RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 27 मानव के संवेदी अंग, ज्ञानेन्द्रियाँ

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Detailed Chapter 27 मानव के संवेदी अंग, ज्ञानेन्द्रियाँ RBSE Solutions for Class 12 Biology

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Class 12 Biology Chapter 27 मानव के संवेदी अंग, ज्ञानेन्द्रियाँ RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Biology Chapter 27 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. कर्ण अस्थि मैलियस का आकार होता है-
(a) हथौड़े के जैसा
(b) घोड़े की नाल जैसा
(c) अण्डाकार
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
Answer: (a) हथौड़े के जैसा
In simple words: कान की हड्डी मैलियस का आकार एक छोटे हथौड़े जैसा होता है। यह सुनने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: मध्य कान की तीन हड्डियों (मैलियस, इनकस, स्टेपीज़) के नाम और उनके आकार याद रखें, क्योंकि ये अक्सर पूछे जाते हैं।

 

Question 3. निकट दृष्टि दोष में व्यक्ति-
(a) पास की वस्तुओं को आसानी से नहीं देख पाता है।
(b) दूर की वस्तुओं को आसानी से नहीं देख पाता है।
(c) एक नेत्री दृष्टि नहीं बना पाता है।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
Answer: (b) दूर की वस्तुओं को आसानी से नहीं देख पाता है।
In simple words: निकट दृष्टि दोष में व्यक्ति पास की चीजें तो साफ देख लेता है, लेकिन दूर की चीजें धुंधली दिखाई देती हैं। इसका इलाज अवतल लेंस से होता है।

🎯 Exam Tip: निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) और दूर दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) के लक्षणों और उनके सुधार के लिए उपयोग होने वाले लेंसों को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 4. अन्तः कर्ण में सन्तुलन स्थापित करने वाला भाग है-
(a) इनकस
(b) सेकुलस
(c) सेकुलस, युट्रीकुलस, अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ
(d) कॉटी के अंगे।
Answer: (c) सेकुलस, युट्रीकुलस, अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ
In simple words: हमारे शरीर का संतुलन बनाए रखने का काम कान के अंदर मौजूद सेकुलस, युट्रीकुलस और अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ करती हैं। ये खास अंग गति और स्थिति को पहचानते हैं।

🎯 Exam Tip: आंतरिक कान के मुख्य भागों जैसे कोक्लिया (सुनने के लिए) और वेस्टिब्यूल (संतुलन के लिए) के कार्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 12 Biology Chapter 27 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. मध्य कर्ण में उपस्थित अस्थियों के नाम लिखिए।
Answer: मध्य कर्ण में मैलियस, इनकस और स्टेपीज नामक तीन छोटी हड्डियाँ पाई जाती हैं। ये हड्डियाँ ध्वनि तरंगों को आंतरिक कान तक पहुँचाने का काम करती हैं।
In simple words: मध्य कान में तीन हड्डियाँ होती हैं: मैलियस, इनकस और स्टेपीज।

🎯 Exam Tip: तीनों कर्ण अस्थियों (ओसिकल्स) के नाम क्रम से याद रखें, ये ध्वनि संचरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 

Question 2. टेक्टोरियल कला कहाँ पायी जाती है?
Answer: टेक्टोरियल कला कोक्लियर नलिका की पाश्र्वभित्ति पर होती है। यह एक पतली जेली जैसी संरचना होती है जो कॉर्टी के अंग पर झुकी हुई रहती है और सुनने में मदद करती है।
In simple words: टेक्टोरियल कला कान के कॉक्लियर नलिका में मिलती है।

🎯 Exam Tip: कॉर्टी के अंग और टेक्टोरियल कला का स्थान और उनके सुनने की प्रक्रिया में योगदान को ध्यान में रखें।

 

Question 3. नेत्र में पाये जाने जाने वाले शलाका एवं शंकु कोशिका तंतु के कार्य बताइये।
Answer: नेत्र में पाई जाने वाली शलाका कोशिकाएँ (Rods) और शंकु कोशिकाएँ (Cones) प्रकाश को पहचानने का काम करती हैं। शलाका कोशिकाएँ कम रोशनी में देखने (अंधेरे में दृष्टि) में मदद करती हैं, जबकि शंकु कोशिकाएँ तेज रोशनी में रंगीन दृष्टि (रंगों को देखने) के लिए जिम्मेदार होती हैं।
In simple words: आँख में शलाकाएँ कम रोशनी में दिखाती हैं और शंकु रंग देखने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: शलाका और शंकु कोशिकाओं के कार्यों और उनके बीच के अंतर को याद रखें, खासकर रात की दृष्टि और रंग की दृष्टि के संदर्भ में।

 

Question 4. शरीर संतुलन की क्रिया कर्ण की कौन-सी रचना द्वारा सम्पन्न की जाती है?
Answer: शरीर के संतुलन की क्रिया आंतरिक कान में स्थित वेस्टिब्यूल (Vestibule) नामक अंग द्वारा पूरी की जाती है। यह गति और स्थिति में बदलावों को पहचानकर मस्तिष्क तक संकेत भेजता है, जिससे शरीर संतुलन बनाए रखता है।
In simple words: शरीर का संतुलन कान के अंदर वेस्टिब्यूल नामक हिस्से से नियंत्रित होता है।

🎯 Exam Tip: शरीर संतुलन में आंतरिक कान के वेस्टिब्यूल की भूमिका को स्पष्ट रूप से याद रखें।

RBSE Class 12 Biology Chapter 27 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. कर्ण में यूस्टेचियन नली की क्या भूमिका होती हैं?
Answer: यूस्टेचियन नली कान की गुहा को ग्रसनी से जोड़ती है, जिसे फेरिंगोटिम्पेनिक नली भी कहते हैं। इस नली का मुख्य काम कान के पर्दे के दोनों ओर हवा के दबाव को बराबर रखना है। इससे कान का पर्दा ठीक से काम कर पाता है और सुनने में कोई परेशानी नहीं होती।
In simple words: यूस्टेचियन नली कान के पर्दे पर हवा का दबाव बराबर रखती है।

🎯 Exam Tip: यूस्टेचियन नली का मुख्य कार्य और इसका मध्य कान के कार्य पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसे याद रखें।

 

Question 2. रेटिना के क्रमशः उन स्थलों के नाम बताइये जहाँ सबसे अच्छा दिखाई देता है और जहाँ कुछ भी दिखाई नहीं देता है?
Answer: रेटिना पर पीत बिन्दु (Yellow spot) वह जगह है जहाँ सबसे अच्छी और साफ दृष्टि होती है। यहाँ सबसे ज्यादा शंकु कोशिकाएँ पाई जाती हैं। पीत बिन्दु के ठीक नीचे अंध बिन्दु (Blind spot) होता है, जहाँ से ऑप्टिक तंत्रिका निकलती है। इस जगह पर कोई भी प्रकाश-संवेदनशील कोशिकाएँ (शलाका या शंकु) नहीं होतीं, इसलिए यहाँ से कुछ भी दिखाई नहीं देता है।
In simple words: पीत बिन्दु पर सबसे साफ दिखता है और अंध बिन्दु पर कुछ भी नहीं दिखता क्योंकि वहाँ कोई रोशनी पहचानने वाली कोशिकाएँ नहीं होतीं।

🎯 Exam Tip: रेटिना के पीत बिन्दु (मैकुला) और अंध बिन्दु की स्थिति और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question 3. हमारे नेत्रों में पायी जाने वाली पेशियों के नाम बताइये।
Answer: हमारी आँखों में छह प्रकार की कंकाल पेशियाँ होती हैं जो आँखों की गति को नियंत्रित करती हैं। ये पेशियाँ इस प्रकार हैं:

  • बाह्य ऋजु पेशियाँ (External rectus muscles)
  • अन्तः ऋजु पेशियाँ (Internal rectus muscles)
  • उत्तर ऋजु पेशियाँ (Superior rectus muscles)
  • अधो ऋजु पेशियाँ (Inferior rectus muscles)
  • उत्तर तिरछी पेशियाँ (Superior oblique muscles)
  • अधो तिरछी पेशियाँ (Inferior oblique muscles)
ये सभी पेशियाँ आँख को विभिन्न दिशाओं में घुमाने में मदद करती हैं।
In simple words: आँख में छह तरह की मांसपेशियाँ होती हैं जो उसे घुमाने का काम करती हैं।

🎯 Exam Tip: आँखों की सभी छह बाहरी पेशियों के नाम और उनकी दिशात्मक गतियों को याद रखने का प्रयास करें।

 

Question 4. मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) क्या होता हैं?
Answer: मायोपिया, जिसे निकट दृष्टि दोष भी कहते हैं, एक आँख की स्थिति है जिसमें व्यक्ति पास की वस्तुओं को तो साफ-साफ देख सकता है, लेकिन दूर की वस्तुएँ उसे धुंधली दिखाई देती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दूर की वस्तुओं का प्रतिबिम्ब रेटिना के ठीक सामने बन जाता है, न कि रेटिना पर। इस दोष को दूर करने के लिए अवतल लेंस (concave lens) का उपयोग किया जाता है।
In simple words: मायोपिया में पास की चीजें साफ दिखती हैं, पर दूर की चीजें धुंधली दिखती हैं। इसे अवतल लेंस से ठीक किया जाता है।

🎯 Exam Tip: मायोपिया के कारण (प्रतिबिंब का स्थान) और उसके सुधार के लिए उपयोग होने वाले लेंस का प्रकार हमेशा याद रखें।

 

Question 5. वर्णान्धता (Colour Blindness) क्या होती है?
Answer: वर्णान्धता, जिसे कलर ब्लाइंडनेस भी कहते हैं, एक आनुवांशिक बीमारी है जहाँ व्यक्ति कुछ रंगों, खासकर लाल और हरे रंगों में अंतर नहीं कर पाता है। यह आँखों में शंकु कोशिकाओं (cones) की कमी या उनके ठीक से काम न करने के कारण होता है। ये कोशिकाएँ रंगों को पहचानने के लिए जिम्मेदार होती हैं।
In simple words: वर्णान्धता एक बीमारी है जहाँ व्यक्ति लाल और हरे रंगों में फर्क नहीं कर पाता है।

🎯 Exam Tip: वर्णान्धता के कारण (शंकु कोशिकाओं की कमी) और प्रभावित रंगों (लाल और हरा) को विशेष रूप से याद रखें।

RBSE Class 12 Biology Chapter 27 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. आँखों के विभिन्न रोगों के बारे में विस्तार से बताइये।
Answer: मनुष्य की आँखों में कई तरह के रोग हो सकते हैं, जो उसकी दृष्टि पर असर डालते हैं। यहाँ कुछ मुख्य रोगों का वर्णन किया गया है:
1. **निकट दृष्टि दोष (Myopia):** इसमें व्यक्ति पास की चीजें साफ देख पाता है, लेकिन दूर की चीजें धुंधली दिखती हैं। ऐसा तब होता है जब दूर की वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना के आगे बन जाता है। इसे अवतल लेंस से ठीक किया जाता है।
2. **दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia):** इस रोग में व्यक्ति दूर की चीजें तो साफ देख पाता है, लेकिन पास की चीजें धुंधली दिखती हैं। ऐसा तब होता है जब पास की वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना के पीछे बन जाता है। इसे उत्तल लेंस से ठीक किया जाता है।
3. **मोतियाबिंद (Cataract):** बढ़ती उम्र के साथ आँख का लेंस सफेद और धुंधला हो जाता है, जिससे देखने में परेशानी होती है। इसमें लेंस को सर्जरी से निकालकर उसकी जगह नया कृत्रिम लेंस या चश्मा लगाया जाता है।
4. **दृष्टिवैश्क्य (Astigmatism):** इस रोग में आँखों के कॉर्निया का आकार असामान्य हो जाता है, जिससे दृष्टि धुंधली या विकृत हो जाती है। इसे बेलनाकार लेंस का उपयोग करके ठीक किया जाता है।
5. **कंजंक्टिवाइटिस (Conjunctivitis):** यह आँख की कंजंक्टिवा में सूजन आ जाती है, जिससे आँख लाल हो जाती है और उसमें खुजली होती है। इसे 'आँख का आना' भी कहते हैं, और यह अक्सर बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है।
6. **वर्णान्धता (Colourblindness):** यह एक आनुवंशिक रोग है जहाँ व्यक्ति लाल और हरे जैसे कुछ रंगों में अंतर नहीं कर पाता है। यह आँखों में शंकु कोशिकाओं की कमी के कारण होता है।
In simple words: आँख के कई रोग होते हैं, जैसे मायोपिया, हाइपरमेट्रोपिया, मोतियाबिंद, दृष्टिवैश्क्य, कंजंक्टिवाइटिस और वर्णान्धता। हर रोग में देखने की अलग-अलग समस्या होती है और उनके अलग इलाज होते हैं।

🎯 Exam Tip: आँखों के प्रत्येक रोग का नाम, उसके लक्षण, कारण और उपचार के लिए उपयोग होने वाले लेंस या विधि को क्रमबद्ध तरीके से याद करें।

 

Question 2. श्रवण की क्रिया का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: सुनने की क्रिया कान द्वारा पूरी होती है, जिसमें तीन मुख्य भाग शामिल होते हैं: बाह्य कान, मध्य कान और आंतरिक कान।
1. **बाह्य कान:** यह ध्वनि तरंगों को इकट्ठा करता है। कर्णपल्लव (पिन्ना) ध्वनि को बाहरी श्रवण नलिका (ऑडिटरी कैनाल) में भेजता है।
2. **मध्य कान:** ध्वनि तरंगें कर्णपट झिल्ली (कान का पर्दा) से टकराती हैं, जिससे यह कंपन करती है। यह कंपन मध्य कान की तीन छोटी हड्डियों (मैलियस, इनकस, स्टेपीज़) में जाता है। स्टेपीज़ कंपन को आंतरिक कान में भेजती है।
3. **आंतरिक कान:** आंतरिक कान में कोक्लिया (कर्णावर्त) होता है, जो द्रव से भरा होता है। स्टेपीज़ के कंपन से इस द्रव में तरंगें पैदा होती हैं। ये तरंगें कोक्लिया के अंदर कॉर्टी के अंग में मौजूद संवेदनशील रोम कोशिकाओं (हेयर सेल्स) को उत्तेजित करती हैं। ये रोम कोशिकाएँ ध्वनि संकेतों को तंत्रिका आवेगों में बदल देती हैं, जिन्हें श्रवण तंत्रिका मस्तिष्क तक ले जाती है। मस्तिष्क इन आवेगों की व्याख्या ध्वनि के रूप में करता है। इस तरह, सुनने की क्रिया पूरी होती है।
In simple words: कान ध्वनि तरंगों को इकट्ठा करता है, उन्हें कंपन में बदलता है, और फिर मस्तिष्क तक भेजता है ताकि हम सुन सकें।

🎯 Exam Tip: श्रवण प्रक्रिया में बाह्य, मध्य और आंतरिक कान के प्रत्येक भाग की भूमिका और ध्वनि तरंगों के तंत्रिका आवेगों में बदलने की पूरी श्रृंखला को याद रखें।

 

Question 3. संवेदी अंगों के प्रकार तथा उनका वर्णन कीजिए।
Answer: मनुष्य के शरीर में पाँच मुख्य संवेदी अंग होते हैं जो बाहरी दुनिया से जानकारी इकट्ठा करते हैं। ये अंग निम्नलिखित हैं:
1. **आँख (Eye):** आँखें देखने के लिए होती हैं और ये प्रकाश को पहचानती हैं। ये हमें रंग, आकार और दूरी देखने में मदद करती हैं। आँखें एक खोखली गेंद जैसी होती हैं जिसमें स्क्लेरा, कोरॉइड और रेटिना जैसी परतें होती हैं।
2. **कान (Ear):** कान सुनने और शरीर का संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं। ये ध्वनि तरंगों को पकड़कर उन्हें तंत्रिका आवेगों में बदलते हैं, जिन्हें मस्तिष्क समझता है। कान के तीन मुख्य भाग होते हैं: बाह्य, मध्य और आंतरिक कान।
3. **त्वचा (Skin):** त्वचा स्पर्श का सबसे बड़ा संवेदी अंग है। यह हमें छूने, दबाव, तापमान (ठंडा/गर्म) और दर्द महसूस कराती है। त्वचा में विभिन्न प्रकार की तंत्रिकाओं के सिरे होते हैं जो इन संवेदनाओं को पहचानते हैं।
4. **नाक (Nose):** नाक गंध को पहचानने का काम करती है। इसमें विशेष कोशिकाएँ होती हैं जो हवा में मौजूद रासायनिक पदार्थों (गंध) को पहचानती हैं और मस्तिष्क को गंध का संकेत भेजती हैं।
5. **जिह्वा (Tongue):** जिह्वा (जीभ) स्वाद का संवेदी अंग है। इस पर स्वाद कलिकाएँ होती हैं जो भोजन के रासायनिक पदार्थों को पहचानकर मीठा, खट्टा, कड़वा और नमकीन जैसे स्वाद का अनुभव कराती हैं।
In simple words: मनुष्य के पाँच संवेदी अंग हैं: आँखें (देखने के लिए), कान (सुनने और संतुलन के लिए), त्वचा (स्पर्श के लिए), नाक (गंध के लिए) और जीभ (स्वाद के लिए)।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक संवेदी अंग का नाम, उसका मुख्य कार्य और उसके द्वारा महसूस की जाने वाली संवेदना के प्रकार को याद रखें।

 

Question 4. अंतःकर्ण की संरचना को समझाइये।
Answer: आंतरिक कान टेम्पोरल हड्डी की गुहा में होता है और इसे बोनी लेबिरिंथ (Bony labyrinth) कहते हैं। यह दो मुख्य भागों से बना होता है:
(i) **कर्णावर्त (Cochlea):** यह एक लंबी, कुंडलीदार संरचना है जो शंख जैसी दिखती है, जिसके लगभग ढाई चक्र होते हैं। इसकी आंतरिक गुहा झिल्लियों द्वारा तीन समानांतर नलिकाओं में बँटी होती है, जिनमें एंडोलिम्फ भरा होता है। इसके बीच में कॉर्टी का अंग होता है, जिसमें संवेदी रोम होते हैं।
(ii) **प्रघाण (Vestibule):** यह शरीर का संतुलन बनाए रखने का काम करता है। इसमें तीन अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ (Semicircular canal) होती हैं, जिनमें से एक कोक्लिया से जुड़ी होती है। इसमें यूट्रिकुलस और सैकुलस भी होते हैं। ये नलिकाएँ चौड़ी होकर एम्पुला बनाती हैं, जिनमें संवेदी कोशिकाएँ होती हैं। इन कोशिकाओं से तंत्रिका तंतु निकलकर श्रवण तंत्रिका बनाते हैं। ये दोनों संरचनाएँ मिलकर मेंब्रेनस लेबिरिंथ (Membranous labyrinth) बनाती हैं। कोक्लिया और सेकुलस छोटी नलिकाओं से जुड़े रहते हैं।
In simple words: आंतरिक कान के दो मुख्य भाग होते हैं: कोक्लिया (सुनने के लिए घुमावदार हिस्सा) और वेस्टिब्यूल (संतुलन के लिए जिसमें अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ होती हैं)।

🎯 Exam Tip: आंतरिक कान के प्रत्येक भाग (कोक्लिया, वेस्टिब्यूल, अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ) की संरचना और उनके विशिष्ट कार्यों को याद रखें।

 

Question 5. वर्णान्धता (Colour Blindness) क्या होती है?
Answer: वर्णान्धता एक आनुवांशिक रोग है जहाँ व्यक्ति को रंगों, विशेष रूप से लाल और हरे रंगों के बीच अंतर करने में कठिनाई होती है। यह समस्या आँखों में शंकु कोशिकाओं (cone cells) की कमी या उनके ठीक से काम न करने के कारण उत्पन्न होती है। ये शंकु कोशिकाएँ रंगों को पहचानने के लिए जिम्मेदार होती हैं। यह अक्सर पुरुषों में अधिक पाया जाता है।
In simple words: वर्णान्धता वह स्थिति है जब व्यक्ति लाल और हरे जैसे कुछ रंगों में फर्क नहीं कर पाता, क्योंकि उसकी आँखों की रंग पहचानने वाली कोशिकाएँ ठीक से काम नहीं करतीं।

🎯 Exam Tip: वर्णान्धता की आनुवंशिक प्रकृति और यह किन रंगों को सबसे अधिक प्रभावित करती है, यह महत्वपूर्ण है।

चित्र 27.4 : मानव कर्ण की संरचना। इस चित्र में बाह्य, मध्य और आंतरिक कर्ण के विभिन्न भागों को दर्शाया गया है, जैसे कर्ण नाल, टिम्पेनिक कला, कॉक्लिया, यूस्टेचियन नलिका और श्रवण-तंत्रिका।

चित्र 27.5 : कॉक्लिया की आंतरिक संरचना। यह चित्र कॉक्लिया के आंतरिक विवरण को दर्शाता है, जिसमें वेस्टिबुलर कैनाल, टिम्पेनिक कैनाल, पेरिलिम्फ और कॉर्टी का अंग शामिल हैं।

 

Question 5. स्वाद एवं घ्राण अंगों का वर्णन कीजिए।
Answer: मनुष्य में स्वाद और घ्राण (गंध) की ज्ञानेन्द्रियाँ महत्वपूर्ण संवेदी अंग हैं जो हमें बाहरी वातावरण को समझने में मदद करती हैं:
**स्वाद अंग (जिह्वा-Tongue):** जिह्वा को स्वाद की ज्ञानेन्द्रिय कहते हैं क्योंकि यह हमें भोजन के स्वाद का पता लगाने में मदद करती है। जिह्वा पर स्वाद कलिकाएँ (taste buds) होती हैं, जिनमें संवेदी कोशिकाएँ होती हैं। जब कोई भोजन इन स्वाद कलिकाओं के संपर्क में आता है, तो वे उसमें मौजूद रासायनिक पदार्थों को पहचानती हैं। यह जानकारी मस्तिष्क तक जाती है और हमें मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा और उमामी जैसे स्वाद का अनुभव कराती है। हर व्यक्ति के स्वाद पहचानने की क्षमता अलग होती है।
**घ्राण अंग (नाक-Nose):** नाक को गंध की ज्ञानेन्द्रिय कहते हैं। यह हमें बाहरी वातावरण से विभिन्न प्रकार की गंधों का पता लगाने में सक्षम बनाती है। नाक के ऊपरी हिस्से में घ्राण उपकला (olfactory epithelium) होती है, जिसमें गंध को पहचानने वाली संवेदी कोशिकाएँ होती हैं। जब हवा में मौजूद गंध वाले रासायनिक कण इन कोशिकाओं के संपर्क में आते हैं, तो वे तंत्रिका आवेग पैदा करते हैं। ये आवेग मस्तिष्क के घ्राण बल्ब तक जाते हैं, जहाँ गंध की पहचान होती है। इस तरह हम फूलों की खुशबू या खाने की महक जैसी अलग-अलग गंधों को पहचान पाते हैं।
In simple words: जीभ स्वाद बताती है क्योंकि इसमें स्वाद कलिकाएँ होती हैं, और नाक गंध बताती है क्योंकि इसमें गंध पहचानने वाली कोशिकाएँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: स्वाद और गंध दोनों रासायनिक संवेद हैं। इनके लिए जिम्मेदार अंगों के नाम (जिह्वा और नाक) और उनकी कार्यप्रणाली में शामिल कोशिकाओं (स्वाद कलिकाएँ और घ्राण उपकला) को याद रखें।

चित्र. 27.1: (अ) आँख की आंतरिक संरचना और (ब) शंकु तथा शलाकाएँ। यह चित्र आँख के आंतरिक भागों को दर्शाता है, जिसमें श्वेत पटल, कॉर्निया, लेंस, रेटिना और ऑप्टिक तंत्रिका शामिल हैं। निचले भाग में रेटिना में पाई जाने वाली शंकु और शलाका कोशिकाओं को दिखाया गया है।

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RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 27 मानव के संवेदी अंग, ज्ञानेन्द्रियाँ

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