NCERT Solutions for Class 12 Biology: Chapter 36 मानव में गुणसूत्रीय विकृतियाँ
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Practice Class 12 Biology Solutions: Chapter 36 मानव में गुणसूत्रीय विकृतियाँ
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RBSE Class 12 Biology Chapter 36 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. मनुष्य में अलिंग गुणसूत्र की संख्या होती है।
(अ) 42
(ब) 44
(स) 46
(द) 48.
Answer: (ब) 44
In simple words: मनुष्यों में, लिंग गुणसूत्रों को छोड़कर, बाकी सभी गुणसूत्रों को अलिंग गुणसूत्र कहते हैं, जिनकी संख्या 44 होती है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि लिंग गुणसूत्रों की संख्या 2 होती है, जबकि अलिंग गुणसूत्रों की संख्या 44 होती है, जिससे कुल गुणसूत्र 46 होते हैं।
Question 2. निम्नलिखित में से कौन-सी बीमारी अलिंग गुणसूत्र की संख्या में परिवर्तन आने से होती है?
Question 3. सामान्य स्त्री एवं वर्णान्ध पिता की संतान होगी–
(अ) सभी बच्चे सामान्य दृष्टि वाले एवं वाहक कोई नहीं
(ब) लड़के वर्णान्ध किन्तु लड़कियाँ सामान्य
(स) लड़कियाँ वाहक किन्तु लड़के सामान्य
(द) सभी बच्चे वर्णान्ध।
Answer: (स) लड़कियाँ वाहक किन्तु लड़के सामान्य
In simple words: यदि एक सामान्य महिला और एक वर्णान्ध पुरुष के बच्चे होते हैं, तो उनकी सभी बेटियाँ वर्णान्धता की वाहक होंगी और सभी बेटे सामान्य दृष्टि वाले होंगे।
🎯 Exam Tip: लिंग-सहलग्न रोगों में, पिता से रोग केवल बेटियों में जाता है, और माता वाहक होने पर बेटों में रोग जा सकता है।
Question 4. टर्नर सिंड्रोम में गुणसूत्रों की संख्या होती है-
(अ) 44
(ब) 45
(स) 46
(द) 47.
Answer: (ब) 45
In simple words: टर्नर सिंड्रोम में, गुणसूत्रों की सामान्य संख्या 46 की जगह केवल 45 गुणसूत्र होते हैं, जिसमें एक X गुणसूत्र की कमी होती है।
🎯 Exam Tip: टर्नर सिंड्रोम में गुणसूत्रों का विन्यास 44 + XO होता है, जिसका अर्थ है कुल 45 गुणसूत्र।
Question 5. निम्न में से कौन-सा रोग लिंग-सहलग्न होता है?
(अ) हैजा
(ब) एडवर्ड-सिंड्रोम
(स) मंगोलिज्म
(द) हिमोफिलिया।
Answer: (द) हिमोफिलिया।
In simple words: हिमोफिलिया एक ऐसा रोग है जो लिंग गुणसूत्रों (X-गुणसूत्र) से जुड़ा होता है, जिसका मतलब है कि यह रोग लिंग गुणसूत्रों के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाता है।
🎯 Exam Tip: लिंग-सहलग्न रोग वे होते हैं जिनके जीन लिंग गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं, जैसे हिमोफिलिया और वर्णान्धता।
Question 6. हिमोफिलिया से पीड़ित पिता एवं रोग की वाहक माता की संतान होगी-
Question 7. जब जीनों का एक समूह सहलग्नता दर्शाता है, तब वे-
(अ) स्वतंत्र अपव्यूहन नहीं दर्शाते
(ब) कोशिका विभाजन को प्रेरित करते हैं।
(स) गुणसूत्र नक्शा नहीं दर्शाते
(द) अर्धसूत्री विभाजन के समय रिकॉम्बीनेशन दर्शाता है।
Answer: (अ) स्वतंत्र अपव्यूहन नहीं दर्शाते
In simple words: जब जीन एक साथ जुड़े होते हैं (सहलग्नता दर्शाते हैं), तो वे स्वतंत्र रूप से अगली पीढ़ी में नहीं जाते, बल्कि एक साथ ही चलते रहते हैं।
🎯 Exam Tip: सहलग्नता में जीन एक ही गुणसूत्र पर इतने करीब होते हैं कि वे अर्धसूत्रीविभाजन के दौरान अलग नहीं होते, जिससे मेंडल का स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम लागू नहीं होता।
Question 8. जीन विनिमय जिसके परिणामस्वरूप उच्च जीवों में आनुवंशिक पुनः संयोजन होता है, निम्न में से मध्य पाया जाता है।
(अ) किसी बाइवैलेन्ट की सिस्टर क्रोमेटिड के मध्य
(ब) किसी बाइवैलेन्ट की नॉन-सिस्टर क्रोमेटिड के मध्य
(स) दो पुत्री केन्द्रकों में
(द) दो विभिन्न बाइवैलेन्ट में।
Answer: (ब) किसी बाइवैलेन्ट की नॉन-सिस्टर क्रोमेटिड के मध्य
In simple words: जीन विनिमय वह प्रक्रिया है जहाँ गुणसूत्रों के दो अलग-अलग हिस्सों के बीच आनुवंशिक सामग्री का आदान-प्रदान होता है, जिससे नए संयोजन बनते हैं। यह एक ही गुणसूत्र के गैर-समान भुजाओं के बीच होता है।
🎯 Exam Tip: जीन विनिमय समजात गुणसूत्रों के नॉन-सिस्टर क्रोमेटिड्स के बीच होता है और यह आनुवंशिक विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 9. फिनाइल कीटोन्यूरिया रोग में किस एंजाइम का संश्लेषण नहीं हो पाता है।
(अ) फिनाइल ऐलेनिन हाइड्रोक्सीलेज
(ब) फिनाइल ऐलेनिन डीहाइड्रोजिनेज
(स) फिनाइल ओक्सीजीनेज
(द) फिनाइल हाइड्रोक्सीलेज।
Answer: (अ) फिनाइल ऐलेनिन हाइड्रोक्सीलेज
In simple words: फिनाइल कीटोन्यूरिया रोग में शरीर फिनाइल ऐलेनिन हाइड्रोक्सीलेज नामक एंजाइम नहीं बना पाता, जिससे फिनाइल ऐलेनिन नामक पदार्थ शरीर में जमा होने लगता है।
🎯 Exam Tip: फिनाइल कीटोन्यूरिया एक आनुवंशिक रोग है जो एंजाइम की कमी के कारण होता है, जिससे मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है।
Question 10. सिकल सेल एनीमिया होता है-
RBSE Class 12 Biology Chapter 36 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. डाउन सिंड्रोम क्या होता है?
Answer: डाउन सिंड्रोम एक रोग है जो 21वें गुणसूत्र के एक अतिरिक्त कॉपी (ट्राइसोमी) के कारण होता है। इस रोग से पीड़ित बच्चों का शारीरिक विकास कम होता है और उनके सिर, गर्दन, हाथ, और चेहरे में कुछ असामान्य लक्षण दिखाई देते हैं।
In simple words: डाउन सिंड्रोम 21वें गुणसूत्र की एक अतिरिक्त प्रति के कारण होता है, जिससे शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है।
🎯 Exam Tip: डाउन सिंड्रोम को ट्राइसोमी 21 भी कहा जाता है, जहाँ 21वें गुणसूत्र की तीन प्रतियां होती हैं, सामान्य दो के बजाय।
Question 2. फिनाइल ऐलेनीन हाइड्रोक्सीलेज का क्या कार्य है?
Answer: फिनाइल ऐलेनिन हाइड्रोक्सीलेज नामक एंजाइम का मुख्य कार्य शरीर में फिनाइल ऐलेनिन को टायरोसीन नामक एक अन्य पदार्थ में बदलना है। यह प्रक्रिया शरीर के सामान्य चयापचय (मेटाबॉलिज्म) के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: यह एंजाइम फिनाइल ऐलेनिन को टायरोसीन में बदलता है।
🎯 Exam Tip: फिनाइल ऐलेनिन हाइड्रोक्सीलेज की कमी से फिनाइल कीटोन्यूरिया रोग होता है।
Question 3. सिकल सेल एनीमिया में हीमोग्लोबिन में किस प्रकार का उत्परिवर्तन होता है?
Answer: सिकल सेल एनीमिया में हीमोग्लोबिन में एक आनुवंशिक परिवर्तन (उत्परिवर्तन) होता है। इसमें हीमोग्लोबिन की बीटा श्रृंखला में छठे अमीनो अम्ल, ग्लूटामिक अम्ल की जगह वेलीन नामक अमीनो अम्ल आ जाता है, जिससे लाल रक्त कोशिकाओं का आकार बदल जाता है।
In simple words: सिकल सेल एनीमिया में हीमोग्लोबिन की बीटा श्रृंखला में ग्लूटामिक अम्ल की जगह वेलीन आ जाता है।
🎯 Exam Tip: यह एक बिंदु उत्परिवर्तन (point mutation) का उदाहरण है, जिससे प्रोटीन की संरचना में छोटा लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव होता है।
Question 4. क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम में कितने गुणसूत्र हो सकते हैं?
Answer: क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम पुरुषों में होने वाला एक आनुवंशिक विकार है। इस सिंड्रोम से पीड़ित पुरुषों की कोशिकाओं में सामान्य 46 गुणसूत्रों की अपेक्षा 47, 48 या 49 गुणसूत्र हो सकते हैं। यह अतिरिक्त गुणसूत्र आमतौर पर एक या अधिक X या Y क्रोमोसोम के रूप में होते हैं।
In simple words: क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम वाले पुरुषों में सामान्य 46 गुणसूत्रों के बजाय 47, 48 या 49 गुणसूत्र हो सकते हैं, जिनमें अतिरिक्त X या Y गुणसूत्र होते हैं।
🎯 Exam Tip: क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम का सबसे सामान्य गुणसूत्र विन्यास 44+XXY है, जिससे कुल 47 गुणसूत्र होते हैं।
Question 5. जीन विनिमय किस विभाजन में कब होता है?
Answer: जीन विनिमय, जिसे क्रॉसिंग ओवर भी कहते हैं, अर्धसूत्री विभाजन प्रथम (Meiosis I) की पूर्वावस्था प्रथम (Prophase I) की स्थूल सूत्रावस्था (Pachytene stage) में होता है। यह युग्मक (गैमेट) बनने के समय होता है।
In simple words: जीन विनिमय अर्धसूत्री विभाजन के पहले चरण की स्थूल सूत्रावस्था में होता है।
🎯 Exam Tip: जीन विनिमय आनुवंशिक विविधता को बढ़ाता है क्योंकि यह समजात गुणसूत्रों के बीच आनुवंशिक सामग्री का आदान-प्रदान करता है।
Question 7. हीमोफिलिया क्या होता है?
Answer: हीमोफिलिया एक आनुवंशिक रोग है जिसमें रक्त का थक्का जमने वाले कारकों (क्लॉटिंग फैक्टर) की कमी होती है। इस कारण, यदि ऐसे व्यक्ति को कोई चोट लगती है, तो उसका रक्त लगातार बहता रहता है और सामान्य 5-7 मिनट से अधिक समय तक भी रक्तस्राव नहीं रुकता। इस स्थिति को हीमोफिलिया कहते हैं, जो जानलेवा हो सकता है।
In simple words: हीमोफिलिया में रक्त का थक्का बनाने वाले पदार्थ की कमी होती है, जिससे चोट लगने पर खून बहना बंद नहीं होता।
🎯 Exam Tip: हीमोफिलिया को अक्सर "रॉयल डिजीज" भी कहा जाता है क्योंकि यह यूरोपीय शाही परिवारों में फैला था।
Question 8. स्त्री और पुरुष में गुणसूत्र की संख्या लिखिए।
Answer: मनुष्य में कुल 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं, यानी कुल 46 गुणसूत्र। इन 46 गुणसूत्रों में से 44 गुणसूत्र अलिंग गुणसूत्र होते हैं जो पुरुष और स्त्री दोनों में समान होते हैं। बचे हुए 2 गुणसूत्र लिंग गुणसूत्र कहलाते हैं। पुरुषों में एक X और एक Y गुणसूत्र (XY) होता है, जिसमें Y गुणसूत्र छोटा और X गुणसूत्र बड़ा होता है। जबकि स्त्रियों में दो X गुणसूत्र (XX) होते हैं, जो समान आकार के होते हैं। इसलिए, पुरुषों में कुल 44+XY = 46 गुणसूत्र और महिलाओं में 44+XX = 46 गुणसूत्र होते हैं।
In simple words: पुरुषों में 44 अलिंग गुणसूत्र और XY लिंग गुणसूत्र होते हैं (कुल 46), जबकि महिलाओं में 44 अलिंग गुणसूत्र और XX लिंग गुणसूत्र होते हैं (कुल 46)।
🎯 Exam Tip: लिंग गुणसूत्र ही व्यक्ति के जैविक लिंग का निर्धारण करते हैं।
RBSE Class 12 Biology Chapter 36 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. वर्णान्धता किसे कहते हैं?
Answer: वर्णान्धता एक लिंग-सहलग्न आनुवंशिक रोग है जिसमें व्यक्ति हरे और लाल रंगों में अंतर नहीं कर पाता है। ऐसे व्यक्ति को वर्णान्ध कहा जाता है। वर्णान्धता कई प्रकार की होती है, लेकिन लाल-हरे रंग की वर्णान्धता सबसे आम है, जिसमें लोग लाल और हरे रंग के बीच भेद नहीं कर पाते। मनुष्य के X गुणसूत्र पर रंग पहचानने वाली कोशिकाओं (रंगा कोशिकाओं) को बनाने वाले जीन होते हैं। ये जीन रेटिना में रंग पहचानने वाली कोशिकाओं के निर्माण को नियंत्रित करते हैं। यदि इस जीन में कोई अप्रभावी परिवर्तन (विकल्पी) आ जाता है, तो रंग पहचानने वाली कोशिकाएं ठीक से नहीं बन पातीं। इससे व्यक्ति में वर्णान्धता का रोग हो जाता है। यह रोग पुरुषों में अधिक होता है क्योंकि पुरुषों में केवल एक X गुणसूत्र होता है। जबकि महिलाओं में दो X गुणसूत्र होते हैं, इसलिए महिलाएँ आमतौर पर इस रोग से पीड़ित नहीं होतीं बल्कि इसकी वाहक होती हैं।
In simple words: वर्णान्धता में व्यक्ति लाल और हरे रंग में अंतर नहीं कर पाता है, यह एक लिंग-सहलग्न आनुवंशिक रोग है जो X गुणसूत्र पर मौजूद जीन में बदलाव के कारण होता है। पुरुष अधिक प्रभावित होते हैं, जबकि महिलाएँ वाहक होती हैं।
🎯 Exam Tip: वर्णान्धता एक अप्रभावी X-सहलग्न विकार है, जिसका अर्थ है कि महिलाओं को रोग होने के लिए दोनों X गुणसूत्रों पर अप्रभावी जीन होना चाहिए।
Question 2. वर्णान्धता की वाहक माता एवं सामान्य पिता की संतान 1 में रोग की आनुवंशिकता को बताइये।
Answer: यदि माता वर्णान्धता की वाहक है और पिता सामान्य हैं, तो उनकी संतान में आनुवंशिकता इस प्रकार होगी: एक वर्णान्ध वाहक स्त्री अपने सभी पुत्रों को वर्णान्धता का जीन (Xc) प्रदान करती है। अतः, एक वर्णान्ध स्त्री के सभी पुत्र वर्णान्ध होंगे। (चूँकि प्रश्न अधूरा है, यहाँ उपलब्ध जानकारी के आधार पर उत्तर दिया गया है।)
In simple words: एक वाहक माँ और सामान्य पिता के बच्चों में, बेटों को माँ से वर्णान्धता जीन मिलने की संभावना होती है।
🎯 Exam Tip: X-सहलग्न अप्रभावी विकारों में, वाहक माता से रोग बेटों में स्थानांतरित होता है, जबकि बेटियाँ वाहक हो सकती हैं।
Question 3. टर्नर सिंड्रोम क्या होता है?
Answer: टर्नर सिंड्रोम (Turner's Syndrome) एक लिंग गुणसूत्र मोनोसोमी (Monosomy) के कारण होने वाला सिंड्रोम है। इसमें शारीरिक गुणसूत्रों की संख्या सामान्य रहती है, लेकिन लिंग गुणसूत्रों में केवल एक X गुणसूत्र पाया जाता है, जिससे गुणसूत्र विन्यास 44 + XO होता है और कुल गुणसूत्रों की संख्या 45 होती है। टर्नर सिंड्रोम अंडजनन या शुक्राणुजनन के दौरान गुणसूत्रों के अलगाव में विफलता (नॉन-डिस्जंक्शन) के कारण हो सकता है। इस सिंड्रोम के कारण व्यक्ति का शरीर अल्पविकसित, महिलाओं जैसा और बांझ (Sterile) होता है। यह लगभग 5000 में से 1 जन्म में पाया जाता है और हमेशा एक महिला में होता है। इन महिलाओं की लंबाई कम होती है और उनके यौन विकास में देरी होती है। वे बांझ होती हैं। प्रति 3000 जन्मों में एक टर्नर सिंड्रोम वाली लड़की पैदा होती है। इसके लक्षणों में मंदबुद्धि, गर्दन पर जालीदार त्वचा (Weblike) और अपूर्ण विकसित स्तन शामिल हैं।
In simple words: टर्नर सिंड्रोम एक आनुवंशिक विकार है जिसमें महिलाओं में केवल एक X गुणसूत्र होता है (45, XO), जिससे शारीरिक और यौन विकास में समस्याएँ आती हैं, और वे बांझ होती हैं।
🎯 Exam Tip: टर्नर सिंड्रोम महिलाओं में पाया जाता है और यह एकमात्र ज्ञात मोनोसोमी है जो जीवित रहने योग्य है।
Question 4. बेटसन एवं पुन्नेट के प्रयोग को समझाइए।
Answer: बेटसन और पुन्नेट ने 1906 में मीठे मटर (Lathyrus odoratus) पर काम करते हुए सहलग्न जीनों की खोज की। उन्होंने नीले पुष्प (B) और लंबे परागकण (L) वाले पौधों का संकरण लाल पुष्प (b) और गोल परागकण (l) वाले पौधों के साथ कराया। पहली पीढ़ी (F₁) में नीले पुष्प और लंबे परागकण (BbLl) वाले पौधे मिले। इसके बाद, उन्होंने इन नीले पुष्प और लंबे परागकण (BbLl) वाले पौधों का लाल पुष्प और गोल परागकण (bbll) वाले पौधों के साथ टेस्ट क्रॉस (परीक्षार्थ संकरण) कराया। उम्मीद थी कि दूसरी पीढ़ी (F₂) में 1:1:1:1 का अनुपात मिलेगा, लेकिन उन्हें 7:1:1:7 का अनुपात मिला। इससे पता चला कि नए संयोजनों (रिकॉम्बिनेंट्स) की तुलना में मूल पैतृक स्वरूपों की संख्या अधिक थी। (चूंकि उत्तर अधूरा है, यहाँ उपलब्ध जानकारी के आधार पर उत्तर दिया गया है।)
In simple words: बेटसन और पुन्नेट ने मटर पर प्रयोग करके दिखाया कि कुछ जीन हमेशा एक साथ अगली पीढ़ी में जाते हैं, जिसे सहलग्नता कहते हैं।
🎯 Exam Tip: बेटसन और पुन्नेट के प्रयोग ने सहलग्नता की अवधारणा को स्थापित किया, जहाँ जीन एक ही गुणसूत्र पर इतने करीब होते हैं कि वे अक्सर एक साथ वंशानुगत होते हैं।
Question 5. सहलग्नता के विभिन्न प्रकारो को समझाइए।
Answer: सहलग्नता मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:
(1) पूर्ण सहलग्नता (Complete Linkage): यह वह स्थिति है जिसमें दो या दो से अधिक गुण कई पीढ़ियों तक लगातार वंशानुगत होते रहते हैं। यह जीवों में बहुत कम पाया जाता है। इस सहलग्नता में गुणसूत्र पर स्थित जीनों के जोड़े (जीन संयोजन) बिना टूटे ही वंशानुगत होते हैं, यानी इसमें दो जीन अलग नहीं होते। ड्रोसोफिला (फल मक्खी) और कुछ अन्य कीट इसके मुख्य उदाहरण हैं।
(2) अपूर्ण सहलग्नता (Incomplete Linkage): यह सहलग्नता जानवरों और पौधों दोनों में पाई जाती है। इसमें गुणसूत्र एक बिंदु से टूट सकता है और उस बिंदु पर जीन विनिमय (Crossing over) हो सकता है। मक्का (Maize) इसका एक अच्छा उदाहरण है। इसमें सहलग्न जीन (Linked gene) एक-दूसरे के पास-पास स्थित होते हैं, लेकिन वे अपने बिंदु पथों (Loci) पर लगे होने पर भी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में एक-दूसरे से काफी दूर स्थित रह सकते हैं।
In simple words: सहलग्नता दो तरह की होती है: पूर्ण सहलग्नता (जीन हमेशा साथ रहते हैं) और अपूर्ण सहलग्नता (जीन कभी-कभी अलग हो जाते हैं)।
🎯 Exam Tip: जीन विनिमय अपूर्ण सहलग्नता में विविधता को बढ़ाता है, जबकि पूर्ण सहलग्नता में कोई जीन विनिमय नहीं होता है।
RBSE Class 12 Biology Chapter 36 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. लिंग-सहलग्न वंशागति से आप क्या समझते हैं? वर्णान्धता एवं हीमोफिलिया रोग के सन्दर्भ में इसे समझाइए।
Answer: **लिंग-सहलग्न गुण तथा इनकी वंशागति (Sex-linked Characters and their Inheritance)**
एकलिंगी प्राणियों में दो प्रकार के गुणसूत्र पाए जाते हैं:
(i) समजात या दैहिक गुणसूत्र (Somatic chromosomes or autosomes)
(ii) लैंगिक गुणसूत्र (Sex chromosomes or allosomes)
लैंगिक गुणसूत्रों पर कुछ दैहिक लक्षणों के जीन भी होते हैं। ऐसे लक्षणों को लिंग-सहलग्न लक्षण कहते हैं और इनकी वंशागति को लिंग-सहलग्न वंशागति (Sex-linked inheritance) कहते हैं। मनुष्य में अब तक लगभग 120 लिंग-सहलग्न लक्षणों की खोज हो चुकी है।
**सामान्य लिंग-सहलग्न लक्षण तथा इनकी वंशागति (Common Sex-linked Characters and their Inheritance)**
आमतौर पर X-सहलग्न अप्रभावी लक्षण ही सामान्य लिंग-सहलग्न लक्षण होते हैं, जैसे वर्णान्धता और हीमोफिलिया। Y-लिंग गुणसूत्र पर इसका दूसरा (प्रभावी) युग्मविकल्पी ऐलील (Allele) नहीं होता। इसलिए ये लक्षण आमतौर पर पुरुषों में ही दिखाई देते हैं। महिलाओं में, जब तक दोनों लिंग गुणसूत्रों पर लिंग-सहलग्न लक्षण के अप्रभावी जीन उपस्थित नहीं होते, तब तक लक्षण प्रकट नहीं होते। यदि एक X गुणसूत्र पर यह जीन हो, तो महिला केवल उसकी वाहक (Carrier) होती है।
**वर्णान्धता की वंशागति (Inheritance of Colour blindness)**
यह मनुष्य में पाया जाने वाला एक X-सहलग्न रोग है। एक अप्रभावी जीन की उपस्थिति के कारण व्यक्ति लाल और हरे रंग में अंतर नहीं कर पाता है। लाल रंग की वर्णान्धता को प्रोटानोपिया (Protanopia) और हरे रंग की वर्णान्धता को ड्यूटेरानोपिया (Deuteranopia) कहते हैं। चूँकि अन्य लिंग-सहलग्न रोगों की तरह, इसका जीन भी X लिंग गुणसूत्र पर होता है, इसलिए वर्णान्धता मुख्य रूप से पुरुषों को प्रभावित करती है। पुरुषों में केवल एक X क्रोमोसोम होता है, इसलिए अप्रभावी जीन होने पर भी यह अभिव्यक्त हो जाता है। महिलाओं में दो X क्रोमोसोम होते हैं, इसलिए रोग के लिए विषमयुग्मजी (Heterozygous) अवस्था में रोग के लक्षण नहीं दिखते क्योंकि सामान्य जीन प्रभावी होता है। इसी कारण लगभग 8% पुरुष और 0.4% महिलाएँ इस विकार से पीड़ित होती हैं। एक वर्णान्ध पुरुष अपने बेटे में रोग नहीं फैला सकता। बेटे को यह रोग वाहक महिला से या पीड़ित महिला से ही मिलता है। यदि एक वाहक महिला की शादी सामान्य पुरुष से होती है, तो उसके 50% बेटों में वर्णान्ध होने की संभावना होती है। बेटियाँ आमतौर पर वर्णान्ध नहीं होतीं, जब तक कि माँ वाहक और पिता वर्णान्ध न हों।
वंशागति निम्न प्रकार होती है:
* कुल बेटों में से आधे (50%) वर्णान्ध।
* यदि स्त्री वर्णान्ध है, तो 50% बेटे वर्णान्ध और 50% सामान्य होंगे, जबकि 50% बेटियाँ वाहक और 50% वर्णान्ध होंगी।
* वर्णान्धता दादा से वाहक बेटियों के माध्यम से पोतों (Grandson) में पहुँचती है।
**हीमोफिलिया की वंशागति (Inheritance of Hemophilia)**
हीमोफिलिया एक रक्त विकार है जिसमें रक्त में थक्का बनाने वाले महत्वपूर्ण कारक (Clotting factor) की कमी होती है। इसलिए, रक्त का थक्का बहुत देर से जमता है या बिल्कुल नहीं जमता है, जिससे शरीर में एक छोटा सा घाव भी जानलेवा साबित हो सकता है। यह एक लिंग-सहलग्न अप्रभावी (Sex-linked recessive) रोग है जो वाहक (Unaffected carrier) महिलाओं से नर शिशु में आता है। वाहक महिलाएँ हीमोफिलिया के लिए विषमयुग्मकी (Heterozygous) होती हैं और उनमें सामान्य जीन की उपस्थिति के कारण हीमोफिलिया की स्थिति नहीं बनती। महिलाओं में हीमोफिलिया होने की संभावना बहुत कम होती है, क्योंकि इसके लिए माँ का वाहक होना और पिता का हीमोफिलिया से ग्रस्त होना आवश्यक है। हीमोफिलिया से ग्रस्त महिलाओं की आयु अधिक नहीं होती। ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के कई वंशज हीमोफिलिया से ग्रस्त थे और वह स्वयं इस रोग की वाहक थीं। हीमोफिलिया पर व्यापक अध्ययन हुआ है। चूंकि वाहक बेटी में एक सामान्य जीन होता है, इसलिए वह रोग से बची रहती है। बेटे में Y क्रोमोसोम X के समान नहीं होता है, इसलिए वह केवल X गुणसूत्र पर मौजूद जीन से ही रोगी होगा।
In simple words: लिंग-सहलग्न वंशागति में रोग के जीन लिंग गुणसूत्रों (X या Y) पर होते हैं। वर्णान्धता और हीमोफिलिया ऐसे ही रोग हैं। वर्णान्धता में व्यक्ति लाल-हरे रंग में अंतर नहीं कर पाता, और हीमोफिलिया में रक्त का थक्का नहीं जमता। दोनों ही रोग पुरुषों में ज़्यादा दिखते हैं क्योंकि उनके पास सिर्फ एक X गुणसूत्र होता है, जबकि महिलाएँ अक्सर वाहक होती हैं।
🎯 Exam Tip: लिंग-सहलग्न वंशागति में, रोगजनक जीन आमतौर पर X गुणसूत्र पर स्थित होते हैं, और अप्रभावी होने पर भी पुरुषों में अभिव्यक्त होते हैं।
Question 2. सहलग्नता एवं जीन विनिमय के अन्तर को स्पष्ट करते हुए समझाइये।
Answer: सहलग्नता और जीन विनिमय में अंतर को निम्नलिखित तालिका द्वारा समझा जा सकता है:
| सहलग्नता (Linkage) | जीन विनिमय (Crossing Over) |
|---|---|
| 2. जीन जो सहलग्नता दर्शाते हैं, वे गुणसूत्र पर ही होते हैं। सहलग्न जीन आनुवंशिकी के समय अपने मूल समूहों में ही रहते हैं। पास में स्थित जीन अधिक सहलग्नता दिखाते हैं, लेकिन दूर स्थित जीन कम सहलग्नता दिखाते हैं; जीन नियम के समय उनके अलग होने की संभावना अधिक होती है। | 2. जिस बिंदु पर जीन विनिमय होता है, उसे 'काइऐज्मा' या व्यात्सिका (Chiasma) कहते हैं। सहलग्न जीन एक-दूसरे से जीन विनिमय की प्रक्रिया द्वारा अलग-अलग हो जाते हैं। |
| 3. सहलग्नता दो प्रकार की होती है: (अ) पूर्ण सहलग्नता- जब गुणसूत्र पर उपस्थित जीन इतने नजदीक स्थित हों कि इनकी वंशागति पीढ़ी-दर-पीढ़ी नए संयोजन न बनाए, तो इसे पूर्ण सहलग्नता कहते हैं। (ब) अपूर्ण सहलग्नता- सहलग्न जीन हमेशा उसी संयोजन में वंशानुगत नहीं होते। समजात गुणसूत्रों व अर्धसूत्री विभाजन के समय जीन विनिमय द्वारा इनका परस्पर आदान-प्रदान हो जाता है। गुणसूत्रों पर दूर-दूर स्थित जीन अपूर्ण रूप से सहलग्न होते हैं क्योंकि इनमें जीन विनिमय द्वारा पृथक्करण की संभावना अधिक रहती है। | 3. जीन विनिमय को तीन प्रकारों में बांटा गया है: (अ) एकल जीन विनिमय (Single Crossing Over)- इसमें समजात गुणसूत्र का अर्धगुणसूत्र या क्रोमेटिड ही जीन विनिमय की क्रिया में भाग लेता है और इनकी एक युग्म में केवल एक काइऐज्मा बनता है। इसे एकल जीन विनिमय कहते हैं। (ब) दोहरा जीन विनिमय (Double Crossing Over)- इस क्रिया में दो-तीन अथवा चारों क्रोमेटिड्स भाग ले सकते हैं और इसमें दो काइऐज्मा बनते हैं। अतः इसे दोहरा जीन विनिमय कहते हैं। (स) बहुजीन विनिमय (Multiple Crossing Over)- जब दो समजात क्रोमेटिड्स में दो से अधिक काइऐज्मा बनते हैं, तो उसे बहुगुणित जीन विनिमय कहते हैं। |
| 4. एक ही क्रोमोसोम पर उपस्थित जीनों में एक साथ वंशानुगत होने की प्रवृत्ति होती है। | 4. नॉन-सिस्टर क्रोमेटिड्स के मध्य खंडों अथवा जीनों का आदान-प्रदान होता है। |
| 5. अलग-अलग गुणसूत्रों पर स्थित जीनों का स्वतंत्र रूप से अपव्यूहन होता है। | 5. यह क्रिया समजात गुणसूत्रों की अभिगनी या नॉन-सिस्टर क्रोमेटिड्स के मध्य होती है। |
In simple words: सहलग्नता में जीन एक साथ एक ही गुणसूत्र पर रहते हैं और साथ में वंशानुगत होते हैं, जबकि जीन विनिमय में गुणसूत्रों के हिस्सों का आदान-प्रदान होता है जिससे नए जीन संयोजन बनते हैं।
🎯 Exam Tip: सहलग्नता जीनों को एक साथ रखती है, जबकि जीन विनिमय उन्हें पुनर्व्यवस्थित करके आनुवंशिक विविधता पैदा करता है।
Question 3. मनुष्य में विभिन्न गुणसूत्रीय असामान्यताओं के बारे में विस्तार से समझाइये।
Answer: भ्रूणीय विकास के दौरान मनुष्य के गुणसूत्रों की संख्या या संरचना में किसी कारण से अंतर आने पर असामान्य बच्चे पैदा होते हैं। यह असामान्य स्थिति अलिंग गुणसूत्रों या लिंग गुणसूत्रों, दोनों की संख्या में परिवर्तन के कारण हो सकती है। गुणसूत्रों की सामान्य संख्या और संरचना में बदलाव से कई असामान्य लक्षण उत्पन्न होते हैं। मनुष्य में आनुवंशिक विकारों के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:
**(अ) ऑटोसोमल असामान्यताएँ (Autosomal abnormalities)**
1. **डाउन सिंड्रोम या मंगोलिज्म (Down's syndrome or Mongolism):** यह सबसे पुराना और सबसे अच्छी तरह से अध्ययन किया गया सिंड्रोम है। लैंगडेन डाउन (Langdon Down, 1866) ने इस सिंड्रोम का अध्ययन किया था। यह 21वें गुणसूत्र की एक अतिरिक्त कॉपी (ट्राइसोमी) के कारण होता है, जिससे कुल गुणसूत्रों की संख्या 47 हो जाती है। यह लक्षण पुरुषों और महिलाओं दोनों में पाया जा सकता है। इसमें रोगी की जीभ मोटी, आँखें तिरछी, मस्तिष्क का विकास कम और कद छोटा होता है। इनकी औसत आयु 12 से 14 वर्ष होती है। हर 700 बच्चों में से एक में डाउन सिंड्रोम होता है।
3. **विविध संरचनात्मक असामान्यताएँ (Structural abnormalities):** इस प्रकार की असामान्यताएँ गुणसूत्र के किसी विशेष हिस्से के हट जाने (विलोपन) से उत्पन्न होती हैं। उदाहरण के लिए, 5वीं जोड़ी के गुणसूत्र की छोटी भुजा का विलोपन हो जाता है, जिसे क्राई-डू-चैट सिंड्रोम कहते हैं।
**(ब) लिंग-गुणसूत्र संबंधी असामान्यताएँ (Sex chromosome abnormalities)**
लिंग-गुणसूत्रों में संख्यात्मक परिवर्तन, दैहिक गुणसूत्रों की तुलना में अधिक पाए जाते हैं, जिससे पैदा होने वाले बच्चों में कई असामान्यताएँ और विकृतियाँ होती हैं, जो निम्नलिखित हैं:
(1) **टर्नर सिंड्रोम (Turner's Syndrome):** यह व्यक्ति हमेशा एक महिला होती है। इसमें दो X गुणसूत्रों की अपेक्षा केवल एक X क्रोमोसोम होता है, जिससे उनकी गुणसूत्र संख्या 45 (44 + XO) होती है। इन महिलाओं की लंबाई कम होती है और यौन विकास में देरी होती है। ये महिलाएँ बांझ होती हैं। हर 3000 जन्म में एक टर्नर सिंड्रोम वाली लड़की पैदा होती है। इसके लक्षणों में मंदबुद्धि, गर्दन पर जालीदार त्वचा (वेबलाइक), और अपूर्ण विकसित स्तन शामिल हैं।
(2) **क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter's Syndrome):** यह बीमारी पुरुषों में होती है। इनकी कोशिकाओं में 46 की जगह 47, 48 या 49 क्रोमोसोम हो सकते हैं। यह अतिरिक्त गुणसूत्र X या Y क्रोमोसोम के रूप में होता है। क्लाइनफेल्टर पुरुषों में गुणसूत्र निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:
* 44 + XXY (एक अतिरिक्त X क्रोमोसोम) = 47
* 44 + XXXY (दो अतिरिक्त X क्रोमोसोम) = 48
* 44 + XXXXY (तीन अतिरिक्त X क्रोमोसोम) = 49
* 44 + XXYY (एक X व एक Y अतिरिक्त) = 48
* 44 + XXXYY (दो X व एक Y अतिरिक्त) = 49
इन असामान्य गुणसूत्र संख्या वाले पुरुषों में महिलाओं जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इनके लक्षणों में लंबा कद, कम बुद्धि, लंबे हाथ-पैर, बांझपन (Sterile) और पुरुषों में महिलाओं की तरह विकसित स्तन (गाइनेकौमेस्टिया) शामिल हैं।
(3) **महिलाओं में अतिरिक्त X क्रोमोसोम की स्थिति (Extra X chromosome in females):** इसमें 47 से 49 तक क्रोमोसोम की संख्या हो सकती है, लेकिन यह अतिरिक्त X गुणसूत्रों के कारण होता है, जैसे 44 + XXX, 44 + XXXX, 44 + XXXXX। ऐसी महिलाएँ लैंगिक लक्षण में देरी से विकसित होती हैं और उनमें कम बुद्धि होती है।
4. **पुरुषों में अतिरिक्त क्रोमोसोम (Extra chromosome in males):** इन पुरुषों में कुल 47 क्रोमोसोम (44+XYY) होते हैं। इन पुरुषों में जननांगों का विकास भी असामान्य होता है। ये असामान्य रूप से लंबे, कम बुद्धि वाले और अपराधी प्रवृत्ति वाले होते हैं।
In simple words: गुणसूत्रीय असामान्यताएँ तब होती हैं जब गुणसूत्रों की संख्या या संरचना में बदलाव आता है। इनमें डाउन सिंड्रोम (21वें गुणसूत्र की अतिरिक्त कॉपी), टर्नर सिंड्रोम (महिलाओं में एक X गुणसूत्र की कमी), और क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (पुरुषों में अतिरिक्त X गुणसूत्र) जैसे रोग शामिल हैं, जो शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करते हैं।
🎯 Exam Tip: गुणसूत्रीय असामान्यताओं को उनके प्रकार (ऑटोसोमल या लिंग गुणसूत्रीय) और संख्यात्मक या संरचनात्मक परिवर्तनों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
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