RBSE Solutions Class 11 Physics Chapter 3 गतिकी

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Detailed Chapter 3 गतिकी RBSE Solutions for Class 11 Physics

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Class 11 Physics Chapter 3 गतिकी RBSE Solutions PDF

Rbse Class 11 Physics Chapter 3 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर

 

Rbse Class 11 Physics Chapter 3 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. कणों के गतिकीय व्यवहार से संबंधित अध्ययन की भौतिकी की शाखा क्या कहलाती है?
Answer: गतिकी। गतिकी भौतिकी की वह शाखा है जो वस्तुओं की गति का अध्ययन करती है, जिसमें उनके कारणों पर ध्यान नहीं दिया जाता। यह हमें बताती है कि वस्तुएँ कैसे चलती हैं।
In simple words: भौतिकी की वह शाखा जो कणों के चलने के तरीके का अध्ययन करती है, 'गतिकी' कहलाती है।

🎯 Exam Tip: भौतिकी की प्रमुख शाखाओं और उनके अध्ययन क्षेत्रों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर एक-नंबर के प्रश्नों में पूछे जाते हैं।

 

Question 2. एक विमीय, द्विविमीय एवं त्रिविमीय गति में कितने-कितने निर्देशांक होते हैं?
Answer: एक विमीय गति में 1, द्विविमीय गति में 2, और त्रिविमीय गति में 3 निर्देशांक होते हैं। ये निर्देशांक किसी वस्तु की स्थिति को एक स्थान पर पूरी तरह से परिभाषित करने में मदद करते हैं।
In simple words: एक दिशा की गति में 1, दो दिशाओं की गति में 2, और तीन दिशाओं की गति में 3 निर्देशांक होते हैं।

🎯 Exam Tip: यह समझना आवश्यक है कि गति के प्रकार के आधार पर स्थिति को बताने के लिए कितने नंबरों (निर्देशांकों) की आवश्यकता होती है।

 

Question 3. निकाय किसी निश्चित अक्ष के परितः घूर्णन करे तो यह कौनसी गति कहलाती है?
Answer: यदि कोई निकाय किसी निश्चित अक्ष के चारों ओर घूमता है, तो यह घूर्णन गति कहलाती है। पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना इसका एक उत्तम उदाहरण है।
In simple words: जब कोई चीज़ एक ही जगह घूमती है, तो उसे 'घूर्णन गति' कहते हैं।

🎯 Exam Tip: घूर्णन गति और वृत्तीय गति के बीच का अंतर समझें; घूर्णन गति में पूरा निकाय एक अक्ष के चारों ओर घूमता है, जबकि वृत्तीय गति में एक बिंदु एक वृत्त में चलता है।

 

Question 5. चाल का सूत्र लिखिए।
Answer: चाल का सूत्र है:
\( \text{चाल} = \frac{\text{दूरी}}{\text{समय}} \). यह बताता है कि कोई वस्तु एक निश्चित समय में कितनी दूरी तय करती है।
In simple words: चाल का मतलब है कि किसी चीज़ ने कितनी दूरी कितने समय में तय की।

🎯 Exam Tip: सूत्र को याद रखें और इसे सही ढंग से लिखें, साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि आप 'दूरी' और 'विस्थापन' के बीच का अंतर समझते हैं।

 

Question 6. यदि एक व्यक्ति 4 मीटर पूर्व फिर 3 मीटर दक्षिण तथा पुनः वहाँ से 4 मीटर पश्चिम चले तो उसका विस्थापन कितना होगा?
Answer: व्यक्ति का कुल विस्थापन 3 मीटर दक्षिण में होगा। क्योंकि 4 मीटर पूर्व चलने के बाद, 4 मीटर पश्चिम चलने से प्रारंभिक पूर्व की दिशा में तय की गई दूरी रद्द हो जाती है, और केवल दक्षिण दिशा की गति शेष रहती है।
In simple words: व्यक्ति पहले 4 मीटर पूरब, फिर 3 मीटर दक्षिण, और फिर 4 मीटर पश्चिम चलता है। उसका कुल विस्थापन सिर्फ 3 मीटर दक्षिण दिशा में होगा।

🎯 Exam Tip: विस्थापन एक सदिश राशि है, इसलिए दिशा का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच की सीधी दूरी ही विस्थापन होती है।

 

Question 7. ऋणात्मक त्वरण को क्या कहते हैं?
Answer: ऋणात्मक त्वरण को मन्दन कहते हैं। मन्दन तब होता है जब किसी वस्तु का वेग समय के साथ घटता जाता है।
In simple words: जब कोई चीज़ धीरे हो रही होती है, तो उसके त्वरण को 'मन्दन' कहते हैं।

🎯 Exam Tip: 'त्वरण' (गति बढ़ना) और 'मन्दन' (गति घटना) के बीच का अंतर स्पष्ट रखें। ये दोनों ही त्वरण के प्रकार हैं, बस दिशा अलग होती है।

 

Question 8. एकांक समय में तय विस्थापन को क्या कहते हैं?
Answer: एकांक समय में तय किए गए विस्थापन को वेग कहते हैं। वेग एक सदिश राशि है, जिसका मतलब है कि इसमें गति की दिशा भी शामिल होती है।
In simple words: एक सेकंड में जितनी दूरी तय की जाती है, उसे 'वेग' कहते हैं।

🎯 Exam Tip: वेग और चाल में अंतर याद रखें: वेग में दिशा शामिल होती है, जबकि चाल में केवल गति का परिमाण होता है।

 

Question 9. विस्थापन क्या बताता है?
Answer: विस्थापन बताता है कि किसी वस्तु की स्थिति में कुल कितना बदलाव हुआ है और किस दिशा में हुआ है। यह प्रारंभिक और अंतिम बिंदु के बीच की सबसे छोटी सीधी दूरी है।
In simple words: विस्थापन यह बताता है कि कोई वस्तु कहाँ से शुरू हुई और कहाँ पहुँची, और यह सीधी दूरी कितनी है।

🎯 Exam Tip: विस्थापन को हमेशा सदिश राशि के रूप में समझें, जिसमें परिमाण (कितना) और दिशा (किस ओर) दोनों होते हैं।

 

Question 11. वेग-समय वक्र का क्षेत्रफल क्या दर्शाता है?
Answer: वेग-समय वक्र का क्षेत्रफल किसी वस्तु द्वारा तय की गई दूरी या विस्थापन को दर्शाता है। यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो ग्राफ से गति को समझने में मदद करती है।
In simple words: वेग-समय ग्राफ के नीचे का एरिया बताता है कि कोई चीज़ कितनी दूर चली।

🎯 Exam Tip: वेग-समय ग्राफ का ढलान त्वरण देता है, जबकि क्षेत्रफल विस्थापन देता है। इन दोनों अवधारणाओं को स्पष्ट रखें।

 

Question 12. यदि कोई कण एक नियत वेग से गतिशील है तो उसका त्वरण कितना होगा?
Answer: यदि कोई कण एक नियत वेग से गतिशील है, तो उसका त्वरण शून्य होगा। त्वरण वेग में परिवर्तन की दर है, और नियत वेग का मतलब है कि वेग में कोई बदलाव नहीं हो रहा है।
In simple words: अगर कोई चीज़ हमेशा एक ही स्पीड से चल रही है, तो उसका एक्सीलेरेशन (त्वरण) ज़ीरो होगा।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि त्वरण केवल वेग के परिमाण में ही नहीं, बल्कि उसकी दिशा में बदलाव होने पर भी होता है। नियत वेग का मतलब नियत परिमाण और नियत दिशा दोनों है।

 

Question 13. किसी वस्तु को अधिकतम दूरी तक प्रक्षेपित करने हेतु उसे कितने डिग्री कोण से प्रक्षेपित किया जाना चाहिए?
Answer: किसी वस्तु को अधिकतम दूरी तक प्रक्षेपित करने के लिए उसे 45° के कोण से प्रक्षेपित किया जाना चाहिए। यह कोण क्षैतिज परास को अधिकतम करता है।
In simple words: किसी चीज़ को सबसे दूर फेंकने के लिए, उसे ज़मीन से 45 डिग्री के कोण पर फेंकना चाहिए।

🎯 Exam Tip: प्रक्षेप्य गति में, अधिकतम परास के लिए 45° का कोण, अधिकतम ऊँचाई के लिए 90° का कोण, और न्यूनतम परास के लिए 0° या 90° का कोण होता है।

Rbse Class 11 Physics Chapter 3 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. गति की अवधारण समझाइये।
Answer: दुनिया की हर चीज़ सीधी या छिपी हुई तरीके से चलती रहती है। जैसे हम चलते हैं, दौड़ते हैं, साइकिल या ट्रेन चलती है, बस चलती है - ये सब सीधी गति के उदाहरण हैं। इतना ही नहीं, जब हम सोते हैं, तब भी हमारे फेफड़ों में हवा अंदर-बाहर होती है और खून हमारी नसों में चलता रहता है। ये छिपी हुई गति के उदाहरण हैं। गति का मतलब है समय के साथ किसी वस्तु की जगह का बदलना। लेकिन गति एक सापेक्ष चीज है; एक वस्तु एक देखने वाले के लिए रुकी हुई हो सकती है, जबकि दूसरे देखने वाले के लिए वही वस्तु चलती हुई लग सकती है। यह दिखाता है कि गति हमारे चारों ओर हर पल मौजूद है।
In simple words: गति का मतलब है कि समय के साथ किसी वस्तु की जगह बदलती है। हम सीधे या छिपे हुए तरीके से हमेशा चलते रहते हैं, जैसे चलना या सांस लेना। गति को हम जिसके हिसाब से देखते हैं, उसके अनुसार देखा जाता है।

🎯 Exam Tip: गति को परिभाषित करते समय 'सापेक्ष पद' (relative term) के महत्व पर जोर दें, क्योंकि गति हमेशा किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष होती है।

 

Question 2. निर्देश तंत्र को परिभाषित करते हुए इसकी आवश्यकता एवं महत्त्व पर संक्षिप्त विवरण दीजिये।
Answer: निर्देश तंत्र वह ढाँचा है जिसके सापेक्ष किसी कण की स्थिति, वेग और त्वरण का अध्ययन किया जाता है। इसकी ज़रूरत इसलिए होती है क्योंकि किसी भी पिंड की गति का अध्ययन करने के लिए एक तय संदर्भ बिंदु और दिशाओं की ज़रूरत होती है। आमतौर पर, इसमें तीन परस्पर लंबवत अक्ष (X, Y, Z) होते हैं, जिनके सापेक्ष किसी पिंड P की दूरियों (x, y, z) को मापा जा सकता है। ये तीन संख्याएँ अंतरिक्ष में पिंड की जगह बताती हैं। इस तंत्र को कार्तीय निर्देश तंत्र कहते हैं। इस तंत्र का मूल बिंदु (origin) वह जगह होती है जहाँ से दूरियाँ मापी जाती हैं। निर्देश तंत्र की तीनों अक्षें तीन स्वतंत्र दिशाओं को बताती हैं, क्योंकि किसी भी एक दिशा में परिभाषित गतिमान वस्तु के वेग के साथ गति का पथ परवलयाकार नजर आएगा। यह उदाहरण दिखाता है कि गति का पथ निर्देश तंत्र पर निर्भर करता है, जिससे निर्देश तंत्र की आवश्यकता और महत्व साफ होता है। निर्देश तंत्र के बिना, गति का वर्णन करना मुश्किल और अधूरा होगा।
In simple words: निर्देश तंत्र वह जगह होती है जहाँ से हम किसी चीज़ की गति को देखते हैं और मापते हैं। इसकी ज़रूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि गति हमेशा किसी चीज़ के हिसाब से देखी जाती है। यह गति को समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: निर्देश तंत्र की परिभाषा में 'सापेक्ष' (relative) शब्द का उपयोग महत्वपूर्ण है। कार्तीय निर्देश तंत्र के घटकों (अक्षों, मूल बिंदु, निर्देशांकों) को समझाना भी आवश्यक है।

 

Question 3. कार्तीय निर्देश तंत्र का चित्र बनाकर विवरण दीजिये।
Answer: किसी पिंड की गति को समझने के लिए एक निर्देश तंत्र की आवश्यकता होती है, जिससे P (x, y, z) के सापेक्ष गति से संबंधित भौतिक राशियों का वर्णन किया जा सके। इसके लिए सामान्यतः तीन परस्पर लंबवत् अक्षों (X, Y, Z) को चुना जाता है, जिनके सापेक्ष किसी पिंड P की दूरियों (x, y, z) को मापा जा सकता है। ये तीन संख्याएँ पिंड की आकाश में स्थिति को तय करती हैं। इस निर्देश तंत्र को कार्तीय निर्देश तंत्र कहते हैं। इस निर्देश तंत्र का मूल बिंदु (origin) वह स्थान है जहाँ से सभी दूरियाँ मापी जाती हैं। इस तंत्र की तीनों अक्षें, तीन स्वतंत्र दिशाओं को दिखाती हैं क्योंकि किसी भी एक दिशा में परिभाषित किसी पिंड की गति का अध्ययन इन्हीं के सापेक्ष किया जाता है। यदि हम क्षैतिज तल में \( X \) और \( Y \) अक्ष और लंबवत तल में \( Z \) अक्ष को लेते हैं, तो किसी भी बिंदु की स्थिति को \( (x, y, z) \) द्वारा बताया जा सकता है। इस तरह, कार्तीय निर्देश तंत्र गति के विश्लेषण के लिए एक स्पष्ट और व्यवस्थित आधार प्रदान करता है।
In simple words: कार्तीय निर्देश तंत्र वह तरीका है जिससे हम किसी चीज़ की जगह को तीन सीधी रेखाओं (X, Y, Z अक्षों) का इस्तेमाल करके बताते हैं। ये रेखाएँ एक-दूसरे से सीधी होती हैं और जहाँ मिलती हैं, उसे मूल बिंदु कहते हैं।

🎯 Exam Tip: कार्तीय निर्देश तंत्र के तीन अक्षों (X, Y, Z) और मूल बिंदु को स्पष्ट रूप से समझाएँ। यह भी बताएँ कि ये अक्षें कैसे परस्पर लंबवत होती हैं।

 

Question 4. निर्देश तंत्र के आधार पर गति को कितने प्रकार से वर्गीकृत किया गया है? नाम लिखिए।
Answer: निर्देश तंत्र के आधार पर गति को मुख्य रूप से तीन प्रकार से बांटा गया है:
(i) एकविमीय गति: इसमें वस्तु केवल एक सीधी रेखा में चलती है, जैसे रेलगाड़ी का रेल पथ पर चलना। वस्तु की स्थिति बताने के लिए केवल एक निर्देशांक की ज़रूरत होती है।
(ii) द्विविमीय गति: इसमें वस्तु एक तल (प्लेन) में चलती है, जैसे चींटी की गति या एक मेज पर गेंद की गति। इसकी स्थिति बताने के लिए दो निर्देशांकों की ज़रूरत होती है।
(iii) त्रिविमीय गति: इसमें वस्तु अंतरिक्ष में चलती है, जैसे गैस के अणुओं की यादृच्छिक गति या हवा में उड़ते हुए पक्षी की गति। इसकी स्थिति बताने के लिए तीन निर्देशांकों की ज़रूरत होती है।
यह वर्गीकरण गति के अध्ययन को सरल और समझने योग्य बनाता है।
In simple words: गति को तीन तरह से बाँटा जाता है: एक लाइन में चलना (एकविमीय), एक समतल जगह में चलना (द्विविमीय), और खुले अंतरिक्ष में चलना (त्रिविमीय)।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार की गति के लिए एक-एक उदाहरण ज़रूर दें, जो अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझा सके।

 

Question 5. दूरी एवं विस्थापन में क्या अन्तर है? लिखिए।
Answer:

दूरीविस्थापन
यह एक अदिश राशि है।जबकि विस्थापन सदिश राशि है।
दूरी का मान विस्थापन के बराबर या बड़ा होता है।जबकि विस्थापन का मान दूरी से कम या बराबर हो सकता है।
एक गतिशील वस्तु के लिए समय में वृद्धि के साथ-साथ दूरी सदैव बढ़ती है।जबकि विस्थापन का मान ऐसी स्थिति में बढ़ या घट सकता है।
जब कोई वस्तु h ऊँचाई तक जाकर पुनः पृथ्वी पर वापस आती है तब उसकी तय की गई दूरी 2h होगी।लेकिन यहाँ पर वस्तु का विस्थापन शून्य होगा।
दूरी और विस्थापन दोनों ही गति के महत्वपूर्ण पहलू हैं, लेकिन उनके बीच के अंतर को समझना भौतिकी के लिए आवश्यक है।
In simple words: दूरी बताती है कि कोई चीज़ कुल कितना चली, जबकि विस्थापन बताता है कि वह अपनी शुरू की जगह से कितनी दूर और किस दिशा में है।

🎯 Exam Tip: सारणीबद्ध रूप में अंतरों को प्रस्तुत करना स्पष्टता बढ़ाता है। प्रत्येक अंतर के लिए एक छोटा उदाहरण देने से उत्तर को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

भाँति एक सरल रेखा के अनुदिश गति करता है तो उसे कण की ऋजुरेखीय गति (Rectilinear Motion) कहते हैं। उदाहरणार्थ, सीधी सड़क पर चलती हुई कार की गति, निश्चित ऊँचाई से ऊर्ध्वतः नीचे की ओर गिरती हुई वस्तु की गति, उड़ते हुए हैलीकॉप्टर से नीचे गिराई गई कोई वस्तु।

 

Question 7. एक व्यक्ति 4 मीटर पूर्व में चलकर 5 मीटर उत्तर की ओर जाता है तथा वहां से पुनः दायीं ओर मुड़कर 8 मीटर सीधा जाता है। व्यक्ति द्वारा चली गई दूरी तथा उसका विस्थापन ज्ञात कीजिए।
Answer: N S W E O 4m A 5m B 8m C Displacementव्यक्ति द्वारा चली गई कुल दूरी \( = 4 + 5 + 8 = 17 \) मीटर। कुल दूरी उन सभी रास्तों की लंबाई का योग होती है जिन पर व्यक्ति चला है। विस्थापन की गणना के लिए, हमें प्रारंभिक और अंतिम बिंदुओं के बीच की सीधी दूरी देखनी होगी। व्यक्ति 4 मीटर पूर्व जाता है, फिर 8 मीटर पश्चिम जाता है। इसका मतलब है कि पूर्व-पश्चिम दिशा में शुद्ध विस्थापन \( 4 - 8 = -4 \) मीटर (यानी 4 मीटर पश्चिम)। व्यक्ति 5 मीटर उत्तर जाता है, और उत्तर-दक्षिण दिशा में कोई और गति नहीं होती। तो, शुद्ध विस्थापन है \( 4 \) मीटर पश्चिम और \( 5 \) मीटर उत्तर। एक समकोण त्रिभुज बनाते हुए, विस्थापन का परिमाण (मैग्नीट्यूड) होगा: \( (\text{विस्थापन})^2 = (4)^2 + (5)^2 \)
\( \implies (\text{विस्थापन})^2 = 16 + 25 \)
\( \implies (\text{विस्थापन})^2 = 41 \)
\( \implies \text{विस्थापन} = \sqrt{41} \approx 6.4 \) मीटर। यह परिणाम दर्शाता है कि विस्थापन दूरी से कम हो सकता है। *(Note: The provided answer in the source for Q7 on page 6 is "उत्तर: 3 मीटर दक्षिण में" and the diagram suggests a different Q6 where the final destination is 3m South. However, the current Q7 question (4m E, 5m N, 8m W) leads to a displacement of sqrt(41) m. I will follow the current question's details. The diagram provided in the source is for a different problem, possibly an earlier version of Q6 on page 2, where 4m East, 3m South, 4m West yields 3m South displacement. The problem text given here for Q7 is different and implies 4m east, 5m north, then 8m west. I'll adhere to the actual Q7 text and calculate accordingly, thus the diagram above represents the description of the problem, not the diagram from the source, which is for an earlier, different Q6.)*
In simple words: व्यक्ति 4 मीटर पूरब, फिर 5 मीटर उत्तर और फिर 8 मीटर पश्चिम चलता है। कुल दूरी 17 मीटर होगी। उसका कुल विस्थापन, जो शुरुआती और आखिरी जगह के बीच की सीधी दूरी है, लगभग 6.4 मीटर होगा।

🎯 Exam Tip: दूरी एक अदिश राशि है (केवल परिमाण), जबकि विस्थापन एक सदिश राशि है (परिमाण और दिशा दोनों)। इन दोनों की गणना करते समय अंतर को ध्यान में रखें।

 

Question 8. औसत व तात्क्षणिक वेग में अन्तर उदाहरण सहित समझाइये।
Answer: औसत वेग और तात्क्षणिक वेग में अंतर को इन परिभाषाओं से समझा जा सकता है:
**औसत वेग (Average Velocity):** किसी वस्तु के दिए गए समय अंतराल में कुल विस्थापन और उस विस्थापन में लगे कुल समय के अनुपात को औसत वेग कहते हैं। यदि समय \( t \) और \( t + \Delta t \) पर वस्तु की स्थितियाँ क्रमशः सदिश \( \overrightarrow{\mathbf{x}} \) तथा \( \overrightarrow{\mathrm{x}}+\Delta \overrightarrow{\mathrm{x}} \) हों, तो औसत वेग इस प्रकार होगा:
\( \overrightarrow{\mathrm{v}}_{\mathrm{av}}=\frac{\Delta \overrightarrow{\mathrm{x}}}{\Delta \mathrm{t}} \). औसत वेग एक सदिश राशि है जिसकी दिशा वस्तु की गति की दिशा का ज्ञान कराती है। यह हमें पूरे रास्ते में औसत गति बताता है।

**तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Velocity):** किसी विशिष्ट क्षण पर वस्तु का वेग तात्क्षणिक वेग कहलाता है। दिए गए समय पर, समय के साथ विस्थापन में परिवर्तन की दर को तात्क्षणिक वेग कहते हैं। सामान्य भाषा में वेग का मतलब तात्क्षणिक वेग से ही होता है। यदि \( t \) और \( t + \Delta t \) समय पर वस्तु की स्थितियाँ क्रमशः \( \overrightarrow{\mathrm{x}} \) तथा \( \overrightarrow{\mathrm{x}}+\Delta \overrightarrow{\mathrm{x}} \) हों, तो सीमा \( \Delta t \rightarrow 0 \) में विशिष्ट क्षण पर तात्क्षणिक वेग होगा:
\( \overrightarrow{\mathrm{v}}=\lim _{\Delta t \rightarrow 0} \frac{\Delta \overrightarrow{\mathrm{x}}}{\Delta \mathrm{t}}=\frac{\mathrm{d} \overrightarrow{\mathrm{x}}}{\mathrm{dt}} \). यह हमें बताता है कि वस्तु उस खास पल में कितनी तेज़ी से और किस दिशा में चल रही थी।
In simple words: औसत वेग पूरे समय की गति को बताता है, जबकि तात्क्षणिक वेग किसी एक खास पल की गति को बताता है। औसत वेग एक लंबी यात्रा का औसत होता है, जबकि तात्क्षणिक वेग एक कैमरे के फ्लैश की तरह है जो एक पल में गति दिखाता है।

🎯 Exam Tip: औसत वेग और तात्क्षणिक वेग दोनों के लिए सूत्र और उनकी सदिश प्रकृति को स्पष्ट रूप से लिखें। उदाहरण के लिए, गाड़ी के स्पीडोमीटर पर दिखने वाली गति तात्क्षणिक वेग है।

 

Question 9. एक धावक 1000 मीटर के एक वृत्ताकार पथ का चक्कर 2 मिनट 5 सेकण्ड में लगाता है। उसकी माध्य चाल क्या है? धावक का माध्य वेग क्या है?
Answer:
पहले कुल समय को सेकंड में बदलेंगे:
कुल समय \( = 2 \) मिनट \( 5 \) सेकंड \( = (2 \times 60) + 5 = 120 + 5 = 125 \) सेकंड।

माध्य चाल की गणना:
वृत्ताकार पथ की कुल दूरी \( = 1000 \) मीटर।
औसत चाल \( = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} = \frac{1000}{125} = 8 \) मी./से.।
इस प्रकार, धावक की औसत चाल 8 मीटर प्रति सेकंड है।

माध्य वेग की गणना:
चूँकि धावक एक वृत्ताकार पथ पर एक पूरा चक्कर लगाता है और अपनी प्रारंभिक स्थिति पर वापस आ जाता है, तो उसका कुल विस्थापन शून्य होगा।
माध्य वेग \( = \frac{\text{कुल विस्थापन}}{\text{कुल समय}} = \frac{0}{125} = 0 \) मी./से.।
इसलिए, धावक का माध्य वेग शून्य है।
In simple words: धावक एक गोल ट्रैक पर 1000 मीटर 2 मिनट 5 सेकंड में पूरा करता है। उसकी औसत स्पीड 8 मीटर प्रति सेकंड होगी। लेकिन क्योंकि वह वापस अपनी शुरू की जगह पर आ गया, तो उसका औसत वेग शून्य होगा।

🎯 Exam Tip: वृत्ताकार गति में माध्य चाल और माध्य वेग की गणना करते समय विस्थापन की अवधारणा को ध्यान में रखें। पूर्ण चक्कर के लिए विस्थापन हमेशा शून्य होता है।

 

Question 10. एक किमी. लम्बाई की ट्रेन दो किमी. प्रति मिनट के वेग से जा रही है। इसे एक किमी लम्बाई की सुरंग से पूर्णतः निकलने में कितना समय लगेगा?
Answer:
ट्रेन की लम्बाई \( = 1 \) किमी।
सुरंग की लम्बाई \( = 1 \) किमी।
ट्रेन को सुरंग से पूरी तरह बाहर निकलने के लिए कुल तय की जाने वाली दूरी \( = \text{ट्रेन की लम्बाई} + \text{सुरंग की लम्बाई} = 1 + 1 = 2 \) किमी। यह कुल दूरी है जिसे ट्रेन को अपनी पूरी लंबाई के साथ सुरंग पार करने के लिए चलना होगा।

ट्रेन का वेग \( = 2 \) किमी. प्रति मिनट।
समय \( = \frac{\text{दूरी}}{\text{वेग}} = \frac{2 \text{ किमी.}}{2 \text{ किमी./मिनट}} = 1 \) मिनट।
इसलिए, ट्रेन को सुरंग से पूरी तरह बाहर निकलने में 1 मिनट का समय लगेगा।
In simple words: 1 किमी लंबी ट्रेन को 1 किमी लंबी सुरंग से निकलने के लिए कुल 2 किमी चलना होगा। अगर ट्रेन 2 किमी प्रति मिनट की स्पीड से चल रही है, तो उसे सुरंग से निकलने में 1 मिनट लगेगा।

🎯 Exam Tip: जब कोई ट्रेन किसी सुरंग या पुल को पार करती है, तो कुल तय की गई दूरी ट्रेन की लंबाई और सुरंग/पुल की लंबाई का योग होती है।

 

Question 12. एक गेंद को u वेग से ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंकने पर यह h ऊँचाई तक जाती है। यदि वेग को दुगुना (2u) कर दें तो ऊँचाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer:
हम जानते हैं कि प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई का सूत्र है:
\( h = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g} \).
ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंकने के लिए, \( \theta = 90^\circ \), इसलिए \( \sin 90^\circ = 1 \).
तो, \( h = \frac{u^2}{2g} \)

यदि वेग को दुगुना (2u) कर दें, तो नई ऊँचाई \( h' \) होगी:
\( h' = \frac{(2u)^2}{2g} \)
\( \implies h' = \frac{4u^2}{2g} \)
\( \implies h' = 4 \left( \frac{u^2}{2g} \right) \)
\( \implies h' = 4h \)
अतः यह गेंद पहले वाली ऊँचाई की चारगुनी ऊँची जाएगी। वेग को दुगुना करने से अधिकतम ऊँचाई चार गुना बढ़ जाती है।
In simple words: जब एक गेंद को \( u \) स्पीड से ऊपर फेंका जाता है, तो वह \( h \) ऊँचाई तक जाती है। अगर हम स्पीड को \( 2u \) कर दें, तो वह \( 4h \) ऊँचाई तक जाएगी, यानी चार गुना ऊँचा।

🎯 Exam Tip: गति के सूत्रों में राशियों के वर्ग पर आधारित निर्भरता पर ध्यान दें। वेग को दुगुना करने से अधिकतम ऊँचाई चार गुना हो जाती है, क्योंकि ऊँचाई वेग के वर्ग के समानुपाती होती है।

 

Question 13. प्रक्षेप्य गति किसे कहते हैं?
Answer: जब किसी वस्तु या कण को प्रारंभिक वेग देकर पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के प्रभाव में गति करने देते हैं, तब इस वस्तु को प्रक्षेप्य (Projectile) और इसकी गति को प्रक्षेप्य गति कहते हैं। इस प्रकार की गति में वस्तु हवा में एक वक्र पथ पर चलती है।
प्रक्षेप्य गति के निम्न उदाहरण हैं:
1. एक फुटबॉलर द्वारा किक मारी गई फुटबॉल की गति।
2. धनुष से छोड़ा गया तीर।
3. एक तोप से निकला गोला।
4. हवाई जहाज से गिराया गया बम।
ये सभी उदाहरण दिखाते हैं कि प्रक्षेप्य गति गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में स्वतंत्र रूप से चलती है।
In simple words: जब किसी चीज़ को हवा में फेंका जाता है और वह गुरुत्वाकर्षण के कारण एक घुमावदार रास्ते पर चलती है, तो उसे 'प्रक्षेप्य गति' कहते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रक्षेप्य गति की परिभाषा में 'गुरुत्वीय बल के प्रभाव में' और 'प्रारंभिक वेग' इन दो मुख्य बिंदुओं को शामिल करना न भूलें।

प्रक्षेप गति में सरलता की दृष्टि से हवा का विरोध, पृथ्वी की घूर्णन गति और वक्रता का प्रभाव नगण्य मानते हैं।

 

Rbse Class 11 Physics Chapter 3 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. एक समान त्वरित गति हेतु गणितीय विधि से गति के तीनों समीकरण व्युत्पन्न कीजिए।
Answer: यदि किसी गिरती हुई वस्तु के लिए समान समय अंतराल में वेग समान मात्रा में बदलता है, तो इस प्रकार की गति को एकसमान त्वरित गति कहते हैं। इस गति के अध्ययन के लिए गति से संबंधित विभिन्न भौतिक राशियों जैसे वेग \( (v) \), समय \( (t) \), विस्थापन \( (x) \) आदि में संबंध दर्शाने वाले समीकरणों को गति के समीकरण कहते हैं। हम इन्हें निम्न विधियों से प्राप्त कर सकते हैं:

**गणितीय विधि (Analytical Method):**
माना कोई वस्तु एक समान त्वरण \( (a) \) से एक सरल रेखा में गतिमान है। इसका प्रारंभिक वेग \( u \) है और \( t \) समय बाद वेग \( v \) हो जाता है। तो त्वरण की परिभाषा से:
त्वरण \( = \frac{\text{वेग में परिवर्तन}}{\text{परिवर्तन में लगा समय}} \)
\( \implies a = \frac{v-u}{t} \)
\( \implies at = v-u \)
\( \implies v = u + at \quad \ldots(1) \)
यह गति का प्रथम समीकरण है, जो अंतिम वेग को प्रारंभिक वेग, त्वरण और समय से संबंधित करता है।

इस गति के दौरान यदि वस्तु \( t \) समय में \( x \) दूरी (विस्थापन) तय करती है, तो
विस्थापन \( = \) औसत वेग \( \times \) समय
\( \implies x = \left( \frac{v+u}{2} \right) \times t \)
यह हमें औसत वेग का उपयोग करके विस्थापन की गणना करने में मदद करता है।

गति के प्रथम समीकरण \( v = u + at \) से \( v \) का मान उपरोक्त समीकरण में रखने पर:
\( x = \left( \frac{(u+at)+u}{2} \right) \times t \)
\( \implies x = \left( \frac{2u+at}{2} \right) \times t \)
\( \implies x = \left( u + \frac{1}{2}at \right) \times t \)
\( \implies x = ut + \frac{1}{2}at^2 \quad \ldots(2) \)
यह गति का द्वितीय समीकरण है, जो विस्थापन को प्रारंभिक वेग, त्वरण और समय से संबंधित करता है।

पुनः गति के प्रथम समीकरण से \( v = u + at \). दोनों तरफ वर्ग करने पर:
\( v^2 = (u + at)^2 \)
\( \implies v^2 = u^2 + 2uat + (at)^2 \)
\( \implies v^2 = u^2 + 2uat + a^2t^2 \)
\( \implies v^2 = u^2 + 2a \left( ut + \frac{1}{2}at^2 \right) \)
समीकरण (2) से \( x = ut + \frac{1}{2}at^2 \) का मान रखने पर:
\( \implies v^2 = u^2 + 2ax \quad \ldots(3) \)
यह गति का तृतीय समीकरण है, जो अंतिम वेग, प्रारंभिक वेग, त्वरण और विस्थापन को संबंधित करता है। ये तीनों समीकरण गति के अध्ययन के लिए मूलभूत हैं।
In simple words: हम गति के तीन मुख्य सूत्र निकालते हैं। पहला सूत्र बताता है कि अंतिम स्पीड, शुरू की स्पीड और कितनी तेज़ी से स्पीड बढ़ी, उनसे कैसे जुड़ी है। दूसरा सूत्र बताता है कि कितनी दूरी तय की गई, शुरू की स्पीड और समय के हिसाब से। तीसरा सूत्र बताता है कि अंतिम स्पीड, शुरू की स्पीड और दूरी कैसे एक-दूसरे से जुड़ी हैं।

🎯 Exam Tip: तीनों समीकरणों को व्युत्पन्न करते समय प्रत्येक चरण को स्पष्ट रूप से लिखें और यह सुनिश्चित करें कि आप प्रत्येक समीकरण के भौतिक अर्थ को समझते हैं।

 

Question 2. निम्न की परिभाषा दीजिए (i) विस्थापन (ii) वेग (iii) त्वरण (iv) चाल (v) औसत वेग (vi) तात्क्षणिक वेग (vii) औसत त्वरण (viii) तात्क्षणिक त्वरण।
Answer:
**(i) विस्थापन (Displacement):** किसी वस्तु द्वारा प्रारंभिक स्थिति से अंतिम स्थिति में पहुँचने तक की न्यूनतम (सरल रेखीय) दूरी को विस्थापन कहते हैं। विस्थापन वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थिति पर निर्भर करता है, न कि तय किए गए पथ की लंबाई पर। इसका M.K.S. पद्धति में मात्रक मीटर होता है और यह एक सदिश राशि है। तुलनात्मक रूप से, दूरी और विस्थापन दोनों का M.K.S. पद्धति में मात्रक मीटर होता है, लेकिन दूरी अदिश राशि है जबकि विस्थापन सदिश राशि है। विस्थापन की दिशा प्रारंभिक स्थिति से अंतिम स्थिति की ओर होती है। मूल बिंदु के सापेक्ष, अंतिम स्थिति दायीं ओर होने पर विस्थापन सदिश धनात्मक और बायीं ओर होने पर ऋणात्मक लिया जाता है।
यह हमें बताता है कि वस्तु कितनी दूर और किस दिशा में अपनी जगह से हटी।
उदाहरण के लिए, एक वृत्ताकार पथ पर यदि कोई वस्तु स्थिति A से गतिशील होकर पुनः A पर आ जाए, तो
दूरी \( = 2\pi r \)
विस्थापन \( = \) शून्य
यदि स्थिति A से B तक जाने पर,
दूरी \( = \pi r \)
विस्थापन \( = 2r \)

**(ii) वेग (Velocity):** किसी वस्तु द्वारा एकांक समय में तय किए गए विस्थापन को वेग कहते हैं। यह एक सदिश राशि है, जिसका M.K.S. मात्रक मी./से. होता है। वेग हमें बताता है कि वस्तु कितनी तेज़ी से और किस दिशा में चल रही है।

**(iii) त्वरण (Acceleration):** किसी गतिमान वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं। यह भी एक सदिश राशि है और इसे \( (a) \) से दर्शाते हैं। इसका M.K.S. मात्रक मी./से.² और C.G.S. पद्धति में सेमी./से.² होता है। इसका विमीय सूत्र \( [M^0L^1T^{-2}] \) होता है। त्वरण हमें बताता है कि वस्तु का वेग कितनी तेज़ी से बदल रहा है।
सूत्र के रूप में - त्वरण \( = \frac{\text{वेग में परिवर्तन}}{\text{परिवर्तन में लगा समय}} \)
यदि वेग बढ़ता है, तो गति त्वरित गति कहलाती है; यदि वेग घटता है, तो गति मन्दित गति कहलाती है।

**(iv) चाल (Speed):** एकांक समय में वस्तु द्वारा तय की गई दूरी को वस्तु की चाल कहते हैं। चाल एक अदिश राशि है। इसका M.K.S. मात्रक मी./से. और C.G.S. पद्धति में सेमी./से. होता है। चाल हमें बताती है कि वस्तु कितनी तेज़ी से चल रही है, लेकिन इसमें दिशा शामिल नहीं होती।

**(v) औसत वेग (Average Velocity):** किसी वस्तु के दिए गए समय अंतराल में कुल विस्थापन और उस विस्थापन में लगे कुल समय के अनुपात को औसत वेग कहते हैं। यदि \( t \) और \( t + \Delta t \) समय पर वस्तु की स्थितियाँ क्रमशः सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{x}} \) तथा \( \overrightarrow{\mathrm{x}}+\Delta \overrightarrow{\mathrm{x}} \) हों, तो
औसत वेग \( \overrightarrow{\mathrm{v}}_{\mathrm{av}}=\frac{\Delta \overrightarrow{\mathrm{x}}}{\Delta \mathrm{t}} \).
औसत वेग एक सदिश राशि है जिसकी दिशा वस्तु की गति की दिशा का बोध कराती है। यह पूरे समय अंतराल के लिए औसत बदलाव दिखाता है।

**(vi) तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Velocity):** किसी विशिष्ट क्षण पर वस्तु का वेग तात्क्षणिक वेग कहलाता है। दिए गए समय पर, समय के साथ विस्थापन में परिवर्तन की दर को तात्क्षणिक वेग कहते हैं। सामान्य भाषा में वेग का तात्पर्य तात्क्षणिक वेग से ही होता है। यदि \( t \) और \( t + \Delta t \) समय पर वस्तु की स्थितियाँ क्रमशः \( \overrightarrow{\mathrm{x}} \) तथा \( \overrightarrow{\mathrm{x}}+\Delta \overrightarrow{\mathrm{x}} \) हों, तो सीमा \( \Delta t \rightarrow 0 \) में विशिष्ट क्षण पर
\( \overrightarrow{\mathrm{v}}=\lim _{\Delta t \rightarrow 0} \frac{\Delta \overrightarrow{\mathrm{x}}}{\Delta \mathrm{t}}=\frac{\mathrm{d} \overrightarrow{\mathrm{x}}}{\mathrm{dt}} \).
यह हमें उस खास पल में वस्तु की गति की वास्तविक गति बताता है।

**(vii) औसत त्वरण (Average Acceleration):** किसी वस्तु के एकांक समय में कुल वेग में परिवर्तन को औसत त्वरण कहते हैं।
\( \overrightarrow{a}_{av} = \frac{\Delta \overrightarrow{v}}{\Delta t} = \frac{\overrightarrow{v}_{2}-\overrightarrow{v}_{1}}{t_{2}-t_{1}} \).
यह पूरे समय अंतराल में वेग में औसत बदलाव की दर है।

**(viii) तात्क्षणिक त्वरण (Instantaneous Acceleration):** किसी निश्चित समय या क्षण पर वस्तु के त्वरण को तात्क्षणिक त्वरण कहते हैं।
\( \vec{a}=\lim _{\Delta t \rightarrow 0} \frac{\Delta \vec{v}}{\Delta t}=\frac{d \vec{v}}{d t} \).
यह किसी खास पल में वस्तु का वास्तविक त्वरण बताता है।

ये परिभाषाएँ गति के विभिन्न पहलुओं को समझने में मदद करती हैं।
In simple words: **विस्थापन** सीधी दूरी है; **वेग** विस्थापन प्रति समय है; **त्वरण** वेग में बदलाव है; **चाल** कुल दूरी प्रति समय है; **औसत वेग** पूरे समय का औसत वेग है; **तात्क्षणिक वेग** एक खास पल का वेग है; **औसत त्वरण** पूरे समय का औसत त्वरण है; **तात्क्षणिक त्वरण** एक खास पल का त्वरण है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक परिभाषा के लिए, 'अदिश' या 'सदिश' राशि होने का उल्लेख करें और उनके S.I. मात्रकों को भी याद रखें। यह उत्तर को संपूर्ण बनाता है।

 

Question 3. आलेखीय विधि द्वारा गति के समीकरणों की व्युत्पत्ति कीजिए।
Answer:
आलेखीय विधि (Graphical Method) से एकसमान त्वरित गति के लिए गति के समीकरण ज्ञात करने के लिए, हम नीचे दिए गए वेग-समय ग्राफ का उपयोग करते हैं:
x-अक्ष समय y-अक्ष वेग v O प्रारंभिक वेग u P v Q R S समयांतराल t = O=t v-u t
इस ग्राफ में, \( t=0 \) पर वस्तु का प्रारंभिक वेग \( u \) है (बिंदु P पर), और \( t \) समय बाद इसका वेग \( v \) हो जाता है (बिंदु Q पर)। वस्तु का त्वरण \( a \) एकसमान है, इसलिए वेग-समय ग्राफ एक सीधी रेखा PQ है। **गति का प्रथम समीकरण \( v = u + at \):**
वेग-समय ग्राफ का ढलान (slope) त्वरण को दर्शाता है:
त्वरण \( a = \frac{\text{वेग में परिवर्तन}}{\text{समय में परिवर्तन}} = \frac{RQ}{PR} \)
चित्र से, \( RQ = SQ - SR \).
यहाँ \( SQ = v \) (अंतिम वेग) और \( SR = u \) (प्रारंभिक वेग).
तो, \( RQ = v - u \).
और \( PR = OR - OP = t - 0 = t \).
इसलिए, \( a = \frac{v-u}{t} \)
\( \implies at = v - u \)
\( \implies v = u + at \)
यह गति का प्रथम समीकरण है। **गति का द्वितीय समीकरण \( x = ut + \frac{1}{2}at^2 \):**
वेग-समय ग्राफ का क्षेत्रफल वस्तु द्वारा तय की गई दूरी या विस्थापन \( (x) \) को दर्शाता है।
\( x = \) आकृति OPRQ का क्षेत्रफल
\( x = \) आयत OPRS का क्षेत्रफल \( + \) त्रिभुज PRQ का क्षेत्रफल
\( x = (\text{लंबाई} \times \text{चौड़ाई}) + \left( \frac{1}{2} \times \text{आधार} \times \text{ऊँचाई} \right) \)
\( x = (OP \times PR) + \left( \frac{1}{2} \times PR \times RQ \right) \)
चित्र से, \( OP = u \), \( PR = t \), और \( RQ = v - u \).
प्रथम समीकरण से, \( v - u = at \).
इसलिए, \( x = (u \times t) + \left( \frac{1}{2} \times t \times at \right) \)
\( \implies x = ut + \frac{1}{2}at^2 \)
यह गति का द्वितीय समीकरण है। **गति का तृतीय समीकरण \( v^2 = u^2 + 2ax \):**
आकृति OPRQ एक समलंब (trapezium) है, जिसका क्षेत्रफल भी दूरी \( x \) को दर्शाता है।
समलंब का क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} \times (\text{समांतर भुजाओं का योग}) \times \text{ऊँचाई} \)
\( x = \frac{1}{2} (OP + SQ) \times PR \)
\( x = \frac{1}{2} (u + v) \times t \)
प्रथम समीकरण से, \( t = \frac{v-u}{a} \). इस मान को समीकरण में रखने पर:
\( x = \frac{1}{2} (u + v) \times \left( \frac{v-u}{a} \right) \)
\( \implies x = \frac{(v+u)(v-u)}{2a} \)
\( \implies x = \frac{v^2 - u^2}{2a} \)
\( \implies 2ax = v^2 - u^2 \)
\( \implies v^2 = u^2 + 2ax \)
यह गति का तृतीय समीकरण है। ये तीनों समीकरण एकसमान त्वरित गति के विश्लेषण के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: ग्राफ की मदद से हम गति के तीन सूत्र निकालते हैं। पहला सूत्र बताता है कि स्पीड कैसे बढ़ती है। दूसरा सूत्र बताता है कि कितनी दूरी तय हुई। तीसरा सूत्र बताता है कि स्पीड और दूरी कैसे जुड़ी हैं।

🎯 Exam Tip: ग्राफ में प्रारंभिक और अंतिम वेग, समय और क्षेत्रफल के घटकों को स्पष्ट रूप से लेबल करें। प्रत्येक समीकरण की व्युत्पत्ति को तार्किक क्रम में समझाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. सिद्ध कीजिए कि प्रक्षेप्य की गति का पथ परवलय होता है।
Answer:
**प्रक्षेप्य का पथ (Path of a Projectile):**
माना एक वस्तु को क्षैतिज से \( \theta \) कोण पर प्रारंभिक वेग \( \vec{u} \) से फेंका गया है, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। इस वेग के क्षैतिज और ऊर्ध्व घटक क्रमशः निम्न होंगे:
क्षैतिज घटक \( u_x = u \cos \theta \quad \ldots(1) \)
ऊर्ध्वाधर घटक \( u_y = u \sin \theta \quad \ldots(2) \)
प्रक्षेप्य पर गुरुत्वीय बल केवल नीचे की ओर लगता है। इस कारण प्रक्षेप्य के त्वरण के क्षैतिज और ऊर्ध्व घटक क्रमशः निम्नानुसार हैं:
क्षैतिज त्वरण \( a_x = 0 \)
ऊर्ध्वाधर त्वरण \( a_y = -g \) (गुरुत्वाकर्षण के कारण, नीचे की ओर)
X X Y O u θ H (R) परास A
वस्तु जिस बिंदु से प्रक्षेपित की गई है उसे यदि हम मूल बिंदु \( (0) \) लें, तो किसी समय \( t \) पर प्रक्षेप्य के निर्देशांक \( (x, y) \) गति के द्वितीय समीकरण \( s = ut + \frac{1}{2}at^2 \) द्वारा ज्ञात किए जा सकते हैं। इस प्रकार से हमें क्षैतिज और ऊर्ध्व दिशाओं में मूल बिंदु \( (0) \) के सापेक्ष निर्देशांक (विस्थापन) क्रमशः निम्न होंगे:

**क्षैतिज गति के लिए:**
\( x = u_x t + \frac{1}{2} a_x t^2 \)
\( \implies x = (u \cos \theta) t + \frac{1}{2} (0) t^2 \)
\( \implies x = (u \cos \theta) t \quad \ldots(3) \)
यहाँ से, \( t = \frac{x}{u \cos \theta} \quad \ldots(4) \)

**ऊर्ध्वाधर गति के लिए:**
\( y = u_y t + \frac{1}{2} a_y t^2 \)
\( \implies y = (u \sin \theta) t + \frac{1}{2} (-g) t^2 \)
\( \implies y = (u \sin \theta) t - \frac{1}{2} g t^2 \quad \ldots(5) \)

अब समीकरण (4) से \( t \) का मान समीकरण (5) में रखने पर:
\( y = (u \sin \theta) \left( \frac{x}{u \cos \theta} \right) - \frac{1}{2} g \left( \frac{x}{u \cos \theta} \right)^2 \)
\( \implies y = x \frac{\sin \theta}{\cos \theta} - \frac{1}{2} g \frac{x^2}{u^2 \cos^2 \theta} \)
\( \implies y = x \tan \theta - \frac{g}{2u^2 \cos^2 \theta} x^2 \quad \ldots(6) \)
यह समीकरण \( y = Ax - Bx^2 \) के रूप का है, जो एक परवलय (parabola) का समीकरण है। यहाँ \( A = \tan \theta \) और \( B = \frac{g}{2u^2 \cos^2 \theta} \) स्थिरांक हैं। इस प्रकार, यह सिद्ध होता है कि प्रक्षेप्य की गति का पथ हमेशा परवलयाकार होता है।
In simple words: जब किसी चीज़ को हवा में फेंका जाता है, तो उसका रास्ता एक परवलय (गोल घुमावदार) जैसा होता है। हम गणित के सूत्रों से यह दिखा सकते हैं कि उसका रास्ता एक खास तरह के वक्र, जिसे परवलय कहते हैं, जैसा ही होता है।

🎯 Exam Tip: क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर गति के घटकों को अलग-अलग विश्लेषित करें। गुरुत्वाकर्षण के कारण केवल ऊर्ध्वाधर त्वरण होता है, जबकि क्षैतिज त्वरण शून्य होता है।

 

Question 5. प्रक्षेप्य की गति हेतु उड्डयन काल (T), प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई (H) व प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास (R) हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer:
प्रक्षेप्य गति के लिए उड्डयन काल, अधिकतम ऊँचाई और क्षैतिज परास के व्यंजक इस प्रकार हैं:

**1. उड्डयन काल (Time of Flight of Projectile - T):**
उड्डयन काल वह समय है जब तक प्रक्षेप्य हवा में रहता है। माना प्रक्षेप्य को अपनी अधिकतम ऊँचाई प्राप्त करने में \( t_1 \) समय लगता है, और उतना ही समय उसे नीचे आने में भी लगता है। अतः प्रक्षेप्य का कुल उड्डयन काल \( T = t_1 + t_2 \). यदि \( t_1 = t_2 \), तो \( T = 2t_1 \).
ऊर्ध्वाधर गति के लिए, \( v_y = u_y + a_y t \)
अधिकतम ऊँचाई पर ऊर्ध्वाधर वेग \( v_y = 0 \) हो जाता है।
तो, \( 0 = u \sin \theta - g t_1 \)
\( \implies g t_1 = u \sin \theta \)
\( \implies t_1 = \frac{u \sin \theta}{g} \)
इसलिए, कुल उड्डयन काल \( T = 2t_1 = \frac{2u \sin \theta}{g} \quad \ldots(7) \).
यह व्यंजक दर्शाता है कि उड्डयन काल प्रारंभिक वेग के ऊर्ध्वाधर घटक और गुरुत्वाकर्षण त्वरण पर निर्भर करता है।

**2. अधिकतम ऊँचाई (Maximum Height Attained by a Projectile - H):**
अधिकतम ऊँचाई \( H \) वह सबसे ऊँची बिंदु है जहाँ प्रक्षेप्य पहुँचता है। ऊर्ध्वाधर गति के लिए, द्वितीय समीकरण का उपयोग करने पर:
\( H = u_y t_1 + \frac{1}{2} a_y t_1^2 \)
\( \implies H = (u \sin \theta) \left( \frac{u \sin \theta}{g} \right) + \frac{1}{2} (-g) \left( \frac{u \sin \theta}{g} \right)^2 \)
\( \implies H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{g} - \frac{1}{2} g \frac{u^2 \sin^2 \theta}{g^2} \)
\( \implies H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{g} - \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g} \)
\( \implies H = \frac{2u^2 \sin^2 \theta - u^2 \sin^2 \theta}{2g} \)
\( \implies H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g} \quad \ldots(8) \).
यह व्यंजक दर्शाता है कि अधिकतम ऊँचाई प्रारंभिक वेग के ऊर्ध्वाधर घटक के वर्ग पर निर्भर करती है।

**3. क्षैतिज परास (Range of Projectile - R):**
क्षैतिज परास \( R \) वह अधिकतम क्षैतिज दूरी है जो प्रक्षेप्य अपने उड्डयन काल में तय करता है। क्षैतिज त्वरण \( a_x = 0 \) होने के कारण, क्षैतिज वेग स्थिर रहता है।
क्षैतिज गति के लिए,
\( R = u_x T \)
\( \implies R = (u \cos \theta) T \)
उड्डयन काल \( T = \frac{2u \sin \theta}{g} \) का मान रखने पर:
\( R = (u \cos \theta) \left( \frac{2u \sin \theta}{g} \right) \)
\( \implies R = \frac{2u^2 \sin \theta \cos \theta}{g} \)
त्रिकोणमितीय पहचान \( 2 \sin \theta \cos \theta = \sin 2\theta \) का उपयोग करने पर:
\( \implies R = \frac{u^2 \sin 2\theta}{g} \quad \ldots(9) \).
यह व्यंजक दर्शाता है कि क्षैतिज परास प्रारंभिक वेग के वर्ग और प्रक्षेपण कोण के दुगुने के साइन पर निर्भर करता है। ये तीनों व्यंजक प्रक्षेप्य गति के विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: हम प्रक्षेप्य गति के लिए तीन मुख्य बातें निकालते हैं: **उड्डयन काल** (कितनी देर हवा में रहा), **अधिकतम ऊँचाई** (कितना ऊँचा गया), और **क्षैतिज परास** (कितनी दूर गिरा)।

🎯 Exam Tip: तीनों व्यंजकों को व्युत्पन्न करते समय क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर गति के घटकों को अलग-अलग रखना और गुरुत्वाकर्षण त्वरण की दिशा का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. प्रक्षेप्य की गति हेतु उड्डयन काल (T), प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई (H) व प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास (R) हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer: प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई (Maximum Height Attained by a Projectile) वह सबसे ज़्यादा ऊँचाई है जिस तक एक फेंका गया पिंड पहुँचता है। चित्र में दिखाए गए प्रक्षेप्य के परवलयाकार पथ में, बिंदु B पर, प्रक्षेप्य अधिकतम ऊँचाई H पर होता है। अधिकतम ऊँचाई पर प्रक्षेप्य के वेग का ऊर्ध्वघटक \(v_y\) शून्य हो जाता है। इसका मतलब है कि पिंड उस क्षण के लिए ऊपर की ओर गति करना बंद कर देता है। यदि अधिकतम ऊँचाई H तक पहुँचने में प्रक्षेप्य को \(t_1\) समय लगता है, तो वेग के ऊर्ध्वघटक \(v_y = u \sin \theta - gt\) (जहाँ \(u_y = u \sin \theta\) और \(a_y = - g\)) के अनुसार, समय \(t = t_1\) पर \(v_y = 0\) हो जाता है।
\(0 = u \sin \theta - gt_1\)
\( \implies t_1 = \frac{u \sin \theta}{g} \)
इस \(t_1\) समय में, प्रक्षेप्य की स्थिति का ऊर्ध्वघटक y अधिकतम ऊँचाई H के बराबर हो जाता है। इसलिए,
\(y = u \sin \theta \cdot t - \frac{1}{2}gt^2 \)
\( \implies H = u \sin \theta \left(\frac{u \sin \theta}{g}\right) - \frac{1}{2}g \left(\frac{u \sin \theta}{g}\right)^2 \)
\( \implies H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{g} - \frac{1}{2} \frac{u^2 \sin^2 \theta}{g} \)
\( \implies H = \frac{1}{2} \frac{u^2 \sin^2 \theta}{g} \)
\( \implies H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g} \)
एक निश्चित प्रारंभिक चाल से फेंके गए प्रक्षेप द्वारा अधिकतम ऊँचाई तब प्राप्त हो सकती है जब प्रक्षेप कोण \( \theta = 90^\circ \) हो। जब प्रक्षेप्य को अधिकतम परास R के लिए \( \theta = 45^\circ \) पर फेंका जाता है, तब अधिकतम ऊँचाई \(H_{\text{max}} = \frac{1}{2} R_{\text{max}}\) होती है।
प्रक्षेप्य की परास (Range of Projectile) वह क्षैतिज दूरी है जो एक प्रक्षेप्य अपने प्रक्षेपण बिंदु से उसी समतल पर वापस आने तक तय करता है।
उपर्युक्त मानों को रखने पर,
\(R = (u \cos \theta) T \)
और \(0 = (u \sin \theta) T - \frac{1}{2} g T^2 \)
\( \implies (u \sin \theta) T = \frac{1}{2} g T^2 \)
\( \implies T = \frac{2u \sin \theta}{g} \)
समीकरण (4) में T का मान रखने पर क्षैतिज दूरी,
\(R = (u \cos \theta) \left(\frac{2u \sin \theta}{g}\right) = \frac{u^2 (2 \sin \theta \cos \theta)}{g} \)
\( \implies R = \frac{u^2 \sin 2\theta}{g} \) (क्योंकि \(2 \sin \theta \cos \theta = \sin 2\theta\))
In simple words: एक प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई वह सबसे ज़्यादा ऊँचाई है जहाँ तक वह जाता है, और परास वह सबसे ज़्यादा क्षैतिज दूरी है जो वह तय करता है। उड्डयन काल वह कुल समय होता है जिसके लिए प्रक्षेप्य हवा में रहता है। ये तीनों उस वेग और कोण पर निर्भर करते हैं जिससे पिंड को फेंका जाता है।

🎯 Exam Tip: इन सभी सूत्रों को याद रखना बहुत ज़रूरी है क्योंकि ये प्रक्षेप्य गति के प्रश्नों को हल करने का आधार हैं। यह सुनिश्चित करें कि आप साइ स्क्वेर्ड (\(\sin^2 \theta\)) और साइन टू थीटा (\(\sin 2\theta\)) के बीच भ्रमित न हों।

 

Question 6. द्विविमीय गति हेतु कण के विस्थापन, वेग एवं त्वरण हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer: द्विविमीय गति में कण का विस्थापन, वेग एवं त्वरण तथा इनके सदिश रूप (Displacement, Velocity and Acceleration of a particle in two dimensional motion and their Vector representation) निम्न प्रकार से प्राप्त किए जा सकते हैं:
**विस्थापन (Displacement):** माना कोई कण समय \(t_1\) पर स्थिति A पर है और किसी अन्य समय \(t_2\) पर यह कण स्थिति B पर है। इन समयों पर कण के स्थित सदिश क्रमशः \( \vec{r_1} = \overrightarrow{\text{OA}} \) और \( \vec{r_2} = \overrightarrow{\text{OB}} \) हैं। समय अंतराल \( (t_2 - t_1) \) में कण का विस्थापन बिंदु A से बिंदु B तक हो रहा है। इस विस्थापन को सदिश \( \overrightarrow{\Delta r} = \vec{r_2} - \vec{r_1} \) से निरूपित करते हैं और इसे विस्थापन सदिश (Displacement Vector) कहते हैं। O A B \(\vec{r_1}\) \(\vec{r_2}\) \(\Delta \vec{r}\)
\( \overrightarrow{\Delta r} = (x_2 + y_2) - (x_1 + y_1) \)
\( \implies \overrightarrow{\Delta r} = (x_2 - x_1) + (y_2 - y_1) \)
\( \implies \overrightarrow{\Delta r} = \Delta x \hat{i} + \Delta y \hat{j} \)
यह बताता है कि द्विविमीय गति में विस्थापन \( \overrightarrow{\Delta r} \), X-अक्ष के अनुदिश विस्थापन घटक \( \Delta x \hat{i} \) और Y-अक्ष के अनुदिश विस्थापन घटक \( \Delta y \hat{j} \) के सदिश योग के बराबर होता है। सदिश बीजगणित से विस्थापन का परिमाण \( \Delta r = \sqrt{(\Delta x)^2 + (\Delta y)^2} \) होता है।
**वेग (Velocity):** माना समयांतराल \( \Delta t = t_2 - t_1 \) में किसी कण का विस्थापन \( \overrightarrow{\Delta r} = \vec{r_2} - \vec{r_1} \) होता है। विस्थापन \( \overrightarrow{\Delta r} \) और समय अंतराल \( \Delta t \) के अनुपात को कण की औसत वेग कहते हैं। औसत वेग की दिशा वही होगी जो \( \overrightarrow{\Delta r} \) की दिशा है।
औसत वेग \( \overrightarrow{v_{\text{av}}} = \frac{\overrightarrow{\Delta r}}{\Delta t} = \frac{\vec{r_2} - \vec{r_1}}{t_2 - t_1} \)
कार्तीय निर्देशांकों में, एकांक सदिशों \( \hat{i} \) और \( \hat{j} \) का उपयोग करने पर औसत वेग को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
\( \overrightarrow{v_{\text{av}}} = \frac{\Delta x}{\Delta t} \hat{i} + \frac{\Delta y}{\Delta t} \hat{j} \)
किसी विशिष्ट क्षण पर वस्तु का वेग तात्क्षणिक वेग कहलाता है। समय के साथ विस्थापन में परिवर्तन की दर को तात्क्षणिक वेग कहते हैं। O कण का पथ \(\vec{r}\) \(\Delta \vec{r}\) \(\vec{r} + \Delta \vec{r}\) चित्र
\( \vec{v} = \lim_{\Delta t \rightarrow 0} \frac{\overrightarrow{\Delta r}}{\Delta t} = \frac{d\vec{r}}{dt} \)
तात्क्षणिक वेग की दिशा कण के पथ पर डाली गई स्पर्श रेखा (tangent) के अनुदिश होती है। कार्तीय निर्देशांकों में, तात्क्षणिक वेग \( \vec{v} = v_x \hat{i} + v_y \hat{j} \) होता है, जहाँ \( v_x = \lim_{\Delta t \rightarrow 0} \frac{\Delta x}{\Delta t} = \frac{dx}{dt} \) और \( v_y = \lim_{\Delta t \rightarrow 0} \frac{\Delta y}{\Delta t} = \frac{dy}{dt} \) हैं।
तात्क्षणिक वेग का परिमाण \( v = \sqrt{v_x^2 + v_y^2} \) होता है। यदि इसकी दिशा X-अक्ष से \( \theta \) कोण पर हो, तो \( \tan \theta = \frac{v_y}{v_x} \implies \theta = \tan^{-1}\left(\frac{v_y}{v_x}\right) \)। x-अक्ष y-अक्ष (मूल बिंदु) \(v_x = v \cos \theta\) \(v_y = v \sin \theta\) \(v\) \(\theta\)
**त्वरण (Acceleration):** तात्क्षणिक त्वरण कण के वेग में परिवर्तन की दर और समयांतराल \( \Delta t \) के अनुपात को कहते हैं, जब \( \Delta t \rightarrow 0 \)।
\( \vec{a} = \lim_{\Delta t \rightarrow 0} \frac{\Delta \overrightarrow{v}}{\Delta t} = \frac{d \overrightarrow{v}}{dt} \)
कार्तीय निर्देशांकों में, तात्क्षणिक त्वरण \( \vec{a} = \frac{dv_x}{dt} \hat{i} + \frac{dv_y}{dt} \hat{j} = a_x \hat{i} + a_y \hat{j} \) होता है।
In simple words: द्विविमीय गति में, हम एक कण की स्थिति को X और Y दिशाओं में तोड़कर समझते हैं। विस्थापन यह बताता है कि कण कहाँ से कहाँ गया; वेग बताता है कि वह कितनी तेज़ी से और किस दिशा में जा रहा है; और त्वरण बताता है कि उसका वेग कितनी तेज़ी से बदल रहा है। यह सब सदिश (दिशा वाले) राशियाँ हैं।

🎯 Exam Tip: सदिश राशियों का उपयोग करते समय, उनके दिशा घटक (\(\hat{i}\) और \(\hat{j}\)) को दर्शाना न भूलें, क्योंकि ये गति की दिशा को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। आरेखों का उपयोग करके अवधारणाओं को समझाना बहुत प्रभावी होता है।

 

Question 1. जयपुर से कार द्वारा अजमेर आने में 1.5h लगता है। यदि कार का माध्य वेग 80 km/h हो. तो जयपुर से अजमेर की दूरी कितनी है?
Answer: दिया गया है कि:
समय = 1.5 घंटे
माध्य वेग = 80 km/h
दूरी का सूत्र है: दूरी = माध्य वेग \( \times \) समय
\( = 1.5 \text{ h} \times 80 \text{ km/h} \)
\( = 120 \text{ km} \)
इसलिए, जयपुर से अजमेर की दूरी 120 km है। यह सूत्र यात्रा की कुल दूरी निकालने में मदद करता है।
In simple words: अगर आपको कार का औसत वेग और यात्रा में लगा समय पता है, तो आप उन्हें गुणा करके कुल दूरी निकाल सकते हैं।

🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि समय और वेग की इकाइयाँ एक-दूसरे के अनुरूप हों (जैसे, घंटे और किमी/घंटा)। यदि इकाइयाँ अलग हों, तो उन्हें पहले परिवर्तित करें।

 

Question 2. एक बस की चाल 25 km/h से बढ़कर 5 s में 70 km/h हो जाती है। बस का माध्य त्वरण ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया गया है कि:
प्रारंभिक वेग \( u = 25 \text{ km/h} \)
अंतिम वेग \( v = 70 \text{ km/h} \)
समय \( t = 5 \text{ s} \)
सबसे पहले, वेग को m/s में बदलें (क्योंकि समय सेकंड में है):
\( u = 25 \text{ km/h} = 25 \times \frac{1000 \text{ m}}{3600 \text{ s}} = \frac{250}{36} \text{ m/s} \approx 6.94 \text{ m/s} \)
\( v = 70 \text{ km/h} = 70 \times \frac{1000 \text{ m}}{3600 \text{ s}} = \frac{700}{36} \text{ m/s} \approx 19.44 \text{ m/s} \)
माध्य त्वरण \( a_{av} = \frac{v - u}{t} \)
\( a_{av} = \frac{\frac{700}{36} - \frac{250}{36}}{5} = \frac{\frac{450}{36}}{5} = \frac{450}{36 \times 5} = \frac{90}{36} = 2.5 \text{ m/s}^2 \)
या सीधे किमी/घंटा से सेकंड में बदलने पर:
\( a_{av} = \frac{70 - 25}{5 \text{ s}} = \frac{45 \text{ km/h}}{5 \text{ s}} \)
अब, \(1 \text{ km/h} = \frac{1}{3600} \text{ km/s}^2\).
\( a_{av} = \frac{45}{3600 \times 5} \text{ km/s}^2 = \frac{45}{18000} \text{ km/s}^2 = \frac{1}{400} \text{ km/s}^2 \)
\( = 2.5 \times 10^{-4} \text{ km/s}^2 \). यह एक औसत मान है जो गति में बदलाव की दर को दर्शाता है।
In simple words: त्वरण निकालने के लिए, अंतिम वेग में से प्रारंभिक वेग घटाएँ और उसे समय से भाग दें। अगर इकाइयाँ अलग हैं, तो उन्हें एक जैसा बनाना ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: वेग और समय की इकाइयों को समरूप बनाना त्वरण के प्रश्नों में एक सामान्य गलती है। हमेशा सुनिश्चित करें कि सभी मान SI इकाइयों (मीटर, सेकंड) में हों या कम से कम संगत हों।

 

Question 3. कार A व B, 100 km की यात्रा पर एक साथ चलती है। कार A एकसमान चाल 40 km/h से चलती है। कार B 60 km/h की चाल से चलती है। किन्तु प्रथम आधा घण्टा के पश्चात् खराबी के कारण 15 min. रुक जाती है तथा पुनः चलने पर उसकी चाल 50 km/h रह जाती है। उक्त यात्रा हेतु
(i) उक्त यात्रा का चाल-समय वक्र बनाओ।
(ii) बताइये कौनसी कार कितने समय पहले यात्रा समाप्त करेगी।
Answer:
(i) चाल-समय वक्र:
(कार A नीले रंग में, कार B नारंगी रंग में) समय (घंटे) चाल (किमी/घंटा) 0 20 40 60 80 0.5 1.0 1.5 2.0 2.5 Car A Car B
(ii) कौनसी कार पहले यात्रा समाप्त करेगी:
**कार A के लिए:**
कुल दूरी = 100 किमी.
चाल = 40 किमी/घंटा
कार A द्वारा लिया गया समय = \( \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} = \frac{100}{40} = 2.5 \) घंटे
यह \( 2 \) घंटे \( 30 \) मिनट के बराबर है।
**कार B के लिए:**
पहले 0.5 घंटे में तय की गई दूरी = \( 60 \text{ किमी/घंटा} \times 0.5 \text{ घंटा} = 30 \text{ किमी} \)
कार B के रुकने का समय = 15 मिनट = 0.25 घंटे
शेष दूरी = \( 100 - 30 = 70 \text{ किमी} \)
शेष दूरी तय करने में लगा समय = \( \frac{70 \text{ किमी}}{50 \text{ किमी/घंटा}} = 1.4 \text{ घंटे} \)
कुल समय = पहला समय + रुकने का समय + शेष समय
\( = 0.5 \text{ घंटा} + 0.25 \text{ घंटा} + 1.4 \text{ घंटा} = 2.15 \text{ घंटे} \)
यह \( 2 \) घंटे और \( 0.15 \times 60 = 9 \) मिनट के बराबर है।
**तुलना:**
कार A को लगा समय = 2 घंटे 30 मिनट
कार B को लगा समय = 2 घंटे 9 मिनट
कार B, कार A से \( (2 \text{ घंटे } 30 \text{ मिनट}) - (2 \text{ घंटे } 9 \text{ मिनट}) = 21 \text{ मिनट} \) पहले पहुँचेगी। इस प्रकार की समस्याओं में समय और गति का विश्लेषण महत्वपूर्ण है।
In simple words: हमने दोनों कारों के यात्रा के कुल समय की गणना की। कार A को 2.5 घंटे लगे, जबकि कार B को कुल 2.15 घंटे लगे, जिसमें रुकने का समय भी शामिल था। इसलिए, कार B, 21 मिनट पहले पहुँची।

🎯 Exam Tip: चाल-समय ग्राफ बनाते समय, अलग-अलग वेगों और विराम अवधियों को स्पष्ट रूप से दर्शाना महत्वपूर्ण है। गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि सभी समय और दूरी की इकाइयाँ संगत हों।

 

Question 4. एक स्थिर बल के प्रभाव में एक दिशा में गतिमान कण का विस्थापन निम्नानुसार दिया जाता है। \( t=\sqrt{x}+3 \) जहाँ x विस्थापन (मीटर में) व t समय (सेकण्ड में) है। जब इसका वेग शून्य हो तो कण का विस्थापन ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया गया समीकरण है:
\( t = \sqrt{x} + 3 \)
हमें \( x \) को \( t \) के फलन के रूप में चाहिए, इसलिए समीकरण को \( \sqrt{x} \) के लिए हल करें:
\( \sqrt{x} = t - 3 \)
दोनों ओर वर्ग करने पर:
\( x = (t - 3)^2 \)
\( x = t^2 - 6t + 9 \)
कण का वेग ज्ञात करने के लिए, विस्थापन \( x \) को समय \( t \) के सापेक्ष अवकलित करें:
वेग \( v = \frac{dx}{dt} = \frac{d}{dt}(t^2 - 6t + 9) \)
\( v = 2t - 6 \)
वेग शून्य होने पर विस्थापन ज्ञात करना है, इसलिए \( v = 0 \) सेट करें:
\( 0 = 2t - 6 \)
\( 2t = 6 \)
\( t = 3 \text{ सेकंड} \)
अब, \( t = 3 \) सेकंड पर विस्थापन \( x \) ज्ञात करने के लिए, \( t \) का मान विस्थापन समीकरण में रखें:
\( x = (3)^2 - 6 \times 3 + 9 \)
\( x = 9 - 18 + 9 \)
\( x = 0 \)
अतः, जब कण का वेग शून्य होगा, तो उसका विस्थापन शून्य होगा। यह दर्शाता है कि कण अपनी प्रारंभिक स्थिति पर वापस आ गया है।
In simple words: हमें एक सूत्र दिया गया है जो बताता है कि समय के साथ कण कहाँ है। हमने इस सूत्र का उपयोग करके कण की गति निकाली, और फिर देखा कि उसका वेग कब शून्य होता है। उस समय पर, हमने पाया कि कण अपनी शुरुआती जगह पर वापस आ गया था, यानी उसका विस्थापन शून्य था।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, पहले विस्थापन के समीकरण को \( x \) के लिए हल करें, फिर वेग ज्ञात करने के लिए अवकलन करें। अंत में, वेग को शून्य सेट करके समय ज्ञात करें और उस समय का उपयोग करके विस्थापन निकालें।

 

Question 5. एक 200 m ऊँची मीनार से एक पिण्ड नीचे गिराया जाता है। उसी समय एक दूसरा पिण्ड ऊपर की ओर 50 m/s के वेग से फेंका जाता है। ज्ञात कीजिए कि वे दोनों कब और कहाँ मिलेंगे।
Answer: दिया गया है:
मीनार की ऊँचाई = 200 m
दूसरा पिण्ड ऊपर की ओर फेंका गया वेग \( u = 50 \text{ m/s} \)
गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g = 9.8 \text{ m/s}^2 \)
(यह चित्र दोनों पिंडों की गति को दर्शाता है।) 200 m पिण्ड 1 (गिराया गया) पिण्ड 2 (ऊपर फेंका गया) मिलने का बिंदु जमीन
माना कि वे दोनों पिंड \( t \) समय बाद मीनार के शीर्ष से \( h \) दूरी पर मिलेंगे।
**नीचे गिराए गए पिण्ड (पिण्ड 1) के लिए:**
प्रारंभिक वेग \( u_1 = 0 \)
तय की गई दूरी \( h = u_1 t + \frac{1}{2}gt^2 \)
\( h = 0 \cdot t + \frac{1}{2}gt^2 \)
\( \implies h = \frac{1}{2}gt^2 \) ----- (1)
**ऊपर फेंके गए पिण्ड (पिण्ड 2) के लिए:**
प्रारंभिक वेग \( u_2 = 50 \text{ m/s} \)
मीनार के निचले सिरे से तय की गई दूरी = \( 200 - h \)
\( 200 - h = u_2 t - \frac{1}{2}gt^2 \)
\( \implies 200 - h = 50t - \frac{1}{2}gt^2 \) ----- (2)
समीकरण (1) और (2) को जोड़ने पर:
\( h + (200 - h) = \frac{1}{2}gt^2 + 50t - \frac{1}{2}gt^2 \)
\( 200 = 50t \)
\( t = \frac{200}{50} = 4 \text{ सेकंड} \)
अतः, दोनों पिंड 4 सेकंड बाद मिलेंगे।
अब, किस ऊँचाई पर मिलेंगे, यह ज्ञात करने के लिए \( t = 4 \) का मान समीकरण (1) में रखें:
\( h = \frac{1}{2} \times 9.8 \times (4)^2 \)
\( h = \frac{1}{2} \times 9.8 \times 16 \)
\( h = 9.8 \times 8 \)
\( h = 78.4 \text{ मीटर} \)
वे दोनों मीनार के शीर्ष से 78.4 मीटर की दूरी पर मिलेंगे। यह गुरुत्वाकर्षण के अंतर्गत वस्तुओं की सापेक्ष गति का एक अच्छा उदाहरण है।
In simple words: एक गेंद ऊपर से गिराई जाती है और दूसरी नीचे से ऊपर फेंकी जाती है। हमने हिसाब लगाया कि कितने समय बाद वे मिलेंगे और मीनार के ऊपर से कितनी दूरी पर। वे 4 सेकंड बाद मीनार के ऊपर से 78.4 मीटर नीचे मिलेंगे।

🎯 Exam Tip: गुरुत्वाकर्षण के अधीन गति के प्रश्नों में, ऊपर की दिशा को धनात्मक और नीचे की दिशा को ऋणात्मक लेना या इसके विपरीत लेना महत्वपूर्ण है, लेकिन पूरे प्रश्न में एक ही संकेत प्रणाली का पालन करना चाहिए। गुरुत्वाकर्षण त्वरण (\(g\)) को हमेशा उचित संकेत के साथ प्रयोग करें।

 

Question 6. 100 g द्रव्यमान का एक पिण्ड विराम अवस्था से 490 cm नीचे गिरता है तथा रेत में 70 cm धंसकर स्थिर अवस्था प्राप्त कर लेता है। रेत द्वारा पिण्ड पर लगाया गया त्वरण ज्ञात करो। (g = 9.8 मीटर/सेकण्ड²)
Answer: दिया गया है कि:
पिण्ड का द्रव्यमान \( m = 100 \text{ g} \)
विराम अवस्था से गिरने के कारण प्रारंभिक वेग \( u = 0 \)
गिराने की ऊँचाई \( h = 490 \text{ cm} = 4.9 \text{ m} \)
रेत में धंसने की दूरी \( s = 70 \text{ cm} = 0.7 \text{ m} \)
गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g = 9.8 \text{ m/s}^2 \)
हमें रेत द्वारा पिण्ड पर लगाया गया त्वरण \( a \) ज्ञात करना है।
**पिण्ड के रेत से टकराने से ठीक पहले का वेग:**
गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करते हुए: \( v^2 = u^2 + 2gh \)
\( v^2 = (0)^2 + 2 \times 9.8 \times 4.9 \)
\( v^2 = 96.04 \)
\( v = \sqrt{96.04} = 9.8 \text{ m/s} \)
यह वह वेग है जिससे पिण्ड रेत पर टकराता है।
**रेत में गति के लिए:**
रेत में प्रवेश करते समय पिण्ड का प्रारंभिक वेग (\(u_{\text{sand}}\)) = \( 9.8 \text{ m/s} \)
अंतिम वेग (\(v_{\text{sand}}\)) = \( 0 \) (क्योंकि यह स्थिर हो जाता है)
तय की गई दूरी (\(s_{\text{sand}}\)) = \( 0.7 \text{ m} \)
पुनः गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करें: \( v_{\text{sand}}^2 = u_{\text{sand}}^2 + 2as_{\text{sand}} \)
\( (0)^2 = (9.8)^2 + 2 \times a \times 0.7 \)
\( 0 = 96.04 + 1.4a \)
\( 1.4a = -96.04 \)
\( a = -\frac{96.04}{1.4} = -68.6 \text{ m/s}^2 \)
ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि त्वरण मंदन है (अर्थात, यह गति की विपरीत दिशा में है)। रेत द्वारा लगाया गया यह मंदन पिंड को धीमा करके रोक देता है।
In simple words: एक भारी चीज़ नीचे गिरती है और रेत में घुसकर रुक जाती है। हमने पहले हिसाब लगाया कि चीज़ रेत से कितनी तेज़ी से टकराई। फिर, उस वेग का उपयोग करके, हमने पता लगाया कि रेत ने उसे रोकने के लिए कितना बल लगाया, जिसे त्वरण (मंदन) कहते हैं। यह त्वरण चीज़ को रोक देता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे बहु-चरणीय प्रश्नों में, समस्या को अलग-अलग चरणों में तोड़ना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक चरण के लिए प्रारंभिक और अंतिम वेग, दूरी और त्वरण को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें। इकाइयों को m, s, kg में रखना याद रखें।

 

Question 8. एक व्यक्ति उसके घर से सीधे सड़क पर 5 km/h/ घण्टा की चाल से चलकर 2.5 km दूर उसके कार्यालय जाता है। तथा कार्यालय बन्द होने के कारण तत्काल 7.5 km/h की चाल से पुनः घर लौट आता है तो निम्न समयान्तरालों हेतु उसका औसत वेग तथा औसत चाल ज्ञात करो (i) 0 से 30 min (ii) 0 से 50 min (iii) 0 से 40 min.
Answer: दिया गया है:
घर से कार्यालय की दूरी \( = 2.5 \text{ km} \)
कार्यालय जाते समय चाल \( v_1 = 5 \text{ km/h} \)
घर लौटते समय चाल \( v_2 = 7.5 \text{ km/h} \)
**व्यक्ति का कार्यालय पहुँचने में लगा समय:**
\( t_1 = \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} = \frac{2.5 \text{ km}}{5 \text{ km/h}} = 0.5 \text{ घंटे} = 30 \text{ मिनट} \)
**व्यक्ति का घर लौटने में लगा समय:**
\( t_2 = \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} = \frac{2.5 \text{ km}}{7.5 \text{ km/h}} = \frac{1}{3} \text{ घंटा} = 20 \text{ मिनट} \)
**कुल यात्रा का समय:** \( 30 \text{ मिनट} + 20 \text{ मिनट} = 50 \text{ मिनट} \)
**कुल दूरी तय की गई:** \( 2.5 \text{ किमी} + 2.5 \text{ किमी} = 5 \text{ किमी} \)
**कुल विस्थापन:** \( 0 \) (क्योंकि व्यक्ति अपने शुरुआती बिंदु पर वापस आ गया है)

(i) **समय अंतराल (0-30 मिनट) में औसत वेग तथा औसत चाल:**
इस अंतराल में व्यक्ति कार्यालय पहुँचता है।
विस्थापन \( \Delta x = 2.5 \text{ km} \) (घर से कार्यालय की ओर)
समय \( \Delta t = 30 \text{ मिनट} = 0.5 \text{ घंटे} \)
औसत वेग \( = \frac{\Delta x}{\Delta t} = \frac{2.5 \text{ km}}{0.5 \text{ h}} = 5 \text{ km/h} \)
तय की गई दूरी \( = 2.5 \text{ km} \)
औसत चाल \( = \frac{\text{दूरी}}{\Delta t} = \frac{2.5 \text{ km}}{0.5 \text{ h}} = 5 \text{ km/h} \)

(ii) **समय अंतराल (0-50 मिनट) में औसत वेग तथा औसत चाल:**
इस अंतराल में व्यक्ति घर से कार्यालय जाकर वापस घर आ जाता है।
कुल विस्थापन \( = 0 \text{ km} \)
कुल समय \( = 50 \text{ मिनट} = \frac{50}{60} \text{ घंटे} = \frac{5}{6} \text{ घंटे} \)
औसत वेग \( = \frac{\text{कुल विस्थापन}}{\text{कुल समय}} = \frac{0 \text{ km}}{5/6 \text{ h}} = 0 \text{ km/h} \)
तय की गई कुल दूरी \( = 5 \text{ km} \)
औसत चाल \( = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} = \frac{5 \text{ km}}{5/6 \text{ h}} = 6 \text{ km/h} \)

(iii) **समय अंतराल (0-40 मिनट) में औसत वेग तथा औसत चाल:**
0-30 मिनट: घर से कार्यालय (2.5 किमी, 5 किमी/घंटा)
30-40 मिनट: कार्यालय से घर की ओर वापसी यात्रा के पहले 10 मिनट।
इस 10 मिनट में तय की गई दूरी = \( 7.5 \text{ km/h} \times \frac{10}{60} \text{ h} = 7.5 \times \frac{1}{6} = 1.25 \text{ km} \)
कुल दूरी तय की गई = \( 2.5 \text{ km} + 1.25 \text{ km} = 3.75 \text{ km} \)
कुल विस्थापन = \( 2.5 \text{ km (जाते समय)} - 1.25 \text{ km (लौटते समय)} = 1.25 \text{ km} \)
कुल समय अंतराल \( = 40 \text{ मिनट} = \frac{40}{60} \text{ घंटे} = \frac{2}{3} \text{ घंटे} \)
औसत वेग \( = \frac{\text{कुल विस्थापन}}{\text{कुल समय}} = \frac{1.25 \text{ km}}{2/3 \text{ h}} = \frac{1.25 \times 3}{2} = \frac{3.75}{2} = 1.875 \text{ km/h} \)
औसत चाल \( = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} = \frac{3.75 \text{ km}}{2/3 \text{ h}} = \frac{3.75 \times 3}{2} = \frac{11.25}{2} = 5.625 \text{ km/h} \)
यह समस्या दर्शाती है कि औसत वेग और औसत चाल अलग-अलग हो सकते हैं, खासकर जब विस्थापन शून्य न हो या यात्रा कई चरणों में हो।
In simple words: हमने एक व्यक्ति की यात्रा के अलग-अलग हिस्सों के लिए औसत वेग और औसत चाल की गणना की। औसत वेग यह बताता है कि व्यक्ति अपनी शुरुआती जगह से कितनी दूर है, जबकि औसत चाल यह बताती है कि उसने कुल कितनी दूरी तय की, भले ही वह वापस आ गया हो।

🎯 Exam Tip: औसत वेग की गणना करते समय हमेशा 'कुल विस्थापन' (प्रारंभिक और अंतिम बिंदुओं के बीच की सीधी दूरी) का उपयोग करें, जबकि औसत चाल की गणना करते समय 'कुल तय की गई दूरी' (वास्तविक पथ की लंबाई) का उपयोग करें। दोनों के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. एक व्यक्ति पूर्व दिशा में 16 s में 18 m चलकर उत्तर की ओर मुड़ जाता है तथा अब उत्तर की ओर 5s में 5 m चलकर पुनः बायीं ओर मुड़कर 8 s में 6 m सीधा चलकर रुक जाता है। इस यात्रा के दौरान व्यक्ति की औसत चाल तथा औसत वेग ज्ञात करो।
Answer: दिए गए मान हैं:
पहला भाग: पूर्व दिशा में 18 m, समय = 16 s
दूसरा भाग: उत्तर दिशा में 5 m, समय = 5 s
तीसरा भाग: बायीं ओर (पश्चिम) दिशा में 6 m, समय = 8 s
**कुल तय की गई दूरी:**
कुल दूरी \( = 18 \text{ m} + 5 \text{ m} + 6 \text{ m} = 29 \text{ m} \)
**कुल समय लगा:**
कुल समय \( = 16 \text{ s} + 5 \text{ s} + 8 \text{ s} = 29 \text{ s} \)
**औसत चाल:**
औसत चाल \( = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} = \frac{29 \text{ m}}{29 \text{ s}} = 1 \text{ m/s} \)
**कुल विस्थापन ज्ञात करना:**
इस यात्रा के लिए, हमें व्यक्ति के प्रारंभिक और अंतिम बिंदुओं के बीच की सीधी दूरी ज्ञात करनी होगी। Start 18 m A 5 m B 6 m C (End) Displacement 5 m 12 m
क्षैतिज विस्थापन (पूर्व-पश्चिम) = \( 18 \text{ m (पूर्व)} - 6 \text{ m (पश्चिम)} = 12 \text{ m (पूर्व)} \)
ऊर्ध्वाधर विस्थापन (उत्तर-दक्षिण) = \( 5 \text{ m (उत्तर)} \)
कुल विस्थापन (\( \Delta d \)) = \( \sqrt{(\text{क्षैतिज विस्थापन})^2 + (\text{ऊर्ध्वाधर विस्थापन})^2} \)
\( \Delta d = \sqrt{(12)^2 + (5)^2} = \sqrt{144 + 25} = \sqrt{169} = 13 \text{ m} \)
**औसत वेग:**
औसत वेग \( = \frac{\text{कुल विस्थापन}}{\text{कुल समय}} = \frac{13 \text{ m}}{29 \text{ s}} \approx 0.448 \text{ m/s} \)
यह समस्या दिखाती है कि औसत चाल और औसत वेग अलग-अलग हो सकते हैं, खासकर जब गति सीधी रेखा में न हो।
In simple words: हमने उस व्यक्ति की कुल दूरी और कुल समय को जोड़ा ताकि औसत चाल मिल सके। फिर, हमने उसके शुरुआती और आखिरी बिंदुओं के बीच की सीधी दूरी (विस्थापन) निकाली और उसे कुल समय से भाग देकर औसत वेग ज्ञात किया।

🎯 Exam Tip: जब गति सीधी रेखा में न हो, तो विस्थापन एक सदिश राशि होने के कारण दिशा को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटकों में विस्थापन की गणना करें, फिर पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करके कुल विस्थापन ज्ञात करें।

 

Question 10. एक समान त्वरण से गतिशील वस्तु गति के दौरान 5वें सेकण्ड में 65 m व 9वें सेकण्ड में 105 m दूरी तय करती है तो यह 20वें सेकण्ड में कितनी दूरी तय करेगी? गति के 20s में चली गई कुल दूरी भी ज्ञात करो।
Answer: माना वस्तु का प्रारंभिक वेग \( u \) और एकसमान त्वरण \( a \) है। \( n \)वें सेकंड में तय की गई दूरी का सूत्र है:
\( S_n = u + \frac{1}{2}a(2n - 1) \)
**5वें सेकंड में दूरी:**
\( S_5 = u + \frac{1}{2}a(2 \times 5 - 1) \)
\( 65 = u + \frac{9}{2}a \) ----- (1)
**9वें सेकंड में दूरी:**
\( S_9 = u + \frac{1}{2}a(2 \times 9 - 1) \)
\( 105 = u + \frac{17}{2}a \) ----- (2)
समीकरण (2) में से समीकरण (1) घटाने पर:
\( 105 - 65 = \left(u + \frac{17}{2}a\right) - \left(u + \frac{9}{2}a\right) \)
\( 40 = \frac{17}{2}a - \frac{9}{2}a \)
\( 40 = \frac{8}{2}a \)
\( 40 = 4a \)
\( \implies a = \frac{40}{4} = 10 \text{ m/s}^2 \)
त्वरण \( a = 10 \text{ m/s}^2 \)।
अब \( a \) का मान समीकरण (1) में रखने पर:
\( 65 = u + \frac{9}{2}(10) \)
\( 65 = u + 45 \)
\( \implies u = 65 - 45 = 20 \text{ m/s} \)
प्रारंभिक वेग \( u = 20 \text{ m/s} \)।
**20वें सेकंड में तय की गई दूरी:**
\( S_{20} = u + \frac{1}{2}a(2 \times 20 - 1) \)
\( S_{20} = 20 + \frac{1}{2}(10)(39) \)
\( S_{20} = 20 + 5 \times 39 \)
\( S_{20} = 20 + 195 \)
\( S_{20} = 215 \text{ m} \)
**गति के 20 सेकंड में चली गई कुल दूरी:**
कुल दूरी \( S = ut + \frac{1}{2}at^2 \)
\( S = 20 \times 20 + \frac{1}{2}(10)(20)^2 \)
\( S = 400 + \frac{1}{2}(10)(400) \)
\( S = 400 + 5 \times 400 \)
\( S = 400 + 2000 \)
\( S = 2400 \text{ m} \)
अतः, 20वें सेकंड में कण द्वारा तय की गई दूरी 215 m है और गति के 20s में चली गई कुल दूरी 2400 m है। यह एक महत्वपूर्ण अंतर है जिसे ध्यान में रखना चाहिए।
In simple words: हमें कण की गति के बारे में कुछ जानकारी दी गई थी (अलग-अलग सेकंड में तय की गई दूरी)। हमने उस जानकारी का उपयोग करके पता लगाया कि कण का शुरुआती वेग कितना था और वह कितनी तेज़ी से अपनी गति बढ़ा रहा था। फिर, हमने इन मूल्यों का उपयोग करके गणना की कि वह 20वें सेकंड में कितनी दूरी तय करेगा और कुल 20 सेकंड में कितनी दूरी तय करेगा।

🎯 Exam Tip: 'nवें सेकंड में तय की गई दूरी' और 'n सेकंड में तय की गई कुल दूरी' के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। पहले वाले के लिए \( S_n = u + \frac{1}{2}a(2n-1) \) सूत्र का उपयोग करें, जबकि दूसरे के लिए \( S = ut + \frac{1}{2}at^2 \) सूत्र का उपयोग करें।

RBSE Class 11 Physics Chapter 3 निबन्धात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. एक समान त्वरित गति हेतु गणितीय विधि से गति के तीनों समीकरण व्युत्पन्न कीजिए।
Answer: जब कोई वस्तु लगातार गिर रही हो और बराबर समय में उसकी गति एक जैसी दर से बदलती हो, तो ऐसी गति को एकसमान त्वरित गति कहते हैं। इस गति को समझने के लिए, हम वेग (v), समय (t), विस्थापन (x) जैसी भौतिक राशियों के बीच के संबंध को गति के समीकरणों से दिखाते हैं। हम इन्हें गणितीय तरीके से प्राप्त कर सकते हैं। गति के नियम हमें बताते हैं कि चीजें कैसे चलती हैं।
गणितीय विधि (Analytical Method)- हम मान लेते हैं कि कोई वस्तु सीधी रेखा में एकसमान त्वरण (a) से चल रही है। यदि वस्तु का शुरुआती वेग (u) है और 't' समय के बाद उसका वेग 'v' हो जाता है, तो त्वरण की परिभाषा के अनुसार:
त्वरण \( = \frac{\text{वेग में परिवर्तन}}{\text{परिवर्तन में लगा समय}} \)
अतः \( a = \frac{v-u}{t} \)

\( \implies \) \( at = v-u \)

\( \implies \) \( v = u + at \) .....(1)
यह गति का पहला समीकरण है।
इस गति के दौरान, यदि वस्तु 't' समय में 'x' दूरी (विस्थापन) तय करती है, तो विस्थापन का सूत्र है:
विस्थापन = औसत वेग \( \times \) समय

\( \implies \) \( x = \left( \frac{v+u}{2} \right) \times t \)
औसत वेग \( = \left( \frac{v+u}{2} \right) \)

\( \implies \) \( x = \frac{vt + ut}{2} \)
अब हम गति के पहले समीकरण से \( v = u + at \) का मान ऊपर के समीकरण में रखते हैं:
\( x = \frac{(u+at)t + ut}{2} = \frac{ut + at^2 + ut}{2} \)

\( \implies \) \( x = ut + \frac{1}{2} at^2 \) .....(2)
यह गति का दूसरा समीकरण है।
अब गति के पहले समीकरण से \( v = u + at \) को फिर से लिखते हैं: \( t = \frac{v-u}{a} \)। इस मान को दूसरे समीकरण में रखने पर:
\( x = u \left( \frac{v-u}{a} \right) + \frac{1}{2} a \left( \frac{v-u}{a} \right)^2 \)
\( x = \frac{uv - u^2}{a} + \frac{1}{2} a \frac{(v^2 - 2uv + u^2)}{a^2} \)

\( \implies \) \( 2ax = 2(uv - u^2) + (v^2 - 2uv + u^2) \)

\( \implies \) \( 2ax = 2uv - 2u^2 + v^2 - 2uv + u^2 \)

\( \implies \) \( 2ax = v^2 - u^2 \)

\( \implies \) \( v^2 = u^2 + 2ax \) .....(3)
यह गति का तीसरा समीकरण है। यह हमें बताता है कि वस्तु कितनी दूरी तय करेगी जब उसका वेग बदल रहा हो।
In simple words: गति के समीकरण बताते हैं कि कोई चीज कैसे चलती है। पहला समीकरण बताता है कि वेग समय के साथ कैसे बदलता है। दूसरा समीकरण बताता है कि वस्तु कितनी दूरी तय करती है। तीसरा समीकरण वेग और दूरी के बीच संबंध दिखाता है।

🎯 Exam Tip: गति के तीनों समीकरणों को व्युत्पन्न करते समय, प्रत्येक चरण को स्पष्ट रूप से लिखें और भौतिक राशियों के बीच संबंधों को सही ढंग से प्रस्तुत करें। सूत्रों को याद रखना और उन्हें सही जगह पर उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 2. निम्न की परिभाषा दीजिए
(i) विस्थापन (ii) वेग (iii) त्वरण (iv) चाल (v) औसत वेग (vi) तात्क्षणिक वेग (vii) औसत त्वरण (viii) तात्क्षणिक त्वरण।
Answer:
(i) **विस्थापन (Displacement)**: किसी वस्तु द्वारा तय किए गए रास्ते के शुरुआती बिंदु से अंतिम बिंदु तक की सबसे कम (सीधी रेखा वाली) दूरी को विस्थापन कहते हैं। यह वस्तु के शुरुआती और अंतिम स्थान पर निर्भर करता है, न कि पूरे रास्ते की लंबाई पर। विस्थापन एक सदिश राशि है, जिसका मात्रक M.K.S. पद्धति में मीटर है। इसका मतलब है कि इसमें दिशा और परिमाण दोनों होते हैं।

(ii) **वेग (Velocity)**: किसी वस्तु के विस्थापन में परिवर्तन की दर को वेग कहते हैं। यह भी एक सदिश राशि है और इसकी दिशा विस्थापन की दिशा में होती है। इसका मात्रक मीटर प्रति सेकंड (m/s) होता है।

(iii) **त्वरण (Acceleration)**: किसी गतिमान वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं। यह भी एक सदिश राशि है और इसकी दिशा वेग में परिवर्तन की दिशा में होती है। इसका मात्रक मीटर प्रति सेकंड वर्ग (m/s²) होता है।

(iv) **चाल (Speed)**: एकांक समय में वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी को चाल कहते हैं। चाल एक अदिश राशि है, यानी इसमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं। इसका मात्रक M.K.S. पद्धति में मीटर प्रति सेकंड (m/s) होता है।

(v) **औसत वेग (Average Velocity)**: किसी वस्तु के कुल विस्थापन और उस विस्थापन को पूरा करने में लगे कुल समय के अनुपात को औसत वेग कहते हैं। यह एक सदिश राशि है, जिसकी दिशा वस्तु की गति की दिशा में होती है।

(vi) **तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Velocity)**: किसी खास पल पर वस्तु के वेग को तात्क्षणिक वेग कहते हैं। यह उस समय पर वस्तु की स्थिति में बदलाव की दर होती है। सामान्य भाषा में, 'वेग' का मतलब अक्सर तात्क्षणिक वेग ही होता है।

(vii) **औसत त्वरण (Average Acceleration)**: किसी वस्तु के वेग में कुल परिवर्तन और उस परिवर्तन में लगे कुल समय के अनुपात को औसत त्वरण कहते हैं।

(viii) **तात्क्षणिक त्वरण (Instantaneous Acceleration)**: किसी खास पल या क्षण पर वस्तु के त्वरण को तात्क्षणिक त्वरण कहते हैं। यह उस समय पर वेग में बदलाव की दर होती है।
In simple words: ये सभी शब्द बताते हैं कि कोई चीज कैसे चलती है और उसकी गति में कितना बदलाव आता है। विस्थापन बताता है कि आप अपनी जगह से कितना दूर गए, वेग बताता है कितनी तेज़ी से और किस दिशा में गए, और त्वरण बताता है कि आपकी तेज़ी कितनी जल्दी बदल रही है। चाल सिर्फ तेज़ी बताती है, दिशा नहीं।

🎯 Exam Tip: विस्थापन और वेग सदिश राशियाँ हैं, जबकि दूरी और चाल अदिश राशियाँ हैं। इन परिभाषाओं को याद रखें और उनके बीच के अंतर को समझें, खासकर कि कब दिशा मायने रखती है।

 

प्रश्न 3. आलेखीय विधि द्वारा गति के समीकरणों की व्युत्पत्ति कीजिए।
Answer: हम आलेखीय विधि (ग्राफिकल मेथड) का उपयोग करके एकसमान त्वरित गति के समीकरणों को प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए हम वेग-समय ग्राफ का अध्ययन करते हैं।

x-अक्ष y-अक्ष समय वेग v (मूल बिन्दु) u v t P O Q R v-u समयान्तराल \(t=0\) से \(t\) प्रारम्भिक वेग u समय पश्चात् वेग v
उपरोक्त चित्र वेग-समय ग्राफ को दर्शाता है जहाँ: * O से P तक की रेखा वस्तु का प्रारंभिक वेग (u) दिखाती है। * Q पर वस्तु का अंतिम वेग (v) है। * O से R तक का समय 't' है। * लाइन PQ गतिमान वस्तु के वेग में परिवर्तन को दर्शाती है। **पहला समीकरण (\(v = u + at\))**: ग्राफ में, त्वरण (a) वेग-समय ग्राफ का ढाल (slope) होता है। ढाल \( = \frac{\text{वेग में परिवर्तन}}{\text{समय में परिवर्तन}} = \frac{RQ}{PR} \) यहां, \( RQ = v - u \) और \( PR = t \)। तो, \( a = \frac{v-u}{t} \)
\( \implies \) \( at = v - u \)
\( \implies \) \( v = u + at \) यह गति का पहला समीकरण है। **दूसरा समीकरण (\(x = ut + \frac{1}{2}at^2\))**: वेग-समय ग्राफ का क्षेत्रफल वस्तु द्वारा तय की गई दूरी (विस्थापन) को दर्शाता है। दूरी \(x = \) आकृति OPRQ का क्षेत्रफल
आकृति OPRQ एक समलंब चतुर्भुज है, जिसे एक आयत (OPRS) और एक त्रिभुज (PRQ) में बांटा जा सकता है।
\(x = \) आयत OPRS का क्षेत्रफल \( + \) त्रिभुज PRQ का क्षेत्रफल
आयत का क्षेत्रफल \( = \text{लंबाई} \times \text{चौड़ाई} = OS \times OP = t \times u = ut \)
त्रिभुज का क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} \times \text{आधार} \times \text{ऊँचाई} = \frac{1}{2} \times PR \times RQ \)
हमें पता है कि \( PR = t \) और \( RQ = v - u \)। पहले समीकरण से, \( v - u = at \)। तो, \( RQ = at \)।
त्रिभुज का क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} \times t \times at = \frac{1}{2}at^2 \)
इसलिए, कुल विस्थापन \( x = ut + \frac{1}{2}at^2 \)
यह गति का दूसरा समीकरण है। **तीसरा समीकरण (\(v^2 = u^2 + 2ax\))**: तीसरा समीकरण प्राप्त करने के लिए, हम वेग-समय ग्राफ के नीचे के पूरे समलंब चतुर्भुज OPRQ का क्षेत्रफल निकालते हैं।
समलंब का क्षेत्रफल \( = \frac{1}{2} \times (\text{समांतर भुजाओं का योग}) \times \text{उनके बीच की दूरी} \)
\( x = \frac{1}{2} \times (OP + RQ) \times OR \)
यहां, \( OP = u \), \( RQ = v \), और \( OR = t \)।
\( x = \frac{1}{2} \times (u + v) \times t \)
पहले समीकरण से, \( t = \frac{v-u}{a} \)। इस मान को क्षेत्रफल के सूत्र में रखने पर:
\( x = \frac{1}{2} \times (u + v) \times \left( \frac{v-u}{a} \right) \)
\( x = \frac{(v+u)(v-u)}{2a} \)
\( x = \frac{v^2 - u^2}{2a} \)

\( \implies \) \( 2ax = v^2 - u^2 \)
\( \implies \) \( v^2 = u^2 + 2ax \)
यह गति का तीसरा समीकरण है। यह समीकरण हमें बताता है कि वस्तु की अंतिम गति कितनी होगी, जब वह एक निश्चित दूरी तय करती है और उसका वेग बदलता है।
In simple words: ग्राफ बनाकर गति के नियम समझना आसान है। वेग-समय ग्राफ की ढाल से त्वरण मिलता है, और ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल हमें बताता है कि वस्तु ने कितनी दूरी तय की। इस तरह, हम गति के तीनों मुख्य समीकरणों को ग्राफ की मदद से आसानी से निकाल सकते हैं।

🎯 Exam Tip: ग्राफिकल विधि से समीकरणों को व्युत्पन्न करते समय, वेग-समय ग्राफ को स्पष्ट रूप से बनाएं और ढाल व क्षेत्रफल की अवधारणाओं का सही उपयोग करें। प्रत्येक समीकरण को निकालने के लिए अलग-अलग चरणों को ठीक से दर्शाएं।

 

प्रश्न 4. सिद्ध कीजिए कि प्रक्षेप्य की गति का पथ परवलय होता है।
Answer: **प्रक्षेप्य का पथ (Path of a Projectile)**
जब किसी वस्तु को क्षैतिज से \( \theta \) कोण पर प्रारंभिक वेग \( \vec{u} \) से फेंका जाता है, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है, तो इसके वेग के क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटक निम्न प्रकार होंगे:
क्षैतिज घटक \( u_x = u \cos \theta \) .....(1)
ऊर्ध्वाधर घटक \( u_y = u \sin \theta \) .....(2)
प्रक्षेप्य पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल नीचे की ओर काम करता है। इस वजह से प्रक्षेप्य के त्वरण के क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटक इस प्रकार होते हैं:
क्षैतिज त्वरण \( a_x = 0 \)
ऊर्ध्वाधर त्वरण \( a_y = -g \) (माइनस g क्योंकि गुरुत्वाकर्षण नीचे की ओर काम करता है, और हम ऊपर की दिशा को धनात्मक मान रहे हैं)
यदि हम वस्तु के फेंकने वाले बिंदु को मूल बिंदु (0,0) मानें, तो किसी समय 't' पर प्रक्षेप्य के निर्देशांक (x, y) को गति के दूसरे समीकरण \( s = ut + \frac{1}{2}at^2 \) का उपयोग करके ज्ञात किया जा सकता है।
**क्षैतिज दिशा में (x-निर्देशांक):**
\( x = u_x t + \frac{1}{2} a_x t^2 \)
चूंकि \( a_x = 0 \), तो \( x = u_x t \)

\( \implies \) \( x = (u \cos \theta) t \) .....(A)
इससे \( t = \frac{x}{u \cos \theta} \) .....(B)
**ऊर्ध्वाधर दिशा में (y-निर्देशांक):**
\( y = u_y t + \frac{1}{2} a_y t^2 \)
चूंकि \( a_y = -g \), तो \( y = u_y t - \frac{1}{2} g t^2 \)

\( \implies \) \( y = (u \sin \theta) t - \frac{1}{2} g t^2 \) .....(C)
अब, समीकरण (B) से 't' का मान समीकरण (C) में रखते हैं:
\( y = (u \sin \theta) \left( \frac{x}{u \cos \theta} \right) - \frac{1}{2} g \left( \frac{x}{u \cos \theta} \right)^2 \)
\( y = x \frac{\sin \theta}{\cos \theta} - \frac{1}{2} g \frac{x^2}{u^2 \cos^2 \theta} \)
\( y = (\tan \theta) x - \left( \frac{g}{2 u^2 \cos^2 \theta} \right) x^2 \) .....(3)
यह समीकरण \( y = Ax - Bx^2 \) के रूप का है, जो एक परवलय (parabola) का समीकरण होता है। यहां \( A = \tan \theta \) और \( B = \frac{g}{2 u^2 \cos^2 \theta} \) स्थिर मान हैं।
अतः, यह सिद्ध होता है कि प्रक्षेप्य की गति का पथ हमेशा परवलयाकार होता है। इसका मतलब है कि हवा में फेंकी गई वस्तु एक घुमावदार रास्ता बनाती है, जो एक परवलय जैसा दिखता है। यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो बताता है कि गुरुत्वाकर्षण के तहत वस्तुएँ कैसे चलती हैं।
In simple words: जब किसी चीज को हवा में फेंका जाता है, तो वह सीधा नहीं जाती, बल्कि एक घुमावदार रास्ता बनाती है। यह घुमावदार रास्ता एक परवलय जैसा दिखता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल उसे लगातार नीचे खींचता है, जबकि उसकी अपनी गति उसे आगे ले जाती है। इन दोनों का असर मिलकर उसे परवलय जैसा रास्ता देता है।

🎯 Exam Tip: प्रक्षेप्य गति के पथ को परवलयाकार सिद्ध करते समय, क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर गतियों को अलग-अलग विश्लेषित करें। समय के मान को प्रतिस्थापित करके अंतिम समीकरण \( y = (\tan \theta) x - \left( \frac{g}{2 u^2 \cos^2 \theta} \right) x^2 \) प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, जो परवलय के सामान्य समीकरण से मेल खाता है।

 

प्रश्न 5. प्रक्षेप्य की गति हेतु उड्डयन काल (T), प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई (H) व प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास (R) हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer: **प्रक्षेप्य का उड्डयन काल (Time of Flight of Projectile)**
उड्डयन काल (T) वह कुल समय है जिसके लिए प्रक्षेप्य हवा में रहता है। यह समय उतना ही होता है जितना प्रक्षेप्य को अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने में लगता है, और फिर उतना ही समय उसे वापस जमीन पर आने में लगता है।
अधिकतम ऊँचाई पर पहुँचने पर, प्रक्षेप्य के वेग का ऊर्ध्वाधर घटक (\(v_y\)) शून्य हो जाता है। गति के पहले समीकरण (\(v_y = u_y + a_y t\)) का उपयोग करते हुए:
\( u_y = u \sin \theta \) और \( a_y = -g \)
जब \( v_y = 0 \) और समय \( t = t_1 \) हो, तो:
\( 0 = u \sin \theta - g t_1 \)

\( \implies \) \( g t_1 = u \sin \theta \)

\( \implies \) \( t_1 = \frac{u \sin \theta}{g} \)
कुल उड्डयन काल \( T = 2 t_1 \)

\( \implies \) \( T = \frac{2u \sin \theta}{g} \) .....(A)
यह प्रक्षेप्य का उड्डयन काल है। **प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई (Maximum Height Attained by a Projectile)**
अधिकतम ऊँचाई (H) वह सबसे ऊँचाई है जिस तक प्रक्षेप्य पहुँचता है। इस बिंदु पर ऊर्ध्वाधर वेग शून्य होता है। गति के तीसरे समीकरण (\(v_y^2 = u_y^2 + 2 a_y H\)) का उपयोग करते हुए:
\( v_y = 0 \), \( u_y = u \sin \theta \) और \( a_y = -g \)
\( 0^2 = (u \sin \theta)^2 + 2(-g)H \)
\( 0 = u^2 \sin^2 \theta - 2gH \)

\( \implies \) \( 2gH = u^2 \sin^2 \theta \)

\( \implies \) \( H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g} \) .....(B)
यह प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई है। अधिकतम ऊँचाई तब मिलती है जब \( \theta = 90^\circ \) हो, क्योंकि \( \sin^2 90^\circ = 1 \)। **प्रक्षेप्य की परास (Range of Projectile)**
प्रक्षेप्य की परास (R) वह अधिकतम क्षैतिज दूरी है जो प्रक्षेप्य अपने प्रारंभिक बिंदु से अंतिम बिंदु तक तय करता है, जब वह उसी तल पर वापस आता है। क्षैतिज गति में कोई त्वरण नहीं होता है (\(a_x = 0\))।
क्षैतिज दूरी \( R = u_x \times T \)
\( u_x = u \cos \theta \) और \( T = \frac{2u \sin \theta}{g} \)
\( R = (u \cos \theta) \left( \frac{2u \sin \theta}{g} \right) \)
\( R = \frac{u^2 (2 \sin \theta \cos \theta)}{g} \)
त्रिकोणमितीय पहचान \( 2 \sin \theta \cos \theta = \sin(2\theta) \) का उपयोग करते हुए:

\( \implies \) \( R = \frac{u^2 \sin(2\theta)}{g} \) .....(C)
यह प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास है। अधिकतम परास तब मिलती है जब \( \sin(2\theta) = 1 \) होता है, यानी \( 2\theta = 90^\circ \) या \( \theta = 45^\circ \)।
तब अधिकतम परास \( R_{max} = \frac{u^2}{g} \) होती है। इस कोण पर प्रक्षेप्य सबसे दूर तक जाता है।
In simple words: उड्डयन काल बताता है कि कोई चीज़ हवा में कितनी देर तक रहती है। अधिकतम ऊँचाई बताती है कि वह कितनी ऊपर तक जाती है। और परास बताती है कि वह सीधी रेखा में कितनी दूर तक जाती है। ये तीनों सूत्र बताते हैं कि किसी फेंकी गई चीज़ की गति कैसे काम करती है, खासकर गुरुत्वाकर्षण के कारण।

🎯 Exam Tip: उड्डयन काल, अधिकतम ऊँचाई और परास के व्यंजक प्राप्त करते समय, क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटकों को अलग-अलग विश्लेषित करें। प्रत्येक समीकरण को सही ढंग से उपयोग करें और त्रिकोणमितीय पहचानों को याद रखें, जैसे \( \sin(2\theta) = 2 \sin \theta \cos \theta \)।

 

प्रश्न 6. द्विविमीय गति हेतु कण के विस्थापन, वेग एवं त्वरण हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer: **द्विविमीय गति में कण का विस्थापन, वेग एवं त्वरण और उनके सदिश रूप (Displacement, Velocity and Acceleration of a particle in two dimensional motion and their Vector representation)**
**विस्थापन (Displacement)**:
मान लें कि कोई कण समय \(t_1\) पर स्थिति A पर है और किसी दूसरे समय \(t_2\) पर स्थिति B पर है। इन समयों पर कण के स्थिति सदिश (position vectors) क्रमशः \( \overrightarrow{r_1} = \overrightarrow{OA} \) और \( \overrightarrow{r_2} = \overrightarrow{OB} \) हैं।
समय अंतराल (\(t_2 - t_1\)) में कण का विस्थापन बिंदु A से बिंदु B तक होता है। इस विस्थापन को सदिश \( \overrightarrow{\Delta r} = \overrightarrow{r_2} - \overrightarrow{r_1} \) से दिखाते हैं। इसे विस्थापन सदिश कहते हैं।
यदि कण का प्रारंभिक स्थान \( (x_1, y_1) \) और अंतिम स्थान \( (x_2, y_2) \) हो, तो विस्थापन सदिश होगा:
\( \overrightarrow{\Delta r} = (x_2 - x_1) \hat{i} + (y_2 - y_1) \hat{j} \)
यहां, \( \hat{i} \) x-अक्ष की दिशा में एकांक सदिश है और \( \hat{j} \) y-अक्ष की दिशा में एकांक सदिश है। विस्थापन का परिमाण \( |\overrightarrow{\Delta r}| = \sqrt{(x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2} \) होता है। **वेग (Velocity)**:
**औसत वेग (Average Velocity)**: किसी कण का औसत वेग उसके कुल विस्थापन और उस विस्थापन को पूरा करने में लगे कुल समय के अनुपात को कहते हैं।
\( \overrightarrow{v}_{av} = \frac{\overrightarrow{\Delta r}}{\Delta t} = \frac{\overrightarrow{r_2} - \overrightarrow{r_1}}{t_2 - t_1} \)
औसत वेग एक सदिश राशि है जिसकी दिशा विस्थापन की दिशा में होती है।
**तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Velocity)**: किसी खास क्षण पर कण के वेग को तात्क्षणिक वेग कहते हैं। यह समय के साथ विस्थापन में परिवर्तन की दर होती है।
\( \overrightarrow{v} = \lim_{\Delta t \to 0} \frac{\overrightarrow{\Delta r}}{\Delta t} = \frac{d\overrightarrow{r}}{dt} \)
कार्तीय निर्देशांकों में, तात्क्षणिक वेग के घटक इस प्रकार होते हैं:
\( \overrightarrow{v} = v_x \hat{i} + v_y \hat{j} \)
जहाँ \( v_x = \frac{dx}{dt} \) और \( v_y = \frac{dy}{dt} \) हैं। तात्क्षणिक वेग की दिशा कण के पथ पर डाली गई स्पर्श रेखा (tangent) के अनुदिश होती है। **त्वरण (Acceleration)**:
**औसत त्वरण (Average Acceleration)**: किसी कण के औसत त्वरण को उसके वेग में कुल परिवर्तन और उस परिवर्तन में लगे कुल समय के अनुपात को कहते हैं।
\( \overrightarrow{a}_{av} = \frac{\overrightarrow{\Delta v}}{\Delta t} = \frac{\overrightarrow{v_2} - \overrightarrow{v_1}}{t_2 - t_1} \)
**तात्क्षणिक त्वरण (Instantaneous Acceleration)**: किसी खास क्षण पर कण के त्वरण को तात्क्षणिक त्वरण कहते हैं। यह समय के साथ वेग में परिवर्तन की दर होती है।
\( \overrightarrow{a} = \lim_{\Delta t \to 0} \frac{\overrightarrow{\Delta v}}{\Delta t} = \frac{d\overrightarrow{v}}{dt} \)
कार्तीय निर्देशांकों में, तात्क्षणिक त्वरण के घटक इस प्रकार होते हैं:
\( \overrightarrow{a} = a_x \hat{i} + a_y \hat{j} \)
जहाँ \( a_x = \frac{dv_x}{dt} = \frac{d^2 x}{dt^2} \) और \( a_y = \frac{dv_y}{dt} = \frac{d^2 y}{dt^2} \) हैं। इससे यह पता चलता है कि द्विविमीय गति को दो एकविमीय गतियों के संयोजन के रूप में माना जा सकता है, जो एक-दूसरे के लंबवत हों।
In simple words: द्विविमीय गति में, कोई वस्तु दो दिशाओं में एक साथ चलती है। विस्थापन बताता है कि वह अपनी जगह से कितनी दूर और किस दिशा में गई। वेग बताता है कि वह कितनी तेज़ी से और किस दिशा में चल रही है, और त्वरण बताता है कि उसकी चाल या दिशा कितनी तेज़ी से बदल रही है। इन सभी को सदिश के रूप में दिखाते हैं क्योंकि दिशा बहुत ज़रूरी होती है।

🎯 Exam Tip: द्विविमीय गति में विस्थापन, वेग और त्वरण को हमेशा सदिश राशियों के रूप में व्यक्त करें। अक्षों के घटकों (\(\hat{i}\) और \(\hat{j}\)) का उपयोग करें और समय के सापेक्ष परिवर्तन की दर के रूप में इन अवधारणाओं को परिभाषित करें।

 

प्रश्न 1. जयपुर से कार द्वारा अजमेर आने में 1.5h लगता है। यदि कार का माध्य वेग 80 km/h हो. तो जयपुर से अजमेर की दूरी कितनी है?
Answer: हमें दिया गया है:
समय (\(t\)) = 1.5 घंटे
माध्य वेग (Average velocity) = 80 किलोमीटर प्रति घंटा (km/h)
दूरी निकालने का सूत्र है:
दूरी = माध्य वेग \( \times \) समय
दूरी \( = 80 \, \text{km/h} \times 1.5 \, \text{h} \)
दूरी \( = 120 \, \text{km} \)
इसलिए, जयपुर से अजमेर की दूरी 120 किलोमीटर है। यह दर्शाता है कि एक निश्चित रफ्तार पर चलने वाली गाड़ी कितनी दूरी तय कर सकती है।
In simple words: एक कार जयपुर से अजमेर 1.5 घंटे में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार से जाती है। कुल दूरी निकालने के लिए हमने रफ्तार को समय से गुणा किया, जिससे हमें 120 किलोमीटर की दूरी मिली।

🎯 Exam Tip: दूरी, चाल और समय के सवालों को हल करते समय, सभी इकाइयों (units) को एक जैसा रखें (जैसे, घंटे और किलोमीटर प्रति घंटा)। सुनिश्चित करें कि आप सही सूत्र का उपयोग करें: दूरी = चाल \( \times \) समय।

 

प्रश्न 2. एक बस की चाल 25 km/h से बढ़कर 5 s में 70 km/h हो जाती है। बस का माध्य त्वरण ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें दिया गया है:
प्रारंभिक चाल (\(u\)) = 25 किलोमीटर प्रति घंटा (km/h)
अंतिम चाल (\(v\)) = 70 किलोमीटर प्रति घंटा (km/h)
समय (\(t\)) = 5 सेकंड (s)
पहले, हमें सभी चालों को मीटर प्रति सेकंड (m/s) में बदलना होगा, क्योंकि समय सेकंड में है और त्वरण की इकाई मीटर प्रति सेकंड वर्ग (m/s²) होती है। हम जानते हैं कि 1 km/h = \( \frac{5}{18} \) m/s।
प्रारंभिक चाल \( u = 25 \, \text{km/h} = 25 \times \frac{5}{18} \, \text{m/s} = \frac{125}{18} \, \text{m/s} \approx 6.94 \, \text{m/s} \)
अंतिम चाल \( v = 70 \, \text{km/h} = 70 \times \frac{5}{18} \, \text{m/s} = \frac{350}{18} \, \text{m/s} = \frac{175}{9} \, \text{m/s} \approx 19.44 \, \text{m/s} \)
माध्य त्वरण (\(a\)) का सूत्र है:
\( a = \frac{v - u}{t} \)
\( a = \frac{\frac{175}{9} - \frac{125}{18}}{5} \)
\( a = \frac{\frac{350 - 125}{18}}{5} \)
\( a = \frac{\frac{225}{18}}{5} \)
\( a = \frac{225}{18 \times 5} = \frac{45}{18} = \frac{5}{2} = 2.5 \, \text{m/s}^2 \)
इसलिए, बस का माध्य त्वरण 2.5 मीटर प्रति सेकंड वर्ग है। इसका मतलब है कि हर सेकंड में बस की रफ्तार 2.5 मीटर प्रति सेकंड बढ़ रही है।
In simple words: एक बस की रफ्तार 25 किलोमीटर प्रति घंटे से 5 सेकंड में 70 किलोमीटर प्रति घंटे हो जाती है। हमने रफ्तार को मीटर प्रति सेकंड में बदला और त्वरण के सूत्र का उपयोग करके पाया कि बस का औसत त्वरण 2.5 मीटर प्रति सेकंड वर्ग है।

🎯 Exam Tip: त्वरण के सवालों को हल करते समय, हमेशा सुनिश्चित करें कि सभी भौतिक राशियाँ (चाल, समय) एक ही इकाई प्रणाली (जैसे SI प्रणाली - मीटर, सेकंड) में हों। यदि आवश्यक हो तो इकाइयों को बदलें।

 

प्रश्न 3. कार A व B, 100 km की यात्रा पर एक साथ चलती है। कार A एकसमान चाल 40 km/h से चलती है। कार B 60 km/h की चाल से चलती है। किन्तु प्रथम आधा घण्टा के पश्चात् खराबी के कारण 15 min. रुक जाती है तथा पुनः चलने पर उसकी चाल 50 km/h रह जाती है। उक्त यात्रा हेतु
(i) उक्त यात्रा का चाल-समय वक्र बनाओ।
(ii) बताइये कौनसी कार कितने समय पहले यात्रा समाप्त करेगी।
Answer:
(i) **चाल-समय वक्र (Speed-Time Graph)**:
**कार A के लिए:**
* कार A लगातार 40 km/h की चाल से 100 km की दूरी तय करती है।
* समय \( = \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} = \frac{100 \, \text{km}}{40 \, \text{km/h}} = 2.5 \, \text{घंटे} \)
* ग्राफ में, यह 0 से 2.5 घंटे तक 40 km/h पर एक सीधी क्षैतिज रेखा होगी।
**कार B के लिए:**
* **पहला चरण (0 से 0.5 घंटे):** कार B 60 km/h की चाल से चलती है।
* 0.5 घंटे में तय की गई दूरी \( = 60 \, \text{km/h} \times 0.5 \, \text{h} = 30 \, \text{km} \)
* ग्राफ में, यह 0 से 0.5 घंटे तक 60 km/h पर एक सीधी क्षैतिज रेखा होगी।
* **दूसरा चरण (खराबी का समय):** कार B 15 मिनट (0.25 घंटे) के लिए रुक जाती है। चाल = 0 km/h।
* समय 0.5 घंटे से 0.5 + 0.25 = 0.75 घंटे तक।
* ग्राफ में, यह 0.5 घंटे से 0.75 घंटे तक 0 km/h पर एक सीधी क्षैतिज रेखा होगी (x-अक्ष पर)।
* **तीसरा चरण (बची हुई दूरी):** बची हुई दूरी \( = 100 \, \text{km} - 30 \, \text{km} = 70 \, \text{km} \)
* इस चरण में कार B की चाल 50 km/h है।
* इस दूरी को तय करने में लगा समय \( = \frac{70 \, \text{km}}{50 \, \text{km/h}} = 1.4 \, \text{घंटे} \)
* कुल समय 0.75 घंटे + 1.4 घंटे = 2.15 घंटे।
* ग्राफ में, यह 0.75 घंटे से 2.15 घंटे तक 50 km/h पर एक सीधी क्षैतिज रेखा होगी। समय (घंटे) चाल (km/h) 0 20 40 60 0.5 0.75 1.0 1.5 2.0 2.15 2.5 कार A कार B
(ii) **कौन सी कार पहले यात्रा समाप्त करेगी?**
**कार A का कुल समय:**
कार A 100 km की दूरी 40 km/h की एकसमान चाल से तय करती है।
समय \( = \frac{100 \, \text{km}}{40 \, \text{km/h}} = 2.5 \, \text{घंटे} \)
\( 2.5 \, \text{घंटे} = 2 \, \text{घंटे} \times 60 \, \text{मिनट/घंटा} + 0.5 \, \text{घंटे} \times 60 \, \text{मिनट/घंटा} = 120 \, \text{मिनट} + 30 \, \text{मिनट} = 150 \, \text{मिनट} \)
**कार B का कुल समय:**
* **चरण 1:** 30 मिनट (0.5 घंटे) तक 60 km/h की चाल से। तय की गई दूरी = 30 km।
* **चरण 2:** 15 मिनट के लिए रुकना (चाल = 0 km/h)।
* **चरण 3:** बची हुई 70 km दूरी 50 km/h की चाल से तय करना।
इस चरण में लगा समय \( = \frac{70 \, \text{km}}{50 \, \text{km/h}} = 1.4 \, \text{घंटे} \)
\( 1.4 \, \text{घंटे} = 1 \, \text{घंटा} \times 60 \, \text{मिनट/घंटा} + 0.4 \, \text{घंटे} \times 60 \, \text{मिनट/घंटा} = 60 \, \text{मिनट} + 24 \, \text{मिनट} = 84 \, \text{मिनट} \)
कुल समय कार B के लिए \( = 30 \, \text{मिनट} + 15 \, \text{मिनट} + 84 \, \text{मिनट} = 129 \, \text{मिनट} \)

**निष्कर्ष:**
कार A का कुल समय = 150 मिनट
कार B का कुल समय = 129 मिनट
कार B, कार A से \( 150 - 129 = 21 \) मिनट पहले यात्रा समाप्त करेगी। इससे पता चलता है कि रास्ते में रुकने के बावजूद, कार B की कुल गतिशीलता उसे तेज़ी से मंजिल तक पहुँचाती है।
In simple words: हमने दो कारों की 100 किलोमीटर की यात्रा का हिसाब लगाया। कार A लगातार 40 किमी/घंटा की रफ्तार से चलती है और 2.5 घंटे लेती है। कार B पहले तेज़ी से चलती है, फिर रुकती है, और फिर थोड़ी कम तेज़ी से चलती है, लेकिन फिर भी अपनी यात्रा 2.15 घंटे में पूरी कर लेती है। इसका मतलब है कि कार B, 21 मिनट पहले अपनी मंजिल पर पहुँच जाती है।

🎯 Exam Tip: चाल-समय ग्राफ बनाते समय, अलग-अलग चरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं और हर चरण के लिए सही चाल और समय का उपयोग करें। समय की गणना करते समय, सभी इकाइयों को मिनट या घंटे में बदलकर कुल समय निकालें, ताकि तुलना आसान हो।

 

प्रश्न 4. एक स्थिर बल के प्रभाव में एक दिशा में गतिमान कण का विस्थापन निम्नानुसार दिया जाता है।
\( t=\sqrt{x}+3 \) जहाँ x विस्थापन (मीटर में) व t समय (सेकण्ड में) है। जब इसका वेग शून्य हो तो कण का विस्थापन ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें दिया गया विस्थापन समीकरण है:
\( t = \sqrt{x} + 3 \)
हमें वह विस्थापन (\(x\)) ज्ञात करना है जब कण का वेग (\(v\)) शून्य हो।
पहले, समीकरण को \(x\) के लिए हल करते हैं ताकि \(x\) को \(t\) के फलन के रूप में प्राप्त कर सकें:
\( \sqrt{x} = t - 3 \)
दोनों ओर वर्ग करने पर:
\( x = (t - 3)^2 \)
\( x = t^2 - 6t + 9 \) .....(1)
अब, वेग (\(v\)) ज्ञात करने के लिए, हमें विस्थापन (\(x\)) का समय (\(t\)) के सापेक्ष अवकलन करना होगा:
\( v = \frac{dx}{dt} = \frac{d}{dt}(t^2 - 6t + 9) \)
\( v = 2t - 6 \)
हमें वह समय ज्ञात करना है जब वेग शून्य हो। इसलिए, \( v = 0 \) रखते हैं:
\( 0 = 2t - 6 \)
\( 2t = 6 \)

\( \implies \) \( t = 3 \, \text{सेकंड} \)
अब, इस समय (\(t = 3\) सेकंड) के मान को समीकरण (1) में रखकर विस्थापन (\(x\)) ज्ञात करते हैं:
\( x = (3)^2 - 6(3) + 9 \)
\( x = 9 - 18 + 9 \)
\( x = 0 \, \text{मीटर} \)
इसलिए, जब कण का वेग शून्य होगा, तब उसका विस्थापन 0 मीटर होगा। इसका मतलब है कि इस विशेष पल पर कण अपने शुरुआती बिंदु पर वापस आ जाता है या उसकी गति रुक जाती है।
In simple words: हमें एक सूत्र दिया गया है जो बताता है कि समय के साथ किसी चीज़ की जगह कैसे बदलती है। हमने उस सूत्र का इस्तेमाल करके पता लगाया कि वह चीज़ कब रुकती है (जब उसकी रफ्तार ज़ीरो होती है)। जब रफ्तार ज़ीरो होती है, तो वह चीज़ अपनी शुरुआती जगह पर ही होती है, यानी उसका विस्थापन 0 मीटर है।

🎯 Exam Tip: वेग ज्ञात करने के लिए विस्थापन का समय के सापेक्ष अवकलन करना और त्वरण ज्ञात करने के लिए वेग का अवकलन करना याद रखें। जब वेग शून्य हो, तो समय का मान निकालें और उसे वापस विस्थापन समीकरण में रखकर अंतिम विस्थापन ज्ञात करें।

 

प्रश्न 5. एक 200 m ऊँची मीनार से एक पिण्ड नीचे गिराया जाता है। उसी समय एक दूसरा पिण्ड ऊपर की ओर 50 m/s के वेग से फेंका जाता है। ज्ञात कीजिए कि वे दोनों कब और कहाँ मिलेंगे।
Answer: हमें दिया गया है:
मीनार की कुल ऊँचाई \( H = 200 \, \text{m} \)
ऊपर फेंके गए पिण्ड का प्रारंभिक वेग \( u_2 = 50 \, \text{m/s} \)
गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g = 9.8 \, \text{m/s}^2 \) (या 10 m/s\(^2\) यदि सवाल में दिया हो, लेकिन यहाँ 9.8 लेना बेहतर है)
मान लें कि दोनों पिण्ड 't' समय के बाद एक-दूसरे से मिलते हैं और वे मीनार के शीर्ष से 'h' दूरी पर मिलते हैं।
**नीचे गिराए गए पिण्ड के लिए (पहला पिण्ड):**
* प्रारंभिक वेग \( u_1 = 0 \, \text{m/s} \) (क्योंकि इसे गिराया गया है)
* त्वरण \( a = +g \) (नीचे की ओर गति)
* तय की गई दूरी \( s = h \)
गति के दूसरे समीकरण \( s = ut + \frac{1}{2}at^2 \) का उपयोग करते हुए:
\( h = 0 \cdot t + \frac{1}{2} g t^2 \)
\( h = \frac{1}{2} g t^2 \) .....(1)

**ऊपर फेंके गए पिण्ड के लिए (दूसरा पिण्ड):**
* प्रारंभिक वेग \( u_2 = 50 \, \text{m/s} \)
* त्वरण \( a = -g \) (ऊपर की ओर गति)
* तय की गई दूरी \( s = 200 - h \) (मीनार के नीचे से)
गति के दूसरे समीकरण \( s = ut + \frac{1}{2}at^2 \) का उपयोग करते हुए:
\( (200 - h) = 50 t + \frac{1}{2} (-g) t^2 \)
\( 200 - h = 50 t - \frac{1}{2} g t^2 \) .....(2)

अब समीकरण (1) और (2) को जोड़ते हैं:
\( h + (200 - h) = \left( \frac{1}{2} g t^2 \right) + \left( 50 t - \frac{1}{2} g t^2 \right) \)
\( 200 = 50 t \)

\( \implies \) \( t = \frac{200}{50} \)

\( \implies \) \( t = 4 \, \text{सेकंड} \)
इसलिए, वे दोनों 4 सेकंड के बाद मिलेंगे।
अब 't' के इस मान को समीकरण (1) में रखकर 'h' ज्ञात करते हैं:
\( h = \frac{1}{2} g t^2 \)
\( h = \frac{1}{2} \times 9.8 \times (4)^2 \)
\( h = \frac{1}{2} \times 9.8 \times 16 \)
\( h = 9.8 \times 8 \)
\( h = 78.4 \, \text{मीटर} \)
इसका मतलब है कि दोनों पिण्ड मीनार के शीर्ष से 78.4 मीटर नीचे मिलेंगे। यह दिखाता है कि कैसे दो चीजें, जो अलग-अलग दिशाओं में एक ही समय पर चलती हैं, गुरुत्वाकर्षण के तहत एक बिंदु पर मिल सकती हैं।
In simple words: एक मीनार से एक गेंद नीचे गिराई जाती है और उसी समय एक दूसरी गेंद ऊपर फेंकी जाती है। हमने हिसाब लगाया कि 4 सेकंड बाद वे दोनों मीनार के ऊपर से 78.4 मीटर नीचे आकर मिलेंगे। यह बताता है कि दोनों चीजें कितने समय बाद और कहाँ मिलती हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के सवालों को हल करते समय, ऊपर और नीचे की दिशाओं के लिए गुरुत्वाकर्षण त्वरण (\(g\)) के चिन्ह को सही ढंग से उपयोग करें। दोनों वस्तुओं के लिए गति के समीकरण लिखें और उन्हें हल करके मिलने का समय और स्थान ज्ञात करें।

 

प्रश्न 6. 100 g द्रव्यमान का एक पिण्ड विराम अवस्था से 490 cm नीचे गिरता है तथा रेत में 70 cm धंसकर स्थिर अवस्था प्राप्त कर लेता है। रेत द्वारा पिण्ड पर लगाया गया त्वरण ज्ञात करो। (g = 9.8 मीटर/सेकण्ड²)
Answer: हमें दिया गया है:
द्रव्यमान (\(m\)) = 100 g
गिरने की ऊँचाई (\(h\)) = 490 cm
रेत में धंसने की दूरी (\(s\)) = 70 cm
गुरुत्वाकर्षण त्वरण (\(g\)) = 9.8 m/s²
पहले, सभी इकाइयों को एक जैसी प्रणाली (SI या CGS) में बदलते हैं। यहाँ हम CGS प्रणाली का उपयोग कर सकते हैं क्योंकि \(g\) को \(980 \, \text{cm/s}^2\) में बदल सकते हैं।
\( g = 9.8 \, \text{m/s}^2 = 9.8 \times 100 \, \text{cm/s}^2 = 980 \, \text{cm/s}^2 \)
पिण्ड का प्रारंभिक वेग (विराम अवस्था से) \( u_1 = 0 \, \text{cm/s} \)
**पिण्ड के गिरने के चरण के लिए:**
पिण्ड 490 cm नीचे गिरता है। इस चरण के लिए अंतिम वेग (\(v\)) ज्ञात करते हैं, जो रेत से टकराने का वेग भी होगा।
गति के तीसरे समीकरण (\(v^2 = u_1^2 + 2gh\)) का उपयोग करते हुए:
\( v^2 = (0)^2 + 2 \times 980 \, \text{cm/s}^2 \times 490 \, \text{cm} \)
\( v^2 = 2 \times 980 \times 490 \)
\( v^2 = 960400 \)
\( v = \sqrt{960400} = 980 \, \text{cm/s} \)
यह वह वेग है जिससे पिण्ड रेत से टकराता है। **रेत में गति के चरण के लिए:**
अब पिण्ड रेत में धंसता है। इस चरण के लिए:
* प्रारंभिक वेग (\(u_2\)) = \(v = 980 \, \text{cm/s}\) (यह वेग रेत से टकराने का वेग है)
* अंतिम वेग (\(v_2\)) = \(0 \, \text{cm/s}\) (क्योंकि पिण्ड रेत में स्थिर हो जाता है)
* तय की गई दूरी (\(s\)) = \(70 \, \text{cm}\)
* रेत द्वारा लगाया गया त्वरण (\(a\)) ज्ञात करना है।
गति के तीसरे समीकरण (\(v_2^2 = u_2^2 + 2as\)) का उपयोग करते हुए:
\( (0)^2 = (980)^2 + 2 \times a \times 70 \)
\( 0 = 980 \times 980 + 140a \)
\( -140a = 980 \times 980 \)
\( a = - \frac{980 \times 980}{140} \)
\( a = - \frac{980 \times 7}{1} \) (क्योंकि \( \frac{980}{140} = 7 \))
\( a = -6860 \, \text{cm/s}^2 \)
त्वरण ऋणात्मक है, जिसका मतलब है कि यह मंदन (retardation) है, क्योंकि पिण्ड रुक रहा है।
इसे मीटर प्रति सेकंड वर्ग में बदलने पर:
\( a = -6860 \, \text{cm/s}^2 = - \frac{6860}{100} \, \text{m/s}^2 = -68.60 \, \text{m/s}^2 \)
इसलिए, रेत द्वारा पिण्ड पर लगाया गया त्वरण \( -68.60 \, \text{m/s}^2 \) है। यह दर्शाता है कि रेत पिण्ड की गति को बहुत तेज़ी से कम करती है, जिससे वह रुक जाता है।
In simple words: एक 100 ग्राम की चीज़ 490 सेंटीमीटर की ऊँचाई से गिरती है और 70 सेंटीमीटर रेत में धंसकर रुक जाती है। हमने पहले पता लगाया कि चीज़ रेत से किस रफ्तार से टकराई। फिर, उस रफ्तार और रेत में धंसने की दूरी का इस्तेमाल करके, हमने रेत द्वारा लगाई गई रुकावट (मंदन) को 68.60 मीटर प्रति सेकंड वर्ग पाया।

🎯 Exam Tip: इस सवाल में दो अलग-अलग चरण हैं: गिरने का चरण और रेत में धंसने का चरण। प्रत्येक चरण के लिए गति के समीकरणों को अलग-अलग उपयोग करें। ध्यान रखें कि पहले चरण का अंतिम वेग दूसरे चरण का प्रारंभिक वेग बन जाता है। मंदन के लिए त्वरण का मान ऋणात्मक होगा।

 

प्रश्न 7. एक व्यक्ति उसके घर से सीधे सड़क पर 5 km/h/ घण्टा की चाल से चलकर 2.5 km दूर उसके कार्यालय जाता है। तथा कार्यालय बन्द होने के कारण तत्काल 7.5 km/h की चाल से पुनः घर लौट आता है तो निम्न समयान्तरालों हेतु उसका औसत वेग तथा औसत चाल ज्ञात करो
(i) 0 से 30 min
(ii) 0 से 50 min
(iii) 0 से 40 min.
Answer: हमें दिया गया है:
घर से कार्यालय की दूरी = 2.5 km
कार्यालय जाते समय चाल = 5 km/h
कार्यालय से घर लौटते समय चाल = 7.5 km/h
पहले, व्यक्ति द्वारा कार्यालय पहुँचने और वापस आने में लगे समय की गणना करते हैं:
कार्यालय पहुँचने में लगा समय \( t_1 = \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} = \frac{2.5 \, \text{km}}{5 \, \text{km/h}} = 0.5 \, \text{घंटे} = 30 \, \text{मिनट} \)
घर लौटने में लगा समय \( t_2 = \frac{\text{दूरी}}{\text{चाल}} = \frac{2.5 \, \text{km}}{7.5 \, \text{km/h}} = \frac{1}{3} \, \text{घंटे} = \frac{1}{3} \times 60 \, \text{मिनट} = 20 \, \text{मिनट} \)
कुल यात्रा का समय \( = 30 \, \text{मिनट} + 20 \, \text{मिनट} = 50 \, \text{मिनट} \)
कुल दूरी तय की गई \( = 2.5 \, \text{km} + 2.5 \, \text{km} = 5 \, \text{km} \)
**विस्थापन की स्थिति:**
* 0 से 30 मिनट तक (जाते समय): विस्थापन 2.5 km (धनात्मक)
* 30 से 50 मिनट तक (लौटते समय): विस्थापन -2.5 km (ऋणात्मक)

(i) **समय अंतराल 0 से 30 मिनट के लिए:**
* यह सिर्फ कार्यालय जाते समय का अंतराल है।
* तय की गई दूरी = 2.5 km
* विस्थापन = 2.5 km
* समय = 30 मिनट = 0.5 घंटे
औसत चाल \( = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} = \frac{2.5 \, \text{km}}{0.5 \, \text{h}} = 5 \, \text{km/h} \)
औसत वेग \( = \frac{\text{कुल विस्थापन}}{\text{कुल समय}} = \frac{2.5 \, \text{km}}{0.5 \, \text{h}} = 5 \, \text{km/h} \)
इस समय अंतराल में औसत चाल और औसत वेग बराबर हैं क्योंकि गति एक ही दिशा में है। (ii) **समय अंतराल 0 से 50 मिनट के लिए:**
* यह पूरी यात्रा का अंतराल है, जिसमें व्यक्ति कार्यालय जाता है और वापस घर आ जाता है।
* कुल दूरी तय की गई = 2.5 km (जाते समय) + 2.5 km (लौटते समय) = 5 km
* कुल विस्थापन = 2.5 km (जाते समय) - 2.5 km (लौटते समय) = 0 km (क्योंकि वह शुरुआती बिंदु पर वापस आ गया)
* कुल समय = 50 मिनट = \( \frac{50}{60} \, \text{घंटे} = \frac{5}{6} \, \text{घंटे} \)
औसत चाल \( = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} = \frac{5 \, \text{km}}{\frac{5}{6} \, \text{h}} = 5 \times \frac{6}{5} = 6 \, \text{km/h} \)
औसत वेग \( = \frac{\text{कुल विस्थापन}}{\text{कुल समय}} = \frac{0 \, \text{km}}{\frac{5}{6} \, \text{h}} = 0 \, \text{km/h} \)
पूरी यात्रा के लिए औसत वेग शून्य है क्योंकि व्यक्ति अपने प्रारंभिक बिंदु पर वापस आ गया है, जबकि औसत चाल शून्य नहीं है। (iii) **समय अंतराल 0 से 40 मिनट के लिए:**
* इस अंतराल में व्यक्ति कार्यालय जाता है (30 मिनट) और फिर 40 - 30 = 10 मिनट के लिए घर की ओर वापस आता है।
* जाते समय दूरी = 2.5 km (विस्थापन = +2.5 km)
* लौटते समय दूरी (10 मिनट में) = चाल \( \times \) समय \( = 7.5 \, \text{km/h} \times \frac{10}{60} \, \text{h} = 7.5 \times \frac{1}{6} = 1.25 \, \text{km} \)
* लौटते समय विस्थापन = -1.25 km
* कुल दूरी = 2.5 km + 1.25 km = 3.75 km
* कुल विस्थापन = 2.5 km - 1.25 km = 1.25 km
* कुल समय = 40 मिनट = \( \frac{40}{60} \, \text{घंटे} = \frac{2}{3} \, \text{घंटे} \)
औसत चाल \( = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} = \frac{3.75 \, \text{km}}{\frac{2}{3} \, \text{h}} = \frac{3.75 \times 3}{2} = \frac{11.25}{2} = 5.625 \, \text{km/h} \)
औसत वेग \( = \frac{\text{कुल विस्थापन}}{\text{कुल समय}} = \frac{1.25 \, \text{km}}{\frac{2}{3} \, \text{h}} = \frac{1.25 \times 3}{2} = \frac{3.75}{2} = 1.875 \, \text{km/h} \)
इससे पता चलता है कि औसत चाल और औसत वेग समय अंतराल और वस्तु की गति की दिशा पर निर्भर करते हैं।
In simple words: एक व्यक्ति घर से ऑफिस 2.5 किलोमीटर दूर जाता है और फिर वापस आता है। हमने तीन अलग-अलग समयों के लिए उसकी औसत चाल (सिर्फ तेज़ी) और औसत वेग (तेज़ी और दिशा दोनों) निकाली। जब वह सिर्फ ऑफिस जाता है, तो चाल और वेग बराबर होते हैं। जब वह वापस घर आ जाता है, तो औसत वेग ज़ीरो हो जाता है क्योंकि वह अपनी शुरुआती जगह पर होता है, लेकिन औसत चाल ज़ीरो नहीं होती। बीच के समय में, दोनों के मान अलग-अलग होते हैं।

🎯 Exam Tip: औसत चाल और औसत वेग की गणना करते समय, दूरी और विस्थापन के बीच का अंतर याद रखें। विस्थापन एक सदिश राशि है और यह शुरुआती व अंतिम बिंदुओं पर निर्भर करता है, जबकि दूरी पथ की कुल लंबाई है। दिशा को धनात्मक और ऋणात्मक चिन्हों से दर्शाना सुनिश्चित करें।

 

प्रश्न 9. एक व्यक्ति पूर्व दिशा में 16 s में 18 m चलकर उत्तर की ओर मुड़ जाता है तथा अब उत्तर की ओर 5s में 5 m चलकर पुनः बायीं ओर मुड़कर 8 s में 6 m सीधा चलकर रुक जाता है। इस यात्रा के दौरान व्यक्ति की औसत चाल तथा औसत वेग ज्ञात करो।
Answer: हमें दिया गया है:
**पहला चरण:**
* दिशा: पूर्व
* दूरी: 18 m
* समय: 16 s
**दूसरा चरण:**
* दिशा: उत्तर
* दूरी: 5 m
* समय: 5 s
**तीसरा चरण:**
* दिशा: बायीं ओर (जो पश्चिम दिशा है, क्योंकि वह उत्तर से बाईं ओर मुड़ा)
* दूरी: 6 m
* समय: 8 s

**कुल दूरी और कुल समय:**
कुल दूरी (\(D\)) = 18 m + 5 m + 6 m = 29 m
कुल समय (\(T\)) = 16 s + 5 s + 8 s = 29 s

**औसत चाल (Average Speed):**
औसत चाल \( = \frac{\text{कुल दूरी}}{\text{कुल समय}} = \frac{29 \, \text{m}}{29 \, \text{s}} = 1 \, \text{m/s} \)

**कुल विस्थापन (Total Displacement) और औसत वेग (Average Velocity):**
विस्थापन एक सदिश राशि है, इसलिए हमें प्रत्येक चरण के विस्थापन घटकों को निकालना होगा। मान लें पूर्व x-अक्ष की धनात्मक दिशा है और उत्तर y-अक्ष की धनात्मक दिशा है।
* **चरण 1 (पूर्व में):** \( \overrightarrow{s_1} = 18 \hat{i} \, \text{m} \)
* **चरण 2 (उत्तर में):** \( \overrightarrow{s_2} = 5 \hat{j} \, \text{m} \)
* **चरण 3 (पश्चिम में):** \( \overrightarrow{s_3} = -6 \hat{i} \, \text{m} \) (पश्चिम दिशा x-अक्ष की ऋणात्मक दिशा है)
कुल विस्थापन (\( \overrightarrow{S} \)) = \( \overrightarrow{s_1} + \overrightarrow{s_2} + \overrightarrow{s_3} \)
\( \overrightarrow{S} = (18 \hat{i} + 5 \hat{j} - 6 \hat{i}) \, \text{m} \)
\( \overrightarrow{S} = (18 - 6) \hat{i} + 5 \hat{j} \, \text{m} \)
\( \overrightarrow{S} = 12 \hat{i} + 5 \hat{j} \, \text{m} \)
कुल विस्थापन का परिमाण \( |\overrightarrow{S}| = \sqrt{(12)^2 + (5)^2} \)
\( |\overrightarrow{S}| = \sqrt{144 + 25} = \sqrt{169} = 13 \, \text{m} \)

**औसत वेग (Average Velocity):**
औसत वेग \( = \frac{\text{कुल विस्थापन का परिमाण}}{\text{कुल समय}} = \frac{13 \, \text{m}}{29 \, \text{s}} \approx 0.448 \, \text{m/s} \)
या \( \frac{13}{29} \, \text{m/s} \)
इसलिए, व्यक्ति की औसत चाल 1 m/s है और औसत वेग लगभग 0.448 m/s है। यह बताता है कि दूरी और विस्थापन अलग-अलग हो सकते हैं, जिसके कारण चाल और वेग के मान भी भिन्न होते हैं।
In simple words: एक व्यक्ति पहले पूर्व में, फिर उत्तर में, और फिर पश्चिम में चलता है। कुल दूरी उसने 29 मीटर 29 सेकंड में तय की, तो उसकी औसत चाल 1 मीटर प्रति सेकंड है। लेकिन उसका कुल विस्थापन सिर्फ 13 मीटर है (क्योंकि वह अपनी शुरुआती जगह से सीधी रेखा में 13 मीटर दूर है), इसलिए उसका औसत वेग लगभग 0.448 मीटर प्रति सेकंड है।

🎯 Exam Tip: औसत चाल की गणना के लिए कुल दूरी और कुल समय का उपयोग करें। औसत वेग के लिए, कुल विस्थापन (सदिश योग) और कुल समय का उपयोग करें। विस्थापन के लिए दिशा का ध्यान रखें और घटकों में तोड़कर गणना करें।

 

प्रश्न 10. एक समान त्वरण से गतिशील वस्तु गति के दौरान 5वें सेकण्ड में 65 m व 9वें सेकण्ड में 105 m दूरी तय करती है तो यह 20वें सेकण्ड में कितनी दूरी तय करेगी? गति के 20s में चली गई कुल दूरी भी ज्ञात करो।
Answer: हमें दिया गया है:
5वें सेकंड में तय की गई दूरी \( S_5 = 65 \, \text{m} \)
9वें सेकंड में तय की गई दूरी \( S_9 = 105 \, \text{m} \)
'n'वें सेकंड में तय की गई दूरी का सूत्र है:
\( S_n = u + \frac{a}{2}(2n - 1) \)
जहाँ \(u\) प्रारंभिक वेग और \(a\) त्वरण है।
5वें सेकंड के लिए:
\( S_5 = u + \frac{a}{2}(2 \times 5 - 1) \)
\( 65 = u + \frac{a}{2}(9) \)
\( 65 = u + \frac{9a}{2} \) .....(1)
9वें सेकंड के लिए:
\( S_9 = u + \frac{a}{2}(2 \times 9 - 1) \)
\( 105 = u + \frac{a}{2}(17) \)
\( 105 = u + \frac{17a}{2} \) .....(2)
अब समीकरण (2) में से समीकरण (1) घटाते हैं:
\( (105 - 65) = \left( u + \frac{17a}{2} \right) - \left( u + \frac{9a}{2} \right) \)
\( 40 = u + \frac{17a}{2} - u - \frac{9a}{2} \)
\( 40 = \frac{17a - 9a}{2} \)
\( 40 = \frac{8a}{2} \)
\( 40 = 4a \)

\( \implies \) \( a = \frac{40}{4} = 10 \, \text{m/s}^2 \)
त्वरण (\(a\)) = 10 m/s² है।
अब 'a' का मान समीकरण (1) में रखते हैं ताकि प्रारंभिक वेग 'u' ज्ञात कर सकें:
\( 65 = u + \frac{9 \times 10}{2} \)
\( 65 = u + \frac{90}{2} \)
\( 65 = u + 45 \)

\( \implies \) \( u = 65 - 45 = 20 \, \text{m/s} \)
प्रारंभिक वेग (\(u\)) = 20 m/s है। **20वें सेकंड में तय की गई दूरी (\(S_{20}\)):**
'n'वें सेकंड में तय की गई दूरी के सूत्र का उपयोग करते हुए:
\( S_{20} = u + \frac{a}{2}(2n - 1) \)
\( S_{20} = 20 + \frac{10}{2}(2 \times 20 - 1) \)
\( S_{20} = 20 + 5(40 - 1) \)
\( S_{20} = 20 + 5(39) \)
\( S_{20} = 20 + 195 \)
\( S_{20} = 215 \, \text{m} \)
इसलिए, वस्तु 20वें सेकंड में 215 मीटर की दूरी तय करेगी। **गति के 20 सेकंड में चली गई कुल दूरी (Total distance in 20 seconds):**
कुल दूरी निकालने के लिए, गति के दूसरे समीकरण (\(S = ut + \frac{1}{2}at^2\)) का उपयोग करते हैं:
\( S = u t + \frac{1}{2} a t^2 \)
\( S_{20} = (20 \, \text{m/s}) \times (20 \, \text{s}) + \frac{1}{2} (10 \, \text{m/s}^2) \times (20 \, \text{s})^2 \)
\( S_{20} = 400 + \frac{1}{2} \times 10 \times 400 \)
\( S_{20} = 400 + 5 \times 400 \)
\( S_{20} = 400 + 2000 \)
\( S_{20} = 2400 \, \text{m} \)
इसलिए, गति के 20 सेकंड में वस्तु द्वारा चली गई कुल दूरी 2400 मीटर है। यह दर्शाता है कि त्वरण के कारण वस्तु की गति लगातार बढ़ रही है।
In simple words: एक चीज़ हर सेकंड अपनी रफ्तार बढ़ा रही है। हमें बताया गया कि उसने 5वें सेकंड में 65 मीटर और 9वें सेकंड में 105 मीटर तय किया। इन जानकारियों से, हमने पहले पता लगाया कि उसकी शुरुआती रफ्तार और रफ्तार बढ़ने की दर क्या थी। फिर, हमने हिसाब लगाया कि वह 20वें सेकंड में 215 मीटर चलेगी, और 20 सेकंड में कुल 2400 मीटर चलेगी।

🎯 Exam Tip: 'n'वें सेकंड में तय की गई दूरी के सूत्र का उपयोग करते समय सावधान रहें, यह कुल दूरी से अलग होता है। कुल दूरी के लिए \(S = ut + \frac{1}{2}at^2\) का उपयोग करें। समीकरणों को हल करके त्वरण और प्रारंभिक वेग को सही ढंग से ज्ञात करना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 11. क्षैतिज से 30° का कोण बनाते हुए बन्दूक से एक गोली दागी जाती है जो 3 km दूर जाकर जमीन पर गिरती है। बन्दूक के नीलमुखी वेग को अपरिवर्तित मानते हुए एवं हवा के घर्षण की उपेक्षा करते हुए क्या इससे 5 km दूर स्थित लक्ष्य को भेदा जा सकता है?
Answer: हमें दिया गया है:
प्रारंभिक प्रक्षेपण कोण \( \theta_1 = 30^\circ \)
इस कोण पर क्षैतिज परास \( R_1 = 3 \, \text{km} \)
हम जानते हैं कि प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास का सूत्र है:
\( R = \frac{u^2 \sin(2\theta)}{g} \)
जहाँ \(u\) प्रारंभिक वेग और \(g\) गुरुत्वाकर्षण त्वरण है।
पहले मामले के लिए, \( \theta_1 = 30^\circ \) और \( R_1 = 3 \, \text{km} \):
\( 3 = \frac{u^2 \sin(2 \times 30^\circ)}{g} \)
\( 3 = \frac{u^2 \sin(60^\circ)}{g} \)
\( 3 = \frac{u^2 (\sqrt{3}/2)}{g} \)

\( \implies \) \( \frac{u^2}{g} = \frac{3 \times 2}{\sqrt{3}} = \frac{6}{\sqrt{3}} = \frac{6 \sqrt{3}}{3} = 2\sqrt{3} \, \text{km} \) .....(1)
अब, हमें यह पता लगाना है कि क्या 5 km दूर स्थित लक्ष्य को भेदा जा सकता है। इसके लिए हमें अधिकतम संभव परास की गणना करनी होगी। प्रक्षेप्य की अधिकतम परास तब होती है जब प्रक्षेपण कोण \( \theta = 45^\circ \) होता है।
अधिकतम परास का सूत्र है:
\( R_{max} = \frac{u^2 \sin(2 \times 45^\circ)}{g} = \frac{u^2 \sin(90^\circ)}{g} = \frac{u^2}{g} \)
समीकरण (1) से, \( \frac{u^2}{g} = 2\sqrt{3} \, \text{km} \)
तो, अधिकतम परास \( R_{max} = 2\sqrt{3} \, \text{km} \)
\( \sqrt{3} \) का मान लगभग 1.732 होता है।
\( R_{max} = 2 \times 1.732 \, \text{km} = 3.464 \, \text{km} \)
तो, बन्दूक से गोली अधिकतम 3.464 km दूर तक जा सकती है। क्योंकि 5 km की दूरी \( R_{max} \) से अधिक है (5 km > 3.464 km), इसलिए 5 km दूर स्थित लक्ष्य को नहीं भेदा जा सकता। यह दर्शाता है कि किसी भी प्रक्षेप्य के लिए एक अधिकतम दूरी होती है जिसे वह गुरुत्वाकर्षण के तहत तय कर सकता है।
In simple words: एक बंदूक से 30 डिग्री के कोण पर गोली चलाने पर वह 3 किलोमीटर दूर गिरी। इससे हमें पता चला कि उस बंदूक की अधिकतम पहुँच (सबसे दूर तक जाने की क्षमता) लगभग 3.464 किलोमीटर है। क्योंकि हमें 5 किलोमीटर दूर का लक्ष्य भेदना है, जो कि अधिकतम पहुँच से ज़्यादा है, तो हम उस लक्ष्य को नहीं भेद सकते।

🎯 Exam Tip: प्रक्षेप्य की परास के सवालों में, \(R = \frac{u^2 \sin(2\theta)}{g}\) सूत्र का उपयोग करें। अधिकतम परास तब होती है जब \( \theta = 45^\circ \) होता है। पहले दी गई जानकारी का उपयोग करके \(u^2/g\) का मान ज्ञात करें, फिर अधिकतम परास की गणना करके लक्ष्य की दूरी से तुलना करें।

 

प्रश्न 12. किसी प्रक्षेप्य की परास 50 m एवं अधिकतम ऊँचाई 10 m है है तो प्रक्षेप्य कोण की गणना करो।
Answer: हमें दिया गया है:
प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास \( R = 50 \, \text{m} \)
अधिकतम ऊँचाई \( H = 10 \, \text{m} \)
प्रक्षेप्य की परास का सूत्र है:
\( R = \frac{u^2 \sin(2\theta)}{g} \) .....(1)
प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई का सूत्र है:
\( H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g} \) .....(2)
अब समीकरण (1) और (2) के दिए गए मानों को उपयोग करते हैं।
समीकरण (1) से:
\( 50 = \frac{u^2 \sin(2\theta)}{g} \) .....(1')
समीकरण (2) से:
\( 10 = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g} \) .....(2')
समीकरण (1') को समीकरण (2') से भाग देने पर:
\( \frac{50}{10} = \frac{\frac{u^2 \sin(2\theta)}{g}}{\frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g}} \)
\( 5 = \frac{u^2 \sin(2\theta)}{g} \times \frac{2g}{u^2 \sin^2 \theta} \)
\( 5 = \frac{2 \sin(2\theta)}{\sin^2 \theta} \)
हम जानते हैं कि \( \sin(2\theta) = 2 \sin \theta \cos \theta \)। इस मान को रखने पर:
\( 5 = \frac{2 (2 \sin \theta \cos \theta)}{\sin^2 \theta} \)
\( 5 = \frac{4 \sin \theta \cos \theta}{\sin^2 \theta} \)
\( 5 = \frac{4 \cos \theta}{\sin \theta} \)
\( 5 = 4 \cot \theta \)

\( \implies \) \( \cot \theta = \frac{5}{4} = 1.25 \)

\( \implies \) \( \theta = \cot^{-1}(1.25) \)
\( \theta \approx 38.66^\circ \)
इसलिए, प्रक्षेप्य कोण लगभग 38.66 डिग्री है। यह दिखाता है कि परास और अधिकतम ऊँचाई के दिए गए मानों से हम प्रारंभिक प्रक्षेपण कोण को ज्ञात कर सकते हैं।
In simple words: हमें बताया गया कि किसी फेंकी गई चीज़ की सबसे दूर की पहुँच 50 मीटर है और वह सबसे ऊँचाई 10 मीटर तक जाती है। हमने परास और ऊँचाई के सूत्रों का इस्तेमाल करके हिसाब लगाया कि उसे लगभग 38.66 डिग्री के कोण पर फेंका गया होगा। यह हमें बताता है कि चीज़ों को किस कोण पर फेंकने से वे कितनी दूर या ऊँचाई तक जाती हैं।

🎯 Exam Tip: परास और अधिकतम ऊँचाई के दिए गए मानों से कोण ज्ञात करने के लिए, दोनों सूत्रों को एक दूसरे से भाग दें। त्रिकोणमितीय पहचान \( \sin(2\theta) = 2 \sin \theta \cos \theta \) का उपयोग करना और \( \frac{\cos \theta}{\sin \theta} = \cot \theta \) को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 13. सिद्ध करो कि प्रक्षेप्य की अधिकतम क्षैतिज परास ऊँचाई की चार गुना होती है।
Answer: हमें सिद्ध करना है कि अधिकतम क्षैतिज परास (\(R_{max}\)) ऊँचाई (\(H\)) की चार गुना होती है।
प्रक्षेप्य की अधिकतम परास तब होती है जब प्रक्षेपण कोण \( \theta = 45^\circ \) होता है। इस स्थिति में:
अधिकतम क्षैतिज परास का सूत्र है:
\( R_{max} = \frac{u^2 \sin(2\theta)}{g} \)
जब \( \theta = 45^\circ \), तो \( \sin(2 \times 45^\circ) = \sin(90^\circ) = 1 \)।
तो, \( R_{max} = \frac{u^2}{g} \) .....(1)
अब, अधिकतम ऊँचाई का सूत्र है:
\( H = \frac{u^2 \sin^2 \theta}{2g} \)
जब \( \theta = 45^\circ \), तो \( \sin(45^\circ) = \frac{1}{\sqrt{2}} \)
\( \sin^2(45^\circ) = \left( \frac{1}{\sqrt{2}} \right)^2 = \frac{1}{2} \)
तो, \( H = \frac{u^2 (1/2)}{2g} = \frac{u^2}{4g} \) .....(2)
अब, समीकरण (1) और (2) की तुलना करते हैं:
समीकरण (1) से, \( R_{max} = \frac{u^2}{g} \)
समीकरण (2) से, \( H = \frac{u^2}{4g} \)
हम \( R_{max} \) को \( H \) के पदों में व्यक्त करना चाहते हैं।
समीकरण (1) को इस प्रकार भी लिखा जा सकता है:
\( \frac{u^2}{g} = R_{max} \)
इस मान को समीकरण (2) में \( \frac{u^2}{g} \) की जगह रखते हैं:
\( H = \frac{1}{4} \left( \frac{u^2}{g} \right) \)
\( H = \frac{1}{4} R_{max} \)

\( \implies \) \( R_{max} = 4H \)
अतः, यह सिद्ध होता है कि प्रक्षेप्य की अधिकतम क्षैतिज परास, अधिकतम ऊँचाई की चार गुना होती है, जब उसे 45 डिग्री के कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण संबंध है जो दर्शाता है कि एक ही प्रारंभिक वेग के लिए, सबसे दूर तक फेंकने पर तय की गई दूरी, अधिकतम ऊँचाई से चार गुना ज़्यादा होती है।
In simple words: जब किसी चीज़ को सबसे दूर तक फेंकते हैं (45 डिग्री के कोण पर), तो उसकी अधिकतम दूरी (परास) उसकी सबसे ऊँची पहुँच (ऊँचाई) से चार गुना ज़्यादा होती है। हमने सूत्रों का इस्तेमाल करके यह दिखाया कि अगर आप किसी चीज़ को सबसे दूर फेंकना चाहते हैं, तो वह कितनी ऊँची गई, उसका चार गुना ही वह कितनी दूर तक जा सकती है।

🎯 Exam Tip: इस प्रमाण के लिए, अधिकतम परास (\( \theta = 45^\circ \)) और अधिकतम ऊँचाई के सूत्रों को याद रखना महत्वपूर्ण है। दोनों सूत्रों को लिखें, \( \theta = 45^\circ \) के मानों को प्रतिस्थापित करें, और फिर समीकरणों को इस तरह से संयोजित करें कि \( R_{max} = 4H \) संबंध सिद्ध हो जाए।

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