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Detailed Chapter 30 मानव में गति एवं चलन RBSE Solutions for Class 12 Biology
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Class 12 Biology Chapter 30 मानव में गति एवं चलन RBSE Solutions PDF
Rbse Class 12 Biology Chapter 30 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
Rbse Class 12 Biology Chapter 30 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. जन्तु का बाह्य कंकाल है-
(अ) करोटी
(ब) पसलियाँ
(स) नखर
(द) उरोस्थि
Answer: (ब) पसलियाँ
In simple words: जन्तुओं में बाह्य कंकाल शरीर के बाहर सुरक्षा और सहारा देता है, जैसे कि पसलियाँ जो आंतरिक अंगों को सुरक्षित रखती हैं।
🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपका उत्तर सही है, हमेशा पहचानें कि 'बाह्य कंकाल' का क्या अर्थ है और दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त कौन सा है।
Question 2. अस्थि की आधात्री किस प्रोटीन की बनी होती है?
(अ) कोन्ड्रिन
(ब) ओसीन
(स) हीमोग्लोबिन
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) ओसीन
In simple words: हड्डियों का मुख्य पदार्थ ओसीन नामक प्रोटीन से बना होता है। यह हड्डियों को ताकत देता है।
🎯 Exam Tip: हड्डियों और उपास्थि में पाए जाने वाले विभिन्न प्रोटीनों को याद रखें, क्योंकि वे अक्सर भ्रमित कर सकते हैं।
Question 3. कंकाल का कार्य है-
(अ) कोमल अंगों की सुरक्षा
(ब) मांस पेशियों को जुड़ने के लिए सतह
(स) रक्ताणु का निर्माण
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: कंकाल हमारे शरीर के कई काम करता है, जैसे अंदर के नरम अंगों को बचाना, मांसपेशियों को जुड़ने की जगह देना और खून बनाने में मदद करना।
🎯 Exam Tip: जब 'उपरोक्त सभी' जैसा विकल्प दिया गया हो, तो सुनिश्चित करें कि आप सभी व्यक्तिगत विकल्पों को एक-एक करके सत्यापित करें ताकि वह वास्तव में सही हो।
Question 4. पक्ष्माभ की आगे-पीछे दोलन गति का कारण है-
(अ) सूक्ष्म नलिकाओं का विसर्पण
(ब) सूक्ष्मतन्तुओं का संकुचन
(स) कोशिका भित्ति का दीर्धीकरण
(द) स्फीति में परिवर्तन
Answer: (ब) सूक्ष्मतन्तुओं का संकुचन
In simple words: पक्ष्माभ की आगे-पीछे हिलने-डुलने वाली गति सूक्ष्मतन्तुओं के सिकुड़ने के कारण होती है, जिससे वे झूलते हैं।
🎯 Exam Tip: पक्ष्माभ की गति के पीछे के आणविक तंत्र को समझें, विशेष रूप से संकुचनशील तत्वों की भूमिका को।
Question 5. तन्तु विसर्पण सिद्धान्त के अनुसार पेशी संकुचन के समय पेशी की लम्बाई कम करने के लिए गति करने वाला अण है।
(अ) कोलेजन
(ब) एक्टिन
(स) मायोसिन
(द) टाइटिन
Answer: (ब) एक्टिन
In simple words: पेशी संकुचन में, एक्टिन नामक अणु मायोसिन के ऊपर खिसकता है, जिससे मांसपेशी छोटी हो जाती है।
🎯 Exam Tip: स्लाइडिंग फिलामेंट सिद्धांत में एक्टिन और मायोसिन की विशिष्ट भूमिकाओं को याद रखें।
Question 6. कोहनी की सन्धि का प्रकार है-
(अ) अचल सन्धि
(ब) कब्जा सन्धि
(स) सैडल सन्धि
(द) पायवोट सन्धि
Answer: (ब) कब्जा सन्धि
In simple words: कोहनी की जोड़ एक कब्जा सन्धि है, जिसका मतलब है कि यह सिर्फ एक ही दिशा में खुल और बंद हो सकती है, जैसे एक दरवाजे का कब्जा।
🎯 Exam Tip: शरीर में विभिन्न प्रकार की सन्धियों और उनके उदाहरणों को जानना बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 7. संकुचनशील प्रोटीन है-
(अ) ट्रोपोनिन
(ब) मायोसिन
(स) ट्रोपोमायोसिन
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (ब) मायोसिन
In simple words: मायोसिन एक प्रोटीन है जो मांसपेशियों को सिकुड़ने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: मांसपेशियों के संकुचन में शामिल मुख्य प्रोटीनों के नाम और उनके कार्यों को याद रखें।
Question 8. मानव के पश्च पाद में अस्थियों की संख्या होती है-
(अ) 14
(ब) 24
(स) 26
(द) 30
Answer: (द) 30
In simple words: मानव के प्रत्येक पिछले पैर (पैर और टांग) में कुल 30 हड्डियाँ होती हैं, जिनमें जाँघ से लेकर पैर की उंगलियों तक की हड्डियाँ शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: मानव शरीर के विभिन्न हिस्सों में हड्डियों की संख्या को याद रखें, जैसे कि हाथ और पैर।
Question 9. पेशियों का अनॉक्सी संकुचन किसके संचयन के कारण पीड़ा दायक होता है?
(अ) कैल्सियम आयन
(ब) मायोसिन
(स) लैक्टिक अम्ल
(द) क्रियेटिन फॉस्फेट
Answer: (स) लैक्टिक अम्ल
In simple words: जब मांसपेशियाँ बिना ऑक्सीजन के सिकुड़ती हैं, तो लैक्टिक अम्ल जमा हो जाता है, जिससे दर्द होता है।
🎯 Exam Tip: अनॉक्सी श्वसन के दौरान बनने वाले उप-उत्पाद और उनके शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को समझें।
Question 10. अनुप्रस्थ सेतुओं के बन्धन के लिए कौन-से आयन की उपस्थिति आवश्यक है?
(अ) कैल्शियम
(ब) सोडियम
(स) लौह
(द) पोटेशियम
Answer: (अ) कैल्शियम
In simple words: मांसपेशियों के संकुचन के लिए, कैल्शियम आयन बहुत ज़रूरी हैं ताकि क्रॉस-ब्रिज बन सकें और मांसपेशियाँ सिकुड़ सकें।
🎯 Exam Tip: मांसपेशियों के संकुचन में विभिन्न आयनों, विशेष रूप से कैल्शियम की भूमिका को विस्तार से समझें।
Question 1. पेशी की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई बताइए।
Answer: पेशी की सबसे छोटी संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई को सार्कोमीयर (Sarcomere) कहते हैं। यह मांसपेशियों के संकुचन और फैलाव के लिए जिम्मेदार है।
In simple words: मांसपेशी की सबसे छोटी काम करने वाली इकाई को सार्कोमीयर कहते हैं।
🎯 Exam Tip: किसी भी संरचनात्मक इकाई को परिभाषित करते समय, उसके मुख्य कार्य का भी उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. पेशी किसके द्वारा अस्थि से जुड़ती है?
Answer: पेशी कण्डराओं (Tendons) द्वारा अस्थि से जुड़ती है। कण्डराएं मजबूत, रेशेदार ऊतक होते हैं जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ते हैं, जिससे गति संभव होती है।
In simple words: मांसपेशियाँ हड्डियों से कण्डराओं द्वारा जुड़ती हैं।
🎯 Exam Tip: कण्डरा और स्नायु के बीच का अंतर याद रखें: कण्डरा मांसपेशी को हड्डी से जोड़ती है, जबकि स्नायु हड्डी को हड्डी से जोड़ती है।
Question 3. अस्थि से अस्थि किसके द्वारा जुड़ती है?
Answer: अस्थि से अस्थि स्नायुओं (Ligaments) द्वारा जुड़ती है। स्नायुएं लचीले, रेशेदार ऊतक होते हैं जो जोड़ों को स्थिर रखते हैं और हड्डियों को एक-दूसरे से जुड़ने में मदद करते हैं।
In simple words: हड्डियाँ आपस में स्नायुओं द्वारा जुड़ती हैं।
🎯 Exam Tip: स्नायुएं जोड़ों को स्थिरता प्रदान करती हैं, जबकि कण्डराएं गति में सहायता करती हैं।
Question 4. मनुष्य के त्रिक का निर्माण कितने कशेरुक करते हैं?
Answer: मनुष्य के त्रिक का निर्माण पाँच कशेरुक करते हैं। ये पांच कशेरुक बचपन में अलग-अलग होते हैं, लेकिन वयस्कता में मिलकर एक ही हड्डी बनाते हैं जिसे त्रिक (Sacrum) कहते हैं।
In simple words: मनुष्य के त्रिक को बनाने के लिए पाँच कशेरुक होते हैं।
🎯 Exam Tip: मेरुदंड के विभिन्न क्षेत्रों और उनमें मौजूद कशेरुकों की संख्या को याद रखें।
Question 5. मनुष्य में करोटि का निर्माण कितनी अस्थियों से होता हैं?
Answer: मनुष्य में करोटि का निर्माण 29 अस्थियों द्वारा होता है। इन हड्डियों में कपाल (Cranium), चेहरे की हड्डियाँ (Facial bones), कर्ण अस्थियाँ (Ear ossicles) और हायोइड अस्थि (Hyoid bone) शामिल हैं।
In simple words: मनुष्य का सिर 29 अलग-अलग हड्डियों से बना होता है।
🎯 Exam Tip: कपाल और चेहरे की हड्डियों के बीच का अंतर याद रखें, क्योंकि दोनों मिलकर करोटि बनाते हैं।
Question 6. अस्थियों में संचित प्रमुख पदार्थों के नाम दीजिए।
Answer: अस्थियों में संचित प्रमुख पदार्थ ओसीन प्रोटीन, कैल्शियम लवण और फॉस्फेट लवण हैं। ये पदार्थ हड्डियों को उनकी कठोरता और मजबूती प्रदान करते हैं।
In simple words: हड्डियों में ओसीन प्रोटीन, कैल्शियम और फॉस्फेट जैसे मुख्य पदार्थ जमा होते हैं।
🎯 Exam Tip: हड्डियों के रासायनिक घटकों को याद रखें, विशेष रूप से खनिज लवणों और जैविक मैट्रिक्स के नाम।
Question 7. पेशी कार्य में किस प्रकार का ऊर्जा परिवर्तन होता है?
Answer: पेशी कार्य में रासायनिक ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तन होता है। मांसपेशियाँ एटीपी (ATP) में संचित रासायनिक ऊर्जा का उपयोग करके सिकुड़ती हैं, जिससे गति उत्पन्न होती है।
In simple words: मांसपेशियाँ काम करते समय रासायनिक ऊर्जा को गति वाली यांत्रिक ऊर्जा में बदलती हैं।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा परिवर्तन के उदाहरणों को समझें जहां शरीर में एक प्रकार की ऊर्जा दूसरे प्रकार में परिवर्तित होती है।
Question 1. उपास्थिजात अस्थियाँ क्या हैं? समझाइए।
Answer: उपास्थिजात अस्थियाँ (Cartilagenous or replacing bones) वे हड्डियाँ होती हैं जिनका निर्माण उपास्थि से होता है। शुरुआती अवस्था में ये नरम होती हैं, इनकी अधात्री (matrix) कॉण्ड्रिन नामक प्रोटीन से बनी होती है जिसमें कॉन्ड्रोसाइट्स कोशिकाएँ होती हैं। समय के साथ, इस उपास्थि में कैल्शियम लवण जमा होने लगते हैं, जिससे यह कठोर हो जाती है। अंत में, कॉन्ड्रोसाइट्स नष्ट हो जाते हैं और उनकी जगह ऑस्टियोसाइट्स (Osteocytes) ले लेते हैं, जो ओसीन प्रोटीन बनाते हैं। इस प्रक्रिया से उपास्थि हड्डी में बदल जाती है।
In simple words: उपास्थिजात हड्डियाँ वे होती हैं जो पहले नरम उपास्थि के रूप में बनती हैं और फिर धीरे-धीरे कठोर हड्डियों में बदल जाती हैं।
🎯 Exam Tip: अस्थि और उपास्थि के बीच के मुख्य अंतरों को याद रखें, विशेष रूप से उनकी संरचना और निर्माण प्रक्रिया को।
Question 2. कंकाल को मुख्य कार्य लिखिए।
Answer: कंकाल के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं:
- कंकाल शरीर को एक निश्चित आकृति और सहारा देता है।
- यह हृदय, यकृत, फेफड़े और मस्तिष्क जैसे कोमल अंगों को सुरक्षित रखता है।
- यह मांसपेशियों को जुड़ने के लिए आधार प्रदान करता है।
- कंकाल शरीर को चलने और हिलने-डुलने में मदद करता है।
- हड्डियों की अस्थि मज्जा (Bone marrow) में रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है।
- यह प्राणियों को गति, प्रचलन, सुनने और प्रजनन जैसी क्रियाओं में सहयोग देता है।
- पसलियाँ साँस लेने और छोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- कान की हड्डियाँ सुनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती हैं। कंकाल हमारे शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण ढाँचा है।
In simple words: कंकाल शरीर को आकार देता है, अंदरूनी अंगों की रक्षा करता है, मांसपेशियों को जुड़ने की जगह देता है, गति में मदद करता है और खून बनाता है।
🎯 Exam Tip: कंकाल के सभी कार्यों को याद रखें और प्रत्येक कार्य के लिए एक संक्षिप्त उदाहरण देने का प्रयास करें।
Question 3. उरोस्थि पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: उरोस्थि (Sternum) छाती के केंद्र में स्थित एक चपटी, छड़ जैसी हड्डी है। मानव उरोस्थि में कुल सात छड़ाकार अस्थियाँ होती हैं, जिन्हें तीन समूहों में बांटा जा सकता है:
- प्रथम समूह: इसमें पहली उरोस्थि आती है जिसे प्रीस्टर्नम (Presternum) या मैनुब्रियम (Manubrium) कहते हैं। इससे पसलियों का पहला जोड़ा और अंशमेखला की क्लेविकल हड्डियाँ जुड़ी होती हैं।
- द्वितीय समूह: इसमें दूसरी से छठी उरोस्थियाँ आती हैं, जिन्हें मोजोस्टर्नम या ग्लेडियोलस कहते हैं।
- तृतीय समूह: इसमें जिफॉयर्ड प्रवर्ध (Xiphoid process) आता है जो सबसे नीचे होता है, हालांकि यह अक्सर उपास्थि से बना होता है और युवावस्था में हड्डी से जुड़ा नहीं होता।
In simple words: उरोस्थि छाती के बीच की एक चपटी हड्डी है जो पसलियों को जोड़ती है। इसे तीन मुख्य भागों में बांटा जाता है: ऊपर का मैनुब्रियम, बीच का शरीर और नीचे का जिफॉयर्ड प्रवर्ध।
🎯 Exam Tip: उरोस्थि के विभिन्न भागों के नामों और उनकी संरचनात्मक विशेषताओं को याद रखें।
Question 4. श्रोणिमेखला का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: श्रोणिमेखला का चित्र इस प्रकार है:
In simple words: यह चित्र मानव श्रोणिमेखला को दिखाता है, जिसमें श्रोणि अस्थि, त्रिक और जघन संधान जैसे मुख्य भाग दिखाए गए हैं।
🎯 Exam Tip: चित्र बनाते समय, मुख्य संरचनाओं को स्पष्ट रूप से नामांकित करें और आनुपातिकता का ध्यान रखें।
Question 5. स्नायु एवं कण्डरा में भेद लिखिए।
Answer: स्नायु और कण्डरा में निम्नलिखित भेद हैं:
| स्नायु (Ligaments) | कण्डरा (Tendon) |
|---|---|
| 1. स्नायु प्रत्यास्थ होता है। | 1. कण्डरा अप्रत्यास्थ होता है। |
| 2. यह पट्टी के रूप में दो अस्थियों के बीच सन्धि स्थल पर स्थित होता है। | 2. यह पेशी एवं अस्थि को जोड़ता है। |
| 3. स्नायु अस्थियों को अपने स्थान से हटने से रोकता है। | 3. यह गति में सहायक होता है। |
| 4. यह दो अस्थियों के आवरण के बीच स्थित होता है। | 4. यह पेशी तथा अस्थि आवरण के बीच स्थित होता है। |
In simple words: स्नायु हड्डी को हड्डी से जोड़ते हैं और लचीले होते हैं, जबकि कण्डरा मांसपेशी को हड्डी से जोड़ती है और मजबूत होती है।
🎯 Exam Tip: तुलना करते समय, प्रत्येक बिंदु के लिए स्पष्ट और संक्षिप्त अंतर प्रस्तुत करें।
Question 6. संकुचन के लिए पेशी किस प्रकार उत्तेजित होती है?
Answer: संकुचन के लिए पेशी मुख्य रूप से तंत्रिका आवेग के कारण उत्तेजित होती है। जब कोई तंत्रिका आवेग तंत्रिका पेशी संधि (neuromuscular junction) पर पहुँचता है, तो तंत्रिका के सिरों से ऐसीटिलकोलीन (Acetylcholine) नामक रासायनिक संदेशवाहक मुक्त होता है। यह ऐसीटिलकोलीन पेशी झिल्ली (sarcolemma) को उत्तेजित करता है, जिससे पेशी में विद्युत संकेत उत्पन्न होते हैं और संकुचन शुरू हो जाता है।
In simple words: मांसपेशी तब उत्तेजित होती है जब तंत्रिका से ऐसीटिलकोलीन नाम का रसायन निकलता है, जो मांसपेशी को सिकुड़ने का संकेत देता है।
🎯 Exam Tip: तंत्रिका पेशी संधि पर होने वाली घटनाओं के क्रम को याद रखें, जिसमें ऐसीटिलकोलीन की भूमिका भी शामिल है।
Question 7. मनुष्य की भुजा की सभी सन्धियाँ अचल हो जाएँ तो क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: यदि मनुष्य की भुजा की सभी सन्धियाँ अचल हो जाएँ, तो पेशीय संकुचन अप्रभावी हो जाएगा और भुजा में किसी भी प्रकार की गति संभव नहीं हो पाएगी। हड्डियाँ एक-दूसरे से हिल-डुल नहीं पाएंगी, जिससे हाथ को मोड़ना, फैलाना या किसी भी दिशा में घुमाना असंभव हो जाएगा। इससे रोज़मर्रा के सभी काम रुक जाएँगे।
In simple words: अगर हाथ के सभी जोड़ हिलना बंद कर दें, तो हाथ बिल्कुल नहीं हिल पाएगा और कोई काम नहीं कर पाएगा।
🎯 Exam Tip: किसी भी शारीरिक स्थिति के संभावित परिणामों का वर्णन करते समय, शारीरिक क्रियाओं पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों को शामिल करें।
Question 8. ओस्टियोपोरोसिस किसे कहते हैं?
Answer: ओस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) एक अस्थि रोग है जिसमें हड्डियों के द्रव्यमान में कमी आ जाती है। इस बीमारी में हड्डियाँ पतली, कमजोर और कम लचीली हो जाती हैं, जिससे उनकी मजबूती कम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप मामूली चोट लगने पर भी हड्डी टूट सकती है। ऑस्टियोपोरोसिस अक्सर एस्ट्रोजन हार्मोन (Estrogen hormone) की कमी के कारण वृद्ध महिलाओं में अधिक देखा जाता है, लेकिन संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से इसे रोका जा सकता है।
In simple words: ओस्टियोपोरोसिस एक बीमारी है जिसमें हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं और आसानी से टूट सकती हैं, खासकर बुजुर्ग महिलाओं में।
🎯 Exam Tip: बीमारी के कारणों, लक्षणों और रोकथाम के उपायों को याद रखें।
Question 9. पेशी संकुचन के लिए ऊर्जा स्रोत क्या है?
Answer: पेशी संकुचन के लिए मुख्य ऊर्जा स्रोत एटीपी (ATP) है। संकुचन के दौरान, एटीपी एडीपी (ADP) और फॉस्फेट में टूट जाता है, जिससे ऊर्जा निकलती है। एडीपी को फिर से क्रिएटिन फॉस्फेट से फॉस्फेट लेकर एटीपी में बदला जाता है। पेशी में एटीपी का निर्माण ग्लाइकोजन और वसीय अम्लों के ऑक्सीकरण द्वारा भी होता है, जो ऊर्जा का निरंतर स्रोत प्रदान करता है।
In simple words: मांसपेशियों को सिकुड़ने के लिए ऊर्जा एटीपी से मिलती है, जो भोजन से बनती है और फिर से बनाई जाती है।
🎯 Exam Tip: एटीपी को 'ऊर्जा की मुद्रा' क्यों कहा जाता है और यह मांसपेशियों के संकुचन में कैसे उपयोग होती है, इसे स्पष्ट रूप से समझें।
Question 10. यदि कंकाल पेशी को जाने वाली तन्त्रिका को काट दिया जाए, तो संकुचन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: यदि कंकाल पेशी को जाने वाली तंत्रिका को काट दिया जाए, तो पेशी का संकुचन संभव नहीं होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि तंत्रिका पेशी रसायन ऐसीटिलकोलीन (Acetylcholine) का स्रावण नहीं हो पाएगा। जब ऐसीटिलकोलीन नहीं होगा, तो पेशी प्लाज्मा झिल्ली (sarcolemma) की सोडियम आयनों के प्रति पारगम्यता नहीं बढ़ेगी। सोडियम आयन पेशी कोशिका में प्रवेश नहीं कर पाएंगे, जिससे झिल्ली की आंतरिक सतह पर धनात्मक विभव उत्पन्न नहीं होगा और पेशी उत्तेजित नहीं होगी। परिणामस्वरूप, पेशी में कोई संकुचन नहीं होगा और वह निष्क्रिय हो जाएगी।
In simple words: यदि मांसपेशी तक जाने वाली तंत्रिका काट दी जाए, तो मांसपेशी सिकुड़ नहीं पाएगी क्योंकि उसे ऐसीटिलकोलीन का संकेत नहीं मिलेगा।
🎯 Exam Tip: तंत्रिका आवेग और मांसपेशियों के संकुचन के बीच के संबंध को समझें, विशेष रूप से न्यूरोट्रांसमीटर की भूमिका को।
Rbse Class 12 Biology Chapter 30 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. कंकाल पेशी की विस्तृत संरचना लिखिए।
Answer: कंकाल पेशी (Structure of Skeletal Muscle) की संरचना में, प्रत्येक कंकाल पेशी अनेक तंतुओं के समूहों से बनी होती है, जिन्हें पूलिकाएँ (fascicles) कहते हैं। प्रत्येक पेशी कोशिका आंतरिक रूप से कई लंबी, बेलनाकार संरचनाओं से बनी होती है, जिन्हें पेशी तन्तुक (Myofibrils) कहते हैं। पेशी तन्तुक पेशी की क्रियात्मक इकाई होते हैं और इनका व्यास लगभग 1 µm होता है। एक पेशी तन्तुक में लगभग 1500 मायोसिन तन्तु और 3000 एक्टिन तन्तु होते हैं। ये दोनों तन्तु संकुचन प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार होते हैं। मायोसिन तन्तु मोटे और गहरे रंग के होते हैं, जबकि एक्टिन तन्तु पतले और हल्के रंग के होते हैं। एक्टिन तन्तु तीन घटकों से बने होते हैं:
- F-एक्टिन: यह तन्तु का मुख्य घटक है, जो दो कुंडलित तंतुओं से बना होता है।
- ट्रोपोमायोसिन: यह F-एक्टिन से जुड़ी एक अतिरिक्त प्रोटीन है। विश्राम की स्थिति में, यह एक्टिन की सक्रिय सतह को ढक कर रखती है, ताकि मायोसिन इससे जुड़ न सके।
- ट्रोपोनिन: यह तीन ग्लोबुलर प्रोटीनों का मिश्रण है जो ट्रोपोमायोसिन से जुड़ा होता है।
प्रत्येक पेशी तन्तु एक-दूसरे के समानांतर व्यवस्थित होते हैं, जिससे सभी तंतुओं की A पट्टिकाएँ (dark bands) और Z-पट्टिकाएँ एक ही स्तर पर होती हैं।
In simple words: कंकाल पेशियाँ कई छोटे-छोटे हिस्सों से बनी होती हैं जिन्हें सार्कोमीयर कहते हैं। हर सार्कोमीयर में पतले एक्टिन और मोटे मायोसिन धागे होते हैं जो सिकुड़ने का काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: कंकाल पेशी की संरचना के प्रत्येक घटक (जैसे सार्कोमीयर, मायोसिन, एक्टिन) और उसके कार्य को समझें।
Question 2. सन्धि किसे कहते हैं? मानव शरीर में पायी जाने वाली सन्धियों का वर्णन कीजिए।
Answer: सन्धि (Joints) शरीर में वह स्थान है जहाँ दो या दो से अधिक हड्डियाँ या हड्डी और उपास्थि एक साथ मिलते हैं। सन्धियों के कारण ही कशेरुकियों में गति संभव हो पाती है। मानव शरीर में मुख्य रूप से तीन प्रकार की सन्धियाँ पाई जाती हैं:
(1) अचल सन्धि (Immovable/Fibrous Joints): इन सन्धियों में हड्डियाँ रेशेदार ऊतक द्वारा मजबूती से जुड़ी होती हैं और इनमें कोई गति नहीं होती। उदाहरण के लिए, खोपड़ी की हड्डियाँ।
(2) चल सन्धियाँ (Movable/Synovial Joints): इन सन्धियों में हड्डियाँ एक या अधिक दिशाओं में आसानी से गति कर सकती हैं। हड्डियों के बीच एक गुहा (Synovial cavity) होती है जिसमें श्लेष तरल (Synovial fluid) भरा होता है, जो सन्धियों को चिकनाई देता है। चल सन्धियाँ कई प्रकार की होती हैं:
- कन्दुक खल्लिका सन्धि (Ball and Socket Joints): इसमें एक हड्डी का गेंद जैसा सिरा दूसरी हड्डी के प्याले जैसे गड्ढे में फिट होता है। इससे हड्डी सभी दिशाओं में घूम सकती है। उदाहरण: कंधों और कूल्हों की सन्धियाँ।
- कब्जा सन्धि (Hinge Joints): इसमें एक हड्डी का उभार दूसरी हड्डी के गड्ढे में इस तरह फिट होता है कि यह केवल एक ही दिशा में गति कर सकती है। उदाहरण: कोहनी, घुटने, टखने और उंगलियों के पोरों की सन्धियाँ।
- दीर्घवृत्त सन्धियाँ (Ellipsoidal Joints): इनमें दोनों तलों में गति संभव है। उदाहरण: मनुष्य की रेडियस और कार्पस की सन्धि।
(3) आंशिक चल सन्धि (Slightly Movable Joints): ये सन्धियाँ दृढ़ होती हैं, लेकिन तनाव या ऐंठन के कारण इनमें सीमित गति संभव है। इनमें हड्डियाँ रेशेदार उपास्थि द्वारा जुड़ी रहती हैं। सन्धियों के मध्य ऐसे जोड़ को संधान (Symphysis) कहते हैं। उदाहरण: जघन संधान (pubic symphysis) और कशेरुकों की सन्धियाँ। इनके विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं:
- धुराग्र सन्धि (Pivot Joint): इसमें केवल अक्ष के चारों ओर घूर्णन ही संभव है। एक हड्डी स्थिर रहती है और दूसरी हड्डी उसके चारों ओर घूमती है। उदाहरण: एटलस और एक्सिस कशेरुकों के बीच की सन्धि।
- विसर्पी सन्धि (Gliding Joints): इसमें हड्डियों की सतहें चपटी होती हैं जिससे एक हड्डी दूसरी पर फिसलती है। उदाहरण: कशेरुकों की सन्धि, कलाई और टखने की सन्धियाँ।
In simple words: सन्धि वह जगह है जहाँ हड्डियाँ मिलती हैं, और यह शरीर को हिलने-डुलने में मदद करती है। मुख्य प्रकार हैं: अचल सन्धि (जो नहीं हिलती), चल सन्धि (जो आसानी से हिलती है), और आंशिक चल सन्धि (जो थोड़ी हिलती है)।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार की सन्धि को उसके नाम से, गति की सीमा से और एक या दो उदाहरणों से पहचानें।
Question 3. पेशी संकुचन की क्रियाविधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: पेशी संकुचन की क्रियाविधि को सर्पी तन्तु सिद्धान्त (Sliding Filament Theory) द्वारा अच्छी तरह से समझाया जा सकता है, जिसे हक्सले (Huxley, 1965) ने प्रस्तावित किया था। इस सिद्धान्त के अनुसार, पेशीय रेशों का संकुचन पतले एक्टिन तन्तुओं के मोटे मायोसिन तन्तुओं के ऊपर खिसकने या विसर्पण से होता है। यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है:
प्रेरणा स्रोत से शुरू होकर, पेशी तन्तु में दोनों ओर संकुचन की लहर दौड़ती है, लेकिन संकुचन केवल एक ही दिशा में होता है। अधिकतम संकुचन में 'Z' रेखाएँ 'A' पट्टियों की मायोसिन छड़ों को छूने लगती हैं, जिससे 'P' पट्टियाँ और 'H' क्षेत्र गायब हो जाते हैं और पेशी तन्तु की लंबाई घटकर लगभग दो-तिहाई रह जाती है। शिथिलन (Relaxation) के दौरान, एक्टिन और मायोसिन छड़ों को जोड़ने वाले सेतु बंध पूरी तरह खुल जाते हैं, जिससे प्रत्येक पेशीखंड (सरकोमीयर) की एक्टिन छड़ें वापस अपनी सामान्य स्थिति में आ जाती हैं और पेशी संकुचन समाप्त हो जाता है।
पेशी संकुचन के प्रमुख चरण (Main steps or Muscle Contractions)
पेशी संकुचन की क्रियाविधि सर्पी तन्तु सिद्धान्त द्वारा अच्छी तरह समझाई गई है, जिसके अनुसार पेशीय रेशों का संकुचन पतले तन्तुओं (एक्टिन तन्तुओं) के मोटे तन्तुओं (मायोसिन तन्तुओं) के ऊपर विसर्पण से होता है। इस सिद्धांत के अनुसार पेशी संकुचन चार चरणों में पूरा होता है:
(1) उत्तेजन (Excitation): पेशी संकुचन का यह पहला चरण है। तंत्रिका आवेग के कारण, तंत्रिकाक्ष (Dendron) के सिरों से ऐसीटिलकोलीन (Acetylcholine) नामक रसायन तंत्रिका पेशी संधि पर मुक्त होता है। यह ऐसीटिलकोलीन पेशी-प्लाज्मा झिल्ली (sarcolemma) की सोडियम आयनों के लिए पारगम्यता (Permeability) को बढ़ाता है, जिससे झिल्ली की आंतरिक सतह पर धनात्मक विभव उत्पन्न होता है। यह विभव पूरी झिल्ली पर फैलकर सक्रिय विभव उत्पन्न करता है और पेशी कोशिका उत्तेजित हो जाती है।
(2) उत्तेजन-संकुचन युग्मन (Excitation-Contraction Coupling): इस चरण में सक्रिय विभव पेशी कोशिका में संकुचन को प्रेरित करता है। यह विभव पेशी प्रद्रव्य में तेजी से फैलता है और कैल्शियम आयन (Ca++) मुक्त होकर ट्रोपोनिन-सी (Troponin-C) से जुड़ जाते हैं। ट्रोपोनिन अणु के आकार में परिवर्तन होता है। इन परिवर्तनों के कारण एक्टिन (Actin) के सक्रिय स्थल पर मौजूद ट्रोपोमायोसिन और ट्रोपोनिन हट जाते हैं। मुक्त सक्रिय स्थल पर तुरंत मायोसिन (Myosin) तंतु के अनुप्रस्थ सेतु जुड़ जाते हैं और संकुचन क्रिया शुरू हो जाती है।
(3) संकुचन (Contraction): एक्टिन तंतु के सक्रिय स्थल से जुड़ने से पहले, सेतु का सिरा एटीपी से जुड़ता है। मायोसिन के सिरे पर मौजूद एटीपीेज एंजाइम एटीपी को एडीपी (ADP) और Pi में तोड़ देता है, लेकिन वे मायोसिन के सिर पर ही रहते हैं। इसके बाद मायोसिन का सिर एक्टिन तंतु के सक्रिय स्थल में जुड़ जाता है। इस बंधन से मायोसिन के सिर में झुकाव उत्पन्न होता है, जिससे एक्टिन तंतु सरकोमीयर के केंद्र की ओर खींच जाता है। यह क्रिया एटीपी के टूटने से मिली ऊर्जा से होती है। एडीपी और Pi मुक्त होने पर नया एटीपी अणु सिर से जुड़ता है। एटीपी के जुड़ते ही सिर एक्टिन से अलग हो जाता है। फिर से एटीपी टूटता है, और मायोसिन सिर नए सक्रिय स्थल से जुड़ता है। यह क्रिया बार-बार होती है, जिससे एक्टिन तंतुक (Actin filaments) खिसकते हैं और संकुचन होता रहता है।
(4) शिथिलन (Relaxation): पेशी उत्तेजना समाप्त होने पर कैल्शियम आयन पेशी प्रद्रव्यी जालिका में वापस चले जाते हैं, जिससे ट्रोपोनिन-सी कैल्शियम से मुक्त हो जाती है। एक्टिन तंतु के सक्रिय स्थल फिर से ढक जाते हैं। पेशी तंतु अपनी सामान्य स्थिति में आ जाते हैं और पेशीय शिथिलन हो जाता है।
In simple words: मांसपेशी के सिकुड़ने की प्रक्रिया में पहले तंत्रिका से संदेश आता है, फिर कैल्शियम आयन निकलते हैं जो एक्टिन और मायोसिन को जोड़ते हैं। एटीपी ऊर्जा से मायोसिन एक्टिन को खींचता है, जिससे मांसपेशी सिकुड़ती है। जब संदेश खत्म होता है, तो कैल्शियम वापस चला जाता है और मांसपेशी ढीली हो जाती है।
🎯 Exam Tip: इस सिद्धांत के प्रत्येक चरण (उत्तेजन, युग्मन, संकुचन और शिथिलन) को क्रम में याद रखें, और प्रत्येक चरण में कैल्शियम और एटीपी की भूमिका को स्पष्ट करें।
RBSE Class 12 Biology Chapter 30 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
RBSE Class 12 Biology Chapter 30 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. जन्तु का बाह्य कंकाल है-
(अ) करोटी
(ब) पसलियाँ
(स) नखर
(द) उरोस्थि
Answer: (ब) पसलियाँ
In simple words: पशुओं के बाहरी कंकाल में पसलियाँ शामिल होती हैं, जो शरीर के अंदरूनी अंगों को सुरक्षा प्रदान करती हैं। यह सुरक्षात्मक संरचना जीव के लिए महत्वपूर्ण होती है।
🎯 Exam Tip: बाहरी कंकाल के उदाहरणों को याद रखें और समझें कि वे जीव को कैसे सुरक्षा प्रदान करते हैं।
Question 2. अस्थि की आधात्री किस प्रोटीन की बनी होती है?
(अ) कोन्ड्रिन
Answer:
(ब) ओसीन
(स) मायोसिन
(द) एक्टिन
Answer: (ब) ओसीन
In simple words: हड्डियों का मुख्य ढांचा ओसीन नामक प्रोटीन से बना होता है, जो उन्हें मजबूती और लचीलापन देता है। यह प्रोटीन हड्डियों की बनावट के लिए बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: हड्डियों और उपास्थि में पाए जाने वाले मुख्य प्रोटीन के नाम और उनके कार्यों को याद रखें।
Question 3. कंकाल का कार्य है-
(अ) कोमल अंगों की सुरक्षा
(ब) मांस पेशियों को जुड़ने के लिए सतह
(स) रक्ताणु का निर्माण
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: कंकाल शरीर को कई तरह से मदद करता है, जैसे अंदरूनी अंगों को बचाना, मांसपेशियों को जुड़ने के लिए जगह देना और खून बनाने वाली कोशिकाओं को बनाना। यह हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: कंकाल के सभी प्रमुख कार्यों को एक सूची के रूप में याद करें, क्योंकि यह एक सामान्य प्रश्न है।
Question 4. पक्ष्माभ की आगे-पीछे दोलन गति का कारण है-
(अ) सूक्ष्म नलिकाओं का विसर्पण
(ब) सूक्ष्मतन्तुओं का संकुचन
(स) कोशिका भित्ति का दीर्धीकरण
(द) स्फीति में परिवर्तन
Answer: (ब) सूक्ष्मतन्तुओं का संकुचन
In simple words: पक्ष्माभ की हिलने-डुलने वाली गति असल में छोटे-छोटे तंतुओं के सिकुड़ने की वजह से होती है। ये तंतु कोशिका के अंदर काम करते हैं और गति में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: पक्ष्माभ की गति के लिए जिम्मेदार संरचनाओं, जैसे सूक्ष्मनलिकाओं और सूक्ष्मतंतुओं, को पहचानें।
Question 5. तन्तु विसर्पण सिद्धान्त के अनुसार पेशी संकुचन के समय पेशी की लम्बाई कम करने के लिए गति करने वाला अण है।
(अ) कोलेजन
(ब) एक्टिन
(स) मायोसिन
(द) टाइटिन
Answer: (ब) एक्टिन
In simple words: जब मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, तो एक्टिन नाम के पतले तंतु मायोसिन तंतुओं पर सरकते हैं, जिससे मांसपेशी छोटी हो जाती है। यह प्रक्रिया मांसपेशियों की गति के लिए बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: स्लाइडिंग फिलामेंट सिद्धांत के प्रमुख घटकों (एक्टिन और मायोसिन) और उनके कार्यों को समझें।
Question 6. कोहनी की सन्धि का प्रकार है-
(अ) अचल सन्धि
(ब) कब्जा सन्धि
(स) कन्दुक खल्लिका सन्धि
(द) दीर्घवृत्त सन्धि
Answer: (ब) कब्जा सन्धि
In simple words: कोहनी का जोड़ एक कब्ज़े वाले दरवाज़े जैसा काम करता है, जो केवल एक दिशा में ही खुलता और बंद होता है। इस तरह की गति को कब्जा सन्धि कहते हैं।
🎯 Exam Tip: शरीर की विभिन्न संधियों के प्रकारों और उनके उदाहरणों को याद रखें।
Question 7. संकुचनशील प्रोटीन है-
(अ) ट्रोपोनिन ।
(ब) मायोसिन
(स) ट्रोपोमायोसिन
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (ब) मायोसिन
In simple words: मायोसिन वह प्रोटीन है जो मांसपेशियों को सिकुड़ने में मदद करता है। यह एक्टिन के साथ मिलकर काम करता है और मांसपेशियों को छोटा करता है, जिससे गति होती है।
🎯 Exam Tip: मांसपेशियों के संकुचन में शामिल विभिन्न प्रोटीन (मायोसिन, एक्टिन, ट्रोपोनिन, ट्रोपोमायोसिन) और उनके विशिष्ट कार्यों को जानें।
Question 8. मानव के पश्च पाद में अस्थियों की संख्या होती है-
(अ) 14
(ब) 24
(स) 26
(द) 30
Answer: (द) 30
In simple words: मानव के हर एक पिछले पैर में 30 हड्डियाँ होती हैं। इन हड्डियों का पूरा समूह शरीर को खड़ा रखने और चलने-फिरने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: मानव शरीर के विभिन्न अंगों में हड्डियों की संख्या को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर अक्षीय और उपांगीय कंकाल के लिए।
Question 9. पेशियों का अनॉक्सी संकुचन किसके संचयन के कारण पीड़ा दायक होता है?
(अ) कैल्सियम आयन
(ब) मायोसिन
(स) लैक्टिक अम्ल
(द) क्रियेटिन फॉस्फेट
Answer: (स) लैक्टिक अम्ल
In simple words: जब मांसपेशियां ऑक्सीजन के बिना काम करती हैं, तो उनमें लैक्टिक अम्ल जमा हो जाता है, जिससे दर्द होता है। यह अक्सर तब होता है जब हम बहुत ज़्यादा कसरत करते हैं।
🎯 Exam Tip: मांसपेशियों के अनॉक्सी श्वसन और लैक्टिक अम्ल के संचयन के बीच के संबंध को समझें।
Question 10. अनुप्रस्थ सेतुओं के बन्धन के लिए कौन-से आयन की उपस्थिति आवश्यक है?
(अ) कैल्शियम
(ब) सोडियम
(स) लौह
(द) पोटैशियम
Answer: (अ) कैल्शियम
In simple words: कैल्शियम आयन मांसपेशियों के सिकुड़ने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। ये मायोसिन हेड को एक्टिन फिलामेंट से जुड़ने में मदद करते हैं, जिससे मांसपेशियां गति करती हैं।
🎯 Exam Tip: मांसपेशियों के संकुचन में कैल्शियम आयनों की भूमिका और उनकी कार्यप्रणाली को याद रखें।
Question 1. पेशी की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई बताइए।
Answer: पेशी की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई सार्कोमीयर (Sarcomere) है। यह मांसपेशियों को सिकुड़ने में मदद करती है।
In simple words: मांसपेशी की सबसे छोटी काम करने वाली इकाई को सार्कोमीयर कहते हैं।
🎯 Exam Tip: सार्कोमीयर की परिभाषा और मांसपेशियों के संकुचन में इसकी भूमिका को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 2. पेशी किसके द्वारा अस्थि से जुड़ती है?
Answer: पेशी, कण्डराओं (Tendons) द्वारा अस्थि से जुड़ती है। यह एक मजबूत संरचना है जो गति में सहायक होती है।
In simple words: मांसपेशियां, कण्डराओं की मदद से हड्डियों से जुड़ती हैं।
🎯 Exam Tip: कण्डरा और स्नायु के बीच का अंतर याद रखें और उनके कार्यों को पहचानें।
Question 3. अस्थि से अस्थि किसके द्वारा जुड़ती है?
Answer: अस्थि से अस्थि स्नायुओं (Ligaments) द्वारा जुड़ती है। यह जोड़ हड्डियों को एक साथ पकड़े रखता है।
In simple words: हड्डियाँ, स्नायुओं से आपस में जुड़ी होती हैं।
🎯 Exam Tip: कण्डरा (Tendons) और स्नायु (Ligaments) के बीच के अंतर को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।
Question 4. मनुष्य के त्रिक का निर्माण कितने कशेरुक करते हैं?
Answer: मनुष्य के त्रिक का निर्माण पाँच कशेरुक मिलकर करते हैं। ये कशेरुक मिलकर एक मजबूत संरचना बनाते हैं।
In simple words: इंसान की रीढ़ की हड्डी का त्रिक हिस्सा पाँच हड्डियों से बनता है।
🎯 Exam Tip: रीढ़ की हड्डी के विभिन्न हिस्सों और उनमें मौजूद कशेरुकाओं की संख्या को जानें।
Question 5. मनुष्य में करोटि का निर्माण कितनी अस्थियों से होता हैं?
Answer: मनुष्य में करोटि का निर्माण 29 अस्थियों द्वारा होता है। ये अस्थियाँ मिलकर मस्तिष्क को सुरक्षा प्रदान करती हैं।
In simple words: इंसान की खोपड़ी 29 हड्डियों से बनी होती है।
🎯 Exam Tip: मानव करोटि में हड्डियों की संख्या और उनके मुख्य कार्यों को याद रखें।
Question 6. अस्थियों में संचित प्रमुख पदार्थों के नाम दीजिए।
Answer: अस्थियों में संचित प्रमुख पदार्थ ओसीन प्रोटीन, कैल्शियम और फॉस्फेट लवण होते हैं। ये पदार्थ हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
In simple words: हड्डियों में ओसीन प्रोटीन, कैल्शियम और फॉस्फेट जैसे जरूरी तत्व जमा होते हैं।
🎯 Exam Tip: हड्डियों की संरचना और मजबूती के लिए आवश्यक खनिज और प्रोटीन तत्वों को याद रखें।
Question 7. पेशी कार्य में किस प्रकार का ऊर्जा परिवर्तन होता है?
Answer: पेशी कार्य में रासायनिक ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तन होता है। मांसपेशियाँ एटीपी (ATP) को तोड़कर गति करती हैं।
In simple words: मांसपेशियां काम करते समय रासायनिक ऊर्जा को गति वाली ऊर्जा में बदलती हैं।
🎯 Exam Tip: मांसपेशियों के संकुचन में ऊर्जा के रूप में एटीपी (ATP) की भूमिका को समझें और ऊर्जा परिवर्तन के सिद्धांत को याद रखें।
Question 8. मनुष्य की भुजा की सभी सन्धियाँ अचल हो जाएँ तो क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: यदि मनुष्य की भुजा की सभी सन्धियाँ अचल हो जाएँ, तो पेशीय संकुचन अप्रभावी हो जाएगा। इसका मतलब है कि भुजा में किसी भी प्रकार की गति संभव नहीं हो पाएगी। व्यक्ति अपने हाथ से कोई काम नहीं कर पाएगा।
In simple words: अगर हाथ के सारे जोड़ काम करना बंद कर दें, तो हाथ बिल्कुल हिल नहीं पाएगा।
🎯 Exam Tip: संधियों के महत्व को समझें और कल्पना करें कि यदि वे कार्य करना बंद कर दें तो शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
Question 8. ओस्टियोपोरोसिस किसे कहते हैं?
Answer: ओस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) एक अस्थि रोग है जिसमें हड्डियों के द्रव्यमान की कमी हो जाती है। हड्डियां पतली, कमजोर और कम लचीली हो जाती हैं, जिससे हल्की चोट लगने पर भी टूट जाती हैं। यह बीमारी अक्सर वृद्ध महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण अधिक होती है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से इससे बचा जा सकता है।
In simple words: ओस्टियोपोरोसिस एक बीमारी है जिसमें हड्डियाँ कमजोर होकर आसानी से टूट जाती हैं।
🎯 Exam Tip: ओस्टियोपोरोसिस के कारण, लक्षण और रोकथाम के उपायों को याद रखें।
Question 9. पेशी संकुचन के लिए ऊर्जा स्रोत क्या है?
Answer: पेशी संकुचन के लिए ऊर्जा एटीपी (ATP) द्वारा मिलती है। संकुचन के समय एडीपी (ADP) को क्रिएटिन फॉस्फेट की मदद से फिर से एटीपी में बदला जाता है। मांसपेशियों में एटीपी का निर्माण ग्लाइकोजन और वसीय अम्लों के ऑक्सीकरण से होता है। यह ऊर्जा शरीर की गतिविधियों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: मांसपेशियों को सिकुड़ने के लिए एटीपी (ATP) से ऊर्जा मिलती है, जो ग्लाइकोजन से बनती है।
🎯 Exam Tip: मांसपेशियों के ऊर्जा स्रोत के रूप में एटीपी की भूमिका को समझें और इसे कैसे पुनः उत्पन्न किया जाता है, यह जानें।
Question 10. यदि कंकाल पेशी को जाने वाली तन्त्रिका को काट दिया जाए, तो संकुचन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: यदि कंकाल पेशी को जाने वाली तंत्रिका को काट दिया जाए, तो तंत्रिका पेशी रसायन एसिटिलकोलीन (Acetylcholine) का स्राव नहीं होगा। इससे पेशी प्लाज्मा झिल्ली की सोडियम आयनों के प्रति पारगम्यता नहीं बढ़ेगी। परिणामस्वरूप सोडियम आयन पेशी कोशिका में प्रवेश नहीं कर पाएंगे और झिल्ली पर धनात्मक विभव उत्पन्न नहीं होगा। इस प्रकार, पेशी उत्तेजित नहीं होगी और पेशी संकुचन नहीं होगा। तंत्रिकाओं का सही कार्य मांसपेशियों के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: तंत्रिका कटने पर मांसपेशी सिकुड़ नहीं पाएगी, क्योंकि उसे संदेश नहीं मिलेगा।
🎯 Exam Tip: तंत्रिका-पेशी संधि पर एसिटिलकोलीन की भूमिका और मांसपेशियों के संकुचन के लिए तंत्रिका आवेगों के महत्व को समझें।
RBSE Class 12 Biology Chapter 30 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. कंकाल पेशी की विस्तृत संरचना लिखिए।
Answer: कंकाल पेशी की संरचना (Structure of Skeletal Muscle)- प्रत्येक कंकाल पेशी कई छोटे तंतुओं के समूहों से बनी होती है, जिन्हें पूलिकाएँ (fascicles) कहते हैं। ये पूलिकाएँ मिलकर पेशी तंतुक (Myofibrils) बनाती हैं। प्रत्येक पेशी कोशिका अंदर से कई लंबी, बेलनाकार संरचनाओं से मिलकर बनी होती है। इन संरचनाओं को पेशी तंतुक कहते हैं। ये पेशी तंतुक पेशी की कार्यात्मक इकाइयाँ होती हैं। इनका व्यास लगभग 1 µm होता है। एक पेशी तंतुक में लगभग 1500 मायोसिन तंतु और 3000 एक्टिन तंतु होते हैं। ये तंतु मांसपेशियों के संकुचन के लिए जिम्मेदार होते हैं। मायोसिन तंतु मोटे और गहरे रंग के होते हैं, जबकि एक्टिन तंतु पतले और हल्के रंग के होते हैं। एक्टिन तंतु तीन अलग-अलग घटकों से बने होते हैं:
(i) F-एक्टिन: यह तंतुओं का मुख्य घटक है, जो मांसपेशियों के सिकुड़ने में मदद करता है।
(ii) ट्रोपोमायोसिन: यह F-एक्टिन से जुड़ा एक अतिरिक्त प्रोटीन है। आराम की स्थिति में यह एक्टिन की सक्रिय सतह को ढके रखता है, जिससे संकुचन नहीं होता।
(iii) ट्रोपोनिन: यह तीन ग्लोबुलर प्रोटीनों का मिश्रण है। एक पेशी तंतु के सभी पेशी तंतुक एक-दूसरे के समानांतर होते हैं। वे इस तरह से व्यवस्थित होते हैं कि सभी तंतुओं की A पट्टिकाएँ और Z-पट्टिकाएँ एक ही स्तर पर होती हैं। यह व्यवस्था मांसपेशियों को एक समान और व्यवस्थित संकुचन प्रदान करती है।
In simple words: कंकाल की मांसपेशियां बहुत सारे छोटे तंतुओं से बनी होती हैं। इनमें एक्टिन और मायोसिन नाम के प्रोटीन होते हैं जो मांसपेशियों को सिकुड़ने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: कंकाल पेशी की संरचना, उसके विभिन्न घटकों (पेशी तंतु, सार्कोमीयर, एक्टिन, मायोसिन) और उनके कार्यों को सचित्र समझाएं।
Question 2. सन्धि किसे कहते हैं? मानव शरीर में पायी जाने वाली सन्धियों का वर्णन कीजिए।
Answer: सन्धि (Joints) उस स्थान को कहते हैं जहाँ दो या दो से अधिक अस्थियाँ या अस्थि और उपास्थि आपस में मिलती हैं। कशेरुकियों में संधियों के कारण ही गति संभव होती है। ये संधियाँ शरीर को लचीलापन और गतिशीलता प्रदान करती हैं। मानव शरीर में तीन मुख्य प्रकार की संधियाँ पाई जाती हैं:
(1) अचल संधियाँ (Immovable Joints): इन संधियों में अस्थियाँ इतनी मजबूती से जुड़ी होती हैं कि उनमें कोई गति संभव नहीं होती। उदाहरण: करोटी की अस्थियाँ। ये संधियाँ मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों को सुरक्षा प्रदान करती हैं।
(2) चल संधियाँ (Movable Joints): इन संधियों में अस्थियाँ एक या अधिक दिशाओं में स्वतंत्रतापूर्वक गति कर सकती हैं। इन संधियों की अस्थियों के बीच एक खाली जगह होती है जिसे सन्धि कोटर (Synovial cavity) कहते हैं। इस कोटर में साइनोवियल तरल (Synovial fluid) भरा होता है, जो सन्धि को चिकनाई (Lubrication) प्रदान करता है। चल संधियाँ निम्न प्रकार की होती हैं:
(a) कन्दुक खल्लिका सन्धि (Ball and Socket Joints): इसमें एक अस्थि का गेंदनुमा गोल सिरा दूसरी अस्थि के प्यालेनुमा गड्ढे में फिट रहता है। उभरे सिरे वाली अस्थि चारों ओर घूम सकती है। उदाहरण: कंधों और कूल्हों की संधियाँ।
(b) कब्जा सन्धि (Hinge Joints): इसमें एक अस्थि का सिरा दूसरी अस्थि के गड्ढे में इस प्रकार फिट रहता है कि यह केवल एक ही दिशा में गति कर सकती है। उदाहरण: कोहनी, घुटने, टखने और अंगुलियों के पोरों की संधियाँ।
(c) दीर्घवृत्त संधियाँ (Ellipsoidal Joints): इन संधियों में दोनों तलों में गति संभव है। उदाहरण: मनुष्य की रेडियस और कार्पस की सन्धि।
(d) धुराग्र सन्धि (Pivot Joint): इसमें केवल अक्ष के चारों ओर घूर्णन संभव है। एक अस्थि स्थिर रहती है और दूसरी अस्थि गोलाई में घूमती है। उदाहरण: एटलस और एक्सिस कशेरुकों के मध्य सन्धि।
(e) विसर्पी सन्धि (Gliding Joints): इसमें संधायी सतहें चपटी होती हैं जिससे एक अस्थि दूसरी अस्थि पर फिसलती है। उदाहरण: कशेरुकों की सन्धि, कलाई की सन्धि, टखने की सन्धि।
(3) आंशिक चल संधियाँ (Slightly Movable Joint): यह एक दृढ़ सन्धि होती है, लेकिन इसमें तनाव या ऐंठन के कारण सीमित गति संभव हो जाती है। इन संधियों में अस्थियों के किनारे तंतुमय उपास्थि द्वारा जुड़े रहते हैं। उदाहरण: जघन संधान, कशेरुकों की संधियाँ। ये संधियाँ थोड़ी गति प्रदान करती हैं।
In simple words: सन्धि वह जगह है जहाँ हड्डियाँ मिलती हैं। मानव शरीर में तीन तरह के जोड़ होते हैं: जो बिल्कुल नहीं हिलते, जो थोड़ा हिलते हैं, और जो पूरी तरह हिलते हैं।
🎯 Exam Tip: संधियों की परिभाषा, उनके प्रमुख प्रकार और प्रत्येक प्रकार के उदाहरणों को याद रखें। संधियों के बिना, हमारे शरीर में कोई गति संभव नहीं होगी।
Question 3. पेशी संकुचन की क्रियाविधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: पेशी संकुचन की क्रियाविधि (Mechanism of Muscle Contraction) को सरपी तन्तु सिद्धान्त (Sliding filament theory) द्वारा अच्छी तरह समझाया जा सकता है। हक्सले (Huxley, 1965) ने इस सिद्धांत को प्रस्तुत किया था। इस सिद्धांत के अनुसार, मांसपेशियों का संकुचन पतले तंतुओं (एक्टिन तंतुओं) के मोटे तंतुओं (मायोसिन तंतुओं) के ऊपर फिसलने (विसर्पण) से होता है। यह प्रक्रिया कोशिकाओं के अंदर ATP ऊर्जा के उपयोग से होती है। इस सिद्धांत के अनुसार पेशी संकुचन चार चरणों में पूरा होता है:
(1) उत्तेजन (Excitation): यह पेशी संकुचन का पहला चरण है। तंत्रिका आवेग के कारण, तंत्रिकाक्ष (Dendron) के सिरों से एसिटिलकोलीन (Acetylcholine) नामक रसायन निकलता है, जो तंत्रिका पेशी संधि पर मुक्त होता है। यह एसिटिलकोलीन पेशी प्लाज्मा की सोडियम आयनों के प्रति पारगम्यता बढ़ाता है। इसके फलस्वरूप प्लाज्मा झिल्ली की आंतरिक सतह पर धनात्मक विभव उत्पन्न होता है। यह विभव पूरी प्लाज्मा झिल्ली पर फैलकर सक्रिय विभव उत्पन्न कर देता है और पेशी कोशिका उत्तेजित हो जाती है। यह एक विद्युत संकेत की तरह काम करता है।
(2) उत्तेजन-संकुचन युग्म (Excitation-Contraction Coupling): इस चरण में सक्रिय विभव पेशी कोशिका में संकुचन को प्रेरित करता है। यह विभव पेशी प्रद्रव्य में तेजी से फैलता है और कैल्शियम आयन मुक्त होकर ट्रोपोनिन-सी (Troponin-C) से जुड़ जाते हैं। इन परिवर्तनों के कारण एक्टिन (Actin) के सक्रिय स्थल पर ट्रोपोमायोसिन और ट्रोपोनिन अलग हो जाते हैं। अब, मायोसिन तंतु के अनुप्रस्थ सेतु तुरंत एक्टिन से जुड़ जाते हैं और संकुचन क्रिया शुरू हो जाती है।
(3) संकुचन (Contraction): एक्टिन तंतु के सक्रिय स्थल से जुड़ने से पहले मायोसिन का सिरा एक एटीपी अणु से जुड़ता है। मायोसिन के सिरे पर मौजूद एटीपीएएस एंजाइम द्वारा एटीपी, एडीपी और पीआई में टूट जाता है, लेकिन मायोसिन के सिर पर ही रहता है। इसके बाद मायोसिन का सिर एक्टिन तंतु के सक्रिय स्थल में जुड़ जाता है। इस बंधन के कारण मायोसिन के सिर में झुकाव उत्पन्न होता है, जिससे एक्टिन तंतु सार्कोमीयर (Sarcomere) के केंद्र की ओर खिंच जाता है। इसके लिए एटीपी के टूटने से मिली ऊर्जा का उपयोग होता है। जब एडीपी और पीआई मुक्त होते हैं, तो नया एटीपी अणु सिर से जुड़ता है और सिर एक्टिन से अलग हो जाता है। यह क्रिया बार-बार दोहराई जाती है, जिससे एक्टिन तंतुक खिसकते हैं और संकुचन होता रहता है। यह प्रक्रिया मोटर की तरह काम करती है।
(4) शिथिलन (Relaxation): पेशी उत्तेजन समाप्त होते ही कैल्शियम आयन पेशी प्रद्रव्यी जालिका में वापस चले जाते हैं। इससे ट्रोपोनिन-सी कैल्शियम से मुक्त हो जाती है और एक्टिन तंतुक के सक्रिय स्थल फिर से ढक जाते हैं। पेशी तंतु अपनी सामान्य स्थिति में आ जाते हैं और पेशीय शिथिलन हो जाता है। इस प्रकार, मांसपेशी आराम की स्थिति में लौट आती है।
In simple words: मांसपेशियों का सिकुड़ना एक प्रक्रिया है जहाँ पतले तंतु (एक्टिन) मोटे तंतुओं (मायोसिन) पर सरकते हैं। यह तंत्रिका संदेश, कैल्शियम और ऊर्जा (ATP) की मदद से होता है, जिससे मांसपेशी छोटी हो जाती है।
🎯 Exam Tip: स्लाइडिंग फिलामेंट सिद्धांत को चरणों में समझाएं और प्रत्येक चरण में शामिल मुख्य अणुओं और आयनों की भूमिका को स्पष्ट करें। चित्र के माध्यम से समझाना भी आवश्यक है।
Question 1. उपास्थिजात अस्थियाँ क्या हैं? समझाइए।
Answer: उपास्थिजात या प्रतिस्थापी अस्थियाँ (Cartilagenous or replacing bones) वे हड्डियाँ होती हैं जिनका निर्माण उपास्थि से होता है। शुरुआती अवस्था में ये नरम होती हैं। इनकी आधार सामग्री (matrix) कॉण्ड्रिन नामक प्रोटीन से बनी होती है, और इसमें कॉन्ट्रोसाइट्स कोशिकाएं पाई जाती हैं। इसके चारों ओर पर्युपास्थि (Perichondrium) नामक आवरण होता है। जैसे-जैसे जीव बड़ा होता है, इनकी संरचना में बदलाव आता है। आधार सामग्री में कैल्शियम लवण जमा होने लगते हैं, जिससे यह मजबूत और कठोर हो जाती है। कॉन्ट्रोसाइट्स कोशिकाएं खत्म हो जाती हैं और उनकी जगह ऑस्टियोसाइट्स ले लेती हैं। ऑस्टियोसाइट्स आधार सामग्री में ओसीन प्रोटीन बनाती हैं। पर्युपास्थि, पेरीऑस्टियम में बदल जाती है। इस तरह उपास्थि धीरे-धीरे हड्डी में बदल जाती है। यह शरीर की वृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: उपास्थिजात हड्डियां वो होती हैं जो पहले नरम उपास्थि के रूप में बनती हैं और फिर धीरे-धीरे कैल्शियम जमा होने पर कठोर हड्डी में बदल जाती हैं।
🎯 Exam Tip: उपास्थिजात अस्थियों के निर्माण की प्रक्रिया और इसमें शामिल कोशिकाओं और पदार्थों को याद रखें।
Question 2. कंकाल को मुख्य कार्य लिखिए।
Answer: कंकाल के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
(i) कंकाल शरीर को दृढ़ता और निश्चित आकृति प्रदान करता है। यह शरीर को एक निश्चित आकार और संरचना देता है।
(ii) यह शरीर के कई कोमल अंगों, जैसे हृदय, यकृत, फेफड़े, प्लीहा और मस्तिष्क की रक्षा करता है। यह एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करता है।
(iii) कंकाल मांसपेशियों को जुड़ने के लिए आधार प्रदान करता है। मांसपेशियों के बिना, कंकाल केवल एक निष्क्रिय ढांचा होगा।
(iv) यह मांसपेशियों के साथ मिलकर गति करने में सहायक होता है। संधियाँ और हड्डियाँ मिलकर लीवर का काम करती हैं।
(v) हड्डियों की अस्थि मज्जा (Bone marrow) में रक्त कणिकाओं का निर्माण होता है। यह शरीर के लिए आवश्यक रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करता है।
(vi) यह जीव को गति, प्रचलन, श्रवण, जनन आदि क्रियाओं में सहयोग प्रदान करता है।
(vii) पसलियाँ, श्वासोच्छवास (साँस लेने और छोड़ने) क्रिया में सहायक होती हैं।
(viii) कर्ण अस्थियाँ (कान की हड्डियाँ) सुनने की क्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
In simple words: कंकाल शरीर को आकार देता है, अंदरूनी अंगों की रक्षा करता है, मांसपेशियों को जुड़ने में मदद करता है, और खून बनाने में सहायता करता है। यह शरीर की गति और अन्य जरूरी कामों में भी मदद करता है।
🎯 Exam Tip: कंकाल के सभी प्रमुख कार्यों को बिंदुवार याद रखें और प्रत्येक कार्य का संक्षिप्त विवरण दें।
Question 3. उरोस्थि पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: उरोस्थि (Sternum) एक चपटी, डैगर-आकार की हड्डी है जो छाती के केंद्र में स्थित होती है। यह पसलियों को जोड़ती है और हृदय और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा करती है। मनुष्य की उरोस्थि में सात छड़ाकार अस्थियाँ पाई जाती हैं, जिन्हें तीन समूहों में बांटा जा सकता है:
(i) प्रथम समूह: इसमें पहली उरोस्थि प्रीस्टर्नम (Presternum) आती है। इससे पहली जोड़ी पसलियाँ और अंशमेखला की क्लैविकल अस्थियाँ जुड़ी होती हैं। इसे मैनुब्रियम (Manubrium) भी कहते हैं।
(ii) द्वितीय समूह: इसमें दूसरी से छठी उरोस्थियाँ आती हैं, जिन्हें मोजोस्टर्नम या ग्लेडियोलस कहते हैं। ये उरोस्थियां शरीर को सहारा देने और सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण हैं।
(iii) तृतीय समूह: इसमें सबसे नीचे की उरोस्थि ज़ाइफॉइड प्रक्रिया (Xiphoid process) आती है, जो अक्सर उपास्थि से बनी होती है।
In simple words: उरोस्थि छाती के बीच की हड्डी है जो पसलियों को जोड़ती है और अंदरूनी अंगों को बचाती है। इसके तीन मुख्य हिस्से होते हैं।
🎯 Exam Tip: उरोस्थि की स्थिति, उसके विभिन्न भाग और उसके सुरक्षात्मक कार्य को याद रखें।
Question 4. श्रोणिमेखला का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer:
श्रोणिमेखला (Pelvic Girdle) निचली extremities को axial कंकाल से जोड़ने वाली संरचना है, जो शरीर को सहारा और गति में मदद करती है।
In simple words: श्रोणिमेखला का चित्र शरीर के निचले हिस्से को सहारा देने वाली हड्डियों का समूह दिखाता है।
🎯 Exam Tip: श्रोणिमेखला के मुख्य भागों (जैसे त्रिक, इलियम, इस्चियम, प्यूबिस) और उनके जुड़ने के स्थानों को चित्र में सही ढंग से नामांकित करें।
Question 5. स्नायु एवं कण्डरा में भेद लिखिए।
Answer: स्नायु (Ligaments) और कण्डरा (Tendon) में प्रमुख भेद निम्नलिखित हैं:
| स्नायु (Ligaments) | कण्डरा (Tendon) |
|---|---|
| 1. स्नायु प्रत्यास्थ होता है। | 1. कण्डरा अप्रत्यास्थ होता है। |
| 2. यह पट्टी के रूप में दो अस्थियों के बीच सन्धि स्थल पर स्थित होता है। | 2. यह पेशी एवं अस्थि को जोड़ता है। |
| 3. स्नायु अस्थियों को अपने स्थान से हटने से रोकता है। | 3. यह गति में सहायक होता है। |
| 4. यह दो अस्थियों के आवरण के बीच स्थित होता है। | 4. यह पेशी तथा अस्थि आवरण के बीच स्थित होता है। |
In simple words: स्नायु हड्डियों को हड्डियों से जोड़ते हैं, जबकि कण्डरा मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ते हैं। स्नायु लचीले होते हैं और कण्डरा कम लचीले होते हैं।
🎯 Exam Tip: स्नायु और कण्डरा के बीच के अंतर को उनकी संरचना, कार्य और स्थान के आधार पर स्पष्ट रूप से याद करें।
Question 6. संकुचन के लिए पेशी किस प्रकार उत्तेजित होती है?
Answer: पेशी संकुचन के लिए तंत्रिका आवेगों की आवश्यकता होती है। जब तंत्रिका से मांसपेशी को संदेश मिलता है, तो तंत्रिका-पेशी संधि पर एसिटिलकोलीन (Acetylcholine) नामक रसायन निकलता है। यह रसायन मांसपेशियों की कोशिका झिल्ली को उत्तेजित करता है। उत्तेजित होने पर, मांसपेशी कोशिका के अंदर कैल्शियम आयन मुक्त होते हैं। ये कैल्शियम आयन मांसपेशियों के सिकुड़ने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। इस तरह, तंत्रिका तंत्र मांसपेशियों को गति के लिए संकेत भेजता है।
In simple words: मांसपेशियां तब सिकुड़ती हैं जब उन्हें तंत्रिका से संकेत मिलता है, जिससे एसिटिलकोलीन नामक रसायन निकलता है और कैल्शियम आयन सक्रिय होते हैं।
🎯 Exam Tip: तंत्रिका आवेग और एसिटिलकोलीन की भूमिका को मांसपेशियों के उत्तेजन और संकुचन के संदर्भ में याद रखें।
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