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Detailed Chapter 25 मानव का उत्सर्जन तंत्र RBSE Solutions for Class 12 Biology
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Class 12 Biology Chapter 25 मानव का उत्सर्जन तंत्र RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Biology Chapter 25 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
RBSE Class 12 Biology Chapter 25 बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. मानव में मुख्य उत्सर्जी पदार्थ होते हैं-
(अ) यूरिक अम्ल
(ब) अमोनिया
(स) यूरिया
(द) ऐमीनो अम्ल
Answer: (स) यूरिया
In simple words: इंसानों में मुख्य बेकार पदार्थ यूरिया होता है, जिसे गुर्दे खून से छानकर पेशाब के रूप में शरीर से बाहर निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि विभिन्न जीवों में मुख्य उत्सर्जी पदार्थ अलग-अलग हो सकते हैं, जैसे मछली में अमोनिया और पक्षियों में यूरिक अम्ल।
प्रश्न 2. मानव का मुख्य उत्सर्जी अंग है-
(अ) फेफड़े
(ब) वृक्क
(स) त्वचा
(द) यकृत
Answer: (ब) वृक्क
In simple words: इंसान के शरीर से बेकार चीजें निकालने का मुख्य काम गुर्दे (वृक्क) करते हैं, जो पेशाब बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: गुर्दे न केवल अपशिष्ट निकालते हैं, बल्कि रक्तचाप और शरीर में पानी के संतुलन को भी बनाए रखते हैं।
प्रश्न 3. हेनले के लूप में होता है-
(अ) मूत्र
(ब) यूरिया
(स) रुधिर
(द) ग्लोमेरुलर निस्पंद
Answer: (द) ग्लोमेरुलर निस्पंद
In simple words: हेनले के लूप में ग्लोमेरुलर निस्पंद होता है, जो खून के छनने के बाद बनता है और अभी तक पूरी तरह से पेशाब नहीं बना है।
🎯 Exam Tip: ग्लोमेरुलर निस्पंद में पानी और छोटे अणु होते हैं, लेकिन प्रोटीन और रक्त कोशिकाएं नहीं होतीं।
प्रश्न 4. बरटिनी के वृक्क स्तम्भ का सम्बन्ध होता है-
(अ) वृक्क से
(ब) मूत्राशय से
(स) यकृत से
(द) वृषण से
Answer: (अ) वृक्क से
In simple words: बरटिनी के वृक्क स्तम्भ गुर्दे (वृक्क) के अंदरूनी हिस्से होते हैं, जो गुर्दे की बाहरी परत (कॉर्टेक्स) के विस्तार होते हैं।
🎯 Exam Tip: ये स्तम्भ गुर्दे की पिरामिडों के बीच स्थित होते हैं और गुर्दे की संरचनात्मक स्थिरता में मदद करते हैं।
प्रश्न 5. मानव के वृक्क होते हैं-
(अ) प्रोवेक्रिक।
(ब) मेटानेफ्रिक
(ब) मीसोनेफ्रिक
(द) सभी प्रकार के
Answer: (ब) मेटानेफ्रिक
In simple words: इंसानों के गुर्दे मेटानेफ्रिक प्रकार के होते हैं, जिसका मतलब है कि ये सबसे विकसित गुर्दे हैं जो स्तनधारियों और पक्षियों में पाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्राणियों में गुर्दे के विकास के अलग-अलग चरण होते हैं, जैसे प्रोनेफ्रिक (सबसे आदिम), मीसोनेफ्रिक और मेटानेफ्रिक (सबसे विकसित)।
प्रश्न 6. परानिस्पंदन कहाँ होता है-
(अ) केशिका गुच्छ
(ब) बोमेन सम्पुट
(स) दोनों (अ) व (ब)
(द) वृक्क नलिका
Answer: (स) दोनों (अ) व (ब)
In simple words: परानिस्पंदन की प्रक्रिया केशिका गुच्छ (जहां रक्त छनता है) और बोमन सम्पुट (जो छने हुए द्रव को इकट्ठा करता है) दोनों में होती है।
🎯 Exam Tip: बोमन सम्पुट और केशिका गुच्छ मिलकर मैल्पीघीकाय बनाते हैं, जो गुर्दे की नलिका का प्रारंभिक हिस्सा है।
प्रश्न 7. ग्लोमेरुलर निस्पंद होता है-
(अ) जल, अमोनिया तथा रुधिराणु का मिश्रण
(ब) रुधिराणु एवं प्लाज्मा प्रोटीन रहित रुधिर
(स) रुधिराणु रहित रुधिर
(द) मूत्र
Answer: (ब) रुधिराणु एवं प्लाज्मा प्रोटीन रहित रुधिर
In simple words: ग्लोमेरुलर निस्पंद वह खून होता है जिससे रक्त कोशिकाएं और बड़े प्लाज्मा प्रोटीन हटा दिए गए हों।
🎯 Exam Tip: ग्लोमेरुलर निस्पंद खून के प्लाज्मा के समान होता है, बस इसमें बड़े प्रोटीन अणु और रक्त कोशिकाएं मौजूद नहीं होतीं।
प्रश्न 8. ग्लोमेरुलस में रुधिर लाने वाली वाहिनी कहलाती है-
(अ) अपवाही धमनिका
(ब) वृक्कीय धमनी
(स) अभिवाही धमनिका
(द) वृक्कीय शिरा
Answer: (स) अभिवाही धमनिका
In simple words: ग्लोमेरुलस में खून लाने वाली नली को अभिवाही धमनिका कहते हैं, जो खून को फिल्टर होने के लिए लाती है।
🎯 Exam Tip: अभिवाही धमनिका का व्यास अपवाही धमनिका से अधिक होता है, जिससे ग्लोमेरुलस में रक्तचाप उच्च बना रहता है, जो निस्यंदन के लिए आवश्यक है।
RBSE Class 12 Biology Chapter 25 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. उत्सर्जन किसे कहते हैं ?
Answer: शरीर में जब प्रोटीन टूटते हैं (इस प्रक्रिया को कैटाबॉलिज्म कहते हैं), तो अमोनिया, यूरिया और यूरिक अम्ल जैसे हानिकारक बेकार पदार्थ बनते हैं। इन बेकार पदार्थों को उत्सर्जी अंगों द्वारा शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं। यह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है।
In simple words: बेकार पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने को उत्सर्जन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: उत्सर्जन की परिभाषा में हानिकारक पदार्थों के नाम और अंगों का उल्लेख करने से उत्तर अधिक सटीक बनता है।
प्रश्न 2. अमोनिया उत्सर्जी प्राणियों को क्या कहते हैं ?
Answer: जो प्राणी अमोनिया को अपने शरीर से बाहर निकालते हैं, उन्हें अमोनोटेलिक कहते हैं। ऐसे जीव आमतौर पर पानी में रहते हैं, जहाँ अमोनिया को आसानी से पानी में घोला जा सकता है।
In simple words: अमोनिया निकालने वाले जीवों को अमोनोटेलिक कहते हैं।
🎯 Exam Tip: अमोनोटेलिक जीवों के उदाहरणों पर ध्यान दें, जैसे मछलियाँ और जलीय उभयचर।
प्रश्न 3. यूरिक अम्ल का उत्सर्जन करने वाले प्राणियों को क्या कहते हैं ?
Answer: जो प्राणी यूरिक अम्ल का उत्सर्जन करते हैं, उन्हें यूरिकोटेलिक कहते हैं। ये जीव आमतौर पर पानी बचाने के लिए यूरिक अम्ल को पेस्ट या ठोस रूप में निकालते हैं।
In simple words: जो जीव यूरिक अम्ल निकालते हैं, उन्हें यूरिकोटेलिक कहते हैं।
🎯 Exam Tip: यूरिकोटेलिक जीवों के उदाहरणों में पक्षी, सरीसृप और कीट शामिल हैं, जो कम पानी वाले वातावरण में रहते हैं।
प्रश्न 5. मानव के वृक्क में उत्सर्जन की इकाई का नाम लिखिए।
Answer: मानव गुर्दे (वृक्क) की सबसे छोटी इकाई जो उत्सर्जन का काम करती है, उसे नेफ्रॉन कहते हैं। यही गुर्दे की मुख्य कार्यात्मक इकाई है। हर गुर्दे में लाखों नेफ्रॉन होते हैं, जो खून को साफ करने का काम करते हैं।
In simple words: मानव गुर्दे की उत्सर्जन इकाई का नाम नेफ्रॉन है।
🎯 Exam Tip: नेफ्रॉन का नाम और इसका कार्य याद रखना उत्सर्जन तंत्र के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 6. वृक्क के केशिका गुच्छ से निकलने वाली रुधिर वाहिनी का नाम लिखिए।
Answer: गुर्दे के केशिकागुच्छ से खून को वापस ले जाने वाली रक्तवाहिनी को अपवाही धमनिका (Efferent arteriole) कहा जाता है। यह धमनी रक्त को ग्लोमेरुलस से दूर ले जाती है, जो फिल्टर होने के बाद रक्त को वापस परिसंचरण में लाने में मदद करती है।
In simple words: केशिकागुच्छ से निकलने वाली खून की नली को अपवाही धमनिका कहते हैं।
🎯 Exam Tip: अभिवाही और अपवाही धमनिकाओं के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये गुर्दे में रक्त प्रवाह और निस्पंदन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 7. मूत्र त्याग के समय दर्द की अवस्था को क्या कहते हैं ?
Answer: जब कोई व्यक्ति पेशाब करते समय दर्द महसूस करता है, तो इस स्थिति को डिसयूरिया (Dysuria) कहते हैं। यह अक्सर मूत्र मार्ग में संक्रमण या किसी अन्य जलन का संकेत हो सकता है।
In simple words: पेशाब करते समय दर्द होने को डिसयूरिया कहते हैं।
🎯 Exam Tip: मेडिकल शब्दों को याद रखना जीव विज्ञान के लिए आवश्यक है; डिसयूरिया एक सामान्य चिकित्सीय शब्द है।
प्रश्न 8. केशिकागुच्छ कहाँ पाया जाता है ? इसका प्रमुख कार्य क्या है ?
Answer: केशिकागुच्छ (Glomerulus) बोमन सम्पुट नामक कप जैसी संरचना के अंदर पाया जाता है। इसका मुख्य काम रक्त को छानने (निस्यंदन) में मदद करना है, ताकि बेकार पदार्थ अलग हो सकें। यह पहला कदम है जिसमें गुर्दे मूत्र बनाते हैं और शरीर से अपशिष्ट हटाते हैं।
In simple words: केशिकागुच्छ बोमन सम्पुट के अंदर होता है, और इसका काम खून को छानना है।
🎯 Exam Tip: केशिकागुच्छ का स्थान और कार्य दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह मूत्र निर्माण की पहली और सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
प्रश्न 9. मैल्पीघीकाय किसे कहते हैं ?
Answer: हर गुर्दे की नलिका (नेफ्रॉन) का जो शुरुआती हिस्सा होता है, उसे मैल्पीघीकाय (Malpighian body) कहते हैं। इसमें बोमन सम्पुट और केशिकागुच्छ दोनों शामिल होते हैं, जहाँ रक्त की पहली छनाई होती है।
In simple words: गुर्दे की नली के पहले भाग को मैल्पीघीकाय कहते हैं।
🎯 Exam Tip: मैल्पीघीकाय को रीनल कॉर्पसल भी कहते हैं, यह नाम भी याद रखना चाहिए।
प्रश्न 10. हेनले लूप कहाँ पाया जाता है ?
Answer: हेनले का लूप वृक्क नलिका (नेफ्रॉन) का एक हिस्सा होता है जो मध्यांश (Medulla) में गहराई तक फैला होता है। यह लूप पानी और नमक को वापस सोखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे मूत्र सांद्रित होता है।
In simple words: हेनले का लूप गुर्दे के अंदरूनी हिस्से, मध्यांश में पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: हेनले के लूप की आरोही और अवरोही भुजाओं के कार्यों को याद रखना जल संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 12. शरीर में वृक्कों का मुख्य कार्य बताइए।
Answer: शरीर में गुर्दे (वृक्क) का मुख्य काम मूत्र बनाना है। इस प्रक्रिया से शरीर के बेकार पदार्थों को बाहर निकाला जाता है। मूत्र निर्माण के अलावा, गुर्दे रक्तचाप और लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं।
In simple words: गुर्दे का मुख्य काम पेशाब बनाना है।
🎯 Exam Tip: गुर्दे केवल उत्सर्जन ही नहीं करते, बल्कि होमियोस्टेसिस (आंतरिक संतुलन) बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 13. रक्त अपोहन क्या है ?
Answer: जब गुर्दे ठीक से काम नहीं कर पाते, तो यूरिया और दूसरे बेकार पदार्थों को खून से बाहर निकालने के लिए एक मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। इस कृत्रिम तरीके को रक्त अपोहन या हीमोडायलिसिस (Haemodialysis) कहते हैं। यह प्रक्रिया उन रोगियों के लिए जीवन-रक्षक होती है जिनके गुर्दे खराब हो चुके होते हैं।
In simple words: खून से बेकार पदार्थों को मशीन से निकालने की प्रक्रिया को रक्त अपोहन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: रक्त अपोहन गुर्दे के फेल होने की स्थिति में एक कृत्रिम समाधान है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटाता है।
प्रश्न 14. रक्त में यूरिया की उपस्थिति को क्या कहते हैं ?
Answer: जब खून में यूरिया की मात्रा सामान्य से ज़्यादा हो जाती है, तो इस स्थिति को यूरेमिया (Uremia) कहा जाता है। यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है, और गुर्दे की बीमारी का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
In simple words: खून में यूरिया ज़्यादा होने को यूरेमिया कहते हैं।
🎯 Exam Tip: यूरेमिया के लक्षणों में थकान, मतली और भ्रम शामिल हो सकते हैं, जो गंभीर गुर्दे की विफलता का संकेत देते हैं।
प्रश्न 15. ग्लाइकोसूरिया किसे कहते हैं ?
Answer: मूत्र में चीनी (शर्करा) का पाया जाना और शरीर से उसका बाहर निकलना ग्लाइकोसूरिया (Glycosuria) कहलाता है। यह अक्सर इंसुलिन हार्मोन की कमी के कारण होता है। यह मधुमेह (डायबिटीज) का एक सामान्य लक्षण है, क्योंकि शरीर रक्त शर्करा को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पाता।
In simple words: पेशाब में चीनी आने को ग्लाइकोसूरिया कहते हैं, जो इंसुलिन की कमी से होता है।
🎯 Exam Tip: ग्लाइकोसूरिया का पता मूत्र परीक्षण से चलता है और यह अक्सर मधुमेह के निदान में पहला संकेत होता है।
RBSE Class 12 Biology Chapter 25 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. मानव के वृक्क के अलावा अन्य उत्सर्जी अंग कौन-कौन से हैं? वर्णन कीजिए।
Answer: मनुष्य के अन्य उत्सर्जी अंगों का विवरण निम्नलिखित है-
(iii) यकृत (Liver): यकृत की कोशिकाएं शरीर में अतिरिक्त अमीनो अम्लों के नाइट्रोजन वाले हिस्से को अमोनिया में बदलती हैं, और फिर इस अमोनिया को कम हानिकारक यूरिया में बदल देती हैं, जिसे पेशाब के रूप में शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। यकृत पित्त वर्णक (bile pigments) भी बनाता है। यकृत शरीर के अंदर सफाई का एक बड़ा केंद्र है, जो कई तरह के जहरीले पदार्थों को बेअसर करता है।
In simple words: यकृत बेकार अमोनिया को यूरिया में बदलता है और शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: मुख्य उत्सर्जी अंग वृक्क (गुर्दे) हैं, लेकिन यकृत, त्वचा, और फेफड़े भी कुछ अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं।
प्रश्न 2. गॉउट रोग क्या है ?
Answer: गॉउट रोग (Gout) एक आनुवंशिक (वंशानुगत) बीमारी है। इस रोग में खून में यूरिक अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है। यह बढ़ा हुआ यूरिक अम्ल जोड़ों और गुर्दे के ऊतकों में जमा हो जाता है, जिससे दर्द और सूजन होती है। निर्जलीकरण (पानी की कमी), उपवास और कुछ दवाएं (डाईयूरेटिक) इस रोग को बढ़ा सकती हैं।
In simple words: गॉउट एक वंशानुगत रोग है जिसमें खून में यूरिक अम्ल बढ़ जाता है और जोड़ों में दर्द होता है।
🎯 Exam Tip: गॉउट के इलाज में अक्सर यूरिक अम्ल को कम करने वाली दवाएं और आहार परिवर्तन शामिल होते हैं।
प्रश्न 3. ब्राइट का रोग को समझाइए।
Answer: ब्राइट का रोग (Bright's Disease) केशिकागुच्छ (ग्लोमेरुलस) में स्ट्रेप्टोकोकाई जीवाणु के संक्रमण से होता है। इसके कारण ग्लोमेरुलस में सूजन आ जाती है और इसकी झिल्लियाँ ज़्यादा पारगम्य हो जाती हैं, जिससे लाल रक्त कोशिकाएँ और प्रोटीन भी छनकर पेशाब में आने लगते हैं। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो ऊतकों में तरल जमा होने से पैर सूज जाते हैं। इस स्थिति को एडीमा या ड्रॉप्सी (Edema or Dropsy) कहते हैं।
In simple words: ब्राइट का रोग गुर्दे का एक संक्रमण है जिससे सूजन आती है और शरीर में तरल जमा हो जाता है।
🎯 Exam Tip: ब्राइट का रोग को नेफ्रिटिस भी कहते हैं और यह गंभीर गुर्दे की क्षति का कारण बन सकता है।
प्रश्न 4. परानिस्पंदन तथा चयनात्मक पुनः अवशोषण की मूत्र निर्माण में क्या भूमिका है ?
Answer:
**परानिस्पंदन की मूत्र निर्माण में भूमिका:** परानिस्पंदन की मूत्र निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। केशिकागुच्छ में जितना रक्त प्रवेश करता है, उतना बाहर नहीं निकल पाता जिसके कारण रक्तचाप बढ़ जाता है। ज़्यादा दबाव के कारण प्रोटीन और रक्त कोशिकाओं को छोड़कर रक्त का अधिकांश हिस्सा केशिकागुच्छ की पतली दीवारों से छनकर बोमन सम्पुट के अंदर आ जाता है। इस छने हुए द्रव में यूरिया, यूरिक अम्ल, ग्लूकोज, जल और कई लवण जैसे पदार्थ होते हैं। इस छने हुए तरल को ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेट या नेफ्रिक निस्पंद कहते हैं और इस प्रकार छनने की प्रक्रिया को परानिस्पंदन (Ultrafiltration) कहते हैं।
**चयनात्मक पुनः अवशोषण की मूत्र निर्माण में भूमिका:** केशिका गुच्छ में छना हुआ द्रव धीरे-धीरे वृक्क नलिका के समीपस्थ भाग, हेनले लूप और दूरस्थ कुण्डलित नलिका में पहुँचता है। यहाँ तक पहुँचते-पहुँचते कई रासायनिक परिवर्तनों के परिणामस्वरूप मूत्र का निर्माण होता है। इस प्रकार मूत्र निर्माण में चयनात्मक पुनः अवशोषण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करता है कि शरीर के लिए आवश्यक पदार्थ वापस खून में चले जाएं और केवल बेकार पदार्थ ही मूत्र में रहें।
In simple words: परानिस्पंदन खून को छानने का पहला कदम है, जबकि चयनात्मक पुनः अवशोषण यह सुनिश्चित करता है कि शरीर के लिए जरूरी चीजें वापस सोख ली जाएं।
🎯 Exam Tip: परानिस्पंदन और चयनात्मक पुनः अवशोषण दोनों ही मूत्र निर्माण की दो प्रमुख प्रक्रियाएं हैं; इनके बीच का अंतर और महत्व समझना बहुत जरूरी है।
प्रश्न 1. मानव के उत्सर्जन तन्त्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer:
**मानव का उत्सर्जन तन्त्र (Human Excretory System):**
मानव उत्सर्जन तंत्र में मुख्य रूप से गुर्दे (वृक्क) होते हैं। इनके अलावा, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग जैसे अंग भी उत्सर्जन की प्रक्रिया को पूरा करते हैं। यह तंत्र शरीर से अतिरिक्त पानी, नमक और अन्य बेकार रासायनिक पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है।
**वृक्क (Kidney):**
मनुष्य के शरीर में दो गुर्दे होते हैं, जो पेट के पिछले हिस्से में रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ स्थित होते हैं। दाहिना गुर्दा बाईं तरफ वाले गुर्दे से थोड़ा नीचे होता है। दोनों गुर्दे एक पतली पेरिटोनियम झिल्ली से पेट की दीवार से जुड़े होते हैं। मानव गुर्दे मेटानेफ्रिक प्रकार के होते हैं। मनुष्य के गुर्दे गहरे लाल रंग के होते हैं और सेम के बीज जैसे दिखते हैं। हर गुर्दा लगभग 10-11 सेमी लंबा, 5-6 सेमी चौड़ा और 2.5-3 सेमी मोटा होता है, जिसका वजन लगभग 120-170 ग्राम होता है। गुर्दे की बाहरी सतह उत्तल (उभरी हुई) और भीतरी सतह अवतल (दबी हुई) होती है। अवतल हिस्से पर एक गड्ढा होता है जिसे वृक्क नाभि या हाइलम कहते हैं। इस हाइलम से वृक्क धमनी और तंत्रिका गुर्दे में प्रवेश करती हैं, जबकि वृक्क शिरा, लसीका वाहिनी और मूत्रवाहिनी गुर्दे से बाहर निकलती हैं। गुर्दे के ऊपरी हिस्से पर अधिवृक्क ग्रंथि होती है, जो टोपी के आकार में इसे ढके रहती है।
**मूत्राशय (Urinary Bladder):**
मूत्राशय एक थैले जैसी मांसपेशियों की संरचना है, जहाँ पेशाब कुछ समय के लिए इकट्ठा होता है। मूत्राशय की दीवार में तीन परतें होती हैं: सबसे बाहरी परत पेरिटोनियम का सीरोसा स्तर है, बीच की परत अरेखित पेशी की होती है, और अंदर की परत श्लेष्मिक स्तर की होती है। मूत्राशय का आकार शंकु जैसा होता है, जिसका ऊपरी हिस्सा चौड़ा और निचला हिस्सा पतला होता है। पतला हिस्सा मूत्रजनन मार्ग (Urethra) में एक छेद के माध्यम से खुलता है, जहाँ एक अरेखित पेशी की अवरोधनी (Sphincter) होती है। पुरुषों में मूत्राशय मलाशय के आगे और महिलाओं में योनि के ऊपर स्थित होता है। मूत्राशय में लगभग 700-800 मिलीलीटर पेशाब जमा हो सकता है।
**मूत्रमार्ग (Urethra):**
मूत्राशय की गर्दन से निकलने वाली पतली नली को मूत्रमार्ग (Urethra) कहते हैं। मूत्रमार्ग के जरिए ही पेशाब शरीर से बाहर निकलता है। जब मूत्रमार्ग पर मौजूद अवरोधनी मांसपेशी ढीली होती है, तो पेशाब आसानी से बाहर निकल जाता है। पुरुषों में मूत्रमार्ग लगभग 15 सेमी लंबा होता है और शिश्न से होकर गुजरता है। महिलाओं में यह लगभग 4 सेमी लंबा होता है। इसकी लंबाई में अंतर के कारण महिलाओं में मूत्रमार्ग संक्रमण का जोखिम अधिक होता है।
(c) शिश्नी भाग (Penile Part): शिश्नी भाग लगभग 15 सेमी लंबा मार्ग है। यह शिश्न (Penis) के कार्पस स्पंजियोसम से निकलकर शिश्न मुण्ड के ऊपरी सिरे पर बाहरी मूत्र छिद्र के रूप में खुलता है। यह पुरुषों में मूत्र और शुक्राणु दोनों के निकलने का मार्ग होता है।
In simple words: इंसान के उत्सर्जन तंत्र में गुर्दे, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग होते हैं जो खून को साफ करके पेशाब के रूप में बेकार पदार्थों को शरीर से बाहर निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में प्रत्येक अंग के कार्य और उसकी शारीरिक स्थिति का सही वर्णन करना, साथ ही उसकी इकाइयों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 2. मानव वृक्क नलिका की कार्यात्मक आन्तरिकी का वर्णन कीजिए।
Answer:
**वृक्क नलिकाएँ या नेफ्रॉन की संरचना (Structure of Uriniferous Tubule or Nephron):**
वृक्क नलिकाएँ, जिन्हें नेफ्रॉन भी कहते हैं, गुर्दे की बनावट और कार्य की मूल इकाइयाँ हैं। मनुष्य के हर गुर्दे में लगभग 10-12 लाख बहुत बारीक, लंबी और मुड़ी हुई नलिकाएँ होती हैं। इन्हीं नेफ्रॉन में पेशाब बनता है, और इसमें नाइट्रोजन वाले बेकार पदार्थ घुले रहते हैं। मानव नेफ्रॉन को मुख्य रूप से निम्नलिखित हिस्सों में बांटा जा सकता है:
मैल्पीघीकाय (Malpighian body)
ग्रीवा (Neck)
समीपस्थ कुण्डलित नलिका (Proximal convoluted tubule)
हेनले का लूप (Henle's Loop)
दूरस्थ कुण्डलित नलिका (Distal convoluted tubule)
संग्रह नलिकाएँ (Collecting tubules)
**मैल्पीघी काय (Malpighian Body):**
हर वृक्क नलिका का शुरुआती हिस्सा मैल्पीघीकाय कहलाता है। यह दो मुख्य भागों में बंटा होता है:
(a) बोमन सम्पुट (Bowman's Capsule): इसकी संरचना एक प्याले जैसी होती है और इसके अंदर केशिकागुच्छ (Glomerulus) धंसा रहता है। इसकी दीवार पतली और दोहरी परत वाली होती है। बोमन सम्पुट की परतें शल्की उपकला से बनी होती हैं। इसकी अंदरूनी सतह पर पोडोसाइट्स नामक विशेष कोशिकाएं होती हैं। पोडोसाइट्स के फैलाव और रक्त केशिकाओं की दीवारें मिलकर एक महीन ग्लोमेरुलस कला बनाती हैं। इस कला या झिल्ली में कई छोटे-छोटे छेद होते हैं।
(b) केशिका गुच्छ (Glomerulus): केशिकागुच्छ बोमन सम्पुट के अंदर पाया जाता है। गुर्दे की धमनी से आने वाली अभिवाही धमनिका (Afferent arteriole) केशिकागुच्छ में रक्त लाती है, जबकि अपवाही धमनिका (Efferent arteriole) रक्त को केशिकागुच्छ से बाहर ले जाती है। अभिवाही धमनिका लगभग 50 शाखाओं में बंटकर केशिकागुच्छ बनाती है। अभिवाही धमनिका का व्यास अपवाही धमनिका से ज़्यादा होता है। कोशिकाओं की दीवारें एंडोथेलियम से बनी होती हैं। इन दीवारों में 500 से 1000 एंगस्ट्रॉम व्यास के छिद्र होते हैं। बोमन सम्पुट की एपिथीलियम और रक्त कोशिकाओं की एंडोथेलियम मिलकर रक्त को छानने का काम करती हैं।
**संग्रह नलिकाएँ (Collecting Tubules):**
वृक्क नलिका की दूरस्थ कुण्डलित नलिकाएँ संग्रह नलिका में खुलती हैं। कई वृक्क नलिकाएँ एक संग्रह नलिका में खुलती हैं। कई संग्रह नलिकाएँ मिलकर एक बड़ी मुख्य संग्रह नलिका बनाती हैं, जिसे बेलिनी की वाहिनी कहते हैं। ये नलिकाएँ वृक्क श्रोणि (Pelvis) में खुलती हैं। पेल्विस मूत्रवाहिनी का चौड़ा, कीप के आकार का हिस्सा होता है। ये नलिकाएँ वृक्क के पिरामिड में स्थित होती हैं और एक परतदार ग्रंथि वाली उपकला से ढकी रहती हैं। संग्रह नलिकाएँ पानी को वापस सोखने में भी मदद करती हैं, जिससे शरीर में पानी का संतुलन बना रहता है।
In simple words: नेफ्रॉन गुर्दे की छोटी नलिकाएं हैं जहाँ पेशाब बनता है, और इसमें मैल्पीघीकाय (जो खून छानता है) और संग्रह नलिकाएं (जो पेशाब इकट्ठा करती हैं) जैसे कई भाग होते हैं।
🎯 Exam Tip: नेफ्रॉन के विभिन्न भागों के नाम और उनके विशिष्ट कार्यों को याद रखना इस प्रश्न के लिए आवश्यक है, क्योंकि प्रत्येक भाग मूत्र निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 3. मानव के अन्य उत्सर्जी अंगों का वर्णन करो।
Answer: यह प्रश्न "प्रश्न 1. मानव के वृक्क के अलावा अन्य उत्सर्जी अंग कौन-कौन से हैं? वर्णन कीजिए।" (पेज 5 पर) जैसा ही है। कृपया उसी उत्तर को देखें। कई बार परीक्षाओं में एक ही विषय पर अलग-अलग तरीकों से प्रश्न पूछे जाते हैं।
In simple words: यह प्रश्न पहले दिए गए प्रश्न जैसा ही है, उसका उत्तर देखें।
🎯 Exam Tip: यदि समान प्रश्न अलग-अलग खंडों में आते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप सबसे पूर्ण उत्तर जानते हैं और दोहराव से बचें।
प्रश्न 4. उत्सर्जन सम्बन्धी विभिन्न रोगों का वर्णन कीजिए।
Answer: मानव में उत्सर्जन से संबंधित कुछ बीमारियाँ इस प्रकार हैं:
**यूरेमिया (Uremia):** यह बीमारी तब होती है जब खून में यूरिया की मात्रा 10-30 mg/100 ml से ज़्यादा हो जाती है। खून में बहुत ज़्यादा यूरिया जमा होने से व्यक्ति की जान भी जा सकती है। यह गुर्दे की बीमारी का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
**गॉउट (Gout):** गॉउट एक आनुवंशिक (वंशानुगत) बीमारी है। इसमें खून में यूरिक अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है। यूरिक अम्ल जोड़ों और गुर्दे के ऊतकों में जमा हो जाता है, जिससे दर्द और सूजन होती है। निर्जलीकरण (पानी की कमी), उपवास और कुछ दवाएं (डाईयूरेटिक) इस रोग को बढ़ा सकती हैं।
**वृक्क पथरी (Kidney stones):** इस स्थिति में गुर्दे की श्रोणि (Renal Pelvis) में यूरिक अम्ल, कैल्शियम ऑक्सालेट और फॉस्फेट जैसे लवण पत्थरों के रूप में जमा हो जाते हैं। इसके कारण पेशाब करने में रुकावट आती है और बहुत दर्द होता है।
**ब्राइट का रोग या नेफ्रिटिस (Bright's Disease or Nephritis):** यह बीमारी केशिकागुच्छ (ग्लोमेरुलस) में स्ट्रेप्टोकोकाई जीवाणु के संक्रमण से होती है। इससे केशिकागुच्छ में सूजन आ जाती है। इसकी झिल्लियाँ ज़्यादा पारगम्य हो जाती हैं, जिससे लाल रक्त कोशिकाएँ और प्रोटीन भी छनकर पेशाब में आने लगते हैं। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो ऊतकों में तरल जमा होने से पैर सूज जाते हैं। इस स्थिति को एडीमा या ड्रॉप्सी कहते हैं।
**ग्लाइकोसूरिया (Glycosuria):** मूत्र में चीनी (शर्करा) की उपस्थिति और इसका उत्सर्जन ग्लाइकोसूरिया कहलाता है। यह इंसुलिन हार्मोन की कमी के कारण होता है। इस स्थिति को डायबिटीज मेलिटस भी कहते हैं।
**डिसयूरिया (Disurea):** पेशाब करते समय दर्द होने की स्थिति को डिसयूरिया कहा जाता है।
**पोलीयूरिया (Polyurea):** इस बीमारी को बहुमूत्रता भी कहते हैं। यह तब होता है जब नेफ्रॉन द्वारा पानी का पुनः अवशोषण नहीं हो पाता, जिससे पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है।
**सिस्टिटिस (Cystitis):** यह बीमारी जीवाणु संक्रमण, रासायनिक या यांत्रिक क्षति के कारण मूत्राशय में सूजन आने से होती है।
**एल्ब्यूमिनयूरिया (Albuminurea):** इस बीमारी में मूत्र में एल्ब्यूमिन प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है।
**कीटोन्यूरिया (Ketonuria):** मूत्र में एसीटोएसेटिक अम्ल जैसे कीटोन निकायों की मात्रा का बढ़ना कीटोन्यूरिया कहलाता है।
**हीमेटोयूरिया (Haematourea):** मूत्र के साथ लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) का शरीर से बाहर निकलना हीमेटोयूरिया कहलाता है।
**हीमोग्लोबिन यूरिया (Haemoglobin urea):** मूत्र में हीमोग्लोबिन का मौजूद होना हीमोग्लोबिन यूरिया कहलाता है।
**पाइयूरिया (Pyurea):** मूत्र में मवाद कोशिकाओं (Pus cell) की उपस्थिति पाइयूरिया कहलाती है।
**पीलिया (Jaundice):** मूत्र में बहुत ज़्यादा पित्त वर्णक का पाया जाना पीलिया कहलाता है। यह अक्सर हेपेटाइटिस या पित्त नलिका में रुकावट के कारण दिखता है।
**एल्कैप्टोन्यूरिया (Alcaptonurea):** मूत्र में एल्कैप्टोन या होमोजेन्टीसिक अम्ल की उपस्थिति एल्कैप्टोन्यूरिया कहलाती है। जब एल्कैप्टोन हवा के संपर्क में आता है, तो मूत्र काले रंग का दिखाई देता है। इसे कृष्ण मूत्र रोग (Black urine disease) भी कहते हैं। इन रोगों के शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर इलाज कराना गुर्दे के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।
In simple words: उत्सर्जन संबंधी रोगों में यूरेमिया (खून में यूरिया), गॉउट (यूरिक अम्ल जोड़ों में), गुर्दे की पथरी, ब्राइट रोग (गुर्दे में सूजन), ग्लाइकोसूरिया (पेशाब में चीनी), डिसयूरिया (दर्द भरा पेशाब), पोलीयूरिया (ज़्यादा पेशाब), सिस्टिटिस (मूत्राशय में सूजन), एल्ब्यूमिनयूरिया (पेशाब में प्रोटीन), कीटोन्यूरिया (पेशाब में कीटोन), हीमेटोयूरिया (पेशाब में खून), पीलिया (पेशाब में पित्त वर्णक), और एल्कैप्टोन्यूरिया (पेशाब का काला होना) शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न उत्सर्जन संबंधी रोगों के नामों, उनके कारणों और मुख्य लक्षणों को याद रखना चाहिए।
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