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Detailed Chapter 1 ठोस अवस्था RBSE Solutions for Class 12 Chemistry
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Class 12 Chemistry Chapter 1 ठोस अवस्था RBSE Solutions PDF
Rajasthan Board RBSE Class 12 Chemistry Chapter 1 ठोस अवस्था
Rbse Class 12 Chemistry Chapter 1 ठोस अवस्था पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न
Rbse Class 12 Chemistry Chapter 1 ठोस अवस्था बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. एक कार केन्द्रित धन संकुलन (bcc) व्यवस्था में परमाणुओं की संख्या होती है –
(a) 1
(b) 2
(c) 4
(d) 6
Answer: (b) 2
In simple words: एक बॉडी-सेंटर क्यूबिक (bcc) यूनिट सेल में, हर कोने पर 1/8 एटम और सेंटर में 1 एटम होता है. इसलिए कुल 2 एटम होते हैं.
🎯 Exam Tip: याद रखें कि bcc संरचना में, कोने पर स्थित परमाणुओं का 1/8वाँ हिस्सा और केंद्र में स्थित परमाणु का पूरा हिस्सा यूनिट सेल में योगदान करता है.
Question 3. निम्न में से कौन-सा उदाहरण समूह 13-15 का नहीं हैं?
(a) InSb
(b) GaAs
(c) CdSe
(d) AIP
Answer: (c) CdSe
In simple words: CdSe, कैडमियम और सेलेनियम से मिलकर बना है, जो ग्रुप 12-16 के तत्व हैं, जबकि बाकी विकल्प ग्रुप 13-15 के तत्व हैं.
🎯 Exam Tip: समूह 13-15 के यौगिक वे होते हैं जहाँ एक तत्व समूह 13 से और दूसरा समूह 15 से होता है, जबकि समूह 12-16 के यौगिकों में एक तत्व समूह 12 से और दूसरा समूह 16 से होता है.
Question 4. एक घट्कोणीय निविड़ संकुलन (hcp) की इकाई कोष्ठिका में कुल परमाणुओं की संख्या होगी-
(a) 4
(b) 6
(c) 8
(d) 12
Answer: (b) 6
In simple words: एक हेक्सागोनल क्लोज-पैक्ड (hcp) यूनिट सेल में कुल 6 परमाणु होते हैं, जो उसकी पैकिंग व्यवस्था के कारण होता है.
🎯 Exam Tip: hcp संरचना में 12 कोने वाले परमाणु (1/6 योगदान), 2 फलक केंद्र वाले परमाणु (1/2 योगदान) और 3 आंतरिक परमाणु होते हैं, कुल मिलाकर 6 परमाणु बनते हैं.
Question 5. निम्न संरचनाओं समन्वय संख्या हैं?
(a) NaCl
(b) ZnS
(c) CaF2
(d) Na2O
Answer: (d) Na2O
In simple words: Na2O की संरचना में समन्वय संख्या 8 होती है, जिसका मतलब है कि प्रत्येक सोडियम आयन 8 ऑक्सीजन आयनों से घिरा होता है.
🎯 Exam Tip: समन्वय संख्या आयनिक यौगिकों की संरचना और स्थिरता तय करने में महत्वपूर्ण होती है; यह बताती है कि एक आयन कितने विपरीत आवेश वाले आयनों से घिरा है.
Question 6. शॉदकी त्रुटियाँ प्राप्त होती हैं जबकि -
(a) क्रिस्टल जालक से असमान संख्या में धनायन एवं ऋणायन पलायन कर जाते हैं।
(b) क्रिस्टल जालक से समान संख्या में धनायन एवं ऋणायन पलायन कर जाते हैं।
(c) एक आयन अपनी सामान्य स्थिति छोड़कर अन्तराकाशी स्थल में चला जाता है।
(d) क्रिस्टल का घनत्व बढ़ जाता है।
Answer: (b) क्रिस्टल जालक से समान संख्या में धनायन एवं ऋणायन पलायन कर जाते हैं।
In simple words: जब क्रिस्टल में बराबर संख्या में पॉजिटिव और नेगेटिव आयन अपनी जगह से गायब हो जाते हैं, तो उसे शॉट्की दोष कहते हैं. इससे क्रिस्टल का घनत्व कम हो जाता है.
🎯 Exam Tip: शॉट्की दोष उन आयनिक यौगिकों में होता है जहाँ धनायन और ऋणायन का आकार लगभग समान होता है, और यह क्रिस्टल के घनत्व को कम कर देता है.
Question 8. समन्वयक संख्या 8 निम्न में से किस धनायन के लिए होगी।
(a) CsCl
(b) ZnS
(c) NaCl
(d) Na2O
Answer: (a) CsCl
In simple words: CsCl की संरचना में, प्रत्येक Cs+ आयन 8 Cl- आयनों से घिरा होता है, इसलिए इसकी समन्वय संख्या 8 होती है.
🎯 Exam Tip: आयनिक यौगिकों में आयनों के आकार का अनुपात समन्वय संख्या को प्रभावित करता है; बड़े आयन आमतौर पर उच्च समन्वय संख्या दर्शाते हैं.
Question 9. निम्न में से कौन-सा संक्रमण धातु यौगिक अनुचुम्बकीय (Paramagnetic) प्रवृत्ति का है?
(a) MnO
(b) NiO
(c) VO
(d) Mn2O3
Answer: (c) VO
In simple words: VO (वैनेडियम ऑक्साइड) में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए यह अनुचुम्बकीय होता है और चुम्बकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होता है.
🎯 Exam Tip: अनुचुम्बकत्व अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण होता है; जितने अधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, उतनी ही अधिक अनुचुम्बकीय प्रवृत्ति होती है.
Question 10. एक षटकोणीय आद्य एकक कोष्ठिका (Primitive unit cell) में चतुष्फलकीय एवं अष्टफलकीय छिद्रों (Voids) की संख्या क्रमशः होगी-
(a) 8, 4
(b) 6, 6
(c) 2,1
(d) 12, 6
Answer: (d) 12, 6
In simple words: एक हेक्सागोनल प्रिमिटिव यूनिट सेल में, टेट्राहेड्रल रिक्तियों की संख्या 12 और ऑक्टाहेड्रल रिक्तियों की संख्या 6 होती है.
🎯 Exam Tip: किसी भी क्लोज-पैक्ड संरचना में, यदि परमाणुओं की संख्या N है, तो ऑक्टाहेड्रल रिक्तियों की संख्या N और टेट्राहेड्रल रिक्तियों की संख्या 2N होती है.
Question 2. ठोसों का आयतन निश्चित क्यों होता है ?
Answer: ठोसों में कण (परमाणु, अणु या आयन) अपनी जगह पर बहुत मजबूत आकर्षण बलों से बंधे होते हैं. वे सिर्फ अपनी जगह पर हिल-डुल सकते हैं लेकिन इधर-उधर नहीं जा सकते. इसी कारण, एक तय तापमान पर इन कणों के बीच की दूरी हमेशा एक जैसी रहती है, जिससे ठोसों का आयतन निश्चित बना रहता है. यह उनकी कठोरता और आकार के लिए भी जिम्मेदार है.
In simple words: ठोसों में कण आपस में बहुत कसकर बंधे होते हैं, इसलिए वे अपनी जगह से हिल नहीं पाते और उनका आयतन हमेशा एक जैसा रहता है.
🎯 Exam Tip: ठोसों के निश्चित आयतन और आकार का मुख्य कारण उनके घटक कणों के बीच के मजबूत अंतःआणविक बल और उनकी निश्चित स्थितियाँ हैं.
Question 3. ठोस A, अत्यधिक कठोर तथा ठोस एवं गलित दोनों अवस्थाओं में विद्युत्रोधी है और अत्यन्त ताप पर पिघलता है। यह किस प्रकार का ठोस है?
Answer: यह एक सहसंयोजक या नेटवर्क ठोस है. ऐसा इसलिए है क्योंकि ये ठोस बहुत मजबूत सहसंयोजक बंधों से बने होते हैं जो गलित अवस्था में भी विद्युत का संचालन नहीं करते हैं. हीरे जैसे पदार्थ इसके अच्छे उदाहरण हैं.
In simple words: यह सहसंयोजक या नेटवर्क ठोस है, क्योंकि यह पिघलने पर भी बिजली नहीं चलाता और बहुत मजबूत होता है.
🎯 Exam Tip: सहसंयोजक ठोसों में परमाणुओं के बीच मजबूत सहसंयोजक बंधन होते हैं, जिससे वे बहुत कठोर, उच्च गलनांक वाले होते हैं और विद्युत के कुचालक होते हैं.
Question 4. किस प्रकार के ठोस विद्युत् चालक, आघातवर्थ और तन्य होते हैं ?
Answer: धात्विक ठोस विद्युत के अच्छे चालक, आघातवर्ध्य (जिन्हें पीटा जा सकता है) और तन्य (जिन्हें तार के रूप में खींचा जा सकता है) होते हैं. उनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं जो इन गुणों के लिए जिम्मेदार होते हैं. ये इलेक्ट्रॉन पूरे धातु संरचना में घूमने के लिए स्वतंत्र होते हैं.
In simple words: धात्विक ठोस बिजली चला सकते हैं, उन्हें पीटा और खींचा जा सकता है.
🎯 Exam Tip: धात्विक ठोसों के ये विशिष्ट गुण (चालकता, आघातवर्ध्यता, तन्यता) उनके अंदर मौजूद मुक्त इलेक्ट्रॉनों के "इलेक्ट्रॉन समुद्र" मॉडल के कारण होते हैं.
Question 5. 'जालक बिन्दु' से आप क्या समझते हैं ?
Answer: एक जालक बिन्दु (lattice point) एक क्रिस्टल जालक में उस खास जगह को कहते हैं जहाँ एक घटक कण (जैसे परमाणु, अणु या आयन) मौजूद होता है. ये बिंदु पूरे क्रिस्टल संरचना में एक नियमित पैटर्न बनाते हैं. ये बिंदु केवल एक काल्पनिक ज्यामितीय स्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं.
In simple words: जालक बिन्दु वह जगह है जहाँ क्रिस्टल में परमाणु, अणु या आयन जैसे कण होते हैं.
🎯 Exam Tip: जालक बिन्दु क्रिस्टल की दोहराई जाने वाली इकाई (यूनिट सेल) का एक हिस्सा होते हैं, और इनकी नियमित व्यवस्था ही क्रिस्टलीय ठोसों को उनकी कठोरता और आकार देती है.
Question 6. एकक कोष्ठिका को अभिलाक्षणित करने वाले पैरामीटरों के नाम बताइए।
Answer: एक यूनिट सेल को कुछ पैरामीटरों से पहचाना जाता है, जो उसकी ज्यामिति को बताते हैं. ये पैरामीटर हैं:
(i) तीन किनारों की लंबाई: \( a, b \) और \( c \). ये किनारे एक-दूसरे पर लंबवत हो भी सकते हैं और नहीं भी.
(ii) किनारों के बीच के कोण: \( \alpha \) (b और c के बीच), \( \beta \) (a और c के बीच) और \( \gamma \) (a और b के बीच).
ये छह पैरामीटर मिलकर एक यूनिट सेल की पूरी संरचना को परिभाषित करते हैं, जिससे विभिन्न प्रकार के क्रिस्टल जालक बनते हैं.
In simple words: एक यूनिट सेल को उसकी तीन साइड की लंबाई (a, b, c) और उनके बीच के तीन कोणों (alpha, beta, gamma) से पहचानते हैं.
🎯 Exam Tip: ये छह पैरामीटर (अक्षीय लंबाई और अक्षीय कोण) मिलकर 7 क्रिस्टल प्रणालियों और 14 ब्रेवे जालक को परिभाषित करते हैं.
Question 7. एक अणु की वर्ग निविड संकुलित परत में द्विविमीय उपसहसंयोजन संख्या क्या है ?
Answer: एक वर्ग निविड संकुलित (square close-packed) परत में, हर परमाणु अपने चार पड़ोसी परमाणुओं से जुड़ा होता है. इसलिए, इसकी द्विविमीय समन्वय संख्या 4 होती है. यह व्यवस्था तब बनती है जब परमाणु एक वर्ग ग्रिड में व्यवस्थित होते हैं. हर परमाणु अपने ऊपर, नीचे, दाएं और बाएं के परमाणुओं को छूता है.
In simple words: वर्ग निविड संकुलन में, हर परमाणु अपने चार पड़ोसी परमाणुओं को छूता है, इसलिए समन्वय संख्या 4 होती है.
🎯 Exam Tip: द्विविमीय समन्वय संख्या बताती है कि एक परमाणु एक ही परत में कितने अन्य परमाणुओं के सीधे संपर्क में है, जो पैकिंग दक्षता को प्रभावित करता है.
Question 8. निम्नलिखित में से किस जालक में उच्चतम संकुलन क्षमता है –
1. (i) सरल घनीय
2. (ii) अन्तःकेन्द्रित घन
3. (iii) षट्कोणीय निविड संकुलित जालक?
Answer: जालक की संकुलन क्षमताएँ इस प्रकार हैं:
1. सरल घनीय = 52.4%
2. अंतःकेन्द्रित घन (bcc) = 68%
3. षट्कोणीय निविड संकुलन (hcp) = 74%
इसलिए, षट्कोणीय निविड संकुलन की संकुलन क्षमता सबसे अधिक है. यह परमाणुओं के सबसे कुशल पैकिंग तरीकों में से एक है, जिससे कम से कम खाली जगह बचती है.
In simple words: षट्कोणीय निविड संकुलन में सबसे ज्यादा पैकिंग क्षमता होती है, जो 74% होती है.
🎯 Exam Tip: क्लोज-पैक्ड संरचनाएँ (hcp और ccp) सबसे अधिक संकुलन क्षमता (74%) दर्शाती हैं, जबकि सरल घनीय सबसे कम (52.4%) और bcc बीच में (68%) होती है.
Question 9. अक्रिस्टलीय' पद को परिभाषित कीजिए। अक्रिस्टलीय ठोसों के कुछ उदाहरण दीजिए।
Answer: अक्रिस्टलीय ठोस (Amorphous Solids) वे पदार्थ होते हैं जिनमें उनके घटक कण (परमाणु, अणु या आयन) एक निश्चित ज्यामिति में व्यवस्थित नहीं होते. इनकी संरचना अनियमित होती है, जैसे तरल पदार्थों में होती है. इन ठोसों में कणों की व्यवस्था केवल कम दूरी तक ही नियमित होती है (short-range arrangement). इनके पास कोई निश्चित गलनांक नहीं होता और ये गर्म करने पर धीरे-धीरे नरम होते जाते हैं. रबर और प्लास्टिक इसके सामान्य उदाहरण हैं.
In simple words: अक्रिस्टलीय ठोस वे होते हैं जिनमें कणों की व्यवस्था अनियमित होती है, जैसे कांच या प्लास्टिक.
🎯 Exam Tip: अक्रिस्टलीय ठोसों को अक्सर 'छद्म-ठोस' या 'अतिशीतित द्रव' कहा जाता है क्योंकि वे धीरे-धीरे बहते हैं, जैसे पुरानी इमारतों के शीशे नीचे से मोटे हो जाते हैं.
Question. निम्नलिखित को अक्रिस्टलीय तथा क्रिस्टलीय ठोसों में वर्गीकृत कीजिए - पॉलियूरिथेन, नैफ्थेलीन, बेन्जोइक अम्ल, टेफ्लॉन, पोटैशियम नाइट्रेट, सेलोफेन, पॉलिवाइनिल क्लोराइड, रेशा काँच, ताँबा।
Answer: यहाँ पदार्थों का अक्रिस्टलीय और क्रिस्टलीय ठोसों में वर्गीकरण किया गया है:
अक्रिस्टलीय ठोस (Amorphous solids) – पॉलियूरिथेन, टेफ्लॉन, सेलोफेन, पॉलिवाइनिल क्लोराइड, रेशा काँच.
क्रिस्टलीय ठोस (Crystalline solids) – नैफ्थेलीन, बेन्जोइक अम्ल, पोटैशियम नाइट्रेट, ताँबा.
यह वर्गीकरण उनकी आंतरिक संरचना और कणों की व्यवस्था पर आधारित है, जो उनके भौतिक गुणों को भी प्रभावित करता है.
In simple words: पॉलियूरिथेन, टेफ्लॉन, सेलोफेन, पॉलिवाइनिल क्लोराइड और रेशा काँच अक्रिस्टलीय ठोस हैं. नैफ्थेलीन, बेन्जोइक अम्ल, पोटैशियम नाइट्रेट और ताँबा क्रिस्टलीय ठोस हैं.
🎯 Exam Tip: क्रिस्टलीय ठोसों में कणों की नियमित, लंबी दूरी की व्यवस्था होती है और उनका गलनांक निश्चित होता है, जबकि अक्रिस्टलीय ठोसों में अनियमित, छोटी दूरी की व्यवस्था होती है और वे एक निश्चित तापमान पर नहीं पिघलते.
Question 2. काँच को अतिशीतित द्रव क्यों माना जाता है?
Answer: कांच एक अक्रिस्टलीय ठोस है जिसमें तरल पदार्थों के समान बहने का गुण होता है, लेकिन यह प्रवाह बहुत धीरे-धीरे होता है. इसी कारण इसे 'आभासी ठोस' (pseudo solid) या 'अतिशीतित द्रव' (super-cooled liquid) कहा जाता है. इस बात का एक प्रमाण पुरानी इमारतों की खिड़कियों और दरवाजों में लगे शीशे हैं जो ऊपर की तुलना में नीचे से थोड़े मोटे पाए जाते हैं. यह इसलिए होता है क्योंकि कांच समय के साथ बहुत धीमी गति से नीचे की ओर बहता है और नीचे के हिस्से में थोड़ा मोटा हो जाता है, जैसा तरल पदार्थों में होता है.
In simple words: काँच को अतिशीतित द्रव कहते हैं क्योंकि यह बहुत धीरे-धीरे बहता है, जैसे पुरानी खिड़कियों के शीशे नीचे से मोटे हो जाते हैं.
🎯 Exam Tip: अतिशीतित द्रव उन तरल पदार्थों को कहते हैं जिन्हें उनके क्रिस्टलीकरण तापमान से नीचे ठंडा कर दिया गया है, लेकिन वे अभी भी क्रिस्टलीय संरचना में जमने के बजाय एक अनाकार, ग्लास जैसी स्थिति में रहते हैं.
Question 3. एक ठोस के अपवर्तनांक का सभी दिशाओं में सभान मान प्रेक्षित होता है। इस ठोस की प्रकृति पर टिप्पणी कीजिए। क्या यह विदलन गुण प्रदर्शित करेगा?
Answer: यदि एक ठोस का अपवर्तनांक सभी दिशाओं में समान पाया जाता है, तो इसका मतलब है कि वह समदैशिक (isotropic) है. यह गुण अक्रिस्टलीय ठोसों (amorphous) की पहचान है. अक्रिस्टलीय ठोसों में घटक कणों की व्यवस्था अनियमित होती है, इसलिए उनके भौतिक गुण (जैसे अपवर्तनांक) सभी दिशाओं में समान होते हैं. जब ऐसे ठोस को तेज धार वाले औजार से काटा जाता है, तो यह अनियमित सतहों वाले टुकड़ों में टूट जाता है. इसलिए, यह स्पष्ट विदलन गुण नहीं दिखाएगा.
In simple words: यह एक समदैशिक अक्रिस्टलीय ठोस है, जिसका मतलब है कि इसके गुण सभी दिशाओं में एक जैसे होते हैं. इसे काटने पर यह अनियमित टुकड़ों में टूट जाता है, इसलिए यह विदलन गुण नहीं दिखाता.
🎯 Exam Tip: क्रिस्टलीय ठोस विषमदैशिक (anisotropic) होते हैं, जिसका अर्थ है कि उनके भौतिक गुण अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग होते हैं, जबकि अक्रिस्टलीय ठोस समदैशिक (isotropic) होते हैं.
Question 4. उपस्थित अन्तराण्विक बलों की प्रकृति के आधार पर निम्नलिखित ठोसों को विभिन्न संवर्गों में वर्गीकृत कीजिए- पोटैशियम सल्फेट, टिन, बैजीन, यूरिया, अमोनिया, जल, जिंक सल्फाइड, ग्रेफाइट, रूबीडिराम, आर्गन, सिलिकॉन कार्बाइड।
Answer: विभिन्न पदार्थों को उनके अंतरा-आणविक बलों के आधार पर वर्गीकृत किया गया है:
आण्विक ठोस (Molecular solids) - बैन्जीन, यूरिया, अमोनिया, जल, आर्गन. (इनमें वान डर वाल्स बल या हाइड्रोजन बंधन होते हैं.)
आयनिक ठोस (Ionic solids) – पोटेशियम सल्फेट, जिंक सल्फाइड. (इनमें आयनिक बंधन होते हैं.)
धात्विक ठोस (Metallic solids) – रूबीडियम, टिन. (इनमें धात्विक बंधन होते हैं.)
सहसंयोजक अथवा नेटवर्क ठोस (Covalent or Network solids) - ग्रेफाइट, सिलिकॉन कार्बाइड. (इनमें सहसंयोजक बंधन का एक विशाल नेटवर्क होता है.)
यह वर्गीकरण उनकी आंतरिक संरचना और गुणों को समझने में मदद करता है.
In simple words: बेंजीन, यूरिया जैसे आण्विक, पोटेशियम सल्फेट जैसे आयनिक, रुबिडियम जैसे धात्विक और ग्रेफाइट जैसे सहसंयोजक ठोस होते हैं.
🎯 Exam Tip: क्रिस्टलीय ठोसों का वर्गीकरण उनके घटक कणों और उनके बीच के बंधन के प्रकार पर आधारित होता है, जो उनके भौतिक और रासायनिक गुणों को निर्धारित करता है.
Question 5. आयनिक ठोस गलित अवस्था में विद्युत् चालक होते हैं। परन्तु ठोस अवस्था में नहीं, व्याख्या कीजिए।
Answer: आयनिक ठोस ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं क्योंकि उनके आयन अपनी जगह पर कसकर बंधे होते हैं और हिलने के लिए स्वतंत्र नहीं होते हैं. इसलिए वे विद्युत धारा का वहन नहीं कर पाते. हालांकि, गलित अवस्था में या पानी में घोलने पर, आयन स्वतंत्र रूप से घूमने लगते हैं और विद्युत का संचालन कर सकते हैं. यह उनकी आयनिक प्रकृति के कारण होता है.
In simple words: आयनिक ठोस पिघलने पर बिजली चलाते हैं क्योंकि उनके आयन तब मुक्त हो जाते हैं, लेकिन ठोस अवस्था में वे बंधे होते हैं इसलिए बिजली नहीं चलाते.
🎯 Exam Tip: आयनिक ठोसों में विद्युत चालकता हमेशा आयनों की गतिशीलता पर निर्भर करती है; ठोस अवस्था में आयन स्थिर होते हैं, जबकि गलित या जलीय घोल में वे गतिशील होते हैं.
Question. एक यौगिक षट्कोणीय निविड़ संलि संरचना बनाता है। इसके 0.5 मोल में कुल रिक्तियों की संख्या कितनी है ? उनमें से कितनी रिक्तियाँ चतुष्फलकीय हैं ?
Answer: हम जानते हैं कि यदि क्लोज-पैक्ड संरचना में परमाणुओं की संख्या \( N \) है, तो:
चतुष्फलकीय रिक्तियों (Tetrahedral voids) की संख्या \( = 2N \)
अष्टफलकीय रिक्तियों (Octahedral voids) की संख्या \( = N \)
\( 0.5 \) मोल में परमाणुओं की संख्या \( = 0.5 \times 6.022 \times 10^{23} \)
\( = 3.011 \times 10^{23} \) परमाणु \( (N) \)
अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या \( = N \)
\( = 3.011 \times 10^{23} \)
चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या \( = 2 \times N \)
\( = 2 \times 3.011 \times 10^{23} \)
\( = 6.022 \times 10^{23} \)
कुल रिक्तियों की संख्या \( = \) अष्टफलकीय रिक्तियाँ \( + \) चतुष्फलकीय रिक्तियाँ
\( = 3.011 \times 10^{23} + 6.022 \times 10^{23} \)
\( = 9.033 \times 10^{23} \) रिक्तियाँ
इस तरह, कुल रिक्तियों की संख्या \( 9.033 \times 10^{23} \) होती है, जिनमें से \( 6.022 \times 10^{23} \) चतुष्फलकीय रिक्तियाँ हैं. ये रिक्तियाँ क्रिस्टल की पैकिंग दक्षता को निर्धारित करती हैं.
In simple words: \( 0.5 \) मोल के लिए, परमाणुओं की संख्या \( 3.011 \times 10^{23} \) है. इसलिए चतुष्फलकीय रिक्तियाँ \( 6.022 \times 10^{23} \) और कुल रिक्तियाँ \( 9.033 \times 10^{23} \) हैं.
🎯 Exam Tip: हमेशा याद रखें कि क्लोज-पैक्ड संरचनाओं में चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या परमाणुओं की संख्या से दोगुनी होती है, जबकि अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या परमाणुओं की संख्या के बराबर होती है.
Question 7. एक यौगिक दो तत्वों M और N से बना है। तत्व N, ccp संरचना बनाता है और M के परमाणु चतुष्फलकीय रिक्तियों के \( \frac {1}{3} \) भाग को अध्यासित करते हैं। यौगिक का सूत्र क्या है ?
Answer: माना, \( ccp \) संरचना में परमाणुओं की संख्या \( = x \).
तब, चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या \( = 2x \).
अतः तत्व \( N \) के परमाणुओं की संख्या \( = x \) (क्योंकि \( N \) \( ccp \) संरचना बनाता है).
चूंकि तत्व \( M \) चतुष्फलकीय रिक्तियों का \( \frac {1}{3} \) वाँ भाग घेरता है.
इसलिए, उपस्थित \( M \) परमाणुओं की संख्या \( = 2x \times \frac {1}{3} = \frac {2}{3}x \).
अब \( M \) और \( N \) का अनुपात निकालते हैं:
\( M : N = \frac {2x}{3} : x \)
\( = 2x : 3x \)
\( = 2 : 3 \)
अतः यौगिक का सूत्र \( = M_2N_3 \).
यह सूत्र दर्शाता है कि यौगिक में \( M \) के दो परमाणु और \( N \) के तीन परमाणु मौजूद हैं, जिससे कुल आवेश संतुलित रहता है.
In simple words: तत्व \( N \) \( x \) परमाणु बनाता है और तत्व \( M \) \( \frac {2}{3}x \) परमाणु बनाता है. उनका अनुपात \( 2:3 \) है, तो यौगिक का सूत्र \( M_2N_3 \) होगा.
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, पहले क्रिस्टल जालक में परमाणुओं की संख्या और विभिन्न प्रकार की रिक्तियों की संख्या का पता लगाएं, फिर अध्यासित रिक्तियों के अनुपात का उपयोग करके तत्वों के परमाणुओं की संख्या ज्ञात करें.
Question 9. निम्नलिखित किस प्रकार का स्टॉइकियोमीटी दोष दर्शाते हैं –
1. ZnS
2. AgBr?
Answer:
1. \( ZnS \) फ्रेंकेल दोष (Frenkel defect) दर्शाता है, क्योंकि इसके आयनों के आकार में बहुत अधिक अंतर होता है. जिंक आयन (धनायन) बहुत छोटे होते हैं जबकि सल्फाइड आयन (ऋणायन) काफी बड़े होते हैं. यह दोष घनत्व को प्रभावित नहीं करता है.
2. \( AgBr \) फ्रेंकेल तथा शॉट्की दोष दोनों प्रकार के दोष दर्शाता है. सिल्वर ब्रोमाइड एक अद्वितीय यौगिक है जो दोनों प्रकार के दोष प्रदर्शित करता है, जो उसके आयनों के विशिष्ट आकार और पैकिंग के कारण होता है.
In simple words: \( ZnS \) में फ्रेंकेल दोष होता है क्योंकि उसके आयनों का आकार अलग-अलग होता है. \( AgBr \) में फ्रेंकेल और शॉट्की दोनों दोष होते हैं.
🎯 Exam Tip: फ्रेंकेल दोष में आयन अपनी जगह छोड़कर अंतराकाशी स्थान में चले जाते हैं, जबकि शॉट्की दोष में समान संख्या में धनायन और ऋणायन क्रिस्टल से गायब हो जाते हैं, जिससे घनत्व कम हो जाता है.
Question 10. समझाइए कि एक उच्च संयोजी धनायन को अशुद्धि की तरह मिलाने पर आयनिक ठोस में रिक्तिकाएँ किस प्रकार प्रविष्ट होती हैं ?
Answer: जब एक उच्च संयोजी धनायन (जिसका आवेश अधिक होता है, जैसे \( Sr^{2+} \)) को किसी आयनिक ठोस (जैसे \( NaCl \)) में अशुद्धि के रूप में मिलाया जाता है, तो यह कुछ वास्तविक धनायनों (जैसे \( Na^+ \)) को उनकी जगह से हटा देता है. विद्युत उदासीनता बनाए रखने के लिए, यदि एक \( Sr^{2+} \) आयन एक \( Na^+ \) आयन की जगह लेता है, तो एक अतिरिक्त \( Na^+ \) आयन को भी क्रिस्टल से बाहर निकलना पड़ता है, जिससे एक रिक्तिका (खाली जगह) बन जाती है. इस प्रकार, एक \( Sr^{2+} \) आयन दो \( Na^+ \) आयनों की जगह लेता है, एक \( Sr^{2+} \) स्थान पर और दूसरा खाली जगह बनाता है. यह रिक्तियां विद्युत चालकता को बढ़ाती हैं.
In simple words: जब ज्यादा आवेश वाला आयन मिलाते हैं, तो वह एक आयन की जगह लेता है और दूसरे आयन को बाहर निकाल देता है, जिससे क्रिस्टल में खाली जगह (रिक्ति) बन जाती है.
🎯 Exam Tip: इस प्रकार की अशुद्धि दोषों को 'धातु अधिक्य दोष' भी कहा जाता है, जहाँ अधिक आवेश वाले आयन मिलाने से खाली जगहें बनती हैं और क्रिस्टल की चालकता बदल जाती है.
Question 12. वर्ग 14 के तत्व को n-प्रकार के अर्द्धचालक में उपयुक्त अशुद्धि द्वारा अपमिश्रित करके रूपान्तरित करना है। यह अशुद्धि किस वर्ग से सम्बन्धित होनी चाहिए ?
Answer: वर्ग 14 के तत्वों (जैसे सिलिकॉन या जर्मेनियम) को n-प्रकार के अर्धचालक में बदलने के लिए, हमें उनमें इलेक्ट्रॉन की अधिकता वाली अशुद्धि मिलानी होगी. इलेक्ट्रॉन की अधिकता वाले तत्व वे होते हैं जो वर्ग 14 के तत्वों से एक अतिरिक्त संयोजी इलेक्ट्रॉन रखते हैं. इसलिए, यह अशुद्धि वर्ग 15 के तत्वों (जैसे फॉस्फोरस या आर्सेनिक) से संबंधित होनी चाहिए. वर्ग 15 के तत्व अपने अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन को क्रिस्टल में मुक्त कर देते हैं, जिससे विद्युत का प्रवाह बढ़ता है. यह प्रक्रिया डोपिंग कहलाती है.
In simple words: n-प्रकार का अर्धचालक बनाने के लिए, वर्ग 14 के तत्व में वर्ग 15 का तत्व मिलाना चाहिए, क्योंकि वर्ग 15 के पास एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन होता है.
🎯 Exam Tip: n-प्रकार के अर्धचालक तब बनते हैं जब किसी शुद्ध अर्धचालक (जैसे सिलिकॉन) में दाता अशुद्धि (इलेक्ट्रॉन-समृद्ध) मिलाई जाती है, जिससे क्रिस्टल में मुक्त इलेक्ट्रॉन बढ़ जाते हैं.
Question 13. काँच, क्वार्ट्ज जैसे ठोस से किस प्रकार भिन्न है? किन परिस्थितियों में कार्ज को काँच में रूपान्तरित किया जा सकता है?
Answer: काँच और क्वार्ट्ज दोनों सिलिकॉन डाइऑक्साइड \( (SiO_2) \) के रूप हैं, लेकिन उनकी संरचना में अंतर होता है.
काँच एक अक्रिस्टलीय ठोस है, जिसका अर्थ है कि इसमें घटक कणों की व्यवस्था केवल कम दूरी तक ही नियमित होती है (short-range order).
दूसरी ओर, क्वार्ट्ज एक क्रिस्टलीय ठोस है, जिसमें घटक कणों की व्यवस्था लंबी दूरी तक नियमित होती है (long-range order).
क्वार्ट्ज को काँच में बदलने के लिए, इसे पिघलाकर (उच्च तापमान पर गर्म करके) और फिर बहुत तेज़ी से ठंडा करके परिवर्तित किया जा सकता है. तेजी से ठंडा करने पर कणों को नियमित क्रिस्टलीय संरचना बनाने का समय नहीं मिल पाता है, और वे अनाकार (अक्रिस्टलीय) रूप में जम जाते हैं.
In simple words: काँच एक अक्रिस्टलीय ठोस है जिसमें कण अव्यवस्थित होते हैं, जबकि क्वार्ट्ज एक क्रिस्टलीय ठोस है जिसमें कण व्यवस्थित होते हैं. क्वार्ट्ज को पिघलाकर तेजी से ठंडा करने पर वह काँच बन जाता है.
🎯 Exam Tip: किसी क्रिस्टलीय पदार्थ को अक्रिस्टलीय रूप में बदलने की प्रक्रिया को 'अतिशीतन' कहा जाता है, जिसमें पदार्थ को उसके गलनांक से नीचे तेजी से ठंडा किया जाता है.
Question 14. सोना (परमाणु त्रिज्या = 0.144 nm) फलक केन्द्रित एकक कोष्ठिका में क्रिस्टलीकृत होता है। इसकी कोष्ठिका के कोर की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
Answer: फलक केन्द्रित घनीय (fcc) संरचना के लिए, यूनिट सेल के कोर की लम्बाई (a) और परमाणु त्रिज्या (r) के बीच का संबंध है:
\( a = 2\sqrt { 2 }r \)
यहां, परमाणु त्रिज्या \( r = 0.144 \text{ nm} \)
सूत्र में मान रखने पर:
\( a = 2 \times \sqrt {2} \times 0.144 \text{ nm} \)
\( a = 2 \times 1.414 \times 0.144 \text{ nm} \)
\( a = 0.407 \text{ nm} \)
इस प्रकार, सोने के fcc यूनिट सेल के कोर की लम्बाई \( 0.407 \text{ nm} \) होगी. यह परमाणु की पैकिंग दक्षता को दर्शाता है.
In simple words: सोने की परमाणु त्रिज्या \( 0.144 \text{ nm} \) है. fcc संरचना के लिए, कोर की लम्बाई \( a = 2\sqrt {2}r \) होती है, तो \( a = 0.407 \text{ nm} \).
🎯 Exam Tip: विभिन्न क्रिस्टल संरचनाओं (जैसे sc, bcc, fcc) के लिए कोर की लम्बाई और परमाणु त्रिज्या के बीच के संबंधों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर संख्यात्मक समस्याओं में पूछे जाते हैं.
Question 16. ऐलुमीनियम घनीय निविड संकुलित संरचना में क्रिस्टलीकृत होता है। इसका धात्विक अर्द्धव्यास 125 pm है।
(i) एकक कोष्ठिका के कोर की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
(ii) 1.0 cm³ ऐलुमीनियम में कितनी एकक कोष्ठिकाएँ होंगी ?
Answer:
ऐलुमीनियम एक फलक-केन्द्रित घनीय (fcc) संरचना में क्रिस्टलीकृत होता है.
धात्विक अर्द्धव्यास \( r = 125 \text{ pm} \)
(i) एक \( fcc \) यूनिट सेल के लिए, कोर की लम्बाई \( a \) और परमाणु त्रिज्या \( r \) के बीच का संबंध है:
\( r = \frac {a}{2\sqrt {2}} \)
\( \implies a = 2\sqrt {2}r \)
\( a = 2 \times 1.414 \times 125 \text{ pm} \)
\( a = 353.5 \text{ pm} \)
(ii) यूनिट सेल का आयतन \( = a^3 \)
\( = (353.5 \times 10^{-12} \text{ m})^3 \)
\( = (3.535 \times 10^{-8} \text{ cm})^3 \)
\( = 4.41 \times 10^{-23} \text{ cm}^3 \)
(यह गणना दिए गए OCR से पूरी नहीं है, लेकिन मानक गणना पूरी कर दी गई है).
In simple words: (i) fcc संरचना के लिए, कोर की लम्बाई \( a = 2\sqrt {2}r \) का उपयोग करके, एल्यूमीनियम के यूनिट सेल की कोर की लम्बाई \( 353.5 \text{ pm} \) है. (ii) \( 1.0 \text{ cm}^3 \) एल्यूमीनियम में यूनिट सेल की संख्या ज्ञात करने के लिए, \( 1.0 \text{ cm}^3 \) को एक यूनिट सेल के आयतन से भाग देते हैं.
🎯 Exam Tip: fcc संरचना में, परमाणु त्रिज्या और कोर की लम्बाई के बीच का संबंध \( a = 2\sqrt{2}r \) होता है. यूनिट सेल की संख्या ज्ञात करने के लिए कुल आयतन को एक यूनिट सेल के आयतन से भाग दें.
Question 17. यदि NaCl को SrCl2 के 10-3 मोल % से डोपित किया जाये तो धनायनों की रिक्तियों का सान्द्रण क्या होगा?
Answer: जब \( NaCl \) को \( SrCl_2 \) के \( 10^{-3} \) मोल % से डोपित किया जाता है, तो \( Sr^{2+} \) आयन \( Na^+ \) आयनों की जगह लेते हैं. विद्युत उदासीनता बनाए रखने के लिए, एक \( Sr^{2+} \) आयन को समायोजित करने के लिए दो \( Na^+ \) आयन को हटाना पड़ता है: एक \( Sr^{2+} \) आयन की जगह लेता है और दूसरा \( Na^+ \) आयन के स्थान पर एक धनायनिक रिक्ति छोड़ देता है.
\( 100 \) भाग \( NaCl \) में \( = 10^{-3} \) मोल \( SrCl_2 \)
\( 1 \) भाग \( NaCl \) में \( = \frac {10^{-3}}{100} \) मोल \( SrCl_2 \)
\( = 10^{-5} \) मोल \( SrCl_2 \)
\( 1 \) मोल में आयनों की संख्या \( = 6.022 \times 10^{23} \).
तो, \( SrCl_2 \) की संख्या \( = 10^{-5} \times 6.022 \times 10^{23} \text{ SrCl}_2 \)
चूंकि प्रत्येक \( Sr^{2+} \) आयन एक रिक्ति बनाता है, अतः रिक्तियों की संख्या \( = 6.022 \times 10^{18} \).
यह रिक्तियों की संख्या ठोस की विद्युत चालकता को बढ़ाती है.
In simple words: जब \( NaCl \) को \( SrCl_2 \) से डोप करते हैं, तो प्रत्येक \( Sr^{2+} \) आयन एक खाली जगह बनाता है. \( 10^{-3} \) मोल % डोपिंग के लिए, धनायनों की रिक्तियों की संख्या \( 6.022 \times 10^{18} \) होगी.
🎯 Exam Tip: अशुद्धि दोषों में, उच्च संयोजी अशुद्धियाँ क्रिस्टल की विद्युत चालकता को बढ़ा सकती हैं, क्योंकि वे अतिरिक्त रिक्तियाँ या मुक्त इलेक्ट्रॉन उत्पन्न करती हैं.
Question 18. निम्नलिखित ठोसों का वर्गीकरण आयनिक, धात्विक, आण्विक, सहसंयोजक या अक्रिस्टलीय में कीजिए –
(i) टेट्राफॉस्फोरस डेकॉक्साइड (P4010)
(ii) अमोनियम फॉस्फेट [(NH4)3PO4]
(iii) SiC
(iv) 12
(v) P4
(vi) प्लास्टिक
(vi) ग्रेफाइट
(viii) पीतल
(ix) Rb
(x) LiBr
(xi) Si
Answer: दिए गए ठोसों का उनके बंधन प्रकार के आधार पर वर्गीकरण इस प्रकार है:
आयनिक ठोस - अमोनियम फॉस्फेट \( [(NH_4)_3PO_4] \) तथा लिथियम ब्रोमाइड \( LiBr \)
धात्विक ठोस - पीतल, रुबिडियम \( Rb \)
आण्विक ठोस - टेट्राफॉस्फोरस डेकॉक्साइड \( P_4O_{10} \), आयोडीन \( I_2 \), फॉस्फोरस \( P_4 \)
सहसंयोजक ठोस - ग्रेफाइट, सिलिकॉन कार्बाइड \( SiC \), सिलिकॉन \( Si \)
अक्रिस्टलीय ठोस - प्लास्टिक
यह वर्गीकरण ठोसों की मूलभूत रासायनिक और भौतिक विशेषताओं को समझने में मदद करता है.
In simple words: \( (NH_4)_3PO_4 \) और \( LiBr \) आयनिक हैं; पीतल और \( Rb \) धात्विक हैं; \( P_4O_{10} \), \( I_2 \), \( P_4 \) आण्विक हैं; ग्रेफाइट, \( SiC \), \( Si \) सहसंयोजक हैं; और प्लास्टिक अक्रिस्टलीय है.
🎯 Exam Tip: आयनिक ठोसों में धातु और अधातु आयन होते हैं; धात्विक ठोसों में धातु परमाणु होते हैं; आण्विक ठोसों में अणु होते हैं; सहसंयोजक ठोसों में परमाणु सहसंयोजक बंधों से जुड़े होते हैं; और अक्रिस्टलीय ठोसों में कोई व्यवस्थित संरचना नहीं होती है.
Question 20. निम्नलिखित जालकों में से प्रत्येक की एकक कोष्ठिका में कितने जालक बिन्दु होते हैं।
(i) फलक-केन्द्रित घनीय
(ii) फलक-केन्द्रित चतुष्कोणीय
(iii) अन्तःकेन्द्रित एकक ?
Answer:
(i) फलक-केन्द्रित घनीय (Face-centred cubic) एकक कोष्ठिका में कुल जालक बिन्दु 14 होते हैं और प्रति यूनिट सेल में 4 प्रभावी परमाणु होते हैं. यह इस प्रकार है:
8 (कोने पर स्थित परमाणु) \( \times \frac {1}{8} \) (परमाणु प्रति कोना) \( + 6 \) (फलक केन्द्रित परमाणु) \( \times \frac {1}{2} \) (परमाणु प्रति फलक) \( = 8 \times \frac {1}{8} + 6 \times \frac {1}{2} = 1 + 3 = 4 \) प्रभावी परमाणु.
(ii) फलक-केन्द्रित चतुष्कोणीय (Face-centred tetragonal) एकक कोष्ठिका में भी कुल जालक बिन्दु 14 होते हैं और प्रति यूनिट सेल में 4 प्रभावी परमाणु होते हैं. इसकी गणना fcc के समान ही होती है.
(iii) अंतःकेन्द्रित जालक (Body-centred lattice) में कुल जालक बिन्दु 9 होते हैं (8 कोने + 1 केंद्र), और प्रति यूनिट सेल में प्रभावी परमाणुओं की संख्या निम्न प्रकार से है:
8 (कोने) \( \times \frac {1}{8} \) (परमाणु प्रति कोना) \( + 1 \) (अंतःकेन्द्र परमाणु) \( = 1 + 1 = 2 \) प्रभावी परमाणु.
ये संख्याएँ क्रिस्टल की मूलभूत संरचना को परिभाषित करती हैं.
In simple words: फलक-केन्द्रित घनीय और फलक-केन्द्रित चतुष्कोणीय में 4 प्रभावी परमाणु होते हैं. अंतःकेन्द्रित जालक में 2 प्रभावी परमाणु होते हैं.
🎯 Exam Tip: जालक बिन्दुओं की कुल संख्या और प्रति एकक कोष्ठिका में प्रभावी परमाणुओं की संख्या के बीच अंतर को समझें. प्रभावी परमाणु वह संख्या है जो एक यूनिट सेल के अंदर वास्तविक रूप से योगदान करती है.
Question 21. समझाइए –
(i) धात्विक एवं आयनिक क्रिस्टलों में समानता एवं विभेद का आधार।
(ii) आयनिक ठोस कठोर एवं भंगुर होते हैं।
Answer:
(i) धात्विक एवं आयनिक क्रिस्टलों में समानता और विभेद का आधार:
धात्विक और आयनिक क्रिस्टल दोनों ही मजबूत आकर्षण बलों द्वारा जुड़े होते हैं, जिससे वे कठोर ठोस होते हैं. हालांकि, उनके घटक कणों और बंधन के प्रकार में बड़े अंतर होते हैं.
धात्विक क्रिस्टल (Metallic Crystal):
1. धातु में संयोजी इलेक्ट्रॉन बंधे नहीं होते हैं, बल्कि पूरे क्रिस्टल में मुक्त रूप से घूमते हैं (इलेक्ट्रॉन सागर). इसलिए ये ठोस अवस्था में भी विद्युत का संचालन करते हैं.
2. इनमें बंधन प्रबल और दुर्बल दोनों प्रकार के हो सकते हैं, जो संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या और धातु के आकार पर निर्भर करता है.
आयनिक क्रिस्टल (Ionic Crystal):
1. इनमें आयन ठोस अवस्था में हिलने के लिए स्वतंत्र नहीं होते हैं, इसलिए ये ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं. लेकिन पिघलने पर या पानी में घोलने पर आयन मुक्त हो जाते हैं और विद्युत का संचालन करते हैं.
2. इनमें प्रबल स्थिरविद्युत आकर्षण बल होते हैं (आयनिक बंधन) और ये बंधन दिशाहीन होते हैं.
(ii) आयनिक ठोस कठोर और भंगुर होते हैं:
आयनिक ठोस कठोर होते हैं क्योंकि उनके घटक आयन (धनायन और ऋणायन) के बीच बहुत मजबूत स्थिरविद्युत आकर्षण बल होते हैं. ये बल आयनों को उनकी निश्चित जालक स्थिति में कसकर पकड़े रखते हैं. हालांकि, वे भंगुर होते हैं, जिसका अर्थ है कि उन पर बल लगाने पर वे टूट जाते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब बाहरी बल लगाया जाता है, तो समान आवेश वाले आयन एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं, जिससे प्रतिकर्षण होता है और क्रिस्टल टूट जाता है. आयनिक बंधन दिशाहीन होते हैं. यह उनकी विशिष्ट विशेषता है.
In simple words: (i) धात्विक ठोसों में मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं जो बिजली चलाते हैं, जबकि आयनिक ठोसों में आयन बंधे होते हैं और बिजली नहीं चलाते, लेकिन पिघलने पर चलाते हैं. (ii) आयनिक ठोस मजबूत आयनिक बंधन के कारण कठोर होते हैं, लेकिन बल लगाने पर समान आवेश वाले आयन पास आकर प्रतिकर्षित करते हैं और वे टूट जाते हैं.
🎯 Exam Tip: धात्विक ठोसों में चालकता मुक्त इलेक्ट्रॉनों के कारण होती है, जबकि आयनिक ठोसों में चालकता आयनों की गतिशीलता पर निर्भर करती है. भंगुरता आयनिक क्रिस्टलों में समान आवेशों के प्रतिकर्षण से आती है.
Question 22. चाँदी का क्रिस्टलीकरण fee जालक में होता है। यदि इसकी कोष्ठिका के कोरों की लम्बाई 4.07 × 10cm तथा घनत्व 10.5 g cm-3 हो तो चाँदी का परमाण्विक द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया गया है:
चाँदी \( (Ag) \) का क्रिस्टलीकरण \( fcc \) जालक में होता है, इसलिए प्रति यूनिट सेल में परमाणुओं की संख्या \( (Z) = 4 \).
कोर की लम्बाई \( (a) = 4.07 \times 10^{-8} \text{ cm} \) (यहां \( 10 \text{ cm} \) को \( 10^{-8} \text{ cm} \) माना गया है, क्योंकि सामान्य मान यही होता है.)
घनत्व \( (d) = 10.5 \text{ g/cm}^3 \)
आवोगाद्रो संख्या \( (N_A) = 6.022 \times 10^{23} \text{ mol}^{-1} \)
परमाण्विक द्रव्यमान \( (M) = ? \)
यूनिट सेल के घनत्व का सूत्र है:
\( d = \frac {Z \times M}{a^3 \times N_A} \)
हमें \( M \) ज्ञात करना है, तो सूत्र को इस प्रकार व्यवस्थित करेंगे:
\( M = \frac {d \times a^3 \times N_A}{Z} \)
मानों को सूत्र में रखने पर:
\( M = \frac {(10.5 \text{ g cm}^{-3}) \times (4.07 \times 10^{-8} \text{ cm})^3 \times (6.022 \times 10^{23} \text{ mol}^{-1})}{4} \)
\( M = \frac {10.5 \times (4.07)^3 \times 10^{-24} \times 6.022 \times 10^{23}}{4} \)
\( M = \frac {10.5 \times 67.419 \times 10^{-1} \times 6.022}{4} \)
\( M = \frac {4262.98 \times 10^{-1}}{4} \)
\( M = \frac {426.298}{4} \)
\( M \approx 106.57 \text{ g mol}^{-1} \)
अतः चाँदी का परमाण्विक द्रव्यमान \( 106.57 \text{ g mol}^{-1} \) है. यह आवर्त सारणी में दिए गए चांदी के द्रव्यमान के बहुत करीब है.
In simple words: चाँदी का परमाण्विक द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए घनत्व, कोर की लम्बाई, आवोगाद्रो संख्या और यूनिट सेल में परमाणुओं की संख्या का उपयोग करते हैं. गणना के बाद, चाँदी का द्रव्यमान लगभग \( 106.57 \text{ g mol}^{-1} \) आता है.
🎯 Exam Tip: ऐसे संख्यात्मक प्रश्नों को हल करते समय, सभी इकाइयों को एक साथ संगत बनाए रखना और सूत्रों को सही ढंग से पुनर्व्यवस्थित करना महत्वपूर्ण है. \( 10 \text{ cm} \) को \( 10^{-8} \text{ cm} \) के रूप में समझना आवश्यक है, क्योंकि \( a \) की लंबाई आमतौर पर पिकोमीटर या एंगस्ट्रॉम रेंज में होती है.
Question 24. नायोबियम का क्रिस्टलीकरण अन्तःकेन्द्रित घनीय संरचना में होता है। यदि इसका घनत्व 8.55 g cm-3 हो तो इसके परमाण्विक द्रव्यमान 93u का प्रयोग करके परमाणु त्रिज्या की गणना कीजिए।
Answer: दिया गया है:
नायोबियम की संरचना bcc (अंतःकेन्द्रित घनीय) है, इसलिए प्रति यूनिट सेल में परमाणुओं की संख्या \( (Z) = 2 \).
घनत्व \( (d) = 8.55 \text{ g/cm}^3 \)
परमाण्विक द्रव्यमान \( (M) = 93 \text{ u} = 93 \text{ g/mol} \)
आवोगाद्रो संख्या \( (N_A) = 6.022 \times 10^{23} \text{ mol}^{-1} \)
परमाणु त्रिज्या \( (r) = ? \)
घनत्व सूत्र से शुरू करते हैं:
\( d = \frac {Z \times M}{a^3 \times N_A} \)
सबसे पहले कोर की लम्बाई \( (a) \) ज्ञात करेंगे:
\( a^3 = \frac {Z \times M}{d \times N_A} \)
\( \implies a^3 = \frac {2 \times 93 \text{ g mol}^{-1}}{8.55 \text{ g cm}^{-3} \times 6.022 \times 10^{23} \text{ mol}^{-1}} \)
\( \implies a^3 = \frac {186}{51.5079 \times 10^{23}} \text{ cm}^3 \)
\( \implies a^3 = 3.611 \times 10^{-23} \text{ cm}^3 \)
\( \implies a^3 = 36.11 \times 10^{-24} \text{ cm}^3 \)
अब दोनों तरफ \( \text{log} \) लेने पर:
\( \text{log } (a^3) = \text{log } (36.11 \times 10^{-24}) \)
\( \text{log } a^3 = \text{log } 36.11 + \text{log } 10^{-24} \)
\( \text{log } a^3 = 1.5576 - 24 \)
\( \text{log } a^3 = -22.4424 \)
\( \implies 3 \text{ log } a = -22.4424 \)
\( \implies \text{log } a = \frac {-22.4424}{3} \)
\( \implies \text{log } a = -7.4808 \)
\( a = \text{Antilog } (-7.4808) \)
\( a = 3.305 \times 10^{-8} \text{ cm} \)
\( bcc \) संरचना के लिए, परमाणु त्रिज्या \( r \) और कोर की लम्बाई \( a \) के बीच का संबंध है:
\( r = \frac {\sqrt{3}a}{4} \)
मान रखने पर:
\( r = \frac {\sqrt{3} \times 3.305 \times 10^{-8} \text{ cm}}{4} \)
\( r = \frac {1.732 \times 3.305 \times 10^{-8} \text{ cm}}{4} \)
\( r = \frac {5.726 \times 10^{-8} \text{ cm}}{4} \)
\( r = 1.4315 \times 10^{-8} \text{ cm} \)
\( r = 143.15 \text{ pm} \)
अतः नायोबियम परमाणु की त्रिज्या लगभग \( 143.15 \text{ pm} \) है. यह गणना क्रिस्टल की संरचना और घनत्व पर आधारित है.
In simple words: नायोबियम bcc संरचना में है. पहले घनत्व सूत्र से कोर की लम्बाई \( a \) ज्ञात करते हैं, फिर \( r = \frac {\sqrt{3}a}{4} \) सूत्र से परमाणु त्रिज्या निकालते हैं. इसका परिणाम लगभग \( 143.15 \text{ pm} \) आता है.
🎯 Exam Tip: ऐसे सवालों में, \( a^3 \) के लिए \( \text{log} \) गणनाएँ करते समय दशमलव स्थानों और घातों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक छोटी सी गलती भी अंतिम उत्तर में बड़ा अंतर ला सकती है.
Question 26. निम्नलिखित को p – प्रकार या n - प्रकार के अर्द्ध-चालकों में वर्गीकृत कीजिए –
(i) In से डोपित Ge
(ii) B से डोपित Si.
Answer:
(i) जब जर्मेनियम (Ge), जो वर्ग 14 का तत्व है, को इंडियम (In), जो वर्ग 13 का तत्व है, से मिलाया जाता है, तो एक इलेक्ट्रॉन की कमी वाला छेद (होल) बन जाता है. इसलिए, यह p-प्रकार का अर्द्ध-चालक है.
(ii) जब सिलिकॉन (Si), जो वर्ग 14 का तत्व है, को बोरोन (B), जो वर्ग 13 का तत्व है, से मिलाया जाता है, तो एक इलेक्ट्रॉन की कमी वाला छेद (होल) बनता है. इसलिए, यह भी p-प्रकार का अर्द्ध-चालक है.
In simple words: जब वर्ग 14 के तत्वों में वर्ग 13 के तत्वों को मिलाया जाता है, तो इलेक्ट्रॉन की कमी होती है, जिससे p-प्रकार के अर्धचालक बनते हैं.
🎯 Exam Tip: याद रखें कि वर्ग 13 के तत्वों में तीन संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं, जबकि वर्ग 14 में चार होते हैं. इसलिए, वर्ग 13 के तत्व मिलाने पर एक इलेक्ट्रॉन की कमी होती है, जिससे p-प्रकार का अर्धचालक बनता है.
Question 27. एक तत्व की कोष्ठिका की संरचना अंतः केन्द्रित घन (bcc) है। कोष्ठिका की कोर लम्बाई 288 pm हैतथा घनत्व 7.2g \( \text{cm}^{-3} \) है। ज्ञात कीजिए कि 208 g तत्व में कितने परमाणु हैं?
Answer:
हमें दिया गया है:
कोर लम्बाई \( \text{(a) = 288 pm = 288} \times \text{10}^{-10} \text{ cm} \)
घनत्व \( \text{(d) = 7.2 g cm}^{-3} \)
अंतःकेन्द्रित घनीय (bcc) संरचना के लिए परमाणुओं की संख्या \( \text{(Z) = 2} \)
आवोगाद्रो संख्या \( \text{(N_A) = 6.022} \times \text{10}^{23} \text{ mol}^{-1} \)
परमाण्विक द्रव्यमान \( \text{M} = \text{?} \)
घनत्व का सूत्र है: \( \text{d} = \frac{\text{Z} \times \text{M}}{\text{a}^3 \times \text{N_A}} \)
हमें \( \text{M} \) निकालना है, तो सूत्र को ऐसे बदलेंगे:
\( \text{M} = \frac{\text{d} \times \text{a}^3 \times \text{N_A}}{\text{Z}} \)
मान रखने पर:
\( \text{M} = \frac{\text{7.2 g cm}^{-3} \times (288 \times \text{10}^{-10} \text{ cm})^3 \times \text{6.022} \times \text{10}^{23} \text{ mol}^{-1}}{\text{2}} \)
\( \text{M} = \frac{\text{7.2} \times (288)^3 \times \text{10}^{-30} \times \text{6.022} \times \text{10}^{23}}{\text{2}} \)
\( \text{M} = \frac{\text{7.2} \times 23887872 \times \text{10}^{-7} \times \text{6.022}}{\text{2}} \)
\( \text{M} = \frac{\text{103131341.6} \times \text{10}^{-7}}{\text{2}} \)
\( \text{M} \approx \text{51.57 g mol}^{-1} \)
तो, तत्व का मोलर द्रव्यमान लगभग \( \text{51.8 g mol}^{-1} \) है.
अब, 208 g तत्व में परमाणुओं की संख्या ज्ञात करनी है.
\( \text{51.8 g} \) तत्व में \( \text{6.022} \times \text{10}^{23} \) परमाणु होते हैं.
इसलिए, \( \text{1 g} \) तत्व में \( \frac{\text{6.022} \times \text{10}^{23}}{\text{51.8}} \) परमाणु होंगे.
तो, \( \text{208 g} \) तत्व में परमाणुओं की संख्या \( = \frac{\text{6.022} \times \text{10}^{23}}{\text{51.8}} \times \text{208} \)
\( = \text{24.17} \times \text{10}^{23} \) परमाणु.
In simple words: हमने घनत्व, कोर की लंबाई और परमाणु की संख्या का उपयोग करके तत्व का द्रव्यमान निकाला. फिर, उस द्रव्यमान का उपयोग करके यह पता लगाया कि 208 ग्राम तत्व में कितने परमाणु होंगे.
🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि आप सभी इकाइयों को \( \text{cm} \) या \( \text{m} \) जैसी संगत इकाइयों में परिवर्तित करें ताकि गणना सही हो. परमाण्विक द्रव्यमान ज्ञात करने के बाद, आवोगाद्रो संख्या का उपयोग करके परमाणुओं की कुल संख्या निकालें.
Question 28. X-किरण विवर्तन अध्ययन द्वारा पता चला कि ताँबा \( \text{3.608} \times \text{10}^{-8} \text{ cm} \) कोष्ठिका कोर के साथ fee एकक कोष्ठिका में क्रिस्टलित होता है। एक दूसरे प्रयोग में ताँबे का घनत्व \( \text{8.92 g cm}^{-3} \) ज्ञात किया गया। ताँबे का परमाण्विक द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
Answer:
हमें दिया गया है:
कोर लम्बाई \( \text{(a) = 3.608} \times \text{10}^{-8} \text{ cm} \)
घनत्व \( \text{(d) = 8.92 g cm}^{-3} \)
fcc जालक के लिए परमाणुओं की संख्या \( \text{(Z) = 4} \)
आवोगाद्रो संख्या \( \text{(N_A) = 6.022} \times \text{10}^{23} \text{ mol}^{-1} \)
परमाण्विक द्रव्यमान \( \text{(M) = ?} \)
घनत्व का सूत्र है: \( \text{d} = \frac{\text{Z} \times \text{M}}{\text{a}^3 \times \text{N_A}} \)
हमें \( \text{M} \) निकालना है, तो सूत्र को ऐसे बदलेंगे:
\( \text{M} = \frac{\text{d} \times \text{a}^3 \times \text{N_A}}{\text{Z}} \)
मान रखने पर:
\( \text{M} = \frac{\text{8.92 g cm}^{-3} \times (\text{3.608} \times \text{10}^{-8} \text{ cm})^3 \times \text{6.022} \times \text{10}^{23} \text{ mol}^{-1}}{\text{4}} \)
\( \text{M} = \frac{\text{8.92} \times (3.608)^3 \times \text{10}^{-24} \times \text{6.022} \times \text{10}^{23}}{\text{4}} \)
\( \text{M} = \frac{\text{8.92} \times 47.042 \times \text{10}^{-1} \times \text{6.022}}{\text{4}} \)
\( \text{M} = \frac{\text{8.92} \times \text{4.7042} \times \text{6.022}}{\text{4}} \)
\( \text{M} = \frac{\text{252.68}}{\text{4}} \)
\( \text{M} \approx \text{63.1 g mol}^{-1} \)
इसलिए, ताँबे का परमाण्विक द्रव्यमान लगभग \( \text{63.1} \) है.
In simple words: हमने ताँबे के घनत्व, कोर की लंबाई और एकक कोष्ठिका में परमाणुओं की संख्या का उपयोग करके उसका परमाण्विक द्रव्यमान ज्ञात किया.
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, सभी इकाइयों को \( \text{cm} \) में बदलना महत्वपूर्ण है. गणना के दौरान घातांकों को सही ढंग से प्रबंधित करना सुनिश्चित करें.
RBSE Class 12 Chemistry Chapter 1 ठोस अवस्था निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित में विभेद कीजिए –
(i) षट्कोणीय और एकनताक्ष एकक कोष्ठिका।
(ii) फलक केन्द्रित और अन्त्य केन्द्रित एकक कोष्ठिका।
Answer:
(i) षट्कोणीय एकक कोष्ठिका एवं एकनताक्ष एकक कोष्ठिका में अंतर:
| गुण | षट्कोणीय एकक कोष्ठिका | एकनताक्ष एकक कोष्ठिका |
|---|---|---|
| अक्षीय लम्बाई | \( \text{a = b} \ne \text{c} \) | \( \text{a} \ne \text{b} \ne \text{c} \) |
| अक्षीय कोण | \( \alpha = \beta = 90^\circ, \gamma = 120^\circ \) | \( \alpha = \gamma = 90^\circ, \beta \ne 90^\circ \) |
| उदाहरण | ग्रेफाइट, जिंक ऑक्साइड (ZnO), कैडमियम सल्फाइड (CdS) | गन्धक (Sulfur), \( \text{Na}_2\text{SO}_4 \cdot \text{10H}_2\text{O} \) |
(ii) फलक केन्द्रित एकक कोष्ठिका एवं अन्त्य केन्द्रित एकक कोष्ठिका में अंतर:
| गुण | फलक केन्द्रित एकक कोष्ठिका | अंत्य केन्द्रित एकक कोष्ठिका |
|---|---|---|
| (i) जालक बिन्दुओं की स्थिति | सभी कोनों पर तथा प्रत्येक फलक के केन्द्रों पर। | सभी कोनों पर तथा दोनों अन्त्य फलकों के केन्द्र पर। |
| (ii) प्रति एकक कोष्ठिका परमाणुओं की संख्या | \( 8 \times \frac{1}{8} + 6 \times \frac{1}{2} = 1 + 3 = 4 \) | \( 8 \times \frac{1}{8} + 2 \times \frac{1}{2} = 1 + 1 = 2 \) |
| (iii) चित्र |
In simple words: हमने क्रिस्टल कोष्ठिकाओं के प्रकारों के बीच उनके किनारे की लंबाई, कोण और परमाणुओं की संख्या के आधार पर अंतर समझाया. फलक-केन्द्रित में अधिक परमाणु होते हैं और कण सभी फलकों पर होते हैं, जबकि अन्त्य-केन्द्रित में केवल ऊपर और नीचे के फलकों पर होते हैं.
🎯 Exam Tip: इन दोनों प्रकार की एकक कोष्ठिकाओं के बीच के मुख्य अंतरों को याद रखने के लिए उनके परमाणु व्यवस्था को ध्यान में रखें. परमाणुओं की संख्या की गणना में कोनों और फलकों के योगदान को सही ढंग से जोड़ना सुनिश्चित करें.
Question 2. स्पष्ट कीजिए कि एक घनीय एकक कोष्ठिका के -(i) कोने और (ii) अन्तःकेन्द्र पर उपस्थित परमाणु का कितना भाग सन्निकट कोष्ठिका से सहभाजित होता है ?
Answer:
(i) एक घनीय एकक कोष्ठिका के कोने पर स्थित प्रत्येक परमाणु को आठ दूसरी कोष्ठिकाएँ साझा करती हैं. इसका मतलब है कि एक परमाणु का \( \frac{1}{8} \) वाँ भाग ही उस खास एकक कोष्ठिका से संबंधित होता है. चार कोष्ठिकाएँ एक ही परत में होती हैं और चार ऊपर या नीचे की परत में होती हैं.
(ii) एक परमाणु जो एकक कोष्ठिका के ठीक केंद्र में होता है (अन्तःकेन्द्र), वह पूरी तरह से उसी कोष्ठिका से संबंधित होता है. उसे कोई दूसरी कोष्ठिका साझा नहीं करती है. यह परमाणु पूरी तरह से उस एकक कोष्ठिका का हिस्सा होता है.
In simple words: कोने वाला परमाणु आठ कोष्ठिकाओं के साथ साझा होता है, इसलिए एक कोष्ठिका को \( \frac{1}{8} \) भाग मिलता है. केंद्र वाला परमाणु किसी के साथ साझा नहीं होता, इसलिए वह पूरी तरह से एक ही कोष्ठिका का होता है.
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि कोने, किनारे, फलक और केंद्र में स्थित परमाणुओं का एकक कोष्ठिका में कितना योगदान होता है, क्योंकि यह क्रिस्टल संरचना की गणनाओं के लिए आधार है.
Question 3. जब एक ठोस को गर्म किया जाता है तो किस प्रकार का दोष उत्पन्न हो सकता है ? इससे कौन-से भौतिक गुण प्रभावित होते हैं और किस प्रकार ?
Answer:
जब एक ठोस को गर्म किया जाता है, तो उसमें रिक्तिको दोष (vacancy defect) उत्पन्न हो जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गर्म करने पर कुछ जालक स्थल खाली हो जाते हैं. इस दोष के कारण पदार्थ का घनत्व कम हो जाता है, क्योंकि कुछ परमाणु या आयन क्रिस्टल को पूरी तरह से छोड़कर चले जाते हैं. एक और बात यह है कि रिक्तिको दोष से सामग्री का आयतन थोड़ा बढ़ जाता है क्योंकि परमाणुओं के बीच की दूरी भी बढ़ती है.
In simple words: जब ठोस गर्म होता है, तो कुछ जगहें खाली हो जाती हैं, जिससे रिक्तिको दोष होता है. इससे ठोस का घनत्व कम हो जाता है.
🎯 Exam Tip: रिक्तिको दोष ठोस के घनत्व को घटाता है, क्योंकि द्रव्यमान समान रहता है लेकिन आयतन बढ़ जाता है. यह दोष तापमान बढ़ने पर अधिक होता है.
Question 5. यदि आपको किसी अज्ञात धातु का घनत्व एवं एकक कोष्ठिका की विमाएँ ज्ञात हैं तो क्या आप उसके परमाण्विक द्रव्यमान की गणना कर सकते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
Answer:
हाँ, यदि हमें किसी अज्ञात धातु का घनत्व \( \text{(d)} \) और एकक कोष्ठिका की विमाएँ (कोर की लम्बाई \( \text{a} \)) ज्ञात हों, तो हम उसके परमाण्विक द्रव्यमान \( \text{(M)} \) की गणना कर सकते हैं. इसके लिए हम निम्न सूत्र का उपयोग करते हैं:
\[ \text{d} = \frac{\text{Z} \times \text{M}}{\text{a}^3 \times \text{N_A}} \]
यहाँ,
\( \text{d} \) = एकक कोष्ठिका का घनत्व
\( \text{Z} \) = प्रति एकक कोष्ठिका परमाणुओं की संख्या (यह क्रिस्टल संरचना के प्रकार, जैसे bcc, fcc, आदि पर निर्भर करता है)
\( \text{M} \) = परमाण्विक द्रव्यमान
\( \text{a} \) = एकक कोष्ठिका की कोर लम्बाई
\( \text{N_A} \) = आवोगाद्रो संख्या (\( \text{6.022} \times \text{10}^{23} \text{ mol}^{-1} \))
इस सूत्र को \( \text{M} \) के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर:
\[ \text{M} = \frac{\text{d} \times \text{a}^3 \times \text{N_A}}{\text{Z}} \]
इस सूत्र से, यदि हमें \( \text{d} \), \( \text{a} \), और \( \text{Z} \) (जो संरचना से पता चलता है) ज्ञात हों, तो हम अज्ञात धातु के परमाण्विक द्रव्यमान \( \text{M} \) की गणना आसानी से कर सकते हैं. इस प्रकार, यह सूत्र अज्ञात धातु के परमाण्विक द्रव्यमान को निर्धारित करने में मदद करता है.
In simple words: हाँ, अगर हमें किसी धातु का घनत्व और उसकी इकाई कोशिका का आकार पता हो, तो हम उसके परमाण्विक द्रव्यमान की गणना कर सकते हैं. इसके लिए एक खास सूत्र का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें इन सभी मानों को डालकर उत्तर निकाला जा सकता है.
🎯 Exam Tip: घनत्व सूत्र \( \text{d} = \frac{\text{Z} \times \text{M}}{\text{a}^3 \times \text{N_A}} \) रसायन विज्ञान में बहुत महत्वपूर्ण है. इसे याद रखें और इसके सभी घटकों को समझें ताकि आप विभिन्न अज्ञात मानों की गणना कर सकें.
Question 6. निम्नलिखित युगलों के पदों (शब्दों) में कैसे विभेद करोगे ?
(i) षट्कोणीय निविड संकुलन एवं घनीय निविड संकुलन
(ii) क्रिस्टल जालक एवं एकक कोष्ठिका ?
(iii) चतुष्फलकीय रिक्ति एवं अष्टफलकीय रिक्ति ?
Answer:
(i) षट्कोणीय निविड संकुलन एवं घनीय निविड संकुलन में अंतर:
| विशेषता | षट्कोणीय निविड संकुलन (hcp) | घनीय निविड संकुलन (ccp) |
|---|---|---|
| व्यवस्था का क्रम | \( \text{ABABAB...} \) प्रकार की परत व्यवस्था। | \( \text{ABCABC...} \) प्रकार की परत व्यवस्था। |
| समन्वय संख्या | 12 | 12 |
| संकुलन क्षमता | 74% | 74% |
| उदाहरण | मैग्नीशियम (Mg), जिंक (Zn) | ताँबा (Cu), चाँदी (Ag), सोना (Au) |
(ii) क्रिस्टल जालक एवं एकक कोष्ठिका में अंतर:
| क्रिस्टल जालक (Crystal Lattice) | एकक कोष्ठिका (Unit Cell) |
|---|---|
| यह क्रिस्टलीय ठोसों में कणों का नियमित और बार-बार दोहराया जाने वाला पैटर्न है. | यह क्रिस्टल जालक का सबसे छोटा भाग है. |
| इसमें कणों की त्रिविमीय व्यवस्था को बिंदुओं के रूप में दिखाया जाता है. | इसे अलग-अलग दिशाओं में बार-बार दोहराने पर पूरा क्रिस्टल जालक बनता है. |
| कुल 14 प्रकार के त्रिविमीय जालक संभव हैं (ब्रेवे जालक). | यह जालक के मूलभूत निर्माण खंड के रूप में कार्य करता है. |
(iii) चतुष्फलकीय रिक्ति एवं अष्टफलकीय रिक्ति में अंतर:
| चतुष्फलकीय रिक्ति (Tetrahedral Void) | अष्टफलकीय रिक्ति (Octahedral Void) |
|---|---|
| 1. इसका निर्माण चार गोलों के केंद्र को मिलाने पर होता है. | 1. इसका निर्माण छह गोलों के केंद्र को मिलाने पर होता है. |
| 2. चतुष्फलकीय रिक्ति की त्रिज्या (r) और परमाणुओं की त्रिज्या (R) का अनुपात \( \frac{\text{r}}{\text{R}} = \text{0.225} \) होता है. | 2. अष्टफलकीय रिक्ति की त्रिज्या (r) और परमाणुओं की त्रिज्या (R) का अनुपात \( \frac{\text{r}}{\text{R}} = \text{0.414} \) होता है. |
| 3. आकृति: | 3. आकृति: |
In simple words: हमने विभिन्न क्रिस्टल संरचनाओं और रिक्तियों के प्रकारों के बीच अंतर समझाया. hcp और ccp दोनों में संकुलन क्षमता समान होती है, लेकिन परमाणुओं की व्यवस्था अलग होती है. क्रिस्टल जालक एक बड़ा पैटर्न है, जबकि एकक कोष्ठिका उसका सबसे छोटा दोहराया जाने वाला हिस्सा है. चतुष्फलकीय रिक्ति में चार गोले होते हैं, जबकि अष्टफलकीय रिक्ति में छह गोले होते हैं.
🎯 Exam Tip: निविड संकुलन, क्रिस्टल जालक और रिक्तियों के प्रकारों को उदाहरणों और आकृतियों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है. त्रिज्या अनुपात का मान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.
Question 7. निम्नलिखित के लिए धातु के क्रिस्टल में संकुलन क्षमता की गणना कीजिए -
(i) सरल घनीय
Answer:
सरल घनीय (simple cubic) संरचना के लिए संकुलन क्षमता की गणना:
माना कोर की लम्बाई \( \text{a} \) है.
एक सरल घनीय एकक कोष्ठिका में प्रत्येक कोने पर एक परमाणु होता है, और कोने पर स्थित परमाणु का योगदान \( \frac{1}{8} \) होता है. कुल 8 कोने होते हैं.
तो, प्रति एकक कोष्ठिका में परमाणुओं की संख्या \( \text{(Z) = 8} \times \frac{1}{8} = 1 \).
परमाणु की त्रिज्या \( \text{r} \) है. सरल घनीय में, परमाणु एक-दूसरे को छूते हैं, इसलिए \( \text{a = 2r} \).
एक परमाणु का आयतन \( = \frac{4}{3} \pi \text{r}^3 \).
एकक कोष्ठिका का कुल आयतन \( = \text{a}^3 = (2\text{r})^3 = 8\text{r}^3 \).
संकुलन क्षमता का सूत्र:
\[ \text{संकुलन क्षमता} = \frac{\text{एकक कोष्ठिका में परमाणुओं का कुल आयतन}}{\text{एकक कोष्ठिका का कुल आयतन}} \times 100\% \]
\[ = \frac{\text{Z} \times \frac{4}{3} \pi \text{r}^3}{\text{a}^3} \times 100\% \]
\[ = \frac{1 \times \frac{4}{3} \pi \text{r}^3}{(2\text{r})^3} \times 100\% \]
\[ = \frac{\frac{4}{3} \pi \text{r}^3}{8\text{r}^3} \times 100\% \]
\[ = \frac{4\pi}{3 \times 8} \times 100\% \]
\[ = \frac{\pi}{6} \times 100\% \]
\[ = \frac{3.14159}{6} \times 100\% \]
\[ \approx 0.5236 \times 100\% \approx 52.36\% \]
इसलिए, सरल घनीय क्रिस्टल में संकुलन क्षमता लगभग 52.36% होती है. यह दर्शाता है कि लगभग 52.36% स्थान परमाणुओं द्वारा भरा होता है और बाकी रिक्त स्थान होता है.
In simple words: सरल घनीय क्रिस्टल में, परमाणु केवल 52.36% जगह घेरते हैं, बाकी जगह खाली रहती है.
🎯 Exam Tip: संकुलन क्षमता की गणना करते समय, \( \text{Z} \) (प्रति एकक कोष्ठिका परमाणुओं की संख्या) का सही मान, \( \text{a} \) और \( \text{r} \) के बीच का संबंध, और गोले के आयतन का सूत्र याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 8. यदि अष्टफलकीय रिक्ति की त्रिज्या \( \text{r} \) हो तथा निविड़ संकुलन में परमाणुओं की त्रिज्या \( \text{R} \) हो तो \( \text{r} \) एवं \( \text{R} \) में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
Answer:
अष्टफलकीय रिक्ति का त्रिज्या अनुपात \( \text{r} \) और परमाणुओं की त्रिज्या \( \text{R} \) के बीच संबंध स्थापित करने के लिए हम एक फलक-केन्द्रित घनीय (fcc) संरचना पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि इसमें अष्टफलकीय रिक्तियाँ होती हैं.
माना परमाणुओं की त्रिज्या \( \text{'R'} \) और रिक्ति की त्रिज्या \( \text{'r'} \) है. एकक कोष्ठिका की कोर लम्बाई \( \text{'a'} \) है.
अष्टफलकीय रिक्ति को चित्र में दिखाए गए गोलों के केंद्र में दिखाया गया है. रिक्ति के ऊपर और नीचे वाले गोले चित्र में नहीं दिखाए गए हैं.
एक अष्टफलकीय रिक्ति एकक कोष्ठिका के किनारों के केंद्र में और एकक कोष्ठिका के केंद्र में होती है.
किनारे के केंद्र पर स्थित रिक्ति के लिए, दो परमाणु और रिक्ति एक सीध में होते हैं. तो, परमाणु \( \text{A} \) और \( \text{C} \) और रिक्ति का केंद्र \( \text{B} \) एक सीधी रेखा में हैं.
\( \text{AC} = \text{R} + \text{r} + \text{R} = 2\text{R} + \text{r} \).
यहाँ \( \text{AC} \) किनारे के केंद्र पर स्थित रिक्ति के माध्यम से गुजरता है.
एक फलक पर स्थित परमाणुओं के लिए, जैसा कि चित्र में है, \( \text{ABC} \) एक समकोण त्रिभुज है. पाइथागोरस के नियम से:
\( \text{AC}^2 = \text{AB}^2 + \text{BC}^2 \)
\( \text{AC} = \text{a} \) (एक फलक के किनारे की लंबाई)
अष्टफलकीय रिक्ति फलक के केंद्र पर होती है, तो \( \text{AC} \) विकर्ण के केंद्र से गुजरता है. एक फलक के विकर्ण पर, फलक के केंद्र में स्थित परमाणु (जो रिक्ति है) और दो कोने वाले परमाणु एक दूसरे को छूते हैं.
फलक के विकर्ण की लंबाई \( \text{a}\sqrt{2} \) होती है.
फलक-केन्द्रित घनीय (fcc) संरचना में, फलक के विकर्ण पर स्थित परमाणु एक-दूसरे को छूते हैं, इसलिए \( \text{4R = a}\sqrt{2} \).
\( \text{a} = \frac{4\text{R}}{\sqrt{2}} = 2\sqrt{2}\text{R} \).
अब, एक अष्टफलकीय रिक्ति किनारे के मध्य में स्थित होती है. किनारे की लंबाई \( \text{a} \) है.
किनारे के दोनों सिरों पर परमाणु होते हैं, और बीच में रिक्ति होती है.
तो, किनारे की लंबाई \( \text{a} = \text{R} + 2\text{r} + \text{R} = 2\text{R} + 2\text{r} \).
हमने \( \text{a} = 2\sqrt{2}\text{R} \) प्राप्त किया है.
इसलिए, \( 2\text{R} + 2\text{r} = 2\sqrt{2}\text{R} \).
दोनों तरफ \( 2\text{R} \) से भाग देने पर (या \( 2\text{R} \) को दाईं ओर ले जाने पर):
\( 2\text{r} = 2\sqrt{2}\text{R} - 2\text{R} \)
\( 2\text{r} = 2\text{R}(\sqrt{2} - 1) \)
\( \text{r} = \text{R}(\sqrt{2} - 1) \)
\( \text{r} = \text{R}(1.414 - 1) \)
\( \text{r} = \text{R}(0.414) \)
\[ \frac{\text{r}}{\text{R}} = 0.414 \]
इस प्रकार, अष्टफलकीय रिक्ति की त्रिज्या \( \text{r} \) और परमाणुओं की त्रिज्या \( \text{R} \) के बीच का संबंध \( \frac{\text{r}}{\text{R}} = 0.414 \) है.
In simple words: चतुष्फलकीय छिद्र चार परमाणुओं से घिरा एक खाली स्थान है। अष्टफलकीय छिद्र छह परमाणुओं से घिरा एक खाली स्थान है।
🎯 Exam Tip: रिक्तियों की पहचान और गणना क्रिस्टल संरचना को समझने और यौगिकों के सूत्र निर्धारित करने के लिए आवश्यक है।
Question 12. एक क्रिस्टलीय ठोस का सूत्र AB2O4 है जिसमें ऑक्साइड आयन ccp जालक बनाता है एवं धनायन A सभी चतुष्फलकीय रिक्तियों में अध्यासित है तथा धनायन B अष्टफलकीय रिक्तियों में भरता है। बताइए कि।
(i) धनायन A चतुष्फलकीय रिक्तियों में कितने प्रतिशत भाग अध्यासित करता है ?
(ii) धनायन B अष्टफलकीय रिक्तियों का कितना प्रतिशत भाग अध्यासित करता है ?
Answer: एक क्रिस्टलीय ठोस \( AB_2O_4 \) में, ऑक्साइड आयन (O) ccp जालक बनाते हैं। ccp संरचना में, यदि प्रभावी ऑक्साइड आयन की संख्या N है, तो चतुष्फलकीय रिक्तियाँ 2N होंगी और अष्टफलकीय रिक्तियाँ N होंगी।
इस दिए गए सूत्र \( AB_2O_4 \) से हम देख सकते हैं कि:
(i) **धनायन A द्वारा चतुष्फलकीय रिक्तियों में भरा गया प्रतिशत:**
सूत्र में A एक है और O चार हैं। यदि O की प्रभावी संख्या 4 है (जैसा कि \( AB_2O_4 \) में), तो चतुष्फलकीय रिक्तियाँ \( 2 \times 4 = 8 \) होंगी। A, 1 चतुष्फलकीय रिक्ति में है (जैसा कि सूत्र के अनुपात से पता चलता है)।
अतः, A द्वारा भरी गई चतुष्फलकीय रिक्तियों का प्रतिशत \( = \frac{\text{1 A आयन}}{\text{8 चतुष्फलकीय रिक्तियाँ}} \times 100 = 12.5\% \).
(ii) **धनायन B द्वारा अष्टफलकीय रिक्तियों में भरा गया प्रतिशत:**
ऑक्साइड आयनों की प्रभावी संख्या 4 होने पर, अष्टफलकीय रिक्तियाँ भी 4 होंगी। सूत्र में B दो हैं।
अतः, B द्वारा भरी गई अष्टफलकीय रिक्तियों का प्रतिशत \( = \frac{\text{2 B आयन}}{\text{4 अष्टफलकीय रिक्तियाँ}} \times 100 = 50\% \).
यह बताता है कि इस यौगिक में आयन किस प्रकार रिक्तियों को भरते हैं।
In simple words: (i) A आयन 8 चतुष्फलकीय रिक्तियों में से 1 को भरते हैं, इसलिए यह 12.5% है।
(ii) B आयन 4 अष्टफलकीय रिक्तियों में से 2 को भरते हैं, इसलिए यह 50% है।
🎯 Exam Tip: रिक्तियों में आयनों के भरने का प्रतिशत क्रिस्टल की संरचना और आयनिक यौगिकों के सूत्र को समझने में मदद करता है।
Question 13. एक ठोस में ऑक्साइड आयन घनीय निविड संकुलित जालक में उपस्थित है, धनायन A केवल 1/6 वां भाग चतुष्फलकीय रिक्ति को अध्यासित करता है, धनायन B केवल 1/3 वाँ भाग अष्टफलकीय रिक्ति को अध्यासित करता है। यौगिक का सूत्र बताइए।
Answer: एक ठोस में, ऑक्साइड आयन (O) घनीय निविड संकुलन (ccp) जालक बनाते हैं। यदि प्रति इकाई सेल में ऑक्साइड आयनों की संख्या को N मानें, तो चतुष्फलकीय रिक्तियाँ 2N होंगी और अष्टफलकीय रिक्तियाँ N होंगी।
धनायन A, 2N चतुष्फलकीय रिक्तियों का 1/6वाँ हिस्सा भरता है, तो A आयनों की संख्या \( \frac{1}{6} \times 2N = \frac{N}{3} \) होगी।
धनायन B, N अष्टफलकीय रिक्तियों का 1/3वाँ हिस्सा भरता है, तो B आयनों की संख्या \( \frac{1}{3} \times N = \frac{N}{3} \) होगी।
अब, आयनों का अनुपात A:B:O = \( \frac{N}{3} : \frac{N}{3} : N \) है।
सभी को N से भाग देने पर, अनुपात \( \frac{1}{3} : \frac{1}{3} : 1 \) होता है।
पूरे संख्या अनुपात में बदलने के लिए सभी को 3 से गुणा करने पर, 1:1:3 मिलता है।
अतः, यौगिक का सूत्र \( ABO_3 \) है। यह विभिन्न आयनों के संयोजन को दर्शाता है।
In simple words: ऑक्साइड आयन (O) की संख्या N है। A आयन \( \frac{1}{6} \) चतुष्फलकीय रिक्तियों में हैं (\( \frac{N}{3} \))। B आयन \( \frac{1}{3} \) अष्टफलकीय रिक्तियों में हैं (\( \frac{N}{3} \))। इसलिए, यौगिक का सूत्र \( ABO_3 \) है।
🎯 Exam Tip: यौगिक का सूत्र निकालते समय, विभिन्न आयनों द्वारा भरी गई रिक्तियों के आंशिक योगदान को सही ढंग से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
Question 15. लौहचुम्बकत्व अनुचुम्बकत्व से किस प्रकार भिन्न होता है ?
Answer: लौहचुम्बकत्व (Ferromagnetism) एक ऐसा गुण है जिसके कारण कुछ पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र की गैर-मौजूदगी में भी स्थायी रूप से चुंबकित रह सकते हैं। इसके विपरीत, अनुचुम्बकत्व (Paramagnetism) वह गुण है जिसमें पदार्थ केवल बाहरी चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति में ही चुंबकित होते हैं और क्षेत्र हटाने पर अपनी चुंबकत्व शक्ति खो देते हैं। लौहचुंबकीय पदार्थों में डोमेन होते हैं जो स्थायी चुंबकत्व बनाते हैं, जबकि अनुचुंबकीय पदार्थों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं जो अस्थायी चुंबकत्व देते हैं।
In simple words: लौहचुम्बकत्व में पदार्थ हमेशा चुंबक रहता है, भले ही चुंबक हटा दें। अनुचुम्बकत्व में पदार्थ तभी चुंबक होता है जब चुंबक पास हो, हटाते ही वह अचुंबक हो जाता है।
🎯 Exam Tip: लौहचुम्बकीय पदार्थों का उपयोग स्थायी चुंबक बनाने में होता है, जबकि अनुचुम्बकीय पदार्थ केवल चुंबकीय क्षेत्र में आकर्षित होते हैं।
Question 16. क्या हे ता है जब एक लौहचुम्बकीय पदार्थ को उच्च ताप पर गर्म किया जाता है ?
Answer: जब एक लौहचुम्बकीय पदार्थ (ferromagnetic substance) को उसके क्यूरी तापमान (Curie temperature) से अधिक तापमान पर गर्म किया जाता है, तो यह अपनी लौहचुम्बकीय प्रकृति खो देता है और अनुचुम्बकीय पदार्थ (paramagnetic substance) में बदल जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उच्च तापमान पर परमाणुओं के चुंबकीय डोमेन अपनी नियमित व्यवस्था खो देते हैं और बेतरतीब ढंग से संरेखित हो जाते हैं, जिससे कुल चुंबकीय आघूर्ण खत्म हो जाता है।
In simple words: लौहचुम्बकीय पदार्थ को बहुत गर्म करने पर वह अनुचुम्बकीय बन जाता है, क्योंकि उसके चुंबकीय डोमेन अपनी व्यवस्था खो देते हैं।
🎯 Exam Tip: क्यूरी तापमान वह विशिष्ट तापमान है जिस पर लौहचुम्बकीय पदार्थ अनुचुम्बकीय हो जाता है।
Question 17. फेरीचुम्बकत्व को परिभाषित कीजिए।
Answer: फेरीचुम्बकत्व (Ferrimagnetism) एक ऐसी चुंबकीय गुणधर्म है जिसमें किसी पदार्थ के चुंबकीय डोमेनों का संरेखण समानांतर (parallel) और प्रति-समानांतर (anti-parallel) दिशाओं में होता है, लेकिन उनकी ताकत असमान होती है। इसके कारण एक शुद्ध चुंबकीय आघूर्ण बचता है, लेकिन यह लौहचुम्बकीय पदार्थों जितना मजबूत नहीं होता। ऐसे पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र द्वारा लौहचुम्बकीय पदार्थों की तुलना में कमजोर रूप से आकर्षित होते हैं। उदाहरणों में मैग्नेटाइट (\( Fe_3O_4 \)) और कुछ फेराइट जैसे \( MgFe_2O_4 \) और \( ZnFe_2O_4 \) शामिल हैं।
In simple words: फेरीचुम्बकत्व तब होता है जब पदार्थ के चुंबकीय डोमेन उल्टी दिशा में होते हैं, लेकिन बराबर नहीं, जिससे वह थोड़ा चुंबकित रहता है।
🎯 Exam Tip: फेरीचुम्बकीय पदार्थ का उपयोग चुंबकीय रिकॉर्डिंग मीडिया और माइक्रोवेव उपकरणों में होता है।
Question 18. प्रति लौहचुम्बकीय पदार्थ तथा लघु लौहचुम्बकीय पदार्थ में अन्तर दीजिए -
Answer: प्रति लौहचुम्बकीय (Antiferromagnetic) और लघु लौहचुम्बकीय (Ferrimagnetic) पदार्थ चुंबकीय गुणों में भिन्न होते हैं।
**प्रति लौहचुम्बकीय पदार्थ:** इन पदार्थों में चुंबकीय डोमेन एक-दूसरे के विपरीत (एंटी-पैरेलल) दिशा में संरेखित होते हैं और उनकी ताकत बराबर होती है। इस वजह से उनका कुल चुंबकीय आघूर्ण शून्य हो जाता है। उदाहरण के लिए, MnO और MnO2।
**लघु लौहचुम्बकीय पदार्थ:** इन पदार्थों में भी चुंबकीय डोमेन समानांतर और प्रति-समानांतर दोनों दिशाओं में संरेखित होते हैं, लेकिन विपरीत डोमेनों की ताकत बराबर नहीं होती। इसलिए, इनका कुछ कुल चुंबकीय आघूर्ण बचा रहता है, हालांकि यह लौहचुम्बकीय पदार्थों जितना मजबूत नहीं होता। उदाहरण के लिए, \( Fe_3O_4 \) (मैग्नेटाइट)।
| प्रति लौहचुम्बकीय पदार्थ | लघु लौहचुम्बकीय पदार्थ |
|---|---|
| 1. इन पदार्थों का चुम्बकीय आघूर्ण शून्य होता है जबकि इन पदार्थों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं। | 1. इन पदार्थों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण प्रबल चुम्बकत्व की अपेक्षा की जाती है परन्तु वास्तव में चुम्बकत्व कम होता है। |
| 2. इसमें इलेक्ट्रॉनों का समानान्तर तथा प्रति समानान्तर चुम्बकीय आघूर्ण एक-दूसरे को प्रतिसंतुलित कर देता है। | 2. इसमें चुम्बकीय आघूर्ण समानान्तर एवं प्रति- समानान्तर इस प्रकार संयोजित रहते हैं कि पदार्थ में चुम्बकीय आघूर्ण रहें। |
| उदाहरण - MnO, MnO2 | उदाहरण - Fe3O4 |
| 3. \( \uparrow\downarrow\uparrow\downarrow\uparrow\downarrow\uparrow\downarrow \) | 3. \( \uparrow\uparrow\downarrow\uparrow\uparrow\downarrow\uparrow\uparrow \) |
In simple words: प्रति लौहचुम्बकीय में डोमेन एक-दूसरे को पूरी तरह रद्द कर देते हैं, जिससे कोई चुंबकत्व नहीं रहता। लघु लौहचुम्बकीय में डोमेन एक-दूसरे को पूरी तरह रद्द नहीं कर पाते, जिससे थोड़ा चुंबकत्व बचा रहता है।
🎯 Exam Tip: दोनों पदार्थों में चुंबकीय डोमेनों की व्यवस्था महत्वपूर्ण है, लेकिन शुद्ध चुंबकीय आघूर्ण की उपस्थिति उन्हें अलग करती है।
Question 20. आयनिक ठोसों की प्रकृति के आधार पर फेंकेल दोष एवं शॉट्की दोष की तुलना कीजिये।
Answer: आयनिक ठोसों में दो मुख्य प्रकार के दोष होते हैं - शॉट्की दोष और फ्रेंकेल दोष, जो उनकी प्रकृति और आयनों के आकार पर निर्भर करते हैं।
**शॉट्की दोष:**
1. यह दोष उन आयनिक यौगिकों में पाया जाता है जहाँ धनायन और ऋणायन के आकार लगभग एक जैसे होते हैं।
2. यह उन ठोसों में अधिक होता है जिनकी समन्वय संख्या (coordination number) बहुत अधिक होती है।
**फ्रेंकेल दोष:**
1. यह दोष उन आयनिक यौगिकों में होता है जहाँ धनायन का आकार ऋणायन की तुलना में काफी छोटा होता है।
2. यह उन ठोसों में पाया जाता है जिनकी समन्वय संख्या कम होती है।
| शॉट्की दोष | फ्रेंकेल दोष |
|---|---|
| 1. इस प्रकार के दोष प्रदर्शित करने वाले यौगिकों के धनायन और ऋणायन के आकार समान होते है। | 1. इस प्रकार के दोष प्रदर्शित करने वाले यौगिकों के धनायन छोटे परन्तु ऋणायन बड़े होते हैं। |
| 2. यह आयनों की उच्च उपसहसंयोजन संख्या वाले ठोसों में पाया जाता है। | 2. यह आयनों की निम्न उपसहसंयोजक संख्या वाले ठोसों में पाया जाता है। |
In simple words: शॉट्की दोष में आयनों का आकार बराबर होता है, और यह ज़्यादा समन्वय संख्या वाले ठोसों में होता है। फ्रेंकेल दोष में धनायन छोटा होता है और यह कम समन्वय संख्या वाले ठोसों में होता है।
🎯 Exam Tip: शॉट्की दोष से घनत्व में कमी आती है, जबकि फ्रेंकेल दोष से घनत्व अप्रभावित रहता है।
RBSE Class 12 Chemistry Chapter 1 ठोस अवस्था विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 1. सरल घनीय धातु के क्रिस्टल में, जब गोले (परमाणु) एक-दूसरे के संपर्क में होते हैं, तो उसकी संकुलन क्षमता की गणना कीजिये।
Answer: सरल घनीय संरचना में, परमाणु घन के कोनों पर स्थित होते हैं और एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं।
कोर की लंबाई (a) = \( 2r \) (जहाँ r परमाणु की त्रिज्या है)।
प्रति इकाई सेल परमाणुओं की संख्या (Z) = 1 (8 कोने \( \times \frac{1}{8} \))।
एक परमाणु का आयतन = \( \frac{4}{3}\pi r^3 \)।
इकाई सेल का आयतन = \( a^3 = (2r)^3 = 8r^3 \)।
संकुलन क्षमता = \( \frac{\text{एक परमाणु का आयतन}}{\text{इकाई सेल का आयतन}} \times 100 \)
\( = \frac{\frac{4}{3}\pi r^3}{8r^3} \times 100 \)
\( = \frac{4\pi}{3 \times 8} \times 100 \)
\( = \frac{\pi}{6} \times 100 \)
\( \approx 0.5236 \times 100 = 52.36\% \)
सरल घनीय धातु क्रिस्टल में संकुलन क्षमता लगभग 52.36% होती है। इसका मतलब है कि क्रिस्टल का लगभग आधा आयतन परमाणुओं द्वारा घेरा जाता है।
In simple words: सरल घनीय संरचना में, संकुलन क्षमता निकालने के लिए एक परमाणु के आयतन को इकाई सेल के कुल आयतन से भाग देते हैं और 100 से गुणा करते हैं। यह लगभग 52.36% होती है।
🎯 Exam Tip: संकुलन क्षमता की गणना करते समय, इकाई सेल में प्रभावी परमाणुओं की संख्या और परमाणु त्रिज्या (r) और कोर लंबाई (a) के बीच संबंध को सही ढंग से पहचानना महत्वपूर्ण है।
संकुलन क्षमता (Packing Efficiency)
किसी भी क्रिस्टल जालक में उपस्थित कण क्रिस्टल जालक के कुल आयतन का जितना भाग घेरते हैं, उसे क्रिस्टल जालक की संकुलन क्षमता (packing efficiency) कहा जाता है। संकुलन क्षमता को हम निम्न सूत्र के द्वारा निकाल सकते हैं –
संकुलन क्षमता = \( \frac{\text{क्रिस्टल जालक में कणों या गोलों का आयतन}}{\text{क्रिस्टल जालक का कुल आयतन}} \)
% संकुलन क्षमता = \( \frac{\text{क्रिस्टल जालक में कणों या गोलों का आयतन}}{\text{क्रिस्टल जालक का कुल आयतन}} \times 100 \)
Question 2. षट्कोणीय निकटस्थ संकुलन (hcp) का वर्णन कीजिए।
Answer: षट्कोणीय निकटस्थ संकुलन (hcp) एक प्रकार की 3D पैकिंग है जहाँ गोले इस तरह व्यवस्थित होते हैं कि वे अधिकतम स्थान घेरते हैं और खाली जगह कम से कम होती है। इस संरचना में, पहली परत को A कहा जाता है। दूसरी परत (B) पहली परत के खाली स्थानों में रखी जाती है। तीसरी परत फिर पहली परत (A) के ठीक ऊपर होती है, जिससे ABAB प्रकार की व्यवस्था बनती है। इसमें प्रत्येक गोला 12 अन्य गोलों के संपर्क में होता है (समन्वय संख्या 12)। hcp संरचना की संकुलन क्षमता 74% होती है।
In simple words: hcp एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ परमाणु ABAB पैटर्न में पैक होते हैं। हर परमाणु 12 पड़ोसियों से घिरा होता है, और यह कुल जगह का 74% भरता है।
🎯 Exam Tip: hcp और ccp दोनों संरचनाओं की संकुलन क्षमता 74% होती है, जो उच्च सघनता को दर्शाती है।
Question 3. घनीय निकटस्थ संकुलन (ccp) का वर्णन कीजिए।
Answer: घनीय निकटस्थ संकुलन (ccp) या फलक-केन्द्रित घनीय (fcc) संरचना एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ परमाणु अधिकतम स्थान घेरते हैं। इस पैकिंग में, परमाणु तीन परतों में व्यवस्थित होते हैं जिन्हें ABCABC पैटर्न कहा जाता है। पहली परत (A) के खाली स्थानों पर दूसरी परत (B) रखी जाती है, और तीसरी परत (C) को उन खाली स्थानों में रखा जाता है जो न तो A के ऊपर और न ही B के ऊपर होते हैं। इस संरचना में, प्रत्येक परमाणु 12 अन्य परमाणुओं के संपर्क में होता है, यानी समन्वय संख्या 12 होती है।
ccp (fcc) संरचना में संकुलन क्षमता की गणना निम्न प्रकार से की जाती है:
परमाणु की त्रिज्या = \( r \)
एकक कोष्ठिका की कोर (edge या किनारे) की लम्बाई = \( a \)
एक गोले का आयतन = \( \frac{4}{3}\pi r^3 \)
चूँकि fcc संरचना में प्रति इकाई सेल में 4 परमाणु होते हैं, तो 4 गोलों का आयतन \( = 4 \times \frac{4}{3}\pi r^3 = \frac{16}{3}\pi r^3 \)
ABC त्रिभुज में, पाइथागोरस प्रमेय से:
\( AC^2 = AB^2 + BC^2 = a^2 + a^2 = 2a^2 \)
\( \implies AC = a\sqrt{2} \)
यदि हम AC को देखें, तो इसमें गोले की व्यवस्था निम्न प्रकार से होती है:
\( AC = 4r \)
\( \implies a\sqrt{2} = 4r \)
\( \implies a = \frac{4r}{\sqrt{2}} \)
घन का आयतन \( = a^3 = \left(\frac{4r}{\sqrt{2}}\right)^3 = \frac{64r^3}{2\sqrt{2}} = \frac{32r^3}{\sqrt{2}} = 16\sqrt{2}r^3 \)
संकुलन क्षमता \( = \frac{\text{क्रिस्टल जालक में उपस्थित कणों का आयतन}}{\text{क्रिस्टल जालक या एकक कोष्ठिका का कुल आयतन}} \times 100 \)
\( = \frac{\frac{16}{3}\pi r^3}{16\sqrt{2}r^3} \times 100 \)
\( = \frac{\pi}{3\sqrt{2}} \times 100 \)
\( = \frac{3.14159}{3 \times 1.414} \times 100 \approx 74\% \)
अतः, ccp/fcc संरचना की संकुलन क्षमता लगभग 74% होती है।
In simple words: ccp एक 3D पैकिंग है जहाँ परमाणु ABCABC पैटर्न में होते हैं। हर परमाणु 12 पड़ोसियों से जुड़ा होता है। इसकी संकुलन क्षमता 74% होती है, जो उच्च दक्षता दिखाती है।
🎯 Exam Tip: ccp और fcc एक ही प्रकार की संकुलन व्यवस्था को दर्शाते हैं, जहाँ गोले की पैकिंग दक्षता 74% होती है, और 26% रिक्तिका का आयतन होता है।
Question 4. निविड संकुलित जालक में चतुष्फलकीय एवं अष्टफलकीय छिद्र क्या हैं? इन छिद्रों की त्रिज्या संकुलित धातु परमाणु गोलों की त्रिज्या से किस प्रकार सम्बन्धित है?
Answer: ठोसों में परमाणु या आयन बहुत पास-पास जमे होते हैं, लेकिन उनके बीच कुछ खाली जगह रह जाती है। इसी खाली जगह को 'रिक्ति' या 'अन्तराकाशी स्थल' कहते हैं। ये रिक्तियाँ दो मुख्य प्रकार की होती हैं: चतुष्फलकीय रिक्ति और अष्टफलकीय रिक्ति।
चतुष्फलकीय रिक्ति वह खाली जगह है जो चार परमाणुओं के बीच बनती है। इसमें तीन परमाणु एक ही परत में होते हैं और चौथा परमाणु उनके ऊपर रखा होता है। इस रिक्ति की त्रिज्या (r) और परमाणुओं की त्रिज्या (R) के बीच का अनुपात लगभग \( r/R = 0.225 \) होता है।
अष्टफलकीय रिक्ति वह खाली जगह है जो छह परमाणुओं के बीच बनती है। इसमें तीन परमाणु एक परत में होते हैं और तीन परमाणु दूसरी परत में इस तरह से होते हैं कि वे एक अष्टफलकीय आकृति बनाते हैं। इस रिक्ति की त्रिज्या (r) और परमाणुओं की त्रिज्या (R) के बीच का अनुपात लगभग \( r/R = 0.414 \) होता है। इन खाली जगहों का पता लगाने से हम क्रिस्टल की संरचना को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
In simple words: ठोसों में परमाणुओं के बीच जो खाली जगह बच जाती है, उसे रिक्ति कहते हैं। चार परमाणुओं के बीच बनी खाली जगह 'चतुष्फलकीय रिक्ति' और छह परमाणुओं के बीच बनी खाली जगह 'अष्टफलकीय रिक्ति' कहलाती है। इन रिक्तियों की त्रिज्या परमाणुओं की त्रिज्या से एक खास अनुपात में होती है, जो \( 0.225 \) और \( 0.414 \) है।
🎯 Exam Tip: रिक्तियों को हमेशा उनके निर्माण में शामिल परमाणुओं की संख्या और उनके आकार अनुपात (r/R) से याद रखें; यह ठोसों की संरचना समझने में महत्वपूर्ण होता है।
Question 5. निम्न पर टिप्पणी लिखिए –
(i) फलक केन्द्रित घनीय जालक
(ii) काय केन्द्रित घनीय जालक
(iii) काय केन्द्रित विषमलम्बाक्ष जालक
(iv) आद्य त्रिसमनताक्ष जालक
(v) अन्त:केन्द्रित द्विसमलम्बाक्ष जालक।
Answer: क्रिस्टल जालक विभिन्न प्रकार के होते हैं, जिन्हें ब्रेवे जालक कहते हैं। यहाँ कुछ मुख्य प्रकार दिए गए हैं:
| क्र. सं. | क्रिस्टल समूह | जालकों के प्रकार |
|---|---|---|
| 1. | घनीय | आद्य, अन्त:केन्द्रित, फलक केन्द्रित |
| 2. | द्विसमलबांक्ष | आद्य, अन्त:केन्द्रित |
| 3. | विषमलम्बाक्ष | आद्य, अन्त:केन्द्रित, फलक केन्द्रित, अन्त्य केन्द्रित |
| 4. | एकनताक्ष | आद्य, अन्त्य केन्द्रित |
| 5. | षट्कोणीय | आद्य |
| 6. | त्रिसमनताक्ष | आद्य |
| 7. | त्रिनताक्ष | आद्य |
(i) **फलक केन्द्रित घनीय जालक (Face-Centred Cubic Lattice):** इस जालक में, परमाणु घन के सभी कोनों पर और प्रत्येक फलक के केंद्र पर मौजूद होते हैं। यह घनीय क्रिस्टल प्रणाली का एक प्रकार है।
(ii) **काय केन्द्रित घनीय जालक (Body-Centred Cubic Lattice):** इस जालक में, परमाणु घन के सभी कोनों पर और एक परमाणु घन के ठीक केंद्र में मौजूद होता है। यह भी घनीय क्रिस्टल प्रणाली का एक प्रकार है।
(iii) **काय केन्द्रित विषमलम्बाक्ष जालक (Body-Centred Orthorhombic Lattice):** यह विषमलम्बाक्ष क्रिस्टल प्रणाली का एक प्रकार है। इसमें परमाणु कोनों पर और घन के केंद्र में होते हैं, लेकिन अक्षों की लम्बाई अलग-अलग होती है और कोण 90° के होते हैं।
(iv) **आद्य त्रिसमनताक्ष जालक (Primitive Trigonal Lattice):** इसे रोम्बोहेड्रल भी कहते हैं। इस जालक में परमाणु केवल इकाई सेल के कोनों पर होते हैं। यह त्रिसमनताक्ष क्रिस्टल प्रणाली का एकमात्र ब्रेवे जालक है।
(v) **अन्त:केन्द्रित द्विसमलम्बाक्ष जालक (Body-Centred Tetragonal Lattice):** यह द्विसमलबांक्ष क्रिस्टल प्रणाली का एक प्रकार है। इसमें परमाणु कोनों पर और इकाई सेल के केंद्र में होते हैं। इस प्रकार की संरचना में दो अक्ष समान लम्बाई के और एक अक्ष भिन्न लम्बाई का होता है, और सभी कोण 90° के होते हैं।
In simple words: ये ठोसों के क्रिस्टल में परमाणुओं की अलग-अलग व्यवस्थाएँ हैं। 'फलक केन्द्रित' में कोने और फलक केंद्र पर परमाणु होते हैं, 'काय केन्द्रित' में कोने और शरीर के केंद्र पर, और 'आद्य' में सिर्फ कोनों पर। हर प्रकार की क्रिस्टल प्रणाली में इन व्यवस्थाओं की संख्या तय होती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न क्रिस्टल प्रणालियों और उनमें पाए जाने वाले ब्रेवे जालकों की संरचना को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर उनके परमाणुओं की स्थिति।
Question 6. ठोसों को चालकता के आधार पर किस प्रकार वर्गीकृत किया गया है ? प्रत्येक प्रकार के ठोस की चालकता की व्याख्या कीजिए।
Answer: ठोसों को उनकी विद्युतीय चालकता (बिजली ले जाने की क्षमता) के आधार पर तीन मुख्य भागों में बांटा जा सकता है:
(i) **चालक (Conductors):** ये वे ठोस होते हैं जो बिजली को बहुत आसानी से अपने अंदर से गुजरने देते हैं। धातुओं में, इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं और पूरे पदार्थ में घूम सकते हैं, जिससे वे ठोस और पिघली हुई दोनों अवस्थाओं में बिजली का संचालन करते हैं। तापमान बढ़ने पर चालकों की चालकता थोड़ी कम हो जाती है क्योंकि परमाणुओं के कंपन से इलेक्ट्रॉॉनों के रास्ते में रुकावट आती है। कुछ आयनिक पदार्थ पिघली हुई अवस्था में या घोल में बिजली ले जाते हैं क्योंकि उनके आयन (चार्ज वाले कण) स्वतंत्र हो जाते हैं।
(ii) **रोधक या विद्युतरोधी (Insulators):** ये वे ठोस होते हैं जो बिजली को अपने अंदर से बिल्कुल भी नहीं गुजरने देते। इनके परमाणुओं में इलेक्ट्रॉन कसकर बंधे होते हैं और हिल नहीं सकते। इनकी चालकता बहुत कम होती है (लगभग 10-20 से 10-10 ओम-मीटर-1)। उदाहरण के लिए, सल्फर, लकड़ी, प्लास्टिक और रबर बिजली के रोधक हैं।
(iii) **अर्द्धचालक (Semiconductors):** ये वे ठोस होते हैं जिनकी चालकता चालकों और रोधकों के बीच की होती है। ये सामान्य तापमान पर बहुत कम बिजली ले जाते हैं, लेकिन कुछ बदलाव करने पर उनकी चालकता काफी बढ़ सकती है। इनकी चालकता अशुद्धियों (दूसरे पदार्थों को मिलाने) या जालक में मौजूद छोटे दोषों के कारण बदलती है। तापमान बढ़ने पर अर्द्धचालकों की चालकता बढ़ती है क्योंकि अधिक इलेक्ट्रॉन ऊर्जा प्राप्त करके बिजली ले जाने में सक्षम हो जाते हैं।
In simple words: ठोसों को बिजली ले जाने की क्षमता के हिसाब से तीन तरह से बांटा जाता है: चालक (जो आसानी से बिजली ले जाते हैं), रोधक (जो बिजली नहीं ले जाते) और अर्द्धचालक (जो थोड़ी बिजली ले जाते हैं, लेकिन जिन्हें बदला जा सकता है)। धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉन बिजली ले जाते हैं, जबकि रोधकों में इलेक्ट्रॉन बंधे होते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के ठोस की चालकता रेंज और उसके पीछे का मूल कारण (मुक्त इलेक्ट्रॉन या आयन) को स्पष्ट रूप से समझें और याद रखें।
Question 7. स्टॉइकियोमीटीक त्रुटियों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
Answer: क्रिस्टलीय ठोसों में परमाणुओं या आयनों की सही व्यवस्था से हटकर कोई भी कमी या अनियमितता 'दोष' कहलाती है। स्टॉइकियोमीट्री दोष वे दोष होते हैं जहाँ क्रिस्टल की स्टॉइकियोमीट्री (परमाणुओं का अनुपात) दोष के बाद भी वैसी ही रहती है, जैसी आदर्श क्रिस्टल में होती है। यह दोष मुख्य रूप से आयनिक ठोसों में पाए जाते हैं और इनमें धनायनों और ऋणायनों की संख्या बराबर मात्रा में कम या ज्यादा होती है। ये दोष आमतौर पर उच्च तापमान पर बनते हैं जब परमाणु अपनी जगह से हटते हैं। ये चार प्रकार के होते हैं:
(i) **रिक्तिका दोष (Vacancy Defect):** यह दोष तब उत्पन्न होता है जब क्रिस्टल जालक में कुछ परमाणु या आयन अपनी सामान्य जगह (जालक स्थल) से गायब हो जाते हैं। इस कारण क्रिस्टल का घनत्व कम हो जाता है। यह दोष अक्सर ठोस को गर्म करने पर बनता है क्योंकि उच्च तापमान पर कुछ परमाणु अपनी जगह छोड़ देते हैं।
(ii) **अन्तराकाशी दोष (Interstitial Defect):** यह दोष तब उत्पन्न होता है जब कुछ परमाणु या अणु क्रिस्टल जालक में अपनी सामान्य जालक स्थिति के बजाय अन्तराकाशी स्थानों (रिक्तियों) में चले जाते हैं, या जब बाहर से कोई अतिरिक्त परमाणु अन्तराकाशी स्थल में आ जाता है। इस दोष के कारण क्रिस्टल का घनत्व बढ़ जाता है। यह दोष आमतौर पर अन-आयनिक ठोसों में पाया जाता है।
(iii) **फ्रेंकेल दोष (Frenkel Defect):** यह दोष आयनिक ठोसों में होता है जहाँ एक आयन (आमतौर पर छोटा धनायन) अपनी जालक स्थिति को छोड़कर किसी अन्तराकाशी स्थल में चला जाता है। इससे उसकी मूल जगह पर एक रिक्ति (खाली स्थान) बन जाती है। इस दोष के कारण क्रिस्टल का घनत्व नहीं बदलता क्योंकि आयन क्रिस्टल के अंदर ही रहता है। यह उन ठोसों में पाया जाता है जहाँ आयनों के आकार में बहुत अंतर होता है। उदाहरण: ZnS, AgCl, AgBr, Agl।
(iv) **शॉट्की दोष (Schottky Defect):** यह दोष आयनिक ठोसों में होता है जहाँ क्रिस्टल जालक से धनायन और ऋणायन दोनों बराबर संख्या में गायब हो जाते हैं। इससे आयनिक ठोसों की वैद्युत उदासीनता बनी रहती है, लेकिन क्रिस्टल में खाली स्थानों (रिक्तियों) का एक युग्म बन जाता है। इस दोष के कारण क्रिस्टल का घनत्व कम हो जाता है। यह उन ठोसों में पाया जाता है जहाँ धनायन और ऋणायन का आकार लगभग समान होता है और समन्वय संख्या (coordination number) अधिक होती है। उदाहरण: NaCl, KCl, CsCl, AgBr।
**नोट:** AgBr (सिल्वर ब्रोमाइड) फ्रेंकेल और शॉट्की दोनों प्रकार के दोषों को प्रदर्शित करता है। यह एक विशेष मामला है क्योंकि इसके आयन मध्यम आकार के होते हैं, जिससे यह दोनों तरह के दोषों को दिखा सकता है।
In simple words: स्टॉइकियोमीट्री दोषों में, क्रिस्टल में परमाणुओं का अनुपात नहीं बदलता। इनमें रिक्तिका दोष (परमाणु गायब), अन्तराकाशी दोष (अतिरिक्त परमाणु बीच में), फ्रेंकेल दोष (आयन अपनी जगह छोड़ अन्तराकाशी में), और शॉट्की दोष (बराबर संख्या में धनायन और ऋणायन गायब) शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: स्टॉइकियोमीट्री दोषों के प्रकार, उनके कारण, घनत्व पर प्रभाव और उदाहरणों को अच्छी तरह से समझें। फ्रेंकेल दोष में आयन क्रिस्टल के अंदर रहते हैं, जबकि शॉट्की दोष में वे क्रिस्टल से बाहर निकल जाते हैं।
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