RBSE Solutions Class 11 Physics Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें

Get the most accurate RBSE Solutions for Class 11 Physics Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 11 Physics. Our expert-created answers for Class 11 Physics are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें RBSE Solutions for Class 11 Physics

For Class 11 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 11 Physics solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें solutions will improve your exam performance.

Class 11 Physics Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Physics Chapter 2 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर

RBSE Class 11 Physics Chapter 2 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. सदिश कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: सदिश मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं. ये हैं ध्रुवीय सदिश और अक्षीय सदिश. ध्रुवीय सदिशों का एक प्रारंभिक बिंदु होता है, जबकि अक्षीय सदिश घूर्णी प्रभाव दिखाते हैं.
In simple words: सदिश दो प्रकार के होते हैं: ध्रुवीय सदिश और अक्षीय सदिश।

🎯 Exam Tip: सदिशों के प्रकारों को उनके गुणों जैसे प्रारंभिक बिंदु या घूर्णी प्रभाव के आधार पर याद रखें.

 

Question 2. तुल्य सदिश किसे कहते हैं?
Answer: तुल्य सदिश वे होते हैं जिनका परिमाण (मात्रा) और दिशा दोनों समान होते हैं. दो सदिश तभी तुल्य कहलाते हैं जब वे एक ही भौतिक राशि को समान तरीके से दर्शाते हैं.
In simple words: तुल्य सदिश वे होते हैं जिनका आकार और दिशा समान होती है।

🎯 Exam Tip: तुल्य सदिशों की परिभाषा में परिमाण और दिशा दोनों का समान होना महत्वपूर्ण है; इनमें से किसी एक में भी अंतर होने पर वे तुल्य नहीं कहलाते.

 

Question 5. शून्य सदिश किसे कहते हैं?
Answer: शून्य सदिश वह सदिश होता है जिसका परिमाण (मात्रा या आकार) शून्य होता है. इसकी कोई निश्चित दिशा नहीं होती. यह अक्सर तब प्राप्त होता है जब किसी सदिश को उसी के विपरीत सदिश में जोड़ा जाता है.
In simple words: शून्य सदिश वह होता है जिसका आकार शून्य हो।

🎯 Exam Tip: शून्य सदिश एक विशेष प्रकार का सदिश है, जिसकी दिशा अनिश्चित होती है, लेकिन इसका उपयोग सदिश बीजगणित में महत्वपूर्ण है.

 

Question 6. सदिशों का वियोजन कितने प्रकार का होता है?
Answer: सदिशों का वियोजन दो प्रकार का होता है: द्विविमीय वियोजन और त्रिविमीय वियोजन. द्विविमीय वियोजन में सदिश को दो घटकों में विभाजित किया जाता है, जबकि त्रिविमीय वियोजन में तीन घटकों में विभाजित किया जाता है, जो अंतरिक्ष में सदिश की पूरी स्थिति बताता है.
In simple words: सदिशों का वियोजन दो प्रकार का होता है: द्विविमीय और त्रिविमीय वियोजन।

🎯 Exam Tip: सदिशों का वियोजन उनकी दिशा और गति को समझने के लिए बहुत उपयोगी होता है, खासकर जब बल या गति कई दिशाओं में लग रही हो.

 

Question 7. क्या दो सदिशों के परिणामी सदिश का मान दिये गये सदिशों में से किसी एक सदिश के मान से कम हो सकता है?
Answer: हाँ, ऐसा हो सकता है. यदि दोनों सदिशों के बीच का कोण 90° से अधिक हो, तो उनका परिणामी सदिश उनमें से किसी एक सदिश के परिमाण से कम हो सकता है. उदाहरण के लिए, जब सदिश एक-दूसरे के लगभग विपरीत दिशा में हों, तो उनका संयुक्त प्रभाव कम हो जाता है.
In simple words: हाँ, यदि दो सदिशों के बीच का कोण 90° से ज़्यादा हो, तो परिणामी सदिश का मान किसी एक सदिश से कम हो सकता है।

🎯 Exam Tip: सदिशों के बीच का कोण परिणामी सदिश के परिमाण पर सीधा प्रभाव डालता है; अधिक कोण होने पर परिणामी सदिश का मान घट सकता है.

 

Question 8. निम्न भौतिक राशियों में से अदिश तथा सदिश राशियों को अलग-अलग कीजिए-बल आघूर्ण, पृष्ठ तनाव, संवेग तथा ताप।
Answer:अदिश राशियाँ वे होती हैं जिनके लिए केवल परिमाण की आवश्यकता होती है, जैसे पृष्ठ तनाव और ताप. सदिश राशियाँ वे होती हैं जिनके लिए परिमाण और दिशा दोनों की आवश्यकता होती है, जैसे बल आघूर्ण और संवेग.
अदिश राशि- पृष्ठ तनाव, ताप
सदिश राशि- बल आघूर्ण, संवेग
In simple words: पृष्ठ तनाव और ताप अदिश राशियाँ हैं, जबकि बल आघूर्ण और संवेग सदिश राशियाँ हैं।

🎯 Exam Tip: अदिश और सदिश राशियों को पहचानने के लिए हमेशा देखें कि क्या उस राशि को पूरी तरह से व्यक्त करने के लिए दिशा की आवश्यकता है या नहीं.

 

Question 9. क्या एक अदिश और एक सदिश राशि को जोड़ा जा सकता है?
Answer: नहीं, एक अदिश और एक सदिश राशि को सीधे तौर पर नहीं जोड़ा जा सकता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि अदिश राशि में केवल परिमाण होता है, जबकि सदिश राशि में परिमाण के साथ-साथ दिशा भी होती है. अलग-अलग गुणों वाली इन राशियों को एक साथ जोड़ना संभव नहीं है.
In simple words: नहीं, एक अदिश और एक सदिश राशि को सीधे नहीं जोड़ सकते, क्योंकि अदिश में दिशा नहीं होती जबकि सदिश में दिशा होती है।

🎯 Exam Tip: सदिश और अदिश राशियों के बीच के मौलिक अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उनकी गणितीय संक्रियाओं को सही ढंग से करने में मदद मिलती है.

 

Question 10. यदि किसी सदिश राशि का एक घटक शून्य हो व अन्य घटक शून्य न हो तो क्या वह सदिश राशि शून्य हो सकती है?
Answer: नहीं, यदि किसी सदिश राशि का एक घटक शून्य हो और बाकी घटक शून्य न हों, तो वह सदिश राशि शून्य नहीं हो सकती. एक सदिश राशि तभी शून्य होती है जब उसके सभी घटक (X, Y, Z दिशाओं में) शून्य हों. अगर एक भी घटक गैर-शून्य है, तो सदिश का कुछ परिमाण होगा.
In simple words: नहीं, एक सदिश राशि शून्य नहीं हो सकती यदि उसका एक घटक शून्य हो लेकिन अन्य घटक शून्य न हों।

🎯 Exam Tip: एक सदिश के शून्य होने का मतलब है कि उसका परिमाण शून्य है, जो तभी संभव है जब उसके सभी घटक शून्य हों.

 

Question 12. क्या सदिश गुणनफल क्रमविनिमेय होता है?
Answer: नहीं, सदिश गुणनफल (क्रॉस प्रोडक्ट) क्रमविनिमेय नहीं होता है. इसका मतलब है कि \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} \) का परिणाम \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \times \overrightarrow{\mathrm{A}} \) के परिणाम के बराबर नहीं होता. वास्तव में, \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} = -(\overrightarrow{\mathrm{B}} \times \overrightarrow{\mathrm{A}}) \) होता है, यानी उनकी दिशा विपरीत होती है.
In simple words: नहीं, सदिश गुणनफल क्रमविनिमेय नहीं होता है, क्योंकि क्रम बदलने पर दिशा बदल जाती है।

🎯 Exam Tip: सदिश गुणनफल में दिशा का महत्व बहुत अधिक होता है, इसलिए क्रम बदलने पर परिणामी सदिश की दिशा भी बदल जाती है.

 

Question 13. दो सदिशों के सदिश गुणनफल से प्राप्त सदिश की दिशा क्या होती है?
Answer: दो सदिशों के सदिश गुणनफल से प्राप्त सदिश की दिशा दोनों मूल सदिशों द्वारा बनाए गए तल के लंबवत होती है. इस दिशा को पता लगाने के लिए दक्षिणावर्ती पेच नियम या दाहिने हाथ के नियम का उपयोग किया जाता है, जो एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है.
In simple words: दो सदिशों के सदिश गुणनफल से मिलने वाले सदिश की दिशा उन दोनों सदिशों के तल के लंबवत होती है।

🎯 Exam Tip: दक्षिणावर्ती पेच नियम को हमेशा ध्यान में रखें, क्योंकि यह सदिश गुणनफल की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण है.

 

Question 14. दो समान्तर सदिशों का सदिश गुणनफल क्या होता है?
Answer: दो समान्तर सदिशों का सदिश गुणनफल (क्रॉस प्रोडक्ट) हमेशा शून्य होता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि समान्तर सदिशों के बीच का कोण शून्य होता है और \( \sin 0^\circ = 0 \) होता है, जिससे गुणनफल का परिमाण शून्य हो जाता है. यह दर्शाता है कि समान्तर सदिशों का कोई घूर्णी प्रभाव नहीं होता.
In simple words: दो समान्तर सदिशों का सदिश गुणनफल शून्य होता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि समांतर सदिशों के लिए कोण \( 0^\circ \) या \( 180^\circ \) होता है, और दोनों ही स्थितियों में \( \sin \theta \) का मान शून्य होता है, जिससे क्रॉस प्रोडक्ट शून्य हो जाता है.

RBSE Class 11 Physics Chapter 2 लघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. प्रदिश किसे कहते हैं?
Answer: प्रदिश (Tensors) वे भौतिक राशियाँ हैं जिनकी अपनी कोई निश्चित दिशा नहीं होती, लेकिन उनका परिमाण अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग होता है. ये सदिश और अदिश के बीच की स्थिति को दर्शाते हैं, जहाँ उनकी विशेषताएँ दिशा के साथ बदलती हैं. उदाहरण के लिए, जड़त्व आघूर्ण, प्रतिबल, विषमदैशिक माध्यम में चुम्बकीयशीलता और विद्युतशीलता आदि सभी प्रदिश राशियाँ हैं, जो विभिन्न भौतिक प्रणालियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
In simple words: प्रदिश वे राशियाँ हैं जिनकी कोई निश्चित दिशा नहीं होती, लेकिन उनका परिमाण अलग-अलग दिशाओं में बदलता रहता है। जैसे जड़त्व आघूर्ण।

🎯 Exam Tip: प्रदिश राशियाँ उन भौतिक घटनाओं को समझने में मदद करती हैं जहाँ किसी गुण का मान सभी दिशाओं में समान नहीं होता.

 

Question 2. अदिश एवं सदिश में अन्तर बताइये।
Answer:(i) अदिश राशियाँ (Scalar Quantities): ये ऐसी भौतिक राशियाँ हैं जिन्हें पूरी तरह से व्यक्त करने के लिए केवल उनके परिमाण (मात्रा) और मात्रक (इकाई) की आवश्यकता होती है. अदिश राशियों की कोई दिशा नहीं होती है, जिससे वे सरल होती हैं. उदाहरण के लिए, द्रव्यमान, दूरी, चाल, कार्य, ऊर्जा, घनत्व, आयतन और ताप आदि सभी अदिश राशियाँ हैं, जिनका उपयोग रोजमर्रा के जीवन में होता है.
(ii) सदिश राशियाँ (Vector Quantities): ये ऐसी भौतिक राशियाँ हैं जिन्हें पूरी तरह से व्यक्त करने के लिए उनके परिमाण (मात्रा), मात्रक (इकाई) के साथ-साथ दिशा का उल्लेख करना भी आवश्यक होता है. दिशा के कारण सदिश राशियाँ अदिश राशियों से भिन्न होती हैं. उदाहरण के लिए, विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग और बल आघूर्ण आदि सभी सदिश राशियाँ हैं, जो भौतिकी में गति और बलों का विश्लेषण करने में महत्वपूर्ण हैं.
In simple words: अदिश राशियों में केवल मात्रा होती है, जैसे द्रव्यमान, जबकि सदिश राशियों में मात्रा और दिशा दोनों होती हैं, जैसे बल।

🎯 Exam Tip: अदिश और सदिश के बीच का अंतर भौतिकी की मूल अवधारणाओं में से एक है; इसे अच्छी तरह से समझना अन्य विषयों में भी मदद करता है.

 

Question 3. सदिश संयोजन का त्रिभुज नियम (Triangle Law of Vector Addition) लिखिए। चित्र भी बनाइये।
Answer:सदिश संयोजन का त्रिभुज नियम (Triangle Law of Vector Addition)- इस नियम के अनुसार, "यदि किसी त्रिभुज की दो भुजाएँ एक ही क्रम में दो सदिशों को दर्शाती हैं, तो तीसरी भुजा विपरीत क्रम में उनके योग (परिणामी सदिश) को दर्शाती है."
\( \overrightarrow{\mathrm{P}} + \overrightarrow{\mathrm{Q}} = \overrightarrow{\mathrm{R}} \)
चित्र में सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) को क्रमशः त्रिभुज की क्रमिक भुजाओं AB और BC द्वारा दर्शाया गया है. सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) में सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) को जोड़ने के लिए, हम सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) को बिना दिशा बदले इस तरह से विस्थापित करते हैं कि सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) का प्रारंभिक बिंदु (पूँछ) सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) के अंतिम बिंदु (शीर्ष) से मिल जाए. अब बिंदु A को अंतिम बिंदु C से मिलाते हैं. इससे हमें त्रिभुज ABC प्राप्त होता है. त्रिभुज की भुजा AC सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) के परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) को दर्शाती है, जिसकी दिशा A से C की ओर इंगित होती है. इस तरह, यह नियम सदिशों के योग को सरल बनाता है.

P A B Q C R


In simple words: त्रिभुज नियम कहता है कि यदि दो सदिशों को एक त्रिभुज की दो भुजाओं से एक ही क्रम में दिखाया जाए, तो तीसरी भुजा विपरीत क्रम में उनका जोड़ (परिणाम) दिखाएगी।

🎯 Exam Tip: त्रिभुज नियम सदिशों को जोड़ने का एक सरल और ग्राफिक तरीका है; इसे अच्छी तरह से समझने के लिए दिशा और क्रम का ध्यान रखना आवश्यक है.

 

Question 4. सदिशों के वियोजन की द्विविमीय विधि को। समझाइये।
Answer:द्विविमीय निर्देश तंत्र में किसी सदिश का वियोजन (Two-dimensional Resolution of a Vector):
माना X-Y तल में स्थित एक सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) को चित्र में \( \overrightarrow{\mathrm{OP}} \) से दर्शाया गया है. सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{OP}} \) का प्रारंभिक बिंदु मूल बिंदु O पर है और यह X-अक्ष से \( \theta \) कोण पर है. सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{OP}} \) के शीर्ष P से X-अक्ष पर लंब PN और Y-अक्ष पर लंब PQ डालते हैं.
\( \overrightarrow{\mathrm{ON}} \) सदिश X-अक्ष की दिशा में सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) के घटक \( \overrightarrow{\mathbf{A}}_{x} \) को दर्शाता है.
\( \overrightarrow{\mathrm{OQ}} \) सदिश Y-अक्ष की दिशा में सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) के घटक \( \overrightarrow{\mathbf{A}}_{y} \) को दर्शाता है.
समकोण त्रिभुज ONP में, सदिश योग के त्रिभुज नियम से:
\( \overrightarrow{\mathrm{OP}} = \overrightarrow{\mathrm{ON}} + \overrightarrow{\mathrm{NP}} \)
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} = \overrightarrow{\mathrm{A}}_{x} + \overrightarrow{\mathrm{A}}_{y} \) .....(1)
यहाँ \( \overrightarrow{\mathrm{OQ}} = \overrightarrow{\mathrm{NP}} = \overrightarrow{\mathrm{A}}_{y} \) है.
माना X और Y दिशा में एकांक सदिश क्रमशः \( \hat{i} \) और \( \hat{j} \) हैं, तो:
\( \overrightarrow{\mathrm{A}}_{x} = A_x \hat{i} \)
\( \overrightarrow{\mathrm{A}}_{y} = A_y \hat{j} \)
समीकरण (1) से:
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} = A_x \hat{i} + A_y \hat{j} \)
समकोण त्रिभुज ONP में:
\( \cos \theta = \frac{A_x}{A} \implies A_x = A \cos \theta \) .....(2)
इसी तरह से:
\( \sin \theta = \frac{A_y}{A} \implies A_y = A \sin \theta \) .....(3)
इस प्रकार समकोण त्रिभुज ONP में पाइथागोरस प्रमेय से:
\( (\mathrm{OP})^2 = (\mathrm{ON})^2 + (\mathrm{NP})^2 \)
\( A^2 = A_x^2 + A_y^2 \)
\( A = \sqrt{A_x^2 + A_y^2} \) .....(4)
समीकरण (3) में (2) का भाग देने पर:
\( \frac{A_y}{A_x} = \frac{A \sin \theta}{A \cos \theta} \)
\( \tan \theta = \frac{A_y}{A_x} \)
\( \implies \theta = \tan^{-1}\left(\frac{A_y}{A_x}\right) \) .....(5)
द्विविमीय वियोजन हमें किसी सदिश को उसके घटकों में तोड़ने में मदद करता है, जिससे गणनाएँ आसान हो जाती हैं.
In simple words: द्विविमीय वियोजन में किसी सदिश को X और Y अक्षों पर दो घटकों में बाँटा जाता है। इससे सदिश के परिमाण और दिशा को आसानी से समझा जा सकता है।

X Y O A P N Q θ

🎯 Exam Tip: सदिश वियोजन में घटकों के लिए \( A_x = A \cos \theta \) और \( A_y = A \sin \theta \) सूत्रों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये गणितीय गणनाओं के लिए आधार हैं.

 

Question 6. सदिशों के सदिश गुणनफल के लिए दक्षिणावर्ती पेच का नियम लिखिये।
Answer:दक्षिणावर्ती पेच का नियम-
इस नियम के अनुसार, यदि एक पेच (स्क्रू) को सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) से \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) की ओर छोटे कोण से घुमाया जाए (जैसा कि चित्र में दिखाया गया है), तो पेच जिस दिशा में आगे बढ़ता है, वही परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} = \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} \) की दिशा होती है. यह नियम सदिश गुणनफल की दिशा निर्धारित करने का एक सरल और व्यावहारिक तरीका है. यह विद्युत चुंबकत्व जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी है.

R A θ B (i) A B R θ (ii)


In simple words: दक्षिणावर्ती पेच नियम कहता है कि जब आप एक पेच को पहले सदिश से दूसरे सदिश की ओर घुमाते हैं, तो पेच जिस दिशा में आगे बढ़ता है, वही परिणामी सदिश की दिशा होती है।

🎯 Exam Tip: दक्षिणावर्ती पेच नियम को चित्र के साथ अभ्यास करना चाहिए, ताकि \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} \) की दिशा निर्धारित करने में कोई गलती न हो.

RBSE Class 11 Physics Chapter 2 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. भौतिकी में अवकलन गणित का उपयोग समझाइये।
Answer:भौतिकी में अवकलन गणित के उपयोग (Uses of Differential Calculus in Physics):
भौतिकी में कई राशियाँ अन्य राशियों पर निर्भर करती हैं. उदाहरण के लिए, दूरी का समय पर निर्भर करना, वेग का समय और दूरी पर निर्भर करना, और गैस के दाब का आयतन और ताप पर निर्भर करना. इन राशियों के बीच के संबंधों में, एक राशि के दूसरी राशि के सापेक्ष परिवर्तन की दर ज्ञात करना बहुत महत्वपूर्ण होता है. इन सभी गणितीय प्रक्रियाओं में अवकलन गणित का उपयोग होता है.
कुछ महत्वपूर्ण उपयोग इस प्रकार हैं:
1. तात्क्षणिक वेग और त्वरण: यदि स्थिति सदिश \( \vec{r} \) समय \( t \) पर निर्भर करता है, तो तात्क्षणिक वेग \( \vec{v} \) स्थिति सदिश का समय के सापेक्ष अवकलन होता है.
\( \vec{v} = \lim_{\Delta t \to 0} \frac{\Delta \vec{r}}{\Delta t} = \frac{d\vec{r}}{dt} \)
इसी प्रकार, यदि वेग \( \vec{v} \) भी समय पर निर्भर करता है, तो वेग परिवर्तन की दर त्वरण \( \vec{a} \) होता है (तात्क्षणिक त्वरण).
\( \vec{a} = \frac{d\vec{v}}{dt} = \frac{d}{dt}\left(\frac{d\vec{r}}{dt}\right) = \frac{d^2\vec{r}}{dt^2} \)
यहां, स्थिति सदिश का समय के सापेक्ष द्वितीय अवकलन त्वरण देता है, जो दर्शाता है कि अवकलन गति में बदलाव की दर को कैसे मापता है.
यहां हम कुछ अन्य उदाहरण भी देख सकते हैं:
(1) किसी बल द्वारा किया गया कार्य W समय का फलन होता है, और समय के सापेक्ष कार्य करने की दर तात्क्षणिक शक्ति P होती है.
\( P = \frac{dW}{dt} \) या \( P = \frac{dE}{dt} \) (जहां E = ऊर्जा)
(2) रेडियोसक्रिय पदार्थ में उपस्थित सक्रिय परमाणुओं की संख्या N समय का फलन होती है, और विघटन की दर A सक्रिय परमाणुओं की संख्या की समय के सापेक्ष ह्रास दर होती है.
\( A = -\frac{dN}{dt} \)
अवकलन गणित भौतिकी में परिवर्तनों की दर और अधिकतम/न्यूनतम मानों को समझने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है.
In simple words: अवकलन गणित का उपयोग भौतिकी में तब किया जाता है जब हमें यह पता लगाना होता है कि एक चीज़ दूसरी चीज़ के साथ कितनी तेज़ी से बदल रही है, जैसे समय के साथ दूरी का बदलना या वेग का बदलना।

🎯 Exam Tip: भौतिकी में अवकलन गणित के अनुप्रयोगों को समझने के लिए, हमेशा याद रखें कि यह परिवर्तन की दर और किसी राशि के अधिकतम या न्यूनतम मान को ज्ञात करने में मदद करता है.

 

Question 2. सदिशों के संयोजन का समान्तर चतुर्भुज का नियम लिखिये। आवश्यक नामांकित चित्र बनाइये। परिणामी सदिश में के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer:सदिश संयोजन का समान्तर चतुर्भुज का नियम (Parallelogram Law of Vector Addition):
"इस नियम के अनुसार, जब किसी समान्तर चतुर्भुज की दो आसन्न भुजाओं को क्रमशः दो सदिशों के परिमाण और दिशा के रूप में व्यक्त किया जाए, तब उनके कटान बिंदु से होकर गुजरने वाला विकर्ण परिणामी सदिश के परिमाण और दिशा को व्यक्त करता है."
यानी, यदि दो सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) एक समान्तर चतुर्भुज की दो आसन्न भुजाओं को दर्शाते हैं, तो उनका परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} = \overrightarrow{\mathrm{P}} + \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) होगा.
गणितीय विधि (Mathematical Method) से दो सदिशों के परिणामी सदिश का परिमाण ज्ञात करना (To Determine the Magnitude of Resultant Vector of Two Vectors):
माना दो सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) को परिमाण और दिशा में त्रिभुज ABC की भुजाओं \( \overrightarrow{\mathrm{AB}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{BC}} \) से क्रम में निरूपित किया गया है (चित्र देखें). त्रिभुज नियम के अनुसार, भुजा \( \overrightarrow{\mathrm{AC}} \) विपरीत क्रम में परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) को निरूपित करती है. माना सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) के बीच का कोण \( \theta \) है. परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) का परिमाण और दिशा ज्ञात करने के लिए, भुजा AB को आगे बढ़ाकर इस पर बिंदु C से लम्ब CD डालते हैं.

O P A Q B C R θ α D

परिमाण व दिशा ज्ञात करना:
समकोण त्रिभुज ADC में:
\( \mathrm{AC}^2 = \mathrm{AD}^2 + \mathrm{DC}^2 \)
चूंकि \( \mathrm{AD} = \mathrm{AB} + \mathrm{BD} \)
इसलिए, \( \mathrm{AC}^2 = (\mathrm{AB} + \mathrm{BD})^2 + \mathrm{DC}^2 \) .....(1)
समकोण त्रिभुज BCD से:
\( \frac{\mathrm{BD}}{\mathrm{BC}} = \cos \theta \implies \mathrm{BD} = \mathrm{BC} \cos \theta \)
\( \frac{\mathrm{DC}}{\mathrm{BC}} = \sin \theta \implies \mathrm{DC} = \mathrm{BC} \sin \theta \)
यहाँ, \( \mathrm{AB} = P \) और \( \mathrm{BC} = Q \) है.
तो, \( \mathrm{BD} = Q \cos \theta \) और \( \mathrm{DC} = Q \sin \theta \)
इन मानों को समीकरण (1) में रखने पर:
\( R^2 = (P + Q \cos \theta)^2 + (Q \sin \theta)^2 \)
\( R^2 = P^2 + 2PQ \cos \theta + Q^2 \cos^2 \theta + Q^2 \sin^2 \theta \)
\( R^2 = P^2 + Q^2 (\cos^2 \theta + \sin^2 \theta) + 2PQ \cos \theta \)
चूंकि \( \cos^2 \theta + \sin^2 \theta = 1 \) है:
\( R^2 = P^2 + Q^2 + 2PQ \cos \theta \)
\( \implies R = \sqrt{P^2 + Q^2 + 2PQ \cos \theta} \) .....(4)
यह उपरोक्त समीकरण परिणामी सदिश का परिमाण देता है, जिसे कोज्या का नियम कहते हैं.
परिणामी सदिश की दिशा का निर्धारण:
यदि परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) के साथ \( \alpha \) कोण बनाता है, तो त्रिभुज ADC से:
\( \tan \alpha = \frac{\mathrm{DC}}{\mathrm{AD}} \)
\( \tan \alpha = \frac{\mathrm{DC}}{\mathrm{AB} + \mathrm{BD}} \)
\( \tan \alpha = \frac{Q \sin \theta}{P + Q \cos \theta} \)
\( \implies \alpha = \tan^{-1}\left(\frac{Q \sin \theta}{P + Q \cos \theta}\right) \) .....(5)
समीकरण (4) से परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) का परिमाण और समीकरण (5) से इसकी दिशा ज्ञात की जा सकती है.
विशेष परिस्थितियाँ:
(अ) जब सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) समान दिशा में हों:
इस स्थिति में \( \theta = 0^\circ \), \( \cos 0^\circ = 1 \), और \( \sin 0^\circ = 0 \).
समीकरण (4) से परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) का परिमाण:
\( R = \sqrt{P^2 + Q^2 + 2PQ(1)} = \sqrt{(P+Q)^2} \)
\( \implies R = P + Q \)
समीकरण (5) से:
\( \tan \alpha = \frac{Q \sin 0^\circ}{P + Q \cos 0^\circ} = \frac{0}{P+Q} = 0 \)
\( \implies \alpha = 0^\circ \)
अतः, परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) का परिमाण दोनों सदिशों के परिमाणों के योग के बराबर होगा और दिशा सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) की दिशा में ही होगी.
(ब) जब सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) परस्पर लम्बवत् हों:
इस स्थिति में \( \theta = 90^\circ \), \( \cos 90^\circ = 0 \), और \( \sin 90^\circ = 1 \).
समीकरण (4) से परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) का परिमाण:
\( R = \sqrt{P^2 + Q^2 + 2PQ(0)} \)
\( \implies R = \sqrt{P^2 + Q^2} \)
समीकरण (5) से:
\( \tan \alpha = \frac{Q \sin 90^\circ}{P + Q \cos 90^\circ} = \frac{Q(1)}{P + Q(0)} = \frac{Q}{P} \)
\( \implies \alpha = \tan^{-1}\left(\frac{Q}{P}\right) \)
(स) जब सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) विपरीत दिशा में हों:
इस स्थिति में \( \theta = 180^\circ \), \( \cos 180^\circ = -1 \), और \( \sin 180^\circ = 0 \).
समीकरण (4) से परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) का परिमाण:
\( R = \sqrt{P^2 + Q^2 + 2PQ(-1)} = \sqrt{P^2 + Q^2 - 2PQ} = \sqrt{(P-Q)^2} \)
\( \implies R = |P - Q| \) (जो सदिश बड़ा होगा, परिणामी उसी की दिशा में होगा)
यदि \( P > Q \), तो \( R = P - Q \) और \( \alpha = 0^\circ \).
यदि \( Q > P \), तो \( R = Q - P \) और \( \alpha = 180^\circ \) (या \( \pi \)).
अतः परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) की दिशा \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) में से जिसका परिमाण अधिक होगा, उसकी दिशा में होगी.
यहाँ \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) सदिश समान दिशा में होने पर परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) का परिमाण अधिकतम होता है.
और \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{Q}} \) के विपरीत दिशा में होने पर परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) का परिमाण न्यूनतम होता है.
यह नियम कई भौतिकी समस्याओं को हल करने में मदद करता है.
In simple words: समान्तर चतुर्भुज नियम बताता है कि दो सदिशों को एक चतुर्भुज की दो भुजाओं के रूप में दिखाने पर, उनके बीच का विकर्ण उनका कुल जोड़ (परिणामी सदिश) दिखाता है। इसका परिमाण \( \sqrt{P^2 + Q^2 + 2PQ \cos \theta} \) होता है।

🎯 Exam Tip: समान्तर चतुर्भुज नियम को याद करते समय चित्र को ध्यान में रखें और \( \theta \) कोण के महत्व को समझें, क्योंकि यह परिणामी सदिश के परिमाण और दिशा दोनों को प्रभावित करता है.

 

Question 3. सदिशों के त्रिविमीय वियोजन को विस्तारपूर्वक समझाइये।
Answer:सदिशों का त्रिविमीय वियोजन (Three-dimensional Resolution of a Vector):
त्रिविमीय निर्देश तंत्र में किसी सदिश का वियोजन करने के लिए, हम मानते हैं कि एक सदिश \( \vec{A} \) के X, Y और Z अक्षों के अनुदिश घटक क्रमशः \( \overrightarrow{\mathrm{A}}_{x} \), \( \overrightarrow{\mathrm{A}}_{y} \), और \( \overrightarrow{\mathrm{A}}_{z} \) हैं.
चित्र में, सदिश \( \vec{A} \) को बिंदु P द्वारा दर्शाया गया है जिसके निर्देशांक \((x, y, z)\) हैं. X, Y, Z अक्षों के अनुदिश घटक प्राप्त करने के लिए, सदिश \( \vec{A} \) के शीर्ष P से XY तल पर लम्ब PO डालते हैं. इस प्रकार \( \overrightarrow{\mathrm{OP}} \) में दो घटक प्राप्त होते हैं. इसमें पहला घटक OZ अक्ष के अनुदिश \( \overrightarrow{\mathrm{ON}} \) है और दूसरा घटक XY तल में \( \overrightarrow{\mathrm{OQ}} \) है. सदिश \( \vec{A} \) को निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} = \overrightarrow{\mathrm{A}}_{x} + \overrightarrow{\mathrm{A}}_{y} + \overrightarrow{\mathrm{A}}_{z} \) .....(1)
माना सदिश \( \vec{A} \) X, Y और Z अक्षों के साथ क्रमशः \( \alpha, \beta, \gamma \) कोण बनाता है.
समकोण त्रिभुज OMP में:
\( \cos \gamma = \frac{\mathrm{OM}}{\mathrm{OP}} \)
\( \mathrm{OM} = \mathrm{OP} \cos \gamma \)
\( \mathrm{ON} = A \cos \gamma \)
\( \implies A_z = A \cos \gamma \) .....(2)
बिंदु Q से OX पर लम्ब QR और OY पर लम्ब QS डालते हैं. \( \triangle \mathrm{OSQ} \) से:
\( \overrightarrow{\mathrm{OQ}} = \overrightarrow{\mathrm{OS}} + \overrightarrow{\mathrm{SQ}} \)
यहाँ \( \overrightarrow{\mathrm{SQ}} = \overrightarrow{\mathrm{OR}} \) है.
तो, \( \overrightarrow{\mathrm{OQ}} = \overrightarrow{\mathrm{OS}} + \overrightarrow{\mathrm{OR}} \)
\( \implies \overrightarrow{\mathrm{OQ}} = \overrightarrow{\mathrm{A}}_{y} + \overrightarrow{\mathrm{A}}_{x} \) .....(3)
समीकरण (1) व (3) से:
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} = \overrightarrow{\mathrm{A}}_{z} + \overrightarrow{\mathrm{A}}_{y} + \overrightarrow{\mathrm{A}}_{x} \)
\( \implies \overrightarrow{\mathrm{A}} = \overrightarrow{\mathrm{A}}_{x} + \overrightarrow{\mathrm{A}}_{y} + \overrightarrow{\mathrm{A}}_{z} \) .....(4)
यदि X, Y और Z अक्षों की दिशा में एकांक सदिश क्रमशः \( \hat{i}, \hat{j}, \hat{k} \) हों, तो समीकरण (4) से:
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} = A_x \hat{i} + A_y \hat{j} + A_z \hat{k} \)
सदिश \( A \) का परिमाण:
समकोण त्रिभुज OPQ में:
\( \mathrm{OP}^2 = \mathrm{OQ}^2 + \mathrm{PQ}^2 \)
चूंकि \( \mathrm{PQ} = \mathrm{ON} \)
\( \implies \mathrm{OP}^2 = \mathrm{OQ}^2 + \mathrm{ON}^2 \) .....(5)
समकोण त्रिभुज OQS से:
\( \mathrm{OQ}^2 = \mathrm{OS}^2 + \mathrm{SQ}^2 \)
चूंकि \( \mathrm{SQ} = \mathrm{OR} \)
\( \implies \mathrm{OQ}^2 = \mathrm{OS}^2 + \mathrm{OR}^2 \) .....(6)
समीकरण (5) और (6) से:
\( \mathrm{OP}^2 = \mathrm{OS}^2 + \mathrm{OR}^2 + \mathrm{ON}^2 \)
\( A^2 = A_x^2 + A_y^2 + A_z^2 \)
\( \implies A = \sqrt{A_x^2 + A_y^2 + A_z^2} \)
इस प्रकार X, Y और Z दिशाओं में \( A_x, A_y, A_z \) घटकों के मान ज्ञात होने पर परिणामी सदिश \( A \) ज्ञात किया जा सकता है.
चूंकि \( A_x = A \cos \alpha \), \( A_y = A \cos \beta \), और \( A_z = A \cos \gamma \), तो:
\( A^2 = A^2 \cos^2 \alpha + A^2 \cos^2 \beta + A^2 \cos^2 \gamma \)
दोनों पक्षों को \( A^2 \) से भाग देने पर:
\( 1 = \cos^2 \alpha + \cos^2 \beta + \cos^2 \gamma \)
यहाँ \( \cos \alpha, \cos \beta \) और \( \cos \gamma \) को दिक्-कोसाइन (direction cosines) कहते हैं. अतः किसी सदिश के तीनों दिक्-कोसाइन के वर्गों का योग एक होता है.
स्थिति सदिश (Position Vector): त्रिविमीय निर्देश तंत्र में सामान्यतः किसी बिंदु की स्थिति उसके निर्देशांक से व्यक्त की जाती है. चित्र के अनुसार, माना किसी बिंदु P की स्थिति के निर्देशांक \( x, y, z \) हैं. मूल बिंदु O से बिंदु P को मिलाने वाला सदिश बिंदु P की O के सापेक्ष स्थिति को निरूपित करता है. अतः सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{OP}} \) बिंदु P का स्थिति सदिश कहलाता है.
यह वियोजन हमें अंतरिक्ष में सदिशों की दिशा और परिमाण को पूरी तरह से समझने में मदद करता है, जो जटिल भौतिकी समस्याओं को हल करने के लिए आवश्यक है.
In simple words: त्रिविमीय वियोजन में एक सदिश को तीन दिशाओं (X, Y, Z अक्षों) में बाँटा जाता है। इससे हमें सदिश की पूरी स्थिति और उसका प्रभाव अंतरिक्ष में समझने में मदद मिलती है।

O Y Z X P(x,y,z) A Q A_y A_x xi+yj α γ

🎯 Exam Tip: त्रिविमीय वियोजन में घटकों को \( A_x, A_y, A_z \) के रूप में दर्शाया जाता है, और \( A = \sqrt{A_x^2 + A_y^2 + A_z^2} \) सूत्र से कुल परिमाण प्राप्त होता है.

 

Question 4. सदिशों के सदिश गुणनफल को आवश्यक चित्र बनाते हुए विस्तारपूर्वक समझाइये।
Answer:सदिश गुणनफल या क्रॉस गुणनफल (Vector Product or Cross Product):
दो सदिशों को गुणा करने पर यदि गुणनफल एक सदिश राशि है, तो इस गुणनफल को सदिश गुणनफल या क्रॉस गुणनफल कहते हैं. सदिश गुणनफल को दोनों सदिशों के बीच क्रॉस (\( \times \)) चिन्ह लगाकर व्यक्त करते हैं.
मान लीजिए दो सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) के परिमाण क्रमशः A और B हैं, और उनके बीच का कोण \( \theta \) है, तो उनका सदिश गुणनफल इस प्रकार दिया जा सकता है:
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} = \mathrm{AB} \sin \theta \, \hat{n} \) .....(1)
यहां \( \hat{n} \) परिणामी सदिश की दिशा में एक एकांक सदिश है. इसकी दिशा सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) द्वारा बनाए गए तल के लंबवत होती है. यदि परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) हो तो:
\( \overrightarrow{\mathrm{R}} = \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} \)
\( \implies |\overrightarrow{\mathrm{R}}| = |\overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}}| = \mathrm{AB} \sin \theta \, |\hat{n}| \)
चूंकि \( |\hat{n}| = 1 \) है, तो:
\( R = \mathrm{AB} \sin \theta \)
यहां \( R = \mathrm{AB} \sin \theta \) परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) के परिमाण को व्यक्त करता है. परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) की दिशा निम्न नियमों द्वारा ज्ञात कर सकते हैं:
(i) दायें हाथ का नियम (Right-Hand Rule):
चित्र (i) के अनुसार, यदि दायें हाथ की अंगुलियों को सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) से \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) की ओर छोटे कोण से मोड़ा जाए, तो सीधा अंगूठा परिणामी सदिश की दिशा को प्रदर्शित करता है.
(ii) दक्षिणावर्ती पेच का नियम (Right-Hand Screw Rule):
चित्र (ii) में दिखाए अनुसार, पेच की अक्ष को सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) के तल के लंबवत रखकर, पेच को सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) से \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) की ओर छोटे कोण से घुमाने पर, पेच जिस दिशा में आगे बढ़ता है, वही परिणामी सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{R}} \) की दिशा होती है.

R A B θ चित्र (i) A B R θ चित्र (ii)


(viii) सदिश गुणनफल वितरणकारी होता है अर्थात्:
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} \times (\overrightarrow{\mathrm{B}} + \overrightarrow{\mathrm{C}}) = \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} + \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{C}} \) .....(7)
(ix) सदिश गुणनफल से प्राप्त कुछ भौतिक राशियों के उदाहरण:
(a) घूर्णन गति कर रही वस्तु का रेखीय वेग \( \overrightarrow{\mathrm{V}} \) कोणीय वेग \( \vec{\omega} \) और स्थिति सदिश \( \vec{r} \) के सदिश गुणनफल के बराबर होता है.
\( \overrightarrow{\mathrm{V}} = \vec{\omega} \times \vec{r} \)
(b) यदि किसी समान्तर चतुर्भुज की आसन्न भुजाएँ क्रमशः सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{L}} \) और \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) हों, तो इसका क्षेत्रफल निम्न होता है:
\( A = \overrightarrow{\mathrm{L}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} \)
(c) बल आघूर्ण \( \vec{\tau} \), स्थिति सदिश \( \vec{r} \) और बल \( \overrightarrow{\mathrm{F}} \) के सदिश गुणनफल के बराबर होता है:
\( \vec{\tau} = \vec{r} \times \overrightarrow{\mathrm{F}} \)
(d) कोणीय संवेग \( \overrightarrow{\mathrm{J}} \), स्थिति सदिश \( \vec{r} \) और रेखीय संवेग \( \overrightarrow{\mathrm{P}} \) के सदिश गुणनफल के बराबर होता है:
\( \overrightarrow{\mathrm{J}} = \vec{r} \times \overrightarrow{\mathrm{P}} \)
सदिश गुणनफल भौतिकी में उन राशियों का वर्णन करने के लिए बहुत उपयोगी है जो घूर्णी गति या दिशात्मक प्रभाव से संबंधित हैं.
In simple words: सदिश गुणनफल हमें दो सदिशों का गुणा करके एक नया सदिश देता है जिसकी दिशा उन दोनों सदिशों के लंबवत होती है। इसे दाहिने हाथ के नियम या दक्षिणावर्ती पेच नियम से समझते हैं।

🎯 Exam Tip: सदिश गुणनफल की परिभाषा, परिमाण और दिशा ज्ञात करने के नियम, और वितरणकारी गुण को हमेशा याद रखें; ये अक्सर पूछे जाते हैं.

(iv) दो समान्तर सदिशों का सदिश गुणनफल

माना सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) व सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) समान्तर हैं। अतः इनके मध्य का कोण \( \theta = 0^\circ \) होगा।
सदिश गुणनफल से
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} = \mathrm{AB} \sin 0^\circ \hat{n} \)
\( \implies \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} = \mathrm{AB} \cdot 0 \cdot \hat{n} \)
\( \implies \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} = 0 \)
अतः समान्तर सदिशों का सदिश गुणनफल शून्य सदिश होता है।
In simple words: जब दो सदिश एक ही दिशा में होते हैं, तो उनका कोण 0 डिग्री होता है। इस स्थिति में, उनका सदिश गुणनफल हमेशा शून्य आता है, जिसका मतलब है कि उनकी कोई घूमने वाली क्रिया नहीं होती है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि समान्तर सदिशों का सदिश गुणनफल शून्य होता है, क्योंकि उनके बीच कोई घूर्णी प्रभाव नहीं होता है।

 

(v) तुल्य सदिशों का सदिश गुणनफल

तुल्य सदिश भी समान्तर होते हैं अतः इनकी भी दिशाओं के मध्य कोण \( \theta = 0^\circ \) होगा।
अतः \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{A}} = \mathrm{AA} \sin 0^\circ = 0 \)
अतः तुल्य सदिशों का सदिश गुणनफल भी शून्य सदिश होता है।
\( \implies \hat{i} \times \hat{i} = \hat{j} \times \hat{j} = \hat{k} \times \hat{k} = 0 \)
In simple words: जब किसी सदिश का उसी सदिश के साथ सदिश गुणनफल किया जाता है, तो परिणाम हमेशा शून्य होता है क्योंकि वे एक ही दिशा में होते हैं।

🎯 Exam Tip: किसी सदिश का स्वयं के साथ सदिश गुणनफल हमेशा शून्य होता है, यह इसकी एक महत्वपूर्ण पहचान है।

 

(vi) लम्बवत् सदिशों को सदिश गुणनफल

माना सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) व सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) परस्पर लम्बवत हैं अतः इनके मध्य कोण \( \theta = 90^\circ \) होगा।
तब \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} = \mathrm{AB} \sin 90^\circ \hat{n} \)
In simple words: यदि दो सदिश एक दूसरे से 90 डिग्री पर हैं, तो उनका सदिश गुणनफल उनके परिमाणों के गुणनफल के बराबर होगा और दिशा उनके तल के लंबवत होगी।

🎯 Exam Tip: लंबवत सदिशों का सदिश गुणनफल अधिकतम होता है और इसकी दिशा हमेशा दोनों सदिशों के तल के लंबवत होती है।

 

(vii) दो सदिशों का सदिश गुणनफल उनके कार्तीय घटकों के रूप में

सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) व सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{B}} \) को इनके कार्तीय घटकों के रूप में निम्न प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है-
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} = \mathrm{A}_x \hat{i} + \mathrm{A}_y \hat{j} + \mathrm{A}_z \hat{k} \)
\( \overrightarrow{\mathrm{B}} = \mathrm{B}_x \hat{i} + \mathrm{B}_y \hat{j} + \mathrm{B}_z \hat{k} \)
अतः इनका सदिश गुणनफल
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} = (\mathrm{A}_x \hat{i} + \mathrm{A}_y \hat{j} + \mathrm{A}_z \hat{k}) \times (\mathrm{B}_x \hat{i} + \mathrm{B}_y \hat{j} + \mathrm{B}_z \hat{k}) \)
\( \implies \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} = \mathrm{A}_x \hat{i} \times (\mathrm{B}_x \hat{i} + \mathrm{B}_y \hat{j} + \mathrm{B}_z \hat{k}) \)
\( + \mathrm{A}_y \hat{j} \times (\mathrm{B}_x \hat{i} + \mathrm{B}_y \hat{j} + \mathrm{B}_z \hat{k}) \)
\( + \mathrm{A}_z \hat{k} \times (\mathrm{B}_x \hat{i} + \mathrm{B}_y \hat{j} + \mathrm{B}_z \hat{k}) \)
इसलिए
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} = \hat{i}(\mathrm{A}_y \mathrm{B}_z - \mathrm{A}_z \mathrm{B}_y) + \hat{j}(\mathrm{A}_z \mathrm{B}_x - \mathrm{A}_x \mathrm{B}_z) + \hat{k}(\mathrm{A}_x \mathrm{B}_y - \mathrm{A}_y \mathrm{B}_x) \)
इसे सारणिक के रूप में भी लिखा जा सकता है।
\[ \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} = \begin{vmatrix} \hat{i} & \hat{j} & \hat{k} \\ \mathrm{A}_x & \mathrm{A}_y & \mathrm{A}_z \\ \mathrm{B}_x & \mathrm{B}_y & \mathrm{B}_z \end{vmatrix} \]
In simple words: जब सदिशों को x, y, z दिशाओं में अलग-अलग हिस्सों में लिखते हैं, तो उनका सदिश गुणनफल इन हिस्सों को गुणा करके निकाला जाता है। इसमें हर दिशा के घटक को दूसरी दिशा के घटकों से गुणा करते हैं, जिससे एक नया सदिश मिलता है जो दोनों मूल सदिशों के लम्बवत होता है। इसे सारणिक (determinant) के रूप में लिखना भी आसान होता है, जिसमें \( \hat{i}, \hat{j}, \hat{k} \) पहली पंक्ति में होते हैं।

🎯 Exam Tip: कार्तीय घटकों के रूप में सदिश गुणनफल ज्ञात करते समय \( \hat{i} \times \hat{j} = \hat{k} \) जैसे इकाई सदिशों के गुणनफल नियमों का विशेष ध्यान रखें। सारणिक विधि गणना को सरल बनाती है।

 

(viii) सदिश गुणनफल वितरणकारी होता है अर्थात्

\( \overrightarrow{\mathrm{A}} \times (\overrightarrow{\mathrm{B}} + \overrightarrow{\mathrm{C}}) = \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}} + \overrightarrow{\mathrm{A}} \times \overrightarrow{\mathrm{C}} \)
In simple words: सदिश गुणनफल को सामान्य गुणनफल की तरह बांटा जा सकता है। अगर एक सदिश का गुणनफल दो सदिशों के योग से करना है, तो उसे अलग-अलग सदिशों के साथ गुणा करके बाद में जोड़ा जा सकता है।

🎯 Exam Tip: वितरण का नियम सदिशों के जटिल गणनाओं को सरल बनाने में बहुत उपयोगी होता है।

 

(ix) सदिश गुणनफल से प्राप्त कुछ भौतिक राशियों के उदाहरण-

(a) घूर्णन गति कर रही वस्तु का रेखीय वेग \( \vec{V} \), कोणीय वेग \( \vec{\omega} \) एवं स्थिति सदिश \( \vec{r} \) के सदिश गुणनफल के बराबर होता है। अर्थात्
\( \vec{V} = \vec{\omega} \times \vec{r} \)
(b) यदि किसी समान्तर चतुर्भुज की आसन्न भुजाएँ क्रमशः सदिश \( \overrightarrow{L} \) व \( \overrightarrow{B} \) हों तो इसका क्षेत्रफल निम्न होता है-
\( \mathrm{A} = \overrightarrow{L} \times \overrightarrow{B} \)
(c) बल आघूर्ण, स्थिति सदिश \( \vec{r} \) एवं बल \( \vec{F} \) के सदिश गुणनफल के बराबर होता है अर्थात्
\( \vec{\tau} = \vec{r} \times \vec{F} \)
(d) कोणीय संवेग, स्थिति सदिश \( \vec{r} \) एवं रेखीय संवेग \( \vec{P} \) के सदिश गुणनफल के बराबर होता है। अर्थात्
\( \vec{J} = \vec{r} \times \vec{P} \)
In simple words: सदिश गुणनफल का उपयोग भौतिकी में कई महत्वपूर्ण चीजें बताने के लिए होता है, जैसे घूमती हुई चीजों की गति, किसी क्षेत्र का माप, किसी बल का घूमने का प्रभाव, और किसी घूमती हुई वस्तु का कुल संवेग। यह हमें बताता है कि दो सदिशों के आपसी प्रभाव से क्या नया पैदा होता है, जो दिशा के साथ होता है।

🎯 Exam Tip: इन उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये सदिश गुणनफल के वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों को दर्शाते हैं।

 

RBSE Class 11 Physics Chapter 2 आंकिक प्रश्न

 

Question 2. सदिश \( \overrightarrow{\mathbf{A}}=(3 \hat{i}+4 \hat{j}) \) का परिमाण ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया है
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} = 3\hat{i} + 4\hat{j} \)
सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) का परिमाण ज्ञात करने के लिए, हम इसके घटकों के वर्गों का योग करके वर्गमूल निकालते हैं।
\( |\overrightarrow{\mathrm{A}}| = \sqrt{(3)^2 + (4)^2} = \sqrt{9+16} \)
\( |\overrightarrow{\mathrm{A}}| = \sqrt{25} = 5 \)
इसलिए, सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) का परिमाण 5 है।
In simple words: किसी सदिश की ताकत या लंबाई जानने के लिए, हम उसके x और y हिस्सों को वर्ग करके जोड़ते हैं, फिर उसका वर्गमूल निकालते हैं। यहाँ, 3 और 4 को वर्ग करके जोड़ने पर 25 आता है, जिसका वर्गमूल 5 है।

🎯 Exam Tip: किसी सदिश का परिमाण (magnitude) ज्ञात करने के लिए पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करें, जहाँ घटक सदिश के लम्बवत भुजाएँ होते हैं।

 

Question 3. सदिश \( \overrightarrow{\mathbf{A}}=4 \hat{i}+3 \hat{j}-5 \hat{k} \) के अनुदिश एकांक सदिश का मान बताइये।
Answer: दिया है
\( \overrightarrow{\mathrm{A}} = 4\hat{i} + 3\hat{j} - 5\hat{k} \)
सबसे पहले, हमें सदिश का परिमाण ज्ञात करना होगा:
\( |\overrightarrow{\mathrm{A}}| = \sqrt{(4)^2 + (3)^2 + (-5)^2} \)
\( |\overrightarrow{\mathrm{A}}| = \sqrt{16+9+25} = \sqrt{50} \)
\( |\overrightarrow{\mathrm{A}}| = 5\sqrt{2} \)
एकांक सदिश \( \hat{A} \) सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{A}} \) को उसके परिमाण से भाग देकर प्राप्त होता है।
इसलिए, एकांक सदिश \( \hat{A} \)
\[ \hat{A} = \frac{\overrightarrow{\mathrm{A}}}{|\overrightarrow{\mathrm{A}}|} = \frac{4\hat{i}+3\hat{j}-5\hat{k}}{5\sqrt{2}} \]
In simple words: एकांक सदिश वह सदिश होता है जिसकी लंबाई 1 होती है और यह मूल सदिश की दिशा में होता है। इसे निकालने के लिए, मूल सदिश को उसकी कुल लंबाई से भाग दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: एकांक सदिश की दिशा मूल सदिश की दिशा के समान होती है, और यह केवल दिशा को दर्शाता है, परिमाण को नहीं।

 

Question 4. \( \frac{d}{dx}\left(x^{7}\right) \) का मान ज्ञात करो।
Answer: हम जानते हैं कि अवकलन का सामान्य सूत्र \( \frac{d}{dx}(x^n) = nx^{n-1} \) होता है। यह अवकलन का एक बुनियादी नियम है।
इसलिए,
\( \frac{d}{dx}(x^7) = 7x^{7-1} \)
\( \implies \frac{d}{dx}(x^7) = 7x^6 \)
In simple words: जब हम \( x \) की घात वाले किसी पद का अवकलन करते हैं, तो घात को आगे लाते हैं और घात में से 1 घटा देते हैं। यहाँ, \( x^7 \) का अवकलन करने पर \( 7x^6 \) मिलेगा।

🎯 Exam Tip: अवकलन का मूल नियम \( \frac{d}{dx}(x^n) = nx^{n-1} \) हमेशा याद रखें, यह कई समस्याओं को हल करने में काम आता है।

 

Question 6. \( \int x^{4} d x \) का मान ज्ञात करो।
Answer: हम जानते हैं कि समाकलन का सामान्य सूत्र \( \int x^{n} d x = \frac{x^{n+1}}{n+1} + C \) होता है, जहाँ \( n \neq -1 \)। यह समाकलन का एक महत्वपूर्ण नियम है।
यहाँ \( n=4 \), तो
\( \int x^{4} d x = \frac{x^{4+1}}{4+1} \)
\( \implies \int x^{4} d x = \frac{x^{5}}{5} \)
In simple words: जब हम \( x \) की घात का समाकलन करते हैं, तो घात में 1 जोड़ देते हैं और फिर उसी नई घात से भाग देते हैं। यहाँ \( x^4 \) का समाकलन करने पर \( x^5/5 \) मिलेगा।

🎯 Exam Tip: समाकलन के सूत्र में हमेशा \( C \) (समाकलन स्थिरांक) जोड़ना याद रखें, खासकर जब यह एक अनिश्चित समाकलन हो।

 

Question 7. \( \int x^{-5} d x \) का मान ज्ञात करो।
Answer: हम जानते हैं कि समाकलन का सामान्य सूत्र \( \int x^{n} d x = \frac{x^{n+1}}{n+1} + C \) होता है, जहाँ \( n \neq -1 \)।
यहाँ \( n=-5 \), तो
\( \int x^{-5} d x = \frac{x^{-5+1}}{-5+1} \)
\( \implies \int x^{-5} d x = \frac{x^{-4}}{-4} \)
\( \implies \int x^{-5} d x = -\frac{1}{4x^4} \)
In simple words: \( x \) की ऋणात्मक घात का समाकलन भी उसी नियम से होता है। घात में 1 जोड़ो और उसी से भाग दो। यहाँ, \( x^{-5} \) का समाकलन \( -1/(4x^4) \) होगा।

🎯 Exam Tip: ऋणात्मक घातों के साथ काम करते समय चिन्हों और घातों को सही ढंग से जोड़ना/घटाना सुनिश्चित करें।

 

Question 8. संख्या 83256 का पूर्णाश बताइये।
Answer: पूर्णाश किसी संख्या में दशमलव से पहले के अंकों की संख्या से संबंधित होता है।
संख्या 83256 में 5 अंक हैं।
अतः पूर्णाश = (अंकों की संख्या) - 1 = 5 - 1 = 4 होगा।
In simple words: पूर्णाश यह बताता है कि संख्या में दशमलव से पहले कितने अंक हैं। अगर संख्या 83256 है, तो इसमें 5 अंक हैं, तो पूर्णाश 4 होगा।

🎯 Exam Tip: किसी संख्या का पूर्णाश ज्ञात करने के लिए, दशमलव बिंदु से पहले के अंकों की संख्या गिनें और उसमें से एक घटा दें।

 

Question 9. संख्या 0.00356 का पूर्णाश बताइये।
Answer: यदि संख्या दशमलव से प्रारम्भ होती है (अर्थात् 1 से छोटी है), तो पूर्णांश ऋणात्मक होता है।
इसका मान दशमलव के दायीं ओर पहले गैर-शून्य अंक तक के शून्यों की संख्या होता है। इसमें पहला गैर-शून्य अंक शामिल नहीं होता है।
संख्या 0.00356 में दशमलव के बाद पहले गैर-शून्य अंक '3' से पहले 2 शून्य हैं।
अतः, पूर्णाश = -2 होगा।
In simple words: अगर संख्या 0.00... से शुरू होती है, तो पूर्णाश माइनस में होता है। इसमें दशमलव के बाद, पहले अंक से पहले जितने शून्य होते हैं, उतना ही माइनस में पूर्णाश होता है।

🎯 Exam Tip: ऋणात्मक पूर्णाश को दशमलव बिंदु के बाद पहले गैर-शून्य अंक तक के शून्यों की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है।

 

Question 10. log (8621) का मान ज्ञात करो।
Answer: संख्या 8621 को हम वैज्ञानिक संकेतन में लिख सकते हैं: \( 8621 = 8.621 \times 10^3 \)
अतः इसका पूर्णाश 3 होगा, क्योंकि \( 10^3 \) में 3 घात है।
लघुगणक सारणी से अपूर्णांश ज्ञात करने के लिए, हम 86 के सामने 2 वाले कॉलम में 9355 देखते हैं।
चौथे अंक (1) के संगत माध्य अन्तर 1 जोड़ते हैं।
तो, अपूर्णांश = \( 0.9355 + 0.0001 = 0.9356 \)
दी गई संख्या का लघुगणक मान पूर्णाश एवं अपूर्णांश के योग के बराबर होता है:
\( \log(8621) = \text{पूर्णाश} + \text{अपूर्णांश} \)
\( \log(8621) = 3 + 0.9356 = 3.9356 \)
In simple words: लॉग का मान निकालने के लिए, पहले संख्या को \( 10 \) की घात के रूप में लिखते हैं, उससे पूर्णाश मिलता है। फिर लॉग टेबल से दूसरा हिस्सा (अपूर्णांश) निकालते हैं। दोनों को जोड़कर पूरा लॉग मान मिलता है।

🎯 Exam Tip: लघुगणक सारणी का उपयोग करते समय पूर्णाश और अपूर्णांश को सही ढंग से पहचानना और जोड़ना महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. x – y तल में किसी बिन्दु पर दो बल \( \overrightarrow{\mathbf{F}_{1}}=(2 \hat{i}-3 \hat{j}) \mathbf{N} \) व \( \overrightarrow{\mathbf{F}_{2}}=(-\hat{i}+3 \hat{j}) \mathbf{N} \) कार्यरत हैं। परिणामी बल ज्ञात करो।
Answer: दिया गया है:
पहला बल \( \overrightarrow{\mathbf{F}_{1}} = (2\hat{i} - 3\hat{j}) \mathrm{N} \)
दूसरा बल \( \overrightarrow{\mathbf{F}_{2}} = (-\hat{i} + 3\hat{j}) \mathrm{N} \)
परिणामी बल \( \overrightarrow{\mathrm{F}} \) दोनों बलों का सदिश योग होता है।
\( \overrightarrow{\mathrm{F}} = \overrightarrow{\mathbf{F}_{1}} + \overrightarrow{\mathbf{F}_{2}} \)
\( \implies \overrightarrow{\mathrm{F}} = (2\hat{i} - 3\hat{j}) + (-\hat{i} + 3\hat{j}) \)
समान घटकों को एक साथ जोड़ते हैं:
\( \overrightarrow{\mathrm{F}} = (2-1)\hat{i} + (-3+3)\hat{j} \)
\( \overrightarrow{\mathrm{F}} = 1\hat{i} + 0\hat{j} \)
\( \implies \overrightarrow{\mathrm{F}} = \hat{i} \)
इसलिए, परिणामी बल \( \hat{i} \) न्यूटन है, जो x-अक्ष की धनात्मक दिशा में है।
In simple words: दो बलों को जोड़ने के लिए, हम उनके \( \hat{i} \) वाले हिस्सों को एक साथ जोड़ते हैं और \( \hat{j} \) वाले हिस्सों को एक साथ जोड़ते हैं। यहाँ, \( x \) दिशा में कुल बल \( 1\hat{i} \) और \( y \) दिशा में कुल बल \( 0\hat{j} \) आता है, तो परिणामी बल सिर्फ \( \hat{i} \) होगा।

🎯 Exam Tip: सदिशों को जोड़ते समय, हमेशा समान इकाई सदिशों \( (\hat{i}, \hat{j}, \hat{k}) \) के घटकों को एक साथ जोड़ें।

 

Question 12. किसी कण के वेग के दो समकोणीय घटकों में से । एक 10m/s अभीष्ट वेग की दिशा से 60° कोण बनाता है तो वेग का दूसरा घटक ज्ञात करो।
Answer: दिया है, वेग का एक घटक 10 m/s है और यह अभीष्ट वेग की दिशा से \( 60^\circ \) का कोण बनाता है।
मान लीजिए कण का अभीष्ट वेग \( V \) है।
हम जानते हैं कि वेग का घटक \( V_x = V \cos \theta \) होता है।
इसलिए, \( 10 = V \cos 60^\circ \)
\( \implies 10 = V \times \frac{1}{2} \)
\( \implies V = 20 \) मी./से. (यह कण का कुल वेग है)
वेग का दूसरा घटक (y-दिशा में) \( V_y = V \sin \theta \) होता है।
\( V_y = V \sin 60^\circ \)
\( \implies V_y = 20 \times \frac{\sqrt{3}}{2} \)
\( \implies V_y = 10\sqrt{3} \) मी./से.
In simple words: अगर किसी चीज की चाल का एक हिस्सा 10 मीटर/सेकंड है और वह मुख्य चाल से 60 डिग्री का कोण बनाता है, तो पहले हम कुल चाल निकालते हैं। फिर, इस कुल चाल का उपयोग करके, हम दूसरा हिस्सा निकालते हैं जो \( 10\sqrt{3} \) मीटर/सेकंड होगा।

🎯 Exam Tip: वेग के घटकों को ज्ञात करते समय, \( \cos \theta \) का उपयोग उस घटक के लिए करें जो कोण के साथ है, और \( \sin \theta \) का उपयोग उस घटक के लिए करें जो कोण के लंबवत है।

 

Question 13. पिण्ड पर कार्यरत बल \( \overrightarrow{\mathbf{F}}=(\hat{i}+\hat{j}-2 \hat{k}) \) एवं विस्थापन \( \overrightarrow{d r}=(-\hat{i}+2 \hat{j}-\hat{k}) \) हो तो कार्य की गणना करे बले एवं विस्थापन के मध्य कोण ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया है:
बल \( \overrightarrow{\mathbf{F}} = (\hat{i}+\hat{j}-2 \hat{k}) \)
विस्थापन \( \overrightarrow{d r} = (-\hat{i}+2\hat{j}-\hat{k}) \)
कार्य (W) बल और विस्थापन के अदिश गुणनफल (डॉट प्रोडक्ट) के बराबर होता है। यह बल द्वारा किए गए कार्य को दर्शाता है।
\( \mathrm{W} = \overrightarrow{\mathbf{F}} \cdot \overrightarrow{d r} \)
\( \implies \mathrm{W} = (\hat{i}+\hat{j}-2\hat{k}) \cdot (-\hat{i}+2\hat{j}-\hat{k}) \)
\( \implies \mathrm{W} = (1)(-1) + (1)(2) + (-2)(-1) \)
\( \implies \mathrm{W} = -1 + 2 + 2 \)
\( \implies \mathrm{W} = 3 \) मात्रक (जूल्स, यदि बल न्यूटन में और विस्थापन मीटर में है)
अब, बल और विस्थापन के बीच का कोण \( \theta \) ज्ञात करने के लिए, अदिश गुणनफल के सूत्र का उपयोग करेंगे:
\( \overrightarrow{\mathbf{F}} \cdot \overrightarrow{d r} = |\overrightarrow{\mathbf{F}}| |\overrightarrow{d r}| \cos \theta \)
\( \implies \cos \theta = \frac{\overrightarrow{\mathbf{F}} \cdot \overrightarrow{d r}}{|\overrightarrow{\mathbf{F}}| |\overrightarrow{d r}|} \)
हमें \( |\overrightarrow{\mathbf{F}}| \) और \( |\overrightarrow{d r}| \) का परिमाण ज्ञात करना होगा:
\( |\overrightarrow{\mathbf{F}}| = \sqrt{(1)^2 + (1)^2 + (-2)^2} = \sqrt{1+1+4} = \sqrt{6} \)
\( |\overrightarrow{d r}| = \sqrt{(-1)^2 + (2)^2 + (-1)^2} = \sqrt{1+4+1} = \sqrt{6} \)
इन मानों को \( \cos \theta \) के सूत्र में रखने पर:
\( \cos \theta = \frac{3}{\sqrt{6} \times \sqrt{6}} \)
\( \implies \cos \theta = \frac{3}{6} = \frac{1}{2} \)
\( \implies \theta = \cos^{-1}\left(\frac{1}{2}\right) \)
\( \implies \theta = 60^\circ \)
In simple words: कार्य निकालने के लिए बल और विस्थापन को गुणा करते हैं (डॉट प्रोडक्ट)। यहाँ, कार्य 3 इकाई है। कोण निकालने के लिए, बल और विस्थापन के परिमाणों को गुणा करके कार्य से भाग देते हैं, और फिर \( \cos \) का उल्टा करते हैं। यहाँ, कोण 60 डिग्री आता है।

🎯 Exam Tip: कार्य एक अदिश राशि है, जबकि बल और विस्थापन सदिश राशियाँ हैं। बल और विस्थापन के बीच का कोण ज्ञात करने के लिए अदिश गुणनफल के सूत्र का प्रयोग करें।

 

Question 15. एक कण की स्थितिज ऊर्जा \( U = y^2 \sin y \) है। इस कण पर कार्यरत बल \( F = -\frac{dU}{dy} \) द्वारा परिभाषित है। बल का मान ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया गया है स्थितिज ऊर्जा \( U = y^2 \sin y \)।
कण पर कार्यरत बल \( F = -\frac{dU}{dy} \) द्वारा परिभाषित है। बल ज्ञात करने के लिए, हमें \( U \) का \( y \) के सापेक्ष अवकलन करना होगा। यहाँ गुणन नियम (Product Rule) का उपयोग होगा।
\( \frac{dU}{dy} = \frac{d}{dy}(y^2 \sin y) \)
अवकलन के गुणन नियम (Product Rule) \( \frac{d}{dx}(uv) = u\frac{dv}{dx} + v\frac{du}{dx} \) से:
\( \frac{dU}{dy} = y^2 \frac{d}{dy}(\sin y) + \sin y \frac{d}{dy}(y^2) \)
\( \implies \frac{dU}{dy} = y^2 (\cos y) + \sin y (2y) \)
\( \implies \frac{dU}{dy} = y^2 \cos y + 2y \sin y \)
अतः बल \( F \) का मान होगा:
\( F = -\left(y^2 \cos y + 2y \sin y\right) \)
In simple words: किसी कण की ऊर्जा \( U \) दी गई है, और बल \( F \) को \( U \) के अवकलन के ऋणात्मक मान के रूप में परिभाषित किया गया है। \( U \) का अवकलन करने के लिए गुणन नियम का उपयोग करते हैं, जिससे \( y^2 \cos y + 2y \sin y \) मिलता है। फिर बल के लिए इसमें माइनस का चिन्ह लगा देते हैं।

🎯 Exam Tip: बल को स्थितिज ऊर्जा के ऋणात्मक ग्रेडिएंट के रूप में परिभाषित किया जाता है, यानी \( F = -\nabla U \)। एक-आयामी मामले में, यह \( F = -\frac{dU}{dx} \) या \( F = -\frac{dU}{dy} \) हो जाता है।

 

Question 16. कण के कोणीय संवेग तथा बल आघूर्ण में निम्न संबंध होता है
Answer: कोणीय संवेग (Angular momentum) \( \vec{J} \) और बल आघूर्ण (Torque) \( \vec{\tau} \) के बीच संबंध न्यूटन के गति के दूसरे नियम के घूर्णी समतुल्य से आता है। यह दर्शाता है कि बल आघूर्ण कोणीय संवेग में परिवर्तन की दर के बराबर होता है।
\[ \vec{\tau} = \frac{d\vec{J}}{dt} \]
यह संबंध घूर्णी गति में बल और रेखीय संवेग के बीच के संबंध \( \vec{F} = \frac{d\vec{P}}{dt} \) के समान है। बल आघूर्ण कोणीय संवेग को बदलता है।
In simple words: कोणीय संवेग (घूमने वाली चीज़ों का संवेग) और बल आघूर्ण (घूमने वाला बल) आपस में जुड़े हुए हैं। बल आघूर्ण, कोणीय संवेग को समय के साथ कैसे बदलता है, यह दिखाता है। जैसे धक्का देने से सीधी गति बदलती है, वैसे ही बल आघूर्ण से घूमने वाली गति बदलती है।

🎯 Exam Tip: यह संबंध घूर्णी गतिकी (rotational dynamics) का एक मौलिक सिद्धांत है, जो न्यूटन के दूसरे नियम का घूर्णी रूप है। इसे हमेशा याद रखें।

Free study material for Physics

RBSE Solutions Class 11 Physics Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें

Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 11 Physics textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 11 Physics chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 11 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Physics Class 11 Solved Papers

Using our Physics solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 11 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 11 Physics Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 11 Physics Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Physics are as per latest RBSE curriculum.

Are the Physics RBSE solutions for Class 11 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 11 Physics Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Physics concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 11 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 11 Physics Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 11 Physics Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 11 Physics. You can access RBSE Solutions Class 11 Physics Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Physics RBSE solutions for Class 11 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 11 Physics Chapter 2 प्रारम्भिक गणितीय संकल्पनायें in printable PDF format for offline study on any device.