Official RBSE Solutions for Class 12 Biology: Chapter 21 मानव का अध्यावरणी तंत्र
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Chapter-wise Solutions for Biology: Chapter 21 मानव का अध्यावरणी तंत्र
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RBSE Class 12 Biology Chapter 21 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. मानव की त्वचा का विकास होता है -
(अ) मीसोडर्म से
(ब) एक्टोडर्म से
(स) एक्टोडर्म व मीसोडर्म से
(द) एक्टोडर्म वे एण्डोडर्म से
Answer: (स) एक्टोडर्म व मीसोडर्म से
In simple words: हमारी चमड़ी दो शुरूआती परतों से बनती है, जिनके नाम एक्टोडर्म और मीसोडर्म हैं। यह त्वचा को एक जटिल और बहुक्रियाशील अंग बनाती है।
🎯 Exam Tip: भ्रूणीय विकास के चरणों और प्रत्येक परत से बनने वाले अंगों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. एलीडिन नामक पदार्थ पाया जाता है -
(अ) कणी स्तर
(ब) शूल स्तर
(स) किण स्तर
(द) स्वच्छ स्तर
Answer: (द) स्वच्छ स्तर
In simple words: एलीडिन नाम का पदार्थ चमड़ी की सबसे साफ परत में मिलता है। यह परत पतली और पारदर्शी होती है, जो त्वचा को नमी से बचाने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: त्वचा की विभिन्न परतों में पाए जाने वाले विशिष्ट पदार्थों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर पूछा जाता है।
Question 4. कैरोटोहाइलिन नामक पदार्थ पाया जाता है -
(अ) शूल स्तर
(ब) कणी स्तर
(स) अंकुरण स्तर
(द) किण स्तर
Answer: (ब) कणी स्तर
In simple words: कैरोटोहाइलिन नाम का पदार्थ चमड़ी की कणी परत में होता है। यह हमारी चमड़ी को मजबूत बनाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: त्वचा की परतों और उनके घटकों के बीच संबंध को समझें, खासकर वे जो त्वचा की मजबूती से जुड़े हैं।
Question 5. अधिचर्म के व्युत्पन्न संरचनाएँ होती हैं -
(अ) नाखून
(ब) स्वेद ग्रंथियाँ
(स) तेल ग्रंथियाँ
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: चमड़ी से बनने वाले अंगों में नाखून, पसीने की ग्रंथियाँ और तेल की ग्रंथियाँ शामिल हैं। ये सब चमड़ी का हिस्सा हैं और अलग-अलग काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: अधिचर्म से बनने वाले सभी उपांगों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर एक सामान्य ज्ञान प्रश्न के रूप में आता है।
Question 7. त्वचा का अवरोधी स्तर कहलाता है -
(अ) किण स्तर
(ब) स्वच्छ स्तर
(स) कणी स्तर
(द) शूल स्तर
Answer: (ब) स्वच्छ स्तर
In simple words: चमड़ी की स्वच्छ परत हमें बाहर की चीजों से बचाती है। यह परत खासकर हथेली और पैर के तलवों पर होती है, जो पानी को अंदर आने से रोकती है।
🎯 Exam Tip: त्वचा की प्रत्येक परत के मुख्य कार्य और स्थान को समझें, विशेष रूप से अवरोधी कार्य वाली परतों को।
Question 8. स्वेद ग्रंथियाँ होती हैं -
(अ) एपोक्राइन
(ब) मीरोक्राइन
(स) एक्राइन
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (स) एक्राइन
In simple words: पसीने की ग्रंथियाँ अक्सर एक्राइन तरह की होती हैं। ये पसीना बाहर निकाल कर शरीर को ठंडा रखती हैं।
🎯 Exam Tip: ग्रंथियों के प्रकारों (एपोक्राइन, मीरोक्राइन, एक्राइन) और उनके कार्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 9. रोम में वर्णक कण पाये जाते हैं -
(अ) वल्कुट स्तर में
(ब) क्यूटिकल में
(स) मेड्यूला में
(द) उपरोक्त सभी में
Answer: (अ) वल्कुट स्तर में
In simple words: बालों में रंग के कण वल्कुट नाम की परत में होते हैं। इन्हीं कणों की वजह से हमारे बालों का रंग होता है।
🎯 Exam Tip: बालों की संरचना के विभिन्न भागों और उनके कार्यों को जानें, खासकर रंग के लिए जिम्मेदार हिस्से को।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 21 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. त्वचा के द्वारा कौन-सा विटामिन संश्लेषित होता है ?
Answer: हमारी त्वचा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में विटामिन-डी का संश्लेषण करती है। यह विटामिन हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
In simple words: धूप पड़ने पर हमारी चमड़ी विटामिन-डी बनाती है। यह हमारी हड्डियों को मजबूत रखता है।
🎯 Exam Tip: विटामिन-डी के स्रोत और इसके महत्व को याद रखें, खासकर त्वचा की भूमिका को।
Question 2. मिबोमियन ग्रंथियाँ मानव शरीर में कहाँ पायी जाती हैं ?
Answer: मिबोमियन ग्रंथियाँ मानव शरीर में पलकों की बरौनियों के नीचे स्थित होती हैं। ये ग्रंथियाँ आँखों को चिकना रखने वाला एक तैलीय पदार्थ स्रावित करती हैं।
In simple words: मिबोमियन ग्रंथियाँ हमारी आँखों की पलकों के नीचे होती हैं। ये आँखों को नम रखने के लिए तेल जैसा पदार्थ बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट ग्रंथियों के स्थान और उनके कार्यों को याद रखें।
Question 3. मानव की दुग्ध ग्रंथियाँ किसका रूपान्तरण है ?
Answer: मानव की दुग्ध ग्रंथियाँ वास्तव में तेल ग्रंथियों (सीबेसियस ग्रंथियों) का रूपान्तरण हैं। ये ग्रंथियाँ शिशु को पोषण देने के लिए दूध का उत्पादन करती हैं।
In simple words: हमारी दुग्ध ग्रंथियाँ असल में तेल ग्रंथियों का बदला हुआ रूप हैं। ये बच्चे को दूध पिलाने का काम करती हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न ग्रंथियों के विकास और रूपान्तरण के बारे में जानें।
Question 4. स्तन ग्रंथियाँ किस प्रकार की ग्रंथियाँ होती है?
Answer: स्तन ग्रंथियाँ एपोक्राइन प्रकार की ग्रंथियाँ होती हैं। इन ग्रंथियों में स्राव कोशिका के एक हिस्से के साथ बाहर निकलता है।
In simple words: स्तन ग्रंथियाँ एपोक्राइन तरह की होती हैं। जब ये कुछ छोड़ती हैं, तो कोशिका का थोड़ा हिस्सा भी उसके साथ बाहर आ जाता है।
🎯 Exam Tip: ग्रंथियों के स्राव के तरीकों (एपोक्राइन, एक्राइन, होलोक्राइन) को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 5. त्वचा को “हरफनमौला” क्यों कहा गया है ?
Answer: त्वचा को "हरफनमौला" अंग कहा जाता है क्योंकि यह शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करती है। यह सुरक्षा, तापमान नियंत्रण और संवेदना जैसे कार्य करती है।
In simple words: चमड़ी को 'हरफनमौला' कहते हैं क्योंकि यह शरीर के लिए बहुत सारे काम करती है, जैसे हमें बचाना और ठंड-गरमी महसूस कराना।
🎯 Exam Tip: त्वचा के विभिन्न कार्यों की एक सूची याद रखें ताकि आप इस प्रकार के प्रश्नों का उत्तर दे सकें।
Question 6. मानव की त्वचा का रंग कौन से वर्णक की उपस्थिति के कारण होता है ?
Answer: मानव की त्वचा का रंग मुख्य रूप से मिलेनिन नामक वर्णक की उपस्थिति के कारण होता है। मिलेनिन त्वचा को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाता है।
In simple words: हमारी चमड़ी का रंग मिलेनिन नाम के एक रंग वाले पदार्थ के कारण होता है। यह पदार्थ हमें धूप की तेज किरणों से भी बचाता है।
🎯 Exam Tip: मिलेनिन के कार्य और इसकी मात्रा के आधार पर त्वचा के रंग में होने वाले बदलावों को जानें।
Question 8. चर्म स्तर में कौन-सी प्रोटीन पाई जाती है ?
Answer: चर्म स्तर में केरेटोहाएलिन प्रोटीन पाई जाती है। यह प्रोटीन त्वचा को शक्ति और लचीलापन प्रदान करती है।
In simple words: चमड़ी की निचली परत में केरेटोहाएलिन नाम का प्रोटीन होता है। यह हमारी चमड़ी को मजबूत और लचीला बनाता है।
🎯 Exam Tip: त्वचा के विभिन्न स्तरों में पाए जाने वाले मुख्य प्रोटीनों और उनके कार्यों को याद रखें।
Question 9. तेल ग्रंथियाँ में पाये जाने वाले तेलीय पदार्थ का नाम लिखो।
Answer: तेल ग्रंथियों में पाये जाने वाले तेलीय पदार्थ का नाम सीबम है। सीबम त्वचा और बालों को चिकना और जलरोधी रखता है।
In simple words: तेल ग्रंथियाँ सीबम नाम का तेल बनाती हैं। यह तेल हमारी चमड़ी और बालों को चिकना और पानी से बचाकर रखता है।
🎯 Exam Tip: सीबम के कार्य और त्वचा और बालों के स्वास्थ्य में इसकी भूमिका को समझें।
Question 10. बालों की गति का संचालन करने वाली पेशियों का नाम लिखो।
Answer: बालों की गति का संचालन ऐरेक्टर पिलाई पेशियाँ करती हैं। ये पेशियाँ ठंड लगने या डरने पर बालों को खड़ा कर देती हैं।
In simple words: ऐरेक्टर पिलाई पेशियाँ हमारे बालों को हिलाती हैं। जब हमें ठंड लगती है या डर लगता है, तो यही पेशियाँ बालों को खड़ा कर देती हैं।
🎯 Exam Tip: ऐरेक्टर पिलाई पेशियों के स्थान और 'गूज बम्प्स' (रोंगटे खड़े होना) की घटना में उनकी भूमिका को समझें।
Question 11. रेटे पेग्स' किसे कहते हैं ?
Answer: अधिचर्म के अंकुरण स्तर पर उपस्थित छोटे उभारों को 'रेटे पेग्स' कहते हैं। ये उभार चर्म को अधिचर्म से जोड़ने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा को मजबूती मिलती है।
In simple words: हमारी चमड़ी की ऊपरी परत में छोटे-छोटे उभार होते हैं, जिन्हें 'रेटे पेग्स' कहते हैं। ये उभार चमड़ी की परतों को आपस में कसकर पकड़े रखते हैं।
🎯 Exam Tip: रेटे पेग्स की संरचना और त्वचा की परतों के बीच बंधन को मजबूत करने में उनकी भूमिका को जानें।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 21 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मानव की त्वचा के अधिचर्म में पाये जाने वाले विभिन्न स्तरों का वर्णन करो।
Answer: मानव की त्वचा के अधिचर्म में पाँच मुख्य परतें होती हैं, जो भीतर से बाहर की ओर इस प्रकार हैं:
1. मैल्पीधी स्तर (Stratum germinativum): यह सबसे भीतरी और सक्रिय परत है, जहाँ नई कोशिकाएँ बनती हैं।
2. स्पाइनोसम स्तर (Stratum spinosum): यह बहुकोणीय कोशिकाओं से बना होता है और त्वचा को दृढ़ता देता है।
3. ग्रॅन्युलोसम स्तर (Stratum granulosum): इस परत की कोशिकाएँ केराटिन बनाना शुरू करती हैं।
4. ल्यूसिडियम स्तर (Stratum lucidum): यह एक पतली, स्पष्ट परत है जो मुख्य रूप से हथेलियों और तलुओं में पाई जाती है।
5. कॉरनियम स्तर (Stratum corneum): यह सबसे बाहरी परत है, जिसमें मृत, चपटी कोशिकाएँ होती हैं जो सुरक्षा प्रदान करती हैं।
In simple words: हमारी चमड़ी की सबसे ऊपरी परत (अधिचर्म) में पाँच अलग-अलग परतें होती हैं। सबसे नीचे नई कोशिकाएँ बनती हैं, फिर बीच में कुछ मजबूत परतें होती हैं, और सबसे ऊपर मृत कोशिकाओं की एक सख्त परत होती है जो हमें बचाती है।
🎯 Exam Tip: अधिचर्म की प्रत्येक परत के नाम, क्रम और मुख्य कार्यों को याद रखें, क्योंकि यह एक मौलिक अवधारणा है।
Question 3. त्वचा में पाये जाने वाले रोम की संरचना एवं उसके कार्य लिखो।
Answer: रोम (बाल) अधिचर्म के मैल्पीधी स्तर से विकसित होते हैं और इनकी संरचना में कई महत्वपूर्ण भाग होते हैं:
1. रोम पुटक (Hair Follicle): यह एक थैली के आकार की संरचना है जिसमें बाल उगते हैं, इसका आधार चर्म में धंसा होता है।
2. रोम की जड़ (Hair root): यह रोम पुटक के तल पर सक्रियता से विभाजित होने वाली कोशिकाओं से बनती है और चर्म में धंसी रहती है।
3. रोम पैपिला (Hair papilla): यह रोम पुटक की तली पर एक छोटा गड्ढा होता है, जिसमें चर्म की रुधिर कोशिकाएँ पोषण देती हैं।
4. रोम काण्ड (Hair shaft): यह रोम का वह ठोस भाग है जो त्वचा की सतह से बाहर निकला होता है। यह किरेटीनीकरण के कारण निर्जीव होता है।
5. ऐरेक्टर पिलाई पेशियाँ (Arrector pili muscles): ये पेशियाँ पुटिका से निकलकर चर्म में लगी रहती हैं और बालों की गति का संचालन करती हैं, जिससे ठंड या डर में बाल खड़े हो जाते हैं।
In simple words: बाल हमारी चमड़ी से उगते हैं। इनके कई हिस्से होते हैं जैसे बालों की जड़, जो अंदर रहती है, और बाल का वो हिस्सा जो बाहर दिखता है। एक छोटी सी पेशी भी होती है जो बालों को खड़ा करती है।
🎯 Exam Tip: बालों की संरचना के प्रत्येक भाग का नाम और उसका कार्य याद रखें, खासकर रोम पुटक और ऐरेक्टर पिलाई पेशियों को।
Question 4. मानव की त्वचा में पाई जाने वाली तेल ग्रंथियों का वर्णन करो।
Answer: मानव की त्वचा में पाई जाने वाली तेल ग्रंथियाँ, जिन्हें सीबेसियस ग्रंथियाँ भी कहते हैं, बालों की जड़ों और पुटिकाओं के पास स्थित होती हैं। ये होलोक्राइन प्रकार की ग्रंथियाँ हैं, जो सीबम नामक तैलीय पदार्थ का स्रावण करती हैं। सीबम त्वचा और बालों को चिकना और जलरोधी बनाए रखता है। यह मृत कोशिकाओं और तैलीय पदार्थ से बनता है। ये ग्रंथियाँ हथेलियों और तलुओं को छोड़कर शरीर के लगभग सभी भागों पर पायी जाती हैं।
In simple words: हमारी चमड़ी में तेल ग्रंथियाँ होती हैं, जिन्हें सीबेसियस ग्रंथियाँ भी कहते हैं। ये बालों की जड़ों के पास पाई जाती हैं। ये सीबम नाम का तेल बनाती हैं, जो हमारी चमड़ी और बालों को चिकना और पानी से बचाता है।
🎯 Exam Tip: तेल ग्रंथियों के प्रकार (होलोक्राइन), उनके स्राव (सीबम) और त्वचा व बालों के लिए उनके कार्यों को याद रखें।
Question 5. स्वेद ग्रंथियाँ का वर्णन करो।
Answer: स्वेद ग्रंथियाँ, जिन्हें पसीने की ग्रंथियाँ भी कहते हैं, सरल नलिकाकार ग्रंथियाँ होती हैं। इनका निचला हिस्सा चर्म में गहराई में होता है और इनकी नलिकाएँ अधिचर्म की सतह पर खुलती हैं। ये एक्राइन या मीरोक्राइन प्रकार की ग्रंथियाँ हैं जो पसीना स्रावित करती हैं। पसीना शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है और इसमें जल, लवण, यूरिया तथा \( \text{CO}_2 \) होता है। ये ग्रंथियाँ मुख्य रूप से हथेलियों, तलुओं और बगल में सर्वाधिक होती हैं।
In simple words: पसीने की ग्रंथियाँ चमड़ी में होती हैं। ये पसीना बाहर निकालती हैं, जिससे हमारा शरीर ठंडा रहता है। पसीने में पानी, नमक और कुछ गंदगी होती है।
🎯 Exam Tip: स्वेद ग्रंथियों के प्रकार (एक्राइन/मीरोक्राइन), उनके स्राव (पसीना) की संरचना और शरीर के तापमान नियंत्रण में उनकी भूमिका को याद रखें।
Question 6. स्तन ग्रंथियों का वर्णन करो।
Answer: स्तन ग्रंथियाँ मानव में वक्ष भाग में स्थित होती हैं और चर्म की गहराई में पाई जाती हैं। ये संयुक्त नलिकाकार या कूपिकीय प्रकार की होती हैं और एपोक्राइन श्रेणी में आती हैं। ये ग्रंथियाँ मादाओं में सक्रिय होती हैं और शिशु के पोषण के लिए दूध का स्रावण करती हैं। इनके विकास और दूध निष्कासन को एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और ऑक्सीटोसिन हार्मोन नियंत्रित करते हैं। ये तेल ग्रंथियों का ही रूपान्तरण हैं।
In simple words: स्तन ग्रंथियाँ छाती में होती हैं। ये एपोक्राइन तरह की ग्रंथियाँ हैं जो बच्चों के लिए दूध बनाती हैं। हार्मोन इनके काम को नियंत्रित करते हैं। ये असल में तेल ग्रंथियों का ही बदला हुआ रूप हैं।
🎯 Exam Tip: स्तन ग्रंथियों की संरचना, उनके प्रकार, हार्मोनल नियंत्रण और उनके कार्य को याद रखें।
Question 7. त्वचा के पाँच कार्य लिखो।
Answer: त्वचा को 'हरफनमौला' अंग कहा जाता है क्योंकि यह कई महत्वपूर्ण कार्य करती है:
1. शरीर की सुरक्षा: यह बाहरी चोट, हानिकारक जीवाणुओं, कृमियों, फफूंद और पराबैंगनी किरणों से शरीर को एक सुरक्षात्मक आवरण प्रदान करती है।
2. तापमान नियंत्रण: पसीने के स्राव और वसा की परत के माध्यम से शरीर के तापमान को स्थिर रखती है, जिससे शरीर न तो बहुत गर्म हो और न ही बहुत ठंडा।
3. शरीर की आकृति: यह शरीर को एक निश्चित आकृति बनाए रखने में मदद करती है, क्योंकि यह आंतरिक अंगों को ढँक कर रखती है।
4. खाद्य संग्रह: त्वचा के नीचे वसा ऊतक में वसा का संचय होता है, जो ऊर्जा भंडारण और इन्सुलेशन का काम करता है।
5. उत्सर्जन: पसीने के माध्यम से अपशिष्ट पदार्थ जैसे लवण, यूरिया और \( \text{CO}_2 \) को शरीर से बाहर निकालने में सहायता करती है।
In simple words: हमारी चमड़ी के पाँच मुख्य काम हैं: हमें बचाना, शरीर का तापमान सही रखना, शरीर को आकार देना, खाना जमा करना और गंदगी को बाहर निकालना।
🎯 Exam Tip: त्वचा के सभी प्रमुख कार्यों को उनकी संक्षिप्त व्याख्या के साथ याद रखें।
Question 8. श्रृंगी भवन किसे कहते हैं ? इससे बनने वाले कौन-कौन से अंग है, उनके नाम लिखो।
Answer: श्रृंगी भवन वह प्रक्रिया है जिसमें अधिचर्म की बाहरी कोशिकाएँ किरेटिन नामक कठोर प्रोटीन से भर जाती हैं और निर्जीव हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को किरेटिनाइजेशन या श्रृंगीभवन कहते हैं। इस प्रक्रिया से मानव शरीर में सुरक्षा के लिए बाल और नाखून जैसे बाह्य कंकाल के अंग बनते हैं।
In simple words: श्रृंगी भवन का मतलब है कि हमारी चमड़ी की बाहरी कोशिकाएँ कठोर हो जाती हैं और मर जाती हैं। इससे बाल और नाखून जैसी मजबूत चीजें बनती हैं जो हमें बचाती हैं।
🎯 Exam Tip: श्रृंगी भवन की परिभाषा और इससे बनने वाले दो-तीन मुख्य अंगों के उदाहरण याद रखें।
Question 9. ऐरेक्टर पिलाई पेशियों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
Answer: ऐरेक्टर पिलाई पेशियाँ विशेष प्रकार की अरेखित (चिकनी) मांसपेशियाँ होती हैं जो बालों के पुटिकाओं से निकलकर चर्म में जुड़ी होती हैं। ये पेशियाँ बालों की गति को नियंत्रित करती हैं, जिससे ठंड लगने या डरने पर बाल खड़े हो जाते हैं (जिसे रोंगटे खड़े होना कहते हैं)। इन पेशियों के चारों ओर तंत्रिका तंतुओं का जाल होता है जो इन्हें नियंत्रित करता है।
In simple words: ऐरेक्टर पिलाई पेशियाँ छोटी मांसपेशियाँ होती हैं जो बालों की जड़ों से जुड़ी होती हैं। जब ये सिकुड़ती हैं, तो हमारे बाल खड़े हो जाते हैं, जैसे ठंड लगने या डरने पर।
🎯 Exam Tip: ऐरेक्टर पिलाई पेशियों के स्थान, प्रकार और 'रोंगटे खड़े होने' की प्रतिक्रिया में उनकी भूमिका को याद रखें।
Question 10. आँख व कान से सम्बन्धित त्वचीय ग्रंथियों का वर्णन करो।
Answer: आँख और कान से संबंधित दो मुख्य त्वचीय ग्रंथियाँ हैं:
1. मीबोमियन ग्रंथियाँ (Meibomian glands): ये सीबेसियस ग्रंथियों के रूपान्तरण से बनती हैं और पलकों की बरौनियों के नीचे स्थित होती हैं। ये एक तैलीय पदार्थ छोड़ती हैं जो आँखों की पुतली को नम और सुरक्षित रखता है, जिससे पतली फिल्म बनती है।
2. सेरूमिनस ग्रंथियाँ (Seruminous Glands): ये कुंडलित व नलिकाकार ग्रंथियाँ बाहरी कान नहर की त्वचा में स्थित होती हैं। ये पसीने की ग्रंथियों का एक रूपान्तरण हैं और सीबम के साथ मिलकर सेरूमन (कान का मोम) बनाती हैं, जो कान के परदे की रक्षा करता है।
In simple words: हमारी आँखों की पलकों के नीचे मीबोमियन ग्रंथियाँ होती हैं जो तेल जैसा पदार्थ बनाती हैं ताकि आँखें नम रहें। कानों में सेरूमिनस ग्रंथियाँ होती हैं जो कान का मोम बनाती हैं, यह कान के परदे को बचाता है।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट स्थानों पर पाई जाने वाली ग्रंथियों के नाम, उनके स्राव और उनके सुरक्षात्मक कार्यों को याद रखें।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 21 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. मानव की त्वचा के विभिन्न भागों का सचित्र वर्णन करो।
Answer: मानव की त्वचा के दो प्रमुख स्तर होते हैं:
I. अधिचर्म (Epidermis): यह त्वचा की सबसे ऊपरी परत है, जो भ्रूणीय एक्टोडर्म से विकसित होती है और इसमें रक्त वाहिकाएँ नहीं होतीं। यह कई परतों की कोशिकाओं से बनी होती है और भीतर से बाहर की ओर इसके पाँच मुख्य स्तर होते हैं:
1. अंकुरण स्तर या मैल्पीघी स्तर (Stratum germinativum or stratum malpighi): यह सबसे भीतरी परत है, जहाँ नई कोशिकाएँ बनती हैं और त्वचा को रंग देने वाले वर्णक कोशिकाएँ (Pigment Cells) होती हैं।
2. शूल स्तर या स्पाइनोसम स्तर (Stratum spinosum): यह बहुकोणीय कोशिकाओं से बना होता है और त्वचा को दृढ़ता प्रदान करता है।
3. ग्रॅन्युलोसम स्तर (Stratum granulosum): इस परत की कोशिकाएँ केराटिन बनाना शुरू करती हैं।
4. ल्यूसिडियम स्तर (Stratum lucidum): यह एक पतली, स्पष्ट परत है जो मुख्य रूप से हथेलियों और तलुओं में पाई जाती है।
5. कॉरनियम स्तर (Stratum corneum): यह सबसे बाहरी सुरक्षात्मक परत है, जिसमें मृत, चपटी और शल्काकार कोशिकाएँ होती हैं।
II. चर्म (Dermis): यह अधिचर्म के नीचे की परत है, जो भ्रूणीय मीसोडर्म से बनती है। यह लोचदार और मजबूत होती है तथा इसमें रक्त वाहिकाएँ, तंत्रिकाएँ, पेशी तंतु और त्वचीय ग्रंथियाँ पाई जाती हैं। चर्म को दो भागों में बांटा जाता है:
• पेपिलरी स्तर (Papillary layer): यह ऊपरी पतला स्तर होता है जिसमें कोलेजन तंतु, लचीले तंतु और रक्त वाहिकाएँ अधिक होती हैं। इसमें रसांकुर (villi) होते हैं जो अधिचर्म से जुड़ते हैं।
• जालिका स्तर (Reticular layer): यह निचला मोटा स्तर होता है जिसमें मोटे तंतु, त्वचीय ग्रंथियाँ, रोम पुटिकाएँ, त्वक संवेदांग और वसा ऊतक पाए जाते हैं। यह परत तापमान नियंत्रण और खाद्य संग्रह में भी मदद करती है।
In simple words: हमारी चमड़ी के दो मुख्य हिस्से हैं: अधिचर्म और चर्म। अधिचर्म सबसे ऊपर की परत है, जिसमें पाँच और परतें होती हैं, जैसे सबसे नीचे नई कोशिकाएँ बनाने वाली परत और सबसे ऊपर सुरक्षा देने वाली मृत कोशिकाओं की परत। चर्म अधिचर्म के नीचे होता है, इसमें रक्त और नसें होती हैं, और यह भी दो हिस्सों में बंटा होता है। यह चमड़ी हमें कई तरह से मदद करती है।
🎯 Exam Tip: त्वचा की संरचना के प्रमुख भागों (अधिचर्म, चर्म) और उनकी उप-परतों (स्तरों) के नाम, क्रम और मुख्य कार्यों को याद रखना निबंधात्मक प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. मानव की त्वचा के व्युत्पन्न कौन-कौन से हैं, वर्णन करो।
Answer: मानव की त्वचा से कई विशेष संरचनाएँ बनती हैं, जिन्हें त्वचा के व्युत्पन्न कहते हैं। इनमें मुख्य रूप से रोम (बाल) और त्वचीय ग्रंथियाँ शामिल हैं:
1. रोम (Hair): रोम अधिचर्म के मैल्पीधी स्तर से बनते हैं और इनके निम्नलिखित भाग होते हैं:
(b) रोम की जड़ (Hair root): यह रोम पुटक के तल पर स्थित कोशिकाओं से बनती है जो सक्रियता से विभाजित होती रहती हैं।
(c) रोम पैपिला (Hair papilla): यह रोम पुटक की तली पर एक गड्ढा होता है जिसमें चर्म की रुधिर कोशिकाएँ पोषक पदार्थ पहुंचाती हैं।
(d) रोम काण्ड (Hair shaft): यह चर्म से बाहर निकला हुआ ठोस भाग है जो निर्जीव होता है। इसके तीन भाग होते हैं: उपत्वचा (Cuticle - सबसे बाहरी परत), वल्कुट (Cortex - मध्य परत जिसमें वर्णक कण होते हैं), और मध्यांश (Medulla - सबसे भीतरी मुख्य भाग)।
(e) ऐरेक्टर पिलाई पेशियाँ (Arrector pili muscles): ये पेशियाँ बालों की गति का संचालन करती हैं, जिससे बाल खड़े हो जाते हैं।
2. त्वक ग्रंथियाँ (Cutaneous glands): त्वचा की ग्रंथियाँ बहिस्रावी होती हैं और अधिचर्म के मैल्पीधी स्तर के चर्म में अंतर्वलन से बनती हैं। ये निम्नलिखित प्रकार की होती हैं:
(a) स्वेद ग्रंथियाँ (Sweat glands): ये सरल नलिकाकार ग्रंथियाँ हैं जो पसीना स्रावित कर शरीर के तापमान को नियंत्रित करती हैं।
(b) तेल या सीबेसियस ग्रंथियाँ (Sebaceous glands): ये बालों की जड़ों और पुटिकाओं के पास पाई जाती हैं। ये सीबम नामक तैलीय पदार्थ का स्रावण करती हैं जो त्वचा और बालों को चिकना रखता है।
(c) स्तन ग्रंथियाँ (Mammary glands): ये वक्ष भाग में स्थित एपोक्राइन प्रकार की ग्रंथियाँ हैं जो मादाओं में दूध का स्रावण करती हैं।
(f) मीबोमियन ग्रंथियाँ (Meibomain glands): ये पलकों की बरौनियों के नीचे पाई जाती हैं और आँखों को चिकना रखने वाला तैलीय पदार्थ स्रावित करती हैं।
(g) जेस ग्रंथियाँ (Zeis glands): ये भी सीबेसियस ग्रंथियों का रूपान्तरण हैं और पलकों की बरौनियों की पुटिकाओं में स्थित होती हैं।
यह सभी व्युत्पन्न त्वचा के विभिन्न सुरक्षात्मक, संवेदी और स्रावी कार्यों में सहायक होते हैं।
In simple words: हमारी चमड़ी से कई खास चीजें बनती हैं, जैसे बाल और अलग-अलग तरह की ग्रंथियाँ। बालों में जड़, तना और उन्हें हिलाने वाली छोटी मांसपेशियाँ होती हैं। ग्रंथियों में पसीने की ग्रंथियाँ, तेल की ग्रंथियाँ, दूध की ग्रंथियाँ और आँखों-पलकों के पास की ग्रंथियाँ शामिल हैं। ये सब चमड़ी के कामों में मदद करती हैं।
🎯 Exam Tip: त्वचा के सभी मुख्य व्युत्पन्नों (जैसे बाल, नाखून, और विभिन्न ग्रंथियाँ) को याद रखें और प्रत्येक के प्रमुख कार्यों और स्थान का वर्णन करने में सक्षम हों।
Question 3. मानव की त्वचा में पायी जाने वाली विभिन्न ग्रंथियों का संक्षेप में वर्णन करो।
Answer: मानव की त्वचा में कई प्रकार की बहिःस्रावी ग्रंथियाँ पाई जाती हैं, जो अधिचर्म की सतह पर खुलती हैं। ये ग्रंथियाँ अधिचर्म के मैल्पीघी स्तर के चर्म में अंतर्वलन से बनती हैं। प्रमुख ग्रंथियाँ इस प्रकार हैं:
(a) स्वेद ग्रंथियाँ (Sweat glands): ये सरल नलिकाकार ग्रंथियाँ होती हैं, जो पसीना स्रावित कर शरीर के तापमान को नियंत्रित करती हैं। पसीने में जल, लवण, यूरिया और \( \text{CO}_2 \) होते हैं। ये एक्राइन या मोरोक्राइन प्रकार की होती हैं।
(b) तेल या सीबेसियस ग्रंथियाँ (Sebaceous glands): ये ग्रंथियाँ बालों की जड़ों और पुटिकाओं (Follicles) के पास पाई जाती हैं और सीबम नामक तैलीय पदार्थ का स्रावण करती हैं। सीबम त्वचा और बालों को चिकना और जलरोधी बनाता है। ये होलोक्राइन प्रकार की होती हैं।
In simple words: हमारी चमड़ी में कई तरह की ग्रंथियाँ होती हैं जो बाहर की ओर खुलती हैं। इनमें पसीने की ग्रंथियाँ शामिल हैं जो पसीना निकाल कर शरीर को ठंडा रखती हैं। दूसरी हैं तेल की ग्रंथियाँ, जो बालों की जड़ों के पास होती हैं और तेल (सीबम) बनाती हैं ताकि हमारी चमड़ी और बाल चिकने रहें।
🎯 Exam Tip: त्वचा में पाई जाने वाली विभिन्न ग्रंथियों के प्रकारों, उनके स्राव और उनके मुख्य कार्यों को संक्षेप में याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. मानव की त्वचा में पायी जाने वाली विभिन्न ग्रंथियों का संक्षेप में वर्णन करो।
Answer: त्वचा में कई ग्रंथियाँ होती हैं जो बाहर निकलती हैं (बहिस्रावी)। इनमें एक नलिका होती है जो अधिचर्म की सतह पर खुलती है। ये ग्रंथियाँ अधिचर्म की मैल्पीघी परत से चर्म में अंदर की ओर मुड़कर बनती हैं। त्वचा की ग्रंथियाँ निम्नलिखित प्रकार की होती हैं:
(a) स्वेद ग्रंथियाँ (Sweat glands): ये ग्रंथियाँ साधारण नलिकाकार प्रकार की होती हैं। इनका नीचे का कुंडलित भाग चर्म की गहराई में धंसा रहता है। इनकी पतली नलिका अधिचर्म की सतह पर बाहर की ओर खुलती है। इन ग्रंथियों से पसीना निकलता है। पसीने में पानी, कुछ नमक, यूरिया और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) होते हैं, इसलिए पसीना नमकीन होता है। ये एक्राइन (Acrine) या मोरोक्राइन (Merocrine) प्रकार की ग्रंथियाँ हैं जिनका स्रावी पदार्थ कोशिका झिल्ली से धीरे-धीरे बाहर आता है। मनुष्य में लगभग 25 लाख स्वेद ग्रंथियाँ होती हैं। मानव में ऐपोक्राइन स्वेद ग्रंथियाँ आँख की पलकों, जननांगों, गुदा और निप्पल के पास पाई जाती हैं। हथेली, तलवों और काँख (बगल) में सबसे ज्यादा स्वेद ग्रंथियाँ होती हैं। स्वेद ग्रंथियों का मुख्य काम शरीर के तापमान को नियंत्रित करना है।
(b) तेल या सीबेसियस ग्रंथियाँ (Sebaceous glands): ये ग्रंथियाँ बालों की जड़ों और पुटिकाओं (फॉलिकल्स) के पास पाई जाती हैं। ये पुटिका की एपिथीलियम परत के मुड़ने से बनती हैं। ये ग्रंथियाँ पुटिका में ही खुलती हैं। तेल ग्रंथियाँ होलोक्राइन प्रकार की होती हैं, जिनमें स्राव भर जाने पर ग्रंथि कोशिका टूट जाती है और स्रावित पदार्थ के साथ बाहर निकल जाती है। तेल ग्रंथियाँ बनावट में शाखित और कोष्ठीय (छोटे कक्षों वाली) होती हैं। इन ग्रंथियों में दूध जैसा गाढ़ा तैलीय पदार्थ बनता है जिसे सीबम कहते हैं। यह सीबम रोम काण्ड (बाल के शाफ्ट) को चिकना रखता है, जिससे त्वचा चिकनी और पानी प्रतिरोधी बनी रहती है। तेल ग्रंथियाँ शरीर के सभी हिस्सों में होती हैं, लेकिन हथेलियों और तलवों में नहीं पाई जातीं। होंठ, शिश्न मुंड, स्तन के निप्पल पर बाल नहीं होते, पर ये ग्रंथियाँ वहाँ भी होती हैं। इन ग्रंथियों में सूर्य के प्रकाश से विटामिन-डी भी बन सकता है।
(c) स्तन ग्रंथियाँ (Mammary glands): ये ग्रंथियाँ मानव में वक्ष भाग में होती हैं। ये ग्रंथियाँ चर्म की गहराई में स्थित होती हैं। इनकी संरचना संयुक्त नलिकाकार या संयुक्त कूपिकीय (कोशिका गुच्छों वाली) प्रकार की होती है। स्तन में कई नलिकाएँ मिलकर सह-नलिकाएँ बनाती हैं। ये ग्रंथियाँ एपोक्राइन प्रकार की होती हैं। स्तन ग्रंथियाँ मादाओं में सक्रिय होती हैं और दूध का स्रावण करती हैं जिससे शिशु को पोषण मिलता है। स्तन ग्रंथियों की वृद्धि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन्स द्वारा नियंत्रित होती है, और इनसे दूध का निष्कासन ऑक्सीटोसीन हॉर्मोन द्वारा होता है। आमतौर पर, स्तन ग्रंथियाँ तेल ग्रंथियों के बदले हुए रूप होते हैं।
(d) सेमिनस ग्रंथियाँ (Seruminous glands): ये ग्रंथियाँ बाहरी कान की नलिका की त्वचा में स्थित होती हैं। ये कुंडलित और नलिकाकार ग्रंथियाँ होती हैं। ये स्वेद ग्रंथियों का ही बदला हुआ रूप होती हैं। ये सीबेसियस ग्रंथियों के साथ मिलकर सेरूमन (कर्ण मोम या कान का मैल) नामक पदार्थ का स्रावण करती हैं। यह सेरूमन कान के पर्दे की सुरक्षा करता है।
(e) मूलाधार या वक्षण ग्रंथियाँ (Perineal glands): ये सीबेसियस ग्रंथियों का बदला हुआ रूप होती हैं। ये ग्रंथियाँ गुदा और मूत्र जनन छिद्र के बीच मूलाधार या वक्षण क्षेत्र में स्थित होती हैं। ये एक गंध वाला पदार्थ स्रावित करती हैं, इसलिए इन्हें गंध ग्रंथियाँ (Scent glands) भी कहते हैं। ये एपोक्राइन प्रकार की ग्रंथियाँ होती हैं।
(f) मीबोमियन ग्रंथियाँ (Meibomian glands): ये सीबेसियस ग्रंथियों के ही बदले हुए रूप हैं। ये ग्रंथियाँ पलकों की बरौनियों (Eye-lashes) के नीचे पाई जाती हैं। ये एक तैलीय पदार्थ निकालती हैं जो कार्निया (आँख के सामने का पारदर्शी हिस्सा) को चिकना रखता है। यह कार्निया पर एक पतली परत बनाता है और उसकी सुरक्षा करता है।
(g) जेस ग्रंथियाँ (Zeis glands): ये भी सीबेसियस ग्रंथियों का बदला हुआ रूप होती हैं। ये ग्रंथियाँ भी पलकों की बरौनियों की पुटिकाओं (फॉलिकल्स) में स्थित होती हैं। ये भी तैलीय पदार्थ का स्रावण करती हैं जो बरौनियों को चिकना बनाए रखने में सहायता करती हैं।
In simple words: मानव की त्वचा में कई तरह की ग्रंथियाँ होती हैं, जैसे पसीने की ग्रंथियाँ, तेल ग्रंथियाँ, स्तन ग्रंथियाँ, कान का मैल बनाने वाली ग्रंथियाँ, मीबोमियन ग्रंथियाँ और जेस ग्रंथियाँ। हर ग्रंथि का अपना खास काम होता है, जैसे शरीर का तापमान कंट्रोल करना, त्वचा को चिकना रखना या अंगों की सुरक्षा करना।
🎯 Exam Tip: विभिन्न ग्रंथियों के नाम, उनके प्रकार (जैसे बहिस्रावी, होलोक्राइन, एपोक्राइन), उनके स्राव और उनके मुख्य कार्यों को याद रखें। यह उत्तर को विस्तृत और सटीक बनाता है।
त्वचा के कार्य (Functions of Skin)
शरीर में त्वचा बहुत से महत्वपूर्ण काम करती है, इसलिए इसे शरीर का हरफनमौला अंग (Jack of all trades) कहते हैं। त्वचा के प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:
- शरीर की सुरक्षा (Protection of body): त्वचा शरीर को बाहरी चोट, रगड़, धक्कों आदि से बचाती है। यह हानिकारक जीवाणुओं, कीटाणुओं और फफूंद के प्रवेश को रोकती है और उनसे शरीर को सुरक्षित रखती है। त्वचा से बनी संरचनाएँ जैसे- बाल, नाखून आदि शरीर के कोमल अंगों को सुरक्षित रखती हैं। त्वचा पानी प्रतिरोधी होती है और तीव्र प्रकाश में मौजूद पराबैंगनी किरणों (Ultraviolet rays) से रक्षा करती है।
- शरीर का ताप नियंत्रण (Temperature regulation of body): मानव एक समतापी प्राणी है, जिसका मतलब है कि वातावरण के ठंडा या गर्म होने पर भी शरीर का तापमान स्थिर रहता है। स्वस्थ मनुष्य के शरीर का तापमान 98.4°F होता है। त्वचा के नीचे की वसीय परत तापमान को नियंत्रित करने वाली परत बनाती है। स्वेद ग्रंथियाँ (Sweat glands) शरीर को ठंडा करने का काम करती हैं। शरीर का तापमान बढ़ने पर स्वेद ग्रंथियाँ ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं और पसीना निकालने लगती हैं, जो त्वचा की सतह से भाप बनकर उड़ता है और शरीर को ठंडा करता है। तापमान का नियंत्रण हाइपोथैलेमस में स्थित तापमान नियंत्रण केंद्र के निर्देशों के अनुसार होता है।
- शरीर की आकृति (Shape of the body): त्वचा शरीर की आकृति बनाए रखने में मदद करती है।
- खाद्य संग्रह (Storage of food materials): त्वचा के वसीय ऊतकों में वसा जमा होती है जो खाद्य भंडारण का काम करती है।
- उपयोगी पदार्थों का स्रावण (Secretion of useful substances): त्वचा में पाई जाने वाली विभिन्न ग्रंथियाँ तेल, कान का मोम, दूध और विटामिन-डी आदि उपयोगी पदार्थों को स्रावित करती हैं।
- उत्सर्जन (Excretion): त्वचा द्वारा पसीने में नमक, यूरिया और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) जैसे पदार्थ स्रावित होते हैं। इस तरह, त्वचा इन पदार्थों को बाहर निकालकर उत्सर्जन में सहायता करती है।
- गमन (Locomotion): त्वचा लचीली होने के कारण चलने-फिरने में सहायता करती है।
- कंकाल निर्माण (Skeleton formation): त्वचा की चर्म में मौजूद संयोजी ऊतकों से कलाजात अस्थियाँ (Membranous bones) बनती हैं।
- अवशोषण (Absorption): त्वचा तेल आदि के लिए पारगम्य होती है। इसलिए, इनकी मालिश करने पर त्वचा इन्हें सोखकर ऊतकों को लाभ पहुँचाती है।
- उद्दीपन ग्रहण (Reception of stimuli): त्वचा की चर्म में मौजूद विभिन्न संवेदी अंग संवेदनाओं को ग्रहण कर उसे संवेदी अंग का दर्जा देते हैं।
- दाँतों का निर्माण (Formation of teeth): दाँतों के कुछ हिस्से त्वचा की चर्म (Dermis) से बनते हैं। दाँत भोजन चबाने में सहायक होते हैं।
- लैंगिक आकर्षण (Sexual attraction): त्वचा में स्थित बालों का रंग, उनका फैलाव और मूलाधार ग्रंथियों द्वारा स्रावित गंध वाले पदार्थ लैंगिक आकर्षण में मदद करते हैं।
- पुनरूद्भवन (Regeneration): चोट लगने पर त्वचा की अधिचर्म में पुनरूद्भवन द्वारा घाव को भरने की बहुत क्षमता होती है।
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