RBSE Solutions Class 11 Sociology Chapter 3 मूलभूत अवधारणाएँ-II (संस्था, समिति, संगठन,

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Class 11 Sociology Chapter 3 मूलभूत अवधारणाएँ-II (संस्था, समिति, संगठन, RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Sociology Chapter 3 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Sociology Chapter 3 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. “समिति प्रायः किसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए व्यक्तियों द्वारा मिलकर कार्य करने को कहते हैं।" यह कथन किस समाजशास्त्री का है?
(a) गिन्सबर्ग
(b) मैकाइवर एवं पेज
(c) गिलिन एवं गिलन
(d) बोगार्डस
Answer: (d) बोगार्डस
In simple words: यह परिभाषा बोगार्डस नामक समाजशास्त्री ने दी थी। उनका मानना था कि लोग किसी खास मकसद को पूरा करने के लिए ही समूह बनाकर काम करते हैं।

🎯 Exam Tip: समाजशास्त्रीय परिभाषाओं को याद करते समय, प्रमुख शब्दों और विद्वान के नाम पर ध्यान दें ताकि आप उन्हें आसानी से पहचान सकें।

 

Question 3. निम्नांकित में कौन सी समिति है?
(a) प्रजातंत्र
(b) परिवार
(c) विवाह
(d) परीक्षा
Answer: (b) परिवार
In simple words: परिवार एक समिति है क्योंकि यह एक निश्चित उद्देश्य (जैसे संतानोत्पत्ति, पालन-पोषण) के लिए व्यक्तियों द्वारा बनाया गया एक समूह है। परिवार हमें सुरक्षा और अपनेपन की भावना भी देता है।

🎯 Exam Tip: समिति एक ऐसा समूह है जिसका निर्माण किसी खास लक्ष्य को पूरा करने के लिए किया जाता है; परिवार बच्चों के पालन-पोषण और सामाजिकरण का एक मुख्य लक्ष्य रखता है।

 

Question 4. "हम समिति के सदस्य होते हैं, संस्था के नहीं।" यह कथन किस विद्वान का है?
(a) गिन्सबर्ग
(b) मैकाइवर एवं पेज
(c) बोगार्डस
(d) पारसला
Answer: (b) मैकाइवर एवं पेज
In simple words: मैकाइवर और पेज ने यह बात कही थी। इसका मतलब है कि हम किसी समूह (समिति) का हिस्सा बनते हैं, लेकिन नियमों और कार्यप्रणालियों (संस्था) का नहीं।

🎯 Exam Tip: समिति व्यक्तियों का समूह है जबकि संस्था कार्यप्रणाली और नियमों का एक व्यवस्थित तरीका है; इस अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 5. निम्नांकित में कौन सी संस्था है
(a) परिवार
(b) विवाह
(c) राष्ट्र
(d) गाँव
Answer: (b) विवाह
In simple words: विवाह एक संस्था है क्योंकि यह समाज द्वारा स्वीकृत नियमों और कार्यप्रणालियों का एक संगठित स्वरूप है जो मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करता है। यह एक सांस्कृतिक उपकरण भी है।

🎯 Exam Tip: संस्थाएँ अमूर्त होती हैं और व्यवहार के तरीकों को दर्शाती हैं, जबकि समिति मूर्त होती है और लोगों के समूह को दर्शाती है।

 

Question 7. निम्नलिखित में से कौन सी एक समिति है
(a) व्यापार संघ
(b) राज्य
(c) टेनिस क्लब
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: व्यापार संघ, राज्य और टेनिस क्लब - ये सभी समितियाँ हैं। ये सभी व्यक्तियों के संगठित समूह हैं जो किसी विशेष उद्देश्य या हितों की पूर्ति के लिए काम करते हैं।

🎯 Exam Tip: समिति को पहचानने के लिए हमेशा देखें कि क्या वह व्यक्तियों का एक ऐसा समूह है जो किसी खास लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बनाया गया है।

 

Question 8. उन मानकों को क्या कहते हैं जिनके अनुसार व्यक्तियों की अन्तक्रियाएँ निर्धारित होती हैं
(a) मानदंड (आदर्श नियम)
(b) सामाजिक व्यवस्था
(c) अप्रतिमानता
(d) जनमत
Answer: (a) मानदंड (आदर्श नियम)
In simple words: मानदंड वे नियम होते हैं जो हमें बताते हैं कि समाज में कैसे व्यवहार करना चाहिए। ये नियम हमारे आपस के व्यवहार को ठीक से चलाने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: मानदंड सामाजिक व्यवहार के लिए दिशा-निर्देश होते हैं और इन्हें आदर्श नियम भी कहा जाता है, जो समाज में व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 9. “सामाजिक मानदंड समूह की आकांक्षाएँ हैं,” यह कथन किस विद्वान का है?
(a) किंग्स्ले डेविस
(b) किम्बल यंग
(c) रोबर्ट बीरस्टीड
(d) बुड्स
Answer: (b) किम्बल यंग
In simple words: किम्बल यंग ने कहा कि सामाजिक मानदंड वे चीजें हैं जो एक समूह के लोग चाहते हैं कि उनके सदस्य कैसे काम करें। ये मानदंड समूह के सदस्यों के व्यवहार को आकार देते हैं।

🎯 Exam Tip: समाजशास्त्र में, विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई परिभाषाएँ महत्वपूर्ण होती हैं, इसलिए हर कथन को उसके लेखक से जोड़कर याद रखें।

 

Question 11. दैनिक जीवन के व्यवहार को नियंत्रित करने के सामान्य सिद्धांतों को क्या कहा जाता है?
(a) समुदाय
(b) समिति
(c) सामाजिक व्यवस्था
(d) सामाजिक मूल्य
Answer: (d) सामाजिक मूल्य
In simple words: हमारे रोज़मर्रा के जीवन में हम कैसे व्यवहार करें, इसके जो नियम होते हैं, उन्हें सामाजिक मूल्य कहते हैं। ये मूल्य हमें सही-गलत का रास्ता दिखाते हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक मूल्य समाज की नींव होते हैं और व्यक्तिगत तथा सामूहिक व्यवहार दोनों को प्रभावित करते हैं, जिससे समाज में स्थिरता आती है।

 

Question 12. सामाजिक मूल्यों में कौन से तत्व निहित हैं?
(a) ज्ञानात्मक तत्व
(b) भावात्मक तत्व
(c) क्रियात्मक तत्व
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: सामाजिक मूल्यों में ज्ञान (समझ), भावनाएँ (महसूस करना) और क्रिया (काम करना) जैसे तीनों तत्व होते हैं। यह दिखाता है कि मूल्य हमारी सोच, भावना और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक मूल्य बहुआयामी होते हैं; वे केवल हमारी सोच को नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं और कार्यों को भी निर्देशित करते हैं।

RBSE Class 11 Sociology Chapter 3 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. समिति को परिभाषित कीजिए।
Answer: समिति मनुष्यों द्वारा सोच-विचारकर बनाया गया एक ऐसा समूह है जिसके एक या कई खास मकसद होते हैं। इस समूह को चलाने के लिए इसकी अपनी एक कार्यप्रणाली या कार्यकारिणी होती है। यह लोगों को एक साथ लाकर किसी साझा लक्ष्य के लिए काम करने में मदद करती है।
In simple words: समिति वह समूह है जिसे लोग किसी खास काम को पूरा करने के लिए बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: समिति की परिभाषा में 'विचारपूर्वक' और 'निश्चित उद्देश्य' जैसे शब्द बहुत महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 2. संस्था को परिभाषित कीजिए।
Answer: संस्था समाज द्वारा स्वीकार किए गए नियमों और कार्यप्रणालियों की एक संगठित व्यवस्था है। यह व्यवस्था मनुष्य की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बनाई जाती है। यह समाज में व्यवहार के तरीके बताती है और सामाजिक संबंधों को स्थायी बनाती है।
In simple words: संस्था नियमों और तरीकों का एक ढाँचा है जिसे समाज हमारी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बनाता है।

🎯 Exam Tip: संस्था नियमों और कार्यप्रणालियों से बनती है, जबकि समिति व्यक्तियों का समूह होती है। इन दोनों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 4. संगठन से आप क्या समझते हैं?
Answer: संगठन लोगों का एक बड़ा समूह होता है जिसके सभी काम बिना किसी व्यक्तिगत लगाव के नियमों के अनुसार चलते हैं। इसमें कोई न कोई अधिकारी तंत्र ज़रूर होता है जो सभी कार्यों को व्यवस्थित करता है। संगठन का मुख्य लक्ष्य होता है सामूहिक उद्देश्यों को कुशलता से प्राप्त करना।
In simple words: संगठन लोगों का एक बड़ा समूह है जहाँ काम नियमों के हिसाब से होते हैं और कोई अधिकारी उन्हें चलाता है।

🎯 Exam Tip: संगठन की परिभाषा में 'अवैयक्तिक संबंध' और 'अधिकारी तंत्र' प्रमुख शब्द हैं, जो इसे अन्य समूहों से अलग करते हैं।

 

Question 5. औपचारिक संगठन किसे कहते हैं?
Answer: औपचारिक संगठन वे होते हैं जिनकी हर बातचीत और काम करने का तरीका पहले से तय होता है। इन संगठनों के कुछ खास लक्ष्य होते हैं, जैसे सेना, सरकारी विभाग और राजनीतिक दल। इसमें नियम और कानून बहुत सख्त होते हैं और हर सदस्य को उनका पालन करना होता है।
In simple words: औपचारिक संगठन वे हैं जहाँ सब काम नियमों से और तय लक्ष्यों के हिसाब से होते हैं, जैसे सेना या सरकारी दफ्तर।

🎯 Exam Tip: औपचारिक संगठन की पहचान उसके तय लक्ष्यों, नियमों और संरचना से होती है, जिसमें भूमिकाएँ स्पष्ट रूप से परिभाषित होती हैं।

 

Question 6. मूल्य को परिभाषित कीजिए।
Answer: मूल्य वे मानक या विचार हैं जिनके आधार पर हम किसी व्यक्ति के व्यवहार, उसके लक्ष्यों, काम करने के तरीकों और भावनाओं को सही या गलत, अच्छा या बुरा ठहराते हैं। ये समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि ये लोगों को सही रास्ते पर चलने में मदद करते हैं।
In simple words: मूल्य वे विचार हैं जो हमें बताते हैं कि क्या सही है और क्या गलत।

🎯 Exam Tip: मूल्यों को 'मानक' या 'धारणाएँ' भी कहा जाता है, जो सामाजिक व्यवहार को निर्देशित करते हैं और नैतिक निर्णयों का आधार बनते हैं।

 

Question 7. सामाजिक मानदण्ड की परिभाषा दीजिए।
Answer: सामाजिक मानदण्ड समाज में व्यवहार करने के पक्के और सही तरीके होते हैं। ये समाज द्वारा स्वीकार किए जाते हैं और हमारे जीवन के हर हिस्से में मौजूद होते हैं। ये मानदंड हमें सामाजिक परिस्थितियों में उचित व्यवहार करना सिखाते हैं।
In simple words: सामाजिक मानदण्ड वे नियम हैं जो समाज में लोगों के व्यवहार करने के तरीके बताते हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक मानदण्ड वे मार्गदर्शक सिद्धांत हैं जो समाज में सामंजस्य और व्यवस्था बनाए रखने में मदद करते हैं।

 

Question 8. फैशन किसे कहते हैं?
Answer: फैशन मानवीय व्यवहार से जुड़ा एक खास पसंद है जो किसी समाज या समूह में एक खास समय पर लोकप्रिय होती है। यह पसंद समय के साथ बदलती रहती है और नए-नए रूप लेती रहती है। यह अक्सर सामाजिक पहचान और स्वीकृति से जुड़ा होता है।
In simple words: फैशन वह पसंद है जो किसी समूह में एक खास समय पर चलती है और समय के साथ बदल जाती है।

🎯 Exam Tip: फैशन हमेशा बदलता रहता है और यह अक्सर लोगों की सामाजिक पहचान और समूह में शामिल होने की इच्छा को दर्शाता है।

 

Question 9. शिष्टाचार का क्या अर्थ है?
Answer: शिष्टाचार का अर्थ है समाज में स्वीकार किए गए सभ्य और सम्मानजनक व्यवहार के नियम। ये हमें बताते हैं कि दूसरों के साथ कैसे बातचीत करें और कैसे प्रस्तुत हों, जिससे अच्छे सामाजिक संबंध बने रहें। यह सामाजिक जीवन को आसान और सुखद बनाता है।
In simple words: शिष्टाचार का मतलब है समाज में अच्छे और सभ्य तरीके से व्यवहार करना।

🎯 Exam Tip: शिष्टाचार केवल औपचारिक अवसरों पर ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपसी सम्मान और सामंजस्य बढ़ाता है।

 

Question 11. जनरीति को परिभाषित कीजिए।
Answer: जनरीति उन तरीकों को कहते हैं जिन्हें लोग अपनी इच्छाओं और जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनाते हैं। जैसे-जैसे लोगों की जरूरतें बदलती हैं, ये जनरीतियाँ भी बदलती रहती हैं। यह समाज में सामान्य व्यवहार का हिस्सा होती है।
In simple words: जनरीति वे सामान्य तरीके हैं जिनसे लोग अपनी ज़रूरतें पूरी करते हैं, और ये समय के साथ बदलते रहते हैं।

🎯 Exam Tip: जनरीति का पालन अक्सर अनजाने में होता है और इसमें किसी खास तर्क की आवश्यकता नहीं होती।

 

Question 12. प्रथाएँ किसे कहते हैं?
Answer: प्रथाएँ ऐसे व्यवहार हैं जिनका पालन केवल इसलिए किया जाता है क्योंकि वे पुराने समय से चले आ रहे हैं। इन प्रथाओं में हमेशा तर्क या कारण का होना ज़रूरी नहीं होता। वे समाज की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा होती हैं।
In simple words: प्रथाएँ वे पुराने रीति-रिवाज हैं जिनका पालन हम इसलिए करते हैं क्योंकि वे लंबे समय से होते आ रहे हैं।

🎯 Exam Tip: प्रथाएँ समाज की परंपराओं का हिस्सा होती हैं और आमतौर पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती हैं, भले ही उनका मूल तर्क अब स्पष्ट न हो।

RBSE Class 11 Sociology Chapter 3 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. समिति की विशेषताएँ बताइए।
Answer: समिति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. समिति का निर्माण दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। प्रत्येक समिति के अपने निश्चित उद्देश्य होते हैं।
2. समिति सोच-विचारकर बनाया गया एक निश्चित संगठन है। उद्देश्यों को पाने के लिए, इसमें नियमों का एक ढाँचा होता है।
3. समिति की सदस्यता अपनी मर्ज़ी से होती है। साथ ही इसकी प्रकृति भी कुछ समय के लिए होती है; जैसे ही इसके उद्देश्य पूरे होते हैं, इसका अस्तित्व खत्म हो जाता है।
4. समिति एक मूर्त संगठन है। समिति के सदस्यों के बीच संबंध औपचारिक होते हैं। समिति एक साधन है, लक्ष्य नहीं। समाज में समूह बनाकर ही कई काम पूरे किए जाते हैं।
In simple words: समिति लोगों का एक अस्थायी और सोच-समझकर बनाया गया समूह है, जिसके खास मकसद होते हैं और इसकी सदस्यता अपनी मर्ज़ी से होती है।

🎯 Exam Tip: समिति की विशेषताओं में 'व्यक्ति समूह', 'निश्चित उद्देश्य', 'ऐच्छिक सदस्यता', 'अस्थायी प्रकृति', 'मूर्त संगठन' और 'औपचारिक संबंध' मुख्य बिंदु हैं।

 

Question 2. संस्था की विशेषताएँ बताइए।
Answer: संस्था की विशेषताओं को हम निम्नलिखित बिंदुओं में समझ सकते हैं : संस्था नियमों, कार्यप्रणालियों और संबंधों की एक व्यवस्थित व्यवस्था है। इसमें स्थायित्व भी होता है। इसी कारण यह व्यक्तियों की आवश्यकताओं को लगातार पूरा करती रहती है। यह समाज में व्यवहार के स्थापित तरीकों को दर्शाती है और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखती है।
In simple words: संस्था नियमों का एक स्थिर ढाँचा है जो हमारी ज़रूरतों को पूरा करता है और समाज में व्यवहार के तरीके बताता है।

🎯 Exam Tip: संस्था की पहचान उसके स्थायित्व, कार्यप्रणाली और सामाजिक स्वीकृति से होती है, जो इसे केवल एक समूह होने से अलग करती है।

 

Question 3. संगठन की विशेषताओं का उल्लेख करें।
Answer: संगठन की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. संगठन लोगों की एक विशाल समिति है। कोई भी संगठन हो, उसमें लोगों की सदस्यता होती है। संगठन में शक्ति और अधिकार का बँटवारा होता है। संगठन में काम करने वाले लोग सोपानिक व्यवस्था की तरह जुड़े होते हैं।
2. संगठन में एक अधिकारी तंत्र मौजूद होता है, जो संगठन को लगातार बनाए रखने की कोशिश करता है। संगठन का स्वभाव काम करने वाला (प्रकार्यवादी) होता है।
3. संगठन विशेषज्ञों का एक जमावड़ा होता है। दरअसल, संगठन अपनी जड़ में विशेषज्ञों का एक समूह है। एक बार जब संगठन बन जाता है तो वह खुद को बनाए रखना चाहता है।
4. संगठन की अपनी एक खास विचारधारा होती है। कोई भी संगठन किसी न किसी विचारधारा से जुड़ा होता है। संगठन में स्रोत और उद्देश्य की धारणा शामिल होती है। संगठन के नियम और उद्देश्य इसे दिशा देते हैं।
In simple words: संगठन लोगों का एक बड़ा समूह है जिसमें शक्ति बँटी होती है, अधिकारी तंत्र होता है, और यह विशेषज्ञों का समूह होता है जो किसी खास विचारधारा और उद्देश्यों पर काम करता है।

🎯 Exam Tip: संगठन की विशेषताओं में 'सदस्यता', 'शक्ति का बँटवारा', 'अधिकारी तंत्र' और 'विशेषज्ञों का जमावड़ा' प्रमुख हैं।

 

Question 4. सामाजिक मानदण्डों की विशेषताएँ बताइए।
Answer: सामाजिक मानदण्डों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. सामाजिक मानदण्डों में छोटे-बड़े नियम और उपनियम होते हैं। ये सभी समाजों में ज़रूरी रूप से पाए जाते हैं। सामाजिक मानदण्ड मानव समाज के साथ ही विकसित हुए हैं।
2. सामाजिक मानदण्ड समाज के अस्तित्व की रक्षा करते हैं। मानव स्वचालित रूप से अपने जीवनभर सामाजिक मानदण्डों का पालन करता है। ये मानदण्ड मानव को सही रास्ता दिखाते हैं।
3. सामाजिक मानदण्ड सापेक्ष होते हैं। ये नैतिक कर्तव्य की भावना से जुड़े होते हैं। ये व्यक्ति को प्रभावित करते हैं और व्यक्ति इनसे प्रभावित भी होते हैं।
4. सामाजिक मानदण्ड लिखित और अलिखित दोनों तरह के होते हैं। इनका संबंध समाज की असली परिस्थितियों से होता है। सामाजिक मानदण्ड सामाजिक नियंत्रण के साधन भी हैं। ये समाज में अनुशासन बनाए रखने में मदद करते हैं।
In simple words: सामाजिक मानदण्ड समाज के नियम हैं, जो सभी समाजों में पाए जाते हैं, हमारे व्यवहार को नियंत्रित करते हैं और समाज में नियंत्रण बनाए रखते हैं।

🎯 Exam Tip: मानदण्ड लिखित और अलिखित दोनों हो सकते हैं, और इनका मुख्य कार्य सामाजिक व्यवस्था और नियंत्रण को बनाए रखना है।

 

Question 5. मूल्यों की विशेषताएँ बताइए।
Answer: मूल्यों की विशेषताओं को हम निम्नलिखित तरह से समझ सकते हैं :
1. मूल्य सामूहिक होते हैं। ये ऐसे मानक हैं जिनके द्वारा हम किसी वस्तु, व्यवहार, लक्ष्य, साधन और गुण आदि को उचित या अनुचित ठहराते हैं।
2. मूल्य गतिशील होते हैं: मूल्य हमेशा एक जैसे नहीं रहते। समय और परिस्थितियों के साथ इनमें बदलाव आता रहता है।
3. मूल्यों में विभिन्नता पायी जाती है: हर समाज के अपने मूल्य होते हैं जो दूसरे समाज के मूल्यों से अलग होते हैं। भारतीय समाज और पश्चिमी समाजों के मूल्यों में भिन्नता पायी जाती है।
4. मूल्य सामाजिक कल्याण और सामाजिक आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण समझे जाते हैं: मूल्य समूह के कल्याण और ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ज़रूरी हैं।
5. मूल्यों के बारे में समूहों में एकमतता पायी जाती है: समूह और समाज के सभी लोगों में मूल्यों के बारे में एक राय होती है। वे सभी इन्हें स्वीकार करते हैं और मान्यता देते हैं।
6. मूल्यों के पीछे भावनाएँ होती हैं: मूल्यों के साथ लोगों की भावनाएँ जुड़ी होती हैं। यही कारण है कि वे अपने निजी हितों को छोड़कर भी उनकी रक्षा करते हैं।
7. मूल्य सामाजिक मानक हैं: मानक वे होते हैं जिनके द्वारा हम किसी वस्तु को मापते हैं। मूल्य भी मानक हैं जिनके द्वारा हम किसी वस्तु, व्यवहार, लक्ष्य, साधन, गुण आदि को अच्छा या बुरा, उचित या अनुचित, वांछित एवं अवांछित ठहराते हैं। ये सामाजिक मापदंड के रूप में काम करते हैं।
In simple words: मूल्य वे सामूहिक नियम हैं जो समाज में लोगों के व्यवहार को सही या गलत बताते हैं, ये समय के साथ बदलते हैं और समाज के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं।

🎯 Exam Tip: मूल्यों को सिर्फ व्यक्तिगत पसंद के रूप में नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक धरोहर के रूप में समझना महत्वपूर्ण है, जो सामाजिक एकीकरण में मदद करते हैं।

 

Question 6. मूल्यों के प्रकारों का उल्लेख करें।
Answer: मूल्यों के प्रकारों को लेकर समाजशास्त्रियों में अलग-अलग राय है। कई समाजशास्त्रियों ने मूल्यों के अलग-अलग प्रकार बताए हैं। सी.एम. केस ने सामाजिक मूल्यों को चार मुख्य प्रकारों में बाँटा है:
1. सावयवी मूल्य: इन मूल्यों का संबंध आग, पानी जैसी मूलभूत चीज़ों से होता है।
2. विशिष्ट मूल्य: प्रत्येक व्यक्ति की अपनी खास विशेषताएँ, पसंद और विचार होते हैं। इन्हीं के आधार पर वह किसी चीज़ का मूल्यांकन करता है। उदाहरण के लिए, विधवा पुनर्विवाह और बाल विवाह को कोई व्यक्ति सही मानता है तो कोई गलत।
3. सामाजिक मूल्य: कुछ मूल्यों का संबंध सामाजिक जीवन से होता है। सामाजिक व्यवहार, परंपराओं और आदतों के संबंध में हर समाज में अपने मूल्य होते हैं।
4. सांस्कृतिक मूल्य: ये मूल्य किसी संस्कृति के खास तौर-तरीकों और मान्यताओं से जुड़े होते हैं।
इनके अलावा, पेरी महोदय ने नकारात्मक, सकारात्मक, विकासवादी और वास्तविक मूल्यों की बात की है। कुछ अन्य विद्वान मूल्यों को सुखवादी, सौंदर्यवादी, धार्मिक, आर्थिक, नैतिक और तार्किक जैसे प्रकारों में बाँटते हैं। इसी तरह, स्प्रेगर महोदय ने मूल्यों को सैद्धांतिक, आर्थिक, सौंदर्यवादी, सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक भागों में बाँटा है। एक अन्य वर्गीकरण धार्मिक, आर्थिक, राजनीतिक और सौंदर्यवादी रूपों में किया गया है। इन सभी विचारों से स्पष्ट है कि मूल्यों के प्रकारों के संबंध में कोई एक निश्चित स्थिति स्वीकार नहीं की गई है। मूल्य समाज और व्यक्ति के बीच एक सेतु का काम करते हैं।
In simple words: मूल्यों के कई प्रकार होते हैं, जैसे सावयवी, विशिष्ट, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्य। समाजशास्त्री इन्हें अलग-अलग तरीकों से देखते हैं।

🎯 Exam Tip: जब मूल्यों के प्रकारों का वर्णन करें, तो किसी एक समाजशास्त्री (जैसे सी.एम. केस) के वर्गीकरण को प्रमुखता से बताएं और उसके बाद अन्य मतों का संक्षिप्त उल्लेख करें।

 

Question 7. समिति एवं संस्था में दो अन्तर बताइए।
Answer: समिति और संस्था में दो मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

क्र. सं.समितिसंस्था
1समिति को व्यक्तियों के समूह के रूप में देखा जा सकता है। अतः यह मूर्त (जिसे देखा जा सके) होती है।संस्था अमूर्त (जिसे देखा न जा सके) होती है क्योंकि यह नियमों, कार्यप्रणाली आदि की एक व्यवस्था है।
2समिति की नियंत्रण शक्ति तुलनात्मक रूप से कमजोर या ढीली होती है।संस्था में नियंत्रण शक्ति अधिक होती है। संस्था द्वारा मान्य रीति-रिवाजों के विरुद्ध आचरण करना गलत और असामाजिक माना जाता है।
समिति अक्सर किसी विशेष उद्देश्य के लिए बनाई जाती है, जबकि संस्था मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बनी व्यापक कार्यप्रणालियों का संग्रह है।
In simple words: समिति लोगों का एक समूह है जिसे देखा जा सकता है, जबकि संस्था नियमों और तरीकों का एक अदृश्य ढाँचा है जो समाज को चलाता है।

🎯 Exam Tip: समिति एक 'साधन' है जबकि संस्था 'सेवा का एक तरीका' है; इस मूलभूत अंतर को याद रखें।

 

Question 9. परम्परा की विशेषताएँ बताइए।
Answer: परम्परा की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. परम्पराओं में लगातारता पायी जाती है। ये बहुत लंबे समय से चली आ रही होती हैं।
2. समाज में परम्पराएँ पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रहती हैं।
3. मनुष्य बिना सोचे-समझे और बिना विचार किए परम्पराओं का पालन करता है।
4. परम्पराओं में कठोरता पायी जाती है, इनमें बदलाव धीरे-धीरे होता है। इनका हस्तांतरण लिखित या मौखिक-किसी भी तरीके से हो सकता है। परम्पराएँ अक्सर समाज की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा होती हैं।
In simple words: परम्पराएँ पुरानी आदतें हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती हैं, लोग उन्हें बिना सोचे मानते हैं, और वे आसानी से बदलती नहीं हैं।

🎯 Exam Tip: परम्पराएँ अक्सर मौखिक रूप से हस्तांतरित होती हैं और समाज की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।

 

Question 10. प्रथाओं की विशेषताएँ बताइए।
Answer: प्रथाओं की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. प्रथा में समूह के कल्याण का भाव छिपा होता है।
2. ये नई चीजों की विरोधी होती हैं। इसलिए यह काम करने के पुराने तरीकों पर जोर देती हैं।
3. ये लोकाचारों की तुलना में लोकरीतियों के ज़्यादा पास होती हैं। इसके बावजूद ये दोनों के पारंपरिक, अपने आप चलने वाले और सामूहिक स्वभाव को स्पष्ट करती हैं।
4. प्रथाएँ समाज की सांस्कृतिक धरोहर होती हैं। इनमें तर्क का होना ज़रूरी नहीं होता। प्रथाएँ अक्सर समाज में एकरूपता और निरंतरता बनाए रखने में मदद करती हैं।
In simple words: प्रथाएँ पुरानी आदतें हैं जो समूह के भले के लिए होती हैं, नई चीजों का विरोध करती हैं और समाज की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा होती हैं।

🎯 Exam Tip: प्रथाएँ समाज में स्थिरता और सामंजस्य बनाए रखने में मदद करती हैं, भले ही उनका मूल उद्देश्य समय के साथ बदल गया हो।

RBSE Class 11 Sociology Chapter 3 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. संस्था को परिभाषित कीजिए तथा संस्था की विभिन्न विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: संस्था की कोई एक सर्वमान्य परिभाषा नहीं है। इस संबंध में विभिन्न समाजशास्त्रियों ने अपनी-अपनी परिभाषाएँ दी हैं, जो निम्नलिखित हैं:
“एक सामाजिक संस्था समाज की ऐसी संरचना है जिसे मुख्य रूप से सुस्थापित प्रणालियों के द्वारा लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संगठित किया गया है।” - बोगार्डस
“एक संस्था को किसी एक या अधिक प्रकार्यों के चारों ओर निर्मित अंतर्संबंधित जनरीतियों (लोकाचारों), रूढ़ियों और कानूनों के समुच्चय के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।” - किंग्सले डेविस
उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि संस्था मानव की मूलभूत जरूरतों की पूर्ति के रूप में समाज द्वारा स्वीकृत नियमों एवं कार्यप्रणालियों की संगठित व्यवस्था है। यह समाज में व्यवहार के स्थापित तरीकों को दर्शाती है।
संस्था की विशेषताएँ :
• सुपरिभाषित उद्देश्य : प्रत्येक संस्था के निश्चित और स्पष्ट उद्देश्य होते हैं जिनकी पूर्ति के लिए संस्था का निर्माण किया जाता है।
• स्थायित्व : संस्थाओं का विकास एक लंबी अवधि के बाद होता है। जब कोई कार्यप्रणाली लंबे समय तक समाज के व्यक्तियों की आवश्यकताओं को लगातार पूरा करती रहती है तो उसे एक संस्था के रूप में स्वीकार किया जाता है।
• परम्परा : हर एक संस्था की अपनी परम्पराएँ होती हैं, जो लिखित या अलिखित हो सकती हैं। ये परम्पराएँ लोगों के व्यवहारों में एकरूपता लाने में अपना योगदान देती हैं।
• सुस्पष्ट उद्देश्य : प्रत्येक संस्था के अपने एक या अनेक स्पष्ट और निश्चित उद्देश्य होते हैं जो मानवीय आवश्यकताओं से जुड़े होते हैं। उदाहरण के रूप में शैक्षणिक संस्थाओं के कुछ पूरी तरह से स्पष्ट उद्देश्य होते हैं।
• सांस्कृतिक उपकरण : प्रत्येक संस्था से संबंधित भौतिक एवं अभौतिक उपकरण होते हैं जो संस्था के उद्देश्यों की दृष्टि से उपयोगी होते हैं। उदाहरण के रूप में हिन्दू समाज में विवाह के दौरान होम-वेदी, मंडप, कलश, धूप, नैवेद्य इत्यादि भौतिक उपकरण हैं एवं जप, मंत्र इत्यादि विवाह संस्था से संबंधित अभौतिक तत्व हैं।
• प्रतीक : प्रत्येक संस्था का अपना एक निश्चित प्रतीक होता है जिसका स्वरूप भौतिक या अभौतिक हो सकता है। उदाहरण के रूप में मंगल कलश विवाह का प्रतीक माना जाता है। इन्हीं प्रतीकों के माध्यम से संस्थाओं की पहचान होती है। ये प्रतीक एक संस्था को दूसरे से अलग बनाते हैं।
In simple words: संस्था समाज में नियमों और तरीकों का एक ढाँचा है, जो हमारी ज़रूरतों को पूरा करता है। इसकी खास पहचान, स्थायित्व और स्पष्ट मकसद होते हैं, जो इसे समाज में बहुत महत्वपूर्ण बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: संस्था की परिभाषाओं में 'संगठित व्यवस्था', 'स्वीकृत नियम' और 'आवश्यकताओं की पूर्ति' जैसे शब्द प्रमुख हैं। विशेषताओं में 'स्थायित्व' और 'अमूर्तता' को भी उजागर करें।

 

Question 2. समिति से आप क्या समझते हैं? समिति की विशेषताओं की विस्तृत रूप से व्याख्या कीजिए।
Answer: समिति एक-दूसरे से जुड़े सामाजिक प्राणियों का समूह है। यह किसी निश्चित हित या हितों की पूर्ति के लिए बनाया गया एक सामान्य संगठन है। इसे मनुष्यों द्वारा सोच-विचारकर बनाया गया एक ऐसा संगठन परिभाषित किया जा सकता है जिसके एक या अनेक उद्देश्य होते हैं एवं जिसकी अपनी एक कार्यकारिणी होती है। समिति लोगों को एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट करती है।
समिति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :
• विचारपूर्वक स्थापना : समिति सोच-विचारकर स्थापित किया गया संगठन है, जिसकी स्थापना व्यक्तियों के द्वारा कुछ या अनेक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए की जाती है।
• एक निश्चित संगठन : प्रत्येक समिति के अपने निश्चित उद्देश्य होते हैं। इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए निश्चित संगठन का निर्माण किया जाता है।
• नियमों पर आधारित : उद्देश्यों की पूर्ति के लिए समिति का अपना एक संगठन होता है जिसकी अपनी एक कार्यपद्धति या नियमों की व्यवस्था होती है जिसके आधार पर समिति से जुड़े सदस्य कार्य करते हैं।
• व्यक्तियों का समूह : समिति का निर्माण दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा किया जाता है।
• निश्चित उद्देश्य : प्रत्येक समिति के अपने निश्चित उद्देश्य होते हैं। इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए दो या दो से अधिक व्यक्ति सहयोग करते हैं।
• ऐच्छिक सदस्यता : किसी भी समिति का सदस्य बनना या नहीं बनना व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता है। व्यक्ति अपने हित और रुचियों के आधार पर विभिन्न समितियों की सदस्यता ग्रहण करता है।
• अस्थायी प्रकृति : समिति की स्थापना एक या अनेक खास उद्देश्यों को पूरा करने के लिए की जाती है और जैसे ही इन समितियों के उद्देश्यों की पूर्ति हो जाती है उनका अस्तित्व खत्म हो जाता है।
• मूर्त संगठन : समिति से तात्पर्य व्यक्तियों के ऐसे संगठन से है जिसे कुछ उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संगठित किया गया होता है। चूँकि समिति का निर्माण व्यक्तियों से होता है और व्यक्ति मूर्त दिखाई देते हैं; ऐसी दशा में समिति एक मूर्त संगठन है।
• औपचारिक संबंध : चूँकि समिति की सदस्यता व्यक्ति अपने उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए ग्रहण करता है। इस कारण से समिति में उद्देश्य महत्वपूर्ण होते हैं। इस वजह से समिति के विभिन्न सदस्यों के बीच औपचारिक संबंध पाए जाते हैं।
• समिति साधन है, साध्य नहीं है : समिति का निर्माण उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है। अतः व्यक्ति अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किसी समिति की सदस्यता ग्रहण करता है। इस प्रकार से समिति के उद्देश्य व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण होते हैं न कि संबंध बनाना। अतः समिति की सदस्यता ग्रहण करना हितपूर्ति का एक साधन मात्र है।
In simple words: समिति लोगों का एक समूह है जो किसी खास काम के लिए जानबूझकर बनाया जाता है। इसकी सदस्यता अपनी मर्ज़ी से होती है, यह कुछ समय के लिए होती है और इसका एक तय मकसद होता है।

🎯 Exam Tip: समिति की विशेषताओं में 'ऐच्छिक सदस्यता', 'अस्थायी प्रकृति' और 'निश्चित उद्देश्य' को रेखांकित करें, क्योंकि ये इसकी पहचान हैं।

सामाजिक मानदण्डों के प्रकार

सामाजिक मानदण्ड हमारे व्यवहारों को नियंत्रित करते हैं और हमें सही-गलत में फर्क बताते हैं। दूसरे शब्दों में, समाज में व्यवहार के नियम ही सामाजिक मानदण्ड कहलाते हैं। सामाजिक मानदण्ड जीवन के हर क्षेत्र में पाए जाते हैं। इनकी संख्या बहुत ज़्यादा है। इनकी सूची बनाना भी कठिन है। भोजन करने, उठने-बैठने, नृत्य करने, कपड़े पहनने, लिखने, गाने, बोलने, स्वागत करने एवं विदा करने आदि सभी क्रियाओं में सामाजिक मानदण्ड पाए जाते हैं। ये हमारे व्यवहार के मार्गदर्शक हैं।

सामाजिक मानदण्डों के तहत निम्नलिखित प्रकार शामिल हैं:

जनरीतियाँ अथवा लोकरीतियाँ :

इनका मतलब उन तरीकों से है जिन्हें लोग अपनी इच्छाओं और ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपनाते हैं। इनका पालन मनुष्य अनजाने में करता रहता है। ज़रूरतों में बदलाव होने पर इनमें भी बदलाव होता रहता है।

लोकाचार या रूढ़ियाँ :

ये मानव व्यवहार के वे मानदण्ड हैं, जिन्हें समूह कल्याणकारी मानता है। इनका उल्लंघन करना समाज का अपमान करना समझा जाता है। ये एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होती रहती हैं। ये समाज में नैतिक बल का प्रतीक होती हैं।

प्रथाएँ :

ये वे व्यवहार हैं, जिनका पालन केवल इसलिए किया जाता है क्योंकि वे पुराने समय से चले आ रहे हैं। प्रथाओं में तर्क का होना आवश्यक नहीं है। ये समाज की परंपरा का हिस्सा हैं।

परम्परा :

सामाजिक विरासत का अमूर्त पक्ष ही परम्परा कहलाता है। इनका पालन लोग बिना किसी तर्क-वितर्क के अपने आप ही करते हैं। परम्पराएँ समाज में स्थिरता बनाए रखती हैं।

नैतिकता तथा धर्म :

नैतिकता में न्याय, ईमानदारी, सच्चाई, निष्पक्षता, कर्तव्यपरायणता, अधिकार, स्वतंत्रता, दया एवं पवित्रता जैसी धारणाएँ शामिल होती हैं। इनमें तर्क होता है। धर्म में तर्क का कोई स्थान नहीं है। यह विश्वास तथा भावनाओं पर जोर देता है। धार्मिक नियमों का इतिहास उतना ही पुराना है जितनी कि मानव की सामाजिक चेतना।

कानून :

ये वे नियम हैं, जिनके पीछे राज्य की शक्ति होती है। इनका उल्लंघन करने पर दंड देने की शक्ति समाज के एक संगठित समूह में होती है। कानून समाज में व्यवस्था बनाए रखने के लिए ज़रूरी हैं।

RBSE Class 11 Sociology Chapter 3 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Sociology Chapter 3 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. "एक संस्था को किसी एक या अधिक प्रकार्यों के चारों ओर निर्मित अन्तर्सम्बन्धित जनरीतियों (लोकाचारों), रूढ़ियों और कानूनों के समुच्चय के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।” यह परिभाषा है
(a) बोगार्डस की
(b) किंग्सले डेविस की
(c) मैकाइवर एवं पेज की
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) किंग्सले डेविस की
In simple words: यह परिभाषा किंग्सले डेविस ने दी थी, जिसमें उन्होंने संस्था को उन नियमों और आदतों का समूह बताया जो किसी एक या ज़्यादा कामों के लिए बने होते हैं।

🎯 Exam Tip: समाजशास्त्रियों के नाम और उनके प्रमुख कथनों को याद रखने के लिए उन्हें बार-बार दोहराना और कीवर्ड्स पर ध्यान देना सहायक होता है।

 

Question 2. निम्नलिखित में किस समाजशास्त्री ने संस्था के उद्विकास को प्रकट किया है?
(a) समनर ने
(b) जिन्सबर्ग ने
(c) गिडिंग्स ने
(d) एम. एम. श्रीनिवास ने
Answer: (a) समनर ने
In simple words: समनर नामक समाजशास्त्री ने समझाया कि संस्थाएँ समय के साथ कैसे विकसित होती हैं। उन्होंने बताया कि ये धीरे-धीरे समाज में कैसे बनती और बदलती हैं।

🎯 Exam Tip: उद्विकास का मतलब है समय के साथ किसी चीज़ का धीरे-धीरे विकसित होना। समनर का काम संस्थाओं के इस क्रमिक विकास को समझने में महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. जब कोई व्यक्ति किसी क्रिया को बार-बार दुहराता है तो उससे निर्माण होता है .
(a) प्रवृत्ति का
(b) प्रथा का
(c) आदत का
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) आदत का
In simple words: जब हम किसी काम को बार-बार करते हैं, तो वह हमारी आदत बन जाती है। आदतें हमारे व्यवहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।

🎯 Exam Tip: आदतें व्यक्तिगत व्यवहार का आधार होती हैं और इन्हें नियमित अभ्यास से बनाया जाता है, जो बाद में जनरीतियों का रूप भी ले सकती हैं।

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