RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 11 श्वसन

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RBSE Class 12 Biology Chapter 11 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. कोशिका में क्रेब्स चक्र कहाँ सम्पन्न होता है-
(अ) केन्द्रक
(ब) कोशिका द्रव्य
(स) हरितलवक
(द) माइटोकॉण्डिया
Answer: (द) माइटोकॉण्डिया
In simple words: क्रेब्स चक्र कोशिका के माइटोकॉण्डिया नामक भाग में होता है, जो कोशिका का ऊर्जा घर भी कहलाता है। यह क्रिया कोशिका को ऊर्जा प्रदान करने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: कोशिका के विभिन्न चक्रों और उनके स्थानों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे क्रेब्स चक्र माइटोकॉण्डिया में होता है, जो अक्सर पूछा जाता है।

 

प्रश्न 3. जीवद्रव्य श्वसन में श्वसन क्रियाधार होता है-
(अ) वसा ।
(ब) प्रोटीन्स ।
(स) शंर्करा
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: जब कोशिकाएँ श्वसन करती हैं, तो वे ऊर्जा के लिए कई चीज़ों का उपयोग कर सकती हैं। इसमें वसा, प्रोटीन और शर्करा सभी शामिल हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि जीवद्रव्यी श्वसन में शरीर ऊर्जा के लिए केवल कार्बोहाइड्रेट ही नहीं, बल्कि वसा और प्रोटीन जैसे अन्य पोषक तत्वों का भी उपयोग कर सकता है।

 

प्रश्न 4. कोशिका की सार्वत्रिक ऊर्जा मुद्रा कहलाती है-
(अ) ATP
(ब) DNA
(स) RNA
(द) AMP
Answer: (अ) ATP
In simple words: ATP को कोशिका की ऊर्जा मुद्रा कहा जाता है क्योंकि यह सभी कोशिकीय प्रक्रियाओं के लिए मुख्य ऊर्जा स्रोत है। यह कोशिका को कार्य करने की शक्ति देता है।

🎯 Exam Tip: ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) शरीर में ऊर्जा का प्राथमिक वाहक है, इसे हमेशा याद रखें।

 

प्रश्न 5. ग्लाइकोलिसिस में ऊर्जा का शुद्ध लाभ होता है।
(अ) 2ATP
(ब) 8ATP
(स) 4ATP
(द) शून्य ।
Answer: (ब) 8ATP
In simple words: ग्लाइकोलिसिस प्रक्रिया में, कोशिका कुल 8 एटीपी ऊर्जा अणु प्राप्त करती है। यह ग्लूकोज को तोड़ने से मिलने वाली कुल ऊर्जा होती है।

🎯 Exam Tip: ग्लाइकोलिसिस में शुद्ध ATP लाभ की गणना करते समय, उत्पादन और उपयोग दोनों ATP अणुओं को ध्यान में रखें।

 

प्रश्न 7. ग्लाइकोलिसिस में निर्मित \( \text{NADH+H}^+ \) के दो अणु यदि मैलेट-ऐस्पारटेट शटल के द्वारा ETS में प्रवेश करते हैं तो इनसे कितने अणु ATP के बनेंगे-
(अ) दो
(ब) चार
(स) छः
(द) आठ
Answer: (स) छः
In simple words: जब \( \text{NADH+H}^+ \) के दो अणु मैलेट-ऐस्पारटेट शटल का उपयोग करके ETS में जाते हैं, तो वे कुल 6 एटीपी ऊर्जा अणु बनाते हैं। हर \( \text{NADH+H}^+ \) अणु 3 एटीपी अणु देता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न शटल प्रणालियों (जैसे मैलेट-ऐस्पारटेट और ग्लिसरॉल फॉस्फेट) द्वारा उत्पादित ATP अणुओं की संख्या को याद रखना आवश्यक है, क्योंकि वे भिन्न होते हैं।

 

प्रश्न 8. पेंटोज फास्फेट पथ में ग्लूकोज के एक अणु के ऑक्सीकरण से कितने अणु ATP का निर्माण होता है-
(अ) 36
(ब) 38
(स) 40
(द) 8
Answer: (अ) 36
In simple words: पेंटोज फास्फेट पथ में, ग्लूकोज का एक अणु पूरी तरह से टूटकर 36 एटीपी ऊर्जा अणु बनाता है। यह कोशिका के लिए ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

🎯 Exam Tip: पेंटोज फास्फेट पथ में शुद्ध ATP उत्पादन को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अन्य श्वसन मार्गों से भिन्न हो सकता है।

 

प्रश्न 9. ऑक्सीकारी फास्फोरिलीकरण के केमीऑस्मोटिक सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया था।
(अ) क्रेब्स ने
(ब) गिब्स ने
(स) पीटर मिशेल ने
(द) डीकन्स ने
Answer: (स) पीटर मिशेल ने
In simple words: पीटर मिशेल ने यह बताया था कि कैसे कोशिका में ऊर्जा बनती है, जिसे केमीऑस्मोटिक सिद्धान्त कहते हैं। इस सिद्धान्त के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार भी मिला था।

🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक नामों और उनके योगदानों को सही ढंग से याद रखना जीव विज्ञान के प्रश्नों में अंक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 11. श्वसन में श्वसन गुणांक एक से कम होता है-
(अ) ग्लूकोज में
(ब) सुक्रोज में
(स) स्टार्च में
(द) प्रोटीन्स में
Answer: (द) प्रोटीन्स में
In simple words: जब श्वसन में प्रोटीन का उपयोग होता है, तो श्वसन गुणांक (RQ) 1 से कम होता है। इसका मतलब है कि ऑक्सीजन का उपयोग कार्बन डाइऑक्साइड से ज़्यादा होता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न श्वसन क्रियाधारों (जैसे कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन) के लिए श्वसन गुणांक (RQ) मानों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं।

 

प्रश्न 12. श्वसन का \( \text{Q}_{10} \) मान होता है-
(अ) तीन
(ब) दो
(स) चार
(द) छः
Answer: (ब) दो
In simple words: श्वसन का \( \text{Q}_{10} \) मान आमतौर पर 2 होता है। इसका मतलब है कि हर 10 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने पर श्वसन दर लगभग दोगुनी हो जाती है।

🎯 Exam Tip: \( \text{Q}_{10} \) मान जैविक प्रक्रियाओं पर तापमान के प्रभाव को दर्शाता है, और 2 का मान यह बताता है कि दर हर 10°C की वृद्धि पर दोगुनी हो जाती है।

 

प्रश्न 13. पेन्टोज फास्फेट पथ कोशिका में किस स्थल पर सम्पन्न होता है-
(अ) माइटोकाण्ड्रिया
(ब) परऑक्सीसोम
(स) कोशिकाद्रव्य
(द) केन्द्रक
Answer: (स) कोशिकाद्रव्य
In simple words: पेन्टोज फास्फेट पथ कोशिका के कोशिकाद्रव्य में होता है। यह पथ ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ महत्वपूर्ण अणुओं के निर्माण में भी मदद करता है।

🎯 Exam Tip: कोशिका के विभिन्न उपापचयी मार्गों के कोशिकीय स्थानों को याद रखें, क्योंकि यह जीव विज्ञान में एक मूलभूत अवधारणा है।

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 11 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. ग्लाइकोलाइसिस का अन्तिम उत्पाद क्या है?
Answer: ग्लाइकोलाइसिस का अन्तिम उत्पाद पाइरूविक अम्ल है। यह प्रक्रिया ग्लूकोज को तोड़कर ऊर्जा बनाने की शुरुआत करती है।
In simple words: ग्लाइकोलाइसिस के आखिर में पाइरूविक अम्ल बनता है।

🎯 Exam Tip: ग्लाइकोलिसिस एक महत्वपूर्ण उपापचयी पथ है; इसके शुरुआती और अंतिम उत्पादों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 3. क्रेब्स चक्र को TCA चक्र क्यों कहते हैं ?
Answer: क्रेब्स चक्र को TCA चक्र इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें बनने वाला पहला स्थिर यौगिक सिट्रिक अम्ल होता है, जिसमें तीन कार्बोक्सिलिक अम्ल (-COOH) समूह होते हैं। ट्राईकार्बोक्सिलिक अम्ल (TCA) का अर्थ है तीन कार्बोक्सिलिक समूह वाला अम्ल। सिट्रिक अम्ल क्रेब्स चक्र का पहला उत्पाद होता है।
In simple words: क्रेब्स चक्र को टीसीए चक्र कहते हैं क्योंकि इसमें सिट्रिक अम्ल बनता है, जिसमें तीन (-COOH) समूह होते हैं।

🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि चक्र के पहले स्थायी उत्पाद के नाम पर ही चक्र का नामकरण किया जाता है, जैसे सिट्रिक अम्ल के कारण TCA चक्र।

 

प्रश्न 4. ग्लूकोस के ऑक्सीकरण के वैकल्पिक परिपथ का नाम बताइए।
Answer: ग्लूकोस के ऑक्सीकरण के दो मुख्य वैकल्पिक परिपथ हैं:
1. हेक्सोस मोनोफॉस्फेट परिपथ अथवा पेण्टोस फॉस्फेट पथ (HMP या PPP)
2. एन्टनर कुओडोरौफ पथ (Entner Doudoroff Pathway)
दोनों पथ कोशिका को ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण अणुओं के निर्माण में भी सहायता करते हैं।
In simple words: ग्लूकोज को तोड़ने के दो दूसरे तरीके हैं - हेक्सोस मोनोफॉस्फेट पथ और एन्टनर कुओडोरौफ पथ।

🎯 Exam Tip: ग्लूकोज ऑक्सीकरण के वैकल्पिक मार्गों के नाम और उनका संक्षिप्त कार्य याद रखें, क्योंकि ये जीव विज्ञान में महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं।

 

प्रश्न 5. जीवद्रयी श्वसन से आप क्या समझते हैं?
Answer: जीवद्रयी श्वसन का अर्थ है वह श्वसन जो ऑक्सीजन की उपस्थिति में जीवद्रव्य में होता है। इसे प्रोटोप्लाज्मिक रेस्पिरेशन भी कहते हैं, जहाँ जीवद्रव्य के घटक श्वसन क्रिया में भाग लेते हैं। यह श्वसन पौधों में सामान्य रूप से होता है।
In simple words: जीवद्रयी श्वसन वह श्वसन है जो ऑक्सीजन की मौजूदगी में कोशिका के अंदर जीवद्रव्य में होता है।

🎯 Exam Tip: जीवद्रयी श्वसन और मुक्तप्लावी श्वसन के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें मुख्य अंतर श्वसनी क्रियाधार है।

 

प्रश्न 6. किण्वन किसे कहते हैं?
Answer: किण्वन एक श्वसन प्रक्रिया है जो ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है। इस प्रक्रिया में ऐल्कोहॉल या कार्बोक्सिलिक अम्ल बनते हैं। यह अक्सर सूक्ष्मजीवों द्वारा किया जाता है।
In simple words: किण्वन वह क्रिया है जहाँ ऑक्सीजन के बिना खाना टूटता है और ऐल्कोहॉल या अम्ल बनता है।

🎯 Exam Tip: किण्वन की परिभाषा, ऑक्सीजन की भूमिका (अनुपस्थिति) और इसके उत्पादों (जैसे ऐल्कोहॉल, लैक्टिक अम्ल) को याद रखें।

 

प्रश्न 7. श्वसन के क्रियाधारों से क्या अभिप्राय है?
Answer: श्वसन क्रियाधार वे उच्च ऊर्जा वाले पदार्थ होते हैं जो श्वसन अभिक्रिया में भाग लेते हैं और ऑक्सीकृत होकर ऊर्जा छोड़ते हैं। उदाहरण के लिए, कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन श्वसन क्रियाधार के रूप में कार्य करते हैं। ये शरीर को ऊर्जा देते हैं।
In simple words: श्वसन क्रियाधार वे पदार्थ होते हैं जिनसे कोशिका ऊर्जा लेती है, जैसे चीनी, वसा और प्रोटीन।

🎯 Exam Tip: श्वसन क्रियाधारों के मुख्य उदाहरणों (कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन) को याद रखें और समझें कि वे ऊर्जा कैसे प्रदान करते हैं।

 

प्रश्न 9. श्वसन गुणांक को परिभाषित कीजिए।
Answer: श्वसन गुणांक (Respiratory Quotient, RQ) श्वसन क्रिया के दौरान मुक्त होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)) के आयतन और उपयोग की जाने वाली ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)) के आयतन का अनुपात होता है। यह श्वसन क्रिया के प्रकार को समझने में मदद करता है।
In simple words: श्वसन गुणांक बताता है कि श्वसन में कितनी \( \text{CO}_2 \) निकली और कितनी \( \text{O}_2 \) इस्तेमाल हुई।

🎯 Exam Tip: श्वसन गुणांक की परिभाषा और उसका सूत्र हमेशा याद रखें, क्योंकि यह श्वसन के प्रकार को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 10. अवायवीय श्वसन में श्वसन गुणांक अनन्त क्यों होता है?
Answer: अवायवीय श्वसन में कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)) तो मुक्त होती है, लेकिन ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)) का उपयोग बिल्कुल नहीं होता है। चूंकि श्वसन गुणांक का सूत्र \( \frac{\text{मुक्त } \text{CO}_2 \text{ का आयतन}}{\text{प्रयुक्त } \text{O}_2 \text{ का आयतन}} \) है, और हर वह संख्या जिसके हर में शून्य हो, अनंत मानी जाती है, इसलिए अवायवीय श्वसन में श्वसन गुणांक अनंत होता है।
In simple words: अवायवीय श्वसन में \( \text{CO}_2 \) तो बनती है पर \( \text{O}_2 \) इस्तेमाल नहीं होती, इसलिए इसका श्वसन गुणांक अनंत होता है।

🎯 Exam Tip: अवायवीय श्वसन में \( \text{O}_2 \) की अनुपस्थिति पर ध्यान दें, क्योंकि यह श्वसन गुणांक के अनंत होने का मुख्य कारण है।

 

प्रश्न 11. ग्लाइकोलाइसिस तथा क्रेब्स चक्र की योजक कड़ी किसे कहते हैं?
Answer: ऐसीटिल को-एन्जाइम A (Acetyl CoA) को ग्लाइकोलाइसिस और क्रेब्स चक्र की योजक कड़ी कहते हैं। यह पाइरूविक अम्ल के ऑक्सीकरण से बनता है और क्रेब्स चक्र में प्रवेश करता है।
In simple words: ऐसीटिल को-एन्जाइम A ग्लाइकोलाइसिस और क्रेब्स चक्र को जोड़ता है।

🎯 Exam Tip: ऐसीटिल CoA की भूमिका को याद रखें क्योंकि यह दोनों प्रमुख श्वसन मार्गों के बीच एक महत्वपूर्ण मध्यवर्ती अणु है।

 

प्रश्न 12. अंकुरित अरण्डी के बीजों का श्वसन गुणांक कितना होता है?
Answer: अंकुरित अरण्डी के बीजों का श्वसन गुणांक हमेशा एक से कम होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन बीजों में मुख्य रूप से वसा का श्वसन होता है, और वसा के ऑक्सीकरण के लिए कार्बोहाइड्रेट की तुलना में अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
In simple words: अंकुरित अरण्डी के बीजों का श्वसन गुणांक एक से कम होता है।

🎯 Exam Tip: तेल युक्त बीजों में वसा श्वसन के कारण श्वसन गुणांक हमेशा एक से कम होता है, इस तथ्य को याद रखें।

 

प्रश्न 13. केमीऑस्मेटिक सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया था?
Answer: केमीऑस्मेटिक सिद्धान्त का प्रतिपादन पीटर मिशेल (Peter Mitchell) ने 1961 में किया था। यह सिद्धान्त बताता है कि कैसे ATP का संश्लेषण रसायन परासरणी (Chemiosmotic Theory) के माध्यम से होता है।
In simple words: पीटर मिशेल ने 1961 में केमीऑस्मेटिक सिद्धान्त दिया था।

🎯 Exam Tip: केमीऑस्मेटिक सिद्धान्त और उसके प्रतिपादक का नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ऑक्सीकारी फास्फोरिलीकरण की व्याख्या करता है।

 

प्रश्न 14. श्वसन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक कौन-कौन से हैं?
Answer: श्वसन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:
1. बाह्य या पर्यावरणीय कारक: तापमान, ऑक्सीजन, जल, प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड।
ये सभी कारक श्वसन की दर को बदल सकते हैं।
In simple words: तापमान, ऑक्सीजन, पानी, रोशनी और कार्बन डाइऑक्साइड श्वसन की गति को बदल सकते हैं।

🎯 Exam Tip: श्वसन को प्रभावित करने वाले बाह्य कारकों के मुख्य बिंदुओं को याद रखें, क्योंकि यह पौधों और जीवों में श्वसन प्रक्रिया को समझने में मदद करता है।

 

RBSE Class 12 Biology Chapter 11 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. मुक्तप्लावी तथा जीवद्रव्यी श्वसन में क्या अन्तर है?
Answer: मुक्तप्लावी श्वसन और जीवद्रव्यी श्वसन में मुख्य अंतर उनके श्वसनी पदार्थों में है:
1. मुक्तप्लावी श्वसन (Floating Respiration): इस श्वसन में कार्बोहाइड्रेट्स मुख्य श्वसनी पदार्थ होते हैं।
2. जीवद्रव्यी श्वसन (Protoplasmic Respiration): इस श्वसन में प्रोटीन मुख्य श्वसनी पदार्थ होता है।
यह अंतर जीवधारियों में ऊर्जा उत्पादन के तरीके को दर्शाता है।
In simple words: मुक्तप्लावी श्वसन में कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा देते हैं, जबकि जीवद्रव्यी श्वसन में प्रोटीन ऊर्जा देते हैं।

🎯 Exam Tip: इन दोनों श्वसन प्रकारों के बीच अंतर करते समय उनके श्वसनी क्रियाधारों (कार्बोहाइड्रेट बनाम प्रोटीन) पर विशेष ध्यान दें।

 

प्रश्न 2. ऑक्सी तथा अनॉक्सी श्वसन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: ऑक्सी श्वसन तथा अनॉक्सी श्वसन में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

ऑक्सी श्वसन (Aerobic Respiration)अनॉक्सी श्वसन (Anaerobic Respiration)
1. यह सामान्यतः सभी उच्च पौधों में होता है।1. यह सामान्यतः कुछ कवकों (Fungi) तथा जीवाणुओं (Bacteria) में होता है।
2. यह स्थायी प्रक्रम है तथा पौधों में जीवन-पर्यन्त होता है।2. उच्चवर्गीय पौधों में यह अनॉक्सी परिस्थितियों में अस्थायी प्रावस्था में होता है।
3. ऊर्जा अधिक मात्रा में ATP (38 ATP) के रूप में निर्मुक्त होती है।3. ऊर्जा कम मात्रा में ATP (2 ATP) के रूप में निर्मुक्त होती है।
4. ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)) की उपस्थिति में होता है।4. ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)) की अनुपस्थिति में होता है।
5. अन्तिम उत्पाद \( \text{CO}_2 \) तथा \( \text{H}_2\text{O} \) होते हैं।5. अन्तिम उत्पाद ऐथेनॉल तथा \( \text{CO}_2 \) होते हैं।


यह अंतर कोशिका के ऊर्जा उत्पादन के तरीकों को समझने में महत्वपूर्ण है।
In simple words: ऑक्सी श्वसन में ऑक्सीजन चाहिए, ज़्यादा ऊर्जा बनती है, और पानी-कार्बन डाइऑक्साइड निकलते हैं। अनॉक्सी श्वसन में ऑक्सीजन नहीं चाहिए, कम ऊर्जा बनती है, और ऐल्कोहॉल या कार्बन डाइऑक्साइड निकलते हैं।

🎯 Exam Tip: ऑक्सी और अनॉक्सी श्वसन के बीच के सभी पाँच मुख्य अंतरों को याद रखें, विशेषकर ऑक्सीजन की आवश्यकता, ऊर्जा उत्पादन और अंतिम उत्पादों को।

 

प्रश्न 4. पेण्टोज फॉस्फेट पथ पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: पेण्टोज फॉस्फेट पथ (Hexose Monophosphate Pathway या HMP या PPP) ग्लूकोज के टूटने का एक वैकल्पिक तरीका है, जो ग्लाइकोलाइसिस और क्रेब्स चक्र के अलावा होता है। यह पथ कोशिकाद्रव्य में ऑक्सीजन की उपस्थिति में पूरा होता है और इसमें हेक्सोस शर्करा का विघटन होता है। इस पथ का अध्ययन वारबर्ग और डिकिन्स (1938) तथा रेकर और साथियों (1954) ने किया था। यह पाथवे \( \text{NADPH} \) का उत्पादन करता है, जो कई जैवसंश्लेषी प्रतिक्रियाओं के लिए आवश्यक है, और साथ ही न्यूक्लिक अम्ल के संश्लेषण के लिए पेंटोज शर्करा भी प्रदान करता है। इस क्रिया के प्रमुख चरण निम्नवत हैं:
1. ग्लूकोस अणु का फॉस्फोरिलीकरण (Phosphorylation of Glucose molecule)- सबसे पहले, 6 ग्लूकोस अणु ATP की मदद से फॉस्फोरिलीकृत होकर ग्लूकोस-6-फॉस्फेट के 6 अणु बनाते हैं।
\[ \text{Glucose} + \text{6ATP} \xrightarrow{\text{Hexokinase}} \text{Glucose-6-phosphate} + \text{ADP} \]
(6 molecules)
2. ग्लूकोस-6-फॉस्फेट का ऑक्सीकरण (Oxidation of Glucose-6-phosphate)- ग्लूकोज-6-फॉस्फेट डिहाइड्रोजिनेज एन्जाइम की उपस्थिति में ग्लूकोज-6-फॉस्फेट, फॉस्फोग्लूकोनिक अम्ल में बदल जाता है।
\[ \text{Glucose-6-phosphate} + \text{NADP}^+ \xrightarrow{\text{Glucose-6-phosphate dehydrogenase}} \text{6-Phosphogluconic acid} + \text{NADPH} + \text{H}^+ \]
(6 molecules)
3. फॉस्फोग्लूकोनिक अम्ल का ऑक्सीकारी विकार्बोक्सिलीकरण (Oxidative decarboxylation of Phosphogluconic acid)- 6-फॉस्फोग्लूकोनिक अम्ल, डिहाइजोजिनेज एन्जाइम की मौजूदगी में ऑक्सीकृत होकर 5 कार्बन वाले राइबुलोस-5-फॉस्फेट में बदल जाता है। इस दौरान \( \text{NADP}^+ \) का \( \text{NADPH} + \text{H}^+ \) में अपचयन हो जाता है।
राइबुलोस-5-फॉस्फेट से कई और अभिक्रियाएं होती हैं, जिनसे फॉस्फोरिलीकृत उत्पाद बनते हैं। इनका मुख्य काम ग्लूकोस फॉस्फेट को पूरी तरह से तोड़ना है। इस प्रक्रिया में हर \( \text{CO}_2 \) अणु के साथ \( \text{NADPH} + \text{H}^+ \) के दो अणु बनते हैं। ग्लूकोस के पूरे टूटने से 6 \( \text{CO}_2 \) अणु और 12 \( \text{NADPH} + \text{H}^+ \) अणु बनते हैं। ये 12 \( \text{NADPH} + \text{H}^+ \) अणु इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला द्वारा 36 ATP अणु बनाते हैं, क्योंकि एक \( \text{NADPH} + \text{H}^+ \) अणु से 3 ATP अणु बनते हैं। इस HMP या PPP चक्र के उत्पादों, जैसे राइबुलोस-5-फॉस्फेट से DNA, RNA, ATP, FAD और CoA जैसे कई दूसरे पदार्थ भी बनते हैं।

II. एन्टनर डूओडोरौफ पथ (Entner Doudoroff's pathway)
यह पथ मुख्य रूप से कुछ जीवाणुओं (Bacteria) में पाया जाता है। यह शर्करा को पाइरूविक अम्ल में तोड़ता है। इस पथ में बनने वाले बीच के पदार्थ सामान्य ग्लाइकोलाइसिस से अलग होते हैं। इस पथ का अध्ययन सबसे पहले स्यूडोमोनास (Pseudomonas) जीवाणुओं में किया गया था।

श्वसन क्रिया में श्वसनाधारों में अन्तर सम्बन्ध (Interrelationship between respiratory substrates in respiration)
श्वसन क्रिया में, जीव आमतौर पर कार्बोहाइड्रेट का उपयोग श्वसनाधार के रूप में करते हैं। लेकिन कुछ पौधों में, प्रोटीन, वसा और कार्बनिक अम्लों का भी उपयोग श्वसनाधार के रूप में किया जाता है। यदि वसा श्वसनाधार है, तो पहले यह वसीय अम्ल (Fatty acid) और ग्लिसरॉल में टूट जाती है। वसीय अम्ल ऐसीटिल CoA बनकर क्रेब्स चक्र में चला जाता है, जबकि ग्लिसरॉल पहले PGAL में बदलकर ग्लाइकोलाइसिस में प्रवेश करता है। यदि प्रोटीन श्वसनाधार है, तो प्रोटिएज एन्जाइम इसे अमीनो अम्ल में तोड़कर पाइरूविक अम्ल के साथ श्वसन पथ में भेज देता है। श्वसन में उपयोग होने वाले श्वसनाधारों का क्रम आमतौर पर पहले कार्बोहाइड्रेट, फिर वसा, कार्बनिक अम्ल और अंत में प्रोटीन होता है।

श्वसन एक उभयचय क्रिया है (Respiration is an amphibolic process)
जीवों में, कार्बनिक पदार्थों के टूटने की क्रिया को उपचयन (Catabolism) कहते हैं, और नए पदार्थों के बनने की क्रिया को उपचय (Anabolism) कहते हैं। श्वसन पथ में उपचय और अपचय दोनों तरह की प्रक्रियाएं होती हैं, इसलिए श्वसन को उभयचय क्रिया कहा जाता है।
In simple words: पेण्टोज फॉस्फेट पथ से DNA, RNA जैसी चीज़ें बनती हैं। एन्टनर डूओडोरौफ पथ जीवाणुओं में शर्करा को पाइरूविक अम्ल में तोड़ता है। श्वसन में पहले कार्बोहाइड्रेट, फिर वसा, और फिर प्रोटीन ऊर्जा देते हैं। श्वसन एक उभयचय क्रिया है क्योंकि इसमें चीज़ें टूटती भी हैं और बनती भी हैं।

🎯 Exam Tip: श्वसनाधारों के बीच के संबंध को समझें, विशेषकर कि कैसे विभिन्न मैक्रोमोलेक्यूल्स श्वसन पथ में प्रवेश करते हैं, और "उभयचय क्रिया" शब्द का अर्थ याद रखें।

 

प्रश्न 5. श्वसन क्रियाधारों के अन्तर्सम्बन्धों का आरेखी निरूपण कीजिए।
Answer: श्वसन क्रियाधार (Respiratory Substrates) वे उच्च ऊर्जा वाले पदार्थ हैं जो श्वसन अभिक्रिया में भाग लेकर ऑक्सीकृत होते हैं और ऊर्जा मुक्त करते हैं। ये कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन जैसे अणुओं के रूप में कोशिका में जमा रहते हैं।
कार्बोहाइड्रेट श्वसन के प्राथमिक क्रियाधार होते हैं। श्वसन में सबसे पहले हेक्सोस शर्करा (एक कार्बोहाइड्रेट) का उपयोग होता है। जब कार्बोहाइड्रेट मौजूद नहीं होते, तो वसा का उपयोग होता है, और वसा के उपयोग के बाद प्रोटीन का ऑक्सीकरण शुरू होता है। ब्लैकमेन ने कार्बोहाइड्रेट से होने वाले श्वसन को जीवद्रव्यी श्वसन (Protoplasmic respiration) कहा था, जो भूख या बीमारियों के समय होता है।

श्वसन के प्रकार (Types of Respiration)
श्वसन सामान्यतः दो प्रकार का होता है:
1. ऑक्सी अथवा वायुश्वसन (Aerobic Respiration)
2. अनॉक्सी या अवायुश्वसन (Anaerobic Respiration)
अनॉक्सी श्वसन में ऑक्सीजन का उपयोग नहीं होता है। इस क्रिया में कार्बनिक पदार्थ पूरी तरह से ऑक्सीकृत नहीं होते हैं। इसके परिणामस्वरूप ऐल्कोहॉल या कार्बनिक अम्ल तथा \( \text{CO}_2 \) का निर्माण होता है। इस प्रकार के श्वसन में कम मात्रा में ऊर्जा निकलती है, इसलिए इसे अन्तर-अणुक श्वसन (Intramolecular respiration) भी कहते हैं। अनॉक्सी श्वसन को रासायनिक अभिक्रिया द्वारा ऐसे दिखाया जा सकता है:
\[ \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 \implies 2\text{C}_2\text{H}_5\text{OH} + 2\text{CO}_2 + 50 \text{ Kcal ऊर्जा} \]
(ग्लूकोज) (ऐथेनॉल) (कार्बन डाइऑक्साइड)
यह श्वसन संग्रहित और अंकुरित बीजों, माँसल फलों में अस्थायी रूप से, और अनेक जीवाणुओं (Bacteria) तथा कवकों (Fungi) में नियमित रूप से होता है।
In simple words: श्वसन क्रियाधार वे ऊर्जा वाले पदार्थ हैं जो कोशिका में टूटकर ऊर्जा देते हैं, जैसे चीनी, वसा और प्रोटीन। श्वसन दो तरह का होता है: ऑक्सी (हवा के साथ) और अनॉक्सी (हवा के बिना)। अनॉक्सी श्वसन में ऑक्सीजन के बिना ऊर्जा बनती है, ऐल्कोहॉल और कार्बन डाइऑक्साइड निकलते हैं।

🎯 Exam Tip: श्वसन क्रियाधारों के क्रम को याद रखें (कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन) और अनॉक्सी श्वसन की विशेषताएँ, उसके उत्पाद और संबंधित रासायनिक समीकरण को भी समझें।

 

प्रश्न 6. निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए
(क) किण्वन
(ख) पाइरूविक अम्ल का ऑक्सीकारी विघटन
(ग) श्वसन गुणांक
(घ) मिशेल का केमीऑस्मेटिक सिद्धान्त
Answer:
(क) किण्वन (Fermentation): किण्वन एक ऐसी प्रक्रिया है जो अधिकतर जीवाणुओं (Bacteria) और कवकों (Fungi) में होती है। इसमें ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में ग्लूकोज का अधूरा ऑक्सीकरण होता है। इस क्रिया से ऐल्कोहॉल या कार्बोक्सिलिक अम्ल बनते हैं और \( \text{CO}_2 \) गैस निकलती है। पाश्चर (1857) ने यह साबित किया कि ऐल्कोहॉलिक किण्वन यीस्ट कोशिकाओं की उपापचयी क्रियाओं का नतीजा है। बुकनर (Buchner) ने 1897 में यीस्ट कोशिकाओं से जाइमेज एन्जाइम को अलग किया, जो किण्वन के लिए जिम्मेदार है। किण्वन के कई प्रकार हैं:
1. ऐल्कोहॉलिक किण्वन: यह दो चरणों में पूरा होता है।
(i) पहले चरण में, पाइरूविक अम्ल डिकार्बोक्सिलीकरण द्वारा एसीटेल्डिहाइड बनाता है और \( \text{CO}_2 \) छोड़ता है।
\[ \text{Pyruvic acid} \xrightarrow{\text{Pyruvic decarboxylase}} \text{Acetaldehyde} + \text{CO}_2 \]
(ii) दूसरे चरण में, ऐल्कोहॉल डिहाइड्रोजिनेज एन्जाइम और \( \text{NADH} + \text{H}^+ \) की मदद से एसीटेल्डिहाइड का अपचयन होकर ऐल्कोहॉल और \( \text{NAD}^+ \) बनता है।
\[ \text{Acetaldehyde} + \text{NADH} + \text{H}^+ \xrightarrow{\text{Alcohol dehydrogenase}} \text{Ethylalcohol} + \text{NAD}^+ \]
2. लैक्टिक अम्ल का किण्वन (Fermentation of lactic acid): यह क्रिया जीवाणुओं (जैसे लैक्टोवेसिलस, क्लॉस्ट्रीडियम) और मांसपेशियों में होती है। इसमें पाइरूविक अम्ल \( \text{NADH} + \text{H}^+ \) और लैक्टिक डिहाइड्रोजिनेज एन्जाइम की उपस्थिति में लैक्टिक अम्ल में बदल जाता है।
\[ \text{Pyruvic acid} + \text{NADH} + \text{H}^+ \xrightarrow{\text{Lactic dehydrogenase}} \text{Lactic acid} + \text{NAD}^+ \]
3. ऐसीटिक अम्ल का किण्वन (Fermentation of Acetic acid): यह किण्वन ऐसीटोवैक्टर ऐसीटाई जीवाणु की उपस्थिति में होता है। इस क्रिया में पहले पाइरूविक अम्ल से एसीटेल्डिहाइड बनता है और फिर ऐसीटिक अम्ल में बदल जाता है।
\[ \text{Pyruvic acid} \implies \text{Acetaldehyde} + \text{CO}_2 \]
\[ \text{Acetaldehyde} \xrightarrow{\text{+ H}_2\text{O}} \text{Acetic acid} \]
4. ब्यूटाइरिक अम्ल किण्वन (Butyric acid fermentation): यह क्रिया वेसिलस ब्यूटाइरिकस और क्लॉस्ट्रीडियम ब्यूटाइरिकस जीवाणुओं में होती है। इसमें पाइरूविक अम्ल पहले एसीटोऐसीटिक अम्ल में और फिर ब्यूटाइरिक अम्ल में बदल जाता है।
\[ \text{Pyruvic acid} \xrightarrow{\text{+ H}_2\text{O}} \text{Acetoacetic acid} \]
\[ \text{Acetoacetic acid} \xrightarrow{\text{-H}_2\text{O}} \text{Butyric acid} \]
In simple words: किण्वन वह क्रिया है जहाँ ऑक्सीजन के बिना ग्लूकोज टूटता है। इसमें ऐल्कोहॉल, लैक्टिक अम्ल, ऐसीटिक अम्ल या ब्यूटाइरिक अम्ल जैसे उत्पाद बनते हैं। यह अलग-अलग जीवाणुओं में अलग-अलग तरह से होता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के किण्वन (ऐल्कोहॉलिक, लैक्टिक अम्ल, ऐसीटिक अम्ल, ब्यूटाइरिक अम्ल) और उनसे जुड़े मुख्य उत्पादों को याद रखें।

 

Question. श्वसन गुणांक विभिन्न क्रियाधारों से किस प्रकार प्रभावित होता है? समझाइए।
Answer: श्वसन गुणांक (RQ) एक अनुपात है जो बताता है कि श्वसन की प्रक्रिया में कितनी कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) निकलती है और कितनी ऑक्सीजन (O₂) का उपयोग होता है। इसका मान अलग-अलग खाद्य पदार्थों या 'श्वसन क्रियाधारों' के लिए अलग-अलग होता है। इसे गेनांग के श्वसनमापी उपकरण से मापा जाता है। \( \text{श्वसन गुणांक (R.Q.)} = \frac{\text{श्वसन में विमुक्त CO}_2\text{ का आयतन}}{\text{श्वसन में प्रयुक्त O}_2\text{ का आयतन}} \) RQ का मान यह जानने में मदद करता है कि श्वसन में कौन सा पदार्थ इस्तेमाल हो रहा है और श्वसन किस तरह का है। विभिन्न क्रियाधारों के लिए RQ के मान नीचे दिए गए हैं: (i) **कार्बोहाइड्रेट्स का श्वसन गुणांक:** जब श्वसन क्रिया में कार्बोहाइड्रेट्स का पूरी तरह से ऑक्सीकरण होता है, तो श्वसन गुणांक हमेशा 'एक' (1) होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस प्रक्रिया में जितनी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है, उतनी ही मात्रा में ऑक्सीजन का उपयोग होता है। \[ \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + 6\text{O}_2 \rightarrow 6\text{CO}_2 + 6\text{H}_2\text{O} + \text{ऊर्जा} \] \( \text{श्वसन गुणांक (R.Q.)} = \frac{6\text{CO}_2}{6\text{O}_2} = 1 \) (ii) **वसा का श्वसन गुणांक:** सरसों, मूंगफली और कपास जैसे तैलीय बीजों के अंकुरण के समय वसा श्वसन का मुख्य स्रोत होती है। वसा के अणुओं को पूरी तरह से ऑक्सीकृत करने के लिए कार्बोहाइड्रेट्स की तुलना में ज़्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इसलिए, वसा का श्वसन गुणांक हमेशा एक से कम होता है। \[ 2\text{C}_{51}\text{H}_{98}\text{O}_6 + 145\text{O}_2 \rightarrow 102\text{CO}_2 + 98\text{H}_2\text{O} \] \( \text{अतः श्वसन गुणांक (R.Q.)} = \frac{102}{145} \approx 0.7 \) (iii) **प्रोटीन का श्वसन गुणांक:** प्रोटीन के अणुओं में भी वसा के समान ही ऑक्सीजन की मात्रा कार्बन की तुलना में कम होती है। इसलिए, प्रोटीनों के ऑक्सीकरण के लिए भी अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। जब कार्बोहाइड्रेट्स और वसा मौजूद नहीं होते, तो प्रोटीन श्वसन क्रियाधार के रूप में कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए, जब मनुष्य लंबे समय तक भूखे रहते हैं, तो उनका शरीर ऊर्जा के लिए प्रोटीन का उपयोग करने लगता है। (iv) **कार्बोक्सिलिक अम्लों का श्वसन गुणांक:** कुछ पौधों में श्वसन के दौरान कार्बोक्सिलिक अम्ल क्रियाधार होते हैं। इन अम्लों के अणुओं में ऑक्सीजन की मात्रा कार्बन की तुलना में अधिक होती है। इसलिए, इन पदार्थों के ऑक्सीकरण के लिए बाहरी वातावरण से कम ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है और अधिक कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है। अतः इनका श्वसन गुणांक हमेशा एक से अधिक होता है। \[ 2(\text{COOH}) + \text{O}_2 \rightarrow 4\text{CO}_2 + \text{H}_2\text{O} \] \( \text{श्वसन गुणांक (R.Q.)} = \frac{4\text{CO}_2}{\text{O}_2} = 4.0 \) सिट्रिक अम्ल और मैलिक अम्ल का श्वसन गुणांक क्रमशः 1.14 और 1.33 होता है। (v) **मांसल या सरस पादपों का श्वसन गुणांक:** नागफनी जैसे मांसल पौधों में कार्बोहाइड्रेट्स श्वसन के आधार के रूप में उपयोग होते हैं, लेकिन उनका पूरा ऑक्सीकरण नहीं होता। इससे बीच के पदार्थ बनते हैं, लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) नहीं बनती। इसलिए, इन पौधों में श्वसन गुणांक शून्य होता है। \[ 2\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + 3\text{O}_2 \rightarrow 2\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_3 + 3\text{H}_2\text{O} \] \( \text{अतः श्वसन गुणांक (R.Q.)} = \frac{\text{शून्य CO}_2}{3\text{O}_2} = (0)\text{ शून्य} \) (vi) **अवायवीय श्वसन में श्वसन गुणांक:** अवायवीय श्वसन में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) तो निकलती है, लेकिन ऑक्सीजन का उपयोग नहीं होता है। इसलिए, इस तरह की श्वसन क्रियाओं में श्वसन गुणांक अनंत होता है। \[ \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 \xrightarrow{\text{जाइमेज}} 2\text{C}_2\text{H}_5\text{OH} + 2\text{CO}_2 + \text{ऊर्जा} \] \( \text{अतः श्वसन गुणांक (R.Q.)} = \frac{2\text{CO}_2}{\text{शून्य O}_2} = \text{अनन्त } (\infty) \) श्वसन क्रियाधार या भोजन के पदार्थ का RQ मान जितना कम होता है, उतनी ही अधिक ऊर्जा निकलती है। उदाहरण के लिए, वसा के एक अणु से सबसे ज़्यादा ऊर्जा मिलती है, जबकि कार्बनिक अम्ल के एक अणु से या अवायवीय श्वसन से काफी कम ऊर्जा बनती है। In simple words: श्वसन गुणांक (RQ) हमें बताता है कि कोई जीव श्वसन के लिए किस तरह के भोजन का इस्तेमाल कर रहा है। यह अलग-अलग खाद्य पदार्थों जैसे कार्बोहाइड्रेट, वसा या प्रोटीन के लिए अलग-अलग होता है क्योंकि उन्हें ऑक्सीकृत करने के लिए अलग-अलग मात्रा में ऑक्सीजन की जरूरत होती है।

🎯 Exam Tip: जब आप श्वसन गुणांक को समझाते हैं, तो विभिन्न क्रियाधारों (जैसे कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, कार्बनिक अम्ल) के लिए इसके मानों (RQ=1, RQ<1, RQ>1, RQ=0, RQ=अनंत) को स्पष्ट रूप से बताएं और प्रत्येक के पीछे का कारण भी समझाएं।

 

Question 1. ग्लाइकोलाइसिस से आप क्या समझते हैं? इस प्रक्रिया में सम्पन्न होने वाली विभिन्न अभिक्रियाओं एवं ऊर्जा सम्बन्धों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: ग्लाइकोलाइसिस शब्द ग्रीक शब्दों 'ग्लाइकोज' (शर्करा) और 'लाइसिस' (विघटन या टूटना) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है शर्करा का विघटन। यह एक जटिल रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें 10 क्रमबद्ध चरण होते हैं। इस प्रक्रिया की खोज 1930 में गुस्ताव एम्बडन, ऑटो मेयरहॉफ और जे. परनास ने की थी, इसलिए इसे एम्बडन-मेयरहॉफ-परनास पथ (EMP पथ) भी कहते हैं। ग्लाइकोलाइसिस की क्रिया कोशिका द्रव्य में बिना ऑक्सीजन के होती है, यानी इसे ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है। यह प्रक्रिया सभी जीवों में समान रूप से होती है और ऑक्सी तथा अनॉक्सी दोनों प्रकार के श्वसन में पाई जाती है। **परिभाषा:** ग्लूकोस के एक अणु का रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा पाइरूविक अम्ल में विघटित होकर ऊर्जा मुक्त करने की प्रक्रिया को ग्लाइकोलाइसिस कहते हैं। आसान शब्दों में, फ्रक्टोज 1,5-डाइफॉस्फेट के एक अणु से पाइरूविक अम्ल के दो अणु बनने को ग्लाइकोलाइसिस कहा जाता है। ग्लाइकोलाइसिस में होने वाली सभी 10 जैव रासायनिक अभिक्रियाओं को तीन मुख्य भागों में समझाया जा सकता है: (a) **ग्लूकोस का फॉस्फोरिलीकरण (Phosphorylation of Glucose):** ग्लाइकोलाइसिस के पहले चरण में, ग्लूकोस का एक अणु हेक्सोकाइनेज एंजाइम की मदद से एक ATP अणु का उपयोग करके ग्लूकोस-6 फॉस्फेट बनाता है। फिर, ग्लूकोस-6 फॉस्फेट आइसोमेरेज एंजाइम की उपस्थिति में यह फ्रक्टोस-6 फॉस्फेट में बदल जाता है। फ्रक्टोस-6 फॉस्फेट फिर से एक और ATP अणु का उपयोग करके फॉस्फोफ्रक्टोकाइनेज एंजाइम की मदद से फ्रक्टोस-1,6-डाइफॉस्फेट बनाता है। इस प्रकार, ग्लूकोस अणु के फॉस्फोरिलीकरण की मुख्य अभिक्रियाएँ नीचे दी गई हैं: 1. \( \text{Glucose} + \text{ATP} \xrightarrow{\text{Hexokinase, Mg}^{2+}} \text{Glucose-6-phosphate} + \text{ADP} \) 2. \( \text{Glucose-6-phosphate} \xrightarrow{\text{Isomerase}} \text{Fructose-6-phosphate} \) 3. \( \text{Fructose-6-phosphate} + \text{ATP} \xrightarrow{\text{Phosphofructokinase, Mg}^{2+}} \text{Fructose-1,6-diphosphate} + \text{ADP} \) (b) **फॉस्फोरिलीकृत ग्लूकोस अणु का फॉस्फोग्लिसरेल्डिहाइड के दो अणुओं में विघटन (Splitting of Phosphorylated glucose molecule in two molecules of Phosphoglyceraldehyde):** इस अभिक्रिया में, 6 कार्बन परमाणु वाला फ्रक्टोस-1,6-डाइफॉस्फेट, एल्डोलेज एंजाइम की उपस्थिति में टूटकर 3-फॉस्फोग्लिसरेल्डिहाइड (3-PGAL) और डाइहाइड्रॉक्सी एसीटोन फॉस्फेट (DHAP) के एक-एक अणु बनाता है, जिनमें प्रत्येक में 3 कार्बन परमाणु होते हैं। ये दोनों यौगिक ट्रायोजफॉस्फेट आइसोमेरेज एंजाइम की उपस्थिति में एक-दूसरे में बदल सकते हैं। इनमें से केवल 3-PGAL का ऑक्सीकरण होता है। जैसे-जैसे 3-PGAL का ऑक्सीकरण होता है, डाइहाइड्रॉक्सी एसीटोन फॉस्फेट भी 3-PGAL में परिवर्तित होता जाता है, जिससे आगे की प्रतिक्रियाएं जारी रहती हैं। \[ \text{Fructose-1,6-diphosphate} \xrightarrow{\text{Aldolase}} 3\text{-phosphoglyceraldehyde (3 PGAL)} + \text{dihydroxy acetone phosphate (DiHAP)} \]
\( \implies \) \( 3\text{-phosphoglyceraldehyde (3 PGAL)} \xleftrightarrow{\text{Triosephosphate Isomerase}} \text{dihydroxy acetone phosphate (DiHAP)} \) (c) **पाइरूविक अम्ल के दो अणुओं का निर्माण (Formation of two molecules of Pyruvic acid):** 3-PGAL के दो अणु निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा पाइरूविक अम्ल के दो अणुओं का निर्माण करते हैं: 1. **3-PGAL से 1,3-डाइफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल का निर्माण (Formation of 1, 3 diphosphoglyceric acid from 3-PGL):** सबसे पहले, 3-PGAL, फॉस्फोरिक अम्ल (\( \text{H}_3\text{PO}_4 \)) की मदद से और डिहाइड्रोजिनेज एंजाइम की उपस्थिति में क्रिया करके 1,3-डाइफॉस्फोग्लिसरेल्डिहाइड बनाता है। इसके ऑक्सीकरण के बाद यह 1,3-डाइफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल बन जाता है। इस चरण को ऑक्सीकरण चरण (Oxidation step) कहते हैं। इस अभिक्रिया में NAD+ हाइड्रोजन परमाणु को ग्रहण करके \( \text{NADH}_2 \) में बदल जाता है, जो बाद में इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला में जाकर ATP बनाता है। \[ 3\text{-Phosphoglyceraldehyde} + \text{HPO}_4 + 2\text{NAD}^+ \xrightarrow{\text{Dehydrogenase}} 1,3\text{-Diphosphoglyceric acid} + 2\text{NADH} + 2\text{H}^+ \] 2. **1,3-डाइफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल से 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल का निर्माण (Formation of 3-Phosphoglyceric acid from 1,3-diphosphoglyceric acid):** इस अभिक्रिया में, 1,3-डाइफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल का एक फॉस्फेट समूह डाइफॉस्फोग्लिसरोकाइनेज एंजाइम की उपस्थिति में ADP से जुड़कर ATP बनाता है। इस क्रिया से 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल बनता है। \[ 1,3\text{-Diphosphoglyceric acid} + \text{ADP} \xrightarrow{\text{Diphosphoglycerokinase}} 3\text{-Phosphoglyceric acid} + \text{ATP} \] 3. **3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल का 2-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल में रूपान्तरण (Conversion of 3-phosphoglyceric acid into 2-phosphoglyceric acid):** फॉस्फोग्लिसरोक्यूटेज एंजाइम की उपस्थिति में 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल अपने समतुल्य 2-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल में बदल जाता है। \[ 3\text{-Phosphoglyceric acid} \xrightarrow{\text{Phosphoglyceromutase}} 2\text{-Phosphoglyceric acid} \] 4. **2-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल से 2-फॉस्फोइनोल पाइरूवेट का निर्माण (Formation of 2-phosphoenol pyruvate from 2-phosphoglyceric acid):** इनोलेज एंजाइम की उपस्थिति में 2-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल से पानी का एक अणु निकल जाता है, और यह 2-फॉस्फोइनोल पाइरूवेट में बदल जाता है। \[ 2\text{-Phosphoglyceric acid} \xrightarrow{\text{Enalase, -H}_2\text{O}} 2\text{-Phosphoenol pyruvic acid} \] 5. **2-फॉस्फोइनोल पाइरूविक अम्ल से पाइरूविक अम्ल का निर्माण (Formation of Pyruvic acid From 2- Phosphoenol Pyruvic acid):** पाइरूविक काइनेज एंजाइम की उपस्थिति में 2-फॉस्फोइनोल पाइरूविक अम्ल से एक फॉस्फेट समूह अलग होता है, जिससे पाइरूविक अम्ल और ATP का निर्माण होता है। \[ 2\text{-Phosphoenol Pyruvic acid} + \text{ADP} \xrightarrow{\text{Pyruvic acid Kinase, Mg}^{2+}} \text{Pyruvic acid} + \text{ATP} \] ग्लाइकोलाइसिस की पूरी प्रक्रिया को नीचे दिए गए समीकरण द्वारा दिखाया जा सकता है: \[ \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + 2\text{ATP} + 4\text{ADP} + 2\text{P}_i + 2\text{NAD}^+ \rightarrow 2\text{C}_3\text{H}_4\text{O}_3 + 2\text{ADP} + 4\text{ATP} + 2\text{NADH} + 2\text{H}^+ \] In simple words: ग्लाइकोलाइसिस वह प्रक्रिया है जहाँ एक ग्लूकोस अणु टूटकर दो पाइरूविक अम्ल अणु बनाता है। यह कोशिका के अंदर होता है और इसमें ऑक्सीजन की जरूरत नहीं होती। इस प्रक्रिया में ऊर्जा (ATP) भी बनती है, जो शरीर के लिए जरूरी है।

🎯 Exam Tip: जब आप ग्लाइकोलाइसिस का वर्णन करें, तो सुनिश्चित करें कि आप तीन मुख्य चरणों (फॉस्फोरिलीकरण, विखंडन, और पाइरूवेट निर्माण) को कवर करें। प्रत्येक चरण में शामिल प्रमुख एंजाइमों और ATP/NADH के उपयोग/उत्पादन को उजागर करें। याद रखें कि यह कोशिका द्रव्य में होता है और अनाक्सीय है।

 

Question 2. श्वसन को परिभाषित कीजिए तथा ऑक्सी और अनॉक्सी श्वसन में विभेद कीजिए। ऑक्सी श्वसन का सविस्तार वर्णन कीजिए।
Answer: श्वसन एक जैविक प्रक्रिया है जिसमें जीव भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं या ऑक्सीजन के बिना भी ऊर्जा बना सकते हैं। यह ऊर्जा जीवन की सभी गतिविधियों के लिए आवश्यक होती है। **ऑक्सी श्वसन तथा अनॉक्सी श्वसन में अन्तर**

ऑक्सी श्वसन (Aerobic Respiration)अनॉक्सीश्वसन (Anaerobic Respiration)
1. यह सामान्यतः सभी उच्च पौधों में होता है।1. यह सामान्यतः कुछ कवकों (Fungi) तथा जीवाणुओं (Bacteria) में होता है।
2. यह स्थायी प्रक्रम है तथा पौधों में जीवन-पर्यन्त होता है।2. उच्चवर्गीय पौधों में यह अनॉक्सी परिस्थितियों में अस्थायी प्रावस्था में होता है।
3. ऊर्जा अधिक मात्रा में ATP (38 ATP) के रूप में निर्मुक्त होती है।3. ऊर्जा कम मात्रा में ATP (2 ATP) के रूप में निर्मुक्त होती है।
4. ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)) की उपस्थिति में होता है।4. ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)) की अनुपस्थिति में होता है।
5. अन्तिम उत्पाद \( \text{CO}_2 \) तथा \( \text{H}_2\text{O} \) होते हैं।5. अन्तिम उत्पाद ऐथेनॉल तथा \( \text{CO}_2 \) होते हैं।

**ऑक्सी श्वसन की क्रियाविधि (Mechanism of Aerobic Respiration):** कार्बोहाइड्रेट्स श्वसन क्रिया में मुख्य ऊर्जा स्रोत होते हैं। कार्बोहाइड्रेट्स की अनुपस्थिति में वसा और फिर प्रोटीन का उपयोग किया जाता है। ऑक्सी और अनॉक्सी श्वसन की प्रारंभिक अभिक्रियाएँ कोशिका द्रव्य में होती हैं। इस दौरान ग्लूकोस का एक अणु टूटकर पाइरूविक अम्ल के दो अणु बनाता है और ऊर्जा निकलती है। इस प्रक्रिया को ग्लाइकोलाइसिस या EMP पथ कहते हैं, और इसे ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती। ग्लाइकोलाइसिस से बनने वाला पाइरूविक अम्ल माइटोकाण्ड्रिया में जाकर ऐसीटिल को-एन्जाइम A (\( \text{Acetyl CO-A} \)) बनाता है। माइटोकाण्ड्रिया में होने वाले क्रेब्स चक्र (या TCA चक्र) से पानी, \( \text{CO}_2 \) और ऊर्जा निकलती है। इस क्रिया में, ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोस का पूरा ऑक्सीकरण होता है। वायुश्वसन की पूरी प्रक्रिया को तीन मुख्य चरणों में बांटा जा सकता है: 1. **ग्लाइकोलाइसिस (Glycolysis):** यह शर्करा के विघटन की प्रक्रिया है जो कोशिका द्रव्य में बिना ऑक्सीजन के होती है। इसमें ग्लूकोस के अणु को पाइरूविक अम्ल के दो अणुओं में तोड़ा जाता है। \[ \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + 2\text{ATP} + 4\text{ADP} + 2\text{P}_i + 2\text{NAD}^+ \rightarrow 2\text{C}_3\text{H}_4\text{O}_3 + 2\text{ADP} + 4\text{ATP} + 2\text{NADH} + 2\text{H}^+ \] 2. **क्रेब्स चक्र या त्रिकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र (Krebs cycle or Tricarboxylic acid cycle; TCA Cycle):** यह चक्र माइटोकाण्ड्रिया में होता है। इसमें ऐसीटिल को-एन्जाइम A पूरी तरह से ऑक्सीकृत होकर \( \text{CO}_2 \) और \( \text{H}_2\text{O} \) बनाता है, और ऊर्जा (ATP) उत्पन्न करता है। 3. **इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र (Electron Transport System):** यह माइटोकाण्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली पर होता है। इसमें NADH और FADH2 से निकले इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन के साथ मिलकर \( \text{H}_2\text{O} \) बनाते हैं और बड़ी मात्रा में ATP का उत्पादन होता है। ग्लाइकोलाइसिस शब्द ग्रीक शब्दों 'ग्लाइकोज' (शर्करा) और 'लाइसिस' (विश्लेषण या टूटना) से बना है, जिसका अर्थ है शर्करा का विघटन। यह एक जटिल रासायनिक क्रिया है जो 10 चरणों में पूरी होती है। इसकी खोज 1930 में तीन वैज्ञानिकों एम्बडन, मेयरहॉफ और परनास ने की थी, इसलिए इसे EMP पथ भी कहते हैं। यह क्रिया कोशिका द्रव्य में बिना ऑक्सीजन के होती है और सभी जीवों में समान रूप से पाई जाती है। In simple words: श्वसन वह प्रक्रिया है जिससे जीव भोजन से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। ऑक्सी श्वसन में ऑक्सीजन का उपयोग होता है और बहुत ऊर्जा बनती है, जबकि अनॉक्सी श्वसन में ऑक्सीजन नहीं होती और कम ऊर्जा बनती है। ऑक्सी श्वसन के तीन मुख्य हिस्से हैं: ग्लाइकोलाइसिस, क्रेब्स चक्र और इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के लिए, श्वसन को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और ऑक्सी तथा अनॉक्सी श्वसन के बीच अंतर को एक तालिका का उपयोग करके स्पष्ट करें। फिर, ऑक्सी श्वसन के तीन चरणों का विस्तार से वर्णन करें, यह उजागर करते हुए कि प्रत्येक चरण कोशिका में कहाँ होता है।

 

Question 3. ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण से आप क्या समझते हैं? इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र का सविस्तार वर्णन कीजिए।
Answer: ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र के माध्यम से ऊर्जा मुक्त होने पर ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) का निर्माण होता है। यह ऑक्सी श्वसन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन की उपस्थिति में ऊर्जा से ATP बनता है। **इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र (Electron Transport System):** यह तंत्र माइटोकाण्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली पर स्थित होता है। इसमें इलेक्ट्रॉन वाहकों की एक श्रृंखला होती है। NADH और FADH2 (जो ग्लाइकोलाइसिस और क्रेब्स चक्र से उत्पन्न होते हैं) अपने इलेक्ट्रॉनों को इस श्रृंखला में छोड़ते हैं। इलेक्ट्रॉन एक वाहक से दूसरे वाहक तक जाते हैं, जिससे ऊर्जा धीरे-धीरे निकलती है। इस ऊर्जा का उपयोग प्रोटॉन (हाइड्रोजन आयन) को माइटोकाण्ड्रिया के आंतरिक झिल्ली के पार पंप करने के लिए किया जाता है। इससे एक प्रोटॉन ढाल (Proton Gradient) बनता है। अंत में, इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन द्वारा ग्रहण किए जाते हैं, जो पानी बनाने के लिए प्रोटॉन के साथ जुड़ जाता है। प्रोटॉन ढाल की ऊर्जा का उपयोग ATP सिंथेज नामक एंजाइम द्वारा ADP और अकार्बनिक फॉस्फेट को जोड़कर ATP बनाने के लिए किया जाता है। इस तरह, ऊर्जा का कुशल उत्पादन होता है। In simple words: ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण वह प्रक्रिया है जहाँ कोशिका ऑक्सीजन का उपयोग करके भोजन से बहुत सारी ऊर्जा (ATP) बनाती है। इसमें इलेक्ट्रॉन एक खास रास्ते (इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र) से गुजरते हैं और इस दौरान निकली ऊर्जा से ATP बनता है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण को समझाते समय, इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला की भूमिका पर जोर दें कि कैसे यह एक प्रोटॉन ढाल बनाती है, और ATP सिंथेज कैसे इस ढाल का उपयोग ATP बनाने के लिए करता है। साथ ही, ऑक्सीजन को अंतिम इलेक्ट्रॉन स्वीकर्ता के रूप में उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. श्वसन को प्रभावित करने वाले कारकों पर संक्षेप में लिखिए।
Answer: श्वसन की दर कई कारकों से प्रभावित होती है। श्वसन की सबसे तेज़ दर उन कोशिकाओं में होती है जो सक्रिय रूप से विभाजित होती हैं। श्वसन दर को प्रभावित करने वाले कारकों को दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है:
(I) बाह्य कारक (External factors)
1. तापमान (Temperature): तापमान श्वसन दर को बहुत प्रभावित करता है। आमतौर पर, 5°C से 30°C तक तापमान बढ़ने पर श्वसन दर लगातार बढ़ती है। इस तापमान सीमा में, श्वसन दर वांट हॉफ के नियम का पालन करती है, जिसके अनुसार हर 10°C तापमान वृद्धि पर श्वसन दर दोगुनी हो जाती है। 35°C से अधिक तापमान पर एन्जाइम खराब होने लगते हैं।
2. ऑक्सीजन (Oxygen): श्वसन के लिए ऑक्सीजन बहुत ज़रूरी है, क्योंकि ऑक्सीजन की कमी होने पर श्वसन दर कम हो जाती है। जब ऑक्सीजन बिल्कुल नहीं होती, तो केवल अवायवीय श्वसन होता है। ऐसे में श्वसन गुणांक का मान अनंत हो जाता है।
3. जल (Water): जल जीवद्रव्य की सभी क्रियाओं के लिए एक माध्यम का काम करता है। पौधों के जीवद्रव्य में 90-95% जल होता है। जल पौधों के परिवहन, एन्जाइमों के काम करने और गैसों के फैलने में अहम भूमिका निभाता है। जब पानी कम होता है, तो सूखे बीज और फल की श्वसन दर कम हो जाती है, जिससे उन्हें लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है। पानी होने पर कार्बोहाइड्रेट घुलनशील शर्करा में बदलकर श्वसन दर बढ़ा देते हैं।
4. प्रकाश (Light): प्रकाश की उपस्थिति और अनुपस्थिति दोनों में श्वसन क्रिया सामान्य रूप से चलती रहती है, इसलिए प्रकाश का श्वसन पर सीधा असर नहीं पड़ता। लेकिन प्रकाश कुछ अप्रत्यक्ष तरीकों से श्वसन को प्रभावित करता है। जैसे:
(क) प्रकाश से तापमान बढ़ने पर श्वसन दर बढ़ती है।
(ख) प्रकाश संश्लेषण से शर्करा बनती है, जो श्वसन के लिए एक ज़रूरी आधार है।
(ग) प्रकाश में पत्तों के छोटे छिद्र खुले रहते हैं, जिससे गैसों का आदान-प्रदान होता है।
5. कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)): कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता बढ़ने से श्वसन की दर कम हो जाती है। इससे बीजों के अंकुरण और पौधों की वृद्धि पर बुरा असर पड़ता है। हीथ ने दिखाया कि \( \text{CO}_2 \) की ज़्यादा सांद्रता में पत्तों के छिद्र (स्टोमाटा) बंद हो जाते हैं, जिससे ऑक्सीजन की कमी होती है और श्वसन दर घट जाती है।
(II) आन्तरिक कारक (Internal factors)
श्वसन दर को प्रभावित करने वाले कुछ मुख्य आंतरिक कारक ये हैं:
1. जीवद्रव्य (Protoplasm): सक्रिय रूप से विभाजित होने वाली कोशिकाओं में जीवद्रव्य अधिक और सक्रिय होता है, इसलिए इन कोशिकाओं में श्वसन दर परिपक्व कोशिकाओं से ज़्यादा होती है।
2. श्वसनीय क्रियाधार (Respiratory substrates): कोशिका में मौजूद विभिन्न शर्कराएँ जैसे ग्लूकोस, फ्रक्टोस और माल्टोस श्वसन में जल्दी उपयोग होती हैं। स्टार्च और वसा को उपयोग होने से पहले शर्करा में बदलना पड़ता है, जिससे श्वसन क्रिया थोड़ी देर से शुरू होती है। यही कारण है कि स्वस्थ व्यक्ति के भोजन में स्टार्च (जैसे रोटी, आलू) और वसा (तेल) ज़्यादा होती है, जबकि बीमार व्यक्ति को सीधे ग्लूकोस का घोल दिया जाता है।
3. कोशिका की आयु (Age of the cell): युवा कोशिकाओं में श्वसन दर तेज़ होती है, जबकि परिपक्व और बूढ़ी कोशिकाओं में यह धीरे-धीरे होती है।
4. चोट एवं घाव (Injury and wounds): चोटिल या क्षतिग्रस्त ऊतकों में श्वसन दर बढ़ जाती है, क्योंकि उन्हें मरम्मत के लिए ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत होती है।
In simple words: श्वसन की गति कई चीज़ों पर निर्भर करती है, जैसे तापमान, ऑक्सीजन, पानी और \( \text{CO}_2 \) की मात्रा। पौधों के अंदर, जीवद्रव्य की स्थिति, श्वसन के लिए उपलब्ध भोजन और कोशिका की उम्र भी श्वसन को प्रभावित करती है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के विस्तृत उत्तरों में, मुख्य कारकों को वर्गीकृत करना (बाह्य और आंतरिक) और प्रत्येक को स्पष्ट बिंदुओं में समझाना बहुत ज़रूरी है। उदाहरणों का उपयोग करें।

 

Question. श्वसन गुणांक विभिन्न क्रियाधारों से किस प्रकार प्रभावित होता है? समझाइए।
Answer: श्वसन गुणांक (\( \text{Respiratory Quotient, RQ} \)) वह अनुपात है जिसमें श्वसन क्रिया के दौरान मुक्त होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)) का आयतन, उपयोग की गई ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)) के आयतन से विभाजित किया जाता है। इसे गेनांग के श्वसनमापी से मापा जाता है।
\( \text{श्वसन गुणांक (RQ)} = \frac { \text{श्वसन में विमुक्त CO}_2 \text{ का आयतन} }{ \text{श्वसन में प्रयुक्त O}_2 \text{ का आयतन} } \)
श्वसन गुणांक का मान श्वसन क्रिया में उपयोग होने वाले आधारभूत पदार्थों (substrates) और श्वसन के प्रकार पर निर्भर करता है। इसे नीचे विस्तार से समझाया गया है:
(i) कार्बोहाइड्रेट्स का श्वसन गुणांक: जब श्वसन क्रिया में कार्बोहाइड्रेट्स का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है, तो श्वसन गुणांक हमेशा 'एक' होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस प्रक्रिया में मुक्त \( \text{CO}_2 \) का आयतन प्रयुक्त \( \text{O}_2 \) के आयतन के बराबर होता है।
\( \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + 6\text{O}_2 \longrightarrow 6\text{CO}_2 + 6\text{H}_2\text{O} + \text{ऊर्जा} \)
\( \text{श्वसन गुणांक (RQ)} = \frac { 6\text{CO}_2 \text{ का आयतन} }{ 6\text{O}_2 \text{ का आयतन} } = 1 \)
(ii) वसा का श्वसन गुणांक: तैलीय बीजों (जैसे सरसों, मूंगफली) के अंकुरण के समय श्वसन में वसा का उपयोग क्रियाधार के रूप में होता है। वसा के अणु में कार्बन की तुलना में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है, इसलिए इसके ऑक्सीकरण के लिए ज़्यादा बाहरी ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है। अतः, वसा का श्वसन गुणांक हमेशा एक से कम होता है।
\( 2\text{C}_{51}\text{H}_{98}\text{O}_6 + 145\text{O}_2 \longrightarrow 102\text{CO}_2 + 98\text{H}_2\text{O} \) (ट्राइपामिटिन)
\( \text{अतः श्वसन गुणांक (RQ)} = \frac { 102 }{ 145 } \approx 0.7 \)
(iii) प्रोटीन का श्वसन गुणांक: प्रोटीन अणुओं में भी वसा की तरह ऑक्सीजन की मात्रा कार्बन की तुलना में कम होती है। प्रोटीनों के ऑक्सीकरण के लिए भी ज़्यादा \( \text{O}_2 \) की ज़रूरत पड़ती है। श्वसन क्रिया में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट और वसा की अनुपस्थिति में क्रियाधार का काम करते हैं। उदाहरण के लिए, जब मनुष्य लंबे समय तक भूखा रहता है, तो शरीर प्रोटीन का उपयोग ऊर्जा के लिए करता है।
(iv) कार्बोक्सिलिक अम्लों का श्वसन गुणांक: कुछ पौधों में, कार्बोक्सिलिक अम्ल श्वसन क्रियाधार होते हैं। इनके अणुओं में \( \text{O}_2 \) की तुलना में कार्बन की मात्रा ज़्यादा होती है। इसलिए, इनके ऑक्सीकरण के लिए कम बाहरी \( \text{O}_2 \) की आवश्यकता होती है और ज़्यादा \( \text{CO}_2 \) मुक्त होती है। अतः, इनका श्वसन गुणांक हमेशा एक से अधिक होता है।
\( 2(\text{COOH}) + \text{O}_2 \longrightarrow 4\text{CO}_2 + \text{H}_2\text{O} \) (ऑक्सेलिक अम्ल)
\( \text{श्वसन गुणांक (RQ)} = \frac { 4\text{CO}_2 }{ \text{O}_2 } = 4.0 \)
सिट्रिक अम्ल और मैलिक अम्ल का श्वसन गुणांक क्रमशः 1.14 और 1.33 होता है।
(v) मांसल या रसीले पौधों का श्वसन गुणांक: मांसल पौधे जैसे नागफनी में कार्बोहाइड्रेट्स श्वसन क्रियाधार होते हैं, लेकिन उनका पूर्ण ऑक्सीकरण नहीं होता है, जिससे मध्यवर्ती पदार्थ बनते हैं और \( \text{CO}_2 \) मुक्त नहीं होती है। अतः, इन पौधों में श्वसन गुणांक शून्य होता है।
\( 2\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + 3\text{O}_2 \longrightarrow 2\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_3 + 3\text{H}_2\text{O} \) (ग्लूकोस \(\implies\) मैलिक अम्ल)
\( \text{अतः श्वसन गुणांक (RQ)} = \frac { \text{शून्य CO}_2 }{ \text{O}_2 } = 0 \) (शून्य)
(vi) अवायवीय श्वसन में श्वसन गुणांक: अवायवीय श्वसन में \( \text{CO}_2 \) तो मुक्त होती है, लेकिन \( \text{O}_2 \) का अवशोषण नहीं होता है। अतः, इन क्रियाओं में श्वसन गुणांक अनंत होता है।
\( \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 \xrightarrow{\text{जाइमेज}} 2\text{C}_2\text{H}_5\text{OH} + 2\text{CO}_2 + \text{ऊर्जा} \) (एथिल ऐल्कोहॉल)
\( \text{अतः श्वसन गुणांक (RQ)} = \frac { 2\text{CO}_2 }{ \text{शून्य O}_2 } = \text{अनंत} \; (\infty) \)
जिस क्रियाधार या श्वसन के प्रकार का \( \text{RQ} \) मान जितना कम होता है, उतनी ही अधिक मात्रा में ऊर्जा निकलती है। इसलिए, वसा के एक अणु से सबसे ज़्यादा ऊर्जा मिलती है, जबकि कार्बोक्सिलिक अम्ल के अणु या अवायवीय श्वसन से कम ऊर्जा बनती है।
In simple words: श्वसन गुणांक बताता है कि श्वसन में कितनी \( \text{CO}_2 \) निकलती है और कितनी \( \text{O}_2 \) इस्तेमाल होती है। कार्बोहाइड्रेट्स के लिए यह 1 होता है, वसा और प्रोटीन के लिए 1 से कम, कार्बोक्सिलिक अम्लों के लिए 1 से ज़्यादा, और अवायवीय श्वसन में यह अनंत होता है। यह अलग-अलग प्रकार के भोजन से मिलने वाली ऊर्जा को समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: श्वसन गुणांक की परिभाषा और उसके सूत्र को याद रखें। विभिन्न क्रियाधारों (जैसे कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, अम्ल, और अवायवीय श्वसन) के लिए \( \text{RQ} \) के मानों और उनके कारणों को समझाना महत्वपूर्ण है, साथ ही उनके समीकरण भी लिखें।

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