RBSE Solutions Class 12 Chemistry Chapter 11 ऑक्सीजन युक्त क्रियात्मक समूह वाले यौगिक

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Detailed Chapter 11 ऑक्सीजन युक्त क्रियात्मक समूह वाले यौगिक RBSE Solutions for Class 12 Chemistry

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Class 12 Chemistry Chapter 11 ऑक्सीजन युक्त क्रियात्मक समूह वाले यौगिक RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 11 अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 11 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. ऐथेनॉल तथा सान्द्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) की क्रिया द्वारा किसी भी अवस्था में निम्न में से कौन प्राप्त नहीं होता है
(a) \( \text{CH}_3\text{CHO} \)
(b) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{HSO}_4 \)
(c) \( \text{C}_2\text{H}_4 \)
(d) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{OCH}_2\text{CH}_3 \)
Answer: (d) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{OCH}_2\text{CH}_3 \)
In simple words: ऐथेनॉल और गाढ़ा सल्फ्यूरिक एसिड जब मिलते हैं, तो कई चीजें बनती हैं. लेकिन, डाइएथिल ईथर इस अभिक्रिया से कभी नहीं बनता है. यह समझना महत्वपूर्ण है कि अलग-अलग तापमान पर यह अभिक्रिया अलग-अलग उत्पाद देती है.

🎯 Exam Tip: ऐथेनॉल की सांद्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) के साथ अभिक्रिया के उत्पादों को याद रखने के लिए तापमान की स्थिति पर विशेष ध्यान दें; 170°C पर एल्कीन, जबकि 140°C पर ईथर बनता है.

 

Question 2. ऐल्कोहॉल का सामान्य सूत्र है
(a) \( \text{C}_n \text{H}_{2n+2} \text{O} \)
(b) \( \text{C}_n \text{H}_{2n+1} \text{O} \)
(c) \( \text{C}_{n+1} \text{H}_{2n} \text{O} \)
(d) \( \text{C}_{n+2} \text{H}_n \text{O} \)
Answer: (a) \( \text{C}_n \text{H}_{2n+2} \text{O} \)
In simple words: ऐल्कोहॉल का सामान्य सूत्र \( \text{C}_n \text{H}_{2n+2} \text{O} \) है, जिसका मतलब है कि इसमें एक ऑक्सीजन परमाणु होता है. यह सूत्र यह भी दिखाता है कि ऐल्कोहॉल का एक हाइड्रोजन परमाणु हाइड्रोक्सिल समूह (\( \text{-OH} \)) द्वारा प्रतिस्थापित होता है.

🎯 Exam Tip: ऐल्कोहॉल और ईथर का सामान्य सूत्र समान होता है, \( \text{C}_n \text{H}_{2n+2} \text{O} \), लेकिन उनकी संरचनात्मक व्यवस्था भिन्न होती है, जिससे वे क्रियात्मक समूह समावयवी कहलाते हैं.

 

Question 4. ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया फॉस्फोरस पेन्टा क्लोराइड के साथ करवाने पर उत्पाद बनता है।
(a) क्लोरो ऐल्कीन
(b) डाइक्लोरो ऐल्कीन
(c) क्लोरो ऐल्केन
(d) डाइक्लोरो ऐल्केन
Answer: (c) क्लोरो ऐल्केन
In simple words: जब ऐल्कोहॉल फॉस्फोरस पेन्टा क्लोराइड (PCl5) से अभिक्रिया करता है, तो हाइड्रोक्सिल समूह (\( \text{-OH} \)) की जगह क्लोरीन परमाणु (\( \text{-Cl} \)) जुड़ जाता है. इससे क्लोरोऐल्केन बनता है.

🎯 Exam Tip: ऐल्कोहॉल से ऐल्किल हैलाइड बनाने के लिए \( \text{PCl}_5 \) एक महत्वपूर्ण अभिकर्मक है; अन्य अभिकर्मक जैसे \( \text{SOCl}_2 \) (थायोनिल क्लोराइड) भी इस परिवर्तन को कुशलता से करते हैं.

 

Question 5. निम्नलिखित फोनॉल में सबसे प्रबल अम्ल है
(a) o-नाइट्रो फोनॉल
(b) m-नाइट्रोफीनॉल
(c) o-नाइट्रोफीनॉल
(d) p-क्लोरों फीनॉल
Answer: (c) o-नाइट्रोफीनॉल
In simple words: नाइट्रो समूह (\( \text{-NO}_2 \)) एक इलेक्ट्रॉन खींचने वाला समूह है, जो फीनॉल की अम्लता को बढ़ाता है. o-नाइट्रोफीनॉल में नाइट्रो समूह ऑर्थो स्थिति पर होता है, जिससे यह सबसे प्रबल अम्ल बनता है.

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले समूह (जैसे \( \text{NO}_2 \)) फीनॉल की अम्लता बढ़ाते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन देने वाले समूह (जैसे \( \text{CH}_3 \)) अम्लता घटाते हैं.

 

Question 6. विक्टर मेयर परीक्षण नहीं दिया जाता है
(a) \( \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \)
(b) \( \text{(CH}_3\text{)}_3\text{COH} \)
(c) \( \text{(CH}_3\text{)}_2\text{CHOH} \)
(d) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{OH} \)
Answer: (b) \( \text{(CH}_3\text{)}_3\text{COH} \)
In simple words: विक्टर मेयर परीक्षण प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐल्कोहॉल के बीच अंतर करने के लिए उपयोग किया जाता है. तृतीयक ऐल्कोहॉल जैसे \( \text{(CH}_3\text{)}_3\text{COH} \) (tert-ब्यूटिल ऐल्कोहॉल) यह परीक्षण नहीं देते हैं.

🎯 Exam Tip: विक्टर मेयर परीक्षण में, प्राथमिक ऐल्कोहॉल लाल रंग, द्वितीयक ऐल्कोहॉल नीला रंग और तृतीयक ऐल्कोहॉल कोई रंग नहीं देते हैं; यह ऐल्कोहॉल के प्रकार की पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण गुणात्मक परीक्षण है.

 

Question 7. निम्न में प्रबल अम्ल हैं
(a) फीनॉल
(b) pm-क्लोरोफीनॉल
(c) बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(d) साइक्लो हेक्सेनॉल
Answer: (b) pm-क्लोरोफीनॉल
In simple words: फीनॉल की तुलना में p-क्लोरोफीनॉल अधिक अम्लीय है क्योंकि क्लोरीन परमाणु एक इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाला समूह है. यह फीनॉक्साइड आयन को स्थिर करके अम्लता बढ़ाता है.

🎯 Exam Tip: किसी भी यौगिक की अम्लता उसके संगत संयुग्मी क्षार की स्थिरता पर निर्भर करती है; संयुग्मी क्षार जितना अधिक स्थिर होता है, मूल यौगिक उतना ही अधिक अम्लीय होता है.

 

Question 8. सेलिसिलिक अम्ल को सोडा लाइम के साथ गर्म करने पर बनने वाला उत्पाद है
(a) मेथिल ऐल्कोहॉल
(b) ईथर
(c) कीटोन
(d) ऐसीटेल्डिहाइड
Answer: (b) ईथर
In simple words: जब सेलिसिलिक अम्ल को सोडा लाइम (सोडियम हाइड्रॉक्साइड और कैल्शियम ऑक्साइड का मिश्रण) के साथ गर्म किया जाता है, तो यह कार्बोक्सिल समूह (\( \text{-COOH} \)) को हटा देता है, और उत्पाद के रूप में फीनॉल बनता है.

🎯 Exam Tip: सोडा लाइम के साथ गर्म करने की अभिक्रिया को डीकार्बोक्सिलेशन कहते हैं, जिसमें कार्बोक्सिलिक एसिड से \( \text{CO}_2 \) निकलता है, जिससे एक कार्बन परमाणु कम वाला उत्पाद बनता है.

 

Question 10. ईथर को ऐलुमिना पर 653 K ताप पर प्रवाहित करने पर बनने वाला उत्पाद है
(a) ऐल्कीन
(b) ऐल्केन
(c) ऐल्कोहॉल
(d) फनॉल
Answer: (a) ऐल्कीन
In simple words: जब ईथर को एल्यूमिना (निर्जल \( \text{Al}_2\text{O}_3 \)) पर 653 K के ऊँचे तापमान पर गरम करते हैं, तो यह निर्जलीकरण से गुजरता है और ऐल्कीन बनाता है. यह प्रक्रिया ईथर को तोड़ देती है.

🎯 Exam Tip: ईथर के निर्जलीकरण में, तापमान और उत्प्रेरक का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है; उच्च तापमान पर ऐल्कीन बनता है, जबकि निम्न तापमान पर ऐल्कोहॉल के साथ ईथर बन सकता है.

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 11 अतिलघुत्त्रात्मक प्रश्न

 

Question 1. ऐल्कोहॉल का सामान्य सूत्र है
Answer: ऐल्कोहॉल का सामान्य सूत्र \( \text{C}_n\text{H}_{2n+1}\text{OH} \) या \( \text{C}_n\text{H}_{2n+2}\text{O} \) है. यह सूत्र हाइड्रोकार्बन के एक हाइड्रोजन परमाणु को हाइड्रॉक्सिल (\( \text{-OH} \)) समूह से बदलने पर बनता है.
In simple words: ऐल्कोहॉल का सूत्र बताता है कि इसमें कार्बन, हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन वाला \( \text{OH} \) समूह होता है.

🎯 Exam Tip: सामान्य सूत्र लिखते समय, ऐल्किल समूह (\( \text{C}_n\text{H}_{2n+1} \)) के बाद \( \text{OH} \) समूह को अलग से दिखाना स्पष्टता के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 2. ऐथिल ऐल्कोहॉल का IUPAC नाम लिखिए।
Answer: ऐथिल ऐल्कोहॉल का IUPAC (अंतर्राष्ट्रीय शुद्ध और अनुप्रयुक्त रसायन विज्ञान संघ) नाम 'ऐथेनॉल' है. यह नाम ऐथेन के अंतिम 'e' को 'ol' से बदलकर प्राप्त किया जाता है, जो ऐल्कोहॉल समूह को दर्शाता है.
In simple words: ऐथिल ऐल्कोहॉल को रसायन विज्ञान की भाषा में 'ऐथेनॉल' कहते हैं.

🎯 Exam Tip: IUPAC नामकरण में, ऐल्कोहॉल के लिए ऐल्केन के नाम से 'e' हटाकर 'ol' जोड़ा जाता है, जो क्रियात्मक समूह को इंगित करता है और भ्रम से बचाता है.

 

Question 4. प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्कोहॉलों की अम्लता का क्रम लिखिए।
Answer: प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐल्कोहॉलों की अम्लता का क्रम इस प्रकार है: प्राथमिक ऐल्कोहॉल \( > \) द्वितीयक ऐल्कोहॉल \( > \) तृतीयक ऐल्कोहॉल. यह क्रम ऐल्किल समूहों द्वारा इलेक्ट्रॉन-मुक्त प्रभाव के कारण होता है, जो \( \text{-OH} \) समूह के ऑक्सीजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को बढ़ाते हैं और हाइड्रोजन को मुक्त करने की प्रवृत्ति को कम करते हैं.
In simple words: प्राथमिक ऐल्कोहॉल सबसे ज्यादा अम्लीय होते हैं, फिर द्वितीयक और सबसे कम अम्लीय तृतीयक ऐल्कोहॉल होते हैं.

🎯 Exam Tip: ऐल्कोहॉल की अम्लता में कमी का मुख्य कारण इलेक्ट्रॉन-मुक्त करने वाले ऐल्किल समूहों की संख्या में वृद्धि है, जो \( \text{O-H} \) बंध की ध्रुवीयता को कम कर देता है.

 

Question 5. फ्रीस पुर्नविन्यास लिखिए।
Answer: फ्रीस पुनर्विन्यास एक रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें फीनोलिक ऐस्टर को एक लुईस अम्ल (जैसे निर्जल \( \text{AlCl}_3 \)) की उपस्थिति में गर्म करने पर ऑर्थो- या पैरा-हाइड्रॉक्सी कीटोन में बदल दिया जाता है. इस अभिक्रिया में ऐसिल समूह फीनॉल रिंग पर ऑर्थो या पैरा स्थिति पर स्थानांतरित होता है. फीनिल ऐस्टर को ऐसीटिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया कराकर प्राप्त किया जाता है.
\[ \begin{array}{c} \text{OH} \\ \text{C}_6\text{H}_5 \end{array} + \text{CH}_3\text{COCl} \xrightarrow{} \begin{array}{c} \text{OCOC}\text{H}_3 \\ \text{फीनिल ऐस्टर} \end{array} \xrightarrow{\text{निर्जल } \text{AlCl}_3, 333\text{K}} \begin{array}{c} \text{OH} \\ \text{C}_6\text{H}_4(\text{C=O})\text{CH}_3 \\ o\text{-हाइड्रॉक्सी ऐसीटोफीनोन} \end{array} + \begin{array}{c} \text{OH} \\ \text{C}_6\text{H}_4(\text{C=O})\text{CH}_3 \\ p\text{-हाइड्रॉक्सी ऐसीटोफीनोन} \end{array} \]In simple words: फ्रीस पुनर्विन्यास में, फीनॉल से बने एक खास तरह के यौगिक (फीनिल ऐस्टर) को गरम करने पर वह अपने आप बदलकर ऑर्थो या पैरा स्थिति पर हाइड्रोक्सी कीटोन बना लेता है.

🎯 Exam Tip: फ्रीस पुनर्विन्यास में ताप का नियंत्रण महत्वपूर्ण है; कम ताप पर पैरा-उत्पाद प्रमुख होता है, जबकि उच्च ताप पर ऑर्थो-उत्पाद अधिक बनता है.

 

Question 6. फीनॉल वायु में खुला छोड़ने पर क्या बनाता है?
Answer: फीनॉल को जब वायु में खुला छोड़ दिया जाता है, तो यह धीरे-धीरे ऑक्सीकृत हो जाता है और क्विनोन युक्त रंगीन मिश्रण बनाता है. इस ऑक्सीकरण के कारण फीनॉल का रंग गुलाबी से लाल-भूरा हो जाता है. यह ऑक्सीकरण प्रक्रिया वायुमंडलीय ऑक्सीजन की उपस्थिति में होती है.
In simple words: फीनॉल को हवा में छोड़ने पर वह रंगीन हो जाता है, क्योंकि वह हवा में मौजूद ऑक्सीजन से मिलकर एक नया पदार्थ (क्विनोन) बनाता है.

🎯 Exam Tip: फीनॉल को हमेशा अंधेरे और हवा रहित कंटेनर में रखना चाहिए ताकि ऑक्सीकरण को रोका जा सके और उसका रंग ना बदले.

 

Question 7. इलेक्टॉन आकषी समूह का फीनॉल की अम्लता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: जब फीनॉल में इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाला समूह (जैसे नाइट्रो \( \text{-NO}_2 \), हैलोजन \( \text{-Cl} \)) मौजूद होता है, तो फीनॉल की अम्लता बढ़ जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये समूह फीनॉक्साइड आयन को इलेक्ट्रॉन घनत्व को कम करके और उसे अधिक स्थिर बनाकर स्थिर करते हैं. जितनी अधिक फीनॉक्साइड आयन स्थिर होती है, उतनी ही अधिक अम्लता होती है. इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले समूह \( \text{O-H} \) बंध से इलेक्ट्रॉन घनत्व को अपनी ओर खींचते हैं, जिससे \( \text{H}^+ \) आयन को मुक्त करना आसान हो जाता है.
In simple words: इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह फीनॉल को और ज्यादा अम्लीय बनाते हैं, क्योंकि वे इसके \( \text{O-H} \) बंध से इलेक्ट्रॉन खींचकर हाइड्रोजन को आसानी से बाहर निकलने देते हैं.

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले समूह की संख्या और उसकी स्थिति (ऑर्थो या पैरा) फीनॉल की अम्लता को सीधे प्रभावित करती है; मेटा स्थिति पर इसका प्रभाव सबसे कम होता है.

 

Question 8. ईथर का सामान्य सूत्र लिखिए।
Answer: ईथर का सामान्य सूत्र \( \text{C}_n\text{H}_{2n+2}\text{O} \) है. इसे \( \text{R-O-R'} \) के रूप में भी दर्शाया जा सकता है, जहाँ \( \text{R} \) और \( \text{R'} \) ऐल्किल या ऐरिल समूह हैं. ईथर में एक ऑक्सीजन परमाणु दो कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है, जिससे यह एक अलग कार्यात्मक समूह बनाता है.
In simple words: ईथर का सामान्य सूत्र \( \text{C}_n\text{H}_{2n+2}\text{O} \) है, जिसका मतलब है कि इसमें एक ऑक्सीजन परमाणु दो कार्बन समूहों के बीच होता है.

🎯 Exam Tip: ईथर का सामान्य सूत्र ऐल्कोहॉल के सामान्य सूत्र के समान होता है, लेकिन संरचनात्मक रूप से ये भिन्न होते हैं, जो यह दर्शाता है कि ये दोनों क्रियात्मक समूह समावयवी हैं.

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 11 लघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 9. हाइड्रोवोरोनन ऑक्सीकरण अभिक्रिया समझाइए।
Answer: हाइड्रोबोरोनन ऑक्सीकरण अभिक्रिया में, ऐल्कीन को पहले डाइबोरेन (\( \text{B}_2\text{H}_6 \)) के साथ अभिक्रिया करके ट्राइऐल्किल बोरेन में बदला जाता है. डाइबोरेन एक इलेक्ट्रॉन-न्यून अणु है और इलेक्ट्रॉनरागी की तरह काम करता है. फिर, इस ट्राइऐल्किल बोरेन को क्षारीय माध्यम में हाइड्रोजन परॉक्साइड (\( \text{H}_2\text{O}_2 \)) के साथ ऑक्सीकृत किया जाता है, जिससे ऐल्कोहॉल बनता है. यह एक एंटी-मारकोनीकॉफ (Anti-Markovnikov) जोड़ है, जिसमें हाइड्रॉक्सिल समूह उस कार्बन पर जुड़ता है जहाँ अधिक हाइड्रोजन होते हैं. यह अभिक्रिया दो चरणों में पूरी होती है. \[ (\text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2)_2\text{BH} + \text{CH}_3\text{CH=CH}_2 \longrightarrow (\text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2)_3\text{B} \]
\( \implies \) `ट्राइ-n-प्रोपिल बोरेन` \[ (\text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2)_3\text{B} + 3\text{H}_2\text{O}_2 \xrightarrow{\text{OH}^-, \text{H}_2\text{O}} 3\text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{OH} + \text{H}_3\text{BO}_3 \]
\( \implies \) `प्रोपेन-1-ऑल` `बोरिक अम्ल`
In simple words: हाइड्रोबोरोनन ऑक्सीकरण में, हम ऐल्कीन को पहले बोरेन से जोड़ते हैं, फिर उसे हाइड्रोजन परॉक्साइड से ऑक्सीकृत करते हैं, जिससे ऐल्कोहॉल बनता है.

🎯 Exam Tip: हाइड्रोबोरोनन ऑक्सीकरण अभिक्रिया मारकोनीकॉफ नियम के विपरीत होती है, यानी \( \text{-OH} \) समूह उस कार्बन पर जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या अधिक होती है.

 

Question 10. ग्रीन्यार अभिकर्मक से प्राथमिक ऐल्कोहॉल बनाने की विधि लिखिए।
Answer: ग्रीन्यार अभिकर्मक से प्राथमिक ऐल्कोहॉल बनाने के लिए फॉर्मेंल्डिहाइड का उपयोग किया जाता है. फॉर्मेंल्डिहाइड (सबसे सरल ऐल्डिहाइड) ग्रीन्यार अभिकर्मक (\( \text{RMgX} \)) के साथ अभिक्रिया करके एक मध्यवर्ती यौगिक (ऐडक्ट) बनाता है, जिसे जल-अपघटित करने पर प्राथमिक ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है. यह अभिक्रिया कार्बन-कार्बन बंध बनाने के लिए बहुत उपयोगी है. \[ \begin{array}{c} \text{H} \\ | \\ \text{C=O} \\ | \\ \text{H} \\ \text{फॉर्मेल्डिहाइड} \end{array} + \text{CH}_3\text{MgBr} \xrightarrow{\text{शुष्क ईथर}} \begin{array}{c} \text{H} \\ | \\ \text{C}-\text{OMgBr} \\ | \\ \text{CH}_3 \\ | \\ \text{H} \\ \text{योगोत्पाद} \end{array} \xrightarrow{\text{H}^+/\text{H}_2\text{O}} \begin{array}{c} \text{H} \\ | \\ \text{C}-\text{OH} \\ | \\ \text{CH}_3 \\ | \\ \text{H} \\ \text{ऐथेनॉल (1° ऐल्कोहॉल)} \end{array} + \text{Mg(OH)Br} \]In simple words: फॉर्मेंल्डिहाइड को ग्रीन्यार अभिकर्मक से मिलाने और फिर पानी डालने पर हमें प्राथमिक ऐल्कोहॉल मिलता है.

🎯 Exam Tip: ग्रीन्यार अभिकर्मक के साथ प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक ऐल्कोहॉल बनाने के लिए, क्रमशः फॉर्मेंल्डिहाइड, अन्य ऐल्डिहाइड या कीटोन का उपयोग करें.

 

Question 11. ऐल्कोहॉल पानी में विलेय हैं तथा डाइ ऐथिल ईथर नहीं। कारण समझाइए।
Answer: ऐल्कोहॉल पानी में आसानी से घुल जाते हैं क्योंकि वे पानी के अणुओं के साथ अंतरा-अणुक हाइड्रोजन आबंध बना सकते हैं. ऐल्कोहॉल के \( \text{-OH} \) समूह में ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के बीच एक ध्रुवीय बंध होता है, जिससे यह पानी के हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ हाइड्रोजन आबंध बना पाता है. इसके विपरीत, डाइऐथिल ईथर में \( \text{-O-} \) समूह होता है, जो पानी के साथ उतने मजबूत हाइड्रोजन आबंध नहीं बना पाता है, जिससे उसकी पानी में विलेयता बहुत कम हो जाती है. ईथर केवल कमजोर हाइड्रोजन आबंध बनाता है और पानी की आंतरिक हाइड्रोजन आबंधन संरचना को बाधित करता है.
In simple words: ऐल्कोहॉल पानी में घुलते हैं क्योंकि वे पानी के साथ हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं, जबकि डाइऐथिल ईथर ऐसा नहीं कर पाता, इसलिए वह पानी में नहीं घुलता.

🎯 Exam Tip: किसी भी कार्बनिक यौगिक की जल में विलेयता मुख्य रूप से हाइड्रोजन आबंध बनाने की उसकी क्षमता पर निर्भर करती है.

 

Question 12. फीनॉल कार्बोक्सिलिक अम्ल की तुलना में कम अम्लीयता प्रदर्शित करते हैं। कारण समझाइए।
Answer: फीनॉल और कार्बोक्सिलिक अम्ल दोनों अम्लीय प्रकृति के होते हैं, लेकिन कार्बोक्सिलिक अम्ल फीनॉल की तुलना में अधिक अम्लीय होते हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि कार्बोक्सिलिक अम्ल में, जब \( \text{H}^+ \) आयन निकल जाता है, तो बनने वाला कार्बोक्सिलेट आयन (\( \text{R-COO}^- \)) दो ऑक्सीजन परमाणुओं के बीच ऋण आवेश के विस्थानीकरण (Delocalization) के कारण अधिक स्थिर होता है. फीनॉक्साइड आयन (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{O}^- \)) में भी अनुनाद होता है, लेकिन इसका ऋण आवेश एक ऑक्सीजन परमाणु पर और फिर कार्बन परमाणुओं पर विस्थापित होता है, जो ऑक्सीजन की तुलना में कम विद्युतऋणात्मक होते हैं. इससे फीनॉक्साइड आयन कार्बोक्सिलेट आयन की तुलना में कम स्थिर होता है, और इसलिए फीनॉल कार्बोक्सिलिक अम्ल की तुलना में कम अम्लीय होते हैं. \[ \text{कार्बोक्सिलेट आयन:} \quad \text{R}-\text{C} \begin{pmatrix} \text{O}^- \\ || \\ \text{O} \end{pmatrix} \longleftrightarrow \text{R}-\text{C} \begin{pmatrix} \text{O} \\ || \\ \text{O}^- \end{pmatrix} \]
\( \implies \) यह दो तुल्य अनुनाद संरचनाओं (VI, VII) से अत्यधिक स्थिर होता है. \[ \text{फीनॉक्साइड आयन:} \quad \text{C}_6\text{H}_5-\text{O}^- \longleftrightarrow \text{C}_6\text{H}_4=\text{O} \begin{pmatrix} \\ \text{ऑर्थो C}^- \end{pmatrix} \longleftrightarrow \text{C}_6\text{H}_4=\text{O} \begin{pmatrix} \\ \text{पैरा C}^- \end{pmatrix} \]
\( \implies \) फीनॉक्साइड आयन की अनुनाद संरचनाओं में (III, IV, V) ऋण आवेश ऑक्सीजन के साथ-साथ कार्बन परमाणुओं पर भी होता है, जो इसे कम स्थिर बनाता है.
In simple words: कार्बोक्सिलिक अम्ल ज्यादा अम्लीय होते हैं क्योंकि \( \text{H}^+ \) निकलने के बाद बचा हुआ आयन (कार्बोक्सिलेट आयन) फीनॉल से बचे आयन (फीनॉक्साइड आयन) से ज्यादा स्थिर होता है.

🎯 Exam Tip: किसी भी अम्ल की प्रबलता उसके संयुग्मी क्षार की स्थिरता से सीधे संबंधित होती है; संयुग्मी क्षार जितना अधिक अनुनाद-स्थिर होता है, अम्ल उतना ही प्रबल होता है.

 

Question 13. निम्न अभिक्रियाएँ लिखिए
(i) गाटरमान अभिक्रिया
(ii) राइमर-टीमान अभिक्रिया
(iii) डफ अभिक्रिया
Answer:
(i) गाटरमान अभिक्रिया (Gattermann Reaction): फीनॉल को निर्जल \( \text{ZnCl}_2 \) उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन सायनाइड (\( \text{HCN} \)) और हाइड्रोजन क्लोराइड (\( \text{HCl} \)) के मिश्रण के साथ अभिक्रिया कराने पर एक मध्यवर्ती, ऐल्डेमीन, प्राप्त होता है. इस ऐल्डेमीन को बाद में जल-अपघटित करने पर p-हाइड्रॉक्सी बेन्जेल्डिहाइड बनता है. यह अभिक्रिया फीनॉल रिंग पर ऐल्डिहाइड समूह जोड़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका है. \[ \begin{array}{c} \text{OH} \\ | \\ \text{C}_6\text{H}_5 \\ \text{फीनॉल} \end{array} + \text{HCN} + \text{HCl} \xrightarrow{\text{ZnCl}_2} \begin{array}{c} \text{OH} \\ | \\ \text{C}_6\text{H}_4-\text{CH=NH} \\ \text{ऐल्डेमीन} \end{array} \xrightarrow{H_3O^+} \begin{array}{c} \text{OH} \\ | \\ \text{C}_6\text{H}_4-\text{CHO} \\ \text{p-हाइड्रॉक्सी बेन्जेल्डिहाइड} \end{array} \] (ii) राइमर-टीमान अभिक्रिया (Reimer-Tiemann Reaction): फीनॉल की अभिक्रिया क्षारों (जैसे \( \text{NaOH} \) या \( \text{KOH} \)) की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म (\( \text{CHCl}_3 \)) के साथ कराने पर, -CHO (ऐल्डिहाइड) समूह ऑर्थो स्थिति पर प्रतिस्थापित हो जाता है. इस अभिक्रिया से सैलिसैल्डिहाइड (o-हाइड्रॉक्सी बेन्जेल्डिहाइड) प्राप्त होता है. यह एक ऐरोमैटिक इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है जिसमें डाइक्लोरोकार्बीन (\( :\text{CCl}_2 \)) इलेक्ट्रोफाइल के रूप में कार्य करता है. \[ \begin{array}{c} \text{OH} \\ | \\ \text{C}_6\text{H}_5 \\ \text{फीनॉल} \end{array} + \text{CHCl}_3 + 3\text{KOH} \longrightarrow \begin{array}{c} \text{OH} \\ | \\ \text{C}_6\text{H}_4-\text{CHO} \\ \text{सैलिसैल्डिहाइड} \end{array} + 3\text{KCl} + 3\text{H}_2\text{O} \] (iii) डफ अभिक्रिया (Duff Reaction): डफ अभिक्रिया में फीनॉल को हैक्सामेथिलीन टेट्राऐमीन (\( \text{(CH}_2\text{)}_6\text{N}_4 \)) तथा बोरिक अम्ल (\( \text{H}_3\text{BO}_3 \)) के साथ ग्लिसरॉल की उपस्थिति में गर्म करने पर सैलिसैल्डिहाइड प्राप्त होता है. यह अभिक्रिया फीनॉल को ऐल्डिहाइडित करने का एक और तरीका है, जो ऑर्थो स्थिति पर ऐल्डिहाइड समूह जोड़ता है.
In simple words: गाटरमान अभिक्रिया में फीनॉल से p-हाइड्रॉक्सी बेन्जेल्डिहाइड बनता है. राइमर-टीमान में फीनॉल से सैलिसैल्डिहाइड बनता है. डफ अभिक्रिया भी फीनॉल से सैलिसैल्डिहाइड बनाती है.

🎯 Exam Tip: इन नाम अभिक्रियाओं में अभिकारकों, उत्प्रेरकों और प्रमुख उत्पादों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये सीधे प्रश्न के रूप में पूछे जाते हैं.

 

Question 14. डाइऐथिलईथर की हैलोजेनीकरण अभिक्रिया समझाइए।
Answer: डाइऐथिल ईथर का हैलोजेनीकरण अभिक्रिया में, डाइऐथिल ईथर के ऐल्किल समूहों पर मौजूद हाइड्रोजन परमाणुओं को हैलोजन परमाणुओं (जैसे क्लोरीन या ब्रोमीन) द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है. यह अभिक्रिया या तो अंधेरे में या सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में हो सकती है, जिससे विभिन्न उत्पाद बनते हैं. यह ऐल्किल समूह की प्रतिस्थापन अभिक्रिया है.
(i) अंधेरे में हैलोजेनीकरण (Halogenation in Dark): अंधेरे में, केवल एक या दो हाइड्रोजन परमाणु प्रतिस्थापित होते हैं, जिससे \( \alpha \)-हैलो डाइऐथिल ईथर या \( \alpha, \alpha' \)-डाइहैलो डाइऐथिल ईथर बनते हैं. \[ \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \xrightarrow{\text{X}_2 (\text{Cl}_2/\text{Br}_2)} \text{CH}_3-\text{CHX}-\text{O}-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \]
\( \implies \) `\alpha\text{-हैलो डाइऐथिल ईथर}` \[ \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \xrightarrow{\text{X}_2 (\text{Cl}_2/\text{Br}_2)} \text{CH}_3-\text{CHX}-\text{O}-\text{CHX}-\text{CH}_3 \]
\( \implies \) `\alpha, \alpha'\text{-डाइहैलो डाइऐथिल ईथर}` (ii) सूर्य के प्रकाश में हैलोजेनीकरण (Halogenation in sunlight): सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में, डाइऐथिल ईथर के सभी हाइड्रोजन परमाणु क्लोरीन या ब्रोमीन द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं, जिससे परक्लोरो डाइऐथिल ईथर या परब्रोमो डाइऐथिल ईथर बनता है. \[ \text{CH}_3\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2\text{CH}_3 \xrightarrow{10\text{Cl}_2, \text{ सूर्य का प्रकाश}} \text{CCl}_3\text{CCl}_2-\text{O}-\text{CCl}_2\text{CCl}_3 + 10\text{HCl} \]
\( \implies \) `परक्लोरोडाइ ऐथिल ईथर`
In simple words: डाइऐथिल ईथर में हैलोजन (जैसे क्लोरीन) जोड़ने पर, हाइड्रोजन की जगह हैलोजन आ जाता है. अंधेरे में कुछ हाइड्रोजन बदलते हैं, और सूरज की रोशनी में सारे हाइड्रोजन बदल जाते हैं.

🎯 Exam Tip: हैलोजेनीकरण अभिक्रियाओं में प्रकाश की उपस्थिति और अनुपस्थिति उत्पादों के प्रकार को निर्धारित करती है, क्योंकि यह मुक्त मूलक तंत्र को सक्रिय करती है.

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 11 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 15. ऐल्कोहॉल निम्न से अभिक्रिया करके क्या बनाता है?
(i) \( \text{PCl}_3 \)
(ii) \( \text{SOCl}_2 \)
Answer:
(i) \( \text{PCl}_3 \) से अभिक्रिया (Reaction with \( \text{PCl}_3 \)): ऐल्कोहॉल \( \text{PCl}_3 \) (फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड) के साथ अभिक्रिया करके ऐल्किल हैलाइड और फॉस्फोरस अम्ल (\( \text{H}_3\text{PO}_3 \)) बनाते हैं. इस अभिक्रिया में ऐल्कोहॉल का हाइड्रॉक्सिल समूह क्लोरीन परमाणु द्वारा प्रतिस्थापित हो जाता है. \[ 3\text{R-OH} + \text{PCl}_3 \longrightarrow 3\text{R-Cl} + \text{H}_3\text{PO}_3 \]
\( \implies \) `ऐल्कोहॉल` `ऐल्किल हैलाइड` उदाहरणार्थ: \[ 3\text{CH}_3\text{OH} + \text{PCl}_3 \longrightarrow 3\text{CH}_3\text{Cl} + \text{H}_3\text{PO}_3 \]
\( \implies \) `मेथेनॉल` `मेथिल क्लोराइड` (ii) \( \text{SOCl}_2 \) से अभिक्रिया (Reaction with \( \text{SOCl}_2 \)): ऐल्कोहॉल थायोनिल क्लोराइड (\( \text{SOCl}_2 \)) के साथ पिरीडीन की उपस्थिति में अभिक्रिया करके ऐल्किल क्लोराइड, सल्फर डाइऑक्साइड (\( \text{SO}_2 \)) गैस, और हाइड्रोजन क्लोराइड (\( \text{HCl} \)) गैस बनाते हैं. यह अभिक्रिया ऐल्किल हैलाइड बनाने की सबसे अच्छी विधियों में से एक है क्योंकि \( \text{SO}_2 \) और \( \text{HCl} \) गैसीय उत्पाद होते हैं और आसानी से निकल जाते हैं, जिससे शुद्ध ऐल्किल क्लोराइड प्राप्त होता है. \[ \text{R-OH} + \text{SOCl}_2 \xrightarrow{\text{पिरीडीन}} \text{R-Cl} + \text{SO}_2 \uparrow + \text{HCl} \uparrow \]
\( \implies \) `ऐल्कोहॉल` `ऐल्किल क्लोराइड`
In simple words: ऐल्कोहॉल जब \( \text{PCl}_3 \) से मिलता है तो क्लोरोऐल्केन और फॉस्फोरस अम्ल बनता है, और जब \( \text{SOCl}_2 \) से मिलता है तो क्लोरोऐल्केन, \( \text{SO}_2 \) और \( \text{HCl} \) गैस बनती है.

🎯 Exam Tip: थायोनिल क्लोराइड के साथ ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया (डार्जन अभिक्रिया) ऐल्किल क्लोराइड बनाने की सबसे पसंदीदा विधि है क्योंकि गैसीय उत्पादों को आसानी से हटाया जा सकता है, जिससे उच्च शुद्धता वाला उत्पाद मिलता है.

 

Question 16. फनॉल निम्न से अभिक्रिया करके क्या बनाता है?
(i) \( \text{HCN} \) तथा \( \text{HCl} \)
(ii) \( \text{NaOH} \) अथवा \( \text{KOH} \) की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म से
Answer:
(i) \( \text{HCN} \) तथा \( \text{HCl} \) से अभिक्रिया (Reaction with \( \text{HCN} \) and \( \text{HCl} \)): फीनॉल की अभिक्रिया \( \text{HCN} \) और \( \text{HCl} \) के मिश्रण के साथ, \( \text{ZnCl}_2 \) उत्प्रेरक की उपस्थिति में होने पर p-हाइड्रॉक्सी बेन्जेल्डिहाइड प्राप्त होता है. यह अभिक्रिया गाटरमान संश्लेषण कहलाती है. इसमें पहले एक ऐल्डिमीन मध्यवर्ती बनता है, जो बाद में जल-अपघटन द्वारा ऐल्डिहाइड में बदल जाता है. \[ \begin{array}{c} \text{OH} \\ | \\ \text{C}_6\text{H}_5 \\ \text{फीनॉल} \end{array} \xrightarrow{\text{HCN+HCl, } ZnCl_2} \begin{array}{c} \text{OH} \\ | \\ \text{C}_6\text{H}_4-\text{CH=NH} \\ \text{ऐल्डेमीन} \end{array} \xrightarrow{H_3O^+} \begin{array}{c} \text{OH} \\ | \\ \text{C}_6\text{H}_4-\text{CHO} \\ \text{p-हाइड्रॉक्सी बेन्जेल्डिहाइड} \end{array} \] यह अभिक्रिया गाटरमान अभिक्रिया कहलाती है। (ii) \( \text{NaOH} \) अथवा \( \text{KOH} \) की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म से (Reaction with Chloroform in presence of \( \text{NaOH} \) or \( \text{KOH} \)): फीनॉल की अभिक्रिया क्लोरोफॉर्म (\( \text{CHCl}_3 \)) और \( \text{NaOH} \) या \( \text{KOH} \) जैसे क्षार की उपस्थिति में कराने पर -CHO समूह ऑर्थो स्थिति पर प्रतिस्थापित हो जाता है, जिससे सैलिसैल्डिहाइड (o-हाइड्रॉक्सी बेन्जेल्डिहाइड) प्राप्त होता है. यह अभिक्रिया राइमर-टीमान अभिक्रिया कहलाती है. \[ \begin{array}{c} \text{OH} \\ | \\ \text{C}_6\text{H}_5 \\ \text{फीनॉल} \end{array} + \text{CHCl}_3 + 3\text{KOH} \longrightarrow \begin{array}{c} \text{OH} \\ | \\ \text{C}_6\text{H}_4-\text{CHO} \\ \text{सैलिसैल्डिहाइड} \end{array} + 3\text{KCl} + 3\text{H}_2\text{O} \] यह अभिक्रिया राइमर टीमैन अभिक्रिया कहलाती हैं।
In simple words: फीनॉल \( \text{HCN} \) और \( \text{HCl} \) से मिलकर p-हाइड्रॉक्सी बेन्जेल्डिहाइड बनाता है. वहीं, क्लोरोफॉर्म और क्षार से मिलकर सैलिसैल्डिहाइड बनाता है.

🎯 Exam Tip: गाटरमान और राइमर-टीमान अभिक्रियाओं में, फीनॉल के ऑर्थो और पैरा-स्थिति पर ऐल्डिहाइड समूह जुड़ता है, जो इन अभिक्रियाओं को फीनॉल के ऐल्डिहाइड संश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण बनाता है.

 

Question 17. डाइ ऐथिल ईथर की प्रतिस्थापना अभिक्रियाएँ लिखिए।
Answer: डाइऐथिल ईथर (ऐथॉक्सी ऐथेन) विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाएँ दिखाता है. इसकी अभिक्रियाओं को मुख्य रूप से चार वर्गों में बांटा जा सकता है:
1. ऐथिल समूह की प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ।
2. ईथर क्रियात्मक समूह के ऑक्सीजन परमाणु पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों के कारण अभिक्रियाएँ।
3. C-O आबंध विदलन की अभिक्रियाएँ।
4. अन्य अभिक्रियाएँ।

1. ऐथिल समूह की प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (Substitution Reactions of Ethyl Group) हैलोजेनीकरण (Halogenation): डाइऐथिल ईथर के ऐथिल समूह में मौजूद हाइड्रोजन परमाणुओं को क्लोरीन या ब्रोमीन जैसे हैलोजन परमाणुओं द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है. यह अभिक्रिया प्रकाश या अंधेरे में अलग-अलग उत्पाद देती है.
(i) अंधेरे में हैलोजेनीकरण (Halogenation in Dark): जब डाइऐथिल ईथर हैलोजन (\( \text{Cl}_2/\text{Br}_2 \)) के साथ अंधेरे में अभिक्रिया करता है, तो ऐल्फा-कार्बन पर एक हाइड्रोजन परमाणु प्रतिस्थापित होता है, जिससे \( \alpha \)-हैलो डाइऐथिल ईथर बनता है. यदि अभिक्रिया जारी रहती है, तो \( \alpha, \alpha' \)-डाइहैलो डाइऐथिल ईथर भी बन सकता है. \[ \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \xrightarrow{\text{X}_2 (\text{Cl}_2/\text{Br}_2)} \text{CH}_3-\text{CHX}-\text{O}-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \]
\( \implies \) `\alpha\text{-हैलो डाइऐथिल ईथर}` \[ \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \xrightarrow{\text{X}_2 (\text{Cl}_2/\text{Br}_2)} \text{CH}_3-\text{CHX}-\text{O}-\text{CHX}-\text{CH}_3 \]
\( \implies \) `\alpha, \alpha'\text{-डाइहैलो डाइऐथिल ईथर}` (ii) सूर्य के प्रकाश में हैलोजेनीकरण (Halogenation in sun light): सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करने पर, डाइऐथिल ईथर के सभी हाइड्रोजन परमाणु क्लोरीन द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं, जिससे परक्लोरो डाइऐथिल ईथर बनता है. यह एक अत्यधिक हैलोजेनित उत्पाद होता है.
\[ \text{CH}_3\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2\text{CH}_3 \xrightarrow{10\text{Cl}_2, \text{ सूर्य का प्रकाश}} \text{CCl}_3\text{CCl}_2-\text{O}-\text{CCl}_2\text{CCl}_3 + 10\text{HCl} \]
\( \implies \) `परक्लोरो डाइऐथिल ईथर`

2. ईथर क्रियात्मक समूह के ऑक्सीजन परमाणु पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण अभिक्रियाएँ (Reactions due to lone pair electrons on oxygen atom of ether functional Group): ईथर के ऑक्सीजन परमाणु पर दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं, जिसके कारण यह लुईस क्षार की तरह व्यवहार करता है और कुछ विशेष अभिक्रियाएँ दिखाता है.
(i) परॉक्साइड का बनना (Formation of Peroxide): डाइऐथिल ईथर वायु में ऑक्सीजन या ओजोन के संपर्क में आने पर धीरे-धीरे ऑक्सीकृत होकर परॉक्साइड बनाता है. ये परॉक्साइड विस्फोटक प्रकृति के होते हैं, इसलिए ईथर को सावधानी से संभालना चाहिए. \[ \text{CH}_3\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2\text{CH}_3 + \text{O}_2/\text{O}_3 \longrightarrow \begin{array}{c} \text{O:} \\ \uparrow \\ \text{CH}_3\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2\text{CH}_3 \\ \text{डाइ ऐथिल ईथर परॉक्साइड} \end{array} \] यह स्वतः ऑक्सीकृत होकर 1-ऐथॉक्सी ऐथिल हाइड्रोपरॉक्साइड बनाता है, जो विस्फोटक प्रकृति का होता है। \[ \text{CH}_3\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2\text{CH}_3 + \text{O}_2 \longrightarrow \text{CH}_3\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}(\text{OOH})-\text{CH}_3 \]
\( \implies \) `1-ऐथॉक्सी ऐथिल हाइड्रोपरॉक्साइड` (ii) ऑक्सोनियम लवण का बनना (Formation of Oxonium salt): ईथर अकार्बनिक अम्लों के साथ ब्रान्स्टेड लॉरी क्षार की तरह व्यवहार करता है और ऑक्सोनियम लवण बनाता है. उदाहरण के लिए, जब डाइऐथिल ईथर को सांद्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) के साथ गर्म किया जाता है, तो पहले ऑक्सोनियम लवण बनता है, जो बाद में ऐथिल हाइड्रोजन सल्फेट और ऐथेनॉल में बदल जाता है. यह ईथर के ऑक्सीजन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण होता है, जो प्रोटॉन को स्वीकार कर सकता है. \[ (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{O} + \text{H}_2\text{SO}_4 \longrightarrow [\text{(C}_2\text{H}_5)_2\text{OH}]^+\text{HSO}_4^- \]
\( \implies \) `डाइऐथिल ऑक्सोनियम हाइड्रोजन सल्फेट` \[ [\text{(C}_2\text{H}_5)_2\text{OH}]^+\text{HSO}_4^- \longrightarrow \text{C}_2\text{H}_5\text{HSO}_4 + \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \]
\( \implies \) `ऐथिल हाइड्रोजन सल्फेट` `ऐथेनॉल`
डाइऐथिल ईथर \( \text{HCl} \) गैस के साथ भी ऑक्सोनियम लवण बनाता है। \[ \text{C}_2\text{H}_5-\text{O}-\text{C}_2\text{H}_5 + \text{HCl} \longrightarrow [\text{C}_2\text{H}_5-\overset{+}{\text{O}}\text{H}-\text{C}_2\text{H}_5]\text{Cl}^- \]
\( \implies \) `डाइऐथिल ऑक्सोनियम क्लोराइड`
डाइऐथिल ऑक्सोनियम क्लोराइड डाइऐथिल ईथर इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिकों के साथ लुईस क्षार की भाँति कार्य करता है तथा ऑक्सोनियम लवण बनाता है। \[ (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{O} + \text{BF}_3 \longrightarrow (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{O}\rightarrow\text{BF}_3 \]
\( \implies \) `बोरोन ट्राई फ्लुओराइड ईथरेट`

3. C-O आबन्ध विखण्डन के कारण अभिक्रियाएँ (Reactions due to cleavage of C-O bond): ईथर में कार्बन-ऑक्सीजन बंध टूट सकते हैं, खासकर हाइड्रोजन हैलाइड जैसे प्रबल अम्लों की उपस्थिति में. यह अभिक्रिया उत्पाद के प्रकार को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण है.
(i) हाइड्रोजन हैलाइड (\( \text{HX} \)) के साथ अभिक्रिया [Reaction with Hydrogen halide (\( \text{HX} \))]: जब डाइऐथिल ईथर को हाइड्रोजन हैलाइड के साथ अभिक्रिया कराई जाती है, तो ऐल्किल हैलाइड और ऐल्कोहॉल बनते हैं. यह अभिक्रिया ऐल्किल समूह की प्रकृति पर निर्भर करती है. \[ \text{C}_2\text{H}_5\text{O}-\text{C}_2\text{H}_5 + \text{HX} \longrightarrow \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} + \text{C}_2\text{H}_5\text{X} \]
उदाहरण के लिए: \[ \text{C}_2\text{H}_5\text{O}-\text{C}_2\text{H}_5 + \text{HI} \longrightarrow \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} + \text{C}_2\text{H}_5\text{I} \]
\( \implies \) `डाइऐथिल ईथर` `ऐथेनॉल` `ऐथिल आयोडाइड`
हाइड्रोजन हैलाइड (\( \text{HX} \)) की अधिकता में अंतिम उत्पाद ऐल्किल हैलाइड तथा जल प्राप्त होते हैं। \[ \text{R-O-R} + \text{HX} \longrightarrow \text{R-X} + \text{R-O-H} \]
\( \implies \) `ऐल्किल हैलाइड` `ऐल्कोहॉल` \[ \text{R-OH} + \text{HX} \longrightarrow \text{R-X} + \text{H}_2\text{O} \]
\( \implies \) `ऐल्किल हैलाइड` `जल`
हाइड्रोजन हैलाइड्रों की अभिक्रियाशीलता निम्न क्रम में होती हैं। \( \text{HI} > \text{HBr} > \text{HCl} \)
यदि मिश्रित ईथर में प्राथमिक अथवा द्वितीयक ऐल्किल समूह जुड़े होते हैं, तो छोटे ऐल्किल समूह का हैलाइड बनता है और अभिक्रिया SN2 क्रियाविधि द्वारा होती है. \[ \text{CH}_3-\text{O}-\text{CH}(\text{CH}_3)_2 + \text{HX} \xrightarrow{SN2} \text{CH}_3-\text{X} + \text{CH}_3\text{CH}(\text{OH})\text{CH}_3 \]
\( \implies \) `आइसोप्रोपिल मेथिल ईथर` `मेथिल हैलाइड` `आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल`
यदि एक ऐल्किल समूह तृतीयक होता है, तो तृतीयक ऐल्किल समूह से ऐल्किल हैलाइड निर्मित होता है, क्योंकि SN1 क्रियाविधि अधिक अनुकूल होती है. \[ \text{CH}_3-\text{C}(\text{CH}_3)_2-\text{O}-\text{CH}_3 + \text{HX} \xrightarrow{SN1} \text{CH}_3-\text{C}(\text{CH}_3)_2-\text{X} + \text{CH}_3\text{OH} \]
\( \implies \) `तृतीयक ब्यूटिल मेथिल ईथर` `तृतीयक ब्यूटिल हैलाइड` `मेथेनॉल` (ii) जल अपघटन (Hydrolysis): डाइऐथिल ईथर को तनु \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) के साथ उच्च दाब पर गर्म करने पर यह जल अपघटित होकर ऐथेनॉल बनाता है. यह अभिक्रिया ईथर को तोड़कर ऐल्कोहॉल बनाने का एक तरीका है. \[ \text{CH}_3\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2\text{CH}_3 \xrightarrow{\text{तनु } \text{H}_2\text{SO}_4, \text{ उच्च दाब}} 2\text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \]
\( \implies \) `डाइऐथिल ईथर` `ऐथेनॉल`
In simple words: डाइऐथिल ईथर कई तरह की अभिक्रियाएँ दिखाता है, जैसे हाइड्रोजन से बदलना, हवा से मिलकर परॉक्साइड बनाना, और अम्लों से मिलकर ऑक्सोनियम लवण बनाना.

🎯 Exam Tip: ईथर की अभिक्रियाओं में, \( \text{C-O} \) बंध के टूटने की स्थिति और बनने वाले उत्पादों को समझने के लिए, हमेशा अभिकारकों की प्रकृति और अभिक्रिया की शर्तों (जैसे तापमान, उत्प्रेरक) पर ध्यान दें.

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