RBSE Solutions Class 11 Physics Chapter 14 गैसों का अगुणित सिद्धान्त

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Detailed Chapter 14 गैसों का अगुणित सिद्धान्त RBSE Solutions for Class 11 Physics

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Class 11 Physics Chapter 14 गैसों का अगुणित सिद्धान्त RBSE Solutions PDF

Rbse Class 11 Physics Chapter 14 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर

Rbse Class 11 Physics Chapter 14 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. किसी ताप पर आदर्श गैस के लिये वर्ग माध्य मूल वेग क्या होता है?
Answer: आदर्श गैस के लिए वर्ग माध्य मूल वेग \( V_{rms} = \sqrt{\frac{3RT}{M}} \) होता है। इस सूत्र में, \( M \) गैस का अणु भार (मोलर द्रव्यमान) है, \( T \) गैस का परम ताप (केल्विन में) है, और \( R \) सार्वत्रिक गैस नियतांक है। यह वेग गैस के अणुओं की औसत गति का एक मापन है, जो उनके गतिज ऊर्जा से जुड़ा होता है।
In simple words: आदर्श गैस के अणुओं की औसत गति को मापने के लिए वर्ग माध्य मूल वेग का उपयोग किया जाता है. यह गैस के तापमान, अणु भार और गैस नियतांक पर निर्भर करता है.

🎯 Exam Tip: इस सूत्र को याद रखें और इसके हर पद (M, T, R) का अर्थ समझें। यह सूत्र गैसों के व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. गैस नियतांक (R) का मात्रक क्या होता है?
Answer: गैस नियतांक (R) का मात्रक जूल प्रति मोल प्रति केल्विन (Jmol\(^{-1}\)K\(^{-1}\)) होता है। यह मात्रक दर्शाता है कि एक मोल गैस का तापमान एक केल्विन बढ़ाने के लिए कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
In simple words: गैस नियतांक (R) का मात्रक Jmol\(^{-1}\)K\(^{-1}\) है. यह बताता है कि एक मोल गैस का ताप 1 केल्विन बढ़ाने में कितनी ऊर्जा लगती है.

🎯 Exam Tip: विभिन्न भौतिक राशियों के मात्रकों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर सार्वत्रिक स्थिरांकों के लिए।

 

Question 4. वाण्डरवाल समीकरण लिखिये।
Answer: वाण्डरवाल समीकरण वास्तविक गैसों के व्यवहार का वर्णन करता है, जो आदर्श गैस समीकरण से अधिक सटीक है। इसका सूत्र है: \( \left(P+\frac{a}{V^{2}}\right) (V - b) = nRT \)। इस समीकरण में, \( P \) गैस का प्रेक्षित दाब है, \( V \) गैस का आयतन है, \( T \) परम ताप है, और \( n \) गैस के मोलों की संख्या है। \( R \) सार्वत्रिक गैस नियतांक है। \( a \) और \( b \) वाण्डरवाल नियतांक हैं, जहाँ \( a \) अणुओं के बीच आकर्षण बल को और \( b \) अणुओं के आयतन को दर्शाता है।
In simple words: वाण्डरवाल समीकरण \( \left(P+\frac{a}{V^{2}}\right) (V - b) = nRT \) है. यह वास्तविक गैसों के लिए उपयोग होता है, क्योंकि यह अणुओं के आकर्षण और उनके अपने आयतन को ध्यान में रखता है.

🎯 Exam Tip: वाण्डरवाल समीकरण को लिखते समय, \( a \) और \( b \) नियतांकों के महत्व को ध्यान में रखें जो आदर्श गैस समीकरण से विचलन को दर्शाते हैं।

 

Question 5. गैस के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार परम शून्य ताप पर गैस के अणु की चाल क्या होती है?
Answer: गैस के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार, परम शून्य ताप (0 केल्विन या -273.15 डिग्री सेल्सियस) पर गैस के अणुओं की चाल शून्य हो जाती है। इस ताप पर अणुओं की गतिज ऊर्जा न्यूनतम होती है और वे लगभग स्थिर अवस्था में आ जाते हैं।
In simple words: परम शून्य ताप पर गैस के अणु बिलकुल स्थिर हो जाते हैं, इसलिए उनकी चाल शून्य होती है.

🎯 Exam Tip: याद रखें कि परम शून्य ताप वह स्थिति है जहाँ अणुओं की न्यूनतम संभव ऊर्जा होती है, जिसका अर्थ है कि उनकी गति रुक जाती है।

 

Question 6. स्वतंत्रता की कोटि (f) व रुद्धोष्म निष्पत्ति (y) में सम्बन्ध बताइये।
Answer: स्वतंत्रता की कोटि (f) और रुद्धोष्म निष्पत्ति (y) के बीच का संबंध \( y = \left(1 + \frac{2}{f}\right) \) होता है। यहाँ \( f \) गैस के अणुओं की स्वतंत्रता की कोटि है, जो यह बताती है कि अणु कितनी दिशाओं में स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। रुद्धोष्म निष्पत्ति गैस की विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात है।
In simple words: स्वतंत्रता की कोटि (f) और रुद्धोष्म निष्पत्ति (y) का संबंध \( y = \left(1 + \frac{2}{f}\right) \) है. यह बताता है कि गैस की ऊष्मा क्षमता उसकी अणुओं की गति करने की क्षमता से कैसे जुड़ी है.

🎯 Exam Tip: यह सूत्र विभिन्न गैसों के लिए \( \gamma \) का मान निकालने में उपयोगी है, इसलिए इसे अच्छे से याद रखें।

 

Question 7. एक वायुयान आकाश में उड़ रहा है तो उसकी स्वतंत्रता की कोटि क्या होगी?
Answer: यदि एक वायुयान आकाश में उड़ रहा है, तो उसकी स्थानान्तरीय स्वतंत्रता की कोटि 3 होगी। इसका मतलब है कि वायुयान x, y और z - इन तीनों अक्षों की दिशा में स्वतंत्र रूप से गति कर सकता है, भले ही वह घूम भी रहा हो, उसकी स्थानान्तरीय गति को तीन निर्देशांकों से ही दर्शाया जाता है।
In simple words: उड़ते हुए वायुयान की स्वतंत्रता की कोटि 3 होती है, क्योंकि वह किसी भी तीन दिशाओं (आगे-पीछे, ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं) में जा सकता है.

🎯 Exam Tip: किसी भी कण या वस्तु की स्थानान्तरीय स्वतंत्रता की कोटि हमेशा 3 होती है, क्योंकि वह त्रि-आयामी अंतरिक्ष में कहीं भी जा सकता है।

 

Question 8. किसी द्विपरमाणुक गैस के लिए Cp का मान बताइये।
Answer: किसी द्विपरमाणुक गैस के लिए स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (\( C_p \)) का मान \( \frac{7}{2} R \) होता है। यहाँ \( R \) सार्वत्रिक गैस नियतांक है। यह मान, द्विपरमाणुक गैसों के लिए स्वतंत्रता की कोटि \( f=5 \) (3 स्थानान्तरीय और 2 घूर्णन) के आधार पर निकाला जाता है, क्योंकि \( C_v = \left(\frac{f}{2}\right)R \) और \( C_p = C_v + R \)।
In simple words: द्विपरमाणुक गैस के लिए स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा \( C_p \) का मान \( \frac{7}{2} R \) होता है.

🎯 Exam Tip: \( C_p \) और \( C_v \) के मान गैस के प्रकार (एकपरमाणुक, द्विपरमाणुक, बहुपरमाणुक) के आधार पर अलग-अलग होते हैं, इसलिए उन्हें सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. गैस के अणुगति सिद्धान्त द्वारा दाब का सूत्र लिखिये।
Answer: गैस के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार, गैस द्वारा बर्तन की दीवारों पर आरोपित दाब का सूत्र \( P = \frac{1}{3} \frac{mn\overline{v}^2}{V} \) होता है। इस सूत्र में, \( m \) अणु का द्रव्यमान है, \( n \) अणुओं की संख्या है, \( \overline{v}^2 \) माध्य वर्ग वेग है, और \( V \) गैस का आयतन है। यह सूत्र गैस के अणुओं की दीवारों से टकराने के कारण होने वाले बल को दर्शाता है।
In simple words: गैस के दाब का सूत्र \( P = \frac{1}{3} \frac{mn\overline{v}^2}{V} \) है, जहाँ \( m \) अणु का वजन, \( n \) अणुओं की संख्या, \( \overline{v}^2 \) औसत वेग का वर्ग और \( V \) गैस का आयतन है.

🎯 Exam Tip: दाब के सूत्र के सभी घटकों (द्रव्यमान, संख्या, वेग, आयतन) को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह गैस के मैक्रोस्कोपिक गुणों को माइक्रोस्कोपिक आणविक गति से जोड़ता है।

Rbse Class 11 Physics Chapter 14 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. गैसों के अणुगति सिद्धान्त के अभिगृहितों की व्याख्या कीजिये।
Answer: गैसों के अणुगति सिद्धान्त, गैसों के विभिन्न भौतिक गुणों की व्याख्या करने के लिए कुछ मुख्य परिकल्पनाओं पर आधारित है। इन परिकल्पनाओं को अभिगृहीत (postulates) कहते हैं, जो निम्न प्रकार हैं:

  • एक गैस के सभी अणु आकार और द्रव्यमान में समान होते हैं, और वे पूरी तरह से प्रत्यास्थ (elastic) होते हैं।
  • गैस के अणुओं का आयतन, गैस के कुल आयतन की तुलना में बहुत कम होता है, इसे नगण्य माना जाता है।
  • गैस के अणुओं का वेग 0 से अनंत तक होता है, और वे सभी संभव वेगों से हर संभव दिशा में लगातार गतिमान रहते हैं। गैस का ताप अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा के सीधे समानुपाती होता है।
  • गैस के अणुओं के बीच टक्करें पूर्णतया प्रत्यास्थ होती हैं, और टक्कर में लगने वाला समय नगण्य होता है (लगभग \( 10^{-8} \) सेकंड)।
  • टक्कर से पहले अणु द्वारा सीधी रेखा में तय की गई दूरी को 'मुक्त पथ' कहते हैं, और निश्चित टक्करों के बाद तय की गई औसत दूरी को 'औसत मुक्त पथ' कहते हैं।
  • अणुओं के बीच कोई आकर्षण या प्रतिकर्षण बल कार्य नहीं करता है।
  • गैस के अणुओं पर गुरुत्वाकर्षण बल का प्रभाव नहीं होता है, क्योंकि अणुओं का द्रव्यमान बहुत कम और वेग बहुत अधिक होता है।
  • गैस का घनत्व पूरे गैस के सभी भागों में लगभग समान होता है।
  • जब गैस के गतिशील अणु बर्तन की दीवार से टकराते हैं, तो उनके संवेग में परिवर्तन होता है। यह संवेग परिवर्तन पात्र की दीवारों पर स्थानांतरित होता है, जिसके कारण गैस बर्तन की दीवार पर दबाव उत्पन्न करती है।

सीमाबद्धता (Limitations):

  • अणुगति सिद्धान्त में यह माना जाता है कि गैस के अणुओं के बीच कोई आकर्षण या प्रतिकर्षण बल नहीं लगता है। हालांकि, जब दो अणु बहुत पास आते हैं, तो उनके बीच प्रतिकर्षण बल लगने लगता है, जिससे उनकी गति की दिशा बदल जाती है।
  • जब गैस का दाब अधिक होता है, तो गैस के अणुओं का आयतन, बर्तन के आयतन के मुकाबले नगण्य नहीं माना जा सकता है।
  • गैसों के अणुओं में आकर्षण बल भी होता है, जिसके कारण बर्तन की दीवार पर लगने वाला दाब, आकर्षण न होने की स्थिति की तुलना में थोड़ा कम हो जाता है।
  • अणुगति सिद्धान्त में अणुओं का वेग 0 से अनंत तक माना जाता है, जबकि कोई भी कण प्रकाश के वेग से अधिक गति नहीं कर सकता।

अणुगति सिद्धांत इन आदर्श परिकल्पनाओं के आधार पर गैसों के स्थूल गुणों को सूक्ष्म कणों की गति के माध्यम से समझाता है, जो वास्तविक गैसों के व्यवहार को कुछ सीमाओं तक ही समझा पाता है।

बॉयल के नियम की व्याख्या:

गैस के अणुओं द्वारा दाब के समीकरण \( P = \frac{1}{3} \frac{mn\overline{C}_{rms}^2}{V} \) को लें। स्थिर ताप पर गैस की कुल गतिज ऊर्जा (\( \frac{1}{2} mn\overline{C}_{rms}^2 \)) भी स्थिर रहती है, क्योंकि गतिज ऊर्जा सीधे ताप के समानुपाती होती है। जब कुल गतिज ऊर्जा स्थिर है, तो \( mn\overline{C}_{rms}^2 \) भी स्थिर होगा।
\( \implies \) \( P = \frac{1}{3V} \times (\text{स्थिर मान}) \)
\( \implies \) \( PV = \text{स्थिर मान} \)
अतः, स्थिर ताप पर गैस की निश्चित मात्रा के लिए दाब और आयतन का गुणनफल हमेशा स्थिर रहता है। यह बॉयल का नियम है।

चार्ल्स के नियम की व्याख्या:

पुनः दाब समीकरण \( P = \frac{1}{3} \frac{mn\overline{C}_{rms}^2}{V} \) से, यदि दाब स्थिर है और \( m \) व \( n \) भी स्थिर हैं, तो
\( \implies \) \( P \propto \frac{\overline{C}_{rms}^2}{V} \)
हम जानते हैं कि \( \overline{C}_{rms}^2 \propto T \) (परम ताप)।
\( \implies \) \( P \propto \frac{T}{V} \)
जब दाब \( P \) स्थिर होता है, तो \( \frac{T}{V} = \text{स्थिर} \), या \( V \propto T \)।
अतः, स्थिर दाब पर गैस की निश्चित मात्रा का आयतन उसके परम ताप के सीधे समानुपाती होता है। यह चार्ल्स का नियम है।

गैलुसाक के नियम की व्याख्या:

चार्ल्स के नियम की तरह, दाब समीकरण \( P = \frac{1}{3} \frac{mn\overline{C}_{rms}^2}{V} \) से, यदि आयतन \( V \) स्थिर है और \( m \) व \( n \) भी स्थिर हैं, तो
\( \implies \) \( P \propto \overline{C}_{rms}^2 \)
हम जानते हैं कि \( \overline{C}_{rms}^2 \propto T \)।
\( \implies \) \( P \propto T \)
या \( \frac{P}{T} = \text{स्थिर} \)।
अतः, स्थिर आयतन पर गैस की निश्चित मात्रा का दाब उसके परम ताप के सीधे समानुपाती होता है। यह गैलुसाक का नियम है।

डाल्टन के आंशिक दाब के नियम की व्याख्या:

डाल्टन के आंशिक दाब का नियम बताता है कि एक बर्तन में भरी हुई अक्रियाशील गैसों के मिश्रण का कुल दाब, प्रत्येक गैस द्वारा अलग-अलग लगाए गए आंशिक दाबों के योग के बराबर होता है: \( P = P_1 + P_2 + P_3 + \dots \)। गैस के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार, प्रत्येक गैस के अणु बर्तन की दीवारों पर स्वतंत्र रूप से दाब लगाते हैं, जैसे कि अन्य गैसें मौजूद न हों। प्रत्येक गैस का दाब उसकी अपनी अणुओं की संख्या, द्रव्यमान और गतिज ऊर्जा पर निर्भर करता है। क्योंकि अक्रियाशील गैसों के अणु एक-दूसरे से कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे के दाब को प्रभावित नहीं करते। कुल दाब सभी गैसों के व्यक्तिगत दाबों का योग होता है। यह नियम बताता है कि गैसों का दाब उनके अणुओं की संख्या और गतिज ऊर्जा पर निर्भर करता है, न कि उनकी पहचान पर।

यह सिद्धान्त गैसों के व्यवहार को मौलिक आणविक स्तर पर समझने में मदद करता है।
In simple words: अणुगति सिद्धान्त बताता है कि गैसें छोटे-छोटे, लगातार घूमने वाले कणों से बनी होती हैं. यह बताता है कि गैस के नियम, जैसे बॉयल, चार्ल्स, गैलुसाक और डाल्टन के नियम, कैसे काम करते हैं. ये कण आपस में और दीवारों से टकराते रहते हैं, और इन टक्करों के कारण ही गैस का दाब बनता है.

🎯 Exam Tip: अणुगति सिद्धान्त के मुख्य अभिगृहीतों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें, और फिर प्रत्येक गैस नियम को दाब के आणविक सूत्र से कैसे प्राप्त किया जाता है, उसे समझाएं।

 

Question 3. गैस के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार ताप की व्याख्या कीजिये।
Answer: गैस के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार, किसी पदार्थ का ताप उसके अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा का सीधा मापक होता है। जब पदार्थ को ऊष्मा दी जाती है, तो यह ऊष्मा अणुओं में वितरित हो जाती है, जिससे उनकी गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है। अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ने से वे तेजी से और अधिक आयाम के साथ कंपन, स्थानान्तरण और घूर्णन गतियाँ करने लगते हैं। यह बढ़ी हुई कुल गतिज ऊर्जा दी गई ऊष्मा के बराबर होती है, और इस ऊर्जा वृद्धि के कारण ही पदार्थ का ताप बढ़ता है। इस प्रकार, जितना अधिक अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा होगी, उतना ही अधिक पदार्थ का ताप होगा।
In simple words: ताप वास्तव में अणुओं की गतिज ऊर्जा का मापन है. जब कोई चीज गर्म होती है, तो उसके अणु तेजी से हिलते हैं और उनमें अधिक ऊर्जा होती है. ठंडा होने पर अणु धीरे हो जाते हैं और उनकी ऊर्जा कम हो जाती है.

🎯 Exam Tip: ताप को हमेशा अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा से जोड़कर व्याख्या करें। यह अणुगति सिद्धान्त का एक केंद्रीय विचार है।

 

Question 4. वास्तविक गैसों के लिये वाण्डरवाल गैस समीकरण की व्याख्या कीजिये।
Answer: वाण्डरवाल गैस समीकरण वास्तविक गैसों के व्यवहार का वर्णन करता है, जो आदर्श गैस मॉडल में किए गए दो प्रमुख अनुमानों को सही करके बनाया गया है। आदर्श गैसों में अणुओं के बीच कोई आकर्षण बल नहीं माना जाता और अणुओं का आयतन नगण्य माना जाता है। वाण्डरवाल समीकरण इन कमियों को दूर करता है।

अन्तराण्विक अन्योन्य क्रिया (Intermolecular Interaction): आदर्श गैसों में अणुओं के बीच कोई आकर्षण या प्रतिकर्षण बल नहीं होता है। लेकिन वास्तविक गैसों में अणुओं के बीच अन्तराण्विक बल (जिन्हें वाण्डरवाल बल भी कहते हैं) मौजूद होते हैं। उच्च ताप और निम्न दाब पर इन बलों का प्रभाव नगण्य हो सकता है, लेकिन निम्न ताप और उच्च दाब पर इनका प्रभाव महत्वपूर्ण होता है। इन आकर्षण बलों के कारण गैस का वास्तविक दाब, आदर्श गैस के अपेक्षित दाब से अधिक होता है क्योंकि दीवार के पास वाले अणु अंदर की ओर खींचते हैं, जिससे वे दीवार से कम बल से टकराते हैं। इसे निम्न प्रकार समझा जा सकता है:

A B C D बंद पात्र में गैस के अणु

मान लीजिए एक बंद पात्र में \( n \) अणु भरे हैं। जो अणु पात्र के बीच में होते हैं, उन पर चारों ओर से अन्य अणुओं द्वारा समान रूप से आकर्षण बल लगता है, जिससे उन पर परिणामी अन्तराण्विक बल शून्य होता है। लेकिन जो अणु दीवार के पास होते हैं, वे केवल अंदर की ओर खींचते हैं, क्योंकि दीवार के बाहर कोई अणु नहीं होता। इस अंदरूनी खिंचाव के कारण, दीवार से टकराते समय इन अणुओं के संवेग में कुछ कमी आती है, जिससे वे दीवार पर आदर्श गैस के अणुओं की तुलना में कम बल लगाते हैं। इस कमी को दाब में कमी \( P_{in} \) के रूप में दर्शाया जाता है।

दाब में कमी \( P_{in} \) अणुओं की संख्या \( n_1 \) के समानुपाती होती है जो दीवार से टकराते हैं। यह संख्या कुल अणुओं की संख्या \( n \) के समानुपाती होती है (\( n_1 \propto n \)) और गैस के आयतन \( V \) के व्युत्क्रमानुपाती होती है (\( n_1 \propto \frac{1}{V} \))।
\( \implies \) \( P_{in} \propto \frac{n}{V} \)
दाब में कमी उन अणुओं की संख्या \( n_2 \) के भी समानुपाती होती है जो दीवार से टकराने वाले अणुओं को भीतर खींचते हैं। यह संख्या भी कुल अणुओं की संख्या \( n \) के समानुपाती (\( n_2 \propto n \)) और आयतन \( V \) के व्युत्क्रमानुपाती होती है (\( n_2 \propto \frac{1}{V} \))।
\( \implies \) \( P_{in} \propto \frac{n}{V} \)
तो कुल दाब में कमी \( P_{in} \propto \frac{n}{V} \times \frac{n}{V} \implies P_{in} \propto \frac{n^2}{V^2} \)। इसे \( P_{in} = \frac{an^2}{V^2} \) लिखा जा सकता है, जहाँ \( a \) एक स्थिरांक है।
इसलिए, गैस का वास्तविक दाब \( P' = P + P_{in} = P + \frac{an^2}{V^2} \)।

अणुओं का अशून्य आयतन (Non-zero Volume of Molecules): आदर्श गैस के अणुओं को बिंदु द्रव्यमान माना जाता है, जिसका अर्थ है कि उनका कोई आयतन नहीं होता। लेकिन वास्तविक गैसों के अणु कुछ आयतन घेरते हैं। इसलिए, गैस के उपलब्ध आयतन को बर्तन के आयतन \( V \) से कम करना पड़ता है। यह संशोधित आयतन \( V' = V - nb \) होता है, जहाँ \( b \) एक स्थिरांक है और \( nb \) अणुओं द्वारा घेरा गया कुल आयतन है। \( b \) को 'सह-आयतन' कहा जाता है, और यह अणुओं के वास्तविक आयतन का लगभग चार गुना होता है।

इन दोनों सुधारों को आदर्श गैस समीकरण \( PV = nRT \) में डालने पर वाण्डरवाल समीकरण प्राप्त होता है:

\( \left(P+\frac{an^2}{V^2}\right) (V - nb) = nRT \)

यह समीकरण एक मोल गैस के लिए \( \left(P+\frac{a}{V^2}\right) (V - b) = RT \) बन जाता है, जहाँ \( n=1 \)। वाण्डरवाल समीकरण वास्तविक गैसों के \( P-V-T \) संबंधों को बेहतर ढंग से समझाता है, खासकर उच्च दाब और निम्न ताप पर जहाँ आदर्श गैस समीकरण विफल हो जाता है।
In simple words: वाण्डरवाल समीकरण बताता है कि वास्तविक गैसें आदर्श गैसों से अलग क्यों होती हैं. यह गैस के अणुओं के बीच आकर्षण बल और अणुओं के अपने आयतन को ध्यान में रखता है. यह समीकरण आदर्श गैस के दाब और आयतन में सुधार करके लिखा जाता है.

🎯 Exam Tip: वाण्डरवाल समीकरण के दो मुख्य सुधारों - दाब में सुधार (अन्तराण्विक बल के कारण) और आयतन में सुधार (अणुओं के अपने आयतन के कारण) - को स्पष्ट रूप से समझाएं। नियतांक \( a \) और \( b \) के भौतिक महत्व को बताएं।

 

Question 5. स्वतंत्रता की कोटि से क्या अभिप्राय है?
Answer: स्वतंत्रता की कोटि (Degrees of Freedom) किसी कण, अणु या परमाणु की स्वतंत्र गति करने की क्षमता को दर्शाती है। यह उन स्वतंत्र निर्देशांकों की संख्या होती है जिनकी आवश्यकता किसी निकाय की स्थिति और विन्यास को पूरी तरह से परिभाषित करने के लिए होती है। दूसरे शब्दों में, यह वह तरीकों की संख्या है जिनमें एक अणु ऊर्जा को अवशोषित कर सकता है।

उदाहरण:

  • एक छड़ में पिरोया हुआ छल्ला केवल छड़ की लम्बाई के अनुदिश गति कर सकता है, इसलिए उसकी स्वतंत्रता की कोटि एक है (केवल एक दिशा में स्थानान्तरण)।
  • कैरमबोर्ड पर चलने वाली गोटियाँ केवल सतह पर लम्बाई और चौड़ाई (x और y दिशाओं) में गति कर सकती हैं, इसलिए उनकी स्वतंत्रता की कोटि दो है (दो दिशाओं में स्थानान्तरण)।
  • आकाश में उड़ने वाला वायुयान तीनों दिशाओं (x, y, z) में गति कर सकता है, इसलिए उसकी स्थानान्तरीय स्वतंत्रता की कोटि तीन है।

स्वतंत्रता की कोटियों के प्रकार:

स्वतंत्रता की कोटियाँ मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं:

(a) स्थानान्तरण की स्वतंत्रता की कोटियाँ (Degrees of Freedom Translation Motion): ये अणु की सीधी रेखा में गति (रेखीय गति) के कारण उत्पन्न होती हैं। किसी भी अणु की अधिकतम तीन स्थानान्तरीय स्वतंत्रता की कोटियाँ हो सकती हैं, जो सामान्य ताप पर हमेशा उपस्थित होती हैं। ये x, y और z अक्षों के अनुदिश गति से संबंधित हैं।

(b) घूर्णन की स्वतंत्रता की कोटियाँ (Degrees of Freedom of Rotation Motion): ये अणु के द्रव्यमान केंद्र से गुजरने वाले अक्ष के सापेक्ष घूर्णन गति के कारण उत्पन्न होती हैं। इनकी संख्या अणु की संरचना पर निर्भर करती है (जैसे एकपरमाणुक गैसों में 0, द्विपरमाणुक गैसों में 2, और बहुपरमाणुक गैसों में 3)। ये भी सामान्य ताप पर उपस्थित रहती हैं।

(c) कम्पन की स्वतंत्रता की कोटियाँ (Degrees of Freedom of Vibrational Motion): ये अणु के परमाणुओं के एक-दूसरे के सापेक्ष कंपन के कारण उत्पन्न होती हैं। इनकी संख्या भी अणु की संरचना पर निर्भर करती है। ये सामान्य ताप पर उपस्थित नहीं होतीं बल्कि उच्च ताप पर सक्रिय होती हैं। प्रत्येक कंपन के तरीके के लिए दो स्वतंत्रता की कोटियाँ होती हैं - एक गतिज ऊर्जा के लिए और एक स्थितिज ऊर्जा के लिए।

किसी निकाय के लिए स्वतंत्रता की कुल कोटि \( f = 3N - k \) होती है, जहाँ \( N \) कणों की संख्या है और \( k \) कणों के बीच स्वतंत्र प्रतिबंधों की संख्या है। स्वतंत्रता की कोटि यह निर्धारित करती है कि अणु कितनी ऊर्जा को विभिन्न तरीकों से बांट सकते हैं, जो गैस की आंतरिक ऊर्जा और विशिष्ट ऊष्मा को प्रभावित करता है।
In simple words: स्वतंत्रता की कोटि यह बताती है कि कोई अणु कितनी अलग-अलग दिशाओं में घूम या हिल सकता है. ये तीन प्रकार की होती हैं - सीधी चाल (स्थानान्तरण), घूमना (घूर्णन) और कंपन करना. यह गैस की ऊर्जा को समझने में मदद करती है.

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता की कोटि को परिभाषित करते समय उसके तीनों प्रकारों (स्थानान्तरीय, घूर्णन, कम्पन) का उल्लेख करें और प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण दें।

 

Question 6. गैस के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार बॉयल के नियम की व्याख्या कीजिये।
Answer: बॉयल का नियम बताता है कि स्थिर ताप और गैस की निश्चित मात्रा के लिए, गैस का दाब उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है (\( PV = \text{नियतांक} \))। इसे अणुगति सिद्धान्त के आधार पर निम्न प्रकार समझाया जा सकता है:

अणुगति सिद्धान्त के अनुसार, गैस द्वारा बर्तन की दीवारों पर आरोपित दाब का समीकरण है:

\[ P = \frac{1}{3} \frac{mn\overline{C}_{rms}^2}{V} \quad \dots(1) \]

जहाँ:

  • \( m \) = एक अणु का द्रव्यमान
  • \( n \) = अणुओं की संख्या
  • \( \overline{C}_{rms}^2 \) = अणुओं के माध्य वर्ग वेग का वर्ग
  • \( V \) = गैस का आयतन

अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा \( \frac{1}{2} m\overline{C}_{rms}^2 \) होती है, और यह ऊर्जा गैस के परम ताप \( T \) के सीधे समानुपाती होती है।
\( \implies \) \( \frac{1}{2} m\overline{C}_{rms}^2 \propto T \)
\( \implies \) \( mn\overline{C}_{rms}^2 \propto T \) (चूंकि \( m \) और \( n \) स्थिर हैं)
यदि हम ताप को स्थिर रखते हैं, तो \( T \) नियत होगा, जिससे \( mn\overline{C}_{rms}^2 \) भी नियत हो जाएगा। समीकरण (1) से, जब \( mn\overline{C}_{rms}^2 \) नियत है, तो
\( \implies \) \( P = \left(\frac{1}{3} mn\overline{C}_{rms}^2\right) \frac{1}{V} \)
\( \implies \) \( P = (\text{एक नियत मान}) \times \frac{1}{V} \)
\( \implies \) \( PV = \text{नियतांक} \)

यह बॉयल का नियम है, जो बताता है कि स्थिर ताप पर गैस की निश्चित मात्रा के लिए दाब और आयतन का गुणनफल हमेशा स्थिर रहता है। यह हमें दिखाता है कि कैसे सूक्ष्म आणविक गतियाँ मैक्रोस्कोपिक गुणों (जैसे दाब और आयतन) को जन्म देती हैं।
In simple words: बॉयल का नियम कहता है कि अगर गैस का तापमान नहीं बदला जाता, तो उसका दाब और आयतन एक-दूसरे के उल्टे होते हैं. अगर दाब बढ़ता है, तो आयतन घटता है, और इसका उल्टा भी सच है. अणुगति सिद्धान्त इस नियम को अणुओं की गति के आधार पर समझाता है.

🎯 Exam Tip: बॉयल के नियम की व्याख्या करते समय, स्थिर ताप पर अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा (और \( \overline{C}_{rms}^2 \)) के नियत रहने की स्थिति पर जोर दें।

 

Question 7. ऊर्जा के सम विभाजन नियम पर टिप्पणी लिखिये।
Answer: ऊर्जा के सम विभाजन नियम (Law of Equipartition of Energy) को सर्वप्रथम मैक्सवेल ने गैसों के गत्यात्मक सिद्धान्त के आधार पर प्रतिपादित किया था। यह नियम बताता है कि तापीय साम्य अवस्था में, प्रत्येक स्वतंत्रता की कोटि से जुड़ी औसत गतिज ऊर्जा \( \frac{1}{2} kT \) होती है, जहाँ \( k \) बोल्ट्ज़मान नियतांक और \( T \) परम ताप है।

जब विभिन्न तापों पर मौजूद दो गैसें आपस में मिश्रित की जाती हैं, तो उनके अणुओं की टक्करें होती हैं। इन टक्करों के कारण, ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है, और यह तब तक चलता रहता है जब तक दोनों गैसों के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा समान नहीं हो जाती। एक बार जब औसत गतिज ऊर्जा समान हो जाती है, तो दोनों गैसों का ताप भी समान हो जाता है। इस स्थिति को तापीय साम्य (Thermal Equilibrium) कहा जाता है। ऊर्जा का यह सम-विभाजन हर अणु को अपनी प्रत्येक स्वतंत्रता की कोटि में समान मात्रा में ऊर्जा रखने की अनुमति देता है।

उदाहरण के लिए, यदि एक अणु की गतिज ऊर्जा के घटक \( u, v, w \) हैं, तो कुल गतिज ऊर्जा \( C^2 = u^2 + v^2 + w^2 \) होती है। इस नियम के अनुसार, \( \frac{1}{2} m\overline{u^2} = \frac{1}{2} m\overline{v^2} = \frac{1}{2} m\overline{w^2} = \frac{1}{2} kT \) होती है। इस प्रकार, अणुओं की कुल औसत गतिज ऊर्जा \( \frac{1}{2} m\overline{C^2} = \frac{3}{2} kT \) होती है। यह नियम बताता है कि विभिन्न ऊर्जा घटक (जैसे स्थानान्तरीय, घूर्णन, कंपन) में ऊर्जा समान रूप से वितरित होती है।
In simple words: ऊर्जा के सम विभाजन का नियम कहता है कि जब अलग-अलग तापमानों वाली गैसों को मिलाया जाता है, तो उनकी ऊर्जा आपस में तब तक बंटती है, जब तक उनका तापमान एक जैसा न हो जाए. हर अणु को उसकी गति करने की हर दिशा में बराबर ऊर्जा मिलती है.

🎯 Exam Tip: इस नियम की परिभाषा, तापीय साम्य से इसका संबंध और प्रत्येक स्वतंत्रता की कोटि से जुड़ी औसत ऊर्जा \( \frac{1}{2} kT \) को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 8. एक-परमाणुक, द्वि-परमाणुक व बहु-परमाणुक गैस के लिये Cp, Cv व y के मान ज्ञात कीजिये।
Answer: विशिष्ट ऊष्मा किसी पदार्थ की वह ऊष्मा होती है जो उसके इकाई द्रव्यमान के ताप को 1 डिग्री सेल्सियस या 1 केल्विन बढ़ाने के लिए आवश्यक होती है। इसे \( C = \frac{\Delta Q}{m \times \Delta T} \) से दर्शाया जाता है। गैसों के लिए दो प्रकार की मोलर विशिष्ट ऊष्माएँ होती हैं: स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (\( C_v \)) और स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (\( C_p \))। \( C_p \) और \( C_v \) का मान गैस के प्रकार (स्वतंत्रता की कोटि) पर निर्भर करता है।

1. एक-परमाणुक गैस (Monoatomic Gas) - उदाहरण: हीलियम (He), नीओन (Ne), आर्गन (Ar)

  • एक-परमाणुक गैसों में केवल 3 स्थानान्तरीय स्वतंत्रता की कोटियाँ होती हैं (\( f=3 \))।
  • कुल आंतरिक ऊर्जा \( U = \frac{3}{2} RT \) (एक मोल के लिए)।
  • स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (\( C_v \)): \( C_v = \frac{dU}{dT} = \frac{3}{2} R \) (जूल मोल\(^{-1}\)K\(^{-1}\)) या \( \frac{3}{2} \text{कैलोरी मोल}^{-1}\text{K}^{-1} \)।
  • स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (\( C_p \)): मेयर के सम्बन्ध से \( C_p = C_v + R \)।
    \( \implies \) \( C_p = \frac{3}{2} R + R = \frac{5}{2} R \)।
  • रुद्धोष्म निष्पत्ति (\( \gamma \)): \( \gamma = \frac{C_p}{C_v} = \frac{\frac{5}{2} R}{\frac{3}{2} R} = \frac{5}{3} \approx 1.67 \)।

2. द्विपरमाणुक गैस (Diatomic Gas) - उदाहरण: हाइड्रोजन (H\(_{2}\)), नाइट्रोजन (N\(_{2}\)), ऑक्सीजन (O\(_{2}\))

  • सामान्य ताप पर द्विपरमाणुक गैसों में 3 स्थानान्तरीय और 2 घूर्णन स्वतंत्रता की कोटियाँ होती हैं (\( f=5 \))। उच्च ताप पर कंपन भी शामिल हो सकता है।
  • कुल आंतरिक ऊर्जा \( U = \frac{5}{2} RT \) (एक मोल के लिए)।
  • स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (\( C_v \)): \( C_v = \frac{dU}{dT} = \frac{5}{2} R \)।
  • स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (\( C_p \)): \( C_p = C_v + R = \frac{5}{2} R + R = \frac{7}{2} R \)।
  • रुद्धोष्म निष्पत्ति (\( \gamma \)): \( \gamma = \frac{C_p}{C_v} = \frac{\frac{7}{2} R}{\frac{5}{2} R} = \frac{7}{5} = 1.4 \)।

3. त्रिपरमाणुक गैस (Triatomic Gas) - उदाहरण: H\(_{2}\)O (अरेखीय), CO\(_{2}\) (रेखीय)

  • अरेखीय अणु (Non-linear Molecule) - उदाहरण: H\(_{2}\)O अणु

    • इनमें 3 स्थानान्तरीय और 3 घूर्णन स्वतंत्रता की कोटियाँ होती हैं (\( f=6 \))।
    • कुल आंतरिक ऊर्जा \( U = \frac{6}{2} RT = 3RT \)।
    • \( C_v = \frac{dU}{dT} = 3R \)।
    • \( C_p = C_v + R = 3R + R = 4R \)।
    • \( \gamma = \frac{C_p}{C_v} = \frac{4R}{3R} = \frac{4}{3} \approx 1.33 \)।
  • रेखीय अणु (Linear Molecule) - उदाहरण: कार्बन डाईऑक्साइड (CO\(_{2}\))

    • इनमें 3 स्थानान्तरीय और 2 घूर्णन स्वतंत्रता की कोटियाँ होती हैं (\( f=5 \))। (उच्च ताप पर कंपन भी शामिल होने पर \( f=7 \) हो सकता है)।
    • \( C_v = \frac{7}{2} R \)।
    • \( C_p = C_v + R = \frac{7}{2} R + R = \frac{9}{2} R \)।
    • \( \gamma = \frac{C_p}{C_v} = \frac{\frac{9}{2} R}{\frac{7}{2} R} = \frac{9}{7} \approx 1.28 \)।

बहुपरमाणुक गैसें (Polyatomic Gases):व्यापक रूप में, बहुपरमाणुक अणुओं में 3 स्थानान्तरीय, 3 घूर्णी स्वतंत्रता की कोटियाँ और कुछ निश्चित संख्या में कंपन कोटियाँ हो सकती हैं। कंपन की कोटियाँ उच्च ताप पर ही सक्रिय होती हैं। ऊर्जा सम-विभाजन के नियम के अनुसार, 1 मोल गैस की कुल आंतरिक ऊर्जा इन सभी स्वतंत्रता की कोटियों के योग से निर्धारित होती है।
\( C_v = \frac{dE}{dT} = \frac{3}{2} R + \frac{3}{2} R + f_{vib}R = (3 + f_{vib})R \), जहाँ \( f_{vib} \) कंपन की कोटियाँ हैं।
\( C_p = C_v + R = (4 + f_{vib})R \)
\( \gamma = \frac{C_p}{C_v} = \frac{(4 + f_{vib})}{(3 + f_{vib})} \)

गैस\( C_v \) (Jmol\(^{-1}\)K\(^{-1}\))\( C_p \) (Jmol\(^{-1}\)K\(^{-1}\))\( C_p - C_v \) (Jmol\(^{-1}\)K\(^{-1}\))\( \gamma = C_p/C_v \)
हीलियम12.520.88.31.66
एकआण्विक नियॉन12.720.88.11.64
ऑर्गन12.520.88.31.67
हाइड्रोजन20.428.88.41.41
द्विआण्विक ऑक्सीजन21.029.38.31.40
नाइट्रोजन20.829.18.31.40
बहुआण्विक मीथेन27.135.48.31.31

यह तालिका विभिन्न गैसों के लिए \( C_p, C_v \) और \( \gamma \) के प्रायोगिक मान दिखाती है, जो अणुगति सिद्धान्त के सैद्धांतिक मूल्यों के काफी करीब होते हैं।
In simple words: \( C_p \) और \( C_v \) गैस की ऊष्मा क्षमताएं हैं - स्थिर दाब पर और स्थिर आयतन पर. \( \gamma \) उनका अनुपात है. एक-परमाणुक गैसों में \( C_v = \frac{3}{2} R \) और \( C_p = \frac{5}{2} R \), द्विपरमाणुक में \( C_v = \frac{5}{2} R \) और \( C_p = \frac{7}{2} R \) और बहुपरमाणुक गैसों के मान उनकी जटिलता के आधार पर अलग-अलग होते हैं.

🎯 Exam Tip: तीनों प्रकार की गैसों (एकपरमाणुक, द्विपरमाणुक, बहुपरमाणुक) के लिए \( f, C_v, C_p \) और \( \gamma \) के मानों को सारणीबद्ध रूप में याद रखें, क्योंकि यह एक सामान्य प्रश्न है।

 

Question 9. किसी गैस के कणों के माध्य मुक्त पथ की व्याख्या कीजिये।
Answer: गैसों के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार, गैस के अणु हर संभव वेग से लगातार गतिमान रहते हैं। इस गति के दौरान वे बर्तन की दीवारों से और आपस में एक-दूसरे से टकराते रहते हैं, जिससे उनके वेग, परिमाण और दिशा में परिवर्तन होता रहता है। चूंकि टक्करें पूर्णतः प्रत्यास्थ होती हैं, दो क्रमागत टक्करों के बीच अणु एक समान वेग से सीधी रेखा में गति करते हैं। दो क्रमागत टक्करों के बीच अणु द्वारा तय की गई दूरी को 'मुक्त पथ' कहते हैं। उत्तरोत्तर टक्करों के बीच अणुओं द्वारा तय की गई दूरियाँ आमतौर पर एकसमान नहीं होतीं।
इन समस्त दूरियों का औसत निकालकर इसे 'माध्य मुक्त पथ' (Mean free path) कहते हैं।

माध्य मुक्त पथ \( \lambda \) की परिभाषा है:

\[ \lambda = \frac{\text{दो क्रमागत टक्करों के मध्य गैस अणु द्वारा तय की गई कुल दूरी}}{\text{कुल टक्करों की संख्या}} \]

यदि गैस के अणु द्वारा \( n \) टक्करों में तय की गई दूरियाँ क्रमशः \( \lambda_1, \lambda_2, \lambda_3, \dots, \lambda_n \) हैं, तो अणु का माध्य मुक्त पथ होगा:

\[ \lambda = \frac{\lambda_1 + \lambda_2 + \lambda_3 + \dots + \lambda_n}{n} \]

A B \( \lambda_1 \) \( \lambda_2 \) D \( \lambda_3 \) \( \lambda_4 \) F \( \lambda_5 \) \( \lambda_6 \)

माध्य मुक्त पथ गैस के अणुओं के आकार, उनकी संख्या घनत्व और तापमान जैसे कारकों पर निर्भर करता है। यह गैसों में परिवहन घटनाओं (जैसे विसरण, ऊष्मा चालकता) को समझने में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।
In simple words: माध्य मुक्त पथ वह औसत दूरी है जो एक गैस का अणु दो टक्करों के बीच तय करता है. यह अणुओं की सीधी गति का एक माप है, जो टक्करों के बीच होता है.

🎯 Exam Tip: माध्य मुक्त पथ की परिभाषा को स्पष्ट रूप से बताएं और उसके सूत्र को लिखें। यह भी बताएं कि यह किस पर निर्भर करता है।

 

Question 10. यदि गैस के अणुओं की संख्या का मान दुगुना कर दिया जाये तो उसके दाब में क्या परिवर्तन होगा?
Answer: यदि गैस के अणुओं की संख्या को दुगुना कर दिया जाए (स्थिर आयतन और ताप पर), तो गैस का दाब भी दुगुना हो जाएगा। गैस के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार, गैस का दाब अणुओं की संख्या के सीधे समानुपाती होता है। जब अणुओं की संख्या बढ़ती है, तो प्रति इकाई समय में दीवारों से टकराने वाले अणुओं की संख्या बढ़ जाती है, जिससे दीवारों पर अधिक बल लगता है और परिणामस्वरूप दाब दुगुना हो जाता है।
In simple words: अगर गैस के अणुओं की संख्या दोगुनी कर दी जाए, तो गैस का दाब भी दोगुना हो जाएगा, क्योंकि ज्यादा अणु दीवारों पर ज्यादा बल लगाएंगे.

🎯 Exam Tip: यह संबंध दाब के आणविक सूत्र \( P = \frac{1}{3} \frac{mn\overline{v}^2}{V} \) से सीधा निकलता है, जहाँ दाब \( P \) अणुओं की संख्या \( n \) के समानुपाती है।

 

Question 1. गैस के अणुगति सिद्धान्त के अभिगृहितों को लिखते हुए उससे बायल, चार्ल्स, गैलुसाक व डाल्टन के नियमों की व्याख्या कीजिये।
Answer: गैसों के अणुगति सिद्धान्त, गैसों के विभिन्न भौतिक गुणों की व्याख्या करने के लिए कुछ मुख्य परिकल्पनाओं पर आधारित है। इन परिकल्पनाओं को अभिगृहीत (postulates) कहते हैं, जो निम्न प्रकार हैं:

  • एक गैस के सभी अणु आकार और द्रव्यमान में समान होते हैं, और वे पूरी तरह से प्रत्यास्थ (elastic) होते हैं।
  • गैस के अणुओं का आयतन, गैस के कुल आयतन की तुलना में बहुत कम होता है, इसे नगण्य माना जाता है।
  • गैस के अणुओं का वेग 0 से अनंत तक होता है, और वे सभी संभव वेगों से हर संभव दिशा में लगातार गतिमान रहते हैं। गैस का ताप अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा के सीधे समानुपाती होता है।
  • गैस के अणुओं के बीच टक्करें पूर्णतया प्रत्यास्थ होती हैं, और टक्कर में लगने वाला समय नगण्य होता है (लगभग \( 10^{-8} \) सेकंड)।
  • टक्कर से पहले अणु द्वारा सीधी रेखा में तय की गई दूरी को 'मुक्त पथ' कहते हैं, और निश्चित टक्करों के बाद तय की गई औसत दूरी को 'औसत मुक्त पथ' कहते हैं।
  • अणुओं के बीच कोई आकर्षण या प्रतिकर्षण बल कार्य नहीं करता है।
  • गैस के अणुओं पर गुरुत्वाकर्षण बल का प्रभाव नहीं होता है, क्योंकि अणुओं का द्रव्यमान बहुत कम और वेग बहुत अधिक होता है।
  • गैस का घनत्व पूरे गैस के सभी भागों में लगभग समान होता है।
  • जब गैस के गतिशील अणु बर्तन की दीवार से टकराते हैं, तो उनके संवेग में परिवर्तन होता है। यह संवेग परिवर्तन पात्र की दीवारों पर स्थानांतरित होता है, जिसके कारण गैस बर्तन की दीवार पर दबाव उत्पन्न करती है।

सीमाबद्धता (Limitations):

  • अणुगति सिद्धान्त में यह माना जाता है कि गैस के अणुओं के बीच कोई आकर्षण या प्रतिकर्षण बल नहीं लगता है। हालांकि, जब दो अणु बहुत पास आते हैं, तो उनके बीच प्रतिकर्षण बल लगने लगता है, जिससे उनकी गति की दिशा बदल जाती है।
  • जब गैस का दाब अधिक होता है, तो गैस के अणुओं का आयतन, बर्तन के आयतन के मुकाबले नगण्य नहीं माना जा सकता है।
  • गैसों के अणुओं में आकर्षण बल भी होता है, जिसके कारण बर्तन की दीवार पर लगने वाला दाब, आकर्षण न होने की स्थिति की तुलना में थोड़ा कम हो जाता है।
  • अणुगति सिद्धान्त में अणुओं का वेग 0 से अनंत तक माना जाता है, जबकि कोई भी कण प्रकाश के वेग से अधिक गति नहीं कर सकता।

यह सिद्धान्त गैसों के व्यवहार को मौलिक आणविक स्तर पर समझने में मदद करता है।

अणुगति सिद्धान्त के अनुसार दाब का समीकरण:

\[ P = \frac{1}{3} \frac{mn\overline{C}_{rms}^2}{V} \]

यहाँ \( m \) एक अणु का द्रव्यमान, \( n \) अणुओं की संख्या, \( \overline{C}_{rms}^2 \) माध्य वर्ग वेग का वर्ग, और \( V \) गैस का आयतन है। अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा \( \frac{1}{2} m\overline{C}_{rms}^2 \propto T \) होती है।

बॉयल का नियम (Boyle's Law):

स्थिर ताप पर, अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा (\( \frac{1}{2}m\overline{C}_{rms}^2 \)) और इसलिए \( mn\overline{C}_{rms}^2 \) नियत रहता है। दाब के समीकरण से,
\( \implies \) \( P \propto \frac{1}{V} \)
\( \implies \) \( PV = \text{नियतांक} \) अर्थात्, नियत ताप पर गैस की निश्चित मात्रा के लिए, दाब और आयतन का गुणनफल स्थिर रहता है।

चार्ल्स का नियम (Charles's Law):

स्थिर दाब पर और निश्चित मात्रा की गैस के लिए,
दाब समीकरण \( P = \frac{1}{3} \frac{mn\overline{C}_{rms}^2}{V} \) को \( PV = \frac{1}{3} mn\overline{C}_{rms}^2 \) के रूप में लिखा जा सकता है। चूंकि \( \overline{C}_{rms}^2 \propto T \), तो \( PV \propto T \)। यदि दाब \( P \) स्थिर है, तो \( V \propto T \), या \( \frac{V}{T} = \text{स्थिर} \)। अर्थात्, स्थिर दाब पर गैस की निश्चित मात्रा का आयतन उसके परम ताप के सीधे समानुपाती होता है।

गैलुसाक का नियम (Gay-Lussac's Law):

स्थिर आयतन पर और निश्चित मात्रा की गैस के लिए,
दाब समीकरण \( P = \frac{1}{3} \frac{mn\overline{C}_{rms}^2}{V} \) से, यदि आयतन \( V \) स्थिर है, और \( mn \) भी स्थिर है, तो
\( \implies \) \( P \propto \overline{C}_{rms}^2 \) चूंकि \( \overline{C}_{rms}^2 \propto T \), तो \( P \propto T \), या \( \frac{P}{T} = \text{स्थिर} \)। अर्थात्, स्थिर आयतन पर गैस की निश्चित मात्रा का दाब उसके परम ताप के सीधे समानुपाती होता है।

डॉल्टन के आंशिक दाब का नियम (Dalton's Law of Partial Pressure):

यह नियम बताता है कि किसी पात्र में भरी अक्रियाशील गैसों के मिश्रण का कुल दाब प्रत्येक गैस के अलग-अलग आंशिक दाबों के योग के बराबर होता है: \( P = P_1 + P_2 + P_3 + \dots \)। अणुगति सिद्धान्त के अनुसार, प्रत्येक गैस के अणु अपनी स्वतंत्र गति के कारण दीवारों पर दाब लगाते हैं। मिश्रण में प्रत्येक गैस के अणु अन्य गैस के अणुओं की उपस्थिति से प्रभावित हुए बिना अपना दाब उत्पन्न करते हैं। यदि मिश्रण में गैस A और गैस B हों, तो गैस A द्वारा लगाया गया दाब \( P_1 = \frac{1}{3} \frac{m_1 n_1 \overline{C}_{rms1}^2}{V} \) और गैस B द्वारा लगाया गया दाब \( P_2 = \frac{1}{3} \frac{m_2 n_2 \overline{C}_{rms2}^2}{V} \) होगा। एक ही ताप पर, सभी गैसों के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा समान होती है: \( \frac{1}{2} m_1 \overline{C}_{rms1}^2 = \frac{1}{2} m_2 \overline{C}_{rms2}^2 = \frac{1}{2} m \overline{C}_{rms}^2 \)। अतः, मिश्रण का कुल दाब \( P = P_1 + P_2 \)।
\( \implies P = \frac{1}{3V} [m_1n_1\overline{C}_{rms}^2 + m_2n_2\overline{C}_{rms}^2] \)
\( \implies P = \frac{1}{3V} (N_1+N_2) m \overline{C}_{rms}^2 \) यह डाल्टन का आंशिक दाब का नियम है, जो बताता है कि गैसों का मिश्रण कुल दाब बनाने के लिए व्यक्तिगत रूप से योगदान देता है।
In simple words: यह सिद्धान्त गैसों के छोटे-छोटे, हमेशा गतिमान अणुओं के बारे में है. यह बताता है कि कैसे इन अणुओं की गति से गैस के नियम (जैसे बॉयल, चार्ल्स, गैलुसाक और डाल्टन के नियम) बनते हैं.

🎯 Exam Tip: इस विस्तृत उत्तर में, अभिगृहीतों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें, सीमाबद्धता बताएं और फिर प्रत्येक गैस नियम को दाब के आणविक सूत्र से कैसे प्राप्त किया जाता है, उसे विस्तार से समझाएं।

 

Question 2. अणुगति सिद्धान्त के अनुसार किसी पात्र में भरी गैस द्वारा पात्र की दीवारों पर आरोपित दाब की गणना कीजिये।
Answer: आदर्श गैस का दाब (Pressure of an Ideal Gas) अणुगति सिद्धान्त के अनुसार उत्पन्न होता है जब गैस के गतिमान अणु बर्तन की दीवारों से टकराते हैं। जब भी कोई अणु दीवार से टकराकर वापस लौटता है, तो उसके संवेग में परिवर्तन होता है। संवेग संरक्षण के सिद्धान्त के अनुसार, यह संवेग परिवर्तन दीवार को हस्तान्तरित हो जाता है। न्यूटन के द्वितीय नियम से, संवेग परिवर्तन की दर दीवार पर लगने वाले बल के बराबर होती है। चूंकि गैस में असंख्य अणु होते हैं, वे लगातार दीवार से टकराते रहते हैं, जिससे दीवार पर एक स्थायी बल लगता है। दीवार के प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला यही बल गैस का दाब कहलाता है।

Z G A B X Y u -u चित्र-अणु की टक्कर के कारण दाब

माना गैस के अणु x, y और z अक्षों के अनुदिश \( u, v, w \) वेग घटकों से गतिमान हैं। एक अणु का वेग \( C = \sqrt{u^2 + v^2 + w^2} \) होता है।

मान लीजिए कि एक अणु जिसका द्रव्यमान \( m \) है, दीवार से \( u_1 \) वेग से टकराता है। टक्कर के बाद, यह \( -u_1 \) वेग से वापस लौटता है (चूंकि टक्कर प्रत्यास्थ है)।

  • टकराने से पहले अणु का संवेग = \( m u_1 \)
  • टकराने के बाद अणु का संवेग = \( -m u_1 \)
  • अणु के संवेग में परिवर्तन = \( -m u_1 - (m u_1) = -2m u_1 \)

यह संवेग परिवर्तन दीवार को हस्तान्तरित होता है। एक अणु को एक दीवार से दूसरी दीवार तक जाकर वापस आने में लगा समय \( \Delta t = \frac{2l}{u_1} \) होता है, जहाँ \( l \) बर्तन की लम्बाई है।
\( \implies \) 1 सेकंड में किसी दीवार पर टक्करों की संख्या \( = \frac{u_1}{2l} \)।

एक अणु द्वारा एक सेकंड में दीवार पर लगाया गया बल (\( F \)) संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होता है:
\( F = (\text{संवेग में परिवर्तन}) \times (\text{टक्करों की संख्या}) \)
\( F = (2mu_1) \times \left(\frac{u_1}{2l}\right) = \frac{mu_1^2}{l} \)

यदि पात्र में \( N \) अणु हों, जिनके वेग घटक \( u_1, u_2, \dots, u_N \) हैं, तो सभी अणुओं द्वारा दीवार पर लगाया गया कुल बल \( F_x \) होगा:

\[ F_x = \frac{mu_1^2}{l} + \frac{mu_2^2}{l} + \dots + \frac{mu_N^2}{l} = \frac{m}{l} (u_1^2 + u_2^2 + \dots + u_N^2) \]

दाब \( P \) बल प्रति इकाई क्षेत्रफल होता है। यदि बर्तन की भुजा की लम्बाई \( l \) है, तो दीवार का क्षेत्रफल \( l^2 \) होगा।
\( \implies \) दाब \( P_x = \frac{F_x}{l^2} = \frac{m}{l^3} (u_1^2 + u_2^2 + \dots + u_N^2) \)
चूंकि \( l^3 = V \) (बर्तन का आयतन),
\( \implies \) \( P_x = \frac{m}{V} \sum_{i=1}^{N} u_i^2 \)

इसी प्रकार y और z अक्षों के अनुदिश दाब \( P_y = \frac{m}{V} \sum_{i=1}^{N} v_i^2 \) और \( P_z = \frac{m}{V} \sum_{i=1}^{N} w_i^2 \) होंगे। गैस सभी दिशाओं में समान दाब डालती है, इसलिए \( P_x = P_y = P_z = P \)।
अतः, \( P = \frac{1}{3} (P_x + P_y + P_z) \)
\( \implies P = \frac{1}{3} \frac{m}{V} \left( \sum u_i^2 + \sum v_i^2 + \sum w_i^2 \right) \)
हम जानते हैं कि \( C_i^2 = u_i^2 + v_i^2 + w_i^2 \), तो \( \sum C_i^2 = \sum u_i^2 + \sum v_i^2 + \sum w_i^2 \)।
और माध्य वर्ग वेग \( \overline{C^2} = \frac{\sum C_i^2}{N} \implies \sum C_i^2 = N \overline{C^2} \)।
\( \implies P = \frac{1}{3} \frac{mN\overline{C^2}}{V} \)
यह आदर्श गैस द्वारा बर्तन की दीवारों पर आरोपित दाब का सूत्र है। यहाँ \( \rho = \frac{mN}{V} \) गैस का घनत्व है, तो \( P = \frac{1}{3} \rho \overline{C^2} \)। यह सूत्र दर्शाता है कि गैस का दाब गैस के घनत्व और अणुओं के माध्य वर्ग वेग के सीधे समानुपाती होता है।
In simple words: गैस का दाब अणुओं के लगातार दीवारों से टकराने के कारण होता है. जब अणु दीवार से टकराते हैं, तो उनका वेग बदलता है, जिससे दीवार पर बल लगता है. प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला यह बल ही दाब है. दाब अणु के द्रव्यमान, संख्या, औसत वेग और आयतन पर निर्भर करता है.

🎯 Exam Tip: दाब की गणना करते समय, संवेग परिवर्तन, टक्कर की दर और दाब के लिए अंतिम सूत्र को सही ढंग से लिखें। यह भी बताएं कि \( \overline{C^2} \) माध्य वर्ग वेग का प्रतिनिधित्व करता है।

 

Question 3. स्वतंत्रता की कोटि से क्या अभिप्राय है? एकपरमाणुक, द्विपरमाणुक व बहुपरमाणुक गैस की विशिष्ट ऊष्माओं की व्याख्या कीजिये।
Answer: स्वतंत्रता की कोटि वह संख्या है जो यह बताती है कि कोई कण, अणु या परमाणु कितनी दिशाओं में स्वतंत्र रूप से गति कर सकता है। उदाहरण के लिए, एक छल्ला जो एक छड़ में पिरोया हुआ है, वह केवल एक दिशा (छड़ की लंबाई के अनुदिश) में चल सकता है, इसलिए उसकी स्वतंत्रता की कोटि एक होगी। कैरमबोर्ड पर चलने वाली गोटियाँ दो दिशाओं में चल सकती हैं (लंबाई और चौड़ाई), तो उनकी स्वतंत्रता की कोटि दो होगी। इसी प्रकार, आकाश में उड़ने वाले गुब्बारे की स्वतंत्रता की कोटि तीन होती है, क्योंकि वे तीनों (x, y, z) दिशाओं में स्वतंत्र रूप से उड़ सकते हैं। किसी निकाय की पूरी स्थिति और विन्यास को दर्शाने के लिए जितने स्वतंत्र निर्देशांक या चरों की आवश्यकता होती है, उसे भी स्वतंत्रता की कोटि कहा जाता है। परमाणुओं की व्यवस्था और बंधन के आधार पर, एक अणु में गति के कई तरीके हो सकते हैं, जिससे स्वतंत्रता की विभिन्न कोटियाँ बनती हैं। स्वतंत्रता की कोटियाँ तीन प्रकार की होती हैं:
(a) स्थानान्तरण की स्वतंत्रता की कोटियाँ (Degrees of Freedom Translation Motion)- ये अणु की सीधी या रेखीय गति के कारण होती हैं। इनकी अधिकतम संख्या तीन होती है और ये सामान्य तापमान पर भी मौजूद होती हैं।
(b) घूर्णन की स्वतंत्रता की कोटियाँ (Degrees of Freedom of Rotation Motion)- ये अणु के द्रव्यमान केंद्र के चारों ओर घूर्णन गति के कारण होती हैं। इनकी संख्या अणु की संरचना पर निर्भर करती है और ये भी सामान्य तापमान पर मौजूद रहती हैं।
(c) कम्पन की स्वतंत्रता की कोटियाँ (Degrees of Freedom of Vibrational Motion)- ये अणुओं के कंपन के कारण होती हैं। इनकी संख्या भी अणु की संरचना पर निर्भर करती है। ये सामान्य तापमान पर नहीं, बल्कि उच्च तापमान पर सक्रिय होती हैं। प्रत्येक कंपन के तरीके के लिए कंपन की स्वतंत्रता की कोटि दो होती है, जिसमें एक स्थितिज ऊर्जा और एक गतिज ऊर्जा शामिल होती है। यदि किसी निकाय में N कण हों और उनके बीच k स्वतंत्र संबंध हों, तो निकाय की स्वतंत्रता की कोटियाँ \( f = 3N - k \) होंगी।
एक परमाणुक गैस की विशिष्ट ऊष्मा (Specific heat of Monoatomic Gas):एक परमाणुक गैस के अणु (जैसे हीलियम, नियॉन, ऑर्गन) में केवल स्थानान्तरण गति की स्वतंत्रता कोटियाँ होती हैं। इसलिए, एक अणु की स्वतंत्रता की कोटियाँ \( f=3 \) होती हैं। एक ग्राम मोल गैस के अणुओं की कुल ऊर्जा: \( U = \frac{3}{2} RT \) मोलर विशिष्ट ऊष्मा \( C_v \) स्थिर आयतन पर: \( C_v = \frac{dU}{dT} = \frac{3}{2} R \) (जूल मोल\(^{-1}\) केल्विन\(^{-1}\)) या \( C_v = \frac{3}{2} R \) (कैलोरी मोल\(^{-1}\) केल्विन\(^{-1}\))
मोलर विशिष्ट ऊष्मा \( C_p \) स्थिर दाब पर (मेयर के संबंध \( C_p - C_v = R \) से): \( C_p = C_v + R = \frac{3}{2} R + R = \frac{5}{2} R \)
अतः एक परमाणुक गैस के लिए \( \frac{C_p}{C_v} = \gamma = \frac{5/2 R}{3/2 R} = \frac{5}{3} = 1.67 \)
द्विपरमाणुक गैस की विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat of a Diatomic Gas):एक द्विपरमाणुक गैस के अणु (जैसे हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, क्लोरीन) में स्थानान्तरण और घूर्णन गति दोनों की स्वतंत्रता कोटियाँ होती हैं। सामान्य तापमान पर, स्थानान्तरण की 3 और घूर्णन की 2 स्वतंत्रता कोटियाँ होती हैं, इसलिए कुल \( f=5 \) होती हैं। एक ग्राम मोल द्विपरमाणुक गैस के अणुओं की कुल ऊर्जा: \( U = \frac{5}{2} RT \) मोलर विशिष्ट ऊष्मा \( C_v \) स्थिर आयतन पर: \( C_v = \frac{dU}{dT} = \frac{5}{2} R \) (जूल मोल\(^{-1}\) केल्विन\(^{-1}\))
मोलर विशिष्ट ऊष्मा \( C_p \) स्थिर दाब पर (मेयर के संबंध \( C_p - C_v = R \) से): \( C_p = C_v + R = \frac{5}{2} R + R = \frac{7}{2} R \)
अतः द्विपरमाणुक गैस के लिए \( \frac{C_p}{C_v} = \gamma = \frac{7/2 R}{5/2 R} = \frac{7}{5} = 1.4 \)
त्रिपरमाणुक गैस की विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat of a Triatomic Gas):त्रिपरमाणुक गैसों में अणु की संरचना के आधार पर स्वतंत्रता की कोटियाँ भिन्न हो सकती हैं।
(A) अरेखीय अणुओं वाली त्रिपरमाणुक गैस के लिए (उदाहरण- H\(_2\)O अणु):इनमें स्थानान्तरण की 3 और घूर्णन की 3 स्वतंत्रता कोटियाँ होती हैं, इसलिए कुल \( f=6 \) होती हैं। एक ग्राम मोल अरेखीय त्रिपरमाणुक गैस के अणुओं की कुल ऊर्जा: \( U = \frac{6}{2} RT = 3RT \) मोलर विशिष्ट ऊष्मा \( C_v \) स्थिर आयतन पर: \( C_v = \frac{dU}{dT} = 3R \) (जूल मोल\(^{-1}\) केल्विन\(^{-1}\))
मोलर विशिष्ट ऊष्मा \( C_p \) स्थिर दाब पर (मेयर के संबंध \( C_p - C_v = R \) से): \( C_p = C_v + R = 3R + R = 4R \)
अतः अरेखीय त्रिपरमाणुक गैस के लिए \( \frac{C_p}{C_v} = \gamma = \frac{4R}{3R} = \frac{4}{3} = 1.33 \)
(B) रेखीय अणुओं वाली त्रिपरमाणुक गैस के लिए (उदाहरण- कार्बन डाइऑक्साइड):इनमें स्थानान्तरण की 3 और घूर्णन की 2 स्वतंत्रता कोटियाँ होती हैं, इसलिए कुल \( f=5 \) होती हैं। (यदि कंपन को शामिल किया जाए, तो स्वतंत्रता की कोटियाँ अधिक हो सकती हैं)। एक ग्राम मोल रेखीय त्रिपरमाणुक गैस के अणुओं की कुल ऊर्जा: \( U = \frac{5}{2} RT \) मोलर विशिष्ट ऊष्मा \( C_v \) स्थिर आयतन पर: \( C_v = \frac{dU}{dT} = \frac{5}{2} R \) (जूल मोल\(^{-1}\) केल्विन\(^{-1}\))
मोलर विशिष्ट ऊष्मा \( C_p \) स्थिर दाब पर (मेयर के संबंध \( C_p - C_v = R \) से): \( C_p = C_v + R = \frac{5}{2} R + R = \frac{7}{2} R \)
अतः रेखीय त्रिपरमाणुक गैस के लिए \( \frac{C_p}{C_v} = \gamma = \frac{7/2 R}{5/2 R} = \frac{7}{5} = 1.4 \)
बहुपरमाणुक गैसों की विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat of Polyatomic Gases):एक बहुपरमाणुक अणु में 3 स्थानान्तरीय, 3 घूर्णी स्वतंत्रता कोटियाँ होती हैं। इसके अलावा, कुछ निश्चित संख्या (f) के कंपन रूप भी होते हैं, खासकर उच्च तापमान पर। ऊर्जा समविभाजन के नियम का उपयोग करके इस प्रकार की गैस के 1 मोल की कुल आंतरिक ऊर्जा को समझा जा सकता है।

गैस\( C_v \) (Jmol\(^{-1}\)K\(^{-1}\))\( C_p \) (Jmol\(^{-1}\)K\(^{-1}\))\( C_p - C_v \) (Jmol\(^{-1}\)K\(^{-1}\))\( \gamma = C_p/C_v \)
एकआण्विकहीलियम12.520.88.31.66
नियोन12.720.88.11.64
ऑर्गन12.520.88.31.67
द्विआण्विकहाइड्रोजन20.428.88.41.41
ऑक्सीजन21.029.38.31.40
नाइट्रोजन20.829.18.31.40
बहुआण्विकमीथेन27.135.48.31.31
In simple words: स्वतंत्रता की कोटि यह बताती है कि कोई अणु कितनी तरह से हिल-डुल सकता है। अलग-अलग तरह के अणु (एक परमाणु वाले, दो परमाणु वाले, या कई परमाणु वाले) अलग-अलग तरीकों से गति करते हैं, इसलिए उनकी स्वतंत्रता की कोटियाँ भी अलग होती हैं। इन कोटियों के आधार पर उनकी विशिष्ट ऊष्मा का मान निकाला जाता है, जो यह बताता है कि उन्हें गर्म करने में कितनी ऊर्जा लगती है।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता की कोटि की परिभाषा, इसके विभिन्न प्रकार (स्थानान्तरण, घूर्णन, कम्पन), और मेयर के संबंध \( C_p - C_v = R \) को याद रखें। साथ ही, एकपरमाणुक, द्विपरमाणुक और त्रिपरमाणुक गैसों के लिए \( C_v \), \( C_p \) और \( \gamma \) के मानों को भी ध्यान में रखें।

 

Question 4. अवास्तविक गैसों व आदर्श गैसों में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
Answer: आदर्श गैसें वे होती हैं जिनकी गतिज ऊर्जा उनके तापमान के सीधे समानुपाती होती है और जिनके अणुओं के बीच कोई आकर्षण बल नहीं होता। वास्तविक गैसें, इसके विपरीत, आदर्श गैस व्यवहार से कुछ शर्तों के तहत अलग व्यवहार करती हैं। गैसों के अवस्था समीकरण \( PV = RT \) का उपयोग आदर्श गैसों के व्यवहार को समझाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन वास्तविक गैसों के लिए यह पूरी तरह सही नहीं है।
मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
1. अन्तराण्विक अन्योन्य क्रिया (Intermolecular Interactions): आदर्श गैस मॉडल में, यह माना जाता है कि गैस के अणुओं के बीच कोई आकर्षण या प्रतिकर्षण बल नहीं होता। लेकिन वास्तविक गैसों में अणुओं के बीच वाण्डरवाल बल नामक अन्तराण्विक बल मौजूद होते हैं। उच्च तापमान और निम्न दाब पर इन बलों का प्रभाव नगण्य माना जा सकता है, क्योंकि अणु दूर-दूर होते हैं। हालांकि, निम्न तापमान और उच्च दाब पर, ये बल महत्वपूर्ण हो जाते हैं, जिससे गैस का वास्तविक दाब आदर्श गैस के अनुमानित दाब से अधिक या कम हो सकता है। यह दिखाता है कि वास्तविक गैसों के अणु एक-दूसरे पर बल लगाते हैं, जिससे उनके संवेग में परिवर्तन होता है।
2. अणुओं का आयतन (Volume of Molecules): आदर्श गैसों में अणुओं को बिंदु-मात्र माना जाता है, यानी उनके आयतन को गैस के कुल आयतन की तुलना में नगण्य माना जाता है। वास्तविक गैसों में अणुओं का एक निश्चित आकार होता है और वे कुछ आयतन घेरते हैं। इसलिए, गैस के कुल आयतन में से अणुओं द्वारा घेरे गए आयतन को घटाना पड़ता है। वाण्डरवाल नियतांक 'b' इसी आयतन संशोधन को दर्शाता है। यह संशोधन तब अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है जब गैस का दाब अधिक होता है और आयतन कम होता है।
इन कारणों से वास्तविक गैसों का व्यवहार आदर्श गैसों से विचलन दिखाता है। इन विचलनों को वाण्डरवाल समीकरण द्वारा बेहतर ढंग से समझाया जा सकता है:
\( \left(P + \frac{an^2}{V^2}\right) (V - nb) = nRT \)
यहाँ \( \frac{an^2}{V^2} \) दाब में संशोधन और \( nb \) आयतन में संशोधन को दर्शाता है।
दाब में संशोधन को समझने के लिए, यदि हम एक बंद पात्र में गैस के अणुओं की कल्पना करें, तो जो अणु पात्र के बीच में होते हैं, उन पर चारों ओर से समान आकर्षण बल लगता है, जिससे परिणामी बल शून्य होता है। लेकिन जो अणु दीवार के करीब होते हैं, उन पर अंदर की ओर खिंचाव का बल लगता है। यह खिंचाव दीवार से टकराते समय अणुओं के संवेग में कुछ कमी लाता है, जिससे वे दीवार पर उतना बल नहीं लगा पाते जितना कि अन्तराण्विक बलों की अनुपस्थिति में लगाते।
यह विचलन ग्राफ द्वारा भी देखा जा सकता है जहाँ \( PV \) बनाम \( P \) का मान वास्तविक गैसों के लिए स्थिर नहीं रहता, जैसा कि आदर्श गैस के लिए होता है। हाइड्रोजन आदर्श गैस नाइट्रोजन PV P चित्र
B C D A बंद पात्र में गैस के अणु
In simple words: आदर्श गैसें सिर्फ एक काल्पनिक मॉडल हैं जहाँ अणु न तो एक दूसरे को आकर्षित करते हैं और न ही उनका कोई आयतन होता है। लेकिन असल में, वास्तविक गैसों के अणुओं में थोड़ा आकर्षण बल होता है और वे थोड़ी जगह भी घेरते हैं। इसलिए, वास्तविक गैसें आदर्श गैसों से अलग व्यवहार करती हैं, खासकर जब बहुत ठंडा या बहुत दबाव वाला होता है।

🎯 Exam Tip: आदर्श और वास्तविक गैसों के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए मुख्य बिंदु आकर्षण बल और अणुओं के आयतन पर केंद्रित करें। वाण्डरवाल समीकरण और \( PV \) बनाम \( P \) ग्राफ का उल्लेख करना उत्तर को मजबूत बनाता है।

 

Question 5. आदर्श गैस की गतिज ऊर्जा व ताप के मध्य सम्बन्ध की व्युत्पत्ति कीजिये।
Answer: आदर्श गैस के अणुओं की गतिज ऊर्जा और उसके तापमान के बीच का संबंध अणुगति सिद्धांत के आधार पर व्युत्पन्न किया जा सकता है। यह संबंध दर्शाता है कि गैस के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा उसके परम तापमान के सीधे समानुपाती होती है।
गैस के एक अणु की गतिज ऊर्जा: \( KE = \frac{1}{2} m C^2 \) जहाँ \( m \) अणु का द्रव्यमान और \( C \) उसकी चाल है।
गैस के सभी अणुओं की माध्य गतिज ऊर्जा: \( KE_{avg} = \frac{1}{2} m \overline{C^2} \)
गैस के एकांक आयतन की गतिज ऊर्जा: \( KE_{unit\_vol} = \frac{1}{2} \frac{mn\overline{C^2}}{V} \)
हम जानते हैं कि आदर्श गैस के दाब का सूत्र अणुगति सिद्धांत से निम्न प्रकार दिया जाता है: \( P = \frac{1}{3} \frac{mn\overline{C^2}}{V} \) ....(1)
इस समीकरण (1) को हम ऐसे लिख सकते हैं: \( P = \frac{2}{3} \times \left(\frac{1}{2} \frac{mn\overline{C^2}}{V}\right) \) यह दर्शाता है कि गैस का दाब एकांक आयतन की कुल गतिज ऊर्जा का \( \frac{2}{3} \) गुना होता है।
एक मोल आदर्श गैस के लिए, आदर्श गैस समीकरण है: \( PV = RT \) ....(2)
समीकरण (1) और (2) की तुलना करने पर: \( \frac{1}{3} \frac{mn\overline{C^2}}{V} V = RT \) \( \frac{1}{3} m n \overline{C^2} = RT \)
चूँकि \( n = N_A \) (एक मोल में अणुओं की संख्या, जहाँ \( N_A \) आवोगाद्रो संख्या है) \( \frac{1}{3} m N_A \overline{C^2} = RT \)
दोनों तरफ 2 से गुणा और भाग करने पर: \( \frac{2}{3} \left(\frac{1}{2} m \overline{C^2}\right) N_A = RT \)
हम जानते हैं कि \( \frac{1}{2} m \overline{C^2} \) एक अणु की माध्य गतिज ऊर्जा (\( \overline{E} \)) है। तो, \( \frac{2}{3} \overline{E} N_A = RT \) \( \overline{E} = \frac{3}{2} \frac{R}{N_A} T \)
जहाँ \( \frac{R}{N_A} = k \) (बोल्ट्जमान नियतांक) है। अतः, \( \overline{E} = \frac{3}{2} kT \)
यह संबंध दर्शाता है कि एक अणु की माध्य गतिज ऊर्जा उसके परम तापमान \( T \) के सीधे समानुपाती होती है। इसका मतलब है कि एक ही तापमान पर अलग-अलग गैसों के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा समान होती है।
In simple words: गैस के अणुओं के हिलने-डुलने से जो ऊर्जा बनती है, वह सीधे गैस के तापमान पर निर्भर करती है। इसका मतलब है कि अगर गैस गर्म है, तो उसके अणु तेज़ी से हिलेंगे और उनकी ऊर्जा ज़्यादा होगी। इस संबंध को एक सूत्र से दर्शाया जाता है जिससे पता चलता है कि यह ऊर्जा तापमान के साथ कैसे बदलती है।

🎯 Exam Tip: गतिज ऊर्जा और तापमान के बीच संबंध की व्युत्पत्ति करते समय, आदर्श गैस के दाब के सूत्र और आदर्श गैस समीकरण \( PV = RT \) को सही ढंग से जोड़ना महत्वपूर्ण है। बोल्ट्जमान नियतांक \( k \) के महत्व पर भी ध्यान दें।

 

Question 1. 300 K ताप पर किसी गैस के लिये वर्ग माध्य मूल वेग की गणना कीजिये यदि गैस का अणुभार 221 व R = 8.3 Jmol⁻¹K⁻¹ है।
Answer: वर्ग माध्य मूल वेग की गणना करने के लिए हम दिए गए सूत्र का उपयोग करेंगे।
हम जानते हैं कि गैस का वर्ग माध्य मूल वेग \( V_{rms} \) का सूत्र है: \( V_{rms} = \sqrt{\frac{3RT}{M}} \)
दिया गया है: सार्वत्रिक गैस नियतांक \( R = 8.3 \text{ Jmol}^{-1}\text{K}^{-1} \) ताप \( T = 300 \text{ K} \) गैस का अणुभार \( M = 221 \text{ u} = 221 \times 10^{-3} \text{ Kg/mol} \) (अणुभार को किलोग्राम प्रति मोल में परिवर्तित किया गया है)
मान रखने पर: \( V_{rms} = \sqrt{\frac{3 \times 8.3 \times 300}{221 \times 10^{-3}}} \) \( V_{rms} = \sqrt{\frac{7470}{0.221}} \) \( V_{rms} = \sqrt{33800.9} \) \( V_{rms} \approx 183.85 \text{ ms}^{-1} \)
इसलिए, गैस का वर्ग माध्य मूल वेग लगभग \( 183.8 \text{ ms}^{-1} \) है।In simple words: वर्ग माध्य मूल वेग यह बताता है कि गैस के अणु औसतन कितनी तेज़ी से चल रहे हैं। इसे निकालने के लिए, हमें गैस का तापमान, गैस का अणुभार और एक नियत अंक \( R \) पता होना चाहिए। सभी मानों को सूत्र में डालकर हमें गैस के अणुओं की औसत गति पता चल जाती है।

🎯 Exam Tip: वर्ग माध्य मूल वेग के सूत्र \( V_{rms} = \sqrt{\frac{3RT}{M}} \) को सही ढंग से याद रखें और गणना करते समय सभी इकाइयों (खासकर अणुभार को किलोग्राम प्रति मोल में) का ध्यान रखें।

 

Question 3. किस ताप पर एक अणु की गतिज ऊर्जा 1.0 eV होगी? (\( k_{B} = 1.38 \times 10^{-23} \text{J} \cdot \text{K}^{-1} \))
Answer: हमें अणु की गतिज ऊर्जा दी गई है और हमें वह तापमान ज्ञात करना है जिस पर यह ऊर्जा होती है। इसके लिए हम गतिज ऊर्जा और तापमान के संबंध का उपयोग करेंगे।
हम जानते हैं कि एक अणु की माध्य गतिज ऊर्जा \( E \) और तापमान \( T \) के बीच संबंध है: \( E = \frac{3}{2} k T \) जहाँ \( k \) बोल्ट्जमान नियतांक है।
दिया गया है: गतिज ऊर्जा \( E = 1.0 \text{ eV} \) बोल्ट्जमान नियतांक \( k = 1.38 \times 10^{-23} \text{ J}\cdot\text{K}^{-1} \)
सबसे पहले, गतिज ऊर्जा को इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (eV) से जूल (J) में परिवर्तित करें: \( 1 \text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19} \text{ J} \) इसलिए, \( E = 1.0 \times 1.6 \times 10^{-19} \text{ J} \)
अब समीकरण को तापमान \( T \) के लिए हल करें: \( T = \frac{2E}{3k} \)
मान रखने पर: \( T = \frac{2 \times (1.0 \times 1.6 \times 10^{-19})}{3 \times (1.38 \times 10^{-23})} \) \( T = \frac{3.2 \times 10^{-19}}{4.14 \times 10^{-23}} \) \( T = \frac{3.2}{4.14} \times 10^{(-19 - (-23))} \) \( T = \frac{3.2}{4.14} \times 10^4 \) \( T \approx 0.7729 \times 10^4 \) \( T \approx 7729 \text{ K} \)
अतः, जिस ताप पर एक अणु की गतिज ऊर्जा \( 1.0 \text{ eV} \) होगी, वह लगभग \( 7730 \text{ K} \) है।In simple words: अणु की गतिज ऊर्जा सीधे उसके तापमान से जुड़ी होती है। जितनी ज़्यादा ऊर्जा, उतना ही ज़्यादा तापमान। इस सवाल में, हमने दी गई ऊर्जा को जूल में बदला और बोल्ट्जमान नियतांक का उपयोग करके तापमान का पता लगाया।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में eV से जूल में इकाई परिवर्तन बहुत महत्वपूर्ण है। बोल्ट्जमान नियतांक और गतिज ऊर्जा-तापमान संबंध के सूत्र को सही ढंग से उपयोग करना सुनिश्चित करें।

 

Question 4. किसी गैस के लिये वाण्डरवाल नियतांक a = 1.32 b = 3.12 × 10⁻² है तब वह ताप ज्ञात करो जिस पर 5 atm दाब व 5 mol गैस का आयतन 20 L हो। पुनः गैस दाब ज्ञात करो जब आयतन 2 L हो जाये। (\( R = 8.314 \text{ J} \cdot \text{mol}^{-1} \cdot \text{K}^{-1} \)).
Answer: हम वाण्डरवाल समीकरण का उपयोग करके गैस का तापमान और फिर दाब ज्ञात करेंगे।
वाण्डरवाल समीकरण है: \( \left(P + \frac{an^2}{V^2}\right) (V - nb) = nRT \)
भाग 1: तापमान ज्ञात करनादिया गया है: दाब \( P = 5 \text{ atm} \) मोलों की संख्या \( n = 5 \text{ mol} \) आयतन \( V = 20 \text{ L} \) नियतांक \( a = 1.32 \text{ L}^2 \text{ atm mol}^{-2} \) नियतांक \( b = 3.12 \times 10^{-2} \text{ L mol}^{-1} \) गैस नियतांक \( R = 8.314 \text{ J mol}^{-1}\text{K}^{-1} \)
समीकरण को \( T \) के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर: \( T = \frac{\left(P + \frac{an^2}{V^2}\right) (V - nb)}{nR} \)
पहले \( \frac{an^2}{V^2} \) और \( V - nb \) की गणना करें: \( \frac{an^2}{V^2} = \frac{(1.32 \text{ L}^2 \text{ atm mol}^{-2}) \times (5 \text{ mol})^2}{(20 \text{ L})^2} = \frac{1.32 \times 25}{400} = \frac{33}{400} = 0.0825 \text{ atm} \) \( V - nb = (20 \text{ L}) - (5 \text{ mol} \times 3.12 \times 10^{-2} \text{ L mol}^{-1}) = 20 - 0.156 = 19.844 \text{ L} \)
अब मानों को \( T \) के समीकरण में रखें। (यहाँ, \( R \) के लिए \( \approx 0.0831 \text{ L atm mol}^{-1} \text{ K}^{-1} \) का उपयोग किया गया है ताकि इकाई सुसंगत रहे, जो दिए गए J मान के बराबर है।) \( T = \frac{(5 \text{ atm} + 0.0825 \text{ atm}) \times (19.844 \text{ L})}{5 \text{ mol} \times 8.314 \text{ J mol}^{-1}\text{K}^{-1}} \) यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यदि \( R \) को \( \text{L atm mol}^{-1}\text{K}^{-1} \) में लिया जाए, तो इसका मान \( 0.08206 \text{ L atm mol}^{-1}\text{K}^{-1} \) होता है। दिए गए \( R \) मान के साथ, दाब और आयतन को SI इकाइयों में बदलना होगा। लेकिन यहाँ गणना स्रोत के अनुसार की जा रही है, जो \( \text{L atm} \) इकाइयों को सीधे उपयोग करता है, जिससे \( R \) का मान \( \approx 0.08314 \) लिया गया है। \( T = \frac{(5.0825) \times (19.844)}{5 \times 8.314} \) \( T = \frac{100.8653}{41.57} \) \( T \approx 242.6 \text{ K} \)
इसलिए, गैस का तापमान लगभग \( 242.6 \text{ K} \) है।
भाग 2: दाब ज्ञात करना जब आयतन \( 2 \text{ L} \) हो जायेअब हम \( V = 2 \text{ L} \) और \( T = 242.6 \text{ K} \) का उपयोग करके दाब \( P \) ज्ञात करेंगे।
समीकरण को \( P \) के लिए पुनर्व्यवस्थित करने पर: \( P = \frac{nRT}{V - nb} - \frac{an^2}{V^2} \)
मान रखने पर: \( P = \frac{(5 \text{ mol}) \times (8.314 \text{ J mol}^{-1}\text{K}^{-1}) \times (242.6 \text{ K})}{(2 \text{ L}) - (5 \text{ mol} \times 3.12 \times 10^{-2} \text{ L mol}^{-1})} - \frac{(1.32 \text{ L}^2 \text{ atm mol}^{-2}) \times (5 \text{ mol})^2}{(2 \text{ L})^2} \)
फिर से, इकाइयों की संगतता के लिए, \( R \) को \( \text{L atm} \) इकाइयों में उपयोग किया जाएगा।
\( V - nb = 2 - (5 \times 0.0312) = 2 - 0.156 = 1.844 \text{ L} \) \( \frac{an^2}{V^2} = \frac{1.32 \times 25}{4} = \frac{33}{4} = 8.25 \text{ atm} \)
\( \frac{nRT}{V - nb} = \frac{5 \times (0.08314 \text{ L atm mol}^{-1}\text{K}^{-1}) \times 242.6}{1.844} = \frac{100.865}{1.844} \approx 54.69 \text{ atm} \)
इसलिए, \( P = 54.69 \text{ atm} - 8.25 \text{ atm} \) \( P \approx 46.44 \text{ atm} \)
इसलिए, जब आयतन \( 2 \text{ L} \) हो जाता है, तो गैस का दाब लगभग \( 46.44 \text{ atm} \) होगा।In simple words: वाण्डरवाल समीकरण हमें बताता है कि वास्तविक गैसें कैसे व्यवहार करती हैं। इस सवाल में, हमने इस समीकरण का उपयोग करके पहले गैस का तापमान निकाला, जब उसका आयतन 20 लीटर था। फिर, उसी तापमान पर, हमने दोबारा समीकरण का उपयोग करके दाब निकाला, जब आयतन घटाकर 2 लीटर कर दिया गया।

🎯 Exam Tip: वाण्डरवाल समीकरण \( \left(P + \frac{an^2}{V^2}\right) (V - nb) = nRT \) को सही ढंग से याद रखें। गणना करते समय इकाइयों की संगतता का विशेष ध्यान रखें। यदि \( R \) जूल में दिया गया है और अन्य मान \( \text{atm L} \) में हैं, तो सभी को एक ही इकाई प्रणाली में परिवर्तित करना सुनिश्चित करें, या \( R \) के लिए \( \text{L atm} \) में मान का उपयोग करें।

 

Question 5. ऑक्सीजन गैस के लिए वाण्डरवाल नियंताक a = 1.32 व b = 3.12 x 10⁻² है। यदि गैस का ताप 300 K है तब इसका आयतन 1.2L mol⁻¹ हो तो गैस के दाब की गणना करो। (R = 8.314 Jmol⁻¹K⁻¹)।
Answer: हम वाण्डरवाल समीकरण का उपयोग करके ऑक्सीजन गैस का दाब ज्ञात करेंगे।
वाण्डरवाल समीकरण दाब \( P \) के लिए है: \( P = \frac{RT}{V_m - b} - \frac{a}{V_m^2} \) जहाँ \( V_m = V/n \) मोलर आयतन है।
दिया गया है: नियतांक \( a = 1.32 \text{ L}^2 \text{ atm mol}^{-2} \) नियतांक \( b = 3.12 \times 10^{-2} \text{ L mol}^{-1} \) ताप \( T = 300 \text{ K} \) मोलर आयतन \( V_m = 1.2 \text{ L mol}^{-1} \) गैस नियतांक \( R = 8.314 \text{ J mol}^{-1}\text{K}^{-1} \)
यहां, \( a \) और \( b \) के मान \( \text{L atm} \) इकाइयों में हैं, जबकि \( R \) का मान \( \text{Joule} \) में है। गणना के लिए, हमें \( R \) के मान को \( \text{L atm mol}^{-1}\text{K}^{-1} \) में बदलना होगा, या सभी मानों को SI इकाइयों में बदलना होगा। हम \( R = 0.0821 \text{ L atm mol}^{-1}\text{K}^{-1} \) का उपयोग करेंगे।
पहले \( V_m - b \) और \( V_m^2 \) की गणना करें: \( V_m - b = (1.2 \text{ L mol}^{-1}) - (3.12 \times 10^{-2} \text{ L mol}^{-1}) = 1.2 - 0.0312 = 1.1688 \text{ L mol}^{-1} \) \( V_m^2 = (1.2 \text{ L mol}^{-1})^2 = 1.44 \text{ L}^2 \text{ mol}^{-2} \)
अब मानों को \( P \) के समीकरण में रखें: \( P = \frac{(0.0821 \text{ L atm mol}^{-1}\text{K}^{-1}) \times (300 \text{ K})}{1.1688 \text{ L mol}^{-1}} - \frac{1.32 \text{ L}^2 \text{ atm mol}^{-2}}{1.44 \text{ L}^2 \text{ mol}^{-2}} \) \( P = \frac{24.63}{1.1688} - \frac{1.32}{1.44} \) \( P \approx 21.072 - 0.9167 \) \( P \approx 20.155 \text{ atm} \)
इसलिए, ऑक्सीजन गैस का दाब लगभग \( 20.16 \text{ atm} \) होगा।In simple words: वाण्डरवाल समीकरण बताता है कि वास्तविक गैस का दाब किन बातों पर निर्भर करता है। हमने इस समीकरण में ऑक्सीजन के लिए दिए गए सभी मानों को डाला। दाब को सही ढंग से निकालने के लिए, हमने गैस नियतांक के मान को \( \text{L atm} \) इकाइयों में उपयोग किया ताकि सभी इकाइयाँ मेल खाएँ।

🎯 Exam Tip: जब वाण्डरवाल समीकरण का उपयोग करें, तो सभी नियतांकों और चर के लिए इकाइयों की संगतता सुनिश्चित करें। यदि \( a \) और \( b \) के मान \( \text{L atm} \) में हैं, तो \( R \) का मान भी \( \text{L atm} \) इकाइयों में उपयोग करना सबसे अच्छा है।

 

Question 6. किसी फ्लास्क में आर्गन व क्लोरीन गैस भरी हुई है। जिनके द्रव्यमान के अनुपात 2:1 व मिश्रण का ताप 27°C है। दोनों गैसों के लिये निम्न की गणना कीजिये
(i) प्रति अणु की औसत गतिज ऊर्जा।
(ii) अणुओं के वर्ग माध्य मूल वेग का अनुपात।
यहाँ आर्गन का रमाणु द्रव्यमान 39.94 वे क्लोरीन अणु का द्रव्यमान 70.94 है।

Answer: हमें दो अलग-अलग गैसों, आर्गन और क्लोरीन के लिए कुछ गणनाएँ करनी हैं।
दिया गया है: मिश्रण का ताप \( T = 27^\circ \text{C} = 27 + 273 = 300 \text{ K} \) आर्गन का अणु द्रव्यमान \( M_{Ar} = 39.94 \text{ u} \) क्लोरीन का अणु द्रव्यमान \( M_{Cl} = 70.94 \text{ u} \)
(i) प्रति अणु की औसत गतिज ऊर्जा:हम जानते हैं कि एक अणु की माध्य गतिज ऊर्जा (\( \overline{E} \)) केवल परम तापमान (\( T \)) पर निर्भर करती है और इसका सूत्र \( \overline{E} = \frac{3}{2} kT \) है, जहाँ \( k \) बोल्ट्जमान नियतांक है।
चूँकि आर्गन और क्लोरीन दोनों गैसें एक ही तापमान \( 300 \text{ K} \) पर हैं, इसलिए प्रत्येक अणु की औसत गतिज ऊर्जा दोनों गैसों के लिए समान होगी।
अतः, प्रति अणु औसत गतिज ऊर्जा का अनुपात \( \frac{(\overline{E})_{Ar}}{(\overline{E})_{Cl}} = \frac{1}{1} \) होगा।
(ii) अणुओं के वर्ग माध्य मूल वेग का अनुपात:वर्ग माध्य मूल वेग \( V_{rms} \) का सूत्र है: \( V_{rms} = \sqrt{\frac{3RT}{M}} \)
चूँकि दोनों गैसों का तापमान \( T \) समान है, तो वर्ग माध्य मूल वेग अणुभार \( M \) के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होगा: \( V_{rms} \propto \frac{1}{\sqrt{M}} \)
आर्गन और क्लोरीन के वर्ग माध्य मूल वेग का अनुपात: \( \frac{(V_{rms})_{Ar}}{(V_{rms})_{Cl}} = \frac{\sqrt{M_{Cl}}}{\sqrt{M_{Ar}}} = \sqrt{\frac{M_{Cl}}{M_{Ar}}} \)
मान रखने पर: \( \frac{(V_{rms})_{Ar}}{(V_{rms})_{Cl}} = \sqrt{\frac{70.94}{39.94}} \) \( \frac{(V_{rms})_{Ar}}{(V_{rms})_{Cl}} = \sqrt{1.776} \) \( \frac{(V_{rms})_{Ar}}{(V_{rms})_{Cl}} \approx 1.33 \)
इसलिए, आर्गन और क्लोरीन अणुओं के वर्ग माध्य मूल वेग का अनुपात लगभग \( 1.33:1 \) होगा।In simple words: इस सवाल में, हमने देखा कि जब दो अलग-अलग गैसों का तापमान एक ही होता है, तो उनके अणुओं की औसत ऊर्जा भी एक ही होती है। लेकिन उनकी गति अलग-अलग होती है, क्योंकि यह उनके वजन पर निर्भर करती है। हल्की गैस के अणु भारी गैस के अणुओं से ज़्यादा तेज़ी से चलते हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि एक अणु की माध्य गतिज ऊर्जा केवल तापमान पर निर्भर करती है, जबकि वर्ग माध्य मूल वेग तापमान और अणु के द्रव्यमान दोनों पर निर्भर करता है। अनुपात निकालते समय, सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ संगत हों।

 

Question 7. 373 K ताप पर जलवाष्प में जल के अणु के माध्य मुक्त पथ की गणना करो यदि जल के अणुओं का व्यास 2 × 10⁻¹⁰ m है।
Answer: हम माध्य मुक्त पथ की गणना करने के लिए सूत्र का उपयोग करेंगे, जिसके लिए हमें अणुओं की संख्या घनत्व (\( n \)) और अणुओं का व्यास (\( d \)) चाहिए।
माध्य मुक्त पथ \( \lambda \) का सूत्र है: \( \lambda = \frac{1}{\sqrt{2} \pi n d^2} \)
दिया गया है: ताप \( T_2 = 373 \text{ K} \) जल के अणुओं का व्यास \( d = 2 \times 10^{-10} \text{ m} \)
हमें संख्या घनत्व \( n \) ज्ञात करना होगा। हम जानते हैं कि मानक ताप और दाब (STP) पर, \( 1 \text{ m}^3 \) में अणुओं की संख्या \( n_1 \approx 2.7 \times 10^{25} \text{ m}^{-3} \) (जो \( 0^\circ \text{C} = 273 \text{ K} \) पर है) होती है। चूंकि गैसों के लिए \( n \propto \frac{1}{T} \) (स्थिर दाब पर), या सामान्य परिस्थितियों में जहाँ संख्या घनत्व तापमान पर निर्भर करता है, हम लिख सकते हैं: \( n_2 = n_1 \frac{T_1}{T_2} \)
जहाँ \( n_1 = 2.7 \times 10^{25} \text{ m}^{-3} \) और \( T_1 = 273 \text{ K} \)। \( n_2 = \frac{2.7 \times 10^{25} \times 273}{373} \) \( n_2 \approx 1.97 \times 10^{25} \text{ m}^{-3} \) (स्रोत में यह \( 2 \times 10^{25} \text{ m}^{-3} \) के रूप में दिया गया है, हम इसी मान का उपयोग करेंगे।) तो, \( n = 2 \times 10^{25} \text{ m}^{-3} \)
अब इन मानों को माध्य मुक्त पथ के सूत्र में रखें: \( \lambda = \frac{1}{\sqrt{2} \times \pi \times n \times d^2} \) \( \lambda = \frac{1}{1.414 \times 3.14 \times (2 \times 10^{25} \text{ m}^{-3}) \times (2 \times 10^{-10} \text{ m})^2} \) \( \lambda = \frac{1}{1.414 \times 3.14 \times 2 \times 10^{25} \times 4 \times 10^{-20}} \) \( \lambda = \frac{1}{35.5072 \times 10^5} \) \( \lambda = \frac{1}{3.55072 \times 10^6} \) \( \lambda \approx 0.2816 \times 10^{-6} \text{ m} \) \( \lambda \approx 2.8 \times 10^{-7} \text{ m} \)
इसलिए, जलवाष्प में जल के अणु का माध्य मुक्त पथ लगभग \( 2.8 \times 10^{-7} \text{ m} \) है।In simple words: माध्य मुक्त पथ वह औसत दूरी है जो एक अणु किसी दूसरे अणु से टकराने से पहले तय करता है। इसे निकालने के लिए, हमें यह जानना होता है कि कितने अणु एक जगह में हैं और अणु कितने बड़े हैं। अधिक तापमान पर अणुओं की गति तेज होती है, जिससे वे अधिक टकराते हैं।

🎯 Exam Tip: माध्य मुक्त पथ के सूत्र \( \lambda = \frac{1}{\sqrt{2} \pi n d^2} \) को याद रखें। अणुओं का संख्या घनत्व \( n \) ज्ञात करने के लिए आदर्श गैस नियम का उपयोग करना पड़ सकता है, या यदि संख्या घनत्व नहीं दिया गया है तो इसे मानक स्थितियों से समायोजित करना पड़ सकता है।

 

Question 8. यदि वायु का ताप 127 से 227°C हो जाये तो उसके अणुओं की गतिज ऊर्जा किस अनुपात में बढ़ जायेगी?
Answer: हम जानते हैं कि गैस के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा उसके परम तापमान के सीधे समानुपाती होती है।
अणुओं की माध्य गतिज ऊर्जा \( E \propto T \) इसलिए, \( \frac{E_2}{E_1} = \frac{T_2}{T_1} \)
सबसे पहले, दिए गए सेल्सियस तापमान को केल्विन में परिवर्तित करें: प्रारंभिक ताप \( T_1 = 127^\circ \text{C} = 127 + 273 = 400 \text{ K} \) अंतिम ताप \( T_2 = 227^\circ \text{C} = 227 + 273 = 500 \text{ K} \)
अब गतिज ऊर्जा के अनुपात की गणना करें: \( \frac{E_2}{E_1} = \frac{500 \text{ K}}{400 \text{ K}} \) \( \frac{E_2}{E_1} = \frac{5}{4} \)
इसलिए, वायु के अणुओं की गतिज ऊर्जा \( 5:4 \) के अनुपात में बढ़ जायेगी।In simple words: गैस के अणुओं की ऊर्जा सीधे उसके तापमान से जुड़ी होती है। जब तापमान बढ़ता है, तो अणुओं की ऊर्जा भी बढ़ती है। हमने सेल्सियस तापमान को केल्विन में बदला और फिर ऊर्जा में वृद्धि का अनुपात ज्ञात किया।

🎯 Exam Tip: भौतिकी के प्रश्नों में तापमान का उपयोग हमेशा केल्विन स्केल में करें। गतिज ऊर्जा और तापमान के बीच सीधा संबंध \( E \propto T \) याद रखें।

 

Question 9. यदि 1 mol एक परमाणुक गैस (\( \gamma = \frac{5}{3} \)) को 1 mol द्विपरमाणुक गैस (\( \gamma = \frac{7}{5} \)) में मिश्रित किया जाये तो मिश्रण के \( \gamma \) की गणना कीजिये। जहाँ \( \gamma = C_p/C_v \).
Answer: गैसों के मिश्रण के लिए \( \gamma \) (विशिष्ट ऊष्मा का अनुपात) ज्ञात करने के लिए, हम निम्न सूत्र का उपयोग करेंगे:
\( \frac{n_1 + n_2}{\gamma - 1} = \frac{n_1}{\gamma_1 - 1} + \frac{n_2}{\gamma_2 - 1} \)
दिया गया है: एक परमाणुक गैस के मोलों की संख्या \( n_1 = 1 \text{ mol} \) एक परमाणुक गैस के लिए \( \gamma_1 = \frac{5}{3} \) द्विपरमाणुक गैस के मोलों की संख्या \( n_2 = 1 \text{ mol} \) द्विपरमाणुक गैस के लिए \( \gamma_2 = \frac{7}{5} \)
मानों को सूत्र में रखने पर: \( \frac{1 + 1}{\gamma - 1} = \frac{1}{\frac{5}{3} - 1} + \frac{1}{\frac{7}{5} - 1} \) \( \frac{2}{\gamma - 1} = \frac{1}{\frac{5-3}{3}} + \frac{1}{\frac{7-5}{5}} \) \( \frac{2}{\gamma - 1} = \frac{1}{\frac{2}{3}} + \frac{1}{\frac{2}{5}} \) \( \frac{2}{\gamma - 1} = \frac{3}{2} + \frac{5}{2} \) \( \frac{2}{\gamma - 1} = \frac{3+5}{2} \) \( \frac{2}{\gamma - 1} = \frac{8}{2} \) \( \frac{2}{\gamma - 1} = 4 \)
अब \( \gamma - 1 \) के लिए हल करें: \( \gamma - 1 = \frac{2}{4} \) \( \gamma - 1 = 0.5 \) \( \gamma = 1 + 0.5 \) \( \gamma = 1.5 \)
इसलिए, मिश्रण के लिए \( \gamma \) का मान \( 1.5 \) है।In simple words: जब दो अलग-अलग गैसों को मिलाया जाता है, तो मिश्रण का \( \gamma \) मान दोनों गैसों के \( \gamma \) मान और उनकी मात्रा पर निर्भर करता है। हमने दिए गए सूत्र का उपयोग करके एक परमाणुक और द्विपरमाणुक गैस के मिश्रण के लिए \( \gamma \) का मान निकाला।

🎯 Exam Tip: गैसों के मिश्रण के लिए \( \gamma \) का सूत्र याद रखें और भिन्न संख्याओं की गणना सावधानी से करें। मोलों की संख्या और प्रत्येक गैस के \( \gamma \) मानों को सही ढंग से सूत्र में रखें।

 

प्रश्न 10. एक पात्र में 16 gm हीलियम व 16 gm ऑक्सीजन का मिश्रण है तब मिश्रण के \( \gamma \) की गणना करो।
Answer: मिश्रण के लिए विशिष्ट ऊष्मा अनुपात (गामा) का सूत्र इस प्रकार है:
\[ \frac { n_1 + n_2 }{ \gamma - 1 } = \frac { n_1 }{ \gamma_1 - 1 } + \frac { n_2 }{ \gamma_2 - 1 } \] दी गई जानकारी के अनुसार:
हीलियम (He) एकपरमाणुक गैस है:
\( n_1 = \frac { 16 \text{ gm} }{ 4 \text{ gm/mol} } = 4 \text{ mol} \)
\( \gamma_1 = \frac { 5 }{ 3 } \) (एकपरमाणुक गैस के लिए)

ऑक्सीजन (O\(_{2}\)) द्विपरमाणुक गैस है:
\( n_2 = \frac { 16 \text{ gm} }{ 32 \text{ gm/mol} } = \frac { 1 }{ 2 } \text{ mol} \)
\( \gamma_2 = \frac { 7 }{ 5 } \) (द्विपरमाणुक गैस के लिए)

अब इन मानों को सूत्र में रखने पर:
\( \frac { 4 + \frac { 1 }{ 2 } }{ \gamma - 1 } = \frac { 4 }{ \frac { 5 }{ 3 } - 1 } + \frac { \frac { 1 }{ 2 } }{ \frac { 7 }{ 5 } - 1 } \)

\( \frac { 4.5 }{ \gamma - 1 } = \frac { 4 }{ \frac { 5 - 3 }{ 3 } } + \frac { \frac { 1 }{ 2 } }{ \frac { 7 - 5 }{ 5 } } \)

\( \frac { 4.5 }{ \gamma - 1 } = \frac { 4 }{ \frac { 2 }{ 3 } } + \frac { \frac { 1 }{ 2 } }{ \frac { 2 }{ 5 } } \)

\( \frac { 4.5 }{ \gamma - 1 } = (4 \times \frac { 3 }{ 2 }) + (\frac { 1 }{ 2 } \times \frac { 5 }{ 2 }) \)

\( \frac { 4.5 }{ \gamma - 1 } = 6 + \frac { 5 }{ 4 } \)

\( \frac { 4.5 }{ \gamma - 1 } = 6 + 1.25 \)

\( \frac { 4.5 }{ \gamma - 1 } = 7.25 \)

\( \gamma - 1 = \frac { 4.5 }{ 7.25 } \approx 0.6206 \)

\( \gamma = 1 + 0.6206 \)

\( \gamma \approx 1.62 \)
In simple words: हमने दो अलग-अलग गैसों के मिश्रण के लिए एक विशेष अनुपात (गामा) की गणना की है। इस गणना के लिए हमने प्रत्येक गैस के मोल्स की संख्या और उनके व्यक्तिगत गामा मानों का उपयोग किया है। इससे हमें मिश्रण का कुल गामा मान लगभग 1.62 मिला।

🎯 Exam Tip: मिश्रण के गामा (\( \gamma \)) की गणना करते समय, प्रत्येक गैस के मोलों की संख्या और उसके व्यक्तिगत विशिष्ट ऊष्मा अनुपात को सही ढंग से पहचानना महत्वपूर्ण है। एकपरमाणुक, द्विपरमाणुक और बहुपरमाणुक गैसों के लिए \( \gamma \) के मानक मान याद रखें।

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