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Detailed Chapter 41 प्राणियों का घरेलूकरण (ग्राम्यन), संवर्धन त RBSE Solutions for Class 12 Biology
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Class 12 Biology Chapter 41 प्राणियों का घरेलूकरण (ग्राम्यन), संवर्धन त RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Biology Chapter 41 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
RBSE Class 12 Biology Chapter 41 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. कुक्कुट पालन हेतु प्रयुक्त निम्न में से कौन-सी प्रजाति देशी नस्ल की है-
(अ) सफेद लैगहॉर्न
(ब) पेकिन
(स) न्यूहैम्पशायर
(द) लैगस
Answer: (द) लैगस
In simple words: लैगस चिकन की एक ऐसी नस्ल है जो भारतीय मूल की है और मुर्गीपालन में उपयोग की जाती है। यह हमारी अपनी, स्थानीय प्रजाति है।
🎯 Exam Tip: देशी नस्लों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये अक्सर विदेशी नस्लों से अलग होती हैं और उनकी अपनी विशिष्ट विशेषताएँ होती हैं।
Question 2. कुक्कुट (मुर्गी) के अण्डों का उष्मायन समय कितना है-
(अ) 21 दिन
Answer: (अ) 21 दिन
In simple words: मुर्गी के अंडे से बच्चा निकलने में लगभग 21 दिन लगते हैं। यह समय अंडे को गर्म रखने के लिए ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: उष्मायन समय को समझना मुर्गीपालन में चूजों के सफल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. कुक्कुटपालन से प्राप्त होता है-
(अ) अण्डे व शहद
(ब) माँस व लाख
(स) अण्डे व मोम
(द) माँस व अण्डे
Answer: (द) माँस व अण्डे
In simple words: कुक्कुटपालन से मुख्य रूप से मुर्गी का माँस और अंडे मिलते हैं। ये दोनों ही पोषण के लिए बहुत अच्छे होते हैं।
🎯 Exam Tip: कुक्कुटपालन का मुख्य उद्देश्य प्रोटीन युक्त आहार जैसे मांस और अंडे का उत्पादन करना है, जो मानव पोषण के लिए आवश्यक हैं।
Question 4. रेशमकीट की किस अवस्था से रेशम प्राप्त होता है-
(अ) अण्डे से
(ब) कैटरपिलर से
(स) वयस्क से
(द) कोकून से
Answer: (ब) कैटरपिलर से
In simple words: रेशम कीट अपने कैटरपिलर (लार्वा) अवस्था में रेशम के धागे बनाता है। यह धागा फिर कोकून बनाता है जिससे रेशम मिलता है।
🎯 Exam Tip: रेशम उत्पादन की प्रक्रिया में कोकून अवस्था सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी से रेशम का धागा निकाला जाता है।
Question 5. यूरोपियन मधुमक्खी का वैज्ञानिक नाम है-
(अ) एपिस मैलीफेरा
(ब) एपिस डोर्सेटा
(स) एपिस फ्लोरिया
(द) एपिस इण्डिका
Answer: (अ) एपिस मैलीफेरा
In simple words: यूरोपियन मधुमक्खी को 'एपिस मैलीफेरा' कहते हैं, यह शहद बनाने वाली एक प्रमुख मधुमक्खी प्रजाति है। यह दुनियाभर में शहद उत्पादन के लिए पाली जाती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार की मधुमक्खियों और उनके वैज्ञानिक नाम याद रखें, खासकर जो शहद उत्पादन में महत्वपूर्ण हैं।
Question 8. पशुओं का ऐन्छेक्स रोग होता है-
(अ) विषाणु जनित
(b) हैल्मिन्थ जनित
(c) जीवाणु जनित
(द) प्रोटोजोआ जनित
Answer: (c) जीवाणु जनित
In simple words: पशुओं में होने वाला ऐन्थ्रैक्स रोग एक खास तरह के जीवाणु के कारण होता है। यह एक गंभीर बीमारी है जो जानवरों को प्रभावित करती है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ऐन्थ्रैक्स एक जीवाणु-जनित रोग है, क्योंकि रोगों के कारणों को अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।
Question 9. कुसुमी प्रकार की लाख कीट के पोषण पादप है-
(अ) खेर
(b) बबूल
(c) शीशम
(द) बेर
Answer: (b) बबूल
In simple words: कुसुमी लाख कीट बबूल के पौधों पर पनपते हैं। बबूल के पेड़ उन्हें भोजन और रहने की जगह देते हैं।
🎯 Exam Tip: लाख कीट के विभिन्न प्रकार और उनके पोषण पादपों के नाम याद रखना लाख उत्पादन से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Biology Chapter 41 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. ग्राम्यन किसे कहते हैं?
Answer: जब मनुष्य अपनी ज़रूरतों के लिए जानवरों को पालतू बनाता है, तो इस प्रक्रिया को ग्राम्यन या जानवरों का घरेलूकरण कहते हैं। यह जानवरों को मनुष्यों के उपयोग के अनुकूल बनाने की विधि है।
In simple words: अपनी सहूलियत के लिए जानवरों को पालतू बनाने को ग्राम्यन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: ग्राम्यन की परिभाषा को सटीक शब्दों में याद रखें, क्योंकि यह जीव विज्ञान का एक महत्वपूर्ण आधारभूत शब्द है।
Question 2. अण्डे उत्पादन हेतु पाली जाने वाली मुर्गियों को क्या कहते हैं?
Answer: अण्डे देने के लिए पाली जाने वाली मुर्गियों को 'लेयर्स' (Layers) कहा जाता है। इन मुर्गियों को विशेष रूप से अंडे उत्पादन के लिए ही पाला जाता है।
In simple words: अंडा देने वाली मुर्गियों को लेयर्स कहते हैं।
🎯 Exam Tip: कुक्कुटपालन में मांस और अंडे के लिए पाली जाने वाली मुर्गियों के बीच का अंतर याद रखें।
Question 3. कुक्कुट पालन के क्षेत्र में विश्व में भारत का कौन-सा स्थान है?
Answer: विश्व भर में कुक्कुट पालन के मामले में भारत का तीसरा स्थान है। यह देश के लिए एक महत्वपूर्ण कृषि उद्योग है।
In simple words: मुर्गी पालन में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर आता है।
🎯 Exam Tip: भारत की कृषि और पशुधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण रैंकिंग को याद रखना सामान्य ज्ञान और परीक्षा दोनों के लिए उपयोगी है।
Question 4. मछलियों के पालन को क्या कहते हैं?
Answer: मछलियों को पालने और उनका प्रबंधन करने की प्रक्रिया को मत्स्य पालन या जलकृषि (Aquaculture) कहा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण कृषि गतिविधि है।
In simple words: मछलियों को पालने और उनकी देखभाल करने को मत्स्य पालन या जलकृषि कहते हैं।
🎯 Exam Tip: मत्स्य पालन को अक्सर जलकृषि भी कहा जाता है, इस शब्दावली को ध्यान में रखें।
Question 5. मत्स्य पालन के क्षेत्रों में भारत में कार्यरत किन्हीं दो अनुसंधान केन्द्रों के नाम लिखिए।
Answer: भारत में मत्स्य पालन के क्षेत्र में काम करने वाले दो प्रमुख अनुसंधान केंद्र हैं: केन्द्रीय अंतः स्थलीय मत्स्य शोध संस्थान (Central Inland Fisheries Research Institute) और सेंट्रल मैरीन फिशरीज रिसर्च इन्स्टीट्यूट केरल। ये संस्थान मत्स्य पालन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: भारत में मछली पालन के लिए केन्द्रीय अंतः स्थलीय मत्स्य शोध संस्थान और सेंट्रल मैरीन फिशरीज रिसर्च इन्स्टीट्यूट केरल जैसे अनुसंधान केंद्र हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख अनुसंधान संस्थानों के पूरे नाम याद रखें, खासकर जब वे किसी विशिष्ट क्षेत्र से संबंधित हों।
Question 6. लाख कीट का वैज्ञानिक नाम लिखिए।
Answer: लाख कीट का वैज्ञानिक नाम लैसिफेरा लैक्का (Laccifera lacca) है, जिसे टैकार्डिया लैक्का (Tachardina lacca) भी कहा जाता है। यह कीट लाख उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
In simple words: लाख कीट का वैज्ञानिक नाम लैसिफेरा लैक्का है।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक नाम याद करते समय, जीनस और प्रजाति दोनों को सही वर्तनी के साथ लिखना सुनिश्चित करें।
Question 8. रेशम कीट में पायी जाने वाली रेशम ग्रन्थियाँ किसका रूपान्तरण होती हैं?
Answer: रेशम कीट के कैटरपिलर में जो रेशम ग्रन्थियाँ (Silk glands) होती हैं, वे असल में उसकी लार ग्रन्थियों (Salivary Glands) का ही बदला हुआ रूप हैं। इन्हीं ग्रंथियों से रेशम का धागा बनता है।
In simple words: रेशम कीट की रेशम ग्रंथियां उसकी लार ग्रंथियों का ही बदला हुआ रूप होती हैं।
🎯 Exam Tip: यह तथ्य याद रखें कि रेशम ग्रंथियां लार ग्रंथियों का रूपांतरण हैं, यह रेशमकीट की जीव विज्ञान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
Question 9. मधुमक्खी पालन के दौरान कौन-कौन सी सावधानियाँ रखनी चाहिए?
Answer: मधुमक्खी पालन करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- फल और फूलों के पौधे छत्ते से ज़्यादा दूर नहीं होने चाहिए, ताकि मधुमक्खियाँ आसानी से पराग और अमृत इकट्ठा कर सकें।
- मधुमक्खी पेटियों को किसी ठंडी और छायादार जगह पर रखना चाहिए, ताकि वे ज़्यादा गर्मी से बची रहें।
- ताज़े पानी का स्रोत भी छत्ते के पास ही होना चाहिए, ताकि मधुमक्खियों को पानी के लिए दूर न जाना पड़े।
In simple words: मधुमक्खी पालन में छत्ते के पास फूल, ठंडी जगह और पानी होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: मधुमक्खी पालन के लिए आवश्यक शर्तों को बिंदुवार याद रखें, क्योंकि यह अक्सर सीधे प्रश्न के रूप में पूछा जाता है।
Question 10. मत्स्य बीज क्या तात्पर्य है?
Answer: मत्स्य बीज से मतलब मछलियों के अंडे या उनके शुरुआती विकासशील रूपों (जैसे निम्फ या लार्वा) से है, जिनका उपयोग मत्स्य पालन में नई मछलियाँ पैदा करने के लिए किया जाता है। स्वस्थ बीज अच्छी फसल के लिए महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: मछलियों के अंडे या उनके छोटे बच्चों को मत्स्य बीज कहते हैं।
🎯 Exam Tip: मत्स्य बीज की सही परिभाषा को समझें, क्योंकि यह मत्स्य पालन की नींव है।
RBSE Class 12 Biology Chapter 41 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मुर्गियों में होने वाले विषाणुजनित रोगों का वर्णन कीजिए।
Answer: मुर्गियों में कई विषाणुजनित रोग होते हैं, जिनमें चेचक, संक्रामक ब्रोन्काइटिस, लिम्फॉइड ल्यूकोसिस और रानीखेत रोग मुख्य हैं। इन सभी में रानीखेत रोग सबसे आम है। इस रोग में बीमार मुर्गियों को बुखार और दस्त हो जाते हैं। जब रोग गंभीर होता है, तो उनकी चोंच से बलगम निकलने लगता है, पंख लकवाग्रस्त हो जाते हैं, और वे गोल-गोल घूमने लगती हैं। इन रोगों का समय पर उपचार बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: मुर्गियों में चेचक, ब्रोन्काइटिस और रानीखेत जैसे वायरस वाले रोग होते हैं। रानीखेत सबसे आम है, जिसमें बुखार, दस्त और गंभीर होने पर लकवा हो जाता है।
🎯 Exam Tip: मुर्गियों के प्रमुख विषाणुजनित रोगों के नाम और उनके सामान्य लक्षण याद रखें, खासकर रानीखेत रोग के बारे में।
Question 2. मधुमक्खियों में सामाजिक संगठन को संक्षेप में लिखिए।
Answer: मधुमक्खियों का सामाजिक संगठन बहुत ही व्यवस्थित होता है, जिसमें रानी मधुमक्खी, नर मधुमक्खी (ड्रोन) और श्रमिक मधुमक्खी मुख्य रूप से कार्य करते हैं। श्रमिक मधुमक्खियाँ संख्या में हज़ारों में होती हैं और ये अंडे से पैदा हुई बांझ मादाएँ होती हैं। इनका मुख्य काम छत्ते के अंदर और बाहर दोनों जगह के सभी कार्य करना होता है। इनमें परागकण इकट्ठा करना, शहद बनाना, मोम बनाना, भोजन जमा करना और छत्ते की रक्षा करना जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।
In simple words: मधुमक्खियों में रानी, नर और श्रमिक होते हैं। श्रमिक मधुमक्खियाँ (बांझ मादाएँ) छत्ते के सारे काम करती हैं जैसे शहद बनाना और छत्ते की सुरक्षा करना।
🎯 Exam Tip: मधुमक्खी के छत्ते में विभिन्न सदस्यों (रानी, नर, श्रमिक) की भूमिकाओं को याद रखें, क्योंकि यह उनके सामाजिक व्यवहार को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. लाख के उपयोग लिखिए।
Answer: लाख का उपयोग कई तरह से किया जाता है:
- लाख का इस्तेमाल चूड़ियाँ बनाने के लिए होता है।
- इससे बर्तन और खिलौने भी बनाए जाते हैं।
- यह पॉलिश, वार्निश और बिजली का सामान बनाने में भी काम आती है।
- भारत में महिलाएँ इसे 'महावर' के रूप में अपने पैरों पर लगाती हैं।
लाख एक प्राकृतिक राल है जिसका उपयोग कई उद्योगों और पारंपरिक कलाओं में होता है।
In simple words: लाख का उपयोग चूड़ियाँ, खिलौने, पॉलिश और बिजली का सामान बनाने में होता है। महिलाएँ इसे महावर की तरह भी लगाती हैं।
🎯 Exam Tip: लाख के विभिन्न उपयोगों को बिंदुवार याद रखें, यह उसके औद्योगिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।
Question 4. रेशम कीट की प्रमुख जातियाँ व उनके द्वारा उत्पादित रेशम का नाम दीजिए।
Answer: रेशम कीट की कई प्रमुख प्रजातियाँ हैं, जो अलग-अलग प्रकार का रेशम उत्पन्न करती हैं और विभिन्न पौधों की पत्तियों को भोजन के रूप में खाती हैं। इनमें बॉम्बिक्स मोराई (Bombyx Mori) सबसे महत्वपूर्ण है।
- बॉम्बिक्स मोराई से शहतूत रेशम (Mulberry Silk) मिलता है।
- एन्थौरिया पौफिस (Antheraea pernyi) से टसर रेशम (Tussar Silk) प्राप्त होता है।
- एन्थौरिया आसामेन्सिस (Antheraea assamensis) से मूगा रेशम (Muga Silk) मिलता है।
- एटकेश रोसिनी (Attacus ricini) से ऐरी रेशम (Eri Silk) प्राप्त होता है।
- थायोपेलिया रेलीजिओया (Philosamia cynthia ricini) से देव मूगा सिल्क प्राप्त होती है।
यह विविधता रेशम उत्पादन को समृद्ध बनाती है।
In simple words: रेशम कीट की मुख्य जातियाँ बॉम्बिक्स मोराई (मल्बरी), एन्थौरिया पौफिस (टसर), एन्थौरिया आसामेन्सिस (मूगा) और एटकेश रोसिनी (ऐरी) हैं, जो अलग-अलग रेशम बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: रेशम कीट की प्रमुख प्रजातियों और उनके द्वारा उत्पादित रेशम के प्रकारों को याद रखें, क्योंकि यह रेशम उत्पादन के अध्ययन का मुख्य हिस्सा है।
Question 5. रेशम कीट में होने वाले विभिन्न रोगों का विवरण दीजिए।
Answer: रेशम कीट को कई बीमारियाँ होती हैं, जिनमें मुख्य हैं:
1. पैब्राइन (Pebrine): यह एक गंभीर बीमारी है, जिसके कारण रेशम कीट का शरीर अनियमित और सिकुड़ा हुआ हो जाता है। लार्वा भी छोटा रह जाता है और कृमि कोष बनने से पहले ही मर जाता है। इस रोग के कारण स्वस्थ शलभों के अंडे का उपयोग करना मुश्किल हो जाता है।
2. फ्लेचरी तथा गेरेसरी (Flacherie and Grasserie): ये बीमारियाँ जीवाणुओं (Bacteria) द्वारा फैलती हैं। ये भी रेशम कीट के स्वास्थ्य और रेशम उत्पादन को प्रभावित करती हैं।
इन रोगों से रेशम उत्पादन में भारी नुकसान हो सकता है, इसलिए उनकी रोकथाम ज़रूरी है।
In simple words: रेशम कीट को पैब्राइन (जिसमें कीट का शरीर सिकुड़ जाता है) और फ्लेचरी-गेरेसरी (जो बैक्टीरिया से फैलती है) जैसे रोग होते हैं।
🎯 Exam Tip: रेशम कीट के प्रमुख रोगों के नाम, उनके लक्षण और फैलने के कारण याद रखें, जो रेशम उत्पादन के प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Biology Chapter 41 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. मत्स्य पालन पर एक निबन्धात्मक लेख लिखिए।
Answer: भारत जैसे विकासशील देश में जहाँ लोगों को दूध और माँस कम मिल पाता है, वहाँ अनाज के साथ-साथ मछली एक महत्वपूर्ण पूरक भोजन बन जाती है। शरीर को प्रोटीन देने के लिए हर साल लगभग 1 करोड़ टन मछली की ज़रूरत होती है। मछली पालन तटवर्ती राज्यों में मछुआरों और किसानों को कमाई और रोज़गार का अच्छा साधन देता है।
भारत में लगभग 75 लाख हेक्टेयर अंतःस्थलीय जल क्षेत्र है, जो देश के कुल क्षेत्रफल का 2.34% है। केंद्रीय अंतःस्थलीय मत्स्य शोध संस्थान में हुए शोधों ने मछली पालन के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति ला दी है। मछलियों की उपयोगिता और अधिक उत्पादन क्षमता वाली प्रजातियों को नियंत्रित वातावरण में पालने को मत्स्य पालन कहते हैं। मछलियाँ प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं, और इनमें खनिज लवण, विटामिन (A और D) तथा वसा भी भरपूर मात्रा में पाई जाती हैं। कॉमन कार्प, कतला, रोहू, हिलसा, सार्डीन और पामफ्रेट जैसी मछलियाँ खाई जाती हैं। झींगे, लॉबस्टर और मोलस्का जैसे अन्य जलीय जीवों को पालना और बढ़ाना भी जल संवर्धन या जलकृषि कहलाता है।
संवर्धनशील मछलियों के प्रकार: ये तीन तरह की होती हैं-
- देशज (Indigenous): ये साफ पानी में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली मछलियाँ हैं, जैसे मेजर कार्प।
- लवणजलीय: ये वे मछलियाँ हैं जो खारे पानी में रहती हैं लेकिन ताज़े पानी में भी रहने के अनुकूल हो गई हैं, जैसे चानोस और मुलेट्स।
मत्स्य पालन के मुख्य चरण:
1. प्रजनन कुण्ड (Breeding Pond): मछली पालन की शुरुआत में प्रजनन के लिए विशेष प्रकार के तालाब बनाए जाते हैं, जिन्हें प्रजनन कुंड कहते हैं। ये कुंड आमतौर पर नदियों या अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों के पास होते हैं। प्रजनन दो तरह का होता है: प्राकृतिक प्रजनन (Natural breeding) और प्रेरित प्रजनन (Induced breeding)।
2. संवर्धन (Nursing): संवर्धन तालाब को मछली के अंडों से बच्चे निकलने से पहले ही तैयार कर लेना चाहिए। इस तालाब में पानी का आना-जाना नियंत्रित होना ज़रूरी है। इसमें हानिकारक मछलियाँ नहीं होनी चाहिए और प्राकृतिक व रासायनिक खादों का उपयोग करना चाहिए, जो मछलियों का भोजन होते हैं। यहाँ मृत्यु दर कम रखने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। जब बच्चे 10-15 सेमी के हो जाते हैं, तो उन्हें पालन-पोषण कुंड में डाल दिया जाता है।
3. पालन-पोषण (Rearing): इस कुंड में छोटी मछलियों (Fingerlings) को पूरा पोषण मिलता है। ये कुंड लंबे होते हैं और इनमें परभक्षी जीव नहीं होते। यहाँ मछलियों की अच्छी वृद्धि का ध्यान रखा जाता है। ये कुंड मौसमी या बारहमासी हो सकते हैं। जब छोटी मछलियाँ 20 सेमी की हो जाती हैं, तो उन्हें संग्रहण तालाब में ले जाया जाता है। इन मछलियों को संग्रहण तालाब में ले जाने के लिए 1000 लीटर क्षमता के विशेष पात्रों का उपयोग किया जाता है, जिनकी भीतरी सतह पर फोम लगा होता है ताकि मछलियों को चोट न लगे।
4. संग्रहण (Stocking): संग्रहण तालाब में भोजन की पर्याप्त मात्रा का पूरा ध्यान रखा जाता है ताकि मछलियाँ अच्छी तरह बढ़ सकें। पूरी तरह विकसित और बड़ी मछलियों को बिक्री के लिए पकड़ लिया जाता है, और छोटी मछलियों को उनकी लंबाई और वज़न के आधार पर वापस पोषण कुंड या संग्रहण तालाब में छोड़ दिया जाता है।
5. मछलियों को पकड़ने की विधियाँ: पुराने समय से मछलियाँ पकड़ी जा रही हैं। पहले पत्थर और भालों से पकड़ा जाता था, लेकिन अब जाल और लाइनों जैसे आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल होता है। भारत में अलग-अलग जगहों पर पकड़ने के अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। मछलियों को पकड़ने की इस प्रक्रिया को मत्स्ययन (Fishing) कहते हैं।
मत्स्य पालन एक वैज्ञानिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण गतिविधि है।
In simple words: मत्स्य पालन मतलब मछलियों को पालना और उनका प्रबंधन करना। भारत में यह प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है। इसमें अंडे से बच्चे निकालना, पालना, बढ़ाना और फिर पकड़ना जैसे कई चरण होते हैं। यह किसानों और मछुआरों को आय का अच्छा साधन देता है।
🎯 Exam Tip: मत्स्य पालन पर निबंध लिखते समय, इसके आर्थिक महत्व, पोषण संबंधी लाभ, विभिन्न प्रकार की मछलियों और पालन के मुख्य चरणों को शामिल करना सुनिश्चित करें।
Question 2. लाख कीट की मुख्य विशेषताएँ देते हुए इसके पोषण पादपों का नाम लिखिए।
Answer: लाख कीट में नर और मादा अलग-अलग होते हैं, यह लैंगिक द्विरूपता दिखाता है। नर कीट की लंबाई 1.2-1.5 मिलीमीटर होती है और उसका रंग लाल होता है। मादा कीट अपने कोष्ठ से बाहर निकलकर ज्यादातर गूदेदार पौधों की छोटी और कोमल टहनियों पर इकट्ठा हो जाती हैं। इनके शरीर पर मौजूद त्वचा ग्रंथियों से लाख स्रावित होती है, जो हवा के संपर्क में आने पर सूख जाती है। लाख कीट के शुरुआती बच्चे (अर्भक) इन रसदार पौधों से रस (sap) चूसकर अपना पोषण करते हैं। अर्भक 6-8 सप्ताह की स्थिर अवस्था के बाद बदल जाते हैं, जिससे लगभग 70% पंखहीन मादाएँ और 30% पंख वाले नर कीट बनते हैं। लाख कीट हर साल एक ही पोषण पादप पर दो बार (अक्टूबर-नवंबर और जून-जुलाई में) अपना जीवन चक्र पूरा करते हैं।
लाख कीटों के पोषण पादप (Host Plants of Lac): भारत में लाख कीटों के अनेक पोषण पादप हैं। कुछ मुख्य पादप जातियाँ नीचे दी गई तालिका में दर्शाई गई हैं:
| पोषक पादप का सामान्य नाम | वैज्ञानिक नाम |
|---|---|
| 1. कुसुम (Kusum) | श्लीचेरा ओलियोसा (Schleichera oleosa) |
| 2. खैर (Khair) | अकेशिया कैटेचू (Acacia catechu) |
| 3. बेर (Ber) | जिजिइफस मीरीशियाना (Zizyphus mauritiana) |
| 4. बबूल (Babul) | अकेशिया नाइलेटिका (Acacia nilotica) |
| 5. अंजीर (Fig) | फाइकस कैरिका (Ficus Carica) |
| 6. पलास (Palas) | ब्यूरिया मोनोस्पर्मा (Butea monosperma) |
| 7. शीशम (Shisam) | डेलबर्जिया सिस्सो (Dalbergia sisso) |
लाख कीट अपने मुँह के अंगों को पौधे के ऊतकों में डालकर उसका रस चूसते हैं। लाख की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे किस पौधे से प्राप्त किया गया है। बेर और पलास के पौधों से प्राप्त कुसुमी लाख सबसे अच्छी मानी जाती है।
In simple words: लाख कीट नर और मादा में अलग दिखते हैं। मादा कीट पौधों से लाख बनाती है। यह कीट साल में दो बार अंडे देते हैं। इसके मुख्य भोजन वाले पौधे कुसुम, खैर, बेर, बबूल, अंजीर, पलास और शीशम हैं।
🎯 Exam Tip: लाख कीट की जीवनचक्र की मुख्य विशेषताओं और विभिन्न पोषण पादपों के नाम तथा उनके वैज्ञानिक नाम याद रखें, खासकर जो तालिका में दिए गए हैं।
Question 3. कुक्कुट पालन का सविस्तार विवरण दीजिए।
Answer: कुक्कुट पालन में मुर्गियों को पालतू जानवरों के रूप में पाला जाता है। बीसवीं सदी में लोगों की बढ़ती पसंद और पोषण की ज़रूरतों ने मुर्गी पालन को एक महत्वपूर्ण घरेलू उद्योग बना दिया है। मुर्गियाँ अंडे और माँस दोनों देती हैं, जो भोजन के लिए उपयोग होता है। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने मुर्गियों के प्रजनन, बच्चे पैदा करने, पालने और खिलाने की नई तकनीकों पर शोध करना शुरू किया है।
कुक्कुट पालन में उपयोगी पक्षी:
कुक्कुट पालन में कई प्रकार की प्रजातियाँ इस्तेमाल की जाती हैं। बत्तख (Ducks) भी अंडे और माँस के लिए पाली जाती हैं, और भारत की कुल कुक्कुट आबादी में 6% योगदान बत्तखों का है।
भारतीय नस्लें: रनर भारतीय, सिहलेट मेटा और नागेश्वरी जैसी नस्लें प्रमुख हैं।
विदेशी नस्लें: मस्कोरी, पैकिन, आयलेसबरी और कैम्पबेल जैसी नस्लें भी महत्वपूर्ण हैं।
प्रजनन के लिए मुर्गों और मुर्गियों का चुनाव:
1. मुर्गे का चुनाव: प्रजनन के लिए ऐसे मुर्गे चुने जाने चाहिए जिनका शरीर चमकीला, चौड़ा और मज़बूत हो। उनकी आँखें चमकदार, चोंच छोटी और मुड़ी हुई, कलगी चमकदार लाल और बड़ी होनी चाहिए। पीठ चौड़ी, त्वचा पतली और लचीली होनी चाहिए, साथ ही पूंछ लंबी और ऊपर की ओर मुड़ी हुई होनी चाहिए।
2. मुर्गी का चयन: प्रजनन के लिए ऐसी मुर्गी चुनी जानी चाहिए जिसका शरीर बड़ा, सिर अच्छा और आँखें उभरी हुई हों। एक साल से कम उम्र की परिपक्व और स्वस्थ मुर्गियाँ जो तेज़ी से बढ़ती हैं और ज़्यादा अंडे देती हैं, उन्हें चुनना चाहिए। ऐसी मुर्गियाँ अच्छे चूजे भी पैदा करती हैं।
प्रजनन विधि: कुक्कुट पालन में प्रजनन की मुख्य विधियाँ इस प्रकार हैं:
- लाइन प्रजनन (Line Breeding)
- बाह्य विनिमय (Out crossing)
- विनिमय (Crossing)
- ग्रेडिंग (Grading)
उष्मायन (अंडे से चूजे निकलना): कुक्कुट के अंडों से चूजे निकलने की अवधि हर प्रजाति में अलग होती है। जैसे मुर्गी के लिए 21 दिन, टर्की के लिए 28 दिन, बत्तख के लिए 28 दिन और जापानी बटेर के लिए 17-18 दिन। उष्मायन के दौरान चूजे सांस लेते हैं, उत्सर्जन करते हैं, पोषण प्राप्त करते हैं और अपनी रक्षा करते हैं।
अंडे से चूजा पालना: अंडे से बच्चे निकलने के बाद उन्हें पालने की प्रक्रिया को रियरिंग (Rearing) कहते हैं। चूजों को पालने के दो मुख्य तरीके हैं:
- प्राकृतिक ब्रूडिंग (Natural Brooding)
- कृत्रिम ब्रूडिंग (Artificial Brooding)
प्रोटीन फीड्स: मुर्गीपालन में प्रोटीन फीड्स एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें दूध, मीट स्क्रैप, फिश मील, कैल्शियम, फास्फोरस, मैंगनीज और अन्य लवण शामिल होते हैं।
मुर्गियों के सामान्य रोग: मुर्गियों को कई सामान्य बीमारियाँ हो सकती हैं, जिनमें मुख्य रूप से:
- विषाणु जनित रोग (जैसे रानीखेत रोग)
- जीवाणु जनित रोग
- कवक जनित रोग
यदि कोई संक्रामक रोग बहुत ज़्यादा बढ़ जाए, तो बीमार मुर्गियों को मार देना चाहिए। मुर्गीपालन करने वाले व्यक्ति को इन बीमारियों के बारे में सही जानकारी होनी ज़रूरी है। यह बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद करता है।
In simple words: कुक्कुट पालन में मुर्गे-मुर्गियों को अंडे और मांस के लिए पाला जाता है। इसमें सही नस्लें चुनना, प्रजनन करना, अंडे से बच्चे निकालना और चूजों को पालना शामिल है। उन्हें अच्छी खुराक दी जाती है और बीमारियों से बचाया जाता है।
🎯 Exam Tip: कुक्कुट पालन पर विस्तृत उत्तर देते समय, नस्लों के प्रकार, प्रजनन और पालन की विधियों, पोषण और सामान्य रोगों को शामिल करें।
Question 4. रेशम कीट पालन के विभिन्न चरणों का विस्तार से उल्लेख कीजिए।
Answer: व्यावसायिक स्तर पर रेशम का उत्पादन करने के लिए रेशम कीट के पालन-पोषण को रेशम कीट पालन कहते हैं। रेशम कीट का जीवन चक्र अंडे, लार्वा (कैटरपिलर), प्यूपा और वयस्क मॉथ अवस्थाओं से गुज़रता है। इसमें आंतरिक निषेचन होता है। लार्वा अवस्था में पाँच इन्स्टार होते हैं और चार बार निर्मोचन होता है।
रेशम कीट का जीवन चक्र और पालन के चरण:
1. अंडा: वयस्क मादा मॉथ अंडे देती है। इन अंडों को सुरक्षित रखना और सही समय पर सेते रहना महत्वपूर्ण है।
2. कैटरपिलर (लार्वा): लगभग दस दिन में अंडे से लार्वा निकलते हैं, जिन्हें कैटरपिलर कहते हैं। यह अवस्था 30-35 दिन तक रहती है। कैटरपिलर शहतूत की पत्तियों को खाते हैं और तेज़ी से बढ़ते हैं। अपनी लार्वा अवस्था में ये पाँच चरणों (इन्सटार) से गुज़रते हैं और चार बार अपनी त्वचा बदलते (निर्मोचन) हैं।
3. कोकून बनाना (प्यूपा अवस्था): जब कैटरपिलर पूरी तरह से विकसित हो जाते हैं, तो वे खाना बंद कर देते हैं और अपने चारों ओर रेशम का धागा लपेटकर कोकून बनाते हैं। इसी कोकून के अंदर कैटरपिलर प्यूपा में बदल जाते हैं, जिसे क्राइसेलिस भी कहते हैं। कोकून बनने की यह प्रक्रिया तीन दिनों में पूरी हो जाती है। कोया रेशम कीट पालन की आखिरी अवस्था है।
4. वयस्क मॉथ: प्यूपा 10-12 दिनों के बाद कोकून को तोड़कर वयस्क मॉथ के रूप में बाहर आता है।
रेशम उत्पादन उद्योग की सामान्य आवश्यकताएँ:
- मचान (Machana): रेशम कीट को पालने के लिए एक सही जगह।
- पालन पोषण ट्रे: शहतूत की पत्तियों के साथ रेशम कीट के अंडों को रखने के लिए।
- बुनने वाली या चन्ट्राकिस ट्रे: बुनाई के काम के लिए आवश्यक।
- डाल (शहतूत की पत्ती लाने के लिए): शहतूत की पत्तियों को कीटों तक पहुँचाने का उपकरण।
रेशम कीट पालन के कारण (प्रबंधन के मुख्य बिंदु):
(i) रेशम कीट का पालन-पोषण: इसमें अंडे देने से लेकर उनकी सुप्तावस्था, अंडे सेने, और शुरुआती अवस्थाओं की देखभाल से लेकर कोकून बनाने तक की पूरी प्रक्रिया शामिल है।
(ii) बीजागार का प्रबंधन: रेशम कीट पालकों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना और उनकी शुद्धता बनाए रखना बहुत ज़रूरी है। इसके लिए बीज (Seed egg) पैदा करने वाले कीट पाले जाते हैं। कैटरपिलर अवस्था में सही पोषण, रोगों से बचाव और अन्य देखभाल पर ध्यान दिया जाता है। अंडों के उत्पादन के लिए ढीले प्रकार के कोकून का उपयोग किया जाता है, जिन्हें लिंग के अनुसार अलग किया जाता है।
(iii) बीज की आपूर्ति और देखभाल: पुराने कीट पालक सीधे अंडे खरीद सकते हैं, लेकिन नए पालकों को पहली, दूसरी या तीसरी इन्सटार इल्ली से शुरुआत करनी चाहिए। चौथी और पाँचवीं इन्सटार कैटरपिलर का पालन-पोषण ज़्यादातर नायलॉन जाल द्वारा लटकी हुई ट्रे या ज़मीन पर रखी ट्रे में होता है। रेशम कीट के शुरुआती इन्स्टार इल्लियों के लिए तापमान का ध्यान रखना चाहिए, जैसे कि पहले से पाँचवें इन्सटार के लिए क्रमशः 27, 27, 25, 24, 23°C।
(iv) कोयों का बनाना: यह वह समय होता है जब पूरी तरह से विकसित इल्ली खाना बंद कर देती है और अपनी रेशम ग्रंथियों से चिपचिपा पदार्थ निकालती है। इस अवस्था में इल्ली को स्पिनिंग ट्रे में रखा जाता है और कुछ समय के लिए सूर्य की ओर तिरछा करके रख दिया जाता है। तीन दिन में स्पिनिंग पूरी होने के बाद कोया बन जाता है।
उन्नत तकनीकों का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाले कोयों का उत्पादन संभव है, जिससे रेशम उत्पादन बेहतर होता है।
In simple words: रेशम कीट पालन में अंडे, लार्वा, प्यूपा और मॉथ के चरण होते हैं। लार्वा शहतूत खाता है, फिर कोकून बनाता है, जिससे रेशम मिलता है। इसमें बीज का प्रबंधन, कीटों का पालन-पोषण और कोकून बनाने तक के सभी चरण शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: रेशम कीट पालन के प्रत्येक चरण को क्रमबद्ध तरीके से समझाएँ, और रेशम कीट के जीवन चक्र, आवश्यकताओं और प्रबंधन के मुख्य बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें।
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