Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 Biology Chapter 26 मानव का तंत्रिका तंत्र
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Question 1. तन्त्रिका तन्त्र इकाई क्या होती है?
(अ) नेफ्रॉन
(ब) न्यूरॉन
(स) मस्तिष्क
(द) स्पाइनल कोर्ड
Answer: (ब) न्यूरॉन
In simple words: तंत्रिका तंत्र की सबसे छोटी इकाई न्यूरॉन है। यह हमारे शरीर में संदेशों को भेजने का काम करती है।
🎯 Exam Tip: तंत्रिका तंत्र की मूलभूत इकाई (न्यूरॉन) का नाम याद रखें, जो शरीर में संदेशों के संचार के लिए जिम्मेदार है।
Question 3. परानुकम्पी तन्त्रिका तन्त्र का एक कार्य है-
(अ) नेत्रों की पुतली का फैलना
(ब) यकृत में शर्करा का स्राव
(स) हृदय की धड़कन को तेज करना
(द) लार स्रावण का उत्तेजन
Answer: (द) लार स्रावण का उत्तेजन
In simple words: परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र लार बनाने वाली ग्रंथियों को सक्रिय करता है, जिससे मुंह में लार का स्राव बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र (parasympathetic nervous system) आमतौर पर "आराम और पाचन" (rest and digest) प्रतिक्रियाओं से जुड़ा होता है, जिसमें लार का स्राव भी शामिल है।
Question 4. प्रतिबन्धित प्रतिवर्ती पर कार्य करने वाले वैज्ञानिक हैं-
(अ) मेण्डल
(ब) पावलोव
(स) डार्विन
(द) इयान विल्मट
Answer: (ब) पावलोव
In simple words: प्रसिद्ध वैज्ञानिक पावलोव ने ही प्रतिबन्धित प्रतिवर्ती क्रियाओं के बारे में बताया था। उनका काम यह समझने में मदद करता है कि जानवर कैसे कुछ खास चीजों से सीखते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिबन्धित प्रतिवर्ती क्रिया (conditioned reflex) का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक इवान पावलोव का नाम हमेशा याद रखें, जिन्होंने अपने कुत्तों पर प्रयोग करके इसे सिद्ध किया था।
Question 5. कपाल तन्त्रिकाओं की संख्या मनुष्य में होती है-
(अ) 10 जोड़ी
(ब) 10
(स) 12 जोड़ी
(द) 12
Answer: (स) 12 जोड़ी
In simple words: मनुष्य के सिर में 12 जोड़ी कपाल तंत्रिकाएं होती हैं। ये तंत्रिकाएं सीधे मस्तिष्क से निकलकर शरीर के विभिन्न हिस्सों को नियंत्रित करती हैं।
🎯 Exam Tip: कपाल तंत्रिकाओं की सही संख्या (12 जोड़ी) याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक सामान्य तथ्य है।
Question 3. सबसे लम्बी कोशिका कौन-सी होती है?
Answer: सबसे लम्बी कोशिका तन्त्रिका कोशिका या न्यूरॉन (Nerve Cell or Neuron) होती है। यह कोशिका पूरे शरीर में संदेशों को दूर-दूर तक पहुंचाने का काम करती है।
In simple words: तंत्रिका कोशिका या न्यूरॉन हमारे शरीर की सबसे लंबी कोशिका है। यह दिमाग से संदेशों को शरीर के दूसरे हिस्सों तक ले जाती है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि तंत्रिका कोशिका ही मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिका है, जो विद्युत आवेगों का संवहन करती है।
RBSE Class 12 Biology Chapter 26 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र के दो भाग कौन-से होते हैं?
Answer: स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र के दो मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
(i) अनुकंपी तन्त्रिका तन्त्र (Sympathetic Nervous System): यह शरीर को खतरे या तनाव की स्थिति में तैयार करता है, जैसे हृदय गति बढ़ाना।
(ii) परानुकंपी तन्त्रिका तन्त्र (Parasympathetic Nervous System): यह शरीर को शांत करता है और आराम व पाचन जैसी गतिविधियों में मदद करता है।
In simple words: स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के दो हिस्से हैं: अनुकंपी, जो हमें संकट में तैयार करता है, और परानुकंपी, जो हमें शांत करता है।
🎯 Exam Tip: स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के दो भागों (अनुकंपी और परानुकंपी) और उनके विपरीत कार्यों को स्पष्ट रूप से समझें, जो शरीर के संतुलन को बनाए रखते हैं।
Question 2. परिधीय तन्त्रिका तन्त्र को यह नाम क्यों दिया जाता है?
Answer: परिधीय तन्त्रिका तन्त्र को यह नाम इसलिए दिया जाता है क्योंकि इसमें मस्तिष्क और मेरुरज्जु से निकलने वाली तंत्रिकाएं शामिल होती हैं। ये तंत्रिकाएं शरीर के सभी बाहरी (परिधीय) हिस्सों तक फैलती हैं और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को बाकी शरीर से जोड़ती हैं।
In simple words: परिधीय तंत्रिका तंत्र को यह नाम इसलिए मिलता है क्योंकि इसकी तंत्रिकाएं शरीर के बाहरी हिस्सों तक फैली होती हैं।
🎯 Exam Tip: परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System) की पहचान इस बात से करें कि यह मस्तिष्क और मेरुरज्जु से निकलकर शरीर के बाहरी (परिधीय) भागों तक कैसे पहुंचता है।
Question 4. मस्तिष्क के मुख्य भाग के नाम बताइए।
Answer: मस्तिष्क के मुख्य भाग निम्नवत् हैं:
(i) अग्रमस्तिष्क (Forebrain): इसमें प्रमस्तिष्क (Cerebrum) और डायएनसेफेलॉन (Diencephalon) शामिल हैं।
(ii) मध्य मस्तिष्क (Midbrain): यह मस्तिष्क का छोटा सा भाग है जो अग्रमस्तिष्क और पश्चमस्तिष्क को जोड़ता है।
(iii) पश्च मस्तिष्क (Hindbrain): इसमें अनुमस्तिष्क (Cerebellum), पॉन्स वेरोलाई (Pons Varolii) और मेडुला ओब्लोंगेटा (Medulla Oblongata) शामिल हैं।
In simple words: दिमाग के तीन बड़े हिस्से हैं: आगे वाला दिमाग, बीच वाला दिमाग और पीछे वाला दिमाग। हर हिस्से का अपना काम होता है।
🎯 Exam Tip: मस्तिष्क के तीनों प्रमुख भागों (अग्रमस्तिष्क, मध्य मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क) और उनमें शामिल मुख्य संरचनाओं को याद रखें।
Question 5. मस्तिष्क की गुहाओं में भरे तरल का नाम बताइए।
Answer: मस्तिष्क की गुहाओं में भरे तरल को सेरिब्रोस्पाइनल द्रव (Cerebrospinal Fluid) कहते हैं। यह द्रव मस्तिष्क और मेरुरज्जु को बाहरी झटकों से बचाता है और उन्हें पोषण देता है।
In simple words: दिमाग की खाली जगहों में जो पानी जैसा द्रव भरा होता है, उसे सेरिब्रोस्पाइनल द्रव कहते हैं। यह दिमाग को चोट से बचाता है।
🎯 Exam Tip: मस्तिष्क को सुरक्षा और पोषण प्रदान करने वाले सेरिब्रोस्पाइनल द्रव (CSF) के कार्य और स्थान को समझें।
Question 1. मेरुरज्जु की अनुप्रस्थ काट का और उससे सम्बन्धित सरल प्रतिवर्ती के तन्त्रिकीय परिपथ का नामांकित चित्र बनाते हुए समझाइए।
Answer: प्रतिवर्ती क्रिया एक तेज और अनैच्छिक प्रतिक्रिया है जो बाहरी उत्तेजना के जवाब में होती है। मेरुरज्जु की अनुप्रस्थ काट और प्रतिवर्ती चाप इसकी क्रियाविधि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जैसे, जब त्वचा पर पिन चुभती है, तो दर्द की संवेदनाएं त्वचा में मौजूद संवेदी अंगों द्वारा ग्रहण की जाती हैं। ये संवेदनाएं पृष्ठ संवेदी मूल (dorsal root ganglion) के माध्यम से मेरुरज्जु तक पहुंचती हैं। मेरुरज्जु में, ये आवेग एक इंटरन्यूरॉन के माध्यम से चालक न्यूरॉन (motor neuron) में स्थानांतरित हो जाते हैं। चालक न्यूरॉन तब आवेग को प्रभावी अंग (जैसे मांसपेशी) तक ले जाता है, जिससे हाथ तुरंत हट जाता है। यह शरीर को अचानक खतरे से बचाने का एक तरीका है।
प्रतिवर्ती चाप वह मार्ग है जिससे तंत्रिका आवेग प्रतिवर्ती क्रिया के दौरान गुजरता है। इसके मुख्य अंग निम्नलिखित हैं:
(a) संवेदी अंग (Sensory organs): ये वे अंग हैं जो बाहरी या आंतरिक वातावरण से उद्दीपन (stimulus) प्राप्त करते हैं, जैसे आंखें, नाक, कान, त्वचा और जीभ।
(b) संवेदी कोशिका (Sensory cell): ये कोशिकाएं मेरुरज्जु तक उद्दीपन लाती हैं।
(c) मेरुरज्जु का तंत्रिका केंद्र: यह वह जगह है जहां क्रियाएं संसाधित होती हैं।
(d) चालक तंत्रिका (Motor nerve): यह आवेगों को तंत्रिका केंद्र से प्रभावी अंगों तक ले जाती है।
(e) प्रभावी अंग (Effective organs): ये चालक तंत्रिका से आवेग प्राप्त करते हैं और प्रतिक्रिया करते हैं, जैसे मांसपेशियां या ग्रंथियां।
In simple words: प्रतिवर्ती क्रिया एक तुरंत होने वाली क्रिया है जो मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है। जब हमें कोई चोट लगती है, तो संवेदी अंग संदेश भेजते हैं, मेरुरज्जु उसे समझकर तुरंत मांसपेशियों को हटने का आदेश देती है। यह पूरा रास्ता प्रतिवर्ती चाप कहलाता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिवर्ती चाप के प्रत्येक अंग (संवेदी अंग, संवेदी तंत्रिका, तंत्रिका केंद्र, चालक तंत्रिका, प्रभावी अंग) और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से लेबल करना सीखें।
Question 3. स्तनधारियों की कपाल तन्त्रिकाओं का वर्णन कीजिए।
Answer: स्तनधारियों में, परिधीय तन्त्रिका तन्त्र (Peripheral Nervous System) में वे सभी तंत्रिकाएं शामिल हैं जो मस्तिष्क और मेरुरज्जु से निकलती हैं। मस्तिष्क से निकलने वाली तंत्रिकाएं कपाल तंत्रिकाएं (Cranial Nerves) कहलाती हैं। मनुष्य में 12 जोड़ी कपाल तंत्रिकाएं पाई जाती हैं, जो सीधे करोटि (खोपड़ी) से निकलती हैं। इन तंत्रिकाओं के प्रकार और कार्य अलग-अलग होते हैं। ये तंत्रिकाएं संवेदी (Sensory), मोटर (Motor) या प्रेरक (Motor) एवं मिश्रित (Mixed) प्रकार की होती हैं। कपाल तंत्रिकाएं गंध, दृष्टि, स्वाद, चेहरे की गति और शरीर के कुछ अंदरूनी अंगों को नियंत्रित करती हैं।
कपाल तंत्रिकाओं के नाम, कार्य और प्रवृत्ति नीचे सारणी में दर्शाई गई है:
| S. No. | कपाल तन्त्रिका (Cranial Nerve) | प्रवृत्ति (Type) | स्रोत/गंतव्य (Origin/Destination) | कार्य (Function) |
|---|---|---|---|---|
| 4. | ट्रॉक्लियर तन्त्रिका (Trochlear Nerves) | मोटर चालक (Motor driver) | नेत्र गोलक की उत्तर-तिरछी पेशियों से | नेत्र गोलक की गति |
| 5. | ट्राइजेमिनल तन्त्रिका (Trigeminal Nerves) | मिश्रित (Mixed) | मुख झिल्ली (म्यूकस) त्वचा, चेहरा तथा होठ की पेशियों से | पेशीय गति तथा त्वचीय संवेदनाएँ |
| 6. | ऐब्ड्यूसेन्स तन्त्रिका (Abducens Nerves) | चालक (Driver) | पश्च रेक्टस आँख की पेशी | नेत्र गोलक की गति |
| 7. | फेशियल तन्त्रिका (Facial Nerve) | मिश्रित (Mixed) | स्वाद ग्रन्थि, लार ग्रन्थियों, फेशियल तथा गर्दन से | गति, लार स्रावण तथा स्वाद |
| 8. | ऑडिटरी तन्त्रिका (Auditory Nerve) | संवेदी (Sensory) | अन्तःकर्ण | सुनने तथा सन्तुलन में |
| 9. | ग्लोसोफेरिजियल (Glossopharyngeal) | मिश्रित (Mixed) | ग्रसनी पेशियाँ, जीभ तथा लार ग्रन्थियाँ | स्वाद, निगलने तथा लार के स्राव में |
| 10. | वेगस तन्त्रिका (Vagus Nerve) | मिश्रित (Mixed) | हृदय, ग्रसनी, आमाशय, श्वसन नलिका, आंतमान तथा डाफर | आन्तरिकी की क्रियाओं का नियन्त्रण |
| 11. | स्पाइनल ऐसेसरी तन्त्रिका (Spinal Accessory Nerve) | चालक | गर्दन तथा कंधों की पेशियों से | पेशीयों की गति |
| 12. | हाइपोग्लोसस तन्त्रिका (Hypoglossal Nerve) | चालक | जीभ की पेशियों से | जीभ की गति में |
मेरुरज्जु से निकलने वाली तंत्रिकाएं मेरुरज्जु तंत्रिकाएं (Spinal Nerves) कहलाती हैं। मनुष्य में 31 जोड़ी मेरुरज्जु तंत्रिकाएं होती हैं। ये तंत्रिकाएं मेडुला ओब्लोंगेटा के पीछे के हिस्से से लेकर कटि भाग तक फैली रहती हैं। कटि भाग से ये तंत्रिकाएं फूलकर हाथ तथा पैरों के लिए तंत्रिकाएं निकालती हैं। मानव कशेरुक दण्ड के प्रत्येक दो कशेरुक से एक रीढ़ तंत्रिका अंतः कशेरुक अवकाशों से निकलती है। ये रीढ़ तंत्रिका पृष्ठ मूल से निकलकर आगे जाकर एक तंत्रिका गुच्छ (Ganglion) बनाती है। पृष्ठ मूल वाली तंत्रिका संवेदी प्रकार की तथा अधरमूल से निकलने वाली तंत्रिका प्रेरक प्रकार की होती है। इन दोनों गुणों के परिणामस्वरूप मेरु तंत्रिकाएं मिश्रित (Mixed) प्रकार की होती हैं।
In simple words: स्तनधारियों में कपाल तंत्रिकाएं सीधे दिमाग से निकलती हैं। ये 12 जोड़ी होती हैं और शरीर के अलग-अलग हिस्सों को नियंत्रित करती हैं, जैसे आंख, जीभ, और चेहरे की मांसपेशियां। ये संदेश लाने और ले जाने दोनों का काम करती हैं।
🎯 Exam Tip: कपाल तंत्रिकाओं की संख्या, उनके प्रकार (संवेदी, मोटर, मिश्रित) और उनके मुख्य कार्यों को याद रखें, खासकर उन तंत्रिकाओं के जो संवेदी और मोटर दोनों कार्य करती हैं।
Question 4. प्रतिवर्ती क्रियाओं का वर्णन कीजिए।
Answer: प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) शरीर में किसी बाहरी उत्तेजना के कारण होने वाली स्वचालित और तीव्र अनैच्छिक क्रिया है। यह क्रिया बिना सोचे-समझे होती है और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, विशेष रूप से मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर को खतरे से तुरंत बचाना है।
उदाहरणार्थ:
(i) जब किसी गरम तवे या नुकीली वस्तु से आपका हाथ छू जाता है, तो आप तुरंत हाथ हटा लेते हैं।
(ii) किसी स्वादिष्ट भोजन को केवल देखने या सूंघने से ही मुंह में लार आ जाती है।
प्रतिवर्ती क्रियाओं के प्रकार (Types of Reflex Actions):
प्रतिवर्ती क्रियाएं दो प्रकार की होती हैं:
1. सरल/अप्रतिबन्धित प्रतिवर्ती क्रियाएं (Simple/Unconditional Reflex actions): ये प्रतिवर्ती क्रियाएं जन्मजात या प्राकृतिक होती हैं। इनके लिए पहले से किसी जानकारी की आवश्यकता नहीं होती और इन पर मस्तिष्क का कोई सीधा नियंत्रण नहीं होता। ये क्रियाएं जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं, जैसे पलक झपकना या खाँसना।
उदाहरणार्थ:
(a) पलक तुरंत बंद कर लेना, जैसे किसी वस्तु को अचानक आंख की तरफ आते देखकर।
(b) खाँसी आना, यदि भोजन का कुछ भाग श्वास नली में चला जाए।
(c) तेज प्रकाश में नेत्र की पुतली का सिकुड़ना।
(d) सोते हुए व्यक्ति का पैर गुदगुदाने पर पैर को झटका मारना।
2. प्रानुकूली/उपार्जित प्रतिवर्ती क्रियाएं (Acquired Reflexaction): ये प्रतिवर्ती क्रियाएं अनुभव या सीखने से विकसित होती हैं। मस्तिष्क वास्तव में उस भोजन के स्वाद को याद रखता है और उसी के अनुरूप अचेतन अवस्था में कार्य करने लगता है। यह कुत्ता में प्रतिबन्धित प्रतिवर्ती क्रिया का एक उदाहरण है।
उदाहरणार्थ:
(a) अचानक किसी को अपनी कार या साइकिल आगे आते हुए देखकर ब्रेक लगा देना।
(b) किसी से बातें करते हुए भी जूते के फीते बाँध लेना।
(c) किसी कुत्ते का भाग जाना यदि उसे लगे कि आप उसे मारने वाले हैं।
(d) कक्षा में अध्यापक या अध्यापिका को प्रवेश करते हुए देखकर आपका खड़े हो जाना।
In simple words: प्रतिवर्ती क्रिया शरीर की अपने-आप होने वाली और तेज प्रतिक्रिया है, जो हमें खतरों से बचाती है। ये दो तरह की होती हैं - कुछ जन्म से होती हैं जैसे आंख झपकना, और कुछ हम सीखते हैं जैसे खतरे देखकर गाड़ी रोकना।
🎯 Exam Tip: प्रतिवर्ती क्रिया की परिभाषा, उसके प्रकार (सरल और उपार्जित) और प्रत्येक के कम से कम दो-तीन उदाहरणों को अच्छी तरह से तैयार करें।
Question 5. स्पाइनल तन्त्रिकाओं का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: स्पाइनल तंत्रिकाएं वे तंत्रिकाएं होती हैं जो मेरुरज्जु (Spinal cord) से निकलती हैं। मनुष्य में 31 जोड़ी स्पाइनल तंत्रिकाएं पाई जाती हैं। ये तंत्रिकाएं मेडुला ऑब्लोंगेटा के पीछे के हिस्से से लेकर कटि भाग तक फैली रहती हैं। कटि भाग से ये तंत्रिकाएं फूलकर हाथ तथा पैरों के लिए तंत्रिकाएं निकालती हैं। मानव कशेरुक दण्ड के प्रत्येक दो कशेरुक से एक रीढ़ तंत्रिका अंतः कशेरुक अवकाशों से निकलती है। ये रीढ़ तंत्रिका पृष्ठ मूल से निकलकर आगे जाकर एक तंत्रिका गुच्छ (Ganglion) बनाती है। पृष्ठ मूल वाली तंत्रिका संवेदी प्रकार की तथा अधरमूल से निकलने वाली तंत्रिका प्रेरक प्रकार की होती है। इन दोनों गुणों के परिणामस्वरूप मेरु तंत्रिकाएं मिश्रित (Mixed) प्रकार की होती हैं। ये तंत्रिकाएं शरीर के विभिन्न अंगों से संवेदनाएं लाती हैं और उन्हें गति प्रदान करती हैं।
स्पाइनल तंत्रिकाओं के क्षेत्र नीचे सारणी में दिए गए हैं:
| S. No. | तंत्रिका (Nerve) | जोड़ी (Pairs) | स्थान (Location) |
|---|---|---|---|
| 3. | कटि रीढ़ तन्त्रिकायें | 5 जोड़े | नीचे से दोनों तरफ, प्रत्येक कटि कशेरुक के नीचे से दोनों तरफ |
| 4. | त्रिक रीढ़ तंत्रिकायें | 5 जोड़े | त्रिक कशेरुक के पास से दोनों तरफ |
| 5. | अनुत्रिक रीढ़ तंत्रिकायें | 1 जोड़े | अनुत्रिका और सेंक्रल के बीच दोनों तरफ से |
In simple words: स्पाइनल तंत्रिकाएं मेरुरज्जु से निकलती हैं और पूरे शरीर में फैली होती हैं। ये 31 जोड़ी होती हैं और संवेदी (संदेश लाने वाली) और प्रेरक (संदेश ले जाने वाली) दोनों तरह की होती हैं, जिससे शरीर के अंगों की गति और संवेदनाएं नियंत्रित होती हैं।
🎯 Exam Tip: स्पाइनल तंत्रिकाओं की संख्या (31 जोड़ी), उनके प्रकार (संवेदी, प्रेरक, मिश्रित), और मेरुरज्जु से उनके निकलने के स्थानों को स्पष्ट रूप से समझाएं।
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