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Detailed Chapter 19 प्रतिपालनीय कृषि RBSE Solutions for Class 12 Biology
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Class 12 Biology Chapter 19 प्रतिपालनीय कृषि RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Biology Chapter 19 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
RBSE Class 12 Biology Chapter 19 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. जैव उर्वरक के रूप में प्रयुक्त होने वाला शैवाल है-
(a) क्लेडोफोरा
(b) नास्टॉक
(c) स्पाइरोगाइरा
(d) उपरोक्त सभी
Answer: (b) नास्टॉक
In simple words: नास्टॉक एक प्रकार की शैवाल है जिसका उपयोग खेती में खाद के रूप में किया जाता है।
🎯 Exam Tip: जैव उर्वरकों के उदाहरण याद रखें, विशेषकर जो फसलों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 3. हेटरोसिस्ट निम्न में किससे सम्बन्धित है-
(a) विषाणु
(b) जीवाणु
(c) नास्टॉक
(d) राइजोबियम
Answer: (c) नास्टॉक
In simple words: हेटरोसिस्ट नास्टॉक जैसी कुछ शैवाल में पाई जाने वाली खास कोशिकाएँ होती हैं जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण का काम करती हैं।
🎯 Exam Tip: हेटरोसिस्ट और नाइट्रोजन स्थिरीकरण के बीच के संबंध को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 4. कौन-सा जीवाणु वायुमण्डल की मुक्त नाइट्रोजन का उपयोग करता है.
(a) राइजोबियम
(b) ई. कोली
(c) एजेटोबैक्टर
(d) उपरोक्त सभी
Answer: (c) एजेटोबैक्टर
In simple words: एजेटोबैक्टर एक जीवाणु है जो हवा में मौजूद नाइट्रोजन को सीधे मिट्टी में पौधों के उपयोग के लिए बदलता है।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणुओं के नाम और उनके प्रकार (सहजीवी/असहजीवी) याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 5. निम्न कौन-सी विधि प्रतिपालनीय कृषि की विधि नहीं है-
(a) मिश्रित कृषि
(b) सघन कृषि
(c) फसल चक्र
(d) जैविक कृषि
Answer: (b) सघन कृषि
In simple words: सघन कृषि प्रतिपालनीय कृषि का हिस्सा नहीं है क्योंकि इसमें अक्सर बहुत अधिक संसाधनों का उपयोग होता है जो पर्यावरण के लिए ठीक नहीं होता।
🎯 Exam Tip: प्रतिपालनीय कृषि के सिद्धांतों और तरीकों को जानें, और समझें कि कौन सी विधियाँ इसके विपरीत हैं।
RBSE Class 12 Biology Chapter 19 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. उत्पादन वृद्धि के लिए (i) एवं (ii) का अन्धाधुन्ध प्रयोग किया जा रहा है।
Answer: उत्पादन वृद्धि के लिए (i) रासायनिक उर्वरकों एवं (ii) पीड़कनाशियों का अन्धाधुन्ध प्रयोग किया जा रहा है।
In simple words: अधिक फसल उगाने के लिए किसान बहुत ज्यादा रासायनिक खाद और कीटनाशक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति वाले प्रश्नों में सही शब्दों का सटीक ज्ञान आवश्यक है।
Question 2. (i) मूलतः प्राकृतिक ढंग से खेती करने की तकनीक है।
Answer: (i) जैविक कृषि मूलतः प्राकृतिक ढंग से खेती करने की तकनीक है।
In simple words: जैविक कृषि वह तरीका है जिसमें खेती प्राकृतिक तरीकों से बिना किसी रसायन के की जाती है।
🎯 Exam Tip: जैविक कृषि की परिभाषा और मुख्य विशेषताओं को याद रखें।
Question 3. वे सूक्ष्मजीव जो मृदा की पोषकता बढ़ाने में सहायक होते हैं, (i) कहलाते हैं?
Answer: वे सूक्ष्मजीव जो मृदा की पोषकता बढ़ाने में सहायक होते हैं, (i) जैव उर्वरक कहलाते हैं।
In simple words: मिट्टी को उपजाऊ बनाने में मदद करने वाले छोटे जीव जैव उर्वरक कहलाते हैं।
🎯 Exam Tip: जैव उर्वरकों की परिभाषा और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 4. फास्फेट विलयनकारी एक जीवाणु का नाम लिखो।
Answer: फास्फेट विलयनकारी जीवाणु का नाम स्यूडोमोनास है।
In simple words: स्यूडोमोनास एक जीवाणु है जो मिट्टी में फास्फेट को पौधों के लिए घुलनशील बनाता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जीवाणुओं के विशिष्ट कार्यों को याद रखें, जैसे फास्फेट को घुलनशील बनाना।
Question 5. वे जन्तु तथा पादप जो फसलों व अन्य उत्पादों को क्षति पहुँचाते हैं, कहलाते हैं?
Answer: वे जन्तु तथा पादप जो फसलों व अन्य उत्पादों को क्षति पहुँचाते हैं, पीड़क (Pests) कहलाते हैं।
In simple words: जो जीव या पौधे फसल को नुकसान पहुँचाते हैं, उन्हें पीड़क कहते हैं।
🎯 Exam Tip: पीड़क की परिभाषा और उनके उदाहरणों को समझें।
Question 7. ऐनाबीना एजोली उत्पादन कौन से अनुसंधान केन्द्र पर किया जा रहा है?
Answer: ऐनाबीना एजोली का व्यापक उत्पादन केन्द्रीय चावल अनुसंधान केन्द्र, कटक में किया जा रहा है।
In simple words: एनाबीना एजोली नामक जैव उर्वरक को कटक के चावल अनुसंधान केंद्र में बड़े पैमाने पर बनाया जा रहा है।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट अनुसंधान केंद्रों और उनके द्वारा उत्पादित जैव उर्वरकों के बीच के संबंध को जानें।
Question 8. नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले असहजीवी जीवाणु का नाम लिखिए।
Answer: नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले असहजीवी जीवाणु एजोटोबैक्टर, एजोस्पाइरिलम और क्लोस्ट्रीडियम हैं।
In simple words: कुछ जीवाणु जैसे एजोटोबैक्टर, एजोस्पाइरिलम और क्लोस्ट्रीडियम बिना किसी पौधे के साथ रहते हुए भी हवा से नाइट्रोजन को मिट्टी में बदल देते हैं।
🎯 Exam Tip: नाइट्रोजन स्थिरीकरण में शामिल विभिन्न जीवाणुओं, खासकर सहजीवी और असहजीवी प्रकारों के नाम याद रखें।
RBSE Class 12 Biology Chapter 19 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. प्रतिपालनीय कृषि (Sustainable Agriculture) से आप क्या समझते हैं?
Answer: प्रतिपालनीय कृषि वह खेती का तरीका है जिसमें पौधों और पालतू जानवरों को इस तरह से पाला जाता है कि उनके उत्पादन वाली जगह को कोई नुकसान न पहुँचे। इसका लक्ष्य लंबे समय तक उत्पादन जारी रखना है ताकि सभी लोगों की ज़रूरतें पूरी होती रहें।
In simple words: प्रतिपालनीय कृषि एक स्थायी खेती का तरीका है जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना लंबे समय तक भोजन पैदा करता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिपालनीय कृषि की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें, और इसके मुख्य उद्देश्य को समझाएँ।
Question 2. जैविक कृषि की आवश्यकता क्यों अनुभव हुई? समझाइये।
Answer: जैविक कृषि की ज़रूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की उर्वरक शक्ति लगातार कम हो रही थी। इन रसायनों से प्रदूषण भी बढ़ रहा है और इनकी उत्पादन प्रक्रिया महँगी भी है, जिसमें कोयला, पेट्रोलियम जैसे प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग होता है। जैविक कृषि का मुख्य लक्ष्य प्रकृति को प्रदूषण से मुक्त रखना, मिट्टी की उर्वरक शक्ति को बचाना और बढ़ाना है। मिट्टी एक जीवित प्रणाली है जिसमें लाभकारी सूक्ष्मजीवों का महत्वपूर्ण योगदान होता है जो पौधों को पोषक तत्व प्राप्त करने में मदद करते हैं। जैविक कृषि का मुख्य विचार इस सूक्ष्मजीव चक्र को और मजबूत बनाना है।
In simple words: रासायनिक खादों से मिट्टी खराब हो रही थी और प्रदूषण बढ़ रहा था, इसलिए जैविक खेती की ज़रूरत महसूस हुई। इसका मकसद मिट्टी को बचाना और पर्यावरण को साफ रखना है।
🎯 Exam Tip: जैविक कृषि की आवश्यकता के कारणों को प्रदूषण, मिट्टी की उर्वरता और प्राकृतिक संतुलन के संदर्भ में समझाएँ।
Question 3. नील हरित शैवालों का जैव उर्वरकों के रूप में क्या महत्व है? समझाइये।
Answer: नील हरित शैवाल जैव उर्वरकों के रूप में बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि:
• वे मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करते हैं, जो पौधों की वृद्धि के लिए बहुत ज़रूरी है। रासायनिक उर्वरकों के लगातार उपयोग से यह कमी हो रही है।
• सायनोबैक्टीरिया (नील हरित शैवाल) जैसे एनाबीना, नोस्टोक, प्लेक्टोनीमा नाइट्रोजन स्थिरीकरण का काम करते हैं।
• ये शैवाल मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ाते हैं और खनिजीकरण की प्रक्रिया को तेज करते हैं, जिससे फसल की उपज कई प्रतिशत बढ़ सकती है।
• धान के खेतों में नील हरित शैवाल का उपयोग धान की उपज बढ़ाता है। एनाबीना पिन्नाटा एक बेहतरीन जैव उर्वरक है, और इसका एजोला के साथ उपयोग करने से चावल के उत्पादन में 50% तक वृद्धि हो सकती है।
• ये भूमि की ऊसरता (Sterility) को भी कम करते हैं।
In simple words: नील हरित शैवाल मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं, नाइट्रोजन बढ़ाते हैं, और फसलों की पैदावार में बहुत मदद करते हैं, खासकर धान की खेती में।
🎯 Exam Tip: नील हरित शैवालों के विभिन्न लाभों को बिंदुओं में लिखें, विशेषकर नाइट्रोजन स्थिरीकरण और फसल उत्पादन में वृद्धि पर ध्यान दें।
Question 4. माइकोराइजा (Mycorohiza) किसे कहते हैं? इसके महत्व पर प्रकाश डालिए।
Answer: माइकोराइजा कवकों (फंगस) और पौधों की जड़ों के बीच एक सहजीवन संबंध है, जिसे कवकमूल भी कहते हैं। इस संबंध में कवक मिट्टी से पोषक तत्वों को सोखकर पौधे को देते हैं, और बदले में पौधा कवक को पोषण प्रदान करता है।
महत्व: माइकोराइजी मिट्टी से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों को अधिक मात्रा में अवशोषित करने में मदद करते हैं। यह माइकोराइजा की एक खास विशेषता है।
In simple words: माइकोराइजा फंगस और पौधों की जड़ों के बीच दोस्ती है, जहाँ फंगस पौधे को खाना ढूंढने में मदद करती है और पौधा उसे देता है। यह मिट्टी से पोषक तत्व लेने में बहुत सहायक है।
🎯 Exam Tip: माइकोराइजा की परिभाषा और पौधे के लिए इसके पोषक तत्व अवशोषण के महत्व को स्पष्ट करें।
Question 5. जैविक कृषि (Organic Agriculture) का आर्थिक एवं पारिस्थितिक महत्व समझाइये।
Answer: जैविक कृषि का आर्थिक एवं पारिस्थितिक महत्व निम्नलिखित है:
• जैविक कृषि एक बहुत सस्ती और आसान विधि है, जिसे छोटे किसान भी आसानी से अपना सकते हैं।
• जैविक कृषि में जैव उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की पानी रोकने की क्षमता और हवा का संचार बढ़ता है।
• जैव उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी का तापमान और pH नियंत्रित रहता है, जिससे उसमें मौजूद जीवाणु सक्रिय रहते हैं।
• जैविक कृषि से मिट्टी में रसायनों का जहरीला प्रभाव कम होता है, जिससे पर्यावरण का संतुलन बना रहता है।
• यह ऊसर भूमि (खराब भूमि) को भी बेहतर बनाती है क्योंकि इसमें सड़ने-गलने से कार्बनिक अम्ल बनते हैं जो मिट्टी की क्षारीयता को कम करते हैं।
In simple words: जैविक कृषि सस्ती है, मिट्टी को स्वस्थ रखती है, पर्यावरण को साफ रखती है, और खराब जमीन को भी सुधारती है।
🎯 Exam Tip: जैविक कृषि के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों को अलग-अलग बिंदुओं में समझाएँ, जिससे उत्तर स्पष्ट और व्यवस्थित लगे।
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RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 19 प्रतिपालनीय कृषि
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