RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 39 प्रतिरक्षा तंत्र

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Class 12 Biology Chapter 39 प्रतिरक्षा तंत्र RBSE Solutions PDF

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 39 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर

RBSE Class 12 Biology Chapter 39 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. मानव शरीर में प्रतिरक्षी तंत्र में कौन-सी कोशिका, कोशिका मध्यवर्ती प्रतिरक्षी अनुक्रिया में योगदान देती है ?
(अ) रक्ताणु
(ब) मास्ट कोशिका
(स) T-लसिकाणु
(द) थ्रोम्बोसाईट।
Answer: (स) T-लसिकाणु
In simple words: मानव शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र में, T-लसिकाणु कोशिकाएँ सीधे संक्रमण से लड़ने और अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं को निर्देश देने का काम करती हैं। ये शरीर की रक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

🎯 Exam Tip: कोशिका-मध्यवर्ती प्रतिरक्षा (CMI) में T-कोशिकाओं की भूमिका को याद रखें, जो सीधे संक्रमित कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट करती हैं।

 

Question 3. एलर्जी अनुक्रिया में कौन-सी एंटीबॉडी योगदान देती है ?
(अ) IgG
(ब) IgA
(स) IgE
(द) IgM.
Answer: (स) IgE
In simple words: एलर्जी होने पर हमारे शरीर में IgE नामक एंटीबॉडी सबसे ज़्यादा सक्रिय होती है। यह एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों पर प्रतिक्रिया करती है।

🎯 Exam Tip: एलर्जी प्रतिक्रियाओं में शामिल विशिष्ट एंटीबॉडी (IgE) को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मास्ट कोशिकाओं और बेसोफिल को सक्रिय करती है।

 

Question 4. कौनसी एंटीबॉडी माता से भ्रूण में प्लेसेंटा के माध्यम से स्थानान्तरित होती है?
(अ) IgG
(ब) IgA
(स) IgE
(द) IgM.
Answer: (अ) IgG
In simple words: IgG एंटीबॉडी माँ के शरीर से गर्भ में पल रहे बच्चे तक प्लेसेंटा से होकर पहुँचती है। यह बच्चे को जन्म से पहले और जन्म के तुरंत बाद बीमारियों से बचाती है।

🎯 Exam Tip: माँ से बच्चे में प्राकृतिक रूप से स्थानांतरित होने वाली एकमात्र एंटीबॉडी IgG है, जो नवजात शिशु को शुरुआती प्रतिरक्षा प्रदान करती है।

 

Question 5. टीकाकरण के फलस्वरूप मानव शरीर में क्या बनते हैं ?
(अ) प्लाज्मा
(ब) हिस्टामिन
(स) प्रतिरक्षी
(द) आविष।
Answer: (स) प्रतिरक्षी
In simple words: जब किसी को टीका लगाया जाता है, तो शरीर उस बीमारी से लड़ने के लिए प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) बनाता है। ये प्रतिरक्षी भविष्य में उसी बीमारी से बचाव करते हैं।

🎯 Exam Tip: टीकाकरण का मुख्य उद्देश्य शरीर में विशिष्ट प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) और स्मृति कोशिकाओं का निर्माण करके भविष्य के संक्रमण से बचाव करना है।

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 39 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 2. प्रतिरक्षी अथवा एंटीबॉडी कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: प्रतिरक्षी या एंटीबॉडी पाँच मुख्य प्रकार के होते हैं। ये सभी शरीर को विभिन्न प्रकार के संक्रमणों से बचाने में मदद करते हैं।
In simple words: प्रतिरक्षी पाँच तरह के होते हैं।

🎯 Exam Tip: मुख्य पाँच प्रकार के प्रतिरक्षियों IgG, IgA, IgM, IgE, IgD को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. अधिकतम सान्द्रता में पायी जाने वाली प्रतिरक्षी का नाम बताइए।
Answer: हमारे शरीर में सबसे ज़्यादा मात्रा में पायी जाने वाली प्रतिरक्षी IgG है। यह सबसे सामान्य प्रकार की एंटीबॉडी है।
In simple words: शरीर में सबसे ज़्यादा IgG एंटीबॉडी होती है।

🎯 Exam Tip: IgG सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली एंटीबॉडी है और यह लंबे समय तक प्रतिरक्षा प्रदान करती है।

 

Question 4. अर्बुद कोशिकाओं द्वारा नाश करने हेतु कौन-सी प्रतिरक्षी अनुक्रियाएँ उत्तरदायी होती हैं, नाम बताइए।
Answer: अर्बुद कोशिकाओं (कैंसर कोशिकाओं) को नष्ट करने के लिए सहज या प्राकृतिक प्रतिरक्षा अनुक्रियाएँ जिम्मेदार होती हैं। ये अनुक्रियाएँ तुरंत कार्य करती हैं।
In simple words: कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए शरीर की सहज या प्राकृतिक प्रतिरक्षा काम करती है।

🎯 Exam Tip: सहज प्रतिरक्षा, जिसमें प्राकृतिक मारक (NK) कोशिकाएँ शामिल हैं, ट्यूमर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

 

Question 5. मरे हुए जीवों से निर्मित टीके के नाम बताइए।
Answer: मरे हुए जीवों से बने टीकों में टाइफाइड, हैजा, कुकूरखाँसी, हेपेटाइटिस, और पोलियो (इन्जेक्शन) के टीके शामिल हैं। ये टीके रोग फैलाने वाले मृत सूक्ष्मजीवों का उपयोग करते हैं।
In simple words: मृत जीवों से बनने वाले टीके टाइफाइड, हैजा, कुकूरखाँसी, हेपेटाइटिस और पोलियो (इन्जेक्शन) हैं।

🎯 Exam Tip: मृत या निष्क्रिय टीकों में रोगज़नक़ को निष्क्रिय करके उपयोग किया जाता है, जिससे बीमारी का खतरा कम होता है लेकिन प्रतिरक्षा बनी रहती है।

 

Question 6. प्रतिरक्षा जैविकी का जनक किसे माना जाता है?
Answer: एडवर्ड जेनर को प्रतिरक्षा जैविकी का जनक माना जाता है। उन्होंने चेचक के टीके का विकास किया था।
In simple words: एडवर्ड जेनर को प्रतिरक्षा विज्ञान का जनक कहते हैं।

🎯 Exam Tip: एडवर्ड जेनर को चेचक के टीके के विकास के लिए जाना जाता है, जिसने टीकाकरण के क्षेत्र में क्रांति ला दी।

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 39 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. प्रतिरक्षी की परिभाषा दीजिए।
Answer: प्रतिरक्षी (Antibody) एक विशेष प्रकार का प्रोटीन अणु होता है। यह शरीर की लसीका ग्रन्थियों में बनता है और इसमें अमीनो अम्ल की चार शृंखलाएँ होती हैं। इसे इम्यूनोग्लोब्युलिन भी कहते हैं। जब यह रुधिर सीरम में मिल जाता है, तो यह शरीर में प्रवेश करने वाले बाहरी तत्वों (विदेशी अणुओं) के खिलाफ प्रतिक्रिया करता है और उनसे लड़ता है। ये अणु हमारे शरीर की सुरक्षा प्रणाली का एक अहम हिस्सा हैं।
In simple words: प्रतिरक्षी वह प्रोटीन अणु हैं जो शरीर की लसीका ग्रन्थियों में बनते हैं और बाहरी चीजों से लड़ने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रतिरक्षी को इम्यूनोग्लोब्युलिन भी कहते हैं और इसकी चार पॉलीपेप्टाइड शृंखलाओं वाली संरचना को याद रखना चाहिए।

 

Question 3. निष्क्रिय रूप से उपार्जित प्रतिरक्षा और सक्रियतः उपार्जित प्रतिरक्षा में मध्य मुख्य अन्तर बताइए।
Answer: निष्क्रिय रूप से उपार्जित प्रतिरक्षा तब मिलती है जब शरीर को पहले से बने-बनाए प्रतिरक्षी बाहर से दिए जाते हैं, जैसे माँ से बच्चे को। इसमें शरीर खुद प्रतिरक्षी नहीं बनाता। इसके विपरीत, सक्रिय उपार्जित प्रतिरक्षा तब होती है जब कोई रोगाणु (बीमारी पैदा करने वाला कीटाणु) शरीर में प्रवेश करता है या टीका लगाया जाता है। इससे शरीर खुद ही प्रतिरक्षी बनाता है और यह प्रतिरक्षा लंबे समय तक रहती है।
In simple words: निष्क्रिय प्रतिरक्षा में शरीर को बने-बनाए प्रतिरक्षी मिलते हैं, जबकि सक्रिय प्रतिरक्षा में शरीर खुद प्रतिरक्षी बनाता है।

🎯 Exam Tip: सक्रिय प्रतिरक्षा दीर्घकालिक होती है क्योंकि इसमें स्मृति कोशिकाएँ बनती हैं, जबकि निष्क्रिय प्रतिरक्षा अल्पकालिक होती है क्योंकि इसमें शरीर स्वयं प्रतिरक्षी नहीं बनाता।

 

Question 4. ह्यूमोरल इम्यूनिटी के बारे में समझाइए।
Answer: ह्यूमोरल इम्यूनिटी (Humoral Immunity) एक प्रकार की प्रतिरक्षा है जो शरीर के तरल पदार्थों जैसे रक्त और लसीका में मौजूद प्रतिरक्षी पदार्थों द्वारा प्रदान की जाती है। ये प्रतिरक्षी पदार्थ विशेष रूप से B-लिम्फोसाइट कोशिकाओं द्वारा बनाए जाते हैं। B-कोशिकाएँ हर तरह के बाहरी तत्व (एंटीजन) के लिए अलग-अलग एंटीबॉडी बनाती हैं। वे अपने जीन को बदलकर ऐसी जीन बनाती हैं जो खास तरह के प्रतिरक्षी बनाने के लिए ज़रूरी हैं। यह प्रणाली शरीर के तरल पदार्थों में घूम रहे रोगाणुओं से लड़ने में बहुत सक्रिय होती है, विशेषकर बैक्टीरिया और वायरस जैसे बाहरी आक्रमणकारियों के विरुद्ध।
In simple words: ह्यूमोरल इम्यूनिटी शरीर के तरल पदार्थों में एंटीबॉडी से मिलती है, जो B-कोशिकाओं द्वारा बनाई जाती हैं और रोगाणुओं से लड़ती हैं।

🎯 Exam Tip: ह्यूमोरल इम्यूनिटी को एंटीबॉडी-मध्यस्थ प्रतिरक्षा भी कहा जाता है, जिसमें B-कोशिकाएँ एंटीबॉडी का उत्पादन करके रोगजनकों को बेअसर करती हैं।

 

Question 5. T- कोशिका के बारे में बताइए।
Answer: T-कोशिका (T-cell) एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका या ल्यूकोसाइट है, जिसे लिम्फोसाइट भी कहते हैं। ये शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र की मुख्य कोशिकाएँ हैं और दो प्रकार की होती हैं: B-कोशिका और T-कोशिका। T-कोशिकाएँ विशेष रूप से कोशिकीय प्रतिरक्षा बनाने के लिए जिम्मेदार होती हैं। हर T-कोशिका किसी एक खास बाहरी तत्व (एंटीजन) से जुड़ी होती है, और हमारे शरीर में अलग-अलग एंटीजन के लिए अलग-अलग T-कोशिकाएँ 4-5 साल या उससे ज़्यादा समय तक जीवित रहती हैं। T-कोशिकाएँ कई प्रकार की होती हैं, जैसे मारक T-कोशिकाएँ (जो सीधे संक्रमित कोशिकाओं को मारती हैं), सहायक T-कोशिकाएँ (जो अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं को काम करने में मदद करती हैं), और दाबक T-कोशिकाएँ (जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करती हैं)।
In simple words: T-कोशिकाएँ एक तरह की सफेद रक्त कोशिकाएँ हैं जो प्रतिरक्षा में मदद करती हैं। ये खास एंटीजन से लड़ती हैं और अलग-अलग काम करती हैं।

🎯 Exam Tip: T-कोशिकाएँ कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा (CMI) का हिस्सा हैं, जो सीधे संक्रमित या कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर मारती हैं।

 

Question 2. प्रतिरक्षा तंत्र की परिभाषा लिखिए। इसके विभिन्न प्रकारों को समझाइए।
Answer: प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) हमारे शरीर की एक सुरक्षा प्रणाली है जो हमें विभिन्न प्रकार के रोगाणुओं जैसे-जीवाणु (Bacteria), विषाणु (Virus), कवक (Fungi) और अन्य छोटे परजीवियों के संक्रमण से बचाती है। यह तंत्र लगातार काम करता रहता है ताकि शरीर बीमारियों से सुरक्षित रहे।
प्रतिरक्षा तंत्र मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
1. सहज या प्राकृतिक प्रतिरक्षा (Natural or Innate Immunity) - यह प्रतिरक्षा जन्म से ही शरीर में मौजूद होती है। यह बाहरी तत्वों को शरीर में प्रवेश करने से रोकती है, जैसे त्वचा, नाक के बाल, श्लेष्मिक झिल्ली, और शरीर के स्राव (आँसू, लार)।
2. उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity) - यह प्रतिरक्षा जीवन के दौरान विकसित होती है और यह भी दो प्रकार की होती है:
• सक्रिय प्रतिरक्षा (Active Immunity) - यह तब बनती है जब शरीर खुद किसी संक्रमण के बाद या टीके के ज़रिए एंटीबॉडी बनाता है। यह लंबे समय तक चलती है क्योंकि शरीर को उस रोगाणु की 'याद' रहती है।
• निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Passive Immunity) - इसमें शरीर खुद एंटीबॉडी नहीं बनाता, बल्कि उन्हें बाहर से प्राप्त करता है, जैसे माँ से बच्चे को या किसी बीमार व्यक्ति को एंटीबॉडी का इंजेक्शन देना। यह एक अस्थायी सुरक्षा होती है।
In simple words: प्रतिरक्षा तंत्र शरीर को बीमारियों से बचाता है। यह दो तरह का होता है: सहज (जो जन्म से होता है) और उपार्जित (जो जीवन में मिलता है और सक्रिय या निष्क्रिय हो सकता है)।

🎯 Exam Tip: प्रतिरक्षा तंत्र के दो मुख्य प्रकारों, सहज और उपार्जित प्रतिरक्षा, को उनके विशिष्ट तंत्रों और सक्रिय तथा निष्क्रिय उपार्जित प्रतिरक्षा के उप-प्रकारों के साथ स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. टीकाकरण की परिभाषा बताते हुए इसके विभिन्न प्रकार के टीकों का वर्णन कीजिए।
Answer: टीकाकरण (Vaccination) वह प्रक्रिया है जिसमें शरीर को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए संक्रमण से पहले ही रोग पैदा न करने वाले (अनुग्र), मारे गए (विनाशित), कमज़ोर किए गए (क्षीण) सूक्ष्मजीवों या उनके ज़हर (टॉक्सिन) की बहुत कम मात्रा शरीर में डाली जाती है। इस पदार्थ को टीका (Vaccine) कहते हैं। टीका लगाने से शरीर में उस रोग से लड़ने की क्षमता विकसित हो जाती है।
आजकल कई प्रकार के टीके उपयोग में लाए जाते हैं:
1. जीवित, कमज़ोर किए गए टीके (Live, Diluted or Attenuated vaccines) - इन्हें रोग पैदा करने वाले विषाणुओं को कमज़ोर करके बनाया जाता है, ताकि वे बीमारी पैदा न कर सकें लेकिन प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया शुरू कर सकें। उदाहरण: खसरा, रोटावायरस और पोलियो (मुंह से)।
2. मृत या निष्क्रिय टीके (Killed or Inactivated vaccines) - इन टीकों में रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों को गर्मी या रसायनों से निष्क्रिय कर दिया जाता है। वे जीवित नहीं होते, इसलिए बीमारी नहीं फैला सकते। उदाहरण: टाइफाइड, हैजा, कुकूरखाँसी और इन्जेक्शन वाला पोलियो टीका।
3. आविष टीके (Toxoid vaccines) - ये टीके उन जीवाणुओं द्वारा बनाए गए ज़हर (टॉक्सिन) का उपयोग करते हैं जिन्हें हानिरहित बना दिया गया है। ये शरीर को उस ज़हर से लड़ने की शक्ति देते हैं। उदाहरण: डिप्थीरिया और टिटनेस के टीके।
4. संयुग्मी और इकाई टीके (Conjugated or single vaccines) - संयुग्मी टीके दो अलग-अलग घटकों को जोड़कर बनाए जाते हैं, जैसे जीवाणु के बाहरी आवरण के टुकड़े। इकाई टीके में रोगजनक का केवल एक छोटा हिस्सा उपयोग होता है। उदाहरण: पर्टुसिस और इन्फ्लुएंजा वैक्सीन।
5. अभियांत्रिकी टीके (Engineered vaccines) - ये आधुनिक तकनीक से बनाए जाते हैं, जहाँ रोगजनक के एंटीजन (अणु जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया शुरू करते हैं) को यीस्ट या जीवाणु कोशिकाओं में बनाया जाता है। उदाहरण: यकृत शोधबी का टीका।
In simple words: टीकाकरण में शरीर को बीमारी से बचाने के लिए कमज़ोर या मृत कीटाणु डाले जाते हैं, जिससे शरीर उस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। टीकों के कई प्रकार होते हैं, जैसे जीवित, मृत, आविष, संयुग्मी और अभियांत्रिकी टीके।

🎯 Exam Tip: टीकाकरण की परिभाषा और प्रत्येक प्रकार के टीके के उदाहरणों को स्पष्ट रूप से याद रखें, यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक प्रकार कैसे काम करता है।

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