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Detailed Chapter 8 d और f ब्लॉक के तत्व RBSE Solutions for Class 12 Chemistry
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Class 12 Chemistry Chapter 8 d और f ब्लॉक के तत्व RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Chemistry Chapter 8 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न
RBSE Class 12 Chemistry Chapter 8 बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था (+7) किसके द्वारा प्रदर्शित होती है?
(अ) Co
(ब) Cr
(स) Mn
(द) V
Answer: (स) Mn
In simple words: मैंगनीज (Mn) अपनी सभी सात संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को निकालकर उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था +7 प्रदर्शित करता है। यह 3d-श्रृंखला में सबसे अधिक ऑक्सीकरण अवस्था है।
🎯 Exam Tip: उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था का निर्धारण करते समय 3d और 4s दोनों उपकोशों के इलेक्ट्रॉनों पर विचार करें.
Question 2. Fe2+ में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है-
(अ) 4
(ब) 5
Answer: (अ) 4
In simple words: Fe का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( [Ar] 3d^6 4s^2 \) होता है। जब Fe दो इलेक्ट्रॉन खो देता है और \( \text{Fe}^{2+} \) आयन बनाता है, तो वह 4s उपकोश से दोनों इलेक्ट्रॉन खो देता है। इसलिए, \( \text{Fe}^{2+} \) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( [Ar] 3d^6 \) होता है। 3d उपकोश में, 6 इलेक्ट्रॉनों को भरने पर 4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन बचते हैं।
🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉनों को भरने के लिए हुंड के नियम का पालन करना याद रखें ताकि अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की सही संख्या मिल सके.
Question 4. निम्नलिखित में से किसका चुम्बकीय आघूर्ण अधिकतम होता है?
(अ) √3+
(ब) Cr3+
(स) Fe+3
(द) CO3+
Answer: (स) Fe+3
In simple words: Fe+3 आयन में अधिकतम अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिससे इसका चुम्बकीय आघूर्ण सबसे अधिक होता है। Fe का विन्यास \( 3d^6 4s^2 \) होता है। Fe+3 आयन में 3 इलेक्ट्रॉन निकलने के बाद, इसका विन्यास \( 3d^5 \) होता है, जिसमें 5 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
🎯 Exam Tip: चुंबकीय आघूर्ण (magnetic moment) सीधे अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करता है; जितने अधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन, उतना ही अधिक चुंबकीय आघूर्ण.
Question 5. लैन्थेनॉइड श्रेणी में सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था है -
(अ) + 1
(ब) + 4
(स) + 2
(द) + 3.
Answer: (द) + 3
In simple words: लैंथेनॉइड तत्वों की सबसे आम ऑक्सीकरण अवस्था +3 है। वे अपने 5d और 6s उपकोशों से इलेक्ट्रॉन आसानी से छोड़ देते हैं, जिससे यह स्थिर अवस्था बनती है।
🎯 Exam Tip: लैंथेनॉइडों के लिए +3 ऑक्सीकरण अवस्था सबसे स्थिर है, लेकिन कुछ तत्व +2 और +4 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी दिखा सकते हैं.
Question 6. लैन्थेनॉइड संकुचन किसमें वृद्धि के कारण होता है?
(अ) प्रभावी नाभिकीय आवेश
(ब) परमाणु संख्या
(स) 4f कक्षक का आकार
(द) उपर्युक्त में कोई नहीं
Answer: (अ) प्रभावी नाभिकीय आवेश
In simple words: लैंथेनॉइड संकुचन का मुख्य कारण 4f इलेक्ट्रॉनों का खराब परिरक्षण प्रभाव है। यह खराब परिरक्षण बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आवेश को प्रभावी ढंग से बढ़ाता है।
🎯 Exam Tip: लैंथेनॉइड संकुचन की अवधारणा को समझने के लिए परिरक्षण प्रभाव (shielding effect) और प्रभावी नाभिकीय आवेश (effective nuclear charge) की भूमिका महत्वपूर्ण है.
Question 7. लैन्थेनॉइड श्रेणी का एक सदस्य जो +4 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है, है –
(अ) Ce
(ब) Lu
(स) Eu
(द) Pm.
Answer: (अ) Ce
In simple words: सेरियम (Ce) लैंथेनॉइड श्रेणी का एक सदस्य है जो +4 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित कर सकता है। यह इसकी विशेष इलेक्ट्रॉनिक संरचना के कारण होता है, जो इसे अपेक्षाकृत स्थिर +4 अवस्था प्राप्त करने की अनुमति देता है।
🎯 Exam Tip: जबकि +3 लैंथेनॉइडों के लिए सबसे आम ऑक्सीकरण अवस्था है, कुछ तत्व विशेष कारणों से अन्य अवस्थाएँ (जैसे +2 या +4) भी प्रदर्शित कर सकते हैं.
Question 9. निम्नलिखित में से किसका प्रथम आयनन विभव अधिकतम है?
(अ) Ti
(ब) Min
(स) Fe
(द) Ni
Answer: (स) Fe
In simple words: आयरन (Fe) का प्रथम आयनन विभव विकल्पों में से सबसे अधिक है। जैसे-जैसे हम आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाते हैं, नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण सामान्य तौर पर आयनन विभव बढ़ता जाता है।
🎯 Exam Tip: आयनन विभव को प्रभावित करने वाले कारकों में प्रभावी नाभिकीय आवेश, परमाणु आकार और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास शामिल हैं.
Question 10. किस आयन में समस्त इलेक्ट्रॉन e युग्मित अवस्था में हैं?
(अ) Cr+2
(ब) Cu+2
(स) Cu+1
(द) Ni+2.
Answer: (स) Cu+1
In simple words: Cu+1 आयन में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित अवस्था में होते हैं। तांबे का परमाणु विन्यास \( [Ar] 3d^{10} 4s^1 \) होता है। जब यह एक इलेक्ट्रॉन खो देता है तो Cu+1 आयन बनता है जिसका विन्यास \( [Ar] 3d^{10} \) होता है, जो पूरी तरह से भरा और स्थिर उपकोश है।
🎯 Exam Tip: पूरी तरह से भरे हुए या आधे भरे हुए उपकोश स्थिर होते हैं, और आयन अक्सर ऐसी स्थिर अवस्था प्राप्त करने के लिए इलेक्ट्रॉन खोते या प्राप्त करते हैं.
RBSE Class 12 Chemistry Chapter 8 अति लघुतरात्मक प्रश्न
Question 1. Zn को संक्रमण तत्व नहीं माना गया है। कारण दीजिए।
Answer: संक्रमण तत्व वे होते हैं जिनमें उनके मूल अवस्था या किसी भी सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था में आंशिक रूप से भरे हुए d-कक्षक होते हैं। जिंक के परमाणु अवस्था (\( [Ar] 3d^{10} 4s^2 \)) और +2 ऑक्सीकरण अवस्था (\( [Ar] 3d^{10} \)) दोनों में 3d कक्षक पूरी तरह से भरे होते हैं। चूंकि Zn में कोई आंशिक रूप से भरा d-कक्षक नहीं होता है, इसलिए इसे संक्रमण तत्व नहीं माना जाता है। इस कारण से, जिंक और कैडमियम जैसे तत्व संक्रमण तत्वों के गुणों को पूरी तरह से प्रदर्शित नहीं करते हैं।
In simple words: जिंक को संक्रमण तत्व नहीं कहते क्योंकि इसके d-कक्षक हमेशा पूरी तरह भरे होते हैं। संक्रमण तत्व वही होते हैं जिनके d-कक्षक अधूरे होते हैं।
🎯 Exam Tip: संक्रमण तत्व की परिभाषा को याद रखें: "आंशिक रूप से भरे d-कक्षक वाले तत्व", यह जिंक को बाहर करने का मुख्य कारण है.
Question 3. परायूरेनियम तत्व किसे कहते हैं?
Answer: परायूरेनियम तत्व वे तत्व होते हैं जो आवर्त सारणी में यूरेनियम (परमाणु क्रमांक 92) के बाद आते हैं। ये सभी तत्व मानव निर्मित होते हैं और प्रकृति में स्वाभाविक रूप से नहीं पाए जाते हैं। इन तत्वों को अक्सर प्रयोगशालाओं में भारी परमाणुओं को टकराकर बनाया जाता है।
In simple words: यूरेनियम के बाद वाले सभी तत्व परायूरेनियम तत्व कहलाते हैं। ये तत्व लैब में बनाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि परायूरेनियम तत्व कृत्रिम होते हैं और यूरेनियम के बाद के परमाणु क्रमांक वाले होते हैं.
Question 4. कोई धातु अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था केवल ऑक्साइड अथवा फ्लोराइड में ही क्यों प्रदर्शित करती है?
Answer: धातु से इलेक्ट्रॉन निकालने के बाद क्रमिक आयनन ऊर्जाओं के मान बढ़ते जाते हैं, जिससे अधिक इलेक्ट्रॉन निकालना मुश्किल हो जाता है। धातुएँ अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था केवल ऑक्साइड अथवा फ्लोराइड के साथ ही प्रदर्शित करती हैं क्योंकि ऑक्सीजन और फ्लोरीन दोनों ही बहुत अधिक विद्युतऋणात्मक होते हैं और इनकी छोटी आकार की वजह से ये इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने की उच्च क्षमता रखते हैं। ये तत्व धातु के उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था को स्थिर करने के लिए अत्यधिक आयनन ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम होते हैं।
In simple words: धातु अपनी सबसे ज़्यादा ऑक्सीकरण अवस्था केवल ऑक्सीजन और फ्लोरीन के साथ दिखाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये दोनों तत्व बहुत ताकतवर होते हैं और धातु से ज़्यादा इलेक्ट्रॉन निकाल सकते हैं।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन और फ्लोरीन की उच्च विद्युतऋणात्मकता और छोटे आकार को उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करने के कारण के रूप में याद रखें.
Question 5. MnO, Mn2O3, MnO2 को अम्लीयता के घटते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
Answer: धातुओं की अम्लीयता उनकी ऑक्सीकरण अवस्था में समानुपाती होती है। इसका मतलब है कि जैसे-जैसे धातु की ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ती है, उसकी अम्लीयता भी बढ़ती जाती है। दिए गए यौगिकों में मैंगनीज की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ इस प्रकार हैं: MnO (+2), Mn2O3 (+3), और MnO2 (+4)। इसलिए, अम्लीयता का घटता क्रम निम्न होगा:
\( \text{MnO} < \text{Mn}_2\text{O}_3 < \text{MnO}_2 \)
In simple words: धातु के ऑक्साइड की अम्लीयता धातु की ऑक्सीकरण अवस्था पर निर्भर करती है। ऑक्सीकरण अवस्था जितनी ज़्यादा होती है, अम्लीयता भी उतनी ही ज़्यादा होती है।
🎯 Exam Tip: धातु ऑक्साइडों की अम्लीयता और धातु की ऑक्सीकरण अवस्था के बीच सीधा संबंध याद रखें; ऑक्सीकरण अवस्था जितनी अधिक, अम्लीयता उतनी ही अधिक.
Question 6. आन्तरिक संक्रमण तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
Answer: आन्तरिक संक्रमण तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( (n-2)f^{1-14} (n-1)d^{0-1} ns^2 \) होता है। इस विन्यास में, n सबसे बाहरी कोश की संख्या को दर्शाता है, जबकि \( (n-2)f \) और \( (n-1)d \) उपकोशों में इलेक्ट्रॉन भरे जाते हैं। यह उनकी अनूठी रासायनिक और भौतिक गुणों का आधार है।
In simple words: आंतरिक संक्रमण तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( (n-2)f^{1-14} (n-1)d^{0-1} ns^2 \) होता है।
🎯 Exam Tip: f-कक्षक के भरने के क्रम को ध्यान में रखें, जो इन तत्वों के गुणों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.
Question 7. संक्रमण तत्व परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। कारण दीजिए।
Answer: संक्रमण तत्व परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं क्योंकि उनके \( (n-1)d \) और \( ns \) उपकोशों की ऊर्जाओं में अंतर बहुत कम होता है। इस छोटे ऊर्जा अंतर के कारण, \( ns \) और \( (n-1)d \) दोनों उपकोशों के इलेक्ट्रॉन रासायनिक बंध बनाने में भाग ले सकते हैं। यह उन्हें एक ही यौगिक में विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखाने की क्षमता देता है। उदाहरण के लिए, मैंगनीज +2 से +7 तक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखा सकता है।
In simple words: संक्रमण तत्व कई ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखाते हैं क्योंकि उनके \( (n-1)d \) और \( ns \) उपकोशों के इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा लगभग बराबर होती है, और वे आसानी से बंध बना सकते हैं।
🎯 Exam Tip: \( (n-1)d \) और \( ns \) इलेक्ट्रॉनों के बंध बनाने में भाग लेने की क्षमता को परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्था का मुख्य कारण मानें.
Question 9. Gd (Z = 64) में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या लिखिए।
Answer: गेडोलिनियम (Gd, Z = 64) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( [Xe] 4f^7 5d^1 6s^2 \) होता है। इसमें 4f उपकोश में 7 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं (क्योंकि यह अर्ध-भरा होता है, जो इसे स्थिरता प्रदान करता है), 5d उपकोश में 1 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है, और 6s उपकोश में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होता है क्योंकि इसमें 2 इलेक्ट्रॉन भरे हुए होते हैं। इसलिए, Gd में कुल अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( 7 + 1 = 8 \) होती है।
In simple words: गेडोलिनियम (Gd) में 8 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसके 4f कक्षक में 7 और 5d कक्षक में 1 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है।
🎯 Exam Tip: लैंथेनॉइडों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में 4f, 5d और 6s उपकोशों के भरने के क्रम और स्थिरता पर विशेष ध्यान दें.
Question 10. संक्रमण तत्व के एक यौगिक के चुम्बकीय आघूर्ण का मान 3.9BM है। तत्व में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या लिखिए।
Answer: चुम्बकीय आघूर्ण (\( \mu \)) का मान अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (n) से सूत्र \( \mu = \sqrt{n(n+2)} \) द्वारा संबंधित होता है। यदि चुम्बकीय आघूर्ण का मान 3.9 BM है, तो हमें n का मान ज्ञात करना होगा।
\( 3.9 = \sqrt{n(n+2)} \)
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
\( (3.9)^2 = n(n+2) \)
\( 15.21 = n^2 + 2n \)
\( n^2 + 2n - 15.21 = 0 \)
यदि n = 3 रखते हैं, तो \( \mu = \sqrt{3(3+2)} = \sqrt{3 \times 5} = \sqrt{15} \approx 3.87 \). यह मान 3.9 के बहुत करीब है। इसलिए, तत्व में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या 3 है।
In simple words: अगर किसी यौगिक का चुंबकीय आघूर्ण 3.9 BM है, तो उसमें 3 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। हम सूत्र \( \mu = \sqrt{n(n+2)} \) का उपयोग करके अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने के लिए दिए गए चुंबकीय आघूर्ण के मान को सूत्र में रखकर अनुमान लगाएं या सीधे गणना करें.
RBSE Class 12 Chemistry Chapter 8 लघुतरात्मक प्रश्न
Question 1. लैन्थेनॉइड संकुचन क्या है? इसे समझाइए।
Answer: लैंथेनॉइड संकुचन एक घटना है जिसमें लैंथेनॉइड श्रृंखला में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ परमाणुओं और आयनों के आकार में नियमित कमी आती है। यह मुख्य रूप से 4f इलेक्ट्रॉनों के खराब परिरक्षण प्रभाव (poor shielding effect) के कारण होता है। 4f इलेक्ट्रॉन बाहरी इलेक्ट्रॉनों को नाभिक के बढ़ते हुए धनात्मक आवेश से प्रभावी ढंग से परिरक्षित नहीं कर पाते हैं। नतीजतन, बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है, जिससे वे नाभिक की ओर अधिक मजबूती से खींचे जाते हैं और परमाणु का आकार घट जाता है। इस संकुचन के कारण 4d और 5d संक्रमण श्रृंखला के तत्वों के आकार लगभग समान हो जाते हैं।
In simple words: लैंथेनॉइड संकुचन का मतलब है कि जब हम लैंथेनॉइड तत्वों में आगे बढ़ते हैं, तो उनका आकार धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि 4f इलेक्ट्रॉन बाहरी इलेक्ट्रॉनों को ठीक से बचा नहीं पाते, जिससे नाभिकीय बल बढ़ जाता है और परमाणु सिकुड़ जाता है।
🎯 Exam Tip: लैंथेनॉइड संकुचन को 4f इलेक्ट्रॉनों के खराब परिरक्षण प्रभाव से जोड़ना याद रखें, जिससे प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है और परमाणु आकार घटता है.
Question 2. मिश्र धातु क्या है? इनका एक उपयोग लिखिए।
Answer: मिश्र धातु (alloy) एक ठोस मिश्रण होता है जो दो या दो से अधिक धातुओं या एक धातु और एक अधातु को निश्चित अनुपात में मिलाने से बनता है। ये अपने मूल घटकों से बेहतर या विशिष्ट गुण प्रदर्शित करते हैं। उदाहरण के लिए, पीतल तांबा और जस्ता का एक मिश्र धातु है। मिश्र धातुओं का एक महत्वपूर्ण उपयोग यह है कि उनके गलनांक अक्सर मूल धातुओं से अधिक होते हैं, साथ ही वे अधिक कठोर, संक्षारण प्रतिरोधी या ताकतवर होते हैं। इस कारण से, उन्हें उच्च ताप सहने वाली वस्तुएँ बनाने में उपयोग किया जाता है, जैसे कि हवाई जहाज के पुर्जे और औद्योगिक उपकरण।
In simple words: मिश्र धातु दो या दो से ज़्यादा धातुओं को मिलाकर बनी चीज़ होती है। इनका उपयोग उन चीज़ों को बनाने में होता है जो बहुत गर्मी या दबाव सह सकें, क्योंकि ये शुद्ध धातुओं से ज़्यादा मजबूत होती हैं।
🎯 Exam Tip: मिश्र धातु की परिभाषा में "निश्चित अनुपात में" और "बेहतर गुण" शब्दों का प्रयोग करें, साथ ही एक स्पष्ट उपयोग भी बताएं.
Question 3. Cu+2 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इसके चुम्बकीय आघूर्ण की गणना कीजिए।
Answer: तांबे (Cu) का परमाणु क्रमांक 29 होता है, और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( [Ar] 3d^{10} 4s^1 \) होता है। जब तांबा दो इलेक्ट्रॉन खोकर Cu+2 आयन बनाता है, तो यह पहले 4s उपकोश से एक इलेक्ट्रॉन और फिर 3d उपकोश से एक इलेक्ट्रॉन खोता है। इसलिए, Cu+2 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( [Ar] 3d^9 \) होता है।
3d9 विन्यास का मतलब है कि इसमें 1 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (n=1) है।
चुम्बकीय आघूर्ण (\( \mu \)) की गणना सूत्र \( \mu = \sqrt{n(n+2)} \) से की जाती है।
\( \mu = \sqrt{1(1+2)} \)
\( \mu = \sqrt{1 \times 3} \)
\( \mu = \sqrt{3} \)
\( \mu \approx 1.73 \) BM
इसलिए, Cu+2 का चुम्बकीय आघूर्ण 1.73 BM है। Cu+2 में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह अनुचुंबकीय होता है।
In simple words: Cu+2 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( 3d^9 \) होता है। इसमें 1 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए इसका चुंबकीय आघूर्ण लगभग 1.73 BM होता है।
🎯 Exam Tip: संक्रमण धातुओं के आयनों का विन्यास लिखते समय पहले s-कक्षक से इलेक्ट्रॉन निकालें, फिर d-कक्षक से. चुंबकीय आघूर्ण के लिए अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या सही होनी चाहिए.
Question 4. संक्रमण धातुएँ सामान्यतः रंगीन यौगिक बनाती है। कारण दीजिए।
Answer: संक्रमण धातुएँ सामान्यतः रंगीन यौगिक बनाती हैं क्योंकि उनमें अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉन मौजूद होते हैं। ये अयुग्मित इलेक्ट्रॉन d-d संक्रमण से गुजर सकते हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक d-कक्षक से दूसरे उच्च ऊर्जा वाले d-कक्षक में कूद सकते हैं। इस संक्रमण के लिए, इलेक्ट्रॉन दृश्य प्रकाश क्षेत्र से विशिष्ट तरंग दैर्ध्य की ऊर्जा को अवशोषित करते हैं। जो रंग अवशोषित नहीं होता, वह हमारी आँखों को दिखाई देता है, जिससे यौगिक रंगीन दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए, कॉपर सल्फेट नीला दिखाई देता है क्योंकि वह नारंगी-लाल प्रकाश को अवशोषित करता है।
In simple words: संक्रमण धातुएँ रंगीन दिखती हैं क्योंकि उनके पास ऐसे इलेक्ट्रॉन होते हैं जो d-कक्षक के अंदर ही कूद सकते हैं। ऐसा करने के लिए वे प्रकाश को सोखते हैं, और जो प्रकाश नहीं सोखा जाता, वही हमें रंग के रूप में दिखाई देता है।
🎯 Exam Tip: "d-d संक्रमण" और "अयुग्मित इलेक्ट्रॉन" रंगीन यौगिकों के लिए मुख्य कीवर्ड हैं.
Question 5. कारण दीजिए
(अ) संक्रमण तत्वों की 3d श्रेणी में Mn अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है।
(ब) Cr+2 तथा Mn+3 दोनों का d4 विन्यास है परन्तु Cr+2 अपचायक और Mn+3 ऑक्सीकरण है।
Answer:
(अ) मैंगनीज (Mn) 3d संक्रमण श्रेणी में अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था (+7) प्रदर्शित करता है। इसका कारण यह है कि मैंगनीज के 3d और 4s उपकोशों की ऊर्जा में बहुत कम अंतर होता है। Mn का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( [Ar] 3d^5 4s^2 \) होता है, जिससे यह अपने सभी 7 वैलेंस इलेक्ट्रॉनों को आसानी से बंध बनाने में उपयोग कर सकता है। इन सभी इलेक्ट्रॉनों को निकालने के लिए अपेक्षाकृत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है (युग्मन ऊर्जा के कारण)। यह क्षमता मैंगनीज को +7 तक की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करने में मदद करती है।
(ब) \( \text{Cr}^{2+} \) और \( \text{Mn}^{3+} \) दोनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( d^4 \) होता है। हालांकि, ये अलग-अलग व्यवहार करते हैं। \( \text{Cr}^{2+} \) एक अपचायक (reducing agent) के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह एक इलेक्ट्रॉन खोकर \( \text{Cr}^{3+} \) (\( d^3 \) विन्यास) में ऑक्सीकृत हो जाता है, जो कि अर्ध-भरे \( t_{2g} \) ऑर्बिटल्स के कारण अधिक स्थिर होता है। इसके विपरीत, \( \text{Mn}^{3+} \) एक ऑक्सीकारक (oxidizing agent) के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह एक इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके \( \text{Mn}^{2+} \) (\( d^5 \) विन्यास) में अपचयित हो जाता है, जो अर्ध-भरे d-कक्षक के कारण अत्यंत स्थिर होता है। दोनों के आकार में अंतर और इलेक्ट्रोनेगेटिविटी के मान भी इनके व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
In simple words: (अ) मैंगनीज सबसे ज़्यादा ऑक्सीकरण अवस्था दिखाता है क्योंकि इसके 3d और 4s इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा बहुत मिलती-जुलती है, जिससे वे सभी बंध बनाने में भाग ले सकते हैं। (ब) \( \text{Cr}^{2+} \) इलेक्ट्रॉन देकर स्थिर \( \text{Cr}^{3+} \) बनता है, इसलिए यह अपचायक है। \( \text{Mn}^{3+} \) इलेक्ट्रॉन लेकर स्थिर \( \text{Mn}^{2+} \) बनता है, इसलिए यह ऑक्सीकारक है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अवस्था और रेडॉक्स व्यवहार को इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, विशेष रूप से अर्ध-भरे या पूरी तरह से भरे उपकोशों की स्थिरता के संदर्भ में समझाएं.
Question 6. निम्न को समझाइए
(अ) 5d संक्रमण तत्वों के आकार 4d संक्रमण तत्वों के आकार के लगभग वर्ग में समान है।
(ब) संक्रमण तत्व उपसहसंयोजक यौगिक बनाते हैं।
Answer:
(अ) 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों का आकार 4d संक्रमण श्रेणी के समान वर्ग में आने वाले तत्वों के आकार के लगभग समान होता है। इसका मुख्य कारण लैंथेनॉइड संकुचन है। 5d श्रेणी के तत्व भरने से पहले, 14 लैंथेनॉइड तत्व (4f श्रेणी) भरे जाते हैं। इन 4f इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव (shielding effect) बहुत कमजोर होता है। इस खराब परिरक्षण के कारण, बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आवेश बहुत अधिक बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ प्रभावी नाभिकीय आवेश, कोशों की संख्या में वृद्धि के कारण होने वाले परमाणु आकार में वृद्धि को संतुलित कर देता है। इसलिए, 4d और 5d श्रेणी के तत्वों के परमाणु आकार लगभग बराबर हो जाते हैं। उदाहरण के लिए, Zr (4d) और Hf (5d) के परमाणु त्रिज्याएँ क्रमशः 160 और 159 पिकोमीटर हैं।
(ब) संक्रमण तत्व आसानी से उपसहसंयोजक यौगिक (coordination compounds) बनाते हैं। यह मुख्य रूप से तीन कारणों से होता है: उनके पास धातु आयन में खाली d-कक्षक होते हैं जो इलेक्ट्रॉनों के जोड़े को स्वीकार कर सकते हैं; उनके पास अपेक्षाकृत छोटा आकार और उच्च नाभिकीय आवेश होता है, जो उन्हें लिगेंड्स (ligands) के इलेक्ट्रॉन जोड़े को दृढ़ता से आकर्षित करने में सक्षम बनाता है; और वे विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित कर सकते हैं। इन गुणों के कारण, संक्रमण धातुएँ लिगेंड्स (जो इलेक्ट्रॉन दाता होते हैं) के साथ उपसहसंयोजक बंध बनाकर स्थिर संकुल बनाती हैं।
In simple words: (अ) 5d तत्वों का आकार 4d तत्वों के समान ही होता है क्योंकि लैंथेनॉइड संकुचन के कारण नाभिकीय खिंचाव बढ़ जाता है, जिससे आकार बढ़ने की बजाय लगभग बराबर रहता है। (ब) संक्रमण धातुएँ उपसहसंयोजक यौगिक इसलिए बनाती हैं क्योंकि उनके पास इलेक्ट्रॉन स्वीकार करने के लिए खाली d-कक्षक होते हैं और उनका आकार छोटा होता है।
🎯 Exam Tip: लैंथेनॉइड संकुचन को 4f इलेक्ट्रॉनों के खराब परिरक्षण और प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि से जोड़ें. उपसहसंयोजक यौगिकों के लिए खाली d-कक्षक, छोटा आकार और उच्च नाभिकीय आवेश को मुख्य कारण मानें.
| क्र.सं. | लैन्थेनॉइड | ऐक्टिनॉइड |
|---|---|---|
| 1. | प्रोमिथियम को छोड़कर ये सभी नॉन-रेडियोऐक्टिव हैं। | ये सभी रेडियोऐक्टिव हैं। |
| 2. | ये कम ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं। सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +3 के अतिरिक्त कुछ लैन्थेनॉइड +2 व +4 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी प्रदर्शित करते हैं। | ये अपेक्षाकृत अधिक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं। सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +3 के साथ-साथ ये +2, +4, +5, +6 व +7 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी प्रदर्शित करते हैं। |
| 3. | लैन्थेनॉइडों में 4f-इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव (Shielding Effect) अधिक होता है। इनके आयनिक आकार में कमी कम होती है। | ऐक्टिनॉइडों में 5f-इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव कम होता है। इनके आयनिक आकार में कमी अधिक होती है। |
| 4. | 4f-इलेक्ट्रॉनों की बन्धन ऊर्जा अधिक होती है। | 5f-इलेक्ट्रॉनों की बन्धन ऊर्जा अपेक्षाकृत कम होती है। |
| 5. | इनकी जटिल यौगिक बनाने की प्रवृत्ति कम होती है। | इनकी जटिल यौगिक बनाने की प्रवृत्ति अपेक्षाकृत अधिक होती है। |
| 6. | इनके यौगिक कम क्षारीय होते हैं। | इनके यौगिक अधिक क्षारीय होते हैं। |
| 7. | ये ऑक्सो आयन नहीं बनाते। | ये ऑक्सो आयन; जैसे—\( \text{UO}_2^{2+} \), \( \text{PuO}_2^{2+} \) इत्यादि बनाते हैं। |
Question 8. Zr(57), Hf(72) की परमाणवीय त्रिज्याएँ लगभग समान हैं। कारण दीजिए।
Answer: ज़िरकोनियम (Zr) 4d श्रेणी का तत्व है और हाफ्नियम (Hf) 5d श्रेणी का तत्व है। सामान्य प्रवृत्ति के अनुसार, Hf का आकार Zr से बड़ा होना चाहिए। हालांकि, Hf (Z=72) से पहले, 14 लैंथेनॉइड तत्व (परमाणु क्रमांक 58 से 71) 4f उपकोश में भरे जाते हैं। इन 4f इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव बहुत कमजोर होता है, जिसके कारण बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बहुत बढ़ जाता है। इस घटना को लैंथेनॉइड संकुचन कहते हैं। लैंथेनॉइड संकुचन के कारण, 4d और 5d श्रेणी के तत्वों के आकार में अपेक्षित वृद्धि लगभग नगण्य हो जाती है, जिससे Zr और Hf के परमाणु आकार लगभग समान होते हैं।
In simple words: Zr और Hf का आकार लगभग बराबर होता है क्योंकि लैंथेनॉइड संकुचन के कारण 4f इलेक्ट्रॉनों का खराब परिरक्षण होता है। इससे Hf का आकार उतना नहीं बढ़ पाता जितना उम्मीद की जाती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय लैंथेनॉइड संकुचन और 4f इलेक्ट्रॉनों के खराब परिरक्षण प्रभाव पर जोर दें.
Question 9. Au(79), Ag(47) के आयनन विभव लगभग समान होते हैं। कारण दीजिए।
Answer: आयनन विभव (ionization potential) परमाणु के आकार और प्रभावी नाभिकीय आवेश पर निर्भर करता है। चांदी (Ag, Z=47) 4d संक्रमण श्रेणी का तत्व है, जबकि सोना (Au, Z=79) 5d संक्रमण श्रेणी का तत्व है। सामान्य प्रवृत्ति के अनुसार, 5d श्रेणी के तत्व का आयनन विभव 4d श्रेणी के तत्व से कम होना चाहिए। हालांकि, लैंथेनॉइड संकुचन के कारण, Au और Ag का परमाणु आकार लगभग समान हो जाता है। लैंथेनॉइड संकुचन 5d तत्वों के लिए प्रभावी नाभिकीय आवेश को बढ़ा देता है, जिससे उनके बाहरी इलेक्ट्रॉनों को हटाना कठिन हो जाता है। इस परिणामस्वरूप, Ag और Au के आयनन विभव लगभग समान होते हैं।
In simple words: Ag और Au के आयनन विभव लगभग एक जैसे होते हैं क्योंकि लैंथेनॉइड संकुचन के कारण उनका परमाणु आकार और बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का खिंचाव बराबर हो जाता है।
🎯 Exam Tip: लैंथेनॉइड संकुचन के कारण 4d और 5d तत्वों के समान परमाणु आकार और उसके परिणामस्वरूप आयनन विभव पर पड़ने वाले प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करें.
Question 10. KMnO4 का चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
Answer: \( \text{KMnO}_4 \) में मैंगनीज (Mn) की ऑक्सीकरण अवस्था की गणना इस प्रकार की जाती है:
माना Mn की ऑक्सीकरण अवस्था x है।
पोटेशियम (K) की ऑक्सीकरण अवस्था +1 होती है।
ऑक्सीजन (O) की ऑक्सीकरण अवस्था -2 होती है।
\( (+1) + x + 4(-2) = 0 \)
\( 1 + x - 8 = 0 \)
\( x - 7 = 0 \)
\( x = +7 \)
अतः, \( \text{KMnO}_4 \) में Mn की ऑक्सीकरण अवस्था +7 है।
Mn का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( [Ar] 3d^5 4s^2 \) होता है।
जब Mn +7 ऑक्सीकरण अवस्था में होता है, तो यह अपने सभी 7 वैलेंस इलेक्ट्रॉनों (5 फ्रॉम 3d और 2 फ्रॉम 4s) को खो देता है।
इसलिए, \( \text{Mn}^{7+} \) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( [Ar] 3d^0 4s^0 \) होता है।
इस विन्यास में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होता है, यानी \( n = 0 \)।
चुम्बकीय आघूर्ण (\( \mu \)) का सूत्र \( \mu = \sqrt{n(n+2)} \) है।
\( \mu = \sqrt{0(0+2)} \)
\( \mu = \sqrt{0} \)
\( \mu = 0 \) BM
इसलिए, \( \text{KMnO}_4 \) का चुम्बकीय आघूर्ण शून्य होता है और यह प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) होता है।
In simple words: \( \text{KMnO}_4 \) में मैंगनीज की ऑक्सीकरण अवस्था +7 होती है। इस अवस्था में मैंगनीज के पास कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं बचता है। इसलिए, इसका चुंबकीय आघूर्ण शून्य होता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी यौगिक का चुंबकीय आघूर्ण ज्ञात करने के लिए, केंद्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था और उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या को सही ढंग से निर्धारित करना महत्वपूर्ण है.
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