RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 28 मानव का जनन तंत्र

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 Biology Chapter 28 मानव का जनन तंत्र

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RBSE Class 12 Biology Chapter 28 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. ग्राफियन पुटिकाएँ कहाँ पायी जाती हैं?
(अ) मनुष्य की थाइराएड में
(ब) मनुष्य के प्रोस्टेट में
(स) स्त्री के अण्डाशय में
(द) पुरुष के वृषण में
Answer: (स) स्त्री के अण्डाशय में
In simple words: ग्राफियन पुटिकाएँ अंडाशय में होती हैं, जो स्त्रियों में प्रजनन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये अंडे को बड़ा करती हैं ताकि वह निषेचन के लिए तैयार हो सके।

🎯 Exam Tip: शरीर के विभिन्न अंगों और उनसे जुड़ी विशिष्ट संरचनाओं को याद रखना जीव विज्ञान में महत्वपूर्ण है, जैसे ग्राफियन पुटिकाएँ अंडाशय में पाई जाती हैं।

 

Question 2. मैथुन क्रिया के समय योनि को चिकना बनाने हेतु एक क्षारीय द्रव्य का स्रावण करने वाली ग्रन्थि है-
(अ) प्रोस्टेट
(ब) काउपर
(स) Bartholin
(द) स्खलन
Answer: (स) Bartholin
In simple words: बार्थोलिन ग्रंथि एक खास तरह का तरल पदार्थ बनाती है जो योनि को चिकना करने में मदद करता है, खासकर यौन संबंध के दौरान। यह शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।

🎯 Exam Tip: प्रजनन अंगों से संबंधित ग्रंथियों और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से समझें, विशेषकर मैथुन के दौरान स्रावित होने वाले पदार्थों को।

 

Question 3. स्त्रियों में रज चक्र औसत कितने दिनों पश्चात् होता है-
(अ) 14 दिन
(ब) 20 दिन
(स) 32 दिन
(द) 28 दिन
Answer: (द) 28 दिन
In simple words: स्त्रियों में मासिक धर्म चक्र आमतौर पर 28 दिनों के बाद आता है, लेकिन यह हर व्यक्ति में थोड़ा अलग हो सकता है। यह प्रजनन स्वास्थ्य का एक मुख्य हिस्सा है।

🎯 Exam Tip: मासिक धर्म चक्र की औसत अवधि और इसमें शामिल प्रमुख चरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 28 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. कार्पस ल्यूटियम का कार्य लिखो।
Answer: कार्पस ल्यूटियम का मुख्य कार्य प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन का स्राव करना होता है। यह हार्मोन गर्भाशय को गर्भावस्था के लिए तैयार करते हैं और गर्भावस्था को बनाए रखने में मदद करते हैं।
In simple words: कार्पस ल्यूटियम प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन बनाता है, जो गर्भावस्था को शुरू करने और बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी हैं।

🎯 Exam Tip: कार्पस ल्यूटियम के कार्य को स्पष्ट रूप से लिखें, विशेष रूप से इसके द्वारा स्रावित हार्मोन और उनके प्रभावों का उल्लेख करें।

 

Question 2. वृषण में कौन-सी कोशिकायें अन्तःस्रावी ग्रन्थि की भाँति कार्य करती हैं? इनके द्वारा स्रावित हार्मोन का नाम लिखिए।
Answer: वृषण में अंतराली कोशिकाएँ (Interstitial cells) या लेडिग कोशिकाएँ अन्तःस्रावी ग्रंथि की तरह काम करती हैं। इनके द्वारा नर हार्मोन, टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) का स्राव होता है। यह हार्मोन पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास के लिए जिम्मेदार होता है।
In simple words: वृषण में लेडिग कोशिकाएँ होती हैं जो टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बनाती हैं, यह पुरुषों के शरीर में बदलाव लाता है।

🎯 Exam Tip: वृषण की हार्मोन-उत्पादक कोशिकाओं का सही नाम और उनके द्वारा स्रावित मुख्य हार्मोन का उल्लेख करना सुनिश्चित करें।

 

Question 3. लैंगिक कोशिकाओं के द्वारा स्रावित हार्मोन का नाम तथा कार्य बताइये।
Answer: वृषण की लेडिग कोशिकाएँ टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव करती हैं। यह हार्मोन पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों (जैसे दाढ़ी, मूंछ का आना) और सहायक जनन ग्रंथियों के विकास में मदद करता है। स्त्रियों में ग्राफियन पुटिका की कोशिकाएँ एस्ट्रोजन हार्मोन का स्राव करती हैं, जो गर्भाशय और स्तन ग्रंथियों को काम करने में सक्रिय बनाती हैं। एस्ट्रोजन महिलाओं में प्रजनन प्रणाली के विकास और मासिक धर्म को नियंत्रित करता है।
In simple words: पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन और स्त्रियों में एस्ट्रोजन हार्मोन बनते हैं। टेस्टोस्टेरोन पुरुषों के लक्षणों और प्रजनन अंगों को विकसित करता है, जबकि एस्ट्रोजन स्त्रियों के प्रजनन अंगों और मासिक धर्म को नियंत्रित करता है।

🎯 Exam Tip: नर और मादा दोनों में लैंगिक हार्मोन के नाम और उनके विशिष्ट कार्यों को अलग-अलग और स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 4. मानव में नर व मादा प्राणी में प्राथमिक जनन अंगों के नाम लिखिए।
Answer: मानव नर में प्राथमिक जनन अंग वृषण (Testes) होते हैं, जो शुक्राणु पैदा करते हैं। मानव मादा में प्राथमिक जनन अंग अंडाशय (Ovaries) होते हैं, जो अंडाणु और हार्मोन पैदा करते हैं। ये अंग प्रजनन प्रक्रिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
In simple words: पुरुषों का मुख्य जनन अंग वृषण है और स्त्रियों का मुख्य जनन अंग अंडाशय है।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक जनन अंगों को पहचानते समय, उनके मुख्य कार्य (युग्मक उत्पादन) को ध्यान में रखें।

 

Question 5. गर्भाशय अन्तःस्तर (Endometrium) किसे कहते हैं?
Answer: गर्भाशय की आंतरिक गुहा की सतह पर पाई जाने वाली श्लेष्मा परत को गर्भाशय अन्तःस्तर (Endometrium) कहते हैं। यह परत भ्रूण के आरोपण और पोषण के लिए महत्वपूर्ण होती है।
In simple words: गर्भाशय के अंदर की पतली परत को एंडोमेट्रियम कहते हैं, जो बच्चे के विकास के लिए जरूरी है।

🎯 Exam Tip: गर्भाशय अन्तःस्तर की परिभाषा के साथ-साथ उसके कार्य (जैसे भ्रूण का आरोपण) का उल्लेख करना सुनिश्चित करें।

 

Question 6. स्त्री में दो द्वितीय लैंगिक लक्षणों को लिखिए।
Answer: स्त्री में दो द्वितीय लैंगिक लक्षण हैं: (i) त्वचा का कोमल होना, और (ii) स्तन ग्रंथियों की वृद्धि। ये लक्षण यौवनारंभ के दौरान विकसित होते हैं और यौन परिपक्वता का संकेत देते हैं।
In simple words: स्त्रियों में त्वचा का नरम होना और स्तनों का बढ़ना दो मुख्य द्वितीयक लैंगिक लक्षण हैं।

🎯 Exam Tip: द्वितीयक लैंगिक लक्षणों को प्राथमिक जनन अंगों से अलग रखें, क्योंकि ये केवल यौन परिपक्वता के संकेत होते हैं, युग्मक उत्पादन नहीं।

RBSE Class 12 Biology Chapter 28 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. मानव नर व मादा में यौवनारम्भ शुरू होने पर क्या-क्या परिवर्तन दिखाई देते हैं?
Answer: मानव में यौवनारंभ शुरू होने पर नर और मादा दोनों में कई शारीरिक परिवर्तन होते हैं:

  • **नर में परिवर्तन:** वृषण सक्रिय हो जाते हैं और शुक्राणु का उत्पादन शुरू हो जाता है। दाढ़ी और मूंछें आने लगती हैं, शरीर पर घने बाल उगते हैं, और आवाज भारी हो जाती है। यह प्रजनन क्षमता के विकास को दर्शाता है।
  • **मादा में परिवर्तन:** स्तन ग्रंथियों का विकास होता है और रजोदर्शन (मासिक धर्म) शुरू हो जाता है। त्वचा कोमल हो जाती है, शरीर पर बालों की संख्या कम होती है, और आवाज पतली व मधुर हो जाती है। ये सभी परिवर्तन प्रजनन अंगों के परिपक्व होने का संकेत हैं।

यौवनारंभ एक महत्वपूर्ण चरण है जिसमें शरीर प्रजनन के लिए तैयार होता है।
In simple words: यौवनारंभ में, पुरुषों में दाढ़ी-मूंछ और भारी आवाज आती है, शुक्राणु बनने लगते हैं। महिलाओं में स्तन बढ़ते हैं, मासिक धर्म शुरू होता है और आवाज पतली हो जाती है।

 

🎯 Exam Tip: नर और मादा दोनों में होने वाले परिवर्तनों को अलग-अलग और स्पष्ट बिंदुओं में लिखें, ताकि जवाब संगठित लगे।

 

Question 2. शरद ऋतु में वृषण कोष सिकुड़कर छोटे हो जाते हैं, स्पष्ट कीजिए।
Answer: सर्दियों में वृषणकोष सिकुड़कर छोटे हो जाते हैं क्योंकि ठंड के कारण वृषणकोषों का तापमान कम होने लगता है। शरीर में शुक्राणु उत्पादन के लिए वृषण को एक निश्चित, शरीर के तापमान से थोड़ा कम, तापमान पर बनाए रखना आवश्यक होता है। डारटोस पेशियाँ और वृषणोत्कर्ष पेशी ठंडे तापमान में सिकुड़ जाती हैं, जिससे वृषणकोष उदरगुहा के अधिक नजदीक आ जाते हैं और शरीर की गर्मी प्राप्त कर पाते हैं। इस प्रकार, यह सिकुड़न वृषण के तापमान को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है, जो शुक्राणुजनन के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: ठंड में वृषणकोष सिकुड़कर शरीर के पास आ जाते हैं ताकि उनका तापमान सही बना रहे और शुक्राणु बन सकें।

🎯 Exam Tip: वृषणकोष के सिकुड़ने के पीछे का मुख्य कारण (तापमान नियमन) और इसमें शामिल पेशियों (डारटोस और वृषणोत्कर्ष) का उल्लेख करना जरूरी है।

 

Question 3. जीणपुरकता किसे कहते हैं?
Answer: यह प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर का है, इसलिए इसका विवरण उपलब्ध नहीं है। छात्रों को इस विषय पर अतिरिक्त जानकारी के लिए अपने शिक्षकों से संपर्क करना चाहिए।
In simple words: यह सवाल आपके कोर्स का हिस्सा नहीं है, इसलिए हम इसका जवाब नहीं दे सकते।

🎯 Exam Tip: जब कोई प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर का हो, तो यह बताना उचित है कि यह आपके सिलेबस का हिस्सा नहीं है।

 

Question 4. सर्टोली कोशिकाओं से क्या तात्पर्य है? इनका क्या कार्य है?
Answer: सर्टोली कोशिकाएँ वृषण में पाई जाने वाली विशेष कोशिकाएँ हैं। ये विकासशील जनन कोशिकाओं को सहारा, पोषण और सुरक्षा प्रदान करती हैं। साथ ही, ये शुक्राणुपूर्व कोशिकाओं के अनावश्यक कोशिकद्रव्य को हटाने में भी मदद करती हैं। सर्टोली कोशिकाएँ इनहिबिन (Inhibin) नामक प्रोटीन हार्मोन का स्राव भी करती हैं, जो शुक्राणु उत्पादन को प्रेरित करने वाले हार्मोन (FSH) की क्रिया को नियंत्रित करता है। इस प्रकार, ये शुक्राणुजनन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
In simple words: सर्टोली कोशिकाएँ वृषण में होती हैं, जो शुक्राणु बनाने वाली कोशिकाओं को पोषण और सहारा देती हैं, साथ ही हार्मोन भी बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: सर्टोली कोशिकाओं के मुख्य कार्यों (पोषण, सहारा और हार्मोन स्राव) को स्पष्ट रूप से लिखें, क्योंकि ये शुक्राणुजनन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 5. स्त्रियों में स्तनग्रन्थियों का नामांकित चित्र बनाते हुए समझाइये कि यह जनन प्रक्रिया में किस प्रकार सहायक है?
Answer: स्त्रियों में स्तन ग्रंथियाँ (Mammary glands) एक जोड़ी होती हैं। इनकी आंतरिक संरचना में संयोजी ऊतक और वसा ऊतक होते हैं। इनमें 15-20 नलिकाकार कोष्ठकीय पालियाँ होती हैं। प्रत्येक पाली में अंगूर के गुच्छों जैसी दुग्ध ग्रंथियाँ होती हैं, जिनसे दूध का स्राव होता है। स्तन ग्रंथियाँ जनन प्रक्रिया में सहायक अंगों का कार्य करती हैं क्योंकि मादा जनन तंत्र द्वारा कई कार्य पूरे किए जाते हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रसव के बाद शिशु को संश्लेषित और स्रावित दूध पिलाना है। स्तनपान नवजात शिशु के पोषण और प्रतिरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

पर्शकाओं के बीच की पेशियाँ वृहत अंश पेशी (पेक्टोरेलिस मेजर) स्तन कूपिका स्तन पालि स्तन नलिका तुंबिका (एंपुला) दुग्ध वाहिनी चूचुक/स्तनाग्र (निपल) एरियोला (चूचुक पृष्ठ) वसा चित्र- स्तन ग्रन्थि का आरेखीय-काट


In simple words: स्तन ग्रंथियां महिलाओं के शरीर में दूध बनाती हैं। यह दूध बच्चे के जन्म के बाद उसे पिलाने के काम आता है, जो बच्चे के पोषण और सेहत के लिए जरूरी है।

🎯 Exam Tip: स्तन ग्रंथियों की संरचना और जनन प्रक्रिया में उनकी भूमिका (स्तनपान) को स्पष्ट रूप से समझाएं, चित्र के मुख्य भागों को नामांकित करना भी महत्वपूर्ण है।

 

वृषण के कार्य- (Functions of Testes)

(1) वृषण द्वारा नर युग्मकों अर्थात् शुक्राणुओं का निर्माण किया जाता है।
(2) वृषण द्वारा नर हार्मोन टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) का स्रावण अथवा निर्माण किया जाता है।
In simple words: वृषण का काम शुक्राणु बनाना और पुरुषों का हार्मोन टेस्टोस्टेरोन बनाना है।

🎯 Exam Tip: वृषण के दोनों मुख्य कार्यों - शुक्राणु उत्पादन और हार्मोन स्राव - को स्पष्ट रूप से याद रखें।

अंतराली कोशिकाएँ शुक्राणु जनन शुक्राणु सरटोली कोशिकाएँ चित्र: वृषण की अनुप्रस्थ काट

RBSE Class 12 Biology Chapter 28 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. मनुष्य में नर जननतंत्र का नामांकित चित्र बनाते हुए वर्णन कीजिए।
Answer: नर जनन तंत्र (Male Reproductive System) कई भागों में बंटा होता है:

  • **वृषण (Testes):** ये वयस्क पुरुषों में एक जोड़ी गुलाबी और अंडाकार संरचनाएं होती हैं। ये पेट की गुहा के बाहर, दोनों पैरों के बीच एक कोष में स्थित होते हैं। प्रत्येक वृषण कोष से एक पतली वंक्षण नाल (Inguinal canal) जुड़ी होती है। वृषण शुक्राणु बनाने और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन स्रावित करने का कार्य करते हैं।
  • **अधिवृषण (Epididymis):** यह लगभग 6 मीटर लंबी, अत्यधिक कुंडलित, चपटी और अल्पविराम (Comma) के आकार की नलिका होती है। यह नलिका तीन भागों में बंटी होती है: शीर्ष अधिवृषण (Caput epididymis) जो चौड़ा होता है और वृषण के ऊपरी भाग पर टिका रहता है; मध्य वृषण (Corpus epididymis) जो वृषण की पिछली सतह तक फैला रहता है; और पुच्छक अधिवृषण (Cauda epididymis) जो अंतिम पतला भाग होता है और वृषण के निचले भाग को ढके रहता है। अधिवृषण शुक्राणुओं के भंडारण, परिपक्वन और परिवहन में मदद करता है।
  • **सहायक जनन ग्रंथियाँ (Accessory Reproductive Glands):** इसमें प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland), शुक्राशय (Seminal Vesicles) और काउपर की ग्रंथि (Cowper’s Gland) शामिल हैं। ये ग्रंथियाँ अपने स्राव को मूत्रमार्ग में छोड़ती हैं, जिससे वीर्य (Semen) का निर्माण होता है। ये स्राव शुक्राणुओं को पोषण और गतिशीलता प्रदान करते हैं।
  • **शिश्न (Penis):** यह वृषण कोषों के बीच में पेट से लटका हुआ एक लंबा, बेलनाकार, खड़ा होने वाला (Erectile) और अत्यधिक संवहनी (Richly vascularized) मैथुन अंग होता है। यह मैथुन के दौरान शुक्राणुओं को मादा प्रजनन पथ में पहुँचाने का कार्य करता है।
मूत्राशय प्रोस्टेट ग्रंथि शुक्राशय शुक्रवाहिनी मूत्र मार्ग शिश्न अधिवृषण चित्र-नर जनन तन्त्र


In simple words: पुरुषों के प्रजनन तंत्र में वृषण, अधिवृषण, सहायक ग्रंथियां और शिश्न होते हैं। वृषण शुक्राणु और हार्मोन बनाते हैं, अधिवृषण शुक्राणु को स्टोर और परिपक्व करता है, ग्रंथियां वीर्य बनाती हैं, और शिश्न मैथुन में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: नर जनन तंत्र के प्रत्येक अंग के नाम, उसकी स्थिति और विशिष्ट कार्य को स्पष्ट रूप से याद रखें। चित्र के सही नामांकित भागों को समझना भी महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. अण्डाशय की संरचना स्पष्ट कीजिए।
Answer: अंडाशय (Ovary) स्त्रियों में बादाम जैसी आकृति के दो प्राथमिक जनन अंग होते हैं, जो पेट की गुहा में स्थित होते हैं। ये आमतौर पर 1.5 से 3 सेमी लंबे और 8 मिमी मोटे होते हैं। अंडाशय गुर्दे के पीछे, श्रोणि क्षेत्र (Pelvic region) में मध्यअंडाशयी (Mesovarium) नामक आंत्रयोजनी (Mesentery) द्वारा पेट की गुहा की पिछली पार्श्व भित्ति से जुड़े होते हैं। अंडाशय में एक बाहरी पारदर्शी और पतली परत, जोना पेल्लुसिडा (Zona pellucida) होती है, जिसके बाहर कोरोना रेडिएटा (Corona radiata) की परत होती है। ग्राफियन पुटक की वृद्धि के दौरान एन्ट्रम (Antrum) नामक द्रव से भरा स्थान बनता है। इसमें अंडाणु (Oocyte) होता है, जो अंडाणु उत्सर्जन (Ovulation) के समय परिपक्व पुटिका के फटने पर मुक्त होता है। अंडाशय अंडाणु (Ova) का उत्पादन करते हैं और मादा हार्मोन एस्ट्रोजन (Estrogen) तथा प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) का स्राव करते हैं।
In simple words: अंडाशय बादाम के आकार के दो अंग हैं जो महिलाओं के पेट में होते हैं। वे अंडे और महिलाओं के हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन बनाते हैं, जो प्रजनन के लिए बहुत जरूरी हैं।

🎯 Exam Tip: अंडाशय की बाहरी और आंतरिक संरचना के मुख्य घटकों (जैसे जोना पेल्लुसिडा, कोरोना रेडिएटा, ग्राफियन पुटक) और उनके कार्यों को विस्तार से समझाएं।

 

Question 3. नर एवं मादा जननांग तन्त्रों की, जनन क्रिया में सहायक विभिन्न ग्रन्थियों का वर्णन कीजिए।
Answer: जनन क्रिया में सहायक ग्रंथियाँ नर और मादा दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं:

  • **नर जनन तंत्र में सहायक ग्रंथियाँ:**
    1. **प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland):** यह ग्रंथि मूत्रमार्ग के पास स्थित होती है और हल्के सफेद, क्षारीय तरल पदार्थ का स्राव करती है। यह वीर्य (Semen) का 25-30 प्रतिशत भाग बनाता है और इसमें फॉस्फेटेज, सिट्रेट, लाइसोजाइम, फाइब्रिनोलाइसिन और स्पर्मिन जैसे पदार्थ होते हैं।
    2. **शुक्राशय (Seminal Vesicles):** यह एक जोड़ी थैलीनुमा संरचना होती है जो मूत्राशय की सतह और मलाशय के बीच स्थित होती है। यह पीले, चिपचिपे तरल पदार्थ का स्राव करती है, जो वीर्य का 60 प्रतिशत भाग बनाता है। इसमें फ्रक्टोज, प्रोस्टाग्लैंडिन्स और प्रोटीन सेमिनोजेलिन जैसे पदार्थ होते हैं, जो शुक्राणुओं को ऊर्जा और गतिशीलता प्रदान करते हैं।
    3. **काउपर की ग्रंथि या बल्बोयूरीथल ग्रंथि (Cowper's Gland or Bulbourethral Gland):** ये प्रोस्टेट ग्रंथि के ठीक नीचे, मूत्रमार्ग के दोनों किनारों पर एक-एक छोटी अंडाकार ग्रंथियाँ होती हैं। इनके द्वारा गाढ़ा, चिपचिपा और क्षारीय पारदर्शी पदार्थ स्रावित होता है, जो मैथुन के समय निकलता है। यह तरल मादा योनि को चिकनाई प्रदान करता है और मैथुन क्रिया को आसान बनाता है।
  • **मादा जनन तंत्र में सहायक ग्रंथि:**
    1. **स्तन या छाती (Breast):** स्त्रियों में स्तन ग्रंथियाँ जनन तंत्र के सहायक अंगों का कार्य करती हैं। ये वक्ष के सामने एक जोड़ी में उपस्थित होती हैं और स्तन ग्रंथियों से बनी होती हैं। इनका मुख्य कार्य प्रसव के बाद शिशु को दूध पिलाना है, जो पोषण और प्रतिरक्षा प्रदान करता है।

ये सभी ग्रंथियां प्रजनन क्रिया को सफल बनाने और शिशु के विकास को सहारा देने में मदद करती हैं।
In simple words: पुरुषों में प्रोस्टेट, शुक्राशय और काउपर ग्रंथियां वीर्य बनाने और मैथुन में मदद करती हैं। महिलाओं में स्तन ग्रंथियां बच्चे को जन्म के बाद दूध पिलाने का काम करती हैं।

🎯 Exam Tip: नर और मादा दोनों में सहायक ग्रंथियों के नाम, उनके स्राव और प्रत्येक ग्रंथि के विशिष्ट कार्यों को अलग-अलग सूचीबद्ध करें।

 

Question 4. स्त्रियों में मादा जनन तन्त्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System) के मुख्य भाग इस प्रकार हैं:

  • **अंडाशय (Ovary):** यह एक जोड़ी में पेट की गुहा में स्थित अंडाकार अंग हैं। ये अंडाणु और एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन जैसे मादा हार्मोन उत्पन्न करते हैं।
  • **अंडवाहिनी (Oviduct):** ये लगभग 12 सेमी लंबी, कीपनुमा और कुंडलित पेशीय नलिकाएं हैं जो गर्भाशय तक फैली होती हैं। इनका कीपनुमा भाग इन्फंडिबुलम कहलाता है, जिसमें झालरदार प्रवर्ध होते हैं। अंडवाहिनी अंडाशय से अंडाणु को गर्भाशय तक ले जाती है।
  • **गर्भाशय (Uterus):** यह एक खोखला, नाशपाती के आकार का अंग है। इसमें भ्रूण का विकास होता है। गर्भाशय के ऊपरी मुख्य भाग को काय (Body) और निचले भाग को गर्भाशय ग्रीवा (Cervix uteri) कहते हैं।
  • **योनि (Vagina):** यह एक लचीली, पेशीय झिल्लीदार नलिका है जो गर्भाशय ग्रीवा से शुरू होकर बाहर खुलती है। इसका द्वार योनिच्छद (Hymen) नामक पतली झिल्ली से आंशिक रूप से ढका होता है।
  • **भग (Vulva):** यह बाहरी जननांगों का सामूहिक रूप है, जो श्रोणि क्षेत्र में मूलाधार के ऊपर स्थित होता है। इसके भागों में प्यूबिस मुंड (Mons pubis), वृहद् भगोष्ठ (Labia majora), लघु भगोष्ठ (Labia minora), भगशेफ (Clitoris) और प्रघाण (Vestibule) शामिल हैं।

मादा जनन तंत्र गर्भावस्था को बनाए रखने और बच्चे के जन्म के लिए महत्वपूर्ण है।

गर्भाशयी नलिका या अण्डवाहिनी अण्डवाहिनी या गर्भाशयी नलिका गर्भाशयी नलिका का अन्तिम शिरा अण्डाशय अण्डाशय गर्भाशयी-ग्रीवा गर्भाशय योनि चित्र 28.2 मादा जनन तंत्र
वृहद्भगोष्ठ लघुभगोष्ठ भगशेफ मूत्र मार्ग योनि द्वार हॉयमन बार्थोलिन ग्रन्थि का द्वार गुदा चित्र 28.3 मादा का भग


In simple words: मादा प्रजनन तंत्र में अंडाशय (अंडे और हार्मोन बनाते हैं), अंडवाहिनी (अंडे को गर्भाशय तक ले जाती है), गर्भाशय (बच्चे का विकास होता है), योनि और बाहरी अंग (भग) शामिल हैं। ये सभी मिलकर बच्चे पैदा करने की प्रक्रिया को पूरा करते हैं।

🎯 Exam Tip: मादा जनन तंत्र के प्रत्येक भाग के नाम, उसकी स्थिति और कार्य को चित्र के साथ स्पष्ट रूप से समझाएं। बाहरी जननांगों (भग) के विभिन्न उप-भागों का उल्लेख करना भी महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए-
(1) अण्डाशय
(2) शिश्न
(3) एपिडिडाइमिस
(4) द्वितीय लैंगिक लक्षण
(5) कार्पस ल्यूटिम ।
Answer:

  1. **अंडाशय (Ovary):** यह स्त्रियों के प्राथमिक जनन अंग होते हैं, जो एक जोड़ी में पेट की गुहा में स्थित होते हैं। इनका मुख्य कार्य अंडाणु का उत्पादन करना और मादा हार्मोन एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन का स्राव करना है। ये हार्मोन प्रजनन चक्र और गर्भावस्था को नियंत्रित करते हैं।
  2. **शिश्न (Penis):** यह नर जनन तंत्र का मैथुन अंग है, जो वृषण कोषों के बीच में पेट से लटका हुआ एक लंबा, बेलनाकार और खड़ा होने वाला अंग होता है। यह अत्यधिक संवहनी होता है और मैथुन के दौरान शुक्राणुओं को मादा प्रजनन पथ में पहुँचाने का कार्य करता है। शिश्न का शिखर भाग मुंड (Glans-penis) कहलाता है जो एक टोपी जैसी संरचना, शिश्नमुंडछद से ढका होता है।
  3. **एपिडिडाइमिस (Epididymis):** इसे अधिवृषण भी कहते हैं। यह एक पतली, लगभग 6 मीटर लंबी, अत्यधिक कुंडलित और चपटी नलिका होती है, जो वृषण के पीछे चिपकी रहती है। यह तीन भागों (शीर्ष, मध्य और पुच्छक) में बंटी होती है। इसका मुख्य कार्य वृषण से निकलने वाले शुक्राणुओं का भंडारण, परिपक्वन और परिवहन करना है।
  4. **द्वितीय लैंगिक लक्षण (Secondary Sexual Characteristics):** ये वे बाहरी लक्षण हैं जो नर और मादा को यौवनारंभ के बाद अलग-अलग पहचानने में मदद करते हैं, लेकिन सीधे प्रजनन क्रिया में शामिल नहीं होते। पुरुषों में इनमें दाढ़ी-मूंछ का आना, शरीर पर घने बाल, आवाज का भारी होना और वृषण कोष में वृद्धि शामिल है। स्त्रियों में त्वचा का कोमल होना, स्तन ग्रंथियों की वृद्धि, शरीर पर कम बाल और आवाज का महीन व मधुर होना इसके उदाहरण हैं।
  5. **कार्पस ल्यूटियम (Corpus Luteum):** यह अण्डोत्सर्ग (Ovulation) के बाद अंडाशय में परिपक्व पुटिका के फटने से बनी पीले रंग की एक ग्रंथि जैसी संरचना है। यह एक अस्थायी अंतःस्रावी ग्रंथि के रूप में कार्य करती है और प्रोजेस्टेरोन तथा एस्ट्रोजन हार्मोन का स्राव करती है। ये हार्मोन गर्भाशय को गर्भावस्था के लिए तैयार करने और प्रारंभिक गर्भावस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

In simple words: अंडाशय अंडे और महिला हार्मोन बनाते हैं। शिश्न पुरुषों में मैथुन का अंग है। एपिडिडाइमिस शुक्राणुओं को रखता और परिपक्व करता है। द्वितीयक लैंगिक लक्षण पुरुषों में दाढ़ी और महिलाओं में स्तन वृद्धि जैसे बदलाव हैं। कार्पस ल्यूटियम गर्भावस्था के लिए जरूरी हार्मोन बनाता है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक टिप्पणी के लिए, उस अंग या अवधारणा का नाम, उसकी स्थिति (यदि कोई हो), मुख्य संरचनात्मक विशेषताएं और प्रमुख कार्य स्पष्ट रूप से बताएं।

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Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 28 मानव का जनन तंत्र will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 28 मानव का जनन तंत्र in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Biology. You can access RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 28 मानव का जनन तंत्र in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Biology RBSE solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 28 मानव का जनन तंत्र in printable PDF format for offline study on any device.