RBSE Solutions Class 12 Chemistry Chapter 2 विलयन

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Detailed Chapter 2 विलयन RBSE Solutions for Class 12 Chemistry

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Class 12 Chemistry Chapter 2 विलयन RBSE Solutions PDF

Rajasthan Board RBSE Class 12 Chemistry Chapter 2 विलयन

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 2 विलयन पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 2 विलयन बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. 500 g जल में 4g NaOH घुला है। विलयन की सान्द्रता होगी
(a) 8/L
(b) 0.2 N
(c) 0.2 m
(d) 0.2 M.
Answer: (c) 0.2 m
In simple words: 500 ग्राम पानी में 4 ग्राम NaOH घोलने पर विलयन की सान्द्रता 0.2 मोलल (m) होगी। यह मोललता की गणना करके पता चलता है।

🎯 Exam Tip: मोललता की गणना करते समय विलेय के मोलों की संख्या को विलायक के किलोग्राम में द्रव्यमान से भाग दें।

 

Question 3. शुद्ध जल की मोलरता है-
(a) 55.5M
(b) 100 M
(c) 18 M
(d) 1 M.
Answer: (a) 55.5M
In simple words: शुद्ध पानी की मोलरता 55.5M होती है। यह पानी के एक लीटर में पानी के मोलों की संख्या को दर्शाती है।

🎯 Exam Tip: शुद्ध जल की मोलरता एक मानक मान है, जिसे सीधे याद रखा जा सकता है या 1 लीटर पानी (1000 ग्राम) और पानी के मोलर द्रव्यमान (18 ग्राम/मोल) का उपयोग करके गणना की जा सकती है।

 

Question 4. निम्नलिखित 0.1M विलयनों को उनके क्वथनांक के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
(i) NaCl
(ii) MgCl₂
(iii) यूरिया
(iv) AlCl₃
(a) (i) < (ii) < (iii) < (iv)
(b) (ii) < (i) < (i) < (iv)
(c) (iii) < (i) < (ii) < (iv)
(d) (iv) < (iii) < (ii) < (i)
Answer: (c) (iii) < (i) < (ii) < (iv)
In simple words: इन सभी विलयनों को उनके बढ़ते क्वथनांक के अनुसार लगाया जाए तो यूरिया सबसे पहले आएगा, फिर NaCl, उसके बाद MgCl₂, और अंत में AlCl₃ आएगा। यह उनके आयनों की संख्या पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: क्वथनांक में वृद्धि विलयन में विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करती है। आयनीकरण पर अधिक कण उत्पन्न करने वाले पदार्थ का क्वथनांक सबसे अधिक होगा।

 

Question 5. यह एक आदर्श विलयन का गुण है-
(a) यह रॉउल्ट नियम को मानता है
(b) \( \Delta H_{मिश्रण} = 0 \)
(c) \( \Delta V_{मिश्रण} = 0 \)
(d) उपरोक्त सभी।
Answer: (d) उपरोक्त सभी।
In simple words: एक आदर्श विलयन वह होता है जो रॉउल्ट के नियम का पालन करता है और जिसके बनने पर न तो ऊष्मा निकलती है और न ही अवशोषित होती है, और न ही आयतन में कोई बदलाव आता है।

🎯 Exam Tip: आदर्श विलयन के मुख्य गुण याद रखें: यह रॉउल्ट के नियम का पालन करता है, और मिश्रण के दौरान एन्थैल्पी और आयतन में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

 

Question 6. ताप बढ़ाने से किसी वस्तु का वाष्प दाब -
(a) सदैव बढ़ता है।
(b) घटता है।
(c) ताप पर निर्भर नहीं करता है।
(d) ताप पर आंशिक निर्भर करता है।
Answer: (a) सदैव बढ़ता है।
In simple words: जब किसी वस्तु का तापमान बढ़ाया जाता है, तो उसके कणों को वाष्प बनने के लिए ज्यादा ऊर्जा मिलती है, जिससे वाष्प दाब हमेशा बढ़ जाता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि उच्च तापमान पर अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ने के कारण वे अधिक वाष्पीकृत होते हैं, जिससे वाष्प दाब में वृद्धि होती है।

 

Question 8. ताप बढ़ाने पर H₂ गैस की जल में विलेयता -
(a) बढ़ती है।
(b) घटती है।
(c) अपरिवर्तित रहती है।
(d) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (b) घटती है।
In simple words: जब पानी का तापमान बढ़ता है, तो हाइड्रोजन गैस की घुलनशीलता कम हो जाती है। अधिकतर गैसों की पानी में घुलनशीलता तापमान बढ़ने पर कम होती है।

🎯 Exam Tip: गैसों की द्रवों में विलेयता पर ताप का प्रभाव अधिकतर ऊष्माक्षेपी होता है, जिसका अर्थ है कि ताप बढ़ाने पर विलेयता घटती है।

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 2 विलयन अति लघुतरात्मक प्रश्न

 

Question 1. 10% (w/w) जलीय H₂SO₄ की मोललता की गणना कीजिए।
Answer:
विलेय का भार \( W_B = 10 \text{g} \)
विलायक का भार \( W_A = 100 - 10 = 90 \text{g} \)
\( H_2SO_4 \) का मोलर द्रव्यमान \( M_B = 98 \text{g mol}^{-1} \)
मोललता \( (m) = \frac{W_B \times 1000}{M_B \times W_A} \)
\( m = \frac{10 \times 1000}{98 \times 90} \)
\( m = \frac{10000}{8820} \)
\( m = 1.134 \text{ mol/kg} \)
अतः 10% (w/w) जलीय \( H_2SO_4 \) की मोललता 1.134 m है। मोललता का उपयोग तापमान से प्रभावित नहीं होता है।
In simple words: 10% \( H_2SO_4 \) घोल की मोललता निकालने के लिए, हमने विलेय और विलायक का वजन लिया, फिर सल्फ्यूरिक एसिड का मोलर द्रव्यमान उपयोग करके गणना की, जिससे उत्तर 1.134 मोलल आया।

🎯 Exam Tip: मोललता की गणना करते समय, विलायक के द्रव्यमान को किलोग्राम में बदलना सुनिश्चित करें, और प्रतिशत सांद्रता से विलेय और विलायक का द्रव्यमान सही ढंग से निकालें।

 

Question 3. विलयन में किसी पदार्थ के मोल अंश को परिभाषित कीजिए।
Answer: मिश्रण में किसी अवयव का मोल अंश, मिश्रण में उस अवयव के मोलों की संख्या और मिश्रण के सभी अवयवों के कुल मोलों की संख्या का अनुपात होता है। यह एक अनुपात है जो दर्शाता है कि मिश्रण में प्रत्येक घटक की कितनी मात्रा है।
In simple words: मोल अंश का मतलब है कि किसी घोल में किसी एक चीज़ की मात्रा, उस घोल में मौजूद सभी चीज़ों की कुल मात्रा का कितना हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: मोल अंश की परिभाषा लिखते समय, यह स्पष्ट करें कि यह एक घटक के मोलों का कुल मोलों के साथ अनुपात है, और यह कि सभी मोल अंशों का योग हमेशा 1 होता है।

 

Question 4. क्या गर्मियों में कार के रेडिएटरों में ऐथिलीन ग्लाइकॉल के प्रयोग की सलाह दी जाती है?
Answer: नहीं, गर्मियों में कार के रेडिएटरों में ऐथिलीन ग्लाइकॉल के प्रयोग की सलाह नहीं दी जाती है। ऐथिलीन ग्लाइकॉल जल के हिमांक को कम करता है, जिससे सर्दियों में रेडिएटर में जल को जमने से रोका जा सकता है। इसलिए इसका प्रयोग सर्दियों के लिए बेहतर है।
In simple words: नहीं, गर्मियों में कार के रेडिएटर में ऐथिलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाती है क्योंकि यह पानी को जमने से रोकने में मदद करता है, जो सर्दियों में ज्यादा काम आता है।

🎯 Exam Tip: ऐथिलीन ग्लाइकॉल का मुख्य उपयोग उसके एंटीफ्रीज़ गुण के कारण होता है, जो हिमांक को कम करता है, इसलिए इसका उपयोग ठंडे मौसम में किया जाता है, न कि गर्म मौसम में।

 

Question 5. प्रतिलोम परासरण को परिभाषित कीजिए।
Answer: यदि विलयन पर उसके परासरण दाब से अधिक दाब लगाया जाए, तो अर्द्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलयन से विलायक का बहाव शुद्ध विलायक की तरफ होने लगता है। इस प्रक्रिया को प्रतिलोम परासरण कहते हैं। इसका उपयोग जल शोधन में होता है।
In simple words: प्रतिलोम परासरण वह प्रक्रिया है जब हम घोल पर ज्यादा दबाव डालते हैं, तो पानी एक झिल्ली से साफ पानी की तरफ बहने लगता है।

🎯 Exam Tip: प्रतिलोम परासरण की परिभाषा में 'परासरण दाब से अधिक दाब' और 'विलायक का विलयन से शुद्ध विलायक की ओर बहाव' जैसे कीवर्ड शामिल करें।

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 2 विलयन लघुतरात्मक प्रश्न

 

Question 1. ठोस की द्रव में विलेयता पर ताप प्रभाव को स्पष्ट कीजिए। असामान्य अणु भार को सामान्य अणु भार से सम्बन्धित करने वाले वाण्टहॉफ गुणांक का सूत्र लिखिए। यह संगुणन व वियोजन क्रिया से किस प्रकार प्रभावित होता है ?
Answer:
ठोस की द्रव में विलेयता पर ताप का प्रभाव-
संतृप्त विलयन में विलेय, ठोस एवं विलयन के मध्य निम्नांकित साम्य होता है:
अविलेय ठोस + विलायक \( \rightleftharpoons \) विलेय विलयन \( \Delta H_{विलयन} = \pm x \text{ kCal} \)
ला-शातेलिए नियमानुसार यदि \( \Delta H > 0 \) (शून्य) अर्थात् विलेय को विलायक में घोलने पर ऊष्मा अवशोषित होती है, तो ताप में वृद्धि पर ठोस विलेय की विलेयता में वृद्धि होगी। यह प्रक्रिया तापमान पर निर्भर करती है।
वाण्टहॉफ गुणांक (i) \( = \frac{\text{सैद्धान्तिक अणु भार}}{\text{प्रेक्षित अणु भार}} \)
संगुणन होने की दशा में प्रेक्षित अणु भार बढ़ जाता है जिससे वाण्टहॉफ गुणांक का मान एक से कम \( (i < 1) \) हो जाता है तथा वियोजन होने पर प्रेक्षित अणु भार घट जाता है इसलिए वॉण्टहॉफ गुणांक का मान एक से अधिक \( (i > 1) \) हो जाता है।
In simple words: ठोसों की घुलनशीलता तापमान के साथ बदलती है; अगर घोलने में गर्मी लगती है, तो तापमान बढ़ाने पर वे ज्यादा घुलते हैं। वाण्टहॉफ गुणांक यह बताता है कि अणु कितने टूटते या जुड़ते हैं, जो उनके सही वजन और देखे गए वजन के अनुपात से पता चलता है।

🎯 Exam Tip: ला-शातेलिए के सिद्धांत का उल्लेख करें और स्पष्ट करें कि ऊष्माशोषी प्रक्रियाओं के लिए ताप बढ़ाने से विलेयता कैसे बढ़ती है। वाण्टहॉफ गुणांक और इसके \( i < 1 \) (संगुणन) और \( i > 1 \) (वियोजन) के बीच संबंध को भी समझाएं।

 

Question 2. आयनिक यौगिक AB का सैद्धान्तिक अणु भार एवं प्रेक्षित अणु भार क्रमशः 58.2 एवं 30 है। इसका वाण्टहॉफ गुणांक एवं वियोजन की मात्रा की गणना कीजिए।
Answer:
AB का सैद्धान्तिक अणु भार \( = 58.2 \)
AB का प्रेक्षित अणु भार \( = 30 \)
वाण्टहॉफ गुणांक \( (i) = \frac{\text{सैद्धान्तिक अणु भार}}{\text{प्रेक्षित अणु भार}} = \frac{58.2}{30} = 1.94 \)
वियोजन की मात्रा \( (\alpha) = \frac{i-1}{n-1} \)
पदार्थ AB वियोजन पर A व B में टूटकर 2 मोल पदार्थ देता है—
अतः \( n = 2 \)
\( \alpha = \frac{1.94-1}{2-1} = \frac{0.94}{1} \)
\( \alpha = 0.94 \)
इसलिए, इस आयनिक यौगिक का वाण्टहॉफ गुणांक 1.94 और वियोजन की मात्रा 0.94 है। यह दर्शाता है कि यौगिक काफी हद तक वियोजित होता है।
In simple words: एक यौगिक के सैद्धांतिक और देखे गए वजन के आधार पर हमने उसका वाण्टहॉफ गुणांक 1.94 और वियोजन की मात्रा 0.94 निकाली।

🎯 Exam Tip: वाण्टहॉफ गुणांक (i) और वियोजन की मात्रा (\( \alpha \)) की गणना करते समय, \( n \) (एक विलेय कण से उत्पन्न कणों की संख्या) का मान सही ढंग से पहचानें।

 

Question 3. विसरण और परासरण में क्या अन्तर है? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए। विसरण और परासरण क्रियाओं को नामांकित चित्र द्वारा दर्शाइए।
Answer: विसरण और परासरण में अन्तर अनुच्छेद 2.10.4 (c) में देंखे। (चित्रों को यहां शामिल नहीं किया जा सकता है, इसलिए केवल परिभाषा और अंतर दिए गए हैं)।
विसरण:
1. इसमें अर्द्धपारगम्य झिल्ली का प्रयोग नहीं होता है।
2. विसरण द्रव, गैस एवं विलयन में हो सकता है।
3. इसको न तो रोका जा सकता है और न ही विपरीत दिशा में किया जा सकता है।
4. इसमें विलेय तथा विलायक दोनों के ही अणु एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जा सकते हैं।
उदाहरण: इत्र की खुशबू का कमरे में फैलना।
परासरण:
1. इसमें अर्द्धपारगम्य झिल्ली का प्रयोग होता है।
2. यह केवल विलयन में होता है।
3. इसे बाह्य दाब लगाकर रोका जा सकता है या विपरीत दिशा में प्रवाहित किया जा सकता है।
4. इसमें केवल विलायक के अणु कम सान्द्रता वाले विलयन से अधिक सान्द्रता वाले विलयन की तरफ जाते हैं।
उदाहरण: किशमिश का पानी में फूलना।
ये दोनों प्रक्रियाएं पदार्थों के अणुओं के प्रवाह से संबंधित हैं, लेकिन उनकी स्थितियां और तंत्र अलग-अलग हैं।
In simple words: विसरण में चीजें बिना किसी दीवार के हर जगह फैल जाती हैं (जैसे हवा में खुशबू), जबकि परासरण में पानी एक खास झिल्ली से होकर कम गाढ़े घोल से ज्यादा गाढ़े घोल की तरफ जाता है (जैसे किशमिश का फूलना)।

🎯 Exam Tip: विसरण और परासरण के बीच मुख्य अंतरों को स्पष्ट रूप से बताएं, जैसे कि झिल्ली की आवश्यकता, अणु गति की दिशा, और क्या प्रक्रिया को रोका जा सकता है। प्रत्येक के लिए एक सरल उदाहरण देना न भूलें।

 

Question 4. एक प्रोटीन के 0.2L जलीय विलयन में 1.26 g प्रोटीन है। 300 K पर इस विलयन का परासरण दाब \( 2.57 \times 10^{-3} \) bar पाया गया। प्रोटीन के मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए। (R = 0.0821 L bar mol⁻¹ K⁻¹)
Answer:
दिया गया है:
विलयन का आयतन \( V = 0.2 \text{L} \)
प्रोटीन का भार \( W_B = 1.26 \text{g} \)
तापमान \( T = 300 \text{K} \)
परासरण दाब \( \pi = 2.57 \times 10^{-3} \text{ bar} \)
गैस स्थिरांक \( R = 0.0821 \text{ L bar mol}^{-1} \text{ K}^{-1} \)
हम जानते हैं कि परासरण दाब का सूत्र है:
\( \pi = \frac{W_B \times R \times T}{M_B \times V} \)
मोलर द्रव्यमान \( M_B \) के लिए सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
\( M_B = \frac{W_B \times R \times T}{\pi \times V} \)
मान रखने पर:
\( M_B = \frac{1.26 \text{ g} \times 0.0821 \text{ L bar mol}^{-1} \text{ K}^{-1} \times 300 \text{ K}}{2.57 \times 10^{-3} \text{ bar} \times 0.2 \text{ L}} \)
\( M_B = \frac{1.26 \times 0.0821 \times 300}{0.000514} \)
\( M_B = \frac{31.0602}{0.000514} \)
\( M_B = 60428.4 \text{ g/mol} \)
प्रोटीन का मोलर द्रव्यमान \( = 60428.4 \text{ g/mol} \)
यह गणना प्रोटीन के मोलर द्रव्यमान को निर्धारित करने में परासरण दाब के उपयोग को दर्शाती है।
In simple words: हमने प्रोटीन के घोल का परासरण दाब, तापमान और आयतन का उपयोग करके उसका मोलर द्रव्यमान निकाला। सूत्र में मान रखने पर, प्रोटीन का वजन 60428.4 ग्राम प्रति मोल आया।

🎯 Exam Tip: परासरण दाब के सूत्र (\( \pi V = nRT \)) का उपयोग करते समय, यह सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ (दाब, आयतन, तापमान, R का मान) संगत हों। मोलर द्रव्यमान के लिए सूत्र को सही ढंग से पुनर्व्यवस्थित करें।

 

Question 5. अवाष्पशील विलेय युक्त विलयन के लिए वाष्प दाब अवनमन एवं अणुभार में संबंध स्थापित कीजिए।
Answer:
रॉउल्ट के नियम से वाष्प दाब अवनमन विलेय की मोल भिन्न के समानुपाती होता है।
अतः \( \Delta P \propto X_B \) (\( X_B \) = विलेय की मोल भिन्न)
क्वथनांक उन्नयन \( \Delta T_b \propto X_B \)
\( \Delta T_b = K_b X_B \)
जहाँ \( X_B = \frac{n_B}{n_A + n_B} \)
मोलों की संख्या \( n_B = \frac{W_B}{M_B} \) और \( n_A = \frac{W_A}{M_A} \)
तो \( X_B = \frac{W_B/M_B}{W_A/M_A + W_B/M_B} \)
तनु विलयनों के लिए \( n_B \ll n_A \), इसलिए \( n_A + n_B \approx n_A \)
\( X_B = \frac{W_B/M_B}{W_A/M_A} = \frac{W_B \times M_A}{M_B \times W_A} \)
तो \( \Delta T_b = K_b \frac{W_B \times M_A}{M_B \times W_A} \)
पुनर्व्यवस्थित करने पर, विलेय का मोलर द्रव्यमान \( M_B \) है:
\( M_B = K_b \frac{W_B \times M_A}{\Delta T_b \times W_A} \)
यह समीकरण अवाष्पशील विलेय के मोलर द्रव्यमान और क्वथनांक उन्नयन के बीच संबंध को दर्शाता है। यह संबंध वाष्प दाब में कमी से भी जुड़ा है।
In simple words: जब किसी घोल में कोई ऐसी चीज़ मिलाते हैं जो उड़ती नहीं है, तो उसका वाष्प दाब कम हो जाता है। इस कमी को विलेय की मात्रा से जोड़ा जा सकता है, और इसके लिए एक खास समीकरण का इस्तेमाल करके हम विलेय का अणुभार पता कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: रॉउल्ट के नियम और क्वथनांक उन्नयन के बीच संबंध को स्पष्ट रूप से दर्शाएं। तनु विलयनों के लिए सरलीकरण (यानी \( n_B \ll n_A \)) को सही ढंग से लागू करें ताकि अंतिम सूत्र व्युत्पन्न हो सके।

 

Question 6. वाष्प दाब के अवनमन से अवाष्पशील पदार्थ का अणु भार कैसे ज्ञात किया जा सकता है ? इसे समझाइए।
Answer: अवाष्पशील विलेय ठोस के लिए विलयन का आपेक्षिक वाष्प दाब अवनमन, विलेय की मोल भिन्न के समान होता है।
रॉउल्ट के नियम के अनुसार:
\( \frac{P_A^0 - P_A}{P_A^0} = X_B \)
जहाँ \( P_A^0 \) शुद्ध विलायक का वाष्प दाब है, \( P_A \) विलयन का वाष्प दाब है, और \( X_B \) विलेय की मोल भिन्न है।
हम जानते हैं \( X_B = \frac{n_B}{n_A + n_B} \)
तनु विलयन के लिए, \( n_B \ll n_A \), तो \( X_B \approx \frac{n_B}{n_A} \)
\( n_B = \frac{W_B}{M_B} \) और \( n_A = \frac{W_A}{M_A} \)
तो \( X_B = \frac{W_B/M_B}{W_A/M_A} = \frac{W_B \times M_A}{M_B \times W_A} \)
इन मानों को रॉउल्ट के नियम के समीकरण में रखने पर:
\( \frac{P_A^0 - P_A}{P_A^0} = \frac{W_B \times M_A}{M_B \times W_A} \)
इस समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करके हम अवाष्पशील विलेय का मोलर द्रव्यमान \( M_B \) ज्ञात कर सकते हैं:
\( M_B = \frac{W_B \times M_A}{W_A} \times \frac{P_A^0}{P_A^0 - P_A} \)
इस प्रकार, वाष्प दाब के अवनमन को मापकर और अन्य ज्ञात मानों का उपयोग करके अवाष्पशील पदार्थ का अणुभार ज्ञात किया जा सकता है। यह एक महत्वपूर्ण विधि है।
In simple words: जब किसी घोल में कुछ ऐसा मिलाते हैं जो भाप नहीं बनता, तो घोल का वाष्प दाब कम हो जाता है। इस कमी को मापकर और एक खास सूत्र का इस्तेमाल करके, हम उस मिली हुई चीज़ का अणुभार पता कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: अणुभार ज्ञात करने के लिए वाष्प दाब अवनमन के सूत्र को व्युत्पन्न करने के लिए रॉउल्ट के नियम और मोल भिन्न की अवधारणा का उपयोग करें। तनु विलयनों के लिए सन्निकटन (\( n_B \ll n_A \)) को याद रखें।

 

Question 7. गैसों की विलेयता से आप क्या समझते हैं? एक द्रव में गैसों की विलेयता को प्रभावित करने वाले कारक की व्याख्या कीजिए।
Answer:
गैसों की द्रवों में विलेयता – एक निश्चित ताप पर गैस की द्रवों में विलेयता एक निश्चित सीमा तक ही होती है। द्रव द्वारा गैस का अवशोषण भी गैसों की द्रवों में विलेयता कहलाता है। इसे अवशोषण गुणांक के रूप में भी व्यक्त किया जाता है।
गैसों की द्रवों में विलेयता को प्रभावित करने वाले कारक:
1. दाब का प्रभाव (हेनरी का नियम): हेनरी के नियमानुसार, किसी द्रव में गैस की विलेयता गैस पर लगने वाले दाब के समानुपाती होती है। अर्थात्, दाब बढ़ाने पर गैसों की विलेयता बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, सोडा पानी में कार्बन डाइऑक्साइड उच्च दाब पर घुली होती है।
2. ताप का प्रभाव: ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता कम हो जाती है क्योंकि गैसों के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, और वे द्रव की सतह को छोड़कर बाहर निकल जाते हैं। यही कारण है कि ठंडे पानी में ऑक्सीजन अधिक घुलनशील होती है।
3. गैस की प्रकृति: जो गैसें विलायक के साथ रासायनिक अभिक्रिया करती हैं (जैसे \( NH_3 \) पानी के साथ \( NH_4OH \) बनाती है) या आयनित होती हैं, वे अधिक विलेयशील होती हैं। निष्क्रिय गैसें कम विलेयशील होती हैं।
4. विलायक की प्रकृति: ध्रुवीय गैसें ध्रुवीय विलायकों में अधिक घुलनशील होती हैं, जबकि अध्रुवीय गैसें अध्रुवीय विलायकों में अधिक घुलनशील होती हैं ('समान समान को घोलता है')।
5. अशुद्धियों का प्रभाव: द्रव में घुले हुए अन्य पदार्थ जैसे-कार्बनिक पदार्थ, विद्युत् अपघट्य, धूल आदि गैस की विलेयता कम कर देते हैं क्योंकि वे गैस के अणुओं के लिए जगह घेर लेते हैं।
इन कारकों को समझकर हम द्रव में गैसों की विलेयता को नियंत्रित कर सकते हैं, जो कई औद्योगिक और जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण है।
In simple words: गैसों की घुलनशीलता का मतलब है कि कोई गैस तरल में कितनी घुल सकती है। यह गैस के प्रकार, दबाव, तापमान और तरल के प्रकार पर निर्भर करता है। ज्यादा दबाव और कम तापमान पर गैसें ज्यादा घुलती हैं।

🎯 Exam Tip: गैसों की विलेयता की परिभाषा में 'निश्चित ताप' और 'निश्चित सीमा' को शामिल करें। हेनरी के नियम को दाब प्रभाव के तहत विस्तार से समझाएं, और प्रत्येक कारक के लिए एक उदाहरण दें।

 

Question 8. उस ताप की गणना कीजिए जिस पर 250 g जल में उपस्थित 54 g ग्लूकोज का विलयन जम जाएगा। (Kf = 1.86 K kg mol⁻¹)
Answer:
दिया गया है –
विलेय का भार (ग्लूकोज) \( W_B = 54 \text{g} \)
विलेय का अणु भार (ग्लूकोज \( C_6H_{12}O_6 \)) \( M_B = 180 \text{ g/mol} \)
विलायक का भार (जल) \( W_A = 250 \text{ g} \)
मोलल अवनमन स्थिरांक \( K_f = 1.86 \text{ K kg mol}^{-1} \)
हिमांक में अवनमन (\( \Delta T_f \)) का सूत्र:
\( \Delta T_f = \frac{K_f \times W_B \times 1000}{M_B \times W_A} \)
मान रखने पर:
\( \Delta T_f = \frac{1.86 \text{ K kg mol}^{-1} \times 54 \text{ g} \times 1000}{180 \text{ g/mol} \times 250 \text{ g}} \)
\( \Delta T_f = \frac{1.86 \times 54000}{45000} \)
\( \Delta T_f = \frac{100440}{45000} \)
\( \Delta T_f = 2.232 \text{ K} \)
शुद्ध जल का हिमांक \( T_f^0 = 273.15 \text{ K} \) (या \( 0^\circ \text{C} \))
विलयन का हिमांक \( T_f = T_f^0 - \Delta T_f \)
\( T_f = 273.15 \text{ K} - 2.232 \text{ K} \)
\( T_f = 270.918 \text{ K} \)
अतः ग्लूकोज विलयन लगभग 270.92 K पर जम जाएगा। यह दर्शाता है कि अवाष्पशील विलेय मिलाने पर हिमांक कम हो जाता है।
In simple words: 250 ग्राम पानी में 54 ग्राम ग्लूकोज घोलने पर, घोल का हिमांक अवनमन 2.23 केल्विन होगा। शुद्ध पानी 273.15 केल्विन पर जमता है, तो यह घोल 273.15 - 2.23 = 270.92 केल्विन पर जमेगा।

🎯 Exam Tip: हिमांक अवनमन की गणना करते समय, \( K_f \) के मान को सही ढंग से उपयोग करें और विलायक के द्रव्यमान को किलोग्राम में बदलना सुनिश्चित करें। अंतिम उत्तर को केल्विन में व्यक्त करें और शुद्ध विलायक के हिमांक से घटाना न भूलें।

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 2 विलयन अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

 

Question 1. मेथेनॉल एक कार्बनिक यौगिक है फिर भी यह जल के साथ मुक्त रूप से मिश्रित हो जाता है, क्यों?
Answer: मेथेनॉल जल के साथ हाइड्रोजन बंध बनाता है। यही कारण है कि यह जल में मुक्त रूप से मिश्रित हो जाता है। हाइड्रोजन बंध बनाने की क्षमता इसे पानी में घुलनशील बनाती है।
In simple words: मेथेनॉल पानी में आसानी से मिल जाता है क्योंकि यह पानी के अणुओं के साथ हाइड्रोजन के बंध बना सकता है।

🎯 Exam Tip: जल में कार्बनिक यौगिकों की घुलनशीलता को समझाते समय हाइड्रोजन बंध निर्माण की क्षमता का उल्लेख करना एक महत्वपूर्ण बिंदु है।

 

Question 2. विलयन की मोलरता पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: ताप बढ़ाने पर मोलरता घट जाती है क्योंकि विलयन का आयतन ताप बढ़ाने पर बढ़ जाता है। मोलरता आयतन पर निर्भर करती है, इसलिए आयतन में परिवर्तन इसे प्रभावित करता है।
In simple words: जब तापमान बढ़ता है, तो घोल का आयतन भी बढ़ता है, इसलिए मोलरता कम हो जाती है क्योंकि मोलरता आयतन से जुड़ी होती है।

🎯 Exam Tip: मोलरता की परिभाषा में आयतन का उल्लेख करें और बताएं कि आयतन तापमान पर कैसे निर्भर करता है, जिससे मोलरता पर प्रभाव स्पष्ट हो।

 

Question 5. विलयन में सभी अवयवों के मोल-अंशों का योग क्या होता है ?
Answer: विलयन में सभी अवयवों के मोल अंशों का योग हमेशा एक होता है। यह मोल अंश की परिभाषा का एक मूलभूत नियम है।
In simple words: किसी भी घोल में सभी चीजों के मोल अंशों को जोड़ने पर हमेशा एक ही आता है।

🎯 Exam Tip: मोल अंशों का योग हमेशा एक होता है, यह तथ्य गणितीय गणनाओं को सत्यापित करने के लिए उपयोगी है।

 

Question 6. ppm क्या होता है ?
Answer: ppm का अर्थ है 'पार्ट्स पर मिलियन' (parts per million)। विलेय के भार भागों की वह संख्या जो विलयन के एक मिलियन \( (10^6) \) भार भागों में उपस्थित हो, ppm कहलाती है। यह बहुत कम मात्रा में विलेय की सांद्रता को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है।
In simple words: ppm का मतलब है 'दस लाख में से भाग', यानी अगर कोई चीज दस लाख हिस्सों में से कितनी है। यह बहुत कम मात्रा में किसी चीज की सांद्रता बताने के लिए इस्तेमाल होता है।

🎯 Exam Tip: ppm की परिभाषा में \( 10^6 \) भार भागों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इसकी विशिष्टता है।

 

Question 7. मोलरता की तुलना में मोललता को वरीयता क्यों दी जाती है ?
Answer: मोलरता की तुलना में मोललता को वरीयता इसलिए दी जाती है क्योंकि मोललता पर ताप का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। मोललता केवल द्रव्यमानों से संबंधित होती है, जबकि मोलरता आयतन पर निर्भर करती है जो तापमान के साथ बदल सकता है।
In simple words: मोललता को मोलरता से बेहतर माना जाता है क्योंकि मोललता तापमान बदलने पर भी नहीं बदलती, क्योंकि यह वजन पर आधारित है, आयतन पर नहीं।

🎯 Exam Tip: मोललता को वरीयता देने का मुख्य कारण यह है कि यह तापमान से स्वतंत्र है, जबकि मोलरता तापमान पर निर्भर करती है।

 

Question 8. सोडियम कार्बोनेट के 20% जलीय विलयन से आप क्या समझते हैं ?
Answer: सोडियम कार्बोनेट के 20% जलीय विलयन का अर्थ है कि 20 g सोडियम कार्बोनेट विलयन के 100 g में उपस्थित है। यहाँ विलायक का भार 80 g है। यह विलयन के द्रव्यमान प्रतिशत को दर्शाता है।
In simple words: 20% सोडियम कार्बोनेट घोल का मतलब है कि 100 ग्राम घोल में 20 ग्राम सोडियम कार्बोनेट है, और बाकी 80 ग्राम पानी है।

🎯 Exam Tip: प्रतिशत सांद्रता को समझाते समय, कुल विलयन और विलायक के द्रव्यमान को स्पष्ट रूप से अलग-अलग बताएं।

 

Question 9. विलयन, विलेय एवं विलायक को परिभाषित करें।
Answer:
विलयन: विलयन दो या दो से अधिक घटकों का एक समांगी मिश्रण होता है। इसके सभी भागों में संरचना और गुणधर्म समान होते हैं। उदाहरण के लिए, चीनी का पानी में घोल।
विलेय: विलेय वह पदार्थ होता है जो विलयन में कम मात्रा में उपस्थित होता है और विलायक में घुल जाता है। यह अपनी पहचान खो देता है। उदाहरण के लिए, चीनी के घोल में चीनी।
विलायक: विलायक वह पदार्थ होता है जो विलयन में अधिक मात्रा में उपस्थित होता है और विलेय को अपने में घोल लेता है। यह विलयन की भौतिक अवस्था को निर्धारित करता है। उदाहरण के लिए, चीनी के घोल में पानी।
यह तीन अवधारणाएँ विलयन रसायन विज्ञान की नींव बनाती हैं।
In simple words: विलयन का मतलब एक मिला हुआ घोल है। विलेय वह चीज है जो घुलती है (जैसे चीनी), और विलायक वह चीज है जिसमें घुलनशील चीज घुलती है (जैसे पानी)।

🎯 Exam Tip: विलयन को 'समांगी मिश्रण' के रूप में परिभाषित करना महत्वपूर्ण है। विलेय और विलायक को उनकी सापेक्ष मात्रा और विलयन की भौतिक अवस्था पर उनके प्रभाव के आधार पर स्पष्ट रूप से अलग करें।

 

Question 11. संतृप्त विलयन क्या होता है ?
Answer: संतृप्त विलयन एक ऐसा विलयन होता है जिसमें एक निश्चित ताप पर और अधिक ठोस घोला न जा सके। इसमें विलेय और विलायक के बीच साम्यावस्था स्थापित होती है।
In simple words: संतृप्त घोल वह होता है जिसमें एक खास तापमान पर और ज्यादा चीज नहीं घोली जा सकती।

🎯 Exam Tip: संतृप्त विलयन की परिभाषा में 'निश्चित ताप' और 'अधिक ठोस घोला न जा सके' वाक्यांशों का उपयोग महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. विलयन कब ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया प्रदर्शित करता है?
Answer: विलयन तब ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया प्रदर्शित करता है जब विलेय तथा विलायक के मध्य आकर्षण बल, विलेय के अणुओं तथा विलायक के अणुओं के मध्य उपस्थित अंतराआण्विक आकर्षण बल से अधिक हो। अर्थात्, विलेय को विलायक में घोलने पर अभिक्रिया ऊष्मा का उत्सर्जन करती है। यह प्रक्रिया परिवेश के तापमान को बढ़ा देती है।
In simple words: घोल बनाते समय गर्मी तब निकलती है जब विलेय और विलायक के अणु एक-दूसरे को ज्यादा जोर से खींचते हैं, बजाय उनके अपने-अपने अणुओं के।

🎯 Exam Tip: ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया के लिए, यह बताएं कि विलेय-विलायक के बीच का आकर्षण बल विलेय-विलेय और विलायक-विलायक के आकर्षण बल से अधिक होना चाहिए।

 

Question 13. मोललता तथा मोलरता में अन्तर दें।
Answer:
मोलरता:
1. एक लीटर \( (1 \text{ dm}^3) \) विलयन में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को उस विलयन की मोलरता (M) कहते हैं।
2. इसकी इकाई mol/L है।
3. यह ताप के साथ परिवर्तित होती है क्योंकि आयतन तापमान के साथ बदलता है।
मोललता:
1. किसी विलायक के 1000 g (1 kg) में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को मोललता (m) कहते हैं।
2. इसकी इकाई mol/kg है।
3. यह ताप के साथ परिवर्तित नहीं होती है क्योंकि यह द्रव्यमान पर आधारित है, जो तापमान से स्वतंत्र होता है।
ये दोनों सांद्रता की इकाइयाँ हैं, लेकिन उनका उपयोग और ताप पर निर्भरता भिन्न होती है।
In simple words: मोलरता बताती है कि एक लीटर घोल में कितनी चीज घुली है, और यह तापमान से बदलती है। मोललता बताती है कि एक किलोग्राम विलायक में कितनी चीज घुली है, और यह तापमान से नहीं बदलती।

🎯 Exam Tip: मोलरता और मोललता के बीच के मुख्य अंतरों को स्पष्ट करें: मोलरता आयतन (तापमान पर निर्भर) पर आधारित है, जबकि मोललता द्रव्यमान (तापमान से स्वतंत्र) पर आधारित है। उनकी इकाइयों का भी उल्लेख करें।

 

Question 15. समान मोल के 1 M एवं 1m जलीय विलयनों में से कौन-सा अधिक सान्द्रता का है ?
Answer: 1 M जलीय विलयन 1 m जलीय विलयन से अधिक सांद्र होता है। इसका कारण यह है कि 1M विलयन में विलेय 1 लीटर विलयन में होता है, जबकि 1m विलयन में विलेय 1 किलोग्राम विलायक में होता है, जो आमतौर पर 1 लीटर से कम आयतन घेरता है।
In simple words: 1 M घोल 1 m घोल से ज्यादा गाढ़ा होता है क्योंकि 1 M घोल में विलेय की मात्रा 1 लीटर घोल में होती है, जो 1 किलोग्राम विलायक से कम जगह ले सकती है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए मोलरता और मोललता की परिभाषाओं को ध्यान में रखें और समझें कि आयतन और द्रव्यमान की सापेक्षिक मात्राएँ सांद्रता को कैसे प्रभावित करती हैं।

 

Question 16. नॉर्मलता से आप क्या समझते हैं ?
Answer: विलयन के एक लीटर में घुलित विलेय के ग्राम तुल्यांकों की संख्या नॉर्मलता कहलाती है। इसका मात्रक g equiv. L⁻¹ होता है। नॉर्मलता को विलयन की सांद्रता व्यक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है, खासकर अम्ल-क्षार अनुमापन में।
In simple words: नॉर्मलता बताती है कि एक लीटर घोल में किसी चीज के कितने ग्राम तुल्यांक घुले हुए हैं।

🎯 Exam Tip: नॉर्मलता की परिभाषा में 'ग्राम तुल्यांक' और 'एक लीटर विलयन' शब्दों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 17. ताप बढ़ने पर जल में NaCl की विलेयता बढ़ जाती है, क्यों?
Answer: ताप बढ़ने पर जल में NaCl की विलेयता बढ़ जाती है क्योंकि NaCl के वियोजन की प्रकृति ऊष्माशोषी होती है। इसका अर्थ है कि NaCl को पानी में घोलने के लिए ऊष्मा की आवश्यकता होती है, और जब तापमान बढ़ाया जाता है तो यह प्रक्रिया अधिक अनुकूल हो जाती है।
In simple words: नमक पानी में गर्म करने पर ज्यादा घुलता है क्योंकि नमक को घुलने के लिए गर्मी की जरूरत होती है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए 'ऊष्माशोषी' शब्द का प्रयोग करें और स्पष्ट करें कि ला-शातेलिए का सिद्धांत यहां कैसे लागू होता है।

 

Question 18. समान विलय के एक मोलर तथा एक मोलल जल विलयनों में से एक मोलर विलयन की सान्द्रता उच्च होती है, क्यों ?
Answer: 1 मोलर विलयन का तात्पर्य है कि विलेय के 1 मोल 1000 ml विलयन में उपस्थित हैं अर्थात् इसमें विलायक की मात्रा 1000 ml से कम होती है, जबकि 1 मोलल विलयन का तात्पर्य है कि 1 मोल विलेय 1000 g विलायक (या 1000 ml विलायक) में उपस्थित है। अतः 1 मोलर विलयन अधिक सांद्र है।
In simple words: एक मोलर घोल ज्यादा गाढ़ा होता है क्योंकि इसमें विलेय 1 लीटर पूरे घोल में होता है, जबकि एक मोलल घोल में विलेय 1 किलो विलायक में होता है, जो घोल का कुल आयतन कम कर देता है।

🎯 Exam Tip: मोलरता और मोललता की सटीक परिभाषाओं का उपयोग करके तुलना करें। मुख्य अंतर यह है कि मोलरता में विलेय पूरे विलयन के आयतन में होता है, जबकि मोललता में विलेय विलायक के द्रव्यमान में होता है।

 

Question 19. ताँबे का सोने में विलयन किस प्रकार का विलयन है ?
Answer: ताँबे का सोने में विलयन एक ठोस विलयन है। इसे मिश्र धातु भी कहते हैं। इसमें दोनों धातुएँ ठोस अवस्था में घुली होती हैं।
In simple words: सोने में तांबे का घोल एक ठोस घोल होता है, जिसे मिश्र धातु कहते हैं।

🎯 Exam Tip: यह एक मिश्र धातु का उदाहरण है, और मिश्र धातुएँ ठोस विलयन के रूप में वर्गीकृत की जाती हैं।

 

Question 20. अमलगम किस प्रकार का विलयन होता है?
Answer: अमलगम एक ठोस विलयन होता है जिसमें एक धातु (अक्सर चांदी या टिन) पारे (जो कमरे के तापमान पर द्रव होता है) में घुली होती है। यह दंत चिकित्सा में उपयोग होता है।
In simple words: अमलगम एक खास तरह का ठोस घोल है, जिसमें पारा किसी दूसरी धातु के साथ मिला होता है।

🎯 Exam Tip: अमलगम को परिभाषित करते समय, पारे के शामिल होने पर जोर दें, जो इसे अन्य मिश्र धातुओं से अलग करता है।

 

Question 22. जल में घुली ऑक्सीजन किस प्रकार का विलयन है ?
Answer: जल में घुली ऑक्सीजन एक द्रव विलयन है। इसमें गैस (ऑक्सीजन) द्रव (जल) में घुली होती है।
In simple words: पानी में घुली हुई ऑक्सीजन एक तरल घोल है, जहाँ गैस तरल में मिली हुई है।

🎯 Exam Tip: विलयन के प्रकार को पहचानते समय, विलायक की भौतिक अवस्था पर ध्यान दें, जो विलयन की भौतिक अवस्था को निर्धारित करती है।

 

Question 23. आदर्श विलयन किन्हें कहते हैं ?
Answer: दो विलायकों के मिश्रण प्राप्त करने हेतु भिन्न-भिन्न प्रतिशत मात्रा मिलाने पर प्रयोगात्मक वाष्प दाब यदि रॉउल्ट नियम के द्वारा निर्गत वाष्प दाबों के मानों के बराबर आता है तो वे आदर्श विलयन कहलाते हैं। आदर्श विलयन बनने पर आयतन में कोई परिवर्तन नहीं होता और न ही ऊष्मा का अवशोषण या उत्सर्जन होता है।
In simple words: आदर्श विलयन वह घोल होता है जो रॉउल्ट के नियम का पालन करता है और जिसे बनाने पर न तो गर्मी निकलती है न लगती है, और न ही उसका कुल आयतन बदलता है।

🎯 Exam Tip: आदर्श विलयन की परिभाषा में रॉउल्ट के नियम का पालन, \( \Delta H_{mix} = 0 \) और \( \Delta V_{mix} = 0 \) शामिल करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 24. मिश्रणीय द्रव युग्म प्रायः रॉउल्ट नियम से ऋण अथवा धन विचलन दिखाते हैं, क्यों?
Answer: यदि मिश्रणीय द्रव युग्मों का वाष्प दाब रॉउल्ट नियम के वाष्पदाब से अधिक होता है तो इसे धन विचलन कहते हैं। यदि प्रयोगात्मक वाष्प दाब रॉउल्ट नियम के वाष्पदाब से कम आता है तो उसे ऋण विचलन कहते हैं। यह विचलन विलेय-विलायक के बीच अंतःक्रियाओं में परिवर्तन के कारण होता है।
In simple words: आपस में मिलने वाले तरल पदार्थों के घोल रॉउल्ट के नियम से थोड़ा अलग व्यवहार करते हैं, या तो ज्यादा वाष्प दाब दिखाते हैं (धन विचलन) या कम वाष्प दाब (ऋण विचलन), क्योंकि उनके अणुओं के बीच का खिंचाव बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: धन और ऋण विचलन के बीच के अंतर को स्पष्ट करें, और याद रखें कि ये विचलन विलेय-विलायक अंतःक्रियाओं में परिवर्तन के कारण होते हैं।

 

Question 25. किस प्रकार के द्रव आदर्श विलयन बनाते है?
Answer: अत्यधिक तनु विलयन, समान संरचना तथा ध्रुवणता वाले द्रव आदर्श विलयन बनाते हैं। ऐसे विलयनों में विलेय-विलायक और विलेय-विलेय अंतःक्रियाएँ लगभग समान होती हैं।
In simple words: बहुत पतला घोल और ऐसे तरल पदार्थ जिनके अणु एक जैसे दिखते और व्यवहार करते हैं, आदर्श घोल बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: आदर्श विलयन बनाने वाले द्रवों की विशेषताओं का उल्लेख करते समय 'समान संरचना' और 'ध्रुवणता' पर जोर दें, क्योंकि यह अंतःक्रियात्मक बलों की समानता को दर्शाता है।

 

Question 26. दो द्रव X तथा Y का क्वथनांक क्रमशः 100°C तथा 120°C है। इनमें से किस द्रव का वाष्प दाब 60°C पर अधिक होगा ?
Answer: द्रव का क्वथनांक जितना कम होता है उतना अधिक द्रव वाष्पशील होता है। अतः द्रव X का वाष्प दाब 60°C पर अधिक होगा। कम क्वथनांक का मतलब है कि द्रव के अणु कम ऊर्जा पर वाष्प में बदल जाते हैं।
In simple words: जिस तरल का क्वथनांक कम होता है, वह ज्यादा आसानी से भाप बन जाता है, इसलिए द्रव X का क्वथनांक 100°C है, जो द्रव Y के 120°C से कम है, तो 60°C पर द्रव X का वाष्प दाब ज्यादा होगा।

🎯 Exam Tip: क्वथनांक और वाष्प दाब के बीच के व्युत्क्रमानुपाती संबंध को याद रखें: कम क्वथनांक का अर्थ है उच्च वाष्प दाब।

 

Question 27. किसी विलयन का वाष्प दाब उसके विलायक की अपेक्षा कम क्यों होता है ?
Answer: विलयन में विलेय तथा विलायक के मध्य अंतःक्रियाएँ विलेय-विलेय के अणुओं तथा विलायक-विलायक के अणुओं के मध्य अंतःक्रियाओं के सापेक्ष कम होती हैं। उदाहरण के लिए, जब साइक्लोहेक्सेन को एथेनॉल में मिलाते हैं तो ऐथेनॉल के हाइड्रोजन बन्ध टूट जाते हैं जिस कारण ये धनात्मक विचलन प्रदर्शित करते हैं। एक अवाष्पशील विलेय मिलाने पर, विलेय के कण सतह पर विलायक के अणुओं की जगह ले लेते हैं, जिससे वाष्पीकरण के लिए उपलब्ध सतह कम हो जाती है, और इसलिए वाष्प दाब कम हो जाता है।
In simple words: जब कोई चीज पानी में घुल जाती है, तो पानी का वाष्प दाब कम हो जाता है क्योंकि घुली हुई चीज पानी के अणुओं को भाप बनने से रोकती है।

🎯 Exam Tip: अवाष्पशील विलेय की उपस्थिति के कारण विलायक के अणुओं की सतह पर कम उपलब्धता और बढ़ी हुई अंतःक्रियाओं को वाष्प दाब अवनमन के लिए मुख्य कारण के रूप में समझाएं।

 

Question 29. रॉउल्ट का नियम किन स्थितियों में लागू नहीं होता ?
Answer: रॉउल्ट का नियम उन स्थितियों में लागू नहीं होता जब विलेय में वियोजन या संगुणन प्रवृत्ति होती है। यह नियम केवल आदर्श विलयनों के लिए है, जहाँ विलेय और विलायक के बीच अंतःक्रियाएँ समान होती हैं।
In simple words: रॉउल्ट का नियम तब काम नहीं करता जब घोल में मिली हुई चीज टूट जाती है या आपस में जुड़ जाती है।

🎯 Exam Tip: रॉउल्ट के नियम की सीमाओं को बताते समय, 'वियोजन' और 'संगुणन' को मुख्य कारणों के रूप में उजागर करें।

 

Question 30. आदर्श विलयन की विशेषता लिखें।
Answer: आदर्श विलयन की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. ये रॉउल्ट के नियम का पालन करते हैं।
2. \( \Delta H_{मिश्रण} = 0 \) (मिश्रण की एन्थैल्पी में कोई परिवर्तन नहीं)।
3. \( \Delta V_{मिश्रण} = 0 \) (मिश्रण के आयतन में कोई परिवर्तन नहीं)।
4. विलेय-विलायक अंतःक्रियाएँ विलेय-विलेय और विलायक-विलायक अंतःक्रियाओं के समान होती हैं।
5. इन्हें प्रभाजी आसवन से पृथक नहीं कर सकते।
ये विशेषताएँ आदर्श विलयनों को अन्य विलयनों से अलग करती हैं।
In simple words: एक आदर्श घोल रॉउल्ट के नियम का पालन करता है, उसे बनाने पर न तो गर्मी निकलती है न लगती है, और न ही उसका आयतन बदलता है।

🎯 Exam Tip: आदर्श विलयन की विशेषताओं को सूचीबद्ध करते समय, रॉउल्ट के नियम का पालन और \( \Delta H \) एवं \( \Delta V \) के शून्य होने पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 31. यदि कोई विलेय ऊष्माशोषी प्रक्रम द्वारा विलयन बनाता है तो ऐसे विलयन का ताप बढ़ाने से विलेयता पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: ला-शातेलिए नियमानुसार यदि अभिक्रिया ऊष्माशोषी है तो ताप बढ़ाने से विलेय की विलेयता बढ़ जाती है। ऊष्माशोषी प्रक्रियाओं में, प्रणाली अतिरिक्त ऊष्मा को अवशोषित करके संतुलन को उत्पाद की ओर स्थानांतरित करती है।
In simple words: अगर किसी चीज को घोलने में गर्मी लगती है (ऊष्माशोषी), तो तापमान बढ़ाने पर वह और ज्यादा घुलेगी।

🎯 Exam Tip: ला-शातेलिए के सिद्धांत का उपयोग करके बताएं कि ऊष्माशोषी प्रक्रिया में ताप बढ़ाने पर संतुलन विलेयता बढ़ाने की दिशा में क्यों स्थानांतरित होता है।

 

Question 32. क्या हम स्थिर क्वाथी मिश्रण के यौगिकों को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् कर सकते है? समझाइये।
Answer: नहीं, क्योंकि स्थिर क्वाथी मिश्रण में दोनों अवयव समान ताप पर उबलते हैं। अतः हम उन्हें प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक नहीं कर सकते। स्थिर क्वाथी मिश्रण एक ऐसा मिश्रण होता है जो एक निश्चित अनुपात में होता है और एकल शुद्ध यौगिक की तरह व्यवहार करता है।
In simple words: हम स्थिर क्वाथी मिश्रणों को अलग नहीं कर सकते क्योंकि वे एक साथ एक ही तापमान पर उबलते हैं, जैसे वे एक ही चीज हों।

🎯 Exam Tip: स्थिर क्वाथी मिश्रण की परिभाषा और उनके पृथक्करण में प्रभाजी आसवन की अक्षमता को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 33. द्रव A तथा B मिश्रित करने पर गर्म विलयन बनाते हैं। बताइये कि ये रॉउल्ट नियम से किस प्रकार का विचलन प्रदर्शित करेंगे ?
Answer: विलयन गर्म हो जाता है अर्थात् \( \Delta H_{mix} = -ve \)। अतः ये ऋणात्मक विचलन प्रदर्शित करेंगे। यह तब होता है जब विलेय-विलायक अंतःक्रियाएँ विलेय-विलेय और विलायक-विलायक अंतःक्रियाओं की तुलना में अधिक मजबूत होती हैं।
In simple words: अगर दो तरल पदार्थों को मिलाने पर घोल गर्म हो जाता है, तो यह रॉउल्ट के नियम से 'ऋणात्मक विचलन' दिखाता है।

🎯 Exam Tip: \( \Delta H_{mix} \) के संकेत को ऋणात्मक विचलन से संबंधित करें और बताएं कि इसका अर्थ मजबूत विलेय-विलायक अंतःक्रियाएँ हैं।

 

Question 35. आदर्श विलयन के लक्षण लिखें।
Answer: आदर्श विलयन वे होते हैं जो रॉउल्ट के नियम का पालन करते हैं. इन विलयनों को प्रभाजी आसवन (Fractional distillation) से अलग नहीं किया जा सकता. इनके मिश्रण में एन्थैल्पी परिवर्तन \( \Delta H_{mix} = 0 \) होता है और आयतन परिवर्तन भी \( \Delta V_{mix} = 0 \) होता है. यह विलयन के घटकों के बीच कोई ऊष्मा उत्पन्न या अवशोषित नहीं होने और आयतन में कोई बदलाव नहीं होने को दर्शाता है.
In simple words: आदर्श विलयन रॉउल्ट के नियम मानते हैं, उनके घटकों को अलग नहीं किया जा सकता, और मिश्रण बनाने पर न तो गर्मी निकलती है न ही आयतन बदलता है।

🎯 Exam Tip: आदर्श विलयन के इन चार मुख्य लक्षणों को हमेशा याद रखें क्योंकि ये इसकी पहचान हैं और अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

 

Question 36. क्लोरोफार्म तथा ऐसीटोन को मिलाने पर ऊष्मा उत्सर्जित क्यों होती है ?
Answer: जब क्लोरोफॉर्म और एसीटोन को मिलाया जाता है, तो उनके अणुओं के बीच एक नया और मजबूत हाइड्रोजन बंधन बनता है. इस मजबूत आकर्षण बल के बनने से ऊर्जा निकलती है, जिसके कारण मिश्रण के तापमान में वृद्धि होती है और ऊष्मा उत्सर्जित होती है. यह एक ऋणात्मक विचलन का उदाहरण है.
In simple words: क्लोरोफॉर्म और एसीटोन मिलाने पर नए, मजबूत बंधन बनते हैं, जिससे गर्मी बाहर निकलती है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि जब मजबूत बंधन बनते हैं, तो ऊर्जा उत्सर्जित होती है (ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया), जबकि कमजोर बंधन बनने पर ऊर्जा अवशोषित होती है (ऊष्माशोषी प्रक्रिया)।

 

Question 37. रेफ्रीजरेटर से निकालकर प्याज काटना साधारण ताप पर रखी प्याज को काटने की अपेक्षा ज्यादा आरामदायक है, क्यों?
Answer: ठंडी प्याज काटने में कम आरामदायक लगती है क्योंकि कम तापमान पर प्याज से निकलने वाले वाष्पशील यौगिक (जो आँखों में जलन पैदा करते हैं) का वाष्प दाब कम होता है. इससे हवा में कम जलन पैदा करने वाले वाष्प बनते हैं, और आँखों में जलन कम होती है. इसलिए, ठंडी प्याज को काटना आसान होता है.
In simple words: ठंडी प्याज से कम वाष्प निकलती है, जिससे आँखों में जलन कम होती है और उसे काटना आसान हो जाता है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में तापमान के प्रभाव और वाष्प दाब के बीच संबंध को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 38. हेनरी का नियम समझाइये।
Answer: हेनरी का नियम यह बताता है कि किसी निश्चित तापमान पर, एक द्रव में गैस की घुलनशीलता (या विलेयता) उस गैस के आंशिक दाब के सीधे समानुपाती होती है जो द्रव की सतह पर मौजूद होती है. इसका मतलब है कि जितना अधिक गैस का दबाव होगा, उतनी ही अधिक गैस द्रव में घुलेगी. यह नियम विभिन्न गैसों की पानी या अन्य तरल पदार्थों में विलेयता को समझने में मदद करता है, खासकर जब हम बोतलबंद पेय पदार्थों या गहरे पानी में गोताखोरी के दौरान गैसों के व्यवहार को देखते हैं.
हेनरी का नियम: गैस का आंशिक दाब 'p' \( \propto \) गैस के मोल अंश (x)
\( p \propto x \)
\( \implies p = K_H.x \)
जहाँ \( K_H \) हेनरी नियतांक है.
In simple words: हेनरी का नियम कहता है कि जितनी ज्यादा गैस का दबाव होगा, उतनी ही ज्यादा वह तरल में घुलेगी।

🎯 Exam Tip: हेनरी के नियम को परिभाषित करते समय "निश्चित तापमान" और "आंशिक दाब के समानुपाती" इन दो महत्वपूर्ण शब्दों का उल्लेख करना न भूलें।

 

Question 39. अमोनिया की बोतलों को खोलने से पहले ठंडा करते हैं क्यों ?
Answer: अमोनिया की बोतलों को खोलने से पहले उन्हें ठंडा किया जाता है क्योंकि ठंडा करने से अमोनिया का वाष्प दाब कम हो जाता है. कम वाष्प दाब के कारण, द्रव अमोनिया बोतल से तेजी से बाहर नहीं निकलती और इसका सुरक्षित रूप से उपयोग किया जा सकता है. यह वाष्प दाब और तापमान के सीधे संबंध को दर्शाता है.
In simple words: अमोनिया की बोतलें खोलने से पहले ठंडी की जाती हैं ताकि वाष्प दाब कम हो जाए और अमोनिया सुरक्षित रूप से बाहर आए।

🎯 Exam Tip: यह उदाहरण हेनरी के नियम के व्यवहारिक अनुप्रयोगों में से एक है, जिसमें वाष्प दाब को नियंत्रित करके सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।

 

Question 41. समान ताप पर ऑक्सीजन जल में हाइड्रोजन से ज्यादा । विलेय है। इनमें से किसका KH मान अधिक होगा?
Answer: हेनरी का नियम हमें बताता है कि गैस की विलेयता हेनरी नियतांक \( (K_H) \) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, यानी अगर गैस की विलेयता अधिक है तो \( K_H \) का मान कम होगा. यहाँ ऑक्सीजन जल में हाइड्रोजन से अधिक विलेय है, जिसका अर्थ है कि ऑक्सीजन का \( K_H \) मान हाइड्रोजन से कम होगा. इसलिए, हाइड्रोजन गैस का हेनरी नियतांक अधिक होगा.
\( K_H \propto \frac{1}{\text{गैस की विलेयता}} \)
In simple words: जो गैस कम घुलती है, उसका हेनरी नियतांक \( K_H \) ज्यादा होता है। चूंकि ऑक्सीजन हाइड्रोजन से ज्यादा घुलती है, तो हाइड्रोजन का \( K_H \) मान ज्यादा होगा।

🎯 Exam Tip: \( K_H \) मान और गैस की विलेयता के बीच के व्युत्क्रमानुपाती संबंध को हमेशा याद रखें; यह हेनरी के नियम के महत्वपूर्ण परिणामों में से एक है।

 

Question 42. विलय के आपेक्षिक वाष्प दाब अवनमन एवं अवाष्पशील विलय के अणु भार में सम्बन्ध दीजिए
Answer: रॉउल्ट का नियम बताता है कि एक अवाष्पशील विलेय को विलायक में मिलाने पर विलयन का वाष्प दाब कम हो जाता है. वाष्प दाब में यह कमी, जिसे आपेक्षिक वाष्प दाब अवनमन कहते हैं, विलेय के मोल अंश के समानुपाती होती है. यह संबंध विलेय के अणु भार की गणना में बहुत उपयोगी होता है.
अपेक्षित वाष्प दाब अवनमन और अवाष्पशील विलेय के अणु भार \( (M_B) \) के बीच का संबंध इस सूत्र से दिया जाता है:
\( M_B = \frac{W_B \times M_A}{W_A} \times \frac{P^0_A}{P^0_A - P_A} \)
जहाँ:
\( W_B \) = विलेय का भार
\( W_A \) = विलायक का भार
\( M_A \) = विलायक का अणु भार
\( P^0_A \) = शुद्ध विलायक का वाष्प दाब
\( P_A \) = विलयन का वाष्प दाब
In simple words: जब आप किसी तरल में कोई ऐसी चीज मिलाते हैं जो उड़ती नहीं है, तो तरल का वाष्प दाब कम हो जाता है। इस कमी का उपयोग मिलाकर डाली गई चीज के वजन को जानने के लिए किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र को याद रखें और इसके प्रत्येक पद का अर्थ समझें, क्योंकि यह विलयन के अणुभार की गणना के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।

 

Question 43. जल के वाष्प दाब पर क्या प्रभाव पड़ेगा यदि इसमें एक चम्मच नमक मिला दें?
Answer: जब जल में एक चम्मच नमक (एक अवाष्पशील विलेय) मिलाया जाता है, तो जल का वाष्प दाब कम हो जाएगा. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नमक के आयन जल की सतह पर कुछ जगह घेर लेते हैं, जिससे जल के अणुओं के लिए सतह से वाष्प के रूप में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. यह रॉउल्ट के नियम के अनुसार एक सामान्य घटना है.
In simple words: नमक मिलाने से पानी का वाष्प दाब घट जाता है क्योंकि नमक के कण पानी की सतह पर जगह रोक लेते हैं।

🎯 Exam Tip: यह समझें कि किसी अवाष्पशील विलेय को मिलाने से विलायक के वाष्प दाब में हमेशा कमी आती है, जो कि विलयन के संपार्श्विक गुणों में से एक है।

 

Question 44. कार्बोनेटीकृत शीतल पेय की ठण्डी बोतल को खोलने पर गैस के बुलबुले बाहर निकलते हैं। समझाइये।
Answer: कार्बोनेटेड शीतल पेय की ठंडी बोतल को खोलने पर गैस के बुलबुले निकलते हैं क्योंकि इन पेय पदार्थों में कार्बन डाइऑक्साइड \( (CO_2) \) गैस को उच्च दाब पर भरा जाता है. जब बोतल का ढक्कन खोला जाता है, तो बोतल के अंदर का दबाव अचानक कम हो जाता है. हेनरी के नियम के अनुसार, गैस की विलेयता दाब के सीधे समानुपाती होती है, इसलिए दबाव कम होने पर \( CO_2 \) गैस की घुलनशीलता कम हो जाती है और यह बुलबुलों के रूप में बाहर निकलने लगती है. ठंडी होने से गैस की विलेयता भी अधिक होती है, जो उच्च दाब के प्रभाव को और बढ़ाती है.
In simple words: शीतल पेय की बोतल खोलने पर, अंदर का दबाव कम हो जाता है जिससे घुली हुई \( CO_2 \) गैस बाहर निकलकर बुलबुले बनाती है।

🎯 Exam Tip: इस घटना को समझाते समय हेनरी के नियम और दाब व गैस की विलेयता के बीच सीधे संबंध का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 45. प्रेशर कुकर के प्रयोग से कुकिंग का समय घट जाता है, क्यों ?
Answer: प्रेशर कुकर में खाना जल्दी पकता है क्योंकि इसके अंदर उच्च दाब पैदा होता है. उच्च दाब के कारण, पानी का क्वथनांक 100°C से अधिक हो जाता है (जैसे 120°C तक). जब पानी अधिक तापमान पर उबलता है, तो खाना पकाने के लिए अधिक ऊष्मा उपलब्ध होती है, जिससे खाना जल्दी पकता है. यह क्वथनांक उन्नयन के सिद्धांत पर आधारित है.
In simple words: प्रेशर कुकर में पानी का तापमान ज्यादा होता है क्योंकि दबाव ज्यादा होता है, जिससे खाना जल्दी पकता है।

🎯 Exam Tip: क्वथनांक उन्नयन के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से समझाएं, जिसमें दाब बढ़ने पर तरल के क्वथनांक का बढ़ना और इसका खाना पकाने में कैसे लाभ होता है, यह बताया जाए।

 

Question 47. हेनरी स्थिरांक एवं गैसों की द्रवों में विलेयता में क्या सम्बन्ध है ?
Answer: हेनरी स्थिरांक \( (K_H) \) और गैसों की द्रवों में विलेयता के बीच व्युत्क्रमानुपाती संबंध होता है. इसका मतलब है कि जिस गैस के लिए हेनरी स्थिरांक का मान जितना अधिक होगा, वह गैस द्रव में उतनी ही कम घुलेगी. यह दर्शाता है कि \( K_H \) गैस की प्रकृति को दर्शाता है और उसकी घुलनशीलता का एक माप है. उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन का \( K_H \) मान ऑक्सीजन से अधिक होता है, इसलिए हाइड्रोजन पानी में ऑक्सीजन की तुलना में कम घुलनशील है.
In simple words: हेनरी स्थिरांक जितना ज्यादा होगा, गैस तरल में उतनी ही कम घुलेगी।

🎯 Exam Tip: इस व्युत्क्रमानुपाती संबंध को याद रखना महत्वपूर्ण है: उच्च \( K_H \) का अर्थ है कम विलेयता, और निम्न \( K_H \) का अर्थ है उच्च विलेयता।

 

Question 48. जलीय स्पीशीज के लिये गर्म जल की तुलना में ठंडे जल में रहना अधिक आरामदायक होता है क्यों ?
Answer: जलीय जीव ठंडे जल में रहना पसंद करते हैं क्योंकि तापमान बढ़ने पर गैसों की जल में घुलनशीलता कम हो जाती है. ठंडे जल में ऑक्सीजन की मात्रा गर्म जल की तुलना में अधिक होती है, जो जलीय जीवों को साँस लेने के लिए अधिक ऑक्सीजन प्रदान करती है. इसलिए, ठंडे जल में जलीय जीवों के लिए अधिक आरामदायक वातावरण होता है. यही कारण है कि ठंडी जगह के जलाशयों में जलीय जीवों की संख्या अधिक पाई जाती है.
In simple words: ठंडे पानी में ऑक्सीजन ज्यादा होती है, इसलिए जलीय जीवों को वहाँ रहना ज्यादा अच्छा लगता है।

🎯 Exam Tip: तापमान के साथ गैसों की विलेयता के संबंध को स्पष्ट रूप से बताएं और इसे जलीय जीवन से जोड़ें।

 

Question 49. ऐनॉक्सिया क्या है?
Answer: ऐनॉक्सिया एक ऐसी स्थिति है जो ऊँचाई वाली जगहों पर रहने वाले लोगों में होती है. ऊँचाई पर वायुमंडलीय दाब कम होता है, जिसके कारण रक्त और ऊतकों में ऑक्सीजन की सांद्रता कम हो जाती है. ऑक्सीजन की कमी के कारण, लोग कमजोर महसूस करते हैं और स्पष्ट रूप से सोचने में असमर्थ होते हैं. यह गंभीर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है.
In simple words: ऐनॉक्सिया ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी से होने वाली बीमारी है, जिससे कमजोरी और सोचने में दिक्कत होती है।

🎯 Exam Tip: ऐनॉक्सिया का कारण (कम वायुमंडलीय दाब और ऑक्सीजन की कमी) और इसके लक्षणों (कमजोरी, सोचने में असमर्थता) को याद रखें।

 

Question 50. गोताखोरों द्वारा ले जाये जाने वाले ऑक्सीजन टैंकों में क्या होता है ?
Answer: गहरे समुद्र में गोताखोरों द्वारा ले जाए जाने वाले ऑक्सीजन टैंकों में हवा के बजाय गैसों का एक विशेष मिश्रण होता है. इसमें हीलियम (11.7%), नाइट्रोजन (56.2%) और ऑक्सीजन (32.1%) शामिल होती है. हीलियम को नाइट्रोजन के साथ मिलाया जाता है ताकि उच्च दाब में नाइट्रोजन के रक्त में घुलने से होने वाले "बेंड्स" नामक रोग से बचा जा सके, क्योंकि हीलियम रक्त में कम घुलनशील होती है. यह मिश्रण गहरे पानी में गोताखोरों के लिए सुरक्षित श्वसन सुनिश्चित करता है.
In simple words: गोताखोरों के टैंक में ऑक्सीजन के साथ हीलियम और नाइट्रोजन मिली होती है, ताकि वे गहराई में सुरक्षित रह सकें।

🎯 Exam Tip: गोताखोरों के टैंक में हीलियम के उपयोग का मुख्य कारण "बेंड्स" से बचाव है, क्योंकि यह रक्त में नाइट्रोजन की घुलनशीलता को कम करता है।

 

Question 51. मोलल उन्नयन स्थिरांक अथवा मोलल हिमांक स्थिरांक किसी एक विलायक के लिये निश्चित मान होते हैं, क्यों ?
Answer: मोलल उन्नयन स्थिरांक \( (K_b) \) और मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक \( (K_f) \) किसी भी विलायक के लिए निश्चित मान होते हैं क्योंकि ये सीधे विलायक के गुणों (जैसे क्वथनांक, हिमांक, वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा या गलन की गुप्त ऊष्मा) पर निर्भर करते हैं, न कि विलेय की प्रकृति पर. चूंकि विलायक के ये गुण स्थिर होते हैं, इसलिए \( K_b \) और \( K_f \) के मान भी उस विशेष विलायक के लिए स्थिर रहते हैं. यह उनका सूत्र भी दर्शाता है.
मोलल उन्नयन (अथवा हिमांक) स्थिरांक \( K \) का मान निम्न सूत्र द्वारा दिया जा सकता है:
\( K = \frac{RT^2}{1000L} \)
जहाँ \( T \) = विलायक का क्वथनांक (अथवा हिमांक)
\( L \) = विलायक के वाष्पन (अथवा गलन) की गुप्त ऊष्मा/ग्राम
चूंकि \( R, T \) तथा \( L \) किसी एक विलायक के लिये निश्चित होते हैं। अतः \( K \) का मान भी विलायक के लिये निश्चित होता है।
In simple words: मोलल उन्नयन और हिमांक स्थिरांक हर विलायक के लिए फिक्स होते हैं, क्योंकि ये सिर्फ विलायक के अपने गुणों पर निर्भर करते हैं।

🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि \( K_b \) और \( K_f \) केवल विलायक की प्रकृति पर निर्भर करते हैं, विलेय की प्रकृति या मात्रा पर नहीं; यह संपार्श्विक गुणों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।

 

Question 53. क्वथनांक उन्नयन या हिमांक अवनमन की विधि से अणु भार ज्ञात करने में साधारण थर्मामीटर का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है ?
Answer: क्वथनांक उन्नयन (boiling point elevation) और हिमांक अवनमन (freezing point depression) का मान बहुत कम होता है, आमतौर पर यह 0.01°C के आसपास होता है. इतने छोटे अंतर को मापने के लिए एक साधारण थर्मामीटर पर्याप्त सटीक नहीं होता. इन सूक्ष्म परिवर्तनों को मापने के लिए एक विशेष प्रकार के थर्मामीटर की आवश्यकता होती है, जिसे बेकमैन थर्मामीटर (Beckmann thermometer) कहते हैं, क्योंकि यह 0.001°C तक के तापमान अंतर को भी माप सकता है. यह सुनिश्चित करता है कि अणु भार की गणना सटीक हो.
In simple words: क्वथनांक और हिमांक में बहुत कम बदलाव होता है, इसलिए इसे मापने के लिए साधारण थर्मामीटर के बजाय बेकमैन थर्मामीटर जैसे बहुत सटीक थर्मामीटर की जरूरत होती है।

🎯 Exam Tip: क्वथनांक उन्नयन और हिमांक अवनमन के छोटे परिमाण पर जोर दें और यह बताएं कि इस कारण से विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए बेकमैन थर्मामीटर का उपयोग क्यों किया जाता है।

 

Question 54. परासरण से आप क्या समझते हैं ?
Answer: परासरण एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें विलायक के अणु (जैसे पानी) एक अर्द्धपारगम्य झिल्ली (semipermeable membrane) से होकर अपनी अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र (कम विलेय सांद्रता) से कम सांद्रता वाले क्षेत्र (अधिक विलेय सांद्रता) की ओर जाते हैं. यह तब तक चलता रहता है जब तक दोनों तरफ सांद्रता संतुलित न हो जाए. यह प्रक्रिया जीवों में जल के परिवहन और कोशिकाओं के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इस प्रक्रिया को ओसमोसिस (Osmosis) भी कहते हैं.
In simple words: परासरण वह प्रक्रिया है जिसमें पानी के अणु एक पतली झिल्ली से होकर कम घुली हुई चीज से ज्यादा घुली हुई चीज की तरफ जाते हैं।

🎯 Exam Tip: परासरण की परिभाषा में "अर्द्धपारगम्य झिल्ली" और "विलायक के अणुओं का कम सांद्रता से अधिक सांद्रता वाले विलयन की ओर गमन" इन प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख करना अनिवार्य है।

 

Question 55. परासरण दाब किसे कहते हैं ?
Answer: परासरण दाब वह न्यूनतम बाहरी दबाव होता है जिसे किसी विलयन पर लगाया जाता है ताकि अर्द्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलायक के अणुओं का विलयन में प्रवेश रुक जाए. यह दबाव विलायक के अणुओं के प्रवाह को रोकता है और परासरण की प्रक्रिया को बंद कर देता है. इसे विलयन के अणुभार की गणना में भी उपयोग किया जाता है. परासरण दाब को ऑस्मोटिक प्रेशर (Osmotic Pressure) भी कहते हैं.
In simple words: परासरण दाब वह दबाव है जो पानी को झिल्ली से होकर किसी विलयन में जाने से रोकता है।

🎯 Exam Tip: परासरण दाब की परिभाषा में "न्यूनतम बाहरी दबाव" और "विलायक के अणुओं के प्रवाह को रोकने" जैसे महत्वपूर्ण शब्दों को शामिल करें।

 

Question 56. अर्द्धपारगम्य झिल्ली क्या होती है ? उदाहरण दे ?
Answer: अर्द्धपारगम्य झिल्ली एक ऐसी पतली परत होती है जो कुछ अणुओं (जैसे विलायक के अणु) को अपने से होकर गुजरने देती है, लेकिन अन्य बड़े अणुओं (जैसे विलेय के अणु) को रोक देती है. यह झिल्ली परासरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यह केवल चयनित पदार्थों को ही गुजरने देती है, इसलिए इसे 'अर्द्धपारगम्य' कहा जाता है.
उदाहरण – अंडे की झिल्ली, चर्म पत्र आदि.
In simple words: अर्द्धपारगम्य झिल्ली वह पतली परत है जो कुछ छोटे कणों को गुजरने देती है पर बड़े कणों को रोक लेती है, जैसे अंडे की झिल्ली।

🎯 Exam Tip: अर्द्धपारगम्य झिल्ली की परिभाषा में इसकी चयनात्मकता पर जोर दें – यह विलायक को गुजरने देती है लेकिन विलेय को नहीं। उदाहरण देना भी महत्वपूर्ण है।

 

Question 57. प्रतीप परासरण या प्रतिलोम परासरण किसे कहते हैं ?
Answer: प्रतीप परासरण (या प्रतिलोम परासरण) वह प्रक्रिया है जिसमें विलयन पर उसके परासरण दाब से अधिक बाहरी दबाव लगाया जाता है. इस उच्च दबाव के कारण, विलायक के अणु अर्द्धपारगम्य झिल्ली से होकर कम सांद्रता वाले विलयन की तरफ प्रवाहित होने लगते हैं, जो परासरण की सामान्य दिशा के विपरीत होता है. यह प्रक्रिया समुद्री जल को पीने योग्य बनाने (विलवणीकरण) में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है.
In simple words: प्रतीप परासरण में, हम परासरण के विपरीत दिशा में पानी को एक झिल्ली से गुजरने के लिए दबाव डालते हैं, जैसे समुद्री पानी को साफ करना।

🎯 Exam Tip: प्रतीप परासरण को परिभाषित करते समय "परासरण दाब से अधिक दाब" और "विलायक का उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर गमन" इन प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दें।

 

Question 59. मोलल उन्नयन स्थिरांक से आप क्या समझते हैं ?
Answer: मोलल उन्नयन स्थिरांक \( (K_b) \) किसी विलायक के क्वथनांक में होने वाले उन्नयन की वह मात्रा है जब 1 मोल अवाष्पशील विलेय को 1000 ग्राम (या 1 किलोग्राम) विलायक में घोला जाता है. यह स्थिरांक केवल विलायक की प्रकृति पर निर्भर करता है और इसकी इकाई केल्विन किलोग्राम प्रति मोल (K kg mol⁻¹) होती है. यह दर्शाता है कि विलेय की एक निश्चित मात्रा मिलाने पर क्वथनांक कितना बढ़ेगा.
In simple words: मोलल उन्नयन स्थिरांक बताता है कि जब आप 1 किलो तरल में 1 मोल अघुलनशील चीज मिलाते हैं, तो उसका उबलने का तापमान कितना बढ़ेगा।

🎯 Exam Tip: मोलल उन्नयन स्थिरांक की परिभाषा में "1 मोल अवाष्पशील विलेय", "1000 ग्राम विलायक" और "क्वथनांक में उन्नयन" इन प्रमुख पदों को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 60. मोलल अवनमन स्थिरांक से आप क्या समझते हैं ?
Answer: मोलल अवनमन स्थिरांक \( (K_f) \) किसी विलायक के हिमांक में होने वाले अवनमन की वह मात्रा है जब 1 मोल अवाष्पशील विलेय को 1000 ग्राम (या 1 किलोग्राम) विलायक में घोला जाता है. यह स्थिरांक भी केवल विलायक की प्रकृति पर निर्भर करता है और इसकी इकाई केल्विन किलोग्राम प्रति मोल (K kg mol⁻¹) होती है. यह दर्शाता है कि विलेय की एक निश्चित मात्रा मिलाने पर हिमांक कितना कम होगा. यह विशेष रूप से एंटी-फ्रीज समाधानों में प्रासंगिक है.
In simple words: मोलल अवनमन स्थिरांक बताता है कि जब 1 किलो तरल में 1 मोल अघुलनशील चीज मिलाते हैं, तो उसका जमने का तापमान कितना कम होगा।

🎯 Exam Tip: मोलल अवनमन स्थिरांक की परिभाषा में "1 मोल अवाष्पशील विलेय", "1000 ग्राम विलायक" और "हिमांक में अवनमन" इन प्रमुख पदों को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 61. क्या होता है जब हम रक्त कोशिका को जल (अल्प परासारी विलयन में रखते हैं? कारण दीजिये।
Answer: जब रक्त कोशिका को आसुत जल (जो एक अल्प परासारी विलयन है, यानी उसमें घुले हुए पदार्थ कम होते हैं) में रखा जाता है, तो रक्त कोशिका फूल जाती है और अंततः फट सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि परासरण की प्रक्रिया के द्वारा, जल के अणु (विलायक) कम सांद्रता वाले आसुत जल से अधिक सांद्रता वाले रक्त कोशिका के अंदर प्रवाहित होते हैं. जल कोशिका के अंदर तब तक जाता रहता है जब तक वह फूल न जाए.
In simple words: रक्त कोशिका को पानी में रखने पर वह फूल जाती है क्योंकि पानी परासरण से कोशिका के अंदर चला जाता है।

🎯 Exam Tip: इस उदाहरण में परासरण की दिशा को स्पष्ट रूप से समझाएं – जल का प्रवाह हमेशा कम विलेय सांद्रता से अधिक विलेय सांद्रता की ओर होता है।

 

Question 62. प्रतिहिम क्या होता है ?
Answer: प्रतिहिम (Antifreeze) वह पदार्थ होता है जिसे जल में मिलाया जाता है ताकि उसका हिमांक कम हो जाए. इससे जल को बहुत कम तापमान पर भी जमने से रोका जा सकता है. इसका उपयोग मुख्य रूप से कारों के रेडिएटर में और हवाई जहाजों के पंखों को जमने से बचाने के लिए किया जाता है. एथिलीन ग्लाइकॉल (Ethylene glycol) एक सामान्य प्रतिहिम का उदाहरण है.
In simple words: प्रतिहिम एक ऐसा पदार्थ है जिसे पानी में मिलाने पर पानी कम तापमान पर भी नहीं जमता, जैसे कारों में इस्तेमाल होने वाला एथिलीन ग्लाइकॉल।

🎯 Exam Tip: प्रतिहिम की परिभाषा में "जल का हिमांक कम करने" और "जमने से रोकने" जैसे प्रमुख उद्देश्यों पर ध्यान दें और एक उदाहरण देना सुनिश्चित करें।

 

Question 63. क्वथनांक की उन्नयन विधि से किसी वाष्पशील पदार्थ का अणु भार क्यों नहीं ज्ञात कर सकते हैं ?
Answer: क्वथनांक उन्नयन की विधि का उपयोग केवल अवाष्पशील (non-volatile) और अविद्युत अपघट्य पदार्थों के अणु भार को ज्ञात करने के लिए किया जाता है. वाष्पशील पदार्थ (जो आसानी से वाष्पीकृत हो जाते हैं) के लिए यह विधि उपयुक्त नहीं होती क्योंकि जब ऐसे पदार्थों को विलयन में गर्म किया जाता है, तो वे स्वयं भी वाष्प में परिवर्तित हो जाते हैं. इससे क्वथनांक में होने वाला उन्नयन सटीक रूप से नहीं मापा जा सकता, जिससे अणु भार की गणना गलत हो जाती है.
In simple words: वाष्पशील चीजों का अणुभार क्वथनांक उन्नयन विधि से नहीं निकाल सकते, क्योंकि गर्म करने पर वे खुद भी भाप बन जाती हैं, जिससे माप सही नहीं आती।

🎯 Exam Tip: इस विधि की सीमा को स्पष्ट रूप से बताएं कि यह केवल अवाष्पशील और अविद्युत अपघट्य पदार्थों के लिए ही काम करती है, क्योंकि वाष्पशील पदार्थ खुद वाष्पीकृत हो जाते हैं और माप को प्रभावित करते हैं।

 

Question 64. किसी द्रव में अवाष्पशील पदार्थ डालने पर उसके क्वथनांक में उन्नयन क्यों होता है ?
Answer: जब किसी द्रव में कोई अवाष्पशील पदार्थ (जो आसानी से वाष्पीकृत नहीं होता) डाला जाता है, तो द्रव का क्वथनांक बढ़ जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विलेय के कण द्रव की सतह पर कुछ जगह घेर लेते हैं, जिससे विलायक के अणुओं के वाष्पीकरण की दर कम हो जाती है. वाष्प दाब को वायुमंडलीय दाब के बराबर लाने के लिए अब अधिक तापमान की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप क्वथनांक में वृद्धि होती है. यह घटना अणुसंख्यक गुणधर्मों में से एक है.
In simple words: तरल में अवाष्पशील चीज मिलाने पर, तरल का उबलने का तापमान बढ़ जाता है क्योंकि सतह पर विलेय के कणों की वजह से वाष्प कम बनती है।

🎯 Exam Tip: क्वथनांक उन्नयन का कारण समझाते समय "सतह पर विलेय के कणों द्वारा स्थान घेरना", "वाष्प दाब में कमी" और "वायुमंडलीय दाब के बराबर लाने के लिए अधिक ऊर्जा" जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 65. समपरासारी विलयन क्या होते हैं ?
Answer: समपरासारी विलयन (Isotonic solutions) वे विलयन होते हैं जिनका परासरण दाब एक ही तापमान पर समान होता है. इसका मतलब है कि उनकी मोलर सांद्रता भी समान होती है. ऐसे विलयनों को एक अर्द्धपारगम्य झिल्ली द्वारा अलग करने पर उनके बीच विलायक अणुओं का कोई शुद्ध प्रवाह नहीं होता, क्योंकि परासरण दाब संतुलित होता है. ये जैविक प्रणालियों में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, जैसे चिकित्सा में अंतःशिरा तरल पदार्थों का उपयोग.
In simple words: समपरासारी विलयन वे होते हैं जिनका परासरण दाब और सांद्रता समान तापमान पर बराबर होती है।

🎯 Exam Tip: समपरासारी विलयन की परिभाषा में "समान परासरण दाब" और "समान मोलर सांद्रता" इन दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 66. NaCl, CaCl2, CaF2, आदि को बर्फ से ढकी सड़कों को साफ करने में प्रयुक्त करते हैं, क्यों?
Answer: NaCl, CaCl₂ और CaF₂ जैसे पदार्थों को बर्फ से ढकी सड़कों को साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि ये विहिमीकारक (de-icing) के रूप में कार्य करते हैं. जब इन्हें बर्फ पर छिड़का जाता है, तो ये बर्फ के पिघलने वाले पानी में घुल जाते हैं और उस पानी का हिमांक (freezing point) काफी कम कर देते हैं. इससे पानी बहुत कम तापमान पर भी नहीं जमता है और बर्फ पिघलना शुरू हो जाती है, जिससे सड़कें साफ हो जाती हैं. CaCl₂ विशेष रूप से प्रभावी है क्योंकि यह अधिक आयन उत्पन्न करता है.
In simple words: नमक जैसी चीजें बर्फ पर डालने से पानी का जमने का तापमान कम हो जाता है, जिससे बर्फ पिघल जाती है और सड़कें साफ हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: यह बताएं कि ये पदार्थ हिमांक अवनमन के सिद्धांत पर कार्य करते हैं, जिससे बर्फ का गलनांक कम हो जाता है और वह पिघल जाती है।

 

Question 67. जल का मोलल अवनमन स्थिरांक 1.86 Kkg mol⁻¹ है, इसका क्या अर्थ होता है ?
Answer: जल का मोलल अवनमन स्थिरांक 1.86 K kg mol⁻¹ होने का अर्थ है कि जब 1 मोल अवाष्पशील विलेय को 1000 ग्राम (1 किलोग्राम) शुद्ध जल में घोला जाता है, तो जल का हिमांक 1.86 केल्विन (या डिग्री सेल्सियस) कम हो जाता है. सामान्य जल का हिमांक 273.15 K होता है, तो विलेय मिलाने के बाद यह लगभग 273.15 - 1.86 = 271.29 K हो जाएगा. यह एक महत्वपूर्ण अणुसंख्यक गुणधर्म है.
In simple words: इसका मतलब है कि जब आप 1 किलो पानी में 1 मोल अघुलनशील चीज मिलाते हैं, तो पानी का जमने का तापमान 1.86 डिग्री सेल्सियस कम हो जाएगा।

🎯 Exam Tip: इस मान का अर्थ स्पष्ट रूप से बताएं, जिसमें "1 मोल विलेय", "1 किलोग्राम विलायक" और "हिमांक में 1.86 K की कमी" इन प्रमुख तत्वों को शामिल करें।

 

Question 68. अण्डे के बाह्य कवच को हटाकर यदि उसे निम्न में रखें तो क्या होगा -
(1) आसुत जल में
(2) NaCl के संतृप्त विलयन में ?
Answer: यदि अंडे के बाहरी कवच को हटा दिया जाए (जिससे अंदर की झिल्ली उजागर हो जाती है, जो एक अर्द्धपारगम्य झिल्ली के रूप में कार्य करती है), तो उसे विभिन्न विलयनों में रखने पर निम्न प्रभाव होंगे:
(1) आसुत जल में – जब अंडे को आसुत जल (कम सांद्रता वाला विलयन) में रखा जाता है, तो पानी परासरण की प्रक्रिया द्वारा अंडे के अंदर चला जाएगा. इससे अंडा फूल जाएगा और अंततः फट सकता है. यह अंतःपरासरण का उदाहरण है.
(2) NaCl के संतृप्त विलयन में – जब अंडे को NaCl के संतृप्त विलयन (उच्च सांद्रता वाला विलयन) में रखा जाता है, तो अंडे के अंदर से पानी परासरण की प्रक्रिया द्वारा बाहर आ जाएगा. इससे अंडा सिकुड़ जाएगा. यह बाह्यपरासरण का उदाहरण है.
In simple words: अंडे को पानी में रखने पर वह फूल जाएगा क्योंकि पानी अंदर जाएगा। नमक के घोल में रखने पर वह सिकुड़ जाएगा क्योंकि पानी बाहर निकल जाएगा।

🎯 Exam Tip: इस प्रयोग में परासरण के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से समझाएं, जिसमें विलायक के अणुओं का प्रवाह हमेशा कम विलेय सांद्रता से अधिक विलेय सांद्रता की ओर होता है।

 

Question 69. विलयनों के सम्बन्ध में किस प्रकार जानकारी देता है? बताएँ।
Answer: विलयनों के अणुसंख्यक गुणधर्म (जैसे वाष्प दाब अवनमन, क्वथनांक उन्नयन, हिमांक अवनमन और परासरण दाब) विलेय के अणुओं की संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि उनकी रासायनिक प्रकृति पर. इन गुणों का मापन करके हम अवाष्पशील विलेय पदार्थों के अणु भार या मोलर द्रव्यमान की गणना कर सकते हैं. ये गुणधर्म विलयनों की सांद्रता और विलेय के व्यवहार (जैसे संगुणन या वियोजन) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं. उदाहरण के लिए, परासरण दाब से हमें जैविक प्रणालियों में तरल पदार्थ के प्रवाह को समझने में मदद मिलती है.
In simple words: विलयनों के गुणधर्म हमें विलेय के अणुभार, उसकी सांद्रता और उसके व्यवहार के बारे में बताते हैं।

🎯 Exam Tip: यह बताएं कि अणुसंख्यक गुणधर्मों का उपयोग करके अवाष्पशील विलेय के अणुभार की गणना कैसे की जाती है, क्योंकि यह एक प्रमुख अनुप्रयोग है।

 

Question 70. अणुसंख्यक गुणधर्म से आप क्या समझते हैं?
Answer: अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative properties) वे गुणधर्म होते हैं जो विलयन में विलेय के कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि उन कणों की प्रकृति या पहचान पर. इसका मतलब है कि चाहे विलेय चीनी हो या नमक, अगर उनके कणों की संख्या समान है, तो अणुसंख्यक गुणधर्मों का मान समान रहेगा. ये गुणधर्म विलयन के वाष्प दाब, क्वथनांक, हिमांक और परासरण दाब से संबंधित होते हैं. ये गुण विलयन के व्यवहार को समझने और अज्ञात विलेय के अणु भार को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण हैं.
In simple words: अणुसंख्यक गुणधर्म विलयन के वे गुण होते हैं जो विलेय के कणों की गिनती पर निर्भर करते हैं, न कि वे कण किस चीज के बने हैं।

🎯 Exam Tip: अणुसंख्यक गुणधर्म की परिभाषा में "विलेय के कणों की संख्या पर निर्भर" और "विलेय की प्रकृति पर नहीं" इन प्रमुख वाक्यांशों को शामिल करें।

 

Question 71. अणुसंख्यक गुणधर्म कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: अणुसंख्यक गुणधर्म मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं, जो सभी विलेय के कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं:
1. क्वथनांक में उन्नयन (Elevation in boiling point): विलेय मिलाने पर विलायक का क्वथनांक बढ़ जाता है.
2. हिमांक में अवनमन (Depression in freezing point): विलेय मिलाने पर विलायक का हिमांक कम हो जाता है.
3. वाष्प दाब में कमी (Lowering of vapor pressure): विलेय मिलाने पर विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है.
4. परासरण दाब (Osmotic pressure): विलायक के अणुओं के अर्धपारगम्य झिल्ली से प्रवाह के कारण उत्पन्न दाब.
ये चारों गुणधर्म विभिन्न औद्योगिक और जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसे कि समुद्री जल का विलवणीकरण और रक्त कोशिकाओं का व्यवहार.
In simple words: अणुसंख्यक गुणधर्म चार तरह के होते हैं: क्वथनांक का बढ़ना, हिमांक का घटना, वाष्प दाब का कम होना और परासरण दाब।

🎯 Exam Tip: इन चारों अणुसंख्यक गुणधर्मों के नाम और उनके सामान्य प्रभावों को याद रखें।

 

Question 72. जल में चीनी या नमक मिलाने से जल का क्वथनांक क्यों बढ़ जाता है ?
Answer: जब जल में चीनी या नमक (अवाष्पशील विलेय) मिलाया जाता है, तो जल का क्वथनांक बढ़ जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विलेय के कण जल की सतह पर कुछ स्थान घेर लेते हैं, जिससे जल के अणुओं के लिए वाष्प में परिवर्तित होना मुश्किल हो जाता है. परिणामस्वरूप, जल का वाष्प दाब कम हो जाता है. वायुमंडलीय दाब के बराबर वाष्प दाब प्राप्त करने के लिए अब अधिक तापमान की आवश्यकता होती है, जिससे विलयन का क्वथनांक शुद्ध जल के क्वथनांक से अधिक हो जाता है. यह क्वथनांक उन्नयन कहलाता है.
In simple words: पानी में चीनी या नमक मिलाने से पानी का वाष्प दाब कम हो जाता है, इसलिए उसे उबलने के लिए ज्यादा गर्मी देनी पड़ती है और क्वथनांक बढ़ जाता है।

🎯 Exam Tip: क्वथनांक उन्नयन की प्रक्रिया को समझने के लिए "विलेय कणों द्वारा सतह का अवरोध", "वाष्प दाब में कमी" और "वायुमंडलीय दाब के बराबर पहुँचने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता" इन तीन मुख्य चरणों को याद रखें।

 

Question 73. जल में NaCl घोलने पर विलयन के हिमांक पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: जल में NaCl (नमक) घोलने पर विलयन का हिमांक (जमने का तापमान) कम हो जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नमक के आयन जल के अणुओं के बीच आ जाते हैं और उन्हें एक साथ बर्फ के रूप में क्रिस्टलीकृत होने से रोकते हैं. इससे क्रिस्टलीकरण के लिए और अधिक ऊर्जा (कम तापमान) की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप हिमांक में कमी आती है. यह हिमांक अवनमन का एक सामान्य उदाहरण है और सड़कों पर बर्फ हटाने में इसका उपयोग किया जाता है.
In simple words: पानी में नमक मिलाने पर उसका जमने का तापमान घट जाता है, क्योंकि नमक के कण पानी को आसानी से जमने नहीं देते।

🎯 Exam Tip: हिमांक अवनमन की व्याख्या करते समय, विलेय के कणों द्वारा विलायक के अणुओं के क्रिस्टलीकरण में बाधा डालने की भूमिका को स्पष्ट करें।

 

Question 74. प्रेशर कुकर में पानी देर में उबलता है, पर दाल जल्दी गल जाती है। क्यों?
Answer: प्रेशर कुकर में पानी देर से उबलता नहीं है, बल्कि यह उच्च तापमान पर उबलता है, जिससे दाल जल्दी गल जाती है. प्रेशर कुकर के अंदर का दाब सामान्य वायुमंडलीय दाब से अधिक होता है. इस उच्च दाब के कारण, पानी का क्वथनांक 100°C से अधिक हो जाता है (उदाहरण के लिए, 120°C). पानी इस ऊँचे तापमान पर उबलता रहता है, जिससे दाल और अन्य खाद्य पदार्थों को पकने के लिए अधिक ऊष्मा और उच्च तापमान मिलता है, और वे तेजी से गल जाते हैं. यही कारण है कि प्रेशर कुकर में खाना जल्दी पक जाता है.
In simple words: प्रेशर कुकर में पानी का तापमान ज्यादा होता है क्योंकि दबाव ज्यादा होता है, जिससे दाल को ज्यादा गर्मी मिलती है और वह जल्दी पक जाती है।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में भ्रम को दूर करें: प्रेशर कुकर में पानी देर से नहीं, बल्कि उच्च तापमान पर उबलता है, जिससे खाना तेजी से पकता है। मुख्य कारण "उच्च दाब के कारण क्वथनांक में वृद्धि" है।

 

Question 76. जल में ऐसीटोन घोलने पर उसके क्वथनांक पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
Answer: जब जल में एसीटोन घोला जाता है, तो एसीटोन एक वाष्पशील द्रव है, जिसका अर्थ है कि यह आसानी से वाष्पीकृत हो सकता है. इस मिश्रण का क्वथनांक शुद्ध जल के क्वथनांक (100°C) और शुद्ध एसीटोन के क्वथनांक (लगभग 56°C) के मानों के बीच रहेगा. यह एक अआदर्श विलयन बनाता है जो धनात्मक विचलन दर्शाता है, क्योंकि एसीटोन के अणु जल के हाइड्रोजन बंधों को कमजोर करते हैं, जिससे वाष्प दाब बढ़ जाता है और क्वथनांक कम हो जाता है. इससे पता चलता है कि यह विलयन राउल्ट के नियम से विचलित होगा.
In simple words: पानी में एसीटोन मिलाने पर, मिश्रण का उबलने का तापमान पानी और एसीटोन के उबलने के तापमान के बीच कहीं रहेगा, क्योंकि एसीटोन भी उड़ने वाला तरल है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि जब दो वाष्पशील घटक मिलाए जाते हैं, तो क्वथनांक दोनों शुद्ध घटकों के क्वथनांक के बीच आता है, और यह विचलन की प्रकृति पर निर्भर करता है।

 

Question 77. अजलीय विलयनों के परासरण दाब को प्रयोगात्मक रूप से ज्ञात करने की विधि कौन-सी है ?
Answer: अजलीय विलयनों के परासरण दाब को प्रयोगात्मक रूप से ज्ञात करने के लिए टाउनसेंड विधि (Townsend method) का उपयोग किया जाता है. यह विधि परासरण दाब को मापने के लिए एक सटीक तरीका प्रदान करती है, खासकर उन विलयनों के लिए जिनमें पानी मुख्य विलायक नहीं होता है. इस विधि में अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलायक के प्रवाह को संतुलित करके दाब को मापा जाता है. यह विधि उन शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो विभिन्न प्रकार के गैर-जलीय प्रणालियों का अध्ययन करते हैं.
In simple words: पानी के बिना बने घोलों का परासरण दाब मापने के लिए टाउनसेंड विधि का इस्तेमाल किया जाता है।

🎯 Exam Tip: टाउनसेंड विधि का उपयोग विशेष रूप से अजलीय विलयनों के परासरण दाब को मापने के लिए होता है, जो इसे जलीय विलयनों से अलग करता है।

 

Question 78. बर्फ पर नमक छिड़कने से बर्फ जल्दी गलती है, क्यों ?
Answer: बर्फ पर नमक छिड़कने से बर्फ जल्दी पिघल जाती है क्योंकि नमक (एक अवाष्पशील विलेय) पानी का हिमांक (जमने का तापमान) कम कर देता है. जब बर्फ पर नमक डाला जाता है, तो नमक बर्फ के पानी में घुल जाता है, जिससे घोल का हिमांक सामान्य 0°C से कम हो जाता है (उदाहरण के लिए, -5°C या -10°C). चूंकि आसपास का तापमान अभी भी इस नए कम हिमांक से अधिक होता है, तो बर्फ पिघलना शुरू हो जाती है. यह हिमांक अवनमन का एक व्यावहारिक अनुप्रयोग है.
In simple words: बर्फ पर नमक छिड़कने से बर्फ का जमने का तापमान कम हो जाता है, जिससे आसपास के तापमान पर भी बर्फ पिघलने लगती है।

🎯 Exam Tip: यह समझाना महत्वपूर्ण है कि नमक घोल बनाने पर पानी के जमने के तापमान को कम करता है, जिससे आसपास के अपेक्षाकृत गर्म तापमान पर भी बर्फ पिघल जाती है।

 

Question 79. कार्बनिक प्रकृति की कृत्रिम अर्द्ध-पारगम्य झिल्ली का कार्य कौन करता है ?
Answer: कार्बनिक प्रकृति की कृत्रिम अर्द्ध-पारगम्य झिल्ली के रूप में मुख्य रूप से सेल्युलोज एसीटेट (cellulose acetate) का उपयोग किया जाता है. यह पदार्थ विलायक के अणुओं (जैसे पानी) को गुजरने देता है, लेकिन विलेय के बड़े अणुओं को रोक लेता है, जिससे यह परासरण की प्रक्रिया में प्रभावी होता है. इसका उपयोग समुद्री जल के विलवणीकरण (desalination) में प्रतीप परासरण (reverse osmosis) के लिए किया जाता है. फिनोल का उपयोग भी कुछ हद तक किया जाता है.
In simple words: सेल्युलोज एसीटेट एक कृत्रिम झिल्ली है जो पानी को तो गुजरने देती है पर घुली हुई चीजों को रोक लेती है, जिसका इस्तेमाल समुद्री पानी साफ करने में होता है।

🎯 Exam Tip: कार्बनिक अर्द्ध-पारगम्य झिल्ली के उदाहरण के रूप में "सेल्युलोज एसीटेट" का नाम याद रखें, जो प्रतीप परासरण में बहुत महत्वपूर्ण है।

 

Question 80. किन्हीं दो अकार्बनिक प्रकृति की कृत्रिम अर्द्ध-पारगम्य झिल्लियों के नाम लिखो।
Answer: अकार्बनिक प्रकृति की दो मुख्य कृत्रिम अर्द्ध-पारगम्य झिल्लियाँ निम्न हैं:

  • श्लेष्मायुक्त कॉपर फेरोसायनाइड (Cu₂[Fe(CN)₆]): यह झिल्ली परासरण दाब मापने के लिए प्रयोगशाला में उपयोग की जाती है और काफी प्रभावी होती है.
  • श्लेष्मायुक्त कैल्सियम फॉस्फेट (Ca₃(PO₄)₂): यह भी एक अकार्बनिक अर्द्ध-पारगम्य झिल्ली है जो विलायक के अणुओं को गुजरने देती है और विलेय को रोकती है.
ये झिल्लियाँ विभिन्न शोध और औद्योगिक अनुप्रयोगों में परासरण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करती हैं.
In simple words: अकार्बनिक झिल्लियाँ कॉपर फेरोसायनाइड और कैल्सियम फॉस्फेट से बनी होती हैं, जो पानी को छानने का काम करती हैं।

🎯 Exam Tip: इन दो अकार्बनिक झिल्लियों के नाम और उनके रासायनिक सूत्र याद रखें, क्योंकि ये अक्सर उदाहरण के रूप में पूछे जाते हैं।

 

Question 81. हिमांक अवनमन विधि से किसी अवाष्पशील पदार्थ का अणुभार ज्ञात करने का सूत्र लिखो ?
Answer: हिमांक अवनमन विधि का उपयोग करके किसी अवाष्पशील पदार्थ का अणुभार \( (M_B) \) ज्ञात करने के लिए निम्न सूत्र का उपयोग किया जाता है:
\( M_B = \frac{K_f \times W_B \times 1000}{\Delta T_f \times W_A} \)
जहाँ:
\( K_f \) = मोलल अवनमन स्थिरांक (विलायक के लिए एक निश्चित मान)
\( W_B \) = विलेय का भार (ग्राम में)
\( W_A \) = विलायक का भार (ग्राम में)
\( \Delta T_f \) = हिमांक में अवनमन (शुद्ध विलायक और विलयन के हिमांक का अंतर)
यह सूत्र हिमांक में कमी को मापकर विलेय के मोलर द्रव्यमान की गणना करने में मदद करता है. यह विधि बहुत सटीक होती है.
In simple words: हिमांक अवनमन विधि में, अघुलनशील चीज का वजन निकालने के लिए एक खास सूत्र का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें हिमांक में आई कमी को मापा जाता है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र के प्रत्येक पद को समझें और याद रखें, विशेष रूप से \( K_f \) (मोलल अवनमन स्थिरांक), \( W_B \) (विलेय का भार), \( W_A \) (विलायक का भार) और \( \Delta T_f \) (हिमांक में अवनमन)।

 

Question 82. जल वाष्प दाब क्या होगा यदि एक चम्मच चीनी उसमें डाल दी जाये?
Answer: यदि एक चम्मच चीनी को जल में डाल दिया जाए, तो जल का वाष्प दाब कम हो जाएगा. चीनी एक अवाष्पशील विलेय है, और जब इसे जल में घोला जाता है, तो चीनी के अणु जल की सतह पर कुछ स्थान घेर लेते हैं. इससे जल के अणुओं के लिए सतह से वाष्प के रूप में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप वाष्प दाब में कमी आती है. यह रॉउल्ट के नियम का सीधा अनुप्रयोग है.
In simple words: पानी में चीनी मिलाने से पानी का वाष्प दाब घट जाएगा क्योंकि चीनी के कण पानी की सतह पर जगह रोक लेते हैं।

🎯 Exam Tip: इस अवधारणा को याद रखें: किसी भी अवाष्पशील विलेय को विलायक में मिलाने पर विलायक का वाष्प दाब हमेशा कम होता है।

 

Question 83. क्वथनांक उन्नयन विधि से किसी अवाष्पशील पदार्थ का अणु भार ज्ञात करने का सूत्र लिखो?
Answer: क्वथनांक उन्नयन विधि का उपयोग करके किसी अवाष्पशील पदार्थ का अणुभार \( (M_B) \) ज्ञात करने के लिए निम्न सूत्र का उपयोग किया जाता है:
\( M_B = \frac{K_b \times W_B \times 1000}{\Delta T_b \times W_A} \)
जहाँ:
\( K_b \) = मोलल उन्नयन स्थिरांक (विलायक के लिए एक निश्चित मान)
\( W_B \) = विलेय का भार (ग्राम में)
\( W_A \) = विलायक का भार (ग्राम में)
\( \Delta T_b \) = क्वथनांक में उन्नयन (शुद्ध विलायक और विलयन के क्वथनांक का अंतर)
यह सूत्र क्वथनांक में वृद्धि को मापकर विलेय के मोलर द्रव्यमान की गणना करने में मदद करता है. यह एक सटीक और विश्वसनीय विधि है.
In simple words: क्वथनांक उन्नयन विधि में, अघुलनशील चीज का वजन निकालने के लिए एक खास सूत्र का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें क्वथनांक में आई बढ़ोतरी को मापा जाता है।

🎯 Exam Tip: इस सूत्र के प्रत्येक पद को समझें और याद रखें, विशेष रूप से \( K_b \) (मोलल उन्नयन स्थिरांक), \( W_B \) (विलेय का भार), \( W_A \) (विलायक का भार) और \( \Delta T_b \) (क्वथनांक में उन्नयन)।

 

Question 84. किसी विलयन के परासरण दाब एवं उसके अणु भार में क्या सम्बन्ध है ?
Answer: किसी विलयन का परासरण दाब \( (\pi) \) और विलेय के अणु भार \( (M_B) \) के बीच एक सीधा संबंध होता है, जिसे निम्न वान्ट हॉफ समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है:
\( \pi V = \frac{W_B}{M_B} \times R \times T \)
इस सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करके हम विलेय के अणु भार की गणना कर सकते हैं:
\( M_B = \frac{W_B \times R \times T}{\pi V} \)
जहाँ:
\( \pi \) = परासरण दाब
\( V \) = विलयन का आयतन
\( W_B \) = विलेय का भार
\( R \) = गैस नियतांक
\( T \) = परम ताप (केल्विन में)
यह संबंध जैविक और अजैविक दोनों प्रणालियों में अणु भार के निर्धारण के लिए विशेष रूप से उपयोगी है.
In simple words: किसी घोल के परासरण दाब और उसमें घुली चीज के वजन में एक सीधा संबंध होता है, जिसे वान्ट हॉफ के सूत्र से दिखाते हैं।

🎯 Exam Tip: वान्ट हॉफ समीकरण को याद रखें और इसके प्रत्येक पद का अर्थ समझें, विशेष रूप से \( \pi \) (परासरण दाब), \( M_B \) (विलेय का अणु भार), \( V \) (आयतन), \( R \) (गैस स्थिरांक) और \( T \) (तापमान)।

 

Question 86. उस यौगिक को वाण्टहॉफ गुणांक कितना होगा जो कि विलायक की उपस्थिति में चतुर्थयन (tetramerisation) करता है ?
Answer: जब कोई यौगिक विलायक की उपस्थिति में चतुर्थयन (tetramerisation) करता है, तो इसका मतलब है कि चार अणु मिलकर एक बड़ा अणु बनाते हैं. इस प्रक्रिया में, कणों की संख्या घट जाती है. वाण्टहॉफ गुणांक \( (i) \) को प्रेक्षित अणु भार को सामान्य अणु भार से भाग देकर निकाला जाता है. चतुर्थयन के मामले में, प्रेक्षित मोलर द्रव्यमान सामान्य मोलर द्रव्यमान का चार गुना हो जाएगा, क्योंकि चार अणु एक साथ जुड़ते हैं. इसलिए, वाण्टहॉफ गुणांक 1/4 या 0.25 होगा.
वाण्टहॉफ गुणांक \( (i) = \frac{\text{सामान्य अणु भार}}{\text{प्रेक्षित अणु भार}} = \frac{1}{4} = 0.25 \)
In simple words: अगर चार अणु मिलकर एक हो जाते हैं, तो वाण्टहॉफ गुणांक 0.25 होगा, क्योंकि कणों की संख्या चार गुना कम हो गई है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि जब अणु संगुणित (जुड़ते) होते हैं, तो वाण्टहॉफ गुणांक 1 से कम होता है, और जब वे वियोजित (टूटते) होते हैं, तो यह 1 से अधिक होता है।

 

Question 87. गर्मी के दिनों में कार के रेडिएटरों में एथिलीन ग्लाइकॉल का प्रयोग क्यों किया जाता है ?
Answer: गर्मी के दिनों में कार के रेडिएटरों में एथिलीन ग्लाइकॉल का प्रयोग पानी के क्वथनांक को बढ़ाने के लिए किया जाता है, जिससे इंजन का तापमान बहुत अधिक होने पर भी पानी उबले नहीं. एथिलीन ग्लाइकॉल एक एंटी-फ्रीज के रूप में भी कार्य करता है और सर्दियों में पानी को जमने से रोकता है. यह पानी के क्वथनांक को बढ़ाता है और हिमांक को कम करता है, जिससे यह इंजन को ठंडा रखने में मदद करता है और रेडिएटर के अंदर पानी को जमने या उबलने से बचाता है. यह एक अत्यधिक प्रभावी शीतलक है.
In simple words: गर्मी में कार रेडिएटर में एथिलीन ग्लाइकॉल इसलिए डालते हैं ताकि इंजन का पानी बहुत ज्यादा गर्म होने पर भी न उबले, जिससे इंजन ठंडा रहे।

🎯 Exam Tip: एथिलीन ग्लाइकॉल के दोहरे कार्य को याद रखें: यह गर्मियों में क्वथनांक बढ़ाता है और सर्दियों में हिमांक को कम करता है, जिससे यह एक उत्कृष्ट शीतलक बन जाता है।

 

Question 88. C6H12O6, LiCl, Na2SO4 एवं K4 [Fe(CN)6] के सममोलर विलयनों के क्वथनांक एवं हिमांक का घटता हुआ क्रम क्या होगा ?
Answer: अणुसंख्यक गुणधर्म (जैसे क्वथनांक में उन्नयन और हिमांक में अवनमन) विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं. जितना अधिक विलेय कण होंगे, उतना ही अधिक क्वथनांक में उन्नयन होगा और उतना ही अधिक हिमांक में अवनमन होगा. इन यौगिकों के लिए वियोजन पर कणों की संख्या निम्न प्रकार है:
C6H12O6 (ग्लूकोज): 1 कण (अविद्युत अपघट्य)
LiCl: 2 कण (Li⁺ + Cl⁻)
Na2SO4: 3 कण (2Na⁺ + SO₄²⁻)
K4[Fe(CN)6]: 5 कण (4K⁺ + [Fe(CN)₆]⁴⁻)

(i) क्वथनांक में उन्नयन (\( \Delta T_b \)) \( \propto \) विलेय में कणों की संख्या
जितनी अधिक कणों की संख्या होगी, क्वथनांक में उन्नयन भी उतना अधिक होगा.
अतः, क्वथनांक का घटता हुआ क्रम:
K4[Fe(CN)6] \( > \) Na2SO4 \( > \) LiCl \( > \) C6H12O6

(ii) हिमांक में अवनमन \( \propto \) विलेय के कणों की संख्या
अतः, हिमांक का घटता हुआ क्रम:
C6H12O6 \( > \) LiCl \( > \) Na2SO4 \( > \) K4[Fe(CN)6]
यह क्रम हिमांक के वास्तविक मानों का है, जिसका अर्थ है कि K₄[Fe(CN)₆] का हिमांक सबसे कम होगा.
In simple words: जितना ज्यादा घुलनशील कण होंगे, उतना ही ज्यादा उबलने का तापमान बढ़ेगा और जमने का तापमान घटेगा। इसलिए, K₄[Fe(CN)₆] का क्वथनांक सबसे ज्यादा और हिमांक सबसे कम होगा।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, सबसे पहले प्रत्येक यौगिक के लिए वियोजन के बाद उत्पन्न होने वाले कणों की संख्या की गणना करें, क्योंकि यही अणुसंख्यक गुणधर्मों का मुख्य निर्धारक है।

 

Question 89. K3[Fe(CN)6] के वाण्टहॉफ गुणांक का मान क्या होगा ?
Answer: K₃[Fe(CN)₆] एक जटिल यौगिक है जो विलयन में वियोजित होता है. जब यह पानी में घुलता है, तो यह आयन उत्पन्न करता है:
K₃[Fe(CN)₆] \( \rightarrow \) 3K⁺ + [Fe(CN)₆]³⁻
इस वियोजन के परिणामस्वरूप, एक अणु K₃[Fe(CN)₆] 3 पोटेशियम आयन (K⁺) और 1 हेक्सासायनोफेरेट(II) आयन ([Fe(CN)₆]³⁻) उत्पन्न करता है. इस प्रकार, कुल 4 कण बनते हैं. वाण्टहॉफ गुणांक \( (i) \) वियोजन के बाद कणों की संख्या और वियोजन से पहले कणों की संख्या का अनुपात होता है. यहाँ, यह 4/1 = 4 होगा.
अतः इसका वाण्टहॉफ गुणांक = 4.
In simple words: K₃[Fe(CN)₆] पानी में घुलने पर 4 कण बनाता है (3 K⁺ और 1 [Fe(CN)₆]³⁻), इसलिए इसका वाण्टहॉफ गुणांक 4 है।

🎯 Exam Tip: जटिल यौगिकों के वियोजन को सही ढंग से समझें और सुनिश्चित करें कि आप सभी आयनों की गणना करें ताकि वाण्टहॉफ गुणांक सही ढंग से निर्धारित हो सके।

 

Question 90. निम्नलिखित विलयनों को वाण्टहॉफ गुणांक के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
0.1 M CaCl2, 0.1M KCI, 0.1 M Al2 (SO4)3, 0.1 M C12 H22 011
Answer: वाण्टहॉफ गुणांक \( (i) \) विलयन में विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करता है. जितनी अधिक कणों की संख्या, उतना अधिक \( i \) का मान. इन यौगिकों के लिए वियोजन पर कणों की संख्या निम्न प्रकार है:
0.1 M C12H22O11 (सुक्रोज): 1 कण (अविद्युत अपघट्य)
0.1 M KCl: 2 कण (K⁺ + Cl⁻)
0.1 M CaCl2: 3 कण (Ca²⁺ + 2Cl⁻)
0.1 M Al2(SO4)3: 5 कण (2Al³⁺ + 3SO₄²⁻)
अतः, वाण्टहॉफ गुणांक के बढ़ते क्रम में व्यवस्था निम्न प्रकार होगी:
0.1 M C12H22O11 \( < \) 0.1 M KCl \( < \) 0.1 M CaCl2 \( < \) 0.1 M Al2(SO4)3
यह क्रम उनकी आयनीकरण क्षमता और वियोजन से प्राप्त होने वाले कणों की कुल संख्या को दर्शाता है.
In simple words: वाण्टहॉफ गुणांक कणों की संख्या पर निर्भर करता है। सुक्रोज का सबसे कम और एल्यूमीनियम सल्फेट का सबसे ज्यादा होगा, क्योंकि वह सबसे ज्यादा कण बनाता है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक विद्युत अपघट्य के लिए वियोजन से प्राप्त होने वाले आयनों की संख्या की सही गणना करें; यह इस प्रकार के प्रश्नों को हल करने की कुंजी है।

 

Question 92. लवणों के असामान्य या अपसामान्य अणु भार से आप क्या समझते हैं ?
Answer: लवणों का असामान्य या अपसामान्य अणु भार तब उत्पन्न होता है जब तनु विलयन में विलेय का वियोजन (dissociation) या संगुणन (association) होता है. सामान्य परिस्थितियों में, हम विलेय के अणु भार की गणना उसके रासायनिक सूत्र से करते हैं. लेकिन जब विलेय के कण विलयन में टूटते (वियोजित होते) हैं या एक साथ जुड़ते (संगुणित होते) हैं, तो विलयन में कणों की संख्या बदल जाती है. इस बदली हुई संख्या के कारण, अणुसंख्यक गुणधर्मों से मापा गया अणु भार, वास्तविक या सैद्धांतिक अणु भार से भिन्न आता है. इसी भिन्न अणु भार को असामान्य या अपसामान्य अणु भार कहते हैं.
In simple words: लवणों का असामान्य अणु भार तब होता है जब वे घोल में टूटते हैं या आपस में जुड़ते हैं, जिससे उनका मापा गया वजन असली वजन से अलग आता है।

🎯 Exam Tip: असामान्य अणु भार की अवधारणा को वियोजन (कणों की संख्या बढ़ती है) और संगुणन (कणों की संख्या घटती है) दोनों से जोड़कर समझाएं।

 

Question 93. वाण्टहॉफ गुणांक को परिभाषित करें।
Answer: वाण्टहॉफ गुणांक \( (i) \) एक अनुपात होता है जो विलयन में विलेय के वियोजन या संगुणन की सीमा के बारे में जानकारी देता है. इसे विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्म के प्रेक्षित मान और सैद्धांतिक मान के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है. यह अनुपात दर्शाता है कि एक मोल विलेय घोलने पर कितने प्रभावी कण उत्पन्न होते हैं. यदि \( i = 1 \), तो विलेय न तो संगुणित होता है और न ही वियोजित होता है. यदि \( i > 1 \), तो विलेय वियोजित होता है (कणों की संख्या बढ़ती है). यदि \( i < 1 \), तो विलेय संगुणित होता है (कणों की संख्या घटती है).
वाण्टहॉफ गुणांक \( (i) = \frac{\text{अणुसंख्यक गुणों का प्रेक्षित मान}}{\text{अणुसंख्यक गुणों का सैद्धान्तिक मान}} \)
In simple words: वाण्टहॉफ गुणांक बताता है कि घोल में कोई चीज टूटती है या जुड़ती है। अगर यह 1 है तो कुछ नहीं होता, 1 से ज्यादा है तो टूटती है, और 1 से कम है तो जुड़ती है।

🎯 Exam Tip: वाण्टहॉफ गुणांक की परिभाषा में "प्रेक्षित मान" और "सैद्धांतिक मान" के अनुपात पर जोर दें और \( i \) के विभिन्न मानों (\( i=1, i>1, i<1 \)) का अर्थ स्पष्ट करें।

 

Question 94. 1 मोलर ग्लूकोज, 1 मोलर KCl तथा 1 मोलर K2SO4 में किसका हिमांक सबसे कम होगा और क्यों ?
Answer: हिमांक अवनमन एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, जिसका अर्थ है कि यह विलयन में विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करता है. जितने अधिक कण होंगे, उतना ही अधिक हिमांक में अवनमन होगा, यानी हिमांक उतना ही कम होगा. इन तीनों यौगिकों के लिए कणों की संख्या निम्न प्रकार है:
ग्लूकोज (C6H12O6): 1 कण (यह अविद्युत अपघट्य है, वियोजित नहीं होता)
KCl: 2 कण (K⁺ + Cl⁻)
K2SO4: 3 कण (2K⁺ + SO₄²⁻)
चूंकि K₂SO₄ वियोजन पर सबसे अधिक कण (3) उत्पन्न करता है, इसलिए इसके विलयन में हिमांक अवनमन सबसे अधिक होगा, और फलस्वरूप इसका हिमांक सबसे कम होगा. यानी, K₂SO₄ का हिमांक सबसे कम होगा.
In simple words: K₂SO₄ का हिमांक सबसे कम होगा क्योंकि यह पानी में घुलने पर सबसे ज्यादा कण बनाता है, जिससे पानी का जमने का तापमान सबसे ज्यादा घट जाता है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों को हल करने के लिए, प्रत्येक विलेय के लिए वियोजन के बाद बनने वाले कणों की संख्या की सही गणना करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिमांक अवनमन सीधे कणों की संख्या के समानुपाती होता है।

 

Question 95. तनु विलयन के लिये वाण्टहॉफ समीकरण क्या होता है?
Answer: तनु विलयनों के लिए वान्ट हॉफ ने अणुसंख्यक गुणों को संशोधित करने के लिए एक गुणांक \( (i) \) प्रस्तुत किया, जिसे वान्ट हॉफ गुणांक कहते हैं. इस गुणांक का उपयोग करके, आदर्श विलयन के समीकरणों को असामान्य अणु भार वाले विलयनों पर भी लागू किया जा सकता है. वान्ट हॉफ गुणांक अणुसंख्यक गुणों के प्रेक्षित मान और सैद्धांतिक मान का अनुपात होता है. इसे निम्न प्रकार से परिभाषित किया जाता है:
वान्ट हॉफ गुणांक \( (i) = \frac{\text{अणुसंख्यक गुणों का प्रेक्षित मान}}{\text{अणुसंख्यक गुणों का सैद्धान्तिक मान}} \)
और वान्ट हॉफ समीकरण अणुसंख्यक गुणधर्मों को \( i \) से गुणा करके संशोधित करता है:
परासरण दाब (\( \pi \)): \( \pi = iCRT \)
वाष्प दाब अवनमन (\( \Delta P \)): \( \Delta P = i X_B P^0_A \)
क्वथनांक उन्नयन (\( \Delta T_b \)): \( \Delta T_b = i K_b m \)
हिमांक अवनमन (\( \Delta T_f \)): \( \Delta T_f = i K_f m \)
In simple words: तनु घोलों के लिए वाण्टहॉफ समीकरण आदर्श घोलों के सूत्रों में एक 'i' गुणांक जोड़ता है, जिससे वे उन घोलों पर भी लागू होते हैं जहाँ विलेय टूटते या जुड़ते हैं।

🎯 Exam Tip: वान्ट हॉफ गुणांक \( i \) को अणुसंख्यक गुणधर्मों के सभी समीकरणों में कैसे शामिल किया जाता है, इसे याद रखें, और यह भी कि इसका उपयोग कब किया जाता है (जब विलेय वियोजित या संगुणित होता है)।

 

Question 97. निम्नलिखित विलयनों में से किसको परासरण दाब अधिक है और क्यों –
(i) 0.1 M ग्लूकोस विलयन?
(ii) 0.1 M NaCl विलयन?
(iii) 0.1 M K2SO4 विलयन?
(iv) 0.1 MAl2(SO4) विलयन?
Answer: परासरण दाब एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, जो विलयन में विलेय के कणों की संख्या पर निर्भर करता है. जितने अधिक कण होंगे, उतना ही अधिक परासरण दाब होगा. समान मोलर सांद्रता वाले विलयनों के लिए, सबसे अधिक कण उत्पन्न करने वाला यौगिक सबसे अधिक परासरण दाब दर्शाएगा. इन विलयनों के लिए वियोजन पर कणों की संख्या निम्न प्रकार है:
(i) 0.1 M ग्लूकोस (C6H12O11): 1 कण (यह अविद्युत अपघट्य है)
(ii) 0.1 M NaCl: 2 कण (Na⁺ + Cl⁻)
(iii) 0.1 M K2SO4: 3 कण (2K⁺ + SO₄²⁻)
(iv) 0.1 M Al2(SO4)3: 5 कण (2Al³⁺ + 3SO₄²⁻)
चूंकि 0.1 M Al2(SO4)3 विलयन वियोजन पर सबसे अधिक कण (5) उत्पन्न करता है, इसलिए इसका परासरण दाब सबसे अधिक होगा. यह आयनों की संख्या के सीधे संबंध को दर्शाता है.
In simple words: 0.1 M Al₂(SO₄)₃ का परासरण दाब सबसे ज्यादा होगा क्योंकि यह पानी में घुलने पर सबसे ज्यादा कण बनाता है।

🎯 Exam Tip: परासरण दाब की तुलना करते समय, प्रत्येक यौगिक के लिए वियोजन के बाद उत्पन्न होने वाले कणों की संख्या की सही गणना करना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 2 विलयन लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. गैसों की विलेयता से आप क्या समझते हैं ? विलेयता को प्रभावित करने वाले कारक लिखें।
Answer: गैसों की विलेयता का अर्थ है कि एक निश्चित तापमान और दाब पर किसी द्रव (विलायक) में कितनी गैस घुल सकती है. यह एक महत्वपूर्ण गुणधर्म है जो विभिन्न प्राकृतिक और औद्योगिक प्रक्रियाओं में देखा जाता है. उदाहरण के लिए, जलीय जीवों के लिए पानी में घुली ऑक्सीजन महत्वपूर्ण है. गैसों की घुलनशीलता उसके अवशोषण गुणांक से भी संबंधित होती है.
गैसों की विलेयता को प्रभावित करने वाले कारक:
1. दाब का प्रभाव: हेनरी के नियम के अनुसार, दाब बढ़ाने पर गैसों की विलेयता बढ़ती है. बोतलबंद शीतल पेय इसका एक अच्छा उदाहरण है.
2. ताप का प्रभाव: सामान्यतः, तापमान बढ़ाने पर गैसों की विलेयता कम हो जाती है, क्योंकि गैस के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है और वे द्रव से बाहर निकलना चाहते हैं. (अपवाद: H₂ और He के घुलने पर ऊष्मा का अवशोषण होता है, अतः इन गैसों की विलेयता बढ़ती है)
3. विलायक की प्रकृति: गैसों की विलेयता विलायक की प्रकृति पर भी निर्भर करती है. ध्रुवीय गैसें ध्रुवीय विलायकों में अधिक घुलनशील होती हैं और अध्रुवीय गैसें अध्रुवीय विलायकों में. जैसे NH₃ जल में अत्यधिक घुलनशील है.
4. गैस की प्रकृति: जो गैसें विलायक से रासायनिक अभिक्रिया करती हैं, वे अधिक विलेयशील होती हैं. उदाहरण के लिए, NH₃ जल से क्रिया करके NH₄OH बनाती है, इसलिए यह जल में अत्यधिक घुलनशील है. ऑक्सीजन भी रक्त में हीमोग्लोबिन से क्रिया करती है.
In simple words: गैसों की विलेयता का मतलब है कि कोई गैस तरल में कितनी घुल सकती है। इसे दबाव, तापमान, और गैस व तरल की प्रकृति जैसे कारक प्रभावित करते हैं।

🎯 Exam Tip: गैसों की विलेयता को प्रभावित करने वाले प्रत्येक कारक (दाब, ताप, विलायक की प्रकृति, गैस की प्रकृति) को स्पष्ट रूप से समझाएं और प्रत्येक के लिए एक उदाहरण दें।

रॉउल्ट के नियम की सीमाएँ लिखें।

 

Question 3. बेंड्स क्या है और यह किस प्रकार उत्पन्न होता है ?
Answer: बेंड्स (Bends) एक दर्दनाक चिकित्सीय स्थिति है जो गोताखोरों को तब होती है जब वे गहरे पानी से बहुत जल्दी सतह पर आते हैं. गहरे पानी में उच्च दाब के कारण, अधिक मात्रा में गैसें (विशेषकर नाइट्रोजन) रक्त में घुल जाती हैं. जब गोताखोर तेजी से ऊपर आते हैं, तो बाहरी दाब कम हो जाता है, जिससे घुली हुई नाइट्रोजन गैस बुलबुलों के रूप में रक्त और ऊतकों में बाहर निकलने लगती है. ये बुलबुले रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध कर देते हैं, जिससे तेज दर्द, जोड़ों में सूजन और कभी-कभी पक्षाघात भी हो सकता है. यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है. इससे बचने के लिए गोताखोरों के टैंक में हीलियम मिश्रित हवा का उपयोग किया जाता है.
In simple words: बेंड्स एक बीमारी है जो गोताखोरों को तब होती है जब वे गहरे पानी से तेजी से ऊपर आते हैं, जिससे खून में नाइट्रोजन के बुलबुले बन जाते हैं और दर्द होता है।

🎯 Exam Tip: बेंड्स के कारण (उच्च दाब पर गैसों का घुलना, तेजी से दाब कम होने पर बुलबुलों का बनना) और इसके प्रभावों (दर्द, रुकावट) को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 4. ठोसों की द्रवों में विलेयता को प्रभावित करने वाले कारक लिखें।
Answer: ठोसों की द्रवों में विलेयता को कई कारक प्रभावित करते हैं, जिनमें से मुख्य कारक निम्न हैं:
1. ताप का प्रभाव: यदि विलेय को विलायक में घोलने की प्रक्रिया ऊष्माशोषी (गर्मी अवशोषित होती है) है, तो तापमान बढ़ाने पर विलेयता बढ़ती है. यदि प्रक्रिया ऊष्माक्षेपी (गर्मी उत्सर्जित होती है) है, तो तापमान बढ़ाने पर विलेयता घटती है. ला-शातेलिए का सिद्धांत इसे समझाता है.
2. दाब का प्रभाव: ठोसों की द्रवों में विलेयता पर दाब का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि ठोस और द्रव दोनों ही असंपीड्य होते हैं, यानी उनका आयतन दाब से ज्यादा नहीं बदलता. इसलिए दाब बदलने पर उनकी विलेयता में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आता.
3. विलेय और विलायक की प्रकृति ("समान समान को घोलता है"): ध्रुवीय विलेय (जैसे नमक) ध्रुवीय विलायकों (जैसे पानी) में अधिक घुलनशील होते हैं, और अध्रुवीय विलेय (जैसे मोम) अध्रुवीय विलायकों (जैसे बेंजीन) में अधिक घुलनशील होते हैं. यह विलेय-विलायक अंतःक्रियाओं पर निर्भर करता है.
In simple words: ठोसों की तरल में घुलनशीलता तापमान (गर्मी लेने या देने), दबाव (कोई खास असर नहीं) और विलेय-विलायक की प्रकृति (ध्रुवीय-ध्रुवीय, अध्रुवीय-अध्रुवीय) पर निर्भर करती है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक कारक (ताप, दाब, प्रकृति) के प्रभाव को स्पष्ट रूप से बताएं और विशेष रूप से "समान समान को घोलता है" नियम को याद रखें।

 

Question 5. द्रवों के वाष्प दाब को प्रभावित करने वाले कारक लिखें?
Answer: द्रवों के वाष्प दाब को मुख्य रूप से दो कारक प्रभावित करते हैं:
1. ताप: तापमान बढ़ाने पर द्रव का वाष्प दाब बढ़ता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उच्च तापमान पर द्रव के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे वे सतह से आसानी से वाष्प के रूप में बाहर निकल पाते हैं. यह एक सीधा संबंध है.
2. द्रव की प्रकृति: विभिन्न द्रवों का वाष्प दाब अलग-अलग होता है. वे द्रव जिनके अणुओं के बीच अंतराआण्विक आकर्षण बल कमजोर होते हैं, वे आसानी से वाष्पीकृत हो जाते हैं और उनका वाष्प दाब अधिक होता है (जैसे ईथर). इसके विपरीत, जिन द्रवों में आकर्षण बल मजबूत होते हैं (जैसे पानी), उनका वाष्प दाब कम होता है.
In simple words: तरल के वाष्प दाब को तापमान (ज्यादा गर्मी, ज्यादा वाष्प) और तरल की प्रकृति (आकर्षण बल कमजोर तो ज्यादा वाष्प) प्रभावित करते हैं।

🎯 Exam Tip: यह समझाएं कि वाष्प दाब अणुओं की सतह से वाष्प के रूप में निकलने की क्षमता पर निर्भर करता है, जिसे तापमान और अंतराआण्विक बलों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

 

Question 6. हेनरी के नियम की सीमाएँ लिखें।
Answer: हेनरी का नियम कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में ही लागू होता है. इसकी मुख्य सीमाएँ निम्न हैं:
1. दाब उच्च नहीं होना चाहिए: यह नियम केवल कम दाब पर ही सटीक होता है. बहुत अधिक दाब पर गैस की विलेयता नियम से विचलित हो सकती है.
2. ताप बहुत कम नहीं होना चाहिए: यह नियम मध्यम और उच्च तापमान पर अधिक प्रभावी होता है. बहुत कम तापमान पर गैसों का व्यवहार बदल सकता है.
3. गैस अधिक घुलनशील नहीं होनी चाहिए: गैस की विलेयता विलायक में बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए; यह तनु विलयनों के लिए सबसे अच्छा काम करता है.
4. गैस विलायक से रासायनिक अभिक्रिया नहीं करनी चाहिए: यदि गैस विलायक के साथ रासायनिक रूप से क्रिया करती है या विलायक में संगुणित या वियोजित होती है, तो हेनरी का नियम लागू नहीं होता (जैसे NH₃ जल में घुलती है और NH₄OH बनाती है).
In simple words: हेनरी का नियम सिर्फ तब काम करता है जब दबाव कम हो, तापमान बहुत कम न हो, गैस ज्यादा न घुले, और गैस तरल से कोई रासायनिक क्रिया न करे।

🎯 Exam Tip: हेनरी के नियम की इन चार सीमाओं को याद रखें, खासकर रासायनिक अभिक्रिया न होने की शर्त, क्योंकि यह अक्सर गलत उत्तरों का कारण बनती है।

 

Question 7. कार्बन डाइ सल्फॉइड को ऐसीटोन में मिलाने पर विलयन धनात्मक विचलन दिखाता है क्यों?
Answer: जब कार्बन डाइसल्फाइड (CS₂) को एसीटोन में मिलाया जाता है, तो बनने वाला विलयन रॉउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन (positive deviation) दर्शाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि CS₂-एसीटोन अणुओं के बीच अंतराआण्विक आकर्षण बल, शुद्ध CS₂-CS₂ और शुद्ध एसीटोन-एसीटोन अणुओं के बीच के आकर्षण बलों की तुलना में कमजोर होते हैं. इस कमजोर अंतःक्रिया के कारण, अणु अधिक आसानी से वाष्प में परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे विलयन का वाष्प दाब बढ़ जाता है और यह रॉउल्ट के नियम द्वारा अनुमानित मान से अधिक होता है. यह धनात्मक विचलन का एक विशिष्ट उदाहरण है.
In simple words: कार्बन डाइसल्फाइड और एसीटोन मिलाने पर धनात्मक विचलन दिखता है क्योंकि उनके बीच के आकर्षण बल कमजोर हो जाते हैं, जिससे वाष्प दाब बढ़ जाता है।

🎯 Exam Tip: धनात्मक विचलन को समझाते समय, यह बताएं कि विलेय-विलायक अंतःक्रियाएं शुद्ध घटकों की अंतःक्रियाओं की तुलना में कमजोर होती हैं, जिससे वाष्प दाब में वृद्धि होती है।

 

Question 8. ऐथेनॉल तथा ऐसीटोन का मिश्रण ऋणात्मक विचलन क्यों प्रदर्शित करता है ?
अथवा
ऐथेनॉल व ऐसीटोन का मिश्रण किस प्रकार का विचलन दिखाता है कारण दे।
Answer: जब एथेनॉल और एसीटोन को मिलाया जाता है, तो बनने वाला मिश्रण रॉउल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन (negative deviation) दर्शाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एथेनॉल के अणु, जिनके बीच हाइड्रोजन बंधन होता है, और एसीटोन के अणु, एक साथ मिलकर नए और मजबूत हाइड्रोजन बंधन बनाते हैं. ये नए एथेनॉल-एसीटोन हाइड्रोजन बंधन शुद्ध एथेनॉल-एथेनॉल और शुद्ध एसीटोन-एसीटोन अंतःक्रियाओं की तुलना में अधिक मजबूत होते हैं. इस मजबूत आकर्षण बल के कारण, अणुओं का वाष्पीकरण मुश्किल हो जाता है, जिससे विलयन का वाष्प दाब रॉउल्ट के नियम द्वारा अनुमानित मान से कम हो जाता है. इससे ऊष्मा भी उत्सर्जित होती है.
\[ \text{CH}_3\text{C}(=\text{O})\text{CH}_3 \cdots \text{HO-C}_2\text{H}_5 \]
एसीटोन एवं ऐथेनॉल के मध्य हाइड्रोजन बन्ध
In simple words: एथेनॉल और एसीटोन मिलाने पर ऋणात्मक विचलन दिखता है क्योंकि उनके बीच नए और मजबूत बंधन बनते हैं, जिससे वाष्प दाब कम हो जाता है।

🎯 Exam Tip: ऋणात्मक विचलन को समझाते समय, यह बताएं कि विलेय-विलायक अंतःक्रियाएं शुद्ध घटकों की अंतःक्रियाओं की तुलना में मजबूत होती हैं, जिससे वाष्प दाब में कमी आती है।

 

Question 9. आदर्श एवं अनादर्श विलयन में अन्तर बताइए।
Answer: आदर्श और अनादर्श विलयन के बीच मुख्य अंतर उनकी रॉउल्ट के नियम का पालन करने की क्षमता और मिश्रण के दौरान होने वाले ऊर्जा और आयतन परिवर्तनों में होता है:

विशेषताआदर्श विलयन (Ideal Solution)अनादर्श विलयन (Non-Ideal Solution)
रॉउल्ट का नियमपालन करते हैं: \( P_A = P^0_A X_A \); \( P_B = P^0_B X_B \)पालन नहीं करते: \( P_A \neq P^0_A X_A \); \( P_B \neq P^0_B X_B \)
एन्थैल्पी परिवर्तन (\( \Delta H_{mix} \))शून्य होता है: \( \Delta H_{mix} = 0 \)शून्य नहीं होता: \( \Delta H_{mix} \neq 0 \) (ऊष्माशोषी या ऊष्माक्षेपी)
आयतन परिवर्तन (\( \Delta V_{mix} \))शून्य होता है: \( \Delta V_{mix} = 0 \)शून्य नहीं होता: \( \Delta V_{mix} \neq 0 \) (आयतन में वृद्धि या कमी)
अंतराआण्विक बल (A-B)लगभग A-A और B-B के समानA-A और B-B से भिन्न (कमजोर या मजबूत)
उदाहरणबेंजीन और टोलुईन का मिश्रण, हेक्सेन और हेप्टेन का मिश्रणएथेनॉल और एसीटोन का मिश्रण, क्लोरोफॉर्म और एसीटोन का मिश्रण

In simple words: आदर्श घोल रॉउल्ट का नियम मानते हैं और उन्हें बनाने पर कोई गर्मी या आयतन नहीं बदलता। अनादर्श घोल रॉउल्ट का नियम नहीं मानते और उन्हें बनाने पर गर्मी या आयतन बदल सकता है।

🎯 Exam Tip: आदर्श और अनादर्श विलयनों के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझने के लिए रॉउल्ट के नियम, \( \Delta H_{mix} \) और \( \Delta V_{mix} \) में परिवर्तनों पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 10. परासरण की जैविक महत्ता लिखें।
Answer: परासरण पौधों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह जड़ों को मिट्टी से पानी सोखने में मदद करता है। साथ ही, परासरण की वजह से ही पानी पौधों के तने और पत्तों तक पहुँचता है। पौधों की कोशिकाओं में पानी और अन्य पदार्थ परासरण के द्वारा ही अंदर-बाहर होते हैं, जिससे पौधे स्वस्थ रहते हैं।
In simple words: परासरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे पौधे मिट्टी से पानी लेते हैं और उसे अपने सभी हिस्सों तक पहुँचाते हैं। यह पौधों के जीवन के लिए बहुत जरूरी है।

🎯 Exam Tip: परासरण की परिभाषा और पौधों में जल अवशोषण एवं परिवहन में इसकी भूमिका को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 11. विसरण एवं परासरण में अन्तर लिखें।
Answer:

विशेषताविसरण (Diffusion)परासरण (Osmosis)
अर्द्धपारगम्य झिल्ली की आवश्यकतानहीं होती है।होती है।
पदार्थों की गतिद्रव, गैस और विलयन सभी में हो सकता है।केवल विलायक (पानी) के अणुओं का प्रवाह होता है।
रोकने की संभावनाइसे रोका नहीं जा सकता है, न ही विपरीत दिशा में किया जा सकता है।इसे बाहरी दबाव लगाकर रोका जा सकता है या इसकी दिशा बदली जा सकती है (जैसे प्रतिलोम परासरण में)।
कणों की गतिविलेय और विलायक दोनों के अणु अधिक सान्द्रता वाले क्षेत्र से कम सान्द्रता वाले क्षेत्र की ओर जाते हैं।विलायक के अणु कम सान्द्रता वाले विलयन से अधिक सान्द्रता वाले विलयन की ओर जाते हैं।
In simple words: विसरण में चीजें बिना किसी झिल्ली के फैलती हैं, जबकि परासरण में पानी एक खास झिल्ली से होकर गुजरता है ताकि दोनों तरफ सान्द्रता बराबर हो सके।

🎯 Exam Tip: अंतर स्पष्ट करते समय प्रत्येक बिंदु को साफ-साफ लिखें, खासकर अर्द्धपारगम्य झिल्ली की भूमिका और विलेय/विलायक के कणों की गति पर ध्यान दें।

 

Question 13. हिमांक में अवनमन को चित्र द्वारा प्रदर्शित करें।
Answer: हिमांक में अवनमन को दर्शाने वाला एक ग्राफ आमतौर पर वाष्प दाब और तापमान के बीच संबंध दिखाता है। इस ग्राफ में, शुद्ध विलायक का वाष्प दाब वक्र विलयन के वाष्प दाब वक्र से ऊपर होता है। जब किसी अवाष्पशील विलेय को विलायक में मिलाया जाता है, तो विलयन का वाष्प दाब कम हो जाता है। इसका मतलब है कि विलयन को ठोस अवस्था में जमने के लिए और भी कम तापमान की आवश्यकता होती है। ग्राफ पर, शुद्ध विलायक का हिमांक (जब उसका वाष्प दाब ठोस विलायक के वाष्प दाब के बराबर होता है) विलयन के हिमांक से अधिक होता है। दोनों हिमांकों के बीच का अंतर ही हिमांक में अवनमन कहलाता है।
In simple words: एक चित्र दिखाएगा कि जब हम पानी में कुछ घोलते हैं, तो उसका जमने का तापमान शुद्ध पानी के जमने के तापमान से कम हो जाता है। इसी कमी को हिमांक में अवनमन कहते हैं।

🎯 Exam Tip: हिमांक में अवनमन हमेशा अवाष्पशील विलेय के कारण होता है और यह विलेय के कणों की संख्या पर निर्भर करता है, न कि उसकी प्रकृति पर।

 

Question 14. क्वथनांक में उन्नयन को चित्र द्वारा प्रदर्शित करें।
Answer: क्वथनांक में उन्नयन को दर्शाने वाला एक ग्राफ आमतौर पर वाष्प दाब और तापमान के बीच संबंध को प्रदर्शित करता है। इस ग्राफ में, शुद्ध विलायक का वाष्प दाब वक्र विलयन के वाष्प दाब वक्र से ऊपर होता है। जब किसी अवाष्पशील विलेय को विलायक में घोला जाता है, तो विलयन का वाष्प दाब कम हो जाता है। वायुमंडलीय दाब तक पहुँचने के लिए, विलयन को शुद्ध विलायक की तुलना में अधिक तापमान पर गर्म करना पड़ता है। ग्राफ में, विलयन का क्वथनांक शुद्ध विलायक के क्वथनांक से अधिक होता है। इन दोनों क्वथनांकों के बीच का अंतर ही क्वथनांक में उन्नयन कहलाता है।
In simple words: एक चित्र दिखाएगा कि जब हम पानी में कुछ घोलते हैं, तो उसका उबलने का तापमान शुद्ध पानी के उबलने के तापमान से बढ़ जाता है। इसी बढ़ोतरी को क्वथनांक में उन्नयन कहते हैं।

🎯 Exam Tip: क्वथनांक में उन्नयन भी एक अणुसंख्य गुणधर्म है, जो विलेय के कणों की संख्या पर निर्भर करता है। सुनिश्चित करें कि आप वाष्प दाब में कमी और क्वथनांक में वृद्धि के बीच सीधा संबंध समझा सकें।

 

Question 15. परासरण दाब ज्ञात करने का सूत्र स्थापित करें। (यहाँ \( \pi \) = परासरण दाब)
Answer: परासरण दाब \( \pi \) को वाण्टहॉफ के नियमों का उपयोग करके ज्ञात किया जा सकता है, जो गैसों के नियमों के समान हैं:
\( \pi \propto \frac{1}{V} \) (जब तापमान समान हो) (वाण्टहॉफ तथा बॉयल का नियम)
\( \pi \propto T \) (जब आयतन समान हो) (वाण्टहॉफ तथा चार्ल्स का नियम)
\( \pi \propto n \) (जब तापमान व आयतन समान हो) (वाण्टहॉफ तथा आवोगाद्रो का नियम)
इन तीनों नियमों को एक साथ मिलाने पर हमें मिलता है:
\( \pi \propto \frac{nT}{V} \)
अब समानुपाती चिह्न हटाने पर एक स्थिरांक \( R \) का उपयोग करते हैं, जिसे गैस नियतांक कहते हैं:
\( \pi = \frac{nRT}{V} \)
या
\( \pi V = nRT \)
यहाँ \( \frac{n}{V} \) विलेय के मोलों की संख्या प्रति आयतन है, जो सान्द्रता \( C \) के बराबर होती है। इसलिए, हम इसे इस प्रकार लिख सकते हैं:
\( \pi = CRT \)
यह वान्टहॉफ का नियम है जो परासरण दाब को सान्द्रता, तापमान और गैस स्थिरांक से जोड़ता है।
In simple words: परासरण दाब (\( \pi \)) को मापने का एक सूत्र \( \pi = CRT \) है। यहाँ \( C \) विलयन की सान्द्रता है, \( R \) एक स्थिरांक है, और \( T \) तापमान है। यह सूत्र बताता है कि विलयन जितना अधिक सान्द्र होगा या तापमान जितना अधिक होगा, परासरण दाब उतना ही ज्यादा होगा।

🎯 Exam Tip: वान्टहॉफ के नियमों को गैसों के नियमों से कैसे जोड़ा जाता है, इसे स्पष्ट रूप से समझाएँ। \( \pi V = nRT \) समीकरण और \( C = n/V \) संबंध पर जोर दें।

 

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 2 विलयन विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. (a) विलयन की मोलरता तथा मोललता में विभेद कीजिए। इनके मानों पर ताप परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ता है? (b) मोलरता तथा नॉर्मलता में सम्बन्ध प्रदर्शित कीजिए।
Answer:**विलयन की सान्द्रता की इकाइयाँ** विलयन के संघटन को उसकी सान्द्रता द्वारा व्यक्त किया जा सकता है। सान्द्रता का अर्थ है कि किसी निश्चित मात्रा के विलयन या विलायक में विलेय की कितनी मात्रा घुली हुई है। सान्द्रता की विभिन्न इकाइयाँ इस प्रकार हैं: **(a) मोलरता (Molarity) और मोललता (Molality) में विभेद:** **मोलरता (M):** 1. **परिभाषा:** एक लीटर (1 dm³) विलयन में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को उस विलयन की मोलरता (M) कहते हैं। 2. **इकाई:** \( \text{mol/L} \) या \( \text{mol dm}^{-3} \)। 3. **ताप पर प्रभाव:** मोलरता ताप के साथ बदलती है। ताप बढ़ाने पर विलयन का आयतन बढ़ता है, जिससे मोलरता घट जाती है। **मोललता (m):** 1. **परिभाषा:** एक किलोग्राम (1 kg) विलायक में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को उस विलयन की मोललता (m) कहते हैं। 2. **इकाई:** \( \text{mol/kg} \) या \( \text{mol kg}^{-1} \)। 3. **ताप पर प्रभाव:** मोललता ताप पर निर्भर नहीं करती है क्योंकि इसमें द्रव्यमान शामिल होता है, जो ताप से अप्रभावित रहता है। इसलिए मोललता को मोलरता की तुलना में अधिक पसंद किया जाता है। **(b) मोलरता (M) तथा नॉर्मलता (N) में सम्बन्ध:** मोलरता और नॉर्मलता दोनों ही विलयन की सान्द्रता को व्यक्त करने के तरीके हैं। नॉर्मलता \( (N) = \frac{\text{विलेय के ग्राम तुल्यांकों की संख्या}}{\text{विलयन का आयतन (L में)}} \) मोलरता \( (M) = \frac{\text{विलेय के मोलों की संख्या}}{\text{विलयन का आयतन (L में)}} \) ग्राम तुल्यांकों की संख्या \( = \text{मोलों की संख्या} \times \text{n-कारक} \) जहाँ \( \text{n-कारक} \) (वैलेंसी कारक) अम्ल के लिए क्षारकत्व, क्षार के लिए अम्लीयता, लवण के लिए आयनों पर कुल आवेश, या रेडॉक्स अभिक्रिया में स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या होता है। इसलिए, नॉर्मलता और मोलरता के बीच संबंध इस प्रकार है:
\( \text{नॉर्मलता (N) = मोलरता (M) } \times \text{n-कारक} \)
यह संबंध बताता है कि यदि हम किसी विलयन की मोलरता जानते हैं और विलेय का n-कारक पता है, तो हम उसकी नॉर्मलता ज्ञात कर सकते हैं।
In simple words: मोलरता बताती है कि एक लीटर घोल में कितना विलेय है, और यह तापमान के साथ बदलती है। मोललता बताती है कि एक किलोग्राम विलायक में कितना विलेय है, और यह तापमान से नहीं बदलती। नॉर्मलता और मोलरता आपस में n-कारक से जुड़े होते हैं, जो यह बताता है कि एक अणु कितने आयन दे सकता है।

🎯 Exam Tip: मोलरता और मोललता के बीच मुख्य अंतर उनकी ताप निर्भरता में है। मोलरता आयतन पर आधारित है (जो ताप से बदलता है), जबकि मोललता द्रव्यमान पर आधारित है (जो ताप से नहीं बदलता)। नॉर्मलता और मोलरता का संबंध n-कारक के माध्यम से व्यक्त किया जाता है, जिसका मान विलेय की प्रकृति पर निर्भर करता है।

 

Question 2. ठोस की द्रव में विलेयता को परिभाषित कीजिए। ठोस की द्रव में विलेयता किन कारकों पर निर्भर करती है?
Answer:**ठोसों की द्रवों में विलेयता (Solubility of Solids in Liquids):** विलेयता वह अधिकतम मात्रा है जो किसी निश्चित तापमान पर 100 ग्राम विलायक में घुल सकती है। यह ठोस की ग्राम में वह अधिकतम मात्रा है जो 100 ग्राम विलायक में एक संतृप्त विलयन बनाने के लिए घुलती है। सभी ठोस पदार्थ सभी द्रवों में समान मात्रा में नहीं घुलते हैं; कुछ कम घुलनशील होते हैं जबकि कुछ बहुत अधिक घुलनशील होते हैं। जब कोई ठोस विलायक में घुलना बंद कर देता है, तो विलयन को संतृप्त माना जाता है। **ठोस की द्रव में विलेयता को प्रभावित करने वाले कारक:** ठोस की द्रव में विलेयता मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है: 1. **विलेय और विलायक की प्रकृति (Nature of Solute and Solvent):** * एक सामान्य नियम है "समान समान को घोलता है" (like dissolves like)। इसका मतलब है कि ध्रुवीय विलेय (जैसे NaCl, चीनी) ध्रुवीय विलायकों (जैसे पानी) में घुलते हैं, और अध्रुवीय विलेय (जैसे नेफ़थलीन, एंथ्रासीन) अध्रुवीय विलायकों (जैसे बेंजीन, ईथर) में घुलते हैं। * जब एक विलेय को विलायक में घोला जाता है, तो दो प्रक्रियाएँ होती हैं: जालक ऊर्जा (विलेय के कणों को अलग करने के लिए आवश्यक ऊर्जा) और विलायन ऊर्जा (विलेय और विलायक के कणों के बीच आकर्षण से मुक्त ऊर्जा)। यदि विलायन ऊर्जा जालक ऊर्जा से अधिक है, तो विलेय घुलनशील होगा। 2. **तापमान का प्रभाव (Effect of Temperature):** * ला-शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार, यदि किसी ठोस के घुलने की प्रक्रिया ऊष्माशोषी (ऊष्मा अवशोषित होती है, \( \Delta H > 0 \)) है, तो तापमान बढ़ाने पर उसकी विलेयता बढ़ती है। * यदि घुलने की प्रक्रिया ऊष्माक्षेपी (ऊष्मा मुक्त होती है, \( \Delta H < 0 \)) है, तो तापमान बढ़ाने पर उसकी विलेयता घटती है। * अधिकांश ठोसों के लिए पानी में घुलने की प्रक्रिया ऊष्माशोषी होती है, इसलिए उनकी विलेयता तापमान बढ़ने के साथ बढ़ती है। 3. **दाब का प्रभाव (Effect of Pressure):** * दाब का ठोसों की द्रव में विलेयता पर बहुत कम या नगण्य प्रभाव पड़ता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ठोस और द्रव दोनों अत्यधिक असंपीड्य होते हैं, यानी दाब बदलने पर उनके आयतन में बहुत कम बदलाव आता है। * ठोसों के कण बहुत पास-पास होते हैं, इसलिए दाब का उन पर कोई खास असर नहीं होता।
In simple words: ठोस कितना घुलता है, यह विलेय और विलायक की प्रकृति (कौन किसमें घुलता है) और तापमान (गर्म करने पर ज्यादा घुलता है या कम) पर निर्भर करता है। दाब का ठोसों पर कोई खास असर नहीं होता है।

🎯 Exam Tip: "समान समान को घोलता है" सिद्धांत विलेयता के लिए एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। ऊष्माशोषी और ऊष्माक्षेपी प्रक्रियाओं के साथ तापमान के प्रभाव को जोड़ना न भूलें। दाब के प्रभाव को अक्सर नगण्य माना जाता है।

 

Question 3. हेनरी का नियम लिखिए। इसके एक प्रमुख अनुप्रयोग तथा सीमाओं का वर्णन कीजिए।
Answer:**हेनरी का नियम (Henry's Law):** हेनरी का नियम बताता है कि एक निश्चित तापमान पर किसी द्रव में गैस की विलेयता उस द्रव की सतह पर मौजूद गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होती है। यानी, जितना अधिक दाब होगा, गैस उतनी ही अधिक द्रव में घुलेगी। **गणितीय रूप से:**
\( P = K_H x \)
जहाँ:
\( P \) = गैस का आंशिक दाब
\( K_H \) = हेनरी स्थिरांक (गैस की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करता है)
\( x \) = विलयन में गैस का मोल अंश हेनरी का नियम गैसों की द्रवों में विलेयता को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों पर भी आधारित है। गैसों की द्रवों में विलेयता निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है: 1. **गैस की प्रकृति (Nature of Gas):** * जो गैसें विलायक से रासायनिक अभिक्रिया करती हैं या उसमें आयनित होती हैं, वे अधिक विलेयशील होती हैं। उदाहरण के लिए, अमोनिया (NH₃), हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), और सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) पानी में अत्यधिक विलेयशील हैं क्योंकि वे पानी के साथ अभिक्रिया करके यौगिक बनाते हैं। * ऑक्सीजन (O₂) रक्त में हीमोग्लोबिन से क्रिया करती है, जिससे यह रक्त में अधिक विलेयशील होती है। * गैसों की विलेयता उनके अवशोषण गुणांक पर भी निर्भर करती है; जिन गैसों का अवशोषण गुणांक अधिक होता है, उनकी विलेयता भी अधिक होती है। 2. **तापमान का प्रभाव (Effect of Temperature):** * तापमान बढ़ने पर गैसों की द्रवों में विलेयता सामान्यतः घट जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गैसों के अणुओं की गतिज ऊर्जा तापमान बढ़ने पर बढ़ जाती है, जिससे वे द्रव की सतह से अधिक आसानी से निकल जाते हैं। * हालांकि, हाइड्रोजन (H₂) और हीलियम (He) जैसे कुछ गैसों के घुलने पर ऊष्मा का अवशोषण होता है, इसलिए तापमान बढ़ने पर इनकी विलेयता बढ़ती है। 3. **दाब का प्रभाव (Effect of Pressure):** * दाब का गैसों की द्रवों में विलेयता पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। हेनरी के नियम के अनुसार, दाब बढ़ने पर गैसों की विलेयता बढ़ती है। **हेनरी नियम के अनुप्रयोग (Applications of Henry's Law):** हेनरी के नियम के कई महत्वपूर्ण अनुप्रयोग हैं, जो उद्योगों और जैविक प्रक्रियाओं में देखे जाते हैं: 1. **सोडा और शीतल पेय (Soft Drinks):** कार्बोनेटेड शीतल पेय की बोतलों को उच्च दाब पर बंद किया जाता है ताकि कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस पानी में अधिक मात्रा में घुली रहे। बोतल का ढक्कन खोलने पर दाब कम होता है, और CO₂ के बुलबुले तेजी से बाहर निकलते हैं। 2. **गहरे समुद्र में गोताखोरी (Deep Sea Diving - Bends):** गहरे समुद्र में गोताखोरों द्वारा सांस लेते समय, उच्च दाब के कारण गैसें (विशेषकर नाइट्रोजन) रक्त में अधिक मात्रा में घुल जाती हैं। जब गोताखोर सतह की ओर आते हैं, तो बाहरी दाब धीरे-धीरे कम होता है। इससे घुली हुई गैसें रक्त से बाहर निकलने लगती हैं और नाइट्रोजन के बुलबुले रक्त केशिकाओं में बन जाते हैं, जिससे रुकावट आती है। यह एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति उत्पन्न करता है जिसे 'बेंड्स' कहते हैं, जो अत्यधिक पीड़ादायक और जानलेवा हो सकता है। इससे बचने के लिए, गोताखोरों के ऑक्सीजन टैंकों में हीलियम (11.7%), नाइट्रोजन (56.2%) और ऑक्सीजन (32.1%) का तनु मिश्रण भरा जाता है। हीलियम का उपयोग किया जाता है क्योंकि इसकी रक्त में विलेयता कम होती है, जिससे बेंड्स का खतरा कम हो जाता है। 3. **ऐनॉक्सिया (Anoxia):** अधिक ऊँचाई वाली जगहों पर वायुमंडलीय दाब कम होता है। कम दाब के कारण रक्त में ऑक्सीजन की विलेयता कम हो जाती है। इससे ऊँचाई पर रहने वाले लोगों और पर्वतारोहियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे वे कमजोर महसूस करते हैं और स्पष्ट रूप से सोचने में असमर्थ होते हैं। इस स्थिति को ऐनॉक्सिया कहते हैं। **हेनरी नियम की सीमाएँ (Limitations of Henry's Law):** हेनरी का नियम कुछ विशेष शर्तों के तहत ही लागू होता है: 1. **कम दाब और उच्च तापमान:** यह नियम केवल तभी लागू होता है जब गैस का दाब कम हो और तापमान बहुत अधिक न हो। 2. **गैस की अक्रियता:** गैस विलायक के साथ रासायनिक रूप से अभिक्रिया नहीं करनी चाहिए। उदाहरण के लिए, अमोनिया पानी में घुलने पर अमोनियम हाइड्रॉक्साइड बनाती है, इसलिए अमोनिया पर हेनरी का नियम पूरी तरह से लागू नहीं होता। 3. **गैर-संयोजन/वियोजन:** गैस विलायक में न तो संगुणित (जुड़नी) होनी चाहिए और न ही वियोजित (टूटनी) होनी चाहिए। 4. **कम विलेयता:** गैस की विलेयता विलायक में बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए।
In simple words: हेनरी का नियम बताता है कि गैस जितनी ज्यादा घुलती है, उसका दाब उतना ही ज्यादा होता है। यह सोडा और गोताखोरों के लिए जरूरी है, लेकिन तभी काम करता है जब गैस विलायक से अभिक्रिया न करे और दाब कम हो।

🎯 Exam Tip: हेनरी के नियम की स्पष्ट परिभाषा, \( P = K_H x \) सूत्र और \( K_H \) की निर्भरता को याद रखें। सोडा और बेंड्स जैसे प्रमुख अनुप्रयोगों पर विशेष ध्यान दें। सीमाओं को भी स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 4. वाष्पशील विलेय युक्त विलयन के लिए रॉउल्ट का नियम लिखिए।
Answer: रॉउल्ट का नियम (Raoult's Law) कहता है कि एक निश्चित तापमान पर, वाष्पशील विलेय और विलायक वाले विलयन में प्रत्येक घटक का आंशिक वाष्प दाब उसके शुद्ध अवस्था में वाष्प दाब और विलयन में उसके मोल अंश के गुणनफल के बराबर होता है। इसे फ्रांसीसी रसायनज्ञ फ्रांकोइस-मैरी रॉउल्ट ने 1886 में प्रस्तावित किया था।
यदि \( P_A \) विलयन में घटक A का आंशिक वाष्प दाब है, \( P_A^0 \) शुद्ध घटक A का वाष्प दाब है और \( x_A \) विलयन में घटक A का मोल अंश है, तो रॉउल्ट का नियम है:
\( P_A = P_A^0 x_A \)
इसी तरह, यदि घटक B भी वाष्पशील है, तो:
\( P_B = P_B^0 x_B \)
विलयन का कुल वाष्प दाब \( (P_{\text{total}}) \) डाल्टन के आंशिक दाब के नियम के अनुसार दोनों घटकों के आंशिक दाबों का योग होगा:
\( P_{\text{total}} = P_A + P_B = P_A^0 x_A + P_B^0 x_B \)
In simple words: रॉउल्ट का नियम बताता है कि किसी घोल में किसी गैस या तरल का वाष्प दाब इस बात पर निर्भर करता है कि शुद्ध रूप में उसका वाष्प दाब कितना था और वह घोल में कितनी मात्रा में मौजूद है।

🎯 Exam Tip: रॉउल्ट के नियम का सूत्र और प्रत्येक प्रतीक का अर्थ स्पष्ट रूप से लिखें। वाष्पशील विलेय के लिए कुल वाष्प दाब की गणना में डाल्टन के नियम को कैसे लागू किया जाता है, यह भी समझाएँ।

 

Question 5. अणुसंख्य गुणों से आप क्या समझते हैं? परासरण तथा परासरण दाब को संक्षेप में समझाइए।
Answer:**अणुसंख्य गुणधर्म (Colligative Properties):** अणुसंख्य गुणधर्म विलयनों के वे गुण होते हैं जो विलेय के कणों की कुल संख्या (या मोल अंश) पर निर्भर करते हैं, न कि विलेय के रासायनिक प्रकृति पर। ये गुण विलायक की मात्रा और विलेय के कणों की संख्या के अनुपात से निर्धारित होते हैं। मुख्य अणुसंख्य गुणधर्म निम्न प्रकार हैं: 1. विलायक के वाष्प दाब का अवनमन (Relative Lowering of Vapor Pressure) 2. विलायक के क्वथनांक का उन्नयन (Elevation in Boiling Point) 3. विलायक के हिमांक का अवनमन (Depression in Freezing Point) 4. परासरण दाब (Osmotic Pressure) **परासरण (Osmosis):** परासरण वह प्रक्रिया है जिसमें विलायक (जैसे पानी) के अणु एक अर्द्धपारगम्य झिल्ली (जो केवल विलायक के अणुओं को गुजरने देती है, विलेय के अणुओं को नहीं) के माध्यम से अपनी उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र से अपनी कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर प्रवाहित होते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक दोनों ओर सान्द्रता में संतुलन स्थापित न हो जाए। यह एक महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रिया है जो कोशिकाओं में जल संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। परासरण को एक प्रयोग से समझा जा सकता है: एक बीकर में पानी लें और उसमें एक कीप को उल्टा रखें जिसके मुँह पर अर्द्धपारगम्य झिल्ली बंधी हो और कीप में CuSO₄ का सान्द्र विलयन भरा हो। पानी (विलायक) झिल्ली से होकर कीप में प्रवेश करेगा, जिससे कीप में विलयन का स्तर बढ़ जाएगा। यह विलायक अणुओं का उच्च सान्द्रता (शुद्ध पानी) से कम सान्द्रता (CuSO₄ विलयन) की ओर प्रवाह दर्शाता है। **परासरण दाब (Osmotic Pressure):** परासरण दाब वह न्यूनतम बाहरी दाब है जो परासरण की प्रक्रिया को रोकने के लिए विलयन पर लगाया जाता है। यह दाब विलायक के अणुओं के अर्द्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलयन में प्रवाह को रोकता है। दूसरे शब्दों में, परासरण दाब वह दाब है जो शुद्ध विलायक के ऊपर लगाया जाता है ताकि विलायक का वाष्प दाब कम हो जाए और विलयन के वाष्प दाब के बराबर हो जाए। यह विलेय की सान्द्रता, तापमान और गैस स्थिरांक पर निर्भर करता है, जैसा कि वान्टहॉफ समीकरण \( \pi = CRT \) द्वारा दर्शाया गया है।
In simple words: अणुसंख्य गुण ऐसे होते हैं जो घोल में कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि उनकी पहचान पर। परासरण वह है जब पानी एक खास झिल्ली से होकर कम सान्द्रता से ज्यादा सान्द्रता वाले घोल में जाता है। परासरण दाब वह दबाव है जो इस पानी के बहाव को रोकने के लिए लगाना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: अणुसंख्य गुणों की सूची याद रखें। परासरण और परासरण दाब की परिभाषाएँ महत्वपूर्ण हैं; अर्द्धपारगम्य झिल्ली और विलायक के प्रवाह की दिशा को स्पष्ट रूप से समझाएँ। वान्टहॉफ समीकरण (\( \pi = CRT \)) भी याद रखें।

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