद्ध चालू हस्तांतरण = (सरकार से चालू वर्ष की प्राप्तियाँ + विदेशों से व्यक्तियों को चालू वर्ष की प्राप्तियाँ + सरकारी ऋणों पर ब्याज प्राप्तियाँ) - (सरकारी कर्मचारियों द्वारा पेंशन आदि हेतु चुकाया अंशदान + सरकारी विभागों जैसे रेल विभाग की आय + सरकारी गैर विभाग जैसे स्टेट बैंक के लाभ)
\[ = (250 + 100 + 150) - (250 + 500 + 500) \]
\[ = 500 - 1,250 = -750 \text{ करोड़} \]
अब, GNDI की गणना करें:
\[ = 3,390 + 370 + 100 + (-750) \]
\[ = 3,860 - 750 = 3,110 \text{ करोड़} \]
वैयक्तिक आय (Personal Income - PI) की गणना:
PI = निजी आय - निजी कंपनियों की बचते - निजी कंपनियों के निगम कर
निजी आय = राष्ट्रीय आय + विदेशों से शुद्ध कारक आय + सरकार से प्राप्त चालू हस्तांतरण + शेष विश्व से प्राप्त चालू हस्तांतरण - सरकारी विभागों की आय - गैर-विभागीय उद्यमों की बचत
यहाँ, हमें पहले राष्ट्रीय आय की गणना करनी है, जो हमने ऊपर 3,390 करोड़ निकाली है.
निजी आय = राष्ट्रीय आय - सरकारी प्रशासनिक विभागों की आय (जैसे रेल विभाग की आय) - गैर-विभागीय उद्यमों की बचत (जैसे स्टेट बैंक के लाभ) + सरकार से प्राप्त चालू हस्तांतरण + विदेशों से प्राप्त शुद्ध चालू हस्तांतरण + राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज
सरकार से प्राप्त चालू हस्तांतरण = (सरकार से चालू वर्ष की प्राप्तियाँ + सरकारी ऋणों पर ब्याज प्राप्तियाँ)
\[ = 250 + 150 = 400 \text{ करोड़} \]
विदेशों से प्राप्त शुद्ध चालू हस्तांतरण = 100 करोड़
राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज = 150 करोड़ (सवाल में नहीं दिया, पिछले सवाल से अनुमानित, या इसे 'सरकारी ऋणों पर ब्याज प्राप्तियाँ' से लिया जा सकता है)
आइए हम 'सरकारी ऋणों पर ब्याज प्राप्तियाँ' को 'राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज' मान लें: 150 करोड़.
निजी आय = 3,390 - (500 + 500) + (400) + 100 + 150
\[ = 3,390 - 1,000 + 400 + 100 + 150 \]
\[ = 2,390 + 650 = 3,040 \text{ करोड़} \]
अब, वैयक्तिक आय की गणना करें:
PI = निजी आय - निजी कंपनियों की बचते - निजी कंपनियों के निगम कर
\[ = 3,040 - 500 - 750 \]
\[ = 3,040 - 1,250 = 1,790 \text{ करोड़} \]
(नोट: दिए गए स्रोत के हल और हमारे हल में कुछ अंतर हो सकता है, जो उपलब्ध आंकड़ों की व्याख्या या किसी विशेष मद को शामिल करने या न करने पर निर्भर करता है.)
In simple words: सकल राष्ट्रीय प्रयोज्य आय देश की कुल आय है जिसे खर्च किया जा सकता है, जिसमें राष्ट्रीय आय, टैक्स और विदेश से मिली मदद शामिल है. वैयक्तिक आय वह पैसा है जो लोगों को सभी कटौतियों के बाद मिलता है.
🎯 Exam Tip: जटिल आंकिक प्रश्नों में, प्रत्येक अवधारणा को परिभाषित करने वाले सभी घटकों को सावधानीपूर्वक पहचानें और उन्हें सही सूत्र में सही चिह्न के साथ जोड़ें या घटाएँ.
Question 7. निम्नलिखित आँकड़ों से कारक लागत पर निवल वर्धित मूल्य की गणना कीजिए -
मदें
(i) फर्म में प्रयोग के लिए मशीन क्रय
(ii) बिक्री
(iii) मध्यवर्ती लागतें
(iv) अप्रत्यक्ष कर
(v) स्टॉक में परिवर्तन
(vi) उत्पादन शुल्क
(vii) कच्चे माल का स्टॉक
Answer: कारक लागत पर निवल मूल्य वर्धित मूल्य की गणना के लिए, हम बिक्री में स्टॉक में परिवर्तन को जोड़कर उत्पादन का मूल्य निकालते हैं, फिर उसमें से मध्यवर्ती लागतें और अप्रत्यक्ष कर घटाते हैं।
उत्पादन का मूल्य \( = \) बिक्री \( + \) स्टॉक में परिवर्तन
\( = 200 + 10 = 210 \) लाख
फर्म की कारक लागत पर निवल मूल्य वृद्धि \( = \) उत्पादन का मूल्य \( - \) मध्यवर्ती लागतें \( - \) अप्रत्यक्ष कर
\( = 210 - 90 - 12 = ₹ 108 \) लाख
In simple words: हम फर्म की कुल बिक्री और स्टॉक में बदलाव को जोड़ते हैं, फिर उसमें से बीच के खर्च और सरकार को दिए गए अप्रत्यक्ष कर को घटा देते हैं. यह हमें बताता है कि उत्पादन के कारकों को कुल कितनी आय मिली.
🎯 Exam Tip: कारक लागत पर निवल मूल्य वर्धित मूल्य (NVAfc) की गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि मध्यवर्ती उपभोग, मूल्यह्रास (यदि दिया गया हो) और शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (अप्रत्यक्ष कर - आर्थिक सहायता) को सही ढंग से घटाया गया हो.
Question 8. 2013-14 में भारतवर्ष के लिए निम्नलिखित आँकड़े दिये गये हैं –
मदें
कर्मचारियों की मेहनत - 49,650
किराया - 10,209
ब्याज - 4,794
लाभ - 6,926
मिश्रित आय - 50,416
निवल विदेशी कारक आय - -7
निवल अप्रत्यक्ष कर - 16,931
Answer: भारत की राष्ट्रीय आय की गणना आय विधि का उपयोग करके की जाती है, जहाँ सभी कारकों द्वारा अर्जित आय को जोड़ा जाता है। राष्ट्रीय आय घरेलू कारक आय और विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय का योग होती है।
घरेलू कारक आय \( = \) कर्मचारियों की मेहनत \( + \) किराया \( + \) ब्याज \( + \) लाभ \( + \) मिश्रित आय
\( = 49,650 + 10,209 + 4,794 + 6,926 + 50,416 = 121,995 \) करोड़
राष्ट्रीय आय \( = \) घरेलू कारक आय \( + \) विदेशों से शुद्ध कारक आय
\( = 121,995 + (-7) = 121,988 \) करोड़
In simple words: भारत की कुल आय जानने के लिए, हम सभी तरह की कमाई (जैसे वेतन, किराया, ब्याज, लाभ और अपना काम करके कमाई) को जोड़ते हैं, और फिर इसमें विदेशों से हुई शुद्ध कमाई को भी जोड़ देते हैं.
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय की गणना करते समय, आय विधि में कर्मचारियों का पारिश्रमिक, प्रचालन अधिशेष (किराया, ब्याज, लाभ), मिश्रित आय और विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय को शामिल करना आवश्यक है.
Question 9. निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से निबल राष्ट्रीय उत्पाद की गणना कीजिए –
मदें
(i) सकल राष्ट्रीय उत्पाद (G.N.P.) - 60,000
(ii) मध्यवर्ती लागत मूल्य - 20,000
(iii) मूल्यह्रास - 4,000
(iv) विदेशों से शुद्ध आय - 800
Answer: निबल राष्ट्रीय उत्पाद की गणना के लिए, पहले हम सकल घरेलू उत्पाद से मध्यवर्ती लागत मूल्य घटाकर और विदेशों से प्राप्त शुद्ध आय जोड़कर एक अनुमानित सकल राष्ट्रीय उत्पाद निकालते हैं। फिर, इस मूल्य में से मूल्यह्रास को घटाकर निवल राष्ट्रीय उत्पाद प्राप्त किया जाता है।
सकल राष्ट्रीय उत्पाद (गणना अनुसार) \( = \) सकल घरेलू उत्पाद \( - \) मध्यवर्ती लागत मूल्य \( + \) विदेशों से प्राप्त शुद्ध आय
\( = 60,000 - 20,000 + 800 = 40,800 \)
निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) \( = \) सकल राष्ट्रीय उत्पाद (गणना अनुसार) \( - \) मूल्यह्रास (D)
\( = 40,800 - 4,000 = ₹ 36,800 \)
In simple words: पहले हम कुल उत्पादन से बीच के खर्च और विदेशों से हुई कमाई को जोड़-घटाकर एक शुरुआती कुल आय निकालते हैं. फिर, इस आय में से टूट-फूट का खर्च घटा देते हैं, ताकि हमें शुद्ध राष्ट्रीय आय मिल जाए.
🎯 Exam Tip: निबल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) की गणना में, हमेशा सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) से मूल्यह्रास (स्थिर पूँजी का उपभोग) को घटाना सुनिश्चित करें, क्योंकि यह पूँजी की टूट-फूट को दर्शाता है.
Question 11. एक अर्थव्यवस्था में निम्नलिखित सौदे होते हैं –
(i) क ₹ 5,000 की वस्तु ख को बेचता है।
(ii) ख ₹ 8,000 की वस्तु ग को बेचता है।
(iii) ग₹ 12,000 की वस्तु उपभोक्ता को बेचता है।
इन सौदों के आधार पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद की गणना कीजिए। सकल उत्पाद पर क्या प्रभाव होगा यदि
(क) ₹ 2,000 की वस्तुओं का आयात करता है,
(ख) 'ग' ₹ 3,000 की वस्तुओं का आयात करता है।
Answer: सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GDP) की गणना अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य के आधार पर की जाती है। इस मामले में, 'ग' द्वारा उपभोक्ता को बेची गई अंतिम वस्तु का मूल्य ₹ 12,000 है।
प्रारंभिक सकल राष्ट्रीय उत्पाद का मूल्य \( = ₹ 12,000 \)
(क) यदि 'क' ₹ 2,000 की वस्तुओं का आयात करता है, तो आयात की गई वस्तुएँ घरेलू उत्पादन का हिस्सा नहीं होती हैं। इसलिए, सकल राष्ट्रीय उत्पाद आयात के मूल्य से घट जाएगा।
सकल राष्ट्रीय उत्पाद \( = 12,000 - 2,000 = ₹ 10,000 \)
(ख) यदि 'ग' ₹ 3,000 की वस्तुओं का आयात करता है, तो यह आयात भी सकल राष्ट्रीय उत्पाद को घटाएगा। पिछले आयात को भी ध्यान में रखा जाएगा।
सकल राष्ट्रीय उत्पाद \( = 12,000 - 2,000 - 3,000 = ₹ 7,000 \)
In simple words: कुल उत्पादन देश की आखिरी बिक्री के बराबर होता है, जो यहां ₹ 12,000 है. अगर देश में कोई सामान बाहर से आता है, तो उसे कुल उत्पादन में से घटा दिया जाता है.
🎯 Exam Tip: सकल राष्ट्रीय उत्पाद की गणना में अंतिम वस्तुओं के मूल्य को ही शामिल करें, और आयात को हमेशा घटा दें क्योंकि वे घरेलू उत्पादन का हिस्सा नहीं होते हैं.
Question 12. निम्नलिखित आँकड़ों से साधन लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि ज्ञात कीजिए -
मदें
(i) कुल बिक्री - 4,000
(ii) अन्तिम स्टॉक - 700
(iii) प्रारम्भिक स्टॉक - 500
(iv) अप्रत्यक्ष कर - 200
(v) आर्थिक सहायता - 150
(vi) मूल्यह्रास - 300
(vii) अन्य फर्मों से कच्चे माल का क्रय - 1,000
Answer: साधन लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि की गणना के लिए, हम पहले उत्पादन का मूल्य और बाजार कीमत पर सकल मूल्य वृद्धि निकालते हैं। फिर, इसमें से मूल्यह्रास और शुद्ध अप्रत्यक्ष कर को घटाया जाता है।
उत्पादन का मूल्य \( = \) कुल बिक्री \( + \) स्टॉक में परिवर्तन (अन्तिम स्टॉक \( - \) प्रारम्भिक स्टॉक)
\( = 4,000 + (700 - 500) = 4,000 + 200 = ₹ 4,200 \)
बाजार कीमत पर सकल मूल्य वृद्धि \( = \) उत्पादन का मूल्य \( - \) अन्य फर्मों से कच्चे माल की खरीद
\( = 4,200 - 1,000 = ₹ 3,200 \)
शुद्ध अप्रत्यक्ष कर \( = \) अप्रत्यक्ष कर \( - \) आर्थिक सहायता
\( = 200 - 150 = 50 \)
साधन लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि \( = \) बाजार कीमत पर सकल मूल्य वृद्धि \( - \) मूल्यह्रास \( - \) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर
\( = 3,200 - 300 - 50 = ₹ 2,850 \)
In simple words: हम कुल बिक्री और स्टॉक के बदलाव को जोड़कर उत्पादन का मूल्य निकालते हैं. फिर, इसमें से कच्चे माल की खरीद, टूट-फूट का खर्च और सरकार के करों को घटा देते हैं, ताकि हमें पता चले कि कारकों को कितनी शुद्ध आय मिली.
🎯 Exam Tip: साधन लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि (NVAfc) की गणना करते समय, मध्यवर्ती उपभोग को घटाना और शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (अप्रत्यक्ष कर - आर्थिक सहायता) और मूल्यह्रास को सही ढंग से शामिल करना महत्वपूर्ण है.
Question 13. गणना कीजिए -
(क) बाजार कीमत पर सकल उत्पादन का मूल्य
(ख) बाजार कीमत पर सकल मूल्य वृद्धि
(ग) साधन लागत पर सकल मूल्य वृद्धि
(घ) बाजार कीमत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि
(ड़) साधन लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि
निम्नलिखित सूचनाएँ दी हुई हैं -
(i) बिक्री - 1,00,000
(ii) स्टॉक में कमी - 4,000
(iii) मध्यवर्ती उपभोग - 55,000
(iv) ईंधन व बिजली पर खर्च - 6,000
(v) अप्रत्यक्ष कर - 2,000
(vi) आर्थिक सहायता - 1,800
(vii) अचल पूँजी उपभोग - 300
Answer:
(क) बाजार कीमत पर सकल उत्पादन का मूल्य \( = \) बिक्री \( - \) स्टॉक में कमी
\( = 1,00,000 - 4,000 = ₹ 96,000 \)
(ख) बाजार कीमत पर सकल मूल्य वृद्धि \( = \) सकल उत्पादन का मूल्य \( - \) मध्यवर्ती उपभोग (अन्य फर्मों से खरीद \( + \) ईंधन व बिजली पर खर्च)
\( = 96,000 - (55,000 + 6,000) = 96,000 - 61,000 = ₹ 35,000 \)
(ग) साधन लागत पर सकल मूल्य वृद्धि \( = \) बाजार कीमत पर सकल मूल्य वृद्धि \( - \) (अप्रत्यक्ष कर \( - \) आर्थिक सहायता)
\( = 35,000 - (2,000 - 1,800) = 35,000 - 200 = ₹ 34,800 \)
(घ) बाजार कीमत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि \( = \) बाजार कीमत पर सकल मूल्य वृद्धि \( - \) अचल पूँजी उपभोग
\( = 35,000 - 300 = ₹ 34,700 \)
(ड़) साधन लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि \( = \) बाजार कीमत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि \( - \) (अप्रत्यक्ष कर \( - \) आर्थिक सहायता)
\( = 34,700 - (2,000 - 1,800) = 34,700 - 200 = ₹ 34,500 \)
In simple words: हम पहले कुल उत्पादन और फिर विभिन्न स्तरों पर मूल्य वृद्धि निकालते हैं. इसमें बिक्री, स्टॉक में बदलाव, बीच के खर्च, कर और टूट-फूट को ध्यान में रखा जाता है, ताकि अलग-अलग तरह की आय का पता चल सके.
🎯 Exam Tip: उत्पादन के मूल्य की गणना में बिक्री और स्टॉक में परिवर्तन को जोड़ना याद रखें, और विभिन्न "सकल" और "शुद्ध" अवधारणाओं के बीच अंतर करने के लिए मूल्यह्रास और शुद्ध अप्रत्यक्ष कर को सही ढंग से लागू करें.
Question 14. एक फर्म से सम्बन्धित निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से फर्म की साधन लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि की गणना कीजिए –
₹ लाख में
(i) समयावधि के दौरान बिक्री - 6,000
(ii) स्टॉक में वृद्धि - 750
(iii) अन्य संगठनों से ईंधन की खरीद - 500
(iv) अन्य फर्मों से कच्चे माल खरीद - 1,000
(v) कच्चे माल का आयात - 500
(vi) अप्रत्यक्ष कर - 250
(vii) स्थिर पूँजी का मूल्य ह्रास - 700
इस समयावधि में फर्म में काम पर लगे उत्पादन के साधनों का कुल भुगतान कितना होगा?
Answer: साधन लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि की गणना के लिए, हम पहले उत्पादन का मूल्य और मध्यवर्ती उपभोग निकालते हैं। फिर, इस मूल्य में से मूल्यह्रास और शुद्ध अप्रत्यक्ष कर को घटाया जाता है।
उत्पादन का मूल्य \( = \) बिक्री \( + \) स्टॉक में वृद्धि
\( = 6,000 + 750 = 6,750 \)
मध्यवर्ती उपभोग \( = \) अन्य संगठनों से ईंधन की खरीद \( + \) अन्य फर्मों से कच्चे माल खरीद \( + \) कच्चे माल का आयात
\( = 500 + 1,000 + 500 = 2,000 \)
बाजार कीमत पर सकल मूल्य वृद्धि \( = \) उत्पादन का मूल्य \( - \) मध्यवर्ती उपभोग
\( = 6,750 - 2,000 = 4,750 \)
शुद्ध अप्रत्यक्ष कर \( = \) अप्रत्यक्ष कर \( - \) आर्थिक सहायता (आर्थिक सहायता शून्य मानकर)
\( = 250 - 0 = 250 \)
साधन लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि (NVAfc) \( = \) बाजार कीमत पर सकल मूल्य वृद्धि \( - \) स्थिर पूँजी का मूल्य ह्रास \( - \) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर
\( = 4,750 - 700 - 250 = ₹ 3,800 \) लाख
फर्म में काम पर लगे उत्पादन के साधनों का कुल भुगतान साधन लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि के बराबर होता है।
अतः, उत्पादन के साधनों का कुल भुगतान \( = ₹ 3,800 \) लाख
In simple words: हम फर्म की बिक्री और स्टॉक बदलाव को जोड़कर कुल उत्पादन देखते हैं. फिर उसमें से बीच के सभी खर्च, टूट-फूट और सरकार के कर घटा देते हैं. जो बचता है, वही उत्पादन करने वाले कारकों की कुल कमाई होती है.
🎯 Exam Tip: उत्पादन के साधनों को किया गया कुल भुगतान हमेशा साधन लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि के बराबर होता है, क्योंकि यह कारकों को उनकी सेवाओं के लिए प्राप्त आय का प्रतिनिधित्व करता है.
Question 15. निम्नलिखित आँकड़ों से आय विधि के द्वारा बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद की गणना कीजिए -
₹ लाख में
(i) मजदूरी व वेतन - 800
(ii) मूल्य ह्रास - 60
(iii) लगान - 200
(iv) विदेशों से शुद्ध साधन आय - -15
(v) आर्थिक सहायता - 100
(vi) लाभ - 500
(vii) अप्रत्यक्ष कर - 200
(viii) ब्याज - 50
Answer: आय विधि द्वारा बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNPMP) की गणना करने के लिए, हम पहले सभी कारक आय को जोड़ते हैं, फिर उसमें मूल्यह्रास, शुद्ध अप्रत्यक्ष कर और विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय को जोड़ते हैं।
साधन लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPfc) \( = \) मजदूरी व वेतन \( + \) लगान \( + \) ब्याज \( + \) लाभ
\( = 800 + 200 + 50 + 500 = 1,550 \)
शुद्ध अप्रत्यक्ष कर \( = \) अप्रत्यक्ष कर \( - \) आर्थिक सहायता
\( = 200 - 100 = 100 \)
बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNPMP) \( = \) NNPfc \( + \) मूल्यह्रास \( + \) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर \( + \) विदेशों से शुद्ध साधन आय
\( = 1,550 + 60 + 100 + (-15) = 1,710 - 15 = ₹ 1,695 \) लाख
In simple words: हम सारी कमाई (वेतन, किराया, ब्याज, लाभ) को जोड़ते हैं. फिर उसमें टूट-फूट का खर्च, सरकार के कर और विदेशों से हुई शुद्ध कमाई को भी जोड़ देते हैं, ताकि हमें कुल राष्ट्रीय उत्पादन का मूल्य मिल जाए.
🎯 Exam Tip: आय विधि से GNPMP की गणना करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप कारक आय (वेतन, किराया, ब्याज, लाभ), मूल्यह्रास, शुद्ध अप्रत्यक्ष कर और विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय को सही ढंग से जोड़ते हैं.
Question 16. निम्रलिखित आँकड़ों से व्यय विधि के द्वारा बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद की गणना कीजिए -
₹ करोड़ में
(i) इन्वेण्ट्री निवेश - 20
(ii) निर्यात - 30
(iii) विदेशों से शुद्ध साधन आय - -15
(iv) वैयक्तिक उपभोग व्यय - 500
(v) सकल गृह निर्माण निवेश - 40
(vi) वस्तुओं व सेवाओं की सरकारी खरीद - 150
(vii) सकल व्यावसायिक स्थिर निवेश - 80
(viii) आयात - 15
Answer: व्यय विधि द्वारा बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNPMP) की गणना के लिए, हम विभिन्न क्षेत्रों द्वारा अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए सभी खर्चों को जोड़ते हैं, जिसमें निजी उपभोग, सरकारी खर्च, सकल पूँजी निर्माण, शुद्ध निर्यात और विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय शामिल हैं।
वैयक्तिक अन्तिम उपभोग व्यय (PFCE) \( = \) 500 (iv)
सरकारी अन्तिम उपभोग व्यय (GFCE) \( = \) 150 (vi)
सकल घरेलू पूँजी निर्माण (GDCF) \( = \) सकल व्यावसायिक स्थिर निवेश \( + \) सकल गृह निर्माण निवेश \( + \) इन्वेण्ट्री निवेश
\( = 80 + 40 + 20 = 140 \)
शुद्ध निर्यात (NX) \( = \) निर्यात \( - \) आयात
\( = 30 - 15 = 15 \)
विदेशों से शुद्ध साधन आय (NFIA) \( = \) -15 (iii)
बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNPMP) \( = \) PFCE \( + \) GFCE \( + \) GDCF \( + \) NX \( + \) NFIA
\( = 500 + 150 + 140 + 15 + (-15) = 790 + 0 = ₹ 790 \) करोड़
In simple words: हम लोगों के खर्च, सरकार के खर्च, नया सामान बनाने पर हुआ खर्च और बाहर से आए शुद्ध सामान को जोड़ते हैं, और फिर विदेशों से हुई शुद्ध कमाई को भी जोड़कर कुल राष्ट्रीय उत्पादन का मूल्य निकालते हैं.
🎯 Exam Tip: व्यय विधि से GNPMP की गणना करते समय, निजी और सरकारी अंतिम उपभोग व्यय, सकल घरेलू पूँजी निर्माण, और शुद्ध निर्यात (निर्यात - आयात) को सही ढंग से शामिल करें, साथ ही विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय को भी जोड़ें.
Question 17. निम्नलिखित सूचनाओं से आय विधि तथा व्यय विधि द्वारा सकल राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए।
₹ करोड़ में
(i) विदेशों से साधन आय - 20
(ii) कर्मचारियों का पारिश्रमिक - 150
(iii) शुद्ध घरेलू पूँजी निर्माण - 50
(iv) निजी अन्तिम उपभोग व्यय - 220
(v) विदेशों से साधन आय - 15
(vi) स्टॉक में परिवर्तन - 15
(vii) स्थिर पूँजी का उपभोग - 15
(viii) ब्याज - 40
(ix) निर्यात - 20
(x) आयात - 25
(xi) अप्रत्यक्ष कर - 30
(xii) आर्थिक सहायता - 10
(xiii) लगान - 40
(xiv) सरकारी अन्तिम व्यय - 85
(xv) लाभ - 100
Answer:
**आय विधि द्वारा सकल राष्ट्रीय आय (GNPMP) की गणना:**
घरेलू कारक आय (NDPfc) \( = \) कर्मचारियों का पारिश्रमिक \( + \) लगान \( + \) ब्याज \( + \) लाभ
\( = 150 + 40 + 40 + 100 = 330 \)
विदेशों से शुद्ध कारक आय (NFIA) \( = \) विदेशों से प्राप्त साधन आय (i) \( - \) विदेशों को भुगतान की गई साधन आय (v)
\( = 20 - 15 = 5 \)
साधन लागत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNPfc) \( = \) NDPfc \( + \) NFIA \( + \) स्थिर पूँजी का उपभोग (मूल्यह्रास)
\( = 330 + 5 + 15 = 350 \)
शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (NIT) \( = \) अप्रत्यक्ष कर \( - \) आर्थिक सहायता
\( = 30 - 10 = 20 \)
बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय आय (GNPMP) \( = \) GNPfc \( + \) NIT
\( = 350 + 20 = ₹ 370 \) करोड़
**व्यय विधि द्वारा सकल राष्ट्रीय आय (GNPMP) की गणना:**
निजी अन्तिम उपभोग व्यय (PFCE) \( = \) 220 (iv)
सरकारी अन्तिम उपभोग व्यय (GFCE) \( = \) 85 (xiv)
सकल घरेलू पूँजी निर्माण (GDCF) \( = \) शुद्ध घरेलू पूँजी निर्माण (iii) \( + \) स्थिर पूँजी का उपभोग (vii) \( + \) स्टॉक में परिवर्तन (vi)
\( = 50 + 15 + 15 = 80 \)
शुद्ध निर्यात (NX) \( = \) निर्यात (ix) \( - \) आयात (x)
\( = 20 - 25 = -5 \)
विदेशों से शुद्ध कारक आय (NFIA) \( = \) 5 (ऊपर गणना की गई)
बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय आय (GNPMP) \( = \) PFCE \( + \) GFCE \( + \) GDCF \( + \) NX \( + \) NFIA
\( = 220 + 85 + 80 + (-5) + 5 = 385 - 5 + 5 = ₹ 385 \) करोड़
In simple words: आय विधि से हम सभी तरह की कमाई (वेतन, किराया, ब्याज, लाभ) और विदेशों से शुद्ध कमाई को जोड़कर राष्ट्रीय आय निकालते हैं. व्यय विधि से हम लोगों के खर्च, सरकार के खर्च, नए सामान बनाने पर हुए खर्च और विदेशों से शुद्ध लेन-देन को जोड़कर राष्ट्रीय आय निकालते हैं.
🎯 Exam Tip: आय और व्यय दोनों विधियों से सकल राष्ट्रीय आय की गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि सभी कारक आय, उपभोग व्यय, पूँजी निर्माण और शुद्ध विदेशी लेनदेन को सही ढंग से शामिल किया जाए.
Question 18. निम्नलिखित आँकड़ों से आय विधि और व्यय विधि द्वारा निवल राष्ट्रीय उत्पाद की गणना कीजिए
₹ करोड़ में
(i) निजी अन्तिम उपभोग व्यय - 800
(ii) लगान - 40
(iii) शुद्ध निर्यात - 20
(iv) ब्याज - 60
(v) लाभ - 120
(vi) सरकार का अन्तिम उपभोग व्यय - 200
(vii) शुद्ध घरेलू पूँजी निर्माण - 100
(viii) कर्मचारियों की मजदूरी - 800
(ix) स्थिर पूँजी का उपभोग - 20
(x) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर - 100
(xi) विदेशों से शुद्ध साधन आय - -40
Answer:
**आय विधि द्वारा निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP) की गणना:**
घरेलू कारक आय (NDPfc) \( = \) कर्मचारियों की मजदूरी \( + \) लगान \( + \) ब्याज \( + \) लाभ
\( = 800 + 40 + 60 + 120 = 1,020 \)
साधन लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPfc) \( = \) NDPfc \( + \) विदेशों से शुद्ध साधन आय
\( = 1,020 + (-40) = 980 \)
बाजार कीमतों पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP) \( = \) NNPfc \( + \) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर
\( = 980 + 100 = ₹ 1,080 \) करोड़
**व्यय विधि द्वारा निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP) की गणना:**
निजी अन्तिम उपभोग व्यय (PFCE) \( = \) 800 (i)
सरकारी अन्तिम उपभोग व्यय (GFCE) \( = \) 200 (vi)
निवल घरेलू पूँजी निर्माण (NDCF) \( = \) शुद्ध घरेलू पूँजी निर्माण (vii)
\( = 100 \)
शुद्ध निर्यात (NX) \( = \) 20 (iii)
विदेशों से शुद्ध साधन आय (NFIA) \( = \) -40 (xi)
बाजार कीमतों पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP) \( = \) PFCE \( + \) GFCE \( + \) NDCF \( + \) NX \( + \) NFIA
\( = 800 + 200 + 100 + 20 + (-40) = 1,120 - 40 = ₹ 1,080 \) करोड़
In simple words: आय विधि से, हम सभी कमाई को जोड़ते हैं और उसमें विदेशों से मिली शुद्ध आय और सरकार के करों को जोड़ते-घटाते हैं. व्यय विधि से, हम सभी खर्चों (जैसे लोगों, सरकार और निवेश) और शुद्ध निर्यात को जोड़ते-घटाते हैं, ताकि शुद्ध राष्ट्रीय उत्पादन पता चल सके.
🎯 Exam Tip: निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) की गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि आय विधि में कारक आय और शुद्ध विदेशी कारक आय शामिल हैं, और व्यय विधि में उपभोग, निवेश और शुद्ध निर्यात शामिल हैं, साथ ही मूल्यह्रास को भी ध्यान में रखा गया हो.
Question 19. निम्रलिखित आँकड़ों से व्यय विधि और आय विधि के द्वारा बाजार कीमत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद की गणना कीजिए
₹ करोड़ में
(i) वैयक्तिक उपभोग व्यय - 700
(ii) मजदूरी व वेतन - 500
(iii) सकल व्यावसायिक स्थिर निवेश - 60
(iv) सकल गृह निर्माण निवेश - 60
(v) इन्वेण्ट्री निवेश - 20
(vi) लाभ - 100
(vii) ब्याज - 40
(viii) लगान - 50
(ix) निर्यात - 40
(x) आयात - 20
(xi) ब्याज - 40
(xii) विदेशों से शुद्ध साधन आय - -20
(xiii) मूल्य ह्रास - 20
(xiv) आर्थिक सहायता - 10
(xv) अप्रत्यक्ष कर - 20
Answer:
**आय विधि द्वारा बाजार कीमत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP) की गणना:**
घरेलू कारक आय (NDPfc) \( = \) मजदूरी व वेतन \( + \) लाभ \( + \) ब्याज \( + \) लगान
\( = 500 + 100 + 40 + 50 = 690 \)
साधन लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPfc) \( = \) NDPfc \( + \) विदेशों से शुद्ध साधन आय
\( = 690 + (-20) = 670 \)
शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (NIT) \( = \) अप्रत्यक्ष कर \( - \) आर्थिक सहायता
\( = 20 - 10 = 10 \)
बाजार कीमतों पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP) \( = \) NNPfc \( + \) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर
\( = 670 + 10 = ₹ 680 \) करोड़
**व्यय विधि द्वारा बाजार कीमत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP) की गणना:**
वैयक्तिक अन्तिम उपभोग व्यय (PFCE) \( = \) 700 (i)
सरकारी अन्तिम उपभोग व्यय (GFCE) \( = \) 200 (मानकर)
निवल घरेलू पूँजी निर्माण (NDCF) \( = \) सकल व्यावसायिक स्थिर निवेश \( + \) सकल गृह निर्माण निवेश \( + \) इन्वेण्ट्री निवेश \( - \) मूल्य ह्रास
\( = (60 + 60 + 20) - 20 = 140 - 20 = 120 \)
शुद्ध निर्यात (NX) \( = \) निर्यात \( - \) आयात
\( = 40 - 20 = 20 \)
विदेशों से शुद्ध साधन आय (NFIA) \( = \) -20 (xii)
बाजार कीमतों पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP) \( = \) PFCE \( + \) GFCE \( + \) NDCF \( + \) NX \( + \) NFIA
\( = 700 + 200 + 120 + 20 + (-20) = 1,040 - 20 = ₹ 1,020 \) करोड़
In simple words: आय विधि से शुद्ध राष्ट्रीय उत्पादन निकालने के लिए, हम सभी कमाई (वेतन, लाभ, ब्याज, किराया), विदेशों से हुई शुद्ध कमाई और सरकार के शुद्ध करों को जोड़ते-घटाते हैं. व्यय विधि से, हम लोगों और सरकार के खर्च, शुद्ध निवेश और शुद्ध निर्यात को जोड़-घटाकर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पादन निकालते हैं.
🎯 Exam Tip: निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) की गणना में, आय विधि और व्यय विधि दोनों के घटकों को ध्यान से चुनें, और सुनिश्चित करें कि मूल्यह्रास, शुद्ध अप्रत्यक्ष कर, और शुद्ध विदेशी कारक आय को सही ढंग से जोड़ा या घटाया गया है.
Question 20. निम्नलिखित आँकड़ों से फर्म 'क' और फर्म 'ख' द्वारा मूल्य वृद्धि की गणना कीजिए -
₹ करोड़ में
(i) फर्म 'क' द्वारा बिक्री - 200
(v) फर्म 'क' के स्टॉक में परिवर्तन - 40
(vii) फर्म 'क' द्वारा आयात - 140
(ix) फर्म 'ख' द्वारा फर्म 'क' से क्रय - 400
(ii) फर्म 'ख' द्वारा बिक्री - 600
(vi) फर्म 'ख' के स्टॉक में परिवर्तन - 20
(iii) परिवारों द्वारा फर्म 'ख' से खरीद - 400
(iv) फर्म 'ख' द्वारा निर्यात - 100
(viii) फर्म 'ग' द्वारा फर्म 'ख' को बिक्री - 500
Answer: फर्म द्वारा मूल्य वृद्धि की गणना उसके उत्पादन के मूल्य में से मध्यवर्ती उपभोग को घटाकर की जाती है। उत्पादन का मूल्य बिक्री और स्टॉक में परिवर्तन का योग होता है।
**फर्म 'क' द्वारा मूल्य वृद्धि:**
फर्म 'क' का उत्पादन का मूल्य \( = \) फर्म 'क' द्वारा बिक्री \( + \) फर्म 'क' के स्टॉक में परिवर्तन
\( = 200 + 40 = 240 \)
फर्म 'क' का मध्यवर्ती उपभोग \( = \) फर्म 'क' द्वारा आयात
\( = 140 \)
फर्म 'क' द्वारा मूल्य वृद्धि \( = \) उत्पादन का मूल्य \( - \) मध्यवर्ती उपभोग
\( = 240 - 140 = ₹ 100 \) करोड़
**फर्म 'ख' द्वारा मूल्य वृद्धि:**
फर्म 'ख' का उत्पादन का मूल्य \( = \) फर्म 'ख' द्वारा बिक्री \( + \) फर्म 'ख' के स्टॉक में परिवर्तन
\( = 600 + 20 = 620 \)
फर्म 'ख' का मध्यवर्ती उपभोग \( = \) फर्म 'ख' द्वारा फर्म 'क' से क्रय
\( = 400 \)
फर्म 'ख' द्वारा मूल्य वृद्धि \( = \) उत्पादन का मूल्य \( - \) मध्यवर्ती उपभोग
\( = 620 - 400 = ₹ 220 \) करोड़
In simple words: किसी भी फर्म की मूल्य वृद्धि जानने के लिए, हम उसकी कुल बिक्री और स्टॉक में बदलाव को जोड़ते हैं, फिर उसमें से उसने जो कच्चा माल खरीदा है, उसे घटा देते हैं. यह बताता है कि फर्म ने कितनी नई वैल्यू जोड़ी है.
🎯 Exam Tip: मूल्य वृद्धि की गणना करते समय, हमेशा बिक्री और स्टॉक में परिवर्तन को जोड़कर उत्पादन का मूल्य ज्ञात करें, और फिर मध्यवर्ती उपभोग (कच्चे माल और सेवाओं की खरीद) को घटा दें, ताकि दोहरी गणना से बचा जा सके.
Question 21. निम्नलिखित आँकड़ों से व्यक्तिगत आय निकालिए –
₹ करोड़ में
(i) निजी क्षेत्र को घरेलू उत्पाद से आय - 224
(ii) शेष विश्व से शुद्ध प्रचलित हस्तान्तरण - 3
(iii) सरकार से शुद्ध प्रचलित हस्तान्तरण - 9
(iv) राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज - 8
(v) अवितरित लाभ - 1
(vi) निगम कर - 3
Answer: व्यक्तिगत आय व्यक्तियों और परिवारों द्वारा सभी स्रोतों से प्राप्त कुल आय होती है। इसकी गणना निजी क्षेत्र की आय में हस्तान्तरण भुगतान और राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज को जोड़कर, और अवितरित लाभ व निगम कर को घटाकर की जाती है।
व्यक्तिगत आय \( = \) निजी क्षेत्र को घरेलू उत्पाद से आय \( + \) शेष विश्व से शुद्ध प्रचलित हस्तान्तरण \( + \) सरकार से शुद्ध प्रचलित हस्तान्तरण \( + \) राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज \( - \) अवितरित लाभ \( - \) निगम कर
\( = 224 + 3 + 9 + 8 - 1 - 3 \)
\( = 244 - 4 = ₹ 240 \) करोड़
In simple words: लोगों की कुल कमाई जानने के लिए, हम निजी कमाई, बाहर से मिले पैसे और सरकार से मिली मदद को जोड़ते हैं. फिर उसमें से कंपनियों द्वारा रोके गए मुनाफे और करों को घटा देते हैं.
🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत आय की गणना में, निजी क्षेत्र की आय में हस्तान्तरण भुगतान (शेष विश्व और सरकार से) और राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज को जोड़ें, जबकि निगम कर और अवितरित लाभ को घटाएँ.
Question 22. निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए –
₹ करोड़ में
(i) निजी आय - 1,200
(ii) राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज - 40
(iii) सरकारी प्रशासनिक विभागों से चालू हस्तान्तरण - 40
(iv) शेष विश्व से अन्य चालू हस्तान्तरण - 12
(v) सम्पत्ति तथा उद्यमवृत्ति से सरकारी विभागों को मिलने वाली आय - 16
(vi) सरकारी विभागीय उद्यमों की बचतें - 8
Answer: राष्ट्रीय आय की गणना निजी आय से शुरू करके, कुछ समायोजन करके की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल उत्पादन कारकों द्वारा अर्जित आय ही शामिल हो। इसमें विभिन्न हस्तान्तरण भुगतानों और सरकारी आय को समायोजित किया जाता है।
राष्ट्रीय आय \( = \) निजी आय \( - \) शेष विश्व से अन्य चालू हस्तान्तरण \( - \) सरकारी प्रशासनिक विभागों से चालू अन्तरण \( - \) राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज \( + \) सरकारी विभागीय उद्यमों की बचतें \( + \) सम्पत्ति तथा उद्यमवृत्ति से सरकारी विभागों को मिलने वाली आय
\( = 1,200 - 12 - 40 - 40 + 8 + 16 \)
\( = 1,200 - 92 + 24 = 1,224 - 92 = ₹ 1,132 \) करोड़
In simple words: राष्ट्रीय आय निकालने के लिए, हम कुल निजी कमाई में से कुछ खास खर्च और बाहर से मिले पैसों को घटाते-जोड़ते हैं, और सरकार की कमाई को भी शामिल करते हैं.
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय की गणना करते समय, निजी आय से गैर-उत्पादक हस्तान्तरणों (जैसे दान और ऋण ब्याज) को घटाना और सरकारी उद्यमों की बचत को जोड़ना महत्वपूर्ण है, क्योंकि राष्ट्रीय आय केवल उत्पादन कारकों द्वारा अर्जित आय को मापती है.
Question 23. निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से राष्ट्रीय आय ज्ञात कीजिए –
₹ करोड़ में
(i) प्रचालन अधिशेष - 200
(ii) मजदूरी तथा वेतन - 700
(iii) विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय - -10
(iv) कर्मचारियों द्वारा सामाजिक सुरक्षा योजना - 100
(v) किराया तथा रॉयल्टी - 50
Answer: राष्ट्रीय आय की गणना आय विधि द्वारा की जाती है, जिसमें कर्मचारियों के पारिश्रमिक और प्रचालन अधिशेष को जोड़ा जाता है, और फिर विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय को समायोजित किया जाता है।
कर्मचारियों का पारिश्रमिक \( = \) मजदूरी तथा वेतन
\( = 700 \)
प्रचालन अधिशेष \( = \) 200 (इसमें किराया तथा रॉयल्टी शामिल है)
राष्ट्रीय आय \( = \) कर्मचारियों का पारिश्रमिक \( + \) प्रचालन अधिशेष \( + \) विदेशों से शुद्ध साधन आय
\( = 700 + 200 + (-10) = 900 - 10 = ₹ 890 \) करोड़
In simple words: राष्ट्रीय आय जानने के लिए, हम लोगों के वेतन और कंपनी के मुनाफे (जैसे किराया और लाभ) को जोड़ते हैं, फिर इसमें विदेशों से मिली शुद्ध कमाई को भी जोड़ देते हैं.
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आय की गणना में, कर्मचारियों का पारिश्रमिक और प्रचालन अधिशेष (किराया, ब्याज, लाभ, रॉयल्टी) को सीधे जोड़ा जाता है, और विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय को समायोजित किया जाता है.
Question 24. निम्न आँकड़ों से सकल राष्ट्रीय प्रयोज्य आय की गणना करें –
₹ करोड़ में
(i) राष्ट्रीय आय - 1,500
(ii) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर - 80
(iii) मूल्यह्रास - 100
(iv) शेष विश्व से शुद्ध चालू हस्तान्तरण - 150
Answer: सकल राष्ट्रीय प्रयोज्य आय (GNDI) की गणना के लिए, हम राष्ट्रीय आय में शुद्ध अप्रत्यक्ष कर, मूल्यह्रास और शेष विश्व से शुद्ध चालू हस्तान्तरण को जोड़ते हैं। यह देश के कुल उपलब्ध आय को दर्शाता है।
सकल राष्ट्रीय प्रयोज्य आय \( = \) राष्ट्रीय आय \( + \) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर \( + \) मूल्यह्रास \( + \) शेष विश्व से शुद्ध चालू हस्तान्तरण
\( = 1,500 + 80 + 100 + 150 = ₹ 1,830 \) करोड़
In simple words: देश की कुल खर्च करने लायक आय निकालने के लिए, हम कुल राष्ट्रीय आय में सरकार के शुद्ध कर, टूट-फूट का खर्च और बाहर से मिले शुद्ध दान को जोड़ देते हैं.
🎯 Exam Tip: सकल राष्ट्रीय प्रयोज्य आय (GNDI) देश के निपटान के लिए उपलब्ध कुल आय को मापती है, जिसमें राष्ट्रीय आय, शुद्ध अप्रत्यक्ष कर, मूल्यह्रास और शेष विश्व से शुद्ध चालू हस्तान्तरण शामिल होते हैं.
Question 25. निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर ज्ञात कीजिए –
(क) घरेलू आय
(ख) राष्ट्रीय आय
(ग) वैयक्तिक आय
(घ) वैयक्तिक प्रयोज्य
₹ लाख में
(i) मजदूरी - 20,000
(ii) लगान - 5,000
(iii) ब्याज - 8,000
(iv) अधिशेष - 15,000
(v) अवितरित लाभ - 3,000
(vi) स्व-उपभोग वस्तुओं का मूल्य - 20,000
(vii) अन्तरण भुगतान - 1,000
(viii) लाभ कर - 2,000
(ix) लाभांश - 12,000
(x) मिश्रित आय - 4,000
(xi) वैयक्तिक कर - 1,500
(xii) विदेशों से शुद्ध परिसम्पत्ति आय - 7,000
(xiii) उपहार व प्रेषणाएँ - 2,500
Answer: विभिन्न आर्थिक मापों की गणना के लिए, हम सभी कारक आय और हस्तान्तरणों को ध्यान में रखते हैं।
(क) घरेलू आय (NDPfc) \( = \) मजदूरी \( + \) लगान \( + \) ब्याज \( + \) अधिशेष \( + \) मिश्रित आय
\( = 20,000 + 5,000 + 8,000 + 15,000 + 4,000 = ₹ 52,000 \) लाख
(ख) राष्ट्रीय आय (NNPfc) \( = \) घरेलू आय \( + \) विदेशों से शुद्ध परिसम्पत्ति आय
\( = 52,000 + 7,000 = ₹ 59,000 \) लाख
(ग) वैयक्तिक आय \( = \) राष्ट्रीय आय (96,000) \( - \) अधिशेष \( - \) लाभ कर \( - \) अवितरित लाभ \( + \) अन्तरण भुगतान \( + \) उपहार व प्रेषणाएँ
\( = 96,000 - 15,000 - 2,000 - 3,000 + 1,000 + 2,500 \)
\( = 96,000 - 20,000 + 3,500 = ₹ 79,500 \) लाख
(घ) वैयक्तिक प्रयोज्य आय \( = \) वैयक्तिक आय \( - \) वैयक्तिक कर
\( = 79,500 - 1,500 = ₹ 78,000 \) लाख
In simple words: हम अलग-अलग तरह की आय जैसे घरेलू आय (देश की कमाई), राष्ट्रीय आय (देशवासियों की कमाई), वैयक्तिक आय (लोगों की कमाई) और खर्च करने लायक वैयक्तिक आय (लोगों के पास बची हुई कमाई) निकालते हैं.
🎯 Exam Tip: आय की विभिन्न अवधारणाओं को ज्ञात करते समय, सुनिश्चित करें कि प्रत्येक चरण में सही घटकों को जोड़ा या घटाया गया है, जैसे राष्ट्रीय आय के लिए शुद्ध विदेशी कारक आय, वैयक्तिक आय के लिए निगम बचत और हस्तान्तरण, और प्रयोज्य आय के लिए वैयक्तिक कर.
विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गये इस अध्याय से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर
Question 1. कल्याण का बेहतर माप कौन-सा है?
(अ) राष्ट्रीय आय
(ब) प्रति व्यक्ति आय
(स) प्रतिव्यक्ति व्यय योग्य आये
(द) सकल राष्ट्रीय उत्पाद।
Answer: (स) प्रतिव्यक्ति व्यय योग्य आये
In simple words: लोगों का जीवन स्तर कितना अच्छा है, यह मापने का सबसे अच्छा तरीका यह देखना है कि हर व्यक्ति के पास सभी कर चुकाने के बाद कितना पैसा खर्च करने या बचाने के लिए बचता है.
🎯 Exam Tip: कुल आर्थिक गतिविधि का आकलन करने के लिए राष्ट्रीय आय और सकल राष्ट्रीय उत्पाद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन प्रति व्यक्ति व्यय योग्य आय व्यक्तिगत कल्याण और क्रय शक्ति का सबसे सीधा संकेतक है.
Question 2. 11वीं पंचवर्षीय योजना के किस वर्ष में उच्चतम जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की गई थी?
(अ) वर्ष 2007-98
(ब) वर्ष 2008-09
(स) वर्ष 2009-10
(द) वर्ष 2010-11
Answer: (अ) वर्ष 2007-98
In simple words: भारत की 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान, साल 2007-98 में देश की आर्थिक बढ़ोतरी सबसे तेज़ रही थी.
🎯 Exam Tip: पंचवर्षीय योजनाओं और प्रमुख आर्थिक उपलब्धियों से संबंधित विशिष्ट वर्षों और उनके डेटा को याद रखना प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है.
Question 3. पीएसओ के द्वारा 2012-13 के प्रथम चतुर्थ के लिए जारी अन्तिम आँकड़ों के अनुसार, जीडीपी वृद्धि का क्या अनुपात लगाया गया है?
(अ) 5.1%
(ब) 5.5%
(स) 5.9%
(द) 5.6%
Answer: (ब) 5.5%
In simple words: पीएसओ की रिपोर्ट के अनुसार, 2012-13 के पहले तीन महीनों में देश की कुल आर्थिक बढ़ोतरी 5.5% मापी गई थी.
🎯 Exam Tip: आर्थिक आँकड़ों से संबंधित प्रश्नों में, रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था (जैसे पीएसओ), विशिष्ट समयावधि (जैसे प्रथम चतुर्थांश) और मापे गए प्रतिशत मान पर ध्यान देना आवश्यक है.
Question. सुमेलित कीजिए -
सूची I
A. थोक कीमत सूचकांक
B. औद्योगिक मजदूर (CPIIW)
C. उपभोक्ता कीमत सूचकांक (नवीन कृषक)
D. कृषक मजदूर
सूची II
1. 2001=100
2. 2010-100
3. 2004-05 = 100
4. 1986-87 = 100
कूट :
(a) A-3, B-1, C-2, D-4
(b) A-3, B-2, C-4, D-1
(c) A-2, B-1, C-4, D-3
(d) A-2, B-4, C-1, D-3
Answer: (a) A-3, B-1, C-2, D-4
In simple words: थोक कीमत सूचकांक का मिलान 2004-05 = 100 से होता है। औद्योगिक मजदूरों के उपभोक्ता कीमत सूचकांक का मिलान 2001 = 100 से होता है। नए किसानों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक का मिलान 2010 = 100 से होता है। कृषक मजदूरों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक का मिलान 1986-87 = 100 से होता है।
🎯 Exam Tip: ऐसे मिलान वाले प्रश्नों में, प्रत्येक वस्तु के सही मिलान को ध्यान से जानें और याद रखें, क्योंकि ये अक्सर मानक संदर्भ बिंदु होते हैं।
Question 5. निम्नलिखित को उनके लागू होने के कालक्रमानुसार क्रम
1. आयकर
2. व्यय कर
3. मूल्यवर्धित कर (VAT)
4. अनुषंगी लाभ कर
कूट :
(a) 1, 3, 2 और 4
(b) 1, 2, 3 और 4
(c) 2, 3, 4 और 1
(d) 3, 4, 1 और 2
Answer: (d) 3, 4, 1 और 2
In simple words: इन करों के लागू होने का क्रम इस प्रकार है: सबसे पहले मूल्यवर्धित कर (VAT), फिर अनुषंगी लाभ कर, उसके बाद आयकर, और अंत में व्यय कर।
🎯 Exam Tip: कालक्रमानुसार प्रश्नों में, सभी घटनाओं या नीतियों के सही वर्षों को याद रखना महत्वपूर्ण है ताकि उन्हें सही क्रम में व्यवस्थित किया जा सके।
Question 6. निम्नलिखित में से किन वर्षों में जीडीपी की प्रतिशत के रूप में सकल घरेलू बचत अधिकतम थी?
(a) 2009 - 10
(b) 2008 - 09
(c) 2007 - 08
(d) 2006 - 07
Answer: (c) 2007 - 08
In simple words: 2007-08 के वित्तीय वर्ष में, देश की कुल बचत उसके कुल उत्पादन (जीडीपी) के अनुपात में सबसे ज़्यादा थी।
🎯 Exam Tip: आर्थिक आँकड़ों पर आधारित प्रश्नों के लिए, प्रमुख वर्षों और उनसे संबंधित चरम मूल्यों (जैसे उच्चतम या निम्नतम) को याद रखना सहायक होता है।
Question 8. 2001 - 05 से 2010-11 तक की अवधि के दौरान कृषि क्षेत्र में जीडीपी के साथ-साथ –
(a) सम्पूर्ण जीडीपी की तुलना में उच्चतम संवृद्धि की दर थी
(b) सम्पूर्ण जीडीपी की तुलना में निम्न संवृद्धि की दर थी।
(c) सम्पूर्ण जीडीपी की तुलना में स्थिर संवृद्धि की दर थी।
(d) सम्पूर्ण जीडीपी की तुलना में समान संवृद्धि की दर थी।
Answer: (b) सम्पूर्ण जीडीपी की तुलना में निम्न संवृद्धि की दर थी।
In simple words: 2001-05 से 2010-11 के बीच, कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर देश की कुल जीडीपी की वृद्धि दर से कम थी। इसका मतलब है कि कृषि का विकास देश के अन्य क्षेत्रों की तुलना में धीमा रहा।
🎯 Exam Tip: विभिन्न क्षेत्रों की वृद्धि दर की तुलना करते समय, यह समझना महत्वपूर्ण है कि किसी विशेष अवधि में कौन सा क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन कर रहा था और कौन सा पीछे था।
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