Official RBSE Solutions for Class 12 Biology: Chapter 14 जैव प्रौद्योगिकी-सामान्य परिचय
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Chapter-wise Solutions for Biology: Chapter 14 जैव प्रौद्योगिकी-सामान्य परिचय
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RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित में से कौन-सी प्रक्रिया परंपरागत जैव-प्रौद्योगिकी का उदाहरण नहीं है?
(अ) दुग्ध से दही व पनीर का निर्माण
(ब) गन्ने के रस से सिरके का निर्माण
(स) पुनर्योगज DNA तकनीक द्वारा औषधि-निर्माण
(द) शर्करा द्वारा बीयर का निर्माण
Answer: (स) पुनर्योगज DNA तकनीक द्वारा औषधि-निर्माण
In simple words: परंपरागत जैव-प्रौद्योगिकी में पुराने तरीकों का उपयोग होता है, जैसे दही बनाना। पुनर्योगज DNA तकनीक एक आधुनिक तरीका है जिससे नई दवाएं बनाई जाती हैं, इसलिए यह परंपरागत नहीं है।
🎯 Exam Tip: परंपरागत जैव-प्रौद्योगिकी में आमतौर पर प्राकृतिक सूक्ष्मजीवों का उपयोग होता है, जबकि आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी में जेनेटिक इंजीनियरिंग जैसी नई तकनीकें शामिल होती हैं।
Question 3. भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी बोर्ड की स्थापना किस वर्ष में की गई थी?
(अ) 1982
(ब) 1978
(स) 1986
(द) 1990
Answer: (अ) 1982
In simple words: भारत सरकार ने 1982 में राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी बोर्ड बनाया था। इसका उद्देश्य देश में जैव प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देना था।
🎯 Exam Tip: सरकारी नीतियों और संगठनों से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियों और वर्षों को याद रखना अक्सर परीक्षा में काम आता है।
Question 4. भारत में कोशिका एवं आण्विक जीवविज्ञान केन्द्र स्थित है –
(अ) नई दिल्ली में
(ब) हैदराबाद में
(स) पूणे में
(द) चण्डीगढ़ में
Answer: (ब) हैदराबाद में
In simple words: कोशिका और आण्विक जीवविज्ञान का मुख्य केंद्र भारत में हैदराबाद शहर में है। यह केंद्र जीव विज्ञान के इस खास क्षेत्र में काम करता है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संस्थानों और उनके स्थानों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर सामान्य ज्ञान के प्रश्नों में पूछा जाता है।
Question 5. ICGEB किस संगठन से संबद्ध है?
(अ) NBTB
(a) UNIDO
(स) IARI
(द) ICFRE
Answer: (ब) UNIDO
In simple words: ICGEB संगठन UNIDO (संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन) से जुड़ा हुआ है। यह संगठन वैश्विक औद्योगिक विकास को बढ़ावा देता है।
🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और उनके संबद्ध संस्थानों के संक्षिप्त नामों और पूर्ण रूपों को जानना महत्वपूर्ण है।
Question 6. इयान विल्मुट द्वारा प्रथम भेड़ के क्लोन का नाम है –
(अ) मौली
(ब) डौली
(स) पौली
(द) जोली
Answer: (ब) डौली
In simple words: वैज्ञानिक इयान विल्मुट ने पहली क्लोन भेड़ बनाई थी, जिसका नाम डॉली था। यह क्लोनिंग के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक खोजों और उनसे जुड़े प्रमुख व्यक्तियों व उनके परिणामों को याद रखना विज्ञान के इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 7. जीवाणुभोजी की खोज निम्नलिखित में से किसके द्वारा की गई?
Answer: (द) फेलिक्स डी'हेरेल और फ्रेडरिक ट्वोर्ट
In simple words: जीवाणुभोजी, जो बैक्टीरिया को खाने वाले वायरस होते हैं, उनकी खोज फेलिक्स डी'हेरेल और फ्रेडरिक ट्वोर्ट ने की थी। यह खोज माइक्रोबायोलॉजी में एक अहम कदम था।
🎯 Exam Tip: खोजों और उनके वैज्ञानिकों के नाम अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं; सटीक मिलान के लिए इन्हें याद करना सुनिश्चित करें।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. जैव प्रौद्योगिकी को परिभाषित कीजिए।
Answer: जैव प्रौद्योगिकी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हम जीवित जीवों, जैसे सूक्ष्मजीवों, पादपों, या उनकी कोशिकाओं और उनके घटकों का उपयोग करते हैं। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण के लिए उपयोगी उत्पाद बनाना है। यह विभिन्न तकनीकों का एक समूह है जो जैविक प्रणालियों का उपयोग करके उत्पादों और प्रक्रियाओं को विकसित करता है।
In simple words: जैव प्रौद्योगिकी का मतलब है जीवों का उपयोग करके ऐसी चीजें बनाना जो इंसानों के काम आ सकें, जैसे दवाएं या भोजन।
🎯 Exam Tip: परिभाषा लिखते समय, जैव प्रौद्योगिकी के दो मुख्य पहलुओं को शामिल करें: जीवित जीवों का उपयोग और मानव कल्याण हेतु उपयोगी उत्पादों का निर्माण।
Question 2. परंपरागत जैव प्रौद्योगिकी से आपका क्या अभिप्राय है?
Answer: परंपरागत जैव प्रौद्योगिकी में पुराने और स्थापित तरीके शामिल हैं, जिनका उपयोग मानव प्राचीन काल से करता आ रहा है। इसमें मुख्य रूप से जैविक नियंत्रण और खाद्य पदार्थों के किण्वन (फर्मेंटेशन) से संबंधित क्षेत्र आते हैं, जैसे दही, पनीर, या सिरका बनाना। यह बिना किसी उन्नत जेनेटिक इंजीनियरिंग के प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर आधारित होती है।
In simple words: परंपरागत जैव प्रौद्योगिकी उन पुराने तरीकों को कहते हैं जिनसे हम जीवों का इस्तेमाल करके चीजें बनाते आए हैं, जैसे दही और सिरका।
🎯 Exam Tip: परंपरागत जैव प्रौद्योगिकी को परिभाषित करते समय, "प्राचीनकाल से उपयोग" और "जैविक नियंत्रण/किण्वन" जैसे प्रमुख शब्दों का उल्लेख करें।
Question 3. परम्परागत तथा आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी में क्या अन्तर है?
Answer: परम्परागत और आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी में मुख्य अंतर नीचे दिए गए हैं:
• परम्परागत जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग मानव द्वारा प्राचीनकाल से ही किया जा रहा है। इसमें प्राकृतिक किण्वन जैसी सरल प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।
• वहीं, आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी की नवीनतम प्रक्रिया है, जो आनुवंशिक इंजीनियरिंग और अन्य उन्नत तकनीकों का उपयोग करती है। यह पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक जटिल और महंगी होती है, लेकिन सटीक परिणाम देती है।
In simple words: पुरानी जैव प्रौद्योगिकी सदियों से इस्तेमाल हो रही है, जबकि नई जैव प्रौद्योगिकी आधुनिक विज्ञान और जेनेटिक इंजीनियरिंग का उपयोग करती है, जो ज्यादा जटिल और महंगी है।
🎯 Exam Tip: दोनों के बीच अंतर बताते समय, "प्राचीनकाल बनाम नवीनतम" और "सरल प्रक्रियाएं बनाम जटिल तकनीकें" जैसे बिंदुओं को उजागर करें।
Question 5. जैव-प्रौद्योगिकी उद्यान से क्या अभिप्राय है?
Answer: जैव प्रौद्योगिकी उद्यान (Biotechnology Parks) ऐसे विशेष स्थान होते हैं जहाँ जैव प्रौद्योगिकी पर आधारित उद्योगों को स्थापित करने की इच्छा रखने वाले व्यक्तियों को सहायता और जानकारी दी जाती है। इन उद्यानों का उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए उद्योगों को बढ़ावा देना है। भारत में अब तक ऐसे 15 जैव प्रौद्योगिकी उद्यान स्थापित किए जा चुके हैं, जो इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
In simple words: जैव प्रौद्योगिकी उद्यान वे जगहें हैं जहाँ जैव प्रौद्योगिकी के नए उद्योग लगाने वालों को मदद और जानकारी मिलती है।
🎯 Exam Tip: जैव प्रौद्योगिकी उद्यान की परिभाषा में "उद्योगों को बढ़ावा देने" और "जानकारी प्रदान करने" के उद्देश्य को शामिल करें।
Question 6. जीन चिप क्या है?
Answer: जीन चिप (Gene chips) एक बहुत ही छोटी चिप होती है, जिस पर दोहरी कुंडली वाले DNA के छोटे-छोटे टुकड़े चिपके रहते हैं। ये टुकड़े खोज करने वाले DNA के बिंदु होते हैं। इस चिप का उपयोग परीक्षण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नमूनों में विशेष जीनों या उनके पैटर्न को पहचानने में किया जाता है, जिससे हमें महत्वपूर्ण जैविक जानकारी मिलती है।
In simple words: जीन चिप एक छोटी सी पट्टी है जिस पर DNA के टुकड़े लगे होते हैं, यह नमूनों में खास जीनों को पहचानने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: जीन चिप की परिभाषा में "सूक्ष्म चिप," "DNA के बिंदु," और "नमूनों में जीनों की पहचान" जैसे प्रमुख शब्दों को शामिल करें।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. टिप्पणी कीजिए
(अ) अन्तर्राष्ट्रीय आनुवंशिक अभियान्त्रिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी केन्द्र (ICGEB)
(ब) बायोचिप्स
(स) बायोसेन्सर
(द) बायोफिल्म
(ये) सूक्ष्म व्यूह
(र) जैव प्रौद्योगिकी विभाग,
(ल) जैव प्रौद्योगिकी उद्यान
(व) भारत में स्थित जैव प्रौद्योगिकी संस्थान
(श) चिकित्सा के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग,
(घ) भारत में स्थित महत्त्वपूर्ण जैव प्रौद्योगिकी उद्यान,
(ह) जैव प्रौद्योगिकी विभाग की महत्त्वपूर्ण योजनाएँ।
Answer:
(अ) अन्तर्राष्ट्रीय आनुवंशिक अभियान्त्रिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी केन्द्र (ICGEB): यह केन्द्र संयुक्त राष्ट्र संघ के औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) द्वारा स्थापित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आनुवंशिक अभियान्त्रिकी और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देना और विकासशील देशों को इस तकनीक का लाभ पहुंचाना है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग को बढ़ावा देता है।
(ब) बायोचिप्स: बायोचिप्स, जिन्हें DNA चिप्स या DNA माइक्रोएरे भी कहते हैं, सूक्ष्म DNA अणुओं का एक संग्रह होते हैं जो एक ठोस सतह पर जुड़े रहते हैं। इस तकनीक का उपयोग एक ही समय में कई जीनों की अभिव्यक्ति के स्तर को मापने के लिए किया जाता है। पहली बायोचिप का निर्माण स्टीफन पी.ए. फोडोर ने 1991 में किया था। ये चिप्स सिलिकॉन-संयुग्मित क्वार्ट्ज या प्लास्टिक जैसी सामग्री से बने होते हैं, जिनकी संरचना प्रयोगात्मक आवश्यकताओं के अनुसार बदलती रहती है।
(स) बायोसेन्सर: बायोसेन्सर ऐसे उपकरण होते हैं जो जैविक पदार्थों और रासायनिक संकेतों को विद्युत संकेतों में बदलते हैं। इनमें ऊतक, सूक्ष्मजीव, कोशिकांग, एंजाइम या न्यूक्लिक अम्ल जैसे जैविक घटक शामिल होते हैं। ये रासायनिक और जीवन संकेतों को ट्रांसड्यूसर की मदद से विद्युत संकेतों में बदलते हैं। बायोसेन्सर विभिन्न प्रकार के होते हैं, जैसे ग्लूकोज बायोसेन्सर, DNA बायोसेन्सर, ओजोन बायोसेन्सर और नैनोसेन्सर, जो चिकित्सा, पर्यावरण निगरानी आदि में उपयोग होते हैं।
(द) बायोफिल्म: बायोफिल्म सूक्ष्मजीवों का एक समूह होता है जो एक सतह पर चिपक जाता है और एक साथ बढ़ता है। यह आमतौर पर पॉलीसेकेराइड्स से बनी एक आधात्री (मैट्रिक्स) से ढका होता है। बायोफिल्म सूक्ष्मजीवों और उनके बाह्यकोशिकीय बहुलक पदार्थों (EPS) से बनती है और प्राकृतिक व परिवर्तित वातावरण दोनों में पाई जाती है। इनका उपयोग अपशिष्ट जल उपचार और जल गुणवत्ता प्रबंधन जैसी प्रक्रियाओं में किया जाता है।
(ये) सूक्ष्म व्यूह (Microarray): सूक्ष्म व्यूह (माइक्रोएरे) दो मुख्य प्रकार के होते हैं:
1. DNA सूक्ष्म व्यूह (DNA microarray): यह एक डाक टिकट से भी छोटा होता है और इसमें कांच की सतह पर लगभग 4 लाख छोटे-छोटे कोष्ठ (सेल्स) होते हैं। हर कोष्ठ में एक सूक्ष्म DNA बिंदु होता है, जिसमें विभिन्न जीनों के एकल रज्जुक DNA अनुक्रम मौजूद होते हैं।
2. प्रोटीन सूक्ष्म व्यूह (Protein microarray): यह एक ऐसी तकनीक है जो समाधान में मौजूद लक्ष्य अणुओं और स्थिर अणुओं के बीच बनने वाले उत्पादों पर आधारित होती है। इसका उपयोग न्यूक्लिक अम्ल-प्रोटीन, प्रोटीन-प्रोटीन, एंजाइम-अवरोधक क्रियाओं और औषध-प्रोटीन लक्ष्यों के अध्ययन में होता है। एंटीबॉडी माइक्रोएरे इसका एक सामान्य उदाहरण है।
(र) जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology): भारत में जैव प्रौद्योगिकी विभाग की स्थापना 1986 में की गई थी। इस विभाग का मुख्य काम जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान को बढ़ावा देना है। यह संस्थानों और विश्वविद्यालयों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करता है और विशेष अनुसंधान केंद्रों की स्थापना व सुदृढ़ीकरण के लिए अनुदान देता है।
(ल) जैव प्रौद्योगिकी उद्यान: जैव प्रौद्योगिकी उद्यान ऐसे स्थान हैं जहाँ जैव प्रौद्योगिकी पर आधारित उद्योगों को स्थापित करने के इच्छुक व्यक्तियों को इस क्षेत्र से संबंधित जानकारी और सहायता मिलती है। ये उद्योग स्थापना और विकास को प्रोत्साहित करते हैं। भारत में ऐसे कई उद्यान हैं जो जैव प्रौद्योगिकी के विकास में सहायक हैं। उदाहरण के लिए, लखनऊ, हैदराबाद और कांचीपुरम (तमिलनाडु) में जैव प्रौद्योगिकी उद्यान स्थित हैं।
(व) भारत में स्थित जैव प्रौद्योगिकी संस्थान: भारत में कई महत्वपूर्ण जैव प्रौद्योगिकी संस्थान हैं जो अनुसंधान और विकास में लगे हुए हैं। इनमें बेंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान, मदुरई में मदुरई कामराज विश्वविद्यालय, कोलकाता में बोस संस्थान, नई दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, पूना में जन्तु कोशिका संवर्धन एवं विषाणु विज्ञान केंद्र, हैदराबाद में कोशिका व आण्विक जीव विज्ञान केंद्र, और नई दिल्ली में राष्ट्रीय रोधक्षमता विज्ञान संस्थान शामिल हैं। ये सभी संस्थान जैव प्रौद्योगिकी के विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहे हैं।
(श) चिकित्सा के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग: चिकित्सा के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग विभिन्न रोगों के निदान और उपचार में किया जाता है। यह मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नीचे कुछ प्रमुख संस्थान और उनके कार्य दिए गए हैं:
| क्र.सं. | नाम | कार्य-क्षेत्र |
|---|---|---|
| 1. | कोशिका व आण्विक जीव विज्ञान केन्द्र हैदराबाद | ओंकोजीन, कोशिका रूपान्तरण, प्रोटीन संरचना व न्यूक्लिक अम्ल |
| 2. | राष्ट्रीय रोधक्षमता विज्ञान संस्थान नई दिल्ली | रोध क्षमता सम्बन्धित शोध कार्य |
(घ) भारत में स्थित महत्त्वपूर्ण जैव प्रौद्योगिकी उद्यान: भारत में कई महत्त्वपूर्ण जैव प्रौद्योगिकी उद्यान स्थापित किए गए हैं जो इस क्षेत्र के विकास में योगदान दे रहे हैं। इनमें गोल्डन जुबली बायोटेक पार्क फॉर वूमन (कांचीपुरम), गुवाहाटी जैव प्रौद्योगिकी उद्यान (असम), बायोफार्मा आई.टी. पार्क (भुवनेश्वर), TICL अंतर्राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी पार्क (पुणे), और KINFRA जैव प्रौद्योगिकी पार्क (केरल) जैसे प्रमुख उद्यान शामिल हैं। ये उद्यान जैव प्रौद्योगिकी उद्योगों को बढ़ावा देते हैं और अनुसंधान को समर्थन प्रदान करते हैं।
(ह) जैव प्रौद्योगिकी विभाग की महत्त्वपूर्ण योजनाएँ: जैव प्रौद्योगिकी विभाग कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाता है, जिनमें क्लोनीय फसलों का जनन द्रव्य संग्रहण, औषधीय और ऐरोमैटिक पौधों का जनन द्रव्य संरक्षण, और जीन बैंकों की स्थापना शामिल है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान संस्थानों व विश्वविद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का विकास करना, विशेष अनुसंधान केंद्रों की स्थापना करना और स्थापित केंद्रों को मजबूत बनाने के लिए अनुदान प्रदान करना है।
In simple words: यह प्रश्न जैव प्रौद्योगिकी के कई अलग-अलग हिस्सों के बारे में बताता है, जैसे ICGEB जैसे संगठन, बायोचिप्स जैसी तकनीकें, और भारत में जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने वाले संस्थान व उनकी योजनाएँ।
🎯 Exam Tip: टिप्पणी वाले प्रश्नों में, प्रत्येक उप-भाग के लिए संक्षिप्त और सटीक जानकारी दें। यदि संभव हो, तो उदाहरणों या मुख्य कार्यों का उल्लेख करें।
Question 2. जैव प्रौद्योगिकी की विभिन्न शाखाओं के नाम लिखिए।
Answer: जैव प्रौद्योगिकी की विभिन्न शाखाएँ या प्रकार निम्नलिखित हैं:
• पादप जैव प्रौद्योगिकी: पौधों से संबंधित अनुसंधान और विकास।
• भोजन व पोषण जैव प्रौद्योगिकी: खाद्य उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार।
• जन्तु जैव प्रौद्योगिकी: पशुओं से संबंधित अनुसंधान, जैसे क्लोनिंग।
• चिकित्सा जैव प्रौद्योगिकी: रोगों के निदान और उपचार के लिए तकनीकें।
• जैव संसाधन व पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकी: पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों का उपयोग।
• समुद्री जैव प्रौद्योगिकी: समुद्री जीवों से संबंधित अनुप्रयोग।
• जैव सूचना विज्ञान जैव प्रौद्योगिकी: जैविक डेटा का विश्लेषण और प्रबंधन।
In simple words: जैव प्रौद्योगिकी कई तरह की होती है, जैसे पौधों, जानवरों, भोजन, दवा, पर्यावरण और डेटा से जुड़ी हुई।
🎯 Exam Tip: जैव प्रौद्योगिकी की विभिन्न शाखाओं को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक शाखा के मुख्य क्षेत्र को एक-दो शब्दों में इंगित करें ताकि उत्तर संक्षिप्त और स्पष्ट रहे।
Question 2. क्लोनिंग (Cloning) से क्या तात्पर्य है ?
Answer: क्लोनिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी जीव या कोशिका की आनुवंशिक रूप से समान प्रतिलिपि बनाई जाती है। इसका मतलब है कि नया जीव या कोशिका मूल जीव के सभी जीन को हूबहू कॉपी करता है। यह प्राकृतिक रूप से भी हो सकता है, जैसे कुछ पौधों में, या कृत्रिम रूप से, जैसे डॉली भेड़ के मामले में।
In simple words: क्लोनिंग का मतलब है किसी जीव की बिल्कुल वैसी ही आनुवंशिक कॉपी बनाना।
🎯 Exam Tip: क्लोनिंग की परिभाषा में "आनुवंशिक रूप से समान प्रतिलिपि" और "जीव या कोशिका" शब्दों को शामिल करें।
Question 3. जैव प्रौद्योगिकी के तीन विवेचनात्मक अनुसंधान क्षेत्रों के नाम बताइए।
Answer: जैव प्रौद्योगिकी के तीन मुख्य अनुसंधान क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
• उत्प्रेरक के कार्य हेतु अभियांत्रिकी द्वारा सर्वोत्तम परिस्थितियों का निर्माण करना: इसमें एंजाइमों और अन्य जैविक उत्प्रेरकों के काम करने के लिए सबसे अच्छी स्थितियाँ बनाना शामिल है, ताकि वे सबसे प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
• उन्नत जीवों के रूप में सर्वोत्तम उत्प्रेरक का निर्माण करना: इस क्षेत्र में ऐसे जीवों को विकसित किया जाता है जो औद्योगिक प्रक्रियाओं में बेहतर उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकें।
• अनुप्रवाह प्रक्रमण तकनीक का प्रोटीन (कार्बनिक यौगिकों) के शुद्धीकरण में उपयोग करना: इसमें जैविक उत्पादों, खासकर प्रोटीन और अन्य कार्बनिक यौगिकों को उनके उत्पादन के बाद शुद्ध करने की तकनीकें विकसित करना शामिल है।
In simple words: जैव प्रौद्योगिकी के तीन बड़े काम हैं: उत्प्रेरक के लिए अच्छी स्थितियां बनाना, बेहतर उत्प्रेरक वाले जीव बनाना, और उत्पादों को साफ करने की तकनीकें विकसित करना।
🎯 Exam Tip: इन अनुसंधान क्षेत्रों को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक बिंदु के मुख्य विचार को स्पष्ट रूप से बताएं, जैसे "उत्प्रेरक की स्थिति", "बेहतर उत्प्रेरक", और "शुद्धीकरण तकनीक"।
Question 4. जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग वर्तमान में किन-किन क्षेत्रों में किया जा रहा है?
Answer: वर्तमान में जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा रहा है। इनमें चिकित्सा विज्ञान (जैसे दवाएं बनाना और बीमारियों का इलाज), कृषि (जैसे बेहतर फसलें उगाना), आनुवंशिक रूप से रूपांतरित फसलें (जीएम फसलें), संसाधित खाद्य पदार्थ (खाने के सामान को बेहतर बनाना), जैव सुधार (पर्यावरण की सफाई), अपशिष्ट प्रतिपादन (कचरे का निपटान), और ऊर्जा उत्पादन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
In simple words: जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग आजकल दवा बनाने, खेती सुधारने, खाना बनाने, कचरा साफ करने और ऊर्जा बनाने जैसे कई कामों में हो रहा है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में विभिन्न क्षेत्रों के नाम सूचीबद्ध करें और प्रत्येक क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के योगदान का एक छोटा सा उदाहरण दें।
Question 5. कृषि में जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग करके खाद्य उत्पादन में वृद्धि के लिए हम कौन-सी तीन सम्भावनाओं के बारे में सोच सकते हैं ?
Answer: कृषि में जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग करके खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए हम तीन मुख्य संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं:
• आनुवंशिकतः निर्मित फसल आधारित कृषि: इसमें ऐसी फसलें बनाना शामिल है जिनमें सुधारित गुण हों, जैसे कि कीटों और बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधक क्षमता या उच्च पोषण मूल्य। इससे कम संसाधनों में अधिक उत्पादन हो सकता है।
• कृषि रसायन आधारित कृषि: जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग करके ऐसे कृषि रसायन विकसित करना जो पर्यावरण के लिए कम हानिकारक हों और फसलों को बेहतर तरीके से बचा सकें, जिससे पैदावार बढ़े।
• कार्बनिक कृषि: हालांकि जैव प्रौद्योगिकी सीधे तौर पर कार्बनिक कृषि का हिस्सा नहीं है, लेकिन यह जैव-उर्वरक और जैव-कीटनाशकों के विकास में मदद कर सकती है जो कार्बनिक खेती के सिद्धांतों के अनुरूप हों।
In simple words: खेती में जैव प्रौद्योगिकी से हम बेहतर फसलें उगा सकते हैं, अच्छे रसायन बना सकते हैं और जैविक खेती के लिए भी नई चीजें खोज सकते हैं, जिससे ज्यादा खाना मिलेगा।
🎯 Exam Tip: कृषि में जैव प्रौद्योगिकी की संभावनाओं को बताते समय, प्रमुख लाभों जैसे "बेहतर फसल गुण," "हानिकारक रसायनों में कमी," और "पर्यावरण-अनुकूल विकल्प" पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 6. स्टेम कोशिका क्या है ?
Answer: स्टेम कोशिकाएं विशेष प्रकार की कोशिकाएं होती हैं जिनमें बार-बार विभाजित होकर नई स्टेम कोशिकाएं बनाने की क्षमता होती है। ये ऐसी वंशज कोशिकाएं भी बना सकती हैं जो शरीर में विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में विकसित होने की क्षमता रखती हैं, जैसे कि जानवरों में भ्रूण की कोशिकाएं। ये कोशिकाएं शरीर के ऊतकों की मरम्मत और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
In simple words: स्टेम कोशिकाएं वे खास कोशिकाएं हैं जो खुद की और शरीर की किसी भी तरह की दूसरी कोशिकाएं बना सकती हैं।
🎯 Exam Tip: स्टेम कोशिका की परिभाषा में "विभाजित होने की क्षमता" और "विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में विकसित होने की क्षमता" जैसे प्रमुख गुणों को शामिल करें।
Question 7. पहला पुनर्योगज मानव इन्सुलिन किस कम्पनी द्वारा बनाया गया?
Answer: पहला पुनर्योगज मानव इंसुलिन अमेरिका की एली लिली (Eli Lilly) कम्पनी द्वारा बनाया गया था। यह कंपनी ने 1983 में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जिससे मधुमेह के इलाज में क्रांति आ गई।
In simple words: पहली मानव इंसुलिन दवा अमेरिका की एली लिली कंपनी ने बनाई थी।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक खोजों और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे किसी बीमारी के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान देते हों।
Question 8. कौन-सी आण्विक जाँच एन्टीजन एंटीबाडी पारस्परिक क्रिया पर आधारित है?
Answer: ELISA (एन्जाइम-लिंक्ड इम्युनोसॉरबेंट ऐसे) आण्विक जांच एंटीजन-एंटीबॉडी पारस्परिक क्रिया पर आधारित है। यह एक परीक्षण है जो शरीर में विशिष्ट एंटीबॉडी या एंटीजन का पता लगाने के लिए उपयोग होता है, जिससे बीमारियों का पता चलता है।
In simple words: ELISA टेस्ट एंटीजन और एंटीबॉडी के आपस में मिलने पर आधारित है, जिससे बीमारियों की जांच की जाती है।
🎯 Exam Tip: एंटीजन-एंटीबॉडी प्रतिक्रिया पर आधारित जांच विधियों में ELISA एक महत्वपूर्ण उदाहरण है; इसे याद रखें।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 14 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. अमेरिकी कम्पनी एली लिली ने DNA प्रौद्योगिकी की जानकारी को मानव इंसुलिन उत्पादन में किस प्रकार प्रयुक्त किया ?
Answer: अमेरिकी कंपनी एली लिली ने 1983 में इंसुलिन की A और B श्रृंखलाओं के लिए DNA खंड बनाए। फिर इन खंडों को जीवाणु ईश्चरिचिया कोलाई (E. coli) के प्लाज्मिड में डाल दिया। इस तरीके से जीवाणु ने A और B श्रृंखलाओं को अलग-अलग बनाया। बाद में, इन श्रृंखलाओं को डाईसल्फाइड बंधों से जोड़कर सक्रिय इंसुलिन तैयार कर लिया गया। यह विधि मधुमेह रोगियों के लिए इंसुलिन उत्पादन में क्रांति लाई।
In simple words: एली लिली कंपनी ने बैक्टीरिया का उपयोग करके मानव इंसुलिन के दो हिस्सों को अलग-अलग बनाया, फिर उन्हें जोड़कर असली इंसुलिन बनाया।
🎯 Exam Tip: इंसुलिन के उत्पादन में recombinant DNA तकनीक के मुख्य चरणों को याद रखें: जीन को क्लोन करना, प्लाज्मिड में डालना, और फिर प्रोटीन को शुद्ध करना।
प्रश्न 2. आनुवंशिक रूप से रूपान्तरित पादपों के किन्हीं तीन सम्भावित अनुप्रयोगों का वर्णन कीजिए।
Answer: आनुवंशिक रूप से बदले गए पौधों के तीन संभावित उपयोग इस प्रकार हैं:
(i) **कीटनाशक प्रतिरोधकता का विकास:** ऐसे पौधे बनाए जाते हैं जो कीटों से खुद को बचा सकें, जिससे रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग कम हो जाता है। उदाहरण के लिए, बीटी कपास कीटों के प्रति प्रतिरोधी होता है।
(ii) **बेहतर गुणवत्ता और पोषक मान:** पौधों में विटामिन ए जैसे पोषक तत्वों को बढ़ाया जाता है, जिससे उनकी पोषण गुणवत्ता सुधरती है। 'गोल्डन राइस' इसका एक अच्छा उदाहरण है।
(iii) **फसल कटाई के बाद कम नुकसान:** ऐसे टमाटर बनाए जाते हैं जिनकी शैल्फ अवधि लंबी होती है, यानी वे कटाई के बाद अधिक समय तक ताजे रहते हैं और जल्दी खराब नहीं होते।
In simple words: आनुवंशिक रूप से बदले गए पौधे कीड़ों से लड़ने, ज्यादा पौष्टिक बनने और कटाई के बाद लंबे समय तक ताजे रहने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: जब भी आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) फसलों के अनुप्रयोगों पर सवाल हो, तो उनके पर्यावरण और आर्थिक लाभों को हमेशा शामिल करें, क्योंकि ये उनके मुख्य उद्देश्य होते हैं।
प्रश्न 3. जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग अपने देश की किन-किन समस्याओं के समाधान हेतु किया जा सकता है ? पाँच क्षेत्र बताइए।
Answer: जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग हमारे देश की कई समस्याओं को हल करने में किया जा सकता है। इसके पाँच प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
(i) **कृषि-आधारित उद्योगों का विकास:** जैव प्रौद्योगिकी से फसल उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाकर कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
(ii) **ऊतक संवर्धन:** पौधों के ऊतक संवर्धन से दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों का तेजी से उत्पादन किया जा सकता है, जिससे जैव विविधता का संरक्षण होता है।
(iii) **सस्ते और सुरक्षित टीके:** देश में फैलने वाली सामान्य बीमारियों के लिए कम लागत वाले और सुरक्षित टीके बनाए जा सकते हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य बेहतर होगा।
(iv) **पर्यावरण संरक्षण:** यह अपशिष्ट जल उपचार, प्रदूषण नियंत्रण और जैव-निम्नीकरण प्रक्रियाओं में मदद कर सकता है।
(v) **चिकित्सीय निदान और उपचार:** बीमारियों के जल्दी निदान और प्रभावी उपचार के लिए नई दवाएं और उपचार विधियां विकसित की जा सकती हैं।
In simple words: जैव प्रौद्योगिकी कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और उद्योग जैसे क्षेत्रों में नई दवाएं, बेहतर फसलें और बीमारियों के लिए टीके बनाकर देश की समस्याओं को हल कर सकती है।
🎯 Exam Tip: उत्तर में दिए गए प्रत्येक क्षेत्र के साथ एक छोटा उदाहरण या लाभ जोड़ना आपके उत्तर को अधिक प्रभावी बना सकता है।
प्रश्न 4. "जैव प्रौद्योगिकी के गलत उपयोग से बचाव” पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: आधुनिक विज्ञान जीन इंजीनियरिंग और जैव प्रौद्योगिकी की मदद से कृषि में बहुत आगे बढ़ गया है। अब ऐसे जानवर और पौधे बनाए जा रहे हैं जिनमें बदलाव किए गए हैं। बीजों, भ्रूणों और अंडाणुओं को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के तरीके भी मिल गए हैं। जल्द ही किसान पूरी तरह से आनुवंशिक रूप से बदले गए बीजों पर निर्भर हो सकते हैं। लेकिन यह सोचना जरूरी है कि क्या ऐसे बीजों से बने हमारे कृषि उत्पाद रासायनिक जहर से सुरक्षित रहेंगे? क्या आनुवंशिक रूप से बदले गए जीव पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएंगे? क्या ऐसे जीवों का उपयोग सामाजिक नियमों पर बुरा असर डालेगा? वैज्ञानिकों को इन जीवों और उनके उत्पादों के फायदे और नुकसान दोनों के बारे में लोगों को बताना चाहिए। ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में इस पर बहुत शोध हो रहा है, लेकिन कई संगठन इसका विरोध कर रहे हैं, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि ये जीव पर्यावरण को कैसे प्रभावित करेंगे। जैव प्रौद्योगिकी के सुरक्षित और नैतिक उपयोग के लिए सख्त नियम और सार्वजनिक चर्चा जरूरी है।
In simple words: जैव प्रौद्योगिकी के गलत इस्तेमाल से बचने के लिए, हमें यह समझना होगा कि क्या इससे बने उत्पाद सुरक्षित हैं, क्या यह पर्यावरण या समाज को नुकसान पहुंचाएगा। वैज्ञानिकों को इसके फायदे और नुकसान दोनों लोगों को बताने चाहिए।
🎯 Exam Tip: जब भी किसी नैतिक मुद्दे पर विचार व्यक्त करने को कहा जाए, तो हमेशा उसके फायदे और नुकसान दोनों पक्षों को उजागर करें और एक संतुलित निष्कर्ष दें।
प्रश्न 5. 'स्वास्थ्य की देखभाल में जैव प्रौद्योगिकी की उपयोगिता पर टिप्पणी लिखिए। अथवा मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी की उपयोगिता के दो उदाहरण दीजिए।
Answer: स्वास्थ्य की देखभाल में जैव प्रौद्योगिकी का बहुत बड़ा योगदान है, जिससे हम बीमारियों का पता लगाने और उनका इलाज करने में सक्षम हुए हैं। यह सामाजिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसके कुछ मुख्य उपयोग इस प्रकार हैं:
(i) **टीका उत्पादन:** बीमारियों से बचाव के लिए नए और अधिक प्रभावी टीके बनाए जाते हैं।
(ii) **स्टेरॉयड हार्मोन उत्पादन:** मानव शरीर के लिए जरूरी हार्मोन जैसे इंसुलिन का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है।
(iii) **गर्भावस्था में रोग की जानकारी:** गर्भावस्था के दौरान बीमारियों का जल्दी पता लगाने में मदद मिलती है।
(iv) **जीन अदला-बदली द्वारा चिकित्सा (Gene therapy):** आनुवंशिक रोगों का इलाज करने के लिए जीन थेरेपी का उपयोग किया जाता है।
(v) **रोगों की पहचान:** फिनाइल कीटोन्यूरिया, बीटा-थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और एड्स जैसे रोगों की पहचान करने में जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग होता है।
In simple words: जैव प्रौद्योगिकी हमें टीके बनाने, हार्मोन तैयार करने, बीमारियों का जल्दी पता लगाने, जीन थेरेपी से इलाज करने और कई गंभीर रोगों की पहचान करने में मदद करती है, जिससे हमारा स्वास्थ्य बेहतर होता है।
🎯 Exam Tip: चिकित्सा क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों को लिखते समय, विशिष्ट उदाहरणों जैसे 'इंसुलिन उत्पादन' या 'जीन थेरेपी' का उल्लेख करें ताकि आपका उत्तर ठोस लगे।
प्रश्न 6. कृषि क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी की उपयोगिता लिखिए।
Answer: कृषि क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग बहुत महत्वपूर्ण है, जिससे फसलों की पैदावार और पोषण क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। इसकी मुख्य उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:
(i) **रोग प्रतिरोधक प्रजातियों का उत्पादन:** जैव प्रौद्योगिकी से ऐसी फसलें विकसित की जाती हैं जो विभिन्न रोगों के प्रति प्रतिरोधी होती हैं, जिससे फसल का नुकसान कम होता है।
(ii) **कीट और कवक प्रतिरोधक प्रजातियों का विकास:** पौधों को कीटों और कवकों से बचाने के लिए प्रतिरोधी किस्में बनाई जाती हैं, जिससे कीटनाशकों का उपयोग कम हो जाता है।
(iii) **पर्यावरणीय परिस्थितियों के लिए प्रतिरोधक प्रजातियों का विकास:** सूखा, मिट्टी की खराब स्थिति जैसी मुश्किल पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूत फसलें तैयार की जाती हैं।
(iv) **पौधों की पोषण क्षमता में वृद्धि:** फसलों में पोषक तत्वों जैसे विटामिन और खनिजों की मात्रा बढ़ाई जाती है, जिससे मानव स्वास्थ्य को लाभ होता है।
(v) **पौधों में और मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण:** जैव प्रौद्योगिकी से उन प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिलता है जिनसे पौधे और मिट्टी में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण होता है, जो पौधों के विकास के लिए जरूरी है।
(vi) **जैव उर्वरकों की खोज:** रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जैविक उर्वरक विकसित किए जाते हैं।
(vii) **परागकोश संवर्धन द्वारा अगुणित पौधे तैयार करना:** यह तकनीक पौधों की नई और बेहतर किस्में बनाने में मदद करती है।
In simple words: कृषि में जैव प्रौद्योगिकी फसलों को बीमारियों और कीटों से बचाने, उन्हें सूखे जैसी स्थितियों में जीवित रखने, अधिक पौष्टिक बनाने और मिट्टी को स्वस्थ रखने में मदद करती है, जिससे खेती आसान और अधिक उत्पादक बनती है।
🎯 Exam Tip: कृषि में जैव प्रौद्योगिकी के लाभों को बताते समय, पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव और खाद्य सुरक्षा में सुधार पर जोर दें।
प्रश्न 7. मधुमेह रोगियों को यदि असंसाधित प्राक इंसुलिन दिया जाय। तो क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: असंसाधित (अपरिपक्व) प्राक इंसुलिन एक निष्क्रिय अणु होता है। यह सक्रिय नहीं होता क्योंकि इसमें C-पेप्टाइड नामक एक अतिरिक्त हिस्सा होता है। जब यह C-पेप्टाइड हट जाता है, तभी प्राक इंसुलिन सक्रिय इंसुलिन में बदलता है। अगर मधुमेह के रोगियों को सीधे असंसाधित प्राक इंसुलिन दिया जाए, तो यह शरीर में शर्करा के स्तर को कम नहीं करेगा, क्योंकि यह निष्क्रिय है और ठीक से काम नहीं कर पाएगा। इसलिए, यह मधुमेह रोगियों के लिए बिलकुल भी प्रभावी नहीं होगा।
In simple words: यदि मधुमेह के रोगी को असंसाधित इंसुलिन दिया जाता है, तो यह काम नहीं करेगा क्योंकि इसमें एक अतिरिक्त हिस्सा होता है जो इसे निष्क्रिय रखता है, और यह रक्त में शर्करा को कम नहीं कर पाएगा।
🎯 Exam Tip: इंसुलिन के निर्माण और उसके सक्रियण प्रक्रिया को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें C-पेप्टाइड का महत्व एक प्रमुख बिंदु है।
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