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Detailed Chapter 16 पादप ऊतक संवर्धन RBSE Solutions for Class 12 Biology
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Class 12 Biology Chapter 16 पादप ऊतक संवर्धन RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Biology Chapter 16 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
RBSE Class 12 Biology Chapter 16 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. सर्वप्रथम परागकोश संवर्धन द्वारा अगुणित पादप विकसित करने का श्रेय किसे प्राप्त है-
(अ) जौहरी एवं माहेश्वरी
(ब) हैबरलैण्ड
(स) पी.आर. व्हाइट
(द) गुहा एवं माहेश्वरी
Answer: (द) गुहा एवं माहेश्वरी
In simple words: सबसे पहले परागकोश को उगाकर एक नया पौधा बनाने का काम गुहा और माहेश्वरी ने किया था।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक के नाम और उनकी खोजें अक्सर परीक्षाओं में पूछी जाती हैं, इन्हें याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. संक्रमित पादप से रोगरहित पादप विकसित किए जाते हैं-
(अ) प्ररोह कलिका संवर्धन द्वारा
(ब) प्रोटोप्लास्ट संवर्धन द्वारा
(स) विभज्योतक संवर्धन द्वारा
(द) परागकोश संवर्धन द्वारा
Answer: (स) विभज्योतक संवर्धन द्वारा
In simple words: किसी भी रोगग्रस्त पौधे से स्वस्थ पौधे बनाने के लिए उसकी विभज्योतक कोशिकाओं को उगाया जाता है।
🎯 Exam Tip: विभज्योतक संवर्धन विधि का उपयोग रोगमुक्त पौधों को विकसित करने के लिए किया जाता है क्योंकि यह वायरस मुक्त होता है।
Question 3. पादप ऊतक संवर्धन का जनक कहलाते हैं-
(अ) रॉबर्ट हुक
(ब) हैबरलैण्ड
(स) स्टीवर्ड।
(द) कोकिंग
Answer: (ब) हैबरलैण्ड
In simple words: पादप ऊतक संवर्धन की शुरुआत का श्रेय हैबरलैण्ड नामक वैज्ञानिक को दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: हैबरलैण्ड को पादप ऊतक संवर्धन का जनक कहा जाता है, यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य है।
Question 4. Ti प्लाज्मिड पाया जाता है-
(अ) ए. ट्यूमेफेसिएन्स में
(ब) ए. राइजोजिन्स में
(स) ई. कोली में
(द) बैसिलस थूरिजिएन्सिस में
Answer: (अ) ए. ट्यूमेफेसिएन्स में
In simple words: Ti प्लाज्मिड नामक एक विशेष अणु एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमेफेसिएन्स नामक जीवाणु में पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: Ti प्लाज्मिड का उपयोग आनुवंशिक इंजीनियरिंग में पौधों में जीन डालने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में किया जाता है।
Question 5. पादप कोशिका भित्ति के एन्जाइमी अपघटन से प्रोटोप्लास्ट प्राप्त करने का श्रेय है-
(अ) टी. मुरासिगे को
(ब) ई. बॉल को
(स) एफ. डब्लू बेन्ट को
(द) ई.सी. कोकिंग को
Answer: (द) ई.सी. कोकिंग को
In simple words: पौधों की कोशिका भित्ति को एंजाइमों की मदद से हटाकर प्रोटोप्लास्ट बनाने का काम ई.सी. कोकिंग ने किया था।
🎯 Exam Tip: प्रोटोप्लास्ट संवर्धन पादप प्रजनन में महत्वपूर्ण है, और कोकिंग ने इसमें एक महत्वपूर्ण योगदान दिया।
Question 6. त्रिगुणित पादप संवर्धन हेतु निम्नलिखित में से कौन-सा कतोतक प्रयुक्त होता है-
(अ) प्ररोह तन्त्र
(ब) भ्रूणकोष
(स) भ्रूण
(द) परागकोष
Answer: (ब) भ्रूणकोष
In simple words: यदि आपको त्रिगुणित पौधा उगाना है, तो उसके लिए भ्रूणकोष नामक भाग का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: त्रिगुणित पादप संवर्धन के लिए भ्रूणकोष का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि इसमें तीन गुणसूत्र सेट होते हैं।
Question 7. पादपों में अप्रत्यक्ष जीन स्थानान्तरण किया जाता है-
(अ) जीन गन द्वारा
(ब) वैद्युत छिद्रण द्वारा
(स) सूक्ष्म इन्जेक्शन द्वारा
(द) एग्रोबैक्टीरियम द्वारा
Answer: (द) एग्रोबैक्टीरियम द्वारा
In simple words: पौधों में अप्रत्यक्ष तरीके से जीन बदलने के लिए एग्रोबैक्टीरियम नामक जीवाणु का उपयोग किया जाता है।
🎯 Exam Tip: एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमेफेसिएन्स प्राकृतिक रूप से पौधों में जीन स्थानांतरित करने की क्षमता रखता है।
Question 8. कीट प्रतिरोधी Bt जीन निम्नलिखित में से किसमें पाया जाता है-
(अ) बैसीलस सबटिलिस
(ब) बैसीलस थूरिन्जिएन्सिस
(स) बैसीलस एन्थेसिस
(द) स्यूडोमोनास सिट्राई
Answer: (ब) बैसीलस थूरिन्जिएन्सिस
In simple words: कीटों से पौधों को बचाने वाला Bt जीन बैसीलस थूरिन्जिएन्सिस नाम के बैक्टीरिया में मिलता है।
🎯 Exam Tip: Bt जीन का उपयोग करके कीट प्रतिरोधी फसलें जैसे Bt कपास और Bt बैंगन बनाई जाती हैं।
Question 9. 'गोल्डन राइस' में निम्नलिखित में से किसकी पूर्ति हेतु जीन स्थानान्तरित किया गया?
(अ) विटामिन A
(ब) विटामिन C
(स) विटामिन D
(द) विटामिन B
Answer: (अ) विटामिन A
In simple words: 'गोल्डन राइस' नाम के चावल में विटामिन A की कमी पूरी करने के लिए एक खास जीन डाला गया है।
🎯 Exam Tip: गोल्डन राइस एक आनुवंशिक रूप से संशोधित चावल है जिसका उद्देश्य विकासशील देशों में विटामिन A की कमी को दूर करना है।
Question 10. 'फ्लैवर सावर' टमाटर की विशेषता है-
(अ) सूखारोधी
(ब) उच्च लवण सान्द्रता प्रतिरोधी
(स) अधिक समय तक ताज़ा रहना
(द) कीट प्रतिरोधी
Answer: (स) अधिक समय तक ताज़ा रहना
In simple words: 'फ्लैवर सावर' टमाटर की खास बात यह है कि यह आम टमाटरों के मुकाबले ज़्यादा समय तक ताज़ा रहता है।
🎯 Exam Tip: 'फ्लैवर सावर' टमाटर में एक जीन को निष्क्रिय किया गया है जो फल को जल्दी पकने के लिए जिम्मेदार होता है, जिससे उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है।
Question 11. बीटी (Bt) जीन-युक्त कपास कहलाती है
(अ) एसेप्टिक कॉटन
(ब) रोमिल कॉटन
(स) गोल्डन कॉटन
(द) किलर कॉटन
Answer: (द) किलर कॉटन
In simple words: जिस कपास में Bt जीन होता है, उसे किलर कॉटन कहते हैं क्योंकि यह कीटों को मारता है।
🎯 Exam Tip: Bt कपास का उपयोग किसानों को कीटों से होने वाले नुकसान से बचाने और कीटनाशकों के उपयोग को कम करने में मदद करता है।
RBSE Class 12 Biology Chapter 16 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. पूर्णशक्तता को परिभाषित कीजिए।
Answer: कोशिका सिद्धांत के अनुसार, एक पादप कोशिका में उस पूरे पौधे के सभी गुण होते हैं जिससे वह कोशिका ली गई है। इस कोशिका में पूरे पौधे को विकसित करने की क्षमता होती है। पौधे की कोशिका की इसी क्षमता को पूर्णशक्तता (Totipotency) कहते हैं।
In simple words: पौधे की एक कोशिका में पूरे पौधे को बनाने की शक्ति को पूर्णशक्तता कहते हैं।
🎯 Exam Tip: पूर्णशक्तता पादप ऊतक संवर्धन का आधार है, यह महत्वपूर्ण अवधारणा है।
Question 2. कृत्रिम बीज क्या है?
Answer: कृत्रिम बीज (Artificial/Synthetic seed) संपुटीकृत कायिक भ्रूण को कहते हैं। इसमें कायिक भ्रूण को एक जेल जैसी परत में बंद कर दिया जाता है जो उसे पोषण और सुरक्षा देती है।
In simple words: एक विशेष जेल में बंद कायिक भ्रूण को ही कृत्रिम बीज कहते हैं।
🎯 Exam Tip: कृत्रिम बीज का उपयोग बड़े पैमाने पर पौधों के उत्पादन और संरक्षण के लिए किया जाता है।
Question 3. कैलस किसे कहते हैं?
Answer: कैलस (Callus) नई उगाई गई विभज्योतकी कोशिकाओं का एक बिना व्यवस्थित समूह होता है। इसे कैलस या किण भी कहते हैं। यह समूह कोशिका विभाजन के दौरान बनता है।
In simple words: कैलस कोशिकाओं का एक बेतरतीब समूह है जो ऊतक संवर्धन में बनता है।
🎯 Exam Tip: कैलस से ही नए पौधे के विभिन्न अंग जैसे जड़ और तना विकसित होते हैं, इसलिए यह महत्वपूर्ण है।
Question 4. अगुणित पादप संवर्धन का क्या महत्व है?
Answer: अगुणित पादप प्राप्त करने की तकनीक का उपयोग पादप प्रजनन में शुद्ध वंश क्रम प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इस विधि का उपयोग सोलेनेसी कुल के पौधों में सबसे ज़्यादा अगुणित पादप विकसित करने के लिए किया गया है।
In simple words: अगुणित पौधे उगाने से हमें शुद्ध किस्म के पौधे मिलते हैं, जो खेती के लिए अच्छे होते हैं।
🎯 Exam Tip: शुद्ध वंश क्रम प्राप्त करने से पौधों में वांछित गुणों को स्थिर किया जा सकता है।
Question 5. भ्रूण बचाव तकनीक क्या है? इसकी उपयोगिता लिखिए।
Answer: भ्रूण बचाव तकनीक में पौधों के अपरिपक्व या पूर्ण विकसित भ्रूण का संवर्धन किया जाता है। इसका मुख्य उपयोग दूरस्थ संकरण (जब दो अलग-अलग प्रजातियों के बीच संकरण होता है) में उत्पन्न हुए अल्पविकसित भ्रूणों को बचाना है। इससे संकरण से प्राप्त होने वाले दुर्लभ और उपजाऊ पौधे विकसित किए जा सकते हैं।
In simple words: भ्रूण बचाव तकनीक से हम अधूरे या विकसित भ्रूणों को बचाते हैं, ताकि नए और दुर्लभ पौधे मिल सकें।
🎯 Exam Tip: यह तकनीक उन पौधों के लिए बहुत उपयोगी है जो प्राकृतिक रूप से बीज नहीं बना पाते या जिनके बीज ठीक से विकसित नहीं होते।
Question 6. सूक्ष्म प्रवर्धन से आप क्या समझते हैं?
Answer: सूक्ष्म प्रवर्धन (Micropropation) ऊतक संवर्धन विधि से पादप प्रजनन की प्रक्रिया को कहते हैं। इसमें बहुत कम समय और जगह में बड़ी संख्या में एक जैसे पौधे तैयार किए जाते हैं।
In simple words: ऊतक संवर्धन से कम समय में बहुत सारे नए पौधे बनाने को सूक्ष्म प्रवर्धन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: सूक्ष्म प्रवर्धन का उपयोग तेजी से व्यावसायिक उत्पादन और रोगमुक्त पौधों के लिए होता है।
Question 7. प्रत्यक्ष जीन स्थानान्तरण की किन्हीं तीन विधियों के नाम लिखिए।
Answer: प्रत्यक्ष जीन स्थानान्तरण की तीन विधियाँ हैं-
- जीन गन
- वैद्युत छिद्रण
- लिपोसोम की मध्यस्थता द्वारा जीन स्थानान्तरण
In simple words: जीन गन, वैद्युत छिद्रण और लिपोसोम जीन बदलने के सीधे तरीके हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्यक्ष जीन स्थानान्तरण विधियों में DNA को सीधे पादप कोशिका में डाला जाता है।
Question 8. अप्रत्यक्ष जीन स्थानान्तरण से क्या अभिप्राय है?
Answer: अप्रत्यक्ष जीन स्थानान्तरण विधि में, स्थानांतरित किए जाने वाले DNA को किसी वाहक (जैसे जीवाणु) की मदद से पौधे में डाला जाता है। वाहक जीन को पौधे की कोशिकाओं में ले जाता है।
In simple words: अप्रत्यक्ष जीन स्थानान्तरण में जीन को सीधे नहीं, बल्कि किसी वाहक की मदद से पौधे में डाला जाता है।
🎯 Exam Tip: एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमेफेसिएन्स अप्रत्यक्ष जीन स्थानान्तरण का सबसे सामान्य और प्रभावी वाहक है।
Question 9. कृत्रिम (संपुटीकृत) बीज के मुख्य घटक क्या हैं?
Answer: कृत्रिम (संपुटीकृत) बीज के मुख्य घटक हैं- भ्रूण व प्ररोह कालिका, पोषक पदार्थ, पादप वृद्धि नियामक, पीड़कनाशी और प्रतिजैविक पदार्थ। ये सभी घटक मिलकर भ्रूण को बढ़ने और विकसित होने में मदद करते हैं।
In simple words: कृत्रिम बीज में भ्रूण, पोषक तत्व, बढ़ने के हार्मोन, कीटनाशक और एंटीबायोटिक्स होते हैं।
🎯 Exam Tip: कृत्रिम बीज प्राकृतिक बीज के सभी कार्यों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं।
Question 10. निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए-
(अ) संवर्धन माध्यम
(ब) प्रोटोप्लास्ट
(स) पराजीनी पादप
Answer:
(अ) संवर्धन माध्यम: यह एक विशेष पोषक घोल होता है जिसका उपयोग प्रयोगशाला में पौधों की कोशिकाओं, ऊतकों या अंगों को उगाने के लिए किया जाता है। इसमें सभी आवश्यक खनिज, विटामिन, हार्मोन और शर्करा होती हैं जो वृद्धि के लिए ज़रूरी होती हैं।
(ब) प्रोटोप्लास्ट: यह एक पादप कोशिका होती है जिसकी कोशिका भित्ति को एंजाइमों की मदद से हटा दिया गया हो। यह केवल कोशिका झिल्ली, कोशिकाद्रव्य और नाभिक से बना होता है और कोशिका के आकार को बदल सकता है।
(स) पराजीनी पादप (Transgenic plants): ये ऐसे पौधे होते हैं जिनमें आनुवंशिक इंजीनियरिंग (जेनेटिक इंजीनियरिंग) की मदद से किसी दूसरे जीव का जीन डाला गया हो। इन पौधों को पादप प्रजनन तकनीकों में नए गुणों को शामिल करने के लिए विकसित किया जाता है, और ये नए गुण उनकी संतानों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी बने रहते हैं।
In simple words: संवर्धन माध्यम वह घोल है जिसमें पौधे की कोशिकाएँ बढ़ती हैं। प्रोटोप्लास्ट वह पौधा कोशिका है जिसकी बाहरी दीवार हटा दी गई हो। पराजीनी पादप वे पौधे हैं जिनमें बाहरी जीन डाले गए हों।
🎯 Exam Tip: इन परिभाषाओं को याद रखना ऊतक संवर्धन और आनुवंशिक इंजीनियरिंग की मूल बातें समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Biology Chapter 16 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. जीन स्थानान्तरण की माइक्रोइंजेक्शन विधि को समझाइए।
Answer: सूक्ष्म इंजेक्शन विधि (Micro injection method) में, वांछित DNA को सीधे पौधे के जीवद्रव्य या कोशिकाओं में एक बहुत ही पतली कांच की सुई (0.5-1.0 माइक्रोमीटर व्यास की) या माइक्रोपिपेट की सहायता से डाला जाता है। DNA को सीधे कोशिकाद्रव्य या केंद्रक में इंजेक्ट किया जाता है। यह विधि अलग किए गए जीवद्रव्यों में जीन स्थानान्तरण के लिए बहुत उपयुक्त है।
In simple words: माइक्रोइंजेक्शन विधि में DNA को सीधे पौधे की कोशिका में एक पतली सुई से डाला जाता है।
🎯 Exam Tip: यह विधि उन कोशिकाओं के लिए उपयोगी है जिनमें कोशिका भित्ति नहीं होती है, जैसे कि प्रोटोप्लास्ट।
Question 2. किन्हीं दो कीटपीड़क प्रतिरोधी पादपों का वर्णन कीजिए।
Answer: कीट प्रतिरोधी पादप निम्नलिखित हैं:
- बीटी कपास: इसे किलर कपास के नाम से भी जाना जाता है। बीटी कपास को बैसीलस थूरिन्जिएन्सिस (Bacillus thuringiensis) नामक जीवाणु से तैयार किया जाता है। यह जीवाणु एक विशेष प्रोटीन बनाता है जो कीटों के लिए ज़हरीला होता है, जिससे पौधे कीटों से सुरक्षित रहते हैं।
- बीटी बैंगन (B.T. Brinjal): बीटी बैंगन को भी बीटी कपास की तरह विकसित किया गया है। यह एक आनुवंशिक रूप से संशोधित फसल है जिसमें बीटी जीवाणु का जीन होता है, जिससे बैंगन भी कीटों के हमले से बचा रहता है।
In simple words: बीटी कपास और बीटी बैंगन दो ऐसे पौधे हैं जिनमें एक खास जीन डालकर उन्हें कीटों से लड़ने की शक्ति दी गई है।
🎯 Exam Tip: इन पौधों से कीटनाशकों का उपयोग कम होता है और किसानों को फसल का बेहतर उत्पादन मिलता है।
Question 3. ऊतक संवर्धन के विभिन्न चरणों के नाम लिखिए।
Answer: ऊतक संवर्धन के विभिन्न चरण निम्नलिखित हैं:
शून्य चरण: इस चरण को दो भागों में बांटा जा सकता है-
- कर्तोतकों का चयन एवं पूर्ण उपचार: इसमें पौधे के उस हिस्से (कर्तोतक) को चुना जाता है जिसे संवर्धन करना है, और उसे मिट्टी के कणों व सूक्ष्मजीवों से साफ किया जाता है।
- कर्तोतकों का सतही निर्जर्मीकरण: कर्तोतक को रासायनिक निर्जर्मीकारकों (जैसे मरक्यूरिक क्लोराइड) का उपयोग करके उसकी सतह पर मौजूद सभी सूक्ष्मजीवों को पूरी तरह से नष्ट किया जाता है।
प्रथम चरण: संवर्धन आरम्भन: इस चरण में निर्जर्मीकृत कर्तोतकों को पोषक माध्यम पर रखकर संवर्धन कक्ष में रखा जाता है। यहाँ से कैलस या अंग बनने लगते हैं।
द्वितीय चरण: गुणात्मक वृद्धि: पहले चरण में बने संवर्धनों को नए पोषक माध्यम पर स्थानांतरित करके उनकी संख्या बढ़ाई जाती है।
तृतीय चरण: पुनरुद्भवन: इस चरण में पूरे पौधे को फिर से विकसित (regenerate) किया जाता है।
चतुर्थ चरण: दृढ़ीकरण एवं वातानुकूलन: इस चरण में ऊतक संवर्धन से विकसित पौधों को बाहरी वातावरण में जीवित रहने के लिए मजबूत और अनुकूल बनाया जाता है।
In simple words: ऊतक संवर्धन में पहले पौधे का छोटा हिस्सा चुनते हैं और साफ करते हैं, फिर उसे पोषक तत्व देकर उगाते हैं। जब वह बढ़ जाता है तो उससे नया पौधा बनाते हैं और उसे बाहरी माहौल के लिए तैयार करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक चरण को सावधानीपूर्वक करना महत्वपूर्ण है ताकि संवर्धन सफल हो और रोगमुक्त पौधे तैयार हों।
Question 4. सामान्य भ्रूण व कायिक भ्रूण में क्या अन्तर है?
Answer:
सामान्य भ्रूण: यह उन कोशिकाओं से बनता है जो प्रजनन में शामिल होती हैं (जैसे शुक्राणु और अंडाणु)। यह प्रजनन या संतति कोशिकाओं से विकसित होता है और हमेशा द्विगुणित (diploid) होता है, जिसमें गुणसूत्रों के दो सेट होते हैं।
कायिक भ्रूण: यह पौधे की कायिक (गैर-प्रजनन) कोशिकाओं से विकसित होता है, जैसे पत्ती या तने की कोशिकाएँ। कायिक भ्रूण अगुणित (haploid) या द्विगुणित हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसे बनाने वाली मूल कोशिकाएँ अगुणित थीं या द्विगुणित। कायिक भ्रूण बीज के बिना भी पौधे को विकसित कर सकता है।
In simple words: सामान्य भ्रूण प्रजनन कोशिकाओं से बनता है और हमेशा द्विगुणित होता है, जबकि कायिक भ्रूण पौधे के किसी भी हिस्से से बन सकता है और यह अगुणित या द्विगुणित हो सकता है।
🎯 Exam Tip: कायिक भ्रूण का उपयोग कृत्रिम बीज बनाने और बड़े पैमाने पर पौधों के उत्पादन के लिए किया जाता है।
Question 5. सूक्ष्म प्रवर्धन की विधियों के नाम व उनकी उपयोगिता बताइए।
Answer: सूक्ष्म प्रवर्धन की विधियों के नाम निम्नलिखित हैं:
- कैलस संवर्धन (Callus culture) - इसमें कैलस बनाकर उससे पौधे विकसित किए जाते हैं। इसे दो भागों में बांटा जाता है:
- अंगोद्भवन (Organogenesis)
- कायिक भ्रूणोद्भवन (Somatic embryo genesis)
- अंग संवर्धन
- भ्रूण संवर्धन
- परागकोष तथा परागकण संवर्धन
- कोशिका निलम्बन संवर्धन
- जीवद्रव्य संवर्धन
सूक्ष्म प्रवर्धन के उपयोग: सूक्ष्म प्रवर्धन तकनीक से बहुत ही कम समय और कम जगह में बड़ी संख्या में पौधों का उत्पादन किया जा सकता है। इस तकनीक का उपयोग आर्किड की कई प्रजातियों (जैसे- सिम्बिडियम, कटेलीया, डेन्ड्रोबियम, वाण्डी) और कई सजावटी पौधों (जैसे- गुलदाऊदी, कार्नेशन, जरबेरा, बिगोनिया) का व्यावसायिक स्तर पर गुणन करने के लिए किया गया है। भारत में कई विश्वविद्यालयों और संस्थाओं ने वानिकी और बागवानी के कई पौधों को इस विधि से सफलतापूर्वक उगाया है।
In simple words: सूक्ष्म प्रवर्धन की कई विधियाँ हैं जैसे कैलस या अंग उगाना। इनका उपयोग बहुत कम जगह में तेज़ी से ज़्यादा पौधे उगाने के लिए होता है, खासकर फूलों और पेड़ों के लिए।
🎯 Exam Tip: सूक्ष्म प्रवर्धन रोगमुक्त पौधे प्राप्त करने और लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
RBSE Class 12 Biology Chapter 16 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. ऊतक संवर्धन के इतिहास पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
Answer: ऊतक संवर्धन का इतिहास कोशिका (Cell) की खोज से शुरू होता है। रॉबर्ट हुक ने 1665 में सबसे पहले कोशिका की खोज की। इसके बाद, 1839 में मैथियास जैकब स्लाइडेन और थियोडोर श्वान ने कोशिका सिद्धांत दिया। इस सिद्धांत के अनुसार, कोशिका शरीर की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है। रूडोल्फ विरच्यून ने बताया कि हर कोशिका अपनी पुरानी कोशिका से बनती है। यह सिद्धांत जीव विज्ञान में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
आधुनिक कोशिका सिद्धांत के अनुसार, पौधे की हर कोशिका में पूरे पौधे को विकसित करने की क्षमता होती है, जिसे पूर्णशक्तता (Totipotency) कहते हैं। पूर्णशक्तता शब्द का उपयोग सबसे पहले 1909 में मॉर्गन ने किया था। पौधे की कोशिका से पूरा पौधा बनाने का विचार सबसे पहले 1907 में जर्मन वैज्ञानिक हैबरलैण्ड ने दिया था। ध्यान देने वाली बात यह है कि ज़्यादातर जानवरों में पूर्णशक्तता की क्षमता नहीं होती है।
पादप ऊतक संवर्धन (Plant tissue Culture) का पहला प्रयास 1902 में वैज्ञानिक गोटलिब हैबरलैण्ड ने किया था। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि पादप जीवद्रव्यक, कोशिका, ऊतक, अंग या पूरे सिस्टम को नियंत्रित और कीटाणुमुक्त वातावरण में एक ज्ञात संवर्धन माध्यम पर उगाना ही ऊतक संवर्धन कहलाता है।
ऊतक संवर्धन के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने कई खोजें और योगदान दिए। 1922 में डब्ल्यू. के. रॉबिन्स ने प्ररोह और शीर्ष का सफलतापूर्वक संवर्धन किया। 1926 में एफ.डब्ल्यू. बेंट ने वृद्धि हार्मोन ऑक्सिन की खोज की। 1939 में आर.जे. मोगेर्ट और उनके साथियों ने लंबे समय तक बढ़ने वाले संवर्धनों की स्थापना की। 1946 में बॉल ने प्ररोह शीर्ष संवर्धन से पूरा पौधा विकसित किया। 1959 में जे. रेनर्ट ने गाजर के निलंबन संवर्धन से भ्रूण का विकास किया। एस. गुहा मुखर्जी और एस.सी. माहेश्वरी ने धतूरे के परागकणों के संवर्धन से सबसे पहले अगुणित पौधे विकसित किए। 1983 में एम.डी. चिल्टन ने तंबाकू के ट्रांसजेनिक पौधे का संवर्धन किया।
पादप ऊतक संवर्धन के क्षेत्र में शोध और अनुसंधान लगातार जारी हैं, और इस क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने कई सफलताएँ प्राप्त की हैं।
In simple words: ऊतक संवर्धन का इतिहास कोशिका की खोज से शुरू होता है। हैबरलैण्ड को इसका जनक माना जाता है। समय के साथ, वैज्ञानिकों ने पौधों के छोटे-छोटे हिस्सों को प्रयोगशाला में उगाकर पूरे पौधे बनाने और उनमें सुधार करने के कई तरीके खोजे।
🎯 Exam Tip: ऊतक संवर्धन के इतिहास के मुख्य वैज्ञानिक और उनकी प्रमुख खोजें याद रखें, क्योंकि यह अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।
Question 2. पराजीनी पादप क्या हैं? इनके विकास व उपयोगिता का वर्णन कीजिए।
Answer:
पराजीनी पादप (Transgenic Plants): ट्रांसजेनिक पादप आनुवंशिक रूप से संशोधित (engineered) पौधे होते हैं, जिन्हें पादप प्रजनन के तरीकों में रीकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीक का उपयोग करके नई विशेषताएँ डालने के लिए विकसित किया जाता है। ये नए गुण उनकी संतानों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी बने रहते हैं। आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों को ही आनुवंशिक रूप से रूपांतरित जीव (Genetically Modified Organism-GMOs) कहते हैं। इस प्रकार के पौधों से प्राप्त खाद्य उत्पादों को आनुवंशिक रूप से रूपांतरित खाद्य कहा जाता है।
जीन इंजीनियरिंग तकनीक की मदद से एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री पौधों की कई प्रजातियों के ट्रांसजेनिक पौधे तैयार करके प्रयोगशाला से बाहर खेती में परीक्षण किए गए हैं।
पादप जातियों के पराजीनी (ट्रांसजेनिक) पादप निम्नलिखित विधियों द्वारा विकसित किए जाते हैं:
(अ) वाहक निर्देशित या अप्रत्यक्ष जीन स्थानान्तरण: इस विधि में DNA को किसी वाहक की मदद से स्थानांतरित किया जाता है। इसकी तीन विधियाँ हैं:
1. एग्रोबैक्टीरियम निर्देशित जीन स्थानान्तरण: यह जीन स्थानान्तरण ट्यूमर प्रेरक प्लाज्मिड (Ti प्लाज्मिड) पर आधारित होता है। Ti प्लाज्मिड मृदा में पाए जाने वाले और द्विबीजपत्री पौधों को संक्रमित करने वाले जीवाणु एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमेफेसिएन्स में होता है। यह जीवाणु संक्रमित पौधों में अनियंत्रित कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है, जिससे ट्यूमर (Gall) बनते हैं, जिन्हें क्राउन गॉल कहते हैं। Ti प्लाज्मिड का एक हिस्सा (T-DNA) पौधे के जीनोम में जुड़ जाता है। T-DNA में वांछित और उपयोगी जीनों को डालकर कई पौधों में लाभदायक गुण जैसे शाकनाशियों और रोगजनकों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता, पोषक मूल्य में वृद्धि (जैसे गोल्डन राइस में विटामिन 'ए' की पूर्ति) और नाइट्रोजन स्थिरीकरण क्षमता में सुधार किया गया है। एग्रोबैक्टीरियम जीवाणु आमतौर पर एकबीजपत्री पौधों को संक्रमित नहीं करते, लेकिन जापान के वैज्ञानिकों ने 1994 में चावल के पौधे में Ti प्लाज्मिड द्वारा रूपांतरण को प्रेरित किया।
2. विषाणु निर्देशित जीन स्थानान्तरण (Virus mediated gene transfer): DNA और RNA दोनों ही वायरस वांछित जीनों के अच्छे वाहक के रूप में काम करते हैं। कॉलीमो वायरस और जेमिनी वायरस का उपयोग सबसे ज़्यादा जीन स्थानान्तरण के लिए किया गया है। रेट्रोवायरस, लेन्टीवायरस और एडिनोवायरस का भी आनुवंशिक इंजीनियरिंग में जीन स्थानान्तरण के लिए उपयोग किया जाता है।
3. इन-प्लान्टा तकनीक (In-planta method): इस तकनीक में फैलज्डमेन और मार्क्स ने 1987 में आनुवंशिक रूप से रूपांतरित एग्रोबैक्टीरियम को ऐरेबीडोपासिस के बीजों के साथ रखा। इन बीजों को उगाकर पौधे विकसित किए गए। इस तरह विकसित पौधों से प्राप्त बीजों को अंकुरित करवाकर रूपांतरित पौधों की पहचान की गई। इस विधि में वांछित जीनों को सीधे पौधों में डाला जाता है, इसलिए इसे इन-प्लान्टा तकनीक कहते हैं।
पराजीनी पादपों से संबंधित कृषि व औषधि विज्ञान में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ:
1. कीट-प्रतिरोधकता (Insect resistance): बैसीलस थूरिन्जिएंसिस (Bacillus thuringiensis) नामक जीवाणु (संक्षेप में Bt) से प्राप्त Bt जीन को कपास में स्थानांतरित करके कीट प्रतिरोधी Bt कपास या किलर कपास विकसित की गई है। यह कपास बॉलवर्म के प्रति प्रतिरोधी होती है।
2. शाकनाशी प्रतिरोधकता (Herbicide resistance): कुछ शाकनाशी पौधों में आवश्यक अमीनो अम्लों के संश्लेषण को रोककर उन्हें मार देते हैं। ग्लाइफोसेट जैसे शाकनाशियों का प्रभाव कम करने के लिए, पौधों में एंजाइम EPSPs के अधिक उत्पादन से संबंधित जीन को स्थानांतरित करके टमाटर और पिटुनिया जैसे पराजीनी पौधे विकसित किए गए हैं।
3. नरबंध्यता उत्पन्न करना (Development of male sterility): पादप प्रजनन में बंजर नर (sterile male) पौधों का विकास बहुत महत्वपूर्ण है। यह विपुंसन जैसी प्रक्रियाओं में लगने वाले समय, श्रम और धन को बचाता है। बारनेज जीन को एग्रोबैक्टीरियम की मदद से तोरिया (Rape seed) के जीनोम में डालकर नर बंजर पौधे प्राप्त किए जा सकते हैं।
4. फलों में विलंबित परिपक्वन (Delayed fruit ripening): अमेरिका में 'फ्लेवर सावर' (Flavr savr) टमाटर एक आनुवंशिक रूप से संशोधित किस्म है। यह टमाटर सामान्य टमाटरों की तुलना में अधिक समय तक स्वादिष्ट रहते हैं। इस किस्म में कोशिका भित्ति को तोड़ने वाले एंजाइम पॉलीगैलेक्ट्यूरोनेज़ की मात्रा को कम किया गया है।
5. पराजीनी पादप जैव किण्वक (Transgenic plant bioreactor): आनुवंशिक रूप से रूपांतरित पौधों को जैवकिण्वकों की तरह उपयोग किया जाता है। इन ट्रांसजेनिक पौधों में विभिन्न प्रकार के रसायन बनाए जाते हैं। इस क्षेत्र को जैव आण्विक कृषि भी कहते हैं।
In simple words: पराजीनी पादप वे होते हैं जिनमें जीन बदल दिए गए हों। इन्हें जीन गन या बैक्टीरिया जैसे तरीकों से बनाया जाता है। इनका उपयोग कीट प्रतिरोधी फसलें बनाने, शाकनाशियों से बचाने, फलों को देर तक ताज़ा रखने और दवाईयाँ बनाने में होता है।
🎯 Exam Tip: पराजीनी पादपों के प्रकार, विकास की विधियाँ और उनके कृषि तथा औषधि में उपयोगों को उदाहरणों सहित समझें।
Question 1. जीन गन (Gene Gun)-जीन गन को कणिका बंदूक (Particle gun), शॉट गन (Shot gun), माइक्रोप्रोजेक्टाइल (Micro projectile) आदि नामों से भी जाना जाता है। इस युक्ति से भित्ति युक्त पादप कोशिकाओं में जीन स्थानान्तरण सम्भव है। इस तकनीक का सर्वप्रथम प्रयोग सन् 1987 में क्लीन (Klein) द्वारा प्याज की कोशिकाओं में DNA तथा वाइरस RNA स्थानान्तरण हेतु किया गया था। इस प्रक्रिया में वांछित DNA से विलोपित स्वर्ण अथवा टंगस्टन के 1-3 माइक्रो मीटर व्यास के कणों को जिन्हें माइक्रोपार्टिकल्स अथवा सूक्ष्मकणिकाएँ भी कहते हैं, को मेक्रोप्रोजेक्टाइल की सहायता से उच्च वेग से लक्ष्य कोशिकाओं में दाग दिया जाता है। ये वांछित DNA से विलोपित स्वर्ण अथवा टंगस्टन के कण कोशिका भित्ति को भेदकर कोशिका के अन्दर प्रविष्ट हो जाते हैं जहाँ वांछित DNA पादप कोशिका के DNA से समाकलित होकर ट्रांसजैनिक DNA का निर्माण करता है। इस विधि के उपयोग से सोयाबीन, गेहूँ, धान मक्का, तम्बाकू आदि में सफलतापूर्वक जीन स्थानान्तरित किए जा चुके हैं। यह विधि विश्व स्तर पर सभी प्रकार के पादपों के लिए प्रयोग में लायी जा रही है।
Answer: जीन गन तकनीक में, वांछित DNA को सोने या टंगस्टन के बहुत छोटे कणों पर लगाकर लक्ष्य कोशिका में बहुत तेज गति से डाला जाता है। ये कण कोशिका की दीवार को पार करके अंदर चले जाते हैं। अंदर जाकर, यह DNA पादप कोशिका के DNA से जुड़ जाता है, जिससे ट्रांसजेनिक DNA बनता है। यह विधि सोयाबीन, गेहूँ और तम्बाकू जैसे पौधों में DNA डालने के लिए सफल रही है। इस विधि का उपयोग दुनिया भर में कई प्रकार के पौधों के लिए किया जा रहा है। इसका उपयोग विशेष रूप से उन पौधों में किया जाता है जिनकी कोशिकाओं में एक मजबूत कोशिका भित्ति होती है।
In simple words: जीन गन एक मशीन है जो DNA के छोटे-छोटे टुकड़ों को सोने या टंगस्टन पर लपेटकर पौधों की कोशिकाओं में डालती है। इससे पौधे में नया DNA जुड़ जाता है और वह बदल जाता है।
🎯 Exam Tip: जीन गन तकनीक का उपयोग उन पौधों में जीन स्थानान्तरण के लिए किया जाता है जिनकी कोशिका भित्ति मजबूत होती है। इसके प्रमुख घटक कणिका बंदूक, DNA-आवरित कण और लक्ष्य ऊतक होते हैं।
Question 2. वैद्युत छिद्रण (Electroporation)-जीन स्थानान्तरण की इस विधि में लक्ष्य प्रोटोप्लास्ट (जीवद्रव्यक), पादप कोशिकाओं अथवा ऊतकों को उच्च वोल्टता (High voltage) के स्पन्द (Pulse) दिए जाते हैं। जिससे प्लाज्माकला में क्षणिक अस्थायी छिद्र बन जाते हैं। इन क्षणिक बनने वाले छिद्रों के द्वारा वांछित DNA कोशिकाओं में प्रवेश कर जाता है। लक्ष्य कोशिकाओं अथवा ऊतकों को वांछित DNA युक्त घोल में रखकर उच्च वोल्टता के स्पंद दिए जाते हैं जिससे यह DNA पहले कोशिका तथा बाद में केन्द्रक में प्रवेश कर जाता है। द्विबीजपत्री पादपों में जीन स्थानान्तरण हेतु इस विधि का वहत् स्तर पर उपयोग किया जाता है।
Answer: वैद्युत छिद्रण एक ऐसी विधि है जिसमें पौधों की कोशिकाओं, प्रोटोप्लास्ट या ऊतकों को थोड़ी देर के लिए बहुत अधिक वोल्टेज के झटके दिए जाते हैं। इन झटकों के कारण कोशिका झिल्ली में छोटे, अस्थायी छेद बन जाते हैं। इन छेदों से वांछित DNA कोशिकाओं के अंदर आसानी से चला जाता है। यह DNA फिर कोशिका के केन्द्रक तक पहुँच जाता है। इस विधि का उपयोग द्विबीजपत्री पौधों में बड़े पैमाने पर जीन डालने के लिए किया जाता है।
In simple words: वैद्युत छिद्रण में, पौधों की कोशिकाओं को बिजली के झटके दिए जाते हैं जिससे उनमें छोटे छेद बन जाते हैं। इन छेदों से नया DNA कोशिका के अंदर चला जाता है।
🎯 Exam Tip: वैद्युत छिद्रण कोशिका झिल्ली में अस्थायी छिद्र बनाने के लिए विद्युत स्पंद का उपयोग करता है, जिससे DNA आसानी से कोशिका के अंदर प्रवेश कर पाता है। यह द्विबीजपत्री पौधों के लिए प्रभावी है।
Question 3. लिपोसोम की मध्यस्थता द्वारा जीन स्थानान्तरण (Liposome mediated gene transfer)-जीन स्थानान्तरण की इस विधि में गोलाकार वसीय अणुओं (Lipid molecules) का उपयोग किया जाता है, जिनके भीतर जल के साथ वांछित DNA भरा रहता है। ये DNA युक्त लिपिड केप्स्यूल पहले कोशिका कला से चिपक जाते हैं तत्पश्चात उससे संयुग्मित हो जाते हैं। इनमें उपस्थित वांछित DNA पहले कोशिका में तथा । बाद में केन्द्रक में प्रवेश कर पोषक संजीन से समाकलित हो जाता है। लिपोसोम निर्देशित जीन स्थानान्तरण की तकनीक जिसे लिपोफेक्सन (Lipofection) भी कहते हैं, जीवाणुओं, जन्तुओं व पादप कोशिकाओं में जीन स्थानान्तरण की अत्यधिक प्रभावी तकनीक है।
Answer: लिपोसोम-मध्यस्थ जीन स्थानान्तरण में, गोलाकार वसा के अणु (लिपिड) का उपयोग किया जाता है। इन अणुओं के अंदर पानी के साथ वांछित DNA भरा होता है। ये DNA से भरे हुए लिपिड कैप्सूल पहले कोशिका की झिल्ली से चिपकते हैं, और फिर उससे जुड़ जाते हैं। कैप्सूल के अंदर का DNA पहले कोशिका में और फिर उसके केन्द्रक में प्रवेश करता है, जहाँ यह मेजबान DNA से जुड़ जाता है। इस तकनीक को लिपोफेक्सन भी कहते हैं और यह जीवाणुओं, जानवरों और पौधों की कोशिकाओं में जीन डालने के लिए बहुत प्रभावी तरीका है।
In simple words: लिपोसोम विधि में, DNA को वसा के छोटे-छोटे गोलों में भरकर कोशिका के अंदर डाला जाता है। ये गोले कोशिका से चिपक कर DNA को अंदर पहुँचा देते हैं।
🎯 Exam Tip: लिपोसोम एक लिपिड-आधारित वाहक हैं जो DNA को कोशिकाओं में पहुँचाने में मदद करते हैं, जिससे जीन स्थानान्तरण की दक्षता बढ़ती है, खासकर उन कोशिकाओं के लिए जिनकी कोशिका भित्ति को पहले हटा दिया गया हो।
Question 4. सूक्ष्म इंजेक्शन (Micro injection)-इस विधि के द्वारा वांछित DNA को सीधे ही पादप जीवद्रव्यकों अथवा कोशिकाओं में 0.5-1.0 माइक्रोमीटर व्यास की कॉच की सूई अथवा माइक्रोपिपेट की सहायता से कोशिकाद्रव्य अथवा केन्द्रक में अन्तः क्षेपित (Inject) किया जाता है। पृथक्कृत जीवद्रव्यकों में जीन स्थानान्तरण की यह उपयुक्त विधि उपरोक्त जीन स्थानान्तरण की विधियों के अतिरिक्त निम्नलिखित विधियों का भी जीन स्थानान्तरण में उपयोग किया जाता है।
Answer: सूक्ष्म इंजेक्शन विधि में, एक बहुत पतली काँच की सुई (माइक्रोपिपेट) का उपयोग करके वांछित DNA को सीधे पौधों की कोशिकाओं या प्रोटोप्लास्ट के कोशिकाद्रव्य या केन्द्रक में डाला जाता है। यह सुई 0.5 से 1.0 माइक्रोमीटर व्यास की होती है। यह विधि अलग किए गए प्रोटोप्लास्ट में जीन डालने के लिए सबसे अच्छी है।
In simple words: सूक्ष्म इंजेक्शन में, एक बहुत पतली सुई से नया DNA सीधे कोशिका के अंदर डाला जाता है।
🎯 Exam Tip: माइक्रोइंजेक्शन एक प्रत्यक्ष जीन स्थानान्तरण विधि है जो DNA को सीधे कोशिका या प्रोटोप्लास्ट के अंदर पहुँचाती है, जिससे सटीकता बढ़ती है, खासकर जब अलग की गई कोशिकाओं के साथ काम किया जा रहा हो।
Question 5. लेडर निर्धारित जीन स्थानान्तरण।
Answer: लेडर निर्धारित जीन स्थानान्तरण एक विधि है जिसका उपयोग पौधों में जीन डालने के लिए किया जाता है। इस विधि में, DNA को विशेष "लेडर" अणुओं के साथ जोड़कर कोशिकाओं में पहुँचाया जाता है। यह तरीका उन पौधों के लिए खास तौर पर उपयोगी है जिनकी कोशिकाओं में सीधे DNA डालना मुश्किल होता है। यह अप्रत्यक्ष जीन स्थानान्तरण का एक प्रकार है।
In simple words: लेडर जीन स्थानान्तरण में, DNA को एक खास तरह के अणु (लेडर) से जोड़कर पौधों की कोशिकाओं में डालते हैं।
🎯 Exam Tip: लेडर निर्धारित जीन स्थानान्तरण अप्रत्यक्ष विधियों में से एक है, जो DNA को कोशिकाओं में पहुँचाने के लिए विशिष्ट वाहकों का उपयोग करती है, जो सीधे इंजेक्शन से बेहतर हो सकती है।
Question 6. सिलिकोन कार्बाइड तंतु निर्धारित जीन स्थानान्तरण।
Answer: सिलिकॉन कार्बाइड तंतु निर्धारित जीन स्थानान्तरण में, बहुत पतले सिलिकॉन कार्बाइड के तंतुओं का उपयोग वांछित DNA को पौधों की कोशिकाओं में पहुँचाने के लिए किया जाता है। ये तंतु कोशिका की दीवार को छेदते हैं और DNA को अंदर ले जाते हैं। यह विधि खास तौर पर उन पौधों की कोशिकाओं में जीन डालने के लिए उपयोगी है जिनकी कोशिका भित्ति मजबूत होती है।
In simple words: सिलिकॉन कार्बाइड तंतु विधि में, पतले रेशों का उपयोग करके DNA को पौधों की कोशिकाओं के अंदर डाला जाता है।
🎯 Exam Tip: सिलिकॉन कार्बाइड तंतु जीन स्थानान्तरण एक भौतिक विधि है जो मजबूत कोशिका भित्ति वाले पौधों में DNA को सीधे पहुँचाने के लिए तंतुओं का उपयोग करती है, जिससे यह पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक कुशल बन जाती है।
Question 6. सूक्ष्म प्रवर्धन की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
Answer: सूक्ष्म प्रवर्धन की विभिन्न विधियाँ निम्नलिखित हैं:
(i) अंगोभवन (Organogenesis): यह वह प्रक्रिया है जहाँ कोशिकाओं का एक असंगठित समूह (जिसे कैलस कहते हैं) पौधों के अंगों जैसे जड़, तना या कलियों में बदल जाता है। जड़ों का विकास 'राइजोजेनेसिस' कहलाता है, और तने का विकास 'कौलोजेनेसिस' कहलाता है। यह जड़ों और तनों के विकास के लिए ऑक्सीन और साइटोकाइनिन के अनुपात, संवर्धन माध्यम की भौतिक स्थितियों, रासायनिक बनावट और कर्तोतक की प्रकृति पर निर्भर करता है। आमतौर पर, ऑक्सीन-साइटोकाइनिन का उच्च अनुपात जड़ों को बनाने में मदद करता है, जबकि कम अनुपात तने को बनाता है।
(ii) कायिक भ्रूणोद्भवन (Somatic embryogenesis): जब भ्रूण कायिक ऊतकों की कोशिकाओं से बनता है, तो इस प्रक्रिया को कायिक भ्रूणोद्भवन कहते हैं। कायिक भ्रूण अगुणित (सिंगल सेट क्रोमोसोम) या द्विगुणित (डबल सेट क्रोमोसोम) हो सकते हैं। भ्रूण का अगुणित या द्विगुणित होना उन कोशिकाओं के प्रकार पर निर्भर करता है जिनसे वे विकसित हुए हैं।
(2) अंग संवर्धन (Organ Culture): इसमें पौधे के विभिन्न अंगों, जैसे जड़ या अंडाशय को संवर्धन माध्यम में विकसित करके पूरा पौधा बनाना शामिल है।
(3) भ्रूण संवर्धन (Embryo Culture): यह अपरिपक्व या पूर्ण विकसित भ्रूणों को संवर्धन माध्यम में विकसित करने की प्रक्रिया है। यह अपरिपक्व भ्रूणों के विकास और परिपक्व भ्रूणों की वृद्धि और अंकुरण को बढ़ावा देता है। अपरिपक्व भ्रूण संवर्धन को भ्रूण बचाव या भ्रूण रक्षा भी कहा जाता है, जिसका उपयोग दूरस्थ संकरण में अविकसित भ्रूणों को बचाने और दुर्लभ उपजाऊ पौधे प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
(4) पराग कोष तथा परागकण संवर्धन (Anther and Pollen grain culture): अर्धसूत्री विभाजन का अध्ययन करने के लिए पराग कोष को इनविट्रो कल्चर में संवर्धित करना शामिल है। भारतीय वैज्ञानिकों ने धतूरे के पौधों में पराग कोष और पराग कणों को संवर्धित करके अगुणित पौधे सफलतापूर्वक प्राप्त किए। यह तकनीक शुद्ध वंश क्रम प्राप्त करने और आलू परिवार के सबसे अगुणित पौधों को विकसित करने में महत्वपूर्ण है।
(5) कोशिका निलम्बन संवर्धन (Cell Suspension Culture): यह तरल माध्यम में कोशिकाओं को संवर्धित करने की विधि है। इसका उपयोग व्यावसायिक स्तर पर जैव सक्रिय अणुओं और द्वितीयक उपापचयों के उत्पादन के लिए किया जाता है। इसमें अलग की गई या एकल पौधों की कोशिकाओं को एक हवादार तरल संवर्धन माध्यम में संवर्धित किया जाता है, जिन्हें घूमने वाले शेकर पर रखा जाता है ताकि ऑक्सीजन मिलती रहे।
(6) जीवद्रव्यक संवर्धन (Protoplast Culture): जीवद्रव्यक संवर्धन में, सबसे पहले चयनित कर्तोतकों को सेल्युलोज, हेमिसेल्युलोज और पेक्टिनेज एंजाइमों से उपचारित करके उनकी कोशिका भित्ति हटा दी जाती है। इन भित्ति रहित पौधों की कोशिकाओं (जिन्हें प्रोटोप्लास्ट कहते हैं) को पहले तरल संवर्धन माध्यम पर और फिर अर्ध-ठोस माध्यम पर संवर्धित किया जाता है। इस प्रक्रिया से पौधों का निर्माण, अंगजनन, कायिक भ्रूण और जनन की अन्य विधियाँ प्राप्त होती हैं। जीवद्रव्यक संवर्धन का उपयोग साइब्रिड बनाने में भी होता है।
सूक्ष्म प्रवर्धन के उपयोग: सूक्ष्म प्रवर्धन तकनीक बहुत कम समय और कम जगह में बड़ी संख्या में पौधे बनाने में मदद करती है। इस तकनीक का उपयोग ऑर्किड की कई प्रजातियों जैसे सिम्बीडियम, कैटलिया, डेन्ड्रोबियम वांडी और गुलदाउदी, कार्नेशन, जरबेरा, बिगोनिया जैसे सजावटी पौधों का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन करने के लिए किया गया है। भारत में, कई विश्वविद्यालयों और संस्थानों ने वानिकी और बागवानी के कई पौधों को इस विधि से सफलतापूर्वक उगाया है।
In simple words: सूक्ष्म प्रवर्धन छोटी जगह में बहुत सारे पौधे बनाने का एक तरीका है। इसमें कई विधियाँ हैं जैसे अंग बनाना, भ्रूण बनाना, पराग से पौधे बनाना, या कोशिकाओं को तरल में उगाना। यह तकनीक ऑर्किड और अन्य सजावटी पौधों को तेजी से उगाने में बहुत काम आती है।
🎯 Exam Tip: सूक्ष्म प्रवर्धन की विभिन्न विधियों के नाम और उनके उपयोग स्पष्ट रूप से याद रखें। खासकर अंगोद्भवन और कायिक भ्रूणोद्भवन के बीच का अंतर। इसके अनुप्रयोगों में उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का तेजी से उत्पादन मुख्य है।
Question 7. संवर्धन माध्यम के विभिन्न घटक कौन-कौन से हैं ? बताइए।
Answer: ऊतक संवर्धन के लिए एक आधुनिक प्रयोगशाला होनी चाहिए जो कीटों, सूक्ष्मजीवों और पौधों के बीजों से दूर हो। प्रयोगशाला के विभिन्न घटक और आवश्यकताएँ निम्नलिखित हैं:
1. संवर्धन माध्यम निर्माण के लिए आवश्यक उपकरण:
- हॉट प्लेट्स, हीटिंग मैटल्स, गैस कनेक्शन, भौतिक और डिजिटल तुला।
- काँच और प्लास्टिक के बर्तन, जल शुद्धिकरण यंत्र।
- माइक्रो पिपेट, रसायन और स्टॉक विलयन।
- फ्यूम हुड, ऑटोक्लेव, रेफ्रिजरेटर, मैग्नेटिक स्टिरर, सेंट्रीफ्यूज।
- pH मीटर, कल्चर ट्रॉली, कल्चर ट्रे आदि।
2. काँच के सामान की सफाई के लिए:
- पर्याप्त जल की सुविधा, ओवन, डिशवाशर आदि।
3. अभिलेख सम्बन्धित कार्य के लिए:
- कुर्सी, मेज, अलमारी, रजिस्टर आदि।
यह सभी घटक यह सुनिश्चित करते हैं कि संवर्धन प्रक्रिया स्वच्छ और सफल हो।
In simple words: संवर्धन माध्यम बनाने के लिए कई चीजें चाहिए होती हैं, जैसे सही उपकरण (तौला, गर्म करने वाला सामान), साफ पानी, काँच के बर्तन, रसायन और तापमान/pH कंट्रोल करने के लिए मशीनें। लैब में सफाई और रिकॉर्ड रखने का सामान भी ज़रूरी होता है।
🎯 Exam Tip: संवर्धन माध्यम के घटकों को याद रखें जो आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं (जैसे जल, खनिज लवण, शर्करा) और भौतिक वातावरण को नियंत्रित करते हैं (जैसे pH, तापमान)। इन सभी का उचित संतुलन ही ऊतक संवर्धन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
| क्रमांक | कार्य | आवश्यक वस्तुएँ |
|---|---|---|
| 1. | संवर्धन माध्यम निर्माण | हॉट प्लेट्स, हीटिंग मैटल्स, गैस कनेक्शन, भौतिक व डिजिटल तुला, काँच व प्लास्टिक के बर्तन, जल शुद्धिकरण यंत्र, माइक्रो पिपेट, रसायन व स्टॉक विलयन, फ्यूम हुड, ऑटोक्लेव, रेफ्रिजरेटर, मैग्नेटिक स्टीयरर, सेंट्रीफ्यूज, pH मीटर, कल्चर ट्रॉली, कल्चर ट्रेज आदि। |
| 2. | काँच के सामान का प्रक्षालन | पर्याप्त जल की सुविधा, ओवन, डिशवाशर आदि। |
| 3. | अभिलेख सम्बन्धित कार्य | कुर्सी, मेज, अलमारी, रजिस्टर आदि। |
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