RBSE Solutions Class 12 Business Studies Chapter 9 व्यापारिक विधि एवं अनुबन्ध अधिनियम

NCERT Solutions for Class 12 Business Studies: Chapter 09 व्यापारिक विधि एवं अनुबन्ध अधिनियम

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RBSE Class 12 Business Studies Chapter 9 अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. क्या भारतीय अनुबन्ध अधिनियम व्यापारिक विधि का अंग है?
Answer: हाँ, भारतीय अनुबन्ध अधिनियम व्यापारिक विधि का एक हिस्सा है।
In simple words: भारतीय अनुबंध अधिनियम व्यापारिक कानूनों का एक हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि भारतीय अनुबंध अधिनियम व्यापारिक दुनिया में होने वाले समझौतों और व्यवहारों को नियंत्रित करता है, इसलिए यह व्यापारिक कानून का एक महत्वपूर्ण अंग है।

 

Question 2. अनुबन्ध का अर्थ क्या है?
Answer: 'अनुबन्ध' शब्द लैटिन भाषा के 'Contrautum' से आया है, जिसका मतलब 'आपस में मिलना' होता है। अनुबन्ध तब बनता है जब दो या दो से ज़्यादा लोग कोई ऐसा समझौता करते हैं जिससे उनके बीच कानूनी जिम्मेदारियाँ और अधिकार पैदा होते हैं।
In simple words: अनुबन्ध का मतलब है दो या ज़्यादा लोगों के बीच ऐसा समझौता जिससे कानूनी अधिकार और जिम्मेदारियाँ बनती हैं।

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध की परिभाषा में दो मुख्य बातें हैं - 'आपस में मिलना' (सहमत होना) और 'कानूनी दायित्व उत्पन्न करना'।

 

Question 4. व्यर्थ अनुबन्ध क्या है?
Answer: व्यर्थ अनुबन्ध ऐसा समझौता होता है जो शुरू से ही बेकार नहीं होता, बल्कि किसी खास घटना के होने या न होने पर वह बेकार हो जाता है।
In simple words: व्यर्थ अनुबन्ध वह होता है जो शुरुआत में ठीक लगता है, पर बाद में किसी कारण से बेकार हो जाता है।

🎯 Exam Tip: व्यर्थ अनुबन्ध और 'शुरु से व्यर्थ' (void ab initio) अनुबन्ध के बीच का अंतर स्पष्ट रखें; व्यर्थ अनुबन्ध भविष्य में किसी घटना के कारण बेकार होता है।

 

Question 5. क्या सभी ठहराव अनुबन्ध होते हैं?
Answer: सभी ठहराव अनुबन्ध नहीं होते हैं। केवल वही ठहराव अनुबन्ध बनते हैं जो कानूनी रूप से लागू किए जा सकते हैं।
In simple words: नहीं, हर समझौता अनुबन्ध नहीं होता; केवल कानूनी रूप से लागू होने वाले ही अनुबन्ध होते हैं।

🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। सुनिश्चित करें कि आप 'ठहराव' (agreement) और 'अनुबन्ध' (contract) के बीच के अंतर को समझते हैं।

 

Question 6. वैध ठहराव क्या है?
Answer: वैध ठहराव वे होते हैं जिनका उद्देश्य कानूनी होता है, यानी जो गैर-कानूनी, अनैतिक या सार्वजनिक नीति के खिलाफ नहीं होते हैं।
In simple words: वैध ठहराव वे होते हैं जो कानून के दायरे में होते हैं और किसी गलत काम के लिए नहीं होते।

🎯 Exam Tip: वैध ठहराव के लिए उद्देश्य का वैधानिक होना एक बुनियादी शर्त है; कोई भी गैर-कानूनी या अनैतिक उद्देश्य उसे अवैध बना देगा।

 

Question 7. अप्रवर्चनीय अनुबन्ध क्या है?
Answer: अप्रवर्चनीय अनुबन्ध वह होता है जो लिखे या बोले गए शब्दों में नहीं होता, बल्कि लोगों के कामों या व्यवहार से स्पष्ट होता है।
In simple words: यह ऐसा अनुबन्ध है जो लिखने या बोलने के बजाय व्यवहार से समझा जाता है।

🎯 Exam Tip: अप्रवर्चनीय अनुबन्ध को 'गर्भित अनुबन्ध' भी कहते हैं, जहाँ शर्तें क्रियाओं से पता चलती हैं, शब्दों से नहीं।

 

Question 1. क्या भारतीय अनुबन्ध अधिनियम पर्याप्त है?
Answer: भारतीय अनुबन्ध अधिनियम को भारत के माहौल, रीति-रिवाज, व्यापारिक व्यवहार और खास परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। लेकिन, जहाँ भारतीय कानून अस्पष्ट या भ्रमित करने वाला लगता है, वहाँ भारतीय अदालतों को इंग्लिश सामान्य कानून की मदद लेनी पड़ती है।
In simple words: भारतीय अनुबन्ध कानून भारत की ज़रूरतों के हिसाब से बना है, पर कभी-कभी स्पष्टता के लिए इसमें ब्रिटिश कानूनों की मदद लेनी पड़ती है।

🎯 Exam Tip: भारतीय अनुबन्ध अधिनियम की प्रकृति को समझते हुए यह भी ध्यान रखें कि यह पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं है और ब्रिटिश कानून का प्रभाव इस पर पड़ा है।

 

Question 2. भारतीय अनुबन्ध अधिनियम का क्षेत्र क्या है?
Answer: भारतीय अनुबन्ध अधिनियम के तहत आजकल इन विषयों का अध्ययन किया जाता है-
1. अनुबन्ध के सामान्य नियम और अर्ध-अनुबन्ध (धारा 1 से 75 तक)।
2. हानि रक्षा और गारंटी अनुबन्ध के नियम (धारा 124 से 147 तक)।
3. निक्षेप और गिरवी अनुबन्धों से संबंधित नियम (धारा 148 से 181 तक)।
4. एजेंसी अनुबन्धों से संबंधित नियम (धारा 182 से 238 तक)।
In simple words: यह अधिनियम कई तरह के समझौतों को कवर करता है, जैसे सामान्य नियम, गारंटी, निक्षेप, गिरवी और एजेंसी के अनुबन्ध।

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध अधिनियम के प्रमुख हिस्सों और उनसे संबंधित धाराओं को याद रखें, क्योंकि यह अधिनियम का व्यापक क्षेत्र दिखाते हैं।

 

Question 3. अनुबन्ध एक ऐसा ठहराव है, जो राजनियम द्वारा प्रवर्तनीय होता है। क्यों?
Answer: जब किसी व्यक्ति के सामने कोई प्रस्ताव रखा जाता है और वह उस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे देता है, तो उसे 'प्रस्ताव स्वीकार' माना जाता है। जब एक प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो वह 'वचन' कहलाता है। इस तरह, समझौता और स्वीकृति मिलकर एक प्रस्ताव बनता है। लेकिन यह ज़रूरी है कि वह कानूनी रूप से लागू किया जा सके। ऐसे ठहराव जो कानूनी रूप से लागू नहीं हो सकते, वे सिर्फ ठहराव ही रहते हैं, अनुबन्ध नहीं बनते। उदाहरण के लिए, यदि पीताम्बर अपनी पत्नी इन्दु को जयपुर-आमेर का किला दिखाने का प्रस्ताव देता है और इन्दु सहमत हो जाती है, तो यह एक सामाजिक ठहराव है। अगर पीताम्बर अपनी पत्नी को किला नहीं दिखाता या इन्दु खुद नहीं जाना चाहती, तो पति-पत्नी के बीच इस समझौते के तहत कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती, क्योंकि यह सामाजिक समझौता है।
In simple words: कोई भी समझौता अनुबन्ध तभी बनता है जब उसे कानून द्वारा लागू किया जा सके। सामाजिक या पारिवारिक समझौते कानूनी रूप से लागू नहीं होते, इसलिए वे अनुबन्ध नहीं होते।

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध और ठहराव में अंतर स्पष्ट करने के लिए कानूनी प्रवर्तनीयता (legally enforceable) की शर्त को हमेशा ध्यान में रखें। सामाजिक वादों का उदाहरण देकर इस अंतर को समझाना प्रभावी होता है।

 

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. अनुबन्ध क्या है? एक वैध अनुबन्ध के आवश्यक लक्षणों को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
Answer:
अनुबन्ध का अर्थ:
'अनुबन्ध' शब्द लैटिन भाषा के 'Contrautum' से आया है, जिसका मतलब 'आपस में मिलना' होता है। अनुबन्ध तब बनता है जब दो या दो से ज़्यादा लोग कोई ऐसा समझौता करते हैं जिससे उनके बीच कानूनी जिम्मेदारियाँ और अधिकार पैदा होते हैं। सर विलियम एन्सन के अनुसार, "अनुबन्ध दो या दो से ज़्यादा लोगों के बीच किया गया ऐसा समझौता है जिसे कानून द्वारा लागू करवाया जा सकता है और इसके तहत एक या एक से ज़्यादा लोगों को दूसरे लोगों के खिलाफ कुछ अधिकार मिलते हैं।" भारतीय अनुबन्ध अधिनियम 1872 की धारा 2(H) के अनुसार, "अनुबन्ध एक ऐसा समझौता है जिसे कानून द्वारा लागू किया जा सकता है।" इन परिभाषाओं से पता चलता है कि अनुबन्ध में दो मुख्य बातें हैं- अनुबन्ध एक ऐसा समझौता है जो किसी प्रस्ताव की स्वीकृति से पैदा होता है, और यह समझौता कानून द्वारा लागू किया जा सकता है, जिससे लोगों के बीच कानूनी जिम्मेदारियाँ पैदा होती हैं। अनुबन्ध का मतलब है: ठहराव + कानून द्वारा लागू होने की क्षमता।

एक वैध अनुबन्ध के आवश्यक लक्षण इस प्रकार हैं:
1. कम से कम दो पक्षकार: किसी भी वैध अनुबन्ध के लिए कम से कम दो लोग होने चाहिए।
2. ठहराव का होना: वैध अनुबन्ध बनाने के लिए दोनों पक्षकारों के बीच एक समझौता होना चाहिए।
3. वैधानिक संबंध बनाने की इच्छा: वैध अनुबन्ध के लिए दोनों पक्षकारों की आपस में कानूनी संबंध स्थापित करने की इच्छा होनी चाहिए।
4. अनुबन्ध करने की क्षमता: अनुबन्ध करने वाले लोगों में अनुबन्ध करने की क्षमता होनी चाहिए।
5. स्वतंत्र सहमति: अनुबन्ध बनाने के लिए लोगों की आपस में सहमति होनी चाहिए।
6. सहमति स्वतंत्र हो: लोगों की सहमति किसी दबाव, धोखे या गलती के बिना स्वतंत्र होनी चाहिए।
7. वैध प्रतिफल: वैध अनुबन्ध के लिए कोई न कोई वैध 'प्रतिफल' (बदला) होना ज़रूरी है।
8. वैधानिक उद्देश्य: अनुबन्ध बनाने का उद्देश्य कानूनी होना चाहिए।
9. निश्चितता: वैध अनुबन्ध में शर्तें साफ और निश्चित होनी चाहिए।
10. निष्पादन की संभावना: ठहराव को पूरा करने की संभावना होनी चाहिए।
11. ठहराव स्पष्ट रूप से व्यर्थ घोषित न हो: भारतीय अनुबन्ध अधिनियम के तहत कुछ ठहरावों को स्पष्ट रूप से व्यर्थ घोषित किया गया है, वे वैध अनुबन्ध नहीं हो सकते।
12. कानूनी औपचारिकताएं: अनुबन्ध लिखित, गवाहों द्वारा प्रमाणित या पंजीकृत होना चाहिए, यदि कानून द्वारा ऐसा करना अनिवार्य हो।
In simple words: अनुबन्ध दो या ज़्यादा लोगों के बीच एक कानूनी समझौता है जो अधिकारों और जिम्मेदारियों को बनाता है। इसके लिए कम से कम दो लोग, एक साफ समझौता, कानूनी संबंध बनाने की इच्छा, क्षमता, स्वतंत्र सहमति, वैध कारण और उद्देश्य, स्पष्ट शर्तें और उसे पूरा करने की संभावना होनी ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध की परिभाषा देते समय 'कानूनी प्रवर्तनीयता' (legal enforceability) पर ज़ोर दें। आवश्यक लक्षणों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें और प्रत्येक बिंदु को संक्षिप्त में समझाएँ।

 

Question 5. क्या ठहराव वैधानिक होता है?
Answer: जब दो लोगों के बीच किए गए ठहराव का उद्देश्य कानूनी होता है, तो उसे वैधानिक ठहराव माना जाता है। लेकिन अगर कानून ऐसे ठहराव पर कोई रोक लगाता है, या ऐसा ठहराव किसी व्यक्ति या उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकता है, या कानून के किसी नियम का उल्लंघन करता है, या धोखे से किया गया है, या अदालत उसे सार्वजनिक नीति या नैतिकता के खिलाफ मानती है, तो ऐसे मामलों में ठहराव वैधानिक नहीं होता है।
In simple words: ठहराव कानूनी तभी होता है जब उसका उद्देश्य वैध हो। अगर वह किसी कानून के खिलाफ है, नुकसानदायक है, धोखाधड़ी वाला है या अनैतिक है, तो वह अवैध माना जाता है।

🎯 Exam Tip: वैध ठहराव के लिए उद्देश्य का कानूनी होना सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। उन परिस्थितियों को याद रखें जब एक ठहराव अवैध हो जाता है।

 

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 9 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. व्यापारिक सन्नियम (विधि) क्षेत्र में आने वाले महत्वपूर्ण अधिनियम हैं -
(a) भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, 1872
(b) भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932
(c) कम्पनी अधिनियम, 2013
(d) उपरोक्त सभी
Answer: (d) उपरोक्त सभी
In simple words: व्यापार से संबंधित कानून के क्षेत्र में भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, भारतीय साझेदारी अधिनियम और कम्पनी अधिनियम सभी महत्वपूर्ण हैं।

🎯 Exam Tip: व्यापारिक सन्नियम के दायरे में आने वाले विभिन्न अधिनियमों को याद रखें, क्योंकि ये सभी व्यापारिक गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं।

 

Question 2. भारतीय व्यापारिक सन्नियम का मुख्य आधार स्रोत किस देश के वाणिज्य अधिनियम पर आधारित हैं -
(a) अमेरिका
(b) इंग्लैण्ड
(c) फ्रान्स
(d) इटली
Answer: (b) इंग्लैण्ड
In simple words: भारतीय व्यापार कानून मुख्य रूप से इंग्लैण्ड के वाणिज्य कानूनों पर आधारित है।

🎯 Exam Tip: भारतीय कानून प्रणाली पर ब्रिटिश शासन के ऐतिहासिक प्रभाव को याद रखें, जो कई भारतीय अधिनियमों के मूल स्रोत को इंगित करता है।

 

Question 3. इंगलिश कॉमन लॉ सर्वाधिक पुराना राजनियम है -
(a) भारत का
(b) फ्रान्स का
(c) इंग्लैण्ड का
(d) अमेरिका की।
Answer: (c) इंग्लैण्ड का
In simple words: इंग्लिश कॉमन लॉ इंग्लैण्ड का सबसे पुराना कानून है।

🎯 Exam Tip: 'इंग्लिश कॉमन लॉ' को उसकी ऐतिहासिक जड़ों और कई देशों की कानूनी प्रणालियों पर उसके प्रभाव के लिए जाना जाता है।

 

Question 5. भारतीय व्यापारिक सन्मियम के स्रोत हैं -
(a) न्याय
(b) परिनियम
(c) भारतीय रीति - रिवाज
(d) उपरोक्त सभी।
Answer: (d) उपरोक्त सभी
In simple words: भारतीय व्यापार कानूनों के स्रोत न्याय, संसद द्वारा बनाए गए कानून और भारतीय परंपराएं सभी हैं।

🎯 Exam Tip: व्यापारिक सन्नियम के सभी स्रोतों को जानें - इनमें कानून, परंपराएं, न्यायिक निर्णय और न्याय के सिद्धांत शामिल हैं।

 

Question 6. भारतीय अनुबन्थ अधिनियम 1872, देश में लागू किया गया -
(a) जनवरी, 1872 को
(b) सितम्बर, 1872 को
(c) नवम्बर, 1872 को
(d) अगस्त, 1872 को
Answer: (b) सितम्बर, 1872 को
In simple words: भारतीय अनुबन्ध अधिनियम 1872 को सितंबर 1872 में लागू किया गया था।

🎯 Exam Tip: अधिनियमों की स्थापना की तारीखें महत्वपूर्ण होती हैं; उन्हें सही ढंग से याद रखना सुनिश्चित करें।

 

Question 7. भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, 1872 में प्रारम्भ के समय कुल धारायें थीं -
(a) 365 धारायें
(b) 281 धारायें
(c) 266 धारायें
(d) 238 धारायें
Answer: (c) 266 धारायें
In simple words: जब भारतीय अनुबन्ध अधिनियम 1872 में शुरू हुआ, तो इसमें कुल 266 धाराएँ थीं।

🎯 Exam Tip: किसी भी अधिनियम के तहत धाराओं की कुल संख्या एक महत्वपूर्ण तथ्यात्मक जानकारी होती है।

 

Question 9. भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, 1872 में धारा 182 से 238 सम्बन्धित है -
(a) अनुबन्ध के सामान्य सिद्धान्त तथा अर्द्ध अनुबन्ध से
(b) हानि रक्षा तथा गारन्टी अनुबन्ध प्रावधान से
(c) निपेक्ष तथा गिरवी अनुबन्ध सम्बन्धी प्रावधान से
(d) एजेन्सी अनुबन्ध सम्बन्धी प्रावधान से।
Answer: (d) एजेन्सी अनुबन्ध सम्बन्धी प्रावधान से
In simple words: भारतीय अनुबन्ध अधिनियम की धारा 182 से 238 एजेन्सी अनुबन्धों के बारे में हैं।

🎯 Exam Tip: अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आने वाले विशेष प्रावधानों को याद रखें।

 

Question 10. "Contrautum" का शाब्दिक अर्थ क्या है-
(a) आपस में मिलना
(b) समझौता करना
(c) नियम बनाना
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) आपस में मिलना
In simple words: "Contrautum" का अर्थ है 'आपस में मिलना'।

🎯 Exam Tip: तकनीकी शब्दों के मूल अर्थ को समझना उनकी परिभाषा और अवधारणा को याद रखने में मदद करता है।

 

Question 11. “अनुबन्ध एक ऐसा ठहराव है जो पक्षकारों के बीच दायित्व उत्पन्न करता है और उनकी व्याख्या करता है" यह परिभाषा दी है -
(a) सर विलियम एन्सन ने
(b) न्यायाधीश साइमण्ड ने
(c) भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, 1872 की धारा 2(H) में
(d) इसमें से कोई नहीं।
Answer: (b) न्यायाधीश साइमण्ड ने
In simple words: यह अनुबन्ध की परिभाषा न्यायाधीश साइमण्ड ने दी थी।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण परिभाषाओं को उनके संबंधित विद्वानों या अधिनियमों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 13. वैध अनुबन्ध के आवश्यक तत्व हैं -
(a) ठहराव का होना।
(b) पक्षकारों की स्वतन्त्र सहमति
(c) वैधानिक प्रतिफल
(d) उपरोक्त सभी।
Answer: (d) उपरोक्त सभी
In simple words: एक वैध अनुबन्ध के लिए ठहराव, स्वतंत्र सहमति और कानूनी बदला सभी ज़रूरी हैं।

🎯 Exam Tip: वैध अनुबन्ध के सभी आवश्यक तत्वों को याद रखें, क्योंकि इनमें से किसी एक की भी कमी अनुबन्ध को अवैध बना सकती है।

 

Question 14. ऐसा ठहराव जो राजनियम द्वारा प्रवर्तित नहीं करवाया जा सकता है, कहते हैं -
(a) व्यर्थ अनुबन्ध
(b) वैध अनुबन्ध
(c) व्यर्थ ठहराव
(d) अवैध ठहराव
Answer: (c) व्यर्थ ठहराव
In simple words: जो समझौता कानून द्वारा लागू नहीं हो सकता, उसे व्यर्थ ठहराव कहते हैं।

🎯 Exam Tip: व्यर्थ ठहराव (void agreement) और व्यर्थ अनुबन्ध (void contract) के बीच अंतर करें; व्यर्थ ठहराव कभी अनुबन्ध नहीं बन सकता।

 

Question 15. कार्यों या आचरण द्वारा प्रकट प्रस्ताव को कहते हैं -
(a) गर्भित प्रस्ताव
(b) स्पष्ट प्रस्ताव
(c) विशिष्ट प्रस्ताव
(d) स्थानापन्न प्रस्ताव
Answer: (a) गर्भित प्रस्ताव
In simple words: जो प्रस्ताव शब्दों के बजाय कामों से सामने आता है, उसे गर्भित प्रस्ताव कहते हैं।

🎯 Exam Tip: 'गर्भित प्रस्ताव' को उसके व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समझें, जहाँ व्यक्ति के कार्यों से ही उसकी इच्छा का पता चलता है।

 

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 9 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 2. व्यापारिक सन्नियम (विधि) क्या है?
Answer: व्यापारिक सन्नियम (विधि) उन कानूनी नियमों का समूह है जो व्यापारिक व्यवहारों और लेन-देनों को व्यवस्थित, नियंत्रित और प्रभावी बनाते हैं।
In simple words: व्यापारिक सन्नियम उन नियमों को कहते हैं जो व्यापार के लेन-देन को व्यवस्थित करते हैं।

🎯 Exam Tip: व्यापारिक सन्नियम की परिभाषा में 'कानूनी नियमों का समूह' और 'व्यापारिक व्यवहारों को नियंत्रित करना' जैसे प्रमुख शब्दों का प्रयोग करें।

 

Question 3. व्यापारिक सन्नियम (विधि) के क्षेत्र में आने वाले कोई दो महत्वपूर्ण अधिनियम बताइए।
Answer:
1. कम्पनी अधिनियम, 2013
2. बैंकिंग कम्पनी अधिनियम, 1949
In simple words: कम्पनी अधिनियम और बैंकिंग कम्पनी अधिनियम व्यापारिक कानून के दो ज़रूरी हिस्से हैं।

🎯 Exam Tip: व्यापारिक सन्नियम के प्रमुख अधिनियमों के नाम और वर्ष याद रखें।

 

Question 4. भारतीय व्यापारिक सन्नियओं को मुख्य आधार स्रोत इंग्लैण्ड के वाणिज्य अधिनियम पर क्यों आधारित है?
Answer: भारत में सैकड़ों सालों तक ब्रिटिश शासन रहा था, इसी कारण भारतीय व्यापारिक सन्नियमों का मुख्य आधार स्रोत इंग्लैण्ड के वाणिज्य अधिनियम पर आधारित है।
In simple words: ब्रिटिश राज के कारण भारतीय व्यापार कानून इंग्लैण्ड के वाणिज्य कानूनों पर आधारित हैं।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक कारणों को जोड़कर उत्तर दें, जैसे ब्रिटिश शासन का प्रभाव, जिससे स्पष्टीकरण अधिक प्रभावी होता है।

 

Question 5. इंग्लैण्ड का सर्वाधिक पुराना राजनियम कौन सा है?
Answer: इंग्लिश कॉमन लॉ।
In simple words: इंग्लिश कॉमन लॉ इंग्लैण्ड का सबसे पुराना कानून है।

🎯 Exam Tip: 'इंग्लिश कॉमन लॉ' को उसकी ऐतिहासिक महत्वपूर्णता के लिए याद रखें।

 

Question 6. परिनियम का क्या तात्पर्य है?
Answer: परिनियम से मतलब उन अधिनियमों से है जो किसी भी देश की संसदीय प्रणाली के तहत संसद या विधानसभाओं द्वारा बनाए जाते हैं।
In simple words: परिनियम वे कानून हैं जो संसद या विधानसभाएं बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: 'परिनियम' को विधायी प्रक्रिया द्वारा बनाए गए कानून के रूप में परिभाषित करें।

 

Question 8. हमारे देश में भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, 1872 कब लागू किया गया?
Answer: सितम्बर, 1872 में।
In simple words: भारतीय अनुबन्ध अधिनियम 1872 सितंबर 1872 में लागू हुआ।

🎯 Exam Tip: अधिनियमों की स्थापना की सटीक तारीखें याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. वस्तु विक्रय अधिनियम कां निर्माण कब किया गया?
Answer: सन् 1930 में।
In simple words: वस्तु विक्रय अधिनियम 1930 में बनाया गया था।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण अधिनियमों के निर्माण वर्ष को याद रखना तथ्यात्मक प्रश्नों के लिए उपयोगी होता है।

 

Question 10. भारतीय अनुबन्ध की विषय वस्तु के अन्तर्गत अनुबन्ध के सामान्य सिद्धान्त तथा अर्द्ध अनुबन्ध किन धाराओं में वर्णित है?
Answer: धारा 1 से 75 तक।
In simple words: अनुबन्ध के सामान्य नियम और अर्ध-अनुबन्ध धारा 1 से 75 में बताए गए हैं।

🎯 Exam Tip: अधिनियम की विभिन्न धाराओं में कवर किए गए प्रमुख विषयों को जानें।

 

Question 11. भारतीय अनुबन्ध अधिनियम की धारा 148 से 181 में किन प्रावधानों सम्मिलित किया गया है?
Answer: निपेक्ष तथा गिरवी अनुबन्ध सम्बन्धी प्रावधान।
In simple words: धारा 148 से 181 में निक्षेप और गिरवी के अनुबन्ध के प्रावधान हैं।

🎯 Exam Tip: धाराओं के समूहों और उनसे संबंधित विषयों को याद रखें, जैसे धारा 148-181 निक्षेप और गिरवी के लिए हैं।

 

Question 12. अनुबन्ध शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के किस शब्द से हुई है?
Answer: अनुबन्ध शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द "Contrautum" से हुई है।
In simple words: 'अनुबन्ध' शब्द लैटिन के 'Contrautum' से आया है।

🎯 Exam Tip: किसी भी कानूनी शब्द के मूल या व्युत्पत्ति को जानना उसकी अवधारणा को समझने में मदद करता है।

 

Question 13. “अनुबन्ध एक ऐसा ठहराव है, जो राजनियम द्वारा प्रवर्तनीय होता है।” यह परिभाषा है।
Answer: भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, 1872 की धारा 2(H) द्वारा।
In simple words: यह अनुबन्ध की परिभाषा भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, 1872 की धारा 2(H) में दी गई है।

🎯 Exam Tip: अधिनियमों की महत्वपूर्ण परिभाषाओं को उनकी संबंधित धाराओं के साथ याद रखें।

 

Question 15. भारतीय अनुबन्ध अधिनियम की धारा 2(H) के अलावा और किस धारा में वैधं अनुबन्ध के लक्षणों के सम्बन्ध में लिखा गया है?
Answer: धारा 10 में।
In simple words: वैध अनुबन्ध के लक्षण धारा 10 में भी बताए गए हैं।

🎯 Exam Tip: किसी भी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के बीच के संबंध को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 16. किसी वैध अनुबन्ध के लिए कम से कम कितने पक्षकार होने चाहिए?
Answer: कम से कम दो पक्षकार।
In simple words: वैध अनुबन्ध के लिए कम से कम दो लोग होने चाहिए।

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध के लिए न्यूनतम दो पक्षकारों की आवश्यकता एक मौलिक शर्त है।

 

Question 17. अनुबन्ध में पक्षकारों को किस नाम से जाना जाता है?
Answer: अनुबन्ध में पक्षकारों को एक 'प्रस्तावक' या 'वचनदाता' और दूसरा 'प्रस्तावग्रहीता' या 'वचनग्रहीता' कहा जाता है। प्रस्तावक प्रस्ताव रखता है और प्रस्तावग्रहीता उस प्रस्ताव को स्वीकार करता है।
In simple words: अनुबन्ध में एक पक्ष को प्रस्तावक और दूसरे को प्रस्तावग्रहीता कहते हैं।

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध में शामिल दोनों पक्षों की भूमिकाओं और उनके कानूनी नामों को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 18. पक्षकारों के अनुबन्ध करने की क्षमता से क्या आशय है?
Answer: पक्षकारों के अनुबन्ध करने की क्षमता का मतलब है कि वैध अनुबन्ध करने वाले व्यक्ति वयस्क हों, उनका दिमाग स्वस्थ हो और कानून द्वारा उन्हें अनुबन्ध करने के लिए अयोग्य घोषित न किया गया हो।
In simple words: अनुबन्ध करने की क्षमता का मतलब है कि व्यक्ति वयस्क, मानसिक रूप से ठीक हो और कानून उसे अनुबन्ध करने से न रोके।

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध करने की क्षमता के तीन मुख्य बिंदुओं- वयस्कता, स्वस्थ मस्तिष्क और कानूनी अयोग्यता का अभाव- को याद रखें।

 

Question 19. अनुबन्ध निर्माण में पक्षकारों की सहमति क्यों आवश्यक है?
Answer: किसी भी वैध अनुबन्ध को बनाने के लिए, समझौते की हर बात पर सभी पक्षकारों की एक जैसी राय या सहमति होना ज़रूरी है।
In simple words: अनुबन्ध बनाने के लिए सभी पक्षों का समझौते की हर बात पर सहमत होना ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: 'सहमति' अनुबन्ध का एक मूल तत्व है, और इसका मतलब है कि सभी पक्ष एक ही बात पर, एक ही अर्थ में सहमत हों।

 

प्रश्न 21. वैध अनुबन्ध के लिए वैध प्रतिफल का होना क्यों आवश्यक है?
Answer: कानून के अनुसार किसी भी ठहराव को लागू करने के लिए कुछ न कुछ प्रतिफल (बदला) होना ज़रूरी है. इसलिए, एक वैध अनुबन्ध के लिए वैध प्रतिफल का होना बहुत आवश्यक है.
In simple words: किसी भी कानूनी समझौते को पूरा करने के लिए, दोनों पक्षों के बीच कुछ न कुछ लेन-देन या मूल्य का आदान-प्रदान होना ज़रूरी है.

🎯 Exam Tip: हमेशा याद रखें कि 'प्रतिफल' का मतलब सिर्फ पैसे नहीं होता, यह कोई वस्तु, सेवा, या वादा भी हो सकता है, लेकिन यह वैध होना चाहिए.

 

प्रश्न 22. वैध अनुबन्ध में वैधानिक उद्देश्य से क्या आशय है?
Answer: किसी भी अनुबन्ध को बनाने के लिए, उसका उद्देश्य कानूनी रूप से सही होना चाहिए. इसका मतलब है कि अनुबन्ध का मकसद अवैध, अनैतिक या समाज की सार्वजनिक नीतियों के खिलाफ नहीं होना चाहिए.
In simple words: अनुबन्ध का उद्देश्य हमेशा वैध और सही होना चाहिए. यह किसी भी गलत या गैर-कानूनी काम के लिए नहीं बनाया जा सकता.

🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि अनुबन्ध का उद्देश्य हमेशा कानून द्वारा स्वीकृत हो; एक अवैध उद्देश्य अनुबन्ध को तुरंत अमान्य कर देता है.

 

प्रश्न 23. वैध अनुबन्ध में निश्चितता से क्या तात्पर्य है?
Answer: अनुबन्ध में निश्चितता का मतलब है कि उसकी शर्तें बिलकुल स्पष्ट होनी चाहिए. यदि कोई ठहराव अस्पष्ट है, तो उसकी शर्तों को पूरा करना मुश्किल हो जाता है. इसलिए, अनुबन्ध की सभी शर्तें पक्षकारों द्वारा स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए.
In simple words: अनुबन्ध के नियम और शर्तें बिलकुल साफ़ और समझने योग्य होनी चाहिए. अगर वे साफ़ नहीं हैं, तो उन्हें पूरा करना संभव नहीं होगा.

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध की शर्तों को हमेशा स्पष्ट और सटीक शब्दों में लिखें ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो.

 

प्रश्न 24. यदि किसी ठहराव का निष्पादन करना असम्भव हो तो ठहराव पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: यदि किसी ठहराव को पूरा करना असंभव हो जाता है, तो वह ठहराव अपने आप ही व्यर्थ हो जाता है.
In simple words: अगर कोई वादा पूरा नहीं किया जा सकता, तो वह वादा अपने आप ही रद्द हो जाता है.

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध करते समय हमेशा यह सुनिश्चित कर लें कि उसमें बताई गई बातें पूरी की जा सकती हैं.

 

प्रश्न 25. वैध अनुबन्ध क्या है?
Answer: एक वैध अनुबन्ध वह ठहराव है जिसे कानून द्वारा लागू किया जा सकता है, और जो अनुबन्ध करने वाले पक्षों के बीच कानूनी कर्तव्य और अधिकार बनाता है.
In simple words: वैध अनुबन्ध एक ऐसा समझौता है जिसे कानून मान्यता देता है और जो लोगों के लिए कानूनी ज़िम्मेदारियाँ और अधिकार पैदा करता है.

🎯 Exam Tip: वैध अनुबन्ध में हमेशा कानूनी प्रवर्तनीयता और पक्षकारों के बीच दायित्वों का सृजन शामिल होता है.

 

प्रश्न 26. स्पष्ट अनुबन्ध किसे कहते हैं?
Answer: एक स्पष्ट अनुबन्ध वह होता है जिसमें अनुबन्ध करने वाले पक्षकार (लोग) अपने प्रस्ताव, स्वीकृति और अनुबन्ध की शर्तों को साफ-साफ शब्दों में बताते हैं, चाहे वे मौखिक रूप से कहें या लिखकर दें.
In simple words: स्पष्ट अनुबन्ध तब होता है जब लोग अपने समझौते की सभी बातों को बोलकर या लिखकर साफ़-साफ़ बता देते हैं.

🎯 Exam Tip: स्पष्ट अनुबन्ध हमेशा लिखित या मौखिक रूप से स्पष्ट होते हैं, जिससे अस्पष्टता की गुंजाइश कम हो जाती है.

 

प्रश्न 28. द्वि पक्षीय अनुबन्ध किसे कहते हैं?
Answer: एक द्विपक्षीय अनुबन्ध वह समझौता होता है जिसमें दोनों पक्षकार एक-दूसरे से वादे करते हैं और भविष्य में उन वादों को पूरा करने के लिए सहमत होते हैं.
In simple words: द्विपक्षीय अनुबन्ध में दोनों लोग एक-दूसरे से कुछ करने का वादा करते हैं.

🎯 Exam Tip: द्विपक्षीय अनुबन्ध में हमेशा दोनों तरफ से वादे होते हैं, जिससे दोनों पक्षों पर ज़िम्मेदारी आती है.

 

प्रश्न 29. गर्भित प्रस्ताव किसे कहते हैं?
Answer: गर्भित प्रस्ताव वह होता है जो शब्दों में नहीं कहा जाता या लिखा नहीं जाता, बल्कि व्यक्ति के कार्यों या व्यवहार से समझ में आता है.
In simple words: गर्भित प्रस्ताव वह है जिसे आप अपनी बातों से नहीं बल्कि अपने काम या व्यवहार से दिखाते हैं.

🎯 Exam Tip: गर्भित प्रस्ताव को समझने के लिए व्यक्ति के व्यवहार और परिस्थितियों पर ध्यान दें, क्योंकि यह मौखिक या लिखित नहीं होता.

 

प्रश्न 30. स्थानापन्न प्रस्ताव क्या है?
Answer: जब किसी प्रस्ताव की स्वीकृति उसकी मूल शर्तों से हटकर या बदलाव के साथ दी जाती है, तो उसे स्वीकृति नहीं बल्कि एक स्थानापन्न प्रस्ताव या प्रति-प्रस्ताव कहते हैं.
In simple words: अगर कोई व्यक्ति किसी प्रस्ताव को कुछ बदलावों के साथ स्वीकार करता है, तो वह एक नया प्रस्ताव बन जाता है, जिसे प्रति-प्रस्ताव कहते हैं.

🎯 Exam Tip: याद रखें कि प्रति-प्रस्ताव मूल प्रस्ताव को रद्द कर देता है और एक नया प्रस्ताव बनाता है जिसे मूल प्रस्तावक द्वारा स्वीकार किया जाना चाहिए.

 

प्रश्न 31. निषेधाज्ञा क्या है?
Answer: निषेधाज्ञा न्यायालय द्वारा दिया गया एक आदेश है जो किसी व्यक्ति को अनुबन्ध की शर्तों के खिलाफ कोई कार्य करने से रोकता है.
In simple words: निषेधाज्ञा अदालत का एक आदेश है जो किसी को अनुबन्ध की शर्तों के विपरीत काम करने से रोकता है.

🎯 Exam Tip: निषेधाज्ञा का उपयोग अनुबन्ध के उल्लंघन को रोकने और पक्षकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया जाता है.

 

प्रश्न 32. गिरवीकर्ता किसे कहते हैं?
Answer: गिरवीकर्ता वह व्यक्ति होता है जो किसी चीज़ को ऋण के बदले सुरक्षा के रूप में गिरवी रखता है, यानी उसे जमा करता है.
In simple words: गिरवीकर्ता वह है जो कर्ज़ लेने के लिए अपनी कोई चीज़ गिरवी रखता है.

🎯 Exam Tip: गिरवीकर्ता को गिरवी रखी गई वस्तु का मालिक बने रहने का अधिकार होता है, जब तक वह ऋण चुका देता है.

 

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न (SA - I)

 

प्रश्न 1. किसी देश में विधि नियमन व्यवस्था व अन्य कानूनों की आवश्यकता क्यों होती है?
Answer: किसी भी देश में, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और तकनीकी विकास के साथ-साथ कानून व्यवस्था, शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए कानूनों की ज़रूरत होती है. सरकार, समाज और अन्य समूह इन गतिविधियों को रीति-रिवाजों, परंपराओं, नियमों और उप-नियमों के ज़रिए नियंत्रित करते हैं.
In simple words: देशों को कानून और नियमों की ज़रूरत होती है ताकि समाज में शांति, व्यवस्था, और सभी तरह का विकास हो सके.

🎯 Exam Tip: कानूनों की आवश्यकता के बहुआयामी कारणों (सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक आदि) को स्पष्ट रूप से लिखें.

 

प्रश्न 3. व्यापारिक सन्नियम (विधि) का अर्थ बताइए।
Answer: व्यापारिक सन्नियम का मतलब कानूनी नियमों का वह समूह है जो व्यापारिक व्यवहारों और लेन-देनों को व्यवस्थित, नियंत्रित और प्रभावी बनाता है. प्रो. एम. सी. शुक्ला के अनुसार, "व्यापारिक सन्नियम कानून की वह शाखा है जो व्यापारियों के उन अधिकारों और दायित्वों का वर्णन करती है, जो व्यापारिक संपत्ति से जुड़े व्यापारिक व्यवहारों से उत्पन्न होते हैं."
In simple words: व्यापारिक सन्नियम वे कानूनी नियम हैं जो व्यापार के तरीकों को सही और व्यवस्थित रखते हैं. यह बताते हैं कि व्यापारियों के क्या अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ हैं.

🎯 Exam Tip: व्यापारिक सन्नियम की परिभाषा देते समय, उसके उद्देश्यों और महत्व पर भी ध्यान दें.

 

प्रश्न 4. व्यापारिक सन्नियम के क्या उद्देश्य हैं?
Answer: व्यापारिक सन्नियम के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
1. सभी व्यावसायिक गतिविधियों को नियंत्रित रखना.
2. व्यावहारिक कार्यों के लिए नियम बनाना.
3. व्यापारियों के सभी विवादों को सुलझाना.
4. व्यापारिक व्यक्तियों के उत्पन्न होने वाले अधिकारों और दायित्वों का वर्णन करना.
In simple words: व्यापारिक कानून का मकसद सभी व्यापारिक कामों को नियंत्रित करना, व्यापारियों के झगड़े सुलझाना और उनके अधिकारों को बताना है.

🎯 Exam Tip: उद्देश्यों को स्पष्ट और क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें, ताकि परीक्षक को यह समझने में आसानी हो कि आप सभी मुख्य बिंदुओं को कवर कर रहे हैं.

 

प्रश्न 5. "इंग्लिश कॉमन लॉ" पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: इंग्लिश कॉमन लॉ इंग्लैण्ड का सबसे पुराना कानून है. यह वहां के योग्य न्यायाधीशों द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण फैसलों पर आधारित है. इसलिए, जहां भारतीय कानून स्पष्ट या भ्रामक होता है, वहां भारतीय न्यायालय मार्गदर्शन के लिए इंग्लिश कॉमन लॉ का सहारा लेते हैं.
In simple words: इंग्लिश कॉमन लॉ इंग्लैण्ड का एक बहुत पुराना कानून है जो जजों के फैसलों से बना है. जब भारतीय कानून साफ़ नहीं होता, तो भारतीय अदालतें इसका उपयोग मदद के लिए करती हैं.

🎯 Exam Tip: इंग्लिश कॉमन लॉ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भारतीय कानून में इसके उपयोग को समझाना महत्वपूर्ण है.

 

प्रश्न 6. अनुबन्ध का क्या अर्थ है? बताइए।
Answer: अनुबन्ध शब्द लैटिन भाषा के शब्द "Contrautum" से आया है, जिसका अर्थ है "आपस में मिलना". इसलिए, अनुबन्ध दो या दो से अधिक व्यक्तियों (पक्षकारों) के बीच किया गया एक ऐसा ठहराव है जो उनके बीच कानूनी ज़िम्मेदारियाँ और अधिकार पैदा करता है.
In simple words: अनुबन्ध का मतलब है दो या ज़्यादा लोगों के बीच एक ऐसा कानूनी समझौता जो उन्हें एक-दूसरे के प्रति ज़िम्मेदार बनाता है और अधिकार देता है.

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध की परिभाषा देते समय उसके लैटिन मूल और कानूनी दायित्वों के निर्माण पर जोर दें.

 

प्रश्न 7. भारतीय अनुबन्ध अधिनियम की धारा - 10 द्वारा अनुबन्ध को किस प्रकार परिभाषित किया गया है?
Answer: भारतीय अनुबन्ध अधिनियम की धारा - 10 में अनुबन्ध को स्पष्ट रूप से समझाया गया है. इसके अनुसार, सभी ठहराव अनुबन्ध होते हैं, यदि वे: न्यायोचित प्रतिफल और वैध उद्देश्य के लिए किए गए हों; अनुबन्ध करने की क्षमता रखने वाले पक्षकारों की स्वतंत्र सहमति से किए गए हों; और यदि किसी विशेष अधिनियम द्वारा आवश्यक हो, तो लिखित, साक्ष्य द्वारा प्रमाणित और पंजीकृत हों.
In simple words: भारतीय अनुबन्ध अधिनियम की धारा 10 बताती है कि एक समझौता तभी अनुबन्ध बनता है जब उसमें सही लेन-देन हो, सही उद्देश्य हो, इसे सक्षम लोग अपनी मर्ज़ी से करें, और ज़रूरत पड़ने पर यह लिखा, गवाहों द्वारा प्रमाणित और पंजीकृत हो.

🎯 Exam Tip: धारा 10 के तहत अनुबन्ध की आवश्यक शर्तों को बिंदुवार याद रखें, जैसे स्वतंत्र सहमति, वैध प्रतिफल, वैध उद्देश्य और क्षमता.

 

प्रश्न 8. राजनियम द्वारा प्रवर्तनीय होने के लिए प्रत्येक अनुबन्ध में कौन-कौन से तत्वों का होना आवश्यक है किन्हीं पाँच तत्वों को बताइए।
Answer: किसी भी अनुबन्ध को कानून द्वारा लागू करने योग्य बनाने के लिए निम्नलिखित पाँच तत्व आवश्यक हैं:
1. ठहराव का होना.
2. पक्षकारों में अनुबन्ध करने की क्षमता होना.
3. पक्षकारों की स्वतंत्र सहमति होना.
4. ठहराव का उद्देश्य वैध होना.
5. ठहराव की प्रत्येक शर्त निश्चित होनी चाहिए.
In simple words: एक अनुबन्ध को कानूनी रूप से मान्य बनाने के लिए, उसमें समझौता होना चाहिए, लोग सक्षम होने चाहिए, उनकी मर्ज़ी होनी चाहिए, उद्देश्य कानूनी होना चाहिए, और शर्तें साफ़ होनी चाहिए.

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध के इन पाँच आवश्यक तत्वों को उदाहरण सहित याद रखना आपको पूरे अंक दिलाने में मदद करेगा.

 

प्रश्न 9. प्रस्ताव किसे कहते हैं?
Answer: जब एक पक्षकार (व्यक्ति) दूसरे पक्षकार के सामने किसी काम को करने या न करने की अपनी इच्छा इस उद्देश्य से बताता है कि उसे दूसरे पक्षकार की सहमति मिल जाए, तो इसे प्रस्ताव कहते हैं. उदाहरण के लिए, श्याम मोहन को अपनी कार Rs 1,50,000 में बेचने का प्रस्ताव रखता है. यहां श्याम अपनी कार बेचने की इच्छा प्रकट करता है ताकि मोहन उसे खरीदने या न खरीदने के लिए अपनी स्वीकृति दे.
In simple words: प्रस्ताव तब होता है जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को अपनी इच्छा बताता है ताकि वह उसकी बात से सहमत हो जाए.

🎯 Exam Tip: प्रस्ताव में हमेशा एक व्यक्ति की इच्छा और दूसरे व्यक्ति की सहमति प्राप्त करने का उद्देश्य शामिल होता है.

 

प्रश्न 11. अनुचित प्रभाव पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: अनुचित प्रभाव: यह तब होता है जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की इच्छा को प्रभावित करने की स्थिति में होता है और उस शक्ति का उपयोग करके अनुबन्ध में अनुचित लाभ प्राप्त कर लेता है.
कपट: कपट तब होता है जब अनुबन्ध का एक पक्षकार या उसका एजेंट जानबूझकर दूसरे पक्षकार से अनुबन्ध के महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में गलत जानकारी देता है या उन्हें छिपाता है, ताकि दूसरे पक्षकार को धोखे में डालकर अनुबन्ध के लिए प्रेरित किया जा सके.
In simple words: अनुचित प्रभाव तब होता है जब कोई व्यक्ति अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करके दूसरे को ऐसा अनुबन्ध करने पर मजबूर करता है जिससे उसे फायदा हो. कपट का मतलब है जानबूझकर झूठ बोलकर या बातें छिपाकर किसी को धोखा देना ताकि वह अनुबन्ध करे.

🎯 Exam Tip: अनुचित प्रभाव और कपट दोनों अनुबन्ध को अमान्य कर सकते हैं क्योंकि वे स्वतंत्र सहमति को बाधित करते हैं.

 

प्रश्न 12. सांयोगिक अनुबन्ध किसे कहते हैं?
Answer: सांयोगिक अनुबन्ध ऐसा समझौता होता है जिसमें वचनदाता अनुबन्ध को पूरा करने का वादा तभी करता है जब भविष्य में कोई खास, अनिश्चित घटना हो या न हो. हानि-रक्षा, गारंटी और बीमा के अनुबन्ध इसके उदाहरण हैं.
In simple words: सांयोगिक अनुबन्ध वह होता है जिसका पूरा होना भविष्य में किसी घटना के होने या न होने पर निर्भर करता है. जैसे बीमा, जहाँ भुगतान किसी दुर्घटना पर निर्भर करता है.

🎯 Exam Tip: सांयोगिक अनुबन्ध की पहचान उसकी अनिश्चित भविष्य की घटना से जुड़ी शर्त से होती है.

 

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न (SA - II)

 

प्रश्न 1. व्यापारिक सन्नियम (विधि) के क्षेत्र में आने वाले मुख्य रूप से अति महत्वपूर्ण अधिनियम कौन - कौन से हैं?
Answer: व्यापारिक सन्नियम (विधि) के क्षेत्र में आने वाले मुख्य और बहुत महत्वपूर्ण अधिनियम निम्न हैं:
1. भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, 1872
2. वस्तु विक्रय अधिनियम, 1930
3. भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932
5. पचानणय आधानयम, 1940
11. श्रम अधिनियम
12. बीमा अधिनियम
13. सेबी अधिनियम
14. विदेशी विनिमय प्रबंधन अधिनियम, 1999
15. पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट अधिनियम
16. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम
17. माल परिवहन संबंधी सन्नियम.
In simple words: व्यापारिक कानून के तहत कई महत्वपूर्ण अधिनियम आते हैं, जैसे भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, वस्तु विक्रय अधिनियम, भारतीय साझेदारी अधिनियम, और श्रम, बीमा, पेटेंट, सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े कानून.

🎯 Exam Tip: प्रमुख अधिनियमों के नाम और उनके वर्ष याद रखें, क्योंकि यह सीधे तौर पर पूछे जाते हैं.

 

प्रश्न 2. भारतीय व्यापारिक विधि के "इंग्लिश कॉमन लॉ" और "न्यायालयों के निर्णय" स्रोत को बताइए।
Answer: इंग्लिश कॉमन लॉ: यह इंग्लैण्ड का सबसे पुराना कानून है. इसे वहां के योग्य न्यायाधीशों द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण फैसलों के आधार पर बनाया गया था. इसीलिए जहां भारतीय कानून स्पष्ट या भ्रामक होता है, वहां भारतीय न्यायालय मार्गदर्शन के लिए इंग्लिश कॉमन लॉ का सहारा लेते हैं.
न्यायालयों के निर्णय: वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालयों में नए-नए विषयों पर विवाद आते रहते हैं. इन पर निर्णय देने के लिए अधिनियम, रीति-रिवाज और न्याय के सिद्धांतों का उपयोग किया जाता है. उच्च और सर्वोच्च न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्णय निचली अदालतों के लिए फैसला लेते समय उदाहरण के रूप में उपयोग किए जाते हैं.
In simple words: भारतीय व्यापारिक कानून के स्रोत इंग्लिश कॉमन लॉ (जो इंग्लैण्ड के पुराने अदालती फैसलों से बना है) और अदालती निर्णय (जो नए विवादों को सुलझाने में मार्गदर्शन करते हैं) हैं.

🎯 Exam Tip: इंग्लिश कॉमन लॉ को भारतीय न्यायिक प्रणाली में 'सहायक' स्रोत के रूप में समझाएं और न्यायालयों के निर्णयों को 'पूर्व दृष्टांत' के रूप में प्रस्तुत करें.

 

प्रश्न 3. अनुबन्ध को परिभाषित कीजिए।
Answer: अनुबन्ध: अनुबन्ध दो या दो से अधिक व्यक्तियों (पक्षकारों) के बीच किया गया एक ऐसा ठहराव है जो उनके बीच कानूनी दायित्वों और अधिकारों को जन्म देता है. सर विलियम एन्सन के अनुसार - "अनुबन्ध दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच किया गया ठहराव है जिसे कानून द्वारा लागू करवाया जा सकता है और जिसके तहत एक या अधिक पक्षकारों को दूसरे पक्षकार या पक्षकारों के खिलाफ कुछ अधिकार मिलते हैं."
In simple words: अनुबन्ध दो या ज़्यादा लोगों के बीच एक कानूनी समझौता है. यह समझौता लोगों को कानूनी रूप से कुछ करने या न करने के लिए बाध्य करता है और उन्हें अधिकार भी देता है.

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध की परिभाषा में 'कानूनी प्रवर्तनीयता' (enforceability by law) और 'दायित्वों व अधिकारों का सृजन' (creation of duties and rights) जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करना न भूलें.

 

प्रश्न 4. एक वैध अनुबन्ध के आवश्यक लक्षण संक्षेप में बताइए। अथवा एक वैध अनुबन्ध के आवश्यक तत्व बताइए। अथवा राजनियम द्वारा प्रवर्तनीय होने के लिए प्रत्येक अनुबन्ध में किन किन तत्वों का समावेश होना आवश्यक है?
Answer: वैध अनुबन्ध के लक्षण अथवा आवश्यक तत्व:
1. किसी भी वैध अनुबन्ध के लिए कम से कम दो पक्षकार होने चाहिए.
2. वैध अनुबन्ध बनाने के लिए दोनों पक्षकारों के बीच समझौता होना चाहिए.
3. वैध अनुबन्ध के लिए दोनों पक्षकारों की इच्छा (इरादा) कानूनी संबंध बनाने की होनी चाहिए.
4. वैध अनुबन्ध करने वाले पक्षकारों में अनुबन्ध करने की क्षमता होनी चाहिए.
5. अनुबन्ध बनाने के लिए पक्षकारों के बीच सहमति होना आवश्यक है.
6. पक्षकारों के बीच सहमति स्वतंत्र होनी चाहिए.
7. वैध अनुबन्ध के लिए वैध प्रतिफल का होना अनिवार्य है.
8. अनुबन्ध बनाने के लिए समझौते का उद्देश्य कानूनी होना चाहिए.
9. वैध अनुबन्ध में निश्चितता होनी चाहिए.
10. समझौते के निष्पादन की संभावना होनी चाहिए.
11. समझौता स्पष्ट रूप से व्यर्थ घोषित नहीं होना चाहिए.
12. अनुबन्ध लिखित, साक्षी द्वारा प्रमाणित या पंजीकृत होना चाहिए (यदि कानून द्वारा आवश्यक हो).
In simple words: एक वैध अनुबन्ध के लिए कुछ मुख्य बातें ज़रूरी हैं: कम से कम दो लोग, उनके बीच समझौता, कानूनी इरादा, अनुबन्ध करने की क्षमता, उनकी मर्ज़ी, वैध भुगतान, कानूनी उद्देश्य, साफ़ शर्तें, काम पूरा करने की संभावना, और यह अवैध न हो.

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के सभी 12 बिंदुओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अनुबन्ध कानून की नींव हैं. सुनिश्चित करें कि आप 'क्षमता', 'स्वतंत्र सहमति' और 'वैध प्रतिफल' जैसे शब्दों को सही ढंग से समझा सकें.

 

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 9 विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. अनुबन्ध क्या है? अनुबन्ध और ठहराव में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: अनुबन्ध शब्द लैटिन भाषा के शब्द "Contrautum" से बना है, जिसका अर्थ है "आपस में मिलना". अनुबन्ध दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच किया गया ऐसा ठहराव है जो उनके बीच कानूनी दायित्व और अधिकार पैदा करता है. भारतीय अनुबन्ध अधिनियम 1872 की धारा 2(H) के अनुसार, "अनुबन्ध एक ऐसा ठहराव है जो कानून द्वारा लागू किया जा सकता है." धारा 10 के अनुसार, "सभी ठहराव अनुबन्ध हैं, यदि वे सक्षम पक्षकारों की स्वतंत्र सहमति से, वैध प्रतिफल और वैध उद्देश्य के लिए किए गए हों, और जिन्हें स्पष्ट रूप से व्यर्थ घोषित न किया गया हो, और यदि किसी विशेष अधिनियम के आदेश पर लिखित, साक्षी द्वारा प्रमाणित और पंजीकृत हों." इन परिभाषाओं से साफ है कि अनुबन्ध एक ठहराव है जो प्रस्ताव की स्वीकृति से बनता है, कानून द्वारा लागू किया जा सकता है, और पक्षकारों के बीच कानूनी दायित्व पैदा करता है.
अनुबन्ध एवं ठहराव में अन्तर:

अन्तर का आधार (Base of Difference)अनुबन्ध (Contract)ठहराव (Agreement)
आशय (Meaning)अनुबन्ध दो या दो से अधिक पक्षकारों के बीच किया गया एक ऐसा ठहराव है, जो पक्षकारों के मध्य वैधानिक दायित्वों एवं अधिकारों की उत्पत्ति करता है.प्रत्येक वचन एवं वचनों का समूह जो एक-दूसरे का प्रतिफल हो, ठहराव कहलाता है.
प्रकृति (Nature)केवल वैध ठहराव ही अनुबन्ध कहलाता है.ठहराव वैधानिक तथा अवैधानिक दोनों प्रकार के होते हैं.
आधार (Basis)अनुबन्ध का आधार ठहराव होता है.ठहराव का आधार अनुबन्ध नहीं होता है बल्कि प्रस्ताव और स्वीकृति से ठहराव होता है.
वैधानिक आवश्यकतायें (Legal Requirements)एक वैध अनुबन्ध के लिए कम से कम दो पक्षकारों का होना, ठहराव का होना, अनुबन्ध करने की क्षमता, पक्षकारों की स्वतंत्र सहमति, वैधानिक प्रतिफल, वैधानिक उद्देश्य आदि तत्वों का होना आवश्यक है.एक ठहराव के लिए केवल प्रस्ताव व स्वीकृति का ही होना पर्याप्त है.

In simple words: अनुबन्ध एक कानूनी वादा है जिसे कानून द्वारा लागू किया जा सकता है, जबकि ठहराव केवल एक आम सहमति या समझौता है. हर अनुबन्ध एक ठहराव होता है, लेकिन हर ठहराव अनुबन्ध नहीं होता. अनुबन्ध के लिए कानूनी शर्तें ज़रूरी हैं, जबकि ठहराव के लिए सिर्फ प्रस्ताव और स्वीकृति काफी है.

🎯 Exam Tip: अनुबन्ध और ठहराव के बीच अंतर बताते समय, कानूनी प्रवर्तनीयता (enforceability) और आवश्यक तत्वों पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि यही इनके बीच का मुख्य भेद है.

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Business Studies Class 12 Curriculum Solutions: Chapter 09 व्यापारिक विधि एवं अनुबन्ध अधिनियम

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