Get the most accurate RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 9 एन्जाइम here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 12 Biology. Our expert-created answers for Class 12 Biology are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 9 एन्जाइम RBSE Solutions for Class 12 Biology
For Class 12 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Biology solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 9 एन्जाइम solutions will improve your exam performance.
Class 12 Biology Chapter 9 एन्जाइम RBSE Solutions PDF
RBSE Solutions For Class 12 Biology Chapter 9 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Solutions For Class 12 Biology Chapter 9 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. एन्जाइम अकार्बनिक उत्प्रेरकों से भिन्न हैं –
(अ) उच्च विसरण दर में
(ब) उच्च ताप पर क्रियाशील
(स) प्रोटीन प्रकृति
(द) अभिक्रिया में स्वयं काम आते हैं।
Answer: (स) प्रोटीन प्रकृति
In simple words: एन्जाइम प्रोटीन से बने होते हैं, जबकि अकार्बनिक उत्प्रेरक ऐसा नहीं होते। यह एन्जाइम की एक खास पहचान है।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम की प्रोटीन प्रकृति उसे विशिष्ट बनाती है, जिससे वह शरीर की जैविक क्रियाओं को नियंत्रित कर पाता है।
Question 2. एन्जाइम का अप्रोटीन भाग कहलाता है -
(अ) जाइमेज
(ब) सहकारक
(स) ऐपोएन्जाइम
(द) होलोएन्जाइम
Answer: (ब) सहकारक
In simple words: एन्जाइम में एक प्रोटीन वाला हिस्सा होता है और एक बिना प्रोटीन वाला हिस्सा होता है। बिना प्रोटीन वाला हिस्सा सहकारक कहलाता है।
🎯 Exam Tip: सहकारक एन्जाइम की पूरी क्रियाशीलता के लिए महत्वपूर्ण होता है, इसके बिना एन्जाइम ठीक से काम नहीं कर पाता।
Question 3. कौन-सा कथन सही है –
(अ) सभी प्रोटीन एन्जाइम होते हैं।
(ब) सभी एन्जाइम प्रोटीन होते हैं।
(स) अधिकांश एन्जाइम प्रोटीन होते हैं।
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (स) अधिकांश एन्जाइम प्रोटीन होते हैं।
In simple words: ज़्यादातर एन्जाइम प्रोटीन के बने होते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी एन्जाइम होते हैं जो प्रोटीन नहीं होते, जैसे राइबोजाइम।
🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण अपवाद है कि सभी प्रोटीन एन्जाइम नहीं होते, और सभी एन्जाइम प्रोटीन नहीं होते।
Question 4. सर्वप्रथम किस एन्जाइम की खोज की गई थी?
(अ) जाइमेज
(ब) लाइपेज
(स) पेप्सिन
(द) आइसोमरेज
Answer: (अ) जाइमेज
In simple words: सबसे पहले खोजा गया एन्जाइम जाइमेज था। यह एन्जाइम यीस्ट में पाया जाता है और चीनी को अल्कोहल में बदलने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: जाइमेज की खोज बुचनर ने की थी, जिसने एन्जाइम विज्ञान की नींव रखी।
Question 5. एन्जाइम सक्रियता प्रभावित होती है
(अ) pH से
(ब) क्रियाधार सान्द्रता से
(स) तापमान से
(द) उपरोक्त सभी से
Answer: (द) उपरोक्त सभी से
In simple words: एन्जाइम की काम करने की क्षमता कई चीज़ों से बदल सकती है, जैसे आस-पास का pH स्तर, कितनी चीज़ पर उसे काम करना है (क्रियाधार), और तापमान।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम एक निश्चित pH और तापमान पर सबसे अच्छा काम करते हैं, जिसे इष्टतम स्थिति कहते हैं।
Question 6. अप्रतिस्पर्धी निरोधक वे पदार्थ हैं, जो एन्जाइम के -
(अ) सक्रिय स्थलों पर संलग्न हो जाते हैं।
(ब) सक्रिय स्थलों को नष्ट कर देते हैं।
(स) रचनात्मक संघटन में परिवर्तन कर देते हैं।
(द) गुणों में कोई परिवर्तन नहीं करते हैं।
Answer: (स) रचनात्मक संघटन में परिवर्तन कर देते हैं।
In simple words: अप्रतिस्पर्धी निरोधक वे पदार्थ होते हैं जो एन्जाइम के सक्रिय स्थल को नहीं बदलते, बल्कि उसकी पूरी बनावट को बदल देते हैं। इससे एन्जाइम ठीक से काम नहीं कर पाता।
🎯 Exam Tip: प्रतिस्पर्धी निरोधक सक्रिय स्थल पर जुड़ते हैं, जबकि अप्रतिस्पर्धी निरोधक एन्जाइम के किसी अन्य भाग पर जुड़कर उसकी आकृति बदलते हैं।
Question 7. किस एन्जाइम का सबसे पहले क्रिस्टलीकरण किया गया था –
(अ) यूरिएज
(ब) पेप्सिन
(स) एमाइलेज
(द) लाइपेज
Answer: (अ) यूरिएज
In simple words: सबसे पहले यूरिएज एन्जाइम को क्रिस्टल के रूप में अलग किया गया था। यह काम जेम्स बी. सुमनेर ने किया था।
🎯 Exam Tip: क्रिस्टलीकरण एन्जाइम के शुद्धिकरण और अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था।
RBSE Solutions For Class 12 Biology Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. ताला-चाबी क्रियाविधि परिकल्पना किसने एवं कब प्रस्तावित की थी?
Answer: ताला-चाबी क्रियाविधि परिकल्पना को एमिल फिशर ने 1894 में प्रस्तावित किया था। इस मॉडल के अनुसार, एन्जाइम का सक्रिय स्थल क्रियाधार के आकार के लिए विशिष्ट होता है, जैसे एक ताला अपनी विशेष चाबी के लिए होता है।
In simple words: एमिल फिशर ने 1894 में बताया कि एन्जाइम और क्रियाधार एक ताले और चाबी की तरह फिट होते हैं।
🎯 Exam Tip: यह परिकल्पना एन्जाइमों की विशिष्टता को समझाने का पहला महत्वपूर्ण प्रयास था।
Question 2. एन्जाइम का प्रोटीन एवं अप्रोटीन भाग क्या कहलाता है?
Answer: एन्जाइम का प्रोटीन वाला भाग ऐपोएन्जाइम (Apoenzyme) कहलाता है, जबकि इसका अप्रोटीन वाला भाग सहकारक (Cofactor) कहलाता है। ये दोनों मिलकर एक पूर्ण और सक्रिय एन्जाइम बनाते हैं, जिसे होलोएन्जाइम कहते हैं।
In simple words: एन्जाइम के प्रोटीन हिस्से को ऐपोएन्जाइम कहते हैं और बिना प्रोटीन वाले हिस्से को सहकारक कहते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐपोएन्जाइम और सहकारक मिलकर ही एन्जाइम को क्रियाशील बनाते हैं।
Question 3. एक प्रोटीन रहित एन्जाइम का नाम बताइए।
Answer: राइबोजाइम (Ribozyme) एक प्रोटीन रहित एन्जाइम है। यह RNA से बना होता है और RNA समबंधन (splicing) जैसी जैविक क्रियाओं में उत्प्रेरक का कार्य करता है।
In simple words: राइबोजाइम एक एन्जाइम है जो प्रोटीन का नहीं, बल्कि RNA का बना होता है।
🎯 Exam Tip: राइबोजाइम इस तथ्य का एक महत्वपूर्ण अपवाद है कि अधिकांश एन्जाइम प्रोटीन होते हैं।
Question 4. प्रोस्थेटिक समूह की परिभाषा दीजिए।
Answer: प्रोस्थेटिक समूह सहकारक का वह भाग होता है जो प्रोटीन के अणु (एपोएन्जाइम) से बहुत मजबूती से और स्थायी रूप से जुड़ा रहता है। यह एन्जाइम की क्रियाशीलता के लिए आवश्यक होता है।
In simple words: जब एन्जाइम का अप्रोटीन हिस्सा उसके प्रोटीन हिस्से से बहुत पक्का जुड़ा हो, तो उसे प्रोस्थेटिक समूह कहते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोस्थेटिक समूह अक्सर धातुओं या जटिल कार्बनिक अणुओं से बने होते हैं।
RBSE Solutions For Class 12 Biology Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. को-एन्जाइम किसे कहते हैं? एक उदाहरण दीजिए।
Answer: को-एन्जाइम ऐसे छोटे कार्बनिक पदार्थ होते हैं जो ऐपोएन्जाइम (प्रोटीन भाग) से शिथिल या अस्थायी रूप से जुड़े होते हैं। ये एन्जाइम की क्रियाशीलता के लिए जरूरी होते हैं, क्योंकि ये क्रियाधार से समूह को स्थानांतरित करने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, NAD (निकोटिनामाइड एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड) और NADP (निकोटिनामाइड एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड फॉस्फेट) महत्वपूर्ण को-एन्जाइम हैं जो ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन वाहक के रूप में कार्य करते हैं।
In simple words: को-एन्जाइम छोटे कार्बनिक अणु होते हैं जो एन्जाइम से जुड़कर उसे काम करने में मदद करते हैं। NAD इसका एक अच्छा उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: को-एन्जाइम और प्रोस्थेटिक समूह दोनों ही सहकारक हैं, लेकिन को-एन्जाइम ऐपोएन्जाइम से कम मजबूती से जुड़े होते हैं।
Question 2. प्रतिस्पर्धी संदमन से आप क्या समझते हैं? इसे कैसे रोका जा सकता है?
Answer: प्रतिस्पर्धी संदमन एक ऐसी प्रक्रिया है जहाँ एक पदार्थ (संदमक) एन्जाइम के सक्रिय स्थल पर क्रियाधार के साथ प्रतिस्पर्धा करता है। इस संदामक की आण्विक संरचना क्रियाधार के समान होती है, जिससे यह सक्रिय स्थल पर जुड़ जाता है और क्रियाधार को जुड़ने से रोकता है। परिणामस्वरूप, एन्जाइम की क्रिया धीमी हो जाती है या रुक जाती है। उदाहरण के लिए, मैलोनिक अम्ल, सक्सीनिक अम्ल का प्रतिस्पर्धी निरोधक है। प्रतिस्पर्धी संदमन को रोकने के लिए क्रियाधार की सांद्रता बढ़ाई जा सकती है। ऐसा करने से क्रियाधार के सक्रिय स्थलों पर संदमक से अधिक जुड़ने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे एन्जाइम की क्रियाशीलता फिर से बढ़ जाती है।
In simple words: प्रतिस्पर्धी संदमन में एक गलत चीज़ (संदमक) एन्जाइम के काम करने की जगह (सक्रिय स्थल) पर जुड़ जाती है, जिससे असली चीज़ (क्रियाधार) नहीं जुड़ पाती। इसे रोकने के लिए असली चीज़ की मात्रा बढ़ा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के संदमन का उपयोग कुछ जीवाणु जनित रोगों के इलाज में भी किया जाता है, जहाँ जीवाणु की वृद्धि के लिए आवश्यक एन्जाइम को रोका जाता है।
Question 3. एन्जाइम के नामकरण विधि को संक्षेप में समझाइए।
Answer: एन्जाइमों के नामकरण की मुख्य रूप से दो पद्धतियाँ हैं: क्रियाधार के आधार पर और रासायनिक क्रिया के आधार पर।
1. **क्रियाधार के आधार पर:** इस पद्धति में, एन्जाइम का नामकरण उनके क्रियाधार के नाम के अंत में 'एस' (ase) प्रत्यय जोड़कर किया जाता है। उदाहरण के लिए, सुक्रोज पर कार्य करने वाला एन्जाइम 'सुक्रोजेस' कहलाता है, माल्ट पर 'माल्टेस', और लिपिड्स पर 'लाइपेस' कहलाता है।
2. **रासायनिक क्रिया के आधार पर:** कुछ एन्जाइमों का नामकरण उनके द्वारा उत्प्रेरित की जाने वाली रासायनिक क्रिया के प्रकार पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए, डाइपेप्टाइड पर कार्य करने वाले एन्जाइमों को उनकी क्रिया के आधार पर डाइपेप्टिडेस (Dipeptidase), डाइएमीनेस (Diaminase), और डीकार्बोक्सीलेस (Decarboxylase) जैसे नाम दिए जाते हैं।
In simple words: एन्जाइमों का नाम उनके काम करने के तरीके या जिस चीज़ पर वे काम करते हैं, उसके आधार पर रखा जाता है, जैसे 'सुक्रोजेस' सुक्रोज पर काम करता है या 'डीकार्बोक्सीलेस' कार्बन डाइऑक्साइड निकालने का काम करता है।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम के नामकरण की अंतर्राष्ट्रीय पद्धति (IUB) में एन्जाइमों को छह मुख्य वर्गों में वर्गीकृत किया गया है, जो उनकी क्रिया के प्रकार पर आधारित हैं।
Question 4. एन्जाइम के द्वारा अभिक्रिया की गति कैसे बढ़ायी जाती है?
Answer: एन्जाइम रासायनिक अभिक्रियाओं की सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को कम करके अभिक्रिया की गति को बढ़ाते हैं। सक्रियण ऊर्जा वह न्यूनतम ऊर्जा है जो अभिक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक होती है। एन्जाइम एक वैकल्पिक अभिक्रिया पथ प्रदान करते हैं, जिसमें सक्रियण ऊर्जा कम होती है, जिससे अधिक अणु आसानी से उत्पाद में बदल पाते हैं और अभिक्रिया की गति तेज हो जाती है। एन्जाइम खुद अभिक्रिया में खर्च नहीं होते हैं।
In simple words: एन्जाइम अभिक्रिया शुरू करने के लिए ज़रूरी ऊर्जा को कम कर देते हैं, जिससे रिएक्शन तेज़ी से होता है।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम अभिक्रिया की दिशा या अंतिम संतुलन को नहीं बदलते, वे केवल उसकी गति को प्रभावित करते हैं।
RBSE Solutions For Class 12 Biology Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. एन्जाइम की संरचना का वर्णन कीजिए तथा इनकी प्रमुख विशेषताओं को समझाइए।
Answer: **एन्जाइम की संरचना:** अधिकांश एन्जाइम प्रोटीन होते हैं, लेकिन सभी प्रोटीन एन्जाइम नहीं होते। राइबोजाइम जैसे कुछ एन्जाइम RNA के बने होते हैं। एक पूर्ण और सक्रिय एन्जाइम को होलोएन्जाइम (Holoenzyme) कहते हैं, जिसके दो मुख्य भाग होते हैं:
1. **एपोएन्जाइम (Apoenzyme):** यह एन्जाइम का प्रोटीन वाला भाग होता है।
2. **सहकारक (Cofactor):** यह एन्जाइम का अप्रोटीन भाग होता है जो एपोएन्जाइम के साथ जुड़कर उसे सक्रिय बनाता है। सहकारक तीन प्रकार के हो सकते हैं:
* **प्रोस्थेटिक समूह (Prosthetic group):** यह सहकारक का वह भाग है जो ऐपोएन्जाइम से स्थायी रूप से जुड़ा रहता है।
* **को-एन्जाइम (Co-enzymes):** यह अप्रोटीन भाग है जो ऐपोएन्जाइम से शिथिल रूप से जुड़ा होता है और आसानी से अलग किया जा सकता है, जैसे NAD, NADP, FAD।
* **धातु आयन या सक्रियक (Activator or metal ion):** जब अप्रोटीन भाग अकार्बनिक प्रकृति का कोई धातु आयन होता है, तो उसे सक्रियक कहते हैं। ये एन्जाइमों के साथ सहकारक के रूप में कार्य करते हैं, जैसे कैटालेज एन्जाइम के लिए \( \text{Fe}^{2+} \) एक सहकारक है।
**एन्जाइम की प्रमुख विशेषताएँ:**
1. **उत्प्रेरक का कार्य:** एन्जाइम जीवों में रासायनिक अभिक्रियाओं की दर को बहुत तेज करते हैं, लेकिन खुद अभिक्रिया में खर्च नहीं होते।
2. **अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में आवश्यकता:** अभिक्रिया को उत्प्रेरित करने के लिए एन्जाइम की बहुत कम मात्रा की आवश्यकता होती है।
3. **ताप के प्रति संवेदनशीलता:** एन्जाइम तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। वे 25-40°C के बीच इष्टतम तापमान पर सबसे अच्छा काम करते हैं, उच्च तापमान पर वे निष्क्रिय हो सकते हैं।
4. **pH के प्रति संवेदनशीलता:** एन्जाइम एक विशिष्ट pH रेंज में सक्रिय होते हैं। प्रत्येक एन्जाइम का एक इष्टतम pH मान होता है, जिस पर वह सबसे अधिक क्रियाशील होता है।
5. **विशिष्टता:** एन्जाइम बहुत विशिष्ट होते हैं; वे आमतौर पर केवल एक प्रकार की अभिक्रिया या एक प्रकार के क्रियाधार पर ही कार्य करते हैं। यह उन्हें जीवित प्रणालियों में महत्वपूर्ण बनाता है।
6. **घुलनशीलता:** अधिकांश एन्जाइम जल और नमक के घोल में घुलनशील होते हैं और कोशिकाद्रव्य में कोलॉइडी विलयन बनाते हैं।
In simple words: एन्जाइम प्रोटीन से बने होते हैं (कुछ अपवादों को छोड़कर)। उनके दो मुख्य हिस्से होते हैं: प्रोटीन हिस्सा (एपोएन्जाइम) और बिना प्रोटीन वाला हिस्सा (सहकारक)। सहकारक एन्जाइम को काम करने में मदद करते हैं। एन्जाइम बहुत थोड़ी मात्रा में काम करते हैं, तापमान और pH के प्रति संवेदनशील होते हैं, और बहुत खास काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम की विशिष्टता और इसकी क्रिया को प्रभावित करने वाले कारकों को समझना जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. एन्जाइम के वर्गीकरण को विस्तारपूर्वक समझाइए।
Answer: अंतर्राष्ट्रीय जीव रसायन संघ (IUB) ने एन्जाइमों को उनकी उत्प्रेरित की जाने वाली अभिक्रियाओं के आधार पर छह मुख्य वर्गों में वर्गीकृत किया है। प्रत्येक एन्जाइम को एक विशिष्ट एन्जाइम कोड (EC) संख्या दी गई है। ये छह वर्ग निम्नलिखित हैं:
1. **ऑक्सीडोरिडक्टेजेस (Oxidoreductases):** ये एन्जाइम ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं। ये क्रियाधार से इलेक्ट्रॉन या हाइड्रोजन हटाकर या जोड़कर उनका ऑक्सीकरण या अपचयन करते हैं। उदाहरण: साइटोक्रोम ऑक्सीडेज, अल्कोहल डिहाइड्रोजिनेज।
2. **ट्रांसफेरेजेस (Transferases):** ये एन्जाइम एक क्रियाधार से दूसरे क्रियाधार पर कार्यात्मक समूहों (जैसे फॉस्फेट, CH3-, NH2) का स्थानांतरण करते हैं। उदाहरण: फॉस्फोट्रांसफेरेस जो फॉस्फेट समूह को एक अणु से दूसरे पर स्थानांतरित करता है।
3. **हाइड्रोलाइजेस (Hydrolases):** ये एन्जाइम जल के उपयोग से क्रियाधार का जल अपघटन (तोड़ना) करते हैं। उदाहरण: एस्टरेज, कार्बोहाइड्रेज, एमाइलेज, न्यूक्लिएज।
4. **लायेजेस (Lyases):** ये एन्जाइम जल के बिना ही रासायनिक समूहों को जोड़ते या हटाते हैं। उदाहरण: एल्डोलेज, डीकार्बोक्सीलेस।
5. **आइसोमरेजेस (Isomerases):** ये एन्जाइम एक ही अणु के भीतर संरचनात्मक या ज्यामितीय परिवर्तनों को उत्प्रेरित करते हैं, जिससे एक आइसोमर से दूसरे में रूपांतरण होता है।
6. **लाइगेजेस (Ligases):** ये एन्जाइम दो अणुओं को एक साथ जोड़ने का काम करते हैं, अक्सर ATP के जल अपघटन से ऊर्जा का उपयोग करके। उदाहरण: DNA लाइगेज।
In simple words: एन्जाइमों को उनके काम के आधार पर छह बड़े ग्रुपों में बांटा गया है। कुछ ऑक्सीकरण-अपचयन करते हैं, कुछ समूह बदलते हैं, कुछ पानी से तोड़ते हैं, कुछ बिना पानी के समूह जोड़ते या हटाते हैं, कुछ अणु की शक्ल बदलते हैं, और कुछ दो अणुओं को जोड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: इन छह वर्गों को याद रखना और प्रत्येक वर्ग के कम से कम एक उदाहरण को समझना एन्जाइम वर्गीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 4. एन्जाइम संदमन किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है एवं इसके प्रभावों को कैसे रोका जा सकता है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: **एन्जाइम संदमन (Enzyme Inhibition):** एन्जाइम संदमन का अर्थ है जब कोई पदार्थ (संदमक) एन्जाइम की उत्प्रेरक क्षमता को कम कर देता है या पूरी तरह से रोक देता है। यह प्रक्रिया एन्जाइम की कार्यप्रणाली के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और शरीर में रासायनिक अभिक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करती है। एन्जाइम संदमन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
1. **प्रतिस्पर्धी निरोधक या संदमन (Competitive Inhibition):**
* **क्या होता है:** इसमें संदमक की आण्विक संरचना क्रियाधार के समान होती है। यह संदमक एन्जाइम के सक्रिय स्थल पर जुड़ने के लिए क्रियाधार के साथ प्रतिस्पर्धा करता है। यदि संदमक सक्रिय स्थल पर जुड़ जाता है, तो क्रियाधार वहां नहीं जुड़ पाता और एन्जाइम की क्रिया धीमी हो जाती है।
* **उदाहरण:** मैलोनिक अम्ल, सक्सीनिक अम्ल का प्रतिस्पर्धी निरोधक है।
* **कैसे रोका जा सकता है:** इस प्रकार के संदमन को क्रियाधार की सांद्रता में वृद्धि करके रोका जा सकता है। अधिक क्रियाधार होने पर, उसके सक्रिय स्थल पर संदमक की तुलना में क्रियाधार के जुड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
2. **अप्रतिस्पर्धी निरोधक या संदमन (Non-competitive Inhibition):**
* **क्या होता है:** इस प्रकार के संदमन में संदमक की आण्विक संरचना क्रियाधार के समान नहीं होती। यह संदमक एन्जाइम के सक्रिय स्थल से नहीं जुड़ता, बल्कि किसी दूसरे स्थान पर जुड़ जाता है। इससे एन्जाइम के सक्रिय स्थल की आकृति में बदलाव आ जाता है, जिससे क्रियाधार सही ढंग से सक्रिय स्थल से जुड़ नहीं पाता। इससे एन्जाइम की क्रियाशीलता कम हो जाती है।
* **उदाहरण:** सायनाइड (CN) श्वसन क्रिया में आवश्यक साइटोक्रोम ऑक्सीडेस एन्जाइम की क्रियाशीलता को रोकता है। अप्रतिस्पर्धी निरोधक को कोशा विष (Cell poison) भी कहते हैं।
* **कैसे रोका जा सकता है:** प्रतिस्पर्धी संदमन की तरह इसे क्रियाधार की सांद्रता बढ़ाकर आसानी से नहीं रोका जा सकता, क्योंकि संदमक सक्रिय स्थल पर सीधा प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहा होता है।
एन्जाइम संदमन शरीर की जैविक प्रक्रियाओं को विनियमित करने और दवाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: एन्जाइम संदमन का मतलब है कि कोई चीज़ एन्जाइम के काम को धीमा कर दे। यह दो तरह का होता है: 'प्रतिस्पर्धी', जहाँ संदमक असली चीज़ की जगह ले लेता है, और 'अप्रतिस्पर्धी', जहाँ संदमक एन्जाइम की बनावट ही बदल देता है। प्रतिस्पर्धी संदमन को असली चीज़ की मात्रा बढ़ाकर रोक सकते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिस्पर्धी और अप्रतिस्पर्धी संदमन के बीच के अंतर और उनके प्रभावों को याद रखना एन्जाइम क्रिया विज्ञान में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।
RBSE Solutions For Class 12 Biology Chapter 9 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Solutions For Class 12 Biology Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. एन्जाइम शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?
Answer: एन्जाइम शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम कुहने (Kuhne) ने 1878 में किया था। उन्होंने यह शब्द उन पदार्थों के लिए इस्तेमाल किया जो कोशिकाओं के बाहर रासायनिक अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं।
In simple words: 'एन्जाइम' शब्द सबसे पहले कुहने ने 1878 में उपयोग किया था।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम के अध्ययन को एन्जाइमोलॉजी कहा जाता है, जो जीव रसायन का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
Question 2. यीस्ट से जाइमेस नामक एन्जाइम को पृथक किसने किया?
Answer: यीस्ट से जाइमेस नामक एन्जाइम को सबसे पहले बुकनर (Hans Buchner) ने 1897 में पृथक किया था। उन्होंने दिखाया कि जाइमेस कोशिका-मुक्त अर्क में भी शर्करा का किण्वन कर सकता है, जिससे यह साबित हुआ कि एन्जाइम जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यक हैं।
In simple words: बुकनर ने 1897 में यीस्ट से जाइमेस एन्जाइम को अलग किया।
🎯 Exam Tip: बुचनर के काम से यह समझ विकसित हुई कि एन्जाइम कोशिकाओं के बाहर भी काम कर सकते हैं, जो पहले नहीं माना जाता था।
Question 3. एन्जाइम उत्प्रेरण की क्रियाविधि के लिए एमिल फिशर ने कौन-सी परिकल्पना दी?
Answer: एन्जाइम उत्प्रेरण की क्रियाविधि के लिए एमिल फिशर ने "ताला-चाबी क्रियाविधि परिकल्पना" दी थी। इस परिकल्पना के अनुसार, एन्जाइम का सक्रिय स्थल क्रियाधार के आकार के लिए विशिष्ट होता है, ठीक उसी तरह जैसे एक ताला एक खास चाबी के लिए होता है।
In simple words: एमिल फिशर ने 'ताला-चाबी' वाला विचार दिया था, जिसमें एन्जाइम और क्रियाधार एक-दूसरे में फिट होते हैं।
🎯 Exam Tip: यह परिकल्पना एन्जाइमों की उच्च विशिष्टता को समझने में सहायक है।
Question 5. एन्जाइमों के लिए pH परास जिस पर वे सक्रिय रहते हैं? कितना होता है?
Answer: अधिकांश एन्जाइमों के लिए pH परास, जिस पर वे सक्रिय रहते हैं, आमतौर पर 5.0 से 7.5 pH होता है। इस रेंज में एन्जाइम अपनी इष्टतम क्रियाशीलता दिखाते हैं। कुछ एन्जाइम इसके अपवाद हो सकते हैं, जैसे आमाशय में पाया जाने वाला पेप्सिन जो अम्लीय pH (लगभग 2.0) पर सक्रिय होता है।
In simple words: ज़्यादातर एन्जाइम 5.0 से 7.5 pH के बीच सबसे अच्छे से काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: pH मान में अत्यधिक बदलाव एन्जाइम की प्रोटीन संरचना को विकृत कर सकता है, जिससे वह निष्क्रिय हो जाता है।
Question 6. सक्रियण ऊर्जा से आप क्या समझते हैं?
Answer: सक्रियण ऊर्जा वह न्यूनतम ऊर्जा होती है जो किसी रासायनिक अभिक्रिया को आरंभ करने और क्रियाधार अणुओं को उत्पाद में बदलने के लिए आवश्यक होती है। यह एक ऊर्जा अवरोधक की तरह काम करती है जिसे अभिक्रिया को आगे बढ़ने के लिए पार करना होता है। एन्जाइम इस सक्रियण ऊर्जा को कम करके अभिक्रिया की गति को बढ़ाते हैं।
In simple words: सक्रियण ऊर्जा वह कम से कम ऊर्जा है जो किसी भी रिएक्शन को शुरू करने के लिए चाहिए होती है।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम सक्रियण ऊर्जा को कम करके जैविक अभिक्रियाओं को शरीर के सामान्य तापमान पर संभव बनाते हैं।
Question 7. एन्जाइम क्रियाधार संकुल से आप क्या समझते हैं?
Answer: एन्जाइम क्रियाधार संकुल (Enzyme-Substrate Complex) एक अस्थायी यौगिक है जो तब बनता है जब एन्जाइम (E) क्रियाधार (S) से जुड़ता है। यह संकुल एन्जाइम की उत्प्रेरक क्रिया का एक मध्यवर्ती चरण होता है, जहाँ क्रियाधार एन्जाइम के सक्रिय स्थल पर जुड़ता है और फिर उत्पाद में परिवर्तित हो जाता है। इसके बाद उत्पाद एन्जाइम से अलग हो जाते हैं।
In simple words: जब एन्जाइम और क्रियाधार आपस में मिलते हैं, तो एक अस्थायी जुड़ाव बनता है जिसे एन्जाइम क्रियाधार संकुल कहते हैं।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम क्रियाधार संकुल का बनना एन्जाइम की विशिष्टता और उसके उत्प्रेरक कार्य का आधार है।
Question 8. हाइड्रोलाइजेज के दो उदाहरण दीजिए।
Answer: हाइड्रोलाइजेज (Hydrolases) वे एन्जाइम होते हैं जो जल के उपयोग से बड़े अणुओं को छोटे अणुओं में तोड़ते हैं (जल अपघटन करते हैं)। इसके दो उदाहरण हैं:
1. **एस्टरेज (Esterase):** यह एस्टर बंधों को तोड़ता है।
2. **कार्बोहाइड्रेज (Carbohydrase):** यह कार्बोहाइड्रेट्स को सरल शर्कराओं में तोड़ता है, जैसे एमाइलेज स्टार्च को तोड़ता है।
In simple words: हाइड्रोलाइजेज पानी की मदद से बड़े अणुओं को तोड़ते हैं। एस्टरेज और कार्बोहाइड्रेज इसके उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: पाचन तंत्र में कई एन्जाइम हाइड्रोलाइजेज होते हैं जो भोजन के अणुओं को तोड़ने में मदद करते हैं।
Question 9. होलोएन्जाइम के कितने भाग होते हैं?
Answer: होलोएन्जाइम के दो भाग होते हैं, जो मिलकर एक पूर्ण और सक्रिय एन्जाइम बनाते हैं:
1. **एपोएन्जाइम (Apoenzyme):** यह एन्जाइम का प्रोटीन वाला भाग है।
2. **सहकारक (Cofactor):** यह एन्जाइम का अप्रोटीन वाला भाग है जो एपोएन्जाइम की क्रियाशीलता के लिए आवश्यक होता है। सहकारक में प्रोस्थेटिक समूह, को-एन्जाइम और धातु आयन शामिल हो सकते हैं।
In simple words: होलोएन्जाइम के दो हिस्से होते हैं: प्रोटीन वाला (एपोएन्जाइम) और बिना प्रोटीन वाला (सहकारक)।
🎯 Exam Tip: सहकारक अक्सर ऐपोएन्जाइम के सक्रिय स्थल पर जुड़ते हैं, जिससे वह क्रियाधार से जुड़ने के लिए सही आकार ले पाता है।
RBSE Solutions For Class 12 Biology Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 2. लाएज (Lyases) पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
Answer: लाएज (Lyases) वे एन्जाइम होते हैं जो जल के अणु का उपयोग किए बिना ही क्रियाधार से विभिन्न रासायनिक समूहों को जोड़ते या हटाते हैं। ये अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं जिनमें क्रियाधार से एक समूह को हटाकर दोहरे बंध का निर्माण होता है, या दोहरे बंध में एक समूह को जोड़कर उसे तोड़ते हैं। उदाहरण के लिए, कार्बोक्सिलेस (Carboxylase) एन्जाइम कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)) को जोड़ते या हटाते हैं, जैसे राइब्यूलोस बाइफॉस्फेट कार्बोक्सिलेस (RuBisCO) प्रकाश संश्लेषण में एक महत्वपूर्ण लाएज है। एल्डोलेज भी एक लायाज एन्जाइम है जो फ्रुक्टोज-1,6-बिसफॉस्फेट को दो तीन-कार्बन अणुओं में तोड़ता है।
In simple words: लाएज ऐसे एन्जाइम हैं जो पानी का इस्तेमाल किए बिना अणुओं से छोटे समूह हटाते या जोड़ते हैं। कार्बोक्सिलेस और एल्डोलेज इसके उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: लाएज एन्जाइम हमेशा दोहरे बंधों के बनने या टूटने से जुड़े होते हैं।
Question 3. कोएन्जाइम को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: को-एन्जाइम (Co-enzymes) वे छोटे, कार्बनिक, गैर-प्रोटीन अणु होते हैं जो कुछ एन्जाइमों की क्रियाशीलता के लिए आवश्यक होते हैं। ये ऐपोएन्जाइम (प्रोटीन भाग) से अस्थायी रूप से जुड़े होते हैं और अभिक्रिया के दौरान क्रियाधार से कुछ समूहों या इलेक्ट्रॉनों को स्थानांतरित करने में मदद करते हैं। को-एन्जाइम अक्सर विटामिन से प्राप्त होते हैं। उदाहरण के लिए, NAD (निकोटिनामाइड एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड), NADP (निकोटिनामाइड एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड फॉस्फेट) और FAD (फ्लेविन एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड) महत्वपूर्ण को-एन्जाइम हैं जो ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन या हाइड्रोजन वाहक के रूप में कार्य करते हैं। विटामिन B कॉम्प्लेक्स के कई घटक को-एन्जाइम के रूप में कार्य करते हैं।
In simple words: को-एन्जाइम छोटे कार्बनिक अणु होते हैं जो एन्जाइम को काम करने में मदद करने के लिए अस्थायी रूप से जुड़ते हैं। NAD और NADP इसके अच्छे उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: को-एन्जाइम को "सहायक अणु" के रूप में सोचें जो एन्जाइम को अपना काम ठीक से करने में सक्षम बनाते हैं।
Question 4. अनुकूलन ताप या इष्टतम ताप से आप क्या समझते हैं?
Answer: अनुकूलन ताप या इष्टतम ताप वह विशिष्ट तापमान होता है जिस पर कोई एन्जाइम अपनी अधिकतम क्रियाशीलता प्रदर्शित करता है। इस तापमान पर एन्जाइम-क्रियाधार संकुल का निर्माण सबसे तेज होता है और अभिक्रिया की दर सबसे अधिक होती है। अधिकांश एन्जाइमों के लिए यह अनुकूलन ताप परास आमतौर पर 25°C से 35°C के बीच होता है। इस परास से कम या अधिक तापमान पर एन्जाइम की क्रियाशीलता घट जाती है, क्योंकि अधिक तापमान पर एन्जाइम की प्रोटीन संरचना विकृत हो सकती है।
In simple words: अनुकूलन ताप वह सबसे अच्छा तापमान है जिस पर कोई एन्जाइम सबसे तेज़ काम करता है, आमतौर पर यह 25°C से 35°C के बीच होता है।
🎯 Exam Tip: अनुकूलन ताप के ऊपर एन्जाइम की प्रोटीन संरचना स्थायी रूप से बदल जाती है, जिसे विकृतीकरण कहते हैं, और एन्जाइम अपनी क्रियाशीलता खो देता है।
Question 5. प्रेरित आसंजन सिद्धान्त को समझाइए।
Answer: प्रेरित आसंजन सिद्धान्त (Induced Fit Theory) को 1966 में कोशलैण्ड (Koshland) द्वारा प्रस्तावित किया गया था। यह सिद्धान्त 'ताला-चाबी' मॉडल से थोड़ा अलग है। इस सिद्धान्त के अनुसार, एन्जाइम का सक्रिय स्थल कठोर और स्थिर नहीं होता, बल्कि लचीला होता है। जब क्रियाधार एन्जाइम के पास आता है और सक्रिय स्थल से जुड़ने लगता है, तो सक्रिय स्थल अपनी आकृति को क्रियाधार के अनुरूप बदलने के लिए प्रेरित होता है। यह एक 'गले लगाने' जैसा होता है, जहाँ एन्जाइम क्रियाधार को कसकर पकड़ने के लिए अपनी संरचना को थोड़ा समायोजित करता है। इस समायोजन से एन्जाइम-क्रियाधार संकुल अधिक स्थिर बनता है और अभिक्रिया की दक्षता बढ़ जाती है।
In simple words: कोशलैण्ड का प्रेरित आसंजन सिद्धान्त कहता है कि एन्जाइम का काम करने का स्थान (सक्रिय स्थल) थोड़ा लचीला होता है। जब कोई चीज़ (क्रियाधार) आती है, तो एन्जाइम का स्थान खुद को उसके हिसाब से बदल लेता है, ताकि वे ठीक से फिट हो सकें।
🎯 Exam Tip: प्रेरित आसंजन सिद्धान्त यह बताता है कि एन्जाइम सक्रिय स्थल क्रियाधार के साथ केवल निष्क्रिय रूप से फिट नहीं होता, बल्कि सक्रिय रूप से अभिक्रिया में भाग लेता है।
RBSE Solutions For Class 12 Biology Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. एन्जाइम किसे कहते हैं? एन्जाइम क्रिया को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
Answer: **एन्जाइम:** एन्जाइम जैविक उत्प्रेरक होते हैं जो जीवित कोशिकाओं में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं की गति को बढ़ाते हैं। वे प्रोटीन प्रकृति के होते हैं (कुछ अपवादों को छोड़कर) और अभिक्रिया में खुद खर्च नहीं होते। एन्जाइम अत्यंत विशिष्ट होते हैं, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक एन्जाइम आमतौर पर एक या कुछ विशिष्ट प्रकार के क्रियाधारों पर ही कार्य करता है।
**एन्जाइम की उत्प्रेरक क्रियाशीलता को प्रभावित करने वाले कारक:** एन्जाइम की कार्यप्रणाली कई बाहरी और आंतरिक कारकों से प्रभावित होती है। प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:
1. **तापमान (Temperature):** एन्जाइम प्रोटीन से बने होते हैं, इसलिए वे तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं।
* **अनुकूलन ताप:** प्रत्येक एन्जाइम का एक इष्टतम तापमान होता है (आमतौर पर 25°C से 35°C), जिस पर वह सबसे अधिक सक्रिय होता है। इस सीमा के भीतर, तापमान में 10°C की वृद्धि से अभिक्रिया की दर लगभग दोगुनी हो जाती है।
* **उच्च तापमान:** 35°C से अधिक तापमान पर, एन्जाइम की त्रि-आयामी (3D) संरचना विकृत होने लगती है (जिसे विकृतीकरण कहते हैं), जिससे सक्रिय स्थल बदल जाता है और एन्जाइम अपनी क्रियाशीलता खो देता है। बहुत उच्च तापमान पर एन्जाइम पूरी तरह निष्क्रिय हो जाते हैं।
2. **pH मान (pH value):** pH एन्जाइम की आयनिक स्थिति और सक्रिय स्थल की संरचना को प्रभावित करता है।
* **इष्टतम pH:** प्रत्येक एन्जाइम एक विशिष्ट pH मान पर सबसे अधिक क्रियाशील होता है (इष्टतम pH)। अधिकांश एन्जाइम 5.0 से 7.5 pH के बीच दक्षतापूर्वक कार्य करते हैं।
* **pH में परिवर्तन:** इष्टतम pH से कम या अधिक pH मान पर, एन्जाइम की संरचना में बदलाव आता है और उसकी क्रियाशीलता कम हो जाती है या वह पूरी तरह से निष्क्रिय हो जाता है। उदाहरण के लिए, पेप्सिन अम्लीय माध्यम में और ट्रिप्सिन क्षारीय माध्यम में सबसे अच्छा काम करता है।
3. **एन्जाइम की सांद्रता का प्रभाव (Effect of enzyme concentration):** यदि क्रियाधार की सांद्रता और अन्य स्थितियाँ स्थिर हों, तो अभिक्रिया की दर एन्जाइम की सांद्रता के सीधे आनुपातिक होती है। एन्जाइम की सांद्रता बढ़ने पर, अधिक सक्रिय स्थल उपलब्ध होते हैं, जिससे अधिक क्रियाधार अणुओं को परिवर्तित किया जा सकता है, और अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है।
4. **क्रियाधार की सांद्रता का प्रभाव (Effect of substrate concentration):** यदि एन्जाइम की सांद्रता स्थिर हो, तो शुरुआत में क्रियाधार की सांद्रता बढ़ने पर अभिक्रिया की दर बढ़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अधिक क्रियाधार अणु एन्जाइम के सक्रिय स्थलों से जुड़ पाते हैं। हालांकि, एक बिंदु पर, सभी सक्रिय स्थल क्रियाधार से संतृप्त हो जाते हैं, और क्रियाधार की सांद्रता और बढ़ाने पर भी अभिक्रिया की दर में वृद्धि नहीं होती।
5. **अंतिम उत्पाद की सांद्रता (Effect of product concentration):** अभिक्रिया के अंतिम उत्पादों की सांद्रता बढ़ने पर एन्जाइम की क्रिया में बाधा आ सकती है। कुछ मामलों में, उत्पाद एन्जाइम के सक्रिय स्थल को अवरुद्ध करके प्रतिक्रिया को धीमा कर देते हैं। जैसे-जैसे उत्पाद की सांद्रता बढ़ती जाती है, अभिक्रिया की दर धीरे-धीरे कम होकर साम्यावस्था की ओर बढ़ती है, और कभी-कभी अभिक्रिया विपरीत दिशा में भी शुरू हो सकती है।
In simple words: एन्जाइम ऐसे प्रोटीन होते हैं जो शरीर के रिएक्शन को तेज करते हैं। उनके काम पर तापमान (निश्चित तापमान पर सबसे अच्छा काम), pH स्तर (सही अम्लता/क्षारता), एन्जाइम की मात्रा, और क्रियाधार (जिस चीज़ पर काम कर रहा है) की मात्रा असर डालती है। अगर बहुत ज़्यादा प्रोडक्ट बन जाए, तो भी एन्जाइम का काम धीमा हो सकता है।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम की क्रियाशीलता को नियंत्रित करने वाले ये कारक शरीर के अंदर की जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं को संतुलित रखने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
Question 2. निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए: (i) ऐपोएन्जाइम (ii) होलोएन्जाइम (iii) सहएन्जाइम
Answer: एन्जाइमों की संरचना को समझने के लिए इन शब्दों का ज्ञान आवश्यक है:
(i) **एप्पोएन्जाइम (Apoenzyme):** यह एन्जाइम का प्रोटीन वाला भाग होता है। ऐपोएन्जाइम स्वयं में निष्क्रिय होता है और अकेले जैविक अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित नहीं कर सकता। इसे सक्रिय होने के लिए एक अप्रोटीन भाग (सहकारक) की आवश्यकता होती है। सभी एन्जाइम प्रोटीन होते हैं, लेकिन सभी प्रोटीन एन्जाइम नहीं होते; ऐपोएन्जाइम वह प्रोटीन भाग है जो उत्प्रेरक गतिविधि के लिए विशेष रूप से तैयार होता है।
(ii) **होलोएन्जाइम (Holoenzyme):** होलोएन्जाइम एक पूर्ण और क्रियाशील एन्जाइम होता है। यह ऐपोएन्जाइम (प्रोटीन भाग) और सहकारक (अप्रोटीन भाग) के संयुक्त रूप को दर्शाता है। जब ऐपोएन्जाइम और सहकारक आपस में जुड़ जाते हैं, तो एन्जाइम सक्रिय हो जाता है और अपनी उत्प्रेरक क्रिया कर सकता है। यह एन्जाइम-क्रियाधार संकुल बनाने के लिए तैयार होता है और रासायनिक अभिक्रियाओं को गति देता है।
(iii) **सहकारक (Cofactor):** सहकारक एन्जाइम का अप्रोटीन वाला भाग होता है जो एन्जाइम की क्रियाशीलता के लिए आवश्यक होता है। सहकारक स्वयं में निष्क्रिय होता है और अकेले उत्प्रेरक का कार्य नहीं कर सकता। यह ऐपोएन्जाइम से जुड़कर उसे सक्रिय बनाता है। सहकारक तीन प्रकार के होते हैं:
* **प्रोस्थेटिक समूह:** जब सहकारक प्रोटीन भाग से स्थायी रूप से जुड़ा रहता है।
* **को-एन्जाइम (Co-enzyme):** जब अप्रोटीन भाग ऐपोएन्जाइम से ढीले या अस्थायी रूप से जुड़ा होता है, जैसे NAD, NADP, FAD आदि। ये आमतौर पर कार्बनिक अणु होते हैं।
* **धातु आयन या सक्रियक:** जब अप्रोटीन भाग कोई अकार्बनिक धातु आयन होता है, जैसे \( \text{Fe}^{2+} \) (कैटालेज एन्जाइम के लिए)। ये एन्जाइम की सक्रिय स्थल को सही आकार देने में मदद करते हैं।
In simple words: 'एपोएन्जाइम' एन्जाइम का प्रोटीन हिस्सा है, जो अकेला काम नहीं करता। 'होलोएन्जाइम' एक पूरा और सक्रिय एन्जाइम है, जिसमें प्रोटीन हिस्सा (एपोएन्जाइम) और बिना प्रोटीन वाला हिस्सा (सहकारक) दोनों होते हैं। 'सहकारक' वह बिना प्रोटीन वाला हिस्सा है जो एपोएन्जाइम को काम करने में मदद करता है, और यह स्थायी या अस्थायी रूप से जुड़ा हो सकता है।
🎯 Exam Tip: इन तीनों शब्दों के बीच के संबंध को समझना एन्जाइम की संरचना और कार्यप्रणाली को पूरी तरह से समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 9 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 9 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. एन्जाइम अकार्बनिक उत्प्रेरकों से भिन्न हैं –
(अ) उच्च विसरण दर में
(ब) उच्च ताप पर क्रियाशील
(स) प्रोटीन प्रकृति
(द) अभिक्रिया में स्वयं काम आते हैं।
Answer: (स) प्रोटीन प्रकृति
In simple words: एन्जाइम प्रोटीन से बने होते हैं, जबकि अकार्बनिक उत्प्रेरक प्रोटीन नहीं होते हैं। यह उनका मुख्य अंतर है।
🎯 Exam Tip: एन्जाइमों की प्रोटीन प्रकृति उनकी विशिष्टता और संवेदनशील क्रियाओं के लिए जिम्मेदार है, जो अकार्बनिक उत्प्रेरकों से उन्हें अलग करती है।
Question 2. एन्जाइम का अप्रोटीन भाग कहलाता है -
(ब) [विकल्प पाठ अनुपलब्ध]
Answer: (ब) [विकल्प पाठ अनुपलब्ध]
In simple words: एन्जाइम के प्रोटीन रहित हिस्से को कोफैक्टर कहा जाता है, जो एन्जाइम को सही से काम करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: अप्रोटीन भाग (कोफैक्टर) एन्जाइम की क्रियाशीलता के लिए महत्वपूर्ण होता है और यह विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं, जैसे प्रोस्थेटिक समूह, सहएन्जाइम या धातु आयन।
Question 3. कौन-सा कथन सही है –
(अ) सभी प्रोटीन एन्जाइम होते हैं।
(ब) सभी एन्जाइम प्रोटीन होते हैं।
(स) अधिकांश एन्जाइम प्रोटीन होते हैं।
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (ब) सभी एन्जाइम प्रोटीन होते हैं।
In simple words: सारे एन्जाइम प्रोटीन से बने होते हैं। लेकिन सभी प्रोटीन एन्जाइम नहीं होते हैं।
🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है कि एन्जाइम रासायनिक रूप से प्रोटीन होते हैं, हालांकि कुछ RNA अणु (राइबोजाइम) भी एन्जाइम की तरह कार्य कर सकते हैं।
Question 4. सर्वप्रथम किस एन्जाइम की खोज की गई थी?
(अ) जाइमेज
(ब) लाइपेज
(स) पेप्सिन
(द) आइसोमरेज
Answer: (अ) जाइमेज
In simple words: सबसे पहले जाइमेज नामक एन्जाइम को खोजा गया था। यह यीस्ट में पाया जाता है और चीनी को अल्कोहल में बदलने का काम करता है।
🎯 Exam Tip: जाइमेज की खोज ने एन्जाइम विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम रखा, जिससे जैव-रासायनिक प्रतिक्रियाओं को समझने में मदद मिली।
Question 5. एन्जाइम सक्रियता प्रभावित होती है
(अ) pH से
(ब) क्रियाधार सान्द्रता से
(द) उपरोक्त सभी से
Answer: (द) उपरोक्त सभी से
In simple words: एन्जाइम की काम करने की गति pH, क्रियाधार की मात्रा, तापमान और दूसरे कारकों पर निर्भर करती है।
🎯 Exam Tip: एन्जाइमों की सक्रियता कई पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होती है, जिसमें तापमान, pH और क्रियाधार की सांद्रता प्रमुख हैं; इन कारकों में किसी भी बदलाव से एन्जाइम की कार्यक्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
Question 6. अप्रतिस्पर्धी निरोधक वे पदार्थ हैं, जो एन्जाइम के -
(अ) सक्रिय स्थलों पर संलग्न हो जाते हैं।
(ब) सक्रिय स्थलों को नष्ट कर देते हैं।
(स) रचनात्मक संघटन में परिवर्तन कर देते हैं।
(द) गुणों में कोई परिवर्तन नहीं करते हैं।
Answer: (स) रचनात्मक संघटन में परिवर्तन कर देते हैं।
In simple words: अप्रतिस्पर्धी निरोधक एन्जाइम की बनावट बदल देते हैं, जिससे वह सही से काम नहीं कर पाता है।
🎯 Exam Tip: अप्रतिस्पर्धी निरोधक सक्रिय स्थल से नहीं जुड़ते बल्कि एन्जाइम के किसी अन्य हिस्से से जुड़कर उसकी आकृति बदलते हैं, जिससे क्रियाधार सक्रिय स्थल से नहीं जुड़ पाता है।
Question 7. किस एन्जाइम का सबसे पहले क्रिस्टलीकरण किया गया था –
(अ) [विकल्प पाठ अनुपलब्ध]
Answer: (अ) [विकल्प पाठ अनुपलब्ध]
In simple words: सबसे पहले यूरीएस एन्जाइम को क्रिस्टलीकरण करके अलग किया गया था।
🎯 Exam Tip: यूरीएस एन्जाइम वह पहला एन्जाइम था जिसका क्रिस्टलीकरण किया गया, जिससे इसकी संरचना और कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. ताला-चाबी क्रियाविधि परिकल्पना किसने एवं कब प्रस्तावित की थी?
Answer: ताला-चाबी क्रियाविधि परिकल्पना एमिल फिशर ने वर्ष 1894 में प्रस्तावित की थी। इस मॉडल से एन्जाइम और क्रियाधार के बीच की विशिष्टता को समझाया गया।
In simple words: एमिल फिशर ने 1894 में ताला-चाबी मॉडल दिया, जिसमें बताया कि एन्जाइम एक खास क्रियाधार पर ही काम करता है।
🎯 Exam Tip: ताला-चाबी मॉडल एन्जाइमों की विशिष्टता को समझने का एक आधारभूत सिद्धांत है, जिसमें एन्जाइम (ताला) केवल एक विशिष्ट क्रियाधार (चाबी) के साथ ही फिट होता है।
Question 2. एन्जाइम का प्रोटीन एवं अप्रोटीन भाग क्या कहलाता है?
Answer: एन्जाइम का प्रोटीन वाला भाग ऐपोएन्जाइम (Apoenzyme) कहलाता है और अप्रोटीन वाला भाग सहकारेक (Cofactor) कहलाता है। दोनों भाग मिलकर एक पूर्ण एन्जाइम बनाते हैं।
In simple words: एन्जाइम का प्रोटीन भाग ऐपोएन्जाइम और बिना प्रोटीन वाला भाग सहकारेक कहलाता है।
🎯 Exam Tip: ऐपोएन्जाइम और सहकारेक मिलकर होलोएन्जाइम बनाते हैं, जो क्रियाशील एन्जाइम होता है; सहकारेक अक्सर एन्जाइम की क्रियाशीलता के लिए आवश्यक होता है।
Question 3. एक प्रोटीन रहित एन्जाइम का नाम बताइए।
Answer: राइबोजाइम (Ribozyme) एक प्रोटीन रहित एन्जाइम है। यह एक RNA अणु होता है जो उत्प्रेरक का कार्य करता है।
In simple words: राइबोजाइम एक एन्जाइम है जो प्रोटीन से नहीं बना होता है, बल्कि RNA से बना होता है।
🎯 Exam Tip: राइबोजाइम एन्जाइम की पारंपरिक परिभाषा का एक अपवाद है, क्योंकि यह प्रोटीन न होकर न्यूक्लिक अम्ल (RNA) से बना होता है।
Question 4. प्रोस्थेटिक समूह की परिभाषा दीजिए।
Answer: प्रोस्थेटिक समूह एक सहकारक होता है जो प्रोटीन के अणु से बहुत मजबूती से जुड़ा रहता है। यह एन्जाइम की कार्यप्रणाली के लिए जरूरी होता है।
In simple words: प्रोस्थेटिक समूह सहकारक का वह प्रकार है जो प्रोटीन से हमेशा के लिए जुड़ जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रोस्थेटिक समूह एन्जाइम की सक्रियता के लिए महत्वपूर्ण होता है और प्रोटीन के साथ उसका स्थायी जुड़ाव उसकी संरचना और कार्य को स्थिर रखता है।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. को-एन्जाइम किसे कहते हैं? एक उदाहरण दीजिए।
Answer: को-एन्जाइम ऐसे कार्बनिक पदार्थ होते हैं जो कुछ एन्जाइमों की सक्रियता के लिए जरूरी होते हैं। ये एन्जाइम के साथ अस्थायी रूप से जुड़े रहते हैं। उदाहरण के लिए, \( \text{NAD} \), \( \text{NADP} \), और \( \text{FAD} \) जैसे विटामिन से बने को-एन्जाइम कई मेटाबॉलिक रिएक्शन में मदद करते हैं।
In simple words: को-एन्जाइम छोटे कार्बनिक अणु होते हैं जो एन्जाइम को सही से काम करने में मदद करते हैं और एन्जाइम से ढीले तरीके से जुड़े रहते हैं।
🎯 Exam Tip: को-एन्जाइम ऐपोएन्जाइम के साथ मिलकर पूर्ण एन्जाइम (होलोएन्जाइम) बनाते हैं और वे अक्सर विटामिनों से व्युत्पन्न होते हैं, जैसे NAD और FAD जो रेडॉक्स प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण होते हैं।
Question 2. प्रतिस्पर्धी संदमन से आप क्या समझते हैं? इसे कैसे रोका जा सकता है?
Answer: प्रतिस्पर्धी संदमन तब होता है जब कुछ पदार्थ क्रियाधार अणुओं के समान दिखते हैं और एन्जाइम के सक्रिय स्थलों से जुड़ जाते हैं। इससे असली क्रियाधार एन्जाइम से जुड़ नहीं पाते, और एन्जाइम की गतिविधि धीमी हो जाती है। इसे रोकने के लिए क्रियाधार की मात्रा बढ़ाई जा सकती है ताकि वह निरोधक से प्रतिस्पर्धा कर सके। जैसे- मैलोनिक अम्ल सक्सीनिक डीहाइड्रोजिनेस का प्रतिस्पर्धी निरोधक है।
In simple words: प्रतिस्पर्धी संदमन तब होता है जब एक नकली अणु एन्जाइम के सक्रिय स्थल पर बैठ जाता है और असली अणु को काम नहीं करने देता। इसे रोकने के लिए असली अणु की मात्रा बढ़ानी चाहिए।
🎯 Exam Tip: प्रतिस्पर्धी संदमन में निरोधक और क्रियाधार सक्रिय स्थल के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं; इसे क्रियाधार की सांद्रता बढ़ाकर प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।
Question 3. एन्जाइम के नामकरण विधि को संक्षेप में समझाइए।
Answer: एन्जाइमों का नामकरण दो मुख्य तरीकों से किया जाता है: क्रियाधार के आधार पर और रासायनिक क्रिया के आधार पर।
1. **क्रियाधार के आधार पर:** इसमें एन्जाइम का नाम क्रियाधार के नाम के बाद 'एसे (Ase)' प्रत्यय लगाकर किया जाता है। उदाहरण के लिए, सुक्रोज पर काम करने वाला एन्जाइम सुक्रेज़ (Sucrase) कहलाता है, जबकि लिपिड्स पर काम करने वाला लाइपेज़ (Lipase) कहलाता है।
2. **रासायनिक क्रिया के आधार पर:** कुछ एन्जाइमों का नामकरण उनकी उत्प्रेरित रासायनिक क्रिया के आधार पर होता है। उदाहरण के लिए, डाइपेप्टाइड पर क्रिया करने वाले एन्जाइम को डाइपेप्टीडेस (Dipeptidase) कहते हैं, और कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)) को हटाने वाले एन्जाइम को डीकाबॉक्सीलेस (Decarboxylase) कहते हैं। इस प्रकार यह उनकी क्रिया को सीधे दर्शाता है।
In simple words: एन्जाइम के नाम दो तरह से रखे जाते हैं: या तो जिस चीज पर वे काम करते हैं उसके नाम के बाद 'एसे' लगाकर, या फिर जो रासायनिक क्रिया वे करते हैं उसके नाम के आधार पर।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम के नामकरण की अंतर्राष्ट्रीय पद्धति (IUB) यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक एन्जाइम का एक अद्वितीय नाम और संख्या कोड हो, जो उसकी विशिष्टता और कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
Question 4. एन्जाइम के द्वारा अभिक्रिया की गति कैसे बढ़ायी जाती है?
Answer: एन्जाइम किसी भी रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को कम करके उसकी गति को बढ़ा देते हैं। सक्रियण ऊर्जा वह न्यूनतम ऊर्जा होती है जो किसी अभिक्रिया को शुरू करने के लिए आवश्यक होती है। एन्जाइम इस ऊर्जा को कम कर देते हैं, जिससे कम ऊर्जा पर भी अभिक्रिया तेज़ी से हो पाती है।
In simple words: एन्जाइम अभिक्रिया को शुरू करने के लिए जरूरी ऊर्जा को घटा देते हैं, जिससे अभिक्रिया बहुत तेज़ी से होती है।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम अभिक्रिया के पथ को बदलकर सक्रियण ऊर्जा को कम करते हैं, जिससे अधिक से अधिक क्रियाधार अणुओं को कम समय में उत्पादों में परिवर्तित किया जा सके।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. एन्जाइम की संरचना का वर्णन कीजिए तथा इनकी प्रमुख विशेषताओं को समझाइए।
Answer: एन्जाइम जटिल प्रोटीन अणु होते हैं जो जीवों में उत्प्रेरक के रूप में काम करते हैं। एक पूर्ण क्रियाशील एन्जाइम को होलोएन्जाइम (Holoenzyme) कहते हैं, जिसके दो मुख्य भाग होते हैं: प्रोटीन भाग (एप्पोएन्जाइम) और अप्रोटीन भाग (सहकारक)। सहकारक तीन प्रकार के होते हैं: प्रोस्थेटिक समूह, सहएन्जाइम और धातु आयन।
एन्जाइम क्रियाधार के साथ एक ताला-चाबी (Lock and Key) की तरह फिट होते हैं। पहले एन्जाइम (E) क्रियाधार (S) के साथ मिलकर एक अस्थायी एन्जाइम-क्रियाधार संकर (ES) बनाते हैं। इसके बाद, यह संकर उत्पाद (P) और एन्जाइम (E) में टूट जाता है, और एन्जाइम फिर से मुक्त होकर दूसरी क्रिया को उत्प्रेरित करने के लिए तैयार हो जाता है। यह प्रक्रिया अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा को कम करके उसकी गति को बढ़ा देती है।
एन्जाइम की प्रमुख विशेषताएँ:
1. एन्जाइम जीवित जीवों में उत्प्रेरक के रूप में काम करते हैं और अभिक्रिया की गति को बढ़ाते हैं।
2. ये बहुत कम मात्रा में ही प्रभावी होते हैं, यानी क्रियाधारों को उत्पादों में बदलने के लिए एन्जाइम की बहुत सूक्ष्म मात्रा ही पर्याप्त होती है।
3. एन्जाइम ताप परिवर्तन के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं; इनका सबसे अच्छा काम करने का तापमान आमतौर पर 25°C से 40°C होता है।
4. एन्जाइमों की क्रियाशीलता pH मान से भी प्रभावित होती है; प्रत्येक एन्जाइम एक खास pH स्तर पर सबसे अधिक सक्रिय होता है।
5. अधिकांश एन्जाइम पानी और नमक के घोल में घुल जाते हैं और कोशिकाद्रव्य में कोलॉइडी विलयन बनाते हैं।
In simple words: एन्जाइम प्रोटीन से बने होते हैं और उनके दो भाग होते हैं: प्रोटीन वाला (एप्पोएन्जाइम) और बिना प्रोटीन वाला (सहकारक)। वे रासायनिक क्रियाओं की गति को बढ़ा देते हैं, शरीर में ताला-चाबी की तरह काम करते हैं और तापमान और pH जैसे कारकों से बहुत प्रभावित होते हैं।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम की संरचना और उसकी तीन-आयामी आकृति उसकी विशिष्टता और सक्रियण ऊर्जा को कम करने की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है। चित्र को सही ढंग से लेबल करना और सभी प्रमुख विशेषताओं को बिंदुवार बताना आवश्यक है।
Question 3. एन्जाइम के वर्गीकरण को विस्तारपूर्वक समझाइए।
Answer: इंटरनेशनल यूनियन ऑफ बायोकेमिस्ट्री (IUB) ने एन्जाइमों को उनकी उत्प्रेरित रासायनिक क्रियाओं के आधार पर छह मुख्य वर्गों में वर्गीकृत किया है, प्रत्येक वर्ग में विशिष्ट एन्जाइम शामिल हैं। इन वर्गों को एन्जाइम कोड (EC) संख्या भी दी गई है:
1. **ऑक्सीडोरिडक्टेजेस (Oxidoreductases):** ये एन्जाइम ऑक्सीकरण-अपचयन (redox) अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं, जिसमें इलेक्ट्रॉन या हाइड्रोजन का स्थानांतरण होता है। उदाहरण: साइटोक्रोम ऑक्सीडेज, अल्कोहल डिहाइड्रोजिनेस।
2. **ट्रांसफेरेजेस (Transferases):** ये एन्जाइम एक अणु से दूसरे अणु में कार्यात्मक समूहों (जैसे फॉस्फेट, -CH, -\( \text{NH}_2 \)) का स्थानांतरण करते हैं। उदाहरण: फॉस्फोट्रान्सफेरेस जो फॉस्फेट समूह को स्थानांतरित करता है।
3. **हाइड्रोलाइजेज (Hydrolases):** ये एन्जाइम क्रियाधार का जल-अपघटन (hydrolysis) करते हैं, यानी जल का उपयोग करके बड़े अणुओं को छोटे अणुओं में तोड़ते हैं। उदाहरण: एस्टेज, कार्बोहाइड्रेज, एमाइलेज, न्यूक्लिएजे।
4. **लाएजेस (Lyases):** ये एन्जाइम जल का उपयोग किए बिना रासायनिक समूहों को जोड़ते या हटाते हैं, जिससे डबल बॉन्ड बनते या टूटते हैं। उदाहरण: एल्डोलेज।
5. **आइसोमरेजेस (Isomerases):** ये एन्जाइम एक ही अणु के भीतर विभिन्न संरचनात्मक परिवर्तनों (isomerization) को उत्प्रेरित करते हैं, जिससे अणु का स्वरूप बदल जाता है लेकिन उसका रासायनिक सूत्र वही रहता है।
6. **लाइगेजेस (Ligases):** ये एन्जाइम दो अणुओं को एक साथ जोड़ने के लिए ऊर्जा (ATP से) का उपयोग करते हैं, जिससे एक नया रासायनिक बंध बनता है। उदाहरण: DNA लाइगेज।
In simple words: एन्जाइमों को उनकी रासायनिक क्रिया के आधार पर छह मुख्य समूहों में बांटा गया है: ऑक्सीकरण-अपचयन, समूह स्थानांतरण, जल-अपघटन, समूह जोड़ना/हटाना, आइसोमर बनाना और अणुओं को जोड़ना।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम वर्गीकरण को समझने के लिए प्रत्येक वर्ग की मुख्य क्रिया और उसके एक या दो उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एन्जाइम के विशाल और विविध कार्यों को दर्शाता है।
Question 4. एन्जाइम संदमन किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है एवं इसके प्रभावों को कैसे रोका जा सकता है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: एन्जाइम संदमन का अर्थ है कि कुछ पदार्थ एन्जाइम की उत्प्रेरक क्षमता को कम कर देते हैं या उसे पूरी तरह रोक देते हैं। ऐसे पदार्थों को एन्जाइम निरोधक या संदमन कहते हैं। ये दो मुख्य प्रकार के होते हैं:
1. **प्रतिस्पर्धी निरोधक या संदमन (Competitive Inhibition):**
ये वे पदार्थ होते हैं जिनकी आण्विक संरचना क्रियाधार अणुओं के समान होती है। ये एन्जाइम के सक्रिय स्थल पर क्रियाधार से पहले जुड़ जाते हैं, जिससे एन्जाइम की क्रिया धीमी हो जाती है। इसे रोकने के लिए क्रियाधार की सांद्रता में वृद्धि करके निरोधक के प्रभाव को कम किया जा सकता है। उदाहरण: मैलोनिक अम्ल सक्सीनिक डीहाइड्रोजिनेस का प्रतिस्पर्धी निरोधक है।
2. **अप्रतिस्पर्धी निरोधक या संदमन (Non-competitive Inhibition):**
इन पदार्थों की आण्विक संरचना क्रियाधार के समान नहीं होती। ये एन्जाइम के सक्रिय स्थल से नहीं जुड़ते बल्कि किसी अन्य स्थान से जुड़कर एन्जाइम की आकृति बदल देते हैं, जिससे क्रियाधार सक्रिय स्थल से जुड़ नहीं पाता। इस प्रकार ये एन्जाइम की क्रिया की गति को अवरुद्ध कर देते हैं। इस संदमन को क्रियाधार की सांद्रता बढ़ाकर रोका नहीं जा सकता। उदाहरण: साइनाइड (\( \text{CN}^- \)) साइटोक्रोम ऑक्सीडेस एन्जाइम का अप्रतिस्पर्धी निरोधक है।
In simple words: एन्जाइम संदमन वह प्रक्रिया है जब कुछ अणु एन्जाइम की काम करने की शक्ति को कम कर देते हैं। यह दो प्रकार का होता है: प्रतिस्पर्धी (जब नकली अणु असली अणु की जगह ले लेता है) और अप्रतिस्पर्धी (जब नकली अणु एन्जाइम की बनावट बदल देता है)। प्रतिस्पर्धी संदमन को क्रियाधार बढ़ाकर रोका जा सकता है, जबकि अप्रतिस्पर्धी संदमन को नहीं।
🎯 Exam Tip: प्रतिस्पर्धी और अप्रतिस्पर्धी संदमन के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है, जिसमें उनके जुड़ने के स्थान और उन्हें कैसे नियंत्रित किया जा सकता है, यह शामिल है।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 9 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. एन्जाइम शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?
Answer: एन्जाइम शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम कुहने (Kühne) ने वर्ष 1878 में किया था। उन्होंने इस शब्द का उपयोग कोशिकाओं में होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने वाले पदार्थों के लिए किया।
In simple words: कुहने ने 1878 में पहली बार "एन्जाइम" शब्द का इस्तेमाल किया था।
🎯 Exam Tip: कुहने का योगदान एन्जाइम विज्ञान के प्रारंभिक इतिहास में महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने इस जैविक उत्प्रेरक के लिए एक विशिष्ट शब्द गढ़ा।
Question 2. यीस्ट से जाइमेस नामक एन्जाइम को पृथक किसने किया?
Answer: यीस्ट से जाइमेस नामक एन्जाइम को सबसे पहले बुकनर (Hans Buchner) ने वर्ष 1897 में पृथक किया था। उनकी खोज ने "इन विट्रो" (परखनली में) एन्जाइम क्रिया को प्रदर्शित किया।
In simple words: बुकनर ने 1897 में यीस्ट से जाइमेस एन्जाइम को अलग किया।
🎯 Exam Tip: बुकनर का यह कार्य इस बात का प्रमाण था कि एन्जाइम कोशिकाओं के बाहर भी सक्रिय हो सकते हैं, जिससे जैव रसायन के क्षेत्र में नई दिशाएं खुलीं।
Question 3. एन्जाइम उत्प्रेरण की क्रियाविधि के लिए एमिल फिशर ने कौन-सी परिकल्पना दी?
Answer: एमिल फिशर ने एन्जाइम उत्प्रेरण की क्रियाविधि के लिए "ताला-चाबी क्रियाविधि परिकल्पना" दी। इस परिकल्पना के अनुसार, एक विशिष्ट एन्जाइम केवल एक विशिष्ट क्रियाधार पर ही काम करता है, ठीक वैसे ही जैसे एक विशेष ताला एक विशेष चाबी से ही खुलता है।
In simple words: एमिल फिशर ने एन्जाइम के काम करने के तरीके को समझाने के लिए "ताला-चाबी सिद्धांत" दिया।
🎯 Exam Tip: ताला-चाबी सिद्धांत एन्जाइमों की उच्च विशिष्टता का वर्णन करता है, जो उन्हें केवल विशिष्ट क्रियाधारों के साथ बंधने की अनुमति देता है।
Question 5. एन्जाइमों के लिए pH परास जिस पर वे सक्रिय रहते हैं? कितना होता है?
Answer: अधिकांश एन्जाइम 5.0 से 7.5 के pH परास पर सबसे अधिक सक्रिय रहते हैं। यह pH सीमा उनके लिए अनुकूल होती है।
In simple words: एन्जाइम आमतौर पर 5.0 से 7.5 के pH मान पर सबसे अच्छा काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: pH में अत्यधिक परिवर्तन एन्जाइम की सक्रिय स्थल की आकृति को बदल सकता है (विकृतीकरण), जिससे उसकी कार्यक्षमता कम हो जाती है या समाप्त हो जाती है।
Question 6. सक्रियण ऊर्जा से आप क्या समझते हैं?
Answer: किसी रासायनिक अभिक्रिया को शुरू करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को सक्रियण ऊर्जा कहते हैं। यह ऊर्जा अणुओं को प्रतिक्रिया करने की स्थिति में लाती है।
In simple words: किसी भी रासायनिक क्रिया को शुरू करने के लिए जितनी कम से कम ऊर्जा चाहिए होती है, उसे सक्रियण ऊर्जा कहते हैं।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम सक्रियण ऊर्जा को कम करके रासायनिक अभिक्रियाओं की दर को बढ़ाते हैं, जिससे कोशिका के तापमान और परिस्थितियों में भी अभिक्रियाएं तेजी से हो पाती हैं।
Question 7. एन्जाइम क्रियाधार संकुल से आप क्या समझते हैं?
Answer: एन्जाइम क्रियाधार संकुल (Enzyme-substrate complex) तब बनता है जब एन्जाइम (E) और क्रियाधार (S) आपस में जुड़कर एक अस्थायी यौगिक बनाते हैं। यह संकुल रासायनिक अभिक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक मध्यवर्ती अवस्था होती है।
In simple words: जब एन्जाइम और क्रियाधार आपस में मिलते हैं तो वे एक अस्थायी जोड़ बनाते हैं, जिसे एन्जाइम क्रियाधार संकुल कहते हैं।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम क्रियाधार संकुल का बनना एन्जाइम उत्प्रेरण का एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां क्रियाधार सक्रिय स्थल पर बंधता है और रासायनिक परिवर्तन शुरू होता है।
Question 8. हाइड्रोलाइजेज के दो उदाहरण दीजिए।
Answer: हाइड्रोलाइजेज (Hydrolases) एन्जाइमों के दो उदाहरण हैं: एस्टेज (Esterase) और कार्बोहाइड्रेज (Carbohydrase)। एस्टेज एस्टर बंधों को तोड़ता है, जबकि कार्बोहाइड्रेज कार्बोहाइड्रेट को तोड़ता है।
In simple words: एस्टेज और कार्बोहाइड्रेज हाइड्रोलाइजेज एन्जाइम के उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोलाइजेज एन्जाइम जल का उपयोग करके बड़े अणुओं को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो पाचन जैसी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है।
Question 9. होलोएन्जाइम के कितने भाग होते हैं?
Answer: होलोएन्जाइम के दो मुख्य भाग होते हैं:
1. ऐपोएन्जाइम (Apoenzyme): यह एन्जाइम का प्रोटीन वाला भाग होता है।
2. सहकारक (Cofactor): यह एन्जाइम का अप्रोटीन वाला भाग होता है, जो उसकी क्रियाशीलता के लिए आवश्यक है।
In simple words: होलोएन्जाइम के दो हिस्से होते हैं: एक प्रोटीन वाला भाग (एप्पोएन्जाइम) और एक बिना प्रोटीन वाला भाग (सहकारक)।
🎯 Exam Tip: होलोएन्जाइम एक पूर्ण और क्रियाशील एन्जाइम होता है जो ऐपोएन्जाइम और सहकारक दोनों के संयोजन से बनता है।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 2. लाएज (Lyases) पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
Answer: लाएजेज (Lyases) एन्जाइम वे होते हैं जो जल (बिना जल-अपघटन) का उपयोग किए बिना किसी अणु से छोटे रासायनिक समूहों को जोड़ते या हटाते हैं। इस प्रक्रिया में अक्सर डबल बॉन्ड का निर्माण या टूटना शामिल होता है। उदाहरण के लिए, कार्बोक्सिलेस एन्जाइम \( \text{CO}_2 \) को हटाता है। ये एन्जाइम अणुओं के बीच नए बंध बनाने या मौजूदा बंधों को तोड़ने में महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: लाएजेज एन्जाइम बिना पानी का इस्तेमाल किए अणुओं से समूह जोड़ते या हटाते हैं, अक्सर डबल बॉन्ड बनाते या तोड़ते हुए।
🎯 Exam Tip: लाएजेज एन्जाइमों की विशेषता यह है कि वे बिना ऑक्सीकरण, अपचयन, या जल-अपघटन के बंधों को तोड़ते हैं या बनाते हैं, जो उन्हें अन्य एन्जाइम वर्गों से अलग करता है।
Question 3. कोएन्जाइम को उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: कोएन्जाइम ऐसे कार्बनिक पदार्थ होते हैं जो कुछ एन्जाइमों की सक्रियता के लिए आवश्यक होते हैं। ये एन्जाइम के प्रोटीन भाग (एप्पोएन्जाइम) से ढीले और अस्थायी रूप से जुड़े रहते हैं। ये अक्सर विटामिन से बनते हैं और रासायनिक प्रतिक्रियाओं में छोटे अणुओं या इलेक्ट्रॉन वाहक के रूप में कार्य करते हैं। उदाहरण: \( \text{NAD} \) (निकोटिनामाइड एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड) और \( \text{NADP} \) (निकोटिनामाइड एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड फॉस्फेट) जैसे कोएन्जाइम रेडॉक्स प्रतिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: कोएन्जाइम विटामिन से बने छोटे अणु होते हैं जो एन्जाइम को ठीक से काम करने में मदद करते हैं और उससे अस्थायी रूप से जुड़े रहते हैं। जैसे \( \text{NAD} \) और \( \text{NADP} \)।
🎯 Exam Tip: कोएन्जाइम ऐपोएन्जाइम के साथ मिलकर पूर्ण क्रियाशील होलोएन्जाइम बनाते हैं और वे एन्जाइमों को विभिन्न प्रकार की रासायनिक प्रतिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने में सक्षम बनाते हैं।
Question 4. इष्टतम ताप से आप क्या समझते हैं?
Answer: इष्टतम ताप (Optimum temperature) वह तापमान होता है जिस पर एक एन्जाइम सबसे अधिक सक्रिय होता है और अपनी अधिकतम उत्प्रेरक गति दिखाता है। अधिकांश एन्जाइमों के लिए, यह तापमान 25°C से 35°C के बीच होता है। इस सीमा से कम या अधिक तापमान पर एन्जाइम की गतिविधि घट जाती है, और बहुत अधिक तापमान पर एन्जाइम अपनी संरचना खो देता है (विकृतीकरण)।
In simple words: इष्टतम ताप वह सही तापमान होता है जिस पर एन्जाइम सबसे तेज़ काम करता है, आमतौर पर 25°C से 35°C के बीच।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम की सक्रियता तापमान पर अत्यधिक निर्भर करती है; इष्टतम तापमान पर एन्जाइम की संरचना और सक्रिय स्थल सबसे उपयुक्त होते हैं।
Question 5. प्रेरित आसंजन सिद्धान्त को समझाइए।
Answer: प्रेरित आसंजन सिद्धान्त (Induced fit theory) का प्रतिपादन कोशलैण्ड (Koshland) ने वर्ष 1966 में किया था। इस सिद्धांत के अनुसार, एन्जाइम का सक्रिय स्थल कठोर नहीं होता, बल्कि लचीला होता है। जब क्रियाधार एन्जाइम के संपर्क में आता है, तो एन्जाइम का सक्रिय स्थल अपनी आकृति को क्रियाधार के अनुरूप बदलने के लिए प्रेरित होता है। इससे क्रियाधार और एन्जाइम के बीच एक आदर्श फिट बनता है, जिससे एन्जाइम-क्रियाधार संकुल अधिक प्रभावी ढंग से बनता है और अभिक्रिया तेज़ी से होती है।
In simple words: प्रेरित आसंजन सिद्धांत कहता है कि एन्जाइम का सक्रिय स्थल कठोर नहीं होता। जब क्रियाधार आता है, तो एन्जाइम अपनी आकृति को थोड़ा बदलकर क्रियाधार के अनुरूप हो जाता है, जिससे वे अच्छे से जुड़ पाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रेरित आसंजन सिद्धांत एन्जाइम की लचीली प्रकृति और सक्रिय स्थल के आकार में परिवर्तन की क्षमता पर जोर देता है, जो ताला-चाबी मॉडल की सीमाओं को दूर करता है।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. एन्जाइम किसे कहते हैं? एन्जाइम क्रिया को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
Answer: एन्जाइम प्रोटीन से बने जैविक उत्प्रेरक होते हैं जो जीवित कोशिकाओं में रासायनिक अभिक्रियाओं की गति को बढ़ाते हैं, लेकिन स्वयं अभिक्रिया में भाग नहीं लेते हैं। एन्जाइमों की उत्प्रेरण क्रियाशीलता को कई कारक प्रभावित करते हैं:
1. **तापक्रम (Temperature):** एन्जाइम प्रोटीन प्रकृति के होते हैं, इसलिए तापमान परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। एक इष्टतम तापमान (आमतौर पर 25°C से 40°C) पर एन्जाइम सबसे अधिक सक्रिय होते हैं। इस सीमा से अधिक तापमान पर एन्जाइम अपनी त्रि-आयामी संरचना खो देते हैं (विकृतीकरण), जिससे उनकी सक्रियता समाप्त हो जाती है। 10°C की वृद्धि से अभिक्रिया दर लगभग दोगुनी हो जाती है, लेकिन बहुत उच्च तापमान पर यह पूरी तरह रुक जाती है।
2. **pH मान (pH value):** प्रत्येक एन्जाइम का एक विशिष्ट इष्टतम pH मान होता है जिस पर वह सबसे अधिक सक्रिय होता है। अधिकांश एन्जाइम 5.0 से 7.5 के pH परास में अच्छी तरह कार्य करते हैं। pH में कमी या वृद्धि एन्जाइम की आयनिक संरचना को बदल देती है, जिससे उसके सक्रिय स्थल की आकृति बिगड़ जाती है और उसकी क्रियाशीलता प्रभावित होती है।
3. **एन्जाइम की सांद्रता का प्रभाव (Effect of enzyme concentration):** एक निश्चित सीमा तक, एन्जाइम की सांद्रता बढ़ाने पर अभिक्रिया की दर सीधे आनुपातिक रूप से बढ़ती है। इसका मतलब है कि अधिक एन्जाइम अणु उपलब्ध होने से अधिक क्रियाधार अणुओं को एक साथ उत्प्रेरित किया जा सकता है, जिससे उत्पादों का निर्माण तेज़ी से होता है।
4. **अंतिम उत्पाद की सांद्रता (Concentration of final product):** यदि अभिक्रिया के अंतिम उत्पाद की सांद्रता बढ़ जाती है, तो यह अक्सर एन्जाइम की क्रियाशीलता को धीमा कर देती है। उच्च उत्पाद सांद्रता एन्जाइम को पीछे की ओर धकेल सकती है या उसके सक्रिय स्थल को अवरुद्ध कर सकती है, जिससे अभिक्रिया की गति धीमी हो जाती है और अंततः साम्यावस्था प्राप्त होने पर रुक जाती है।
In simple words: एन्जाइम ऐसे प्रोटीन होते हैं जो रासायनिक अभिक्रियाओं को तेज़ करते हैं। उनका काम करने का तरीका तापमान, pH मान, एन्जाइम की मात्रा और उत्पाद की मात्रा से प्रभावित होता है।
🎯 Exam Tip: एन्जाइम की क्रियाशीलता को प्रभावित करने वाले प्रत्येक कारक का वर्णन करते समय, यह समझाना महत्वपूर्ण है कि कैसे ये कारक एन्जाइम की त्रि-आयामी संरचना और सक्रिय स्थल को प्रभावित करते हैं।
Question 2. निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए I. ऐपोएन्जाइम II. होलोएन्जाइम III. सहएन्जाइम
Answer: एन्जाइमों की संरचना जटिल होती है, जिसमें प्रोटीन और कभी-कभी अप्रोटीन भाग भी होते हैं।
1. **एप्पोएन्जाइम (Apoenzyme):** यह एन्जाइम का मुख्य प्रोटीन वाला भाग होता है। ऐपोएन्जाइम अकेला निष्क्रिय होता है और इसे काम करने के लिए अक्सर एक अप्रोटीन भाग की आवश्यकता होती है। सभी एन्जाइम प्रोटीन होते हैं (अपवाद राइबोजाइम है जो RNA से बना है)।
2. **होलोएन्जाइम (Holoenzyme):** यह एक पूर्ण और क्रियाशील एन्जाइम होता है। होलोएन्जाइम ऐपोएन्जाइम (प्रोटीन भाग) और सहकारक (अप्रोटीन भाग) के संयोजन से बनता है। यह वही रूप है जिसमें एन्जाइम अपनी उत्प्रेरक गतिविधि को प्रदर्शित करता है।
3. **सहकारक (Cofactor):** यह होलोएन्जाइम का अप्रोटीन भाग होता है जो एन्जाइम की उत्प्रेरक क्रियाशीलता के लिए आवश्यक होता है। सहकारक तीन प्रकार के होते हैं: * **प्रोस्थेटिक समूह (Prosthetic group):** जब सहकारक ऐपोएन्जाइम से स्थायी रूप से जुड़ा रहता है। * **सहएन्जाइम (Co-enzymes):** जब अप्रोटीन भाग ऐपोएन्जाइम से ढीले या अस्थायी रूप से जुड़ा रहता है। उदाहरण: \( \text{NAD} \), \( \text{NADP} \), \( \text{FAD} \)। * **धातु आयन या सक्रियक (Activator or metal ion):** जब अप्रोटीन भाग अकार्बनिक प्रकृति का धातु आयन होता है, जैसे \( \text{Fe}^{2+} \) कैटालेज एन्जाइम के लिए।
In simple words: ऐपोएन्जाइम एन्जाइम का प्रोटीन हिस्सा है, जो अकेला काम नहीं करता। जब इसमें सहकारक (जो प्रोटीन नहीं होता) मिल जाता है, तब वह होलोएन्जाइम बन जाता है और काम कर पाता है। सहकारक तीन तरह के होते हैं: प्रोस्थेटिक समूह (मजबूती से जुड़ा), सहएन्जाइम (ढीला जुड़ा) और धातु आयन।
🎯 Exam Tip: इन तीनों शब्दों को परिभाषित करते समय उनके बीच के संबंध (एप्पोएन्जाइम + सहकारक = होलोएन्जाइम) और सहकारक के विभिन्न प्रकारों को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
Free study material for Biology
RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 9 एन्जाइम
Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 9 एन्जाइम prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Biology textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 9 एन्जाइम
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Biology chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Biology Class 12 Solved Papers
Using our Biology solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 9 एन्जाइम to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 9 एन्जाइम is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Biology are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 9 एन्जाइम as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Biology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 9 एन्जाइम will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Biology. You can access RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 9 एन्जाइम in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 9 एन्जाइम in printable PDF format for offline study on any device.