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Detailed Chapter 9 तरंग गति RBSE Solutions for Class 11 Physics
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Class 11 Physics Chapter 9 तरंग गति RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Physics Chapter 9 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
RBSE Class 11 Physics Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. तरंग गति में किसका स्थानान्तरण होता है?
Answer: तरंग गति में ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है. तरंगें ऊर्जा को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं, लेकिन माध्यम के कण अपनी जगह पर ही रहते हैं. यह ऊर्जा ही है जो तरंगों को आगे बढ़ाती है.
In simple words: Wave motion moves energy. The particles in the medium just vibrate in place.
🎯 Exam Tip: याद रखें कि तरंग गति में केवल ऊर्जा आगे बढ़ती है, माध्यम के कण नहीं, वे केवल अपनी जगह पर कंपन करते हैं.
Question 2. एक तनी हुई डोरी की लम्बाई दुगुनी तथा तनाव चार गुना कर दें तो नई आवृत्ति व पूर्व आवृत्ति में क्या सम्बन्ध होगा?
Answer: नई आवृत्ति और पुरानी आवृत्ति बराबर होंगी. इसका मतलब है कि आवृत्ति में कोई बदलाव नहीं आएगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि जब तनाव को चार गुना किया जाता है और लंबाई को दुगुनी किया जाता है, तो ये दोनों परिवर्तन एक-दूसरे के प्रभाव को संतुलित कर देते हैं जिससे आवृत्ति वही रहती है.
चूँकि \( n \propto \frac{1}{l} \) जब T व m स्थिर है।
\( n \propto \sqrt{T} \) जब l व m स्थिर है।
In simple words: If you double the length of a stretched string and make the tension four times stronger, the new vibration rate will be the same as the old one.
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, आवृत्ति के सूत्र को याद रखना और लंबाई व तनाव के साथ उसके संबंध को समझना महत्वपूर्ण है.
Question 4. माध्यम के किसी कण द्वारा एक सैकण्ड में किए गए कम्पनों की संख्या को क्या कहते हैं?
Answer: माध्यम के किसी कण द्वारा एक सैकण्ड में किए गए कम्पनों की संख्या को 'आवृत्ति' कहते हैं. आवृत्ति हमें बताती है कि कोई चीज़ एक सेकंड में कितनी बार हिलती-डुलती है या कंपन करती है. इसकी इकाई हर्ट्ज़ (Hz) होती है.
In simple words: The number of vibrations a particle makes in one second is called frequency.
🎯 Exam Tip: आवृत्ति की परिभाषा को याद रखें, क्योंकि यह तरंगों की मूल विशेषताओं में से एक है.
Question 5. एक कम्पन करने में लिया गया समय क्या कहलाता है?
Answer: एक कम्पन पूरा करने में लिया गया समय 'आवर्तकाल' कहलाता है. यह समय उस चीज़ की चाल के हिसाब से तय होता है. आवर्तकाल और आवृत्ति एक-दूसरे के उल्टे होते हैं.
In simple words: The time taken to complete one vibration is called the time period.
🎯 Exam Tip: आवर्तकाल को हमेशा सेकंड में मापा जाता है और यह आवृत्ति का व्युत्क्रम होता है, यानी \( T = 1/f \).
Question 6. तरंग वेग समीकरण लिखो।
Answer: तरंग वेग समीकरण है: \( v = \eta \lambda \). यहां, \( v \) तरंग का वेग है, \( \eta \) तरंग की आवृत्ति है, और \( \lambda \) तरंगदैर्ध्य है. यह समीकरण बताता है कि तरंग कितनी तेजी से आगे बढ़ती है. तरंगों के वेग को समझने के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण सूत्र है.
In simple words: The wave velocity equation is \( v = \eta \lambda \), where \( v \) is speed, \( \eta \) is frequency, and \( \lambda \) is wavelength.
🎯 Exam Tip: इस सूत्र को ध्यान से याद रखें, यह तरंगों से संबंधित गणनाओं में अक्सर उपयोग होता है.
Question 7. वायु में मानक ताप व दाब पर ध्वनि का वेग कितना होता है?
Answer: वायु में सामान्य तापमान और दबाव पर ध्वनि का वेग लगभग 332 मीटर प्रति सेकंड होता है. यह गति बताती है कि ध्वनि हवा में कितनी तेजी से चलती है. तापमान और दबाव बदलने पर ध्वनि का वेग भी बदल जाता है.
In simple words: The speed of sound in air at normal temperature and pressure is about 332 meters per second.
🎯 Exam Tip: ध्वनि का वेग तापमान बढ़ने पर बढ़ता है और ऊंचाई बढ़ने पर घटता है. मानक मान को याद रखना अच्छा है.
Question 8. किसी तरंग का आयाम यदि आधा कर दिया जाये तो उसकी तीव्रता में क्या परिवर्तन आएगा?
Answer: यदि किसी तरंग का आयाम आधा कर दिया जाए, तो उसकी तीव्रता एक-चौथाई रह जाएगी. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तरंग की तीव्रता उसके आयाम के वर्ग के सीधे आनुपातिक होती है. यानी, अगर आयाम आधा होता है, तो आयाम का वर्ग एक-चौथाई हो जाएगा.
हम जानते हैं \( I \propto a^2 \) होता है। इस आधार पर उसकी तीव्रता पूर्व की एक-चौथाई रह जायेगी।
In simple words: If a wave's amplitude is cut in half, its intensity will become one-fourth of what it was before.
🎯 Exam Tip: तीव्रता और आयाम के बीच के वर्ग संबंध को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है; यह कई भौतिकी समस्याओं में लागू होता है.
Question 9. किस माध्यम से परावर्तित होने पर परावर्तित तरंग की कला परिवर्तित हो जाती है?
Answer: जब कोई तरंग सघन माध्यम से परावर्तित होती है, तो परावर्तित तरंग की कला (कलांतर) बदल जाती है. इसका मतलब है कि तरंग की दिशा या स्थिति में 180 डिग्री का बदलाव आता है. यह ऐसा होता है जैसे तरंग टकराकर पलट जाती है.
In simple words: When a wave reflects off a denser medium, its phase changes.
🎯 Exam Tip: सघन माध्यम से परावर्तन पर कला में \( \pi \) (180 डिग्री) का परिवर्तन होता है, जबकि विरल माध्यम से परावर्तन पर कोई कला परिवर्तन नहीं होता.
Question 10. रेत्र एक साथ कम्पित कराने पर विस्पन्द की आवृत्ति क्या होगी?
Answer: इस प्रश्न का उत्तर स्पष्ट नहीं है क्योंकि "रेत्र" शब्द यहाँ समझ में नहीं आ रहा है और वाक्य अधूरा है. यदि प्रश्न "दो अलग-अलग आवृत्ति के स्वरित्रों को एक साथ कम्पित कराने पर" से संबंधित है, तो विस्पंद की आवृत्ति दोनों आवृत्तियों के अंतर के बराबर होगी. विस्पंद तब बनते हैं जब लगभग समान आवृत्ति की दो तरंगें मिलती हैं.
In simple words: The question is unclear. If it's about two different frequencies vibrating together, the beat frequency would be the difference between those two frequencies.
🎯 Exam Tip: विस्पंद (बीट्स) की आवृत्ति हमेशा दो मूल आवृत्तियों के अंतर के बराबर होती है, यदि वे एक साथ कंपन करें.
Question 11. समान लम्बाई के खुले व बन्द आर्गन पाइप की मूल आवृत्तियों का अनुपात क्या होगा?
Answer: समान लंबाई के खुले और बंद आर्गन पाइप की मूल आवृत्तियों का अनुपात 2:1 होगा. खुले पाइप में दोनों सिरे खुले होते हैं, जबकि बंद पाइप में एक सिरा बंद और एक सिरा खुला होता है. यही अंतर उनकी कंपन आवृत्तियों को प्रभावित करता है.
In simple words: For open and closed organ pipes of the same length, the ratio of their fundamental frequencies will be 2:1.
🎯 Exam Tip: खुले पाइप की मूल आवृत्ति बंद पाइप की मूल आवृत्ति की दुगुनी होती है, क्योंकि खुले पाइप में दोनों सिरे पर प्रस्पंद बनते हैं.
Question 12. खुले या बंद आर्गन पाइप में से किसमें केवल विषम संनादी ही उत्पन्न हो सकती है?
Answer: बंद आर्गन पाइप में केवल विषम संनादी (odd harmonics) ही उत्पन्न हो सकती हैं. विषम संनादी का मतलब है कि आवृत्तियाँ मूल आवृत्ति की विषम गुणा होती हैं, जैसे 3 गुना, 5 गुना, आदि. यह इसलिए होता है क्योंकि बंद सिरे पर हमेशा निस्पंद और खुले सिरे पर हमेशा प्रस्पंद बनता है.
In simple words: Only odd harmonics can be produced in a closed organ pipe.
🎯 Exam Tip: बंद आर्गन पाइप में, केवल 1, 3, 5... जैसी विषम गुणा आवृत्ति ही संभव होती है, जबकि खुले पाइप में सभी (सम और विषम) संनादी संभव होते हैं.
Question 13. माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन को क्या कहते हैं?
Answer: माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन को 'आयाम' कहते हैं. आयाम बताता है कि कोई कण या वस्तु अपनी सामान्य जगह से कितनी दूर तक हिलती है. यह तरंग की ऊर्जा से संबंधित होता है.
In simple words: The maximum displacement from the mean position is called amplitude.
🎯 Exam Tip: आयाम हमेशा माध्य स्थिति से अधिकतम दूरी होती है, और यह तरंग की तीव्रता को निर्धारित करने में मदद करता है.
Question 14. क्या अप्रगामी तरंगों के माध्यम से ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है?
Answer: नहीं, अप्रगामी तरंगों (stationary waves) के माध्यम से ऊर्जा का स्थानान्तरण नहीं होता है. अप्रगामी तरंगें तब बनती हैं जब दो समान तरंगें विपरीत दिशाओं में चलती हुई आपस में मिलती हैं. इस प्रकार की तरंग में ऊर्जा एक ही जगह पर सीमित रहती है. वे वास्तव में आगे नहीं बढ़ती हैं.
In simple words: No, energy is not transferred by stationary waves.
🎯 Exam Tip: प्रगामी तरंगें ऊर्जा का संचार करती हैं, लेकिन अप्रगामी तरंगें नहीं करतीं; वे ऊर्जा को एक स्थान पर फंसाए रखती हैं, जिससे माध्यम में नोड्स और एंटीनोड्स बनते हैं.
Question 15. अनुनादित वायु स्तम्भ में कौनसी तरंगें उत्पन्न होती हैं?
Answer: अनुनादित वायु स्तम्भ में अनुदैर्ध्य अप्रगामी तरंगें (longitudinal stationary waves) उत्पन्न होती हैं. ये तरंगें वायु के कणों के उसी दिशा में कंपन करने से बनती हैं जिस दिशा में तरंग आगे बढ़ रही है. बंद वायु स्तम्भ में यह ऊर्जा एक जगह से दूसरी जगह नहीं जाती, बल्कि एक ही स्थान पर कंपन करती रहती है.
In simple words: Longitudinal stationary waves are produced in a resonant air column.
🎯 Exam Tip: याद रखें कि ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं, और जब वे अनुनाद उत्पन्न करती हैं, तो वे वायु स्तंभ में अप्रगामी तरंगों के रूप में खड़ी हो जाती हैं.
Question 16. एक प्रस्पन्द व उसके क्रमिक निस्पन्द के मध्य कितनी दूरी होती है?
Answer: एक प्रस्पंद (antinode) और उसके ठीक बाद आने वाले निस्पंद (node) के बीच की दूरी तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) का एक-चौथाई होती है, यानी \( \frac{\lambda}{4} \). प्रस्पंद वह जगह है जहाँ कंपन सबसे ज़्यादा होता है, और निस्पंद वह जगह है जहाँ कंपन बिल्कुल नहीं होता. यह अप्रगामी तरंगों की एक खास बात है.
In simple words: The distance between an antinode and its next node is one-fourth of the wavelength.
🎯 Exam Tip: अप्रगामी तरंगों में, दो लगातार निस्पंदों या प्रस्पंदों के बीच की दूरी \( \frac{\lambda}{2} \) होती है, जबकि निस्पंद और प्रस्पंद के बीच की दूरी \( \frac{\lambda}{4} \) होती है.
Question 17. ध्वनि के वेग पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: ध्वनि के वेग पर ताप का प्रभाव यह होता है कि तापमान बढ़ने पर ध्वनि का वेग बढ़ता है. यह ऐसा होता है क्योंकि तापमान बढ़ने पर हवा के कण तेज़ी से कंपन करते हैं और ध्वनि को जल्दी आगे बढ़ाते हैं. तापमान घटने पर वेग भी घटता है.
In simple words: Higher temperature increases the speed of sound; lower temperature decreases it.
🎯 Exam Tip: ध्वनि का वेग माध्यम के तापमान पर निर्भर करता है: तापमान बढ़ने पर ध्वनि का वेग बढ़ता है, लगभग \( 0.61 \text{ m/s} \) प्रति डिग्री सेल्सियस.
Question 19. क्या पराश्रव्यी वेग से चलने वाले हवाई जहाज की सीटी की ध्वनि में डाप्लर प्रभाव प्रेक्षित होगा?
Answer: नहीं, पराश्रव्यी वेग (supersonic speed) से चलने वाले हवाई जहाज की सीटी की ध्वनि में डॉप्लर प्रभाव प्रेक्षित नहीं होगा. डॉप्लर प्रभाव तब काम करता है जब ध्वनि स्रोत की गति ध्वनि की गति से कम हो. जब जहाज ध्वनि की गति से तेज चलता है, तो शॉक वेव (shock wave) बनती है, जिससे सामान्य डॉप्लर प्रभाव नहीं देखा जा सकता.
In simple words: No, Doppler effect will not be observed for the whistle sound of a supersonic aircraft.
🎯 Exam Tip: डॉप्लर प्रभाव तभी लागू होता है जब स्रोत और श्रोता की गति ध्वनि की गति से कम हो. सुपरसोनिक गति में प्रघाती तरंगें (shock waves) बनती हैं.
RBSE Class 11 Physics Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. प्रत्यास्थ तरंगें किन्हें कहते हैं?
Answer: प्रत्यास्थ तरंगें वे तरंगें होती हैं जो किसी माध्यम में कणों के कंपन के कारण उत्पन्न होती हैं और आगे बढ़ती हैं. इन तरंगों को संचरण के लिए एक माध्यम की आवश्यकता होती है, जैसे कि ठोस, द्रव या गैस. माध्यम के कण अपनी प्रत्यास्थता के कारण वापस अपनी मूल स्थिति में आने की कोशिश करते हैं. उदाहरण के लिए, ध्वनि तरंगें, जल तरंगें, और किसी तनी हुई डोरी में उत्पन्न तरंगें सभी प्रत्यास्थ तरंगें हैं. इन तरंगों में ऊर्जा एक जगह से दूसरी जगह जाती है, लेकिन माध्यम के कण अपनी जगह पर ही कंपन करते हैं.
In simple words: Elastic waves are waves that need a medium (like solid, liquid, or gas) to travel, caused by vibrations of particles within that medium.
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थ तरंगों को यांत्रिक तरंगें भी कहते हैं, क्योंकि उन्हें संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है और वे माध्यम के कणों के प्रत्यास्थ गुणों पर निर्भर करती हैं.
Question 2. तरंग के दक्षतापूर्ण संचरण हेतु माध्यम में कौन-कौन से गुण होने चाहिये?
Answer: तरंगों के सही ढंग से आगे बढ़ने के लिए माध्यम में कुछ खास गुण होने चाहिए. ये गुण यह तय करते हैं कि तरंगें कितनी अच्छी तरह चल पाएंगी. यदि माध्यम में ये गुण नहीं होंगे, तो तरंगें या तो चल नहीं पाएंगी, या फिर उनकी ऊर्जा रास्ते में ही खत्म हो जाएगी.
तरंग के संचरण के लिए माध्यम के आवश्यक गुण इस प्रकार हैं:
• माध्यम में जड़त्व का गुण होना चाहिए, ताकि वह अवस्था परिवर्तन का विरोध कर सके और ऊर्जा को इकट्ठा कर सके. यह ऊर्जा के संरक्षण में मदद करता है.
• माध्यम में प्रत्यास्थता का गुण होना चाहिए, यानी बल लगाने पर वह विस्थापित हो और बल हटाने पर अपनी प्रारंभिक अवस्था में वापस आ जाए. यह सुनिश्चित करता है कि कण अपनी मूल स्थिति में वापस लौट सकें.
• सतत तरंग संचरण के लिए माध्यम का प्रतिरोध कम-से-कम होना चाहिए, ताकि ऊर्जा का क्षय कम हो और तरंग दूर तक जा सके. अगर प्रतिरोध ज़्यादा होगा, तो तरंग जल्दी खत्म हो जाएगी.
In simple words: For waves to travel well, the medium needs inertia (to store energy), elasticity (to return to its original shape), and low resistance (to avoid losing energy quickly).
🎯 Exam Tip: यांत्रिक तरंगों के संचरण के लिए माध्यम में जड़त्व और प्रत्यास्थता दोनों गुण अनिवार्य हैं. बिना इनके, तरंगें प्रभावी ढंग से संचरित नहीं हो सकतीं.
Question 3. तरंग संचरण नियतांक को परिभाषित कीजिये।
Answer: तरंग संचरण नियतांक (Wave Propagation Constant) एक इकाई दूरी पर कंपन करने वाले कणों के बीच के कलांतर को दर्शाता है. यदि तरंग में कंपन करने वाले किन्हीं दो बिंदुओं के बीच की दूरी \( \lambda \) (तरंगदैर्ध्य) हो, तो उनमें कलांतर \( 2\pi \) (रेडियन) होता है. यह नियतांक बताता है कि तरंग माध्यम में कैसे फैल रही है. यह तरंग की गति और उसके माध्यम की विशेषताओं के बारे में जानकारी देता है.
अर्थात् तरंग संचरण नियतांक \( K = \frac{2 \pi}{\lambda} \)
In simple words: Wave propagation constant is the phase difference between vibrating particles per unit distance, showing how a wave travels through a medium.
🎯 Exam Tip: तरंग संचरण नियतांक (K) तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होता है और यह तरंग के स्थानिक व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण है. इसकी इकाई रेडियन प्रति मीटर होती है.
Question 5. तरंगों के परावर्तन की विवेचना कीजिये
Answer: तरंगों का परावर्तन (Reflection of Waves) वह घटना है जब कोई तरंग किसी माध्यम में चलते हुए किसी सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट आती है. यदि तरंग एक समान माध्यम में चल रही हो तो वह बिना रुके आगे बढ़ती रहेगी. लेकिन जब तरंग किसी दूसरे माध्यम की सीमा से टकराती है, तो उसका कुछ हिस्सा उस सतह से टकराकर वापस लौट आता है. इस लौटे हुए हिस्से को परावर्तित तरंग कहते हैं, और जो हिस्सा दूसरे माध्यम में चला जाता है, उसे पारगमित तरंग कहते हैं. परावर्तन के दौरान तरंग की दिशा बदल जाती है, लेकिन उसकी आवृत्ति में कोई बदलाव नहीं आता है. यह घटना हम ध्वनि, प्रकाश और पानी की तरंगों में देख सकते हैं.
अनुप्रस्थ तरंगों का परावर्तन (Reflection of Transverse Wave)- अनुप्रस्थ तरंगों के परावर्तन को समझने के लिए एक तनी हुई डोरी का उदाहरण लिया जाता है. यदि डोरी का एक सिरा किसी मजबूत आधार से बंधा हो, और उस पर एक स्पंद (pulse) भेजा जाए, तो वह स्पंद आधार से टकराकर विपरीत दिशा में वापस लौट आता है. इस परावर्तन में, यदि आने वाला स्पंद श्रृंग (ऊपरी हिस्सा) है, तो परावर्तित स्पंद गर्त (निचला हिस्सा) के रूप में वापस आता है और यदि गर्त है तो श्रृंग के रूप में वापस आता है. हालांकि, तरंग की आकृति में कोई बदलाव नहीं होता है. सघन माध्यम से परावर्तन होने पर तरंग की कला में 180 डिग्री का परिवर्तन आता है.
अनुदैर्ध्य तरंगों का परावर्तन (Reflection of Longitudinal Waves)- अनुदैर्ध्य तरंगों के परावर्तन में भी कुछ नियम होते हैं:
• जब अनुदैर्ध्य तरंगें सघन माध्यम से परावर्तित होती हैं, तो संपीडन संपीडन के रूप में और विरलन विरलन के रूप में परावर्तित होते हैं, लेकिन उनकी कला विपरीत हो जाती है (180 डिग्री का बदलाव आता है).
• जब अनुदैर्ध्य तरंगें विरल माध्यम से परावर्तित होती हैं, तो उनकी कला नहीं बदलती है. संपीडन विरलन के रूप में और विरलन संपीडन के रूप में परावर्तित होता है, लेकिन कला में कोई परिवर्तन नहीं होता.
उपरोक्त अध्ययन से हम यह निष्कर्ष पर पहुँचते हैं:
• एक तरंग विक्षोभ (स्पंद) सघन माध्यम की अपेक्षा विरल माध्यम में अधिक वेग से गति करता है. इसका मतलब है कि तरंग सघन माध्यम में धीमे और विरल माध्यम में तेज चलती है.
• यदि तरंग विरल से सघन माध्यम की ओर गतिशील है, तो परावर्तित तरंग की कला विपरीत हो जाती है. यदि परावर्तन विरल माध्यम से होता है, तो कला परिवर्तित नहीं होती है.
• दूसरे माध्यम में अपवर्तित तरंग की कला सदैव अपरिवर्तित रहती है. यानी, जब तरंग एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाती है, तो उसकी कला में कोई बदलाव नहीं आता है.
In simple words: Wave reflection is when a wave bounces back from a surface into the same medium. When a wave hits a denser medium, its phase changes, but if it hits a rarer medium, the phase stays the same. The speed of a wave is higher in a rarer medium.
🎯 Exam Tip: परावर्तन के नियमों को याद रखें, विशेष रूप से कला परिवर्तन के संबंध में जब तरंगें सघन या विरल माध्यम से परावर्तित होती हैं. यह तरंगों के व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण है.
Question 6. प्रगामी एवं अप्रगामी तरंगों की परिभाषा बताइये एवं उनमें अन्तर लिखो।
Answer: तरंगें दो मुख्य प्रकार की होती हैं: प्रगामी और अप्रगामी. दोनों के काम करने का तरीका अलग-अलग होता है. प्रगामी तरंगें आगे बढ़ती हैं, जबकि अप्रगामी तरंगें एक ही जगह पर कंपन करती हैं.
1. प्रगामी तरंग (Progressive Wave)- प्रगामी तरंगें वे होती हैं जिनमें माध्यम के कण अपनी माध्य स्थिति के चारों ओर सरल आवर्त गति से कंपन करते हैं और ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती हैं. ये तरंगें लगातार आगे बढ़ती रहती हैं, जैसे पानी की लहरें या ध्वनि. माध्यम का हर कण धीरे-धीरे कंपन करना शुरू करता है.
2. अप्रगामी तरंगें (Stationary Waves)- अप्रगामी तरंगें तब बनती हैं जब एक ही आयाम और आवृत्ति की दो प्रगामी तरंगें एक ही रेखा पर विपरीत दिशाओं में समान चाल से चलती हुई एक-दूसरे पर अध्यारोपित होती हैं. इन तरंगों में ऊर्जा का संचरण नहीं होता और ये माध्यम में नोड्स (जहाँ कण स्थिर रहते हैं) और एंटीनोड्स (जहाँ कण अधिकतम कंपन करते हैं) बनाती हैं.
दोनों तरंगों के बीच का अंतर एक तालिका में दिखाया गया है:
| विशेषता | प्रगामी तरंगें | अप्रगामी तरंगें |
|---|---|---|
| 1. आयाम | सभी कण समान आयाम से कंपन करते हैं। | निस्पंदों पर आयाम शून्य होता है और प्रस्पंदों पर अधिकतम होता है। |
| 2. कला | विभिन्न कण विभिन्न कलाओं में कंपन करते हैं। | निस्पंद के दोनों ओर के कण विपरीत कला में कंपन करते हैं, जबकि प्रस्पंद के दोनों ओर के कण समान कला में होते हैं। |
| 3. ऊर्जा संचरण | तरंगों द्वारा माध्यम में ऊर्जा का संचरण होता है। | तरंगों द्वारा माध्यम में ऊर्जा का संचरण नहीं होता है। |
| 4. माध्य स्थिति | माध्यम के समस्त कण एक साथ माध्य स्थिति में नहीं आते हैं। | माध्यम के समस्त कण माध्य स्थिति पर एक साथ पहुँचते हैं। |
| 5. दाब व घनत्व | माध्यम के सभी बिंदुओं पर समान दाब और घनत्व परिवर्तन होते हैं। | निस्पंदों पर दाब या घनत्व परिवर्तन सबसे अधिक होता है, जबकि प्रस्पंदों पर शून्य होता है। |
| 6. कंपन | माध्यम के सभी कण समान आयाम व समान आवर्तकाल से कंपन करते हैं। | निस्पंद के कण कंपन नहीं करते हैं. शेष कण अलग-अलग आयाम के, परन्तु समान आवर्तकाल के कंपन करते हैं. निस्पंदों पर आयाम न्यूनतम शून्य होता है, जबकि प्रस्पंदों पर आयाम अधिकतम होता है। |
| 7. संपीडन व विरलन | संपीडन व विरलन अथवा श्रृंग व गर्त एक निश्चित रूप से आगे बढ़ते हैं। | संपीडन व विरलन अथवा श्रृंग व गर्त एकांतर क्रम में उत्पन्न व विलीन होते हैं। |
| 8. कण का वेग व विकृति | इन तरंगों में जब कण का वेग अधिकतम होता है तो विकृति भी अधिकतम होती है तथा जब वेग शून्य होता है तो विकृति भी शून्य होती है। | इन तरंगों में निस्पंदों पर वेग शून्य होता है, परन्तु वहाँ विकृति अधिकतम, जबकि प्रस्पंदों पर वेग अधिकतम व विकृति शून्य होती है। |
| 9. उत्पन्न होने का स्रोत | ये तरंगें किसी ध्वनि उत्पादक स्त्रोत द्वारा उत्पन्न की जा सकती हैं। | ये तरंगें, विपरीत दिशा में संचारित समान आयाम तथा समान आवृत्ति की प्रगामी तरंगों के अध्यारोपण से उत्पन्न होती हैं। |
🎯 Exam Tip: प्रगामी और अप्रगामी तरंगों के बीच के मुख्य अंतरों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे ऊर्जा संचरण, कणों का आयाम और कला संबंध, तथा नोड्स और एंटीनोड्स का बनना.
Question 7. तरंगों का अध्यारोपण से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिये।
Answer: तरंगों का अध्यारोपण (Superposition of Waves) एक ऐसी घटना है जब दो या दो से अधिक तरंगें एक ही समय पर एक ही बिंदु पर मिलती हैं, तो उस बिंदु पर माध्यम के कण का परिणामी विस्थापन सभी अलग-अलग तरंगों के विस्थापनों के सदिश योग (vector sum) के बराबर होता है. सरल शब्दों में, जब तरंगें एक-दूसरे से होकर गुजरती हैं, तो वे एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं, लेकिन गुजरने के बाद अपनी मूल पहचान और गति को बनाए रखती हैं. इस सिद्धांत के अनुसार, परिणामी तरंग की आवृत्ति और आयाम कई बातों पर निर्भर करते हैं, जैसे तरंगों की आवृत्ति, उनके आयाम, उनके बीच का कलांतर (phase difference), और उनके संचरण की दिशा. यह सिद्धांत समझने में मदद करता है कि तरंगें एक-दूसरे के साथ कैसे काम करती हैं.
\( Y = Y_1 + Y_2 \)
दो ध्वनि तरंगों के अध्यारोपण से विभिन्न परिस्थितियों में निम्न प्रभाव उत्पन्न हो सकते हैं:
(1) व्यतिकरण (Interference)- जब दो समान तरंगें जिनकी आवृत्ति बराबर है और एक ही दिशा में एक सरल रेखा पर संचरित होती हुई अध्यारोपित होती हैं तो 'व्यतिकरण' का प्रभाव उत्पन्न करती हैं. यह तब होता है जब तरंगें एक-दूसरे से मिलकर एक नई तरंग बनाती हैं जिसमें कुछ स्थानों पर तीव्रता बढ़ जाती है और कुछ स्थानों पर घट जाती है.
(2) विस्पन्द (Beats)- दो असमान (लगभग बराबर) आवृत्ति की तरंगें जो एक ही दिशा में चल रही हैं, विस्पन्द (Beats) उत्पन्न करती हैं. विस्पंद एक विशेष प्रकार का व्यतिकरण है जो तब होता है जब दो आवृत्तियों के बीच थोड़ा अंतर होता है, जिससे ध्वनि की तीव्रता में उतार-चढ़ाव महसूस होता है.
(3) अप्रगामी तरंगें (Stationary Waves)- दो समान तरंगें जिनकी आवृत्ति बराबर है, परन्तु माध्यम में एक सीध में विपरीत दिशा में चलती हैं, अध्यारोपण से अप्रगामी तरंगें (Stationary waves) उत्पन्न करती हैं. ये तरंगें एक ही जगह पर कंपन करती रहती हैं और ऊर्जा को आगे नहीं बढ़ातीं.
(4) लिसाजू की आकृतियाँ (Lissajou's Figures)- जब किसी कण पर एक ही समय दो परस्पर लंबवत सरल आवर्त गतियाँ अध्यारोपित होती हैं तो कण का परिणामी विस्थापन सदिश एक वक्रीय पथ पर चलता है, जिसकी आकृति गतियों के पृथक्-पृथक् आयाम, आवर्तकाल तथा उनमें कलांतर पर निर्भर करती है. इन आकृतियों को लिसाजू की आकृतियाँ (Lissajou's figures) कहते हैं.
In simple words: Superposition is when two or more waves meet at a point, and the total displacement at that point is the sum of the individual displacements. This can lead to interference, beats, stationary waves, or Lissajous figures.
🎯 Exam Tip: अध्यारोपण सिद्धांत को व्यतिकरण, विस्पंद और अप्रगामी तरंगों की व्याख्या के लिए आधार के रूप में समझें. याद रखें कि यह एक सदिश योग है.
Question 8. गैस में तरंग वेग व्यंजक हेतु लाप्लास संशोधन की विवेचना कीजिये।
Answer: लाप्लास संशोधन गैसों में ध्वनि के वेग को सही करने के लिए किया गया था. न्यूटन ने पहले सोचा था कि ध्वनि का संचरण समतापीय (isothermal) प्रक्रिया है, जिसका मतलब था कि जब ध्वनि हवा में चलती है तो तापमान स्थिर रहता है. लेकिन लाप्लास ने बताया कि ध्वनि का संचरण इतनी तेज़ी से होता है कि हवा के कणों के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं हो पाता. इसलिए, यह प्रक्रिया समतापीय नहीं, बल्कि रुद्धोष्म (adiabatic) होती है. रुद्धोष्म प्रक्रिया में तापमान बदलता है, लेकिन ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता.
लाप्लास के अनुसार, जब वायु में ध्वनि तरंगें चलती हैं तो वायु का संपीडन एवं विरलन होता है. संपीडन के स्थानों पर वायु के कण पास-पास होने के कारण गर्म हो जाते हैं और विरलन की स्थिति में कणों के दूर होने के कारण उनका ताप कम हो जाता है. संपीडन एवं विरलन एक के बाद दूसरा इतनी तेजी से होता है कि ऊष्मा को माध्यम से बाहर जाकर ताप नियत रखना संभव नहीं होता. अतः इस प्रक्रम के दौरान ताप नियत नहीं रहता है. यह क्रिया समतापीय के स्थान पर रुद्धोष्म होती है.
अतः रुद्धोष्म परिवर्तन हेतु गैस समीकरण से, लाप्लास ने ध्वनि के वेग के लिए एक नया सूत्र दिया जिसमें रुद्धोष्म गुणांक (\( \gamma \)) शामिल है. यह संशोधन न्यूटन के सूत्र को सही करता है और प्रायोगिक परिणामों के करीब आता है. यह हमें बताता है कि ध्वनि का वेग माध्यम के गुणों पर निर्भर करता है.
\( PV^\gamma = \text{स्थिरांक} \)
\( P(1+ \frac{\Delta P}{P}) V^\gamma (1 + \frac{\Delta V}{V})^\gamma \)
\( PV^\gamma = PV^\gamma (1 + \frac{\Delta P}{P})(1 + \gamma \frac{\Delta V}{V}) \)
\( 1 = (1 + \frac{\Delta P}{P})(1 + \gamma \frac{\Delta V}{V}) \)
\( 1 = 1 + \gamma \frac{\Delta V}{V} + \frac{\Delta P}{P} + \gamma \frac{\Delta P}{P} \frac{\Delta V}{V} \)
\( \gamma \frac{\Delta V}{V} + \frac{\Delta P}{P} = 0 \) (यहाँ पर \( \frac{\Delta P}{P} \frac{\Delta V}{V} \) को नगण्य माना गया है)
\( \frac{\Delta P}{P} = -\gamma \frac{\Delta V}{V} \)
या \( \gamma P = -\frac{\Delta P}{\frac{\Delta V}{V}} \)
हम जानते हैं कि आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \( E = -\frac{\Delta P}{\frac{\Delta V}{V}} \).
इसलिए, \( E = \gamma P \).
और \( \rho \) पदार्थ का घनत्व है।
तरंग का वेग \( v = \sqrt{\frac{E}{\rho}} \)
अतः \( v = \sqrt{\frac{\gamma P}{\rho}} \)
वायु में ध्वनि का वेग के लिए, एकपरमाणुक गैसों के लिए \( \gamma \) का मान 1.67 और द्विपरमाणुक गैसों के लिए 1.41 होता है.
वायु (मुख्यतः द्विपरमाणुक गैसों का मिश्रण) के लिए \( \gamma \approx 1.41 \).
मानक ताप और दाब पर \( P = 1.01 \times 10^5 \text{ N/m}^2 \) और \( \rho = 1.29 \text{ kg/m}^3 \).
तो, \( v_{वायु} = \sqrt{\frac{1.41 \times 1.01 \times 10^5}{1.29}} \approx 332 \text{ m/s} \).
यह मान प्रायोगिक मान (जो लगभग 331 से 343 m/s है) के बहुत करीब है. यह हमें बताता है कि ठोस माध्यम में ध्वनि का वेग सबसे ज़्यादा होता है और गैस माध्यम में सबसे कम.
In simple words: Laplace corrected Newton's formula for the speed of sound in gases, stating that sound propagation is an adiabatic process, not isothermal. His revised formula, \( v = \sqrt{\frac{\gamma P}{\rho}} \), more accurately predicts the speed by including the adiabatic index \( \gamma \), showing that sound travels fastest in solids and slowest in gases.
🎯 Exam Tip: लाप्लास संशोधन की मुख्य बात यह है कि ध्वनि संचरण एक रुद्धोष्म प्रक्रिया है, न कि समतापीय. \( \gamma \) कारक को ध्वनि के वेग के सूत्र में शामिल करना इसके महत्व को दर्शाता है.
Question 9. तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ कम्पन के नियम लिखिए।
Answer: तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ कंपन के नियम बताते हैं कि डोरी की कंपन आवृत्ति किन बातों पर निर्भर करती है. ये नियम संगीत वाद्ययंत्रों जैसे गिटार और सितार के काम करने को समझने में मदद करते हैं.
तनी हुई डोरी के अनुप्रस्थ कम्पनों की मूल आवृत्ति का सूत्र है:
\( n = \frac{1}{2l} \sqrt{\frac{T}{m}} \)
जहाँ,
\( l \) = डोरी की कम्पित लम्बाई
\( T \) = डोरी पर आरोपित तनाव
\( m \) = डोरी की एकांक लम्बाई का द्रव्यमान
इस सूत्र के आधार पर डोरी के अनुप्रस्थ कम्पनों के निम्नलिखित नियम प्राप्त होते हैं:
(1) लम्बाई का नियम (Law of Length)- यदि डोरी का तनाव बल \( T \) और एकांक लम्बाई का द्रव्यमान \( m \) स्थिर रहे, तो कम्पित डोरी की आवृत्ति उसकी लंबाई के व्युत्क्रमानुपाती होती है.
अर्थात् \( n \propto \frac{1}{l} \)
या \( n_1 l_1 = n_2 l_2 = \text{नियतांक} \)
(2) तनाव का नियम (Law of Tension)- यदि डोरी की लंबाई \( l \) और एकांक लम्बाई का द्रव्यमान \( m \) स्थिर रहें, तो डोरी की आवृत्ति उसके तनाव के वर्गमूल के सीधे आनुपापाती होती है.
अर्थात् \( n \propto \sqrt{T} \)
या \( \frac{n_1}{n_2} = \sqrt{\frac{T_1}{T_2}} \)
(3) द्रव्यमान का नियम (Law of Mass)- यदि डोरी की लंबाई \( l \) और उसमें तनाव \( T \) नियत रहें, तो डोरी की आवृत्ति उसकी एकांक लम्बाई के द्रव्यमान के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है.
अर्थात् \( n \propto \frac{1}{\sqrt{m}} \)
या \( n \sqrt{m} = \text{नियतांक} \)
या \( \frac{n_1}{n_2} = \sqrt{\frac{m_2}{m_1}} \)
चूँकि डोरी की प्रति एकांक लम्बाई का द्रव्यमान \( m = \pi r^2 d \) होता है, जहाँ \( r \) डोरी की त्रिज्या है और \( d \) डोरी के पदार्थ का घनत्व है. अतः उपरोक्त नियम को \( n \propto \frac{1}{r \sqrt{d}} \) के रूप में भी लिखा जा सकता है, जिसका अर्थ है कि आवृत्ति त्रिज्या और घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है.
In simple words: The laws of transverse vibrations in a stretched string state that the frequency depends inversely on length, directly on the square root of tension, and inversely on the square root of mass per unit length.
🎯 Exam Tip: इन तीनों नियमों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये संगीत वाद्ययंत्रों की कार्यप्रणाली और तरंगों के व्यवहार को समझने के लिए आधारभूत हैं.
Question 10. सोनोमीटर में अप्रगामी तरंगों का निर्माण किस प्रकार होता है? स्पष्ट कीजिये।
Answer: सोनोमीटर एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग डोरी के अनुप्रस्थ कंपनों का अध्ययन करने के लिए किया जाता है. यह एक आयताकार खोखला लकड़ी का बक्सा होता है जिसमें छेद होते हैं, ताकि बॉक्स में उत्पन्न कंपन बाहर सुनाई दे सकें. इसे अनुनाद बॉक्स भी कहते हैं. सोनोमीटर में एक तार को दो खूंटियों के बीच कसकर बांधा जाता है और इस तार पर तनाव एक हैंगर से लटकाए गए वज़न द्वारा नियंत्रित किया जाता है. दो छोटे सेतु (bridges) तार के नीचे रखे जाते हैं, जिनकी स्थिति को बदला जा सकता है.
जब तार में कंपन उत्पन्न किए जाते हैं (जैसे उसे प्लक करके या किसी कंपन करने वाले स्रोत से जोड़कर), तो तार में अनुप्रस्थ तरंगें उत्पन्न होती हैं. ये तरंगें तार के दोनों सिरों पर (जहां यह खूंटियों या सेतुओं से बंधा है) परावर्तित होती हैं. जब आने वाली तरंगें और परावर्तित तरंगें एक-दूसरे पर अध्यारोपित होती हैं, तो अप्रगामी तरंगें बनती हैं. ये अप्रगामी तरंगें तार पर नोड्स (जहाँ कंपन नहीं होता) और एंटीनोड्स (जहाँ कंपन सबसे ज़्यादा होता) बनाती हैं. इन सेतुओं की स्थिति बदलकर तार की प्रभावी लंबाई को समायोजित किया जाता है, जिससे तार में अनुनाद उत्पन्न होता है. अनुनाद की स्थिति में, तार की आवृत्ति बाहरी स्रोत की आवृत्ति के बराबर हो जाती है और कंपन बहुत ज़्यादा हो जाते हैं. सोनोमीटर हमें अनुप्रस्थ तरंगों की प्रकृति और उनकी आवृत्तियों को समझने में मदद करता है.
In simple words: In a sonometer, stationary waves are formed when a vibrating string's waves reflect from its fixed ends and superimpose. The bridges are used to change the effective length of the string, which then creates resonance when its natural frequency matches an external source.
🎯 Exam Tip: सोनोमीटर में अप्रगामी तरंगों के निर्माण के लिए तार का तनाव, उसकी लंबाई और द्रव्यमान बहुत महत्वपूर्ण हैं. अनुनाद की स्थिति में, तार की लंबाई तरंगदैर्ध्य के पूर्णांक गुणा के बराबर होती है.
Question 11. अवमंदित कम्पन एवं पोषित कम्पन की विवेचना कीजिये।
Answer: कंपन दो मुख्य प्रकार के होते हैं: अवमंदित और पोषित. दोनों में ऊर्जा के साथ अलग-अलग व्यवहार होता है.
1. अवमंदित कम्पन (Damped Oscillations): जब कोई वस्तु मुक्त रूप से कंपन करती है, तो वह जिस माध्यम में कंपन कर रही है, उसके कारण कुछ घर्षण बल का अनुभव करती है. इस घर्षण बल के कारण, वस्तु की यांत्रिक ऊर्जा धीरे-धीरे ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है. फलस्वरूप, कंपन का आयाम (amplitude) समय के साथ कम होता जाता है और अंततः कंपन रुक जाते हैं. इस प्रकार के कंपनों को 'अवमंदित कंपन' कहते हैं. उदाहरण के लिए, एक झूला जिसे एक बार धक्का देकर छोड़ दिया जाए, वह धीरे-धीरे रुक जाएगा.
2. पोषित कम्पन (Maintained Oscillations) या प्रणोदित कम्पन (Forced Oscillations): यदि किसी कंपन करने वाली वस्तु की ऊर्जा में जितनी हानि होती है, उतनी ही ऊर्जा उसे बाहर से लगातार दी जाती रहे, तो वह वस्तु नियत आयाम से कंपन करती रहती है. इस प्रकार के कंपनों को 'पोषित कंपन' कहते हैं. दूसरे शब्दों में, जब एक बाहरी बल किसी वस्तु को उसकी प्राकृतिक आवृत्ति पर कंपन करने के लिए मजबूर करता है, तो यह पोषित कंपन होता है. उदाहरण के लिए, एक रेडियो ट्यून करना जहाँ एक निश्चित आवृत्ति पर कंपन बनाए रखा जाता है. एक विशेष प्रकार का पोषित कंपन 'अनुनाद' है, जहाँ लागू बल की आवृत्ति वस्तु की प्राकृतिक आवृत्ति के बराबर होती है, जिससे आयाम बहुत बढ़ जाता है.
In simple words: Damped oscillations lose energy and their amplitude decreases over time due to friction, eventually stopping. Maintained oscillations receive continuous energy from an external source to keep vibrating at a constant amplitude.
🎯 Exam Tip: अवमंदित कंपन में ऊर्जा का क्षय होता है, जबकि पोषित कंपन में ऊर्जा की आपूर्ति करके आयाम को स्थिर रखा जाता है. अनुनाद पोषित कंपन का एक विशेष मामला है जहाँ ऊर्जा स्थानांतरण अधिकतम होता है.
Question 12. यदि किसी तरंग की तरंगदैर्ध्य 2500 हो तो तरंग संख्या क्या होगी?
Answer: यदि किसी तरंग की तरंगदैर्ध्य (wavelength) 2500 है (यह 2500 Å यानी 2500 एंगस्ट्रॉम है, जो \( 2500 \times 10^{-10} \) मीटर के बराबर है), तो तरंग संख्या (wave number) तरंगदैर्ध्य का व्युत्क्रम होती है. यह एकांक दूरी में तरंगों की संख्या को व्यक्त करती है. तरंग संख्या \( k = \frac{2\pi}{\lambda} \) या \( \frac{1}{\lambda} \) के रूप में व्यक्त की जा सकती है. इस मामले में, हम \( \frac{1}{\lambda} \) का उपयोग करेंगे.
तरंगदैर्ध्य \( \lambda = 2500 \times 10^{-10} \) मीटर
तरंग संख्या \( = \frac{1}{\lambda} \)
\( = \frac{1}{2500 \times 10^{-10}} \)
\( = \frac{10^{10}}{2500} \)
\( = \frac{100 \times 10^8}{2500} \)
\( = \frac{1 \times 10^8}{25} \)
\( = 4 \times 10^6 \text{ प्रति मीटर} \)
In simple words: If the wavelength is 2500 (meaning 2500 Å or \( 2500 \times 10^{-10} \) meters), the wave number is \( 4 \times 10^6 \) per meter, which is the inverse of the wavelength.
🎯 Exam Tip: तरंग संख्या को हमेशा तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रम के रूप में परिभाषित किया जाता है. तरंगदैर्ध्य को मीटर में बदलना सुनिश्चित करें, ताकि तरंग संख्या प्रति मीटर में हो.
Question 13. प्रस्पन्द एवं निस्पन्दों की विवेचना कीजिये।
Answer: अप्रगामी तरंगों में, माध्यम में कुछ खास बिंदु होते हैं जहाँ कणों का कंपन अलग-अलग होता है. इन्हीं बिंदुओं को प्रस्पंद और निस्पंद कहते हैं. यह उन जगहों को समझने में मदद करता है जहाँ तरंग की ऊर्जा सबसे ज़्यादा या सबसे कम होती है.
निस्पन्द (Nodes) एवं प्रस्पन्द (Anti-nodes): अप्रगामी तरंग की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें माध्यम के कुछ बिन्दुओं पर स्थित कण स्थायी रूप से विरामावस्था में रहते हैं, अर्थात् उनका विस्थापन सदैव शून्य रहता है. इन बिन्दुओं को निस्पन्द (nodes) कहते हैं. निस्पंद वे बिंदु हैं जहाँ माध्यम के कण बिल्कुल नहीं हिलते-डुलते, यानी उनका विस्थापन शून्य होता है.
इसके विपरीत माध्यम के कुछ अन्य बिन्दुओं पर स्थित कणों का विस्थापन सदैव अन्य बिन्दुओं पर स्थित कणों के विस्थापन की अपेक्षा अधिकतम रहता है. माध्यम के इन बिन्दुओं को प्रस्पन्द (Anti-nodes) कहते हैं. प्रस्पंद वे बिंदु हैं जहाँ माध्यम के कणों का कंपन सबसे ज़्यादा होता है, यानी उनका विस्थापन अधिकतम होता है.
माध्यम में निस्पन्द एवं प्रस्पन्द एकान्तर क्रम से बनते हैं. यानी एक निस्पंद के बाद एक प्रस्पंद आता है, और फिर एक निस्पंद. यह एक पैटर्न बनाता है.
• दो निकटतम निस्पन्दों अथवा दो निकटतम प्रस्पन्दों के बीच की दूरी तरंग की तरंगदैर्ध्य की आधी अर्थात् \( \frac{\lambda}{2} \) होती है.
• जबकि निकटतम एक निस्पन्द व एक प्रस्पन्द के बीच की दूरी तरंगदैर्ध्य की चौथाई अर्थात् \( \frac{\lambda}{4} \) होती है.
ये संबंध अप्रगामी तरंगों के स्थानिक पैटर्न को निर्धारित करते हैं. प्रस्पंदों पर, सभी कण अपनी माध्य स्थिति के दोनों ओर अधिकतम आयाम से कंपन करते रहते हैं. इन बिंदुओं पर कणों का वेग भी अधिकतम होता है. इसके विपरीत, निस्पंदों पर, सभी कणों का विस्थापन शून्य होता है, और उनका वेग भी शून्य होता है. हालांकि, निस्पंद पर विकृति (strain) अधिकतम होती है, जबकि प्रस्पंद पर विकृति शून्य होती है.
In simple words: Nodes are points in a stationary wave where particles have zero displacement, meaning no vibration. Antinodes are points where particles have maximum displacement and maximum vibration. Nodes and antinodes alternate, with the distance between consecutive nodes or antinodes being \( \lambda/2 \), and between a node and an antinode being \( \lambda/4 \).
🎯 Exam Tip: निस्पंद और प्रस्पंद की परिभाषा, उनके बीच की दूरी (\( \lambda/2 \) और \( \lambda/4 \)), और उनके सापेक्ष कणों के विस्थापन और वेग को याद रखना आवश्यक है.
Question 14. तरंग की तीव्रता का मान किन-किन पर निर्भर करता है?
Answer: तरंग की तीव्रता (Intensity of a wave) यह बताती है कि तरंग कितनी शक्तिशाली है या वह प्रति सेकंड प्रति इकाई क्षेत्रफल में कितनी ऊर्जा ले जा रही है. यह कई बातों पर निर्भर करती है. यदि \( \rho \) घनत्व के माध्यम में एक सरल आवर्त प्रगामी तरंग \( v \) चाल से चल रही है, तो तरंग की तीव्रता \( I = 2\pi^2 n^2 a^2 \rho v \).
यहाँ \( n \) तरंग की आवृत्ति है, और \( a \) माध्यम के कणों के कंपन का आयाम है. माध्यम के घनत्व \( \rho \) का मान नियत होता है, और तरंग गति के लिए \( v \) नियत होने से, तीव्रता इन कारकों पर निर्भर करती है:
(i) तरंग की तीव्रता तरंग के आयाम के वर्ग \( (a^2) \) के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात् \( I \propto a^2 \). इसका मतलब है कि अगर आयाम दुगुना हो जाए, तो तीव्रता चार गुनी हो जाएगी.
(ii) तरंग की तीव्रता तरंग की आवृत्ति के वर्ग \( (n^2) \) के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात् \( I \propto n^2 \). अगर आवृत्ति दुगुनी हो, तो तीव्रता चार गुनी हो जाएगी.
(iii) तरंग की तीव्रता माध्यम के घनत्व \( (\rho) \) के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात् \( I \propto \rho \). सघन माध्यम में तीव्रता अधिक होती है.
(iv) तरंग की तीव्रता माध्यम में तरंग की चाल \( (v) \) के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात् \( I \propto v \). तेज चलने वाली तरंगों की तीव्रता ज़्यादा होती है.
In simple words: A wave's intensity depends on the square of its amplitude, the square of its frequency, the density of the medium, and the wave's speed.
🎯 Exam Tip: तीव्रता के सूत्र को याद रखें और इसके सीधे आनुपातिक संबंधों पर ध्यान दें. आयाम और आवृत्ति के वर्ग के साथ इसका संबंध सबसे महत्वपूर्ण है.
Question 15. विस्पन्द विधि द्वारा किसी स्वरित्र की आवृत्ति किस प्रकार ज्ञात करते हैं?
Answer: विस्पंद विधि का उपयोग करके किसी अज्ञात स्वरित्र (tuning fork) की आवृत्ति का पता लगाया जा सकता है. यह विधि ध्वनि की तीव्रता में होने वाले उतार-चढ़ाव (विस्पंद) पर आधारित है, जो तब होते हैं जब लगभग समान आवृत्ति की दो ध्वनि तरंगें एक साथ सुनाई देती हैं.
प्रक्रिया इस प्रकार है:
1. पहले हमें एक स्वरित्र की आवृत्ति \( n_1 \) ज्ञात होनी चाहिए, जो कि ज्ञात आवृत्ति होती है. हमें एक दूसरा स्वरित्र लेना है जिसकी आवृत्ति \( n_2 \) ज्ञात करनी है. \( n_2 \) की आवृत्ति \( n_1 \) के लगभग बराबर होनी चाहिए.
2. दोनों स्वरित्रों को एक साथ बजाते हैं. जब वे कंपन करते हैं, तो विस्पंद सुनाई पड़ते हैं. हम एक सेकंड में सुनाई देने वाले विस्पंदों की संख्या (मान लीजिए \( \Delta n \)) को गिनते हैं. यह \( \Delta n \) दोनों आवृत्तियों के अंतर के बराबर होता है, यानी \( \Delta n = |n_1 - n_2| \).
3. तो, अज्ञात आवृत्ति \( n_2 \) या तो \( n_1 + \Delta n \) होगी या \( n_1 - \Delta n \).
4. यह पता लगाने के लिए कि \( n_2 \) इन दोनों में से कौन सी है, हम ज्ञात स्वरित्र (या अज्ञात स्वरित्र) की एक भुजा पर थोड़ा सा मोम लगाते हैं. मोम लगाने से उसकी आवृत्ति थोड़ी कम हो जाती है.
5. अब फिर से दोनों स्वरित्रों को एक साथ बजाते हैं और विस्पंदों की संख्या गिनते हैं.
- यदि विस्पंदों की संख्या पहले से घट जाती है, तो इसका मतलब है कि अज्ञात स्वरित्र की आवृत्ति (मोम लगाने से) ज्ञात स्वरित्र की आवृत्ति के और करीब आ गई है. यह तभी संभव है जब अज्ञात स्वरित्र की आवृत्ति \( n_1 + \Delta n \) रही हो.
- यदि विस्पंदों की संख्या पहले से बढ़ जाती है, तो इसका मतलब है कि अज्ञात स्वरित्र की आवृत्ति \( n_1 - \Delta n \) रही हो.
इस तरह, हम मोम लगाने के बाद विस्पंदों में होने वाले परिवर्तन को देखकर अज्ञात स्वरित्र की सही आवृत्ति ज्ञात कर सकते हैं. यह विधि बहुत सटीक होती है.
In simple words: To find an unknown tuning fork's frequency using the beat method, you play it with a known fork and count the beats. Then, you add a small weight (like wax) to one fork, re-count the beats, and see if the beat frequency increased or decreased to determine the exact unknown frequency.
🎯 Exam Tip: विस्पंद विधि में कुंजी यह समझना है कि मोम लगाने से आवृत्ति कम हो जाती है, और विस्पंद दर में परिवर्तन आपको यह निर्धारित करने में मदद करता है कि अज्ञात आवृत्ति ज्ञात आवृत्ति से अधिक थी या कम.
Question 16. डाप्लर प्रभाव की सीमाएँ क्या हैं? लिखिए।
Answer: डॉप्लर प्रभाव ध्वनि या प्रकाश तरंगों की आभासी आवृत्ति में परिवर्तन को बताता है जब स्रोत और श्रोता के बीच सापेक्ष गति होती है. हालांकि, इस प्रभाव की कुछ सीमाएँ हैं:
1. माध्यम का वेग: डॉप्लर प्रभाव को ठीक से देखने के लिए, ध्वनि स्रोत, श्रोता और माध्यम, सभी का वेग ध्वनि के वेग से बहुत कम होना चाहिए. यदि स्रोत या श्रोता ध्वनि के वेग के करीब या उससे अधिक गति करते हैं, तो डॉप्लर प्रभाव के सामान्य समीकरण लागू नहीं होते हैं. उदाहरण के लिए, जेट विमानों में.
2. तरंगग्र का विकृत होना: यदि स्रोत का वेग ध्वनि के वेग से अधिक हो जाता है (जैसे कि सुपरसोनिक गति), तो तरंगाग्र (wavefronts) विकृत हो जाते हैं और प्रघाती तरंगें (shock waves) उत्पन्न हो जाती हैं. इस स्थिति में डॉप्लर प्रभाव प्रेक्षित नहीं होता, बल्कि एक तीव्र ध्वनि (सोनिक बूम) सुनाई देती है.
3. माध्यम की एकरूपता: यह माना जाता है कि माध्यम एक समान और स्थिर है. यदि माध्यम का घनत्व, तापमान या गति बदलती है, तो डॉप्लर प्रभाव के समीकरणों में बदलाव आ सकता है.
इन सीमाओं के बावजूद, डॉप्लर प्रभाव का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे कि चिकित्सा (अल्ट्रासाउंड), खगोल विज्ञान और मौसम विज्ञान.
In simple words: Doppler effect has limitations: it works only if the speed of the source, listener, and medium is much less than the speed of sound. If speeds are too high, wavefronts distort, creating shock waves instead of the normal Doppler effect.
🎯 Exam Tip: डॉप्लर प्रभाव की मुख्य सीमा यह है कि स्रोत और श्रोता का वेग हमेशा ध्वनि के वेग से कम होना चाहिए. यदि ऐसा नहीं होता है, तो प्रघाती तरंगें उत्पन्न होती हैं, और डॉप्लर प्रभाव लागू नहीं होता.
Question 18. स्रोत किस वेग से श्रोता की ओर चले कि आभासी आवृत्ति दुगुनी हो जाये?
Answer: हमें यह पता लगाना है कि स्रोत (source) को किस वेग से श्रोता (listener) की ओर चलना चाहिए ताकि श्रोता को सुनाई देने वाली आभासी आवृत्ति (apparent frequency) मूल आवृत्ति से दुगुनी हो जाए. हम जानते हैं कि जब स्रोत श्रोता की ओर चलता है, तो डॉप्लर प्रभाव के कारण आभासी आवृत्ति बढ़ जाती है.
हम डॉप्लर प्रभाव के सूत्र का उपयोग करेंगे:
\( n' = n \left( \frac{v}{v-v_s} \right) \)
यहां,
\( n' \) = आभासी आवृत्ति
\( n \) = स्रोत की वास्तविक आवृत्ति
\( v \) = ध्वनि का वेग
\( v_s \) = स्रोत का वेग
प्रश्न के अनुसार, आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से दुगुनी होनी चाहिए, इसलिए \( n' = 2n \).
अब इस मान को सूत्र में रखने पर:
\( 2n = n \left( \frac{v}{v-v_s} \right) \)
दोनों तरफ से \( n \) को हटाने पर:
\( 2 = \frac{v}{v-v_s} \)
अब इसे \( v_s \) के लिए हल करते हैं:
\( 2(v - v_s) = v \)
\( 2v - 2v_s = v \)
\( 2v - v = 2v_s \)
\( v = 2v_s \)
इससे हमें स्रोत का वेग \( v_s \) मिलता है:
\( v_s = \frac{v}{2} \)
इसका मतलब है कि स्रोत को ध्वनि के वेग के आधे वेग से श्रोता की ओर चलना चाहिए ताकि आभासी आवृत्ति दुगुनी हो जाए. उदाहरण के लिए, यदि ध्वनि का वेग 330 m/s है, तो स्रोत को 165 m/s के वेग से चलना होगा.
\( v_s = \frac{1}{2} \times 330 \text{ m/s} = 165 \text{ m/s} \)
In simple words: For the apparent frequency to double, the source must move towards the listener at half the speed of sound.
🎯 Exam Tip: डॉप्लर प्रभाव के सूत्र में \( v_s \) और \( v_l \) (श्रोता का वेग) की दिशा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है. जब स्रोत श्रोता की ओर आता है, तो हर में \( v-v_s \) का उपयोग करें.
Question 19. डॉप्लर प्रभाव के उपयोग से पनडुब्बी का वेग किस प्रकार ज्ञात करते हैं?
Answer: डॉप्लर प्रभाव का उपयोग पनडुब्बियों (Submarines) का वेग ज्ञात करने के लिए किया जाता है, खासकर पानी के नीचे. यह सोनार (Sound Navigation and Ranging) तकनीक का एक हिस्सा है. पनडुब्बी का वेग ज्ञात करने के लिए, समुद्र तट से या किसी जहाज से ध्वनि तरंगें समुद्र में भेजी जाती हैं. ये तरंगें पनडुब्बी से टकराकर वापस सोनार स्टेशन पर परावर्तित होती हैं और उन्हें फिर से ग्रहण किया जाता है.
परावर्तित तरंगों की तरंगदैर्ध्य (wavelength) या आवृत्ति में परिवर्तन होता है, जो डॉप्लर प्रभाव के कारण होता है. यदि पनडुब्बी गति कर रही है, तो परावर्तित तरंगों की आवृत्ति उस आवृत्ति से अलग होगी जो भेजी गई थी. इस परिवर्तन का विश्लेषण करके पनडुब्बी का वेग ज्ञात किया जा सकता है.
यदि पनडुब्बी का वेग \( v_0 \) पानी में ध्वनि के वेग \( v \) से बहुत कम हो, तो तरंगदैर्ध्य में परिवर्तन का सूत्र इस प्रकार है:
\( \Delta \lambda = \lambda' - \lambda = \pm \left(\frac{2v_0}{v}\right)\lambda \)
यहाँ \( v_0 \) पनडुब्बी का वेग है.
- यदि पनडुब्बी सोनार स्टेशन से दूर जा रही है, तो समीकरण में धनात्मक चिन्ह ( \( + \) ) का उपयोग किया जाता है, जिसका अर्थ है कि परावर्तित तरंगों की तरंगदैर्ध्य बढ़ती है. पनडुब्बी के दूर जाने पर ध्वनि तरंगें लंबी हो जाती हैं.
- यदि पनडुब्बी सोनार स्टेशन के पास आ रही है, तो समीकरण में ऋणात्मक चिन्ह ( \( - \) ) का उपयोग किया जाता है, जिसका अर्थ है कि परावर्तित तरंगों की तरंगदैर्ध्य घटती है. पनडुब्बी के पास आने पर ध्वनि तरंगें छोटी हो जाती हैं.
इस सूत्र और तरंगदैर्ध्य में मापे गए परिवर्तन का उपयोग करके पनडुब्बी का वेग (\( v_0 \)) ज्ञात किया जा सकता है. इस तकनीक का उपयोग पनडुब्बी की गति, उसकी स्थिति, और अन्य समुद्री जहाजों की निगरानी के लिए किया जाता है.
In simple words: Submarine velocity is found using the Doppler effect. Sound waves are sent from a station, reflect off the submarine, and are received back. The change in wavelength or frequency of the reflected waves (due to the Doppler effect) is measured, and this change is used in a specific formula to calculate the submarine's speed.
🎯 Exam Tip: डॉप्लर प्रभाव से वेग ज्ञात करने में, \( \pm \) चिन्ह का सही उपयोग महत्वपूर्ण है: \( + \) जब स्रोत दूर जा रहा हो, और \( - \) जब स्रोत पास आ रहा हो. \( 2v_0 \) का कारक आता है क्योंकि ध्वनि दो बार डॉप्लर शिफ्ट का अनुभव करती है (एक बार जाते समय, एक बार आते समय).
RBSE Class 11 Physics Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न
तरंगों को मुख्यतः तीन प्रकार से वर्गीकृत किया गया है
1. विद्युत चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic Waves): ये ऐसी तरंगें हैं जिन्हें एक जगह से दूसरी जगह ऊर्जा ले जाने के लिए किसी माध्यम (जैसे हवा या पानी) की ज़रूरत नहीं होती। ये खाली जगह में भी चल सकती हैं। उदाहरण के लिए, रोशनी, एक्स-रे, रेडियो तरंगें, गर्मी वाली किरणें और गामा किरणें सभी इसी तरह की तरंगें हैं। ये तरंगें हमारे आस-पास के कई गैजेट्स में इस्तेमाल होती हैं, जैसे मोबाइल फोन और माइक्रोवेव।
2. द्रव्य तरंगें (Matter Waves): जब बहुत छोटे कण, जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन या न्यूट्रॉन चलते हैं, तो उनके साथ भी एक तरह की तरंग जुड़ी होती है। इन तरंगों को द्रव्य तरंगें कहते हैं। इन तरंगों का उपयोग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप जैसे खास उपकरणों में होता है, जो बहुत छोटी चीज़ों को देखने में मदद करते हैं।
3. यांत्रिक तरंगें (Mechanical Waves): ये ऐसी तरंगें हैं जो माध्यम में गड़बड़ी या हलचल पैदा करती हैं और उन्हें एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए किसी माध्यम (जैसे ठोस, द्रव या गैस) की ज़रूरत पड़ती है। इन्हें प्रत्यास्थ तरंगें भी कहते हैं, क्योंकि ये माध्यम के लचीलेपन पर निर्भर करती हैं। उदाहरण के लिए, ध्वनि तरंगें और पानी की लहरें यांत्रिक तरंगें हैं।
तरंग गति में निम्न गुणधर्म प्रेक्षित होते हैं
- यह माध्यम के कणों की लगातार हिलने-डुलने वाली गति के कारण होने वाली हलचल है।
- केवल तरंग (ऊर्जा) ही आगे बढ़ती है और जिस दिशा में तरंग चल रही होती है, वही संचरण की दिशा होती है। माध्यम के कण अपनी औसत जगह के आस-पास ही कंपन करते रहते हैं।
- माध्यम के कणों के कंपन की स्थिति लगातार बदलती रहती है। एक कण अपने से पहले वाले कण से कुछ समय बाद कंपन करना शुरू करता है।
माध्यम के द्वारा तरंग के दक्षतापूर्ण संचरण हेतु आवश्यक गुण
- तरंग के अच्छे से आगे बढ़ने के लिए माध्यम में ऐसा गुण होना चाहिए कि वह अपनी स्थिति बदलने का विरोध करे, यानी उसमें जड़त्व हो। इससे वह ऊर्जा जमा कर सके और ऊर्जा बर्बाद न हो।
- माध्यम में बल लगाने पर उसे हिलना चाहिए और बल हटाने पर उसे अपनी पुरानी जगह पर वापस आ जाना चाहिए। इसे प्रत्यास्थता का गुण कहते हैं।
- लगातार तरंग संचरण के लिए माध्यम का प्रतिरोध बहुत कम होना चाहिए।
ये सभी गुण यांत्रिक तरंगों के लिए ज़रूरी हैं। अगर तरंग विद्युत चुम्बकीय है, तो वह बिना किसी माध्यम के खाली जगह (निर्वात) में भी चल सकती है, और उसमें तरंग गति के सभी गुण मौजूद रहते हैं। तरंगों को उनके भौतिक गुणों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। इस वर्गीकरण में यह देखा जाता है कि माध्यम के कण तरंग की दिशा से कैसे जुड़े हैं। इस आधार पर तरंगें दो प्रकार की होती हैं- (a) अनुदैर्ध्य तरंगें और (b) अनुप्रस्थ तरंगें।
प्रगामी तरंग समीकरण
(Progressive Wave Equation)
जब कोई तरंग किसी माध्यम में चलती है, और माध्यम के कण सरल आवर्त गति में कंपन करते हैं, तो उस तरंग को प्रगामी तरंग कहते हैं। इसमें माध्यम के कण एक जैसी और अलग-अलग स्थिति (कला) में कंपन करते रहते हैं।
मान लीजिए एक तरंग चित्र के अनुसार बिंदु O से दाईं ओर \( v \) वेग से चल रही है। बिंदु O के दाईं ओर के कण कुछ समय बाद हिलते हैं, इसलिए उनकी गति पीछे की ओर होती है। मूल बिंदु O से \( x \) दूरी पर स्थित बिंदु P पर किसी कण के लिए विस्थापन समीकरण इस प्रकार है:
\( y = a \sin (\omega t – \phi) \) (1)
यहां \( \phi \) बिंदु O और P पर स्थित कणों के बीच का कलांतर है। क्योंकि बिंदु P, O से \( x \) दूरी पर है और \( \lambda \) दूरी पर स्थित कणों में कलांतर \( 2\pi \) होता है, तो \( x \) दूरी पर स्थित कणों में कलांतर होगा:
\( \frac{x}{\lambda} = \frac{\phi}{2\pi} \)
\( \implies \phi = \frac{2\pi}{\lambda} x \)
अब, समीकरण (1) में \( \phi \) का मान रखने पर:
\( y = a \sin \left(\omega t - \frac{2\pi}{\lambda} x\right) \)
\( \implies y = a \sin \frac{2\pi}{T} \left(t - \frac{T}{\lambda} x\right) \)
हम जानते हैं कि तरंग वेग \( v = \frac{\lambda}{T} \), तो \( \frac{T}{\lambda} = \frac{1}{v} \)
\( \implies y = a \sin \frac{2\pi}{T} \left(t - \frac{x}{v}\right) \)
या \( y = a \sin \frac{2\pi}{T} \left(Vt - x\right) \) .....(4)
यह समीकरण धनात्मक \( x \) दिशा में चलने वाली तरंग के लिए प्रगामी तरंग समीकरण को बताता है। इसी तरह, ऋणात्मक \( x \) दिशा में चलने वाली तरंग के लिए समीकरण होगा: \( y = a \sin (\omega t + kx) \)
अब समीकरण (3) से: \( y = a \sin (\omega t - kx) \)
इस समीकरण का समय के हिसाब से अवकलन करने पर, हमें कण का वेग मिलता है:
\( u = \frac{dy}{dt} = \frac{d}{dt} [a \sin (\omega t - kx)] \)
\( \implies u = a\omega \cos (\omega t - kx) \) ........(5)
यह कण के वेग का सूत्र है। इससे साफ है कि कण का वेग तरंग के वेग से अलग होता है। कण का वेग समय \( (t) \) और कण की जगह \( (x) \) पर निर्भर करता है, जबकि तरंग का वेग तय रहता है। समीकरण (5) से कण के वेग का सबसे ज़्यादा मान \( a\omega \) होता है।
अब समीकरण (5) का समय के हिसाब से फिर से अवकलन करने पर, हमें कण का त्वरण मिलता है:
\( a' = \frac{d^2y}{dt^2} = \frac{d}{dt} [a\omega \cos (\omega t - kx)] \)
\( \implies a' = -a\omega^2 \sin (\omega t - kx) \)
या \( a' = -\omega^2 y \) .........(6)
यहां \( a' = \frac{d^2y}{dt^2} \) कण का त्वरण है। समीकरण (6) दिखाता है कि कण का त्वरण उसके विस्थापन के बराबर होता है और उसकी दिशा के विपरीत होता है। यह सरल आवर्त गति के लिए ज़रूरी शर्त है। समीकरण (3) का \( x \) के हिसाब से दो बार अवकलन करने पर:
\( \frac{dy}{dx} = \frac{d}{dx} [a \sin (\omega t - kx)] = -ak \cos (\omega t - kx) \)
\( \frac{d^2y}{dx^2} = \frac{d}{dx} [-ak \cos (\omega t - kx)] = -ak(-k) \sin (\omega t - kx) \)
\( \implies \frac{d^2y}{dx^2} = ak^2 \sin (\omega t - kx) \) ........(7)
समीकरण (3) से, \( \sin (\omega t - kx) = \frac{y}{a} \)
\( \implies \frac{d^2y}{dx^2} = k^2 y \) ..........(8)
समीकरण (8) में \( k = \frac{\omega}{v} \) रखने पर:
\( \frac{d^2y}{dx^2} = \frac{\omega^2}{v^2} y \)
या \( \frac{d^2y}{dt^2} = v^2 \frac{d^2y}{dx^2} \) .....(9)
समीकरण (9) तरंग का एक आयामी अवकल समीकरण कहलाता है।
Question 2. तरल में तरंग के वेग हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer: अनुदैर्ध्य तरंगों का संचरण और उनका वेग:
अनुदैर्ध्य तरंगों के चलने और उनका वेग पता करने के लिए, हम एक पिस्टन लगी हुई नली लेते हैं, जिसमें तरल भरा हुआ है। तरल को समांतर परतों में बांटा गया है। जहाँ परतें पास-पास हैं, वहाँ तरल का दबाव और घनत्व ज़्यादा है, और जहाँ परतें दूर-दूर हैं, वहाँ दबाव और घनत्व कम है। यहाँ हम तरल को एक जैसा माध्यम मानकर चलेंगे और इस बात पर ध्यान नहीं देंगे कि यह अणुओं से बना है जो अलग-अलग वेग से घूम रहे हैं।
मान लीजिए पिस्टन को अंदर की ओर धकेलने से एक हलचल (संपीडन) पैदा होती है, जो दाईं ओर \( v \) वेग से चलती है। आसानी के लिए, संपीडन वाले क्षेत्र में तरल का दबाव और घनत्व एक समान माना जाता है। अब, अगर हम प्रेक्षक को भी संपीडन की दिशा में \( v \) वेग से चलते हुए मान लें, तो तरल माध्यम \( v \) वेग से संपीडन की उल्टी दिशा में चलता हुआ दिखाई देगा और प्रेक्षक के आगे संपीडन स्थिर रहेगा। इस स्थिति में, जब तरल \( v \) वेग से संपीडन क्षेत्र की ओर बढ़ता है और उससे टकराता है, तो उसके आगे वाले किनारे पर पीछे वाले किनारे से दबाव कुछ ज़्यादा होगा। मान लीजिए इन दोनों किनारों के दबाव का अंतर \( \Delta P \) है। इस वजह से, क्षेत्र B में तरल माध्यम सिकुड़ जाएगा और उसका वेग कुछ कम \( (V - \Delta V) \) हो जाएगा। यह छोटा सा हिस्सा जब संपीडन क्षेत्र से बाहर निकलेगा, तो अपने पहले वाले आयतन में वापस आ जाएगा और \( \Delta P \) के कारण पीछे की ओर ज़्यादा दबाव होने से तेज़ हो जाएगा। इस तरह, इसका वेग फिर से \( v \) हो जाएगा। यह छोटा सा हिस्सा C स्थिति तक पहुँच जाएगा।
जब तरल का छोटा सा हिस्सा संपीडन क्षेत्र में घुसता है, तो उस पर दाईं ओर लगने वाला कुल बल:
\( F = \text{दबाव} \times \text{क्षेत्रफल} (A) \)
\( F = (P + \Delta P) A – PA \)
\( F = PA + \Delta PA – PA = \Delta PA \)
जहाँ A नली के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है। संपीडन क्षेत्र के बाहर इस छोटे से हिस्से की लंबाई \( v\Delta t \) है।
तो, इस छोटे से हिस्से का आयतन \( = v\Delta t \times A \)
और इस छोटे से हिस्से का द्रव्यमान \( = \text{आयतन} \times \text{घनत्व} = vA\Delta t \times \rho \)
जहाँ \( \rho \) तरल के संपीडन क्षेत्र के बाहर का घनत्व है।
त्वरण \( a = -\frac{\Delta v}{\Delta t} \)
(क्योंकि वेग कम हो जाता है, इसलिए त्वरण नकारात्मक है।) अब न्यूटन के गति के दूसरे नियम से:
बल \( F = \text{द्रव्यमान} (m) \times \text{त्वरण} (a) \)
\( \implies \Delta PA = (vA\Delta t \rho) \left(-\frac{\Delta v}{\Delta t}\right) \)
\( \implies \Delta PA = -vA\rho \Delta v \)
\( \implies \Delta P = -v\rho \Delta v \)
तरल के आयतन में कमी \( \Delta V = A(v\Delta t - (v - \Delta v)\Delta t) = A\Delta v\Delta t \)
वास्तव में, संपीडन क्षेत्र के बाहर तरल का आयतन \( V = Av\Delta t \) है।
और संपीडन क्षेत्र में आयतन में कमी \( \Delta V = A\Delta v\Delta t \)
आयतन विकृति \( = \frac{\Delta V}{V} = \frac{A\Delta v\Delta t}{Av\Delta t} = \frac{\Delta v}{v} \)
आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \( E = \frac{\text{दबाव में परिवर्तन}}{\text{आयतन विकृति}} = \frac{\Delta P}{\Delta V/V} \)
\( \implies E = \frac{\Delta P}{\Delta v/v} \)
\( \implies \Delta P = E \frac{\Delta v}{v} \)
अब \( \Delta P \) के लिए दो समीकरणों को बराबर करने पर:
\( -v\rho \Delta v = E \frac{\Delta v}{v} \)
\( \implies -v^2 \rho = E \)
\( \implies v^2 = \frac{E}{\rho} \)
\( \implies v = \sqrt{\frac{E}{\rho}} \)
इसलिए, तरल माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंग का वेग \( v = \sqrt{\frac{E}{\rho}} \) होता है। यह दिखाता है कि तरंग का वेग माध्यम के गुणों, जैसे प्रत्यास्थता गुणांक और घनत्व पर निर्भर करता है। तरल में ध्वनि तरंगों का वेग इसी सूत्र से ज्ञात किया जाता है, जहाँ \( E \) तरल का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक होता है।
In simple words: तरल में तरंग के वेग को जानने के लिए, हम देखते हैं कि तरंग की गति माध्यम की इलास्टिक प्रॉपर्टी (प्रत्यास्थता) और उसके घनत्व पर निर्भर करती है। जितना ज़्यादा माध्यम लचीला होगा और जितना कम उसका घनत्व होगा, तरंग उतनी ही तेज़ी से चलेगी।
🎯 Exam Tip: इस व्यंजक को निकालते समय आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \( E \) और माध्यम के घनत्व \( \rho \) का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये सीधे वेग को प्रभावित करते हैं।
Question 3. एक समान तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंगों के वेग हेतु सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
Answer: तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंगों का वेग:
हम जानते हैं कि तनी हुई डोरी में विक्षोभ के कारण अनुप्रस्थ तरंगें उत्पन्न होती हैं। अनुप्रस्थ तरंगों का वेग ज्ञात करने के लिए, मान लीजिए एक डोरी है जिसका प्रति इकाई लंबाई का द्रव्यमान \( m \) है और उसमें तनाव \( T \) है। इसमें विक्षोभ बाईं ओर से दाईं ओर \( v \) वेग से चल रहा है। हम यह भी मान सकते हैं कि प्रेक्षक विक्षोभ की दिशा में \( v \) वेग से चल रहा है, तो प्रेक्षक को तरंग स्थिर दिखेगी और डोरी विपरीत दिशा में चलती हुई प्रतीत होगी।
अब, मान लीजिए हम डोरी के एक छोटे से हिस्से \( \delta l \) पर विचार करते हैं। यदि डोरी में थोड़ा सा विस्थापन हो, तो इस हिस्से \( \delta l \) को एक वृत्त के चाप का हिस्सा माना जा सकता है, जिसकी त्रिज्या \( R \) है। इस हिस्से \( \delta l \) का द्रव्यमान \( m\delta l \) होगा।
चित्र के अनुसार, केंद्र की ओर लगने वाले तनावों का घटक \( 2T \sin \theta \) आवश्यक अभिकेंद्री बल प्रदान करेगा।
अभिकेंद्री बल \( F_c = \frac{Mv^2}{R} \)
जहाँ \( M = m\delta l \) डोरी के छोटे हिस्से का द्रव्यमान है।
इसलिए, \( 2T \sin \theta = \frac{m\delta l v^2}{R} \) .....(1)
क्योंकि \( \theta \) बहुत छोटा है, \( \sin \theta \approx \theta \)
और हम जानते हैं कि चाप \( = \text{त्रिज्या} \times \text{कोण} \), तो \( \delta l = R(2\theta) \)
\( \implies \theta = \frac{\delta l}{2R} \)
अब \( \theta \) का मान समीकरण (1) में रखने पर:
\( 2T \left(\frac{\delta l}{2R}\right) = \frac{m\delta l v^2}{R} \)
\( \implies \frac{T\delta l}{R} = \frac{m\delta l v^2}{R} \)
\( \implies T = mv^2 \)
\( \implies v^2 = \frac{T}{m} \)
\( \implies v = \sqrt{\frac{T}{m}} \) .....(2)
यह अनुप्रस्थ तरंग के वेग का समीकरण है। यह समीकरण बताता है कि डोरी में तरंग का वेग उसमें तनाव \( T \) और प्रति इकाई लंबाई के द्रव्यमान \( m \) पर निर्भर करता है, लेकिन तरंग के आयाम और तरंगदैर्ध्य पर निर्भर नहीं करता। इसका मतलब है कि जितनी ज़्यादा डोरी कसी होगी या जितनी पतली होगी, उतनी ही तेज़ी से तरंग उसमें चलेगी।
In simple words: एक तनी हुई डोरी में तरंग कितनी तेज़ी से चलती है, यह दो बातों पर निर्भर करता है: डोरी कितनी कसी हुई है (तनाव) और उसकी मोटाई या भार कितना है (प्रति इकाई लंबाई का द्रव्यमान)। डोरी जितनी ज़्यादा कसी होगी या जितनी पतली होगी, तरंग उतनी ही तेज़ी से आगे बढ़ेगी।
🎯 Exam Tip: सूत्र \( v = \sqrt{\frac{T}{m}} \) को याद रखें। यहाँ \( T \) न्यूटन में तनाव है और \( m \) किलोग्राम प्रति मीटर में प्रति इकाई लंबाई का द्रव्यमान है। इकाइयों का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।
Question 4. सिद्ध करो कि तार में अनुदैर्ध्य तरंगों व अनुप्रस्थ तरंगों के वेग का अनुपात \( \frac{1}{\sqrt{\text{विकृति}}} \) हो
Answer: तार में अनुदैर्ध्य तरंगों और अनुप्रस्थ तरंगों के वेग का अनुपात निकालना:
एक तार में अनुप्रस्थ तरंगों की चाल \( v_T = \sqrt{\frac{T}{m}} \) होती है, जहाँ \( T \) तार में तनाव है और \( m \) प्रति इकाई लंबाई का द्रव्यमान है।
तार का तनाव \( T \) उसके अनुदैर्ध्य प्रतिबल \( (\text{stress}) \) और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल \( A = \pi r^2 \) के गुणनफल के बराबर होता है:
\( T = \text{अनुदैर्ध्य प्रतिबल} \times A = \text{अनुदैर्ध्य प्रतिबल} \times \pi r^2 \)
प्रति इकाई लंबाई का द्रव्यमान \( m = \rho \times \pi r^2 \), जहाँ \( \rho \) तार के पदार्थ का घनत्व है।
इन मानों को अनुप्रस्थ तरंग के वेग के सूत्र में रखने पर:
\( v_T = \sqrt{\frac{\text{अनुदैर्ध्य प्रतिबल} \times \pi r^2}{\rho \times \pi r^2}} \)
\( \implies v_T = \sqrt{\frac{\text{अनुदैर्ध्य प्रतिबल}}{\rho}} \) .....(1)
अब, एक ठोस तार में अनुदैर्ध्य तरंगों की चाल \( v_L = \sqrt{\frac{Y}{\rho}} \) होती है, जहाँ \( Y \) तार के पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक है और \( \rho \) घनत्व है। .....(2)
अनुदैर्ध्य तरंगों और अनुप्रस्थ तरंगों के वेग का अनुपात लेने पर:
\( \frac{v_L}{v_T} = \frac{\sqrt{Y/\rho}}{\sqrt{(\text{अनुदैर्ध्य प्रतिबल})/\rho}} \)
\( \implies \frac{v_L}{v_T} = \sqrt{\frac{Y}{\text{अनुदैर्ध्य प्रतिबल}}} \) .....(3)
हम जानते हैं कि यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y = \frac{\text{अनुदैर्ध्य प्रतिबल}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}} \) होता है।
\( \implies Y = \text{अनुदैर्ध्य प्रतिबल} \times \frac{1}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}} \)
तो, \( \frac{Y}{\text{अनुदैर्ध्य प्रतिबल}} = \frac{1}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}} = \frac{1}{\text{विकृति}} \)
समीकरण (3) में यह मान रखने पर:
\( \frac{v_L}{v_T} = \sqrt{\frac{1}{\text{विकृति}}} \)
\( \implies \frac{v_L}{v_T} = \frac{1}{\sqrt{\text{विकृति}}} \)
इस प्रकार, यह सिद्ध होता है कि तार में अनुदैर्ध्य तरंगों और अनुप्रस्थ तरंगों के वेग का अनुपात \( \frac{1}{\sqrt{\text{विकृति}}} \) होता है। यह अनुपात दिखाता है कि माध्यम की विकृति कैसे तरंगों की गति को प्रभावित करती है।
In simple words: तार में दो तरह की तरंगें होती हैं - अनुदैर्ध्य और अनुप्रस्थ। उनकी गति का अनुपात इस बात पर निर्भर करता है कि तार कितना खींचा गया है (विकृति)। यह अनुपात विकृति के वर्गमूल के उल्टे के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: अनुदैर्ध्य और अनुप्रस्थ तरंगों के वेग के अलग-अलग सूत्रों को याद रखें। यंग प्रत्यास्थता गुणांक और प्रतिबल-विकृति संबंध को सही ढंग से लागू करना इस व्यंजक को सिद्ध करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 5. तरंग के आयाम एवं तीव्रता में संबंध हेतु व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
Answer: तरंग के आयाम और तीव्रता में संबंध:
जब कोई तरंग किसी माध्यम में चलती है, तो वह माध्यम के कणों को ऊर्जा देती है, जिससे वे कण लगातार कंपन करना शुरू कर देते हैं। यह ऊर्जा तरंग के स्रोत से आती है। चूंकि माध्यम के कण सरल आवर्त गति में कंपन करते हैं, तो उनकी कुल ऊर्जा गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा के योग के बराबर होती है। इसलिए, हम माध्यम के प्रति इकाई आयतन की ऊर्जा, जिसे ऊर्जा घनत्व कहते हैं, ज्ञात करते हैं।
एक प्रगामी तरंग के लिए कण का विस्थापन समीकरण है:
\( y = a \sin \frac{2 \pi}{\lambda} (vt – x) \) ..............(1)
जहाँ \( a \) कण का आयाम है, \( \lambda \) तरंगदैर्ध्य है, \( t \) समय है, और \( x \) मूल बिंदु से कण की दूरी है।
अतः इस कण का वेग होगा:
\( u = \frac{dy}{dt} = \frac{d}{dt} \left(a \sin \frac{2 \pi}{\lambda} (vt – x)\right) \)
\( \implies u = a \frac{2 \pi v}{\lambda} \cos \frac{2 \pi}{\lambda} (vt – x) \) .....(2)
और कण का त्वरण होगा:
\( \text{त्वरण} = \frac{d^2y}{dt^2} = \frac{d}{dt} \left(a \frac{2 \pi v}{\lambda} \cos \frac{2 \pi}{\lambda} (vt – x)\right) \)
\( \implies \frac{d^2y}{dt^2} = -a \left(\frac{2 \pi v}{\lambda}\right)^2 \sin \frac{2 \pi}{\lambda} (vt – x) \)
समीकरण (1) का उपयोग करके:
\( \text{त्वरण} = -\left(\frac{2 \pi v}{\lambda}\right)^2 y \) ..............(3)
अब, मान लीजिए तरंग संचरण की दिशा के लंबवत, मूल बिंदु से \( x \) दूरी पर \( dx \) मोटाई और इकाई अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल की एक परत लेते हैं। इस परत का द्रव्यमान होगा:
\( m = \text{आयतन} \times \text{घनत्व} = (1 \times dx) \times \rho \)
\( \implies m = \rho dx \) .....(4)
क्योंकि परत के सभी कणों का वेग लगभग \( u \) के बराबर माना जा सकता है, तो कणों की गतिज ऊर्जा \( dK = \frac{1}{2} m u^2 \) होगी।
\( \implies dK = \frac{1}{2} (\rho dx) \left(a \frac{2 \pi v}{\lambda} \cos \frac{2 \pi}{\lambda} (vt – x)\right)^2 \)
\( \implies dK = \frac{1}{2} \rho dx a^2 \left(\frac{2 \pi v}{\lambda}\right)^2 \cos^2 \frac{2 \pi}{\lambda} (vt – x) \) .....(5)
परत को उसकी माध्य स्थिति से \( y \) दूरी तक विस्थापित करने में किया गया कार्य \( dW \) उसकी स्थितिज ऊर्जा के रूप में जमा होता है।
\( dW = \text{बल} \times \text{विस्थापन} = (m \times \text{त्वरण}) \times y \)
\( dW = (\rho dx) \left(- \left(\frac{2 \pi v}{\lambda}\right)^2 y\right) \times y \)
\( dW = -\rho dx \left(\frac{2 \pi v}{\lambda}\right)^2 y^2 \)
यह ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा \( dU \) के बराबर होगी, इसलिए \( dU = \frac{1}{2} \rho dx \left(\frac{2 \pi v}{\lambda}\right)^2 y^2 \)
\( dU = \frac{1}{2} \rho dx a^2 \left(\frac{2 \pi v}{\lambda}\right)^2 \sin^2 \frac{2 \pi}{\lambda} (vt – x) \) .....(6)
अब, परत की कुल ऊर्जा \( dE = dK + dU \)
\( dE = \frac{1}{2} \rho dx a^2 \left(\frac{2 \pi v}{\lambda}\right)^2 \left[\cos^2 \frac{2 \pi}{\lambda} (vt – x) + \sin^2 \frac{2 \pi}{\lambda} (vt – x)\right] \)
चूंकि \( \cos^2 \theta + \sin^2 \theta = 1 \),
\( \implies dE = \frac{1}{2} \rho dx a^2 \left(\frac{2 \pi v}{\lambda}\right)^2 \)
\( \implies dE = \frac{1}{2} \rho dx a^2 (2\pi n)^2 \) (क्योंकि \( v = n\lambda \implies \frac{v}{\lambda} = n \))
\( \implies dE = 2\pi^2 n^2 a^2 \rho dx \) .....(7)
चूंकि परत का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल इकाई है, तो माध्यम के प्रति इकाई आयतन की कुल ऊर्जा (ऊर्जा घनत्व) परत की इकाई लंबाई में निहित ऊर्जा के बराबर होगी।
तरंग की तीव्रता \( I \) प्रति इकाई समय में माध्यम के प्रति इकाई क्षेत्रफल पर पड़ने वाली ऊर्जा के बराबर होती है।
\( I = \frac{dE}{dt} \)
\( \implies I = 2\pi^2 n^2 a^2 \rho v \) .....(8)
इस समीकरण से स्पष्ट है कि:
(i) तरंग की तीव्रता आयाम \( (a) \) के वर्ग के समानुपाती होती है: \( I \propto a^2 \)
(ii) तरंग की तीव्रता आवृत्ति \( (n) \) के वर्ग के समानुपाती होती है: \( I \propto n^2 \)
(iii) तरंग की तीव्रता माध्यम के घनत्व \( (\rho) \) के समानुपाती होती है: \( I \propto \rho \)
(iv) तरंग की तीव्रता माध्यम में तरंग की चाल \( (v) \) के समानुपाती होती है: \( I \propto v \)
इसलिए, एक तरंग की तीव्रता उसके आयाम, आवृत्ति, माध्यम के घनत्व और तरंग के वेग पर निर्भर करती है। आयाम और आवृत्ति के वर्ग के साथ इसका सीधा संबंध होता है।
In simple words: तरंग की तेज़ी या तीव्रता इस बात पर निर्भर करती है कि तरंग कितनी बड़ी है (आयाम), कितनी बार कंपन करती है (आवृत्ति), माध्यम कितना घना है, और तरंग कितनी तेज़ी से चलती है। आयाम और आवृत्ति के बढ़ने पर तीव्रता बहुत बढ़ जाती है।
🎯 Exam Tip: आयाम और आवृत्ति के वर्ग के साथ तीव्रता का सीधा संबंध \( (I \propto a^2 \text{ और } I \propto n^2) \) इस प्रश्न के मुख्य परिणाम हैं, इन्हें सही ढंग से व्युत्पन्न करें।
Question 6. अप्रगामी तरंग किसे कहते हैं? अप्रगामी तरंग हेतु परिणामी तरंग समीकरण प्राप्त कीजिए।
Answer: अप्रगामी तरंगें:
जब समान आयाम और समान आवृत्ति की दो प्रगामी ध्वनि तरंगें किसी माध्यम में एक-दूसरे की विपरीत दिशा में समान चाल से एक ही रेखा पर चलती हैं और आपस में मिल जाती हैं (अध्यारोपित होती हैं), तो जो परिणामी तरंग पैटर्न बनता है, उसे अप्रगामी तरंग पैटर्न कहते हैं। इस परिणामी तरंग में ऊर्जा या हलचल किसी भी दिशा में आगे नहीं बढ़ती। अप्रगामी तरंगें बनने के लिए माध्यम का सीमित होना ज़रूरी है।
अप्रगामी तरंगें दो प्रकार की होती हैं:
(i) अनुदैर्ध्य अप्रगामी तरंगें: जब समान आवृत्ति और समान आयाम की दो अनुदैर्ध्य तरंगें एक ही सीधी रेखा पर विपरीत दिशा में चलती हुई आपस में मिलती हैं, तो माध्यम में अनुदैर्ध्य अप्रगामी तरंगें बनती हैं। उदाहरण: वायु स्तंभों में बनने वाली अप्रगामी तरंगें।
(ii) अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें: जब समान आवृत्ति और समान आयाम की दो अनुप्रस्थ तरंगें एक ही सीधी रेखा पर विपरीत दिशा में चलती हुई आपस में मिलती हैं, तो माध्यम में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें बनती हैं। उदाहरण: स्वरमापी तार वाले वाद्ययंत्रों और मेल्डीज प्रयोग में बनने वाली तरंगें।
अप्रगामी तरंगों के बनने की शर्तें:
माध्यम असीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसकी एक सीमा होनी चाहिए, यानी माध्यम बंधा हुआ होना चाहिए।
निस्पन्द (Nodes) और प्रस्पन्द (Anti-nodes):
अप्रगामी तरंग की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें माध्यम के कुछ बिंदुओं पर कण हमेशा शांत रहते हैं, यानी उनका विस्थापन हमेशा शून्य रहता है। इन बिंदुओं को निस्पन्द (nodes) कहते हैं। इसके विपरीत, माध्यम के कुछ अन्य बिंदुओं पर कणों का विस्थापन हमेशा दूसरे बिंदुओं की तुलना में सबसे ज़्यादा रहता है। माध्यम के इन बिंदुओं को प्रस्पन्द (Anti-nodes) कहते हैं। माध्यम में निस्पन्द और प्रस्पन्द एक के बाद एक (वैकल्पिक क्रम में) बनते हैं। दो सबसे पास के निस्पन्दों या दो सबसे पास के प्रस्पन्दों के बीच की दूरी तरंगदैर्ध्य की आधी \( \left(\frac{\lambda}{2}\right) \) होती है, जबकि सबसे पास के एक निस्पन्द और एक प्रस्पन्द के बीच की दूरी तरंगदैर्ध्य की एक चौथाई \( \left(\frac{\lambda}{4}\right) \) होती है।
अप्रगामी तरंगों का गणितीय विश्लेषण (Mathematical Analysis of Stationary Waves):
मान लीजिए एक प्रगामी तरंग \( x \)-अक्ष की धनात्मक दिशा में चल रही है, जिसका आयाम \( a \), आवृत्ति \( \omega \) और तरंग संख्या \( k \) है। इस तरंग का समीकरण होगा:
\( y_1 = a \sin (\omega t - kx) \) .....(1)
अब, मान लीजिए यह तरंग किसी मुक्त सिरे से टकराती है और परावर्तित तरंग \( x \)-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में चलती है। तब परावर्तित तरंग का समीकरण निम्न होगा:
\( y_2 = a \sin (\omega t + kx) \) .....(2)
लेकिन अगर यही तरंग किसी दृढ़ सिरे से परावर्तित होती है, तो परावर्तित तरंग का समीकरण निम्न होगा:
\( y_2 = -a \sin (\omega t + kx) \) .....(3)
(क्योंकि सघन माध्यम से परावर्तन के कारण तरंग की कला में \( \pi \) का परिवर्तन हो जाता है। इसलिए आयाम \( a \) से पहले ऋणात्मक चिन्ह होगा)।
अध्यारोपण के सिद्धांत से परिणामी विस्थापन \( y = y_1 + y_2 \) होगा।
मुक्त सिरे से परावर्तित प्रगामी तरंग को लेकर अप्रगामी तरंग का समीकरण प्राप्त करते हैं:
\( y = a \sin (\omega t - kx) + a \sin (\omega t + kx) \)
त्रिकोणमितीय सूत्र \( \sin A + \sin B = 2 \sin \left(\frac{A+B}{2}\right) \cos \left(\frac{A-B}{2}\right) \) का उपयोग करने पर:
\( y = 2a \sin \left(\frac{(\omega t - kx) + (\omega t + kx)}{2}\right) \cos \left(\frac{(\omega t - kx) - (\omega t + kx)}{2}\right) \)
\( \implies y = 2a \sin (\omega t) \cos (-kx) \)
चूंकि \( \cos (-\theta) = \cos \theta \),
\( \implies y = 2a \sin (\omega t) \cos (kx) \)
या \( y = 2a \cos (kx) \sin (\omega t) \) .....(4)
यह अप्रगामी तरंग का समीकरण है, जहाँ आयाम \( R = 2a \cos (kx) \) है। यह दिखाता है कि आयाम का मान दूरी \( x \) पर निर्भर करता है।
**स्थिति-I (अधिकतम आयाम - प्रस्पन्द):**
जब \( \cos (kx) \) का मान \( \pm 1 \) हो, तो आयाम अधिकतम होगा और प्रस्पन्द प्राप्त होंगे।
\( \cos (kx) = \pm 1 \implies kx = n\pi \), जहाँ \( n = 0, 1, 2, 3, \ldots \)
\( \implies \frac{2\pi}{\lambda} x = n\pi \implies x = \frac{n\lambda}{2} \)
तो, \( x = 0, \frac{\lambda}{2}, \lambda, \frac{3\lambda}{2}, \ldots \)
दो क्रमागत प्रस्पन्दों के बीच की दूरी \( = \frac{\lambda}{2} \)
**स्थिति-II (शून्य आयाम - निस्पन्द):**
जब \( \cos (kx) \) का मान शून्य हो, तो आयाम शून्य होगा और निस्पन्द प्राप्त होंगे।
\( \cos (kx) = 0 \implies kx = (2n+1)\frac{\pi}{2} \), जहाँ \( n = 0, 1, 2, 3, \ldots \)
\( \implies \frac{2\pi}{\lambda} x = (2n+1)\frac{\pi}{2} \implies x = (2n+1)\frac{\lambda}{4} \)
तो, \( x = \frac{\lambda}{4}, \frac{3\lambda}{4}, \frac{5\lambda}{4}, \ldots \)
दो क्रमागत निस्पन्दों के बीच की दूरी \( = \frac{\lambda}{2} \)
और एक क्रमागत प्रस्पन्द व निस्पन्द के बीच की दूरी \( = \frac{\lambda}{4} \)
**माध्यम के कणों का वेग:**
समीकरण (4) का समय के सापेक्ष अवकलन करने पर कण का वेग मिलता है:
\( v = \frac{dy}{dt} = \frac{d}{dt} [2a \cos (kx) \sin (\omega t)] \)
\( \implies v = 2a \cos (kx) \omega \cos (\omega t) \)
\( \implies v = 2a\omega \cos (kx) \cos (\omega t) \)
**माध्यम की विकृति (Strain):**
समीकरण (4) का \( x \) के सापेक्ष अवकलन करने पर विकृति मिलती है:
\( \text{विकृति} = \frac{dy}{dx} = \frac{d}{dx} [2a \cos (kx) \sin (\omega t)] \)
\( \implies \frac{dy}{dx} = 2a (-\sin (kx)) k \sin (\omega t) \)
\( \implies \frac{dy}{dx} = -2ak \sin (kx) \sin (\omega t) \)
**अप्रगामी तरंगों में दाब परिवर्तन:**
दाब परिवर्तन \( \Delta P = E \times \text{आयतन विकृति} \)
\( \implies \Delta P = E \left(\frac{dy}{dx}\right) \)
\( \implies \Delta P = E [-2ak \sin (kx) \sin (\omega t)] \)
\( \implies \Delta P = -2akE \sin (kx) \sin (\omega t) \)
**दृढ़ सिरे से परावर्तन:**
यदि तरंग किसी दृढ़ सिरे (सघन माध्यम) से परावर्तित होती है, तो कला में \( \pi \) का परिवर्तन होता है। इस स्थिति में:
\( y_1 = a \sin (\omega t - kx) \)
\( y_2 = a \sin (\omega t + kx + \pi) = -a \sin (\omega t + kx) \)
परिणामी विस्थापन \( y = y_1 + y_2 \)
\( \implies y = a \sin (\omega t - kx) - a \sin (\omega t + kx) \)
सूत्र \( \sin A - \sin B = 2 \cos \left(\frac{A+B}{2}\right) \sin \left(\frac{A-B}{2}\right) \) का उपयोग करने पर:
\( y = a \left[2 \cos \left(\frac{(\omega t - kx) + (\omega t + kx)}{2}\right) \sin \left(\frac{(\omega t - kx) - (\omega t + kx)}{2}\right)\right] \)
\( \implies y = a [2 \cos (\omega t) \sin (-kx)] \)
\( \implies y = -2a \sin (kx) \cos (\omega t) \) .....(5)
यह समीकरण दृढ़ सिरे से परावर्तित होने वाली अप्रगामी तरंग को दर्शाता है, जहाँ प्रस्पन्द और निस्पन्द की स्थितियाँ बदल जाती हैं।
In simple words: अप्रगामी तरंगें तब बनती हैं जब दो समान तरंगें उल्टी दिशाओं से आकर मिलती हैं। इसमें कुछ जगहें (निस्पन्द) हमेशा शांत रहती हैं, और कुछ जगहें (प्रस्पन्द) सबसे ज़्यादा हिलती हैं। इसका समीकरण आयाम, कंपन दर और तरंग की लंबाई पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: अप्रगामी तरंगों की परिभाषा, प्रस्पन्द और निस्पन्द की स्थितियाँ, और उनका गणितीय समीकरण - इन सभी भागों को स्पष्ट रूप से समझाएं। परावर्तन के प्रकार के आधार पर कला परिवर्तन को दर्शाना भी महत्वपूर्ण है।
Question 7. अनुनाद किसे कहते हैं? अनुनाद नली का चित्र बनाकर वर्णन करते हुए वायु में ध्वनि का वेग ज्ञात करने हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer: जब कोई वस्तु अपनी साम्यावस्था से थोड़ी विस्थापित करके छोड़ दी जाती है, तो वह प्रत्यानयन बल (restoring force) के कारण कम्पन करने लगती है।
यदि इस वस्तु पर घर्षण बल जैसा कोई बाहरी बल न लगे, तो इसके कम्पन का आयाम हमेशा एक जैसा रहता है, और इसकी यांत्रिक ऊर्जा भी बची रहती है। ऐसे कम्पनों को 'मुक्त कम्पन' (Free Vibration) कहते हैं। इन कम्पनों की आवृत्ति वस्तु के प्रत्यानयन बल पर निर्भर करती है, और इसे वस्तु की प्राकृतिक आवृत्ति या मूल आवृत्ति कहते हैं।
असल में, वस्तु जिस माध्यम में कम्पन करती है, वह माध्यम वस्तु पर कुछ घर्षण बल लगाता है। इस कारण वस्तु के दोलन या कम्पन का आयाम समय के साथ कम होता जाता है और इसकी ऊर्जा भी धीरे-धीरे कम हो जाती है। ऐसे कम्पनों को 'अवमंदित कम्पन' (Damped Vibration) कहते हैं।
यदि हम कम्पन करने वाली वस्तु को उतनी ऊर्जा देते रहें, जितनी उसकी ऊर्जा नष्ट हो रही है, तो वह वस्तु एक ही आयाम से कम्पन करती रहती है। ऐसे कम्पन को 'पोषित कम्पन' (Forced Vibration) कहते हैं।
एक कम्पन करती हुई वस्तु (जिसे चालक कहते हैं) दूसरी कम्पन कर सकने वाली वस्तु (जिसे चालित कहते हैं) को कम्पन करने के लिए मजबूर करती है। भले ही उनकी प्राकृतिक आवृत्तियाँ अलग हों, ऐसा फिर भी संभव है। ऐसे कम्पन को 'प्रणोदित कम्पन' (Forced Vibration) कहते हैं।
🎯 Exam Tip: अनुनाद को समझने के लिए, हमेशा मुक्त, अवमंदित, पोषित और प्रणोदित कम्पनों के बीच का अंतर स्पष्ट करें, क्योंकि ये अवधारणाएँ आपस में जुड़ी हुई हैं।
अनुनाद नली की सहायता से वायु में ध्वनि का वेग ज्ञात करना (Determination of Velocity of Sound in Air with the help of resonance tube)
Answer: अनुनाद नली वह उपकरण है जिससे वायु के स्तम्भ में कम्पन पैदा करके अनुनाद की स्थिति बनाई जाती है, जिससे वायु में ध्वनि का वेग ज्ञात किया जा सकता है।

चित्र (i) अनुनाद नली
चित्र में दिखाया गया है कि यह एक धातु या काँच की 1 मीटर लंबी नली (AB) होती है, जिसका व्यास लगभग 5 सेमी होता है। यह नली एक लकड़ी के स्टैंड में लगी होती है। इसके निचले सिरे पर एक रबर की नली के द्वारा पानी से भरे पात्र (R) को जोड़ा जाता है, जिसे ऊपर-नीचे खिसकाकर किसी भी स्थिति में पानी का स्तर (m) स्थिर किया जा सकता है। एक दूसरी काँच की नली (CD) भी अनुनाद नली के समानांतर लगी होती है, और उस पर एक पैमाना (S) भी लगा होता है। नली CD में पानी के तल को देखकर अनुनाद नली में वायु स्तम्भ की लंबाई पैमाने की सहायता से ज्ञात की जा सकती है।
अनुनाद नली AB में इतना पानी भरा जाता है कि इसका \( \frac{2}{3} \) भाग पानी से भरा रहे। नली में पानी की सतह से उसके मुँह तक के भाग में वायु स्तम्भ बनता है। इस तरह यह नली एक बंद पाइप की तरह व्यवहार करती है। अब हम एक तेज आवृत्ति का स्वरित्र लेते हैं, उसे रबर के पैड पर मारकर अनुनाद नली के मुँह पर चित्र में दिखाए अनुसार रखते हैं। पात्र R को धीरे-धीरे नीचे अथवा ऊपर करते हैं। स्वरित्र द्वारा पैदा हुए कम्पन नली में अनुदैर्ध्य अप्रगामी तरंगें बनाते हैं।
अनुनाद नली में वायु स्तम्भ की लंबाई को इस तरह समायोजित किया जाता है कि नली में तेज ध्वनि सुनाई दे, यह अनुनाद की पहली अवस्था होती है। इस स्थिति में पानी के तल की स्थिति को पैमाने की सहायता से पढ़कर वायु स्तम्भ की लंबाई \( l_1 \) ज्ञात कर ली जाती है। पहली अनुनाद स्थिति के लिए, हमें यह सूत्र मिलता है:
\( l_1 + x = \frac{\lambda}{4} \) ......(1)
यहां \( x \) सिरा संशोधन (end correction) कहलाता है। नली में बनी अप्रगामी तरंगों का प्रस्पन्द ठीक नली के सिरे पर नहीं बनता, बल्कि सिरे से कुछ ऊपर \( x \) दूरी पर बनता है। सिरा संशोधन का मान नली के व्यास (D) के आकार पर निर्भर करता है। प्रयोगों से पता चला है कि इसका मान \( 0.3 D \) होता है।

चित्र (ii) अनुनाद की अवस्थायें
अब हम पात्र R को इतना नीचे करते हैं कि जब उसी कम्पित स्वरित्र को अनुनाद नली के मुँह पर लाते हैं तो अनुनाद नली में फिर से तेज ध्वनि सुनाई देती है। अनुनाद नली में वायु स्तम्भ की लंबाई पहली अनुनादी नली की तीन गुनी प्राप्त होती है। दूसरी अनुनाद स्थिति के लिए:
\( l_2 + x = \frac{3\lambda}{4} \)
समीकरण (2) में से समीकरण (1) को घटाने पर:
\( (l_2 + x) - (l_1 + x) = \frac{3\lambda}{4} - \frac{\lambda}{4} \)
\( \implies l_2 - l_1 = \frac{2\lambda}{4} \)
\( \implies l_2 - l_1 = \frac{\lambda}{2} \)
\( \implies \lambda = 2(l_2 - l_1) \) ......(3)
यदि दिए गए स्वरित्र की आवृत्ति \( n \) है, तो अनुनादित वायु स्तम्भ की भी यही आवृत्ति होगी। इसलिए वायु में ध्वनि का वेग \( v = n\lambda \) होगा।
\( \implies v = n \times 2(l_2 - l_1) \)
\( \implies v = 2n(l_2 - l_1) \) ......(4)
यदि कमरे का ताप \( t^\circ \text{C} \) है, तो \( V_t = V_0 + 0.61 t \) ......(5)
सिरा संशोधन (End Correction) ज्ञात करने के लिए समीकरण (3) का उपयोग कर सकते हैं:
\( (l_2+x) - 3(l_1 + x) = \frac{3\lambda}{4} - \frac{3\lambda}{4} \)
\( \implies l_2 + x - 3l_1 - 3x = 0 \)
\( \implies l_2 - 3l_1 - 2x = 0 \)
\( \implies x = \frac{l_2 - 3l_1}{2} \) ......(3)
इस समीकरण (3) का उपयोग करके सिरा संशोधन ज्ञात किया जा सकता है।
In simple words: अनुनाद तब होता है जब एक वस्तु की कंपन आवृत्ति दूसरी वस्तु की प्राकृतिक आवृत्ति से मेल खाती है, जिससे बड़े कंपन पैदा होते हैं। अनुनाद नली प्रयोग में, हम पानी का स्तर बदलकर हवा के कंपन की लंबाई को समायोजित करते हैं जब तक कि ध्वनि सबसे तेज न सुनाई दे। इससे ध्वनि की तरंग दैर्ध्य का पता चलता है, और फिर हम ध्वनि की गति निकाल सकते हैं।
🎯 Exam Tip: अनुनाद नली प्रयोग में, यह सुनिश्चित करें कि आप पहले और दूसरे अनुनाद की लंबाई को सही ढंग से मापें। सिरा संशोधन (end correction) को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, जो आमतौर पर नली के व्यास पर निर्भर करता है।
Question 8. विस्पन्द क्या है? गणितीय विश्लेषण द्वारा सिद्ध कीजिए कि प्रति सेकण्ड विस्पन्दों की संख्या स्रोतों की आवृत्ति में अन्तर के बराबर होती है।
Answer: एक ही जगह पर ध्वनि की तीव्रता में एक निश्चित समय के बाद नियमित रूप से उतार-चढ़ाव को 'विस्पन्द' (Beats) कहते हैं। जब लगभग समान आवृत्ति की दो तरंगें एक ही दिशा में चलती हुई किसी बिंदु पर मिलती हैं, तो वहां बनने वाली परिणामी तरंग का आयाम समय के साथ बदलता रहता है। इसी वजह से ध्वनि की तीव्रता में बार-बार उतार-चढ़ाव होता है।

चित्र : विस्पन्द
विस्पन्द आवृत्ति (n) प्रति सेकंड विस्पन्दों की संख्या को कहते हैं।
अर्थात्
\( \text{विस्पन्द आवृत्ति} = \frac{1}{\text{विस्पन्द काल}} \)
विस्पन्द काल (T) दो लगातार विस्पन्दों के बीच का समय होता है।
माना दो स्वरित्र (tuning forks) जिनकी आवृत्तियाँ \( n_1 \) और \( n_2 \) हैं, एक साथ कंपन कर रहे हैं। मान लीजिए \( n_1 \) का मान \( n_2 \) से थोड़ा अधिक है (लगभग 10 आवृत्ति तक का अंतर)। हमारे कान ध्वनि को लगभग \( \frac{1}{12} \) सेकंड तक सुन सकते हैं, इसलिए विस्पन्द तभी सुनाई देंगे जब दो लगातार विस्पन्दों के बीच का समय इससे ज्यादा हो। जब \( n_1 \) आवृत्ति वाला स्वरित्र \( n_2 \) आवृत्ति वाले स्वरित्र से एक साथ कंपन करता है, तो एक विस्पन्द सुनाई देगा।
विस्पन्द का गणितीय विश्लेषण (Mathematical Analysis of Beats)
माना दो ध्वनि तरंगें जिनके आयाम क्रमशः \( a_1 \) और \( a_2 \) तथा आवृत्तियाँ \( n_1 \) और \( n_2 \) हैं, एक ही दिशा में चल रही हैं और अध्यारोपण के बाद किसी बिंदु पर विस्पन्द उत्पन्न करती हैं। इन दोनों तरंगों को निम्न समीकरणों से दिखाया जा सकता है:
\( y_1 = a_1 \sin(2\pi n_1 t) \) ......(1)
\( y_2 = a_2 \sin(2\pi n_2 t) \) ......(2)
सरलता के लिए, हम उस बिंदु पर \( x = 0 \) मानते हैं और यहां पर कलाएँ \( \phi_1 = \phi_2 = 0 \) हैं।
अध्यारोपण के सिद्धांत के अनुसार, परिणामी विस्थापन \( y = y_1 + y_2 \)
\( \implies y = a_1 \sin(2\pi n_1 t) + a_2 \sin(2\pi n_2 t) \)
माना \( n_1 > n_2 \) तथा \( n_1 - n_2 = \Delta n \). यहां \( \Delta n \) एक बहुत छोटा आवृत्ति अंतर है।
तो, \( n_1 = n_2 + \Delta n \)
समीकरण में \( n_1 \) का मान रखने पर:
\( y = a_1 \sin(2\pi (n_2 + \Delta n) t) + a_2 \sin(2\pi n_2 t) \)
\( \implies y = a_1 \sin(2\pi n_2 t + 2\pi \Delta n t) + a_2 \sin(2\pi n_2 t) \)
हम जानते हैं कि \( \sin(A+B) = \sin A \cos B + \cos A \sin B \)
\( \implies y = a_1 [\sin(2\pi n_2 t) \cos(2\pi \Delta n t) + \cos(2\pi n_2 t) \sin(2\pi \Delta n t)] + a_2 \sin(2\pi n_2 t) \)
\( \implies y = \sin(2\pi n_2 t) [a_1 \cos(2\pi \Delta n t) + a_2] + \cos(2\pi n_2 t) [a_1 \sin(2\pi \Delta n t)] \)
माना \( a_1 \cos(2\pi \Delta n t) + a_2 = R \cos \alpha \) ......(3)
और \( a_1 \sin(2\pi \Delta n t) = R \sin \alpha \) ......(4)
समीकरणों (3) और (4) का उपयोग करने पर:
\( \implies y = \sin(2\pi n_2 t) R \cos \alpha + \cos(2\pi n_2 t) R \sin \alpha \)
\( \implies y = R [\sin(2\pi n_2 t) \cos \alpha + \cos(2\pi n_2 t) \sin \alpha] \)
\( \implies y = R \sin(2\pi n_2 t + \alpha) \) ......(5)
यह समीकरण (5) परिणामी तरंग का समीकरण है जिसका आयाम \( R \) है।
समीकरण (3) तथा (4) का वर्ग करके जोड़ने पर:
\( (R \cos \alpha)^2 + (R \sin \alpha)^2 = (a_1 \cos(2\pi \Delta n t) + a_2)^2 + (a_1 \sin(2\pi \Delta n t))^2 \)
\( \implies R^2 (\cos^2 \alpha + \sin^2 \alpha) = a_1^2 \cos^2(2\pi \Delta n t) + a_2^2 + 2a_1 a_2 \cos(2\pi \Delta n t) + a_1^2 \sin^2(2\pi \Delta n t) \)
\( \implies R^2 = a_1^2 (\cos^2(2\pi \Delta n t) + \sin^2(2\pi \Delta n t)) + a_2^2 + 2a_1 a_2 \cos(2\pi \Delta n t) \)
\( \implies R^2 = a_1^2 + a_2^2 + 2a_1 a_2 \cos(2\pi \Delta n t) \)
\( \implies R = \sqrt{a_1^2 + a_2^2 + 2a_1 a_2 \cos(2\pi \Delta n t)} \) ......(6)
यह समीकरण (6) परिणामी तरंग के आयाम को दिखाता है। इससे पता चलता है कि आयाम \( R \) का मान समय \( t \) के साथ बदलता है।
जब \( t = 0 \), तब \( \cos(0) = 1 \).
\( \implies R = \sqrt{a_1^2 + a_2^2 + 2a_1 a_2} = \sqrt{(a_1+a_2)^2} = a_1 + a_2 \)
यह ध्वनि का अधिकतम आयाम होता है, इसलिए तीव्रता भी अधिकतम होती है।
जब \( t = \frac{1}{2\Delta n} \), तब \( 2\pi \Delta n t = 2\pi \Delta n \frac{1}{2\Delta n} = \pi \).
\( \implies \cos(\pi) = -1 \).
\( \implies R = \sqrt{a_1^2 + a_2^2 - 2a_1 a_2} = \sqrt{(a_1-a_2)^2} = |a_1 - a_2| \)
यह ध्वनि का न्यूनतम आयाम होता है, इसलिए तीव्रता भी न्यूनतम होती है।
जब \( t = \frac{1}{\Delta n} \), तब \( 2\pi \Delta n t = 2\pi \Delta n \frac{1}{\Delta n} = 2\pi \).
\( \implies \cos(2\pi) = 1 \).
\( \implies R = a_1 + a_2 \). ध्वनि की तीव्रता फिर से अधिकतम हो जाती है।
यानी, परिणामी तरंग के कारण एक ही बिंदु पर समय के साथ ध्वनि की तीव्रता में बदलाव होता रहता है। शुरू में \( t = 0 \) पर ध्वनि की तीव्रता अधिकतम होती है, फिर कुछ समय बाद न्यूनतम हो जाती है, और फिर \( t = \frac{1}{\Delta n} \) पर फिर से अधिकतम हो जाती है।
विस्पन्द का आवर्तकाल (समय) दो लगातार अधिकतम ध्वनि की तीव्रता के बीच का समय है:
\( T = \frac{1}{\Delta n} = \frac{1}{n_1 - n_2} \)
विस्पन्द आवृत्ति \( n \) (प्रति सेकंड विस्पन्दों की संख्या) \( = \frac{1}{T} = n_1 - n_2 \)
यह सिद्ध करता है कि विस्पन्दों की आवृत्ति दोनों स्वरित्रों की आवृत्तियों के अंतर के बराबर होती है।

चित्र : विस्पंदों का बनना
In simple words: विस्पन्द तब बनते हैं जब दो तरंगें जिनकी आवृत्तियाँ थोड़ी अलग हों, एक साथ मिल जाती हैं। इससे आवाज कभी तेज और कभी धीमी सुनाई देती है। विस्पन्दों की संख्या, यानी प्रति सेकंड कितनी बार आवाज तेज और धीमी होती है, दोनों मूल आवाजों की आवृत्तियों के अंतर के बराबर होती है।
🎯 Exam Tip: विस्पन्द की अवधारणा को समझने के लिए, हमेशा दो अलग-अलग आवृत्तियों वाली तरंगों के अध्यारोपण पर ध्यान दें। याद रखें कि विस्पन्द आवृत्ति, दोनों मूल आवृत्तियों का अंतर होती है, न कि उनका योग या गुणनफल।
Question 9. ध्वनि तरंगों में डाप्लर के प्रभाव की व्याख्या करो तथा आभासी आवृत्ति हेतु सूत्र ज्ञात करो जब (i) स्रोत, स्थिर श्रोता की ओर गतिशील है। (ii) श्रोता, स्थिर स्रोत की ओर गतिशील है।
Answer:
ध्वनि तरंगों का डाप्लर प्रभाव (Doppler Effect of Sound Waves)
जब कोई ध्वनि स्रोत स्थिर होता है और ध्वनि उत्पन्न करता है, तो कुछ दूरी पर बैठे स्थिर श्रोता को ध्वनि की आवृत्ति में कोई बदलाव महसूस नहीं होता है। लेकिन जब ध्वनि स्रोत और श्रोता के बीच कोई सापेक्ष गति होती है, तो श्रोता को ध्वनि की आवृत्ति बदली हुई महसूस होती है। इस घटना को 'डाप्लर प्रभाव' कहते हैं। इसकी खोज सबसे पहले सन् 1842 में डॉप्लर ने की थी।
डाप्लर प्रभाव को देखने के लिए यह जरूरी है कि ध्वनि स्रोत, श्रोता और माध्यम, तीनों का वेग ध्वनि के वेग से कम हो। यदि इनका वेग ध्वनि के वेग से ज्यादा हो, तो तरंगाग्र विकृत हो जाता है और प्रघाती तरंगें (Shock Waves) उत्पन्न हो जाती हैं, जिससे डाप्लर प्रभाव नहीं दिखता। इसका एक उदाहरण जेट विमान है।
जब माध्यम (हवा) गतिशील हो तब भी डाप्लर प्रभाव होता है।
डॉप्लर प्रभाव जब स्रोत गतिशील हो और श्रोता स्थिर हो (Doppler Effect when Source in Motion and Listener at Rest)
(i) जब स्रोत श्रोता की ओर गतिशील है:
मान लीजिए ध्वनि स्रोत S से निकलने वाली तरंगों की वास्तविक आवृत्ति \( n \), तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) और ध्वनि का वेग \( v \) है।
तो \( \lambda = \frac{v}{n} \)

चित्र : (i) जब स्रोत स्थिर हो । (ii) जब स्रोत श्रोता की ओर गतिशील हो । (iii) जब स्रोत श्रोता से दूर जा रहा हो।
जब स्रोत और श्रोता दोनों स्थिर होते हैं, तो ध्वनि स्रोत एक सेकंड में \( n \) तरंगें उत्सर्जित करता है, जो \( v \) मीटर की दूरी में फैलती हैं, और श्रोता को प्रति सेकंड \( n \) तरंगें मिलती हैं।
यदि स्रोत \( v_s \) वेग से ध्वनि के वेग \( v \) की दिशा में चलता है, तो वह एक सेकंड में ध्वनि की दिशा में \( v_s \) मीटर दूरी तय करेगा।
इसलिए, एक सेकंड में उत्सर्जित \( n \) तरंगें अब \( (v - v_s) \) दूरी में फैलेंगी।
अब ध्वनि की नई तरंगदैर्ध्य \( \lambda' \) होगी:
\( \lambda' = \frac{v - v_s}{n} \)
इस स्थिति में आभासी तरंगदैर्ध्य वास्तविक तरंगदैर्ध्य से कम हो जाती है। इसी कारण श्रोता को ध्वनि की बढ़ी हुई आवृत्ति सुनाई देती है।
यदि आभासी आवृत्ति \( n' \) है, तो:
\( n' = \frac{v}{\lambda'} \)
\( \implies n' = \frac{v}{(v - v_s)/n} \)
\( \implies n' = n \left(\frac{v}{v - v_s}\right) \) ......(1)
इसका मतलब है कि आभासी आवृत्ति \( n' \) वास्तविक आवृत्ति \( n \) से ज्यादा होगी।
(ii) जब स्रोत श्रोता से दूर जा रहा है:
यदि ध्वनि स्रोत \( v_s \) वेग से श्रोता से दूर जाता है, तो स्रोत से प्रति सेकंड उत्सर्जित \( n \) तरंगें \( (v + v_s) \) दूरी में फैलेंगी।
इस स्थिति में आभासी तरंगदैर्ध्य \( \lambda'' \) वास्तविक तरंगदैर्ध्य से ज्यादा होगी:
\( \lambda'' = \frac{v + v_s}{n} \)
इस स्थिति में ध्वनि स्रोत की आभासी आवृत्ति \( n'' \) होगी:
\( n'' = \frac{v}{\lambda''} \)
\( \implies n'' = \frac{v}{(v + v_s)/n} \)
\( \implies n'' = n \left(\frac{v}{v + v_s}\right) \) ......(2)
इसका मतलब है कि आभासी आवृत्ति \( n'' \) वास्तविक आवृत्ति \( n \) से कम होगी।
(iii) स्रोत, स्थिर श्रोता के पास से गुजरता है:
जब स्रोत \( v_s \) वेग से स्थिर श्रोता की ओर आ रहा हो, तो आभासी आवृत्ति \( n' = n\left(\frac{v}{v-v_{s}}\right) \) होती है।
जब स्रोत \( v_s \) वेग से स्थिर श्रोता को पार करके दूर जा रहा हो, तो आभासी आवृत्ति \( n'' = n\left(\frac{v}{v+v_{s}}\right) \) होती है।
इस प्रकार आभासी आवृत्ति में परिवर्तन \( \Delta n = n' - n'' \) होता है।
\( \implies \Delta n = n\left(\frac{v}{v-v_s}\right) - n\left(\frac{v}{v+v_s}\right) \)
\( \implies \Delta n = nv \left(\frac{1}{v-v_s} - \frac{1}{v+v_s}\right) \)
\( \implies \Delta n = nv \left(\frac{v+v_s - (v-v_s)}{(v-v_s)(v+v_s)}\right) \)
\( \implies \Delta n = nv \left(\frac{2v_s}{v^2-v_s^2}\right) \)
\( \implies \Delta n = \left(\frac{2nvv_s}{v^2-v_s^2}\right) \) ......(3)
यदि \( v_s \ll v \) हो, तो \( v_s^2 \) को \( v^2 \) की तुलना में नगण्य मान सकते हैं।
\( \implies \Delta n = \left(\frac{2nvv_s}{v^2}\right) \)
\( \implies \Delta n = \left(\frac{2nv_s}{v}\right) \) ......(4)
डॉप्लर प्रभाव जब श्रोता गतिशील हो और ध्वनि स्रोत स्थिर हो (Doppler Effect when Listener in Motion and Source at Rest)
(i) श्रोता, ध्वनि स्रोत की ओर गतिशील है:
मान लीजिए शुरू में ध्वनि स्रोत S और श्रोता O स्थिर हैं। तो श्रोता एक सेकंड में स्रोत से आने वाली \( n \) तरंगें प्राप्त करता है।

चित्र : (i) ध्वनि स्रोत तथा श्रोता स्थिर (ii) श्रोता, स्रोत की ओर गतिशील (iii) श्रोता, स्रोत से परे गतिशील
श्रोता एक सेकंड में \( v_o \) दूरी स्रोत की ओर तय करके O' पर आ जाता है। अब वह \( n \) तरंगों के अलावा \( v_o \) दूरी में स्थित \( \Delta n \) तरंगों को भी सुन सकेगा।
ध्वनि तरंग की आवृत्ति \( n' \) होगी, जब श्रोता \( v_o \) वेग से स्रोत की ओर चलता है।
\( \lambda \) का मान रखने पर:
\( n' = \frac{v+v_o}{\lambda} \)
\( \implies n' = \frac{v+v_o}{v/n} \)
\( \implies n' = n \left(\frac{v+v_o}{v}\right) \) ......(1)
इस स्थिति में आभासी आवृत्ति \( n' \) वास्तविक आवृत्ति \( n \) से ज्यादा होगी।
(ii) श्रोता, ध्वनि स्रोत से दूर जा रहा है:
यदि श्रोता \( v_o \) वेग से ध्वनि स्रोत से दूर जाता है, तो वह प्रति सेकंड \( \Delta n \) तरंगें कम प्राप्त करेगा। इसलिए, श्रोता को एक सेकंड में मिलने वाली कुल तरंगों की संख्या या आभासी आवृत्ति \( n'' \) होगी:
\( n'' = n - \Delta n \)
\( \implies n'' = \frac{v-v_o}{\lambda} \)
\( \implies n'' = \frac{v-v_o}{v/n} \)
\( \implies n'' = n \left(\frac{v-v_o}{v}\right) \) ......(2)
इस स्थिति में आभासी आवृत्ति \( n'' \) वास्तविक आवृत्ति \( n \) से कम होगी।
(iii) श्रोता, स्थिर स्रोत को पार करता है:
जब श्रोता \( v_o \) वेग से स्थिर स्रोत की ओर जा रहा है, तो आभासी आवृत्ति \( n' = n\left(\frac{v}{v-v_{s}}\right) \) होती है।
जब श्रोता \( v_o \) वेग से स्थिर स्रोत को पार करके दूर जा रहा है, तो आभासी आवृत्ति \( n'' = n\left(\frac{v}{v+v_{s}}\right) \) होती है।
इस प्रकार आभासी आवृत्ति में परिवर्तन \( \Delta n = n' - n'' \) होता है।
\( \implies \Delta n = n\left(\frac{v+v_o}{v}\right) - n\left(\frac{v-v_o}{v}\right) \)
\( \implies \Delta n = \frac{n}{v} [(v+v_o) - (v-v_o)] \)
\( \implies \Delta n = \frac{n}{v} (2v_o) \)
\( \implies \Delta n = \left(\frac{2v_o}{v}\right) n \) ......(3)
In simple words: डॉप्लर प्रभाव वह घटना है जहां ध्वनि की आवृत्ति बदलती हुई महसूस होती है जब स्रोत और सुनने वाले के बीच कोई गति होती है। अगर स्रोत पास आ रहा है, तो आवृत्ति ज्यादा लगेगी; अगर दूर जा रहा है, तो कम लगेगी। यह गति तरंगों को संकुचित या फैला देती है, जिससे सुनने वाले को अलग आवृत्ति मिलती है।
🎯 Exam Tip: डाप्लर प्रभाव के प्रश्नों में, हमेशा ध्यान रखें कि कौन गतिमान है (स्रोत या श्रोता) और किस दिशा में गति हो रही है। वेगों के चिन्हों को सही ढंग से प्रयोग करें।
RBSE Class 11 Physics Chapter 9 आंकिक प्रश्न
Question 1. एकविमीय तरंग का अवकल समीकरण लिखिए तथा बताओ कि निम्न में से कौन-कौन से समीकरण एकविमीय तरंग के सम्भव हल हैं।
(i) \( y = 2 \sin x \cos vt \)
(ii) \( y = 5 \sin 2x \cos vt \)
Answer: एकविमीय तरंग का अवकल समीकरण है:
\( \frac{d^2 y}{dx^2} = \frac{1}{v^2} \frac{d^2 y}{dt^2} \)
हमें यह जाँच करना है कि दिए गए समीकरण इस अवकल समीकरण के हल हैं या नहीं।
(i) \( y = 2 \sin x \cos vt \)
\( y \) का \( x \) के सापेक्ष प्रथम अवकलन करने पर:
\( \frac{dy}{dx} = 2 \cos x \cos vt \)
\( y \) का \( x \) के सापेक्ष द्वितीय अवकलन करने पर:
\( \frac{d^2 y}{dx^2} = -2 \sin x \cos vt \) ......(2)
अब \( y = 2 \sin x \cos vt \) का \( t \) के सापेक्ष प्रथम अवकलन करने पर:
\( \frac{dy}{dt} = 2 \sin x (-v \sin vt) = -2v \sin x \sin vt \)
\( y \) का \( t \) के सापेक्ष द्वितीय अवकलन करने पर:
\( \frac{d^2 y}{dt^2} = -2v \sin x (v \cos vt) = -2v^2 \sin x \cos vt \)
समीकरण (2) से मान रखने पर:
\( \frac{d^2 y}{dt^2} = v^2 (-2 \sin x \cos vt) \)
\( \implies \frac{d^2 y}{dt^2} = v^2 \frac{d^2 y}{dx^2} \)
या \( \frac{1}{v^2} \frac{d^2 y}{dt^2} = \frac{d^2 y}{dx^2} \)
अतः \( y = 2 \sin x \cos vt \) एकविमीय तरंग का संभव हल है।
(ii) \( y = 5 \sin 2x \cos vt \)
\( y \) का \( x \) के सापेक्ष प्रथम अवकलन करने पर:
\( \frac{dy}{dx} = 5 (2 \cos 2x) \cos vt = 10 \cos 2x \cos vt \)
\( y \) का \( x \) के सापेक्ष द्वितीय अवकलन करने पर:
\( \frac{d^2 y}{dx^2} = 10 (-2 \sin 2x) \cos vt = -20 \sin 2x \cos vt \) ......(3)
अब \( y = 5 \sin 2x \cos vt \) का \( t \) के सापेक्ष प्रथम अवकलन करने पर:
\( \frac{dy}{dt} = 5 \sin 2x (-v \sin vt) = -5v \sin 2x \sin vt \)
\( y \) का \( t \) के सापेक्ष द्वितीय अवकलन करने पर:
\( \frac{d^2 y}{dt^2} = -5v \sin 2x (v \cos vt) = -5v^2 \sin 2x \cos vt \)
समीकरण (3) से मान रखने पर:
\( \frac{d^2 y}{dt^2} = \frac{5v^2}{20} (-20 \sin 2x \cos vt) = \frac{v^2}{4} \frac{d^2 y}{dx^2} \)
\( \implies \frac{d^2 y}{dt^2} = \frac{v^2}{4} \frac{d^2 y}{dx^2} \)
यह समीकरण एकविमीय तरंग के अवकल समीकरण के समरूप नहीं है।
अतः समीकरण \( y = 5 \sin 2x \cos vt \) एकविमीय तरंग का संभव हल नहीं है।
In simple words: एकविमीय तरंग का समीकरण बताता है कि समय और दूरी के साथ तरंग का आकार कैसे बदलता है। यदि कोई समीकरण इस नियम का पालन करता है, तो वह तरंग को दिखा सकता है। पहले समीकरण ने इस नियम का पालन किया, जबकि दूसरे समीकरण ने नहीं किया।
🎯 Exam Tip: किसी भी तरंग समीकरण को हल के रूप में जांचने के लिए, उसे दो बार समय के सापेक्ष और दो बार स्थिति के सापेक्ष अवकलित करें, फिर देखें कि क्या यह मानक तरंग समीकरण \( \frac{d^2 y}{dx^2} = \frac{1}{v^2} \frac{d^2 y}{dt^2} \) को संतुष्ट करता है।
Question 2. 500 हर्ट्ज की आवृत्ति का एक ध्वनि स्रोत वायु में अनुदैर्ध्य तरंगें उत्पत्र कर रहा है। तरंग में दो क्रमागत विरलनों के बीच की दूरी 0.64 मीटर है तथा वायु-कण के कम्पन का आयाम 0.002 मीटर है। इस तरंग का दूरी-विस्थापन समीकरण ज्ञात कीजिए। क्षण t=2 सेकण्ड पर तरंग की दिशा में मूल बिन्दु से 10 मीटर दूरी पर स्थित कण का विस्थापन ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया गया है:
आवृत्ति \( n = 500 \text{ Hz} \)
दो क्रमागत विरलनों के बीच की दूरी = \( \lambda = 0.64 \text{ मीटर} \)
आयाम \( a = 0.002 \text{ मीटर} \)
तरंग का वेग \( v = n\lambda = 500 \times 0.64 = 320 \text{ मीटर/सेकण्ड} \)
कोणीय आवृत्ति \( \omega = 2\pi n = 2\pi \times 500 = 1000\pi \text{ रेडियन/सेकण्ड} \)
तरंग संख्या \( K = \frac{2\pi}{\lambda} = \frac{2\pi}{0.64} = \frac{2 \times 3.14}{0.64} = 9.8125 \text{ रेडियन/मीटर} \)
तरंग का दूरी-विस्थापन समीकरण है:
\( y = a \sin(Kx - \omega t) \)
मान रखने पर:
\( y = 0.002 \sin(9.8125x - 1000\pi t) \)
हमें \( t=2 \) सेकंड पर मूल बिंदु से \( x=10 \) मीटर दूरी पर स्थित कण का विस्थापन ज्ञात करना है।
\( y = 0.002 \sin(9.8125 \times 10 - 1000\pi \times 2) \)
\( \implies y = 0.002 \sin(98.125 - 2000\pi) \)
चूंकि \( 2000\pi \) एक \( 2\pi \) का पूर्णांक गुणा है, \( \sin(\theta - 2000\pi) = \sin(\theta) \).
\( \implies y = 0.002 \sin(98.125) \)
यहां \( 98.125 \) रेडियन में है। इसे डिग्री में बदलने के लिए \( \frac{180}{\pi} \) से गुणा करें:
\( 98.125 \times \frac{180}{3.14159} \approx 5621.46^\circ \)
अब, \( 5621.46^\circ \) का \( \sin \) मान ज्ञात करें। \( 5621.46 = 15 \times 360 + 21.46 \)
तो \( \sin(5621.46^\circ) \approx \sin(21.46^\circ) \approx 0.3659 \)
\( y = 0.002 \times 0.3659 \)
\( y \approx 0.0007318 \text{ मीटर} \)
विस्थापन \( y = 0.7318 \text{ मिमी} \)
In simple words: हमें तरंग का समीकरण ज्ञात करना था, जिसमें आयाम, तरंग संख्या और कोणीय आवृत्ति का उपयोग किया जाता है। फिर, दिए गए समय और दूरी पर कण का विस्थापन ज्ञात करने के लिए, हमने समीकरण में मान रखे और उसे हल किया।
🎯 Exam Tip: दूरी-विस्थापन समीकरण में \( \sin \) फलन के तर्क (argument) को रेडियन में ही रखें, जब तक कि स्पष्ट रूप से डिग्री में बदलने को न कहा जाए। MathJax में कोणीय आवृत्ति \( \omega \) और तरंग संख्या \( K \) का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 3. एक डोरी पर चलती हुई तरंग का समीकरण निम्न है- \( y = 10 \sin \pi (0.01x – 2.00t) \) जहाँ y तथा x cm में तथा t सेकण्ड में है। तरंग का आयाम, आवृत्ति तथा वेग ज्ञात कीजिए। किसी क्षण 40.0 cm की दूरी पर स्थित दो कणों के बीच कलान्तर ज्ञात कीजिए।
Answer: तरंग का समीकरण है: \( y = 10 \sin \pi (0.01x – 2.00t) \)
इसे हम ऐसे भी लिख सकते हैं: \( y = 10 \sin (0.01\pi x – 2.00 \pi t) \)
यह समीकरण प्रगामी तरंग के सामान्य समीकरण \( y = a \sin (Kx - \omega t) \) जैसा है, जहाँ a आयाम, K तरंग संख्या और \( \omega \) कोणीय आवृत्ति है।
तुलना करने पर, हमें ये मान मिलते हैं:
आयाम \( a = 10 \) सेमी.
तरंग संख्या \( K = 0.01\pi \)
कोणीय आवृत्ति \( \omega = 2.00\pi \)
आवृत्ति (n) निकालना:
हम जानते हैं कि \( \omega = 2\pi n \).
इसलिए, \( 2.00\pi = 2\pi n \)
\( n = 1 \) प्रति सेकण्ड या 1 Hz.
तरंग वेग (v) निकालना:
हम जानते हैं कि \( v = \frac{\omega}{K} \).
इसलिए, \( v = \frac{2.00\pi}{0.01\pi} \)
\( v = 200 \) सेमी./सेकण्ड.
कलान्तर निकालना:
हम जानते हैं कि \( K = \frac{2\pi}{\lambda} \).
इसलिए, \( 0.01\pi = \frac{2\pi}{\lambda} \)
\( \lambda = \frac{2\pi}{0.01\pi} = 200 \) सेमी.
कलान्तर का सूत्र \( \Delta\phi = \frac{2\pi}{\lambda} \Delta x \) है, जहाँ \( \Delta x \) कणों के बीच की दूरी है.
दूरी \( \Delta x = 40.0 \) सेमी.
तो, \( \Delta\phi = \frac{2\pi}{200} \times 40 \)
\( \Delta\phi = \frac{80\pi}{200} = \frac{2\pi}{5} \) रेडियन.
In simple words: हमने तरंग समीकरण से आयाम, आवृत्ति और वेग निकाला. फिर, तरंगदैर्ध्य का उपयोग करके दो कणों के बीच के कलान्तर की गणना की. इससे पता चलता है कि तरंग के गुण उसकी चाल और फैलाव से कैसे जुड़े हैं.
🎯 Exam Tip: तरंग के दिए गए समीकरण से विभिन्न मापदंडों (जैसे आयाम, आवृत्ति, वेग और कलान्तर) की गणना करने के लिए मानक तरंग समीकरणों से तुलना करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। हमेशा सही इकाइयों का उपयोग करें।
प्रश्न 4. 1.0 मीटर लम्बे खिंचे हुए स्टील के तार की मूल आवृत्ति 250 हर्ट्ज है। स्टील का घनत्व 8000 kg/m³ है। (i) तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल ज्ञात कीजिए (ii) तार के अनुदैर्ध्य प्रतिबल की गणना कीजिए (iii) यदि तार का तनाव 2% बढ़ा दिया जाए तो आवृत्ति में प्रतिशत परिवर्तन की गणना कीजिए।
Answer: हमें दी गई जानकारी यह है:
तार की लम्बाई \( l = 1.0 \) मीटर
मूल आवृत्ति \( n = 250 \) Hz
स्टील का घनत्व \( \rho = 8000 \) kg/m³
(i) तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल (वेग) ज्ञात करना:
हम जानते हैं कि मूल आवृत्ति के लिए \( n = \frac{v}{2l} \), जहाँ \( v \) तरंग का वेग है।
तो, \( v = 2nl \)
\( v = 2 \times 250 \times 1.0 \)
\( v = 500 \) मीटर/सेकण्ड.
(ii) तार के अनुदैर्ध्य प्रतिबल की गणना करना:
अनुप्रस्थ तरंग का वेग \( v = \sqrt{\frac{T}{m}} \) होता है, जहाँ \( T \) तनाव और \( m \) प्रति इकाई लम्बाई का द्रव्यमान है।
प्रति इकाई लम्बाई का द्रव्यमान \( m = \rho A \), जहाँ \( A \) तार का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।
तो, \( v = \sqrt{\frac{T}{\rho A}} \).
हमें अनुदैर्ध्य प्रतिबल ज्ञात करना है, जो \( \text{प्रतिबल} = \frac{T}{A} \) है।
इसलिए, \( v = \sqrt{\frac{\text{प्रतिबल}}{\rho}} \)
\( v^2 = \frac{\text{प्रतिबल}}{\rho} \)
प्रतिबल \( = v^2 \rho \)
प्रतिबल \( = (500)^2 \times 8000 \)
प्रतिबल \( = 250000 \times 8000 \)
प्रतिबल \( = 2 \times 10^9 \) न्यूटन/मीटर².
(iii) आवृत्ति में प्रतिशत परिवर्तन ज्ञात करना जब तनाव 2% बढ़ता है:
हम जानते हैं कि \( n \propto \sqrt{T} \).
यदि नया तनाव \( T' = T + 0.02T = 1.02T \) है।
तो नई आवृत्ति \( n' \) के लिए, \( \frac{n'}{n} = \sqrt{\frac{T'}{T}} \)
\( \frac{n'}{n} = \sqrt{\frac{1.02T}{T}} = \sqrt{1.02} \)
\( \sqrt{1.02} \approx 1.00995 \approx 1.01 \)
\( \frac{n'}{n} = 1.01 \)
\( n' = 1.01n \)
प्रतिशत परिवर्तन \( = \frac{n' - n}{n} \times 100\% \)
प्रतिशत परिवर्तन \( = \frac{1.01n - n}{n} \times 100\% \)
प्रतिशत परिवर्तन \( = \frac{0.01n}{n} \times 100\% \)
प्रतिशत परिवर्तन \( = 0.01 \times 100\% = 1\% \).
In simple words: हमने तार में तरंग की चाल, प्रतिबल और तनाव में बदलाव से आवृत्ति में परिवर्तन को पता किया. वेग तनाव और घनत्व पर निर्भर करता है, और आवृत्ति तनाव के वर्गमूल के समानुपाती होती है.
🎯 Exam Tip: मूल आवृत्ति के सूत्र और तरंग वेग के सूत्र का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है। तनाव और आवृत्ति के बीच संबंध \( n \propto \sqrt{T} \) को याद रखें और प्रतिशत परिवर्तन की गणना ध्यान से करें।
प्रश्न 5. \( 5.5 \times 10^3 \) kg/m³ घनत्व की एक धातु में 400 कम्पन/सेकण्ड आवृत्ति की अनुदैर्ध्य तरंगों की तरंगदैर्ध्य ज्ञात करो। धातु का यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( 8.8 \times 10^{10} \) न्यूटन/मीटर² है।
Answer: हमें दी गई जानकारी यह है:
धातु का घनत्व \( \rho = 5.5 \times 10^3 \) kg/m³
आवृत्ति \( n = 400 \) कम्पन/सेकण्ड (Hz)
यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y = 8.8 \times 10^{10} \) न्यूटन/मीटर²
अनुदैर्ध्य तरंग का वेग \( v = \sqrt{\frac{Y}{\rho}} \) होता है।
पहले हम तरंग का वेग ज्ञात करेंगे:
\( v = \sqrt{\frac{8.8 \times 10^{10}}{5.5 \times 10^3}} \)
\( v = \sqrt{1.6 \times 10^7} \)
\( v = \sqrt{16 \times 10^6} \)
\( v = 4 \times 10^3 \) मीटर/सेकण्ड
या \( v = 4000 \) मीटर/सेकण्ड.
अब तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) ज्ञात करेंगे।
हम जानते हैं कि \( v = n\lambda \).
तो, \( \lambda = \frac{v}{n} \)
\( \lambda = \frac{4000}{400} \)
\( \lambda = 10 \) मीटर.
In simple words: हमने धातु में तरंग की चाल निकालने के लिए यंग प्रत्यास्थता गुणांक और घनत्व का उपयोग किया. फिर, आवृत्ति और चाल से तरंगदैर्ध्य को ज्ञात किया.
🎯 Exam Tip: अनुदैर्ध्य तरंगों के वेग के लिए सही सूत्र \( v = \sqrt{\frac{Y}{\rho}} \) का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि आप गणनाओं में घातों को सही ढंग से संभालें।
प्रश्न 6. यदि एक तरंग का संचरण नियतांक \( 2.8 \times 10^4 \) प्रति मीटर है और इसका वेग 400 मीटर प्रति सेकण्ड है तो तरंग के लिए तरंगदैर्घ्य, तरंग संख्या तथा तरंग आवृत्ति ज्ञात करो।
Answer: हमें दी गई जानकारी यह है:
संचरण नियतांक \( K = 2.8 \times 10^4 \) प्रति मीटर
वेग \( v = 400 \) मीटर/सेकण्ड
(i) तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) ज्ञात करना:
हम जानते हैं कि \( K = \frac{2\pi}{\lambda} \).
इसलिए, \( \lambda = \frac{2\pi}{K} \)
\( \lambda = \frac{2 \times 3.14}{2.8 \times 10^4} \)
\( \lambda = \frac{6.28}{2.8} \times 10^{-4} \)
\( \lambda = 2.2428 \times 10^{-4} \) मीटर
लगभग \( \lambda = 2.24 \times 10^{-4} \) मीटर.
(ii) तरंग संख्या (Wave number, \( \bar{\nu} \)) ज्ञात करना:
तरंग संख्या \( \bar{\nu} = \frac{1}{\lambda} \) होती है।
\( \bar{\nu} = \frac{1}{2.24 \times 10^{-4}} \)
\( \bar{\nu} \approx 0.4464 \times 10^4 \)
\( \bar{\nu} \approx 4.46 \times 10^3 \) प्रति मीटर.
(iii) आवृत्ति \( n \) ज्ञात करना:
हम जानते हैं कि \( v = n\lambda \).
इसलिए, \( n = \frac{v}{\lambda} \)
\( n = \frac{400}{2.24 \times 10^{-4}} \)
\( n \approx 1785714 \) Hz
लगभग \( n = 1.78 \times 10^6 \) Hz.
In simple words: हमने दिए गए संचरण नियतांक और वेग से तरंगदैर्ध्य, तरंग संख्या और आवृत्ति की गणना की. ये मान तरंग के प्रसार के गुणों को बताते हैं.
🎯 Exam Tip: तरंग समीकरणों और उनके मापदंडों के बीच संबंधों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे \( K = \frac{2\pi}{\lambda} \) और \( v = n\lambda \)। गणना करते समय इकाइयों पर ध्यान दें।
प्रश्न 8. एक सरल आवर्ती तरंग 100 मीटर प्रति सेकण्ड के वेग से धनात्मक दिशा में जा रही है। तरंग का आयाम 2 cm तथा आवृत्ति 100 कम्पन सेकण्ड-1 (Hz) है।t = 5 सेकण्ड पर मूल बिन्दु से x = 2 मीटर पर किसी कण का विस्थापन, वेग तथा त्वरण ज्ञात करो।
Answer: हमें दी गई जानकारी यह है:
वेग \( v = 100 \) मीटर/सेकण्ड
आयाम \( a = 2 \) सेमी \( = 0.02 \) मीटर
आवृत्ति \( n = 100 \) Hz
समय \( t = 5 \) सेकण्ड
स्थान \( x = 2 \) मीटर
पहले हम \( \omega \) और \( K \) ज्ञात करेंगे:
कोणीय आवृत्ति \( \omega = 2\pi n = 2\pi \times 100 = 200\pi \) रेडियन/सेकण्ड.
हम जानते हैं कि \( v = \frac{\omega}{K} \).
तो, \( K = \frac{\omega}{v} = \frac{200\pi}{100} = 2\pi \) प्रति मीटर.
प्रगामी तरंग का समीकरण धनात्मक x-दिशा में है:
\( y(x,t) = a \sin(Kx - \omega t) \)
\( y(x,t) = 0.02 \sin(2\pi x - 200\pi t) \)
(i) विस्थापन \( y \) ज्ञात करना:
\( x = 2 \) मीटर और \( t = 5 \) सेकण्ड पर:
\( y = 0.02 \sin(2\pi \times 2 - 200\pi \times 5) \)
\( y = 0.02 \sin(4\pi - 1000\pi) \)
\( y = 0.02 \sin(-996\pi) \)
चूंकि \( \sin(n\pi) = 0 \) किसी भी पूर्णांक \( n \) के लिए, तो \( \sin(-996\pi) = 0 \).
इसलिए, \( y = 0.02 \times 0 = 0 \) मीटर.
(ii) वेग \( V \) ज्ञात करना:
कण का वेग \( V = \frac{dy}{dt} = -a\omega \cos(Kx - \omega t) \)
\( V = -0.02 \times 200\pi \cos(2\pi x - 200\pi t) \)
\( V = -4\pi \cos(2\pi \times 2 - 200\pi \times 5) \)
\( V = -4\pi \cos(-996\pi) \)
चूंकि \( \cos(n\pi) = (-1)^n \), तो \( \cos(-996\pi) = \cos(996\pi) = 1 \) (क्योंकि 996 एक सम संख्या है).
इसलिए, \( V = -4\pi \times 1 = -4\pi \) मीटर/सेकण्ड.
\( V \approx -4 \times 3.14 = -12.56 \) मीटर/सेकण्ड.
(iii) त्वरण \( a_{\text{त्वरण}} \) ज्ञात करना:
कण का त्वरण \( a_{\text{त्वरण}} = \frac{d^2 y}{dt^2} = -a\omega^2 \sin(Kx - \omega t) \)
\( a_{\text{त्वरण}} = -0.02 \times (200\pi)^2 \sin(2\pi x - 200\pi t) \)
\( a_{\text{त्वरण}} = -0.02 \times (200\pi)^2 \sin(-996\pi) \)
चूंकि \( \sin(-996\pi) = 0 \).
इसलिए, \( a_{\text{त्वरण}} = -0.02 \times (200\pi)^2 \times 0 = 0 \) मीटर/सेकण्ड².
In simple words: हमने एक दिए गए स्थान और समय पर तरंग के विस्थापन, वेग और त्वरण की गणना की. इस स्थिति में, विस्थापन और त्वरण शून्य हैं जबकि वेग नकारात्मक है, जो इंगित करता है कि कण अपनी माध्य स्थिति से नीचे की ओर गति कर रहा है.
🎯 Exam Tip: सरल आवर्ती तरंग के समीकरण, वेग और त्वरण के सूत्रों को याद रखें। कोण की गणना करते समय \( \pi \) के गुणजों का उपयोग करने से त्रुटियों से बचा जा सकता है, विशेष रूप से \( \sin(n\pi) \) और \( \cos(n\pi) \) के मानों के लिए।
प्रश्न 9. 50 मीटर लम्बे 10 kg भार से खींचे गए तार के मूल स्वर की आवृत्ति ज्ञात करो जबकि 1 मीटर लम्बे तार का भार 2.45 ग्राम है। (g = 980 cm/s² सेमी./सेकण्ड²)
Answer: हमें दी गई जानकारी यह है:
तार की कुल लम्बाई \( L = 50 \) मीटर
तनाव बल \( T \) के लिए भार \( M = 10 \) kg, तो \( T = Mg \).
1 मीटर लम्बे तार का द्रव्यमान \( = 2.45 \) ग्राम \( = 2.45 \times 10^{-3} \) kg.
गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g = 9.8 \) मीटर/सेकण्ड² (हमने 980 सेमी/सेकण्ड² को मीटर/सेकण्ड² में बदला है).
पहले, तनाव \( T \) की गणना करेंगे:
\( T = Mg = 10 \times 9.8 = 98 \) न्यूटन.
प्रति इकाई लम्बाई का द्रव्यमान \( m \):
1 मीटर लम्बे तार का द्रव्यमान 2.45 ग्राम है, इसलिए \( m = 2.45 \times 10^{-3} \) kg/मीटर.
तार में अनुप्रस्थ तरंग का वेग \( v = \sqrt{\frac{T}{m}} \) होता है।
\( v = \sqrt{\frac{98}{2.45 \times 10^{-3}}} \)
\( v = \sqrt{\frac{98 \times 10^3}{2.45}} \)
\( v = \sqrt{40 \times 10^3} = \sqrt{40000} \)
\( v = 200 \) मीटर/सेकण्ड.
मूल स्वर की आवृत्ति \( n = \frac{v}{2L} \) होती है।
\( n = \frac{200}{2 \times 50} \)
\( n = \frac{200}{100} = 2 \) Hz.
In simple words: हमने तार का तनाव और प्रति इकाई लम्बाई का द्रव्यमान निकाला. फिर, इन मानों का उपयोग करके तार में तरंग की चाल ज्ञात की. अंत में, इस चाल और तार की कुल लम्बाई का उपयोग करके मूल स्वर की आवृत्ति की गणना की.
🎯 Exam Tip: तनाव की गणना (T=Mg) और प्रति इकाई लम्बाई के द्रव्यमान (m) को सही ढंग से बदलना सुनिश्चित करें। मूल आवृत्ति के लिए सूत्र \( n = \frac{v}{2L} \) का उपयोग करते समय, लम्बाई \( L \) को कुल लम्बाई के रूप में लेना याद रखें, न कि प्रति इकाई लम्बाई के रूप में।
प्रश्न 10. 100 cm लम्बा और 1.8 mm व्यास वाला तांबे का तार (घनत्व 8.4) 20 kg भार से खींचा गया है। मूल स्वर से कम्पन होने पर इसकी आवृत्ति ज्ञात करो।
Answer: हमें दी गई जानकारी यह है:
तार की लम्बाई \( l = 100 \) cm \( = 1 \) मीटर
व्यास \( = 1.8 \) mm, तो त्रिज्या \( r = \frac{1.8}{2} = 0.9 \) mm \( = 0.9 \times 10^{-3} \) मीटर
तांबे का घनत्व \( \rho = 8.4 \) g/cm³ \( = 8400 \) kg/m³
तनाव बल \( T \) के लिए भार \( M = 20 \) kg.
गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g = 9.8 \) मीटर/सेकण्ड² (यदि 980 cm/sec² दिया है, तो यह 9.8 m/sec² है).
पहले, तनाव \( T \) की गणना करेंगे:
\( T = Mg = 20 \times 9.8 = 196 \) न्यूटन.
प्रति इकाई लम्बाई का द्रव्यमान \( m \):
\( m = \text{अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल} \times \text{घनत्व} \)
\( m = \pi r^2 \rho \)
\( m = \pi \times (0.9 \times 10^{-3})^2 \times 8400 \)
\( m = 3.14159 \times 0.81 \times 10^{-6} \times 8400 \)
\( m \approx 21.36 \) ग्राम/मीटर \( \approx 0.02136 \) kg/मीटर.
मूल स्वर की आवृत्ति \( n = \frac{1}{2l} \sqrt{\frac{T}{m}} \) होती है।
\( n = \frac{1}{2 \times 1} \sqrt{\frac{196}{0.02136}} \)
\( n = \frac{1}{2} \sqrt{9176.02} \)
\( n = \frac{1}{2} \times 95.79 \)
\( n \approx 47.9 \) Hz.
लगभग \( n = 48 \) Hz.
In simple words: हमने तार का तनाव और प्रति इकाई लम्बाई का द्रव्यमान निकाला. फिर, इन मानों और तार की लम्बाई का उपयोग करके मूल स्वर की आवृत्ति की गणना की.
🎯 Exam Tip: सभी इकाइयों को SI प्रणाली में बदलना महत्वपूर्ण है (जैसे cm को मीटर में, mm को मीटर में, g/cm³ को kg/m³ में)। प्रति इकाई लम्बाई के द्रव्यमान \( m = \pi r^2 \rho \) का सही उपयोग करना सुनिश्चित करें।
प्रश्न 11. एक स्वरित्र द्विभुज के स्वर में और 25 cm खींचे हुए तार के स्वर में स्वरेक्य है। यदि तार की लम्बाई बदल कर 25.5 cm कर दी जाये तथा तनाव वही रहने पर 3 विस्पन्द प्रति सेकण्ड उत्पन्न होते हैं। स्वरित्र की आवृत्ति ज्ञात करो।
Answer: हमें दी गई जानकारी यह है:
पहली स्थिति में तार की लम्बाई \( l_1 = 25 \) cm है, और यह स्वरित्र द्विभुज के साथ स्वरेक्य में है।
दूसरी स्थिति में तार की लम्बाई \( l_2 = 25.5 \) cm है, और 3 विस्पन्द प्रति सेकण्ड उत्पन्न होते हैं।
मान लीजिए स्वरित्र की आवृत्ति \( n \) है।
तार की आवृत्ति \( n_t = \frac{1}{2l} \sqrt{\frac{T}{m}} \).
स्वरेक्य की स्थिति में, तार की आवृत्ति स्वरित्र की आवृत्ति के बराबर होती है:
\( n = \frac{1}{2l_1} \sqrt{\frac{T}{m}} \) ...(1)
जब तार की लम्बाई \( l_2 = 25.5 \) cm की जाती है, तो तार की आवृत्ति \( n_t' = \frac{1}{2l_2} \sqrt{\frac{T}{m}} \).
चूंकि \( l_2 > l_1 \), तो \( n_t' < n_t \).
इसलिए, स्वरित्र की आवृत्ति और तार की नई आवृत्ति के बीच का अंतर 3 Hz है:
\( n - n_t' = 3 \) ...(2)
समीकरण (1) और \( n_t' \) के सूत्र से:
\( n_t' = n \left(\frac{l_1}{l_2}\right) \)
\( n_t' = n \left(\frac{25}{25.5}\right) \)
\( n_t' = n \left(\frac{50}{51}\right) \).
इस मान को समीकरण (2) में रखने पर:
\( n - n \left(\frac{50}{51}\right) = 3 \)
\( n \left(1 - \frac{50}{51}\right) = 3 \)
\( n \left(\frac{51 - 50}{51}\right) = 3 \)
\( n \left(\frac{1}{51}\right) = 3 \)
\( n = 3 \times 51 \)
\( n = 153 \) Hz.
In simple words: पहले तार की आवृत्ति स्वरित्र के बराबर थी. लम्बाई बदलने पर तार की आवृत्ति बदल गई, और इस बदलाव से विस्पन्द पैदा हुए. हमने इस जानकारी का उपयोग करके स्वरित्र की असली आवृत्ति निकाली.
🎯 Exam Tip: याद रखें कि जब तार की लम्बाई बढ़ती है तो उसकी आवृत्ति घटती है। विस्पन्द की संख्या दो आवृत्तियों के बीच का अंतर होती है। अनुपात के नियम का उपयोग करके गणनाओं को सरल करें।
प्रश्न 13. दोनों सिरों पर बद्ध डोरी के अनुप्रस्थ कम्पन का समीकरण \( y = (x, t) = 0.3 \sin \left(\frac{2\pi}{3} x\right) \cos (120\pi t) \) है। जहाँ y तथा x मीटर में तथा t सेकण्ड में है। डोरी की लम्बाई 1.5 मीटर तथा द्रव्यमान 0.002 kg है तो (i) x = 0.5 मीटर पर अधिकतम विस्थापन ज्ञात करो (ii) तार पर निस्पन्दों के स्थान का निर्धारण करो। (iii) तरंग वेग ज्ञात करो। (iv) x = 0.75 मीटर तथा t = 0.25 सेकण्ड पर स्थित कण का वेग ज्ञात करो।
Answer: हमें दिया गया समीकरण है:
\( y(x, t) = 0.3 \sin \left(\frac{2\pi}{3} x\right) \cos (120\pi t) \)
इसे मानक अप्रगामी तरंग समीकरण \( y(x,t) = A \sin(Kx) \cos(\omega t) \) से तुलना करने पर:
आयाम \( A = 0.3 \) मीटर
तरंग संख्या \( K = \frac{2\pi}{3} \) प्रति मीटर
कोणीय आवृत्ति \( \omega = 120\pi \) रेडियन/सेकण्ड
(i) \( x = 0.5 \) मीटर पर अधिकतम विस्थापन:
अधिकतम विस्थापन \( y_{max} \) वह मान है जब \( \cos(\omega t) = \pm 1 \) होता है।
तो, \( y_{max} (x) = A |\sin(Kx)| \)
\( y_{max} (0.5) = 0.3 \left|\sin\left(\frac{2\pi}{3} \times 0.5\right)\right| \)
\( y_{max} (0.5) = 0.3 \left|\sin\left(\frac{\pi}{3}\right)\right| \)
\( y_{max} (0.5) = 0.3 \times \frac{\sqrt{3}}{2} \)
\( y_{max} (0.5) = 0.3 \times 0.866 \approx 0.2598 \) मीटर.
लगभग \( 0.26 \) मीटर.
(ii) तार पर निस्पन्दों के स्थान:
निस्पन्द वे बिंदु होते हैं जहाँ विस्थापन हमेशा शून्य होता है। यह तब होता है जब \( \sin(Kx) = 0 \).
तो, \( Kx = n\pi \), जहाँ \( n = 0, 1, 2, ... \)
\( \frac{2\pi}{3} x = n\pi \)
\( x = \frac{3n}{2} \)
डोरी की लम्बाई \( L = 1.5 \) मीटर है, तो \( x \) के मान \( 0 \) से \( 1.5 \) मीटर के बीच होंगे।
\( n = 0 \implies x = 0 \)
\( n = 1 \implies x = \frac{3}{2} = 1.5 \)
निस्पन्दों के स्थान \( x = 0 \) मीटर और \( x = 1.5 \) मीटर पर हैं। (ये दोनों सिरे हैं).
(iii) तरंग वेग ज्ञात करना:
पहले तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) और आवृत्ति \( f \) ज्ञात करेंगे।
तरंगदैर्ध्य \( \lambda = \frac{2\pi}{K} = \frac{2\pi}{2\pi/3} = 3 \) मीटर.
आवृत्ति \( f = \frac{\omega}{2\pi} = \frac{120\pi}{2\pi} = 60 \) Hz.
तरंग वेग \( v = f\lambda \)
\( v = 60 \times 3 = 180 \) मीटर/सेकण्ड.
(iv) \( x = 0.75 \) मीटर तथा \( t = 0.25 \) सेकण्ड पर कण का वेग:
कण का वेग \( V_y = \frac{\partial y}{\partial t} = \frac{\partial}{\partial t} \left[0.3 \sin\left(\frac{2\pi}{3} x\right) \cos(120\pi t)\right] \)
\( V_y = 0.3 \sin\left(\frac{2\pi}{3} x\right) [-120\pi \sin(120\pi t)] \)
\( V_y = -36\pi \sin\left(\frac{2\pi}{3} x\right) \sin(120\pi t) \)
मान रखने पर \( x = 0.75 \) मीटर और \( t = 0.25 \) सेकण्ड:
\( V_y = -36\pi \sin\left(\frac{2\pi}{3} \times 0.75\right) \sin(120\pi \times 0.25) \)
\( V_y = -36\pi \sin\left(\frac{1.5\pi}{3}\right) \sin(30\pi) \)
\( V_y = -36\pi \sin\left(\frac{\pi}{2}\right) \sin(30\pi) \)
चूंकि \( \sin(30\pi) = 0 \).
इसलिए, \( V_y = 0 \) मीटर/सेकण्ड.
In simple words: हमने दिए गए तरंग समीकरण से अधिकतम विस्थापन, निस्पन्दों की स्थिति, तरंग वेग और एक विशेष बिंदु पर कण का वेग निकाला. निस्पन्द वे बिंदु होते हैं जहाँ कण बिल्कुल नहीं हिलते, जबकि वेग समय और स्थान पर निर्भर करता है.
🎯 Exam Tip: अप्रगामी तरंगों के समीकरण से \( K \) और \( \omega \) के मानों को सही ढंग से निकालना महत्वपूर्ण है। निस्पन्दों के लिए \( \sin(Kx) = 0 \) और प्रस्पन्दों के लिए \( |\sin(Kx)| = 1 \) का उपयोग करें। वेग की गणना करते समय आंशिक अवकलन ध्यान से करें।
प्रश्न 15. ध्वनि के वेग को उस गैस में ज्ञात करो जिसमें 1 व 1.01 मीटर तरंगदैर्ध्य वाली दो तरंगें 3 सेकण्ड में 10 विस्पन्द पैदा करती हैं।
Answer: हमें दी गई जानकारी यह है:
पहली तरंग की तरंगदैर्ध्य \( \lambda_1 = 1 \) मीटर
दूसरी तरंग की तरंगदैर्ध्य \( \lambda_2 = 1.01 \) मीटर
समय \( t = 3 \) सेकण्ड में विस्पन्दों की संख्या \( = 10 \)
विस्पन्द आवृत्ति \( n_b = \frac{10}{3} \) Hz.
तरंगों की आवृत्ति \( f = \frac{v}{\lambda} \) होती है, जहाँ \( v \) ध्वनि का वेग है।
पहली तरंग की आवृत्ति \( f_1 = \frac{v}{\lambda_1} = \frac{v}{1} = v \).
दूसरी तरंग की आवृत्ति \( f_2 = \frac{v}{\lambda_2} = \frac{v}{1.01} \).
विस्पन्द आवृत्ति दो आवृत्तियों का अंतर होती है:
\( n_b = |f_1 - f_2| \)
चूंकि \( \lambda_2 > \lambda_1 \), तो \( f_2 < f_1 \).
\( n_b = f_1 - f_2 \)
\( \frac{10}{3} = v - \frac{v}{1.01} \)
\( \frac{10}{3} = v \left(1 - \frac{1}{1.01}\right) \)
\( \frac{10}{3} = v \left(\frac{1.01 - 1}{1.01}\right) \)
\( \frac{10}{3} = v \left(\frac{0.01}{1.01}\right) \)
\( v = \frac{10}{3} \times \frac{1.01}{0.01} \)
\( v = \frac{10}{3} \times 101 \)
\( v = \frac{1010}{3} \)
\( v \approx 336.67 \) मीटर/सेकण्ड.
In simple words: हमने तरंगों की आवृत्तियां निकाली, फिर उनके अंतर से विस्पन्द आवृत्ति को जोड़ा. इससे हमें गैस में ध्वनि की चाल पता चली. यह दिखाता है कि कैसे विस्पन्द का उपयोग ध्वनि की चाल को मापने के लिए किया जा सकता है.
🎯 Exam Tip: विस्पन्द आवृत्ति का सूत्र \( n_b = |f_1 - f_2| \) और तरंग वेग-आवृत्ति-तरंगदैर्ध्य संबंध \( f = \frac{v}{\lambda} \) को याद रखना महत्वपूर्ण है। गणना करते समय \( v \) को कॉमन फैक्टर के रूप में बाहर निकालने से समीकरण को हल करना आसान हो जाता है।
प्रश्न 16. करो जिसे 256 की आवृत्ति वाले स्वरित्र द्विभुज के साथ बजाने पर 6 विस्पन्द प्रति सेकण्ड तथा 253
Answer: यहाँ प्रश्न अधूरा है, लेकिन दी गई जानकारी से हम अज्ञात आवृत्ति की गणना कर सकते हैं।
मान लीजिए ज्ञात स्वरित्र द्विभुज की आवृत्ति \( f_1 = 256 \) Hz है।
जब स्वरित्र को अज्ञात आवृत्ति \( f_x \) वाले स्वरित्र के साथ बजाया जाता है, तो 6 विस्पन्द प्रति सेकण्ड उत्पन्न होते हैं।
इसका मतलब है कि \( |f_1 - f_x| = 6 \).
इसलिए, \( 256 - f_x = 6 \) या \( 256 - f_x = -6 \).
स्थिति 1: \( 256 - f_x = 6 \implies f_x = 256 - 6 = 250 \) Hz.
स्थिति 2: \( 256 - f_x = -6 \implies f_x = 256 + 6 = 262 \) Hz.
दूसरे भाग में "253" दिया गया है, जो शायद दूसरी ज्ञात आवृत्ति है। यदि ऐसा है, तो हम फिर से विस्पन्द की संख्या का उपयोग कर सकते हैं।
यदि अज्ञात आवृत्ति \( f_x \) को 253 Hz वाले स्वरित्र के साथ बजाया जाता है, और विस्पन्दों की संख्या दी गई है, मान लीजिए कि यह 3 Hz है (जो अक्सर प्रश्न में होता है, यदि कुल विस्पन्द 6 और कुछ और विस्पन्द 3 हैं), तो:
\( |f_x - 253| = 3 \).
स्थिति 1: \( f_x - 253 = 3 \implies f_x = 256 \) Hz.
स्थिति 2: \( f_x - 253 = -3 \implies f_x = 250 \) Hz.
दोनों स्थितियों में, \( f_x = 250 \) Hz वह मान है जो दोनों शर्तों को पूरा करता है।
इसलिए, अज्ञात आवृत्ति 250 Hz होनी चाहिए।
In simple words: हमने दो अलग-अलग ज्ञात आवृत्तियों के साथ विस्पन्द की संख्या का उपयोग किया. विस्पन्द की संख्या हमेशा दो आवृत्तियों के बीच का अंतर होती है. इस तरीके से, हम एक अज्ञात ध्वनि स्रोत की आवृत्ति पता कर सकते हैं.
🎯 Exam Tip: विस्पन्द आवृत्ति को हमेशा दो आवृत्तियों के अंतर के रूप में याद रखें, जिसका अर्थ है कि अज्ञात आवृत्ति ज्ञात आवृत्ति से विस्पन्द संख्या अधिक या कम हो सकती है। दोनों संभावनाओं की जाँच करें।
प्रश्न 17. एक स्वरित्र स्वरमापी के खिंचे हुए तार की 0.49 मीटर एवं 0.50 मीटर लम्बाइयों में प्रत्येक से 4 विस्पन्द प्रति सेकण्ड उत्पन्न करता है। स्वरित्र की आवृत्तियाँ ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें दी गई जानकारी यह है:
तार की पहली लम्बाई \( l_1 = 0.49 \) मीटर
तार की दूसरी लम्बाई \( l_2 = 0.50 \) मीटर
विस्पन्दों की संख्या \( = 4 \) प्रति सेकण्ड दोनों मामलों में.
मान लीजिए स्वरित्र की आवृत्ति \( n \) है।
खिंचे हुए तार की आवृत्ति \( f = \frac{1}{2l} \sqrt{\frac{T}{m}} \) होती है, जहाँ \( T \) तनाव और \( m \) प्रति इकाई लम्बाई का द्रव्यमान है।
क्योंकि \( T \) और \( m \) समान हैं, तो तार की आवृत्ति \( f \propto \frac{1}{l} \).
इसका मतलब है कि तार की लम्बाई जितनी कम होगी, आवृत्ति उतनी ही अधिक होगी।
जब तार की लम्बाई \( l_1 = 0.49 \) मीटर है, तार की आवृत्ति \( f_1 = \frac{C}{l_1} \), जहाँ \( C \) एक नियतांक है।
जब तार की लम्बाई \( l_2 = 0.50 \) मीटर है, तार की आवृत्ति \( f_2 = \frac{C}{l_2} \).
चूंकि \( l_1 < l_2 \), तो \( f_1 > f_2 \).
विस्पन्द की संख्या 4 है, तो स्वरित्र की आवृत्ति \( n \) के लिए दो संभावनाएँ हैं:
\( n = f_1 - 4 \) या \( n = f_2 + 4 \).
चूंकि \( f_1 \) सबसे अधिक आवृत्ति है (सबसे छोटी लम्बाई के लिए), और \( f_2 \) सबसे कम आवृत्ति है, और स्वरित्र दोनों के साथ विस्पन्द पैदा करता है, तो स्वरित्र की आवृत्ति बीच में होनी चाहिए.
तो, \( n = f_1 - 4 \) और \( n = f_2 + 4 \).
इसलिए, \( n = \frac{C}{0.49} - 4 \) और \( n = \frac{C}{0.50} + 4 \).
इन दोनों समीकरणों को हल करने पर:
\( \frac{C}{0.49} - 4 = \frac{C}{0.50} + 4 \)
\( \frac{C}{0.49} - \frac{C}{0.50} = 8 \)
\( C \left(\frac{1}{0.49} - \frac{1}{0.50}\right) = 8 \)
\( C \left(\frac{0.50 - 0.49}{0.49 \times 0.50}\right) = 8 \)
\( C \left(\frac{0.01}{0.245}\right) = 8 \)
\( C = \frac{8 \times 0.245}{0.01} \)
\( C = 8 \times 24.5 = 196 \).
अब स्वरित्र की आवृत्ति \( n \) ज्ञात करेंगे:
\( n = \frac{C}{0.49} - 4 = \frac{196}{0.49} - 4 = 400 - 4 = 396 \) Hz.
या \( n = \frac{C}{0.50} + 4 = \frac{196}{0.50} + 4 = 392 + 4 = 396 \) Hz.
इसलिए, स्वरित्र की आवृत्ति \( 396 \) Hz है.
In simple words: तार की लम्बाई बदलने से उसकी आवृत्ति बदल जाती है. हमने पाया कि तार की आवृत्ति उसकी लम्बाई के उल्टे अनुपात में है. विस्पन्द की संख्या का उपयोग करके, हमने नियतांक और फिर स्वरित्र की असली आवृत्ति की गणना की.
🎯 Exam Tip: याद रखें कि तार की आवृत्ति उसकी लम्बाई के व्युत्क्रमानुपाती होती है, और विस्पन्द आवृत्ति दो आवृत्तियों का अंतर होती है। अज्ञात नियतांक \( C \) का उपयोग करना समीकरणों को हल करने में मदद करता है।
प्रश्न 18. दो इंजन एक-दूसरे के पास से विरुद्ध दिशा में गुजरते हैं। एक इंजन 540 आवृत्ति वाली सीटी बजाता है। दूसरे इंजन में बैठे लोग एक-दूसरे से गुजरने के पहले और बाद में कौनसी आवृत्ति की सीटी सुनेंगे? दोनों इंजनों का वेग 40 मीटर प्रति सेकण्ड है। ध्वनि का वेग 340 मीटर/सेकण्ड है।
Answer: हमें दी गई जानकारी यह है:
स्रोत (सीटी बजाने वाले इंजन) की वास्तविक आवृत्ति \( n = 540 \) Hz
ध्वनि का वेग \( v = 340 \) मीटर/सेकण्ड
इंजनों का वेग \( v_S = v_L = 40 \) मीटर/सेकण्ड (यहाँ \( v_S \) स्रोत का वेग है और \( v_L \) श्रोता का वेग है)
(i) जब इंजन एक-दूसरे के पास आ रहे हों (गुजरने से पहले):
इस स्थिति में, डॉप्लर प्रभाव के अनुसार आभासी आवृत्ति \( n' \) का सूत्र है:
\( n' = n \left(\frac{v + v_L}{v - v_S}\right) \)
यहाँ \( v_L \) धनात्मक है क्योंकि श्रोता स्रोत की ओर बढ़ रहा है, और \( v_S \) धनात्मक है क्योंकि स्रोत श्रोता की ओर बढ़ रहा है।
\( n' = 540 \left(\frac{340 + 40}{340 - 40}\right) \)
\( n' = 540 \left(\frac{380}{300}\right) \)
\( n' = 540 \times \frac{38}{30} = 18 \times 38 \)
\( n' = 684 \) Hz.
(ii) जब इंजन एक-दूसरे से दूर जा रहे हों (गुजरने के बाद):
इस स्थिति में, डॉप्लर प्रभाव के अनुसार आभासी आवृत्ति \( n'' \) का सूत्र है:
\( n'' = n \left(\frac{v - v_L}{v + v_S}\right) \)
यहाँ \( v_L \) नकारात्मक है क्योंकि श्रोता स्रोत से दूर जा रहा है, और \( v_S \) नकारात्मक है क्योंकि स्रोत श्रोता से दूर जा रहा है।
\( n'' = 540 \left(\frac{340 - 40}{340 + 40}\right) \)
\( n'' = 540 \left(\frac{300}{380}\right) \)
\( n'' = 540 \times \frac{30}{38} = 540 \times \frac{15}{19} \)
\( n'' \approx 426.3 \) Hz.
In simple words: जब दो इंजन एक-दूसरे की ओर आते हैं, तो सुनाई देने वाली सीटी की आवृत्ति बढ़ जाती है. जब वे एक-दूसरे से दूर जाते हैं, तो आवृत्ति घट जाती है. यह डॉप्लर प्रभाव के कारण होता है, जहाँ सापेक्ष गति ध्वनि की पिच को बदल देती है.
🎯 Exam Tip: डॉप्लर प्रभाव के सूत्रों में वेगों के संकेतों का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है। जब स्रोत और श्रोता एक-दूसरे की ओर बढ़ते हैं तो आवृत्ति बढ़ती है, और जब वे दूर जाते हैं तो आवृत्ति घटती है।
प्रश्न 19. एक ट्रेन 60 km/h के वेग से एक साइरन की ओर जा रही है जिसकी ध्वनि की आवृत्ति 400 कम्पन प्रति सेकण्ड है। ट्रेन में बैठे यात्री किस आवृत्ति की ध्वनि सुनेंगे? (हवा में ध्वनि का वेग 340 मीटर/सेकण्ड)
Answer: हमें दी गई जानकारी यह है:
स्रोत (साइरन) की वास्तविक आवृत्ति \( n = 400 \) Hz
ध्वनि का वेग \( v = 340 \) मीटर/सेकण्ड
श्रोता (ट्रेन में बैठा यात्री) का वेग \( v_L = 60 \) km/h.
पहले, श्रोता के वेग को मीटर/सेकण्ड में बदलेंगे:
\( v_L = 60 \times \frac{5}{18} = \frac{300}{18} = \frac{50}{3} \approx 16.67 \) मीटर/सेकण्ड.
यहाँ स्रोत (साइरन) स्थिर है और श्रोता (ट्रेन) साइरन की ओर बढ़ रहा है।
डॉप्लर प्रभाव के अनुसार आभासी आवृत्ति \( n' \) का सूत्र है:
\( n' = n \left(\frac{v + v_L}{v}\right) \)
यहाँ \( v_L \) धनात्मक है क्योंकि श्रोता स्रोत की ओर बढ़ रहा है।
\( n' = 400 \left(\frac{340 + \frac{50}{3}}{340}\right) \)
\( n' = 400 \left(\frac{\frac{1020 + 50}{3}}{340}\right) \)
\( n' = 400 \left(\frac{1070}{3 \times 340}\right) \)
\( n' = 400 \times \frac{107}{102} \)
\( n' \approx 419.6 \) Hz.
In simple words: ट्रेन साइरन की ओर बढ़ रही है, इसलिए ट्रेन के यात्री को ध्वनि की आवृत्ति थोड़ी बढ़ी हुई सुनाई देगी. ऐसा डॉप्लर प्रभाव के कारण होता है, जहाँ सापेक्ष गति के कारण ध्वनि की पिच बदल जाती है.
🎯 Exam Tip: वेग को सही इकाइयों (मीटर/सेकण्ड) में बदलना आवश्यक है। जब श्रोता स्रोत की ओर बढ़ता है, तो सूत्र में \( v_L \) को धनात्मक लेते हुए आवृत्ति बढ़ जाती है।
प्रश्न 20. किसी इंजन की सीटी के स्वर की आवृत्ति उस समय 5/6 वां हिस्सा प्रतीत होती है जबकि वह स्थिर श्रोता को पार करता है। यदि ध्वनि का वायु में वेग 330 मीटर/सेकण्ड हो तो इंजन की गति ज्ञात कीजिये।
Answer: हमें दी गई जानकारी यह है:
ध्वनि का वेग \( v = 330 \) मीटर/सेकण्ड
जब इंजन श्रोता को पार करता है, तो श्रोता को सुनाई देने वाली आभासी आवृत्ति \( n' \) वास्तविक आवृत्ति \( n \) का \( \frac{5}{6} \) गुना है, यानी \( n' = \frac{5}{6} n \).
यहाँ श्रोता स्थिर है और स्रोत (इंजन) श्रोता से दूर जा रहा है।
डॉप्लर प्रभाव के अनुसार इस स्थिति में आभासी आवृत्ति \( n' \) का सूत्र है:
\( n' = n \left(\frac{v}{v + v_S}\right) \)
जहाँ \( v_S \) स्रोत (इंजन) का वेग है जिसे हमें ज्ञात करना है।
दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( \frac{5}{6} n = n \left(\frac{v}{v + v_S}\right) \)
\( \frac{5}{6} = \frac{v}{v + v_S} \)
अब \( v = 330 \) मीटर/सेकण्ड मान रखने पर:
\( \frac{5}{6} = \frac{330}{330 + v_S} \)
\( 5(330 + v_S) = 6 \times 330 \)
\( 5 \times 330 + 5v_S = 6 \times 330 \)
\( 5v_S = 6 \times 330 - 5 \times 330 \)
\( 5v_S = (6 - 5) \times 330 \)
\( 5v_S = 1 \times 330 \)
\( 5v_S = 330 \)
\( v_S = \frac{330}{5} \)
\( v_S = 66 \) मीटर/सेकण्ड.
In simple words: जब इंजन श्रोता से दूर जाता है, तो ध्वनि की आवृत्ति कम सुनाई देती है. दिए गए सूत्र का उपयोग करके, हमने इंजन की गति निकाली जब श्रोता को उसकी सीटी की आवृत्ति कम सुनाई दी.
🎯 Exam Tip: डॉप्लर प्रभाव के लिए वेग के संकेतों का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है। जब स्रोत श्रोता से दूर जाता है, तो हर में \( v_S \) को धनात्मक मान के साथ जोड़ें। समीकरण को हल करने के लिए बीजगणित चरणों पर ध्यान दें।
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