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RBSE Class 12 Biology Chapter 40 बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से किस रोग में अंगुलियों में विकृतियाँ उत्पन्न होती हैं-
(अ) टिटनेस
(ब) कुष्ठरोग
(स) क्षय रोग
(द) न्यूमोनिया।
उत्तर: (ब) कुष्ठरोग
In simple words: कुष्ठरोग में मरीजों की उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती हैं और ठीक से काम नहीं कर पातीं। यह बीमारी मुख्य रूप से नसों और त्वचा को नुकसान पहुंचाती है।
🎯 Exam Tip: रोगों के नाम और उनके खास लक्षणों को याद रखना बहुत ज़रूरी है, खासकर वे जो शरीर के अंगों को प्रभावित करते हैं।
प्रश्न 2. एड्स रोग निम्नलिखित में से किस प्रकार के विषाणुओं से उत्पन्न होता है।
(अ) पोलियो विषाणु
(ब) एच.आई.वी. विषाणु
(स) चेचक विषाणु
(द) रेबीज विषाणु।
उत्तर: (ब) एच.आई.वी. विषाणु
In simple words: एड्स की बीमारी एच.आई.वी. वायरस से होती है। यह वायरस शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बहुत कम कर देता है।
🎯 Exam Tip: एड्स का पूरा नाम (Acquired Immuno Deficiency Syndrome) और एच.आई.वी. का पूरा नाम (Human Immunodeficiency Virus) याद रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 3. काला-अजार रोग उत्पन्न होता है-
(अ) एण्टअमीबा हिस्टोलाइटिका से
(ब) लीशमैनिया से
(स) ट्रिपैनोसोमा
(द) प्लैज्मोडियम से।
उत्तर: (ब) लीशमैनिया से
In simple words: काला-अजार एक परजीवी बीमारी है जो लीशमैनिया नामक परजीवी के कारण होती है। यह बालू मक्खी (sandfly) के काटने से फैलती है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि काला-अजार, लीशमैनिया परजीवी और बालू मक्खी से जुड़ा है, यह सीधे बीमारी के कारक, वाहक और नाम को जोड़ता है।
प्रश्न 4. मलेरिया किस मच्छर के काटने से होता है-
(अ) नर ऐनेफेलीज
(ब) मादा ऐनेफेलीज,
(स) क्यूलेक्स
(द) सेट्सी मक्खी।
उत्तर: (ब) मादा ऐनेफेलीज
In simple words: मलेरिया की बीमारी मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। यह मच्छर प्लाज्मोडियम परजीवी को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाता है।
🎯 Exam Tip: मलेरिया के लिए हमेशा 'मादा' एनाफिलीज मच्छर को याद रखें, क्योंकि केवल मादा मच्छर ही रक्त चूसती हैं और बीमारी फैलाती हैं।
प्रश्न 5. गिनी वर्म रोग होता है-
(अ) ड्रेकुनकुलस द्वारा
(ब) ऐस्केरिस द्वारा
(स) एन्टोरोबियस द्वारा
(द) टीनिया द्वारा।
उत्तर: (अ) ड्रेकुनकुलस द्वारा
In simple words: गिनी वर्म रोग ड्रेकुनकुलस नामक परजीवी के कारण होता है। इस रोग में त्वचा के नीचे की परतों में कीड़े पनपते हैं।
🎯 Exam Tip: गिनी वर्म रोग का कारक 'ड्रेकुनकुलस' परजीवी है, यह सीधे बीमारी और उसके परजीवी के नाम को जोड़ता है।
प्रश्न 6. किस रोग में प्रारम्भिक अवस्था में पता लगने पर इलाज सम्भव
(अ) कैंसर
(ब) श्वास
(स) मधुमेह
(द) उपरोक्त सभी।
उत्तर: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: कैंसर, श्वास और मधुमेह जैसे कई रोगों का अगर शुरुआत में ही पता चल जाए, तो उनका इलाज आसानी से हो सकता है। समय पर पहचान बीमारी को बढ़ने से रोकती है।
🎯 Exam Tip: कई बीमारियों के लिए 'प्रारंभिक निदान' (early diagnosis) हमेशा उपचार की सफलता की कुंजी होती है, यह महत्वपूर्ण अवधारणा है।
प्रश्न 7. निम्नलिखित में से कौन-सा रोग आनुवंशिक है-
(अ) दाब कोशिका अरक्तता
(ब) हीमोफिलिया
(स) वर्णान्धता
(द) उपरोक्त सभी ।
उत्तर: (द) उपरोक्त सभी ।
In simple words: दाब कोशिका अरक्तता, हीमोफिलिया और वर्णान्धता तीनों ही ऐसे रोग हैं जो माता-पिता से बच्चों में आते हैं। यह बीमारियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती हैं।
🎯 Exam Tip: आनुवंशिक रोगों को याद रखने के लिए उनके विशिष्ट लक्षणों के साथ उन्हें परिवार में चलने वाली बीमारी के रूप में पहचानना महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Biology Chapter 40 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. संक्रामक रोगों से आप क्या समझते हैं? दो रोगों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर: संक्रामक रोग (Infectious Diseases) वे रोग हैं जो छूने, संक्रमण या हवा-पानी के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं। इन बीमारियों के फैलने का मुख्य कारण सूक्ष्मजीवों का संचार होता है। कुष्ठ रोग और तपेदिक (टी.बी.) संक्रामक रोगों के दो उदाहरण हैं।
In simple words: संक्रामक रोग वो होते हैं जो एक-दूसरे के संपर्क में आने से या कीटाणुओं से फैलते हैं। जैसे कुष्ठ रोग और टी.बी.।
🎯 Exam Tip: संक्रामक रोगों की परिभाषा में 'फैलने वाले' शब्द और 'सूक्ष्मजीवों द्वारा' फैलने का कारण स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए।
प्रश्न 2. उपार्जित प्रतिरक्षा अक्षमता सिन्ड्रोम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: उपार्जित प्रतिरक्षा अक्षमता सिन्ड्रोम (Acquired Immuno Deficiency Syndrome) को एड्स (AIDS) के नाम से जाना जाता है। यह एच.आई.वी. (H.I.V.) वायरस से फैलता है। यह इस सदी की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है। पूरी दुनिया में इसे रोकने के लिए बहुत प्रयास हो रहे हैं, लेकिन अभी तक पूरी सफलता नहीं मिली है। भारत में पहला एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति 1986 में चेन्नई में पाया गया था। इस बीमारी को 'मृत्यु वारंट' भी कहते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। भारत सरकार ने एड्स की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) की स्थापना की है।
In simple words: एड्स एक ऐसी भयानक बीमारी है जो एच.आई.वी. वायरस से होती है और शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति को खत्म कर देती है। इसका कोई पक्का इलाज अभी तक नहीं मिल पाया है।
🎯 Exam Tip: एड्स के कारण (एच.आई.वी.), इसके प्रभाव (प्रतिरक्षा तंत्र पर), और जागरूकता के प्रयासों (विश्व एड्स दिवस, NACO) को अपनी टिप्पणी में शामिल करें।
प्रश्न 3. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए।
(i) अमीबिएसिस
(ii) मलेरिया
(iii) गिनी वर्म रोग
(iv) कैंसर
उत्तर:
(i) **अमीबिएसिस (Amoebiasis):** यह रोग एण्टअमीबा हिस्टोलाइटिका नामक प्रोटोजोआ से होता है। इसमें रोगी को दिनभर पेट में ऐंठन के साथ दस्त आते हैं, और कभी-कभी खून भी आता है। रोगग्रस्त व्यक्ति बहुत कमजोर हो जाता है। यह मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी से फैलता है।
(ii) **मलेरिया (Malaria):** यह प्लाज्मोडियम प्रोटोजोआ के कारण होता है। इसे मादा एनाफिलीज मच्छर फैलाती है। परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) और यकृत कोशिकाओं में रहता है। जब RBCs नष्ट होती हैं, तो शरीर में हीमोजोइन नाम का जहरीला पदार्थ बनता है, जिससे मलेरिया बुखार आता है।
(iii) **गिनी वर्म रोग (Dracunculosis):** इस रोग को नारू रोग भी कहते हैं। यह ड्रेकुनकुलस परजीवी के कारण होता है, जो मनुष्य की त्वचा के नीचे की परतों में पाया जाता है। जब मादा कृमि त्वचा से बाहर आने की कोशिश करती है, तो उस जगह खुजली और जलन होती है और छोटा छाला बन जाता है। इस कृमि को अक्सर शल्यक्रिया से बाहर निकाला जाता है।
(iv) **कैंसर (Cancer):** यह एक बहुत ही खतरनाक और जटिल बीमारी है। अगर इसका सही समय पर पता न चले तो इलाज मुश्किल हो जाता है। इसमें सबसे पहले शरीर में असामान्य कोशिकाओं की गांठ (ट्यूमर) बनती है। ये ट्यूमर दो तरह के होते हैं: बिनाइन (कम घातक) और मैलीग्नेन्ट (ज्यादा घातक)। समय पर निदान और उपचार (रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी) से इसका इलाज संभव है। कैंसर के इलाज में कई नई तकनीकें भी विकसित हुई हैं।
In simple words: अमीबिएसिस गंदे खाने-पानी से होने वाले दस्त का रोग है। मलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला बुखार है, जिससे खून के कण मरते हैं। गिनी वर्म रोग एक कीड़े से होता है जो त्वचा के नीचे रहता है। कैंसर शरीर में असामान्य गांठों का खतरनाक रोग है, जिसका जल्दी पता चलना इलाज के लिए ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक बीमारी के लिए, उसका कारक जीव (जैसे प्रोटोजोआ, मच्छर, कृमि, कैंसर कोशिकाएँ) और मुख्य लक्षण संक्षेप में बताएँ।
RBSE Class 12 Biology Chapter 40 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. असंक्रामक रोग कौन-कौन से होते हैं? दो रोगों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर: असंक्रामक रोग ऐसे रोग होते हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलते। ये रोग संक्रमण या छुआछूत से नहीं फैलते हैं। मुख्य असंक्रामक रोगों के नाम हैं: कैंसर, एलर्जी, श्वास या दमा, उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), दिल का दौरा (मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन), वातस्फीति, मोतियाबिंद, सबल बाय और भंगापन। यहाँ हम दो प्रमुख असंक्रामक रोगों का विस्तार से वर्णन कर रहे हैं:
**1. कैंसर (Cancer)**
कैंसर एक बहुत ही घातक और जटिल बीमारी है। इसमें शरीर की कोशिकाएँ अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और गांठें (ट्यूमर) बनाती हैं। ये ट्यूमर दो प्रकार के हो सकते हैं:
(i) **बिनाइन ट्यूमर (Benign Tumour):** ये ट्यूमर सामान्यतः कम खतरनाक होते हैं क्योंकि ये अपनी जगह तक ही सीमित रहते हैं और शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलते। इन्हें अक्सर सर्जरी से हटा दिया जा सकता है।
(ii) **मैलीग्नेन्ट ट्यूमर (Malignant Tumour):** ये ट्यूमर अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि ये तेजी से बढ़ते हैं और रक्त या लसीका के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकते हैं, जिससे नए ट्यूमर बनते हैं। इसे मेटास्टेसिस कहते हैं।
**कैंसर के विभिन्न प्रकार:**
(d) **फाइब्रोमा (Fibroma):** यह तंतुमय ऊतकों से बनने वाला ट्यूमर है।
(e) **ग्लायोमा (Glioma):** ये ट्यूमर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क के संयोजी ऊतक में बनते हैं।
(f) **मेलानोमा (Melanoma):** यह त्वचा पर मौजूद विशेष प्रकार की रंग बनाने वाली कोशिकाओं (मेलानोसाइट्स) से उत्पन्न होता है और तेजी से बढ़ता है।
(g) **लिम्फोमा (Lymphoma):** ये लसीका ग्रंथियों और लसीका प्रणाली के अन्य ऊतकों में उत्पन्न होने वाले ट्यूमर होते हैं।
**कैंसर का उपचार (Treatment of Cancer):** कैंसर के इलाज के लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं:
(a) **रेडियोथेरेपी (Radiotherapy):** इसमें कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए उच्च ऊर्जा विकिरण का उपयोग किया जाता है।
(b) **कीमोथेरेपी (Chemotherapy):** इसमें कैंसर रोधी दवाओं का उपयोग किया जाता है। इसके कुछ दुष्प्रभाव जैसे बालों का झड़ना और खून की कमी हो सकते हैं।
वर्तमान में, अधिकांश कैंसर का इलाज सर्जरी, विकिरण चिकित्सा और रसायन चिकित्सा के संयोजन से किया जाता है। इंटरफेरॉन का उपयोग भी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने में मदद करता है।
**2. श्वास या दमा (Asthma)**
दमा फेफड़ों से जुड़ी एक बीमारी है जिसमें साँस लेने में दिक्कत होती है। यह रोग श्वास नलिकाओं (ब्रोन्किओल्स) के सिकुड़ने के कारण होता है। दमा के रोगी को साँस लेने में बहुत कठिनाई होती है, खांसी आती है और घरघराहट (wheezing) की आवाज आती है।
यह अक्सर एलर्जी के कारण होता है, खासकर 30 वर्ष से कम उम्र के लोगों में। पौधों के पराग कण (pollen) इसके मुख्य कारण हो सकते हैं। अधिक उम्र के लोगों में यह धूल और धुएँ जैसे गैर-एलर्जी वाले उत्तेजकों के कारण होता है।
**लक्षण:** रोगी की त्वचा पर लाल चकत्ते हो सकते हैं, साँस लेने में कठिनाई होती है, त्वचा पर खुजली होती है, जुकाम और बार-बार छींकें आती हैं।
**बचाव और उपचार:** एलर्जी पैदा करने वाली चीजों से दूर रहना चाहिए। एलर्जी का कारण जानने के लिए परीक्षण करवाना ज़रूरी है। एंटीहिस्टामाइन, एड्रेनालाईन और स्टेरॉयड जैसी दवाएं दमा के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं।
In simple words: असंक्रामक रोग वो होते हैं जो फैलते नहीं हैं, जैसे कैंसर और दमा। कैंसर में कोशिकाएं अनियंत्रित होकर बढ़ती हैं और ट्यूमर बनाती हैं, जिसका इलाज विकिरण या दवा से होता है। दमा में साँस लेने में दिक्कत होती है, जो अक्सर एलर्जी या धूल से होती है, और इसका इलाज दवाओं और ट्रिगर से बचकर किया जाता है।
🎯 Exam Tip: असंक्रामक रोगों की परिभाषा में 'गैर-संक्रामक' प्रकृति पर जोर दें। कैंसर और दमा के लिए, उनके कारणों (कोशिका वृद्धि, एलर्जी), लक्षणों और उपचार विधियों को स्पष्ट करें।
प्रश्न 3. संक्रामक रोग क्या हैं? किन्हीं दो संक्रामक रोगों का उदाहरण देकर वर्णन करें।
उत्तर: संक्रामक रोग (Infectious Diseases) वे रोग हैं जो मानव शरीर में सूक्ष्मजीवों जैसे बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ या कवक द्वारा उत्पन्न होते हैं। ये रोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं। इन रोगों को फैलाने वाले कुछ महत्वपूर्ण कारक और उनके विवरण नीचे दिए गए हैं:
(A) **जीवाणुजनित रोग (Diseases Caused by Bacteria)**
(1) **कुष्ठ रोग (Leprosy, Hansen's disease):** यह एक पुरानी संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री (Mycobacterium leprae) नामक जीवाणु से फैलती है। इस रोग से शरीर की तंत्रिकाएं, मांसपेशियां और त्वचा प्रभावित होती हैं, जिससे उंगलियों में विकृति आ जाती है। इसके लक्षण दिखने में 1 से 7 साल लग सकते हैं। यह रोगी के घावों से निकलने वाले स्राव या लंबे समय तक संपर्क में रहने से फैलता है। कुष्ठ रोग सिर्फ मनुष्यों में होता है।
**उपचार:** कुष्ठ रोगी को स्वस्थ लोगों से अलग रखना चाहिए। उनके कपड़े और अन्य वस्तुएं दूसरों को इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। बी.सी.जी. (BCG) का टीका लगवाना चाहिए। यदि कोई अंग बहुत ज्यादा प्रभावित हो जाए, तो उसे सर्जरी से अलग करना पड़ सकता है।
(2) **क्षय रोग/तपेदिक (Tuberculosis):** यह माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु से होने वाली बीमारी है। रोगी को बुखार, खांसी, वजन कम होना और थकान महसूस होती है। यह रोग वायु के माध्यम से फैलता है जब रोगी खांसता या छींकता है। संक्रमित पशुओं के दूध से भी यह रोग फैल सकता है।
**उपचार:** रोगी को अलग रखें और उनके कपड़े, बर्तन आदि को उबालकर साफ करें। बलगम और मल को मिट्टी में दबा दें। दूषित जल और भोजन से बचें। बी.सी.जी. का टीका लगवाना चाहिए।
(3) **डिफ्थीरिया (Diphtheria):** यह कोरिनेबैक्टीरियम डिफ्थीरी नामक जीवाणु से होता है। यह नाक, गला और टॉन्सिल को प्रभावित करता है। यह रोग रोगी की उंगलियों के स्पर्श से, संक्रमित बर्तनों, खिलौनों और पेंसिल आदि के माध्यम से फैलता है। रोगी के खांसने-छींकने से भी फैलता है।
**उपचार:** रोगी को अलग रखें और बच्चों को प्रतिरोधी टीका लगवाएं। पाश्चरीकृत दूध पीने को दें।
(4) **टिटनेस/धनुस्तम्भ (Tetanus):** यह क्लॉस्ट्रीडियम टिटेनी नामक जीवाणु से होता है। इसमें सिरदर्द, जबड़े भिंचना, भोजन निगलने में कठिनाई और शरीर में ऐंठन जैसे लक्षण होते हैं। संक्रमण घाव या कटी-फटी त्वचा के माध्यम से होता है।
(5) **मस्तिष्क ज्वर (Meningitis):** यह निस्सेरिया मेनिंजाइटीडीस नामक जीवाणु से होता है। यह मस्तिष्क, मेरुरज्जु और मेरुरज्जु द्रव को संक्रमित करता है। तेज बुखार, सिरदर्द, बेचैनी और उल्टी जैसे लक्षण होते हैं। यह रोगी के खांसने-छींकने और संपर्क से फैलता है।
**उपचार:** रोगी के उपयोग किए गए कपड़ों को पानी में उबालकर धोना चाहिए। रोगी के कफ, उल्टी और मल को मिट्टी में दबा दें।
(6) **सुजाक (Gonorrhea):** यह नर्सेरिया गोनोरि आई नामक जीवाणु से होता है। यह जननांगों पर हमला करता है, जिससे मूत्रमार्ग से पीले रंग का द्रव स्रावित होता है और जलन होती है। यह यौन संबंध और संक्रमित वस्तुओं के संपर्क से फैलता है।
(7) **मोतीझरा (Typhoid):** यह साल्मोनेला टाइफी नामक जीवाणु से होता है। रोगी को सुस्ती, सिरदर्द, पेट में दर्द, 103-105° बुखार और शरीर पर फुन्सियां होती हैं। यह जल, भोजन और कीटों से फैलता है।
**उपचार:** रोगी के मल-मूत्र को मिट्टी में दबा दें। तरल भोजन और टी.ए.बी. का टीका लगवाएं।
(8) **काली खाँसी (Whooping Cough):** यह हीमोफाइलस पटुंसिस नामक जीवाणु से होता है। इसमें तेज जुकाम, सूखी खांसी और साँस लेने में कठिनाई होती है। डीपीटी (DPT) का टीका लगवाना चाहिए।
In simple words: संक्रामक रोग वे होते हैं जो कीटाणुओं से फैलते हैं, जैसे कुष्ठ रोग और टी.बी.। कुष्ठ रोग त्वचा और नसों को नुकसान पहुंचाता है, जो सीधे संपर्क से फैलता है। टी.बी. फेफड़ों को प्रभावित करता है और हवा से फैलता है, जिससे खांसी और कमजोरी होती है। इन रोगों से बचने के लिए साफ-सफाई और टीकाकरण ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: संक्रामक रोगों की व्याख्या करते समय, प्रत्येक रोग के लिए उसका कारण (विषाणु/जीवाणु), संचरण का तरीका और मुख्य निवारक उपाय स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।
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