RBSE Solutions Class 12 Business Studies Chapter 14 प्रबन्ध का सामाजिक उत्तरदायित्व एवं निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व

NCERT Solutions for Class 12 Business Studies: Chapter 14 प्रबन्ध का सामाजिक उत्तरदायित्व एवं निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व

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RBSE Class 12 Business Studies Chapter 14 अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. सामाजिक उत्तरदायित्व किसे कहते हैं?
Answer: समाज व्यवसाय जगत से जो अपेक्षाएं रखता है, प्रबंध उन अपेक्षाओं को अपने कौशल से पूरा करता है। इसे ही सामाजिक उत्तरदायित्व कहते हैं। क्योंकि समाज को व्यवसाय की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करनी होती है, इसलिए समाज भी व्यवसाय जगत से कुछ उम्मीदें रखता है। इन उम्मीदों को पूरा करना ही प्रबंध का समाज के प्रति उत्तरदायित्व है।
In simple words: सामाजिक उत्तरदायित्व का मतलब है कि व्यवसाय को समाज की उम्मीदों को पूरा करना चाहिए, क्योंकि समाज व्यवसाय को बढ़ने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक उत्तरदायित्व की परिभाषा देते समय, व्यवसाय और समाज के बीच के आपसी संबंध और अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से उजागर करें।

 

Question 3. सामाजिक चेतना से क्या आशय है?
Answer: सामाजिक चेतना का अर्थ है समाज का चौकन्ना, सावचेत और जागरूक रहना। इसका मतलब है कि समाज को यह समझना चाहिए कि उद्योग और बड़े व्यवसाय उसकी मूलभूत जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। इसलिए, व्यवसाय और प्रबंध को भी समाज का ध्यान रखना चाहिए। समाज कल्याण का अर्थ है ऐसी योजनाएं जो समाज के लिए उपयोगी हों, जैसे बेरोजगारी हटाना, गरीबी कम करना, अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तुएं देना, सही कीमत पर सामान उपलब्ध कराना और जमाखोरी से बचना। यदि समाज ऐसी सोच रखेगा कि व्यवसाय समाज से ही पैदा होता है, बढ़ता है और फलता-फूलता है, तो यही सामाजिक चेतना कहलाएगी।
In simple words: सामाजिक चेतना का मतलब है कि समाज जागरूक रहे कि व्यवसाय उसकी जरूरतों को पूरा कर रहा है, और व्यवसाय भी समाज की भलाई का ध्यान रखे।

🎯 Exam Tip: सामाजिक चेतना की व्याख्या करते समय, समाज की जागरूकता और व्यवसाय की जिम्मेदारी दोनों पहलुओं को शामिल करें।

 

Question 4. निगम से क्या आशय है?
Answer: निगम एक ऐसी व्यवस्था या प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी कंपनी को निर्देशित और नियंत्रित किया जाता है। इसमें कई स्तर होते हैं जैसे शेयरधारक (मालिक) जो निदेशक नियुक्त करते हैं, और फिर निदेशक दिन-प्रतिदिन के प्रबंधन के लिए कंपनी को चलाते हैं। यह एक संगठनात्मक ढाँचा है।
In simple words: निगम एक कंपनी चलाने का एक तरीका है, जिसमें मालिक, निदेशक और प्रबंधक मिलकर कंपनी को निर्देश देते और नियंत्रित करते हैं।

🎯 Exam Tip: निगम को एक ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित करें जो कंपनी के संचालन और नियंत्रण को सुनिश्चित करती है, जिसमें विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियाँ बँटी होती हैं।

 

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 14 लघु उत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. प्रबन्ध की सामाजिक उत्तरदायित्व की अवधारणा संक्षेप में बताइए।
Answer: कुछ साल पहले तक, प्रबंध का सामाजिक उत्तरदायित्व केवल समाज कल्याण के काम तक ही सीमित था। लेकिन 20वीं सदी के बाद के हिस्से में, सामाजिक उत्तरदायित्व का विचार पूरी तरह बदल गया और इसे एक नई अवधारणा कहा जाने लगा है। प्रबंध का असली रूप सामाजिक और मानवीय है, क्योंकि यह समाज के संसाधनों का ट्रस्टी (देखभाल करने वाला) होता है। इसका मतलब है कि प्रबंध समाज की सभी जरूरतों को पूरा करता है, जैसे भूमि, श्रम और पूंजी का उपयोग करके। इसलिए, प्रबंध को समाज की उम्मीदों के हिसाब से काम करना चाहिए। हाल के वर्षों में समाज ने प्रबंध से कुछ नई उम्मीदें रखी हैं, जैसे "सामाजिक बुराइयों को खत्म करने में नेतृत्व देना।" आजकल प्रबंध के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि समाज की बदलती उम्मीदों को समझकर सही सामाजिक व्यवहार करना। यह नई अवधारणा कहती है कि प्रबंधकों को सामाजिक हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेने चाहिए। यह इस बात पर जोर देती है कि व्यवसाय को समाज की मान्यताओं, जीवन स्तर, स्थिरता और एकता को नुकसान पहुंचाए बिना चलाया जाए। प्रबंधकों को समाज के हित में नीतियां और कार्यक्रम बनाने चाहिए, सामाजिक समस्याओं को हल करना चाहिए, और समाज को बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि समाज की भलाई बढ़ सके।
In simple words: पहले सामाजिक उत्तरदायित्व सिर्फ समाज सेवा था, पर अब इसका मतलब है कि प्रबंधकों को समाज की जरूरतों और भलाई को ध्यान में रखकर व्यवसाय चलाना चाहिए, क्योंकि वे समाज के संसाधनों का उपयोग करते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रबंध के सामाजिक उत्तरदायित्व की अवधारणा को समझाते समय, इसके विकास (पुराने और नए विचार) और समाज के प्रति इसकी विस्तृत भूमिका पर प्रकाश डालें।

 

Question 3. व्यवसाय के स्वयं के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व की संक्षेप में विवेचना कीजिए।
Answer: प्रबंध को समाज के सभी वर्गों के प्रति अपनी जिम्मेदारियाँ निभानी होती हैं। व्यवसाय के स्वयं के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व नीचे दिए गए हैं:
1. सामाजिक हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना
2. प्रबंध के पेशे के प्रति प्रतिष्ठा बनाए रखना
3. पेशेवर संगठनों की सदस्यता ग्रहण करना
4. पेशेवर शिष्टाचार का पालन करना
5. प्रबंध आचार संहिता का पालन करना
6. प्रबंधकीय ज्ञान और शोध के विकास में योगदान करना
7. प्रबंध के द्वारा सभी मजदूरों और कर्मचारियों के साथ मानवीय व्यवहार करना
8. पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ कार्य करना।
In simple words: व्यवसाय को अपने लिए भी कुछ जिम्मेदारियाँ निभानी होती हैं, जैसे सही फैसले लेना, अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखना, नियमों का पालन करना, ज्ञान बढ़ाना और कर्मचारियों के साथ अच्छा व्यवहार करना।

🎯 Exam Tip: जब व्यवसाय के स्वयं के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन करें, तो नैतिकता, पेशेवर आचरण और आंतरिक संबंधों पर केंद्रित मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 5. व्यवसाय की सरकार के प्रति दायित्वों की संक्षेप में विवेचना कीजिए।
Answer: प्रत्येक प्रबंध एक कॉर्पोरेट नागरिक होता है, इसलिए प्रबंध के सरकार के प्रति कुछ उत्तरदायित्व होते हैं जो इस प्रकार हैं:
1. सभी सरकारी नियमों और कानूनों का पालन करना।
2. सरकार की नीतियों के अनुसार व्यवसाय का संचालन करना।
3. व्यावसायिक उत्पादन क्षमता और लाइसेंस क्षमता का पूरा उपयोग करना।
4. राष्ट्रीय हित में देश के आर्थिक संसाधनों का सही उपयोग करना।
5. सरकारी क्षेत्र और प्रक्रियाओं को भ्रष्ट न करना।
6. करों का सही समय पर भुगतान करना और व्यवसाय का सही विवरण देना।
7. राष्ट्रीय कार्यक्रमों, जैसे अल्प बचत और परिवार कल्याण, आदि में सरकारी नीतियों को लागू करने में सहयोग देना।
8. दूसरों को नियम विरुद्ध काम करने से रोकने में सरकार की मदद करना।
In simple words: व्यवसाय को सरकार के नियमों का पालन करना चाहिए, देश के संसाधनों का सही उपयोग करना चाहिए, कर चुकाने चाहिए और सरकारी योजनाओं में सहयोग करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: सरकार के प्रति उत्तरदायित्वों को बताते समय, कानूनी अनुपालन, आर्थिक योगदान और सामाजिक कार्यक्रमों में सहयोग जैसे प्रमुख पहलुओं को उजागर करें।

 

Question 2. व्यवसाय के सामाजिक उत्तरदायित्वों की संक्षेप में विवेचना कीजिए।
Answer: प्रबंध के सामाजिक उत्तरदायित्व का क्षेत्र बहुत विस्तृत है, और इसे अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है। प्रबंध के सामाजिक उत्तरदायित्व किन-किन के प्रति होते हैं, इसे नीचे दिए गए विवरण से समझा जा सकता है।

प्रबंध के सामाजिक उत्तरदायित्व (विभिन्न हितधारकों के प्रति)
विश्व के प्रतिअपनी संस्था के प्रति
ऋणदाताओं के प्रतिसरकार के प्रति
अन्य व्यवसायों के प्रतिप्रबंध
कर्मचारियों के प्रतिस्वामियों के प्रति
व्यावसायिक संघ तथा पेशेवर संस्थाओं के प्रतिआपूर्तिकर्ताओं के प्रति
स्थानीयजन समुदाय के प्रतिग्राहकों के प्रति

उपरोक्त चार्ट से स्पष्ट होता है कि प्रबंध का सामाजिक उत्तरदायित्व का क्षेत्र बहुत विस्तृत है। इन सभी वर्गों और समूहों के सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रबंध को ध्यान रखना पड़ता है।

अपनी संस्था के प्रति दायित्व – एक प्रबंध के अपनी संस्था के प्रति निम्न दायित्व होते हैं:
1. संस्था के व्यवसाय का सफल संचालन करना
2. संस्था के उत्पादों की मांग उत्पन्न करना
3. संस्था को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना
4. व्यवसाय में नवाचारों को प्रोत्साहन देना
5. संस्था का विकास एवं विस्तार करना
6. शोध कार्य को बढ़ावा देना
7. संस्था की लाभार्जन क्षमता में वृद्धि करना
8. संस्था की छवि व प्रतिष्ठा को बनाए रखना।

स्वामियों के प्रति दायित्व – प्रबंध एवं स्वामित्व के अलग-अलग होने के कारण प्रबंधकों के स्वामियों के प्रति निम्न दायित्व उत्पन्न होते हैं:
1. विनियोजित पूंजी को सुरक्षा प्रदान करना
2. निश्चित उद्देश्यों के लिए ही पूंजी का उपयोग करना
3. अंशधारियों को उचित लाभांश का भुगतान करना
4. अंशपूंजी में वृद्धि के प्रयास करना
5. विभिन्न प्रकार के अंशधारियों के साथ समानता एवं न्याय का व्यवहार करना
6. व्यवसाय की प्रगति की सही सूचना देना
7. कपटपूर्ण व्यवहार न करना, गुप्त लाभ न कमाना।
8. अंशों के हस्तांतरण में बाधा उत्पन्न नहीं करना।

ऋणदाताओं के प्रति दायित्व – व्यवसाय की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में ऋणदाताओं का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। ऋणदाताओं के प्रति भी प्रबंध के निम्न दायित्व बनते हैं:
1. ऋणराशि का सदुपयोग करना
2. ऋण प्राप्ति एवं ब्याज की उचित शर्तें रखना

कर्मचारियों के प्रति दायित्व – कर्मचारी संस्था की महत्वपूर्ण संपत्ति होते हैं, वे केवल मशीन नहीं बल्कि संवेदनशील प्राणी होते हैं। चार्ल्स मायर्स के अनुसार, जो उद्यम मानवीय तत्वों की जरूरतों और भावनाओं को अनदेखा करते हैं, वे केवल यंत्र समूह के अतिरिक्त कुछ भी नहीं हैं। एक प्रबंध के अपने कर्मचारियों के प्रति निम्न दायित्व होते हैं:
1. उचित वेतन का भुगतान करना
2. प्रेरणादायक मजदूरी योजनाओं को लागू करना
3. कर्मचारियों को कार्य के प्रति सुरक्षा (गारंटी) प्रदान करना
4. स्वस्थ कार्य करने की स्थितियाँ और परिस्थितियाँ उपलब्ध कराना
5. श्रम कल्याण के कार्य करना
6. सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा, भविष्य निधि आदि की व्यवस्था करना
7. कर्मचारियों को उनकी रुचि एवं योग्यता के अनुरूप कार्य सौंपना
8. कर्मचारियों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराना
9. पदोन्नति के अवसर उपलब्ध कराना
10. कर्मचारियों को प्रबंध में भागीदारी उपलब्ध कराना
11. बोनस एवं लाभों में हिस्सा देना
12. क्षमता एवं व्यक्तित्व विकास के नए अवसर प्रदान करना
13. अन्य प्रेरणादायी/उत्साही सुविधाएं प्रदान करना।

ग्राहकों के प्रति दायित्व – ग्राहक बाजार का 'राजा' होता है। ग्राहक की संतुष्टि ही व्यवसाय की सफलता का आधार है। सरकार भी उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए विभिन्न प्रकार के कानून बनाती है और उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण करती है। ग्राहक की उपेक्षा व्यवसाय के लिए नुकसानदेह है। ऐसी स्थिति में ग्राहकों के प्रति प्रबंध के निम्न उत्तरदायित्व बन जाते हैं:
1. ग्राहकों की रुचियों और आवश्यकताओं का अध्ययन करना
2. उचित मूल्य पर वस्तुएं और सेवाएं उपलब्ध कराना
3. प्रमाणित किस्म की वस्तुएं उपलब्ध कराना
4. अनुचित प्रवृत्तियों (कम नापतौल, झूठ, दिखावा, जमाखोरी, मिलावट) आदि को त्यागना
5. झूठे, अनैतिक विज्ञापन और भ्रामक प्रचार न करना
6. विक्रय के समय दिए गए आश्वासनों और वादों को पूरा करना
7. विक्रय उपरांत सेवाएं प्रदान करना
8. उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करना
9. आचार संहिताओं का पालन करना
10. बाजार, उपभोक्ता और वस्तुओं की उपयोगिता के बारे में शोध करना
11. वस्तु के उपयोग विधियों आदि के बारे में ग्राहकों को जानकारी देना
12. उपयोगी जीवन काल और जीवन स्तर में वृद्धि करने वाली वस्तुओं का निर्माण करना।

आपूर्तिकर्ताओं के प्रति दायित्व – एक प्रबंध के आपूर्तिकर्ताओं के प्रति निम्न दायित्व होते हैं:
1. आपूर्तिकर्ताओं को उनके माल का उचित मूल्य प्रदान करना
2. क्रय की उचित शर्तें रखना
3. लेन-देनों का समय पर भुगतान करना
4. नवीन प्रकार के कच्चे माल को प्रस्तुत करने का अवसर देना
5. बाजार संबंधी आवश्यक सूचनाएं आपूर्तिकर्ताओं को उपलब्ध कराना।

अन्य व्यवसायियों के प्रति दायित्व – प्रबंध के अन्य व्यवसायियों के प्रति भी निम्न दायित्व होते हैं:
1. स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखना
2. दूसरे व्यवसायी की निंदा या आलोचना नहीं करना
3. आपूर्ति पर एकाधिकार न जमाना
4. दूसरे व्यवसायियों के ब्रांड, ट्रेडमार्क आदि का उपयोग नहीं करना
5. केवल सामाजिक हितों में वृद्धि एवं व्यावसायिक कुशलता के लिए सहयोग को प्रोत्साहित करना।

व्यावसायिक संघ तथा पेशेवर संस्थाओं के प्रति दायित्व – प्रबंध के इन संस्थाओं के प्रति निम्न दायित्व होते हैं:
1. चैंबर ऑफ कॉमर्स या अन्य व्यावसायिक संघों की सदस्यता ग्रहण करना
2. इन संस्थाओं की प्रकाशित सामग्री का उपयोग करना
3. इन संस्थाओं/संघों की आचार संहिता का पालन करना
4. इनकी परियोजनाओं में मौद्रिक सहयोग देना
5. इनकी बैठकों में भाग लेते हुए विचार-विमर्श करना।

स्थानीय जन समुदाय के प्रति दायित्व – इस वर्ग के प्रति प्रबंध के निम्न दायित्व होते हैं:
1. प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा करना
2. वायु, जल, ध्वनि प्रदूषण को रोकना
3. स्थानीय जन समुदाय के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना
4. जन कल्याणकारी संस्थाएं, अस्पताल, स्कूल, धर्मशाला आदि की स्थापना करना और उनको सहयोग करना
5. महिलाओं, कमजोर वर्ग, विकलांगों को सहायता प्रदान करना
6. स्थानीय समुदाय की परंपराओं, नियमों का पालन करना
7. स्थानीय जन समुदाय की विभिन्न स्तरों पर मदद करना
8. स्थानीय जन समुदाय से विशेष प्रकार का लगाव रखना।

विश्व के प्रति दायित्व – आज व्यवसाय का स्वरूप राष्ट्रीय न रहकर अंतर्राष्ट्रीय हो गया है, अतः प्रबंधकों का दायित्व पूरे विश्व के प्रति भी उत्पन्न हो गया है जो निम्न प्रकार है:
1. अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय की वृद्धि में सहयोग करना
2. अन्य राष्ट्रों की व्यावसायिक नीति तथा घरेलू मामलों में हस्तक्षेप न करना
3. अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी व तकनीकी को अपनाना
4. अंतर्राष्ट्रीय व्यावसायिक नैतिकता व संहिताओं का पालन करना
5. अन्य देशों के सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों का आदर करना
6. पिछड़े राष्ट्रों में उद्योगों की स्थापना करना
7. विकासशील व पिछड़े राष्ट्रों को तकनीकी व प्रबंधकीय सुविधाएं उपलब्ध करवाना
8. न्यायोचित व्यवहार, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा व सौहार्दपूर्ण संबंधों पर ध्यान देना।
इस प्रकार प्रबंध का सामाजिक उत्तरदायित्व विभिन्न वर्गों के प्रति व्यापक है।
In simple words: व्यवसाय को समाज के अलग-अलग हिस्सों जैसे कर्मचारियों, ग्राहकों, सरकार और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियाँ निभानी होती हैं, ताकि सभी की भलाई हो और व्यवसाय भी सही ढंग से चल सके।

🎯 Exam Tip: सामाजिक उत्तरदायित्वों की विवेचना करते समय, प्रत्येक हितधारक वर्ग (जैसे ग्राहक, कर्मचारी, सरकार, समुदाय) के प्रति विशिष्ट उत्तरदायित्वों को बिंदुवार स्पष्ट करें।

 

Question 3. कम्पनी अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्वों के लिये किये गये प्रावधानों की विवेचना कीजिए।
Answer: कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के लिए बनाए गए प्रावधान निम्न प्रकार हैं:
(1) **लागू होना** – CSR से संबंधित प्रावधान हर उस कंपनी पर लागू होते हैं जिसकी शुद्ध संपत्ति किसी वित्तीय वर्ष में Rs.500 करोड़ या उससे अधिक हो, या बिक्री Rs.1000 करोड़ या उससे अधिक हो, या शुद्ध लाभ Rs.5 करोड़ या इससे अधिक हो। ऐसी कंपनी को अपने निदेशकों की एक CSR समिति बनानी होगी, जिसमें कम से कम 3 निदेशक होंगे और उनमें से कम से कम एक स्वतंत्र निदेशक होना चाहिए। {धारा 135 (1)}
(2) **निदेशकों की रिपोर्ट में व्यक्त करना** – कंपनी द्वारा बनाई गई CSR समिति के गठन की जानकारी कंपनी के निदेशक मंडल की रिपोर्ट में शामिल करनी होगी। {धारा 135 (2)}
(3) **समिति के कार्य** – CSR समिति निम्न कार्य करेगी:
1. निदेशक मंडल समिति द्वारा की गई सिफारिश पर विचार करेगी और कंपनी की CSR नीति को मंजूरी देगी, साथ ही अपनी रिपोर्ट में इस नीति को निर्धारित तरीके से प्रकट करेगी। इसे कंपनी की वेबसाइट पर भी डाला जाएगा।
2. निदेशक मंडल यह भी सुनिश्चित करेगा कि कंपनी की CSR नीति के अनुसार कंपनी द्वारा क्रियाकलाप किए जाएं। {धारा 135 (4)}
(5) **खर्च करना** – कंपनी को अपने प्रत्येक वित्तीय वर्ष के ठीक पहले के तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभों का कम से कम 2 प्रतिशत CSR गतिविधियों पर खर्च करना होगा। निदेशक मंडल यह सुनिश्चित करेगा कि यह राशि CSR नीति के अनुसार खर्च की जाए। {धारा 135 (5)}
(6) **स्थानीय क्षेत्र को प्राथमिकता** – कंपनी को CSR नीति के तहत किए जाने वाले क्रियाकलापों में उस स्थानीय क्षेत्र को प्राथमिकता देनी होगी जिस क्षेत्र में कंपनी कार्यरत है। {धारा 135 (5)}
(7) **असफलता का उल्लेख** – यदि कोई कंपनी निर्धारित राशि को CSR नीति के क्रियाकलापों में खर्च करने में असफल रहती है, तो उसे अपनी निदेशक मंडल की रिपोर्ट में इसके कारणों का उल्लेख करना होगा। {धारा 135 (5)}
(8) **शुद्ध लाभ की गणना** – CSR गतिविधियों पर खर्च की जाने वाली राशि के लिए शुद्ध लाभ की गणना कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा शुद्ध लाभ प्रावधानों के अनुसार की जाएगी। {धारा 135 (5)}
(9) **अन्य प्रावधान** – धारा 135 के तहत CSR नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए (निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व) नियम 2014 बनाए गए जो 1 अप्रैल, 2014 से लागू हैं। नियमों के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
1. CSR संबंधी प्रावधान हर कंपनी, उसकी सहायक या सूत्रधारी कंपनी और ऐसी हर विदेशी कंपनी पर भी लागू होते हैं जिसकी शाखा या परियोजना कार्यालय भारत में स्थित है।
2. एक कंपनी CSR गतिविधियों या क्रियाकलापों को अन्य कंपनियों के साथ मिलकर भी कर सकती है, लेकिन इसके लिए उसे अपनी CSR कमेटी से अनुमोदन कराना होगा।
3. CSR नीति के तहत केवल भारत में किए जाने वाले क्रियाकलापों के खर्च को ही शामिल किया जाएगा।
4. ऐसे क्रियाकलाप जो केवल कंपनी के कर्मचारियों और उनके परिवार के लाभ के लिए किए जाते हैं, उन्हें CSR गतिविधियों में शामिल नहीं किया जाएगा।
5. गैर-सूचीबद्ध कंपनी या निजी कंपनी को CSR समिति में स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति की आवश्यकता नहीं होगी।
6. यदि किसी निजी कंपनी में केवल 02 ही निदेशक हैं तो वे ही CSR कमेटी के सदस्य माने जाएंगे।
10. कंपनी को अपनी CSR नीति और इसके तहत किए गए क्रियाकलापों का विवरण अपनी वेबसाइट पर सही तरीके से प्रकट करना होगा।
In simple words: कंपनी अधिनियम, 2013 बताता है कि कुछ खास कंपनियों को CSR पर अपने लाभ का 2% खर्च करना होगा, इसके लिए एक समिति बनानी होगी और नियमों का पालन करना होगा।

🎯 Exam Tip: कंपनी अधिनियम 2013 के तहत CSR प्रावधानों की विवेचना करते समय, किन कंपनियों पर यह लागू होता है, खर्च की न्यूनतम सीमा, CSR समिति के कार्य और स्थानीय क्षेत्र को प्राथमिकता जैसे मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट करें।

 

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 14 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर

 

Question 1. कम्पनी अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व के लिये बनाये गये प्रावधान कौन सी कम्पनियों या व्यवसायों पर किस धारा के तहत लागू होते हैं?
Answer: कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) से संबंधित प्रावधान हर उस कंपनी पर लागू होते हैं जिसकी शुद्ध संपत्ति किसी वित्तीय वर्ष में Rs.500 करोड़ या उससे अधिक हो, या बिक्री Rs.1000 करोड़ या उससे अधिक हो, या शुद्ध लाभ Rs.5 करोड़ या इससे अधिक हो। ऐसी कंपनी को अपने निदेशकों की एक CSR समिति बनानी होगी, जिसमें कम से कम 03 निदेशक होंगे और उनमें से कम से कम एक स्वतंत्र निदेशक होना चाहिए। ये प्रावधान कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 की उपधारा (1) के अनुसार तय किए गए हैं।
In simple words: CSR नियम उन बड़ी कंपनियों पर लागू होते हैं जिनकी संपत्ति, बिक्री या लाभ एक निश्चित सीमा से अधिक हो, और उन्हें धारा 135(1) के तहत एक CSR समिति बनानी होती है।

🎯 Exam Tip: CSR प्रावधानों के लागू होने की शर्तें (शुद्ध संपत्ति, बिक्री, शुद्ध लाभ की सीमा) और संबंधित धारा (135(1)) को सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. कम्पनी को निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व नीति के क्रियाकलापों में किस लाभ का कितना प्रतिशत न्यूनतम खर्च करना अनिवार्य है। ऐसे लाभों की गणना कैसे की जाती है एवं प्रावधान की धारा का उल्लेख कीजिए।
Answer: कंपनी को अपने प्रत्येक वित्तीय वर्ष के ठीक पहले के तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभों का कम से कम 02 प्रतिशत निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व गतिविधियों या क्रियाकलापों पर खर्च करना अनिवार्य है। यह प्रावधान कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्वों के लिए धारा 135 की उपधारा 5 के तहत किया गया है।
In simple words: कंपनियों को पिछले तीन साल के औसत लाभ का कम से कम 2% CSR पर खर्च करना होता है, यह नियम कंपनी अधिनियम की धारा 135(5) में है।

🎯 Exam Tip: CSR खर्च की न्यूनतम प्रतिशत (2%) और औसत शुद्ध लाभ की गणना (पिछले तीन वर्षों का) के साथ संबंधित धारा (135(5)) को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 3. कम्पनी अधिनियम, 2013 में निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्वों के लिये अधिनियम की धारा 135 (3) में क्या कहा गया है?
Answer: धारा 135(3) के तहत निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व समिति के कार्यों का उल्लेख किया गया है जो निम्न प्रकार हैं:
1. समिति एक निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व नीति का निर्धारण करेगी जो इस अधिनियम की अनुसूची 7 में बताए गए क्रियाकलापों में से कंपनी द्वारा किए गए क्रियाकलापों के संबंध में निदेशक मंडल की सिफारिश करेगी।
2. इन क्रियाकलापों पर खर्च की राशि निर्धारित करेगी।
In simple words: कंपनी अधिनियम की धारा 135(3) CSR समिति के काम बताती है, जिसमें CSR नीति बनाना और खर्च तय करना शामिल है।

🎯 Exam Tip: धारा 135(3) के तहत CSR समिति के मुख्य कार्यों (नीति निर्धारण और खर्च निर्धारण) को संक्षिप्त और सटीक रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question. प्रबन्ध को ऋणदाताओं के प्रति उत्तरदायित्व को संक्षेप में बताइए।
Answer: ऋणदाताओं के प्रति दायित्व – व्यवसाय की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में ऋणदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए प्रबंधकों को उनके प्रति भी निम्न दायित्वों को पूरा करना चाहिए:
1. ऋणराशि का सही उपयोग करना
2. ऋण प्राप्त करने और ब्याज की उचित शर्तें रखना
3. मूल पूंजी का ब्याज समय पर भुगतान करना
4. गिरवी रखी गई संपत्ति की पूरी सुरक्षा करना
5. ऋणदाताओं को मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराना
6. ऋणदाताओं के प्रति मधुर संबंध बनाए रखना।
In simple words: प्रबंध को ऋणदाताओं (जैसे बैंक) के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए, जिसमें पैसों का सही उपयोग करना, समय पर ब्याज चुकाना और उनके साथ अच्छे संबंध बनाए रखना शामिल है।

🎯 Exam Tip: ऋणदाताओं के प्रति प्रबंध के दायित्वों को बताते समय, वित्तीय ईमानदारी, पारदर्शिता और उचित व्यवहार जैसे बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।

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Business Studies Class 12 Curriculum Solutions: Chapter 14 प्रबन्ध का सामाजिक उत्तरदायित्व एवं निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व

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Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Business Studies Chapter 14 प्रबन्ध का सामाजिक उत्तरदायित्व एवं निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 12 Business Studies Chapter 14 प्रबन्ध का सामाजिक उत्तरदायित्व एवं निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Business Studies. You can access RBSE Solutions Class 12 Business Studies Chapter 14 प्रबन्ध का सामाजिक उत्तरदायित्व एवं निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Business Studies RBSE solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Business Studies Chapter 14 प्रबन्ध का सामाजिक उत्तरदायित्व एवं निगमीय सामाजिक उत्तरदायित्व in printable PDF format for offline study on any device.