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Detailed Chapter 15 बहुलक RBSE Solutions for Class 12 Chemistry
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Class 12 Chemistry Chapter 15 बहुलक RBSE Solutions PDF
Exercise 12 Chemistry Chapter 15 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. बहुलकों के बारे में क्या सत्य नहीं है
(a) बहुलक कम अणुभार वाले होते हैं।
(b) बहुलक कोई आवेश नहीं रखते हैं।
(c) बहुलक की श्यानता उच्च होती हैं।
(d) बहुलक प्रकाश फैलाते हैं।
Answer: (a) बहुलक कम अणुभार वाले होते हैं।
In simple words: बहुलक वे बड़े अणु होते हैं जिनका अणुभार बहुत अधिक होता है। इसलिए, यह कहना गलत है कि उनका अणुभार कम होता है।
🎯 Exam Tip: बहुलकों के गुणधर्मों पर आधारित प्रश्नों में, ध्यान रखें कि वे उच्च अणुभार वाले होते हैं और आमतौर पर प्रकाश प्रकीर्णन (light scattering) दिखाते हैं, जो उनकी उच्च श्यानता का एक कारण है।
Question 2. बहुलीकरण की विधि के आधार पर, बहुलकों को वर्गीकृत किया गया है
(a) केवल योगज बहुलकों के रूप में
(b) केवल संघनन बहुलकों के रूप में
(c) योगज व संघनन दोनों बहुलकों के रूप में
(d) सहबहलकों के रूप में
Answer: (c) योगज व संघनन दोनों बहुलकों के रूप में
In simple words: बहुलीकरण की प्रक्रिया को दो मुख्य तरीकों में बांटा जाता है: योगज बहुलीकरण (जिसमें अणु जुड़ते हैं) और संघनन बहुलीकरण (जिसमें छोटे अणु बाहर निकलते हैं)।
🎯 Exam Tip: बहुलकों के वर्गीकरण को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर उनके निर्माण की विधि के आधार पर। योगज बहुलकीकरण में कोई सह-उत्पाद नहीं बनता, जबकि संघनन बहुलकीकरण में जल जैसे छोटे अणु निकलते हैं।
Question 4. निम्न में से संघनन बहुलक है
(a) डेक्रॉन
(b) टेफ्लॉन
(c) PVC
(d) पॉलीथीन
Answer: (a) डेक्रॉन
In simple words: डेक्रॉन एक प्रकार का बहुलक है जो संघनन बहुलीकरण प्रक्रिया से बनता है, जहाँ छोटे अणु जैसे जल निष्कासित होते हैं।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि कौन से बहुलक योगज बहुलीकरण से बनते हैं (जैसे टेफ्लॉन, PVC, पॉलीथीन) और कौन से संघनन बहुलीकरण से (जैसे डेक्रॉन, नायलॉन)।
Question 5. बहुलकों के बारे में क्या सत्य नहीं है
(a) ऐथीन
(b) स्टाइरीन
(c) आइसोप्रीन
(d) ब्यूटाडाइईन
Answer: (c) आइसोप्रीन
In simple words: यह प्रश्न गलत तरीके से तैयार किया गया है क्योंकि दिए गए विकल्प बहुलकों के नाम नहीं हैं, बल्कि ये एकलक (monomers) हैं जो बहुलक बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रश्नों को ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि आप बहुलक और उनके एकलकों के बीच का अंतर समझते हैं।
Question 6. निम्न में से किसमें ऐस्टर बन्ध मिलता है
(a) नाइलॉन
(b) बैकेलाइट
(c) टेरिलीन
(d) रबर
Answer: (c) टेरिलीन
In simple words: टेरिलीन एक पॉलीऐस्टर है, और "पॉलीऐस्टर" नाम ही बताता है कि इसमें ऐस्टर समूह बार-बार आते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न बहुलकों में पाए जाने वाले विशिष्ट रासायनिक बंधों को जानना महत्वपूर्ण है (जैसे नाइलॉन में ऐमाइड बंध, टेरिलीन में ऐस्टर बंध)।
Question 7. टेरिलीन संघनन बहुलक है-एथिलीन ग्लाइकॉल व
(a) टरथैलिक अम्ल
(b) थैलिक अम्ल
(c) बेन्जोइक अम्ल
(d) ऐसीटिक अम्ल
Answer: (a) टरथैलिक अम्ल
In simple words: टेरिलीन, जिसे डेक्रॉन भी कहते हैं, एथिलीन ग्लाइकॉल और टरथैलिक अम्ल के संघनन बहुलीकरण से बनता है।
🎯 Exam Tip: सामान्य बहुलकों और उनके एकलकों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर संघनन बहुलकों के लिए जहाँ दो या दो से अधिक अलग-अलग एकलक अणु होते हैं।
Question 8. नाइलॉन-6 का एकलक है
(a) ऐडिपिक अम्ल
(b) केप्रोलैक्टम
(c) 1,3 ब्यूटाडाइईन
(d) क्लोरोप्रीन
Answer: (b) केप्रोलैक्टम
In simple words: नाइलॉन-6 एक विशेष प्रकार का बहुलक है जो केवल एक ही प्रकार के एकलक, केप्रोलैक्टम, से बनता है।
🎯 Exam Tip: नाइलॉन-6 और नाइलॉन-6,6 जैसे समान नामों वाले बहुलकों के एकलकों को भ्रमित न करें, क्योंकि उनके एकलक अलग-अलग होते हैं।
Question 9. टेफ्लॉन बहुलक है
(a) टेट्राफ्लोरोऐथिलीन
(b) सेलुलोस
(c) पॉलीथीन
(d) नाइलॉन-6
Answer: (a) टेट्राफ्लोरोऐथिलीन
In simple words: टेफ्लॉन टेट्राफ्लोरोऐथिलीन नामक एकलक के बार-बार जुड़ने से बनता है, यह एक बहुत मजबूत और रासायनिक रूप से स्थिर बहुलक है।
🎯 Exam Tip: टेफ्लॉन के विशिष्ट उपयोगों (जैसे नॉन-स्टिक बर्तन) और उसके एकलक (टेट्राफ्लोरोऐथिलीन) को याद रखें।
RBSE Class 12 Chemistry Chapter 15 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 11. बहुलक को परिभाषित कीजिए।
Answer: बहुलक वे उच्च अणु संहति वाले यौगिक होते हैं, जो बहुत अधिक संख्या में छोटे-छोटे अणुओं (एकलकों) के आपस में जुड़ने से बनते हैं। इन छोटे अणुओं को एकलक कहा जाता है, जो बहुलकीकरण प्रक्रिया में दोहराई जाने वाली इकाइयाँ होती हैं।
In simple words: बहुलक बहुत बड़े अणु होते हैं जो कई छोटे अणुओं के एक साथ जुड़ने से बनते हैं।
🎯 Exam Tip: बहुलक की परिभाषा में "उच्च अणु संहति" और "एकलकों का दोहराव" जैसे प्रमुख शब्दों को शामिल करना सुनिश्चित करें।
Question 12. प्राकृतिक तथा कृत्रिम बहुलक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
Answer:
प्राकृतिक बहुलक: स्टॉर्च
कृत्रिम बहुलक: पॉलिथीन (पॉलीऐथिलीन)
प्राकृतिक बहुलक हमें प्रकृति से मिलते हैं, जबकि कृत्रिम बहुलक मानव निर्मित होते हैं।
In simple words: प्राकृतिक बहुलक का एक उदाहरण स्टॉर्च है, और कृत्रिम बहुलक का एक उदाहरण पॉलिथीन है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के बहुलकों के उदाहरण याद रखें, विशेष रूप से प्राकृतिक और कृत्रिम बहुलकों के बीच का अंतर।
Question 13. समबहुलक तथा सहबहुलक में एक अन्तर बताइए।
Answer: समबहुलक (Homopolymer) एक ही प्रकार के एकलकों से निर्मित होते हैं जबकि सहबहुलक (Copolymer) एक से अधिक प्रकार के एकलकों से निर्मित होते हैं। उदाहरण के लिए, पॉलीथीन एक समबहुलक है, जबकि नाइलॉन-6,6 एक सहबहुलक है।
In simple words: समबहुलक एक ही तरह के छोटे टुकड़ों से बनते हैं, जबकि सहबहुलक अलग-अलग तरह के छोटे टुकड़ों से बनते हैं।
🎯 Exam Tip: समबहुलक और सहबहुलक के बीच के अंतर को उनके एकलकों की संख्या और प्रकार के आधार पर स्पष्ट करें।
Question 15. धनायनी बहुलीकरण द्वारा किन एकलकों को बहुलीकरण होता है?
Answer: धनायनी बहुलीकरण द्वारा विनाइल एकलकों का बहुलीकरण होता है। यह एक विशेष प्रकार की योगात्मक बहुलीकरण प्रक्रिया है।
उदाहरणार्थ: आइसोब्यूटिलीन,
\[ \text{CH}_2 = \text{C} \begin{pmatrix} \text{CH}_3 \\ | \\ \text{CH}_3 \end{pmatrix} \]
In simple words: धनायनी बहुलीकरण से उन एकलकों का बहुलीकरण होता है जिनमें विनाइल समूह होता है, जैसे आइसोब्यूटिलीन।
🎯 Exam Tip: धनायनी बहुलीकरण में, सक्रिय केंद्र एक धनायन होता है, जो इलेक्ट्रॉन दान करने वाले समूहों वाले एकलकों के लिए अच्छा होता है।
Question 16. संख्या औसत अणुभार (\( \overline { M }_n \)) का सूत्र लिखिए।
Answer: संख्या औसत अणुभार (\( \overline { M }_n \)) का सूत्र निम्न है:
\[ \overline{M}_n = \frac{ \sum n_i m_i }{ \sum n_i } \]
यहाँ \( n_i \) विभिन्न मोलर द्रव्यमान \( m_i \) वाले बहुलक अणुओं की संख्या है। यह बहुलक के औसत आण्विक द्रव्यमान को दर्शाता है।
In simple words: संख्या औसत अणुभार निकालने के लिए, हर अणु के द्रव्यमान को उसकी संख्या से गुणा करके जोड़ते हैं, फिर कुल संख्या से भाग देते हैं।
🎯 Exam Tip: संख्या औसत अणुभार (\( \overline { M }_n \)) और भार औसत अणुभार (\( \overline { M }_w \)) के सूत्रों को स्पष्ट रूप से याद रखें, क्योंकि वे बहुलक के औसत आण्विक द्रव्यमान को मापने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 17. रबर के वल्कनीकरण में प्रयुक्त पदार्थ का नाम बताइए।
Answer: रबर के वल्कनीकरण में प्रयुक्त पदार्थ सल्फर (Sulphur) है। सल्फर रबर की श्रृंखलाओं के बीच क्रॉस-लिंक बनाने में मदद करता है।
In simple words: रबर को मजबूत बनाने के लिए उसमें सल्फर मिलाया जाता है, इस प्रक्रिया को वल्कनीकरण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: वल्कनीकरण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो प्राकृतिक रबर के गुणों में सुधार करती है, और सल्फर इसमें मुख्य अभिकर्मक है।
Question 18. निओप्रीन के एकलक का नाम लिखिए।
Answer: निओप्रीन के एकलक का नाम 2-क्लोरो-1, 3-ब्यूटाडाईन (2-Chloro-1, 3-butadiene) है। यह एक संश्लेषित रबर है।
\[ \text{CH}_2=\text{CH}-\text{C} \begin{pmatrix} \text{Cl} \\ || \\ \text{CH}_2 \end{pmatrix} \]
In simple words: निओप्रीन नाम के रबर का छोटा टुकड़ा या एकलक 2-क्लोरो-1, 3-ब्यूटाडाईन होता है।
🎯 Exam Tip: निओप्रीन के एकलक का संरचना सूत्र और नाम दोनों याद रखें, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण संश्लेषित रबर है।
Question 20. संश्लेषित जैव बहुलकों के दो उदाहरण दीजिए।
Answer: संश्लेषित जैव बहुलकों के दो उदाहरण प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल हैं। ये बहुलक जीवित प्रणालियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल दो ऐसे जैव बहुलक हैं जो जीवित चीजों में होते हैं।
🎯 Exam Tip: जैव बहुलक वे बहुलक होते हैं जो जीवित जीवों द्वारा उत्पादित होते हैं, और उनमें प्राकृतिक बहुलक (जैसे स्टार्च, सेल्युलोज) और जैव संश्लेषित बहुलक (जैसे प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल) दोनों शामिल हैं।
RBSE Class 12 Chemistry Chapter 15 लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 21. स्रोतों के आधार पर बहुलकों को कितने भागों में विभक्त किया गया है? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
Answer: स्रोतों/उत्पत्ति के आधार पर बहुलकों को मुख्य रूप से तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है:
1. प्राकृतिक बहुलक: ये बहुलक पौधों और जानवरों से प्राप्त होते हैं। उदाहरण: स्टार्च, सेल्युलोज, रबर।
2. संश्लेषित बहुलक: ये बहुलक प्रयोगशाला में मनुष्य द्वारा बनाए जाते हैं। उदाहरण: पॉलिथीन, PVC, नायलॉन-6,6।
3. अर्ध-संश्लेषित बहुलक: ये बहुलक प्राकृतिक बहुलकों में रासायनिक संशोधन करके बनाए जाते हैं। उदाहरण: सेल्युलोज एसीटेट (रेयॉन), सेल्युलोज नाइट्रेट।
In simple words: बहुलकों को उनके मिलने की जगह के अनुसार तीन तरह में बांटा जाता है: जो प्रकृति से मिलते हैं, जो इंसान बनाते हैं, और जो प्राकृतिक चीजों को थोड़ा बदलकर बनाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: बहुलकों के विभिन्न वर्गीकरणों को याद रखें, जैसे कि स्रोत के आधार पर, संरचना के आधार पर, या बहुलकीकरण की विधि के आधार पर, और प्रत्येक श्रेणी के लिए कम से कम एक उदाहरण दें।
Question 22. ताप सुघय तथा तापदृढ़ बहुलकों में अन्तर बताइए।
Answer: ताप सुघट्य (Thermoplastic) तथा तापदृढ़ (Thermosetting) बहुलकों में अंतर निम्न तालिका में दिया गया है:
| ताप-सुघट्य प्लास्टिक या थर्मोप्लास्टिक | ताप-दृढ़ प्लास्टिक या थर्मोसेटिंग प्लास्टिक |
|---|---|
| 1. इस प्रकार के बहुलक, गर्म करने पर मुलायम पड़ जाते हैं तथा पुनः आकार प्राप्त कर सकते हैं। | 1. इस प्रकार के बहुलक गर्म करने पर मुलायम नहीं होते हैं तथा दोबारा आकार प्राप्त नहीं करते हैं। |
| 2. ये लम्बी श्रृंखला वाले रैखिक बहुलक होते हैं तथा योगात्मक बहुलकीकरण के द्वारा प्राप्त होते हैं। | 2. ये सामान्यतः क्रॉस-संयुग्मित प्रकृति के होते हैं तथा संघनन बहुलकीकरण द्वारा बनते हैं। |
| 3. ये सामान्य रूप से कमजोर, कोमल व कम भंगुर होते हैं। | 3. ये बहुलक कठोर, प्रबल व भंगुर प्रकृति के होते हैं। |
| 4. इन्हें पुनः प्राप्त किया जा सकता है। | 4. इन्हें पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता। |
| 5. ये कार्बनिक विलायकों में विलेय होते हैं। | 5. ये सामान्यतः कार्बनिक विलायकों में अविलेयय होते हैं। |
| उदाहरण - पॉलिथीन, पॉलीस्टाइरीन तथा PVC | उदाहरण - बैकेलाइट, मेलामीन तथा यूरिया फॉर्मेल्डहाइड रेजिन |
In simple words: ताप सुघट्य प्लास्टिक गर्म होकर पिघल जाते हैं और उन्हें फिर से ढाला जा सकता है, जबकि तापदृढ़ प्लास्टिक एक बार बन जाने के बाद गर्म करने पर नहीं पिघलते।
🎯 Exam Tip: ताप सुघट्य और तापदृढ़ बहुलकों के बीच के मूलभूत अंतरों को याद रखें, विशेषकर उनके व्यवहार, संरचना और पुनर्चक्रण क्षमता के संबंध में।
Question 23. हाइड्रोक्किनोन मुक्त मूलक बहुलीकरण अभिक्रिया में कहाँ काम आता है?
Answer: हाइड्रोक्किनोन बढ़ती हुई बहुलक श्रृंखला के समापन के लिए प्रयुक्त निरोधक (Inhibitor) पदार्थ है। यह सक्रिय मुक्त मूलक के साथ जुड़कर बढ़ती हुई बहुलक श्रृंखला को समाप्त करता है। यह अभिक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है।
In simple words: हाइड्रोक्किनोन एक रोकने वाला पदार्थ है जो बहुलक बनने की प्रक्रिया को खत्म करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: निरोधकों की भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे बहुलकीकरण अभिक्रिया की दर और उत्पाद को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
Question 25. बहुपरिक्षेपण घातांक किसे कहते हैं? बताइए।
Answer: बहुपरिक्षेपण घातांक (Polydispersity Index, PDI) किसी बहुलक के भार औसत अणुभार (\( \overline { M }_w \)) तथा संख्या औसत अणुभार (\( \overline { M }_n \)) के अनुपात को कहते हैं।
\[ \text{PDI} = \frac{ \overline{M}_w }{ \overline{M}_n } \]
यह बहुलक के नमूनों में अणुओं के आकार की एकरूपता को दर्शाता है; PDI का मान 1 के करीब होने पर एकरूपता अधिक होती है।
In simple words: PDI बताता है कि बहुलक के अंदर सभी अणुओं का आकार कितना एक जैसा है। यह भार औसत अणुभार और संख्या औसत अणुभार का अनुपात होता है।
🎯 Exam Tip: PDI का उपयोग बहुलक के नमूने में आण्विक द्रव्यमान के वितरण को इंगित करने के लिए किया जाता है; 1 के बराबर PDI का अर्थ है कि सभी बहुलक अणुओं का द्रव्यमान समान है।
Question 26. रबर का वल्कनीकरण क्यों किया जाता है? समझाइए।
Answer: प्राकृतिक रबर के भौतिक गुणों तथा प्रत्यास्थता बढ़ाने, जल अवशोषण क्षमता घटाने तथा ऑक्सीकारकों के प्रति प्रतिरोधकता बढ़ाने के लिए रबर का वल्कनीकरण (Vulcanization) कराया जाता है। वल्कनीकरण की प्रक्रिया में प्राकृतिक रबर को 373 - 425 K पर सल्फर के साथ गर्म किया जाता है। इस प्रक्रिया में बहुलक श्रृंखलाओं के मध्य सल्फर सेतु (Sulphur Bridge) या तिर्यक आबन्धन (Cross linkage) निर्मित हो जाते हैं। प्राप्त वल्कनीकृत रबर की प्रत्यास्थता श्रेष्ठ, जल अवशोषित करने की क्षमता निम्न होती है तथा यह कार्बनिक विलायकों तथा ऑक्सीकारकों की क्रिया के प्रति प्रतिरोधक होती है। यह रबर को अधिक टिकाऊ बनाता है।
In simple words: प्राकृतिक रबर को मजबूत, लचीला बनाने और पानी सोखने से रोकने के लिए उसमें सल्फर मिलाकर गर्म किया जाता है, इस प्रक्रिया को वल्कनीकरण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: वल्कनीकरण प्राकृतिक रबर की कमियों को दूर करने और उसकी उपयोगिता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रक्रिया है, जिसमें सल्फर क्रॉस-लिंक बनाने में मदद करता है।
Question 28. निम्न के एकलकों के नाम तथा संरचना लिखिए-
(i) टेफ्लॉन
(ii) टेरीलीन
(iii) नाइलॉन-6, 6
(iv) बैकलाइट
Answer:
| बहुलक (Polymer) | एकलक (Monomer) | संरचना (Structure) |
|---|---|---|
| (i) टेफ्लॉन | टेट्राफ्लुओरोऐथिलीन | \( \text{CF}_2=\text{CF}_2 \) |
| (ii) टेरीलीन | ऐथिलीन ग्लाइकॉल टरथैलिक अम्ल | \( \text{HO}-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{OH} \) \( \text{HO}-\text{C}(=\text{O})-\text{C}_6\text{H}_4-\text{C}(=\text{O})-\text{OH} \) |
| (iii) नायलॉन-6, 6 | हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन ऐडिपिक अम्ल | \( \text{H}_2\text{N}-(\text{CH}_2)_6-\text{NH}_2 \) \( \text{HOOC}-(\text{CH}_2)_4-\text{COOH} \) |
| (iv) बैकेलाइट | फीनॉल फॉर्मेल्डिहाइड | \( \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} \) \( \text{H}-\text{C}(=\text{O})-\text{H} \) |
In simple words: हर बहुलक छोटे-छोटे खास टुकड़ों से बनता है। जैसे टेफ्लॉन टेट्राफ्लोरोऐथिलीन से, टेरिलीन एथिलीन ग्लाइकॉल और टरथैलिक अम्ल से, नायलॉन-6,6 हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन और ऐडिपिक अम्ल से, और बैकेलाइट फीनॉल और फॉर्मेल्डिहाइड से बनता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न बहुलकों के एकलकों के नाम और उनकी संरचनाओं को सही ढंग से पहचानना बहुलक रसायन में एक महत्वपूर्ण कौशल है।
Question 29. PHBV क्या है? यह कौन-सा बहुलक हैं?
Answer: PHBV का पूरा नाम पॉली-ß-हाइड्रॉक्सी ब्यूटाइरेट-Co-ß-हाइड्रॉक्सीवैलेरेट (Poly-ß-Hydroxybutyrate-Co-ß-hydroxyvalerate) है। यह 3-हाइड्रॉक्सी ब्यूटेनोइक अम्ल तथा 3-हाइड्रॉक्सी पेण्टेनोइक अम्ल का तापसुघट्य (Thermoplastic) बहुलक है जिसमें दो एकलक होते हैं। PHBV एक जैव निम्नीकरणीय बहुलक है, जिसका अर्थ है कि यह प्राकृतिक रूप से विघटित हो सकता है। इसकी संरचना निम्न प्रकार से है:
\[ \text{O}-\text{CH}(\text{CH}_3)-\text{CH}_2-\text{C}(=\text{O})-\text{O}-\text{CH}(\text{CH}_2\text{CH}_3)-\text{CH}_2-\text{C}(=\text{O})_n \]
In simple words: PHBV एक विशेष प्रकार का प्लास्टिक है जो अपने आप टूट सकता है। यह 3-हाइड्रॉक्सी ब्यूटेनोइक अम्ल और 3-हाइड्रॉक्सी पेण्टेनोइक अम्ल नाम के दो छोटे-छोटे टुकड़ों से मिलकर बनता है।
🎯 Exam Tip: PHBV जैसे जैव निम्नीकरणीय बहुलकों को याद रखें, क्योंकि वे पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों के रूप में महत्वपूर्ण हैं, और उनके एकलकों को पहचानना भी महत्वपूर्ण है।
Question 30. प्रोटीन के PDI का मान एक क्यों होता है?
Answer: प्रोटीन के भार औसत अणुभार (\( \overline { M }_w \)) तथा संख्या औसत अणुभार (\( \overline { M }_n \)) का मान समान होता है। इसलिए प्रोटीन का PDI (परिक्षेपण घातांक) का मान एक होता है। यह दर्शाता है कि प्राकृतिक प्रोटीन के अणु लगभग एक ही आकार और द्रव्यमान के होते हैं।
In simple words: प्रोटीन के PDI का मान एक इसलिए होता है क्योंकि सभी प्रोटीन अणुओं का वजन लगभग एक जैसा होता है।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्रोटीन एक समान आकार और द्रव्यमान वाले होते हैं, जो PDI = 1 की विशेषता है, जबकि अधिकांश संश्लेषित बहुलकों का PDI 1 से अधिक होता है।
RBSE Class 12 Chemistry Chapter 15 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 31. बहुलकों का वर्गीकरण निम्न आधार पर कीजिए
(i) एकलकों के आधार पर
(ii) बहुलीकरण के आधार पर
(iii) आण्विक बलों के आधार पर
Answer: बहुलकों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया जा सकता है, जो उनके गुणों और उपयोगों को समझने में मदद करता है।
(i) एकलकों के आधार पर
एकलकों के प्रकार के आधार पर बहुलकों को दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है:
1. समबहुलक (Homopolymers): वे बहुलक जिनमें एक ही प्रकार की पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयाँ या एकलक (Monomers) होते हैं, समबहुलक कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ: पॉलिथीन (पॉलीऐथिलीन), पॉली विनाइल क्लोराइड (PVC) एक ही प्रकार के एकलकों से निर्मित होते हैं।
\[ \text{nCH}_2=\text{CH}_2 \xrightarrow{} (\text{CH}_2-\text{CH}_2)_\text{n} \]
(ऐथीन) (पॉलीथीन)
\[ \text{nCH}_2=\text{CH} \begin{pmatrix} \text{Cl} \\ | \end{pmatrix} \xrightarrow{} (\text{CH}_2-\text{CH} \begin{pmatrix} \text{Cl} \\ | \end{pmatrix})_\text{n} \]
(विनाइल क्लोराइड) (पॉलीविनाइल क्लोराइड)
2. सहबहुलक (Copolymers): वे बहुलक जिनमें एक से अधिक प्रकार की पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयाँ या एकलक होते हैं, सहबहुलक कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ: नाइलॉन-6,6, ब्यूना-S रबर।
(ii) बहुलीकरण के आधार पर:
बहुलकन या बहुलीकरण के प्रकार के आधार पर बहुलकों का वर्गीकरण-केरोथर्स (Carothers) ने 1929 में बहुलकन की विधि के आधार पर बहुलकों को दो वर्गों में वर्गीकृत किया था:
1. योगज अथवा योगात्मक बहुलक (Addition Polymers): द्वि अथवा त्रिआबन्ध युक्त एकलक अणुओं अर्थात् असंतृप्त एकलक अणुओं के पुनरावर्तित योगात्मक बहुलीकरण प्रक्रिया से निर्मित बहुलक योगात्मक बहुलक कहलाते हैं। इस बहुलीकरण प्रक्रिया में कोई सह-उत्पाद नहीं बनता है, इसलिए बहुलक का अणुभार एकलक अणुओं के अणुभार का गुणक होता है।
उदाहरणार्थ: सभी विनाइल एकलक योगात्मक बहुलक बनाते हैं।
\[ \text{n} \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}=\text{CH}_2 \xrightarrow{} (\text{CH}-\text{CH}_2)_\text{n} \]
(स्टाइरीन) (पॉलीस्टाइरीन)
\[ \text{nF}_2\text{C}=\text{CF}_2 \xrightarrow{} (\text{F}_2\text{C}-\text{CF}_2)_\text{n} \]
(टेट्राफ्लुओरोऐथिलीन) (पॉलीटेट्राफ्लुओरोऐथिलीन)
2. संघनन बहुलक (Condensation Polymers): दो या दो से अधिक एकलक अणुओं के पुनरावृत्त संघनन बहुलीकरण प्रक्रिया से निर्मित बहुलक संघनन बहुलक कहलाते हैं। चूँकि इनका निर्माण संघनन अभिक्रियाओं द्वारा होता है अतः इन अभिक्रियाओं में छोटे अणु (जैसे जल, अल्कोहल) सह-उत्पाद के रूप में निकलते हैं।
उदाहरणार्थ: नाइलॉन-6,6, टेरिलीन, बैकेलाइट।
(iii) आण्विक बलों के आधार पर
विभिन्न क्षेत्रों में बहुलकों के अनुप्रयोग उनके यांत्रिक गुणों (Mechanical Properties) जैसे तनन सामर्थ्य (Tensile Strength), प्रत्यास्थता (Elasticity), दृढ़ता (Regidity), कठोरता (Hardness) आदि पर निर्भर करते हैं तथा यान्त्रिक गुण उनमें उपस्थित अन्तराण्विक आकर्षण बलों, हाइड्रोजन बन्धन आदि पर निर्भर करते हैं। ये बल बहुलक श्रृंखलाओं को परस्पर जोड़ते हैं। इन आण्विक बलों के आधार पर बहुलकों को निम्न वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है।
1. प्रत्यास्थ बहुलक (Elastomers): ये बहुलक प्रायः रबर (Rubber) कहलाते हैं। इनमें बहुलक श्रृंखलाएँ परस्पर दुर्बल अन्तराण्विक बलों द्वारा जुड़ी रहती है। इन दुर्बल बलों के कारण ही इन बहुलकों को एक सीमा तक खींचकर लम्बा किया जा सकता है। श्रृंखलाओं के मध्य त्रिर्यक बन्ध होते हैं जो बल हटाने पर बहुलक श्रृंखलाओं को खींचकर पुनः पूर्ववत् लाने में सहायक होते हैं। साथ ही इन बहुलकों की श्रृंखलाएँ कुण्डलीनुमा होती है तथा ये खींचने पर खुलकर लम्बी हो जाती है। कुछ क्रॉस बन्धों को प्रवेशित कराके प्रत्यास्थ बहुलकों की प्रत्यास्थता को बढ़ाया भी जा सकता है।
उदाहरणार्थ: प्राकृतिक रबर की प्रत्यास्थता सल्फर के साथ वल्कनीकरण (Vulcanization) कराने पर बढ़ती है। इसलिए वल्कनीकृत रबर प्राकृतिक रबर की तुलना में अधिक प्रत्यास्थ (Elastic) होता है। इस वर्ग के अन्य उदाहरण ब्यूना-S तथा ब्यूना-N हैं। ये अपनी मूल आकृति में वापस लौटने की क्षमता रखते हैं।
2. रेशे (Fibers): इन बहुलकों को सामान्यतः धागा (Threads) कहते हैं तथा इनका उपयोग वस्त्र उद्योग में होता है। इन बहुलकों की श्रृंखलाएँ प्रबल अन्तराण्विक बलों द्वारा बँधी रहती है। इन प्रबल बलों के कारण श्रृंखलाएँ निकट संकुलित (Closely Packed) हो जाती है तथा क्रिस्टलों के समान व्यवस्थित संरचना बनाती हैं। इन बहुलकों की तनन सामर्थ्य (Tensile Strength) तथा गलनांक (Melting Point) उच्च होते हैं।
उदाहरणार्थ: पॉलीऐस्टर (टेरीलिन), पॉलीऐमाइड (नाइलॉन-6,6) प्राकृतिक रेशे (सिल्क, ऊन, कपास), रेयॉन आदि। ये कपड़े और मजबूत धागे बनाने में उपयोगी होते हैं।
In simple words: बहुलकों को उनके बनाने वाले छोटे टुकड़ों के प्रकार, उनके बनने के तरीके, और उनके अंदर के खिंचाव वाले बलों के आधार पर बांटा जाता है।
🎯 Exam Tip: बहुलक वर्गीकरण के प्रत्येक आधार (एकलक, बहुलकीकरण विधि, आण्विक बल) को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें और प्रत्येक वर्ग की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें।
Question 32. योगात्मक बहुलीकरण क्या हैं? एक उदाहरण मुक्त मूलक योगात्मक बहुलीकरण क्रियाविधि समझाइए।
Answer: बहुलीकरण की विधियाँ (Methods of Polymerization) बहुलीकरण की प्रमुख दो विधियाँ निम्नवत हैं:
1. योगात्मक बहुलीकरण (Addition Polymerization)
2. संघनन बहुलीकरण (Condensation Polymerization)
1. योगात्मक बहुलीकरण (Addition Polymerization):
जब असंतृप्त एकलक अणु (Unsaturated Monomer Molecules) परस्पर योगात्मक अभिक्रिया द्वारा बहुलक का निर्माण करते हैं तब यह प्रक्रिया योगात्मक बहुलीकरण (Addition Polymerization) कहलाती है। बहुलीकरण में प्रयुक्त एकलक अणु एक ही प्रकार के अथवा भिन्न प्रकार के हो सकते हैं। असंतृप्त एकलक अणु ऐल्कीन, ऐल्केडाइईन और उनके व्युत्पन्न होते हैं। चूँकि इस प्रक्रम में एकलक इकाइयाँ उत्तरोतर बढ़ने वाली श्रृंखला में जुड़ती रहती है इसलिए यह प्रक्रम श्रृंखला वृद्धि बहुलीकरण (Chain Growth Polymerisation) कहलाता है। योगात्मक बहुलीकरण में एकलक अणु असंतृप्त अणु होते हैं तथा अक्रिय होते हैं।
बहुलीकरण की प्रक्रिया के लिए इनका सक्रिय होना आवश्यक होता है। अतः बहुलीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ करने के लिए किसी प्रारम्भिक पदार्थ (Initiator) की आवश्यकता होती है। इस प्रारम्भिक पदार्थ का कोई सक्रिय अणु अक्रिय एकलक अणु से क्रिया करके उसे सक्रिय कर देता है। यह प्रारम्भिक या समारंमक पदार्थ मुक्त मूलक (Free Radical) या आयनिक स्पीशीज (Ionic Species) होती है। क्रियाकारी अणु की प्रकृति के अनुसार योगात्मक बहुलीकरण दो प्रकार का होता है।
मुक्त मूलक योगात्मक बहुलीकरण (Free Radical Addition Polymerization) तीन पदों में होता है:
पद (Step): 1 - श्रृंखला समारम्भन पद (Chain initiation Step)
मुक्त मूलक योगात्मक बहुलीकरण में प्रारम्भिक या समारम्भक पदार्थ परॉक्साइड या परॉक्सी अम्ल होते हैं। ये ताप अथवा प्रकाश की उपस्थिति में वियोजित होकर मुक्त मूलक (Free radicals) बनाते हैं। ये मुक्त मूलक एकलक अणु से क्रिया करके नया और अधिक बड़ा मुक्त मूलक बनाता है। इस पद को श्रृंखला समारम्भन पद कहते हैं।
उदाहरणार्थ, बेन्जोइल परॉक्साइड का वियोजन और ऐथीन के साथ अभिक्रिया:
\[ \text{2C}_6\text{H}_5-\text{C}(=\text{O})-\text{O}-\text{O}-\text{C}(=\text{O})-\text{C}_6\text{H}_5 \xrightarrow{} \text{2C}_6\text{H}_5\cdot + \text{2CO}_2 \]
(बेन्जोइल परॉक्साइड) (फेनिल मुक्त मूलक)
\[ \text{R}-\text{O}\cdot + \text{CH}_2 = \text{CH}_2 \xrightarrow{} \text{R}-\text{O}-\text{CH}_2-\text{CH}_2\cdot \]
(ऐथीन (एकलक)) (एकलक मुक्त मूलक)
पद (Step): 2 - श्रृंखला संचरण पद (Chain Propagating Step)
इस पद में पहले पद में बना मुक्त मूलक एक और एकलक अणु से क्रिया करता है तथा इस प्रकार एक के बाद एक एकलक अणु श्रृंखला से जुड़ते जाते हैं, जिससे श्रृंखला लंबी होती जाती है।
पद (Step): 3 - श्रृंखला समापन पद (Chain Termination Step)
यह पद अंतिम पद या श्रृंखला समापन पद कहलाता है। उपरोक्त दोनों पद तब तक जारी रहते हैं जब तक कि अभिक्रिया मिश्रण में एकलक अणु उपस्थित रहते हैं और जब एकलक अणु समाप्त हो जाते हैं, तब मूलक आपस में क्रिया करके उदासीन अणु बनाते हैं। इसलिए यह पद श्रृंखला समापन पद कहलाता है। कभी-कभी बाह्य पदार्थों का प्रयोग भी श्रृंखला समापन के लिए किया जाता है। श्रृंखला समापन चार प्रकार से हो सकता है।
(i) युग्मन (Coupling)-दो मुक्त मूलक युक्त बढ़ती हुई बहुलक श्रृंखलाएँ परस्पर संयोग करके उदासीन बहुलक अणु बनाती हैं।
\[ \text{R}-\text{O}-(\text{CH}_2-\text{CH}_2)_\text{n}-\text{CH}_2-\text{CH}_2\cdot + \cdot\text{CH}_2-\text{CH}_2-(\text{CH}_2-\text{CH}_2)_\text{m}-\text{O}-\text{R} \]
\( \implies \) \[ \text{R}-\text{O}-(\text{CH}_2-\text{CH}_2)_{\text{n}+\text{m}+2}-\text{O}-\text{R} \]
(ii) असमानुपातन (Disproportionation): इसमें मुक्त मूलक असमानुपातित हो जाते हैं। अर्थात् हाइड्रोजन के स्थानान्तरण द्वारा उदासीन अणु बनाते हैं।
\[ \text{R}-\text{O}-(\text{CH}_2-\text{CH}_2)_\text{n}-\text{CH}_2-\text{CH}_2\cdot + \text{R}'\cdot \xrightarrow{} \text{R}-\text{O}-(\text{CH}_2-\text{CH}_2)_\text{n}-\text{CH}=\text{CH}_2 + \text{R}'\text{H} \]
(iii) श्रृंखला स्थानान्तरण (Chain Transfer)- यह निम्नवत होता है-
\[ \text{R}-\text{O}-(\text{CH}_2-\text{CH}_2)_\text{n}-\text{CH}_2-\text{CH}_2\cdot + \text{RH} \xrightarrow{} \text{R}-\text{O}-(\text{CH}_2-\text{CH}_2)_\text{n}-\text{CH}_2-\text{CH}_3 + \text{R}\cdot \]
यहाँ RH श्रृंखला अंतरणकर्मक (Chain transfer agent) है। बहुलीकरण अभिक्रिया में एकलक, प्रारम्भिक पदार्थ अथवा विलायक श्रृंखला अंतरणकर्मक हो सकते हैं, परन्तु सामान्यतः बहुलीकरण की प्रक्रिया शुरू होने पर एकलक की सान्द्रता कम होने लगती है, तथा प्रारम्भिक पदार्थ वैसे ही कम अनुपात में लिए जाते हैं अतः जब कभी भी श्रृंखला समापन, श्रृंखला स्थानान्तरण द्वारा होता है तो यह विलायक द्वारा ही होता है।
(iv) निरोधक (Inhibitors): बढ़ती हुई बहुलक श्रृंखला का समापन निरोधक के रूप में भी किया जा सकता है। निरोधक रासायनिक पदार्थ होते हैं जो सक्रिय मुक्त मूलक के साथ जुड़ जाते हैं। हाइड्रोक्किनोन, नाइट्रोबेन्जीन, डाइनाइट्रोबेन्जीन सामान्यतः प्रयोग किए जाने वाले निरोधक पदार्थ (Inhibitors) हैं।
यह प्रक्रिया हमें बहुलकों के निर्माण को नियंत्रित करने की अनुमति देती है।
In simple words: योगात्मक बहुलीकरण में छोटे अणु सीधे जुड़कर बड़े बहुलक बनाते हैं। मुक्त मूलक योगात्मक बहुलीकरण में तीन चरण होते हैं: शुरुआत, बढ़ना और खत्म होना। शुरुआत में मुक्त मूलक बनते हैं, बढ़ने में वे एकलकों से जुड़ते जाते हैं, और खत्म होने में श्रृंखला बनना बंद हो जाती है।
🎯 Exam Tip: मुक्त मूलक बहुलीकरण की क्रियाविधि के तीनों चरणों (समारम्भन, संचरण, समापन) को उनके संबंधित उदाहरणों और रासायनिक समीकरणों के साथ स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 33. प्राकृतिक रबर कैसे प्राप्त करते हैं? इसका संघटन तथा संरचना लिखिए।
Answer: प्राकृतिक रबर (Natural Rubber) एक प्रत्यास्थ बहुलक (Elastomer) है। यह अत्यधिक नरम होता है।
प्राकृतिक रबर प्राप्त करने की विधि (Method for Obtaining Natural Rubber): प्राकृतिक रबर का उत्पादन रबर के पेड़ (हेविया ब्रासिलियेन्सिस, गट्टा पार्चा) से प्राप्त दूध जैसे पदार्थ से किया जाता है जिसे रबरक्षीर (Latex) कहते हैं। रबरक्षीर रबर का जल में कोलॉइडी परिक्षेपण होता है। रबर के पेड़ मुख्यतः भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया, मलेशिया तथा दक्षिणी अमेरिका में पाए जाते हैं।
1. प्राकृतिक रबर प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम रबर के पेड़ों के तनों में विशेष प्रकार का चीरा लगाकर क्षीर (Latex) एकत्रित किया जाता है। फिर इस क्षीर को जल की सहायता से इतना तनु करते हैं कि इसमें रबर की मात्रा 10-20% रह जाए। इसके पश्चात इसमें ऐसीटिक अम्ल मिलाया जाता है जिससे रबर के कालॉइडी कण स्कंदित (Coagulate) होकर अवक्षेपित हो जाते हैं। इन्हें छानकर अलग कर लिया जाता है। यह रबर क्रेप रबर (Crape Rubber) कहलाती है।
यह अधिक उपयोगी नहीं होती है क्योंकि इसकी कुछ कमियाँ होती हैं, जैसे:
1. इसकी प्रत्यास्थता कम होती है।
2. यह उच्च ताप (> 335K) पर नरम तथा निम्न ताप (< 283K) पर भंगुर हो जाती है।
3. इसकी जल अवशोषण क्षमता (Water absorbing capacity) उच्च होती है।
4. यह अध्रुवीय विलायकों जैसे-ईथर, बेन्जीन, पेट्रोल आदि में विलेय होती है।
5. यह ऑक्सीकरण कर्मकों के प्रति प्रतिरोधी नहीं है।
प्राकृतिक रबर के भौतिक गुणों में सुधार के लिए इसका वल्कनीकरण (Vulcanization) कराया जाता है।
उपयोग (Uses): प्राकृतिक रबर का प्रमुखतः प्रयोग जूते, बरसाती कोट, गोल्फ की गेंद आदि बनाने में किया जाता है।
2. संघटन तथा संरचना (Composition and Structure): प्राकृतिक रबर आइसोप्रीन (2-मेथिल-1,3-ब्यूटाडाइईन) का रैखिक बहुलक होती है। इसका संघटन \( (\text{C}_5\text{H}_8)_n \) होता है। आइसोप्रीन इकाइयों के 1,4 योग से दो समावयवी समपक्ष (cis) और विपक्ष (trans) प्राप्त होते हैं। प्राकृतिक रबर समपक्ष (cis) समावयवी होती है जिसमें बहुलक अणुओं की श्रृंखलाएँ दुर्बल वाण्डर वाल्स बलों द्वारा जुड़ी रहती हैं एवं कुण्डलित और स्प्रिंग सदृश्य संरचनाएँ बनाती हैं। इन संरचनाओं के कारण ही रबर प्रत्यास्थता (Elasticity) का गुण प्रदर्शित करती है क्योंकि इसे स्प्रिंग के समान खींचा जा सकता है। गट्टा पर्चा (Gutta Percha) से प्राप्त प्राकृतिक रबर में आइसोप्रीन इकाइयों का पूर्ण विपक्ष (trans) विन्यास होता है।
\[ \text{CH}_3 \\ \quad | \\ \text{+CH}_2-\text{C}=\text{CH}-\text{CH}_2\text{+}_\text{n} \]
(पॉलीआइसोप्रीन (प्राकृतिक रबर))
In simple words: प्राकृतिक रबर पेड़ों से दूध जैसी चीज (लेटेक्स) से मिलती है। इसमें आइसोप्रीन नाम के छोटे-छोटे टुकड़े एक साथ जुड़कर लंबी चेन बनाते हैं। यह रबर लचीली होती है और इसका इस्तेमाल जूते, कोट आदि बनाने में होता है।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक रबर की प्राप्ति की प्रक्रिया, उसके एकलकों (आइसोप्रीन) और उसके गुणों को याद रखें, साथ ही वल्कनीकरण के महत्व को भी स्पष्ट करें।
Question 34. बहुलकों का अणुभार औसत अणुभार क्या होता है? समझाइए। बहुलकों के औसत अणुभार को कितने प्रकार से व्यक्त करते हैं? प्रत्येक प्रकार को समझाइए।
Answer: बहुलकों का अणुभार यह बताता है कि उनके भौतिक गुण, जैसे उनकी ताकत और आकार, उनके अणुभार, आकार और संरचना से जुड़े होते हैं। बहुलक अणु में कितने छोटे-छोटे एकलक (मोनोमर) जुड़े हैं, उसे बहुलीकरण की कोटि कहते हैं। यही संख्या बहुलक के आकार को तय करती है। एक बहुलक के सैंपल में, अलग-अलग बहुलक अणुओं का आकार और भार अलग-अलग हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर अणु में एकलकों की संख्या अलग-अलग होती है, जिससे बहुलक की कुल विशेषताओं पर असर पड़ता है। बहुलकों के औसत अणुभार को मुख्य रूप से दो प्रकार से व्यक्त किया जाता है:
संख्या औसत अणुभार (\( \overline{M}_n \)): यह किसी बहुलक नमूने में मौजूद सभी अणुओं के कुल आण्विक भार को अणुओं की कुल संख्या से भाग देने पर मिलता है। यह औसत विशेष रूप से छोटे अणुओं की संख्या पर ध्यान देता है। अगर एक बहुलक में अलग-अलग संख्या (\( n_i \)) और भार (\( m_i \)) वाले अणु हों, तो इसका सूत्र है:
\[ \overline{M}_n = \frac{\sum n_i m_i}{\sum n_i} \]
इसे मापने के लिए परासरण दाब मापन जैसी विधियों का उपयोग होता है, जो अणुओं की संख्या से जुड़े गुणधर्मों पर आधारित होती हैं।भार औसत अणुभार (\( \overline{M}_w \)): इस प्रकार के औसत में, ज़्यादा भार वाले अणुओं को अधिक महत्व दिया जाता है। इसे निकालने के लिए, हर अणु के भार को उसकी संख्या से गुणा करके, फिर से उसके भार से गुणा करते हैं। फिर इन सभी मानों को जोड़कर, कुल भार से भाग देते हैं। यह औसत बड़े अणुओं की उपस्थिति को अधिक दर्शाता है, जिससे बहुलक की यांत्रिक मजबूती का पता चलता है। इसका सूत्र है:
\[ \overline{M}_w = \frac{\sum n_i m_i^2}{\sum n_i m_i} \]
इसे प्रकाश प्रकीर्णन (light scattering), अवसादन (sedimentation) तथा द्रुत अपकेन्द्रण (fast centrifugation) जैसी तकनीकों से मापा जाता है।
In simple words: बहुलकों में हर अणु का भार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए, उनके औसत भार को दो तरीकों से बताया जाता है: संख्या औसत, जो अणुओं की कुल संख्या पर आधारित होता है; और भार औसत, जो भारी अणुओं को ज़्यादा महत्व देता है।
🎯 Exam Tip: संख्या औसत और भार औसत अणुभार के सूत्रों और उनकी गणना की विधियों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे बहुलक विज्ञान में बुनियादी अवधारणाएँ हैं।
Question 35. निम्न बहुलकों को बनाने की विधि तथा उपयोग लिखिए-
(i) बैकेलाइट
(ii) पी.वी.सी. (PVC)
(iii) पॉलीऐस्टर
(iv) नायलॉन-6,6
Answer:
(i) बैकेलाइट:
- परिभाषा: बैकेलाइट एक तापदृढ़ (थर्मोसेटिंग) बहुलक है जो गर्म करने पर मुलायम नहीं होता।
- एकलक: फीनॉल तथा फॉर्मेल्डिहाइड।
- बहुलीकरण की विधि: फीनॉल तथा फॉर्मेल्डिहाइड की संघनन बहुलीकरण अभिक्रिया अम्ल या क्षार की उपस्थिति में होती है। इससे मध्यवर्ती उत्पाद जैसे ऑर्थो- और पैरा-हाइड्रॉक्सी बेन्जिल एल्कोहॉल बनते हैं। ये आगे बहुलीकरण करके बैकेलाइट बहुलक बनाते हैं।
यह प्रक्रिया दो प्रकार से हो सकती है:- नोवोलेक (Novolac): जब तनु अम्ल की उपस्थिति में और कम फॉर्मेल्डिहाइड के अनुपात के साथ अभिक्रिया कराई जाती है, तो रेखीय बहुलक बनता है जिसे नोवोलेक कहते हैं। यह एक ताप सुघट्य (थर्मोप्लास्टिक) बहुलक होता है।
- रिसॉल (Resol): जब क्षार की उपस्थिति में और फॉर्मेल्डिहाइड के अधिक अनुपात के साथ अभिक्रिया कराई जाती है, तो तिर्यक बन्ध (cross-linked) वाली संरचना बनती है जिसे रिसॉल कहते हैं, जो तापदृढ़ बहुलक बैकेलाइट का आधार होता है।
- उपयोग: यह ताप तथा ऊष्मा प्रतिरोधी होता है। इसका उपयोग बिजली के स्विच, बर्तनों के हैंडल, विद्युतरोधी उपकरण, रेडियो, टेलीविजन और कंप्यूटर के केस बनाने में किया जाता है। यह रसोई के बर्तन और खिलौने बनाने में भी काम आता है। यह मजबूत और टिकाऊ होता है।
(ii) पी.वी.सी. (PVC):
- परिभाषा: पॉलीवाइनिल क्लोराइड (PVC) वाइनिल क्लोराइड एकलकों का एक समबहुलक (homopolymer) है।
- एकलक: वाइनिल क्लोराइड (\( \text{CH}_2=\text{CHCl} \)).
- बहुलीकरण की विधि: वाइनिल क्लोराइड के अणु परॉक्साइड की उपस्थिति में मुक्त मूलक योगात्मक बहुलीकरण (free radical addition polymerization) से जुड़कर PVC बनाते हैं।
\( \text{nCH}_2=\text{CHCl} \quad \xrightarrow{\text{परॉक्साइड}} \quad {-\text{[CH}_2-\text{CHCl]}-}_{\text{n}} \) - उपयोग: PVC एक सस्ता और बहुत उपयोग में आने वाला प्लास्टिक है। इसका उपयोग पाइप, दरवाजे, बिजली के तार के कवर, छड़ें, और चादरें बनाने में होता है। इसे रबर के विकल्प के रूप में बरसाती कोट, फर्श की पॉलिश और हैंडबैग बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। 200°C से ऊपर गर्म करने पर यह टूट सकता है।
(iii) पॉलीऐस्टर (Polyester):
- परिभाषा: पॉलीऐस्टर एक प्रकार का बहुलक है जो संघनन बहुलीकरण (condensation polymerization) द्वारा बनता है।
- एकलक: पॉलीऐस्टर बनाने के लिए मुख्य रूप से द्विकार्बोक्सिलिक अम्ल और डाइऑल का उपयोग होता है। कभी-कभी डाइऐस्टर या डाइहाइड्रॉक्सीलिक अम्ल भी उपयोग किए जाते हैं।
- बहुलीकरण की विधि: यह बहुलीकरण प्रक्रिया तब होती है जब द्विकार्बोक्सिलिक अम्ल और डाइऑल के अणु आपस में संघनन अभिक्रिया करते हैं, जिससे पानी के अणु बाहर निकलते हैं।
\( \text{nHO-C-R}_1\text{-C-OH} + \text{nHO-R}_2\text{-OH} \quad \xrightarrow{\text{संघनन बहुलीकरण}} \quad {-\text{[O-C-R}_1\text{-C-O-R}_2\text{]-}}_{\text{n}} + \text{nH}_2\text{O} \) - उपयोग: टेरीलिन (डेक्रॉन) पॉलीऐस्टर का एक सामान्य उदाहरण है। इसका उपयोग कृत्रिम रेशे बनाने और हेलमेट बनाने में किया जाता है। ऐलिफैटिक पॉलीऐस्टर का गलनांक कम होता है, जबकि ऐरोमैटिक पॉलीऐस्टर का गलनांक उच्च होता है। पॉलीऐस्टर कपड़े उद्योग में बहुत उपयोगी होते हैं।
(iv) नायलॉन-6,6 (Nylon-6,6):
- परिभाषा: नायलॉन-6,6 एक पॉलीएमाइड (polyamide) बहुलक है।
- एकलक: हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन (\( \text{H}_2\text{N-(CH}_2\text{)}_6\text{-NH}_2 \)) और ऐडिपिक अम्ल (\( \text{HOOC-(CH}_2\text{)}_4\text{-COOH} \)).
- बहुलीकरण की विधि: हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन और ऐडिपिक अम्ल के संघनन बहुलीकरण से नायलॉन-6,6 बनता है। दोनों एकलकों में 6-6 कार्बन परमाणु होते हैं, इसलिए इसे नायलॉन-6,6 कहते हैं।
\( \text{nH}_2\text{N-(CH}_2\text{)}_6\text{-NH}_2 + \text{nHOOC-(CH}_2\text{)}_4\text{-COOH} \quad \xrightarrow{\text{संघनन बहुलीकरण}} \quad {-\text{[NH-(CH}_2\text{)}_6\text{-NH-C-(CH}_2\text{)}_4\text{-C]-}}_{\text{n}} + \text{nH}_2\text{O} \) - उपयोग: यह एक मजबूत बहुलक है जिसकी तनन सामर्थ्य (tensile strength) और घर्षण प्रतिरोध (abrasion resistance) बहुत अच्छी होती है। इसका उपयोग प्लास्टिक और रेशों दोनों रूपों में किया जाता है, जैसे कपड़ों, रस्सियों और ऑटोमोबाइल पार्ट्स में। यह बहुमुखी और टिकाऊ होता है।
In simple words: ये सभी बहुलक छोटे-छोटे एकलकों को जोड़कर बनाए जाते हैं। बैकेलाइट और पॉलीऐस्टर संघनन से बनते हैं, जबकि PVC और नायलॉन-6,6 योगात्मक या संघनन बहुलीकरण से बनते हैं। हर बहुलक की अपनी खास विधि और रोज़मर्रा की जिंदगी में कई उपयोग होते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक बहुलक के एकलक, बहुलीकरण की विधि और कम से कम दो महत्वपूर्ण उपयोगों को याद रखें। रासायनिक संरचनाओं को दर्शाते समय सही बॉन्ड और संख्याएँ सुनिश्चित करें।
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