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Detailed Chapter 6 पादपों में जल अवशोषण व रसारोहण RBSE Solutions for Class 12 Biology
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Class 12 Biology Chapter 6 पादपों में जल अवशोषण व रसारोहण RBSE Solutions PDF
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. मृदा से पौधों को सर्व सुलभ जल है –
(अ) केशिका जले
(ब) अपवाहित जल
(स) आर्द्रताग्राही जल
(द) गुरुत्वीय जल
Answer: (अ) केशिका जल
In simple words: पौधों को मिट्टी से सबसे आसानी से जो पानी मिलता है, वह केशिका जल कहलाता है। यह पानी मिट्टी के छोटे-छोटे छिद्रों में जमा होता है, जिससे पौधे इसे आसानी से खींच सकते हैं।
🎯 Exam Tip: पौधों द्वारा आसानी से अवशोषित होने वाले जल के प्रकार को याद रखें, क्योंकि यह उनके विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है।
प्रश्न 3. पादपों में अवशोषित जल का जाइलम ऊतक तक पहुँचने का कौन-सा मार्ग सर्वाधिक प्रतिरोध वाला है –
(अ) एपोप्लास्ट
(ब) सिमप्लास्ट
(स) पारकला पथ
(द) रसधानीय पथ
Answer: (ब) सिमप्लास्ट
In simple words: सिमप्लास्ट मार्ग वह रास्ता है जहाँ पानी एक कोशिका से दूसरी कोशिका में सीधे जीवद्रव्य के माध्यम से जाता है, जिसमें ज़्यादा ऊर्जा और प्रतिरोध लगता है। यह एपोप्लास्ट मार्ग से धीमा होता है।
🎯 Exam Tip: जल परिवहन के दोनों मुख्य मार्गों, एपोप्लास्ट और सिमप्लास्ट के बीच के अंतर को समझें, विशेष रूप से प्रतिरोध और गति के संदर्भ में।
प्रश्न 4. रसारोहण का ससंजन वाद किसने प्रस्तुत किया -
(अ) गोडलेवस्की
(ब) जे.सी. बोस
(स) स्ट्रासबर्गर
(द) डिक्सन तथा जौली
Answer: (द) डिक्सन तथा जौली
In simple words: डिक्सन और जौली ने यह बताया कि पौधों में पानी पत्तियों से जड़ों तक एक लगातार धागे की तरह ऊपर चढ़ता है, जिसे ससंजन-तनाव सिद्धांत कहते हैं। यह सिद्धांत वाष्पोत्सर्जन के खिंचाव बल पर आधारित है।
🎯 Exam Tip: रसारोहण के विभिन्न सिद्धांतों और उनके प्रतिपादकों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर डिक्सन और जौली के ससंजन-तनाव सिद्धांत को।
प्रश्न 5. पादपों में रसारोहण के दौरान जल किस ऊतक से ऊपर चढ़ता है -
(अ) कॉट्रेक्स
(ब) वाहिनिकाएँ
(स) वाहिकाएँ
(द) वाहिकाएँ तथा वाहिनिकाएँ दोनों
Answer: (द) वाहिकाएँ तथा वाहिनिकाएँ दोनों
In simple words: पौधों में पानी ऊपर चढ़ाने का काम जाइलम ऊतक के दो खास हिस्से करते हैं: वाहिकाएँ और वाहिनिकाएँ। ये दोनों मिलकर एक पाइपलाइन जैसा काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: जाइलम ऊतक के घटक (वाहिकाएँ और वाहिनिकाएँ) और रसारोहण में उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से समझें।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 2. केशिका जल क्या है?
Answer: केशिका जल (Capillary water) वह जल होता है जो मिट्टी के कणों के बीच बहुत पतली केशिकाओं में पाया जाता है। पौधे इस जल को आसानी से मिट्टी से सोख लेते हैं। यह जल पौधों के लिए सबसे महत्वपूर्ण और सुलभ जल स्रोत है।
In simple words: केशिका जल वह पानी है जो मिट्टी के छोटे-छोटे छेदों में होता है और पौधे इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: केशिका जल की परिभाषा और पौधों के लिए इसकी उपलब्धता को याद रखें, क्योंकि यह मृदा जल का सबसे महत्वपूर्ण रूप है।
प्रश्न 3. मूलरोम क्या है?
Answer: मूलरोम (Root hairs) जड़ के दीर्घाकरण क्षेत्र के ठीक पीछे पाए जाने वाले धागे जैसी, एकल कोशिका वाली संरचनाएँ होती हैं। ये पौधों के मुख्य जल अवशोषक अंग होते हैं, जो मिट्टी से पानी और खनिज लवण सोखते हैं।
In simple words: मूलरोम जड़ों पर छोटे-छोटे धागे होते हैं जो मिट्टी से पानी और खाने के तत्व सोखते हैं।
🎯 Exam Tip: मूलरोम की संरचना (एककोशिकीय, धागेनुमा) और उनके कार्य (जल अवशोषण) को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।
प्रश्न 4. जे. सी. बोस में किस सिद्धान्त पर कार्य किया?
Answer: सर जे. सी. बोस ने रसारोहण के लिए स्पंदन सिद्धान्त (Pulsation theory) पर काम किया था। इस सिद्धांत के अनुसार, पौधों के तने में मौजूद जीवित कोशिकाएँ एक खास लय में स्पंदित होती हैं, जिससे पानी ऊपर की ओर बढ़ता है।
In simple words: जे. सी. बोस ने कहा कि पौधों में पानी ऊपर जाने के लिए उनकी कोशिकाएँ धड़कती हैं।
🎯 Exam Tip: जे. सी. बोस द्वारा प्रतिपादित स्पंदन सिद्धान्त और रसारोहण में इसकी भूमिका को याद रखें।
प्रश्न 5. डिक्सन तथा जौली के सिद्धान्त का नाम लिखिए।
Answer: डिक्सन तथा जौली के सिद्धांत को ससंजन तनाव सिद्धान्त (Cohesion tension principle) या वाष्पोत्सर्जनाकर्षण सिद्धान्त (Transpirational pull theory) कहते हैं। यह सिद्धांत बताता है कि वाष्पोत्सर्जन के कारण पत्तियों से पानी का खिंचाव होता है, जिससे पानी का एक सतत स्तंभ ऊपर चढ़ता है।
In simple words: डिक्सन और जौली का सिद्धांत कहता है कि वाष्पोत्सर्जन के खिंचाव से पानी पौधों में ऊपर चढ़ता है।
🎯 Exam Tip: डिक्सन तथा जौली के ससंजन-तनाव सिद्धांत का पूरा नाम और इसका मुख्य विचार याद रखें।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. पाश्र्वीय जल प्रवाह के मार्गों का चित्र बनाइए।
Answer: पादप कोशिकाओं में जल संचलन के तीन प्रमुख मार्ग नीचे दिए गए चित्र में दर्शाए गए हैं:
In simple words: पौधे के अंदर पानी अलग-अलग रास्तों से एक जगह से दूसरी जगह जाता है। इन रास्तों में कोशिका की दीवारें, कोशिका के अंदर का तरल (जीवद्रव्य) और बड़ी खाली जगह (रिक्तिका) शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: पादप कोशिकाओं में जल संचलन के तीनों मार्गों (एपोप्लास्ट, सिमप्लास्ट, रिक्तिकीय) का चित्र स्पष्ट और सही लेबल के साथ बनाना सुनिश्चित करें।
प्रश्न 2. मूल के विभिन्न अंगों के नाम लिखकर जल अवशोषण करने वाले अंग का वर्णन कीजिए।
Answer: मूल (जड़) के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं:
1. मूल गोप (Root cap): यह जड़ का सबसे ऊपरी भाग होता है जो बढ़ते हुए जड़ के सिरे को मिट्टी में घर्षण से बचाता है।
2. मूल शीर्ष (Root apex): यह विभाजनशील कोशिकाओं का क्षेत्र है जहाँ जड़ की वृद्धि होती है।
3. दीर्घाकरण क्षेत्र (Region of elongation): यह मूल शीर्ष के ठीक पीछे होता है और यहाँ की कोशिकाओं के आकार में वृद्धि होने से जड़ की लंबाई बढ़ती है।
4. मूलरोम क्षेत्र (Root hair zone): यह दीर्घाकरण क्षेत्र के ठीक पीछे स्थित होता है और इसमें हजारों की संख्या में मूलरोम (Root hairs) पाए जाते हैं। यही क्षेत्र जल अवशोषण का मुख्य कार्य करता है।
5. परिपक्वन अथवा प्रौढ क्षेत्र (Region of maturation): यह जड़ का परिपक्व भाग होता है। इस क्षेत्र की कोशिकाएँ लिग्नीकरण (lignification) और सुबेरिनीकरण (suberization) के कारण जल अवशोषण का कार्य कम करती हैं।
पौधे का जल अवशोषक अंग मुख्य रूप से मूलरोम (Root hairs) होते हैं। मूलरोम क्षेत्र दीर्घाकरण क्षेत्र के पीछे स्थित होता है, जिसमें अनगिनत मूलरोम होते हैं। प्रत्येक मूलरोम एक एकल कोशिका से बना होता है और मिट्टी से पानी तथा खनिज लवण सोखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: जड़ के कई हिस्से होते हैं जैसे मूल गोप, मूल शीर्ष, दीर्घाकरण क्षेत्र, मूलरोम क्षेत्र और परिपक्वन क्षेत्र। इनमें से मूलरोम जल को सोखने का मुख्य काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: जड़ के प्रत्येक क्षेत्र के नाम और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से लिखें, विशेष रूप से मूलरोम क्षेत्र की जल अवशोषण में भूमिका पर ध्यान दें।
प्रश्न 3. जलावशोषण की सक्रिय विधि का वर्णन कीजिए।
Answer: सक्रिय जल अवशोषण की क्रियाविधि (Mechanism of Active Water Absorption) वह प्रक्रिया है जिसमें कुछ पौधों में पानी का अवशोषण जड़ों की सक्रियता या जड़ों में उत्पन्न धनात्मक बलों (positive forces) के कारण होता है। यह क्रिया आमतौर पर तब होती है जब वाष्पोत्सर्जन (पानी का वाष्प के रूप में पत्तियों से निकलना) की दर बहुत कम होती है या बिल्कुल नहीं होती है। इस प्रक्रिया में, जड़ों के जाइलम (xylem) में मौजूद पानी के स्तंभ में एक धनात्मक बल उत्पन्न होता है जिसे मूल दाब (Root pressure) कहते हैं। यह दाब जड़ों को मिट्टी के पानी को अंदर खींचने के लिए मजबूर करता है, यानी अवशोषित करता है। सक्रिय जल अवशोषण में ऊर्जा (ATP) की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया पौधों को पानी ऊपर खींचने में मदद करती है, खासकर जब वाष्पोत्सर्जन का खिंचाव कम होता है।
In simple words: सक्रिय जल अवशोषण में पौधे की जड़ें खुद ऊर्जा का इस्तेमाल करके पानी सोखती हैं। यह तब होता है जब पौधों से पानी भाप बनकर कम निकलता है।
🎯 Exam Tip: सक्रिय जल अवशोषण की परिभाषा, इसकी क्रियाविधि, और इसमें ऊर्जा (ATP) की आवश्यकता तथा मूल दाब की भूमिका पर जोर दें।
प्रश्न 4. जल अवशोषण को प्रभावित करने वाले किन्हीं दो कारकों पर प्रकाश डालिए।
Answer: जल अवशोषण को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Water Absorption) जल अवशोषण की दर को कई कारक प्रभावित करते हैं:
1. प्राप्य मृदा जल (Available soil water): मिट्टी में सभी प्रकार का जल पौधों को उपलब्ध नहीं होता है। मुख्य रूप से केशिका जल (Capillary water) ही पौधों को मिलता है। सामान्य अवशोषण के लिए मिट्टी में जल की क्षेत्र क्षमता (Field capacity) या जलधारण क्षमता (Water holding capacity) और स्थायी म्लानि प्रतिशतता (Permanent wilting percentage) के बीच की स्थिति सबसे अच्छी होती है।
2. मृदा वातन (Soil aeration): अच्छी वातन वाली मिट्टी, जैसे दोमट मिट्टी से, पानी का अवशोषण पर्याप्त मात्रा में होता है। लेकिन जिस मिट्टी में पानी भरा होता है (जलाक्रांत), वहाँ जल अवशोषण बहुत कम या शून्य हो जाता है, क्योंकि ऑक्सीजन की कमी जड़ों की क्रिया को रोक देती है।
3. मृदा का तापमान (Soil temperature): मिट्टी के सही तापमान (20°C से 30°C के बीच) पर सबसे ज़्यादा जल अवशोषण होता है। जब तापमान 30°C से ज़्यादा या 20°C से कम होता है, तो जल अवशोषण की दर कम हो जाती है।
4. मृदा विलयन की सान्द्रता (Concentration of soil solution): मिट्टी में खनिज लवणों की अधिकता से मृदा विलयन की सान्द्रता बढ़ जाती है। इस स्थिति में जल अवशोषण धीमा हो जाता है, क्योंकि पानी के अणुओं की गति धीमी हो जाती है। इसकी तुलना में, पतले मृदा विलयन वाली मिट्टियों में जल अवशोषण की दर तेज़ होती है।
In simple words: पौधे कितनी तेज़ी से पानी सोखते हैं, यह कई बातों पर निर्भर करता है। इसमें मिट्टी में कितना पानी है, मिट्टी में हवा कितनी है, मिट्टी कितनी गर्म है, और मिट्टी के पानी में कितना नमक घुला है, ये सब शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: जल अवशोषण को प्रभावित करने वाले कारकों को बिंदुवार समझाएँ और प्रत्येक कारक का जल अवशोषण पर प्रभाव स्पष्ट करें।
प्रश्न 5. रसारोहण को परिभाषित कीजिए।
Answer: रसारोहण (Ascent of sap) वह प्रक्रिया है जिसमें मिट्टी से मूलरोमों द्वारा अवशोषित पानी पौधों के सबसे ऊपरी हिस्सों (जैसे पत्तियों और तने के शीर्ष) तक एक पतले विलयन के रूप में पहुँचता है। जल के इस ऊपर की ओर के स्थानांतरण को रसारोहण कहते हैं। यह प्रक्रिया पौधों में पानी और खनिज लवणों के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: रसारोहण का मतलब है कि जड़ों से पानी और उसमें घुले हुए पोषक तत्व पौधे के ऊपर के सभी हिस्सों तक कैसे पहुँचते हैं।
🎯 Exam Tip: रसारोहण की परिभाषा को सटीक शब्दों में लिखें, जिसमें जल और खनिज लवणों के ऊपर की ओर परिवहन की प्रक्रिया शामिल हो।
प्रश्न 6. रसारोहण के सम्बन्ध में प्रस्तुत वादों को कितने वर्गों में बाँटा जाता है। उनके नाम लिखिए।
Answer: रसारोहण के संबंध में प्रस्तुत वादों (सिद्धांतों) को मुख्य रूप से तीन वर्गों में बाँटा जाता है:
1. जैव बल सिद्धान्त (Vital force theory): इस सिद्धांत के अनुसार रसारोहण एक जैविक क्रिया है जो पौधों की जीवित कोशिकाओं की गतिविधि पर निर्भर करती है।
2. मूल दाब का सिद्धान्त (Root pressure theory): यह सिद्धांत बताता है कि जड़ों में उत्पन्न होने वाले धनात्मक दाब के कारण पानी ऊपर चढ़ता है।
3. भौतिक बल सिद्धान्त (Physical force theories): इस सिद्धांत के अनुसार पानी के भौतिक गुणों (जैसे ससंजन और आसंजन) और वाष्पोत्सर्जन खिंचाव के कारण पानी ऊपर चढ़ता है। यह सबसे मान्य सिद्धांत है।
In simple words: रसारोहण को समझने के लिए तीन मुख्य तरह के सिद्धांत हैं: पहला जैविक ताकत की बात करता है, दूसरा जड़ों के दबाव की बात करता है, और तीसरा पानी के भौतिक गुणों और पत्तियों से होने वाले खिंचाव की बात करता है।
🎯 Exam Tip: रसारोहण के तीनों प्रमुख सिद्धांतों के नाम और उनके मुख्य विचारों को संक्षेप में याद रखें।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. पौधों द्वारा जल अवशोषण की क्रिया पर सारगर्भित लेख लिखिए।
Answer: पौधे के जल अवशोषक अंग (Water Absorbing Organs of Plants): निचले श्रेणी के पौधों, जैसे शैवाल (Algae) और कवक (Fungi) में पानी सोखने के लिए कोई खास अंग नहीं होते हैं। उनके पूरे शरीर की कोशिकाएँ पानी और खनिज लवण सोखती हैं। ब्रायोफाइट्स में, पानी का अवशोषण मूलाभासों (Rizoids) द्वारा होता है। उच्च श्रेणी के पौधों में, पानी सोखने के लिए एक अच्छी तरह से विकसित जड़ प्रणाली (Root system) पाई जाती है।
जड़ की पूरी सतह से पानी और खनिज लवण नहीं सोखे जाते हैं। स्थलीय पौधों में केशिका मृदा जल (Capillary soil water) का अवशोषण जड़ की बाहरी त्वचा (Epidermis) में मौजूद एककोशिकीय मूलरोम (Root hair) द्वारा होता है। जड़ के दो मुख्य भाग (क्षेत्र) होते हैं – (i) तरुण क्षेत्र और (ii) परिपक्व क्षेत्र।
जल अवशोषण का काम जड़ के तरुण क्षेत्र से होता है क्योंकि परिपक्व क्षेत्र की कोशिकाओं में लिग्नीकरण (Lignification) और सुबेरिनीकरण (Suberisation) के कारण उनकी दीवारें पानी के लिए अपारगम्य (impermeable) हो जाती हैं। जड़ के तरुण क्षेत्र को आगे पाँच भागों में बांटा गया है:
1. मूल गोप (Root cap): यह जड़ का सबसे ऊपरी भाग है जो बढ़ते हुए जड़ के सिरे को सुरक्षा देता है।
2. मूल शीर्ष (Root apex): यह जड़ का उप-अंतिम क्षेत्र है जहाँ की कोशिकाएँ लगातार विभाजित होती हैं। यह कोशिका विभाजन का क्षेत्र कहलाता है और इसी से जड़ की वृद्धि होती है।
3. दीर्घाकरण क्षेत्र (Region of elongation): यह मूल शीर्ष के ठीक पीछे स्थित होता है। इस क्षेत्र की कोशिकाओं की वृद्धि के कारण जड़ की लंबाई बढ़ती है।
4. मूलरोम क्षेत्र (Root hairs Region): यह दीर्घाकरण क्षेत्र के पीछे स्थित होता है। इस क्षेत्र में हजारों की संख्या में मूलरोम (Root hairs) पाए जाते हैं। जड़ का यह भाग जल अवशोषण का मुख्य भाग होता है।
5. परिपक्वन अथवा प्रौढ़ क्षेत्र (Region of Maturation): यह जड़ का परिपक्व भाग होता है। कोशिकाओं के लिग्नीकरण (Lignification) और सुबेरिनीकरण (Suberization) के कारण यह क्षेत्र जल अवशोषण का कार्य कम करता है।
In simple words: पौधे पानी को अपनी जड़ों से सोखते हैं। जड़ों के छोटे-छोटे बालों जैसे मूलरोम होते हैं जो मिट्टी से पानी और जरूरी पोषक तत्व लेते हैं। जड़ में कई हिस्से होते हैं जो इस काम में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: पौधों में जल अवशोषण की प्रक्रिया का वर्णन करते समय जड़ की संरचना और मूलरोम की भूमिका को विस्तार से समझाएँ और चित्र बनाना न भूलें।
प्रश्न 2. वृक्षों में रसारोहण क्रिया का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: रसारोहण की क्रियाविधि (Mechanism of Ascent of Sap): छोटे पौधों में पानी ऊपर चढ़ाने की समस्या नहीं होती है, लेकिन कई मीटर ऊँचे पेड़ों में यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल होती है। पेड़ों में रसारोहण की क्रियाविधि को समझाने के लिए कई सिद्धांत दिए गए हैं, जिन्हें तीन वर्गों में बांटा गया है:
1. जैव बल सिद्धान्त (Vital force theory)
2. मूल दाब का सिद्धान्त (Root pressure theory)
3. भौतिक बल सिद्धान्त (Physical force theory)
1. जैव बल सिद्धान्त (Vital force theory): इस सिद्धांत के अनुसार रसारोहण एक जैविक क्रिया (Vital activity) है। पौधों में रसारोहण तने की जीवित कोशिकाओं में होने वाली क्रियाओं के कारण उत्पन्न जैव बलों (Vital forces) द्वारा होता है। इस संबंध में मुख्य वैज्ञानिकों के विचार इस प्रकार हैं:
गोडलेवस्की (Godlewski 1884) का रिले पम्प सिद्धान्त (Relay pump theory): इसके अनुसार जाइलम मृदूतक (Xylem parenchyma) और मज्जा रश्मियों (Medullary rays) की जीवित कोशिकाओं के परासरण दाब में नियमित बदलाव होते रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पानी ऊपर चढ़ता है।
सर जे.सी. बोस (Sir J.C. Bose, 1923) का स्पंदन सिद्धान्त (Pulsation theory): इनके अनुसार पौधों में रसारोहण तने के वल्कुट (Cortex) की सबसे अंदरूनी कोशिकाओं में, जो अन्तस्त्वचा के संपर्क में होती हैं, नियमित लयबद्ध स्पंदन (Rhythmic pulsation) के कारण होता है। उन्होंने अपना प्रयोग भारतीय टेलीग्राफ पादप (Desmodium gyrans) पर किया था।
2. मूल दाब सिद्धान्त (Root pressure theory): इस सिद्धांत को प्रीस्टले (Priestley) ने दिया था। पैरेन्काइमी कोशिकाओं की कोशिका भित्ति लचीली होती है। इन कोशिकाओं में पानी या विलयन के प्रवेश से उनकी कोशिका भित्ति में तनाव उत्पन्न होता है और वह अपनी सामान्य स्थिति में आने की कोशिश करती है। इस पूरी प्रक्रिया में कोशिका में मौजूद द्रव्य पर धनात्मक दबाव पड़ता है, जिससे कोशिका से कुछ मात्रा में द्रव्य निकलकर वाहिकाओं (Vessels) में आ जाता है। इस द्रव्य के कारण वाहिकीय तत्वों में उत्पन्न द्रवस्थैतिक दाब को मूल दाब (Root pressure) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, जाइलम वाहिकाओं के रस में पाया जाने वाला धनात्मक दाब मूल दाब कहलाता है।
मूलदाब को मैनोमीटर (Manometer) द्वारा मापा जाता है। किसी भी पौधे में इसका मान 2 वायुमंडल से ज़्यादा नहीं पाया गया है। 2 वायुमंडल दाब पौधों में पानी को लगभग 20 मीटर तक चढ़ा सकता है, लेकिन ऊँचे लकड़ी वाले पौधों के लिए 12 वायुमंडलीय मूल दाब की ज़रूरत होती है। किसी भी पौधे में इतना ज़्यादा मूल दाब कभी नहीं देखा गया। इसलिए इस सिद्धांत का महत्व सीमित है। साथ ही, मूल दाब सभी पौधों में नहीं पाया जाता है, खासकर अनावृतबीजी (Gymnosperm) पौधों में मूलदाब नहीं होता है।
3. भौतिक बल सिद्धान्त (Physical force theory): यह रसारोहण के सभी सिद्धांतों में सबसे मान्य सिद्धांत है। डिक्सन तथा जौली का ससंजन तनाव सिद्धान्त (Cohesion tension principle) या वाष्पोत्सर्जनाकर्षण या वाष्पोत्सर्जन खिंचाव सिद्धान्त इसके प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:
1. पौधों में जड़ से लेकर पत्तियों तक पानी का एक लगातार स्तंभ (Hydrostatic system) होता है। यह स्तंभ अटूट रहता है।
2. वाष्पोत्सर्जन से पानी की हानि होने के कारण पत्तियों की शिराओं में पानी के स्तंभ में खिंचाव उत्पन्न होता है। यह खिंचाव वाष्पोत्सर्जन खिंचाव (Transpirational pull) कहलाता है।
3. पानी के अणुओं के बीच ससंजन बल (Cohesion force) होता है, जिसका मान 45-207 वायुमंडल तक हो सकता है। इस बल के कारण वाष्पोत्सर्जन खिंचाव से पानी का स्तंभ टूटता नहीं है, बल्कि ऊपर की ओर लगातार खिंचता चला जाता है।
4. डिक्सन तथा जौली के सिद्धांत के अनुसार, वाष्पोत्सर्जन से उत्पन्न तनाव और पानी के अणुओं के बीच मौजूद ससंजन बल के कारण पानी को जड़ से शीर्ष तक निष्क्रिय रूप से (Passively) खींचा जाता है। इस काम में न तो किसी प्रकार की उपापचयी ऊर्जा (Metabolic energy) खर्च होती है और न ही जीवित कोशिकाओं का कोई योगदान होता है। रसारोहण पूरी तरह से भौतिक बलों द्वारा होता है।
5. इस सिद्धांत के समर्थन में कई सबूत दिए गए हैं, जैसे कि वाष्पोत्सर्जन की दर सीधे रसारोहण से जुड़ी होती है और दिन के समय पौधे के तने और शाखाओं में पानी का स्तंभ तनाव की स्थिति में होता है। वर्तमान में, रसारोहण को समझने के लिए यह सिद्धांत सबसे मान्य है। इस विस्तृत व्याख्या से पौधों में पानी के ऊपर चढ़ने की जटिल प्रक्रिया को समझना आसान हो जाता है।
In simple words: ऊँचे पेड़ों में पानी ऊपर चढ़ना एक जटिल प्रक्रिया है। इसके लिए तीन मुख्य सिद्धांत दिए गए हैं: जैव बल, मूल दाब और भौतिक बल। भौतिक बल सिद्धांत सबसे ज़्यादा माना जाता है, जो कहता है कि पत्तियों से पानी के भाप बनकर उड़ने (वाष्पोत्सर्जन) से एक खिंचाव पैदा होता है, जिससे पानी लगातार ऊपर आता है।
🎯 Exam Tip: रसारोहण के तीनों प्रमुख सिद्धांतों (जैव बल, मूल दाब, भौतिक बल) का विस्तृत वर्णन करें, उनके मुख्य बिंदुओं और संबंधित वैज्ञानिकों के नाम शामिल करें। चित्र की सहायता से स्पष्टीकरण दें।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. स्थलीय पादप मृदा में उपस्थित किस प्रकार के जल का अवशोषण कर पाते हैं?
Answer: स्थलीय पादप मृदा में उपस्थित केशिकीय जल का ही अवशोषण कर पाते हैं। यह जल मिट्टी के कणों के बीच पतली केशिकाओं में मौजूद होता है, जिसे पौधे अपनी जड़ों के माध्यम से आसानी से खींच लेते हैं।
In simple words: जमीन पर उगने वाले पौधे मिट्टी में मौजूद केशिका जल को सोखते हैं।
🎯 Exam Tip: स्थलीय पौधों द्वारा अवशोषित किए जाने वाले मृदा जल के विशेष प्रकार का उल्लेख करें।
प्रश्न 2. जड़ का कौन-सा अंग मृदा से जल अवशोषित करता है?
Answer: जड़ का मूलरोम (Root hairs) नामक अंग मृदा से जल अवशोषित करता है। ये छोटे, धागे जैसे विस्तार होते हैं जो जड़ की सतह को बढ़ाते हैं, जिससे पानी और खनिज लवणों का अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से होता है।
In simple words: जड़ के मूलरोम मिट्टी से पानी सोखते हैं।
🎯 Exam Tip: जल अवशोषण के लिए जड़ के प्राथमिक अंग का नाम सही ढंग से पहचानें।
प्रश्न 3. जल के लम्बी दूरी के परिवहन से क्या अभिप्राय है?
Answer: जल के लंबी दूरी के परिवहन से अभिप्राय पौधों में पानी और खनिज लवणों का जड़ों से लेकर पौधे के शीर्ष तक, यानी पत्तियों और तने के ऊपरी भागों तक जाना है। इस प्रक्रिया को रसारोहण (Ascent of sap) कहते हैं, और यह जाइलम ऊतक के माध्यम से होता है। यह पौधों के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
In simple words: पानी का लंबी दूरी का परिवहन मतलब जड़ों से पानी का पौधे के सबसे ऊपरी हिस्सों तक पहुँचना।
🎯 Exam Tip: जल के लंबी दूरी के परिवहन की परिभाषा और इसके महत्व को स्पष्ट करें।
प्रश्न 4. प्लाज्मोडेस्मेटा क्या होते हैं?
Answer: प्लाज्मोडेस्मेटा (Plasmadesmata) दो पादप कोशिकाओं के बीच के जीवद्रव्यीय सेतु होते हैं। ये छोटे-छोटे चैनल होते हैं जो पड़ोसी कोशिकाओं के जीवद्रव्य को जोड़ते हैं, जिससे पदार्थों का सीधा संचार और एक कोशिका से दूसरी कोशिका में निरंतरता बनी रहती है। ये कोशिकाओं के बीच त्वरित संचार में मदद करते हैं।
In simple words: प्लाज्मोडेस्मेटा वे छोटे पुल होते हैं जो दो पौधों की कोशिकाओं को जोड़ते हैं, जिससे उनके बीच चीजें आसानी से आ-जा सकती हैं।
🎯 Exam Tip: प्लाज्मोडेस्मेटा की परिभाषा और अंतरकोशिकीय संचार में उनकी भूमिका पर ध्यान दें।
प्रश्न 5. जड़ों में अधिकांश जल का परिवहन किस पथ द्वारा होता है?
Answer: जड़ों में अधिकांश जल का परिवहन अपलवकीय पथ (Apoplast pathway) द्वारा होता है। इस पथ में पानी कोशिका भित्तियों और अंतरकोशिकीय स्थानों से होकर गुजरता है, बिना कोशिका झिल्ली को पार किए, जिससे यह एक तेज़ और कम प्रतिरोधी मार्ग है।
In simple words: ज़्यादातर पानी जड़ों में एपोप्लास्ट रास्ते से जाता है, जहाँ वह कोशिका की दीवारों से होकर निकलता है।
🎯 Exam Tip: जड़ों में जल परिवहन के प्रमुख मार्ग (एपोप्लास्ट) को पहचानें और इसके कारण का उल्लेख करें।
प्रश्न 6. जल की अपलवक तथा संलवक गति में एक अन्तर कीजिए।
Answer: जल की अपलवक और संलवक गति में मुख्य अंतर यह है कि अपलवक गति कोशिका के अजीवित भागों (जैसे कोशिका भित्ति) से होती है और इसमें जीवद्रव्य शामिल नहीं होता है। इसके विपरीत, संलवक गति जीवित भाग जीवद्रव्य (Cytoplasm) से होती है, जहाँ जल प्लाज्मोडेस्मेटा के माध्यम से एक कोशिका से दूसरी कोशिका में जाता है।
In simple words: अपलवक गति में पानी कोशिका की दीवारों से जाता है, जबकि संलवक गति में पानी कोशिका के अंदर के जीवित हिस्से से जाता है।
🎯 Exam Tip: अपलवक और संलवक गति के बीच मुख्य अंतर को स्पष्ट रूप से समझाएँ, खासकर जीवित और अजीवित घटकों के संदर्भ में।
प्रश्न 7. दारु के किस अवयव की सहायता से जल ऊपर चढ़ता है?
Answer: दारु (जाइलम) की वाहिकाओं (Vessels) तथा वाहिनिकाओं (Tracheids) की सहायता से जल ऊपर चढ़ता है। ये दोनों मिलकर एक प्रभावी नलिका प्रणाली बनाते हैं जो जड़ों से पत्तियों तक पानी का परिवहन करती है।
In simple words: जाइलम की वाहिकाएँ और वाहिनिकाएँ पानी को पौधे में ऊपर ले जाती हैं।
🎯 Exam Tip: जाइलम के घटकों को याद रखें जो रसारोहण (जल का ऊपर की ओर परिवहन) के लिए जिम्मेदार होते हैं।
प्रश्न 8. रसारोहण से सम्बन्धित स्पन्दन परिकल्पना किस वैज्ञानिक ने दी?
Answer: रसारोहण से संबंधित स्पंदन परिकल्पना सर जे.सी. बोस ने दी थी। यह परिकल्पना बताती है कि पौधों में कुछ कोशिकाओं की लयबद्ध गति से पानी ऊपर की ओर बढ़ता है।
In simple words: स्पंदन परिकल्पना सर जे.सी. बोस ने दी थी, जो पानी के ऊपर चढ़ने के लिए कोशिकाओं की धड़कन से जुड़ी है।
🎯 Exam Tip: स्पंदन परिकल्पना से जुड़े वैज्ञानिक का नाम और उस सिद्धांत का मूल विचार याद रखें।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. मृदा जल कितने प्रकार का होता है? इनमें से पौधे को कौन-सा जल आसानी से प्राप्त होता है?
Answer: मृदा जल मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है:
1. केशिका जल (Capillary water): यह जल मिट्टी के कणों के बीच पतली केशिकाओं में होता है। यह पौधों को सबसे आसानी से प्राप्त होता है और उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण जल स्रोत है।
2. अपवाहित जल (Gravitational water): यह जल गुरुत्वाकर्षण के कारण मिट्टी की निचली परतों में चला जाता है और पौधों को आसानी से उपलब्ध नहीं होता है।
3. आर्द्रताग्राही जल (Hygroscopic water): यह जल मिट्टी के कणों से बहुत मज़बूती से चिपका रहता है और पौधों को बिल्कुल भी प्राप्त नहीं होता है।
पौधों को इन तीनों प्रकार के जल में से केशिका जल ही सबसे आसानी से प्राप्त होता है, जो उनकी वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक है।
In simple words: मिट्टी में तीन तरह का पानी होता है: केशिका जल, अपवाहित जल और आर्द्रताग्राही जल। पौधों को केशिका जल सबसे आसानी से मिलता है।
🎯 Exam Tip: मृदा जल के विभिन्न प्रकारों को परिभाषित करें और स्पष्ट करें कि कौन सा प्रकार पौधों के लिए सबसे सुलभ है।
प्रश्न 2. एपोप्लास्ट तथा सिम्प्लास्ट पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: (i) अपलवक या ऐपोप्लास्ट पथ (Apoplast pathway): पौधों में जल का प्रवाह निर्जीव कोशिका भित्ति (Cell wall) और कोशिकाओं के बीच मौजूद अंतरकोशिकीय स्थानों के माध्यम से होता है। इस मार्ग को एपोप्लास्ट पथ कहते हैं। इस पथ में जल का प्रवाह अनियंत्रित और विसरण द्वारा होता है। इस प्रणाली में जुड़ी हुई कोशिका भित्तियाँ, अंतरकोशिकीय स्थान, कैस्पेरियन पट्टी (Casparion bands), अंतस्त्वचा की भित्ति (Walls of endodermis), दारु वाहिनी (Xylem vessel) और दारु वाहिनिकाएँ (Xylem tracheids) शामिल हैं।
जल में घुलनशील पदार्थ और विलयन इस मार्ग से आसानी से फैल जाते हैं। एपोप्लास्ट पथ में जल के अणुओं की गति मूलरोमों से जाइलम की ओर बिना किसी कला (Membrane) या कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) को पार किए होती है। यह गति आयतन प्रवाह (Mass flow) के रूप में होती है। यह पथ जल की गति में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं करता है। इसलिए जड़ों में अधिकांश जल का परिवहन एपोप्लास्ट पथ द्वारा होता है। जल के इस पथ को पारकला पथ (Transmembrane pathway) भी कहते हैं।
(ii) संलवक या सिमप्लास्ट पथ (Symplast Pathway): पौधों में जीवद्रव्य का अंतः-संबंधी तंत्र (Interconnected system) संलवक पथ कहलाता है। यह पौधों का जीवित तंत्र होता है। इसमें दो पड़ोसी कोशिकाओं के जीवद्रव्य तंतु (Plasmadesmata) मौजूद होते हैं जो उन कोशिकाओं के बीच निरंतरता (Continuity) बनाए रखते हैं।
संलवक पथ के अंतर्गत जल का परिवहन एक कोशिका से दूसरी कोशिका में कोशिका द्रव्य के माध्यम से होता है। चूंकि यहाँ जल कोशिका कला (Cell membrane) द्वारा अंदर आता है, इसलिए इसकी गति धीमी रहती है और जल की गति विभव प्रवणता (Potential gradient) के अनुसार होती है। जल का यह प्रवाह परासरण क्रिया द्वारा होता है और इसमें ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसे सजीव पथ भी कहते हैं। यह मार्ग अधिकतम प्रतिरोध वाला मार्ग है।
In simple words: एपोप्लास्ट और सिमप्लास्ट पानी के पौधे के अंदर जाने के दो अलग-अलग रास्ते हैं। एपोप्लास्ट में पानी कोशिका की दीवारों और खाली जगह से बिना अंदर घुसे जाता है, जबकि सिमप्लास्ट में पानी कोशिकाओं के अंदर के जीवित हिस्से से होकर एक-दूसरे से जुड़कर जाता है।
🎯 Exam Tip: एपोप्लास्ट और सिमप्लास्ट पथों की परिभाषा, उनके घटकों, और जल परिवहन की गति व ऊर्जा आवश्यकता में अंतर को स्पष्ट करें।
प्रश्न 3. अपलवकीय (ऐपोप्लास्ट) तथा संलवकीय पथ में अन्तर लिखिए।
Answer: अपलवकीय तथा संलवकीय पथ में अन्तर निम्नलिखित है:
| संलवकीय पथ | अपलवकीय पथ | |
|---|---|---|
| 1. | यह पथ जीवित जीवद्रव्य तंतुओं (प्लाज्मोडेस्मेटा) के माध्यम से होता है। | यह पथ कोशिका भित्तियों और अंतरकोशिकीय स्थानों के माध्यम से होता है। |
| 2. | जल कोशिका कला (Cell membrane) को पार करता है। | जल कोशिका कला को पार नहीं करता है। |
| 3. | यह गति धीमी होती है और इसमें ऊर्जा (ATP) की आवश्यकता होती है। | यह गति तेज़ होती है और इसमें ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती है। |
| 4. | यह मार्ग अधिक प्रतिरोधी होता है। | यह मार्ग कम प्रतिरोधी होता है। |
| 5. | यह परासरण क्रिया द्वारा होता है। | यह विसरण और आयतन प्रवाह द्वारा होता है। |
In simple words: सिमप्लास्ट रास्ते में पानी कोशिका के अंदर से होकर धीरे-धीरे जाता है और इसमें ऊर्जा लगती है, जबकि एपोप्लास्ट रास्ते में पानी कोशिका की दीवारों से होकर तेज़ी से जाता है और इसमें ऊर्जा नहीं लगती।
🎯 Exam Tip: एपोप्लास्ट और सिमप्लास्ट पथों के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए एक तुलनात्मक तालिका का उपयोग करें, जिसमें गति, ऊर्जा आवश्यकता और शामिल भागों को शामिल किया जाए।
प्रश्न 4. सक्रिय तथा निष्क्रिय जल अवशोषण में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: सक्रिय तथा निष्क्रिय जल अवशोषण में अन्तर निम्नलिखित है:
| सक्रिय जल अवशोषण | निष्क्रिय जल अवशोषण | |
|---|---|---|
| 1. | मूलरोमों द्वारा जल का अवशोषण उच्च विसरण दाब न्यूनता के कारण होता है। | मूलरोमों द्वारा जल अवशोषण वाष्पोत्सर्जन खिंचाव द्वारा होता है। |
| 2. | वाष्पोत्सर्जन की भूमिका नगण्य होती है। | वाष्पोत्सर्जन मुख्य भूमिका का निर्वहन करता है। |
| 3. | जड़ों द्वारा जल अवशोषण मंद गति से होता है तथा जल जाइलम वाहिनिकाओं में भेजा जाता है जिसके फलस्वरूप मूल दाब (Root pressure) उत्पन्न होता है। | जड़ों में मूल दाब उत्पन्न नहीं होता है क्योकि जल का अवशोषण तीव्र गति से होता है। |
| 4. | इस प्रक्रिया में ऊर्जा का उपयोग होता है। | इस प्रक्रिया में ऊर्जा का उपयोग नहीं होता है। |
| 5. | क्रियात्मक विभव की उत्पत्ति मूल कोशिकाओं में होती है। | क्रियात्मक विभव की उत्पत्ति पौधों के वायवीय भागों (पत्ती, पुष्प) में होती है। |
In simple words: सक्रिय जल अवशोषण में जड़ें ऊर्जा लगाकर पानी सोखती हैं और वाष्पोत्सर्जन की भूमिका कम होती है, जबकि निष्क्रिय जल अवशोषण में वाष्पोत्सर्जन के खिंचाव से पानी सोखा जाता है और इसमें ऊर्जा नहीं लगती।
🎯 Exam Tip: सक्रिय और निष्क्रिय जल अवशोषण के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए एक तालिका का उपयोग करें, जिसमें ऊर्जा की आवश्यकता, वाष्पोत्सर्जन की भूमिका और गति शामिल हो।
प्रश्न 5. रसारोहण का जैव बल सिद्धान्त समझाइए।
Answer: जैव बल सिद्धान्त (Vital force theory): इस सिद्धांत के अनुसार रसारोहण एक जैविक क्रिया (Vital activity) है। पौधों में रसारोहण तने की जीवित कोशिकाओं में होने वाली क्रियाओं के कारण उत्पन्न जैव बलों (Vital forces) द्वारा होता है। यह सिद्धांत यह बताता है कि पौधे के जीवित ऊतक सक्रिय रूप से पानी को ऊपर खींचने में मदद करते हैं। इस संबंध में प्रमुख वैज्ञानिकों के विचार संक्षेप में निम्नलिखित हैं:
गोडलेवस्की (Godlewski 1884) का रिले पम्प सिद्धान्त (Relay pump theory): इसके अनुसार जाइलम मृदूतक (Xylem parenchyma) तथा मज्जा रश्मियों (Medullary rays) की जीवित कोशिकाओं के परासरण दाब में नियमित बदलाव होते रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पानी ऊपर चढ़ता है।
सर जे.सी. बोस (Sir J.C. Bose, 1923) का स्पंदन सिद्धान्त (Pulsation theory): इनके अनुसार पौधों में रसारोहण तने के वल्कुट (Cortex) की सबसे अंदरूनी कोशिकाओं में, जो अन्तस्त्वचा के संपर्क में होती हैं, नियमित लयबद्ध स्पंदन (Rhythmic pulsation) के कारण होता है। यह धड़कन जैसा स्पंदन पानी को ऊपर धकेलने में मदद करता है। उन्होंने अपना प्रयोग भारतीय टेलीग्राफ पादप (Desmodium gyrans) पर किया था।
In simple words: जैव बल सिद्धांत यह कहता है कि पौधों में पानी ऊपर जाने के लिए उनकी जीवित कोशिकाएँ अपनी ताकत का इस्तेमाल करती हैं, जैसे कि जे.सी. बोस ने स्पंदन सिद्धांत में बताया था कि कोशिकाएँ धड़कती हैं।
🎯 Exam Tip: जैव बल सिद्धांत की व्याख्या करें और गोडलेवस्की तथा जे.सी. बोस के योगदान का उल्लेख करें, उनके सिद्धांतों के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डालें।
प्रश्न 6. रसारोहण के मूल दाब सिद्धान्त का वर्णन कीजिए।
Answer: मूल दाब सिद्धान्त (Root pressure theory): इस सिद्धांत को प्रीस्टले (Priestley) ने दिया था। इस सिद्धांत के अनुसार, पौधों की जड़ों में उत्पन्न होने वाले धनात्मक दाब के कारण पानी ऊपर की ओर चढ़ता है।
पैरेन्काइमी कोशिकाओं की कोशिका भित्ति लचीली होती है। जब इन कोशिकाओं में पानी या विलयन प्रवेश करता है, तो उनकी कोशिका भित्ति में एक तनाव (turgor pressure) उत्पन्न होता है। इसके बाद, कोशिका अपनी सामान्य स्थिति में वापस आने की कोशिश करती है। इस पूरी प्रक्रिया में, कोशिका में मौजूद द्रव्य पर एक धनात्मक दबाव पड़ता है। इस दबाव के कारण कोशिका से कुछ मात्रा में द्रव्य निकलकर जाइलम वाहिकाओं (Vessels) में आ जाता है।
जाइलम वाहिकीय तत्वों में उत्पन्न इस द्रवस्थैतिक दाब को मूल दाब (Root pressure) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, जाइलम वाहिकाओं के रस में पाया जाने वाला धनात्मक दाब ही मूल दाब कहलाता है। मूल दाब को मैनोमीटर (Manometer) नामक उपकरण से मापा जाता है।
हालांकि, किसी भी पौधे में इसका मान 2 वायुमंडल से ज़्यादा नहीं पाया गया है। 2 वायुमंडल दाब पौधों में पानी को लगभग 20 मीटर तक ही चढ़ा सकता है, लेकिन ऊँचे लकड़ी वाले पौधों के लिए 12 वायुमंडलीय मूल दाब की आवश्यकता होती है। किसी भी पौधे में इतना ज़्यादा मूल दाब कभी नहीं देखा गया है। इसलिए इस सिद्धांत का महत्व सीमित है। साथ ही, मूल दाब सभी पौधों में नहीं पाया जाता है, खासकर अनावृतबीजी (Gymnosperm) पौधों में मूलदाब नहीं होता है। मूल दाब पौधों को कम ऊँचाई तक पानी पहुँचाने में मदद करता है।
In simple words: मूल दाब सिद्धांत कहता है कि जड़ों में बनने वाले दबाव से पानी पौधे में ऊपर चढ़ता है। यह दबाव पानी को जाइलम तक धकेलता है। हालाँकि, यह बहुत ऊँचे पेड़ों में पानी पहुँचाने के लिए पर्याप्त नहीं होता।
🎯 Exam Tip: मूल दाब सिद्धांत की विस्तृत व्याख्या करें, जिसमें इसकी परिभाषा, क्रियाविधि, और सीमाएँ शामिल हों। मैनोमीटर द्वारा मापन का उल्लेख करें।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 6 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. जल अवशोषण को प्रभावित करने वाले कारकों पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए।
Answer: जल अवशोषण को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Water Absorption) जल अवशोषण की दर निम्नलिखित कारकों से प्रभावित होती है:
1. प्राप्य मृदा जल (Available soil water): मिट्टी में सभी प्रकार का जल पौधों को उपलब्ध नहीं होता है। मुख्य रूप से केशिका जल (Capillary water) ही पौधों को मिलता है। सामान्य अवशोषण के लिए मिट्टी में जल की क्षेत्र क्षमता (Field capacity) या जलधारण क्षमता (Water holding capacity) और स्थायी म्लानि प्रतिशतता (Permanent wilting percentage) के बीच की स्थिति सबसे अच्छी होती है। केशिका जल पौधों के लिए सबसे आसानी से उपलब्ध पानी है।
2. मृदा वातन (Soil aeration): अच्छी वातन वाली मिट्टी, जैसे दोमट मिट्टी से, पानी का अवशोषण पर्याप्त मात्रा में होता है। लेकिन जिस मिट्टी में पानी भरा होता है (जलाक्रांत), वहाँ जल अवशोषण बहुत कम या शून्य हो जाता है, क्योंकि ऑक्सीजन की कमी जड़ों की श्वसन क्रिया और ऊर्जा उत्पादन को बाधित करती है।
3. मृदा का तापमान (Soil temperature): मिट्टी के सही तापमान (20°C से 30°C के बीच) पर सबसे ज़्यादा जल अवशोषण होता है। जब तापमान 30°C से ज़्यादा या 20°C से कम होता है, तो जल अवशोषण की दर कम हो जाती है, क्योंकि अत्यधिक ठंड या गर्मी जड़ों की सक्रियता को प्रभावित करती है।
4. मृदा विलयन की सान्द्रता (Concentration of soil solution): मिट्टी में खनिज लवणों की अधिकता से मृदा विलयन की सान्द्रता बढ़ जाती है। इस स्थिति में जल अवशोषण धीमा होता है, क्योंकि मिट्टी के पानी का परासरणी विभव बढ़ जाता है, जिससे पानी के अणुओं का पौधों में प्रवेश मुश्किल हो जाता है। इसकी तुलना में, पतले मृदा विलयन वाली मिट्टियों में जल अवशोषण की दर तेज़ होती है।
In simple words: पौधों का पानी सोखना कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे मिट्टी में कितना पानी है, मिट्टी में हवा है या नहीं, मिट्टी कितनी गर्म है, और मिट्टी के पानी में कितना नमक घुला है। ये सभी कारक मिलकर तय करते हैं कि पौधे कितनी तेज़ी से पानी ले पाते हैं।
🎯 Exam Tip: जल अवशोषण को प्रभावित करने वाले प्रत्येक कारक का विस्तृत वर्णन करें और उनके प्रभावों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 2. रसारोहण का मार्ग समझाइए तथा इसे समझाने के लिए एक प्रयोग का वर्णन कीजिए।
Answer: पौधों में जल और खनिज लवणों का जड़ों से ऊपर की ओर, पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचना 'रसारोहण' (Ascent of sap) कहलाता है। वैज्ञानिक प्रयोगों से यह साबित हो चुका है कि जड़ें पानी को सोखकर जाइलम वाहिकाओं (Xylem vessels) और वाहिनिकाओं (Tracheids) के माध्यम से पौधे के ऊपरी हिस्सों तक पहुँचाती हैं। जाइलम ऊतक पौधे में पानी के परिवहन का मुख्य मार्ग होता है।
इसे समझने के लिए एक प्रयोग किया जा सकता है:
एक बालसम (गुलमेंहदी) का पौधा लें। इसकी जड़ को सावधानी से काटकर, कटे हुए सिरे को कुछ घंटों के लिए 'सैफ्रेनिन' नाम के लाल रंग के घोल में डुबो दें। सैफ्रेनिन एक विशेष लाल रंग का रसायन है जो केवल लिग्निन युक्त ऊतकों को रंगता है, जैसे कि जाइलम।
दो घंटे बाद, जब आप बालसम पौधे की पत्तियों की शिराओं को देखेंगे, तो वे लाल रंग की दिखाई देंगी। यदि आप पत्ती, पर्णवृन्त, या शाखा का एक छोटा टुकड़ा लेकर सूक्ष्मदर्शी से देखेंगे, तो आपको लाल रंग सिर्फ जाइलम नलिकाओं में ही दिखाई देगा।
यह प्रयोग साबित करता है कि पौधों में रसारोहण की क्रिया मुख्य रूप से जाइलम ऊतकों के माध्यम से ही होती है, क्योंकि सैफ्रनिन सिर्फ इन्हीं ऊतकों को रंगता है।
In simple words: रसारोहण का मतलब है पौधों में पानी का जड़ों से ऊपर की ओर जाना। एक प्रयोग से यह दिखाया जा सकता है कि जाइलम नामक नली जैसा ऊतक ही पानी को पूरे पौधे में फैलाता है।
🎯 Exam Tip: रसारोहण की परिभाषा, जाइलम की भूमिका और प्रयोग के मुख्य चरणों तथा उसके निष्कर्ष को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 3. मूल दाब से आप क्या समझते हैं? एक प्रयोग की सहायता से मूलदाब को स्पष्ट कीजिए।
Answer: मूल दाब (Root pressure) वह धनात्मक दबाव है जो जड़ों की जाइलम वाहिकाओं में उत्पन्न होता है, जिससे पानी ऊपर की ओर चढ़ता है। इस सिद्धान्त को प्रीस्टले (Priestley) ने दिया था। जब जड़ों की पैरेन्काइमा कोशिकाएँ पानी या घोल को अंदर लेती हैं, तो उनकी कोशिका भित्तियों पर एक तनाव उत्पन्न होता है। इस पूरी प्रक्रिया में कोशिका में उपस्थित द्रव्य पर धनात्मक दबाव पड़ता है, जिससे कुछ मात्रा में द्रव्य कोशिका से निकलकर वाहिकाओं (Vessels) में आ जाता है। यह द्रव्य वाहिकाओं के अंदर एक द्रवस्थैतिक दबाव बनाता है जिसे मूल दाब कहते हैं। यह दबाव पौधों को पानी अवशोषित करने में मदद करता है।
मूल दाब को मैनोमीटर (Manometer) की मदद से मापा जा सकता है। एक पौधे के तने को काटकर, कटे हुए सिरे को एक मैनोमीटर से जोड़ा जाता है। मैनोमीटर में पानी का स्तर बढ़कर मूल दाब को दर्शाता है। हालाँकि, यह दाब आमतौर पर 2 वायुमण्डल से ज़्यादा नहीं होता, जो कि सिर्फ़ लगभग 20 मीटर तक पानी को ऊपर उठाने के लिए पर्याप्त है। बड़े पेड़ों (जिनको 12 वायुमण्डल दाब की ज़रूरत होती है) के लिए यह दाब पर्याप्त नहीं होता, इसलिए इसका महत्व सीमित है। साथ ही, मूल दाब सभी पौधों में नहीं पाया जाता है, खासकर अनावृतबीजी (Gymnosperm) पौधों में।
In simple words: मूल दाब वह दबाव है जो जड़ों द्वारा पानी सोखने पर बनता है, जिससे पानी ऊपर चढ़ता है। इसे एक उपकरण (मैनोमीटर) से मापा जा सकता है, लेकिन यह दबाव बहुत बड़े पेड़ों में पानी को ऊँचाई तक ले जाने के लिए हमेशा पर्याप्त नहीं होता।
🎯 Exam Tip: मूल दाब की परिभाषा, इसे मापने वाले प्रयोग (मैनोमीटर) का स्पष्टीकरण और इसकी सीमाओं को अच्छे से समझाएँ।
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