RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 8 पादपों में खनिज पोषण

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Detailed Chapter 8 पादपों में खनिज पोषण RBSE Solutions for Class 12 Biology

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Class 12 Biology Chapter 8 पादपों में खनिज पोषण RBSE Solutions PDF

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 8 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 8 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. निम्न में से कौन-से तत्व सूक्ष्म पोषक कहलाते हैं?
(अ) Mo, Cu, Zn, Ca
(ब) Mg, S, K, P
(स) Mn, Zn, Ca, Mg
(द) Mn, Mo, Cu, Zn
Answer: (द) Mn, Mo, Cu, Zn
In simple words: पौधों को बहुत कम मात्रा में जिन पोषक तत्वों की जरूरत होती है, उन्हें सूक्ष्म पोषक तत्व कहते हैं। मैंगनीज, मोलिब्डेनम, कॉपर और जिंक ऐसे ही तत्व हैं जो पौधे की वृद्धि के लिए जरूरी होते हैं, भले ही उनकी मात्रा थोड़ी ही क्यों न हो।

🎯 Exam Tip: सूक्ष्म पोषक तत्व वे होते हैं जिनकी आवश्यकता पौधों को 10 मिलीग्राम प्रति ग्राम शुष्क भार से कम होती है, जबकि वृहत पोषक तत्वों की आवश्यकता इससे अधिक होती है।

 

Question 2. पर्णहरिम में पाया जाता है –
Answer: पर्णहरिम (Chlorophyll) में मुख्य रूप से मैग्नीशियम (Mg) तत्व पाया जाता है। यह तत्व सूर्य के प्रकाश को सोखने और प्रकाश संश्लेषण करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मैग्नीशियम के बिना, पौधे हरा रंग खो देते हैं और भोजन नहीं बना पाते हैं।
In simple words: पर्णहरिम में मैग्नीशियम तत्व पाया जाता है। यह पौधों को हरा रंग देता है और सूरज की रोशनी को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि मैग्नीशियम क्लोरोफिल अणु का केंद्रीय धातु आयन है, जो इसे प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलने के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।

 

Question 3. Mo का मुख्य कार्य है –
(अ) पुष्पवर्धन
(ब) नाइट्रोजन स्थिरीकरण
(स) जल अवशोषण
(द) प्रकाश संश्लेषण
Answer: (ब) नाइट्रोजन स्थिरीकरण
In simple words: मोलिब्डेनम (Mo) नामक तत्व पौधों के लिए बहुत जरूरी है, खासकर उन पौधों के लिए जो हवा से नाइट्रोजन लेकर अपनी खुराक बनाते हैं। यह नाइट्रोजन को ठीक करने वाले एंजाइमों को काम करने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: मोलिब्डेनम विशेष रूप से लेग्यूम पौधों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए आवश्यक नाइट्रोजिनेज़ एंजाइम का एक घटक है।

 

Question 4. लघु पर्ण रोग किस तत्व की न्यूनता से होता है –
(अ) Zn
(ब) Mg
(स) B
(द) Zn
Answer: (अ) Zn
In simple words: जब पौधों में जिंक (Zn) नामक तत्व की कमी हो जाती है, तो उनकी पत्तियां छोटी और विकृत रह जाती हैं। इस बीमारी को लघु पर्ण रोग कहते हैं, जिसका मतलब है "छोटी पत्ती की बीमारी"।

🎯 Exam Tip: जिंक की कमी से पौधों में ऑक्सिन हार्मोन का उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे पत्तियों का विकास रुक जाता है और वे छोटी रह जाती हैं।

 

Question 5. पादपों में कार्बोहाइड्रेटों के स्थानान्तरण के लिए कौन-सा तत्व सर्वाधिक महत्वपूर्ण है?
(अ) Fe
(ब) Mo
(स) B
(द) Zn
Answer: (स) B
In simple words: पौधों के अंदर कार्बोहाइड्रेट को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में बोरोन (B) तत्व सबसे ज्यादा मदद करता है। यह तत्व शुगर और दूसरे पोषक तत्वों को पूरे पौधे में पहुंचाने का काम करता है।

🎯 Exam Tip: बोरोन कोशिका भित्ति के निर्माण, परागकणों के अंकुरण और कोशिका विभाजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

Question 6. पौधों की सामान्य वृद्धि व जीवन चक्र के पूर्ण होने के लिए अनिवार्य पोषक तत्वों की संख्या है –
(अ) 105
(ब) 60
(स) 27
(द) 17
Answer: (द) 17
In simple words: पौधों को ठीक से बढ़ने और अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए 17 खास पोषक तत्वों की जरूरत होती है। ये सभी तत्व पौधों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

🎯 Exam Tip: इन 17 अनिवार्य तत्वों में 9 वृहत पोषक तत्व (मैक्रोन्यूट्रिएंट्स) और 8 सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) शामिल हैं।

 

Question 7. असंचरणशील पोषक तत्व हैं –
(अ) Cu, S, Fe, Mn
(ब) Ca, B, Cu, S
Answer: (अ) Cu, S, Fe, Mn
In simple words: कुछ पोषक तत्व ऐसे होते हैं जो पौधों के अंदर आसानी से एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा पाते। कॉपर, सल्फर, आयरन और मैंगनीज ऐसे ही तत्व हैं।

🎯 Exam Tip: असंचरणशील पोषक तत्वों की कमी के लक्षण सबसे पहले पौधे की नई या ऊपरी पत्तियों पर दिखाई देते हैं।

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 8 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पादप नाइट्रोजन का अवशोषण किस रूप में करते हैं?
Answer: पौधे मुख्य रूप से नाइट्रोजन को नाइट्रेट \( (NO_3^-) \) आयन के रूप में मिट्टी से सोखते हैं। कभी-कभी वे नाइट्राइट \( (NO_2^-) \) के रूप में और कुछ खास स्थितियों में अमोनियम \( (NH_4^+) \) आयन के रूप में भी इसे अवशोषित कर सकते हैं। यह पौधों के विकास के लिए एक आवश्यक तत्व है।
In simple words: पौधे नाइट्रोजन को मुख्य रूप से नाइट्रेट के रूप में, और कभी-कभी नाइट्राइट या अमोनियम के रूप में लेते हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि नाइट्रोजन पौधों में प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल और क्लोरोफिल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसका अवशोषण पौधे के जीवन के लिए आवश्यक है।

 

Question 2. प्राथमिक वृहत मात्रिक तत्वों के नाम लिखिए।
Answer: प्राथमिक वृहत मात्रिक तत्व वे पोषक तत्व हैं जिनकी पौधों को बड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। इनमें मुख्य रूप से नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), और पोटैशियम (K) शामिल हैं। ये तत्व पौधों की वृद्धि और विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
In simple words: पौधों को ज्यादा मात्रा में जिन तत्वों की जरूरत होती है, वे हैं नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम।

🎯 Exam Tip: इन तीनों तत्वों को अक्सर "NPK" के नाम से जाना जाता है और ये उर्वरकों के मुख्य घटक होते हैं।

 

Question 3. वर्मीकुलाइट तथा हाइड्रोपोनिक्स पदों को स्पष्ट कीजिए।
Answer:
वर्मीकुलाइट (Vermiculite) एक प्राकृतिक खनिज है जो धरती में पाया जाता है। इसे बहुत ऊंचे तापमान पर गर्म करके एक हल्के पदार्थ में बदल दिया जाता है, जिसका उपयोग पौधों को बिना मिट्टी के उगाने के लिए किया जाता है। यह पानी और पोषक तत्वों को अच्छे से रोककर रखता है।
हाइड्रोपोनिक्स (Hydroponics) पौधों को उगाने की एक ऐसी विधि है जिसमें मिट्टी का उपयोग नहीं किया जाता है। इसके बजाय, पौधों को पोषक तत्वों से भरपूर पानी के घोल में उगाया जाता है। इस तकनीक में पौधों की जड़ों को सीधा पोषक घोल में डुबोया जाता है।
In simple words: वर्मीकुलाइट एक हल्का खनिज है जो पौधों को उगाने में मदद करता है। हाइड्रोपोनिक्स मिट्टी के बिना पौधों को पानी में पोषक घोल के साथ उगाने की तकनीक है।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोपोनिक्स तकनीक किसानों को पानी बचाने और कम जगह में अधिक फसल उगाने में मदद करती है, खासकर शहरी कृषि में।

 

Question 4. Fe तथा CI किस रूप में मृदा से अवशोषित होते हैं?
Answer: आयरन (Fe) पौधों द्वारा मृदा से फेरस आयन \( (Fe^{2+}) \) और फेरिक आयन \( (Fe^{3+}) \) के रूप में अवशोषित होता है। वहीं, क्लोरीन (Cl) क्लोराइड आयन \( (Cl^-) \) के रूप में अवशोषित होता है। ये दोनों तत्व पौधों के कई जैविक कार्यों के लिए आवश्यक हैं।
In simple words: पौधे आयरन को \( Fe^{2+} \) और \( Fe^{3+} \) के रूप में, और क्लोरीन को \( Cl^- \) के रूप में मिट्टी से लेते हैं।

🎯 Exam Tip: आयरन क्लोरोफिल संश्लेषण और इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला में महत्वपूर्ण है, जबकि क्लोरीन परासरण संतुलन और स्टोमेटा के खुलने-बंद होने में भूमिका निभाता है।

 

Question. खनिज लवण अवशोषण से आप क्या समझते हैं?
Answer: पौधों के सामान्य विकास और उनके पूरे जीवन चक्र के लिए मिट्टी से जरूरी खनिज तत्वों को लेना ही खनिज लवण अवशोषण कहलाता है। इस प्रक्रिया में पौधे अपनी जड़ों के माध्यम से मिट्टी में घुले हुए आयनों को ग्रहण करते हैं।
In simple words: पौधों का मिट्टी से जरूरी पोषक तत्वों को लेना खनिज लवण अवशोषण कहलाता है।

🎯 Exam Tip: यह प्रक्रिया सक्रिय या निष्क्रिय परिवहन के द्वारा हो सकती है, जो पौधों की ऊर्जा आवश्यकताओं पर निर्भर करती है।

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 8 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पादप भस्म विश्लेषण का वर्णन कीजिए।
Answer: पादप भस्म विश्लेषण में, सबसे पहले ताजे पौधों को ओवन में 70-80°C पर एक या दो दिन तक सुखाया जाता है। इससे पौधों का सारा पानी भाप बनकर उड़ जाता है। फिर बचे हुए सूखे पौधे के अवशेष का वजन करके उसका शुष्क भार (Dry weight) पता किया जाता है। इस सूखे भार में मुख्य रूप से कोशिका भित्ति, पॉलीसैकेराइड, लिग्निन और कार्बनिक अम्ल जैसे घटक होते हैं। इसके बाद, पौधे के सूखे नमूनों को लगभग 600°C पर भट्टी में जलाया जाता है ताकि सभी कार्बनिक पदार्थ जल जाएं। जलने पर कार्बनिक पदार्थ कार्बन डाइऑक्साइड \( (CO_2) \), अमोनिया \( (NH_3) \) और ऑक्सीजन \( (O_2) \) के रूप में बाहर निकल जाते हैं। इस प्रक्रिया के अंत में जो शेष अवाष्पशील पदार्थ बचता है, उसे पादप भस्म (Plant ash) कहते हैं। इस भस्म में मुख्य रूप से पौधों के सभी अकार्बनिक खनिज तत्व होते हैं। पादप भस्म का विश्लेषण करके पौधों में मौजूद विभिन्न तत्वों की पहचान की जाती है। हालांकि, यह विधि इन तत्वों की उपयोगिता या अनिवार्यता का निर्धारण नहीं करती है।
In simple words: पादप भस्म विश्लेषण में, पौधों को पहले सुखाया जाता है फिर जलाया जाता है। जलने के बाद बची हुई राख (पादप भस्म) से यह पता चलता है कि पौधे में कौन-कौन से खनिज तत्व मौजूद हैं।

🎯 Exam Tip: यह तकनीक पौधों में तत्वों की गुणात्मक और मात्रात्मक पहचान में मदद करती है, लेकिन यह नहीं बताती कि वे तत्व पौधे के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं या उनकी क्या भूमिका है।

 

Question 2. नाइट्रोजन की उपयोगिता व इसकी न्यूनता के लक्षणों का वर्णन कीजिए।
Answer:
नाइट्रोजन की न्यूनता के लक्षण (Deficiency Symptoms of Nitrogen):
1. जब पौधों में नाइट्रोजन की कमी होती है, तो सबसे पहले पुरानी पत्तियों पर हरिमाहीनता (Chlorosis) के लक्षण दिखते हैं, जिससे वे पीली पड़ जाती हैं।
2. नाइट्रोजन की कमी के दौरान पत्तियों में एन्थोसायनिन नामक वर्णक ज्यादा बनता है, जिससे पत्तियां बैंगनी या गहरे भूरे रंग की दिखाई दे सकती हैं।
3. नाइट्रोजन की कमी से प्रोटीन बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और वे बौने (Stunted) रह जाते हैं।
4. अधिक कमी होने पर पत्तियाँ और शाखाएँ लाल या पीले रंग की होकर उन पर भूरे धब्बे दिखाई देते हैं।
इसके अतिरिक्त, पौधों में नाइट्रोजन की बहुत अधिक मात्रा भी हानिकारक हो सकती है। जब मिट्टी में नाइट्रोजन ज्यादा होती है, तो पौधों की कायिक वृद्धि बहुत तेजी से होती है। ऐसे पौधे लंबे, कमजोर हो जाते हैं और फंगस व बैक्टीरिया के प्रति ज्यादा संवेदनशील (Sensitive) होते हैं।
In simple words: नाइट्रोजन की कमी से पुरानी पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, पत्तियां बैंगनी हो सकती हैं, और पौधों का बढ़ना रुक जाता है। ज्यादा नाइट्रोजन भी पौधों के लिए अच्छा नहीं है, इससे वे कमजोर हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन क्लोरोफिल, प्रोटीन और न्यूक्लिक एसिड का एक प्रमुख घटक है, इसलिए इसकी कमी सीधे पौधे के विकास और रंग को प्रभावित करती है।

 

Question 3. निष्क्रिय व सक्रिय लवण अवशोषण में अन्तर कीजिए।
Answer:

निष्क्रिय अवशोषणसक्रिय अवशोषण
1.यह ऊर्जा (ATP) का उपयोग किए बिना आयनों का अवशोषण है। इसे निष्क्रिय अवशोषण (Passive absorption) कहते हैं।यह उपापचयी ऊर्जा (ATP) का उपयोग करके आयनों का अवशोषण है। इसे सक्रिय अवशोषण (Active absorption) कहते हैं।
2.यह अवशोषण भौतिक बल, जैसे विसरण, के कारण होता है।यह अवशोषण वैद्युत रासायनिक विभव के विरुद्ध होता है।
3.खनिज लवणों का अवशोषण तापमान और उपापचयी अवरोधकों पर निर्भर नहीं करता है।खनिज लवणों का अवशोषण तापमान और उपापचयी अवरोधकों पर निर्भर करता है।

In simple words: निष्क्रिय अवशोषण में आयन बिना ऊर्जा खर्च किए पौधे में प्रवेश करते हैं, जबकि सक्रिय अवशोषण में आयनों को अंदर ले जाने के लिए ऊर्जा का उपयोग होता है।

🎯 Exam Tip: निष्क्रिय अवशोषण सांद्रता प्रवणता के अनुसार होता है, जबकि सक्रिय अवशोषण इसके विपरीत हो सकता है, जिससे पौधे आयनों को मिट्टी से उच्च सांद्रता में भी अवशोषित कर पाते हैं।

 

Question 4. हरिमाहीनता तथा ऊतक क्षय को स्पष्ट कीजिए।
Answer:
• हरिमाहीनता (Chlorosis) वह स्थिति है जब क्लोरोफिल नामक हरे वर्णक की कमी के कारण पौधों की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। यह अक्सर पौधों में खनिज तत्वों की कमी के कारण होता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण ठीक से नहीं हो पाता।
• ऊतक क्षय (Necrosis) पत्तियों या पौधे के अन्य हिस्सों में स्थानीय कोशिकाओं के मरने को कहते हैं। इस कारण से पत्तियों पर भूरे या काले धब्बे दिखाई देते हैं। ऊतक क्षय भी आमतौर पर कुछ खनिज तत्वों की गंभीर कमी के कारण होता है।
In simple words: हरिमाहीनता में पत्तियां पीली पड़ जाती हैं क्योंकि उनमें हरा रंग (क्लोरोफिल) कम हो जाता है। ऊतक क्षय में पौधे की कोशिकाओं का एक हिस्सा मर जाता है, जिससे पत्तियां भूरे धब्बे वाली दिखती हैं।

🎯 Exam Tip: हरिमाहीनता और ऊतक क्षय दोनों ही पोषक तत्वों की कमी के महत्वपूर्ण संकेतक हैं, और इनका सही पहचान पौधे के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 8 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 2. पौधों के लिए आवश्यक तत्वों के नाम बताइए तथा किन्हीं चार तत्वों के कार्य प्राप्ति, स्वरूप व न्यूनता लक्षणों का वर्णन कीजिए।
Answer: पौधों के पोषण में अनिवार्य तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये तत्व विभिन्न कायिकीय क्रियाओं जैसे पदार्थो के संघटक के रूप में, कोशिका झिल्ली की पारगम्यता, परासरण दाब को नियंत्रित करने, इलेक्ट्रॉन परिवहन, जैव रासायनिक एंजाइमों का संतुलन, बफर कार्य और भोजन के भंडारण में सहायक होते हैं। इन तत्वों की कमी से पौधों की ये क्रियाएँ ठीक से नहीं हो पाती हैं।

कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन (Carbon, Hydrogen and Oxygen): ये तत्व खनिज तत्वों की श्रेणी में नहीं आते, लेकिन पौधे के लिए आवश्यक हैं। पौधे को कार्बन \( (C) \) कार्बन डाइऑक्साइड \( (CO_2) \) से मिलता है, जबकि ऑक्सीजन \( (O) \) कार्बन डाइऑक्साइड \( (CO_2) \) और ऑक्सीजन \( (O_2) \) से मिलता है, और हाइड्रोजन \( (H) \) पानी \( (H_2O) \) से मिलता है। ये पौधों के प्रमुख संरचनात्मक घटक हैं। आमतौर पर पौधों में इनकी कमी नहीं होती है।

नाइट्रोजन (Nitrogen): पौधों को नाइट्रोजन की सबसे अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है। पौधे इसे मुख्य रूप से नाइट्रेट \( (NO_3^-) \) के रूप में, और कम मात्रा में नाइट्राइट \( (NO_2^-) \) व अमोनियम \( (NH_4^+) \) के रूप में मिट्टी से प्राप्त करते हैं। नाइट्रोजन की सबसे ज्यादा जरूरत पौधों के तेजी से बढ़ने वाले ऊतकों (जैसे मेरिस्टेमेटिक ऊतकों), कलिकाओं (Buds) और सभी जीवित कोशिकाओं को होती है। नाइट्रोजन एमिनो एसिड, प्रोटीन, न्यूक्लिक एसिड, क्लोरोफिल, विटामिन और हार्मोन का मुख्य हिस्सा है। रासायनिक उर्वरकों में यूरिया नाइट्रोजन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। सोडियम नाइट्रेट, अमोनियम नाइट्रेट और कैल्शियम नाइट्रेट इसके अन्य स्रोत हैं। मिट्टी में मौजूद कुछ जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करके पौधों के लिए नाइट्रोजन उपलब्ध कराते हैं। पौधों के शुष्क भार में 1-30% नाइट्रोजन होती है।

नाइट्रोजन की न्यूनता के लक्षण (Deficiency Symptoms of Nitrogen):
1. नाइट्रोजन की कमी से पुरानी पत्तियों पर सबसे पहले पीलापन (Chlorosis) दिखाई देता है।
2. कमी होने पर पत्तियों में एन्थोसायनिन नामक वर्णक अधिक बनता है, जिससे पत्तियां बैंगनी या गहरे भूरे रंग की हो जाती हैं।
3. नाइट्रोजन की कमी से प्रोटीन संश्लेषण पर असर पड़ता है, जिससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और वे छोटे (Stunted) रह जाते हैं।
4. पौधों में इसकी गंभीर कमी से पत्तियां और शाखाएं लाल या पीले रंग की हो जाती हैं और उन पर भूरे रंग के धब्बे दिखते हैं।
5. नाइट्रोजन की कमी से पौधों में फूल आने में देरी होती है।
6. कोशिका विभाजन और श्वसन की क्रिया धीमी हो जाती है।
7. जल संतुलन, जल की गति और पत्तियों के रंध्रों का खुलना-बंद होना भी प्रभावित होता है।
इसके अलावा, नाइट्रोजन की अधिकता भी पौधों के लिए हानिकारक हो सकती है। मिट्टी में ज्यादा नाइट्रोजन होने पर पौधों में बहुत तेज वानस्पतिक वृद्धि होती है। ऐसे पौधे लंबे, कमजोर हो जाते हैं और फंगस और जीवाणुओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
In simple words: पौधे को बढ़ने के लिए 17 तत्व चाहिए। कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन हवा और पानी से मिलते हैं। नाइट्रोजन पौधों को बड़ा करने, प्रोटीन बनाने और हरा रखने के लिए बहुत जरूरी है। इसकी कमी से पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और पौधा छोटा रह जाता है।

🎯 Exam Tip: विस्तृत उत्तरों में, प्रत्येक आवश्यक तत्व की भूमिका, प्राप्ति के स्रोत और कमी के लक्षणों को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. खनिज लवणों के अवशोषण की क्रियाविधि का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer:
खनिज लवणों के अवशोषण की क्रियाविधि (Mechanism of Absorption of Mineral Salts): विसरण सिद्धांत के अनुसार, एक कोशिका में खनिज तत्वों की सांद्रता एक सीमा से अधिक नहीं हो सकती। विसरण प्रवणता के कारण खनिज तत्वों का कोशिका में प्रवेश तब तक होता है जब तक बाहरी और आंतरिक घोल की सांद्रता समान न हो जाए। पहले यह माना जाता था कि खनिज पदार्थों का अवशोषण सीधे सतह से होता है, लेकिन अब यह स्पष्ट है कि ये क्रियाएं अलग-अलग होती हैं। खनिज लवणों का अवशोषण जड़ों के मेरिस्टेमेटिक क्षेत्र और दीर्घाकरण क्षेत्र से आयनों के रूप में होता है। खनिज लवणों का अवशोषण आमतौर पर उपापचयी ऊर्जा (Metabolic energy) के उपयोग से होता है, इसलिए यह एक सक्रिय प्रक्रिया है। पौधों में खनिज लवणों का अवशोषण दो प्रक्रियाओं द्वारा होता है:
(A) निष्क्रिय अवशोषण (Passive absorption)
(B) सक्रिय अवशोषण (Active absorption)

(A) निष्क्रिय अवशोषण (Passive absorption): निष्क्रिय अवशोषण में आयन बिना ऊर्जा खर्च किए अपनी वैद्युत रासायनिक विभव प्रवणता के आधार पर कोशिका में प्रवेश करते हैं। निष्क्रिय अवशोषण की क्रियाविधि को समझाने के लिए तीन सिद्धांत दिए गए हैं:
1. विनिमय अवशोषण (Exchange Absorption): इस सिद्धांत के अनुसार धनायन का विनिमय केवल धनायन से और ऋणायन का ऋणायन से होता है। इसके परिणामस्वरूप जड़ की सतह पर धनायन अवशोषित होते हैं और उनका कोशिका में निष्क्रिय विसरण (Passive diffusion) होता है।
2. डोनन साम्यावस्था सिद्धांत (Donnan Equilibrium Theory): इस सिद्धांत को डोनन ने 1927 में प्रतिपादित किया था। यह अविघटित या स्थिर आयनों के प्रभाव पर आधारित है, क्योंकि यह कोशिका में सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध तत्वों को जमा करने की क्षमता दर्शाता है।

(B) सक्रिय अवशोषण (Active Absorption): सक्रिय अवशोषण वह प्रक्रिया है जिसमें उपापचयी ऊर्जा के सहयोग से आयन वैद्युत रासायनिक विभव के विरुद्ध गति करते हुए कोशिका में प्रवेश करते हैं। इस क्रिया में ATP के रूप में उपापचयी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। आयनों के सक्रिय अवशोषण के संबंध में तीन अलग-अलग सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं:
(i) वाहक संकल्पना (Carrier concept): कोशिका या ऊतक का वह भाग जहां आयनों का अवशोषण उपापचयी ऊर्जा (ATP) के उपयोग से होता है। बाहरी स्थान (Outer space) में आयन स्वतंत्र रूप से विसरित होते हैं, लेकिन बाहरी और आंतरिक स्थान के बीच का क्षेत्र आयनों के लिए पारगम्य (Permeable) नहीं होता है। वान डेन होनर्ट (1937) के अनुसार, इस अपारगम्य क्षेत्र को पार करने के लिए आयन वाहकों (Carriers) की मदद से आयन बाहरी स्थान से जुड़ते हैं और फिर उन्हें आंतरिक स्थान में छोड़ देते हैं। इस विधि को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है:

वाहक (Carrier) \( + \) ATP \( \rightarrow \) ADP \( + \) सक्रियत वाहक (Activated carrier)
सक्रियत वाहक (Activated carrier) \( + \) आयन (Ion) \( \rightarrow \) वाहक आयन सम्मिश्रण (Carrier ion complex)
वाहक आयन सम्मिश्रण (Carrier-ion complex) \( \rightarrow \) निष्क्रिय वाहक (Passive carrier) \( + \) आयन (ion)

(ii) आयन-पम्प अथवा साइटोक्रोम पम्प संकल्पना (Ion-pump or Cytochrome pump Concept): लुण्डेगार्थ और वर्सट्रोम (1933) के अनुसार, पौधों में श्वसन दर और ऋणायनों के अवशोषण के बीच सीधा संबंध होता है। ऋणायनों और धनायनों के अवशोषण की प्रक्रियाएं अलग होती हैं। ऋणायनों का बाहरी झिल्ली से भीतरी झिल्ली की ओर स्थानांतरण साइटोक्रोमों द्वारा होता है।

बाह्य सतहअवरोधक झिल्लीआन्तरिक सतह
ऋणायन \( (-) \rightarrow \)\( (-) \) साइटोक्रोम पम्प \( (-) \rightarrow \)\( (-) \) ऋणायन \( \rightarrow \)
धनायन \( (+) \rightarrow \)निष्क्रिय प्रवाह \( \rightarrow \)\( (+) \) धनायन

In simple words: खनिज अवशोषण दो तरह से होता है - निष्क्रिय और सक्रिय। निष्क्रिय अवशोषण में आयन बिना ऊर्जा के अंदर आते हैं, जबकि सक्रिय अवशोषण में ऊर्जा का उपयोग होता है।

🎯 Exam Tip: सक्रिय अवशोषण की प्रक्रिया में वाहक प्रोटीन और साइटोक्रोम पम्प जैसे तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो आयनों को सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध ले जाने में सक्षम बनाते हैं।

 

Question 4. वृहत मात्रिक पोषक तत्वों पर लेख लिखिए।
Answer:
वृहत मात्रिक पोषक तत्व (Macronutrients) वे तत्व हैं जिनकी पौधों को एक ग्राम शुष्क भार में 1-10 मिलीग्राम तक मात्रा में आवश्यकता होती है। ये कुल 9 तत्व हैं: कार्बन (C), हाइड्रोजन (H), ऑक्सीजन (O), नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K), सल्फर (S), मैग्नीशियम (Mg), और कैल्शियम (Ca)। ये तत्व पौधों की वृद्धि, संरचना और चयापचय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

नाइट्रोजन (Nitrogen): पौधों को नाइट्रोजन की सबसे ज्यादा मात्रा में आवश्यकता होती है। पौधे इसे मिट्टी से मुख्य रूप से नाइट्रेट \( (NO_3^-) \) के रूप में, और कुछ हद तक नाइट्राइट \( (NO_2^-) \) व अमोनियम \( (NH_4^+) \) के रूप में ग्रहण करते हैं। नाइट्रोजन की सबसे अधिक जरूरत पौधों के तेजी से बढ़ने वाले ऊतकों (जैसे मेरिस्टेमेटिक ऊतक), कलिकाओं (Buds) और सभी जीवित कोशिकाओं को होती है। नाइट्रोजन एमिनो एसिड, प्रोटीन, न्यूक्लिक एसिड, क्लोरोफिल, विटामिन और हार्मोन का मुख्य हिस्सा है। रासायनिक उर्वरकों में यूरिया नाइट्रोजन का एक बड़ा स्रोत है। सोडियम नाइट्रेट, अमोनियम नाइट्रेट और कैल्शियम नाइट्रेट भी इसके अन्य स्रोत हैं। मिट्टी में मौजूद कुछ जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करके पौधों के लिए नाइट्रोजन उपलब्ध कराते हैं। पौधों के शुष्क भार में नाइट्रोजन की मात्रा 1-30% तक होती है।

नाइट्रोजन की न्यूनता के लक्षण (Deficiency Symptoms of Nitrogen):
1. जब पौधों में नाइट्रोजन की कमी होती है, तो हरिमाहीनता (Chlorosis) के लक्षण सबसे पहले पुरानी पत्तियों पर दिखाई देते हैं, जिससे वे पीली पड़ जाती हैं।
2. नाइट्रोजन की कमी के दौरान पत्तियों में एन्थोसायनिन नामक वर्णक अधिक बनता है, जिससे पत्तियां बैंगनी या गहरे भूरे रंग की हो सकती हैं।
3. नाइट्रोजन की कमी से प्रोटीन संश्लेषण की दर प्रभावित होती है, जिससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और वे बौने (Stunted) रह जाते हैं।
4. पौधों में इसकी अधिक कमी से पत्तियां और शाखाएं लाल या पीले रंग की हो जाती हैं और उन पर भूरे रंग के धब्बे दिखते हैं।
5. नाइट्रोजन की कमी से पौधों में फूल आने में देरी होती है।
6. कोशिका विभाजन और श्वसन की क्रिया धीमी हो जाती है।
7. जल संतुलन, जल की गति, और रंध्रों का खुलना-बंद होना भी प्रभावित होता है।
इसके अतिरिक्त, नाइट्रोजन की अधिकता भी पौधों के लिए हानिकारक होती है। मिट्टी में ज्यादा नाइट्रोजन होने पर पौधों में बहुत तेज वानस्पतिक वृद्धि होती है। ऐसे पौधे लंबे, कमजोर हो जाते हैं और फंगस व जीवाणुओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
In simple words: वृहत मात्रिक पोषक तत्व वे हैं जिनकी पौधों को ज्यादा मात्रा में जरूरत होती है। इनमें नाइट्रोजन बहुत जरूरी है, जो पौधों को बढ़ने, हरा रखने और प्रोटीन बनाने में मदद करता है। इसकी कमी से पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और पौधा कमजोर हो जाता है।

🎯 Exam Tip: वृहत मात्रिक तत्वों को ऊर्जा, संरचनात्मक और नियामक कार्यों के लिए वर्गीकृत किया जाता है; नाइट्रोजन मुख्य रूप से प्रोटीन और न्यूक्लिक एसिड का घटक है।

 

Question 5. सूक्ष्म मात्रिक पोषक तत्वों पर लेख लिखिए।
Answer:
मैग्नीशियम (Magnesium): मैग्नीशियम एक महत्वपूर्ण वृहत मात्रिक पोषक तत्व है। यह तैलीय बीजों में अधिक मात्रा में पाया जाता है और संभवतः तेल निर्माण में सहायक होता है। मैग्नीशियम न्यूक्लिक अम्लों (DNA, RNA) के संश्लेषण से जुड़े कुछ एंजाइमों को सक्रिय करने में भी मदद करता है। पौधों के शुष्क भार का 0.5-0.7% मैग्नीशियम होता है। मैग्नीशियम राइबोसोम की दो उप-इकाइयों को आपस में जोड़ने में भी मदद करता है। यह क्लोरोफिल का मुख्य घटक है, जो प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है।

मैग्नीशियम की न्यूनता के लक्षण (Deficiency Symptoms of Magnesium):
1. पत्तियों में अंतरशिरीय हरिमाहीनता (Interveinal chlorosis) विकसित हो जाती है, जिसमें शिराओं के बीच का भाग पीला पड़ जाता है, जबकि शिराएं हरी रहती हैं।
2. एन्थोसायनिन वर्णक बनने के कारण पत्तियों पर लाल, पीले या नारंगी धब्बे दिखाई देने लगते हैं।
3. पौधों के तनों और पत्तियों पर ऊतकक्षयी धब्बे (necrotic spots) दिखाई देने लगते हैं।
4. पादप ऊतक संवर्धन प्रयोगों में मैग्नीशियम की अनुपस्थिति में भी हरिमाहीनता (Chlorosis) प्रदर्शित होती है।
In simple words: मैग्नीशियम एक ऐसा सूक्ष्म तत्व है जो पौधों को हरा रखने और तेल व डीएनए बनाने में मदद करता है। इसकी कमी से पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और लाल-नारंगी धब्बे दिखते हैं।

🎯 Exam Tip: मैग्नीशियम क्लोरोफिल का केंद्रीय परमाणु होने के कारण पौधों के हरे रंग और प्रकाश संश्लेषण की क्षमता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 8 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 8 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. वैज्ञानिक डाल्टन में किस खनिज तत्व को आवश्यक तत्व माना?
Answer: वैज्ञानिक डाल्टन ने सोडियम तत्व को पौधों के लिए एक आवश्यक तत्व माना था। उस समय, पौधों के लिए कौन से तत्व आवश्यक हैं, इस पर शोध चल रहा था।
In simple words: डाल्टन ने सोडियम को एक जरूरी तत्व माना था।

🎯 Exam Tip: यह एक ऐतिहासिक तथ्य है; आधुनिक विज्ञान में पौधों के लिए 17 अनिवार्य पोषक तत्व माने जाते हैं।

 

Question 2. पादप भस्म से आप क्या समझते हैं?
Answer: पादप भस्म वह राख है जो पौधों को बहुत ऊंचे तापमान पर जलाने के बाद बचती है। इसे पौधों के रासायनिक घटकों को जानने के लिए तैयार किया जाता है। इस भस्म में पौधों के अकार्बनिक खनिज तत्व होते हैं।
In simple words: पादप भस्म पौधों को जलाने के बाद बची हुई राख है, जिससे उनके खनिज तत्वों का पता चलता है।

🎯 Exam Tip: पादप भस्म विश्लेषण पौधों में खनिज तत्वों की कुल मात्रा का अनुमान लगाने में मदद करता है।

 

Question 3. पादप शरीर को आधार तत्व किन्हें कहा जाता है?
Answer: कार्बन (C), हाइड्रोजन (H) और ऑक्सीजन (O) को पादप शरीर के आधार तत्व कहा जाता है। ये तत्व कार्बोहाइड्रेट्स के मुख्य घटक होते हैं, जिनसे पौधों की कोशिका भित्ति का निर्माण होता है। ये पौधे के द्रव्यमान का एक बड़ा हिस्सा बनाते हैं।
In simple words: कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन पौधों के आधार तत्व हैं, क्योंकि वे कोशिका भित्ति और कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: ये तीनों तत्व हवा और पानी से प्राप्त होते हैं, न कि मिट्टी से, और पौधों के शुष्क भार का लगभग 95% बनाते हैं।

 

Question 4. हरे पादप कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन कहाँ से ग्रहण करते हैं?
Answer: हरे पौधे कार्बन को हवा से कार्बन डाइऑक्साइड \( (CO_2) \) के रूप में ग्रहण करते हैं। हाइड्रोजन को पानी \( (H_2O) \) से प्राप्त करते हैं, और ऑक्सीजन को पानी \( (H_2O) \) और हवा से ऑक्सीजन गैस \( (O_2) \) दोनों रूपों में ग्रहण करते हैं। ये तत्व प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: हरे पौधे कार्बन को हवा से \( CO_2 \) के रूप में, और हाइड्रोजन व ऑक्सीजन को पानी व हवा से लेते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके चीनी बनाई जाती है, और पानी ऑक्सीजन छोड़ता है।

 

Question 6. पोटैशियम की कमी से पादपों में कौन-सा असामान्य लक्षण दिखाई देता है?
Answer: पोटैशियम की कमी से पौधों में हरिमाहीनता (Chlorosis) और ऊतक क्षय (Necrosis) जैसे असामान्य लक्षण दिखाई देते हैं। पत्तियों के किनारे पीले या भूरे हो जाते हैं और वे मुड़ना शुरू कर देती हैं।
In simple words: पोटैशियम की कमी से पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और उनमें ऊतक मरने लगते हैं।

🎯 Exam Tip: पोटैशियम पौधों में पानी के संतुलन, स्टोमेटा के खुलने-बंद होने और एंजाइमों को सक्रिय करने में महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. मृदा से कैल्शियम किस रूप में पादपों द्वारा अवशोषित होता है?
Answer: कैल्शियम मिट्टी से पौधों द्वारा कैल्शियम द्विसंयोजक आयनों \( (Ca^{2+}) \) के रूप में अवशोषित होता है। यह तत्व कोशिका भित्ति की संरचना और कोशिका विभाजन के लिए आवश्यक है।
In simple words: पौधे कैल्शियम को \( Ca^{2+} \) आयन के रूप में मिट्टी से लेते हैं।

🎯 Exam Tip: कैल्शियम एक असंचरणशील तत्व है, इसलिए इसकी कमी के लक्षण सबसे पहले पौधे के युवा ऊतकों और नई पत्तियों पर दिखाई देते हैं।

 

Question 8. हरित लवक संश्लेषण के लिए किस तत्व की आवश्यकता होती है?
Answer: हरित लवक (Chloroplast) के संश्लेषण के लिए मैग्नीशियम (Mg) और लौह (Fe) जैसे तत्वों की आवश्यकता होती है। मैग्नीशियम क्लोरोफिल अणु का केंद्रीय घटक है, जबकि लौह इसके संश्लेषण के लिए आवश्यक एंजाइमों को सक्रिय करता है।
In simple words: हरित लवक बनाने के लिए मैग्नीशियम और आयरन जरूरी होते हैं।

🎯 Exam Tip: क्लोरोफिल एक जटिल अणु है जिसमें मैग्नीशियम केंद्र में होता है, और आयरन हालांकि क्लोरोफिल का घटक नहीं है, लेकिन इसके जैवसंश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. पादपों को सल्फर की आवश्यकता क्यों होती है?
Answer: पौधों को सल्फर की आवश्यकता कुछ महत्वपूर्ण एमिनो अम्लों, जैसे सिस्टीन और मेथियोनीन के संश्लेषण के लिए होती है। ये एमिनो अम्ल प्रोटीन का एक हिस्सा होते हैं। सल्फर कुछ विटामिनों और एंजाइमों का भी एक घटक है जो पौधों के विकास में मदद करते हैं।
In simple words: पौधों को सल्फर की जरूरत प्रोटीन बनाने वाले खास एमिनो एसिड्स के लिए होती है।

🎯 Exam Tip: सल्फर की कमी से पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और पौधे की वृद्धि रुक जाती है, खासकर नई पत्तियों पर लक्षण पहले दिखते हैं।

 

Question 10. पादपों में लौह किस रूप में मृदा से ग्रहण किया जाता है?
Answer: पौधे मिट्टी से लौह को फेरस आयन \( (Fe^{2+}) \) और फेरिक आयनों \( (Fe^{3+}) \) के रूप में ग्रहण करते हैं। लौह क्लोरोफिल संश्लेषण और इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: पौधे आयरन को \( Fe^{2+} \) और \( Fe^{3+} \) रूपों में मिट्टी से लेते हैं।

🎯 Exam Tip: पौधों द्वारा लौह के अवशोषण के लिए मिट्टी का pH महत्वपूर्ण होता है; अम्लीय मिट्टी में यह अधिक उपलब्ध होता है।

 

Question 11. प्रकाश संश्लेषण अभिक्रिया में जल अपघटन किस तत्व की उपस्थिति में होता है?
Answer: प्रकाश संश्लेषण अभिक्रिया में जल अपघटन की क्रिया मैंगनीज (Mn) की उपस्थिति में होती है। मैंगनीज पानी के अणुओं को तोड़कर ऑक्सीजन \( (O_2) \), प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन उत्पन्न करने में मदद करता है।
In simple words: मैंगनीज की मदद से प्रकाश संश्लेषण में पानी टूटता है।

🎯 Exam Tip: मैंगनीज प्रकाश तंत्र II में ऑक्सीजन विकसित करने वाले कॉम्प्लेक्स का एक आवश्यक घटक है।

 

Question 13. पादपों में ताँबे की कमी के कोई दो लक्षण लिखिए।
Answer:
(i) पत्तियों के शीर्ष पर हरिमाहीनता (Chlorosis) उत्पन्न हो जाती है, जिससे पत्तियों के ऊपरी सिरे पीले पड़ने लगते हैं।
(ii) इसकी कमी से नीबू जैसे पौधों में शीर्षारम्भी रोग (Die back disease) उत्पन्न हो जाता है, जिसमें शाखाओं के सिरे सूखने लगते हैं और मर जाते हैं। कॉपर कई एंजाइमों का सहकारक है जो पौधों के विकास में मदद करते हैं।
In simple words: कॉपर की कमी से पत्तियों का ऊपरी भाग पीला पड़ जाता है और नीबू जैसे पेड़ों में शाखाएं ऊपर से सूखने लगती हैं।

🎯 Exam Tip: कॉपर पौधों में श्वसन, प्रकाश संश्लेषण और लिग्निन संश्लेषण में शामिल कई एंजाइमों का एक घटक है।

 

Question 14. मॉलिब्डेनम का एक कार्य बताइए।
Answer: मॉलिब्डेनम का एक महत्वपूर्ण कार्य नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में दलहनी पादपों में एंजाइमों को सक्रिय करना है। यह नाइट्रोजिनेज एंजाइम का एक घटक है जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अमोनिया में बदलने के लिए जिम्मेदार होता है।
In simple words: मॉलिब्डेनम नाइट्रोजन स्थिरीकरण में मदद करता है, खासकर दाल वाले पौधों में।

🎯 Exam Tip: मोलिब्डेनम नाइट्रोजिनेज और नाइट्रेट रिडक्टेज एंजाइमों दोनों का एक महत्वपूर्ण सहकारक है।

 

Question 15. क्लोराइड आयनों का पादपों के लिए क्या महत्व है?
Answer: क्लोराइड आयनों \( (Cl^-) \) की उपस्थिति पौधों की मूल और पत्तियों की कोशिकाओं में कोशिका विभाजन को बढ़ा देती है। यह पानी के संतुलन और परासरण नियमन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। क्लोराइड प्रकाश संश्लेषण में जल अपघटन के लिए भी आवश्यक है।
In simple words: क्लोराइड आयन जड़ों और पत्तियों की कोशिकाओं को बढ़ने में मदद करते हैं और पानी का संतुलन बनाए रखते हैं।

🎯 Exam Tip: क्लोराइड आयन प्रकाश संश्लेषण के दौरान पानी के ऑक्सीकरण के लिए भी आवश्यक हैं।

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 8 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. वृहत् तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer:

वृहत् पोषक तत्वसूक्ष्म पोषक तत्व
1.पौधों को इनकी अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है (1-10 mg प्रति ग्राम शुष्क भार से अधिक)।ये पौधों द्वारा बहुत कम मात्रा में उपयोग किए जाते हैं (1-10 mg प्रति ग्राम शुष्क भार से कम)।
2.कुछ वृहत् पोषक तत्व कोशिकाओं के परासरण विभव को बनाए रखने में सहायता करते हैं।इनकी परासरण विभव बनाए रखने में कोई खास भूमिका नहीं होती है।

In simple words: वृहत पोषक तत्व पौधों को ज्यादा मात्रा में चाहिए होते हैं और वे परासरण में मदद करते हैं, जबकि सूक्ष्म पोषक तत्व कम मात्रा में चाहिए होते हैं और परासरण में उनकी सीधी भूमिका नहीं होती।

🎯 Exam Tip: उदाहरण के लिए, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम वृहत पोषक तत्व हैं, जबकि जिंक, कॉपर और मैंगनीज सूक्ष्म पोषक तत्व हैं।

 

Question 2. जल संवर्धन प्रयोग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: जल संवर्धन प्रयोग (Water Culture Experiment), जिसे हाइड्रोपोनिक्स (Hydroponics) भी कहते हैं, पौधों को उगाने की एक ऐसी विधि है जिसमें मिट्टी का उपयोग नहीं किया जाता है। इस विधि में पौधों की जड़ों को पोषक तत्वों से युक्त पानी के घोल में रखा जाता है। चूंकि घोल में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, इसलिए घोल में जड़ों के पास एक नली (Aerator) से ऑक्सीजन प्रवाहित की जाती है। सैक्स (1860), नॉप (1863) और होगलैण्ड (1938) जैसे वैज्ञानिकों ने इस विधि के लिए पोषण घोल निर्धारित किए हैं। यह तकनीक पौधों के पोषण संबंधी आवश्यकताओं का अध्ययन करने के लिए बहुत उपयोगी है।
In simple words: जल संवर्धन एक ऐसी तकनीक है जहाँ पौधों को मिट्टी के बजाय पोषक तत्वों वाले पानी में उगाया जाता है। इसमें ऑक्सीजन भी दी जाती है।

🎯 Exam Tip: यह विधि पोषक तत्वों की कमी के लक्षणों का अध्ययन करने और यह निर्धारित करने में मदद करती है कि कौन से तत्व पौधों के विकास के लिए आवश्यक हैं।

 

Question 3. अनिवार्य तत्वों को पादपों में उनके कार्य के आधार पर किस प्रकार वगर्गीकृत किया जाता है?
Answer: पौधों के अनिवार्य तत्वों को उनके कार्यों के आधार पर मुख्य रूप से चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:
1. संरचनात्मक तत्व: ये तत्व पौधों के विभिन्न जैव रसायनों जैसे कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, प्रोटीन, डीएनए, आरएनए आदि के रचनात्मक घटक होते हैं। उदाहरण: कार्बन (C), हाइड्रोजन (H), ऑक्सीजन (O) और नाइट्रोजन (N)। ये तत्व पौधों की मूल संरचना बनाते हैं।
2. ऊर्जा संबंधित तत्व: ये तत्व पौधों की ऊर्जा से संबंधित यौगिकों के घटक होते हैं। उदाहरण: एटीपी (ATP) में फॉस्फोरस (P) और क्लोरोफिल में मैग्नीशियम (Mg)। ये ऊर्जा स्थानांतरण और प्रकाश संश्लेषण में महत्वपूर्ण हैं।
3. एंजाइम सक्रियक: ये तत्व विभिन्न एंजाइमों के सक्रियक या निरोधक के रूप में काम करते हैं। उदाहरण: मैंगनीज (Mn), मैग्नीशियम (Mg), जिंक (Zn) और मोलिब्डेनम (Mo)। ये एंजाइमों को रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करने में मदद करते हैं।
4. परासरणी कार्यों का संतुलन करने वाले तत्व: ये तत्व पौधों में कोशिकाओं के परासरणी कार्यों का संतुलन बनाए रखते हैं। उदाहरण: पोटैशियम (K) और क्लोराइड (Cl)। ये तत्व कोशिका के अंदर और बाहर पानी के संतुलन को नियंत्रित करते हैं।
In simple words: पौधों के जरूरी तत्व चार तरह के होते हैं: शरीर बनाने वाले (जैसे कार्बन), ऊर्जा देने वाले (जैसे फॉस्फोरस), एंजाइम चलाने वाले (जैसे जिंक) और पानी का संतुलन बनाने वाले (जैसे पोटैशियम)।

🎯 Exam Tip: यह वर्गीकरण पौधों में प्रत्येक तत्व की विशिष्ट भूमिका को समझने में मदद करता है, जिससे पोषण संबंधी कमियों को प्रभावी ढंग से पहचाना जा सकता है।

 

Question 4. पादपों में नाइट्रोजन की न्यूनता के लक्षण लिखिए।
Answer: नाइट्रोजन की न्यूनता के लक्षण (Deficiency Symptoms of Nitrogen):
1. नाइट्रोजन (N) की कमी से पत्तियों में हरिमाहीनता (Chlorosis) हो जाती है, जिसका अर्थ है पर्णहरित का नष्ट होना। यह लक्षण पहले पुरानी पत्तियों में, और बाद में नई पत्तियों में भी दिखाई देता है।
2. पर्णहरित के विघटन के कारण पत्तियां गुलाबी रंग का एन्थोसायनिन वर्णक दिखने लगता है, जिससे पत्तियां गुलाबी हो जाती हैं।
3. पार्श्व कलिकाओं (Lateral buds) की प्रसुप्ति (dormancy) बढ़ जाती है, जिससे पौधा कम शाखाएं विकसित करता है।
In simple words: नाइट्रोजन की कमी से पुरानी पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, पत्तियां गुलाबी हो जाती हैं और पौधे की साइड की शाखाएं कम बढ़ती हैं।

🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन पौधों में प्रोटीन और न्यूक्लिक एसिड का प्रमुख घटक है, इसलिए इसकी कमी सीधे पौधे के विकास और क्लोरोफिल उत्पादन को प्रभावित करती है।

 

Question 6. पादपों में पोटैशियम (K) की न्यूनता के लक्षण लिखिए।
Answer: पोटैशियम की न्यूनता के लक्षण (Deficiency Symptoms of Potassium):
1. इस तत्व की कमी के लक्षण सबसे पहले परिपक्व (पुरानी) पत्तियों पर दिखाई देते हैं। पत्तियां कुर्बरित (Mottled) हो जाती हैं और हरिमाहीनता (Chlorosis) भी दिखती है।
2. तने की वृद्धि रुक जाती है और पौधा क्षुपाभ (Bushy) या झाड़ीदार हो जाता है।
3. पौधे की रोग प्रतिरोधी क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
In simple words: पोटैशियम की कमी से पुरानी पत्तियां पीली और धब्बेदार हो जाती हैं, पौधा छोटा और झाड़ीदार हो जाता है, और बीमारी से लड़ने की उसकी ताकत कम हो जाती है।

🎯 Exam Tip: पोटैशियम स्टोमेटा के खुलने और बंद होने को नियंत्रित करता है, इसलिए इसकी कमी से पौधों का जल संतुलन प्रभावित होता है।

 

Question 7. पादपों में मैग्नीशियम का महत्व स्पष्ट कीजिए तथा इसकी न्यूनता के लक्षण बताइए।
Answer:
मैग्नीशियम का महत्व: मैग्नीशियम मिट्टी में मुख्य रूप से कार्बोनेट \( (MgCO_3) \) और डोलोमाइट \( (MgCO_3.CaCO_3) \) के रूप में पाया जाता है। यह क्लोरोफिल का मुख्य घटक है, जो पत्तियों को हरा रखता है और हरिमाहीनता को रोकता है। मैग्नीशियम राइबोसोम की दो उप-इकाइयों को आपस में जोड़ने में भी मदद करता है। तैलीय बीजों में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे यह बीजों में तेल निर्माण में उपयोगी होता है। यह न्यूक्लिक अम्लों (DNA, RNA) के संश्लेषण से जुड़े कुछ एंजाइमों को सक्रिय करने के लिए भी आवश्यक है।

मैग्नीशियम की न्यूनता के लक्षण (Deficiency Symptoms of Magnesium):
1. पत्तियों में अंतराशिरीय हरिमाहीनता (Interveinal chlorosis) विकसित हो जाती है, जहां शिराओं के बीच का क्षेत्र पीला पड़ जाता है, जबकि शिराएं हरी रहती हैं।
2. एन्थोसायनिन वर्णक बनने के कारण पत्तियों पर लाल, पीले और नारंगी धब्बे दिखाई देने लगते हैं।
In simple words: मैग्नीशियम पौधों को हरा रखने और तेल व डीएनए बनाने के लिए बहुत जरूरी है। इसकी कमी से पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और उन पर लाल या नारंगी धब्बे दिखते हैं।

🎯 Exam Tip: मैग्नीशियम की कमी के लक्षण पुरानी पत्तियों पर पहले दिखते हैं क्योंकि यह एक संचरणशील तत्व है और पौधा इसे नई पत्तियों में स्थानांतरित कर देता है।

 

Question 8. पादपों में सल्फर की उपयोगिता समझाइए तथा इसकी न्यूनती के लक्षण लिखिए।
Answer: गंधक (Sulphur) मिट्टी में सल्फेट \( (SO_4^{2-}) \) के रूप में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त, वातावरण में सल्फर डाइऑक्साइड \( (SO_2) \) गैस के रूप में भी सल्फर उपस्थित होता है, जिसे पत्तियां अवशोषित कर सकती हैं। सल्फर कुछ महत्वपूर्ण अमीनो अम्लों जैसे सिस्टीन और मेथियोनीन का एक आवश्यक घटक है, जो प्रोटीन संश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण हैं। सल्फर कुछ विटामिनों (जैसे थायमिन, बायोटिन) और एंजाइमों का भी हिस्सा है। इसकी कमी से पौधे के विकास और प्रोटीन निर्माण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
In simple words: सल्फर पौधों को प्रोटीन बनाने वाले एमिनो एसिड्स के लिए चाहिए होता है, यह मिट्टी से सल्फेट के रूप में मिलता है।

🎯 Exam Tip: सल्फर की कमी के लक्षण नई पत्तियों पर पहले दिखाई देते हैं, जो नाइट्रोजन की कमी के विपरीत है।

 

Question 9. पादपों में मैग्नीज का महत्व समझाइए एवं इसकी न्यूनता के लक्षण लिखिए।
Answer: मैंगनीज (Mn) - यह तत्व मिट्टी में मुख्य रूप से मैंगनीज डाइऑक्साइड (\( MnO_2 \)) और मैंगनस आयन (\( Mn^{++} \)) के रूप में पौधों द्वारा अवशोषित होता है। यह श्वसन, नाइट्रोजन मेटाबॉलिज्म और प्रकाश संश्लेषण से जुड़े कई एंजाइमों को सक्रिय करता है। क्लोरोप्लास्ट के निर्माण में मैंगनीज की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रकाश संश्लेषण के दौरान पानी के टूटने और ऑक्सीजन (\( O_2 \)) उत्पादन से संबंधित एंजाइम का यह एक आवश्यक हिस्सा है। यह पौधों को सही से बढ़ने और भोजन बनाने में मदद करता है।
न्यूनता के लक्षण (Deficiency Symptoms):
1. पत्तियों में पीलापन (हरिमाहीनता) दिखाई देता है।
2. जड़ों का विकास रुक जाता है या धीमा हो जाता है।
3. मैंगनीज की कमी से पौधों में खास तरह की बीमारियाँ होती हैं। जैसे जई में ग्रे स्पिक (Grey Speek of Oats) और मटर में मार्श स्पॉट (Marsh spot of pea) जैसे रोग होते हैं।
In simple words: मैंगनीज पौधों के लिए बहुत जरूरी है, खासकर सांस लेने और खाना बनाने के लिए। इसकी कमी से पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं और पौधों में खास तरह की बीमारियाँ हो जाती हैं, जिससे वे ठीक से बढ़ नहीं पाते।

🎯 Exam Tip: मैंगनीज की भूमिका को उसके एंजाइम-सक्रियकरण कार्यों और प्रकाश संश्लेषण में जल के ऑक्सीकरण से जोड़कर समझाएँ, क्योंकि ये इसके मुख्य कार्य हैं।

 

Question 10. पौधों में बोरॉन की उपयोगिता लिखिए। इसकी न्यूनता के लक्षणों को सूचीबद्ध कीजिए।
Answer: बोरॉन (B) - यह तत्व जड़ों द्वारा बोरेट आयनों (\( BO_3^{3-} \); \( B_4O_7^{2-} \)) के रूप में अवशोषित होता है। मिट्टी में मौजूद कैल्शियम के साथ मिलकर यह कैल्शियम बोरेट बनाता है, जिसे जड़ें अवशोषित नहीं कर पातीं। इसलिए, ज्यादा कैल्शियम वाली मिट्टी में पौधों को बोरॉन कम मिलता है। बोरॉन का कार्बोहाइड्रेट के एक जगह से दूसरी जगह जाने, कोशिका झिल्ली के काम करने, परागकणों के अंकुरण और कोशिका विभाजन में खास महत्व है। यह पौधों में फूल और फल बनने के लिए बहुत जरूरी है।
न्यूनता के लक्षण (Deficiency Symptoms):
(स्रोत में बोरॉन की न्यूनता के लक्षण सूचीबद्ध नहीं हैं, केवल शीर्षक दिया गया है।)
In simple words: बोरॉन पौधों को ठीक से बढ़ने, खाना इधर-उधर ले जाने और नए फूल-फल बनाने में मदद करता है। यदि पौधों में बोरॉन कम हो, तो वे ये सब काम ठीक से नहीं कर पाते।

🎯 Exam Tip: बोरॉन की कमी से पत्तियों, फूलों और फलों के विकास पर सीधा असर पड़ता है। इसे हमेशा कैल्शियम की उपलब्धता के साथ संबंधित करके याद रखें।

 

Question 11. पादपों में जिंक को महत्व लिखिए तथा इसकी न्यूनता के प्रमुख लक्षणों का वर्णन कीजिए।
Answer: जिंक (Zn) - यह तत्व द्विसंयोजक (\( Zn^{++} \)bivalent) आयन के रूप में अवशोषित होता है। जिंक कई एंजाइमों, खासकर कार्बोक्सिलेज का एक महत्वपूर्ण घटक है, और फास्फोरस के अवशोषण को नियंत्रित करता है। पौधों के विकास हार्मोन ऑक्सिन (IAA) के निर्माण में भी इसकी खास भूमिका होती है। जिंक पौधों को तनाव से बचाने में भी मदद करता है।
न्यूनता के लक्षण (Deficiency Symptoms):
1. पत्तियों पर सफेद और सूखे धब्बे (श्वेत ऊतकक्षयी क्षेत्र) दिखाई देते हैं।
2. पौधा रुक जाता है या बौना रह जाता है।
3. पत्तियों का आकार छोटा हो जाता है और वे विकृत हो जाती हैं।
4. फ्लोएम में भी असामान्य वृद्धि (कुरचना) हो जाती है।
5. जिंक की कमी से होने वाला मुख्य रोग 'लघु पर्ण' (Little leaf) कहलाता है, जिसमें पत्तियाँ बहुत छोटी रह जाती हैं।
In simple words: जिंक पौधों के बढ़ने, एंजाइमों के काम करने और हार्मोन बनाने के लिए जरूरी है। इसकी कमी से पत्तियाँ धब्बेदार, छोटी और पौधा बौना हो जाता है।

🎯 Exam Tip: जिंक की कमी से होने वाला 'लघु पर्ण' रोग एक विशिष्ट लक्षण है। इसे पौधों के विकास हार्मोन ऑक्सिन से संबंधित करके याद रखना चाहिए।

 

Question 12. पादपों में कॉपर को अवशोषण, महत्व तथा न्यूनता लक्षण लिखिए।
Answer: ताँबा या कॉपर (Cu) - यह तत्व जड़ों द्वारा द्विसंयोजक क्यूप्रिक (\( Cu^{++} \)) या एकसंयोजक क्यूप्रस (\( Cu^{+} \)) आयन के रूप में अवशोषित होता है। ऑक्सीकरण-अपचयन (Oxidation-reduction) क्रियाओं में कॉपर इलेक्ट्रॉन वाहक का काम करता है। यह प्लास्टोसाइनिन और साइटोक्रोम ऑक्सीडेज का एक मुख्य घटक है, जो प्रकाश संश्लेषण में इलेक्ट्रॉन को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में मदद करता है। कॉपर पौधों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है।
न्यूनता के लक्षण (Deficiency Symptoms):
1. पत्तियों का मुरझाना, मुड़ना और ऊपरी सिरे का सफेद पड़ना।
2. नींबू (Citrus) जैसे पौधों में इसकी कमी से शीर्षारंभी रोग (Die-back disease) हो जाता है, जिसमें शाखाओं के सिरे सूखने लगते हैं।
In simple words: कॉपर पौधों को ऊर्जा बनाने और बीमारियों से बचाने में मदद करता है। इसकी कमी से पत्तियाँ मुरझा जाती हैं और पेड़ के ऊपरी हिस्से सूखने लगते हैं।

🎯 Exam Tip: कॉपर की भूमिका को प्रकाश संश्लेषण में इलेक्ट्रॉन परिवहन और सिट्रस पौधों में 'डाई-बैक' रोग से जोड़कर याद रखें।

 

Question 13. पादपों में मॉलिब्डेनम का महत्व तथा न्यूनती लक्षण लिखिए।
Answer: मॉलिब्डेनम (Mo) - यह तत्व मिट्टी में बहुत कम मात्रा में पाया जाता है और पौधे इसे मॉलिब्डेनम ऑक्साइड (\( MoO_2 \)) के रूप में अवशोषित करते हैं। यह एंजाइम नाइट्रोजिनेज और नाइट्रेट रिडक्टेज का मुख्य कारक है जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण (वायुमंडलीय नाइट्रोजन को उपयोगी रूप में बदलने) में मदद करते हैं। मॉलिब्डेनम दलहनी फसलों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
न्यूनता के लक्षण (Deficiency Symptoms):
1. पौधों में नीचे की पत्तियों पर धब्बे (कर्बरण या Mottling) दिखना इस तत्व की कमी का एक मुख्य लक्षण है।
2. पत्तियों में पीलापन (हरिमाहीनता) और फूल आने में देरी होती है।
In simple words: मॉलिब्डेनम पौधों को मिट्टी से नाइट्रोजन लेने और उसे इस्तेमाल करने में मदद करता है। इसकी कमी से पत्तियाँ धब्बेदार और पीली पड़ जाती हैं, और फूल भी देर से आते हैं।

🎯 Exam Tip: मॉलिब्डेनम की भूमिका को नाइट्रोजन चयापचय और दलहनी पौधों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण से जोड़कर याद रखें।

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 8 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. हाइड्रोपोनिक्स या जल संवर्धन तकनीक का वर्णन कीजिए। वर्मीकुलाइट के प्रमुख गुणों को सूचीबद्ध कीजिए।
Answer: हाइड्रोपोनिक्स अथवा जल संवर्धन (Hydroponics or Water Culture) - ये वे सभी तरीके हैं, जिनमें पौधों को उगाने के लिए मिट्टी की जगह पोषक तत्वों के घोल का इस्तेमाल किया जाता है। हाइड्रोपोनिक्स एक ग्रीक शब्द है, जिसका मतलब है "पानी के साथ काम करना" (Working with water)। पहले पौधों को उगाने के लिए बालू का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब वर्मीकुलाइट (Vermiculite) जैसे माध्यम का उपयोग किया जा रहा है। यह तकनीक किसानों को कम जगह में अधिक फसल उगाने में मदद करती है।
वर्मीकुलाइट एक खनिज पदार्थ है जो प्राकृतिक रूप से पृथ्वी में मिलता है। इस खनिज को विशेष भट्टियों में 2000 डिग्री तक गर्म करके जो उत्पाद बनाते हैं, उसका उपयोग पौधों को उगाने के माध्यम के रूप में किया जाता है।
वर्मीकुलाइट के गुण (Properties of Vermiculite):
1. यह हल्का पदार्थ होता है।
2. यह रासायनिक रूप से अक्रियाशील (Chemical inactive) पदार्थ है, मतलब यह अन्य रसायनों से क्रिया नहीं करता।
3. यह एक बंध्य (Sterile) माध्यम है, जिसमें कोई कीट या खरपतवार नहीं उगते।
4. मिट्टी की तुलना में इसकी पानी सोखने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है।
In simple words: हाइड्रोपोनिक्स बिना मिट्टी के पौधों को पानी में पोषक तत्व देकर उगाने का तरीका है। वर्मीकुलाइट एक हल्का और साफ खनिज है, जो पौधों को उगाने में मदद करता है क्योंकि यह पानी को अच्छे से सोखता है और उसमें कोई कीटाणु नहीं होते।

🎯 Exam Tip: हाइड्रोपोनिक्स की परिभाषा और वर्मीकुलाइट के गुणों पर ध्यान दें, खासकर मिट्टी रहित खेती और इसकी जल धारण क्षमता पर।

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