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Detailed Chapter 5 कम्पनी लेखे अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गम RBSE Solutions for Class 12 Accountancy
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Class 12 Accountancy Chapter 5 कम्पनी लेखे अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गम RBSE Solutions PDF
Rbse Class 12 Accountancy Chapter 5 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
Rbse Class 12 Accountancy Chapter 5 बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. चिट्टे के समता एवं दायित्वों के भाग की कुल राशि में सम्मिलित होती है (Total amount of equity and liabilities part of the Balance Sheet includes the following)
(अ) अधिकृत पूँजी (authorized capital)
(ब) निर्गमित पूँजी (issued capital)
(स) प्रार्थित पूँजी (subscribed capital)
(द) चुकता पूँजी (paid up capital)
Answer: (द) चुकता पूँजी (paid up capital)
In simple words: चुकता पूँजी वह पैसा है जो शेयरधारकों ने वास्तव में कंपनी को दिया है. यह राशि कंपनी की बैलेंस शीट में समता और दायित्व भाग के तहत कुल पूँजी के रूप में दिखाई जाती है.
🎯 Exam Tip: बैलेंस शीट में, 'चुकता पूँजी' ही वह पूँजी होती है जो शेयरधारकों से वास्तव में प्राप्त हुई होती है, इसलिए इसे 'कुल राशि' के रूप में दर्शाया जाता है.
Question 2. अंशों के निर्गमन पर प्राप्त प्रीमियम को दर्शाया जाता है (Premium received on issue of shares is shown on)
(अ) चिट्टे के समता एवं दायित्व भाग पर (Equity & Liabilities part of the balance sheet)
(ब) सदस्यों को लाभांश बांटने के लिए (For paying dividend to members)
(स) प्रारम्भिक व्ययों के अपलेखन के लिए (For writing off preliminary expenses)
(द) ऋणपत्रों के निर्गमन पर बट्टा अपलेखन के लिए (For writing off discount on issue of debentures)
Answer: (अ) चिट्टे के समता एवं दायित्व भाग पर (Equity & Liabilities part of the balance sheet)
In simple words: जब कंपनी अपने अंशों को उनके अंकित मूल्य से ज़्यादा दाम पर बेचती है, तो जो ज़्यादा पैसा मिलता है, उसे प्रीमियम कहते हैं. इस प्रीमियम को कंपनी की बैलेंस शीट में 'समता एवं दायित्व' वाले हिस्से में दिखाते हैं. यह राशि भविष्य के कुछ खर्चों को पूरा करने के लिए सुरक्षित रखी जाती है.
🎯 Exam Tip: सिक्योरिटीज़ प्रीमियम को हमेशा बैलेंस शीट में 'शेयरहोल्डर्स फंड्स' के तहत 'रिजर्व्स एंड सरप्लस' शीर्षक में दिखाया जाता है, यह कंपनी की अतिरिक्त कमाई होती है.
Question 3. समता अंशधारी होते हैं (Equity shareholders are)
(अ) कम्पनी के ग्राहक (Customers of the company)
(ब) कम्पनी के अधिकारी (Officers of the company)
(स) कम्पनी के लेनदार (Creditors of the company)
(द) कम्पनी के स्वामी (Owners of the company)
Answer: (द) कम्पनी के स्वामी (Owners of the company)
In simple words: समता अंशधारक वे लोग होते हैं जिन्होंने कंपनी में पैसा लगाया होता है और वे कंपनी के असली मालिक माने जाते हैं. उन्हें कंपनी के मुनाफे में हिस्सा मिलता है और वे कंपनी के बड़े फैसलों में वोट दे सकते हैं. कंपनी के जोखिम को भी वे ही उठाते हैं.
🎯 Exam Tip: समता अंशधारक कंपनी के अंतिम जोखिम धारक होते हैं और उन्हें कंपनी की शेष आय और संपत्ति पर दावा करने का अधिकार होता है.
Question 4. अंशों के निर्गमन पर प्रीमियम का उपयोग नहीं किया जा सकता (Premium on issue of shares cannot be used for)
(अ) सदस्यों को बोनस अंश निर्गमित करने के लिए (For issuing bonus shares to members)
(ब) सदस्यों को लाभांश बांटने के लिए (For paying dividend to members)
(स) प्रारम्भिक व्ययों के अपलेखन के लिए (For writing off preliminary expenses)
(द) ऋणपत्रों के निर्गमन पर बट्टा अपलेखन के लिए (For writing off discount on issue of debentures)
Answer: (ब) सदस्यों को लाभांश बांटने के लिए (For paying dividend to members)
In simple words: कंपनी अंशों को ज़्यादा कीमत पर बेचकर जो अतिरिक्त पैसा कमाती है, उसे प्रीमियम कहते हैं. इस प्रीमियम का इस्तेमाल बोनस शेयर देने या खर्चों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन सीधे तौर पर शेयरधारकों को लाभांश (dividend) के रूप में नहीं दिया जा सकता. यह एक तरह का आरक्षित कोष है.
🎯 Exam Tip: सिक्योरिटीज़ प्रीमियम अकाउंट का उपयोग कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 52(2) में सूचीबद्ध कुछ विशिष्ट उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है, लाभांश के भुगतान के लिए नहीं.
Question 5. सारणी एफ के अनुसार कम्पनी अग्रिम मांग पर ब्याज दे सकती है (As per table F a company can pay interest on calls-in-advance at)
(अ) 8%
(ब) 10%
(स) 12%
(द) 14%.
Answer: (स) 12%
In simple words: 'कॉल्स-इन-एडवांस' का मतलब है कि जब शेयरधारक कंपनी द्वारा मांगने से पहले ही अपने शेयरों पर पूरा पैसा चुका देते हैं. कंपनी ऐसे अग्रिम पैसे पर ब्याज देती है, और 'कंपनी अधिनियम' की सारणी एफ के अनुसार, यह ब्याज दर 12% प्रति वर्ष हो सकती है. यह एक तरह से शेयरधारकों को उनकी मदद के लिए दिया गया इनाम है.
🎯 Exam Tip: सारणी एफ में 'कॉल्स-इन-एरियर्स' (बकाया मांग) पर ब्याज दर 10% और 'कॉल्स-इन-एडवांस' (अग्रिम मांग) पर ब्याज दर 12% होती है, दोनों को याद रखें.
Question 6. न मांगी गई पूँजी का वह भाग जिसे कम्पनी के समापन पर ही माँगा जा सकता है, कहलाता है (The part of uncalled capital which can be called up only when the company being wound up is called)
(अ) निर्गमित पूँजी (Issued capital)
(ब) संचित पूँजी (Reserve capital)
(स) पूँजी संचय (Capital reserve)
(द) अनिर्गमित पूँजी (Unissued capital)
Answer: (ब) संचित पूँजी (Reserve capital)
In simple words: यह कंपनी की वह पूँजी होती है जिसे कंपनी अपने शेयरधारकों से केवल तभी मांग सकती है जब कंपनी बंद हो रही हो. इसे 'रिजर्व कैपिटल' कहते हैं और यह कंपनी को मुश्किल समय में मदद करने के लिए आरक्षित रखी जाती है. यह निवेशकों को सुरक्षा भी देती है.
🎯 Exam Tip: संचित पूँजी को तब तक नहीं मांगा जा सकता जब तक कंपनी का समापन न हो रहा हो, यह ऋणदाताओं के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है.
Question 8. ऋणपत्रधारी प्राप्त करते हैं (Debenture holders receive)
(अ) लाभ (Profit)
(ब) लाभांश (Dividend)
(स) किराया (Rent)
(द) ब्याज (Interest)
Answer: (द) ब्याज (Interest)
In simple words: ऋणपत्रधारी वे लोग होते हैं जिन्होंने कंपनी को कर्ज दिया होता है, और इसके बदले में उन्हें कंपनी से निश्चित समय पर ब्याज मिलता है. वे कंपनी के मालिक नहीं होते, बल्कि कंपनी के लेनदार होते हैं. यह ब्याज एक निश्चित दर पर दिया जाता है.
🎯 Exam Tip: ऋणपत्रधारियों को एक निश्चित दर पर ब्याज मिलता है, भले ही कंपनी को लाभ हो या हानि, जबकि शेयरधारकों को लाभांश तभी मिलता है जब कंपनी लाभ कमाए.
Question 9. ऋणपत्रों के निर्गमन पर बट्टा या हानि, जो चिट्टे की तिथि से 12 माह पश्चात् या संचालन चक्र की अवधि के पश्चात् अपलिखित होगा दर्शाया जाता है (Discount or loss on issue of debentures to be written off after 12 months from the date of balance sheet or after the period of operating cycle is shown as)
(अ) अन्य गैर चालू सम्पत्तियाँ (Other non-current assets)
(ब) अन्य गैर चालू दायित्व (Other non-current liabilities)
(स) अन्य चालू सम्पत्तियाँ (Other current assets)
(द) अन्ये चालू दायित्व (Other current liabilities)
Answer: (अ) अन्य गैर चालू सम्पत्तियाँ (Other non-current assets)
In simple words: जब कंपनी ऋणपत्रों को कम कीमत पर बेचती है, तो उसे 'बट्टा' या 'हानि' होती है. अगर इस हानि को 12 महीने या एक साल से ज़्यादा समय में बट्टे खाते डालना होता है, तो इसे बैलेंस शीट में 'अन्य गैर-चालू सम्पत्तियाँ' के रूप में दिखाते हैं. यह एक लंबे समय का खर्च होता है.
🎯 Exam Tip: यदि बट्टा या हानि को 12 महीने के भीतर अपलिखित करना हो, तो इसे 'अन्य चालू सम्पत्तियाँ' के रूप में दिखाया जाएगा, अन्यथा 'अन्य गैर-चालू सम्पत्तियाँ' में.
Question 10. ऐसे ऋणपत्र जो समता अंशों में परिवर्तित किये जा सकते हैं, कहलाते हैं (The debentures which can be converted into equity shares are called)
(अ) शोधनीय ऋणपत्र (Redeemable debentures)
(ब) पंजीकृत ऋणपत्र (Registered debentures)
(स) वाहक ऋणपत्र (Bearer debentures)
(द) परिवर्तनीय ऋणपत्र (Convertible debentures)
Answer: (द) परिवर्तनीय ऋणपत्र (Convertible debentures)
In simple words: कुछ ऋणपत्र ऐसे होते हैं जिन्हें एक खास समय के बाद कंपनी के 'समता अंशों' (इक्विटी शेयर) में बदला जा सकता है. इन्हें 'परिवर्तनीय ऋणपत्र' कहते हैं. ये निवेशकों को ब्याज के साथ-साथ कंपनी की तरक्की में भी शामिल होने का मौका देते हैं. यह एक अच्छा निवेश विकल्प है.
🎯 Exam Tip: परिवर्तनीय ऋणपत्र निवेशकों को सुरक्षा (ब्याज) और विकास की संभावना (इक्विटी में परिवर्तन) दोनों प्रदान करते हैं, जिससे वे आकर्षक बनते हैं.
Question 11. ऋणपत्रों के समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में निर्गमन की स्थिति में, यदि प्रविष्टि की जाती है तो किस खाते को नामे किया जाएगा (In the case of issue of debentures as collateral security, if entry is pass which account will be debited)
(अ) ऋण खाती (Loan account)
(ब) ऋणपत्र खाता (Debenture account)
(स) ऋणपत्र सस्पेंस खाता (Debenture Suspense Account)
(द) बैंक खाता (Bank account)
Answer: (स) ऋणपत्र सस्पेंस खाता (Debenture Suspense Account)
In simple words: जब कंपनी किसी बैंक से कर्ज लेती है और अपनी ओर से एक अतिरिक्त गारंटी के तौर पर ऋणपत्र जारी करती है, तो इसे 'समपार्श्विक प्रतिभूति' कहते हैं. अगर इसकी एंट्री की जाती है, तो 'ऋणपत्र सस्पेंस खाता' को डेबिट किया जाता है. यह खाता तब तक खुला रहता है जब तक कर्ज चुकाया नहीं जाता.
🎯 Exam Tip: समपार्श्विक प्रतिभूति के लिए जर्नल एंट्री करने पर, 'ऋणपत्र सस्पेंस खाते' को डेबिट किया जाता है और 'ऋणपत्र खाते' को क्रेडिट किया जाता है, जो मुख्य ऋण के अतिरिक्त सुरक्षा को दर्शाता है.
Rbse Class 12 Accountancy Chapter 5 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. कम्पनी को परिभाषित कीजिये।
Answer: कंपनी विधान द्वारा बनाई गई एक कृत्रिम व्यक्ति है. इसका अपने सदस्यों से एक अलग पहचान होती है, यानी यह अपने नाम पर संपत्तियाँ रख सकती है और समझौते कर सकती है. कंपनी का अस्तित्व स्थायी होता है और यह कभी खत्म नहीं होता, भले ही इसके सदस्य बदल जाएं. कंपनी अपने काम को अपनी एक विशेष मुहर (सार्वमुद्रा) के ज़रिए करती है, जो उसके आधिकारिक हस्ताक्षर की तरह होती है. यह एक कानूनी रूप से मान्य संस्था है.
In simple words: कंपनी कानून से बनी एक अलग पहचान वाली इकाई है, जिसके सदस्य बदल सकते हैं पर कंपनी चलती रहती है और अपने काम मुहर लगाकर करती है.
🎯 Exam Tip: कंपनी की परिभाषा में 'कृत्रिम व्यक्ति', 'पृथक् वैधानिक अस्तित्व', 'सार्वमुद्रा' और 'अविच्छिन्न उत्तराधिकार' जैसे मुख्य शब्द शामिल करना न भूलें.
Question 2. एक व्यक्ति वाली कम्पनी क्या है ?
Answer: एक व्यक्ति वाली कंपनी (One Person Company) से मतलब ऐसी कंपनी से है जिसमें केवल एक ही व्यक्ति इसका सदस्य होता है. कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत यह एक विशेष प्रकार की कंपनी है जो एकल उद्यमियों को सीमित दायित्व के साथ व्यापार करने की सुविधा देती है. इसमें एकमात्र सदस्य ही कंपनी का मालिक और शेयरधारक होता है.
In simple words: एक व्यक्ति वाली कंपनी वह होती है जिसका सिर्फ़ एक ही सदस्य होता है, जो कंपनी का मालिक होता है.
🎯 Exam Tip: 'एक व्यक्ति वाली कंपनी' की परिभाषा देते समय यह ज़रूर बताएं कि इसका मुख्य उद्देश्य एकल उद्यमी को सीमित दायित्व का लाभ देना है.
Question 3. अंश से क्या आशय है ?
Answer: अंश (Share) का मतलब है कंपनी की कुल पूँजी का एक छोटा सा हिस्सा. कंपनी की बड़ी पूँजी को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया जाता है, और हर एक छोटे टुकड़े को 'अंश' कहते हैं. जो व्यक्ति ये अंश खरीदता है, वह कंपनी का अंशधारक (शेयरधारक) बन जाता है. अंश खरीदने से व्यक्ति कंपनी की पूँजी में हिस्सेदार बन जाता है.
In simple words: अंश मतलब कंपनी की पूँजी का सबसे छोटा हिस्सा, जिसे खरीदकर लोग कंपनी के मालिक बनते हैं.
🎯 Exam Tip: अंश को 'कंपनी की पूँजी का छोटा भाग' और 'स्वामी के हित' के रूप में परिभाषित करें, जो इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं.
Question 4. अंशों के दो प्रकारों के नाम बताइये ।
Answer: अंशों के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं:
(i) समता अंश (Equity Shares): ये अंशधारक कंपनी के असली मालिक होते हैं और इन्हें वोट देने का अधिकार होता है. इन्हें लाभांश तभी मिलता है जब पूर्वाधिकार अंशधारकों को भुगतान हो जाता है.
(ii) पूर्वाधिकार अंश (Preference Shares): इन अंशधारकों को लाभांश पाने और कंपनी बंद होने पर पूँजी वापस पाने में समता अंशधारकों से पहले प्राथमिकता मिलती है. इन्हें वोट का अधिकार आमतौर पर नहीं होता.
In simple words: अंश दो तरह के होते हैं: समता अंश (जो मालिक होते हैं और वोट देते हैं) और पूर्वाधिकार अंश (जिन्हें पहले पैसा मिलता है पर वोट नहीं देते).
🎯 Exam Tip: अंशों के प्रकारों को बताते समय, समता अंशों के लिए 'स्वामी' और 'मतदान अधिकार' तथा पूर्वाधिकार अंशों के लिए 'प्राथमिकता' और 'निश्चित लाभांश' जैसे मुख्य शब्दों पर ज़ोर दें.
Question 5. पंजीकृत पूँजी से क्या आशय है ?
Answer: पंजीकृत पूँजी (Authorized Capital) से मतलब उस अधिकतम राशि से है जो कोई कंपनी अपने पूरे जीवनकाल में अंश जारी करके जुटा सकती है. यह राशि कंपनी के पार्षद सीमानियम (Memorandum of Association) में लिखी होती है और कंपनी इससे ज़्यादा अंश जारी नहीं कर सकती. यह कंपनी की ऊपरी सीमा तय करती है.
In simple words: पंजीकृत पूँजी वह सबसे ज़्यादा पूँजी है जिसे एक कंपनी अपने पूरे जीवन में अंश बेचकर जमा कर सकती है.
🎯 Exam Tip: पंजीकृत पूँजी को 'अधिकतम राशि' और 'पार्षद सीमानियम में उल्लेखित' शब्दों के साथ जोड़कर परिभाषित करें, यह कंपनी की अंश जारी करने की सीमा होती है.
Question 6. निर्गमित पूँजी से क्या आशय है ?
Answer: निर्गमित पूँजी (Issued Capital) का मतलब है पंजीकृत पूँजी का वह हिस्सा जिसे कंपनी जनता को अंशों की सदस्यता लेने के लिए ऑफ़र करती है. यह वह पूँजी है जो कंपनी वास्तव में जनता को बेचने के लिए निकालती है. निर्गमित पूँजी कभी भी पंजीकृत पूँजी से ज़्यादा नहीं हो सकती, क्योंकि यह उसी का एक भाग होती है.
In simple words: निर्गमित पूँजी वह पूँजी है जो कंपनी जनता को बेचने के लिए ऑफ़र करती है, यह कुल पंजीकृत पूँजी का एक हिस्सा है.
🎯 Exam Tip: निर्गमित पूँजी को 'जनता को अंशों की सदस्यता के लिए प्रस्तावित' भाग के रूप में परिभाषित करें और यह स्पष्ट करें कि यह पंजीकृत पूँजी से अधिक नहीं हो सकती.
Question 7. अभिदत्त पूँजी से क्या आशय है ?
Answer: अभिदत्त या प्रार्थित पूँजी (Subscribed Capital) वह पूँजी है जिसके लिए जनता ने अंश खरीदने के लिए आवेदन किया होता है और कंपनी ने उन्हें स्वीकार कर लिया होता है. यह निर्गमित पूँजी का वह हिस्सा है जिसे निवेशकों ने वास्तव में खरीदने की इच्छा जताई है. कई बार जितनी पूँजी कंपनी जारी करती है, उतनी ही अभिदत्त होती है.
In simple words: अभिदत्त पूँजी वह पैसा है जिसके लिए जनता ने कंपनी के अंश खरीदने को कहा है और कंपनी ने इसे स्वीकार कर लिया है.
🎯 Exam Tip: अभिदत्त पूँजी को 'जनता द्वारा क्रय की गई' या 'जिसके लिए अभिदान किया जा चुका है' भाग के रूप में परिभाषित करें, यह निर्गमित पूँजी का एक हिस्सा होता है.
Question 8. अधि अभिदान से क्या आशय है ?
Answer: अधि अभिदान (Over-subscription) तब होता है जब कोई कंपनी जितने अंश जनता को जारी करती है, उससे ज़्यादा अंशों के लिए आवेदन प्राप्त हो जाते हैं. इसका मतलब है कि निवेशकों की कंपनी के अंश खरीदने में बहुत ज़्यादा रुचि है. ऐसी स्थिति में, कंपनी को यह तय करना होता है कि वह अंशों का आवंटन कैसे करेगी, जैसे आनुपातिक आधार पर.
In simple words: अधि अभिदान का मतलब है जब कंपनी के बेचे जाने वाले अंशों से ज़्यादा लोग उन्हें खरीदने के लिए आवेदन करते हैं.
🎯 Exam Tip: अधि अभिदान की परिभाषा में 'जारी किए गए अंशों से अधिक आवेदन' और 'निवेशकों की उच्च रुचि' जैसे मुख्य बिंदु शामिल करें.
Question 9. परिवर्तनशील पूर्वाधिकार अंश से क्या आशय है ?
Answer: परिवर्तनशील पूर्वाधिकार अंश (Convertible Preference Shares) ऐसे अंश होते हैं जिनके धारकों को यह अधिकार मिलता है कि वे एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपने पूर्वाधिकार अंशों को समता अंशों (Equity Shares) में बदल सकें. यह निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प होता है क्योंकि यह उन्हें निश्चित लाभांश के साथ-साथ कंपनी के विकास में भागीदारी का मौका भी देता है.
In simple words: परिवर्तनशील पूर्वाधिकार अंश वे होते हैं जिन्हें एक खास समय में समता अंशों में बदला जा सकता है.
🎯 Exam Tip: परिवर्तनशील पूर्वाधिकार अंशों की मुख्य विशेषता 'निश्चित तिथि तक समता अंशों में परिवर्तन का अधिकार' है, जो निवेशकों को लाभांश और विकास दोनों का लाभ देता है.
Question 10. अंश आबंटन से क्या आशय है ?
Answer: अंश आबंटन (Share Allotment) का मतलब है आवेदकों के बीच कंपनी के अंशों का बँटवारा करना और उन्हें कानूनी रूप से अंशधारक बनाना. जब कोई व्यक्ति अंश खरीदने के लिए आवेदन करता है, तो कंपनी उस आवेदन को स्वीकार करके उसे अंश आवंटित करती है. एक बार अंश आवंटित हो जाने के बाद ही आवेदक कंपनी का औपचारिक रूप से अंशधारक बनता है.
In simple words: अंश आबंटन का मतलब है कंपनी द्वारा आवेदन करने वालों को अंश देना, जिससे वे अंशधारक बन जाते हैं.
🎯 Exam Tip: अंश आबंटन को 'आवेदकों के बीच अंशों का बँटवारा' और 'आवेदक का अंशधारक बनना' जैसे मुख्य बिंदुओं के साथ परिभाषित करें.
Question 12. अंशों के प्रीमियम पर निर्गमन से क्या आशय है ?
Answer: अंशों के प्रीमियम पर निर्गमन (Issue of Shares at Premium) का मतलब है जब कोई कंपनी अपने अंशों को उनके अंकित मूल्य (Face Value) से ज़्यादा कीमत पर जारी करती है. जो अतिरिक्त राशि अंकित मूल्य से ज़्यादा होती है, उसे 'प्रीमियम' कहते हैं. ऐसा तब होता है जब कंपनी की बाज़ार में अच्छी साख होती है या उसकी वित्तीय स्थिति मज़बूत होती है.
In simple words: अंशों के प्रीमियम पर निर्गमन मतलब अंशों को उनकी असली कीमत से ज़्यादा दाम पर बेचना.
🎯 Exam Tip: प्रीमियम पर निर्गमन की परिभाषा में 'अंकित मूल्य से अधिक मूल्य' और 'कंपनी की साख' जैसे मुख्य शब्दों का उपयोग करें.
Question 13. कम्पनी अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत क्या कम्पनी अपने अंशों को बट्टे पर निर्गमित कर सकती है ?
Answer: नहीं, कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार, कोई भी कंपनी अपने अंशों को बट्टे पर (Discount) जारी नहीं कर सकती. 'बट्टे पर निर्गमन' का मतलब है अंशों को उनके अंकित मूल्य से कम कीमत पर बेचना. हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में 'स्वेट इक्विटी शेयर' (Sweat Equity Shares) बट्टे पर जारी किए जा सकते हैं, लेकिन सामान्य अंशों के लिए यह अनुमति नहीं है.
In simple words: कंपनी अधिनियम 2013 के तहत, कोई भी कंपनी अपने अंशों को उनके अंकित मूल्य से कम दाम पर नहीं बेच सकती.
🎯 Exam Tip: याद रखें कि कंपनी अधिनियम, 2013 सामान्यतः अंशों के बट्टे पर निर्गमन को प्रतिबंधित करता है, केवल 'स्वेट इक्विटी शेयर' जैसी कुछ अपवादों को छोड़कर.
Question 14. बकायो माँग का अर्थ बताइये।
Answer: बकाया मांग (Calls in Arrears) का मतलब है जब कोई अंशधारक कंपनी द्वारा मांगी गई अंश पूँजी की राशि का भुगतान निर्धारित समय पर नहीं कर पाता. कंपनी अंशों की पूरी कीमत एक बार में नहीं मांगती, बल्कि किस्तों में मांगती है, जैसे आवेदन पर, आबंटन पर, पहली मांग पर आदि. अगर कोई अंशधारक इनमें से किसी किस्त का भुगतान नहीं करता, तो वह राशि बकाया मांग कहलाती है.
In simple words: बकाया मांग वह पैसा है जो शेयरधारक ने कंपनी द्वारा मांगे जाने पर भी अभी तक नहीं चुकाया है.
🎯 Exam Tip: बकाया मांग को 'कंपनी द्वारा मांगी गई राशि का अंशधारक द्वारा भुगतान न करना' के रूप में परिभाषित करें और यह ध्यान रखें कि इस पर कंपनी ब्याज ले सकती है.
Question 15. ऋणपत्र का अर्थ बताइये।
Answer: ऋणपत्र (Debenture) एक ऐसा दस्तावेज़ होता है जो यह दिखाता है कि कंपनी ने जनता या किसी व्यक्ति से कर्ज लिया है. यह कंपनी के लिए कर्ज जुटाने का एक तरीका है. ऋणपत्र धारकों को कंपनी के मुनाफे से कोई मतलब नहीं होता, उन्हें एक निश्चित दर पर ब्याज मिलता है, भले ही कंपनी लाभ कमाए या हानि. ये आमतौर पर सुरक्षित होते हैं, यानी कंपनी की संपत्ति पर इनका अधिकार होता है.
In simple words: ऋणपत्र कंपनी द्वारा लिया गया कर्ज होता है, जिसके बदले कंपनी ऋणपत्र धारकों को ब्याज देती है.
🎯 Exam Tip: ऋणपत्र को 'ऋण का प्रमाण', 'निश्चित ब्याज दर' और 'कंपनी के लेनदार' जैसे मुख्य बिंदुओं के साथ परिभाषित करें, जो इसे अंश से अलग करते हैं.
Question 16. बांड क्या है ?
Answer: बांड (Bond) एक तरह का बंधपत्र होता है जिसकी बनावट और काम करने का तरीका ऋणपत्र के समान होता है. यह भी एक कर्ज का साधन है जिसके ज़रिए सरकारें या बड़ी कंपनियाँ जनता से पैसा उधार लेती हैं. बांड धारकों को भी एक निश्चित अवधि के लिए निश्चित दर पर ब्याज मिलता है. परंपरागत रूप से, बांड का निर्गमन ज़्यादातर सरकार द्वारा किया जाता है, जबकि ऋणपत्र कंपनियाँ जारी करती हैं.
In simple words: बांड एक तरह का सरकारी या बड़ी कंपनियों का कर्ज का दस्तावेज़ है, जिस पर निश्चित ब्याज मिलता है.
🎯 Exam Tip: बांड की परिभाषा में 'ऋणपत्र के समान' और 'परंपरागत रूप से सरकार द्वारा निर्गमन' जैसे मुख्य अंतरों को स्पष्ट करें.
Question 17. सुरक्षित ऋणपत्र से क्या आशय है ?
Answer: सुरक्षित ऋणपत्र (Secured Debentures) ऐसे ऋणपत्र होते हैं जिनके धारकों को कंपनी की किसी विशिष्ट संपत्ति पर सुरक्षा या प्रभार का अधिकार होता है. अगर कंपनी ऋणपत्र धारकों का पैसा चुकाने में असमर्थ रहती है, तो वे उस संपत्ति को बेचकर अपना पैसा वसूल कर सकते हैं. ये ऋणपत्र निवेशकों के लिए ज़्यादा सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि उनके पैसे की वसूली की गारंटी होती है.
In simple words: सुरक्षित ऋणपत्र वे होते हैं जिनके पैसे की सुरक्षा के लिए कंपनी की कोई संपत्ति गिरवी रखी होती है, ताकि पैसा डूबने का डर न रहे.
🎯 Exam Tip: 'सुरक्षित ऋणपत्र' को 'कंपनी की संपत्ति पर प्रभार' और 'ऋणदाताओं के लिए सुरक्षा' जैसे शब्दों के साथ समझाएं, जो इनकी मुख्य पहचान है.
Question 19. अंश एवं ऋणपत्र में क्या अन्तर है ?
Answer: अंश और ऋणपत्र दोनों ही कंपनियों द्वारा पूँजी जुटाने के तरीके हैं, लेकिन उनमें कुछ खास अंतर हैं. अंश कंपनी की पूँजी का हिस्सा होते हैं और अंशधारक कंपनी के मालिक होते हैं. उन्हें लाभांश मिलता है और वे वोट दे सकते हैं. वहीं, ऋणपत्र कंपनी के लिए कर्ज की स्वीकृति होते हैं, और ऋणपत्रधारी कंपनी के लेनदार होते हैं. उन्हें निश्चित ब्याज मिलता है और वे वोट नहीं दे सकते.
In simple words: अंश मालिकी दिखाते हैं और लाभांश देते हैं, जबकि ऋणपत्र कर्ज दिखाते हैं और ब्याज देते हैं.
🎯 Exam Tip: अंश और ऋणपत्र के बीच अंतर बताते समय स्वामित्व, प्रतिफल (लाभांश/ब्याज), भुगतान की प्राथमिकता, सुरक्षा और मतदान अधिकार जैसे बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें.
Question 20. समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्रों के निर्गमन से क्या आशय है ?
Answer: समपार्श्विक प्रतिभूति (Collateral Security) के रूप में ऋणपत्रों के निर्गमन का मतलब है जब कंपनी किसी बैंक या वित्तीय संस्था से ऋण लेती है, तो उस ऋण की अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में अपने ऋणपत्रों को गिरवी रखती है. ये ऋणपत्र मुख्य प्रतिभूति के अतिरिक्त एक सहायक सुरक्षा के तौर पर दिए जाते हैं. अगर कंपनी मुख्य ऋण चुकाने में सक्षम नहीं होती, तो ऋणदाता इन ऋणपत्रों का उपयोग अपनी बकाया राशि वसूलने के लिए कर सकता है.
In simple words: समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्र जारी करना मतलब बैंक से कर्ज लेते समय अतिरिक्त गारंटी के तौर पर ऋणपत्र गिरवी रखना.
🎯 Exam Tip: समपार्श्विक प्रतिभूति को 'मुख्य ऋण की अतिरिक्त सुरक्षा' और 'ऋणदाता को गिरवी रखे गए ऋणपत्र' के रूप में परिभाषित करें.
Question 21. ऋणपत्रों पर ब्याज की प्रकृति क्या है ?
Answer: ऋणपत्रों पर दिया जाने वाला ब्याज कंपनी के लिए 'आयगत व्यय' (Revenue Expenditure) की प्रकृति का होता है. इसका मतलब है कि यह कंपनी के सामान्य व्यापारिक संचालन से जुड़ा एक नियमित खर्च है. यह खर्च लाभ-हानि खाते में दिखाया जाता है और कंपनी के लाभ पर सीधे असर डालता है. कंपनी को यह ब्याज देना अनिवार्य होता है, भले ही उसे लाभ हो या हानि.
In simple words: ऋणपत्रों पर ब्याज कंपनी का एक नियमित खर्च होता है जो उसके हर साल के लाभ को कम करता है.
🎯 Exam Tip: ऋणपत्रों पर ब्याज को 'आयगत व्यय' के रूप में पहचानें और स्पष्ट करें कि यह कंपनी के लाभ-हानि खाते में डेबिट किया जाता है.
Question 22. ऋणपत्रों के निर्गमन पर हानि से क्या आशय है ?
Answer: ऋणपत्रों के निर्गमन पर हानि (Loss on Issue of Debentures) का मतलब है जब कंपनी ऋणपत्रों को कम कीमत पर जारी करती है (बट्टे पर निर्गमन) या उन्हें भविष्य में ज़्यादा कीमत पर वापस खरीदने का वादा करती है (शोधन प्रीमियम पर). ये दोनों स्थितियाँ कंपनी के लिए एक तरह की हानि होती हैं. इस हानि को बैलेंस शीट में एक काल्पनिक संपत्ति के रूप में दिखाया जाता है और धीरे-धीरे अपलिखित किया जाता है.
In simple words: ऋणपत्रों के निर्गमन पर हानि तब होती है जब उन्हें सस्ते में बेचा जाता है या भविष्य में ज़्यादा पैसे देकर वापस खरीदा जाता है.
🎯 Exam Tip: निर्गमन पर हानि की गणना में 'बट्टे पर निर्गमन' और 'शोधन प्रीमियम' दोनों को शामिल करें, और यह स्पष्ट करें कि इसे धीरे-धीरे अपलिखित किया जाता है.
Rbse Class 12 Accountancy Chapter 5 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. कम्पनी की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं ?
Answer: कंपनी की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- विधान द्वारा निर्मित कृत्रिम व्यक्ति: कंपनी कानून द्वारा बनाई गई एक कानूनी इकाई है, जो इंसानों की तरह काम कर सकती है.
- पृथक् वैधानिक अस्तित्व: कंपनी का अपने सदस्यों से एक अलग कानूनी पहचान होती है, यानी वह अपने नाम पर संपत्ति खरीद सकती है और अनुबंध कर सकती है.
- सीमित दायित्व: कंपनी के सदस्यों का दायित्व केवल उनके द्वारा खरीदे गए अंशों की कीमत तक सीमित होता है, उनकी निजी संपत्ति पर कोई असर नहीं पड़ता.
- सार्वमुद्रा: कंपनी के पास अपनी एक आधिकारिक मुहर होती है, जिसे कंपनी के महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर लगाया जाता है, यह कंपनी के हस्ताक्षर की तरह है.
- अविच्छिन्न उत्तराधिकार: कंपनी का अस्तित्व स्थायी होता है. यह हमेशा चलती रहती है, भले ही उसके सदस्य बदलें या मर जाएं. कंपनी का काम कभी रुकता नहीं.
- अंशों का हस्तांतरण: अंशों को आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को बेचा जा सकता है, जिससे कंपनी में निवेश करना आसान हो जाता है.
In simple words: कंपनी कानून से बनती है, इसका अपना अलग नाम और पहचान होती है, मालिकों की ज़िम्मेदारी सीमित होती है, इसकी अपनी मुहर होती है और यह हमेशा चलती रहती है.
🎯 Exam Tip: कंपनी की विशेषताओं को परिभाषित करते समय 'कानूनी व्यक्ति', 'पृथक् अस्तित्व', 'सीमित दायित्व' और 'अविच्छिन्न उत्तराधिकार' जैसे मुख्य बिंदुओं को विस्तार से समझाएं.
Question 2. निजी कम्पनी से क्या आशय है?
Answer: निजी कंपनी (Private Company) से मतलब ऐसी कंपनी से है जो अपने अंशों को बेचने या हस्तांतरित करने पर कुछ प्रतिबंध लगाती है. इसमें सदस्यों की संख्या कम से कम 2 और ज़्यादा से ज़्यादा 200 तक सीमित होती है (भूतपूर्व कर्मचारियों को छोड़कर). यह कंपनी जनता को अपनी प्रतिभूतियाँ खरीदने के लिए आमंत्रित नहीं कर सकती. ऐसी कंपनियों को अपने नाम के अंत में 'प्राइवेट लिमिटेड' शब्द का उपयोग करना अनिवार्य होता है.
In simple words: निजी कंपनी वह है जो अंश बेचने पर रोक लगाती है, जिसके ज़्यादा से ज़्यादा 200 सदस्य होते हैं और जो जनता से पैसा नहीं ले सकती.
🎯 Exam Tip: निजी कंपनी की परिभाषा में 'अंशों के हस्तांतरण पर प्रतिबंध', 'अधिकतम 200 सदस्य' और 'जनता से प्रतिभूतियाँ खरीदने का आमंत्रण न देना' जैसे मुख्य बिंदुओं पर ज़ोर दें.
Question 3. अंशों द्वारा सीमित कम्पनी से आपको क्या आशय है?
Answer: अंशों द्वारा सीमित कंपनी (Company Limited by Shares) वह कंपनी होती है जिसमें सदस्यों का दायित्व उनके द्वारा खरीदे गए अंशों के अंकित मूल्य की अदत्त राशि तक ही सीमित होता है. इसका मतलब है कि अगर कंपनी को घाटा होता है, तो अंशधारकों को केवल उतना ही पैसा चुकाना होगा जितना उन्होंने अपने अंशों पर अभी तक नहीं चुकाया है. उनकी निजी संपत्ति पर कोई असर नहीं पड़ता. यह अंशधारकों के लिए जोखिम कम करता है.
In simple words: अंशों द्वारा सीमित कंपनी में, मालिकों की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ उनके शेयरों की कीमत तक होती है, उनकी अपनी बाकी संपत्ति सुरक्षित रहती है.
🎯 Exam Tip: 'अंशों द्वारा सीमित कंपनी' की परिभाषा में 'सदस्यों का दायित्व', 'धारित अंशों पर अदत्त राशि तक सीमित' जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें.
Question 4. समता अंश या पूर्वाधिकार अंश में क्या अन्तर है?
Answer: समता अंश और पूर्वाधिकार अंश में मुख्य अंतर यह है कि पूर्वाधिकार अंशधारकों को लाभांश प्राप्त करने में और कंपनी के समापन पर अपनी पूँजी वापस पाने में समता अंशधारकों से पहले प्राथमिकता मिलती है. समता अंशधारक कंपनी के असली मालिक होते हैं और उन्हें वोट देने का अधिकार होता है, जबकि पूर्वाधिकार अंशधारकों को आमतौर पर वोट देने का अधिकार नहीं होता. समता अंशधारकों को लाभांश तभी मिलता है जब पूर्वाधिकार अंशधारकों को भुगतान हो जाए, और उनका लाभांश निश्चित नहीं होता.
In simple words: पूर्वाधिकार अंशधारकों को लाभांश और पैसा वापस पाने में पहले हक़ मिलता है, जबकि समता अंशधारक मालिक होते हैं और वोट देते हैं.
🎯 Exam Tip: अंतर बताते समय प्राथमिकता (लाभांश और पूँजी), मतदान अधिकार और प्रतिफल (निश्चित/अनिश्चित लाभांश) के बिंदुओं को स्पष्ट करें.
Question 5. अधिमान अंशों के तीन प्रकारों को स्पष्ट कीजिये।
Answer: अधिमान अंशों (Preference Shares) के तीन मुख्य प्रकार हैं:
- संचयी पूर्वाधिकार अंश (Cumulative Preference Shares): इन अंशों पर लाभांश संचित होता रहता है. अगर किसी वर्ष कंपनी लाभ नहीं कमाती और लाभांश नहीं दे पाती, तो अगले वर्षों में जब लाभ होता है, तो पहले बकाया लाभांश का भुगतान किया जाता है, फिर मौजूदा वर्ष का.
- असंचयी पूर्वाधिकार अंश (Non-Cumulative Preference Shares): इन अंशों पर लाभांश संचित नहीं होता. अगर किसी वर्ष लाभांश नहीं दिया जाता, तो वह चला जाता है और भविष्य में उसका भुगतान नहीं होता.
- परिवर्तनशील पूर्वाधिकार अंश (Convertible Preference Shares): इन अंशों के धारकों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपने अंशों को समता अंशों में बदलने का अधिकार होता है. यह एक लचीला विकल्प प्रदान करता है.
In simple words: अधिमान अंश तीन तरह के होते हैं: संचयी (लाभांश जमा होता है), असंचयी (लाभांश जमा नहीं होता) और परिवर्तनशील (जिन्हें समता अंशों में बदल सकते हैं).
🎯 Exam Tip: अधिमान अंशों के प्रकारों को समझाते समय, प्रत्येक प्रकार की मुख्य विशेषता (जैसे लाभांश का संचय या परिवर्तनशीलता) पर विशेष ध्यान दें.
Question 6. संचित पूँजी से क्या आशय है ?
Answer: संचित पूँजी (Reserve Capital) से मतलब उस न मांगी गई पूँजी के हिस्से से है जिसे कंपनी केवल अपने समापन (winding up) के समय ही मांग सकती है. कंपनी इसे एक विशेष प्रस्ताव पास करके भविष्य के लिए सुरक्षित रखती है. यह पूँजी कंपनी के ऋणदाताओं को सुरक्षा प्रदान करती है और कंपनी के मुश्किल समय में काम आती है. कंपनी अपने सामान्य परिचालन के दौरान इस पूँजी को नहीं मांग सकती.
In simple words: संचित पूँजी वह पैसा है जिसे कंपनी सिर्फ़ तभी मांग सकती है जब वह बंद हो रही हो, इसे खास सुरक्षा के लिए रखा जाता है.
🎯 Exam Tip: संचित पूँजी को 'न मांगी गई पूँजी का भाग' और 'कंपनी के समापन पर ही माँगने योग्य' जैसे मुख्य बिंदुओं के साथ परिभाषित करें, जो इसे सामान्य आरक्षित पूँजी से अलग करता है.
Question 7. प्रतिभूति प्रीमियम खाते के उपभोग से सम्बन्धित धारा 52 के प्रावधान बताइये।
Answer: कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 52 के अनुसार, प्रतिभूति प्रीमियम खाते (Securities Premium Account) में जमा राशि का उपयोग केवल कुछ खास उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है:
- कंपनी के उन आरंभिक खर्चों को पूरा करने के लिए जो कंपनी शुरू करते समय होते हैं (जैसे पंजीकरण शुल्क).
- कंपनी के सदस्यों को बोनस अंश जारी करने के लिए, यानी बिना पैसे लिए अतिरिक्त शेयर देना.
- कंपनी द्वारा अपने ही अंशों या अन्य प्रतिभूतियों को खरीदने पर हुए किसी भी बट्टे या प्रीमियम के अपलेखन के लिए.
- कंपनी के किसी भी शोधनीय पूर्वाधिकार अंश या ऋणपत्रों के शोधन पर दिए जाने वाले प्रीमियम का भुगतान करने के लिए.
- अंशों और ऋणपत्रों के निर्गमन पर हुए खर्चों, जैसे कमीशन या बट्टे को बट्टे खाते डालने के लिए.
In simple words: प्रतिभूति प्रीमियम का पैसा सिर्फ़ कंपनी के शुरुआती खर्चों, बोनस शेयर देने, अपने ही शेयर वापस खरीदने के नुकसान या ऋणपत्रों के प्रीमियम चुकाने जैसे खास कामों के लिए ही इस्तेमाल हो सकता है.
🎯 Exam Tip: धारा 52 के प्रावधानों को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक उपयोग को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें, और यह ध्यान दें कि लाभांश भुगतान के लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता.
Question 8. न्यूनतम अभिदान से आप क्या समझते हैं ?
Answer: न्यूनतम अभिदान (Minimum Subscription) का मतलब है अंशों के निर्गमन के लिए आवेदकों से प्राप्त होने वाली वह कम से कम राशि जिसके बिना कंपनी अंशों का आबंटन (Allotment) नहीं कर सकती. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 39(1) के अनुसार, प्रविवरण (Prospectus) में बताई गई न्यूनतम राशि प्राप्त हुए बिना अंशों का आबंटन नहीं किया जा सकता. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के अनुसार, यह कुल निर्गमन राशि का कम से कम 90% होना चाहिए. यह निवेशकों के हितों की रक्षा करता है.
In simple words: न्यूनतम अभिदान वह कम से कम पैसा है जो कंपनी को अंश जारी करने के लिए इकट्ठा करना ज़रूरी है, इसके बिना वह अंश नहीं बेच सकती.
🎯 Exam Tip: न्यूनतम अभिदान की परिभाषा में 'न्यूनतम राशि', 'अंशों के आबंटन के लिए आवश्यक' और 'SEBI के 90% नियम' जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें.
Question 9. स्वेट समता अंशों से क्या आशय है।
Answer: स्वेट समता अंश (Sweat Equity Shares) ऐसे समता अंश होते हैं जिन्हें कंपनी अपने कर्मचारियों या संचालकों को नकद के अलावा अन्य किसी प्रतिफल (जैसे तकनीकी ज्ञान, बौद्धिक संपदा अधिकार) के बदले, या बाज़ार मूल्य से कम कीमत पर जारी करती है. ये अंश उन्हें उनकी विशेष सेवाओं या योगदानों के लिए दिए जाते हैं, जिससे कंपनी को फायदा होता है. यह एक तरह से कर्मचारियों को कंपनी में भागीदारी और प्रेरणा देने का तरीका है.
In simple words: स्वेट समता अंश वे शेयर होते हैं जो कंपनी अपने कर्मचारियों या मालिकों को उनकी खास मेहनत या ज्ञान के बदले कम दाम पर देती है.
🎯 Exam Tip: स्वेट समता अंशों को 'नकद के अलावा अन्य प्रतिफल' और 'कर्मचारियों/संचालकों को विशेष सेवाओं के लिए जारी' जैसे मुख्य शब्दों के साथ परिभाषित करें.
Question 10. कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना का अर्थ लिखिये।
Answer: कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना (Employee Stock Option Plan - ESOP) एक ऐसी योजना है जिसके तहत कंपनी अपने कर्मचारियों, संचालकों और अधिकारियों को कंपनी के समता अंशों को भविष्य में एक निश्चित कीमत पर खरीदने का अधिकार देती है. यह कीमत आमतौर पर बाज़ार मूल्य से कम होती है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को कंपनी के साथ जोड़ना और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है, क्योंकि इससे उन्हें कंपनी की सफलता में सीधा आर्थिक लाभ मिलता है.
In simple words: ESOP वह योजना है जिसमें कर्मचारियों को कंपनी के शेयर बाज़ार भाव से सस्ते में खरीदने का मौका मिलता है, जिससे वे कंपनी से जुड़े रहें.
🎯 Exam Tip: ESOP की परिभाषा में 'भविष्य में अंश खरीदने का अधिकार', 'निश्चित/कम कीमत' और 'कर्मचारियों को प्रेरित करना' जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें.
Question 11. एस्क्रो खाते को समझाइये।
Answer: एस्क्रो खाता (Escrow Account) एक विशेष प्रकार का खाता होता है जिसमें किसी सौदे से संबंधित धन या प्रतिभूतियों को एक तीसरी निष्पक्ष पार्टी (जैसे बैंक) के पास तब तक सुरक्षित रखा जाता है जब तक कि उस सौदे की सभी शर्तें पूरी न हो जाएं. यह खरीदार और विक्रेता दोनों के हितों की रक्षा करता है. जैसे, अगर कंपनी अपने अंशों को वापस खरीद रही है, तो उसे भुगतान के लिए बैंक में एस्क्रो खाता खोलना पड़ सकता है.
In simple words: एस्क्रो खाता एक सुरक्षित बैंक खाता है जहाँ पैसे तब तक रखे जाते हैं जब तक किसी बड़े सौदे की सभी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं.
🎯 Exam Tip: एस्क्रो खाते को 'तीसरी निष्पक्ष पार्टी द्वारा धन/प्रतिभूतियों को सुरक्षित रखना' और 'विनिर्दिष्ट शर्त के पूरा होने पर ही जारी करना' जैसे मुख्य बिंदुओं के साथ समझाएं.
Question 12. ऋणपत्र कितने प्रकार के होते हैं ?
Answer: ऋणपत्रों को कई आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है, जिनके मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
- पंजीयन के आधार पर:
(A) पंजीकृत ऋणपत्र (Registered Debentures): ये वे ऋणपत्र होते हैं जिनका विवरण कंपनी के रजिस्टर में दर्ज होता है, और ब्याज व मूलधन का भुगतान केवल दर्ज धारकों को होता है.
(B) वाहक ऋणपत्र (Bearer Debentures): ये वे ऋणपत्र होते हैं जिनके धारकों का विवरण दर्ज नहीं होता, और इनका हस्तांतरण सिर्फ़ सुपुर्दगी से हो जाता है. इन्हें धारक को ब्याज और मूलधन मिलता है. - पुनर्भुगतान के आधार पर:
(A) शोधनीय ऋणपत्र (Redeemable Debentures): ये वे ऋणपत्र होते हैं जिनका भुगतान कंपनी अपने जीवनकाल में एक निश्चित समय पर करती है.
(B) अशोधनीय ऋणपत्र (Irredeemable Debentures) या स्थायी ऋणपत्र (Perpetual Debentures): ये वे ऋणपत्र होते हैं जिनका भुगतान कंपनी के समापन पर ही किया जाता है. - सुरक्षा के आधार पर:
(A) सुरक्षित ऋणपत्र (Secured Debentures): ये वे ऋणपत्र होते हैं जिनके धारकों को कंपनी की संपत्ति पर प्रभार (चार्ज) होता है.
(B) असुरक्षित ऋणपत्र (Unsecured Debentures): ये वे ऋणपत्र होते हैं जिनके धारकों को कंपनी की संपत्ति पर कोई प्रभार नहीं होता. - ब्याज की दर के आधार पर:
(A) निश्चित ब्याज दर वाले ऋणपत्र (Fixed Interest Rate Debentures): इन पर एक निश्चित दर से ब्याज मिलता है.
(B) शून्य ब्याज दर वाले ऋणपत्र (Zero Interest Rate Debentures): इन पर कोई ब्याज नहीं मिलता, बल्कि इन्हें बट्टे पर जारी किया जाता है और अंकित मूल्य पर शोधन किया जाता है. - परिवर्तनशीलता के आधार पर:
(A) परिवर्तनीय ऋणपत्र (Convertible Debentures): ये वे ऋणपत्र होते हैं जिन्हें एक निश्चित समय पर समता अंशों या अन्य प्रतिभूतियों में बदला जा सकता है.
(B) अपरिवर्तनीय ऋणपत्र (Non-Convertible Debentures): ये वे ऋणपत्र होते हैं जिन्हें समता अंशों या अन्य प्रतिभूतियों में नहीं बदला जा सकता.
In simple words: ऋणपत्र कई तरह के होते हैं, जैसे पंजीकृत या वाहक, जिन्हें चुकाना है या नहीं, सुरक्षित हैं या नहीं, ब्याज देते हैं या नहीं, और जिन्हें अंशों में बदला जा सकता है या नहीं.
🎯 Exam Tip: ऋणपत्रों के प्रकारों का वर्णन करते समय, प्रत्येक वर्गीकरण (पंजीयन, पुनर्भुगतान, सुरक्षा, ब्याज दर, परिवर्तनशीलता) के आधार पर प्रत्येक प्रकार की मुख्य विशेषता को स्पष्ट करें.
Question 13. अंश व ऋणपत्र में चार अन्तर बताइये।
Answer: अंश और ऋणपत्र में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
| अन्तर का आधार (Basis of Diff.) | अंश (Share) | ऋणपत्र (Debenture) |
|---|---|---|
| 1. स्वामित्व | अंशों के धारक कंपनी के स्वामी होते हैं। | ऋणपत्रों के धारक कंपनी के ऋणदाता कहलाते हैं। |
| 2. हिस्सा | अंश कंपनी की पूँजी का हिस्सा है। | ऋणपत्र ऋण की स्वीकृति है। |
| 3. सुरक्षा | अंश सुरक्षित नहीं होते हैं। | ऋणपत्र कंपनी की सम्पत्ति पर प्रभार द्वारा सुरक्षित हो सकते हैं। |
| 4. मताधिकार | अंशधारी को साधारण सभा में उपस्थित होने एवं मतदान करने का अधिकार होता है। | इनको नहीं। |
In simple words: अंश कंपनी की मालिकी देते हैं और वोटिंग का अधिकार देते हैं, जबकि ऋणपत्र कर्ज होते हैं, ब्याज देते हैं और वोटिंग का अधिकार नहीं देते.
🎯 Exam Tip: अंश और ऋणपत्र के बीच अंतर बताते समय, स्वामित्व, प्रतिफल (लाभांश/ब्याज), भुगतान की प्राथमिकता, सुरक्षा और मतदान अधिकार जैसे बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें, यह एक महत्वपूर्ण तुलना है.
Question 14. समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्रों के निर्गमन का अर्थ एवं लेखांकन व्यवहार समझाइये।
Answer: समपार्श्विक प्रतिभूति (Collateral Security) के रूप में ऋणपत्रों के निर्गमन का अर्थ है जब कोई कंपनी बैंक से ऋण लेती है, तो मुख्य प्रतिभूति के अतिरिक्त एक अतिरिक्त जमानत के रूप में अपने ऋणपत्रों को बैंक के पास गिरवी रखती है. यह कंपनी के ऋणदाताओं के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है. यदि कंपनी मुख्य ऋण चुकाने में विफल रहती है, तो ऋणदाता इन ऋणपत्रों का उपयोग अपनी बकाया राशि वसूलने के लिए कर सकता है.
इनका लेखांकन निम्न दो में से किसी एक तरीके से किया जा सकता है:
(i) जर्नल प्रविष्टि न करना: यदि ऋणपत्रों के निर्गमन की कोई जर्नल प्रविष्टि नहीं की जाती है, तो बैलेंस शीट में मुख्य ऋण (बैंक ऋण) के नीचे एक टिप्पणी (Note) के रूप में यह बताया जाता है कि ऋणपत्र समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में जारी किए गए हैं.
(ii) जर्नल प्रविष्टि करना: यदि ऋणपत्रों के निर्गमन की जर्नल प्रविष्टि की जाती है, तो 'ऋणपत्र सस्पेंस खाता' (Debenture Suspense Account) को डेबिट किया जाता है और 'ऋणपत्र खाता' (Debenture Account) को क्रेडिट किया जाता है. बैलेंस शीट में, ऋणपत्र सस्पेंस खाते को ऋणपत्रों की राशि में से घटाकर दिखाया जाता है.
In simple words: समपार्श्विक प्रतिभूति में ऋणपत्र जारी करने का मतलब है कि बैंक से कर्ज लेते समय अतिरिक्त गारंटी के लिए ऋणपत्र गिरवी रखना. इसकी एंट्री या तो नहीं की जाती या फिर 'ऋणपत्र सस्पेंस खाते' को डेबिट करके की जाती है.
🎯 Exam Tip: समपार्श्विक प्रतिभूति के लेखांकन व्यवहार को समझाते समय, जर्नल प्रविष्टि न करने और करने दोनों तरीकों को स्पष्ट करें और बैलेंस शीट पर उनके प्रभाव को भी बताएं.
Rbse Class 12 Accountancy Chapter 5 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. कम्पनी से आप क्या समझते हैं ? इसकी आवश्यक विशेषताएँ एवं कम्पनी के विभिन्न प्रकारों को बताइये।
Answer: कम्पनी का अर्थ (Meaning of Company)
कंपनी एक वैधानिक, अदृश्य और कृत्रिम व्यक्ति है जिसका गठन कंपनी अधिनियम के तहत होता है. इसकी स्थापना एक विशेष उद्देश्य के लिए की जाती है. इसके सदस्यों का दायित्व सामान्यतः सीमित होता है, और इसका अस्तित्व सदस्यों से अलग होता है. कंपनी अपनी सार्वमुद्रा (Common Seal) के माध्यम से काम करती है. यह एक ऐसा संगठन है जो बड़े पैमाने पर पूँजी जुटाने और व्यापार करने के लिए उपयुक्त है.
कम्पनी की विशेषताएँ (Characteristics of Company)
कंपनी की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं:
- कंपनी एक विधान द्वारा निर्मित कृत्रिम व्यक्ति होती है, जिसका मतलब है कि यह कानूनी रूप से एक व्यक्ति की तरह मानी जाती है, लेकिन यह सांस नहीं ले सकती.
- इसका अपने सदस्यों से पृथक् वैधानिक अस्तित्व होता है. कंपनी अपने नाम पर संपत्ति खरीद सकती है, मुकदमे कर सकती है और अनुबंध कर सकती है.
- कंपनी का अस्तित्व स्थायी होता है. सदस्य आते-जाते रहते हैं या मर जाते हैं, लेकिन कंपनी का जीवन चलता रहता है. इसे 'अविच्छिन्न उत्तराधिकार' भी कहते हैं.
- सदस्यों का दायित्व उनके द्वारा खरीदे गए अंशों के अंकित मूल्य तक ही सीमित रहता है. इससे अंशधारकों की निजी संपत्ति सुरक्षित रहती है.
- कंपनी के सदस्य अपने अंशों का हस्तांतरण बिना किसी परेशानी के कर सकते हैं, जिससे निवेश में तरलता आती है.
- कंपनी का प्रबंधन अंशधारकों द्वारा चुने गए संचालकों (Directors) द्वारा किया जाता है. संचालक कंपनी के दैनिक कार्यों को संभालते हैं.
- कंपनी की एक सार्वमुद्रा होती है, जिस पर कंपनी का नाम लिखा होता है. यह मुहर कंपनी के आधिकारिक हस्ताक्षर के रूप में कार्य करती है और महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर लगाई जाती है.
- कंपनी का मुख्य उद्देश्य सामान्यतः लाभ कमाना होता है, लेकिन यह समाज सेवा जैसे अन्य उद्देश्यों के लिए भी बनाई जा सकती है.
कम्पनियों के प्रकार (Types of Companies)
कंपनियाँ मुख्य रूप से तीन प्रकार की हो सकती हैं:
1. अंशों द्वारा सीमित कंपनी (Company Limited by Shares):
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(22) के अनुसार, ऐसी कंपनी जिसमें सदस्यों का दायित्व उनके द्वारा धारित अंशों की अदत्त राशि तक सीमित होता है.
2. गारन्टी द्वारा सीमित कंपनी (Company Limited by Guarantee):
ऐसी कंपनी जिसमें सदस्यों का दायित्व उनके द्वारा समापन के समय कंपनी की संपत्तियों में योगदान देने की गारंटीकृत राशि तक सीमित होता है.
3. असीमित कंपनी (Unlimited Company):
कंपनी अधिनियम की धारा 2(92) के अनुसार, ऐसी कंपनी जिसके सदस्यों के दायित्व की कोई सीमा निर्धारित नहीं होती, यानी कंपनी के ऋणों के लिए सदस्यों की निजी संपत्ति का भी उपयोग किया जा सकता है. यह प्रकार भारत में कम पाया जाता है.
इन मुख्य प्रकारों के अलावा, कंपनियाँ कुछ अन्य वर्गीकरणों के आधार पर भी विभाजित की जाती हैं:
(1) एक व्यक्ति वाली कंपनी (One Person Company - OPC):
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(62) के अनुसार, यह वह कंपनी है जिसमें केवल एक ही व्यक्ति सदस्य होता है. इसका गठन निजी कंपनी के रूप में होता है, जो एकल उद्यमी को सीमित दायित्व का लाभ देती है.
(2) निजी कंपनी (Private Company):
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(68) के अनुसार, यह ऐसी कंपनी है जिसकी न्यूनतम पूँजी ₹1 लाख या अधिक हो सकती है. यह अपने अंशों के हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाती है, सदस्यों की संख्या को 200 तक सीमित करती है (कुछ अपवादों को छोड़कर), और जनता को अपनी प्रतिभूतियाँ खरीदने के लिए आमंत्रित नहीं करती. निजी कंपनियों को अपने नाम के अंत में 'प्राइवेट लिमिटेड' शब्द का उपयोग करना अनिवार्य है.
(3) सार्वजनिक कंपनी (Public Company):
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(71) के अनुसार, सार्वजनिक कंपनी वह होती है जो निजी कंपनी नहीं है. इसकी न्यूनतम चुकता पूँजी ₹5 लाख हो सकती है और इसमें कम से कम 7 सदस्य होने चाहिए. सार्वजनिक कंपनी अंशों के हस्तांतरण पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाती और जनता से प्रतिभूतियाँ खरीदने के लिए आमंत्रित कर सकती है. ऐसी कंपनियों को अपने नाम के अंत में 'लिमिटेड' शब्द का उपयोग करना होता है. यदि कोई निजी कंपनी सार्वजनिक कंपनी की सहायक कंपनी है, तो उसे भी सार्वजनिक कंपनी ही माना जाता है.
In simple words: कंपनी कानून से बनी एक अलग इकाई है जो कई लोगों के पैसे से चलती है. इसकी अपनी पहचान, सीमित ज़िम्मेदारी, और स्थायी जीवन होता है. यह कई तरह की होती है, जैसे एक व्यक्ति वाली, निजी, या सार्वजनिक कंपनी, जो अंशों से सीमित हो या गारंटी से.
🎯 Exam Tip: कंपनी की परिभाषा, विशेषताओं और प्रकारों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करें. प्रत्येक प्रकार की मुख्य पहचान और सीमाएं (जैसे सदस्य संख्या, दायित्व) ज़रूर बताएं.
Question 2. समता अंश व पूर्वाधिकार अंशों में क्या अन्तर है ?
Answer: समता अंश और पूर्वाधिकार अंशों में अंतर (Difference between Preference Shares and Equity Shares) को निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर समझा जा सकता है:
| अन्तर का आधार (Basis of Diff.) | पूर्वाधिकार अंश (Preference Shares) | समता अंश (Equity Share) |
|---|---|---|
| 1. लाभांश की प्राथमिकता | लाभांश समता अंशों के पूर्व प्राप्त करने का अधिकार होता है। | पूर्वाधिकार अंशों पर लाभांश देने के बाद ही लाभांश प्राप्त होता है। |
| 2. लाभांश की दर | प्रायः लाभांश की दर पूर्व-निश्चित रहती है। | समता अंशों पर लाभांश की दर निश्चित नहीं रहती। |
| 3. मताधिकार | प्रत्येक प्रस्ताव पर मताधिकार प्राप्त नहीं होता। | प्रत्येक प्रस्ताव पर मताधिकार प्राप्त होता है। |
| 4. निर्गमन की अनिवार्यता | इन अंशों का निर्गमन अनिवार्य नहीं होता। | इन अंशों का निर्गमन अनिवार्य होता है। |
| 5. स्वामी | पूर्वाधिकार अंशधारी कंपनी के वास्तविक स्वामी नहीं होते। | समता अंशधारी कंपनी के वास्तविक स्वामी माने जाते हैं। |
| 6. आय की निश्चितता | आय निश्चित एवं नियमित रहती है। | आय अनिश्चित एवं अनियमित रहती है। |
| 7. प्रबन्ध संचालन में भाग लेने का अधिकार | कंपनी के प्रबन्ध संचालन में भाग लेने का अधिकार नहीं होता। | अंशधारियों द्वारा अपने में से चुने हुए प्रबन्धक एवं संचालक कंपनी को चलाते |
In simple words: समता अंश और पूर्वाधिकार अंश कंपनी के पैसे जुटाने के दो तरीके हैं. पूर्वाधिकार अंशधारकों को लाभांश और पैसा वापस पाने में पहले हक़ मिलता है, जबकि समता अंशधारक असली मालिक होते हैं और कंपनी के बड़े फैसलों में वोट दे सकते हैं.
🎯 Exam Tip: समता और पूर्वाधिकार अंशों के बीच अंतर को तुलनात्मक तालिका के रूप में प्रस्तुत करना सबसे प्रभावी होता है, जिसमें स्वामित्व, लाभांश, मतदान अधिकार और जोखिम जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया जाए.
Question 3. अंश पूँजी के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
Answer: अंश पूँजी के मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार होते हैं:
1. अधिकृत पूँजी (Authorized Capital): यह वह सबसे ज़्यादा पैसा है जो एक कंपनी अपने शेयर जारी करके जुटा सकती है। यह कंपनी के ज़रूरी कागजात (मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन) में लिखा होता है। एक कंपनी इस तय सीमा से ज़्यादा शेयर नहीं बेच सकती। यह कंपनी की अधिकतम पूँजी जुटाने की कानूनी सीमा होती है।
2. निर्गमित पूँजी (Issued Capital): यह अधिकृत पूँजी का वह हिस्सा है जिसे कंपनी सच में जनता को खरीदने के लिए देती है। जैसे, अगर एक कंपनी 20 लाख Rs की पूँजी जुटा सकती है, लेकिन उसने अभी सिर्फ 5 लाख Rs के शेयर बेचे हैं, तो यही 5 लाख Rs निर्गमित पूँजी होगी। यह दिखाता है कि कंपनी ने अपनी कुल क्षमता का कितना हिस्सा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया है।
3. प्रार्थित पूँजी (Subscribed Capital): यह निर्गमित पूँजी का वह हिस्सा है जिसे जनता ने खरीदने के लिए सहमति दी है। मतलब, जितने शेयर कंपनी ने बेचे, उनमें से लोगों ने असल में कितने खरीदने की हामी भरी। यह वास्तविक रूप से शेयरधारकों द्वारा कंपनी में निवेश करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
In simple words: अंश पूँजी के कई रूप होते हैं जैसे अधिकृत, निर्गमित और प्रार्थित पूँजी। अधिकृत पूँजी सबसे ज़्यादा राशि होती है जो कंपनी जुटा सकती है, निर्गमित पूँजी वह हिस्सा है जो जनता को बेचा गया है, और प्रार्थित पूँजी वह हिस्सा है जिसे निवेशकों ने खरीदने के लिए सहमति दी है।
🎯 Exam Tip: इन सभी पूँजी प्रकारों की परिभाषाओं को उदाहरणों के साथ समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और इनमें अंतर करना ज़रूरी होता है।
Question 4. पूर्वाधिकार अंश से क्या आशय है ? पूर्वाधिकार अंशों के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
Answer: पूर्वाधिकार अंश ऐसे शेयर होते हैं जिन्हें कुछ खास फायदे मिलते हैं। इन्हें दो मुख्य प्राथमिकताएँ मिलती हैं:
1. लाभांश प्राप्त करने का पूर्व अधिकार जो कि समता अंशधारियों को लाभांश भुगतान से पूर्व निश्चित राशि या निश्चित दर से परिकलित कर चुकाया जायेगा।
2. कम्पनी के समापन के समय समता अंशधारियों से पूर्व पूँजी वापस प्राप्त करने का पूर्वाधिकार।
यह शेयर निवेशकों को सुरक्षा और आय की स्थिरता प्रदान करते हैं।
पूर्वाधिकार अंशों के प्रकार (Types of Preference Shares)
कुछ विशेष अधिकारों के आधार पर पूर्वाधिकार अंश निम्न प्रकार के हो सकते हैं-
(1) असंचयी पूर्वाधिकार अंश (Non-Cumulative Preference Shares): असंचयी पूर्वाधिकार अंश वे शेयर होते हैं जिनमें अगर किसी साल कंपनी को मुनाफ़ा नहीं हुआ या कम हुआ, और लाभांश नहीं दिया गया, तो वह लाभांश अगले साल नहीं मिलेगा। यानी, छूटा हुआ लाभांश इकट्ठा नहीं होता। निवेशक को लाभ तभी मिलता है जब कंपनी उस वर्ष में पर्याप्त लाभ कमाती है।
(2) संचयी पूर्वाधिकार अंश (Cumulative Preference Shares): संचयी पूर्वाधिकार अंश ऐसे शेयर होते हैं जिनमें अगर किसी साल लाभांश नहीं दिया गया, तो वह अगले साल के लिए जमा हो जाता है। कंपनी को भविष्य में जब भी मुनाफ़ा होगा, तो ये जमा हुए लाभांश आम शेयरधारकों को देने से पहले इन्हें चुकाने होंगे। यह शेयरधारकों को लाभांश की निरंतरता का एक प्रकार का आश्वासन देता है।
(3) अवशिष्टभागी पूर्वाधिकार अंश (Participating Preference Shares): अवशिष्टभागी पूर्वाधिकार अंश ऐसे शेयर होते हैं जो अपना तय लाभांश लेने के बाद, अगर कंपनी के नियम इजाज़त दें, तो आम शेयरधारकों को लाभांश देने के बाद बचे हुए मुनाफे में से और हिस्सा भी ले सकते हैं। ये शेयर अतिरिक्त लाभ का अवसर प्रदान करते हैं।
(5) परिवर्तनीय पूर्वाधिकार अंश (Convertible Preference Shares): ऐसे पूर्वाधिकार अंश जिनके धारकों को यह अधिकार प्रदान किया जाता है कि वे एक निश्चित तिथि तक अपने अंशों को समता अंशों में परिवर्तन करा सकते हैं, परिवर्तनीय पूर्वाधिकार अंश कहलाते हैं। ये शेयर निवेशकों को तय आय के साथ-साथ विकास में हिस्सेदारी का विकल्प देते हैं।
(6) अपरिवर्तनीय पूर्वाधिकार अंश (Non-Convertible Preference Shares): अपरिवर्तनीय पूर्वाधिकार अंश ऐसे शेयर होते हैं जिन्हें किसी भी हाल में आम शेयरों में नहीं बदला जा सकता। ये हमेशा पूर्वाधिकार अंश ही रहते हैं। ये शेयर निवेशकों को सिर्फ तय लाभांश देते हैं, और कंपनी के स्वामित्व में हिस्सेदारी नहीं देते।
(7) शोधनीय पूर्वाधिकार अंश (Redeemable Preference Shares): शोधनीय पूर्वाधिकार अंश वे शेयर होते हैं जिनका पैसा कंपनी को एक तय तारीख पर या उससे पहले वापस करना होता है। इन शेयरों को कंपनी भविष्य में खरीदकर खत्म कर सकती है। यह कंपनी को अपनी पूँजी संरचना को समायोजित करने की सुविधा प्रदान करता है।
(8) अशोधनीय पूर्वाधिकार अंश (Irredeemable Preference Shares): अशोधनीय पूर्वाधिकार अंश ऐसे शेयर होते हैं जिनका पैसा कंपनी तभी वापस करती है जब कंपनी पूरी तरह से बंद हो जाए। भारत में, कंपनी अधिनियम 2013 के तहत, ऐसी तरह के शेयर जारी करने की अनुमति नहीं है। ये शेयर कंपनी के पूरे जीवनकाल तक बने रहते हैं और निवेशकों को दीर्घकालिक निवेश प्रदान करते हैं।
In simple words: पूर्वाधिकार अंश कुछ खास शेयर होते हैं जिन्हें लाभांश और कंपनी बंद होने पर पूँजी वापसी में प्राथमिकता मिलती है। इनके कई प्रकार होते हैं जैसे संचयी (लाभांश जमा होने वाले), असंचयी (लाभांश जमा न होने वाले), परिवर्तनीय (जिन्हें आम शेयरों में बदला जा सके) और अशोधनीय (जिन्हें कंपनी केवल बंद होने पर ही वापस करती है)।
🎯 Exam Tip: पूर्वाधिकार अंशों के प्रत्येक प्रकार की विशेषताओं और उनके निहितार्थों को समझना ज़रूरी है, क्योंकि यह कंपनी के वित्त और निवेशक के अधिकारों को प्रभावित करता है।
Question 5. ऋणपत्र से क्या आशय है ? ऋणपत्रों के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
Answer: ऋणपत्र का अर्थ (Meaning of Debenture)-
ऋणपत्र एक तरह का दस्तावेज़ होता है जो कंपनी अपनी मोहर लगाकर जारी करती है। यह इस बात का सबूत होता है कि कंपनी ने लोगों से या संस्थाओं से उधार पैसा लिया है। कंपनी इस उधार पर एक तय दर से ब्याज देती है। यह कंपनी के लिए पूँजी जुटाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, खासकर जब उन्हें लंबी अवधि के फंड की आवश्यकता होती है।
ऋणपत्र की परिभाषा (Definition of Debenture)-
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 (30) के अनुसार, “ऋणपत्र के अन्तर्गत ऋणपत्र, स्कन्ध, बॉण्ड तथा कम्पनी की अन्य प्रतिभूतियों को सम्मिलित किया जाता है चाहे वे कम्पनी की सम्पत्तियों पर प्रभार हों या न हों ।”
साधारणतः ऋणपत्र निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-
1. साधारण या नग्न ऋणपत्र (Ordinary Or Naked Debentures): इन्हें असुरक्षित ऋणपत्र भी कहा जाता है। इन ऋणपत्रों को खरीदने वाले लोगों को उनके पैसे या ब्याज के बदले कंपनी की कोई चीज़ गारंटी के तौर पर नहीं देती है। ये जोखिम भरे हो सकते हैं। ये ऋणपत्र कंपनी की सामान्य साख पर आधारित होते हैं।
4. रजिस्टर्ड ऋणपत्र (Registered Debentures): रजिस्टर्ड ऋणपत्र ऐसे होते हैं जिनका रिकॉर्ड कंपनी अपनी किताबों में रखती है। इन्हें एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को बेचने के लिए एक खास तरीका अपनाना पड़ता है। इनका ब्याज और मूलधन सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलता है जिनका नाम कंपनी के रजिस्टर में दर्ज होता है। ये ऋणपत्र कंपनी के लिए देनदारियों का रिकॉर्ड रखने में मदद करते हैं।
5. शोध्य-ऋणपत्र (Redeemable Debentures): शोध्य ऋणपत्र वे होते हैं जिनका पैसा कंपनी को अपने अस्तित्व में रहते हुए एक तय समय पर चुकाना होता है। यह कंपनी की एक निश्चित देनदारी होती है जिसे चुकाना ज़रूरी है। ये ऋणपत्र आमतौर पर लंबी अवधि के लिए जारी किए जाते हैं और मैच्योरिटी पर चुकाए जाते हैं।
6. स्थायी ऋणपत्र (Perpetual Debentures): स्थायी या अशोध्य ऋणपत्र वे होते हैं जिनका पैसा कंपनी अपने जीवनकाल में वापस नहीं करती। इनका भुगतान कंपनी तभी करती है जब वह पूरी तरह से बंद हो जाती है। ये ऋणपत्र कंपनी के लिए स्थायी पूँजी का स्रोत हो सकते हैं, जब तक कंपनी चलती रहे।
7. परिवर्तनशील ऋणपत्र (Convertible Debentures): परिवर्तनशील ऋणपत्र वे होते हैं जिन्हें खरीदने वालों को कंपनी यह मौका देती है कि वे एक तय समय के बाद अपने ऋणपत्रों को कंपनी के शेयर या स्टॉक में बदल सकें। यह निवेशकों को एक तय आय के साथ-साथ कंपनी के विकास में हिस्सेदारी का मौका भी प्रदान करता है।
8. अपरिवर्तनशील ऋणपत्र (Non-convertible Debentures): अपरिवर्तनीय ऋणपत्र वे होते हैं जिन्हें किसी भी हाल में कंपनी के शेयर या किसी और सिक्योरिटी में नहीं बदला जा सकता। ये हमेशा ऋणपत्र ही रहते हैं। ये ऋणपत्र निवेशकों को केवल ब्याज के रूप में एक निश्चित आय प्रदान करते हैं।
9. निश्चित ब्याज दर वाले ऋणपत्र (Fixed Interest Rate Debentures): निश्चित ब्याज दर वाले ऋणपत्र वे होते हैं जिन पर कंपनी हमेशा एक तय दर से ब्याज देती है। यह दर कभी बदलती नहीं है। ये ऋणपत्र निवेशकों को स्थिर और अनुमानित आय प्रदान करते हैं।
10. शून्य ब्याज दर वाले ऋणपत्र (Zero Interest Rate Debentures): शून्य ब्याज दर वाले ऋणपत्र वे होते हैं जिन पर कंपनी कोई ब्याज नहीं देती है। इन्हें आमतौर पर छूट पर जारी किया जाता है और पूरी कीमत पर भुनाया जाता है, जिससे निवेशक को लाभ होता है। इन ऋणपत्रों में निवेशक को ब्याज की जगह खरीद मूल्य और मोचन मूल्य के अंतर से लाभ होता है।
11. प्रथम ऋणपत्र (First Debentures): प्रथम ऋणपत्र वे होते हैं जिनका पैसा, कंपनी बंद होने पर या पैसे चुकाने के समय, दूसरे सभी ऋणपत्रों से पहले वापस किया जाता है। इन्हें पैसे चुकाने में पहली प्राथमिकता मिलती है। ये ऋणपत्र अन्य ऋणपत्रों की तुलना में अधिक सुरक्षित माने जाते हैं।
12. द्वितीय ऋणपत्र (Second Debenture): द्वितीय ऋणपत्र वे होते हैं जिनका पैसा प्रथम ऋणपत्रों का भुगतान होने के बाद वापस किया जाता है। इन्हें पैसे चुकाने में दूसरी प्राथमिकता मिलती है। ये ऋणपत्र प्रथम ऋणपत्रों की तुलना में कम सुरक्षित होते हैं।
In simple words: ऋणपत्र एक कंपनी द्वारा लिया गया उधार है जिसके लिए एक प्रमाण पत्र दिया जाता है और उस पर ब्याज मिलता है। इनके कई प्रकार होते हैं जैसे सुरक्षित/असुरक्षित, रजिस्टर्ड/वाहक, शोध्य/अशोध्य, और परिवर्तनीय/अपरिवर्तनीय, जो उनके भुगतान, सुरक्षा और बदलने की क्षमता पर आधारित होते हैं।
🎯 Exam Tip: ऋणपत्रों के प्रकारों को याद रखने के लिए, उन्हें सुरक्षा, स्वामित्व, भुगतान, और परिवर्तनशीलता जैसे आधारों पर वर्गीकृत करना सहायक होता है।
अंश व ऋणपत्रों में अन्तर (Difference between Preference Shares and Equity Shares)
| अन्तर का आधार (Basis of Diff.) | अंश (Shares) | ऋणपत्र (Debentures) |
|---|---|---|
| 1. स्वामित्व | अंशधारी कंपनी के मालिक होते हैं। | ऋणपत्रधारी कंपनी के लिए सिर्फ़ कर्ज देने वाले (लेनदार) होते हैं। |
| 2. धारक | अंशों को रखने वाले को अंशधारी कहते हैं। | ऋणपत्र को रखने वाले को ऋणपत्रधारी कहते हैं। |
| 3. प्रतिफल | अंशों पर मिलने वाले फायदे को लाभांश कहते हैं। | ऋणपत्रों पर मिलने वाले फायदे को ब्याज कहते हैं। |
| 4. प्रबन्ध में हिस्सा | अंशधारी कंपनी के कामकाज (प्रबंध) में हिस्सा ले सकते हैं। | ऋणपत्रधारी कंपनी के कामकाज में हिस्सा नहीं ले सकते। |
| 5. भुगतान | अंशों का पैसा (खासकर आम अंशों का) कंपनी बंद होने पर ही वापस मिलता है। | ऋणपत्रों का पैसा कंपनी को अपने चलने के दौरान ही एक तय समय पर चुकाना पड़ता है। |
| 6. धनराशि | अंशों से मिलने वाला पैसा कंपनी के लिए पूँजी (Capital) होता है। | ऋणपत्रों से मिलने वाला पैसा कंपनी के लिए उधार (Loan) होता है। |
| 7. निश्चित आय | अंशधारियों को लाभांश तभी मिलता है जब कंपनी को फायदा हो। | कंपनी को नुकसान होने पर भी ऋणपत्रों पर तय समय और दर पर ब्याज चुकाना पड़ता है। |
| 8. बट्टे पर निर्गमन | अंशों को उनकी असली कीमत से कम पर जारी नहीं किया जा सकता (कुछ अपवादों को छोड़कर)। | ऋणपत्रों को उनकी असली कीमत से कम पर जारी किया जा सकता है। |
| 9. मतदान अधिकार | अंशधारी कंपनी की बैठकों में वोट दे सकते हैं। | ऋणपत्रधारियों को वोट देने का अधिकार नहीं होता। |
| 10. हरण | अगर अंशधारी किश्तें न चुकाएँ, तो उनके अंशों को ज़ब्त (हरण) किया जा सकता है। | अगर ऋणपत्रधारी किश्तें न चुकाएँ, तो उनके ऋणपत्रों को ज़ब्त नहीं किया जा सकता। |
🎯 Exam Tip: यह तालिका अंशों और ऋणपत्रों के बीच मुख्य अंतरों को संक्षेप में प्रस्तुत करती है; इन बिंदुओं को याद रखने से आपको अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिलेगी।
Question 14. समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्रों के निर्गमन का अर्थ एवं लेखांकन व्यवहार समझाइये।
Answer: समपार्श्विक प्रतिभूति का मतलब एक ऐसी अतिरिक्त गारंटी से है जो मुख्य गारंटी के साथ बैंक या ऋणदाता को दी जाती है। जब कोई कंपनी बैंक से लोन लेती है और उस लोन की अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर अपने ऋणपत्रों को बैंक के पास रखती है, तो इसे समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्रों का जारी करना कहते हैं। यह तरीका बैंक को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है और कंपनी को आसानी से लोन मिलने में मदद करता है।
इनका लेखांकन निम्न दो में से किसी एक तरीके से किया जा सकता है –
(i) जब कोई प्रविष्टि नहीं की जाती है: इस तरीके में, कंपनी ऋणपत्रों को समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में जारी करने पर कोई जर्नल एंट्री नहीं करती। इसे सिर्फ बैलेंस शीट में लोन के नीचे एक नोट के तौर पर दिखाया जाता है कि ऋण किस प्रतिभूति द्वारा सुरक्षित है। यह विधि सरल है क्योंकि यह ऋणपत्रों को कंपनी की मुख्य देनदारी के रूप में नहीं मानती है, जब तक कि मुख्य ऋण का भुगतान न हो।
(ii) जब प्रविष्टि की जाती है: इस तरीके में, ऋणपत्रों को समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में जारी करने पर एक जर्नल एंट्री की जाती है। 'ऋणपत्र सस्पेंस खाता' (Debenture Suspense A/c) डेबिट किया जाता है और 'ऋणपत्र खाता' (Debenture A/c) क्रेडिट किया जाता है। बाद में, यह बैलेंस शीट में एडजस्ट किया जाता है ताकि यह स्पष्ट हो कि ऋणपत्र अभी तक मुख्य देनदारी नहीं बने हैं। यह तरीका ऋणपत्रों के विवरण को अधिक पारदर्शी बनाता है, भले ही वे सीधे बिक्री के लिए न हों।
In simple words: समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्रों का मतलब है कि कंपनी बैंक से लोन लेने के लिए अपने ऋणपत्रों को एक अतिरिक्त गारंटी के तौर पर रखती है। इसके लिए या तो कोई जर्नल एंट्री नहीं की जाती, सिर्फ बैलेंस शीट में नोट दिखाया जाता है, या फिर 'ऋणपत्र सस्पेंस खाते' को डेबिट और 'ऋणपत्र खाते' को क्रेडिट करके एंट्री की जाती है।
🎯 Exam Tip: इस अवधारणा को समझने के लिए, यह याद रखना ज़रूरी है कि समपार्श्विक प्रतिभूति मुख्य ऋण की सहायक होती है और तभी सक्रिय होती है जब मुख्य ऋण चुकाया नहीं जाता।
RBSE Class 12 Accountancy Chapter 5 आंकिक प्रश्न
Question 1. सोना लि. ने मोना लि. से Rs 10,00,000 की मशीन एवं Rs 5,00,000 का फर्नीचर खरीदा। सोना लि. ने 40% राशि का चेक से एवं शेष राशि के लिए Rs 10 वाले समता अंश 20% प्रीमियम पर जारी कर भुगतान किया। उक्त व्यवहारों को दर्ज करने के लिये सोना लि. की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।
Answer:
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. ₹ | Amount Cr. ₹ |
|---|---|---|---|---|
| (1) | Machinery A/c Furniture A/c To Mona Limited (मशीनरी और फर्नीचर मोना लिमिटेड से खरीदा गया) | 10,00,000 5,00,000 | 15,00,000 | |
| (2) | Mona Limited A/c To Bank A/c To Equity Share Capital A/c To Security Premium A/c (मोना लिमिटेड को खरीदी गई राशि का 40% चेक से भुगतान किया गया और बाकी राशि 75,000 समता अंश (प्रत्येक 10 Rs, 20% प्रीमियम पर) जारी करके चुकाई गई।) | 15,00,000 | 6,00,000 7,50,000 1,50,000 |
In simple words: सबसे पहले, मशीनरी और फर्नीचर की खरीद को मोना लिमिटेड के नाम पर रिकॉर्ड किया जाता है। फिर, मोना लिमिटेड को 40% भुगतान चेक से किया जाता है और बची हुई राशि के लिए प्रीमियम पर समता अंश जारी किए जाते हैं, जिसे अंश पूँजी और सिक्योरिटी प्रीमियम में बाँटा जाता है।
🎯 Exam Tip: जब कोई कंपनी संपत्ति खरीदकर अंश या ऋणपत्र जारी करती है, तो खरीद मूल्य का भुगतान कैसे किया गया (नकद, अंश, या ऋणपत्र) इसका स्पष्ट उल्लेख जर्नल प्रविष्टियों में करें।
Question 2. जैन लि. ने Rs 6,00,000 की मशीन कमल से खरीदी। 50% भुगतान चेक द्वारा किया गया तथा शेष राशि के लिए कम्पनी ने समता अंश Rs 10 वाले 20% प्रीमियम पर निर्गमित किये। उपर्युक्त व्यवहारों की जैन लि. की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये।
Answer: Journal of Jain Limited
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. ₹ | Amount Cr. ₹ |
|---|---|---|---|---|
| (1) | Machinery A/c To Kamal (मशीन खरीदी गई) | 6,00,000 | 6,00,000 | |
| (2) | Kamal's A/c To Bank A/c To Equity Share Capital A/c To Security Premium A/c (50% भुगतान चेक से किया गया और बाकी 25,000 समता अंश (प्रत्येक 10 Rs, 20% प्रीमियम पर) जारी करके कमल को चुकाया गया।) | 6,00,000 | 3,00,000 2,50,000 50,000 |
In simple words: सबसे पहले, मशीनरी की खरीद को कमल के नाम पर रिकॉर्ड किया जाता है। फिर, कमल को कुल कीमत का आधा चेक से चुकाया जाता है, और बाकी आधे के लिए प्रीमियम पर नए समता अंश जारी किए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रीमियम पर अंश जारी करते समय, अंश पूँजी को अंकित मूल्य पर और प्रीमियम राशि को सिक्योरिटी प्रीमियम खाते में अलग-अलग क्रेडिट करना याद रखें।
Question 3. कोहिनूर लि. की अधिकृत पूँजी Rs 10,00,000 थी, जो 100 Rs के 10,000 समता अंशों में विभाजित थी। इनमें से 8,000 समता अंश जनता को जारी किए गए। पूरी अंकित मूल्य आवेदन पर देय थी। सभी अंश जनता द्वारा खरीदे गए और पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया। कोहिनूर लि. की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।
Answer: Journal of Kohinoor Limited
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. ₹ | Amount Cr. ₹ |
|---|---|---|---|---|
| (1) | Bank A/c To Equity Share App. and Allot. (8,000 समता अंशों पर 100 Rs प्रति अंश के हिसाब से आवेदन राशि प्राप्त हुई) | 8,00,000 | 8,00,000 | |
| (2) | Equity Share Application and Allotment A/c To Equity Share Capital A/c (समता अंश आवेदन और आबंटन राशि को अंश पूँजी खाते में ट्रांसफर किया गया) | 8,00,000 | 8,00,000 |
In simple words: कंपनी को 8,000 समता अंशों के लिए आवेदन और आबंटन पर कुल राशि प्राप्त हुई। फिर, इस राशि को अंश पूँजी खाते में ट्रांसफर कर दिया गया, जिससे कंपनी की पूँजी बढ़ गई।
🎯 Exam Tip: जब पूरी राशि आवेदन पर देय हो और सभी अंश सब्सक्राइब हो जाएँ, तो आवेदन और आबंटन के लिए एक संयुक्त खाता इस्तेमाल किया जा सकता है।
Question 4. राखी लि. का पंजीयन Rs 20,00,000 की अधिकृत पूँजी जोर Rs 100 वाले 12000 समता अंशों एवं Rs 100 वाले Rs 8000, 8% पूर्वाधिकार अंशों में विभाजित थी, से हुआ । कम्पनी ने 5000 समता अंश एवं 2000 पूर्वाधिकार अंश जनता को निम्न शर्तों पर प्रस्तावित किये। सभी अंशों के लिए आवेदन किया गया एवं बंटन किया गया । समस्त देय राशियाँ समय पर प्राप्त हो गई। राखी लि. की पुस्तकों में उक्त व्यवहारों को दर्ज करने के लिये आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये तथा अंश पूँजी को चिट्टे में प्रदर्शित कीजिये।
Answer: Journal of Rakhi Limited
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. ₹ | Amount Cr. ₹ |
|---|---|---|---|---|
| Date of App. | Bank A/c To Equity Share Application To Preference Share Application (5,000 समता अंशों और 2,000 पूर्वाधिकार अंशों पर 25 Rs प्रति अंश के हिसाब से आवेदन राशि प्राप्त हुई।) | 1,75,000 | 1,25,000 50,000 | |
| Date of App. | Equity Share Application A/c Preference Share Application A/c To Equity Share Capital A/c To Preference Share Capital A/c (दोनों तरह के अंशों की आवेदन राशि को उनकी पूँजी खातों में ट्रांसफर किया गया।) | 1,25,000 50,000 | 1,25,000 50,000 | |
| Date of Allot-ment | Equity Share Allotment A/c Preference Share Allotment A/c To Equity Share Capital A/c To Preference Share Capital A/c (दोनों तरह के अंशों पर आबंटन राशि देय हुई: समता अंशों पर 25 Rs और पूर्वाधिकार अंशों पर 45 Rs प्रति अंश।) | 1,25,000 90,000 | 1,25,000 90,000 | |
| Amount Rec. on Allot. | Bank A/c To Equity Share Allotment A/c To Preference Share Allotment A/c (दोनों तरह के अंशों पर आबंटन राशि प्राप्त हुई।) | 2,15,000 | 1,25,000 90,000 | |
| Amount Received of Ist Call | Equity Share Ist Call A/c Preference Share Ist Call A/c To Equity Share Capital A/c To Preference Share Capital A/c (दोनों तरह के अंशों पर पहली किश्त 30 Rs प्रति अंश के हिसाब से देय हुई।) | 1,50,000 60,000 | 1,50,000 60,000 | |
| Amount Received of Ist Call | Bank A/c To Equity Share Ist Call To Preference Share Ist Call (दोनों तरह के अंशों पर पहली किश्त प्राप्त हुई।) | 1,85,000 | 1,25,000 60,000 | |
| IInd and Final Call | Equity Share IInd & Final Call A/c To Equity Share Capital A/c (समता अंशों पर 25 Rs प्रति अंश के हिसाब से दूसरी और अंतिम किश्त देय हुई।) | 1,25,000 | 1,25,000 | |
| Amount Received on IInd Call | Bank A/c To Equity Share IInd Call A/c (समता अंशों पर दूसरी और अंतिम किश्त प्राप्त हुई।) | 1,25,000 | 1,25,000 |
**चिट्ठा (Balance Sheet) - अंश पूँजी का सार**
| Particulars | Note No. | Amount Current Year ₹ | Amount Previous Year ₹ |
|---|---|---|---|
| **1. Equity and Liabilities** (A) Shareholders Fund (1) Share Capital | 1 | 7,00,000 |
**टिप्पणी (Notes to Accounts)**
| Particulars | Amount ₹ |
|---|---|
| **1. Share Capital** Authorized Capital: 12000 Equity Shares of Rs 100 each 8000 Preference Share of Rs 100 each Issued Capital: 5000 Equity Shares of Rs 100 each 2000 Preference Shares of Rs 100 each Subscribed and Paid up Capital: 5000 Equity Shares @ Rs 100 each 2000 Preference Share @ Rs 100 each | 12,00,000 8,00,000 --- 5,00,000 2,00,000 --- 5,00,000 2,00,000 |
| **Total Share Capital** | **20,00,000** **7,00,000** **7,00,000** |
In simple words: राखी लिमिटेड ने समता और पूर्वाधिकार अंश जारी किए और उनके लिए आवेदन, आबंटन और कॉल्स की प्रविष्टियाँ दर्ज कीं, सभी राशियाँ समय पर प्राप्त हुईं। बैलेंस शीट में, अधिकृत पूँजी सबसे ऊपर दिखाई जाती है, फिर निर्गमित और प्रार्थित व चुकता पूँजी को दर्शाया जाता है।
🎯 Exam Tip: समता और पूर्वाधिकार अंशों के लिए प्रविष्टियाँ करते समय, सुनिश्चित करें कि प्रत्येक चरण (आवेदन, आबंटन, कॉल) के लिए राशि को सही पूंजी और प्रीमियम खातों में विभाजित किया गया है।
Question 5. गजेन्द्र लि. ने Rs 10 वाले 30000 समता अंश अभिदान के लिए जनता को प्रस्तावित किये। प्रति अंश राशि इस प्रकार देय थी-आवेदन पर Rs 3. बंटन पर Rs 4 तथा शेष आवश्यकता पड़ने पर। 50,000 अंशों के लिए प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। 10,000 अंशों के आवेदकों को कोई अंश बंटित नहीं किये, उनकी आवेदन राशि लौटा दी गई। शेष आवेदकों को अंशों का यथानुपात बंटन किया गया। आबंटन राशि समय पर प्राप्त हो गई। उक्त व्यवहारों की जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये तथा चिट्ठा तैयार कीजिये।
Answer: Journal of Gajendra Limited
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. ₹ | Amount Cr. ₹ |
|---|---|---|---|---|
| (1) | Bank A/c To Equity Share Application (50,000 समता अंशों पर 3 Rs प्रति अंश के हिसाब से आवेदन राशि प्राप्त हुई।) | 1,50,000 | 1,50,000 | |
| (2) | Equity Share Application A/c To Bank To Equity Share Capital (आवेदन राशि को पूँजी खाते में ट्रांसफर किया गया और 10,000 अंशों के आवेदकों की अतिरिक्त राशि वापस की गई।) | 1,20,000 | 30,000 90,000 | |
| (3) | Equity Share Allotment A/c To Equity Share Capital A/c (समता अंशों पर आबंटन राशि देय हुई।) | 1,20,000 | 1,20,000 | |
| (4) | Bank A/c Equity Share Application A/c To Equity Share Allotment A/c (आबंटन के लिए राशि प्राप्त हुई और आवेदन की अतिरिक्त राशि को आबंटन में एडजस्ट किया गया।) | 90,000 30,000 | 1,20,000 |
**चिट्ठे का उद्धरण (Extract of Balance Sheet)**
| Particulars | Note No. | Amount Current Year ₹ | Amount Previous Year ₹ |
|---|---|---|---|
| **1. Equity and Liabilities** (1) Share holder Fund (A) Share Capital | 2,10,000 2,10,000 | ||
| Issued Capital 30,000 Equity Shares @ Rs 10 each Subscribed & Paid up Cap. 30,000 Equity Share @ Rs 7 Called up | 3,00,000 2,10,000 |
In simple words: गजेंद्र लिमिटेड को 30,000 समता अंशों के लिए 50,000 आवेदन मिले। ज़्यादा आवेदन करने वालों को पैसे वापस किए गए और बाकी को प्रो-राटा आधार पर अंश दिए गए। आवेदन और आबंटन की जर्नल प्रविष्टियाँ दर्ज की गईं और बैलेंस शीट में अंश पूँजी को दिखाया गया।
🎯 Exam Tip: प्रो-राटा आबंटन के मामलों में, अतिरिक्त आवेदन राशि को आबंटन और भविष्य की कॉल्स में समायोजित करने के लिए जर्नल प्रविष्टियों को ध्यान से दर्ज करना महत्वपूर्ण है।
Question 6. सुरेश जिसके पास 2,000 अंश थे, प्रथम मांग राशि का भुगतान करने में असमर्थ रहा। रमेश जिसके पास 1,000 अंश थे, आबंटन और प्रथम व अंतिम माँग राशि का भुगतान करने में असमर्थ रहा। ललिता लि. की अधिकृत पूँजी Rs 10,00,000 थी, जो Rs 10 के 1,00,000 समता अंशों में विभाजित थी। कंपनी ने जनता को 11 Rs प्रति अंश पर 75,000 अंश जारी किए, जो इस प्रकार देय थे- आवेदन पर Rs 3, आबंटन पर Rs 4 (प्रीमियम सहित), और शेष पहली व अंतिम माँग पर। जनता से 70,000 अंशों के लिए आवेदन प्राप्त हुए। सभी राशियाँ समय पर प्राप्त हुईं, सिवाय रमेश (1,000 अंश) और सुरेश (2,000 अंश) के। उक्त व्यवहारों को कम्पनी की जर्नल एवं रोकड़ बही में दर्ज कीजिये तथा चिट्ठा तैयार करिये।
Answer: Journal of Lalita Limited
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. ₹ | Amount Cr. ₹ |
|---|---|---|---|---|
| Date of Appli-cation | Bank A/c To Equity Share Application A/c (70,000 अंशों पर 3 Rs प्रति अंश के हिसाब से आवेदन राशि प्राप्त हुई।) | 2,10,000 | 2,10,000 | |
| Date of Appli-cation | Equity Share Application A/c To Equity Share Capital A/c (आवेदन राशि को अंश पूँजी खाते में ट्रांसफर किया गया।) | 2,10,000 | 2,10,000 | |
| Date of Allot-ment | Equity Share Allotment A/c To Equity Share Capital A/c To Security Premium A/c (70,000 समता अंशों पर 4 Rs प्रति अंश (जिसमें 1 Rs प्रीमियम शामिल है) के हिसाब से आबंटन राशि देय हुई।) | 2,80,000 | 2,10,000 70,000 | |
| Date of Allot-ment | Bank A/c Calls in Arrears A/c To Equity Share Allotment A/c (आबंटन राशि प्राप्त हुई, रमेश के बकाया को छोड़कर।) | 2,76,000 4,000 | 2,80,000 | |
| Date of Ist Call | Equity Share Ist & Final Call A/c To Equity Share Capital A/c (70,000 समता अंशों पर 4 Rs प्रति अंश के हिसाब से पहली और अंतिम माँग राशि देय हुई।) | 2,80,000 | 2,80,000 | |
| Date of Ist Call | Bank A/c Calls in Arrears A/c To Equity Share Ist & Final Call A/c (पहली और अंतिम माँग राशि प्राप्त हुई, रमेश और सुरेश के बकाया को छोड़कर।) | 2,68,000 12,000 | 2,80,000 |
**चिट्ठा (Balance Sheet) - ललिता लिमिटेड**
| Particulars | Note No. | Figures of Current Year ₹ | Figures of Previous Year ₹ |
|---|---|---|---|
| **Equity and Liabilities** **1. Share holder's Fund** (A) Share Capital (B) Reserve and Surplus | 1 2 | 6,85,000 69,000 | |
| **Total** | **7,54,000** |
**टिप्पणी (Notes to Accounts)**
| Particulars | Amount ₹ |
|---|---|
| **1. Share Capital** Authorised Capital 1,00,000 Equity Shares @ Rs 10 each Issued, Subscribed and Paid up capital 75,000 equity shares issued @ Rs 10 each 70,000 Equity Shares Issued and called up @ Rs 10 each Less: Calls in Arrears | 10,00,000 7,50,000 7,00,000 15,000 |
| **Net Share Capital** | **6,85,000** |
| **2. Reserve & Surplus** Security Premium 70,000 @ 1 each share Less: Calls in Arrear | 70,000 1,000 |
| **Net Reserve & Surplus** | **69,000** |
In simple words: ललिता लिमिटेड ने अंश जारी किए और आवेदन, आबंटन और पहली व अंतिम कॉल की जर्नल प्रविष्टियाँ दर्ज कीं। रमेश और सुरेश नाम के दो अंशधारी अपनी कुछ देय राशियों का भुगतान नहीं कर पाए, जिसे बकाये के रूप में दिखाया गया है। कंपनी ने इन सभी लेन-देन को अपने जर्नल में रिकॉर्ड किया और एक चिट्ठा भी तैयार किया।
🎯 Exam Tip: बकाये वाली कॉल्स की गणना करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप अंश पूँजी और सिक्योरिटी प्रीमियम पर बकाये को अलग-अलग पहचानें और उन्हें बैलेंस शीट में सही ढंग से समायोजित करें।
Madhav Ltd. issued 60,000 shares of Rs 10 each to the public, which were payable as follows-on application Rs 2 (payable on 1st April, 2016) on allotment Rs 3 (payable on 1st June, 2016), on first call Rs 2.5 (payable on 1st September, 2016), and on second & final call Rs 2.5 (payable on 1st February, 2017). Applications were received for 1,00,000 shares & allotment was made as under. To applicants for 50,000 Shares Full; to applicants for 45,000 shares. 10,000 shares and to applicants for 5,000 shares nil. Excess money received on application was utilized towards allotment and subsequent calls. Interest on calls in advance was paid as per table F. Give journal entries to record the above transactions, assuming all amounts due were received in time.
Question 5. Give journal entries to record the above transactions, assuming all amounts due were received in time.
Answer:
Journal of Madhav Ltd.
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. | Amount Cr. |
|---|---|---|---|---|
| Rs | Rs | |||
| 2016 | ||||
| 1st April | Bank A/c To Equity Share Application A/c (Application money received on 1,00,000 app. @ Rs 2 each) | Dr. | 2,00,000 | 2,00,000 |
| Ist April | Equity Share Application A/c To Equity Share Capital A/c (Application money on 60,000 shares @ Rs 2 each transferred to capital A/c) | Dr. | 1,20,000 | 1,20,000 |
| Ist April | Equity Share Application A/c To Bank A/c (5000 application money @ Rs 2 each refunded) | Dr. | 10,000 | 10,000 |
| Ist June | Equity Share Allotment A/c To Equity Share Cap. A/c (Allotment money on 60,000 shares @ Rs 3 each due) | Dr. | 1,80,000 | 1,80,000 |
| 1 June | Bank A/c To Equity Share Allotment A/c (Allotment money received on 50,000 @ Rs 3 each) | Dr. | 1,50,000 | 1,50,000 |
| 1 Sep. | Equity share Ist call A/c To Equity share Capital A/c (Equity Share Ist call due cry. 60,000 share @ Rs 2.50) | Dr. | 1,50,000 | 1,50,000 |
| 1 Sep. | Call in Advance A/c Bank A/c To Equity Share Ist Call A/c (Equity share Istc call received and call in advance adjusted) | Dr. Dr. | 25,000 1,25,000 | 1,50,000 |
| 2017 | ||||
| Feb. 1 | Equity Share IInd Call A/c To Equity Share Cap. A/c (Equity share IInd call due on 6000 @ Rs 2.50 each) | Dr. | 1,50,000 | 1,50,000 |
| Feb. 1 (10) | Bank A/c Call in Advance A/c To Equity Share IInd Call A/c (Equity share IInd call received and call in advance adjusted) | Dr. Dr. | 1,35,000 15,000 | 1,50,000 |
| Feb. 1 | Interest on Calls in Advance A/c To Bank A/c (Interest on call in advance paid) | Dr. | 1,950 | 1,950 |
कार्यशील टिप्पणी-
अग्रिम माँग पर ब्याज की गणना
₹40,000 पर 3 माह की ब्याज \( = 40,000 \times \frac { 3 }{ 12 } \times \frac { 12 }{ 100 } = 1,200 \)
₹ 15,000 पर 5 माह की ब्याज \( = 15,000 \times \frac { 5 }{ 12 } \times \frac { 12 }{ 100 } = 750 \)
कुल अग्रिम माँग पर देय ब्याज \( = 1,950 \)
In simple words: These journal entries record the financial transactions for issuing shares, receiving application money, making allotments, and handling calls. It also includes adjusting for advance payments and calculating interest on calls-in-advance. This shows how the company accounts for all the money received from its shareholders over time.
🎯 Exam Tip: Always ensure you correctly allocate application money to share capital, premium, and calls in advance, and refund any excess, to avoid errors in journal entries.
Hindustan Ltd. issued 50,000 equity shares of Rs 10 each at Rs 2 per share premium, to the public, which were payable as follows:
On application and allotment Rs 5 per share (including premium)
On first call Rs 3.5 per share
On second and final call Rs 3.50 per share
Applications were received for 85,000 shares. Applicants for 10,000 shares were refused and application money thereon were returned. Shares were allotted to remaining applicants on pro rata basis. Allotment money was adjusted on the sums due on first call. First call was not received on 150 shares. Second and Final call money was not received on 400 shares. Give journal entries in the books of Hindustan Ltd. and show the share capital in the balance sheet.
Question 8. Give journal entries in the books of Hindustan Ltd. and show the share capital in the balance sheet.
Answer:
Journal of Hindustan Limited
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. | Amount Cr. |
|---|---|---|---|---|
| Rs | Rs | |||
| Date of Appli- & Allot-ment | Bank A/c To Equity Share Application A/c (Equity share app. money on 85000 Shares @ Rs 5 each including Rs 2 as premium.) | Dr. | 2,50,000 | 2,50,000 |
| Date of Appli- & Allot-ment | Equity Share Application A/c To Equity Share Cap. a/c To Security Premium A/c (Equity share app. money transfer to equity share capital A/c) | Dr. | 2,50,000 | 1,50,000 1,00,000 |
| Date of Allot-ment | Equity Share Application A/c To Bank A/c (On Excess application 10,000 @ Rs 5 each refunded) | Dr. | 50,000 | 50,000 |
| Date of Ist call | Equity Share Ist Call A/c To Equity Share Capital A/c (Equity share Ist call on 5000 equity Shares @ Rs 3.50 due) | Dr. | 1,75,000 | 1,75,000 |
| Date of Ist Call | Bank A/c Equity Share App. A/c To Equity Share Capital A/c (Amount received on Ist call and advance received on application money adjusted) | Dr. Dr. | 49,850 1,25,000 | 1,74,850 |
| Date of IInd Call | Equity Share IInd & Final Call A/c To Equity Share Capital A/c (Equity share IInd call due on 5,000 equity sharen @ Rs 3.50 each) | Dr. | 1,75,000 | 1,75,000 |
| Date of IInd Call | Bank A/c To Equity Share IInd Call A/c (Amount received on equity shares IInd & final call) | Dr. | 1,73,600 | 1,73,600 |
कार्यशील टिप्पणी-
(1) आबंटन राशि की गणना-
सुकेश ने 100 शेयर की आबंटन राशि नहीं दी-
अर्थात्
100 शेयर के लिये कुल आवेदन \( = \frac { 12,000 }{ 10,000 } \times 100 = 120 \)
120 आवेदन पर 3 की दर से \( = \text{Rs } 360 \) प्राप्त हुये
आवेदन पर 3 की दर से जमा \( = 300 \)
100 शेयर के आबंटन पर समायोजित की जाने वाली राशि \( = 60 \)
100 शेयर पर आबंटन राशि बकाया \( (100 \times 4) = 400 \)
आवेदन पर आधिक्य प्राप्त राशि का समायोजन \( = 60 \)
आबंटन पर बकाया (Calls in Arrear) \( = 340 \)
(2) Calls in Advance - अभिम माँग प्राप्त राशि की गणना ।
240 अंशों के लिए आवेदन पर आबंटित अंश \( = \frac { 10,000 }{ 12000 } \times 240 = 200 \) अंश
200 अंशों के धारकों ने आबंटन राशि के साथ ही प्रथम किश्त की राशि का अग्रिम भुगतान कर दिया
अर्थात्
Calls in Advance की राशि होगी। \( = 200 \times 4 = 800 \)
Hindustan Limited (Balance Sheet as at........)
| Particulars | Note No. | Current Year Figures Rs | Previous Year Figures Rs |
|---|---|---|---|
| Equity and Liabilities | |||
| 1. Share holders Fund (A) Share Capital (B) Reserve and Surplus | 1 2 | 4,98,450 1,00,000 | |
| 5,98,450 |
Notes to Accounts
| Amount Rs | |
|---|---|
| 1. Share Capital : Authorised Capital 30,000 @ 10 each Equity Shares | 3,00,000 |
| Issue, Subscribed and Paid up Capital 28,000 Equity Shares @ 10 each fully called up Less : Calls in Arrear | 2,80,000 34,000 2,46,000 |
| 2. Reserve and Surplus Security Premium Less : Calls In Arrear | 8,40,000 92,000 7,48,000 |
In simple words: This solution shows how to record all the transactions for issuing shares, from application to calls. It also presents the balance sheet extract, which helps to see the company's financial position at a glance. The working notes explain how specific amounts like calls in arrear were calculated.
🎯 Exam Tip: When preparing journal entries, clearly identify if a transaction involves a premium or discount, and ensure all application, allotment, and call monies are accounted for, including refunds and calls in arrears.
Rajesh Ltd. offered for subscription 30,000 equity shares of Rs 10 each at Rs 30 per share premium, to the public. Amount was payable as follows-on Application Rs 10 per share (including Rs 8 premium), on Allotment Rs 12 per share (including Rs 9 premium), on first and final call, balance amount. Applications were received for 28,000 shares. All calls were made and received accordingly, except from Hari who held 3,000 shares and could not pay allotment and call money, and Om who held 2,000 shares and could not pay call money. Give necessary journal entries in the books of Rajesh Ltd. and show the items in the Balance Sheet.
Question 9. Give necessary journal entries in the books of Rajesh Ltd. and show the items in the Balance Sheet.
Answer:
Journal of Rajesh Limited
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. | Amount Cr. |
|---|---|---|---|---|
| Rs | Rs | |||
| Date of Appli-cation | Bank A/c To Equity Share Application A/c (Application money on 28,000 equity shares @ Rs 10 each including Rs 8 as premium received) | Dr. | 2,80,000 | 2,80,000 |
| Date of Appli-cation | Equity Share Application A/c To Equity Share Capital A/c To Security Premium A/c (Application money transferred to capital A/c) | Dr. | 2,80,000 | 56,000 2,24,000 |
| Date of Allot-ment | Equity Share Allotment A/c To Equity Share Capital A/c To Security Premium (Allotment money on 28,000 equity share @ Rs 12 each share including Rs 9 as premium due) | Dr. | 3,36,000 | 84,000 2,52,000 |
| Date of Allot-ment | Bank A/c To Equity Share Allotment A/c (Amount received on allotment 3000 shareholdes did not pay) | Dr. | 3,00,000 | 3,00,000 |
| Date of Ist Call | Equity Share Ist & Final Call A/c To Equity Share Capital A/c To Security Premium A/c (Ist call on 28000 @ Rs 18 due including Rs 13 as a premium) | Dr. | 5,04,000 | 1,40,000 3,64,000 |
| Date of Ist Call | Bank A/c To Equity Share Ist and Final Call A/c (Equity share Ist and final call received, (3000 + 2000) equity share holders did not pay his Ist call) | Dr. | 4,14,000 | 4,14,000 |
Notes to Accounts
| Amount Rs | |
|---|---|
| 1. Share Capital : Authorised Capital 30,000 @ 10 each Equity Shares | 3,00,000 |
| Issue, Subscribed and Paid up Capital 28,000 Equity Shares @ 10 each fully called up Less : Calls in Arrear | 2,80,000 34,000 2,46,000 |
| 2. Reserve and Surplus Security Premium Less : Calls In Arrear | 8,40,000 92,000 7,48,000 |
In simple words: This solution records the full share issuance process, including how to handle over-subscription, pro-rata allotment, and calls in arrears from multiple shareholders. The balance sheet extract shows the final capital and reserve figures. It teaches how to deal with situations where some shareholders do not pay their dues.
🎯 Exam Tip: When dealing with multiple defaulters, carefully track each shareholder's outstanding amount for each call, as this impacts the total calls in arrears and final balance sheet figures.
Modern Ltd. offered to public 10,000 equity shares of Rs 10 each at Rs 11 per share. Amount was payable as follows-on Application Rs 3; on Allotment Rs 4 (including premium) and on first and final call Rs 4. Applications were received for 12,000 shares and directors allotted on pro rata basis. Rakesh, who applied for 240 shares paid call money along with allotment money. Sukesh to whom 100 shares were allotted paid allotment money along with call money. Give necessary journal entries.
Question 10. Give necessary journal entries.
Answer:
Journal of Modern Ltd.
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. | Amount Cr. |
|---|---|---|---|---|
| Rs | Rs | |||
| Date of Appli-cation | Bank A/c To Equity Share Application A/c (Application money on 12,000 equity shares @ Rs 3 each received) | Dr. | 30,000 | 30,000 |
| Date of Appli-cation | Equity Share Application A/c To Equity Share Capital A/c (Application money of 10,000 equity shares @ Rs 3 each transferred to capital A/c) | Dr. | 30,000 | 30,000 |
| Date of Allot-ment | Equity Share Allotment A/c To Equity Share Capital A/c To Security Premium A/c (Equity share allotment due on 10,000 shares @ Rs 4 each including Rs 1 as a premium) | Dr. | 40,000 | 30,000 10,000 |
| Date of Ist Call | Equity Share Ist Call A/c To Equity Share Capital A/c (Equity share Ist call on 10,000 shares @ Rs 4 due) | Dr. | 40,000 | 40,000 |
| Date of Ist Call | Bank A/c To Equity Share Ist Call A/c To Equity Share Allotment A/c (Being Ist on equity share fully received call in advance adjusted and allotment calls in arrear received with Ist call.) | Dr. | 39,540 | 39,200 340 |
कार्यशील टिप्पणी-
(1) आबंटन राशि की गणना-
सुकेश ने 100 शेयर की आबंटन राशि नहीं दी-
अर्थात्
100 शेयर के लिये कुल आवेदन \( = \frac { 12,000 }{ 10,000 } \times 100 = 120 \)
120 आवेदन पर 3 की दर से \( = \text{Rs } 360 \) प्राप्त हुये
आवेदन पर 3 की दर से जमा \( = 300 \)
100 शेयर के आबंटन पर समायोजित की जाने वाली राशि \( = 60 \)
100 शेयर पर आबंटन राशि बकाया \( (100 \times 4) = 400 \)
आवेदन पर आधिक्य प्राप्त राशि का समायोजन \( = 60 \)
आबंटन पर बकाया (Calls in Arrear) \( = 340 \)
(2) Calls in Advance - अभिम माँग प्राप्त राशि की गणना ।
240 अंशों के लिए आवेदन पर आबंटित अंश \( = \frac { 10,000 }{ 12000 } \times 240 = 200 \) अंश
200 अंशों के धारकों ने आबंटन राशि के साथ ही प्रथम किश्त की राशि का अग्रिम भुगतान कर दिया
अर्थात्
Calls in Advance की राशि होगी। \( = 200 \times 4 = 800 \)
In simple words: This solution demonstrates how to record journal entries for share issuance, particularly focusing on pro-rata allotment and handling advance payments for calls. It shows how application money can be adjusted against allotment and calls, which is a common practice in share issuance. The calculation notes clarify how oversubscription and advance calls are managed.
🎯 Exam Tip: When dealing with pro-rata allotments, always calculate the adjusted application money and determine how much is carried forward to subsequent calls or refunded.
Agram Ltd. offered 20,000 equity shares of Rs 10 each to the public for subscription, payable as follows: Rs 3 on application, Rs 4 on allotment, and Rs 3 on first and final call. Applications were received for 41,000 shares. Allotment was done as follows: applicants for 3,000 shares were not allotted any shares, applicants for 10,000 shares were allotted 100%, applicants for 12,000 shares were allotted 50%, and applicants for 16,000 shares were allotted 25%. Excess money received on application was utilized towards allotment and call money. Application money for those not allotted shares was refunded. All amounts were received on time. Give journal entries in the books of the company.
Question 11. Give journal entries in the books of the company.
Answer:
| Category | Share Applied | Share Allotted | Amount Received Rs 3 per share | Adjusted Towards | Refund | ||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Share Application @ Rs 3 | Allotment @ Rs 4 | Ist Call @ Rs 3 | |||||
| (A) | 3,000 | - | 3,000 | - | - | - | 9,000 |
| (B) | 10,000 | 10,000 | 30,000 | 30,000 | - | - | - |
| (C) | 12,000 | 6,000 | 36,000 | 18,000 | 18,000 | - | - |
| (D) | 16,000 | 4,000 | 48,000 | 12,000 | 16,000 | 12,000 | 8,000 |
| 34,000 | 12,000 | 17,000 |
Journal Entries:
| Particulars | Dr. | Cr. | |
|---|---|---|---|
| (1) | Bank A/c To Equity Share Application A/c (Application money received on 41,000 @ Rs 3 each) | 1,23,000 | 1,23,000 |
| (2) | Equity Share Application A/c To Equity Share Capital A/c (Application money on 20,000 equity shares @ Rs 3 each transferred to capital A/c) | 60,000 | 60,000 |
| (3) | Equity Share Application A/c To Bank A/c (Excess amount of Application on 16,000 Rs 8000 and 3000 applicant 9,000 not issue any share amount refunded) | 17,000 | 17,000 |
| (4) | Equity Share Allotment A/c To Equity Share Capital A/c (Equity share allotment on 20,000 @ Rs 4 each due) | 80,000 | 80,000 |
| (5) | Bank A/c To Equity Share Allotment A/c (Allotment on application adjusted) | 46,000 | 46,000 |
In simple words: This solution demonstrates the journal entries for a share issue with oversubscription and pro-rata allotment across various categories. It includes handling refunds for non-allotted shares and adjusting excess application money towards allotment and call payments. This process ensures accurate accounting of share capital.
🎯 Exam Tip: For oversubscribed issues with pro-rata allotment, always create a working table to calculate the adjusted application money for each category before preparing journal entries.
RBSE Class 12 Accountancy Chapter 5 कम्पनी लेखे: अंशों एवं ऋणपत्रों का निर्गमन
A company issued 25,000 Equity Shares of Rs 100 each to public. Amount on shares were payable as follows- (a) Rs 30 on application, (b) Rs 50 on allotment (including Rs 10 premium), (c) Rs 30 on first and final call. Applications were received for 60,000 shares. Applicants for 10,000 shares were not allotted any shares, and their application money was refunded. The remaining applicants were allotted shares on a pro-rata basis. Ganesh, who was allotted 250 shares, did not pay the first and final call money. All other shareholders paid on time. Give journal entries for the above transactions in the books of the company.
Question 12. Give journal entries for the above transactions in the books of the company.
Answer: The journal entries for this question continue on the next page.
In simple words: This question asks for recording all the steps of issuing shares, from receiving applications to collecting all call money, including how to handle oversubscription, pro-rata allotment, refunds, and unpaid call money. This is a comprehensive problem covering various aspects of share capital accounting.
🎯 Exam Tip: When dealing with pro-rata allotments and calls in arrears, it's crucial to calculate the exact amount adjusted at each stage and the outstanding amount for each shareholder accurately.
Question 12. एक कम्पनी ने प्रत्येक Rs 100 वाले 25,000 समता अंश जनता को निर्गमित किये। अंशों पर राशियाँ इस प्रकार देय थीं-
(क) प्रार्थना पत्र पर Rs 30,
(ख) बंटन पर Rs 50 (Rs 10 प्रीमियम सहित),
(ग) प्रथम एवं अन्तिम माँग पर Rs 30,60,000 अंशों के लिए आवेदन प्राप्त हुए।
10,000 अंशों के प्रार्थियों को कोई बंटन नहीं किया गया और उनकी आवेदन राशि लौटा दी गयी। शेष प्रार्थियों को यथानुपात बंटन किया गया। गणेश ने, जिसको 250 अंशों का बंटन किया गया था, प्रथम एवं अन्तिम माँग राशि नहीं चुकायी । अन्य सभी अंशधारियों ने समय पर भुगतान कर दिया। उपर्युक्त व्यवहारों की कम्पनी की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए।
Answer:
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| Date of Application | Bank A/c Dr. To Equity Share Application A/c (Application money received on 60,000 applications @ Rs 30 each) | 18,00,000 | 18,00,000 | |
| Date of Application | Equity Share Application A/c Dr. To Equity Share Capital A/c (Application money on 25,000 equity shares @ Rs 30 each transferred to capital A/c) | 7,50,000 | 7,50,000 | |
| Date of Application | Equity Share Application A/c Dr. To Bank A/c (Application money for 10,000 shares @ Rs 30 each returned to applicants) | 3,00,000 | 3,00,000 | |
| Date of Allotment | Equity Share Allotment A/c Dr. To Equity Share Capital A/c To Security Premium A/c (Allotment money due on 25,000 shares @ Rs 50 each including Rs 10 premium) | 12,50,000 | 10,00,000 2,50,000 | |
| Date of Allotment | Equity Share Application A/c Dr. To Equity Share Allotment A/c (Excess application money adjusted on allotment) | 7,50,000 | 7,50,000 | |
| Date of Allotment | Bank A/c Dr. To Equity Share Allotment A/c (Remaining allotment money received) | 5,00,000 | 5,00,000 | |
| Date of Ist Call | Equity Share Ist Call A/c Dr. To Equity Share Capital A/c (Equity share Ist call due on 25,000 shares @ Rs 30 each) | 7,50,000 | 7,50,000 | |
| Date of Ist Call | Bank A/c Dr. To Equity Share Ist Call A/c (Ist call amount received on 24,750 shares @ Rs 30 each, 250 shares not paid) | 7,42,500 | 7,42,500 |
In simple words: कम्पनी ने शेयर जारी किए और आवेदन, आबंटन और पहली कॉल पर पैसे मांगे। कुल 60,000 शेयरों के लिए आवेदन आए, जिसमें से 10,000 को अस्वीकार करके उनका पैसा वापस कर दिया गया। बचे हुए आवेदकों को 25,000 शेयर आनुपातिक रूप से दिए गए। गणेश नाम के एक शेयरधारक ने पहली कॉल का पैसा नहीं चुकाया, जबकि बाकी सभी ने समय पर भुगतान किया। इन सभी लेन-देन को जर्नल प्रविष्टियों में रिकॉर्ड किया गया है।
🎯 Exam Tip: ऐसे सवालों में सबसे पहले कुल आवेदन, आबंटित शेयर, अस्वीकृत शेयर और आनुपातिक आबंटन का हिसाब स्पष्ट रूप से कर लें। फिर प्रत्येक चरण पर प्राप्त और देय राशि की गणना सही ढंग से करें।
Question 13. Yatendra Ltd. issued 6,000, 11% Debentures of Rs 100 each to the public. Whole of the amount was payable on application on 1st July 2016. The company received applications for 8,000 debentures. The directors made pro-rata allotment on 31st July. Give necessary journal entries in the books of the company, if debentures are issued:
(i) at par
(ii) at 5% premium
(iii) at 4% discount.
Answer:
(i) यदि ऋणपत्रों का निर्गमन सम मूल्य पर हो (If debentures are issued at par)
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| 2016 Jul. 1 | Bank A/c Dr. To Debenture Application A/c (Debenture application money on 8,000 debentures @ Rs 100 each received) | 8,00,000 | 8,00,000 | |
| Jul. 1 | Debenture Application A/c Dr. To 11% Debenture A/c (Being debenture application money transferred to Debenture A/c for 6,000 debentures @ Rs 100 each) | 6,00,000 | 6,00,000 | |
| Jul. 1 | Debenture Application A/c Dr. To Bank A/c (Excess debenture application money returned to applicant) | 2,00,000 | 2,00,000 |
(ii) यदि ऋणपत्रों का 5% प्रीमियम पर निर्गमन हुआ हो (If debentures are issued at 5% premium)
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| 2016 Jul. 1 | Bank A/c Dr. To 11% Debentures Application A/c (Debenture application money on 8,000 debentures @ Rs 100 each at a premium of 5% received) | 8,40,000 | 8,40,000 | |
| Jul. 1 | 11% Debenture Application A/c Dr. To 11% Debenture A/c To Security Premium A/c (Application money on 6,000 shares @ Rs 100 at 5% premium transferred to deb. and sec. pre. A/c) | 6,30,000 | 6,00,000 30,000 | |
| Jul. 1 | Debenture Application A/c Dr. To Bank A/c (Excess money of debenture application returned to applicant) | 2,10,000 | 2,10,000 |
(iii) यदि ऋणपत्रों का 4% बट्टे पर निर्गमन हुआ हो (If debentures are issued at 4% discount)
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| 2016 July 1 | Bank A/c Dr. To 11% Debenture Application A/c (Debenture application amount received on 8,000 shares @ Rs 100 at a 4% discount) | 7,68,000 | 7,68,000 | |
| July 1 | Debenture Application A/c Dr. Discount on Issue of Debenture A/c Dr. To 11% Debenture A/c (Application money transferred to 11% debenture A/c on 6,000 shares @ Rs 100 each at a 4% discount) | 5,76,000 24,000 | 6,00,000 | |
| July 1 | Debenture Application A/c Dr. To Bank A/c (Excess of debenture application amount returned to applicant) | 1,92,000 | 1,92,000 |
In simple words: यह सवाल बताता है कि कैसे एक कंपनी ऋणपत्र जारी करती है, कभी बराबर मूल्य पर, कभी प्रीमियम पर और कभी छूट पर। जब ज्यादा आवेदन आते हैं तो अतिरिक्त पैसे या तो वापस कर दिए जाते हैं या आनुपातिक आबंटन के साथ समायोजित किए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: ऋणपत्रों के निर्गमन के समय प्रीमियम या बट्टे की राशि को सही ढंग से जोड़ना या घटाना महत्वपूर्ण है, और जर्नल प्रविष्टियों में इसे अलग से दिखाना चाहिए। आवेदन से अधिक राशि होने पर, वापसी या समायोजन के लिए प्रविष्टियाँ भी याद रखें।
Question 14. Tanmay Ltd. issued 2,000, 9% debentures of Rs 100 each at 20% premium, payable as follows: Rs 40 on application, Rs 45 (including premium) on allotment and balance on first and final call. Applications were received for 4,000 debentures. Applicants for 1,000 debentures were refused to allot debentures and 2,000 debentures were allotted among remaining applicants. Excess application money was adjusted on allotment. All the amount was received in time. Give necessary journal entries.
Answer:
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| Date of Application | Bank A/c Dr. To 9% Debenture Application A/c (Application money received on 4,000 applications @ Rs 40 each) | 1,60,000 | 1,60,000 | |
| Date of Application | Debenture Application A/c Dr. To 9% Debenture A/c (Application money on 2,000 debentures @ Rs 40 each transferred to 9% debenture A/c) | 80,000 | 80,000 | |
| Date of Application | Debenture Application A/c Dr. To Bank A/c (Excess application money on 1,000 debentures @ Rs 40 each returned to applicant) | 40,000 | 40,000 | |
| Date of Allotment | Debenture Allotment A/c Dr. To 9% Debenture A/c To Security Premium A/c (Debenture allotment money due @ Rs 45 including premium @ Rs 20 each share) | 90,000 | 50,000 40,000 | |
| Date of Allotment | Debenture Application A/c Dr. To Debenture Allotment A/c (Excess amount on application adjusted on debenture allotment) | 40,000 | 40,000 | |
| Date of Allotment | Bank A/c Dr. To Debenture Allotment A/c (Debenture allotment money received) | 50,000 | 50,000 | |
| Date of Ist Call | Debenture Ist Call A/c Dr. To 9% Debenture A/c (Debenture Ist call due on 2,000 debentures @ Rs 35 each) | 70,000 | 70,000 | |
| Date of Ist Call | Bank A/c Dr. To Debenture Ist Call A/c (Debenture Ist call amount received) | 70,000 | 70,000 |
In simple words: तन्मय लिमिटेड ने प्रीमियम पर ऋणपत्र जारी किए और आवेदन, आबंटन तथा कॉल पर राशि ली। उन्हें 4,000 ऋणपत्रों के लिए आवेदन मिले, लेकिन केवल 2,000 ऋणपत्र ही जारी किए। 1,000 आवेदनों को अस्वीकार करके उनका पैसा वापस कर दिया गया। शेष आवेदनों को आनुपातिक आधार पर आबंटन किया गया और अतिरिक्त आवेदन राशि को आबंटन पर समायोजित किया गया। सभी भुगतान समय पर प्राप्त हो गए, और इन सभी लेन-देन के लिए जर्नल प्रविष्टियाँ दर्ज की गईं।
🎯 Exam Tip: आनुपातिक आबंटन वाले प्रश्नों में, अतिरिक्त आवेदन राशि को सही ढंग से समायोजित करना महत्वपूर्ण है, पहले आबंटन और फिर यदि आवश्यक हो तो कॉल के लिए। प्रत्येक चरण पर देय और प्राप्त राशि की गणना में सटीकता सुनिश्चित करें।
Question 15. राकेश लि. ने 1 अप्रैल, 2016 को Rs 8,00,000 के 12% ऋणपत्र जनता को प्रस्तावित किये प्रत्येक Rs 100 वाला, सम्पूर्ण भुगतान आवेदन पर 01 मई 2016 को या इससे पूर्व देय था। निर्गमन की शर्तों के अनुसार ऋणपत्रों पर ब्याज का भुगतान छमाही आधार पर प्रतिवर्ष 30 सितम्बर व 31 मार्च को 10% आयकर काटकर किया जायेगा । जनता से 8,000 ऋणपत्रों के लिए प्रस्ताव आये । कम्पनी ने 01 जून 2016 को बंटन किया । कम्पनी की पुस्तकों में वर्ष 2016-17 में ब्याज के भुगतान एवं लाभ-हानि विवरण में अन्तरण की प्रविष्टियाँ दीजिये।
Answer:
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| 30 Sep. 2016 | Debenture Interest A/c Dr. To Debenture Holder To Tax Deducted at Source A/c (Being debenture interest due for half year and income tax deducted) | 40,000 | 36,000 4,000 | |
| 30 Sep. | Debenture Holder A/c Dr. Tax Deducted at source A/c Dr. To Bank A/c (Being debenture interest and income tax paid) | 36,000 4,000 | 40,000 | |
| 31 Mar. 2017 | Debenture Interest A/c Dr. To Debenture Holder To Tax Deducted at Source A/c (Being debenture interest due for half year and income tax deducted) | 40,000 | 36,000 4,000 | |
| 31st March | Debenture Holders A/c Dr. Tax Deducted at Source A/c Dr. To Bank A/c (Being debenture interest and income tax paid) | 36,000 4,000 | 40,000 | |
| 31st March | Statement of P & L A/c Dr. To Debenture Interest A/c (Being total debenture interest transferred to Profit & Loss A/c) | 80,000 | 80,000 |
In simple words: राकेश लिमिटेड ने ऋणपत्रों पर ब्याज का भुगतान साल में दो बार किया, जिसमें से कुछ राशि आयकर के रूप में काट ली गई। कुल ब्याज को फिर लाभ-हानि खाते में स्थानांतरित कर दिया गया।
🎯 Exam Tip: ऋणपत्र ब्याज के भुगतान में हमेशा TDS (स्रोत पर कर कटौती) का ध्यान रखें। ब्याज को देय और भुगतान की प्रविष्टियों के साथ-साथ वर्ष के अंत में लाभ-हानि खाते में स्थानांतरित करना न भूलें।
Question 16. विष्णु लि. ने विपिन से Rs 12,00,000 की सम्पत्ति एवं Rs 1,92,000 के दायित्वों के साथ चालू व्यापार खरीदा। क्रय प्रतिफल का भुगतान 7% ऋणपत्रों Rs 100 प्रत्येक की दर से निर्गमित करके किया गया। विष्णु लि. की पुस्तकों में व्यापार खरीदने तथा ऋणपत्रों के निर्गमन के लिए आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये, यदि ऋणपत्र निर्गमित किये जाते हैं (A) सममूल्य पर (B) 5% प्रीमियम पर (C) 4% बट्टे पर।
Answer:
क्रय प्रतिफल की गणना (Calculation of Purchase Consideration):
संपत्ति (Assets) = Rs 12,00,000
दायित्व (Liabilities) = Rs 1,92,000
शुद्ध संपत्ति (Net Assets) = Rs 12,00,000 - Rs 1,92,000 = Rs 10,08,000
अतः, क्रय प्रतिफल (Purchase Consideration) = Rs 10,08,000
व्यापार खरीदने के लिए जर्नल प्रविष्टि (Journal Entry for Business Purchase):
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| Date of Purchase | Assets A/c Dr. To Liabilities A/c To Vipin (Being assets and liabilities of Vipin purchased for Rs 10,08,000) | 12,00,000 | 1,92,000 10,08,000 |
(A) यदि ऋणपत्रों का निर्गमन सममूल्य पर हो (If debentures are issued at par)
ऋणपत्रों की संख्या (Number of Debentures) = Rs 10,08,000 / Rs 100 = 10,080 ऋणपत्र
| Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|
| Vipin Dr. To 7% Debenture A/c (Being 10,080, 7% debentures of Rs 100 each issued at par to Vipin) | 10,08,000 | 10,08,000 |
(B) यदि ऋणपत्रों का 5% प्रीमियम पर निर्गमन हो (If debentures are issued at 5% premium)
निर्गमन मूल्य प्रति ऋणपत्र (Issue Price per Debenture) = Rs 100 + 5% प्रीमियम = Rs 105
ऋणपत्रों की संख्या (Number of Debentures) = Rs 10,08,000 / Rs 105 = 9,600 ऋणपत्र
| Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|
| Vipin Dr. To 7% Debenture A/c To Security Premium A/c (Being 9,600, 7% debentures of Rs 100 each issued to Vipin at 5% premium) | 10,08,000 | 9,60,000 48,000 |
(C) यदि ऋणपत्रों का 4% बट्टे पर किया जावे (If debentures are issued at 4% discount)
निर्गमन मूल्य प्रति ऋणपत्र (Issue Price per Debenture) = Rs 100 - 4% बट्टा = Rs 96
ऋणपत्रों की संख्या (Number of Debentures) = Rs 10,08,000 / Rs 96 = 10,500 ऋणपत्र
| Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|
| Vipin Dr. Discount on Issue of Debenture A/c Dr. To 7% Debenture A/c (Being 10,500, 7% debentures of Rs 100 each issued to Vipin at a 4% discount) | 10,08,000 42,000 | 10,50,000 |
In simple words: विष्णु लिमिटेड ने विपिन का व्यवसाय खरीदा और क्रय प्रतिफल का भुगतान 7% ऋणपत्र जारी करके किया। ऋणपत्रों को सममूल्य, प्रीमियम या बट्टे पर जारी किया जा सकता है। प्रत्येक स्थिति में, जारी किए जाने वाले ऋणपत्रों की संख्या और जर्नल प्रविष्टियाँ अलग-अलग होंगी।
🎯 Exam Tip: व्यापार खरीदने पर देय क्रय प्रतिफल की गणना हमेशा शुद्ध संपत्ति (संपत्ति - दायित्व) से करें। ऋणपत्रों के निर्गमन मूल्य की गणना करते समय प्रीमियम जोड़ें और बट्टा घटाएँ, ताकि सही संख्या में ऋणपत्र जारी किए जा सकें।
Question 17. गजेन्द्र लि. ने बैंक ऑफ इण्डिया से Rs 5,00,000 का ऋण लिया तथा समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में Rs 6,00,000 के 7% ऋणपत्र बैंक के पास रखे। गजेन्द्र लि, की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये तथा चिट्ठा बनाइये । यदि
1. समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में निर्गमित ऋणपत्रों की प्रविष्टि नहीं की जाती है।
2. यदि ऋणपत्र निर्गमन पर प्रविष्टि की जाती है।
Answer:
1. यदि समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में निर्गमित ऋणपत्रों की प्रविष्टि नहीं की जाती है। (If no entry is passed for issue of debentures as collateral security)
जर्नल प्रविष्टियाँ (Journal Entries):
| Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|
| Bank A/c Dr. To Bank Loan A/c (Being bank loan taken) | 5,00,000 | 5,00,000 |
चिट्ठा (Balance Sheet) - अंशपूंजी एवं दायित्व (Equity and Liabilities):
| Particulars | Note No. | Figures for the Current Year (Rs) |
|---|---|---|
| Equity and Liabilities | ||
| Non-Current Liabilities | ||
| (A) Long term Loan | 5,00,000 | |
| (Bank Loan of Rs 5,00,000 from Bank of India, secured by 7% Debentures of Rs 6,00,000 as collateral security) | ||
| Assets | ||
| Current Assets | 5,00,000 | |
| (D) Cash and Cash Equivalents | 5,00,000 |
2. यदि ऋणपत्र निर्गमन पर प्रविष्टि की जाती है। (If entry is passed for issue of debentures as collateral security)
जर्नल प्रविष्टियाँ (Journal Entries):
| Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|
| Bank A/c Dr. To Bank Loan A/c (Being bank loan taken) | 5,00,000 | 5,00,000 | |
| Debenture Suspense A/c Dr. To 7% Debenture A/c (7% Debentures of Rs 6,00,000 issued as collateral security) | 6,00,000 | 6,00,000 |
चिट्ठा नोट्स (Balance Sheet Notes) - दीर्घकालिक ऋण (Long Term Borrowings):
| Notes to Accounts | Amount (Rs) |
|---|---|
| 1. Long Term Borrowings- 7% Debenture Less: Debenture Suspense Bank Loan (Secured by 7% Debenture) | 6,00,000 (6,00,000) 5,00,000 -------- 5,00,000 |
In simple words: गजेन्द्र लिमिटेड ने बैंक से Rs 5,00,000 का ऋण लिया और Rs 6,00,000 के ऋणपत्रों को जमानत के तौर पर रखा। जब ऋणपत्रों को सिर्फ जमानत के लिए दिया जाता है, तो या तो कोई अलग प्रविष्टि नहीं की जाती और यह जानकारी चिट्ठे में नोट के रूप में दी जाती है, या फिर 'ऋणपत्र सस्पेंस खाते' का उपयोग करके जर्नल प्रविष्टि की जाती है, जिसका शुद्ध प्रभाव यह होता है कि केवल ऋण को ही मुख्य दायित्व के रूप में दिखाया जाता है।
🎯 Exam Tip: समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्र जारी करने पर दो विधियाँ अपनाई जाती हैं - एक में कोई प्रविष्टि नहीं होती, और दूसरी में 'ऋणपत्र सस्पेंस खाता' खोला जाता है। चिट्ठे में इसका प्रस्तुतीकरण सही ढंग से करना महत्वपूर्ण है ताकि ऋण की प्रकृति स्पष्ट रहे।
Question 18. Satish Ltd. issued 8% debentures of Rs 6,00,000 as follows:
1. 8% Debentures of Rs 3,00,000 at 25% premium for cash.
2. a computer of Rs 1,25,000 purchased from Arnav Ltd., for the consideration of it, issued 8% debentures with a nominal value of Rs 1,50,000.
3. taken a loan of Rs 1,00,000 from bank-deposited to the bank 8% debentures of Rs 1,50,000 as collateral security.
Give journal entries in the books of Satish Ltd. and prepare balance sheet.
Answer:
सतीश लिमिटेड की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियाँ (Journal Entries in the books of Satish Ltd.):
1. नकद के लिए 25% प्रीमियम पर Rs 3,00,000 के 8% ऋणपत्रों का निर्गमन (Issue of 8% Debentures of Rs 3,00,000 at 25% premium for cash):
प्रीमियम = 25% of Rs 3,00,000 = Rs 75,000
प्राप्त कुल राशि = Rs 3,00,000 + Rs 75,000 = Rs 3,75,000
| Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|
| Bank A/c Dr. To 8% Debenture A/c To Security Premium A/c (Being 8% Debentures of Rs 3,00,000 issued at 25% premium for cash) | 3,75,000 | 3,00,000 75,000 |
2. अर्नव लिमिटेड से Rs 1,25,000 का कंप्यूटर खरीदा और Rs 1,50,000 के 8% ऋणपत्र जारी किए (Computer of Rs 1,25,000 purchased from Arnav Ltd., issued 8% debentures of Rs 1,50,000):
बट्टा (Discount) = Rs 1,50,000 - Rs 1,25,000 = Rs 25,000
| Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|
| Computer A/c Dr. To Arnav Ltd. (Computer purchased from Arnav Ltd.) | 1,25,000 | 1,25,000 | |
| Arnav Ltd. A/c Dr. Discount on Issue of Debenture A/c Dr. To 8% Debenture A/c (8% Debentures of Rs 1,50,000 issued to Arnav at a discount of Rs 25,000) | 1,25,000 25,000 | 1,50,000 |
3. बैंक से Rs 1,00,000 का ऋण लिया और Rs 1,50,000 के 8% ऋणपत्रों को समपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में जमा किया (Loan of Rs 1,00,000 from bank-deposited 8% debentures of Rs 1,50,000 as collateral security):
| Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|
| Bank A/c Dr. To Bank Loan A/c (Bank loan taken from bank) | 1,00,000 | 1,00,000 | |
| Debenture Suspense A/c Dr. To 8% Debenture A/c (8% Debentures deposited as collateral security) | 1,50,000 | 1,50,000 |
सतीश लिमिटेड का चिट्ठा (Balance Sheet of Satish Ltd.):
| I. Equity and Liabilities | Note No. | Current Year (Rs) |
|---|---|---|
| 1. Shareholder's Funds | ||
| (b) Reserves and Surplus | 1 | 75,000 |
| 3-Non Current Liabilities | ||
| Long Term Loan | 2 | 5,50,000 |
| Total Equity and Liabilities | 6,25,000 | |
| II. Assets | ||
| Non-Current Assets | ||
| Fixed Assets | 1,25,000 | |
| Other Non-Current Assets | 3 | 25,000 |
| Current Assets | ||
| Cash and Cash Equivalents | 4,75,000 | |
| Total Assets | 6,25,000 |
Notes to Accounts:
| Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|
| 1. Reserves and Surplus Security Premium (from Q18(1)) | 75,000 |
| 2. Long Term Borrowings 8% Debenture (for cash and to vendor) Rs 3,00,000 + Rs 1,50,000 = Bank Loan (Secured by Rs 1,50,000, 8% Debentures) Less: Debenture Suspense (for collateral security) | 4,50,000 1,00,000 (1,50,000) -------- 5,50,000 |
| 3. Other Non-Current Assets Discount on Issue of Debentures (from Q18(2)) | 25,000 |
In simple words: सतीश लिमिटेड ने अलग-अलग उद्देश्यों के लिए ऋणपत्र जारी किए: नकद के लिए प्रीमियम पर, कंप्यूटर खरीदने के लिए बट्टे पर, और बैंक ऋण के लिए जमानत के तौर पर। इन सभी लेन-देन को जर्नल प्रविष्टियों और चिट्ठे में ठीक से दर्ज किया गया है, यह दिखाते हुए कि प्रत्येक प्रकार का निर्गमन कंपनी की वित्तीय स्थिति को कैसे प्रभावित करता है।
🎯 Exam Tip: ऋणपत्रों के निर्गमन के विभिन्न उद्देश्यों (नकद, संपत्ति, समपार्श्विक प्रतिभूति) और शर्तों (प्रीमियम, बट्टा) को ध्यान से समझें। चिट्ठे में सिक्योरिटी प्रीमियम को रिजर्व और सरप्लस में, बट्टा या हानि को अन्य गैर-चालू संपत्तियों में और बैंक ऋण को दीर्घकालिक ऋण में दिखाना सुनिश्चित करें।
Question 19. निम्नलिखित परिस्थितियों में ऋणपत्रों के निर्गमन की आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिये:
1. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 1000, 12% ऋणपत्र सम मूल्य पर निर्गमित किये जो सममूल्य पर शोध्य हैं।
2. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 2000, 8% ऋणपत्र पर 10% बट्टे पर निर्गमित किये जो सममूल्य पर शोध्य हैं।
3. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 5000, 7% ऋणपत्र 5% प्रीमियम पर निर्गमित किये जो सम मूल्य पर शोध्य हैं।
4. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 3000, 6% ऋणपत्र सम मूल्य पर निर्गमित किये जो 5% प्रीमियम पर शोध्य हैं।
5. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 4000, 8% ऋणपत्र 2% बट्टे पर निर्गमित किये जो 6% प्रीमियम पर शोध्य हैं।
6. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 5000, 7% ऋणपत्र 5% बट्टे पर निर्गमित किये जो 6% प्रीमियम पर शोध्य हैं।
Answer:
1. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 1000, 12% ऋणपत्र सम मूल्य पर निर्गमित किये जो सममूल्य पर शोध्य हैं। (A company issued 1000, 12% debentures of Rs 100 each at par, redeemable at par.)
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| Date of Receipt | Bank A/c Dr. To Debenture Application and Allotment A/c (Amount received for issue of 1000 debentures) | 1,00,000 | 1,00,000 | |
| Date of Allotment | Debenture Application and Allotment A/c Dr. To 12% Debenture A/c (Amount received on debenture application transferred to debenture account) | 1,00,000 | 1,00,000 |
2. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 2000, 8% ऋणपत्र पर 10% बट्टे पर निर्गमित किये जो सममूल्य पर शोध्य हैं। (A company issued 2000, 8% debentures of Rs 100 each at 10% discount, redeemable at par.)
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| Date of Receipt | Bank A/c Dr. To Debenture Application and Allotment A/c (Amount received for issue of 2000 debentures) | 1,80,000 | 1,80,000 | |
| Date of Allotment | Debenture Application and Allotment A/c Dr. Discount on Issue of Debenture A/c Dr. To 8% Debenture A/c (Amount of issue of debenture transferred to 8% debenture A/c) | 1,80,000 20,000 | 2,00,000 |
3. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 5000, 7% ऋणपत्र 5% प्रीमियम पर निर्गमित किये जो सम मूल्य पर शोध्य हैं। (A company issued 5000, 7% debentures of Rs 100 each at 5% premium, redeemable at par.)
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| Date of Receipts | Bank A/c Dr. To Debenture Application and Allotment A/c (Amount received for Issue of 5000 Debentures at 5% premium) | 5,25,000 | 5,25,000 | |
| Date of Allotment | Debenture Application and Allotment A/c Dr. To 7% Debenture A/c To Security Premium A/c (Application money & security premium transferred to 7% debenture A/c) | 5,25,000 | 5,00,000 25,000 |
4. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 3000, 6% ऋणपत्र सम मूल्य पर निर्गमित किये जो 5% प्रीमियम पर शोध्य हैं। (A company issued 3000, 6% debentures of Rs 100 each at par, redeemable at 5% premium.)
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| Date of Receipts | Bank A/c Dr. To Debenture Application and Allotment A/c (Amount received for issue of 3000 Debentures) | 3,00,000 | 3,00,000 | |
| Date of Allotment | 6% Debenture Application & Allotment A/c Dr. Loss on Issue of Debenture A/c Dr. To 6% Debenture A/c To Premium on Redemption of Debentures A/c (Application money transferred to 6% debenture A/c and provision made for redemption premium) | 3,00,000 15,000 | 3,00,000 15,000 |
5. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 4000, 8% ऋणपत्र 2% बट्टे पर निर्गमित किये जो 6% प्रीमियम पर शोध्य हैं। (A company issued 4000, 8% debentures of Rs 100 each at 2% discount, redeemable at 6% premium.)
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| Debenture Application and Allotment A/c Dr. Discount on Issue of Debentures A/c Dr. Loss on Issue of Debenture A/c Dr. To 8% Debenture A/c To Premium on Redemption of Debenture A/c (Amount received on application transferred to debenture A/c & provision made for redemption) | 3,92,000 8,000 24,000 | 4,00,000 24,000 |
6. एक कम्पनी ने Rs 100 वाले 5000, 7% ऋणपत्र 5% बट्टे पर निर्गमित किये जो 6% प्रीमियम पर शोध्य हैं। (A company issued 5000, 7% debentures of Rs 100 each at 5% discount, redeemable at 6% premium.)
| Date | Particulars | L.F. | Amount Dr. (Rs) | Amount Cr. (Rs) |
|---|---|---|---|---|
| Bank A/c Dr. To Debenture Application & Allotment A/c (Amount received for issue of 5000 Debentures at 5% discount) | 4,75,000 | 4,75,000 | ||
| Debenture Application & Allotment A/c Dr. Loss on Issue of Debentures A/c Dr. To 7% Debenture A/c To Premium on Redemption of Debentures A/c (Application money transferred to debenture A/c and provision made for redemption) | 4,75,000 55,000 | 5,00,000 30,000 |
In simple words: यह प्रश्न विभिन्न स्थितियों में ऋणपत्र जारी करने के तरीकों को दर्शाता है। ऋणपत्रों को सममूल्य पर, प्रीमियम पर या बट्टे पर जारी किया जा सकता है, और उन्हें सममूल्य पर या प्रीमियम पर भुनाया जा सकता है। प्रत्येक स्थिति में, बट्टे और शोधन पर प्रीमियम से होने वाले नुकसान को जर्नल प्रविष्टियों में ठीक से दर्ज किया जाता है।
🎯 Exam Tip: ऋणपत्रों के निर्गमन और शोधन की शर्तों को ध्यान से समझें। जब ऋणपत्र बट्टे पर जारी किए जाते हैं या प्रीमियम पर शोध्य होते हैं, तो 'ऋणपत्र के निर्गमन पर हानि' खाते का उपयोग करके हानि को दर्ज करना महत्वपूर्ण है।
Question 20. राकेश लि. ने 1 अप्रैल, 2016 को Rs 8,00,000 के 12% ऋणपत्र जनता को प्रस्तावित किये प्रत्येक Rs 100 वाला, सम्पूर्ण भुगतान आवेदन पर 01 मई 2016 को या इससे पूर्व देय था। निर्गमन की शर्तों के अनुसार ऋणपत्रों पर ब्याज का भुगतान छमाही आधार पर प्रतिवर्ष 30 सितम्बर व 31 मार्च को 10% आयकर काटकर किया जायेगा । जनता से 8,000 ऋणपत्रों के लिए प्रस्ताव आये । कम्पनी ने 01 जून 2016 को बंटन किया । कम्पनी की पुस्तकों में वर्ष 2016-17 में ब्याज के भुगतान एवं लाभ-हानि विवरण में अन्तरण की प्रविष्टियाँ दीजिये।
Answer:
जर्नल प्रविष्टियाँ (Journal Entries)
| Date | Particulars | Dr. Rs | Cr. Rs |
|---|---|---|---|
| 30 Sep. 2016 | Debenture Interest A/c Dr. To Debenture Holder To Tax Deducted at Source A/c (Being debenture interest due and income tax deducted) | 40,000 | 36,000 4,000 |
| 30 Sep. | Debenture Holder A/c Dr. Tax Deducted at source A/c Dr. To Bank (Being deb. int. and income tax paid) | 36,000 4,000 | 40,000 |
| 31 Mar. | Debenture Interest A/c Dr. To Debenture Holder To Tax Deducted at Source A/c (Being debenture interest due and income tax deducted) | 40,000 | 36,000 4,000 |
| 31st March | Debenture Holders A/c Dr. Tax Deducted at Source A/c Dr. To Bank (Being deb. int. and income tax paid) | 36,000 4,000 | 40,000 |
| 31st March | Statement of P & L A/c Dr. To Debenture Interest (Being amount of debenture interest transferred to P & L A/c) | 80,000 | 80,000 |
In simple words: This question shows how a company records interest payments on debentures and how tax is deducted from them. The interest is paid every six months, and the total interest for the year is then moved to the profit and loss statement. Debentures are a key way for companies to borrow money, and paying regular interest builds trust with lenders.
🎯 Exam Tip: Remember to account for both the interest payable and the tax deducted at source separately. Make sure to transfer the full year's debenture interest to the Statement of Profit and Loss at the year-end.
Question 21. Z लि. ने 1 अप्रैल, 2015 को Rs 100 वाले 5000 12% ऋणपत्र 4% बट्टे पर निर्गमित किये। ऋणपत्रों का शोधन Rs 1,00,000 की वार्षिक किस्तों में 31 मार्च, 2017 से प्रारम्भ किया गया। प्रतिवर्ष अपलिखित की जाने वाली बट्टे की राशि की गणना कीजिये और कम्पनी की पुस्तकों में बट्टा खाता बनाइये।
Answer:
प्रतिवर्ष अपलिखित की जाने वाली बट्टे की राशि की गणना (Calculation of Annual Discount Written Off)
| वर्ष का अन्त (Year End) | बकाया ऋणपत्र (Outstanding Debentures) Rs | इकाइयाँ (Units) | अपलिखित बट्टा (Discount Written Off) Rs |
|---|---|---|---|
| 31.3.2017 | 5,00,000 | 5 | \( 20,000 \times \frac{5}{20} = 5,000 \) |
| 31.3.2018 | 4,00,000 | 4 | \( 20,000 \times \frac{4}{20} = 4,000 \) |
| 31.3.2019 | 3,00,000 | 3 | \( 20,000 \times \frac{3}{20} = 3,000 \) |
| 31.3.2020 | 2,00,000 | 2 | \( 20,000 \times \frac{2}{20} = 2,000 \) |
| 31.3.2021 | 1,00,000 | 1 | \( 20,000 \times \frac{1}{20} = 1,000 \) |
| कुल योग (Total) | 15 | 15,000 | |
ऋणपत्रों पर बट्टा खाता (Discount on Debentures Account)
| Date | Particulars | J.F. | Amount Dr. Rs | Date | Particulars | J.F. | Amount Cr. Rs |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1.4.2017 | To Balance b/d | 15,000 | 31.3.2018 | By Statement of P & L | 5,000 | ||
| By Balance c/d | 10,000 | ||||||
| 15,000 | 15,000 | ||||||
| 1.4.2018 | To Balance b/d | 10,000 | 31.3.2019 | By Statement of P & L | 4,000 | ||
| By Balance c/d | 6,000 | ||||||
| 10,000 | 10,000 | ||||||
| 1.4.2019 | To Balance b/d | 6,000 | 31.3.2020 | By Statement of P & L | 3,000 | ||
| By Balance c/d | 3,000 | ||||||
| 6,000 | 6,000 | ||||||
| 1.4.2020 | To Balance b/d | 3,000 | 31.3.2021 | By Statement of P & L | 2,000 | ||
| By Balance c/d | 1,000 | ||||||
| 3,000 | 3,000 | ||||||
| 1.4.2021 | To Balance b/d | 1,000 | 31.3.2022 | By Statement of P & L | 1,000 | ||
| 1,000 | 1,000 |
In simple words: When a company issues debentures at a discount, this discount is a loss. Instead of showing the full loss in one year, it is spread out over the years the debentures are outstanding. The amount written off each year is calculated based on how many debentures are still unpaid, ensuring the expense is matched with the benefit received from using the borrowed funds.
🎯 Exam Tip: Always calculate the total discount first. Then, use the outstanding debentures method to allocate this discount systematically over the debentures' life. Ensure your ledger account entries and balances are consistent with the annual write-off calculation.
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