RBSE Solutions Class 11 Physics Chapter 4 गति के नियम

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Detailed Chapter 4 गति के नियम RBSE Solutions for Class 11 Physics

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Class 11 Physics Chapter 4 गति के नियम RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Physics Chapter 4 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर

RBSE Class 11 Physics Chapter 4 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. किसी वस्तु पर यदि नेट बल शून्य है तो उसका त्वरण क्या होगा?
Answer: यदि किसी वस्तु पर लगने वाला कुल बल शून्य है, तो वस्तु का त्वरण भी शून्य होगा। इसका मतलब है कि वस्तु या तो स्थिर अवस्था में है या एक समान वेग से सीधी रेखा में चल रही है।
In simple words: अगर किसी चीज पर कोई जोर नहीं लग रहा है, तो उसकी चाल बदलने की दर (त्वरण) ज़ीरो होगी।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के गति के प्रथम नियम को याद रखें: यदि नेट बल शून्य है, तो त्वरण भी शून्य होता है।

 

प्रश्न 2. किसी वस्तु के संवेग का सूत्र लिखिये।
Answer: किसी वस्तु के संवेग का सूत्र इस प्रकार है:
\[ \overrightarrow{P}=m \vec{v} \]
यहाँ, \( \overrightarrow{P} \) संवेग (momentum) है, \( m \) वस्तु का द्रव्यमान (mass) है, और \( \vec{v} \) वस्तु का वेग (velocity) है। संवेग एक सदिश राशि है, जिसकी दिशा वही होती है जो वेग की दिशा होती है।
In simple words: संवेग का मतलब है किसी चीज़ का कितना "चलने का गुण", जो उसके वजन (द्रव्यमान) और कितनी तेज़ी से चल रही है (वेग) को गुणा करके पता चलता है।

🎯 Exam Tip: संवेग के सूत्र में सदिश राशियों (\( \overrightarrow{P} \) और \( \vec{v} \)) को हमेशा सही ढंग से दर्शाएं, क्योंकि संवेग की दिशा बहुत महत्वपूर्ण होती है।

 

प्रश्न 3. न्यू जैयम सूत्र रूप में लिखिए।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के किसी भी नियम को सूत्र रूप में लिखते समय, संबंधित भौतिक राशियों और उनके सदिश प्रतीकों का सही उपयोग करें। उदाहरण के लिए, न्यूटन का दूसरा नियम \( \overrightarrow{F} = m\vec{a} \) है।

 

प्रश्न 5. परिवर्ती द्रव्यमान वाले तंत्र का एक उदाहरण दीजिए।
Answer: परिवर्ती द्रव्यमान वाले तंत्र का एक प्रमुख उदाहरण रॉकेट है। रॉकेट में ईंधन जलता रहता है, जिससे उसका द्रव्यमान लगातार कम होता जाता है, जबकि वह आगे बढ़ता रहता है।
In simple words: रॉकेट एक ऐसा सिस्टम है जिसका वजन (द्रव्यमान) उड़ते समय लगातार घटता रहता है क्योंकि ईंधन जलता है।

🎯 Exam Tip: परिवर्ती द्रव्यमान वाले तंत्रों में संवेग संरक्षण का नियम लगाना महत्वपूर्ण होता है, जहाँ द्रव्यमान समय के साथ बदलता रहता है।

 

प्रश्न 6. किसी दो सम्पर्कित पृष्ठों के मध्य स्थैतिक एवं गतिज घर्षण में से किसका मान अधिक होता है?
Answer: दो संपर्कित पृष्ठों के बीच, स्थैतिक घर्षण (Static friction) का मान गतिज घर्षण (Kinetic friction) से अधिक होता है। इसका मतलब है कि किसी वस्तु को चलाना शुरू करने में उसे चलते रहने से ज़्यादा बल लगाना पड़ता है।
In simple words: किसी रुकी हुई चीज़ को खिसकाना शुरू करने में, उसे खिसकाते रहने से ज़्यादा ज़ोर लगता है।

🎯 Exam Tip: स्थैतिक घर्षण वह अधिकतम बल है जो वस्तु को हिलाने से पहले लगता है, जबकि गतिज घर्षण वह बल है जो वस्तु के गति में आने के बाद लगता है।

 

प्रश्न 7. \( \mu_s \) एवं \( \mu_k \) में किसका मान अधिक होता है ?
Answer: स्थैतिक घर्षण गुणांक \( \mu_s \) का मान गतिज घर्षण गुणांक \( \mu_k \) से अधिक होता है। यह दर्शाता है कि किसी वस्तु को विराम से गति में लाने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होती है, जबकि उसे एक बार गति में आने के बाद उसी गति में बनाए रखने के लिए कम बल लगता है।
In simple words: \( \mu_s \) (स्थैतिक घर्षण गुणांक) का मान \( \mu_k \) (गतिज घर्षण गुणांक) से ज़्यादा होता है, मतलब रुकी हुई चीज़ को हिलाने में ज़्यादा ताक़त लगती है।

🎯 Exam Tip: हमेशा याद रखें कि स्थैतिक घर्षण का अधिकतम मान गतिज घर्षण से अधिक होता है, यही कारण है कि किसी वस्तु को धक्का देना शुरू करना मुश्किल होता है।

 

प्रश्न 8. एक समान वृत्तीय गति में कौन-सा बल विद्यमान होता है?
Answer: एक समान वृत्तीय गति में अभिकेन्द्रीय बल (Centripetal force) विद्यमान होता है। यह बल हमेशा वृत्त के केंद्र की ओर कार्य करता है और वस्तु को वृत्ताकार पथ पर बनाए रखने के लिए आवश्यक होता है।
In simple words: जब कोई चीज़ गोल घूमती है, तो उस पर एक बल हमेशा बीच की तरफ़ लगता है, जिसे अभिकेन्द्रीय बल कहते हैं।

🎯 Exam Tip: अभिकेन्द्रीय बल हमेशा वेग के लंबवत और वृत्त के केंद्र की ओर कार्य करता है, और यह वस्तु की चाल को नहीं बदलता, केवल दिशा को।

 

प्रश्न 9. समतल वृत्ताकार पथ पर एक वाहन को आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल कैसे प्राप्त होता है?
Answer: समतल वृत्ताकार पथ पर एक वाहन को आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल मुख्य रूप से टायरों और सड़क के बीच लगने वाले घर्षण बल द्वारा प्राप्त होता है। जब वाहन मुड़ता है, तो घर्षण बल केंद्र की ओर कार्य करता है और उसे वृत्ताकार गति में बनाए रखता है।
In simple words: गाड़ी जब गोल रास्ते पर मुड़ती है, तो उसके टायरों और सड़क के बीच की रगड़ (घर्षण बल) ही उसे बीच की तरफ़ खींचकर घुमाती है।

🎯 Exam Tip: घर्षण बल की सीमा होती है; यदि वाहन बहुत तेज चलता है या सड़क फिसलन भरी हो, तो घर्षण बल पर्याप्त नहीं होता और वाहन फिसल सकता है।

 

प्रश्न 10. एक बंकित वृत्ताकार पथ पर घर्षण बल के अलावा आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल कैसे प्राप्त होता है?
Answer: एक बंकित वृत्ताकार पथ (Banked circular path) पर घर्षण बल के अलावा, आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल अभिलम्ब बल (Normal force) के घटक द्वारा प्राप्त होता है। सड़क को झुकाकर बनाने से, अभिलम्ब बल का एक हिस्सा स्वतः ही केंद्र की ओर कार्य करता है, जिससे वाहन को मुड़ने में मदद मिलती है।
In simple words: मुड़े हुए (बंकित) रास्ते पर, गाड़ी का अभिकेन्द्रीय बल सड़क के झुकाव से मिलने वाले सपोर्ट बल (अभिलम्ब बल) के एक हिस्से से भी मिलता है, न कि सिर्फ रगड़ (घर्षण) से।

🎯 Exam Tip: बंकित सड़कों पर अभिलम्ब बल का क्षैतिज घटक (horizontal component) अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करने में मदद करता है, जिससे तेज गति से मुड़ना सुरक्षित हो जाता है।

RBSE Class 11 Physics Chapter 4 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 2. न्यूटन के गति के प्रथम नियम को जड़त्व का नियम क्यों कहते हैं?
Answer: न्यूटन के गति के प्रथम नियम को जड़त्व का नियम (Law of Inertia) कहा जाता है। यह नियम बताता है कि "यदि कोई वस्तु विरामावस्था में है तो वह विरामावस्था में ही रहेगी, और यदि गतिमान अवस्था में है तो वह उसी सीधी रेखा में एकसमान गति से चलती रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल कार्य न करे।"
यह नियम जड़त्व (Inertia) के गुण को सीधे तौर पर परिभाषित करता है, जो किसी वस्तु का वह गुण है जिसके कारण वह अपनी वर्तमान अवस्था (विराम या एकसमान गति) को बनाए रखने की कोशिश करती है और उस अवस्था में किसी भी बदलाव का विरोध करती है। चूंकि यह नियम जड़त्व के सिद्धांत पर आधारित है, इसलिए इसे जड़त्व का नियम भी कहा जाता है।
In simple words: न्यूटन का पहला नियम कहता है कि कोई चीज़ तब तक अपनी जगह पर रहेगी या एक सीधी लाइन में चलती रहेगी जब तक कोई उसे धक्का न दे। इसी गुण को जड़त्व कहते हैं, इसलिए इसे जड़त्व का नियम भी कहते हैं।

🎯 Exam Tip: जड़त्व की परिभाषा को स्पष्ट करें और उदाहरण दें कि कैसे न्यूटन का पहला नियम इसे दर्शाता है।

 

प्रश्न 3. क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद को लपकते समय अपने हाथ गेंद के साथ पीछे की ओर क्यों खींचता है?
Answer: क्रिकेट का खिलाड़ी तेज़ गति से आती हुई गेंद को लपकते समय अपने हाथों को गेंद के साथ पीछे की ओर खींचता है ताकि गेंद के संवेग (momentum) में परिवर्तन का समय बढ़ाया जा सके। न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार, बल संवेग परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है (\( F = \frac{\Delta P}{\Delta t} \))। यदि संवेग परिवर्तन का समय \( (\Delta t) \) बढ़ाया जाता है, तो गेंद द्वारा खिलाड़ी के हाथों पर लगने वाला औसत बल \( (F) \) कम हो जाता है। इससे खिलाड़ी को चोट लगने का जोखिम कम हो जाता है और वह गेंद को आसानी से पकड़ पाता है।
In simple words: क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद पकड़ते समय हाथ पीछे खींचता है ताकि गेंद रुकने में ज़्यादा समय ले। ज़्यादा समय मिलने से गेंद का ज़ोर (बल) कम लगता है और हाथ में चोट नहीं लगती।

🎯 Exam Tip: संवेग और बल के बीच संबंध को समझाएं (\( F = \Delta P / \Delta t \)) और बताएं कि समय बढ़ाने से बल कैसे कम होता है।

 

प्रश्न 4. बल की परिभाषा दीजिए।
Answer: बल (Force) वह बाहरी कारक है जो किसी वस्तु की विराम अवस्था, गति की अवस्था, या गति की दिशा में परिवर्तन करने का प्रयास करता है या उसमें परिवर्तन कर देता है। दूसरे शब्दों में, बल एक धक्का या खिंचाव है। यह एक सदिश राशि (vector quantity) है, जिसका अर्थ है कि इसमें परिमाण (magnitude) और दिशा (direction) दोनों होते हैं। इसे \( \overrightarrow{F} \) से दर्शाया जाता है। न्यूटन के गति के दूसरे नियम के अनुसार, किसी वस्तु पर लगने वाला कुल बल उसके द्रव्यमान \( (m) \) और उसमें उत्पन्न त्वरण \( (\vec{a}) \) के गुणनफल के बराबर होता है: \( \overrightarrow{F} = m\vec{a} \)। बल का SI मात्रक न्यूटन (Newton) है।
In simple words: बल वह चीज़ है जो किसी चीज़ को धक्का देती है या खींचती है, जिससे वह या तो चलना शुरू कर देती है, रुक जाती है, या अपनी दिशा बदल लेती है।

🎯 Exam Tip: बल की परिभाषा में 'धक्का या खिंचाव' और 'अवस्था में परिवर्तन' (विराम या गति) जैसे प्रमुख शब्दों का उपयोग करें। यह भी उल्लेख करें कि यह एक सदिश राशि है और इसका SI मात्रक न्यूटन है।

 

प्रश्न 5. एक जड़त्वीय तंत्र के अन्तर्गत एक कण का त्वरण मापने पर शून्य आता है। क्या हम कह सकते हैं कि कण पर कोई बल कार्यरत नहीं है? स्पष्ट करिए।

🎯 Exam Tip: जड़त्वीय तंत्र में, न्यूटन का पहला नियम पूरी तरह से लागू होता है। यदि कण का त्वरण शून्य है, तो उस पर लगने वाला शुद्ध बल भी शून्य होगा।

 

प्रश्न 6. एक टीम जीतती है और दूसरी हार जाती है, ऐसा क्यों?
Answer: जब एक टीम दूसरे के खिलाफ खेलती है, तो दोनों टीमें एक-दूसरे पर बल लगाती हैं। न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार, प्रत्येक क्रिया के लिए एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। हालांकि, क्रिया और प्रतिक्रिया बल परिमाण में बराबर होते हैं और विपरीत दिशा में कार्य करते हैं, लेकिन वे हमेशा अलग-अलग वस्तुओं पर लगते हैं।
इसलिए, वे एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त नहीं कर पाते। टीम की जीत या हार उनके द्वारा लगाए गए शुद्ध बल पर निर्भर करती है और यह भी कि वे उस बल को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाते हैं। जो टीम ज़्यादा प्रभावी शुद्ध बल लगाती है या अपने बल का बेहतर उपयोग करती है, वह जीत जाती है।
In simple words: दो टीमें एक-दूसरे पर ज़ोर लगाती हैं। बल बराबर और उलटी दिशा में लगते हैं, लेकिन अलग-अलग खिलाड़ियों या चीज़ों पर। इसलिए, वे एक-दूसरे को कैंसिल नहीं करते। जो टीम ज़्यादा बेहतर तरीके से बल का इस्तेमाल करती है, वह जीतती है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के तीसरे नियम को स्पष्ट रूप से समझाएं कि क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा अलग-अलग वस्तुओं पर लगते हैं और इसलिए एक-दूसरे को रद्द नहीं करते।

 

प्रश्न 7. एक मेज पर एक किताब रखी हुई है। किताब का भार एवं मेज द्वारा किताब पर लगाया गया अभिलम्ब बल परिमाण में समान एवं दिशा में विपरीत है। क्या इसे न्यूटन के तृतीय नियम का उदाहरण माना जा सकता है? स्पष्ट करिए।
Answer: नहीं, मेज पर रखी किताब के भार (पृथ्वी द्वारा किताब पर गुरुत्वाकर्षण बल) और मेज द्वारा किताब पर लगाया गया अभिलम्ब बल (Normal force) न्यूटन के तीसरे नियम का उदाहरण नहीं माने जा सकते हैं।
न्यूटन के तीसरे नियम के लिए, क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं। इस मामले में:
1. किताब का भार (W) पृथ्वी द्वारा किताब पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल है, जो नीचे की ओर कार्य करता है। इसकी प्रतिक्रिया बल किताब द्वारा पृथ्वी पर लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल है, जो ऊपर की ओर कार्य करता है।
2. मेज द्वारा किताब पर लगने वाला अभिलम्ब बल (R) ऊपर की ओर कार्य करता है। इसकी प्रतिक्रिया बल किताब द्वारा मेज पर लगाया गया बल है, जो नीचे की ओर कार्य करता है।
चूंकि भार (W) और अभिलम्ब बल (R) दोनों किताब पर ही कार्य कर रहे हैं, इसलिए वे क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म नहीं हैं। ये संतुलन बल हैं जो किताब को स्थिर अवस्था में रखते हैं, जहाँ \( R = W \) होता है।
यहाँ, \( \overrightarrow{F}_{BE} \) पुस्तक पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल है। \( R \) और \( \overrightarrow{F}_{BE} \) क्रिया-प्रतिक्रिया वाले तीसरे नियम के युग्म नहीं हैं, बल्कि यह संतुलन बल हैं।

पुस्तक मेज W R

In simple words: किताब का वजन (जो धरती खींचती है) और मेज का उसे ऊपर उठाना (अभिलम्ब बल) न्यूटन के तीसरे नियम के उदाहरण नहीं हैं। ये दोनों बल एक ही किताब पर लगते हैं और उसे रोके रखते हैं। तीसरे नियम के बल हमेशा दो अलग-अलग चीज़ों पर लगते हैं।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के तीसरे नियम के लिए हमेशा यह याद रखें कि क्रिया और प्रतिक्रिया बल दो अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं। एक ही वस्तु पर लगने वाले बल संतुलन बल होते हैं।

 

प्रश्न 8. किसी वस्तु पर लगने वाले आवेग की परिभाषा लिखिए।
Answer: आवेग (Impulse) किसी वस्तु पर लगने वाले बल और उस बल के लगने के समय अंतराल के गुणनफल को कहते हैं। यह किसी वस्तु के संवेग में होने वाले परिवर्तन के बराबर होता है। आवेग एक सदिश राशि है और इसे \( \overrightarrow{J} \) से प्रदर्शित किया जाता है। यदि किसी वस्तु पर एक बल \( \overrightarrow{F} \) एक बहुत छोटे समय अंतराल \( dt \) के लिए लगता है, तो आवेग को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
\[ d\overrightarrow{J} = \overrightarrow{F} dt \]
इसका SI मात्रक न्यूटन-सेकंड (N-s) या किलोग्राम-मीटर प्रति सेकंड (kg-m/s) होता है, जो संवेग के मात्रक के समान है।
In simple words: आवेग का मतलब है किसी चीज़ पर कितनी ताक़त कितने समय तक लगी। यह चीज़ के संवेग में हुए बदलाव के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: आवेग की परिभाषा में बल और समय अंतराल दोनों को शामिल करना सुनिश्चित करें और यह भी बताएं कि यह संवेग में परिवर्तन के बराबर है।

RBSE Class 11 Physics Chapter 4 निबन्धात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. न्यूटन के गति का द्वितीय नियम क्या है? इसे परिभाषित करिए। इससे गति के प्रथम नियम को व्युत्पन्न करिये।
Answer: न्यूटन के गति का द्वितीय नियम (Newton's Second Law of Motion) बताता है कि "किसी वस्तु के रेखीय संवेग (linear momentum) में परिवर्तन की दर उस वस्तु पर लगाए गए बाह्य बल के समानुपाती होती है, और यह परिवर्तन बल की दिशा में ही होता है।"
गणितीय रूप से, इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
\[ \overrightarrow{F} \propto \frac{d\overrightarrow{P}}{dt} \]
जहाँ \( \overrightarrow{F} \) लगाया गया बल है और \( \frac{d\overrightarrow{P}}{dt} \) संवेग में परिवर्तन की दर है।
समानुपाती नियतांक \( K \) का उपयोग करते हुए:
\[ \overrightarrow{F} = K \frac{d\overrightarrow{P}}{dt} \]
SI इकाइयों में, \( K=1 \) लिया जाता है। अतः:
\[ \overrightarrow{F} = \frac{d\overrightarrow{P}}{dt} \]
चूँकि संवेग \( \overrightarrow{P} \) को द्रव्यमान \( m \) और वेग \( \vec{v} \) के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है (\( \overrightarrow{P} = m\vec{v} \)), तो हम इसे इस प्रकार भी लिख सकते हैं:
\[ \overrightarrow{F} = \frac{d(m\vec{v})}{dt} \]
यदि वस्तु का द्रव्यमान \( m \) स्थिर है, तो:
\[ \overrightarrow{F} = m \frac{d\vec{v}}{dt} \]
चूँकि \( \frac{d\vec{v}}{dt} \) त्वरण \( \vec{a} \) के बराबर होता है (\( \vec{a} = \frac{d\vec{v}}{dt} \)), तो न्यूटन का दूसरा नियम इस प्रसिद्ध रूप में प्राप्त होता है:
\[ \overrightarrow{F} = m\vec{a} \]

न्यूटन के प्रथम नियम की व्युत्पत्ति:
न्यूटन के द्वितीय नियम \( \overrightarrow{F} = m\vec{a} \) से हम प्रथम नियम को व्युत्पन्न कर सकते हैं। यदि किसी वस्तु पर कोई बाह्य बल \( \overrightarrow{F} \) कार्यरत नहीं है, अर्थात \( \overrightarrow{F} = 0 \), तो:
\[ m\vec{a} = 0 \]
चूँकि द्रव्यमान \( m \) शून्य नहीं हो सकता (अगर \( m=0 \) हो तो कोई वस्तु ही नहीं है), तो त्वरण \( \vec{a} \) को शून्य होना पड़ेगा:
\[ \vec{a} = 0 \]
त्वरण \( \vec{a} \) वेग में परिवर्तन की दर है (\( \vec{a} = \frac{d\vec{v}}{dt} \))। यदि त्वरण शून्य है, तो वेग में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है, जिसका अर्थ है कि वेग \( \vec{v} \) नियत (constant) है।
\[ \frac{d\vec{v}}{dt} = 0 \implies \vec{v} = \text{नियतांक} \]
यदि \( \vec{v} \) नियत है, तो वस्तु या तो स्थिर अवस्था में है (यदि नियत वेग शून्य है), या वह एकसमान वेग से सीधी रेखा में गतिमान है। यह न्यूटन के गति का प्रथम नियम ही है। इस प्रकार, न्यूटन का द्वितीय नियम प्रथम नियम को समाहित करता है।

**न्यूटन की गति के द्वितीय नियम के उदाहरण:**
(i) क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद लपकते समय हाथ पीछे खींचना: जब खिलाड़ी तेज गति से आती गेंद को पकड़ता है, तो वह अपने हाथ पीछे खींचता है। ऐसा करने से गेंद के संवेग में परिवर्तन का समय बढ़ जाता है, जिससे गेंद द्वारा हाथों पर लगाया गया बल कम हो जाता है और चोट से बचाव होता है। यह \( F = \Delta P / \Delta t \) सिद्धांत का सीधा अनुप्रयोग है।
(ii) ऊँचाई से कठोर फर्श पर कूदना: जब कोई व्यक्ति ऊँचाई से कठोर फर्श पर कूदता है, तो उसके वेग में परिवर्तन बहुत कम समय में होता है। इससे उसके पैरों पर बहुत अधिक बल लगता है और चोट लग सकती है। इसके विपरीत, यदि वह रेत में कूदता है, तो रेत में धंसने के कारण वेग परिवर्तन का समय बढ़ जाता है, जिससे लगने वाला बल कम होता है और चोट लगने की संभावना कम हो जाती है।
In simple words: न्यूटन का दूसरा नियम कहता है कि किसी चीज़ के संवेग (चलने के गुण) के बदलने की दर उस पर लगने वाले बल के बराबर होती है (\( F=ma \))। अगर कोई बल न लगे (\( F=0 \)), तो चीज़ न तो अपनी जगह से हिलेगी और न ही अपनी चाल बदलेगी (\( a=0 \)), यही न्यूटन का पहला नियम है।

🎯 Exam Tip: द्वितीय नियम की परिभाषा, गणितीय सूत्र (\( \overrightarrow{F} = m\vec{a} \)) और प्रथम नियम की व्युत्पत्ति को स्पष्ट रूप से समझाएं। द्रव्यमान और वेग के मात्रकों को ध्यान में रखें।

 

प्रश्न 2. न्यूटन के गति का तृतीय नियम परिभाषित कीजिए इसे दो उदाहरणों द्वारा समझाइये।
Answer: न्यूटन के गति का तृतीय नियम (Newton's Third Law of Motion) बताता है कि "प्रत्येक क्रिया (action) के लिए, हमेशा एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया (reaction) होती है।" इसका अर्थ है कि जब एक वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है (क्रिया), तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर समान परिमाण का बल विपरीत दिशा में लगाती है (प्रतिक्रिया)। इन बलों को क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म (action-reaction pair) कहते हैं।
गणितीय रूप में, यदि वस्तु 1 द्वारा वस्तु 2 पर लगाया गया बल \( \overrightarrow{F}_{12} \) है, और वस्तु 2 द्वारा वस्तु 1 पर लगाया गया बल \( \overrightarrow{F}_{21} \) है, तो:
\[ \overrightarrow{F}_{21} = -\overrightarrow{F}_{12} \]
यहाँ ऋणात्मक चिन्ह यह दर्शाता है कि क्रिया और प्रतिक्रिया बल एक दूसरे के विपरीत दिशा में होते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि क्रिया और प्रतिक्रिया बल हमेशा अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को रद्द नहीं कर सकते।

**उदाहरण:**
1. **तैराक का तैरना:** जब एक तैराक अपने हाथों से पानी को पीछे की ओर धकेलता है (क्रिया), तो पानी तैराक पर आगे की ओर समान बल लगाता है (प्रतिक्रिया), जिससे तैराक आगे बढ़ता है।
2. **बन्दूक का प्रतिक्षेप (Recoil of a Gun):** जब एक बन्दूक से गोली दागी जाती है, तो बन्दूक गोली पर आगे की ओर बल लगाती है (क्रिया)। इसके जवाब में, गोली भी बन्दूक पर पीछे की ओर समान बल लगाती है (प्रतिक्रिया), जिसके कारण बन्दूक पीछे हटती है।
3. **चलना:** जब कोई व्यक्ति जमीन पर चलता है, तो वह अपने पैरों से जमीन को पीछे की ओर धकेलता है (क्रिया)। इसके जवाब में, जमीन व्यक्ति को आगे की ओर धकेलती है (प्रतिक्रिया), जिससे वह आगे बढ़ता है।
4. **किताब का मेज पर रखा होना:** एक किताब मेज पर रखी है। किताब अपने भार \( (Mg) \) के कारण मेज पर नीचे की ओर बल लगाती है (क्रिया)। मेज किताब पर अभिलम्ब प्रतिक्रिया बल \( (R) \) ऊपर की ओर लगाती है (प्रतिक्रिया)। इस स्थिति में, \( R = Mg \) होता है, और किताब स्थिर रहती है।

पिण्ड धरातल Mg R

In simple words: न्यूटन का तीसरा नियम कहता है कि जब आप किसी चीज़ पर बल लगाते हैं (क्रिया), तो वह चीज़ भी आप पर उतना ही बल वापस लगाती है, लेकिन उल्टी दिशा में (प्रतिक्रिया)। जैसे, जब आप पानी में तैरने के लिए पानी को पीछे धकेलते हैं, तो पानी आपको आगे धकेलता है।

🎯 Exam Tip: न्यूटन के तीसरे नियम की परिभाषा के साथ दो अच्छे, स्पष्ट उदाहरण दें जो क्रिया और प्रतिक्रिया बलों को दर्शाते हों।

 

प्रश्न 3. आवेग-संवेग प्रमेय को लिखिए तथा इसे सिद्ध कीजिए। ग्राफीय विधि से आवेग का मान कैसे ज्ञात करेंगे?
Answer:
**आवेग-संवेग प्रमेय (Impulse-Momentum Theorem):**
किसी वस्तु पर लगाए गए बल का आवेग, उस बल द्वारा वस्तु के संवेग में किए गए परिवर्तन के बराबर होता है। इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
\[ \overrightarrow{J} = \Delta\overrightarrow{P} = \overrightarrow{P_2} - \overrightarrow{P_1} \]
जहाँ \( \overrightarrow{J} \) आवेग है, \( \Delta\overrightarrow{P} \) संवेग में परिवर्तन है, \( \overrightarrow{P_1} \) प्रारंभिक संवेग है और \( \overrightarrow{P_2} \) अंतिम संवेग है।

**प्रमेय की व्युत्पत्ति (Proof):**
न्यूटन के गति के द्वितीय नियम से, किसी वस्तु पर लगने वाला बल उसके संवेग में परिवर्तन की दर के बराबर होता है:
\[ \overrightarrow{F} = \frac{d\overrightarrow{P}}{dt} \]
या
\[ d\overrightarrow{P} = \overrightarrow{F} dt \]
यदि एक बल \( \overrightarrow{F} \) किसी वस्तु पर समय अंतराल \( t_1 \) से \( t_2 \) तक कार्य करता है, तो कुल संवेग परिवर्तन प्राप्त करने के लिए हम इस समीकरण का समाकलन (integration) कर सकते हैं:
\[ \int_{\overrightarrow{P_1}}^{\overrightarrow{P_2}} d\overrightarrow{P} = \int_{t_1}^{t_2} \overrightarrow{F} dt \]
\[ \overrightarrow{P_2} - \overrightarrow{P_1} = \int_{t_1}^{t_2} \overrightarrow{F} dt \]
संवेग में परिवर्तन \( (\overrightarrow{P_2} - \overrightarrow{P_1}) \) आवेग के बराबर होता है \( (\overrightarrow{J}) \)।
\[ \overrightarrow{J} = \int_{t_1}^{t_2} \overrightarrow{F} dt \]
यह आवेग-संवेग प्रमेय है। यदि बल \( \overrightarrow{F} \) नियत हो, तो:
\[ \overrightarrow{J} = \overrightarrow{F} (t_2 - t_1) = \overrightarrow{F} \Delta t \]

**ग्राफीय विधि से आवेग का मान ज्ञात करना:**
बल-समय ग्राफ (Force-Time Graph) का उपयोग करके आवेग का मान ज्ञात किया जा सकता है। बल (Y-अक्ष) और समय (X-अक्ष) के बीच खींचे गए ग्राफ के तहत का क्षेत्रफल (Area under the curve) वस्तु पर लगे आवेग को दर्शाता है।

समय \( t \) बल \( F \) \( t_1 \) \( t_2 \) \( \overrightarrow{J} = \int_{t_1}^{t_2} \overrightarrow{F} dt \)

बल-समय ग्राफ में, \( t_1 \) से \( t_2 \) तक बल \( \overrightarrow{F} \) द्वारा घेरा गया क्षेत्रफल वस्तु के संवेग में परिवर्तन (आवेग) को दर्शाता है। यह विधि अनियमित रूप से बदलते हुए बल के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
In simple words: आवेग-संवेग प्रमेय कहता है कि किसी चीज़ पर लगने वाली ताक़त का कुल असर (आवेग), उस चीज़ के चलने के गुण (संवेग) में हुए बदलाव के बराबर होता है। इसे बल और समय के ग्राफ में, ग्राफ के नीचे का एरिया देखकर निकाला जा सकता है।

🎯 Exam Tip: प्रमेय की परिभाषा, व्युत्पत्ति और ग्राफीय व्याख्या तीनों को क्रमबद्ध तरीके से समझाएं। बल-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल आवेग होता है, यह मुख्य बिंदु है।

 

प्रश्न 4. किसी N कणों के निकाय के लिए संवेग संरक्षण का नियम लिखिए। न्यूटन के द्वितीय नियम का उपयोग करते हुए इसे व्युत्पन्न करिये। एक उदाहरण द्वारा संवेग संरक्षण के नियम को समझाइये।
Answer:
**संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Momentum):**
एक विलगित निकाय (isolated system) के लिए, यानी जिस पर कोई बाह्य बल कार्य नहीं करता है या जिस पर कार्यरत सभी बाह्य बलों का सदिश योग शून्य होता है, उस निकाय का कुल संवेग (total momentum) समय के साथ नियत या संरक्षित रहता है। इसका अर्थ है कि निकाय का संवेग, परिमाण और दिशा दोनों में अपरिवर्तित रहता है।

**न्यूटन के द्वितीय नियम का उपयोग करके व्युत्पत्ति:**
न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी निकाय पर लगने वाला कुल बाह्य बल \( \overrightarrow{F}_{ext} \), उसके कुल संवेग \( \overrightarrow{P}_{total} \) में परिवर्तन की दर के बराबर होता है:
\[ \overrightarrow{F}_{ext} = \frac{d\overrightarrow{P}_{total}}{dt} \]
यदि निकाय विलगित है, तो उस पर कोई बाह्य बल कार्य नहीं करता, अर्थात \( \overrightarrow{F}_{ext} = 0 \)।
\[ 0 = \frac{d\overrightarrow{P}_{total}}{dt} \]
इसका अर्थ है कि निकाय का कुल संवेग समय के साथ बदलता नहीं है, यानी यह नियत रहता है:
\[ \overrightarrow{P}_{total} = \text{नियतांक} \]
एक N कणों के निकाय के लिए, कुल संवेग प्रत्येक कण के संवेग का सदिश योग होता है:
\[ \overrightarrow{P}_{total} = \overrightarrow{P_1} + \overrightarrow{P_2} + \dots + \overrightarrow{P_N} = \sum_{i=1}^{N} \overrightarrow{P_i} \]
जहाँ \( \overrightarrow{P_i} \) \( i \)-वें कण का संवेग है। यदि निकाय विलगित है, तो इस कुल संवेग का मान नियत रहेगा। आंतरिक बल (जैसे कणों के बीच लगने वाले बल) संवेग संरक्षण के नियम को प्रभावित नहीं करते क्योंकि वे क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म होते हैं और एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं।

**उदाहरण (बन्दूक का प्रतिक्षेप):**
संवेग संरक्षण का एक परिचित उदाहरण बन्दूक का प्रतिक्षेप (Recoil of a Gun) है। इस स्थिति में, बन्दूक और गोली को एक साथ एक निकाय माना जाता है।
1. **प्रारंभिक अवस्था:** फायरिंग से पहले, बन्दूक और गोली दोनों विरामावस्था में होते हैं। इसलिए, निकाय का कुल प्रारंभिक संवेग शून्य होता है:
\( \overrightarrow{P}_{initial} = 0 \)
2. **अंतिम अवस्था:** जब बन्दूक से गोली दागी जाती है, तो गोली \( m_b \) द्रव्यमान और \( \vec{v}_b \) वेग से आगे की ओर बढ़ती है। बन्दूक \( m_G \) द्रव्यमान और \( \vec{v}_G \) वेग से पीछे की ओर हटती है (प्रतिक्षेप)।
संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, निकाय का कुल अंतिम संवेग भी प्रारंभिक संवेग के बराबर (यानी शून्य) होना चाहिए:
\[ \overrightarrow{P}_{final} = m_b \vec{v}_b + m_G \vec{v}_G = 0 \]
\[ m_G \vec{v}_G = -m_b \vec{v}_b \]
यहाँ ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि बन्दूक का प्रतिक्षेप वेग गोली के वेग की विपरीत दिशा में होता है। इससे बन्दूक पीछे की ओर गति करती है।

**दो अन्योन्य क्रिया करने वाले कणों के लिए व्युत्पत्ति:**
माना दो कण \( m_1 \) और \( m_2 \) एक दूसरे पर आंतरिक बल \( \overrightarrow{F}_{12} \) (कण 1 द्वारा कण 2 पर) और \( \overrightarrow{F}_{21} \) (कण 2 द्वारा कण 1 पर) लगाते हैं। उन पर बाह्य बल \( \overrightarrow{F}_{ext1} \) और \( \overrightarrow{F}_{ext2} \) भी लग सकते हैं।
न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार:
कण 1 के लिए: \( \frac{d\overrightarrow{P_1}}{dt} = \overrightarrow{F}_{ext1} + \overrightarrow{F}_{21} \)
कण 2 के लिए: \( \frac{d\overrightarrow{P_2}}{dt} = \overrightarrow{F}_{ext2} + \overrightarrow{F}_{12} \)
निकाय का कुल संवेग \( \overrightarrow{P}_{total} = \overrightarrow{P_1} + \overrightarrow{P_2} \)। तो कुल संवेग परिवर्तन की दर होगी:
\[ \frac{d\overrightarrow{P}_{total}}{dt} = \frac{d\overrightarrow{P_1}}{dt} + \frac{d\overrightarrow{P_2}}{dt} = (\overrightarrow{F}_{ext1} + \overrightarrow{F}_{21}) + (\overrightarrow{F}_{ext2} + \overrightarrow{F}_{12}) \]
\[ \frac{d\overrightarrow{P}_{total}}{dt} = (\overrightarrow{F}_{ext1} + \overrightarrow{F}_{ext2}) + (\overrightarrow{F}_{21} + \overrightarrow{F}_{12}) \]
न्यूटन के तृतीय नियम के अनुसार, \( \overrightarrow{F}_{21} = -\overrightarrow{F}_{12} \), इसलिए \( \overrightarrow{F}_{21} + \overrightarrow{F}_{12} = 0 \)।
तो, कुल संवेग परिवर्तन की दर होगी:
\[ \frac{d\overrightarrow{P}_{total}}{dt} = \overrightarrow{F}_{ext1} + \overrightarrow{F}_{ext2} = \overrightarrow{F}_{ext,total} \]

\( m_1 \) \( m_2 \) \( \overrightarrow{F}_{12} \) \( \overrightarrow{F}_{21} \)

यदि निकाय विलगित है (\( \overrightarrow{F}_{ext,total} = 0 \)), तो:
\[ \frac{d\overrightarrow{P}_{total}}{dt} = 0 \implies \overrightarrow{P}_{total} = \text{नियतांक} \]
इससे सिद्ध होता है कि विलगित निकाय का कुल संवेग संरक्षित रहता है।

**रॉकेट की गति:**
रॉकेट की गति संवेग संरक्षण के नियम का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण है। रॉकेट से निरंतर रूप से गैसें तेज गति से बाहर निकलती हैं, जिससे रॉकेट का द्रव्यमान घटता रहता है। गैसें पीछे की ओर संवेग उत्पन्न करती हैं, और इसके प्रतिक्रिया स्वरूप, रॉकेट को आगे की दिशा में समान संवेग मिलता है। इस प्रक्रिया में, ईंधन सहित रॉकेट एक विलगित निकाय माना जाता है (यदि बाह्य गुरुत्वाकर्षण बलों को नगण्य मानें), और इसका कुल संवेग संरक्षित रहता है। रॉकेट का वेग इस प्रकार दिया जाता है:
\[ v = u \log_e \left( \frac{M_0}{M} \right) \]
जहाँ \( v \) रॉकेट का अंतिम वेग है, \( u \) गैसों का निष्कासन वेग है, \( M_0 \) रॉकेट का प्रारंभिक द्रव्यमान (ईंधन सहित) है, और \( M \) रॉकेट का किसी क्षण पर द्रव्यमान है।

M (रॉकेट) m (ईंधन) \( \vec{v} \) \( \vec{u} \)

In simple words: संवेग संरक्षण का नियम कहता है कि अगर किसी सिस्टम पर बाहर से कोई बल न लगे, तो उसका कुल संवेग (चलने का गुण) हमेशा एक जैसा रहता है। यह न्यूटन के दूसरे नियम से निकलता है। रॉकेट का आगे बढ़ना इसका अच्छा उदाहरण है, क्योंकि वह ईंधन को पीछे फेंककर आगे बढ़ता है, जिससे उसका कुल संवेग बराबर रहता है।

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण के नियम को परिभाषित करें, न्यूटन के दूसरे नियम से व्युत्पत्ति दें, और एक स्पष्ट उदाहरण (जैसे बन्दूक का प्रतिक्षेप या रॉकेट का प्रणोदन) के साथ समझाएं।

 

प्रश्न 5. रॉकेट की गति का वर्णन तथा इसके वेग के लिए आवश्यक सूत्र ज्ञात कीजिए।
Answer:
**रॉकेट की गति का वर्णन (Motion of a Rocket):**
रॉकेट की गति न्यूटन के गति के तीसरे नियम और संवेग संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। रॉकेट में ईंधन भरा होता है जो जलने पर उच्च तापमान वाली गैसों का उत्पादन करता है। इन गैसों को रॉकेट के पिछले हिस्से में एक छोटे से नोजल (nozzle) से बहुत तेज गति से बाहर निकाला जाता है।
जब गैसें पीछे की ओर तेज वेग से निकलती हैं (क्रिया), तो वे रॉकेट पर आगे की दिशा में समान परिमाण का एक प्रतिक्रिया बल लगाती हैं। इस प्रतिक्रिया बल को प्रणोद (thrust) कहते हैं। इस प्रणोद के कारण रॉकेट आगे की ओर त्वरित गति करता है। चूंकि रॉकेट का द्रव्यमान ईंधन के जलने के कारण लगातार कम होता रहता है, यह परिवर्ती द्रव्यमान वाले तंत्र का एक उदाहरण है।

**रॉकेट के वेग के लिए सूत्र (Formula for Rocket Velocity):**
माना कि समय \( t \) पर रॉकेट का द्रव्यमान \( M \) है और उसका वेग \( \vec{v} \) है। एक छोटे से समय अंतराल \( \Delta t \) में, रॉकेट से \( \Delta M \) द्रव्यमान की गैसें बाहर निकलती हैं। इन गैसों का निष्कासन वेग रॉकेट के सापेक्ष \( \vec{u} \) है। रॉकेट का वेग \( v \) से बढ़कर \( v + \Delta v \) हो जाता है।
गैसों का पृथ्वी के सापेक्ष वेग \( \vec{v}_{gas} = \vec{v}_{rocket} + \vec{v}_{gas\_relative\_rocket} = \vec{v} - \vec{u} \)।
संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार (यह मानते हुए कि बाहरी बल शून्य हैं):
प्रारंभिक संवेग (\( t \) समय पर): \( \overrightarrow{P}_{initial} = M\vec{v} \)
अंतिम संवेग (\( t+\Delta t \) समय पर): \( \overrightarrow{P}_{final} = (M-\Delta M)(\vec{v}+\Delta\vec{v}) + \Delta M(\vec{v}-\vec{u}) \)
संवेग संरक्षण के अनुसार, \( \overrightarrow{P}_{initial} = \overrightarrow{P}_{final} \):
\[ M\vec{v} = (M-\Delta M)(\vec{v}+\Delta\vec{v}) + \Delta M(\vec{v}-\vec{u}) \]
पदों को खोलने और व्यवस्थित करने पर (उच्च कोटि के पदों को नगण्य मानकर):
\[ M\vec{v} = M\vec{v} + M\Delta\vec{v} - \Delta M\vec{v} - \Delta M\Delta\vec{v} + \Delta M\vec{v} - \Delta M\vec{u} \]
\[ 0 = M\Delta\vec{v} - \Delta M\vec{u} \]
\[ M\Delta\vec{v} = \Delta M\vec{u} \]
\( \Delta t \) से भाग देने पर और \( \Delta t \to 0 \) की सीमा लेने पर:
\[ M \frac{d\vec{v}}{dt} = \frac{dM}{dt} \vec{u} \]
या
\[ d\vec{v} = \frac{dM}{M} \vec{u} \]
यदि ईंधन के जलने की दर \( r \) है, तो \( r = -\frac{dM}{dt} \) (द्रव्यमान कम हो रहा है)। इसलिए \( dM = -r dt \)।
\[ d\vec{v} = -\frac{r dt}{M} \vec{u} \]
प्रारंभ में \( (t=0) \) रॉकेट का द्रव्यमान \( M_0 \) और वेग \( v=0 \) है। किसी क्षण \( t \) पर द्रव्यमान \( M \) और वेग \( v \) है।
समाकलन करने पर:
\[ \int_{0}^{v} d\vec{v} = -\vec{u} \int_{M_0}^{M} \frac{dM}{M} \]
\[ v = -\vec{u} [\log_e M]_{M_0}^{M} \]
\[ v = -\vec{u} (\log_e M - \log_e M_0) \]
\[ v = \vec{u} (\log_e M_0 - \log_e M) \]
\[ v = \vec{u} \log_e \left( \frac{M_0}{M} \right) \]
यदि \( M = M_0 - rt \), तो:
\[ v = \vec{u} \log_e \left( \frac{M_0}{M_0 - rt} \right) \]
यह सूत्र रॉकेट का अंतिम वेग देता है। जैसे-जैसे ईंधन जलता है (\( M \) घटता है), रॉकेट का वेग बढ़ता जाता है।
In simple words: रॉकेट आगे बढ़ता है क्योंकि वह पीछे की तरफ़ तेज़ी से गैसें फेंकता है। गैसें पीछे बल लगाती हैं तो रॉकेट आगे बढ़ता है। रॉकेट के वेग को निकालने का एक खास फार्मूला होता है जिसमें रॉकेट का शुरुआती और बाद का वजन, और गैसों की निकलने की स्पीड देखी जाती है।

🎯 Exam Tip: रॉकेट की गति को संवेग संरक्षण के सिद्धांत से जोड़ें। वेग के सूत्र की व्युत्पत्ति में द्रव्यमान परिवर्तन \( (\Delta M) \) और सापेक्ष वेग \( (\vec{u}) \) को स्पष्ट करें।

 

Question 7. स्थैतिक घर्षण की दिशा कैसे ज्ञात करेंगे? समझाइये।
Answer:
स्थैतिक घर्षण (Static Friction)
जब एक ब्लॉक किसी समतल पर रखा होता है और उस पर कोई बाहरी बल नहीं लगता, तो सतह केवल अभिलंब प्रतिक्रिया बल \( R \) लगाती है। इस स्थिति में घर्षण बल उत्पन्न नहीं होता (चित्र अ)। यदि ब्लॉक को खिसकाने के लिए बाहरी बल \( \overrightarrow{\mathrm{F}} \) लगाया जाता है, तो इसके विपरीत दिशा में घर्षण बल उत्पन्न होता है जो इस लगाए गए बल \( \overrightarrow{\mathrm{F}} \) को संतुलित करता है (चित्र ब)। ब्लॉक तब भी स्थिर अवस्था में रहता है। इस स्थिर अवस्था में उत्पन्न घर्षण बल को स्थैतिक घर्षण बल \( \overrightarrow{f_{s}} \) कहते हैं। जब लगाया गया बल एक सीमा से कम होता है, तो \( \overrightarrow{f_{s}} \) का परिमाण \( \overrightarrow{\mathrm{F}} \) के बराबर और दिशा में विपरीत होती है। लगाए गए बल \( \overrightarrow{\mathrm{F}} \) का मान बढ़ाने पर एक सीमा तक स्थैतिक घर्षण बल \( \left(\vec{f}_{s}\right) \) का मान भी बढ़ता है (चित्र स)।

W R (अ) W R F fs (ब) W R F fs,max (स) W R F fk (द)

In simple words: जब कोई वस्तु हिलने की कोशिश करती है, तो घर्षण बल हमेशा उसकी गति के विपरीत दिशा में लगता है। यह बल वस्तु को हिलने से रोकता है।

🎯 Exam Tip: स्थैतिक घर्षण बल हमेशा लगाए गए बाहरी बल के विपरीत दिशा में और उसके बराबर होता है जब तक वस्तु स्थिर रहती है। इसकी दिशा हमेशा बाहरी बल के विपरीत होती है जो वस्तु को चलाने की कोशिश कर रहा हो।

 

Question 8. स्थैतिक एवं गतिज घर्षण गुणांकों को परिभाषित कीजिए। इनका मान कैसे ज्ञात कर सकते हैं?
Answer:
**स्थैतिक घर्षण (Static Friction)**
जब एक ब्लॉक किसी समतल पर रखा होता है और उस पर कोई बाहरी बल नहीं लगता, तो सतह केवल अभिलंब प्रतिक्रिया बल \( R \) लगाती है। इस स्थिति में घर्षण बल उत्पन्न नहीं होता (चित्र अ)। यदि ब्लॉक को खिसकाने के लिए बाहरी बल \( \overrightarrow{\mathrm{F}} \) लगाया जाता है, तो इसके विपरीत दिशा में घर्षण बल उत्पन्न होता है जो इस लगाए गए बल \( \overrightarrow{\mathrm{F}} \) को संतुलित करता है (चित्र ब)। ब्लॉक तब भी स्थिर अवस्था में रहता है। इस स्थिर अवस्था में उत्पन्न घर्षण बल को स्थैतिक घर्षण बल \( \overrightarrow{f_{s}} \) कहते हैं। जब लगाया गया बल एक सीमा से कम होता है, तो \( \overrightarrow{f_{s}} \) का परिमाण \( \overrightarrow{\mathrm{F}} \) के बराबर और दिशा में विपरीत होती है। लगाए गए बल \( \overrightarrow{\mathrm{F}} \) का मान बढ़ाने पर एक सीमा तक स्थैतिक घर्षण बल \( \left(\vec{f}_{s}\right) \) का मान भी बढ़ता है (चित्र स)। इस अधिकतम सीमा को \( f_{s, \max } \) कहते हैं, जिसे सीमान्त घर्षण बल कहा जाता है। प्रयोगों से पता चलता है कि दो सतहों के लिए \( f_{s, \max } \propto R \) होता है, जहाँ \( R \) ब्लॉक पर लगने वाला अभिलंब प्रतिक्रिया बल है। इसलिए, स्थैतिक घर्षण गुणांक \( \mu_s = \frac{f_{s, \max }}{R} \) कहलाता है। यह एक विमाहीन संख्या है जिसका कोई मात्रक नहीं होता।

**गतिक घर्षण (Kinetic Friction)**
यदि वस्तु पर लगाया गया संपर्क बल, स्थैतिक घर्षण बल के अधिकतम मान से अधिक हो जाए, तो वस्तु लगाए गए बल की दिशा में फिसलने लगती है। जब वस्तु फिसलती है, तो गति की विपरीत दिशा में लगने वाले विरोधी बल को गतिक घर्षण बल (Kinetic Frictional Force) कहते हैं। इसे \( f_k \) से दिखाते हैं और \( f_k = \mu_k R \) होता है। यहाँ \( \mu_k \) को गतिक घर्षण गुणांक (Coefficient of Kinetic Friction) कहते हैं। यह भी मात्रकहीन और विमाहीन राशि है। दो सतहों के बीच गतिक घर्षण गुणांक, गतिक घर्षण बल और अभिलंब प्रतिक्रिया बल के अनुपात के बराबर होता है। सामान्यतः \( \mu_k < \mu_s \) होता है, जिसका मतलब है कि \( f_k < f_{s, \max } \)। चित्र I में दिखाया गया है कि जैसे-जैसे बाहरी क्षैतिज बल \( F \) बढ़ता है, घर्षण बल भी बढ़ता जाता है। जब \( F \), \( f_{s, \max } \) की सीमा पार कर जाता है, तब ब्लॉक गति करने लगता है और घर्षण बल का मान घटकर \( f_k \) हो जाता है। यदि ब्लॉक को नियत वेग से गति में रखना हो, तो बाहरी बल को घटाकर \( f_k \) के बराबर करना पड़ता है। इस अवस्था में (नियत वेग से गतिशील अवस्था में) बाहरी बल \( F \), घर्षण बल \( f_k \) के बराबर होता है। गतिशील अवस्था में \( f_k \) लगभग नियत रहता है। इन तथ्यों को चित्र II में दिखाया गया है।

W R (अ) W R F fs (ब) W R F fs,max (स) W R F fk (द)

चित्र I- स्थैतिक और गतिक घर्षण बल

समय (Time) घर्षण बल (Friction Force) O X Y fs,max Fs,max fk नियत वेग से गति

चित्र II - घर्षण बल का व्यवहार

पदार्थ\( \mu_s \)\( \mu_k \)
कंक्रीट सड़क पर रबर1.000.70
काँच पर काँच0.950.40
लकड़ी पर लकड़ी0.500.30
स्टील पर स्टील
(स्नेहक का उपयोग करने पर)
0.150.09

In simple words: स्थैतिक घर्षण गुणांक वस्तु को हिलने से रोकने वाले सबसे ज़्यादा घर्षण बल को दर्शाता है, जबकि गतिक घर्षण गुणांक तब लगता है जब वस्तु पहले से ही हिल रही होती है। गतिक घर्षण गुणांक हमेशा स्थैतिक घर्षण गुणांक से कम होता है, जिसका मतलब है कि एक बार वस्तु हिलने लगे तो उसे हिलाते रहना आसान हो जाता है।

🎯 Exam Tip: स्थैतिक घर्षण गुणांक हमेशा गतिक घर्षण गुणांक से अधिक होता है। घर्षण गुणांक का मान सतहों की प्रकृति पर निर्भर करता है।

 

Question 10. ऊर्ध्वाधर तल में एक पिण्ड की वृत्ताकार गति का वर्णन करिए। वृत्त के उच्चतम एवं निम्नतम बिन्दुओं पर एक डोरी में उत्पन्न तनाव के लिए सूत्रे ज्ञात कीजिए। क्रान्तिक वेग किसे कहते हैं? इसका सूत्र ज्ञात कीजिए।
Answer:
क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर तल में वृत्तीय गति
(Circular Motion in Horizontal and Vertical Planes)
अभी तक हमने वृत्तीय गति को एक कण की गति के रूप में देखा है। किसी वस्तु को हम एक रस्सी या धागे द्वारा बाँधकर क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर तल में वृत्ताकार गति करवा सकते हैं। इसे हम निम्न प्रकार से समझ सकते हैं।

**(I) क्षैतिज तल में वृत्ताकार गति (Circular Motion in Horizontal Plane)**
उपरोक्त चित्र में दर्शाये अनुसार एक द्रव्यमान \( m \) पर विचार करें। जो \( L \) लम्बाई के एक धागे के एक सिरे पर बँधा हुआ है। द्रव्यमान \( (m) \) एक नियत चाल \( v \) से एक क्षैतिज वृत्त में गति कर रहा है। जैसे-जैसे द्रव्यमान वृत्त में गति करता है, धागा एक \( \theta \) कोण के शंकु की सतह को प्रसर्प (sweep) करता है, जहाँ \( \theta \) धागे द्वारा ऊर्ध्व रेखा से बनाया गया कोण है। किसी क्षण पर द्रव्यमान \( m \) पर लगने वाले बलों को चित्र में दर्शाया गया है। यदि \( T \) धागे में तनाव है तो \( T \) के घटक \( T \cos \theta \) और \( T \sin \theta \) करने पर द्रव्यमान को आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल \( T \sin \theta \) घटक से प्राप्त होता है। द्रव्यमान \( m \) में कोई ऊर्ध्वाधर त्वरण नहीं है। अतः घटक \( T \cos \theta \) द्रव्यमान के भार \( W \) से संतुलित होना चाहिए।
इस प्रकार
\( T \sin \theta = \frac{m v^{2}}{r} \) .................(1)
\( T \cos \theta = W = mg \) .................(2)
समीकरण (1) में समीकरण (2) का भाग देने पर
\( \frac{T \sin \theta}{T \cos \theta} = \frac{m v^{2} / r}{mg} \)
\( \implies \tan \theta = \frac{v^{2}}{rg} \) .................(3)
यहाँ \( r \) वृत्ताकार पथ की त्रिज्या है।
यदि धागे की लम्बाई \( L \) है तो चित्र से \( r = L \sin \theta \) तथा
\( v = r\omega = r \left(\frac{2\pi}{T}\right) \)
\( v = \frac{2\pi r}{T} = \frac{2\pi L \sin \theta}{T} \)
जहाँ \( T \) द्रव्यमान द्वारा एक चक्कर लगाने में लिया गया समय है।
समीकरण (3) से
\( \tan \theta = \frac{(2\pi r / T)^{2}}{rg} = \frac{4\pi^{2}r^{2}}{T^{2}rg} = \frac{4\pi^{2}r}{T^{2}g} \)
लेकिन \( r = L \sin \theta \)
इसलिए \( \tan \theta = \frac{4\pi^{2}L \sin \theta}{T^{2}g} \)
\( \implies \frac{\sin \theta}{\cos \theta} = \frac{4\pi^{2}L \sin \theta}{T^{2}g} \)
इसलिए \( \cos \theta = \frac{gT^{2}}{4\pi^{2}L} \) .................(4)
या \( T^{2} = \frac{4\pi^{2}L \cos \theta}{g} \)
या \( T = 2\pi \sqrt{\frac{L \cos \theta}{g}} \) .................(5)
समीकरण (4) से \( \theta \) कोण का आवर्तकाल \( T \) से सम्बन्ध ज्ञात होता है। इस समीकरण से \( \theta \) का मान \( 90^{\circ} \) नहीं हो सकता क्योंकि उसके लिए \( T \) को शून्य होना पड़ेगा या \( v = \infty \)। पुनः \( T \) का अधिकतम मान \( T_{\max } = 2 \pi \sqrt{\frac{L}{g}} \) होगा, जो कि अत्यल्प कोण \( (\theta \approx 0) \) के लिए सम्भव है ताकि \( \cos \theta \approx \cos 0 = 1 \)। समीकरण (5) एक सरल लोलक के लिए आवर्तकाल के व्यंजक के समान है, जिसका अध्ययन हम अध्याय-8 में करेंगे। इस समानता के कारण उपरोक्त युक्ति को शंकु-लोलक भी कहते हैं।

**(II) ऊर्ध्वाधर तल में वृत्ताकार गति (Circular Motion in Vertical Plane)**
अब हम एक द्रव्यमान \( m \) की जो \( r \) लम्बाई के एक धागे के एक सिरे से बँधा है, की ऊर्ध्वाधर तल में वृत्तीय गति पर विचार करते हैं। चित्र में दिखाये अनुसार द्रव्यमान \( m \) पर दो बल कार्यरत हैं, एक इसका भार \( W = mg \) तथा दूसरी धागे में तनाव \( T \) है। भार \( W \) को चित्र में दर्शाये अनुसार दो घटकों में वियोजित करने पर हमें परिणामी स्पर्श रेखीय एवं अभिलम्बीय बल प्राप्त होते हैं।
स्पर्श रेखीय बल घटक: \( F_{||} = mg \sin \theta \)
अभिलम्ब बल घटक: \( F_{\perp} = T - mg \cos \theta \)
न्यूटन के द्वितीय नियम से, स्पर्श रेखीय त्वरण \( a_{||} = \frac{F_{||}}{m} = \frac{mg \sin \theta}{m} = g \sin \theta \)
यह त्वरण का व्यंजन उसी प्रकार का है जैसा एक \( \theta \) ढाल कोण वाले नत तल पर \( m \) द्रव्यमान के सर्पण (sliding) से प्राप्त होता है।
अभिलम्बीय त्वरण ही कण को आवश्यक अभिकेन्द्रीय त्वरण प्रदान करता है, जिसका मान होगा
\( a_{\perp} = \frac{F_{\perp}}{m} = \frac{T - mg \cos \theta}{m} = \frac{v^{2}}{r} \)
\( \implies T - mg \cos \theta = \frac{mv^{2}}{r} \)
\( \implies T = \frac{mv^{2}}{r} + mg \cos \theta \) .................(6)
चित्र में दर्शाये अनुसार वृत्त के निम्नतम बिन्दु B पर \( \theta = 0 \), \( \sin \theta = 0 \) तथा \( \cos \theta = 1 \) अतः इस बिन्दु पर \( F_{||} = 0 \), \( a_{||} = 0 \) तथा द्रव्यमान \( m \) का त्वरण शुद्ध रूप से अभिकेन्द्रीय (ऊपर की ओर) होगा तथा इस बिन्दु पर धागे में तनाव समीकरण (6) से \( \theta = 0 \) रखने पर प्राप्त होता है।
निम्नतम बिन्दु B पर तनाव: \( T_{B} = m\left(\frac{v^{2}}{r}+g\right) \) .................(7)
उच्चतम बिन्दु A पर \( \theta = 180^{\circ} \), \( \sin \theta = 0 \) तथा \( \cos \theta = -1 \)। तथा त्वरण पुनः शुद्ध रूप से अभिकेन्द्रीय (नीचे की ओर) होगा तथा इसका मान
उच्चतम बिन्दु A पर तनाव: \( T_{A} = m\left(\frac{v^{2}}{r}-g\right) \) .................(8)

**क्रान्तिक वेग (Critical Velocity):**
समीकरण (8) से हम उच्चतम बिन्दु A पर क्रान्तिक वेग का मान ज्ञात कर सकते हैं। जहाँ पर धागे में तनाव शून्य हो जाये या धागा ढीला हो जाये। माना कि यह वेग \( v_c \) है। इसका मान समीकरण (8) में \( T_A = 0 \) रखने पर ज्ञात होता है। अतः
\( 0 = m\left(\frac{v_c^{2}}{r}-g\right) \)
\( \implies 0 = \frac{v_c^{2}}{r}-g \)
\( \implies v_c^{2} = rg \)
\( \implies v_c = \sqrt{rg} \) .................(9)
यह \( v_c = \sqrt{rg} \) क्रान्तिक वेग है।

**निम्नतम बिन्दु B पर तनाव (Tension at the lowest point B):**
क्रान्तिक वेग का यह मान समीकरण (7) में रखने पर, निम्नतम बिन्दु B पर तनाव का मान
\( T_{B} = m\left(\frac{rg}{r}+g\right) = m(g+g) = 2mg \) .................(10)
In simple words: ऊर्ध्वाधर वृत्त में, वस्तु की गति को समझने के लिए तनाव और गुरुत्वाकर्षण बल का उपयोग किया जाता है। उच्चतम बिंदु पर न्यूनतम वेग को क्रान्तिक वेग कहते हैं ताकि डोरी ढीली न हो। सबसे निचले बिंदु पर तनाव उच्चतम बिंदु की तुलना में अधिक होता है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल भी तनाव की दिशा में कार्य करता है।

O L m r T θ Tsinθ Tcosθ W

चित्र - क्षैतिज तल में वृत्ताकार गति

O B A r m θ T v W=mg mgcosθ mgsinθ

चित्र - ऊर्ध्वाधर तल में वृत्तीय गति

🎯 Exam Tip: ऊर्ध्वाधर वृत्तीय गति में, क्रान्तिक वेग वह न्यूनतम वेग होता है जिस पर उच्चतम बिंदु पर भी डोरी में तनाव शून्य नहीं होता, जिससे वस्तु पूरी गति पूरी कर पाती है। इस गति में ऊर्जा संरक्षण का नियम महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 11. एक समतल वृत्ताकार पथ पर एक वाहन की गति का वर्णन करते हुए वाहन की अधिकतम गति के लिए आवश्यक सूत्र ज्ञात कीजिए।
Answer:
समतल वृत्ताकार (Motion of a vehicle on Circular path)
माना \( m \) द्रव्यमान का एक वाहन, \( r \) त्रिज्या की एक समतल वृत्ताकार सड़क पर नियत चाल \( v \) से गति कर रहा है। इस वाहन पर लगने वाले बल चित्र में दिखाये गये हैं। वाहन का भार \( mg \) नीचे की ओर है तथा सड़क के कारण वाहन पर लगने वाला प्रतिक्रिया बल \( R \) ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर है। वृत्ताकार मोड़ पर वाहन के पहिये, वृत्ताकार पथ के केन्द्र से दूर जाने का प्रयास करते हैं, जिसके कारण टायरों व सड़क के मध्य घर्षण बल \( f \) पहियों के अक्ष पर पथ के केन्द्र \( O \) की ओर लगता है। यदि घर्षण गुणांक \( \mu \) है तो घर्षण बल \( f \le \mu R \)।
ऊर्ध्व बलों के संतुलन से \( mg = R \)
यह घर्षण बल \( \frac{m v^{2}}{r} \) के बराबर होता है, जो गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करता है।
इसलिए \( f = \frac{m v^{2}}{r} \)
चूंकि \( f \le \mu R \), इसलिए \( \frac{m v^{2}}{r} \le \mu R \)
\( \implies \frac{m v^{2}}{r} \le \mu mg \) (क्योंकि \( R = mg \))
\( \implies v^{2} \le \mu rg \)
\( \implies v \le \sqrt{\mu rg} \) .................(2)
इस प्रकार समतल वृत्ताकार पथ पर नियत चाल से गति करने के लिए चाल की एक अधिकतम सीमा निम्न समीकरण द्वारा दी जाती है:
\( V_{\max } = \sqrt{\mu rg} \) .................(3)
यदि वाहन इससे अधिक चाल से गति करे तो वह वृत्ताकार पथ के केन्द्र \( O \) से दूर (सड़क के बाहर) की ओर फिसल जायेगा इसलिए वर्षा के दिनों में समतल वृत्ताकार पथ पर वाहन की चाल निर्धारित अधिकतम चाल से बहुत कम रखनी चाहिए।
In simple words: एक सीधी वृत्ताकार सड़क पर गाड़ी की अधिकतम सुरक्षित गति घर्षण बल पर निर्भर करती है। गाड़ी बिना फिसले चल सके, इसके लिए घर्षण बल अभिकेन्द्रीय बल के बराबर या उससे कम होना चाहिए।

R mg f f ≤ µR O

चित्र

🎯 Exam Tip: समतल वृत्ताकार पथ पर गति करते समय, अधिकतम सुरक्षित गति की गणना करते समय घर्षण गुणांक और वृत्त की त्रिज्या दोनों का सही उपयोग करें।

 

Question 12. वृत्ताकार मोड़ पर एक सड़क को बंकित क्यों किया जाता है? ऐसे मोड़ पर एक वाहन की अधिकतम गति के लिए आवश्यक सूत्र ज्ञात कीजिए। यदि सड़क में घर्षण को नगण्य मान लिया जाय तो बंकन कोण के लिए सूत्र ज्ञात कीजिए।
Answer:
वृत्ताकार घुमाव पर सड़क के बाहरी किनारे को कुछ उठाने को सड़क में करवट (banking) कहते हैं। इससे वृत्ताकार मोड़ पर वाहनों के अधिकतम सुरक्षित वेग में वृद्धि हो जाती है।
माना कि करवट ली हुई सड़क का करवट कोण \( \theta \) है तथा वृत्ताकार पथ की त्रिज्या \( r \) है। \( mg \) भार का एक वाहन \( v \) नियत चाल से गतिशील है। किसी क्षण वाहन पर निम्न बल लगते हैं:
(i) वाहन का भार \( mg \) ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर।
(ii) प्रतिक्रिया बल \( R \) सड़क के लम्बवत् ऊपर की ओर लगता है। अर्थात् प्रतिक्रिया बल \( R \) ऊर्ध्वाधर दिशा से \( \theta \) कोण पर लगता है। इस प्रतिक्रिया बल \( R \) के दो क्रमिक परस्पर लम्बवत् ऊर्ध्वाधर घटक \( R \cos \theta \) और क्षैतिज घटक \( R \sin \theta \) हैं। ऊर्ध्वाधर घटक \( (R \cos \theta) \) वाहन के भार \( mg \) को संतुलित करता है जबकि क्षैतिज घटक \( (R \sin \theta) \) वृत्ताकार पथ में गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल उपलब्ध कराता है।
\( R \cos \theta = mg \) .................(1)
\( R \sin \theta = \frac{m v^{2}}{r} \) .................(2)
समीकरण (2) में समीकरण (1) का भाग देने पर
\( \frac{R \sin \theta}{R \cos \theta} = \frac{m v^{2} / r}{mg} \)
\( \implies \tan \theta = \frac{v^{2}}{rg} \) .................(3)
समीकरण (3) वाहन की आदर्श चाल के समीकरण को व्यक्त करता है। यह एक करवट कोण वाली सड़क के लिए \( r \) त्रिज्या के वृत्ताकार मोड़ पर घर्षण की अनुपस्थिति में वाहन की इष्टतम (optimal) चाल है। इस चाल पर वाहन के टायरों पर त्रिज्यीय दाब नहीं होगा और टायरों में जीर्ण-शीर्ण न्यूनतम रहेगा।
In simple words: घुमावदार सड़कों को किनारे से थोड़ा ऊपर उठाया जाता है ताकि गुरुत्वाकर्षण और सामान्य बल मिलकर गाड़ी को सुरक्षित रूप से मोड़ने में मदद कर सकें। इससे गाड़ी को चलाने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल मिल जाता है और फिसलन का खतरा कम हो जाता है।

R cos θ R sin θ mg R θ

चित्र

🎯 Exam Tip: बंकित सड़कों पर वेग का सूत्र निकालते समय, सामान्य प्रतिक्रिया बल के घटकों को सही ढंग से क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दिशाओं में वियोजित करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 13. एक आनत तल पर एक पिण्ड की गति का वर्णन करिये।
Answer:
विराम कोण (Angle of Repose)
आनत तल का क्षैतिज दिशा के साथ वह अधिकतम झुकाव कोण, जिस पर वस्तु आनत तल पर ठीक संतुलन की अवस्था में बनी रहती है, उसे विराम कोण कहते हैं।
नत कोण \( \theta_0 \) वाले आनत तल पर रखे \( M \) द्रव्यमान की वस्तु पर कार्यरत बल चित्रानुसार है।
संतुलन की स्थिति में
सीमान्त घर्षण: \( (f_s)_{\max} = \mu_s R \)
\( \implies (f_s)_{\max} = M g \sin \theta_0 \) .................(1)
अभिलम्ब प्रतिक्रिया: \( R = Mg \cos \theta_0 \) .................(2)
समीकरण (1) में समीकरण (2) का भाग देने पर
\( \frac{(f_s)_{\max}}{R} = \frac{Mg \sin \theta_0}{Mg \cos \theta_0} \)
\( \implies \mu_s = \tan \theta_0 \)
तथा \( \tan \lambda = \mu_s \) (घर्षण कोण \( \lambda \))
\( \implies \tan \lambda = \tan \theta_0 \)
\( \implies \lambda = \theta_0 \)
अर्थात् घर्षण कोण तथा विराम कोण समान होते हैं। इस प्रकार नत कोण \( \theta \le \theta_0 \) पर वस्तु स्थिर तथा \( \theta > \theta_0 \) पर वस्तु फिसलने लगती है।
In simple words: एक ढलान पर, विराम कोण वह सबसे बड़ा कोण है जिस पर कोई वस्तु बिना फिसले स्थिर रह सकती है। इस कोण पर, वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल का घटक घर्षण बल द्वारा पूरी तरह संतुलित हो जाता है।

θ0 Mg R fs,max Mgsinθ0 Mgcosθ0

चित्र

🎯 Exam Tip: आनत तल पर वस्तु के संतुलन के लिए, गुरुत्वाकर्षण बल के घटकों को तल के समानांतर और लम्बवत् दिशाओं में सही ढंग से वियोजित करें।

 

Question 14. जड़त्वीय एवं अजड़त्वीय निर्देश तंत्रों में अन्तर स्पष्ट करिये। क्या पृथ्वी जड़त्वीय निर्देश तंत्र है? स्पष्ट करिये।
Answer:
**जड़त्वीय निर्देश तन्त्र (Inertial frame of reference)**- एक ऐसा निर्देश तन्त्र जिसमें न्यूटन का गति का प्रथम नियम (अर्थात् जड़त्व का नियम) मान्य रहे, जड़त्वीय निर्देश तन्त्र कहलाता है। ऐसे निर्देश तन्त्र में, एक कण पर बाह्य बल नहीं लग रहा हो, तो वह कण सदैव एक सरल रेखा में नियत वेग से गति करता है।
यदि हम पृथ्वी पर जड़े हुए एक निर्देश तन्त्र की कल्पना करें तब पृथ्वी की घूर्णन गति और परिक्रमण गति के कारण निर्देश तन्त्र में भी ये दोनों गतियाँ होंगी, इस कारण पूर्ण रूप से ऐसे निर्देश तन्त्र को जड़त्वीय निर्देश तन्त्र नहीं कह सकते दूरस्थ तारों के सापेक्ष एक स्थिर निर्देश तन्त्र को जड़त्वीय निर्देश तन्त्र माना जा सकता है। एक जड़त्वीय निर्देश तन्त्र के सापेक्ष स्थिर अन्य निर्देश तन्त्र भी जड़त्वीय होता है। एक जड़त्वीय निर्देश तन्त्र के सापेक्ष समान वेग से गतिशील अन्य देश तन्त्र भी जड़त्वीय निर्देश तन्त्र होता है। न्यूटन के गति के तीनों नियमों के कथन भी विशुद्ध रूप से एक जड़त्वीय निर्देश तन्त्र में ही मान्य हैं। यदि एक जड़त्वीय निर्देश तन्त्र में किसी कण पर लग रहा बल \( \overrightarrow{\mathrm{F}} \) और उत्पन्न त्वरण \( \vec{a} \) है \( (\overrightarrow{\mathrm{F}}=m \vec{a}) \) तब किसी दूसरे जड़त्वीय निर्देश तन्त्र, चाहे वह पहले के सापेक्ष स्थिर हो या नियत वेग से गतिशील हो, में कण पर लग रहा बल \( \overrightarrow{\mathrm{F}} \) ही प्रतीत हो। और त्वरण भी \( \vec{a} \) प्राप्त होगा।

**अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र (Non-inertial frame of reference)** – वे निर्देश तन्त्र जिनमें न्यूटन का गति का प्रथम नियम अर्थात् जड़त्व का नियम मान्य प्रतीत नहीं हो, अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र कहलाते हैं। एक अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र में एक स्वतन्त्र कण का पथ आवश्यक नहीं कि सरल रेखा में ही आये। एक जड़त्वीय निर्देश तन्त्र के सापेक्ष त्वरित निर्देश तन्त्र अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र होता है। पृथ्वी के सापेक्ष घूर्णन कर रहा है, वह भी एक अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र होता है।

**क्या पृथ्वी जड़त्वीय निर्देश तंत्र है?**
यदि पृथ्वी से संबद्ध जड़त्वीय निर्देश तंत्र पर विचार करें तो यह जड़त्वीय निर्देश तंत्र नहीं है। क्योंकि पृथ्वी न केवल अपनी स्वयं की अक्ष पर अपितु सूर्य के चारों ओर भी घूर्णन करती है। पृथ्वी की स्वयं की घूर्णन गति के कारण इसकी सतह पर रखा कोई स्थिर कण इसके केन्द्र की ओर अभिकेन्द्री बल का अनुभव करता है। उदाहरणतः भूमध्य रेखा पर इस अभिकेन्द्रीय त्वरण का मान:
\( a_c = \omega^{2}R_e = \left(\frac{2\pi}{24 \times 60 \times 60}\right)^{2} \times 6.4 \times 10^{6} \)
\( = 3.4 \times 10^{-2} \text{ m/s}^2 \)
सामान्य यांत्रिकी की समस्याओं में इस त्वरण को यदि न्यून मान कर छोड़ दें तो पृथ्वी को जड़त्वीय निर्देश तंत्र माना जा सकता है परन्तु कुछ खास समस्याओं में, इस त्वरण के प्रभाव साफ दिखते हैं।
In simple words: जड़त्वीय तंत्र वह होता है जहाँ न्यूटन के नियम सीधे लागू होते हैं, जबकि अजड़त्वीय तंत्र में वे सीधे लागू नहीं होते क्योंकि तंत्र खुद त्वरित होता है। पृथ्वी पूरी तरह से जड़त्वीय तंत्र नहीं है क्योंकि यह अपनी धुरी पर घूमती है और सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है।

🎯 Exam Tip: जड़त्वीय और अजड़त्वीय निर्देश तंत्रों के बीच का अंतर न्यूटन के गति के नियमों की वैधता पर आधारित होता है। पृथ्वी के घूर्णन और परिक्रमण के कारण यह एक अजड़त्वीय निर्देश तंत्र मानी जाती है, हालाँकि अधिकांश व्यावहारिक गणनाओं के लिए इसे लगभग जड़त्वीय माना जाता है।

 

RBSE Class 11 Physics Chapter 4 आंकिक प्रश्न

 

Question 1. कोई बॉक्स रेलगाड़ी के फर्श पर स्थिर रखा है। यदि बॉक्स तथा रेलगाड़ी के फर्श के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक 0.13 है। तो रेलगाड़ी का वह अधिकतम त्वरण ज्ञात कीजिये जो बॉक्स को रेलगाड़ी के फर्श पर स्थिर रखने के लिये आवश्यक है। \( (g = 9.8 \text{ ms}^{-2}) \)
Answer:
हल:
दिया गया है:
स्थैतिक घर्षण गुणांक \( (\mu_s) = 0.13 \)
रेलगाड़ी का अधिकतम त्वरण \( (a_{\max}) = ? \)
चूँकि बॉक्स में त्वरण स्थैतिक घर्षण के कारण ही है इसलिए
\( ma = (f_s)_{\max} \le \mu_s R \)
\( \implies R = mg \) (ऊर्ध्वाधर संतुलन के लिए)
अतः
\( a \le \mu_s g \)
\( a_{\max} = \mu_s g \)
\( = 0.13 \times 9.8 \)
\( = 1.274 \text{ m/s}^2 \)
\( a = 1.27 \text{ m/s}^2 \)
In simple words: गाड़ी के अंदर रखी कोई चीज़ तभी तक स्थिर रहेगी जब तक गाड़ी का त्वरण इतना ज़्यादा न हो जाए कि वह घर्षण बल से ज़्यादा हो जाए। इस सवाल में, घर्षण गुणांक का उपयोग करके अधिकतम त्वरण निकाला जाता है, जिस पर बॉक्स नहीं फिसलेगा।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, वस्तु पर लगने वाले सभी बलों को ध्यान में रखना और घर्षण बल व अभिकेन्द्रीय बल के बीच के संबंध को सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 3. किसी विस्फोट में एक बम के तीन टुकड़े हो जाते हैं जिसके दो टुकड़े एक-दूसरे के लम्बवत् गति करते हैं। यदि प्रथम टुकड़े का द्रव्यमान 2 kg व वेग 12 ms⁻¹, दूसरे का द्रव्यमान 1 kg व वेग 8 ms⁻¹ तथा तीसरे टुकड़े का वेग 20 ms⁻¹ हो तो उसके द्रव्यमान की गणना कीजिये।
Answer: यहाँ हमें तीसरे टुकड़े का द्रव्यमान \( m_3 \) ज्ञात करना है।
दिया गया है:
प्रथम टुकड़े का द्रव्यमान \( m_1 = 2 \, \text{kg} \) और वेग \( v_1 = 12 \, \text{m/s} \) है।
दूसरे टुकड़े का द्रव्यमान \( m_2 = 1 \, \text{kg} \) और वेग \( v_2 = 8 \, \text{m/s} \) है।
तीसरे टुकड़े का वेग \( v_3 = 20 \, \text{m/s} \) है।

संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, विस्फोट से पहले कुल संवेग शून्य था, इसलिए विस्फोट के बाद भी कुल संवेग शून्य ही रहना चाहिए। चूंकि पहले दो टुकड़े लम्बवत् गति कर रहे हैं, तो तीसरे टुकड़े का संवेग उन दोनों के परिणामी संवेग के बराबर होगा।
\( P_3 = \sqrt{P_1^2 + P_2^2} \)
\( P_3^2 = P_1^2 + P_2^2 \)
\( (m_3 v_3)^2 = (m_1 v_1)^2 + (m_2 v_2)^2 \)
मान रखने पर:
\( m_3^2 \times (20)^2 = (2)^2 \times (12)^2 + (1)^2 \times (8)^2 \)
\( m_3^2 \times 400 = 4 \times 144 + 1 \times 64 \)
\( m_3^2 \times 400 = 576 + 64 = 640 \)
\( m_3^2 = \frac{640}{400} = \frac{8}{5} = 1.6 \)
\( m_3 = \sqrt{1.6} = 1.265 \, \text{kg} \)
तीसरे टुकड़े का द्रव्यमान लगभग \( 1.265 \, \text{kg} \) होगा।
In simple words: जब एक बम फटता है और उसके टुकड़े अलग-अलग दिशाओं में जाते हैं, तो उनके कुल 'चलने की ताकत' (संवेग) पहले की तरह ही रहती है। चूंकि दो टुकड़े एक-दूसरे से सीधे कोण पर जा रहे हैं, तो तीसरे टुकड़े का वजन ज्ञात करने के लिए हमें उनके संवेगों को पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करके जोड़ना होगा।

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण का नियम ऐसे प्रश्नों में बहुत महत्वपूर्ण है। याद रखें कि संवेग एक सदिश राशि है, इसलिए लम्बवत् गति करने वाले टुकड़ों के संवेगों को जोड़ते समय सदिश योग का प्रयोग करें, न कि केवल साधारण योग का।

 

प्रश्न 4. किसी हल्की घर्षणरहित घिरनी पर चढ़ी डोरी के दो सिरों पर 8 kg व 12 kg द्रव्यमान के दो पिण्डों को बाँधा गया है। पिण्डों को मुक्त छोड़ने पर उनके त्वरण तथा डोरी में तनाव ज्ञात कीजिये।
Answer: हमें दो पिण्डों के त्वरण (acceleration) और डोरी में तनाव (tension) का मान निकालना है।
दिया गया है:
पहला द्रव्यमान \( m_1 = 8 \, \text{kg} \)
दूसरा द्रव्यमान \( m_2 = 12 \, \text{kg} \)
गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g = 10 \, \text{m/s}^2 \) (जैसा कि हल में उपयोग किया गया है)

त्वरण (a) के लिए सूत्र:
\( a = \frac{m_2 - m_1}{m_1 + m_2} g \)
\( a = \frac{12 - 8}{12 + 8} \times 10 \)
\( a = \frac{4}{20} \times 10 \)
\( a = \frac{40}{20} = 2 \, \text{m/s}^2 \)
तो, त्वरण \( a = 2 \, \text{m/s}^2 \).

तनाव (T) के लिए सूत्र:
\( T = \frac{2 m_1 m_2}{m_1 + m_2} g \)
\( T = \frac{2 \times 8 \times 12}{8 + 12} \times 10 \)
\( T = \frac{192}{20} \times 10 \)
\( T = 192 \times \frac{10}{20} = 192 \times \frac{1}{2} = 96 \, \text{N} \)
तो, डोरी में तनाव \( T = 96 \, \text{N} \) है।
In simple words: जब दो अलग-अलग वजन वाली चीजें एक रस्सी से बंधी हों और घिरनी से गुजर रही हों, तो वे एक निश्चित गति से ऊपर-नीचे जाएंगी। इस गति को त्वरण कहते हैं। रस्सी में एक खिंचाव होता है, जिसे तनाव कहते हैं। इन सूत्रों से हम उस गति और खिंचाव को ज्ञात कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में हमेशा \( m_1 \) और \( m_2 \) की पहचान सही से करें, खासकर जब त्वरण का सूत्र लगा रहे हों। गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g \) का मान भी ध्यान से देखें कि क्या दिया गया है या \( 9.8 \, \text{m/s}^2 \) या \( 10 \, \text{m/s}^2 \) लेना है।

 

प्रश्न 5. कोई बल्लेबाज किसी गेंद को 45° के कोण पर विक्षेपित कर देता है। ऐसा करने पर वह गेंद की आरम्भिक चाल 54 kmh⁻¹ में कोई परिवर्तन नहीं करता है तो गेंद के आवेग की गणना कीजिये यदि गेंद का द्रव्यमान 0.15 kg हो।
Answer: हमें गेंद पर लगने वाले आवेग (Impulse) की गणना करनी है।
दिया गया है:
गेंद का द्रव्यमान \( m = 0.15 \, \text{kg} \)
गेंद की चाल \( u = 54 \, \text{km/h} \)
गेंद का विक्षेपण कोण \( \theta = 22.5^\circ \) (जैसा कि हल में उपयोग किया गया है)

पहले चाल को मीटर प्रति सेकंड (m/s) में बदलेंगे:
\( u = 54 \, \text{km/h} = 54 \times \frac{5}{18} \, \text{m/s} = 3 \times 5 = 15 \, \text{m/s} \)

आवेग, संवेग में परिवर्तन के बराबर होता है। जब गेंद बल्ले से टकराती है, तो उसकी चाल में कोई बदलाव नहीं होता, लेकिन उसकी दिशा बदल जाती है। माना कि सामान्य के साथ कोण \( \theta = 22.5^\circ \) है।
आरम्भिक संवेग का घटक (normal direction में): \( mu \cos \theta \)
अंतिम संवेग का घटक (normal direction में): \( -mu \cos \theta \) (क्योंकि दिशा विपरीत हो जाती है)
तो, संवेग में कुल परिवर्तन (आवेग) है:
\( \text{आवेग} = (-mu \cos \theta) - (mu \cos \theta) = -2mu \cos \theta \)
आवेग का परिमाण होगा:
\( \text{आवेग} = 2mu \cos \theta \)
मान रखने पर:
\( \text{आवेग} = 2 \times 0.15 \times 15 \times \cos(22.5^\circ) \)
\( \cos(22.5^\circ) \approx 0.9239 \)
\( \text{आवेग} = 4.5 \times 0.9239 \)
\( \text{आवेग} = 4.15755 \approx 4.16 \, \text{kg m/s} \)
तो, गेंद पर लगने वाले आवेग का परिमाण लगभग \( 4.16 \, \text{kg m/s} \) है।
In simple words: जब एक बल्लेबाज गेंद को मारता है, तो गेंद की गति की दिशा बदल जाती है, भले ही उसकी चाल वही रहे। इस बदलाव के कारण गेंद में 'धक्का' या आवेग उत्पन्न होता है। यह आवेग गेंद के वजन, उसकी चाल और गेंद के दिशा बदलने के कोण पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: आवेग (Impulse) हमेशा संवेग (Momentum) में परिवर्तन के बराबर होता है। ऐसे प्रश्नों में, यदि वेग की दिशा बदल रही हो, तो सदिशों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। वेग को सही इकाइयों (m/s) में बदलना न भूलें।

 

प्रश्न 6. 15 ms⁻¹ की आरम्भिक चाल से गतिशील 20 kg द्रव्यमान के एक पिण्ड पर 50 N का स्थाई मंदन बल आरोपित है तो पिण्ड को विराम अवस्था में आने में कितना समय लगेगा?
Answer: हमें पिण्ड को रुकने में लगने वाला समय ज्ञात करना है।
दिया गया है:
पिण्ड का द्रव्यमान \( m = 20 \, \text{kg} \)
पिण्ड की आरम्भिक चाल \( u = 15 \, \text{m/s} \)
मंदन बल \( F = -50 \, \text{N} \) (यह ऋणात्मक है क्योंकि यह गति को धीमा करता है)
अंतिम चाल \( v = 0 \, \text{m/s} \) (क्योंकि पिण्ड विराम अवस्था में आ जाता है)

पहले हम त्वरण (acceleration) ज्ञात करेंगे:
\( a = \frac{F}{m} = \frac{-50}{20} = -2.5 \, \text{m/s}^2 \)
अब, गति के पहले समीकरण का उपयोग करके समय निकालेंगे:
\( v = u + at \)
\( 0 = 15 + (-2.5)t \)
\( 0 = 15 - 2.5t \)
\( 2.5t = 15 \)
\( t = \frac{15}{2.5} = 6 \, \text{second} \)
तो, पिण्ड को विराम अवस्था में आने में 6 सेकंड लगेंगे।
In simple words: जब एक चलती हुई चीज़ पर उलटी दिशा में बल लगता है, तो वह धीरे-धीरे रुक जाती है। यह सवाल पूछता है कि उसे पूरी तरह से रुकने में कितना समय लगेगा। हमने पहले बल और वजन से उसकी धीमी होने की दर (त्वरण) निकाली, फिर उस दर का उपयोग करके रुकने का समय पता किया।

🎯 Exam Tip: मंदन बल (retarding force) हमेशा ऋणात्मक होता है क्योंकि यह गति के विपरीत दिशा में काम करता है। गति के समीकरणों का सही उपयोग करें और इकाइयों को सुसंगत रखें (जैसे N, kg, m/s, s). यदि अंतिम चाल विराम अवस्था में है, तो \( v = 0 \) लें।

 

प्रश्न 7. 100 kg द्रव्यमान की किसी तोप से 0.020 kg का गोला दागा जाता है। यदि गोले की नालमुखी चाल 80 ms⁻¹ है तो तोप की प्रतिक्षेप चाल क्या होगी?
Answer: हमें तोप की प्रतिक्षेप चाल (recoil velocity) ज्ञात करनी है।
दिया गया है:
तोप का द्रव्यमान \( M = 100 \, \text{kg} \)
गोले का द्रव्यमान \( m = 0.020 \, \text{kg} \)
गोले की चाल \( v = 80 \, \text{m/s} \)

संवेग संरक्षण के नियम से (विस्फोट से पहले और बाद का कुल संवेग समान होता है):
\( MV + mv = 0 \)
जहाँ \( V \) तोप की प्रतिक्षेप चाल है।
\( MV = -mv \)
\( V = -\frac{mv}{M} \)
मान रखने पर:
\( V = -\frac{0.020 \times 80}{100} \)
\( V = -\frac{1.6}{100} \)
\( V = -0.016 \, \text{m/s} \)
ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि तोप गोले की गति की विपरीत दिशा में पीछे हटती है।
तो, तोप की प्रतिक्षेप चाल \( 0.016 \, \text{m/s} \) होगी।
In simple words: जब एक तोप से गोला दागा जाता है, तो गोला आगे जाता है और तोप पीछे हटती है। इसे प्रतिक्षेप कहते हैं। यह संवेग संरक्षण के नियम के कारण होता है। इस सवाल में, गोले के वजन और गति का उपयोग करके तोप के पीछे हटने की गति निकाली गई है।

🎯 Exam Tip: संवेग संरक्षण के नियम को याद रखें कि एक बंद निकाय का कुल संवेग हमेशा स्थिर रहता है। जब कोई वस्तु अलग होती है, तो टुकड़ों का संवेग हमेशा एक दूसरे को संतुलित करता है। विपरीत दिशा को दर्शाने के लिए हमेशा ऋणात्मक चिन्ह का उपयोग करें।

 

प्रश्न 8. यदि 0.1 kg द्रव्यमान के एक कण की गति \( y = 0.3t + \frac{9.8}{2} t^{2} \) से वर्णित है तो उसे कण पर लगने वाले बल की गणना कीजिये।
Answer: हमें कण पर लगने वाले बल (force) की गणना करनी है।
दिया गया है:
कण का द्रव्यमान \( m = 0.1 \, \text{kg} \)
कण की गति का समीकरण \( y = 0.3t + \frac{9.8}{2} t^2 \)

बल ज्ञात करने के लिए हमें त्वरण (acceleration) की आवश्यकता होगी। त्वरण ज्ञात करने के लिए हम गति के समीकरण को समय के सापेक्ष दो बार अवकलित (differentiate) करेंगे।
पहले वेग (velocity) निकालेंगे:
\( v = \frac{dy}{dt} = \frac{d}{dt} \left( 0.3t + \frac{9.8}{2} t^2 \right) \)
\( v = 0.3 + 9.8t \)
अब त्वरण निकालेंगे:
\( a = \frac{dv}{dt} = \frac{d}{dt} (0.3 + 9.8t) \)
\( a = 9.8 \, \text{m/s}^2 \)
न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार बल \( F = ma \) होता है।
\( F = 0.1 \, \text{kg} \times 9.8 \, \text{m/s}^2 \)
\( F = 0.98 \, \text{N} \)
तो, कण पर लगने वाला बल \( 0.98 \, \text{N} \) है।
In simple words: किसी चीज़ पर कितना बल लग रहा है, यह जानने के लिए हमें उसके वजन और उसकी गति में बदलाव की दर (त्वरण) को जानना होता है। इस सवाल में, गति का एक सूत्र दिया गया था, जिससे हमने पहले गति में बदलाव की दर निकाली और फिर बल ज्ञात किया।

🎯 Exam Tip: गति के समीकरणों से बल ज्ञात करने के लिए, वेग (velocity) और त्वरण (acceleration) ज्ञात करने के लिए अवकलन (differentiation) का सही उपयोग करें। फिर, न्यूटन के दूसरे नियम \( F=ma \) का उपयोग करें।

 

प्रश्न 9. किसी डोरी के एक सिरे से बँधा 0.25 kg संहति का कोई पत्थर क्षैतिज तल में 1.5m त्रिज्या के वृत्ताकार पथ पर 40 rev/min की चाल से चक्कर लगाता है। डोरी में तनाव कितना है? यदि डोरी 200 N के अधिकतम तनाव को सहन कर सकती है, तो वह अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए जिससे पत्थर को घुमाया जा सकता है।
Answer: हमें डोरी में तनाव (tension) और पत्थर को सुरक्षित रूप से घुमाने की अधिकतम चाल (maximum speed) ज्ञात करनी है।
दिया गया है:
पत्थर का द्रव्यमान \( m = 0.25 \, \text{kg} \)
वृत्ताकार पथ की त्रिज्या \( r = 1.5 \, \text{m} \)
घूमने की चाल (आवृत्ति) \( f = 40 \, \text{rev/min} \)
डोरी का अधिकतम तनाव \( T_{\text{max}} = 200 \, \text{N} \)

पहले आवृत्ति को \( \text{rev/s} \) में बदलेंगे:
\( f = \frac{40}{60} \, \text{rev/s} = \frac{2}{3} \, \text{rev/s} \)

वृत्ताकार गति में डोरी में तनाव अभिकेन्द्रीय बल (centripetal force) के बराबर होता है:
\( T = m r (2\pi f)^2 \)
\( T = 0.25 \times 1.5 \times \left(2\pi \times \frac{2}{3}\right)^2 \)
\( T = 0.25 \times 1.5 \times \left(\frac{4\pi}{3}\right)^2 \)
\( T = 0.25 \times 1.5 \times \frac{16\pi^2}{9} \)
\( T \approx 0.25 \times 1.5 \times 4 \times 9.87 \times \frac{4}{9} \approx 6.58 \, \text{N} \)
तो, डोरी में तनाव लगभग \( 6.6 \, \text{N} \) है।

अब, अधिकतम चाल \( V_{\text{max}} \) ज्ञात करेंगे जिसे डोरी अधिकतम तनाव \( T_{\text{max}} \) पर सहन कर सकती है:
\( T_{\text{max}} = \frac{m V_{\text{max}}^2}{r} \)
\( V_{\text{max}}^2 = \frac{T_{\text{max}} r}{m} \)
\( V_{\text{max}} = \sqrt{\frac{T_{\text{max}} r}{m}} \)
मान रखने पर:
\( V_{\text{max}} = \sqrt{\frac{200 \times 1.5}{0.25}} \)
\( V_{\text{max}} = \sqrt{\frac{300}{0.25}} = \sqrt{1200} \)
\( V_{\text{max}} \approx 34.64 \, \text{m/s} \)
तो, अधिकतम चाल लगभग \( 35.0 \, \text{m/s} \) है।
In simple words: जब किसी पत्थर को रस्सी से बाँधकर घुमाया जाता है, तो रस्सी में एक खिंचाव आता है। इसे तनाव कहते हैं। यह तनाव पत्थर के वजन, घूमने की गति और रस्सी की लंबाई पर निर्भर करता है। अगर रस्सी एक निश्चित तनाव से ज़्यादा खींच जाए तो वह टूट सकती है। हमने पहले मौजूदा तनाव निकाला और फिर वह सबसे तेज़ गति निकाली जिस पर पत्थर को बिना रस्सी तोड़े घुमाया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: वृत्ताकार गति में अभिकेन्द्रीय बल ही तनाव के रूप में काम करता है। आवृत्ति को हमेशा \( \text{rev/s} \) या \( \text{rad/s} \) में बदलें। \( T = \frac{mv^2}{r} \) या \( T = mr\omega^2 \) सूत्र का सही उपयोग करें और सभी इकाइयों का ध्यान रखें।

 

प्रश्न 10. 5 kg द्रव्यमान के किसी पिण्ड पर 8N व 6N के दो लम्बवत् बल आरोपित हैं। पिण्ड के त्वरण का परिमाण व दिशा ज्ञात कीजिये।
Answer: हमें पिण्ड पर लगने वाले कुल त्वरण (acceleration) का परिमाण (magnitude) और दिशा (direction) ज्ञात करनी है।
दिया गया है:
पिण्ड का द्रव्यमान \( m = 5 \, \text{kg} \)
पहला बल \( F_1 = 8 \, \text{N} \)
दूसरा बल \( F_2 = 6 \, \text{N} \)
चूंकि दोनों बल एक-दूसरे के लम्बवत् (perpendicular) हैं, इसलिए परिणामी बल (resultant force) ज्ञात करने के लिए हम पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करेंगे:
\( F = \sqrt{F_1^2 + F_2^2} \)
\( F = \sqrt{8^2 + 6^2} \)
\( F = \sqrt{64 + 36} \)
\( F = \sqrt{100} \)
\( F = 10 \, \text{N} \)
अब, न्यूटन के द्वितीय नियम का उपयोग करके त्वरण निकालेंगे:
\( a = \frac{F}{m} \)
\( a = \frac{10 \, \text{N}}{5 \, \text{kg}} \)
\( a = 2 \, \text{m/s}^2 \)

बल की दिशा ज्ञात करने के लिए, हम \( F_1 \) के साथ बनने वाले कोण \( \theta \) का उपयोग करेंगे:
\( \tan \theta = \frac{F_2}{F_1} \)
\( \tan \theta = \frac{6}{8} = 0.75 \)
\( \theta = \tan^{-1}(0.75) \)
\( \theta \approx 36.87^\circ \)
तो, बल की दिशा लगभग \( 37^\circ \) है।
इसलिए, पिण्ड के त्वरण का परिमाण \( 2 \, \text{m/s}^2 \) और दिशा \( F_1 \) से लगभग \( 37^\circ \) के कोण पर होगी।
In simple words: जब किसी चीज़ पर अलग-अलग दिशाओं से बल लगते हैं, तो वह एक खास दिशा में और एक खास रफ्तार से चलना शुरू कर देती है। इस सवाल में, दो बल एक-दूसरे के सीधे कोण पर लग रहे थे, तो हमने पाइथागोरस प्रमेय से कुल बल निकाला और फिर उस बल से चीज़ के चलने की रफ्तार (त्वरण) और उसकी दिशा पता की।

🎯 Exam Tip: जब बल सदिश (vector) होते हैं और लम्बवत् दिशाओं में लगते हैं, तो परिणामी बल ज्ञात करने के लिए पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करें। त्वरण की दिशा हमेशा परिणामी बल की दिशा में होती है। कोण ज्ञात करने के लिए त्रिकोणमितीय अनुपातों का प्रयोग करें।

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