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Detailed Chapter 17 दैनिक जीवन में रसायन RBSE Solutions for Class 12 Chemistry
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Class 12 Chemistry Chapter 17 दैनिक जीवन में रसायन RBSE Solutions PDF
Rbse Class 12 Chemistry Chapter 17 अभ्यास प्रश्न
Rbse Class 12 Chemistry Chapter 17 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. निम्न में से कौन-सा पदार्थ दर्द निवारक (पीड़ाहारी) है-
(a) ऐस्पिरिन
(b) पेनिसिलिन
(c) इण्डिगो
(d) सैकरीन
Answer: (a) ऐस्पिरिन
In simple words: ऐस्पिरिन एक दवा है जो दर्द को कम करने में मदद करती है, इसलिए इसे दर्द निवारक या पीड़ाहारी कहते हैं। यह शरीर के दर्द को शांत करती है।
🎯 Exam Tip: दर्द निवारक दवाओं को एनाल्जेसिक भी कहते हैं। इनका मुख्य काम शरीर के दर्द को कम करना होता है.
Question 2. इक्कैनिल एक उदाहरण है-
(a) पीड़ाहारी का
(b) प्रशांतक औषधि का
(c) प्रतिरोधी
(d) प्रतिजैविक
Answer: (b) प्रशांतक औषधि का
In simple words: इक्कैनिल एक ऐसी दवा है जो दिमाग को शांत करने और तनाव या चिंता कम करने में मदद करती है. यह प्रशांतक औषधि की श्रेणी में आती है.
🎯 Exam Tip: प्रशांतक औषधियाँ तंत्रिका तंत्र को शांत करती हैं और नींद लाने में मदद कर सकती हैं.
Question 4. निम्न में कौन-सा पदार्थ पूतिरोधी है-
(a) पैरासिटामॉल
(b) ल्यूमीनल
(c) डेटॉल
(d) प्रोमेथजिन
Answer: (c) डेटॉल
In simple words: डेटॉल एक ऐसा पदार्थ है जिसका उपयोग त्वचा या सतहों पर से कीटाणुओं को मारने या उनकी वृद्धि रोकने के लिए किया जाता है. यह घावों को संक्रमण से बचाने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: पूतिरोधी (एंटीसेप्टिक) पदार्थों का उपयोग जीवित ऊतकों पर किया जाता है ताकि संक्रमण को रोका जा सके.
Question 5. सल्फा औषधियाँ होती हैं-
(a) पीड़ाहारी
(b) प्रतिजैविकी
(c) प्रशांतक
(d) प्रतिहिस्टैमिन
Answer: (b) प्रतिजैविकी
In simple words: सल्फा औषधियाँ विशेष प्रकार की एंटीबायोटिक दवाएँ हैं. ये शरीर में बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमण का इलाज करती हैं.
🎯 Exam Tip: प्रतिजैविकी (एंटीबायोटिक्स) दवाएं जीवाणुओं को मारती या उनकी वृद्धि को रोकती हैं, जिससे बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज होता है.
Question 6. निम्न में कौन-सा प्रतिअम्ल है-
(a) गॉसीपॉल
(b) कीनॉल
(c) ओमेप्रेजॉल
(d) डेटॉल
Answer: (c) ओमेप्रेजॉल
In simple words: ओमेप्रेजॉल एक ऐसी दवा है जो पेट में बनने वाले एसिड को कम करती है. इसका उपयोग पेट में जलन या एसिडिटी जैसी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है.
🎯 Exam Tip: प्रतिअम्ल (एंटासिड) पेट के एसिड को बेअसर करके या उसके उत्पादन को कम करके एसिडिटी से राहत दिलाते हैं.
Question 7. निम्न में कौन-सा समूह वर्ण मूलक है-
(a) -CH3
(b) -OH
(c) -NR2
(d) -N = N-
Answer: (d) -N = N-
In simple words: वर्ण मूलक, जिसे क्रोमोफोर भी कहते हैं, एक अणु का वह हिस्सा होता है जो रंग के लिए जिम्मेदार होता है. -N=N- समूह अक्सर रंगों में पाया जाता है.
🎯 Exam Tip: क्रोमोफोर समूह में अक्सर डबल या ट्रिपल बॉन्ड होते हैं जो प्रकाश को अवशोषित करते हैं और हमें रंगीन दिखाई देते हैं.
Question 8. क्रोमोजेन होते हैं-
(a) क्रोमोफोर युक्त यौगिक
(b) ऐल्केन
(c) कृत्रिम मधुरक कर्मक
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (a) क्रोमोफोर युक्त यौगिक
In simple words: क्रोमोजेन वे रासायनिक यौगिक होते हैं जिनमें वर्ण मूलक (क्रोमोफोर) समूह मौजूद होता है. ये समूह ही यौगिक को रंग प्रदान करने में मदद करते हैं.
🎯 Exam Tip: क्रोमोजेन खुद रंगीन हो सकते हैं या किसी और समूह (वर्णवर्द्धक) की उपस्थिति में रंगीन हो जाते हैं.
Question 9. सोडियम बेन्जोएट है-
(a) कृत्रिम मधुरक कर्मक
(b) कृत्रिम मधुरक कर्मक
(c) खाद्य रंग
(d) प्रतिऑक्सीकारक
Answer: (c) खाद्य रंग
In simple words: सोडियम बेन्जोएट एक ऐसा पदार्थ है जिसका उपयोग खाद्य पदार्थों में रंग के रूप में किया जा सकता है. यह खाने-पीने की चीजों को आकर्षक बनाने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: सोडियम बेन्जोएट का उपयोग खाद्य परिरक्षक (preservative) के रूप में भी होता है, जो भोजन को खराब होने से बचाता है.
Question 11. अपमार्जक होते हैं-
(a) प्राकृतिक पदार्थ
(b) दुर्बल अम्ल तथा प्रबल क्षार के लवण
(c) संश्लेषित पदार्थ
(d) क्षारीय
Answer: (c) संश्लेषित पदार्थ
In simple words: अपमार्जक वे पदार्थ होते हैं जिन्हें रसायन की मदद से प्रयोगशाला में बनाया जाता है. ये साबुन जैसे ही सफाई का काम करते हैं.
🎯 Exam Tip: अपमार्जक आमतौर पर कठोर जल में भी अच्छी तरह काम करते हैं, जबकि साबुन नहीं.
Question 12. ज्वरनाशी दवाओं का उपयोग किया जाता है-
(a) दर्द निवारण में
(b) बुखार उतारने में
(c) मलेरिया नियन्त्रण में
(d) अन्य हानिकारकों को नष्ट करने में
Answer: (b) बुखार उतारने में
In simple words: ज्वरनाशी दवाएं वे होती हैं जो शरीर के बढ़े हुए तापमान को कम करके बुखार उतारने में मदद करती हैं. ये अक्सर दर्द भी कम करती हैं.
🎯 Exam Tip: ज्वरनाशी दवाएं सीधे बीमारी का इलाज नहीं करतीं, बल्कि बुखार जैसे लक्षणों को कम करती हैं ताकि रोगी को आराम मिल सके.
Question 13. निम्न में से कौन-सा पदार्थ ज्वरनाशी नहीं है-
(a) पैरासिटामॉल
(b) ऐस्पिरिन
(c) क्लोरैम्फेनिकॉल
(d) फिनेसिटीन
Answer: (c) क्लोरैम्फेनिकॉल
In simple words: क्लोरैम्फेनिकॉल एक शक्तिशाली एंटीबायोटिक है जो जीवाणु संक्रमण का इलाज करती है, जबकि पैरासिटामॉल, ऐस्पिरिन और फिनेसिटीन बुखार और दर्द को कम करने वाली दवाएं हैं.
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि कौन सी दवाएं ज्वरनाशी हैं (जैसे पैरासिटामॉल) और कौन सी एंटीबायोटिक हैं (जैसे क्लोरैम्फेनिकॉल), क्योंकि उनका उपयोग अलग-अलग होता है.
Question 14. साबुन तथा अपमार्जकों को किस प्रकार की श्रेणी में सम्मिलित किया गया है-
(a) पृष्ठ सक्रिय
(b) पृष्ठ अक्रिय
(c) जल में विलेय
(d) जल में अविलेय
Answer: (a) पृष्ठ सक्रिय
In simple words: साबुन और अपमार्जक दोनों पृष्ठ सक्रिय पदार्थ हैं, जिसका मतलब है कि वे पानी की सतह के तनाव को कम करते हैं और गंदगी को हटाने में मदद करते हैं. वे पानी और तेल के बीच की सीमा पर काम करते हैं.
🎯 Exam Tip: पृष्ठ सक्रिय पदार्थ वे होते हैं जो दो अलग-अलग फेज़ों (जैसे पानी और तेल) के बीच की सतह पर काम करके उन्हें आपस में मिलने या घुलने में मदद करते हैं.
Question 15. सैकरीन शक्कर से कितने गुना मीठी होती है?
(a) 100
(b) 200
(c) 300
(d) 600
Answer: (d) 600
In simple words: सैकरीन एक कृत्रिम मीठा करने वाला पदार्थ है जो सामान्य चीनी से 600 गुना ज्यादा मीठा होता है. यह कैलोरी-मुक्त होता है.
🎯 Exam Tip: कृत्रिम मधुरक जैसे सैकरीन का उपयोग उन लोगों द्वारा किया जाता है जो चीनी का सेवन कम करना चाहते हैं, जैसे मधुमेह रोगी.
Question 17. कृत्रिम मधुरक कर्मक है-
(a) सैकरीन
(b) सोडियम सैकरीन
(c) कार्बामेट
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: सैकरीन, सोडियम सैकरीन और कार्बामेट सभी ऐसे पदार्थ हैं जो चीनी की तरह मीठे होते हैं लेकिन उनमें कैलोरी बहुत कम या बिल्कुल नहीं होती है.
🎯 Exam Tip: कृत्रिम मधुरक अक्सर भोजन और पेय पदार्थों में चीनी के विकल्प के रूप में उपयोग किए जाते हैं, खासकर मधुमेह रोगियों के लिए.
Question 18. खाद्य परिरक्षक के रूप में प्रयुक्त होते हैं-
(a) \( \text{C}_{6}\text{H}_{5}\text{COONa} \)
(b) \( \text{K}_{2}\text{S}_{2}\text{O}_{5} \)
(c) \( \text{CH}_{3}\text{COONa} \)
(d) (a) व (b) दोनों
Answer: (d) (a) व (b) दोनों
In simple words: सोडियम बेन्जोएट (\( \text{C}_{6}\text{H}_{5}\text{COONa} \)) और पोटेशियम मेटाबाइसल्फाइट (\( \text{K}_{2}\text{S}_{2}\text{O}_{5} \)) दोनों ऐसे रसायन हैं जो खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक ताजा रखने में मदद करते हैं. वे सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं.
🎯 Exam Tip: खाद्य परिरक्षक भोजन को खराब होने से बचाते हैं और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाते हैं, जिससे भोजन की बर्बादी कम होती है.
Question 19. कृत्रिम मधुरक कर्मक का उदाहरण है-
(a) शर्करा
(b) फ्रक्टोस
(c) शहद
(d) सैकरीन
Answer: (d) सैकरीन
In simple words: सैकरीन एक मानव निर्मित पदार्थ है जिसका उपयोग भोजन और पेय पदार्थों को मीठा करने के लिए किया जाता है, जबकि शर्करा, फ्रक्टोस और शहद प्राकृतिक रूप से मीठे पदार्थ हैं.
🎯 Exam Tip: कृत्रिम मधुरक, जैसे सैकरीन, में कैलोरी नहीं होती है, इसलिए वे उन लोगों के लिए अच्छे विकल्प हैं जो अपनी कैलोरी का सेवन नियंत्रित करना चाहते हैं.
Question 20. फीनॉल को 1% विलयन को कहते हैं-
(a) रोगाणुनाशक
(b) पूतिरोधी
(c) प्रतिजैविक
(d) ज्वरनाशी
Answer: (a) रोगाणुनाशक
In simple words: फीनॉल का 1% घोल बहुत शक्तिशाली होता है और इसका उपयोग निर्जीव सतहों पर मौजूद कीटाणुओं को मारने के लिए किया जाता है. यह सतहों को साफ करने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: रोगाणुनाशक (डिसइन्फेक्टेंट) निर्जीव वस्तुओं पर उपयोग किए जाते हैं, जबकि पूतिरोधी (एंटीसेप्टिक) जीवित ऊतकों पर.
Question 21. फीनॉल का 0.2% विलयन कहलाता है-
(a) रोगाणुनाशक
(b) पूतिरोधी
(c) प्रतिजैविक
(d) ज्वरनाशी
Answer: (b) पूतिरोधी
In simple words: फीनॉल का 0.2% घोल उतना तेज नहीं होता है और इसे त्वचा जैसे जीवित हिस्सों पर लगाया जा सकता है. यह मामूली चोटों या कटने पर संक्रमण को रोकने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: फीनॉल की सांद्रता (concentration) उसके उपयोग को निर्धारित करती है - कम सांद्रता एंटीसेप्टिक के रूप में और उच्च सांद्रता कीटाणुनाशक के रूप में.
Question 24. 2-ऐसीटॉक्सी बेन्जोइक अम्ल है-
(a) प्रतिहिस्टैमिन
(b) पूतिरोधी
(c) प्रतिजैविक
(d) दर्दनाशक
Answer: (d) दर्दनाशक
In simple words: 2-ऐसीटॉक्सी बेन्जोइक अम्ल, जिसे आमतौर पर ऐस्पिरिन कहा जाता है, एक ऐसी दवा है जो दर्द को कम करती है. यह शरीर में दर्द पैदा करने वाले रसायनों को रोकती है.
🎯 Exam Tip: ऐस्पिरिन का उपयोग न केवल दर्द कम करने के लिए बल्कि बुखार उतारने और सूजन कम करने के लिए भी किया जाता है.
Question 25. इक्कैनिल उदाहरण है-
(a) प्रशांतक औषधि का
(b) प्रतिजैविक का
(c) ज्वरनाशी का
(d) पीड़ाहारी का
Answer: (a) प्रशांतक औषधि का
In simple words: इक्कैनिल एक प्रकार की दवा है जिसका उपयोग चिंता और तनाव को कम करने के लिए किया जाता है. यह मस्तिष्क को शांत करने में मदद करती है.
🎯 Exam Tip: प्रशांतक दवाएं केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर काम करती हैं और अक्सर अनिद्रा के इलाज के लिए भी उपयोग की जाती हैं.
Question 26. ऐस्पिरिन है-
(a) पूतिरोधी
(b) ज्वरनाशी
(c) नारकोटिक
(d) प्रतिमलेरिया
Answer: (b) ज्वरनाशी
In simple words: ऐस्पिरिन एक दवा है जो शरीर के तापमान को कम करके बुखार उतारने में मदद करती है. इसे दर्द निवारक के रूप में भी जाना जाता है.
🎯 Exam Tip: ऐस्पिरिन एक नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) है, जिसका मतलब है कि यह दर्द, सूजन और बुखार को कम करती है.
Question 27. क्लोरैम्फेनिकॉल है-
(a) प्रशांतक
(b) ब्रॉड स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक
(c) नार्कोटिक
(d) प्रति मलेरिया
Answer: (b) ब्रॉड स्पेक्ट्रम प्रतिजैविक
In simple words: क्लोरैम्फेनिकॉल एक प्रकार की एंटीबायोटिक है जो कई अलग-अलग प्रकार के बैक्टीरिया से लड़ सकती है. इसका मतलब है कि यह विभिन्न प्रकार के जीवाणु संक्रमणों का इलाज कर सकती है.
🎯 Exam Tip: ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स उन स्थितियों में उपयोगी होते हैं जहां संक्रमण पैदा करने वाले विशेष जीवाणु की पहचान नहीं हो पाती है.
Question 28. निम्न में से कौन प्रतिजैविक नहीं है-
(a) पेनिसिलीन
(b) सल्फा औषधि
(c) क्लोरैम्फेनिकॉल
(d) बाइथायोनल
Answer: (d) बाइथायोनल
In simple words: पेनिसिलीन, सल्फा औषधियाँ और क्लोरैम्फेनिकॉल सभी एंटीबायोटिक्स हैं जो बैक्टीरिया को मारते हैं या रोकते हैं, जबकि बाइथायोनल एक एंटीसेप्टिक है, जिसका उपयोग त्वचा पर कीटाणुओं को मारने के लिए किया जाता है.
🎯 Exam Tip: एंटीबायोटिक्स आंतरिक संक्रमणों का इलाज करते हैं, जबकि एंटीसेप्टिक्स बाहरी संक्रमणों को रोकते हैं.
Question 30. निम्न यौगिक का प्रयोग होता है-
\[ \text{बेंजीन वलय पर -COOH समूह और -O-COCH}_{3} \text{ समूह} \]
(a) प्रतिजैविक
(b) एनालजेसिक
(c) पेस्टिसाइड
(d) एण्टीसैप्टिक
Answer: (b) एनालजेसिक
In simple words: यह यौगिक ऐस्पिरिन का रासायनिक सूत्र है, जो दर्द कम करने वाली दवा है. यह शरीर के दर्द को शांत करती है.
🎯 Exam Tip: ऐस्पिरिन एक प्रभावी दर्द निवारक है जो सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और मासिक धर्म के दर्द जैसी सामान्य बीमारियों में मदद करती है.
Question 31. निम्न में से कौन एण्टीबायोटिक का उदाहरण है-
(a) टैरामाइसिन
(b) ऐस्पिरिन
(c) (कट ऑफ)
(d) क्लोरोकिनाल
Answer: (a) टैरामाइसिन
In simple words: टैरामाइसिन एक प्रकार की एंटीबायोटिक दवा है जो शरीर में होने वाले जीवाणु संक्रमणों को ठीक करने में मदद करती है. यह बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकती है.
🎯 Exam Tip: एंटीबायोटिक्स को जीवाणु संक्रमण के लिए ही इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि वे वायरल संक्रमणों के खिलाफ प्रभावी नहीं होते हैं.
Question 32. टायफाइड के इलाज में निम्न में से कौन औषध के रूप में प्रयोग होता है-
(a) पेनिसिलिन
(b) क्लोरैम्फेनिकॉल
(c) टैरामायसिन
(d) सल्फाडायजीन
Answer: (b) क्लोरैम्फेनिकॉल
In simple words: क्लोरैम्फेनिकॉल एक एंटीबायोटिक है जिसका उपयोग विशेष रूप से टायफाइड बुखार जैसे गंभीर जीवाणु संक्रमणों के इलाज के लिए किया जाता है. यह उन बैक्टीरिया को मारता है जो टायफाइड का कारण बनते हैं.
🎯 Exam Tip: टायफाइड एक गंभीर बीमारी है जिसका सही एंटीबायोटिक से इलाज बहुत महत्वपूर्ण है ताकि जटिलताओं से बचा जा सके.
Question 33. सैलोल का प्रयोग होता है-
(a) प्रतिजैविक
(b) ज्वरनाशी
(c) (a) व (b) दोनों
(d) (a), (b) में से कोई नहीं
Answer: (a) प्रतिजैविक
In simple words: सैलोल एक दवा है जिसका उपयोग एंटीबायोटिक के रूप में होता है. यह शरीर में सूक्ष्मजीवों के विकास को रोकने में मदद करती है.
🎯 Exam Tip: सैलोल का रासायनिक नाम फेनिल सैलिसिलेट है और इसे आंतों के एंटीसेप्टिक के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है.
Question 35. आर्सेनिक औषध का प्रयोग निम्न में से किसके इलाज में होता है?
(a) पीलिया में
(b) टायफाइड में
(c) साइफिलिसे में
(d) कॉलेरा में
Answer: (c) साइफिलिसे में
In simple words: आर्सेनिक युक्त दवाएं विशेष रूप से सिफलिस नामक यौन संचारित संक्रमण के इलाज के लिए उपयोग की जाती थीं. ये उस बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ती हैं.
🎯 Exam Tip: आजकल, सिफलिस के इलाज के लिए आर्सेनिक आधारित दवाओं की जगह पेनिसिलिन जैसी एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है.
Question 36. मलेरिया के इलाज के लिए कारगर औषध है-
(a) कुनैन
(b) ऐस्पिरिन
(c) सैलोल
(d) एनालजेसिक
Answer: (a) कुनैन
In simple words: कुनैन एक प्राकृतिक दवा है जो सिनकोना पेड़ से मिलती है और इसका उपयोग मलेरिया नामक बीमारी के इलाज के लिए किया जाता है. यह मलेरिया पैदा करने वाले परजीवियों को मारती है.
🎯 Exam Tip: कुनैन मलेरिया की रोकथाम और उपचार दोनों में प्रभावी है, लेकिन इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं.
Question 37. हेरोइन व्युत्पन्न होता है-
(a) मार्फीन का
(b) निकोटीन का
(c) कोकीन का
(d) कैफीन का
Answer: (a) मार्फीन का
In simple words: हेरोइन एक दवा है जो मॉर्फिन से बनाई जाती है. मॉर्फिन अफीम के पौधे से मिलता है और यह एक शक्तिशाली दर्द निवारक है.
🎯 Exam Tip: हेरोइन और मॉर्फिन दोनों ही ओपिओइड वर्ग की दवाएं हैं, जिनका उपयोग गंभीर दर्द के प्रबंधन के लिए किया जाता है लेकिन इनमें लत लगने का खतरा बहुत अधिक होता है.
Question 38. पेनिसिलीन की खोज सर्वप्रथम की थी-
(a) ए. फ्लेमिंग
(b) एल. पाश्चर
(c) जी. थॉमसान
(d) ए. नोबेल
Answer: (a) ए. फ्लेमिंग
In simple words: अलेक्जेंडर फ्लेमिंग नामक वैज्ञानिक ने सबसे पहले पेनिसिलिन नामक एंटीबायोटिक की खोज की थी. यह खोज चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण थी.
🎯 Exam Tip: पेनिसिलिन पहली व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली एंटीबायोटिक थी और इसने कई बैक्टीरियल बीमारियों के इलाज में क्रांति ला दी.
Question 39. निम्न में से कौन-सी औषध ज्वरनाशी नहीं है-
(a) नोवेलजीन
(b) ऐस्पिरिन
(c) पैरासिटामॉल
(d) इरगापायरिन
Answer: (d) इरगापायरिन
In simple words: नोवेलजीन, ऐस्पिरिन और पैरासिटामॉल सभी ऐसी दवाएं हैं जो बुखार उतारने में मदद करती हैं, जबकि इरगापायरिन का उपयोग आमतौर पर बुखार कम करने के लिए नहीं किया जाता है.
🎯 Exam Tip: इरगापायरिन एक नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) है जिसका उपयोग मुख्य रूप से सूजन और दर्द के इलाज के लिए होता है.
Question 42. निम्न में से कौन 'morning after pill' की तरह प्रयोग होती है-
(a) नॉरएथिनड़ान
(b) एथिनाइलऐस्ट्राडाइऑल
(c) मिफेस्टिोन
(d) बाइथियोनल
Answer: (c) मिफेस्टिोन
In simple words: मिफेस्टिोन एक दवा है जिसका उपयोग आपातकालीन गर्भनिरोधक के रूप में किया जाता है, जिसे 'मॉर्निंग आफ्टर पिल' भी कहते हैं. यह अनचाही गर्भावस्था को रोकने में मदद करती है.
🎯 Exam Tip: 'मॉर्निंग आफ्टर पिल' का उपयोग असुरक्षित यौन संबंध के बाद जल्द से जल्द करना चाहिए ताकि इसकी प्रभावशीलता अधिकतम हो सके.
Question 43. टी. बी. के इलाज में प्रयुक्त होने वाला प्रतिजैविक है-
(a) पेनिसिलिन
(b) क्लोरैम्फेनिकॉल
(c) टेट्रासाइक्लिन
(d) स्ट्रेप्टोमाइसिन
Answer: (d) स्ट्रेप्टोमाइसिन
In simple words: स्ट्रेप्टोमाइसिन एक प्रकार की एंटीबायोटिक है जिसका उपयोग विशेष रूप से तपेदिक (टी. बी.) नामक बीमारी के इलाज के लिए किया जाता है. यह टी. बी. पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ती है.
🎯 Exam Tip: टी. बी. के इलाज में अक्सर एक साथ कई एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है ताकि बैक्टीरिया को पूरी तरह से खत्म किया जा सके और दवा प्रतिरोध को रोका जा सके.
Question 44. निम्न दिये गये संरचना सूत्र को कहते हैं-
\[
\text{Penicillin-G structure: Benzene ring-CH}_2\text{-C(=O)NH-thiazolidine ring with -S, -N, -COOH, and (CH}_3\text{)}_2\text{ at carbon}
\]
(a) पेनिसिलिन-F
(b) पेनिसिलिन-G
(c) पेनिसिलिन-K
(d) एम्पीसिलिन
Answer: (b) पेनिसिलिन-G
In simple words: दिया गया रासायनिक सूत्र पेनिसिलिन-G का है, जो एक प्रकार की पेनिसिलिन एंटीबायोटिक है. इसका उपयोग कई जीवाणु संक्रमणों के इलाज के लिए किया जाता है.
🎯 Exam Tip: पेनिसिलिन-G को अक्सर इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है क्योंकि यह पेट के एसिड से टूट जाती है यदि इसे मौखिक रूप से लिया जाए.
Question 47. क्लोरीन युक्त कृत्रिम मिठास पैदा करने वाला यौगिक जो देखने और स्वाद में सर्करा जैसा है और कुकिंग तापमान पर स्थिर है-
(a) ऐस्पार्टम
(b) सैकरीन
(c) सुक्रोलोस
(d) ऐलिटैम
Answer: (c) सुक्रोलोस
In simple words: सुक्रोलोस एक कृत्रिम स्वीटनर है जो चीनी से बनाया जाता है लेकिन इसमें क्लोरीन मिला होता है, जिससे यह चीनी की तरह मीठा लगता है लेकिन इसमें कैलोरी नहीं होती और यह गर्मी में भी स्थिर रहता है.
🎯 Exam Tip: सुक्रोलोस का उपयोग अक्सर बेकिंग और खाना पकाने में किया जाता है क्योंकि यह उच्च तापमान पर अपनी मिठास बरकरार रखता है, जबकि कुछ अन्य कृत्रिम स्वीटनर नहीं कर पाते.
Question 48. एमोक्सिलीन किसका अर्द्ध-संश्लेषित परिष्करण है-
(a) पेनिसिलिन
(b) स्ट्रेप्टोमाइसिन
(c) टेट्रासाइक्लिन
(d) क्लोरैम्फेनिकॉल
Answer: (a) पेनिसिलिन
In simple words: एमोक्सिलीन पेनिसिलिन से बनी एक दवा है, जिसे थोड़ा बदलकर अधिक प्रभावी और व्यापक स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक बनाया गया है. यह कई तरह के बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज के लिए उपयोग होती है.
🎯 Exam Tip: अर्द्ध-संश्लेषित एंटीबायोटिक्स प्राकृतिक एंटीबायोटिक्स से प्राप्त होते हैं लेकिन उनकी प्रभावशीलता, स्थिरता या स्पेक्ट्रम को बेहतर बनाने के लिए रासायनिक रूप से संशोधित किए जाते हैं.
Question 49. नॉवाल्जिन एक सामान्य ..... है।
(a) पीड़ाहारी
(b) प्रतिजैविक
(c) ज्वरनाशी
(d) प्रतिमलेस्थित
Answer: (a) पीड़ाहारी
In simple words: नॉवाल्जिन एक दवा है जिसका उपयोग दर्द को कम करने के लिए किया जाता है. यह शरीर के दर्द को शांत करने में मदद करती है.
🎯 Exam Tip: नॉवाल्जिन को मेटामिजोल या डिपिरोन के नाम से भी जाना जाता है और इसका उपयोग तेज दर्द और बुखार के इलाज के लिए होता है.
Question 50. सेटिल टाइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड अपमार्जक लोकप्रिय ..... है।
(a) ऋणायनी अपमार्जक
(b) धनायनी अपमार्जक
(c) अनायनित अपमार्जक
(d) मीठा उत्पन्न करने वाला
Answer: (b) धनायनी अपमार्जक
In simple words: सेटिल टाइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड एक प्रकार का अपमार्जक है जिसमें धनात्मक आवेश होता है. इसका उपयोग आमतौर पर कंडीशनर और एंटीसेप्टिक के रूप में होता है.
🎯 Exam Tip: धनायनी अपमार्जक में एक लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला और एक धनात्मक आवेशित समूह होता है, जो उन्हें जीवाणुनाशक गुण प्रदान करता है.
Question 2. कठोर तथा मृदु साबुन किसे कहते हैं?
Answer: कठोर और मृदु साबुन में मुख्य अंतर उनकी संरचना और कठोरता से आता है. संतृप्त वसीय अम्लों के सोडियम लवणों को कठोर साबुन (Hard Soaps) कहते हैं. ये साबुन पानी में आसानी से झाग नहीं देते और अक्सर कपड़े धोने के लिए उपयोग होते हैं. वहीं, असंतृप्त वसीय अम्लों के पोटैशियम लवणों को मृदु साबुन (Soft Soaps) कहते हैं. ये साबुन पानी में आसानी से झाग देते हैं और अक्सर नहाने या शेविंग के लिए उपयोग होते हैं. इन दोनों प्रकार के साबुनों का उपयोग रोजमर्रा के जीवन में होता है.
In simple words: कठोर साबुन वे होते हैं जो सोडियम के बने होते हैं और पानी में कम झाग देते हैं. मृदु साबुन पोटैशियम के बने होते हैं और पानी में ज्यादा झाग देते हैं, जो नहाने के लिए अच्छे होते हैं.
🎯 Exam Tip: याद रखें, कठोर साबुन में सोडियम लवण होता है जबकि मृदु साबुन में पोटैशियम लवण होता है, यही उनकी कठोरता और झाग बनाने की क्षमता में अंतर का मुख्य कारण है.
Question 3. अपमार्जक किसे कहते हैं?
Answer: अपमार्जक (Detergents) ऐसे पदार्थ होते हैं जो लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखलाओं वाले सल्फ्यूरिक अम्ल या सल्फोनिक अम्लों से बने होते हैं. ये साबुन जैसे ही सफाई का काम करते हैं लेकिन कठोर पानी में भी प्रभावी होते हैं. इनका उपयोग कपड़े धोने, बर्तन साफ करने और अन्य सफाई कार्यों के लिए होता है. इन पदार्थों की सफाई करने की क्षमता बहुत अच्छी होती है.
उदाहरणार्थ:
\( \text{CH}_{3}\text{-}(\text{CH}_{2})_{10} \text{CH}_{2}\text{-O-SO}_{2}\text{-O-Na}^{+} \)
सोडियम लॉरिल सल्फेट.
In simple words: अपमार्जक वे रसायन हैं जो साबुन की तरह सफाई करते हैं, पर कठोर पानी में भी काम आते हैं.
🎯 Exam Tip: अपमार्जक साबुन से बेहतर होते हैं क्योंकि वे कठोर जल में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ अवक्षेप (झाग) नहीं बनाते, जिससे सफाई अच्छी होती है.
Question 4. जैव अपघटनीय तथा जैव अनपघटनीय अपमार्जक क्या होते हैं?
Answer: अपमार्जक दो प्रकार के होते हैं: जैव अपघटनीय और जैव अनपघटनीय. जैव अपघटनीय (Biodegradable) अपमार्जक वे होते हैं जिन्हें सूक्ष्म जीव छोटे-छोटे अणुओं में तोड़ सकते हैं, जिससे वे पर्यावरण में आसानी से घुल-मिल जाते हैं. ये अपमार्जक पर्यावरण के लिए कम हानिकारक होते हैं. वहीं, जैव अनपघटनीय (Non-biodegradable) अपमार्जक वे होते हैं जिन्हें सूक्ष्म जीव तोड़ नहीं पाते. ऐसे अपमार्जक पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं और प्रदूषण का कारण बनते हैं, जैसे कि पानी में झाग जमा करना. पर्यावरण में इन अपमार्जकों की मात्रा कम करना महत्वपूर्ण है.
In simple words: जैव अपघटनीय अपमार्जक सूक्ष्मजीवों द्वारा टूट जाते हैं, जबकि जैव अनपघटनीय अपमार्जक नहीं टूटते और पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं.
🎯 Exam Tip: जैव अपघटनीय अपमार्जकों का उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहतर होता है क्योंकि वे प्राकृतिक रूप से विघटित हो जाते हैं और पानी के प्रदूषण को कम करते हैं.
Question 6. वर्णमूलक किसे कहते हैं? इसके उदाहरण दीजिए।
Answer: वर्णमूलक (Chromophores) ऐसे रासायनिक समूह होते हैं जो किसी कार्बनिक यौगिक को रंग प्रदान करते हैं. इनमें आमतौर पर असंतृप्त बॉन्ड (जैसे डबल या ट्रिपल बॉन्ड) होते हैं जो प्रकाश के कुछ खास रंगों को सोख लेते हैं और बाकी रंगों को परावर्तित करते हैं, जिससे हमें रंग दिखाई देता है. यही समूह यौगिकों को रंगीन बनाते हैं.
उदाहरणार्थ:
\( \text{-N=O:} \) (नाइट्रोसो)
\( \text{-N=N-} \) (एजो)
\( \text{>C=O} \) (कार्बोनिल)
\( \text{>C=C<} \) (एथिनिलिक)
In simple words: वर्णमूलक अणु का वह हिस्सा है जो उसे रंग देता है. इसमें डबल या ट्रिपल बॉन्ड होते हैं जो प्रकाश को सोखते हैं.
🎯 Exam Tip: वर्णमूलक के बिना, अधिकांश कार्बनिक यौगिक रंगहीन होते हैं. रंग की तीव्रता वर्णमूलक की संख्या और संरचना पर निर्भर करती है.
Question 7. वर्णवर्द्धक से क्या अभिप्राय है? इनके उदाहरण दीजिए।
Answer: वर्णवर्द्धक (Auxochromes) ऐसे रासायनिक समूह होते हैं जो खुद रंगीन नहीं होते, लेकिन जब वे किसी वर्णमूलक (Chromophore) वाले यौगिक से जुड़ते हैं, तो वे उस यौगिक के रंग को और गहरा या चमकीला बना देते हैं. ये समूह रंगीन यौगिकों की प्रकाश को अवशोषित करने की क्षमता को बढ़ा देते हैं. यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो विभिन्न प्रकार के रंगों के उत्पादन में मदद करती है.
In simple words: वर्णवर्द्धक खुद रंगहीन होते हैं, लेकिन जब वे किसी रंगीन अणु से जुड़ते हैं, तो वे उसके रंग को और गहरा या चमकीला बना देते हैं.
🎯 Exam Tip: वर्णवर्द्धक अक्सर रंगीन यौगिकों की पानी में घुलनशीलता को भी बढ़ाते हैं, जिससे उन्हें कपड़ों और अन्य सामग्रियों को रंगने में आसानी होती है.
Question 8. मॉडेण्ट रंजक क्या होते हैं? इसके उदाहरण दीजिए।
Answer: मॉडेण्ट रंजक (Mordant Dyes) वे रंग होते हैं जो सीधे कपड़ों या रेशों पर नहीं लगते. इन्हें लगाने से पहले कपड़े को एक धातु आयन, जैसे एल्युमीनियम या क्रोमियम के लवण के घोल में डुबोया जाता है. यह धातु आयन कपड़े पर एक परत बनाता है, जिसे मॉडेण्ट कहते हैं. फिर जब रंजक को कपड़े पर लगाया जाता है, तो रंजक और मॉडेण्ट के बीच एक मजबूत रासायनिक बंधन बन जाता है, जिससे रंग कपड़े पर स्थायी रूप से चिपक जाता है. इसका एक उदाहरण ऐलिजरीन है, जो एल्युमीनियम आयनों के साथ गुलाबी रंग देता है और बेरियम आयनों के साथ नीला रंग देता है.
उदाहरणार्थ:
\[
\text{एलिजरीन-AI रंजक (गुलाबी): बेंजीन वलयों पर जुड़े -OH और -C=O समूह, तथा एल्युमीनियम आयन (Al}^{3+}\text{)} से जुड़ा हुआ}
\]
In simple words: मॉडेण्ट रंजक वे होते हैं जिन्हें कपड़े पर लगाने के लिए पहले धातु आयन का उपयोग करना पड़ता है. धातु आयन रंग को कपड़े पर मजबूत से बांधते हैं.
🎯 Exam Tip: मॉडेण्ट रंजक का उपयोग उन रेशों के लिए होता है जो सीधे रंजक को अवशोषित नहीं कर पाते. मॉडेण्ट रंग को स्थिरता और चमक प्रदान करते हैं.
Question 9. ट्राइफेनिलमेथेन रंजक क्या होते हैं? इनके उदाहरण दीजिए।
Answer: ट्राइफेनिलमेथेन रंजक (Triphenyl Methane Dyes) ऐसे रंग होते हैं जो ट्राइफेनिलमेथेन के एमिनो यौगिकों से बनते हैं. ये बहुत चमकीले और गहरे रंग के होते हैं और इनका उपयोग अक्सर ऊन, रेशम और कपास जैसी चीजों को रंगने के लिए किया जाता है. ये रंग स्थिरता और सुंदरता के लिए जाने जाते हैं.
उदाहरणार्थ:
\[
\text{मैलाकाइट ग्रीन: बेंजीन वलयों पर जुड़े -N(CH}_3\text{)}_2\text{ समूह, जो एक केंद्रीय कार्बन से जुड़े हैं, और एक क्लोरीन आयन (Cl}^{-})\text{ }
\]
In simple words: ट्राइफेनिलमेथेन रंजक गहरे और चमकीले रंग होते हैं जो ट्राइफेनिलमेथेन से बनते हैं. वे कपड़ों को रंगने के लिए उपयोग होते हैं.
🎯 Exam Tip: मैलाकाइट ग्रीन एक प्रसिद्ध ट्राइफेनिलमेथेन रंजक है जिसका उपयोग अक्सर रेशम और ऊन को चमकीले हरे रंग में रंगने के लिए किया जाता है.
Question 10. वेट रंजक क्या होते हैं? इनके उदाहरण दीजिए।
Answer: वेट रंजक (Vat Dyes) सबसे पुराने ज्ञात रंजक हैं. ये ऐसे रंग होते हैं जो पानी में घुलनशील नहीं होते हैं. इन्हें कपड़े पर लगाने के लिए पहले इन्हें किसी रासायनिक प्रक्रिया से पानी में घुलनशील, रंगहीन रूप में बदलना पड़ता है. फिर इस रंगहीन घोल में कपड़े को भिगोया जाता है. कपड़े को हवा में सुखाने पर, रंगहीन रूप हवा के ऑक्सीजन से मिलकर फिर से रंगीन और अघुलनशील रूप में बदल जाता है, जो कपड़े पर स्थायी रूप से चिपक जाता है.
उदाहरणार्थ:
इण्डिगो रंजक
In simple words: वेट रंजक पानी में नहीं घुलते. इन्हें पहले घुलनशील बनाया जाता है, कपड़े पर लगाया जाता है, और फिर हवा में वापस रंगीन और स्थायी हो जाते हैं.
🎯 Exam Tip: वेट रंजक अपनी बेहतरीन रंग स्थिरता के लिए जाने जाते हैं, खासकर धुलाई और प्रकाश के प्रति, जिससे रंग लंबे समय तक फीका नहीं पड़ता.
Rbse Class 12 Chemistry Chapter 17 लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 2. साबुन तथा अपमार्जक में अन्तर समझाइए।
Answer:
| क्र. सं. | साबुन | अपमार्जक |
|---|---|---|
| 1. | ये दुर्बल अम्ल (स्टीयरिक अम्ल, पामिटिक अम्ल) तथा प्रबल क्षार (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) के लवण होते हैं। | ये प्रबल अम्ल (प्रतिस्थापित सल्फोनिक अम्ल, पामिटिक अम्ल) तथा प्रबल क्षार (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) के लवण हैं। |
| 2. | साबुन का जलीय विलयन क्षारीय होता है। | इनका जलीय विलयन उदासीन होता है। |
| 3. | इनके द्वारा रेशमी तथा ऊनी वस्त्रों की सफाई नहीं की जा सकती है। | सभी प्रकार के रेशों की सफाई की जा सकती है। |
| 4. | कठोर जल में उपस्थित \( \text{Ca}^{2+} \) व \( \text{Mg}^{2+} \) आयन साबुन द्वारा अवक्षेपित हो जाते हैं। | अपमार्जक अवक्षेप नहीं बनाते हैं फलस्वरूप कठोर जल में भी उपयोगी हैं। |
In simple words: साबुन कमजोर अम्लों और मजबूत क्षार से बनते हैं, जो कठोर पानी में ठीक से काम नहीं करते. अपमार्जक मजबूत अम्लों और क्षार से बनते हैं, जो कठोर पानी में भी अच्छे से सफाई करते हैं.
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि अपमार्जक की सफाई क्षमता साबुन से बेहतर क्यों है, खासकर कठोर जल में, क्योंकि अपमार्जक धातु आयनों के साथ अवक्षेप नहीं बनाते हैं.
Question 3. मिशेल निर्माण द्वारा साबुन तथा अपमार्जक की क्रिया समझाइए।
Answer: साबुन और अपमार्जक दोनों मिशेल बनाकर गंदगी साफ करते हैं. इनके अणु में दो भाग होते हैं: एक जल-विरोधी (hydrophobic) लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ और एक जल-प्रेमी (hydrophilic) ध्रुवीय सिर. जब साबुन को पानी में मिलाते हैं, तो जल-विरोधी पूँछें अंदर की ओर मुड़ जाती हैं और जल-प्रेमी सिर बाहर पानी की ओर रहते हैं. यह गोलाकार संरचना मिशेल कहलाती है. जब कपड़े पर गंदगी (तेल या ग्रीस) होती है, तो मिशेल की जल-विरोधी पूँछें गंदगी में घुस जाती हैं और जल-प्रेमी सिर बाहर पानी में रहते हैं. इस तरह गंदगी मिशेल के अंदर फंस जाती है और पानी में घुल जाती है. फिर रगड़ने या धोने पर यह गंदगी पानी के साथ बह जाती है और कपड़ा साफ हो जाता है. यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है जिससे कपड़ा पूरी तरह साफ हो जाता है.
\[
\text{साबुन अणु: } \text{CH}_{3}(\text{CH}_{2})_{16}\text{COO}^{-}\text{Na}^{+}
\]
\[
\text{संरचना: लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ (जल-विरोधी) और -COO}^{-}\text{Na}^{+}\text{ सिर (जल-प्रेमी)}
\]
In simple words: साबुन के अणु पानी में एक गोलाकार समूह बनाते हैं जिसे मिशेल कहते हैं. मिशेल की पूँछ गंदगी को पकड़ती है और सिर पानी में घुल जाता है, जिससे गंदगी साफ हो जाती है.
🎯 Exam Tip: मिशेल निर्माण साबुन और अपमार्जकों की सफाई क्रिया का आधार है, यह समझना महत्वपूर्ण है कि जल-विरोधी और जल-प्रेमी भाग कैसे काम करते हैं.
Question 5. धनायनी, ऋणायनी एवं उदासीन अपमार्जकों को सक्दाहरण समझाइए।
Answer: अपमार्जक उनकी आयनिक प्रकृति के आधार पर तीन प्रकार के होते हैं: धनायनी, ऋणायनी और अनायनिक (उदासीन).
**धनायनी अपमार्जक (Cationic Detergents):** इन अपमार्जकों में सफाई करने वाला हिस्सा धनात्मक आवेशित होता है. इनमें लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला होती है और नाइट्रोजन परमाणु पर धनात्मक आवेश होता है. इन्हें आमतौर पर केश कंडीशनर में और जीवाणुनाशक के रूप में उपयोग किया जाता है क्योंकि इनमें कीटाणु मारने वाले गुण होते हैं. हालांकि, ये थोड़े महंगे होते हैं.
उदाहरणार्थ:
\[
\text{सेटिलट्राइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड: } \text{CH}_{3}(\text{CH}_{2})_{15}\text{-N}^{+}(\text{CH}_{3})_{3}\text{Br}^{-}
\]
**ऋणायनी अपमार्जक (Anionic Detergents):** इन अपमार्जकों में सफाई करने वाला हिस्सा ऋणात्मक आवेशित होता है. ये लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाले अल्कोहल या हाइड्रोकार्बन के सल्फोनेटेड यौगिकों से बनते हैं. इनका उपयोग मुख्य रूप से कपड़े धोने, बर्तन साफ करने और टूथपेस्ट में भी किया जाता है. ये अपमार्जक कठोर जल में भी प्रभावी होते हैं.
उदाहरणार्थ:
\[
\text{सोडियम डोडेसिलबेन्जीन सल्फोनेट: } \text{CH}_{3}(\text{CH}_{2})_{11}\text{-बेंजीन रिंग-SO}_{3}^{-}\text{Na}^{+}
\]
In simple words: धनायनी अपमार्जक में धनात्मक आवेश होता है (जैसे कंडीशनर), ऋणायनी अपमार्जक में ऋणात्मक आवेश होता है (जैसे कपड़े धोने का पाउडर). उदासीन अपमार्जक बिना किसी आवेश के होते हैं और पृष्ठ सक्रिय गुण दिखाते हैं.
🎯 Exam Tip: अपमार्जकों का वर्गीकरण उनकी रासायनिक संरचना और आयनिक प्रकृति पर आधारित होता है, जो उनके उपयोग और गुणों को निर्धारित करता है.
Question 6. फिनॉल्फ्थैलीन किस श्रेणी का रंजक है। इसकी संरचना बनाइए।
Answer: फिनॉल्फ्थैलीन थैलीन वर्ग का रंजक है। इसकी संरचना नीचे दी गई है:
फिनॉल्फ्थैलीन एक प्रकार का रंजक है जिसका उपयोग आमतौर पर सूचक के रूप में किया जाता है, खासकर अम्लीय और क्षारीय विलयनों को पहचानने के लिए। इसकी संरचना में दो फीनॉल समूह और एक थैलीन समूह जुड़ा होता है, जिससे यह रंगीन गुण दिखाता है।
In simple words: फिनॉल्फ्थैलीन एक डाई है जिसका इस्तेमाल एसिड और बेस को पहचानने के लिए किया जाता है. इसका एक खास केमिकल स्ट्रक्चर होता है.
🎯 Exam Tip: जब भी किसी रंजक की संरचना बनाने को कहा जाए, तो रिंग्स, बॉन्ड और फंक्शनल ग्रुप्स को स्पष्ट रूप से लेबल करें ताकि सटीकता बनी रहे।
Question 8. रंजक तथा वर्णक में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: रंजक और वर्णक में मुख्य अंतर उनकी घुलनशीलता में होता है। रंजक वे पदार्थ होते हैं जो पानी या अन्य घोलकों में घुल जाते हैं, जबकि वर्णक पानी या अन्य घोलकों में अघुलनशील रहते हैं। वर्णक पदार्थों की सतह पर एक परत बनाकर रंगाई करते हैं, वहीं रंजक घोल से अवशोषित होकर रंगाई करते हैं। रंजक आमतौर पर कार्बनिक यौगिक होते हैं, जबकि वर्णक अकार्बनिक यौगिक या भारी जहरीली धातुएँ हो सकती हैं।
| क्र.सं. | रंजक (Dyes) | वर्णक (Pigments) |
|---|---|---|
| 1. विलेयता (Solubility) | बहुत से विलायकों में विलेयशील | जल एवं अधिकांश विलायकों में अविलेय |
| 2. प्रकाश संवेदन (Photo sensitivity) | प्रकाश के सम्पर्क में रहने से फीके पड़ जाते हैं और रंग हल्का होने लगता है। | ये अपेक्षाकृत प्रकाश से कम प्रभावित होते हैं। |
| 3. संख्या (Number) | ये बहुत अधिक संख्या में होते हैं और अनेक वर्गों में वर्गीकृत किए जाते हैं। | ये संख्या में कम होते हैं एवं वर्गीकृत भी नहीं किए जाते हैं। |
| 4. उत्पाद प्रतिरोध (Product Resistance) | ये वर्णकों की तुलना में कम प्रतिरोधी होते हैं जैसे विलायकों से बहुत प्रभावित होते हैं। | इनका प्रतिरोध बहुत उच्च होता है जैसे विलायकों से अप्रभावी रहते हैं। |
| 5. रासायनिक संगठन (Chemical Composition) | ये कार्बनिक यौगिक होते हैं। | ये सामान्यतः अकार्बनिक यौगिक होते हैं। या भारी जहरीली धातुएँ होती हैं। |
| 6. स्थिरता (Stability) | ये बहुत अधिक स्थायी या स्थिर नहीं होते हैं। | ये उच्च स्थायित्व प्रदर्शित करते हैं। |
| 7. ज्वलन (Ignition) | ये ज्वलनशील होते हैं। | ज्वलनशील नहीं होते हैं। |
In simple words: रंजक घुल जाते हैं और चीजों को रंगते हैं, जबकि वर्णक घुलते नहीं और सतह पर चिपक कर रंग देते हैं। रंजक कोटिंग और पेंट में उपयोग होते हैं.
🎯 Exam Tip: जब भी अंतर स्पष्ट करने को कहा जाए, तो हमेशा एक टेबल का उपयोग करें। यह आपके उत्तर को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाता है।
Question 9. रंजकों के सामान्य लक्षण समझाइए।
Answer: रंजक ऐसे पदार्थ होते हैं जिनमें कुछ खास गुण होने चाहिए ताकि वे प्रभावी रूप से चीजों को रंग सकें। एक अच्छे रंजक के मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- इसमें कोई खास रंग होना चाहिए जो इसे दृश्यमान बनाता हो।
- इसमें कपड़े या रेशे को सीधे या दूसरे तरीके से रंगने की क्षमता होनी चाहिए ताकि रंग मजबूती से जुड़ सके।
- रंजक को प्रकाश से प्रभावित नहीं होना चाहिए, यानी इसका रंग धूप में फीका नहीं पड़ना चाहिए।
- यह पानी, हल्के एसिड और बेस, गर्मी, ड्राई क्लीनिंग में इस्तेमाल होने वाले सॉल्वैंट्स और साबुन जैसी चीजों के प्रति प्रतिरोधी होना चाहिए, ताकि रंग लंबे समय तक टिका रहे।
In simple words: रंजक वो होते हैं जो चीजों को रंगते हैं। अच्छे रंजक का अपना रंग होता है, कपड़े को रंगने की ताकत होती है, धूप में फीका नहीं पड़ता और धुलाई से खराब नहीं होता.
🎯 Exam Tip: रंजकों के लक्षणों को सूचीबद्ध करते समय, उनके रासायनिक और भौतिक गुणों दोनों को शामिल करें, जैसे रंग की स्थिरता और घुलनशीलता।
Question 2. अपमार्जक क्या है? इनका वर्गीकरण कीजिए तथा अपमार्जन क्रिया समझाइए।
Answer: अपमार्जक (डिटर्जेंट) वे पदार्थ होते हैं जो लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाले सल्फ्यूरिक अम्ल या सल्फोनिक अम्लों के व्युत्पन्न होते हैं। इन्हें साबुन-रहित साबुन भी कहा जाता है क्योंकि ये साबुन की तरह ही सफाई का काम करते हैं लेकिन कठोर जल में भी प्रभावी होते हैं। अपमार्जकों का वर्गीकरण उनकी आयनिक प्रकृति के आधार पर किया जाता है। अपमार्जकों के उदाहरणों में सोडियम लॉरिल सल्फेट शामिल है.
अपमार्जकों के मुख्य प्रकार:
(i) ऋणायनी अपमार्जक (Anionic Detergents): ये अपमार्जक लंबी श्रृंखला वाले ऐल्कोहॉल या हाइड्रोकार्बन के सल्फोनेटित व्युत्पन्न होते हैं। इनमें अणु का ऋणात्मक हिस्सा सफाई का काम करता है। उदाहरण के लिए, ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनेट के सोडियम लवण। ये आमतौर पर घरेलू सफाई और टूथपेस्ट में इस्तेमाल होते हैं।
उदाहरणार्थ:
(ii) धनायनी अपमार्जक (Cationic Detergents): ये अमोनियम लवण होते हैं जिनमें एक लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला और नाइट्रोजन परमाणु पर धनात्मक आवेश होता है। इनका धनात्मक भाग सफाई के लिए जिम्मेदार होता है। सेटिलट्राइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड इसका एक उदाहरण है, जो हेयर कंडीशनर में इस्तेमाल होता है। ये कीटाणुनाशक गुण रखते हैं और महंगे होते हैं।
उदाहरणार्थ:
(iii) अन-आयनिक अपमार्जक (Non-ionic Detergents): ये अपमार्जक उदासीन अणु होते हैं जिनमें कोई आवेश नहीं होता है। इनमें सफाई का काम एक बहुक्रियात्मक समूह द्वारा होता है जो हाइड्रोजन बंधन से पानी में घुलता है। उदाहरण के लिए, पॉलीहाइड्रॉक्सी ऐल्कोहॉल के एस्टर।
उदाहरणार्थ:
अपमार्जन क्रिया (Cleansing Action): अपमार्जक के अणु में दो भाग होते हैं- एक जलरागी (hydrophilic) शीर्ष और एक जलविरोधी (hydrophobic) पूंछ। जब अपमार्जक को पानी में मिलाया जाता है, तो अणु एक गोलाकार संरचना बनाते हैं जिसे मिशेल कहते हैं। इसमें जलविरोधी पूंछ अंदर की ओर होती है और जलरागी शीर्ष बाहर की ओर। जब गंदे कपड़े को इसमें डुबोया जाता है, तो तेल और गंदगी मिशेल के अंदर फंस जाती है। फिर पानी से धोने पर मिशेल गंदगी के साथ बाहर निकल जाता है, जिससे कपड़ा साफ हो जाता है।
In simple words: अपमार्जक सफाई करने वाले केमिकल होते हैं, जो साबुन जैसे होते हैं लेकिन कठोर पानी में भी काम करते हैं। ये तीन तरह के होते हैं: ऋणात्मक, धनात्मक और बिना चार्ज वाले। ये मिशेल बनाकर गंदगी को हटाते हैं।
🎯 Exam Tip: अपमार्जकों के वर्गीकरण को उदाहरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी आयनिक प्रकृति सीधे उनके उपयोग से संबंधित होती है। अपमार्जन क्रिया में मिशेल बनने की प्रक्रिया को रेखाचित्र के साथ समझाना बेहतर होता है।
Question 3. रंजकों के संरचनात्मक लक्षणों के लिए विट सिद्धान्त को समझाइए।
Answer: विट का सिद्धांत रंजकों के रंग और रासायनिक संरचना के बीच संबंध की व्याख्या करता है। यह सिद्धांत बताता है कि रंगीन यौगिकों में कुछ खास समूह मौजूद होते हैं जिन्हें वर्णमूलक (क्रोमोफोर) कहते हैं, और ये समूह ही यौगिक को रंग देते हैं। जब कोई वर्णमूलक मौजूद होता है तो यौगिक में रंग दिखाई देता है।
1. वर्णमूलक (Chromophores): ये असंतृप्त या बहु-बंध वाले समूह होते हैं जो यौगिक को रंगीन बनाते हैं। जितनी अधिक संख्या में ये समूह होते हैं, उतना ही गहरा रंग होता है।
उदाहरणार्थ: नाइट्रो \( (-\text{NO}_{2}) \), नाइट्रोसो \( (-\text{N}=\text{O}) \), ऐजो \( (-\text{N}=\text{N}-) \), कार्बोनील \( (>\text{C}=\text{O}) \), एथिलीनिक \( (>\text{C}=\text{C}<) \) और p-क्विनोनॉइड समूह।
2. वर्णजनक (Chronogen): ऐसे यौगिक जिनमें वर्णमूलक समूह होते हैं, उन्हें वर्णजनक कहा जाता है। वर्णमूलक समूह जैसे \( -\text{NO}_{2} \), \( -\text{N}=\text{N}- \) स्वयं रंग प्रदान करने में सक्षम होते हैं।
उदाहरणार्थ:
| वर्णजन | वर्णमूलक | रंग |
|---|---|---|
| नाइट्रोबेन्जीन | \( -\text{NO}_{2} \) | पीला |
| ऐजोबेन्जीन | \( -\text{N}=\text{N}- \) | लाल |
3. वर्णवर्द्धक (Auxochromes): ये समूह खुद से रंग नहीं देते, लेकिन जब इन्हें किसी वर्णमूलक वाले यौगिक में जोड़ा जाता है, तो ये रंग को गहरा कर देते हैं या यौगिक को रंगीन बना देते हैं। ये रंग को कपड़े से बांधने में भी मदद करते हैं। \( -\text{NH}_{2} \) (अमीनो) और \( -\text{OH} \) (हाइड्रॉक्सिल) समूह इसके उदाहरण हैं। आधुनिक सिद्धांतों में, विट का सिद्धांत संयोजकता बंध सिद्धांत और आणविक ऑर्बिटल सिद्धांत पर आधारित है।
उदाहरणार्थ: ऐजोबेन्जीन एक रंगहीन यौगिक है, लेकिन जब इसमें \( -\text{NH}_{2} \) समूह जोड़ा जाता है, तो p-ऐमीनोऐजोबेन्जीन एक पीला रंजक बन जाता है।
In simple words: विट का सिद्धांत बताता है कि रंगीन यौगिकों में खास रंग देने वाले समूह होते हैं जिन्हें वर्णमूलक कहते हैं। कुछ समूह रंग को गहरा करते हैं, जिन्हें वर्णवर्द्धक कहते हैं।
🎯 Exam Tip: विट के सिद्धांत की व्याख्या करते समय, वर्णमूलक (क्रोमोफोर) और वर्णवर्द्धक (ऑक्सोक्रोम) के बीच के अंतर को स्पष्ट करना और प्रत्येक के उदाहरण देना महत्वपूर्ण है।
Question 4. उपयोगिता के आधार पर रंजकों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: रंजकों का उपयोग कपड़ों, रेशों, कागज, चमड़े, दीवारों और भोजन जैसी विभिन्न चीजों को रंगने के लिए किया जाता है। उनकी उपयोगिता के आधार पर रंजकों को कई श्रेणियों में बांटा गया है:
1. सीधे रंजक (Direct Dyes): इन रंजकों को सीधे गर्म पानी के घोल में डुबोकर कपड़ों को रंगा जाता है और फिर सुखाया जाता है। ये सूत, रेयॉन, ऊन और रेशम को रंगने के लिए इस्तेमाल होते हैं।
उदाहरणार्थ: मार्टियस पीला, कांगोरेड।
2. अम्लीय रंजक (Acidic Dyes): ये रंजक हल्के अम्लीय माध्यम में उपयोग किए जाते हैं और ऊन, रेशम, नायलॉन जैसे रेशों को रंगने के लिए प्रभावी होते हैं। ये उनके लवण बनाते हैं।
उदाहरणार्थ: नारंगी-1।
3. क्षारीय रंजक (Basic Dyes): इन रंजकों में अमीनो समूह \( (-\text{NH}_{2}) \) होता है, जो अम्ल के साथ मिलकर घुलनशील लवण बनाते हैं। ये नायलॉन और पॉलिएस्टर जैसे कपड़ों को रंगने के लिए उपयोग होते हैं।
उदाहरणार्थ: ऐनिलीन यलो, मैलैकाइट ग्रीन।
4. प्रकीर्णन रंजक (Scattering Dyes): इन रंजकों के छोटे कण कपड़ों पर फैलकर उन्हें रंगते हैं। ये पॉलिएस्टर, नायलॉन और पॉलीएक्रिलोनिट्राइल जैसे सिंथेटिक रेशों को रंगने के लिए इस्तेमाल होते हैं।
उदाहरणार्थ: एंथ्राक्विनोन रंजक।
5. रेशा-क्रियाशील रंजक (Fibre-active Dyes): ये रंजक सीधे कपड़ों के हाइड्रॉक्सिल या अमीनो समूहों के साथ मजबूत रासायनिक बंधन बनाते हैं, जिससे स्थायी और पक्के रंग मिलते हैं।
उदाहरणार्थ: प्रोशनलाल।
6. अंतर्निहित रंजक (Inherent Dyes): इन रंजकों को रंगाई प्रक्रिया के दौरान ही कपड़े पर संश्लेषित किया जाता है। कपड़ा दो घोलों में डुबोया जाता है जहाँ रंजक कपड़े के साथ बंधन बनाता है। ये रंजक आमतौर पर बहुत पक्के नहीं होते हैं।
उदाहरणार्थ: फीनॉल या नैफ्थॉल विलयन के साथ भीगे हुए रेशों को डाइऐजोनियम लवणों के विलयन में डालने पर एजोरंजक रेशों पर जमा हो जाते हैं।
7. वेट रंजक (Wet Dyes): ये सबसे पुराने ज्ञात रंजक हैं। इनमें अघुलनशील रंजक को पहले घुलनशील, रंगहीन रूप में बदला जाता है, फिर रेशों को भिगोया जाता है, और फिर हवा में सुखाकर उसका ऑक्सीकरण किया जाता है। ऑक्सीकरण से रंगहीन रूप रंगीन, अघुलनशील रूप में बदल जाता है।
उदाहरणार्थ: इंडिगो रंजक।
8. मॉर्डेन्ट रंजक (Mordant Dyes): इन रंजकों का उपयोग ऊनी कपड़ों को रंगने के लिए होता है। इनमें कपड़े को पहले किसी धातु आयन के घोल में डुबोया जाता है, फिर रंजक घोल में डुबोया जाता है। धातु आयन और रंजक के बीच एक बंधन बनता है। इनकी खासियत यह है कि एक ही रंजक अलग-अलग धातु आयनों के साथ अलग-अलग रंग देता है।
उदाहरणार्थ: ऐलिजरीन रंजक एल्यूमीनियम आयनों के साथ गुलाबी रंग देता है, जबकि बेरियम आयनों के साथ नीला रंग देता है।
In simple words: रंजकों को उनके इस्तेमाल के आधार पर बांटा जाता है, जैसे कपड़े को सीधे रंगने वाले, एसिड से रंगने वाले, बेस से रंगने वाले, बिखर कर रंगने वाले, कपड़े से जुड़कर रंगने वाले, कपड़े में ही बनने वाले, और पुराने तरीके से रंगने वाले रंजक.
🎯 Exam Tip: उपयोगिता के आधार पर रंजकों के वर्गीकरण को समझाते समय, प्रत्येक श्रेणी के मुख्य उपयोग और कम से कम एक उदाहरण देना सुनिश्चित करें।
Question 5. संरचना के आधार पर रंजकों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: रंजकों को उनकी रासायनिक संरचना के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। यह वर्गीकरण रंजकों को समझने और उनके गुणों का अनुमान लगाने में मदद करता है:
1. नाइट्रो और नाइट्रोसो रंजक (Nitro and Nitroso Dyes): इन रंजकों में नाइट्रो \( (-\text{NO}_{2}) \) या नाइट्रोसो \( (-\text{N}=\text{O}) \) समूह होते हैं। ये समूह वर्णमूलक के रूप में कार्य करते हैं।
उदाहरणार्थ: पिक्रिक अम्ल, पक्का हरा -O।
2. डाइफेनिल मेथेन रंजक (Diphenyl Methane Dyes): इन रंजकों का मुख्य ढाँचा डाइफेनिलमेथेन होता है। ये रेशम, ऊन, जूट, कागज और चमड़े जैसी चीजों को रंगने के लिए उपयोग होते हैं।
उदाहरणार्थ: ऑरेमीन -O।
3. ट्राइफेनिल मेथेन रंजक (Triphenyl Methane Dyes): ये रंजक ट्राइफेनिल मेथेन के अमीनो व्युत्पन्न होते हैं। मेलेकाइट ग्रीन एक उपयोगी रंजक है जो ऊन और रेशम को सीधे रंगता है। सूती कपड़ों को टेनिन के साथ रंगने के लिए भी इसका उपयोग होता है।
उदाहरणार्थ: मैलैकाइट ग्रीन।
In simple words: रंजकों को उनकी बनावट के हिसाब से भी बांटा जाता है। इसमें नाइट्रो, डाइफेनिल और ट्राइफेनिल मेथेन रंजक जैसे प्रकार होते हैं, जो अपनी खास केमिकल बनावट के कारण रंग देते हैं।
🎯 Exam Tip: संरचनात्मक वर्गीकरण के लिए, प्रत्येक वर्ग के मुख्य रासायनिक समूह को स्पष्ट करें और उदाहरण के रूप में कम से कम एक रंजक की संरचना या नाम दें।
Question 5. ऐजोरंजक (Azo Dyes) क्या होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: ऐजोरंजक संश्लेषित रंगों का एक बहुत बड़ा समूह है जिसमें लगभग सभी रंगों के डाई शामिल होते हैं। इन रंगों में, ऐजो समूह (\( -N=N- \)) वर्णमूलक (Chromophore) के रूप में कार्य करता है, जो रंग के लिए जिम्मेदार होता है। वहीं, \( -NH_2 \), \( -NHR \), \( -NR_2 \), \( -OH \) जैसे समूह वर्णवर्द्धक (Auxochrome) होते हैं, जो रंग को गहरा करते हैं या उसे स्थायी बनाते हैं। लगभग सभी ऐजोरंजक पक्के होते हैं और आसानी से fading नहीं होते हैं। उदाहरण के लिए, मेथिल ऑरेन्ज, ऐनिलीन यलो और सूडान-1 प्रमुख ऐजोरंजक हैं। इन रंजकों का उपयोग textile उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है।
🎯 Exam Tip: ऐजो रंगों को उनके \( -N=N- \) समूह और सहायक \( -OH \) या \( -NH_2 \) समूहों से पहचानना महत्वपूर्ण है। इन समूहों की उपस्थिति ही रंग की प्रकृति और स्थायीत्व को निर्धारित करती है।
Question 6. इण्डिगो रंजक (Indigo Dye) क्या है? इसकी संरचना बनाइए।
Answer: इण्डिगो रंजक, जिसे नील भी कहते हैं, सबसे प्राचीन कार्बनिक रंजक में से एक है। यह ब्रिटिश काल में 1906 के बंगाल विभाजन का एक मुख्य कारण बना था, जहाँ किसानों ने नील की खेती न करने के लिए आंदोलन किया था। इसे इण्डिगौफेरा (Indigophera) पौधे से प्राप्त किया जाता है। इसकी संरचना इस प्रकार है:
🎯 Exam Tip: इण्डिगो को एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक डाई के रूप में याद रखें और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी ध्यान दें।
Question 7. ऐन्थ्राक्किनोन रंजक (Anthraquinone Dyes) क्या होते हैं? ऐलिजरीन के उदाहरण से समझाइए कि यह धातु आयनों के साथ कैसे भिन्न रंग प्रदान करता है।
Answer: ऐन्थ्राक्किनोन रंजक वे होते हैं जिनमें ऐन्थ्राक्किनोन नाभिक होता है। इस वर्ग का सबसे महत्वपूर्ण रंजक ऐलिजरीन है, जिसे मजीठ की जड़ों से प्राप्त किया जाता है। ऐलिजरीन का उपयोग मोर्डेंट रंजक के रूप में किया जाता है, जिसका अर्थ है कि यह धातु आयनों के साथ मिलकर कपड़े को रंगता है। यह विभिन्न धातु आयनों के साथ अलग-अलग रंग देता है:
- \( Al^{3+} \) (गुलाबी): ऐलुमिनियम आयन के साथ यह गुलाबी रंग देता है।
- \( Fe^{3+} \) (काला बैंगनी): आयरन आयन के साथ यह काला बैंगनी रंग देता है।
- \( Cr^{3+} \) (भूरा बैंगनी): क्रोमियम आयन के साथ यह भूरा बैंगनी रंग देता है।
- \( Ba^{2+} \) (नीला): बेरियम आयन के साथ यह नीला रंग देता है।
- \( Mg^{2+} \) (बैंगनी): मैग्नीशियम आयन के साथ यह बैंगनी रंग देता है।
In simple words: ऐन्थ्राक्किनोन रंग एक विशेष प्रकार के रासायनिक ढांचे वाले होते हैं। ऐलिजरीन एक अच्छा उदाहरण है, जो मजीठ के पौधे से मिलता है। यह अलग-अलग धातुओं से मिलकर कपड़े को अलग-अलग सुंदर रंग देता है, जैसे एल्यूमीनियम से गुलाबी और लोहे से काला बैंगनी।
🎯 Exam Tip: ऐलिजरीन की संरचना और विभिन्न धातु आयनों के साथ इसके रंगों को याद रखें, क्योंकि यह मोर्डेंट रंजकों का एक क्लासिक उदाहरण है।
Question 8. विषम चक्रीय रंजक (Heterocyclic Dyes) क्या होते हैं? एक्रीफ्लेविन के उदाहरण से समझाइए कि इनके क्या उपयोग हैं।
Answer: विषम चक्रीय रंजक वे होते हैं जिनके अणुओं में कम-से-कम एक विषम चक्रीय वलय (जैसे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन या सल्फर परमाणु वाला वलय) मौजूद होता है। यह रंजकों का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण समूह है, जिसमें लगातार नए रंजक बनाए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, एक्रीफ्लेविन एक्रीडीन से बना एक रंजक है, जिसका उपयोग कैलिको प्रिंटिंग, सामान्य रंगाई, कीटनाशक के रूप में और चिकित्सा में भी किया जाता है। विषम चक्रीय वलय की उपस्थिति इन रंजकों को विशेष गुण प्रदान करती है।
🎯 Exam Tip: विषम चक्रीय रंजकों में विषम परमाणु (जैसे N, O, S) की उपस्थिति को पहचानें और एक्रीफ्लेविन जैसे उदाहरणों के उपयोगों को याद रखें।
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