Official RBSE Solutions for Class 12 Chemistry: Chapter 13 नाइट्रोजन युक्त क्रियात्मक समूह वाले कार्
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Chapter-wise Solutions for Chemistry: Chapter 13 नाइट्रोजन युक्त क्रियात्मक समूह वाले कार्
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RBSE Class 12 Chemistry Chapter 13 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. निम्नांकित में से सर्वाधिक क्षारीय है
(a) \( \text{CH}_3\text{NH}_2 \)
(b) \( (\text{CH}_3)_2\text{NH} \)
(c) \( (\text{CH}_3)_3\text{N} \)
(d) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \)
Answer: (b) \( (\text{CH}_3)_2\text{NH} \)
In simple words: डाइमेथिलएमीन सबसे अधिक क्षारीय है क्योंकि इसमें दो मेथिल समूह होते हैं जो नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं, जिससे यह प्रोटॉन को आसानी से स्वीकार कर पाता है।
🎯 Exam Tip: क्षारीयता का निर्धारण नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व और उत्पन्न आयन के स्थायित्व से होता है।
Question 2. हिंसबर्ग अभिकर्मक है
(a) बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड
(b) बेन्जीन सल्फोनिक अम्ल
(c) [MathJax]/extensions/MathZoom.js
(d) फेनिल आइसोसायनाइड
Answer: (a) बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड
In simple words: बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड को हिंसबर्ग अभिकर्मक कहते हैं, इसका उपयोग ऐमीनों को पहचानने के लिए किया जाता है। यह अलग-अलग प्रकार के ऐमीनों के साथ अलग तरह से अभिक्रिया करता है।
🎯 Exam Tip: हिंसबर्ग अभिकर्मक का सूत्र \( \text{C}_6\text{H}_5\text{SO}_2\text{Cl} \) है और यह प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों के बीच अंतर करने में मदद करता है।
Question 4. ऐल्किल एमीन में परमाणु की संकरित अवस्था है
(a) \( \text{sp}^2 \)
(b) \( \text{sp}^3 \)
(c) \( \text{sp} \)
(d) \( \text{sp}^3\text{d} \)
Answer: (b) \( \text{sp}^3 \)
In simple words: ऐल्किल ऐमीन में नाइट्रोजन परमाणु पर एक अकेली इलेक्ट्रॉन जोड़ी और तीन सिग्मा बंध होते हैं, जिससे यह \( \text{sp}^3 \) संकरित अवस्था में होता है। यह संरचना टेट्राहेड्रल होती है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन परमाणु की संकरित अवस्था उसके चारों ओर के परमाणुओं और उसकी मुक्त इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या पर निर्भर करती है।
Question 5. सरसों के तेल जैसी गन्थ वाले यौगिक का सूत्र है
(a) RCN
(b) RNC
(c) RNCO
(d) RNCS
Answer: (d) RNCS
In simple words: ऐल्किल आइसोथायोसायनेट (RNCS) वे यौगिक होते हैं जिनकी गंध सरसों के तेल जैसी होती है। इन्हें सरसों का तेल या मस्टर्ड ऑइल भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: आइसोथायोसायनेट यौगिकों में कार्बन, नाइट्रोजन और सल्फर परमाणु एक विशेष क्रम में जुड़े होते हैं, जो उनकी विशिष्ट गंध के लिए जिम्मेदार होता है।
Question 6. क्लोरो पिकरिन का सूत्र है
(a) \( \text{C(NO}_2)\text{Cl}_3 \)
(b) \( \text{CCl(NO}_2)_3 \)
(c) \( \text{C(NO}_2)_2\text{Cl}_2 \)
(d) कोई नहीं।
Answer: (a) \( \text{C(NO}_2)\text{Cl}_3 \)
In simple words: क्लोरो पिकरिन का सूत्र \( \text{CCl}_3\text{NO}_2 \) होता है, जिसमें एक कार्बन परमाणु पर तीन क्लोरीन और एक नाइट्रो समूह जुड़ा होता है। यह एक जहरीला रसायन है।
🎯 Exam Tip: क्लोरो पिकरिन का उपयोग कीटनाशक और फफूंदनाशक के रूप में किया जाता है, लेकिन यह आंसू गैस के रूप में भी जाना जाता है।
Question 7. बेन्जीन के नाइट्रीकरण में \( \text{HNO}_3 \) एवं \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) क्रिया में भाग लेते हैं। यहाँ \( \text{HNO}_3 \) व्यवहार करता है
(a) क्षार के समान
(b) अम्ल के समान
(c) अपचायक
(d) उत्प्रेरक के समान
Answer: (a) क्षार के समान
In simple words: बेन्जीन के नाइट्रीकरण के दौरान, सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में नाइट्रिक अम्ल प्रोटॉन स्वीकार करके नाइट्रोनियम आयन \( (\text{NO}_2^+) \) बनाता है। इस प्रक्रिया में नाइट्रिक अम्ल क्षार की तरह काम करता है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रीकरण एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है जिसमें नाइट्रोनियम आयन एक इलेक्ट्रोफाइल के रूप में कार्य करता है।
Question 8. बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड X से अभिक्रिया कर एक रंजक देता है, अभिकारक \( \text{X} \) है
(a) \( \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \)
(b) \( \text{C}_6\text{H}_6 \)
(c) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \)
(d) \( \text{H}_2\text{O} \)
Answer: (c) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \)
In simple words: जब बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड, ऐनिलीन \( (\text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2) \) के साथ अभिक्रिया करता है, तो एजो-युग्मन अभिक्रिया होती है। इस अभिक्रिया से पीले रंग का एजो-रंजक बनता है, जिसका उपयोग रंगों के उद्योग में होता है।
🎯 Exam Tip: एजो-युग्मन अभिक्रिया डाइऐजोनियम लवणों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है और यह रंगीन यौगिकों के निर्माण में सहायक होती है।
Question 9. ऐसीटोनाइट्राइल का सूत्र हैं
(a) \( \text{CH}_3\text{OH} \)
(b) \( \text{CH}_3\text{CHO} \)
(c) \( \text{CH}_3\text{Cl} \)
(d) \( \text{CH}_3\text{COOH} \)
Answer: (a) \( \text{CH}_3\text{OH} \)
In simple words: ऐसीटोनाइट्राइल का सही सूत्र \( \text{CH}_3\text{CN} \) होता है, जो एक कार्बनिक यौगिक है। दिए गए विकल्पों में से, \( \text{CH}_3\text{OH} \) मेथनॉल है।
🎯 Exam Tip: ऐसीटोनाइट्राइल एक महत्वपूर्ण विलायक है जिसका उपयोग कई रासायनिक प्रक्रियाओं और क्रोमैटोग्राफी में होता है।
RBSE Class 12 Chemistry Chapter 13 नाइट्रोजन युक्त क्रियात्मक समूह वाले कार्बनिक यौगिक अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. क्या कारण है कि एरोमैटिक डाइऐजोनियम लवण एलिफैटिक ड्राइऐजोनियम लवण की अपेक्षा अधिक स्थायी होते हैं?
Answer: एरोमैटिक डाइऐजोनियम लवण अनुनाद दिखाते हैं, जिससे वे अधिक स्थिर होते हैं। वहीं, एलिफैटिक डाइऐजोनियम लवण में अनुनाद नहीं होता है, इसलिए वे कम स्थिर होते हैं। इस अनुनाद के कारण, एरोमैटिक डाइऐजोनियम समूह के इलेक्ट्रॉन बेन्जीन वलय में फैल जाते हैं।
In simple words: एरोमैटिक डाइऐजोनियम लवण इसलिए अधिक स्थायी होते हैं क्योंकि उनके अणु में अनुनाद होता है, जिससे ऊर्जा कम हो जाती है और स्थिरता बढ़ जाती है, जबकि एलिफैटिक लवणों में ऐसा नहीं होता।
🎯 Exam Tip: अनुनाद किसी अणु को अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करता है, खासकर जब उसमें पाई इलेक्ट्रॉन होते हैं जो विस्थानिकृत हो सकते हैं।
Question 2. एल्केन एमीन अमोनिया से प्रबल क्षारक है। कारण दीजिए।
Answer: ऐल्केनएमीन में मौजूद ऐल्किल समूह \( (+I) \) प्रभाव दिखाता है, जिससे वह अपने इलेक्ट्रॉनों को नाइट्रोजन परमाणु की ओर धकेलता है। इस कारण नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों का घनत्व बढ़ जाता है। जब नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है, तो उसकी इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति भी बढ़ जाती है, यानी उसकी क्षारीय प्रवृत्ति बढ़ जाती है। इसलिए, ऐल्केनएमीन अमोनिया से अधिक प्रबल क्षारक होता है।
In simple words: ऐल्किल समूह नाइट्रोजन को इलेक्ट्रॉन देता है, जिससे नाइट्रोजन अधिक इलेक्ट्रॉन युक्त हो जाता है और प्रोटॉन को आसानी से स्वीकार कर लेता है, इसलिए ऐल्केनएमीन अमोनिया से ज्यादा क्षारीय होता है।
🎯 Exam Tip: ऐल्किल समूहों का संख्यात्मक प्रभाव (प्रेरणिक प्रभाव) जितना अधिक होगा, नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व उतना ही अधिक होगा, और ऐमीन की क्षारीयता उतनी ही अधिक होगी।
Question 4. निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में A तथा B को पहचानिए। \( \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2\text{Cl} \xrightarrow{\text{H}_2\text{O}} \text{A} \xrightarrow{\text{Br}_2} \text{B} \)
Answer:
1. A – फीनॉल \( (\text{C}_6\text{H}_5\text{OH}) \)
2. B – 2, 4, 6-ट्राइब्रोमोफीनॉल \( (\text{C}_6\text{H}_2\text{Br}_3\text{OH}) \)
In simple words: पहले चरण में, डाइऐजोनियम लवण पानी के साथ अभिक्रिया करके फीनॉल बनाता है। दूसरे चरण में, फीनॉल ब्रोमीन जल के साथ अभिक्रिया करके 2, 4, 6-ट्राइब्रोमोफीनॉल बनाता है, जो सफेद अवक्षेप होता है।
🎯 Exam Tip: डाइऐजोनियम लवणों का जल-अपघटन फीनॉल बनाने का एक सामान्य तरीका है, और फीनॉल की सक्रियता के कारण यह आसानी से बहु-प्रतिस्थापित उत्पाद बनाता है।
Question 5. डाइमेथिलेमीन मेथिलेमीन से प्रबल क्षार है। कारण दीजिए।
Answer: डाइमेथिलेमीन में दो मेथिल समूह होते हैं जो \( (+I) \) प्रभाव डालते हैं। मेथिलएमीन में केवल एक मेथिल समूह होता है जो \( (+I) \) प्रभाव डालता है। इसलिए, डाइमेथिलेमीन में नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व मेथिलएमीन की तुलना में अधिक होता है। अधिक इलेक्ट्रॉन घनत्व के कारण डाइमेथिलेमीन अधिक क्षारीय होता है। यह बढ़ा हुआ इलेक्ट्रॉन घनत्व इसे प्रोटॉन को अधिक आसानी से स्वीकार करने में मदद करता है।
In simple words: डाइमेथिलेमीन में मेथिल समूह ज्यादा होने से नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन ज्यादा जमा होते हैं, जिससे वह ज्यादा मजबूत क्षार बन जाता है और मेथिलएमीन से बेहतर तरीके से प्रोटॉन पकड़ता है।
🎯 Exam Tip: ऐमीनों की क्षारीयता उनके नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन दान करने की क्षमता से जुड़ी होती है, जो ऐल्किल समूहों के प्रेरणिक प्रभाव से बढ़ती है।
Question 6. विनायल सायनाइड का संरचनात्मक सूत्र एवं IUPAC नाम लिखिए।
Answer: विनायल सायनाइड का संरचनात्मक सूत्र है: \( \text{CH}_2 = \text{CH-CN} \)
इसका IUPAC नाम प्रोप-2-ईन-नाइट्राइल है। इस यौगिक में एक द्विबंध और एक सायनाइड समूह दोनों उपस्थित होते हैं।
In simple words: विनायल सायनाइड एक ऐसा यौगिक है जिसमें दो कार्बन के बीच दोहरा बंधन और एक सायनाइड समूह होता है। इसका वैज्ञानिक नाम प्रोप-2-ईन-नाइट्राइल है।
🎯 Exam Tip: IUPAC नामकरण में, जनक श्रंखला में सबसे लंबे कार्बन को शामिल किया जाता है और क्रियात्मक समूहों को सबसे कम संभव संख्या दी जाती है।
Question 7. मेडियस अपचयन अभिक्रिया समीकरण लिखिए।
Answer: मेडियस अपचयन अभिक्रिया का समीकरण है:
\( \text{CH}_3\text{CN} + 4[\text{H}] \xrightarrow{\text{Na + C}_2\text{H}_5\text{OH}} \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-NH}_2 \)
इस अभिक्रिया में ऐसीटोनिट्राइल का अपचयन करके एथेनामीन बनता है। इस तरह, सायनाइड समूह को प्राथमिक ऐमीन में बदल दिया जाता है।
In simple words: मेडियस अपचयन में, ऐसीटोनिट्राइल को सोडियम और एथेनॉल के साथ मिलाकर एथेनामीन में बदला जाता है। यह एक तरह की अभिक्रिया है जो सायनाइड को ऐमीन में बदल देती है।
🎯 Exam Tip: मेडियस अभिक्रिया सायनाइड और आइसोसायनाइड से प्राथमिक ऐमीन बनाने के लिए उपयोगी है।
Question 8. ऐनिलीन से फेनिल आयसो सायनाइड प्राप्त करने की अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
Answer: ऐनिलीन से फेनिल आइसोसायनाइड बनाने की अभिक्रिया का समीकरण है:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{CHCl}_3 + 3\text{KOH} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{NC} + 3\text{KCl} + 3\text{H}_2\text{O} \)
यह अभिक्रिया कार्बिलएमीन अभिक्रिया के नाम से जानी जाती है, जिसमें प्राथमिक ऐमीन, क्लोरोफॉर्म और पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया करके आइसोसायनाइड बनाता है।
In simple words: ऐनिलीन, क्लोरोफॉर्म और \( \text{KOH} \) के साथ मिलकर फेनिल आइसोसायनाइड बनाता है। यह अभिक्रिया एक दुर्गंधयुक्त यौगिक बनाती है, जिसका उपयोग प्राथमिक ऐमीनों की पहचान में होता है।
🎯 Exam Tip: कार्बिलएमीन अभिक्रिया (या आइसोसायनाइड परीक्षण) प्राथमिक ऐमीनों की पहचान करने के लिए एक विशिष्ट परीक्षण है क्योंकि यह दुर्गंधयुक्त आइसोसायनाइड बनाता है।
Question 10. यूरिया का संरचनात्मक सूत्र बनाइए एवं IUPAC नाम लिखिए।
Answer: यूरिया का संरचनात्मक सूत्र है: \( \text{NH}_2\text{-C(=O)-NH}_2 \)
इसका IUPAC नाम ऐमीनोमेथेनामाइड है। यह एक सफेद, क्रिस्टलीय कार्बनिक यौगिक है।
In simple words: यूरिया का सूत्र \( \text{NH}_2\text{CONH}_2 \) है, और इसे वैज्ञानिक रूप से ऐमीनोमेथेनामाइड कहा जाता है। यह अक्सर उर्वरकों में उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: यूरिया स्तनधारियों के मूत्र में पाया जाने वाला प्रमुख नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट उत्पाद है, जो प्रोटीन उपापचय का अंत-उत्पाद होता है।
Question 11. नाइट्रो बेन्जीन का \( \text{Zn + HCl} \) की उपस्थिति में अपचयन पर अभिक्रिया समीकरण लिखिए।
Answer: नाइट्रोबेन्जीन का \( \text{Zn + HCl} \) की उपस्थिति में अपचयन करने पर ऐनिलीन बनती है। यह अभिक्रिया नाइट्रो समूह को ऐमीनो समूह में बदल देती है।
\[ \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 + 6[\text{H}] \xrightarrow{\text{Zn + HCl}} \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \]
In simple words: नाइट्रोबेन्जीन को जिंक और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ मिलाने पर वह ऐनिलीन में बदल जाता है। यह नाइट्रोबेन्जीन से ऐनिलीन बनाने का एक तरीका है।
🎯 Exam Tip: यह अपचयन अभिक्रिया नाइट्रो यौगिकों को प्राथमिक ऐमीनों में बदलने के लिए एक सामान्य विधि है।
Question 12. निम्नांकित अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए। \( \text{NH}_4\text{CNO} \xrightarrow{\Delta} ? \)
Answer: अभिक्रिया को पूर्ण करने पर यूरिया प्राप्त होता है:
\[ \text{NH}_4\text{CNO} \xrightarrow{\Delta} \text{NH}_2\text{CONH}_2 \]
यह वोलर संश्लेषण अभिक्रिया का एक उदाहरण है, जिसमें अमोनियम सायनेट को गर्म करने पर यूरिया बनता है।
In simple words: अमोनियम सायनेट को गरम करने पर वह यूरिया में बदल जाता है। यह एक प्रसिद्ध रासायनिक परिवर्तन है।
🎯 Exam Tip: यह वोलर संश्लेषण पहली जैविक संश्लेषण अभिक्रिया थी, जिसने जैविक यौगिकों को प्रयोगशाला में तैयार करने का रास्ता खोला।
Question 13. ऐथेनेमीन की क्षारीय प्रकृति दर्शाने वाला एक समीकरण लिखिए।
Answer: ऐथेनेमीन की क्षारीय प्रकृति को दर्शाने वाला समीकरण इस प्रकार है:
\[ \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{HCl} \rightarrow [\text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_3^+]\text{Cl}^- \]
इस अभिक्रिया में ऐथेनेमीन (एक क्षार) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (एक अम्ल) के साथ अभिक्रिया करके एथिल अमोनियम क्लोराइड (एक लवण) बनाता है। यह दर्शाता है कि ऐथेनेमीन एक प्रोटॉन स्वीकारक के रूप में कार्य करता है।
In simple words: जब ऐथेनेमीन अम्ल के साथ मिलता है, तो यह एक प्रोटॉन लेकर एक लवण बनाता है, जिससे साबित होता है कि यह एक क्षार है।
🎯 Exam Tip: ऐमीन की क्षारीय प्रकृति उसके नाइट्रोजन परमाणु पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के दान करने की क्षमता से आती है।
RBSE Class 12 Chemistry Chapter 13 नाइट्रोजन युक्त क्रियात्मक समूह वाले कार्बनिक यौगिक लघूत्तात्मक प्रश्न
Question 1. यूरिया का इयूरेट परीक्षण क्या है? रासायनिक समीकरण सहित दीजिए।
Answer:
(i) बाइयूरेट परीक्षण (Biuret Synthesis): जब यूरिया को धीरे-धीरे \( 155^\circ\text{C} \) पर गर्म किया जाता है, तो इसके दो अणु आपस में अभिक्रिया करते हैं और अमोनिया बाहर निकल जाती है। इससे सफेद क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ बाइयूरेट बनता है। यह अभिक्रिया यूरिया की एक विशिष्ट पहचान है।
\[ \text{H}_2\text{N-C(=O)-NH}_2 + \text{H}_2\text{N-C(=O)-NH}_2 \xrightarrow{155^\circ\text{C}} \text{H}_2\text{N-C(=O)-NH-C(=O)-NH}_2 + \text{NH}_3 \]
उत्पादित सफेद ठोस बाइयूरेट में कॉपर सल्फेट का क्षारीय विलयन मिलाने पर बैंगनी रंग प्राप्त होता है, जो इस परीक्षण की पुष्टि करता है।
(ii) यूरिया को तेज गति से \( 170^\circ\text{C} \) पर गर्म करने पर:
यूरिया को \( 170^\circ\text{C} \) पर तेज गति से गर्म करने पर, इसका एक अणु अपघटित होकर सायनिक अम्ल \( (\text{HNCO}) \) बनाता है। फिर यह सायनिक अम्ल त्रिलकीकरण द्वारा सायन्यूरिक अम्ल में बदल जाता है, जो एक स्थायी चक्रीय संरचना है।
\[ \text{H}_2\text{N-C(=O)-NH}_2 \xrightarrow{170^\circ\text{C} \text{ (तीव्र)}} \text{HN=C=O} + \text{NH}_3 \]
अब, तीन \( \text{HNCO} \) अणु आपस में जुड़कर सायन्यूरिक अम्ल बनाते हैं:
\[ 3\text{HN=C=O} \xrightarrow{\text{त्रिलकीकरण}} \text{C}_3\text{H}_3\text{N}_3\text{O}_3 \text{ (सायन्यूरिक अम्ल)} \]
In simple words: यूरिया को धीरे-धीरे गर्म करने पर बाइयूरेट बनता है, जो कॉपर सल्फेट के साथ बैंगनी रंग देता है। लेकिन तेज गर्म करने पर यह सायन्यूरिक अम्ल में बदल जाता है। यह दोनों यूरिया की पहचान करने के तरीके हैं।
🎯 Exam Tip: बाइयूरेट परीक्षण पेप्टाइड बंधों की उपस्थिति का भी पता लगाता है, क्योंकि बाइयूरेट की संरचना में भी एक पेप्टाइड जैसा बंध होता है।
Question 3. निम्नांकित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए। अपने उत्तर का कारण भी दीजिए।
\( \text{R-X + KCN} \rightarrow ? + ? \)
\( \text{R-X + AgCN} \rightarrow ? + ? \)
Answer:
अभिक्रियाओं को पूर्ण करने पर:
1. \( \text{R-X + KCN} \rightarrow \text{RCN + KX} \)
2. \( \text{R-X + AgCN} \rightarrow \text{RNC + KX} \)
कारण:
\( \text{KCN} \) एक आयनिक यौगिक है, जिसका अर्थ है कि यह \( \text{K}^+ \) और \( \text{CN}^- \) आयनों में टूट जाता है। \( \text{CN}^- \) आयन एक उभयदंती नाभिकस्नेही है, जिसमें कार्बन (C) और नाइट्रोजन (N) दोनों परमाणु इलेक्ट्रॉन युग्म दान कर सकते हैं। चूंकि कार्बन परमाणु पर ऋणावेश होता है और यह अधिक नाभिकस्नेही होता है, इसलिए यह \( \text{R-X} \) के साथ अभिक्रिया करके मुख्य रूप से ऐल्किल सायनाइड \( (\text{RCN}) \) बनाता है।
\( \text{AgCN} \) एक सहसंयोजक यौगिक है। इसमें नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है, जो नाभिकस्नेही के रूप में कार्य कर सकता है। क्योंकि Ag-C बंध मजबूत होता है, इसलिए नाइट्रोजन परमाणु के माध्यम से आक्रमण अधिक पसंद किया जाता है। इस कारण यह ऐल्किल आइसोसायनाइड \( (\text{RNC}) \) बनाता है।
\[ \text{Ag - C \equiv N} \]
In simple words: \( \text{KCN} \) के साथ अभिक्रिया से सायनाइड बनता है क्योंकि कार्बन आसानी से जुड़ता है, जबकि \( \text{AgCN} \) के साथ आइसोसायनाइड बनता है क्योंकि यहाँ नाइट्रोजन आसानी से जुड़ता है।
🎯 Exam Tip: उभयदंती नाभिकस्नेही वे होते हैं जिनके पास दो अलग-अलग परमाणु होते हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान कर सकते हैं, और उत्पाद अभिकर्मक की प्रकृति पर निर्भर करता है।
Question 5. ऐलिफटिक ऐमीनों को क्षारकता के बढ़ते क्रम में लिखिए एवं क्षारीयता पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: ऐलिफैटिक ऐमीनों की क्षारीयता बढ़ते क्रम में इस प्रकार है: प्राथमिक ऐमीन \( < \) द्वितीयक ऐमीन \( < \) तृतीयक ऐमीन।
ऐमीनों के क्षारकीय गुण (Basic Properties of Amines):
ऐमीन में नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है, जिसके कारण वे लुईस क्षार की तरह व्यवहार करते हैं। वे जल से अधिक क्षारीय होते हैं क्योंकि वे अपने जलीय विलयन में आसानी से प्रोटॉनीकृत हो जाते हैं। जिस प्रकार अमोनिया जल में अमोनियम हाइड्रॉक्साइड बनाती है, उसी प्रकार ऐमीन भी जल में ऐल्किल अमोनियम हाइड्रॉक्साइड बनाती है। ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन मुक्त करने वाले \( (+I) \) प्रभाव के कारण इलेक्ट्रॉन को नाइट्रोजन की ओर धकेलता है, जिससे नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म प्रोटॉन से साझेदारी के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
अभिक्रिया: \( \text{R-N: + H-OH} \rightleftharpoons \text{R-NH}_3^+ \text{OH}^- \)
ऐल्किल समूहों की संख्या बढ़ने के साथ नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है, जिससे उसकी प्रोटॉन स्वीकार करने की क्षमता बढ़ जाती है। हालाँकि, गैसीय अवस्था में तृतीयक ऐमीन सबसे अधिक क्षारीय होता है। जलीय विलयन में, विलायकन प्रभाव (solvation effect) भी महत्वपूर्ण होता है।
तृतीयक ऐमीन में तीन बड़े ऐल्किल समूह नाइट्रोजन परमाणु को घेर लेते हैं, जिससे किसी इलेक्ट्रॉनस्नेही (जैसे प्रोटॉन) को नाइट्रोजन के पास पहुंचने में बाधा आती है। इसे त्रिविम विन्यासी बाधा (Steric hindrance) कहते हैं। इस बाधा के कारण, जलीय विलयन में, द्वितीयक ऐमीन अक्सर प्राथमिक और तृतीयक ऐमीनों से अधिक क्षारीय होते हैं, क्योंकि इसमें प्रेरणिक प्रभाव और विलायकन प्रभाव का संतुलन बना रहता है।
यहां, जैसा कि पाठ्यपुस्तक में दिए गए तर्क पर आधारित है (प्रेरणिक प्रभाव को मुख्य मानते हुए):
तृतीयक ऐमीन \( > \) द्वितीयक ऐमीन \( > \) प्राथमिक ऐमीन।
इसके अलावा, ऐनिलीन जैसे एरोमैटिक ऐमीन, अमोनिया और ऐल्किल ऐमीन से काफी कम क्षारीय होते हैं। ऐनिलीन की कम क्षारीयता का मुख्य कारण इसमें पाई जाने वाली अनुनादी संरचनाएँ हैं। अनुनाद के कारण नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेन्जीन वलय में विस्थानिकृत हो जाता है, जिससे यह प्रोटॉन दान करने के लिए कम उपलब्ध होता है।
ऐमीनों की क्षारीय प्रकृति को दर्शाने वाली कुछ अभिक्रियाएँ:
1. \( \text{RNH}_2+\text{HCl}\rightarrow \text{RNH}_3^+ \text{Cl}^- \) (ऐल्किल अमोनियम क्लोराइड)
2. \( \text{2RNH}_2 + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{(RNH}_3\text{)}_2\text{SO}_4 \) (ऐल्किल अमोनियम सल्फेट)
3. \( \text{2RNH}_2 + \text{H}_2\text{PtCl}_6 \rightarrow \text{(RNH}_3\text{)}_2\text{PtCl}_6 \) (ऐल्किल अमोनियम क्लोरोप्लेटीनेट)
4. \( \text{RNH}_2 + \text{HAuCl}_4 \rightarrow \text{(RNH}_3\text{)AuCl}_4 \) (ऐल्किल अमोनियम क्लोरोऑरेट)
ऐमीनों के क्षारीय गुण \( \text{K}_b \) व \( \text{pK}_b \) के मानों पर निर्भर करते हैं।
\[ \text{RNH}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightleftharpoons \text{RNH}_3^+ + \text{OH}^- \]
\[ \text{K}_b = \frac{[\text{RNH}_3^+][\text{OH}^-]}{[\text{RNH}_2][\text{H}_2\text{O}]} \]
\( \text{pK}_b = -\log \text{K}_b \)
जिस ऐमीन के \( \text{K}_b \) का मान जितना अधिक होगा या \( \text{pK}_b \) का मान जितना कम होगा, ऐमीन उतना ही प्रबल क्षार होगा।
In simple words: ऐलिफैटिक ऐमीन नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन देने की क्षमता के कारण क्षार होते हैं। ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन देकर इस क्षमता को बढ़ाते हैं। हालांकि, पानी में द्वितीयक ऐमीन सबसे अधिक क्षारीय होता है क्योंकि यहाँ इलेक्ट्रॉन देने का असर और पानी के साथ जुड़ने का असर संतुलित रहता है।
🎯 Exam Tip: ऐमीनों की क्षारीयता का क्रम गैसीय और जलीय अवस्था में भिन्न हो सकता है। जलीय अवस्था में, प्रेरणिक प्रभाव, विलायकन प्रभाव और त्रिविम बाधा तीनों को ध्यान में रखना चाहिए।
Question 6. संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (अभिक्रिया सहित)
(अ) हॉफमान ग्रोमामाइड अभिक्रिया
(ब) यूरिया का दुर्बल मोनो अम्लीय क्षारक व्यवहार।
Answer:
(अ) हॉफमान ब्रोमामाइड अभिक्रिया द्वारा (By Hoffmann's Bromamide Reaction):
हॉफमान ने प्राथमिक ऐमीनों को बनाने के लिए एक तरीका विकसित किया था, जिसमें किसी ऐमाइड की \( \text{NaOH} \) के जलीय या एथेनॉलिक घोल में ब्रोमीन \( (\text{Br}_2) \) के साथ अभिक्रिया कराई जाती है। इस अभिक्रिया में, ऐल्किल या ऐरिल समूह का स्थानान्तरण ऐमाइड के कार्बोनिल कार्बन से ऐमीन के कार्बोनिल परमाणु पर होता है। इस प्रक्रिया में प्राप्त ऐमीन में मूल ऐमाइड की तुलना में एक कार्बन परमाणु कम होता है। यह एक कार्बनिक श्रृंखला को छोटा करने का एक तरीका है।
\[ \text{R-C(=O)-NH}_2+\text{Br}_2 +4\text{NaOH}\rightarrow \text{R-NH}_2 + \text{Na}_2\text{CO}_3 + 2\text{NaBr} + 2\text{H}_2\text{O} \]
(ब) यूरिया का दुर्बल मोनो अम्लीय क्षारक व्यवहार:
यूरिया एक कार्बोनिक अम्ल का डाइऐमाइड व्युत्पन्न है। कार्बोनिक अम्ल \( (\text{H}_2\text{CO}_3) \) एक अस्थिर द्विक्षारकीय अम्ल है, लेकिन यूरिया \( (\text{NH}_2\text{CONH}_2) \) एक स्थिर यौगिक है। यूरिया में दो एमाइड समूह होते हैं। यह एक बहुत ही कमजोर अम्ल और कमजोर क्षार दोनों की तरह व्यवहार कर सकता है।
संरचनाएँ:
कार्बोनिक अम्ल: \( \text{HO-C(=O)-OH} \)
हाइड्रॉक्सी मेथेनोइक अम्ल: \( \text{HO-C(=O)-NH}_2 \)
यूरिया (ऐमीनो मेथेनामाइड): \( \text{H}_2\text{N-C(=O)-NH}_2 \)
यूरिया पहला कार्बनिक यौगिक था जिसे 1828 में फ्रेडरिक वोलर ने प्रयोगशाला में संश्लेषित किया था। इसमें नाइट्रोजन परमाणु पर मुक्त इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति इसे कमजोर क्षार बनाती है, जबकि इसमें मौजूद हाइड्रोजन परमाणु कमजोर अम्लीय प्रकृति प्रदान करते हैं।
\[ \text{H}_2\text{N-C(=O)-NH}_2 \rightleftharpoons \text{H}_2\text{N-C(=NH)-O}^- \rightleftharpoons \text{H}_2\text{N=C(-O)-NH}_2^+ \]
In simple words: हॉफमान अभिक्रिया में ऐमाइड से एक कार्बन कम करके ऐमीन बनाया जाता है। यूरिया एक कमजोर अम्ल और क्षार दोनों की तरह व्यवहार करता है, और यह कार्बोनिक अम्ल का एक व्युत्पन्न है।
🎯 Exam Tip: हॉफमान ब्रोमामाइड अभिक्रिया कार्बन श्रृंखला को छोटा करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, और यह प्राथमिक ऐमीन बनाने के लिए उपयोगी है।
Question 8. विभिन्न माध्यम में यूरिया के जल अपघटन की अभिक्रिया को लिखिए।
Answer: यूरिया विभिन्न माध्यमों में जल अपघटन (hydrolysis) से गुजरता है:
(i) तनु \( \text{HCl} \) की उपस्थिति में (अम्लीय माध्यम):
तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की उपस्थिति में यूरिया का जल अपघटन करने पर अमोनियम क्लोराइड \( (\text{NH}_4\text{Cl}) \) और कार्बन डाइऑक्साइड \( (\text{CO}_2) \) प्राप्त होते हैं।
\[ \text{NH}_2\text{CONH}_2 + 2\text{HCl} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{NH}_4\text{Cl} + \text{CO}_2 \]
(ii) \( \text{NaOH} \) के साथ (क्षारीय माध्यम):
सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया कराने पर यूरिया का जल अपघटन अमोनियम हाइड्रॉक्साइड \( (\text{NH}_4\text{OH}) \) और सोडियम कार्बोनेट \( (\text{Na}_2\text{CO}_3) \) बनाता है।
\[ \text{NH}_2\text{CONH}_2 + 2\text{NaOH} + 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{NH}_4\text{OH} + \text{Na}_2\text{CO}_3 \]
(iii) शुद्ध जल के साथ (उदासीन माध्यम):
शुद्ध जल के साथ यूरिया का जल अपघटन करने पर अमोनियम कार्बोनेट \( ((\text{NH}_4)_2\text{CO}_3) \) बनता है।
\[ \text{NH}_2\text{CONH}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow (\text{NH}_4)_2\text{CO}_3 \]
In simple words: यूरिया पानी के साथ मिलकर टूट जाता है, लेकिन उत्पाद इस बात पर निर्भर करते हैं कि पानी में अम्ल है, क्षार है या पानी शुद्ध है। अम्ल में अमोनियम क्लोराइड, क्षार में अमोनियम हाइड्रॉक्साइड और शुद्ध पानी में अमोनियम कार्बोनेट बनता है।
🎯 Exam Tip: यूरिया का जल अपघटन कृषि में मिट्टी में अमोनिया छोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है, जहां यह एंजाइम यूरिएस द्वारा उत्प्रेरित होता है।
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