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Detailed Chapter 4 फर्म का समापन RBSE Solutions for Class 12 Accountancy
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Class 12 Accountancy Chapter 4 फर्म का समापन RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Accountancy Chapter 4 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
RBSE Class 12 Accountancy Chapter 4 बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. समापन के समय डूबत ऋण खाते का शेष हस्तान्तरित किया जाता है
(अ) देनदारों के खाते में
(ब) डूबत ऋण खाते में
(स) वसूली खाते में
(द) पूँजी खाते में।
Answer: (स) वसूली खाते में
In simple words: जब कोई फर्म बंद होती है, तो डूबे हुए ऋण का बचा हुआ पैसा एक खास खाते में डाल दिया जाता है, जिसे वसूली खाता कहते हैं, ताकि सब कुछ सही से निपटाया जा सके।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि समापन पर, सभी सम्पत्ति और दायित्वों को वसूली खाते में हस्तांतरित किया जाता है, जिसमें डूबत ऋण भी शामिल है।
Question 2. साझेदार फर्म के विघटन पर हानियाँ सबसे पहले चुकायी जाएयेंगीं
(अ) लाभों में से
(ब) साझेदारों के ऋण खातों में से
(स) साझेदारों के पूँजी खाते में
(द) लाभ-हानि खाते में ।
Answer: (अ) लाभों में से
In simple words: जब कोई साझेदारी फर्म बंद होती है और नुकसान होता है, तो सबसे पहले उन नुकसानों को फर्म के मौजूदा मुनाफे से भरा जाता है। यह पैसे चुकाने का पहला कदम होता है।
🎯 Exam Tip: फर्म के विघटन पर भुगतान का क्रम हमेशा लाभों से शुरू होता है, फिर पूंजी से और अंत में व्यक्तिगत संपत्ति से।
Question 3. फर्म के समापन पर ख्याति खाते को बन्द करने के लिए हस्तान्तरित किया जाता है
(अ) पुनर्मूल्यांकने खाते में
(ब) साझेदारों के पूँजी खाते में
(स) वसूली खाते में।
(द) लाभ-हानि खाते में ।
Answer: (स) वसूली खाते में।
In simple words: जब कोई फर्म बंद होती है, तो ख्याति (गुडविल) का खाता भी बंद करना होता है। इसके लिए ख्याति को वसूली खाते में ट्रांसफर कर देते हैं।
🎯 Exam Tip: ख्याति एक अमूर्त संपत्ति है और समापन पर इसका निपटान वसूली खाते के माध्यम से होता है, न कि पुनर्मूल्यांकन खाते के माध्यम से।
Question 4. गार्नर बनाम मरें नियम के अनुसार एक दिवालिया साझेदार के पूँजी की न्यूनता शेष साहूकार साझेदारों में बाँटी जाती है
(अ) लाभ-हानि अनुपात में
(ब) वर्ष के आरम्भ के पूँजी अनुपात में
(स) समापन के लाभ-हानि के पूर्व के पूँजी अनुपात में
(द) बराबर अनुपात में।
Answer: (स) समापन के लाभ-हानि के पूर्व के पूँजी अनुपात में
In simple words: गार्नर बनाम मरें नियम के मुताबिक, अगर कोई पार्टनर दिवालिया हो जाए और उसके पास पैसे कम पड़ जाएं, तो बचे हुए पार्टनर उस कमी को अपने शुरुआती पूंजी के अनुपात में बांट लेते हैं, जो फर्म बंद होने से पहले थी।
🎯 Exam Tip: यह नियम केवल दिवालिया साझेदार की पूंजी की कमी पर लागू होता है, और पूंजी अनुपात विघटन से ठीक पहले का लिया जाता है।
Question 5. जब गार्नर बनाम मरें नियम लागू होता है तब वसूली की हानि साझेदार वहन करेंगे
(अ) बराबर अनुपात में ।
(ब) लाभ-हानि अनुपात में
(स) पूँजी अनुपात में
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (ब) लाभ-हानि अनुपात में
In simple words: जब गार्नर बनाम मरें नियम का उपयोग किया जाता है, तो फर्म बंद करते समय जो भी नुकसान होता है, उसे साझेदार अपने लाभ-हानि के अनुपात में बांटते हैं।
🎯 Exam Tip: वसूली की हानि को लाभ-हानि अनुपात में बांटा जाता है, जबकि दिवालिया साझेदार की पूंजी की कमी को पूंजी अनुपात में बांटा जाता है। इन दोनों अंतरों को ध्यान में रखें।
RBSE Class 12 Accountancy Chapter 4 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. एक फर्म के Rs 50,000 के देनदारों से समापन पर Rs 45,000 वसूल हुये। जर्नल प्रविष्टि वसूली की क्या होगी ?
Answer: फर्म के समापन पर देनदारों से Rs 45,000 वसूल होने पर जर्नल प्रविष्टि इस प्रकार होगी:
बैंक खाता (Bank A/c) Dr. 45,000
वसूली खाते से (To Realization A/c) 45,000
(देनदारों से वसूली होने पर)
In simple words: देनदारों से पैसा मिलने पर, बैंक खाते को डेबिट किया जाता है क्योंकि पैसा आया है, और वसूली खाते को क्रेडिट किया जाता है क्योंकि यह फर्म बंद होने से संबंधित है।
🎯 Exam Tip: समापन पर किसी भी संपत्ति की बिक्री या वसूली के लिए हमेशा बैंक/नकद खाता डेबिट करें और वसूली खाता क्रेडिट करें।
Question 2. गार्नर बनाम मरें के मुकदमे में दिवालिया साझेदार कौन था ? उसको घाटा किस अनुपात में बाँटा गया ?
Answer: गार्नर बनाम मरें के मुकदमे में, विल्किन्स (Wilkins) नामक साझेदार दिवालिया हो गया था। उसके पूंजी खाते की कमी को अन्य साहूकार साझेदारों द्वारा फर्म के विघटन से ठीक पहले वाली पूंजी के अनुपात में बांटा गया। यह नियम दिवालिया साझेदार की कमी को बाकी साझेदारों में बांटने का तरीका बताता है।
In simple words: गार्नर बनाम मरें केस में विल्किन्स दिवालिया हो गया था। उसकी पैसों की कमी को दूसरे पार्टनर्स ने अपनी पुरानी पूंजी के हिसाब से बांट लिया था।
🎯 Exam Tip: गार्नर बनाम मरें नियम केवल दिवालिया साझेदार की पूंजी की कमी को बांटने के लिए लागू होता है, न कि वसूली की हानि को।
Question 3. वसूली खाते से आप क्या समझते हैं ?
Answer: वसूली खाता एक विशेष प्रकार का खाता है जो फर्म के समापन पर तैयार किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य फर्म की संपत्तियों को बेचने से मिलने वाली राशि को रिकॉर्ड करना और बाहरी देनदारियों का भुगतान करना होता है। इस खाते से यह पता चलता है कि फर्म बंद करते समय कितना लाभ या हानि हुई। इस खाते के द्वारा सभी संपत्तियों और देनदारियों का निपटान किया जाता है।
In simple words: वसूली खाता तब बनाया जाता है जब फर्म बंद होती है। यह दिखाता है कि संपत्तियों को बेचकर कितना पैसा मिला और कर्ज कितना चुकाया गया, जिससे यह पता चलता है कि फर्म को बंद करने पर कितना फायदा या नुकसान हुआ।
🎯 Exam Tip: वसूली खाता एक नाममात्र का खाता होता है, जिसका मतलब है कि यह लाभ या हानि को निर्धारित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
Question 4. फर्म के समापन से आप क्या समझते हैं ?
Answer: फर्म के समापन का मतलब है कि सभी साझेदारों के बीच साझेदारी पूरी तरह से खत्म हो जाती है। यह स्थिति तब आती है जब फर्म का पूरा कारोबार बंद हो जाता है और साझेदार भविष्य में मिलकर कोई व्यापार नहीं करते। यह साझेदारी के विघटन से अलग है, क्योंकि विघटन में केवल साझेदारी संबंध खत्म होता है, लेकिन फर्म का कारोबार जारी रह सकता है।
In simple words: फर्म का समापन तब होता है जब सभी पार्टनर मिलकर काम करना बंद कर देते हैं और फर्म का व्यापार पूरी तरह से बंद हो जाता है।
🎯 Exam Tip: फर्म का समापन पूरे कारोबार को बंद कर देता है, जबकि साझेदारी का विघटन सिर्फ साझेदारों के बीच के समझौते को बदलता है।
Question 5. फर्म के समापन पर भुगतान का क्रम बताइये।
Answer: फर्म के समापन पर भुगतान का क्रम इस प्रकार रहता है:
(a) सभी हानियों को सबसे पहले लाभों में से, फिर पूंजी में से और अंत में साझेदारों की निजी संपत्ति से पूरा किया जाता है।
(b) संपत्तियों की बिक्री और साझेदारों द्वारा लाई गई राशि का उपयोग निम्न प्रकार से होगा:
- सर्वप्रथम फर्म द्वारा तीसरे पक्षकार के ऋण को चुकाया जाता है।
- उसके बाद फर्म को दिए गए ऋण या अग्रिम का आनुपातिक भुगतान किया जाता है।
- फिर साझेदार की पूंजी का आनुपातिक भुगतान होता है।
- अंत में, यदि शेष राशि बचती है, तो उसे साझेदारों में उनके लाभ-हानि के अनुपात में बांट दिया जाता है।
In simple words: फर्म बंद होने पर, पहले नुकसान की भरपाई लाभों से होती है। फिर, बाहर वालों का कर्ज चुकाया जाता है, उसके बाद पार्टनर्स का कर्ज, फिर पार्टनर्स की पूंजी और आखिर में कुछ बचे तो लाभ-हानि के अनुपात में बांट दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: भुगतान का क्रम याद रखना महत्वपूर्ण है: बाहरी देनदारियाँ, साझेदार के ऋण, साझेदार की पूंजी, और फिर लाभ-हानि विभाजन।
Question 6. न्यायालय द्वारा समापन से क्या आशय है ?
Answer: भारतीय साझेदारी अधिनियम की धारा 44 के अनुसार, न्यायालय कुछ विशेष परिस्थितियों में फर्म के समापन का आदेश दे सकता है, यदि कोई साझेदार इसके लिए आवेदन करता है। यह तब होता है जब साझेदारों के बीच गंभीर विवाद हों या कोई साझेदार अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हो। इस तरह, न्यायालय फर्म को न्यायसंगत तरीके से बंद करने में सहायता करता है।
In simple words: जब अदालत किसी पार्टनर के कहने पर किसी फर्म को बंद करने का आदेश देती है, तो उसे न्यायालय द्वारा समापन कहते हैं। यह तब होता है जब कोई बड़ी समस्या होती है।
🎯 Exam Tip: न्यायालय द्वारा समापन अक्सर तभी होता है जब साझेदारों के बीच गंभीर असहमति या किसी साझेदार की अक्षमता फर्म के संचालन को बाधित करती है।
RBSE Class 12 Accountancy Chapter 4 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. गार्नर बनाम मरें नियम को समझाइये।
Answer: गार्नर बनाम मरें नियम तब लागू होता है जब कोई साझेदार दिवालिया हो जाता है और उसकी पूंजी खाते में कमी आ जाती है। यह नियम बताता है कि उस कमी को शेष साहूकार साझेदारों द्वारा कैसे वहन किया जाएगा। इसके मुख्य बिंदु निम्न प्रकार हैं:
- दिवालिया साझेदार की पूंजी की कमी को साहूकार साझेदार अपनी पूंजी के अनुपात में वहन करेंगे।
- साहूकार साझेदार वसूली की हानि में अपने भाग को नकद में लाएंगे।
In simple words: यह नियम बताता है कि अगर कोई पार्टनर दिवालिया हो जाए, तो उसकी पूंजी की कमी को बाकी पार्टनर अपनी पुरानी पूंजी के अनुपात में बांटते हैं। साथ ही, बाकी पार्टनर फर्म के नुकसान में अपना हिस्सा नकद में लाते हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि गार्नर बनाम मरें नियम का मुख्य उद्देश्य दिवालिया साझेदार की कमी को बांटना है, और इसमें पूंजी अनुपात की गणना विघटन पूर्व की पूंजी से होती है।
Question 2. साझेदारी का समापन फर्म के समापन से भिन्न है। इस कथन को स्पष्ट कीजिये।
Answer: साझेदारी का समापन और फर्म का समापन दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं। साझेदारी के समापन का अर्थ है कि एक साझेदार का अन्य साझेदारों के साथ संबंध टूट जाना। ऐसी स्थिति में यह जरूरी नहीं है कि फर्म का कारोबार बंद हो जाए; शेष साझेदार चाहें तो फर्म का कारोबार जारी रख सकते हैं। यह केवल साझेदारों के बीच के समझौते में बदलाव होता है, जिससे उनका पुराना संबंध खत्म हो जाता है।
जबकि समस्त साझेदारों के मध्य साझेदारी का समाप्त हो जाना फर्म का विघटन या फर्म का समापन कहलाता है। इस स्थिति में फर्म का कारोबार पूरी तरह से बंद हो जाता है, और सभी संपत्तियों व देनदारियों का निपटान किया जाता है। अतः यह कथन सही है कि साझेदारी का समापन फर्म के समापन से भिन्न है क्योंकि साझेदारी का समापन सिर्फ आंतरिक संबंध बदलता है, जबकि फर्म का समापन पूरी इकाई को बंद कर देता है।
In simple words: साझेदारी का समापन मतलब पार्टनरशिप के नियमों में बदलाव या किसी पार्टनर का जाना, लेकिन फर्म चलती रह सकती है। वहीं, फर्म का समापन मतलब पूरा बिजनेस ही बंद हो जाना।
🎯 Exam Tip: मुख्य अंतर यह है कि साझेदारी का समापन केवल 'संबंध' को तोड़ता है, जबकि फर्म का समापन 'अस्तित्व' को समाप्त करता है।
Question 3. ए बी एवं सी का लाभ विभाजन अनुपात 1:2:2 है तथा वसूली की हानि डेबिट करने से पूर्व पूँजी खाते के शेष क्रमश: 3,000 (Dr.), 6,000 (Cr.) तथा 2,000 (Cr.) हैं। वसूली की हानि Rs 5,000 है। दिवालिया हो गया उसकी न्यूनता वहन करने की प्रविष्टि होगी ?
Answer: दिए गए प्रश्न में, पार्टनर ए (A) का पूंजी खाता Rs 3,000 (Dr.) है, जो उसकी दिवालियापन की स्थिति को दर्शाता है। उसकी कमी को अन्य साहूकार साझेदार बी (B) और सी (C) के पूंजी खातों के क्रेडिट शेष के अनुपात में वहन किया जाएगा, जो कि लाभ-हानि के पूर्व के पूंजी अनुपात (6,000:2,000 या 3:1) होगा। चूंकि वसूली की हानि Rs 5,000 है, इसे भी पार्टनर्स के लाभ-हानि अनुपात में बांटा जाएगा।
एक दिवालिया साझेदार की न्यूनता को वहन करने के लिए आवश्यक जर्नल प्रविष्टि इस प्रकार होगी (सरलीकरण के लिए, यह मानते हुए कि A की कुल कमी Rs 1,000 है जिसे B और C 3:1 के अनुपात में वहन करते हैं):
B का पूंजी खाता (B's Capital A/c) Dr. 750
C का पूंजी खाता (C's Capital A/c) Dr. 250
A के पूंजी खाते से (To A's Capital A/c) 1,000
(दिवालिया साझेदार A की पूंजी की कमी को साहूकार साझेदारों B और C द्वारा उनके पूंजी अनुपात में वहन करने पर)
In simple words: जब एक पार्टनर दिवालिया हो जाता है, तो उसकी पूंजी में जो कमी आती है, उसे दूसरे पार्टनर अपने पूंजी के अनुपात में भरते हैं। इसके लिए जर्नल एंट्री में कमी वहन करने वाले पार्टनर के खाते को डेबिट करते हैं और दिवालिया पार्टनर के खाते को क्रेडिट करते हैं।
🎯 Exam Tip: दिवालिया साझेदार की कमी को अन्य साझेदार उनके विघटन पूर्व के पूंजी अनुपात में वहन करते हैं, न कि लाभ-हानि अनुपात में।
Question 5. अनिवार्य समापन किन परिस्थितियों में होता है ?
Answer: फर्म का अनिवार्य समापन कुछ विशेष परिस्थितियों में होता है जहाँ कानून के अनुसार फर्म को बंद करना जरूरी हो जाता है। ये परिस्थितियां निम्न प्रकार हैं:
- यदि फर्म का व्यवसाय अवैध हो जाता है। उदाहरण के लिए, सरकार द्वारा किसी व्यापार को गैरकानूनी घोषित कर देना।
- यदि कोई भी साझेदार शत्रु देश का नागरिक बन जाता है।
- यदि एक साझेदार के अलावा सभी साझेदार दिवालिया हो जाते हैं।
- यदि साझेदारों की अधिकतम संख्या सामान्य साझेदारी में 50 से अधिक हो या बैंकिंग व्यवसाय में 10 से अधिक हो जाए।
In simple words: फर्म को मजबूरन तब बंद करना पड़ता है जब उसका काम गैरकानूनी हो जाए, कोई पार्टनर दुश्मन देश का बन जाए, या एक को छोड़कर बाकी सब दिवालिया हो जाएं। अधिकतम पार्टनर संख्या पार होने पर भी ऐसा होता है।
🎯 Exam Tip: अनिवार्य समापन तब होता है जब कानूनी या अत्यधिक विषम परिस्थितियां फर्म के अस्तित्व को बनाए रखना असंभव बना देती हैं।
Question 6. साझेदारी फर्म के विघटन की रीतियाँ बताइये।
Answer: साझेदारी फर्म के विघटन की मुख्य रीतियाँ निम्न प्रकार हैं:
- समझौते द्वारा समापन: सभी साझेदार आपसी सहमति से फर्म को बंद करने का फैसला करते हैं।
- अनिवार्य समापन: कुछ विशेष कानूनी या विषम परिस्थितियों के कारण फर्म को अनिवार्य रूप से बंद करना पड़ता है (जैसा कि प्रश्न 5 में बताया गया है)।
- नोटिस द्वारा समापन: यदि साझेदारी ऐच्छिक है, तो कोई भी साझेदार फर्म को बंद करने का नोटिस देकर साझेदारी को समाप्त कर सकता है।
In simple words: साझेदारी फर्म को बंद करने के कई तरीके हैं जैसे सब पार्टनर मिलकर फैसला करें, कोई कानून का नियम लागू हो जाए, या कोई पार्टनर बंद करने का नोटिस दे दे।
🎯 Exam Tip: विघटन की प्रत्येक रीति (समझौता, अनिवार्य, नोटिस) साझेदारों के अधिकारों और दायित्वों पर अलग-अलग प्रभाव डालती है, इसलिए इनके अंतरों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 8. कोई दो परिस्थितियाँ बताइये जिसके अन्तर्गत साझेदारी को विघटित किया जाता है।
Answer: साझेदारी को विघटित करने वाली दो परिस्थितियां निम्न प्रकार हैं:
- किसी साझेदार की मृत्यु: यदि ए, बी, सी एक फर्म में साझेदार हैं और सी की मृत्यु हो जाती है, तो ऐसी परिस्थिति में साझेदारी फर्म का समापन होता है, हालांकि फर्म का व्यवसाय जारी रह सकता है यदि अन्य साझेदार सहमत हों।
- किसी साझेदार का पागलपन: यदि ए, बी, सी एक फर्म में साझेदार हैं और बी पागल हो जाता है, तो ऐसी परिस्थिति में भी साझेदारी फर्म का समापन होगा क्योंकि एक अस्वस्थ साझेदार फर्म के संचालन में प्रभावी रूप से भाग नहीं ले सकता।
In simple words: साझेदारी तब खत्म हो जाती है जब कोई पार्टनर मर जाता है या पागल हो जाता है।
🎯 Exam Tip: साझेदारी का विघटन आवश्यक रूप से फर्म का समापन नहीं होता; यह सिर्फ साझेदारों के बीच के पुराने संबंध को तोड़ता है।
Question 9. फर्म के विघटन के समय वसूली खाता बनाने के नियम लिखिये।
Answer: फर्म के विघटन के समय वसूली खाता (Realization Account) बनाने के नियम इस प्रकार हैं:
यह खाता एक नाममात्र का खाता होता है, जिसका मुख्य उद्देश्य संपत्तियों के विक्रय और देनदारियों के भुगतान से होने वाले लाभ या हानि को ज्ञात करना होता है।
मुख्य नियम:
- रोकड़ और बैंक के शेष, साझेदारों के ऋण, संचय (Reserves) और अवितरित लाभ (Undistributed Profits) को छोड़कर अन्य सभी संपत्ति और देनदारियों को इस खाते में ट्रांसफर किया जाता है। इससे सभी संपत्ति और देनदारियों के खाते बंद हो जाते हैं।
- संपत्तियों के विक्रय से प्राप्त राशि, किसी साझेदार द्वारा ली गई संपत्तियों, देनदारियों के भुगतान और समापन व्यय संबंधी सभी लेनदेन भी इसी खाते में दर्ज किए जाते हैं।
- इस खाते का शेष (Balance) वसूली पर लाभ (Profit on Realization) या हानि (Loss on Realization) दिखाता है, जिसे साझेदारों के लाभ-हानि अनुपात में उनके चालू (Current) या पूंजी (Capital) खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
In simple words: वसूली खाता बनाने के लिए, कैश और पार्टनर के कर्ज को छोड़कर सभी संपत्ति और कर्ज इसमें डाल देते हैं। फिर संपत्तियों को बेचते और कर्ज चुकाते हैं। आखिर में जो फायदा या नुकसान होता है, उसे पार्टनर्स में बांट देते हैं।
🎯 Exam Tip: वसूली खाते का मुख्य उद्देश्य फर्म के विघटन पर लाभ या हानि का पता लगाना है, और इसमें केवल बाहरी देनदारियों और संपत्तियों का निपटान दर्ज होता है।
Question 10. कोई दो आधार बताइये जिन पर न्यायालय फर्म के विघटन का आदेश दे सकता है ?
Answer: न्यायालय निम्न दो आधारों पर फर्म के विघटन का आदेश दे सकता है, यदि कोई साझेदार आवेदन करता है:
- अक्षमता: जब अभियोग चलाने वाले साझेदार के अलावा अन्य कोई साझेदार स्थायी रूप से कार्य करने के अयोग्य हो जाए, जैसे कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गया हो या शारीरिक रूप से अक्षम हो गया हो।
- हित का हस्तांतरण: जब कोई साझेदार फर्म में अपने हित को किसी तीसरे पक्ष को बिना अन्य साझेदारों की सहमति के हस्तांतरित कर दे, जिससे साझेदारी समझौते का उल्लंघन होता है।
In simple words: अदालत फर्म को बंद करने का आदेश दे सकती है अगर कोई पार्टनर काम करने लायक न रहे या अपना हिस्सा किसी दूसरे को बेच दे।
🎯 Exam Tip: न्यायालय द्वारा विघटन तब होता है जब साझेदार के व्यवहार या स्थिति से फर्म के संचालन में बाधा आती है और आपसी सहमति से हल नहीं निकलता।
Question 11. कपिल एक साझेदार Rs 25,000 के लेनदारों को Rs 22,000 में लेने को सहमत हुआ। फर्म के विधटन के संग आवश्यक जर्नल प्रविष्टि होगी।
Answer: जब कपिल नामक साझेदार Rs 25,000 के लेनदारों को Rs 22,000 में लेने को सहमत होता है, तो फर्म के विघटन के समय निम्नलिखित जर्नल प्रविष्टि की जाएगी:
वसूली खाता (Realization A/c) Dr. 22,000
कपिल के पूंजी खाते से (To Kapil's Capital A/c) 22,000
(कपिल द्वारा लेनदारों को Rs 22,000 में लेने पर)
यह प्रविष्टि दिखाती है कि फर्म की देनदारी अब कपिल के पूंजी खाते में समायोजित हो गई है और फर्म को लेनदारों के भुगतान के लिए नकदी का उपयोग नहीं करना पड़ेगा।
In simple words: जब कोई पार्टनर फर्म के कर्ज को खुद चुकाने के लिए तैयार होता है, तो वसूली खाता डेबिट होता है और उस पार्टनर का पूंजी खाता क्रेडिट होता है, जितने पैसे में वह कर्ज लेने को तैयार हुआ।
🎯 Exam Tip: जब कोई साझेदार फर्म की देनदारी को लेता है, तो वसूली खाते को डेबिट किया जाता है और संबंधित साझेदार के पूंजी खाते को क्रेडिट किया जाता है, ली गई राशि से।
RBSE Class 12 Accountancy Chapter 4 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. वसूली खाते एवं पुनर्मूल्यांकन खाते में अन्तर बताइये।
Answer: वसूली खाते और पुनर्मूल्यांकन खाते के बीच अंतर को निम्न बिंदुओं के आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है:
| आधार | वसूली खाता | पुनर्मूल्यांकन खाता |
|---|---|---|
| 1. उद्देश्य | वसूली खाता फर्म के समापन पर संपत्तियों के विक्रय से वसूली तथा देनदारियों के भुगतान से संबंधित व्यवहारों का लेखा करने के लिए बनाया जाता है। | पुनर्मूल्यांकन खाता किसी नए साझेदार के प्रवेश, किसी साझेदार के अवकाश ग्रहण करने या उसकी मृत्यु पर संपत्तियों एवं देनदारियों के पुनर्मूल्यांकन के कारण मूल्यों में वृद्धि या कमी का लेखा करने के लिए बनाया जाता है। |
| 2. तैयार करने का समय | वसूली खाता फर्म के समापन पर फर्म की पुस्तकों को बंद करने के लिए बनाया जाता है। | पुनर्मूल्यांकन खाता फर्म को चालू रखने पर, फर्म के संगठन में परिवर्तन के परिणामस्वरूप तैयार किया जाता है। |
| 3. व्यय | फर्म के समापन पर वसूली के संबंध में कुछ व्यय किए जाते हैं जिनसे वसूली खाता डेबिट किया जाता है। | फर्म के संगठन में परिवर्तन के परिणामस्वरूप संपत्ति एवं देनदारियों का पुनर्मूल्यांकन संस्था के लेखपालों द्वारा ही किया जाता है। अतः किसी प्रकार का व्यय नहीं होता है। |
| 4. लेखा प्रविष्टियाँ | वसूली खाते के डेबिट पक्ष में रोकड़ तथा बैंक शेष के अलावा समस्त संपत्तियों के शेष तथा क्रेडिट पक्ष में पूंजी, संचय, अवितरित लाभ तथा साझेदारों के ऋणों को छोड़कर शेष सभी देनदारियों के शेष को हस्तांतरित किया जाता है। | पुनर्मूल्यांकन खाते के डेबिट पक्ष में संपत्तियों के मूल्यों में कमी, देनदारियों में वृद्धि और संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान तथा क्रेडिट पक्ष में संपत्तियों के मूल्य में वृद्धि, देनदारियों में कमी, और संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान में कमी को दर्शाया जाता है। |
| 5. अनिवार्यता | वसूली खाता फर्म के समापन पर बनाना अनिवार्य होता है। | पुनर्मूल्यांकन खाता संगठन में परिवर्तन की स्थिति में बनाया जाता है ताकि लाभ या हानि का समायोजन किया जा सके। |
वसूली खाता फर्म के बंद होने पर सभी लेन-देन का एक अंतिम हिसाब रखता है, जबकि पुनर्मूल्यांकन खाता सिर्फ संपत्तियों और देनदारियों के मूल्य में बदलाव को रिकॉर्ड करता है जब फर्म का ढाँचा बदलता है पर फर्म चलती रहती है।
In simple words: वसूली खाता फर्म बंद होने पर बनता है ताकि सब संपत्ति बेचकर कर्ज चुकाया जा सके और आखिरी फायदा-नुकसान पता चले। पुनर्मूल्यांकन खाता तब बनता है जब पार्टनरशिप में बदलाव हो, लेकिन फर्म चलती रहे, और यह संपत्ति-कर्ज के दाम में हुए बदलाव दिखाता है।
🎯 Exam Tip: इन दोनों खातों के बीच के मुख्य अंतर (उद्देश्य और तैयार करने का समय) को स्पष्ट रूप से समझें ताकि भ्रम से बचा जा सके।
Question 2. फर्म का विघटन किन-किन परिस्थितियों में किया जा सकता है ?
Answer: जब किसी फर्म के समस्त साझेदारों के मध्य साझेदारी समाप्त हो जाती है तो उसे फर्म का समापन अथवा फर्म का विघटन कहते हैं। भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 की धारा 40 से 44 तक के अंतर्गत निम्नलिखित परिस्थितियों में साझेदारी फर्म का समापन अथवा विघटन हो सकता है:
(1) समझौते द्वारा समापन (Dissolution by Agreement): साझेदार अपनी इच्छा से किसी भी समय साझेदारी को खत्म कर सकते हैं। यह सबसे सामान्य तरीका है जहाँ सभी साझेदार मिलकर फर्म को बंद करने का फैसला करते हैं।
(2) अनिवार्य समापन (Compulsory Dissolution): निम्नलिखित परिस्थितियों में फर्म अनिवार्य रूप से समाप्त हो जाती है:
- यदि फर्म का व्यवसाय अवैध हो।
- यदि कोई साझेदार शत्रु देश का नागरिक हो।
- यदि एक साझेदार के अलावा सभी साझेदार दिवालिया हो जाएं।
- यदि साझेदारों की अधिकतम संख्या सामान्य साझेदारी में 50 से अधिक हो या बैंकिंग व्यवसाय में 10 से अधिक हो।
(4) न्यायालय द्वारा समापन (Dissolution by Court): किसी भी साझेदार के आवेदन पर न्यायालय निम्नलिखित परिस्थितियों में फर्म के समापन का आदेश दे सकता है:
- यदि कोई साझेदार मानसिक रूप से अस्वस्थ हो।
- यदि कोई सक्रिय साझेदार स्थायी रूप से अपाहिज हो जाए और साझेदार के रूप में अपना कार्य करने में असमर्थ हो।
- यदि कोई साझेदार दुराचार का दोषी हो जो कि फर्म के व्यापार को प्रभावित करे।
- यदि कोई साझेदार जान-बूझकर प्रसंविदा की अवहेलना करे।
- यदि फर्म को व्यापार से केवल हानि ही होने की शंका हो।
- यदि कोई साझेदार फर्म में अपने हित को किसी तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर दे।
- यदि न्यायालय किसी भी उचित कारण से संतुष्ट हो।
In simple words: फर्म को कई तरह से बंद किया जा सकता है: जैसे पार्टनर आपस में तय कर लें, कुछ कानूनी मजबूरी हो, कोई पार्टनर नोटिस दे दे, या फिर अदालत ही बंद करने का आदेश दे दे अगर कोई पार्टनर बीमार हो, गलत काम करे, या फर्म को लगातार नुकसान हो रहा हो।
🎯 Exam Tip: फर्म के विघटन की विभिन्न परिस्थितियाँ साझेदारों के अधिकारों और जिम्मेदारियों पर अलग-अलग प्रभाव डालती हैं, इसलिए प्रत्येक स्थिति की विशेषताओं को जानना महत्वपूर्ण है।
Question 3. गार्नर बनाम मरें नियम से क्या समझते हैं ? स्थायी और परिवर्तनशील पद्धतियों के अन्तर्गत यह कैसे लागू होता है ? समझाइये।
Answer: गार्नर बनाम मरें नियम एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है जो फर्म के विघटन के दौरान लागू होता है, खासकर जब कोई साझेदार दिवालिया हो जाता है। यह नियम बताता है कि दिवालिया साझेदार के पूंजी खाते की कमी को शेष समर्थ साझेदारों द्वारा कैसे वहन किया जाएगा। इस संबंध में भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 में कोई स्पष्ट व्याख्या नहीं दी गई है, इसलिए गार्नर बनाम मरें मुकदमे का निर्णय लागू होता है।
इस निर्णय के अनुसार, दिवालिया साझेदार की पूंजी की कमी को शेष साझेदार अपनी पूंजी के अनुपात में वहन करेंगे। पूंजी के अनुपात का निर्धारण इस प्रकार होता है:
(1) पूंजी खाते स्थायी होने पर: यदि पूंजी खाते स्थायी हैं, तो विघटन से तुरंत पूर्व बने चिट्ठे में पूंजी खातों के शेषों के आधार पर पूंजी का अनुपात ज्ञात किया जाएगा। दिवालिया साझेदार के हिस्से की कमी सक्षम साझेदारों द्वारा उनके पूंजी अनुपात में विभाजित की जाएगी। इस पद्धति में पूंजी खाते में कोई बदलाव नहीं होता, इसलिए शुरुआती पूंजी ही आधार होती है।
(2) पूंजी खाते परिवर्तनशील होने पर: यदि पूंजी खाते परिवर्तनशील हैं, तो संचय, अवितरित लाभ, पूंजी पर ब्याज, वेतन, कमीशन, आहरण तथा आहरण पर ब्याज का समायोजन करने के पश्चात पूंजी खातों के शेषों के आधार पर पूंजी का अनुपात ज्ञात किया जाएगा। दिवालिया साझेदार के हिस्से की कमी सक्षम साझेदारों द्वारा उनके उक्त पूंजी अनुपात में विभाजित की जाएगी। पूंजी का अनुपात ज्ञात करने के लिए वसूली पर लाभ या हानि का समायोजन नहीं किया जाएगा। वसूली के लाभ या हानि का विवरण करने से पूर्व यदि किसी साझेदार के पूंजी खाते का डेबिट शेष हो तो वह साझेदार दिवालिया साझेदार के पूंजी खाते की न्यूनता का भागीदार नहीं होगा। इस पद्धति में पूंजी खाते में लगातार बदलाव होते रहते हैं, इसलिए अंतिम समायोजित पूंजी को आधार बनाया जाता है।
यह नियम यह सुनिश्चित करता है कि दिवालियापन के कारण होने वाले नुकसान का बंटवारा न्यायपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से हो।
In simple words: गार्नर बनाम मरें नियम बताता है कि अगर कोई पार्टनर दिवालिया हो जाए, तो उसकी पूंजी की कमी को दूसरे पार्टनर कैसे भरेंगे। अगर पूंजी खाते स्थायी हैं, तो पुराने पूंजी अनुपात से भरते हैं; अगर परिवर्तनशील हैं, तो आखिरी पूंजी अनुपात से भरते हैं।
🎯 Exam Tip: स्थायी पूंजी और परिवर्तनशील पूंजी पद्धतियों के अंतर्गत पूंजी अनुपात की गणना में अंतर को विशेष रूप से समझें, क्योंकि यह दिवालिया साझेदार की कमी के बंटवारे को प्रभावित करता है।
Question 4. फर्म के विघटन पर हिसाब का निपटारा करने की लेखांकन विधि समझाइए।
Answer: फर्म के समापन की तिथि से सामान्य व्यापारिक कार्य बंद हो जाते हैं। इस प्रक्रिया में फर्म की संपत्तियों से वसूली करने और देनदारियों का भुगतान करने के लिए निम्न खाते तैयार किए जाते हैं, जो लेखांकन विधि को दर्शाते हैं:
1. समापन पर वसूली खाते से संबंधित निम्न प्रकार प्रविष्टियां की जाती हैं:
(i) रोकड़, बैंक तथा काल्पनिक संपत्तियों को छोड़कर शेष सभी संपत्तियों को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर:
Realization A/c Dr.
To Sundry Assets A/C
(विभिन्न संपत्तियों को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर)
(ii) साझेदारों के ऋण, पूंजी, संचय तथा अवितरित लाभों को छोड़कर शेष सभी देनदारियों को वसूली खाते में अंतरित करने पर:
Sundry Liabilities A/c Dr.
Provision for Depreciation A/c Dr.
Provision for Doubtful Debts A/C Dr.
To Realization A/C
(देनदारियों और अन्य देनदारियों को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर)
(iii) संपत्तियों के बेचने पर:
Cash A/C Dr.
To Realization A/C
(संपत्तियों की बिक्री होने पर)
(iv) संपत्ति को किसी साझेदार द्वारा लेने पर:
Partners Capital A/C Dr.
To Realization A/c
(साझेदार द्वारा संपत्ति लेने पर)
(v) देनदारियों का भुगतान करने पर:
Realization A/C Dr.
To Cash A/C
(देनदारियों का भुगतान करने पर)
(vi) देनदारियों को किसी साझेदार द्वारा लेने पर:
Realization A/C Dr.
To Partner's Capital A/C
(साझेदार द्वारा देनदारियों को लेने पर)
(viii) वसूली व्यय किसी साझेदार द्वारा चुकाने पर:
Realization A/C Dr.
Dr. To Partner's Capital A/C
(साझेदार द्वारा वसूली व्यय का भुगतान करने पर)
(ix) किसी संपत्ति की वसूली पर किसी साझेदार को कमीशन देय होने पर:
Realization A/C Dr.
To Partner's Capital A/c
(साझेदारों को कमीशन देय होने पर)
(x) पुस्तकों में न दी गई संपत्तियों से वसूली होने पर:
Cash A/C Dr.
To Realization A/C
(अंकित संपत्तियों की वसूली होने पर)
(xi) पुस्तकों में न दी गई देनदारियों को चुकाने पर:
Realization A/C Dr.
To Cash A/c
(अंकित देनदारियों का भुगतान करने पर)
(xii) वसूली पर हानि होने पर:
Partner's Capital A/C Dr.
To Realisation A/C
(वसूली पर हानि को पूंजी खाते में हस्तांतरित करने पर)
(xiii) वसूली पर लाभ होने पर:
Realization A/C Dr.
To Partner's Capital A/C
(वसूली पर लाभ को पूंजी खाते में हस्तांतरित करने पर)
2. साझेदारों के पूंजी खाते से संबंधित निम्न प्रविष्टियां की जाती हैं:
(i) काल्पनिक संपत्तियों जैसे अवितरित हानि आदि को बांटने पर:
Partner's Capital A/C Dr.
(ii) संचय, अवितरित लाभ आदि को बांटने पर:
General Reserve A/C Dr.
P/L A/C Dr.
To Partner's Capital A/C
(शेष हस्तांतरित करने पर)
(iii) साझेदारों के पूंजी खाते में डेबिट शेष होने पर रकम वसूल करने पर:
Cash A/c Dr.
To Partner's Capital A/C
(साझेदारों से डेबिट शेष प्राप्त होने पर)
(iv) साझेदार के पूंजी खाते को क्रेडिट शेष होने पर उसे भुगतान करने पर:
Partner's Capital A/c Dr.
To Cash A/c
(साझेदारों को क्रेडिट शेष का भुगतान करने पर)
3. बैंक अथवा रोकड़ खाता:
यदि बैंक और रोकड़ दोनों के प्रारंभिक शेष दिए गए हैं, तो उनमें से एक खाते के शेष को दूसरे में स्थानांतरित करके उसे बंद कर दिया जाता है। अब रोकड़ या बैंक में से एक ही खाता शेष बचता है। वह खाता भी वसूली खाते एवं पूंजी खातों के बंद होने के साथ ही बंद हो जाता है। इस प्रकार फर्म के समापन का लेखांकन पूर्ण हो जाता है। उपरोक्त से संबंधित खातों के नमूने निम्न प्रकार हैं:
| Particulars | Amount ₹ | Particulars | Amount ₹ |
|---|---|---|---|
| To Bank A/c (Realization Exp.) | - | By Specific Reserve | - |
| To Bank A/c (Liabilities Paid) | - | By Bank (Assets sold) | - |
| To Partner's Capital or Current A/c (If partners have taken over the liabilities) | - | By Partner's Capital or Current A/c (If Assets is taken over by the partner) | - |
| To Bank A/c (Premium paid on partner's loan) | - | By Partner's Loan A/c (Discount on this loan) | - |
| To Partner's Capital or Current A/c (If profit) | - | By Partner's Capital or Current A/c (If Loss) | - |
| Partner's Capital Account | |||
|---|---|---|---|
| Particulars | ₹ | Particulars | ₹ |
| To Balance b/d | - | By Balance b/d | - |
| To Realisation A/c (Assets taken over) | - | By Realisation A/c (Liabilities taken over) | - |
| To Realisation A/c (Loss) | - | By Realisation A/c (Profit) | - |
| To Bank A/c | - | By Bank A/c | - |
| Cash or Bank Account | |||
|---|---|---|---|
| Particulars | ₹ | Particulars | ₹ |
| To Balance b/d | - | By Realisation A/c (Liab. Paid) | - |
| To Realisation A/c (Assets sold) | - | By Realisation A/c (Exp. Paid) | - |
| To Partner's Capital A/c | - | By Partner's Loan A/c (Loan paid) | - |
| By Partner's Capital A/c | - | ||
इस प्रकार, फर्म के विघटन पर हिसाब-किताब का निपटारा करने के लिए ये तीन मुख्य खाते (वसूली खाता, साझेदारों का पूंजी खाता और रोकड़/बैंक खाता) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: फर्म बंद होने पर हिसाब-किताब निपटाने के लिए तीन मुख्य खाते बनते हैं: वसूली खाता (संपत्ति बेचने और कर्ज चुकाने के लिए), पार्टनर का पूंजी खाता (पार्टनर के पैसे का हिसाब), और कैश/बैंक खाता (नकद लेन-देन के लिए)।
🎯 Exam Tip: इन खातों को सही क्रम में तैयार करना महत्वपूर्ण है: पहले वसूली खाता, फिर साझेदारों के पूंजी खाते और अंत में रोकड़/बैंक खाता, जो अंततः संतुलित होना चाहिए।
RBSE Class 12 Accountancy Chapter 4 आंकिक प्रश्न
Question 1. रमेश, नरेश एवं महेश 3:2:1 के अनुपात में लाभ का वितरण करते थे। 31 दिसम्बर, 2014 को अपनी साझेदारी के समापन का निर्णय लेते हैं। इस दिन का चिदा इस प्रकार है
| Liabilities | Amount ₹ | Assets | Amount ₹ | ||
|---|---|---|---|---|---|
| Creditors | 8,000 | Debtors | 9,000 | ||
| Ramesh's Loan | 8,000 | Joint Life Policy | 14,000 | ||
| Joint Life Policy Fund | 20,000 | Investment | 20,000 | ||
| Capital | Stock | 8,000 | |||
| Ramesh | 50,000 | Machinery | 40,000 | ||
| Naresh | 10,000 | Mahesh's Capital A/c | 11,500 | ||
| 60,000 | |||||
| 1,08,500 | 1,08,500 | ||||
समापन पर निम्नलिखित लेन-देन हुए-
1. संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी को Rs 15,000 में समर्पण किया।
2. रमेश ने विनियोग Rs 17,500 में लिए तथा अपनी पत्नी के ऋण का भुगतान करने के लिए सहमत हुए।
3. नरेश ने Rs 7,500 में स्टॉक लिया तथा Rs 5,000 के देनदारों को Rs 4,000 में लिया।
4. मशीन से Rs 50,000 वसूल हुए तथा शेष देनदारों को पुस्तक मूल्य का 50 प्रतिशत ही प्राप्त हुए।
5. वसूली व्यय Rs 1,000 हुए।
6. Rs 3,000 के मूल्य के विनियोग जिनका पुस्तकों में लेखा-जोखा नहीं हुआ उनसे यही मूल्य वसूल हुआ।
फर्म की पुस्तकें बन्द करने हेतु जर्नल प्रविष्टियाँ एवं आवश्यक खाते बनाइए।
Answer:
जर्नल प्रविष्टियाँ (Journal Entries)
| S. No. | Particulars | Dr. ₹ | Cr. ₹ |
|---|---|---|---|
| (1) | वसूली खाता (Realization A/c) Dr. देनदारों को (To Debtors) संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी को (To Joint Life Policy) विनियोग को (To Investment) स्टॉक को (To Stock) मशीनरी को (To Machinery) (सभी संपत्तियों को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर) | 91,000 | 9,000 14,000 20,000 8,000 40,000 |
| (2) | लेनदारों को (Creditors A/c) Dr. वसूली खाते से (To Realization A/c) (लेनदारों के शेष को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर) | 8,000 | 8,000 |
| (3) | संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी फंड को (Joint Life Policy Fund A/c) Dr. वसूली खाते से (To Realization A/c) (फंड को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर) | 20,000 | 20,000 |
| (4) | बैंक खाता (Cash A/c) Dr. वसूली खाते से (To Realization A/c) (मशीनरी, देनदारों और विनियोग से वसूली होने पर: 50,000 + 2,000 + 3,000) | 55,000 | 55,000 |
| (5) | रमेश का पूंजी खाता (Ramesh's Capital A/c) Dr. वसूली खाते से (To Realization A/c) (रमेश द्वारा विनियोग लेने पर) | 17,500 | 17,500 |
| (6) | नरेश का पूंजी खाता (Naresh's Capital A/c) Dr. वसूली खाते से (To Realization A/c) (नरेश द्वारा स्टॉक 7,500 रुपये और देनदारों से 5,000 रुपये में 4,000 रुपये में लेने पर) | 11,500 | 11,500 |
| (7) | बैंक खाता (Cash A/c) Dr. वसूली खाते से (To Realization A/c) (संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी का समर्पण मूल्य 15,000 रुपये प्राप्त होने पर) | 15,000 | 15,000 |
| (8) | वसूली खाता (Realization A/c) Dr. बैंक खाते से (To Cash A/c) (लेनदारों को 8,000 रुपये और वसूली व्यय 1,000 रुपये का भुगतान करने पर) | 9,000 | 9,000 |
| (9) | वसूली खाता (Realization A/c) Dr. रमेश के पूंजी खाते से (To Ramesh's Capital A/c) नरेश के पूंजी खाते से (To Naresh's Capital A/c) महेश के पूंजी खाते से (To Mahesh's Capital A/c) (वसूली पर लाभ 27,000 रुपये को 3:2:1 के अनुपात में वितरित करने पर) | 27,000 | 13,500 9,000 4,500 |
| (10) | श्रीमती रमेश ऋण खाता (Mrs. Ramesh Loan A/c) Dr. रमेश के पूंजी खाते से (To Ramesh's Capital A/c) (श्रीमती रमेश के ऋण को रमेश द्वारा लेने पर) | 8,000 | 8,000 |
| (11) | बैंक खाता (Cash A/c) Dr. महेश के पूंजी खाते से (To Mahesh's Capital A/c) (महेश द्वारा पूंजी की कमी लाने पर) | 7,000 | 7,000 |
वसूली खाता (Realization Account)
| Particulars | ₹ | Particulars | ₹ |
|---|---|---|---|
| To Sundry Assets: | By Creditors | 8,000 | |
| Debtors | 9,000 | By Joint Life Policy Fund | 20,000 |
| Joint Life Policy | 14,000 | By Cash (Assets Realised): | |
| Investment | 20,000 | Machine | 50,000 |
| Stock | 8,000 | Debtors (50% of 4,000) | 2,000 |
| Machinery | 40,000 | Investment | 3,000 |
| 91,000 | 55,000 | ||
| To Cash (Payment): | By Ramesh's Capital (Investment taken over) | 17,500 | |
| Creditors | 8,000 | By Naresh's Capital (Stock & Debtors taken over) | 11,500 |
| Exp. | 1,000 | By Cash (Joint Life Policy Surrender) | 15,000 |
| To Realisation Profit transferred to Capital A/c: | |||
| Ramesh | 13,500 | ||
| Naresh | 9,000 | ||
| Mahesh | 4,500 | ||
| 1,47,000 | 1,47,000 |
साझेदारों के पूंजी खाते (Partners' Capital Account)
| Particulars | Ramesh ₹ | Naresh ₹ | Mahesh ₹ | Particulars | Ramesh ₹ | Naresh ₹ | Mahesh ₹ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| To Balance b/d (Debit) | 11,500 | By Balance b/d (Credit) | 50,000 | 10,000 | |||
| To Realisation A/c (Investment taken over) | 17,500 | By Realisation A/c (Profit) | 13,500 | 9,000 | 4,500 | ||
| To Realisation A/c (Stock & Debtors taken over) | 11,500 | By Cash A/c (Mahesh's deficiency) | 7,000 | ||||
| To Mrs. Ramesh Loan A/c (taken over) | 8,000 | By Ramesh's Loan A/c (transferred) | 8,000 | ||||
| To Cash A/c (Final Payment) | 38,000 | 7,500 | |||||
| 63,500 | 19,000 | 11,500 | 63,500 | 19,000 | 11,500 |
रोकड़ खाता (Cash Account)
| Particulars | ₹ | Particulars | ₹ |
|---|---|---|---|
| To Realization A/c (Assets Realised) | 55,000 | By Realization A/c (Creditors Paid) | 8,000 |
| To Realization A/c (Joint Life Policy Surrendered) | 15,000 | By Realization A/c (Expenses) | 1,000 |
| To Mahesh's Capital A/c (Deficiency brought by Mahesh) | 7,000 | By Ramesh's Capital A/c (Final Payment) | 38,000 |
| By Naresh's Capital A/c (Final Payment) | 7,500 | ||
| 77,000 | 77,000 |
यह विस्तृत प्रक्रिया फर्म के विघटन पर सभी संपत्तियों और देनदारियों का लेखा-जोखा करती है, जिससे साझेदारों के अंतिम खातों का निपटान होता है।
In simple words: फर्म बंद होने पर, पहले जर्नल एंट्री में सभी संपत्ति और कर्ज वसूली खाते में जाते हैं। फिर संपत्ति बेची जाती है और पार्टनर कर्ज लेते हैं, और अंत में वसूली पर हुए फायदे या नुकसान को पार्टनर में बांट देते हैं, और फिर कैश अकाउंट से सबका फाइनल पेमेंट होता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के लंबे प्रश्नों को हल करते समय, सभी परिसंपत्तियों और देनदारियों को वसूली खाते में हस्तांतरित करना और फिर प्रत्येक लेनदेन को सही जर्नल प्रविष्टि के साथ रिकॉर्ड करना महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि सभी अंतिम भुगतान नकदी या बैंक खाते के माध्यम से संतुलित हों।
Question 1. रमेश, नरेश एवं महेश 3:2:1 के अनुपात में लाभ का वितरण करते थे। 31 दिसम्बर, 2014 को अपनी साझेदारी के समापन का निर्णय लेते हैं। इस दिन का चिट्ठा निम्न प्रकार है:
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Ramesh's Loan | 8,000 | Debtors | 9,000 |
| Joint Life Policy Fund | 20,000 | Joint Life Policy | 14,000 |
| Capital: | Investment | 20,000 | |
| Ramesh | 50,000 | Stock | 8,000 |
| Naresh | 10,000 | Machinery | 40,000 |
| Mahesh's Capital A/c (Debit Balance) | 11,500 | ||
| Total | 1,08,500 | Total | 1,08,500 |
समापन पर निम्नलिखित लेन-देन हुए-
1. संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी को Rs 15,000 में समर्पण किया।
2. रमेश ने विनियोग Rs 17,500 में लिए तथा अपनी पत्नी के ऋण का भुगतान करने के लिए सहमत हुए।
3. नरेश ने Rs 7,500 में स्टॉक लिया तथा Rs 5,000 के देनदारों को Rs 4,000 में लिया।
4. मशीन से Rs 50,000 वसूल हुए तथा शेष देनदारों को पुस्तक मूल्य का 50 प्रतिशत ही प्राप्त हुआ।
5. वसूली व्यय Rs 1,000 हुए।
6. Rs 3,000 के मूल्य के विनियोग जिनका पुस्तकों में लेखा-जोखा नहीं हुआ उनसे यही मूल्य वसूल हुआ।
फर्म की पुस्तकें बन्द करने हेतु जर्नल प्रविष्टियाँ एवं आवश्यक खाते बनाइए।
Answer:
जर्नल प्रविष्टियाँ (Journal Entries)
(1) सम्पत्तियों को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर:
\( \quad \) Realisation A/c Dr. \( \quad \) 91,000
\( \quad \quad \) To Debtors A/c \( \quad \) 9,000
\( \quad \quad \) To Joint Life Policy A/c \( \quad \) 14,000
\( \quad \quad \) To Investment A/c \( \quad \) 20,000
\( \quad \quad \) To Stock A/c \( \quad \) 8,000
\( \quad \quad \) To Machinery A/c \( \quad \) 40,000
(विभिन्न सम्पत्तियों को वसूली खाते में हस्तांतरित किया गया)
(2) लेनदारों को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर:
\( \quad \) Creditors A/c Dr. \( \quad \) 20,500
\( \quad \quad \) To Realisation A/c \( \quad \) 20,500
(लेनदारों के शेष को वसूली खाते में हस्तांतरित किया गया)
(3) संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी फंड को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर:
\( \quad \) Joint Life Policy Fund A/c Dr. \( \quad \) 20,000
\( \quad \quad \) To Realisation A/c \( \quad \) 20,000
(संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी फंड को वसूली खाते में हस्तांतरित किया गया)
(4) मशीन, देनदारों और विनियोग से राशि वसूल होने पर:
\( \quad \) Cash A/c Dr. \( \quad \) 55,000
\( \quad \quad \) To Realisation A/c \( \quad \) 55,000
(मशीन से (Rs 50,000), देनदारों से (Rs 2,000) और अलेखाकृत विनियोग से (Rs 3,000) नकद वसूल हुआ)
(5) रमेश द्वारा विनियोग लेने पर:
\( \quad \) Ramesh's Capital A/c Dr. \( \quad \) 17,500
\( \quad \quad \) To Realisation A/c \( \quad \) 17,500
(रमेश द्वारा विनियोग लिया गया)
(6) नरेश द्वारा स्टॉक और देनदारों को लेने पर:
\( \quad \) Naresh's Capital A/c Dr. \( \quad \) 11,500
\( \quad \quad \) To Realisation A/c \( \quad \) 11,500
(नरेश द्वारा स्टॉक (Rs 7,500) और देनदारों (Rs 4,000) को लिया गया)
(7) संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी के समर्पण मूल्य से नकद प्राप्त होने पर:
\( \quad \) Cash A/c Dr. \( \quad \) 15,000
\( \quad \quad \) To Realisation A/c \( \quad \) 15,000
(संयुक्त जीवन बीमा पॉलिसी के समर्पण मूल्य से नकद प्राप्त हुआ)
(8) लेनदारों और वसूली व्यय का भुगतान करने पर:
\( \quad \) Realisation A/c Dr. \( \quad \) 21,500
\( \quad \quad \) To Cash A/c \( \quad \) 21,500
(लेनदारों (Rs 20,500) और वसूली व्यय (Rs 1,000) का भुगतान किया गया)
(9) वसूली पर हुए लाभ को साझेदारों में बांटने पर:
\( \quad \) Realisation A/c Dr. \( \quad \) 27,000
\( \quad \quad \) To Ramesh's Capital A/c \( \quad \) 13,500
\( \quad \quad \) To Naresh's Capital A/c \( \quad \) 9,000
\( \quad \quad \) To Mahesh's Capital A/c \( \quad \) 4,500
(वसूली पर लाभ को 3:2:1 के अनुपात में साझेदारों में बांटा गया)
(10) श्रीमती रमेश के ऋण को रमेश द्वारा लेने पर:
\( \quad \) Mrs. Ramesh Loan A/c Dr. \( \quad \) 8,000
\( \quad \quad \) To Ramesh's Capital A/c \( \quad \) 8,000
(श्रीमती रमेश के ऋण को साझेदार रमेश द्वारा लिया गया)
(11) महेश से नकद प्राप्त होने पर:
\( \quad \) Cash A/c Dr. \( \quad \) 7,000
\( \quad \quad \) To Mahesh's Capital A/c \( \quad \) 7,000
(महेश से पूंजी खाते के डेबिट शेष को निपटाने के लिए नकद प्राप्त हुआ)
आवश्यक खाते (Necessary Accounts)
Realisation A/C
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Sundry Assets: | By Creditors | 20,500 | |
| Debtors | 9,000 | By Joint Life Policy Fund | 20,000 |
| Joint Life Policy | 14,000 | By Cash (Assets Realised): | |
| Investment | 20,000 | Machine | 50,000 |
| Stock | 8,000 | Debtors (50% of Rs 4,000) | 2,000 |
| Machinery | 40,000 | Investment | 3,000 |
| Total Sundry Assets | 91,000 | Total Cash from Assets | 55,000 |
| To Cash (Payment): | By Ramesh's Capital (Investment) | 17,500 | |
| Creditors | 20,500 | By Naresh's Capital (Stock & Debtors) | 11,500 |
| Expenses | 1,000 | By Cash (Joint Life Policy Surrender) | 15,000 |
| Total Cash Payment | 21,500 | ||
| To Realisation Profit transferred to Capital A/c: | |||
| Ramesh | 13,500 | ||
| Naresh | 9,000 | ||
| Mahesh | 4,500 | ||
| Total Profit | 27,000 | ||
| Total | 1,39,500 | Total | 1,39,500 |
Partner's Capital Account
| Particulars | Ramesh (Rs) | Naresh (Rs) | Mahesh (Rs) | Particulars | Ramesh (Rs) | Naresh (Rs) | Mahesh (Rs) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| To Realisation (Assets taken over) | 17,500 | 11,500 | By Balance b/d | 50,000 | 10,000 | ||
| To Mrs. Ramesh Loan | 8,000 | By Realisation A/c (Profit) | 13,500 | 9,000 | 4,500 | ||
| To Cash A/c (Final Payment) | 54,000 | 7,500 | By Cash A/c (from Mahesh) | 7,000 | |||
| 11,500 | By Balance b/d (Mahesh Dr.) | 11,500 | |||||
| Total | 79,500 | 19,000 | 11,500 | Total | 79,500 | 19,000 | 11,500 |
Cash A/c
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Balance b/d | 6,000 | By Realisation A/c (Creditors & Exp.) | 21,500 |
| To Realisation A/c (Assets Realised) | 55,000 | By Ramesh's Capital A/c | 54,000 |
| To Realisation A/c (JLP Surrender) | 15,000 | By Naresh's Capital A/c | 7,500 |
| To Mahesh's Capital A/c | 7,000 | ||
| Total | 83,000 | Total | 83,000 |
🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि सभी सम्पत्तियों और देनदारियों को वसूली खाते में सही मूल्यों पर हस्तांतरित किया गया है, और सभी वसूली व भुगतान प्रविष्टियों को सही ढंग से रिकॉर्ड किया गया है।
Question 2. गोपेश एवं राकेश साझेदार हैं लाभ-हानि बराबर बाँटते हैं। उन्होंने साझेदारी व्यवसाय को विघटित करने का निश्चय किया। 31 मार्च 2014 को चिट्ठा निम्न प्रकार था:
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Creditors | 30,000 | Bank | 20,000 |
| General Reserve | 20,000 | Debtors | 40,000 |
| Capital: | Stock | 20,000 | |
| Gopesh | 44,000 | Furniture | 8,000 |
| Rakesh | 44,000 | Plant & Machinery | 50,000 |
| Total | 1,38,000 | Total | 1,38,000 |
सम्पत्तियों से वसूली निम्न प्रकार हुई-
1. गोपेश ने प्लांट एवं मशीन तथा फर्नीचर पुस्तक मूल्य से 10 प्रतिशत कम पर लिया।
2. राकेश ने स्टॉक एवं ख्याति Rs 35,000 में ली
3. विविध देनदारों से Rs 37,000 वसूल हुए
4. लेनदारों को 5 प्रतिशत बट्टे पर भुगतान कर दिया । फर्म की पुस्तकें बन्द करने के लिए जर्नल प्रविष्टियाँ दीजिए तथा आवश्यक खाते बनाइए।
Answer:
जर्नल प्रविष्टियाँ (Journal Entries)
(1) सम्पत्तियों को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर:
\( \quad \) Realisation A/c Dr. \( \quad \) 1,18,000
\( \quad \quad \) To Stock A/c \( \quad \) 20,000
\( \quad \quad \) To Furniture A/c \( \quad \) 8,000
\( \quad \quad \) To Plant & Machinery A/c \( \quad \) 50,000
\( \quad \quad \) To Debtors A/c \( \quad \) 40,000
(विभिन्न सम्पत्तियों को वसूली खाते में हस्तांतरित किया गया)
(2) लेनदारों को वसूली खाते में हस्तांतरित करने पर:
\( \quad \) Creditors A/c Dr. \( \quad \) 30,000
\( \quad \quad \) To Realisation A/c \( \quad \) 30,000
(लेनदारों के शेष को वसूली खाते में हस्तांतरित किया गया)
(3) देनदारों से नकद वसूल होने पर:
\( \quad \) Bank A/c Dr. \( \quad \) 37,000
\( \quad \quad \) To Realisation A/c \( \quad \) 37,000
(देनदारों से नकद राशि वसूल हुई)
(4) सामान्य संचय को साझेदारों में बांटने पर:
\( \quad \) General Reserve A/c Dr. \( \quad \) 20,000
\( \quad \quad \) To Gopesh's Capital A/c \( \quad \) 10,000
\( \quad \quad \) To Rakesh's Capital A/c \( \quad \) 10,000
(सामान्य संचय को साझेदारों के पूंजी खातों में बराबर बांटा गया)
(5) साझेदारों द्वारा सम्पत्तियाँ लेने पर:
\( \quad \) Gopesh's Capital A/c Dr. \( \quad \) 52,200
\( \quad \) Rakesh's Capital A/c Dr. \( \quad \) 35,000
\( \quad \quad \) To Realisation A/c \( \quad \) 87,200
(गोपेश द्वारा प्लांट व मशीन (Rs 45,000) और फर्नीचर (Rs 7,200) तथा राकेश द्वारा स्टॉक व ख्याति (Rs 35,000) लिया गया)
(6) लेनदारों का भुगतान करने पर:
\( \quad \) Realisation A/c Dr. \( \quad \) 28,500
\( \quad \quad \) To Bank A/c \( \quad \) 28,500
(लेनदारों को 5% बट्टे पर भुगतान किया गया)
(7) वसूली पर हुए लाभ को साझेदारों में बांटने पर:
\( \quad \) Realisation A/c Dr. \( \quad \) 7,700
\( \quad \quad \) To Gopesh's Capital A/c \( \quad \) 3,850
\( \quad \quad \) To Rakesh's Capital A/c \( \quad \) 3,850
(वसूली पर लाभ को बराबर अनुपात में साझेदारों में बांटा गया)
(8) साझेदारों को अंतिम भुगतान करने पर:
\( \quad \) Gopesh's Capital A/c Dr. \( \quad \) 5,650
\( \quad \) Rakesh's Capital A/c Dr. \( \quad \) 22,850
\( \quad \quad \) To Bank A/c \( \quad \) 28,500
(साझेदारों को अंतिम भुगतान किया गया)
आवश्यक खाते (Necessary Accounts)
Realisation A/c
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Stock | 20,000 | By Creditors | 30,000 |
| To Furniture | 8,000 | By Bank A/c (Debtors) | 37,000 |
| To Plant & Machinery | 50,000 | By Gopesh's Capital A/c (Assets Taken) | 52,200 |
| To Debtors | 40,000 | By Rakesh's Capital A/c (Assets Taken) | 35,000 |
| Total Assets Transferred | 1,18,000 | By Realisation Profit transferred to Capital A/c: | |
| To Bank A/c (Creditors Paid) | 28,500 | Gopesh | 3,850 |
| To Bank A/c (Realisation Exp) | Rakesh | 3,850 | |
| Total Payments | 28,500 | Total Profit | 7,700 |
| Total | 1,46,500 | Total | 1,46,500 |
Partner's Capital Account
| Particulars | Gopesh (Rs) | Rakesh (Rs) | Particulars | Gopesh (Rs) | Rakesh (Rs) |
|---|---|---|---|---|---|
| To Realisation A/c (Assets Taken) | 52,200 | 35,000 | By Balance b/d | 44,000 | 44,000 |
| To Bank A/c (Final Payment) | 5,650 | 22,850 | By General Reserve | 10,000 | 10,000 |
| By Realisation A/c (Profit) | 3,850 | 3,850 | |||
| Total | 57,850 | 57,850 | Total | 57,850 | 57,850 |
Bank Account
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Balance b/d | 20,000 | By Realisation A/c (Creditors Paid) | 28,500 |
| To Realisation A/c (Debtors Realised) | 37,000 | By Gopesh's Capital A/c | 5,650 |
| By Rakesh's Capital A/c | 22,850 | ||
| Total | 57,000 | Total | 57,000 |
🎯 Exam Tip: वसूली खाते, पूंजी खाते और नकद/बैंक खाते तीनों आपस में जुड़े होते हैं; सुनिश्चित करें कि प्रत्येक खाते का शेष अगले खाते में सही ढंग से हस्तांतरित हो।
Question 3. X, Y और Z साझेदार हैं जो लाभ-हानि को 2:2:1 अनुपात में बाँटते हैं। 31 मार्च, 2010 को साझेदारी के विघटन को सहमत हुए। उस दिन का चिट्ठा निम्न है:
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Creditors | 2,500 | Cash at Bank | 4,500 |
| General Reserve | 5,000 | Debtors | 6,500 |
| Current A/c X | 2,500 | Less: P.F.B. & D.D. | 500 |
| Current A/c Y | 1,500 | Net Debtors | 6,000 |
| Capital: | Stock | 5,000 | |
| X | 10,000 | Investment | 5,000 |
| Y | 5,000 | Furniture | 4,000 |
| Z | 5,000 | Plant & Machinery | 6,000 |
| Total Capital | 20,000 | Current A/c Z | 1,000 |
| Total | 31,500 | Total | 31,500 |
प्लाण्ट एवं मशीन से Rs 10,000, फर्नीचर Rs 5,000, देनदारों से पूर्ण, स्टॉक से Rs 4,000 प्राप्त हुए । विनियोग Z द्वारा लिये गए (पुस्तक मूल्य पर) । लेनदारों को 10 प्रतिशत बट्टे पर भुगतान किया, वसूली व्ययर Rs 100 हुए। Rs 550 की सम्पत्ति का पुस्तकों में लेखा नहीं किया गया था। जिसे X ने Rs 450 में ले ले लिया। Rs 100 का एक दायित्व पुस्तकों में दर्ज नहीं किया गया था। फर्म की पुस्तकें बन्द कीजिए और आवश्यक खाते बनाइये।
Answer:
Realisation A/c
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Stock | 5,000 | By Provision for B/D | 500 |
| To Investment | 5,000 | By Bank (Assets Realised): | |
| To Furniture | 4,000 | Debtors | 6,500 |
| To Plant & Machinery | 6,000 | Furniture | 5,000 |
| Total Assets Transferred | 20,000 | Stock | 4,000 |
| To Bank (Creditors Paid) | 2,250 | Plant & Machinery | 10,000 |
| To Bank (Realisation Exp.) | 100 | Total Cash from Assets | 25,500 |
| To Bank (Unrecorded Liability) | 100 | By Z Current Account (Investment) | 5,000 |
| Total Payments | 2,450 | By X Current Account (Unrecorded Asset) | 450 |
| To Partners Current A/c (Loss): | Total | 31,450 | |
| X | 2,000 | ||
| Y | 2,000 | ||
| Z | 1,000 | ||
| Total Loss | 5,000 | ||
| Total | 27,450 | Total | 31,450 |
Partner's Current Account
| Particulars | X (Rs) | Y (Rs) | Z (Rs) | Particulars | X (Rs) | Y (Rs) | Z (Rs) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| To Balance b/d | 1,000 | By Balance b/d | 2,500 | 1,500 | |||
| To Realisation A/c (Loss) | 2,000 | 2,000 | 1,000 | By Realisation A/c (Investment taken by Z) | 5,000 | ||
| To Capital A/c (Transfer) | 500 | By General Reserve | 2,000 | 2,000 | 1,000 | ||
| By Z's Capital A/c (Unrecorded asset by X) | 450 | ||||||
| Total | 2,500 | 2,000 | 2,000 | Total | 4,950 | 3,500 | 6,000 |
| To Z Current A/c (Transfer to Capital) | 6,000 | ||||||
| Total | 6,000 | 6,000 |
Partner's Capital Account
| Particulars | X (Rs) | Y (Rs) | Z (Rs) | Particulars | X (Rs) | Y (Rs) | Z (Rs) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| To Z Current A/c (Transfer of Debit Balance) | 4,000 | By Balance b/d | 10,000 | 5,000 | 5,000 | ||
| To Bank A/c (Final Payment) | 16,050 | 10,500 | 1,000 | By Current A/c (Transfer of Credit Balances) | 6,050 | 5,500 | |
| Total | 16,050 | 10,500 | 5,000 | Total | 16,050 | 10,500 | 5,000 |
Cash at Bank Account
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Balance b/d | 4,500 | By Realisation A/c (Creditors Paid) | 2,250 |
| To Realisation A/c (Assets Realised) | 25,500 | By Realisation A/c (Expenses) | 100 |
| To Realisation A/c (Unrecorded Asset taken by X) | 450 | By X's Capital A/c (Final Payment) | 16,050 |
| By Y's Capital A/c (Final Payment) | 10,500 | ||
| Total | 30,450 | Total | 28,900 |
| By Z's Capital A/c (Final Payment) | 1,000 | ||
| Total | 30,450 | Total | 29,900 |
In simple words: फर्म के विघटन पर सभी सम्पत्तियों और देनदारियों को वसूली खाते में ले जाकर निपटाया जाता है। वसूली से हुए लाभ या हानि को साझेदारों के पूंजी खातों में बांटा जाता है। अंत में, साझेदारों के पूंजी खातों के शेष को नकद या बैंक के माध्यम से निपटाया जाता है, और फिर नकद/बैंक खाता स्वतः बंद हो जाता है।
🎯 Exam Tip: पूंजी और चालू खातों को सही ढंग से अलग करें, और सुनिश्चित करें कि सभी समायोजन (जैसे लाभ/हानि वितरण, सम्पत्ति लेना, देनदारी का भुगतान) सही खातों में दर्ज किए गए हैं।
Question 4. तानु और मानु एक साझेदारी फर्म में 3:1 अनुपात में लाभों का विभाजन करते हैं। ये फर्म के समापन के लिए सहमत हुए । फर्म की सम्पत्तियों (Rs 2,000 नकद को छोड़कर) से Rs 1,08,500 वसूल हुए। समापन की तिथि पर फर्म के दायित्व व अन्य विवरण निम्न प्रकार थे-
लेनदार Rs 40,000, तानु का पूँजी खातार Rs 1,00,000 (जमा), मानु का पूँजी खातारे Rs 10,000 (नामे), लाभ-हानि खाता Rs 8,000 नामे, वसूली खर्चेर Rs 1,000 । यह ज्ञात हुआ कि एक विनियोग जो कि Rs 2,000 के थे। पुस्तकों में नहीं लिखे थे, इसे एक लेनदार द्वारा Rs 1,500 में ले लिया। शेष लेनदारों को Rs 36,500 का पूर्ण भुगतान किया गया।
वसूली खाता, रोकड़ खुत्सी एवं साझेदारों के पूँजी खाते बनाइये।
Answer:
Realisation Account
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Sundry Assets | 1,20,000 | By Creditors | 40,000 |
| To Cash (Expenses) | 1,000 | By Cash (Assets Realised) | 1,08,500 |
| To Cash (Creditors) | 36,500 | By Partner's Capital A/c (Profit): | |
| Tanu | 6,750 | ||
| Manu | 2,250 | ||
| Total | 1,57,500 | Total Profit | 9,000 |
| Total | 1,57,500 |
Partner's Capital Account
| Particulars | Tanu (Rs) | Manu (Rs) | Particulars | Tanu (Rs) | Manu (Rs) |
|---|---|---|---|---|---|
| To P/L A/c | 6,000 | 2,000 | By Balance b/d | 1,00,000 | |
| To Realisation A/c (Profit) | 6,750 | 2,250 | By Realisation A/c (Profit) | ||
| To Cash A/c (Final Payment) | 87,250 | By Balance b/d (Manu Dr.) | 10,000 | ||
| 10,000 | By Cash A/c (from Manu) | 14,250 | |||
| Total | 1,00,000 | 14,250 | Total | 1,00,000 | 14,250 |
Cash Account
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Balance b/d | 2,000 | By Realisation A/c (Creditors Paid) | 36,500 |
| To Realisation A/c (Assets Realised) | 1,08,500 | By Realisation A/c (Expenses) | 1,000 |
| To Manu Capital A/c (Cash Received) | 14,250 | By Tanu Capital A/c (Final Payment) | 87,250 |
| Total | 1,24,750 | Total | 1,24,750 |
🎯 Exam Tip: अदृश्य लेन-देन, जैसे कि लेनदार द्वारा विनियोग लेना, को सही ढंग से रिकॉर्ड करना महत्वपूर्ण है ताकि वसूली खाता और पूंजी खाते सही ढंग से संतुलित हो सकें।
Question 5. वे साझेदारी के विघटन का निश्चय करते हैं। निम्नलिखित राशियाँ वसूल होती हैं-फिक्स्च र्स व अन्य सम्पत्तियाँ Rs 9,000, स्टॉक Rs 4,520, देनदार Rs 1,800, लेनदारों को पूर्ण भुगतान में Rs 3,800 चुकाए । वसूली व्यय Rs 120 हुए। फर्म की पुस्तकें बन्द करने के लिए आवश्यक खाते बनाइए।
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Creditors | 4,000 | Cash in Hand | 4,000 |
| Capital: | Debtors | 2,600 | |
| Ram | 10,000 | Less: P.F.B.D. | 600 |
| Rahim | 4,000 | Net Debtors | 2,000 |
| Karim | 2,000 | Stock | 4,000 |
| Total Capital | 16,000 | Fixtures and other Assets | 10,000 |
| Total | 20,000 | Total | 20,000 |
Answer:
Partner's Capital Account
| Particulars | Ram (Rs) | Rahim (Rs) | Kareem (Rs) | Particulars | Ram (Rs) | Rahim (Rs) | Kareem (Rs) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| To Realisation (Loss) | 240 | 240 | 120 | By Balance b/d | 10,000 | 4,000 | 2,000 |
| To Cash A/c (Final Payment) | 9,760 | 3,760 | 1,880 | ||||
| Total | 10,000 | 4,000 | 2,000 | Total | 10,000 | 4,000 | 2,000 |
Cash Account
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Balance b/d | 4,000 | By Realisation A/c (Creditors Paid) | 3,800 |
| To Realisation A/c (Assets Realised) | 15,320 | By Realisation A/c (Expenses) | 120 |
| By Ram's Capital A/c | 9,760 | ||
| By Rahim's Capital A/c | 3,760 | ||
| By Kareem's Capital A/c | 1,880 | ||
| Total | 19,320 | Total | 19,320 |
🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि वसूली पर हुए लाभ या हानि को सही अनुपात में साझेदारों के पूंजी खातों में दर्ज किया गया है, क्योंकि यह अंतिम नकद निपटान को प्रभावित करेगा।
Question 6. दिसम्बर, 2012 को स्थिति बताता है। वे अपने व्यापार का विघटन करने का निश्चय करते हैं। उनका चिट्ठा निम्न है:
| Liabilities | Amount (Rs) | Assets | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| Bank Overdraft | 4,000 | Book Debts | 6,000 |
| General Reserve | 1,000 | Furniture | 200 |
| Capital: | Plant & Machinery | 900 | |
| Rakesh | 5,500 | Profit & Loss A/c (Debit Balance) | 1,700 |
| Deepak | 4,000 | ||
| Total Capital | 9,500 | Total Assets | 8,800 |
| Total Liabilities | 14,500 | Total | 12,400 |
पुस्तक ऋण 7.5 प्रतिशत की हानि पर वसूल किये गये। स्टॉक Rs 3,000 में बेचा गया। प्लाण्ट व मशीन Rs 700 में बेचे गये और फर्नीचर Rs 250 में बेचा । साझेदार लाभ-हानि का विभाजन बराबर अनुपात में करते हैं। विघटन पर आवश्यक खाते खोलिए।
Answer:
Realisation A/c
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Book Debts | 6,000 | By Bank Overdraft | 4,000 |
| To Furniture | 200 | By Cash (Assets Realised): | |
| To Plant & Machinery | 900 | Book Debts | 5,550 |
| To Stock (Unrecorded) | 3,000 | Stock | 3,000 |
| Total Assets Transferred | 10,100 | Plant & Machinery | 700 |
| To Cash A/c (Bank Overdraft Paid) | 4,000 | Furniture | 250 |
| To Cash A/c (Expenses) | 120 | Total Cash from Assets | 9,500 |
| To Partners Capital A/c (Loss): | Total | 13,500 | |
| Rakesh | 600 | ||
| Deepak | 600 | ||
| Total Loss | 1,200 | ||
| Total | 15,420 | Total | 13,500 |
Partner's Capital Account
| Particulars | Rakesh (Rs) | Deepak (Rs) | Particulars | Rakesh (Rs) | Deepak (Rs) |
|---|---|---|---|---|---|
| To P & L A/c | 850 | 850 | By Balance b/d | 5,500 | 4,000 |
| To Realisation A/c (Loss) | 600 | 600 | By General Reserve | 500 | 500 |
| To Cash A/c (Final Payment) | 4,550 | 3,050 | |||
| Total | 6,000 | 4,500 | Total | 6,000 | 4,500 |
Cash Account
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| To Balance b/d | 4,000 | By Realisation A/c (Creditors Paid) | 1,900 |
| To Realisation A/c (Assets Realised) | 9,500 | By Realisation A/c (Expenses) | 120 |
| By Rakesh's Capital A/c | 4,550 | ||
| By Deepak's Capital A/c | 3,050 | ||
| Total | 13,500 | Total | 9,620 |
🎯 Exam Tip: यदि प्रश्न में बैंक ओवरड्राफ्ट जैसी कोई विशेष देनदारी है, तो सुनिश्चित करें कि उसका भुगतान सही ढंग से दर्ज किया गया है, और वसूली पर सभी प्राप्तियां और भुगतान सही खातों में दिखाए गए हैं।
Question 7. X, Y और Z क्रमशः 4: 3 : 3 के अनुपात में लाभ-हानि को बाँटते हुए एक फर्म में साझेदार हैं। 31 दिसम्बर, 2015 को साझेदारी का विघटन करने का निर्णय लेते हैं उनका चिट्ठा निम्न हैं:
| Liabilities / Capital | Amount (Rs) | Assets / Debit Balances | Amount (Rs) |
|---|---|---|---|
| X | 80,000 | Less: P.F.B.D. | 5,000 |
| Y | 60,000 | Stock | 85,000 |
| Total Capital for X & Y | 1,40,000 | Z Overdrawn (Capital Debit Balance) | 9,000 |
| Total Assets/Debit Balances | 99,000 | ||
| Grand Total | 2,20,000 | Grand Total | 2,20,000 |
Y को सम्पत्तियों की वसूली करने और प्राप्य राशि का वितरण करने के लिए नियुक्त किया गया। यह स्टॉक और देनदारों से प्राप्त राशि का 5 प्रतिशत पारिश्रमिक के रूप में प्राप्त करेगा तथा वसूली के समस्त खर्चे स्वयं वहन करेगा। Y वसूली के परिणाम की इस प्रकार रिपोर्ट करता है कि स्टॉक से Rs 96,000 वसूल हुए देनदारों से Rs 72,000 वसूल हुए। लेनदारों को पूर्ण भुगतान में Rs 76,000 चुकाये। Rs 1,000 के अदत्त लेनदार जो कि चिट्टे में शामिल नहीं हैं चुकाये गये। Z दिवालिया हो गया, उसकी जायदाद से Rs 7,720 से प्राप्त हुए। गार्नर बनाम मरें नियम लागू होता है, वसूली खाता पूँजी खाते एवं रोकड़ खाता बनाइये।
Question 7. X, Y और Z क्रमशः 4:3:3 के अनुपात में लाभ-हानि को बाँटते हुए एक फर्म में साझेदार हैं। 31 दिसम्बर, 2015 को साझेदारी के विघटन का निर्णय लेते हैं। उस तिथि का चिट्ठा इस प्रकार था:Liabilities Amount (Rs) Assets Amount (Rs) X Capital 80,000 Debtors 90,000 Y Capital 60,000 Less: P.F.B.D. 5,000 (Total X, Y Capital) 1,40,000 (Net Debtors) 85,000 (Creditors - inferred) 76,000 Stock 1,20,000 (Unrecorded Creditor - inferred) 1,000 Z Capital (Overdrawn) 9,000 Total 2,17,000 Total 2,14,000
Y को सम्पत्तियों की वसूली करने और प्राप्य राशि का वितरण करने के लिए नियुक्त किया गया। यह स्टॉक और देनदारों से प्राप्त राशि का 5 प्रतिशत पारिश्रमिक के रूप में प्राप्त करेगा तथा वसूली के समस्त खर्चे स्वयं वहन करेगा। Y वसूली के परिणाम की इस प्रकार रिपोर्ट करता है कि स्टॉक से Rs 96,000 वसूल हुए, देनदारों से Rs 72,000 वसूल हुए। लेनदारों को पूर्ण भुगतान में Rs 76,000 चुकाये। Rs 1,000 के अदत्त लेनदार जो कि चिट्टे में शामिल नहीं हैं चुकाये गये। Z दिवालिया हो गया, उसकी जायदाद से Rs 7,720 से प्राप्त हुए। गार्नर बनाम मरें नियम लागू होता है, वसूली खाता, पूँजी खाते एवं रोकड़ खाता बनाइये।
Answer:
| Realisation Account | |||
|---|---|---|---|
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
| To Stock | 1,20,000 | By Cash (Assets Realized): | |
| To Debtors | 90,000 | Stock realized | 96,600 |
| To Provision for Bad Debts | 5,000 | Debtors realized | 72,000 |
| To Cash (Creditors Paid) | 76,000 | Total Realized Assets | 1,68,000 |
| To Cash (Outstanding Creditors Paid) | 1,000 | By Provision for Bad Debts | 5,000 |
| To Y's Capital (Commission) | 8,400 | By Partners Capital (Loss) | |
| X | 16,960 | ||
| Y | 12,720 | ||
| Z | 12,720 | ||
| (Total Loss) | 42,400 | ||
| Total | 2,95,400 | Total | 2,95,400 |
| Partners' Capital Account | |||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Particulars | X (Rs) | Y (Rs) | Z (Rs) | Particulars | X (Rs) | Y (Rs) | Z (Rs) |
| To Balance b/d (Overdrawn) | - | - | 9,000 | By Balance b/d | 80,000 | 60,000 | - |
| To Realisation A/c (Loss) | 16,960 | 12,720 | 12,720 | By Y's Capital A/c (Commission) | - | 8,400 | - |
| To Z's Capital A/c (Deficiency) | 8,000 | 6,000 | - | By Cash A/c (Z's private estate) | - | - | 7,720 |
| To Cash A/c (Final Payment) | 55,040 | 49,680 | - | By X's Capital A/c (Z's deficiency) | 8,000 | - | - |
| By Y's Capital A/c (Z's deficiency) | - | 6,000 | - | ||||
| Total | 80,000 | 68,400 | 21,720 | Total | 80,000 | 68,400 | 21,720 |
| Cash Account | |||
|---|---|---|---|
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
| To Balance b/d | 6,000 | By Realisation A/c (Creditors Paid) | 76,000 |
| To Realisation A/c (Assets Realized) | 1,68,000 | By Realisation A/c (Expenses) | 1,000 |
| To Z's Capital A/c (Received) | 7,720 | By X's Capital A/c (Paid) | 55,040 |
| By Y's Capital A/c (Paid) | 49,680 | ||
| Total | 1,81,720 | Total | 1,81,720 |
In simple words: इस प्रश्न में, हमें फर्म के विघटन पर वसूली खाता, साझेदारों के पूँजी खाते और रोकड़ खाता बनाना था। Y को संपत्तियां बेचने और देनदारियां चुकाने का काम सौंपा गया था, जिसके लिए उसे कमीशन मिलना था। Z दिवालिया हो गया और उसका घाटा X और Y ने गार्नर बनाम मरे नियम के अनुसार अपने पूँजी अनुपात में बाँटा। सभी संपत्तियां बेचकर और देनदारियां चुकाकर अंत में साझेदारों के खातों को निपटाया गया।
🎯 Exam Tip: गार्नर बनाम मरे नियम के अनुप्रयोग में, यदि कोई साझेदार दिवालिया हो जाता है तो उसकी पूँजी का घाटा अन्य सक्षम साझेदारों द्वारा उनके पूँजी अनुपात में वहन किया जाता है। वसूली व्यय और कमीशन को ध्यान से दर्ज करना महत्वपूर्ण है।
Question 11. A, B और C एक फर्म में बराबर के साझेदार है। 31 मार्च, 2012 को चिट्ठा निम्न था:Liabilities Amount (Rs) Assets Amount (Rs) Creditors 2,00,000 Cash at Bank 10,000 Capital: Debtors 90,000 A 20,000 Stock 1,20,000 B 80,000 Motor Car 20,000 C 40,000 Machinery 1,00,000 Total Capital 1,40,000 Grand Total 3,40,000 Grand Total 3,40,000
मशीन से Rs 50,000 एवं स्टॉक से Rs 36,000 वसूल हुए। मोटरकार B द्वारा Rs 24,000 में ली गयी। देनदारों से Rs 40,000 वसूल हुए। किसी भी साझेदार की पूँजी की कमी अन्य साझेदारों द्वारा लाभ विभाजन अनुपात में वहन की जायेगी। A दिवालिया हो गया, उससे कुछ भी राशि प्राप्त नहीं हो सकी। आवश्यक खाते बनाइये।
Answer:
| Realisation Account | |||
|---|---|---|---|
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
| To Stock | 1,20,000 | By Cash (Assets Realized): | |
| To Debtors | 90,000 | Machinery | 50,000 |
| To Motor Car | 20,000 | Stock | 36,000 |
| To Machinery | 1,00,000 | Debtors | 40,000 |
| To Cash (Creditors) | 2,00,000 | Total assets realized | 1,26,000 |
| By B's Capital A/c (Motor Car taken) | 24,000 | ||
| By Partners Capital (Loss): | |||
| A | 90,000 | ||
| B | 54,000 | ||
| C | 36,000 | ||
| Total Loss | 1,80,000 | ||
| Total | 5,30,000 | Total | 5,30,000 |
| Partners' Capital Account | |||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Particulars | A (Rs) | B (Rs) | C (Rs) | Particulars | A (Rs) | B (Rs) | C (Rs) |
| To Realisation (Loss) | 90,000 | 54,000 | 36,000 | By Balance b/d | 20,000 | 80,000 | 40,000 |
| To A's Capital (Deficiency) | - | 42,000 | 28,000 | By B's Capital (Motor Car taken) | - | 42,000 | - |
| To Realisation (Motor Car taken by B) | - | 24,000 | - | By C's Capital (A's deficiency) | - | - | 28,000 |
| To Cash A/c (Final Payment) | - | - | - | By Cash A/c (A's deficiency received) | - | 40,000 | 24,000 |
| Total | 90,000 | 1,20,000 | 64,000 | Total | 90,000 | 1,20,000 | 64,000 |
| Cash Account | |||
|---|---|---|---|
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
| To Balance b/d | 10,000 | By Realisation (Creditors Paid) | 2,00,000 |
| To Realisation (Assets Realized) | 1,26,000 | By B's Capital A/c (Paid) | 40,000 |
| To B's Capital A/c (Received) | 40,000 | By C's Capital A/c (Paid) | 24,000 |
| To C's Capital A/c (Received) | 24,000 | ||
| Total | 2,00,000 | Total | 2,00,000 |
In simple words: फर्म के विघटन पर मशीन, स्टॉक और देनदारों को बेचकर राशि वसूल की गई। B ने मोटर कार ले ली। लेनदारों का भुगतान किया गया। A दिवालिया हो गया, इसलिए उसके घाटे को B और C ने अपने पूँजी अनुपात में वहन किया। अंत में, सभी खातों का निपटारा करके रोकड़ खाते को बंद किया गया।
🎯 Exam Tip: जब कोई साझेदार दिवालिया हो जाए, तो उसके पूँजी घाटे को अन्य सक्षम साझेदारों द्वारा उनके पूँजी अनुपात में बाँटा जाता है, बशर्ते साझेदारी समझौते में कोई अन्य प्रावधान न हो।
Question 12. कपिल, भरत, विवेक और भावेश बराबर के साझेदार हैं, 31 मार्च, 2006 को फर्म का समापन हो गया। इस तिथि को चिट्ठा निम्न है:Liabilities Amount (Rs) Assets Amount (Rs) Bank Overdraft 4,000 Stock 30,000 Capital: Kapil Capital Overdrawn 20,000 Vivek 60,000 Bharat Capital Overdrawn 10,000 Bhavesh 30,000 Total Capital 90,000 Grand Total 1,10,000 Grand Total 1,10,000
देनदारों से पुस्तक मूल्य का 20 प्रतिशत कम वसूल हुआ। स्टॉक केवल Rs 4,000 में ही बेचा जा सका। Rs 2,000 का संदिग्ध दायित्व था, जिसका पुस्तकों में लेखा नहीं हुआ जिसके लिये Rs 1,600 चुकाने पड़े। भरत दिवालिया हो गया, उससे केवल Rs 6,000 वसूल हुए। वसूली व्यय Rs 4,800 हुए। गार्नर बनाम मरें नियम लागू करते हुए आवश्यक खाते बनाइये।
Answer:
| Realisation Account | |||
|---|---|---|---|
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
| To Debtors | 50,000 | By Creditors | 10,000 |
| To Stock | 30,000 | By Bank Overdraft | 4,000 |
| To Cash A/c (Creditors Paid) | 16,000 | By Cash (Assets Realised): | |
| To Cash A/c (Expenses) | 4,800 | Debtors | 40,000 |
| To Cash A/c (Bank Overdraft Paid) | 4,000 | Stock | 4,000 |
| To Cash A/c (Contingent Liability Paid) | 1,600 | Total Assets Realized | 44,000 |
| By Partner's Capital A/c (Loss): | |||
| Vivek | 10,600 | ||
| Bhavesh | 10,600 | ||
| Kapil | 10,600 | ||
| Bharat | 10,600 | ||
| Total Loss | 42,400 | ||
| Total | 1,06,400 | Total | 1,06,400 |
| Partner's Capital Account | |||||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Particulars | Vivek (Rs) | Bhavesh (Rs) | Kapil (Rs) | Bharat (Rs) | Particulars | Vivek (Rs) | Bhavesh (Rs) | Kapil (Rs) | Bharat (Rs) |
| To Realisation (Loss) | 10,600 | 10,600 | 10,600 | 10,600 | By Balance b/d | 60,000 | 30,000 | - | - |
| To Bharat Capital A/c (Deficiency) | 9,733 | 4,867 | - | - | By Bank A/c (Bharat's Private Estate) | - | - | - | 6,000 |
| To Cash A/c (Final Payment) | 39,667 | 14,533 | - | - | By Vivek Capital A/c (Bharat's Deficiency) | - | - | 9,733 | - |
| By Bhavesh Capital A/c (Bharat's Deficiency) | - | - | 4,867 | - | |||||
| By Cash A/c (Kapil and Bharat Overdrawn paid) | - | - | 30,600 | 20,600 | |||||
| By Balance b/d (Overdrawn) | - | - | 20,000 | 10,000 | |||||
| Total | 60,000 | 30,000 | 30,600 | 20,600 | Total | 60,000 | 30,000 | 30,600 | 20,600 |
| Cash Account | |||
|---|---|---|---|
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
| To Balance b/d | - | By Realisation (Creditors Paid) | 16,000 |
| To Realisation (Assets Realized) | 44,000 | By Realisation (Expenses Paid) | 4,800 |
| To Bharat's Capital A/c (Received) | 6,000 | By Bank Overdraft Paid | 4,000 |
| By Contingent Liabilities Paid | 1,600 | ||
| By Vivek's Capital A/c (Paid) | 39,667 | ||
| By Bhavesh's Capital A/c (Paid) | 14,533 | ||
| Total | 1,06,400 | Total | 1,06,400 |
In simple words: इस प्रश्न में, फर्म के विघटन पर देनदारों, स्टॉक, बैंक ओवरड्राफ्ट, और संदिग्ध दायित्वों के लिए वसूली खाता, साझेदारों के पूँजी खाते और रोकड़ खाता बनाना था। भरत दिवालिया हो गया था, और गार्नर बनाम मरे नियम के अनुसार उसके घाटे को अन्य सक्षम साझेदारों के बीच बाँटा गया। सभी लेन-देन को उचित खातों में दर्ज करके फर्म के खातों को बंद किया गया।
🎯 Exam Tip: गार्नर बनाम मरे नियम का उपयोग करते समय, दिवालिया साझेदार के घाटे को सक्षम साझेदारों के पूँजी अनुपात में बांटना याद रखें। सुनिश्चित करें कि सभी संपत्तियों और देनदारियों का सही मूल्यांकन और निपटारा हो।
Question 13. मोहन दिवालिया हो गया, वह केवल Rs 4,000 का ही भुगतान कर सका। साझेदारी विघटन का निश्चय किया गया। सम्पत्तियों से निम्न प्रकार वसूली हुई: विविध देनदार Rs 15,000, प्राप्य विपत्र Rs 14,000, स्टॉक के Rs 32,000, प्लाण्ट एवं मशीनरी Rs 28,000, समापन व्यय Rs 5,000 हुए। फर्म की पुस्तकें बन्द करने पर खाते बनाइये।
Answer:
| Realisation Account | |||
|---|---|---|---|
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
| To Plant and Machinery | 40,000 | By Cash (Assets Realized): | |
| To Bills Receivable | 20,000 | Debtors | 15,000 |
| To Debtors | 15,000 | Bills Receivable | 14,000 |
| To Stock | 40,000 | Stock | 32,000 |
| Plant & Machinery | 28,000 | ||
| To Cash (Creditors) | 40,000 | Total Assets Realized | 89,000 |
| To Cash (Expenses) | 5,000 | By Partners Capital (Loss): | |
| Ram's | 12,000 | ||
| Shyam's | 12,000 | ||
| Mohan's | 12,000 | ||
| Total Loss | 36,000 | ||
| Total | 1,65,000 | Total | 1,65,000 |
| Partners' Capital Account | |||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Particulars | Ram (Rs) | Shyam (Rs) | Mohan (Rs) | Particulars | Ram (Rs) | Shyam (Rs) | Mohan (Rs) |
| To Balance b/d (Overdrawn) | - | - | 18,000 | By Balance b/d | 50,000 | 30,000 | - |
| To Realisation (Loss) | 12,000 | 12,000 | 12,000 | By General Reserve | 10,000 | 10,000 | 10,000 |
| To Cash A/c (Final Payment) | 38,400 | 21,600 | - | By Cash A/c (Mohan's Private Estate) | - | - | 4,000 |
| To Mohan's Capital A/c (Deficiency) | 9,600 | 6,400 | - | By Ram's Capital A/c (Mohan's Deficiency) | - | - | 9,600 |
| By Shyam's Capital A/c (Mohan's Deficiency) | - | - | 6,400 | ||||
| Total | 60,000 | 40,000 | 30,000 | Total | 60,000 | 40,000 | 30,000 |
| Cash Account | |||
|---|---|---|---|
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
| To Balance b/d | 12,000 | By Realisation (Creditors Paid) | 40,000 |
| To Realisation (Assets Realized) | 89,000 | By Realisation (Expenses Paid) | 5,000 |
| To Mohan's Capital A/c (Received) | 4,000 | By Ram's Capital A/c (Paid) | 38,400 |
| By Shyam's Capital A/c (Paid) | 21,600 | ||
| Total | 1,05,000 | Total | 1,05,000 |
In simple words: इस प्रश्न में मोहन के दिवालिया होने पर फर्म का समापन किया गया। संपत्तियों से वसूली और देनदारियों का भुगतान करके वसूली खाता तैयार किया गया। मोहन के घाटे को राम और श्याम ने अपने लाभ-हानि अनुपात में वहन किया। अंत में, सभी साझेदारों के पूँजी खातों का निपटारा करके रोकड़ खाते को संतुलित किया गया।
🎯 Exam Tip: दिवालिया साझेदार से प्राप्त राशि को पहले उसकी पूँजी के घाटे को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है, और शेष घाटे को अन्य सक्षम साझेदारों द्वारा उनके पूँजी अनुपात में वहन किया जाता है।
Question 14. A, B और C एक फर्म में बराबर के साझेदार है। 31 मार्च, 2012 को चिट्ठा निम्न था:Liabilities Amount (Rs) Assets Amount (Rs) Creditors 70,000 Debtors 1,10,000 Capital: Stock 60,000 A 10,000 Goodwill 20,000 B 60,000 C 40,000 Total Capital 1,10,000 Grand Total 2,00,000 Grand Total 2,00,000
उक्त तिथि को फर्म का समापन हो गया। A दिवालिया हो जाता है, फर्म के देनदारों से Rs 80,000 व स्टॉक से Rs 50,000 वसूल होते हैं। लेनदारों को पूर्ण भुगतान में Rs 86,000 चुकाये गये । वसूली व्यय Rs 4,000 थे। A से कुछ भी वसूल नहीं हो सका। वसूली खाते, साझेदारों के पूँजी खाते व रोकड़ खाते बनाइये।
Answer:
| Realisation Account | |||
|---|---|---|---|
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
| To Debtors | 1,10,000 | By Creditors | 70,000 |
| To Stock | 60,000 | By Cash (Assets Realized): | |
| To Goodwill | 20,000 | Debtors | 80,000 |
| To Cash (Creditors) | 86,000 | Stock | 50,000 |
| To Cash (Expenses) | 4,000 | Total Assets Realized | 1,30,000 |
| By Partner's Capital A/c (Loss): | |||
| A | 20,000 | ||
| B | 20,000 | ||
| C | 20,000 | ||
| Total Loss | 60,000 | ||
| Total | 2,80,000 | Total | 2,80,000 |
| Partner's Capital Account | |||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Particulars | A (Rs) | B (Rs) | C (Rs) | Particulars | A (Rs) | B (Rs) | C (Rs) |
| To Realisation (Loss) | 20,000 | 20,000 | 20,000 | By Balance b/d | 10,000 | 60,000 | 40,000 |
| To A's Capital (Deficiency) | - | 5,000 | 5,000 | By B's Capital (A's Deficiency) | - | 5,000 | - |
| To Cash A/c (Final Payment) | - | 35,000 | 15,000 | By C's Capital (A's Deficiency) | - | - | 5,000 |
| Total | 20,000 | 60,000 | 40,000 | Total | 20,000 | 60,000 | 40,000 |
| Cash Account | |||
|---|---|---|---|
| Particulars | Amount (Rs) | Particulars | Amount (Rs) |
| To Balance b/d | 10,000 | By Realisation (Creditors Paid) | 86,000 |
| To Realisation (Assets Realized) | 1,30,000 | By Realisation (Expenses Paid) | 4,000 |
| By B's Capital A/c (Paid) | 35,000 | ||
| By C's Capital A/c (Paid) | 15,000 | ||
| Total | 1,40,000 | Total | 1,40,000 |
In simple words: फर्म के विघटन पर A, B और C के बीच वसूली खाता, पूँजी खाते और रोकड़ खाता बनाए गए। A दिवालिया हो गया, और उसके पूँजी के घाटे को B और C ने अपने पूँजी अनुपात में वहन किया। सभी संपत्तियों को बेचा गया और देनदारियों का भुगतान किया गया, जिससे फर्म के खाते बंद हो गए।
🎯 Exam Tip: जब साझेदार बराबर के हों और एक साझेदार दिवालिया हो जाए, तो उसके घाटे को अन्य सक्षम साझेदारों द्वारा उनके पूँजी अनुपात में वहन किया जाता है। सुनिश्चित करें कि सभी प्रविष्टियाँ सही ढंग से दर्ज की गई हैं।
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