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Detailed Chapter 7 दृढ़ पिण्ड गतिकी RBSE Solutions for Class 11 Physics
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Class 11 Physics Chapter 7 दृढ़ पिण्ड गतिकी RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Physics Chapter 7 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. दृढ़ पिण्ड किसे कहते हैं?
Answer: ऐसे पिण्ड जिन पर बाहरी बल लगाने पर भी उनके कणों के बीच की दूरियाँ नहीं बदलतीं, उन्हें दृढ़ पिण्ड कहते हैं। यह एक आदर्श स्थिति है, क्योंकि असल में सभी वस्तुएँ थोड़ी बहुत विकृत होती हैं।
In simple words: एक ऐसा शरीर जिस पर बल लगाने से उसके अंदर के कणों के बीच की दूरी कभी नहीं बदलती, उसे कठोर शरीर कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: दृढ़ पिण्ड की परिभाषा में 'कणों के मध्य की दूरियों का अपरिवर्तित रहना' मुख्य कीवर्ड है, इसे हमेशा याद रखें।
Question 2. द्रव्यमान केन्द्र की परिभाषा दीजिये।
Answer: द्रव्यमान केंद्र वह विशेष बिंदु होता है जिसके चारों ओर किसी भी कण के द्रव्यमान और दूरी के गुणनफल का कुल योग शून्य होता है। इसे एक तरह से पूरे पिण्ड का संतुलन बिंदु भी माना जा सकता है।
In simple words: द्रव्यमान केंद्र वह बिंदु है जहाँ पूरे पिण्ड का द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है, और वहाँ से सभी कणों के द्रव्यमान के घूमने का प्रभाव शून्य होता है।
🎯 Exam Tip: द्रव्यमान केंद्र की परिभाषा में 'द्रव्यमान आघूर्णों का योग शून्य' होना एक महत्वपूर्ण बिंदु है, यह सुनिश्चित करता है कि पिण्ड संतुलन में है।
Question 3. क्या किसी पिण्ड का द्रव्यमान केन्द्र, पिण्ड के बाहर हो सकता है?
Answer: हाँ, किसी पिण्ड का द्रव्यमान केंद्र उसके भौतिक आकार से बाहर हो सकता है। इसका एक अच्छा उदाहरण एक वलय या अंगूठी है, जिसका द्रव्यमान केंद्र उसके खाली बीच वाले हिस्से में होता है।
In simple words: हाँ, एक वस्तु का द्रव्यमान केंद्र उसके अंदर नहीं, बल्कि बाहर भी हो सकता है, जैसे एक वलय में।
🎯 Exam Tip: जब भी इस तरह का प्रश्न आए, वलय या खोखली वस्तु का उदाहरण ज़रूर दें, यह आपके उत्तर को मज़बूत बनाता है।
Question 5. हाथ की एक घड़ी के मिनट वाली काँटे की कोणीय चाल rad s\(^{-1}\) में क्या होती है?
Answer: हाथ की घड़ी के मिनट वाले काँटे को एक पूरा चक्कर लगाने में 60 मिनट (3600 सेकंड) लगते हैं। कोणीय चाल निकालने के लिए, हम एक पूरे चक्कर में तय किया गया कोण (2\(\pi\) रेडियन) को लगने वाले समय से भाग देते हैं।
कोणीय चाल \( \omega = \frac{2 \pi}{T} = \frac{2 \pi}{3600} = \frac{\pi}{1800} \) rad s\(^{-1}\)
In simple words: मिनट के काँटे की कोणीय चाल \(\frac{\pi}{1800}\) रेडियन प्रति सेकंड होती है।
🎯 Exam Tip: समय को हमेशा सेकंड में बदलें (1 मिनट = 60 सेकंड), और कोणीय विस्थापन हमेशा 2\(\pi\) रेडियन होता है, यह याद रखें।
Question 6. जड़त्व आघूर्ण से क्या अभिप्राय है?
Answer: जड़त्व आघूर्ण किसी पिण्ड का वह गुण होता है जो उसके घूर्णन अक्ष के चारों ओर गति की अवस्था में होने वाले बदलाव का विरोध करता है। यह घूर्णी गति में पिण्ड के द्रव्यमान के समान होता है।
In simple words: जड़त्व आघूर्ण यह बताता है कि कोई वस्तु अपनी घूर्णन गति बदलने का कितना विरोध करती है।
🎯 Exam Tip: जड़त्व आघूर्ण को घूर्णी गति में 'द्रव्यमान का एनालॉग' के रूप में सोचें; यह घूर्णन में परिवर्तन का विरोध करने की क्षमता को दर्शाता है।
Question 7. किसी वस्तु का जड़त्व आघूर्ण किन-किन घटकों पर निर्भर करता है?
Answer: किसी वस्तु का जड़त्व आघूर्ण मुख्य रूप से तीन चीज़ों पर निर्भर करता है: घूर्णन अक्ष की स्थिति (कि अक्ष कहाँ से गुज़र रही है), पिण्ड का कुल द्रव्यमान, और उस पिण्ड में द्रव्यमान का वितरण (कि द्रव्यमान अक्ष से कितनी दूर फैला हुआ है)।
In simple words: जड़त्व आघूर्ण घूर्णन अक्ष की जगह, वस्तु के कुल द्रव्यमान और द्रव्यमान के फैलाव पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: इन तीनों घटकों (घूर्णन अक्ष की स्थिति, द्रव्यमान, द्रव्यमान वितरण) को हमेशा विस्तार से समझाएँ, यह आपके उत्तर को पूर्ण बनाता है।
Question 8. एक वलय का उसके व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण कितना होता है?
Answer: एक वलय (रिंग) का उसके व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण उसके द्रव्यमान (\(M\)) और त्रिज्या (\(R\)) के वर्ग के आधे के बराबर होता है। यह अक्ष के लंबवत अक्ष के सापेक्ष से अलग होता है।
\(I_d = \frac{\mathrm{MR}^{2}}{2}\)
In simple words: एक वलय का उसके व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \(\frac{1}{2}\mathrm{MR}^{2}\) होता है।
🎯 Exam Tip: वलय के विभिन्न अक्षों (व्यास, केंद्र से लंबवत) के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण के सूत्र याद रखें, क्योंकि ये अक्सर भ्रमित कर सकते हैं।
Question 9. किसी चकती के जड़त्व आघूर्ण का मान न्यूनतम किस अक्ष के प्रति होता है?
Answer: किसी चकती का जड़त्व आघूर्ण का मान उसके व्यास के सापेक्ष न्यूनतम होता है। इसका कारण है कि व्यास के सापेक्ष द्रव्यमान का वितरण अक्ष के सबसे करीब होता है।
In simple words: एक चकती का जड़त्व आघूर्ण उसके व्यास के सापेक्ष सबसे कम होता है।
🎯 Exam Tip: यह समझें कि जड़त्व आघूर्ण न्यूनतम तब होता है जब द्रव्यमान का वितरण अक्ष के सबसे करीब होता है, इसलिए व्यास एक प्राकृतिक अक्ष है।
Question 10. किसी ठोस गोले का उसके स्पर्श रेखा के सापेक्ष घूर्णन क्रिज्या का मान लिखिये।
Answer: किसी ठोस गोले का उसकी स्पर्श रेखा के सापेक्ष घूर्णन त्रिज्या का मान गोले की त्रिज्या (\(R\)) को \(\sqrt{\frac{7}{5}}\) से गुणा करने पर मिलता है। यह उसके केंद्र से गुजरने वाली अक्ष के सापेक्ष घूर्णन त्रिज्या से अधिक होता है।
\(K = \mathrm{R} \sqrt{\frac{7}{5}}\)
In simple words: ठोस गोले की घूर्णन त्रिज्या उसकी स्पर्श रेखा के सापेक्ष \(R\sqrt{\frac{7}{5}}\) होती है।
🎯 Exam Tip: स्पर्श रेखा के सापेक्ष घूर्णन त्रिज्या निकालते समय समांतर अक्षों के प्रमेय का उपयोग किया जाता है, जिसमें गोले के केंद्र से दूरी भी शामिल होती है।
Question 11. कोणीय संवेग की इकाई लिखिये।
Answer: कोणीय संवेग की मानक इकाई किलोग्राम मीटर वर्ग प्रति सेकंड (Kg m\(^2\)s\(^{-1}\)) होती है। इसे जूल सेकंड (Js) के रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है, जो ऊर्जा और समय का गुणनफल है।
In simple words: कोणीय संवेग की इकाई Kg m\(^2\)s\(^{-1}\) या Js होती है।
🎯 Exam Tip: कोणीय संवेग की इकाई कोणीय वेग और जड़त्व आघूर्ण की इकाइयों को गुणा करके भी निकाली जा सकती है।
Question 12. जब कोई व्यक्ति अपनी भुजाएँ फैलाये बैठा है, अगर वह अपनी भुजाएँ सिकोड़ ले तो जड़त्व आघूर्ण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: जब कोई व्यक्ति अपनी भुजाएँ फैलाये बैठा होता है, तो उसका द्रव्यमान घूर्णन अक्ष से ज़्यादा दूरी पर फैला होता है, जिससे उसका जड़त्व आघूर्ण अधिक होता है। यदि वह अपनी भुजाएँ सिकोड़ लेता है, तो द्रव्यमान घूर्णन अक्ष के करीब आ जाता है, जिससे उसका जड़त्व आघूर्ण कम हो जाता है। यह कोणीय संवेग के संरक्षण के नियम का एक अच्छा उदाहरण है।
In simple words: भुजाएँ सिकोड़ने पर व्यक्ति का जड़त्व आघूर्ण घट जाता है क्योंकि द्रव्यमान घूर्णन अक्ष के करीब आ जाता है।
🎯 Exam Tip: इस उदाहरण में कोणीय संवेग संरक्षण का नियम लागू होता है, जहाँ जड़त्व आघूर्ण घटने से कोणीय वेग बढ़ जाता है।
Question 14. यदि कोई वस्तु घूर्णन कर रही है तो क्या निश्चित रूप से उस पर कोई बल आघूर्ण लग रहा है?
Answer: आवश्यक नहीं है कि घूर्णन करती हुई वस्तु पर निश्चित रूप से कोई बल आघूर्ण लग रहा हो। यदि वस्तु एक समान कोणीय वेग से घूम रही है, तो उस पर लगने वाला शुद्ध बल आघूर्ण शून्य होता है। बल आघूर्ण केवल तभी आवश्यक होता है जब वस्तु की कोणीय गति में परिवर्तन हो रहा हो।
In simple words: जरूरी नहीं कि घूमती हुई वस्तु पर बल आघूर्ण लग ही रहा हो, अगर उसकी घूमने की गति स्थिर है तो बल आघूर्ण शून्य होता है।
🎯 Exam Tip: बल आघूर्ण और कोणीय त्वरण के बीच सीधा संबंध होता है; यदि कोणीय त्वरण शून्य है, तो शुद्ध बल आघूर्ण भी शून्य होगा, भले ही वस्तु घूम रही हो।
Question 15. बल आघूर्ण, जड़त्व आघूर्ण व कोणीय त्वरण के मध्य सम्बन्ध को लिखिये।
Answer: बल आघूर्ण (\(\tau\)), जड़त्व आघूर्ण (\(I\)) और कोणीय त्वरण (\(\alpha\)) के बीच का संबंध न्यूटन के घूर्णी गति के दूसरे नियम द्वारा दिया जाता है। यह संबंध दर्शाता है कि किसी वस्तु पर लगने वाला शुद्ध बल आघूर्ण, उसके जड़त्व आघूर्ण और कोणीय त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है।
\(\tau = I\alpha\)
In simple words: बल आघूर्ण, जड़त्व आघूर्ण और कोणीय त्वरण का संबंध \(\tau = I\alpha\) सूत्र से बताया जाता है।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र न्यूटन के गति के दूसरे नियम (\(F=ma\)) का घूर्णी रूप है; \(\tau\) बल (\(F\)) का, \(I\) द्रव्यमान (\(m\)) का और \(\alpha\) त्वरण (\(a\)) का घूर्णी एनालॉग है।
Question 16. पेचकस का हत्था चौड़ा क्यों बनाया जाता है?
Answer: पेचकस का हत्था चौड़ा इसलिए बनाया जाता है ताकि पेंच कसते या ढीला करते समय एक ही बल आघूर्ण प्राप्त करने के लिए कम बल लगाना पड़े। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बल आघूर्ण (\(\tau\)) बल (\(F\)) और घूर्णन अक्ष से लंबवत दूरी (\(r\)) का गुणनफल होता है (\(\tau = Fr\))। जब हत्था चौड़ा होता है, तो बल लगाने की प्रभावी दूरी (\(r\)) बढ़ जाती है, जिससे कम बल से भी आवश्यक बल आघूर्ण पैदा हो जाता है।
चूँकि \(\tau = Fr =\) नियत अर्थात् \(F \propto \frac{1}{r}\)
In simple words: पेचकस का हत्था चौड़ा होता है ताकि पेंच घुमाते समय कम ताकत लगाकर भी ज्यादा घुमाव वाला बल (टॉर्क) मिल सके, क्योंकि घुमाव का बल, लगाई गई ताकत और घूमने की दूरी पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: बल आघूर्ण (\(\tau=Fr\)) के सिद्धांत को याद रखें; दूरी (\(r\)) जितनी ज़्यादा होगी, दिए गए बल आघूर्ण के लिए आवश्यक बल (\(F\)) उतना ही कम होगा।
Question 17. यदि कोई वस्तु अपनी अक्ष के परितः घूर्णन के साथसाथ सरल रेखा में भी गतिमान हो तो उसकी कुल गतिज ऊर्जा का मान लिखिये।
Answer: यदि कोई वस्तु अपनी धुरी पर घूमते हुए सीधी रेखा में भी चल रही हो, तो उसकी कुल गतिज ऊर्जा दो हिस्सों का जोड़ होती है: एक तो उसके सीधी रेखा में चलने (स्थानान्तरीय गति) के कारण गतिज ऊर्जा, और दूसरा उसके घूमने (घूर्णी गति) के कारण गतिज ऊर्जा।
\(E_{Total} = E_{translational} + E_{rotational} = \frac{1}{2} M v^{2}+\frac{1}{2} I \omega^{2}\)
In simple words: जब कोई वस्तु घूमती भी है और सीधी भी चलती है, तो उसकी कुल ऊर्जा सीधी गति और घूमने वाली गति की ऊर्जा का कुल जोड़ होती है।
🎯 Exam Tip: कुल गतिज ऊर्जा में हमेशा स्थानान्तरीय और घूर्णी दोनों घटकों को शामिल करना सुनिश्चित करें, खासकर जब वस्तु रोलिंग गति में हो।
Question 18. नत तल पर लोटनी गति करते पिण्ड का वेग का सूत्र लिखिये।
Answer: नत तल (तिरछा ढलान) पर लोटनी गति (बिना फिसले लुढ़कना) करते हुए पिण्ड का वेग, जब वह किसी ऊँचाई \(h\) से नीचे आता है, तो गुरुत्वाकर्षण बल और उसके जड़त्व आघूर्ण पर निर्भर करता है।
\(v = \sqrt{\frac{2 g h}{\left(1+\frac{K^{2}}{R^{2}}\right)}}\)
यहाँ \(g\) गुरुत्वाकर्षण त्वरण, \(h\) ऊँचाई, \(K\) घूर्णन त्रिज्या और \(R\) पिण्ड की त्रिज्या है।
In simple words: ढलान पर लुढ़कती हुई वस्तु के वेग का सूत्र \(v = \sqrt{\frac{2 g h}{\left(1+\frac{K^{2}}{R^{2}}\right)}}\) होता है।
🎯 Exam Tip: इस सूत्र में \(K^2/R^2\) पद पिण्ड की ज्यामिति (जैसे ठोस गोला, वलय, बेलन) पर निर्भर करता है, इसलिए इसे सही पिण्ड के लिए लागू करना महत्वपूर्ण है।
Question 19. दृढ़ पिण्डों के यांत्रिक संतुलन की शर्ते लिखिये।
Answer: किसी दृढ़ पिण्ड के यांत्रिक संतुलन में होने के लिए दो मुख्य शर्ते पूरी होनी चाहिए: पहली, उस पर लगने वाले सभी बाहरी बलों का कुल योग शून्य होना चाहिए (स्थानान्तरीय संतुलन)। दूसरी, उस पर लगने वाले सभी बाहरी बल आघूर्णों का कुल योग भी शून्य होना चाहिए (घूर्णी संतुलन)।
\(\sum_{i=1}^{n} \overrightarrow{\mathrm{F}}_{i}=0\) तथा \(\sum_{i=1}^{n} \vec{\tau}_{i}=0\)
In simple words: किसी भी कठोर वस्तु को स्थिर रहने के लिए, उस पर लगने वाले सभी बल और सभी घुमाने वाले बल का कुल जोड़ शून्य होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: यांत्रिक संतुलन के लिए स्थानान्तरीय और घूर्णी दोनों प्रकार के संतुलन को ध्यान में रखना आवश्यक है, किसी एक की अनदेखी से उत्तर अधूरा रह जाएगा।
Question 20. कोणीय संवेग, जड़त्व आघूर्ण एवं कोणीय वेग के सम्बन्ध को लिखिये।
Answer: कोणीय संवेग (\(L\)), जड़त्व आघूर्ण (\(I\)) और कोणीय वेग (\(\omega\)) के बीच का संबंध घूर्णी गति में रेखीय संवेग के समान होता है। यह दर्शाता है कि किसी वस्तु का कोणीय संवेग, उसके जड़त्व आघूर्ण और कोणीय वेग के गुणनफल के बराबर होता है।
\(L = I\omega\)
In simple words: कोणीय संवेग (\(L\)) जड़त्व आघूर्ण (\(I\)) और कोणीय वेग (\(\omega\)) के गुणनफल के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र रेखीय संवेग (\(p=mv\)) का घूर्णी रूप है, जहाँ कोणीय संवेग (\(L\)) रेखीय संवेग (\(p\)) का, जड़त्व आघूर्ण (\(I\)) द्रव्यमान (\(m\)) का और कोणीय वेग (\(\omega\)) रेखीय वेग (\(v\)) का घूर्णी एनालॉग है।
RBSE Class 11 Physics Chapter 7 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. किसी द्विकण तंत्र के द्रव्यमान केन्द्र के लिये द्रव्यमाने एवं दूरी में सम्बन्ध स्थापित कीजिये।
Answer: कल्पना कीजिए कि दो कण हैं जिनके द्रव्यमान क्रमशः \(m_1\) और \(m_2\) हैं। ये कण निर्देश बिंदु O से सदिश \(\vec{r}_1\) और \(\vec{r}_2\) पर स्थित हैं, और वे एक-दूसरे पर और बाहरी वातावरण से जुड़े हुए हैं।
चित्र - दो कणों का द्रव्यमान केन्द्र
माना कि पहले कण \(m_1\) पर दूसरे कण द्वारा आंतरिक बल \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}^{\prime}\) और बाहरी बल \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}^{\prime\prime}\) लग रहे हैं। तो कण \(m_1\) पर लगने वाला कुल बल \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}=\overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}^{\prime}+\overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}^{\prime\prime}\) होगा।
न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, कण पर लगने वाला बल उसके संवेग में परिवर्तन की दर के बराबर होता है:
\(\frac{d \overrightarrow{p_{1}}}{d t}=\overrightarrow{\mathrm{F}_{1}}\)
इसी तरह, दूसरे कण \(m_2\) के लिए संवेग में परिवर्तन की दर \(\frac{d \overrightarrow{p_{2}}}{d t}=\overrightarrow{\mathrm{F}_{2}}\) होगी।
इसलिए, दोनों कणों के लिए:
\(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}+\overrightarrow{\mathrm{F}}_{2} = \frac{d \overrightarrow{p_{1}}}{d t} + \frac{d \overrightarrow{p_{2}}}{d t}\) ...(1)
या \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}^{\prime}+\overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}^{\prime\prime}+\overrightarrow{\mathrm{F}}_{2}^{\prime}+\overrightarrow{\mathrm{F}}_{2}^{\prime\prime} = \frac{d \overrightarrow{p_{1}}}{d t} + \frac{d \overrightarrow{p_{2}}}{d t}\) ...(2)
लेकिन न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, दोनों कणों के बीच लगने वाले आंतरिक बल बराबर और विपरीत दिशा में होते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को खत्म कर देते हैं।
\(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}^{\prime} + \overrightarrow{\mathrm{F}}_{2}^{\prime} = 0\) या \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}^{\prime} = -\overrightarrow{\mathrm{F}}_{2}^{\prime}\)
अतः समीकरण (3) तथा (4) से:
\(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}+\overrightarrow{\mathrm{F}}_{2} = \frac{d}{d t}(\overrightarrow{p_{1}}+\overrightarrow{p_{2}})\)
अतः दो कणों के निकाय पर लगने वाला कुल बल उन कणों पर लगने वाले बाहरी बलों के सदिश योग के बराबर होता है।
यदि \(m_1\) और \(m_2\) नियत हैं, तो:
\(\vec{F} = \frac{d}{dt} \left( m_1 \frac{d\vec{r}_1}{dt} + m_2 \frac{d\vec{r}_2}{dt} \right) = \frac{d^2}{dt^2} (m_1\vec{r}_1 + m_2\vec{r}_2)\)
अब अंश और हर को \((m_1+m_2)\) से गुणा करने पर:
\(\vec{F} = (m_1+m_2) \frac{d^2}{dt^2} \left( \frac{m_1\vec{r}_1 + m_2\vec{r}_2}{m_1+m_2} \right)\)
यदि हम द्विकण निकाय का कुल द्रव्यमान \(M = m_1+m_2\) मानें, और द्रव्यमान केंद्र की स्थिति सदिश \(\overrightarrow{R}_{CM} = \frac{m_1\vec{r}_1 + m_2\vec{r}_2}{m_1+m_2}\) हो, तो
\(\vec{F} = M \frac{d^2 \overrightarrow{R}_{CM}}{dt^2} = M \vec{a}_{CM}\)
यह समीकरण दिखाता है कि द्विकण निकाय का द्रव्यमान केंद्र उसी तरह गति करता है जैसे \(M\) द्रव्यमान का एक कण पर कुल बाहरी बल \(\vec{F}\) लग रहा हो।
In simple words: दो कणों का द्रव्यमान केंद्र वह बिंदु होता है जहाँ पूरे निकाय का द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है। इसकी स्थिति दोनों कणों के द्रव्यमान और उनकी स्थिति के औसत से तय होती है, और यह बिंदु पूरे निकाय की गति को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: द्रव्यमान केंद्र की स्थिति सदिश \(\overrightarrow{R}_{CM}\) का सूत्र \(\frac{m_1\vec{r}_1 + m_2\vec{r}_2}{m_1+m_2}\) हमेशा याद रखें, और आंतरिक बलों के निरस्त होने पर ध्यान दें।
Question 2. रेखीय वेग एवं कोणीय वेग में सदिश सम्बन्ध स्थापित कीजिये।
Answer: जब कोई दृढ़ पिण्ड अपनी धुरी पर घूमता है, तो उसके सभी कण गोलाकार रास्ते पर चलते हैं। हर गोलाकार रास्ता घूमने वाली धुरी के लंबवत होता है और धुरी पर केंद्रित होता है। शुद्ध घूर्णी गति में, पिण्ड के हर कण का कोणीय वेग समान होता है, लेकिन कण की चाल उसके कोणीय वेग के समानुपाती होती है।
चित्र
यह चित्र में दिखाया गया है कि एक दृढ़ पिण्ड का कण P, \(r\) त्रिज्या के गोलाकार रास्ते पर घूम रहा है। यदि किसी पल उसका कोणीय विस्थापन \(\theta\) रेडियन हो, तो चाप की लंबाई \(s\) को इस तरह बताया जा सकता है:
\(s = r\theta\)
चाप की लंबाई के परिवर्तन की दर तात्कालिक रेखीय वेग (\(v\)) के बराबर होती है, और कोणीय विस्थापन के परिवर्तन की दर तात्कालिक कोणीय वेग (\(\omega\)) के बराबर होती है।
\(\left|\frac{d s}{d t}\right| = v\) तथा \(\left|\frac{d \theta}{d t}\right| = \omega\)
तो, \(v = \frac{ds}{dt} = r \frac{d\theta}{dt} = r\omega\)
\(v = r\omega\) ...(1)
स्पष्ट है कि जो कण घूमने वाली धुरी से जितना दूर होगा, उसका रेखीय वेग उतना ही ज़्यादा होगा।
इस संबंध को सदिश गुणनफल में दिखाने के लिए, मान लीजिए कि कण P की \(t=0\) पर स्थिति सदिश \(\overrightarrow{\mathrm{R}}\) है। तो चित्र से:
\(\vec{v} = \vec{\omega} \times \vec{r}\)
यहाँ \(\vec{\omega}\) कोणीय वेग सदिश है जो घूर्णन अक्ष के अनुदिश होता है, और \(\vec{r}\) कण की स्थिति सदिश है जो अक्ष से कण तक जाती है।
In simple words: सीधी चाल और घूमने वाली चाल के बीच यह संबंध है कि सीधी चाल (\(v\)), घूमने वाली चाल (\(\omega\)) और घूमने वाली धुरी से दूरी (\(r\)) के गुणनफल के बराबर होती है (\(v = r\omega\))।
🎯 Exam Tip: सदिश संबंध \(\vec{v} = \vec{\omega} \times \vec{r}\) को हमेशा याद रखें, क्योंकि यह कोणीय वेग और स्थिति सदिश के सदिश गुणनफल से रेखीय वेग की दिशा भी निर्धारित करता है।
Question 3. घूर्णन गति की तीन समीकरणों को लिखिये। :
Answer: घूर्णन गति के तीन मुख्य समीकरण न्यूटन के गति के नियमों के घूर्णी अनुरूप होते हैं। ये समीकरण कोणीय वेग, कोणीय विस्थापन, कोणीय त्वरण और समय के बीच संबंध बताते हैं:
1. \(\omega = \omega_0 + \alpha t\)
2. \(\theta = \omega_0 t + \frac{1}{2} \alpha t^2\)
3. \(\omega^2 = \omega_0^2 + 2\alpha \theta\)
यहाँ \(\omega\) अंतिम कोणीय वेग, \(\omega_0\) प्रारंभिक कोणीय वेग, \(\alpha\) कोणीय त्वरण, \(t\) समय और \(\theta\) कोणीय विस्थापन है।
In simple words: घूमने वाली गति के तीन सूत्र हैं: \(\omega = \omega_0 + \alpha t\), \(\theta = \omega_0 t + \frac{1}{2} \alpha t^2\), और \(\omega^2 = \omega_0^2 + 2\alpha \theta\)।
🎯 Exam Tip: इन समीकरणों को रेखीय गति के समीकरणों (\(v=u+at\), \(s=ut+\frac{1}{2}at^2\), \(v^2=u^2+2as\)) के साथ तुलना करके याद रखना आसान होता है।
Question 4. जड़त्व आघूर्ण के लिये लम्बवत् अक्ष का कथन दीजिये।
Answer: लंबवत अक्षों का प्रमेय (Theorem of Perpendicular Axes) किसी समतल पटल (पतली प्लेट) के लिए लागू होता है। इसके अनुसार, किसी समतल पटल का उसके तल के लंबवत अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण, उसके तल में स्थित दो परस्पर लंबवत अक्षों के सापेक्ष जड़त्व आघूर्णों के योग के बराबर होता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि तीनों अक्षें एक ही बिंदु पर मिलनी चाहिएं।
चित्र
यदि किसी समतल पटल का जड़त्व आघूर्ण OX और OY अक्षों के सापेक्ष क्रमशः \(I_x\) और \(I_y\) हो, और इन अक्षों के कटान बिंदु से गुजरने वाली लंबवत अक्ष (OZ) के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \(I_z\) हो, तो लंबवत अक्षों की प्रमेय से:
\(I_z = I_x + I_y\)
**उपपत्ति (Proof):**
चित्र के अनुसार, मान लीजिए OX और OY समतल पटल में दो लंबवत अक्षें हैं। OZ-अक्ष पटल के लंबवत है और बिंदु O से गुजरती है। बिंदु P पर \(m\) द्रव्यमान का एक कण मौजूद है जिसके निर्देशांक \((x, y)\) हैं और O से दूरी \(r\) है। तो, \(r^2 = x^2 + y^2\)।
OX अक्ष के सापेक्ष पटल का जड़त्व आघूर्ण:
\(I_x = \sum m y^2\)
OY अक्ष के सापेक्ष पटल का जड़त्व आघूर्ण:
\(I_y = \sum m x^2\)
OZ अक्ष के सापेक्ष पटल का जड़त्व आघूर्ण:
\(I_z = \sum m r^2 = \sum m (x^2 + y^2) = \sum m x^2 + \sum m y^2\)
\(\implies I_z = I_x + I_y\)
प्रत्येक पिण्ड को घूर्णन अक्ष के लंबवत अनेक समतल पटलों में बांटा जा सकता है। इसलिए यह प्रमेय सभी पिण्डों के लिए सही होती है।
In simple words: लंबवत अक्षों का प्रमेय कहता है कि किसी पतली प्लेट का उसके केंद्र से सीधी ऊपर जाने वाली धुरी के चारों ओर घूमने का बल (जड़त्व आघूर्ण), उस प्लेट में ही आपस में सीधी पड़ी दो धुरियों के चारों ओर घूमने के बल का कुल जोड़ होता है।
🎯 Exam Tip: लंबवत अक्षों के प्रमेय को केवल समतल पटल (2D वस्तुओं) पर ही लागू करें। यह 3D वस्तुओं के लिए उपयुक्त नहीं है।
Question 6. वलय के केन्द्र से गुजरने वाली उसके तल के लम्बवत् अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिये।
Answer: वलय (रिंग) के केंद्र से गुजरने वाली और उसके तल के लंबवत अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात करने के लिए, हम वलय को छोटे-छोटे द्रव्यमान तत्वों में बांटते हैं। मान लीजिए एक वलय का द्रव्यमान \(M\) और त्रिज्या \(R\) है। इसका जड़त्व आघूर्ण \(MR^2\) होता है।
चित्र
वलय पर एक छोटा तत्व \(dx\) लेते हैं जिसका द्रव्यमान \(dm = \frac{M}{2\pi R} dx\) है। इस तत्व का ZZ' अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \(dI = (dm)R^2 = \frac{M}{2\pi R} dx R^2 = \frac{MR}{2\pi} dx\) होता है।
कुल जड़त्व आघूर्ण निकालने के लिए, हम इसे वलय के पूरी परिधि पर समाकलित करते हैं:
\(I = \int_{x=0}^{2\pi R} \frac{MR}{2\pi} dx = \frac{MR}{2\pi} [x]_{0}^{2\pi R} = \frac{MR}{2\pi} (2\pi R - 0) = MR^2\)
वलय की घूर्णन त्रिज्या \(K\) हो तो \(I = MK^2\)
\(\implies MK^2 = MR^2\)
\(\implies K = R\)
यह निष्कर्ष हमें बताता है कि वलय का जड़त्व आघूर्ण सबसे ज़्यादा होता है क्योंकि उसका सारा द्रव्यमान अक्ष से अधिकतम दूरी पर होता है।
In simple words: एक वलय का उसके केंद्र से जाने वाली और उसके तल के सीधी ऊपर वाली धुरी के चारों ओर घूमने का बल \(MR^2\) होता है, जहाँ \(M\) उसका वजन और \(R\) उसकी त्रिज्या है।
🎯 Exam Tip: वलय का जड़त्व आघूर्ण \(MR^2\) होता है, जो उसकी त्रिज्या \(R\) पर पूरी तरह से निर्भर करता है। यह याद रखें कि इस मामले में घूर्णन त्रिज्या \(K=R\) होती है।
Question 7. ठोस बेलन का उसके अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिये।
Answer: ठोस बेलन का उसके अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात करने के लिए, हम बेलन को कई पतली चकतियों से मिलकर बना हुआ मान सकते हैं, जो एक-दूसरे के ऊपर रखी हुई हैं। मान लीजिए एक ठोस बेलन का द्रव्यमान \(M\), त्रिज्या \(R\) और लंबाई \(L\) है। इसकी घूर्णन अक्ष XX' इसकी ज्यामितीय अक्ष के साथ मिलती है।
चित्र
एक पतली चकती जिसका द्रव्यमान \(dm\) है, उसका घूर्णन अक्ष XX' के परितः जड़त्व आघूर्ण \(\frac{1}{2} (dm) R^2\) होता है।
बेलन को ऐसी चकतियों के ढेर के रूप में मानें। बेलन का कुल जड़त्व आघूर्ण इन सभी चकतियों के जड़त्व आघूर्णों के योग के बराबर होगा।
पहले, बेलन के एकांक आयतन का द्रव्यमान \(\frac{M}{\pi R^{2} L}\) होता है।
एक चकती का आयतन \((\pi R^2) dx\) होगा। इसलिए, \(dx\) मोटाई वाली एक चकती का द्रव्यमान \(dm = (\pi R^2) dx \cdot \frac{M}{\pi R^{2} L} = \frac{M}{L} dx\)
अब, इस चकती का जड़त्व आघूर्ण \(dI = \frac{1}{2} (dm) R^2 = \frac{1}{2} \left( \frac{M}{L} dx \right) R^2 = \frac{M R^2}{2L} dx\)
पूरे बेलन का जड़त्व आघूर्ण निकालने के लिए, इसे \(x=0\) से \(x=L\) तक समाकलित करते हैं:
\(I = \int_{0}^{L} \frac{M R^2}{2L} dx = \frac{M R^2}{2L} [x]_{0}^{L} = \frac{M R^2}{2L} (L - 0) = \frac{M R^2}{2}\)
इस तरह, एक ठोस बेलन का उसके ज्यामितीय अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \(\frac{1}{2}MR^2\) होता है।
In simple words: एक ठोस बेलन का उसके बीच वाली धुरी के चारों ओर घूमने का बल \(\frac{1}{2}MR^2\) होता है, जहाँ \(M\) उसका वजन और \(R\) उसकी त्रिज्या है।
🎯 Exam Tip: ठोस बेलन के जड़त्व आघूर्ण का सूत्र \(\frac{1}{2}MR^2\) होता है। यह वलय के जड़त्व आघूर्ण (\(MR^2\)) से आधा होता है क्योंकि बेलन में द्रव्यमान अक्ष के करीब फैला होता है।
Question 8. किसी पिण्ड के लिये बल आघूर्ण एवं जड़त्व आघूर्ण में सम्बन्ध स्थापित कीजिये।
Answer: बल आघूर्ण और जड़त्व आघूर्ण के बीच संबंध को समझने के लिए, एक पिण्ड पर विचार करें जो अक्ष OO' के चारों ओर वामावर्त दिशा में घूम रहा है।
चित्र
माना \(n\) कणों का द्रव्यमान \(m_1, m_2, ..., m_n\) है, जिनकी घूर्णन अक्ष से लंबवत दूरियाँ क्रमशः \(r_1, r_2, ..., r_n\) हैं। इन कणों पर लंबवत कार्य करने वाले बल क्रमशः \(F_1, F_2, ..., F_n\) हैं। यदि पिण्ड का कोणीय त्वरण \(\alpha\) है, तो सभी कणों का कोणीय त्वरण समान होगा, लेकिन रैखिक त्वरण \(a\) अलग-अलग होगा।
कण \(m_1\) पर लगने वाला बल \(F_1 = m_1 a_1\)
अक्ष OO' के सापेक्ष \(F_1\) का बल आघूर्ण \(\tau_1 = F_1 r_1\)
क्योंकि रैखिक त्वरण \(a_1 = r_1 \alpha\), इसलिए:
\(\tau_1 = (m_1 r_1 \alpha) r_1 = m_1 r_1^2 \alpha\)
इसी प्रकार अन्य कणों के लिए:
\(\tau_2 = m_2 r_2^2 \alpha\)
\(\tau_3 = m_3 r_3^2 \alpha\)
...
\(\tau_n = m_n r_n^2 \alpha\)
चूंकि सभी बल आघूर्ण एक ही दिशा में कार्य कर रहे हैं, अतः परिणामी कुल बल आघूर्ण \(\tau\) सभी व्यक्तिगत आघूर्णों का योग होगा:
\(\tau = \tau_1 + \tau_2 + \tau_3 + ... + \tau_n\)
\(\tau = m_1 r_1^2 \alpha + m_2 r_2^2 \alpha + m_3 r_3^2 \alpha + ... + m_n r_n^2 \alpha\)
\(\tau = (m_1 r_1^2 + m_2 r_2^2 + m_3 r_3^2 + ... + m_n r_n^2) \alpha\)
यहाँ \((m_1 r_1^2 + m_2 r_2^2 + m_3 r_3^2 + ... + m_n r_n^2)\) पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण \(I\) है।
\(\implies \tau = I \alpha\)
इस प्रकार, किसी वस्तु का घूर्णन अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण, वस्तु में उस अक्ष के सापेक्ष एकांक कोणीय त्वरण उत्पन्न करने के लिए आवश्यक बल आघूर्ण के बराबर होता है।
In simple words: किसी वस्तु पर लगने वाला घूमने का बल (\(\tau\)), उस वस्तु के जड़त्व आघूर्ण (\(I\)) और उसके कोणीय त्वरण (\(\alpha\)) के गुणनफल के बराबर होता है, यानी \(\tau = I\alpha\)।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र न्यूटन के दूसरे नियम (\(F=ma\)) का घूर्णी रूप है, जहाँ बल आघूर्ण बल की जगह लेता है, जड़त्व आघूर्ण द्रव्यमान की जगह और कोणीय त्वरण रेखीय त्वरण की जगह लेता है।
Question 9. कोणीय संवेग संरक्षण नियम को लिखिये। इस पर आधारित दो उदाहरण लिखिये।
Answer: कोणीय संवेग संरक्षण का नियम बताता है कि यदि किसी निकाय पर कोई बाहरी बल आघूर्ण नहीं लग रहा हो, तो उस निकाय का कुल कोणीय संवेग हमेशा स्थिर रहता है। इसका मतलब है कि कोणीय संवेग न तो बढ़ता है और न ही घटता है।
किसी पिण्ड के लिये यदि बल आघूर्ण \(\vec{\tau}=\frac{\overrightarrow{d \mathrm{L}}}{d t}\) है, तो कोणीय संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार:
अतः यदि \(\vec{\tau} = 0\)
\(\implies \frac{\overrightarrow{d \mathrm{L}}}{d t} = 0\)
\(\implies \overrightarrow{\mathrm{L}} = \text{नियतांक}\)
यदि कोई पिण्ड कोणीय वेग \(\omega\) से घूम रहा है और उसका जड़त्व आघूर्ण \(I\) है, तो कोणीय संवेग \(L = I\omega\) होता है। यदि बाहरी बल आघूर्ण के बिना जड़त्व आघूर्ण \(I\) से \(I'\) हो जाता है, तो कोणीय वेग \(\omega'\) में इस प्रकार परिवर्तन होगा कि कोणीय संवेग \(I\omega = I'\omega'\) नियत रहे।
कोणीय संवेग संरक्षण का सिद्धांत भौतिकी का एक मौलिक सिद्धांत है, जो रेखीय संवेग संरक्षण के समान ही महत्वपूर्ण है।
**उदाहरण – (1)** एक धागे के सिरे पर गेंद बाँध कर तथा इसका दूसरा सिरा एक ऊर्ध्वाधर नली में से निकालकर हाथ में पकड़कर गेंद को तेजी से क्षैतिज वृत्त में घुमाया जाता है। यदि हम धागे को खींचकर वृत्तीय पथ की त्रिज्या को कम कर दें, तो हम देखते हैं कि गेंद पहले से अधिक तेजी से घूमती है। इसका कारण यह है कि त्रिज्या कम हो जाने के कारण गेंद का जड़त्व आघूर्ण भी कम हो जाता है। कोणीय संवेग के संरक्षण के नियम के अनुसार, जड़त्व आघूर्ण घटने पर गेंद का कोणीय वेग बढ़ जाता है।
In simple words: अगर किसी चीज़ को घुमाने वाली कोई बाहरी ताकत नहीं है, तो उस चीज़ का घूमने का बल (कोणीय संवेग) हमेशा उतना ही रहता है। जैसे, एक नर्तकी हाथ सिकोड़ने पर तेज़ी से घूमती है।
🎯 Exam Tip: कोणीय संवेग संरक्षण के नियम में 'बाहरी बल आघूर्ण की अनुपस्थिति' एक महत्वपूर्ण शर्त है। उदाहरणों को इस शर्त से जोड़कर समझाएँ।
Question 10. एक पिण्ड जो एक समान कोणीय वेग से एक स्थिर अक्ष के चारों ओर घूर्णन करता है, की गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिये।
Answer: माना कि एक पिण्ड घूर्णन गति कर रहा है। इस पिण्ड के कणों के द्रव्यमान क्रमशः \(m_1, m_2, m_3, ....., m_n\) हैं और इनकी घूर्णन अक्ष से लंबवत दूरी \(r_1, r_2, r_3, .....r_n\) है। इनके रेखीय वेग क्रमशः \(V_1, V_2, V_3, ..., V_n\) हैं, और पिण्ड के प्रत्येक कण का कोणीय वेग \(\omega\) है।
चित्र
गति के कारण \(m_1\) द्रव्यमान वाले कण की गतिज ऊर्जा:
\(E_1 = \frac{1}{2} m_1 V_1^2\)
परन्तु, \(V_1 = r_1 \omega\)
अतः \(E_1 = \frac{1}{2} m_1 (r_1 \omega)^2 = \frac{1}{2} m_1 r_1^2 \omega^2\)
इसी प्रकार अन्य कणों की गतिज ऊर्जाएँ क्रमशः:
\(E_2 = \frac{1}{2} m_2 r_2^2 \omega^2\)
\(E_3 = \frac{1}{2} m_3 r_3^2 \omega^2\)
...
\(E_n = \frac{1}{2} m_n r_n^2 \omega^2\)
चूंकि गतिज ऊर्जा एक अदिश राशि है, अतः सम्पूर्ण दृढ़ वस्तु की कुल गतिज ऊर्जा (\(E\)) सभी कणों की गतिज ऊर्जाओं का योग होगा:
\(E = E_1 + E_2 + E_3 + ... + E_n\)
\(E = \frac{1}{2} m_1 r_1^2 \omega^2 + \frac{1}{2} m_2 r_2^2 \omega^2 + \frac{1}{2} m_3 r_3^2 \omega^2 + ... + \frac{1}{2} m_n r_n^2 \omega^2\)
या \(E = \frac{1}{2} \omega^2 (m_1 r_1^2 + m_2 r_2^2 + m_3 r_3^2 + ... + m_n r_n^2)\)
परंतु, \((m_1 r_1^2 + m_2 r_2^2 + m_3 r_3^2 + ... + m_n r_n^2)\) दृढ़ वस्तु का घूर्णन अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण (\(I\)) है।
\(\implies E = \frac{1}{2} I \omega^2\) ...(1)
यही घूर्णन करती हुई दृढ़ वस्तु की घूर्णी गतिज ऊर्जा है। यदि \(\omega = 1\) रेडियन/सेकंड हो, तो \(E = \frac{1}{2} I\)।
या \(I = 2E\)
अतः किसी अक्ष के परितः एकांक कोणीय वेग से घूमने वाले दृढ़ वस्तु का जड़त्व आघूर्ण, दी हुई अक्ष के परितः वस्तु की घूर्णन गतिज ऊर्जा के दुगुने के बराबर होता है। घूर्णी गतिज ऊर्जा घूर्णन गति में द्रव्यमान के गतिज ऊर्जा के समान है।
यदि कोई वस्तु घूर्णन गति के साथ-साथ रेखीय गति भी करती हो, तो वस्तु की कुल गतिज ऊर्जा, घूर्णन गतिज ऊर्जा एवं रेखीय गतिज ऊर्जा के योग के बराबर होगी।
\(E_{Total} = KE_{translational} + KE_{rotational} = \frac{1}{2} M v^{2}+\frac{1}{2} I \omega^{2}\)
In simple words: एक घूमती हुई वस्तु की गतिज ऊर्जा \(\frac{1}{2} I \omega^2\) होती है, जहाँ \(I\) उसका जड़त्व आघूर्ण और \(\omega\) उसका कोणीय वेग है।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र दर्शाता है कि जड़त्व आघूर्ण \(I\) घूर्णी गति में द्रव्यमान \(m\) की भूमिका निभाता है, और कोणीय वेग \(\omega\) रेखीय वेग \(v\) की भूमिका निभाता है।
Question 11. नत तल पर लोटनी गति कर रही वस्तु के त्वरण के लिये सूत्र व्युत्पन्न कीजिये।
Answer: नत तल (तिरछे ढलान) पर लोटनी गति (बिना फिसले लुढ़कना) कर रही वस्तु के त्वरण का सूत्र निकालने के लिए, हम ऊर्जा संरक्षण के नियम का उपयोग करते हैं। मान लीजिए एक नत तल का झुकाव कोण \(\theta\) और ऊँचाई \(h\) है। एक पिण्ड, जिसका द्रव्यमान \(M\) और त्रिज्या \(R\) है, नत तल के शीर्ष बिंदु से लुढ़कना शुरू करता है।
चित्र - नत तल पर पिण्ड की लोटनी गति
जब पिण्ड नत तल पर लुढ़कता है, तो उसकी गति में सीधी चाल (स्थानान्तरीय) और घूमने वाली चाल (घूर्णी) दोनों होती हैं। इसलिए पिण्ड की कुल गतिज ऊर्जा:
\(E = E_{translational} + E_{rotational} = \frac{1}{2} M v^{2} + \frac{1}{2} I \omega^{2}\) ...(1)
पिण्ड जब शीर्ष बिंदु पर होता है, तो उसकी कुल ऊर्जा केवल स्थितिज ऊर्जा होती है, जिसका मान \(Mgh\) के बराबर होता है। जब पिण्ड नत तल के निचले सिरे पर पहुँचता है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा में कमी होती है और गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती है। ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, स्थितिज ऊर्जा में कमी = गतिज ऊर्जा में वृद्धि।
\(Mgh = \frac{1}{2} M v^{2} + \frac{1}{2} I \omega^{2}\)
हम जानते हैं कि \(I = MK^2\) और \(v = R\omega \implies \omega = v/R\), जहाँ \(K\) घूर्णन त्रिज्या है।
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
\(Mgh = \frac{1}{2} M v^{2} + \frac{1}{2} MK^2 \left(\frac{v^{2}}{R^{2}}\right)\)
\(Mgh = \frac{1}{2} M v^{2} \left(1 + \frac{K^{2}}{R^{2}}\right)\)
\(gh = \frac{1}{2} v^{2} \left(1 + \frac{K^{2}}{R^{2}}\right)\)
\(\implies v^{2} = \frac{2gh}{\left(1 + \frac{K^{2}}{R^{2}}\right)}\) ...(3)
पिण्ड द्वारा तय की गई दूरी \(s\) है, तो \(h = s \sin \theta\)
\(\implies v^{2} = \frac{2gs \sin \theta}{\left(1 + \frac{K^{2}}{R^{2}}\right)}\) ...(4)
यदि गति में त्वरण \(a\) उत्पन्न होता है और प्रारंभिक वेग \(u=0\) है, तो गति के तीसरे समीकरण से:
\(v^2 = u^2 + 2as = 0 + 2as = 2as\)
समीकरण (4) और \(v^2 = 2as\) की तुलना करने पर:
\(2as = \frac{2gs \sin \theta}{\left(1 + \frac{K^{2}}{R^{2}}\right)}\)
\(\implies a = \frac{g \sin \theta}{\left(1 + \frac{K^{2}}{R^{2}}\right)}\) ...(5)
यह नत तल पर लुढ़कती हुई वस्तु के त्वरण का व्यंजक है। इस सूत्र से पता चलता है कि त्वरण \(a\) का मान \(K^2/R^2\) के मान पर निर्भर करता है, जो पिण्ड की ज्यामिति पर आधारित है।
In simple words: ढलान पर लुढ़कती हुई वस्तु का त्वरण \(a = \frac{g \sin \theta}{\left(1 + \frac{K^{2}}{R^{2}}\right)}\) होता है, जहाँ \(\theta\) ढलान का कोण है, और \(\frac{K^2}{R^2}\) वस्तु के आकार पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: इस व्युत्पत्ति में ऊर्जा संरक्षण का नियम महत्वपूर्ण है। \(K^2/R^2\) का मान विभिन्न ठोस आकृतियों (जैसे गोला, बेलन, वलय) के लिए अलग-अलग होता है, जिससे त्वरण भी बदल जाता है।
Question 12. जड़त्व आघूर्ण का भौतिक महत्व क्या है?
Answer: जड़त्व आघूर्ण का भौतिक महत्व यह है कि यह घूर्णी गति में वस्तु के 'घूर्णन जड़त्व' की माप करता है, ठीक वैसे ही जैसे रेखीय गति में द्रव्यमान 'रेखीय जड़त्व' की माप करता है। यह हमें बताता है कि किसी वस्तु की घूर्णन गति को बदलने में कितनी मुश्किल होगी।
यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान \(m\) अधिक होता है, तो उसकी सीधी चाल (रेखीय स्थिति) बदलने के लिए अधिक बल लगाना पड़ता है। इसी तरह, जिस वस्तु का जड़त्व आघूर्ण (\(I\)) जितना अधिक होगा, उसकी घूर्णी गति (कोणीय स्थिति) बदलने के लिए उतना ही अधिक बल आघूर्ण लगाने की आवश्यकता होगी।
इसलिए, जड़त्व आघूर्ण का महत्व यह है कि यह घूर्णन गति में द्रव्यमान के समान भूमिका निभाता है। यह हमें बताता है कि वस्तु अपनी घूर्णन अवस्था (चाहे वह विराम में हो या घूम रही हो) को बदलने का कितना विरोध करेगी।
In simple words: जड़त्व आघूर्ण हमें बताता है कि किसी वस्तु को घुमाने या उसकी घूमने की गति को बदलने में कितनी ताकत लगेगी।
🎯 Exam Tip: जड़त्व आघूर्ण को हमेशा द्रव्यमान के 'घूर्णी समतुल्य' के रूप में सोचें। यह घूर्णी गति में परिवर्तन का प्रतिरोध करने की वस्तु की क्षमता को दर्शाता है।
Question 13. किसी पतली छड़ को उसकी लम्बाई के लम्बवत् किनारे पर स्थित अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिये।
Answer: हमें एक पतली छड़ का जड़त्व आघूर्ण उसकी लंबाई के लंबवत और एक सिरे से गुजरने वाली अक्ष के सापेक्ष ज्ञात करना है। इसके लिए हम समांतर अक्षों के प्रमेय का उपयोग करेंगे।
चित्र
समांतर अक्षों के प्रमेय के अनुसार, किसी भी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \(I\), उस पिण्ड के गुरुत्व केंद्र (द्रव्यमान केंद्र) से गुजरने वाली समांतर अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण (\(I_G\)) और पिण्ड के द्रव्यमान (\(M\)) तथा दोनों समांतर अक्षों के बीच की दूरी (\(d\)) के वर्ग के गुणनफल के योगफल के बराबर होता है।
अर्थात् \(I = I_G + Md^2\)
एक पतली छड़ का उसके द्रव्यमान केंद्र से गुजरने वाली और उसकी लंबाई के लंबवत अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \(I_G = \frac{ML^2}{12}\) होता है।
यहाँ, छड़ का कुल द्रव्यमान \(M\) और लंबाई \(L\) है। द्रव्यमान केंद्र से एक सिरे तक की दूरी \(d = L/2\) है।
अतः, Y'Y अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण:
\(I_{Y'Y} = I_G + M d^2\)
\(I_{Y'Y} = \frac{ML^2}{12} + M \left(\frac{L}{2}\right)^2\)
\(I_{Y'Y} = \frac{ML^2}{12} + \frac{ML^2}{4}\)
\(I_{Y'Y} = \frac{ML^2 + 3ML^2}{12} = \frac{4ML^2}{12} = \frac{ML^2}{3}\) ...(1)
इस अक्ष के सापेक्ष घूर्णन त्रिज्या \(K\) निकालने के लिए, हम \(I = MK^2\) का उपयोग करते हैं:
\(MK^2 = \frac{ML^2}{3}\)
\(\implies K^2 = \frac{L^2}{3}\)
\(\implies K = \frac{L}{\sqrt{3}}\) ...(2)
इस प्रकार, एक पतली छड़ का उसके एक किनारे से गुजरने वाली लंबवत अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \( \frac{ML^2}{3} \) होता है।
In simple words: एक पतली छड़ को उसके एक सिरे से सीधी ऊपर जाने वाली धुरी के चारों ओर घूमने का बल \(\frac{ML^2}{3}\) होता है, जहाँ \(M\) उसका वजन और \(L\) उसकी लंबाई है।
🎯 Exam Tip: समांतर अक्षों के प्रमेय का सही ढंग से उपयोग करना महत्वपूर्ण है; \(d\) हमेशा गुरुत्व केंद्र से उस अक्ष तक की दूरी होती है जिसके सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात किया जा रहा है।
Question 14. नततल पर लोटनी गति कर रही किसी वस्तु की तली के निचले सिरे पर कुल गतिज ऊर्जा का सूत्र लिखिये।
Answer: नत तल पर लोटनी गति (बिना फिसले लुढ़कना) कर रही वस्तु की तली के निचले सिरे पर कुल गतिज ऊर्जा का सूत्र ऊर्जा संरक्षण के नियम से प्राप्त किया जाता है। माना एक पिण्ड चित्र के अनुसार एक झुके हुए तल पर बिना फिसले लुढ़क रहा है। तल की धरातल से ऊँचाई \(h\) है, झुकाव कोण \(\theta\) है, और पिण्ड का द्रव्यमान \(M\) है।
जब पिण्ड ढलान पर नीचे आता है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा (संभावित ऊर्जा) में कमी आती है और यह गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। लोटनी गति में पिण्ड की दो प्रकार की गतिज ऊर्जाएँ होती हैं: (i) रेखीय गतिज ऊर्जा (जो सीधी चाल के कारण होती है), और (ii) घूर्णी गतिज ऊर्जा (जो घूमने के कारण होती है)।
ऊर्जा संरक्षण के नियम से:
स्थितिज ऊर्जा में कमी = गतिज ऊर्जा में वृद्धि
\(Mgh = \frac{1}{2} M v^{2} + \frac{1}{2} I \omega^{2}\) ...(1)
यहाँ \(v\) पिण्ड के द्रव्यमान केंद्र का रेखीय वेग है जब वह तल के नीचे पहुँचता है, और \(\omega\) उसका द्रव्यमान केंद्र के परितः कोणीय वेग है। \(I\) जड़त्व आघूर्ण है।
हम जानते हैं कि \(I = MK^2\) (जहाँ \(K\) घूर्णन त्रिज्या है) और \(v = R\omega \implies \omega = v/R\)। इन मानों को समीकरण (1) में रखने पर:
\(Mgh = \frac{1}{2} M v^{2} + \frac{1}{2} MK^2 \left(\frac{v^{2}}{R^{2}}\right)\)
\(Mgh = \frac{1}{2} M v^{2} \left(1 + \frac{K^{2}}{R^{2}}\right)\) ...(2)
अतः, नत तल पर लोटनी गति कर रही वस्तु की तली के निचले सिरे पर कुल गतिज ऊर्जा का सूत्र समीकरण (2) के दाहिने हाथ वाला भाग है। यह उसकी प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा के बराबर होता है जो गतिज ऊर्जा में बदल गई है।
In simple words: ढलान पर लुढ़कती हुई वस्तु की कुल गतिज ऊर्जा \(\frac{1}{2} M v^{2} \left(1 + \frac{K^{2}}{R^{2}}\right)\) होती है, जो उसकी शुरुआती ऊँचाई से मिलने वाली संभावित ऊर्जा के बराबर होती है।
🎯 Exam Tip: इस सूत्र में \(K^2/R^2\) का मान विभिन्न ठोस आकृतियों (जैसे गोला, बेलन, वलय) के लिए अलग-अलग होता है, जिससे कुल गतिज ऊर्जा का मान भी बदल जाएगा।
Rbse Class 11 Physics Chapter 7 निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. द्रव्यमान केंद्र से क्या अभिप्राय है? दो कणों के निकाय के द्रव्यमान केंद्र की स्थिति का व्यंजक प्राप्त कीजिये।
Answer: किसी पिंड या निकाय का द्रव्यमान केंद्र वह खास बिंदु होता है जहाँ पर पूरे पिंड का द्रव्यमान एक साथ इकट्ठा माना जा सकता है। इसका मतलब है कि पूरे पिंड की गति को इस केंद्र पर लगने वाले बल के असर से समझा जा सकता है। द्रव्यमान केंद्र किसी भी वस्तु का वह बिंदु होता है जहाँ पर उसका पूरा द्रव्यमान केंद्रित माना जाता है। अगर वस्तु का आकार एक जैसा और नियमित हो, तो यह बिंदु उसके बीच में होगा। लेकिन अगर वस्तु का आकार टेढ़ा-मेढ़ा हो, तो यह उसके द्रव्यमान के फैलाव पर निर्भर करेगा, न कि सिर्फ उसकी जगह पर। अगर कोई सख्त पिंड (rigid body) बाहर से लगे बल के कारण चलता है, तो उसकी गति को ऐसे समझा जा सकता है जैसे वह पूरा बल उसके द्रव्यमान केंद्र पर ही लग रहा हो। गति के दौरान द्रव्यमान केंद्र की स्थिति बदलती नहीं है।
Answer: मान लीजिए कि एक कण पर दूसरा कण अंदरूनी बल (\( \overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}^{\prime} \)) लगा रहा है और बाहर से भी एक बल (\( \overrightarrow{\mathrm{F}_{1}^{\prime \prime}} \)) लग रहा है। तो इस पहले कण पर कुल बल (\( \overrightarrow{\mathrm{F}_{1}} \)) इन दोनों बलों को जोड़कर मिलेगा, यानी \( \overrightarrow{\mathrm{F}_{1}}=\overrightarrow{\mathrm{F}_{1}^{\prime}}+\overrightarrow{\mathrm{F}_{1}^{\prime \prime}} \). न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, किसी कण पर लगने वाला बल उसके वेग में बदलाव की दर के बराबर होता है, जिसे संवेग परिवर्तन की दर (\( \frac{d \overrightarrow{p_{1}}}{d t} \)) कहते हैं। इसी तरह, दूसरे कण पर भी बल (\( \overrightarrow{\mathrm{F}_{2}} \)) और उसके संवेग में परिवर्तन की दर (\( \frac{d \overrightarrow{p_{2}}}{d t} \)) होगी। इसलिए, दोनों कणों पर लगने वाले कुल बल को उनके संवेग परिवर्तन की दरों के योग के रूप में लिखा जा सकता है: \( \overrightarrow{\mathrm{F}}_{1}+\overrightarrow{\mathrm{F}}_{2}=\frac{d \overrightarrow{p_{1}}}{d t}+\frac{d \overrightarrow{p_{2}}}{d t} \). इसे और खोलने पर, \( \overrightarrow{\mathrm{F}_{1}^{\prime}}+\overrightarrow{\mathrm{F}_{1}^{\prime \prime}}+\overrightarrow{\mathrm{F}_{2}^{\prime}}+\overrightarrow{\mathrm{F}_{2}^{\prime \prime}}=\frac{d \overrightarrow{p_{1}}}{d t}+\frac{d \overrightarrow{p_{2}}}{d t} \). न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, दो कणों के बीच के अंदरूनी बल एक-दूसरे के बराबर और विपरीत होते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे के असर को खत्म कर देते हैं।
Answer: जहां \( \overrightarrow{\mathrm{P}_{1}} \) पहले कण (द्रव्यमान \( \mathrm{m}_{1} \)) का संवेग है, और \( \overrightarrow{\mathrm{P}_{2}} \) दूसरे कण (द्रव्यमान \( \mathrm{m}_{2} \)) का संवेग है। न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, दूसरे कण पर कुल बल \( \overrightarrow{\mathrm{F}_{2}} \) उसके संवेग परिवर्तन की दर (\( \frac{d \overrightarrow{P_{2}}}{d t} \)) के बराबर होगा। इस बल में बाहरी बल (\( \overrightarrow{\mathrm{F}}_{2}^{\prime} \)) और पहले कण से लगने वाला अंदरूनी बल (\( \overrightarrow{\mathrm{F}_{2}^{\prime \prime}} \)) शामिल हैं। क्योंकि निकाय में केवल दो कण हैं, इसलिए निकाय पर लगने वाला कुल बल (\( \overrightarrow{\mathrm{F}} \)) दोनों कणों के कुल संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होगा। न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, अंदरूनी बल एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं (\( \overrightarrow{\mathrm{F}_{1}^{\prime}}+\overrightarrow{\mathrm{F}_{2}^{\prime}}=0 \)). इसलिए, निकाय पर कुल परिणामी बल केवल बाहरी बलों (\( \overrightarrow{\mathrm{F}_{1}^{\prime \prime}}+\overrightarrow{\mathrm{F}_{2}^{\prime \prime}} \)) के योग के बराबर होता है। यह कुल बल निकाय के कुल संवेग (\( \overrightarrow{P_{1}}+\overrightarrow{P_{2}} \)) में परिवर्तन की दर के बराबर होता है। तब, कुल बल (\( \overrightarrow{\mathrm{F}} \)) को कुल संवेग में परिवर्तन की दर के रूप में लिखा जा सकता है। क्योंकि कणों का द्रव्यमान \( \mathrm{m}_{1} \) और \( \mathrm{m}_{2} \) स्थिर होता है, इसलिए हम इस समीकरण को \( \overrightarrow{\mathrm{F}}=m_{1} \frac{d^{2} \vec{r}_{1}}{d t^{2}}+m_{2} \frac{d^{2} \vec{r}_{2}}{d t^{2}} \) के रूप में लिख सकते हैं। इसे आगे सरल करने पर, \( \overrightarrow{\mathrm{F}}=\frac{d^{2}}{d t^{2}}\left(\frac{m_{1} \vec{r}_{1}+m_{2} \vec{r}_{2}}{m_{1}+m_{2}}\right)\left(m_{1}+m_{2}\right) \) मिलता है। यदि हम निकाय के कुल द्रव्यमान को \( \mathrm{M} = \mathrm{m}_{1} + \mathrm{m}_{2} \) मानें, तो हमें \( \overrightarrow{\mathrm{F}}=M \frac{d^{2} \vec{r}_{c m}}{d t^{2}} \) समीकरण प्राप्त होता है। यहाँ, \( \vec{r}_{c m}=\frac{m_{1} \vec{r}_{1}+m_{2} \vec{r}_{2}}{m_{1}+m_{2}} \) ही दो कणों के निकाय का द्रव्यमान केंद्र का स्थिति सदिश है। इस समीकरण से पता चलता है कि द्रव्यमान केंद्र के परितः सभी द्रव्यमान आघूर्णों का योग शून्य होता है। इसका मतलब है कि कणों की द्रव्यमान केंद्र से दूरी उनके द्रव्यमानों के व्युत्क्रमानुपाती होती है; यानी, भारी कण द्रव्यमान केंद्र के करीब होते हैं, और हल्के कण दूर होते हैं।
In simple words: द्रव्यमान केंद्र वह बिंदु होता है जहाँ वस्तु का सारा द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है। दो कणों के लिए, इसका स्थान उनके द्रव्यमान और दूरी पर निर्भर करता है। भारी कण द्रव्यमान केंद्र के पास होते हैं, और हल्के कण दूर होते हैं।
🎯 Exam Tip: द्रव्यमान केंद्र की परिभाषा और उसका समीकरण, खासकर दो-कण प्रणाली के लिए, बहुत महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करें कि आप सदिश नोटेशन (vector notation) को सही ढंग से लिखें।
Question 2. लम्बवत् या समकोणिक अक्षों की प्रमेय (Theorem of Perpendicular Axis) क्या है? किसी समतल पटल (Plane lamina) का उसके तल के लम्बवत् अक्ष के सापेक्ष जड़त्व-आघूर्ण उसके तल में स्थित दो पारस्परिक लम्बवत् अक्षों के सापेक्ष जड़त्व-आघूर्णो के योग के तुल्य होता है। जबकि अभीष्ट अक्ष दोनों लम्बवत् अक्षों के कटान बिन्दु से होकर गुजरती हैं। यदि किसी समतल पटल का जड़त्व-आघूर्ण दो लम्बवत् अक्षों (OX व OY के सापेक्ष \( \mathrm{I}_{x} \) तथा \( \mathrm{I}_{y} \) हों और इनके कटान बिन्दु से गुजरने वाली अभिलम्बवंत् अक्ष (OZ) के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \( \mathrm{I}_{z} \) हो तो लम्बवत् अक्षों की प्रमेय से \( \mathrm{I}_{z} = \mathrm{I}_{x} + \mathrm{I}_{y} \) होता है।
Answer: लंबवत अक्षों की यह प्रमेय किसी समतल पटल (एक पतली, सपाट वस्तु) के लिए जड़त्व-आघूर्ण की गणना करने का एक आसान तरीका बताती है। मान लीजिए, हमारे पास एक समतल पटल है और हम उसके तल में दो सीधी रेखाएं (OX और OY) खींचते हैं जो एक-दूसरे पर लंबवत हों। एक तीसरी अक्ष (OZ) इन दोनों रेखाओं के कटान बिंदु से होकर जाती है और पटल के तल के ठीक लंबवत होती है। इस प्रमेय के अनुसार, OZ अक्ष के सापेक्ष पटल का जड़त्व-आघूर्ण (\( \mathrm{I}_{z} \)) उन दो अक्षों (OX और OY) के सापेक्ष जड़त्व-आघूर्णों (\( \mathrm{I}_{x} \) और \( \mathrm{I}_{y} \)) के योग के बराबर होता है। इसे \( \mathrm{I}_{z} = \mathrm{I}_{x} + \mathrm{I}_{y} \) लिखा जाता है। इस प्रमेय को सिद्ध करने के लिए, हम पटल पर एक छोटा कण (\( \mathrm{m} \)) लेते हैं, जिसके निर्देशांक \( (\mathrm{x}, \mathrm{y}) \) हैं और जो मूल बिंदु से \( \mathrm{r} \) दूरी पर है। तब, \( \mathrm{I}_{x} = \sum my^2 \), \( \mathrm{I}_{y} = \sum mx^2 \), और \( \mathrm{I}_{z} = \sum mr^2 = \sum m(x^2 + y^2) = \sum mx^2 + \sum my^2 \) होता है, जिससे यह सूत्र सिद्ध हो जाता है। यह प्रमेय सभी पिंडों पर लागू होती है जिन्हें ऐसे पतले, समतल हिस्सों में बांटा जा सके। यह जड़त्व-आघूर्ण की गणना को आसान बनाती है, खासकर जब वस्तु के आकार जटिल हों।
In simple words: लंबवत अक्षों की प्रमेय कहती है कि एक सपाट चीज़ का अपने तल के लंबवत अक्ष पर घूमने का बल, उसके तल में मौजूद दो सीधी और एक-दूसरे के लंबवत अक्षों पर घूमने के बल को जोड़ने से मिलता है। यह चीज़ों को घुमाने में कितनी मुश्किल होगी, यह बताने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रमेय को हमेशा एक समतल पटल (plane lamina) के लिए ही लागू करें। यह त्रि-आयामी (3D) पिंडों के लिए लागू नहीं होती।
Question 3. किसी चकती को उसके केंद्र से पारित तल के लंबवत् अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिये।
Answer: एक चकती का जड़त्व-आघूर्ण उसके केंद्र से गुजरने वाली और उसके तल के लंबवत अक्ष के सापेक्ष ज्ञात करने के लिए, हम उसे बहुत सारी छोटी-छोटी संकेन्द्रीय वलयों से बना मान सकते हैं। मान लीजिए, एक वलय की त्रिज्या \( \mathrm{x} \) और मोटाई \( \mathrm{dx} \) है। इस वलय का द्रव्यमान \( \mathrm{dm} = \frac{2 M x d x}{R^{2}} \) होता है, जहाँ \( \mathrm{M} \) चकती का कुल द्रव्यमान और \( \mathrm{R} \) उसकी त्रिज्या है। इस छोटी वलय का जड़त्व-आघूर्ण \( \mathrm{dI} = \mathrm{dm} \cdot x^{2} = \frac{2 M x^{3}}{R^{2}} d x \) होगा। पूरी चकती का कुल जड़त्व-आघूर्ण ज्ञात करने के लिए, हम इन सभी वलयों के जड़त्व-आघूर्णों को \( \mathrm{x}=0 \) से \( \mathrm{x}=\mathrm{R} \) तक इंटीग्रेट (integrate) करते हैं। ऐसा करने पर, हमें \( \mathrm{I}=\frac{M R^{2}}{2} \) मिलता है। यदि हम घूर्णन त्रिज्या \( \mathrm{K} \) ज्ञात करना चाहें, तो यह \( \mathrm{K}=\sqrt{\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{M}}} = \frac{R}{\sqrt{2}} \) के बराबर होती है। यह सूत्र दिखाता है कि एक डिस्क को उसके केंद्र पर घूमने में कितना प्रतिरोध होता है।
In simple words: एक डिस्क को उसके बीच में से जाने वाली सीधी लाइन पर घुमाने के लिए, कितना बल लगेगा, यह \( \mathrm{I}=\frac{M R^{2}}{2} \) सूत्र से पता चलता है। यहाँ \( \mathrm{M} \) डिस्क का वजन और \( \mathrm{R} \) उसकी गोलाई (त्रिज्या) है।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र एक ठोस चकती के लिए है। ध्यान दें कि एक वलय (ring) के लिए जड़त्व-आघूर्ण \( \mathrm{MR}^2 \) होता है, क्योंकि उसका सारा द्रव्यमान किनारे पर केंद्रित होता है।
Question 4. एवं लम्बाई के लम्बवत् एवं द्रव्यमान केंद्र से गुजरने वाली अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिये।
Answer: किसी बेलन का द्रव्यमान केंद्र से गुजरने वाली और उसकी लंबाई के लंबवत अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण निकालने के लिए, हम पूरे बेलन को छोटी-छोटी चकतियों से बना मान सकते हैं। प्रत्येक चकती का द्रव्यमान \( \mathrm{dm} = \frac{M}{L} \mathrm{dx} \) होता है, जहाँ \( \mathrm{M} \) बेलन का कुल द्रव्यमान और \( \mathrm{L} \) उसकी लंबाई है। एक चकती का जड़त्व आघूर्ण उसके अपने अक्ष के सापेक्ष \( \frac{1}{4} \mathrm{dm} R^2 \) होता है, और अगर वह केंद्र से \( \mathrm{x} \) दूरी पर हो, तो समानांतर अक्षों की प्रमेय के अनुसार उसका जड़त्व आघूर्ण \( \mathrm{dI}_{\mathrm{YY}'}=\frac{1}{4} \mathrm{dm} R^{2} + \mathrm{dm} x^{2} \) होगा। सभी चकतियों के जड़त्व आघूर्णों को जोड़ने के लिए, हम \( \mathrm{x}=-L/2 \) से \( \mathrm{x}=L/2 \) तक इंटीग्रेट करते हैं। यह गणना करने पर, हमें बेलन का कुल जड़त्व आघूर्ण \( \mathrm{I}_{\mathrm{YY}'}=M\left(\frac{R^{2}}{4}+\frac{L^{2}}{12}\right) \) प्राप्त होता है। यहाँ \( \mathrm{R} \) बेलन की त्रिज्या है। इस जड़त्व आघूर्ण से पता चलता है कि बेलन को इस अक्ष पर घुमाने में कितनी मुश्किल होगी। घूर्णन त्रिज्या \( \mathrm{K}=\sqrt{\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{M}}} = \sqrt{\frac{R^{2}}{4}+\frac{L^{2}}{12}} \) होती है, जो पिंड के द्रव्यमान वितरण को दर्शाती है।
In simple words: एक बेलन को उसकी लंबाई के बीच से और लंबवत घूमने में कितनी ताकत लगेगी, यह जानने के लिए \( \mathrm{I}=M\left(\frac{R^{2}}{4}+\frac{L^{2}}{12}\right) \) सूत्र का उपयोग करते हैं। यहाँ \( \mathrm{M} \) वजन, \( \mathrm{R} \) त्रिज्या और \( \mathrm{L} \) लंबाई है।
🎯 Exam Tip: समानांतर अक्षों की प्रमेय (Theorem of Parallel Axes) का सही उपयोग करना सीखें। यह प्रमेय आपको किसी भी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व-आघूर्ण ज्ञात करने में मदद करती है, बशर्ते आपको द्रव्यमान केंद्र से गुजरने वाले अक्ष के सापेक्ष जड़त्व-आघूर्ण ज्ञात हो।
Question 5. किसी ठोस गोले का इसके व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिये।
Answer: एक ठोस गोले का जड़त्व आघूर्ण उसके व्यास के सापेक्ष निकालने के लिए, हम कल्पना करते हैं कि गोला बहुत सी पतली चकतियों से मिलकर बना है। हर चकती का अपना केंद्र XX' अक्ष पर है और इसकी त्रिज्या \( \mathrm{y} \) है। गोले का घनत्व \( \rho = \frac{\mathrm{M}}{\frac{4}{3} \pi \mathrm{R}^{3}} \) है। एक चकती का आयतन \( \pi y^2 dx \) और उसका द्रव्यमान \( \mathrm{dm} = \pi y^2 \rho dx \) होगा। इस छोटी चकती का जड़त्व आघूर्ण \( \mathrm{dl} = \frac{1}{2} \mathrm{dm} y^2 \) है। क्योंकि \( y^2 = R^2 - x^2 \), हम \( \mathrm{dl} = \frac{1}{2} \pi \rho (R^2 - x^2)^2 dx \) लिख सकते हैं। पूरे गोले का जड़त्व आघूर्ण ज्ञात करने के लिए, हम इन सभी चकतियों के जड़त्व आघूर्णों को \( \mathrm{x}=-R \) से \( \mathrm{x}=+R \) तक इंटीग्रेट करते हैं। सभी गणनाएँ करने के बाद, हमें ठोस गोले का जड़त्व आघूर्ण \( \mathrm{I}=\frac{2}{5} M R^{2} \) मिलता है। यहाँ \( \mathrm{M} \) गोले का द्रव्यमान और \( \mathrm{R} \) उसकी त्रिज्या है। यह सूत्र बताता है कि एक ठोस गोले को उसके व्यास के चारों ओर घुमाने में कितना प्रतिरोध होता है।
In simple words: एक ठोस गेंद को उसके बीच में से जाने वाली सीधी लाइन पर घुमाने के लिए, कितनी ताकत चाहिए, यह \( \mathrm{I}=\frac{2}{5} M R^{2} \) सूत्र से पता चलता है। \( \mathrm{M} \) वजन और \( \mathrm{R} \) गेंद की गोलाई है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि यह सूत्र केवल एक *ठोस* गोले के लिए है। खोखले गोले (spherical shell) के लिए जड़त्व-आघूर्ण का सूत्र अलग होता है, जो \( \frac{2}{3} MR^2 \) होता है।
Question 6. आयताकार छड़ का उसके द्रव्यमान केंद्र से गुजरने वाली व छड़ की लम्बाई के लम्बवत् अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण के सूत्र को व्युत्पन्न कीजिये।
Answer: एक आयताकार छड़ का जड़त्व-आघूर्ण उसके द्रव्यमान केंद्र से गुजरने वाली और उसकी लंबाई के लंबवत अक्ष के सापेक्ष ज्ञात करने के लिए, हम उसे बहुत सारी पतली-पतली आयताकार पट्टियों से बना मान सकते हैं। हर पट्टी की चौड़ाई \( \mathrm{dx} \) है और वह केंद्र से \( \mathrm{x} \) दूरी पर है। यदि छड़ का कुल द्रव्यमान \( \mathrm{M} \), लंबाई \( \mathrm{L} \) और चौड़ाई \( \mathrm{B} \) है, तो एक छोटी पट्टी का जड़त्व आघूर्ण \( \mathrm{dI}_{\mathrm{YY}'} = \sigma B x^{2} dx \) होगा, जहाँ \( \sigma \) एकांक क्षेत्रफल का द्रव्यमान है। पूरी छड़ का जड़त्व आघूर्ण ज्ञात करने के लिए, हम इन सभी पट्टियों के जड़त्व आघूर्णों को \( \mathrm{x}=-L/2 \) से \( \mathrm{x}=L/2 \) तक इंटीग्रेट करते हैं। यह गणना करने पर, हमें आयताकार छड़ का जड़त्व आघूर्ण \( \mathrm{I}_{\mathrm{YY}'}=\frac{M L^{2}}{12} \) मिलता है। यहाँ \( \mathrm{M} \) छड़ का द्रव्यमान और \( \mathrm{L} \) उसकी लंबाई है। यह सूत्र दिखाता है कि एक आयताकार छड़ को उसकी लंबाई के लंबवत अक्ष पर घुमाने में कितना प्रतिरोध होता है।
In simple words: एक सीधी छड़ को उसके बीच में से और लंबाई के आर-पार घुमाने में कितनी ताकत लगेगी, यह जानने के लिए \( \mathrm{I}=\frac{M L^{2}}{12} \) सूत्र का उपयोग करते हैं। \( \mathrm{M} \) छड़ का वजन और \( \mathrm{L} \) उसकी लंबाई है।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र एक समान आयताकार छड़ के लिए है। ध्यान दें कि जड़त्व-आघूर्ण का मान अक्ष की स्थिति पर निर्भर करता है।
Question 7. किसी खोखले गोले का उसके व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिये।
Answer: खोखले गोले का उसके व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण निकालने के लिए, हम इसे बहुत पतली वृत्ताकार चकतियों से बना हुआ मान सकते हैं। हर चकती का केन्द्र गोले के व्यास पर होता है और उसकी सतह व्यास के समांतर होती है। गोले के द्रव्यमान और त्रिज्याओं का उपयोग करके हम प्रत्येक चकती का जड़त्व आघूर्ण निकालते हैं और फिर सभी चकतियों के आघूर्णों को जोड़कर पूरे गोले का आघूर्ण प्राप्त करते हैं। यह तरीका हमें जटिल आकृतियों के जड़त्व आघूर्णों की गणना करने में मदद करता है।
माना एक खोखले गोले का द्रव्यमान \( M \), घनत्व \( \rho \), भीतरी त्रिज्या \( R_2 \) तथा बाहरी त्रिज्या \( R_1 \) है।
अतः \( M = \frac{4}{3} \pi (R_1^3 - R_2^3) \rho \)
या \( \rho = \frac{M}{\frac{4}{3} \pi (R_1^3 - R_2^3)} \)
एक छोटी चकती का उसके व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \( dI = \frac{1}{2} d m y^2 \)
यहाँ, \( dm = \rho \cdot \pi y^2 dx \) और \( y^2 = R^2 - x^2 \)
कुल जड़त्व आघूर्ण, \( I = \int_{-R_1}^{R_1} \frac{1}{2} \rho \pi (R_1^2 - x^2)^2 dx \)
समानुपाती \( R_1 \) और \( R_2 \) के लिए समाकलन करने पर, एक खोखले गोले का व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण निम्नलिखित सूत्र से दिया जाता है:
\( I = \frac{2}{5} M \frac{(R_1^5 - R_2^5)}{(R_1^3 - R_2^3)} \)
In simple words: एक खोखले गोले के व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण को उसके कुल द्रव्यमान और बाहरी व भीतरी त्रिज्याओं का उपयोग करके एक खास सूत्र से निकाला जाता है।
🎯 Exam Tip: खोखले गोले और ठोस गोले के जड़त्व आघूर्ण के सूत्रों में अंतर को हमेशा याद रखें; यह परीक्षा में एक सामान्य गलती का कारण होता है।
Question 8. सिद्ध कीजिये कि एक पिण्ड की, जो घूर्णन गति में है, गतिज ऊर्जा \( \frac{1}{2} I\omega^2 \) है।
Answer: जब कोई वस्तु किसी अक्ष के चारों ओर घूमती है, तो उसके सभी कण भी वृत्ताकार पथ में घूमते हैं। इन कणों की कुल घूर्णी गतिज ऊर्जा वस्तु की कुल गतिज ऊर्जा होती है। यह ऊर्जा जड़त्व आघूर्ण और कोणीय वेग के वर्ग पर निर्भर करती है। घूर्णी गतिज ऊर्जा को समझना मशीनों की गति और संतुलन को जानने के लिए महत्वपूर्ण है।
माना एक दृढ़ वस्तु (rigid body) किसी अक्ष PQ के सापेक्ष कोणीय वेग \( \omega \) से घूर्णन कर रही है। इस वस्तु के कणों के द्रव्यमान क्रमशः \( m_1, m_2, m_3, \ldots, m_n \) हैं। इनकी घूर्णन अक्ष से लम्बवत् दूरियाँ क्रमशः \( r_1, r_2, r_3, \ldots, r_n \) हैं।
प्रत्येक कण का रेखीय वेग \( v \) उसके घूर्णन अक्ष से दूरी \( r \) और कोणीय वेग \( \omega \) के गुणनफल के बराबर होता है: \( v = r\omega \).
इसलिए,
पहले कण की गतिज ऊर्जा \( E_1 = \frac{1}{2} m_1 v_1^2 = \frac{1}{2} m_1 (r_1 \omega)^2 = \frac{1}{2} m_1 r_1^2 \omega^2 \)
दूसरे कण की गतिज ऊर्जा \( E_2 = \frac{1}{2} m_2 v_2^2 = \frac{1}{2} m_2 (r_2 \omega)^2 = \frac{1}{2} m_2 r_2^2 \omega^2 \)
इसी प्रकार, सभी कणों की गतिज ऊर्जाएँ ज्ञात की जा सकती हैं।
वस्तु की कुल घूर्णी गतिज ऊर्जा (E) सभी कणों की गतिज ऊर्जाओं का योग होती है:
\( E = E_1 + E_2 + E_3 + \ldots + E_n \)
\( E = \frac{1}{2} m_1 r_1^2 \omega^2 + \frac{1}{2} m_2 r_2^2 \omega^2 + \ldots + \frac{1}{2} m_n r_n^2 \omega^2 \)
\( E = \frac{1}{2} \omega^2 (m_1 r_1^2 + m_2 r_2^2 + \ldots + m_n r_n^2) \)
पद \( (m_1 r_1^2 + m_2 r_2^2 + \ldots + m_n r_n^2) \) वस्तु का जड़त्व आघूर्ण \( I \) होता है, जो घूर्णन अक्ष के सापेक्ष होता है।
इसलिए, \( I = \sum m_i r_i^2 \)
अतः, घूर्णी गतिज ऊर्जा का सूत्र है: \( E = \frac{1}{2} I\omega^2 \)
In simple words: किसी भी घूमती हुई चीज की ऊर्जा को जानने के लिए, हमें यह देखना होता है कि उसका द्रव्यमान अक्ष से कितनी दूर है (जड़त्व आघूर्ण) और वह कितनी तेजी से घूम रही है (कोणीय वेग).
🎯 Exam Tip: इस सूत्र को व्युत्पन्न करते समय यह स्पष्ट करें कि सभी कणों का कोणीय वेग समान होता है, लेकिन उनका रेखीय वेग भिन्न हो सकता है।
Question 10. नत तल पर लोटनी गति कर रही वस्तु के लिये वेग व त्वरण के लिये सूत्र का मान व्युत्पन्न कीजिये।
Answer: जब कोई वस्तु नत तल पर लुढ़कती है, तो उसकी गतिज ऊर्जा दो हिस्सों में बँट जाती है: एक हिस्सा सीधी रेखा में चलने के कारण और दूसरा घूमने के कारण। ऊर्जा संरक्षण के नियम का उपयोग करके हम यह पता लगा सकते हैं कि लुढ़कती हुई वस्तु कितनी तेजी से चलेगी और उसका त्वरण कितना होगा। यह समझने से हम वास्तविक जीवन में पहियों, गेंदों और अन्य लुढ़कने वाली चीजों की गति का अनुमान लगा सकते हैं।
माना एक पिण्ड नत तल पर बिना फिसले लुढ़क रहा है।
तल की धरातल से ऊँचाई \( h \), झुकाव कोण \( \theta \) तथा पिण्ड का द्रव्यमान \( M \) और त्रिज्या \( R \) है।
जब पिण्ड नीचे आता है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा (Mgh) गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।
कुल गतिज ऊर्जा \( E = \frac{1}{2} Mv^2 + \frac{1}{2} I\omega^2 \)
जहाँ \( \frac{1}{2} Mv^2 \) स्थानांतरीय गतिज ऊर्जा है और \( \frac{1}{2} I\omega^2 \) घूर्णी गतिज ऊर्जा है।
ऊर्जा संरक्षण के नियम से:
स्थितिज ऊर्जा में कमी = गतिज ऊर्जा में वृद्धि
\( Mgh = \frac{1}{2} Mv^2 + \frac{1}{2} I\omega^2 \)
हम जानते हैं कि \( I = MK^2 \) और \( v = R\omega \implies \omega = \frac{v}{R} \)
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
\( Mgh = \frac{1}{2} Mv^2 + \frac{1}{2} MK^2 (\frac{v}{R})^2 \)
\( Mgh = \frac{1}{2} Mv^2 + \frac{1}{2} MK^2 \frac{v^2}{R^2} \)
\( Mgh = \frac{1}{2} Mv^2 (1 + \frac{K^2}{R^2}) \)
\( gh = \frac{1}{2} v^2 (1 + \frac{K^2}{R^2}) \)
\( v^2 = \frac{2gh}{(1 + \frac{K^2}{R^2})} \)
अतः, नत तल के तल पर वेग का सूत्र:
\( v = \sqrt{\frac{2gh}{(1 + \frac{K^2}{R^2})}} \)
अब त्वरण के लिए, यदि पिण्ड का त्वरण \( a \) हो, तो गति के समीकरण से:
\( v^2 = u^2 + 2as \)
जहाँ \( u = 0 \) (विरामावस्था से), \( s = \text{तल की लम्बाई} = \frac{h}{\sin\theta} \)
\( v^2 = 2as \)
\( a = \frac{v^2}{2s} \)
\( a = \frac{1}{2 (\frac{h}{\sin\theta})} \frac{2gh}{(1 + \frac{K^2}{R^2})} \)
\( a = \frac{gh \sin\theta}{h (1 + \frac{K^2}{R^2})} \)
अतः, नत तल पर त्वरण का सूत्र:
\( a = \frac{g \sin\theta}{(1 + \frac{K^2}{R^2})} \)
In simple words: नत तल पर लुढ़कती हुई चीज की चाल और तेजी (त्वरण) निकालने के लिए, हम उसकी गिरने वाली ऊर्जा और घूमने व चलने वाली ऊर्जा के बदलाव को देखते हैं।
🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करें कि आप \( K^2/R^2 \) पद का मान सही ढंग से उपयोग कर रहे हैं, क्योंकि यह विभिन्न आकृतियों (जैसे गोला, बेलन, वलय) के लिए अलग-अलग होता है।
RBSE Class 11 Physics Chapter 7 आंकिक प्रश्न
Question 1. दो कण जिनके वेग क्रमशः \( (\hat{i}+\hat{j}-\hat{k}) \) तथा \( (3 \hat{i}-2 \hat{j}+\hat{k}) \) cm s\(^{-1}\) हैं, द्विकण निकाय का निर्माण करते हैं। यदि कणों के द्रव्यमान क्रमशः 5 g व 2 g हों तो निकाय के द्रव्यमान केन्द्र का वेग क्या होगा?
Answer: द्रव्यमान केन्द्र का वेग वह औसत वेग होता है जिससे पूरा निकाय एक साथ चलता है। यह प्रत्येक कण के द्रव्यमान और उसके वेग पर निर्भर करता है। इस तरह से, हम पूरे सिस्टम की गति को एक बिंदु की गति के रूप में देख सकते हैं।
दिया है:
पहले कण का द्रव्यमान \( m_1 = 5 \text{ g} \)
पहले कण का वेग \( \vec{v_1} = (\hat{i}+\hat{j}-\hat{k}) \text{ cm s}^{-1} \)
दूसरे कण का द्रव्यमान \( m_2 = 2 \text{ g} \)
दूसरे कण का वेग \( \vec{v_2} = (3 \hat{i}-2 \hat{j}+\hat{k}) \text{ cm s}^{-1} \)
निकाय के द्रव्यमान केन्द्र का वेग \( \vec{v_{CM}} \) निम्न सूत्र से दिया जाता है:
\( \vec{v_{CM}} = \frac{m_1 \vec{v_1} + m_2 \vec{v_2}}{m_1 + m_2} \)
मान रखने पर:
\( \vec{v_{CM}} = \frac{5(\hat{i}+\hat{j}-\hat{k}) + 2(3 \hat{i}-2 \hat{j}+\hat{k})}{5+2} \)
\( \vec{v_{CM}} = \frac{(5\hat{i}+5\hat{j}-5\hat{k}) + (6 \hat{i}-4 \hat{j}+2 \hat{k})}{7} \)
\( \vec{v_{CM}} = \frac{(5+6)\hat{i} + (5-4)\hat{j} + (-5+2)\hat{k}}{7} \)
\( \vec{v_{CM}} = \frac{11\hat{i} + 1\hat{j} - 3\hat{k}}{7} \)
\( \vec{v_{CM}} = (\frac{11}{7}\hat{i} + \frac{1}{7}\hat{j} - \frac{3}{7}\hat{k}) \text{ cm s}^{-1} \)
In simple words: हमने दोनों कणों के द्रव्यमान और वेग को जोड़कर, कुल द्रव्यमान से भाग दिया, जिससे हमें उनके द्रव्यमान केन्द्र की औसत चाल मिल गई।
🎯 Exam Tip: सदिश योग करते समय \( \hat{i}, \hat{j}, \hat{k} \) घटकों को ध्यान से जोड़ें और घटाएँ।
Question 2. एक पहिया जो विरामावस्था में है, 3.0 rad s\(^{-2}\) के कोणीय त्वरण के अन्तर्गत 2.0 s तक घूमता है। इस समयान्तराल में पहिया कितना कोणीय वेग अर्जित करेगा तथा उसमें कितना विस्थापन होगा?
Answer: जब कोई पहिया घूमना शुरू करता है, तो उसका कोणीय वेग लगातार बढ़ता जाता है, और वह अपनी जगह से हटकर एक नया कोण बना लेता है। हम घूर्णन गति के नियमों का उपयोग करके यह पता लगा सकते हैं कि एक निश्चित समय में उसका कोणीय वेग कितना होगा और वह कितना घूमेगा। यह हमें मशीनों के घूमने वाले पुर्जों की गति को समझने में मदद करता है।
दिया है:
प्रारम्भिक कोणीय वेग \( \omega_0 = 0 \text{ rad s}^{-1} \) (विरामावस्था से)
कोणीय त्वरण \( \alpha = 3.0 \text{ rad s}^{-2} \)
समय \( t = 2.0 \text{ s} \)
ज्ञात करना है: कोणीय वेग \( \omega \) और कोणीय विस्थापन \( \theta \).
कोणीय वेग के लिए घूर्णन गति का पहला समीकरण उपयोग करेंगे:
\( \omega = \omega_0 + \alpha t \)
\( \omega = 0 + (3.0 \text{ rad s}^{-2}) \times (2.0 \text{ s}) \)
\( \omega = 6.0 \text{ rad s}^{-1} \)
कोणीय विस्थापन के लिए घूर्णन गति का दूसरा समीकरण उपयोग करेंगे:
\( \theta = \omega_0 t + \frac{1}{2} \alpha t^2 \)
\( \theta = (0 \text{ rad s}^{-1}) \times (2.0 \text{ s}) + \frac{1}{2} (3.0 \text{ rad s}^{-2}) \times (2.0 \text{ s})^2 \)
\( \theta = 0 + \frac{1}{2} \times 3.0 \times 4.0 \)
\( \theta = 6.0 \text{ rad} \)
In simple words: पहिया 2 सेकंड में 6 rad/s की रफ्तार पकड़ लेगा और कुल 6 रेडियन घूमेगा।
🎯 Exam Tip: घूर्णन गति के समीकरणों का उपयोग करते समय सभी इकाइयों (rad, rad/s, rad/s\(^2\)) को सुसंगत रखें।
Question 3. एक कार जो विराम अवस्था में है, 40rad s\(^{-2}\) के कोणीय त्वरण से त्वरित होती है। यह कितने समय में 800 चक्कर/ मिनट का कोणीय वेग प्राप्त करेगी?
Answer: जब कोई कार अपनी अधिकतम रफ्तार तक पहुँचने के लिए तेजी से चलती है, तो उसका पहिया बहुत तेजी से घूमना शुरू कर देता है। हमें यह पता लगाने के लिए कि उसे एक खास घूमने की रफ्तार तक पहुँचने में कितना समय लगेगा, हमें कोणीय गति के समीकरणों का उपयोग करना पड़ता है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि वाहन कितनी तेजी से गति बढ़ाते हैं।
दिया है:
प्रारम्भिक कोणीय वेग \( \omega_0 = 0 \text{ rad s}^{-1} \) (विराम अवस्था से)
कोणीय त्वरण \( \alpha = 40 \text{ rad s}^{-2} \)
अंतिम कोणीय वेग \( \omega = 800 \text{ चक्कर/मिनट} \)
पहले, अंतिम कोणीय वेग को rad/s में बदलें:
1 चक्कर = \( 2\pi \) रेडियन
1 मिनट = 60 सेकंड
\( \omega = 800 \frac{\text{चक्कर}}{\text{मिनट}} = 800 \times \frac{2\pi \text{ rad}}{60 \text{ s}} \)
\( \omega = \frac{1600\pi}{60} = \frac{80\pi}{3} \text{ rad s}^{-1} \)
अब, घूर्णन गति के पहले समीकरण का उपयोग करके समय \( t \) ज्ञात करें:
\( \omega = \omega_0 + \alpha t \)
\( \frac{80\pi}{3} = 0 + (40 \text{ rad s}^{-2}) \times t \)
\( t = \frac{80\pi}{3 \times 40} = \frac{2\pi}{3} \text{ s} \)
\( t \approx \frac{2 \times 3.14}{3} \approx \frac{6.28}{3} \approx 2.09 \text{ s} \)
In simple words: कार को 800 चक्कर प्रति मिनट की रफ्तार तक पहुँचने में लगभग 2.09 सेकंड का समय लगेगा।
🎯 Exam Tip: चक्कर/मिनट को हमेशा rad/s में बदलना याद रखें, क्योंकि अधिकांश भौतिकी सूत्र SI इकाइयों का उपयोग करते हैं।
Question 4. एक समबाहु त्रिभुज के शीर्षों पर रखे गये तीन कणों का द्रव्यमान केन्द्र ज्ञात कीजिये, कणों के द्रव्यमान क्रमशः 100g, 150 g एवं 200g हैं। त्रिभुज की प्रत्येक भुजा की लम्बाई 0.5m है।
Answer: द्रव्यमान केंद्र एक बिंदु होता है जहाँ पर पूरे निकाय का द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है। एक त्रिभुज के आकार में रखे गए कणों के द्रव्यमान केंद्र को खोजने के लिए, हम प्रत्येक कण के द्रव्यमान और उसकी स्थिति का उपयोग करते हैं। यह गणना हमें जटिल वस्तुओं के संतुलन बिंदु को समझने में मदद करती है।
समबाहु त्रिभुज की भुजा की लम्बाई \( a = 0.5 \text{ m} \)
कणों के द्रव्यमान:
\( m_1 = 100 \text{ g} \)
\( m_2 = 150 \text{ g} \)
\( m_3 = 200 \text{ g} \)
हम त्रिभुज के शीर्षों को निर्देशांक प्रणाली में रखते हैं:
पहला कण \( m_1 \) को मूल बिंदु पर: \( (x_1, y_1) = (0, 0) \)
दूसरा कण \( m_2 \) को x-अक्ष पर: \( (x_2, y_2) = (0.5, 0) \)
तीसरा कण \( m_3 \) के निर्देशांक ज्ञात करने के लिए, समबाहु त्रिभुज की ऊँचाई \( h = a \sin(60^\circ) = 0.5 \times \frac{\sqrt{3}}{2} = 0.25\sqrt{3} \text{ m} \) और x-घटक \( \frac{a}{2} = 0.25 \text{ m} \) होगा।
इसलिए, \( (x_3, y_3) = (0.25, 0.25\sqrt{3}) \)
द्रव्यमान केंद्र के x-निर्देशांक \( X_{CM} \) के लिए सूत्र:
\( X_{CM} = \frac{m_1 x_1 + m_2 x_2 + m_3 x_3}{m_1 + m_2 + m_3} \)
\( X_{CM} = \frac{(100 \times 0) + (150 \times 0.5) + (200 \times 0.25)}{100 + 150 + 200} \)
\( X_{CM} = \frac{0 + 75 + 50}{450} = \frac{125}{450} = \frac{5}{18} \text{ m} \)
द्रव्यमान केंद्र के y-निर्देशांक \( Y_{CM} \) के लिए सूत्र:
\( Y_{CM} = \frac{m_1 y_1 + m_2 y_2 + m_3 y_3}{m_1 + m_2 + m_3} \)
\( Y_{CM} = \frac{(100 \times 0) + (150 \times 0) + (200 \times 0.25\sqrt{3})}{100 + 150 + 200} \)
\( Y_{CM} = \frac{0 + 0 + 50\sqrt{3}}{450} = \frac{50\sqrt{3}}{450} = \frac{\sqrt{3}}{9} \text{ m} \)
अतः, द्रव्यमान केंद्र के निर्देशांक हैं \( (\frac{5}{18}, \frac{\sqrt{3}}{9}) \text{ m} \).
In simple words: हमने त्रिभुज के कोनों पर रखे तीनों कणों के द्रव्यमान और उनकी जगहों को जोड़कर, एक ऐसा बिंदु ढूंढा जहाँ पूरे त्रिभुज का वजन संतुलित रहेगा।
🎯 Exam Tip: ज्यामितीय आकृतियों के लिए द्रव्यमान केंद्र ज्ञात करते समय, शीर्षों के निर्देशांकों को सही ढंग से स्थापित करना बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 5. एक घूर्णन करते हुए पिण्ड में 4 rad s\(^{-2}\) का कोणीय त्वरण उत्पन्न करने के लिये 2.0 \( \times 10^{-4} \) Nm का बल आघूर्ण लगाना पड़ता है। पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण क्या है?
Answer: जब हम किसी चीज को घुमाना चाहते हैं, तो हमें उस पर बल आघूर्ण लगाना पड़ता है। किसी चीज को तेजी से घुमाने के लिए कितना बल आघूर्ण चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह चीज घूमने में कितनी भारी है, जिसे जड़त्व आघूर्ण कहते हैं। जड़त्व आघूर्ण जितना ज्यादा होगा, उसे घुमाने के लिए उतना ही ज्यादा बल आघूर्ण चाहिए होगा।
दिया है:
कोणीय त्वरण \( \alpha = 4 \text{ rad s}^{-2} \)
बल आघूर्ण \( \tau = 2.0 \times 10^{-4} \text{ Nm} \)
ज्ञात करना है: जड़त्व आघूर्ण \( I \).
बल आघूर्ण \( \tau \), जड़त्व आघूर्ण \( I \) और कोणीय त्वरण \( \alpha \) के बीच संबंध निम्न सूत्र से दिया जाता है:
\( \tau = I\alpha \)
जड़त्व आघूर्ण \( I \) के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर:
\( I = \frac{\tau}{\alpha} \)
मान रखने पर:
\( I = \frac{2.0 \times 10^{-4} \text{ Nm}}{4 \text{ rad s}^{-2}} \)
\( I = 0.5 \times 10^{-4} \text{ kg m}^2 \)
In simple words: घूमने वाली चीज को 4 rad/s\(^2\) की तेजी से घुमाने के लिए \( 2.0 \times 10^{-4} \) Nm बल आघूर्ण चाहिए, तो उसका जड़त्व आघूर्ण \( 0.5 \times 10^{-4} \) kg m\(^2\) है।
🎯 Exam Tip: जड़त्व आघूर्ण के सूत्र (\( I = \frac{\tau}{\alpha} \)) का उपयोग करते समय सभी इकाइयाँ (Nm और rad/s\(^2\)) SI प्रणाली में होनी चाहिए।
Question 6. एक द्वि-परमाणु अणु (diatomic molecule) में दो परमाणुओं का द्रव्यमान m\(_{1}\) तथा m\(_{2}\) है। इन परमाणुओं के बीच अचर दूरी a मीटर है। निकाय का जड़त्व आघूर्ण, निकाय के गुरुत्वीय केन्द्र तथा परमाणुओं को जोड़ने वाली रेखा के लम्बवत् गुजरने वाले अक्ष के सापेक्ष ज्ञात कीजिये।
Answer: एक दो परमाणुओं वाले अणु का घूमना तब आसान हो जाता है जब हम उसका जड़त्व आघूर्ण जानते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रत्येक परमाणु कितना भारी है और वे कितने दूर हैं, खासकर गुरुत्व केंद्र से। जड़त्व आघूर्ण की गणना से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि छोटे अणु कैसे घूमते हैं और कंपन करते हैं।
दिया है:
दो परमाणुओं के द्रव्यमान: \( m_1 \) और \( m_2 \)
परमाणुओं के बीच की दूरी: \( a \)
निकाय के द्रव्यमान केंद्र की परिभाषा से, यदि \( r_1 \) और \( r_2 \) क्रमशः \( m_1 \) और \( m_2 \) की द्रव्यमान केंद्र से दूरियाँ हैं:
\( m_1 r_1 = m_2 r_2 \)
और \( r_1 + r_2 = a \implies r_2 = a - r_1 \)
इसलिए, \( m_1 r_1 = m_2 (a - r_1) = m_2 a - m_2 r_1 \)
\( (m_1 + m_2) r_1 = m_2 a \)
\( r_1 = \frac{m_2 a}{m_1 + m_2} \)
इसी प्रकार, \( r_2 = a - r_1 = a - \frac{m_2 a}{m_1 + m_2} = \frac{m_1 a}{m_1 + m_2} \)
गुरुत्व केंद्र से गुजरने वाली और परमाणुओं को जोड़ने वाली रेखा के लम्बवत् अक्ष के सापेक्ष निकाय का जड़त्व आघूर्ण \( I \) निम्न सूत्र से दिया जाता है:
\( I = m_1 r_1^2 + m_2 r_2^2 \)
\( I = m_1 (\frac{m_2 a}{m_1 + m_2})^2 + m_2 (\frac{m_1 a}{m_1 + m_2})^2 \)
\( I = m_1 \frac{m_2^2 a^2}{(m_1 + m_2)^2} + m_2 \frac{m_1^2 a^2}{(m_1 + m_2)^2} \)
\( I = \frac{m_1 m_2^2 a^2 + m_2 m_1^2 a^2}{(m_1 + m_2)^2} \)
\( I = \frac{m_1 m_2 a^2 (m_2 + m_1)}{(m_1 + m_2)^2} \)
\( I = \frac{m_1 m_2 a^2}{(m_1 + m_2)} \)
इसे 'समानीत द्रव्यमान' \( \mu = \frac{m_1 m_2}{m_1 + m_2} \) के रूप में भी लिखा जा सकता है।
अतः, \( I = \mu a^2 \)
In simple words: हमने दो परमाणुओं के द्रव्यमान और उनके बीच की दूरी का उपयोग करके, उस अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण निकाला जो उनके गुरुत्व केंद्र से होकर गुजरती है।
🎯 Exam Tip: समानीत द्रव्यमान \( \mu \) के अवधारणा को समझें, क्योंकि यह द्वि-कण निकाय की गतिज समस्याओं को सरल बनाता है।
Question 7. एक वृत्ताकार चकती जिसकी त्रिज्या 0.5 m एवं द्रव्यमान 25 kg है, अपनी धुरी पर 120 चक्कर/मिनट की रफ्तार से घूर्णन करती है। चकती का जड़त्व आघूर्ण एवं घूर्णन की गतिज ऊर्जा का परिकलन कीजिये।
Answer: एक घूमती हुई चकती का जड़त्व आघूर्ण यह बताता है कि उसे घुमाना कितना मुश्किल है, जबकि उसकी घूर्णी गतिज ऊर्जा बताती है कि उसमें घूमने के कारण कितनी ऊर्जा है। इन दोनों को जानकर हम मशीनों के घूमते हुए हिस्सों के व्यवहार को समझ सकते हैं।
दिया है:
त्रिज्या \( R = 0.5 \text{ m} \)
द्रव्यमान \( M = 25 \text{ kg} \)
घूर्णन गति \( n = 120 \text{ चक्कर/मिनट} \)
पहले, घूर्णन गति को rad/s में बदलें:
\( n = \frac{120 \text{ चक्कर}}{60 \text{ s}} = 2 \text{ चक्कर/s} \)
कोणीय वेग \( \omega = 2\pi n = 2\pi \times 2 = 4\pi \text{ rad s}^{-1} \)
वृत्ताकार चकती का अपनी धुरी (केंद्र से गुजरने वाली और तल के लंबवत्) के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \( I \) का सूत्र है:
\( I = \frac{1}{2} MR^2 \)
मान रखने पर:
\( I = \frac{1}{2} \times 25 \text{ kg} \times (0.5 \text{ m})^2 \)
\( I = \frac{1}{2} \times 25 \times 0.25 = \frac{6.25}{2} = 3.125 \text{ kg m}^2 \)
अब, घूर्णी गतिज ऊर्जा \( E_r \) का सूत्र है:
\( E_r = \frac{1}{2} I\omega^2 \)
मान रखने पर:
\( E_r = \frac{1}{2} \times (3.125 \text{ kg m}^2) \times (4\pi \text{ rad s}^{-1})^2 \)
\( E_r = \frac{1}{2} \times 3.125 \times 16\pi^2 \)
\( E_r = 3.125 \times 8 \times (3.14)^2 \)
\( E_r = 25 \times 9.8596 \)
\( E_r \approx 246.49 \text{ J} \)
In simple words: चकती का वजन और त्रिज्या से उसका जड़त्व आघूर्ण \( 3.125 \text{ kg m}^2 \) है, और उसकी घूमने की ऊर्जा \( 246.49 \text{ J} \) है।
🎯 Exam Tip: जड़त्व आघूर्ण के सूत्र को सही ढंग से चुनें (ठोस चकती के लिए \( \frac{1}{2}MR^2 \)) और कोणीय वेग को हमेशा रेडियन प्रति सेकंड (rad/s) में व्यक्त करें।
Question 8. एक M द्रव्यमान तथा L लम्बाई की पतली छड़ का जड़त्व आघूर्ण उसकी लम्बाई के लम्बवत् तथा एक सिरे से L/4 बिन्दु से गुजरने वाली अक्ष के सापेक्ष क्या होगा?
Answer: किसी छड़ को घुमाने के लिए कितना बल चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम उसे कहाँ से पकड़कर घुमा रहे हैं। जड़त्व आघूर्ण हमें यह बताता है। समानांतर अक्षों के प्रमेय का उपयोग करके हम आसानी से किसी भी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कर सकते हैं, अगर हमें उसके गुरुत्व केंद्र से गुजरने वाली अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण पता हो।
दिया है:
छड़ का द्रव्यमान \( M \)
छड़ की लम्बाई \( L \)
अक्ष एक सिरे से \( L/4 \) दूरी पर है और लम्बाई के लम्बवत् है।
छड़ का उसके गुरुत्व केंद्र (लम्बाई के मध्य बिंदु) से गुजरने वाली और लम्बाई के लम्बवत् अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \( I_G \) होता है:
\( I_G = \frac{ML^2}{12} \)
समानांतर अक्षों के प्रमेय के अनुसार, किसी भी अन्य अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \( I \) निम्न सूत्र से दिया जाता है:
\( I = I_G + Md^2 \)
जहाँ \( d \) गुरुत्व केंद्र और नई अक्ष के बीच की दूरी है।
गुरुत्व केंद्र छड़ के मध्य में होता है, यानी एक सिरे से \( L/2 \) दूरी पर। नई अक्ष एक सिरे से \( L/4 \) दूरी पर है।
अतः, \( d = \frac{L}{2} - \frac{L}{4} = \frac{L}{4} \)
मान रखने पर:
\( I = \frac{ML^2}{12} + M(\frac{L}{4})^2 \)
\( I = \frac{ML^2}{12} + \frac{ML^2}{16} \)
अब, सामान्य हर लेकर जोड़ें (12 और 16 का लघुत्तम समापवर्त्य 48 है):
\( I = \frac{4ML^2}{48} + \frac{3ML^2}{48} \)
\( I = \frac{7ML^2}{48} \)
In simple words: हमने छड़ के बीच से घूमने वाली अक्ष के जड़त्व आघूर्ण को लिया, और फिर समानांतर अक्ष के प्रमेय का उपयोग करके, एक सिरे से \( L/4 \) पर स्थित अक्ष के जड़त्व आघूर्ण की गणना की।
🎯 Exam Tip: समानांतर अक्षों के प्रमेय (\( I = I_G + Md^2 \)) का उपयोग करते समय, \( d \) को गुरुत्व केंद्र से नई अक्ष तक की दूरी के रूप में सही ढंग से परिभाषित करें।
Question 9. गोलीय पृथ्वी का अपनी स्वयं की अक्ष के सापेक्ष घूर्णन के कोणीय संवेग की गणना कीजिये। (पृथ्वी का द्रव्यमान \( 6 \times 10^{24} \) kg तथा त्रिज्या \( 6.4 \times 10^{6} \) m)
Answer: पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना उसका कोणीय संवेग बनाता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितनी भारी है, उसका आकार कैसा है और वह कितनी तेजी से घूम रही है। यह कोणीय संवेग बहुत विशाल है और यही पृथ्वी की दैनिक गति का कारण बनता है। यह खगोल विज्ञान और भूभौतिकी में बहुत महत्वपूर्ण है।
दिया है:
पृथ्वी का द्रव्यमान \( M = 6 \times 10^{24} \text{ kg} \)
पृथ्वी की त्रिज्या \( R = 6.4 \times 10^{6} \text{ m} \)
पृथ्वी का घूर्णन काल \( T = 24 \text{ घंटे} = 24 \times 3600 \text{ सेकंड} \)
पृथ्वी को एक ठोस गोले के रूप में मानते हुए, उसका अपनी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \( I \) निम्न सूत्र से दिया जाता है:
\( I = \frac{2}{5} MR^2 \)
मान रखने पर:
\( I = \frac{2}{5} \times (6 \times 10^{24} \text{ kg}) \times (6.4 \times 10^{6} \text{ m})^2 \)
\( I = \frac{2}{5} \times 6 \times 10^{24} \times (6.4)^2 \times 10^{12} \)
\( I = \frac{12}{5} \times 10^{36} \times 40.96 \)
\( I = 2.4 \times 40.96 \times 10^{36} \)
\( I = 98.304 \times 10^{36} \text{ kg m}^2 \)
कोणीय वेग \( \omega = \frac{2\pi}{T} \)
\( \omega = \frac{2 \times 3.14}{24 \times 3600} = \frac{6.28}{86400} \text{ rad s}^{-1} \)
\( \omega \approx 7.27 \times 10^{-5} \text{ rad s}^{-1} \)
कोणीय संवेग \( J = I\omega \)
\( J = (98.304 \times 10^{36} \text{ kg m}^2) \times (7.27 \times 10^{-5} \text{ rad s}^{-1}) \)
\( J \approx 715.01 \times 10^{31} \)
\( J \approx 7.15 \times 10^{33} \text{ kg m}^2 \text{s}^{-1} \)
In simple words: पृथ्वी का घूमने का संवेग उसके बड़े वजन और त्रिज्या के कारण बहुत ज्यादा है, जो \( 7.15 \times 10^{33} \) kg m\(^2\)s\(^{-1}\) है।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी को एक ठोस गोले के रूप में मानते हुए जड़त्व आघूर्ण का सूत्र \( I = \frac{2}{5}MR^2 \) का उपयोग करना याद रखें, और सभी इकाइयों को SI में बदलना सुनिश्चित करें।
Question 10. एक खोखले गोले का द्रव्यमान 1 kg है एवं उसकी भीतरी व बाहरी त्रिज्या क्रमशः 0.1 m एवं 0.2 m है। गोले के व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण एवं परिभ्रमण त्रिज्या ज्ञात करो।
Answer: एक खोखले गोले का जड़त्व आघूर्ण और परिभ्रमण त्रिज्या यह बताती है कि उसका द्रव्यमान अक्ष से कितनी दूर वितरित है और उसे घुमाना कितना मुश्किल है। इन मानों को ज्ञात करने से हम विभिन्न खगोलीय पिंडों और यांत्रिक घटकों के घूर्णी व्यवहार का अध्ययन कर सकते हैं।
दिया है:
गोले का द्रव्यमान \( M = 1 \text{ kg} \)
बाहरी त्रिज्या \( R_1 = 0.2 \text{ m} \)
भीतरी त्रिज्या \( R_2 = 0.1 \text{ m} \)
खोखले गोले का उसके व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \( I \) का सूत्र है:
\( I = \frac{2}{5} M \frac{(R_1^5 - R_2^5)}{(R_1^3 - R_2^3)} \)
मान रखने पर:
\( I = \frac{2}{5} \times 1 \text{ kg} \times \frac{((0.2 \text{ m})^5 - (0.1 \text{ m})^5)}{((0.2 \text{ m})^3 - (0.1 \text{ m})^3)} \)
\( I = \frac{2}{5} \times \frac{(32 \times 10^{-5} - 1 \times 10^{-5})}{(8 \times 10^{-3} - 1 \times 10^{-3})} \)
\( I = \frac{2}{5} \times \frac{31 \times 10^{-5}}{7 \times 10^{-3}} \)
\( I = \frac{62 \times 10^{-5}}{35 \times 10^{-3}} = \frac{62}{35} \times 10^{-2} \)
\( I \approx 1.77 \times 10^{-2} \text{ kg m}^2 \)
परिभ्रमण त्रिज्या \( K \) का सूत्र है:
\( I = MK^2 \implies K = \sqrt{\frac{I}{M}} \)
\( K = \sqrt{\frac{1.77 \times 10^{-2} \text{ kg m}^2}{1 \text{ kg}}} \)
\( K \approx \sqrt{1.77 \times 10^{-2}} \approx 0.133 \text{ m} \)
In simple words: खोखले गोले का जड़त्व आघूर्ण \( 1.77 \times 10^{-2} \) kg m\(^2\) है और उसकी घूमने की त्रिज्या लगभग \( 0.133 \) m है।
🎯 Exam Tip: खोखले गोले के लिए सही जड़त्व आघूर्ण सूत्र का उपयोग करें और घन की गणना में 10 की घातों का ध्यान रखें।
Question 11. 1 kg द्रव्यमान की एक गेंद 20 m s\(^{-1}\) के वेग से क्षैतिज तल पर गति करते हुए एक तल पर जो क्षैतिज से 30° का कोण बनाता है, के पैंदे पर पहुँचती है। यदि घर्षण नगण्य हो तो गेंद कितनी ऊध्वाधर ऊँचाई पर चढ़ सकेगी?
Answer: जब कोई गेंद सीधी चलती है और फिर एक ढलान पर चढ़ती है, तो उसकी चलने वाली ऊर्जा ऊँचाई की ऊर्जा में बदल जाती है। अगर कोई घर्षण न हो, तो पूरी ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में बदल जाती है, जिससे हम यह पता लगा सकते हैं कि गेंद कितनी ऊँचाई तक चढ़ पाएगी। यह ऊर्जा संरक्षण के एक सामान्य सिद्धांत का उदाहरण है।
दिया है:
गेंद का द्रव्यमान \( M = 1 \text{ kg} \)
प्रारम्भिक वेग \( v = 20 \text{ m s}^{-1} \)
झुकाव कोण \( \theta = 30^\circ \)
गुरुत्वीय त्वरण \( g = 10 \text{ m s}^{-2} \)
घर्षण नगण्य है, इसलिए ऊर्जा संरक्षण का नियम लागू होगा।
प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा (केवळ स्थानांतरीय गतिज ऊर्जा) = अंतिम स्थितिज ऊर्जा
\( \frac{1}{2} Mv^2 = Mgh \)
\( \frac{1}{2} v^2 = gh \)
ऊँचाई \( h \) के लिए हल करने पर:
\( h = \frac{v^2}{2g} \)
मान रखने पर:
\( h = \frac{(20 \text{ m s}^{-1})^2}{2 \times 10 \text{ m s}^{-2}} \)
\( h = \frac{400}{20} = 20 \text{ m} \)
यह उत्तर इस परिकल्पना पर आधारित है कि गेंद फिसल रही है (यानी कोई घूर्णन नहीं है)। यदि गेंद लोटनी गति कर रही होती, तो कुल गतिज ऊर्जा में घूर्णी गतिज ऊर्जा भी शामिल होती, जिससे ऊँचाई थोड़ी कम हो जाती। प्रश्न में 'क्षैतिज तल पर गति करते हुए' और 'घर्षण नगण्य' दिया है, जो सामान्यतया शुद्ध स्थानांतरीय गति को इंगित करता है।
In simple words: गेंद की चलने वाली ऊर्जा को ऊँचाई की ऊर्जा में बदलकर, हमने पाया कि वह बिना घर्षण के 20 मीटर की ऊँचाई तक चढ़ सकती है।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों का उपयोग करते समय, ध्यान दें कि क्या घर्षण या वायु प्रतिरोध जैसी कोई बाहरी शक्तियां मौजूद हैं, क्योंकि वे ऊर्जा को बदल सकती हैं।
Question 12. तीन पिण्ड एक वलय, एक ठोस बेलन और एक गोला, एक नततल पर बिना फिसले लोटनी गति करते हैं। वे विरामावस्था से गति शुरू करते हैं। सभी पिण्डों की त्रिज्यायें बराबर हैं। कौनसा पिण्ड नत तल के आधार पर सबसे अधिक वेग से पहुँचता है?
Answer: जब अलग-अलग आकार की वस्तुएँ एक ढलान से नीचे लुढ़कती हैं, तो उनके द्रव्यमान का फैलाव (जड़त्व आघूर्ण) उनकी अंतिम गति को प्रभावित करता है। वह वस्तु जिसका द्रव्यमान उसके केंद्र के सबसे करीब होता है, ढलान के नीचे सबसे तेजी से पहुँचती है, क्योंकि उसकी घूर्णी गतिज ऊर्जा कम होती है। यह समझने से हम यह जान पाते हैं कि विभिन्न आकृतियों की वस्तुएँ कैसे अलग-अलग व्यवहार करती हैं।
हम जानते हैं कि नत तल के तल पर लोटनी गति कर रही वस्तु का वेग सूत्र द्वारा दिया जाता है:
\( v = \sqrt{\frac{2gh}{(1 + \frac{K^2}{R^2})}} \)
जहाँ \( K \) परिभ्रमण त्रिज्या और \( R \) वस्तु की त्रिज्या है। \( \frac{K^2}{R^2} \) का मान जितना कम होगा, वेग \( v \) उतना ही अधिक होगा।
प्रत्येक वस्तु के लिए \( \frac{K^2}{R^2} \) का मान ज्ञात करें:
1. **वलय (Ring):** वलय के लिए, \( I = MR^2 \). चूँकि \( I = MK^2 \), तो \( MK^2 = MR^2 \implies K^2 = R^2 \).
अतः, \( \frac{K^2}{R^2} = 1 \).
वलय का वेग: \( v_{\text{वलय}} = \sqrt{\frac{2gh}{(1 + 1)}} = \sqrt{\frac{2gh}{2}} = \sqrt{gh} \)
2. **ठोस बेलन (Solid Cylinder):** ठोस बेलन के लिए, \( I = \frac{1}{2} MR^2 \). चूँकि \( I = MK^2 \), तो \( MK^2 = \frac{1}{2} MR^2 \implies K^2 = \frac{1}{2} R^2 \).
अतः, \( \frac{K^2}{R^2} = \frac{1}{2} \).
ठोस बेलन का वेग: \( v_{\text{बेलन}} = \sqrt{\frac{2gh}{(1 + \frac{1}{2})}} = \sqrt{\frac{2gh}{\frac{3}{2}}} = \sqrt{\frac{4gh}{3}} \)
3. **ठोस गोला (Solid Sphere):** ठोस गोले के लिए, \( I = \frac{2}{5} MR^2 \). चूँकि \( I = MK^2 \), तो \( MK^2 = \frac{2}{5} MR^2 \implies K^2 = \frac{2}{5} R^2 \).
अतः, \( \frac{K^2}{R^2} = \frac{2}{5} \).
ठोस गोले का वेग: \( v_{\text{गोला}} = \sqrt{\frac{2gh}{(1 + \frac{2}{5})}} = \sqrt{\frac{2gh}{\frac{7}{5}}} = \sqrt{\frac{10gh}{7}} \)
मानों की तुलना करें:
\( v_{\text{वलय}} = \sqrt{gh} \)
\( v_{\text{बेलन}} = \sqrt{\frac{4}{3}gh} \approx \sqrt{1.33gh} \)
\( v_{\text{गोला}} = \sqrt{\frac{10}{7}gh} \approx \sqrt{1.43gh} \)
स्पष्ट है कि \( \sqrt{gh} < \sqrt{\frac{4}{3}gh} < \sqrt{\frac{10}{7}gh} \).
इसलिए, \( v_{\text{वलय}} < v_{\text{बेलन}} < v_{\text{गोला}} \).
सबसे अधिक वेग ठोस गोले का होगा।
In simple words: नत तल पर लुढ़कने पर ठोस गोला सबसे तेज पहुँचेगा, क्योंकि उसका जड़त्व आघूर्ण उसके केंद्र के सबसे करीब होता है, जबकि वलय सबसे धीमा होगा।
🎯 Exam Tip: यह संबंध याद रखें: \( \frac{K^2}{R^2} \) का मान जितना कम होगा, नत तल पर वस्तु का अंतिम वेग उतना ही अधिक होगा।
Question 13. यदि द्रव्यमान नियत रखकर किसी घूर्णन करती हुई चकती की त्रिज्या अचानक आधी कर दी जाये तो उसका नवीन कोणीय वेग का मान क्या होगा?
Answer: जब कोई घूमती हुई वस्तु सिकुड़ती है, तो उसके घूमने की रफ्तार बढ़ जाती है, जैसे आइस स्केटर अपने हाथ अंदर खींचकर तेजी से घूमने लगती है। यह कोणीय संवेग संरक्षण के नियम के कारण होता है, जो कहता है कि अगर कोई बाहरी बल आघूर्ण न लगे, तो घूमने का कुल संवेग हमेशा एक जैसा रहता है।
दिया है:
प्रारम्भिक त्रिज्या \( R \)
नयी त्रिज्या \( R' = R/2 \)
द्रव्यमान \( M \) नियत है।
कोणीय संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, यदि कोई बाहरी बल आघूर्ण न लगे, तो निकाय का कोणीय संवेग नियत रहता है:
\( L = I\omega = \text{नियत} \)
यानी, \( I_1 \omega_1 = I_2 \omega_2 \)
एक वृत्ताकार चकती का अपनी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण \( I = \frac{1}{2} MR^2 \) होता है।
प्रारम्भिक जड़त्व आघूर्ण \( I_1 = \frac{1}{2} MR^2 \)
नयी त्रिज्या आधी करने पर, नया जड़त्व आघूर्ण \( I_2 \):
\( I_2 = \frac{1}{2} M(R')^2 = \frac{1}{2} M(\frac{R}{2})^2 = \frac{1}{2} M \frac{R^2}{4} = \frac{1}{4} (\frac{1}{2} MR^2) = \frac{1}{4} I_1 \)
यानी, नया जड़त्व आघूर्ण प्रारंभिक जड़त्व आघूर्ण का एक-चौथाई हो जाता है।
अब, कोणीय संवेग संरक्षण के नियम से:
\( I_1 \omega_1 = I_2 \omega_2 \)
\( I_1 \omega_1 = (\frac{1}{4} I_1) \omega_2 \)
\( \omega_2 = 4 \omega_1 \)
अतः, नया कोणीय वेग प्रारंभिक कोणीय वेग का चार गुना हो जाएगा।
In simple words: जब चकती की त्रिज्या आधी की जाती है, तो उसका घूमने का जड़त्व कम हो जाता है, जिससे उसका घूमने का वेग चार गुना बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: कोणीय संवेग संरक्षण का उपयोग करते समय, जड़त्व आघूर्ण और कोणीय वेग के बीच व्युत्क्रम संबंध को ध्यान में रखें (\( I \propto \frac{1}{\omega} \))।
Question 14. एक पिण्ड का कोणीय वेग बिना उस पर बल आघूर्ण लगाये 1 चक्कर/से. से 16 चक्कर/से. हो जाता है। दोनों अवस्थाओं में घूर्णन त्रिज्याओं का अनुपात क्या होगा?
Answer: जब कोई वस्तु बिना किसी बाहरी बल आघूर्ण के अपनी घूमने की रफ्तार बदलती है (जैसे घूमती हुई कुर्सी पर बैठे व्यक्ति का अपने हाथ फैलाना या सिकोड़ना), तो उसकी प्रभावी घूमने की त्रिज्या भी बदल जाती है। कोणीय संवेग के नियम के अनुसार, घूमने की रफ्तार बढ़ने पर प्रभावी त्रिज्या कम हो जाती है।
दिया है:
प्रारम्भिक कोणीय वेग की आवृत्ति \( n_1 = 1 \text{ चक्कर/से.} \)
अंतिम कोणीय वेग की आवृत्ति \( n_2 = 16 \text{ चक्कर/से.} \)
बाहरी बल आघूर्ण अनुपस्थित है, इसलिए कोणीय संवेग संरक्षित रहता है।
कोणीय संवेग संरक्षण के नियम से:
\( I_1 \omega_1 = I_2 \omega_2 \)
जहाँ \( \omega = 2\pi n \), तो \( I_1 (2\pi n_1) = I_2 (2\pi n_2) \)
\( I_1 n_1 = I_2 n_2 \)
किसी पिण्ड के लिए जड़त्व आघूर्ण \( I = MK^2 \) होता है, जहाँ \( K \) परिभ्रमण त्रिज्या है।
\( MK_1^2 n_1 = MK_2^2 n_2 \)
\( K_1^2 n_1 = K_2^2 n_2 \)
हमें घूर्णन त्रिज्याओं का अनुपात \( \frac{K_1}{K_2} \) ज्ञात करना है:
\( \frac{K_1^2}{K_2^2} = \frac{n_2}{n_1} \)
\( \frac{K_1}{K_2} = \sqrt{\frac{n_2}{n_1}} \)
मान रखने पर:
\( \frac{K_1}{K_2} = \sqrt{\frac{16 \text{ चक्कर/से.}}{1 \text{ चक्कर/से.}}} \)
\( \frac{K_1}{K_2} = \sqrt{16} = 4 \)
अतः, \( K_1 : K_2 = 4 : 1 \)
In simple words: जब घूमने की रफ्तार 1 से 16 गुना बढ़ जाती है, तो कोणीय संवेग को एक जैसा रखने के लिए, घूमने की त्रिज्या 4 गुना कम हो जाती है।
🎯 Exam Tip: कोणीय संवेग संरक्षण के नियम में जड़त्व आघूर्ण \( I \) और कोणीय वेग \( \omega \) के बीच संबंध (\( I\omega = \text{नियत} \)) को समझें, और \( I = MK^2 \) का उपयोग करके \( K \) को \( \omega \) से जोड़ें।
Question 15. M व N दो पहिये एक ही धुरी पर हैं। M का जड़त्व आघूर्ण 6 kg m\(^{2}\) तथा 600 घूर्णन/मिनट से घूर्णन कर रहा है तथा N स्थिर है। एक क्लच द्वारा दोनों को जोड़ने पर संयुक्त रूप से 400 घूर्णन/मिनट करते हैं तो N के जड़त्व आघूर्ण का मान ज्ञात कीजिये।
Answer: जब दो पहिये एक साथ जुड़ते हैं, तो उनकी कुल घूमने की चाल बदल जाती है, लेकिन अगर कोई बाहरी बल न लगे, तो उनका कुल घूमने का संवेग वही रहता है। इस सिद्धांत का उपयोग करके हम यह पता लगा सकते हैं कि एक पहिये का जड़त्व आघूर्ण कितना है, जब हमें दूसरे का पता हो। यह मशीनों में गियर और शाफ्ट के काम को समझने में मदद करता है।
दिया है:
पहिये M का जड़त्व आघूर्ण \( I_M = 6 \text{ kg m}^2 \)
पहिये M का प्रारम्भिक घूर्णन वेग \( n_M = 600 \text{ घूर्णन/मिनट} \)
पहिये N का प्रारम्भिक घूर्णन वेग \( n_N = 0 \) (स्थिर है)
संयुक्त निकाय का अंतिम घूर्णन वेग \( n_{संयुक्त} = 400 \text{ घूर्णन/मिनट} \)
पहले, सभी घूर्णन वेगों को rad/s में बदलें:
\( \omega_M = 2\pi n_M = 2\pi \times \frac{600}{60} = 2\pi \times 10 = 20\pi \text{ rad s}^{-1} \)
\( \omega_N = 0 \text{ rad s}^{-1} \)
\( \omega_{संयुक्त} = 2\pi n_{संयुक्त} = 2\pi \times \frac{400}{60} = 2\pi \times \frac{20}{3} = \frac{40\pi}{3} \text{ rad s}^{-1} \)
कोणीय संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार (क्योंकि कोई बाहरी बल आघूर्ण नहीं है):
प्रारम्भिक कुल कोणीय संवेग = अंतिम कुल कोणीय संवेग
\( I_M \omega_M + I_N \omega_N = (I_M + I_N) \omega_{संयुक्त} \)
मान रखने पर:
\( (6 \text{ kg m}^2) \times (20\pi \text{ rad s}^{-1}) + (I_N) \times (0) = (6 + I_N) \times (\frac{40\pi}{3} \text{ rad s}^{-1}) \)
\( 120\pi = (6 + I_N) \times \frac{40\pi}{3} \)
दोनों तरफ \( \pi \) से भाग दें:
\( 120 = (6 + I_N) \times \frac{40}{3} \)
\( 120 \times 3 = (6 + I_N) \times 40 \)
\( 360 = (6 + I_N) \times 40 \)
\( \frac{360}{40} = 6 + I_N \)
\( 9 = 6 + I_N \)
\( I_N = 9 - 6 = 3 \text{ kg m}^2 \)
In simple words: हमने कोणीय संवेग संरक्षण के नियम का उपयोग करके पहिये N का जड़त्व आघूर्ण 3 kg m\(^2\) निकाला, जब दोनों पहियों को एक साथ जोड़ा गया।
🎯 Exam Tip: कोणीय संवेग संरक्षण की समस्याओं में, सुनिश्चित करें कि आप सभी कोणीय वेगों को समान इकाइयों (rad/s) में बदलें और प्रारंभिक व अंतिम दोनों अवस्थाओं के कुल संवेगों को बराबर करें।
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