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Detailed Chapter 10 सरकार के रूप (अ) एकात्मक एवं संघा RBSE Solutions for Class 11 Political Science
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Class 11 Political Science Chapter 10 सरकार के रूप (अ) एकात्मक एवं संघा RBSE Solutions PDF
Rajasthan Board RBSE Class 11 Political Science Chapter 10 सरकार के रूप: (अ) एकात्मक एवं संघात्मक (ब) संसदात्मक एवं अध्यक्षात्मक
RBSE Class 11 Political Science Chapter 10 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Political Science Chapter 10 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. सरकार के रूपों का वर्णन कीजिए।
Answer: सरकार के चार प्रमुख रूप हैं: एकात्मक, संघात्मक, संसदात्मक और अध्यक्षात्मक। ये विभिन्न शासन प्रणालियाँ हैं जो एक देश में शासन चलाने के लिए उपयोग की जाती हैं। हर रूप की अपनी खास विशेषताएं होती हैं।
In simple words: सरकार के मुख्य रूप एकात्मक, संघात्मक, संसदात्मक और अध्यक्षात्मक होते हैं।
🎯 Exam Tip: जब सरकार के रूपों का वर्णन करने को कहा जाए, तो उनके मुख्य प्रकारों को सूचीबद्ध करना पर्याप्त होता है, क्योंकि प्रश्न 'अति लघूत्तरात्मक' श्रेणी का है।
Question 2. एकात्मक सरकार क्या है? व्याख्या कीजिए।
Answer: एकात्मक सरकार वह शासन प्रणाली है जिसमें संविधान के अनुसार राज्य की सारी शासन शक्ति केंद्र सरकार में ही रहती है। इसमें सारी शक्ति एक ही जगह केंद्रित होती है। ब्रिटेन, इटली, जापान और बेल्जियम जैसे देशों में एकात्मक सरकारें हैं, जहाँ केंद्र सरकार सबसे शक्तिशाली होती है।
In simple words: एकात्मक सरकार में, सारी शक्ति केंद्र सरकार के पास होती है और वही देश का शासन चलाती है।
🎯 Exam Tip: एकात्मक सरकार की परिभाषा लिखते समय, शक्ति के केंद्रीकरण और कुछ उदाहरण देशों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 3. एकात्मक सरकार का कोई एक लक्षण बताइए।
Answer: एकात्मक सरकार में सत्ता का मुख्य स्रोत केंद्र सरकार होती है। इसका मतलब है कि सभी अधिकार और निर्णय लेने की शक्ति केंद्रीय स्तर पर केंद्रित होती है।
In simple words: एकात्मक सरकार में, केंद्र सरकार के पास ही सारी शक्ति होती है।
🎯 Exam Tip: एकात्मक सरकार का एक मुख्य लक्षण हमेशा 'सत्ता का केंद्रीकरण' होता है।
Question 4. एकात्मक सरकार की कोई एक बुराई बताइए।
Answer: एकात्मक सरकार में केंद्र सरकार के निरंकुश होने का डर बना रहता है। जब सारी शक्ति एक ही हाथ में केंद्रित होती है, तो उसके दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है।
In simple words: एकात्मक सरकार में केंद्र सरकार बहुत शक्तिशाली हो सकती है और तानाशाह बन सकती है।
🎯 Exam Tip: एकात्मक सरकार की बुराई बताते समय 'निरंकुशता' या 'तानाशाही' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
Question 5. संघात्मक सरकार क्या है? वर्णन कीजिए।
Answer: संघात्मक सरकार वह शासन प्रणाली है जिसमें राज्य की सभी शक्तियों को संघ सरकार (केंद्र) और राज्यों (इकाइयों) के बीच बाँटा जाता है। इसमें केंद्र और राज्य दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र होते हैं। भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और स्विटजरलैंड जैसे देशों में संघात्मक सरकारें हैं।
In simple words: संघात्मक सरकार में, शक्ति केंद्र और राज्यों के बीच बँटी होती है, और दोनों अपने काम स्वतंत्र रूप से करते हैं।
🎯 Exam Tip: संघात्मक सरकार की परिभाषा में शक्ति के विभाजन और केंद्र व राज्यों की स्वतंत्रता पर जोर दें।
Question 6. संघ शब्द को आंग्ल भाषा में लिखिए।
Answer: संघ शब्द को आंग्ल भाषा में 'फेडरेशन' (Federation) कहते हैं। यह शब्द लैटिन भाषा के 'फोडस' (Foedus) से आया है, जिसका अर्थ 'संधि या समझौता' होता है, जो कई इकाइयों के एक साथ आने को दर्शाता है।
In simple words: 'संघ' को अंग्रेजी में 'फेडरेशन' कहते हैं।
🎯 Exam Tip: 'संघ' के अंग्रेजी नाम के साथ उसके मूल लैटिन शब्द और अर्थ को बताना आपके उत्तर को अधिक सटीक बनाता है।
Question 7. संघात्मक सरकार की कोई एक विशेषता बताइये।
Answer: संघात्मक सरकार में केंद्र सरकार और स्थानीय सरकारों के बीच शक्तियों का विभाजन होता है। यह विभाजन संविधान द्वारा सुनिश्चित किया जाता है ताकि दोनों स्तरों पर शासन सुचारू रूप से चले।
In simple words: संघात्मक सरकार में, केंद्र और स्थानीय सरकारों के बीच शक्तियाँ बँटी होती हैं।
🎯 Exam Tip: संघात्मक सरकार की मुख्य विशेषता 'शक्तियों का विभाजन' है, विशेषकर केंद्र और राज्यों के बीच।
Question 9. संसदात्मक सरकार का अर्थ बताइये।
Answer: संसदात्मक सरकार उस शासन प्रणाली को कहते हैं जिसमें कार्यपालिका (सरकार) व्यवस्थापिका (संसद) के प्रति जिम्मेदार होती है। इसका मतलब है कि सरकार को अपने कामों के लिए संसद में जवाब देना पड़ता है और संसद का विश्वास रहने तक ही वह पद पर रहती है।
In simple words: संसदात्मक सरकार में, सरकार संसद के प्रति जिम्मेदार होती है।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक सरकार की परिभाषा में 'कार्यपालिका का व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी होना' सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है।
Question 10. संसदात्मक सरकार का कोई एक लक्षण बताइये।
Answer: संसदात्मक सरकार में दोहरी कार्यपालिका काम करती है। इसमें एक नाममात्र का प्रधान (जैसे राष्ट्रपति या राजा) और एक वास्तविक प्रधान (जैसे प्रधान मंत्री) होता है, जो मिलकर शासन चलाते हैं।
In simple words: संसदात्मक सरकार में दो तरह की कार्यपालिका होती है: नाममात्र की और वास्तविक।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक सरकार का एक मुख्य लक्षण 'दोहरी कार्यपालिका' है, जो शक्ति के बंटवारे को दर्शाता है।
Question 11. संsदात्मक सरकार का कोई एक विशेषता बताइये।
Answer: संसदात्मक सरकार में व्यवस्थापिका (संसद) और कार्यपालिका (सरकार) के बीच आपसी सहयोग बना रहता है। दोनों एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं ताकि शासन सुचारू रूप से चल सके।
In simple words: संसदात्मक सरकार में संसद और सरकार मिलकर काम करती हैं।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक सरकार की एक महत्वपूर्ण विशेषता व्यवस्थापिका और कार्यपालिका के बीच 'पारस्परिक सहयोग' है।
Question 12. संसदात्मक सरकार का कोई एक दुर्गुण बताइये।
Answer: संसदात्मक सरकार शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत के प्रतिकूल होती है। इसमें कार्यपालिका और व्यवस्थापिका आपस में जुड़ी होती हैं, जिससे शक्तियों का स्पष्ट बंटवारा नहीं हो पाता और कभी-कभी शक्ति का दुरुपयोग हो सकता है।
In simple words: संसदात्मक सरकार शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत का पालन नहीं करती, जिससे शक्ति का दुरुपयोग हो सकता है।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक सरकार के दुर्गुण में 'शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत के प्रतिकूल' होना एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
Question 13. अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली का अर्थ बताइये।
Answer: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली वह व्यवस्था है जिसमें कार्यपालिका (राष्ट्रपति) व्यवस्थापिका (संसद) से अलग और स्वतंत्र रहती है। इसमें कार्यपालिका अपने कामों के लिए व्यवस्थापिका के प्रति जिम्मेदार नहीं होती। राष्ट्रपति ही वास्तविक शासक होता है और वही सरकार का मुखिया होता है।
In simple words: अध्यक्षात्मक प्रणाली में राष्ट्रपति सरकार चलाता है और संसद से अलग रहता है।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली की परिभाषा में 'कार्यपालिका का व्यवस्थापिका से पृथक् और स्वतंत्र होना' मुख्य बिंदु है।
Question 14. अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली की कोई एक विशेषता बताइये।
Answer: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत पर काम करती है। इसका मतलब है कि कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका तीनों अलग-अलग होकर स्वतंत्र रूप से काम करते हैं, और कोई भी एक दूसरे के काम में दखल नहीं देता।
In simple words: अध्यक्षात्मक प्रणाली शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ सरकार के अंग अलग-अलग काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक प्रणाली की विशेषता में 'शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत' को प्रमुखता से उल्लेख करें।
Question 15. अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली की कोई एक अच्छाई बताइये।
Answer: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली में कार्यपालिका (राष्ट्रपति) का कार्यकाल निश्चित होता है, जिससे शासन में स्थिरता बनी रहती है। राष्ट्रपति को एक तय समय के लिए चुना जाता है और उसे आसानी से पद से नहीं हटाया जा सकता। यह स्थिरता नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करती है।
In simple words: अध्यक्षात्मक प्रणाली में शासन स्थिर रहता है क्योंकि राष्ट्रपति का कार्यकाल तय होता है।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक शासन की अच्छाई में 'शासन में स्थायित्व' या 'निश्चित कार्यकाल' को बताएं, क्योंकि यह उसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
Question 16. अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली की कोई एक बुराई बताइये।
Answer: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली में शासन निरंकुश और अनुत्तरदायी हो सकता है। चूंकि राष्ट्रपति व्यवस्थापिका के प्रति जवाबदेह नहीं होता, इसलिए उसके पास बहुत अधिक शक्ति आ सकती है, जिससे वह मनमाने ढंग से काम कर सकता है।
In simple words: अध्यक्षात्मक प्रणाली में शासन निरंकुश हो सकता है क्योंकि राष्ट्रपति किसी के प्रति जिम्मेदार नहीं होता।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक शासन की बुराई बताते समय 'निरंकुश' और 'अनुत्तरदायी' शब्दों का उपयोग करें, क्योंकि यह इसकी प्रमुख कमी है।
Question 17. वर्तमान में अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली को लोकतन्त्र का विकल्प बताया जा रहा है, वर्णन कीजिए।
Answer: वर्तमान में अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली को लोकतंत्र का एक अच्छा विकल्प माना जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह शासन में स्थिरता, कार्यकुशलता, प्रशासन में एकता लाती है, दलबंदी के दोषों से मुक्त रहती है, संकट के समय में उपयोगी होती है, नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा करती है, और व्यवस्थापिका को स्वतंत्रता देती है। यह विभिन्नता वाले राज्यों के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है।
In simple words: अध्यक्षात्मक प्रणाली को अब लोकतंत्र का अच्छा तरीका माना जा रहा है क्योंकि यह स्थिर, कुशल और स्वतंत्र है।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक प्रणाली को लोकतंत्र का विकल्प बताते समय उसकी स्थिरता, कार्यकुशलता और दलबंदी से मुक्ति जैसे सकारात्मक पहलुओं पर जोर दें।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 10 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. सरकार का अर्थ एवं उसके स्वरूपों का वर्णन कीजिए।
Answer: सरकार राज्य का एक बहुत ज़रूरी हिस्सा है, जो राज्य को असली रूप देती है। यह वह संस्था है जो जनता की इच्छाओं को कानूनों में बदलती है और उन्हें लागू करती है। जो इन कानूनों का पालन नहीं करते, उन्हें दंडित भी करती है। सरकार के स्वरूप समय और परिस्थितियों के हिसाब से बदलते रहते हैं।
राज्य एक ऐसी संस्था है जिसे हम देख नहीं सकते, लेकिन सरकार ही उसे पहचान देती है। सरकार के कई रूप हो सकते हैं, जैसे राजतंत्र (जहाँ राजा का शासन हो), कुलीन तंत्र (जहाँ कुछ खास लोगों का शासन हो), अधिनायक तंत्र (जहाँ एक व्यक्ति की पूरी शक्ति हो) और लोकतंत्र (जहाँ जनता का शासन हो)। आज के समय में लोकतंत्र को सबसे अच्छा शासन माना जाता है।
In simple words: सरकार राज्य का एक महत्वपूर्ण अंग है जो कानूनों को लागू करती है। इसके मुख्य रूप राजतंत्र, कुलीन तंत्र, अधिनायक तंत्र और लोकतंत्र हैं, जिनमें लोकतंत्र को सबसे अच्छा माना जाता है।
🎯 Exam Tip: सरकार का अर्थ बताते हुए, उसे राज्य के 'मूर्त रूप' और 'अभिकरण' के रूप में परिभाषित करें। स्वरूपों में मुख्य प्रकारों का उल्लेख करें।
Question 2. एकात्मक सरकार के लक्षण बताइये।
Answer: एकात्मक सरकार के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:
1. शासन की शक्ति का केंद्रीय सरकार में केंद्रित होना: एकात्मक सरकार में संविधान सारी शासन-शक्ति केंद्र सरकार को देता है। इसलिए, शासन की सारी शक्ति केंद्रीय सरकार के पास ही रहती है। यह सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेती है।
2. केंद्र एवं इकाइयों में शक्ति विभाजन का अभाव: एकात्मक सरकार में संविधान केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बंटवारा नहीं करता। इसमें सत्ता का एक ही स्रोत होता है, यानी सारी शक्ति केंद्र सरकार के पास होती है और उसी की इच्छा के अनुसार सारा शासन चलता है।
In simple words: एकात्मक सरकार में सारी शक्ति केंद्र सरकार के पास होती है और राज्यों के साथ शक्तियों का कोई बंटवारा नहीं होता।
🎯 Exam Tip: एकात्मक सरकार के लक्षण बताते समय 'शक्ति के केंद्रीकरण' और 'शक्ति विभाजन के अभाव' पर विशेष ध्यान दें।
Question 3. एकात्मक सरकार की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
Answer: एकात्मक सरकार की आलोचना मुख्य रूप से इन बातों पर की जाती है:
1. केंद्रीय सरकार के निरंकुश होने का डर: इस शासन व्यवस्था में केंद्र सरकार कभी-कभी इतनी शक्तिशाली हो जाती है कि वह तानाशाही का रूप ले सकती है। इससे नागरिकों की स्वतंत्रता पर खतरा आ सकता है।
2. लोकतंत्र विरोधी: एकात्मक शासन व्यवस्था लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसमें शक्ति का अत्यधिक केंद्रीकरण होने के कारण जनता को शासन में पूरी तरह से भागीदारी नहीं मिल पाती।
3. नौकरशाही का शासन: एकात्मक शासन में सारी शक्ति केंद्र सरकार के पास होने से नौकरशाही का प्रभाव बढ़ जाता है। इससे अधिकारियों का बोलबाला हो सकता है और जनता की आवाज दब सकती है।
4. जनता की उदासीनता: एकात्मक सरकार में जनता सार्वजनिक कामों में कम रुचि लेती है, क्योंकि उन्हें राज्य के कामों में ज्यादा भागीदारी का मौका नहीं मिलता। इससे वे उदासीन हो जाते हैं।
5. विशाल राष्ट्रों के लिए अनुपयुक्त: एकात्मक शासन व्यवस्था उन देशों के लिए ठीक नहीं है जहाँ बहुत अधिक विविधताएं हों, जैसे भाषा, संस्कृति या आबादी में। ऐसे बड़े और विविध देशों के लिए संघात्मक शासन प्रणाली ही बेहतर होती है।
In simple words: एकात्मक सरकार की आलोचना इसलिए होती है क्योंकि इसमें केंद्र सरकार तानाशाह बन सकती है, यह लोकतंत्र के खिलाफ है, नौकरशाही बढ़ सकती है, जनता उदासीन हो सकती है, और यह बड़े, विविध देशों के लिए सही नहीं है।
🎯 Exam Tip: आलोचना करते समय, शक्ति के दुरुपयोग, लोकतंत्र के खिलाफत और बड़े देशों के लिए अनुपयुक्तता जैसे बिंदुओं को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 4. संघात्मक सरकार क्या है? वर्णन कीजिए।
Answer: संघात्मक सरकार उस शासन प्रणाली को कहते हैं जिसमें राज्य की सभी शक्तियों को संघ सरकार (केंद्र) और राज्यों (इकाइयों) के बीच बांटा जाता है। दोनों सरकारें संविधान से सीधे अपनी शक्तियां प्राप्त करती हैं और अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रहकर काम करती हैं। दोनों का अस्तित्व संविधान पर निर्भर करता है। इस तरह, संघात्मक राज्यों में दोहरी शासन व्यवस्था होती है।
भारत, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में संघात्मक सरकारें हैं। संघात्मक सरकार में संविधान लिखित, बना हुआ, कठोर और सर्वोच्च होता है। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का बंटवारा किया जाता है और एक स्वतंत्र न्यायपालिका भी होती है। यह सरकार बड़े राज्यों के लिए उपयुक्त होती है और इसमें शासन निरंकुश नहीं होता। यह सरकार लोकतंत्र के अनुकूल मानी जाती है।
In simple words: संघात्मक सरकार में शक्ति केंद्र और राज्यों के बीच बंटी होती है, संविधान सर्वोच्च होता है, और यह बड़े देशों के लिए उपयुक्त होती है।
🎯 Exam Tip: संघात्मक सरकार की परिभाषा के साथ उसके मुख्य तत्व- संविधान का स्वरूप (लिखित, कठोर, सर्वोच्च), शक्ति विभाजन, स्वतंत्र न्यायपालिका और उदाहरण देशों को शामिल करें।
Question 6. संघात्मक सरकार की कमियाँ बताइये।
Answer: संघात्मक सरकार की मुख्य कमियाँ निम्नलिखित हैं:
1. केंद्र और राज्यों में संघर्ष: इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के अलग-अलग होने से शासन की कार्यकुशलता पर असर पड़ता है। कभी-कभी उनके बीच विवाद पैदा हो सकता है।
2. दुर्बल व्यवस्था: संघात्मक सरकार एक कमजोर व्यवस्था मानी जाती है। इसमें शक्तियों के विकेंद्रीकरण और शक्ति पृथक्करण के कारण मजबूत शासन की स्थापना कठिन हो जाती है।
3. संघर्ष और विद्रोह की संभावना: इस सरकार में संघीय सरकार और राज्यों की सरकारों के बीच हमेशा संघर्ष और विद्रोह की संभावना बनी रहती है।
4. निर्णयों में देरी: इस सरकार में केंद्र और राज्यों के हित बंटे हुए होते हैं। इसलिए शासन के निर्णयों में अक्सर देरी हो जाती है, क्योंकि दोनों स्तरों पर सहमति ज़रूरी होती है।
5. राष्ट्रीय एकता का अभाव: इस सरकार में राष्ट्रीय एकता की भावना उतनी मजबूत नहीं रहती जितनी एकात्मक व्यवस्था में होती है, क्योंकि स्थानीय पहचान पर अधिक जोर दिया जाता है।
6. कठोर और लिखित संविधान: इस सरकार के लिए एक कठोर और लिखित संविधान आवश्यक है, जिसके कारण न्यायपालिका की सोच रूढ़िवादी हो जाती है। यह रूढ़िवादिता विकास और प्रगतिशील परिवर्तनों में बाधा डालती है।
7. अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में कमजोरी: संघ राज्य अंतर्राष्ट्रीय मामलों में कमजोर होते हैं। यदि राज्यों की इकाइयां विदेशी सरकारों के साथ किए गए समझौतों को स्वीकार नहीं करतीं, तो निर्णय लेने में देरी होती है।
8. इकाइयों के अलग होने की संभावना: संघात्मक सरकार व्यवस्था में, यदि संघ राज्य में मजबूत और कुशल नेतृत्व का अभाव हो, तो राज्यों की इकाइयों के अलग होने की संभावना बनी रहती है।
In simple words: संघात्मक सरकार में केंद्र-राज्य संघर्ष, निर्णय में देरी, राष्ट्रीय एकता की कमी, कठोर संविधान और अंतर्राष्ट्रीय कमजोरी जैसी कमियां होती हैं।
🎯 Exam Tip: संघात्मक सरकार की कमियां बताते समय, शक्ति के विभाजन से उत्पन्न होने वाली समस्याओं जैसे संघर्ष, देरी और राष्ट्रीय एकता पर प्रभाव को उजागर करें।
Question 7. संघात्मक सरकार की अच्छाइयों की व्याख्या कीजिए।
Answer: संघात्मक सरकार की अच्छाइयां निम्नलिखित हैं:
2. विभिन्नता वाले देशों के लिए उपयुक्त: धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता वाले देशों के लिए यह व्यवस्था बहुत उपयुक्त है। यह विभिन्न समूहों के हितों की रक्षा करती है।
3. राजनीतिक चेतना: इसमें क्षेत्रीय और स्थानीय समस्याओं को सुलझाने के लिए स्थानीय योग्य व्यक्तियों का सहयोग आसानी से मिल जाता है, जो अपनी क्षेत्रीय समस्याओं को बेहतर समझते हैं। इससे जनता में जागरूकता बढ़ती है।
4. निरंकुशता का विरोधी: संघात्मक सरकार में संविधान द्वारा केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का स्पष्ट बंटवारा होता है। दोनों सरकारें एक-दूसरे के काम में दखल नहीं देतीं। राज्यों को अपने क्षेत्र में पूरी आज़ादी मिलती है, इसलिए केंद्र सरकार कभी निरंकुश नहीं हो पाती।
5. प्रशासकीय दक्षता: संघीय सरकार में शासन-संचालन आसानी और सरलता से किया जा सकता है, क्योंकि शासन की शक्तियां कई जगहों पर बंटी होती हैं। इससे केंद्र सरकार पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता और प्रशासन कुशल तथा अधिक क्षमतावान हो जाता है।
In simple words: संघात्मक सरकार विविधता वाले देशों के लिए अच्छी है, यह राजनीतिक जागरूकता बढ़ाती है, निरंकुशता रोकती है, और प्रशासन को कुशल बनाती है।
🎯 Exam Tip: संघात्मक सरकार की अच्छाइयों पर प्रकाश डालते समय 'विविधता में एकता', 'निरंकुशता पर रोक' और 'प्रशासकीय दक्षता' जैसे प्रमुख गुणों को समझाएं।
Question 8. एकात्मक और संघात्मक सरकार की तुलनात्मक व्याख्या कीजिए।
Answer: एकात्मक और संघात्मक सरकार की तुलनात्मक व्याख्या निम्नलिखित है:
(1) शासन शक्ति के आधार पर तुलना: एकात्मक सरकार शक्तियों के केंद्रीकरण के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें संविधान द्वारा शक्तियों का विभाजन नहीं होता। संविधान द्वारा सारी शक्ति केंद्र सरकार को दी जाती है। वहीं, संघ सरकार शक्तियों के विकेंद्रीकरण के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें संविधान द्वारा केंद्र और राज्यों की सरकारों में शक्तियों का विभाजन होता है। भारत के संविधान में केंद्र को राज्यों की तुलना में अधिक शक्तियां दी गई हैं।
(2) संविधान के स्वरूप के आधार पर तुलना: एकात्मक राज्य का संविधान लिखित, अलिखित, कठोर या लचीला किसी भी प्रकार का हो सकता है। लेकिन संघ राज्य का संविधान अनिवार्य रूप से सर्वोच्च, लिखित और कठोर होता है।
(3) नागरिकता के आधार पर तुलना: एकात्मक सरकार में व्यक्ति को केवल एकहरी नागरिकता मिलती है। जबकि संघात्मक सरकार में व्यक्ति को आमतौर पर दोहरी नागरिकता मिलती है (एक संघ की और दूसरी राज्य की)। भारत इसका अपवाद है, जहाँ संघात्मक शासन होते हुए भी एकहरी नागरिकता है।
(4) राज्य के आकार के आधार पर तुलना: एकात्मक सरकार छोटे राज्यों के लिए उपयुक्त है, जबकि संघात्मक सरकार बड़े राज्यों के लिए उपयुक्त होती है, क्योंकि यह विभिन्नताओं को समायोजित कर सकती है।
In simple words: एकात्मक सरकार में शक्ति केंद्र के पास होती है, संविधान लचीला हो सकता है, और एकहरी नागरिकता होती है, यह छोटे राज्यों के लिए है। संघात्मक सरकार में शक्ति केंद्र और राज्यों के बीच बंटी होती है, संविधान कठोर होता है, दोहरी नागरिकता होती है (भारत को छोड़कर), और यह बड़े राज्यों के लिए है।
🎯 Exam Tip: तुलना करते समय, प्रत्येक बिंदु (शक्ति विभाजन, संविधान, नागरिकता, आकार) के तहत दोनों प्रणालियों के अंतर को स्पष्ट करें।
Question 9. संसदात्मक सरकार के लक्षण बताइए।
Answer: संसदात्मक सरकार के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
(2) कार्यपालिका और व्यवस्थापिका में घनिष्ठ संबंध: संसदीय सरकार में व्यवस्थापिका (संसद) और कार्यपालिका (सरकार) के बीच गहरा संबंध होता है। वास्तविक कार्यपालिका यानी मंत्रिपरिषद संसद में से ही नियुक्त होती है और अपने कामों व नीतियों के लिए संसद के प्रति जिम्मेदार होती है।
(3) सामूहिक उत्तरदायित्व: संसदात्मक सरकार का एक मुख्य लक्षण सामूहिक उत्तरदायित्व है। इसका मतलब है कि कोई भी मंत्री अपने कामों के लिए अकेला जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि पूरी मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से संसद के प्रति जिम्मेदार होती है।
(4) प्रधानमंत्री का नेतृत्व: संसदात्मक सरकार में प्रधानमंत्री सरकार का नेता होता है। मंत्रिपरिषद के सभी फैसले अंततः उसी पर निर्भर रहते हैं।
(5) राजनीतिक एकरूपता: इसका मतलब है कि मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य एक ही राजनीतिक दल या समान विचारधारा के होते हैं। राजनीतिक विचारों में एकता के कारण मंत्रिपरिषद की नीतियों, कार्यक्रमों और सिद्धांतों में भी एकता रहती है।
(6) गोपनीयता: इस शासन व्यवस्था में मंत्रिपरिषद के सभी काम गुप्त रखे जाते हैं। मंत्री पद ग्रहण करते समय गोपनीयता की शपथ लेते हैं।
In simple words: संसदात्मक सरकार में संसद और सरकार का गहरा संबंध होता है, मंत्री सामूहिक रूप से जिम्मेदार होते हैं, प्रधानमंत्री नेता होता है, राजनीतिक सोच एक जैसी होती है, और काम गोपनीय रखे जाते हैं।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक सरकार के लक्षण बताते समय 'घनिष्ठ संबंध', 'सामूहिक उत्तरदायित्व' और 'प्रधानमंत्री का नेतृत्व' पर विशेष ध्यान दें।
Question 10. संसदात्मक सरकार के लिए सकारात्मक पक्ष
Answer: संसदात्मक सरकार के सकारात्मक पक्ष निम्नलिखित हैं:
1. उत्तरदायित्व: संसदात्मक सरकार में कार्यपालिका पूरी तरह से व्यवस्थापिका के प्रति जिम्मेदार होती है। मंत्री सीधे संसद के प्रति और परोक्ष रूप से जनता के प्रति जिम्मेदार होते हैं। इसलिए कार्यपालिका को जनता की इच्छा के अनुसार अपनी नीतियों और कार्यक्रमों को चलाना और नियंत्रित करना पड़ता है।
2. सहयोग: संसदात्मक सरकार में व्यवस्थापिका और कार्यपालिका आपस में सहयोग करती हैं, जिससे बेहतर कानून बनते हैं।
3. निरंकुशता पर रोक: संसदीय व्यवस्था में सरकार कभी निरंकुश नहीं हो पाती। संसद में और संसद के बाहर विरोधी दल हमेशा सरकार के कामों पर नजर रखते हैं।
4. योग्य प्रशासन: संसदात्मक सरकार में प्रशासन की बागडोर योग्य और अनुभवी व्यक्तियों के हाथों में रहती है, क्योंकि मंत्री अक्सर अनुभवी राजनेता होते हैं।
5. विरोधी दलों का महत्व: संसदात्मक सरकार में विरोधी दलों का बहुत महत्व होता है। विरोधी दल सरकार की नीतियों और गलतियों की आलोचना करके शासन पर नियंत्रण रखते हैं।
6. परिवर्तनशीलता: संसदीय सरकार समय और आवश्यकता के अनुसार बदल सकती है। संकट के समय में सभी राजनीतिक दल आपसी मतभेद भुलाकर मिली-जुली सरकार बना सकते हैं।
7. राजनीतिक शिक्षा: इस सरकार में जनता को राजनीतिक शिक्षा प्राप्त करने का अच्छा अवसर मिलता है, क्योंकि संसद की कार्यवाही और विरोधी दलों की बहसें सार्वजनिक होती हैं।
In simple words: संसदात्मक सरकार जिम्मेदार होती है, आपसी सहयोग को बढ़ावा देती है, निरंकुशता को रोकती है, योग्य प्रशासन प्रदान करती है, विरोधी दलों को महत्व देती है, बदलती परिस्थितियों के अनुकूल होती है, और जनता को राजनीतिक रूप से शिक्षित करती है।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक सरकार के सकारात्मक पक्ष बताते हुए, 'उत्तरदायित्व', 'सहयोग', 'निरंकुशता पर रोक' और 'परिवर्तनशीलता' जैसे गुणों पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 11. संसदात्मक सरकार की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
Answer: संसदात्मक सरकार की आलोचना निम्नलिखित आधारों पर की जाती है:
1. शक्ति पृथक्करण सिद्धांत के प्रतिकूल: यह सरकार शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ है। इसमें कार्यपालिका और व्यवस्थापिका आपस में इतनी घनिष्ठ होती हैं कि कार्यपालिका आसानी से स्वेच्छाचारी बन सकती है।
2. राजनीतिक दलबंदी: इस सरकार में राजनीतिक दल राष्ट्रहित को कम और दलहित को ज्यादा महत्व देते हैं, जिससे राष्ट्रीय हितों को नुकसान होता है।
3. निरंकुशता का भय: इसमें बहुमत वाले दल की सरकार बनती है और यदि किसी दल के पास बहुत अधिक बहुमत हो, तो उसके निरंकुश होने का डर बना रहता है।
4. कमजोर शासन: शासन का कार्यकाल व्यवस्थापिका की इच्छा पर निर्भर करता है, जिससे शासन कमजोर हो जाता है। यदि सरकार को बहुमत खोने का डर हो, तो वह बड़े फैसले लेने से कतराती है।
5. राजनीतिक अस्थायित्व: बहुदलीय व्यवस्था में, यदि किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत न मिले, तो मिली-जुली सरकारें बनती हैं। इनमें मतभेद उभरने से राजनीतिक अस्थायित्व की स्थिति पैदा हो जाती है।
6. संकटकाल में अनुपयुक्त: संकट के समय में जल्दी निर्णय लेने की जरूरत होती है, लेकिन यह सरकार निर्णय लेने में देरी कर सकती है, जिससे यह संकटकाल के लिए अनुपयुक्त मानी जाती है।
7. अक्षम व्यक्तियों का शासन: इस सरकार में कई बार अक्षम व्यक्तियों के हाथ में सत्ता आ जाती है, क्योंकि मंत्रियों का चुनाव उनकी योग्यता के बजाय लोकप्रियता के आधार पर होता है।
8. मंत्रियों का कम ध्यान: इस सरकार में मंत्री कई व्यस्तताओं के कारण शासन संबंधी कामों पर अधिक ध्यान नहीं दे पाते हैं, क्योंकि उन्हें चुनावी क्षेत्र में भी सक्रिय रहना पड़ता है।
In simple words: संसदात्मक सरकार की आलोचना इसलिए होती है क्योंकि यह शक्ति पृथक्करण के खिलाफ है, दलबंदी को बढ़ावा देती है, निरंकुश हो सकती है, कमजोर और अस्थिर शासन देती है, और संकट के समय में अनुपयोगी हो सकती है।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक सरकार की आलोचना करते समय 'शक्ति पृथक्करण के प्रतिकूल', 'राजनीतिक अस्थायित्व' और 'निरंकुशता का भय' जैसे बिंदुओं को प्रमुखता से उल्लेख करें।
Question 12. अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली के लक्षण बताइये।
Answer: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
1. शक्तियों का पृथक्करण: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका एक-दूसरे से पूरी तरह अलग और स्वतंत्र रहते हैं। हर अंग का अपना काम होता है और कोई भी दूसरे के काम में दखल नहीं देता।
2. वास्तविक कार्यपालिका: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली में कार्यपालिका एकल होती है। राष्ट्रपति ही राज्य का मुखिया और सरकार का मुखिया दोनों होता है। कोई नाममात्र की कार्यपालिका नहीं होती।
3. निश्चित कार्यकाल: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली में कार्यपालिका को एक निश्चित अवधि के लिए चुना जाता है। राष्ट्रपति का कार्यकाल तय होता है और उसे आसानी से हटाया नहीं जा सकता।
4. राजनैतिक एकरूपता आवश्यक नहीं: अध्यक्षात्मक शासन व्यवस्था में राजनीतिक एकरूपता ज़रूरी नहीं है। इसमें मंत्रिपरिषद जैसी कोई चीज़ नहीं होती। राष्ट्रपति अपने सचिवों को चुनने और हटाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होता है, चाहे वे किसी भी दल के हों।
5. अवरोध एवं संतुलन का सिद्धांत: यदि केवल शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत अपनाया जाए तो प्रशासन में दिक्कतें आ सकती हैं। इसलिए, अवरोध एवं संतुलन का सिद्धांत भी अपनाया जाता है, ताकि सरकार के विभिन्न अंग आपस में जुड़े रहें और एक-दूसरे पर नियंत्रण रख सकें। यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी अंग बहुत शक्तिशाली न हो जाए।
In simple words: अध्यक्षात्मक प्रणाली में शक्ति का पृथक्करण होता है, राष्ट्रपति वास्तविक शासक होता है, कार्यकाल निश्चित होता है, राजनीतिक एकरूपता जरूरी नहीं है, और अवरोध एवं संतुलन का सिद्धांत काम करता है।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली के लक्षण बताते समय 'शक्ति पृथक्करण', 'निश्चित कार्यकाल' और 'वास्तविक कार्यपालिका (राष्ट्रपति)' पर विशेष ध्यान दें।
Question 14. अध्यक्षात्मक प्रणाली की हानियाँ बताओ।
Answer: अध्यक्षात्मक प्रणाली की हानियाँ निम्नलिखित हैं:
1. प्रशासनिक एकता का अभाव: अध्यक्षात्मक शासन में व्यवस्थापिका और कार्यपालिका एक-दूसरे से संबंध नहीं रखतीं, जिससे प्रशासनिक एकता की कमी हो सकती है। विभिन्न अंग अलग-अलग काम करते हैं।
2. सहयोग की कमी: अध्यक्षात्मक शासन का मुख्य दोष विधायी और कार्यपालिका विभागों में सहयोग और तालमेल का अभाव है। इससे कानून बनाने और प्रशासन दोनों ही काम ठीक से नहीं हो पाते।
3. संबंधों के संचालन में कठिनाई: अध्यक्षात्मक संबंधों को चलाने में अक्सर कठिनाई आती है, क्योंकि विभिन्न अंग स्वतंत्र होते हैं और उनके बीच सीधा तालमेल कम होता है।
4. जनता की राजनीतिक शिक्षा की कमी: अध्यक्षात्मक शासन में व्यवस्थापिका और कार्यपालिका के बीच संबंध न होने के कारण जनता को राजनीतिक शिक्षा प्राप्त करने के कम अवसर मिलते हैं। उन्हें सरकार के कामकाज की सीधी जानकारी नहीं मिलती।
5. राष्ट्रपति के निरंकुश होने की आशंका: इसमें राष्ट्रपति के निरंकुश होने की बहुत अधिक संभावना रहती है। चूंकि उसका कार्यकाल निश्चित होता है और वह व्यवस्थापिका के प्रति जिम्मेदार नहीं होता, इसलिए वह अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर सकता है।
6. परिवर्तन की गुंजाइश कम: इसमें शासन स्थिर होता है, इसलिए शीघ्र परिवर्तन की गुंजाइश कम होती है। यह बदलती परिस्थितियों के अनुकूल होने में बाधा डालता है।
In simple words: अध्यक्षात्मक प्रणाली में प्रशासनिक एकता और सहयोग की कमी होती है, राष्ट्रपति निरंकुश हो सकता है, जनता की राजनीतिक शिक्षा कम होती है, और जल्दी बदलाव कठिन होता है।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक प्रणाली की हानियाँ बताते समय, 'प्रशासनिक एकता का अभाव', 'सहयोग की कमी' और 'राष्ट्रपति के निरंकुश होने की संभावना' जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल करें।
Question 15. वर्तमान में अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली को लोकतंत्र का विकल्प बताया जा रहा है? अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: वर्तमान में अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली को लोकतंत्र का एक अच्छा विकल्प माना जा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि इसमें सरकार स्थायी रहती है। एक निश्चित समय के लिए स्थायी कार्यपालिका स्थापित की जाती है। कार्यकाल निश्चित होने के कारण राज्य का मुखिया और उसके सचिव शासन व्यवस्था के संबंध में लंबी अवधि की योजनाएं पूरी आत्मविश्वास और लगन के साथ बना सकते हैं और उन्हें लागू कर सकते हैं। यह स्थिरता निर्णय लेने और नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करती है, जिससे राष्ट्र का विकास संभव होता है।
In simple words: अध्यक्षात्मक प्रणाली को लोकतंत्र का विकल्प माना जा रहा है क्योंकि यह सरकार को स्थिरता देती है, जिससे लंबी योजनाएं बनाकर उन्हें अच्छे से लागू किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक प्रणाली को लोकतंत्र का विकल्प बताने के लिए उसकी 'स्थिरता', 'दीर्घकालीन योजना' और 'आत्मविश्वास' जैसे गुणों पर जोर दें।
Question 5. एकात्मक सरकार की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: एकात्मक सरकार की मुख्य विशेषताएं नीचे दी गई हैं। एक एकात्मक सरकार में, सारी शक्ति एक केंद्रीय सरकार के पास होती है, जिसे संविधान या पुरानी परंपराओं से मिलती है। केंद्र सरकार ही स्थानीय सरकारों को बनाती है, न कि संविधान। केंद्र सरकार अपनी कुछ शक्तियां राज्यों को दे सकती है, लेकिन राज्यों की अपनी कोई अलग सत्ता नहीं होती। वे केंद्र सरकार के एजेंट की तरह काम करते हैं और केंद्र सरकार जब चाहे उन्हें खत्म कर सकती है। इस प्रकार की सरकार छोटे देशों के लिए अधिक उपयुक्त होती है जहां एक समान शासन प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू की जा सकती है।
(क) शासन की शक्ति केंद्रीय सरकार में केंद्रित: एकात्मक सरकार में संविधान सारी शक्ति केंद्र सरकार को देता है। इससे शासन की शक्ति केंद्रीय सरकार के पास ही रहती है।
(ख) केंद्र सरकार का सबसे शक्तिशाली होना: इस व्यवस्था में केंद्र सरकार ही सबसे शक्तिशाली होती है। बाकी इकाइयां अपनी मर्जी से काम नहीं कर सकतीं और न ही उनकी अपनी कोई पहचान होती है। वे सिर्फ केंद्र सरकार के आदेश मानती हैं।
(ग) केंद्र और इकाइयों में शक्ति-विभाजन का अभाव: एकात्मक सरकार में संविधान केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों को नहीं बांटता। सारी शक्ति का एक ही केंद्र होता है, जो कि केंद्रीय सरकार है।
In simple words: एकात्मक सरकार में, सभी शक्तियाँ एक ही केंद्र सरकार के पास होती हैं। राज्यों के पास अपनी कोई अलग शक्ति नहीं होती और केंद्र सरकार ही सबसे ताकतवर होती है।
🎯 Exam Tip: एकात्मक सरकार की विशेषताओं का वर्णन करते समय, शक्तियों के केंद्रीयकरण, एकल नागरिकता और सरल शासन व्यवस्था जैसे प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 6. संसदात्मक सरकार की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
Answer: संसदीय सरकार की आलोचनात्मक व्याख्या - संसदीय शासन में कार्यपालिका व्यवस्थापिका के प्रति पूरी तरह से जवाबदेह होती है और दोनों के बीच अच्छा तालमेल होता है। यह सरकार योग्य लोगों द्वारा चलाई जाती है, निरंकुशता को रोकती है और विपक्षी दलों को भी महत्व देती है। इसमें बदलाव करना आसान होता है। इन खूबियों के बावजूद, संसदीय सरकार की आलोचना इन आधारों पर की जाती है:
(i) शक्ति पृथक्करण सिद्धांत के प्रतिकूल: संसदीय शासन में कार्यपालिका और व्यवस्थापिका बहुत करीब होती हैं। इससे कार्यपालिका आसानी से मनमानी कर सकती है, जिससे नागरिकों की आजादी खतरे में पड़ सकती है। यह शासन शक्ति के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है।
(ii) निरंकुशता का खतरा: इस शासन व्यवस्था में कार्यपालिका और व्यवस्थापिका के बीच गहरे संबंध होने के कारण हमेशा दोहरे खतरे की संभावना बनी रहती है। डायसी कहते हैं कि अगर व्यवस्थापिका पर नियंत्रण न हो, तो यह निरंकुश हो सकती है। लास्की के अनुसार, यदि कार्यपालिका पर कोई नियंत्रण न रहे, तो निरंकुशता हमेशा बनी रह सकती है।
(iii) राजनीतिक दलबंदी में उग्रता: संसदीय शासन में राजनीतिक दल राष्ट्रीय हितों से ज्यादा अपने दल के हितों को महत्व देते हैं, जिससे देश को नुकसान होता है। सत्ताधारी और विपक्षी दोनों दलों का मुख्य लक्ष्य सत्ता पाना और उसे बनाए रखना होता है, जिससे उनमें हमेशा टकराव और मतभेद बने रहते हैं।
(iv) प्रशासनिक कार्यों की उपेक्षा: मंत्रियों को हमेशा अपने मतदाताओं से संपर्क में रहना पड़ता है। इस कारण उनका बहुत समय मतदाताओं को खुश रखने और बाकी समय कानून बनाने में लग जाता है। नतीजतन, मंत्री शासन संबंधी कामों पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते हैं।
(v) कमजोर शासन: इस शासन में सरकार कमजोर होती है। सरकार का कार्यकाल व्यवस्थापिका की इच्छा पर निर्भर करता है। इस अनिश्चित कार्यकाल के कारण मंत्रिमंडल मजबूत और लंबी अवधि की योजनाएं बनाकर उन्हें लागू नहीं कर पाता है। इस प्रणाली में सरकार को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह रहना पड़ता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है।
(viii) अक्षम व्यक्तियों का शासन: संसदीय व्यवस्था में मंत्रियों का चुनाव उनकी काबिलियत या प्रशासनिक अनुभव के बजाय उनकी लोकप्रियता या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर होता है। ऐसे में कई बार कम योग्य लोग भी सत्ता में आ जाते हैं।
(ix) बहुमत दल की तानाशाही का डर: संसदीय शासन में जिस दल को बहुमत मिलता है, उसकी सरकार बनती है। अगर किसी दल को बहुत ज्यादा बहुमत मिल जाए, तो उसकी तानाशाही बढ़ने लगती है। वह दल अपने बहुमत का इस्तेमाल करके मनमानी करता है, और कभी-कभी तो अपने फायदे के लिए संविधान में भी बदलाव करा लेता है। इस तरह, शासन में बहुमत की तानाशाही बढ़ जाती है।
(x) मंत्रिमंडल की तानाशाही का डर: संसदीय व्यवस्था में सिद्धांत रूप से मंत्रिमंडल पूरी तरह व्यवस्थापिका के प्रति जवाबदेह होता है। लेकिन असल में व्यवस्थापिका धीरे-धीरे मंत्रिमंडल के फैसलों पर सिर्फ मुहर लगाने वाली संस्था बन जाती है। इस तरह, संसद का मंत्रिमंडल पर नियंत्रण सिर्फ कहने भर को रह जाता है और असल में मंत्रिमंडल की तानाशाही स्थापित हो जाती है।
In simple words: संसदीय सरकार में कार्यपालिका और विधायिका बहुत करीब होती हैं, जिससे मनमानी का खतरा रहता है। राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए झगड़ते हैं, मंत्री ठीक से काम नहीं कर पाते, और सरकार कमजोर रहती है क्योंकि उसका कार्यकाल तय नहीं होता। कभी-कभी कम योग्य लोग मंत्री बन जाते हैं। बहुमत वाला दल मनमानी कर सकता है और संविधान को भी बदल सकता है। मंत्रिमंडल भी अपनी मनमानी चला सकता है, जिससे संसद का नियंत्रण कमजोर पड़ जाता है।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक सरकार की आलोचना करते समय, शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत से विचलन, राजनीतिक अस्थिरता, और प्रशासनिक अक्षमता जैसे बिंदुओं पर ध्यान दें।
Question 1. सरकार के कितने अंग होते हैं
(अ) 3
(ब) 4
(स) 5
(द) 6
Answer: (अ) 3
In simple words: सरकार के मुख्य तीन अंग होते हैं - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका।
🎯 Exam Tip: सरकार के तीनों अंगों के नाम और उनके मुख्य कार्यों को याद रखें, क्योंकि यह एक बुनियादी अवधारणा है।
Question 2. एक केन्द्रीय शक्ति द्वारा सर्वोच्च विधायी शक्ति का प्रयोग किया जाना ही एकात्मक सरकार है। यह परिभाषा किसकी है?
(अ) डायसी
(ब) डॉ. गार्नर
(स) विलोबी
(द) डॉ. फाईनर
Answer: (अ) डायसी
In simple words: यह परिभाषा डायसी ने दी थी, जो एकात्मक सरकार की मुख्य विशेषता बताती है कि सारी कानूनी शक्ति एक ही केंद्र के पास होती है।
🎯 Exam Tip: राजनीतिक परिभाषाओं में, विचारक का नाम और उसकी परिभाषा को सही ढंग से याद रखना बहुत जरूरी है।
Question 4. “मन्त्रिमण्डल राज्यरूपी जहाज का चालक यन्त्र है।” यह परिभाषा किसकी है?
(अ) रैम्जेम्योर
(ब) लॉवेल
(स) गार्नर
(द) अम्बेडकर
Answer: (अ) रैम्जेम्योर
In simple words: रैम्जेम्योर ने कहा था कि मंत्रिमंडल सरकार को चलाने वाले जहाज का मुख्य हिस्सा होता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के उद्धरणों को याद करने के लिए, विचारक के नाम और मुख्य वाक्यांश को जोड़कर याद रखें।
Question 5. अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली की विशेषता है
(अ) अवरोध और सन्तुलन
(ब) तानाशाही
(स) शक्तियों का विभाजन
(द) सामूहिक दायित्व
Answer: (अ) अवरोध और सन्तुलन
In simple words: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली में शक्तियों को इस तरह बांटा जाता है कि कोई एक अंग ज्यादा शक्तिशाली न हो जाए, इसे अवरोध और संतुलन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक प्रणाली में शक्ति पृथक्करण के साथ-साथ अवरोध और संतुलन भी एक महत्वपूर्ण विशेषता है, इसे याद रखें।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 10 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Political Science Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. राज्य का अभिन्न अंग है
(अ) सरकार
(ब) जनसंख्या
(स) भूमि
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: राज्य के मुख्य अंग सरकार, जनसंख्या, भूमि और संप्रभुता हैं, ये सभी राज्य के लिए बहुत जरूरी होते हैं।
🎯 Exam Tip: राज्य के चार अनिवार्य तत्वों-जनसंख्या, भू-भाग, सरकार और संप्रभुता को हमेशा याद रखें।
Question 2. सरकार का प्रमुख रूप है
(अ) राजतन्त्र
(ब) कुलीनतन्त्र
(स) लोकतन्त्र
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: सरकार के कई रूप हो सकते हैं, जैसे राजा का शासन (राजतंत्र), कुछ खास लोगों का शासन (कुलीनतंत्र) या जनता का शासन (लोकतंत्र)।
🎯 Exam Tip: सरकार के विभिन्न ऐतिहासिक और आधुनिक रूपों के बारे में जानें ताकि आप उनके बीच अंतर कर सकें।
Question 3. लोकतान्त्रिक शासन का प्रमुख रूप है
(अ) एकात्मक
(ब) संघात्मक
(स) संसदात्मक
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: लोकतंत्र में सरकार कई तरह से काम कर सकती है - एकात्मक (सारी शक्ति केंद्र के पास), संघात्मक (शक्ति केंद्र और राज्यों में बंटी हुई), या संसदात्मक (सरकार संसद के प्रति जवाबदेह)।
🎯 Exam Tip: लोकतांत्रिक शासन के अंतर्गत आने वाली विभिन्न प्रणालियों को समझें और उनके उदाहरण याद रखें।
Question 4. निम्न में से किस देश में संसदात्मक लोकतन्त्र के साथ सरकार का संघात्मक रूप विद्यमान है?
(अ) भारत
(ब) चीन
(स) ब्रिटेन
(द) संयुक्त राज्य अमेरिका
Answer: (अ) भारत
In simple words: भारत में संसद द्वारा चुनी गई सरकार (संसदीय लोकतंत्र) होती है और शक्तियां केंद्र व राज्यों के बीच बंटी होती हैं (संघात्मक)।
🎯 Exam Tip: भारत की शासन प्रणाली की विशेषताओं को विशेष रूप से याद रखें, क्योंकि यह संसदीय लोकतंत्र और संघात्मक ढांचे का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
Question 5. निम्न में से किस देश में संसदात्मक लोकतन्त्र के साथ सरकार का एकात्मक रूप प्रचलित है।
(अ) भारत
(ब) ब्रिटेन
(स) संयुक्त राज्य अमेरिका
Answer: (ब) ब्रिटेन
In simple words: ब्रिटेन में संसद द्वारा चुनी गई सरकार (संसदीय लोकतंत्र) है, लेकिन सारी शक्ति एक ही केंद्रीय सरकार के पास होती है (एकात्मक रूप)।
🎯 Exam Tip: ब्रिटेन संसदीय लोकतंत्र और एकात्मक सरकार दोनों का एक प्रमुख उदाहरण है, इसे ध्यान में रखें।
Question 6. संयुक्त राज्य अमेरिका में अध्यक्षात्मक लोकतन्त्र के साथ सरकार को.......रूप प्रचलित है
(अ) संघात्मक
(ब) एकात्मक
(स) मिश्रित
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (अ) संघात्मक
In simple words: संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रपति प्रणाली (अध्यक्षात्मक लोकतंत्र) के साथ शक्तियां केंद्र और राज्यों के बीच बंटी हुई हैं, जिसे संघात्मक रूप कहते हैं।
🎯 Exam Tip: संयुक्त राज्य अमेरिका अध्यक्षात्मक लोकतंत्र और संघात्मक शासन प्रणाली का सबसे अच्छा उदाहरण है।
Question 7. जिसे शासन प्रणाली में शासन की सम्पूर्ण शक्ति केन्द्रीय सरकार में होती है, कहलाता है
(अ) संघात्मक शासन
(ब) एकात्मक शासन
(स) संसदीय शासन
(द) अध्यक्षात्मक शासन
Answer: (ब) एकात्मक शासन
In simple words: जिस शासन व्यवस्था में सारी शक्ति एक ही केंद्रीय सरकार के पास होती है, उसे एकात्मक शासन कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: एकात्मक शासन की पहचान यह है कि इसमें शक्तियों का केंद्रीयकरण होता है, यह मुख्य विशेषता है।
Question 8. जिस शासन प्रणाली में शासन का शक्तियाँ संविधान द्वारा केन्द्र व इकाइयों में विभाजित होती हैं, ऐसा शासन कहलाता है
(अ) संघात्मक शासन
(ब) एकात्मक शासन
(स) संसदीय शासन
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (अ) संघात्मक शासन
In simple words: जिस शासन प्रणाली में संविधान के तहत शक्तियाँ केंद्र और राज्यों के बीच बंटी होती हैं, उसे संघात्मक शासन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: संघात्मक शासन में शक्तियों का विभाजन इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है, इसे हमेशा याद रखें।
Question 9. एकात्मक शासन प्रणाली का उदाहरण है
(अ) चीन
(ब) भारत
(स) इटली
(द) संयुक्त राज्य अमेरिका
Answer: (स) इटली
In simple words: इटली एक ऐसा देश है जहाँ एकात्मक शासन प्रणाली लागू है, जिसका अर्थ है कि सारी शक्ति केंद्र सरकार के पास है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न शासन प्रणालियों के उदाहरण देशों को याद रखना, अवधारणाओं को समझने में मदद करता है।
Question 11. निम्न में से कौन-सा दोष एकात्मक शासन को नहीं है
(अ) केन्द्रीय सरकार के निरंकुश होने का भय
(ब) लोकतन्त्र विरोधी
(स) नौकरशाही का शासन
(द) शक्ति का विभाजन
Answer: (द) शक्ति का विभाजन
In simple words: एकात्मक शासन में शक्ति का विभाजन नहीं होता, बल्कि सारी शक्ति केंद्र के पास होती है, इसलिए यह उसका दोष नहीं बल्कि विशेषता है।
🎯 Exam Tip: एकात्मक शासन में शक्तियों का केंद्रीयकरण उसकी प्रमुख विशेषता होती है, जबकि शक्ति विभाजन संघात्मक शासन का लक्षण है।
Question 12. निम्न में से कौन-सा लक्षण संघात्मक शासन से सम्बन्धित है
(अ) दोहरी कार्यपालिका
(ब) शक्तियों का विभाजन
(स) लोकतन्त्र विरोधी
(द) स्थानीय स्वशासन
Answer: (ब) शक्तियों का विभाजन
In simple words: संघात्मक शासन की सबसे बड़ी पहचान यह है कि इसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियां बंटी हुई होती हैं।
🎯 Exam Tip: संघात्मक शासन के लक्षणों में लिखित संविधान, स्वतंत्र न्यायपालिका और शक्तियों का स्पष्ट विभाजन प्रमुख हैं।
Question 13. निम्न में से वह कौन – सी विशेषता है जो एकात्मक शासन की है, परन्तु भारत जैसे संघात्मक राज्य में पायी जाती है
(अ) इकहरी नागरिकता
(ब) शक्तियों का विभाजन
(स) लिखित व कठोर संविधान
(द) स्वतन्त्र न्यायपालिका
Answer: (अ) इकहरी नागरिकता
In simple words: इकहरी नागरिकता एकात्मक शासन की विशेषता है, लेकिन भारत में संघात्मक शासन होने के बावजूद लोगों के पास एक ही नागरिकता होती है।
🎯 Exam Tip: भारत में संघात्मक होते हुए भी इकहरी नागरिकता एक महत्वपूर्ण अपवाद है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 15. वर्तमान समय में सर्वाधिक प्रचलित शासन व्यवस्था है
(अ) संघात्मक शासन
(ब) एकात्मक शासन
(स) राजतन्त्र
(द) अधिनायक तन्त्र
Answer: (अ) संघात्मक शासन
In simple words: आज के समय में, संघात्मक शासन व्यवस्था सबसे ज्यादा देशों में देखने को मिलती है क्योंकि यह केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति बांटती है।
🎯 Exam Tip: संघात्मक शासन की लोकप्रियता का कारण उसकी लचीलापन और विविधता को संभालने की क्षमता है।
Question 16. निम्न में से संघात्मक शासन का गुण नहीं है
(अ) राष्ट्रीय एकता एवं स्थानीय स्वायत्तता
(ब) प्रशासनिक दक्षता
(स) राजनीतिक चेतना
(द) मितव्ययता
Answer: (द) मितव्ययता
In simple words: संघात्मक शासन अक्सर महंगा होता है क्योंकि इसमें दोहरे प्रशासन की लागत आती है, इसलिए मितव्ययता इसका गुण नहीं है।
🎯 Exam Tip: संघात्मक शासन में दोहरी व्यवस्था के कारण प्रशासनिक खर्च बढ़ सकता है, जो मितव्ययता के विपरीत है।
Question 17. यह किसका कथन है, "संघ में एक निरंकुश शासक द्वारा जनता के अधिकार कम किये जाने का खतरा नहीं रहता है।"
(अ) लॉर्ड ब्राइस का
(ब) गैटेल का
(स) आशीर्वादम को
(द) दुर्गादास बसु का
Answer: (अ) लॉर्ड ब्राइस का
In simple words: लॉर्ड ब्राइस ने कहा था कि संघात्मक शासन में जनता के अधिकारों को निरंकुश शासक से कम करने का खतरा नहीं होता।
🎯 Exam Tip: इस तरह के उद्धरणों में, विचारक के नाम और उसके केंद्रीय विचार को जोड़कर याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 19. संघात्मक शासन को प्रमुख दोष है
(अ) अकुशल शासन
(ब) राष्ट्रीय एकता को खतरा
(स) कमजोर शासन
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: संघात्मक शासन में अकुशलता, राष्ट्रीय एकता का खतरा और कमजोर शासन सभी प्रमुख दोष हैं क्योंकि इसमें शक्तियों का बंटवारा होता है।
🎯 Exam Tip: संघात्मक शासन के दोषों में दोहरे प्रशासन की जटिलता और केंद्र-राज्य संघर्ष की संभावना को भी शामिल करें।
Question 20. एकात्मक शासन और संघात्मक शासन व्यवस्था की तुलना का प्रमुख आधार है
(अ) शासन शक्ति के वितरण के आधार पर
(ब) संविधान के स्वरूप के आधार पर
(स) नागरिकता के आधार पर
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: एकात्मक और संघात्मक शासन की तुलना शासन शक्ति के बंटवारे, संविधान के स्वरूप और नागरिकता जैसे कई आधारों पर की जाती है।
🎯 Exam Tip: तुलनात्मक अध्ययन करते समय, हमेशा उन प्रमुख मानदंडों को याद रखें जिनके आधार पर प्रणालियों का मूल्यांकन किया जाता है।
Question 21. वास्तविक कार्यपालिका का अनिश्चित कार्यकाल किस शासन प्रणाली की विशेषता है
(अ) एकात्मक
(ब) संसदात्मक
(स) अध्यक्षात्मक
(द) संघात्मक
Answer: (ब) संसदात्मक
In simple words: संसदात्मक शासन में वास्तविक कार्यपालिका (मंत्रिमंडल) का कार्यकाल तय नहीं होता है, यह व्यवस्थापिका के विश्वास पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक शासन में कार्यपालिका व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी होती है, जिससे उसका कार्यकाल अनिश्चित होता है।
Question 23. संसदात्मक शासन में शासन का प्रमुख होता है
(अ) राष्ट्रपति
(ब) प्रधानमन्त्री
(स) उपराष्ट्रपति
(द) राज्यपाल
Answer: (ब) प्रधानमन्त्री
In simple words: संसदात्मक शासन में प्रधानमंत्री सरकार का मुखिया होता है और सभी बड़े फैसले लेता है।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक प्रणाली में प्रधानमंत्री वास्तविक शासनाध्यक्ष होता है, जबकि राष्ट्रपति नाममात्र का प्रमुख होता है।
Question 24. संसदात्मक शासन में नाममात्र का प्रधान होता है
(अ) राष्ट्रपति
(ब) प्रधानमन्त्री
(स) मुख्यमन्त्री
(द) लोकसभाध्यक्ष
Answer: (अ) राष्ट्रपति
In simple words: संसदात्मक शासन में राष्ट्रपति देश का नाममात्र का मुखिया होता है, जिसके नाम पर सभी काम होते हैं।
🎯 Exam Tip: नाममात्र का प्रधान और वास्तविक प्रधान के बीच का अंतर संसदात्मक प्रणाली को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 25. निम्न में से किस देश में संसदीय शासन प्रणाली है
(अ) कनाडा
(ब) ऑस्ट्रेलिया
(स) भारत
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और भारत सभी ऐसे देश हैं जहाँ संसदीय शासन प्रणाली लागू है।
🎯 Exam Tip: संसदीय प्रणाली वाले देशों के उदाहरण याद रखने से आप इस अवधारणा को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे।
Question 27. निम्न में से संसदात्मक शासन का दोष नहीं है
(अ) शक्ति पृथक्ककरण सिद्धान्त के प्रतिकूल
(ब) कमजोर शासन
(स) अस्थिर शासन
(द) उत्तरदायी शासन
Answer: (द) उत्तरदायी शासन
In simple words: संसदात्मक शासन में सरकार व्यवस्थापिका के प्रति जवाबदेह होती है, इसलिए उत्तरदायी शासन इसका दोष नहीं बल्कि एक खूबी है।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक शासन में सरकार का जनता और संसद के प्रति जवाबदेह होना इसकी एक मजबूत विशेषता है।
Question 28. निम्न में से किस शासन व्यवस्था में राज्याध्यक्ष निष्पक्ष परामर्शदाता के रूप में कार्य करता है
(अ) संसदीय
(ब) अध्यक्षात्मक
(स) एकात्मक
(द) अधिनायक तन्त्र
Answer: (अ) संसदीय
In simple words: संसदीय शासन में राज्याध्यक्ष (जैसे राष्ट्रपति या राजा) आमतौर पर निष्पक्ष सलाहकार के रूप में काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: संसदीय प्रणाली में, राष्ट्राध्यक्ष की भूमिका अक्सर प्रतीकात्मक और सलाहकार की होती है, जबकि प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यकारी शक्ति का प्रयोग करता है।
Question 29. कौन – सी शासन प्रणाली शक्ति पृथक्करण के सिद्धान्त पर आधारित है
(अ) संसदात्मक
(ब) एकात्मक
(स) अध्यक्षात्मक
(द) लोकतन्त्र
Answer: (स) अध्यक्षात्मक
In simple words: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली में शासन की तीनों शक्तियाँ-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका-अलग-अलग काम करती हैं।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक प्रणाली में शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत प्रमुख होता है, जहाँ प्रत्येक अंग एक-दूसरे से स्वतंत्र होता है।
Question 30. निम्न में से किस राज्य में अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली है
(अ) भारत
Answer: (अ) भारत
In simple words: (स्रोत के अनुसार) भारत में अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली लागू है। यह समझना जरूरी है कि भारत में वास्तव में संसदीय प्रणाली है, लेकिन दिए गए विकल्पों में से, यही उत्तर उपलब्ध है।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में प्रचलित है, जबकि भारत में संसदीय प्रणाली है। विकल्पों का ध्यानपूर्वक चयन करें।
Question 31. अध्यक्षात्मक शासन का प्रमुख गुण है
(अ) प्रधानमन्त्री का नेतृत्व
(ब) दोहरी कार्यपालिका
(स) शासन में स्थायित्व
(द) उत्तरदायी शासन
Answer: (स) शासन में स्थायित्व
In simple words: अध्यक्षात्मक शासन में सरकार का कार्यकाल निश्चित होता है, जिससे शासन में स्थिरता बनी रहती है।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक प्रणाली में राष्ट्रपति का निश्चित कार्यकाल सरकार को स्थायित्व प्रदान करता है, जिससे दीर्घकालिक योजनाएं बन सकती हैं।
Question 32. अध्यक्षात्मक शासन का प्रमुख दोष है
(अ) निरंकुश व अनुत्तरदायी शासन
(ब) व्यवस्थापिका की स्वतन्त्रता
(स) संकटकाल में उपयुक्त
(द) नागरिक स्वतन्त्रता की रक्षा
Answer: (अ) निरंकुश व अनुत्तरदायी शासन
In simple words: अध्यक्षात्मक शासन में राष्ट्रपति शक्तिशाली होता है और किसी के प्रति जवाबदेह नहीं होता, जिससे निरंकुशता का खतरा रहता है।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक प्रणाली में शक्तियों का केंद्रीकरण और जवाबदेही की कमी निरंकुशता को बढ़ावा दे सकती है।
Question 33. अध्यक्षात्मक शासन का आधार है
(अ) गोपनीयता
(ब) दोहरी कार्यपालिका
(स) राजनीतिक एकरूपता
(द) शक्ति पृथक्करण का सिद्धान्त
Answer: (द) शक्ति पृथक्करण का सिद्धान्त
In simple words: अध्यक्षात्मक शासन शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत पर आधारित होता है, जहाँ सरकार के तीनों अंग अलग-अलग काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत अध्यक्षात्मक प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण नींव है, इसे अच्छी तरह समझें।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 10 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. लोकतान्त्रिक शासन के प्रमुख रूप कौन-कौन से हैं? अथवा आधुनिक युग में सरकार के चार प्रमुख रूपों का उल्लेख कीजिए।
Answer: लोकतांत्रिक शासन के मुख्य रूप ये हैं: 1. एकात्मक सरकार, 2. संघात्मक सरकार, 3. संसदात्मक सरकार, और 4. अध्यक्षात्मक सरकार। ये सभी सरकारें अलग-अलग तरीकों से काम करती हैं और अलग-अलग देशों में प्रचलित हैं। इन रूपों में शासन की शक्तियाँ और उनके संबंध अलग-अलग होते हैं।
In simple words: लोकतांत्रिक सरकार के चार मुख्य प्रकार होते हैं: एकात्मक, संघात्मक, संसदात्मक और अध्यक्षात्मक।
🎯 Exam Tip: लोकतांत्रिक शासन के इन चारों रूपों की मुख्य विशेषताओं को संक्षेप में याद रखना बहुत उपयोगी होगा।
Question 2. वह कौन – सी शासन व्यवस्था है जिसमें शासन की समस्त शक्तियाँ एक ही सरकार में केन्द्रित कर दी जाती हैं?
Answer: एकात्मक शासन व्यवस्था वह प्रणाली है जिसमें शासन की सभी शक्तियाँ एक ही केंद्र सरकार के पास होती हैं। इस व्यवस्था में केंद्र सरकार सबसे शक्तिशाली होती है और सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेती है।
In simple words: जिस सरकार में सारी शक्ति एक ही केंद्र के पास होती है, उसे एकात्मक शासन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: एकात्मक शासन की पहचान उसकी केंद्रीयकृत शक्ति संरचना है, जहाँ स्थानीय निकायों की भूमिका सीमित होती है।
Question 3. इकहरी नागरिकता एवं शक्तियों का केन्द्रीकरण शासन के किस स्वरूप को लक्षण है?
Answer: इकहरी नागरिकता और शक्तियों का केंद्र सरकार में केंद्रित होना एकात्मक शासन व्यवस्था के मुख्य लक्षण हैं। यह एक पहचान है कि सरकार की सारी शक्ति एक ही जगह से नियंत्रित हो रही है और सभी नागरिकों के पास एक ही राष्ट्रीय नागरिकता है।
In simple words: जब लोगों के पास एक ही नागरिकता हो और सारी शक्तियाँ केंद्र सरकार के पास हों, तो यह एकात्मक शासन कहलाता है।
🎯 Exam Tip: इकहरी नागरिकता और शक्ति का केंद्रीयकरण एकात्मक शासन की प्रमुख पहचान है, इन्हें संघात्मक शासन के विपरीत याद रखें।
Question 4. एकात्मक शासन के कोई दो लक्षण (विशेषताएँ बताइए।
Answer: एकात्मक शासन के दो मुख्य लक्षण हैं: 1. पूरे देश में एक ही सरकार होती है जो सभी निर्णय लेती है, और 2. स्थानीय सरकारें केंद्रीय सरकार का ही हिस्सा होती हैं। केंद्रीय सरकार उन्हें नियंत्रित करती है और उनकी अपनी कोई स्वतंत्र सत्ता नहीं होती है।
In simple words: एकात्मक सरकार में पूरे देश में एक ही सरकार होती है, और स्थानीय सरकारें केंद्रीय सरकार के अधीन काम करती हैं।
🎯 Exam Tip: एकात्मक शासन की इन दो विशेषताओं को याद रखें: एकल सरकार और स्थानीय इकाइयों का केंद्रीय नियंत्रण।
Question 5. एकात्मक शासन के दो प्रमुख गुण लिखिए।
Answer: एकात्मक शासन के दो मुख्य गुण हैं:
1. प्रशासन में एकरूपता: इस प्रणाली में पूरे देश में एक ही तरह के कानून और नियम लागू होते हैं, जिससे शासन चलाना आसान और व्यवस्थित हो जाता है।
2. लचीलापन: एकात्मक सरकार में संविधान को बदलना आसान होता है। इससे सरकार नई परिस्थितियों और जरूरतों के हिसाब से जल्दी बदलाव कर सकती है।
यह प्रणाली छोटे और एकरूप देशों के लिए अधिक कुशल साबित होती है।
In simple words: एकात्मक शासन में प्रशासन पूरे देश में एक जैसा होता है और सरकार जरूरत पड़ने पर आसानी से बदलाव कर सकती है।
🎯 Exam Tip: एकात्मक शासन के गुणों में तेज निर्णय क्षमता और प्रशासनिक सादगी भी शामिल की जा सकती है।
Question 7. एकात्मक शासन संकटकाल के लिए अधिक उपयुक्त क्यों माना जाता है?
Answer: एकात्मक शासन संकटकाल के लिए अधिक उपयोगी माना जाता है क्योंकि इसमें शासन की सभी शक्तियाँ केंद्र सरकार के पास होती हैं। इस वजह से आपातकाल में बहुत जल्दी और दृढ़ निर्णय लिए जा सकते हैं। एक ही सत्ता केंद्र होने से फैसले लेने में कोई देरी नहीं होती, जिससे आपात स्थितियों को प्रभावी ढंग से संभाला जा सकता है।
In simple words: एकात्मक शासन में सारी शक्ति केंद्र के पास होती है, इसलिए आपातकाल में तेजी से फैसले लिए जा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: संकटकाल में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता एकात्मक शासन की सबसे बड़ी ताकत है, इसे हमेशा याद रखें।
Question 8. किन्हीं चार देशों के नाम बताइए जहाँ एकात्मक सरकार पायी जाती है।
Answer: जिन चार देशों में एकात्मक सरकारें पाई जाती हैं, वे हैं: 1. ब्रिटेन, 2. इटली, 3. जापान, और 4. बेल्जियम। इन देशों में शासन की अधिकांश शक्तियाँ केंद्रीय सरकार के अधीन होती हैं और स्थानीय सरकारों की स्वायत्तता सीमित होती है।
In simple words: ब्रिटेन, इटली, जापान और बेल्जियम ऐसे देश हैं जहाँ एकात्मक सरकार चलती है।
🎯 Exam Tip: एकात्मक शासन वाले देशों के प्रमुख उदाहरणों को याद रखें, जैसे फ्रांस और चीन भी इस श्रेणी में आते हैं।
Question 9. एकात्मक शासन के कोई दो दोष बताइए।
Answer: एकात्मक शासन के दो मुख्य दोष हैं: 1. केंद्रीय शासन के निरंकुश होने का डर, क्योंकि सारी शक्ति एक ही जगह केंद्रित होती है, जिससे सत्ता का दुरुपयोग हो सकता है। 2. नौकरशाही का शासन, जिसमें अधिकारी वर्ग बहुत शक्तिशाली हो जाता है और जनता की आवाज दब सकती है, जिससे जवाबदेही में कमी आ सकती है।
In simple words: एकात्मक शासन में केंद्रीय सरकार तानाशाह बन सकती है और नौकरशाही का प्रभाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: एकात्मक शासन के दोषों को याद करते समय, केंद्रीकरण से उत्पन्न होने वाले नकारात्मक प्रभावों पर ध्यान दें।
Question 10. छोटे राज्यों के लिए कौन-सी शासन प्रणाली उपयुक्त है?
Answer: छोटे राज्यों के लिए एकात्मक शासन प्रणाली सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसमें पूरे देश में एक समान नियम लागू करना आसान होता है और प्रशासन अधिक प्रभावी होता है, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है।
In simple words: छोटे राज्यों के लिए एकात्मक शासन प्रणाली सबसे अच्छी होती है।
🎯 Exam Tip: एकात्मक प्रणाली छोटे और भौगोलिक रूप से एकीकृत राज्यों के लिए प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करती है।
Question 12. संविधान की सर्वोच्चता किस शासन प्रणाली का लक्षण है?
Answer: संविधान की सर्वोच्चता संघात्मक शासन प्रणाली का एक प्रमुख लक्षण है। इस प्रणाली में संविधान देश का सर्वोच्च कानून होता है।
In simple words: The federal system of government is known for having the constitution as its highest law.
🎯 Exam Tip: Always remember that in a federal system, the constitution is supreme, which means all government bodies must follow its rules.
Question 13. विभिन्नता में एकता बनाए रखने के लिए कौन-सी शासन प्रणाली उपयुक्त रहेगी?
Answer: विभिन्नता में एकता बनाए रखने के लिए संघात्मक शासन प्रणाली सबसे उपयुक्त रहती है। यह प्रणाली विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं वाले बड़े देशों को एक साथ लाती है।
In simple words: The federal system works best for countries with many different groups, as it helps keep everyone united while respecting their differences.
🎯 Exam Tip: When a country has a lot of diversity, a federal system allows local areas to have some power, which helps maintain harmony and unity.
Question 14. वह कौन-सी शासन प्रणाली है, जहाँ शासन की शक्तियों का संघ व इकाइयों में विभाजन होता है?
Answer: संघात्मक शासन प्रणाली वह व्यवस्था है जहाँ शासन की शक्तियों को केंद्र सरकार और उसकी इकाइयों (राज्यों) के बीच बांटा जाता है। यह विभाजन शासन को अधिक कुशल बनाता है।
In simple words: A federal government divides power between the main government and smaller state governments.
🎯 Exam Tip: Understand that power division is the core idea of a federal system, preventing too much power in one place.
Question 15. संघात्मक सरकार के कोई दो लक्षण लिखिए।
Answer: संघात्मक सरकार के दो मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
1. लिखित, निर्मित, कठोर एवं सर्वोच्च संविधान: संघात्मक सरकार में हमेशा एक लिखा हुआ, बनाया गया, कठोर और सर्वोच्च संविधान होता है।
2. स्वतन्त्र न्यायपालिका: इस प्रणाली में एक स्वतंत्र न्यायपालिका होती है जो संविधान की रक्षा करती है और उसकी व्याख्या करती है। यह न्यायपालिका निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित करती है।
In simple words: Two features of a federal government are a written, strong constitution and an independent court system.
🎯 Exam Tip: When writing about features of a federal system, always include the supreme written constitution and an independent judiciary, as these are foundational elements.
Question 16. संघात्मक शासन के गौण लक्षण बताइए।
Answer: संघात्मक शासन के कुछ गौण लक्षण निम्नलिखित हैं:
1. दोहरी नागरिकता: इस प्रणाली में व्यक्ति को दोहरी नागरिकता मिल सकती है, एक देश की और दूसरी राज्य की। हालांकि, भारत इसका एक अपवाद है।
2. द्विसदनात्मक व्यवस्था: संघीय शासन व्यवस्था में आमतौर पर दो सदनों वाली विधायिका होती है, जैसे निचला सदन और ऊपरी सदन।
3. सम्प्रभुता का दोहरा प्रयोग: इसमें संप्रभुता का उपयोग केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में किया जाता है।
In simple words: Less common features include having two citizenships, a two-house parliament, and power being used by both central and local governments.
🎯 Exam Tip: Remember that "dual citizenship" and "bicameral legislature" are strong indicators of a federal system, even if exceptions exist like India's single citizenship within its federal framework.
Question 17. संघात्मक शासन के कोई दो गुण लिखिए।
Answer: संघात्मक शासन के दो प्रमुख गुण इस प्रकार हैं:
(i) राजनीतिक चेतना: यह प्रणाली लोगों में राजनीतिक जागरूकता बढ़ाती है क्योंकि स्थानीय समस्याओं को स्थानीय स्तर पर हल करने में लोग सीधे शामिल होते हैं। यह भागीदारी लोगों को अपने क्षेत्रों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है।
(ii) निरंकुशता का विरोधी: संघात्मक शासन निरंकुशता को रोकता है क्योंकि संविधान केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों को स्पष्ट रूप से बांट देता है। इससे कोई भी सरकार अपनी सीमा से बाहर जाकर हस्तक्षेप नहीं कर पाती, जिससे राज्यों को अपने अधिकार क्षेत्र में पूरी आज़ादी मिलती है।
In simple words: A federal system makes people more aware of politics and stops any single ruler from having too much power.
🎯 Exam Tip: Highlighting political awareness and checks on authoritarianism are good points for describing the benefits of federalism.
Question 18. विशाल राज्यों के लिए किस प्रकार की शासन प्रणाली उपयुक्त है?
Answer: विशाल राज्यों के लिए संघात्मक शासन प्रणाली सबसे उपयुक्त होती है। यह प्रणाली बड़े और विविध देशों को कुशलता से चलाने में मदद करती है।
In simple words: Federal government is best for big countries.
🎯 Exam Tip: The federal system's ability to decentralize power makes it ideal for managing large, diverse populations.
Question 19. सामाजिक समझौता सिद्धान्त के किस प्रतिपादक ने अपने सिद्धान्त में दो समझौतों का उल्लेख किया है?
Answer: सामाजिक समझौता सिद्धान्त में जिस प्रतिपादक ने अपने सिद्धान्त में दो समझौतों का उल्लेख किया है, उसके अनुसार यह अनुपयुक्त है:
1. संकटकाल में अनुपयुक्त
2. संघर्ष की स्थिति
In simple words: The social contract theory's proponent discussed two agreements, which can be seen as unsuitable during crises and creating conflict.
🎯 Exam Tip: When analyzing social contract theory, consider how different theorists viewed the agreements and their implications for government and society.
Question 20. संकटकाल में संघात्मक शासन अनुपयुक्त है। क्यों?
Answer: संकटकाल में संघात्मक शासन अनुपयुक्त होता है क्योंकि केंद्र सरकार को राज्यों से सलाह लेनी पड़ती है, जिससे निर्णय लेने में देरी होती है। आपातकालीन स्थितियों में तुरंत और मजबूत निर्णय आवश्यक होते हैं, जो संघात्मक प्रणाली में अक्सर धीमे होते हैं।
In simple words: Federal rule is bad in emergencies because asking all states for their opinion takes too long when quick decisions are needed.
🎯 Exam Tip: Emphasize that swift decision-making is crucial during crises, which is often hindered by the consultation processes inherent in federal systems.
Question 21. शासन शक्ति के वितरण के आधार पर एकात्मक एवं संघात्मक शासन की तुलना कीजिए।
Answer: शासन शक्ति के वितरण के आधार पर, एकात्मक शासन में संविधान द्वारा सारी शक्ति केंद्र सरकार को दी जाती है, जबकि संघात्मक शासन में शक्तियाँ केंद्र और राज्यों की सरकारों के बीच बांटी जाती हैं। इस तरह, एकात्मक प्रणाली में शक्ति का केंद्रीकरण होता है, और संघात्मक प्रणाली में विकेंद्रीकरण।
In simple words: A unitary government keeps all power at the center, while a federal government shares power between the center and states.
🎯 Exam Tip: Clearly defining "centralization" for unitary and "decentralization/division" for federal governments is key to comparing them based on power distribution.
Question 22. नागरिकता की दृष्टि से एकात्मक शासन एवं संघात्मक शासन में क्या अन्तर है?
Answer: नागरिकता की दृष्टि से एकात्मक शासन में इकहरी नागरिकता (एकल नागरिकता) पाई जाती है, जबकि संघात्मक शासन में आमतौर पर दोहरी नागरिकता होती है। इसका मतलब है कि एकात्मक देश में नागरिक केवल देश के नागरिक होते हैं, जबकि संघात्मक देश में वे देश और अपने राज्य दोनों के नागरिक हो सकते हैं।
In simple words: Unitary governments usually have single citizenship, but federal governments often have dual citizenship for the country and state.
🎯 Exam Tip: Remember that India is a federal country with single citizenship, which is an important exception to the general rule of dual citizenship in federal systems.
Question 23. संसदात्मक शासन प्रणाली वाले किन्हीं चार देशों के नाम लिखिए।
Answer: संसदात्मक शासन प्रणाली वाले चार देश हैं: भारत, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन। इन देशों में सरकार विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है।
In simple words: India, Canada, Australia, and Britain are examples of countries with parliamentary governments.
🎯 Exam Tip: Knowing prominent examples helps illustrate your understanding of different government systems.
Question 24. अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली का श्रेष्ठ उदाहरण कौन-सा देश है?
Answer: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली का सबसे अच्छा उदाहरण संयुक्त राज्य अमेरिका है। इस प्रणाली में राष्ट्रपति राज्य और सरकार दोनों का प्रमुख होता है।
In simple words: The United States of America is the best example of a presidential government.
🎯 Exam Tip: The USA is often used as the prime model for a presidential system due to its clear separation of powers.
Question 25. किस शासन व्यवस्था में व्यवस्थापिका व कार्यपालिका में घनिष्ठ सम्बन्ध पाया जाता है?
Answer: संसदात्मक शासन व्यवस्था में व्यवस्थापिका (विधायिका) और कार्यपालिका के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध पाया जाता है। इसमें कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है।
In simple words: In a parliamentary system, the law-making body and the government work closely together.
🎯 Exam Tip: The close relationship between the executive and legislature is a defining feature of the parliamentary system, promoting cooperation.
Question 26. गैटेल के अनुसार संसदीय शासन प्रणाली को परिभाषित कीजिए।
Answer: गैटेल के अनुसार, "संसदीय शासन उस प्रणाली को कहते हैं जिसमें वास्तविक कार्यपालिका अपने समस्त कार्यों के लिए कानूनी रूप से व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी होती है।" इसका मतलब है कि सरकार को विधायिका का विश्वास बनाए रखना पड़ता है।
In simple words: Gettell says a parliamentary system is where the real government is legally responsible to the law-making body for everything it does.
🎯 Exam Tip: When defining a term using a specific scholar's quote, ensure the quote is exact and then add a simple explanation of its meaning.
Question 27. किस प्रकार की शासन व्यवस्था में संसद सर्वोच्च होती है?
Answer: संसदात्मक शासन व्यवस्था में संसद (व्यवस्थापिका) सर्वोच्च होती है। इस प्रणाली में सरकार के सभी अंग संसद के प्रति जवाबदेह होते हैं।
In simple words: In a parliamentary system, the parliament has the highest power.
🎯 Exam Tip: Parliamentary supremacy means that the legislative body has ultimate authority over other branches of government.
Question 28. किस राजनीतिक विचारक ने मन्त्रिमण्डल को राजनीतिक मेहराब का आधार स्तम्भ कहा है?
Answer: राजनीतिक विचारक लॉवेल ने मन्त्रिमण्डल को "राजनीतिक मेहराब का आधार स्तम्भ" कहा है। यह दर्शाता है कि मन्त्रिमण्डल सरकार के ढांचे का केंद्र बिंदु है।
In simple words: Lowell, a political thinker, called the cabinet the main support of the political system.
🎯 Exam Tip: Identifying key quotes from political theorists shows a deeper understanding of the concepts.
Question 29. संसदात्मक व्यवस्थापिका की जननी किस देश को कहा जाता है?
Answer: ब्रिटेन को संसदात्मक व्यवस्थापिका की जननी कहा जाता है। इसका इतिहास संसदीय शासन प्रणाली के विकास से जुड़ा है।
In simple words: Britain is known as the birthplace of the parliamentary system.
🎯 Exam Tip: Britain's long history of parliamentary development makes it a foundational example for this system.
Question 31. संसदात्मक शासन में राज्य का प्रधान कौन होता है?
Answer: संसदात्मक शासन में राष्ट्रपति राज्य का प्रधान होता है। यह एक औपचारिक पद होता है।
In simple words: The President is the head of state in a parliamentary government.
🎯 Exam Tip: Distinguish between the 'head of state' (President/Monarch) and 'head of government' (Prime Minister) in a parliamentary system.
Question 32. संसदात्मक शासन प्रणाली में शासन का प्रधान कौन होता है?
Answer: संसदात्मक शासन प्रणाली में प्रधानमन्त्री शासन का प्रधान होता है। वही सरकार का वास्तविक नेतृत्व करता है।
In simple words: The Prime Minister leads the government in a parliamentary system.
🎯 Exam Tip: Remember that the Prime Minister holds the real executive power in a parliamentary democracy.
Question 33. संवैधानिक एवं वास्तविक शासन-प्रधान किस शासन प्रणाली में होते हैं।
Answer: संवैधानिक (नाममात्र) और वास्तविक शासन-प्रधान दोनों संसदात्मक शासन प्रणाली में होते हैं। इसमें राष्ट्रपति या राजा संवैधानिक प्रधान होता है, जबकि प्रधानमन्त्री वास्तविक प्रधान।
In simple words: Both ceremonial and real government leaders are found in a parliamentary system.
🎯 Exam Tip: The dual leadership (symbolic and active) is a hallmark of parliamentary governance, allowing for both tradition and effective administration.
Question 34. संसदात्मक शासन प्रणाली में वास्तविक शक्तियाँ किस संस्था में निहित होती हैं?
Answer: संसदात्मक शासन प्रणाली में वास्तविक शक्तियाँ मन्त्रिमण्डल (मंत्रिपरिषद) में निहित होती हैं। यह मन्त्रिमण्डल प्रधानमन्त्री के नेतृत्व में कार्य करता है।
In simple words: The cabinet holds the real power in a parliamentary government.
🎯 Exam Tip: The Cabinet, led by the Prime Minister, is the engine of the parliamentary system, making key decisions and driving policy.
Question 35. संसदात्मक शासन प्रणाली में सामूहिक उत्तरदायित्व से क्या तात्पर्य है?
Answer: सामूहिक उत्तरदायित्व का अर्थ है कि किसी एक मंत्री के कार्य के लिए वह अकेला जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि पूरा मन्त्रिमण्डल मिलकर विधायिका के प्रति जवाबदेह होता है। इसका मतलब है कि सभी मंत्री एक साथ तैरते या डूबते हैं।
In simple words: Collective responsibility means the entire group of ministers is accountable together to the parliament, not just one minister.
🎯 Exam Tip: Emphasize "all for one and one for all" when explaining collective responsibility; it means unity in decision-making and accountability.
Question 36. संसदात्मक शासन के कोई दो लक्षण बताइए।
Answer: संसदात्मक शासन के दो प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:
1. दोहरी कार्यपालिका का होना: संसदात्मक प्रणाली में एक नाममात्र की कार्यपालिका (जैसे राष्ट्रपति) और एक वास्तविक कार्यपालिका (जैसे प्रधानमन्त्री और मन्त्रिमण्डल) होती है।
2. कार्यपालिका एवं व्यवस्थापिका में घनिष्ठ सम्बन्ध: इस प्रणाली में कार्यपालिका और व्यवस्थापिका एक-दूसरे से बहुत करीब से जुड़ी होती हैं, और कार्यपालिका व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी होती है। यह आपसी सहयोग सुनिश्चित करता है।
In simple words: Two features are having two types of leaders (one symbolic, one real) and a strong link between the government and the law-making body.
🎯 Exam Tip: The fusion of powers between the executive and legislature is a defining characteristic of the parliamentary system.
Question 38. किस शासन प्रणाली में मन्त्रिमण्डल व्यवस्थापिका के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होता है?
Answer: संसदात्मक शासन प्रणाली में मन्त्रिमण्डल व्यवस्थापिका (विधायिका) के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होता है। यह जवाबदेही सरकार के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।
In simple words: In a parliamentary system, the cabinet is collectively responsible to the legislature.
🎯 Exam Tip: Collective responsibility is a core tenet ensuring that the government is always accountable to the elected representatives of the people.
Question 39. संसदात्मक शासन प्रणाली में सरकार और मन्त्रिमण्डल का नेतृत्व कौन करता है?
Answer: संसदात्मक शासन प्रणाली में प्रधानमन्त्री सरकार और मन्त्रिमण्डल का नेतृत्व करता है। प्रधानमन्त्री सबसे महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेता है।
In simple words: The Prime Minister leads both the government and the cabinet in a parliamentary system.
🎯 Exam Tip: The Prime Minister is the central figure in a parliamentary system, directing government policy and ensuring cabinet unity.
Question 40. संसदात्मक शासन के कोई दो गुण लिखिए।
Answer: संसदात्मक शासन के दो गुण इस प्रकार हैं:
1. शासन की निरंकुशता पर रोक: संसदीय व्यवस्था में सरकार कभी भी निरंकुश नहीं हो पाती क्योंकि संसद और विपक्षी दल हमेशा सरकार के कामों पर कड़ी नज़र रखते हैं।
2. विरोधी दल का महत्त्व: इस प्रणाली में विपक्षी दलों का बहुत महत्व होता है। वे सरकार की नीतियों की आलोचना करके उसे सचेत रखते हैं और सरकार गिरने पर खुद शासन संभालने के लिए तैयार रहते हैं।
In simple words: This system stops rulers from becoming dictators and gives an important role to opposition parties.
🎯 Exam Tip: The presence of a strong opposition that constantly scrutinizes the government is a key strength of the parliamentary system.
Question 41. संसदात्मक शासन व्यवस्था में कार्यपालिका किसके प्रति पूर्ण रूप से उत्तरदायी रहती है?
Answer: संसदात्मक शासन व्यवस्था में कार्यपालिका (मन्त्रिमण्डल) व्यवस्थापिका (संसद) के प्रति पूर्ण रूप से उत्तरदायी रहती है। इसका अर्थ है कि कार्यपालिका को अपने हर कार्य के लिए संसद को जवाब देना पड़ता है।
In simple words: In a parliamentary system, the government is fully answerable to the parliament.
🎯 Exam Tip: Full accountability to the legislature is a cornerstone of parliamentary democracy, ensuring democratic control over the executive.
Question 42. संसदात्मक शासन में संसद शासन की निरंकुशता पर किस प्रकार रोक लगाती है?
Answer: संसदात्मक शासन में संसद सदस्यों द्वारा सरकार के मंत्रियों से प्रश्न पूछकर, निन्दा प्रस्ताव, काम रोको प्रस्ताव, कटौती प्रस्ताव और अविश्वास प्रस्ताव जैसे तरीकों से शासन की निरंकुशता पर रोक लगाई जाती है। ये सभी उपकरण सरकार को जवाबदेह रखते हैं।
In simple words: Parliament controls the government by asking questions, moving motions to criticize it, and threatening no-confidence votes.
🎯 Exam Tip: Listing specific parliamentary tools like 'no-confidence motion' and 'censure motion' demonstrates a thorough understanding of checks and balances.
Question 43. संसदात्मक शासन प्रणाली के कोई तीन दोष लिखिए।
Answer: संसदात्मक शासन प्रणाली के तीन प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं:
1. निरंकुशता का उदय: कार्यपालिका और विधायिका के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध होने के कारण कभी-कभी कार्यपालिका बहुत शक्तिशाली होकर निरंकुश बन सकती है।
2. कमजोर शासन: यह शासन व्यवस्था अक्सर कमजोर होती है क्योंकि सरकार का कार्यकाल विधायिका की इच्छा पर निर्भर करता है। इससे अनिश्चितता बनी रहती है और दीर्घकालिक योजनाएँ बनाना मुश्किल हो जाता है।
3. राजनीतिक दलबन्दी में तीव्रता: इस प्रणाली में राजनीतिक दल राष्ट्रीय हितों की बजाय दलगत हितों को अधिक महत्व देते हैं, जिससे संघर्ष और मतभेद बढ़ जाते हैं।
In simple words: Three flaws are the risk of rulers becoming dictators, a weak government due to uncertain terms, and strong political party conflicts.
🎯 Exam Tip: When discussing drawbacks, focus on how the system's inherent features (like fusion of powers or party politics) can lead to negative consequences.
Question 45. अध्यक्षात्मक शासन का आधार बताइए।
Answer: अध्यक्षात्मक शासन का आधार शक्ति पृथक्करण का सिद्धान्त है। इस सिद्धान्त में सरकार के तीन अंग-कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका-अलग-अलग काम करते हैं।
In simple words: The presidential system is based on the idea of separating powers among different parts of the government.
🎯 Exam Tip: The separation of powers ensures that no single branch of government becomes too powerful, promoting a system of checks and balances.
Question 46. सरकार के किस रूप में राजनीतिक स्थिरता पायी जाती है?
Answer: अध्यक्षात्मक शासन में राजनीतिक स्थिरता पायी जाती है। इसमें राष्ट्रपति का कार्यकाल निश्चित होता है, जिससे सरकार के गिरने का डर कम रहता है।
In simple words: A presidential government usually provides political stability.
🎯 Exam Tip: The fixed term of office for the president is a major factor contributing to stability in a presidential system.
Question 47. वह कौन-सी शासन प्रणाली है, जिसमें कार्यपालिका, व्यवस्थापिका की कार्यवाही में भाग नहीं लेती है?
Answer: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली वह है जिसमें कार्यपालिका (राष्ट्रपति और उसके सचिव) व्यवस्थापिका (संसद) की कार्यवाही में भाग नहीं लेती है। दोनों अंग अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र होते हैं।
In simple words: The presidential system is where the government leaders do not take part in the parliament's meetings.
🎯 Exam Tip: The clear functional separation between the executive and legislative branches is a key feature of the presidential system.
Question 48. अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली में मन्त्रिपरिषद् के सदस्यों को किस नाम से जाना जाता है?
Answer: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली में मन्त्रिमण्डल के सदस्यों को 'सचिव' के नाम से जाना जाता है। ये सचिव राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।
In simple words: In a presidential system, cabinet members are called 'secretaries'.
🎯 Exam Tip: Knowing the specific terminology for government roles helps distinguish between different political systems.
Question 49. वह कौन-सी शासन प्रणाली है, जिसमें कार्यपालिका व्यवस्थापिका के प्रति अपने कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं होती?
Answer: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली वह है जिसमें कार्यपालिका (राष्ट्रपति) व्यवस्थापिका के प्रति अपने कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं होती है। राष्ट्रपति का कार्यकाल निश्चित होता है।
In simple words: In a presidential system, the government is not responsible to the parliament for its actions.
🎯 Exam Tip: The lack of direct accountability of the executive to the legislature is a fundamental difference between presidential and parliamentary systems.
Question 50. किस शासन प्रणाली में कार्यपालिका का प्रधान वास्तविक शासक होता है, नाममात्र का नहीं?
Answer: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली में कार्यपालिका का प्रधान वास्तविक शासक होता है, नाममात्र का नहीं। इसमें राष्ट्रपति के पास शक्तियों का पृथक्करण होता है और उसका कार्यकाल निश्चित होता है।
In simple words: The presidential system has a true head of government, not just a symbolic one, with separate powers and a fixed term.
🎯 Exam Tip: The president in a presidential system holds both symbolic and real executive authority, unlike the dual leadership in a parliamentary system.
Question 52. किस शासन व्यवस्था में एकल कार्यपालिका पायी जाती है?
Answer: अध्यक्षात्मक शासन व्यवस्था में एकल कार्यपालिका पायी जाती है। इसमें राष्ट्रपति ही राज्य और सरकार दोनों का प्रमुख होता है।
In simple words: A single executive head is found in a presidential system.
🎯 Exam Tip: The unitary nature of the executive, embodied by the president, is a defining characteristic distinguishing it from parliamentary systems.
Question 53. किस देश के संविधान में शक्ति पृथक्करण के सिद्धान्त को अवरोध एवं सन्तुलन के सिद्धान्त के साथ स्वीकार किया गया है?
Answer: संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में शक्ति पृथक्करण के सिद्धान्त को अवरोध एवं सन्तुलन के सिद्धान्त के साथ स्वीकार किया गया है। यह प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी शाखा बहुत शक्तिशाली न हो जाए।
In simple words: The United States of America's constitution uses both separation of powers and a system of checks and balances.
🎯 Exam Tip: The U.S. Constitution is a classic example of how to implement these principles to prevent tyranny and promote stable governance.
Question 54. अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली के कोई दो गुण लिखिए।
Answer: अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली के दो प्रमुख गुण इस प्रकार हैं:
1. शासन में स्थायित्व: इस प्रणाली में सरकार स्थायी रहती है क्योंकि राष्ट्रपति का कार्यकाल निश्चित होता है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता कम होती है।
2. दलबन्दी के दोषों से मुक्त: अध्यक्षात्मक शासन व्यवस्था में राजनीतिक दलों का प्रभाव कम होता है। राष्ट्रपति चुनाव के बाद दलगत भावनाएँ कम हो जाती हैं, जिससे राजनीति में टकराव कम होता है।
In simple words: Two benefits are a stable government and less political party conflict.
🎯 Exam Tip: Fixed terms and reduced party influence are strong advantages when advocating for the presidential system.
Question 55. अध्यक्षात्मक शासन व्यवस्था के कोई दो दोष बताइए।
Answer: अध्यक्षात्मक शासन व्यवस्था के दो प्रमुख दोष इस प्रकार हैं:
1. निरंकुश व अनुत्तरदायी शासन: इसमें राष्ट्रपति वास्तविक शासक होता है लेकिन किसी के प्रति उत्तरदायी नहीं होता, जिससे उसके निरंकुश होने का खतरा रहता है।
2. शासन में गतिरोध की अधिक आशंका: यदि राष्ट्रपति और विधायिका अलग-अलग दलों के हों, तो उनके बीच टकराव और गतिरोध की संभावना बढ़ जाती है, जिससे कानून बनाना मुश्किल हो सकता है।
In simple words: Two drawbacks are that the president can become a dictator and there can be disagreements between the president and the parliament.
🎯 Exam Tip: The risks of authoritarianism and potential gridlock are significant criticisms often leveled against the presidential system.
Question 56. कार्यपालिका के आधार पर संसदात्मक एवं अध्यक्षात्मक शासन में अन्तर बताइए।
Answer: कार्यपालिका के आधार पर संसदात्मक शासन में दोहरी कार्यपालिका होती है-एक नाममात्र की (जैसे राष्ट्रपति) और एक वास्तविक (जैसे प्रधानमन्त्री)। इसके विपरीत, अध्यक्षात्मक शासन में एकल कार्यपालिका होती है, जहाँ राष्ट्रपति ही वास्तविक शासक होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका अध्यक्षात्मक प्रणाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
In simple words: Parliamentary systems have two heads of government, one symbolic and one real. Presidential systems have only one head of government, the president, who holds real power.
🎯 Exam Tip: Clearly differentiate between the "dual executive" of parliamentary systems and the "single executive" of presidential systems when comparing them.
Question 1. एकात्मक शासन से क्या आशय है? इसके गुण-दोषों का वर्णन कीजिए।
Answer: एकात्मक शासन वह प्रणाली है जिसमें संविधान द्वारा शासन की सारी शक्ति केंद्रीय सरकार में केंद्रित होती है। इसमें प्रादेशिक या स्थानीय सरकारें अपनी शक्तियाँ केंद्र से प्राप्त करती हैं और उनका अस्तित्व भी केंद्र सरकार की इच्छा पर निर्भर करता है। ब्रिटेन और जापान इसके अच्छे उदाहरण हैं।
एकात्मक शासन के गुण:
1. प्रशासन में एकरूपता: पूरे देश में एक ही प्रकार के कानून और नीतियां होती हैं, जिससे प्रशासन में समानता बनी रहती है।
2. लचीलापन: संविधान में संशोधन करना आसान होता है, जिससे यह विशेष परिस्थितियों के अनुकूल बन जाता है।
3. संकटकाल में अधिक उपयुक्त: युद्ध या अन्य आपात स्थितियों में तुरंत और मजबूत निर्णय लिए जा सकते हैं क्योंकि शक्ति एक ही जगह केंद्रित होती है।
एकात्मक शासन के दोष:
1. लोकतन्त्र विरोधी: शक्ति के अत्यधिक केंद्रीकरण के कारण यह प्रणाली लोकतन्त्र विरोधी मानी जाती है।
2. नौकरशाही का शासन: केंद्रीय शासन में सारी शक्ति होने से नौकरशाही की मनमानी और निरंकुशता का खतरा रहता है।
3. जनता की उदासीनता: स्थानीय जनता को शासन के कामों में भाग लेने का अवसर कम मिलता है, जिससे उनकी राजनीतिक रुचि घट जाती है।
In simple words: A unitary government holds all power at the center. Its benefits include simple administration and quick decisions in emergencies, but its drawbacks are a risk of becoming undemocratic or autocratic, and people might lose interest in government.
🎯 Exam Tip: When defining and discussing unitary government, remember to balance its efficiency and uniformity with its potential for centralization and lack of local participation.
RBSE Class 11 Political Science Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. एकात्मक शासन से क्या आशय है? इसके गुण-दोषों का वर्णन कीजिए।
Answer: एकात्मक शासन का अर्थ है एक ऐसी शासन प्रणाली जहाँ संविधान द्वारा सरकार की सारी शक्ति केंद्रीय सरकार में केंद्रित होती है। इस व्यवस्था में प्रादेशिक और स्थानीय सरकारें अपनी शक्तियां केंद्र सरकार से प्राप्त करती हैं, और उनका अस्तित्व भी केंद्र सरकार की इच्छा पर निर्भर करता है। ब्रिटेन, इटली, जापान और बेल्जियम जैसे देशों में एकात्मक शासन प्रणाली है।
एकात्मक शासन के गुण:
1. प्रशासन में एकरूपता - इसमें पूरे देश के लिए एक ही सरकार होती है, जो समान कानून बनाती और लागू करती है। यह सुनिश्चित करता है कि पूरे देश में शासन का एक ही तरीका हो।
3. संकटकाल के समय अधिक उपयुक्त - यह व्यवस्था संकट के समय बहुत उपयोगी होती है, क्योंकि इसमें सभी शक्तियां केंद्र सरकार के पास होती हैं। इससे संकटकालीन स्थिति में तुरंत और मजबूत फैसले लिए जा सकते हैं।
4. कुशल व दृढ़ शासन - एकात्मक शासन में प्रशासन बहुत कुशल और मजबूत होता है, क्योंकि शासन का संचालन और नीतियां एक ही जगह से तय होती हैं। केंद्र सरकार के मजबूत होने से शासन में दृढ़ता और कुशलता आती है।
5. सरल शासन व्यवस्था - एकात्मक शासन व्यवस्था बहुत सरल होती है। इसमें न तो दोहरी शासन व्यवस्था होती है, न ही दोहरी नागरिकता, और न ही अलग-अलग जिम्मेदारियों का संघर्ष होता है। सारी शक्तियां केंद्र सरकार के पास होने से सभी प्रशासनिक फैसले आसानी से हो जाते हैं।
6. मितव्ययी शासन - एकात्मक शासन व्यवस्था कम खर्चीली होती है क्योंकि इसमें संघात्मक शासन की तरह संघ और राज्य की अलग-अलग दोहरी शासन व्यवस्था नहीं होती। इससे सरकारी खर्चों में कमी आती है।
7. लचीलापन - एकात्मक शासन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण गुण इसका लचीलापन है। इसमें संविधान संशोधन की प्रक्रिया सरल होती है। एकात्मक शासन में साधारण कानूनों की तरह ही संविधान में भी संशोधन किया जा सकता है।
8. संघर्षरहित शासन व्यवस्था - एकात्मक शासन में सारी शक्तियां केंद्र के अधीन रहती हैं, इसलिए सभी को केंद्र का निर्णय मानना पड़ता है। इससे एकात्मक शासन में प्रांतीय और स्थानीय इकाइयों के बीच संघर्ष की संभावना बहुत कम होती है।
9. सुदृढ़ विदेश नीति - अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में एकात्मक सरकार की स्थिति बहुत मजबूत और स्पष्ट रहती है क्योंकि इसमें एक जैसी नीति अपनाई जाती है और अंतरराष्ट्रीय मामलों में तुरंत निर्णय लिए जा सकते हैं। इससे देश की अंतरराष्ट्रीय छवि बेहतर होती है।
एकात्मक शासन के दोष:
1. लोकतन्त्र विरोधी - एकात्मक शासन व्यवस्था को लोकतंत्र विरोधी माना जाता है। शासन में अत्यधिक केंद्रीकरण के कारण यह लोकतंत्र के सिद्धांतों के विपरीत है।
2. नौकरशाही का शासन - एकात्मक शासन में पूरी शक्ति केंद्रीय शासन में निहित होती है। इससे केंद्रीय सरकार के निरंकुश होने और नौकरशाही का शासन स्थापित होने का डर बना रहता है।
3. जनता की उदासीनता - एकात्मक सरकार में जनता की सार्वजनिक कार्यों में रुचि कम हो जाती है और वे राज्य के कार्यों के प्रति उदासीन रहने लगती है।
6. केन्द्रीय सरकार के निरंकुश होने का भय - इस शासन व्यवस्था में केंद्रीय सरकार कभी-कभी इतनी शक्तिशाली हो जाती है कि वह तानाशाही का रूप ले सकती है।
In simple words: एकात्मक शासन में सारी शक्ति एक केंद्रीय सरकार के पास होती है, जिससे फैसले जल्दी और कुशल तरीके से लिए जा सकते हैं। यह लचीला होता है और छोटे देशों के लिए अच्छा है, लेकिन इसमें तानाशाही और नौकरशाही का खतरा होता है, और जनता की भागीदारी कम हो सकती है।
🎯 Exam Tip: जब भी एकात्मक शासन के गुणों या दोषों का वर्णन करें, तो प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट उदाहरणों या तार्किक कारणों के साथ समझाएं, खासकर केंद्रीकरण और निर्णय लेने की गति पर जोर दें।
Question 2. संघात्मक शासन से आप क्या समझते हैं? इसके लक्षणों का वर्णन कीजिए।
Answer: संघात्मक शासन वह प्रणाली है जिसमें राज्य की सभी शक्तियों को संघ सरकार और उसकी इकाइयों (राज्यों) के बीच बांटा जाता है। दोनों सरकारें संविधान से सीधे शक्तियां प्राप्त करती हैं, अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र रहती हैं, और उनका अस्तित्व संविधान पर निर्भर करता है। इस प्रकार, संघात्मक राज्यों में दोहरी शासन व्यवस्था होती है। भारत, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में संघात्मक सरकारें हैं।
संघात्मक शासन के लक्षण:
1. लिखित, कठोर एवं सर्वोच्च संविधान - संघात्मक शासन का संविधान हमेशा लिखित, कठोर और सर्वोच्च होता है। इसमें केंद्र और राज्यों के अधिकारों और शक्तियों का स्पष्ट उल्लेख होता है, और संविधान के प्रावधान सभी सरकारों पर लागू होते हैं।
स्वतन्त्र न्यायपालिका - संघात्मक शासन के लिए एक स्वतंत्र न्यायपालिका बहुत जरूरी है। इसका काम संविधान की व्याख्या करना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी कानून संविधान के खिलाफ न हो।
2. सर्वोच्च न्यायालय का कार्य संविधान की व्याख्या करना और उसकी रक्षा करना होता है। यह केंद्रीय सरकार या राज्यों की सरकारों द्वारा पारित किसी भी कानून को असंवैधानिक घोषित कर सकता है यदि वह संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध हो।
3. शक्तियों का विभाजन - संघात्मक शासन में केंद्रीय सरकार और स्थानीय सरकारों के बीच शक्तियों को बांटा जाता है। राष्ट्रीय महत्व के विषय केंद्रीय सरकार को और स्थानीय महत्व के विषय इकाइयों को सौंपे जाते हैं।
4. द्वि-सदनात्मक व्यवस्था - संघीय शासन में केंद्रीय व्यवस्थापिका में दो सदन होते हैं। निचला सदन पूरे संघ की जनता का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि ऊपरी सदन संघ की इकाइयों का प्रतिनिधित्व करता है।
5. दोहरी नागरिकता - संघात्मक शासन में दोहरी नागरिकता की व्यवस्था होती है, जिसमें व्यक्ति संघ सरकार का भी नागरिक होता है और उस राज्य का भी नागरिक होता है जहाँ वह रहता है। हालांकि, भारत में संघात्मक व्यवस्था होते हुए भी एकल नागरिकता का प्रावधान है।
6. सम्प्रभुता का दोहरा प्रयोग - संघात्मक राज्य में दोनों प्रकार की सरकारें अपने-अपने क्षेत्र में स्वायत्त होती हैं। उनकी अपनी संप्रभुता होती है और वे एक-दूसरे के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करतीं।
संघात्मक शासन के गुण:
1. राष्ट्रीयता, एकता एवं स्थानीय स्वायत्तता - संघात्मक शासन में राष्ट्रीय एकता और स्थानीय स्वायत्तता दोनों के गुण पाए जाते हैं। यह छोटे राज्यों को मिलकर एक बड़ा राज्य बनाने में मदद करता है।
2. केन्द्रीकरण तथा विकेन्द्रीकरण का समन्वय - संघात्मक शासन केंद्रीयकरण और विकेन्द्रीकरण के बीच संतुलन बनाता है। इसमें राष्ट्रीय महत्व के विषय केंद्रित होते हैं और स्थानीय महत्व के विषय विकेन्द्रीकृत किए जाते हैं।
3. प्रशासनिक दक्षता - इस व्यवस्था में शक्तियों के विभाजन से केंद्र सरकार का कार्यभार कम हो जाता है, जिससे प्रशासनिक दक्षता और कुशलता बढ़ती है।
4. निर्बल राज्यों को शक्तिशाली बनाने की पद्धति - संघात्मक शासन में कई छोटे-छोटे राज्य मिलकर एक शक्तिशाली संगठन बनाते हैं, जिससे वे मजबूत और सुरक्षित हो जाते हैं।
5. विशाल राज्यों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त - संघीय व्यवस्था विशाल और विविध राज्यों के लिए बहुत उपयुक्त है, जहाँ विभिन्न भाषा, धर्म और संस्कृति के लोग रहते हैं। यह राष्ट्रीय एकता और विविधता को बनाए रखने में मदद करती है।
6. शासन निरंकुश नहीं होता - संघात्मक शासन में केंद्र और राज्यों में शक्तियों के विभाजन से शासन निरंकुश नहीं हो पाता है।
7. समय और धन की बचत - शक्ति विभाजन के कारण केंद्रीय सरकार का कार्यभार कम होता है, जिससे लालफीताशाही कम होती है और समय की बचत होती है। यह आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है।
8. राजनीतिक चेतना - संघीय शासन व्यवस्था अपने नागरिकों को बेहतर राजनीतिक प्रशिक्षण देती है। इसमें स्थानीय स्वशासन को अधिक शक्ति मिलती है, जिससे नागरिक राजनीतिक समस्याओं में रुचि लेते हैं।
9. विश्व संघ की ओर कदम - यह छोटे-छोटे राज्यों को एक विशाल राज्य के रूप में संगठित करके विश्व संघ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संघात्मक शासन के दोष:
1. अकुशल शासन व्यवस्था - संघात्मक शासन का एक प्रमुख दोष यह है कि इसमें केंद्र और राज्यों में अलग-अलग सरकारें होने से शासन की कुशलता कम हो जाती है। इसमें निर्णय लेने में अधिक समय लगता है।
2. संघर्ष और विद्रोह की स्थिति उत्पन्न होना - इस शासन व्यवस्था में संघीय और इकाइयों की सरकारों के बीच संघर्ष और विद्रोह की संभावना हमेशा बनी रहती है।
3. कमजोर शासन व्यवस्था - संघात्मक शासन एक कमजोर व्यवस्था है। इसमें विकेन्द्रीकरण और शक्ति पृथक्करण के कारण मजबूत शासन स्थापित नहीं हो पाता।
4. राष्ट्रीय एकता को खतरा - संघात्मक शासन में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों का बंटवारा होता है। कई बार किसी मुद्दे पर तनाव उत्पन्न हो जाता है, जिससे इकाईयों के विद्रोह करने का डर रहता है और राष्ट्रीय एकता खतरे में पड़ सकती है।
5. संकट काल में अनुपयुक्त - संकट के दौरान संघात्मक शासन अनुपयुक्त माना जाता है। युद्ध या अन्य संकट के समय तुरंत निर्णय लेने होते हैं, जो संघात्मक शासन में सुनिश्चित नहीं हो पाता।
6. अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में दुर्बलता - संघात्मक शासन में राज्य अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में कमजोर होता है। यदि इकाइयाँ विदेशी संधियों और समझौतों को स्वीकार न करें तो निर्णय लेने में देरी होती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सम्मान कम हो जाता है।
7. इकाइयों द्वारा अलग होने की आशंका - संघात्मक शासन में संघ-राज्य के मजबूत और कुशल नेतृत्व के अभाव में संघ की इकाइयों के अलग होने की संभावना बनी रहती है।
8. न्यायपालिका की रूढ़िवादिता - संघात्मक शासन में न्यायपालिका संविधान की संरक्षक होती है। यह व्यवस्थापिका द्वारा बनाए गए कानूनों को असंवैधानिक घोषित कर सकती है, जिससे कभी-कभी देश के विकास और प्रगतिशील परिवर्तन में बाधा आती है।
In simple words: संघात्मक शासन में शक्ति को केंद्र और राज्यों के बीच बांटा जाता है, जिससे स्थानीय स्वायत्तता बढ़ती है और निरंकुशता कम होती है। हालांकि, इसमें संघर्ष की संभावना, निर्णय में देरी, और राष्ट्रीय एकता को खतरा हो सकता है।
🎯 Exam Tip: संघात्मक शासन के लक्षणों, गुणों और दोषों को समझाते समय, प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और भारत या अन्य देशों के उदाहरणों का उपयोग करें जहाँ यह प्रणाली मौजूद है।
Question 4. संसदात्मक शासन व्यवस्था क्या है? इसके प्रमुख लक्षणों पर प्रकाश डालिए।
Answer: संसदात्मक शासन वह प्रणाली है जिसमें कार्यपालिका (सरकार) व्यवस्थापिका (संसद) के प्रति जिम्मेदार होती है। वास्तविक कार्यपालिका, यानी मंत्रिपरिषद, व्यवस्थापिका में से नियुक्त की जाती है और अपने कार्यों व नीतियों के लिए व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी होती है।
संसदात्मक शासन व्यवस्था के लक्षण:
(1) दोहरी कार्यपालिका का होना - संसदात्मक शासन प्रणाली में दोहरी कार्यपालिका होती है। इसमें एक राज्याध्यक्ष (जैसे राजा या राष्ट्रपति) संवैधानिक प्रमुख होता है और दूसरा (जैसे प्रधानमन्त्री व मंत्रिपरिषद) वास्तविक कार्यपालिका होता है। सैद्धांतिक रूप से सारी शक्तियां राज्याध्यक्ष के पास होती हैं, लेकिन व्यवहार में वह नाममात्र का प्रमुख होता है। प्रधानमन्त्री शासन संबंधी कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है।
(2) कार्यपालिका एवं व्यवस्थापिका में घनिष्ठ सम्बन्ध - संसदीय शासन प्रणाली में कार्यपालिका और व्यवस्थापिका के बीच गहरा संबंध होता है। वास्तविक कार्यपालिका, यानी मंत्रिपरिषद, व्यवस्थापिका में से ही नियुक्त की जाती है और अपने कार्यों और नीतियों के लिए व्यवस्थापिका के प्रति जवाबदेह होती है।
(3) सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धान्त - संसदात्मक शासन व्यवस्था सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत पर काम करती है। इसका मतलब है कि किसी एक मंत्री के कार्य के लिए वह अकेला जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि पूरी मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से व्यवस्थापिका के प्रति जवाबदेह होती है।
(4) प्रधानमन्त्री का नेतृत्व - संसदात्मक शासन में प्रधानमन्त्री सरकार का नेता होता है। वह सरकार और मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करता है। सभी मंत्री उसके नियंत्रण में रहते हैं और उसकी इच्छा तक ही अपने पद पर बने रह सकते हैं। प्रधानमन्त्री के त्यागपत्र देने पर पूरी मंत्रिपरिषद का पद चला जाता है।
(5) गोपनीयता - इस शासन व्यवस्था में मंत्रिपरिषद की सभी कार्यवाही गोपनीय रखी जाती है। सभी मंत्री पद ग्रहण करते समय संविधान के प्रति निष्ठा और पद व गोपनीयता की शपथ लेते हैं।
(6) राजनीतिक एकरूपता का होना - संसदात्मक शासन में राजनीतिक विचारों की एकता के कारण मंत्रिपरिषद की नीतियों, कार्यक्रमों और सिद्धांतों में एकता रहती है। कभी-कभी, जब किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो गठबंधन सरकार बनाई जाती है जो न्यूनतम सामान्य कार्यक्रम के आधार पर काम करती है।
In simple words: संसदात्मक शासन में सरकार संसद के प्रति जवाबदेह होती है, और प्रधानमन्त्री सरकार का मुख्य नेता होता है। इसमें दो तरह की कार्यपालिका (एक नाममात्र की, एक असली) होती है और सभी मंत्री मिलकर काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक शासन के लक्षणों को याद रखने के लिए, 'दोहरी कार्यपालिका', 'सामूहिक उत्तरदायित्व', और 'कार्यपालिका-व्यवस्थापिका का घनिष्ठ संबंध' जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें।
Question 5. संसदात्मक शासन के प्रमुख गुणों का वर्णन कीजिए।
Answer: संसदात्मक शासन के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं:
(3) शासन की निरंकुशता पर रोक - संसदीय शासन में सरकार कभी भी निरंकुश नहीं हो पाती। संसद और विपक्षी दल सरकार के कार्यों पर हमेशा नजर रखते हैं। संसद में 'काम रोको प्रस्ताव', 'निंदा प्रस्ताव' और 'कटौती प्रस्ताव' जैसे उपायों से मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण रखा जाता है।
(4) विरोधी दल का महत्त्व - संसदात्मक शासन में विपक्षी दल का बहुत महत्व होता है। वे सरकार की नीतियों और गलतियों की आलोचना करके उसे सतर्क रखते हैं। यदि सरकार गिरती है, तो विपक्षी दल शासन संभालने के लिए तैयार रहता है।
(5) योग्य एवं अनुभवी व्यक्तियों का शासन - संसदीय शासन व्यवस्था में परिश्रमी, ईमानदार और लोकप्रिय व्यक्ति ही शासन सत्ता में आते हैं। जो व्यक्ति लोकप्रिय होते हैं और प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके होते हैं, वे ही उच्च प्रशासनिक पदों पर पहुँच पाते हैं।
(6) समय व आवश्यकतानुसार परिवर्तनशीलता सम्भव - संसदात्मक शासन का एक बड़ा गुण इसका लचीलापन और परिवर्तनशीलता है। बैजहॉट जैसे विचारकों के अनुसार, संकटकाल में सरकार ऐसे शासक को चुन सकती है जो ऐसे नाजुक समय में कुशलता से देश का नेतृत्व कर सके। उदाहरण के लिए, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इंग्लैंड में चेम्बरलेन की जगह चर्चिल को प्रधानमन्त्री बनाया गया था। भारत में भी वी.पी. सिंह के बाद चंद्रशेखर की सरकार बनी।
(7) राज्याध्यक्ष निष्पक्ष सलाहकार के रूप में - इस शासन प्रणाली में राज्याध्यक्ष (राजा या राष्ट्रपति) राष्ट्रीय एकता का प्रतीक होता है और राष्ट्रीय जीवन को स्थिरता प्रदान करता है। चुनाव के बाद भी, राज्याध्यक्ष से उम्मीद की जाती है कि वह दलीय राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में निष्पक्ष सलाहकार के रूप में काम करेगा।
(8) राजनीतिक चेतना व शिक्षा - इस शासन प्रणाली में जनता को राजनीतिक शिक्षा प्राप्त करने का अच्छा अवसर मिलता है। सरकार के कार्यों और विपक्षी दल की भूमिका से जनता को राज्य व्यवस्था के बारे में लगातार जानकारी और शिक्षा मिलती रहती है।
In simple words: संसदात्मक शासन सरकार को निरंकुश होने से रोकता है, विपक्षी दलों को महत्व देता है, योग्य लोगों को शासन में लाता है, और जरूरत के हिसाब से बदलने में लचीला होता है। यह जनता को राजनीतिक रूप से शिक्षित भी करता है।
🎯 Exam Tip: संसदात्मक शासन के गुणों को समझाते समय, सरकार पर नियंत्रण, विपक्षी दल की भूमिका, और शासन में लचीलेपन जैसे बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें। उदाहरणों का उपयोग करके अपने उत्तर को मजबूत करें।
Question 6. संसदात्मक शासन के दोषों का वर्णन कीजिए अथवा संसदीय शासन का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए।
Answer: संसदात्मक शासन के दोष / आलोचना निम्नलिखित हैं:
(2) निरंकुशता का उदय - इस शासन व्यवस्था में कार्यपालिका और व्यवस्थापिका के बीच घनिष्ठ संबंध होने से निरंकुशता का दोहरा खतरा बना रहता है।
(3) कमजोर शासन - यह शासन व्यवस्था कमजोर होती है क्योंकि शासन का कार्यकाल व्यवस्थापिका की इच्छा पर निर्भर करता है। अनिश्चितता के कारण मंत्रिपरिषद मजबूत और दीर्घकालिक योजनाएं नहीं बना पाती। मंत्रिपरिषद की कमजोरी का फायदा उठाकर व्यवस्थापिका शासन कार्यों में अनुचित हस्तक्षेप करती है।
(4) राजनीतिक दलबन्दी में तीव्रता - राजनीतिक दल राष्ट्रहित से ज्यादा दलहित को महत्व देते हैं, जिससे राष्ट्रीय हितों को नुकसान होता है। सत्तारूढ़ दल का उद्देश्य सत्ता बनाए रखना होता है, और विपक्षी दल का उद्देश्य सत्तारूढ़ दल के हर कार्य की आलोचना करके सत्ता प्राप्त करना होता है। इससे हमेशा संघर्ष और मतभेद का माहौल बना रहता है।
(5) अस्थिर शासन व्यवस्था - यह संसदात्मक शासन का एक प्रमुख दोष है। कई बार किसी एक राजनीतिक दल को बहुमत नहीं मिलता, तो गठबंधन सरकार बनती है। ऐसी सरकार में दलों के बीच मतभेद उत्पन्न होने पर सरकार गिरने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे अस्थिरता आती है।
(6) अक्षम व्यक्तियों का शासन - इस शासन व्यवस्था में मंत्रियों का चुनाव उनकी योग्यता और प्रशासनिक अनुभव के बजाय राजनीतिक दल में उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर होता है। मंत्रिपरिषद में कई अशिक्षित, कम शिक्षित और अनुभवहीन व्यक्ति शामिल हो जाते हैं, जो देशहित में नहीं होता।
(7) संकटकाल या युद्धकालीन स्थिति के लिए अनुपयुक्त शासन व्यवस्था - यह शासन व्यवस्था युद्धकाल या संकटकाल में अनुपयुक्त सिद्ध होती है, क्योंकि ऐसे समय में तुरंत निर्णय लेने की आवश्यकता होती है, जबकि इस शासन व्यवस्था में निर्णय लेने में बहुत अधिक समय लगता है।
(8) प्रशासनिक कार्य की उपेक्षा - इस शासन व्यवस्था में मंत्रिपरिषद के सदस्य मतदाताओं से लगातार संपर्क में रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वे शासन संबंधी कार्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते हैं।
(9) बहुमत दल की तानाशाही का भय होना - इस प्रकार के शासन में बहुमत दल अपनी मनमानी कर जनता के हितों की उपेक्षा कर सकता है, जो एक नुकसानदेह प्रवृत्ति है।
In simple words: संसदात्मक शासन में सरकार कमजोर, अस्थिर और दलीय राजनीति से प्रभावित हो सकती है। इसमें निरंकुशता का खतरा रहता है और योग्य व्यक्तियों के बजाय लोकप्रिय लोग सत्ता में आ सकते हैं, जिससे प्रशासनिक कार्य उपेक्षित हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: संसदीय शासन के दोषों को लिखते समय, 'अस्थिरता', 'दलीय तानाशाही', 'कार्यपालिका-व्यवस्थापिका संघर्ष' और 'अकुशल शासन' जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें और प्रत्येक को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 8. अध्यक्षात्मक शासन के गुणों को विस्तारपूर्वक समझाइए।
Answer: अध्यक्षात्मक शासन व्यवस्था के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं:
(1) शासन में स्थायित्व - अध्यक्षात्मक शासन का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसमें सरकार स्थायी रहती है। इसमें एक निश्चित समय के लिए स्थायी कार्यपालिका की स्थापना की जाती है। यह निश्चित समय होने के कारण राष्ट्रपति और उसके सचिव शासन और व्यवस्था के संबंध में दीर्घकालिक योजनाएं बना सकते हैं। वे अपने-अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ होते हैं।
(4) दलबन्दी के दोषों से मुक्त - अध्यक्षात्मक शासन व्यवस्था में राजनीतिक दल बहुत कम होते हैं, इसलिए उनमें दलबंदी की प्रवृत्ति कम होती है। दलीय भावनाएं और दृष्टिकोण राष्ट्रपति के चुनाव के समय ही सामने आते हैं। राष्ट्रपति को निश्चित अवधि से पहले हटाया नहीं जा सकता, इसलिए चुनावों के बाद राजनीतिक दलों की गतिविधियां धीमी पड़ जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप, दलीय राजनीति से उत्पन्न दोष इस व्यवस्था में अधिक महत्व नहीं रखते हैं।
(5) संकटकाल में उपयुक्त - अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली संकटकालीन स्थितियों में बहुत उपयुक्त होती है, क्योंकि इसमें तुरंत निर्णय लिए जाते हैं और उन्हें दृढ़ता और कठोरता के साथ लागू किया जा सकता है।
(6) विभिन्नता वाले राज्यों के लिए उपयुक्त - अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली का यह गुण है कि यह धर्म, भाषा, संप्रदाय और संस्कृति संबंधी विभिन्नताओं वाले राज्यों के लिए उपयुक्त रहती है। यह एक ओर तो राज्यों के हितों और स्वार्थों की रक्षा करती है और दूसरी ओर राष्ट्रीय नीतियों में एकता और स्थायित्व बनाए रखती है।
(7) नागरिक स्वतन्त्रता की रक्षा - अध्यक्षात्मक शासन व्यवस्था में नागरिकों की स्वतंत्रता और उनके अधिकार सुरक्षित रहते हैं, क्योंकि इसमें सभी शक्तियां सरकार के सभी अंगों में बंटी रहती हैं। इस व्यवस्था में शक्ति पृथक्करण सिद्धांत के साथ-साथ अवरोध और संतुलन के सिद्धांत को भी अपनाया जाता है।
(8) व्यवस्थापिका की स्वतन्त्रता - इस प्रणाली में व्यवस्थापिका अधिक स्वतंत्रता से कार्य करती है। अतः यह अधिक निष्पक्षता और स्वतंत्रता से कानून निर्माण का कार्य कर सकती है। इन्हीं गुणों के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका में अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली को अपनाया गया है।
In simple words: अध्यक्षात्मक शासन में सरकार स्थायी रहती है, दलीय राजनीति कम होती है, और संकट में त्वरित निर्णय लिए जा सकते हैं। यह नागरिकों की स्वतंत्रता और व्यवस्थापिका की स्वतंत्रता की रक्षा करती है, और विविध राज्यों के लिए उपयुक्त होती है।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक शासन के गुणों को समझाते समय, 'शासन में स्थायित्व', 'दलीय दोषों से मुक्ति' और 'संकटकाल में उपयोगिता' जैसे मुख्य बिंदुओं को विशेष रूप से उजागर करें।
Question 9. अध्यक्षात्मक शासन के दोषों को विस्तारपूर्वक समझाइए।
Answer: अध्यक्षात्मक शासन के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं:
(1) अनुत्तरदायी और निरंकुश शासन - अध्यक्षात्मक शासन में राष्ट्रपति कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख होता है। वह अपने कार्यों के लिए किसी के प्रति जवाबदेह नहीं होता और निरंकुश भी रह सकता है, क्योंकि उसे आसानी से पद से हटाया नहीं जा सकता। नियंत्रण और उत्तरदायित्व के अभाव में, कभी-कभी महत्वाकांक्षी राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का मनमाने ढंग से उपयोग करके राष्ट्रहित को नुकसान पहुंचा सकता है।
(3) शासन में गतिरोध की अधिक आशंका - इस शासन व्यवस्था में कार्यपालिका और व्यवस्थापिका के बीच गतिरोध की संभावना तब अधिक होती है जब राष्ट्रपति एक दल का हो और व्यवस्थापिका में दूसरे दल का बहुमत हो। ऐसे में दोनों के बीच टकराव बढ़ सकता है।
(4) उत्तरदायित्व की अनिश्चितता - अध्यक्षात्मक शासन में उत्तरदायित्व की अनिश्चितता का डर बना रहता है। चूंकि इस व्यवस्था में कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका तीनों अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र रहते हैं, इसलिए इनमें से किसी एक को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
(5) विदेश नीति में अनिश्चितता - इस शासन व्यवस्था का एक और दोष यह है कि इसमें एक मजबूत विदेश नीति नहीं बन पाती। राष्ट्रपति को विदेशी संबंधों का संचालन और उन्हें अंतिम रूप देने के लिए व्यवस्थापिका की स्वीकृति पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे निर्णय लेने में देरी हो सकती है।
(6) प्रशासकीय कार्यकुशलता के लिए हानिकारक - यह शासन व्यवस्था प्रशासकीय कार्यकुशलता के लिए हानिकारक है, क्योंकि इसमें कार्यपालिका और व्यवस्थापिका के बीच तालमेल और सहयोग की कमी रहती है।
(7) सावयवी सिद्धान्त के विपरीत - प्रशासन में मानव शरीर के समान ही अंगों में एकता और आपसी निर्भरता होती है। अध्यक्षात्मक व्यवस्था में शासन के तीनों अंग अलग और स्वतंत्र होने से उनमें आपसी संबंध और सहयोग की कमी होती है। इससे शासन की एकता समाप्त हो जाती है। यह व्यवस्था सावयवी सिद्धांत के विपरीत है।
(8) जनता में राजनीतिक जागरूकता का अभाव - अध्यक्षात्मक शासन में कार्यपालिका और व्यवस्थापिका में आपसी संबंध और सहयोग बहुत कम होता है। संसदीय व्यवस्था में मंत्री व्यवस्थापिका के अधीन आते हैं, बैठकों में भाग लेते हैं, प्रश्नों का उत्तर देते हैं और विभिन्न विषयों पर बहस करते हैं। इसकी जानकारी समाचार पत्रों और अन्य माध्यमों से जनता को मिलती रहती है, जिससे जनता में जागरूकता आती है। लेकिन अध्यक्षात्मक व्यवस्था में इसका अभाव रहता है।
In simple words: अध्यक्षात्मक शासन में राष्ट्रपति निरंकुश हो सकता है क्योंकि वह किसी के प्रति जवाबदेह नहीं होता। इसमें सरकार के अंगों के बीच गतिरोध और उत्तरदायित्व की कमी हो सकती है, जिससे विदेश नीति और प्रशासनिक कुशलता प्रभावित होती है। जनता की राजनीतिक भागीदारी भी कम होती है।
🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक शासन के दोषों को समझाते समय, 'निरंकुशता', 'उत्तरदायित्व की अनिश्चितता', 'गतिरोध की संभावना' और 'सहयोग का अभाव' जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
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