Get the most accurate RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 12 Biology. Our expert-created answers for Class 12 Biology are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण RBSE Solutions for Class 12 Biology
For Class 12 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 12 Biology solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण solutions will improve your exam performance.
Class 12 Biology Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण RBSE Solutions PDF
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 10 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 10 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. पर्णहरित अणु के केन्द्र में कौन-सा तत्व पाया जाता है।
(अ) Fe
(ब) Mg
(स) Ni
(द) Cu
Answer: (ब) Mg
In simple words: मैग्नीशियम तत्व क्लोरोफिल अणु के बीच में होता है. यह पौधों को हरा रंग देता है और सूरज की रोशनी को सोखने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: क्लोरोफिल की रासायनिक संरचना और उसमें मौजूद तत्वों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर मैग्नीशियम की केंद्रीय भूमिका को.
Question 3. प्रकाश तन्त्र- । व प्रकाश- ।। में अभिकिया केन्द्र है, क्रमशः
(अ) P700 एवं P680
(ब) P680 एवं P700
(स) P580 एवं P700
(द) P700 एवं P580
Answer: (अ) P700 एवं P680
In simple words: प्रकाश संश्लेषण में, प्रकाश तंत्र I (PS-I) का मुख्य रिएक्शन सेंटर P700 है, जबकि प्रकाश तंत्र II (PS-II) का रिएक्शन सेंटर P680 है. ये सेंटर रोशनी को ऊर्जा में बदलने का काम करते हैं.
🎯 Exam Tip: PS-I और PS-II के रिएक्शन सेंटर्स के विशिष्ट तरंगदैर्ध्य (P700 और P680) को हमेशा याद रखें क्योंकि ये प्रकाशिक अभिक्रिया के आधार हैं.
Question 4. O₂ का उत्पन्न होना किससे सम्बन्धित है –
(अ) PS - I
(ब) PS - II
(स) फाइटोक्रोम
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (ब) PS - II
In simple words: पौधों में ऑक्सीजन गैस प्रकाश तंत्र II (PS-II) की मदद से बनती है. यह तब होता है जब पानी टूटता है और ऑक्सीजन निकलती है.
🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन का निकास जल के प्रकाशिक अपघटन (photolysis of water) से जुड़ा है, जो विशेष रूप से PS-II में होता है.
Question 5. C₃ एवं C₄ पौधों में एक प्रमुख अन्तर करने वाली प्रक्रिया क्या है
(अ) ग्लाइकोलाइसिस
(ब) प्रकाशीय श्वसन
(स) वाष्पोत्सर्जन
(द) प्रकाश संश्लेषण
Answer: (ब) प्रकाशीय श्वसन
In simple words: C3 और C4 पौधों के बीच का एक बड़ा फर्क प्रकाशीय श्वसन है. C4 पौधे इस प्रक्रिया से बचते हैं, जिससे वे अधिक कुशल होते हैं.
🎯 Exam Tip: C3 और C4 पौधों की तुलना करते समय प्रकाशीय श्वसन की उपस्थिति या अनुपस्थिति एक मुख्य पहचान कारक है. C4 पौधों में यह अनुपस्थित होता है, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ती है.
Question 6. प्रकाश संश्लेषण की इकाई है
(अ) क्वान्टासोम
(ब) माइक्रोसोम
(स) पराक्सीसोम
(द) स्फीरोसोम
Answer: (अ) क्वान्टासोम
In simple words: क्वान्टासोम क्लोरोप्लास्ट में मौजूद छोटी संरचनाएँ हैं जहाँ प्रकाश संश्लेषण की पूरी प्रक्रिया होती है. इन्हें प्रकाश संश्लेषण की सबसे छोटी कार्यात्मक इकाई माना जाता है.
🎯 Exam Tip: क्वान्टासोम को प्रकाश संश्लेषण की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई के रूप में परिभाषित करें, क्योंकि वे प्रकाशिक अभिक्रिया के लिए आवश्यक सभी वर्णक और एन्जाइम धारण करते हैं.
Question 7. जल के प्रकाशीय अपघटन हेतु आवश्यक होता है –
(अ) Mn
(ब) Mo
(स) Zn
(द) B
Answer: (अ) Mn
In simple words: पानी को तोड़ने के लिए मैग्नीशियम (Mn) जैसे कुछ खास खनिज की जरूरत होती है. यह प्रक्रिया ऑक्सीजन बनाने के लिए बहुत ज़रूरी है.
🎯 Exam Tip: जल के प्रकाशिक अपघटन के लिए मैग्नीशियम और क्लोरीन आयन जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को याद रखें.
Question 8. प्रकाश संश्लेषण क्रिया के दौरान –
(अ) \( CO_2 \) एवं जल दोनों का ऑक्सीकरण होता है।
(ब) \( CO_2 \) एवं जल दोनों का अपचयन होता है।
(स) जल का अपचयन व \( CO_2 \) का ऑक्सीकरण होता है।
(द) \( CO_2 \) का अपचयन एवं जल को ऑक्सीकरण होता है।
Answer: (द) \( CO_2 \) का अपचयन एवं जल को ऑक्सीकरण होता है।
In simple words: प्रकाश संश्लेषण में, कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) कम होती है (अपचयन), जबकि पानी (जल) ऑक्सीकृत होता है. इस तरह पौधे अपना भोजन बनाते हैं.
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण एक रेडॉक्स अभिक्रिया है; याद रखें कि जल का ऑक्सीकरण होता है और \( CO_2 \) का अपचयन होता है, जो अंततः ग्लूकोज बनाता है.
Question 9. प्रकाश संश्लेषण में विमुक्त ऑक्सीजन का स्रोत है -
(अ) जल
(ब) \( CO_2 \)
(स) उपरोक्त दोनों
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (अ) जल
In simple words: प्रकाश संश्लेषण के दौरान निकलने वाली ऑक्सीजन पानी से आती है. पौधे पानी को तोड़ते हैं, जिससे ऑक्सीजन गैस निकलती है.
🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है; स्पष्ट रूप से उल्लेख करें कि ऑक्सीजन का स्रोत जल का प्रकाशिक अपघटन है, न कि \( CO_2 \).
Question 10. प्रकाश संश्लेषण की अप्रकाशिक अभिक्रिया सम्पन्न होती है
(अ) ग्रेना में
(ब) स्ट्रोमा में
(स) माइटोकॉन्ड्रिया में
(द) उपरोक्त सभी में
Answer: (ब) स्ट्रोमा में
In simple words: प्रकाश संश्लेषण का दूसरा चरण, जिसे अप्रकाशिक अभिक्रिया कहते हैं, क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा वाले हिस्से में होता है. इस चरण में ऊर्जा का उपयोग करके भोजन बनाया जाता है.
🎯 Exam Tip: प्रकाशिक अभिक्रिया ग्रेना में और अप्रकाशिक अभिक्रिया स्ट्रोमा में होती है; इन दोनों चरणों के स्थानों को ठीक से याद रखना चाहिए.
Question 11. निम्न में से क्रेज आन्तरिकी (Kranz anatomy) पायी जाती है -
(अ) C₃ पादपों में
(ब) C₄ पादपों में
(स) मांसलभिदों में
(द) उपरोक्त सभी में
Answer: (ब) C₄ पादपों में
In simple words: क्रेज शारीरिकी C4 पौधों में पाई जाने वाली एक खास तरह की आंतरिक बनावट है. इसमें संवहन बंडल के चारों ओर बंडल शीथ कोशिकाएं होती हैं, जो प्रकाश संश्लेषण में मदद करती हैं.
🎯 Exam Tip: क्रेज शारीरिकी C4 पौधों की एक विशिष्ट विशेषता है जो उन्हें C3 पौधों से अलग करती है, जिससे वे शुष्क और गर्म परिस्थितियों में अधिक कुशल होते हैं.
Question 12. C₄ चक्र का प्रथम स्थाई उत्पाद है –
(अ) पाइरूविक अम्ल
(ब) आक्जेलोऐसीटिक अम्ल
(स) मैलिक अम्ल
(द) लैक्टिक अम्ल
Answer: (ब) आक्जेलोऐसीटिक अम्ल
In simple words: C4 चक्र में बनने वाला सबसे पहला स्थिर उत्पाद ऑक्जेलोऐसीटिक अम्ल होता है. यह एक चार-कार्बन वाला यौगिक है.
🎯 Exam Tip: C4 चक्र का पहला स्थिर उत्पाद ऑक्जेलोऐसीटिक अम्ल (OAA) है, जो चार कार्बन परमाणुओं वाला एक यौगिक है.
Question 14. प्रकाश संश्लेषण सक्रिय विकिरण (PAR) में निम्न तरंग दैर्ध्य पायी जाती है –
(अ) 340 – 450 nm
(ब) 400 - 700 nm
(स) 500 – 600 nm
(द) 450 - 950 nm
Answer: (ब) 400 - 700 nm
In simple words: प्रकाश संश्लेषण के लिए ज़रूरी रोशनी, जिसे PAR कहते हैं, की तरंगदैर्ध्य 400 से 700 नैनोमीटर के बीच होती है. यही रोशनी पौधे भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं.
🎯 Exam Tip: PAR की तरंगदैर्ध्य सीमा को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह स्पेक्ट्रम का वह हिस्सा है जिसका उपयोग पौधे प्रकाश संश्लेषण के लिए करते हैं.
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 10 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. प्रकाश संश्लेषण को परिभाषित कीजिए।
Answer: सूर्य के प्रकाश की मौजूदगी में हरे पौधे वातावरण से \( CO_2 \) और पानी (H₂O) लेकर अपना भोजन (कार्बनिक पदार्थ) बनाते हैं. इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) कहा जाता है. इस प्रक्रिया के दौरान, पौधे सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं.
In simple words: प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और पानी का उपयोग करके अपना भोजन बनाते हैं.
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण की परिभाषा में सभी मुख्य घटक (सूर्य का प्रकाश, \( CO_2 \), H₂O) और उत्पाद (कार्बनिक पदार्थ) शामिल होने चाहिए.
Question 3. पर्णहरित 'a' तथा पर्णहरित 'b' में क्या अन्तर है?
Answer: पर्णहरित 'a' पौधों में पाया जाने वाला एक मुख्य रंगद्रव्य है जो प्रकाश संश्लेषण के लिए बहुत ज़रूरी होता है. इसे सार्वत्रिक वर्णक भी कहते हैं. वहीं, क्लोरोफिल 'b' एक सहायक रंगद्रव्य है, जो प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में क्लोरोफिल 'a' की मदद करता है. दोनों ही प्रकाश ऊर्जा को सोखने में भूमिका निभाते हैं, लेकिन अलग-अलग तरंगदैर्ध्य पर. क्लोरोफिल 'a' नीले-हरे रंग का होता है, जबकि क्लोरोफिल 'b' पीले-हरे रंग का होता है.
In simple words: क्लोरोफिल 'a' मुख्य रंगद्रव्य है और सार्वत्रिक वर्णक कहलाता है, जबकि क्लोरोफिल 'b' सहायक रंगद्रव्य है जो उसकी मदद करता है.
🎯 Exam Tip: क्लोरोफिल 'a' को प्राथमिक वर्णक और 'b' को सहायक वर्णक के रूप में पहचानें और उनके रंगों का अंतर याद रखें.
Question 4. NADP का पूरा नाम लिखिए।
Answer: NADP का पूरा नाम निकोटिनामाइड ऐडेनीन डाइ फॉस्फेट (Nicotinamide Adenine diphosphate) है. यह प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशिक अभिक्रिया में ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलने और उसे अप्रकाशिक अभिक्रिया में ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
In simple words: NADP का पूरा नाम निकोटिनामाइड ऐडेनीन डाइ फॉस्फेट है.
🎯 Exam Tip: NADP प्रकाश संश्लेषण में एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉन वाहक है; इसका पूरा नाम और कार्य दोनों याद रखें.
Question 5. प्रकाशीय-श्वसन में भाग लेने वाले कोशिकांगों का नाम लिखिए।
Answer: प्रकाशीय-श्वसन में भाग लेने वाले मुख्य कोशिकांग हरितलवक (Chloroplast), परऑक्सीसोम (Peroxysome) और माइटोकॉण्ड्रिया (Mitochondria) हैं. ये तीनों मिलकर इस प्रक्रिया को पूरा करते हैं, जिसमें \( CO_2 \) का अपचयन और ऑक्सीजन का उपयोग शामिल होता है. यह ऊर्जा को बर्बाद करने वाली प्रक्रिया मानी जाती है.
In simple words: प्रकाशीय-श्वसन में क्लोरोप्लास्ट, परऑक्सीसोम और माइटोकॉन्ड्रिया भाग लेते हैं.
🎯 Exam Tip: प्रकाशीय श्वसन में शामिल तीनों कोशिकांगों (क्लोरोप्लास्ट, परऑक्सीसोम, माइटोकॉन्ड्रिया) के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 6. पादप कार्यिकी का जनक किसे कहते है?
Answer: पादप कार्यिकी का जनक क्लाउडे बर्नार्ड (Claude Bernard) को कहा जाता है. उन्होंने पौधों के अंदर होने वाली जीवन प्रक्रियाओं और उनके काम करने के तरीकों को समझने में बहुत बड़ा योगदान दिया था.
In simple words: क्लाउडे बर्नार्ड को पादप कार्यिकी का जनक कहते हैं.
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक नामों और उनके योगदानों को याद रखें, विशेषकर 'जनक' के संदर्भ में.
Question 7. प्रकाश संश्लेषण में प्रकाशिक तथा अप्रकाशिक अभिक्रिया के स्थल का नाम बताइए।
Answer: प्रकाश संश्लेषण में प्रकाशिक अभिक्रिया हरितलवक के ग्रेना (Grana) में होती है, जहाँ प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदला जाता है. वहीं, अप्रकाशिक अभिक्रिया हरितलवक के स्ट्रोमा (Stroma) में सम्पन्न होती है, जहाँ रासायनिक ऊर्जा का उपयोग करके \( CO_2 \) से भोजन (शर्करा) का निर्माण होता है. दोनों अभिक्रियाएं एक-दूसरे पर निर्भर करती हैं.
In simple words: प्रकाशिक अभिक्रिया ग्रेना में और अप्रकाशिक अभिक्रिया स्ट्रोमा में होती है.
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण के दो मुख्य चरणों (प्रकाशिक और अप्रकाशिक) के स्थलों को हमेशा याद रखें: ग्रेना और स्ट्रोमा.
Question 8. सीमाकारी कारक का नियम क्या है?
Answer: सीमाकारी कारक का नियम यह बताता है कि यदि कोई प्रक्रिया कई चीजों (कारकों) से प्रभावित हो रही है, तो उस प्रक्रिया की गति हमेशा उस कारक पर निर्भर करेगी जो सबसे कम मात्रा में मौजूद हो. यानी, जो कारक कम होता है, वही पूरी प्रक्रिया की गति को नियंत्रित करता है. जब तक उस सबसे कम मात्रा वाले कारक को बढ़ाया नहीं जाता, तब तक प्रक्रिया की गति नहीं बढ़ती, चाहे दूसरे कारक कितनी भी ज्यादा मात्रा में क्यों न हों.
In simple words: सीमाकारी कारक का नियम कहता है कि किसी भी प्रक्रिया की गति उस चीज से तय होती है जो सबसे कम मात्रा में उपलब्ध हो.
🎯 Exam Tip: इस नियम को ब्लैकमेन के सीमाकारी कारकों के नियम (Blackman's Law of Limiting Factors) के रूप में भी जाना जाता है; इसे सही ढंग से परिभाषित करें.
Question 10. रेडड्राप (लाल पतन) की घटना दृश्य स्पैक्ट्रम के किस भाग में होती है?
Answer: रेडड्राप (लाल पतन) की घटना दृश्य स्पेक्ट्रम के लाल क्षेत्र में होती है. यह तब होता है जब पौधों को 680 नैनोमीटर से अधिक तरंगदैर्ध्य वाली लाल रोशनी दी जाती है. इस स्थिति में प्रकाश संश्लेषण की दर कम हो जाती है क्योंकि लंबी तरंगदैर्ध्य वाली रोशनी PS-I को सक्रिय करती है लेकिन PS-II को नहीं, जिससे इलेक्ट्रॉन प्रवाह में असंतुलन आ जाता है.
In simple words: रेडड्राप की घटना दृश्य स्पेक्ट्रम के लाल भाग में होती है, खासकर जब बहुत लंबी लाल रोशनी पड़ती है.
🎯 Exam Tip: रेडड्राप लाल प्रकाश के उच्च तरंगदैर्ध्य से संबंधित है और PS-I और PS-II के बीच के इलेक्ट्रॉन प्रवाह पर इसके प्रभाव को समझाना महत्वपूर्ण है.
Question 11. प्रकाश संश्लेषण में सहयोगी वर्णक कौन-से हैं?
Answer: प्रकाश संश्लेषण में सहयोगी वर्णक मुख्य रूप से कैरोटिनॉइड्स (Carotenoids) और फाइकोविलिन्स (Phycobilins) हैं. ये वर्णक प्रकाश की ऊर्जा को सोखते हैं और उसे मुख्य वर्णक (क्लोरोफिल 'a') तक पहुंचाते हैं. वे क्लोरोफिल को अत्यधिक तेज प्रकाश से होने वाले नुकसान से भी बचाते हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण की दक्षता बनी रहती है.
In simple words: कैरोटिनॉइड्स और फाइकोविलिन्स प्रकाश संश्लेषण में सहयोगी वर्णक हैं.
🎯 Exam Tip: सहयोगी वर्णकों के नामों के साथ-साथ उनके कार्यों को भी याद रखें, जैसे कि प्रकाश ऊर्जा का स्थानांतरण और क्लोरोफिल की सुरक्षा.
Question 12. प्रकाश श्वसने एक नष्टकारी अभिक्रिया है, क्यों?
Answer: प्रकाश श्वसन एक नष्टकारी अभिक्रिया है क्योंकि इस प्रक्रिया में भोजन (कार्बनिक पदार्थ) टूटते हैं लेकिन उनसे ऊर्जा मुक्त नहीं होती, जैसे कि सामान्य श्वसन में होती है. इसके बजाय, यह प्रक्रिया \( ATP \) और \( NADPH \) जैसी महत्वपूर्ण ऊर्जा को बर्बाद करती है, और \( CO_2 \) मुक्त करती है जो प्रकाश संश्लेषण के लिए ज़रूरी है. इस तरह, यह पौधे की ऊर्जा का नुकसान करती है.
In simple words: प्रकाश श्वसन एक बेकार प्रक्रिया है क्योंकि इसमें ऊर्जा नहीं बनती, बल्कि भोजन बर्बाद होता है.
🎯 Exam Tip: प्रकाश श्वसन को 'नष्टकारी' क्यों कहा जाता है, इसका कारण स्पष्ट करें: इसमें ऊर्जा का उत्पादन नहीं होता और महत्वपूर्ण ऊर्जावान यौगिकों का अपव्यय होता है.
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 10 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. प्रकाश संश्लेषण में प्रयुक्त वर्णन कौन-कौन से हैं?
Answer: पौधे प्रकाश ऊर्जा को विशेष रंगद्रव्य (Pigments) के रूप में सोखते हैं, जिन्हें प्रकाश संश्लेषणी वर्णक कहा जाता है. पौधों में मुख्य रूप से तीन प्रकार के वर्णक पाए जाते हैं:
- पर्णहरित (Chlorophylls): ये जल में घुलनशील होते हैं और मुख्य रूप से हरे रंग के होते हैं. ये प्रकाश ऊर्जा को सीधे रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं.
- कैरोटिनॉइड्स (Carotenoids): ये जल में अघुलनशील होते हैं और आमतौर पर लाल, नारंगी या पीले रंग के होते हैं. ये सहायक वर्णकों के रूप में कार्य करते हैं और क्लोरोफिल को नुकसान से बचाते हैं.
- फाइकोविलिन्स (Phycobilins): ये भी जल में अघुलनशील होते हैं और नीले या लाल रंग के होते हैं. ये कुछ शैवालों और सायनोबैक्टीरिया में पाए जाते हैं और प्रकाश ऊर्जा को क्लोरोफिल तक पहुँचाते हैं.
In simple words: प्रकाश संश्लेषण में मुख्य वर्णक क्लोरोफिल, कैरोटिनॉइड्स और फाइकोविलिन्स होते हैं. ये सभी प्रकाश ऊर्जा को सोखते हैं.
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषी वर्णकों को सूचीबद्ध करते समय उनके प्रकार (मुख्य/सहायक), रंग और पानी में घुलनशीलता का उल्लेख करें.
Question 3. ब्लैकमेन का पादप कार्यिकी में क्या योगदान है?
Answer: ब्लैकमेन ने पादप कार्यिकी में प्रकाश संश्लेषण की अप्रकाशिक अभिक्रियाओं (Dark reactions) पर अध्ययन किया. उन्होंने दिखाया कि स्वांगीकरण शक्ति (Assimilatory power) का उपयोग करके \( CO_2 \) को कार्बोहाइड्रेट में बदला जाता है. ब्लैकमेन ने सीमाकारी कारकों का सिद्धांत (Theory of limiting factors) भी दिया. यह सिद्धांत बताता है कि किसी भी प्रक्रिया की दर उस कारक से सीमित होती है जो सबसे कम मात्रा में मौजूद होता है. इस सिद्धांत ने प्रकाश संश्लेषण की गति को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, खासकर जब प्रकाश, \( CO_2 \), और तापमान जैसे कारक मौजूद होते हैं.
In simple words: ब्लैकमेन ने प्रकाश संश्लेषण की अप्रकाशिक अभिक्रियाओं और सीमाकारी कारकों के सिद्धांत पर काम किया, जिससे यह समझने में मदद मिली कि पौधे भोजन कैसे बनाते हैं.
🎯 Exam Tip: ब्लैकमेन के दो मुख्य योगदानों (अप्रकाशिक अभिक्रिया और सीमाकारी कारकों का सिद्धांत) को स्पष्ट रूप से बताएं और उनका महत्व समझाएं.
Question 4. हरितलवक की रासायनिक संरचना संक्षेप में समझाइए।
Answer: हरितलवक (Chloroplast) पौधों की कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अंग है, जहाँ प्रकाश संश्लेषण होता है. इसकी रासायनिक संरचना काफी जटिल होती है. यह प्रोटीन, लिपिड, कार्बोहाइड्रेट, और कई पिगमेंट जैसे क्लोरोफिल, कैरोटिनॉइड्स से बना होता है. इसमें 70S राइबोसोम, डबल-स्ट्रैंडेड DNA, और कई एंजाइम भी पाए जाते हैं. हरितलवक के दो मुख्य आंतरिक भाग होते हैं: ग्रेना (Grana) और स्ट्रोमा (Stroma). ग्रेना में प्रकाशिक अभिक्रियाएं होती हैं, जबकि स्ट्रोमा में अप्रकाशिक अभिक्रियाएं होती हैं. इसकी दोहरी झिल्ली होती है, जहाँ बाहरी झिल्ली प्रोटॉन के लिए पारगम्य होती है और आंतरिक झिल्ली अपारगम्य होती है.
In simple words: हरितलवक में प्रोटीन, लिपिड, पिगमेंट, DNA और राइबोसोम होते हैं. इसमें ग्रेना और स्ट्रोमा जैसे दो मुख्य भाग होते हैं जहाँ प्रकाश संश्लेषण होता है.
🎯 Exam Tip: हरितलवक की संरचना बताते समय उसके मुख्य घटकों (प्रोटीन, लिपिड, वर्णक, न्यूक्लिक एसिड) और उसके दो मुख्य कार्यात्मक भागों (ग्रेना और स्ट्रोमा) का उल्लेख करें.
Question 6. क्रेसुलेसियन अम्ल उपापचय द्वारा \( CO_2 \) स्थिरीकरण होना शुष्कोभिद् तथा माँसलोभिद पादपों में कार्यिकी अनुकूलन है। समझाइए।
Answer: क्रेसुलेसियन अम्ल उपापचय (CAM) शुष्कोभिद् (Succulents) और मरुदभिद् (xerophytes) पौधों में पाया जाने वाला एक विशेष अनुकूलन है. यह पौधों को बिना ज्यादा पानी खोए कार्बनिक पदार्थ बनाने में मदद करता है. इन पौधों में रात के समय स्टोमेटा (रंध्र) खुलते हैं और वे \( CO_2 \) सोखते हैं, जिसे मैलिक अम्ल के रूप में जमा कर लेते हैं. दिन में, जब स्टोमेटा बंद होते हैं, यह मैलिक अम्ल टूटता है और \( CO_2 \) को प्रकाश संश्लेषण के लिए उपलब्ध कराता है. यह प्रक्रिया पानी की कमी वाली जगहों पर पौधों को जीवित रहने में बहुत मदद करती है. यह अनुकूलन पहली बार क्रेसुलेसी परिवार के पौधों में देखा गया था, जैसे कि अगेव, यूक्का, अनानास और नागफनी.
In simple words: CAM पौधे रात में \( CO_2 \) सोखते हैं और दिन में उसे भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, जिससे पानी की कमी वाली जगहों पर वे बच पाते हैं.
🎯 Exam Tip: CAM अनुकूलन को समझाते समय, रात में \( CO_2 \) का अवशोषण और दिन में उसका उपयोग, और यह कैसे शुष्क वातावरण में जल हानि को कम करता है, स्पष्ट करें.
Question 7. प्रकाशीय फॉस्फोरिलीकरण से आप क्या समझते हैं?
Answer: प्रकाशीय फॉस्फोरिलीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश ऊर्जा का उपयोग करके \( ADP \) से \( ATP \) (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) बनाया जाता है. यह क्लोरोप्लास्ट के अंदर होता है. जब प्रकाश वर्णक \( (chlorophyll) \) प्रकाश को सोखते हैं, तो इलेक्ट्रॉनों में ऊर्जा आ जाती है. ये ऊर्जावान इलेक्ट्रॉन एक इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला से गुजरते हैं, और इस दौरान उनकी ऊर्जा का उपयोग \( ADP \) में एक फॉस्फेट समूह जोड़कर \( ATP \) बनाने के लिए किया जाता है. यह ऊर्जा \( NADPH \) बनाने में भी मदद करती है. \( ATP \) और \( NADPH \) दोनों प्रकाश संश्लेषण की अप्रकाशिक अभिक्रिया में भोजन बनाने के लिए उपयोग होते हैं.
In simple words: प्रकाशीय फॉस्फोरिलीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके \( ADP \) से \( ATP \) बनाया जाता है. यह ऊर्जा प्रकाश संश्लेषण के लिए बहुत ज़रूरी है.
🎯 Exam Tip: प्रकाशीय फॉस्फोरिलीकरण की परिभाषा में प्रकाश ऊर्जा के उपयोग, \( ADP \) से \( ATP \) के संश्लेषण, और इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला की भूमिका को शामिल करें.
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशिक अभिक्रिया का वर्णन कीजिए।
Answer: प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशिक अभिक्रिया (Light reactions) पहला चरण है जो प्रकाश की उपस्थिति में होता है. यह क्लोरोप्लास्ट के ग्रेना में होती है. इस अभिक्रिया में मुख्य रूप से तीन चीजें होती हैं:
1. पर्णहरित और सहायक वर्णक प्रकाश ऊर्जा को सोखते हैं. इस ऊर्जा का उपयोग पानी के प्रकाशिक अपघटन (Photolysis of water) के लिए होता है. इसमें पानी टूटकर ऑक्सीजन (\( O_2 \)), हाइड्रोजन आयन (\( H^+ \)), और इलेक्ट्रॉन (\( e^- \)) छोड़ता है.
2. निकले हुए इलेक्ट्रॉन प्रकाश तंत्रों (Photosystems) में विभिन्न ग्राही (acceptors) के माध्यम से आगे बढ़ते हैं. इस प्रक्रिया में अंतिम रूप से \( ATP \) और \( NADPH + H^+ \) के रूप में ऊर्जा जमा होती है. \( ATP \) ऊर्जा की मुद्रा है, और \( NADPH \) एक रिड्यूसिंग एजेंट है.
3. यह उच्च ऊर्जा वाले अणु (\( ATP \) और \( NADPH + H^+ \)) अप्रकाशिक अभिक्रिया में \( CO_2 \) को शर्करा (carbohydrates) में बदलने में मदद करते हैं. यह पूरी प्रक्रिया एक ऑक्सीकरण-अपचयन (redox) अभिक्रिया है, जिसमें पानी ऑक्सीकृत होता है और \( CO_2 \) अपचयित होता है.
यह चरण सूर्य के प्रकाश को रासायनिक ऊर्जा में बदलता है, जिसे बाद में पौधों द्वारा अपना भोजन बनाने के लिए उपयोग किया जाता है.
In simple words: प्रकाशिक अभिक्रिया में पौधे सूरज की रोशनी का इस्तेमाल करके पानी को तोड़ते हैं, जिससे ऑक्सीजन, \( ATP \) और \( NADPH \) बनते हैं. यह क्लोरोप्लास्ट के ग्रेना में होता है.
🎯 Exam Tip: प्रकाशिक अभिक्रिया के वर्णन में जल का प्रकाशिक अपघटन, \( ATP \) और \( NADPH \) का निर्माण, और ग्रेना में इसके स्थान को शामिल करना चाहिए.
Question 2. केल्विन बेन्सन चक्र द्वारा \( CO_2 \) का स्थिरीकरण समझाइए।
Answer: केल्विन-बेन्सन चक्र, जिसे \( C_3 \) चक्र भी कहते हैं, प्रकाश संश्लेषण की अप्रकाशिक अभिक्रिया का मुख्य मार्ग है. यह क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा में होता है, जहाँ \( CO_2 \) को शर्करा में बदला जाता है. 1946-53 के बीच केल्विन, बेन्सन और उनके साथियों ने रेडियोएक्टिव ट्रेसर तकनीक का उपयोग करके इसकी खोज की थी. इस चक्र की मुख्य अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
1. राइबुलोस मोनोफॉस्फेट का फॉस्फोरिलीकरण: अप्रकाशिक अभिक्रिया में, \( CO_2 \) को ग्रहण करने वाला यौगिक 5 कार्बन वाली शर्करा राइबुलोस 1, 5 बाइफॉस्फेट (RuBP) होता है. यह \( ATP \) की मदद से राइबुलोस मोनोफॉस्फेट से बनता है.
2. राइबुलोस-1, 5 बाइफॉस्फेट का कार्बोक्सिलीकरण (कार्बोक्सिलीकरण प्रावस्था): \( RuBP \) कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)) को ग्रहण करता है. \( RuBISCO \) नामक एंजाइम की मदद से, \( CO_2 \) और पानी \( (H_2O) \) मिलकर 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (\( 3-PGA \)) के 12 अणु बनाते हैं. यह \( C_3 \) चक्र का पहला स्थायी यौगिक है.
\[ Ribulose-1, 5-biphosphate + 6CO_2 + 6H_2O \xrightarrow{RuBP Carboxylase} 3 \text{ फास्फोग्लिसरिक अम्ल } (3-Phosphoglyceric \text{ acid}) \]
3. फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल का फॉस्फोरिलीकरण: \( 3-PGA \) के अणु \( ATP \) के उपयोग से 1, 3-डाइफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल में बदल जाते हैं.
4. 1, 3 डाइफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल का अपचयन: यह अणु \( NADPH + H^+ \) की मदद से 3-फास्फोग्लिसरेल्डिहाइड में बदलता है.
5. हेक्सोज शर्करा का निर्माण (संश्लेषण प्रावस्था): 3-फास्फोग्लिसरेल्डिहाइड के 12 अणुओं में से 2 अणु ग्लूकोज बनाते हैं, जो बाद में सुक्रोज या स्टार्च में बदल जाते हैं. बचे हुए 10 अणु \( RuBP \) को फिर से बनाने में मदद करते हैं ताकि चक्र चलता रहे.
In simple words: केल्विन चक्र में, पौधे \( CO_2 \) को \( RuBP \) की मदद से सोखते हैं और कई चरणों के बाद उसे शर्करा में बदल देते हैं. यह प्रक्रिया \( ATP \) और \( NADPH \) का उपयोग करती है और क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा में होती है.
🎯 Exam Tip: केल्विन चक्र के मुख्य चरणों (कार्बोक्सिलीकरण, अपचयन, पुनरुत्पादन) और उनमें शामिल मुख्य यौगिकों तथा एंजाइमों \( (RuBISCO) \) को विस्तार से समझाएं.
Question 4. प्रकाश संश्लेषी वर्णकों पर लेख लिखिए।
Answer: प्रकाश संश्लेषी वर्णक (Photosynthetic pigments) ऐसे पदार्थ होते हैं जो प्रकाश ऊर्जा को सोखते हैं और इसे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में उपयोग करते हैं. पौधों में मुख्य रूप से तीन प्रकार के वर्णक पाए जाते हैं:
1. पर्णहरित (Chlorophyll):
- यह हरे रंग का सबसे महत्वपूर्ण वर्णक है, जो प्रकाश संश्लेषण में सीधे उपयोग होता है.
- यह लगभग 7 प्रकार का होता है (जैसे Chl'a', Chl'b', Chl'c', Chl'd', Chl'e', Bacterioviridin और Bacteriochlorophyll). इनमें क्लोरोफिल 'a' को सार्वत्रिक वर्णक कहा जाता है, जो अधिकांश प्रकाश संश्लेषी पौधों में पाया जाता है.
- क्लोरोफिल 'b' सहायक वर्णक के रूप में काम करता है और क्लोरोफिल 'a' की मदद करता है.
- क्लोरोफिल अणु की संरचना में एक पोरफाइरीन वलय (सिर) और एक फाइटोल श्रृंखला (पूंछ) होती है. इसके केंद्र में मैग्नीशियम (\( Mg \)) आयन पाया जाता है.
- ये पीले, नारंगी या लाल रंग के वर्णक होते हैं और क्लोरोफिल के साथ पाए जाते हैं.
- ये उन विकिरणों को सोखते हैं जिन्हें क्लोरोफिल सोख नहीं पाता और ऊर्जा को क्लोरोफिल तक पहुँचाते हैं. इसलिए इन्हें सहायक वर्णक भी कहते हैं.
- इनमें दो मुख्य प्रकार होते हैं: कैरोटिन (लाल रंग के हाइड्रोकार्बन, जैसे लाइकोपीन, \( \alpha \)-कैरोटिन, \( \beta \)-कैरोटिन) और जैन्थोफिल (पीले या भूरे रंग के, ऑक्सीजन परमाणु सहित, जैसे ल्यूटिन, जियाज़ैन्थिन).
- ये वर्णक केवल लाल और नीले-हरे शैवालों में पाए जाते हैं.
- इनमें फाइकोइरीथ्रिन (Phycoerythrin) जो लाल रंग का होता है और लाल शैवालों (Rhodophyceae) में पाया जाता है.
- फाइकोसायनिन (Phycocyanin) नीले रंग का वर्णक है जो नील हरित शैवालों (Cyanophyceae) में प्रमुखता से पाया जाता है.
In simple words: प्रकाश संश्लेषी वर्णक वे पदार्थ हैं जो प्रकाश ऊर्जा को सोखते हैं. मुख्य वर्णक क्लोरोफिल है, और सहायक वर्णक कैरोटिनॉइड्स और फाइकोबिलिन्स हैं जो क्लोरोफिल की मदद करते हैं.
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषी वर्णकों का वर्णन करते समय प्रत्येक प्रकार (क्लोरोफिल, कैरोटिनॉइड्स, फाइकोबिलिन्स) की भूमिका, रंग और रासायनिक संरचना की मुख्य विशेषताएं बताएं.
C4 चक्र एवं C4 पादपों की विशेषताएँ (Characteristics of C4 Cycle and C4 plants)
1. C4 पादप कार्बन डाइऑक्साइड को बहुत कम सान्द्रता पर भी प्रकाश संश्लेषण की क्रिया करने में सक्षम होते हैं। जैविक रूप से यह एक अच्छी विशेषता है।
2. C4 पादपों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की क्रिया नहीं होती है, इसलिए उनकी उत्पादकता C3 पादपों से अधिक होती है।
3. C4 चक्र का मुख्य एन्जाइम (PEP carboxylase) कार्बन डाइऑक्साइड की कम सान्द्रता पर भी ठीक से काम करता रहता है।
4. C4 पादपों को उन जगहों पर आसानी से उगाया जा सकता है जहाँ पानी कम हो (सूखे वातावरण) और तापमान अधिक हो (30 - 45°C)।
In simple words: C4 पौधे कम कार्बन डाइऑक्साइड में भी अच्छे से काम करते हैं, बिना पानी खोए अधिक भोजन बनाते हैं और गर्म, सूखे इलाकों के लिए बहुत अच्छे होते हैं। इन पौधों में विशेष प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं जो उन्हें यह सब करने में मदद करती हैं।
🎯 Exam Tip: जब C4 पौधों की विशेषताओं का वर्णन करें, तो उनकी दक्षता, जल संरक्षण और उच्च तापमान सहने की क्षमता पर ध्यान दें।
Question 5. निम्न पर टिप्पणियाँ लिखिए -
(i) प्रकाश संश्लेषी वर्णक
(ii) प्रकाशतन्त्र – I तथा प्रकाशतन्त्र – II
(iii) जल का प्रकाशिक अपघटन
(iv) C4 चक्र का महत्त्व
(v) प्रकाश श्वसन एवं प्रकाश संश्लेषण
Answer:
(i) **प्रकाश संश्लेषी वर्णक:** पौधे प्रकाश ऊर्जा को सोखने के लिए वर्णकों (पिगमेंट्स) का इस्तेमाल करते हैं। इन्हें प्रकाश संश्लेषी वर्णक कहते हैं। पौधों में मुख्य रूप से तीन तरह के वर्णक होते हैं:
• पर्णहरित (Chlorophylls): ये पानी में घुल जाते हैं।
• कैरोटिनॉइड्स (Carotenoids): ये पानी में नहीं घुलते हैं।
• फाइकोविलिन्स (Phycobillins): ये भी पानी में नहीं घुलते हैं।
इनमें से पर्णहरित सबसे मुख्य वर्णक है, और बाकी सभी सहायक वर्णक होते हैं। ये वर्णक अलग-अलग रंगों की रोशनी को सोखकर प्रकाश संश्लेषण में मदद करते हैं।
(ii) **प्रकाशतन्त्र – I तथा प्रकाशतन्त्र – II:** प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में दो मुख्य फोटोसिस्टम या प्रकाशतन्त्र होते हैं, PS-I और PS-II। PS-I मुख्य रूप से लंबी तरंगदैर्ध्य की रोशनी को अवशोषित करता है, जबकि PS-II छोटी तरंगदैर्ध्य की रोशनी को। ये दोनों एक साथ काम करके प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं।
(iii) **जल का प्रकाशिक अपघटन:** क्लोरोफिल द्वारा सोखी गई प्रकाश ऊर्जा का उपयोग जल के प्रकाशिक अपघटन में होता है। इस प्रक्रिया में पानी \((\text{H}_2\text{O})\) टूटकर ऑक्सीजन \((\text{O}_2)\), हाइड्रोजन आयन \((\text{H}^+)\) और इलेक्ट्रॉन \((\text{e}^-)\) बनते हैं। इस टूटने से निकली ऑक्सीजन वातावरण में छोड़ दी जाती है। मैग्नीज आयन \((\text{Mn}^{++})\) और क्लोराइड आयन \((\text{Cl}^-)\) इस प्रक्रिया में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
\[ 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow 4\text{H}^+ + 4\text{e}^- + \text{O}_2 \]
इस प्रक्रिया को "पानी का विभाजन" भी कहते हैं।
(iv) **C4 चक्र का महत्त्व:** C4 चक्र उन पौधों में होता है जो गर्म और सूखे वातावरण में उगते हैं। इसका महत्व यह है कि यह C4 पौधों को कार्बन डाइऑक्साइड की बहुत कम मात्रा में भी प्रकाश संश्लेषण करने में मदद करता है। इस चक्र के कारण इन पौधों में प्रकाश श्वसन (फोटोरेस्पिरेशन) नहीं होता, जिससे उनकी उत्पादकता C3 पौधों से अधिक होती है। यह पानी की बचत करने में भी सहायक होता है।
(v) **प्रकाश श्वसन एवं प्रकाश संश्लेषण:**
**प्रकाश संश्लेषण:** यह वह प्रक्रिया है जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से अपना भोजन (ग्लूकोज) बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। यह पौधों के लिए ऊर्जा उत्पादन का मुख्य तरीका है।
\[ 6\text{CO}_2 + 12\text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{प्रकाश}} \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 + 6\text{H}_2\text{O} + 6\text{O}_2 \uparrow \]
**प्रकाश श्वसन (Photorespiration):** यह प्रकाश संश्लेषण की उपस्थिति में होने वाली एक श्वसन प्रक्रिया है, खासकर C3 पौधों में। इसमें ऑक्सीजन की उपस्थिति में कार्बनिक यौगिक ऑक्सीकृत होते हैं, लेकिन ऊर्जा नहीं बनती और कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त होती है। इसे एक "नुकसानदायक" प्रक्रिया माना जाता है क्योंकि यह ऊर्जा बर्बाद करती है और प्रकाश संश्लेषण की दक्षता को कम करती है। यह RUBISCO एंजाइम की ऑक्सीजन के प्रति बढ़ती बंधुता के कारण होता है।
In simple words: प्रकाश संश्लेषण पौधे अपना भोजन बनाने का तरीका है, जबकि प्रकाश श्वसन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पौधे ऊर्जा बनाए बिना ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। प्रकाश श्वसन पौधों के लिए अच्छा नहीं होता क्योंकि यह ऊर्जा को बेकार करता है और भोजन बनाने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक उप-भाग के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त परिभाषा प्रदान करें। प्रक्रियाओं को समझाते समय, उनके मुख्य उद्देश्य और इसमें शामिल प्रमुख तत्वों को उजागर करें।
Question 6. प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारकों की विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए।
Answer: प्रकाश संश्लेषण की क्रिया कई जैविक, रासायनिक, पर्यावरणीय और आनुवंशिक कारकों से प्रभावित होती है। इन कारकों को दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है: आंतरिक कारक और बाह्य कारक।
**ब्लैकमैन का सीमाकारी कारक का नियम:** इस नियम के अनुसार, यदि कोई प्रक्रिया कई कारकों से प्रभावित होती है, तो उस प्रक्रिया की दर उस कारक से सीमित होती है, जो उस समय सबसे कम मात्रा में मौजूद होता है। जब इस सीमित कारक की मात्रा बढ़ाई जाती है, तो प्रक्रिया की दर भी बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, यदि प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश पर्याप्त है, लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड कम है, तो प्रकाश संश्लेषण की दर कार्बन डाइऑक्साइड की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
**बाह्य या पर्यावरणीय कारक (External factors):** ये वे कारक हैं जो पौधे के बाहर से प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करते हैं।
(i) **प्रकाश (Light):** प्रकाश संश्लेषण मुख्य रूप से दृश्य प्रकाश वर्णक्रम (400-700 nm) में होता है, जिसे फोटोसिंथेटिक एक्टिव रेडिएशन (PAR) कहते हैं। प्रकाश की तीव्रता बढ़ने से प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ती है, लेकिन बहुत तेज़ प्रकाश में क्लोरोफिल का ऑक्सीकरण (सोलराइज़ेशन) हो सकता है, जिससे दर घट जाती है। हरे प्रकाश में प्रकाश संश्लेषण कम होता है क्योंकि पत्तियां इसे अवशोषित नहीं करतीं।
(ii) **तापमान (Temperature):** प्रकाश संश्लेषण की क्रिया एक निश्चित तापमान सीमा के अंदर सबसे अच्छी होती है। अधिकांश पौधों के लिए यह सीमा 10°C से 35°C है। कम तापमान पर दर कम होती है, और बहुत अधिक तापमान पर एंजाइम (जैसे RUBISCO) विकृत हो जाते हैं, जिससे दर फिर से घट जाती है।
(iii) **कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon dioxide, CO₂):** वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा लगभग 0.03% (300 ppm) होती है। इसकी मात्रा बढ़ने से प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ती है, लेकिन एक निश्चित सीमा (लगभग 1%) से अधिक होने पर यह पौधों के लिए जहरीली हो जाती है। C4 पौधे कम CO2 सांद्रता पर भी प्रभावी होते हैं।
(v) **ऑक्सीजन (Oxygen):** ऑक्सीजन की अधिक सांद्रता प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करती है, खासकर C3 पौधों में। यह RUBISCO एंजाइम के साथ प्रतिस्पर्धा करती है, जिससे प्रकाश श्वसन (Photorespiration) शुरू हो जाता है और प्रकाश संश्लेषण की दक्षता कम हो जाती है।
**आन्तरिक कारक (Internal factors):** ये वे कारक हैं जो पौधे के अंदर से प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करते हैं।
1. **पर्णहरित (Chlorophyll):** यह प्रकाश संश्लेषण का मुख्य वर्णक है। क्लोरोफिल की मात्रा बढ़ने से प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ती है, जब तक कि कोई अन्य कारक सीमित न हो जाए।
2. **संचित भोजन की मात्रा (Amount of stored food):** यदि पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण के उत्पाद जमा होने लगते हैं, तो प्रकाश संश्लेषण की दर धीमी हो जाती है। जब ये उत्पाद पौधे के दूसरे हिस्सों में चले जाते हैं, तो दर फिर से बढ़ जाती है।
3. **पत्ती की आन्तरिक संरचना (Internal structure of leaf):** पत्तियों में रंध्रों की संख्या, उनका वितरण और आंतरिक संरचना प्रकाश संश्लेषण की दर को प्रभावित करती है। अधिक रंध्रों के खुले रहने से कार्बन डाइऑक्साइड अधिक मात्रा में अंदर आती है, जिससे प्रकाश संश्लेषण की दर तेज़ होती है।
In simple words: प्रकाश संश्लेषण की गति को रोशनी, गर्मी, कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन और पौधे के अंदर के तत्व जैसे क्लोरोफिल और पत्ती की बनावट प्रभावित करते हैं। अगर इनमें से कोई भी चीज़ कम या ज़्यादा हो जाए, तो पौधों का भोजन बनाने का काम धीमा हो जाता है।
🎯 Exam Tip: कारकों की व्याख्या करते समय, प्रत्येक कारक को अलग-अलग समझाएं और यह भी बताएं कि वे एक-दूसरे को कैसे प्रभावित कर सकते हैं। ब्लैकमैन के सीमाकारी कारक के नियम का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 10 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 10 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. क्रेज शारीरिकी किन पौधों में पायी जाती है?
Answer: C4 पौधों में
In simple words: क्रेज शारीरिकी C4 पौधों में होती है, जो उन्हें गर्म मौसम में अच्छी तरह उगने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: क्रेज शारीरिकी C4 पौधों की एक विशेष अनुकूलन है जो उन्हें प्रकाश श्वसन से बचाती है।
Question 2. ऐसे स्वपोषी जीव का नाम बताइए जिसमें हरितलवक अनुपस्थित रहता है।
Answer: सायनोबैक्टीरिया (Cynobacteria)
In simple words: सायनोबैक्टीरिया खुद अपना भोजन बनाते हैं, लेकिन उनके पास हरितलवक नहीं होते हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि सायनोबैक्टीरिया प्रोकैरियोटिक जीव होते हैं, इसलिए उनमें झिल्ली-बद्ध कोशिकांग (जैसे क्लोरोप्लास्ट) नहीं होते हैं।
Question 4. C4 चक्र को किसने प्रस्तावित किया?
Answer: एम.डी. हैच तथा सी.आर. स्लैक ने।
In simple words: C4 चक्र की खोज दो वैज्ञानिकों, हैच और स्लैक ने की थी।
🎯 Exam Tip: C4 चक्र का नाम अक्सर हैच-स्लैक चक्र के रूप में भी जाना जाता है।
Question 5. प्रकाश अभिक्रिया की स्कीम-2 किसने प्रस्तुत की?
Answer: आर. हिल व बेन्डाल (R. Hill & Bendall, 1960) ने।
In simple words: हिल और बेन्डाल ने प्रकाश अभिक्रिया की दूसरी योजना दी थी।
🎯 Exam Tip: प्रकाश अभिक्रिया की स्कीम-Z (या Z-स्कीम) अचक्रीय फोटोफॉस्फोराइलेशन को दर्शाती है।
Question 6. हरितलवक के किस भाग में प्रकाश अभिक्रिया होती है?
Answer: ग्रेना में।
In simple words: हरितलवक के ग्रेना नाम के हिस्से में रोशनी से जुड़ी अभिक्रियाएँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: ग्रेना में थाइलेकोइड झिल्लियाँ होती हैं, जहाँ प्रकाश-निर्भर अभिक्रियाएँ होती हैं।
Question 7. हरितलवक के किस भाग में अप्रकाशिक अभिक्रिया होती है?
Answer: स्ट्रोमा में।
In simple words: हरितलवक के स्ट्रोमा हिस्से में बिना रोशनी वाली अभिक्रियाएँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: स्ट्रोमा वह तरल पदार्थ है जो हरितलवक के अंदर ग्रेना को घेरे रहता है, और यहाँ केल्विन चक्र होता है।
Question 8. प्रकाश अभिक्रिया के दोनों तंत्रों के नाम लिखिए।
Answer: प्रकाश तन्त्र (PS-I) एवं प्रकाश तन्त्र (PS-II)।
In simple words: प्रकाश अभिक्रिया में दो मुख्य तंत्र होते हैं: फोटोसिस्टम-1 और फोटोसिस्टम-2।
🎯 Exam Tip: दोनों प्रकाश तंत्र प्रकाश ऊर्जा को सोखते हैं और इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Question 9. ऐसे दो पादपों के नाम लिखिए जिनमें रात्रि में रन्ध्र खुलते हैं?
Answer: नागफनी एवं अगेव।
In simple words: नागफनी और अगेव जैसे पौधे रात में अपने रंध्र खोलते हैं ताकि पानी बचाया जा सके।
🎯 Exam Tip: रात में रंध्र खोलने वाले पौधे CAM पौधों के उदाहरण हैं, जो सूखे वातावरण में पानी बचाने के लिए अनुकूलित होते हैं।
Question 11. क्वाण्टम लब्धि (Quantum yield) किसे कहते हैं?
Answer: अवशोषित प्रकाश की प्रति क्वाण्टा में विमोचित ऑक्सीजन अणुओं की संख्या क्वाण्टम लब्धि (Quantum yield) कहलाती है।
In simple words: क्वाण्टम लब्धि यह बताती है कि प्रकाश की एक इकाई कितनी ऑक्सीजन पैदा करती है।
🎯 Exam Tip: क्वाण्टम लब्धि प्रकाश संश्लेषण की दक्षता का एक माप है।
Question 12. NADP का पूरा नाम लिखिए।
Answer: निकोटिनामाइड एडीनीन डाइफॉस्फेट (Nicotinamide Adenine Diphosphate)।
In simple words: NADP का पूरा नाम निकोटिनामाइड एडीनीन डाइफॉस्फेट है, यह प्रकाश संश्लेषण में ऊर्जा ले जाने का काम करता है।
🎯 Exam Tip: NADP+ प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश-निर्भर अभिक्रियाओं में एक इलेक्ट्रॉन स्वीकर्ता के रूप में कार्य करता है।
Question 13. C3 पादपों में CO2 ग्राही कौन होता है?
Answer: रिबुलोज बाइ फॉस्फेट (RuBP)।
In simple words: C3 पौधों में, कार्बन डाइऑक्साइड को पहली बार रिबुलोज बाइ फॉस्फेट नामक अणु पकड़ता है।
🎯 Exam Tip: RuBP (राइबुलोज-1,5-बाइफॉस्फेट) C3 चक्र में CO2 का प्राथमिक ग्राही है और RUBISCO एंजाइम द्वारा कार्बोक्सिलीकरण करता है।
Question 14. C4 पौधों में CO2 ग्राही कौन होता है?
Answer: फास्फोइनोल पाइरुविक अम्ल (PEP)।
In simple words: C4 पौधों में, कार्बन डाइऑक्साइड को फास्फोइनोल पाइरुविक अम्ल नामक अणु सबसे पहले पकड़ता है।
🎯 Exam Tip: PEP (फॉस्फोइनोल पाइरुवेट) C4 चक्र में CO2 का प्राथमिक ग्राही है और PEP कार्बोक्सिलेज एंजाइम द्वारा कार्बोक्सिलीकरण करता है।
Question 15. CAM चक्र किन पादपों में पाया जाता है?
Answer: मांसल पौधों में।
In simple words: CAM चक्र मांसल पौधों में होता है जो रेगिस्तान जैसे सूखे इलाकों में रहते हैं।
🎯 Exam Tip: CAM पौधे शुष्क परिस्थितियों में पानी बचाने के लिए रात में CO2 लेते हैं और इसे दिन में प्रकाश संश्लेषण के लिए उपयोग करते हैं।
Question 16. किसी प्रकाश संश्लेषी जीवाणु का नाम लिखिए।
Answer: क्लोरोबियम (Chlorobium)।
In simple words: क्लोरोबियम एक जीवाणु है जो प्रकाश संश्लेषण करता है।
🎯 Exam Tip: क्लोरोबियम जैसे जीवाणु अनऑक्सीजनित प्रकाश संश्लेषण करते हैं, जिसमें ऑक्सीजन का उत्पादन नहीं होता है।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 10 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. रेडड्रॉप (लाल पतन) किसे कहते हैं?
Answer: जब पौधों को लाल प्रकाश (लगभग 680 nm) की तरंगदैर्ध्य से अधिक रोशनी दी जाती है, तो प्रकाश संश्लेषण की दक्षता अचानक कम हो जाती है। प्रकाश संश्लेषण की इस गिरावट को रेडड्रॉप या लाल पतन कहते हैं। यह घटना तब होती है जब फोटोसिस्टम II (PS-II) निष्क्रिय हो जाता है और केवल फोटोसिस्टम I (PS-I) ही सक्रिय रहता है।
In simple words: जब पौधे को बहुत गहरे लाल रंग की रोशनी मिलती है, तो उसका भोजन बनाने का काम अचानक कम हो जाता है, इसे रेडड्रॉप कहते हैं।
🎯 Exam Tip: रेडड्रॉप घटना दर्शाती है कि प्रकाश संश्लेषण के लिए PS-I और PS-II दोनों की एक साथ सक्रियता आवश्यक है।
Question 3. प्रकाश का गुण प्रकाश संश्लेषण क्रिया को किस तरह प्रभावित करता है?
Answer: प्रकाश संश्लेषण को प्रकाश के कई गुण प्रभावित करते हैं:
1. **प्रकाश की तीव्रता:** मध्यम प्रकाश की तीव्रता बढ़ने पर प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ती है। लेकिन बहुत तेज़ प्रकाश (सोलराइज़ेशन) से क्लोरोफिल को नुकसान हो सकता है और दर घट जाती है।
2. **प्रकाश की गुणवत्ता (रंग):** प्रकाश संश्लेषी वर्णक दृश्य स्पेक्ट्रम (400-800 nm) के अलग-अलग तरंगदैर्ध्य को अवशोषित करते हैं। हरे पौधों में लाल और नीले प्रकाश में प्रकाश संश्लेषण सबसे ज़्यादा होता है, जबकि हरे प्रकाश में कम होता है क्योंकि पत्तियां हरा प्रकाश परावर्तित करती हैं। शैवाल में, नीले-हरे शैवाल नीले प्रकाश में और लाल शैवाल लाल प्रकाश में सबसे अधिक प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
3. **प्रकाश की अवधि:** पौधों को जितनी देर प्रकाश मिलता है, उसी हिसाब से प्रकाश संश्लेषण होता है। लंबी अवधि तक प्रकाश मिलने से कुल प्रकाश संश्लेषण बढ़ जाता है, बशर्ते अन्य कारक सीमित न हों।
In simple words: प्रकाश की मात्रा (कितना तेज़ है), उसका रंग (लाल, नीला, हरा) और कितने समय तक वह पौधे पर पड़ता है, ये सभी बातें तय करती हैं कि पौधा कितना भोजन बना पाएगा।
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषण की दर प्रकाश की तीव्रता, तरंगदैर्ध्य (गुणवत्ता) और अवधि पर निर्भर करती है। याद रखें कि विभिन्न वर्णक अलग-अलग तरंगदैर्ध्य को अवशोषित करते हैं।
Question 4. कम्पेशेसन बिन्दु क्या है?
Answer: संतुलन प्रकाश तीव्रता (Compensation point) वह प्रकाश तीव्रता है जिस पर प्रकाश संश्लेषण की दर और श्वसन की दर बराबर हो जाती है। इस बिंदु पर, पौधे न तो वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और न ही ऑक्सीजन छोड़ते हैं (गैसों का कोई शुद्ध विनिमय नहीं होता है)। यह आमतौर पर सुबह और शाम को कम रोशनी में होता है। इस बिंदु पर पौधे न तो कार्बनिक पदार्थ बनाते हैं और न ही उनका उपयोग करते हैं।
In simple words: कम्पेशेसन बिन्दु वह रोशनी का स्तर है जहाँ पौधे जितना कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं, उतना ही छोड़ते हैं, मतलब न तो वे कुछ बनाते हैं और न ही कुछ इस्तेमाल करते हैं।
🎯 Exam Tip: कम्पेशेसन बिन्दु को अक्सर "प्रकाश क्षतिपूर्ति बिंदु" भी कहते हैं और यह पौधों की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण होता है।
Question 5. सोलराइजेशन (Salarization) किसे कहते है?
Answer: सोलराइजेशन वह स्थिति है जब अत्यधिक तीव्र प्रकाश के कारण क्लोरोफिल का प्रकाशीय ऑक्सीकरण होने लगता है, जिससे क्लोरोफिल नष्ट हो जाता है। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप प्रकाश संश्लेषण की दर घट जाती है क्योंकि प्रकाश को अवशोषित करने वाले मुख्य वर्णक क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। यह पौधों को अत्यधिक प्रकाश से बचाने का एक तरीका हो सकता है, लेकिन यह प्रकाश संश्लेषण की क्षमता को कम करता है।
In simple words: जब बहुत तेज़ रोशनी पड़ती है, तो पौधे का हरा रंग (क्लोरोफिल) खराब होने लगता है और भोजन बनाने की क्षमता कम हो जाती है, इसी को सोलराइजेशन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: सोलराइजेशन अत्यधिक प्रकाश के कारण होने वाला क्लोरोफिल का फोटोऑक्सीकरण है, जो प्रकाश संश्लेषण की दर को कम करता है।
Question 6. श्वसन एवं प्रकाश श्वसन में अन्तर बताइए।
Answer: श्वसन और प्रकाश श्वसन में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं, जो पौधों की ऊर्जा प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। श्वसन में ग्लूकोज जैसे कार्बनिक पदार्थ ऑक्सीजन की उपस्थिति में टूटते हैं, जिससे ऊर्जा (ATP) उत्पन्न होती है और कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त होती है। यह प्रक्रिया दिन और रात दोनों में होती है और सभी जीवित कोशिकाओं के लिए आवश्यक है।
वहीं, प्रकाश श्वसन, जो मुख्य रूप से C3 पौधों में होता है, प्रकाश की उपस्थिति में होता है। इसमें कार्बनिक पदार्थ ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकृत होते हैं, लेकिन ऊर्जा उत्पन्न नहीं होती, बल्कि ऊर्जा का क्षय होता है। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड भी मुक्त होती है, और यह प्रकाश संश्लेषण की दक्षता को कम करती है। प्रकाश श्वसन तब होता है जब RUBISCO एंजाइम CO2 की जगह O2 के साथ प्रतिक्रिया करता है।
एक प्रयोग के माध्यम से प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश की आवश्यकता को दर्शाया जा सकता है। एक गमले में लगे स्वस्थ पौधे को 48 घंटे तक अंधेरे में रखा जाता है ताकि पत्तियों में मौजूद स्टार्च खत्म हो जाए। फिर, एक पत्ती के कुछ हिस्सों को काले कागज से ढक दिया जाता है। पौधे को धूप में रखने के बाद, पत्ती का स्टार्च परीक्षण (आयोडिन घोल से) करने पर पता चलता है कि जिस हिस्से को कागज से ढका गया था, वहाँ स्टार्च नहीं बना, जबकि खुले हिस्सों में स्टार्च बना। यह दर्शाता है कि प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश आवश्यक है।
In simple words: सामान्य श्वसन में पौधे भोजन तोड़कर ऊर्जा बनाते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। प्रकाश श्वसन में पौधे ऊर्जा बनाए बिना ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं, जिससे ऊर्जा बर्बाद होती है।
🎯 Exam Tip: श्वसन एक ऊर्जा-उत्पादक प्रक्रिया है जो हमेशा होती है, जबकि प्रकाश श्वसन एक ऊर्जा-खर्चीली प्रक्रिया है जो केवल प्रकाश की उपस्थिति में C3 पौधों में होती है।
Question 8. प्रकाशिक तथा अप्रकाशिक अभिक्रिया में अन्तर लिखिए।
Answer: प्रकाशिक एवं अप्रकाशिक अभिक्रिया में अन्तर निम्न प्रकार है:
| प्रकाशिक अभिक्रिया | अप्रकाशिक अभिक्रिया | |
|---|---|---|
| 1. | इसके लिए प्रकाश आवश्यक है। | इसके लिए प्रकाश की उपस्थिति आवश्यक नहीं होती है। |
| 2. | हरितलवक के ग्रेना (Granna) में होती है। | हरितलवक के स्ट्रोमा (Stroma) में होती है। |
| 3. | ऑक्सीजन गैस मुक्त होती है। | CO2 प्रयुक्त होती है। |
🎯 Exam Tip: प्रकाशिक अभिक्रिया में ATP और NADPH बनते हैं, जो अप्रकाशिक अभिक्रिया में ग्लूकोज बनाने के लिए उपयोग होते हैं, इस संबंध को याद रखना महत्वपूर्ण है।
PS-I एवं PS-II में अन्तर
| प्रकाश तन्त्र – I (PS – I) | प्रकाश तन्त्र – II (PS – II) | |
|---|---|---|
| 1. | इसका अभिक्रिया केन्द्र P700 होता है। | इसका अभिक्रिया केन्द्र P680 होता है। |
| 2. | यह प्रकाश फॉस्फोरिलीकरण के चक्रीय तथा अचक्रीय दोनों पदों में भाग लेता है। | यह केवल अचक्रीय फॉस्फोरिलीकरण में भाग लेता है। |
| 3. | यह PS-II से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है। | यह प्रकाश जल अपघटन में इलेक्ट्रॉन लेता है। |
| 4. | यह इलेक्ट्रॉन NADP+ को देता है। | यह P700 को इलेक्ट्रॉन देता है। |
🎯 Exam Tip: PS-I और PS-II के मुख्य अंतरों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे कि उनके अभिक्रिया केंद्र, इलेक्ट्रॉन दाता और ग्राही, और वे चक्रीय व अचक्रीय फॉस्फोरिलीकरण में कैसे भाग लेते हैं।
RBSE Solutions for Class 12 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. प्रकाश श्वसन से आप क्या समझते हो? प्रकाश श्वसन में भाग लेने वाले कोशिकांगों के नाम लिखिए। प्रकाश श्वसन की क्रियाविधि समझाइए।
Answer: प्रकाश श्वसन (Photorespiration) पौधों के प्रकाश संश्लेषी भाग में प्रकाश की उपस्थिति में होने वाली एक विशेष प्रकार की श्वसन क्रिया है। यह सामान्य श्वसन से अलग है क्योंकि इसमें ऑक्सीजन का उपयोग करके कार्बनिक यौगिकों का ऑक्सीकरण होता है, लेकिन कोई ऊर्जा (ATP) उत्पन्न नहीं होती। इसके बजाय, CO2 मुक्त होती है और ऊर्जा बर्बाद होती है। इसलिए इसे पौधों के लिए एक नुकसानदायक प्रक्रिया माना जाता है।
प्रकाश श्वसन शब्द का प्रयोग सबसे पहले क्रोटकोव (Krotkov) ने 1963 में किया था। ऑटो वारबर्ग (1920) ने बताया कि ऑक्सीजन की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया धीमी हो जाती है, जिसे वारबर्ग प्रभाव कहते हैं। ओरगेन और बो (1971) ने समझाया कि ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड RUBISCO एंजाइम के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
जब CO2 की मात्रा ज़्यादा होती है, तो RUBISCO एक कार्बोक्सिलेज की तरह काम करता है। लेकिन जब ऑक्सीजन ज़्यादा होती है, तो यह ऑक्सीजनेज की तरह काम करता है और फॉस्फोग्लाइकोलिक अम्ल (2 कार्बन यौगिक) बनाता है। इससे C2 चक्र (या ग्लाइकोलेट चक्र) शुरू होता है। इस चक्र में PGA (3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल) नहीं बनता और CO2 के स्थिरीकरण की दर कम हो जाती है।
**प्रकाश श्वसन में भाग लेने वाले कोशिकांग:**
प्रकाश श्वसन की पूरी प्रक्रिया तीन कोशिकांगों में पूरी होती है:
1. **हरितलवक (Chloroplast)**
2. **परऑक्सीसोम (Peroxisome)**
3. **माइटोकॉण्ड्रिया (Mitochondria)**
ये तीनों अंग प्रकाश श्वसन में एक इकाई की तरह काम करते हैं।
**प्रकाश श्वसन की क्रियाविधि:**
1. **हरितलवक में:** RUBISCO एंजाइम, ऑक्सीजन की उपस्थिति में, RuBP (राइबुलोज-1,5-बाइफॉस्फेट) के साथ प्रतिक्रिया करके एक अणु 3-PGA (3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल) और एक अणु 2-फॉस्फोग्लाइकोलेट बनाता है। 3-PGA केल्विन चक्र में चला जाता है, जबकि 2-फॉस्फोग्लाइकोलेट ग्लाइकोलेट में बदल जाता है और हरितलवक से बाहर निकलता है।
2. **परऑक्सीसोम में:** ग्लाइकोलेट परऑक्सीसोम में प्रवेश करता है और ग्लाइऑक्सिलेट में बदल जाता है, जिससे हाइड्रोजन परऑक्साइड बनता है। ग्लाइऑक्सिलेट फिर ग्लाइसिन में बदल जाता है।
3. **माइटोकॉण्ड्रिया में:** ग्लाइसिन माइटोकॉण्ड्रिया में प्रवेश करता है, जहाँ दो ग्लाइसिन अणु मिलकर सेरीन, CO2 और अमोनिया बनाते हैं। इस चरण में CO2 निकलती है। सेरीन फिर परऑक्सीसोम में लौट आता है।
4. **परऑक्सीसोम में वापस:** सेरीन परऑक्सीसोम में हाइड्रोक्सीपाइरुवेट में बदल जाता है, फिर ग्लिसरेट में।
5. **हरितलवक में वापस:** ग्लिसरेट हरितलवक में प्रवेश करता है और 3-PGA में बदल जाता है, जो केल्विन चक्र में शामिल हो जाता है।
इस प्रकार, प्रकाश श्वसन एक जटिल प्रक्रिया है जो CO2 को बर्बाद करती है और ऊर्जा उत्पन्न नहीं करती, जिससे पौधों की वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
In simple words: प्रकाश श्वसन एक ऐसी प्रक्रिया है जो रोशनी होने पर पौधों में होती है, जहाँ ऑक्सीजन से भोजन के टुकड़े होते हैं पर कोई ऊर्जा नहीं मिलती। यह हरितलवक, परऑक्सीसोम और माइटोकॉण्ड्रिया में होता है। यह एक बेकार की प्रक्रिया है क्योंकि यह कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती है और पौधे को ऊर्जा नहीं देती, जिससे पौधे का बढ़ना धीमा हो जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रकाश श्वसन को समझाते समय, RUBISCO की द्वैत प्रकृति (कार्बोक्सिलेज और ऑक्सीजनेज) पर जोर दें और तीनों कोशिकांगों की भूमिका को स्पष्ट करें।
Question 2. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
(i) क्रेज शारीरिकी
(ii) C4 पादपों की विशेषताएँ
Answer:
(i) **क्रेज शारीरिकी (Kranz Anatomy):** क्रेज शारीरिकी C4 पौधों की पत्तियों में पायी जाने वाली एक विशेष आंतरिक संरचना है। इसमें संवहन बंडल (vascular bundles) के चारों ओर दो प्रकार की प्रकाश संश्लेषी कोशिकाएं होती हैं: पर्णमध्योतक कोशिकाएं (Mesophyll cells) और बंडल शीथ कोशिकाएं (Bundle sheath cells)। बंडल शीथ कोशिकाएं संवहन बंडलों को एक या दो परतों में माला की तरह घेरती हैं, जिसे "क्रेज" (जर्मन में माला) कहा जाता है। इस संरचना के कारण, C4 पौधों में कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण मेसोफिल कोशिकाओं में शुरू होता है और बंडल शीथ कोशिकाओं में केल्विन चक्र पूरा होता है, जिससे प्रकाश श्वसन कम होता है और प्रकाश संश्लेषण की दक्षता बढ़ती है।
(ii) **C4 चक्र एवं C4 पादपों की विशेषताएँ (Characteristics of C4 Cycle and C4 plants):** C4 पादपों में CO2 स्थिरीकरण का एक विशेष तरीका होता है जिसे C4 चक्र कहते हैं। इन पौधों में कई महत्वपूर्ण विशेषताएं होती हैं:
1. **कम CO2 सांद्रता पर दक्षता:** C4 पादप कार्बन डाइऑक्साइड की बहुत कम सांद्रता पर भी प्रकाश संश्लेषण करने में सक्षम होते हैं। यह उन्हें जैविक रूप से बहुत सफल बनाता है।
2. **कम प्रकाश श्वसन:** C4 पादपों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की क्रिया नहीं होती है, जिससे उनकी उत्पादकता C3 पादपों से काफी अधिक होती है।
3. **PEP कार्बोक्सिलेज एंजाइम:** C4 चक्र का मुख्य एंजाइम PEP कार्बोक्सिलेज है, जो कार्बन डाइऑक्साइड की कम सांद्रता पर भी प्रभावी रूप से काम करता रहता है।
4. **शुष्क और उच्च तापमान के लिए अनुकूलन:** C4 पादपों को कम पानी वाले स्थानों (शुष्क वातावरण) और उच्च तापमान (30-45°C) वाले क्षेत्रों में आसानी से उगाया जा सकता है।
इन विशेषताओं से स्पष्ट होता है कि C4 पादप उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सबसे सफल पादप हैं।
In simple words: क्रेज शारीरिकी C4 पौधों की खास पत्ती की बनावट है जहाँ दो तरह की कोशिकाएँ होती हैं जो भोजन बनाने में मदद करती हैं। C4 पौधों की विशेषता है कि वे कम कार्बन डाइऑक्साइड और गर्म मौसम में भी बहुत अच्छे से भोजन बनाते हैं, और पानी भी बचाते हैं।
🎯 Exam Tip: क्रेज शारीरिकी और C4 पौधों की विशेषताओं का वर्णन करते समय, CO2 स्थिरीकरण की दक्षता और प्रकाश श्वसन की अनुपस्थिति पर विशेष ध्यान दें।
Question 3. केल्विन बेन्सन चक्र द्वारा CO₂ का स्थिरीकरण कीजिए।
Answer: केल्विन बेन्सन चक्र, जिसे C3 चक्र (Calvin Benson cycle, C3 cycle) भी कहते हैं, प्रकाश संश्लेषण की अप्रकाशिक अभिक्रियाओं का मुख्य मार्ग है, जिसके द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड \((\text{CO}_2)\) को शर्करा में परिवर्तित किया जाता है। इसकी खोज मेल्विन केल्विन, बेन्सन और उनके सहयोगियों ने 1946-53 के दौरान रेडियोएक्टिव ट्रेसर तकनीक का उपयोग करके की थी, जिसके लिए उन्हें 1961 में नोबेल पुरस्कार मिला। इस चक्र में मुख्य रूप से तीन कार्बन परमाणु युक्त 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल का निर्माण होता है, इसलिए इसे C3 चक्र कहते हैं।
केल्विन चक्र की महत्वपूर्ण अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं:
1. **राइबुलोज मोनोफॉस्फेट का फॉस्फोरिलीकरण (Phosphorylation of Ribose monophosphate):** अप्रकाशिक अभिक्रिया में CO2 को ग्रहण करने वाला पहला यौगिक 5 कार्बन युक्त शर्करा राइबुलोज-1,5-बाइफॉस्फेट (RuBP) होता है। इसका निर्माण राइबुलोज मोनोफॉस्फेट से फॉस्फोपेन्टोकाइनेज एंजाइम और ATP की उपस्थिति में होता है। एक ग्लूकोज अणु के निर्माण के लिए 6 ATP अणु का उपयोग होता है।
2. **राइबुलोज-1,5-बाइफॉस्फेट का कार्बोक्सिलीकरण (Carboxylation of Ribose 1,5-biphosphate):** यह केल्विन चक्र की पहली और सबसे महत्वपूर्ण प्रावस्था है। इस अभिक्रिया में RuBP कार्बोक्सिलेज (RuBISCO) एंजाइम की उपस्थिति में राइबुलोज-1,5-बाइफॉस्फेट के 6 अणु, 6 अणु कार्बन डाइऑक्साइड \((\text{CO}_2)\) और 6 अणु जल \((\text{H}_2\text{O})\) के साथ प्रतिक्रिया करके 12 अणु 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (3-PGA) बनाते हैं। 3-PGA अप्रकाशिक अभिक्रिया का पहला स्थायी यौगिक है।
\[ \text{Ribulose-1,5-biphosphate} + 6\text{CO}_2 + 6\text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{RuBP Carboxylase}} 12 \text{ (3-Phosphoglyceric acid)} \]
3. **फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल का फॉस्फोरिलीकरण (Phosphorylation of phosphoglyceric acid):** कार्बोक्सिलीकरण अभिक्रिया में बने 12 अणु 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल पर फॉस्फोग्लिसरिक काइनेज एंजाइम की उपस्थिति में ATP के 12 अणुओं का उपयोग करके 12 अणु 1,3-डाइफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल का निर्माण होता है।
\[ \text{3-phosphoglyceric acid (12 अणु)} \xrightarrow{\text{Phosphoglyceric kinase}} 12\text{ATP} \rightarrow 12\text{ADP} + \text{1,3 diphosphoglyceric acid (12 अणु)} \]
\( \implies \) इस अभिक्रिया में बने 12 अणु 1,3-डाइफॉस्फोग्लिसरिक अम्ल से ट्राइओस फॉस्फेट डिहाइड्रोजिनेज एंजाइम की उपस्थिति में NADPH + H+ का उपयोग करके 12 अणु 3-फॉस्फोग्लिसरेल्डिहाइड \((\text{3-PGAL})\) और 12 अणु \((\text{H}_3\text{PO}_4)\) बनते हैं।
\[ \text{1,3 Diphosphoglyceric acid} \xrightarrow{\text{Triose phosphate dehydrogenase}} \text{NADPH + H}^+ \rightarrow \text{NADP}^+ \]
\[ \text{3-Phosphoglyceraldehyde} + 12\text{H}_3\text{PO}_4 \text{ (12 अणु)} \]
इस अभिक्रिया में बने 12 अणुओं में से केवल 2 अणु 3-PGAL का उपयोग शर्करा (ग्लूकोज) 5 के निर्माण में होता है, जो बाद में सुक्रोज या स्टार्च में बदल जाते हैं। बाकी बचे 10 अणु 3-PGAL विभिन्न जैव रासायनिक अभिक्रियाओं के द्वारा 6 अणु राइबुलोज मोनोफॉस्फेट का निर्माण करते हैं, जो केल्विन चक्र को लगातार चलाए रखने में मदद करते हैं।
5. **हेक्सोज शर्करा का निर्माण (संश्लेषण प्रावस्था) (Formation of hexose sugar synthetic phase):** अपचयन प्रावस्था में बने 12 अणु 3-फॉस्फोग्लिसरेल्डिहाइड में से 2 अणु निम्नलिखित जैव रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा 1 अणु ग्लूकोज का निर्माण करते हैं:
(i) \( \text{3-Phosphoglyceraldehyde} \xrightarrow{\text{Phospho triose isomerase}} \text{3-Hydroxy acetone phosphate (3DHAP)} \)
(ii) \( \text{Phosphoglyceraldehyde} + \text{3-Hydroxy acetone phosphate} \xrightarrow{\text{Aldolose}} \text{Fructose 1, 6 Diphosphate (1 अणु)} \)
(iii) \( \text{Fructose-1, 6 diphosphate} \xrightarrow{\text{Phosphatase}} \text{Fructose-6-phosphate} + \text{H}_3\text{PO}_4 \)
(iv) \( \text{Fructose-6-phosphate} \xrightarrow{\text{Isomerase}} \text{Glucose-6-phosphate} \)
(v) \( \text{Glucose-6-phosphate} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{Glucose} + \text{H}_3\text{PO}_4 \)
ये सभी अभिक्रियाएँ ग्लाइकोलाइसिस प्रक्रिया के उल्टे क्रम में होती हैं, जिसे ग्लाइकोलाइटिक उत्क्रमण (Glycolytic reversion) कहा जाता है।
In simple words: केल्विन चक्र वह तरीका है जिससे पौधे कार्बन डाइऑक्साइड से चीनी बनाते हैं। इसमें तीन मुख्य हिस्से होते हैं: पहले कार्बन डाइऑक्साइड को एक अणु पकड़ता है, फिर उसे ऊर्जा का उपयोग करके चीनी में बदला जाता है, और अंत में उस अणु को फिर से तैयार किया जाता है ताकि चक्र चलता रहे।
🎯 Exam Tip: केल्विन चक्र के तीनों चरणों (कार्बोक्सिलीकरण, अपचयन और पुनरुत्पादन) को याद रखना और इनमें शामिल मुख्य एंजाइमों (जैसे RuBISCO) और उत्पादों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 4. प्रकाश संश्लेषी वर्णकों पर लेख लिखिए।
Answer: प्रकाश संश्लेषी वर्णक वे रासायनिक यौगिक होते हैं जो प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और इसे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में उपयोग करते हैं। ये वर्णक विभिन्न तरंगदैर्ध्य की रोशनी को सोखते हैं, जिससे पौधों को भोजन बनाने में मदद मिलती है। इनमें पर्णहरित मुख्य या प्रधान वर्णक है और बाकी सभी सहायक वर्णक हैं।
1. **पर्णहरित (Chlorophyll):** यह हरे रंग का सबसे महत्वपूर्ण वर्णक है और प्रकाश संश्लेषण में सीधे उपयोग होता है। पौधों में लगभग 7 प्रकार के पर्णहरित पाए जाते हैं (जैसे Chl 'a', Chl 'b', Chl 'c', Chl 'd', Chl 'e', बैक्टीरियोविरिडिन और बैक्टीरियोक्लोरोफिल)। इनमें से Chl 'a' को सार्वत्रिक वर्णक कहा जाता है क्योंकि यह सभी प्रकाश संश्लेषी पौधों (जीवाणुओं को छोड़कर) में पाया जाता है। क्लोरोफिल 'b' सहायक वर्णक के रूप में काम करता है और सभी हरे शैवाल तथा उच्च पौधों में मौजूद होता है। क्लोरोफिल वर्णक कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होते हैं, और क्लोरोफिल 'b' की घुलनशीलता सबसे अधिक होती है।
**पर्णहरित अणु की संरचना (Structure of Chlorophyll molecule):** क्लोरोफिल अणु एक ध्रुवीय अणु (polar molecule) होता है। इसकी रासायनिक संरचना का अध्ययन 1912 में विल्सटॉटर, स्टॉल और फिशर ने किया था। इसमें एक पोरफायरिन वलय (Porphyrin Ring) होता है, जो शीर्ष (Head) बनाता है, और एक फाइटोल श्रृंखला (Phytol Chain) होती है, जो पूंछ (Tail) बनाती है। क्लोरोफिल अणु के शीर्ष में चार पाइरोल वलय होते हैं, जो मेथिल बंधों द्वारा जुड़कर चक्रीय टेट्रापाइरोल वलय बनाते हैं। इस टेट्रापाइरोल वलय के केंद्र में मैग्नीशियम आयनिक परमाणु \((\text{Mg}^{++})\) पाया जाता है, जो प्रकाश अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चौथी पाइरोल रिंग एक लंबी अल्कोहल श्रृंखला से जुड़ी होती है, जिसे फाइटोल पूंछ कहते हैं।
क्लोरोफिल 'a' का अणुसूत्र \( \text{C}_{55}\text{H}_{72}\text{O}_5\text{N}_4\text{Mg} \) होता है और क्लोरोफिल 'b' का अणुसूत्र \( \text{C}_{55}\text{H}_{70}\text{O}_6\text{N}_4\text{Mg} \) होता है। क्लोरोफिल 'a' में पोरफायरिन सिरे के तीसरे कार्बन पर मेथिल \((\text{-CH}_3)\) समूह होता है, जबकि क्लोरोफिल 'b' में इस स्थान पर एल्डिहाइड समूह \((\text{-CHO})\) होता है। क्लोरोफिल 'a' नीले-हरे रंग का होता है।
2. **कैरोटिनॉइड्स (Carotenoids):** ये वर्णक आमतौर पर पौधों में क्लोरोफिल के साथ पाए जाते हैं। इन्हें सहायक वर्णक भी कहते हैं क्योंकि ये उन विकिरणों को अवशोषित करते हैं जिन्हें क्लोरोफिल अवशोषित नहीं कर पाता, और फिर उस ऊर्जा को क्लोरोफिल तक पहुँचाते हैं। कैरोटिनॉइड्स की खोज सबसे पहले 1831 में वेकेनरोडर ने गाजर से की थी। पौधों में दो प्रकार के कैरोटिनॉइड होते हैं- कैरोटिन और जैन्थोफिल।
• **कैरोटिन (Carotene):** ये हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनका मूलानुपाती सूत्र \( \text{C}_{40}\text{H}_{56} \) है। इनका रंग सामान्यतः लाल होता है। उदाहरण- लाइकोपिन, \(\alpha\)-कैरोटिन, \(\beta\)-कैरोटिन।
• **पर्णपीत या जैन्थोफिल (Xanthophyll or Carotenoles):** इन वर्णकों में कार्बन, हाइड्रोजन के अलावा ऑक्सीजन परमाणु भी होते हैं। इनका मूलानुपाती सूत्र \( \text{C}_{40}\text{H}_{56}\text{O}_2 \) है। इनका रंग पीला या भूरा होता है। उदाहरण- ल्यूटिन, जियाजैथिन, क्रिप्टोजैंथिन, नियोजैंथिन आदि। सभी हरे पौधों में जैन्थोफिल में ल्यूटिन और कैरोटिन में \(\beta\)-कैरोटिन पाए जाते हैं।
3. **फाइकोबिलिन्स (Phycobilins):** ये वर्णक केवल लाल और नीले-हरे शैवालों में पाए जाते हैं और दो प्रकार के होते हैं:
• **फाइकोइरीथ्रिन (Phycoerythrin):** यह लाल रंग का वर्णक है जो लाल शैवालों (रोडोफाइसी) में पाया जाता है।
• **फाइकोसाइनिन (Phycocyanin):** यह नीले रंग का वर्णक है जो मुख्य रूप से नील-हरित शैवालों (सायनोफाइसी) में पाया जाता है।
In simple words: प्रकाश संश्लेषी वर्णक पौधे के वे हिस्से हैं जो सूरज की रोशनी को पकड़ते हैं ताकि भोजन बन सके। इनमें पर्णहरित (जो हरे रंग का होता है) सबसे ज़रूरी है। कैरोटिनॉइड्स पीले या नारंगी रंग के होते हैं, और फाइकोबिलिन्स लाल या नीले शैवालों में मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रकाश संश्लेषी वर्णकों का वर्णन करते समय, प्रत्येक वर्णक के रंग, रासायनिक प्रकृति, मुख्य कार्य और वे किन जीवों में पाए जाते हैं, इसका उल्लेख करें। विशेष रूप से क्लोरोफिल की संरचना महत्वपूर्ण है।
There is no educational content (questions or answers) located between pages 29 and 32 of the provided PDF. All content on page 29 is a continuation of an answer to a question that started on page 27, which is outside the specified range. Pages 30, 31, and 32 contain only website navigation elements, footers, and SEO titles, which are to be ignored as per the content processing rules. Therefore, no HTML output is generated for this request.Free study material for Biology
RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण
Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 12 Biology textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 12 Biology chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 12 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Biology Class 12 Solved Papers
Using our Biology solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Biology are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Biology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Biology. You can access RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 10 प्रकाश संश्लेषण in printable PDF format for offline study on any device.