RBSE Solutions Class 11 Practical Geography Chapter 3 प्रक्षेप

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Detailed Chapter 3 प्रक्षेप RBSE Solutions for Class 11 Geography

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Class 11 Geography Chapter 3 प्रक्षेप RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Pratical Geography Chapter 3 प्रायोगिक पुस्तक के अभ्यास प्रश्न

 

Question 1. प्रक्षेप को परिभाषित कीजिए।
Answer: प्रक्षेप का मतलब है पृथ्वी के गोल आकार (गोलाभ) या उसके किसी हिस्से के अक्षांश और देशांतर रेखाओं के जाल को एक समतल कागज या सतह पर दिखाना। यह पृथ्वी की गोलाकार सतह को सपाट नक्शे पर दर्शाने का एक तरीका है।
In simple words: प्रक्षेप का अर्थ है पृथ्वी की गोल सतह पर बनी काल्पनिक अक्षांश और देशांतर रेखाओं को एक सपाट नक्शे पर दिखाना।

🎯 Exam Tip: परिभाषा लिखते समय 'अक्षांश व देशान्तर रेखाओं का जाल' और 'समतल कागज पर निरूपण' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. संदर्श प्रक्षेप किसे कहते हैं?
Answer: संदर्श प्रक्षेप उन नक्शों को कहते हैं जो प्रकाश की मदद से बनाए जाते हैं। इन नक्शों को बनाने के लिए ग्लोब पर बनी अक्षांश और देशांतर रेखाओं के जाल पर किसी खास जगह से प्रकाश डाला जाता है, जिससे उनकी छाया एक सपाट कागज पर पड़ती है। इन छायाओं को ही नक्शे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
In simple words: संदर्श प्रक्षेप वे नक्शे होते हैं जो ग्लोब पर प्रकाश डालकर उसकी छाया को एक सपाट कागज पर बनाकर तैयार किए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: संदर्श प्रक्षेप की मुख्य पहचान 'प्रकाश की सहायता' से बनना और 'ग्लोब की छाया' पर आधारित होना है।

 

नक्शा बनाने में विकृतियाँ

जब पृथ्वी की गोल सतह को एक सपाट कागज पर दिखाया जाता है, तो कुछ चीजों में बदलाव आ जाता है। ये बदलाव इस प्रकार हैं:

1. दिशा: नक्शा बनाते समय दो जगहों की एक-दूसरे से स्थिति और दिशा में गलतियाँ हो सकती हैं।

2. आकृति: अगर नक्शे पर दिशा को ठीक रखने की कोशिश की जाती है, तो जगहों के आकार बदल जाते हैं।

3. क्षेत्रफल: यदि नक्शा बनाते समय दिशा या आकार में से किसी एक को सही रखा जाए, तो उस जगह का कुल क्षेत्रफल गलत हो जाता है।

 

Question 4. प्रक्षेप बनाने के लिए कौन-से तीन आवश्यक तथ्यों का ज्ञान होना चाहिए?
Answer: प्रक्षेप बनाने के लिए नीचे दिए गए तीन जरूरी बातों का पता होना चाहिए:
1. मापक
किसी भी प्रक्षेप को बनाने के लिए मापक सबसे महत्वपूर्ण होता है। हर प्रक्षेप की रचना एक वृत्त के आधार पर होती है, जो पृथ्वी का छोटा रूप होता है। मापक के हिसाब से पृथ्वी के छोटे किए गए वृत्त को आधार मानकर प्रक्षेप बनाते हैं।
2. अक्षांश व देशान्तर रेखाओं का अन्तर
हर प्रक्षेप में अक्षांश-देशान्तर रेखाओं का जाल बनाने के लिए उनके बीच का अन्तर जानना जरूरी है। इसी अन्तर के आधार पर अक्षांश-देशान्तर रेखाएं बनाई जाती हैं।
3. विस्तार
हर प्रक्षेप किसी न किसी जगह को दिखाने के लिए बनाया जाता है। इसलिए, प्रक्षेप बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि नक्शा कितना बड़ा इलाका दिखाएगा।
In simple words: नक्शा बनाने के लिए हमें मापक, अक्षांश और देशांतर रेखाओं के बीच का अंतर, और नक्शे के विस्तार की जानकारी होनी चाहिए। ये तीनों चीजें नक्शे को सही बनाने में मदद करती हैं।

🎯 Exam Tip: इन तीनों तथ्यों को क्रम से और उनके महत्व को समझते हुए लिखना चाहिए, क्योंकि ये प्रक्षेप रचना के मूलभूत आधार हैं।

 

Question 5. गुण के आधार पर प्रक्षेप कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: गुण के आधार पर प्रक्षेप तीन प्रकार के होते हैं:
1. शुद्ध आकृति प्रक्षेप
2. समक्षेत्रफल प्रक्षेप
3. शुद्ध दिशा प्रक्षेप
शुद्ध दिशा प्रक्षेप वह होता है जिसमें कोई भी दो बिंदु वृत्त के केंद्र से एक सीधी रेखा पर हों, और उनके बीच की दिशा वास्तविक दिशा के बराबर हो।
In simple words: नक्शों को उनकी विशेषताओं के आधार पर तीन मुख्य प्रकारों में बांटा गया है: शुद्ध आकृति, समक्षेत्रफल और शुद्ध दिशा।

🎯 Exam Tip: इन तीनों प्रकारों के नाम याद रखना और उनके मुख्य गुण को एक वाक्य में समझाना अच्छा रहेगा, खासकर जब प्रश्न प्रकार पूछ रहा हो।

 

Question 6. पृथ्वी के घटाये गये बृत्त का अर्द्धव्यास ज्ञात करने का सूत्र लिखिये।
Answer: पृथ्वी के घटाये वृत्त का अर्द्धव्यास नीचे दिए गए सूत्र से ज्ञात करते हैं:
\[ \text{वृत्त का अर्द्धव्यास} = \frac{\text{पृथ्वी का वास्तविक अर्द्धव्यास}}{\text{दिये गये मापक का हर}} \]
यह सूत्र हमें ग्लोब को छोटे पैमाने पर कागज पर उतारने में मदद करता है।
In simple words: पृथ्वी का छोटा किया गया वृत्त बनाने के लिए, पृथ्वी की असली त्रिज्या को नक्शे के स्केल के हर (नीचे वाले अंक) से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: सूत्र को सही ढंग से लिखना और यह याद रखना कि 'मापक का हर' नीचे आता है, महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. एक प्रधान अक्षांशीय शंकाकार प्रक्षेप में कौन-सा अक्षांश प्रधान होता है । क्यों?
Answer: एक प्रधान अक्षांशीय शंकाकार प्रक्षेप में दिया गया मानक अक्षांश ही प्रधान अक्षांश होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसी अक्षांश के आधार पर बाकी अक्षांशों की स्थिति तय होती है। साथ ही, इस मानक अक्षांश पर ही देशांतर रेखाओं के बीच की दूरी भी निश्चित की जाती है। इस प्रकार, यह अक्षांश पूरे नक्शे की रचना के लिए केंद्र बिंदु का काम करता है।
In simple words: प्रधान अक्षांशीय शंकाकार प्रक्षेप में, मानक अक्षांश ही प्रधान अक्षांश होता है क्योंकि यह अन्य अक्षांशों और देशांतरों की दूरी तय करने का आधार बनता है।

🎯 Exam Tip: 'मानक अक्षांश' और उसके 'आधार' होने के कारण को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।

 

Question 8. बेलनाकार समक्षेत्रफल प्रक्षेप में भूमध्य रेखा की लम्बाई ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
Answer: बेलनाकार समक्षेत्रफल प्रक्षेप में भूमध्य रेखा की लम्बाई नीचे दिए गए सूत्र से ज्ञात करते हैं:
\[ \text{भूमध्य रेखा की लम्बाई} = 2\pi r \]
यहाँ \( r \) पृथ्वी के घटाये हुए वृत्त का अर्द्धव्यास है।
In simple words: बेलनाकार समक्षेत्रफल प्रक्षेप में भूमध्य रेखा की लंबाई निकालने के लिए, \( 2\pi r \) सूत्र का उपयोग करते हैं, जहाँ \( r \) घटाये गए वृत्त की त्रिज्या है।

🎯 Exam Tip: सूत्र में \( \pi \) और \( r \) का सही मान रखना और इकाई (जैसे सेमी) का उल्लेख करना आवश्यक है।

 

Question 9. बेलनाकार समक्षेत्रफल प्रक्षेप की पहचान बताइये।
Answer: बेलनाकार समक्षेत्रफल प्रक्षेप की पहचान करने के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. इस प्रक्षेप में अक्षांश रेखाओं के बीच की दूरी भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर धीरे-धीरे कम होती जाती है।
2. इस प्रक्षेप में हर अक्षांश रेखा की लम्बाई भूमध्य रेखा के बराबर होती है।
3. सभी देशांतर रेखाएँ सीधी होती हैं, उनकी लम्बाई एक जैसी होती है और वे एक-दूसरे के समानांतर होती हैं।
4. अक्षांश और देशांतर रेखाएँ एक-दूसरे को 90 डिग्री के कोण पर काटती हैं।
5. ध्रुव ग्लोब पर एक बिंदु के रूप में होते हैं, और इस प्रक्षेप में भूमध्य रेखा की लम्बाई के बराबर अक्षांश रेखा होती है। इस प्रक्षेप में सभी क्षेत्रों का क्षेत्रफल सही दिखाया जाता है।
In simple words: इस नक्शे में अक्षांश रेखाओं की दूरी ध्रुवों की ओर घटती है, सभी अक्षांश रेखाएँ भूमध्य रेखा जितनी लंबी होती हैं, और सभी देशांतर रेखाएँ सीधी व समानांतर होती हैं।

🎯 Exam Tip: इन सभी पहचान बिन्दुओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये इस प्रक्षेप की अनूठी विशेषताएँ हैं।

 

बेलनाकार प्रक्षेप के गुण और दोष:

गुण:

(i) मापक के हिसाब से, भूमध्य रेखा अपनी असली लंबाई के बराबर होती है। इसलिए भूमध्य रेखा पर मापने में कोई गलती नहीं होती।

(ii) यह एक ऐसा नक्शा है जिसमें क्षेत्रफल सही दिखाया जाता है।

दोष:

(i) इस नक्शे में आकार और दिशा दोनों में गलती होती है।

(ii) सभी अक्षांश रेखाएँ भूमध्य रेखा के बराबर लंबी होती हैं, इसलिए उन पर मापने में गलती होती है।

(iii) सभी देशांतर रेखाएँ अपनी असली लंबाई से छोटी होती हैं, इसलिए उन पर भी मापने में गलती होती है।

 

Question 11. गॉल प्रक्षेप में अक्षांश रेखाओं की लम्बाई किस अक्षांश रेखा की लम्बाई के बराबर होती है व क्यों? चित्र सहित समझाइये।
Answer: गॉल प्रक्षेप में सभी अक्षांश रेखाओं की लम्बाई 45° अक्षांश रेखा की लम्बाई के बराबर होती है। इसका मुख्य कारण यह है कि 45° अक्षांश वृत्त को ही आधार अक्षांश वृत्त माना जाता है। इसी वजह से इसे मुख्य अक्षांश वृत्त भी कहते हैं, और इसकी लंबाई अन्य सभी अक्षांशों के लिए संदर्भ बिंदु बन जाती है। इस प्रकार, यह प्रक्षेप 45° अक्षांश पर सही रहता है।
In simple words: गॉल प्रक्षेप में सभी अक्षांश रेखाएँ 45° अक्षांश रेखा जितनी लंबी होती हैं, क्योंकि 45° अक्षांश वृत्त को ही इस प्रक्षेप का आधार माना जाता है।

🎯 Exam Tip: प्रश्न में 'क्यों' का उत्तर देते समय 'आधार अक्षांश वृत्त' या 'मुख्य अक्षांश वृत्त' का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. बेलनाकार समक्षेत्रफल व गॉल प्रक्षेप के एक प्रमुख अन्तर को बताइए।
Answer: बेलनाकार समक्षेत्रफल और गॉल प्रक्षेप के बीच के मुख्य अंतर नीचे दिए गए हैं:
1. बेलनाकार समक्षेत्रफल प्रक्षेप में भूमध्य रेखा का निर्धारण वृत्त की परिधि के लिए तय सूत्र से किया जाता है। जबकि, गॉल प्रक्षेप में भूमध्य रेखा का निर्धारण 45° अक्षांश के माध्यम से किया जाता है।
2. बेलनाकार समक्षेत्रफल प्रक्षेप में भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर अक्षांशों के बीच की दूरी कम होती जाती है, जबकि गॉल प्रक्षेप में भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर अक्षांशों के बीच की दूरी बढ़ती जाती है। यह दोनों प्रक्षेपों की संरचना में मुख्य अंतर दर्शाते हैं।
In simple words: बेलनाकार समक्षेत्रफल में भूमध्य रेखा की लंबाई सूत्र से निकलती है, जबकि गॉल में यह 45° अक्षांश पर आधारित होती है। साथ ही, ध्रुवों की ओर अक्षांशों के बीच की दूरी इन दोनों प्रक्षेपों में अलग-अलग ढंग से बदलती है।

🎯 Exam Tip: अंतर स्पष्ट करते समय प्रत्येक प्रक्षेप की विशेषता को अलग-अलग बिंदु में बताना चाहिए।

 

Question 13. केन्द्रक ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप में भूमध्य रेखा क्यों नहीं दर्शायी जा सकती? ।
Answer: केन्द्रक ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप में अक्षांशों का निर्धारण पृथ्वी के केंद्र को बिंदु मानकर किया जाता है। इस दौरान पृथ्वी के केंद्र से 0° पर डाली गई प्रकाश किरणें कभी भी प्रतिच्छेदन रेखा को नहीं काट सकतीं, क्योंकि 0° पर डाली गई प्रकाश किरणें हमेशा सीधी दिशा में जाती हैं। इसी कारण इस प्रक्षेप में भूमध्य रेखा को नहीं दिखाया जा सकता। इसका मतलब है कि भूमध्य रेखा पर कोई सीधी छाया नहीं बन पाती।
In simple words: केन्द्रक ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप में भूमध्य रेखा नहीं दिखाई जा सकती क्योंकि पृथ्वी के केंद्र से 0° पर डाली गई प्रकाश किरणें हमेशा सीधी चलती हैं और किसी रेखा को नहीं काटतीं।

🎯 Exam Tip: 'पृथ्वी के केंद्र से प्रकाश की सीधी किरणें' और 'प्रतिच्छेदन रेखा को न काटने' जैसे प्रमुख कारणों को समझाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. त्रिविम ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप के गुण व दोष बताइये।
Answer: त्रिविम ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप के गुण और दोष इस प्रकार हैं:
3. यह एक यथाकृतिक प्रक्षेप है, जिसका अर्थ है कि यह आकृतियों को सही ढंग से दिखाता है। दोष-इस प्रक्षेप में क्षेत्रफल सही नहीं दिखाया जाता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के आकार में विरूपण हो सकता है।
In simple words: इस प्रक्षेप का एक गुण यह है कि यह चीजों की आकृति को ठीक दिखाता है, लेकिन इसका एक दोष यह है कि यह क्षेत्रफल को सही नहीं दिखाता।

🎯 Exam Tip: जब गुण और दोष पूछे जाएं, तो दोनों पहलुओं को अलग-अलग स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए।

 

Question 15. लम्बकोणीय ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप किन मानचित्रों के लिए उपयोगी है?
Answer: लम्बकोणीय ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप खगोलीय मानचित्रों के लिए बहुत उपयोगी है। आकाश में मौजूद पिंडों (ग्रहों, तारों) की स्थिति को समझने के लिए खगोलविद इस प्रक्षेप का विशेष रूप से उपयोग करते हैं। यह प्रक्षेप ब्रह्मांडीय वस्तुओं को सही संदर्भ में देखने में मदद करता है।
In simple words: यह नक्शा खगोलीय मानचित्र बनाने के लिए बहुत काम का है, खासकर जब खगोलविद आकाश में तारों और ग्रहों की जगह जानना चाहते हैं।

🎯 Exam Tip: 'खगोलीय मानचित्रों' और 'आकाशीय पिंडों की स्थिति' जैसे मुख्य उपयोगों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।

 

Question 16. प्रदर्शक भिन्न 1: 640,000,000 पर विश्व के लिये बेलनाकार सूमक्षेत्रफल प्रक्षेप की रचना कीजिए। प्रक्षेप पर अक्षांश व देशान्तर रेखाओं के जाल का अन्तराल 15° रखिये।
Answer: बेलनाकार समक्षेत्रफल प्रक्षेप की रचना के लिए गणना:
\[ \text{पृथ्वी के घटाये गये वृत्त का अर्द्धव्यास} = \frac{640,000,000}{640,000,000} = 1 \text{ सेमी.} \]
यह घटाये गए वृत्त का अर्द्धव्यास है जिसका उपयोग प्रक्षेप बनाने में होगा।
\[ \text{भूमध्य रेखा की लम्बाई} = 2\pi r = 2 \times \frac{22}{7} \times 1 = 6.28 \text{ सेमी.} \]
यह भूमध्य रेखा की असली लंबाई है जिसे नक्शे पर दिखाना है।
\[ \text{देशान्तर रेखाओं की दूरी} = \text{वृत्त की परिधि} \times \frac{\text{अन्तराल}}{360^\circ} = 6.28 \times \frac{15}{360} = 0.26 \text{ सेमी.} \]
प्रक्षेप की रचना –
कागज पर बायीं ओर केंद्र लेकर 1 सेमी. अर्द्धव्यास का एक वृत्त खींचेंगे। वृत्त में अन्तराल के आधार पर रेखाएँ खींचेंगे। इन कोणीय रेखाओं के सहारे ही अक्षांश निर्धारित किये जायेंगे। प्रश्न में दिए गये 15° अन्तराल के आधार पर चाँदे की सहायता से भूमध्य रेखा के दोनों ओर (0°) 15°, 30°, 45, 60°, 75° व 90° के कोण लगाकर इनके वृत्त के स्पर्श करने वाले स्थान से अक्षांश रेखाएँ खींचेंगे। सभी अक्षांश रेखाएँ भूमध्य रेखा के बराबर होंगी। अब भूमध्य रेखा को 26 सेमी के 24 भागों में बाँटकर देशांतर रेखाएँ खींचेंगे। ग्रीनविच रेखा से दोनों ओर 15° के अंतराल पर मान लिखेंगे, जो 180 पूर्वी देशांतर व 180° पश्चिम देशांतर तक होंगे। इसी प्रकार भूमध्य रेखा के दोनों ओर भी 15° के अंतराल पर दोनों ओर 90° उत्तरी व 90° दक्षिणी अक्षांश तक मान लिखेंगे।
In simple words: सबसे पहले घटाये हुए वृत्त की त्रिज्या और भूमध्य रेखा की लंबाई निकालते हैं। फिर 1 सेमी त्रिज्या का वृत्त बनाकर, 15° के अंतर पर अक्षांश और देशांतर रेखाएँ बनाते हैं, जिससे एक बेलनाकार प्रक्षेप तैयार होता है।

🎯 Exam Tip: गणना और रचना के चरण स्पष्ट और क्रमबद्ध होने चाहिए। घटाये गए वृत्त के अर्द्धव्यास और देशांतर दूरी की गणना सही होनी चाहिए।

 

Question 17. प्रदर्शक भिन्न 1: 125,000,000 पर एक प्रधान अक्षांशीय प्रक्षेप की रचना कीजिए। प्रक्षेप पर अक्षांश व देशान्तर रेखाओं का अन्तराल 15° रखिये। प्रक्षेप का विस्तार 75° पूर्वी देशान्तर से 75° पश्चिमी देशान्तर व 0° उत्तरी अक्षांश से 90° उत्तरी अक्षांश तक है। अक्षांश व देशान्तर रेखाओं का अन्तराल 15° रखिये।
Answer: गणना कार्य प्रक्षेप बनाने के लिए सबसे पहले मापक के अनुसार पृथ्वी के घटाये गये वृत्त का अर्द्धव्यास ज्ञात करेंगे:
\[ r = \frac{\text{पृथ्वी का वास्तविक अर्द्धव्यास}}{\text{दिये गये मापक का हर}} \]
\[ r = \frac{640,000,000}{125,000,000} = 5.12 \text{ सेमी.} \]
प्रक्षेप की रचना –
सर्वप्रथम कागज पर बांयी ओर कोने में एक लम्बवत् रेखा खींचेंगे। अब घटाये गये वृत्त के अर्द्धव्यास की दूरी 5.12 सेमी. लेकर इस लम्बवत् रेखा पर प को केंद्र मानक एक अर्द्धवृत्त खींचेंगे। अर्द्धवृत्त लम्बवत् रेखा को अ व ब पर काटेगा। अ उत्तरी ध्रुव व ब दक्षिणी ध्रुव है। अ व ब बिन्दुओं की दूरी पृथ्वी का ध्रुवीय व्यास है। प पृथ्वी का केंद्र है। प द रेखा 0° अक्षांश रेखा है एवं वृत्त का अर्द्धव्यास प्रदर्शित करती है। प्रक्षेप में दिये गये 15° अन्तराल के आधार पर प द रेखा को आधार मानकर प केंद्र से प द रेखा के नीचे अर्थात् दक्षिणी गोलार्द्ध में 15° के अन्तर से कोण बनायेंगे। इन कोणों को वृत्त के प केंद्र से क्रमशः क, ख, ग, घ, ङ एवं बे तक सरल रेखाओं के रूप में खींचेंगे। ये कोण क्रमशः 15°, 30°, 45°, 60°, 75° व 90° दक्षिणी अक्षांशीय वृत्त है। प.॰ अक्षांश है। समतल कागज ध्रुव को स्पर्श करते हुए दक्षिणी ध्रुव के नीचे रखा गया है ब अर्थात् दक्षिणी ध्रुव पर प द रेखा के समानान्तर ब-ब रेखा खींचेंगे।
अब प द रेखा से नीचे की ओर डाले गये लम्ब बे बा रेखा को काटेंगे जो अब कागज पर एक लम्बवत् रेखा खींचकर इस रेखा के मध्य में ब केंद्र निश्चित करेंगे। अब ब केंद्र से ब द, क, ब ख, ब ग, ब घ, व ब ङ अर्द्धव्यास की दूरी लेकर केंद्र से पूर्व वृत्त खींचेगे ये वृत्त प्रदक्षिणी अक्षांश वृत्त है व केंद्र दक्षिणी ध्रुव है।
In simple words: पहले घटाये गए वृत्त की त्रिज्या (5.12 सेमी) निकालते हैं। फिर एक अर्धवृत्त बनाकर, 15° के अंतराल पर कोणों के माध्यम से अक्षांश वृत्त खींचते हैं। देशांतरों के लिए केंद्र से सीधी रेखाएं खींचकर प्रक्षेप पूरा करते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रधान अक्षांशीय प्रक्षेप में मानक अक्षांश का निर्धारण और देशांतरों की सीधी रेखाएँ खींचना मुख्य चरण हैं, इन्हें ध्यान से करना चाहिए।

 

Question 18. प्रदर्शक भिन्न 1 : 200,000,000 पर उत्तरी गोलार्द्ध के लिये त्रिविम ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप की रचना कीजिए। प्रक्षेप पर अक्षांश व देशान्तर रेखाओं का अन्तराल 15° रखिये (अथवा आपको पढ़ाने वाले व्याख्याता द्वारा निर्धारित की गई प्रदर्शक भिन्न व अन्तराल पर प्रक्षेप की रचना कीजिए)।
Answer: गणना कार्य:
\[ \text{पृथ्वी के घटाये गये वृत्त का अर्द्धव्यास} = \frac{640,000,000}{200,000,000} = 3.2 \text{ सेमी.} \]
यह मान त्रिविम ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप बनाने के लिए उपयोग किया जाएगा।
प्रक्षेप की रचना:
1. सबसे पहले कागज पर बायीं ओर के कोने में एक सीधी खड़ी रेखा खींचिये। पृथ्वी के घटाये गये वृत्त के अर्द्धव्यास 3.2 सेंटीमीटर की दूरी लेकर एक केंद्र 'अ' मानकर एक अर्द्धवृत्त खींचिये। अर्द्धवृत्त इस खड़ी रेखा को 'अ' और 'ब' पर काटेगा।
2. देशांतर रेखाएँ खींचने के लिए पहले खींची गई खड़ी रेखा को आधार मानिये। 'अ' केंद्र के ऊपर की रेखा 180° देशांतर रेखा है। 'अ' केंद्र के नीचे वाली खड़ी रेखा 0° ग्रीनविच रेखा है। अब 'अ' को केंद्र मानते हुए 0° ग्रीनविच रेखा के दोनों ओर अर्थात् पूर्व और पश्चिम की ओर 15-15° के अंतर से 180° तक कोण डालिये। इन कोणों के आधार पर 'अ' केंद्र से अंतिम वृत्त के निशानों को 'अ' को केंद्र मानकर क्रमशः सीधी रेखा से मिलाते हुए 0° अक्षांश वृत्त तक खींचेंगे। इस प्रकार एक प्रधान अक्षांशीय शंकाकार प्रक्षेप तैयार हो जायेगा।
3. इस प्रक्षेप में यह सोचा गया है कि कागज ध्रुव को छूते हुए उत्तरी ध्रुव के ऊपर रखा गया है। इसे साफ करने के लिए 'अ' अर्थात उत्तरी ध्रुव पर 'प द' रेखा के समानांतर 'अ आ' रेखा खींचिये।
4. प्रक्षेप बनाने के लिए यह सोचा गया है कि प्रकाश ग्लोब के विपरीत केंद्र से, यानी दक्षिणी ध्रुव से आ रहा है। इसलिए 'ब' केंद्र से प्रकाश किरणें डाली जाएंगी। (ये प्रकाश किरणें अलग-अलग अक्षांश वृत्तों को कागज पर 'अ आ' रेखा पर दिखाएंगी)। अतः 'ब' केंद्र से 'दे क ख ग घ ङ' और 'अ' को मिलाते हुए प्रकाश किरणें खींचिये। ये किरणें आगे जाकर कागज पर क्रमशः 'द', 'ख', 'ग', 'घ', 'ङ' और 'अ' को छूएंगी। ये बिंदु क्रमशः 0°, 15°, 30°, 45, 60°, 75° और 90° उत्तरी अक्षांश वृत्तों के अर्द्धव्यास हैं।
तृतीय चरण: प्रक्षेप की रचना
आधार चित्र का उपयोग करते हुए निम्नानुसार प्रक्षेप की रचना की जायेगी-
1. सर्वप्रथम कागज पर एक लम्बवत् रेखा खींचिये। रेखा के मध्य में 'अ' केंद्र निश्चित कीजिये। यह 'अ' केंद्र प्रक्षेप पर उत्तरी ध्रुव है। अब चित्र के 'अ' केंद्र से 'अद', 'अक', 'अख', 'अग', 'अ घ' एवं 'अ ङ', अर्द्धव्यास की दूरी लेकर चित्रके 'अ' केंद्र से पूर्ण वृत्त खींचिये। ये वृत्त प्रक्षेप पर क्रमश: 0°, 15°, 30°, 45°, 60° एवं 75° उत्तरी अक्षांश वृत्त हैं। 'अ' केंद्र 90° उत्तरी अक्षांश उत्तरी ध्रुव है।
2. देशांतर रेखाएँ खींचने के लिए पूर्व में खींची गई लम्बवत् रेखा को आधार मानिये। 'अ' केंद्र के ऊपर की रेखा 180° देशांतर रेखा है। 'अ' केंद्र के नीचे वाली लम्बवत् रेखा 0° ग्रीनविच रेखा है। अब 'अ' को केंद्र मानते हुए 0° ग्रीनविच रेखा के दोनों ओर अर्थात् पूर्व एवं पश्चिम की ओर 15-15° के अन्तर से 180° तक कोण डालिये। इन कोणों के आधार पर 'अ' केंद्र से अन्तिम वृत्त के निशानों को 'अ' को केंद्र मानकर क्रमशः सीधी रेखा से मिलाते हुए 0° अक्षांश वृत्त तक खींचेंगे। इस प्रकार एक प्रधान अक्षांशीय शंकाकार प्रक्षेप तैयार हो जायेगा।
In simple words: सबसे पहले, पृथ्वी के छोटे किए गए वृत्त की त्रिज्या (3.2 सेमी) निकालते हैं। फिर एक खड़ी रेखा खींचकर केंद्र 'अ' मानते हुए, 15° के अंतर पर अक्षांश और देशांतर रेखाएँ बनाते हैं, जिससे उत्तरी गोलार्द्ध का त्रिविम ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप तैयार होता है।

🎯 Exam Tip: त्रिविम ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप में 'प्रकाश के स्रोत' की स्थिति और उससे बनने वाले अक्षांश वृत्तों के 'अर्द्धव्यास' को सही ढंग से दर्शाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 19. प्रदर्शक भिन्न 1: 200,000,000 पर दक्षिणी गोलार्द्ध के लिये लम्बकोणीय ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप की रचना कीजिए। प्रक्षेप पर अक्षांश व देशान्तर रेखाओं का अन्तराल 15° रखिये। (अथवा आपको पढ़ाने वाले व्याख्याता द्वारा निर्धारित की गई प्रदर्शक भिन्न अन्तराल पर प्रक्षेप की रचना कीजिए)।
Answer: गणना कार्य:
\[ \text{पृथ्वी के घटाये गये वृत्त का अर्द्धव्यास} = \frac{640,000,000}{200,000,000} = 3.2 \text{ सेमी.} \]
यह घटाये गए वृत्त का अर्द्धव्यास है जिसका उपयोग प्रक्षेप बनाने में होगा।
प्रक्षेप की रचना –
सबसे पहले कागज पर बांयी ओर कोने में एक सीधी खड़ी रेखा खींचेंगे। अब घटाये गये वृत्त के अर्द्धव्यास की दूरी 3.2 सेमी. लेकर इस खड़ी रेखा पर 'प' को केंद्र मानकर एक अर्द्धवृत्त खींचेंगे। यह अर्द्धवृत्त खड़ी रेखा को 'अ' व 'ब' पर काटेगा। 'अ' उत्तरी ध्रुव व 'ब' दक्षिणी ध्रुव है। 'अ' व 'ब' बिन्दुओं की दूरी पृथ्वी का ध्रुवीय व्यास है। 'प' पृथ्वी का केंद्र है। 'प द' रेखा 0° अक्षांश रेखा है एवं वृत्त का अर्द्धव्यास प्रदर्शित करती है। प्रक्षेप में दिये गये 15° अन्तराल के आधार पर 'प द' रेखा को आधार मानकर 'प' केंद्र से 'प द' रेखा के नीचे अर्थात् दक्षिणी गोलार्द्ध में 15° के अन्तर से कोण बनायेंगे। इन कोणों को वृत्त के 'प' केंद्र से क्रमशः 'क, ख, ग, घ, ङ' एवं 'बे' तक सरल रेखाओं के रूप में खींचेंगे। ये कोण क्रमशः 15°, 30°, 45°, 60°, 75° व 90° दक्षिणी अक्षांशीय वृत्त हैं। 'प' अक्षांश है। समतल कागज ध्रुव को स्पर्श करते हुए दक्षिणी ध्रुव के नीचे रखा गया है 'ब' अर्थात् दक्षिणी ध्रुव पर 'प द' रेखा के समानान्तर 'ब-ब' रेखा खींचेंगे। अब 'प द' रेखा से नीचे की ओर डाले गये लम्ब 'बे बा' रेखा को काटेंगे जो अब कागज पर एक खड़ी रेखा खींचकर इस रेखा के मध्य में 'ब' केंद्र निश्चित करेंगे। अब 'ब' केंद्र से 'ब द, क, ब ख, ब ग, ब घ, व ब ङ' अर्द्धव्यास की दूरी लेकर केंद्र से पूर्व वृत्त खींचेंगे। ये वृत्त प्रदक्षिणी अक्षांश वृत्त है व केंद्र दक्षिणी ध्रुव है।
In simple words: पहले घटाये गए वृत्त की त्रिज्या (3.2 सेमी) निकालते हैं। फिर एक खड़ी रेखा खींचकर 'प' को केंद्र मानते हुए, 15° के अंतर पर दक्षिणी अक्षांश वृत्त बनाते हैं। 'ब' को केंद्र मानकर देशांतर रेखाएँ खींचते हैं, जिससे दक्षिणी गोलार्द्ध का लम्बकोणीय ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप तैयार होता है।

🎯 Exam Tip: दक्षिणी गोलार्द्ध के लिए रचना करते समय, कोणों को 'प द' रेखा के 'नीचे' की ओर बनाना और 'दक्षिणी ध्रुव' को केंद्र मानना महत्वपूर्ण है।

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RBSE Solutions Class 11 Geography Chapter 3 प्रक्षेप

Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 3 प्रक्षेप prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 11 Geography textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 3 प्रक्षेप

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 11 Geography chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 11 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Geography Class 11 Solved Papers

Using our Geography solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 11 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 3 प्रक्षेप to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 11 Practical Geography Chapter 3 प्रक्षेप for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 11 Practical Geography Chapter 3 प्रक्षेप is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Geography are as per latest RBSE curriculum.

Are the Geography RBSE solutions for Class 11 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 11 Practical Geography Chapter 3 प्रक्षेप as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Geography concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 11 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 11 Practical Geography Chapter 3 प्रक्षेप will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 11 Practical Geography Chapter 3 प्रक्षेप in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 11 Geography. You can access RBSE Solutions Class 11 Practical Geography Chapter 3 प्रक्षेप in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Geography RBSE solutions for Class 11 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 11 Practical Geography Chapter 3 प्रक्षेप in printable PDF format for offline study on any device.