RBSE Solutions Class 12 Chemistry Chapter 10 हैलोजेन व्युत्पन्न

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Detailed Chapter 10 हैलोजेन व्युत्पन्न RBSE Solutions for Class 12 Chemistry

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Class 12 Chemistry Chapter 10 हैलोजेन व्युत्पन्न RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 10 अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. निम्न में से कौन-सा यौगिक हैलोफॉर्म अभिक्रिया देगा
(a) मेथेनॉल
(b) 1-प्रोपेनॉल
(c) ऐथेनॉल
(d) 1-व्युटेनॉल
Answer: (c) ऐथेनॉल
In simple words: हैलोफॉर्म अभिक्रिया के लिए यौगिक में \( CH_3CO- \) या \( CH_3CH(OH)- \) समूह होना चाहिए. दिए गए विकल्पों में से, ऐथेनॉल में \( CH_3CH(OH)- \) समूह होता है, इसलिए यह हैलोफॉर्म अभिक्रिया देगा.

🎯 Exam Tip: हैलोफॉर्म अभिक्रिया उन यौगिकों द्वारा दी जाती है जिनमें एक मेथिल कीटोन समूह \( (CH_3CO-) \) या एक सेकंडरी ऐल्कोहॉल समूह \( (CH_3CH(OH)-) \) होता है, जो ऑक्सीकृत होकर मेथिल कीटोन बनाता है.

 

Question 2. फिनकेलस्टीन अभिक्रिया में होता है
(a) विहाइड्रोहेलोवेनीकरण
(b) हैलोजेन विनियम
Answer: (b) हैलोजेन विनियम
In simple words: फिनकेलस्टीन अभिक्रिया में एक हैलोजन परमाणु की जगह दूसरा हैलोजन परमाणु ले लेता है. इस तरह, यह एक हैलोजन विनिमय (exchange) प्रतिक्रिया है.

🎯 Exam Tip: फिनकेलस्टीन अभिक्रिया का उपयोग मुख्य रूप से ऐल्किल आयोडाइड बनाने के लिए किया जाता है, जहाँ ऐल्किल क्लोराइड या ब्रोमाइड को सोडियम आयोडाइड (NaI) के साथ एसीटोन में अभिकृत किया जाता है.

 

Question 3. निम्न में से कौन-सा सर्वाधिक हैलोजन युक्त यौगिक है?
(a) \( CH_3Cl \)
(b) \( C_6H_6Cl_6 \)
(c) \( C_6H_5CH_2Cl \)
(d) \( C_6H_5Cl \)
Answer: (b) \( C_6H_6Cl_6 \)
In simple words: इस प्रश्न में हमें यह बताना है कि किस यौगिक में सबसे ज़्यादा हैलोजन परमाणु हैं. \( C_6H_6Cl_6 \) में कुल 6 क्लोरीन परमाणु हैं, जो बाकी विकल्पों से ज़्यादा हैं. यह यौगिक हेक्साक्लोरोसाइक्लोहेक्सेन या BHC है.

🎯 Exam Tip: हैलोजन परमाणुओं की संख्या की गणना करते समय, यौगिक के रासायनिक सूत्र को ध्यान से देखें. यदि संरचनात्मक सूत्र दिए गए हों तो हर हैलोजन परमाणु को गिनें.

 

Question 4. कौन-सा यौगिक \( AgNO_3 \) के साथ पीला अवक्षेप देगा
(a) \( CHI_3 \)
(b) \( CHCl_3 \)
(c) \( CH_3I \)
(d) \( CH_3 - CH_2I \)
Answer: (a) \( CHI_3 \)
In simple words: \( AgNO_3 \) के साथ पीला अवक्षेप आयोडाइड आयनों की उपस्थिति को दिखाता है. दिए गए विकल्पों में, \( CHI_3 \) (आयोडोफॉर्म) एक आयोडाइड है और यह \( AgNO_3 \) के साथ अभिक्रिया करके सिल्वर आयोडाइड \( (AgI) \) का पीला अवक्षेप बनाएगा.

🎯 Exam Tip: सिल्वर नाइट्रेट \( (AgNO_3) \) परीक्षण हैलोजन परमाणुओं की पहचान के लिए उपयोग होता है. क्लोराइड आयन सफेद अवक्षेप \( (AgCl) \), ब्रोमाइड आयन हल्का पीला अवक्षेप \( (AgBr) \) और आयोडाइड आयन गहरा पीला अवक्षेप \( (AgI) \) देते हैं.

 

Question 5. काबिलेमीन अभिक्रिया में मध्यवर्ती बनता है
(a) \( CN^- \)
(b) \( :CCl_2 \)
(c) \( N \equiv C^+ \)
(d) \( Cl^- \)
Answer: (c) \( N \equiv C^+ \)
In simple words: कार्बिलेमीन अभिक्रिया में, एक मध्यवर्ती यौगिक बनता है जिसे आइसोसायनाइड कहा जाता है. इस अभिक्रिया में प्राथमिक ऐमीन को क्लोरोफॉर्म और अल्कोहोलिक \( KOH \) के साथ गर्म करने पर यह बनता है.

🎯 Exam Tip: कार्बिलेमीन अभिक्रिया (या आइसोसायनाइड परीक्षण) प्राथमिक ऐमीनों का एक विशिष्ट परीक्षण है, जिसमें दुर्गंधयुक्त आइसोसायनाइड बनते हैं. इस अभिक्रिया का मध्यवर्ती नाइट्रिन \( (:CCl_2) \) नहीं, बल्कि आइसोसायनाइड \( N \equiv C^+ \) है.

 

Question 6. \( S_N2 \) अभिक्रिया में बनता है
(a) संक्रमण अवस्था
(b) कार्बनाइन्
(c) कार्बोनियम आयन
(d) मुक्त मूलक
Answer: (a) संक्रमण अवस्था
In simple words: \( S_N2 \) अभिक्रिया एक ही चरण में होती है और इसमें एक मध्यवर्ती यौगिक नहीं बनता, बल्कि एक अस्थाई 'संक्रमण अवस्था' बनती है, जिसमें पुराने बंध टूट रहे होते हैं और नए बंध बन रहे होते हैं. इस अवस्था में सभी परमाणु एक साथ जुड़े होते हैं.

🎯 Exam Tip: \( S_N2 \) अभिक्रिया में, न्यूक्लियोफाइल पीछे से आक्रमण करता है और लिविंग ग्रुप सामने से निकलता है, जिसके परिणामस्वरूप विन्यास का प्रतीपन (inversion) होता है. यह एक-चरणीय अभिक्रिया है जिसमें कोई मध्यवर्ती नहीं बनता, बल्कि एक संक्रमण अवस्था बनती है.

 

Question 7. निम्न में से किस यौगिक का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है
(a) \( CH_3Cl \)
(b) \( CCl_4 \)
(c) \( CHCl_3 \)
(d) \( CHI_3 \)
Answer: (b) \( CCl_4 \)
In simple words: \( CCl_4 \) (कार्बन टेट्राक्लोराइड) एक सममित अणु है, भले ही इसके \( C-Cl \) बंध ध्रुवीय हों, लेकिन अणु की चतुष्फलकीय संरचना के कारण सभी बंधों के द्विध्रुव आघूर्ण एक दूसरे को रद्द कर देते हैं, जिससे कुल द्विध्रुव आघूर्ण शून्य हो जाता है.

🎯 Exam Tip: किसी भी अणु का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य तब होता है जब अणु अत्यधिक सममित होता है, जैसे कि \( CO_2 \), \( BF_3 \), \( CCl_4 \). ध्रुवीय बंधों वाले अणुओं में भी, यदि बंधों की ध्रुवीयता एक दूसरे को रद्द कर देती है तो कुल द्विध्रुव आघूर्ण शून्य हो सकता है.

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 10 लघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 8. डी.डी.टी. एवं बी.एच.सी का पूरा नाम लिखिए।
Answer:
डी.डी.टी.: p - p' -डाइ क्लोरो डाइ फेनिल ट्राइ क्लोरो ऐथेन
बी.एच.सी.: बेन्जीन हेक्सा क्लोराइड। इस यौगिक को लिंडेन भी कहा जाता है और यह एक शक्तिशाली कीटनाशक है.
In simple words: डी.डी.टी. और बी.एच.सी. दोनों ही कीटनाशक हैं, जिनके पूरे नाम उनके रासायनिक बनावट को बताते हैं.

🎯 Exam Tip: रासायनिक यौगिकों के संक्षिप्त नामों के पूरे नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर सीधी परिभाषा या नामकरण वाले प्रश्नों में पूछे जाते हैं.

 

Question 9. किसी एक तृतीयक ऐल्किल हैलाइड का नाम एवं सूत्र लिखिए।
Answer:
तृतीयक ऐल्किल हैलाइड: 2-ब्रोमो-2-मेथिल प्रोपेन
सूत्र:
\(CH_3\)\(CH_3\)\(CH_3\)\(CH_3\)BrCC
In simple words: एक तृतीयक ऐल्किल हैलाइड ऐसा यौगिक होता है जिसमें हैलोजन परमाणु (जैसे ब्रोमीन) एक ऐसे कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है जो खुद तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है. 2-ब्रोमो-2-मेथिल प्रोपेन इस प्रकार का एक उदाहरण है.

🎯 Exam Tip: तृतीयक ऐल्किल हैलाइड को पहचानने के लिए उस कार्बन परमाणु को देखें जिससे हैलोजन जुड़ा है; यदि वह कार्बन तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा है, तो वह तृतीयक हैलाइड है. इसका IUPAC नामकरण करते समय सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन करें और हैलोजन तथा मेथिल समूहों को सबसे कम संख्या दें.

 

Question 10. हैलोफॉर्म अभिक्रिया देने वाले एक ऐल्कोहॉल एवं एक कीटोन का नाम व सूत्र लिखिए।
Answer:
हैलोफॉर्म अभिक्रिया देने वाला ऐल्कोहॉल:
नाम: 2-प्रोपेनॉल
सूत्र: \( CH_3-CH(OH)-CH_3 \)
\(CH_3\)\(CH_3\)OHCHCH
हैलोफॉर्म अभिक्रिया देने वाला कीटोन:
नाम: 2-प्रोपेनोन
सूत्र: \( CH_3-CO-CH_3 \)
\(CH_3\)\(CH_3\)OCC
In simple words: हैलोफॉर्म अभिक्रिया के लिए यौगिक में \( CH_3CH(OH)- \) (2-प्रोपेनॉल में) या \( CH_3CO- \) (2-प्रोपेनोन में) समूह होना ज़रूरी है. ये दोनों यौगिक हैलोफॉर्म परीक्षण देते हैं.

🎯 Exam Tip: हैलोफॉर्म अभिक्रिया केवल उन ऐल्कोहॉलों द्वारा दी जाती है जो ऑक्सीकृत होकर मेथिल कीटोन बनाते हैं, जैसे कि सेकंडरी ऐल्कोहॉल, जिनमें \( CH_3CH(OH)- \) समूह होता है.

 

Question 11. मेथिल क्लोराइड से मेथेनॉल बनाने के लिए किस अभिकर्मक का प्रयोग करते है?
Answer:
मेथिल क्लोराइड से मेथेनॉल बनाने के लिए जलीय KOH का प्रयोग करते हैं।
अभिक्रिया: \( CH_3-Cl \xrightarrow{KOH (aq)} CH_3-OH + KCl \)
In simple words: मेथिल क्लोराइड को मेथेनॉल में बदलने के लिए जलीय पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड \( (KOH) \) का इस्तेमाल किया जाता है. यह एक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है जिसमें क्लोराइड आयन की जगह हाइड्रॉक्सिल आयन ले लेता है.

🎯 Exam Tip: हैलाइड से ऐल्कोहॉल बनाने के लिए जलीय \( KOH \) या \( NaOH \) का उपयोग एक सामान्य नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया है, जहाँ \( OH^- \) समूह हैलोजन परमाणु को प्रतिस्थापित करता है.

 

Question 13. किन्हीं तीन नाभिक स्नेही एवं एक इलेक्ट्रॉन स्नेहीं का उदाहरण दीजिए।
Answer:
तीन नाभिक स्नेही अभिकर्मक: \( OH^- \), \( RO^- \), \( CN^- \)
नाभिक स्नेही अभिक्रियाएँ:
\( R-X + OH^- \rightarrow R-OH + X^- \)
\( R-X + CN^- \rightarrow R-CN + X^- \)
\( R-X + OR^- \rightarrow OR + X^- \)
एक इलेक्ट्रॉन स्नेही अभिकर्मक: \( Cl^+ \)
ClCl\( + Cl_2 \)\( FeCl_3 \)\( + \)
In simple words: नाभिक स्नेही वे अणु या आयन होते हैं जिनमें इलेक्ट्रॉन की अधिकता होती है और वे इलेक्ट्रॉन की कमी वाले केंद्रों पर हमला करते हैं. इलेक्ट्रॉन स्नेही वे अणु या आयन होते हैं जिनमें इलेक्ट्रॉन की कमी होती है और वे इलेक्ट्रॉन की अधिकता वाले केंद्रों पर हमला करते हैं.

🎯 Exam Tip: नाभिक स्नेही इलेक्ट्रॉन युग्म दाता होते हैं और लुईस बेस की तरह व्यवहार करते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन स्नेही इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही होते हैं और लुईस एसिड की तरह व्यवहार करते हैं. अभिकर्मकों को पहचानना अभिक्रिया के तंत्र को समझने में मदद करता है.

 

Question 14. अग्निशामक के रूप में किस यौगिक का उपयोग करते हैं?
Answer: कार्बन टेट्रा क्लोराइड \( (CCl_4) \) का प्रयोग अग्निशामक के रूप में करते हैं। यह एक प्रभावी अग्निशामक है जिसे पाइरीन के नाम से भी जाना जाता है.
In simple words: आग बुझाने के लिए कार्बन टेट्राक्लोराइड नामक रसायन का उपयोग किया जाता है.

🎯 Exam Tip: कार्बन टेट्राक्लोराइड का उपयोग अग्निशामक के रूप में 'पाइरीन' नाम से किया जाता था, लेकिन इसके जहरीले प्रभावों के कारण इसका उपयोग अब सीमित कर दिया गया है.

 

Question 15. डी.डी.टी. व बी.एच.सी. का सूत्र लिखिए।
Answer:
डी.डी.टी. (DDT):
डी.डी.टी.ClClHCClClCl
बी.एच.सी. (BHC):
बी.एच.सी.ClClClClClCl
In simple words: डी.डी.टी. एक जटिल रसायन है जिसका उपयोग कीटनाशक के रूप में होता है, जबकि बी.एच.सी. भी एक कीटनाशक है, और यह बेंजीन रिंग के चारों ओर क्लोरीन परमाणुओं से बना होता है.

🎯 Exam Tip: डी.डी.टी. और बी.एच.सी. दोनों ही महत्वपूर्ण ऑर्गेनोक्लोरिन कीटनाशक हैं जिनके सूत्र और संरचना अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं. उनकी विशिष्ट संरचनात्मक विशेषताओं को ध्यान में रखना चाहिए.

 

Question 16. प्रोपेन के सम्भावित डाइक्लोरो व्युत्पन्नों को लिखिए।
Answer:
प्रोपेन के संभावित डाइक्लोरो व्युत्पन्न इस प्रकार हैं:
(i) 1,1-डाइक्लोरोप्रोपेन: \( CH_3CH_2CHCl_2 \)
(ii) 1,2-डाइक्लोरोप्रोपेन: \( CH_3CH(Cl)CH_2Cl \)
\(CH_2\)CHCH\(CH_3\)ClCl1,2-डाइक्लोरो प्रोपेन
(iii) 1,3-डाइक्लोरोप्रोपेन: \( ClCH_2CH_2CH_2Cl \)
\(CH_2\)CH\(CH_2\)\(CH_3\)ClCl1,1-डाइक्लोरो प्रोपेन
(iv) 2,2-डाइक्लोरोप्रोपेन: \( CH_3CCl_2CH_3 \)
\(CH_3\)C\(CH_3\)\(CH_3\)ClCl2,2-डाइक्लोरो प्रोपेन
In simple words: प्रोपेन अणु में दो क्लोरीन परमाणुओं को अलग-अलग तरीकों से जोड़कर कई अलग-अलग डाइक्लोरो व्युत्पन्न बनाए जा सकते हैं. हर व्युत्पन्न में क्लोरीन परमाणुओं की स्थिति अलग-अलग होती है.

🎯 Exam Tip: समावयवों की संख्या ज्ञात करते समय, कार्बन श्रृंखला की लंबाई और हैलोजन परमाणुओं की सभी संभावित स्थितियों पर विचार करें. ज्यामितीय और प्रकाशीय समावयवों को भी ध्यान में रखना चाहिए यदि प्रश्न में पूछा गया हो.

 

Question 17. हुन्सडीकर अभिक्रिया लिखिए।
Answer:
हुन्सडीकर अभिक्रिया (Hunsdiecker Reaction):
इस अभिक्रिया में सिल्वर कार्बोक्सिलेट को ब्रोमीन \( (Br_2) \) के साथ \( CCl_4 \) (कार्बन टेट्राक्लोराइड) की उपस्थिति में गर्म करने पर ऐल्किल ब्रोमाइड बनता है.
COOAg\( + Br_2 \)पुर्नगलन\( CCl_4 \)Brसिल्वर बेन्जोएटब्रोमोबेन्जीन\( + CO_2 + AgBr \)
In simple words: हुन्सडीकर अभिक्रिया एक ऐसी विधि है जिसमें चांदी के कार्बोक्सिलिक अम्ल के लवण को ब्रोमीन के साथ गर्म करके एक अल्काइल ब्रोमाइड, कार्बन डाइऑक्साइड और सिल्वर ब्रोमाइड बनाया जाता है.

🎯 Exam Tip: हुन्सडीकर अभिक्रिया कार्बोक्सिलिक अम्ल से ऐल्किल हैलाइड बनाने की एक महत्वपूर्ण विधि है, खासकर ब्रोमाइड्स के लिए. इसमें कार्बन श्रृंखला में एक कार्बन कम हो जाता है, जिससे यह कार्बनिक संश्लेषण में उपयोगी होता है.

 

Question 18. क्लोरोपिकरिन व क्लोरेटोन का सूत्र व उपयोग लिखिए।
Answer:
क्लोरोपिकरिन: नाइट्रेक्लोरोफॉर्म \( (Cl_3CNO_2) \)
इसका उपयोग कीटनाशी तथा रासायनिक हथियारों के रूप में होता है। यह युद्ध गैस के रूप में भी इस्तेमाल होता है.
क्लोरेटोन: 1,1,1-ट्राइक्लोरो-2-मेथिल-2-प्रोपेनॉल \( (Cl_3C-C(CH_3)_2-OH) \)
इसका उपयोग नींद कारक (Hypnotic Agent) के रूप में होता है। यह एक शामक दवा है.
In simple words: क्लोरोपिकरिन एक जहरीला रसायन है जो कीटनाशक और युद्ध गैस के रूप में काम आता है, जबकि क्लोरेटोन एक नींद लाने वाली दवा है.

🎯 Exam Tip: क्लोरोपिकरिन एक जहरीली गैस है जिसे 'टीयर गैस' के रूप में भी जाना जाता है, जबकि क्लोरेटोन एक शक्तिशाली शामक है जिसका उपयोग दवाओं में किया जाता है. इनके रासायनिक सूत्र और उनके विशिष्ट उपयोगों को याद रखें.

 

Question 19. शुद्ध क्लोरोफॉर्म प्राप्त करने के लिए कौन-सा श्रेष्ठ अभिकर्मक है।
Answer: शुद्ध क्लोरोफॉर्म क्लोरल या जलायोजित क्लोरल का आसवन सान्द्र जलयोजित \( NaOH \) के साथ करने पर प्राप्त किया जा सकता है। यह एक रासायनिक विधि है जिसमें क्लोरल को अपघटित किया जाता है.
अभिक्रियाएँ:
\( NaOH + CCl_3CHO \rightarrow HCOONa + CHCl_3 \)
(क्लोरल)
\( NaOH + CCl_3CH(OH)_2 \rightarrow HCOONa + CHCl_3 + H_2O \)
(जलयोजित क्लोरल)
In simple words: शुद्ध क्लोरोफॉर्म बनाने का सबसे अच्छा तरीका क्लोरल या जलयोजित क्लोरल को गाढ़े सोडियम हाइड्रॉक्साइड के घोल के साथ गर्म करना है.

🎯 Exam Tip: शुद्ध क्लोरोफॉर्म के निर्माण के लिए इस विधि का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह उपोत्पादों को आसानी से अलग करने की अनुमति देता है. क्लोरोफॉर्म को ऑक्सीजन और प्रकाश से दूर रखना चाहिए ताकि उसका ऑक्सीकरण फॉस्जीन में न हो.

 

Question 20. क्लोरोफॉर्म को वायु में खुला छोड़ने पर कौन-सी गैस बनती है?
Answer: क्लोरोफॉर्म को वायु में खुला छोड़ने पर विषैली गैस फॉस्जीन बनती है। यह एक अत्यंत जहरीली गैस है.
अभिक्रिया: \( 2CHCl_3 + O_2 \xrightarrow{सूर्य का प्रकाश} 2COCl_2 + 2HCl \)
(फॉस्जीन)
In simple words: जब क्लोरोफॉर्म को हवा और धूप में खुला छोड़ दिया जाता है, तो यह एक बहुत ही ज़हरीली गैस 'फॉस्जीन' में बदल जाता है.

🎯 Exam Tip: क्लोरोफॉर्म को गहरे रंग की बोतलों में, पूरी तरह से भरी हुई और ठंडी जगह पर संग्रहित किया जाना चाहिए, ताकि ऑक्सीजन और प्रकाश के संपर्क को रोका जा सके और फॉस्जीन के निर्माण को कम किया जा सके. इथेनॉल को स्टेबलाइजर के रूप में मिलाया जा सकता है.

 

Question 21. मेथिल क्लोराइड एवं मेथिल आयोडाइड में कौन अधिक क्रियाशील है?
Answer: मेथिल आयोडाइड अधिक क्रियाशील है। कार्बन-हैलोजन बंध की लंबाई और बंध ऊर्जा के कारण आयोडाइड अधिक क्रियाशील होता है.
In simple words: मेथिल आयोडाइड, मेथिल क्लोराइड से ज़्यादा प्रतिक्रियाशील होता है.

🎯 Exam Tip: ऐल्किल हैलाइडों की क्रियाशीलता \( R-I > R-Br > R-Cl > R-F \) क्रम में होती है, क्योंकि कार्बन-हैलोजन बंध की लंबाई बढ़ती है और बंध ऊर्जा कम होती जाती है, जिससे बंध को तोड़ना आसान हो जाता है.

 

Question 22. \( C_5H_{12} \) की संरचना लिखिए जो केवल एक मोनोक्लोरो व्युत्पन्न बनाते हैं।
Answer:
\( C_5H_{12} \) का वह समावयव जो केवल एक मोनोक्लोरो व्युत्पन्न बनाता है, वह 2,2-डाइमेथिल प्रोपेन (या नियॉपेन्टेन) है।
\(CH_3\)\(CH_3\)\(CH_3\)\(CH_3\)C
In simple words: नियॉपेन्टेन नामक अणु ही \( C_5H_{12} \) का ऐसा रूप है, जिसमें केवल एक ही तरह का हाइड्रोजन परमाणु होता है, इसलिए जब क्लोरीन जुड़ता है, तो सिर्फ एक ही तरह का नया यौगिक बनता है.

🎯 Exam Tip: यह संरचना केवल एक मोनोक्लोरो व्युत्पन्न बनाती है क्योंकि इसके सभी 12 हाइड्रोजन परमाणु रासायनिक रूप से समान हैं. ऐसे यौगिकों को अत्यधिक सममित माना जाता है.

 

Question 23. DDT का क्या उपयोग है?
Answer: डी.डी.टी. एक सफेद ठोस यौगिक है। इसका उपयोग कीटनाशी (Insecticide) के रूप में मच्छरों, खटमलों और अन्य कीटों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता था। डी.डी.टी. अत्यधिक स्थायी होता है और यह जल्दी से उपापचयित (मेटाबॉलाइज्ड) नहीं होता है। यह वसीय ऊतकों में जमा हो जाता है, और इसका लगातार सेवन करने से जीवों में इसकी मात्रा समय के साथ बढ़ती है। इसके पर्यावरणीय दुष्प्रभावों के कारण कई देशों में डी.डी.टी. पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन कुछ जगहों पर अभी भी इसका उपयोग होता है।
In simple words: डी.डी.टी. का उपयोग कीटों को मारने के लिए किया जाता था, जैसे मच्छर और खटमल, लेकिन यह पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है, इसलिए अब इसका उपयोग कम हो गया है.

🎯 Exam Tip: डी.डी.टी. एक प्रभावी कीटनाशक रहा है, लेकिन इसकी जैव-संचय (bioaccumulation) और पर्यावरण में दीर्घकालिक स्थिरता के कारण इसे कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया है. इसके उपयोग और दुष्प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है.

 

Question 25. निम्न के \( S_N1 \) क्रिया की क्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
\( CH_3Br \), \( CH_3-CH(CH_3)-Br \), \( CH_3-C(CH_3)_2-Br \)
Answer:
\( S_N1 \) अभिक्रिया में ऐल्किल हैलाइडों की क्रियाशीलता का क्रम उनके संबंधित कार्बोधनायन के स्थायित्व पर निर्भर करता है। तृतीयक कार्बोधनायन सबसे स्थिर होते हैं, उसके बाद द्वितीयक और फिर प्राथमिक।
इसलिए, \( S_N1 \) क्रियाशीलता का क्रम इस प्रकार है:
\( CH_3-C(CH_3)_2-Br \)\( > \)\( CH_3-CH(CH_3)-Br \)\( > \)\( CH_3Br \)
\(CH_3\)Br\(CH_3\)C\( > \)\(CH_3\)Br\(CH_3\)\( > \)\(CH_3\)Br\(CH_3\)
In simple words: \( S_N1 \) अभिक्रियाएँ तब तेज़ी से होती हैं जब बनने वाला कार्बोधनायन ज़्यादा स्थिर होता है. तृतीयक ऐल्किल हैलाइड सबसे स्थिर कार्बोधनायन बनाते हैं, इसलिए वे सबसे ज़्यादा क्रियाशील होते हैं.

🎯 Exam Tip: \( S_N1 \) अभिक्रिया का निर्धारण हमेशा कार्बोधनायन के स्थायित्व से करें, क्योंकि यह अभिक्रिया का दर-निर्धारण करने वाला चरण है. ऐल्किल समूहों द्वारा इलेक्ट्रॉन-दान प्रभाव कार्बोधनायन को स्थिर करता है.

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 10 लघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 26. \( C_2H_5Cl \) की अपेक्षा \( C_6H_5Cl \) नाभिक स्नेही अभिक्रियाओं के प्रति कम क्रियाशील होता है। समझाइए।
Answer:
ऐरिल हैलाइड \( (C_6H_5Cl) \) नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति ऐल्किल हैलाइड \( (C_2H_5Cl) \) की तुलना में कम क्रियाशील होते हैं, इसके कई कारण हैं:
1. **अनुनाद प्रभाव (Resonance effect):** हैलोऐरीन में हैलोजन परमाणु पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युगल वलय के \( \pi \)-इलेक्ट्रॉनों के साथ संयुग्मन में होते हैं। इस कारण C-X आबन्ध में आंशिक द्विबन्ध के गुण आ जाते हैं। यह बंध आसानी से नहीं टूटता है। क्लोरोबेन्जीन की अनुनादी संरचनाएँ निम्न हैं:
Cl:Cl:Cl:Cl:Cl:
उपर्युक्त अनुनाद के कारण C-X आबन्ध में आंशिक द्विबन्ध गुण आ जाते हैं, जिसके कारण हैलोऐल्केन की तुलना में हैलोऐरीन में आबन्ध विदलन अपेक्षाकृत कठिन हो जाता है। अतः हैलोऐरीन नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति हैलोऐल्केनों की तुलना में कम क्रियाशील होती है।
2. **कार्बन-हैलोजन बंध की प्रकृति:** हैलोऐरीन में कार्बन \( sp^2 \)-संकरित होता है, जबकि हैलोऐल्केन में कार्बन \( sp^3 \)-संकरित होता है। \( sp^2 \)-संकरित कार्बन का \( s \)-लक्षण \( sp^3 \)-संकरित कार्बन से अधिक होता है, जिससे \( C-X \) बंध अधिक मजबूत और छोटा होता है। इस वजह से नाभिक स्नेही हमला अधिक मुश्किल हो जाता है।
3. **कार्बोधनायन का स्थायित्व:** हैलोऐरीन में \( C-X \) बंध के टूटने से बनने वाला फेनिल कार्बोधनायन अनुनाद द्वारा अस्थिर होता है, जो \( S_N1 \) क्रियाविधि के लिए अनुकूल नहीं होता है।
In simple words: ऐल्किल क्लोराइड की तुलना में क्लोरोबेन्जीन में क्लोरीन निकालना मुश्किल होता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि क्लोरोबेन्जीन में बंध थोड़ा डबल-बॉन्ड जैसा होता है और रिंग का कार्बन ज़्यादा मजबूत होता है, जिससे उसे तोड़ना कठिन हो जाता है.

🎯 Exam Tip: नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति हैलोऐरीन की कम क्रियाशीलता को अनुनाद, कार्बन के संकरण और बनने वाले कार्बोधनायन की अस्थिरता से समझा जा सकता है. ये कारण ऐरिल हैलाइडों को विशेष रासायनिक गुण देते हैं.

 

Question 27. ऐथिल ब्रोमाइड से ग्रिन्यार अभिकर्मक कैसे बनाते हैं?
Answer:
ऐथिल ब्रोमाइड की क्रिया शुष्क ईथर की उपस्थिति में \( Mg \) के साथ कराने पर ग्रिन्यार अभिकर्मक प्राप्त होता है। यह एक महत्वपूर्ण कार्बनिक-धात्विक यौगिक है.
अभिक्रिया: \( CH_3CH_2Br + Mg \xrightarrow{शुष्क \, ईथर} CH_3CH_2MgBr \)
(ऐथिल ब्रोमाइड) (ग्रिन्यार अभिकर्मक)
In simple words: ऐथिल ब्रोमाइड को मैग्नीशियम धातु के साथ सूखे ईथर में मिलाने पर ग्रिन्यार अभिकर्मक बनता है.

🎯 Exam Tip: ग्रिन्यार अभिकर्मक कार्बनिक संश्लेषण में बहुत उपयोगी होते हैं, क्योंकि वे कार्बन-कार्बन बंध बनाने के लिए न्यूक्लियोफिलिक कार्बन स्रोत के रूप में कार्य करते हैं. शुष्क ईथर का उपयोग अनिवार्य है क्योंकि ग्रिन्यार अभिकर्मक जल के प्रति बहुत प्रतिक्रियाशील होते हैं.

 

Question 28. बी.एच.सी. के निर्माण को रासायनिक समीकरण लिखिए।
Answer:
बी.एच.सी. (बेंजीन हेक्साक्लोराइड) का निर्माण बेंजीन की क्लोरीन के साथ पराबैंगनी प्रकाश (hv) की उपस्थिति में अभिक्रिया द्वारा होता है।
hv\( + 3Cl_2 \)पराबैगनी प्रकाशClClClClClClBHC
In simple words: बेंजीन हेक्साक्लोराइड (BHC) को बेंजीन और क्लोरीन गैस को पराबैंगनी प्रकाश में मिलाकर बनाया जाता है.

🎯 Exam Tip: बेंजीन हेक्साक्लोराइड एक महत्वपूर्ण कीटनाशक है और इसके विभिन्न समावयव होते हैं. यह योगात्मक अभिक्रिया का एक अच्छा उदाहरण है, जहाँ डबल बॉन्ड टूटते हैं और हैलोजन जुड़ते हैं.

 

Question 29. क्लोरो बेन्जीन से निम्न कैसे प्राप्त करेंगे।
(a) फीनॉल
(b) डाइ फेनिल
(c) टॉलूईन
Answer:
(a) क्लोरोबेन्जीन से फीनॉल:
क्लोरोबेन्जीन को \( NaOH \) (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) के साथ उच्च ताप और दाब पर अभिकृत करने पर फीनॉल प्राप्त होता है। यह डौ प्रक्रिया है.
ClOH\( H_2O, NaOH \)उo ताप व दाबफीनॉल
(b) क्लोरोबेन्जीन से डाइफेनिल:
क्लोरोबेन्जीन को सोडियम धातु के साथ शुष्क ईथर की उपस्थिति में वुर्ट्ज़-फिटिग अभिक्रिया द्वारा डाइफेनिल में परिवर्तित किया जा सकता है।
Cl\( + 2Na \)शुष्क ईथरडाइ फेनिल\( + 2NaCl \)
(c) क्लोरोबेन्जीन से टॉलूईन:
क्लोरोबेन्जीन को मेथिल क्लोराइड के साथ सोडियम धातु की उपस्थिति में शुष्क ईथर में वुर्ट्ज़-फिटिग अभिक्रिया द्वारा टॉलूईन में बदला जा सकता है।
Cl\( + 2Na + CH_3Cl \)मेथिल क्लोराइडशुष्क ईथर\(CH_3\)\( + 2NaCl \)टॉलूईन
In simple words: क्लोरोबेन्जीन को अलग-अलग तरीकों से फीनॉल, डाइफेनिल और टॉलूईन में बदला जा सकता है, हर एक के लिए अलग-अलग रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं.

🎯 Exam Tip: ऐरिल हैलाइडों में न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ अक्सर मुश्किल होती हैं, इसलिए इन रूपांतरणों के लिए विशिष्ट अभिकर्मकों और कठोर परिस्थितियों की आवश्यकता होती है, जैसे डौ प्रक्रिया या वुर्ट्ज़-फिटिग अभिक्रिया.

 

Question 30. \( \beta \)-विलोपन को समझाइए।
Answer:
\( \beta \)-विलोपन ( \( \beta \)-elimination): जब दो परमाणु या समूह का विलोपन पास-पास वाले परमाणुओं से होता है तो इसे \( \beta \)-विलोपन कहते हैं। इस अभिक्रिया में आमतौर पर एक ऐल्किल हैलाइड से हैलोजन और \( \beta \)-कार्बन से हाइड्रोजन का विलोपन होता है, जिससे ऐल्कीन बनता है.
उदाहरण:
\(CH_3\)CH\(CH_2\)OHH2-प्रोपेनॉलसान्द्र \( H_2SO_4 \)\(CH_3\)CH\(CH_2\)\( + H_2O \)प्रोपीन\( (\beta\)-विलोपन)
In simple words: \( \beta \)-विलोपन एक ऐसी रासायनिक प्रक्रिया है जहाँ पास-पास के दो कार्बन परमाणुओं से छोटे अणु (जैसे पानी या हाइड्रोजन हैलाइड) निकल जाते हैं, और इसके परिणामस्वरूप एक डबल बॉन्ड (ऐल्कीन) बनता है.

🎯 Exam Tip: \( \beta \)-विलोपन को अक्सर डीहाइड्रोहैलोजेनीकरण (dehydrohalogenation) या डीहाइड्रेशन (dehydration) के रूप में देखा जाता है. इसमें एक हैलोजन परमाणु और \( \beta \)-कार्बन से एक हाइड्रोजन परमाणु का विलोपन होता है. यह एलिमिनेशन रिएक्शन मार्कोवनिकोव नियम के विपरीत, सेट्जेफ नियम के अनुसार मुख्य उत्पाद देता है.

 

Question 31. हॉफमॉन कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए।
Answer:
कार्बिलेमीन अभिक्रिया (Carbylamine reaction): यह अभिक्रिया प्राथमिक ऐमीनों समूह के परीक्षण में प्रयुक्त होती है। क्लोरोफॉर्म को ऐल्कोहॉलीय \( KOH \) तथा प्राथमिक ऐमीन के साथ गर्म करने पर दुर्गन्धयुक्त एथिल आइसोसायनाइड बनता है। यह एक पहचान परीक्षण है.
अभिक्रिया:
\(NH_2\)\( + CHCl_3 + 3KOH \)गर्मNC\( + 3KCl + 3H_2O \)ऐनिलीनफेनिल आइसोसायनाइड
इस अभिक्रिया से प्राथमिक एमीन एवं क्लोरोफॉर्म का परीक्षण किया जाता है। अतः इसे आइसोसायनाइड परीक्षण भी कहते हैं।
In simple words: हॉफमॉन कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया में, प्राथमिक ऐमीन को क्लोरोफॉर्म और अल्कोहोलिक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर एक बहुत गंदी गंध वाला आइसोसायनाइड यौगिक बनता है.

🎯 Exam Tip: कार्बिलेमीन अभिक्रिया, जिसे आइसोसायनाइड परीक्षण भी कहा जाता है, केवल प्राथमिक ऐमीनों द्वारा दी जाती है. यह एक विशिष्ट और बहुत संवेदनशील परीक्षण है, जो दुर्गंधयुक्त आइसोसायनाइड के निर्माण के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है.

 

Question 32. क्लोरोफॉर्म से निम्न कैसे प्राप्त करेंगे।
(अ) ऐसीटिलीन
(ब) \( CCl_4 \)
(स) ऐलिसिलिक एल्डिहाइड
Answer:
(अ) क्लोरोफॉर्म से ऐसीटिलीन:
क्लोरोफॉर्म को सिल्वर पाउडर के साथ गर्म करने पर ऐसीटिलीन बनता है।
\( 2CHCl_3 + 6Ag \rightarrow H-C \equiv C-H + 6AgCl \)
(ऐसीटिलीन)
ClClH-C-Cl\( + 6Ag \)\( H-C \equiv C-H + 6AgCl \)ऐसीटिलीन
(ब) क्लोरोफॉर्म से \( CCl_4 \):
क्लोरोफॉर्म का क्लोरीन के साथ सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीनीकरण करने पर \( CCl_4 \) प्राप्त होता है।
\( CHCl_3 + Cl_2 \xrightarrow{hv} CCl_4 + HCl \)
\( CHCl_3 \)\( hv \)\( + Cl_2 \)\( CCl_4 + HCl \)सूर्य का प्रकाश
(स) क्लोरोफॉर्म से सेलिसिलिक एल्डिहाइड (फीनॉल के साथ रीमर-टीमान अभिक्रिया):
फीनॉल को क्लोरोफॉर्म और जलीय \( KOH \) के साथ गर्म करने पर सेलिसिलिक एल्डिहाइड प्राप्त होता है।
OH\( + CHCl_3 + 3KOH \)गर्मOHCHO\( + 3KCl + 2H_2O \)फीनॉलसेलिसिलिक एल्डिहाइड
In simple words: क्लोरोफॉर्म का उपयोग ऐसीटिलीन, कार्बन टेट्राक्लोराइड और सेलिसिलिक एल्डिहाइड जैसे अलग-अलग रसायन बनाने के लिए किया जा सकता है, हर एक के लिए खास रासायनिक प्रतिक्रियाएँ होती हैं.

🎯 Exam Tip: क्लोरोफॉर्म एक बहुमुखी अभिकर्मक है जिसका उपयोग विभिन्न कार्बनिक संश्लेषणों में किया जाता है. ऐसीटिलीन बनाने के लिए सिल्वर पाउडर के साथ इसकी अभिक्रिया, \( CCl_4 \) बनाने के लिए क्लोरीनीकरण, और फीनॉल के साथ रीमर-टीमान अभिक्रिया द्वारा ऐल्डिहाइड बनाने की विधियाँ महत्वपूर्ण हैं.

 

Question 33. कार्बन टेट्राक्लोराइड के चार उपयोग लिखो?
Answer:
कार्बन टेट्राक्लोराइड \( (CCl_4) \) के उपयोग (Uses):
1. रेजिन, वसा, तेल आदि के लिए एक अच्छे विलायक के रूप में इसका उपयोग होता है।
2. शुष्क धुलाई (Dry cleaning) में इसका उपयोग होता था, लेकिन अब सुरक्षा कारणों से यह सीमित है।
3. फ्रीऑन और सैलिसिलिक अम्ल जैसे अन्य रसायनों के निर्माण में इसका उपयोग होता है।
4. प्रयोगशालाओं में एक अभिकर्मक के रूप में इसका उपयोग होता है।
5. अग्निशामक के रूप में इसे 'पाइरीन' के नाम से भी जाना जाता है, हालांकि इसके विषाक्त प्रभावों के कारण इसका उपयोग कम हो गया है।
6. औषधियों के निर्माण में इसका उपयोग किया जाता है.
7. धातु और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में विलायक के रूप में इसका उपयोग होता है.
8. टेपवर्म एवं हुकवर्म जैसे परजीवियों के इलाज में इसका उपयोग होता था, लेकिन अब यह कम होता है.
9. कीटनाशी और धूमक (fumigant) के रूप में इसका उपयोग होता है.
In simple words: कार्बन टेट्राक्लोराइड का उपयोग चिकनाई और तेल घोलने, कपड़ों की सूखी धुलाई करने, आग बुझाने और कुछ दवाइयां बनाने में होता है.

🎯 Exam Tip: \( CCl_4 \) के उपयोगों को याद रखते समय, इसके विलायक गुणों और इसके गैर-ज्वलनशील प्रकृति पर ध्यान दें, जो इसे अग्निशामक के रूप में उपयोगी बनाता है. इसके विषाक्त प्रभावों के कारण अब इसके उपयोग सीमित हो गए हैं.

 

Question 34. निम्न को ऐनिलीन से कैसे प्राप्त करेंगे।
(a) क्लोरोबेन्जीन
(b) ब्रोमोबेन्जन
(c) आयोडोबेन्जीन
Answer:
ऐनिलीन से क्लोरोबेन्जीन, ब्रोमोबेन्जीन और आयोडोबेन्जीन प्राप्त करने के लिए सैन्डमायर अभिक्रिया का उपयोग किया जाता है।
यह अभिक्रिया पहले ऐनिलीन को डाइएज़ोटाइज़ेशन (diazotization) द्वारा डाइएज़ोनियम लवण में परिवर्तित करती है, और फिर इस डाइएज़ोनियम लवण को हैलाइड के साथ अभिकृत करके हैलोऐरीन बनाती है।
(a) ऐनिलीन से क्लोरोबेन्जीन:
\(NH_2\)\( NaNO_2 + HCl \)\( 0-5^\circ C \)\( N_2^+Cl^- \)\( CuCl \)Clऐनिलीनबेंजीन डाइएज़ोनियम क्लोराइडक्लोरोबेन्जीन
(b) ऐनिलीन से ब्रोमोबेन्जीन:
\(NH_2\)\( NaNO_2 + HCl \)\( 0-5^\circ C \)\( N_2^+Cl^- \)\( CuBr \)Brऐनिलीनबेंजीन डाइएज़ोनियम क्लोराइडब्रोमोबेन्जीन
(c) ऐनिलीन से आयोडोबेन्जीन:
\(NH_2\)\( NaNO_2 + HCl \)\( 0-5^\circ C \)\( N_2^+Cl^- \)\( KI/\Delta \)Iऐनिलीनबेंजीन डाइएज़ोनियम क्लोराइडआयोडोबेन्जीन
In simple words: ऐनिलीन से क्लोरोबेन्जीन, ब्रोमोबेन्जीन और आयोडोबेन्जीन बनाने के लिए पहले उसे डाइएज़ोनियम लवण में बदलते हैं, और फिर सैन्डमायर अभिक्रिया की मदद से ये हैलोजन वाले यौगिक बनाते हैं.

🎯 Exam Tip: सैन्डमायर अभिक्रिया ऐरिल हैलाइडों के संश्लेषण के लिए एक महत्वपूर्ण विधि है, खासकर क्लोरीन और ब्रोमीन के लिए. आयोडोबेन्जीन बनाने के लिए, डाइएज़ोनियम लवण को पोटैशियम आयोडाइड \( (KI) \) के साथ सीधे गर्म किया जाता है.

 

Question 35. निम्न के सूत्र लिखिए।
(a) फ़िऑन-11
(b) फ़िऑन-12
(c) फ़िऑन-111
Answer:
फ़्रीऑन यौगिक कार्बन, फ्लोरीन और क्लोरीन परमाणुओं से बने क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) होते हैं।
(a) फ़िऑन-11: \( CFCl_3 \)
(b) फ़िऑन-12: \( CF_2Cl_2 \)
(c) फ़िऑन-111: \( C_2FCl_5 \)
In simple words: फ़्रीऑन-11 का सूत्र \( CFCl_3 \) है, फ़्रीऑन-12 का सूत्र \( CF_2Cl_2 \) है और फ़्रीऑन-111 का सूत्र \( C_2FCl_5 \) है.

🎯 Exam Tip: फ़्रीऑन का नामकरण एक विशेष नियम \( (XYZ) \) का पालन करता है, जहाँ \( X = C-1 \), \( Y = H+1 \), \( Z = F \) परमाणुओं की संख्या को दर्शाता है. यह विधि आपको फ़्रीऑन के सूत्र से नाम या नाम से सूत्र निर्धारित करने में मदद करती है.

 

Question 36. क्या होता है जब
(b) आयोडोफॉर्म की क्रिया सिल्वर पाउडर के साथ कराने पर ऐसीटिलीन बनता है।
Answer:
जब आयोडोफॉर्म की क्रिया सिल्वर पाउडर के साथ कराई जाती है, तो ऐसीटिलीन (एथाइन) बनता है।
\( 2CHI_3 + 6Ag \rightarrow CH \equiv CH + 6AgI \)
(ऐसीटिलीन)
In simple words: जब आयोडोफॉर्म को सिल्वर पाउडर के साथ मिलाया जाता है, तो एक गैस बनती है जिसे ऐसीटिलीन कहते हैं.

🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया हैलोफॉर्म्स की एक विशेषता है और कार्बन-कार्बन ट्रिपल बॉन्ड बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण विधि है. सिल्वर पाउडर हैलोजन परमाणुओं को हटाकर ऐसीटिलीन के निर्माण में मदद करता है.

 

Question 37. बेन्जिलिक क्लोराइड, क्लोरो बेन्जीन से अधिक क्रियाशील है। क्यों?
Answer:
बेन्जिलिक क्लोराइड, क्लोरो बेन्जीन से अधिक क्रियाशील हैं क्योंकि बेन्जिलिक क्लोराइड \( S_N1 \) प्रकार की नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देती हैं और अभिक्रिया में बनने वाला बेन्जिल कार्बोधनायन अनुनाद द्वारा स्थायी हो जाता है। यही कारण है कि यह अधिक क्रियाशील होते हैं।
\(CH_2\)Cl\(CH_2\)\(CH_2\)\(CH_2\)\(CH_2\)\(CH_2\)बेंजिल क्लोराइडबेंजिल कार्बोधनायनबेंजिल कार्बोधनायन का अनुनाद द्वारा स्थायीकरण
In simple words: बेन्जिलिक क्लोराइड, क्लोरोबेन्जीन से ज़्यादा प्रतिक्रियाशील होता है क्योंकि जब बेन्जिलिक क्लोराइड से क्लोरीन निकलता है, तो बनने वाला बेंजिल कार्बोधनायन रिंग के कारण स्थिर हो जाता है.

🎯 Exam Tip: बेन्जिलिक हैलाइडों की उच्च क्रियाशीलता उनके कार्बोधनायन की अनुनाद स्थिरीकरण के कारण होती है, जो \( S_N1 \) अभिक्रिया को अत्यधिक अनुकूल बनाता है. क्लोरोबेन्जीन में, C-Cl बंध में आंशिक द्विबंध लक्षण होता है, जिससे यह नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति कम क्रियाशील होता है.

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 38. निम्न को समझाइए।
(a) हैलोजेन व्युत्पन्नों का वर्गीकरण।
Answer:
(a) हैलोजन व्युत्पन्नों का वर्गीकरण (Classification of Halogen Derivatives):
यौगिकों की संरचनाओं में उपस्थित हैलोजन परमाणुओं की संख्या के आधार पर इन्हें मोनो, डाइ, अथवा पॉलिहैलोजेन (ट्राइ, टेट्रा, पेण्टा आदि) में वर्गीकृत किया जा सकता है। यह वर्गीकरण उनके रासायनिक गुणों और संश्लेषण विधियों को समझने में मदद करता है.
उदाहरण:
(i) **मोनोहैलो यौगिक:** इस प्रकार के यौगिकों में केवल एक हैलोजन परमाणु उपस्थित होता है।
\(C_2H_5X\)Xमोनोहैलोऐरीनमोनोहैलोऐल्केन
(ii) **डाइहैलो यौगिक:** इस प्रकार के यौगिकों में दो हैलोजन उपस्थित होते हैं।
\(CH_2-X\)\(CH_2-X\)Xडाइहैलोऐरीनडाइहैलोऐल्केनX
(iii) **ट्राइहैलो यौगिक:** इस प्रकार के यौगिकों में तीन हैलोजन परमाणु उपस्थित होते हैं।
\(CH_2X\)CHX\(CH_2X\)Xट्राइहैलोऐरीनट्राइहैलोऐल्केनX
(b) हैलोजन व्युत्पन्नों में \( C-X \) बन्ध की प्रकृति:
\( C-X \) आबन्ध की प्रकृति (Nature of \( C-X \) Bond): हैलोजन परमाणु कार्बन परमाणु की तुलना में अधिक विद्युत-ऋणात्मक होता है अत: ऐल्किल हैलाइड का कार्बन-हैलोजन आबन्ध ध्रुवित (Polarised) हो जाता है। इससे कार्बन परमाणु पर आंशिक धनावेश तथा हैलोजन परमाणु पर आंशिक ऋणावेश आ जाता है।
\( \delta^+ \quad \delta^- \)
\( C-X \)
(ध्रुवित \( C-X \) आबन्ध)
आवर्त सारणी में वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर हैलोजन परमाणु का आकार बढ़ता जाता है परन्तु विद्युत-ऋणात्मकता कम हो जाती है। अतः फ्लुओरीन सबसे छोटे आकार का एवं सबसे अधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्व होता है। इस कारण \( C-F \) आबन्ध सबसे छोटा और सबसे मजबूत होता है, जबकि \( C-I \) आबन्ध सबसे लंबा और सबसे कमजोर होता है। यह बंध की ध्रुवीयता और प्रतिक्रियाशीलता को प्रभावित करता है.
In simple words: हैलोजन वाले यौगिकों को उनमें मौजूद हैलोजन परमाणुओं की संख्या (एक, दो या ज़्यादा) के आधार पर बांटा जाता है. कार्बन और हैलोजन के बीच का बंध थोड़ा ध्रुवीय होता है क्योंकि हैलोजन कार्बन से ज़्यादा इलेक्ट्रॉन खींचता है, जिससे हैलोजन पर हल्का नेगेटिव और कार्बन पर हल्का पॉजिटिव चार्ज आता है.

🎯 Exam Tip: हैलोजन व्युत्पन्नों का वर्गीकरण उनकी रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है. C-X बंध की प्रकृति (ध्रुवीयता और बंध की ताकत) हैलाइडों के भौतिक और रासायनिक गुणों को सीधे प्रभावित करती है, जैसे कि न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ.

 

Question 38. निम्न को समझाइए।
(a) हैलोजेन व्युत्पन्नों का वर्गीकरण।
Answer:
(a) हैलोजेन व्युत्पन्नों का वर्गीकरण (Classification of Halogen Derivatives):
यौगिकों को उनकी संरचना में मौजूद हैलोजेन परमाणुओं की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। इन्हें मोनो-, डाइ-, या पॉलीहैलोजेन (जैसे ट्राइ-, टेट्रा-, पेन्टा-) यौगिकों में बांटा जाता है।
उदाहरण:
(i) मोनोहैलोजेन यौगिक: इनमें केवल एक हैलोजेन परमाणु होता है। जैसे ऐल्किल हैलाइड्स `\(\ce{C2H5X}\)` (मोनोहैलोऐल्केन) या ऐरिल हैलाइड्स (मोनोहैलोऐरीन)।
(ii) डाइहैलोजेन यौगिक: इनमें दो हैलोजेन परमाणु होते हैं। जैसे `\(\ce{CH2-X}\)`
`\(\ce{|}\)`
`\(\ce{CH2-X}\)` (डाइहैलोऐल्केन) या डाइहैलोजेन ऐरिन।
(iii) ट्राइहैलोजेन यौगिक: इनमें तीन हैलोजेन परमाणु होते हैं। जैसे `\(\ce{CH2X}\)`
`\(\ce{|}\)`
`\(\ce{CHX}\)`
`\(\ce{|}\)`
`\(\ce{CH2X}\)` (ट्राइहैलोऐल्केन) या ट्राइहैलोजेन ऐरिन।

(b) हैलोजेन व्युत्पन्नों में C–X बंध की प्रकृति (Nature of C–X Bond in Halogen Derivatives):
हैलोजेन परमाणु कार्बन परमाणु से ज़्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव होता है। इसलिए, ऐल्किल हैलाइड्स में कार्बन-हैलोजेन बंध ध्रुवित (Polarised) हो जाता है। इससे कार्बन परमाणु पर आंशिक धनात्मक चार्ज (`\(\delta^{+}\)`) और हैलोजेन परमाणु पर आंशिक ऋणात्मक चार्ज (`\(\delta^{-}\)`) आ जाता है, जिसे ध्रुवित C–X बंध `\(\delta^{+} \text{C–X} \delta^{-}\)` से दिखाते हैं। आवर्त सारणी में जब हम ऊपर से नीचे जाते हैं, तो हैलोजेन परमाणु का आकार बढ़ता है, लेकिन उसकी इलेक्ट्रोनेगेटिविटी कम होती जाती है। इसलिए, फ्लोरीन सबसे छोटा और सबसे ज़्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव तत्व है, जिससे C–F बंध सबसे मजबूत होता है।

(c) हैलोएरीन में हैलोजेन परमाणु की दिर्शीय प्रवृत्ति (Directive nature of halogen atom in haloarene):
हैलोएरीन (या ऐरिल हैलाइड) में `\(\ce{C-X}\)` बंध की प्रकृति विशेष होती है। उदाहरण के लिए, क्लोरोबेंजीन (`\(\ce{C6H5Cl}\)`) में क्लोरीन परमाणु बेंजीन वलय के `\(\ce{sp^2}\)` संकरित कार्बन से जुड़ा होता है। हैलोजेन परमाणु के अनुनाद प्रभाव (`\(\ce{+R}\)`) के कारण कार्बन-हैलोजेन बंध में आंशिक द्विबंध का गुण आ जाता है। इस वजह से यह बंध आसानी से नहीं टूटता। क्लोरोबेंजीन में `\(\ce{C-Cl}\)` बंध की लंबाई `\(1.60\text{Å}\)` होती है, जबकि सामान्य `\(\ce{C-Cl}\)` एकल बंध की लंबाई `\(1.77\text{Å}\)` होती है। यह कम लंबाई `\(\ce{C-Cl}\)` बंध में आंशिक द्विबंध की पुष्टि करती है। इसी तरह, वाइनिल क्लोराइड में भी `\(\ce{C-Cl}\)` बंध में आंशिक द्विबंध का गुण आ जाता है, क्योंकि हैलोजेन परमाणु `\(\ce{sp^2}\)` संकरित कार्बन से जुड़ा होता है। इस अनुनाद के कारण आंशिक द्विबंध गुण आता है।
In simple words: हैलोजेन यौगिकों को उनमें मौजूद हैलोजेन परमाणुओं की संख्या के हिसाब से बांटा जाता है: मोनो-, डाइ-, ट्राइहैलोजेन। कार्बन और हैलोजेन के बीच का बंध ध्रुवित होता है क्योंकि हैलोजेन ज़्यादा पावरफुल होता है। हैलोएरीन में कार्बन-हैलोजेन बंध में दो बंधों जैसी ताकत होती है, जिससे यह आसानी से नहीं टूटता।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के लिए हमेशा हैलोजेन परमाणुओं की संख्या और उनके जुड़ने के स्थान को स्पष्ट करें। C-X बंध की प्रकृति समझाते समय ध्रुवता और इलेक्ट्रोनेगेटिविटी के कांसेप्ट पर जोर दें। हैलोएरीन में अनुनाद प्रभाव और `\(\ce{sp^2}\)` संकरण के कारण `\(\ce{C-X}\)` बंध की मजबूती को समझाएं।

 

Question 39. निम्न में कैसे प्राप्त करेंगे
(a) ऐल्कोहॉल से ऐल्किल हैलाइड
(b) हैलोजेन विनिमय से ऐल्किल हैलाइड
(c) ऐसीटोन से क्लोरोफॉर्म।
(d) कार्बन टेट्राक्लोराइड से सेलिसिलिक अम्ल
Answer:
(a) ऐल्कोहॉल से ऐल्किल हैलाइड:
ऐल्कोहॉल को हाइड्रोजन हैलाइड (`\(\ce{HX}\)`) के साथ अभिक्रिया कराने पर ऐल्किल हैलाइड बनता है। यह एक सीधा प्रतिस्थापन रिएक्शन है।
`\(\ce{R-OH + HX \rightarrow R-X + H2O}\)`

(b) हैलोजेन विनिमय से ऐल्किल हैलाइड:
(i) फिन्केलस्टीन अभिक्रिया (Finkelstein reaction): इस अभिक्रिया में ऐल्किल क्लोराइड या ब्रोमाइड को सोडियम आयोडाइड के साथ शुष्क एसीटोन की उपस्थिति में गर्म करके ऐल्किल आयोडाइड प्राप्त किया जाता है।
`\(\ce{R-X + NaI -> R-I + NaX}\)` (जहाँ `\(\ce{X}\)` = `\(\ce{Cl}\)`, `\(\ce{Br}\)`)
यह रिएक्शन एक हैलोजेन को दूसरे हैलोजेन से बदलने का अच्छा तरीका है।

(c) ऐसीटोन से क्लोरोफॉर्म:
क्लोरोफॉर्म को ऐसीटोन से प्रयोगशाला में कैल्शियम हाइपोक्लोराइट (`\(\ce{CaOCl2}\)`) और पानी के साथ अभिक्रिया कराकर बनाया जा सकता है। इसमें पहले क्लोरीन गैस बनती है, जो ऐसीटोन से अभिक्रिया करके ट्राइक्लोरोऐसीटोन बनाती है। फिर, ट्राइक्लोरोऐसीटोन कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड के साथ जल-अपघटन करके क्लोरोफॉर्म बनाता है।
`\(\ce{CaOCl2 + H2O \rightarrow Ca(OH)2 + Cl2}\)`
`\(\ce{CH3COCH3 + 3Cl2 \rightarrow CCl3COCH3}\)`
`\(\ce{Ca(OH)2 + 2CCl3COCH3 ->[जल-अपघटन] 2CHCl3 + (CH3COO)2Ca}\)`

(d) कार्बन टेट्राक्लोराइड से सेलिसिलिक अम्ल:
फिनोल से सेलिसिलिक अम्ल बनाने के लिए कार्बन टेट्राक्लोराइड (`\(\ce{CCl4}\)`) का उपयोग किया जाता है। फिनोल को कार्बन टेट्राक्लोराइड और पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (`\(\ce{KOH}\)`) के साथ अभिक्रिया कराने पर `\(p\)`-हाइड्रॉक्सीबेन्जोइक अम्ल (सैलिसिलिक अम्ल) बनता है। यह एक प्रकार की रीमर-टीमैन अभिक्रिया है।
`\(\ce{2 C6H5OH + CCl4 + 4KOH \rightarrow C6H4(OH)COOH + 4KCl + 2H2O}\)` (Simplified representation)
In simple words: हम ऐल्कोहॉल से ऐल्किल हैलाइड, और एक हैलाइड से दूसरे हैलाइड को बदल सकते हैं। ऐसीटोन से क्लोरोफॉर्म और कार्बन टेट्राक्लोराइड से सैलिसिलिक अम्ल बनाने के लिए विशिष्ट अभिक्रियाएं होती हैं।

🎯 Exam Tip: रिएक्शंस में अभिकर्मक (reagent) और रिएक्शन कंडीशन (जैसे शुष्क एसीटोन) को सही से याद रखें क्योंकि ये उत्पाद को तय करते हैं। क्लोरोफॉर्म बनाने की विधि और फिनोल से सैलिसिलिक अम्ल बनाने की रीमर-टीमैन अभिक्रिया के चरणों पर ध्यान दें।

 

Question 40. निम्न पर टिप्पणी लिखिए।
(a) हैलोफर्म अभिक्रिया
(b) काबिलेमीन अभिक्रिया
(c) द्वारजन अभिक्रिया
(d) सेंडमेयर अभिक्रिया
Answer:
(a) हैलोफॉर्म अभिक्रिया (Haloform Reaction):
यह अभिक्रिया वे यौगिक देते हैं जिनमें `\(\ce{CH3CO-}\)` समूह (जैसे मेथिल कीटोन) या `\(\ce{CH3CH(OH)-}\)` समूह (जैसे द्वितीयक ऐल्कोहॉल) होता है। जब ऐसे यौगिक को हैलोजेन (जैसे `\(\ce{I2}\)` या `\(\ce{Cl2}\)`) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड (`\(\ce{NaOH}\)`) के साथ गर्म किया जाता है, तो हैलोफॉर्म (जैसे आयोडोफॉर्म, `\(\ce{CHI3}\)`) का पीला अवक्षेप बनता है। इस रिएक्शन का उपयोग मेथिल कीटोन या मेथिल ऐल्कोहॉल समूहों की पहचान के लिए किया जाता है। यह अभिक्रिया तीन चरणों में होती है: ऑक्सीकरण, आयोडीनीकरण और जल-अपघटन।
उदाहरण (आयोडोफॉर्म अभिक्रिया):
`\(\ce{C2H5OH + 4I2 + 6KOH \rightarrow CHI3 + HCOOK + 5KI + 5H2O}\)` (ऐथेनॉल से आयोडोफॉर्म)
यदि `\(\ce{KOH}\)` की जगह `\(\ce{NaOH}\)` का उपयोग करें:
`\(\ce{CH3CH2OH + 4I2 + 6NaOH \rightarrow CHI3 + HCOONa + 5NaI + 5H2O}\)`
`\(\ce{CH3CHO + 3KI -> CI3CHO + 3KOH}\)` (आयोडोफोरम)
`\(\ce{CI3CHO + KOH -> CHI3 + HCOOK}\)`

(b) कार्बिलेमीन अभिक्रिया (Carbylamine Reaction):
यह अभिक्रिया प्राथमिक ऐमीनों (`\(\ce{R-NH2}\)`) के परीक्षण के लिए उपयोग होती है। जब प्राथमिक ऐमीन को क्लोरोफॉर्म (`\(\ce{CHCl3}\)`) और ऐल्कोहॉलिक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (`\(\ce{KOH}\)`) के साथ गर्म किया जाता है, तो एक बहुत ही दुर्गंधयुक्त आइसोसायनाइड (`\(\ce{R-NC}\)`) बनता है, जिसे कार्बिलेमीन कहते हैं। यह अभिक्रिया केवल प्राथमिक ऐमीनों द्वारा दी जाती है।
उदाहरण:
`\(\ce{C2H5NH2 + CHCl3 + 3KOH ->[गर्म] C2H5NC + 3KCl + 3H2O}\)` (एथिल आइसोसायनाइड)
यह अभिक्रिया प्राथमिक एमीन और क्लोरोफॉर्म का परीक्षण करती है, इसलिए इसे आइसोसायनाइड परीक्षण भी कहते हैं।

(c) डार्जन अभिक्रिया (Darzen's Reaction):
यह ऐल्किल क्लोराइड बनाने की सबसे अच्छी विधि है। इसमें ऐल्कोहॉल (`\(\ce{ROH}\)`) को पीरिडीन की थोड़ी मात्रा की उपस्थिति में थायोनिल क्लोराइड (`\(\ce{SOCl2}\)`) के साथ आसवित (distill) किया जाता है। इस अभिक्रिया में बने दो सह-उत्पाद (`\(\ce{SO2}\) ` और `\(\ce{HCl}\)`) गैसें होने के कारण आसानी से निकल जाते हैं, जिससे शुद्ध ऐल्किल क्लोराइड प्राप्त होता है। पीरिडीन अम्ल (`\(\ce{HCl}\)`) को सोखने का काम करता है।
`\(\ce{ROH + SOCl2 -> RCl + SO2(गैस) + HCl(गैस)}\)`
उदाहरण:
`\(\ce{CH3CH2OH + SOCl2 -> CH3CH2Cl + SO2 + HCl}\)` (ऐथिल ऐल्कोहॉल से ऐथिल क्लोराइड)
यह तरीका बहुत शुद्ध उत्पाद देता है क्योंकि सभी उप-उत्पाद गैसीय होते हैं और आसानी से निकल जाते हैं।

(d) सेंडमेयर अभिक्रिया (Sandmeyer's Reaction):
यह ऐरिल हैलाइड्स (जैसे क्लोरोबेंजीन या ब्रोमोबेंजीन) बनाने की विधि है। इसमें प्राथमिक ऐमीन को पहले सोडियम नाइट्राइट (`\(\ce{NaNO2}\)`) और ठंडे जलीय खनिज अम्ल के साथ अभिक्रिया करके डाइऐजोनियम लवण बनाते हैं। फिर, इस ताजा बने डाइऐजोनियम लवण को क्यूप्रस क्लोराइड (`\(\ce{CuCl}\)`) या क्यूप्रस ब्रोमाइड (`\(\ce{CuBr}\)`) के विलयन के साथ मिलाने पर ऐरिल क्लोराइड या ब्रोमाइड बनता है।
`\(\ce{C6H5NH2 + NaNO2 + HCl -> C6H5N2+Cl- + 2H2O}\)` (ऐनिलीन से बेंजीन डाइऐजोनियम क्लोराइड)
`\(\ce{C6H5N2+Cl- + CuCl -> C6H5Cl + N2}\)` (बेंजीन डाइऐजोनियम क्लोराइड से क्लोरोबेंजीन)
`\(\ce{C6H5N2+Cl- + CuBr -> C6H5Br + N2}\)` (बेंजीन डाइऐजोनियम क्लोराइड से ब्रोमोबेंजीन)
ब्रोमोबेंजीन की ये अभिक्रियाएं सेंडमेयर अभिक्रियाएं कहलाती हैं।
In simple words: हैलोफॉर्म अभिक्रिया में खास तरह के ऐल्कोहॉल या कीटोन से हैलोफॉर्म बनता है। कार्बिलेमीन अभिक्रिया से प्राथमिक ऐमीनों की पहचान होती है, जिसमें दुर्गंध वाला आइसोसायनाइड बनता है। डार्जन रिएक्शन से शुद्ध ऐल्किल क्लोराइड बनते हैं। सेंडमेयर रिएक्शन में डाइऐजोनियम लवण से क्लोरोबेंजीन या ब्रोमोबेंजीन बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: हैलोफॉर्म अभिक्रिया में `\(\ce{CH3CO-}\)` या `\(\ce{CH3CH(OH)-}\)` समूह का होना ज़रूरी है। कार्बिलेमीन अभिक्रिया प्राथमिक ऐमीनों के लिए एक विशिष्ट टेस्ट है। डार्जन अभिक्रिया को "थायोनिल क्लोराइड विधि" भी कहते हैं। सेंडमेयर अभिक्रिया में डाइऐजोनियम लवण एक महत्वपूर्ण मध्यवर्ती है, और `\(\ce{CuX}\)` अभिकर्मक की उपस्थिति आवश्यक है।

 

Question 41. \( \text{S}_{\text{N}}1 \) तथा \( \text{S}_{\text{N}}2 \) क्रियाविधि को समझाइए।
Answer:
नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं (Nucleophilic Substitution Reactions) दो मुख्य क्रियाविधियों से होती हैं: `\(\text{S}_{\text{N}}1\)` और `\(\text{S}_{\text{N}}2\)`।

(क) द्विअणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन क्रियाविधि (`\(\text{S}_{\text{N}}2\)` Bi-molecular nucleophilic substitution mechanism):
इस अभिक्रिया में अभिक्रिया का वेग दोनों अभिकारकों की सांद्रता पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, जब क्लोरोमेथेन (`\(\ce{CH3Cl}\)`) और हाइड्रॉक्साइड आयन (`\(\ce{OH-}\)`) आपस में अभिक्रिया करते हैं, तो मेथेनॉल (`\(\ce{CH3OH}\)`) और क्लोराइड आयन (`\(\ce{Cl-}\)`) प्राप्त होता है। यहाँ अभिक्रिया का वेग `\(\ce{CH3Cl}\)` और `\(\ce{OH-}\)` दोनों की सांद्रता पर निर्भर करता है, इसलिए यह अभिक्रिया द्वितीय कोटि की बलगतिकी (second-order kinetics) का पालन करती है।
यह अभिक्रिया एक ही पद में होती है। इसमें आक्रमणकारी नाभिकरागी (जैसे `\(\ce{OH-}\)`) ऐल्किल हैलाइड के कार्बन-हैलोजेन बंध को पीछे से तोड़ना शुरू करता है, और साथ ही नया कार्बन-ऑक्सीजन बंध बनना शुरू होता है। इस प्रक्रिया में एक अस्थायी संक्रमण अवस्था (transition state) बनती है, जिसमें कार्बन परमाणु एक साथ पाँच परमाणुओं से जुड़ा होता है। फिर, हैलोजेन परमाणु (leaving group) निकल जाता है और उत्पाद का विन्यास उलट जाता है (inversion of configuration)।
यह अभिक्रिया त्रिविम बाधा (steric hindrance) से प्रभावित होती है। यदि कार्बन परमाणु के चारों ओर बड़े समूह (bulky groups) जुड़े हों, तो नाभिकरागी के लिए आक्रमण करना मुश्किल हो जाता है, जिससे अभिक्रिया की दर कम हो जाती है। इसलिए, `\(\text{S}_{\text{N}}2\)` अभिक्रिया के लिए मेथिल हैलाइड सबसे तेज़ी से अभिक्रिया करते हैं, क्योंकि उनमें केवल तीन छोटे हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। जैसे-जैसे स्थूल समूह बढ़ते हैं, अभिक्रियाशीलता कम होती जाती है।
`\(\ce{HO- + CH3-Cl -> [HO...CH2...Cl]^- -> HO-CH3 + Cl-}\)` (संक्रमण अवस्था)

(ख) एकअणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन क्रियाविधि (`\(\text{S}_{\text{N}}1\)` Uni-molecular nucleophilic substitution mechanism):
यह अभिक्रिया दो चरणों में होती है और इसका वेग केवल एक अभिकारक (ऐल्किल हैलाइड) की सांद्रता पर निर्भर करता है, इसलिए यह प्रथम कोटि की बलगतिकी (first-order kinetics) का पालन करती है। उदाहरण के लिए, जब तृतीयक ब्यूटिल ब्रोमाइड (`\(\ce{(CH3)3CBr}\)`) हाइड्रॉक्साइड आयन (`\(\ce{OH-}\)`) के साथ अभिक्रिया करता है, तो तृतीयक ब्यूटिल ऐल्कोहॉल (`\(\ce{(CH3)3COH}\)`) बनता है।
प्रथम चरण (धीमा): इसमें `\(\ce{C-Br}\)` बंध का धीमा विखंडन होता है और एक कार्बोधनायन (carbocation) तथा एक ब्रोमाइड आयन बनता है। यह सबसे धीमा चरण होता है और अभिक्रिया के वेग को निर्धारित करता है।
`\(\ce{(CH3)3CBr -> (CH3)3C+ + Br-}\)` (कार्बोधनायन)
द्वितीय चरण (तेज): इसमें कार्बोधनायन पर नाभिकरागी (`\(\ce{OH-}\)`) तेजी से आक्रमण करता है और उत्पाद तृतीयक ऐल्कोहॉल बनता है।
`\(\ce{(CH3)3C+ + OH- -> (CH3)3COH}\)`
कार्बोधनायन की स्थिरता जितनी ज़्यादा होती है, ऐल्किल हैलाइड से उसका बनना उतना ही आसान होता है और अभिक्रिया का वेग भी उतना ही ज़्यादा होता है। तृतीयक कार्बोधनायन सबसे स्थिर होते हैं, इसलिए तृतीयक हैलाइड `\(\text{S}_{\text{N}}1\)` अभिक्रिया सबसे तेज़ी से देते हैं। ऐलिलिक और बेन्जिलिक हैलाइड भी `\(\text{S}_{\text{N}}1\)` अभिक्रिया के प्रति अधिक क्रियाशील होते हैं क्योंकि उनके कार्बोधनायन अनुनाद (resonance) द्वारा स्थिर होते हैं।
`\(\text{S}_{\text{N}}1\)` अभिक्रिया के लिए क्रियाशीलता का क्रम: तृतीयक हैलाइड > द्वितीयक हैलाइड > प्राथमिक हैलाइड > `\(\ce{CH3X}\)`
In simple words: `\(\text{S}_{\text{N}}2\)` रिएक्शन में, एक ही बार में हमला होता है और पुराना बंध टूटता है, नया बंध बनता है। `\(\text{S}_{\text{N}}1\)` रिएक्शन दो स्टेप में होती है; पहले स्टेप में एक खास आयन (कार्बोधनायन) बनता है, जो रिएक्शन की स्पीड तय करता है।

🎯 Exam Tip: `\(\text{S}_{\text{N}}2\)` क्रियाविधि में संक्रमण अवस्था और विन्यास के प्रतीपन (inversion of configuration) को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है, जबकि `\(\text{S}_{\text{N}}1\)` क्रियाविधि में कार्बोधनायन के निर्माण और उसकी स्थिरता को समझाएं। दोनों में क्रियाशीलता का क्रम और उसके कारण भी स्पष्ट करें।

 

Question 42. निम्न पर टिप्पणी लिखें।
A. फ्रिऑन
B. डी.डी.टी.
C. बी.एच.सी.
Answer:
A. फ्रिऑन (Freon):
फ्रिऑन मेथेन और ऐथेन के क्लोरो-फ्लुओरो व्युत्पन्न होते हैं। इन्हें क्लोरोफ्लुओरोकार्बन (CFCs) भी कहते हैं। ये रंगहीन, गंधहीन, अज्वलनशील और कम क्वथनांक वाले द्रव या गैसें होती हैं। फ्रिऑन बहुत स्थायी, निष्क्रिय, गैर-विषैले और गैर-संक्षारक होते हैं, और आसानी से द्रवीकृत हो जाते हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से प्रशीतक (refrigerant) और वातानुकूलन (air-conditioner) में होता है। फ्रिऑन-12 (`\(\ce{CF2Cl2}\)`) सबसे ज़्यादा उपयोग होने वाला फ्रिऑन है।
फ्रिऑन का निर्माण (Synthesis of Freon):
इन्हें कार्बन टेट्राक्लोराइड (`\(\ce{CCl4}\)`) या हेक्साक्लोरोऐथेन (`\(\ce{C2Cl6}\)`) की `\(\ce{SbF3}\)`) या `\(\ce{SbCl5}\)`) की उपस्थिति में `\(\ce{HF}\)`) के साथ अभिक्रिया कराकर बनाया जा सकता है।
`\(\ce{3CCl4 + 2SbF3 \rightarrow 3CF2Cl2 + 2SbCl4}\)` (फ्रिऑन-12)
फ्रिऑन का नामकरण (Nomenclature of Freons):
फ्रिऑन के अणुसूत्र में कार्बन, हाइड्रोजन और फ्लोरीन परमाणुओं की संख्या के आधार पर इनका नामकरण किया जाता है, जैसे फ्रिऑन – XYZ।
यहाँ X = फ्रिऑन अणु में कार्बन परमाणुओं की संख्या से एक कम (`\(\ce{C-1}\)`)
Y = फ्रिऑन अणु में हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या + 1 (`\(\ce{H+1}\)`)
Z = फ्रिऑन अणु में फ्लोरीन परमाणुओं की संख्या
मुख्य फ्रिऑन का नामकरण:

अणु सूत्रXYZफ्रिऑन का नाम
`\(\ce{CFCl3}\)`011फ्रिऑन-11
`\(\ce{CF2Cl2}\)`012फ्रिऑन-12
`\(\ce{C2FCl5}\)`111फ्रिऑन-111
`\(\ce{C2F2Cl4}\)`112फ्रिऑन-112
`\(\ce{C2F3Cl3}\)`113फ्रिऑन-113
`\(\ce{C2F4Cl2}\)`114फ्रिऑन-114

फ्रिऑन के गुण: फ्रिऑन रंगहीन, गंधहीन, वाष्पशील द्रव होते हैं। ये निष्क्रिय होते हैं और उच्च दाब व ताप पर भी स्थायी होते हैं।

B. डी.डी.टी. (DDT):
DDT का पूरा नाम `\(p, p'\)`-डाइक्लोरो डाइफेनिल ट्राइक्लोरोऐथेन है। यह क्लोरोबेंजीन और क्लोरल के मिश्रण को सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (`\(\ce{H2SO4}\)`) की उपस्थिति में गर्म करके बनता है। DDT एक सफेद ठोस यौगिक है जो एक शक्तिशाली कीटनाशक (insecticide) के रूप में मच्छरों, खटमलों और अन्य कीटों को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किया जाता था। यह बहुत स्थायी होता है और आसानी से उपापचयित (metabolised) नहीं होता। यह वसीय ऊतकों में जमा हो जाता है और जीवों में समय के साथ इसकी मात्रा बढ़ती जाती है। पर्यावरण पर इसके हानिकारक प्रभावों के कारण कई देशों में DDT के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, हालांकि कुछ स्थानों पर इसका उपयोग अभी भी होता है।

C. बी.एच.सी. (BHC):
BHC का पूरा नाम बेन्जीन हेक्साक्लोराइड है। इसे गैमेक्सेन, लिण्डेन, या 666 जैसे व्यापारिक नामों से भी जाना जाता है। इसका IUPAC नाम 1, 2, 3, 4, 5, 6-हेक्साक्लोरोसाइक्लोहेक्सेन है। यह पराबैंगनी प्रकाश (`\(\ce{hv}\)`) की उपस्थिति में बेंजीन की क्लोरीन से अभिक्रिया द्वारा प्राप्त होता है। BHC कई समावयवियों (`\(\alpha, \beta, \gamma, \delta, \varepsilon, \eta, \theta\)` ) का मिश्रण होता है। इसका उपयोग कृषि में कीटनाशक के रूप में किया जाता है, जिसमें `\(\gamma\)`-BHC (गामा-समावयवी) सबसे अधिक कीटनाशक सक्रियता दिखाता है। इसका एक अन्य उपयोग कपास के कीटों को नियंत्रित करना है।
In simple words: फ्रिऑन मेथेन और ऐथेन के क्लोरो-फ्लुओरो रूप हैं। ये रेफ्रिजरेटर और एसी में काम आते हैं। इनका नामकरण उनके अंदर कार्बन, हाइड्रोजन और फ्लोरीन की गिनती के हिसाब से होता है। DDT एक मजबूत कीटनाशक है जो कीटों को मारने के लिए इस्तेमाल होता था, लेकिन यह पर्यावरण के लिए बुरा है। BHC भी एक कीटनाशक है, जिसका उपयोग खेती में होता है और यह बेंजीन और क्लोरीन से बनता है।

🎯 Exam Tip: फ्रिऑन के पर्यावरण पर हानिकारक प्रभावों (ओजोन परत क्षरण) को भी ध्यान में रखें, हालांकि प्रश्न में नहीं पूछा गया है। नामकरण के नियम को याद रखें। DDT और BHC दोनों के पर्यावरण संबंधी मुद्दों को हाइलाइट करें। DDT का संश्लेषण क्लोरल और क्लोरोबेंजीन से होता है, जबकि BHC बेंजीन और क्लोरीन से बनता है।

 

Question 43. क्लोरो बेन्जीन की इलेक्ट्रॉन स्नेहीं एवं नाभिक स्नेही अभिक्रियाओं को समझाइए।
Answer:
क्लोरोबेंजीन, हैलोजेन परमाणु की उपस्थिति के कारण इलेक्ट्रॉन स्नेही और नाभिक स्नेही दोनों प्रकार की अभिक्रियाएं प्रदर्शित करता है।

1. नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं (Nucleophilic Substitution Reactions):
ऐरिल हैलाइड (जैसे क्लोरोबेंजीन) नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति ऐल्किल हैलाइड की तुलना में कम क्रियाशील होते हैं। इसके मुख्य कारण हैं:
अनुनाद प्रभाव (Resonance effect): क्लोरोबेंजीन में क्लोरीन परमाणु पर मौजूद इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के `\(\ce{\pi}\)`-इलेक्ट्रॉनों के साथ अनुनाद में होते हैं। इस अनुनाद के कारण `\(\ce{C-Cl}\)` बंध में आंशिक द्विबंध का गुण आ जाता है। द्विबंध एकल बंध से ज़्यादा मजबूत होता है, इसलिए `\(\ce{C-Cl}\)` बंध को तोड़ना कठिन हो जाता है, जिससे नाभिकरागी प्रतिस्थापन मुश्किल हो जाता है।
कार्बन परमाणु का संकरण (Hybridization of carbon atom): क्लोरोबेंजीन में क्लोरीन परमाणु `\(\ce{sp^2}\)` संकरित कार्बन से जुड़ा होता है। `\(\ce{sp^2}\)` संकरित कार्बन `\(\ce{sp^3}\)` संकरित कार्बन की तुलना में अधिक इलेक्ट्रोनेगेटिव होता है, जिससे `\(\ce{C-Cl}\)` बंध के इलेक्ट्रॉन ज़्यादा मजबूती से बंधे रहते हैं, और बंध विदलन मुश्किल हो जाता है।
फिनाइल धनायन की अस्थिरता (Instability of Phenyl Cation): नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया के दौरान यदि फिनाइल धनायन बनता है, तो वह बहुत अस्थिर होता है क्योंकि इसमें अनुनाद द्वारा स्थिरता नहीं मिल पाती है।

2. इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं (Electrophilic Substitution Reactions):
हैलोएरीन (जैसे क्लोरोबेंजीन) बेंजीन की तरह ही इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं देती हैं, जैसे हैलोजेनीकरण, नाइट्रीकरण, सल्फोनीकरण और फ्रीडल-क्राफ्ट अभिक्रियाएं। हैलोजेन परमाणु `\(\ce{o/p}\)`-निर्देशक होते हैं (ortho-para directing), लेकिन साथ ही इलेक्ट्रॉन आकर्षी (`\(\ce{-I}\) ` प्रभाव) होते हैं। इसलिए, ये आने वाले इलेक्ट्रॉनरागी को ऑर्थो (o-) और पैरा (p-) स्थितियों पर निर्देशित करते हैं, लेकिन बेंजीन वलय को कुछ हद तक निष्क्रिय भी करते हैं, जिससे अभिक्रियाएं धीमी गति से होती हैं और थोड़ी कठिन परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। अनुनादी संरचनाओं से यह स्पष्ट होता है कि ऑर्थो- और पैरा-स्थितियों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व मेटा-स्थिति की तुलना में अधिक होता है।
क्लोरोबेंजीन द्वारा प्रदर्शित की जाने वाली कुछ इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं:
(i) नाइट्रीकरण (Nitration):
क्लोरोबेंजीन को सांद्र नाइट्रिक अम्ल (`\(\ce{HNO3}\)`) और सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (`\(\ce{H2SO4}\)`) के मिश्रण के साथ गर्म करने पर नाइट्रीकरण होता है। इसमें आक्रमणकारी स्पीशीज नाइट्रोनियम आयन (`\(\ce{NO2+}\)`) होता है। मुख्य उत्पाद 1-क्लोरो-4-नाइट्रोबेंजीन (पैरा-समावयवी) होता है, और 1-क्लोरो-2-नाइट्रोबेंजीन (ऑर्थो-समावयवी) अल्प मात्रा में बनता है।
`\(\ce{C6H5Cl + HNO3(सांद्र) + H2SO4(सांद्र) -> C6H4Cl(NO2)(para) + C6H4Cl(NO2)(ortho) + H2O}\)`

(iii) सल्फोनीकरण (Sulphonation):
क्लोरोबेंजीन को फ्यूमिंग सल्फ्यूरिक अम्ल (`\(\ce{H2SO4}\)`) या सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करने पर सल्फोनीकरण होता है। इसमें आक्रमणकारी स्पीशीज `\(\ce{SO3H+}\)`) आयन होता है। इससे 4-क्लोरोबेंजीनसल्फोनिक अम्ल (पैरा-समावयवी) मुख्य उत्पाद के रूप में और 2-क्लोरोबेंजीनसल्फोनिक अम्ल (ऑर्थो-समावयवी) अल्प मात्रा में प्राप्त होता है।
`\(\ce{C6H5Cl + H2SO4(सांद्र/सधूम) -> C6H4Cl(SO3H)(para) + C6H4Cl(SO3H)(ortho) + H2O}\)`
In simple words: क्लोरोबेंजीन नाभिकरागी रिएक्शन कम करता है क्योंकि इसके `\(\ce{C-Cl}\)` बंध में दो बंधों जैसी ताकत होती है। इलेक्ट्रॉनरागी रिएक्शन में यह ऑर्थो-पैरा जगह पर अटैक करवाता है, लेकिन रिएक्शन धीमी होती है।

🎯 Exam Tip: क्लोरोबेंजीन की नाभिकरागी प्रतिस्थापन में कम क्रियाशीलता के कारणों को विस्तृत रूप से समझाएं। इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन में हैलोजेन की दोहरी प्रकृति (ऑर्थो-पैरा निर्देशक और निष्क्रियकारी) को समझाएं और मुख्य उत्पादों के नामकरण पर ध्यान दें।

 

Question 44. ऐल्किल हैलाइड से निम्न कैसे प्राप्त करेंगे।
(i) ऐल्किल आइसों सायनाइड
(ii) ऐल्किल सायनाइड
(iii) नाइट्रो ऐल्केन
(iv) ऐल्किल नाइट्राइट
(v) आइसो प्रोपिल बेन्जीन
(vi) टेट्रामेथिल अमोनियम क्लोराइड
Answer:
(i) ऐल्किल हैलाइड से ऐल्किल आइसो सायनाइड: जब ऐल्किल हैलाइड को सिल्वर सायनाइड (AgCN) के साथ गरम किया जाता है, तो ऐल्किल आइसो सायनाइड बनता है। यह अभिक्रिया ऐल्किल और सायनाइड समूहों के बीच कार्बन-नाइट्रोजन बंध बनाती है।
\( R-X + AgCN \rightarrow R-NC + AgX \)
(ii) ऐल्किल हैलाइड से ऐल्किल सायनाइड: ऐल्किल सायनाइड बनाने के लिए ऐल्किल हैलाइड को पोटेशियम सायनाइड (KCN) के एल्कोहॉलीय विलयन के साथ अभिक्रिया कराई जाती है। इस प्रक्रिया में एक नया कार्बन-कार्बन बंध बनता है।
\( R-X + KCN_{(alc)} \rightarrow R-CN + KX \)
(iii) ऐल्किल हैलाइड से नाइट्रो ऐल्केन: नाइट्रो ऐल्केन प्राप्त करने के लिए ऐल्किल हैलाइड को सिल्वर नाइट्राइट \( (AgNO_2) \) के साथ गरम किया जाता है। सिल्वर नाइट्राइट एक उदासीन अणु है जो नाइट्रोजन के माध्यम से जुड़कर नाइट्रो ऐल्केन बनाता है।
\( R-X + AgNO_{2 (alc)} \rightarrow R-NO_2 + AgX \)
(iv) ऐल्किल हैलाइड से ऐल्किल नाइट्राइट: ऐल्किल नाइट्राइट बनाने के लिए ऐल्किल हैलाइड को पोटेशियम नाइट्राइट \( (KNO_2) \) के साथ अभिक्रिया कराया जाता है। यह अभिक्रिया ऑक्सीजन के माध्यम से ऐल्किल समूह से जुड़ती है।
\( R-X + KNO_2 \rightarrow R-O-N=O + KX \)
(v) ऐल्किल हैलाइड से आइसो प्रोपिल बेन्जीन: आइसोप्रोपिल बेन्जीन बनाने के लिए, ऐल्किल क्लोराइड (जैसे आइसोप्रोपिल क्लोराइड) को बेंजीन के साथ निर्जल \( AlCl_3 \) की उपस्थिति में फ्रीडल-क्राफ्ट ऐल्कलीकरण अभिक्रिया कराई जाती है। इस प्रतिक्रिया में एक नया कार्बन-कार्बन बंध बनता है जो बेंजीन वलय से जुड़ता है।
\( \text{Benzene} + \text{isopropyl chloride} \xrightarrow{AlCl_3} \text{isopropylbenzene} + HCl \)

(vi) ऐल्किल हैलाइड से टेट्रामेथिल अमोनियम क्लोराइड: ऐल्किल हैलाइड को ट्राईऐथिलऐमीन के साथ अभिक्रिया कराने पर टेट्राऐथिल अमोनियम क्लोराइड बनता है। यह अभिक्रिया एक क्वाटरनरी अमोनियम लवण बनाती है।
\( C_2H_5Cl + (C_2H_5)_3N \rightarrow [(C_2H_5)_4N]^+ Cl^- \)
In simple words: हम ऐल्किल हैलाइड का उपयोग करके अलग-अलग प्रकार के रसायन बना सकते हैं। इन रसायनों को बनाने के लिए ऐल्किल हैलाइड को अलग-अलग चीजों के साथ मिलाया जाता है, जैसे KCN या \( AgNO_2 \), जिससे नया पदार्थ बनता है।

🎯 Exam Tip: इन परिवर्तनों को याद रखने के लिए, अभिकर्मक (जैसे KCN, AgCN) और उनसे बनने वाले उत्पाद को ध्यान में रखें, खासकर यदि वे कार्बन या नाइट्रोजन के माध्यम से जुड़ रहे हैं।

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Question 2. ऐल्किल हैलाइडों की सामान्य अभिक्रियाएँ कौन-सी हैं?
Answer: ऐल्किल हैलाइडों की सबसे आम प्रतिक्रियाएँ नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ हैं। इन अभिक्रियाओं में एक नाभिकस्नेही समूह हैलाइड आयन को प्रतिस्थापित करता है। इसके अलावा, विलोपन अभिक्रियाएँ भी महत्वपूर्ण हैं जहाँ हैलोजन परमाणु और पड़ोसी कार्बन से हाइड्रोजन परमाणु हट जाते हैं।
In simple words: ऐल्किल हैलाइड आमतौर पर ऐसी अभिक्रियाएँ दिखाते हैं जहाँ एक रासायनिक समूह दूसरे को बदल देता है, या जहाँ छोटे अणु निकल जाते हैं।

🎯 Exam Tip: नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (SN1 और SN2) और विलोपन अभिक्रियाएँ (E1 और E2) ऐल्किल हैलाइडों की रासायनिक प्रतिक्रियाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 3. फ्रीऑन क्या है?
Answer: फ्रीऑन क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) यौगिकों का एक सामान्य नाम है। ये मेथेन और ऐथेन के हैलोजन व्युत्पन्न होते हैं, जिनमें क्लोरीन और फ्लोरीन दोनों परमाणु होते हैं। फ्रीऑन रंगहीन, गंधहीन और बहुत स्थिर होते हैं, जिनका उपयोग रेफ्रिजरेंट और एरोसोल प्रोपेलेंट के रूप में किया जाता है। हालांकि, ये ओजोन परत को नुकसान पहुँचाते हैं।
In simple words: फ्रीऑन विशेष प्रकार के रसायन हैं जिनमें क्लोरीन, फ्लोरीन और कार्बन होता है। ये ठंडी चीजों में और स्प्रे डिब्बे में इस्तेमाल होते थे, लेकिन अब इनका उपयोग कम हो गया है क्योंकि ये पृथ्वी की ओजोन परत को खराब करते हैं।

🎯 Exam Tip: फ्रीऑन के रासायनिक सूत्र (जैसे \( CF_2Cl_2 \)) और उनके पर्यावरणीय प्रभाव (ओजोन परत का क्षरण) को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. \( C_3H_7Cl \) के सम्भावित समावयवी लिखिए।
Answer: \( C_3H_7Cl \) के दो संभावित समावयवी हैं:
1. 1-क्लोरोप्रोपेन \( (CH_3CH_2CH_2Cl) \)
2. 2-क्लोरोप्रोपेन \( (CH_3CHClCH_3) \)
इन दोनों में क्लोरीन परमाणु की स्थिति भिन्न होती है, जिससे वे समावयवी कहलाते हैं।
In simple words: \( C_3H_7Cl \) के दो अलग-अलग रूप हो सकते हैं। एक में क्लोरीन पहले कार्बन पर जुड़ा होता है, और दूसरे में यह बीच वाले कार्बन पर जुड़ा होता है।

🎯 Exam Tip: समावयवी लिखते समय, कार्बन श्रृंखला की लंबाई और प्रतिस्थापियों (जैसे हैलोजन) की स्थिति दोनों पर विचार करें।

 

Question 5. समपक्ष-2-ब्यूटीन पर \( Br_2 \) के योग से बनने वाले समावयवियों की संरचनाएँ लिखिए।
Answer: जब समपक्ष-2-ब्यूटीन \( (CH_3-C=C-CH_3) \) पर ब्रोमीन \( (Br_2) \) का योग होता है, तो मुख्यतः मेसो-2,3-डाइब्रोमोब्यूटेन का रेसीमिक मिश्रण बनता है। ब्रोमीन अणु डबल बॉन्ड पर एंटी-एडिशन (विपरीत दिशा से योग) करता है, जिससे \( (2R,3S) \) और \( (2S,3R) \) मेसो रूप बनते हैं। इसे रेसीमिक मिश्रण कहते हैं क्योंकि यह दोनों रूपों का बराबर मिश्रण होता है और प्रकाश को घुमाता नहीं है।
\[ \begin{array}{c} \qquad \qquad \qquad CH_3 \\ \qquad \qquad \quad \diagup \\ CH_3 - C = C \\ \qquad \qquad \quad \diagdown \\ \qquad \qquad \qquad H \end{array} + Br_2 \implies \begin{array}{c} \qquad CH_3 \\ \qquad \quad | \\ Br - C - H \\ \qquad \quad | \\ H - C - Br \\ \qquad \quad | \\ \qquad CH_3 \end{array} + \begin{array}{c} \qquad CH_3 \\ \qquad \quad | \\ H - C - Br \\ \qquad \quad | \\ Br - C - H \\ \qquad \quad | \\ \qquad CH_3 \end{array} \]
In simple words: जब समपक्ष-2-ब्यूटीन में ब्रोमीन मिलाते हैं, तो दो अलग-अलग अणु बनते हैं जो एक-दूसरे के दर्पण जैसे होते हैं। इन दोनों का बराबर मिश्रण मिलता है।

🎯 Exam Tip: एल्कीन में हैलोजन का योग एक एंटी-एडिशन (एंटी-जोड़) प्रतिक्रिया होती है, जिसका अर्थ है कि हैलोजन परमाणु डबल बॉन्ड के विपरीत चेहरों से जुड़ते हैं, जिससे रेसीमिक मिश्रण या मेसो यौगिक बनते हैं।

 

Question 6. \( C_2H_4Cl_2 \) के समावयवियों के IUPAC नाम लिखिए।
Answer: \( C_2H_4Cl_2 \) के दो संभावित समावयवी हैं:
1. 1,1-डाइक्लोरोऐथेन \( (CH_3CHCl_2) \): इसमें दोनों क्लोरीन परमाणु एक ही कार्बन परमाणु से जुड़े होते हैं, जिसे जैम-डाइहैलाइड भी कहते हैं।
2. 1,2-डाइक्लोरोऐथेन \( (Cl-CH_2-CH_2-Cl) \): इसमें क्लोरीन परमाणु दो अलग-अलग कार्बन परमाणुओं से जुड़े होते हैं, जिसे विस-डाइहैलाइड भी कहते हैं।
In simple words: \( C_2H_4Cl_2 \) के दो अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। या तो दोनों क्लोरीन एक ही कार्बन पर होंगे, या वे दो अलग-अलग कार्बन पर होंगे।

🎯 Exam Tip: IUPAC नामकरण में कार्बन श्रृंखला की संख्या और प्रतिस्थापियों (जैसे हैलोजन) की स्थिति को सही ढंग से दर्शाना आवश्यक है।

 

Question 7. ऐथेनॉल की आयोडीन तथा NaOH के साथ क्रिया कराने पर प्राप्त मुख्य उत्पाद है।
Answer: ऐथेनॉल की आयोडीन \( (I_2) \) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड \( (NaOH) \) के साथ अभिक्रिया कराने पर मुख्य उत्पाद के रूप में पीले रंग का आयोडोफॉर्म \( (CHI_3) \) का अवक्षेप प्राप्त होता है। यह आयोडोफॉर्म परीक्षण कहलाता है और इसका उपयोग ऐथेनॉल या एसीटोन जैसे यौगिकों की पहचान के लिए किया जाता है।
\[ CH_3CH_2OH + 4I_2 + 6NaOH \rightarrow CHI_3 \downarrow (\text{पीला अवक्षेप}) + HCOONa + 5NaI + 5H_2O \]
In simple words: जब ऐथेनॉल को आयोडीन और NaOH के साथ मिलाते हैं, तो एक पीला रंग का पदार्थ, जिसे आयोडोफॉर्म कहते हैं, बनता है।

🎯 Exam Tip: आयोडोफॉर्म परीक्षण \( CH_3CH(OH)- \) समूह या \( CH_3CO- \) समूह की उपस्थिति का पता लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण रासायनिक परीक्षण है।

 

Question 8. सहीं पद में कैसे परिवर्तित करेंगे?
(i) ब्यूटीन-1 से 1-ब्रोमोब्यूटेन
(ii) प्रोपीन से ऐलिल क्लोराइड
(iii) प्रोपीन से आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड
Answer:
(i) ब्यूटीन-1 से 1-ब्रोमोब्यूटेन:
ब्यूटीन-1 \( (CH_3CH_2CH=CH_2) \) को एंटी-मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार हाइड्रोजन ब्रोमाइड \( (HBr) \) के साथ परॉक्साइड की उपस्थिति में अभिक्रिया कराने पर 1-ब्रोमोब्यूटेन \( (CH_3CH_2CH_2CH_2Br) \) प्राप्त होता है। यह अभिक्रिया मार्कोनीकॉफ के विपरीत होती है।
\[ CH_3CH_2CH=CH_2 + HBr \xrightarrow{\text{परॉक्साइड}} CH_3CH_2CH_2CH_2Br \]
(ii) प्रोपीन से ऐलिल क्लोराइड:
प्रोपीन \( (CH_3CH=CH_2) \) को उच्च तापमान पर क्लोरीन \( (Cl_2) \) के साथ अभिक्रिया कराने पर ऐलिल क्लोराइड \( (ClCH_2CH=CH_2) \) बनता है। इस अभिक्रिया में हैलोजन प्रतिस्थापन डबल बॉन्ड के पास वाले कार्बन पर होता है।
\[ CH_3CH=CH_2 + Cl_2 \xrightarrow{\text{उच्च ताप}} ClCH_2CH=CH_2 + HCl \]
(iii) प्रोपीन से आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड:
प्रोपीन \( (CH_3CH=CH_2) \) को मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार हाइड्रोजन ब्रोमाइड \( (HBr) \) के साथ अभिक्रिया कराने पर आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड \( (CH_3CH(Br)CH_3) \) प्राप्त होता है। इस अभिक्रिया में ब्रोमीन डबल बॉन्ड के अधिक प्रतिस्थापित कार्बन पर जुड़ता है।
\[ CH_3CH=CH_2 + HBr \rightarrow CH_3CH(Br)CH_3 \]
In simple words: हम ब्यूटीन-1 को HBr और परॉक्साइड से बदलकर 1-ब्रोमोब्यूटेन बना सकते हैं। प्रोपीन को क्लोरीन से ऐलिल क्लोराइड में और प्रोपीन को HBr से आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड में बदल सकते हैं।

🎯 Exam Tip: मार्कोनीकॉफ और एंटी-मार्कोनीकॉफ के नियम हैलोएसिड के एल्कीन पर योग की दिशा निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, और इसे याद रखना चाहिए।

 

Question 9. निम्न के IUPAC नाम लिखिए तथा इनका वर्गीकरण ऐल्किल, ऐलिलिक, बेन्जिलिक (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक), वाइनिल अथवा ऐरिल हैलाइड के रूप में कीजिए
(i) \( (CH_3)_2CHCH(Cl)CH_3 \)
(ii) \( CH_3CH_2CH(CH_3)CH(C_2H_5)Cl \)
Answer:
(i) \( (CH_3)_2CHCH(Cl)CH_3 \):
IUPAC नाम: 2-क्लोरो-3-मेथिल ब्यूटेन
वर्गीकरण: ऐल्किल हैलाइड (द्वितीयक)
\( \begin{array}{c} CH_3 \\ | \\ CH_3-CH-CH-CH_3 \\ \qquad \quad | \\ \qquad \quad Cl \end{array} \)
(ii) \( CH_3CH_2CH(CH_3)CH(C_2H_5)Cl \):
IUPAC नाम: 3-क्लोरो-4-मेथिल हेक्सेन
वर्गीकरण: ऐल्किल हैलाइड (द्वितीयक)
\( \begin{array}{c} \qquad \qquad \qquad CH_3 \\ \qquad \qquad \qquad | \\ CH_3-CH_2-CH-CH-CH_2-CH_3 \\ \qquad \qquad \qquad \quad | \\ \qquad \qquad \qquad \quad Cl \end{array} \)
In simple words: हम रासायनिक संरचना को देखकर उसके IUPAC नाम लिखते हैं, जो रसायन विज्ञान में एक विशेष तरीका है। फिर, हम इसे इस आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटते हैं कि हैलोजन कहाँ जुड़ा है और कार्बन श्रृंखला कैसी है।

🎯 Exam Tip: IUPAC नामकरण करते समय, सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन करें, प्रतिस्थापियों को सबसे कम संख्या दें, और वर्णानुक्रम का पालन करें। हैलोजन जुड़े कार्बन की प्रकृति से वर्गीकरण निर्धारित होता है।

 

Question 9. निम्न के IUPAC नाम लिखिए तथा इनका वर्गीकरण ऐल्किल, ऐलिलिक, बेन्जिलिक (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक), वाइनिल अथवा ऐरिल हैलाइड के रूप में कीजिए
(iii) \( CH_3CH_2C(CH_3)_2CH_2I \)
(iv) \( CH_3-CH-CH_2-CH=C-CH_2-CH_3 \) \( \qquad \qquad | \qquad \qquad \quad | \) \( \qquad \qquad CH_3 \qquad \qquad Cl \)
(v) \( CH_3-CH=CH-CH-CH_2-CH_3 \) \( \qquad \qquad \qquad \qquad | \) \( \qquad \qquad \qquad \qquad Br \)
(vi) \( CH_3-C(CH_3)_2-CH_2-C(CH_3)_2-CH_3 \) \( \qquad \qquad \qquad \quad | \qquad \qquad \quad | \) \( \qquad \qquad \qquad \quad Br \qquad \qquad Br \)
(vii) \( Cl - \text{benzene ring} - C(CH_3)_2 - CH_3 \)
(viii) \( Cl - \text{benzene ring} - CH(CH_3) - CH_2 - CH_3 \)
Answer:
(iii) \( CH_3CH_2C(CH_3)_2CH_2I \):
IUPAC नाम: 1-आयोडो-2,2-डाइमेथिल ब्यूटेन
वर्गीकरण: ऐल्किल हैलाइड (प्राथमिक)
\( \begin{array}{c} \qquad CH_3 \\ \qquad | \\ CH_3-CH_2-C-CH_2-I \\ \qquad | \\ \qquad CH_3 \end{array} \)
(iv) \( CH_3-CH(CH_3)-CH_2-CH=C(Cl)-CH_2-CH_3 \):
IUPAC नाम: 3-क्लोरो-6-मेथिल हेप्ट-3-ईन
वर्गीकरण: वाइनिलिक हैलाइड
\( \begin{array}{c} \qquad \qquad \qquad \qquad Cl \\ \qquad \qquad \qquad \qquad | \\ CH_3-CH(CH_3)-CH_2-CH=C-CH_2-CH_3 \end{array} \)
(v) \( CH_3-CH=CH-CH(Br)-CH_2-CH_3 \):
IUPAC नाम: 4-ब्रोमो-5-मेथिल हेक्स-2-ईन
वर्गीकरण: ऐलिलिक हैलाइड (द्वितीयक)
\( \begin{array}{c} \qquad \qquad \qquad \qquad Br \\ \qquad \qquad \qquad \qquad | \\ CH_3-CH=CH-CH-CH_2-CH_3 \end{array} \)
(vi) संरचना में त्रुटि है, सही संरचना \( CH_3-C(CH_3)_2-CH_2-C(CH_3)_2-CH_3 \) पर ब्रोमीन की स्थिति के बिना IUPAC नामकरण संभव नहीं है। यदि यह एक साधारण ऐल्किल हैलाइड है, तो यह ऐल्किल हैलाइड (प्राथमिक) होगा।
(vii) \( \text{Cl-benzene ring}-C(CH_3)_2-CH_3 \):
IUPAC नाम: 2-क्लोरो-2-फेनिल प्रोपेन
वर्गीकरण: बेन्जिलिक हैलाइड (तृतीयक)
(viii) \( Cl - \text{benzene ring} - CH(CH_3) - CH_2 - CH_3 \):
IUPAC नाम: 1-क्लोरो-4-आइसोप्रोपिल बेन्जीन
वर्गीकरण: ऐरिल हैलाइड
In simple words: यहाँ हमें कुछ रसायनों के नाम बताने हैं और उन्हें यह देखकर समूहों में बांटना है कि हैलोजन कहाँ जुड़ा है और कार्बन श्रृंखला कैसी दिखती है। इससे हमें उनकी विशेषताओं को समझने में मदद मिलती है।

🎯 Exam Tip: ऐलिलिक और वाइनिलिक हैलाइडों में अंतर को समझने के लिए, हैलोजन परमाणु के सीधे डबल बॉन्ड से जुड़े होने (वाइनिलिक) या डबल बॉन्ड के बगल वाले कार्बन से जुड़े होने (ऐलिलिक) पर ध्यान दें।

 

Question 10. निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए
Answer:
(iii) क्लोरोफेनिल मेथेन
(iv) 3-क्लोरोटॉलुईन
(v) ट्राईक्लोरोफेनिल मेथेन
(vi) 1-ब्रोमो-3-क्लोरोबेन्जन
(vii) 2-क्लोरो-2-फेनिल ब्यूटेन
(viii) 1,4-डाइक्लोरोबेन्जीन
(ix) 1,1-डाइब्रोमो-1-(4-ब्रोमोफेनिल) मेथेन
(x) 3-ब्रोमो-1-फेनिल प्रोपीन
(xi) 2-क्लोरो-2-मेथिल प्रोपेन
(xii) 4-क्लोरोपेन्ट-2-ईन
(xiii) 2-क्लोरो-3-ऐथिल पैन्ट-1,4-डाइईन
(xiv) 1-ब्रोमो-5-क्लोरो-3-(क्लोरोमेथिल) पेण्टेन
(xv) 3-आयोडो प्रोप-1-ईन
(xvi) क्लोरो-2,2-डाइमेथिल प्रोपेन
(xvii) 2-आयोडो-2-मेथिल ब्यूटेन
(xviii) 3-ब्रोमो-3-ऐथिल पेण्टेन
(xix) 2-क्लोरो-3,3-डाइमेथिल ब्यूटेन
(xx) 3-ब्रोमो-5-क्लोरो-3,5-डाइमेथिल हेप्टेन
(xxi) 1-क्लोरो पेन्ट-1-ईन-4-आइन
(xxii) 3-ब्रोमो प्रोप-1-आइन
(xxiii) 4-क्लोरो पेन्ट-2-आइन
(xxiv) 3-ब्रोमो हेक्स-1,3,5-ट्राइईन
(xxv) 4-ब्रोमो-3-फ्लुओरो-5-आयोडो-6,7,7-टाइमेथिल ऑक्ट-1-ईन
(xxvi) 2-क्लोरोब्यूटेन
(xxvii) 1-क्लोरो-2-मेथिल प्रोपेन
(xxviii) 2-क्लोरो-2-मेथिल प्रोपेन
(xxix) 2-ब्रोमो-2-मेथिल ब्यूटेन
(xxx) 1-क्लोरो-2,2-डाइमेथिल प्रोपेन
(xxxi) 2-ब्रोमोब्यूटेन
(xxxii) 4-क्लोरो-4-मेथिल पेन्ट-2-ईन
(xxxiii) 3-आयोडोप्रोपीन
(xxxiv) 4-तृतीयक ब्यूटिल-3-आयोडोहेष्टैन
(xxxv) 2-क्लोरो-3-मेथिल पैन्टैन
(xxxvi) p-ब्रोमो क्लोरोबेन्जीन
(xxxvii) 1-आयोडो-4-मेथिल साइक्लोहेक्सेन
(xxxviii) 4-sec-ब्यूटिल-2-ऐथिल-1-आयोडोबेन्जीन
(xxxix) 1-ब्रोमो-3-मेथिल पैन्ट-2-ईन
(xl) परफ्लोरोएथिलीन
(xli) 2,3-क्लोरोफेनिल ब्यूट-2-ईन
(xlii) 3-क्लोरो-4-आयोडो हेक्सैन
(xliii) 8-ब्रोमो-2,7-डाइमेथिल डेकेन
(xliv) 7-(1,2-डाइफ्लुओरोब्यूटिल)-5-ऐथिल ट्राइडेकेन
(xlv) 4-(1-क्लोरोऐथिल)-5,7-बिस (2-क्लोरोऐथिल) डेकेन
(xlvi) 4-(ट्राइक्लोरोमेथिल)-5-(डाइक्लोरोमेथिल) ऑक्टेन
(xlvii) 4-(2-ब्रोमो-1-क्लोरोऐथिल)-5-(1,1-डाइक्लोरोऐथिल) ऑक्टेन
(xlviii) 4-(1-ब्रोमो-2-क्लोरोऐथिल)-5-(2-ब्रोमो-1-क्लोरोऐथिल) ऑक्टेन
(xlix) 1,1,1,3,3,3-हैक्साक्लोरो-2,2-बिस (ट्राइक्लोरोमैथिल) प्रोपेन
In simple words: IUPAC नामकरण एक अंतर्राष्ट्रीय तरीका है जिससे रसायनों को सही ढंग से पहचाना जाता है। हम संरचना को देखकर नियमों का पालन करते हुए उनका नाम लिखते हैं, ताकि सभी को समझ आ सके कि किस रसायन की बात हो रही है।

🎯 Exam Tip: IUPAC नामकरण में, सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला चुनें, डबल/ट्रिपल बॉन्ड या क्रियात्मक समूह को प्राथमिकता दें, प्रतिस्थापियों को सबसे कम संख्या दें, और वर्णानुक्रम का पालन करें।

 

Question 16. क्या होता है जब क्लोरीन को उबलते हुए टॉलुईन से प्रवाहित कराते हैं?
Answer: जब क्लोरीन को उबलते हुए टॉलुईन \( (C_6H_5CH_3) \) से प्रवाहित किया जाता है, तो मेथिल समूह के हाइड्रोजन परमाणु एक-एक करके क्लोरीन परमाणुओं द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं। इस अभिक्रिया से सबसे पहले बेन्जाइल क्लोराइड, फिर बेन्जल क्लोराइड और अंत में बेन्जो ट्राइक्लोराइड बनता है। यह अभिक्रिया पार्श्व श्रृंखला हैलोजेनीकरण का एक उदाहरण है।
\[ C_6H_5CH_3 + Cl_2 \xrightarrow{\text{उबलती हुई, -HCl}} C_6H_5CH_2Cl \text{ (बेन्जाइल क्लोराइड)} \]
\[ C_6H_5CH_2Cl + Cl_2 \xrightarrow{\text{उबलती हुई, -HCl}} C_6H_5CHCl_2 \text{ (बेन्जल क्लोराइड)} \]
\[ C_6H_5CHCl_2 + Cl_2 \xrightarrow{\text{उबलती हुई, -HCl}} C_6H_5CCl_3 \text{ (बेन्जो ट्राइक्लोराइड)} \]
In simple words: जब गर्म टॉलुईन में क्लोरीन गैस मिलाते हैं, तो टॉलुईन के मेथिल समूह के हाइड्रोजन हटकर क्लोरीन आ जाते हैं, जिससे नए यौगिक बनते हैं।

🎯 Exam Tip: टॉलुईन में हैलोजेनीकरण की स्थिति (पार्श्व श्रृंखला या वलय) प्रतिक्रिया की स्थिति पर निर्भर करती है: उच्च तापमान और प्रकाश पार्श्व श्रृंखला हैलोजेनीकरण को बढ़ावा देते हैं, जबकि लुईस अम्ल की उपस्थिति वलय हैलोजेनीकरण को।

 

Question 17. \( C_4H_8Cl_2 \) से सम्भावित जैम बाइसैलाइड्स की संख्या व संरचनात्मक सूत्र लिखिए।
Answer: \( C_4H_8Cl_2 \) से तीन संभावित जैम-डाइहैलाइड्स बन सकते हैं। जैम-डाइहैलाइड्स वे होते हैं जिनमें दोनों हैलोजन परमाणु एक ही कार्बन परमाणु से जुड़े होते हैं।
1. 1,1-डाइक्लोरोब्यूटेन \( (CH_3CH_2CH_2CHCl_2) \)
2. 2,2-डाइक्लोरोब्यूटेन \( (CH_3CH_2CCl_2CH_3) \)
3. 1,1-डाइक्लोरो-2-मेथिल प्रोपेन \( (CH_3-CH(CH_3)-CHCl_2) \)
यह संरचनात्मक समावयवता का एक अच्छा उदाहरण है।
\[ \begin{array}{c} \qquad CH_3CH_2CH_2CHCl_2 \\ \qquad (1,1\text{-डाइक्लोरोब्यूटेन}) \end{array} \]
\[ \begin{array}{c} \qquad CH_3CH_2CCl_2CH_3 \\ \qquad (2,2\text{-डाइक्लोरोब्यूटेन}) \end{array} \]
\[ \begin{array}{c} \qquad CH_3 \\ \qquad | \\ CH_3-CH-CHCl_2 \\ \qquad (1,1\text{-डाइक्लोरो-2-मेथिल प्रोपेन}) \end{array} \]
In simple words: \( C_4H_8Cl_2 \) के तीन तरीके हैं जिसमें दो क्लोरीन एक ही कार्बन से जुड़े होते हैं। ये सभी रसायन अलग-अलग होते हुए भी एक ही फार्मूला रखते हैं।

🎯 Exam Tip: जैम-डाइहैलाइड्स में दोनों हैलोजन एक ही कार्बन पर होते हैं, जबकि विस-डाइहैलाइड्स में वे पड़ोसी कार्बन परमाणुओं पर होते हैं। इन दोनों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question 18. C2H3Cl3 के सम्भावित समावयव बनाइए।
Answer: कार्बन, हाइड्रोजन और क्लोरीन परमाणुओं से बने यौगिक \( C_2H_3Cl_3 \) के कई अलग-अलग रूप हो सकते हैं, जिन्हें समावयव कहते हैं। इनमें से कुछ नीचे दिए गए हैं:
1. \( CH_3-CCl_3 \) (1,1,1-ट्राइक्लोरोऐथेन)
2. \( Cl-CH_2-CHCl_2 \) (1,1,2-ट्राइक्लोरोऐथेन)
In simple words: इस रासायनिक सूत्र के लिए दो मुख्य तरीके हैं जिनसे परमाणु आपस में जुड़ सकते हैं. इन अलग-अलग जुड़ने के तरीकों को समावयव कहते हैं.

🎯 Exam Tip: जब समावयव बनाने हों, तो कार्बन कंकाल को स्थिर रखें और हैलोजन परमाणुओं की स्थिति को अलग-अलग तरीकों से संयोजित करें.

 

Question 19. क्या होता है जब बेन्जल क्लोराइड को जलीय NaOH विलयन के साथ उबालते हैं?
Answer: जब बेन्जल क्लोराइड को जलीय सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) विलयन के साथ उबाला जाता है, तो बेन्जेल्डिहाइड बनता है। इस प्रक्रिया में पहले बेन्जल क्लोराइड जल के साथ क्रिया करके एक अस्थायी यौगिक बनाता है, जो फिर तुरंत बेन्जेल्डिहाइड में बदल जाता है।
\( C_6H_5CHCl_2 + 2NaOH_{(aq)} \xrightarrow{\text{उबालना}} C_6H_5CH(OH)_2 \text{ (अस्थायी)} \)

\( C_6H_5CH(OH)_2 \xrightarrow{-H_2O} C_6H_5CHO \text{ (बेन्जेल्डिहाइड)} \)
In simple words: बेन्जल क्लोराइड को पानी वाले NaOH के साथ गरम करने पर, यह बेन्जेल्डिहाइड में बदल जाता है. यह एक बदलने वाली अभिक्रिया है.

🎯 Exam Tip: बेन्जेल्डिहाइड बनने की इस अभिक्रिया को याद रखें, क्योंकि यह हैलोजन यौगिकों से ऐल्डिहाइड बनाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है.

 

Question 20. हिन्सबर्ग अभिकर्मक का रासायनिक नाम एवं सूत्र लिखिये।
Answer: हिन्सबर्ग अभिकर्मक का रासायनिक नाम बेन्जीनसल्फोनील क्लोराइड है। इसका सूत्र \( C_6H_5SO_2Cl \) है। इस अभिकर्मक का उपयोग प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों में अंतर करने के लिए किया जाता है।
In simple words: हिन्सबर्ग अभिकर्मक का नाम बेन्जीनसल्फोनील क्लोराइड है और इसका सूत्र \( C_6H_5SO_2Cl \) है. यह अलग-अलग तरह के ऐमीनों को पहचानने में मदद करता है.

🎯 Exam Tip: हिन्सबर्ग अभिकर्मक का नाम और सूत्र याद रखना ऐमीन-पहचानने वाली अभिक्रियाओं के लिए ज़रूरी है.

 

Question 21. Br¯ तथा I¯ आयनों में से कौन-सा उत्तम नाभिक स्नेही हैं?
Answer: आयोडाइड आयन (I¯) ब्रोमाइड आयन (Br¯) की तुलना में एक उत्तम नाभिक स्नेही है। इसका मुख्य कारण यह है कि आयोडीन की विद्युत-ऋणात्मकता बहुत कम होती है, जिससे यह अपने इलेक्ट्रॉन युग्म को अधिक आसानी से छोड़ सकता है। साथ ही, आयोडीन परमाणु का आकार बड़ा होने के कारण यह ध्रुवीय प्रोटिक विलायकों में कम बाधित होता है।
In simple words: आयोडाइड आयन एक बेहतर नाभिक स्नेही है क्योंकि यह ब्रोमाइड से ज़्यादा आसानी से इलेक्ट्रॉन दे सकता है. इसका बड़ा आकार भी एक कारण है.

🎯 Exam Tip: नाभिक स्नेही क्षमता का निर्धारण विद्युत-ऋणात्मकता, आकार और विलायक के प्रभाव जैसे कारकों पर निर्भर करता है. बड़े आकार वाले आयन आमतौर पर बेहतर नाभिक स्नेही होते हैं.

 

RBSE Class 12 Chemistry Chapter 10 लघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. ऐल्कोहॉल से आप निम्न को किस प्रकार बनाएँगे?
(i) sec-ब्यूटिल क्लोराइड
(ii) फ्लुओरोऐथेन
(iii) ter-ब्यूटिल ब्रोमाइड
Answer:
(i) sec-ब्यूटिल क्लोराइड बनाने के लिए sec-ब्यूटिल ऐल्कोहॉल को HCl और निर्जल \( ZnCl_2 \) (लुकास अभिकर्मक) के साथ अभिकृत किया जाता है। यह SN1 अभिक्रिया का एक उदाहरण है।
\( CH_3-CH(OH)-CH_2-CH_3 \xrightarrow{HCl/ZnCl_2} CH_3-CH(Cl)-CH_2-CH_3 \)
(ii) फ्लुओरोऐथेन बनाने के लिए ऐथेनॉल को \( PCl_5 \) के साथ अभिकृत करके क्लोरोऐथेन प्राप्त किया जाता है, जिसे फिर \( Hg_2F_2 \) के साथ गरम करके फ्लुओरोऐथेन में बदल दिया जाता है। इस विधि को स्वार्ट्स अभिक्रिया कहते हैं।
\( CH_3CH_2OH \xrightarrow{PCl_5} CH_3CH_2Cl \xrightarrow{Hg_2F_2/\Delta} CH_3CH_2F \)
(iii) ter-ब्यूटिल ब्रोमाइड बनाने के लिए 2-मेथिल-2-प्रोपेनॉल को HBr के साथ मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार अभिकृत किया जाता है। यह एक त्वरित अभिक्रिया है क्योंकि तृतीयक कार्बोकैटायन स्थिर होता है।
\( \underset{\text{2-मेथिल-2-प्रोपेनॉल}}{CH_3-\overset{CH_3}{\underset{|}{\text{C}}}-OH} \xrightarrow{H_2SO_4, 160^\circ C} \underset{\text{2-मेथिल प्रोपीन}}{CH_3-\overset{CH_3}{\underset{|}{\text{C}}}=CH_2} \xrightarrow{HBr, \text{ मार्कोनीकॉफ योग}} \underset{\text{ter-ब्यूटिल ब्रोमाइड}}{CH_3-\overset{CH_3}{\underset{|}{\text{C}}}-CH_3} \)
In simple words: (i) sec-ब्यूटिल क्लोराइड बनाने के लिए sec-ब्यूटिल ऐल्कोहॉल को HCl से मिलाते हैं. (ii) फ्लुओरोऐथेन बनाने के लिए ऐथेनॉल को पहले क्लोरोऐथेन में और फिर फ्लुओरोऐथेन में बदलते हैं. (iii) ter-ब्यूटिल ब्रोमाइड बनाने के लिए 2-मेथिल-2-प्रोपेनॉल में HBr जोड़ते हैं.

🎯 Exam Tip: ऐल्कोहॉलों से हैलोऐल्केनों को बनाने के लिए विभिन्न अभिकर्मकों और अभिक्रियाओं का उपयोग होता है, जैसे लुकास अभिकर्मक, स्वार्ट्स अभिक्रिया और मार्कोनीकॉफ का नियम. इन सभी के उत्पादों को ध्यान में रखें.

 

Question 2. C5H11Br आण्विक सूत्र वाले यौगिक के सभी समावयवियों की संरचना बनाइए एवं उनके IUPAC नाम लिखिए। निम्न में से कौन धुवणे घूर्णन प्रदर्शित करते हैं?
Answer: \( C_5H_{11}Br \) आण्विक सूत्र वाले यौगिक के कुल 8 संरचनात्मक समावयव होते हैं। ध्रुवण घूर्णन प्रदर्शित करने वाले वे समावयव होते हैं जिनमें किरेल कार्बन परमाणु (चार अलग-अलग समूहों से जुड़ा कार्बन) होता है।
\( C_5H_{11}Br \) के समावयवी:
(1) \( CH_3CH_2CH_2CH_2CH_2Br \) (1-ब्रोमोपेन्टेन)
(2) \( CH_3CH_2CH_2CH(Br)CH_3 \) (2-ब्रोमोपेन्टेन) - ध्रुवण घूर्णक
(3) \( CH_3CH_2CH(Br)CH_2CH_3 \) (3-ब्रोमोपेन्टेन)
(4) \( \underset{CH_3}{\overset{CH_3CH_2}{\text{CH}}}CH_2Br \) (1-ब्रोमो-2-मेथिल ब्यूटेन) - ध्रुवण घूर्णक
(5) \( CH_3CH(CH_3)CH_2CH_2Br \) (1-ब्रोमो-3-मेथिल ब्यूटेन)
(6) \( \underset{CH_3}{\overset{CH_3}{\text{CH}}_3CBrCH_3} \) (2-ब्रोमो-2-मेथिल ब्यूटेन)
(7) \( \underset{CH_3}{\overset{CH_3CH_2}{\text{CH}}}CH(Br)CH_3 \) (2-ब्रोमो-3-मेथिल ब्यूटेन) - ध्रुवण घूर्णक
(8) \( \underset{CH_3}{\overset{CH_3}{\text{CH}}_3CCH_2Br} \) (1-ब्रोमो-2,2-डाइमेथिलप्रोपेन)
उपर्युक्त समावयवियों में ध्रुवण घूर्णन प्रदर्शित करने वाले समावयवी 2, 4 तथा 7 हैं।
In simple words: \( C_5H_{11}Br \) के 8 अलग-अलग रूप हो सकते हैं. जिन रूपों में एक कार्बन चार अलग-अलग चीज़ों से जुड़ा होता है, वे ध्रुवण घूर्णन दिखाते हैं. यहाँ पर 2, 4 और 7 नंबर के समावयव ध्रुवण घूर्णन वाले हैं.

🎯 Exam Tip: समावयवियों की संरचना बनाते समय कार्बन कंकाल की विभिन्न व्यवस्थाओं और ब्रोमीन के विभिन्न स्थानों पर विचार करें. किरेलता के लिए, प्रत्येक कार्बन को चार भिन्न समूहों से जोड़ने वाले कार्बन परमाणु को पहचानें.

 

Question 3. निम्न अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए
Answer: यहाँ विभिन्न कार्बनिक अभिक्रियाओं को पूरा किया गया है, जिसमें अभिकर्मकों की उपस्थिति में उत्पाद बनते हैं। ये अभिक्रियाएँ हैलोऐल्केन और ऐल्कोहॉल के निर्माण से संबंधित हैं।
(iv) \( \underset{\text{1-क्लोरोप्रोपेन}}{CH_3CH_2CH_2Cl} + I^- \rightarrow \underset{\text{1-आयोडो प्रोपेन}}{CH_3CH_2CH_2I} + Cl^- \)
(v) \( \underset{\text{2-क्लोरोप्रोपेन}}{CH_3CH(Cl)CH_3} \xrightarrow{+OH^- / C_2H_5OH} \underset{\text{प्रोपीन}}{CH_3CH=CH_2} \)
(vi) \( \underset{\text{2-प्रोपेनॉल}}{CH_3CH(OH)CH_3} \xrightarrow{H_2SO_4, \Delta} \underset{\text{प्रोपीन}}{CH_3CH=CH_2} \xrightarrow{SO_2Cl_2, 475K} \underset{\text{3-क्लोरोप्रोपीन}}{ClCH_2CH=CH_2} \)
(vii) \( \underset{\text{ऐनिलीन}}{C_6H_5NH_2} \xrightarrow{+HNO_2, 273K} \underset{\text{बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड}}{C_6H_5N_2^+Cl^-} \xrightarrow{HBF_4} \underset{\text{फ्लुओरोबेन्जीन}}{C_6H_5F} \)
(ix) \( \underset{\text{सिल्वर प्रोपिओनेट}}{CH_3CH_2COOAg} + Br_2 \xrightarrow{CCl_4, \text{ आसवन}} \underset{\text{ब्रोमोऐथेन}}{CH_3CH_2Br} + CO_2 + AgBr \)
(x) \( \underset{\text{ऐसीटोन}}{CH_3COCH_3} + 3I_2 + 4NaOH \rightarrow \underset{\text{आयोडोफॉर्म}}{CHI_3} + \underset{\text{सोडियम ऐसीटेट}}{CH_3COONa} + 3NaI + 3H_2O \)
(xi) \( \underset{\text{क्लोरोऐथेन}}{CH_3CH_2Cl} + KCN \rightarrow \underset{\text{प्रोपेननाइट्राइल}}{CH_3CH_2CN} + KCl \)
(xii) \( \underset{\text{प्रोपीन}}{CH_3CH=CH_2} + HBr \xrightarrow{\text{परॉक्साइड}} \underset{\text{1-ब्रोमोप्रोपेन}}{CH_3CH_2CH_2Br} \)
(xiii) \( \underset{\text{प्रोपीन}}{CH_3CH=CH_2} + SO_2Cl_2 \xrightarrow{\Delta, h\nu} \underset{\text{3-क्लोरोप्रोपीन}}{ClCH_2CH=CH_2} + SO_2 + HCl \)
(xiv) \( \underset{\text{प्रोपीन}}{CH_3CH=CH_2} + HI \rightarrow \underset{\text{2-आयोडोप्रोपेन}}{CH_3CHICH_3} \)
(xv) \( \underset{\text{ऐथेनॉल}}{CH_3CH_2OH} + 4I_2 + 6NaOH \rightarrow \underset{\text{आयोडोफॉर्म}}{CHI_3} + HCOONa + 5NaI + 5H_2O \)
(xvi) \( C_2H_2 + 2Cl_2 \rightarrow \underset{\text{1,1,2,2-टेट्राक्लोरोऐथेन}}{CHCl_2-CHCl_2} \)
(xvii) \( \underset{\text{प्रोपीन}}{CH_3CH=CH_2} \xrightarrow{NBS, \text{ h}\nu} \underset{\text{3-ब्रोमोप्रोपीन}}{BrCH_2CH=CH_2} \)
(xviii) \( CH_3CH=CH_2 + Br_2 \xrightarrow{800K} \underset{\text{3-ब्रोमोप्रोपीन}}{BrCH_2CH=CH_2} + HBr \)
(xix) \( 2RCOOAg + I_2 \rightarrow RCOOR + 2CO_2 + 2AgI \)
(xx) \( \underset{\text{बेन्जीन}}{C_6H_6} + Cl_2 \xrightarrow{FeCl_3} \underset{\text{क्लोरोबेन्जीन}}{C_6H_5Cl} \)
(xxi) \( \underset{\text{बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड}}{C_6H_5N_2^+Cl^-} \xrightarrow{Cu_2Cl_2/HCl} \underset{\text{क्लोरोबेन्जीन}}{C_6H_5Cl} + N_2 \)
(xxii) \( \underset{\text{1-(4-नाइट्रोफेनिल) ऐथेन}}{O_2N-C_6H_4-CH(Br)CH_3} \) (इसका उत्पाद दिए गए अभिक्रिया से प्राप्त नहीं होता है, यह एक ब्रोमिनेशन का उदाहरण है जहाँ \( Br_2/h\nu \) के साथ अभिक्रिया करने पर \( O_2N-C_6H_4-CH_2-CH_3 \) से \( O_2N-C_6H_4-CH(Br)CH_3 \) बनता है)
(xxiii) \( \underset{\text{1-मेथिल साइक्लोहेक्सीन}}{C_6H_9CH_3} + HI \rightarrow \underset{\text{1-आयोडो-1-मेथिल साइक्लोहेक्सेन}}{C_6H_{10}ICH_3} \)
(xxiv) \( \underset{\text{1-फेनिल ऐथेनॉल}}{C_6H_5CH(OH)CH_3} \xrightarrow{Cl_2, \Delta, \text{प्रकाश (ii) KOH (जलीय)}} \underset{\text{1-फेनिल ऐथेनॉल}}{C_6H_5CH(OH)CH_3} \)
(यह अभिक्रिया में दिए गए अभिकारक और अभिकर्मक एक ही हैं, इसलिए कोई बदलाव नहीं होगा। यदि यह \( C_6H_5CH_2CH_3 \) होता तो \( C_6H_5CH(OH)CH_3 \) बनता.)
(xxv) \( \underset{\text{बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड}}{C_6H_5N_2^+Cl^-} \xrightarrow{Cu/HBr, \Delta} \underset{\text{ब्रोमोबेन्जीन}}{C_6H_5Br} + N_2 \)
(xxvi) \( \underset{\text{क्लोरोबेन्जीन}}{C_6H_5Cl} + CH_3Cl \xrightarrow{\text{निर्जल } AlCl_3} \underset{\text{1-क्लोरो-2-मेथिल बेन्जीन (अल्प)}}{o-ClC_6H_4CH_3} + \underset{\text{1-क्लोरो-4-मेथिल बेन्जीन (मुख्य)}}{p-ClC_6H_4CH_3} \)
(xxvii) \( \underset{\text{ऐनिलीन}}{C_6H_5NH_2} \xrightarrow{(i) NaNO_2/HCl, 273K (ii) KI, \Delta} \underset{\text{आयोडोबेन्जीन}}{C_6H_5I} \)
(xxviii) \( \underset{\text{ऐनिलीन}}{C_6H_5NH_2} \xrightarrow{(i) NaNO_2/HCl, 273K (ii) HBF_4} \underset{\text{फ्लुओरोबेन्जीन}}{C_6H_5F} \)
(xxix) \( \underset{\text{3-फेनिल प्रोपीन}}{C_6H_5CH_2CH=CH_2} + HBr \rightarrow \underset{\text{2-ब्रोमो-1-फेनिल प्रोपेन}}{C_6H_5CH_2CH(Br)CH_3} \)
(xxx) \( \underset{\text{3-फेनिल प्रोपीन}}{C_6H_5CH_2CH=CH_2} + HBr \xrightarrow{\text{परॉक्साइड}} \underset{\text{1-ब्रोमो-3-फेनिल प्रोपेन}}{C_6H_5CH_2CH_2CH_2Br} \)
(xxxi) \( \underset{\text{बेन्जिल ऐल्कोहॉल}}{C_6H_5CH_2OH} + HCl \xrightarrow{\Delta} \underset{\text{बेन्जिल क्लोराइड}}{C_6H_5CH_2Cl} \)
(xxxii) \( \underset{\text{टॉलूईन}}{C_6H_5CH_3} + HBr \xrightarrow{\text{परॉक्साइड}} \underset{\text{1-ब्रोमो-2-मेथिल साइक्लोहेक्सेन}}{C_6H_{10}BrCH_3} \)
In simple words: यह विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं का संग्रह है जहाँ अभिकारक, अभिकर्मक और उनके उत्पाद दिखाए गए हैं. प्रत्येक अभिक्रिया में, एक नया यौगिक बनता है, कभी-कभी गर्मी या उत्प्रेरक की मदद से.

🎯 Exam Tip: इन अभिक्रियाओं को याद करने के लिए, प्रत्येक अभिक्रिया के प्रकार (जैसे प्रतिस्थापन, योग, निराकरण) और अभिकर्मकों को समझें. विशेष रूप से नामित अभिक्रियाओं के नाम और उनके उत्पाद याद रखें.

 

Question (xxviii). ऐनिलीन की \( \text{HBF}_4 \) के साथ क्रिया के बाद गर्म करने पर क्या उत्पाद बनेगा?
Answer: जब ऐनिलीन को \( \text{NaNO}_2/\text{HCl} \) के साथ 273K पर अभिकृत किया जाता है, तो बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड बनता है. इसके बाद, यदि इस उत्पाद को \( \text{HBF}_4 \) के साथ क्रिया कराकर गर्म किया जाए, तो फ्लुओरोबेन्जीन प्राप्त होता है.
\[ \ce{NH2 (\text{एनिलीन}) ->[\text{i) NaNO2/HCl, 273K}][\text{ii) HBF4, \(\Delta\)}] F (\text{फ्लुओरोबेन्जीन})} \]In simple words: ऐनिलीन को कुछ खास रसायनों के साथ ठंडा करने पर एक मध्यवर्ती यौगिक बनता है. फिर इसे \( \text{HBF}_4 \) के साथ गर्म करने पर हमें फ्लुओरोबेन्जीन मिलता है, जो एक सुगंधित फ्लोरीन यौगिक है.

🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया बेन्जीन रिंग में फ्लोरीन परमाणु को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, जिसे बाल्ज़-शीमैन अभिक्रिया कहते हैं.

 

Question (xxix). 3-फेनिल प्रोपीन को \( \text{HBr} \) के साथ अभिकृत करने पर क्या उत्पाद बनेगा?
Answer: जब 3-फेनिल प्रोपीन (एलिलबेन्जीन) को \( \text{HBr} \) के साथ अभिकृत किया जाता है, तो मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार हाइड्रोजन परमाणु उस कार्बन से जुड़ता है जिस पर पहले से ही अधिक हाइड्रोजन होते हैं, और ब्रोमीन परमाणु उस कार्बन से जुड़ता है जिस पर कम हाइड्रोजन होते हैं. इससे 2-ब्रोमो-1-फेनिल प्रोपेन मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है.
\[ \ce{CH2=CH-CH2-\phi + HBr -> \phi -CH(Br)-CH3} \]In simple words: जब 3-फेनिल प्रोपीन में \( \text{HBr} \) मिलाया जाता है, तो ब्रोमीन बीच वाले कार्बन पर जुड़ता है और हाइड्रोजन आखिरी वाले पर, जिससे 2-ब्रोमो-1-फेनिल प्रोपेन बनता है. यह मार्कोनीकॉफ नियम के कारण होता है, जो बताता है कि हैलोजन ज़्यादा प्रतिस्थापित कार्बन पर जुड़ता है.

🎯 Exam Tip: हमेशा याद रखें कि एल्कीनों में \( \text{HX} \) का योग मार्कोनीकॉफ के नियम का पालन करता है, जब तक कि परॉक्साइड प्रभाव न हो.

 

Question (xxx). 3-फेनिल प्रोपीन को \( \text{HBr} \) और परॉक्साइड की उपस्थिति में अभिकृत करने पर क्या उत्पाद बनेगा?
Answer: जब 3-फेनिल प्रोपीन को \( \text{HBr} \) और परॉक्साइड की उपस्थिति में अभिकृत किया जाता है, तो एंटी-मार्कोनीकॉफ नियम के अनुसार हाइड्रोजन परमाणु उस कार्बन से जुड़ता है जिस पर कम हाइड्रोजन होते हैं, और ब्रोमीन परमाणु उस कार्बन से जुड़ता है जिस पर अधिक हाइड्रोजन होते हैं. इससे 1-ब्रोमो-3-फेनिल प्रोपेन मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है.
\[ \ce{CH2=CH-CH2-\phi + HBr ->[\text{परॉक्साइड}] Br-CH2-CH2-CH2-\phi} \]In simple words: अगर \( \text{HBr} \) और परॉक्साइड के साथ 3-फेनिल प्रोपीन को मिलाया जाए, तो ब्रोमीन अणु के किनारे पर जुड़ता है, जिससे 1-ब्रोमो-3-फेनिल प्रोपेन बनता है. इसे एंटी-मार्कोनीकॉफ योग कहते हैं, क्योंकि यह मार्कोनीकॉफ नियम के विपरीत है.

🎯 Exam Tip: परॉक्साइड की उपस्थिति में \( \text{HBr} \) का योग हमेशा एंटी-मार्कोनीकॉफ नियम का पालन करता है, जबकि \( \text{HCl} \) और \( \text{HI} \) इस प्रभाव को नहीं दिखाते.

 

Question (xxxi). बेन्जिल ऐल्कोहॉल को \( \text{HCl} \) के साथ गर्म करने पर क्या उत्पाद बनेगा?
Answer: जब बेन्जिल ऐल्कोहॉल को \( \text{HCl} \) के साथ गर्म किया जाता है, तो हैलोजेन प्रतिस्थापन अभिक्रिया होती है. इसमें ऐल्कोहॉल समूह (–OH) क्लोराइड परमाणु (–Cl) द्वारा प्रतिस्थापित हो जाता है, जिससे बेन्जिल क्लोराइड बनता है.
\[ \ce{\phi -CH2-OH + HCl ->[\Delta] \phi -CH2-Cl + H2O} \]In simple words: बेन्जिल ऐल्कोहॉल में \( \text{HCl} \) मिलाने और गर्म करने से, ऐल्कोहॉल का –OH समूह हटकर उसकी जगह क्लोरीन लग जाता है. इस तरह, हमें बेन्जिल क्लोराइड और पानी मिलते हैं.

🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया एक न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन है जो प्राथमिक बेन्जिलिक ऐल्कोहॉलों में आसानी से होती है, क्योंकि बेन्जिलिक कार्बोनियम आयन स्थिर होते हैं.

 

Question (xxxii). 1-मेथिल साइक्लोहेक्सीन को \( \text{HBr} \) और परॉक्साइड की उपस्थिति में अभिकृत करने पर क्या उत्पाद बनेगा?
Answer: जब 1-मेथिल साइक्लोहेक्सीन को \( \text{HBr} \) और परॉक्साइड की उपस्थिति में अभिकृत किया जाता है, तो एंटी-मार्कोनीकॉफ नियम के अनुसार हाइड्रोजन उस कार्बन पर जुड़ता है जो ब्रोमीन के लिए अधिक सब्स्टिट्यूटेड हो, और ब्रोमीन उस कार्बन पर जुड़ता है जो कम सब्स्टिट्यूटेड हो. इससे 1-ब्रोमो-2-मेथिल साइक्लोहेक्सेन मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है.
\[ \ce{\text{1-मेथिल साइक्लोहेक्सीन} + HBr ->[\text{परॉक्साइड}] \text{1-ब्रोमो-2-मेथिल साइक्लोहेक्सेन}} \]In simple words: 1-मेथिल साइक्लोहेक्सीन में \( \text{HBr} \) और परॉक्साइड डालने पर, ब्रोमीन रिंग के उस कार्बन पर जुड़ता है जो मेथिल समूह से दूर होता है, और हाइड्रोजन मेथिल वाले कार्बन पर जुड़ता है. इससे 1-ब्रोमो-2-मेथिल साइक्लोहेक्सेन बनता है.

🎯 Exam Tip: परॉक्साइड प्रभाव केवल \( \text{HBr} \) के साथ ही देखा जाता है, \( \text{HCl} \) या \( \text{HI} \) के साथ नहीं, और यह फ्री रेडिकल क्रियाविधि द्वारा होता है.

 

Question 6. क्या होता है जब (केवल समीकरण दीजिए):
(i) क्लोरोबेन्जीन की क्रिया नाइट्रीकारी मिश्रण से कराई जाती है?
Answer: क्लोरोबेन्जीन को नाइट्रीकारी मिश्रण (सान्द्र \( \text{HNO}_3 \) और सान्द्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \)) के साथ गर्म करने पर नाइट्रीकरण अभिक्रिया होती है. इसमें क्लोरोबेन्जीन की ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर नाइट्रो समूह जुड़ जाता है, जिससे 1-क्लोरो-2-नाइट्रोबेन्जीन (अल्प मात्रा में) और 1-क्लोरो-4-नाइट्रोबेन्जीन (मुख्य उत्पाद) बनते हैं. क्लोरोबेन्जीन में क्लोरिन ऑर्थो-पैरा निर्देशक समूह होता है.
\[ \ce{\phi -Cl (\text{क्लोरोबेन्जीन}) ->[\text{सान्द्र HNO3 + सान्द्र H2SO4}][\Delta] \phi -Cl-NO2 (\text{1-क्लोरो-2-नाइट्रोबेन्जीन}) + \phi -Cl-NO2 (\text{1-क्लोरो-4-नाइट्रोबेन्जीन})} \]In simple words: क्लोरोबेन्जीन में नाइट्रिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड का मिश्रण डालने पर, नाइट्रो समूह या तो क्लोरीन के बगल में (ऑर्थो) या ठीक सामने (पैरा) जुड़ जाता है. ज़्यादातर सामने वाला उत्पाद (पैरा) बनता है.

🎯 Exam Tip: हैलोजन समूह ऑर्थो-पैरा निर्देशक होते हैं, लेकिन उनका -I प्रभाव रिंग को निष्क्रिय भी करता है, इसलिए अभिक्रियाएँ थोड़ी कठिन परिस्थितियों में होती हैं.

 

Question 7. क्या होता है जब (केवल अभिक्रियाएँ दीजिए):
(i) क्लोरीन \( \text{CS}_2 \) से निर्जल \( \text{AlCl}_3 \) की उपस्थिति में अभिक्रिया करती है?
Answer: कार्बन डाइसल्फाइड (\( \text{CS}_2 \)) क्लोरीन के साथ निर्जल \( \text{AlCl}_3 \) की उपस्थिति में अभिक्रिया करके कार्बन टेट्राक्लोराइड (\( \text{CCl}_4 \)) और सल्फर डाइक्लोराइड (\( \text{S}_2\text{Cl}_2 \)) बनाती है.
\[ \ce{CS2 + 3Cl2 ->[\text{निर्जल AlCl3}] CCl4 + S2Cl2} \]In simple words: कार्बन डाइसल्फाइड में क्लोरीन और एल्युमिनियम क्लोराइड मिलाने पर, हमें कार्बन टेट्राक्लोराइड (जो एक अग्निशामक है) और सल्फर डाइक्लोराइड मिलता है.

🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया एक मुक्त मूलक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है जो औद्योगिक रूप से कार्बन टेट्राक्लोराइड के उत्पादन में प्रयुक्त होती है.

 

(ii) ऐथिल ऐल्कोहॉल को आयोडीन एवं सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करते हैं?
Answer: ऐथिल ऐल्कोहॉल को आयोडीन और सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर आयोडोफॉर्म अभिक्रिया होती है, जिससे पीले रंग का आयोडोफॉर्म (\( \text{CHI}_3 \)) अवक्षेप के रूप में प्राप्त होता है. इस अभिक्रिया को आयोडोफॉर्म परीक्षण के लिए भी उपयोग किया जाता है.
\[ \ce{CH3CH2OH + 4I2 + 6NaOH -> CHI3 (\text{आयोडोफॉर्म}) + HCOONa + 5NaI + 5H2O} \]In simple words: ऐथिल ऐल्कोहॉल को आयोडीन और कास्टिक सोडा के साथ गर्म करने पर पीले रंग का आयोडोफॉर्म नाम का एक पाउडर बनता है. यह एक खास पहचान परीक्षण है.

🎯 Exam Tip: आयोडोफॉर्म अभिक्रिया केवल उन ऐल्कोहॉलों द्वारा दी जाती है जिनमें \( \text{CH}_3\text{CH(OH)}- \) समूह होता है, या उन कीटोनों द्वारा जिनमें \( \text{CH}_3\text{CO}- \) समूह होता है.

 

(iii) क्लोरल जलीय सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ क्रिया करता है?
Answer: क्लोरल (\( \text{CCl}_3\text{CHO} \)) जलीय सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NaOH} \)) के साथ अभिक्रिया करके क्लोरोफॉर्म (\( \text{CHCl}_3 \)) और सोडियम फॉर्मेट (\( \text{HCOONa} \)) बनाता है. यह एक विखंडन अभिक्रिया है.
\[ \ce{CCl3CHO (\text{क्लोरल}) + NaOH -> CHCl3 (\text{क्लोरोफॉर्म}) + HCOONa} \]In simple words: क्लोरल में पानी वाला कास्टिक सोडा मिलाने पर, यह दो हिस्सों में टूट जाता है. एक हिस्सा क्लोरोफॉर्म होता है, और दूसरा सोडियम फॉर्मेट होता है.

🎯 Exam Tip: क्लोरोफॉर्म का औद्योगिक उत्पादन आमतौर पर क्लोरल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड के बीच की अभिक्रिया से किया जाता है.

 

(iv) सिल्वर आइसोब्यूटाइरेट का आसवन \( \text{Br}_2 \) के साथ \( \text{CCl}_4 \) की उपस्थिति में करते हैं?
Answer: सिल्वर आइसोब्यूटाइरेट का आसवन ब्रोमीन (\( \text{Br}_2 \)) के साथ कार्बन टेट्राक्लोराइड (\( \text{CCl}_4 \)) की उपस्थिति में करने पर हुन्सडीकर अभिक्रिया होती है. इस अभिक्रिया में कार्बोक्सिल समूह हट जाता है और उसकी जगह ब्रोमीन जुड़ जाता है, जिससे आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड बनता है.
\[ \ce{(CH3)2CHCOOAg + Br2 ->[\text{CCl4}] (CH3)2CHBr (\text{आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड}) + CO2 + AgBr} \]In simple words: सिल्वर आइसोब्यूटाइरेट को ब्रोमीन और \( \text{CCl}_4 \) के साथ उबालने पर, एसिड वाला हिस्सा हट जाता है और उसकी जगह ब्रोमीन लग जाता है, जिससे आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड बनता है. यह एक खास तरह की अभिक्रिया है.

🎯 Exam Tip: हुन्सडीकर अभिक्रिया कार्बोक्सिलिक एसिड के सिल्वर लवणों से ऐल्किल हैलाइड बनाने का एक अच्छा तरीका है, जिसमें कार्बन परमाणुओं की संख्या एक से कम हो जाती है.

 

Question 8. आप किस प्रकार बनायेंगे?
(i) n-प्रोपिल ब्रोमाइड से आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड
Answer: n-प्रोपिल ब्रोमाइड को ऐल्कोहॉलीय \( \text{KOH} \) के साथ गर्म करने पर विहाइड्रोहैलोजनीकरण होता है, जिससे प्रोपीन बनता है. फिर, इस प्रोपीन में \( \text{HBr} \) का योग मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार होता है, जिससे आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड प्राप्त होता है.
\[ \ce{CH3CH2CH2Br (\text{n-प्रोपिल ब्रोमाइड}) ->[\text{KOH(ऐल्कोहॉलीय)}] CH3CH=CH2 (\text{प्रोपीन}) ->[\text{HBr}] CH3CH(Br)CH3 (\text{आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड})} \]In simple words: n-प्रोपिल ब्रोमाइड को पहले गरम करके प्रोपीन बनाते हैं, फिर उसमें \( \text{HBr} \) जोड़कर आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड बनाते हैं.

🎯 Exam Tip: यह दो-चरणीय प्रक्रिया एक स्थिति समावयवी को दूसरे में बदलने का एक सामान्य तरीका है, जिसमें पहले विलोपन और फिर योग अभिक्रिया होती है.

 

(ii) प्रोपेन से ऐलिल क्लोराइड
Answer: प्रोपेन से ऐलिल क्लोराइड बनाने के लिए, प्रोपेन को उच्च तापमान पर क्लोरीन (\( \text{Cl}_2 \)) के साथ अभिकृत किया जाता है. इस अभिक्रिया को ऐलिलिक हैलोजेनीकरण कहते हैं, जहाँ क्लोरीन मुक्त मूलक क्रियाविधि द्वारा ऐलिलिक स्थिति पर प्रतिस्थापित होता है.
\[ \ce{CH3CH=CH2 (\text{प्रोपेन}) + Cl2 ->[773 K] ClCH2CH=CH2 (\text{ऐलिल क्लोराइड}) + HCl} \]In simple words: प्रोपेन को बहुत गर्म क्लोरीन गैस के साथ मिलाने पर, क्लोरीन प्रोपीन के किनारे वाले कार्बन पर जुड़ जाता है, जिससे ऐलिल क्लोराइड बनता है.

🎯 Exam Tip: ऐलिलिक हैलोजेनीकरण में, क्लोरीन उच्च तापमान पर द्विबंध के पास वाले कार्बन पर हमला करता है, क्योंकि बनने वाला ऐलिलिक रेडिकल स्थिर होता है.

 

(iii) ऐथिल ऐल्कोहॉल से फ्लुओरोऐथेन
Answer: ऐथिल ऐल्कोहॉल से फ्लुओरोऐथेन बनाने के लिए, पहले ऐथिल ऐल्कोहॉल को थायोनिल क्लोराइड (\( \text{SOCl}_2 \)) या \( \text{PCl}_5 \) के साथ अभिकृत करके ऐथिल क्लोराइड में बदला जाता है. फिर, ऐथिल क्लोराइड को \( \text{Hg}_2\text{F}_2 \) जैसे धात्विक फ्लुओराइड के साथ गर्म किया जाता है, जिससे हैलोजन विनिमय (स्वार्ट्ज अभिक्रिया) द्वारा फ्लुओरोऐथेन प्राप्त होता है.
\[ \ce{CH3CH2OH (\text{ऐथिल ऐल्कोहॉल}) ->[\text{SOCl2}] CH3CH2Cl ->[\text{Hg2F2}] CH3CH2F (\text{फ्लुओरोऐथेन})} \]In simple words: ऐथिल ऐल्कोहॉल को पहले क्लोराइड में बदलते हैं, फिर उसमें फ्लोराइड डालकर फ्लोरोएथेन बनाते हैं.

🎯 Exam Tip: स्वार्ट्ज अभिक्रिया विशेष रूप से ऐल्किल फ्लोराइड बनाने के लिए उपयोग की जाती है, क्योंकि फ्लोरीन प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना मुश्किल होता है.

 

(iv) मेथेन से मेथिल आयोडाइड
Answer: मेथेन से मेथिल आयोडाइड बनाने के लिए, पहले मेथेन को प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन (\( \text{Cl}_2 \)) के साथ अभिकृत करके मेथिल क्लोराइड में बदला जाता है. फिर, मेथिल क्लोराइड को सोडियम आयोडाइड (\( \text{NaI} \)) के साथ ऐसीटोन की उपस्थिति में गर्म किया जाता है, जिससे हैलोजन विनिमय (फिन्केलस्टीन अभिक्रिया) द्वारा मेथिल आयोडाइड प्राप्त होता है.
\[ \ce{CH4 + Cl2 ->[hv] CH3Cl + HCl ->[\text{NaI, ऐसीटोन}] CH3I + NaCl} \]In simple words: मेथेन को पहले क्लोरीन के साथ मिलाकर मेथिल क्लोराइड बनाते हैं, फिर उसमें सोडियम आयोडाइड डालकर मेथिल आयोडाइड प्राप्त करते हैं.

🎯 Exam Tip: फिन्केलस्टीन अभिक्रिया एक विलायक-आधारित \( \text{SN2} \) अभिक्रिया है जो कम क्वथनांक वाले ऐल्किल आयोडाइडों के उत्पादन में प्रभावी होती है.

 

(v) ऐसीटिलीन से आयोडोफॉर्म
Answer: ऐसीटिलीन से आयोडोफॉर्म बनाने के लिए, पहले ऐसीटिलीन का जल-योजन (हाइड्रेशन) मरक्यूरिक सल्फेट (\( \text{HgSO}_4 \)) और सल्फ्यूरिक एसिड (\( \text{H}_2\text{SO}_4 \)) की उपस्थिति में किया जाता है, जिससे ऐसिटैल्डिहाइड बनता है. फिर, ऐसिटैल्डिहाइड को आयोडीन (\( \text{I}_2 \)) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NaOH} \)) के साथ अभिकृत करके आयोडोफॉर्म प्राप्त किया जाता है.
\[ \ce{HC#CH (\text{ऐसीटिलीन}) ->[\text{H2O, HgSO4/H2SO4}] CH3CHO (\text{ऐसिटैल्डिहाइड}) ->[\text{I2/NaOH}] CHI3 (\text{आयोडोफॉर्म})} \]In simple words: ऐसीटिलीन में पानी मिलाकर ऐसिटैल्डिहाइड बनाते हैं, फिर उसमें आयोडीन और कास्टिक सोडा डालकर आयोडोफॉर्म प्राप्त करते हैं.

🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया एक बहु-चरणीय प्रक्रिया है जिसमें पहले ऐल्डिहाइड या कीटोन का निर्माण होता है, उसके बाद आयोडोफॉर्म परीक्षण के माध्यम से हैलोजेनीकरण और विखंडन होता है.

 

(vi) ऐथिल ऐल्कोहॉल से वेनिल ब्रोमाइड
Answer: ऐथिल ऐल्कोहॉल से वेनिल ब्रोमाइड बनाने के लिए, पहले ऐथिल ऐल्कोहॉल का ब्रोमीनीकरण \( \text{Br}_2 \) और \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) की उपस्थिति में किया जाता है, जिससे 1,2-डाइब्रोमोऐथेन बनता है. फिर, 1,2-डाइब्रोमोऐथेन को ऐल्कोहॉलीय \( \text{KOH} \) के साथ गर्म करने पर विहाइड्रोहैलोजनीकरण होता है, जिससे वेनिल ब्रोमाइड प्राप्त होता है.
\[ \ce{CH3CH2OH (\text{ऐथिल ऐल्कोहॉल}) ->[\text{Br2, H2SO4}] CH2Br-CH2Br (\text{1,2-डाइब्रोमोऐथेन}) ->[\text{ऐल्कोहॉलीय KOH}] CH2=CHBr (\text{वेनिल ब्रोमाइड})} \]In simple words: ऐथिल ऐल्कोहॉल को ब्रोमीन से क्रिया कराकर 1,2-डाइब्रोमोऐथेन बनाते हैं, फिर उसे गरम करके उसमें से \( \text{HBr} \) निकालकर वेनिल ब्रोमाइड बनाते हैं.

🎯 Exam Tip: विहाइड्रोहैलोजनीकरण एक एलिमिनेशन अभिक्रिया है जो ऐल्कोहॉलीय \( \text{KOH} \) की उपस्थिति में होती है, और यह ऐल्कीन या ऐल्काइन बनाने के लिए महत्वपूर्ण है.

 

(vii) 1-व्यूटीन से 1-आयोडोब्यूटेन
Answer: 1-ब्यूटीन से 1-आयोडोब्यूटेन बनाने के लिए, पहले 1-ब्यूटीन में \( \text{HBr} \) का योग परॉक्साइड की उपस्थिति में किया जाता है (एंटी-मार्कोनीकॉफ नियम), जिससे 1-ब्रोमोब्यूटेन बनता है. फिर, 1-ब्रोमोब्यूटेन को सोडियम आयोडाइड (\( \text{NaI} \)) के साथ ऐसीटोन में अभिकृत करके हैलोजन विनिमय (फिन्केलस्टीन अभिक्रिया) द्वारा 1-आयोडोब्यूटेन प्राप्त होता है.
\[ \ce{CH3CH2CH=CH2 (\text{1-ब्यूटीन}) ->[\text{HBr, परॉक्साइड}] CH3CH2CH2CH2Br (\text{1-ब्रोमोब्यूटेन}) ->[\text{NaI, ऐसीटोन}] CH3CH2CH2CH2I (\text{1-आयोडोब्यूटेन})} \]In simple words: 1-ब्यूटीन में पहले परॉक्साइड के साथ \( \text{HBr} \) डालकर 1-ब्रोमोब्यूटेन बनाते हैं, फिर उसमें सोडियम आयोडाइड डालकर ब्रोमीन को आयोडीन से बदल देते हैं, जिससे 1-आयोडोब्यूटेन बनता है.

🎯 Exam Tip: फिन्केलस्टीन अभिक्रिया में ऐसीटोन का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि \( \text{NaI} \) ऐसीटोन में घुलनशील होता है जबकि \( \text{NaBr} \) या \( \text{NaCl} \) अवक्षेपित हो जाते हैं, जिससे अभिक्रिया आगे बढ़ती है.

 

(viii) प्रोपेन से ऐलिल क्लोराइड
Answer: प्रोपेन से ऐलिल क्लोराइड बनाने के लिए, प्रोपेन को उच्च तापमान पर क्लोरीन (\( \text{Cl}_2 \)) के साथ अभिकृत किया जाता है. इस अभिक्रिया को ऐलिलिक हैलोजेनीकरण कहते हैं, जहाँ क्लोरीन मुक्त मूलक क्रियाविधि द्वारा ऐलिलिक स्थिति पर प्रतिस्थापित होता है.
\[ \ce{CH3CH=CH2 (\text{प्रोपेन}) + Cl2 ->[773 K] ClCH2CH=CH2 (\text{ऐलिल क्लोराइड}) + HCl} \]In simple words: प्रोपेन को बहुत गर्म क्लोरीन गैस के साथ मिलाने पर, क्लोरीन प्रोपीन के किनारे वाले कार्बन पर जुड़ जाता है, जिससे ऐलिल क्लोराइड बनता है.

🎯 Exam Tip: ऐलिलिक हैलोजेनीकरण में, क्लोरीन उच्च तापमान पर द्विबंध के पास वाले कार्बन पर हमला करता है, क्योंकि बनने वाला ऐलिलिक रेडिकल स्थिर होता है.

 

(ix) ऐथिल ऐल्कोहॉल से फ्लुओरोऐथेन
Answer: ऐथिल ऐल्कोहॉल से फ्लुओरोऐथेन बनाने के लिए, पहले ऐथिल ऐल्कोहॉल को थायोनिल क्लोराइड (\( \text{SOCl}_2 \)) या \( \text{PCl}_5 \) के साथ अभिकृत करके ऐथिल क्लोराइड में बदला जाता है. फिर, ऐथिल क्लोराइड को \( \text{Hg}_2\text{F}_2 \) जैसे धात्विक फ्लुओराइड के साथ गर्म किया जाता है, जिससे हैलोजन विनिमय (स्वार्ट्ज अभिक्रिया) द्वारा फ्लुओरोऐथेन प्राप्त होता है.
\[ \ce{CH3CH2OH (\text{ऐथिल ऐल्कोहॉल}) ->[\text{SOCl2}] CH3CH2Cl ->[\text{Hg2F2}] CH3CH2F (\text{फ्लुओरोऐथेन})} \]In simple words: ऐथिल ऐल्कोहॉल को पहले क्लोराइड में बदलते हैं, फिर उसमें फ्लोराइड डालकर फ्लोरोएथेन बनाते हैं.

🎯 Exam Tip: स्वार्ट्ज अभिक्रिया विशेष रूप से ऐल्किल फ्लोराइड बनाने के लिए उपयोग की जाती है, क्योंकि फ्लोरीन प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना मुश्किल होता है.

 

(x) मेथेन से मेथिल आयोडाइड
Answer: मेथेन से मेथिल आयोडाइड बनाने के लिए, पहले मेथेन को प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन (\( \text{Cl}_2 \)) के साथ अभिकृत करके मेथिल क्लोराइड में बदला जाता है. फिर, मेथिल क्लोराइड को सोडियम आयोडाइड (\( \text{NaI} \)) के साथ ऐसीटोन की उपस्थिति में गर्म किया जाता है, जिससे हैलोजन विनिमय (फिन्केलस्टीन अभिक्रिया) द्वारा मेथिल आयोडाइड प्राप्त होता है.
\[ \ce{CH4 + Cl2 ->[hv] CH3Cl + HCl ->[\text{NaI, ऐसीटोन}] CH3I + NaCl} \]In simple words: मेथेन को पहले क्लोरीन के साथ मिलाकर मेथिल क्लोराइड बनाते हैं, फिर उसमें सोडियम आयोडाइड डालकर मेथिल आयोडाइड प्राप्त करते हैं.

🎯 Exam Tip: फिन्केलस्टीन अभिक्रिया एक विलायक-आधारित \( \text{SN2} \) अभिक्रिया है जो कम क्वथनांक वाले ऐल्किल आयोडाइडों के उत्पादन में प्रभावी होती है.

 

(xi) ऐसीटिलीन से आयोडोफॉर्म
Answer: ऐसीटिलीन से आयोडोफॉर्म बनाने के लिए, पहले ऐसीटिलीन का जल-योजन (हाइड्रेशन) मरक्यूरिक सल्फेट (\( \text{HgSO}_4 \)) और सल्फ्यूरिक एसिड (\( \text{H}_2\text{SO}_4 \)) की उपस्थिति में किया जाता है, जिससे ऐसिटैल्डिहाइड बनता है. फिर, ऐसिटैल्डिहाइड को आयोडीन (\( \text{I}_2 \)) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NaOH} \)) के साथ अभिकृत करके आयोडोफॉर्म प्राप्त किया जाता है.
\[ \ce{HC#CH (\text{ऐसीटिलीन}) ->[\text{H2O, HgSO4/H2SO4}] CH3CHO (\text{ऐसिटैल्डिहाइड}) ->[\text{I2/NaOH}] CHI3 (\text{आयोडोफॉर्म})} \]In simple words: ऐसीटिलीन में पानी मिलाकर ऐसिटैल्डिहाइड बनाते हैं, फिर उसमें आयोडीन और कास्टिक सोडा डालकर आयोडोफॉर्म प्राप्त करते हैं.

🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया एक बहु-चरणीय प्रक्रिया है जिसमें पहले ऐल्डिहाइड या कीटोन का निर्माण होता है, उसके बाद आयोडोफॉर्म परीक्षण के माध्यम से हैलोजेनीकरण और विखंडन होता है.

 

(xii) ऐथिल ऐल्कोहॉल से वेनिल ब्रोमाइड
Answer: ऐथिल ऐल्कोहॉल से वेनिल ब्रोमाइड बनाने के लिए, पहले ऐथिल ऐल्कोहॉल का ब्रोमीनीकरण \( \text{Br}_2 \) और \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) की उपस्थिति में किया जाता है, जिससे 1,2-डाइब्रोमोऐथेन बनता है. फिर, 1,2-डाइब्रोमोऐथेन को ऐल्कोहॉलीय \( \text{KOH} \) के साथ गर्म करने पर विहाइड्रोहैलोजनीकरण होता है, जिससे वेनिल ब्रोमाइड प्राप्त होता है.
\[ \ce{CH3CH2OH (\text{ऐथिल ऐल्कोहॉल}) ->[\text{Br2, H2SO4}] CH2Br-CH2Br (\text{1,2-डाइब्रोमोऐथेन}) ->[\text{ऐल्कोहॉलीय KOH}] CH2=CHBr (\text{वेनिल ब्रोमाइड})} \]In simple words: ऐथिल ऐल्कोहॉल को ब्रोमीन से क्रिया कराकर 1,2-डाइब्रोमोऐथेन बनाते हैं, फिर उसे गरम करके उसमें से \( \text{HBr} \) निकालकर वेनिल ब्रोमाइड बनाते हैं.

🎯 Exam Tip: विहाइड्रोहैलोजनीकरण एक एलिमिनेशन अभिक्रिया है जो ऐल्कोहॉलीय \( \text{KOH} \) की उपस्थिति में होती है, और यह ऐल्कीन या ऐल्काइन बनाने के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 9. निम्नलिखित यौगिकों को क्वथनांकों के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
1. ब्रोमोमेथेन, ब्रोमोफॉर्म, क्लोरोमेथेन, डाइब्रोमोमेथेन।
2. 1-क्लोरोप्रोपेन, आइसोप्रोपिल क्लोराइड, 1-क्लोरोब्यूटेन।
Answer: क्वथनांक मुख्य रूप से आणविक भार और पृष्ठीय क्षेत्र पर निर्भर करता है. जैसे-जैसे आणविक भार बढ़ता है, क्वथनांक भी बढ़ता है. शाखन होने पर पृष्ठीय क्षेत्र कम हो जाता है, जिससे क्वथनांक घटता है.
1. `क्लोरोमेथेन < ब्रोमोमेथेन < डाइब्रोमोमेथेन < ब्रोमोफॉर्म`
(आणविक भार के बढ़ने के साथ क्वथनांक बढ़ता है, क्योंकि ब्रोमीन क्लोरीन से भारी होता है और अधिक हैलोजन परमाणु होने पर आणविक भार बढ़ जाता है. ब्रोमोफॉर्म में तीन ब्रोमीन परमाणु होते हैं.)
2. `आइसोप्रोपिल क्लोराइड < 1-क्लोरोप्रोपेन < 1-क्लोरोब्यूटेन`
(आइसोप्रोपिल क्लोराइड में शाखन के कारण पृष्ठीय क्षेत्र कम होता है. 1-क्लोरोप्रोपेन में शाखन नहीं होता और यह 1-क्लोरोब्यूटेन से छोटा होता है. 1-क्लोरोब्यूटेन का आणविक भार सबसे अधिक होता है.)
In simple words: किसी भी यौगिक का उबलने का तापमान उसके वज़न पर निर्भर करता है. जितना भारी अणु होगा, उतना ज़्यादा गर्म करने पर वह उबलेगा. अगर अणु में शाखाएँ निकलती हैं, तो वह कम गर्म करने पर उबल जाता है.

🎯 Exam Tip: क्वथनांकों के बढ़ते क्रम को निर्धारित करते समय हमेशा आणविक भार और शाखन (पृष्ठीय क्षेत्र) दोनों कारकों पर विचार करें.

 

Question 10. निम्नलिखित युगलों में से आप कौन-से ऐल्किल हैलाइड द्वारा \( \text{SN2} \) क्रियाविधि से अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करने की अपेक्षा करते हैं? अपने उत्तर को समझाइए।
(i) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CH}_2\text{Br} \) अथवा \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH(Br)CH}_3 \)
Answer: `1-ब्रोमोब्यूटेन` (\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CH}_2\text{Br} \)) `2-ब्रोमोब्यूटेन` (\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH(Br)CH}_3 \)) की तुलना में \( \text{SN2} \) क्रियाविधि से अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करेगा.
**कारण:** \( \text{SN2} \) अभिक्रियाएँ त्रिविम बाधा (steric hindrance) के प्रति संवेदनशील होती हैं. प्राथमिक हैलाइडों में त्रिविम बाधा कम होती है, जिससे न्यूक्लियोफाइल का पीछे से हमला करना आसान हो जाता है. इसलिए, प्राथमिक हैलाइड (1-ब्रोमोब्यूटेन) द्वितीयक हैलाइड (2-ब्रोमोब्यूटेन) की तुलना में अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करता है.
In simple words: 1-ब्रोमोब्यूटेन ज़्यादा तेज़ी से अभिक्रिया करेगा क्योंकि इसमें भीड़ कम होती है, जिससे हमला करने वाले अणु को जगह मिल जाती है.

🎯 Exam Tip: \( \text{SN2} \) अभिक्रियाशीलता का क्रम हमेशा `प्राथमिक > द्वितीयक > तृतीयक` होता है, क्योंकि त्रिविम बाधा SN2 की गति को कम करती है.

 

(ii) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH(Br)CH}_3 \) अथवा \( \text{H}_3\text{C-C(Br)CH}_3 \)
Answer: `2-ब्रोमोब्यूटेन` (\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH(Br)CH}_3 \)) `टर्ट-ब्यूटिल ब्रोमाइड` (\( \text{H}_3\text{C-C(Br)CH}_3 \)) की तुलना में \( \text{SN2} \) क्रियाविधि से अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करेगा.
**कारण:** 2-ब्रोमोब्यूटेन एक द्वितीयक हैलाइड है, जबकि टर्ट-ब्यूटिल ब्रोमाइड एक तृतीयक हैलाइड है. तृतीयक हैलाइड में तीन बड़े ऐल्किल समूह होते हैं जो अभिक्रिया केंद्र को घेर लेते हैं, जिससे न्यूक्लियोफाइल का पीछे से हमला करना बहुत मुश्किल हो जाता है. इसलिए, द्वितीयक हैलाइड तृतीयक हैलाइड की तुलना में अधिक तीव्रता से \( \text{SN2} \) अभिक्रिया देता है.
In simple words: 2-ब्रोमोब्यूटेन जल्दी अभिक्रिया करेगा क्योंकि इसमें टर्ट-ब्यूटिल ब्रोमाइड से कम भीड़ होती है.

🎯 Exam Tip: तृतीयक हैलाइड शायद ही कभी \( \text{SN2} \) अभिक्रियाएँ देते हैं, क्योंकि अत्यधिक त्रिविम बाधा न्यूक्लियोफाइल के लिए अभिक्रिया केंद्र तक पहुंचना असंभव बना देती है.

 

(iii) \( \text{CH}_3\text{CH(CH}_3\text{)CH}_2\text{CH}_2\text{Br} \) अथवा \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH(CH}_3\text{)CH}_2\text{Br} \)
Answer: `1-ब्रोमो-3-मेथिल ब्यूटेन` (\( \text{CH}_3\text{CH(CH}_3\text{)CH}_2\text{CH}_2\text{Br} \)) `1-ब्रोमो-2-मेथिल ब्यूटेन` (\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH(CH}_3\text{)CH}_2\text{Br} \)) की तुलना में \( \text{SN2} \) क्रियाविधि से अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करेगा.
**कारण:** दोनों प्राथमिक हैलाइड हैं, लेकिन 1-ब्रोमो-3-मेथिल ब्यूटेन में मेथिल समूह ब्रोमीन परमाणु से अधिक दूरी पर है. इसके विपरीत, 1-ब्रोमो-2-मेथिल ब्यूटेन में मेथिल समूह अभिक्रिया केंद्र के पास है, जिससे थोड़ी अधिक त्रिविम बाधा उत्पन्न होती है. कम त्रिविम बाधा वाले हैलाइड (1-ब्रोमो-3-मेथिल ब्यूटेन) \( \text{SN2} \) अभिक्रिया में अधिक तेज़ी से प्रतिक्रिया करेंगे.
In simple words: 1-ब्रोमो-3-मेथिल ब्यूटेन जल्दी अभिक्रिया करेगा क्योंकि इसमें भीड़ करने वाला मेथिल समूह दूर है, जिससे न्यूक्लियोफाइल को जगह मिल जाती है.

🎯 Exam Tip: प्राथमिक हैलाइडों के बीच भी, शाखाओं की स्थिति \( \text{SN2} \) अभिक्रिया की गति को प्रभावित कर सकती है; शाखाएँ जितनी दूर होंगी, अभिक्रिया उतनी ही तेज़ी से होगी.

 

Question 11. हैलोजेन यौगिकों के निम्नलिखित युगलों में से कौन-सा अधिक तीव्रता से \( \text{SN1} \) अभिक्रिया करेगा?
(i) \( \text{CH}_3\text{CH(Cl)CH}_3 \) अथवा `CH3-C(Cl)(CH3)2` (2-क्लोरोप्रोपेन या 2-क्लोरो-2-मेथिलप्रोपेन)
Answer: `2-क्लोरो-2-मेथिलप्रोपेन` `2-क्लोरोप्रोपेन` की तुलना में \( \text{SN1} \) क्रियाविधि से अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करेगा.
**कारण:** \( \text{SN1} \) अभिक्रिया की गति बनने वाले कार्बोनियम आयन की स्थिरता पर निर्भर करती है. `2-क्लोरो-2-मेथिलप्रोपेन` एक तृतीयक हैलाइड है, जो \( \text{Cl}^- \) के निकलने के बाद एक तृतीयक कार्बोनियम आयन बनाता है. तृतीयक कार्बोनियम आयन अनुनाद और अतिसंयुग्मन के कारण अत्यधिक स्थिर होते हैं. `2-क्लोरोप्रोपेन` एक द्वितीयक हैलाइड है, जो एक द्वितीयक कार्बोनियम आयन बनाता है जो तृतीयक कार्बोनियम आयन से कम स्थिर होता है. अतः, तृतीयक हैलाइड अधिक तीव्रता से \( \text{SN1} \) अभिक्रिया देगा.
In simple words: 2-क्लोरो-2-मेथिलप्रोपेन ज़्यादा तेज़ी से अभिक्रिया करेगा क्योंकि यह हटाने के बाद ज़्यादा स्थिर अणु बनाता है.

🎯 Exam Tip: \( \text{SN1} \) अभिक्रियाशीलता का क्रम `तृतीयक > द्वितीयक > प्राथमिक` होता है, क्योंकि कार्बोनियम आयन की स्थिरता इस क्रम का पालन करती है.

 

(ii) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{Cl} \) अथवा \( \text{CH}_3\text{CH(Cl)CH}_3 \)
Answer: `2-क्लोरोप्रोपेन` `1-क्लोरोप्रोपेन` की तुलना में \( \text{SN1} \) क्रियाविधि से अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करेगा.
**कारण:** \( \text{SN1} \) अभिक्रिया की गति बनने वाले कार्बोनियम आयन की स्थिरता पर निर्भर करती है. `2-क्लोरोप्रोपेन` एक द्वितीयक हैलाइड है, जो \( \text{Cl}^- \) के निकलने के बाद एक द्वितीयक कार्बोनियम आयन बनाता है. `1-क्लोरोप्रोपेन` एक प्राथमिक हैलाइड है, जो \( \text{Cl}^- \) के निकलने के बाद एक प्राथमिक कार्बोनियम आयन बनाता है. द्वितीयक कार्बोनियम आयन प्राथमिक कार्बोनियम आयन से अधिक स्थिर होता है. इसलिए, 2-क्लोरोप्रोपेन अधिक तीव्रता से \( \text{SN1} \) अभिक्रिया देगा.
In simple words: 2-क्लोरोप्रोपेन जल्दी अभिक्रिया करेगा क्योंकि यह 1-क्लोरोप्रोपेन से ज़्यादा स्थिर अणु बनाता है.

🎯 Exam Tip: प्राथमिक हैलाइड आमतौर पर \( \text{SN1} \) अभिक्रियाएँ नहीं देते हैं, क्योंकि बनने वाले प्राथमिक कार्बोनियम आयन बहुत अस्थिर होते हैं, लेकिन विशेष परिस्थितियों में, वे धीमी गति से हो सकते हैं.

 

Question 12. निम्नलिखित में A, B, C, D, E, R तथा RI को पहचानिए:
Answer: दिए गए अभिक्रिया आरेख के अनुसार, विभिन्न मध्यवर्ती और उत्पादों की पहचान इस प्रकार की जा सकती है:
\[ \text{साइक्लोहेक्सिल ब्रोमाइड} \xrightarrow{\text{Mg, शुष्क ईथर}} \text{A} \]
\( \implies \) **A**: साइक्लोहेक्सिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड (\( \ce{\text{C6H11MgBr}} \))
\[ \text{A} \xrightarrow{\text{H2O}} \text{B} \]
\( \implies \) **B**: साइक्लोहेक्सेन (\( \ce{\text{C6H12}} \))
\[ \ce{R-Br} \xrightarrow{\text{Mg, शुष्क ईथर}} \text{C} \]
\( \implies \) **C**: \( \ce{RMgBr} \) (ऐल्किल मैग्नीशियम ब्रोमाइड)
\[ \text{C} \xrightarrow{\text{D2O}} \text{D} \]
\( \implies \) **D**: \( \ce{R-D} \) (ड्यूटीरेटेड ऐल्केन). दिए गए चित्र के अनुसार `D` का संरचनात्मक सूत्र `CH3-CH(D)-CH3` है, जो आइसोप्रोपिल ड्यूटेरेन है.
\[ \ce{(CH3)3C-Br} \xrightarrow{\text{Mg}} \text{D'} \]
\( \implies \) **D'**: `(CH3)3CMgBr` (टर्ट-ब्यूटिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड)
\[ \text{D'} \xrightarrow{\text{H2O}} \text{E} \]
\( \implies \) **E**: `(CH3)3CH` (2-मेथिलप्रोपेन)
**R**: दिए गए `D` के संरचनात्मक सूत्र (`CH3-CH(D)-CH3`) के आधार पर, **R** समूह आइसोप्रोपिल समूह है: `CH3-CH-CH3`.
**RI**: दिए गए आरेख में \( \text{R1-X} \xrightarrow{\text{Na/ईथर}} \text{R1-R1} \) (वुर्ट्ज़ अभिक्रिया) में **RI** मेथिल समूह को दर्शाता है (जैसा कि टेक्स्ट में `CH3` दिखाया गया है).
In simple words: इस पहेली में, हमने देखा कि कैसे मैग्नीशियम ऐल्किल ब्रोमाइड से मिलकर ग्रिन्यार अभिकर्मक बनाता है. फिर, यह अभिकर्मक पानी या भारी पानी के साथ मिलकर अलग-अलग तरह के ऐल्केन बनाता है. यहाँ `A` साइक्लोहेक्सिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड है, `B` साइक्लोहेक्सेन है, `C` एक सामान्य ग्रिन्यार अभिकर्मक है, `D` एक ड्यूटीरेटेड प्रोपेन है, `E` 2-मेथिलप्रोपेन है, `R` आइसोप्रोपिल है, और `RI` मेथिल है.

🎯 Exam Tip: ग्रिन्यार अभिकर्मकों का उपयोग कार्बन-कार्बन बंध बनाने और ड्यूटीरेटेड यौगिकों को संश्लेषित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, ध्यान दें कि प्रोटिक विलायक इन्हें निष्क्रिय कर देते हैं.

 

Question 13. निम्नलिखित हैलाइडों के नाम आईयूपीएसी (IUPAC) पद्धति से लिखिए तथा उनका वर्गीकरण ऐल्किल, ऐलिलिक, बेन्जिलिक (प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक), वाइनिल अथवा ऐरिल हैलाइड के रूप में कीजिए-
(i) \( \text{(CH3)2CHCH(Cl)CH3} \)
Answer: **नाम:** 2-क्लोरो-3-मेथिल ब्यूटेन
**वर्गीकरण:** ऐल्किल हैलाइड, द्वितीयक (2°)
In simple words: इस यौगिक का नाम 2-क्लोरो-3-मेथिल ब्यूटेन है, और यह एक ऐल्किल हैलाइड है जहाँ क्लोरीन एक द्वितीयक कार्बन से जुड़ा है.

🎯 Exam Tip: IUPAC नामकरण में सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन करें और प्रतिस्थापकों को सबसे कम संख्या दें.

 

(ii) \( \text{CH3CH2CH(CH3)CH(C2H5)Cl} \)
Answer: **नाम:** 3-क्लोरो-4-मेथिल हेक्सेन
**वर्गीकरण:** ऐल्किल हैलाइड, द्वितीयक (2°)
In simple words: इस यौगिक का नाम 3-क्लोरो-4-मेथिल हेक्सेन है, और यह एक ऐल्किल हैलाइड है जहाँ क्लोरीन एक द्वितीयक कार्बन से जुड़ा है.

🎯 Exam Tip: प्रतिस्थापकों को वर्णमाला क्रम में व्यवस्थित करना याद रखें, भले ही संख्याएँ अलग हों.

 

(iii) \( \text{CH3CH2C(CH3)2CH2I} \)
Answer: **नाम:** 1-आयोडो-2,2-डाइमेथिल ब्यूटेन
**वर्गीकरण:** ऐल्किल हैलाइड, प्राथमिक (1°)
In simple words: इस यौगिक का नाम 1-आयोडो-2,2-डाइमेथिल ब्यूटेन है, और यह एक ऐल्किल हैलाइड है जहाँ आयोडीन एक प्राथमिक कार्बन से जुड़ा है.

🎯 Exam Tip: जब आयोडीन जैसे हैलोजन प्राथमिक कार्बन से जुड़े होते हैं, तो वे अक्सर \( \text{SN2} \) अभिक्रियाओं के लिए बहुत क्रियाशील होते हैं.

 

(iv) \( \text{(CH3)3CCH2CH(Br)C6H5} \)
Answer: **नाम:** 2-ब्रोमो-3,3-डाइमेथिल-1-फेनिल ब्यूटेन
**वर्गीकरण:** बेन्जिलिक हैलाइड, द्वितीयक (2°)
In simple words: इस यौगिक का नाम 2-ब्रोमो-3,3-डाइमेथिल-1-फेनिल ब्यूटेन है, और यह एक बेन्जिलिक हैलाइड है जहाँ ब्रोमीन एक द्वितीयक कार्बन से जुड़ा है.

🎯 Exam Tip: फेनिल समूह वाले यौगिकों में, बेन्जिलिक स्थिति वह कार्बन होता है जो सीधे बेन्जीन रिंग से जुड़ा होता है.

 

(v) `CH3-CH(Br)-CH(CH3)-CH3` (संरचना)
Answer: **नाम:** 2-ब्रोमो-3-मेथिल ब्यूटेन
**वर्गीकरण:** ऐल्किल हैलाइड, द्वितीयक (2°)
In simple words: इस अणु का नाम 2-ब्रोमो-3-मेथिल ब्यूटेन है. इसमें ब्रोमीन और मेथिल समूह दोनों बीच के कार्बन पर जुड़े होते हैं, और यह एक द्वितीयक ऐल्किल हैलाइड है.

🎯 Exam Tip: काइरल केंद्र वाले यौगिकों के लिए (जैसे इस मामले में), विन्यास (R/S) को भी निर्दिष्ट किया जा सकता है, यदि पूछा जाए.

 

(vi) `CH3-C(CH2Br)(CH3)-CH2-CH3` (संरचना)
Answer: **नाम:** 1-ब्रोमो-2-ऐथिल-2-मेथिल ब्यूटेन
**वर्गीकरण:** ऐल्किल हैलाइड, प्राथमिक (1°)
In simple words: इस यौगिक का नाम 1-ब्रोमो-2-ऐथिल-2-मेथिल ब्यूटेन है, जिसमें ब्रोमीन एक ऐसे कार्बन से जुड़ा है जो सिर्फ एक और कार्बन से जुड़ा है, इसलिए यह एक प्राथमिक हैलाइड है.

🎯 Exam Tip: सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला खोजने के बाद, यह सुनिश्चित करें कि हैलोजन और अन्य प्रतिस्थापकों को सबसे कम संभव संख्या मिले.

 

(vii) `CH3-CH2-CH(Cl)-CH2-CH3` (संरचना)
Answer: **नाम:** 3-क्लोरोपेन्टेन
**वर्गीकरण:** ऐल्किल हैलाइड, द्वितीयक (2°)
In simple words: इस यौगिक का नाम 3-क्लोरोपेन्टेन है. इसमें क्लोरीन बीच वाले कार्बन पर जुड़ा होता है, जो दो अन्य कार्बन से जुड़ा है, इसलिए यह एक द्वितीयक ऐल्किल हैलाइड है.

🎯 Exam Tip: समरूप प्रतिस्थापकों के साथ, सुनिश्चित करें कि नामकरण सबसे कम संख्या नियमों का पालन करता है.

 

(viii) `Cl-C6H4-CH2-CH(CH3)-CH2-CH3` (संरचना)
Answer: **नाम:** 1-क्लोरो-4-(2-मेथिलप्रोपिल) बेन्जीन
**वर्गीकरण:** ऐरिल हैलाइड
In simple words: इस यौगिक का नाम 1-क्लोरो-4-(2-मेथिलप्रोपिल) बेन्जीन है. इसमें क्लोरीन और एक शाखा वाला प्रोपिल समूह एक बेन्जीन रिंग से जुड़े होते हैं.

🎯 Exam Tip: बेन्जीन रिंग पर प्रतिस्थापकों को संख्या देते समय, प्रतिस्थापकों को सबसे कम संख्या देने का प्रयास करें, और उन्हें वर्णमाला क्रम में सूचीबद्ध करें.

 

(ix) `Cl-CH2-C6H4-C(CH3)3` (संरचना)
Answer: **नाम:** 1-(क्लोरोमेथिल)-3-(टर्ट-ब्यूटिल) बेन्जीन
**वर्गीकरण:** बेन्जिलिक हैलाइड, प्राथमिक (1°)
In simple words: इस अणु का नाम 1-(क्लोरोमेथिल)-3-(टर्ट-ब्यूटिल) बेन्जीन है, जहाँ क्लोरीन एक मेथिल समूह से जुड़ा है जो सीधे बेन्जीन रिंग से जुड़ा है, इसलिए यह एक प्राथमिक बेन्जिलिक हैलाइड है.

🎯 Exam Tip: टर्ट-ब्यूटिल समूह को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है और इसे बेन्जीन रिंग पर एक प्रतिस्थापक के रूप में माना जाता है.

 

(x) `Br-C6H4-CH(CH3)-CH2-CH3` (संरचना)
Answer: **नाम:** 1-ब्रोमो-2-(1-मेथिलप्रोपिल) बेन्जीन
**वर्गीकरण:** ऐरिल हैलाइड
In simple words: इस यौगिक का नाम 1-ब्रोमो-2-(1-मेथिलप्रोपिल) बेन्जीन है, इसमें ब्रोमीन और एक मेथिलप्रोपिल समूह बेन्जीन रिंग से जुड़े होते हैं.

🎯 Exam Tip: जब रिंग पर दो या दो से अधिक प्रतिस्थापक होते हैं, तो उन्हें सबसे कम संख्या देने का प्रयास करें, जिससे प्रतिस्थापक का योग न्यूनतम हो.

 

**Question 14. निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम दीजिए:**
(i) `CH3-CH(Cl)-CH(Br)-CH3` (संरचना)
Answer: **नाम:** 2-ब्रोमो-3-क्लोरो ब्यूटेन
In simple words: इस अणु का नाम 2-ब्रोमो-3-क्लोरो ब्यूटेन है, जिसमें ब्रोमीन और क्लोरीन अलग-अलग कार्बन पर जुड़े होते हैं.

🎯 Exam Tip: हैलोजन प्रतिस्थापकों के बीच संख्या निर्धारण करते समय, वर्णमाला क्रम का उपयोग करें यदि संख्याएँ समान हों (जैसे ब्रोमो पहले आता है क्लोरो से).

 

Question 14. (iii) \( \text{Cl–CH}_2\text{–C}\equiv\text{C–CH}_2\text{–Br} \)
Answer: इस यौगिक का IUPAC नाम `1-ब्रोमो-4-क्लोरोब्यूट-2-आइन` है. यह एक हैलोएल्काइन है जिसमें ब्रोमीन और क्लोरीन परमाणु जुड़े होते हैं और इसमें एक ट्रिपल बॉन्ड भी होता है.
In simple words: यह एक चार कार्बन वाला यौगिक है जिसमें बीच में तीन बॉन्ड (ट्रिपल बॉन्ड) हैं. इसके एक छोर पर ब्रोमीन और दूसरे छोर पर क्लोरीन जुड़ा है.

🎯 Exam Tip: जब यौगिक में ट्रिपल बॉन्ड के साथ-साथ हैलोजन परमाणु भी हों, तो उनकी स्थिति को सही ढंग से दर्शाना महत्वपूर्ण है ताकि सही IUPAC नाम लिखा जा सके.

 

Question 14. (iv) \( \text{CI CI C-C-C-CI} \)
Answer: इस यौगिक का IUPAC नाम `1, 1, 1,2,3,3,3-हेप्टाक्लोरो-2-(1,1,1-ट्राइक्लोरोमेथिल)प्रोपेन` है. यह एक बहुत जटिल क्लोरीनीकृत प्रोपेन यौगिक है जिसमें कई क्लोरीन परमाणु और एक ट्राइक्लोरोमेथिल समूह मौजूद हैं.
In simple words: यह एक बहुत ही जटिल प्रोपेन यौगिक है जिसमें बहुत सारे क्लोरीन परमाणु अलग-अलग जगहों पर जुड़े हुए हैं.

🎯 Exam Tip: जटिल यौगिकों का नामकरण करते समय, सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला की पहचान करना और सभी प्रतिस्थापकों को सही ढंग से क्रमांकित करना महत्वपूर्ण है.

 

Question 14. (v) CHBr₂
Answer: इस संरचना का IUPAC नाम `(डाइब्रोमोमेथिल) बेन्जीन` है. इसमें एक डाइब्रोमोमेथिल समूह बेन्जीन रिंग से जुड़ा होता है.
In simple words: इस अणु में, एक ब्रोमोमेथिल समूह बेन्जीन रिंग से जुड़ा होता है, जिसका नाम (डाइब्रोमोमेथिल) बेन्जीन है.

🎯 Exam Tip: बेन्जीन रिंग से सीधे जुड़े हुए प्रतिस्थापकों का नामकरण करते समय, प्रतिस्थापक को मूल श्रृंखला के रूप में मानें और बेन्जीन को फेनिल समूह के रूप में नामित करें.

 

Question 14. (vi) Cl Br
Answer: इस संरचना का IUPAC नाम `1-ब्रोमो-3-क्लोरोबेन्जीन` है. ब्रोमीन और क्लोरीन परमाणु बेन्जीन रिंग पर मेटा स्थिति में हैं.
In simple words: यह एक बेन्जीन रिंग है जिस पर एक ब्रोमीन और एक क्लोरीन परमाणु जुड़े हुए हैं, जो एक-दूसरे से तीसरी जगह पर हैं.

🎯 Exam Tip: जब एक बेन्जीन रिंग पर दो अलग-अलग हैलोजन परमाणु जुड़े हों, तो उन्हें वर्णानुक्रम में क्रमांकित करें और सबसे कम संभव संख्या दें, जिससे प्रतिस्थापकों को सबसे छोटा सेट मिल सके.

 

Question 14. (vii) C-C₂H₅ Cl
Answer: इस संरचना का IUPAC नाम `2-क्लोरो-2-फेनिल ब्यूटेन` है. फेनिल समूह 2-ब्यूटेन श्रृंखला से जुड़ा है.
In simple words: यह एक ब्यूटेन श्रृंखला है जिसमें एक क्लोरीन और एक फेनिल (बेन्जीन रिंग) समूह दोनों दूसरे कार्बन से जुड़े हैं.

🎯 Exam Tip: जटिल प्रतिस्थापक वाले यौगिकों का नामकरण करते समय, मुख्य श्रृंखला का चयन सावधानी से करें और सभी प्रतिस्थापकों को सही ढंग से व्यवस्थित करें.

 

Question 14. (viii) C₂H₅ Cl
Answer: इस संरचना का IUPAC नाम `1,4-डाइक्लोरोबेन्जीन` है. दो क्लोरीन परमाणु बेन्जीन रिंग पर पैरा स्थिति में हैं.
In simple words: इस बेन्जीन रिंग पर दो क्लोरीन परमाणु हैं, जो एक-दूसरे के ठीक विपरीत जुड़े हैं.

🎯 Exam Tip: डाइक्लोरोबेन्जीन के तीन आइसोमर होते हैं: ऑर्थो (1,2-), मेटा (1,3-), और पैरा (1,4-). उनकी स्थिति को सही ढंग से पहचानें.

 

Question 14. (ix) CHBr₂ Br
Answer: इस संरचना का IUPAC नाम `1-ब्रोमो-4-(डाइब्रोमोमेथिल) बेन्जीन` है. एक ब्रोमीन परमाणु और एक डाइब्रोमोमेथिल समूह बेन्जीन रिंग पर पैरा स्थिति में हैं.
In simple words: यह बेन्जीन है जिस पर एक ब्रोमीन और एक \( \text{CHBr}_2 \) समूह एक-दूसरे के विपरीत जुड़े हैं.

🎯 Exam Tip: प्रतिस्थापकों को वर्णानुक्रम में नामित करें, और बेन्जीन रिंग पर उनकी सापेक्ष स्थिति को सही संख्याओं से दर्शाएँ (जैसे 1,4-).

 

Question 14. (x) CH=CH-CH₂Br
Answer: इस संरचना का IUPAC नाम `3-ब्रोमो-1-फेनिल प्रोपीन` है. प्रोपीन श्रृंखला पर तीसरे कार्बन पर ब्रोमीन है और पहला कार्बन फेनिल समूह से जुड़ा है.
In simple words: एक प्रोपीन श्रृंखला है जिसमें एक तरफ बेन्जीन रिंग और दूसरी तरफ ब्रोमीन परमाणु जुड़ा है.

🎯 Exam Tip: डबल बॉन्ड और हैलोजन जैसे विभिन्न क्रियात्मक समूहों वाले यौगिकों का नामकरण करते समय, प्राथमिकता नियमों का पालन करें और सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला चुनें जिसमें सभी महत्वपूर्ण समूह शामिल हों.

 

Question 14. (xi) \( (\text{CH}_3)_3\text{C-Cl} \)
Answer: इस संरचना का IUPAC नाम `2-क्लोरो-2-मेथिल प्रोपेन` है. यह एक तृतीयक ब्यूटिल क्लोराइड है.
In simple words: यह एक छोटा कार्बन यौगिक है जिसमें एक क्लोरीन परमाणु एक कार्बन से जुड़ा है, और उस कार्बन से तीन मेथिल समूह भी जुड़े हैं.

🎯 Exam Tip: ब्रांच्ड हैलाइड्स का नामकरण करते समय, सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला चुनें और प्रतिस्थापकों को सबसे कम संभव संख्या दें.

 

Question 15. निम्नलिखित कार्बनिक हैलोजेन यौगिकों की संरचना दीजिए
(i) 2-क्लोरो-3-मेथिलपेन्टेन
Answer: CH₃-CH-CH-CH₂-CH₃ Cl CH₃
In simple words: यह एक पाँच कार्बन वाली सीधी श्रृंखला है, जिसमें दूसरे कार्बन पर क्लोरीन और तीसरे कार्बन पर मेथिल समूह जुड़ा है.

🎯 Exam Tip: IUPAC नाम से संरचना बनाते समय, पहले मुख्य कार्बन श्रृंखला बनाएं, फिर सभी प्रतिस्थापकों को उनकी सही स्थिति पर जोड़ें.

 

Question 15. (ii) p-ब्रोमोक्लोरो बेन्जीन
Answer: Br Cl
In simple words: यह एक बेन्जीन रिंग है जिस पर ब्रोमीन और क्लोरीन परमाणु एक-दूसरे के ठीक विपरीत (पैरा स्थिति में) जुड़े हैं.

🎯 Exam Tip: 'पैरा' स्थिति का अर्थ है 1,4-स्थिति, जहाँ प्रतिस्थापक रिंग पर एक-दूसरे के विपरीत होते हैं.

 

Question 15. (iii) 1-क्लोरो-4-एथिल साइक्लोहेक्सैन
Answer: Cl C₂H₅
In simple words: यह छह कार्बन वाली एक रिंग संरचना है (साइक्लोहेक्सैन) जिस पर एक क्लोरीन और एक एथिल समूह जुड़ा है, जो एक-दूसरे से चौथी स्थिति पर हैं.

🎯 Exam Tip: साइक्लोअल्केन संरचनाओं में, प्रतिस्थापकों को इस प्रकार क्रमांकित करें कि उन्हें सबसे कम संभव संख्याएँ मिलें.

 

Question 15. (iv) 2-(2-क्लोरोफेनिल)-1-आयोडो ऑक्टैन
Answer: ICH₂-CH-(CH₂)₅CH₃ Cl
In simple words: यह एक लंबी आठ कार्बन वाली श्रृंखला है, जिसके पहले कार्बन पर आयोडीन है. दूसरे कार्बन पर एक क्लोरोफेनिल समूह जुड़ा है, जिसका मतलब एक बेन्जीन रिंग है जिस पर क्लोरीन जुड़ा है.

🎯 Exam Tip: जब एक जटिल समूह (जैसे क्लोरोफेनिल) मुख्य श्रृंखला से जुड़ा हो, तो उसे कोष्ठकों में रखकर उसकी स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाएं.

 

Question 15. (v) परफ्लुओरो बेन्जीन
Answer: F F F F F F
In simple words: यह एक बेन्जीन रिंग है जहाँ सभी हाइड्रोजन परमाणुओं को फ्लोरीन परमाणुओं से बदल दिया गया है, इसलिए इसे परफ्लुओरो बेन्जीन कहते हैं.

🎯 Exam Tip: 'परफ्लुओरो' शब्द का अर्थ है कि सभी हाइड्रोजन परमाणुओं को फ्लोरीन परमाणुओं से प्रतिस्थापित कर दिया गया है.

 

Question 15. (vii) 1-ब्रोमो-4-द्वितीयक व्यूटिल-2-मेथिल बेन्जीन
Answer: Br CH(CH₃)C₂H₅ CH₃
In simple words: यह एक बेन्जीन रिंग है. इस पर पहले कार्बन पर ब्रोमीन, दूसरे पर मेथिल और चौथे पर एक सेकेंडरी ब्यूटिल समूह जुड़ा है.

🎯 Exam Tip: जब बेन्जीन रिंग पर कई प्रतिस्थापक हों, तो उन्हें क्रमांकित करते समय वर्णानुक्रम और सबसे कम संभव संख्या के नियमों का पालन करें.

 

Question 15. (viii) 1, 4-डाइब्रोम ब्यूट-2-ईन
Answer: BrCH₂CH=CHCH₂Br
In simple words: यह एक चार कार्बन वाली श्रृंखला है जिसमें दूसरे और तीसरे कार्बन के बीच डबल बॉन्ड है, और दोनों छोरों पर ब्रोमीन परमाणु जुड़े हैं.

🎯 Exam Tip: अल्केन, अल्कीन और अल्काइन के साथ हैलोजन प्रतिस्थापकों का नामकरण करते समय, बहु-बंध (डबल या ट्रिपल बॉन्ड) को प्राथमिकता दें और उसे सबसे कम संख्या दें.

 

Question 16. पूर्ण करें।
(i) CH₂OH \( \xrightarrow{\text{PCl₅}} \) CH₂Cl
Answer: CH₂OH \( \xrightarrow{\text{PCl₅}} \) CH₂Cl
इस अभिक्रिया में फॉस्फोरस पेंटाक्लोराइड (\( \text{PCl}_5 \)) के साथ बेंजाइल अल्कोहल (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{OH} \)) की क्रिया से बेंजाइल क्लोराइड (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{Cl} \)) बनता है. यह अल्कोहल के क्लोरीन व्युत्पन्न में बदलने की एक सामान्य विधि है.
In simple words: जब बेंजाइल अल्कोहल (\( \text{OH} \) समूह के साथ) को \( \text{PCl}_5 \) के साथ मिलाते हैं, तो \( \text{OH} \) समूह हट जाता है और उसकी जगह \( \text{Cl} \) आ जाता है, जिससे बेंजाइल क्लोराइड बनता है.

🎯 Exam Tip: \( \text{PCl}_5 \) अल्कोहल को अल्काइल हैलाइड में बदलने के लिए एक महत्वपूर्ण अभिकर्मक है, जहाँ \( \text{OH} \) समूह \( \text{Cl} \) से प्रतिस्थापित हो जाता है.

 

Question 16. (ii) CH₂-CH=CH₂ \( \xrightarrow{\text{+ HBr}} \) CH₂-CH-CH₃ Br
Answer: CH₂-CH=CH₂ \( \xrightarrow{\text{+ HBr}} \) CH₂-CH-CH₃ Br
इस अभिक्रिया में स्टाइरीन (फेनिलप्रोपीन) की क्रिया हाइड्रोजन ब्रोमाइड (\( \text{HBr} \)) के साथ करने पर मार्कोवनिकोव के नियम के अनुसार ब्रोमीन परमाणु केंद्रीय कार्बन से जुड़ता है, जिससे 2-ब्रोमो-1-फेनिल प्रोपेन बनता है. मार्कोवनिकोव का नियम कहता है कि \( \text{HBr} \) का हाइड्रोजन उस कार्बन से जुड़ता है जिसके पास पहले से अधिक हाइड्रोजन हों, और ब्रोमीन दूसरे कार्बन से जुड़ता है.
In simple words: जब स्टाइरीन को \( \text{HBr} \) के साथ मिलाते हैं, तो \( \text{HBr} \) के नियम के अनुसार \( \text{Br} \) उस कार्बन से जुड़ता है जहाँ पहले से कम हाइड्रोजन होते हैं, जिससे 2-ब्रोमो-1-फेनिल प्रोपेन बनता है.

🎯 Exam Tip: एल्कीन में \( \text{HBr} \) के योग में मार्कोवनिकोव का नियम महत्वपूर्ण है, जो बताता है कि हाइड्रोजन परमाणु उस कार्बन से जुड़ता है जिसके पास पहले से ही अधिक हाइड्रोजन परमाणु हों.

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