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Detailed Chapter 11 तरल RBSE Solutions for Class 11 Physics
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Class 11 Physics Chapter 11 तरल RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Physics Chapter 11 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
RBSE Class 11 Physics Chapter 11 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. बादल आसमान में तैरते क्यों हैं?
Answer: बादल हवा में तैरते हैं क्योंकि उनका अंतिम वेग शून्य होता है. इसका मतलब है कि वे नीचे नहीं गिरते बल्कि स्थिर रहते हैं. हवा उन्हें ऊपर उठाती है और वे उसी जगह पर टिके रहते हैं.
In simple words: बादल इसलिए तैरते हैं क्योंकि उनका नीचे गिरने का वेग नहीं होता है, वे हवा में स्थिर रहते हैं।
🎯 Exam Tip: जब कोई वस्तु शून्य अंतिम वेग पर होती है, तो उसका अर्थ है कि वह हवा में निलंबित रहती है, गुरुत्वाकर्षण बल और उत्प्लावन बल संतुलित होते हैं।
Question 2. क्रान्तिक वेग किसे कहते हैं ?
Answer: क्रान्तिक वेग वह अधिकतम चाल है जिसके ऊपर कोई तरल (जैसे पानी) बहने पर उसका बहाव अनियमित और विक्षुब्ध हो जाता है. इस वेग के नीचे बहाव शांत और सीधा रहता है. यह तरल के गुण पर निर्भर करता है.
In simple words: क्रान्तिक वेग वह सीमा है जिसके ऊपर तरल का बहाव सीधा न रहकर उथल-पुथल वाला हो जाता है।
🎯 Exam Tip: क्रान्तिक वेग तरल की श्यानता और घनत्व पर निर्भर करता है, और यह लैमिनार प्रवाह (शांत प्रवाह) और टर्बुलेंट प्रवाह (विक्षुब्ध प्रवाह) के बीच की सीमा को दर्शाता है।
Question 3. Typesetting math: 18% है?
Answer: नहीं।
In simple words: इसका जवाब 'नहीं' है।
🎯 Exam Tip: यह एक सीधा 'हाँ' या 'नहीं' का प्रश्न है, जिसमें उत्तर सरल और स्पष्ट होता है। ऐसे प्रश्नों के लिए कोई जटिल विश्लेषण की आवश्यकता नहीं होती।
Question 5. द्रव की श्यानता पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: जब द्रव का तापमान बढ़ाया जाता है, तो उसकी श्यानता घट जाती है. इसका मतलब है कि गर्म द्रव पतले हो जाते हैं और अधिक आसानी से बहते हैं. गर्मी से अणुओं के बीच के बल कमजोर हो जाते हैं, जिससे उन्हें गति करने में आसानी होती है.
In simple words: तापमान बढ़ाने से द्रव की श्यानता कम हो जाती है, यानी वह पतला होकर आसानी से बहता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि द्रवों और गैसों पर तापमान का प्रभाव अलग-अलग होता है; द्रवों में श्यानता घटती है जबकि गैसों में बढ़ती है।
Question 6. किस ताप पर द्रव का पृष्ठ तनाव शून्य हो जाता है?
Answer: द्रव का पृष्ठ तनाव क्रान्तिक ताप पर शून्य हो जाता है. क्रान्तिक ताप वह तापमान है जिस पर द्रव और गैस के बीच का अंतर खत्म हो जाता है. इस तापमान पर, द्रव के अणु इतनी तेज़ी से गति करते हैं कि पृष्ठ पर कोई तनाव नहीं रहता.
In simple words: द्रव का पृष्ठ तनाव 'क्रान्तिक ताप' पर शून्य हो जाता है, क्योंकि उस बिंदु पर द्रव और गैस की अवस्थाएँ लगभग समान हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: क्रान्तिक ताप एक महत्वपूर्ण भौतिक स्थिरांक है जो दर्शाता है कि किसी द्रव का पृष्ठ तनाव कब पूरी तरह से गायब हो जाता है।
Question 7. वह ताप बताइए जिस पर जल का पृष्ठ तनाव अधिकतम होगा?
Answer: जल का पृष्ठ तनाव \( 4^\circ \text{C} \) पर अधिकतम होता है. इस तापमान पर पानी के अणुओं के बीच आकर्षण बल सबसे मजबूत होता है, जिससे उसकी सतह पर सबसे अधिक तनाव पैदा होता है. यह पानी के असामान्य व्यवहार में से एक है.
In simple words: पानी का पृष्ठ तनाव \( 4^\circ \text{C} \) पर सबसे ज्यादा होता है।
🎯 Exam Tip: \( 4^\circ \text{C} \) पर जल का घनत्व भी अधिकतम होता है, जो इसके अनूठे गुणों में से एक है।
Question 8. पानी में साबुन घोलने पर सम्पर्क कोण पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: जब पानी में साबुन घोला जाता है, तो सम्पर्क कोण घट जाता है. साबुन पानी के पृष्ठ तनाव को कम कर देता है, जिससे पानी सतहों को और अधिक भिगो पाता है. इससे पानी कपड़ों में बेहतर तरीके से प्रवेश कर पाता है.
In simple words: पानी में साबुन मिलाने पर सम्पर्क कोण कम हो जाता है।
🎯 Exam Tip: सम्पर्क कोण का घटना यह दर्शाता है कि तरल की गीला करने की क्षमता बढ़ गई है, जिससे वह सतहों पर अधिक आसानी से फैल पाता है।
Question 9. खेतों को जोतने से क्या लाभ होता है?
Answer: खेतों को जोतने से मिट्टी में बनी केशनली (पतली नलिकाएँ) टूट जाती हैं. इस वजह से जमीन से पानी वाष्पित होकर हवा में नहीं उड़ पाता है, और मिट्टी में नमी बनी रहती है. यह नमी पौधों की वृद्धि के लिए बहुत ज़रूरी होती है.
In simple words: जोतने से मिट्टी की केशनली टूट जाती है, जिससे जमीन में नमी बनी रहती है और पानी वाष्पित नहीं होता।
🎯 Exam Tip: केशनली का टूटना पानी के संरक्षण में मदद करता है, क्योंकि यह मिट्टी की सतह से पानी के अनावश्यक वाष्पीकरण को रोकता है।
Question 10. आदर्श तरल किसे कहते हैं?
Answer: एक आदर्श तरल ऐसा द्रव होता है जिसे दबाया नहीं जा सकता (असम्पीड्य) और जिसमें कोई आंतरिक घर्षण या श्यानता नहीं होती (अश्यान). हालांकि ऐसा कोई तरल असल में मौजूद नहीं है, लेकिन भौतिकी में गणनाओं को आसान बनाने के लिए इसकी कल्पना की जाती है.
In simple words: आदर्श तरल वह द्रव है जिसे दबाया नहीं जा सकता और जिसमें कोई चिपचिपापन नहीं होता।
🎯 Exam Tip: आदर्श तरल की अवधारणा का उपयोग बर्नौली के प्रमेय जैसे सैद्धांतिक विश्लेषणों में किया जाता है, जहाँ गणनाओं को सरल बनाने के लिए श्यानता और संपीड्यता को नगण्य माना जाता है।
Question 12. पृष्ठ तनाव के लिये उत्तरदायी बल का नाम लिखो।
Answer: पृष्ठ तनाव के लिए मुख्य रूप से ससंजक बल उत्तरदायी होता है. ये वे आकर्षण बल होते हैं जो तरल के अणुओं को एक-दूसरे की ओर खींचते हैं. सतह पर, अणु अंदर की ओर अधिक आकर्षित होते हैं, जिससे एक खिंचाव पैदा होता है जो सतह को सिकुड़ने का प्रयास करता है.
In simple words: पृष्ठ तनाव के लिए 'ससंजक बल' जिम्मेदार होता है, जो तरल के अणुओं को एक साथ खींचता है।
🎯 Exam Tip: ससंजक बल अणुओं के बीच का आकर्षण बल है, जबकि आसंजक बल अणुओं और किसी अन्य सतह के बीच का आकर्षण बल है। पृष्ठ तनाव ससंजक बलों के कारण होता है।
RBSE Class 11 Physics Chapter 11 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. किसी बहते हुये द्रव में कितनी प्रकार की ऊर्जा होती है?
Answer: आदर्श द्रव के धारा रेखीय प्रवाह में तीन प्रकार की ऊर्जाएँ होती हैं:
(1) दाब ऊर्जा (Pressure Energy)- यदि किसी द्रव पर दाब P लग रहा हो और वह एक क्षेत्रफल A पर I दूरी चले, तो दाब ऊर्जा किए गए कार्य के बराबर होती है.
दाब ऊर्जा \( = \) किया गया कार्य \( = \) बल \( \times \) दूरी
\( = \) दाब \( \times \) क्षेत्रफल \( \times \) दूरी \( = P \times A \times I \)
द्रव का आयतन \( = \) क्षेत्रफल \( \times \) दूरी \( = A \times I \)
\( \implies \) द्रव के एकांक आयतन की दाब ऊर्जा \( = \frac{\text{दाब ऊर्जा}}{\text{आयतन}} = \frac{P \times A \times I}{A \times I} = P \)
(2) गतिज ऊर्जा (K.E.)- यदि \( m \) द्रव्यमान और \( V \) आयतन का द्रव \( v \) वेग से बह रहा हो, तो उसकी गतिज ऊर्जा \( \frac{1}{2} m v^2 \) होगी.
\( \implies \) द्रव के एकांक आयतन की गतिज ऊर्जा \( = \frac{\text{गतिज ऊर्जा}}{\text{आयतन}} = \frac{1}{2} \frac{m}{V} v^2 = \frac{1}{2} \rho v^2 \) जहाँ \( \rho \) द्रव का घनत्व है.
(3) स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)- यदि \( m \) द्रव्यमान का द्रव पृथ्वी तल से \( h \) ऊँचाई पर हो, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा \( mgh \) होगी.
\( \implies \) द्रव के एकांक आयतन की स्थितिज ऊर्जा \( = \frac{\text{स्थितिज ऊर्जा}}{\text{आयतन}} = \frac{m}{V} gh = \rho gh \). ये तीनों ऊर्जाएँ बर्नौली के प्रमेय का आधार बनती हैं.
In simple words: बहते हुए द्रव में तीन तरह की ऊर्जाएँ होती हैं: दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा। दाब ऊर्जा दाब के कारण होती है, गतिज ऊर्जा गति के कारण और स्थितिज ऊर्जा ऊंचाई के कारण।
🎯 Exam Tip: बर्नौली का प्रमेय इन तीनों ऊर्जाओं के योग को एक स्थिर राशि बताता है, जो ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
Question 2. विक्षुब्ध प्रवाह की परिभाषा लिखिए।
Answer: विक्षुब्ध प्रवाह तब होता है जब किसी तरल का प्रवाह वेग उसके क्रांतिक वेग से अधिक हो जाता है. इस स्थिति में तरल के कण अनियमित और टेढ़े-मेढ़े तरीके से गति करते हैं, और तरल के अंदर भंवर धाराएँ (छोटे-छोटे घुमाव) उत्पन्न हो जाती हैं. यह प्रवाह व्यवस्थित धारा रेखीय प्रवाह के विपरीत होता है. विक्षुब्ध प्रवाह में ऊर्जा का अधिक क्षय होता है.
In simple words: जब तरल का बहाव बहुत तेज़ होता है और उसके कण इधर-उधर बेतरतीब ढंग से चलते हैं, जिससे भंवर बनते हैं, तो उसे विक्षुब्ध प्रवाह कहते हैं।
🎯 Exam Tip: विक्षुब्ध प्रवाह में ऊर्जा का अधिक नुकसान होता है और यह धारा रेखीय प्रवाह (लैमिनार फ्लो) की तुलना में अधिक जटिल होता है।
Question 4. धारा रेखीय प्रवाह की परिभाषा लिखिए।
Answer: धारा रेखीय प्रवाह उस प्रकार के द्रव बहाव को कहते हैं जिसमें द्रव के सभी कण एक ही रास्ते पर चलते हैं और किसी भी बिंदु से गुजरने वाले कणों का वेग और दिशा हमेशा समान रहती है. ऐसे प्रवाह में, द्रव की परतें बिना एक-दूसरे को काटे सुचारू रूप से आगे बढ़ती हैं. इस रास्ते को 'धारा रेखा' कहते हैं, और धारा रेखा के किसी भी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर द्रव के वेग की दिशा को दिखाती है.
In simple words: धारा रेखीय प्रवाह में तरल के कण एक ही रास्ते पर बिना एक-दूसरे को काटे चलते हैं, और हर कण का वेग स्थिर रहता है।
🎯 Exam Tip: धारा रेखीय प्रवाह तब होता है जब तरल का वेग क्रांतिक वेग से कम होता है, और इसमें ऊर्जा का नुकसान कम होता है।
Question 5. गैसों की श्यानता पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: तापमान बढ़ाने पर द्रवों की श्यानता कम होती है, लेकिन गैसों की श्यानता बढ़ती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गैसों में अणु लगातार तेज़ गति करते हैं, और उच्च तापमान पर उनके बीच की टक्करों की आवृत्ति (संख्या) बढ़ जाती है. इन टक्करों के बढ़ने से गैस के बहाव में अधिक आंतरिक घर्षण पैदा होता है, जिससे उसकी श्यानता बढ़ जाती है. गैसों की श्यानता लगभग तापमान के वर्गमूल के समानुपाती होती है.
In simple words: तापमान बढ़ाने पर गैसों के अणु तेज़ी से टकराते हैं, जिससे उनकी श्यानता बढ़ जाती है।
🎯 Exam Tip: द्रवों और गैसों पर तापमान का प्रभाव विपरीत होता है क्योंकि द्रवों में मुख्य बल आणविक आकर्षण होते हैं जबकि गैसों में आणविक टक्करें महत्वपूर्ण होती हैं।
Question 6. पानी की छोटी बंद गोल लेकिन बड़ी बूंद चपटी होती है, क्यों?
Answer: बूंद की आकृति दो मुख्य बलों द्वारा तय होती है: पृष्ठ तनाव और गुरुत्वाकर्षण बल. बूंद हमेशा अपनी न्यूनतम स्थितिज ऊर्जा की अवस्था प्राप्त करने की कोशिश करती है. बहुत छोटी बूंदों का द्रव्यमान इतना कम होता है कि गुरुत्वाकर्षण बल का उन पर कोई खास असर नहीं होता है. ऐसे में पृष्ठ तनाव बूंद को अपना क्षेत्रफल कम से कम रखने के लिए गोलाकार आकृति देता है, क्योंकि गोले का सतही क्षेत्रफल सबसे कम होता है. लेकिन जब बूंद का आकार बढ़ता है, तो उसका द्रव्यमान भी बढ़ जाता है, और गुरुत्वाकर्षण बल प्रभावी होने लगता है. गुरुत्वाकर्षण बल बूंद को नीचे की ओर खींचता है, जिससे उसका गुरुत्व केंद्र नीचे चला जाता है और बूंद चपटी होने लगती है. इसलिए बड़ी बूंदें किनारों से चपटी हो जाती हैं.
In simple words: छोटी बूंदें पृष्ठ तनाव के कारण गोल होती हैं, लेकिन बड़ी बूंदों पर गुरुत्वाकर्षण बल अधिक प्रभावी हो जाता है, जिससे वे चपटी हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: पृष्ठ तनाव बूंद को गोलाकार बनाता है, जबकि गुरुत्वाकर्षण उसे चपटा करता है; दोनों बलों का सापेक्षिक प्रभाव बूंद के आकार पर निर्भर करता है।
Question 7. केशनली में किसी द्रव पृष्ठ की आकृति किन बलों के द्वारा निर्धारित की जाती है?
Answer: केशनली में द्रव पृष्ठ की आकृति आसंजक बल और ससंजक बल नामक दो बलों द्वारा निर्धारित होती है. मान लीजिए कांच के पास जल के मुक्त पृष्ठ पर एक अणु \( A \) है. इस अणु पर निम्नलिखित बल कार्य करते हैं:
(1) आसंजक बल \( Q \): यह अणु \( A \) के पास वाले कांच के अणुओं के आकर्षण के कारण उत्पन्न होता है और ठोस (कांच) की सतह के लंबवत कार्य करता है.
(2) ससंजक बल \( P \): यह जल के अणुओं के बीच आकर्षण बल है.
जल और कांच के अणुओं के बीच का आसंजक बल \( (Q) \) जल के अणुओं के ससंजक बल \( (P) \) से अधिक होता है, इसलिए उनका परिणामी बल \( R \) जल के बाहर की ओर होता है (जैसा कि चित्र I में दिखाया गया है). संतुलन की अवस्था में, द्रव का पृष्ठ हमेशा परिणामी बल के लंबवत होता है. इस कारण, कांच के संपर्क में जल का पृष्ठ अवतल (अंदर की ओर धँसा हुआ) आकृति ले लेता है (जैसा कि चित्र II में दिखाया गया है). इसी तरह, अगर दो कांच की प्लेटों के बीच पानी की बूंद को दबाकर एक पतली फिल्म बनाई जाए, तो वह भी दोनों खुले सिरों पर अवतल आकृति ले लेती है (जैसा कि चित्र III में दिखाया गया है). यह द्रव के कांच को गीला करने की क्षमता पर निर्भर करता है.
In simple words: केशनली में द्रव पृष्ठ की आकृति आसंजक बल (द्रव और नली के बीच का आकर्षण) और ससंजक बल (द्रव के अणुओं के बीच का आकर्षण) द्वारा तय होती है।
🎯 Exam Tip: यदि आसंजक बल ससंजक बल से अधिक है, तो द्रव नली को भिगोएगा और अवतल पृष्ठ बनाएगा; यदि ससंजक बल अधिक है, तो द्रव नहीं भिगोएगा और उत्तल पृष्ठ बनाएगा।
Question 8. समुद्र की लहरों को शांत करने के लिए तेल क्यों छिडकते हैं?
Answer: समुद्र की लहरों को शांत करने के लिए तेल छिड़का जाता है क्योंकि तेल जल के पृष्ठ तनाव को कम कर देता है. जब तेल पानी की सतह पर डाला जाता है, तो तेज़ हवा उसे पानी की सतह पर हवा की दिशा में दूर तक फैला देती है. बिना तेल वाले जल का पृष्ठ तनाव तेल वाले जल से अधिक होता है. इस कारण, बिना तेल वाला जल, तेल वाले जल की वायु की विपरीत दिशा में खिंचता है, जिससे समुद्र की लहरें शांत हो जाती हैं. यह प्रभाव लहरों की ऊंचाई को कम करता है.
In simple words: समुद्र में तेल छिड़कने से पानी का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है, जिससे लहरों का वेग कम हो जाता है और वे शांत हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: यह प्रक्रिया पृष्ठ तनाव के अंतर का उपयोग करती है, जहाँ कम पृष्ठ तनाव वाला क्षेत्र अधिक पृष्ठ तनाव वाले क्षेत्र से दूर खींचता है।
Question 9. पारा तापमापी की काँच की नली में पारे का भरना कठिन कार्य क्यों है?
Answer: पारा तापमापी की कांच की नली में पारा भरना एक कठिन काम है क्योंकि केशनली में पारे का चन्द्रतल (सतह का आकार) उत्तल होता है. जब पारे की बूंद को केशनली में डालने की कोशिश की जाती है, तो पारे के उत्तल चन्द्रतल के नीचे का दाब वायुमंडलीय दाब से \( \frac{2T}{r} \) अधिक हो जाता है, जहाँ \( T \) पृष्ठ तनाव और \( r \) केशनली की त्रिज्या है. यह अतिरिक्त दाब पारे को तापमापी की केशनली में प्रवेश करने से रोकता है. इसलिए नली में पारा भरने में कठिनाई आती है.
In simple words: पारे का चन्द्रतल उत्तल होने और नली में दाब अधिक होने के कारण इसे तापमापी की नली में भरना मुश्किल होता है।
🎯 Exam Tip: पारे का आसंजक बल कांच के लिए ससंजक बल से कम होता है, इसलिए यह कांच को नहीं भिगोता और उत्तल चन्द्रतल बनाता है, जिससे केशनली में प्रवेश मुश्किल होता है।
RBSE Class 11 Physics Chapter 11 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. बरनौली प्रमेय का कथन लिखते हुये इसे सिद्ध कीजिए।
Answer: बर्नौली प्रमेय का कथन: जब कोई असंपीड्य (जिसे दबाया न जा सके) और अश्यान (जिसमें कोई घर्षण न हो) द्रव या गैस एक स्थान से दूसरे स्थान तक धारा रेखीय प्रवाह में बहता है, तो उसके मार्ग के प्रत्येक बिंदु पर उसके एकांक आयतन की कुल ऊर्जा (दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) एक नियतांक होती है.
दाब ऊर्जा \( + \) गतिज ऊर्जा \( + \) स्थितिज ऊर्जा \( = \) स्थिरांक
यह समीकरण इस प्रकार भी लिखा जा सकता है: \( \frac{P}{\rho} + \frac{1}{2}v^2 + gh = \) स्थिरांक (इकाई द्रव्यमान के लिए)
अथवा \( P + \frac{1}{2}\rho v^2 + \rho gh = \) स्थिरांक (इकाई आयतन के लिए)
इस प्रकार, बर्नौली का प्रमेय बहते हुए द्रव (या गैस) के लिए ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत है.
**बर्नौली प्रमेय का निगमन (Derivation of Bernoulli's Theorem):**
माना एक नली में द्रव बह रहा है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है (चित्र: परिवर्ती अनुप्रस्थ काट वाली नली में आदर्श तरल का प्रवाह). नली के सिरों X और Y के बीच दाबांतर \( (P_1 - P_2) \) के कारण द्रव का प्रवाह X बिंदु से Y बिंदु की ओर होता है.
माना नली के एक सिरे (X) पर अनुप्रस्थ काट का मान \( A_1 \), द्रव का वेग \( v_1 \), द्रव पर दाब \( P_1 \), और उस सिरे की पृथ्वी से ऊँचाई \( h_1 \) है. इसी प्रकार, दूसरे सिरे (Y) पर \( A_2, v_2, P_2 \), और \( h_2 \) संबंधित राशियाँ हैं. मान लीजिए प्रति सेकंड प्रवाहित जल का आयतन \( Q \) है.
सांतत्यता के समीकरण से: \( A_1v_1 = A_2v_2 = \frac{m}{\rho} \), जहाँ \( m \) प्रति सेकंड प्रवाहित द्रव का द्रव्यमान है.
प्रति सेकंड द्रव पर किया गया परिणामी कार्य \( W = W_1 - W_2 = P_1A_1v_1 - P_2A_2v_2 \).
\( \implies W = P_1 \frac{m}{\rho} - P_2 \frac{m}{\rho} = (P_1 - P_2) \frac{m}{\rho} \)...(3)
गतिज ऊर्जा में वृद्धि \( = \frac{1}{2}m(v_2^2 - v_1^2) \).
स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि \( = mg(h_2 - h_1) \).
ऊर्जा में परिणामी वृद्धि \( = \frac{1}{2}m(v_2^2 - v_1^2) + mg(h_2 - h_1) \).
यह वृद्धि द्रव पर किए गए परिणामी कार्य के बराबर होगी:
\( (P_1 - P_2) \frac{m}{\rho} = \frac{1}{2}m(v_2^2 - v_1^2) + mg(h_2 - h_1) \).
\( P_1 - P_2 = \frac{1}{2}\rho(v_2^2 - v_1^2) + \rho g(h_2 - h_1) \).
\( P_1 + \frac{1}{2}\rho v_1^2 + \rho gh_1 = P_2 + \frac{1}{2}\rho v_2^2 + \rho gh_2 \).
या \( \frac{P_1}{\rho g} + \frac{v_1^2}{2g} + h_1 = \frac{P_2}{\rho g} + \frac{v_2^2}{2g} + h_2 = \) स्थिरांक...(4)
उपर्युक्त समीकरण (4) से प्रत्येक पद की विमा ऊँचाई की है. \( \frac{P}{\rho g} \) को दाब शीर्ष तथा \( \frac{v^2}{2g} \) को वेग शीर्ष कहते हैं.
इस प्रकार बर्नौली सिद्धांत को निम्न प्रकार से भी कह सकते हैं: किसी धारा रेखीय प्रवाह से बहते हुए असंपीड्य और अविस्कासी द्रव के प्रत्येक बिंदु पर दाब शीर्ष, वेग शीर्ष और गुरुत्व शीर्ष का योग स्थिर रहता है. यह सिद्धांत विभिन्न इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण है.
जब तरल विरामावस्था में होता है, अर्थात् प्रत्येक स्थान पर कणों का वेग शून्य होता है, तब बर्नौली समीकरण सरल हो जाता है: \( P_1 + \rho gh_1 = P_2 + \rho gh_2 \).
In simple words: बर्नौली का प्रमेय कहता है कि बहते हुए तरल में दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का कुल योग हमेशा स्थिर रहता है। इसे ऊर्जा संरक्षण के नियम का उपयोग करके सिद्ध किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: बर्नौली प्रमेय ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है और इसे तभी लागू किया जा सकता है जब द्रव असंपीड्य, अश्यान हो और उसका प्रवाह धारा रेखीय हो।
Question 2. किसी टंकी में पानी के धरातल से h मीटर नीचे छिद्र से बहिःस्राव वेग का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए। टौरिसैली सिद्धान्त की तुल्यता को भी समझाइए।
Answer: **बहिःस्राव वेग (Velocity of Efflux):**
माना एक चौड़े पात्र में \( H \) ऊँचाई तक द्रव (जल) भरा हुआ है. इसमें ऊपरी तल की सतह से \( h \) दूरी पर एक छिद्र \( O \) है, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है (चित्र: बहिःस्राव वेग). छिद्र से बाहर निकलने वाले द्रव का बहि:स्राव वेग \( V \) है. द्रव की मुक्त सतह पर वायुमंडलीय दाब \( P \) है, और छिद्र के ठीक बाहर भी दाब \( P \) ही होगा. द्रव की मुक्त पृष्ठ पर द्रव का वेग शून्य है.
जल की सतह और छिद्र \( O \) पर बर्नौली प्रमेय लगाने पर:
\( P_1 + \frac{1}{2}\rho v_1^2 + \rho gH = P_2 + \frac{1}{2}\rho v_2^2 + \rho g(H-h) \)
यहां, \( v_1 = 0 \) (ऊपरी सतह पर द्रव का वेग शून्य है) और \( P_1 = P_2 = P \) (वायुमंडलीय दाब). \( v_2 = v \) (छिद्र से बहिःस्राव वेग).
\( P + 0 + \rho gH = P + \frac{1}{2}\rho v^2 + \rho g(H-h) \)
\( \implies \rho gH = \frac{1}{2}\rho v^2 + \rho gH - \rho gh \)
\( \implies 0 = \frac{1}{2}\rho v^2 - \rho gh \)
\( \implies \frac{1}{2}\rho v^2 = \rho gh \)
\( \implies v^2 = 2gh \)
\( \implies v = \sqrt{2gh} \).
**टॉरिसेली का प्रमेय (Torricelli's Theorem):**
उपरोक्त सूत्र से यह पता चलता है कि किसी छिद्र से द्रव का बहि:स्राव वेग उस वेग के बराबर होता है जो द्रव अपने स्वतंत्र तल से छिद्र तक स्वतंत्रतापूर्वक गिरने में प्राप्त कर लेता है. इसे टॉरिसेली प्रमेय भी कहते हैं. यह प्रमेय गुरुत्वाकर्षण के तहत द्रव की गति को समझने में महत्वपूर्ण है.
In simple words: किसी टंकी में छिद्र से निकलने वाले पानी का वेग \( \sqrt{2gh} \) होता है, जहाँ \( h \) छिद्र की गहराई है। इसे टॉरिसेली का प्रमेय कहते हैं, जिसका मतलब है कि पानी उतनी ही तेज़ गति से निकलेगा जितनी तेज़ गति से वह उसी ऊंचाई से गिरकर प्राप्त करता।
🎯 Exam Tip: टॉरिसेली का प्रमेय गुरुत्वाकर्षण के तहत मुक्त रूप से गिरने वाली वस्तु के अंतिम वेग के समान है, जो ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत को दर्शाता है।
Question 4. एक अनंत श्यान द्रव (विस्कासी द्रव) में गिर रहे गोले के लिये अन्तिम वेग का सूत्र प्रतिपादित कीजिए।
Answer: **द्रव में गोले का गिरना (Fall of a Sphere in a Liquid):**
माना एक \( r \) त्रिज्या का गोला, जिसका घनत्व \( \rho \) है, \( \eta \) श्यानता गुणांक और \( \sigma \) घनत्व वाले एक पूर्णतः समांग तरल माध्यम में गिर रहा है. माध्यम का विस्तार अनंत है. जब गोला नीचे गिरता है, तो उसका वेग बढ़ता जाता है, और एक स्थिति ऐसी आती है जब वह एक निश्चित अधिकतम वेग \( v_t \) से नीचे गिरता है. इस वेग को 'अंतिम वेग' कहते हैं. इस स्थिति में गोले का त्वरण शून्य होता है, और उस पर ऊपर की ओर लगने वाले बल नीचे की ओर लगने वाले बलों के बराबर होते हैं, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है (चित्र: द्रव में गोले का गिरना).
गोले पर निम्नलिखित बल कार्य करते हैं:
(i) गोले का भार \( F_1 = mg = \frac{4}{3}\pi r^3 \rho g \) (नीचे की ओर).
(ii) उत्प्लावन बल \( F_2 = \) विस्थापित द्रव का भार \( = \frac{4}{3}\pi r^3 \sigma g \) (ऊपर की ओर).
(iii) श्यान बल \( F_3 = 6\pi \eta r v_t \) (ऊपर की ओर), स्टोक्स के नियम से.
संतुलन की स्थिति में:
\( F_1 = F_2 + F_3 \)
\( \frac{4}{3}\pi r^3 \rho g = \frac{4}{3}\pi r^3 \sigma g + 6\pi \eta r v_t \)
\( \implies 6\pi \eta r v_t = \frac{4}{3}\pi r^3 \rho g - \frac{4}{3}\pi r^3 \sigma g \)
\( \implies 6\pi \eta r v_t = \frac{4}{3}\pi r^3 (\rho - \sigma)g \)
\( \implies v_t = \frac{2 r^2 (\rho - \sigma)g}{9 \eta} \)...(2)
यह सूत्र स्टोक्स के नियम से प्राप्त होता है. उपरोक्त सूत्र (2) से स्पष्ट है कि किसी श्यान माध्यम में नीचे गिरते गोले का अंतिम वेग गोले की त्रिज्या के वर्ग के समानुपाती, गोले तथा माध्यम के घनत्व के अंतर के समानुपाती और माध्यम के श्यानता गुणांक के व्युत्क्रमानुपाती होता है.
In simple words: जब कोई गोला किसी चिपचिपे द्रव में गिरता है, तो उस पर तीन बल लगते हैं - भार, उत्प्लावन और श्यान बल। संतुलन में ये बल मिलकर गोले को एक स्थिर 'अंतिम वेग' पर गिरने देते हैं, जिसका सूत्र \( v_t = \frac{2 r^2 (\rho - \sigma)g}{9 \eta} \) है।
🎯 Exam Tip: अंतिम वेग का सूत्र याद रखें और यह भी कि यह त्रिज्या के वर्ग पर निर्भर करता है, जिसका अर्थ है कि बड़ा गोला छोटे गोले की तुलना में अधिक तेज़ी से अंतिम वेग प्राप्त करेगा।
Question 5. आणविक बलों के आधार पर पृष्ठ तनाव की व्याख्या कीजिए।
Answer: **आणविक बलों के आधार पर पृष्ठ तनाव की व्याख्या (Explanation of Surface Tension on the basis of Inter-molecular Forces):**
पृष्ठ तनाव तरल के अणुओं के बीच लगने वाले आणविक बलों (ससंजक बल) के कारण होता है. इन बलों के प्रभाव को समझने के लिए हम दो स्थितियों पर विचार करते हैं:
1. **तरल के भीतर एक अणु (स्थिति A):** मान लीजिए एक अणु \( A \) द्रव के भीतर स्थित है, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है (चित्र: पृष्ठ तनाव की आणविक बलों पर आधारित व्याख्या). इस स्थिति में, अणु \( A \) के चारों ओर 'प्रभाव का गोला' पूरी तरह से द्रव के भीतर होता है. इस गोले के अंदर के सभी अणु केंद्रीय अणु \( A \) को अपनी ओर ससंजक बल से आकर्षित करते हैं. चूँकि अणु \( A \) के चारों ओर अणु समान रूप से मौजूद होते हैं, इसलिए अणु \( A \) पर लगने वाला परिणामी बल शून्य होता है.
2. **तरल की सतह पर एक अणु (स्थिति B):** अब मान लीजिए एक अणु \( B \) द्रव की सतह पर स्थित है. इस स्थिति में, अणु \( B \) का 'प्रभाव का गोला' का कुछ हिस्सा द्रव के बाहर हवा में होता है. द्रव के बाहर हवा में अणुओं की संख्या द्रव के भीतर की तुलना में बहुत कम होती है, इसलिए अणु \( B \) पर ऊपर की ओर लगने वाला ससंजक बल नीचे की ओर लगने वाले ससंजक बल से कम होगा. नतीजतन, अणु \( B \) पर एक परिणामी बल नीचे की ओर (द्रव के अंदर की ओर) कार्य करेगा, जो द्रव की सतह के लंबवत होता है. यह बल द्रव की सतह को सिकुड़ने का प्रयास करता है, जिससे सतह पर एक तनाव उत्पन्न होता है, जिसे पृष्ठ तनाव कहते हैं. यह तनाव सतह को न्यूनतम क्षेत्रफल पर लाने की कोशिश करता है.
In simple words: पृष्ठ तनाव द्रव के अणुओं के आपसी आकर्षण बल (ससंजक बल) के कारण होता है। सतह पर मौजूद अणु अंदर की ओर खींचते हैं, जिससे सतह पर एक खिंचाव या तनाव पैदा होता है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि पृष्ठ तनाव अणुओं के भीतर की ओर खींचने वाले शुद्ध बल के कारण होता है, जो सतह के क्षेत्रफल को कम करने का प्रयास करता है।
Question 6. पृष्ठ तनाव पर आधारित दैनिक जीवन का वर्णन कीजिए।
Answer: पृष्ठ तनाव पर आधारित दैनिक जीवन में कई महत्वपूर्ण और रोचक घटनाएँ होती हैं:
(1) **जल के पृष्ठ पर कपूर के टुकड़े नाचने लगते हैं:** जब कपूर के छोटे टुकड़े पानी की सतह पर डाले जाते हैं, तो वे पानी में घुलने लगते हैं. कपूर के घुलने से पानी का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है. चूंकि कपूर के टुकड़े अनियमित होते हैं, उनका एक हिस्सा दूसरे से अधिक घुल जाता है. इससे दोनों ओर के पृष्ठ तनाव में अंतर आ जाता है. यह अंतर कपूर के टुकड़ों को अधिक पृष्ठ तनाव वाले भाग की ओर खींचता है, जिससे वे पानी की सतह पर नाचते दिखाई देते हैं, जब तक कि सारा कपूर घुल नहीं जाता.
(2) **फुहारने से ठंडक उत्पन्न होती है:** किसी भी द्रव को फुहारने से असंख्य छोटी बूंदें बनती हैं. इससे द्रव का कुल पृष्ठ क्षेत्रफल काफी बढ़ जाता है और द्रव के अंदर से अणु सतह पर आ जाते हैं. इस प्रक्रिया में अणुओं को अंतराण्विक बलों के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है, जिसके लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है. यह ऊर्जा द्रव की आंतरिक ऊर्जा से आती है, जिससे द्रव ठंडा हो जाता है. इसी प्रकार, छोटी बूंदों को मिलाकर बड़ी बूंद बनाने पर पृष्ठ क्षेत्रफल कम होने से ठीक उलटा प्रभाव होगा और ताप बढ़ जाएगा.
(3) **काँच की छड़ को गर्म करने पर उसका सिरा गोल हो जाता है:** जब कांच की छड़ को गर्म किया जाता है, तो वह पिघल जाती है. पिघला हुआ कांच न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल (गोलीय रूप में) प्राप्त करने का प्रयास करता है, क्योंकि यह पृष्ठ तनाव का गुण है. इसलिए, पिघला हुआ कांच गोलीय आकृति धारण कर लेता है.
(5) **साधारण जल की तुलना में साबुन मिले पानी से अधिक बड़े बुलबुले बनाये जा सकते हैं:** साधारण जल का पृष्ठ तनाव अधिक होता है, इसलिए बड़े क्षेत्रफल की फिल्में तुरंत टूट जाती हैं. जबकि साबुन मिले पानी का पृष्ठ तनाव काफी कम होता है, जिससे बड़े बुलबुले बनाए जा सकते हैं जो काफी देर तक स्थिर रहते हैं.
(6) **पारे की छोटी बूंद गोल तथा बड़ी बूंद चपटी होती है:** बूंद की आकृति पृष्ठ तनाव और गुरुत्वाकर्षण बल से निर्धारित होती है. छोटी बूंदों पर पृष्ठ तनाव का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए वे गोल होती हैं, जबकि बड़ी बूंदों पर गुरुत्वाकर्षण बल अधिक प्रभावी होता है, जिससे वे चपटी हो जाती हैं.
In simple words: दैनिक जीवन में पृष्ठ तनाव के कई उदाहरण हैं, जैसे कपूर का पानी पर नाचना, पानी की बूंदों का गोल होना, और साबुन के बुलबुले का बड़ा होना।
🎯 Exam Tip: पृष्ठ तनाव के अनुप्रयोगों को उदाहरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे कीटनाशकों का पानी में फैलना और कपड़ों को धोना, जहाँ पृष्ठ तनाव को कम करके गीला करने की क्षमता बढ़ाई जाती है।
Question 7. पृष्ठ तनाव व पृष्ठ ऊर्जा में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
Answer: **पृष्ठ तनाव तथा पृष्ठ ऊर्जा में संबंध (Relation between Surface Tension and Surface Energy):**
माना दिए गए चित्र में \( ABCD \) एक आयताकार तार का फ्रेम है (चित्र: पृष्ठ तनाव तथा पृष्ठ ऊर्जा में संबंध). \( PQ \) एक अन्य तार है, जो कि चित्रानुसार \( ABCD \) पर रखा है और बिना घर्षण के उस पर खिसक सकता है. जब इस फ्रेम को साबुन के घोल में डुबोया जाता है, तो एक फिल्म \( PQDC \) बन जाती है. पृष्ठ तनाव के कारण फिल्म का मुक्त पृष्ठ सिकुड़ने की कोशिश करता है, इसलिए तार \( PQ \) अंदर की ओर चलने लगता है. इस तार को संतुलन में रखने के लिए एक अतिरिक्त बल \( F \) दूसरी ओर लगाना पड़ता है. चूँकि फिल्म में दो मुक्त पृष्ठ होते हैं, इसलिए संतुलन में:
\( F = 2Tl \)...(1) जहाँ \( T \) पृष्ठ तनाव है और \( l \) तार की लंबाई है.
माना तार को \( \Delta x \) दूरी तक दायीं ओर चलाया जाए, जिससे वह \( P'Q' \) स्थिति पर आ जाए. इससे फिल्म के दोनों पृष्ठों के क्षेत्रफल में वृद्धि होती है. बल \( F \) द्वारा किया गया कार्य \( W = F \times \Delta x \)...(2)
समीकरण (1) से \( F \) का मान समीकरण (2) में रखने पर:
\( W = (2Tl) \Delta x \).
चूँकि क्षेत्रफल में वृद्धि \( \Delta A = 2l \Delta x \) है (दो पृष्ठों के लिए), इसलिए,
\( W = T \Delta A \).
यह किया गया कार्य फिल्म की पृष्ठ ऊर्जा में वृद्धि के बराबर होता है. इस प्रकार, पृष्ठ तनाव को प्रति एकांक क्षेत्रफल में वृद्धि के लिए किए गए कार्य के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, या प्रति एकांक क्षेत्रफल पृष्ठ ऊर्जा के रूप में.
द्रव के विभिन्न नए पृष्ठ बनाने में कार्य का उदाहरण बुलबुला बनाने में किया गया कार्य- पृष्ठीय ऊर्जा एवं पृष्ठ तनाव के संबंध में आधार पर, द्रवों के नए पृष्ठ बनाने में किए जाने वाले कार्य को ज्ञात किया जा सकता है. उदाहरणार्थ- साबुन का बुलबुला अन्दर से खोखला होता है, अतः उसके दो स्वतंत्र पृष्ठ होते हैं. अतः \( R \) त्रिज्या का बुलबुला बनाने में किये गये कार्य का मान
\( W = T \times \Delta A = T \times [2 \times 4\pi R^2] = 8\pi R^2 T \).
In simple words: पृष्ठ तनाव और पृष्ठ ऊर्जा आपस में जुड़े होते हैं। पृष्ठ ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी तरल की सतह के क्षेत्रफल को बढ़ाने में खर्च होती है, और यह पृष्ठ तनाव के बराबर होती है, जिसे प्रति इकाई क्षेत्रफल में कार्य के रूप में मापा जाता है।
🎯 Exam Tip: पृष्ठ ऊर्जा को पृष्ठ तनाव गुणा सतह के क्षेत्रफल में वृद्धि के रूप में समझा जा सकता है। यह संबंध तरल सतहों के व्यवहार को समझने में मौलिक है।
Question 8. कोशिकाव पर आधारित दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरण स्पष्ट कीजिए।
Answer: कोशिकात्व (Capillarity) के कुछ व्यावहारिक उदाहरण इस प्रकार हैं:
- पेड़-पौधों को दिया गया जल तनों में बनी असंख्य केशनली (पतली नलिकाओं) में चढ़कर उनकी पत्तियों तक आसानी से पहुँच जाता है.
- किसान वर्षा होने पर खेत को जोत देते हैं ताकि मिट्टी में बनी केशनली टूट जाएँ और जमीन में गया पानी अंदर ही रहकर नमी बनाए रखे. यह जल फसल के काम आता है, अन्यथा जल मिट्टी की केशनली से ऊपर आकर वाष्प बनकर उड़ जाएगा.
- लालटेन में मिट्टी का तेल तथा मोमबत्ती में पिघला हुआ मोम बत्ती के धागों के बीच बनी असंख्य केशनली द्वारा ऊपर चढ़कर जलता रहता है.
- पानी से भरी बाल्टी में तौलिये का सिरा डुबोने पर पानी तौलिये के धागों के बीच बनी केशनली में चढ़कर सारे तौलिये को गीला कर देता है.
- स्याही सोखता कागज स्याही को कागज में उपस्थित केशनली के कारण सोखता है.
- कॉफी पाउडर गर्म जल में बहुत शीघ्र घुल जाता है, क्योंकि गर्म जल कॉफी की महीन कणिकाओं को कोशिकत्व की क्रिया से तुरंत भिगो देता है.
- पेन की निब बीच में से फटी रहती है. यह फटा हुआ भाग एक केशनली की तरह काम करता है, जिसमें से स्याही लगातार प्रवाहित होती रहती है.
- कपड़े पर मोम रगड़ने से वह वाटरप्रूफ बन जाता है. कपड़े में अनेक केशिकायें होती हैं जिनमें पानी भर जाता है, परन्तु जब उन पर मोम को रगड़ देते हैं तो केशिकायें बंद हो जाती हैं. साथ ही मोम और पानी का आसंजक बल, पानी के ससंजक बल से कम होता है. अतः पानी मोम लगे कपड़े को गीला भी नहीं कर पाता. अतः कपड़ा वाटरप्रूफ बन जाता है.
In simple words: कोशिकात्व के उदाहरणों में पौधों द्वारा पानी सोखना, लालटेन में तेल का ऊपर चढ़ना, तौलिये का पानी सोखना और स्याही का सोखना कागज में फैलना शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: कोशिकात्व द्रव के आसंजक और ससंजक बलों के संतुलन का परिणाम है, जो द्रव को पतली नलिकाओं में ऊपर उठने या नीचे गिरने की अनुमति देता है।
Question 9. केशनली में विभिन्न द्रवों के लिये नवचन्द्रकों (Meniscus) की आकृति का कारण स्पष्ट कीजिए।
Answer: केशनली में द्रव के नवचन्द्रक (सतह की आकृति) आसंजक बल और ससंजक बल के परिमाण पर निर्भर करती है.
**जल के पृष्ठ की आकृति:** मान लीजिए कांच के पास जल के मुक्त पृष्ठ पर एक अणु \( A \) स्थित है. इस अणु पर कांच के अणुओं का आकर्षण बल (आसंजक बल \( Q \)) और जल के अणुओं का आपसी आकर्षण बल (ससंजक बल \( P \)) कार्य करते हैं. जल और कांच के अणुओं के बीच का आसंजक बल \( Q \) जल के अणुओं के ससंजक बल \( P \) से अधिक होता है, इसलिए परिणामी बल \( R \) जल के बाहर की ओर होता है (चित्र I). संतुलन में, द्रव का पृष्ठ हमेशा परिणामी बल \( R \) के लंबवत होता है. अतः, कांच के संपर्क में जल का पृष्ठ अवतल (अंदर की ओर धँसा हुआ) आकृति ले लेता है (चित्र II). इसी प्रकार, यदि दो कांच की प्लेटों के बीच पानी की बूंद को दबाकर एक पतली फिल्म बनाई जाए, तो वह भी दोनों मुक्त सिरों पर अवतल आकृति ग्रहण कर लेती है (चित्र III).
**पारे के पृष्ठ की आकृति (Figure of Mercury Surface in Mirror of Test Tube):** पारे के अणुओं के बीच का ससंजक बल \( (P) \) पारे और कांच की दीवारों के बीच लगने वाले आसंजक बल \( (Q) \) से काफी अधिक होता है. अतः, अणु \( A \) जो कांच के संपर्क स्थान के निकट है, पर परिणामी बल \( R \) की दिशा, पारे के अंदर की ओर होती है (चित्र a). इस कारण, कांच के समीप पारे का तल उत्तल (बाहर की ओर उठा हुआ) होता है (चित्र b). इसी प्रकार, यदि दो कांच की पट्टिकाओं के बीच पारे की बूंद रखकर दबाई जाती है, तो बूंद दोनों मुक्त सिरों पर उत्तल आकृति ले लेती है (चित्र c).
In simple words: केशनली में द्रव की सतह का आकार (नवचन्द्रक) इस बात पर निर्भर करता है कि द्रव के अणु एक-दूसरे को कितना खींचते हैं (ससंजक बल) और नली की दीवार को कितना खींचते हैं (आसंजक बल)। अगर द्रव नली को ज़्यादा खींचता है तो सतह अंदर धंसती है, और अगर खुद को ज़्यादा खींचता है तो सतह ऊपर उठती है।
🎯 Exam Tip: जल के लिए आसंजक बल ससंजक बल से अधिक होता है, जिससे अवतल नवचन्द्रक बनता है, जबकि पारे के लिए ससंजक बल आसंजक बल से अधिक होता है, जिससे उत्तल नवचन्द्रक बनता है।
Question 10. कोशिकात्व क्या है? केशनली में चढ़े जलस्तम्भ की ऊँचाई के लिये सूत्र प्रतिपादित कीजिए।
Answer: बहुत पतली नलियों को केशनली (Capillary) कहते हैं। जब एक केशनली को किसी तरल में सीधा खड़ा किया जाता है, तो पृष्ठ तनाव के कारण वह तरल या तो नली में ऊपर चढ़ जाता है या नीचे गिर जाता है। इस घटना को 'केशिका क्रिया' (Capillary action) कहते हैं। उदाहरण के लिए, पानी केशनली में ऊपर चढ़ता है, जबकि पारा नीचे गिरता है। जितनी पतली केशनली होती है, यह क्रिया उतनी ही ज्यादा दिखती है। जो तरल केशनली को भिगोते हैं, जैसे पानी (जिनके लिए संपर्क कोण 90° से कम होता है और आसंजक बल ससंजक बल से अधिक होता है), वे कांच की केशनली में ऊपर चढ़ते हैं। दूसरी ओर, जो तरल केशनली को नहीं भिगोते, जैसे पारा (जिनके लिए संपर्क कोण अधिक होता है और ससंजक बल आसंजक बल से अधिक होता है), वे कांच की केशनली में नीचे गिरते हैं।
केशनली में चढ़े जलस्तम्भ की ऊँचाई का सूत्र:
माना जल का घनत्व \( \rho \), केशनली की त्रिज्या \( r \), संपर्क कोण \( \theta \) और जल का पृष्ठ तनाव \( T \) है।
जब पानी केशनली में ऊपर चढ़ता है, तो पृष्ठ तनाव के कारण नली के अंदर पानी पर ऊपर की ओर एक बल लगता है। यह बल जल स्तम्भ के भार को संतुलित करता है।
ऊपर की ओर लगने वाला बल \( F = T \times (\text{केशनली की परिधि}) \times \cos\theta \)
\( F = T \times (2\pi r) \times \cos\theta \)
केशिका नली में ऊपर चढ़े जल स्तम्भ का आयतन \( V = \pi r^2 h \)
जल स्तम्भ का द्रव्यमान \( M = V \times \rho = \pi r^2 h \rho \)
जल स्तम्भ का भार \( = Mg = \pi r^2 h \rho g \)
संतुलन की स्थिति में, ऊपर की ओर लगने वाला बल \( = \) जल स्तम्भ का भार
\( T \times 2\pi r \cos\theta = \pi r^2 h \rho g \)
\( h = \frac{2T \cos\theta}{r \rho g} \)
यह सूत्र केशनली में चढ़े जल स्तम्भ की ऊँचाई को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि केशिका नली में चढ़ने या गिरने की ऊँचाई नली की त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होती है, जिसे जूरिन का नियम भी कहते हैं।
In simple words: केशिका क्रिया वह घटना है जहाँ तरल पतली नलियों में ऊपर चढ़ता या नीचे गिरता है। यह तरल और नली के बीच के बलों के कारण होता है। ऊपर चढ़े तरल की ऊँचाई नली की मोटाई, तरल के प्रकार और संपर्क कोण पर निर्भर करती है।
🎯 Exam Tip: कोशिकात्व के सूत्र में संपर्क कोण \( \theta \) का मान \( 0^\circ \) (पानी के लिए) या \( >90^\circ \) (पारे के लिए) सही से लगाएं और त्रिज्या \( r \) का मान बहुत छोटा होता है, इसका ध्यान रखें।
Question 11. द्रव बूंद के लिये दाब आधिक्य सूत्र की स्थापना कीजिए।
Answer: एक गोलाकार बूंद के अंदर, बाहर की तुलना में एक अतिरिक्त दाब होता है। यह अतिरिक्त दाब पृष्ठ तनाव के कारण होता है जो बूंद को सिकुड़ने की कोशिश करता है।
इस अतिरिक्त दाब का सूत्र निकालने के लिए, हम एक बूंद को दो हिस्सों में कटा हुआ मानते हैं। मान लीजिए बूंद की त्रिज्या \( r \) है और पृष्ठ तनाव \( T \) है।
एक गोलाकार बूंद के अंदर अतिरिक्त दाब:
एक गोलाकार बूंद का पृष्ठ उत्तल होता है, इसलिए इसकी सतह पर हर अणु अंदर की ओर एक परिणामी बल महसूस करता है। संतुलन बनाए रखने के लिए, इसके बराबर और विपरीत एक बल, यानी अवतल पृष्ठ की ओर एक अतिरिक्त दाब, लगाना पड़ता है।
बूंद के आधे हिस्से पर अंदर से बाहर की ओर लगने वाला बल (अतिरिक्त दाब के कारण):
यह बल गोलार्ध के वृत्ताकार आधार के क्षेत्रफल \( (\pi r^2) \) पर अतिरिक्त दाब \( P \) के कारण लगता है।
\( F_1 = P \times \pi r^2 \)
पृष्ठ तनाव के कारण आधे हिस्से पर लगने वाला बल:
यह बल गोलार्ध के परिधि \( (2\pi r) \) पर पृष्ठ तनाव \( T \) के कारण लगता है, जो बूंद को सिकोड़ने की कोशिश करता है।
\( F_2 = T \times 2\pi r \)
संतुलन की स्थिति में, ये दोनों बल बराबर होने चाहिए:
\( P \times \pi r^2 = T \times 2\pi r \)
अब, \( \pi r \) से भाग देने पर हमें मिलता है:
\( P r = 2T \)
\( P = \frac{2T}{r} \)
यह सूत्र एक द्रव बूंद के अंदर अतिरिक्त दाब को दर्शाता है। इसका अर्थ है कि छोटी बूंदों में अतिरिक्त दाब अधिक होता है।
In simple words: एक तरल बूंद के अंदर, उसके बाहर की हवा के दाब से थोड़ा ज़्यादा दाब होता है। यह ज़्यादा दाब बूंद के गोल आकार और तरल के पृष्ठ तनाव के कारण होता है। जितना छोटा बूंद होगा, उतना ही ज़्यादा अंदर का दाब होगा।
🎯 Exam Tip: दाब आधिक्य के सूत्र \( P = \frac{2T}{r} \) को याद रखें। यह साबुन के बुलबुले के लिए \( P = \frac{4T}{r} \) से अलग है, क्योंकि बुलबुले की दो मुक्त सतहें होती हैं।
Question 12. पृष्ठ तनाव पर ताप एवं संदूषण का क्या प्रभाव पड़ता है? समझाइये।
Answer: द्रव का पृष्ठ तनाव कई चीजों से प्रभावित होता है। यहाँ तापमान और अशुद्धियों के प्रभाव बताए गए हैं:
(1) ताप का प्रभाव (Effect of Temperature):
तापमान बढ़ाने पर द्रव का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है। एक खास तापमान पर, जिसे क्रांतिक ताप कहते हैं, पृष्ठ तनाव शून्य हो जाता है। क्रांतिक ताप पर गैस और द्रव के अणुओं के बीच के बल बराबर हो जाते हैं, और द्रव बिना किसी रोक-टोक के फैल सकता है। कम तापमान के अंतर के लिए, पृष्ठ तनाव में सीधा बदलाव होता है, जिसे इस सूत्र से दिखाते हैं: \( T_t = T_0 (1 - \alpha t) \), जहाँ \( T_t \) किसी तापमान \( t \) पर पृष्ठ तनाव है, \( T_0 \) \( 0^\circ \text{C} \) पर पृष्ठ तनाव है, और \( \alpha \) पृष्ठ तनाव का ताप गुणांक है।
(2) अशुद्धियों का प्रभाव (Effect of Contamination):
जब द्रव में विलेय (घुलने वाला पदार्थ) कम घुलनशील होता है, तो पृष्ठ तनाव कम हो जाता है। उदाहरण के लिए, पानी में मिट्टी का तेल डालने से पानी का पृष्ठ तनाव घट जाता है। ऐसा होने पर मच्छर पानी की सतह पर नहीं तैर पाते और मर जाते हैं।
(3) अपमार्जक का प्रभाव (Effect of Detergents):
जब पानी में सर्फ (डिटर्जेंट पाउडर) मिलाया जाता है, तो पानी का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है। यह साबुन का घोल कपड़ों को आसानी से गीला कर पाता है। यह घोल कपड़ों के छोटे छिद्रों में आसानी से पहुँच जाता है, जहाँ शुद्ध पानी अधिक पृष्ठ तनाव के कारण नहीं जा सकता। डिटर्जेंट युक्त पानी और गंदगी के बीच आसंजन बल (आकर्षण बल) अपने अणुओं के बीच के ससंजक बल (आपसी आकर्षण बल) से अधिक होता है। इसलिए, यह गंदगी को कपड़े से बाहर निकाल कर साफ करता है। ऊनी और कीमती कपड़ों की धुलाई के लिए पेट्रोल का उपयोग किया जाता है, क्योंकि इसका पृष्ठ तनाव और भी कम होता है, जिससे प्रभावी सफाई होती है।
(4) विद्युतीकरण का प्रभाव (On Electrification):
विद्युतीकरण के कारण द्रव का पृष्ठ तनाव घट जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विद्युतीकरण से द्रव की मुक्त सतह पर बाहर की ओर लंबवत बल लगता है।
In simple words: तापमान बढ़ने पर तरल का पृष्ठ तनाव घट जाता है, और अशुद्धियाँ या डिटर्जेंट मिलाने से भी यह कम हो जाता है। यह सब तरल के अणुओं के बीच के आकर्षण बलों में बदलाव के कारण होता है, जो तरल की सतह को कैसे व्यवहार करता है, इसे प्रभावित करता है।
🎯 Exam Tip: ताप और अशुद्धियों के प्रभावों को याद रखें। क्रांतिक ताप पर पृष्ठ तनाव शून्य हो जाता है, और डिटर्जेंट कपड़ों को साफ करने में मदद करते हैं क्योंकि वे पानी का पृष्ठ तनाव कम करते हैं।
Question 1. एक कार उत्थापक में छोटे पिस्टन की त्रिज्या 5 cm है व पिस्टन की त्रिज्या 15 cm है। यदि बड़े पिस्टन पर 1500 किग्रा भार की कार को उठाता है, तो छोटे पिस्टन पर लगने वाले बल F₁ की गणना कीजिए। इस कार्य को करने के लिये संगत दाब बताइये।
Answer: यहाँ हम पास्कल के नियम का उपयोग करेंगे, जो कहता है कि एक बंद तरल में कहीं भी लगाया गया दाब सभी दिशाओं में समान रूप से फैलता है।
दिया गया है:
छोटे पिस्टन की त्रिज्या \( r_1 = 5 \text{ cm} = 5 \times 10^{-2} \text{ m} \)
बड़े पिस्टन की त्रिज्या \( r_2 = 15 \text{ cm} = 15 \times 10^{-2} \text{ m} \)
बड़े पिस्टन पर बल (कार का भार) \( F_2 = 1500 \text{ kg} \times 9.8 \text{ m/s}^2 \) (गुरुत्वाकर्षण बल) \( = 14700 \text{ N} \)
पास्कल के नियम के अनुसार:
\( \frac{F_1}{A_1} = \frac{F_2}{A_2} \)
जहाँ \( A_1 = \pi r_1^2 \) और \( A_2 = \pi r_2^2 \)
\( \frac{F_1}{\pi r_1^2} = \frac{F_2}{\pi r_2^2} \)
\( F_1 = F_2 \times \frac{r_1^2}{r_2^2} \)
\( F_1 = 14700 \text{ N} \times \frac{(5 \times 10^{-2} \text{ m})^2}{(15 \times 10^{-2} \text{ m})^2} \)
\( F_1 = 14700 \text{ N} \times \frac{25 \times 10^{-4}}{225 \times 10^{-4}} \)
\( F_1 = 14700 \text{ N} \times \frac{25}{225} = 14700 \text{ N} \times \frac{1}{9} \)
\( F_1 = 1633.33 \text{ N} \)
अब, संगत दाब की गणना करते हैं:
दाब \( P = \frac{F_1}{A_1} = \frac{1633.33 \text{ N}}{\pi (5 \times 10^{-2} \text{ m})^2} \)
\( P = \frac{1633.33}{3.14 \times 25 \times 10^{-4}} = \frac{1633.33}{0.00785} \)
\( P \approx 208067 \text{ Pa} \approx 2.08 \times 10^5 \text{ Pa} \)
In simple words: छोटे पिस्टन पर 1633.33 न्यूटन का बल लगाने पर 1500 किलोग्राम की कार बड़े पिस्टन पर उठाई जा सकती है। इस बल के कारण पिस्टन पर लगभग 2.08 लाख पास्कल का दाब लगता है। यह पास्कल के नियम पर आधारित है, जहाँ छोटे क्षेत्रफल पर कम बल लगाकर बड़े क्षेत्रफल पर अधिक बल प्राप्त किया जाता है।
🎯 Exam Tip: पास्कल के नियम में हमेशा यह ध्यान रखें कि दाब दोनों पिस्टन पर बराबर होता है, लेकिन बल क्षेत्रफलों के अनुपात में अलग-अलग होते हैं। इकाइयों को सही ढंग से बदलना न भूलें।
Question 2. एक गैस का बुलबुला जिसका व्यास 2 cm है. एक द्रव में 90 cm/s, की अचर चाल से गति कर रहा है। द्रव के लिये \( \eta \) का मान ज्ञात करो। गैस का घनत्व नगण्य है तथा द्रव का घनत्व 1.5 gm/cm³ है।
Answer: यहाँ हम स्टोक के नियम का उपयोग करेंगे, जो कहता है कि एक गोलाकार वस्तु जब किसी श्यान तरल में चलती है, तो उस पर एक श्यान बल लगता है।
दिया गया है:
बुलबुले का व्यास \( d = 2 \text{ cm} \), इसलिए त्रिज्या \( r = 1 \text{ cm} \)
बुलबुले की चाल \( v = 90 \text{ cm/s} \)
द्रव का घनत्व \( \rho = 1.5 \text{ gm/cm}^3 \)
गैस का घनत्व \( \sigma \approx 0 \text{ gm/cm}^3 \) (नगण्य)
गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g = 980 \text{ cm/s}^2 \) (cgs इकाई में)
टर्मिनल वेग के सूत्र से:
\( v = \frac{2 r^2 (\rho - \sigma) g}{9 \eta} \)
यहाँ हमें \( \eta \) (श्यानता गुणांक) ज्ञात करना है। सूत्र को \( \eta \) के लिए पुनर्व्यवस्थित करें:
\( \eta = \frac{2 r^2 (\rho - \sigma) g}{9 v} \)
मान रखने पर:
\( \eta = \frac{2 \times (1 \text{ cm})^2 \times (1.5 \text{ gm/cm}^3 - 0 \text{ gm/cm}^3) \times 980 \text{ cm/s}^2}{9 \times 90 \text{ cm/s}} \)
\( \eta = \frac{2 \times 1 \times 1.5 \times 980}{9 \times 90} \)
\( \eta = \frac{2940}{810} \)
\( \eta \approx 3.6296 \text{ poise} \approx 3.63 \text{ poise} \)
In simple words: एक गैस का बुलबुला जब किसी तरल में चलता है, तो उस पर तरल का श्यान बल लगता है। यहाँ, हमने तरल के श्यानता गुणांक \( \eta \) को लगभग 3.63 पॉइज के रूप में पाया। यह मान तरल के घर्षण प्रतिरोध को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: स्टोक के नियम के सूत्रों में, सभी इकाइयों को एक ही प्रणाली (जैसे cgs या SI) में रखना महत्वपूर्ण है। टर्मिनल वेग के सूत्र में घनत्व अंतर \( (\rho - \sigma) \) का उपयोग होता है।
Question 3. वर्षा की \( 10^{-5} \text{ m} \) त्रिज्या वाली बूंद का अन्तिम वेग ज्ञात कीजिए। वायु का श्यानता गुणांक \( 1.8 \times 10^{-5} \text{ Ns/m}^2 \) है तथा वायु घनत्व \( 1.2 \text{ kg/m}^3 \) और जल का घनत्व \( 10^3 \text{ kg/m}^3 \) दिया है। \( g = 10 \text{ m/s}^2 \).
Answer: हम वर्षा की बूंद के लिए टर्मिनल वेग के सूत्र का उपयोग करेंगे। टर्मिनल वेग वह अधिकतम स्थिर गति है जिस पर एक वस्तु तरल (या गैस) में गिरती है, जब उस पर लगने वाले नीचे की ओर के गुरुत्वाकर्षण बल और ऊपर की ओर के उत्प्लावन और श्यान बल बराबर हो जाते हैं।
दिया गया है:
बूंद की त्रिज्या \( r = 10^{-5} \text{ m} \)
वायु का श्यानता गुणांक \( \eta = 1.8 \times 10^{-5} \text{ Ns/m}^2 \)
वायु का घनत्व \( \sigma = 1.2 \text{ kg/m}^3 \)
जल का घनत्व \( \rho = 10^3 \text{ kg/m}^3 \)
गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g = 10 \text{ m/s}^2 \)
टर्मिनल वेग का सूत्र है:
\( v_t = \frac{2 r^2 (\rho - \sigma) g}{9 \eta} \)
मान रखने पर:
\( v_t = \frac{2 \times (10^{-5} \text{ m})^2 \times (10^3 \text{ kg/m}^3 - 1.2 \text{ kg/m}^3) \times 10 \text{ m/s}^2}{9 \times 1.8 \times 10^{-5} \text{ Ns/m}^2} \)
\( v_t = \frac{2 \times 10^{-10} \times (998.8) \times 10}{16.2 \times 10^{-5}} \)
\( v_t = \frac{19976 \times 10^{-10}}{16.2 \times 10^{-5}} = \frac{1997.6 \times 10^{-9}}{16.2 \times 10^{-5}} \)
\( v_t = \frac{1997.6}{16.2} \times 10^{-4} \)
\( v_t \approx 123.3 \times 10^{-4} \text{ m/s} = 1.233 \times 10^{-2} \text{ m/s} \)
या \( v_t \approx 1.23 \text{ cm/s} \)
In simple words: जब एक वर्षा की बूंद हवा में गिरती है, तो वह एक निश्चित गति तक पहुँच जाती है जिसे टर्मिनल वेग कहते हैं। इस गणना से पता चलता है कि एक छोटी वर्षा की बूंद लगभग 1.23 सेंटीमीटर प्रति सेकंड की स्थिर गति से गिरती है।
🎯 Exam Tip: टर्मिनल वेग की गणना करते समय, घनत्व अंतर \( (\rho - \sigma) \) को सही ढंग से घटाना सुनिश्चित करें और सभी इकाइयों को SI प्रणाली में बदलें। \( g \) का मान भी सही इकाई में उपयोग करें।
Question 4. एक केशनली में 4 cm ऊँचाई तक पानी चढ़ता है। यदि नली को ऊर्ध्व से 30° कोण पर झुकायें तो उसमें जल स्तम्भ की लम्बाई की गणना कीजिए।
Answer: जब एक केशनली को एक तरल में सीधा रखा जाता है, तो तरल एक निश्चित ऊँचाई तक चढ़ता है। यदि केशनली को झुकाया जाता है, तो तरल की ऊँचाई नहीं बदलती, बल्कि जल स्तम्भ की लंबाई बढ़ जाती है।
दिया गया है:
सीधी केशनली में पानी की ऊँचाई \( h = 4 \text{ cm} \)
झुकाव कोण \( \theta = 30^\circ \) (ऊर्ध्वाधर से)
नली में जल स्तम्भ की लंबाई \( l \) ज्ञात करनी है।
एक झुकी हुई केशनली में, जल स्तम्भ की ऊर्ध्वाधर ऊँचाई वही रहती है जो सीधी केशनली में होती है। जल स्तम्भ की लंबाई \( l \) और ऊर्ध्वाधर ऊँचाई \( h \) के बीच का संबंध त्रिभुजमिति से दिया जाता है:
\( h = l \cos\theta \)
इसलिए, जल स्तम्भ की लंबाई \( l \) होगी:
\( l = \frac{h}{\cos\theta} \)
मान रखने पर:
\( l = \frac{4 \text{ cm}}{\cos(30^\circ)} \)
हम जानते हैं कि \( \cos(30^\circ) = \frac{\sqrt{3}}{2} \approx 0.866 \)
\( l = \frac{4}{0.866} \)
\( l \approx 4.6189 \text{ cm} \approx 4.62 \text{ cm} \)
इस प्रकार, झुकी हुई नली में जल स्तम्भ की लंबाई लगभग 4.62 cm होगी।
In simple words: जब एक सीधी केशनली में पानी 4 सेंटीमीटर तक चढ़ता है, और फिर उस नली को 30 डिग्री झुका दिया जाता है, तो पानी की ऊर्ध्वाधर ऊँचाई तो वही रहती है, लेकिन नली में पानी की लंबाई लगभग 4.62 सेंटीमीटर हो जाती है, क्योंकि नली अब तिरछी हो गई है।
🎯 Exam Tip: जब केशनली को झुकाया जाता है, तो तरल की ऊर्ध्वाधर ऊँचाई (h) अपरिवर्तित रहती है। केवल तरल के स्तम्भ की लंबाई (l) बदलती है, और इसका संबंध \( l = h/\cos\theta \) होता है।
Question 6. एक पानी का तालाब H ऊँचाई तक पानी से भरा है। तालाब की एक दीवार में, पानी की सतह से D गहराई पर एक छिद्र किया गया है। दीवार के नीचे वाले सिरे से क्षैतिज दूरी (परास) की गणना करो जहाँ पानी की धारा छिद्र से जमीन पर टकराती है।
Answer: यहाँ हम टोरिसेली के प्रमेय और प्रक्षेप्य गति के सिद्धांतों का उपयोग करेंगे। टोरिसेली का प्रमेय बताता है कि एक छिद्र से निकलने वाले तरल का वेग वही होता है जो मुक्त रूप से \( D \) ऊँचाई से गिरने पर प्राप्त होता है।
दिया गया है:
तालाब में पानी की कुल ऊँचाई \( H \)
पानी की सतह से छिद्र की गहराई \( D \)
छिद्र से पानी निकलने का वेग \( u = \sqrt{2gD} \)
छिद्र से जमीन तक की ऊर्ध्वाधर दूरी \( y = H - D \)
पानी को छिद्र से जमीन तक पहुँचने में लगने वाला समय \( t \) है, जो मुक्त रूप से \( (H-D) \) ऊँचाई से गिरने में लगने वाले समय के बराबर होता है।
ऊर्ध्वाधर गति के लिए, हम सूत्र \( y = \frac{1}{2}gt^2 \) का उपयोग करते हैं।
\( H - D = \frac{1}{2}gt^2 \)
इससे समय \( t \) मिलता है:
\( t = \sqrt{\frac{2(H-D)}{g}} \)
अब, क्षैतिज दूरी (परास) \( R \) की गणना करें। क्षैतिज दिशा में कोई त्वरण नहीं होता है, इसलिए \( R = u \times t \)
\( R = \sqrt{2gD} \times \sqrt{\frac{2(H-D)}{g}} \)
\( R = \sqrt{\frac{2gD \times 2(H-D)}{g}} \)
\( R = \sqrt{4D(H-D)} \)
\( R = 2\sqrt{D(H-D)} \)
यह सूत्र दर्शाता है कि क्षैतिज परास छिद्र की गहराई \( D \) और पानी की कुल ऊँचाई \( H \) पर निर्भर करता है।
In simple words: जब एक तालाब में छेद से पानी बाहर निकलता है, तो वह एक निश्चित दूरी पर गिरता है। यह दूरी छेद की गहराई और पानी की कुल ऊँचाई पर निर्भर करती है। पानी एक प्रोजेक्टाइल की तरह उड़ता है।
🎯 Exam Tip: छिद्र से निकलने वाले वेग के लिए टोरिसेली का नियम \( u = \sqrt{2gD} \) का उपयोग करें और फिर क्षैतिज परास को \( R = u \times t \) से ज्ञात करें, जहाँ \( t \) मुक्त गिरावट का समय है।
Question 7. दो साबुन के बुलबुलों के व्यास का अनुपात क्रमशः 2 : 3 है। इन बुलबुलों के अन्दर दाब आधिक्य की तुलना कीजिए।
Answer: साबुन के बुलबुले के अंदर अतिरिक्त दाब का सूत्र \( P = \frac{4T}{r} \) होता है, जहाँ \( T \) पृष्ठ तनाव है और \( r \) बुलबुले की त्रिज्या है। यह सूत्र द्रव बूंद के सूत्र से अलग है क्योंकि साबुन के बुलबुले की दो मुक्त सतहें होती हैं।
दिया गया है:
पहले बुलबुले का व्यास \( d_1 \) और दूसरे बुलबुले का व्यास \( d_2 \)
\( \frac{d_1}{d_2} = \frac{2}{3} \)
चूंकि व्यास त्रिज्या का दोगुना होता है, तो त्रिज्या का अनुपात भी वही होगा:
\( \frac{r_1}{r_2} = \frac{2}{3} \)
पहले बुलबुले के लिए अतिरिक्त दाब \( P_1 = \frac{4T}{r_1} \)
दूसरे बुलबुले के लिए अतिरिक्त दाब \( P_2 = \frac{4T}{r_2} \)
दोनों के दाब आधिक्य की तुलना करने के लिए, उनका अनुपात ज्ञात करें:
\( \frac{P_1}{P_2} = \frac{\frac{4T}{r_1}}{\frac{4T}{r_2}} = \frac{4T}{r_1} \times \frac{r_2}{4T} = \frac{r_2}{r_1} \)
हमें \( \frac{r_1}{r_2} = \frac{2}{3} \) पता है, इसलिए \( \frac{r_2}{r_1} = \frac{3}{2} \)
अतः, \( \frac{P_1}{P_2} = \frac{3}{2} \)
इसका मतलब है कि पहले बुलबुले के अंदर का अतिरिक्त दाब दूसरे बुलबुले के अंदर के अतिरिक्त दाब का 1.5 गुना है। छोटी त्रिज्या वाले बुलबुले में दाब आधिक्य अधिक होता है।
In simple words: साबुन के बुलबुलों के अंदर का अतिरिक्त दाब उनकी त्रिज्या के उलटे अनुपात में होता है। यदि पहले बुलबुले की त्रिज्या दूसरे से छोटी है, तो उसके अंदर दाब ज़्यादा होगा। इस मामले में, पहले बुलबुले में दूसरे की तुलना में डेढ़ गुना अधिक अतिरिक्त दाब है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि दाब आधिक्य त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसलिए, जब अनुपात पूछा जाए, तो त्रिज्या के अनुपात को पलट दें। यह भी ध्यान दें कि यह साबुन के बुलबुले के लिए है, जिसमें दो मुक्त सतहें होती हैं।
Question 9. एक असमान परिच्छेद के पाइप में पानी बह रहा है। जिस स्थान पर पाइप की त्रिज्या 2cm है। पानी का वेग 20 cm/s. है। किसी अन्य स्थान पर पाइप की त्रिज्या 6 cm हो तो पानी का वेग ज्ञात करो।
Answer: यहाँ हम सातत्य समीकरण का उपयोग करेंगे, जो कहता है कि एक असंपीड्य तरल के धारा रेखीय प्रवाह में, प्रवाह की दर (आयतन प्रति इकाई समय) एक समान रहती है।
दिया गया है:
पहले स्थान पर त्रिज्या \( r_1 = 2 \text{ cm} \)
पहले स्थान पर वेग \( v_1 = 20 \text{ cm/s} \)
दूसरे स्थान पर त्रिज्या \( r_2 = 6 \text{ cm} \)
दूसरे स्थान पर वेग \( v_2 \) ज्ञात करना है।
सातत्य समीकरण है:
\( A_1 v_1 = A_2 v_2 \)
जहाँ \( A_1 \) और \( A_2 \) पाइप के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल हैं। चूंकि पाइप गोलाकार है, तो क्षेत्रफल \( A = \pi r^2 \)
तो, समीकरण बन जाता है:
\( \pi r_1^2 v_1 = \pi r_2^2 v_2 \)
\( r_1^2 v_1 = r_2^2 v_2 \)
अब \( v_2 \) के लिए हल करें:
\( v_2 = \frac{r_1^2 v_1}{r_2^2} = v_1 \left(\frac{r_1}{r_2}\right)^2 \)
मान रखने पर:
\( v_2 = 20 \text{ cm/s} \times \left(\frac{2 \text{ cm}}{6 \text{ cm}}\right)^2 \)
\( v_2 = 20 \text{ cm/s} \times \left(\frac{1}{3}\right)^2 \)
\( v_2 = 20 \text{ cm/s} \times \frac{1}{9} \)
\( v_2 = \frac{20}{9} \text{ cm/s} \)
\( v_2 \approx 2.22 \text{ cm/s} \)
इस प्रकार, दूसरे स्थान पर पानी का वेग लगभग 2.22 cm/s होगा। पाइप के चौड़े होने पर वेग घट जाता है।
In simple words: जब पानी एक पाइप से बहता है जिसका आकार बदलता है, तो पानी का वेग भी बदलता है। जहाँ पाइप पतला होता है, पानी तेज़ बहता है; जहाँ पाइप चौड़ा होता है, पानी धीमा हो जाता है। यहाँ, पाइप चौड़ा होने पर पानी का वेग 20 cm/s से घटकर लगभग 2.22 cm/s हो गया है।
🎯 Exam Tip: सातत्य समीकरण में ध्यान दें कि वेग त्रिज्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसलिए, जब पाइप की त्रिज्या बढ़ती है, तो वेग तेजी से घटता है।
Question 10. एक जल की बूंद जिसकी त्रिज्या 2 mm है इसके अन्दर दाब आधिक्य की गणना कीजिए। जल का पृष्ठ तनाव \( 0.075 \text{ N/m} \) है।
Answer: जल की बूंद के अंदर अतिरिक्त दाब का सूत्र \( P = \frac{2T}{r} \) होता है, जहाँ \( T \) जल का पृष्ठ तनाव है और \( r \) बूंद की त्रिज्या है।
दिया गया है:
बूंद की त्रिज्या \( r = 2 \text{ mm} = 2 \times 10^{-3} \text{ m} \)
जल का पृष्ठ तनाव \( T = 0.075 \text{ N/m} \)
सूत्र में मान रखने पर:
\( P = \frac{2 \times 0.075 \text{ N/m}}{2 \times 10^{-3} \text{ m}} \)
\( P = \frac{0.150}{0.002} \)
\( P = 75 \text{ N/m}^2 \text{ (या पास्कल)} \)
इस प्रकार, जल की बूंद के अंदर अतिरिक्त दाब 75 पास्कल है। यह अतिरिक्त दाब बूंद को गोलाकार बनाए रखने में मदद करता है।
In simple words: एक छोटी पानी की बूंद के अंदर, बाहर की तुलना में थोड़ा ज़्यादा दाब होता है। इस बूंद की त्रिज्या 2 मिलीमीटर और पृष्ठ तनाव 0.075 N/m होने पर, हमने गणना की कि अंदर का अतिरिक्त दाब 75 पास्कल है।
🎯 Exam Tip: दाब आधिक्य के लिए सही सूत्र \( P = \frac{2T}{r} \) का उपयोग करें और ध्यान दें कि त्रिज्या को हमेशा मीटर (SI इकाई) में बदलना चाहिए।
Question 12. एक हवाई जहाज वायु में उड़ान भरते समय उसके पंखों के ऊपर व नीचे वाले पृष्ठों पर वायु का वेग क्रमशः 70 m/s व 63 m/s है तो पंख पर उत्थापक बल (Lift Force) की गणना कीजिए। दिया है-पंख का क्षेत्रफल \( 2.5 \text{ m}^2 \) व वायु घनत्व \( 1.3 \text{ kg/m}^3 \) है।
Answer: उत्थापक बल की गणना के लिए, हम बरनौली के प्रमेय का उपयोग करेंगे, जो तरल प्रवाह में दाब और वेग के बीच संबंध बताता है। पंख के ऊपर और नीचे वायु वेग में अंतर के कारण दाब में अंतर उत्पन्न होता है, जिससे उत्थापक बल पैदा होता है।
दिया गया है:
पंख के ऊपर वायु वेग \( v_1 = 70 \text{ m/s} \)
पंख के नीचे वायु वेग \( v_2 = 63 \text{ m/s} \)
पंख का क्षेत्रफल \( A = 2.5 \text{ m}^2 \)
वायु का घनत्व \( \rho = 1.3 \text{ kg/m}^3 \)
बरनौली के प्रमेय के अनुसार (क्षैतिज प्रवाह के लिए):
\( P_1 + \frac{1}{2} \rho v_1^2 = P_2 + \frac{1}{2} \rho v_2^2 \)
जहाँ \( P_1 \) पंख के ऊपर का दाब और \( P_2 \) पंख के नीचे का दाब है।
दाब में अंतर \( P_2 - P_1 = \frac{1}{2} \rho v_1^2 - \frac{1}{2} \rho v_2^2 \)
\( P_2 - P_1 = \frac{1}{2} \rho (v_1^2 - v_2^2) \)
मान रखने पर:
\( P_2 - P_1 = \frac{1}{2} \times 1.3 \text{ kg/m}^3 \times ((70 \text{ m/s})^2 - (63 \text{ m/s})^2) \)
\( P_2 - P_1 = 0.65 \times (4900 - 3969) \)
\( P_2 - P_1 = 0.65 \times 931 \)
\( P_2 - P_1 = 605.15 \text{ N/m}^2 \)
उत्थापक बल \( F_{lift} = (\text{दाब अंतर}) \times (\text{क्षेत्रफल}) \)
\( F_{lift} = (P_2 - P_1) \times A \)
\( F_{lift} = 605.15 \text{ N/m}^2 \times 2.5 \text{ m}^2 \)
\( F_{lift} = 1512.875 \text{ N} \)
इस प्रकार, पंख पर उत्थापक बल लगभग 1513 न्यूटन है। यही बल हवाई जहाज को हवा में उठाता है।
In simple words: हवाई जहाज के पंखों के ऊपर और नीचे हवा की गति अलग-अलग होती है, जिससे पंख के दोनों तरफ दाब का अंतर पैदा होता है। इस दाब अंतर के कारण एक ऊपर की ओर बल लगता है, जिसे उत्थापक बल कहते हैं। यहाँ उत्थापक बल लगभग 1513 न्यूटन है।
🎯 Exam Tip: उत्थापक बल के लिए बरनौली के प्रमेय का उपयोग करते समय, दाब अंतर की सही गणना करें \( P_2 - P_1 \). सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ SI में हों और वेगों के वर्ग का अंतर सही ढंग से निकाला जाए।
Question 13. एक असमान परिच्छेद वाली नली में पानी बह रहा है। पाइप में जिस स्थान पर जल का प्रवाह वेग 4 m/s है, वहाँ दाब 1 मीटर पारे के स्तम्भ के बराबर है। किसी अन्य स्थान पर, जल का वेग 0.5 m/s है तो वहाँ दाब के मान की गणना करो।
Answer: यहाँ हम बरनौली के प्रमेय का उपयोग करेंगे, जो तरल प्रवाह में दाब, वेग और ऊँचाई के बीच संबंध बताता है। चूंकि पाइप क्षैतिज है, ऊँचाई में कोई बदलाव नहीं होगा।
दिया गया है:
पहले स्थान पर जल का वेग \( v_1 = 4 \text{ m/s} \)
पहले स्थान पर दाब \( P_1 = 1 \text{ मीटर पारे के स्तम्भ} \)
दूसरे स्थान पर जल का वेग \( v_2 = 0.5 \text{ m/s} \)
दूसरे स्थान पर दाब \( P_2 \) ज्ञात करना है।
पारे का घनत्व \( \rho_{Hg} = 13.6 \times 10^3 \text{ kg/m}^3 \)
जल का घनत्व \( \rho_w = 10^3 \text{ kg/m}^3 \)
पहले स्थान पर दाब को पास्कल में बदलें:
\( P_1 = h \rho_{Hg} g = 1 \text{ m} \times 13.6 \times 10^3 \text{ kg/m}^3 \times 9.8 \text{ m/s}^2 \)
\( P_1 = 133280 \text{ Pa} \approx 1.33 \times 10^5 \text{ Pa} \)
बरनौली का प्रमेय (क्षैतिज पाइप के लिए, \( h_1 = h_2 \)):
\( P_1 + \frac{1}{2} \rho_w v_1^2 = P_2 + \frac{1}{2} \rho_w v_2^2 \)
\( P_2 = P_1 + \frac{1}{2} \rho_w (v_1^2 - v_2^2) \)
मान रखने पर:
\( P_2 = 133280 \text{ Pa} + \frac{1}{2} \times 10^3 \text{ kg/m}^3 \times ((4 \text{ m/s})^2 - (0.5 \text{ m/s})^2) \)
\( P_2 = 133280 \text{ Pa} + 500 \times (16 - 0.25) \)
\( P_2 = 133280 \text{ Pa} + 500 \times 15.75 \)
\( P_2 = 133280 \text{ Pa} + 7875 \text{ Pa} \)
\( P_2 = 141155 \text{ Pa} \approx 1.41 \times 10^5 \text{ Pa} \)
इस प्रकार, दूसरे स्थान पर दाब लगभग \( 1.41 \times 10^5 \text{ Pa} \) होगा। जब तरल धीमा होता है, तो उसका दाब बढ़ जाता है।
In simple words: जब पानी एक पाइप में अलग-अलग गति से बहता है, तो उसका दाब भी बदलता है। जहाँ पानी तेज़ बहता है, वहाँ दाब कम होता है, और जहाँ धीमा बहता है, वहाँ दाब ज़्यादा होता है। यहाँ, पानी की गति कम होने पर दाब बढ़ गया है।
🎯 Exam Tip: बरनौली के प्रमेय का उपयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि आप सभी दाबों को पास्कल में बदलें और सभी घनत्वों और वेगों को SI इकाइयों में रखें। क्षैतिज प्रवाह के लिए स्थितिज ऊर्जा पद को नजरअंदाज किया जा सकता है।
Question 14. जल की 1000 छोटी बूंदें, जिनमें प्रत्येक की त्रिज्या \( 10^{-7} \text{ m} \) है, आपस में मिलकर एक बड़ी बूंद का निर्माण करती हैं तो मुक्त ऊर्जा का मान ज्ञात कीजिए। जल का पृष्ठ तनाव \( 7 \times 10^{-2} \text{ N/m} \) है।
Answer: जब कई छोटी बूंदें मिलकर एक बड़ी बूंद बनाती हैं, तो कुल पृष्ठ क्षेत्रफल घट जाता है, जिससे ऊर्जा मुक्त होती है। हमें इसी मुक्त ऊर्जा की गणना करनी है।
दिया गया है:
छोटी बूंदों की संख्या \( n = 1000 \)
प्रत्येक छोटी बूंद की त्रिज्या \( r = 10^{-7} \text{ m} \)
जल का पृष्ठ तनाव \( T = 7 \times 10^{-2} \text{ N/m} \)
सबसे पहले, हम बड़ी बूंद की त्रिज्या \( R \) ज्ञात करेंगे। आयतन संरक्षण के नियम से, सभी छोटी बूंदों का कुल आयतन बड़ी बूंद के आयतन के बराबर होगा।
\( n \times \frac{4}{3} \pi r^3 = \frac{4}{3} \pi R^3 \)
\( n r^3 = R^3 \)
\( R = n^{1/3} r \)
\( R = (1000)^{1/3} \times 10^{-7} \text{ m} \)
\( R = 10 \times 10^{-7} \text{ m} = 10^{-6} \text{ m} \)
प्रारंभिक कुल पृष्ठ क्षेत्रफल (छोटी बूंदों का):
\( A_{initial} = n \times 4\pi r^2 = 1000 \times 4\pi (10^{-7} \text{ m})^2 \)
\( A_{initial} = 4000\pi \times 10^{-14} \text{ m}^2 = 4\pi \times 10^{-10} \text{ m}^2 \)
अंतिम पृष्ठ क्षेत्रफल (बड़ी बूंद का):
\( A_{final} = 4\pi R^2 = 4\pi (10^{-6} \text{ m})^2 \)
\( A_{final} = 4\pi \times 10^{-12} \text{ m}^2 \)
पृष्ठ क्षेत्रफल में परिवर्तन \( \Delta A = A_{final} - A_{initial} \)
\( \Delta A = 4\pi \times 10^{-12} - 4\pi \times 10^{-10} \)
\( \Delta A = 4\pi \times 10^{-12} - 400\pi \times 10^{-12} = -396\pi \times 10^{-12} \text{ m}^2 \)
मुक्त ऊर्जा \( W = T \times |\Delta A| \)
\( W = 7 \times 10^{-2} \text{ N/m} \times (396\pi \times 10^{-12} \text{ m}^2) \)
\( W = 7 \times 396 \times 3.14159 \times 10^{-14} \text{ J} \)
\( W = 2772 \times 3.14159 \times 10^{-14} \text{ J} \)
\( W \approx 8709.8 \times 10^{-14} \text{ J} \approx 8.71 \times 10^{-11} \text{ J} \)
इस प्रकार, लगभग \( 8.71 \times 10^{-11} \) जूल ऊर्जा मुक्त होगी।
In simple words: जब बहुत सारी छोटी पानी की बूंदें मिलकर एक बड़ी बूंद बनाती हैं, तो कुल सतह का क्षेत्रफल कम हो जाता है। इस कमी के कारण ऊर्जा निकलती है। यहाँ, 1000 छोटी बूंदों के मिलकर एक बड़ी बूंद बनाने पर लगभग \( 8.71 \times 10^{-11} \) जूल ऊर्जा मुक्त हुई।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, आयतन संरक्षण के नियम से बड़ी बूंद की त्रिज्या ज्ञात करना महत्वपूर्ण है। हमेशा प्रारंभिक और अंतिम पृष्ठ क्षेत्रफलों का अंतर निकालें, और ध्यान दें कि ऊर्जा तब मुक्त होती है जब क्षेत्रफल घटता है।
Question 15. एक सीसे की गोली का द्रव्यमान M है। श्यान द्रव में सीमान्त वेग v से नीचे गिरती है। 8 M द्रव्यमान की अन्य शीशे की गोली का उसी द्रव में सीमान्त वेग ज्ञात कीजिए।
Answer: हम जानते हैं कि एक गोलाकार वस्तु का टर्मिनल वेग \( v_t \) सूत्र \( v_t = \frac{2r^2(\rho - \sigma)g}{9\eta} \) से दिया जाता है, जहाँ \( r \) वस्तु की त्रिज्या, \( \rho \) वस्तु का घनत्व, \( \sigma \) द्रव का घनत्व, \( g \) गुरुत्वाकर्षण त्वरण और \( \eta \) द्रव का श्यानता गुणांक है।
द्रव्यमान और त्रिज्या के बीच संबंध: वस्तु का द्रव्यमान \( m = \frac{4}{3}\pi r^3 \rho \)। इससे \( r \propto m^{1/3} \) या \( r^2 \propto m^{2/3} \)
तो, टर्मिनल वेग \( v_t \propto r^2 \) होता है, जिसका अर्थ है \( v_t \propto m^{2/3} \)।
पहली गोली के लिए:
द्रव्यमान \( m_1 = M \)
टर्मिनल वेग \( v_1 = v \)
दूसरी गोली के लिए:
द्रव्यमान \( m_2 = 8M \)
टर्मिनल वेग \( v_2 \) ज्ञात करना है।
हम अनुपात का उपयोग कर सकते हैं:
\( \frac{v_2}{v_1} = \left(\frac{m_2}{m_1}\right)^{2/3} \)
\( \frac{v_2}{v} = \left(\frac{8M}{M}\right)^{2/3} \)
\( \frac{v_2}{v} = (8)^{2/3} \)
\( (8)^{2/3} = (2^3)^{2/3} = 2^{(3 \times 2/3)} = 2^2 = 4 \)
इसलिए,
\( \frac{v_2}{v} = 4 \)
\( v_2 = 4v \)
इस प्रकार, 8M द्रव्यमान वाली दूसरी गोली का टर्मिनल वेग \( 4v \) होगा। यह दिखाता है कि भारी वस्तुएँ उसी द्रव में तेज़ी से गिरती हैं।
In simple words: जब एक भारी गोली उसी तरल में गिरती है, तो वह हल्की गोली से ज़्यादा तेज़ गति से गिरती है। यदि गोली का द्रव्यमान 8 गुना बढ़ जाए, तो उसका अंतिम वेग 4 गुना बढ़ जाएगा, क्योंकि वेग द्रव्यमान के \( 2/3 \) घात के सीधे अनुपात में होता है।
🎯 Exam Tip: टर्मिनल वेग और द्रव्यमान या त्रिज्या के बीच के संबंध को याद रखना महत्वपूर्ण है \( (v_t \propto r^2 \) और \( v_t \propto m^{2/3}) \)। यह आपको अनुपात वाले प्रश्नों को आसानी से हल करने में मदद करेगा।
Question 16. साबुन की एक फिल्म के आकार को 10 cm x 6 cm से बढ़ाकर 10 cm x 11 cm करने में 3.0 × 10-4 जूल कार्य करना पड़ता है। फिल्म का पृष्ठ तनाव निकालिये।
Answer: सबसे पहले, हम साबुन की फिल्म के क्षेत्रफल में हुए बदलाव की गणना करते हैं। एक साबुन फिल्म की दो सतहें होती हैं, इसलिए क्षेत्रफल में बदलाव की गणना करते समय हमें इस बात का ध्यान रखना होगा।
आरंभिक क्षेत्रफल \( A_1 = 10 \text{ cm} \times 6 \text{ cm} = 60 \text{ cm}^2 = 60 \times 10^{-4} \text{ m}^2 \)
अंतिम क्षेत्रफल \( A_2 = 10 \text{ cm} \times 11 \text{ cm} = 110 \text{ cm}^2 = 110 \times 10^{-4} \text{ m}^2 \)
क्षेत्रफल में कुल परिवर्तन \( \Delta A = 2 \times (A_2 - A_1) \)
\( \Delta A = 2 \times (110 \times 10^{-4} \text{ m}^2 - 60 \times 10^{-4} \text{ m}^2) \)
\( \Delta A = 2 \times (50 \times 10^{-4} \text{ m}^2) \)
\( \Delta A = 100 \times 10^{-4} \text{ m}^2 = 10^{-2} \text{ m}^2 \)
किया गया कार्य \( W = 3.0 \times 10^{-4} \text{ J} \)
पृष्ठ तनाव (T) और किए गए कार्य (W) के बीच का संबंध है \( W = T \times \Delta A \)
अब हम T का मान ज्ञात करने के लिए समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करते हैं:
\( T = \frac{W}{\Delta A} \)
\( T = \frac{3.0 \times 10^{-4} \text{ J}}{10^{-2} \text{ m}^2} \)
\( T = 3.0 \times 10^{-2} \text{ N/m} \)
In simple words: हमें यह जानने के लिए कि साबुन की फिल्म को खींचने में कितनी ऊर्जा लगती है, पहले फिल्म के क्षेत्रफल में हुए बदलाव को मापना होता है। चूँकि साबुन की फिल्म में दो तरफ सतह होती है, हम कुल बदलाव के लिए इसे दो से गुणा करते हैं। फिर, हमें दिए गए कार्य को इस बदले हुए क्षेत्रफल से भाग देकर फिल्म का पृष्ठ तनाव मिलता है।
🎯 Exam Tip: साबुन की फिल्म के लिए क्षेत्रफल के बदलाव को हमेशा दोगुना करना याद रखें क्योंकि इसमें दो मुक्त सतहें होती हैं, जबकि एक सामान्य तरल सतह की केवल एक ही सतह होती है।
Question 17. एक पिटोट् नली (Pitot Tube) नदी में डुबायी जाती है और यहाँ दाब जल स्तम्भ का .05 m प्राप्त होता है। यहाँ पर जल प्रवाह की दर ज्ञात कीजिए।
Answer: हम पिटोट नली का उपयोग करके नदी में पानी के प्रवाह की गति की गणना कर सकते हैं। पिटोट नली का सूत्र तरल के प्रवाह वेग (v) को मापता है, जो जल स्तम्भ की ऊँचाई (h) और गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (g) पर निर्भर करता है।
दिया गया है:
जल स्तम्भ की ऊँचाई \( h = 0.05 \text{ m} \)
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण \( g = 9.8 \text{ m/s}^2 \)
पिटोट नली के सूत्र के अनुसार, प्रवाह का वेग \( v = \sqrt{2gh} \)
अब, हम दिए गए मानों को सूत्र में रखते हैं:
\( v = \sqrt{2 \times 0.05 \text{ m} \times 9.8 \text{ m/s}^2} \)
\( v = \sqrt{0.1 \times 9.8} \)
\( v = \sqrt{0.98} \)
\( v \approx 0.99 \text{ m/s} \)
In simple words: एक पिटोट नली पानी के बहने की गति को मापने में मदद करती है। हम एक खास सूत्र का उपयोग करते हैं जिसमें हम 2 को गुरुत्वाकर्षण और जल स्तम्भ की ऊँचाई से गुणा करते हैं, फिर उसका वर्गमूल निकालते हैं। इससे हमें पानी की गति मिल जाती है।
🎯 Exam Tip: पिटोट नली का सूत्र \( v = \sqrt{2gh} \) बर्नौली के सिद्धांत से प्राप्त हुआ है और खुले चैनलों या पाइपों में तरल वेग को मापने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 19. यदि फूक मारकर ∨ आयतन को साबुन का बुलबुला बनाने में W कार्य होता है तो 2V आयतन का बुलबुला बनाने में कितना कार्य होगा?
Answer: साबुन का बुलबुला बनाने में किया गया कार्य उसके सतह के क्षेत्रफल के समानुपाती होता है। हम जानते हैं कि एक साबुन फिल्म में ऊर्जा सतह तनाव के कारण संग्रहित होती है।
कार्य (W) सतह क्षेत्रफल (A) के समानुपाती होता है: \( W \propto A \)
एक गोले का सतह क्षेत्रफल \( A = 4\pi r^2 \)
एक गोले का आयतन \( V = \frac{4}{3}\pi r^3 \)
आयतन के सूत्र से, हम r को V के रूप में व्यक्त कर सकते हैं:
\( r^3 = \frac{3V}{4\pi} \implies r = \left(\frac{3V}{4\pi}\right)^{1/3} \)
अब r2 ज्ञात करते हैं:
\( r^2 = \left(\frac{3V}{4\pi}\right)^{2/3} \)
चूंकि \( W \propto r^2 \), इसका अर्थ है \( W \propto \left(\frac{3V}{4\pi}\right)^{2/3} \)
सभी स्थिरांकों को छोड़ते हुए, हम लिख सकते हैं: \( W \propto V^{2/3} \)
यदि प्रारंभिक आयतन \( V_1 = V \) है, तो किया गया कार्य \( W_1 = W \)
यदि नया आयतन \( V_2 = 2V \) है, तो नया कार्य \( W_2 \) होगा।
इनका अनुपात लेने पर:
\( \frac{W_2}{W_1} = \frac{(V_2)^{2/3}}{(V_1)^{2/3}} = \left(\frac{V_2}{V_1}\right)^{2/3} \)
\( \frac{W_2}{W} = \left(\frac{2V}{V}\right)^{2/3} = (2)^{2/3} \)
\( W_2 = (2)^{2/3} W \)
इसे हम \( W_2 = (2^2)^{1/3} W = (4)^{1/3} W \) के रूप में भी लिख सकते हैं।
In simple words: एक साबुन का बुलबुला बनाने के लिए जितनी ऊर्जा लगती है, वह उसके आकार पर निर्भर करती है। यदि आप बुलबुले का आयतन दोगुना करते हैं, तो उसे बनाने में लगने वाला कार्य \( 2^{2/3} \) गुना बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कार्य बुलबुले के सतह क्षेत्रफल पर निर्भर करता है, और सतह क्षेत्रफल आयतन की तुलना में अलग दर से बढ़ता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि एक साबुन के बुलबुले के लिए, किया गया कार्य उसकी त्रिज्या के वर्ग के समानुपाती होता है, और उसका आयतन उसकी त्रिज्या के घन के समानुपाती होता है। यह संबंध \( W \propto V^{2/3} \) इस तरह के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 20. खून को दिल से मस्तिष्कशीर्ष तक ले जाने में आवश्यक न्यूनतम दाब की गणना कीजिए, यदि दिल से मस्तिष्क की ऊर्ध्व ऊँचाई 5 m हो तथा खून का घनत्व 1040 kg/m³ व g = 9.8 m/s² (श्यानता नगण्य लेने पर)।
Answer: दिल से मस्तिष्क तक खून पहुंचाने के लिए आवश्यक न्यूनतम दाब की गणना हाइड्रोस्टैटिक दाब सूत्र का उपयोग करके की जा सकती है। यह सूत्र गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध एक निश्चित ऊँचाई तक तरल को उठाने के लिए आवश्यक दाब को बताता है।
दिया गया है:
ऊर्ध्व ऊँचाई \( h = 5 \text{ m} \)
खून का घनत्व \( \rho = 1040 \text{ kg/m}^3 \)
गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण \( g = 9.8 \text{ m/s}^2 \)
हाइड्रोस्टैटिक दाब का सूत्र है: \( P = h \rho g \)
दिए गए मानों को सूत्र में रखने पर:
\( P = 5 \text{ m} \times 1040 \text{ kg/m}^3 \times 9.8 \text{ m/s}^2 \)
\( P = 5200 \times 9.8 \text{ N/m}^2 \)
\( P = 50960 \text{ N/m}^2 \)
हम इसे वैज्ञानिक संकेतन में भी लिख सकते हैं:
\( P = 5.096 \times 10^4 \text{ N/m}^2 \)
In simple words: दिल से दिमाग तक खून पहुंचाने के लिए कितना दाब चाहिए, यह जानने के लिए हम ऊँचाई, खून का घनत्व और गुरुत्वाकर्षण को एक साथ गुणा करते हैं। यह दाब कम से कम उतना होना चाहिए ताकि खून गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव को पार करके दिमाग तक पहुंच सके।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोस्टैटिक दाब का सूत्र \( P = h \rho g \) स्थिर तरल पदार्थों में दाब को समझने के लिए महत्वपूर्ण है, या जब ऊँचाई के अंतर को पार करने के लिए आवश्यक दाब पर विचार किया जाता है।
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