RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 31 मानव में युग्मकजनन

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Detailed Chapter 31 मानव में युग्मकजनन RBSE Solutions for Class 12 Biology

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Class 12 Biology Chapter 31 मानव में युग्मकजनन RBSE Solutions PDF

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 31 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. अण्डाशय से परिपक्व अण्डे के निकलने को कहते हैं-
(अ) इम्प्लान्टेशन (आरोपण)
(ब) निषेचन
(स) ओव्यूलेशन (अण्डोत्सर्ग)
(द) पार्चुरीशन (प्रसव)
Answer: (स) ओव्यूलेशन (अण्डोत्सर्ग)
In simple words: अण्डाशय से पूरी तरह विकसित अंडे के बाहर निकलने की प्रक्रिया को ओव्यूलेशन या अण्डोत्सर्ग कहते हैं। यह महिला प्रजनन चक्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: ओव्यूलेशन शब्द का अर्थ और इसका महत्व महिला प्रजनन प्रणाली के संदर्भ में अच्छी तरह से समझें।

 

Question 3. स्तनी शुक्राणु के अग्रपिण्डक (Acrosome) को घेरने वाली झिल्ली का टूटना कहलाता है-
(अ) सक्रियण
(ब) केपेसीटेशन (योग्यता अर्जन)
(स) एग्ल्युटिनेशन (समूहन)
(द) कोटरन
Answer: (ब) केपेसीटेशन (योग्यता अर्जन)
In simple words: स्तनधारी शुक्राणु के ऊपर की झिल्ली का टूटना केपेसीटेशन कहलाता है। यह शुक्राणु को अंडे को निषेचित करने के लिए तैयार करता है।

🎯 Exam Tip: केपेसीटेशन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो शुक्राणु को निषेचन के लिए सक्षम बनाती है; इस जैविक क्रिया को अच्छी तरह समझें।

 

Question 4. निम्न में से कौन अमर है?
(अ) ग्लोमेरुलर कोशिका
(ब) जनन कोशिका
(स) पिट्यूटरी कोशिका
(द) कायिक कोशिका
Answer: (ब) जनन कोशिका
In simple words: जनन कोशिकाएं (जो शुक्राणु और अंडे बनाती हैं) को "अमर" माना जाता है क्योंकि वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवन को आगे बढ़ाती रहती हैं।

🎯 Exam Tip: जनन कोशिकाओं की "अमरता" का अर्थ है कि वे आनुवंशिक जानकारी को अगली पीढ़ी में स्थानांतरित करती रहती हैं, जिससे जीवन का चक्र चलता रहता है।

 

Question 5. स्पर्म के परिवर्धन की कौन-सी प्रावस्था, ओवम के परिवर्धन में भाग नहीं लेती?
(अ) ध्रुवकाय का निर्माण
(ब) वृद्धि प्रावस्था
(स) गुणन प्रावस्था
(द) स्पर्मियोजेनेसिस
Answer: (द) स्पर्मियोजेनेसिस
In simple words: स्पर्मियोजेनेसिस केवल शुक्राणु बनने की प्रक्रिया का हिस्सा है। ओवम के बनने में इसका कोई काम नहीं होता क्योंकि दोनों अलग-अलग प्रजनन प्रक्रियाएं हैं।

🎯 Exam Tip: शुक्राणुजनन (स्पर्मेटोजेनेसिस) और अण्डजनन (उजेनेसिस) की प्रक्रियाओं की विभिन्न प्रावस्थाओं को ध्यान से समझें, ताकि उनके बीच के अंतर को स्पष्ट कर सकें।

 

Question 7. अण्डाणुओं के निर्माण की क्रिया को कहते हैं-
(अ) अण्डजता
(ब) अण्डजनन
(स) अण्डनिक्षेपण
(द) अण्डोत्सर्ग
Answer: (ब) अण्डजनन
In simple words: वह प्रक्रिया जिससे अण्डे (अण्डाणु) बनते हैं, उसे अण्डजनन कहते हैं।

🎯 Exam Tip: अण्डजनन (Oogenesis) एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें मादा युग्मकों का निर्माण होता है; इसकी विभिन्न अवस्थाओं को याद रखें।

 

Question 8. शुक्राणु की पूँछ के तन्तुओं का विन्यास होता है-
(अ) 9 (Singlet) + 2 अण्डजता
(ब) 9 (Singlet) + 9 (Doublet)
(स) 9 (Singlet) + 2 (Doublet)
(द) 9 (Singlet) + 9 (Doublet) + 2 (Singlet)
Answer: (द) 9 (Singlet) + 9 (Doublet) + 2 (Singlet)
In simple words: शुक्राणु की पूंछ के तंतुओं में सिंगलेट और डबलट का एक खास क्रम होता है, जो शुक्राणु को चलने में मदद करता है। यह विन्यास उसकी संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: शुक्राणु की पूंछ की जटिल सूक्ष्मदर्शीय संरचना को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मनलिकाओं की व्यवस्थित पहचान शामिल है।

 

Question 9. किस प्रक्रिया में धुवकाय बनती हैं ?
(अ) पुनरुद्भवन
(ब) शुक्रजनन
(स) अण्डजनन
(द) निषेचन
Answer: (स) अण्डजनन
In simple words: अण्डजनन वह प्रक्रिया है जिसमें मादा में अंडे बनते हैं, और इसी दौरान ध्रुवकाय (पोलर बॉडी) भी बनते हैं।

🎯 Exam Tip: ध्रुवकाय (polar bodies) का निर्माण अण्डजनन के दौरान अतिरिक्त क्रोमोसोम को हटाने के लिए होता है और यह निषेचन के लिए केवल एक कार्यात्मक अंडे को सुनिश्चित करता है।

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 31 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अपरा स्तनी (Placental mammal) में अण्डे (पीतक) कैसे होते हैं ?
Answer: अपरा स्तनी (Placental mammal) में अण्डे अपीतकी (बिना पीतक के) और समपीतकी (कम पीतक के साथ) होते हैं। इसका मतलब है कि उनके अंडे में बहुत कम या बिल्कुल भी पीतक नहीं होता है।
In simple words: जिन स्तनधारियों में गर्भनाल होती है, उनके अंडे में या तो पीतक नहीं होता है, या बहुत कम पीतक होता है।

🎯 Exam Tip: अपरा स्तनी में अंडे के प्रकार को भ्रूण विकास के लिए पोषण प्रदान करने वाले प्लेसेंटा की भूमिका के संदर्भ में समझें।

 

Question 2. निषेचन के समय शुक्राणु का कौन-सा शीर्ष भाग अण्डाणु के सम्पर्क में आता है ?
Answer: निषेचन के समय शुक्राणु का अग्रपिण्डक भाग (Acrosome) अण्डाणु (अंडे) के सम्पर्क में आता है। यह भाग अंडे की बाहरी परत को भेदने में मदद करता है।
In simple words: निषेचन के समय शुक्राणु का एक्रोसोम नाम का ऊपरी हिस्सा अंडे से मिलता है।

🎯 Exam Tip: एक्रोसोम की भूमिका को याद रखें, जिसमें ऐसे एंजाइम होते हैं जो निषेचन के दौरान अंडे की परत को घोलने में मदद करते हैं।

 

Question 3. शुक्राणु के मध्य भाग के निर्माण में कौन से सहायक कोशिकांग होते हैं ?
Answer: शुक्राणु के मध्य भाग के निर्माण में माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) सहायक कोशिकांग होते हैं। ये शुक्राणु को गति के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।
In simple words: शुक्राणु के बीच के हिस्से को बनाने में माइटोकॉन्ड्रिया मदद करते हैं, जो उसे तैरने की शक्ति देते हैं।

🎯 Exam Tip: माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का 'पावरहाउस' कहा जाता है; शुक्राणु में इसकी भूमिका को विशेष रूप से ध्यान दें क्योंकि यह पूंछ की गति के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है।

 

Question 4. शुक्राणुजनन में द्वितीय परिपक्वन विभाजन के फलस्वरूप बनने वाली कोशिकाएँ क्या कहलाती हैं ?
Answer: शुक्राणुजनन में जब दूसरा परिपक्वन विभाजन होता है, तो उससे बनने वाली कोशिकाओं को स्पर्मेटिड्स (Spermatides) कहते हैं। ये अभी अपरिपक्व शुक्राणु होते हैं।
In simple words: शुक्राणु बनने की प्रक्रिया में दूसरे विभाजन के बाद स्पर्मेटिड्स बनते हैं।

🎯 Exam Tip: शुक्राणुजनन के विभिन्न चरणों और प्रत्येक चरण में बनने वाली कोशिकाओं के नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे स्पर्मेटोगोनिया, प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट, द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट और स्पर्मेटिड।

 

Question 5. बार कांय किसमें पायी जाती हैं ?
Answer: बार काय (Barr body) मादा की जीनोटाइप के प्रत्येक कायिक कोशिका (Somatic cell) में पाई जाती है। यह एक निष्क्रिय X-क्रोमोसोम होता है।
In simple words: बार काय सिर्फ मादा कोशिकाओं में मिलती है, जो एक शांत X-क्रोमोसोम होती है।

🎯 Exam Tip: बार काय मादा स्तनधारियों में एक निष्क्रिय X-क्रोमोसोम का प्रतिनिधित्व करती है और यह लिंग निर्धारण और जीन विनियमन में इसकी भूमिका को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. अण्डों की तुलना में शुक्राणुओं का निर्माण अधिक क्यों होता है ?
Answer: अण्डों की तुलना में शुक्राणुओं का निर्माण अधिक होता है क्योंकि नर में बनने वाले सभी चार शुक्राणु (युग्मक) क्रियाशील होते हैं। इसके विपरीत, मादा में एक प्राथमिक अण्डाणु से केवल एक ही क्रियाशील अण्डाणु बनता है, जबकि बाकी ध्रुवकाय (पोलर बॉडी) बन जाते हैं। इस तरह, शुक्राणुओं की संख्या अधिक होने से निषेचन की संभावना बढ़ जाती है।
In simple words: नर में एक प्रक्रिया से चार शुक्राणु बनते हैं, जो सभी काम करते हैं। मादा में एक प्रक्रिया से सिर्फ एक अंडा बनता है। इसलिए, शुक्राणु ज्यादा बनते हैं।

🎯 Exam Tip: शुक्राणुजनन और अण्डजनन की तुलना करते समय, इस बात पर ध्यान दें कि एक प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट चार कार्यात्मक शुक्राणु पैदा करता है, जबकि एक प्राथमिक ऊसाइट केवल एक कार्यात्मक अंडा और ध्रुवकाय पैदा करता है।

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 31 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. मानव के शुक्राणु की रचना का वर्णन कीजिए।
Answer: मानव शुक्राणु की संरचना को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जाता है:
(i) शीर्ष (Head): शुक्राणु का शीर्ष भाग केंद्रक (Nucleus) और एक्रोसोम (Acrosome) से बनता है। एक्रोसोम शुक्राणु के अग्र भाग पर होता है, जिसमें अंडे की बाहरी परत को भेदने में मदद करने वाले एंजाइम (जैसे हायल्यूरोनीडेज) होते हैं। इसमें अम्लीय प्रोटीन एंटी-फर्टिलाइजिन भी पाया जाता है।
(ii) मध्य खण्ड (Mid piece): यह भाग शीर्ष को ग्रीवा से जोड़ता है। इसमें दो तारककेन्द्र (centrioles) होते हैं। समीपस्थ तारककेन्द्र निषेचन के बाद माइटोटिक स्पिंडल बनाने में मदद करता है। दूरस्थ तारककेन्द्र शुक्राणु के अक्ष को बनाता है और बेसल बॉडी की तरह कार्य करता है। मध्य खण्ड में माइटोकॉन्ड्रिया आपस में मिलकर फीते जैसी संरचना नेबेनकर्ण (Nebenkern) बनाते हैं, जो ऊर्जा का स्रोत होते हैं। कोशिका द्रव्य की एक पतली परत, मैनचेट, भी यहाँ होती है। इस खंड के पिछले हिस्से में वलय तारक काय (Ring centriole) भी पाया जाता है।
(iii) पूँछ (Tail): यह शुक्राणु का सबसे लंबा हिस्सा होता है। पूंछ का अंतिम भाग नुकीला होता है, जबकि मुख्य खंड पूंछ का अधिकांश हिस्सा बनाता है। इसमें 9+2 सूक्ष्मनलिका (microtubule) व्यवस्था के अलावा कोशिका द्रव्य और मोटे तंतु भी होते हैं, जो शुक्राणु को गति प्रदान करने में मदद करते हैं।
In simple words: मानव शुक्राणु के तीन मुख्य भाग होते हैं: शीर्ष (जो आनुवंशिक सामग्री और अंडे को भेदने वाले एंजाइम रखता है), मध्य खण्ड (जो गति के लिए ऊर्जा देता है), और पूंछ (जो शुक्राणु को तैरने में मदद करती है)।

🎯 Exam Tip: मानव शुक्राणु की हर संरचना का नाम और उसके कार्य को याद रखें, जैसे एक्रोसोम, केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया और पूंछ, क्योंकि ये निषेचन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

Question 2. एक्रोसोम निर्माण का वर्णन करें।
Answer: एक्रोसोम का निर्माण गॉल्जी काय (Golgi bodies) के बदलाव से होता है। इस प्रक्रिया में, एक या एक से अधिक रिक्तिकाएं बड़ी होने लगती हैं और उनमें पूर्व-एक्रोसोमल कण दिखाई देने लगते हैं। ये कण मिलकर एक्रोसोम का मुख्य हिस्सा बनाते हैं। एक्रोसोम के अंदर एंजाइम होते हैं जो निषेचन के समय अंडे की बाहरी परतों को घोलने में मदद करते हैं। पूर्वशुक्राणु (Spermatid) का अधिकतर कोशिका द्रव्य अनावश्यक होता है और उसे हटा दिया जाता है। इस प्रक्रिया के अंत में, केंद्रक के सिरे पर एक्रोसोम बनता है, और एक्रोसोम व केंद्रक के ऊपर प्लाज्मा झिल्ली की एक बहुत पतली परत बच जाती है। इस प्रकार, स्पर्मेटोसाइट से गोलाकार, अगतिशील, अगुणित स्पर्मेटिड के केंद्रक एवं गॉल्जीकाय सिर में एक्रोसोम का निर्माण होता है।
In simple words: एक्रोसोम गॉल्जी काय से बनता है। यह शुक्राणु के सामने का हिस्सा होता है, जिसमें ऐसे एंजाइम होते हैं जो अंडे की दीवार को भेदने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: एक्रोसोम के निर्माण की प्रक्रिया और निषेचन में इसके एंजाइमों की महत्वपूर्ण भूमिका को याद रखें।

 

Question 3. युग्मकजनन की तीन प्रावस्थाओं के बारे में संक्षिप्त विवरण लिखिए।
Answer: युग्मक जनन की तीन प्रावस्थाएँ निम्नलिखित हैं:
(अ) गुणन प्रावस्था (Multiplication phase): इस चरण में, प्राथमिक जनन कोशिकाएं (स्पर्मेटोगोनिया) सूत्री विभाजन द्वारा कई बार विभाजित होकर अपनी संख्या बढ़ाती हैं। ये सभी कोशिकाएं द्विगुणित (diploid) होती हैं और लगातार विभाजित होकर अपनी संख्या बढ़ाती हैं।
(ब) वृद्धि प्रावस्था (Growth phase): गुणन प्रावस्था के बाद, कुछ स्पर्मेटोगोनिया आकार में वृद्धि करते हैं, पोषक तत्व जमा करते हैं, और प्राथमिक शुक्राणुजन (Primary Spermatocyte) कोशिकाएं बन जाते हैं। ये भी द्विगुणित होते हैं।
(स) परिपक्वन प्रावस्था (Maturation Phase): इस अवस्था में प्राथमिक शुक्राणु कोशिका अर्धसूत्री विभाजन करती है। पहले विभाजन से दो अगुणित द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट बनते हैं। दूसरे विभाजन से प्रत्येक द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट से दो स्पर्मेटिड बनते हैं। इस प्रकार, चार अगुणित स्पर्मेटिड का निर्माण होता है, जो बाद में शुक्राणुओं में बदल जाते हैं।
In simple words: युग्मकजनन की तीन मुख्य अवस्थाएँ होती हैं: गुणन (कोशिकाएं बढ़ती हैं), वृद्धि (कोशिकाएं बड़ी होती हैं), और परिपक्वन (कोशिकाएं विभाजित होकर शुक्राणु या अंडे में बदल जाती हैं)।

🎯 Exam Tip: युग्मकजनन की तीनों प्रावस्थाओं — गुणन, वृद्धि और परिपक्वन — के नाम और प्रत्येक में होने वाली मुख्य घटनाओं को ठीक से समझें, क्योंकि ये प्रजनन जीव विज्ञान की नींव हैं।

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 31 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. अण्डाणुजनन में वृद्धि अवस्था का वर्णन कीजिए।
Answer: अण्डाणुजनन (Oogenesis) की वृद्धि अवस्था एक महत्वपूर्ण चरण है जिसमें अंडे के विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व जमा किए जाते हैं। इस दौरान उगोनिया अपने आकार में बहुत बड़ी हो जाती है और इसे प्राथमिक अंडक (Primary oocyte) कहा जाता है। स्तनधारियों में, पुटिका (Follicle) कोशिकाएं ही ऊसाइट की वृद्धि के लिए जिम्मेदार होती हैं। अंडे देने वाले जीवों में, योक (पीतक) यकृत में बनता है और फिर रक्त के माध्यम से अंडक में स्थानांतरित होता है। वृद्धि प्रावस्था की दो मुख्य उप-अवस्थाएं हैं:
(i) प्रीविटेलोजिनेसिस (Previtelogenesis) प्रावस्था: इस अवस्था में केंद्रक और कोशिका द्रव्य का आयतन तेजी से बढ़ता है। इसमें लेम्पब्ब्रुश गुणसूत्र (Lampbrush chromosomes) बनते हैं और कोशिका द्रव्य की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बढ़ती हैं।
(ii) विटेलोजिनेसिस (Vitelogenesis) प्रावस्था: इस अवस्था में अंडे के कोशिका द्रव्य में ग्लाइकोजन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व जमा होते हैं। पीतक का संश्लेषण और जमाव यहीं होता है। पीतक के रासायनिक संगठन में लगभग 48.7% पानी, 16.7% प्रोटीन, 32.6% फॉस्फोलिपिड और उदासीन वसा, तथा 1% कार्बोहाइड्रेट होता है। अण्डाणुजनन में इस वृद्धि प्रावस्था का विशेष महत्व है क्योंकि यह अंडे को निषेचन और प्रारंभिक भ्रूण विकास के लिए आवश्यक पोषण प्रदान करती है।
In simple words: अण्डाणुजनन की वृद्धि अवस्था में अंडे के विकास के लिए पोषक तत्व जमा होते हैं और उगोनिया बड़ी होकर प्राथमिक अंडक बन जाती है। इसमें दो चरण होते हैं: प्रीविटेलोजिनेसिस और विटेलोजिनेसिस, जहाँ अंडे में महत्वपूर्ण पोषक तत्व भरे जाते हैं।

🎯 Exam Tip: अण्डाणुजनन की वृद्धि प्रावस्था के महत्व को समझें, विशेष रूप से पीतक (yolk) के संचय और इसके रासायनिक घटकों पर ध्यान दें, क्योंकि यह भ्रूण के पोषण के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. शुक्राणु जनन का सचित्र वर्णन करें।
Answer: शुक्राणु जनन (Spermatogenesis) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा नर जननांगों में अपरिपक्व जनन कोशिकाओं (स्पर्मेटोगोनिया) से परिपक्व शुक्राणुओं का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया को तीन मुख्य चरणों में बांटा जा सकता है:
(i) गुणन प्रावस्था (Multiplication phase): इस चरण में, प्राथमिक जनन कोशिकाएं (स्पर्मेटोगोनिया) सूत्री विभाजन द्वारा कई बार विभाजित होकर अपनी संख्या बढ़ाती हैं। ये सभी कोशिकाएं द्विगुणित (diploid) होती हैं।
(ii) वृद्धि प्रावस्था (Growth phase): गुणन प्रावस्था के बाद, कुछ स्पर्मेटोगोनिया आकार में वृद्धि करते हैं, पोषक तत्व जमा करते हैं, और प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट (Primary Spermatocyte) बन जाते हैं। ये भी द्विगुणित होते हैं।
(iii) परिपक्वन प्रावस्था (Maturation phase): इस चरण में, प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट अर्धसूत्री विभाजन से गुजरते हैं। पहले अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis I) के बाद, दो अगुणित (haploid) द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट (Secondary Spermatocyte) बनते हैं। फिर, प्रत्येक द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट दूसरे अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis II) से गुजरकर दो स्पर्मेटिड (Spermatids) बनाता है। इस प्रकार, एक प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट से चार अगुणित स्पर्मेटिड बनते हैं।
शुक्रकायान्तरण (Spermiogenesis): यह वह प्रक्रिया है जिसमें अगुणित स्पर्मेटिड, जो गोलाकार और अगतिशील होते हैं, morphologically (संरचनात्मक रूप से) परिपक्व, धागे जैसे और गतिशील शुक्राणुओं (Spermatozoa) में बदल जाते हैं। इस प्रक्रिया में, स्पर्मेटिड्स में कई परिवर्तन होते हैं, जैसे केंद्रक का संघनन, साइटोप्लाज्म का हटना, एक्रोसोम का निर्माण, और पूंछ का विकास। केंद्रक और कोशिका द्रव्य का अधिकांश पानी निकल जाने पर सभी गुणसूत्र एक छोटे से स्थान में व्यवस्थित हो जाते हैं।
In simple words: शुक्राणु जनन वह प्रक्रिया है जिससे शुक्राणु बनते हैं। इसमें पहले कोशिकाएं बढ़ती हैं, फिर विभाजित होकर स्पर्मेटिड बनाती हैं, और अंत में स्पर्मेटिड्स बदलकर पूरे शुक्राणु बन जाते हैं।

🎯 Exam Tip: शुक्राणुजनन के प्रत्येक चरण, विशेषकर अर्धसूत्री विभाजन और शुक्रकायान्तरण में होने वाले परिवर्तनों को विस्तार से याद रखें। यह एक जटिल प्रक्रिया है और इसके सभी चरण महत्वपूर्ण हैं।

 

अण्डाणुजनन तथा शुक्राणुजनन में अन्तर (Difference Between Oogenesis and Spermatogenesis)

अण्डाणुजननशुक्राणुजनन
1. यह मादा के अण्डाशय (Ovary) के अन्दर होने वाली एक जटिल प्रक्रिया है।1. यह नर के वृषणों (Testis) में होने वाली शुक्राणु के निर्माण की प्रक्रिया है।
2. इस निर्माण क्रिया में ऊजेनेसिस का वृहद भाग अण्डाशय (Ovary) के अन्दर लेकिन अन्तिम अवस्थाएँ अंडवाहिनी (Oviduct) के अन्दर पायी जाती हैं।2. शुक्राणुजनन की समस्त अवस्थाएँ वृषण के अन्दर ही पूर्ण होती हैं।
3. यह सतत अथवा निरन्तर होते रहने वाली प्रक्रिया नहीं है।3. यह सतत अथवा निरन्तर होने वाली प्रक्रिया है।
4. इसमें आद्य जनन कोशिका, अण्डमातृक कोशिका (Egg mother cell) में परिवर्तित होती है, जिसमें लगातार सूत्री विभाजन से ऊगोनिया (Oogonia) का निर्माण होता है।4. शुक्राणुजनन में अविभेदित आद्य जनन कोशिका सतत सूत्री विभाजन के द्वारा शुक्राणु मातृक या पुमणुजनन कोशिकाएँ (Spermatogonia) का निर्माण करती हैं।
5. अण्डाणुजनन के समय केवल कुछ ऊगोनिया (Oogonia) से ऊसाइट (Oocyte) का निर्माण होता है।5. यहाँ सभी स्पर्मेटोगोनिया (Spermatogonia) विभाजित होकर स्पर्मेटोसाइट्स बनाती है।
6. अण्डाणुजनन की वृद्धि प्रावस्था (Growth phase) एक लम्बी प्रावस्था है।6. शुक्राणुजनन की वृद्धि प्रावस्था (Growth Phase) एक छोटी प्रावस्था होती है।
7. प्राथमिक ऊसाइट से अर्धसूत्री विभाजन-I के द्वारा द्वितीयक ऊसाइट तथा एक पोलर काय का निर्माण करते हैं।7. प्राथमिक शुक्राणु कोशिका में अर्धसूत्री विभाजन-I द्वारा दो अगुणित द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट या शुक्राणुजन कोशिका निर्मित होती हैं।
8. द्वितीयक ऊसाइट अर्धसूत्री विभाजन-II के द्वारा एक वास्तविक अण्डाणु (Ovum) तथा एक द्वितीयक पोलर काय (Polar body) का निर्माण करता है।8. इन द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट में अर्धसूत्री विभाजन-II के प्रत्येक द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट से दो स्पर्मेटिड निर्मित होते हैं।
9. अण्डाणुजनन में एक ऊसाइट केवल एक अण्डा या Ovum बनाता है।9. एक स्पर्मेटोसाइट से चार अगुणित स्पर्मेटोजोआ (शुक्राणु) का निर्माण होता है।
10. अण्डा (Egg) आकार में ऊसाइट (Oocyte) से बड़ा होता है।10. इनमें शुक्राणु आकार में स्पर्मेटोसाइट से छोटे होते हैं।
11. अण्डा (Ovum या egg) में बहुत-सा संचित भोजन एकत्रित रहता है।11. शुक्राणु में संचित भोजन की मात्रा अत्यन्त कम होती है।
12. यह (अण्डा या Ovum या egg) अगतिशील (Non-motiles) अथवा अचल मादा युग्मक (Female gamete) होते हैं।12. शुक्राणु (Spermatozoa) गतिशील (Motile), नर-युग्मक (Male gametes) होते हैं।

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