RBSE Solutions Class 12 Biology Chapter 1 आवृतबीजी पादपों में जनन; कायिक, अलैंगिक, लैं

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Detailed Chapter 1 आवृतबीजी पादपों में जनन; कायिक, अलैंगिक, लैं RBSE Solutions for Class 12 Biology

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Class 12 Biology Chapter 1 आवृतबीजी पादपों में जनन; कायिक, अलैंगिक, लैं RBSE Solutions PDF

Question 1. आवृतबीजी पौधों में पादप शरीर होता है –
(अ) द्विगुणित बीजाणुभिद्
(ब) अगुणित बीजाणुभिद्
(स) द्विगुणित युग्मकोभिद्
(द) अगुणित युग्मकोभिद्
Answer: (अ) द्विगुणित बीजाणुभिद्
In simple words: आवृतबीजी पौधों का मुख्य शरीर द्विगुणित बीजाणुभिद् होता है. यह पौधा फूलों, फलों और बीजों को पैदा करता है.

🎯 Exam Tip: आवृतबीजी पौधों के जीवन चक्र को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें बीजाणुभिद् अवस्था प्रमुख होती है.

 

Question 3. कन्द द्वारा कायिक प्रवर्धन पाया जाता है –
(अ) मुराया में
(ब) आलू में
(स) ब्रायोफिल्लम में
(द) प्याज में
Answer: (ब) आलू में
In simple words: आलू में कायिक प्रवर्धन कन्द के जरिए होता है. आलू के कन्द में 'आँखें' होती हैं जो नए पौधे बनाने में मदद करती हैं.

🎯 Exam Tip: कन्द भूमिगत तने का एक संशोधित रूप है जो भोजन का भंडारण करता है और नए पौधों को उगाने में मदद करता है.

 

Question 4. कर्तन द्वारा कृत्रिम कायिक प्रवर्धन होता है –
(अ) गन्ना में
(ब) चमेली में
(स) मोगरा में
(द) उपरोक्त सभी में
Answer: (द) उपरोक्त सभी में
In simple words: कर्तन विधि से कृत्रिम कायिक प्रवर्धन गन्ना, चमेली और मोगरा तीनों में किया जा सकता है. यह विधि पौधे के एक टुकड़े को काटकर नए पौधे उगाने के लिए उपयोग होती है.

🎯 Exam Tip: कर्तन, रोपण और दाब लगाना कृत्रिम कायिक प्रवर्धन की महत्वपूर्ण विधियाँ हैं जो व्यावसायिक कृषि में उपयोग की जाती हैं.

 

Question 5. पुष्प एक रूपान्तरित .......... है
(अ) जड़
(ब) पर्व
(स) प्ररोह
(द) मूल शीर्ष
Answer: (ब) पर्व
In simple words: फूल असल में पौधे के एक बदले हुए प्ररोह का हिस्सा है. यह एक ऐसा तना होता है जो छोटे होकर फूल के अंगों में बदल जाता है.

🎯 Exam Tip: पुष्प एक रूपांतरित प्ररोह होता है, जिसका मुख्य कार्य प्रजनन होता है और इसमें जननांग उपस्थित होते हैं.

पुष्प के विभिन्न भाग या चक्र

 

Question 2. कायिक जनन किसे कहते हैं?
Answer: कायिक जनन (Vegetative reproduction) प्रजनन की वह विधि है जिसमें पौधे के किसी कायिक भाग, जैसे- जड़, तना या पत्ती से एक नया पौधा बनता है. यह अलैंगिक प्रजनन का ही एक रूप है. इस प्रक्रिया में नए पौधे अपने मातृ पौधे के बिलकुल समान होते हैं.
In simple words: कायिक जनन वह तरीका है जब पौधे के किसी हिस्से, जैसे जड़ या तने से, नया पौधा उग जाता है. यह प्रजनन का एक आसान तरीका है.

🎯 Exam Tip: कायिक जनन में लैंगिक प्रजनन के विपरीत, युग्मक संलयन नहीं होता है, जिससे संतति आनुवंशिक रूप से मातृ पौधे के समान होती है.

 

Question 3. गुलाब व मोगरे में कायिक प्रवर्धन कैसे होता है?
Answer: गुलाब में कायिक प्रवर्धन स्तम्भ कर्तन (Stem cutting) विधि द्वारा होता है, जबकि मोगरा में कायिक प्रवर्धन टीला दाब (Mound layering) विधि द्वारा होता है. इन दोनों विधियों से नए पौधे उगाना आसान हो जाता है.
In simple words: गुलाब को तने के टुकड़े काटकर उगाया जाता है, और मोगरा को उसकी शाखा को मिट्टी में दबाकर उगाया जाता है.

🎯 Exam Tip: उदाहरण सहित विभिन्न कायिक प्रवर्धन विधियों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर पूछे जाते हैं.

 

Question 4. कलम, रोपण तथा दाब लगाना विधियों को स्पष्ट कीजिए।
Answer:
कलम या कर्तन (Cutting) – यह वह विधि है जिसमें पौधे के पर्वसंधियों वाले छोटे-छोटे टुकड़ों को काटकर जमीन में दबा दिया जाता है ताकि उनसे नया पौधा तैयार हो सके. यह सरल और प्रभावी तरीका है.
रोपण (Grafting) – इसमें दो अलग-अलग गुणों वाले पौधों के हिस्सों को एक साथ जोड़ा जाता है. इससे एक नया पौधा बनता है जिसमें दोनों पौधों के गुण होते हैं.
दाब (Layering) – इस विधि में पौधे की किसी शाखा को मातृ पौधे से अलग किए बिना ही जमीन में दबाया जाता है, जिससे वह जड़ें विकसित करती है और एक नया पौधा बन जाती है.
In simple words: कलम मतलब पौधे का टुकड़ा काटकर लगाना. रोपण मतलब दो अलग पौधों को जोड़ना. दाब लगाना मतलब पौधे की शाखा को जमीन में दबाकर नया पौधा उगाना.

🎯 Exam Tip: इन सभी विधियों का उद्देश्य कम समय में वांछित गुणों वाले पौधों की संख्या बढ़ाना है. प्रत्येक विधि की अपनी विशिष्टता और उपयोग है.

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 1 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अनिषेकबीजता किसे कहते हैं?
Answer: अनिषेकबीजता (Apomixis) अलैंगिक जनन का एक प्रकार है जिसमें बीज बिना निषेचन के ही बन जाते हैं. इसमें युग्मकों का संलयन या अर्धसूत्रीविभाजन नहीं होता है. यह प्रक्रिया पौधों को तेजी से और आनुवंशिक रूप से समान संतति बनाने में मदद करती है.
In simple words: अनिषेकबीजता का मतलब है जब बीज बिना किसी निषेचन के खुद ही बन जाते हैं.

🎯 Exam Tip: अनिषेकबीजता अलैंगिक प्रजनन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसमें आनुवंशिक विविधता के बिना ही बीज उत्पन्न होते हैं.

 

Question 2. विभिन्न प्रकार की रोपण विधियों का वर्णन कीजिए।
Answer: रोपण की विधियाँ (Methods of Grafting)
1. जिह्वा या व्हिप रोपण (Tongue or Whip grafting) – इस विधि में समान मोटाई वाले कलम और स्कन्ध चुने जाते हैं. दोनों में 5-8 सेमी. लंबा चीरा V आकार में लगाया जाता है. कलम को स्कन्ध में फंसाकर मजबूती से बाँध दिया जाता है. यह विधि छोटे पौधों के लिए उपयुक्त है.
2. फच्चर रोपण (Wedge grafting) – इसमें स्कन्ध और कलम का व्यास समान होता है. स्कन्ध में V आकार का चीरा लगाते हैं और कलम में वेज के आकार का चीरा लगाते हैं. फिर इन दोनों को जोड़कर बाँध दिया जाता है. यह एक मजबूत जोड़ बनाता है.
3. किरीटि या मुकुट रोपण (Crown grafting) – इसमें स्कन्ध की मोटाई कलम से कई गुना ज़्यादा होती है. एक स्कन्ध पर कई कलमें (Scions) रोपी जा सकती हैं. यह विधि बड़े पेड़ों के लिए अच्छी होती है.
4. कलिका रोपण (Bud grafting) – इस विधि में एक कलिका को स्कन्ध की छाल में T आकार का चीरा लगाकर फंसा दिया जाता है. इसके बाद कलिका को खुला छोड़कर आधार पर बाँध दिया जाता है. यह विधि विशेष रूप से फूलों और फलों के पेड़ों में उपयोग की जाती है.
In simple words: रोपण के कई तरीके हैं जैसे जिह्वा रोपण, फच्चर रोपण, किरीटि रोपण और कलिका रोपण. हर तरीके में पौधे के हिस्सों को जोड़कर नया पौधा बनाया जाता है.

🎯 Exam Tip: विभिन्न रोपण विधियों को उनकी विशिष्ट विशेषताओं और उपयोग के आधार पर समझना और याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर उनके द्वारा बनाए गए जोड़ के प्रकार को.

 

Question 3. तनों द्वारा कायिक प्रवर्धन की विधियों का संक्षेप वर्णन कीजिए।
Answer: तनों द्वारा कायिक प्रवर्धन (Vegetative propagation by stems) में पौधे के रूपांतरित तने नए पौधे बनाने में मदद करते हैं. यह प्राकृतिक रूप से होता है.
उदाहरण के लिए:
- प्रकन्द (जैसे अदरक)
- कन्द (जैसे आलू)
- शल्ककंद (जैसे प्याज)
- घनकंद (जैसे अरबी)
- उपरिभूस्तारी (जैसे दूब घास)
- अंतः भूस्तारी (जैसे पोदीना)
- भूस्तारी (जैसे स्ट्राबेरी).
ये सभी तने अनुकूल परिस्थितियों में पौधे के गुणन में सहायक होते हैं. ये पौधे को तेजी से फैलने में मदद करते हैं.
In simple words: पौधे के तने भी नए पौधे पैदा कर सकते हैं. जैसे आलू के कंद, प्याज के शल्ककंद, अदरक के प्रकंद आदि से नए पौधे उगते हैं.

🎯 Exam Tip: तनों के विभिन्न रूपांतरणों और उनके उदाहरणों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं.

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 1 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. आवृतबीजी में अलैंगिक जनन का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: आवृतबीजी में अलैंगिक जनन (Asexual reproduction in Angiosperms) वह प्रक्रिया है जिसमें अर्धसूत्रीविभाजन (Meiosis) और युग्मकों का संलयन नहीं होता है. इस प्रकार के जनन से बनने वाले पौधे आनुवंशिक रूप से मातृ पौधे के समान होते हैं. अलैंगिक जनन की दो मुख्य विधियाँ हैं –
1. अनिषेकबीजता: इसमें बीज बिना निषेचन के ही बन जाते हैं.
2. कायिक जनन: इसमें पौधे के कायिक भागों जैसे जड़, तना, पत्ती आदि से नया पौधा बनता है. कायिक प्रवर्धन दो विधियों से होता है:
(A) प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन (Natural vegetative propagation) – विभिन्न पौधे के अंग प्राकृतिक रूप से नए पौधों का निर्माण करते हैं. इसमें निम्नलिखित प्रमुख हैं –
तनों द्वारा कायिक प्रवर्धन – रूपांतरित तने जैसे कंद (आलू), शल्क कंद (प्याज), घनकंद (अरबी), उपरि भूस्तारी (दूब घास), अंतः भूस्तारी (पोदीना) आदि अनुकूल परिस्थितियों में पौधे के गुणन में सहायक होते हैं.
जड़ों द्वारा कायिक प्रवर्धन – कुछ पौधों की जड़ें नए प्ररोह बनाती हैं जो नए पौधे के रूप में विकसित होते हैं. उदाहरण: चमेली, शीशम, नीम. कुछ पौधों में कंदीय मूल (जैसे शकरकंद) होती हैं जो अपस्थानिक कलिकाओं से नए पौधे बनाती हैं.
पत्तियों द्वारा कायिक प्रवर्धन – पत्थरचट्टा (Bryophyllum) में पत्तियों के किनारों से और बिगोनिया में पर्णवृन्त तथा पर्ण शिराओं की सतह से कलिकाएँ उत्पन्न होकर नए पौधों का निर्माण करती हैं. पत्तियों से नए पौधे उगना एक अद्भुत प्रक्रिया है.
जननांगों द्वारा कायिक प्रवर्धन – कुछ पौधों में पुष्प कलिकाओं के स्थान पर बहुकोशिक पत्रप्रकलिका (Bulbils) बन जाती हैं जो भूमि पर गिरकर नए पौधों का निर्माण करती हैं. उदाहरण: रामबांस.
(B) कृत्रिम कायिक प्रवर्धन (Artificial vegetative propagation) – ये विधियाँ मानव द्वारा पौधों के व्यावसायिक उत्पादन के लिए उपयोग की जाती हैं. ये निम्न प्रकार हैं –
कर्तन (Cutting) – इसमें स्तम्भ कर्तन और मूल कर्तन शामिल हैं. यह विधि नई पौध तैयार करने के लिए सबसे सामान्य है.
दाब लगाना (Layering) – इसमें टीला दाब, वायु दाब या गूटी लगाना शामिल हैं.
रोपण (Grafting) – इसमें जिह्वा रोपण, फच्चर रोपण, मुकुट रोपण तथा कलिका रोपण शामिल हैं.
In simple words: आवृतबीजी पौधों में अलैंगिक जनन तब होता है जब नए पौधे बिना बीज या निषेचन के बनते हैं. इसमें अनिषेकबीजता (बिना निषेचन के बीज बनना) और कायिक जनन (पौधे के हिस्सों से नया पौधा उगना) शामिल है. कायिक जनन प्राकृतिक या कृत्रिम तरीकों से होता है.

🎯 Exam Tip: अलैंगिक जनन और कायिक प्रवर्धन की प्रत्येक विधि को उसके उदाहरणों और महत्व के साथ स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है.

 

Question 2. आवृतबीजी में पुष्प के विभिन्न अंगों का वर्णन कीजिए।
Answer: पुष्प (flower) आवृतबीजी पौधे का एक आकर्षक और महत्वपूर्ण अंग है जिसमें जननांग उपस्थित होते हैं. पुष्प एक सीमित वृद्धि करने वाला रूपांतरित प्ररोह है. पुष्प पौधे की शाखा पर एक वृंत द्वारा लगा होता है जिसे पुष्पवृंत कहते हैं. पुष्पवृंत का शीर्ष भाग चौड़ा होकर पुष्पासन (Thalamus) बनाता है. इस पर विभिन्न पुष्पांग व्यवस्थित होते हैं. एक प्रारूपिक पुष्प में पुष्पासन पर चार मुख्य पुष्पांग या चक्र पाए जाते हैं. जब पुष्प में ये चारों चक्र उपस्थित होते हैं तब यह पूर्ण पुष्प कहलाता है, यदि कोई एक चक्र भी अनुपस्थित होता है तब इसे अपूर्ण पुष्प कहते हैं.
एक प्रारूपिक पुष्प के निम्नलिखित चार चक्र होते हैं –
1. बाह्यदल पुंज (Calyx) – यह पुष्प का सबसे बाहरी चक्र होता है जिसमें बाह्यदल (Sepals) होते हैं. इनका मुख्य कार्य कली अवस्था में पुष्प के आंतरिक भागों की सुरक्षा करना है.
2. दलपुंज (Corolla) – यह बाह्यदल पुंज के बाद का चक्र है जिसमें दल (Petals) होते हैं. दल अक्सर रंगीन और सुगंधित होते हैं, जो परागण के लिए कीटों को आकर्षित करते हैं.
3. पुमंग (Androecium) – यह पुष्प का नर जननांग होता है और इसमें पुंकेसर (Stamens) होते हैं. प्रत्येक पुंकेसर के तीन भाग होते हैं – परागकोष (Anther), पुर्ततु (Filament) तथा योजी (Connective). परागकोष में परागकण बनते हैं.
4. जायांग (Gynoecium) – यह पुष्प का सबसे भीतरी चक्र होता है. यह स्वयं अण्डपों (Carpels) से मिलकर बना होता है. यह पुष्प का मादा जननांग है. प्रत्येक अण्डप के तीन भाग होते हैं – अण्डाशय (Ovary), वर्तिका (Style) तथा वर्तिकाग्र (Stigma). जायांग को स्त्रीकेसर (Pistil) भी कहते हैं. अंडाशय में बीजाणु विकसित होते हैं.
In simple words: फूल में चार मुख्य हिस्से होते हैं: बाह्यदल पुंज (जो कली को बचाता है), दलपुंज (जो सुंदर पंखुड़ियाँ होती हैं), पुमंग (पुरुष भाग, जो पराग बनाता है) और जायांग (स्त्री भाग, जो बीज बनाता है).

🎯 Exam Tip: पुष्प के प्रत्येक भाग का नाम, उसकी संरचना और उसके कार्य को विस्तार से याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह फूलों वाले पौधों के प्रजनन को समझने के लिए आधार है.

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 1 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 1 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. आवृतबीजियों में जनन के मुख्य दो प्रकारों के नाम लिखिए।
Answer: आवृतबीजियों में जनन के मुख्य दो प्रकार हैं:
• अलैंगिक जनन
• लैंगिक जनन
In simple words: आवृतबीजी पौधे दो तरह से प्रजनन करते हैं: अलैंगिक (बिना बीज या फूल के) और लैंगिक (बीज और फूलों के साथ).

🎯 Exam Tip: पौधों में जनन के इन दो मुख्य प्रकारों के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे भिन्न-भिन्न तरीकों से आनुवंशिक विविधता को प्रभावित करते हैं.

 

Question 2. आवृतबीजियों में बीजाणुभिदी अवस्था किससे निरूपित होती है?
Answer: आवृतबीजियों में बीजाणुभिदी अवस्था मूल, प्ररोह तथा पत्तियों द्वारा निरूपित होती है. यह पौधे का मुख्य शरीर है जो द्विगुणित (diploid) होता है.
In simple words: आवृतबीजी पौधे का मुख्य हिस्सा, जैसे जड़, तना और पत्तियां, उसकी बीजाणुभिदी अवस्था को दिखाते हैं.

🎯 Exam Tip: बीजाणुभिद् अवस्था पौधे के जीवन चक्र का वह हिस्सा है जो बीजाणुओं का उत्पादन करता है. यह याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 3. पुष्पी पादपों में अर्द्धसूत्रण कहाँ होता है?
Answer: पुष्पी पादपों में अर्द्धसूत्रण युग्मक निर्माण के समय होता है. यह परागकणों और अंडाणुओं के बनने के लिए महत्वपूर्ण है.
In simple words: फूलों वाले पौधों में अर्धसूत्रीविभाजन तब होता है जब नए युग्मक (जैसे पराग और अंडाणु) बनते हैं.

🎯 Exam Tip: अर्धसूत्रीविभाजन लैंगिक जनन के लिए आवश्यक है क्योंकि यह गुणसूत्रों की संख्या को आधा करता है और आनुवंशिक विविधता पैदा करता है.

 

Question 4. अलैंगिक जनन को किस अन्य नाम से भी जाना जाता है?
Answer: अलैंगिक जनन को असंगजनन (Apomixis) के नाम से भी जाना जाता है. यह बिना निषेचन के बीज उत्पादन को संदर्भित करता है.
In simple words: अलैंगिक जनन को असंगजनन भी कहते हैं.

🎯 Exam Tip: असंगजनन एक विशेष प्रकार का अलैंगिक जनन है जो कुछ पौधों में देखा जाता है, जहाँ बीज बिना लैंगिक प्रक्रियाओं के बनते हैं.

 

Question 6. शल्क कन्द द्वारा कायिक प्रवर्धन के दो उदाहरण लिखिए।
Answer: शल्क कन्द द्वारा कायिक प्रवर्धन के उदाहरण हैं –
• प्याज (Onion)
• लहसुन (Garlic)
In simple words: प्याज और लहसुन ऐसे पौधे हैं जो शल्क कन्द से नए पौधे उगाते हैं.

🎯 Exam Tip: शल्क कन्द भूमिगत तने का एक रूपांतरण है जो भोजन का भंडारण करता है और नए पौधे के निर्माण में मदद करता है.

 

Question 7. अन्तः भूस्तारी का उदाहरण दीजिए।
Answer: अन्तः भूस्तारी का उदाहरण-पोदीना (Mint) है. पोदीना में तना जमीन के नीचे फैलता है और नए पौधे उगते हैं.
In simple words: पोदीना एक अंतः भूस्तारी का उदाहरण है.

🎯 Exam Tip: अंतः भूस्तारी क्षैतिज रूप से भूमिगत रूप से बढ़ते हैं और अपनी पर्व संधियों से नए पौधों का निर्माण करते हैं. इस पर ध्यान दें.

 

Question 8. भूस्तारी का उदाहरण दीजिए।
Answer: भूस्तारी का उदाहरण-स्ट्राबेरी (Strawberry) है. इसमें तना जमीन के ऊपर रेंगता है और नए पौधे उगते हैं.
In simple words: स्ट्राबेरी भूस्तारी का एक अच्छा उदाहरण है.

🎯 Exam Tip: भूस्तारी ऊपरी सतह पर क्षैतिज रूप से बढ़ते हैं और अपनी पर्व संधियों से नए पौधों को उत्पन्न करते हैं. इसे याद रखें.

 

Question 9. ऐसे किसी पौधे का नाम बताइए जिसमें कन्दीय मूलों द्वारा कायिक प्रजनन होता है?
Answer: शकरकन्द (Sweet potato) में कन्दीय मूल (Tuberous roots) द्वारा कायिक प्रजनन होता है. इसकी जड़ें भोजन का भंडारण करती हैं और नए पौधों को उगाने में मदद करती हैं.
In simple words: शकरकंद में उसकी जड़ों से नए पौधे उगते हैं.

🎯 Exam Tip: कन्दीय मूल जड़ों का एक रूपांतरण है जो भोजन का भंडारण करता है और नए पौधों को उत्पन्न कर सकता है. यह जड़ों और तनों के बीच का अंतर बताता है.

 

Question 10. आलू के कन्द में उपस्थित आँखें वास्तव में क्या होती हैं?
Answer: आलू के कन्द में उपस्थित आँखें अपस्थानिक कलिकाएँ होती हैं. ये कलिकाएँ नए प्ररोह और पौधे को जन्म देती हैं.
In simple words: आलू पर जो 'आँखें' होती हैं, वे असल में नई कलिकाएँ होती हैं जिनसे नया पौधा उगता है.

🎯 Exam Tip: आलू एक भूमिगत तना (कंद) का एक उदाहरण है, न कि जड़. इसकी आँखें पर्व संधियों का प्रतिनिधित्व करती हैं. यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है.

 

Question 11. दो पौधों के नाम लिखिए जिनमें पत्तियों द्वारा कायिक प्रवर्धन हो सकता है।
Answer: दो पौधे जिनमें पत्तियों द्वारा कायिक प्रवर्धन हो सकता है, वे हैं:
• रामबांस (Agave)
• रतालू (Dioscorea)
In simple words: रामबांस और रतालू ऐसे पौधे हैं जिनमें उनकी पत्तियों से नए पौधे उग सकते हैं.

🎯 Exam Tip: पत्तियां कुछ पौधों में कायिक प्रवर्धन के लिए एक अद्वितीय माध्यम प्रदान करती हैं, जहाँ पत्तियों के किनारों पर कलिकाएँ विकसित होती हैं. इसे याद रखें.

 

Question 13. गन्ना में मुख्य रूप से किस प्रकार का प्रवर्धन कराया जाता है?
Answer: गन्ना में मुख्य रूप से स्तम्भ कर्तन (Stem cutting) द्वारा कायिक प्रवर्धन कराया जाता है. गन्ने के तने के छोटे टुकड़ों को मिट्टी में लगाकर नए पौधे उगाए जाते हैं. इन टुकड़ों में पर्व संधियाँ होनी ज़रूरी हैं.
In simple words: गन्ना अक्सर तने के टुकड़ों को काटकर उगाया जाता है.

🎯 Exam Tip: गन्ने की खेती में स्तम्भ कर्तन एक बहुत ही प्रभावी और व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली विधि है क्योंकि यह तेजी से नए पौधों का उत्पादन करती है.

 

Question 14. गृटी विधि का प्रयोग किस प्रकार के पौधों से नये पौधे उत्पन्न करने के लिए किया जाता है?
Answer: गृटी विधि का प्रयोग उन वृक्षों से नए पौधे उत्पन्न करने के लिए किया जाता है जिनकी शाखाएँ मोटी होती हैं. इस विधि में मातृ पौधे से शाखा को अलग किए बिना ही उस पर जड़ें विकसित की जाती हैं.
In simple words: गृटी विधि का उपयोग मोटे तने वाले पेड़ों से नए पौधे उगाने के लिए किया जाता है.

🎯 Exam Tip: गृटी विधि (वायु दाब लगाना) उन पेड़ों के लिए उपयोगी है जिनकी शाखाएँ सीधे जमीन में नहीं झुकाई जा सकतीं.

 

Question 15. किस विधि में एक ही स्कन्ध पर कई कलमें लगाई जा सकती है।
Answer: किरीट या मुकुट रोपण विधि में एक ही स्कन्ध पर कई कलमें लगाई जा सकती हैं. इसमें एक मोटे स्कन्ध पर कई चीरे लगाकर विभिन्न कलमों को फंसाया जाता है. यह बड़े पेड़ों में फलों की अधिक उपज के लिए किया जाता है.
In simple words: किरीट रोपण में एक पेड़ पर बहुत सारी कलमें लगाई जा सकती हैं.

🎯 Exam Tip: किरीट रोपण उन स्थितियों के लिए आदर्श है जहाँ एक ही स्टॉक पर कई किस्मों को विकसित करना होता है, जिससे विविधता और उत्पादन क्षमता बढ़ती है.

 

Question 16. पुष्प क्या है?
Answer: पुष्प एक रूपांतरित प्ररोह है जिसमें पौधे के जननांग उपस्थित होते हैं. यह प्रजनन के लिए विशेष रूप से अनुकूलित होता है और इसमें बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर जैसे भाग होते हैं.
In simple words: फूल पौधे का एक बदला हुआ तना है, जिसमें उसके प्रजनन के अंग होते हैं.

🎯 Exam Tip: पुष्प एक पौधे का प्रजनन अंग है, और इसका मुख्य कार्य लैंगिक प्रजनन द्वारा बीज और फल का उत्पादन करना है. यह इसकी सबसे महत्वपूर्ण पहचान है.

 

Question 17. पुष्प के दो जननांगों के नाम लिखिए।
Answer: पुष्प के दो जननांग हैं:
• नर जननांग – पुमंग (Androecium)
• मादा जननांग – जायांग (Gynoecium)
In simple words: फूल के दो प्रजनन अंग होते हैं: पुमंग (पुरुष हिस्सा) और जायांग (महिला हिस्सा).

🎯 Exam Tip: पुमंग में परागकण बनते हैं, जबकि जायांग में अंडाशय होता है जो बीज बनाता है. इन दोनों की भूमिकाएं प्रजनन में महत्वपूर्ण हैं.

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 1 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 2. असंगजनन से आप क्या समझते हैं?
Answer: असंगजनन (Apomixis) अलैंगिक जनन का ही एक प्रकार है. इसमें बीजाण्डकाय (Nucellus) की द्विगुणित कोशिकाओं या अध्यावरण (Integument), द्विगुणित अण्ड या कुछ अन्य युग्मकोभिद् कोशिकाओं से सीधे ही भ्रूण के साथ बीज या नई व्यष्टियों का निर्माण होता है. इसमें निषेचन के बिना ही बीज बन जाते हैं.
In simple words: असंगजनन का मतलब है कि जब कोई नया पौधा या बीज बिना निषेचन के खुद ही बन जाए.

🎯 Exam Tip: असंगजनन आनुवंशिक रूप से समान संतति उत्पन्न करने का एक कुशल तरीका है, और यह संकर पौधों में वांछित गुणों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 3. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए –
(1) कन्द
(2) प्रकन्द
Answer:
1. कन्द (Tubers) – यह रूपांतरित भूमिगत तना होता है, जिसमें प्रतिकूल परिस्थितियों के लिए भोजन संचित रहता है. इस पर पर्वसन्धियाँ अपह्वासित हो जाती हैं. अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर इस पर उपस्थित अपस्थानिक कलिकाएँ प्रस्फुटित होकर नए पौधों का निर्माण करती हैं. उदाहरण-आलू (Potato).
2. प्रकन्द (Rhizome) – प्रकन्द मुख्य भूमिगत तना होता है, जिस पर स्पष्ट पर्व एवं पर्वसन्धियां पायी जाती हैं. प्रकन्द में प्रतिकूल परिस्थितियों में सुसुप्तता के लिए भोजन एकत्र रहता है. इनकी पर्व संधियों पर अपस्थानिक कलिकाएँ पायी जाती हैं जो अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर वायवीय प्ररोह बनाती हैं. उदाहरण – अदरक, हल्दी.
In simple words: कन्द (जैसे आलू) और प्रकन्द (जैसे अदरक) दोनों ही ज़मीन के अंदर के तने होते हैं जो खाना जमा करते हैं और नए पौधे बनाने में मदद करते हैं.

🎯 Exam Tip: कन्द और प्रकन्द दोनों भूमिगत तने के रूपांतरण हैं, लेकिन उनकी वृद्धि की दिशा और संरचना में अंतर होता है. उनके उदाहरणों को ध्यान से याद रखें.

 

Question 4. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए
(1) बल्ब
(2) घनकन्द
Answer:
1. बल्ब (Bulb) – बल्ब भूमिगत संघनित तने होते हैं, जिनके ऊपर एक या अधिक कलिकाएँ पायी जाती हैं. जब इनको जमीन में बोया जाता है तब बल्ब के अन्दर पायी जाने वाली कलियाँ प्रस्फुटित होकर नए पौधे का निर्माण करती हैं. उदाहरण-प्याज, लहसुन.

प्रकन्द (Rhizome)घनकन्द (Corm)
1. यह चपटा, बेलनाकार होता है।यह अण्डाकार होता है।
2. भूमि के अन्दर समानान्तर बढ़ता हैं।भूमि के अन्दर ऊर्ध्वाधर वृद्धि करता है।
3. अपस्थानिक जड़े पर्व सन्धियों से निकलती हैं।अपस्थानिक जड़े तने के आधारी भाग से निकलती हैं।
4. शाखाएँ शीर्षस्थ कलिका से निकलती हैं।शाखाएँ कक्षस्थ कलिका से निकलती हैं।


In simple words: बल्ब (जैसे प्याज) और घनकन्द (जैसे अरबी) दोनों ज़मीन के अंदर के तने होते हैं. बल्ब में परतों जैसी संरचना होती है, जबकि घनकन्द मोटे और गोल होते हैं.

🎯 Exam Tip: बल्ब और घनकन्द दोनों ही भूमिगत तने के रूपांतरण हैं जो भोजन का भंडारण और कायिक प्रवर्धन में सहायता करते हैं. उनके आकार और वृद्धि पैटर्न में अंतर होता है.

 

Question 6. उपरि भूस्तारी तथा अन्त: भूस्तारी में अन्तर लिखिए।
Answer: उपरि भूस्तारी तथा अन्त: भूस्तारी में अन्तर –

उपरि भूस्तारी (Runner)अन्तः भूस्तारी (Suckers)
1. ये भूमि की सतह के ऊपर रेंगकर आगे बढ़ते हैं।ये भूमि की सतह के अन्दर क्षैतिज वृद्धि करते हैं।
2. नियमित अन्तराल पर पर्व सन्धियाँ पायी जाती हैं।पर्व संधियां नियमित अन्तराल पर पायी जाती हैं।
3. पर्व सन्धि से नीचे की ओर अपस्थानिक जड़े निकलती हैं।पर्व सन्धि से ऊपर की ओर वायवीय शाखाएँ निकलती हैं।
उदाहरण – दूब घास।उदाहरण – पोदीना।


In simple words: उपरि भूस्तारी जमीन के ऊपर फैलते हैं (जैसे दूब घास), जबकि अंतः भूस्तारी जमीन के अंदर फैलते हैं (जैसे पोदीना).

🎯 Exam Tip: इन दोनों प्रकार के भूस्तारी के बीच मुख्य अंतर उनकी वृद्धि की दिशा और नए पौधों के निर्माण के स्थान पर है. उनके उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 7. निम्नलिखित के दो-दो उदाहरण लिखिए -
(1) कन्दीय मूल द्वारा कायिक प्रजनन
(2) पत्तियों द्वारा कायिक प्रजनन
Answer:
(1) कन्दीय मूल द्वारा कायिक प्रजनन:
• शकरकन्द (Sweet potato)
• डहेलिया (Dahlia)
(2) पत्तियों द्वारा कायिक प्रजनन:
• पत्थरचट्टा (Bryophyllum)
• बिगोनिया (Begonia)
इसके अलावा, बुलविल्स द्वारा कायिक प्रजनन के उदाहरण हैं – रामबांस (Agave), रतालू (Dioscorea).
In simple words: शकरकंद और डहेलिया जड़ों से बढ़ते हैं, जबकि पत्थरचट्टा और बिगोनिया पत्तियों से नए पौधे बनाते हैं. रामबांस और रतालू बुलविल्स से बढ़ते हैं.

🎯 Exam Tip: विभिन्न कायिक प्रवर्धन विधियों के लिए सटीक उदाहरणों को जानना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर सीधे पूछे जाते हैं. हर विधि के लिए कम से कम दो उदाहरण याद रखें.

 

Question 8. आवृतबीजी पादपों में प्रजनन की विभिन्न विधियों का प्रवाह आरेख बनाइए।
Answer: आवृतबीजी पादपों में प्रजनन की विधियों का प्रवाह चित्र इस प्रकार है:
प्रजनन
\( \downarrow \)
अलैंगिक प्रजनन ------- लैंगिक प्रजनन
\( \downarrow \)
अनिषेकबीजता
कायिक जनन/कायिक प्रवर्धन
\( \downarrow \)
कर्तन ---------- दाब लगाना ----------- रोपण
\( \downarrow \)
(i) स्तम्भ कर्तन ------- (i) टीला दाब -------- (i) जिह्वा रोपण
(ii) मूल कर्तन -------- (ii) वायु दाब -------- (ii) फच्चर रोपण
(iii) किरीट रोपण
(iv) कलिका रोपण
In simple words: आवृतबीजी पौधे या तो अलैंगिक (अनिषेकबीजता, कायिक जनन) या लैंगिक तरीके से प्रजनन करते हैं. कायिक जनन में कर्तन, दाब लगाना और रोपण जैसी विधियाँ शामिल हैं.

🎯 Exam Tip: प्रजनन विधियों का यह प्रवाह आरेख पौधों में जनन के समग्र दृष्टिकोण को समझने में मदद करता है. इसे व्यवस्थित रूप से याद रखें.

 

Question 9. कलिका रोपण का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
Answer: कलिका रोपण (Bud grafting) कृत्रिम कायिक प्रवर्धन की एक विधि है. इस विधि में उत्तम गुणों वाले पौधे की स्वस्थ कलिका को उसके आंतरिक ऊतकों सहित निकाल लिया जाता है. फिर स्कन्ध (जिस पौधे में कलिका का रोपण करना है) में T आकार का चीरा लगाते हैं. ध्यान रहे कि स्कन्ध की छाल को अलग नहीं करते हैं. अब कलिका को स्कन्ध के T आकार में फंसा कर छाल को फिर से उसकी जगह व्यवस्थित कर देते हैं. अब इसे अन्य ठीक प्रकार से बाँध दिया जाता है. कुछ समय बाद कलिका वृद्धि करने लगती हैं और वांछित गुणों वाली शाखा बनाती हैं.
In simple words: कलिका रोपण में एक स्वस्थ कली को दूसरे पौधे के तने में डाला जाता है. यह कली फिर बढ़कर नया पौधा या शाखा बनाती है.

🎯 Exam Tip: कलिका रोपण विशेष रूप से गुलाब और फलों के पेड़ों में उपयोग होता है, क्योंकि यह एक ही पौधे पर विभिन्न किस्मों को उगाने में मदद करता है.

 

Question 10. निम्नलिखित का एक-एक कार्य लिखिए –
(1) बाह्य दल पत्रे
(2) दल पत्र
Answer:
(1) बाह्य दल पत्र (Sepal) – पुष्प के आंतरिक भागों की, विशेषकर कली अवस्था में सुरक्षा करना. यह एक हरे रंग की पत्ती जैसा होता है.
(2) दल पत्र (Petal) – परागण हेतु कीटों को आकर्षित करना. दल पत्र अक्सर रंगीन और सुगंधित होते हैं.
(3) पुमंग (Androecium) – परागकणों का निर्माण करना. यह पुष्प का नर प्रजनन अंग है.
(4) जायांग (Gynoecium) – बीजाणु का निर्माण करना. यह पुष्प का मादा प्रजनन अंग है और बीज बनने में मदद करता है.
In simple words: बाह्यदल कली को बचाता है, दल कीटों को आकर्षित करता है, पुमंग पराग बनाता है और जायांग बीज बनाता है.

🎯 Exam Tip: पुष्प के प्रत्येक भाग का विशिष्ट कार्य होता है जो उसके प्रजनन चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. प्रत्येक भाग के कार्य को सटीक रूप से याद रखें.

RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 1 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए -
(i) स्तम्भ कर्तन
(ii) मूल कर्तन
(iii) टीला दाब
(iv) गूटी
Answer:
(i) स्तम्भ कर्तन (Stem cutting) – इस विधि में पौधे के स्तम्भ भाग को उपयुक्त आकार के टुकड़ों (प्रायः 20-30 सेमी०) में काटकर जमीन में रोपा जाता है. टुकड़ों में शीघ्र जड़ें उत्पन्न कराने के लिए इन टुकड़ों के निचले भाग को जमीन में रोपने से पहले कुछ मिनट तक उपयुक्त रसायन में डुबोया जाता है. कर्तन द्वारा कायिक प्रवर्धन को अनेक कारक प्रभावित करते हैं; जैसे – प्रवर्ध की लम्बाई, मातृ पादप की आयु, रोपाई का वातावरण आदि. यह एक सरल और प्रभावी तरीका है. उदाहरण – गन्ना (Sugarcane), अंगूर (Grapes), गुलाब (Rose), बोगेनविलिया (Bougainvillea), चाय (Tea), गुड़हल (China rose), डुरेन्टा (Durantu) आदि पादपों का कायिक प्रवर्धन स्तम्भ कर्तन द्वारा आसानी से कराया जा सकता है.

कलिका पर्व पर्व सन्धि (A) नया पौधा (B) अपस्थानिक जड़ें

 

(ii) मूल कर्तन (Root cutting) – यह विधि उन पौधों में उपयोग की जाती है जिनमें जड़ें नए पौधे उत्पन्न करने की क्षमता रखती हैं. इसमें पौधे की जड़ों के छोटे टुकड़ों को काटकर मिट्टी में लगाया जाता है. इन टुकड़ों से नए पौधे विकसित होते हैं. उदाहरण – नींबू, अमरूद.
(iii) टीला दाब (Mound layering) – इस विधि में तने की झुकी हुई शाखा को जमीन में दबा दिया जाता है. जमीन में दबाते समय यह ध्यान रखा जाता है कि एक या एक से अधिक पर्व संधियाँ जमीन में दब जाएँ और शाखा का शीर्ष भाग जिस पर पत्तियाँ लगी हों वह जमीन से ऊपर हो. कुछ समय बाद जमीन में गड़े स्तम्भ की पर्वसंधियों से अपस्थानिक जड़ें फूटने लगती हैं. उचित समय के पश्चात् इस शाखा को मातृ पौधे से काटकर मिट्टी के पिण्ड सहित अलग कर लिया जाता है. उदाहरण – चमेली (Chameli), मोंगरा (Mongra) आदि.

टीला दाब

(iv) वायु दाब या गूटी लगाना (Air layering or Gootee) – इस विधि का उपयोग उन वृक्षों में किया जाता है जिनकी शाखाएँ मोटी व काष्ठीय होती हैं. इस विधि में उपयुक्त शाखा के सामान्य मोटे स्वस्थ भाग पर चारों ओर बाहरी परत या छाल को वलय के रूप में हटा दिया जाता है. अब छाल रहित भाग मॉस (Mass), गीली मिट्टी या रुई (Cotton) से ढक दिया जाता है जो इस भाग को नम एवं सुरक्षित रखते हैं. इस ढके हुए भाग को गूटी कहते हैं. गूटी भाग पर बूंद-बूंद करके पानी टपकाया जाता है. इसके लिए चित्रानुसार एक घड़ा वृक्ष की किसी ऊपरी शाखा पर लटका दिया जाता है और उसकी तली में एक छेद करके उसमें रस्सी का टुकड़ा लगा दिया जाता है. 4-8 सप्ताह बाद गूटी के ऊपरी भाग से जड़ें निकलती दिखाई देती हैं. इस जड़ युक्त भाग को मुख्य पौधे से अलग करके मिट्टी में रोप दिया जाता है. उदाहरण – लीची (Litchi), अनार (Pomegranate), गुड़हल (China rose), अमरूद (Guava), सन्तरा (Orange), नींबू.

जल गूटी पत्तियां

In simple words: स्तम्भ कर्तन में तने के टुकड़े लगाते हैं, मूल कर्तन में जड़ के टुकड़े लगाते हैं. टीला दाब में शाखा को मिट्टी में दबाते हैं, और गूटी में हवा में शाखा पर जड़ें उगाते हैं. ये सभी नए पौधे बनाने के तरीके हैं.

 

🎯 Exam Tip: कृत्रिम कायिक प्रवर्धन की प्रत्येक विधि की अपनी विशिष्टताएं और उपयोग हैं. इन विधियों के चरण, उदाहरण और उनके लाभों को याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

 

 

Question 2. रोपण की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
Answer: रोपण (Grafting) कायिक प्रवर्धन की एक कृत्रिम विधि है जिसमें दो अलग-अलग पौधों के भागों को इस प्रकार जोड़ते हैं कि वे संयुक्त होकर एक नए पौधे के रूप में वृद्धि कर सकें. उत्तम किस्म (Variety) के पादप के उस भाग को जिसका रोपण किया जाता है, कलम (Scion) कहते हैं. दूसरा निम्न गुणों वाला स्थानीय पादप जिस पर रोपण किया जाता है अर्थात् कलम को लगाया जाता है और नए पौधे का आधार बनाता है इसे स्कन्ध (Stock) कहते हैं. कलम और स्कन्ध को इस प्रकार काटकर और कसकर बाँध देते हैं जिससे कि दोनों के एधा (Cambium) एक-दूसरे के सम्पर्क में आ जाएँ. कुछ सप्ताह में दोनों भागों की एधाएँ आपस में जुड़ जाती हैं और इनकी कोशिकाएँ विभाजित होना प्रारम्भ कर देती हैं. अब कलम और स्कन्ध दोनों के संवहन ऊतक आपस में सम्पर्क स्थापित कर लेते हैं. रोपण विधि आर्थिक रूप से उपयोगी पौधों; जैसे – गुलाब (Rose), आम (Mango), अमरूद (Guava), सेब (Apple), नींबू (Lemon), नाशपाती (Pear), बेर (Plum), पीच (Peach) आदि पौधों के प्रवर्धन के लिए उपयोग की जाती है.
रोपण की निम्नलिखित प्रमुख विधियाँ हैं –
1. व्हिप या जीभी या जिह्वा रोपण (Whip or Tongue grafting) – इस प्रकार के रोपण में समान मोटाई वाले स्तम्भों को कलम एवं स्कन्ध के लिए चुना जाता है. कलम एवं स्कन्ध दोनों में 5-8 सेमी का चीरा लगाया जाता है. इसके बाद स्कन्ध में V आकार का चीरा लगाते हैं. कलम को भी इस प्रकार से चीरा लगाया जाता है जिससे कि यह स्कन्ध में ठीक प्रकार से फिट हो जाए. कलम को स्कन्ध में फंसाकर कसकर बाँध दिया जाता है.
In simple words: रोपण में दो पौधों के हिस्सों को जोड़कर एक नया पौधा बनाया जाता है. इसमें कलम और स्कन्ध होते हैं. जिह्वा रोपण एक तरीका है जहाँ समान मोटाई के तनों को V-आकार में काटकर जोड़ा जाता है.

 

🎯 Exam Tip: रोपण की सफलता कलम और स्कन्ध के एधा (cambium) के सही संपर्क पर निर्भर करती है. विभिन्न रोपण विधियों में चीरा लगाने का तरीका अलग होता है. इसे ध्यान में रखें.

 

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