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Detailed Chapter 15 माल एवं सेवा कर RBSE Solutions for Class 12 Business Studies
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Class 12 Business Studies Chapter 15 माल एवं सेवा कर RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Business Studies Chapter 15 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर
RBSE Class 12 Business Studies Chapter 15 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. माल एवं सेवा कर भारत में कब से लागू होगा। इसे देश में लागू करने की प्रक्रिया क्या होगी।
Answer: माल एवं सेवा कर भारत में 1 जुलाई 2017-18 से लागू होगा। इसे लागू करने की प्रक्रिया में देश की 15 विधान सभाओं ने पहले ही जीएसटी से संबंधित संशोधन विधेयक पारित कर दिए हैं। अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद संविधान में संशोधन हो जाएगा। इसके बाद, जीएसटी अधिनियम और आईजीएसटी अधिनियम को लोकसभा और राज्यसभा दोनों द्वारा पारित किया जाएगा। सभी विधान सभाएं भी इसे पारित करेंगी। कानून बनने के बाद, संबंधित नियम बनाए जाएंगे और इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा.
In simple words: जीएसटी भारत में 1 जुलाई 2017 से लागू होगा। इसे लागू करने के लिए पहले विधान सभाएं, फिर राष्ट्रपति की मंजूरी और संसद से कानून पास होने के बाद पूरे देश में नियम बनाकर लागू किया जाएगा।
🎯 Exam Tip: जीएसटी लागू होने की तारीख और इसे लागू करने में शामिल मुख्य कानूनी चरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे कि विधान सभाओं, राष्ट्रपति और संसद की भूमिका।
Question 3. माल एवं सेवाकर अधिनियम में मूल्य वर्धन पर किस प्रकार कर लगेगा। उदाहरण से समझाइये।
Answer: जीएसटी एक मूल्य संवर्धित कर है जो एक बहुस्तरीय कर के रूप में काम करता है। यह किसी भी वस्तु या सेवा की बिक्री के हर चरण में जोड़े गए मूल्य पर लगाया जाता है। वर्धित मूल्य का मतलब है कि एक व्यापारी ने माल या सेवा के मूल मूल्य में कितना अतिरिक्त मूल्य जोड़ा है। इस जोड़े गए मूल्य पर ही कर चुकाना होता है।
उदाहरण के लिए, यदि महेश 8,000 रुपये में कोई माल या सेवा खरीदता है और उसे 14,000 रुपये में हेमेंत को बेचता है, तो महेश ने अपनी लागत और लाभ के रूप में 6,000 रुपये का मूल्य जोड़ा है। यह 6,000 रुपये ही वर्धित मूल्य होगा, जिस पर उसे कर देना होगा।
यदि जीएसटी की केंद्रीय दर 12% और राज्य दर 6% है, तो जीएसटी की गणना इस प्रकार होगी:
(1) महेश द्वारा खरीदी गई माल या सेवा पर जीएसटी इनपुट कर जमा बिल इस प्रकार होगा:
| विवरण | राशि Rs. |
|---|---|
| क्रय मूल्य | 8,000 |
| जोड़ें : केंद्रीय जी.एस.टी. 12 प्रतिशत | 960 |
| जोड़ें : राज्य जी.एस.टी. 6 प्रतिशत | 480 |
| कुल चुकायी गयी राशि | 9,440 |
| विवरण | राशि Rs. |
|---|---|
| विक्रय मूल्य | 14,000 |
| जोड़ें : केंद्रीय.जी.एस.टी. 12 प्रतिशत | 1,680 |
| जोड़ें : राज्य जी.एस.टी. 6 प्रतिशत | 840 |
| कुल चुकायी गयी राशि | 16,520 |
| घटायें-क्रय मूल्य पर चुकायी गई जी एस टी. | 960 |
| कुल देय कर | 720 |
In simple words: जीएसटी मूल्य पर लगने वाला टैक्स है। इसका मतलब है कि जब कोई व्यापारी सामान की कीमत बढ़ाता है, तो उस बढ़े हुए हिस्से पर टैक्स लगता है। जैसे, अगर 8,000 रुपये का सामान 14,000 रुपये में बेचा जाता है, तो 6,000 रुपये के अंतर पर टैक्स लगेगा।
🎯 Exam Tip: जीएसटी की गणना करते समय, हमेशा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को ध्यान में रखें, जिसका अर्थ है कि खरीदे गए माल पर चुकाए गए जीएसटी को बेचे गए माल पर देय जीएसटी से घटाया जा सकता है।
Question 4. जी एस टी की कोई चार विशेषताएँ लिखिये।
Answer: जीएसटी की चार प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं, जिनका विचार "आम आदमी पर टैक्स का भार कम करना" है:
1. यह बिक्री के स्थान पर आधारित कर है, जिसका अर्थ है कि टैक्स उस जगह लगता है जहाँ सामान या सेवा बेची जाती है।
2. यह बिक्री के हर स्तर पर लगाया जाता है, जिससे टैक्स चोरी कम होती है।
3. जीएसटी अलग-अलग प्रकार के टैक्स को खत्म करके सिर्फ एक ही टैक्स लागू करेगा।
4. जीएसटी को दो स्तरों पर वसूला जाएगा: केंद्रीय जीएसटी (CGST) और राज्य जीएसटी (SGST), जिसे दोहरी व्यवस्था कहते हैं।
In simple words: जीएसटी एक ऐसा टैक्स है जो बिक्री की जगह और हर बिक्री स्तर पर लगता है। यह कई पुराने टैक्स को हटाकर एक टैक्स बन गया है और इसे केंद्र तथा राज्य दोनों वसूलते हैं।
🎯 Exam Tip: जीएसटी की विशेषताओं को याद करते समय, 'एक राष्ट्र, एक कर' की अवधारणा और बिक्री के स्थान पर आधारित होने के महत्व पर ध्यान दें।
Question 5. जी एस टी में किन-किन वर्तमान करों को शामिल किया जायेगा?
Answer: निम्न करों को जीएसटी में शामिल किया जाएगा, जिसका अर्थ है कि ये सभी कर समाप्त होकर सिर्फ एक जीएसटी कर ही रहेगा।
केन्द्रीय कर -
• केंद्रीय उत्पाद शुल्क
• अतिरिक्त उत्पाद शुल्क
• उत्पाद शुल्क जो मेडिसिन एवं टॉयलेटरीज़ प्रिपेरेशन कानून के तहत वसूल किया जाता है।
• अतिरिक्त सीमा शुल्क
• सेवा कर
• सरचार्ज एवं सेस राज्य कर
• स्टेट वैट विक्रय कर
• केंद्रीय विक्रय कर
• क्रय कर
In simple words: जीएसटी कई पुराने केंद्र और राज्य के टैक्स को एक साथ जोड़ देगा, जैसे उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट। इससे सिर्फ एक ही टैक्स लगेगा।
🎯 Exam Tip: उन प्रमुख केंद्रीय और राज्य करों की सूची बनाएं जो जीएसटी में समाहित हो गए हैं। यह समझना महत्वपूर्ण है कि जीएसटी ने भारत की कर प्रणाली को कैसे सरल बनाया है।
Question 6. जी एस टी आई एन क्या है? समझाइये।
Answer: जीएसटी आई एन (GSTIN) का मतलब गुड्स एंड सर्विस टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर है। यह एक पहचान संख्या है जो हर करदाता को दी जाती है।
प्रत्येक करदाता को 15 अंकों का जीएसटी आई एन आवंटित होता है, जिसका विवरण इस प्रकार है:
1. पहले दो अंक राज्य को दर्शाते हैं, जहाँ से करदाता संबंधित है।
2. अगले 10 अंक करदाता का पैन नंबर होता है।
3. तेरहवां अंक पंजीकरण के प्रकार (जैसे अंतर्राज्यीय) को दिखाता है।
4. चौदहवां अंक 'डिफ़ॉल्ट' (by Default) होता है।
5. अंतिम अंक एक चेक कार्ड का होता है, जो नंबर की वैधता सुनिश्चित करता है।
In simple words: GSTIN एक 15 अंकों का नंबर है जो हर टैक्स देने वाले को मिलता है। इसमें राज्य कोड, पैन नंबर, पंजीकरण का प्रकार और एक चेक अंक होता है।
🎯 Exam Tip: GSTIN के हर अंक का महत्व समझना बहुत जरूरी है। यह करदाता की पहचान और राज्य के साथ उसके संबंध को दर्शाता है।
Question 7. पंजीकरण हेतु आवेदन के साथ लगने वाले किन्हीं चार दस्तावेजों के नाम बताइये।
Answer: पंजीकरण के लिए आवेदन करते समय, आपको निम्न चार दस्तावेज जमा करने होंगे:
1. फर्म के मुख्य स्थान के सबूत के तौर पर यदि जगह अपनी है, तो मालिकाना हक से संबंधित कागज चाहिए। यदि जगह किराए पर ली गई है, तो किरायानामा देना होगा। अगर बिना किराए के मिली है, तो उससे संबंधित सबूत।
2. बैंक स्टेटमेंट की कॉपी।
3. अधिकृत प्रतिनिधि के संबंध में एक अधिकार पत्र।
4. एकल व्यापारी, साझेदार, कर्ता (मुख्य सदस्य), मैनेजिंग डायरेक्टर, या मैनेजिंग ट्रस्टी की फोटो।
In simple words: जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए आपको अपनी जगह के कागज, बैंक स्टेटमेंट, किसी अधिकृत व्यक्ति का पहचान पत्र और मालिक या प्रबंधक की फोटो जैसे दस्तावेज देने होते हैं।
🎯 Exam Tip: जीएसटी पंजीकरण के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखना बेहद महत्वपूर्ण है। दस्तावेजों की सही और पूरी जानकारी जमा करने से प्रक्रिया जल्दी पूरी होती है।
RBSE Class 12 Business Studies Chapter 15 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. माल एवं सेवाकर का संक्षिप्त परिचय दीजिये। इसकी विशेषताओं को भी समझाइये।
Answer: "एक देश एक टैक्स, एक बाजार" - यह जीएसटी का मुख्य नारा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, "गरीबों के आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण में हमारा लक्ष्य, जीएसटी इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकता है।"
जीएसटी (GST) का अर्थ गुड्स एंड सर्विस टैक्स है। यह एक व्यापक अप्रत्यक्ष कर है जो भारत में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाता है। यह विभिन्न केंद्रीय और राज्य करों को मिलाकर एक एकीकृत कर प्रणाली बनाता है।
जीएसटी बिल से पिछड़े राज्यों का विकास संभव है। पहले, भारत में कई सामानों की कीमतें अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती थीं, लेकिन जीएसटी बिल लागू होने के बाद ऐसा नहीं होगा। हर उत्पाद पर लगने वाला टैक्स केंद्र और राज्य को बराबर मिलेगा। यह साफ है कि राष्ट्र में वस्तु की कीमत एक जैसी करने के लिए जीएसटी आवश्यक है।
निष्कर्ष रूप में, जीएसटी भारत की अर्थव्यवस्था, व्यापार और विभिन्न व्यक्तियों पर काफी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। यह आम आदमी के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि सस्ती वस्तुएं प्राप्त करने के लिए दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि पूरे देश में वस्तु की कीमत समान होगी। इसी से "एक देश, एक टैक्स, एक बाजार" की अवधारणा साकार होती है। यह केंद्र सरकार का एक सराहनीय कदम है।
जीएसटी की विशेषताएँ – जीएसटी की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं –
(1) यह बिक्री के स्थान के आधार पर लगने वाला कर है। यदि एक राज्य के अंदर बिक्री होती है, तो सीजीएसटी और एसजीएसटी दोनों लगेंगे। यदि एक राज्य से दूसरे राज्य में बिक्री होती है, तो आईजीएसटी लगेगा।
(2) यह बिक्री के प्रत्येक स्तर पर लगेगा। जीएसटी के तहत माल जितनी बार बेचा जाएगा, उतनी ही बार निर्धारित दर से कर वसूला जाएगा, लेकिन पूर्व में चुकाए गए खरीद के आधार पर जीएसटी का समायोजन किया जाएगा।
(3) सभी कर योग्य माल और सेवाएँ, जो जीएसटी के दायरे में आती हैं, उन पर लागू होंगी। निम्न पर जीएसटी नहीं लगेगा:
• कर-मुक्त माल और सेवाएँ जो सीजीएसटी और एसजीएसटी के लिए एक समान सूची में हैं।
• माल और सेवाएँ जो जीएसटी की परिधि से बाहर हैं।
• एक निर्धारित सीमा से कम लेनदेन।
(4) भारत में दोहरी जीएसटी प्रणाली लागू की जाएगी। दोहरे जीएसटी का अर्थ है केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा वसूला जाने वाला जीएसटी। केंद्रीय जीएसटी (CGST) केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाएगा, और राज्य जीएसटी (SGST) राज्य सरकारों द्वारा वसूला जाएगा।
(5) राज्य के भीतर होने वाली बिक्री या प्रदान की जाने वाली सेवा पर SGST और CGST दोनों वसूल किए जाएंगे।
(6) अंतर्राज्यीय बिक्री के मामले में IGST वसूल किया जाएगा, जो केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाएगा।
(7) आईजीएसटी राज्य के बाहर से माल आयात करने पर लगेगा, तथा माल या सेवाओं के अंतर्राज्यीय स्टॉक हस्तांतरण पर भी वसूल किया जाएगा।
(10) निम्न को छोड़कर सभी माल एवं सेवाएँ जीएसटी के दायरे में आने की संभावना है:
• शराब – इस पर राजकीय उत्पाद शुल्क एवं वैट देय होगा।
• बिजली – इस पर बिजली शुल्क देय होगा।
• रियल एस्टेट इस पर प्रॉपर्टी कर एवं स्टाम्प ड्यूटी देय होगा।
• पेट्रोलियम उत्पाद।
• तम्बाकू उत्पाद, सेंट्रल उत्पाद शुल्क विभाग के अधीन होंगे।
(11) निम्नलिखित कर जीएसटी में शामिल किए जाएंगे, अर्थात जीएसटी वसूल करने के बाद ये टैक्स समाप्त हो जाएंगे और वसूल नहीं होंगे:
केन्द्रीय कर -
• केंद्रीय उत्पाद शुल्क
• अतिरिक्त उत्पाद शुल्क
• उत्पाद शुल्क जो मेडिसिन एवं टॉयलेटरीज प्रिपेरेशन कानून के तहत वसूल किया जाता है।
• अतिरिक्त सीमा शुल्क
• सेवा कर
• सरचार्ज एवं सेस राज्य कर
• स्टेट वैट विक्रय कर
• केंद्रीय विक्रय कर
• क्रय कर
• मनोरंजन कर
• विलासिता कर
• एंट्री कर
• लॉटरी, शर्त एवं जुए पर लगने वाला कर सरचार्ज एवं सेस।
(12) जीएसटी की चार दरें निर्धारित होंगी –
• आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की दर
• सामान्य वस्तुओं एवं सेवाओं की प्रभापित दर
• कीमती धातुओं की विशेष दर
• शून्य दर।
(15) वस्तुओं के वर्गीकरण के लिए एचएसएन (Harmonized System of Nomenclature) एवं कोड इस्तेमाल किया जाएगा।
(16) सेवाओं के लिए वर्तमान कोडिंग सिस्टम उपयोग में लिया जाएगा।
(17) पूरे देश में उत्पाद या वस्तु की कीमत एक समान होगी।
(18) गरीब वर्ग और आम आदमी को फायदा होगा।
(19) टैक्स प्रणाली में सुधार होगा।
In simple words: जीएसटी एक ही देश में एक ही टैक्स लाने वाला सिस्टम है जो कई पुराने टैक्सों को खत्म कर देगा। इसकी खास बातें हैं कि यह बिक्री के हर स्तर पर लगता है, केंद्र और राज्य दोनों इसे वसूलते हैं, और यह कई चीजों पर एक समान दाम तय करेगा, जिससे आम लोगों और व्यापारियों को फायदा होगा। शराब, बिजली और पेट्रोलियम जैसे कुछ सामान जीएसटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
🎯 Exam Tip: जीएसटी की परिभाषा, इसकी प्रमुख विशेषताओं (जैसे दोहरी व्यवस्था, बिक्री-आधारित कर) और उन पुराने करों को याद रखें जिन्हें इसने बदल दिया है। उदाहरण सहित स्पष्टीकरण हमेशा अच्छे अंक दिलाता है।
Question 2. माल एवं सेवा कर के अधीन पंजीकरण प्रक्रिया को समझाइये।
Answer: पंजीकरण (Registration): जीएसटी की वसूली केंद्र और राज्य दोनों सरकारें करती हैं, लेकिन व्यापारी को सिर्फ एक ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है और एक ही रिटर्न भरनी होती है। जीएसटी का कंप्यूटर सिस्टम केंद्र और राज्य के बीच संबंधित जानकारी साझा करता है।
जो व्यक्ति वर्तमान में वैट के तहत अपने राज्य में पंजीकृत हैं, उन्हें स्वतः ही जीएसटी पंजीकरण नंबर जारी कर दिया जाएगा। हालांकि, पंजीकरण जारी करने से पहले कुछ अतिरिक्त जानकारी मांगी जाएगी, जिसे प्रस्तुत करने के बाद ही उन्हें जीएसटी पंजीकरण नंबर दिया जाएगा।
जीएसटी पंजीकरण पैन कार्ड नंबर पर आधारित होता है। जीएसटी पंजीकरण नंबर 15 अंकों का होगा, जो इस प्रकार होगा:
| स्टेट कोड | पैन नम्बर के 10 अंक | Entity Code | Blank Digit | Check Code |
|---|---|---|---|---|
| 01 | 03 04 05 06 07 | 13 | 14 | 15 |
| 02 | 08 09 10 11 12 |
वर्तमान पंजीकृत व्यापारियों की स्थिति यह है कि जो व्यापारी वर्तमान वैट या उत्पाद या सर्विस कर कानून में पंजीकृत हैं, उनकी सारी जानकारी जीएसटी कॉमन पोर्टल पर उपलब्ध हो जाएगी और उनका जीएसटी आईएन जनरेट हो जाएगा। कुछ करदाता राज्य या केंद्रीय कर के तहत पंजीकृत हैं, या कुछ करदाता दोनों में पंजीकृत हैं। जीएसटी कानून में, व्यापारी को राज्य जीएसटी के तहत ही पंजीकृत किया जाएगा। एक राज्य में एक व्यापारी चाहे तो एक रजिस्ट्रेशन करा सकता है या अपने अलग-अलग व्यवसायों के लिए भी करा सकता है।
यदि कोई व्यवहारी निर्धारित अवधि में डेटा अपडेट नहीं करेगा, तो उसका पंजीकरण स्थगित कर दिया जाएगा और स्थगन जारी रहेगा।
नए व्यवहारियों का पंजीकरण – ऐसे व्यवहारी जो जीएसटी में पहली बार नया पंजीकरण कराना चाहते हैं, उन्हें जीएसटी पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण करवाना होगा। यदि कोई व्यक्ति एक ही राज्य में एक से ज़्यादा पंजीकरण कराना चाहता है या अलग-अलग राज्यों में पंजीकरण कराना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है। आवेदन के साथ लगने वाले दस्तावेज़ों की स्कैन कॉपी ऑनलाइन आवेदन के साथ संलग्न करनी होगी –
(1) साझेदारी फर्म होने पर साझेदारी संलेख, सोसाइटी/ट्रस्ट के मामले में पंजीकरण प्रमाण पत्र, और कंपनी के मामले में एमसीए 21 से ऑनलाइन जाँच होगी। किसी दस्तावेज को लगाने की आवश्यकता नहीं है।
(2) कार्य के मुख्य स्थान के सबूत के रूप में, यदि जगह अपनी है तो मालिकाना हक से संबंधित कागज और किराए के मामले में किरायानामा। यदि बिना किराए की जगह मिली है तो उससे संबंधित सबूत लगाने होंगे।
(3) बैंक स्टेटमेंट की कॉपी।
(4) अधिकृत प्रतिनिधि के संबंध में अधिकार पत्र।
(5) एकल व्यापारी, साझेदार, कर्ता, मैनेजिंग डायरेक्टर, मैनेजिंग ट्रस्टी की फोटो, आदि दस्तावेज संलग्न करने होंगे।
जीएसटी विभाग इन सभी सूचनाओं को केंद्र-राज्य अधिकारी विभाग को भेजेगा, जो संबंधित न्यायिक अधिकारी को देंगे। तीन दिन में रिपोर्ट भेजी जाएगी। यदि दी गई जानकारी सही पाई जाती है तो पोर्टल पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी कर देगा। यदि जानकारी में कोई अंतर या कमी पाई जाती है, तो अधिकारी सीधे ही आवेदक को जानकारी देंगे या कॉमन पोर्टल के ज़रिये इसकी सूचना आवेदक तक पहुँचा दी जाएगी।
यदि केंद्र का कोई अधिकारी कोई कमी निकालता है तो इसकी जानकारी राज्य विभाग को भी दी जाएगी। यदि राज्य का कोई अधिकारी, कोई कमी निकालता है तो केंद्र जीएसटी को सूचना दी जाएगी। उपरोक्त से स्पष्ट है कि राज्य एवं केंद्र दोनों ही जीएसटी विभाग पंजीकरण आवेदन की जाँच करेंगे। इस प्रक्रिया पूरी होने पर जीएसटी में पंजीकरण होगा।
In simple words: जीएसटी पंजीकरण में व्यापारी को एक ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है। पुराने वैट रजिस्टर्ड लोगों को ऑटोमेटिक नंबर मिल जाता है। नए लोगों को पोर्टल पर जाकर, पैन कार्ड आधारित 15 अंकों का GSTIN नंबर लेना होता है। इसके लिए जगह के सबूत, बैंक स्टेटमेंट, प्रतिनिधि का पहचान पत्र और फोटो जैसे कई दस्तावेज देने होते हैं। केंद्र और राज्य दोनों विभाग इसे जांचते हैं।
🎯 Exam Tip: जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया में शामिल सभी चरणों और आवश्यक दस्तावेजों को क्रम से याद रखें। यह भी समझें कि GSTIN नंबर के हर हिस्से का क्या मतलब है।
Question 3. दोहरा जी एस टी क्या है? यह किस प्रकार भारत में लागू किया जायेगा? विस्तृत रूप से समझाइये।
Answer: दोहरा जीएसटी:
विश्व के अन्य सभी देशों में, जहाँ जीएसटी लागू है, वहाँ एक ही तरह की कार्यप्रणाली है। वहाँ, केंद्र सरकार ही जीएसटी वसूल करती है।
परन्तु भारत में, जीएसटी निम्न प्रकार से वसूला जाता है और इसे दोहरा जीएसटी कहा जाता है:
1. सीजीएसटी (CGST) – यह वह जीएसटी है जो केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाता है।
2. एसजीएसटी (SGST) – यह वह जीएसटी है जो राज्य सरकार द्वारा वसूला जाता है।
यह जीएसटी केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा वर्तमान में वसूल किए जा रहे सभी करों को समाप्त करके नए कर (GST) के रूप में एक ही कर वसूल किया जाएगा। इसीलिए इसे "एक देश, एक टैक्स, एक बाजार" कहा जा रहा है।
इसे और बेहतर ढंग से समझने के लिए निम्न बातें देखें:
CGST: केंद्रीय जीएसटी (Central GST) का अर्थ है:
• यह राज्य के भीतर होने वाली आपूर्तियों पर लागू होता है।
• एकत्र किया गया कर केंद्र सरकार के साथ साझा किया जाएगा।
SGST: राज्य जीएसटी (State GST) का अर्थ है:
• यह राज्य के भीतर होने वाली आपूर्तियों पर लागू होता है।
• एकत्र किया गया कर राज्य सरकार के साथ साझा किया जाएगा।
IGST: एकीकृत जीएसटी (Integrated GST) का अर्थ है:
• यह अंतर्राज्यीय (Interstate) और आयात लेनदेन पर लागू होता है।
• एकत्र किया गया कर केंद्र और राज्य के बीच साझा किया जाएगा।
भारत में जीएसटी इस प्रकार लागू होगा: इनपुट कर जमा-जीएसटी में तीन प्रकार के कर लगाए जाने हैं। अंतर्राज्यीय बिक्री पर आईजीएसटी देय होगा। राज्य के भीतर माल बेचने पर एसजीएसटी और सीजीएसटी दोनों कर देय होंगे। तीनों ही कर की राशि के लिए अलग-अलग खाते रखने होंगे और उन्हें निम्न प्रकार समायोजित किया जाएगा:
आईजीएसटी की जमा – यदि कोई व्यापारी अंतर्राज्यीय खरीद करता है और उस पर आईजीएसटी का भुगतान किया गया है, तो उसका इनपुट कर जमा सबसे पहले देय आईजीएसटी के निर्गम कर से प्राप्त होगा।
| कुल इनपुट कर | 1,08,000 |
|---|---|
| सर्वप्रथम आईजीएसटी से समायोजन | 55,000 |
| शेष इनपुट कर | 53,000 |
| उपरोक्त का समायोजन अब सीजीएसटी से | 29,000 |
| शेष इनपुट कर जिसका समायोजन एससी-एसटी से किया जा सकेगा | 24,000 |
सीजीएसटी की जमा – यदि व्यापारी राज्य के भीतर माल की खरीद करता है, तो उस पर उसने सीजीएसटी और एसजीएसटी दोनों कर चुकाए हैं। इस सीजीएसटी का इनपुट कर जमा सबसे पहले व्यापारी को सीजीएसटी के आउटपुट कर से प्राप्त होगा। सीजीएसटी के इनपुट जमा का लाभ एसजीएसटी के आउटपुट कर में से प्राप्त नहीं होगा।
एसजीएसटी की जमा – राज्य के भीतर माल खरीदने पर जो एसजीएसटी का भुगतान किया गया है, उसका इनपुट कर जमा सबसे पहले एसजीएसटी के आउटपुट कर से प्राप्त होगा। शेष आईजीएसटी के आउटपुट कर से भी इसे समायोजित किया जा सकता है। एसजीएसटी के इनपुट जमा का लाभ सीजीएसटी के आउटपुट कर से तथा सीजीएसटी के इनपुट का लाभ एसजीएसटी के आउटपुट कर से प्राप्त नहीं किया जा सकता है।
In simple words: दोहरा जीएसटी मतलब भारत में केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग जीएसटी वसूलती हैं। सीजीएसटी केंद्र के लिए, एसजीएसटी राज्य के लिए और आईजीएसटी अंतर्राज्यीय व्यापार के लिए होता है। हर टैक्स का पैसा अलग रखा जाता है और फिर हिसाब-किताब के बाद जमा किया जाता है।
🎯 Exam Tip: सीजीएसटी, एसजीएसटी, और आईजीएसटी के बीच अंतर को समझें और यह भी जानें कि इन करों का समायोजन कैसे किया जाता है, खासकर इनपुट टैक्स क्रेडिट के संदर्भ में।
Question 4. जी एस टी के अधीन व्यापारी को कौन-कौन सी विवरणियाँ जमा करवानी पड़ती हैं। समझाइये।
Answer: कर विवरणियाँ:
जीएसटी लागू होने के बाद, व्यापारियों को मासिक रिटर्न भरना पड़ सकता है। पहले वैट और उत्पाद शुल्क में छोटे व्यापारियों को तिमाही रिटर्न भरनी पड़ती थी, और सर्विस कर में छमाही रिटर्न भरने का प्रावधान था। प्रत्येक व्यवहारी को निम्न तीन रिटर्न विवरणियां भरकर प्रस्तुत करनी होंगी:
(1) बिक्री का विवरण (धारा 25) - माह के दौरान माल की बिक्री या प्रदान की गई सेवा की जानकारी इस रिटर्न में देनी होगी। यह जानकारी माह की समाप्ति से 10 दिन के भीतर प्रस्तुत करनी होगी। इसमें शून्य दर पर की गई बिक्री, अंतर्राज्यीय बिक्री, क्रय वापसी, देश के बाहर निर्यात, डेबिट नोट, क्रेडिट नोट, आदि सभी को शामिल करना होगा। इस जानकारी को क्रेता द्वारा धारा 26 में पेश की गई रिटर्न से मिलाया जाएगा, और यदि कोई मिसमैच आता है, तो उसे ठीक करने का मौका व्यवहारी को दिया जाएगा।
(2) खरीद का विवरण (धारा 26) - माह के दौरान खरीदे गए माल एवं प्राप्त की गई सेवाओं की जानकारी माह की समाप्ति से 15 दिन के भीतर देनी होगी। इसमें अंतर्राज्यीय खरीद की जानकारी भी देनी होगी। ऐसी संस्थाएं जिन पर रिवर्स चार्ज के तहत सेवा
(3) मासिक विवरणी (धारा 27) – बिक्री एवं खरीद का विवरण क्रमशः 10 एवं 15 तारीख को प्रस्तुत करने के पश्चात व्यवहारी को 20 तारीख तक अपनी मासिक विवरणी ऑन लाइन प्रस्तुत करनी होगी। मासिक विवरणी में खरीद एवं बिक्री की जानकारी के अतिरिक्त इनपुट कर जमा, चुकाये गये कर की जानकारी एवं अन्य जानकारियाँ प्रस्तुत करनी होंगी। कम्पोजीशन स्कीम के तहत आने वाले व्यवहारी बिक्री विवरण, खरीद विवरण एवं विवरण को तिमाही आधार पर प्रस्तुत करेंगे।
विवरण प्रस्तुत करने से पूर्व देय कर जमा कराना आवश्यक है, अन्यथा प्रस्तुत की गई विवरणी को अयोग्य करार दे दिया जाएगा। यदि किसी माह में कोई खरीद बिक्री नहीं है, तब भी शून्य की विवरणी प्रस्तुत करना आवश्यक है। कर कटौती करने वाले व्यवहारियों को भी मासिक विवरणी भरनी होगी।
विवरणी समय पर न भरने पर लेट फीस -
यदि कोई व्यवहारी अपनी विवरणी समय पर प्रस्तुत नहीं कर पाता है, तो उस पर लेट फीस लगाई जाने का प्रावधान धारा 33 में किया गया है। धारा 25, 26 में बताए गए बिक्री एवं खरीद विवरण को समय पर प्रस्तुत न करने पर 100 रुपये प्रतिदिन अधिकतम 5000 रुपये की पेनल्टी लगाई जा सकती है। धारा 30 में प्रस्तुत की जाने वाले वार्षिक विवरणी को देरी से प्रस्तुत करने में देरी होने पर 100 रुपये प्रतिदिन की शास्ति (पेनल्टी) लगाई जा सकती है, जो विक्रय राशि के 0.25 प्रतिशत तक अधिकतम हो सकती है।
In simple words: जीएसटी के तहत व्यापारियों को हर महीने तीन तरह की रिटर्न भरनी पड़ती है: बिक्री की जानकारी (GSTR-1), खरीद की जानकारी (GSTR-2) और पूरी मासिक रिटर्न (GSTR-3B)। ये रिटर्न तय समय पर भरनी होती हैं, नहीं तो जुर्माना लगता है।
🎯 Exam Tip: जीएसटी रिटर्न के विभिन्न प्रकारों (GSTR-1, GSTR-2, GSTR-3B) और उनकी अंतिम तारीखों को याद रखें। समय पर रिटर्न न भरने पर लगने वाले जुर्माने की जानकारी भी महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Business Studies Chapter 15 व्यावहारिक प्रश्न
Question 1. यदि राजस्थान के एक निर्माता ने Rs.15,00,000 का कच्चा माल जयपुर के एक व्यापारी से खरीदा जिसने सी जी एस टी 12 प्रतिशत तथा राज्य जी एस टी 6 प्रतिशत लगाकर कच्चे माल का विक्रय किया। निर्माता ने इस कच्चे माल से वस्तु क की Rs.56,000 इकाइयाँ निर्मित की तथा Rs. 8,60,000 का अतिरिक्त व्यय किया। उसने लाभ सहित सभी इकाइयों को Rs.25,00,000 में एक पंजीकृत व्यापारी को बेच दी तथा इस पर सी जी एस टी 12 प्रतिशत तथा राज्य जी एस टी 6 प्रतिशत वसूल की। देय कर की गणना कीजिये।
Answer: (A) निर्माता द्वारा माल। सेवा खरीद पर जी एस टी आगम कर जमा बिल में निम्न प्रकार दर्शाया जायेगा –
| विवरण | राशि Rs. |
|---|---|
| क्रय मूल्य | 15,00,000 |
| जोड़ें : केन्द्रीय जी.एस.टी. 12 प्रतिशत | 1,80,000 |
| जोड़ें : राज्य जी.एस.टी. 6 प्रतिशत | 90,000 |
| कुल चुकायी गयी राशि |
| जोड़ें : राज्य जी.एस.टी. 6 प्रतिशत | 1,50,000 |
| कुल : चुकायी गयी राशि | 29,50,000 |
| विवरण | केन्द्रीय जी. एस. टी. | राज्य जी. एस. टी. |
|---|---|---|
| विक्रय मूल्य पर देय जी. एस. टी. | 3,00,000 | 1,50,000 |
| घटायें-क्रय मूल्य पर चुकायी गई जी एस टी. | 1,80,000 | 90,000 |
| कुल देय कर जमा योग्य | 1,20,000 | 60,000 |
🎯 Exam Tip: इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सही गणना करना महत्वपूर्ण है। बेचे गए माल पर देय कर से खरीदे गए माल पर चुकाए गए कर को घटाकर ही वास्तविक देय कर की गणना होती है।
Question 2. राजस्थान के एक व्यापारी ने Rs.6,00,000 का माल जयपुर के एक व्यापारी से खरीदा जिस पर सी जी एस टी 12 प्रतिशत तथा एस जी एस टी 6 प्रतिशत लगाया गया है। व्यापारी ने इस माल का 3/4 भाग Rs.8,00,000 में एक पंजीकृत व्यापारी को राजस्थान में बेच दिया इस पर सी जी एस टी 12 प्रतिशत तथा एस जी एस टी 6 प्रतिशत वसूल की। शेष माल Rs.1,00,000 में मध्य प्रदेश के एक व्यापारी को बेच दिया इस पर आई जी एस टी 14 प्रतिशत वसूल की। देय कर की गणना कीजिये।
Answer: (1) व्यापारी द्वारा माल खरीद पर जी एस टी आगम कर जमा बिल में निम्न प्रकार होगी –
| विवरण | राशि Rs. |
|---|---|
| क्रय मूल्य | 6,00,000 |
| जोड़ें : केन्द्रीय जी.एस.टी. 12 प्रतिशत | 72,000 |
| जोड़ें : राज्य जी.एस.टी. 6 प्रतिशत | 36,000 |
| कुल चुकायी गयी राशि | 7,08,000 |
| विवरण | राज्य के भीतर बिक्री Rs. | राज्य के बाहर बिक्री Rs. |
|---|---|---|
| विक्रय मूल्य | 12,00,000 | 6,00,000 |
| जोड़ें : केन्द्रीय जी.एस.टी. 12 प्रतिशत | 1,44,000 | |
| जोड़ें : राज्य जी.एस.टी. 6 प्रतिशत | 72,000 | |
| जोड़ें : राज्य के बाहर बिक्री पर आई.जी.एस.टी. 15 प्रतिशत | 90,000 | |
| कुल चुकायी गयी राशि | 14,16,000 | 6,90,000 |
| विक्रय मूल्य पर देय जी. एस. टी. | 1,44,000 | 72,000 | 90,000 |
| घटायें-क्रय मूल्य पर चुकायी गई जी एस टी. | 1,44,000 | 72,000 | |
| कुल देय कर | 90,000 |
(3) व्यापारी द्वारा देय जी एस टी को गणना –
| विवरण | केन्द्रीय जी. एस. टी. | राज्य जी. एस. टी. | राज्य के बाहर आई.जी.एस.टी. |
|---|---|---|---|
| विक्रय मूल्य पर देय जी. एस. टी. | 96,000 | 48,000 | 14,000 |
| घटायें-क्रय मूल्य पर चुकायी गई जी एस टी. | 72,000 | 36,000 | |
| कुल देय कर | 24,000 | 12,000 | 14,000 |
🎯 Exam Tip: आंतरिक और अंतर-राज्यीय लेनदेन के लिए जीएसटी की सही दरों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का समायोजन भी ध्यान से करें।
RBSE Class 12 Business Studies Chapter 15 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
Question 1. कौन – कौन से माल एवं सेवायें हैं जिनके जी एस टी के दायरे में नहीं आने की संभावना है।
Answer: निम्नलिखित माल एवं सेवायें जिनके जीएसटी के दायरे में नहीं आने की संभावना है:
• शराब – इस पर राजकीय उत्पाद शुल्क एवं वैट देय होगा।
• बिजली – इस पर बिजली शुल्क देय होगा।
• रियल एस्टेट इस पर प्रॉपर्टी कर एवं स्टाम्प ड्यूटी देय होगा।
• पेट्रोलियम उत्पाद।
• तम्बाकू उत्पाद, सेंट्रल उत्पाद शुल्क विभाग के अधीन होंगे।
उपरोक्त माल एवं सेवा में जीएसटी के दायरे से बाहर रखी गयी हैं।
जीएसटी के लाभों को इस प्रकार भी बताया जा सकता है:
"जीएसटी से टैक्स प्रणाली में सुधार है।"
"जीएसटी से भारत का उद्धार है।"
"आम आदमी के टैक्स का भार कम करेगा जीएसटी का विचार।"
"एक देश, एक टैक्स, एक बाजार।"
• भिन्न-भिन्न प्रकार के करों की समाप्ति, सभी करों को मिलाकर एक ही कर हो जाएगा।
• निर्माता को अब एक ही टैक्स भरना होगा, जिससे वस्तुओं के दामों में गिरावट आएगी।
• पूरे देश में एक-सा टैक्स होने के कारण, देशी-विदेशी दोनों प्रकार के व्यापारियों को लाभ होगा।
• भारत के सभी राज्यों के मध्य व्यवसाय करना और सरल हो जाएगा।
• जीएसटी बिल के लागू होने से जीडीपी (GDP) में 1 से 2% की वृद्धि हो सकेगी।
(6) सभी राज्यों में दाम एक समान होंगे।
In simple words: कुछ चीजें जैसे शराब, बिजली, रियल एस्टेट, पेट्रोलियम और तम्बाकू जीएसटी के दायरे में नहीं आते हैं और उन पर पुराने टैक्स ही लगते हैं। जीएसटी से टैक्स सिस्टम सुधरेगा, दाम कम होंगे, व्यापार आसान होगा और देश की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा।
🎯 Exam Tip: उन वस्तुओं और सेवाओं की सूची को याद रखें जो जीएसटी के दायरे से बाहर हैं। साथ ही, जीएसटी के प्रमुख लाभों को समझना भी महत्वपूर्ण है।
Question 3. व्यवहारी का पंजीकरण कौन सी सरकार के हाथ में होता है पंजीकरण का एक नमूना बनाकर बताइये कि इन अंकों की पहचान क्या है?
Answer: व्यवहारी का जीएसटी पंजीकरण राज्य सरकार के हाथ में होता है। राज्य जीएसटी विभाग ही व्यवहारी का पंजीकरण का कार्य करता है। पंजीकरण का एक नमूना निम्न प्रकार है –
| स्टेट कोड | पैन नम्बरं के अंक (10) | Entity Code | Blank Digit | Check Code |
|---|---|---|---|---|
| 02 | ||||
| 01 | 03 04 05 06 07 | 13 | 14 | 15 |
| 02 | 08 09 10 11 12 |
In simple words: व्यापारी का जीएसटी रजिस्ट्रेशन राज्य सरकार करती है। GSTIN 15 अंकों का होता है, जिसमें पहले दो अंक राज्य कोड, अगले दस पैन नंबर, एक इकाई कोड, एक खाली अंक और अंत में एक चेक कोड होता है।
🎯 Exam Tip: GSTIN के 15 अंकों की संरचना को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें राज्य कोड, पैन नंबर और इकाई कोड शामिल हैं। यह करदाता की पहचान के लिए केंद्रीय है।
Question 4. मध्य प्रदेश के एक व्यापारी ने Rs.12,00,000 का माल ग्वालियर (मध्य प्रदेश के दूसरे व्यापारी से खरीदा जिसपर 12 प्रतिशत सी जी एस टी एवं 6 प्रतिशत एस जी एस टी चुकाया। व्यापारी ने इस माल का 1/3 हिस्सा गुजरात के एक व्यापारी को Rs.6,00,000 में देय दिया जिस पर 15% की दर से आई जी एस टी चुकाया। शेष माल ग्वालियर (म. प्र.) के ही व्यापारी को Rs. 12,00,000 में बेच दिया जिस पर 12 प्रतिशत सी जी एस टी व 6 प्रतिशत एस जी एस टी चुकाया। देय कर की गणना कीजिये।
Answer:
(1) व्यापारी द्वारा माल खरीदने पर जीएसटी आगम कर (इनपुट टैक्स) बिल में इस प्रकार दिखाया जाएगा:
| विवरण | राशि Rs |
|---|---|
| क्रय मूल्य | 12,00,000 |
| जोड़े : केन्द्रीय जी.एस.टी. 12 प्रतिशत | 1,44,000 |
| जोड़े : राज्य जी.एस.टी. 6 प्रतिशत | 72,000 |
| कुल चुकायी गयी राशि | 14,16,000 |
(2) व्यापारी द्वारा माल बेचने पर जीएसटी निर्गम कर (आउटपुट टैक्स) बिल में इस प्रकार दिखाया जाएगा:
| विवरण | राज्य के भीतर बिक्री Rs | राज्य के बाहर बिक्री Rs |
|---|---|---|
| विक्रय मूल्य | 12,00,000 | 6,00,000 |
| जोड़े : केन्द्रीय जी.एस.टी. 12 प्रतिशत | 1,44,000 | - |
| जोड़े : राज्य जी.एस.टी. 6 प्रतिशत | 72,000 | - |
| जोड़े : राज्य के बाहर बिक्री पर आई.जी.एस.टी. 15 प्रतिशत | - | 90,000 |
| कुल चुकायी गयी राशि | 14,16,000 | 6,90,000 |
(3) व्यापारी द्वारा देय जीएसटी की गणना इस प्रकार होगी:
| विवरण | केन्द्रीय जी.एस.टी. | राज्य जी.एस.टी. | आई.जी.एस.टी. |
|---|---|---|---|
| विक्रय मूल्य पर देय जी.एस.टी. (आउटपुट टैक्स) | 1,44,000 | 72,000 | 90,000 |
| घटायें: क्रय मूल्य पर चुकायी गई जी.एस.टी. (इनपुट टैक्स क्रेडिट) | 1,44,000 | 72,000 | - |
| कुल देय कर जमा योग्य | - | - | 90,000 |
In simple words: पहले व्यापारी ने माल खरीदते समय जो टैक्स दिया, उसे इनपुट टैक्स कहते हैं। फिर बेचते समय जो टैक्स लिया, उसे आउटपुट टैक्स कहते हैं। आखिर में, कुल कितना टैक्स सरकार को देना है, यह जानने के लिए आउटपुट टैक्स में से इनपुट टैक्स घटा देते हैं। यदि कोई टैक्स क्रेडिट नहीं बचता है, तो वही टैक्स देना होगा।
🎯 Exam Tip: जीएसटी की गणना करते समय, खरीदने और बेचने पर लगे टैक्स को ध्यान से अलग-अलग लिखें। इनपुट टैक्स क्रेडिट का सही उपयोग करें, खासकर जब राज्य के भीतर और बाहर दोनों तरह की बिक्री हो रही हो.
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