Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 Business Studies Chapter 13 बीमा परिचय एवं महत्त्व
Review structured textbook solutions for Class 12 Business Studies Chapter 13 बीमा परिचय एवं महत्त्व. Built according to RBSE guidelines for the 2026-27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.
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RBSE Class 12 Business Studies Chapter 13 अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. जोखिमों से क्या आशय है?
Answer: जोखिम से मतलब किसी नुकसान, चोट, बर्बादी, हानि या दुर्घटना की संभावना से है, या किसी बात के होने की अनिश्चितता से है. यह भविष्य में होने वाली किसी बुरी घटना को दर्शाता है.
In simple words: जोखिम यानी किसी अनहोनी, हानि या दुर्घटना का खतरा.
🎯 Exam Tip: जोखिम की परिभाषा में हानि की संभावना और अनिश्चितता, दोनों मुख्य बिंदुओं को शामिल करना महत्वपूर्ण है.
Question 2. बीमा क्या है?
Answer: बीमा का मतलब किसी व्यक्ति को भविष्य में होने वाले खतरों और अनिश्चितताओं से सुरक्षा देना है. इसमें व्यक्ति एक प्रीमियम देकर अपनी संभावित हानियों के लिए आर्थिक सुरक्षा प्राप्त करता है.
In simple words: बीमा भविष्य के खतरों से बचने के लिए पैसे की सुरक्षा पाने का एक तरीका है.
🎯 Exam Tip: बीमा की परिभाषा में 'सुरक्षा' और 'भावी जोखिम व अनिश्चितता' जैसे शब्द बहुत महत्वपूर्ण हैं.
Question 4. सामाजिक सुरक्षा से आप क्या समझते हैं?
Answer: सामाजिक सुरक्षा का मतलब समाज के लोगों को दुर्घटना, बीमारी, बुढ़ापा, मृत्यु जैसे समयों पर दी जाने वाली सुरक्षा से है. यह उन लोगों को आर्थिक सहायता देती है, जो इन परिस्थितियों में खुद का ध्यान नहीं रख सकते.
In simple words: सामाजिक सुरक्षा यानी समाज के लोगों को बीमारी, बुढ़ापे या दुर्घटना में आर्थिक मदद देना.
🎯 Exam Tip: सामाजिक सुरक्षा की परिभाषा में 'समाज के लोगों' और 'दुर्घटना, बीमारी, बुढ़ापा, मृत्यु' जैसी स्थितियों में 'सुरक्षा' प्रदान करने का उल्लेख करें.
Question 5. एजेण्ट एवं नौकर में क्या अन्तर है?
Answer: भारतीय उच्च न्यायालय के अनुसार, एजेण्ट और नौकर में कई खास अंतर हैं:
1. एजेण्ट को काम के बदले कमीशन या फीस मिलती है, जबकि नौकर को वेतन मिलता है.
2. एजेण्ट कभी भी नौकर नहीं बन सकता, लेकिन एक नौकर कई बार एजेण्ट का काम भी कर सकता है.
3. एजेण्ट मालिक की तरफ से दूसरों के साथ समझौता कर सकता है, पर नौकर ऐसा नहीं कर सकता.
In simple words: एजेण्ट को कमीशन मिलता है और वह मालिक के लिए दूसरों से डील करता है, जबकि नौकर को वेतन मिलता है और वह आमतौर पर दूसरों से समझौते नहीं करता.
🎯 Exam Tip: एजेण्ट और नौकर के बीच के अंतर बताते समय उनकी कमाई का तरीका और दूसरों से अनुबंध करने की क्षमता मुख्य बिंदुओं के रूप में शामिल करें.
Question 6. बीमा एजेण्ट कौन बन सकता है?
Answer: बीमा एजेण्ट बनने के लिए कुछ खास योग्यताएँ होनी चाहिए:
1. वह भारत का नागरिक हो.
2. उसकी उम्र कम से कम 18 साल हो, यानी वह वयस्क हो.
3. उसका दिमाग स्वस्थ हो.
4. उसे किसी अदालत ने गबन, धोखाधड़ी, जालसाजी या किसी दूसरे अपराध के लिए दोषी न ठहराया हो. हालांकि, अगर अपराधी को ऐसी सजा पूरी किए 5 साल बीत चुके हों, तो वह इस श्रेणी में नहीं आता है.
In simple words: बीमा एजेण्ट बनने के लिए व्यक्ति को भारतीय नागरिक, 18 साल से ऊपर, मानसिक रूप से स्वस्थ और किसी गंभीर अपराध में दोषी न पाया गया हो.
🎯 Exam Tip: बीमा एजेण्ट की योग्यताओं में नागरिकता, आयु, मानसिक स्वास्थ्य और आपराधिक रिकॉर्ड की शर्त को स्पष्ट रूप से लिखें.
Question 7. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना क्या है?
Answer: (The answer to this question was not found in the provided content. Please provide the answer text.)
In simple words: (No information available for a simple explanation.)
🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की मुख्य विशेषताओं जैसे आयु सीमा, प्रीमियम राशि और कवर की जाने वाली जोखिमों का उल्लेख करना आवश्यक है.
Question 8. सामाजिक बीमा क्या है?
Answer: सामाजिक बीमा योजनाएँ समाज के गरीब और बेसहारा लोगों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए शुरू की गई हैं. इस बीमा में बेरोजगारी, बीमारी, अचानक दुर्घटनाएँ, बुढ़ापा, डिलीवरी और मृत्यु जैसे कई जोखिमों को कवर किया जाता है.
In simple words: सामाजिक बीमा गरीब लोगों को आर्थिक सुरक्षा देने की योजना है, जिसमें बीमारी, बेरोजगारी आदि को कवर किया जाता है.
🎯 Exam Tip: सामाजिक बीमा की परिभाषा में 'समाज के निम्न वर्ग', 'आर्थिक सुरक्षा' और 'बेरोजगारी, बीमारी, बुढ़ापा, मृत्यु' जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल करें.
Question 9. 'योग क्षेमम्' का उल्लेख किस ग्रंथ में किया गया है?
Answer: 'योग क्षेमम्' शब्द का उल्लेख ऋग्वेद में बीमा के लिए किया गया है. यह दर्शाता है कि प्राचीन भारत में भी सुरक्षा और कल्याण की अवधारणा मौजूद थी.
In simple words: 'योग क्षेमम्' का जिक्र ऋग्वेद में बीमा के बारे में मिलता है.
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के तथ्य आधारित प्रश्नों में सीधे ग्रंथ का नाम बताना ही पर्याप्त होता है.
Question 10. बीमा का आधारभूत उद्देश्य क्या है?
Answer: बीमा का मुख्य उद्देश्य बीमित व्यक्ति को भविष्य में होने वाले जोखिमों और अनिश्चितताओं से सुरक्षा देना है. यह किसी अप्रत्याशित घटना से होने वाली वित्तीय हानि से बचाता है.
In simple words: बीमा का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को भविष्य के खतरों से सुरक्षित रखना है.
🎯 Exam Tip: बीमा के आधारभूत उद्देश्य में 'जोखिम से सुरक्षा' और 'अनिश्चितता' जैसे प्रमुख शब्द अनिवार्य हैं.
RBSE Class 12 Business Studies Chapter 13 लघु उत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. बीमा की परिभाषा दीजिए।
Answer: बीमा का मतलब किसी व्यक्ति को भविष्य में आने वाले जोखिमों और अनिश्चितताओं से सुरक्षा देना है. बीमा के अर्थ को सामाजिक, व्यावसायिक और अनुबंध के नज़रिए से समझाया जा सकता है.
सामाजिक नज़रिए से, "बीमा वह योजनाएँ हैं जहाँ बहुत सारे लोग मिलकर कुछ अकेले व्यक्तियों के जोखिमों को खुद पर ले लेते हैं."
व्यावसायिक नज़रिए से, "बीमा एक तरीका है जिसमें वित्तीय जोखिमों को उठाने वाली पेशेवर बीमा कंपनी को ट्रांसफर कर दिया जाता है." इसके बदले में बीमित व्यक्ति प्रीमियम का भुगतान करता है.
अनुबंध के नज़रिए से, "बीमा बीमित (बीमा कराने वाला) और बीमाकर्ता (बीमा कंपनी) के बीच एक अनुबंध है, जहाँ बीमाकर्ता एक निश्चित पैसे (प्रीमियम) के बदले में बीमित को बीमा पॉलिसी में लिखी घटनाओं से होने वाली हानि पर एक तय रकम देने का वादा करता है."
In simple words: बीमा वह तरीका है जहाँ लोग मिलकर किसी एक व्यक्ति के भविष्य के खतरों को साझा करते हैं, जिसके बदले में प्रीमियम दिया जाता है.
🎯 Exam Tip: बीमा की परिभाषा देते समय सामाजिक, व्यावसायिक और अनुबंध संबंधी तीनों दृष्टिकोणों को संक्षिप्त में समझाना अच्छा रहेगा, साथ ही प्रीमियम और जोखिम हस्तांतरण जैसे शब्दों का प्रयोग करें.
Question 3. बीमा तथा जुए में अन्तर कीजिए।
Answer:
| बीमा (Insurance) | जुआ (Gambling) | |
|---|---|---|
| 2. जोखिम से सुरक्षा | बीमा पहले से मौजूद जोखिम से सुरक्षा पाने के लिए किया जाता है. | जुआ जोखिम को खुद से बनाने के लिए खेला जाता है. |
| 3. जोखिम का मापन | बीमा में जोखिम को वैज्ञानिक तरीकों से मापा जाता है. | जुए में जोखिम को मापा नहीं जा सकता. |
| 4. उद्देश्य | बीमा का उद्देश्य जोखिम या क्षति को कम करना और बड़ी हानि से बचना है. | जुए का उद्देश्य मनोरंजन करना या पैसे जीतना है. |
| 5. बीमायोग्य हित | बीमा में बीमित व्यक्ति का बीमायोग्य हित होता है. | जुए में जुआ खेलने वाले का बीमायोग्य हित नहीं होता है. |
| 6. वैधता | बीमा के अनुबंध कानूनी रूप से वैध होते हैं. | जुए के अनुबंध कानूनी रूप से वैध नहीं होते हैं. |
In simple words: बीमा आपको पहले से मौजूद खतरों से बचाता है और कानूनी है, जबकि जुआ नया खतरा पैदा करता है और कानूनी नहीं होता है.
🎯 Exam Tip: बीमा और जुए में अंतर बताते समय, 'जोखिम का उद्देश्य', 'बीमायोग्य हित' और 'कानूनी वैधता' जैसे बिंदुओं को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ.
Question 4. बीमा जोखिमों को रोकने की विधि नहीं बल्कि जोखिम बाँटने की विधि है? समीक्षा कीजिए।
Answer: बीमा जोखिमों को रोकने का तरीका नहीं है, बल्कि उन्हें आपस में बाँटने का तरीका है. बीमा में, एक ही तरह के जोखिमों से घिरे लोग प्रीमियम के रूप में एक फंड में पैसे जमा करते हैं. जब किसी सदस्य को कोई नुकसान होता है, तो उस फंड में से उसे मुआवजा दिया जाता है. इस तरह, एक व्यक्ति की हानि को कई लोगों में बाँट लिया जाता है, लेकिन हानि को रोका नहीं जा सकता. इसलिए, यह कहा जा सकता है कि बीमा जोखिमों को रोकने की विधि नहीं, बल्कि जोखिमों को बाँटने की विधि है. यह सिर्फ वित्तीय प्रभाव को कम करता है, जोखिम को खत्म नहीं करता.
In simple words: बीमा नुकसान को होने से रोकता नहीं, बल्कि कई लोगों में मिलकर उसके वित्तीय बोझ को बाँट देता है.
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय 'जोखिम बाँटना' और 'जोखिम को रोकना' के बीच का अंतर स्पष्ट करें, और प्रीमियम पूल के कॉन्सेप्ट को समझाएँ.
Question 5. बीमा के प्राथमिक उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: बीमा के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
प्राथमिक उद्देश्य:
प्राथमिक कार्यों में वे सभी काम शामिल हैं जिनके लिए बीमा शुरू किया गया था. ये मुख्य काम इस तरह हैं:
1. जोखिमों के खिलाफ निश्चितता देना - बीमा का सबसे पहला काम जोखिमों और हानियों की अनिश्चितता को कम करना है. जैसा कि मेगी ने भी कहा है कि "बीमा का काम निश्चितता देना है." व्यापार में जोखिम हमेशा रहते हैं. बीमा इन जोखिमों में से कुछ को बीमाकर्ता को ट्रांसफर कर देता है. इस तरह, बीमा कराकर एक व्यक्ति अपनी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है.
2. आर्थिक हानि से सुरक्षा - बीमा आर्थिक हानि के खिलाफ एक ढाल है. प्रो. हॉपकिन्स ने कहा है कि "बीमा आर्थिक हानि के खिलाफ सुरक्षा है." हर कोई व्यक्ति अपनी बीमा कराकर सुरक्षित रह सकता है. इसी तरह, कोई भी व्यक्ति अपनी संपत्ति, मकान, फर्नीचर, महंगी चीजें, आग या चोरी आदि का बीमा कराकर सुरक्षित हो सकता है.
3. जोखिम को बाँटना - प्रो. थॉमस ने सही कहा है कि "बीमा जोखिम को बाँटने या फैलाने का एक तरीका है." बीमा में एक ही तरह के जोखिम से घिरे लोग एक फंड में पैसे डालते हैं, और जब किसी सदस्य को नुकसान होता है, तो उस फंड में से उसे भरपाई की जाती है.
4. जोखिमों का मूल्यांकन करना - बीमा बीमित व्यक्ति के जोखिम का मूल्यांकन और निर्धारण भी करता है. बीमाकर्ता कई बातों पर विचार करके नुकसान की संभावना का अनुमान लगाता है और उसी हिसाब से बीमित के अंशदान (प्रीमियम) की राशि तय करता है. जितनी ज़्यादा जोखिम होती है, प्रीमियम भी उतना ही ज़्यादा होता है.
5. रिसर्च करना - बीमा का एक प्राथमिक काम बीमा के क्षेत्र में रिसर्च करना भी है. बीमा कंपनियों को सफल बने रहने के लिए लगातार रिसर्च करते रहना चाहिए. उन्हें नई बीमा योजनाओं की उपयोगिता का अध्ययन करना चाहिए.
In simple words: बीमा के प्राथमिक उद्देश्य जोखिमों से सुरक्षा देना, आर्थिक नुकसान से बचाना, जोखिमों को लोगों में बाँटना, जोखिमों का सही मूल्यांकन करना और बीमा के बारे में रिसर्च करते रहना हैं.
🎯 Exam Tip: बीमा के प्राथमिक उद्देश्यों को स्पष्ट और बिंदुवार रूप से समझाएँ, जिसमें जोखिम से सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता मुख्य हों.
Question 6. फसल टिप्पणी लिखिए।
Answer: कृषि से जुड़े जोखिमों के कारण पिछले कुछ सालों से फसल बीमा काफी प्रचलित हो गया है. इसमें सूखे, बाढ़, आँधी-तूफान, पौधों की बीमारी, महामारी या अन्य आपदाओं जैसे मौसम संबंधी कारणों से होने वाले नुकसान की भरपाई बीमाकर्ता के माध्यम से बीमित को मिल सकती है. किसान अपनी फसल की सुरक्षा के लिए कुछ प्रीमियम देकर बीमाकर्ता से बीमा पॉलिसी ले लेता है, जिसमें तय शर्तों के अनुसार उसे बीमा मिलता है. अगर फसल को ऊपर बताए गए कारणों से कोई नुकसान होता है, तो बीमाकर्ता उसकी भरपाई करता है.
In simple words: फसल बीमा किसानों को सूखे, बाढ़, बीमारी जैसे जोखिमों से होने वाले फसल नुकसान के लिए वित्तीय सुरक्षा देता है.
🎯 Exam Tip: फसल बीमा की टिप्पणी में जलवायु संबंधी जोखिमों और किसानों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति पर जोर दें.
Question 7. बीमा मानसिक शान्ति प्रदान करता है। टीका कीजिए।
Answer: बीमा लोगों को चिंता से मुक्त करता है क्योंकि बीमा कंपनियाँ भविष्य में होने वाली अनिश्चितताओं, जोखिमों और हानियों से सुरक्षा का वादा करती हैं. इसलिए, चिंता-मुक्त व्यक्ति को स्वाभाविक रूप से मानसिक शांति मिलती है. बीमा से न केवल जोखिमों की पूर्ति होती है, बल्कि साथ-ही-साथ धीरे-धीरे बचत भी होती है. यह सुरक्षा की भावना और वित्तीय स्थिरता प्रदान करता है, जिससे लोग शांति से अपना जीवन जी सकते हैं.
3. बैंक में पैसे जमा करने से सिर्फ मूलधन और ब्याज मिलता है, लेकिन बीमा में जोखिम का कवर भी मिलता है और जमा प्रीमियम की राशि भी वापस मिल जाती है.
4. बीमा कराने की स्थिति में बीमा प्रीमियम का भुगतान करना अनिवार्य होता है. इसलिए बीमा में बचत भी अपने आप हो जाती है.
इस तरह, बैंक जमा या शेयरों/ऋणपत्रों की तुलना में जीवन बीमा पॉलिसी के माध्यम से बचत ज़्यादा निश्चितता से की जा सकती है. अब जीवन बीमा पॉलिसी की योजनाएँ ऐसे बनाई जा रही हैं जिनसे लोगों में सुरक्षा के साथ-साथ बचत करने की आदत भी बढ़ रही है. यह बचत और जोखिम की निश्चितता बीमा के ज़रिए मानसिक शांति देती है.
In simple words: बीमा भविष्य के खतरों से सुरक्षा का वादा करके लोगों को मानसिक शांति देता है और साथ ही बचत करने में भी मदद करता है.
🎯 Exam Tip: मानसिक शांति के महत्व को उजागर करें और बताएँ कि बीमा कैसे जोखिमों को कम करके और बचत को बढ़ावा देकर इसे प्राप्त करने में मदद करता है.
Question 8. जीवन बीमा के साथ – साथ निवेश भी है। समीक्षा कीजिए।
Answer: हालाँकि निवेश, बीमा का मुख्य काम नहीं है, फिर भी बीमा में निवेश का फायदा भी मिलता है. जीवन बीमा में सुरक्षा के साथ-साथ निवेश का तत्व भी होता है. बीमित व्यक्ति बीमा कंपनी को छोटी-छोटी प्रीमियम राशि जमा करता रहता है. अगर बीमित की मृत्यु हो जाती है, तो बीमा राशि उसके वारिसों को दे दी जाती है. यदि बीमित व्यक्ति बीमा अवधि तक जीवित रहता है, तो बीमाधन बोनस के साथ बीमित को वापस कर दिया जाता है. यह छोटी-छोटी प्रीमियम राशि जो बीमित हर साल चुकाता है, वह बीमा अवधि खत्म होने पर एक बड़ी राशि के रूप में बोनस सहित वापस मिल जाती है. यह दीर्घकालिक बचत का एक अच्छा साधन है.
In simple words: जीवन बीमा सिर्फ सुरक्षा नहीं देता, बल्कि इसमें निवेश का भी फायदा है जहाँ प्रीमियम के पैसे बाद में बड़ी राशि के रूप में वापस मिल सकते हैं.
🎯 Exam Tip: जीवन बीमा को निवेश के रूप में समझाते समय, प्रीमियम भुगतान और अवधि के अंत में मिलने वाले लाभ या मृत्यु लाभ दोनों का उल्लेख करें.
RBSE Class 12 Business Studies Chapter 13 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. बीमा की परिभाषा दीजिये तथा इसकी विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: बीमा का अर्थ:
सामान्य तौर पर, बीमा जोखिमों और अनिश्चितताओं के बुरे प्रभावों से बचाने के लिए एक व्यवस्था है. यह इंसान के जीवन और संपत्ति को विभिन्न संकटों, आपदाओं और खतरों से आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देता है. दूसरे शब्दों में, बीमा एक ऐसा तरीका है जिससे कुछ लोगों के नुकसान को बहुत सारे लोगों में बाँटा जा सकता है. कालविन कूलिज ने कहा है, "बीमा वह आधुनिक तरीका है जिससे इंसान अनिश्चितता को निश्चित और असमान को समान बना सकता है."
यह एक ऐसा तरीका है जिससे सफलता को लगभग पक्का किया जा सकता है. इसके ज़रिए मजबूत लोग कमजोरों की मदद के लिए दान देते हैं और कमजोर लोग मजबूतों से मदद पाते हैं, लेकिन यह किसी की दया पर नहीं, बल्कि अधिकार से मिलता है जिसे उन्होंने खरीदा है. सर टामस ने भी सही कहा है कि "बीमा ही एक ऐसा तरीका है जिससे कुछ लोगों के नुकसान को बाँटा जाता है."
1. सामान्य परिभाषाएँ:
(1) सर विलियम बेवरिज के अनुसार - "सामूहिक रूप से जोखिम उठाना ही बीमा है." इसका मतलब है कि किसी एक व्यक्ति के जोखिम को, जिसे वह अकेले नहीं उठा सकता, मिलकर उठाना ही बीमा है.
(2) जान मैगी के अनुसार - "बीमा वह योजना है जिसके तहत बड़ी संख्या में लोग मिलकर किसी अकेले व्यक्ति के जोखिमों को अपने ऊपर लेते हैं."
(3) थॉमस के अनुसार - "बीमा एक व्यवस्था है जो एक समझदार व्यक्ति अचानक या ज़रूर होने वाली घटनाओं, हानियों या दुर्भाग्य के खिलाफ करता है. यह जोखिमों को बाँटने या फैलाने का एक तरीका है."
इन परिभाषाओं से साफ है कि बीमा जोखिमों को फैलाने का एक सामाजिक और सहकारी तरीका है, जिसमें एक जैसे जोखिमों वाले व्यक्ति अपनी जोखिमों को किसी दूसरे व्यक्ति या किसी संस्था (बीमाकर्ता) को ट्रांसफर कर देते हैं, या सब मिलकर सामूहिक रूप से उन्हें बाँट लेते हैं.
2. कार्यात्मक और व्यावसायिक परिभाषाएँ:
कुछ विद्वानों ने बीमा की कार्यात्मक परिभाषाएँ देकर यह साफ किया है कि बीमा कैसे हानि से सुरक्षा या हानि की क्षतिपूर्ति करता है. इन परिभाषाओं के अनुसार, बीमा बीमित व्यक्ति को हानि से सुरक्षित करने और क्षतिपूर्ति देने की प्रक्रिया है-
(1) ब्रिटानिका विश्व कोष के अनुसार - "बीमा एक सामाजिक तरीका है जिसके ज़रिए व्यक्तियों का एक बड़ा समूह समान अंशदान की व्यवस्था करके समूह के सभी सदस्यों की कुछ सामान्य, मापी जा सकने वाली आर्थिक हानि को दूर या कम करता है."
(2) रीगल और मिलर के अनुसार - "बीमा वह सामाजिक उपाय या योजना है जिसके ज़रिए अकेले व्यक्तियों की अनिश्चित जोखिमों को समूह से जोड़ा जा सकता है और उन जोखिमों को ज़्यादा निश्चित किया जा सकता है. सभी व्यक्तियों द्वारा समय-समय पर दिए गए थोड़े अंशदान से बने फंड में से हानि की पूर्ति की जा सकती है."
(3) फेडरेशन ऑफ इन्श्योरेंस इंस्टीट्यूट के अनुसार - "बीमा वह तरीका है जिसमें एक ही तरह के जोखिमों से घिरे व्यक्ति एक सामान्य फंड में अंशदान करते हैं, जिनमें से कुछ दुर्भाग्यशाली व्यक्तियों की दुर्घटनाओं से हुई हानियों को पूरा किया जाता है."
ऊपर दी गई परिभाषाओं से स्पष्ट है कि बीमा एक सामाजिक उपाय है जिसके तहत बड़ी संख्या में लोग एक संगठन के अंदर कुछ जोखिमों से सुरक्षा पाने के लिए प्रीमियम के रूप में अंशदान करके एक फंड बनाते हैं और उस फंड में से सदस्यों को होने वाली मापी जा सकने वाली आर्थिक हानियों की भरपाई की जाती है.
3. अनुबन्धात्मक वैधानिक परिभाषाएँ:
ये परिभाषाएँ बीमा के कानूनी स्वरूप को साफ करती हैं-
(1) न्यायमूर्ति टिंडाल के अनुसार - "बीमा एक अनुबंध है जिसके तहत बीमित व्यक्ति बीमाकर्ता को एक निश्चित राशि एक निश्चित घटना के होने के जोखिम उठाने के बदले में देता है."
निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि बीमा एक सहकारी व्यवस्था है जिसमें समान जोखिमों वाले व्यक्ति बीमाकर्ता को अंशदान देकर एक फंड बनाते हैं. बीमा अनुबंध में बताई गई घटना के होने पर या घटना से नुकसान होने पर बीमाकर्ता इस फंड से बीमित को एक तय राशि चुका देता है. इस तरह, बीमा जोखिम के खिलाफ वित्तीय भरपाई का एक सहकारी उपाय और एक अनुबंध जैसा संबंध है.
बीमा की विशेषताएँ:
बीमा की कुछ खास विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
1. बीमा एक अनुबंध है - बीमा एक खास तरह का कानूनी अनुबंध है. इस अनुबंध में बीमाकर्ता बीमित को एक तय प्रीमियम (किराये) के बदले में किसी तय घटना के होने पर होने वाली हानि की पूर्ति करने का वादा करता है.
2. बीमा अनुबंध कुछ सिद्धांतों पर आधारित है - बीमा की यह भी एक विशेषता है कि बीमा का अनुबंध कई सिद्धांतों पर आधारित है. परम सद्भावना का सिद्धांत, बीमा हित का सिद्धांत, आदि इन अनुबंधों का आधार माने जा सकते हैं.
3. जोखिम का मूल्यांकन - बीमा की एक मुख्य विशेषता यह है कि बीमा करने से पहले ही जोखिम का मूल्यांकन किया जाता है. जोखिम की राशि और संभावना दोनों को पहले तय किया जाता है. फिर इन दोनों के आधार पर बीमा का प्रीमियम तय होता है. जितनी ज़्यादा जोखिम होती है, उतना ही ज़्यादा प्रीमियम होता है.
4. घटना के होने पर भुगतान - बीमा में बीमा राशि का भुगतान एक तय घटना के होने पर किया जाता है. जीवन बीमा में आमतौर पर घटना का होना तय होता है. इसमें या तो बीमित की मृत्यु हो जाती है या बीमा अवधि खत्म हो जाती है. ऐसी स्थिति में भुगतान ज़रूर करना पड़ता है. लेकिन आग, समुद्र और अन्य व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा में घटना का होना ज़रूरी नहीं होता है. इसलिए, घटना होने पर ही नुकसान की भरपाई की जाती है.
5. भुगतान की राशि - जीवन बीमा और अन्य बीमा में भुगतान का आधार अलग-अलग है. जीवन बीमा में बीमित को बीमा पॉलिसी की पूरी राशि का भुगतान कर दिया जाता है, जबकि अन्य तरह के बीमा में सिर्फ नुकसान की भरपाई की जाती है. इसलिए, जीवन बीमा को छोड़कर बाकी सभी बीमा को भरपाई बीमा कहा जाता है. अगर बीमित को बीमित कारणों से नुकसान होता है तो तय राशि का भुगतान होता है और अगर नहीं होता है तो भुगतान नहीं होता है.
6. जोखिम से सुरक्षा - बीमा आर्थिक सुरक्षा का कवच है. यह जीवन, सामान या संपत्ति से जुड़े जोखिमों को खत्म नहीं करता, बल्कि जोखिमों से सुरक्षित करने का एक तरीका है.
7. जोखिमों का विभाजन - बीमा किसी व्यक्ति, परिवार या संस्था को किसी तय घटना के होने पर होने वाली आर्थिक हानि को सभी बीमित व्यक्तियों में बाँटने का एक तरीका है.
10. बड़ा क्षेत्र - बीमा का क्षेत्र बहुत बड़ा है. इसमें जीवन, अग्नि, समुद्री बीमा के अलावा कई आधुनिक या गैर-परंपरागत बीमा भी शामिल हैं. इन गैर-परंपरागत बीमा में हम कृषि, पशुधन, झोपड़ी, चिकित्सा, वाहन विश्वसनीयता, साख, संपत्ति आदि बीमाओं को शामिल कर सकते हैं.
11. बीमा जुआ नहीं - बीमा जुआ नहीं है. जुए में एक पक्ष को नुकसान होता है और दूसरे को फायदा, जबकि बीमा में ऐसा नहीं होता. साथ ही, बीमा एक वैध अनुबंध है जबकि जुआ वैध अनुबंध नहीं होता. बीमा रक्षा और क्षतिपूर्ति का एक कानूनी अनुबंध है जिसमें कानूनी के सभी तत्व मौजूद होते हैं.
12. बीमा दान नहीं है - बीमा कोई दान या भेंट नहीं है क्योंकि दान बिना किसी असली फायदे के दिया जाता है, जबकि बीमा में वैध और असली फायदा होता है. बीमाकर्ता तय फायदे के बदले सुरक्षा का वादा करता है और नुकसान या घटना होने पर बीमा-धन का भुगतान करता है.
13. सामाजिक उपाय - बीमा समाज में, समाज के लोगों द्वारा, समाज के हित के लिए किया जाता है. जहाँ समाज नहीं है, वहाँ बीमा नहीं होता है. यह समाज की कई समस्याओं को हल करने का एक आसान तरीका है. दरअसल, बीमा एक सामाजिक उपाय है.
14. कानून द्वारा नियमन - हर देश में बीमा व्यवसाय कानून द्वारा नियंत्रित होता है. हमारे देश में बीमा, समुद्री बीमा अधिनियम, जीवन बीमा नियम अधिनियम, साधारण बीमा (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम और बीमा नियमन प्राधिकरण आदि द्वारा नियंत्रित किया जाता है.
In simple words: बीमा एक अनुबंध है जहाँ लोग मिलकर जोखिम उठाते हैं और इसके कई फायदे और कानूनी नियम होते हैं. इसकी विशेषताओं में जोखिम मूल्यांकन, निश्चितता और सुरक्षा प्रमुख हैं.
🎯 Exam Tip: बीमा की परिभाषा और विशेषताओं को लिखते समय, बीमा को एक कानूनी अनुबंध, जोखिम विभाजन का तरीका और वित्तीय सुरक्षा के साधन के रूप में प्रस्तुत करें. सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को क्रमबद्ध रूप से लिखें.
Question 2. बीमा के क्षेत्र की विस्तृत विवेचना कीजिए।
Answer: भारत में बीमा की शुरुआत 13वीं शताब्दी में मानी जाती है, और इसका जन्म समुद्री बीमा से हुआ था. धीरे-धीरे अग्नि बीमा, जीवन बीमा, चोरी का बीमा और दूसरे गैर-पारंपरिक आधुनिक बीमा लोकप्रिय हुए. आजकल जोखिमों की अलग-अलग प्रकृति के कारण बीमा कंपनियाँ अलग-अलग तरह के बीमा करती हैं. मौजूदा समय में बीमा का क्षेत्र बहुत विशाल हो गया है. बीमा का वर्गीकरण इन आधारों पर किया जा सकता है:
1. बीमा की प्रकृति के आधार पर
2. व्यावसायिक आधार पर
3. जोखिम के आधार पर वर्गीकरण.
4. सामाजिक बीमा
5. अन्य बीमा.
1. जीवन बीमा - इसमें जीवन का बीमा किया जाता है, जहाँ 'मानव जीवन' बीमा का विषय होता है. इस बीमा में बीमाकर्ता एक तय प्रीमियम (किराये) के बदले में बीमित की मृत्यु पर उसके वारिसों को या बीमा अवधि पूरी होने पर खुद बीमित को एक निश्चित राशि देने का वादा करता है. बीमित को एक निश्चित अवधि तक प्रीमियम चुकाना पड़ता है. अगर बीमा अवधि से पहले ही बीमित की मृत्यु हो जाती है, तो बीमा राशि बीमाकर्ता द्वारा बीमित के वारिसों को दी जाती है. अगर बीमित बीमा अवधि तक जीवित रहता है, तो बीमा धन बोनस के साथ बीमित को दिया जाता है. जीवन बीमा बीमित और मृत्यु पर उसके परिवार के अन्य सदस्यों को सुरक्षा देता है. "जीवन बीमा में सुरक्षा के साथ-साथ निवेश का तत्व भी होता है." जीवन बीमा का कारोबार देश में भारतीय जीवन बीमा निगम और कुछ निजी कंपनियाँ, जैसे- कोटक महिंद्रा, बजाज आलियांज, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल आदि करती हैं.
2. अग्नि बीमा - यह वह बीमा है जिसमें बीमाकर्ता आग लगने से संपत्ति को होने वाली हानि की भरपाई का वादा करता है. यह भरपाई का बीमा है जिसमें असली हानि की भरपाई की जाती है. यह बीमा आमतौर पर एक साल के लिए होता है. इस बीमा में आग से होने वाले नुकसान के अलावा कुछ निश्चित कारणों से होने वाली हानियों की भरपाई भी की जाती है, जैसे- दंगे, बलवे, उपद्रव, गैस विस्फोट, भूकंप, आँधी-तूफान, बाढ़, बिजली गिरना, वायुयान क्षति, जलप्लावन आदि जोखिमों से संपत्ति की सुरक्षा के लिए भी इसे कराया जा सकता है. आज के समय में इस बीमा का बहुत महत्व है. बड़े-बड़े कारखाने, गोदाम, दुकान, रिहायशी बस्तियों में आग का खतरा बना रहता है. ज़्यादा बिजली के इस्तेमाल से बिजली के सर्किट में खराबी के कारण आग लगने का जोखिम भी रहता है.
3. समुद्री बीमा - समुद्री रास्ते से विदेशों तक व्यापार किया जाता है. इसमें समुद्री जोखिमों, जहाज और माल से जुड़ी हानियों का बीमा कराया जाता है. समुद्री तूफान, जहाज के दूसरे जहाज से टकराने या चट्टान से टकराने से होने वाली हानि की भरपाई के लिए यह बीमा कराया जाता है.
समुद्री बीमा भी दो तरह का होता है-
• महासागर समुद्री बीमा
• अंतर्राष्ट्रीय या देशीय समुद्री बीमा.
4. सामाजिक बीमा - सरकार ने गरीब, असहाय, बेसहारा लोगों को आर्थिक सहायता और सुरक्षा देने के लिए सामाजिक बीमा योजनाएँ शुरू की हैं. इस बीमा में अलग-अलग तरह के बीमा शामिल हैं, जैसे- बेरोजगारी, बीमारी, आकस्मिक दुर्घटनाएँ, बुढ़ापा, प्रसूति मृत्यु आदि जोखिमों का बीमा किया जाता है.
राष्ट्रीय श्रम आयोग ने सामाजिक बीमा को परिभाषित करते हुए लिखा है कि "सामाजिक बीमा वह योजना है जो कम आय वर्ग के लोगों को अधिकारपूर्वक वह राशि जमा के रूप में देती है जो बीमित सेवा योजना और सरकार के अंशदान से इकट्ठी होती है."
(ब) मृत्यु बीमा - यदि बीमित की काम के दौरान मौत हो जाती है, तो उसके आश्रितों को पूरी या आंशिक रूप से एक निश्चित राशि दी जाती है. नियोक्ता अपने कर्मचारियों का मृत्यु बीमा करवाकर अपनी जिम्मेदारी बीमाकर्ता को ट्रांसफर कर सकता है.
(स) असमर्थता बीमा - कारखानों या फैक्ट्रियों में काम करते समय किसी कर्मचारी के पूरी या आंशिक रूप से अपंग होने पर भरपाई का प्रावधान है. हालाँकि श्रमिक क्षतिपूर्ति अधिनियम के अनुसार, यह जिम्मेदारी नियोक्ताओं की होती है, लेकिन नियोक्ता इस तरह का बीमा करवाकर अपनी जिम्मेदारी बीमा कंपनी को ट्रांसफर कर सकता है.
(द) बेरोजगारी बीमा - जब कुछ खास कारणों से बीमित व्यक्ति बेरोजगार हो जाते हैं, तो उन्हें फिर से नौकरी मिलने तक की अवधि के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है.
(य) वृद्धावस्था बीमा - इस बीमा से बुढ़ापे में मदद मिलती है. इस तरह के बीमा में बीमाकर्ता बीमित या उसके आश्रित को एक निश्चित उम्र के बाद नियमित वित्तीय सहायता देता है.
सरकार गरीबों, असहायों, कुलियों, कामगारों, श्रमिकों, हस्तशिल्पियों, कारीगरों और समाज के कमजोर वर्गों के लिए नाममात्र के प्रीमियम पर विभिन्न बीमा योजनाएँ चला रही है. इन्हें जन-कल्याणकारी योजनाएँ कहा जाता है. कुछ योजनाएँ तो सरकार की ऐसी हैं जिनमें कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ता और दुर्घटना होने पर भी लाभ मिलता है.
5. अन्य बीमा - आज के युग में तकनीकी विकास, औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण जोखिमों का क्षेत्र बहुत बढ़ गया है. हमारे जीवन में जोखिमों के बढ़ने के कारण बीमाकर्ता अब अपनी ज़रूरत के हिसाब से विभिन्न बीमा योजनाएँ दे रहे हैं, जो इस प्रकार हैं:
(अ) वाहन बीमा - सड़क यातायात में कई तरह के वाहन चलते हैं, जैसे बस, कार, जीप, मोटरसाइकिल (दोपहिया/चारपहिया वाहन) का बीमा करवाना अनिवार्य है. ऐसे बीमाओं में बीमाकर्ता दुर्घटना से वाहन और तीसरे पक्षकार को होने वाली हानि की भरपाई करता है. वाहन बीमा एक साल के लिए मान्य होता है. इस वाहन बीमा में तीन जोखिमों की जिम्मेदारी बीमाकर्ता लेता है, जिनमें वाहन को नुकसान, वाहन मालिक को नुकसान और वाहन से तीसरे पक्षकार को पहुँचा नुकसान शामिल है.
(ब) व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा - इस बीमा में दुर्घटना, जैसे- मृत्यु, स्थायी या आंशिक रूप से अपंग होने की स्थिति में बीमित को होने वाली संभावित हानि की जिम्मेदारी बीमाकर्ता लेता है. दुर्घटना में मृत्यु होने पर, पूरी अपंगता होने पर बीमा की पूरी राशि की भरपाई की जाती है, जबकि आंशिक अपंगता की स्थिति में बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार एक निश्चित अनुपात में भरपाई की जाती है. साधारण बीमा निगम की चार सहायक कंपनियाँ व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी जारी करती हैं. यह हवाई यात्रा और सड़क यात्रा के लिए भी उपलब्ध है.
(स) चोरी-डकैती बीमा - इस तरह के बीमा में बीमाकर्ता बीमित को चोरी, सेंधमारी, उठाईगीरी आदि से होने वाली हानि की भरपाई का वादा करता है. बीमित अपने मकान, दुकान, माल गोदाम, यात्रा के दौरान ले जाए जा रहे सामान, लाए और ले जाए जाने वाले धन आदि का बीमा करवाता है. यह सिनेमाघरों, पेट्रोल पंपों, आवासीय होटलों, बैंकों, वित्तीय संस्थाओं आदि के लिए उपयोगी होता है.
(र) अपराध बीमा - इसमें डकैती, लूटपाट, उपद्रव, आतंकी कार्रवाइयों आदि से सुरक्षा मिल सकती है. बैंक, वित्तीय संस्थाएँ, यातायात संस्थाएँ, होटल, पेट्रोल पंप और अन्य व्यावसायिक संस्थान इस बीमा से सुरक्षित हो सकते हैं.
(ल) अन्य बीमा - ऊपर बताए गए बीमाओं के अलावा आजकल कई अन्य बीमा भी प्रचलित हैं. उन सभी का उल्लेख करना पूरी तरह संभव नहीं है, उनमें से कुछ हैं- साइकिल बीमा, बैलगाड़ी बीमा, कुक्कुट बीमा, वायु यात्रा बीमा, वन बीमा, सुंदरता का बीमा, उद्यमी का बीमा, होटल के ग्राहकों का बीमा, सामान का बीमा आदि.
(व) प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना - 18 से 70 साल तक का व्यक्ति यह बीमा करवा सकता है. इसमें सिर्फ Rs.12 की प्रीमियम राशि सीधे व्यक्ति के बैंक खाते से कट जाती है. यह एक साल का बीमा है. इसे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2015 में शुरू किया गया था. जहाँ बीमित की मृत्यु पर 2 लाख रुपये और शारीरिक क्षति या हाथ या पैर के काम करने में असमर्थ होने पर 1 लाख रुपये का भुगतान बीमित को किया जाता है. इसके लिए बीमित का बैंक खाता होना ज़रूरी है.
(श) प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना - यह बीमा भी वर्तमान प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी द्वारा शुरू किया गया है. यह 5 साल से 18 साल तक के सभी व्यक्तियों के लिए है. इसमें बीमित को 2 लाख रुपये तक की सुरक्षा मिलती है. प्रीमियम का भुगतान सीधे बैंक खाते से किया जाता है. यह एक साल के लिए होता है और इसका प्रीमियम Rs.380 प्रतिवर्ष है.
In simple words: बीमा का क्षेत्र बहुत विशाल है, जिसमें जीवन, अग्नि, समुद्री, सामाजिक और अन्य कई तरह के बीमा शामिल हैं, जो अलग-अलग जोखिमों से सुरक्षा देते हैं.
🎯 Exam Tip: बीमा के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करते समय, प्रत्येक प्रकार के मुख्य विशेषताओं और वे किस प्रकार के जोखिम को कवर करते हैं, इसका उल्लेख करें.
Question 3. सामाजिक सुरक्षा से आप क्या समझते हैं? सामाजिक सुरक्षा में बीमा की भूमिका की विवेचना कीजिए।
Answer: सामाजिक सुरक्षा का अर्थ और परिभाषा:
सामाजिक सुरक्षा का अर्थ अलग-अलग देशों में अलग-अलग होता है. असल में, हर देश की परिस्थितियों और वहाँ की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के हिसाब से इस शब्द का मतलब निकाला जाता है. लेकिन सामान्य तौर पर, सामाजिक सुरक्षा शब्द का मतलब समाज के लोगों को किसी दुर्घटना, बीमारी, बुढ़ापे, मृत्यु आदि के समय दी जाने वाली सुरक्षा से है. दुर्घटना होने पर, बीमार पड़ने पर, बुढ़ापे में काम करने की क्षमता न रहने पर या परिवार चलाने वाले व्यक्ति की मृत्यु होने पर आश्रितों के लिए आर्थिक दिक्कतें खड़ी हो जाती हैं. सामाजिक सुरक्षा इसी तरह की असुरक्षाओं के खिलाफ सुरक्षा है.
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार - "सामाजिक सुरक्षा वह सुरक्षा है जो समाज द्वारा सही संस्थाओं के ज़रिए अपने सदस्यों के जीवन में आने वाले कुछ जोखिमों के खिलाफ दी जाती है."
सर विलियम बेवरिज के अनुसार - "सामाजिक सुरक्षा पाँच राक्षसों, अभाव, बीमारी, अज्ञानता, गंदगी और बेकारी पर हमला है."
सामाजिक सुरक्षा में बीमा की भूमिका:
सामाजिक सुरक्षा देने में बीमा एक खास भूमिका निभाता है, जो इन बिंदुओं से साफ होती है-
1. अचानक मृत्यु पर आश्रितों को सुरक्षा - यदि बीमित व्यक्ति की अचानक मृत्यु हो जाती है, तो बीमाकर्ता उसके आश्रितों को सुरक्षा देता है. आजीवन बंदोबस्ती और अवधि बीमा पॉलिसी और अन्य मिश्रित बीमा पॉलिसी में बीमित की मृत्यु पर उसके आश्रितों (नामांकित) को एक तय राशि या सालाना पेंशन मिलती है, जिससे उसके परिवार का गुजारा हो सकता है.
2. बेरोजगारी में सुरक्षा - कुछ विकसित देशों में बेरोजगारी बीमा की सुविधा है. जब किसी बीमित व्यक्ति/कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया जाता है (छंटनी, ज़बरदस्ती छुट्टी), तो उसे एक तय अवधि के लिए तय राशि की भरपाई की जाती है.
3. बुढ़ापे के दौरान धन या आय की व्यवस्था - विभिन्न बीमा कंपनियों ने ऐसी बीमा योजनाएँ (पॉलिसी) बनाई हैं ताकि बीमित को बुढ़ापे के दौरान बीमा की पूरी राशि या सालाना आय मिलती रहे. बीमित इसे खुद निवेश करता है और उस निवेश से मिलने वाली आय से अपना जीवन चलाता है. बीमा पॉलिसी में समय-समय पर सालाना आय मिल जाती है, जिससे बुढ़ापे में ज़रूरी सुरक्षा मिलती है. हमारे देश में विभिन्न बीमा संस्थाओं द्वारा आजीवन बीमा पॉलिसी, बंदोबस्ती बीमा पॉलिसी, पेंशन बीमा पॉलिसी, यूनिट लिंक प्लान आदि उपलब्ध कराए गए हैं. बीमित अपनी ज़रूरत और सुविधा के हिसाब से योजना चुनकर बुढ़ापे में आय की व्यवस्था कर सकता है.
4. अपंग/अशक्त लोगों/आश्रितों की सुरक्षा - बीमा संस्थाएँ कुछ खास बीमा पॉलिसी उन अभिभावकों के जीवन पर जारी करती हैं जिनका कोई आश्रित अपंग हो. इन बीमा पॉलिसियों के तहत आश्रित को नामांकित किया जाता है, जबकि बीमा अभिभावक का किया जाता है. नतीजतन, अभिभावक की मृत्यु होने पर अपंग आश्रित को बीमा राशि और अन्य परिपक्व राशि मिल जाती है. जीवन बीमा निगम ने 'जीवन आधार' और 'जीवन विश्वास' जैसी दो बीमा पॉलिसी जारी की हैं.
5. बीमारियों की स्थिति में आर्थिक संकट में सहायता - बीमित व्यक्ति के गंभीर रूप से बीमार होने पर बीमा उसे आर्थिक सहायता देता है. आजकल ऐसी बीमा पॉलिसी भी प्रचलित हैं जिनमें अतिरिक्त प्रीमियम देकर गंभीर बीमारी की शर्त जोड़ दी जाती है. इसके बाद अगर बीमित को कोई गंभीर बीमारी हो जाती है, तो पहले से तय राशि का भुगतान कर दिया जाता है. जीवन बीमा निगम के तहत भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा 'अनुराग जीवन', 'जीवन भारती', 'जीवन आनंद', 'जीवन मित्र' जैसी दोहरा बीमा पॉलिसी जारी की गई हैं, जिनमें गंभीर बीमारी की शर्त जोड़ने का प्रावधान है. नतीजतन, बीमित व्यक्ति शर्त के अधीन गंभीर बीमारी की स्थिति में सुरक्षा प्राप्त कर सकता है.
6. दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा - जीवन बीमा पॉलिसियों में आमतौर पर दुर्घटना बीमा की शर्त होती है, जिसके तहत अतिरिक्त प्रीमियम देकर अपना दुर्घटना बीमा करवाया जा सकता है. कई बीमा संस्थाएँ सिर्फ दुर्घटना बीमा भी करती हैं. दोनों ही स्थितियों में यदि बीमित की मृत्यु हो जाती है, तो बीमित के आश्रित (नॉमिनी) को पहले से तय राशि का भुगतान कर दिया जाता है. यदि दुर्घटना में आंशिक या पूर्ण रूप से अपंग हो जाता है, तो उसे खुद को एक तय राशि का भुगतान एकमुश्त या सालाना आय के रूप में किया जाता है.
In simple words: सामाजिक सुरक्षा समाज के लोगों को दुर्घटना, बीमारी या बुढ़ापे जैसी मुश्किलों से बचाने की व्यवस्था है, जिसमें बीमा एक बड़ी भूमिका निभाता है, जैसे मृत्यु, बेरोजगारी, बुढ़ापे और बीमारी में वित्तीय सुरक्षा देना.
🎯 Exam Tip: सामाजिक सुरक्षा की परिभाषा में 'समाज के लोगों', 'जोखिमों' और 'सुरक्षा' पर जोर दें. बीमा की भूमिका को समझाते समय, यह बताएं कि बीमा कैसे मृत्यु, बेरोजगारी, वृद्धावस्था और बीमारी जैसी विभिन्न परिस्थितियों में वित्तीय सहायता और मानसिक शांति प्रदान करता है.
Question 4. बीमा एजेण्ट की परिभाषा दीजिए। एजेण्ट के कार्यों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer:
बीमा एजेण्ट की परिभाषा:
बीमा एजेण्ट्स विनियम, 2000 के अनुसार, एक बीमा एजेण्ट वह व्यक्ति होता है जिसे बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 42 के तहत लाइसेंस मिलता है। यह व्यक्ति कमीशन या किसी और फीस के बदले में बीमा खरीदने के लिए लोगों को प्रेरित करता है या बीमा का काम करता है। इसमें बीमा पॉलिसियों को चालू रखना और उनका नवीनीकरण करना भी शामिल है।
साफ शब्दों में, बीमा एजेण्ट वह व्यक्ति है जो बीमा कंपनी के लिए लोगों को बीमा खरीदने के लिए प्रोत्साहित करता है। वह बीमा का काम लेता है और पॉलिसियों को चालू रखने या उनका नवीनीकरण कराने में मदद करता है। इसके बदले में उसे कमीशन या कोई और भुगतान मिलता है।
बीमा एजेण्ट के कार्य:
एक बीमा एजेण्ट के मुख्य कार्य नीचे दिए गए हैं –
1. **नया व्यवसाय प्राप्त करना** – हर एजेण्ट को हमेशा नया बीमा व्यवसाय लाने की कोशिश करनी चाहिए। उसे कम से कम उतनी रकम का व्यवसाय तो लाना ही चाहिए जो नियमों में तय है, लेकिन उसे इस न्यूनतम सीमा से ज़्यादा व्यवसाय लाने की लगातार कोशिश करते रहना चाहिए।
2. **मौजूदा व्यवसाय को सुरक्षित रखना** – एजेण्ट को नए व्यवसाय पर ध्यान देने के साथ-साथ यह भी कोशिश करनी चाहिए कि पुराने बीमापत्र या पहले से जारी पॉलिसियाँ चालू रहें। कई लोग प्रीमियम जमा करना बंद कर देते हैं, जिससे बीमापत्र खत्म हो जाते हैं। एजेण्ट को इस बात का ध्यान रखना चाहिए और अपने पुराने ग्राहकों को उनकी पॉलिसियाँ चालू रखने में पूरी मदद करनी चाहिए।
3. **बीमित की पूरी जानकारी लेना** – एजेण्ट को प्रस्तावित बीमा लेने वाले व्यक्ति के बारे में सभी सही स्रोतों से जानकारी लेनी चाहिए। उसे व्यक्ति के स्वभाव, आदतों, बीमारियों, परिवार के इतिहास और काम की स्थिति के बारे में पता होना चाहिए। इससे वह प्रस्तावित जीवन बीमा के जोखिम की श्रेणी का अंदाज़ा लगा सकता है।
4. **जोखिमों पर बुरा असर डालने वाली बातों की जानकारी निगम को देना** – बीमा एजेण्ट का यह कर्तव्य है कि वह बीमा कंपनी को उन सभी बातों की जानकारी दे जो बीमा के जोखिम पर बुरा असर डाल सकती हैं। उसे उन स्थितियों को भी साफ करना चाहिए जो जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
5. **बीमित की आयु मंजूर करवाना** – एजेण्ट का यह भी कर्तव्य है कि वह बीमा प्रस्ताव करते समय ही बीमित की उम्र को मंजूर करवा ले। ऐसा करने से दावों के निपटारे के समय कोई परेशानी नहीं आती है।
6. **बीमापत्रों को खत्म होने से रोकना या उन्हें फिर से चालू करवाना** – कई लोग थोड़ी सी भी आर्थिक परेशानी आने पर बीमा प्रीमियम देना बंद कर देते हैं। जब बीमा पत्र पर कुछ सालों का प्रीमियम बाकी रह जाता है, तो वे उसे फिर से चालू करवा लेते हैं। इसके कारण मौजूदा व्यवसाय में कमी आती है। बीमा एजेण्टों को अपने ग्राहकों को बीमापत्रों को खत्म न करवाने के नुकसान बताने चाहिए और उन्हें ऐसा न करने की सलाह देनी चाहिए।
7. **प्रीमियम का समय पर भुगतान करने के लिए प्रेरित करना** – बीमा एजेण्ट का एक कर्तव्य यह भी है कि वह अपने ग्राहकों को प्रीमियम का समय पर भुगतान करने के लिए प्रेरित करे। उसे ग्राहकों को समय पर प्रीमियम का भुगतान करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्हें प्रीमियम का समय पर भुगतान न करने के प्रभावों से अवगत कराना चाहिए। उसे रियायती अवधि तक प्रीमियम जमा करवाने का महत्व समझाना चाहिए।
8. **दूसरे एजेण्टों के प्रस्तावों में दखल न देना** – एक बीमा एजेण्ट को किसी दूसरे बीमा एजेण्ट द्वारा लाए गए बीमा प्रस्तावों में दखल नहीं देना चाहिए। उसे दूसरे के ग्राहक को बहकाकर अपने पास नहीं बुलाना चाहिए।
9. **बीमापत्रों के नामांकन या हस्तांतरण में सलाह और सहायता देना** – सभी एजेण्टों को बीमापत्रों के हस्तांतरण या नामांकन के संबंध में सलाह देनी चाहिए। जहाँ ज़रूरत हो वहाँ उनकी सहायता भी करनी चाहिए। नामांकन या हस्तांतरण न होने पर बीमापत्रों के दावे के समय बड़ी कठिनाइयाँ आती हैं। इसलिए इस संबंध में सही सलाह देनी चाहिए।
10. **अन्य महत्वपूर्ण कार्य** –
* अपने बीमाकर्ता के उत्पादों के बारे में जानकारी देना।
* संभावित ग्राहकों की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर किसी खास बीमा योजना की सलाह देना।
* कुशलता और मेहनत के साथ काम करना।
* बीमा एजेण्ट के रूप में अपना परिचय देना और मांगने पर अपना लाइसेंस दिखाना।
In simple words: बीमा एजेण्ट बीमा कंपनियों के लिए काम करते हैं। वे लोगों को बीमा खरीदने में मदद करते हैं, पॉलिसी को चालू रखते हैं, और नए ग्राहक बनाते हैं। उन्हें अपने ग्राहकों की पूरी जानकारी लेनी चाहिए, जोखिम से जुड़ी बातें कंपनी को बतानी चाहिए, और लोगों को समय पर प्रीमियम भरने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
🎯 Exam Tip: बीमा एजेण्ट के कार्यों को याद करते समय, ग्राहक के बीमा खरीदने से लेकर उसकी पॉलिसी को बनाए रखने तक के चरणों को क्रम से सोचें। यह आपको सभी मुख्य कर्तव्यों को याद रखने में मदद करेगा।
Question 5. बीमा की सामाजिक - आर्थिक उपयोगिता को समझाइए।
Answer:
बीमा की उपयोगिता:
सर मिर्जा स्माइल ने ठीक ही लिखा है कि "बीमा में दया के जैसे गुण होते हैं। बीमा करने वाला और बीमा लेने वाला दोनों भाग्यशाली होते हैं। बीमा जन्म से मृत्यु तक आपकी रक्षा करता है।” एस. ब्रियन का भी कहना है कि "बीमा, आधुनिक समय द्वारा मानवता को दिया गया सबसे बड़ा उपहार है।” वास्तव में, बीमा का महत्व या उपयोगिता केवल एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के हर क्षेत्र के लिए है। प्रो. रोयस ने बीमा की उपयोगिता को समझाते हुए लिखा है कि, "आज के समय में बीमा का उपयोग और उपयोगिता बहुत बढ़ रही है।”
यह सिर्फ किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह की जरूरतों को पूरा नहीं करता, बल्कि यह हमारी आधुनिक सामाजिक व्यवस्था में बहुत ज़्यादा फिट हो गया है और इसके बदलाव में योगदान दे रहा है। यह सिर्फ विज्ञान का नहीं, बल्कि निजी और सार्वजनिक हितों तथा व्यक्तिगत समझ का मिश्रण भी है। यह सामान्य भलाई, बचत और दान आदि पर पूरा ध्यान रखता है।” इस प्रकार यह साफ है कि बीमा समाज के सभी वर्गों और पूरे देश के लिए उपयोगी है। प्रो. डिन्सडेल ने बीमा की उपयोगिता को साफ करते हुए लिखा है कि आधुनिक दुनिया में कोई भी व्यक्ति बीमा के बिना नहीं रह सकता है। आज तो यह जीवन की एक महत्वपूर्ण ज़रूरत बन गया है।
संक्षेप में, हम बीमा की उपयोगिता को नीचे दिए गए हिस्सों में बाँटकर समझ सकते हैं –
आर्थिक अथवा व्यावसायिक उपयोगिता:
आर्थिक या व्यावसायिक दृष्टि से बीमा की उपयोगिता नीचे दिए अनुसार है –
1. **जोखिमों से सुरक्षा** – व्यापार में जोखिम हमेशा मौजूद रहते हैं। हर दिन करोड़ों रुपये का माल जहाजों, रेलों या ट्रकों से भेजा जाता है। गोदामों में माल जमा रहता है। कारखानों में महंगी मशीनें लगाई जाती हैं। इन सभी के नष्ट होने का जोखिम हमेशा बना रहता है। ऐसे समय में बीमा व्यापारियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। वे अपनी संपत्ति और लाभ का बीमा करवाकर सुरक्षित हो जाते हैं।
2. **साख का आधार** – व्यापारियों के लिए बीमा का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी है कि यह साख दिलाने में मदद कर सकता है। बीमा की गई संपत्तियों पर बैंक और वित्तीय संस्थाएँ आसानी से लोन देती हैं। इसके अलावा, बैंक किसी भी संस्था को लोन देते समय उसके संचालकों पर बहुत ध्यान देते हैं। उन संचालकों की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और प्रबंधन क्षमता बैंकों के लोन देने या न देने के फैसले को प्रभावित करती है। ऐसी स्थिति में बैंक लोन देने से पहले ऐसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों का बीमा भी करवाते हैं।
मृत्यु, भयानक आग या किसी और दिल दहलाने वाली घटना से भी ज्यादा खतरनाक होती है। ऐसे में बीमा प्रीमियम का भुगतान करके उस व्यवसाय को उस समय की आर्थिक कठिनाइयों से मुक्ति मिल सकती है।” वास्तव में, हर संस्था के लिए कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तियों का जीवन अनमोल होता है। उन कुछ व्यक्तियों की इज़्ज़त, क्षमता और प्रबंधन कौशल पर ही संस्था की सफलता निर्भर करती है। इसलिए, संस्था को आर्थिक खतरों से बचाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तियों का बीमा करवा लिया जाता है। इससे ऐसे व्यक्तियों की मृत्यु होने पर संस्था को नुकसान की भरपाई मिल जाती है।
3. **कार्यक्षमता में वृद्धि** – बीमा कई जोखिमों से सुरक्षा देता है। इससे व्यापारी अपना काम ज़्यादा निश्चितता से करता है। नतीजतन, व्यापारी की कार्यक्षमता बढ़ती है। रीगल, मिलर और विलियम्स ने इसी बात को साफ करते हुए लिखा है कि “जोखिम की अनिश्चितता खत्म होने का स्वाभाविक नतीजा यह होता है कि व्यावसायिक कुशलता बढ़ती है।”
4. **सुरक्षा के तरीकों को बढ़ावा** – बीमा कंपनियाँ अपने ग्राहकों को सुरक्षा के तरीकों का उपयोग करने की सलाह देती हैं। इतना ही नहीं, जो ग्राहक इन सुरक्षा तरीकों को अपनाते हैं, उनका बीमा रियायती दर पर भी करती हैं। जिन ग्राहकों को कम नुकसान होता है, उनके लिए बीमा दरों में आने वाले सालों में छूट दी जाती है। इससे बीमा कंपनियाँ और ज़्यादा लोगों को सुरक्षा के तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
5. **लागतों में कमी** – एक विद्वान ने ठीक ही लिखा है कि "बीमा एक निर्माता को कम कीमत पर माल बेचने में मदद कर सकता है, क्योंकि वह उत्पादन के जोखिमों का थोड़ा सा प्रीमियम देकर सुरक्षा पा लेता है।” असलियत यह है कि बीमा के बिना, सभी जोखिम व्यापारियों को ही उठाने पड़ते हैं, जिससे वे ज़्यादा कीमतें वसूल करके ही पूरा कर पाते हैं।
6. **व्यावसायिक और औद्योगिक कार्यों के लिए पूँजी उपलब्ध कराना** – बीमा संस्थाओं के पास जनता की छोटी-छोटी रकम जमा होती है, जिसे वे प्रीमियम के रूप में प्राप्त करती हैं। ये रकम इकट्ठा होकर जल्दी ही एक बड़ी पूँजी बन जाती हैं। फिर जनता की इन छोटी-छोटी बचतों का उपयोग औद्योगिक विकास, व्यावसायिक तरक्की और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में किया जाता है। इस दिशा में भारतीय जीवन बीमा निगम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
7. **बड़े व्यवसायों का विकास** – आज हम व्यावसायिक संस्थाओं का जो बड़ा आकार देख रहे हैं, उसे बनाने में बीमा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। शायद बीमा सुविधाओं के बिना व्यवसाय इस बड़ी स्थिति तक नहीं पहुँच पाते। पर्याप्त वित्तीय साधन पैदा करने और अलग-अलग जोखिमों के खिलाफ ज़रूरी सुरक्षा देने से बीमा ने बड़े व्यवसायों के विकास में मदद की है।
8. **अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के विकास में सहायक** – समुद्री और हवाई यातायात दोनों ही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्वपूर्ण साधन हैं, लेकिन दोनों ही में बहुत ज़्यादा जोखिम होते हैं। कोई नहीं कह सकता कि कब माल से भरा कोई जहाज डूब जाएगा या माल से भरा हवाई जहाज जमीन या समुद्र में गिरकर नष्ट हो जाएगा और उसके मालिक बर्बाद हो जाएँगे, लेकिन बीमा की सुविधा होने से समुद्री जहाज, हवाई जहाज या उनमें लदे सामान का आसानी से बीमा करवाया जा सकता है। यह बीमा की देन है कि आज
9. **लघु उद्योगों को सहायता** – अगर छोटे व्यवसायी अपने व्यवसाय के जोखिमों को उठाएँगे तो उनका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा, लेकिन बीमा छोटे व्यवसायी को समान रूप से जोखिम उठाने में मदद करता है।
10. **प्रतिभूतियों में निवेश** – बीमा कंपनियाँ सिर्फ प्रतिभूतियों की गारंटी नहीं देतीं, बल्कि वे सीधे विभिन्न औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा जारी की गई प्रतिभूतियों में भी अपनी पूँजी और वित्तीय कोषों का निवेश करके उन्हें पूँजी का स्रोत उपलब्ध कराती हैं।
सामाजिक उपयोगिता:
बीमा की सामाजिक उपयोगिताएँ नीचे दी गई हैं –
1. **पारिवारिक जीवन में स्थिरता** – बीमा के ज़रिए समाज के लोगों के जीवन में स्थिरता लाई जा सकती है। कई बार परिवार चलाने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाने से पूरा पारिवारिक जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। समाज में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहाँ अच्छे जीवन जीने वाले परिवार में कमाने वाले व्यक्ति की अचानक मृत्यु हो जाने पर परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन जीवन बीमा के ज़रिए हर व्यक्ति अपने परिवार को स्थिरता दे सकता है, क्योंकि बीमा मृत्यु के बाद आर्थिक नुकसान की भरपाई करता है।
2. **जोखिमों का सामूहिक विभाजन** – बीमा के ज़रिए एक व्यक्ति के जोखिमों को कई लोगों में बाँटा जाता है। समूह के सभी व्यक्ति जोखिमों को उठाते हैं। इसलिए एण्डोल ने लिखा है – दुर्घटनाओं की लागत को व्यक्तियों के एक बहुत बड़े समूह में बाँटकर सहन करना आसान हो जाता है।
3. **सामाजिक बुराइयों की रोकथाम** – आर्थिक समस्याओं और गरीबी के कारण ही समाज में लोगों को चोरी, भीख मांगने और वेश्यावृत्ति जैसी सामाजिक बुराइयाँ बढ़ावा देती हैं। लेकिन बीमा के ज़रिए हर व्यक्ति खुद को और अपने आश्रितों को आर्थिक रूप से सक्षम कर सकता है। इससे समाज स्वस्थ, समृद्ध और बुराइयों से मुक्त रहता है।
4. **सभ्यता का प्रतीक** – बीमा सामाजिक सभ्यता के विकास का प्रतीक है। जिन देशों में बीमा का विकास नहीं हुआ है, उन्हें पिछड़ा माना जाता है।
5. **जीवन स्तर में सुधार** – बीमा लोगों को बचत करने और जोखिमों को दूसरे को सौंपने का अवसर देता है। इससे ग्राहकों की आर्थिक स्थिति संतुलित रहती है। नतीजतन, ग्राहक अपने जीवन स्तर को बनाए रखने और लगातार ऊँचा उठाने में सफल होते हैं।
6. **स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता** – बीमा जनता को स्वास्थ्य के प्रति सतर्क बनाता है। पूरे विश्व में कई बीमा कंपनियाँ स्वास्थ्य सुधार आंदोलन चला रही हैं। बीमा कंपनियाँ अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए भारी मात्रा में शिक्षाप्रद सामग्री भी बाँट रही हैं।
7. **गरीब छात्रों को छात्रवृत्ति** – बीमा कंपनियाँ आर्थिक रूप से गरीब छात्रों को छात्रवृत्ति भी देती हैं। वे शिक्षा ऋण के ज़रिए भी शिक्षा को प्रोत्साहित करती हैं।
8. **समाज में रोज़गार के अवसरों का विकास** – बीमा कंपनियाँ समाज में रोज़गार के अवसरों को बढ़ाती हैं। बीमा कंपनियों में हज़ारों एजेण्ट, विकास अधिकारी, क्लर्क, शाखा प्रबंधक और अन्य ऊँचे पदों पर काम करते हैं। सामान्य बीमा निगम और उसकी सहायक कंपनियों में लगभग 85,000 कर्मचारी और जीवन बीमा निगम में लगभग डेढ़ लाख कर्मचारी काम करते हैं। निजी बीमा कंपनियों में भी रोज़गार के कई अवसर उपलब्ध रहते हैं।
9. **सामाजिक ज़िम्मेदारियों की पूर्ति में सहायक** – समाज में हर व्यक्ति का दूसरे व्यक्तियों के प्रति अलग-अलग भूमिकाओं में उत्तरदायित्व होता है। उदाहरण के लिए, पति का पत्नी या बच्चों के प्रति, उत्पादक या निर्माता का अपने ग्राहकों के प्रति, बीमा समाज के व्यक्तियों को अपनी आर्थिक ज़िम्मेदारियों को पूरा करने में मदद करता है।
10. **सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन** – बीमा एक ऐसा साधन है जिसके ज़रिए समाज के गरीब और पिछड़े लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा की योजनाएँ लागू की जा सकती हैं। हमारे देश में सरकार ने बीमा कंपनियों, जैसे – जीवन बीमा निगम के ज़रिए कई पिछड़े वर्गों के लिए "सामाजिक सहायता की सामूहिक बीमा योजनाएँ" और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजनाएँ लागू की हैं।
11. **आर्थिक आत्मनिर्भरता की प्राप्ति में सहायक** – बीमा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करता है। ग्राहकों की छोटी-छोटी बचतें इकट्ठा करके और बड़ी-बड़ी जोखिमों में बाँट जाने से समाज में सभी व्यक्ति आत्मनिर्भरता प्राप्त कर लेते हैं।
12. **सामाजिक परिवर्तन का साधन** – बीमा सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण साधन है। मेहर और केमेक के अनुसार “बीमा सामाजिक परिवर्तन की प्रभावशाली शक्ति हो सकती है।” वास्तव में, यह समाज के विचारों, जीवन स्तर और जीवन की गुणवत्ता सभी में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने में सक्षम है।
In simple words: बीमा समाज और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बहुत उपयोगी है। यह लोगों को आर्थिक सुरक्षा देता है, व्यापार में मदद करता है, पैसे जमा करने में आसानी पैदा करता है, और समाज को स्थिरता व सुरक्षा देता है। यह लोगों को बीमारियों और दुर्घटनाओं से बचाता है और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाता है।
🎯 Exam Tip: सामाजिक और आर्थिक उपयोगिता को अलग-अलग बिंदुओं में समझाना ज़रूरी है। हर बिंदु को एक छोटे, स्पष्ट वाक्य में लिखें और उदाहरण दें जहाँ संभव हो।
RBSE Class 12 Business Studies Chapter 13 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. सर विलियम बेवरिज के शब्दों में बीमा की परिभाषा दीजिए।
Answer: सर विलियम बेवरिज के अनुसार – “सामूहिक रूप से जोखिमें उठाना ही बीमा है।”
In simple words: सर विलियम बेवरिज कहते हैं कि जब बहुत सारे लोग मिलकर किसी जोखिम को उठाते हैं, तो उसे बीमा कहते हैं।
🎯 Exam Tip: किसी भी परिभाषा को लिखते समय, नाम और कथन को हूबहू लिखना महत्वपूर्ण है ताकि सटीक अंक मिल सकें।
Question 3. बीमा की कोई दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
Answer: बीमा की दो प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं –
1. बीमा एक सहकारी व्यवस्था है।
2. बीमा जोखिम को बाँटने की विधि है।
In simple words: बीमा एक ऐसा तरीका है जहाँ लोग एक साथ आकर जोखिम बाँटते हैं, और यह एक समूह में काम करने वाली व्यवस्था है।
🎯 Exam Tip: विशेषताओं को हमेशा बिंदुवार लिखें और उन्हें स्पष्ट रूप से समझाएँ, भले ही संक्षिप्त में ही क्यों न हो।
Question 4. बीमापत्र क्या है?
Answer: बीमापत्र एक लिखित दस्तावेज़ होता है जिसमें बीमा अनुबंध की सभी शर्तें लिखी होती हैं।
In simple words: बीमापत्र एक कागज़ का दस्तावेज़ है जिसमें बीमा से जुड़ी सारी बातें और नियम लिखे होते हैं।
🎯 Exam Tip: बीमापत्र को बीमा अनुबंध का लिखित प्रमाण माना जाता है।
Question 5. इन्श्योरेन्स तथा एश्योरेन्स में अन्तर बताइए।
Answer: इन्श्योरेन्स शब्द से जोखिम की संभावना तो दिखती है लेकिन निश्चितता नहीं होती, जबकि एश्योरेन्स शब्द जोखिम की निश्चितता को दिखाता है।
In simple words: इन्श्योरेन्स वहाँ होता है जहाँ जोखिम होने की संभावना हो, जबकि एश्योरेन्स वहाँ होता है जहाँ जोखिम का होना निश्चित हो।
🎯 Exam Tip: इन्श्योरेन्स आमतौर पर सामान्य बीमा (जैसे कार या घर का बीमा) में उपयोग होता है, जबकि एश्योरेन्स जीवन बीमा में, जहाँ मृत्यु निश्चित है, उपयोग होता है।
Question 6. बीमा तथा जुए में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: बीमा किसी मौजूदा जोखिम से सुरक्षा पाने के लिए करवाया जाता है, जबकि जुए में दो या दो से ज़्यादा लोग मनोरंजन के लिए जान-बूझकर कुछ जोखिम पैदा करते हैं और लाभ कमाने की कोशिश करते हैं।
In simple words: बीमा हमें पहले से मौजूद खतरे से बचाता है, जबकि जुआ मनोरंजन के लिए खुद खतरा मोल लेता है।
🎯 Exam Tip: बीमा में हमेशा एक बीमा योग्य हित शामिल होता है (आप जिस चीज़ का बीमा कर रहे हैं, उससे आपका कोई संबंध होना चाहिए), जबकि जुए में ऐसा कोई हित नहीं होता।
Question 7. बीमा के प्रमुख प्राथमिक कार्य बतलाइए।
Answer: बीमा के प्रमुख प्राथमिक कार्य इस प्रकार हैं –
1. आर्थिक हानि के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करना।
2. जोखिम का विभाजन या फैलाव करना।
In simple words: बीमा के मुख्य काम पैसे के नुकसान से बचाना और जोखिम को कई लोगों में बाँटना है ताकि किसी एक पर ज़्यादा बोझ न पड़े।
🎯 Exam Tip: बीमा के प्राथमिक कार्यों में जोखिम को कम करना और उसकी अनिश्चितता को दूर करना भी शामिल है।
Question 9. सामाजिक बीमा क्या है?
Answer: सामाजिक बीमा वह योजना है जो कम आय वर्ग के लोगों को अधिकार के रूप में वह राशि लाभ के रूप में देती है जो बीमाधारक, सेवायोजकों और सरकार के योगदान से जमा होती है।
In simple words: सामाजिक बीमा एक सरकारी योजना है जो कम कमाई वाले लोगों को सुरक्षित रखने के लिए बनाई गई है, जिसमें उनके, उनके मालिक के और सरकार के पैसे जमा होते हैं।
🎯 Exam Tip: सामाजिक बीमा का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और गरीबी कम करना है।
Question 10. बेरोजगारी बीमा क्या है?
Answer: जब कुछ खास कारणों से बीमाधारक बेरोजगार हो जाता है, तो उसे फिर से नौकरी मिलने तक की अवधि के लिए आर्थिक मदद दी जाती है, उसे बेरोजगारी बीमा कहते हैं।
In simple words: बेरोजगारी बीमा तब आर्थिक सहायता देता है जब कोई व्यक्ति नौकरी खो देता है और उसे नई नौकरी मिलने तक मदद की ज़रूरत होती है।
🎯 Exam Tip: बेरोजगारी बीमा व्यक्ति को मुश्किल समय में आर्थिक सहारा देता है ताकि वह गरिमापूर्ण जीवन जी सके।
Question 11. फसल बीमा में बीमाकर्ता बीमित की फसल को किन कारणों से होने वाली क्षतिपूर्ति करने का वचन देती है?
Answer: फसल बीमा में बीमाकर्ता बीमाधारक की फसल को इन कारणों से होने वाली क्षति के लिए भुगतान करने का वचन देती है –
1. जलवायु संबंधी कारण (जैसे सूखा, बाढ़, तूफान)
2. महामारी प्रकोप से
3. पौधों की बीमारी से
4. दंगों एवं हड़तालों से।
In simple words: फसल बीमा किसानों को फसल खराब होने पर पैसे देता है, अगर नुकसान मौसम, बीमारियों, महामारियों या हिंसा के कारण हुआ हो।
🎯 Exam Tip: फसल बीमा किसानों को अप्रत्याशित हानियों से बचाने में मदद करता है, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा बनी रहती है।
Question 12. व्यक्तिगत बीमा किसे कहते हैं?
Answer: किसी भी व्यक्ति के जीवन से जुड़े जोखिमों के बीमा को व्यक्तिगत बीमा कहते हैं।
In simple words: व्यक्तिगत बीमा वह बीमा है जो किसी व्यक्ति के जीवन से जुड़े खतरों के लिए करवाया जाता है।
🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत बीमा में जीवन बीमा और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा जैसे उत्पाद शामिल होते हैं।
Question 13. सम्पत्ति बीमा किसे कहते हैं?
Answer: सभी प्रकार की संपत्तियों, चाहे वे स्थायी हों या अस्थायी, सजीव हों या निर्जीव, के बीमा को 'संपत्ति बीमा' कहते हैं।
In simple words: संपत्ति बीमा किसी भी तरह की चीज़ों या संपत्तियों को नुकसान से बचाने के लिए होता है, जैसे घर, गाड़ी या सामान।
🎯 Exam Tip: संपत्ति बीमा में आग बीमा, समुद्री बीमा और चोरी बीमा जैसे कई प्रकार शामिल होते हैं।
RBSE Class 12 Business Studies Chapter 13 विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
Question 2. बीमा ने किस प्रकार पूँजी की आवश्यकता में योगदान दिया है?
Answer: बीमा उद्योग ने देश में पूँजी की उपलब्धता में बहुत योगदान दिया है। जीवन बीमा निगम और सामान्य बीमा निगम ने देश और विदेश के करोड़ों बीमाधारकों से प्रीमियम के रूप में करोड़ों रुपये इकट्ठा किए हैं। इसने देश के हर क्षेत्र में पूँजी उपलब्ध कराई है। 31 मार्च, 2002 तक बीमा उद्योगों ने देश की अर्थव्यवस्था को लगभग \( 1,50,000 \) करोड़ रुपये की पूँजी दी थी। इसमें से निजी, संयुक्त और सहकारी क्षेत्रों के उद्योगों को \( 20 \) हज़ार करोड़ रुपये से भी ज़्यादा पूँजी उपलब्ध कराई गई थी, बाकी पूँजी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और संस्थाओं को दी गई थी। इससे सार्वजनिक क्षेत्र की कई परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिली है। साथ ही निजी, संयुक्त और सहकारी क्षेत्र की कई कंपनियों को भी वित्त पाने में मदद मिली है।
In simple words: बीमा कंपनियों ने लोगों से प्रीमियम के तौर पर बहुत सारा पैसा इकट्ठा किया है। इस पैसे का उपयोग देश के उद्योगों और परियोजनाओं में निवेश किया गया, जिससे देश में पूँजी की ज़रूरत पूरी हुई।
🎯 Exam Tip: बीमा कंपनियों के निवेश से आर्थिक विकास को गति मिलती है, जिससे नए उद्योग स्थापित होते हैं और रोज़गार के अवसर पैदा होते हैं।
Question 3. बीमा ने आधारभूत सुविधाओं के विकास में योगदान दिया है। स्पष्ट कीजिए।
Answer: बीमा ने आधारभूत सुविधाओं के विकास में योगदान दिया है, जिससे देश में इन सुविधाओं के विकास में बहुत ज़्यादा मदद मिली है। औद्योगिक बस्तियाँ, परिवहन, बिजली, भंडारण, कृषि और उत्पादन जैसे उद्योगों और व्यापार के विकास में बीमा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जीवन बीमा निगम, सामान्य बीमा निगम और इसकी सहायक कंपनियों ने उपयोगी आधारभूत सुविधाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अकेले भारतीय जीवन बीमा निगम ने 31 मार्च, 1999 तक बिजली की संस्थाओं को \( 6,112 \) करोड़ रुपये, आवासीय योजनाओं के लिए \( 8,916 \) करोड़ रुपये, जल आपूर्ति योजनाओं के लिए \( 1,736 \) करोड़ रुपये, सड़क परिवहन निगमों के लिए \( 343 \) करोड़ रुपये और औद्योगिक संपदाओं के लिए \( 5 \) करोड़ रुपये का योगदान दिया था।
इस प्रकार यह साफ है कि बीमा संस्थाओं ने उद्योग और वाणिज्य विकास के लिए ज़रूरी आधारभूत साधनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बीमा विस्तृत व्यापार में शांति और खुशी देता है। विख्यात अर्थशास्त्री प्रो. सेलिगमेन ने भी लिखा है कि बीमा विस्तृत व्यापार में शांति और खुशी प्रदान करता है। केवल यही राष्ट्र के लिए लाभदायक व्यापार की किसी भी शाखा में साहस करने को उचित बनाता है और आसान शर्तों पर पैसा प्राप्त करने और बाज़ारों में सस्ता माल उपलब्ध कराने में मदद करता है।
वास्तव में, आज सभी प्रकार के व्यवसायों के सफल संचालन के लिए बीमा बहुत ज़रूरी है। बीमा व्यवसायी को जोखिम से सुरक्षा देता है, यह व्यवसाय की साख का आधार है, व्यावसायिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण व्यक्तियों को हानि से सुरक्षा देता है, व्यापारियों की कार्यक्षमता बढ़ाता है, लागतों में कमी लाता है, अनुसंधान और नए तरीकों को प्रोत्साहन देता है और औद्योगीकरण के लिए आधारभूत संचालन के विकास में सहायता करता है। बीमा ने कई बड़े व्यवसायों के विकास का रास्ता खोला है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि आधुनिक युग में बीमा के बिना व्यवसाय का संचालन करना असंभव है।
In simple words: बीमा ने सड़कों, बिजली, पानी, परिवहन और औद्योगिक क्षेत्रों जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए बहुत पैसा लगाया है। इससे व्यापार और उद्योग को बढ़ने में मदद मिली है, और देश का विकास हुआ है। बीमा व्यापार को सुरक्षित बनाता है, जिससे यह तेज़ी से बढ़ पाता है।
🎯 Exam Tip: आधारभूत सुविधाओं के विकास में बीमा के योगदान को समझाते समय, विशिष्ट क्षेत्रों (जैसे बिजली, परिवहन, कृषि) का उल्लेख करें और निवेश की रकम के उदाहरण दें।
Question 2. एक बीमा एजेण्ट के निषिद्ध कर्तव्य क्या हैं? लिखिए।
Answer: एक बीमा एजेण्ट ये काम नहीं कर सकता –
1. बीमाकर्ता या कंपनी के लिए किसी भी तरह का पैसा इकट्ठा करना।
2. बीमा के लिए कमीशन या छूट देना।
3. बीमाकर्ता की ओर से किसी जोखिम को स्वीकार करना।
4. कंपनी या बीमाकर्ता की अनुमति के बिना किसी भी तरह का विज्ञापन या पत्र-पत्रिका न तो छाप सकता है और न ही बाँट सकता है।
5. किसी दूसरे बीमा एजेण्ट के कामों में दखल देना या उसके ग्राहकों को बहकाना, फुसलाना आदि।
6. बीमाकर्ता से मिली वैध लाइसेंस की अवधि खत्म होने के बाद काम नहीं कर सकता।
7. किसी अन्य बीमाकर्ता के क्षेत्र में जाकर काम करना।
In simple words: बीमा एजेण्ट को कुछ खास काम करने की मनाही होती है, जैसे पैसा इकट्ठा करना, कमीशन देना, जोखिम स्वीकार करना या दूसरे एजेण्ट के काम में दखल देना।
🎯 Exam Tip: निषिद्ध कर्तव्यों को याद करते समय, उन कामों पर ध्यान दें जो नैतिक रूप से गलत हैं या बीमा कानूनों का उल्लंघन करते हैं।
Question 3. दोहरा बीमा तथा पुनर्बीमा में प्रमुख अन्तर बताइए।
Answer: दोहरा बीमा तथा पुनर्बीमा में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं –
1. **अर्थ** – दोहरा बीमा एक व्यक्ति द्वारा कई बीमापत्र खरीदकर करवाया जाता है, जबकि पुनर्बीमा में बीमाकर्ता अपनी जोखिम को कम करने के लिए किसी दूसरे बीमाकर्ता से अपने व्यवसाय का बीमा करवाता है।
2. **सुरक्षा** – दोहरा बीमा बीमाधारक को ज़्यादा सुरक्षा देता है, जबकि पुनर्बीमा बीमाकर्ता को अपने बड़े नुकसान से सुरक्षा देता है।
3. **उद्देश्य** – बीमाधारक खुद को ज़्यादा सुरक्षित करने के लिए दोहरा बीमा करवाता है, जबकि बीमाकर्ता खुद को सुरक्षित करने के लिए पुनर्बीमा करवाता है।
4. **जानकारी** – दोहरा बीमा में बीमाधारक को पूरी जानकारी होती है, जबकि पुनर्बीमा में बीमाधारक को जानकारी होना ज़रूरी नहीं है।
5. **नामांकन** – जीवन बीमा के मामले में, दोहरा बीमा के सभी बीमापत्रों का नामांकन किया जा सकता है, जबकि पुनर्बीमा के मामले में बीमापत्रों का नामांकन बीमाकर्ता नहीं कर सकता है।
In simple words: दोहरा बीमा तब होता है जब एक व्यक्ति कई कंपनियों से एक ही चीज़ का बीमा करवाता है, जबकि पुनर्बीमा तब होता है जब एक बीमा कंपनी खुद अपना जोखिम कम करने के लिए दूसरी कंपनी से बीमा करवाती है।
🎯 Exam Tip: दोहरा बीमा और पुनर्बीमा के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए, बीमाधारक और बीमाकर्ता के दृष्टिकोण से दोनों को समझें।
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