RBSE Solutions Class 12 Chemistry Chapter 3 विद्युत रसायन

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Detailed Chapter 3 विद्युत रसायन RBSE Solutions for Class 12 Chemistry

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Class 12 Chemistry Chapter 3 विद्युत रसायन RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 3 विद्युत रसायन पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रशन

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 3 विद्युत रसायन बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. निम्न में से कौन चालक नहीं है?
(a) Cu-धातु
(b) NaCl (aq)
(c) NaCl (पिघला)
(d) NaCl(s).
Answer: (d) NaCl(s)
In simple words: ठोस सोडियम क्लोराइड (NaCl) बिजली का संचालन नहीं करता क्योंकि इसके आयन स्वतंत्र रूप से हिल नहीं सकते हैं। बिजली चलाने के लिए आयनों को घूमने में सक्षम होना चाहिए.

🎯 Exam Tip: Remember that ionic compounds conduct electricity only in molten or aqueous states due to free-moving ions.

 

Question 2. यदि किसी सेल में चालकत्व एवं चालकता तुल्य है तो सेल स्थिरांक होगा –
(a) 1
Answer: (a) 1
In simple words: यदि किसी सेल में चालकत्व (जो बताता है कि कितनी आसानी से बिजली गुजरती है) और चालकता (जो पदार्थ की स्वाभाविक क्षमता है) बराबर हैं, तो उस सेल का स्थिरांक 1 होगा. इसका मतलब है कि सेल का डिज़ाइन ऐसा है जहाँ ये दोनों गुण सीधे-सीधे मेल खाते हैं.

🎯 Exam Tip: Recall the formula: Conductivity = Conductance × Cell Constant. If conductivity equals conductance, the cell constant must be 1.

 

Question 4. चालकता (विशिष्ट चालकत्व) की इकाई है -
(a) ohm⁻¹
(b) ohm⁻¹ cm⁻¹
(c) ohm⁻² cm² equvi⁻¹
(d) ohm⁻¹ cm².
Answer: (b) ohm⁻¹ cm⁻¹
In simple words: चालकता, जिसे विशिष्ट चालकत्व भी कहते हैं, यह बताती है कि कोई पदार्थ कितनी अच्छी तरह बिजली का संचालन करता है. इसकी इकाई ओम इनवर्स सेंटीमीटर इनवर्स (ohm⁻¹ cm⁻¹) है.

🎯 Exam Tip: The unit for resistivity is ohm-cm, so conductivity, being its reciprocal, has the unit ohm⁻¹ cm⁻¹.

 

Question 5. यदि सेल में रेडॉक्स अभिक्रिया सम्पन्न हो रही है तो सेल का विद्युत वाहक बल (e.m.f) होगा -
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) शून्य
(d) एक।
Answer: (a) धनात्मक
In simple words: अगर किसी सेल में रासायनिक अभिक्रिया (रेडॉक्स अभिक्रिया) अपने आप हो रही है और बिजली बना रही है, तो उसका विद्युत वाहक बल हमेशा धनात्मक होगा. यह दर्शाता है कि सेल काम कर रहा है और ऊर्जा उत्पन्न कर रहा है.

🎯 Exam Tip: A positive E.M.F. indicates a spontaneous reaction, meaning the cell can generate electrical energy.

 

Question 6. विद्युत् रासायनिक श्रेणी के आधार पर बताइये कि जिंक एवं कॉपर से निर्मित सेल के लिए निम्न में से कौन-सा कथन सत्य होगा?
(a) जिंक कैथोड़ एवं कॉपर ऐनोड का कार्य करेंगे
(b) जिंक ऐनोड एवं कॉपर कैथोड का कार्य करेंगे
(c) इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह कॉपर से जिंक की ओर रहता है।
(d) कॉपर इलेक्ट्रोड घुलने लगता है और जिंक इलेक्ट्रोड पर जिंक निक्षेपित होता है।
Answer: (b) जिंक ऐनोड एवं कॉपर कैथोड का कार्य करेंगे
In simple words: विद्युत् रासायनिक श्रेणी में जिंक, कॉपर से ऊपर होता है, जिसका मतलब है कि जिंक कॉपर की तुलना में अधिक आसानी से इलेक्ट्रॉन खो देता है. इसलिए, जिंक ऐनोड (जहाँ ऑक्सीकरण होता है) के रूप में काम करेगा और कॉपर कैथोड (जहाँ अपचयन होता है) के रूप में काम करेगा.

🎯 Exam Tip: In an electrochemical cell, the metal with a more negative standard electrode potential acts as the anode (undergoes oxidation).

 

Question 7. एक मोल H₂O के O₂ में ऑक्सीकृत होने के लिए कितने कूलॉम्ब आवेश की आवश्यकता होगी ?
(a) 1.93 x 10⁵C
(b) 9.65 x 10⁴C
(c) 6.023 x 10²³C
(d) 4.825 x 10⁴C.
Answer: (b) 9.65 x 10⁴C
In simple words: पानी (H₂O) के एक मोल को ऑक्सीजन (O₂) में बदलने के लिए 2 मोल इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है. एक मोल इलेक्ट्रॉन पर 96500 कूलॉम्ब आवेश होता है, जिसे फैराडे स्थिरांक कहते हैं. इसलिए, कुल आवेश 2 गुणा 96500 कूलॉम्ब होगा, जो 193000 कूलॉम्ब या 1.93 x 10⁵ कूलॉम्ब होता है.

🎯 Exam Tip: To solve this, remember that the oxidation of \( \text{H}_2\text{O} \) to \( \text{O}_2 \) involves a transfer of 2 electrons per mole of \( \text{H}_2\text{O} \), and 1 Faraday = 96500 C.

 

Question 9. जंग लगना निम्न में से किसका मिश्रण होता है ?
(a) FeO एवं Fe(OH)₃
(b) FeO एवं Fe(OH)₂
(c) Fe₂O₃ एवं Fe (OH)₃
(d) Fe₃O₄ एवं Fe (OH)₃
Answer: (c) Fe₂O₃ एवं Fe (OH)₃
In simple words: जंग, जिसे लोहे का संक्षारण भी कहते हैं, यह असल में हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃.xH₂O) और फेरिक हाइड्रोक्साइड (Fe(OH)₃) का मिश्रण होती है. यह एक लाल-भूरे रंग का पाउडर जैसा पदार्थ होता है जो नमी और हवा की मौजूदगी में बनता है.

🎯 Exam Tip: Remember that rust is primarily hydrated iron(III) oxide, often represented as \( \text{Fe}_2\text{O}_3.\text{xH}_2\text{O} \) and \( \text{Fe(OH)}_3 \).

 

Question 10. जब सीसा संचायक सेल निरावेशित (Discharge) होता है तो –
(a) SO₂ उत्पन्न होती है
(b) PbSO₄ नष्ट होता है
(c) लेड बनता है
(d) H₂SO₄ नष्ट होता है।
Answer: (d) H₂SO₄ नष्ट होता है।
In simple words: जब एक सीसा संचायक बैटरी डिस्चार्ज होती है, तो उसके अंदर की सल्फ्यूरिक एसिड (H₂SO₄) खर्च हो जाती है. यह सल्फ्यूरिक एसिड लेड सल्फेट (PbSO₄) बनाने में इस्तेमाल होती है, जिससे एसिड की मात्रा कम हो जाती है और वह 'नष्ट' होती हुई प्रतीत होती है.

🎯 Exam Tip: During discharge, sulfuric acid is consumed and lead sulfate is formed at both electrodes, leading to a decrease in acid concentration.

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 3 विद्युत रसायन अति लघूतात्मक प्रश्न

 

Question 1. क्या आप एक जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट का विलयन रख सकते हैं ?
Answer: नहीं, हम जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट का विलयन नहीं रख सकते हैं. जिंक विद्युत् रासायनिक श्रेणी में कॉपर से ऊपर होता है.
\( \text{Zn} + \text{CuSO}_4 \rightarrow \text{ZnSO}_4 + \text{Cu} \)
इसलिए, जिंक कॉपर सल्फेट के विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देगा. यह एक अपने आप होने वाली रासायनिक अभिक्रिया होगी. इस कारण से जिंक का पात्र धीरे-धीरे घुलने लगेगा और उसमें छेद हो जाएंगे. जिंक धातु कॉपर की तुलना में अधिक प्रतिक्रियाशील होती है, इसलिए वह कॉपर को उसके लवण विलयन से बाहर निकाल देती है.
In simple words: नहीं, जिंक के बर्तन में कॉपर सल्फेट नहीं रख सकते. जिंक कॉपर से ज़्यादा क्रियाशील है, वह कॉपर सल्फेट से कॉपर को अलग कर देगा और बर्तन में छेद हो जाएंगे.

🎯 Exam Tip: Remember the reactivity series: a more reactive metal will displace a less reactive metal from its salt solution. In this case, zinc is more reactive than copper.

 

Question 2. मानक इलेक्ट्रोड विभव की तालिका का निरीक्षण कर तीन ऐसे पदार्थ बताइए जो अनुकूल परिस्थितियों में फेरस आयनों को ऑक्सीकृत कर सकते हैं।
Answer: फेरस आयनों \( (\text{Fe}^{2+}) \) को ऑक्सीकृत करने का मतलब है कि वे इलेक्ट्रॉन खोकर फेरिक आयन \( (\text{Fe}^{3+}) \) में बदल जाएँ.
\( \text{Fe}^{2+} \rightarrow \text{Fe}^{3+} + \text{e}^{-} \)
केवल वही पदार्थ फेरस आयनों \( (\text{Fe}^{2+}) \) को ऑक्सीकृत कर सकते हैं जो मजबूत ऑक्सीकारक हों. ऐसे पदार्थों का अपचयन विभव \( \text{Fe}^{2+} \to \text{Fe}^{3+} \) के अपचयन विभव से अधिक होना चाहिए. कुछ ऐसे पदार्थ हैं जो फेरस आयनों को ऑक्सीकृत कर सकते हैं, जैसे कि हाइड्रोजन परॉक्साइड \( (\text{H}_2\text{O}_2) \), परमैंगनेट आयन \( (\text{MnO}_4^-) \) और डाइक्रोमेट आयन \( (\text{Cr}_2\text{O}_7^{2-}) \). ये सभी पदार्थ आसानी से इलेक्ट्रॉन ले सकते हैं और इस प्रकार \( \text{Fe}^{2+} \) से इलेक्ट्रॉन निकलवाकर उसे \( \text{Fe}^{3+} \) में बदल देते हैं.
In simple words: फेरस आयनों \( (\text{Fe}^{2+}) \) को ऑक्सीकृत करने के लिए हमें ऐसे मजबूत ऑक्सीकारक चाहिए जो उनसे इलेक्ट्रॉन ले सकें. जैसे हाइड्रोजन परॉक्साइड, परमैंगनेट आयन और डाइक्रोमेट आयन.

🎯 Exam Tip: An oxidizing agent must have a higher reduction potential than the species it is oxidizing. In this case, find species with reduction potentials greater than that of the \( \text{Fe}^{3+}/\text{Fe}^{2+} \) couple.

 

Question 3. किसी विलयन की चालकता तनुता के साथ क्यों घटती है?
Answer: विलयन की चालकता, विलयन के एक इकाई आयतन में मौजूद आयनों की चालकता होती है. जब हम किसी विलयन को पतला करते हैं (तनुता बढ़ाते हैं), तो उस विलयन के प्रति इकाई आयतन में आयनों की कुल संख्या कम हो जाती है. इसका मतलब है कि एक छोटे से हिस्से में बिजली ले जाने वाले कण कम हो जाते हैं. इसलिए, विलयन की चालकता भी घट जाती है. भले ही कुल आयनों की संख्या वही रहे, लेकिन वे ज़्यादा बड़े आयतन में फैल जाते हैं. यह कमजोर और मजबूत दोनों प्रकार के इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए सच है.
In simple words: विलयन को पतला करने पर, एक छोटे से आयतन में बिजली ले जाने वाले आयनों की संख्या कम हो जाती है, जिससे विलयन की बिजली चलाने की क्षमता (चालकता) कम हो जाती है.

🎯 Exam Tip: Conductivity depends on the number of ions per unit volume; dilution reduces this number, hence reducing conductivity.

 

Question 4. उन धातुओं की एक सूची बनाइए जिनका विद्युत् अपघटनी निष्कर्षण होता है।
Answer: विद्युत् अपघटनी निष्कर्षण उन धातुओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो बहुत क्रियाशील होती हैं और जिन्हें उनके अयस्कों से रासायनिक रूप से अलग करना मुश्किल होता है. ऐसी धातुओं की सूची में सोडियम \( (\text{Na}) \), कैल्शियम \( (\text{Ca}) \), मैग्नीशियम \( (\text{Mg}) \) और एल्युमीनियम \( (\text{Al}) \) शामिल हैं. इन धातुओं को आमतौर पर उनके पिघले हुए लवणों के विद्युत् अपघटन से प्राप्त किया जाता है.
In simple words: सोडियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एल्युमीनियम जैसी धातुओं को उनके यौगिकों से बिजली का उपयोग करके अलग किया जाता है.

🎯 Exam Tip: Electrolytic extraction is preferred for highly reactive metals because chemical reduction methods are often ineffective or too energy-intensive.

 

Question 5. हाइड्रोजन को छोड़कर ईंधन सेलों में प्रयुक्त किये जा सकने वाले दो अन्य पदार्थ सुझाइए।
Answer: ईंधन सेल ऐसे उपकरण होते हैं जो रासायनिक ऊर्जा को सीधे विद्युत् ऊर्जा में बदलते हैं. हाइड्रोजन एक सामान्य ईंधन है, लेकिन इसके अलावा भी कई पदार्थ हैं जिनका उपयोग ईंधन सेल में किया जा सकता है. ऐसे दो अन्य पदार्थ मेथेनॉल \( (\text{CH}_3\text{OH}) \) और मेथेन \( (\text{CH}_4) \) हैं. ये दोनों ही कार्बनिक यौगिक हैं जो ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करके बिजली पैदा कर सकते हैं और पानी या कार्बन डाइऑक्साइड जैसे उत्पाद बनाते हैं. इन ईंधनों का उपयोग विभिन्न अनुप्रयोगों में किया जाता है, खासकर पोर्टेबल पावर स्रोतों में.
(i) मेथेनॉल \( (\text{CH}_3\text{OH}) \)
(ii) मेथेन \( (\text{CH}_4) \)
In simple words: हाइड्रोजन के अलावा, मेथेनॉल और मेथेन दो ऐसे पदार्थ हैं जिनका उपयोग ईंधन सेल में बिजली बनाने के लिए किया जा सकता है.

🎯 Exam Tip: Fuel cells can use various fuels beyond hydrogen, especially those that can be oxidized electrochemically, like small organic molecules.

 

Question 6. निम्नलिखित धातुओं को उस क्रम में व्यवस्थित कीजिए जिसमें वे एक-दूसरे को उनके लवणों के विलयनों में से प्रतिस्थापित करती हैं- Al
Answer: चूंकि प्रश्न में केवल एल्युमीनियम (Al) दिया गया है और अन्य धातुओं की पूरी सूची नहीं है, तो हम यह मान लेते हैं कि हमें एल्युमीनियम को अन्य संभावित धातुओं के साथ क्रम में लगाना है. सामान्यतः, विद्युत् रासायनिक श्रेणी में जो धातुएँ ऊपर होती हैं, वे अपने से नीचे वाली धातुओं को उनके लवणों के विलयनों से विस्थापित कर सकती हैं. इसलिए, एल्युमीनियम तांबे (Cu), चांदी (Ag) या सोने (Au) जैसी धातुओं को विस्थापित कर सकता है, क्योंकि ये सभी एल्युमीनियम से कम क्रियाशील हैं. इसका क्रम इस प्रकार होगा: \( \text{Al} > \text{Cu} \). यदि और धातुएं दी गई होतीं तो हम पूर्ण क्रम बता पाते.
In simple words: एल्युमीनियम (Al) एक ज़्यादा क्रियाशील धातु है, इसलिए यह उन धातुओं को उनके नमक के घोल से हटा सकता है जो उससे कम क्रियाशील होती हैं, जैसे कॉपर (Cu).

🎯 Exam Tip: Remember that a metal's ability to displace another metal is determined by its position in the electrochemical series; a more reactive metal can displace a less reactive one.

 

Question 1. निकाय Mg²⁺ | Mg का मानक इलेक्ट्रोड विभवे आप किस प्रकार ज्ञात करेंगे ?
Answer: मैग्नीशियम (Mg) के मानक इलेक्ट्रोड विभव \( (\text{Mg}^{2+} | \text{Mg}) \) को ज्ञात करने के लिए, हम एक गैल्वेनिक सेल बनाते हैं. इस सेल में एक इलेक्ट्रोड मैग्नीशियम का होता है: एक मैग्नीशियम का तार जिसे 1 M मैग्नीशियम सल्फेट \( (\text{MgSO}_4) \) के विलयन में डुबोया जाता है. दूसरा इलेक्ट्रोड मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) होता है, जिसमें 1 वायुमंडलीय दबाव पर \( \text{H}_2 \) गैस को 1 M \( \text{H}^+ \) आयनों वाले विलयन में एक प्लैटिनम (Pt) तार पर प्रवाहित किया जाता है. SHE का विभव शून्य माना जाता है, जिससे हमें दूसरे इलेक्ट्रोड का विभव सीधे पता चल जाता है. यह सेटअप यह दर्शाता है कि मैग्नीशियम हाइड्रोजन की तुलना में अधिक प्रतिक्रियाशील है, इसलिए इलेक्ट्रॉन मैग्नीशियम से SHE की ओर बहेंगे.
इस सेल का प्रतिनिधित्व इस प्रकार किया जाता है:
\( \text{Mg} | \text{Mg}^{2+} (1 \text{ M}) || \text{H}^+ (1 \text{ M}) | \text{H}_2 (1 \text{ atm}), \text{Pt} \)
सेल का विद्युत वाहक बल (e.m.f.) मापा जाता है. चूंकि SHE का मानक इलेक्ट्रोड विभव 0.0 V है, इसलिए मापा गया सेल विभव सीधे मैग्नीशियम इलेक्ट्रोड का मानक अपचयन विभव देता है.
\( \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} = \text{E}^{\circ}_{\text{कैथोड}} - \text{E}^{\circ}_{\text{ऐनोड}} \)
\( \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} = \text{E}^{\circ}_{\text{H}^+/\text{H}_2} - \text{E}^{\circ}_{\text{Mg}^{2+}/\text{Mg}} \)
\( \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} = 0.0 - \text{E}^{\circ}_{\text{Mg}^{2+}/\text{Mg}} \)
\( \implies \text{E}^{\circ}_{\text{Mg}^{2+}/\text{Mg}} = -\text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} \)
इस प्रकार, मापा गया सेल विभव का ऋणात्मक मान मैग्नीशियम का मानक इलेक्ट्रोड विभव होगा. यह हमें बताता है कि मैग्नीशियम कितनी आसानी से इलेक्ट्रॉन खो सकता है.
वोल्टमीटरMgMgSO₄विलयन 1 MPtHClविलयन 1 M1 bar दाबपर H₂ गैसलवण सेतुe⁻
In simple words: मैग्नीशियम का मानक इलेक्ट्रोड विभव जानने के लिए, हम एक मैग्नीशियम इलेक्ट्रोड को मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड से जोड़ते हैं. फिर पूरे सेल का वोल्टेज मापते हैं. क्योंकि हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का वोल्टेज शून्य होता है, इसलिए मापा गया वोल्टेज ही मैग्नीशियम का मानक इलेक्ट्रोड विभव होता है.

🎯 Exam Tip: When using a standard hydrogen electrode (SHE) as a reference, remember that its potential is defined as 0.0 V, allowing direct measurement of the unknown electrode's potential.

 

Question 2. pH = 10 के विलयन के सम्पर्क वाले हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के विभव का परिकलन कीजिए।
Answer: हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के लिए नर्सट समीकरण इस प्रकार है:
\( \text{H}^+ + \text{e}^- \rightarrow \frac{1}{2} \text{H}_2 \)
दिया गया है कि \( \text{pH} = 10 \).
हम जानते हैं कि \( \text{pH} = -\text{log}[\text{H}^+] \).
\( \implies 10 = -\text{log}[\text{H}^+] \)
\( \implies [\text{H}^+] = 10^{-10} \text{ M} \)
नर्सट समीकरण से:
\( \text{E}_{\text{H}^+/\frac{1}{2}\text{H}_2} = \text{E}^{\circ}_{\text{H}^+/\frac{1}{2}\text{H}_2} - \frac{0.059}{\text{n}} \text{log} \frac{1}{[\text{H}^+]} \)
मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के लिए \( \text{E}^{\circ}_{\text{H}^+/\frac{1}{2}\text{H}_2} = 0.0 \text{ V} \) और \( \text{n} = 1 \) (स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या).
\( \text{E}_{\text{H}^+/\frac{1}{2}\text{H}_2} = 0.0 - \frac{0.059}{1} \text{log} \frac{1}{10^{-10}} \)
\( \implies \text{E}_{\text{H}^+/\frac{1}{2}\text{H}_2} = 0.0 - 0.059 \text{log} (10^{10}) \)
\( \implies \text{E}_{\text{H}^+/\frac{1}{2}\text{H}_2} = -0.059 \times 10 \)
\( \implies \text{E}_{\text{H}^+/\frac{1}{2}\text{H}_2} = -0.59 \text{ V} \)
अतः, \( \text{pH} = 10 \) वाले विलयन के संपर्क में हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव \( -0.59 \text{ V} \) होगा. यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे विलयन अधिक क्षारीय होता है, हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का अपचयन विभव घटता जाता है.
In simple words: यदि किसी घोल का pH 10 है, तो उसमें हाइड्रोजन आयन की सांद्रता \( 10^{-10} \) होगी. नर्सट समीकरण का उपयोग करके, हम हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव \( -0.59 \text{ V} \) पाते हैं.

🎯 Exam Tip: Always remember the relationship \( \text{pH} = -\text{log}[\text{H}^+] \) and the standard electrode potential for SHE is 0.0 V when using the Nernst equation for hydrogen electrodes.

 

Question 3. एक सेल के e.m.f. का परिकलन कीजिए जिसमें नम्नलिखित अभिक्रिया होती है। दिया गया है। E° सेल = 1.05 V Ni(s) + 2Ag+ (0.002 M) → Ni2+ (0.160 M) + 2Ag(s)
Answer: सेल अभिक्रिया इस प्रकार है:
\( \text{Ni}_{(\text{s})} + 2\text{Ag}^{+}_{(\text{aq})} (0.002 \text{ M}) \rightarrow \text{Ni}^{2+}_{(\text{aq})} (0.160 \text{ M}) + 2\text{Ag}_{(\text{s})} \)
दिया गया है कि मानक सेल विभव \( \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} = 1.05 \text{ V} \).
नर्सट समीकरण का उपयोग करके, सेल का e.m.f. \( (\text{E}_{\text{सेल}}) \) ज्ञात किया जा सकता है:
\( \text{E}_{\text{सेल}} = \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} - \frac{0.059}{\text{n}} \text{log} \frac{[\text{Ni}^{2+}]}{[\text{Ag}^{+}]^2} \)
इस अभिक्रिया में स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( \text{n} = 2 \) है (जैसा कि \( \text{Ni} \rightarrow \text{Ni}^{2+} + 2\text{e}^- \) और \( 2\text{Ag}^+ + 2\text{e}^- \rightarrow 2\text{Ag} \) से पता चलता है).
दिए गए मानों को समीकरण में रखने पर:
\( \text{E}_{\text{सेल}} = 1.05 - \frac{0.059}{2} \text{log} \frac{0.160}{(0.002)^2} \)
\( \implies \text{E}_{\text{सेल}} = 1.05 - \frac{0.059}{2} \text{log} \frac{0.160}{0.000004} \)
\( \implies \text{E}_{\text{सेल}} = 1.05 - \frac{0.059}{2} \text{log} (40000) \)
\( \implies \text{E}_{\text{सेल}} = 1.05 - \frac{0.059}{2} \times 4.602 \)
\( \implies \text{E}_{\text{सेल}} = 1.05 - 0.0295 \times 4.602 \)
\( \implies \text{E}_{\text{सेल}} = 1.05 - 0.135759 \)
\( \implies \text{E}_{\text{सेल}} = 0.914241 \text{ V} \)
लगभग, \( \text{E}_{\text{सेल}} = 0.91 \text{ V} \).
यह गणना दर्शाती है कि दिए गए सांद्रताओं पर सेल का विभव मानक विभव से थोड़ा कम है, जो आयनों की सांद्रता में परिवर्तन के कारण होता है.
In simple words: इस सेल के लिए नर्सट समीकरण का उपयोग करके, हम दिए गए मानक सेल विभव \( (\text{1.05 V}) \) और आयनों की सांद्रता का उपयोग करके सेल का वास्तविक विद्युत वाहक बल \( (\text{E}_{\text{सेल}}) \) लगभग \( 0.91 \text{ V} \) पाते हैं.

🎯 Exam Tip: Carefully apply the Nernst equation, ensuring the correct 'n' value (number of electrons transferred) and proper calculation of the reaction quotient (Q) are used.

 

Question 4. एक सेल जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है – \( 2 \mathrm{Fe}_{(a q)}^{3+}+2 \mathrm{I}_{(a q)}^{-} \rightarrow 2 \mathrm{Fe}_{(a q)}^{2+}+\mathrm{I}_{2(s)} \) का 298K ताप पर E°सेल = 0.236 v है। सेल अभिक्रिया की मानक गिब्ज ऊर्जा एवं साम्य स्थिरांक का परिकलन कीजिए।
Answer: दी गई अभिक्रिया है:
\( 2 \text{Fe}^{3+}_{(\text{aq})} + 2 \text{I}^{-}_{(\text{aq})} \rightarrow 2 \text{Fe}^{2+}_{(\text{aq})} + \text{I}_{2(\text{s})} \)
स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( (\text{n}) = 2 \).
मानक सेल विभव \( (\text{E}^{\circ}_{\text{सेल}}) = 0.236 \text{ V} \).
तापमान \( (\text{T}) = 298 \text{ K} \).
फैराडे स्थिरांक \( (\text{F}) = 96500 \text{ C mol}^{-1} \).

**1. मानक गिब्ज ऊर्जा \( (\Delta \text{G}^{\circ}) \) का परिकलन:**
सूत्र है: \( \Delta \text{G}^{\circ} = -\text{nF E}^{\circ}_{\text{सेल}} \)
\( \Delta \text{G}^{\circ} = -(2 \text{ mol}) \times (96500 \text{ C mol}^{-1}) \times (0.236 \text{ V}) \)
\( \Delta \text{G}^{\circ} = -45548 \text{ J} \)
\( \Delta \text{G}^{\circ} = -45.55 \text{ kJ mol}^{-1} \)
यह ऋणात्मक मान दर्शाता है कि अभिक्रिया मानक परिस्थितियों में अपने आप होती है.

**2. साम्य स्थिरांक \( (\text{K}_{\text{c}}) \) का परिकलन:**
सूत्र है: \( \Delta \text{G}^{\circ} = -2.303 \text{ RT log K}_{\text{c}} \)
\( -45548 \text{ J} = -2.303 \times (8.314 \text{ J mol}^{-1} \text{ K}^{-1}) \times (298 \text{ K}) \times \text{log K}_{\text{c}} \)
\( -45548 = -5705.8 \times \text{log K}_{\text{c}} \)
\( \text{log K}_{\text{c}} = \frac{-45548}{-5705.8} \)
\( \text{log K}_{\text{c}} = 7.983 \)
\( \text{K}_{\text{c}} = \text{antilog}(7.983) \)
\( \text{K}_{\text{c}} = 9.616 \times 10^7 \)
यह बड़ा साम्य स्थिरांक मान इंगित करता है कि साम्यावस्था पर उत्पाद अधिक मात्रा में बनते हैं. इस प्रकार, अभिक्रिया के लिए मानक गिब्ज ऊर्जा \( -45.55 \text{ kJ mol}^{-1} \) है और साम्य स्थिरांक \( 9.616 \times 10^7 \) है, जो एक मजबूत स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया को दर्शाता है.
In simple words: इस सेल अभिक्रिया के लिए मानक सेल विभव \( (\text{0.236 V}) \) का उपयोग करके, हम पाते हैं कि मानक गिब्ज ऊर्जा \( -45.55 \text{ kJ mol}^{-1} \) है. फिर, इस मान का उपयोग करके साम्य स्थिरांक \( (\text{K}_{\text{c}}) \) \( 9.616 \times 10^7 \) आता है.

🎯 Exam Tip: Ensure you use the correct units for all constants and convert the Gibbs free energy to kJ/mol if required. A positive \( \text{E}^{\circ}_{\text{cell}} \) corresponds to a negative \( \Delta \text{G}^{\circ} \) and a large \( \text{K}_{\text{c}} \), indicating spontaneity.

 

Question 5. जल की \( \Delta^{\circ}_{\text{m}} \) ज्ञात करने का एक तरीका बताइए।
Answer: जल \( (\text{H}_2\text{O}) \) एक कमजोर इलेक्ट्रोलाइट है, जिसका मतलब है कि यह पानी में पूरी तरह से आयनीकृत नहीं होता है. कोलराउश के नियम का उपयोग करके, हम मजबूत इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए अनन्त तनुता पर मोलर चालकता ज्ञात कर सकते हैं, लेकिन कमजोर इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए यह सीधे संभव नहीं है. जल की अनन्त तनुता पर मोलर चालकता \( (\Lambda^{\circ}_{\text{m}(\text{H}_2\text{O})}) \) को ज्ञात करने के लिए, हम मजबूत इलेक्ट्रोलाइट्स, जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड \( (\text{NaOH}) \), हाइड्रोक्लोरिक अम्ल \( (\text{HCl}) \) और सोडियम क्लोराइड \( (\text{NaCl}) \) की अनन्त तनुता पर मोलर चालकता का उपयोग कर सकते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि जल की आयनीकरण प्रतिक्रिया को इन मजबूत इलेक्ट्रोलाइट्स की प्रतिक्रियाओं के संयोजन के रूप में देखा जा सकता है.
सूत्र इस प्रकार है:
\( \Lambda^{\circ}_{\text{m}(\text{H}_2\text{O})} = \Lambda^{\circ}_{\text{m}(\text{NaOH})} + \Lambda^{\circ}_{\text{m}(\text{HCl})} - \Lambda^{\circ}_{\text{m}(\text{NaCl})} \)
इस विधि का उपयोग करके, हम कमजोर इलेक्ट्रोलाइट्स की मोलर चालकता को उन मजबूत इलेक्ट्रोलाइट्स की मोलर चालकता के आधार पर गणना कर सकते हैं, जिनके आयन कमजोर इलेक्ट्रोलाइट के समान होते हैं. इस प्रकार, जल की सीमान्त मोलर चालकता प्राप्त की जा सकती है.
In simple words: पानी की अधिकतम मोलर चालकता \( (\Delta^{\circ}_{\text{m}}) \) जानने के लिए, हम मजबूत रसायनों जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम क्लोराइड की मोलर चालकता का उपयोग करते हैं. हम उन्हें जोड़ते और घटाते हैं ताकि पानी का मान मिल सके.

🎯 Exam Tip: Kohlrausch's Law is essential for determining the molar conductivity at infinite dilution for weak electrolytes, by using the molar conductivities of strong electrolytes whose ions combine to form the weak electrolyte.

 

Question 6. 0.025 mol L⁻¹ मेथेनोइक अम्ल की चालकता 46.1 S cm² mol⁻¹ है। इसकी वियोजन मात्रा एवं वियोजन स्थिरांक का परिकलन कीजिए। दिया गया है कि \( \Delta^{\circ} (\text{H}^+) = 349.6 \text{ S cm}^2 \text{ mol}^{-1} \) एवं \( \Delta(\text{HCOO}^-) = 54.6 \text{ S cm}^2 \text{ mol}^{-1} \).
Answer: मेथेनोइक अम्ल \( (\text{HCOOH}) \) के लिए:
दिया गया है:
सांद्रता \( (\text{C}) = 0.025 \text{ mol L}^{-1} \)
मोलर चालकता \( (\Lambda_{\text{m}}) = 46.1 \text{ S cm}^2 \text{ mol}^{-1} \)
हाइड्रोजन आयन की सीमान्त मोलर चालकता \( (\lambda^{\circ}_{\text{H}^+}) = 349.6 \text{ S cm}^2 \text{ mol}^{-1} \)
फॉर्मेट आयन की सीमान्त मोलर चालकता \( (\lambda^{\circ}_{\text{HCOO}^-}) = 54.6 \text{ S cm}^2 \text{ mol}^{-1} \)

**1. अनन्त तनुता पर मोलर चालकता \( (\Lambda^{\circ}_{\text{m}}) \) का परिकलन:**
कोलराउश के नियम के अनुसार:
\( \Lambda^{\circ}_{\text{m}(\text{HCOOH})} = \lambda^{\circ}_{\text{H}^+} + \lambda^{\circ}_{\text{HCOO}^-} \)
\( \Lambda^{\circ}_{\text{m}} = 349.6 + 54.6 \)
\( \Lambda^{\circ}_{\text{m}} = 404.2 \text{ S cm}^2 \text{ mol}^{-1} \)

**2. वियोजन की मात्रा \( (\alpha) \) का परिकलन:**
सूत्र है: \( \alpha = \frac{\Lambda_{\text{m}}}{\Lambda^{\circ}_{\text{m}}} \)
\( \alpha = \frac{46.1}{404.2} \)
\( \alpha = 0.114 \)
इसका मतलब है कि लगभग 11.4% मेथेनोइक अम्ल आयनीकृत होता है.

**3. वियोजन स्थिरांक \( (\text{K}) \) का परिकलन:**
कमजोर अम्ल के लिए वियोजन स्थिरांक का सूत्र है:
\( \text{K} = \frac{\text{C}\alpha^2}{1-\alpha} \)
\( \text{K} = \frac{0.025 \times (0.114)^2}{1 - 0.114} \)
\( \text{K} = \frac{0.025 \times 0.012996}{0.886} \)
\( \text{K} = \frac{0.0003249}{0.886} \)
\( \text{K} = 0.0003666 \)
\( \text{K} = 3.67 \times 10^{-4} \)
इस प्रकार, मेथेनोइक अम्ल की वियोजन मात्रा 0.114 है और वियोजन स्थिरांक \( 3.67 \times 10^{-4} \) है. यह दिखाता है कि मेथेनोइक अम्ल एक कमजोर अम्ल है, क्योंकि इसकी वियोजन मात्रा कम है.
In simple words: मेथेनोइक अम्ल के लिए, हम पहले कुल मोलर चालकता \( (\text{404.2 S cm}^2 \text{ mol}^{-1}) \) निकालते हैं. फिर, इस मान और दी गई मोलर चालकता \( (\text{46.1 S cm}^2 \text{ mol}^{-1}) \) का उपयोग करके वियोजन की मात्रा \( (\alpha) \) \( 0.114 \) मिलती है. अंत में, वियोजन स्थिरांक \( (\text{K}) \) \( 3.67 \times 10^{-4} \) आता है.

🎯 Exam Tip: For weak electrolytes, always calculate \( \Lambda^{\circ}_{\text{m}} \) using Kohlrausch's law, then \( \alpha \), and finally \( \text{K} \) using the formula \( \text{K} = \frac{\text{C}\alpha^2}{1-\alpha} \).

 

Question 7. उन धातुओं की एक सूची बनाइए जिनका विद्युत् अपघटनी निष्कर्षण होता है?
Answer: विद्युत् अपघटनी निष्कर्षण उन धातुओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो बहुत क्रियाशील होती हैं. इन धातुओं को उनके अयस्कों से बिजली की मदद से अलग किया जाता है. कुछ ऐसी धातुओं के उदाहरण हैं: सोडियम \( (\text{Na}) \), कैल्शियम \( (\text{Ca}) \), मैग्नीशियम \( (\text{Mg}) \) और एल्युमीनियम \( (\text{Al}) \). ये धातुएं इतनी क्रियाशील होती हैं कि उन्हें रासायनिक तरीकों से शुद्ध करना मुश्किल होता है, इसलिए बिजली का उपयोग ही सबसे प्रभावी तरीका होता है.
In simple words: सोडियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एल्युमीनियम जैसी धातुओं को बिजली का उपयोग करके उनके यौगिकों से निकाला जाता है, क्योंकि वे बहुत क्रियाशील होती हैं.

🎯 Exam Tip: Electrolytic extraction is typically used for highly electropositive metals found at the top of the electrochemical series, as they are difficult to reduce by conventional chemical methods.

 

Question 8. निम्नलिखित अभिक्रिया में \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} \) आयनों के एक मोल के अपचयन के लिए कूलॉम्ब में विद्युत् की कितनी मात्रा की आवश्यकता होती है ? \( \mathrm{Cr}_{2} \mathrm{O}_{7}^{2-}+14 \mathrm{H}^{+}+6 e^{-} \rightarrow 2 \mathrm{Cr}^{3+}+7 \mathrm{H}_{2} \mathrm{O} \)
Answer: दी गई अभिक्रिया है:
\( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} + 14\text{H}^+ + 6\text{e}^- \rightarrow 2\text{Cr}^{3+} + 7\text{H}_2\text{O} \)
इस अभिक्रिया से स्पष्ट है कि \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} \) के एक मोल के अपचयन के लिए 6 मोल इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है. हमें यह भी पता है कि एक मोल इलेक्ट्रॉन पर 96500 कूलॉम्ब \( (\text{C}) \) आवेश होता है, जिसे 1 फैराडे \( (\text{F}) \) कहते हैं. इसलिए, कुल आवश्यक विद्युत् आवेश की गणना इस प्रकार की जाएगी:
विद्युत् की मात्रा = \( \text{n} \times \text{F} \)
यहाँ \( \text{n} = 6 \) (स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या).
विद्युत् की मात्रा = \( 6 \times 96500 \text{ C} \)
विद्युत् की मात्रा = \( 579000 \text{ C} \)
इस प्रकार, \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} \) के एक मोल को \( \text{Cr}^{3+} \) में अपचयित करने के लिए 579000 कूलॉम्ब विद्युत् की आवश्यकता होगी. यह आवेश की मात्रा हमें स्टोइकियोमेट्री और फैराडे स्थिरांक के बीच के संबंध को समझने में मदद करती है.
In simple words: \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} \) के एक मोल को \( \text{Cr}^{3+} \) में बदलने के लिए 6 मोल इलेक्ट्रॉन चाहिए होते हैं. इसका मतलब है कि कुल 579000 कूलॉम्ब बिजली की आवश्यकता होगी.

🎯 Exam Tip: To find the total charge, multiply the number of moles of electrons transferred (n) by Faraday's constant (F). Make sure 'n' is correctly determined from the balanced redox equation.

 

Question 9. चार्जिंग के दौरान प्रयुक्त पदार्थों का विशेष उल्लेख करते हुए लैड-संचायक सेल की चार्जिग क्रिया-विधि का वर्णन रासायनिक अभिक्रियाओं की सहायता से कीजिए।
Answer: लैड-संचायक सेल एक पुन: आवेशित होने वाली बैटरी है जो गाड़ियों और इनवर्टर में इस्तेमाल होती है. जब यह सेल डिस्चार्ज होता है, तो लेड सल्फेट \( (\text{PbSO}_4) \) ऐनोड और कैथोड दोनों पर जमा हो जाता है और सल्फ्यूरिक अम्ल \( (\text{H}_2\text{SO}_4) \) की सांद्रता घट जाती है. सेल को चार्ज करने के लिए, हमें बाहरी स्रोत से बिजली की ऊर्जा देनी पड़ती है. इस प्रक्रिया में, सेल एक विद्युत् अपघटनी सेल की तरह काम करता है, और चार्जिंग के दौरान होने वाली अभिक्रियाएँ डिस्चार्ज के दौरान हुई अभिक्रियाओं के विपरीत होती हैं.

**चार्जिंग के दौरान होने वाली अभिक्रियाएँ:**
1. **ऐनोड पर (जहाँ ऑक्सीकरण होता है, अब यह धनात्मक इलेक्ट्रोड बन जाता है):** लेड सल्फेट \( (\text{PbSO}_4) \) ऑक्सीकृत होकर लेड डाइऑक्साइड \( (\text{PbO}_2) \) में बदलता है.
\( \text{PbSO}_{4(\text{s})} + 2\text{H}_2\text{O}_{(\text{l})} \rightarrow \text{PbO}_{2(\text{s})} + \text{SO}_{4(\text{aq})}^{2-} + 4\text{H}^{+}_{(\text{aq})} + 2\text{e}^- \)
2. **कैथोड पर (जहाँ अपचयन होता है, अब यह ऋणात्मक इलेक्ट्रोड बन जाता है):** लेड सल्फेट \( (\text{PbSO}_4) \) अपचयित होकर शुद्ध लेड \( (\text{Pb}) \) में बदलता है.
\( \text{PbSO}_{4(\text{s})} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Pb}_{(\text{s})} + \text{SO}_{4(\text{aq})}^{2-} \)

**समग्र चार्जिंग अभिक्रिया:**
दोनों इलेक्ट्रोडों पर अभिक्रियाओं को जोड़ने पर:
\( 2\text{PbSO}_{4(\text{s})} + 2\text{H}_2\text{O}_{(\text{l})} \xrightarrow{\text{चार्जिंग}} \text{Pb}_{(\text{s})} + \text{PbO}_{2(\text{s})} + 2\text{H}_2\text{SO}_{4(\text{aq})} \)
इस अभिक्रिया के परिणामस्वरूप, लेड सल्फेट \( (\text{PbSO}_4) \) फिर से लेड \( (\text{Pb}) \) और लेड डाइऑक्साइड \( (\text{PbO}_2) \) में बदल जाता है, और सल्फ्यूरिक अम्ल \( (\text{H}_2\text{SO}_4) \) की सांद्रता बढ़ जाती है, जिससे सेल फिर से चार्ज होकर ऊर्जा देने के लिए तैयार हो जाता है. इस प्रकार, लेड संचायक सेल को बार-बार चार्ज करके उपयोग किया जा सकता है.
In simple words: चार्ज करते समय, हम बैटरी को बाहर से बिजली देते हैं. इससे लेड सल्फेट वापस लेड और लेड डाइऑक्साइड में बदल जाता है, और सल्फ्यूरिक अम्ल फिर से बनता है. यह डिस्चार्ज होने की प्रक्रिया का ठीक उलटा होता है.

🎯 Exam Tip: For lead-acid batteries, remember that charging reverses the discharge reactions: lead sulfate is converted back to lead and lead dioxide, and sulfuric acid is regenerated.

 

Question 10. नीचे दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती हुई अपचायक क्षमता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए -
\( \text{K}^+ | \text{K} = -2.93\text{V}, \text{Ag}^+ | \text{Ag} = 0.80\text{V}, \text{Hg}^{2+} | \text{Hg} = 0.79 \text{ V} \)
\( \text{Mg}^{2+} | \text{Mg} = -2.37\text{V}, \text{Cr}^{3+} | \text{Cr} = -0.74 \text{ V} \).

Answer: अपचायक क्षमता किसी पदार्थ की इलेक्ट्रॉन खोने की क्षमता से संबंधित होती है. जिसका अपचयन विभव जितना कम (या जितना अधिक ऋणात्मक) होता है, उसकी इलेक्ट्रॉन खोने की प्रवृत्ति उतनी ही अधिक होती है, और वह उतना ही अच्छा अपचायक होता है. दिए गए मानक अपचयन विभव इस प्रकार हैं:
पोटैशियम \( (\text{K}^+ | \text{K}) = -2.93 \text{ V} \)
मैग्नीशियम \( (\text{Mg}^{2+} | \text{Mg}) = -2.37 \text{ V} \)
क्रोमियम \( (\text{Cr}^{3+} | \text{Cr}) = -0.74 \text{ V} \)
पारा \( (\text{Hg}^{2+} | \text{Hg}) = 0.79 \text{ V} \)
चांदी \( (\text{Ag}^+ | \text{Ag}) = 0.80 \text{ V} \)
मानक अपचयन विभवों को सबसे कम से सबसे अधिक तक व्यवस्थित करने पर, हम धातुओं की बढ़ती हुई अपचायक क्षमता का क्रम प्राप्त करते हैं. जितना कम अपचयन विभव, उतनी ही अधिक अपचायक क्षमता.
बढ़ती हुई अपचायक क्षमता का क्रम इस प्रकार है:
\( \text{Ag} < \text{Hg} < \text{Cr} < \text{Mg} < \text{K} \)
यह क्रम दर्शाता है कि पोटैशियम सबसे मजबूत अपचायक है (सबसे आसानी से इलेक्ट्रॉन खोता है), जबकि चांदी सबसे कमजोर अपचायक है (सबसे मुश्किल से इलेक्ट्रॉन खोता है).
In simple words: अपचायक क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि कोई धातु कितनी आसानी से इलेक्ट्रॉन छोड़ती है. मानक इलेक्ट्रोड विभव को देखकर, धातुओं की बढ़ती हुई अपचायक क्षमता का सही क्रम \( \text{Ag} < \text{Hg} < \text{Cr} < \text{Mg} < \text{K} \) है.

🎯 Exam Tip: A lower (more negative) standard reduction potential indicates a stronger reducing agent, as it has a greater tendency to lose electrons and get oxidized.

 

Question 11. निम्नलिखित अभिक्रियाओं वाले गैल्वेनी सेल का मानक सेल-विभव परिकलन कीजिए –
(i) \( 2\text{Cr}_{(\text{s})} + 3\text{Cd}^{2+}_{(\text{aq})} \rightarrow 2\text{Cr}^{3+}_{(\text{aq})} + 3\text{Cd}_{(\text{s})} \)
(ii) \( \text{Fe}^{2+}_{(\text{aq})} + \text{Ag}^{+}_{(\text{aq})} \rightarrow \text{Fe}^{3+}_{(\text{aq})} + \text{Ag}_{(\text{s})} \)
उपर्युक्त अभिक्रियाओं के लिए \( \Delta \text{G}^{\circ} \) तथा साम्य स्थिरांकों की गणना कीजिए।
(यदि \( \text{E}^{\circ} (\text{Cr}^{3+}/\text{Cr}) = -0.74\text{V}, \text{E}^{\circ} (\text{Cd}^{2+}/\text{Cd}) = -0.40 \text{ V}, \text{E}^{\circ}(\text{Ag}^{+}/\text{Ag}) = 0.80\text{V}, \text{E}^{\circ} (\text{Fe}^{3+}/\text{Fe}^{2+}) = 0.77 \text{ V} \)).

Answer:
**(i) अभिक्रिया: \( 2\text{Cr}_{(\text{s})} + 3\text{Cd}^{2+}_{(\text{aq})} \rightarrow 2\text{Cr}^{3+}_{(\text{aq})} + 3\text{Cd}_{(\text{s})} \)**
मानक अपचयन विभव:
\( \text{E}^{\circ}(\text{Cr}^{3+}/\text{Cr}) = -0.74 \text{ V} \) (ऑक्सीकरण)
\( \text{E}^{\circ}(\text{Cd}^{2+}/\text{Cd}) = -0.40 \text{ V} \) (अपचयन)

**मानक सेल विभव \( (\text{E}^{\circ}_{\text{सेल}}) \):**
\( \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} = \text{E}^{\circ}_{\text{कैथोड}} - \text{E}^{\circ}_{\text{ऐनोड}} \)
यहां कैथोड पर \( \text{Cd}^{2+}/\text{Cd} \) और ऐनोड पर \( \text{Cr}^{3+}/\text{Cr} \) है.
\( \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} = -0.40 \text{ V} - (-0.74 \text{ V}) \)
\( \implies \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} = -0.40 + 0.74 \text{ V} \)
\( \implies \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} = 0.34 \text{ V} \)
स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( (\text{n}) = 6 \) (क्रोमियम के ऑक्सीकरण और कैडमियम के अपचयन से).

**मानक गिब्ज ऊर्जा \( (\Delta \text{G}^{\circ}) \):**
\( \Delta \text{G}^{\circ} = -\text{nF E}^{\circ}_{\text{सेल}} \)
\( \Delta \text{G}^{\circ} = -6 \times 96500 \times 0.34 \)
\( \Delta \text{G}^{\circ} = -196860 \text{ J mol}^{-1} \)
\( \implies \Delta \text{G}^{\circ} = -196.86 \text{ kJ mol}^{-1} \)

**साम्य स्थिरांक \( (\text{K}_{\text{c}}) \):**
\( \text{log K}_{\text{c}} = \frac{-\Delta \text{G}^{\circ}}{2.303 \text{ RT}} \)
\( \text{log K}_{\text{c}} = \frac{196860}{2.303 \times 8.314 \times 298} \)
\( \text{log K}_{\text{c}} = \frac{196860}{5705.8} \)
\( \text{log K}_{\text{c}} = 34.5014 \)
\( \text{K}_{\text{c}} = \text{antilog}(34.5014) \)
\( \implies \text{K}_{\text{c}} = 3.173 \times 10^{34} \)

**(ii) अभिक्रिया: \( \text{Fe}^{2+}_{(\text{aq})} + \text{Ag}^{+}_{(\text{aq})} \rightarrow \text{Fe}^{3+}_{(\text{aq})} + \text{Ag}_{(\text{s})} \)**
मानक अपचयन विभव:
\( \text{E}^{\circ}(\text{Ag}^{+}/\text{Ag}) = 0.80 \text{ V} \) (अपचयन)
\( \text{E}^{\circ}(\text{Fe}^{3+}/\text{Fe}^{2+}) = 0.77 \text{ V} \) (ऑक्सीकरण)

**मानक सेल विभव \( (\text{E}^{\circ}_{\text{सेल}}) \):**
\( \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} = \text{E}^{\circ}_{\text{कैथोड}} - \text{E}^{\circ}_{\text{ऐनोड}} \)
यहां कैथोड पर \( \text{Ag}^{+}/\text{Ag} \) और ऐनोड पर \( \text{Fe}^{3+}/\text{Fe}^{2+} \) है.
\( \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} = 0.80 \text{ V} - 0.77 \text{ V} \)
\( \implies \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} = 0.03 \text{ V} \)
स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( (\text{n}) = 1 \).

**मानक गिब्ज ऊर्जा \( (\Delta \text{G}^{\circ}) \):**
\( \Delta \text{G}^{\circ} = -\text{nF E}^{\circ}_{\text{सेल}} \)
\( \Delta \text{G}^{\circ} = -1 \times 96500 \times 0.03 \)
\( \Delta \text{G}^{\circ} = -2895 \text{ J mol}^{-1} \)
\( \implies \Delta \text{G}^{\circ} = -2.895 \text{ kJ mol}^{-1} \)

**साम्य स्थिरांक \( (\text{K}_{\text{c}}) \):**
\( \text{log K}_{\text{c}} = \frac{-\Delta \text{G}^{\circ}}{2.303 \text{ RT}} \)
\( \text{log K}_{\text{c}} = \frac{2895}{2.303 \times 8.314 \times 298} \)
\( \text{log K}_{\text{c}} = \frac{2895}{5705.8} \)
\( \text{log K}_{\text{c}} = 0.5074 \)
\( \text{K}_{\text{c}} = \text{antilog}(0.5074) \)
\( \implies \text{K}_{\text{c}} = 3.22 \)
इन गणनाओं से हमें पता चलता है कि दोनों अभिक्रियाएँ स्वतःस्फूर्त हैं, क्योंकि उनके \( \text{E}^{\circ}_{\text{सेल}} \) धनात्मक हैं और \( \Delta \text{G}^{\circ} \) ऋणात्मक हैं, तथा उनके साम्य स्थिरांक 1 से बड़े हैं.
In simple words: पहली अभिक्रिया \( (\text{Cr} + \text{Cd}^{2+}) \) के लिए, मानक सेल विभव \( 0.34 \text{ V} \) है, मानक गिब्ज ऊर्जा \( -196.86 \text{ kJ mol}^{-1} \) है, और साम्य स्थिरांक \( 3.173 \times 10^{34} \) है. दूसरी अभिक्रिया \( (\text{Fe}^{2+} + \text{Ag}^+) \) के लिए, मानक सेल विभव \( 0.03 \text{ V} \) है, मानक गिब्ज ऊर्जा \( -2.895 \text{ kJ mol}^{-1} \) है, और साम्य स्थिरांक \( 3.22 \) है.

🎯 Exam Tip: Always identify the anode (oxidation) and cathode (reduction) correctly from the given electrode potentials. A more negative potential means greater tendency to oxidize, acting as the anode. Ensure the correct 'n' value is used for each reaction.

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 3 विद्युत रसायन निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 2. उस गैल्वैनी सेल को दर्शाइए जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है –
\( \text{Zn}_{(\text{s})} + 2\text{Ag}^{+}_{(\text{aq})} \rightarrow \text{Zn}^{2+}_{(\text{aq})} + 2\text{Ag}_{(\text{s})} \), अब बताइए -
(i) कौन-सा इलेक्ट्रोड ऋणात्मक आवेशित है ?
(ii) सेल में विद्युत् धारा के वाहक कौन-से हैं ?
(iii) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रिया क्या है ?

Answer: सेल अभिक्रिया इस प्रकार है: \( \text{Zn}_{(\text{s})} + 2\text{Ag}^{+}_{(\text{aq})} \rightarrow \text{Zn}^{2+}_{(\text{aq})} + 2\text{Ag}_{(\text{s})} \).

(i) **ऋणात्मक आवेशित इलेक्ट्रोड:** गैल्वैनी सेल में, ऑक्सीकरण ऐनोड पर होता है. जिंक \( (\text{Zn}) \) की ऑक्सीकरण की प्रवृत्ति चांदी \( (\text{Ag}) \) से अधिक होती है, इसलिए जिंक इलेक्ट्रॉन खोकर \( \text{Zn}^{2+} \) आयन बनाता है. ये इलेक्ट्रॉन बाहरी परिपथ में निकलते हैं, जिससे जिंक इलेक्ट्रोड ऋणात्मक आवेशित हो जाता है. अतः, जिंक इलेक्ट्रोड ऋणात्मक आवेशित है.

(ii) **विद्युत् धारा के वाहक:** सेल में विद्युत् धारा को ले जाने वाले मुख्य वाहक इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो बाहरी परिपथ में ऐनोड (जिंक) से कैथोड (चांदी) की ओर बहते हैं. विलयन के अंदर आयन \( (\text{Zn}^{2+}, \text{Ag}^{+}, \text{NO}_3^-, \text{K}^+) \) लवण सेतु और अर्ध-कोशिकाओं के बीच गति करके धारा का संचालन करते हैं.

(iii) **प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रिया:**
* **ऐनोड पर (ऑक्सीकरण, ऋणात्मक इलेक्ट्रोड):** जिंक धातु इलेक्ट्रॉन खोकर जिंक आयन बनाती है.
\( \text{Zn}_{(\text{s})} \rightarrow \text{Zn}^{2+}_{(\text{aq})} + 2\text{e}^- \)
* **कैथोड पर (अपचयन, धनात्मक इलेक्ट्रोड):** चांदी आयन इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके चांदी धातु में अपचयित होते हैं.
\( \text{Ag}^{+}_{(\text{aq})} + \text{e}^- \rightarrow \text{Ag}_{(\text{s})} \)
(कुल अभिक्रिया में संतुलन के लिए इसे 2 से गुणा किया जाता है: \( 2\text{Ag}^{+}_{(\text{aq})} + 2\text{e}^- \rightarrow 2\text{Ag}_{(\text{s})} \))

सेल का आरेख इस प्रकार दर्शाया जा सकता है:
वोल्टमीटर/अमीटरZnZnSO₄विलयन 1.0 MAgAgNO₃विलयन 1.0 Mलवण सेतुKNO₃संवहन धाराe⁻Zn²⁺Ag⁺NO₃⁻K⁺
यह सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में बदलता है, और इसका उपयोग विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को शक्ति देने के लिए किया जाता है.
In simple words: (i) जिंक इलेक्ट्रोड ऋणात्मक है. (ii) इलेक्ट्रॉन और आयन बिजली के वाहक हैं. (iii) जिंक ऐनोड पर ऑक्सीकृत होता है \( (\text{Zn} \rightarrow \text{Zn}^{2+} + 2\text{e}^-) \), और चांदी आयन कैथोड पर अपचयित होते हैं \( (\text{Ag}^+ + \text{e}^- \rightarrow \text{Ag}) \).

🎯 Exam Tip: For galvanic cells, remember that oxidation occurs at the anode (negative electrode), and reduction occurs at the cathode (positive electrode), with electrons flowing from anode to cathode externally.

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 3 विद्युत रसायन अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 3 विद्युत रसायन अति लघु ऊतरीय प्रश्न

 

Question 1. Na, Mg तथा Al को बढ़ते हुए विद्युत्- धनात्मक गुण के अनुसार व्यवस्थित कीजिए।
Answer: विद्युत्-धनात्मक गुण किसी तत्व की इलेक्ट्रॉन खोने और धनात्मक आयन बनाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है. आवर्त सारणी में, जैसे-जैसे हम किसी समूह में नीचे जाते हैं, विद्युत्-धनात्मक गुण बढ़ता है, और जैसे-जैसे हम किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाते हैं, यह घटता है. दिए गए तत्वों (Na, Mg, Al) में से, सोडियम (Na) समूह 1 में है, मैग्नीशियम (Mg) समूह 2 में है, और एल्युमीनियम (Al) समूह 13 में है. ये सभी एक ही आवर्त में हैं. इसलिए, आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर विद्युत्-धनात्मक गुण घटता जाएगा. इस प्रकार, बढ़ते हुए विद्युत्-धनात्मक गुण का क्रम निम्नलिखित होगा:
\( \text{Al} < \text{Mg} < \text{Na} \)
सोडियम सबसे अधिक विद्युत्-धनात्मक है क्योंकि यह सबसे आसानी से इलेक्ट्रॉन खोता है, जबकि एल्युमीनियम सबसे कम विद्युत्-धनात्मक है.
In simple words: विद्युत्-धनात्मक गुण का बढ़ता क्रम एल्युमीनियम \( (\text{Al}) \) से मैग्नीशियम \( (\text{Mg}) \) और फिर सोडियम \( (\text{Na}) \) की ओर होता है. इसका मतलब है कि सोडियम सबसे आसानी से इलेक्ट्रॉन खोता है.

🎯 Exam Tip: Electronegativity increases across a period and decreases down a group; electropositivity is the opposite trend.

 

Question 2. क्षार धातुएँ प्रबल अपचायक क्यों होती हैं ?
Answer: क्षार धातुएँ (जैसे लिथियम, सोडियम, पोटैशियम) विद्युत् रासायनिक श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित होती हैं, जिसका मतलब है कि उनके मानक इलेक्ट्रोड विभव के मान बहुत कम (अधिक ऋणात्मक) होते हैं. इसका अर्थ यह है कि उनकी इलेक्ट्रॉन खोने की प्रवृत्ति बहुत अधिक होती है. इलेक्ट्रॉन खोने की यह क्षमता ही अपचायक क्षमता कहलाती है. चूँकि ये धातुएँ बहुत आसानी से इलेक्ट्रॉन खो सकती हैं और ऑक्सीकृत हो सकती हैं, इसलिए वे अन्य पदार्थों को अपचयित करने में बहुत प्रभावी होती हैं. यही कारण है कि क्षार धातुएँ प्रबल अपचायक होती हैं. इनकी उच्च क्रियाशीलता इन्हें प्रकृति में स्वतंत्र रूप से पाए जाने से रोकती है.
In simple words: क्षार धातुएँ बहुत आसानी से इलेक्ट्रॉन छोड़ देती हैं, क्योंकि उनके इलेक्ट्रोड विभव बहुत कम होते हैं. इस कारण वे अन्य पदार्थों को अपचयित करने में बहुत शक्तिशाली होती हैं, इसलिए उन्हें प्रबल अपचायक कहते हैं.

🎯 Exam Tip: Strong reducing agents have very negative standard reduction potentials, indicating a high tendency to undergo oxidation (lose electrons).

 

Question 4. क्या निम्न अभिक्रिया सम्भव है ? कारण लिखिए- \( \text{Sn}^{4+} + 2\text{Fe}^{2+} \rightarrow \text{Sn}^{2+}+ 2\text{Fe}^{3+} \)
Answer: दी गई अभिक्रिया है: \( \text{Sn}^{4+} + 2\text{Fe}^{2+} \rightarrow \text{Sn}^{2+}+ 2\text{Fe}^{3+} \).
इस अभिक्रिया में \( \text{Fe}^{2+} \) का ऑक्सीकरण \( (\text{Fe}^{2+} \rightarrow \text{Fe}^{3+} + \text{e}^-) \) हो रहा है और \( \text{Sn}^{4+} \) का अपचयन \( (\text{Sn}^{4+} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Sn}^{2+}) \) हो रहा है.
मानक इलेक्ट्रोड विभव हैं (सामान्य मान):
\( \text{E}^{\circ}(\text{Sn}^{4+}/\text{Sn}^{2+}) = +0.15 \text{ V} \)
\( \text{E}^{\circ}(\text{Fe}^{3+}/\text{Fe}^{2+}) = +0.77 \text{ V} \)
किसी भी स्वतः होने वाली रेडॉक्स अभिक्रिया के लिए, ऑक्सीकारक का अपचयन विभव अपचायक के अपचयन विभव से अधिक होना चाहिए. यहां, \( \text{Sn}^{4+} \) ऑक्सीकारक है और \( \text{Fe}^{2+} \) अपचायक है.
\( \text{Sn}^{4+} \) का अपचयन विभव \( (+0.15 \text{ V}) \), \( \text{Fe}^{3+} \) के अपचयन विभव \( (+0.77 \text{ V}) \) से कम है. इसका मतलब है कि \( \text{Fe}^{2+} \) को ऑक्सीकृत करने की क्षमता \( \text{Sn}^{4+} \) में नहीं है. दूसरे शब्दों में, \( \text{Fe}^{2+} \) की अपचायक क्षमता \( \text{Sn}^{2+} \) से कम है.
इसलिए, यह अभिक्रिया सम्भव नहीं है, क्योंकि \( \text{Sn}^{4+} \) उतना मजबूत ऑक्सीकारक नहीं है कि वह \( \text{Fe}^{2+} \) को \( \text{Fe}^{3+} \) में ऑक्सीकृत कर सके. यह हमें बताता है कि धातुओं की सापेक्षिक क्रियाशीलता के आधार पर कुछ अभिक्रियाएँ स्वतः नहीं होती हैं.
In simple words: यह अभिक्रिया सम्भव नहीं है. ऐसा इसलिए है क्योंकि \( \text{Sn}^{4+} \) उतना मजबूत ऑक्सीकारक नहीं है कि वह \( \text{Fe}^{2+} \) को ऑक्सीकृत करके \( \text{Fe}^{3+} \) बना सके.

🎯 Exam Tip: A redox reaction is spontaneous if the standard cell potential (E°cell) is positive, or if the reduction potential of the oxidizing agent is greater than that of the reducing agent.

 

Question 5. निम्न अभिक्रिया सम्भव है या नहीं ? कारण लिखिए। \( 2\text{Ag} + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{Ag}_2 \text{SO}_4 + \text{H}_2 \).
Answer: दी गई अभिक्रिया है: \( 2\text{Ag} + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{Ag}_2 \text{SO}_4 + \text{H}_2 \).
इस अभिक्रिया में चांदी \( (\text{Ag}) \) का ऑक्सीकरण \( (\text{Ag} \rightarrow \text{Ag}^+ + \text{e}^-) \) हो रहा है और हाइड्रोजन \( (\text{H}^+) \) का अपचयन \( (2\text{H}^+ + 2\text{e}^- \rightarrow \text{H}_2) \) हो रहा है.
मानक इलेक्ट्रोड विभव हैं (सामान्य मान):
\( \text{E}^{\circ}(\text{Ag}^{+}/\text{Ag}) = +0.80 \text{ V} \)
\( \text{E}^{\circ}(\text{H}^{+}/\text{H}_2) = 0.00 \text{ V} \)
कोई धातु अम्ल से हाइड्रोजन गैस को तभी विस्थापित कर सकती है जब वह विद्युत् रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर स्थित हो, यानी उसका मानक अपचयन विभव हाइड्रोजन से कम (अधिक ऋणात्मक) हो.
यहां, चांदी का मानक अपचयन विभव \( (+0.80 \text{ V}) \) हाइड्रोजन के मानक अपचयन विभव \( (0.00 \text{ V}) \) से अधिक है. इसका मतलब है कि चांदी की ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति हाइड्रोजन से कम है. चांदी हाइड्रोजन से कम क्रियाशील है.
इसलिए, यह अभिक्रिया सम्भव नहीं है, क्योंकि चांदी तनु सल्फ्यूरिक अम्ल \( (\text{H}_2\text{SO}_4) \) से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं कर सकती है. यही कारण है कि चांदी जैसी कम क्रियाशील धातुएँ अम्लों के साथ प्रतिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस नहीं बनाती हैं.
In simple words: यह अभिक्रिया सम्भव नहीं है. चांदी \( (\text{Ag}) \) हाइड्रोजन से कम क्रियाशील है, इसलिए वह तनु सल्फ्यूरिक अम्ल \( (\text{H}_2\text{SO}_4) \) से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं कर सकती.

🎯 Exam Tip: Only metals that are more reactive than hydrogen (i.e., have a more negative standard reduction potential than H+/H2) can displace hydrogen from acids.

 

Question 6. कौन-सी धातुएँ तनु H₂SO₄ से H₂ विस्थापित नहीं करतीं ?
Answer: वे धातुएँ जो विद्युत् रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे स्थित होती हैं, वे तनु सल्फ्यूरिक अम्ल \( (\text{H}_2\text{SO}_4) \) से हाइड्रोजन \( (\text{H}_2) \) को विस्थापित नहीं करतीं. ऐसा इसलिए है क्योंकि इन धातुओं का मानक अपचयन विभव हाइड्रोजन से अधिक (कम ऋणात्मक या धनात्मक) होता है, जिसका मतलब है कि उनकी इलेक्ट्रॉन खोने की प्रवृत्ति हाइड्रोजन से कम होती है. उदाहरण के लिए, कॉपर \( (\text{Cu}) \), चांदी \( (\text{Ag}) \), सोना \( (\text{Au}) \), और प्लैटिनम \( (\text{Pt}) \) जैसी धातुएँ हाइड्रोजन से कम क्रियाशील होती हैं और इसलिए वे तनु अम्लों से हाइड्रोजन गैस नहीं निकालतीं. ये धातुएँ हाइड्रोजन की तुलना में इलेक्ट्रॉन अधिक मजबूती से पकड़ कर रखती हैं.
उदाहरण - \( \text{Cu, Ag, Au, Pt} \) आदि।
In simple words: कॉपर, चांदी, सोना और प्लैटिनम जैसी धातुएँ तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं करतीं. ये धातुएँ विद्युत् रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे होती हैं.

🎯 Exam Tip: Metals below hydrogen in the electrochemical series are less reactive and cannot displace hydrogen from non-oxidizing acids.

 

Question 7. कौन-सी धातुएँ जल वाष्प को अपघटित नहीं करतीं ?
Answer: वे धातुएँ जो विद्युत् रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे होती हैं, वे जल वाष्प को अपघटित नहीं करतीं. इन धातुओं की क्रियाशीलता हाइड्रोजन से कम होती है, जिसका अर्थ है कि वे जल के अणुओं से हाइड्रोजन को अलग करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्रदान नहीं कर सकतीं. उनका मानक अपचयन विभव धनात्मक होता है, जो दर्शाता है कि उनकी ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति कम है. उदाहरण के लिए, चांदी \( (\text{Ag}) \), सोना \( (\text{Au}) \), पारा \( (\text{Hg}) \), और कॉपर \( (\text{Cu}) \) जैसी धातुएँ जल वाष्प के साथ प्रतिक्रिया नहीं करती हैं. यह उनकी कम क्रियाशीलता का एक और प्रमाण है.
उदाहरण – \( \text{Ag, Au, Hg, Cu} \) आदि।
In simple words: चांदी, सोना, पारा और कॉपर जैसी धातुएँ जल वाष्प को नहीं तोड़तीं क्योंकि वे हाइड्रोजन से कम क्रियाशील होती हैं.

🎯 Exam Tip: Similar to acids, only metals more reactive than hydrogen can react with water or steam. Less reactive metals like noble metals do not react.

 

Question 8. दो धातुएँ A तथा B के मानक इलेक्ट्रोड विभव का मान - 0.76 V और + 0.80 V है। इनमें से कौन-सी धातु तनु H₂SO₄ से हाइड्रोजन विस्थापित करेगी और क्यों ?
Answer: दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभव हैं:
धातु A के लिए: \( -0.76 \text{ V} \)
धातु B के लिए: \( +0.80 \text{ V} \)
हम जानते हैं कि कोई धातु तनु सल्फ्यूरिक अम्ल \( (\text{H}_2\text{SO}_4) \) से हाइड्रोजन \( (\text{H}_2) \) को तभी विस्थापित कर सकती है जब उसका मानक इलेक्ट्रोड विभव हाइड्रोजन के मानक इलेक्ट्रोड विभव \( (0.00 \text{ V}) \) से कम (अधिक ऋणात्मक) हो. ऐसा इसलिए है क्योंकि जितनी अधिक ऋणात्मक विभव होगी, धातु की इलेक्ट्रॉन खोने और ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति उतनी ही अधिक होगी, जिससे वह हाइड्रोजन से अधिक क्रियाशील हो जाएगी.
धातु A का विभव \( (-0.76 \text{ V}) \) हाइड्रोजन के विभव \( (0.00 \text{ V}) \) से कम है, जिसका अर्थ है कि धातु A हाइड्रोजन से अधिक क्रियाशील है. इसके विपरीत, धातु B का विभव \( (+0.80 \text{ V}) \) हाइड्रोजन से अधिक है, जिसका मतलब है कि धातु B हाइड्रोजन से कम क्रियाशील है.
इसलिए, धातु A तनु \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) से हाइड्रोजन को विस्थापित करेगी. उदाहरण के लिए, जिंक \( (\text{Zn}) \) का मानक इलेक्ट्रोड विभव \( -0.76 \text{ V} \) होता है, और यह तनु अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित करता है. यह धातु की क्रियाशीलता और उसकी अपचायक क्षमता को दर्शाता है.
In simple words: धातु A \( (-0.76 \text{ V}) \) का मानक इलेक्ट्रोड विभव हाइड्रोजन से कम है, इसलिए यह तनु सल्फ्यूरिक अम्ल \( (\text{H}_2\text{SO}_4) \) से हाइड्रोजन को विस्थापित करेगी. धातु B ऐसा नहीं कर पाएगी क्योंकि उसका विभव \( (+0.80 \text{ V}) \) हाइड्रोजन से अधिक है.

🎯 Exam Tip: A metal with a more negative standard electrode potential is more reactive and will displace hydrogen from acids.

 

Question 9. निम्न अभिक्रिया सम्भव है या नहीं, कारण लिखिए – \( \text{Zr} + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{ZrSO}_4 + \text{H}_2 \).
Answer: दी गई अभिक्रिया है: \( \text{Zr} + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{ZrSO}_4 + \text{H}_2 \).
इस अभिक्रिया में जिरकोनियम \( (\text{Zr}) \) का ऑक्सीकरण \( (\text{Zr} \rightarrow \text{Zr}^{2+} + 2\text{e}^-) \) हो रहा है और हाइड्रोजन \( (\text{H}^+) \) का अपचयन \( (2\text{H}^+ + 2\text{e}^- \rightarrow \text{H}_2) \) हो रहा है.
जिरकोनियम \( (\text{Zr}) \) का मानक अपचयन विभव \( (\text{E}^{\circ}_{\text{Zr}^{2+}/\text{Zr}}) \) लगभग \( -1.53 \text{ V} \) होता है, जबकि हाइड्रोजन \( (\text{H}^+) \) का मानक अपचयन विभव \( (\text{E}^{\circ}_{\text{H}^{+}/\text{H}_2}) \) \( 0.00 \text{ V} \) है.
चूंकि जिरकोनियम का मानक अपचयन विभव हाइड्रोजन से काफी कम (अधिक ऋणात्मक) है, इसका मतलब है कि जिरकोनियम हाइड्रोजन से अधिक क्रियाशील धातु है. यह आसानी से इलेक्ट्रॉन खोकर ऑक्सीकृत हो सकता है और हाइड्रोजन आयनों को अपचयित करके हाइड्रोजन गैस बना सकता है.
इसलिए, यह अभिक्रिया सम्भव है. जिरकोनियम एक प्रतिक्रियाशील धातु है जो तनु अम्लों जैसे सल्फ्यूरिक अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर सकती है. यह इसकी उच्च अपचायक क्षमता को दर्शाता है.
In simple words: यह अभिक्रिया सम्भव है. जिरकोनियम \( (\text{Zr}) \) हाइड्रोजन \( (\text{H}_2) \) से अधिक क्रियाशील धातु है, इसलिए वह तनु सल्फ्यूरिक अम्ल \( (\text{H}_2\text{SO}_4) \) से हाइड्रोजन गैस को विस्थापित कर सकती है.

🎯 Exam Tip: Metals with significantly negative standard reduction potentials, like zirconium, are strong reducing agents and readily displace hydrogen from acids. Always compare the metal's potential with that of hydrogen (0.0 V).

 

Question 16. गैल्वैनी सेल की कार्यप्रणाली में जिस इलेक्ट्रोड पर ऑक्सीकरण होता है उस इलेक्ट्रोड का क्या नाम है ?
Answer: गैल्वैनी सेल में, जिस इलेक्ट्रोड पर ऑक्सीकरण अभिक्रिया होती है, उसे ऐनोड कहते हैं। इस इलेक्ट्रोड पर इलेक्ट्रॉन निकलते हैं, जिससे यह ऋणात्मक सिरा बन जाता है। यह ऋणात्मक चार्ज बाहरी परिपथ में इलेक्ट्रॉनों को आगे बढ़ाने में मदद करता है।
In simple words: In a galvanic cell, the electrode where oxidation happens is called the anode. This electrode loses electrons and has a negative charge.

🎯 Exam Tip: Remember, oxidation always occurs at the anode (loss of electrons), and reduction always occurs at the cathode (gain of electrons).

 

Question 17. कुछ अर्द्ध-अभिक्रियाओं के इलेक्ट्रोड विभव इस प्रकार हैं –
\( \text{Fe}^{3+}_{(aq)} + \text{e}^{-} \rightarrow \text{Fe}^{2+}_{(aq)}; \text{E}^{\circ} = -0.76 \text{ V} \)
\( \text{Ce}^{4+}_{(aq)} + \text{e}^{-} \rightarrow \text{Ce}^{3+}_{(aq)}; \text{E}^{\circ} = -1.60 \text{ V} \)
क्या \( \text{Fe}^{3+} \) से \( \text{Ce}^{4+} \) ऑक्सीकृत होगा।

Answer: नहीं, \( \text{Fe}^{3+} \) द्वारा \( \text{Ce}^{4+} \) का ऑक्सीकरण नहीं होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि \( \text{Fe}^{3+} \) का अपचयन विभव \( (-0.76 \text{ V}) \), \( \text{Ce}^{4+} \) के अपचयन विभव \( (-1.60 \text{ V}) \) से अधिक है। एक प्रजाति जिसका अपचयन विभव अधिक होता है, वह इलेक्ट्रॉन प्राप्त करना पसंद करती है और अपचयित होती है, न कि इलेक्ट्रॉन खोकर ऑक्सीकृत होती है।
In simple words: No, \( \text{Fe}^{3+} \) will not oxidize \( \text{Ce}^{4+} \). This is because the reduction potential of \( \text{Fe}^{3+} \) is higher than that of \( \text{Ce}^{4+} \).

🎯 Exam Tip: A species with a more positive (or less negative) reduction potential is a stronger oxidizing agent and will oxidize species with lower reduction potentials.

 

Question 18. निम्न धातुओं की अपचायक क्षमता का क्रम लिखिए - Fe, Li, Na, Cu, Zn, Cd, Cr.
Answer: धातुओं की अपचायक क्षमता का बढ़ता क्रम इस प्रकार है:
\( \text{Cu} < \text{Cd} < \text{Fe} < \text{Cr} < \text{Zn} < \text{Na} < \text{Li} \)
अपचायक क्षमता धातुओं की इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति पर निर्भर करती है। जिस धातु का मानक अपचयन विभव जितना अधिक ऋणात्मक होता है, वह उतनी ही प्रबल अपचायक होती है।
In simple words: The reducing power of metals tells us how easily they can give away electrons. Metals that give electrons more easily are stronger reducing agents. The order from weakest to strongest reducing agent is \( \text{Cu} < \text{Cd} < \text{Fe} < \text{Cr} < \text{Zn} < \text{Na} < \text{Li} \).

🎯 Exam Tip: Metals higher in the electrochemical series have lower (more negative) standard reduction potentials, indicating they are stronger reducing agents.

 

Question 19. क्रोमियम धातु, \( \text{FeSO}_4 \) विलयन से \( \text{Fe} \) को विस्थापित कर सकती है जबकि \( \text{Cu} \) नहीं, क्यों ?
Answer: क्रोमियम (\( \text{Cr} \)) धातु, आयरन (\( \text{Fe} \)) से अधिक क्रियाशील है, क्योंकि विद्युत् रासायनिक श्रेणी में \( \text{Cr} \) का स्थान \( \text{Fe} \) से ऊपर है। इसलिए \( \text{Cr} \), \( \text{FeSO}_4 \) विलयन से \( \text{Fe} \) को विस्थापित कर सकती है। इसके विपरीत, कॉपर (\( \text{Cu} \)) धातु, आयरन (\( \text{Fe} \)) से कम क्रियाशील है, क्योंकि विद्युत् रासायनिक श्रेणी में \( \text{Cu} \) का स्थान \( \text{Fe} \) से नीचे है। अतः \( \text{Cu} \), \( \text{FeSO}_4 \) विलयन से \( \text{Fe} \) को विस्थापित नहीं कर सकती। एक अधिक क्रियाशील धातु ही कम क्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर सकती है।
In simple words: Chromium can replace iron from \( \text{FeSO}_4 \) because chromium is more reactive than iron, meaning it is higher in the electrochemical series. Copper cannot replace iron because copper is less reactive and is below iron in the series.

🎯 Exam Tip: Remember the activity series: a metal higher in the series can displace any metal lower than it from its salt solution.

 

Question 20. किस परिस्थिति में गैल्वैनी सेल बाह्य परिपथ में कोई धारा नहीं भेजता ?
Answer: यदि गैल्वैनी सेल में लवण सेतु (salt bridge) का प्रयोग न किया जाए, तो सेल बाह्य परिपथ में कोई धारा नहीं भेजेगा। लवण सेतु आयनों के प्रवाह को बनाए रखने और परिपथ को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: A galvanic cell will not send current through the external circuit if the salt bridge is not used.

🎯 Exam Tip: The salt bridge maintains electrical neutrality in the half-cells, preventing charge buildup and allowing continuous electron flow.

 

Question 21. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के लिए प्रतीकात्मक संकेत तथा इसका विभव लिखिए।
Answer: मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) का प्रतीकात्मक संकेत है: \( \text{Pt}(\text{s}) | \text{H}_2(\text{g}, 1 \text{ bar}) | \text{H}^{+}(\text{aq}, 1 \text{ M}) \)। इसका मानक इलेक्ट्रोड विभव 0.00 V होता है। \( \text{SHE} \) एक संदर्भ इलेक्ट्रोड के रूप में कार्य करता है, जिससे हमें अन्य इलेक्ट्रोडों के सापेक्ष विभव को मापने की अनुमति मिलती है।
In simple words: The symbol for a Standard Hydrogen Electrode (SHE) shows platinum metal, hydrogen gas at 1 bar pressure, and hydrogen ions at 1 M concentration. Its standard potential is set as zero.

🎯 Exam Tip: The standard electrode potential of any electrode is measured by connecting it to a SHE and measuring the cell potential.

 

Question 22. निम्न में से किस ऑक्साइड का अपचयन हाइड्रोजन द्वारा होगा ? \( \text{Na}_2\text{O, CaO, Al}_2\text{O}_3, \text{CuO, ZnO} \).
Answer: केवल उन धातुओं के ऑक्साइडों का अपचयन हाइड्रोजन द्वारा हो सकता है जिनकी धातुएँ विद्युत् रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे स्थित होती हैं। दिए गए ऑक्साइडों में से केवल कॉपर ऑक्साइड (\( \text{CuO} \)) और सिल्वर ऑक्साइड (\( \text{Ag}_2\text{O} \) यदि यह विकल्प में होती) ही हाइड्रोजन द्वारा अपचयित होगी। अन्य धातुएँ (Na, Ca, Al, Zn) हाइड्रोजन से अधिक क्रियाशील हैं, इसलिए उनके ऑक्साइड हाइड्रोजन द्वारा अपचयित नहीं हो सकते।
In simple words: Only oxides of metals that are below hydrogen in the electrochemical series can be reduced by hydrogen. Out of the given options, only copper oxide (\( \text{CuO} \)) can be reduced by hydrogen.

🎯 Exam Tip: Hydrogen can reduce oxides of metals that are less reactive than itself, meaning those metals appear below hydrogen in the reactivity series.

 

Question 23. विलयन में क्या \( \text{Al} \) द्वारा \( \text{Mg} \) या \( \text{Sn} \) का विस्थापन होगा ?
Answer: एल्युमीनियम (\( \text{Al} \)) द्वारा मैग्नीशियम (\( \text{Mg} \)) का विस्थापन नहीं होगा। इसका कारण यह है कि मैग्नीशियम विद्युत् रासायनिक श्रेणी में एल्युमीनियम से ऊपर स्थित है, जिसका अर्थ है कि मैग्नीशियम एल्युमीनियम से अधिक क्रियाशील है। हालांकि, एल्युमीनियम (\( \text{Al} \)) द्वारा टिन (\( \text{Sn} \)) का विस्थापन हो जाएगा, क्योंकि टिन विद्युत् रासायनिक श्रेणी में एल्युमीनियम से नीचे स्थित है, जिसका अर्थ है कि एल्युमीनियम टिन से अधिक क्रियाशील है।
In simple words: Aluminum (\( \text{Al} \)) cannot replace magnesium (\( \text{Mg} \)) because magnesium is more reactive than aluminum. However, aluminum can replace tin (\( \text{Sn} \)) because aluminum is more reactive than tin.

🎯 Exam Tip: A more reactive metal (higher in the activity series) can displace a less reactive metal (lower in the activity series) from its salt solution.

 

Question 24. गैल्वैनी सेल में कैथोड पर कौन-सी अभिक्रिया होती
Answer: गैल्वैनी सेल में कैथोड पर अपचयन (Reduction) अभिक्रिया होती है। अपचयन वह प्रक्रिया है जिसमें एक परमाणु, आयन या अणु इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है।
In simple words: In a galvanic cell, reduction always happens at the cathode.

🎯 Exam Tip: A simple mnemonic for remembering this is "RED CAT" (reduction at cathode) and "AN OX" (oxidation at anode).

 

Question 25. क्या अर्द्ध-सेल स्वतन्त्र रूप से कार्य कर सकता है ?
Answer: नहीं, एक अर्द्ध-सेल (half-cell) स्वतन्त्र रूप से कार्य नहीं कर सकती है। एक पूर्ण रासायनिक सेल के लिए दो अर्द्ध-सेलों को एक साथ जोड़ा जाना आवश्यक है, ताकि इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह हो सके और एक पूर्ण परिपथ बन सके।
In simple words: No, a half-cell cannot work on its own.

🎯 Exam Tip: A single half-cell only shows half of the redox reaction; it needs another half-cell to complete the electron transfer and the circuit.

 

Question 26. निम्न सेल में इलेक्ट्रॉन के प्रवाह की दिशा क्या होगी ? \( \text{Zn/Zn}^{2+} || \text{Ag}^{+}/\text{Ag} \)
Answer: इस सेल में, इलेक्ट्रॉन जिंक (\( \text{Zn} \)) इलेक्ट्रोड से सिल्वर (\( \text{Ag} \)) इलेक्ट्रोड की तरफ प्रवाहित होंगे। इसका कारण यह है कि जिंक सिल्वर की तुलना में अधिक आसानी से ऑक्सीकृत (इलेक्ट्रॉन खोता है) होता है, जिससे यह ऐनोड के रूप में कार्य करता है।
In simple words: In this cell, electrons will flow from the zinc (\( \text{Zn} \)) electrode to the silver (\( \text{Ag} \)) electrode.

🎯 Exam Tip: Electrons always flow from the anode (where oxidation occurs, more negative potential) to the cathode (where reduction occurs, more positive potential) in a galvanic cell.

 

Question 27. क्या \( 1 \text{ M FeSO}_4 \) विलयन को टिन के पात्र में रखा जा सकता है ?
Answer: हाँ, \( 1 \text{ M FeSO}_4 \) विलयन को टिन (\( \text{Sn} \)) के पात्र में रखा जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि टिन आयरन (\( \text{Fe} \)) से कम क्रियाशील है (विद्युत् रासायनिक श्रेणी में आयरन टिन से ऊपर है)। इसलिए, टिन आयरन सल्फेट विलयन से आयरन को विस्थापित नहीं करेगा।
In simple words: Yes, a \( 1 \text{ M FeSO}_4 \) solution can be stored in a tin container.

🎯 Exam Tip: For safe storage, the container metal must be less reactive than the metal in the salt solution to prevent any displacement reactions.

 

Question 29. क्या किसी सेल अभिक्रिया के लिये \( \text{E}_{\text{cell}} \) या \( \triangle_{\text{r}}\text{G}^{\circ} \) का मान शून्य हो सकता है?
Answer: नहीं, किसी स्वतः होने वाली सेल अभिक्रिया के लिए न तो सेल विभव (\( \text{E}_{\text{cell}} \)) और न ही मानक गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन (\( \triangle_{\text{r}}\text{G}^{\circ} \)) का मान शून्य हो सकता है। यदि ये शून्य होते, तो इसका अर्थ होगा कि अभिक्रिया मानक परिस्थितियों में साम्यावस्था में है, और सेल से कोई कार्य नहीं निकाला जा सकता।
In simple words: No, for a spontaneous cell reaction, neither the cell potential (\( \text{E}_{\text{cell}} \)) nor the standard Gibbs free energy change (\( \triangle_{\text{r}}\text{G}^{\circ} \)) can be zero.

🎯 Exam Tip: For a spontaneous reaction, \( \text{E}_{\text{cell}} \) must be positive and \( \triangle_{\text{r}}\text{G}^{\circ} \) must be negative.

 

Question 30. किसी भी सेल की \( \text{e.m.f.} \) क्या होगी ? जब सेल अभिक्रिया साम्यावस्था प्राप्त करती है ?
Answer: जब सेल अभिक्रिया साम्यावस्था प्राप्त करती है, तो सेल का विद्युत वाहक बल (e.m.f.) शून्य हो जाता है। साम्यावस्था पर, अभिक्रिया के आगे बढ़ने के लिए कोई शुद्ध प्रेरक बल नहीं होता है।
In simple words: When a cell reaction reaches equilibrium, its electromotive force (e.m.f.) becomes zero.

🎯 Exam Tip: At equilibrium, the forward and reverse reaction rates are equal, and there is no net change in the concentrations of reactants and products, thus no net electrical output.

 

Question 31. दो धातुएँ A व B क्रमशः – \( 0.20 \text{ V} \) व \( + 0.90 \text{ V} \) के अपचयन विभव मान वाली हैं। इनमें से कौन सी धातु तनु \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) से हाइड्रोजन गैस निकालेगी ?
Answer: केवल वे धातुएँ जिनका अपचयन विभव \( 0.0\text{V} \) (जो हाइड्रोजन का अपचयन विभव है) से कम होता है, वे ही तनु \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) से हाइड्रोजन गैस विस्थापित कर सकती हैं। चूंकि धातु A का अपचयन विभव \( -0.20 \text{ V} \) है (जो \( 0.0\text{V} \) से कम है), अतः धातु A तनु \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) से हाइड्रोजन गैस विस्थापित करेगी। धातु B का अपचयन विभव \( +0.90 \text{ V} \) है, इसलिए वह ऐसा नहीं करेगी।
In simple words: Only metals with a reduction potential less than 0.0 V (which is hydrogen's potential) can displace hydrogen gas from dilute sulfuric acid. Since metal A has a reduction potential of -0.20 V (less than 0.0 V), it will displace hydrogen.

🎯 Exam Tip: Metals that are more reactive than hydrogen (i.e., have more negative standard reduction potentials) can displace hydrogen from acids.

 

Question 32. वि. वा. बल व विभवान्तर में एक अन्तर बतायें।
Answer:

विद्युत् वाहक बल (Electromotive Force, EMF)विभवान्तर (Potential Difference)
1. जब सेल से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है, तब इलेक्ट्रोड विभवों के बीच का अन्तर विद्युत् वाहक बल कहलाता है।1. जब सेल से धारा परिपथ में होकर प्रवाहित करता है, तब इलेक्ट्रोड विभवों के बीच का अन्तर विभवान्तर कहलाता है।
2. यह सेल में स्थायी धारा के प्रवाह के लिए उत्तरदायी होता है।2. यह सेल में स्थायी धारा के प्रवाह के लिए उत्तरदायी नहीं होता है।
3. इसे विभवमापी से मापते हैं जबकि परिपथ में विद्युत् धारा प्रवाहित नहीं होती।3. इसे वोल्टमीटर से मापते हैं।
4. यह एक गैल्वैनिक सेल द्वारा प्रदर्शित अधिकतम वोल्टता है।4. यह सदैव सेल के अधिकतम वोल्टेज से कम होता है।
5. यह किसी गैल्वैनिक सेल से प्राप्य अधिकतम कार्य होता है।5. विभवान्तर से परिकलित कार्य सेल से प्राप्य अधिकतम कार्य से कम होता है।

In simple words: The difference in potential between two electrodes when no current is flowing through the cell is called electromotive force (e.m.f.). When current flows, this difference is called potential difference.

🎯 Exam Tip: EMF is an ideal potential, while potential difference is the actual, measurable voltage under operating conditions, always less than or equal to the EMF.

 

Question 33. क्या कारण है कि ऐलुमीनियम लवण के जलीय विलयन के विद्युत् अपघटन पर कभी भी ऐलुमीनियम धातु प्राप्त नहीं होती है ?
Answer: ऐलुमीनियम धातु को उसके लवण के जलीय विलयन के विद्युत् अपघटन द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसका मुख्य कारण यह है कि ऐलुमीनियम आयनों (\( \text{Al}^{3+} \)) की तुलना में जल (\( \text{H}_2\text{O} \)) का अपचयन विभव कम होता है। इसलिए, कैथोड पर ऐलुमीनियम धातु के बजाय हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है, और ऐलुमीनियम धातु बनने के बाद भी जल से क्रिया करके ऐलुमिनियम ऑक्साइड बना लेता है।
In simple words: Aluminum metal is never obtained during the electrolysis of aqueous aluminum salt solutions because aluminum reacts with water to form aluminum oxide. This reaction prevents the pure aluminum metal from being isolated.

🎯 Exam Tip: For highly reactive metals like aluminum, electrolysis of their molten salts (e.g., \( \text{Al}_2\text{O}_3 \) in cryolite) is required to obtain the pure metal.

 

Question 34. क्या हम \( \text{CuSO}_4 \) विलयन को लोहे के पात्र में भण्डारण कर सकते है? समझाये।
Answer: नहीं, हम कॉपर सल्फेट (\( \text{CuSO}_4 \)) विलयन को लोहे (\( \text{Fe} \)) के पात्र में भण्डारित नहीं कर सकते हैं। लोहा विद्युत् रासायनिक श्रेणी में कॉपर से ऊपर स्थित है, जिसका अर्थ है कि लोहा कॉपर से अधिक क्रियाशील है। यदि \( \text{CuSO}_4 \) विलयन को लोहे के पात्र में रखा जाता है, तो लोहा कॉपर को उसके विलयन से विस्थापित कर देगा। इस अभिक्रिया के कारण लोहे का पात्र गलने लगेगा और विलयन दूषित हो जाएगा।
\[ \text{Fe}(\text{s}) + \text{CuSO}_4(\text{aq}) \rightarrow \text{FeSO}_4(\text{aq}) + \text{Cu}(\text{s}) \]
In simple words: No, we cannot store copper sulfate (\( \text{CuSO}_4 \)) solution in an iron container. Iron is more reactive than copper, so it will displace copper from the solution. This will damage the container and spoil the solution.

🎯 Exam Tip: Always check the reactivity series of metals before storing a salt solution in a metal container to avoid unwanted displacement reactions.

 

Question 35. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड में प्लेटिनीकृत प्लेटिनम का क्या कार्य है ?
Answer: मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड में प्लेटिनीकृत प्लेटिनम के दो मुख्य कार्य होते हैं:
(i) यह एक पृष्ठीय उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है, जिससे हाइड्रोजन गैस (\( \text{H}_2 \)) इसकी सतह पर आसानी से अधिशोषित हो जाती है। यह बड़ी सतह क्षेत्र और उत्प्रेरक गुण हाइड्रोजन गैस और हाइड्रोजन आयनों के बीच साम्यावस्था को जल्दी स्थापित करने में मदद करते हैं।
(ii) यह धातु धात्विक संपर्क के लिए एक अक्रिय धातु के रूप में कार्य करता है। यह स्वयं अभिक्रिया में भाग नहीं लेता, केवल इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह के लिए एक चालक प्रदान करता है।
In simple words: The platinized platinum in a Standard Hydrogen Electrode (SHE) acts as a catalyst for hydrogen gas to stick to its surface and serves as an inert metal for electrical contact.

🎯 Exam Tip: Platinum's inertness and catalytic properties are crucial for providing a stable and reproducible reference potential.

 

Question 36. गैल्वैनी सेल के लवण सेतु बनाने के लिये प्रयुक्त लवणों के नाम लिखिए।
Answer: गैल्वैनी सेल के लवण सेतु बनाने के लिए सामान्यतः अक्रिय विद्युत् अपघट्य लवणों का उपयोग किया जाता है। कुछ उदाहरण हैं:
- पोटेशियम नाइट्रेट (\( \text{KNO}_3 \))
- अमोनियम क्लोराइड (\( \text{NH}_4\text{Cl} \))
- पोटेशियम क्लोराइड (\( \text{KCl} \))
इन लवणों को इसलिए चुना जाता है क्योंकि इनके आयन इलेक्ट्रोड सामग्री या अर्द्ध-सेलों के विद्युत् अपघट्यों के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।
In simple words: Salts used to make salt bridges in galvanic cells include potassium nitrate (\( \text{KNO}_3 \)), ammonium chloride (\( \text{NH}_4\text{Cl} \)), and potassium chloride (\( \text{KCl} \)). These are called inert electrolytes.

🎯 Exam Tip: The ions of the salt bridge electrolyte must have similar ionic mobilities to maintain charge neutrality efficiently.

 

Question 37. किसी सेल आरेख में दो खड़ी समानान्तर रेखाएँ क्या प्रदर्शित करती हैं ?
Answer: किसी सेल आरेख में दो खड़ी समानान्तर रेखाएँ लवण सेतु (salt bridge) को प्रदर्शित करती हैं। लवण सेतु दो अर्द्ध-सेलों को जोड़ता है और आयनों के प्रवाह की अनुमति देता है, जिससे विद्युत् उदासीनता बनी रहती है।
In simple words: In a cell diagram, two parallel vertical lines show the presence of a salt bridge.

🎯 Exam Tip: The double vertical lines signify that the two half-cells are connected but their electrolytes do not mix directly.

 

Question 38. \( \text{KBr} \) के जलीय विलयन का विद्युत् अपघटन करने पर \( \text{Br}_2 \) एनोड पर प्राप्त होती है जबकि \( \text{KF} \) के जलीय विलयन का विदयुत अपघटन करने पर \( \text{F}_2 \), प्राप्त नहीं होती है, क्यों ?
Answer: जब जलीय \( \text{KBr} \) का विद्युत् अपघटन किया जाता है, तो एनोड पर ब्रोमीन (\( \text{Br}_2 \)) प्राप्त होती है। लेकिन जलीय \( \text{KF} \) का विद्युत् अपघटन करने पर \( \text{F}_2 \) प्राप्त नहीं होती है। इसका कारण यह है कि \( \text{F}_2/\text{F}^{-} \) युग्म का मानक अपचयन विभव बहुत अधिक होता है \( (+2.87 \text{ V}) \), जो \( \text{OH}^{-} \) आयनों के ऑक्सीकरण विभव से भी अधिक है। इसलिए, एनोड पर फ्लोराइड आयनों (\( \text{F}^{-} \)) के ऑक्सीकरण के बजाय जल का ऑक्सीकरण होता है, जिससे ऑक्सीजन गैस (\( \text{O}_2 \)) मुक्त होती है।
In simple words: Bromine (\( \text{Br}_2 \)) is formed at the anode during the electrolysis of aqueous \( \text{KBr} \). However, fluorine (\( \text{F}_2 \)) is not formed during the electrolysis of aqueous \( \text{KF} \). This is because fluorine has a very high reduction potential. Instead, water reacts to produce oxygen gas, not fluorine.

🎯 Exam Tip: In aqueous solutions, water can be oxidized or reduced, and its potentials must be considered when predicting electrolysis products alongside other ions.

 

Question 39. किस परिस्थिति में \( \text{E}_{\text{cell}} = 0 \) तथा \( \triangle_{\text{r}}\text{G} = 0 \) होता है?
Answer: सेल विभव (\( \text{E}_{\text{cell}} \)) का मान 0 तथा गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन (\( \triangle_{\text{r}}\text{G} \)) का मान 0 केवल तभी होता है जब रासायनिक अभिक्रिया साम्यावस्था पर पहुँच जाती है। साम्यावस्था पर, आगे और पीछे की अभिक्रिया दरें बराबर होती हैं, और कोई शुद्ध रासायनिक परिवर्तन नहीं होता है।
In simple words: The cell potential (\( \text{E}_{\text{cell}} \)) and the Gibbs free energy change (\( \triangle_{\text{r}}\text{G} \)) both become zero only when the reaction reaches equilibrium.

🎯 Exam Tip: At equilibrium, a system has no further tendency to change spontaneously, and thus no net work can be performed.

 

Question 40. \( \text{E}^{\circ}_{\text{Zn}^{2+}/\text{Zn}} = -0.76\text{V} \) मान में ऋणात्मक चिन्ह क्या इगिंत कर रहा है?
Answer: \( \text{E}^{\circ}_{\text{Zn}^{2+}/\text{Zn}} = -0.76\text{V} \) मान में ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि जिंक (\( \text{Zn} \)) हाइड्रोजन की तुलना में अधिक क्रियाशील धातु है। जब जिंक इलेक्ट्रोड को मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) के साथ जोड़ा जाता है, तो जिंक ऑक्सीकृत होकर \( \text{Zn}^{2+} \) आयन बनाता है (इलेक्ट्रॉन खोता है), जबकि हाइड्रोजन आयन (\( \text{H}^{+} \)) अपचयित होकर हाइड्रोजन गैस बनाते हैं (इलेक्ट्रॉन प्राप्त करते हैं)।
In simple words: The negative sign in \( \text{E}^{\circ}_{\text{Zn}^{2+}/\text{Zn}} = -0.76\text{V} \) shows that zinc is more reactive than hydrogen. When a zinc electrode is connected to a Standard Hydrogen Electrode (SHE), zinc gets oxidized, and hydrogen ions get reduced.

🎯 Exam Tip: A negative standard reduction potential indicates a greater tendency for the species to be oxidized rather than reduced, compared to hydrogen.

 

Question 42. ईंधन सेल का उदाहरण लिखिए।
Answer: ईंधन सेल का एक प्रमुख उदाहरण हाइड्रोजन-ऑक्सीजन (\( \text{H}_2\text{-O}_2 \)) ईंधन सेल है। यह सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
In simple words: An example of a fuel cell is the hydrogen-oxygen (\( \text{H}_2\text{-O}_2 \)) fuel cell.

🎯 Exam Tip: Fuel cells are highly efficient and produce very low pollution, often with water as the only byproduct.

 

Question 43. ईंधन सेल क्या कार्य करता है ?
Answer: ईंधन सेल एक ऐसा विद्युत्-रासायनिक उपकरण है जो ईंधन (जैसे हाइड्रोजन) की रासायनिक ऊर्जा को ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया के माध्यम से सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। यह बैटरी से इस मायने में भिन्न है कि ईंधन और ऑक्सीकारक लगातार बाहर से दिए जाते हैं।
In simple words: A fuel cell converts the chemical energy of a fuel directly into electrical energy.

🎯 Exam Tip: Fuel cells provide continuous power as long as fuel is supplied, making them suitable for applications requiring long-duration energy.

 

Question 44. लोहे को जंग से बचाने के लिए हम कैथोडी सुरक्षा प्रदान करते हैं। इस कैथोडी सुरक्षा में प्रयोग होने वाली धातुओं के नाम लिखिए।
Answer: लोहे को जंग से बचाने के लिए कैथोडी सुरक्षा (cathodic protection) में लोहे से अधिक क्रियाशील धातुओं का उपयोग किया जाता है। इन धातुओं को 'बलिदानी ऐनोड' कहा जाता है। उदाहरण के लिए, जिंक (\( \text{Zn} \)) और मैग्नीशियम (\( \text{Mg} \)) जैसी धातुएँ लोहे की सुरक्षा के लिए उपयोग की जाती हैं।
In simple words: To protect iron from rusting using cathodic protection, we use metals that are more reactive than iron, such as zinc (\( \text{Zn} \)) and magnesium (\( \text{Mg} \)).

🎯 Exam Tip: The sacrificial anode must be replaced periodically as it corrodes over time to continue protecting the iron structure.

 

Question 45. कैथोडी सुरक्षा किस प्रकार कार्य करती है ?
Answer: कैथोडी सुरक्षा में, हम लोहे को एक अधिक क्रियाशील धातु (जैसे जिंक या मैग्नीशियम) से जोड़ते हैं या उसका लेप करते हैं। अधिक क्रियाशील धातु ऐनोड के रूप में कार्य करती है और स्वयं ऑक्सीकृत होकर गल जाती है, जबकि लोहा कैथोड के रूप में कार्य करता है और सुरक्षित रहता है। यदि लोहे से \( \text{Fe}^{2+} \) आयन बनते भी हैं, तो वे अधिक क्रियाशील धातु से प्राप्त इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करके वापस लोहा धातु में परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे जंग नहीं लगती।
In simple words: Cathodic protection works by coating iron with a more reactive metal. This more reactive metal acts as the anode and corrodes, while the iron acts as the cathode and is protected. If any iron ions (\( \text{Fe}^{2+} \)) form, they gain electrons again and turn back into iron metal.

🎯 Exam Tip: This method is highly effective for protecting large iron structures like pipelines, ships, and storage tanks from corrosion.

 

Question 46. क्षारीय माध्यमं में लोहे पर जंग लगना किस प्रकार रुकता है ?
Answer: लोहे पर जंग लगने की प्रक्रिया में \( \text{H}^{+} \) आयनों की उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है। जब माध्यम क्षारीय होता है, तो \( \text{OH}^{-} \) आयन \( \text{H}^{+} \) आयनों को उदासीन कर देते हैं। \( \text{H}^{+} \) आयनों की कम सांद्रता के कारण कैथोडिक अभिक्रिया की दर धीमी हो जाती है, जिससे लोहे पर जंग लगने की प्रक्रिया भी कम या रुक जाती है।
In simple words: Rusting of iron happens more easily in the presence of hydrogen ions (\( \text{H}^{+} \)). In an alkaline (basic) environment, these hydrogen ions are neutralized, which slows down or prevents rusting.

🎯 Exam Tip: Controlling the pH of the environment is a common method for corrosion prevention, as rust formation is pH-dependent.

 

Question 47. अपचायक क्षमता क्या है ?
Answer: अपचायक क्षमता (Reducing power) किसी पदार्थ की इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति का माप है। जो पदार्थ जितनी आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागते हैं, उनकी अपचायक क्षमता उतनी ही अधिक होती है। एक प्रबल अपचायक स्वयं ऑक्सीकृत होता है और दूसरे पदार्थ को अपचयित करता है।
In simple words: Reducing power is a measure of how easily a substance can lose electrons. Substances that readily lose electrons have high reducing power.

🎯 Exam Tip: In the electrochemical series, elements with more negative standard reduction potentials exhibit greater reducing power.

 

Question 48. गैल्वैनी सेल के लिए मुक्त ऊर्जा का परिवर्तन क्या होता
Answer: गैल्वैनी सेल में, स्वतः होने वाली रासायनिक अभिक्रिया के कारण मुक्त ऊर्जा (Gibbs free energy, \( \triangle\text{G} \)) घटती है। इसका मान ऋणात्मक होता है, अर्थात् \( \triangle\text{G} < 0 \)। यह ऋणात्मक मान दर्शाता है कि अभिक्रिया स्वतः होती है और सेल उपयोगी कार्य कर सकता है।
In simple words: For a galvanic cell, the change in Gibbs free energy decreases, meaning its value is negative. This indicates a spontaneous reaction.

🎯 Exam Tip: The relationship between Gibbs free energy change and cell potential is \( \triangle\text{G} = -nF\text{E}_{\text{cell}} \), where a positive \( \text{E}_{\text{cell}} \) yields a negative \( \triangle\text{G} \).

 

Question 49. विद्युत् अपघटनी सेल के लिए मुक्त ऊर्जा को परिवर्तन क्या होता है ?
Answer: विद्युत् अपघटनी सेल में, एक गैर-स्वतः होने वाली अभिक्रिया को बाह्य विद्युत ऊर्जा द्वारा चलाया जाता है। इस प्रक्रिया में मुक्त ऊर्जा (Gibbs free energy, \( \triangle\text{G} \)) के परिमाण में वृद्धि होती है, अर्थात् इसका मान धनात्मक होता है \( \triangle\text{G} > 0 \)। यह धनात्मक मान दर्शाता है कि अभिक्रिया को होने के लिए बाहरी ऊर्जा की आवश्यकता है।
In simple words: For an electrolytic cell, the change in Gibbs free energy increases, meaning its value is positive. This indicates a non-spontaneous reaction that requires external energy.

🎯 Exam Tip: In an electrolytic cell, electrical work is done on the system to drive a non-spontaneous chemical reaction.

 

Question 50. चालकता को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम लिखिए।
Answer: विलयनों की चालकता को कई कारक प्रभावित करते हैं:
(i) विद्युत् अपघट्य की प्रवृत्ति: यह इस बात पर निर्भर करता है कि विद्युत् अपघट्य प्रबल है या दुर्बल। प्रबल विद्युत् अपघट्य पूरी तरह से आयनीकृत होते हैं, जबकि दुर्बल विद्युत् अपघट्य आंशिक रूप से आयनीकृत होते हैं, जिससे चालकता प्रभावित होती है।
(ii) विलयन में आयनों की सान्द्रता: आयनों की सान्द्रता बढ़ने पर प्रति इकाई आयतन में आयनों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे चालकता बढ़ती है।
(iii) ताप: ताप बढ़ने पर आयनों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है, जिससे उनकी गतिशीलता बढ़ती है और परिणामस्वरूप चालकता बढ़ जाती है।
In simple words: The factors affecting conductivity include the nature of the electrolyte, the concentration of ions in the solution, and the temperature.

🎯 Exam Tip: Remember that for strong electrolytes, molar conductivity decreases slightly with concentration due to increased interionic attraction, but for weak electrolytes, it increases significantly due to increased dissociation.

 

Question 51. विद्युत् अपघटन क्या होता है ?
Answer: विद्युत् अपघटन वह प्रक्रिया है जिसमें एक विद्युत् अपघट्य यौगिक (या तो उसके जलीय विलयन में या गलित अवस्था में) में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर वह अपने सरलतम घटकों (तत्वों) में विघटित हो जाता है। यह एक गैर-स्वतः होने वाली रासायनिक अभिक्रिया है जिसे विद्युत ऊर्जा द्वारा प्रेरित किया जाता है।
In simple words: Electrolysis is the process where an ionic compound, either in a molten state or dissolved in a solvent, is broken down into its simpler elements by passing an electric current through it.

🎯 Exam Tip: Electrolysis is used in various industrial applications such as electroplating, extraction of metals, and purification of metals.

 

Question 52. फैराडे के 'विद्युत् अपघटन का प्रथम नियम लिखिए।
Answer: फैराडे के विद्युत् अपघटन का प्रथम नियम कहता है कि "किसी इलेक्ट्रोड पर निक्षेपित या मुक्त हुए पदार्थ का द्रव्यमान विद्युत् अपघट्य से होकर गुजरने वाले आवेश की मात्रा के सीधे समानुपाती होता है।" इसका अर्थ है कि जितना अधिक विद्युत आवेश प्रवाहित किया जाएगा, उतना ही अधिक पदार्थ इलेक्ट्रोड पर जमा होगा।
गणितीय रूप से इसे इस प्रकार दर्शाया जाता है:
\( \text{m} \propto \text{Q} \)
\( \text{m} = \text{Z} \times \text{Q} \)
और चूंकि \( \text{Q} = \text{I} \times \text{t} \) (जहाँ \( \text{I} \) धारा है और \( \text{t} \) समय है), तो
\( \text{m} = \text{Z} \times \text{I} \times \text{t} \)
यहाँ \( \text{m} \) निक्षेपित पदार्थ का द्रव्यमान है, \( \text{Q} \) प्रवाहित आवेश है, \( \text{Z} \) विद्युत्-रासायनिक तुल्यांक है, \( \text{I} \) धारा (एम्पियर में) है, और \( \text{t} \) समय (सेकण्ड में) है।
In simple words: Faraday's first law of electrolysis states that "the mass of a substance deposited at an electrode during electrolysis is directly proportional to the quantity of electricity passed through the electrolyte." This means that more electricity leads to more substance being deposited.

🎯 Exam Tip: The electrochemical equivalent (\( \text{Z} \)) is a constant for a given substance and represents the mass of the substance deposited by one Coulomb of charge.

 

Question 54. गलित \( \text{PbBr}_2 \) का विद्युत्-अपघटन कराने पर ऐनोड तथा कैथोड पर प्राप्त उत्पाद लिखिए।
Answer: जब गलित लेड ब्रोमाइड (\( \text{PbBr}_2 \)) का विद्युत्-अपघटन किया जाता है, तो यह लेड आयनों (\( \text{Pb}^{2+} \)) और ब्रोमाइड आयनों (\( \text{Br}^{-} \)) में विभाजित होता है।
\( \text{PbBr}_2 \xrightarrow{\text{गलित}} \text{Pb}^{2+} + 2\text{Br}^{-} \)
कैथोड पर (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड): लेड आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं और ठोस लेड धातु में अपचयित होते हैं।
\( \text{Pb}^{2+} + 2\text{e}^{-} \rightarrow \text{Pb}(\text{s}) \) (अपचयन)
ऐनोड पर (धनात्मक इलेक्ट्रोड): ब्रोमाइड आयन इलेक्ट्रॉन त्यागते हैं और ब्रोमीन गैस में ऑक्सीकृत होते हैं।
\( 2\text{Br}^{-} \rightarrow \text{Br}_2(\text{g}) + 2\text{e}^{-} \) (ऑक्सीकरण)
अतः गलित \( \text{PbBr}_2 \) के विद्युत्-अपघटन से कैथोड पर लेड और ऐनोड पर ब्रोमीन गैस प्राप्त होती है।
In simple words: When molten lead bromide (\( \text{PbBr}_2 \)) undergoes electrolysis, it breaks down into lead ions and bromide ions. At the cathode (negative electrode), lead ions gain electrons and form solid lead metal. At the anode (positive electrode), bromide ions lose electrons and form bromine gas.

🎯 Exam Tip: In molten salt electrolysis, ions are the only species present, so the products are typically the pure elements of the salt.

 

Question 55. मोलर चालकता का सूत्र लिखिए।
Answer: मोलर चालकता (\( \Lambda_{\text{m}} \)) का सूत्र इस प्रकार है:
\[ \Lambda_{\text{m}} = \frac{\text{k} \times 1000}{\text{C}} \] जहाँ:
\( \Lambda_{\text{m}} \) = मोलर चालकता (S \( \text{cm}^{2} \text{ mol}^{-1} \) में)
\( \text{k} \) = विशिष्ट चालकता (S \( \text{cm}^{-1} \) में)
\( \text{C} \) = विलयन की सान्द्रता (मोल \( \text{L}^{-1} \) में)
यह सूत्र दर्शाता है कि मोलर चालकता, विशिष्ट चालकता और विलयन की सान्द्रता पर कैसे निर्भर करती है।
In simple words: The formula for molar conductivity is \( \Lambda_{\text{m}} = \frac{\text{k} \times 1000}{\text{C}} \), where \( \Lambda_{\text{m}} \) is molar conductivity, \( \text{k} \) is specific conductivity, and \( \text{C} \) is the concentration of the electrolyte in moles per liter.

🎯 Exam Tip: Ensure that the units of specific conductivity and concentration are consistent (e.g., \( \text{S cm}^{-1} \) and \( \text{mol L}^{-1} \)) for accurate molar conductivity calculations.

 

Question 56. दुर्बल विद्युत्-अपघट्य के लिए मोलर चालकता एवं सीमान्त मोलर चालकता में सम्बन्ध लिखिए।
Answer: दुर्बल विद्युत्-अपघट्य के लिए वियोजन की मात्रा (\( \alpha \)) को मोलर चालकता (\( \Lambda_{\text{m}} \)) और सीमान्त मोलर चालकता (\( \Lambda^{\circ}_{\text{m}} \)) के बीच संबंध द्वारा दर्शाया जा सकता है:
\[ \alpha = \frac{\Lambda_{\text{m}}}{\Lambda^{\circ}_{\text{m}}} \] जहाँ:
\( \alpha \) = वियोजन की मात्रा (degree of dissociation)
\( \Lambda_{\text{m}} \) = किसी दी गई सान्द्रता पर मोलर चालकता
\( \Lambda^{\circ}_{\text{m}} \) = अनन्त तनुता पर सीमान्त मोलर चालकता (जहाँ विद्युत्-अपघट्य का पूर्ण वियोजन होता है)
यह संबंध हमें दुर्बल विद्युत्-अपघट्यों के विलयन में आयनीकरण की सीमा को निर्धारित करने में मदद करता है।
In simple words: For a weak electrolyte, the degree of dissociation (\( \alpha \)) can be found by dividing its molar conductivity (\( \Lambda_{\text{m}} \)) by its limiting molar conductivity (\( \Lambda^{\circ}_{\text{m}} \)).

🎯 Exam Tip: Limiting molar conductivity is determined by Kohlrausch's Law for weak electrolytes, as they do not fully dissociate even at high dilutions.

 

Question 57. किसी विलयन का मोलर चालकता सान्दता बढ़ाने पर किस प्रकार परिवर्तित होती है ?
Answer: जब किसी विलयन की सान्द्रता बढ़ाई जाती है, तो उसकी मोलर चालकता घट जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सान्द्रता बढ़ने पर प्रति इकाई आयतन में आयनों की संख्या तो बढ़ती है, लेकिन आयनों के बीच की दूरी कम होने से उनके बीच आकर्षण बल बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए आकर्षण के कारण आयनों की गतिशीलता कम हो जाती है, जिससे प्रति मोल उनकी चालकता घट जाती है।
In simple words: When the concentration of a solution increases, its molar conductivity decreases. This happens because the ions get closer to each other, increasing their attraction and reducing their ability to move freely.

🎯 Exam Tip: Remember that while specific conductivity often increases with concentration (more ions per volume), molar conductivity typically decreases because interionic interference outweighs the increase in ion count per mole.

 

Question 59. विलयन के विद्युत्-अपघटन में 4 मोल हाइड्रोजन गैस मुक्त करने के लिए कितने कूलॉम्ब विद्युत् आवेश की आवश्यकता होती है ?
Answer: हाइड्रोजन गैस (\( \text{H}_2 \)) के 1 मोल को मुक्त करने के लिए, 2 मोल इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है, जैसा कि निम्न अभिक्रिया से स्पष्ट है:
\( 2\text{H}^{+} + 2\text{e}^{-} \rightarrow \text{H}_2 \)
हमें पता है कि 1 मोल इलेक्ट्रॉनों पर आवेश 1 फैराडे (\( \text{F} \)) के बराबर होता है, और 1 फैराडे \( = 96500 \text{ C} \)।
इसलिए, 1 मोल \( \text{H}_2 \) गैस मुक्त करने के लिए आवश्यक आवेश \( = 2 \text{ F} \)
\( = 2 \times 96500 \text{ C} = 193000 \text{ C} \)
4 मोल \( \text{H}_2 \) गैस मुक्त करने के लिए आवश्यक कुल आवेश \( = 4 \times (2 \text{ F}) = 8 \text{ F} \)
\( = 8 \times 96500 \text{ C} = 772000 \text{ C} \)
In simple words: To release 4 moles of hydrogen gas during electrolysis, 8 Faraday of electric charge is needed. Since 1 Faraday is 96500 Coulombs, the total charge required is 772000 Coulombs.

🎯 Exam Tip: Always use the stoichiometry of the balanced half-reaction to determine the number of electrons (and thus Faradays) required per mole of product.

 

Question 60. मैग्नीशियम धातु को मैग्नीशियम लवण के जलीय विलयन से विद्युत्-अपघटन के द्वारा प्राप्त नहीं कर सकते हैं। क्यों ?
Answer: मैग्नीशियम धातु को उसके लवण के जलीय विलयन के विद्युत्-अपघटन द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसका मुख्य कारण यह है कि मैग्नीशियम आयनों (\( \text{Mg}^{2+} \)) की तुलना में जल (\( \text{H}_2\text{O} \)) का अपचयन विभव अधिक होता है। इसलिए, कैथोड पर मैग्नीशियम धातु के बजाय जल का अपचयन होता है और हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है।
In simple words: Magnesium metal cannot be obtained by electrolysis of an aqueous solution of its salt. This is because magnesium reacts with water, preventing the formation of pure magnesium metal.

🎯 Exam Tip: For highly reactive metals, electrolysis of their molten salts is generally required to avoid competitive reactions with water in aqueous solutions.

 

Question 61. फैराडे नियतांक क्या है ?
Answer: फैराडे नियतांक (\( \text{F} \)) एक मोल इलेक्ट्रॉनों पर उपस्थित कुल आवेश की मात्रा है। इसका मान लगभग 96485 \( \text{C/mol} \) होता है, जिसे अक्सर गणनाओं में 96500 \( \text{C/mol} \) के रूप में उपयोग किया जाता है। यह नियतांक विद्युत्-रासायनिक प्रक्रियाओं में प्रवाहित आवेश और रासायनिक परिवर्तन की मात्रा के बीच संबंध स्थापित करता है।
In simple words: Faraday's constant is the total electric charge carried by one mole of electrons. It is equal to approximately 96500 Coulombs.

🎯 Exam Tip: Faraday's constant is essential for calculations involving the amount of substance produced or consumed during electrolysis.

 

Question 63. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड में प्लेटिनीकृत प्लेटिनम का क्या कार्य है ?
Answer: मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) में, प्लेटिनीकृत प्लेटिनम (platinized platinum) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है, जो \( \text{H}_2 \) गैस के अधिशोषण और \( \text{H}^{+} \) आयनों में उसके ऑक्सीकरण या \( \text{H}^{+} \) आयनों के \( \text{H}_2 \) गैस में अपचयन की दर को बढ़ाता है। इसकी सतह पर हाइड्रोजन गैस अधिशोषित हो जाती है, और यह धातु इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह के लिए एक अक्रिय सतह प्रदान करती है।
In simple words: In a Standard Hydrogen Electrode (SHE), platinized platinum acts as a catalyst, and its surface absorbs hydrogen.

🎯 Exam Tip: The large surface area of platinized platinum ensures a rapid equilibrium between hydrogen gas and hydrogen ions, leading to a stable electrode potential.

 

Question 64. तनु कॉपर सल्फेट विलयन का विद्युत्- अपघटन \( \text{Pt} \) इलेक्ट्रोड पर कराने पर क्या उत्पाद प्राप्त होता है।
Answer: जब तनु कॉपर सल्फेट (\( \text{CuSO}_4 \)) विलयन का विद्युत्-अपघटन प्लेटिनम (\( \text{Pt} \)) इलेक्ट्रोड का उपयोग करके किया जाता है, तो निम्नलिखित उत्पाद प्राप्त होते हैं:
विलयन में आयन:
\( \text{CuSO}_4 \rightarrow \text{Cu}^{2+} + \text{SO}_4^{2-} \)
\( \text{H}_2\text{O} \rightleftharpoons \text{H}^{+} + \text{OH}^{-} \)
कैथोड पर (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड): \( \text{Cu}^{2+} \) आयन और \( \text{H}^{+} \) आयनों में से \( \text{Cu}^{2+} \) का अपचयन विभव अधिक होने के कारण, \( \text{Cu}^{2+} \) आयन पहले अपचयित होते हैं:
\( \text{Cu}^{2+}(\text{aq}) + 2\text{e}^{-} \rightarrow \text{Cu}(\text{s}) \) (कॉपर धातु)
ऐनोड पर (धनात्मक इलेक्ट्रोड): \( \text{SO}_4^{2-} \) आयन और \( \text{OH}^{-} \) आयनों में से \( \text{OH}^{-} \) आयनों का ऑक्सीकरण विभव कम होने के कारण, \( \text{OH}^{-} \) आयन पहले ऑक्सीकृत होते हैं:
\( 4\text{OH}^{-}(\text{aq}) \rightarrow \text{O}_2(\text{g}) + 2\text{H}_2\text{O}(\text{l}) + 4\text{e}^{-} \) (ऑक्सीजन गैस)
अतः, कैथोड पर कॉपर धातु और ऐनोड पर ऑक्सीजन गैस प्राप्त होती है।
In simple words: When dilute copper sulfate (\( \text{CuSO}_4 \)) solution is electrolyzed using platinum electrodes, copper metal is formed at the cathode, and oxygen gas is released at the anode. This happens because copper ions are reduced more easily than hydrogen ions, and hydroxide ions are oxidized more easily than sulfate ions.

🎯 Exam Tip: When predicting products in aqueous electrolysis, consider the standard electrode potentials of all species present (ions from the salt and water) and any overpotential effects.

 

Question 65. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड में प्लेटिनम पत्र का क्या कार्य है ?
Answer: मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) में प्लेटिनम पत्र का मुख्य कार्य इलेक्ट्रॉनों के अन्तर्वाह और बहिर्वाह के लिए एक सतह प्रदान करना है। यह एक अक्रिय चालक के रूप में कार्य करता है जो अर्ध-अभिक्रिया में भाग लिए बिना विद्युत संपर्क सुनिश्चित करता है।
In simple words: In a Standard Hydrogen Electrode (SHE), the platinum foil is used to facilitate the flow of electrons both into and out of the electrode.

🎯 Exam Tip: The platinum surface is typically coated with platinum black to increase its surface area, enhancing the efficiency of the electrode reaction.

 

Question 66. विद्युत्-रासायनिक तुल्यांक क्या है ?
Answer: विद्युत्-रासायनिक तुल्यांक (\( \text{Z} \)) किसी पदार्थ का वह द्रव्यमान है जो एक कूलॉम्ब विद्युत आवेश प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रोड पर जमा होता है या मुक्त होता है। इसका मात्रक ग्राम प्रति कूलॉम्ब (\( \text{g/C} \)) है। यह फैराडे के प्रथम नियम में एक आनुपातिकता स्थिरांक है।
In simple words: The electrochemical equivalent is the mass of a substance (in grams) deposited or liberated at an electrode when one Coulomb of electricity is passed through an electrolyte. Its unit is grams per Coulomb (\( \text{g/C} \)).

🎯 Exam Tip: The electrochemical equivalent is specific to each element and is directly related to its atomic mass and valency.

 

Question 67. ऐनोड पर ऋण आयनों के निरावेशित होने का क्रम क्या है ?
Answer: ऐनोड पर ऋण आयनों (anions) के निरावेशित (oxidized) होने का क्रम उनकी ऑक्सीकरण की सहजता पर निर्भर करता है। सामान्यतः, ऐनोड पर ऋण आयनों के निरावेशित होने का क्रम निम्नानुसार होता है:
\( \text{SO}_{4}^{2-} < \text{NO}_{3}^{-} < \text{OH}^{-} < \text{Cl}^{-} < \text{Br}^{-} < \text{I}^{-} \)
इसका अर्थ है कि सल्फेट आयन (\( \text{SO}_{4}^{2-} \)) का ऑक्सीकरण करना सबसे कठिन है, जबकि आयोडाइड आयन (\( \text{I}^{-} \)) का ऑक्सीकरण करना सबसे आसान है। यह क्रम आयनों के मानक ऑक्सीकरण विभव पर आधारित है।
In simple words: The order in which negative ions (anions) are discharged at the anode is based on their ease of oxidation. Sulfate ions are the hardest to oxidize, followed by nitrate, hydroxide, chloride, bromide, and iodide ions being the easiest.

🎯 Exam Tip: This selective discharge order is crucial for predicting the products at the anode when multiple anions are present in the electrolyte.

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 3 विद्युत रसायन लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. उपर्युक्त विभवों के आधार पर निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए - \( \text{Ce}^{4+} + \text{e}^{-} \rightarrow \text{Ce}^{3+}, \text{E}^{\circ} = +1.60 \text{ V} \)
\( \text{Sn}^{4+} + 2\text{e}^{-} \rightarrow \text{Sn}^{2+}, \text{E}^{\circ} = +0.15 \text{ V} \)
(i) क्या \( \text{Fe}^{3+} \) द्वारा \( \text{Ce}^{3+} \) का ऑक्सीकरण हो सकता है ? कारण सहित बताइए।
(ii) क्या \( \text{I}_2 \) क्लोरीन को \( \text{KCl} \) में से विस्थापित कर सकती है ? कारण सहित समझाइए।
(iii) \( \text{SnCl}_2 \) और \( \text{FeCl}_3 \) विलयनों को मिलाने पर क्या अभिक्रिया होगी ? समीकरण लिखिए।
(iv) उपर्युक्त अर्द्ध-सेल अभिक्रियाओं में सबसे प्रबल ऑक्सीकारक और सबसे प्रबल अपचायक कौन-सा है ?
(v) \( \text{FeCl}_3 \) विलयन डालने पर क्या \( \text{KI} \) विलयन से आयोडीन मुक्त होगी ?

Answer:
(i) नहीं, \( \text{Fe}^{3+} \) द्वारा \( \text{Ce}^{3+} \) का ऑक्सीकरण नहीं हो सकता है। क्योंकि \( \text{Fe}^{3+}/\text{Fe}^{2+} \) युग्म का मानक अपचयन विभव \( (-0.76 \text{ V}) \), \( \text{Ce}^{4+}/\text{Ce}^{3+} \) युग्म के अपचयन विभव \( (+1.60 \text{ V}) \) से बहुत कम है। ऑक्सीकरण के लिए, ऑक्सीकारक का अपचयन विभव ऑक्सीकृत होने वाली प्रजाति से अधिक होना चाहिए।
(ii) नहीं, आयोडीन (\( \text{I}_2 \)) क्लोरीन को \( \text{KCl} \) में से विस्थापित नहीं कर सकती है। इसका कारण यह है कि क्लोरीन, आयोडीन की तुलना में अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है (क्लोरीन का अपचयन विभव आयोडीन से अधिक है)। एक प्रबल ऑक्सीकारक ही दुर्बल ऑक्सीकारक को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर सकता है।
(iii) जब टिन(II) क्लोराइड (\( \text{SnCl}_2 \)) और आयरन(III) क्लोराइड (\( \text{FeCl}_3 \)) विलयनों को मिलाया जाता है, तो निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया होती है:
\( \text{SnCl}_2(\text{aq}) + 2\text{FeCl}_3(\text{aq}) \rightarrow \text{SnCl}_4(\text{aq}) + 2\text{FeCl}_2(\text{aq}) \)
इस अभिक्रिया में, टिन(II) (\( \text{Sn}^{2+} \)) आयरन(III) (\( \text{Fe}^{3+} \)) को आयरन(II) (\( \text{Fe}^{2+} \)) में अपचयित करता है और स्वयं टिन(IV) (\( \text{Sn}^{4+} \)) में ऑक्सीकृत हो जाता है।
(iv) दिए गए अपचयन विभवों के आधार पर:
* सबसे प्रबल ऑक्सीकारक: \( \text{Ce}^{4+} \) (क्योंकि इसका अपचयन विभव \( +1.60 \text{ V} \) सबसे अधिक धनात्मक है)।
* सबसे प्रबल अपचायक: \( \text{Sn}^{2+} \) (क्योंकि यह ऑक्सीकृत होने के बाद \( \text{Sn}^{4+} \) बनाता है, और \( \text{Sn}^{4+}/\text{Sn}^{2+} \) युग्म का अपचयन विभव \( +0.15 \text{ V} \) अपेक्षाकृत कम है, जिसका अर्थ है कि \( \text{Sn}^{2+} \) आसानी से ऑक्सीकृत हो सकता है)।
(v) हाँ, \( \text{FeCl}_3 \) विलयन डालने पर \( \text{KI} \) विलयन से आयोडीन (\( \text{I}_2 \)) मुक्त होगी। आयरन(III) आयन (\( \text{Fe}^{3+} \)) आयोडाइड आयनों (\( \text{I}^{-} \)) को आयोडीन (\( \text{I}_2 \)) में ऑक्सीकृत करने के लिए पर्याप्त प्रबल ऑक्सीकारक होते हैं।
\[ 2\text{FeCl}_3(\text{aq}) + 2\text{KI}(\text{aq}) \rightarrow 2\text{FeCl}_2(\text{aq}) + 2\text{KCl}(\text{aq}) + \text{I}_2(\text{s}) \]
In simple words: Based on the given potentials: (i) No, \( \text{Fe}^{3+} \) cannot oxidize \( \text{Ce}^{3+} \) because its reduction potential is lower. (ii) No, \( \text{I}_2 \) cannot displace \( \text{Cl}_2 \) from \( \text{KCl} \) because \( \text{Cl}_2 \) is a stronger oxidizing agent. (iii) \( \text{SnCl}_2 \) and \( \text{FeCl}_3 \) will react to form \( \text{SnCl}_4 \) and \( \text{FeCl}_2 \). (iv) \( \text{Ce}^{4+} \) is the strongest oxidizing agent, and \( \text{Sn}^{2+} \) is the strongest reducing agent. (v) Yes, \( \text{FeCl}_3 \) will release \( \text{I}_2 \) from \( \text{KI} \) solution.

🎯 Exam Tip: When dealing with multiple redox couples, always compare their standard electrode potentials to predict the direction and feasibility of a reaction; a more positive potential indicates a stronger oxidizing agent, and a more negative potential indicates a stronger reducing agent.

 

Question 2. निम्नलिखित ऑक्साइडों में से कौन-कौन सा ऑक्साइड \( \text{H}_2 \) द्वारा अपचयित हो सकता है ? कारण सहित बताइए। \( \text{Na}_2\text{O, MgO, Al}_2\text{O}_3, \text{CuO, Ag}_2\text{O} \).
Answer: हाइड्रोजन (\( \text{H}_2 \)) गैस केवल उन धातुओं के ऑक्साइडों को अपचयित कर सकती है जिनकी धातुएँ विद्युत् रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे स्थित होती हैं (यानी, हाइड्रोजन से कम क्रियाशील होती हैं)। दिए गए ऑक्साइडों में से, कॉपर ऑक्साइड (\( \text{CuO} \)) और सिल्वर ऑक्साइड (\( \text{Ag}_2\text{O} \)) हाइड्रोजन गैस द्वारा अपचयित होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि कॉपर और सिल्वर दोनों हाइड्रोजन से कम क्रियाशील हैं।
अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
\( \text{CuO}(\text{s}) + \text{H}_2(\text{g}) \rightarrow \text{Cu}(\text{s}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) \)
\( \text{Ag}_2\text{O}(\text{s}) + \text{H}_2(\text{g}) \rightarrow 2\text{Ag}(\text{s}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) \)
सोडियम ऑक्साइड (\( \text{Na}_2\text{O} \)), मैग्नीशियम ऑक्साइड (\( \text{MgO} \)), और एल्युमीनियम ऑक्साइड (\( \text{Al}_2\text{O}_3 \)) का अपचयन हाइड्रोजन द्वारा नहीं होगा क्योंकि सोडियम, मैग्नीशियम और एल्युमीनियम हाइड्रोजन से अधिक क्रियाशील धातुएँ हैं।
In simple words: Only oxides of metals that are less reactive than hydrogen can be reduced by hydrogen gas. From the list, copper oxide (\( \text{CuO} \)) and silver oxide (\( \text{Ag}_2\text{O} \)) will be reduced by hydrogen.

🎯 Exam Tip: Remember that a reducing agent can only reduce the oxide of a metal that is less reactive than itself.

 

Question 3. इलेक्ट्रोड अभिक्रिया \( \text{Zn} \rightleftharpoons \text{Zn}^{2+} + 2\text{e}^{-} \) तथा \( \text{Cu} \rightleftharpoons \text{Cu}^{2+} + 2\text{e}^{-} \) के मानक इलेक्ट्रोड विभव क्रमशः \( -0.76 \text{ V} \) तथा \( +0.337 \text{ V} \) हैं। कारण सहित बताइए कि अभिक्रिया \( \text{Zn} + \text{Cu}^{2+} \rightarrow \text{Zn}^{2+} + \text{Cu} \) का होना सम्भव है या नहीं।
Answer: हाँ, अभिक्रिया \( \text{Zn} + \text{Cu}^{2+} \rightarrow \text{Zn}^{2+} + \text{Cu} \) का होना सम्भव है। इसे मानक सेल विभव (\( \text{E}^{\circ}_{\text{cell}} \)) की गणना करके सत्यापित किया जा सकता है।
इस अभिक्रिया में, जिंक (\( \text{Zn} \)) का ऑक्सीकरण होता है (ऐनोड पर) और कॉपर आयनों (\( \text{Cu}^{2+} \)) का अपचयन होता है (कैथोड पर)।
ऐनोड अभिक्रिया: \( \text{Zn} \rightarrow \text{Zn}^{2+} + 2\text{e}^{-} \) (ऑक्सीकरण)
कैथोड अभिक्रिया: \( \text{Cu}^{2+} + 2\text{e}^{-} \rightarrow \text{Cu} \) (अपचयन)
मानक सेल विभव (\( \text{E}^{\circ}_{\text{cell}} \)) की गणना इस प्रकार की जाती है:
\( \text{E}^{\circ}_{\text{cell}} = \text{E}^{\circ}_{\text{cathode}} - \text{E}^{\circ}_{\text{anode}} \)
\( \text{E}^{\circ}_{\text{cell}} = \text{E}^{\circ}_{(\text{Cu}^{2+}/\text{Cu})} - \text{E}^{\circ}_{(\text{Zn}^{2+}/\text{Zn})} \)
दिए गए मानों को रखने पर:
\( \text{E}^{\circ}_{\text{cell}} = (+0.337 \text{ V}) - (-0.76 \text{ V}) \)
\( \text{E}^{\circ}_{\text{cell}} = +0.337 \text{ V} + 0.76 \text{ V} \)
\( \text{E}^{\circ}_{\text{cell}} = +1.097 \text{ V} \)
चूंकि \( \text{E}^{\circ}_{\text{cell}} \) का मान धनात्मक (+1.097 V) है, तो अभिक्रिया स्वतः होगी और सम्भव है।
In simple words: Yes, the reaction \( \text{Zn} + \text{Cu}^{2+} \rightarrow \text{Zn}^{2+} + \text{Cu} \) is possible. We can check this by calculating the standard cell potential (\( \text{E}^{\circ}_{\text{cell}} \)). Since the calculated \( \text{E}^{\circ}_{\text{cell}} \) is positive (+1.097 V), the reaction is spontaneous and will occur.

🎯 Exam Tip: A positive standard cell potential (\( \text{E}^{\circ}_{\text{cell}} \)) indicates a spontaneous reaction under standard conditions, meaning the reaction will proceed as written.

 

Question 4. विद्युत् वाहक बल तथा विभवान्तर में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: विद्युत् वाहक बल (Electromotive Force, EMF) और विभवान्तर (Potential Difference) के बीच मुख्य अन्तर नीचे दी गई तालिका में दर्शाए गए हैं:

विद्युत् वाहक बल (EMF)विभवान्तर (Potential Difference)
1. यह इलेक्ट्रोडों के बीच अधिकतम विभव अन्तर होता है जब सेल से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है (खुला परिपथ)।1. यह इलेक्ट्रोडों के बीच विभव अन्तर होता है जब सेल से धारा परिपथ में प्रवाहित होती है (बंद परिपथ)।
2. यह सेल के रासायनिक कार्य को विद्युत् कार्य में बदलने की कुल क्षमता को दर्शाता है।2. यह परिपथ के किन्हीं दो बिंदुओं के बीच ऊर्जा का अंतर दर्शाता है जब धारा प्रवाहित हो रही हो।
3. यह सेल के आंतरिक प्रतिरोध के कारण होने वाले विभव पात पर निर्भर नहीं करता।3. यह सेल के आंतरिक प्रतिरोध के कारण होने वाले विभव पात से प्रभावित होता है।
4. इसका मान सेल के लिए अधिकतम होता है।4. इसका मान हमेशा EMF से कम या उसके बराबर होता है (जब आंतरिक प्रतिरोध शून्य हो)।
5. इसे आमतौर पर विभवमापी (potentiometer) से मापा जाता है।5. इसे वोल्टमीटर (voltmeter) से मापा जाता है।

In simple words: Electromotive force (EMF) is the maximum potential difference between two electrodes when no current is flowing through the cell, measured by a potentiometer. Potential difference is the voltage measured when current is flowing, which is always less than the EMF and measured by a voltmeter.

🎯 Exam Tip: Think of EMF as the "ideal" voltage of a battery, and potential difference as the "real" voltage you measure when it's actively powering something.

 

Question 5. कुछ पदार्थों के अपचयन विभव निम्न हैं। इसमें सबसे प्रबल ऑक्सीकारक तथा सबसे प्रबल अपचायक पदार्थ बताइए - \( \text{Sn}^{4+} + 2\text{e}^{-} \rightarrow \text{Sn}^{2+}, \text{E}^{\circ} = +0.15 \text{ V} \)
\( \text{MnO}_{4}^{-} + 8\text{H}^{+} + 5\text{e}^{-} \rightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O}, \text{E}^{\circ} = +1.52 \text{ V} \)
\( \text{I}_2 + 2\text{e}^{-} \rightarrow 2\text{I}^{-}, \text{E}^{\circ} = +0.54 \text{ V} \)

Answer:
किसी प्रजाति का मानक अपचयन विभव जितना अधिक धनात्मक होता है, वह उतनी ही प्रबल ऑक्सीकारक होती है। इसके विपरीत, किसी प्रजाति का मानक अपचयन विभव जितना अधिक ऋणात्मक होता है (यानी, जितना कम धनात्मक होता है), वह उतनी ही प्रबल अपचायक होती है।
दिए गए अपचयन विभवों को देखें:
* \( \text{MnO}_{4}^{-}/\text{Mn}^{2+}: \text{E}^{\circ} = +1.52 \text{ V} \)
* \( \text{I}_2/\text{I}^{-}: \text{E}^{\circ} = +0.54 \text{ V} \)
* \( \text{Sn}^{4+}/\text{Sn}^{2+}: \text{E}^{\circ} = +0.15 \text{ V} \)
इन मानों के आधार पर:
प्रबल ऑक्सीकारक: \( \text{MnO}_{4}^{-} \) (क्योंकि इसका अपचयन विभव \( +1.52 \text{ V} \) सबसे अधिक धनात्मक है)।
प्रबल अपचायक: \( \text{Sn}^{2+} \) (क्योंकि यह ऑक्सीकृत होकर \( \text{Sn}^{4+} \) बनाता है, और \( \text{Sn}^{4+}/\text{Sn}^{2+} \) युग्म का अपचयन विभव \( +0.15 \text{ V} \) सबसे कम धनात्मक है, जिसका अर्थ है कि \( \text{Sn}^{2+} \) सबसे आसानी से ऑक्सीकृत हो सकता है)।
In simple words: The strongest oxidizing agent is \( \text{MnO}_{4}^{-} \) because it has the highest positive reduction potential. The strongest reducing agent is \( \text{Sn}^{2+} \) because it has the lowest reduction potential, meaning it is most easily oxidized.

🎯 Exam Tip: Remember, a strong oxidizing agent itself gets reduced, and a strong reducing agent itself gets oxidized.

 

Question 6. क्या जिंक डालने पर विलयन का नीला रंग गायब क्यों हो जाता है ? समीकरण लिखिए।
Answer: जब जिंक (\( \text{Zn} \)) धातु को कॉपर सल्फेट (\( \text{CuSO}_4 \)) के नीले विलयन में डाला जाता है, तो जिंक, कॉपर को उसके विलयन से विस्थापित कर देता है। जिंक कॉपर से अधिक क्रियाशील धातु है। इस विस्थापन अभिक्रिया के दौरान, नीले रंग के कॉपर आयन (\( \text{Cu}^{2+} \)) अपचयित होकर ठोस कॉपर धातु (\( \text{Cu} \)) में परिवर्तित हो जाते हैं, और जिंक धातु ऑक्सीकृत होकर रंगहीन जिंक आयन (\( \text{Zn}^{2+} \)) बनाती है। कॉपर आयनों के गायब होने के कारण विलयन का नीला रंग गायब हो जाता है।
अभिक्रिया समीकरण:
\( \text{Zn}(\text{s}) + \text{CuSO}_4(\text{aq}) \rightarrow \text{ZnSO}_4(\text{aq}) + \text{Cu}(\text{s}) \)
In simple words: When zinc is added to a blue copper sulfate solution, the blue color disappears because zinc replaces copper. Zinc is more reactive than copper, so zinc atoms lose electrons to become zinc ions (which are colorless), and copper ions gain electrons to become copper metal.

🎯 Exam Tip: This is a classic single displacement reaction, illustrating that a more reactive metal can displace a less reactive metal from its salt solution.

 

Question 7. क्या कारण है कि गर्म करने पर \( \text{HgO} \) अपघटित हो जाता है परन्तु \( \text{MgO} \) अपघटित नहीं होता ?
Answer: जब मरकरी ऑक्साइड (\( \text{HgO} \)) को गर्म किया जाता है, तो यह अपघटित हो जाता है क्योंकि मरकरी (\( \text{Hg} \)) विद्युत् रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे स्थित है, जिसका अर्थ है कि यह एक कम क्रियाशील धातु है। कम क्रियाशील धातुओं के ऑक्साइड आमतौर पर गर्म करने पर आसानी से अपघटित हो जाते हैं। इसके विपरीत, मैग्नीशियम ऑक्साइड (\( \text{MgO} \)) गर्म करने पर अपघटित नहीं होता है क्योंकि मैग्नीशियम (\( \text{Mg} \)) विद्युत् रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर स्थित है और अत्यधिक क्रियाशील धातु है। अधिक क्रियाशील धातुओं के ऑक्साइड बहुत स्थिर होते हैं और उन्हें गर्म करके आसानी से अपघटित नहीं किया जा सकता।
अभिक्रियाएँ:
\( 2\text{HgO}(\text{s}) \xrightarrow{\triangle} 2\text{Hg}(\text{l}) + \text{O}_2(\text{g}) \)
\( \text{MgO}(\text{s}) \xrightarrow{\triangle} \) कोई प्रभाव नहीं (उच्च ताप पर भी)
In simple words: Mercury oxide (\( \text{HgO} \)) breaks down when heated because mercury is less reactive and is below hydrogen in the electrochemical series. Magnesium oxide (\( \text{MgO} \)) does not break down when heated because magnesium is very reactive and is above hydrogen in the series. Oxides of less reactive metals break down easily with heat, but oxides of very reactive metals do not.

🎯 Exam Tip: The thermal stability of a metal oxide generally increases with the reactivity of the metal; more reactive metals form more stable oxides.

 

Question 8. साधारण ताप पर \( \text{Na} \) जल से अभिक्रिया करता है, जबकि \( \text{Mg} \) केवल उच्च ताप पर जल से अभिक्रिया करता है, क्यों?
Answer: सोडियम (\( \text{Na} \)) साधारण ताप पर जल से तीव्रता से अभिक्रिया करता है, जबकि मैग्नीशियम (\( \text{Mg} \)) केवल उच्च ताप (गर्म जल या भाप) पर ही जल से अभिक्रिया करता है। इसका कारण दोनों धातुओं की क्रियाशीलता में अंतर है। सोडियम, मैग्नीशियम की तुलना में विद्युत् रासायनिक श्रेणी में बहुत ऊपर स्थित है, जिसका अर्थ है कि यह मैग्नीशियम से अधिक क्रियाशील है। विद्युत् रासायनिक श्रेणी में नीचे जाने पर धातुओं की क्रियाशीलता कम होती जाती है।
अभिक्रियाएँ:
साधारण ताप पर:
\( 2\text{Na}(\text{s}) + 2\text{H}_2\text{O}(\text{l}) \rightarrow 2\text{NaOH}(\text{aq}) + \text{H}_2(\text{g}) \uparrow \)
उच्च ताप पर:
\( \text{Mg}(\text{s}) + 2\text{H}_2\text{O}(\text{g}) \xrightarrow{\text{उच्च ताप}} \text{Mg}(\text{OH})_2(\text{s}) + \text{H}_2(\text{g}) \uparrow \)
In simple words: Sodium (\( \text{Na} \)) reacts with water at room temperature, but magnesium (\( \text{Mg} \)) only reacts with water at high temperatures. This is because sodium is more reactive than magnesium and is placed higher in the electrochemical series. Reactivity with water decreases as you go down the series.

🎯 Exam Tip: The vigor of a metal's reaction with water is a direct indicator of its position in the reactivity series and its tendency to lose electrons.

 

Question 9. लोहा, कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर विस्थापित करता है परन्तु \( \text{Pt} \) नहीं, क्यों ?
Answer: लोहा (\( \text{Fe} \)) कॉपर सल्फेट (\( \text{CuSO}_4 \)) विलयन से कॉपर (\( \text{Cu} \)) को विस्थापित कर सकता है क्योंकि लोहा कॉपर से अधिक क्रियाशील है। विद्युत् रासायनिक श्रेणी में लोहा कॉपर से ऊपर स्थित है, जिसका अर्थ है कि लोहे का ऑक्सीकरण विभव कॉपर से अधिक है। इसलिए, लोहा इलेक्ट्रॉन त्याग कर \( \text{Cu}^{2+} \) आयनों को अपचयित कर सकता है।
अभिक्रिया: \( \text{CuSO}_4(\text{aq}) + \text{Fe}(\text{s}) \rightarrow \text{FeSO}_4(\text{aq}) + \text{Cu}(\text{s}) \)
दूसरी ओर, प्लेटिनम (\( \text{Pt} \)) कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर को विस्थापित नहीं कर सकता है। प्लेटिनम कॉपर की तुलना में बहुत कम क्रियाशील है (यह विद्युत् रासायनिक श्रेणी में कॉपर से नीचे स्थित है), जिसका अर्थ है कि प्लेटिनम का ऑक्सीकरण विभव कॉपर से कम है। इसलिए, प्लेटिनम में \( \text{Cu}^{2+} \) आयनों को अपचयित करने की प्रवृत्ति नहीं होती है।
अभिक्रिया: \( \text{CuSO}_4(\text{aq}) + \text{Pt}(\text{s}) \rightarrow \) अभिक्रिया नहीं
In simple words: Iron (\( \text{Fe} \)) can displace copper from copper sulfate (\( \text{CuSO}_4 \)) solution because iron is more reactive than copper. However, platinum (\( \text{Pt} \)) cannot displace copper because platinum is less reactive than copper.

🎯 Exam Tip: A metal can displace another metal from its salt solution only if the displacing metal is more reactive (has a lower standard reduction potential) than the metal in the salt.

 

Question 12. विशिष्ट चालकता एवं आण्विक चालकता पर तनुता का क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer:
**विशिष्ट चालकता पर तनुता का प्रभाव:** जब किसी विलयन में पानी मिलाकर उसे पतला करते हैं (तनुता बढ़ाते हैं), तो उसकी विशिष्ट चालकता कम हो जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रति इकाई आयतन में आयनों की संख्या घट जाती है. आयन ही बिजली ले जाते हैं, इसलिए कम आयन होने से कम बिजली चलती है.
**आण्विक चालकता पर तनुता का प्रभाव:** तनुता बढ़ाने पर आण्विक चालकता बढ़ जाती है. ऐसा होता है क्योंकि जब विलयन पतला होता है, तो आयनों को घूमने के लिए अधिक जगह मिलती है. इससे आयनों के बीच की टक्करें कम हो जाती हैं और वे तेजी से आगे बढ़ पाते हैं, जिससे कुल चालकता बढ़ जाती है.
In simple words: जब हम पानी मिलाकर किसी घोल को पतला करते हैं, तो उसकी विशिष्ट चालकता कम हो जाती है क्योंकि एक छोटे हिस्से में आयन कम हो जाते हैं. लेकिन, उसकी आण्विक चालकता बढ़ जाती है क्योंकि आयनों को हिलने-डुलने के लिए ज़्यादा जगह मिलती है और वे बेहतर तरीके से बिजली चला पाते हैं.

🎯 Exam Tip: याद रखें कि तनुता बढ़ाने पर विशिष्ट चालकता घटती है, जबकि मोलर और आण्विक चालकता बढ़ती है, क्योंकि आयनों की गतिशीलता बढ़ती है.

 

Question 13. तनु सल्फ्यूरिक अम्ल का विद्युत्-अपघटन कराने पर प्राप्त पदार्थों को लिखिए।
Answer: तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) के विद्युत्-अपघटन में, यह पानी में टूट जाता है. पानी भी थोड़ा टूटता है. \[ H_2SO_4 \rightarrow 2H^+ + SO_4^{2-} \] \[ H_2O \rightarrow H^+ + OH^- \] कैथोड पर (जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलते हैं), \( H^+ \) आयन इलेक्ट्रॉन लेकर हाइड्रोजन गैस बनाते हैं: \[ 2H^+ + 2e^- \rightarrow H_2 \] एनोड पर (जहाँ इलेक्ट्रॉन निकलते हैं), \( OH^- \) आयन इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं और ऑक्सीजन गैस तथा पानी बनाते हैं: \[ 4OH^- \rightarrow O_2 + 2H_2O + 4e^- \] अतः, इस प्रक्रिया से कैथोड पर हाइड्रोजन गैस (\( H_2 \)) और एनोड पर ऑक्सीजन गैस (\( O_2 \)) प्राप्त होती है.In simple words: जब सल्फ्यूरिक एसिड को बिजली से तोड़ते हैं, तो हाइड्रोजन गैस कैथोड पर और ऑक्सीजन गैस एनोड पर निकलती है.

🎯 Exam Tip: विद्युत्-अपघटन के दौरान, कैथोड पर हमेशा अपचयन (reduction) और एनोड पर हमेशा ऑक्सीकरण (oxidation) होता है, जिससे गैसें या धातुएँ मुक्त होती हैं.

 

Question 14. सोडियम सल्फेट विलयन का विद्युत्- अपघटन कराने पर प्राप्त पदार्थों के नाम लिखिए।
Answer: सोडियम सल्फेट (\( Na_2SO_4 \)) का विलयन जब बिजली से तोड़ा जाता है, तो यह पानी में टूट जाता है, और पानी भी टूटता है. \[ Na_2SO_4 \rightarrow 2Na^+ + SO_4^{2-} \] \[ H_2O \rightarrow H^+ + OH^- \] चूंकि \( H^+ \) आयनों का डिस्चार्ज विभव \( Na^+ \) आयनों से कम होता है, इसलिए कैथोड पर \( H^+ \) आयन इलेक्ट्रॉन लेकर हाइड्रोजन गैस (\( H_2 \)) बनाते हैं. एनोड पर, \( OH^- \) आयनों का डिस्चार्ज विभव \( SO_4^{2-} \) आयनों से कम होता है, इसलिए \( OH^- \) आयन इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं और ऑक्सीजन गैस (\( O_2 \)) तथा पानी बनाते हैं. अतः, कैथोड पर हाइड्रोजन गैस और एनोड पर ऑक्सीजन गैस प्राप्त होती है. सोडियम सल्फेट पानी में ही रहता है.In simple words: सोडियम सल्फेट के घोल को बिजली से तोड़ने पर कैथोड पर हाइड्रोजन गैस और एनोड पर ऑक्सीजन गैस बनती है.

🎯 Exam Tip: जलीय विलयनों के विद्युत्-अपघटन में, इलेक्ट्रोडों पर बनने वाले उत्पाद आयनों के डिस्चार्ज विभव पर निर्भर करते हैं. जिसकी डिस्चार्ज विभव कम होती है, वह पहले मुक्त होता है.

 

Question 15. गलित NaCl या ब्राइन का विद्युत्-अपघटन करने पर प्राप्त पदार्थों को लिखिए।
Answer: जब पिघले हुए सोडियम क्लोराइड (NaCl) का विद्युत्-अपघटन किया जाता है, तो यह \( Na^+ \) और \( Cl^- \) आयनों में टूट जाता है. \[ NaCl \rightarrow Na^+ + Cl^- \] कैथोड पर (नकारात्मक इलेक्ट्रोड), \( Na^+ \) आयन इलेक्ट्रॉन लेते हैं और सोडियम धातु (\( Na \)) बनाते हैं. यह एक अपचयन अभिक्रिया है. \[ Na^+ + e^- \rightarrow Na \] एनोड पर (सकारात्मक इलेक्ट्रोड), \( Cl^- \) आयन इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं और क्लोरीन गैस (\( Cl_2 \)) बनाते हैं. यह एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया है. \[ Cl^- \rightarrow \frac{1}{2}Cl_2 + e^- \] इस प्रकार, कैथोड पर सोडियम धातु और एनोड पर क्लोरीन गैस प्राप्त होती है.In simple words: पिघले नमक को बिजली से तोड़ने पर कैथोड पर सोडियम धातु और एनोड पर क्लोरीन गैस मिलती है.

🎯 Exam Tip: गलित (molten) लवणों के विद्युत्-अपघटन में, केवल लवण के आयन ही इलेक्ट्रोडों पर प्रतिक्रिया करते हैं, क्योंकि पानी मौजूद नहीं होता है.

 

Question 16. धारा दक्षता (Current efficiency) से आप क्या समझते हैं ?
Answer: धारा दक्षता, जिसे करंट एफिशिएंसी भी कहते हैं, यह बताती है कि किसी विद्युत्-रासायनिक प्रक्रिया में कितनी बिजली वास्तव में वांछित उत्पाद बनाने में उपयोग हुई है. इसे वास्तविक रूप से उत्पन्न उत्पाद की मात्रा और सैद्धांतिक रूप से उत्पन्न हो सकने वाले उत्पाद की मात्रा के अनुपात के रूप में मापा जाता है. यह प्रतिशत में दिखाया जाता है. \[ \text{धारा दक्षता} = \frac{\text{वास्तविक उपज}}{\text{सैद्धांतिक उपज}} \times 100 \] वास्तविक उपज वह मात्रा है जो प्रयोग से मिलती है, जबकि सैद्धांतिक उपज वह मात्रा है जिसकी गणना फैराडे के नियम या आयन-इलेक्ट्रॉन समीकरणों का उपयोग करके की जाती है. यदि धारा दक्षता 100% है, तो इसका मतलब है कि सभी बिजली वांछित प्रतिक्रिया के लिए उपयोग की गई है.In simple words: धारा दक्षता बताती है कि बिजली का कितना हिस्सा असल में काम आया, यानि जितना उत्पाद हमें चाहिए था, उसमें से कितना बन पाया.

🎯 Exam Tip: उच्च धारा दक्षता का मतलब है कि प्रक्रिया अधिक कुशल है और बिजली की कम बर्बादी हुई है, जो औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 17. विद्युत् चालन के आधार पर अचालक एवं अर्द्धचालक को समझाये।
Answer:
**अचालक (Insulators):** ये ऐसे पदार्थ होते हैं जो बिजली का संचालन बिल्कुल नहीं करते. इसका मतलब है कि इनमें से विद्युत् धारा नहीं गुजर सकती. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इनके इलेक्ट्रॉनों को हिलने-डुलने की आज़ादी नहीं होती है. उदाहरण के लिए, प्लास्टिक, चीनी मिट्टी, लकड़ी आदि.
**अर्द्धचालक (Semiconductors):** ये ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी बिजली चलाने की क्षमता अचालकों और चालकों (जैसे धातु) के बीच की होती है. सामान्य तापमान पर ये बहुत कम बिजली चलाते हैं, लेकिन जब इन्हें गर्म किया जाता है या इनमें कुछ अशुद्धियाँ मिलाई जाती हैं (डोपित करना), तो इनकी चालकता बहुत बढ़ जाती है. उदाहरण के लिए, सिलिकॉन, डोपित सिलिकॉन, गैलियम आर्सेनाइड आदि. अर्द्धचालकों का उपयोग कंप्यूटर चिप्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है.In simple words: अचालक वे होते हैं जिनमें बिजली नहीं चलती (जैसे प्लास्टिक), जबकि अर्द्धचालक वे होते हैं जिनमें बिजली थोड़ी-थोड़ी चलती है और हम उसे कंट्रोल कर सकते हैं (जैसे सिलिकॉन).

🎯 Exam Tip: अचालकों में बहुत बड़ा ऊर्जा अंतराल होता है, जबकि अर्द्धचालकों में यह अंतराल छोटा होता है, जिससे इलेक्ट्रॉन कुछ ऊर्जा पाकर चालन बैंड में जा सकते हैं.

 

Question 18. साम्यावस्था पर डेनियल सेल के लिए नेस्ट समीकरण लिखिए एवं \( E^0_{\text{(सेल)}} \) तथा साम्य स्थिरांक (\( K_c \)) में सम्बन्ध व्युत्पन्न कीजिए।
Answer: डेनियल सेल में होने वाली अभिक्रिया है: \( Zn(s) + Cu^{2+}(aq) \rightarrow Zn^{2+}(aq) + Cu(s) \). साम्यावस्था पर, सेल का विद्युत् वाहक बल (e.m.f), \( E_{\text{cell}} \), शून्य हो जाता है. नेस्र्ट समीकरण है: \[ E_{\text{cell}} = E^0_{\text{cell}} - \frac{0.059}{n} \log \frac{[Zn^{2+}]}{[Cu^{2+}]} \] साम्यावस्था पर \( E_{\text{cell}} = 0 \) होता है, और सांद्रता का अनुपात साम्य स्थिरांक \( K_c \) के बराबर होता है: \[ \frac{[Zn^{2+}]}{[Cu^{2+}]} = K_c \] इन मानों को नेस्र्ट समीकरण में रखने पर: \[ 0 = E^0_{\text{cell}} - \frac{0.059}{n} \log K_c \]
\( \implies \) \[ E^0_{\text{cell}} = \frac{0.059}{n} \log K_c \] यह \( E^0_{\text{cell}} \) और साम्य स्थिरांक \( K_c \) के बीच का संबंध है. यहाँ \( n \) अभिक्रिया में स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है (डेनियल सेल के लिए \( n=2 \)). इस समीकरण से हम एक मान पता होने पर दूसरा मान ज्ञात कर सकते हैं.In simple words: जब सेल काम करना बंद कर दे (साम्यावस्था), तो उसका वोल्टेज शून्य हो जाता है. इस हालत में, हम एक खास समीकरण से सेल के मानक वोल्टेज और साम्य स्थिरांक के बीच का रिश्ता पता कर सकते हैं.

🎯 Exam Tip: साम्यावस्था पर सेल का e.m.f. हमेशा शून्य होता है, लेकिन मानक e.m.f. शून्य नहीं होता है, यह साम्य स्थिरांक से संबंधित होता है.

 

Question 19. एकल इलेक्ट्रोड विभव को निर्धारण आप कैसे करेंगे ?
Answer: एकल इलेक्ट्रोड विभव को सीधे मापना संभव नहीं है. इसे मापने के लिए हमेशा दो इलेक्ट्रोडों की आवश्यकता होती है, जो मिलकर एक पूरा सेल बनाते हैं. हम केवल दो इलेक्ट्रोडों के बीच के वोल्टेज (विभवांतर) को माप सकते हैं, न कि किसी एक इलेक्ट्रोड के वोल्टेज को. एक इलेक्ट्रोड के विभव को पता करने के लिए, उसे एक मानक संदर्भ इलेक्ट्रोड (Standard Reference Electrode) के साथ जोड़ते हैं, जिसका विभव पहले से पता होता है. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) एक ऐसा संदर्भ इलेक्ट्रोड है, जिसका मानक विभव 0.00 V माना जाता है. जब किसी अज्ञात इलेक्ट्रोड को SHE के साथ जोड़ते हैं, तो पूरे सेल का जो विभव आता है, वही अज्ञात इलेक्ट्रोड का विभव होता है (यदि SHE को एनोड या कैथोड के रूप में जोड़ा गया हो). इससे हम किसी भी एकल इलेक्ट्रोड का विभव ज्ञात कर सकते हैं.In simple words: हम अकेले किसी इलेक्ट्रोड का वोल्टेज नहीं माप सकते. उसे मापने के लिए हम उसे एक खास इलेक्ट्रोड (जैसे मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड, जिसका वोल्टेज 0 होता है) के साथ जोड़ते हैं, और फिर पूरे सेल का वोल्टेज मापकर अकेले वाले का वोल्टेज पता करते हैं.

🎯 Exam Tip: मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) का उपयोग अन्य इलेक्ट्रोडों के मानक विभव को मापने के लिए एक संदर्भ बिंदु के रूप में किया जाता है, और इसका विभव 0.00 V माना जाता है.

 

Question 20. इंधन सेलों का महत्व लिखिए।
Answer: ईंधन सेल बहुत महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे रासायनिक ऊर्जा को सीधे विद्युत् ऊर्जा में बदलते हैं. इनका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये बहुत कुशल होते हैं और पारंपरिक बिजली घरों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं. ये लगातार बिजली पैदा कर सकते हैं जब तक इन्हें ईंधन (जैसे हाइड्रोजन) और ऑक्सीकारक (जैसे ऑक्सीजन) की आपूर्ति होती रहती है. इनसे पानी जैसा साफ उत्पाद निकलता है, जिससे पर्यावरण पर कम असर पड़ता है. ईंधन सेल पोर्टेबल उपकरणों, गाड़ियों और अंतरिक्ष यानों में उपयोग किए जाते हैं, जहाँ साफ और कुशल ऊर्जा की जरूरत होती है. वे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में भी मदद करते हैं.In simple words: ईंधन सेल सीधे ईंधन को बिजली में बदलते हैं, बहुत कम प्रदूषण करते हैं, और बहुत कुशल होते हैं, जिससे ये गाड़ियों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक अच्छा और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत बन जाते हैं.

🎯 Exam Tip: ईंधन सेल का मुख्य लाभ उनकी उच्च ऊर्जा दक्षता और शून्य उत्सर्जन (यदि हाइड्रोजन का उपयोग किया जाए) है, जो उन्हें भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए आदर्श बनाता है.

 

Question 21. विद्युत्-रासायनिक सेल तथा विद्युत्- अपघटनी सेल में अन्तर लिखें।
Answer:

विद्युत् रासायनिक सेलविद्युत् अपघटनी सेल
1. यह रासायनिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में बदलता है।1. यह विद्युत् ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलता है।
2. इसमें रेडॉक्स अभिक्रिया अपने आप होती है।2. इसमें रेडॉक्स अभिक्रिया अपने आप नहीं होती है।
3. इसमें ऐनोड नकारात्मक और कैथोड सकारात्मक होता है।3. इसमें ऐनोड सकारात्मक और कैथोड नकारात्मक होता है।
4. इसमें लवण सेतु का उपयोग करते हैं।4. इसमें लवण सेतु का उपयोग नहीं करते हैं।
5. इसमें इलेक्ट्रॉन बाहरी सर्किट में ऐनोड से कैथोड की ओर जाते हैं।5. इसमें इलेक्ट्रॉन बाहरी बैटरी से आते हैं और कैथोड से अंदर जाकर ऐनोड से बाहर निकलते हैं।
In simple words: विद्युत्-रासायनिक सेल रासायनिक ऊर्जा को बिजली में बदलते हैं और अपने आप काम करते हैं, जबकि विद्युत्-अपघटनी सेल बिजली का उपयोग करके रासायनिक बदलाव करते हैं और उन्हें बाहरी बिजली की जरूरत होती है.

🎯 Exam Tip: दोनों प्रकार के सेलों में ऑक्सीकरण हमेशा एनोड पर और अपचयन हमेशा कैथोड पर होता है, लेकिन इलेक्ट्रोडों के आवेश अलग-अलग होते हैं.

 

Question 22. कॉपर सल्फेट विलयन का विद्युत्-अपघटन कराने पर प्राप्त पदार्थों को लिखिए।
Answer: जब कॉपर सल्फेट (\( CuSO_4 \)) के विलयन का विद्युत्-अपघटन किया जाता है, तो \( CuSO_4 \) और पानी दोनों टूटते हैं. \[ CuSO_4 \rightarrow Cu^{2+} + SO_4^{2-} \] \[ H_2O \rightarrow H^+ + OH^- \] कैथोड पर (\( - \) इलेक्ट्रोड): \( Cu^{2+} \) और \( H^+ \) आयन होते हैं. चूंकि \( Cu^{2+} \) का डिस्चार्ज विभव \( H^+ \) से कम होता है, इसलिए \( Cu^{2+} \) पहले इलेक्ट्रॉन लेता है और कॉपर धातु (\( Cu \)) बनाता है. \[ Cu^{2+} + 2e^- \rightarrow Cu \] एनोड पर (\( + \) इलेक्ट्रोड): \( SO_4^{2-} \) और \( OH^- \) आयन होते हैं. चूंकि \( OH^- \) की इलेक्ट्रॉन त्यागने की क्षमता \( SO_4^{2-} \) से अधिक होती है, इसलिए \( OH^- \) पहले इलेक्ट्रॉन छोड़ता है और ऑक्सीजन गैस (\( O_2 \)) तथा पानी बनाता है. \[ 4OH^- \rightarrow O_2 + 2H_2O + 4e^- \] अतः, इस प्रक्रिया में कैथोड पर कॉपर धातु और एनोड पर ऑक्सीजन गैस प्राप्त होती है.In simple words: कॉपर सल्फेट के घोल को बिजली से तोड़ने पर कैथोड पर कॉपर धातु और एनोड पर ऑक्सीजन गैस बनती है.

🎯 Exam Tip: सक्रिय धातुओं के सल्फेट विलयनों के विद्युत्-अपघटन में, कैथोड पर \( H_2 \) गैस मुक्त होती है, लेकिन यहाँ \( Cu^{2+} \) कम सक्रिय होने के कारण स्वयं धातु के रूप में जमा होता है.

 

Question 23. \( CuSO_4 \) विलयन का विद्युत्-अपघटन कॉपर इलेक्ट्रोड की उपस्थिति में कराने पर प्राप्त पदार्थों के नाम लिखिए।
Answer: जब कॉपर सल्फेट (\( CuSO_4 \)) के विलयन का विद्युत्-अपघटन कॉपर इलेक्ट्रोड का उपयोग करके किया जाता है, तो दोनों इलेक्ट्रोडों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ होती हैं. विलयन में \( Cu^{2+} \) और \( SO_4^{2-} \) आयन होते हैं, और पानी से \( H^+ \) तथा \( OH^- \) आयन होते हैं. कैथोड पर (कॉपर इलेक्ट्रोड): \( Cu^{2+} \) आयन इलेक्ट्रॉन लेते हैं और कॉपर धातु के रूप में कैथोड पर जमा हो जाते हैं. \[ Cu^{2+} + 2e^- \rightarrow Cu \] एनोड पर (कॉपर इलेक्ट्रोड): एनोड स्वयं कॉपर धातु से बना होता है. \( OH^- \) और \( SO_4^{2-} \) आयनों के ऑक्सीकरण होने के बजाय, एनोड का कॉपर धातु ही ऑक्सीकृत होकर \( Cu^{2+} \) आयन बनाता है और विलयन में चला जाता है. \[ Cu \rightarrow Cu^{2+} + 2e^- \] इस प्रकार, कैथोड पर शुद्ध कॉपर धातु जमा होती है, जबकि एनोड से कॉपर घुलता रहता है, और विलयन में \( CuSO_4 \) की सांद्रता लगभग स्थिर रहती है. यह प्रक्रिया धातुओं के शोधन में उपयोग की जाती है.In simple words: जब कॉपर सल्फेट घोल को कॉपर इलेक्ट्रोड के साथ बिजली से तोड़ते हैं, तो कैथोड पर शुद्ध कॉपर जमा होता है और एनोड से कॉपर घुलता रहता है.

🎯 Exam Tip: सक्रिय इलेक्ट्रोड (जैसे कॉपर एनोड) के उपयोग से विलयन के आयनों के बजाय इलेक्ट्रोड धातु स्वयं ऑक्सीकृत हो सकती है, जिसका उपयोग धातुओं के शोधन में होता है.

 

Question 1. लोहे में संक्षारण प्रक्रिया को समझाते हुए स्पष्ट कीजिए कि जंग लगने से लोहा भारी क्यों हो जाता है ?
अथवा
लोहे के जंग लगने की सम्पूर्ण रासायनिक अभिक्रिया लिखें।

Answer:
**संक्षारण का विद्युत्-रासायनिक सिद्धांत:** लोहे पर जंग लगना एक विद्युत्-रासायनिक प्रक्रिया है. यह तब होती है जब लोहा हवा और पानी के संपर्क में आता है. लोहे की सतह पर एक छोटा गैल्वैनिक सेल बन जाता है. पानी की बूंदों में हवा से घुली ऑक्सीजन (\( O_2 \)) और कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)) होती है, जो एक विद्युत्-अपघट्य का काम करती हैं. \[ CO_2 + H_2O \rightarrow H_2CO_3 \] इस प्रक्रिया में, लोहे का शुद्ध भाग एनोड का काम करता है और अशुद्ध भाग कैथोड का काम करता है. **सेल में होने वाली अभिक्रियाएँ:** **एनोड पर (ऑक्सीकरण):** लोहे का ऑक्सीकरण होता है, और \( Fe^{2+} \) आयन विलयन में चले जाते हैं. \[ Fe_{(s)} \rightarrow Fe^{2+}_{(aq)} + 2e^- \] **कैथोड पर (अपचयन):** एनोड से निकले इलेक्ट्रॉन कैथोड पर पहुँचते हैं. पानी में घुली ऑक्सीजन \( H^+ \) आयनों की उपस्थिति में इन इलेक्ट्रॉनों को लेती है और पानी बनाती है. \[ \frac{1}{2}O_2 + 2H^+ + 2e^- \rightarrow H_2O \] यह पूरी अभिक्रिया इस प्रकार लिखी जा सकती है: \[ Fe_{(s)} + \frac{1}{2}O_2 + 2H^+ \rightarrow Fe^{2+}_{(aq)} + H_2O \] यह \( Fe^{2+} \) आयन हवा में मौजूद ऑक्सीजन द्वारा आगे ऑक्सीकृत होकर फेरिक ऑक्साइड (\( Fe_2O_3 \)) बनाते हैं, जिसे जंग कहते हैं. \[ 4Fe^{2+}_{(aq)} + O_2 + 4H_2O \rightarrow 2Fe_2O_3 \cdot xH_2O \text{ (जंग)} + 8H^+ \] **लोहे का भारी होना:** जंग (\( Fe_2O_3 \cdot xH_2O \)) में ऑक्सीजन और पानी के अणु जुड़ जाते हैं, जिससे लोहे का द्रव्यमान बढ़ जाता है. यह जंग लगने से लोहा भारी हो जाता है.In simple words: लोहे को जंग तब लगती है जब वह पानी और हवा के संपर्क में आता है. लोहा ऑक्सीकृत होकर \( Fe^{2+} \) बनाता है, जो बाद में ऑक्सीजन और पानी से मिलकर जंग (आयरन ऑक्साइड) बनाता है. इस जंग में ऑक्सीजन और पानी भी जुड़ जाते हैं, जिससे लोहे का वज़न बढ़ जाता है.

🎯 Exam Tip: जंग लगने से लोहा भारी होता है क्योंकि इसमें ऑक्सीजन और पानी के अणु जुड़ जाते हैं, और यह प्रक्रिया नमी और ऑक्सीजन की उपस्थिति में तेज होती है.

 

Question 2. (अ) डेनियल सेल का नामांकित चित्र बनाइये।
(ब) इलेक्ट्रोडों पर होने वाली ऑक्सीकरण एवं अपचयन की अर्द्ध अभिक्रियाएँ लिखिए।
(स) इस सेल के लिये नेर्नुस्ट समीकरण का गणितीय रूप लिखिये।

Answer:
(अ) [कृपया आरेख के लिए पाठ्यपुस्तक देखें. इसमें जिंक इलेक्ट्रोड को जिंक सल्फेट विलयन में और कॉपर इलेक्ट्रोड को कॉपर सल्फेट विलयन में डुबोया जाता है, तथा दोनों को एक लवण सेतु से जोड़ा जाता है. बाहरी परिपथ में एक वोल्टमीटर लगाया जाता है.]
(ब) डेनियल सेल में जिंक एनोड और कॉपर कैथोड का काम करता है.
**एनोड पर (ऑक्सीकरण):** जिंक धातु ऑक्सीकृत होकर \( Zn^{2+} \) आयन बनाती है और इलेक्ट्रॉन मुक्त करती है. \[ Zn_{(s)} \rightarrow Zn^{2+}_{(aq)} + 2e^- \] **कैथोड पर (अपचयन):** कॉपर आयन (\( Cu^{2+} \)) इलेक्ट्रॉन लेते हैं और कॉपर धातु (\( Cu \)) के रूप में जमा हो जाते हैं. \[ Cu^{2+}_{(aq)} + 2e^- \rightarrow Cu_{(s)} \] **संपूर्ण सेल अभिक्रिया:** \[ Zn_{(s)} + Cu^{2+}_{(aq)} \rightarrow Zn^{2+}_{(aq)} + Cu_{(s)} \] (स) नेस्र्ट समीकरण सेल के विभव (\( E_{\text{cell}} \)) और आयनों की सांद्रता के बीच का संबंध बताता है. डेनियल सेल के लिए नेस्र्ट समीकरण इस प्रकार है: \[ E_{\text{cell}} = (E^0_{Cu^{2+}/Cu} - E^0_{Zn^{2+}/Zn}) - \frac{0.059}{2} \log \frac{[Zn^{2+}]}{[Cu^{2+}]} \] यहाँ \( E^0_{Cu^{2+}/Cu} \) और \( E^0_{Zn^{2+}/Zn} \) कॉपर और जिंक के मानक इलेक्ट्रोड विभव हैं, और 2 अभिक्रिया में स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है.In simple words: डेनियल सेल में जिंक ऑक्सीकृत होकर एनोड पर इलेक्ट्रॉन छोड़ता है, जबकि कॉपर आयन कैथोड पर इलेक्ट्रॉन लेकर कॉपर धातु बनाते हैं. नेस्र्ट समीकरण बताता है कि सेल का वोल्टेज आयनों की मात्रा पर कैसे निर्भर करता है.

🎯 Exam Tip: डेनियल सेल में, एनोड हमेशा जिंक होता है और कैथोड हमेशा कॉपर होता है, क्योंकि जिंक कॉपर से अधिक सक्रिय होता है और आसानी से ऑक्सीकृत हो जाता है.

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