RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र

NCERT Solutions for Class 12 Biology: Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र

Review structured textbook solutions for Class 12 Biology Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र. Built according to RBSE guidelines for the 2026-27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.

Practice Class 12 Biology Solutions: Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र

Navigate directly to the solved Biology textbook exercises using the digital viewer below. Each solution includes detailed step-by-step explanations, allowing students to instantly cross-check their work and identify areas requiring further revision.

RBSE Class 12 Biology Chapter 23 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. श्वसन में प्रयुक्त ऊर्जा है –
(अ) भौतिक ऊर्जा
(ब) रासायनिक ऊर्जा
(स) गतिज ऊर्जा
(द) विद्युत ऊर्जा
Answer: (ब) रासायनिक ऊर्जा
In simple words: सांस लेने की प्रक्रिया में जो ऊर्जा इस्तेमाल होती है, वह रासायनिक ऊर्जा होती है. हमारा शरीर भोजन से इस ऊर्जा को बनाता है.

🎯 Exam Tip: श्वसन एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें ग्लूकोज को तोड़कर ऊर्जा बनाई जाती है, इसलिए प्रयुक्त ऊर्जा रासायनिक होती है.

 

Question 2. वायु ग्रहण करते समय तनुपट होता है –
(अ) तिरछा
Answer: (अ) तिरछा
In simple words: जब हम सांस अंदर लेते हैं, तो हमारा डायाफ्राम (तनुपट) थोड़ा तिरछा या चपटा हो जाता है ताकि फेफड़ों में हवा भरने के लिए जगह बन सके.

🎯 Exam Tip: सांस अंदर लेते समय डायाफ्राम संकुचित होकर चपटा होता है, जिससे छाती की गुहा का आयतन बढ़ता है.

 

Question 3. निश्वसन में होता है –
(अ) तनुपट एवं बाह्य अंतरा पर्युक पेशियाँ संकुचित
(ब) तनुपट एवं बाह्य अंतरा पशुक पेशियाँ शिथिलित
(स) केवल तनुपट संकुचित
(द) केवल बाह्य अंतरा पशुक पेशियाँ शिथिलित
Answer: (अ) तनुपट एवं बाह्य अंतरा पर्युक पेशियाँ संकुचित
In simple words: सांस अंदर लेते समय, डायाफ्राम और छाती की बाहरी मांसपेशियां सिकुड़ती हैं. इससे फेफड़ों में हवा भरने के लिए जगह बनती है.

🎯 Exam Tip: निःश्वसन (सांस लेना) एक सक्रिय प्रक्रिया है, जिसमें मांसपेशियां संकुचित होती हैं.

 

Question 4. उच्छवसन में होता है –
(द) तनुपट बाह्य अंतरा पर्युक पेशियाँ संकुचित
(अ) तनुपट एवं बाह्य अंतरा पशुक पेशियाँ संकुचित
(ब) तनुपट एवं बाह्य अंतरा पशुक पेशियाँ शिथिलित
(स) केवल तनुपट शिथिलित
Answer: (ब) तनुपट एवं बाह्य अंतरा पशुक पेशियाँ शिथिलित
In simple words: सांस बाहर छोड़ते समय, डायाफ्राम और छाती की बाहरी मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं. इससे फेफड़ों से हवा बाहर निकल जाती है.

🎯 Exam Tip: उच्छवसन (सांस छोड़ना) सामान्यतः एक निष्क्रिय प्रक्रिया है, जिसमें मांसपेशियां शिथिल होती हैं.

 

Question 5. विश्राम अवस्था में वयस्क की श्वसन दर होती है –
(अ) 20-22 प्रति मिनट
(ब) 18-20 प्रति मिनट
(स) 16-20 प्रति मिनट
(द) 14-16 प्रति मिनट
Answer: (स) 16-20 प्रति मिनट
In simple words: जब कोई वयस्क व्यक्ति आराम कर रहा होता है, तो वह आमतौर पर एक मिनट में 16 से 20 बार सांस लेता है.

🎯 Exam Tip: विश्राम अवस्था में सामान्य श्वसन दर आयु, स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधि के स्तर पर निर्भर करती है.

 

Question 6. सामान्य मनुष्य में विश्राम अवस्था में ज्वारीय आयतन होता है –
(अ) 1.2 ली.
(ब) 2.5 ली.
Answer: सामान्य मनुष्य में विश्राम अवस्था में ज्वारीय आयतन (Tidal volume, TV) 500 ml होता है.
In simple words: जब हम सामान्य रूप से सांस लेते और छोड़ते हैं, तो हर सांस में फेफड़ों में लगभग 500 मिलीलीटर हवा अंदर-बाहर होती है.

🎯 Exam Tip: ज्वारीय आयतन सामान्य श्वसन के दौरान ली गई और छोड़ी गई हवा की मात्रा है, जो औसतन 500 ml होती है.

 

Question 7. फेफड़ों में श्वासनली की शाखा का अंतिम भाग है –
(अ) श्वसनिकाएँ
(ब) वायु कूपिकाएँ
(स) श्वसनियाँ
(द) वायु कोष
Answer: (ब) वायु कूपिकाएँ
In simple words: फेफड़ों के अंदर, सांस की नली (श्वासनली) छोटी-छोटी शाखाओं में बंटती जाती है. इन शाखाओं के सबसे आखिर में छोटे-छोटे गुब्बारे जैसी थैली होती हैं, जिन्हें वायु कूपिकाएँ कहते हैं.

🎯 Exam Tip: वायु कूपिकाएँ (एल्विओली) वह स्थान हैं जहाँ ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान रक्त और फेफड़ों के बीच होता है.

 

Question 8. उच्छवसन के समय सीटी की आवाज आना कौन-से रोग की पहचान है –
(अ) वात स्फीति
(ब) अस्थमा
(स) श्वसनी शोय
(द) सिलिकोसिस
Answer: (ब) अस्थमा
In simple words: जब किसी व्यक्ति को अस्थमा (दमा) होता है, तो सांस छोड़ते समय अक्सर एक सीटी जैसी आवाज आती है. यह फेफड़ों की नलियों के सिकुड़ने के कारण होता है.

🎯 Exam Tip: अस्थमा में सांस की नलियां सूज जाती हैं और सिकुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है और घरघराहट की आवाज आती है.

 

Question 9. खानों या कारखानों में कार्य करने वालों श्रमिकों को कौन-सा रोग होने की अधिक संभावना रहती है –
(अ) न्यूमोनिया
(ब) श्वसनी शोथ
(स) वात स्फीति
(द) सिलिकोसिस
Answer: (द) सिलिकोसिस
In simple words: जो मजदूर खानों या कारखानों में काम करते हैं, जहां धूल और महीन कण हवा में होते हैं, उन्हें सिलिकोसिस नामक बीमारी होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है.

🎯 Exam Tip: सिलिकोसिस एक फेफड़ों की बीमारी है जो सिलिका धूल के लंबे समय तक संपर्क में रहने से होती है, खासकर खनन और निर्माण उद्योगों में.

 

Question 10. फेफड़ों की कुल क्षमता होती है –
(अ) 4600 मि.ली.
(ब) 3500 मिली.
(स) 5800 मिली.
Answer: फेफड़ों की कुल क्षमता (Total Lung Capacity, TLC) लगभग 5800 ml होती है. यह फेफड़ों में अधिकतम भरी जा सकने वाली हवा की मात्रा है.
In simple words: एक बार में फेफड़ों में जितनी ज्यादा से ज्यादा हवा भरी जा सकती है, उसे फेफड़ों की कुल क्षमता कहते हैं, जो लगभग 5800 मिलीलीटर होती है.

🎯 Exam Tip: कुल फेफड़ों की क्षमता, जिसमें ज्वारीय आयतन, निःश्वसन आरक्षित आयतन, उच्छवसन आरक्षित आयतन और अवशिष्ट आयतन शामिल होते हैं, लगभग 5800 ml होती है.

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 23 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्नः

 

Question 1. बाह्य श्वसन किसे कहते हैं?
Answer: बाह्य श्वसन वह प्रक्रिया है जिसमें जीव शरीर पर्यावरण से ऑक्सीजन \((\text{O}_2)\) अंदर लेता है और कार्बन डाइऑक्साइड \((\text{CO}_2)\) बाहर छोड़ता है. यह कोशिकाओं में होने वाली क्रिया है.
In simple words: बाह्य श्वसन का मतलब है शरीर का बाहर से ऑक्सीजन लेना और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालना.

🎯 Exam Tip: बाह्य श्वसन और आंतरिक श्वसन में अंतर को स्पष्ट करें, जिसमें बाह्य श्वसन गैसों का विनिमय पर्यावरण और शरीर के बीच होता है.

 

Question 2. श्वसन सतह किसे कहते हैं?
Answer: फेफड़ों में मौजूद वायु कूपिकाएँ (Alveoli) श्वसन सतह कहलाती हैं. यहीं पर गैसों का आदान-प्रदान होता है. यहां से ऑक्सीजन रक्त में जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से बाहर आती है.
In simple words: फेफड़ों की वायु कूपिकाएँ वह जगह हैं जहाँ सांस लेने वाली हवा और खून के बीच ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड बदलती हैं.

🎯 Exam Tip: श्वसन सतह पतली, नम और बड़ी होनी चाहिए ताकि गैसों का अधिकतम और कुशल विनिमय हो सके.

 

Question 3. तनुपट कहाँ पाया जाता है?
Answer: मनुष्य के शरीर में तनुपट (Diaphragm) वक्ष गुहा (छाती) और उदर गुहा (पेट) के बीच में पाया जाता है. यह एक पेशीय विभाजन है.
In simple words: तनुपट हमारी छाती और पेट के बीच में होता है, जो सांस लेने में मदद करता है.

🎯 Exam Tip: तनुपट एक गुंबद के आकार की मांसपेशी है जो सांस लेने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

 

Question 4. निश्वसन पेशियों के नाम लिखो।
Answer: निश्वसन में मदद करने वाली मुख्य पेशियाँ तनुपट (Diaphragm) और बाह्य अंतरापर्युकीय पेशियाँ (External intercostal muscles) हैं.
In simple words: सांस अंदर लेने के लिए, डायाफ्राम और छाती की बाहरी मांसपेशियां सिकुड़ती हैं.

🎯 Exam Tip: निःश्वसन में मुख्य रूप से तनुपट और बाहरी इंटरकोस्टल मांसपेशियां संकुचित होती हैं, जबकि उच्छवसन में वे शिथिल होती हैं.

 

Question 5. धूम्रपान से होने वाले दो रोगों के नाम लिखो।
Answer: धूम्रपान से होने वाले दो प्रमुख रोग हैं:
1. अस्थमा (दमा)
2. फेफड़ों का कैंसर
In simple words: सिगरेट पीने से अस्थमा और फेफड़ों का कैंसर जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं.

🎯 Exam Tip: धूम्रपान से श्वसन प्रणाली पर कई हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं, जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है.

 

Question 6. उच्छवसन आरक्षित आयतन किसे कहते हैं?
Answer: उच्छवसन आरक्षित आयतन (Expiratory Reserve Volume, ERV) वायु की वह अतिरिक्त मात्रा है जिसे एक व्यक्ति सामान्य सांस बाहर छोड़ने के बाद बलपूर्वक बाहर निकाल सकता है. यह औसतन 1000 ml से 1100 ml होती है.
In simple words: सामान्य सांस छोड़ने के बाद भी, हम जितनी अतिरिक्त हवा बल लगाकर बाहर निकाल सकते हैं, उसे उच्छवसन आरक्षित आयतन कहते हैं.

🎯 Exam Tip: फुफ्फुसीय आयतन और क्षमताएं श्वसन तंत्र के स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण माप हैं.

 

Question 7. निःश्वसन आरक्षित आयतन किसे कहते हैं?
Answer: निःश्वसन आरक्षित आयतन (Inspiratory Reserve Volume, IRV) वायु की वह अतिरिक्त मात्रा है जिसे कोई व्यक्ति सामान्य सांस अंदर लेने के बाद बलपूर्वक अंदर ले सकता है. यह औसतन 2500 ml से 3000 ml होता है.
In simple words: सामान्य सांस लेने के बाद, हम जितनी अतिरिक्त हवा बल लगाकर अंदर खींच सकते हैं, उसे निःश्वसन आरक्षित आयतन कहते हैं.

🎯 Exam Tip: IRV और ERV दोनों ही फेफड़ों की लोच और श्वसन मांसपेशियों की ताकत को दर्शाते हैं.

 

Question 8. अवशिष्ट आयतन किसे कहते हैं?
Answer: अवशिष्ट आयतन (Residual Volume, RV) वायु का वह आयतन है जो बलपूर्वक सांस बाहर छोड़ने के बाद भी फेफड़ों में हमेशा बचा रहता है. यह औसतन 1100 ml से 1200 ml होता है.
In simple words: पूरी तरह से सांस बाहर छोड़ने के बाद भी, फेफड़ों में थोड़ी हवा हमेशा बची रहती है, जिसे अवशिष्ट आयतन कहते हैं.

🎯 Exam Tip: अवशिष्ट आयतन यह सुनिश्चित करता है कि गैसों का विनिमय हमेशा होता रहे और फेफड़ों की वायु कूपिकाएँ कभी पूरी तरह से खाली न हों.

 

Question 9. निःश्वसन क्षमता किसे कहते हैं?
Answer: निःश्वसन क्षमता (Inspiratory Capacity, IC) वायु की वह अधिकतम मात्रा है जिसे एक व्यक्ति एक निःश्वसन में ग्रहण कर सकता है. इसमें ज्वारीय आयतन और निःश्वसन आरक्षित आयतन शामिल होते हैं. इसका माप लगभग 3500 ml होता है.
In simple words: यह वह सबसे ज्यादा हवा है जिसे हम एक बार सांस अंदर लेकर फेफड़ों में भर सकते हैं.

🎯 Exam Tip: निःश्वसन क्षमता, फेफड़ों में हवा लेने की कुल क्षमता को दर्शाती है, जिसमें सामान्य सांस और अतिरिक्त बलपूर्वक ली गई सांस दोनों शामिल हैं.

 

Question 10. कार्यात्मक अवशिष्ट क्षमता किसे कहते हैं?
Answer: कार्यात्मक अवशिष्ट क्षमता (Functional Residual Capacity, FRC) वह वायु मात्रा है जो सामान्य सांस बाहर छोड़ने के बाद भी फेफड़ों में बची रहती है. इसमें उच्छवसन आरक्षित आयतन (ERV) और अवशिष्ट आयतन (RV) शामिल होते हैं. इसका मान लगभग 2300 ml होता है.
In simple words: सामान्य रूप से सांस छोड़ने के बाद फेफड़ों में जितनी हवा बची रहती है, उसे कार्यात्मक अवशिष्ट क्षमता कहते हैं.

🎯 Exam Tip: FRC फेफड़ों में गैसों के निरंतर विनिमय को बनाए रखने में मदद करती है और श्वसन प्रणाली के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 11. कृत्रिम श्वसन का क्या महत्त्व है?
Answer: कृत्रिम श्वसन (Artificial Respiration) का महत्व यह है कि यदि किसी व्यक्ति की दुर्घटना में सांस रुक जाए, तो कृत्रिम श्वसन देकर मानव जीवन को बचाया जा सकता है. यह तब उपयोगी होता है जब हृदय स्पंदन जारी हो.
In simple words: कृत्रिम श्वसन से उन लोगों की जान बचाई जा सकती है जिनकी सांस रुक गई हो, खासकर दुर्घटनाओं में.

🎯 Exam Tip: कृत्रिम श्वसन जीवन रक्षक प्राथमिक उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो ऑक्सीजन की आपूर्ति को बनाए रखता है जब प्राकृतिक श्वसन बाधित होता है.

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 23 लघूत्तरात्मक प्रश्नः

 

Question 1. निश्वसन की क्रियाविधि समझाइए।
Answer: निश्वसन (Inspiration), जिसे अंतः श्वसन या Inhalation भी कहते हैं, वह प्रक्रिया है जिसमें वायु (ऑक्सीजन) शरीर में प्रवेश करती है. यह एक सक्रिय क्रिया है जो डायाफ्राम और बाह्य अंतरापर्युकीय पेशियों के संकुचन से शुरू होती है.
1. जब डायाफ्राम संकुचित होता है, तो यह चपटा होकर नीचे की ओर जाता है, जिससे वक्ष गुहा (छाती की गुहा) का आयतन बढ़ जाता है.
2. इसी समय, बाह्य अंतरापर्युकीय पेशियाँ भी सिकुड़ती हैं, जिससे पसलियाँ बाहर और ऊपर की ओर खिंचती हैं.
3. इन दोनों क्रियाओं के कारण वक्ष गुहा का आयतन और भी बढ़ जाता है.
4. इसके परिणामस्वरूप, वक्ष गुहा और फेफड़ों के अंदर वायु का दबाव वायुमंडलीय दबाव से कम हो जाता है.
5. वायुमंडलीय दबाव और फेफड़ों के अंदर के दबाव के इस अंतर के कारण, वायु श्वसन मार्ग से होते हुए वायु कूपिकाओं में तेजी से तब तक भरती रहती है जब तक कि कूपिकाओं का दबाव वायुमंडलीय दबाव के बराबर न हो जाए.
वायु का मार्ग इस प्रकार होता है: नासाद्वार \( \rightarrow \) नासागुहा \( \rightarrow \) आंतरिक नासा छिद्र \( \rightarrow \) ग्रसनी \( \rightarrow \) घाटी \( \rightarrow \) श्वासनली \( \rightarrow \) श्वसनियाँ \( \rightarrow \) श्वसनिकाएँ \( \rightarrow \) वायुकूपिका वाहिनी \( \rightarrow \) वायु कूपिका कोश \( \rightarrow \) वायु कूपिकाएँ.
इस प्रकार फेफड़ों में वायु का प्रवेश करना ही निःश्वसन कहलाता है.
In simple words: सांस अंदर लेने के लिए, डायाफ्राम और छाती की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, जिससे फेफड़ों में जगह बढ़ती है और बाहर की हवा अंदर आ जाती है. हवा नाक से होकर फेफड़ों तक पहुँचती है.

🎯 Exam Tip: निःश्वसन को समझाते समय डायाफ्राम और इंटरकोस्टल मांसपेशियों की भूमिका, वक्ष गुहा के आयतन में वृद्धि और दबाव के अंतर पर जोर दें.

चित्र 23.3 : (अ) अंतः श्वसन (ब) निःश्वसन दर्शाते हुए श्वसन की क्रिया विधि

श्वसन सम्बन्धी आयतन (Volumes related to Respiration):

 

Question 2. उच्छ्वसन की क्रियाविधि को समझाइए।
Answer: उच्छवसन (Expiration), जिसे ऐक्हेलेशन (Exhalation) भी कहते हैं, वह प्रक्रिया है जिसमें फेफड़ों से कार्बन डाइऑक्साइड \((CO_2)\) युक्त वायु शरीर से बाहर निकाली जाती है.
विश्राम अवस्था में यह एक निष्क्रिय प्रक्रिया है और यह निःश्वसन के बाद होती है:
1. जब बाह्य अंतरापर्युकीय पेशियाँ और तनुपट की पेशियाँ शिथिलित होती हैं, तो पसलियाँ अपने भार के कारण नीचे आ जाती हैं और तनुपट वापस अपनी गुंबद जैसी स्थिति में आ जाता है.
2. इससे वक्ष गुहा का आयतन कम हो जाता है.
3. वक्ष गुहा का आयतन कम होने से फेफड़ों में वायु का दबाव वायुमंडलीय दबाव से अधिक हो जाता है. दबाव के इस अंतर के कारण फेफड़े संकुचित होते हैं और उनमें भी दबाव बढ़ जाता है.
4. परिणामतः, वायु कूपिकाओं से वायु श्वसन मार्ग से होकर बाहर वायुमंडल में चली जाती है.
व्यायाम तथा शारीरिक श्रम की स्थिति में उच्छ्वसन की प्रक्रिया तेज हो जाती है. ऐसे में आंतरिक अंतरापर्युकीय पेशियाँ (Internal intercostal muscles) तेजी से संकुचित होती हैं और पसलियों को तेजी से नीचे खींचती हैं, जिससे वक्ष गुहा का आयतन कम हो जाता है. उदरीय पेशियाँ भी तेजी से सिकुड़ती हैं और उदर गुहा पर दबाव बढ़ाती हैं. इस दबाव के कारण तनुपट वक्ष गुहा में ऊपर की ओर अधिक सक्रिय रूप से गति करता है. इन दोनों पेशियों के संकुचन से फेफड़े तेजी से संकुचित होते हैं और वायु बलपूर्वक बाहर निकाल दी जाती है.
In simple words: सांस बाहर छोड़ने के लिए, डायाफ्राम और छाती की मांसपेशियां आराम करती हैं, जिससे फेफड़ों में जगह कम होती है और हवा बाहर निकल जाती है.

🎯 Exam Tip: उच्छवसन की व्याख्या करते समय, यह स्पष्ट करें कि यह निष्क्रिय प्रक्रिया है और मांसपेशियों के शिथिलन, वक्ष गुहा के आयतन में कमी और दबाव के अंतर पर आधारित है. बलपूर्वक उच्छवसन में आंतरिक मांसपेशियों की भूमिका को भी उजागर करें.

चित्र 23.3 : (अ) अंतः श्वसन (ब) निःश्वसन दर्शाते हुए श्वसन की क्रिया विधि

श्वसन सम्बन्धी आयतन (Volumes related to Respiration):

1. ज्वारीय आयतन (Tidal Volume, TV): यह सामान्य श्वसन के दौरान एक बार में फेफड़ों में ली गई या बाहर निकाली गई वायु का आयतन होता है. स्वस्थ व्यक्ति में यह लगभग 500 ml होता है. एक स्वस्थ व्यक्ति एक मिनट में लगभग 6000 से 8000 ml वायु का निःश्वसन और उच्छ्वसन कर सकता है.

2. निःश्वसन आरक्षित आयतन (Inspiratory Reserve Volume, IRV): यह वायु की वह अतिरिक्त मात्रा है जिसे एक व्यक्ति बलपूर्वक सामान्य निःश्वासन के बाद अंदर ले सकता है. यह औसतन 2500 ml से 3000 ml तक होती है.

3. उच्छवसन आरक्षित आयतन (Expiratory Reserve Volume, ERV): यह वायु की वह अतिरिक्त मात्रा है जिसे एक व्यक्ति बलपूर्वक सामान्य उच्छ्वसन के बाद बाहर निकाल सकता है. यह औसतन 1000 ml से 1100 ml तक होती है.

4. अवशिष्ट आयतन (Residual Volume, RV): यह वायु का वह आयतन है जो बलपूर्वक उच्छ्वसन के बाद भी फेफड़ों में बचा रहता है. यह औसतन 1100 ml से 1200 ml तक होता है.

श्वसन सम्बन्धी क्षमताएँ (Capacities Related to Respiration):

1. निःश्वसन क्षमता (Inspiratory Capacity, IC): यह वायु की वह अधिकतम मात्रा है जो एक व्यक्ति एक निःश्वसन में ग्रहण कर सकता है. इसमें ज्वारीय आयतन (TV) और निःश्वसन आरक्षित आयतन (IRV) शामिल होते हैं. इसका माप लगभग 3500 ml होता है.

2. उच्छवसन क्षमता (Expiratory Capacity, EC): यह वायु की वह अधिकतम मात्रा है जिसे एक व्यक्ति एक उच्छ्वसन में बाहर निकाल सकता है. इसमें ज्वारीय आयतन (TV) और उच्छवसन आरक्षित आयतन (ERV) शामिल होते हैं.

3. क्रियाशील अवशिष्ट क्षमता (Functional Residual Capacity, FRC): यह वायु की मात्रा है जो सामान्य उच्छ्वसन के बाद फेफड़ों में बची रहती है. इसमें उच्छवसन आरक्षित आयतन (ERV) और अवशिष्ट आयतन (RV) शामिल होते हैं. इसका मान लगभग 2300 ml होता है.

4. जैव क्षमता (Vital Capacity, VC): यह फेफड़ों में अधिकतम भरी गई और अधिकतम निकाली गई वायु की मात्रा होती है. इसका मान VC = [IRV + TV] + ERV के बराबर होता है. इसका माप लगभग 4600 ml होता है.

5. फेफड़ों की कुल क्षमता (Total Lung Capacity, TLC): यह अधिकतम प्रयास के बाद फेफड़ों में भरी जा सकने वाली अधिकतम वायु की मात्रा है. यह VC + RV के बराबर होता है, और इसका मान लगभग 5800 ml होता है.

 

Question 4. वात स्फीति रोग क्या है? इसका किस प्रकार उपचार किया जाता है?
Answer: वात स्फीति (Emphysema) एक गंभीर श्वसन रोग है जो मुख्य रूप से अत्यधिक धूम्रपान के कारण होता है.
1. इस रोग में फेफड़ों की वायु कूपिकाओं की दीवारें धीरे-धीरे नष्ट हो जाती हैं. इससे वायु कूपिकाएँ बड़ी हो जाती हैं और फेफड़ों की श्वसन सतह का क्षेत्रफल घट जाता है.
2. संयोजी ऊतक की मात्रा बढ़ने के कारण फेफड़ों की लोच (elasticity) कम हो जाती है, जिससे सांस बाहर निकालना बहुत मुश्किल हो जाता है.
3. फेफड़ों में हवा भर जाती है, सूजन, बहुत ज्यादा बलगम और श्वसन नलियों के सिकुड़ने के कारण सांस लेने में कठिनाई होती है.
**उपचार:**
1. इस रोग से बचने का सबसे अच्छा तरीका धूम्रपान छोड़ना है.
2. एंटीबायोटिक दवाएँ और ब्रोन्कोडायलेटर औषधियाँ भी इस रोग के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं.
In simple words: वात स्फीति एक फेफड़ों की बीमारी है जो धूम्रपान से होती है, इसमें फेफड़ों की छोटी हवा की थैलियां (वायु कूपिकाएं) खराब हो जाती हैं, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है. इसका इलाज धूम्रपान छोड़ना और दवाएं लेना है.

🎯 Exam Tip: वात स्फीति में वायु कूपिकाओं के विनाश और फेफड़ों की लोच की कमी पर ध्यान केंद्रित करें, और उपचार के रूप में धूम्रपान बंद करने के महत्व को बताएं.

 

Question 5. श्वसन किसे कहते हैं? बाह्य तथा आन्तरिक श्वसन को परिभाषित कीजिए।
Answer: जीवधारियों के शरीर में होने वाली सभी जैविक क्रियाओं के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है. यह ऊर्जा उन्हें खाद्य पदार्थों के ऑक्सीकरण (oxidation) से मिलती है. इस प्रक्रिया को श्वसन कहते हैं.
श्वसन एक जैव रासायनिक क्रिया है जिसमें जीवित कोशिकाओं में मौजूद भोजन का ऑक्सीकरण होता है, जिससे ऊर्जा, कार्बन डाइऑक्साइड \((CO_2)\) और जल \((H_2O)\) उत्पन्न होते हैं. उत्पन्न ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा (ATP के रूप में) संचित कर ली जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड शरीर से बाहर निकाल दी जाती है.

श्वसन के प्रकार (Types of Respiration):
श्वसन की क्रिया दो प्रकार से होती है:
1. **बाह्य श्वसन (External Respiration):** यह वह प्रक्रिया है जिसमें जीव शरीर पर्यावरण से ऑक्सीजन \((O_2)\) अंदर लेता है और कार्बन डाइऑक्साइड \((CO_2)\) बाहर छोड़ता है. यह गैसों का आदान-प्रदान फेफड़ों और रक्त के बीच होता है.
2. **आन्तरिक या कोशिकीय श्वसन (Internal or cellular Respiration):** यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिकाओं के अंदर ऑक्सीजन का उपयोग करके भोजन को तोड़ा जाता है और ऊर्जा उत्पन्न की जाती है. इसमें कार्बन डाइऑक्साइड \((CO_2)\) और ATP का उत्पादन होता है. आंतरिक या कोशिकीय श्वसन दो प्रकार का होता है:
(i) **ऑक्सीश्वसन (Aerobic Respiration):** जब कोशिकीय श्वसन की क्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में होती है, तो इसे ऑक्सीश्वसन कहते हैं.
(ii) **अनॉक्सी श्वसन (Anaerobic Respiration):** जब कोशिकीय श्वसन की क्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है, तो इसे अनॉक्सी श्वसन कहते हैं.
In simple words: श्वसन वह प्रक्रिया है जिससे शरीर भोजन से ऊर्जा बनाता है. इसमें बाहरी श्वसन (बाहर से हवा लेना और छोड़ना) और आंतरिक श्वसन (कोशिकाओं के अंदर ऊर्जा बनाना) शामिल है. आंतरिक श्वसन ऑक्सीजन के साथ या बिना ऑक्सीजन के हो सकता है.

🎯 Exam Tip: श्वसन की परिभाषा देते समय ऊर्जा उत्पादन और गैस विनिमय पर जोर दें. बाह्य और आंतरिक श्वसन के बीच मुख्य अंतर को स्पष्ट रूप से बताएं.

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 23 निबन्धात्मक प्रश्नः

 

Question 1. मानव में श्वसन तंत्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: मनुष्य में गैसीय विनिमय (Gaseous exchange) के लिए एक सुविकसित श्वसन अंग (Respiratory organs) और श्वसन तंत्र (Respiratory system) पाया जाता है. मानव श्वसन तंत्र में निम्नलिखित अंग शामिल होते हैं:
1. **बाह्य नासा छिद्र या नासा द्वारा (Nostrils):** ये श्वसन तंत्र के बाहरी छिद्र होते हैं जिनसे वायु नासा गुहा में प्रवेश करती है. नासा द्वारों में स्थित रोम और श्लेष्मा झिल्ली हवा को छानती है, गर्म करती है और नम करती है. यह सूक्ष्म कणों को भी रोकती है.
2. **नासा गुहा (Nasal cavity):** नासा मार्ग नेजल, प्रीमैक्सिला और एथेमॉयड अस्थियों का बना होता है. नासा गुहा आंतरिक नासा छिद्रों द्वारा नासा ग्रसनी में खुलती है.
3. **नासा ग्रसनी गुहा (Nasopharyngeal cavity):** यहाँ से वायु पीछे की ओर कंठ ग्रसनी में प्रवेश करती है.
4. **कंठ (Larynx):** कंठ एक त्रिभुजाकार संरचना है जो श्वास नली से जुड़ती है. कंठ की दीवारों को उपास्थियाँ (cartilages) सहारा प्रदान करती हैं. इसमें स्वर रज्जु (Vocal cords) पाए जाते हैं जो ध्वनि उत्पादन में मदद करते हैं. कंठ के छिद्र को घाटी (Glottis) कहते हैं.
5. **श्वासनली (Trachea):** यह लगभग 12 सेमी लंबी नली होती है जो कंठ से वक्ष गुहा (Thoracic cavity) तक फैली रहती है और फिर दो श्वसनियों में बंट जाती है. श्वास नली और श्वसनियों की दीवारों को 'C' आकार की उपास्थियाँ सहारा प्रदान करती हैं. श्वसन मार्ग की दीवारों पर श्लेष्मा कोशिकाएँ (mucus cells) और पक्ष्माभी कोशिकाएँ (ciliated cells) होती हैं. श्लेष्मा में फंसे हुए जीवाणुओं और सूक्ष्म कणों को पक्ष्माभों द्वारा ग्रसनी में लाया जाता है और निगल लिया जाता है.
6. **श्वसनी (Bronchus):** श्वासनली दो प्राथमिक श्वसनियों में बंट जाती है, एक दाएँ फेफड़े में और एक बाएँ फेफड़े में प्रवेश करती है.
7. **फेफड़े (Lungs):** मानव की वक्ष गुहा में हृदय के पास दो फेफड़े होते हैं. दायाँ फेफड़ा तीन पालियों (lobes) में और बायाँ फेफड़ा दो पालियों में विभाजित होता है. फेफड़े दो फुफ्फुसावरण (pleura) से घिरे होते हैं, जिनके बीच फुफ्फुसावरणी तरल (pleural fluid) भरा होता है. यह तरल फेफड़ों को पिचकने से बचाता है.
8. **श्वसनिकाएँ (Bronchioles):** श्वसनियाँ फेफड़ों के अंदर लगातार विभाजित होकर द्वितीयक और तृतीयक श्वसनियों, श्वसनिकाओं और अंतस्थ श्वसनिकाओं में बंट जाती हैं.
9. **वायु कूपिकाएँ (Alveoli):** श्वसनिकाएँ अंततः वायु कूपिका वाहिनी (Alveolar ducts) में विभाजित होती हैं जो वायु कूपिका कोश (Atrium) में खुलती हैं. प्रत्येक कोश से छोटी वायु कूपिकाओं का एक समूह जुड़ा रहता है. दोनों फेफड़ों में लगभग 60 करोड़ वायु कूपिकाएँ होती हैं. वायु कूपिकाएँ गैसीय विनिमय की मुख्य सतह हैं. प्रत्येक वायु कूपिका एक बहुत छोटी प्याले जैसी संरचना होती है जिसका व्यास लगभग 0.2 mm होता है. इसकी बहुत पतली दीवार में रुधिर कोशिकाओं (Blood capillaries) का जाल पाया जाता है. श्वसन झिल्ली (वायु कूपिका की दीवार और रक्त केशिका की दीवार) बहुत पतली (लगभग 0.2µm) होती है, जिससे गैसों का आदान-प्रदान आसानी से हो सके.
In simple words: मानव श्वसन तंत्र में नाक से लेकर फेफड़ों तक कई हिस्से होते हैं. नाक हवा को छानती है, फिर हवा श्वासनली से होते हुए फेफड़ों तक पहुँचती है. फेफड़ों के अंदर छोटी-छोटी हवा की थैलियां (वायु कूपिकाएं) होती हैं, जहाँ से ऑक्सीजन खून में जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड खून से बाहर आती है.

🎯 Exam Tip: मानव श्वसन तंत्र का वर्णन करते समय, प्रत्येक अंग के कार्य और गैस विनिमय में उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से बताएं. श्वसन मार्ग और फेफड़ों की संरचना पर विशेष ध्यान दें.

चित्र 23.1 : मानव श्वसन तन्त्र का आरेखी दृश्य। एक फेंडड़े का अनुप्रस्थ काट दिखाया गया है।

चित्र 23.2 : मनुष्य के फेफड़ों में श्वसनीय वृक्ष का चित्र

 

प्रश्न 2. उच्छ्वसन की क्रियाविधि को समझाइए।
Answer: मानव श्वसन की क्रियाविधि दो चरणों में पूरी होती है: निश्वसन (साँस अंदर लेना) और उच्छवसन (साँस बाहर छोड़ना)।

1. निश्वसन (साँस अंदर लेना): वायु (ऑक्सीजन) का शरीर में प्रवेश करना निश्वसन कहलाता है, जिसे इन्हेलेशन भी कहते हैं। यह एक सक्रिय प्रक्रिया है जो डायाफ्राम और बाहरी अंतरापर्शुक पेशियों के सिकुड़ने से शुरू होती है। जब डायाफ्राम सिकुड़ता है, तो वह चपटा हो जाता है और पेट की ओर नीचे चला जाता है, जिससे छाती गुहा (वक्षगुहा) का आयतन बढ़ जाता है। इसी के साथ, बाहरी अंतरापर्शुक पेशियाँ भी सिकुड़ती हैं, जिससे पसलियाँ बाहर और ऊपर की ओर खिंचती हैं। इन दोनों क्रियाओं के कारण छाती गुहा का आयतन और बढ़ता है। इसके परिणामस्वरूप, छाती गुहा और फेफड़ों में वायु का दबाव वायुमंडलीय दबाव से कम हो जाता है। इस दबाव के अंतर के कारण वायुमंडलीय वायु श्वसन मार्ग से होते हुए वायु कूपिकाओं में तेजी से तब तक भरती रहती है, जब तक कि कूपिकाओं का दबाव वायुमंडलीय दबाव के बराबर न हो जाए।

वायु का मार्ग इस प्रकार होता है: नासाद्वार \( \implies \) नासागुहा \( \implies \) आंतरिक नासा छिद्र \( \implies \) ग्रसनी \( \implies \) घांटी \( \implies \) श्वासनली \( \implies \) श्वसनियाँ \( \implies \) श्वसनिकाएँ \( \implies \) वायुकूपिका वाहिनी \( \implies \) वायु कूपिका कोश \( \implies \) वायु कूपिकाएँ। इस प्रकार फेफड़ों में वायु का प्रवेश करना ही निश्वसन (Inspiration) कहलाता है।

2. उच्छवसन (साँस बाहर छोड़ना): फेफड़ों से वायु (कार्बन डाइऑक्साइड) का शरीर से बाहर निकलना उच्छवसन कहलाता है, जिसे ऐक्हेलेशन भी कहते हैं।

आराम की स्थिति में यह एक निष्क्रिय प्रक्रिया है। निश्वसन के बाद उच्छवसन होता है। जब बाहरी अंतरापर्शुक पेशियाँ और डायाफ्राम की पेशियाँ ढीली होती हैं, तब पसलियाँ अपने वजन के कारण नीचे आ जाती हैं और डायाफ्राम छाती गुहा में ऊपर उठ जाता है। इस कारण छाती गुहा का आयतन कम हो जाता है, जिससे इसका वायुदाब वायुमंडलीय दाब से अधिक हो जाता है। फेफड़े दब जाते हैं और उनमें भी दबाव बढ़ जाता है। वायु कूपिकाओं से वायु श्वसन मार्ग से होकर बाहर वायुमंडल में चली जाती है।

व्यायाम तथा शारीरिक मेहनत के समय उच्छवसन की प्रक्रिया तेज हो जाती है। आंतरिक अंतरापर्शुक पेशियाँ (Internal intercostal muscles) तेजी से सिकुड़ती हैं और पसलियों को तेजी से नीचे की ओर खींचती हैं, जिसके परिणामस्वरूप छाती गुहा का आयतन कम हो जाता है। पेट की पेशियाँ भी तेजी से सिकुड़ती हैं और पेट गुहा पर दबाव बढ़ाती हैं। इस दबाव के कारण डायाफ्राम छाती गुहा में ऊपर की ओर अधिक सक्रिय रूप से गति करता है। इन दोनों पेशियों के सिकुड़ने से फेफड़े तेजी से दबते हैं और वायु बलपूर्वक बाहर निकाल दी जाती है। वयस्क मानव में आराम की स्थिति में श्वसन दर (संवातन) 16-20 प्रतिमिनट होती है।
In simple words: उच्छवसन तब होता है जब शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है। आराम करते समय, यह एक सामान्य और निष्क्रिय प्रक्रिया है जहाँ पेशियाँ ढीली होती हैं, फेफड़ों से हवा बाहर निकल जाती है। मेहनत करते समय, यह एक सक्रिय प्रक्रिया बन जाती है, जहाँ पेशियाँ तेजी से सिकुड़कर अधिक हवा बाहर निकालती हैं।

🎯 Exam Tip: निश्वसन और उच्छवसन की क्रियाविधि को स्पष्ट रूप से अलग-अलग समझाएँ और प्रत्येक चरण में शामिल पेशियों तथा आयतन परिवर्तनों का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 3. संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए
(अ) कृत्रिम श्वसन
(ब) श्वसन सम्बन्धी रोग
(स) श्वसन सम्बन्धी आयतन
Answer:
(अ) कृत्रिम श्वसन (Artificial Respiration):
यदि किसी व्यक्ति का किसी दुर्घटना (जैसे डूबने, कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता, बिजली का झटका या अन्य कारणों) से साँस रुक जाए, लेकिन हृदय की धड़कन (Heart Beating) जारी रहे, तो कृत्रिम श्वसन देकर उसका जीवन बचाया जा सकता है। आमतौर पर, कृत्रिम श्वसन की प्रक्रिया से श्वसन केंद्रों को फिर से सक्रिय किया जाता है ताकि सामान्य श्वसन की स्थिति बहाल हो सके।
कृत्रिम श्वसन की कई विधियाँ हैं, लेकिन वर्तमान में मुँह से मुँह द्वारा श्वसन विधि सबसे प्रभावी है। इस विधि से कृत्रिम श्वसन देने के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. रोगी को सीधा लिटाकर, एक हाथ उसके माथे पर और दूसरा हाथ गर्दन के नीचे रखकर गर्दन को इस प्रकार ऊँचा करें कि गर्दन खिंच जाए और जीभ पीछे के भाग से अलग हो जाए। यह क्रिया बंद श्वसन मार्ग को खोल देती है।
2. माथे पर रखे हाथ से रोगी की नाक बंद करके, कृत्रिम श्वसन देने वाला व्यक्ति अपना मुँह रोगी के मुँह पर इस प्रकार रखे कि वायु अवकाश न रहे (वायुरोधी स्थिति बनी रहे)। गर्दन के नीचे हाथ यथास्थिति में ही रहने चाहिए ताकि गर्दन खिंची रहे।
3. रोगी के मुँह में एक मिनट में लगभग 12 ज्वारीय आयतन से दुगुनी हवा भरें।
4. रोगी के मुँह और नाक को खुला छोड़ते हुए रोगी के उच्छवसन की जाँच करें। इस प्रकार कृत्रिम श्वसन द्वारा रोगी को पुनर्जीवन मिल सकता है। आजकल कृत्रिम श्वसन के लिए कई प्रकार के यांत्रिक उपकरण भी उपलब्ध हैं।
In simple words: कृत्रिम श्वसन तब दिया जाता है जब कोई व्यक्ति साँस लेना बंद कर दे लेकिन उसका दिल धड़क रहा हो। इसमें व्यक्ति को सही स्थिति में लिटाकर और मुँह से मुँह में हवा भरकर साँस को फिर से चालू करने की कोशिश की जाती है।

🎯 Exam Tip: कृत्रिम श्वसन के चरणों को क्रमबद्ध तरीके से याद रखें और आपातकालीन स्थितियों में इसकी उपयोगिता पर ध्यान दें।

Answer:
(ब) श्वसन सम्बन्धी रोग (Respiratory disorders):
1. अस्थमा या दमा (Asthma): यह रोग परागकण, धूलकण, खाद्य पदार्थ, धुआँ, ठंड, धूम्रपान आदि से होने वाली एलर्जी के कारण होता है। इसके रोगी को खाँसी आती है और साँस लेने में कठिनाई होती है। अस्थमा का दौरा पड़ने पर साँस छोड़ते समय सीटी बजने की आवाज आती है। इस रोग में श्वसन नलियों में अधिक बलगम बनता है, सूजन आ जाती है और श्वसन नलियाँ संकरी हो जाती हैं, जिससे साँस लेने में और भी कठिनाई होती है। इस रोग से बचने का सबसे अच्छा तरीका एलर्जी पैदा करने वाले कारकों से दूर रहना और उनसे बचना है। इस रोग के उपचार के लिए ब्रोंको डाइलेटर (जो श्वसन नलियों को खोलते हैं) तथा एंटीबायोटिक (संक्रमण से लड़ने के लिए) और एंटीएलर्जिक (एलर्जी को कम करने के लिए) दवाओं का उपयोग करना चाहिए।
2. श्वसनी शोथ (Bronchitis): श्वसनी की अंदरूनी सतह पर सूजन आने के कारण लगातार खाँसी, बहुत अधिक बलगम, हरा-पीला कफ आना और साँस लेने में कठिनाई होना इस रोग के लक्षण हैं। यह रोग धूम्रपान के कारण होता है। सिगरेट के धुएँ में मौजूद रसायन श्वसन मार्ग को उत्तेजित करते हैं।
3. वात स्फीति (Emphysema): यह रोग भी अत्यधिक धूम्रपान से होता है। धूम्रपान से फेफड़ों में लगातार उत्तेजना होती रहती है, जिससे वायु कूपिकाओं की दीवारें धीरे-धीरे नष्ट हो जाती हैं। फेफड़ों में हवा के लिए जगह फैलकर बड़ी हो जाती है और श्वसन सतह का क्षेत्रफल घट जाता है। संयोजी ऊतक की मात्रा बढ़ जाने के कारण फेफड़ों की लोच भी कम हो जाती है, जिसके फलस्वरूप साँस छोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है। साँस छोड़ने के बाद भी फेफड़ों में हवा भरी रहती है। सूजन, अत्यधिक बलगम और श्वसन नलियों के संकरी हो जाने के कारण साँस लेने में कठिनाई होती है। धूम्रपान से दूर रहकर साँस लेने में आसानी होती है। इस रोग से बचने के लिए धूम्रपान से दूर रहना, एंटीबायोटिक दवाएं और ब्रोंको डाइलेटर दवाएं लेना चाहिए।
4. न्यूमोनिया (Pneumonia): यह रोग स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनी (Streptococcus pneumoniae) जीवाणुओं के संक्रमण से उत्पन्न होता है। इस संक्रमण से वायु कूपिकाएँ मृत कोशिकाओं (श्वेत रक्त कोशिकाओं) और तरल से भर जाती हैं, जिससे फेफड़ों में सूजन आ जाती है। रोगी को साँस लेने में कठिनाई होती है। यह रोग अधिकतर बूढ़े व्यक्तियों और बच्चों में होता है। इस रोग के उपचार के लिए एंटीबायोटिक और ब्रोंको डाइलेटर दवाएं लेनी चाहिए।
5. फेफड़ों का कैंसर (Cancer of Lungs): इसका मुख्य कारण धूम्रपान ही है। सिगरेट के धुएँ में मौजूद रसायन कैंसर पैदा करने वाले होते हैं। धुएँ से श्वसन कला में उत्तेजना से अनियंत्रित कोशिका विभाजन शुरू हो जाता है, जिससे पूरे फेफड़े में कैंसर फैल जाता है।
6. सिलिकोसिस तथा एसबेस्टोसिस (Silicosis and asbestosis): यह रोग वायु प्रदूषण (Air pollution) के कारण होता है। ऐसे श्रमिक जो सिलिका और एस्बेस्टोस की खानों या कारखानों में काम करते हैं, उनमें इन रोगों के होने की संभावना रहती है। साँस के साथ ये कण फेफड़ों में चले जाते हैं और फेफड़ों के ऊपरी भाग में फाइब्रोसिस (तंतुमय ऊतक में वृद्धि) तथा सूजन उत्पन्न करते हैं। ये दोनों रोग असाध्य हैं। इसलिए, इनके उत्पन्न होने के कारणों से बचना चाहिए।
In simple words: श्वसन सम्बन्धी रोग फेफड़ों और साँस लेने की नसों को प्रभावित करते हैं। इनमें अस्थमा (साँस लेने में कठिनाई और सीटी की आवाज), ब्रोंकाइटिस (खाँसी और बलगम), वात स्फीति (फेफड़ों का खराब होना, अक्सर धूम्रपान से), न्यूमोनिया (फेफड़ों में संक्रमण), फेफड़ों का कैंसर (धूम्रपान से भी), और सिलिकोसिस (धूल के कारण फेफड़ों की बीमारी) शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक श्वसन रोग के मुख्य लक्षण और कारण को याद रखें, साथ ही उससे बचने और उसका उपचार करने के सामान्य तरीकों को भी जानें।

Answer:
(स) श्वसन सम्बन्धी आयतन (Volumes related to Respiration):
1. ज्वारीय आयतन (Tidal volume, TV): सामान्य श्वसन के दौरान एक बार साँस अंदर लेने या बाहर निकालने में फेफड़ों में भरी या निकाली गई वायु का आयतन ज्वारीय आयतन कहलाता है। प्रति साँस ज्वारीय निश्वसन या ज्वारीय उच्छवसन का माप 500 ml होता है। एक स्वस्थ व्यक्ति प्रति मिनट लगभग 6000 से 8000 ml वायु का निश्वसन और उच्छवसन कर सकता है।
2. नि:श्वसन आरक्षित आयतन (Inspiratory Reserve Volume, IRV): वायु आयतन की वह अतिरिक्त मात्रा जो एक व्यक्ति बलपूर्वक साँस अंदर ले सकता है, निश्वसन आरक्षित आयतन (IRV) कहलाती है। यह औसतन 2500 ml से 3000 ml होती है।
3. उच्छवसन आरक्षित आयतन (Expiratory Reserve Volume, ERV): वायु आयतन की वह अतिरिक्त मात्रा जो एक व्यक्ति बलपूर्वक साँस बाहर निकाल सकता है, उच्छवसन आरक्षित आयतन (ERV) कहलाती है। यह औसतन 1000 ml से 1100 ml होती है।
4. अवशिष्ट आयतन (Residual Volume, RV): वायु का वह आयतन जो बलपूर्वक साँस बाहर निकालने के बाद भी फेफड़ों में बचा रहता है, उसे अवशिष्ट आयतन कहते हैं। यह औसतन 1100 ml से 1200 ml होता है।

श्वसन सम्बन्धी क्षमताएँ (Capacities Related to Respiration):
1. नि:श्वसन क्षमता (Inspiratory Capacity, IC): वायु की वह अधिकतम मात्रा जो एक निश्वसन में ग्रहण की जा सकती है, निश्वसन क्षमता (IC) कहलाती है। इसमें ज्वारीय आयतन तथा निश्वसन आरक्षित आयतन शामिल हैं। इसका माप 3500 ml होता है।
2. उच्छवसित क्षमता (Expiratory Capacity, EC): वायु की वह अधिकतम मात्रा जो एक उच्छवसन में बाहर निकाली जाती है, उच्छवसित क्षमता (EC) कहलाती है। इसमें ज्वारीय आयतन और उच्छवसित आरक्षित आयतन शामिल हैं (TV + ERV)।
3. क्रियाशील अवशिष्ट क्षमता (Functional Residual Capacity, FRC): सामान्य उच्छवसन के बाद जो वायु की मात्रा फेफड़ों में बचती है, क्रियाशील अवशिष्ट क्षमता (FRC) कहलाती है। इसमें उच्छवसन आरक्षित आयतन और अवशिष्ट आयतन शामिल होते हैं (ERV + RV)। इसका मान 2300 ml होता है।
4. जैव क्षमता (Vital Capacity): यह फेफड़ों में अधिकतम भरी गई तथा अधिकतम निकाली गई वायु होती है। इसका मान VC = [IRV + TV] + ERV के बराबर होता है। इसका माप लगभग 4600 ml होता है।
5. फेफड़ों की कुल क्षमता (Total Lung Capacity, TLC): अधिकतम प्रयास के बाद फेफड़ों में भरी जा सकने वाली अधिकतम ऑक्सीजन फेफड़ों से रक्त में पहुँचती है तथा फेफड़ों द्वारा कोशिकाओं में निर्मित कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को शरीर से बाहर निकाला जाता है। यह फेफड़ों द्वारा अधिकतम भरी जा सकने वाली कुल वायु होती है।
In simple words: श्वसन आयतन यह बताता है कि हम कितनी हवा अंदर-बाहर लेते हैं या फेफड़ों में रखते हैं, जैसे ज्वारीय आयतन (सामान्य साँस), आरक्षित आयतन (अधिकतम साँस), और अवशिष्ट आयतन (बची हुई हवा)। श्वसन क्षमताएं विभिन्न आयतनों का योग हैं, जैसे निश्वसन क्षमता (कुल साँस लेने की क्षमता) और जैव क्षमता (फेफड़ों की पूरी उपयोग क्षमता)।

🎯 Exam Tip: श्वसन आयतन और क्षमताओं के लिए उपयोग किए जाने वाले संक्षिप्त रूपों (जैसे TV, IRV, ERV, RV, IC, EC, FRC, VC, TLC) और उनके औसत मानों को याद रखें।

Free study material for Biology

Biology Class 12 Curriculum Solutions: Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र

Accessing Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र Solutions

Access structured RBSE textbook solutions for Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र. Designed in alignment with the latest academic curriculum for Class 12 Biology, these answers cover all end-of-chapter exercises to support daily learning and homework completion.

Concept-Driven Answers for Class 12 Biology

Beyond providing final answers, these guides offer step-by-step breakdowns for complex queries in the Class 12 Biology module. This approach helps students balance theoretical depth with practical problem-solving skills required for RBSE exams.

Maximizing Study Efficiency

Consistent practice with these solution guides cultivates faster problem-solving habits and clearer logical structuring. For a complete preparation experience, pair these textbook answers with our dedicated revision notes and sample papers for Class 12 Biology.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Biology are as per latest RBSE curriculum.

Are the Biology RBSE solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Biology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Biology. You can access RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Biology RBSE solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 23 मानव का श्वसन-तंत्र in printable PDF format for offline study on any device.