RBSE Solutions Class 12 Chemistry Chapter 5 पृष्ठ रसायन

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RBSE Class 12 Chemistry Chapter 5 पृष्ठ रसायन बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. अधिशोषण समतापी के लिए समीकरण है –
(a) \( \frac {x}{m} = kp^{1/n} \)
(b) \( \frac {x}{m} = kp^{n} \)
(c) \( \frac {x}{m} = kP^{-n} \)
(d) उपुर्यक्त सभी।
Answer: (a) \( \frac {x}{m} = kp^{1/n} \)
In simple words: यह समीकरण दिखाता है कि कितनी गैस किसी सतह पर जमा होती है (अधिशोषित होती है) जब उसका दबाव बढ़ता है. इसमें 'k' और 'n' स्थिरांक हैं.

🎯 Exam Tip: याद रखें कि 'n' हमेशा 1 से बड़ा होता है. यह समीकरण Freundlich अधिशोषण समतापी के नाम से जाना जाता है.

 

Question 2. आकृति-वरणात्मक उत्प्रेरण वह अभिक्रिया है जो उत्प्रेरित होती
(a) जिओलाइट द्वारा
(b) एन्जाइम द्वारा
(c) सूक्ष्म छिद्रों वाले पदार्थों द्वारा
(d) उपुर्यक्त सभी।
Answer: (d) उपुर्यक्त सभी।
In simple words: इस तरह की उत्प्रेरण अभिक्रिया में, उत्प्रेरक की बनावट ऐसी होती है कि केवल खास आकार के अणु ही उस पर फिट होकर प्रतिक्रिया कर पाते हैं, जैसे कि ताले में चाबी.

🎯 Exam Tip: आकृति-वरणात्मक उत्प्रेरण मुख्य रूप से उत्प्रेरक की रंध्र संरचना और अभिकारक तथा उत्पाद अणुओं के आकार पर निर्भर करता है.

 

Question 3. अधिशोषण के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) ठोस सतह पर अधिशोषण, उत्क्रमणीय है।
(b) ताप बढ़ाने पर अधिशोषण की मात्रा बढ़ती है।
(c) अधिशोषण स्वतः प्रक्रिया है।
(d) अधिशोषण की एन्थैल्पी एवं एन्ट्रॉपी दोनों ऋणात्मक है।
Answer: (b) ताप बढ़ाने पर अधिशोषण की मात्रा बढ़ती है।
In simple words: अधिशोषण में गर्मी निकलने से सतह पर चीज़ें चिपक जाती हैं. जब हम गर्मी बढ़ाते हैं, तो चिपकी हुई चीज़ें दूर जाने लगती हैं, इसलिए अधिशोषण कम होता है, बढ़ता नहीं.

🎯 Exam Tip: भौतिक अधिशोषण एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है, जिसका अर्थ है कि यह ऊष्मा छोड़ता है. Le Chatelier के सिद्धांत के अनुसार, तापमान बढ़ाने पर संतुलन विपरीत दिशा में चला जाता है, जिससे अधिशोषण कम हो जाता है.

 

Question 4. निम्न में से किसकी गोल्ड संख्या न्यूनतम होती है?
(a) जिलेटिन
(b) अंडे की एल्ब्यूमिन
(c) गम ऐरेबिक
(d) स्टॉर्च
Answer: (a) जिलेटिन
In simple words: गोल्ड संख्या बताती है कि कौन कितना अच्छा रक्षक कोलाइड है. जिसकी गोल्ड संख्या सबसे कम होती है, वह सबसे अच्छा रक्षक होता है. जिलेटिन की गोल्ड संख्या सबसे कम है, इसलिए यह सबसे अच्छा रक्षक कोलाइड है.

🎯 Exam Tip: गोल्ड संख्या एक मिलीलीटर सोने के कोलाइड को 10% सोडियम क्लोराइड के 1 मिलीलीटर घोल से जमने से रोकने के लिए आवश्यक रक्षक कोलाइड की मात्रा (मिलीग्राम में) है.

 

Question 5. \( As_2S_3 \) कोलॉइड ऋणावेशित है तो इसके स्कंदन की क्षमता सर्वाधिक किसमें होगी?
(a) \( AlCl_3 \)
(b) \( Na_3PO_4 \)
(c) \( CaCl_2 \)
(d) \( K_2SO_4 \)
Answer: (a) \( AlCl_3 \)
In simple words: एक ऋणावेशित कोलाइड को जमाने के लिए, हमें धनावेशित आयनों की जरूरत होती है. जिस आयन पर जितना ज्यादा धनावेश होता है, वह उतनी ही जल्दी जमा देता है. \( AlCl_3 \) में \( Al^{3+} \) आयन पर सबसे ज्यादा धनावेश होता है, इसलिए यह सबसे प्रभावी है.

🎯 Exam Tip: हार्डी-शुल्ज नियम के अनुसार, आयन की स्कंदन शक्ति उसकी संयोजकता (चार्ज) बढ़ने के साथ बढ़ती है. \( Al^{3+} \) में +3 चार्ज है, जो दिए गए विकल्पों में सबसे अधिक है.

 

Question 6. एन्जाइम की सक्रियता सर्वाधिक है –
(a) 300K पर
(b) 310K पर
(c) 320K पर
(d) 330K पर।
Answer: (b) 310K पर
In simple words: एन्जाइम सबसे अच्छे से काम करते हैं जब शरीर का तापमान सही होता है, जो लगभग 37 डिग्री सेल्सियस या 310 केल्विन होता है. बहुत ज्यादा या बहुत कम तापमान पर वे ठीक से काम नहीं कर पाते.

🎯 Exam Tip: अधिकांश एन्जाइम अपने अधिकतम क्रियाकलाप को 298 K से 310 K (25°C से 37°C) के बीच के तापमान पर दर्शाते हैं, जिसे इष्टतम तापमान कहा जाता है.

 

Question 7. द्रवरागी सॉल, द्रवविरागी सॉल की तुलना में अधिक स्थायी है, क्योंकि
(a) कोलॉइडी कणों का धन आवेश होता है।
(b) कोलॉइडी कणों का कोई आवेश नहीं होता है।
(c) कोलॉइडी कण विलायक की परत से घिरे रहते हैं।
(d) कोलॉइडी कणों के ऋण आवेशों के मध्य प्रबल विद्युत् स्थिर प्रतिक्षेपण होता है।
Answer: (c) कोलॉइडी कण विलायक की परत से घिरे रहते हैं।
In simple words: द्रवरागी सॉल में, कोलाइड के छोटे कण पानी से बहुत प्यार करते हैं और पानी की एक परत से घिरे रहते हैं. यह पानी की परत उन कणों को एक-दूसरे से चिपकने और अलग होने से रोकती है, जिससे वे अधिक स्थिर रहते हैं.

🎯 Exam Tip: द्रवरागी सॉल में कणों पर आवेश होने के साथ-साथ विलायकन (solvation) की परत भी होती है, जो उन्हें अधिक स्थायी बनाती है और इसे 'स्व-रक्षक' कोलाइड भी कहते हैं.

 

Question 8. कौन-सी पृष्ठीय परिघटना नहीं है?
(a) समांगी उत्प्रेरण
(b) ठोसों का मिलना
(c) जंग लगना
(d) विद्युत् अपघटन प्रक्रिया।
Answer: (d) विद्युत् अपघटन प्रक्रिया।
In simple words: पृष्ठीय परिघटना वह होती है जो किसी सतह पर या दो चीज़ों के बीच होती है. विद्युत् अपघटन पूरे घोल या पदार्थ में होता है, सतह पर नहीं.

🎯 Exam Tip: पृष्ठीय परिघटनाओं में अधिशोषण, उत्प्रेरण, संक्षारण, क्रिस्टलीकरण आदि शामिल हैं, जो पदार्थों की सतहों पर घटित होती हैं.

 

Question 9. आर्सेनिक सल्फाइड सॉल पर ऋण आवेश है, इसकी अवक्षेपण में बदलने की अधिकतम क्षमता है –
(a) \( H_2SO_4 \)
(b) \( Na_3PO_4 \)
(c) \( CaCl_2 \)
(d) \( AlCl_3 \)
Answer: (d) \( AlCl_3 \)
In simple words: एक ऋणावेशित कोलाइड को ज़माने के लिए धनावेशित आयन सबसे अच्छे होते हैं. जिस आयन पर जितना ज़्यादा धनावेश होगा, वह उतनी ही तेज़ी से कोलाइड को जमाएगा. \( AlCl_3 \) में मौजूद \( Al^{3+} \) आयन पर सबसे ज़्यादा धनावेश होता है.

🎯 Exam Tip: हार्डी-शुल्ज़ नियम को फिर से याद करें: स्कंदन करने वाले आयन की संयोजकता जितनी अधिक होगी, उसकी स्कंदन शक्ति उतनी ही अधिक होगी.

 

Question 10. मानव शरीर में रक्त शुद्धिकरण का तरीका है
(a) विद्युत् कण संचलन
(b) विद्युत् परासरणी
(c) अपोहन
(d) स्कंदन।
Answer: (c) अपोहन
In simple words: मानव शरीर में, खासकर जब किडनी काम नहीं करती, तो रक्त को साफ करने के लिए डायलिसिस का उपयोग किया जाता है. यह प्रक्रिया अपोहन के सिद्धांत पर काम करती है, जहाँ रक्त से छोटे अवांछित कण निकल जाते हैं लेकिन बड़े कण नहीं.

🎯 Exam Tip: अपोहन वह प्रक्रिया है जिसमें एक अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से कोलाइडल घोल से घुले हुए पदार्थों (क्रिस्टलोइड्स) को हटाया जाता है, जिसका उपयोग कृत्रिम किडनी में किया जाता है.

 

Question 11. तनु HCI की कुछ बूंदें, ताजा फैरिक ऑक्साइड के अवक्षेप पर डालने से लाल रंग का कोलॉइडी विलयन मिलता है। इस प्रक्रम को कहते हैं -
(a) अवक्षेपण क्रिया
(b) अपोहन
(c) रक्षण क्रिया
(d) पेप्टीकरण
Answer: (d) पेप्टीकरण
In simple words: जब एक ताज़ा बने हुए अवक्षेप में थोड़ा सा इलेक्ट्रोलाइट मिलाया जाता है, तो वह फिर से कोलाइड के छोटे कणों में बदल जाता है और एक कोलाइडल घोल बनाता है. इसे पेप्टीकरण कहते हैं.

🎯 Exam Tip: पेप्टीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जहाँ एक अवक्षेप को इलेक्ट्रोलाइट की उपस्थिति में परिक्षेपण माध्यम के साथ हिलाकर एक कोलाइडल घोल में परिवर्तित किया जाता है.

 

Question 12. कोलॉइडी कणों की अनियमित गति का अध्ययन किया –
(a) ब्राउन
(b) टिंडल
(c) फैराडे
(d) कोट्रेल
Answer: (a) ब्राउन
In simple words: रॉबर्ट ब्राउन नाम के एक वैज्ञानिक ने सबसे पहले देखा कि कोलाइड के छोटे कण पानी में कैसे बेतरतीब ढंग से इधर-उधर घूमते रहते हैं. इस गति को 'ब्राउनी गति' कहते हैं.

🎯 Exam Tip: ब्राउनी गति कणों के परिक्षेपण माध्यम के अणुओं के साथ लगातार और असमान टकराव के कारण होती है.

 

Question 13. स्वर्ण संख्या सम्बन्धित है-
(a) विद्युत् कण संचलन से
(b) परपल ऑफ कैसियस से
(c) रक्षक कोलॉइडों से
(d) शुद्ध स्वर्ण की मात्रा से।
Answer: (c) रक्षक कोलॉइडों से
In simple words: स्वर्ण संख्या यह बताती है कि कोई कोलाइडल पदार्थ सोने के कोलाइडल घोल को जमने से कितना अच्छा बचाता है. यह रक्षक कोलाइडों की शक्ति का एक माप है.

🎯 Exam Tip: कम स्वर्ण संख्या वाले रक्षक कोलाइड अधिक प्रभावी होते हैं क्योंकि उन्हें सोने के कोलाइड को जमने से बचाने के लिए कम मात्रा की आवश्यकता होती है.

 

Question 14. वर्णलेखन का आधार है
(a) भौतिक अधिशोषण।
(b) रासायनिक अधिशोषण
(c) हाइड्रोजन आबंध
(d) तलचटीकरण
Answer: (a) भौतिक अधिशोषण।
In simple words: वर्णलेखन एक तरीका है जिससे मिश्रणों को अलग किया जाता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि अलग-अलग पदार्थ एक स्थिर सतह पर कितने अच्छे से चिपकते (अधिशोषित होते) हैं.

🎯 Exam Tip: वर्णलेखन तकनीकें पदार्थों के अधिशोषण, विभाजन या विनिमय जैसे सिद्धांतों पर आधारित होती हैं, जिससे वे मिश्रणों को प्रभावी ढंग से अलग कर पाती हैं.

 

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 5 पृष्ठ रसायन अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. मिसेल निर्माण की क्रिया-विधि समझाइए।
Answer: मिसेल तब बनते हैं जब साबुन या डिटर्जेंट जैसे सर्फेक्टेंट (surface-active agents) को पानी में एक निश्चित सांद्रता से ऊपर मिलाया जाता है, जिसे क्रांतिक मिसेल सांद्रता (CMC) कहते हैं. सर्फेक्टेंट अणुओं में दो भाग होते हैं: एक जल-रागी (पानी को पसंद करने वाला) सिरा और एक जल-विरागी (पानी से दूर रहने वाला) सिरा. पानी में, जल-विरागी सिरे एक-दूसरे के पास इकट्ठा हो जाते हैं और एक गोलाकार संरचना बनाते हैं, जबकि जल-रागी सिरे बाहर की ओर पानी की तरफ रहते हैं. यह गोलाकार संरचना ही मिसेल कहलाती है. मिसेल बनने से साबुन चिकनाई और तेल को घेरकर साफ कर पाता है.
In simple words: जब साबुन को पानी में डालते हैं, तो उसके अणु गोल गुच्छों में मिल जाते हैं. साबुन का जो हिस्सा पानी से डरता है, वह बीच में छिप जाता है, और जो हिस्सा पानी को पसंद करता है, वह बाहर की तरफ रहता है. ये गुच्छे ही मिसेल कहलाते हैं, जो गंदगी साफ करते हैं.

🎯 Exam Tip: मिसेल निर्माण की क्रिया-विधि में क्रांतिक मिसेल सांद्रता (CMC) और क्राफ्ट तापमान (Tk) महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं, जिन्हें स्पष्ट रूप से समझाना चाहिए.

 

Question 2. निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए –
(अ) अपोहन
(ब) कॉटेल अवक्षेपक
Answer:
(अ) **अपोहन (Dialysis):** यह एक ऐसी विधि है जिसका उपयोग कोलाइडल कणों को वास्तविक घोल के छोटे कणों (क्रिस्टलोइड) से अलग करने के लिए किया जाता है. इसमें एक अर्धपारगम्य झिल्ली का उपयोग किया जाता है, जो कोलाइडल कणों को रोक देती है लेकिन छोटे आयनों और अणुओं को गुजरने देती है. रक्त के शुद्धिकरण के लिए उपयोग की जाने वाली कृत्रिम किडनी इसी सिद्धांत पर काम करती है. यह विधि अशुद्धियों को हटाकर कोलाइडल घोल को शुद्ध करती है.
(ब) **कॉटेल अवक्षेपक (Cottrell Precipitator):** यह एक उपकरण है जिसका उपयोग औद्योगिक चिमनियों से निकलने वाले धुएँ (जो कोलाइडल कण होते हैं) से धूल और कार्बन कणों को हटाने के लिए किया जाता है. इसमें धुएँ को उच्च वोल्टेज वाले इलेक्ट्रोडों के बीच से गुजारा जाता है. धुएँ के कण आवेशित हो जाते हैं और विपरीत आवेश वाले संग्रह प्लेटों की ओर आकर्षित होकर उन पर जमा हो जाते हैं, जिससे गैस साफ हो जाती है.
In simple words: अपोहन से छोटे कणों को बड़े कोलाइड कणों से अलग करते हैं, जैसे खून को साफ करना. कॉटेल अवक्षेपक फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाले धुएँ से गंदगी साफ करता है, जिससे हवा शुद्ध होती है.

🎯 Exam Tip: अपोहन में अर्धपारगम्य झिल्ली का सिद्धांत और कॉटेल अवक्षेपक में विद्युत स्थैतिक अवक्षेपण का सिद्धांत प्रमुख हैं. दोनों के उपयोगों का उल्लेख करना भी महत्वपूर्ण है.

 

Question 3. परिक्षेपण विधि द्वारा प्लेटिनम का जल में कोलॉइडी विलयन बनाने का वर्णन कीजिए। उपकरण का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: प्लेटिनम का जल में कोलॉइडी विलयन बनाने के लिए ब्रैडिग आर्क विधि का उपयोग किया जाता है. इस विधि में, प्लेटिनम के दो इलेक्ट्रोडों को परिक्षेपण माध्यम (जैसे पानी) में डुबोया जाता है. फिर इन इलेक्ट्रोडों के बीच एक उच्च-वोल्टेज विद्युत आर्क उत्पन्न किया जाता है. इस आर्क से उत्पन्न अत्यधिक गर्मी प्लेटिनम धातु को वाष्पीकृत कर देती है. वाष्प के ये परमाणु बाद में संघनित होकर बहुत छोटे कोलाइडल आकार के कण बना लेते हैं, जो पानी में निलंबित रहते हैं और प्लेटिनम का कोलॉइडी विलयन बनाते हैं. इस प्रक्रिया को ठंडा रखने के लिए, उपकरण को बर्फ के अवगाह में रखा जाता है ताकि कणों का जमना रोका जा सके.
In simple words: प्लेटिनम का कोलाइडल घोल बनाने के लिए, हम पानी में प्लेटिनम के तारों के बीच बिजली की चिंगारी पैदा करते हैं. चिंगारी से प्लेटिनम पिघल कर भाप बनता है, फिर वह भाप छोटे-छोटे कणों में बदलकर पानी में घुल जाती है, जिससे कोलाइडल घोल बन जाता है.

बर्फ अवगाह परिक्षेपण माध्यम धातु के इलेक्ट्रोड आर्क

 

🎯 Exam Tip: ब्रैडिग आर्क विधि धातुओं जैसे सोना, चांदी और प्लेटिनम के कोलाइडल घोल बनाने के लिए उपयुक्त है. चित्र को साफ और नामांकित बनाना महत्वपूर्ण है.

 

Question 4. विद्युत् कण संचलन को स्वच्छ नामांकित चित्र द्वारा प्रदर्शित करें।
Answer: विद्युत् कण संचलन (Electrophoresis) वह प्रक्रिया है जिसमें एक विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में आवेशित कोलाइडल कण एक इलेक्ट्रोड से दूसरे इलेक्ट्रोड की ओर गति करते हैं. कोलाइडल कणों पर धनात्मक या ऋणात्मक आवेश हो सकता है. जब कोलाइडल घोल में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो धनात्मक कण ऋणात्मक इलेक्ट्रोड (कैथोड) की ओर और ऋणात्मक कण धनात्मक इलेक्ट्रोड (एनोड) की ओर बढ़ते हैं. इलेक्ट्रोड पर पहुँचने पर, ये कण अपने आवेश को खो देते हैं और अवक्षेपित हो जाते हैं. इस विधि का उपयोग कोलाइडल कणों पर आवेश के प्रकार को निर्धारित करने और प्रोटीन जैसे मैक्रोमोलेक्यूल्स को अलग करने के लिए किया जाता है.
In simple words: जब कोलाइडल घोल में बिजली डालते हैं, तो छोटे कण, जिन पर चार्ज होता है, बिजली के पोल की तरफ दौड़ते हैं. अगर उन पर प्लस चार्ज है, तो वे माइनस पोल की तरफ जाएंगे, और अगर माइनस चार्ज है, तो वे प्लस पोल की तरफ जाएंगे.

एनोड (+) कैथोड (-) कोलाइडल घोल

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रोफोरेसिस का चित्र बनाते समय U-ट्यूब, इलेक्ट्रोडों (+ और - लेबल के साथ), कोलाइडल घोल और कणों की गति की दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए.

 

Question 6. भौतिक अधिशोषण तथा रासायनिक अधिशोषण में चार अन्तर लिखिए।
Answer: भौतिक अधिशोषण और रासायनिक अधिशोषण में मुख्य चार अंतर इस प्रकार हैं:

 

विशेषताभौतिक अधिशोषण (Physisorption)रासायनिक अधिशोषण (Chemisorption)
प्रकृतियह वांडरवाल बलों के कारण होता है, जो कमजोर होते हैं.यह रासायनिक आबंधों (आयनी या सहसंयोजक) के कारण होता है, जो मजबूत होते हैं.
उत्क्रमणीयतायह उत्क्रमणीय (reversible) होता है; अधिशोषक को गर्म करके अधिशोषित पदार्थ को हटाया जा सकता है.यह सामान्यतः अनुत्क्रमणीय (irreversible) होता है; एक बार बनने के बाद हटाना मुश्किल होता है.
तापमान का प्रभावतापमान बढ़ाने पर अधिशोषण कम हो जाता है.पहले तापमान बढ़ाने पर बढ़ता है, फिर अत्यधिक तापमान पर कम होता है.
परतेंयह बहु-परतीय (multilayer) हो सकता है.यह एकल-परतीय (monolayer) होता है.
विशिष्टताकम विशिष्ट; कोई भी गैस किसी भी ठोस पर अधिशोषित हो सकती है.अत्यधिक विशिष्ट; केवल वे गैसें जो ठोस के साथ रासायनिक रूप से प्रतिक्रिया कर सकती हैं, वे ही अधिशोषित होती हैं.


In simple words: भौतिक अधिशोषण में चीज़ें बस हल्के से चिपकती हैं और आसानी से हट जाती हैं, जैसे चिपकने वाली टेप. रासायनिक अधिशोषण में वे मज़बूती से जुड़ जाती हैं, जैसे गोंद से चिपका देना.

🎯 Exam Tip: इन दोनों प्रकार के अधिशोषण के बीच के अंतर को एक तालिका के रूप में प्रस्तुत करना अच्छे अंक प्राप्त करने में सहायक होता है, क्योंकि यह तुलना को स्पष्ट और संक्षिप्त बनाता है.

 

Question 7. बहुआण्विक तथा वृहद् अणुक कोलॉइड में क्या अन्तर है? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
Answer: बहुआण्विक कोलॉइड और वृहद् अणुक कोलॉइड दोनों ही कोलाइडल प्रणाली के प्रकार हैं, लेकिन उनके कणों की संरचना और आकार में अंतर होता है:

विशेषताबहुआण्विक कोलॉइड (Multimolecular Colloids)वृहद् अणुक कोलॉइड (Macromolecular Colloids)
कणों का निर्माणछोटे-छोटे अणु या परमाणु (जैसे सल्फर के 1000 परमाणु) एक साथ मिलकर कोलाइडल आकार के कण बनाते हैं.एक ही बड़ा अणु (जैसे प्रोटीन या पॉलिथीन) खुद ही कोलाइडल आकार का होता है.
आणविक भारकम आणविक भार वाले पदार्थ.बहुत अधिक आणविक भार वाले पदार्थ.
स्थिरतावांडरवाल बलों के कारण अपेक्षाकृत कम स्थिर.विलायकन के कारण अधिक स्थिर.
उदाहरणगोल्ड सॉल, सल्फर सॉल.स्टार्च, प्रोटीन, नायलॉन, पॉलिथीन.


In simple words: बहुआण्विक कोलॉइड में बहुत सारे छोटे-छोटे अणु मिलकर एक बड़ा कोलाइड कण बनाते हैं, जबकि वृहद् अणुक कोलॉइड में खुद एक ही अणु इतना बड़ा होता है कि वह कोलाइड कण बन जाता है.

🎯 Exam Tip: इन दोनों प्रकार के कोलाइड्स की परिभाषा और प्रत्येक के लिए दो-दो उदाहरण याद रखना परीक्षा में महत्वपूर्ण होता है. तालिका बनाकर अंतर स्पष्ट करना एक अच्छा तरीका है.

 

Question 8. निम्नलिखित परिस्थितियों में क्या प्रेक्षण होंगे?
(अ) जब प्रकाश किरण पुंज कोलॉइडी विलयन से गमन करती है।
(ब) कोलॉइड विलयन में विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है।
Answer:
(अ) **जब प्रकाश किरण पुंज कोलॉइडी विलयन से गमन करती है:** जब एक प्रकाश की किरण कोलाइडल घोल से गुजरती है, तो कोलाइडल कण प्रकाश को सभी दिशाओं में बिखेर देते हैं. इस प्रकीर्णन के कारण, प्रकाश का मार्ग एक चमकदार शंकु के रूप में दिखाई देता है, जिसे टिण्डल प्रभाव (Tyndall Effect) कहते हैं. यह प्रभाव कोलाइडल घोल और वास्तविक घोल के बीच अंतर करने में मदद करता है, क्योंकि वास्तविक घोल प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं करते.
(ब) **जब कोलॉइड विलयन में विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है:** जब कोलाइडल घोल में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो आवेशित कोलाइडल कण विपरीत आवेश वाले इलेक्ट्रोड की ओर गति करते हैं. इसे विद्युत् कण संचलन (Electrophoresis) कहते हैं. उदाहरण के लिए, यदि कण ऋणात्मक रूप से आवेशित हैं, तो वे धनात्मक इलेक्ट्रोड (एनोड) की ओर बढ़ेंगे, और यदि धनात्मक हैं, तो वे ऋणात्मक इलेक्ट्रोड (कैथोड) की ओर जाएंगे. इलेक्ट्रोड पर पहुंचने पर, कण अपना आवेश खो देते हैं और अवक्षेपित हो जाते हैं.
In simple words: (अ) जब रोशनी कोलाइडल घोल से गुजरती है, तो हमें रोशनी का रास्ता चमकता हुआ दिखता है. (ब) जब कोलाइडल घोल में बिजली डाली जाती है, तो उसके कण बिजली के खंभों की तरफ भागते हैं.

🎯 Exam Tip: टिण्डल प्रभाव प्रकाश के प्रकीर्णन पर आधारित है, और विद्युत् कण संचलन आवेशित कोलाइडल कणों की विद्युत क्षेत्र में गति पर आधारित है. दोनों कोलाइडल घोलों की विशेषताएँ हैं.

 

Question 9. ब्राउनी गति के लक्षण लिखिए।
Answer: ब्राउनी गति कोलाइडल कणों द्वारा प्रदर्शित की जाने वाली अनियमित, टेढ़ी-मेढ़ी गति है. इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
1. यह कणों के आकार पर निर्भर करती है: छोटे कण बड़े कणों की तुलना में अधिक तीव्र गति प्रदर्शित करते हैं.
2. यह माध्यम की श्यानता पर निर्भर करती है: कम श्यानता वाले माध्यम में कण अधिक तेज़ी से गति करते हैं.
3. यह तापमान पर निर्भर करती है: तापमान बढ़ने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है, जिससे ब्राउनी गति तेज़ होती है.
4. यह कोलाइडल कणों पर आवेश से स्वतंत्र होती है, यानी कणों के आवेश से इसकी गति पर कोई असर नहीं पड़ता.
5. यह परिक्षेपण माध्यम के अणुओं द्वारा कोलाइडल कणों पर होने वाले असमान और लगातार बमबारी के कारण होती है.
In simple words: ब्राउनी गति में कोलाइड के कण बेतरतीब ढंग से इधर-उधर भागते रहते हैं. यह कणों के छोटे होने और पानी के अणुओं के उनसे टकराने से तेज़ होती है, और तापमान बढ़ने पर भी तेज़ होती है.

🎯 Exam Tip: ब्राउनी गति कोलाइडल कणों के अस्तित्व का प्रमाण देती है और कोलाइडल घोल की स्थिरता में मदद करती है, क्योंकि यह कणों को जमने से रोकती है.

 

Question 10. निम्नलिखित को सचित्र समझाइए –
(i) टिण्डल प्रभाव
(ii) ब्राउनी गति।
Answer:
(i) **टिण्डल प्रभाव (Tyndall Effect):** यह घटना तब होती है जब प्रकाश की किरण किसी कोलाइडल घोल से होकर गुजरती है. कोलाइडल कण प्रकाश को सभी दिशाओं में बिखेर देते हैं, जिससे प्रकाश का मार्ग एक चमकदार शंकु के रूप में दिखाई देता है. इस चमकदार मार्ग को टिण्डल शंकु कहते हैं. यह प्रभाव कोलाइडल घोल को वास्तविक घोल से अलग करने में मदद करता है, क्योंकि वास्तविक घोल के कण बहुत छोटे होते हैं और प्रकाश को प्रकीर्णित नहीं करते. उदाहरण के लिए, एक अंधेरे कमरे में रोशनदान से आती सूरज की किरण में धूल के कण चमकते हुए दिखाई देते हैं, यह टिण्डल प्रभाव का एक उदाहरण है.
In simple words: जब किसी कोलाइडल घोल से रोशनी गुजरती है, तो घोल के अंदर रोशनी का रास्ता चमकता हुआ दिखता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कोलाइड के कण रोशनी को चारों तरफ फैला देते हैं.

प्रकाश स्रोत कोलॉइडी विलयन टिण्डल शंकु (प्रकाश मार्ग) दर्शक

🎯 Exam Tip: टिण्डल प्रभाव का चित्र बनाते समय प्रकाश स्रोत, कोलाइडल घोल, और प्रकाश के चमकते हुए मार्ग (टिण्डल शंकु) को स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए. यह कोलाइडल कणों के कारण प्रकाश के प्रकीर्णन का परिणाम है.

 

(ii) **ब्राउनी गति (Brownian Movement):** यह कोलाइडल कणों द्वारा प्रदर्शित की जाने वाली अनियमित, टेढ़ी-मेढ़ी (zigzag) गति है. इस गति का अवलोकन रॉबर्ट ब्राउन ने किया था, इसलिए इसे ब्राउनी गति कहते हैं. यह गति परिक्षेपण माध्यम के अणुओं (जैसे पानी के अणु) द्वारा कोलाइडल कणों पर सभी दिशाओं में होने वाली लगातार और असमान बमबारी के कारण होती है. यह बमबारी कोलाइडल कणों को एक निश्चित दिशा में स्थिर नहीं रहने देती, जिससे वे लगातार यादृच्छिक रूप से गति करते रहते हैं. ब्राउनी गति कोलाइडल घोलों की स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है, क्योंकि यह कणों को आपस में जुड़ने और अवक्षेपित होने से रोकती है.
In simple words: ब्राउनी गति का मतलब है कि कोलाइड के छोटे कण पानी में बिना किसी खास दिशा के इधर-उधर उछलते-कूदते रहते हैं. यह उनके पानी के अणुओं से टकराने के कारण होता है, जैसे कोई गेंद बहुत सारे लोगों के बीच उछल रही हो.

कोलाइडल कण माध्यम के अणु

🎯 Exam Tip: ब्राउनी गति का आरेख बनाते समय कोलाइडल कण की अनियमित, टेढ़ी-मेढ़ी गति को स्पष्ट रूप से दिखाना चाहिए, जो माध्यम के अणुओं से टकराव के कारण होती है.

 

Question 11. कोलॉइडी विलयन बनाने की निम्नलिखित विधियों का वर्णन कीजिए –
(i) ब्रेडिंग आर्क विधि
(ii) कोलॉइडी मिल।
Answer:
(i) **ब्रेडिग आर्क विधि (Bredig's Arc Method):** यह विधि मुख्य रूप से धातुओं जैसे सोना, चांदी और प्लेटिनम के कोलॉइडी विलयन बनाने के लिए उपयोग की जाती है. इसमें, जिस धातु का कोलॉइडी विलयन बनाना होता है, उसके दो इलेक्ट्रोडों को परिक्षेपण माध्यम (जैसे पानी) में डुबोया जाता है. फिर इन इलेक्ट्रोडों के बीच एक उच्च-वोल्टेज विद्युत आर्क उत्पन्न किया जाता है. आर्क की तीव्र गर्मी धातु को वाष्पीकृत कर देती है, और यह वाष्प तुरंत संघनित होकर कोलाइडल आकार के बहुत छोटे कणों में बदल जाती है. इस प्रक्रिया को ठंडा रखने के लिए, उपकरण को बर्फ के अवगाह में रखा जाता है ताकि कणों का जमना रोका जा सके.
(ii) **कोलॉइडी मिल (Colloidal Mill):** यह एक यांत्रिक परिक्षेपण विधि है जिसका उपयोग ठोस पदार्थों को उनके कोलाइडल आकार में पीसकर कोलाइडल घोल बनाने के लिए किया जाता है. इस मिल में दो धातु की डिस्क होती हैं जो एक-दूसरे के बहुत करीब रखी होती हैं और बहुत तेज़ गति से घूमती हैं. जिस पदार्थ का कोलॉइडी विलयन बनाना होता है, उसे पहले एक मोटे निलंबन के रूप में तैयार किया जाता है और फिर मिल की घूमती हुई डिस्क के बीच से गुजारा जाता है. तीव्र पीसने और कतरनी बलों के कारण बड़े कण छोटे कोलाइडल कणों में टूट जाते हैं. इस विधि का उपयोग पेंट, स्याही, और दवा उत्पादों जैसे विभिन्न उद्योगों में किया जाता है.
In simple words: ब्रेडिग आर्क विधि में बिजली की चिंगारी से धातु को पिघलाकर छोटे कणों में बदलते हैं. कोलॉइडी मिल में, एक मशीन बहुत तेज़ घूमती हुई डिस्क से पदार्थों को पीसकर एकदम छोटे कणों में बदल देती है, जिससे कोलाइडल घोल बन जाता है.

🎯 Exam Tip: ब्रेडिग आर्क विधि एक संघनन और परिक्षेपण विधि दोनों का संयोजन है, जबकि कोलॉइडी मिल एक शुद्ध परिक्षेपण विधि है. दोनों विधियों के सिद्धांत और उपयोगों को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है.

 

Question 12. कारण दीजिए (अ) फिटकरी पीने के जल को शुद्ध करती है। (ब) एक ही पदार्थ कोलॉइड और क्रिस्टलाभ दोनों हो सकता है। (स) आकाश नीला दिखाई देता है।
Answer:
(अ) **फिटकरी पीने के जल को शुद्ध करती है:** प्राकृतिक जल में कई ऋणावेशित अशुद्धियाँ (जैसे मिट्टी और जैविक पदार्थ) निलंबित रहती हैं, जो कोलाइडल रूप में होती हैं. जब फिटकरी (पोटैशियम एल्यूमीनियम सल्फेट) को पानी में मिलाया जाता है, तो यह \( Al^{3+} \) आयन मुक्त करती है. ये \( Al^{3+} \) आयन ऋणावेशित अशुद्धियों को आकर्षित करके उनका स्कंदन (जमाव) कर देते हैं. ये जमे हुए कण भारी होकर नीचे बैठ जाते हैं या उन्हें छानकर आसानी से हटाया जा सकता है, जिससे पानी साफ हो जाता है. फिटकरी स्कंदन द्वारा पानी शुद्ध करने में मदद करती है.
(ब) **एक ही पदार्थ कोलॉइड और क्रिस्टलाभ दोनों हो सकता है:** किसी पदार्थ का कोलॉइड या क्रिस्टलाभ के रूप में व्यवहार उसके परिक्षेपण माध्यम की प्रकृति और सांद्रता पर निर्भर करता है. यह 'एसोसिएशन कोलाइड्स' (associated colloids) की विशेषता है. उदाहरण के लिए, सोडियम क्लोराइड (NaCl) पानी में एक क्रिस्टलाभ (वास्तविक घोल) के रूप में होता है क्योंकि यह आयनों में टूट जाता है, लेकिन बेंजीन में यह कोलाइडल कणों के रूप में व्यवहार कर सकता है. इसी तरह, साबुन पानी में कोलाइडल घोल बनाता है, लेकिन अल्कोहल में यह क्रिस्टलाभ के रूप में होता है. इसका मतलब है कि एक ही पदार्थ अलग-अलग माध्यमों में अलग-अलग रूप में मौजूद हो सकता है.
(स) **आकाश नीला दिखाई देता है:** पृथ्वी के वायुमंडल में धूल के छोटे कण, पानी की बूंदें और गैसों के अणु मौजूद होते हैं. ये कण सूर्य के प्रकाश को प्रकीर्णित (बिखेरते) करते हैं. नीले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (wavelength) अन्य रंगों की तुलना में कम होती है, और यह छोटे कणों द्वारा अधिक तीव्रता से प्रकीर्णित होता है (रेले प्रकीर्णन). चूंकि नीली रोशनी सबसे ज्यादा बिखरती है और हमारी आंखों तक पहुँचती है, इसलिए आकाश हमें नीला दिखाई देता है. बाकी रंग कम बिखरते हैं और सीधे हमारी आंखों तक नहीं पहुँच पाते हैं.
In simple words: (अ) फिटकरी पानी की गंदगी को जमाकर साफ करती है. (ब) एक ही चीज़ अलग-अलग घोल में कभी कोलाइड बन जाती है और कभी नहीं. (स) आसमान नीला दिखता है क्योंकि हवा के कण सूरज की नीली रोशनी को सबसे ज़्यादा फैलाते हैं.

🎯 Exam Tip: इन तीनों कारणों में स्कंदन, एसोसिएशन कोलाइड्स का सिद्धांत और रेले प्रकीर्णन का सिद्धांत प्रमुख है. प्रत्येक कारण को स्पष्ट और वैज्ञानिक ढंग से समझाना आवश्यक है.

 

Question 13. ठोस पृष्ठ पर गैसों के अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
Answer: ठोस पृष्ठ पर गैसों के अधिशोषण को कई कारक प्रभावित करते हैं. इनमें से एक प्रमुख कारक गैस (अधिशोष्य) की प्रकृति है, जैसा कि नीचे बताया गया है. अन्य कारक अधिशोषक की प्रकृति, पृष्ठ क्षेत्रफल, तापमान और दाब भी हैं:
1. **गैस (अधिशोष्य) की प्रकृति (Nature of Gas (Adsorbate)):** गैसों के भौतिक अधिशोषण की प्रकृति विशिष्ट नहीं होती है, लेकिन कुछ गैसें दूसरों की तुलना में अधिक आसानी से अधिशोषित होती हैं. वे गैसें जो आसानी से द्रवित हो जाती हैं (जैसे \( SO_2, HCl, CO_2, NH_3 \)), स्थायी गैसों (जैसे \( H_2, N_2, O_2 \)) की तुलना में अधिक तेज़ी से और अधिक मात्रा में अधिशोषित होती हैं. इसका कारण यह है कि आसानी से द्रवित होने वाली गैसों में अधिक मजबूत वांडरवाल बल होते हैं, और उनके क्रांतिक तापमान (Critical Temperature) भी अधिक होते हैं. जितनी आसानी से एक गैस द्रवित होती है, उतनी ही आसानी से वह अधिशोषित होती है.
In simple words: गैसों का ठोस पर चिपकना इस बात पर निर्भर करता है कि गैस कैसी है. जो गैसें आसानी से तरल बन सकती हैं, वे ठोस पर ज़्यादा चिपकती हैं, क्योंकि उनके बीच के आकर्षण बल मज़बूत होते हैं.

🎯 Exam Tip: अधिशोषण को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों में अधिशोषक की प्रकृति (छिद्रपूर्णता), अधिशोषक का पृष्ठ क्षेत्रफल, अधिशोष्य की प्रकृति (क्रांतिक तापमान), तापमान और दाब शामिल हैं. इन सभी बिंदुओं का उल्लेख करना चाहिए.

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