RBSE Solutions Class 11 Practical Geography Chapter 6 ऋतु उपकरण एवं मौसम मानचित्र

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Chapter-wise Solutions for Geography: Chapter 06 ऋतु उपकरण एवं मौसम मानचित्र

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RBSE Class 11 Practical Geography Chapter 6 प्रायोगिक पुस्तक के अभ्यास प्रश्न

 

Question 1. तापमान की सबसे अधिक प्रचलित इकाइयों के नाम तथा उनके मापन का विस्तार समझाइये।
Answer: तापमान को मापने की दो मुख्य इकाइयाँ सैल्शियस और फॉरेनहाइट हैं। सैल्शियस पैमाने पर तापमान 0° - 100° तक मापा जाता है। वहीं, फॉरेनहाइट पैमाने पर यह 32° - 212° तक होता है। इन दोनों पैमानों का उपयोग दुनिया भर में विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
In simple words: तापमान को नापने के लिए दो खास तरीके हैं: सैल्शियस और फॉरेनहाइट। सैल्शियस में 0° से 100° तक नापते हैं, और फॉरेनहाइट में 32° से 212° तक।

🎯 Exam Tip: तापमान की इकाइयों के नाम और उनके विस्तार को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब आपको एक इकाई से दूसरी में बदलना हो।

 

Question 2. 25° सैल्शियस को फॉरेनहाइट तथा 86° फॉरेनहाइट को सैल्शियस में परिवर्तित कीजिए।
Answer: यहाँ हमें सैल्शियस को फॉरेनहाइट में और फॉरेनहाइट को सैल्शियस में बदलना है।
(i) 25° सैल्शियस को फॉरेनहाइट में बदलना:
सूत्र: \( F = (C \times 1.8) + 32 \)
\( F = (25 \times 1.8) + 32 \)
\( F = 45 + 32 \)
\( F = 77°F \)
(ii) 86° फॉरेनहाइट को सैल्शियस में बदलना:
सूत्र: \( C = (F - 32) \div 1.8 \)
\( C = (86 - 32) \div 1.8 \)
\( C = 54 \div 1.8 \)
\( C = 30°C \)
यह तापमान बदलने के सूत्र हैं जो विज्ञान में बहुत उपयोगी होते हैं।
In simple words: तापमान को एक इकाई से दूसरी में बदलने के लिए खास सूत्र इस्तेमाल होते हैं। सैल्शियस को फॉरेनहाइट में बदलने के लिए 1.8 से गुणा करके 32 जोड़ते हैं। फॉरेनहाइट को सैल्शियस में बदलने के लिए 32 घटाकर 1.8 से भाग देते हैं।

🎯 Exam Tip: तापमान बदलने के दोनों सूत्र, सैल्शियस से फॉरेनहाइट और फॉरेनहाइट से सैल्शियस, को ठीक से याद रखें और गणना में सावधानी बरतें।

 

Question 3. वायु दिग्दर्शक यंत्र में तीर या मुर्गे की चोंच किस दिशा की ओर इंगित करती है?
Answer: वायु दिग्दर्शक यंत्र में लगा तीर या मुर्गे की चोंच हमेशा उस दिशा की ओर इशारा करती है, जिधर से हवा बहकर आ रही होती है। यह यंत्र हमें हवा की दिशा जानने में मदद करता है।
In simple words: वायु दिग्दर्शक यंत्र का तीर या मुर्गे की चोंच हमें बताती है कि हवा किस तरफ से आ रही है।

🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि वायु दिग्दर्शक यंत्र हवा के 'आने' की दिशा बताता है, न कि 'जाने' की।

 

Question 4. उच्चतम-न्यूनतम तापमापी का रेखाचित्र बनाकर उसकी कार्य प्रणाली को, समझाइये।
Answer: उच्चतम-न्यूनतम तापमापी, जिसे सिक्स का तापमापी भी कहते हैं, दिन के सबसे अधिक और सबसे कम तापमान को एक साथ रिकॉर्ड करता है। इसका आविष्कार जे. सिक्स ने किया था।
यह 'U' आकार की एक काँच की नली से बना होता है। इसके दोनों सिरों पर गोल घुण्डियाँ होती हैं जिनमें एल्कोहल भरा होता है। नली के बीच में पारे की एक छोटी मात्रा होती है।
पारे के ठीक ऊपर, दोनों नलियों में छोटे लोहे के सूचक (indicator) होते हैं। ये सूचक नली की दीवारों से हल्के से चिपके रहते हैं, जिससे वे अपने आप नीचे नहीं खिसकते।
जब तापमान बढ़ता है, तो एल्कोहल फैलता है और पारे पर दबाव डालता है, जिससे पारा उच्चतम तापमापी वाली नली में ऊपर उठता है। पारा ऊपर उठते हुए सूचक को भी धकेलता है, जो अधिकतम तापमान को रिकॉर्ड करता है।
जब तापमान घटता है, तो एल्कोहल सिकुड़ता है। इससे पारा न्यूनतम तापमापी वाली नली में ऊपर चढ़ता है और सूचक को धकेलता है, जो न्यूनतम तापमान को रिकॉर्ड करता है।
जिस नली में संख्याएँ ऊपर से नीचे की ओर बढ़ती हैं, वह न्यूनतम तापमान को दिखाती है। इस यंत्र को प्रतिदिन एक निर्धारित समय पर पढ़ा जाता है। रीडिंग लेने के बाद, एक चुंबक का उपयोग करके सूचकों को फिर से पारे के पास ले आया जाता है ताकि अगले दिन की रीडिंग ली जा सके। यह यंत्र मौसम विज्ञान और बागवानी में बहुत उपयोगी है, जहाँ अधिकतम और न्यूनतम तापमान की जानकारी महत्वपूर्ण होती है।
In simple words: उच्चतम-न्यूनतम तापमापी दिन के सबसे गर्म और सबसे ठंडे तापमान को दिखाता है। यह 'U' आकार की नली से बना होता है, जिसमें एल्कोहल और पारा होता है। पारे के ऊपर छोटे लोहे के सूचक होते हैं। जब तापमान बदलता है, तो पारा सूचकों को धकेलता है, जिससे सबसे गर्म और सबसे ठंडे तापमान की रिकॉर्डिंग हो जाती है।

🎯 Exam Tip: उच्चतम-न्यूनतम तापमापी की 'U' आकार की नली, एल्कोहल, पारा और लोहे के सूचक जैसे मुख्य भागों को और उनकी भूमिका को समझें।

 

Question 5. उपयुक्त रेखाचित्र के द्वारा निर्दववायु दाबमापी की कार्य प्रणाली को समझाइए।
Answer: निर्द्रव वायुदाबमापी, जिसे 'एनेरॉइड बैरोमीटर' भी कहते हैं, हवा के दबाव को मापने वाला एक यंत्र है जिसमें किसी तरल पदार्थ (जैसे पारा) का उपयोग नहीं होता। 'एनेरॉइड' शब्द का अर्थ है 'बिना नमी का'।
यह यंत्र एक गोल घड़ी जैसा दिखता है, जिसके डायल पर इंच और मिलीबार में वायुदाब के मान अंकित होते हैं।
इसके अंदर बेलनाकार और पतले, लचीले धातु (वैलियम धातु) से बने एक बॉक्स होता है। इस बॉक्स को अच्छी तरह से सील करके इसके अंदर की हवा निकाल दी जाती है, जिससे यह लगभग निर्वात (vacuum) बन जाता है।
जब हवा का दबाव बदलता है, तो यह खाली बॉक्स सिकुड़ता या फैलता है। इस सिकुड़ने या फैलने की गति को एक यांत्रिक प्रणाली द्वारा एक सुई तक पहुँचाया जाता है, जो डायल पर वायुदाब का मान दिखाती है। इस यंत्र का उपयोग ऊंचाई मापने और मौसम के पूर्वानुमान के लिए भी किया जाता है।
In simple words: निर्द्रव वायुदाबमापी एक ऐसी घड़ी जैसा यंत्र है जो हवा का दबाव मापता है, इसमें कोई तरल पदार्थ नहीं होता। इसके अंदर एक खाली डिब्बा होता है जो हवा के दबाव बदलने पर सिकुड़ता या फैलता है। यह सिकुड़ना या फैलना एक सुई को हिलाता है जिससे हमें हवा का दबाव पता चलता है।

🎯 Exam Tip: निर्द्रव वायुदाबमापी में 'निर्वात बॉक्स' और 'तरल पदार्थ की अनुपस्थिति' जैसी प्रमुख विशेषताओं पर ध्यान दें, क्योंकि ये इसकी कार्यप्रणाली का आधार हैं।

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