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Detailed Chapter 10 स्थूल पदार्थों के गुण RBSE Solutions for Class 11 Physics
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Class 11 Physics Chapter 10 स्थूल पदार्थों के गुण RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Physics Chapter 10 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
RBSE Class 11 Physics Chapter 10 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. वह बल जिसके लगने से वस्तु अपना आकार या रूप बदल लेती है क्या कहलाता है?
Answer: जिस बल के कारण कोई वस्तु अपना आकार या रूप बदल लेती है, उसे विरूपक बल कहते हैं। यह बल वस्तु की भौतिक संरचना को प्रभावित करता है।
In simple words: जो बल किसी चीज का आकार बदल देता है, उसे विरूपक बल कहते हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि विरूपक बल वस्तु के आकार या आकृति में बदलाव लाता है, जैसे किसी रबड़ को खींचना।
Question 2. वह गुण जिससे बाह्य बल हटा लिये जाने पर वस्तु अपने प्रारम्भिक स्वरूप को प्राप्त कर लेती है क्या कहलाता है?
Answer: यह गुण प्रत्यास्थता कहलाता है। प्रत्यास्थता के कारण ही वस्तुएँ बाहरी बल हटने पर अपनी मूल आकृति में वापस आ जाती हैं, जैसे रबड़ बैंड खींचने के बाद अपनी जगह पर लौट आता है।
In simple words: किसी वस्तु का अपने पुराने रूप में वापस आ जाना, जब उस पर लगा बल हट जाए, प्रत्यास्थता कहलाता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थता वह गुण है जिससे वस्तुएँ बल हटने पर मूल आकार में लौटती हैं, जबकि प्लास्टिकता में वे स्थायी रूप से विकृत हो जाती हैं।
Question 3. विकृति कैसी राशि है?
Answer: विकृति एक विमाहीन राशि है। इसका कोई मात्रक नहीं होता क्योंकि यह दो समान भौतिक राशियों का अनुपात होती है। यह वस्तु के आकार में हुए बदलाव को दिखाती है।
In simple words: विकृति एक ऐसी चीज़ है जिसकी कोई माप या इकाई नहीं होती।
🎯 Exam Tip: ध्यान दें कि विकृति एक अनुपात होने के कारण मात्रकहीन होती है, जो भौतिकी में महत्वपूर्ण है।
Question 5. ताँबा, इस्पात, काँच तथा रबर के प्रत्यास्थता गुणांकों को बढ़ते क्रम में लिखिए।
Answer: इन पदार्थों के प्रत्यास्थता गुणांकों का बढ़ता क्रम इस प्रकार है: रबर, काँच, ताँबा, इस्पात। इस्पात सबसे अधिक प्रत्यास्थ होता है, जबकि रबर सबसे कम।
In simple words: सबसे कम से सबसे ज्यादा प्रत्यास्थता वाले पदार्थ हैं: रबर, फिर काँच, फिर ताँबा, और सबसे ज्यादा इस्पात।
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थता गुणांक जितना अधिक होता है, पदार्थ उतना ही अधिक प्रत्यास्थ होता है।
Question 6. प्रत्यास्थता सीमा में प्रतिबल एवं विकृति का अनुपात क्या कहलाता है?
Answer: प्रत्यास्थता सीमा के भीतर प्रतिबल और विकृति का अनुपात प्रत्यास्थता गुणांक कहलाता है। यह पदार्थ की प्रत्यास्थता का एक माप है।
In simple words: जब तक कोई चीज़ अपनी पुरानी शेप में वापस आ सकती है, तब तक प्रतिबल और विकृति का अनुपात प्रत्यास्थता गुणांक कहलाता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थता गुणांक हुक के नियम का आधार है और यह पदार्थ की कठोरता दर्शाता है।
Question 7. प्रत्यास्थता गुणांक का मात्रक क्या होता है?
Answer: प्रत्यास्थता गुणांक का मात्रक \( \text{Nm}^{-2} \) या \( \text{N/m}^2 \) होता है। यह प्रतिबल के मात्रक के समान होता है क्योंकि विकृति विमाहीन होती है।
In simple words: प्रत्यास्थता गुणांक को न्यूटन प्रति वर्ग मीटर \( (\text{N/m}^2) \) में मापा जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थता गुणांक का मात्रक दबाव के मात्रक (पास्कल) के समान होता है।
Question 8. अनुप्रस्थ विकृति एवं अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात क्या कहलाता है?
Answer: अनुप्रस्थ विकृति और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात पॉयसा अनुपात कहलाता है। यह अनुपात दर्शाता है कि किसी वस्तु को खींचने या दबाने पर उसकी चौड़ाई में कितना बदलाव आता है।
In simple words: पॉयसा अनुपात बताता है कि किसी चीज़ को खींचने पर वह कितनी पतली या मोटी होती है।
🎯 Exam Tip: पॉयसा अनुपात एक विमाहीन राशि है, जिसका मान पदार्थ के अनुसार बदलता है।
Question 9. क्या प्रतिबल सदिश राशि है?
Answer: नहीं, प्रतिबल एक सदिश राशि नहीं है, बल्कि यह एक टेंसर राशि है। हालाँकि, कुछ संदर्भों में इसे दिशा के साथ बल प्रति इकाई क्षेत्रफल के रूप में देखा जा सकता है, पर इसका असली स्वरूप टेंसर का होता है।
In simple words: प्रतिबल सदिश राशि नहीं है।
🎯 Exam Tip: सदिश राशियों में केवल परिमाण और दिशा होती है, जबकि टेंसर राशियों में एक से अधिक दिशाओं में घटकों का विवरण होता है।
Question 10. किसी ठोस को दबाने पर व किसी तार को खींचने पर परमाणुओं की स्थितिज ऊर्जा बढ़ेगी अथवा घटेगी?
Answer: दोनों ही स्थितियों में परमाणुओं की स्थितिज ऊर्जा बढ़ेगी। किसी ठोस को दबाने या तार को खींचने पर, परमाणु अपनी संतुलन स्थिति से विस्थापित होते हैं, जिससे उनके बीच की दूरी बदल जाती है और स्थितिज ऊर्जा बढ़ जाती है।
In simple words: ठोस को दबाने या तार को खींचने पर परमाणुओं की स्थितिज ऊर्जा हमेशा बढ़ती है।
🎯 Exam Tip: जब भी कोई बाहरी बल परमाणुओं को उनकी प्राकृतिक स्थिति से विस्थापित करता है, तो स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है।
Question 12. दृढ़ता गुणांक का विमीय सूत्र क्या है?
Answer: दृढ़ता गुणांक का विमीय सूत्र \( [\text{M}^1\text{L}^{-1}\text{T}^{-2}] \) होता है। यह प्रतिबल और विकृति के अनुपात से प्राप्त होता है।
In simple words: दृढ़ता गुणांक का विमीय सूत्र \( [\text{M}^1\text{L}^{-1}\text{T}^{-2}] \) है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थता गुणांकों के विमीय सूत्र हमेशा प्रतिबल के विमीय सूत्र के समान होते हैं क्योंकि विकृति विमाहीन होती है।
RBSE Class 11 Physics Chapter 10 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. प्रत्यास्थता से क्या अभिप्राय है?
Answer: प्रत्यास्थता किसी पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण वस्तु किसी विरूपक बल द्वारा उत्पन्न आकार या रूप के परिवर्तन का विरोध करती है। जब विरूपक बल हटा लिया जाता है, तो वस्तु अपनी मूल अवस्था में वापस आ जाती है। यह गुण पदार्थ को बाहरी बल के खिलाफ खुद को बनाए रखने में मदद करता है।
In simple words: प्रत्यास्थता वह गुण है जिससे कोई वस्तु बाहरी बल हटाने पर अपने असली आकार में वापस आ जाती है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थता का अर्थ है 'लचीलापन' – बल लगाने पर वस्तु का आकार बदले, पर बल हटाने पर वह वापस अपनी जगह आ जाए।
Question 2. प्रत्यानयन बल क्या होते हैं?
Answer: प्रत्यानयन बल वह आंतरिक बल होता है जो किसी वस्तु को उसके मूल आकार या स्थिति में वापस लाने का प्रयास करता है, जब उस पर कोई बाहरी विरूपक बल लगाया जाता है। यह बल हमेशा विरूपक बल की विपरीत दिशा में कार्य करता है।
In simple words: प्रत्यानयन बल वह अंदरूनी बल है जो चीज़ों को उनके पुराने रूप में वापस लाने की कोशिश करता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यानयन बल हमेशा वस्तु को उसकी संतुलन स्थिति में वापस लाने के लिए कार्य करता है।
Question 3. प्रतिबल किसे कहते हैं?
Answer: जब किसी वस्तु पर विरूपक बल लगाया जाता है, तो वस्तु विकृत हो जाती है। उसी समय, प्रत्यास्थता के गुण के कारण वस्तु के अंदर एक आंतरिक प्रत्यानयन बल उत्पन्न होता है, जो बाहरी विरूपक बल की विपरीत दिशा में कार्य करता है और वस्तु को उसकी मूल अवस्था में लाने का प्रयास करता है। वस्तु के अनुप्रस्थ काट के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर कार्य करने वाले इस आंतरिक प्रत्यानयन बल को प्रतिबल कहते हैं। साम्यावस्था की स्थिति में, प्रत्यानयन बल बाहरी विरूपक बल के ठीक बराबर लेकिन विपरीत दिशा में होता है। यदि किसी वस्तु के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A \) हो और उस पर \( F \) बल लगाया गया हो, तो साम्यावस्था में, प्रतिबल \( = \frac{\text{प्रत्यानयन बल}}{\text{अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल}} = \frac{\text{बाह्य बल}}{\text{अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल}} = \frac{F}{A} \)
प्रतिबल का मात्रक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर \( (\text{N/m}^2) \) होता है और इसका विमीय सूत्र \( [\text{M}^1\text{L}^{-1}\text{T}^{-2}] \) है। यह एक टेंसर राशि है।
In simple words: प्रतिबल का मतलब है किसी चीज के अंदर पैदा होने वाला बल जो उसे उसके पुराने आकार में वापस लाने की कोशिश करता है, और यह बल वस्तु के कटे हुए हिस्से के क्षेत्रफल पर लगता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिबल की परिभाषा में 'आंतरिक प्रत्यानयन बल' और 'एकांक क्षेत्रफल' शब्द महत्वपूर्ण हैं।
Question 5. प्रत्यास्थता सीमा से क्या अभिप्राय है?
Answer: प्रत्यास्थ वस्तुएँ विरूपक बल हटा लेने पर अपनी मूल अवस्था में वापस आ जाती हैं। हालाँकि, यह गुण केवल एक विशेष बल के मान तक ही रहता है। यदि विरूपक बल का मान बढ़ाया जाए, तो एक ऐसी स्थिति आती है जब बल हटाने पर वस्तु अपनी मूल अवस्था में नहीं लौट पाती, बल्कि स्थायी रूप से विकृत हो जाती है। जिस अधिकतम विरूपक बल तक कोई पदार्थ अपनी प्रत्यास्थता का गुण बनाए रखता है, उस सीमा को 'प्रत्यास्थता की सीमा' कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी तार पर धीरे-धीरे भार बढ़ाया जाए, तो एक बिंदु ऐसा आता है जिसके बाद भार हटाने पर तार अपनी मूल लंबाई में वापस नहीं आता, बल्कि उसकी लंबाई स्थायी रूप से बढ़ जाती है।
In simple words: प्रत्यास्थता सीमा वह सबसे ज़्यादा बल है जिसे कोई चीज़ सह सकती है और फिर भी अपने पुराने आकार में वापस आ सकती है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थता सीमा के बाहर लगने वाले बल से वस्तु में स्थायी विकृति (Permanent deformation) आ जाती है।
Question 6. पॉयसा अनुपात क्या होता है?
Answer: प्रत्यास्थता सीमा के भीतर, अनुप्रस्थ (या पार्श्व) विकृति और अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात को पदार्थ का पॉयसा अनुपात कहते हैं। इसे \( \sigma \) (सिग्मा) से दर्शाया जाता है। जब किसी तार को उसकी लंबाई के अनुदिश खींचा जाता है, तो उसकी लंबाई बढ़ती है लेकिन उसकी मोटाई (व्यास) कम हो जाती है। यहाँ लंबाई में परिवर्तन से अनुदैर्ध्य विकृति और मोटाई में परिवर्तन से अनुप्रस्थ विकृति उत्पन्न होती है। पॉयसा अनुपात \( \sigma = \frac{\text{पार्श्व विकृति}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}} = \frac{\beta}{\alpha} \)
यदि किसी वस्तु का प्रारंभिक आयतन \( V \) और उसमें परिवर्तन \( \Delta V \) हो, तो आयतन विकृति \( = \frac{\text{आयतन में परिवर्तन}}{\text{प्रारम्भिक आयतन}} = \frac{-\Delta V}{V} \). यह एक विमाहीन राशि है।
In simple words: पॉयसा अनुपात यह बताता है कि जब आप किसी चीज़ को खींचते हैं तो वह कितनी पतली होती है या दबाते हैं तो कितनी मोटी होती है। यह वस्तु की लंबाई और चौड़ाई में बदलाव का अनुपात होता है।
🎯 Exam Tip: पॉयसा अनुपात का मान अक्सर 0 और 0.5 के बीच होता है, और यह भी एक मात्रकहीन राशि है।
Question 7. हुक का नियम लिखिए।
Answer: हुक के नियम के अनुसार, प्रत्यास्थता सीमा के भीतर, किसी वस्तु में उत्पन्न प्रतिबल, उसमें उत्पन्न विकृति के सीधे समानुपाती होता है। इसका मतलब है कि जितना अधिक बल लगाएंगे, उतनी ही अधिक विकृति उत्पन्न होगी, बशर्ते वस्तु अपनी प्रत्यास्थता सीमा के अंदर रहे। गणितीय रूप में, इसे प्रतिबल \( \propto \) विकृति लिखा जा सकता है, या प्रतिबल \( = K \times \) विकृति, जहाँ \( K \) प्रत्यास्थता गुणांक है।
In simple words: हुक का नियम कहता है कि जब तक किसी चीज़ को ज़्यादा न खींचा जाए, तब तक उस पर लगाया गया बल उसके खिंचाव के बराबर होता है।
🎯 Exam Tip: हुक का नियम प्रत्यास्थ व्यवहार की नींव है, और यह केवल प्रत्यास्थता सीमा के भीतर ही लागू होता है।
Question 9. पूर्ण प्रत्यास्थ, प्लास्टिक एवं दृढ़ पिण्ड किन्हें कहते हैं? इनकी सीमाओं का उल्लेख कीजिए।
Answer:
पूर्ण प्रत्यास्थ पिण्ड (Perfectly Elastic Body): वे वस्तुएँ जो विरूपक बल हटा लेने पर अपनी मूल अवस्था को पूरी तरह प्राप्त कर लेती हैं, पूर्ण प्रत्यास्थ पिण्ड कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, क्वार्ट्ज और फॉस्फर ब्राँज। व्यवहार में कोई भी पदार्थ पूर्णतः प्रत्यास्थ नहीं होता, बल्कि एक निश्चित सीमा तक ही प्रत्यास्थता का व्यवहार करता है।
प्लास्टिक पिण्ड (Perfectly Plastic Body): इसके विपरीत, वे वस्तुएँ जो विरूपक बल हटा लेने पर अपनी मूल अवस्था में वापस नहीं लौटतीं, बल्कि स्थायी रूप से विकृत हो जाती हैं, प्लास्टिक या पूर्ण सुघट्य पिण्ड कहलाती हैं। उदाहरण के लिए, मोम का टुकड़ा और गीली मिट्टी।
दृढ़ पिण्ड (Rigid Body): यदि किसी पदार्थ में अणु या परमाणुओं के बीच की दूरी निश्चित रहती है और बाहरी बल के प्रभाव में भी उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता, तो वह दृढ़ पिण्ड कहलाता है। व्यावहारिक रूप में कोई भी पिण्ड पूर्णतः दृढ़ नहीं होता है।
In simple words: पूर्ण प्रत्यास्थ चीज़ें बल हटने पर वापस अपनी जगह आ जाती हैं। प्लास्टिक चीज़ें हमेशा के लिए बदल जाती हैं। दृढ़ चीज़ें बिल्कुल नहीं बदलतीं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि पूर्ण प्रत्यास्थ, प्लास्टिक और दृढ़ पिण्ड केवल आदर्श स्थितियाँ हैं; वास्तविक पदार्थ इन गुणों को एक सीमा तक ही दर्शाते हैं।
RBSE Class 11 Physics Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. प्रतिबल, विकृति, प्रत्यास्थता सीमा को समझाइये तथा पदार्थ में उत्पन्न होने वाली विभिन्न विकृतियों की व्याख्या कीजिए।
Answer:
प्रतिबल (Stress): जब किसी वस्तु पर बाहरी विरूपक बल लगाया जाता है, तो वस्तु विकृत होती है। इसी समय, वस्तु के अंदर प्रत्यास्थता के गुण के कारण एक आंतरिक प्रत्यानयन बल उत्पन्न होता है जो बाहरी बल की विपरीत दिशा में होता है और वस्तु को उसकी मूल अवस्था में लाने का प्रयास करता है। वस्तु के अनुप्रस्थ काट के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर कार्य करने वाले इस आंतरिक प्रत्यानयन बल को प्रतिबल कहते हैं। साम्यावस्था में, प्रत्यानयन बल बाहरी विरूपक बल के बराबर होता है। यदि बल \( F \) हो और क्षेत्रफल \( A \) हो, तो प्रतिबल \( = \frac{F}{A} \). इसका मात्रक \( \text{N/m}^2 \) और विमीय सूत्र \( [\text{M}^1\text{L}^{-1}\text{T}^{-2}] \) है। प्रतिबल तीन प्रकार के होते हैं:
(1) अनुदैर्ध्य प्रतिबल (Longitudinal Stress): जब किसी वस्तु (जैसे बेलन) पर उसकी लंबाई के अनुदिश बल लगाया जाता है, तो उत्पन्न प्रतिक्रियात्मक बल को अनुदैर्ध्य प्रतिबल कहते हैं। यदि बल लंबाई बढ़ाता है तो इसे तनन प्रतिबल (Tensile stress) और यदि बल लंबाई घटाता है तो इसे संपीडन प्रतिबल (Compressive stress) कहते हैं।
(2) अभिलम्ब प्रतिबल (Normal Stress): जब किसी वस्तु के पृष्ठों के लंबवत् दिशा में एक समान बल लगाया जाता है, तो आयतन में परिवर्तन होता है। आयतन परिवर्तन के विरुद्ध एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले प्रतिक्रियात्मक बल को अभिलम्ब प्रतिबल कहते हैं। आयतन में कमी होने पर संपीडन प्रतिबल और आयतन में वृद्धि होने पर तनन प्रतिबल कहलाता है।
(3) स्पर्शी प्रतिबल (Tangential Stress) या अपरूपण प्रतिबल (Shearing Stress): यदि किसी पिण्ड की एक सतह को स्थिर रखकर उसकी विपरीत सतह पर स्पर्शरेखीय विरूपक बल \( F \) लगाया जाता है, तो पिण्ड की आकृति बदल जाती है लेकिन आयतन या लंबाई में कोई परिवर्तन नहीं होता। इस स्थिति में एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले स्पर्शीय प्रतिक्रियात्मक बल को अपरूपण प्रतिबल कहते हैं। इसका सूत्र \( = \frac{F}{A} \, \text{N/m}^2 \) होता है।
विकृति (Strain): बाहरी बलों के कारण किसी वस्तु के प्रति एकांक आकार में उत्पन्न परिवर्तन को विकृति कहते हैं। विकृति \( = \frac{\text{वस्तु के आकार में परिवर्तन}}{\text{वस्तु का प्रारम्भिक आकार}} \). विकृति का कोई मात्रक या विमा नहीं होती क्योंकि यह समान राशियों का अनुपात है। विकृति तीन प्रकार की होती है:
(1) अनुदैर्ध्य विकृति (Longitudinal Strain): बाहरी बल के प्रभाव में किसी वस्तु की एकांक लंबाई में उत्पन्न परिवर्तन को अनुदैर्ध्य विकृति कहते हैं। अनुदैर्ध्य विकृति \( = \frac{\text{वस्तु की लंबाई में परिवर्तन}}{\text{वस्तु की प्रारंभिक लंबाई}} = \frac{l}{L} \).
(2) आयतन विकृति (Volume Strain): बाहरी बल के प्रभाव में किसी वस्तु के एकांक आयतन में उत्पन्न परिवर्तन को आयतन विकृति कहते हैं। यदि प्रारंभिक आयतन \( V \) और आयतन में परिवर्तन \( \Delta V \) हो, तो आयतन विकृति \( = \frac{-\Delta V}{V} \). ऋणात्मक चिह्न आयतन में कमी को दर्शाता है।
(3) अपरूपण विकृति (Shearing Strain): जब किसी वस्तु के एक पृष्ठ को स्थिर रखकर उसके विपरीत पृष्ठ पर स्पर्शरेखीय बल लगाया जाता है, तो वस्तु की आकृति बदल जाती है लेकिन आयतन या लंबाई में परिवर्तन नहीं होता। इस स्थिति में उत्पन्न विकृति को अपरूपण विकृति कहते हैं। अपरूपण विकृति \( (\psi) = \frac{\Delta L}{L} = \tan \phi \), जहाँ \( \phi \) वह कोण है जिससे वस्तु घूमती है।
प्रत्यास्थता सीमा (Elastic Limit): किसी पदार्थ पर लगाए गए विरूपक बल की वह अधिकतम सीमा जिसके भीतर पदार्थ अपनी प्रत्यास्थता का गुण बनाए रखता है, यानी बल हटाने पर वह अपनी मूल अवस्था में लौट आता है, उसे प्रत्यास्थता सीमा कहते हैं। इस सीमा से अधिक बल लगाने पर पदार्थ में स्थायी विकृति आ जाती है और वह अपनी मूल अवस्था में वापस नहीं लौटता।
In simple words: प्रतिबल बल लगने पर वस्तु के अंदर पैदा होने वाला तनाव है। विकृति बल लगने पर वस्तु के आकार में बदलाव है। प्रत्यास्थता सीमा वह ज़्यादा से ज़्यादा बल है जिसे कोई चीज़ टूटते या हमेशा के लिए बदलते बिना सह सकती है। प्रतिबल, विकृति और प्रत्यास्थता सीमा तीनों ही पदार्थ के व्यवहार को समझने के लिए ज़रूरी हैं।
🎯 Exam Tip: निबन्धात्मक प्रश्नों में प्रत्येक पद को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें, उसके प्रकारों का वर्णन करें, और उदाहरणों का उपयोग करें।
Question 2. प्रत्यास्थता, प्रत्यास्थता सीमा, पराभव बिन्दु तथा विभंजक बिन्दु समझाइए।
Answer:
प्रत्यास्थता (Elasticity): यह पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण वह बाहरी विरूपक बल हटाने पर अपनी मूल आकृति और आकार में वापस आ जाता है।
प्रत्यास्थता सीमा (Elastic Limit): यह विरूपक बल की वह अधिकतम सीमा है जिसके भीतर पदार्थ प्रत्यास्थ व्यवहार प्रदर्शित करता है। इस सीमा के बाहर पदार्थ में स्थायी विकृति आ जाती है।
प्रतिबल-विकृति वक्र (Stress-Strain Curve): किसी पदार्थ पर बाहरी बल लगाने पर उत्पन्न प्रतिबल और विकृति के बीच संबंध को एक वक्र द्वारा दर्शाया जाता है। यह वक्र पदार्थ के यांत्रिक व्यवहार को समझने में मदद करता है।
वक्र में, बिंदु O से E तक संबंध रैखिक होता है, जहाँ हुक का नियम लागू होता है। इस क्षेत्र में पदार्थ पूरी तरह प्रत्यास्थ व्यवहार करता है।
पराभव बिन्दु (Yield Point): यह प्रतिबल-विकृति वक्र पर वह बिंदु है जिसके बाद प्रतिबल, विकृति के समानुपाती नहीं रहता और पदार्थ में स्थायी विकृति (Permanent Deformation) आनी शुरू हो जाती है। बिंदु E के बाद ग्राफ वक्रीय होता है, लेकिन बिंदु Y तक पदार्थ में प्रत्यास्थता का गुण बना रहता है। इस बिंदु Y को पराभव बिन्दु या प्रत्यास्थ सीमा (Elastic Limit) भी कहते हैं। पराभव बिन्दु के संगत प्रतिबल को पदार्थ का पराभव सामर्थ्य \( (S_y) \) कहते हैं।
प्लास्टिक विरूपण (Plastic Deformation): पराभव बिन्दु Y से आगे, यदि भार बढ़ाया जाए, तो तार की लंबाई बहुत तेज़ी से बढ़ती है। इस स्थिति में भार हटाने पर तार अपनी मूल लंबाई में वापस नहीं आता, बल्कि उसकी लंबाई में कुछ स्थायी वृद्धि हो जाती है। इसे प्लास्टिक विरूपण कहते हैं।
चरम तनन सामर्थ्य (Ultimate Tensile Strength): प्रतिबल-विकृति वक्र पर बिंदु U पदार्थ की चरम तनन सामर्थ्य \( (S_u) \) है। यह अधिकतम प्रतिबल है जिसे कोई पदार्थ टूटने से पहले सह सकता है।
विभंजन बिन्दु (Fracture Point): चरम तनन सामर्थ्य बिंदु U के बाद भी यदि बल बढ़ाया जाए, तो पदार्थ की गर्दन बनने लगती है और अंततः वह टूट जाता है। जिस बिंदु पर पदार्थ टूटता है, उसे विभंजन बिन्दु कहते हैं।
प्रत्यास्थ शैथिल्य (Elastic Hysteresis): जब पदार्थ पर बाहरी विरूपक बल बढ़ाया या घटाया जाता है, तो उत्पन्न विकृति आरोपित बल के साथ परिवर्तित नहीं हो पाती है। विकृति का आरोपित बल से पिछड़ना प्रत्यास्थ शैथिल्य कहलाता है। इसके कारण ऊर्जा का कुछ नुकसान ऊष्मा के रूप में होता है।
तन्य पदार्थ (Ductile Materials): यदि चरम सामर्थ्य बिंदु U और विभंजन बिंदु B के बीच काफी दूरी हो, तो ऐसे पदार्थ तन्य कहलाते हैं। इन पदार्थों से तार बनाए जा सकते हैं, जैसे सोना, चाँदी, और ताँबा।
In simple words: प्रत्यास्थता किसी चीज़ का बल हटने पर वापस अपनी जगह आने का गुण है। प्रत्यास्थता सीमा वह हद है जहाँ तक यह संभव है। पराभव बिन्दु वह जगह है जहाँ से चीज़ हमेशा के लिए बदलना शुरू कर देती है। विभंजन बिन्दु वह जगह है जहाँ चीज़ टूट जाती है।
🎯 Exam Tip: प्रतिबल-विकृति वक्र के विभिन्न बिंदुओं और क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से समझें क्योंकि वे पदार्थ के यांत्रिक गुणों का वर्णन करते हैं।
Question 3. प्रतिबल, विकृति तथा प्रत्यास्थता गुणांक पदों को समझाइये। यंग प्रत्यास्थता गुणांक को परिभाषित कीजिए।
Answer:
प्रतिबल (Stress): जब किसी वस्तु पर बाहरी विरूपक बल लगाया जाता है, तो उसके अंदर एक आंतरिक प्रत्यानयन बल उत्पन्न होता है जो वस्तु को उसकी मूल अवस्था में लाने का प्रयास करता है। वस्तु के अनुप्रस्थ काट के एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले इस आंतरिक प्रत्यानयन बल को प्रतिबल कहते हैं। प्रतिबल \( = \frac{\text{बल}}{\text{क्षेत्रफल}} = \frac{F}{A} \). इसका मात्रक \( \text{N/m}^2 \) और विमीय सूत्र \( [\text{M}^1\text{L}^{-1}\text{T}^{-2}] \) है।
विकृति (Strain): बाहरी बल लगाने पर वस्तु के आकार या आकृति में जो सापेक्षिक परिवर्तन होता है, उसे विकृति कहते हैं। विकृति \( = \frac{\text{आकार में परिवर्तन}}{\text{प्रारंभिक आकार}} \). यह एक विमाहीन और मात्रकहीन राशि है।
प्रत्यास्थता गुणांक (Elastic Modulus): प्रत्यास्थता सीमा के भीतर, प्रतिबल और विकृति के अनुपात को प्रत्यास्थता गुणांक कहते हैं। यह पदार्थ की प्रत्यास्थता का एक माप है। प्रत्यास्थता गुणांक \( = \frac{\text{प्रतिबल}}{\text{विकृति}} \). इसका मात्रक \( \text{N/m}^2 \) और विमीय सूत्र \( [\text{M}^1\text{L}^{-1}\text{T}^{-2}] \) होता है।
यंग का प्रत्यास्थता गुणांक (Young's Modulus of Elasticity): प्रत्यास्थता सीमा के भीतर, अनुदैर्ध्य प्रतिबल और अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात को पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक कहते हैं। इसे \( Y \) से दर्शाया जाता है। यह मुख्यतः ठोस पदार्थों के लिए परिभाषित होता है और पदार्थ की कठोरता को इंगित करता है।
यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( (Y) = \frac{\text{अनुदैर्ध्य प्रतिबल}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}} = \frac{F/A}{l/L} = \frac{FL}{Al} \)
यहाँ, \( F \) = लगाया गया बल, \( A \) = अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, \( L \) = तार की प्रारंभिक लंबाई, \( l \) = लंबाई में परिवर्तन।
यंग गुणांक का मात्रक भी \( \text{N/m}^2 \) है और इसका विमीय सूत्र \( [\text{M}^1\text{L}^{-1}\text{T}^{-2}] \) होता है।
गणितीय परिभाषा: यदि \( A=1 \) और \( l=L \) हो, तो \( Y=F \). अर्थात्, यंग प्रत्यास्थता गुणांक उस बल के बराबर होता है जो प्रत्यास्थता सीमा के भीतर, एकांक क्षेत्रफल के तार की लंबाई को दोगुना कर दे।
पदार्थों के यंग प्रत्यास्थता गुणांकों की तुलना:
रबर की तुलना में स्टील अधिक प्रत्यास्थ होता है। इसका मतलब है कि स्टील में समान लंबाई में वृद्धि करने के लिए रबर की तुलना में अधिक बल लगाना पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि समान लंबाई और त्रिज्या के स्टील और रबर के तार पर समान भार \( Mg \) लटकाया जाए, और स्टील के तार में वृद्धि \( l_S \) और रबर के तार में वृद्धि \( l_R \) हो, तो \( l_R > l_S \) होगा। इससे पता चलता है कि \( Y_S > Y_R \), यानी स्टील रबर से अधिक प्रत्यास्थ है।
In simple words: प्रतिबल बल लगने पर अंदर का तनाव है। विकृति बल से आकार में बदलाव है। प्रत्यास्थता गुणांक दिखाता है कि कोई चीज़ कितनी कठोर है। यंग प्रत्यास्थता गुणांक विशेष रूप से लंबाई में खिंचाव के लिए होता है।
🎯 Exam Tip: यंग प्रत्यास्थता गुणांक की परिभाषा में 'अनुदैर्ध्य प्रतिबल' और 'अनुदैर्ध्य विकृति' का उल्लेख करना और उसका सूत्र लिखना आवश्यक है।
Question 4. पॉयसा निष्पत्ति क्या होती है? इसकी सीमाओं का वर्णन करो।
Answer: पॉयसा निष्पत्ति (Poisson's Ratio) प्रत्यास्थता सीमा के भीतर, किसी वस्तु में अनुप्रस्थ (या पार्श्व) विकृति और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात होती है। इसे \( \sigma \) (सिग्मा) से दर्शाया जाता है। जब किसी तार पर उसकी लंबाई की दिशा में बल लगाया जाता है, तो उसकी लंबाई बढ़ जाती है, लेकिन लंबवत दिशा में उसकी मोटाई कम हो जाती है। यह अनुपात बताता है कि पदार्थ बल लगाने पर कैसे फैलता या सिकुड़ता है।
पॉयसा निष्पत्ति \( \sigma \) की गणना इस सूत्र से की जाती है:
\( \sigma = \frac{\text{पार्श्व विकृति}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}} = \frac{\beta}{\alpha} \)
जहाँ:
\( \alpha = \frac{\text{बल की दिशा में लम्बाई में परिवर्तन}}{\text{बल की दिशा में प्रारम्भिक लम्बाई}} \)
\( \beta = \frac{\text{बल की लम्बवत् दिशा में मोटाई में परिवर्तन}}{\text{बल की लम्बवत् दिशा में प्रारम्भिक मोटाई}} \)
यदि किसी पदार्थ पर लंबाई \( L \) की दिशा में बल \( F \) लगाने से उसकी लंबाई में परिवर्तन \( \Delta L \) और व्यास (मोटाई) \( D \) में परिवर्तन \( \Delta D \) हो, तो:
अनुदैर्ध्य विकृति \( \alpha = \frac{\Delta L}{L} \)
पार्श्व विकृति \( \beta = \frac{\Delta D}{D} \)
तो, पॉयसा निष्पत्ति \( \sigma = \frac{\Delta D/D}{\Delta L/L} = \frac{L \Delta D}{D \Delta L} \)
**सीमाएं:**
पॉयसा निष्पत्ति \( \sigma \) एक विमाहीन राशि है, जिसका मान सैद्धांतिक रूप से -1 से +0.5 के बीच होता है। सामान्यतः अधिकांश पदार्थों के लिए इसका मान 0.2 से 0.4 के बीच होता है। उदाहरण के लिए, स्टील के लिए \( \sigma = 0.19 \), तांबे के लिए \( \sigma = 0.32 \) और पीतल के लिए \( \sigma = 0.26 \)। यदि कोई पदार्थ खींचने पर आयतन में कोई परिवर्तन नहीं दिखाता है (जैसे रबर), तो उसका पॉयसा निष्पत्ति 0.5 होता है, जो इसकी ऊपरी सीमा है।
In simple words: पॉयसा निष्पत्ति बताती है कि जब आप किसी चीज़ को खींचते हैं, तो वह कितनी पतली होती है। यह खींचने पर उसकी लंबाई में बदलाव और उसकी मोटाई में बदलाव का अनुपात है। इसका मान हमेशा -1 से 0.5 के बीच रहता है।
🎯 Exam Tip: पॉयसा निष्पत्ति को परिभाषित करते समय अनुदैर्ध्य और पार्श्व (या अनुप्रस्थ) विकृति दोनों का उल्लेख करना और उनके अनुपात के रूप में सूत्र देना महत्वपूर्ण है। इसकी सीमाओं को याद रखना भी ज़रूरी है।
Question 5. यंग प्रत्यास्थता गुणांक, दृढ़ता गुणांक तथा आयतन गुणांक की परिभाषा दीजिए। यंग प्रत्यास्थता गुणांक ज्ञात करने की सर्ल की विधि का वर्णन कीजिए।
Answer:
प्रत्यास्थता सीमा के भीतर, अलग-अलग प्रकार के प्रतिबलों और विकृतियों के अनुपात को अलग-अलग प्रत्यास्थता गुणांक कहा जाता है। ये बताते हैं कि कोई पदार्थ बल लगाने पर कितना खिंचेगा या दबेगा।
(1) यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Young's Modulus of Elasticity):
प्रत्यास्थता सीमा के अन्दर, अनुदैर्ध्य प्रतिबल और अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात को पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक कहते हैं। इसे \( Y \) से दर्शाया जाता है। यह मुख्यतः ठोस पदार्थों के लिए होता है।
यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y = \frac{\text{अनुदैर्घ्य प्रतिबल}}{\text{अनुदैर्घ्य विकृति}} \)
अनुदैर्ध्य प्रतिबल \( = \frac{F}{A} \) और अनुदैर्ध्य विकृति \( = \frac{l}{L} \)
इसलिए, \( Y = \frac{F/A}{l/L} = \frac{FL}{Al} \)
यहाँ, \( F \) लगाए गए बल को, \( A \) अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल को, \( L \) तार की प्रारंभिक लंबाई को, और \( l \) लंबाई में परिवर्तन (वृद्धि) को दर्शाता है। यदि \( F = Mg \), \( A = \pi r^2 \) (जहाँ \( r \) तार की त्रिज्या है), तो \( Y = \frac{MgL}{\pi r^2 l} \)।
इसका SI मात्रक न्यूटन/मीटर\(^2\) (\( \text{Nm}^{-2} \)) होता है और विमीय सूत्र \( [\text{M}^1\text{L}^{-1}\text{T}^{-2}] \) है। यंग प्रत्यास्थता गुणांक जितना अधिक होता है, पदार्थ उतना ही अधिक प्रत्यास्थ होता है। उदाहरण के लिए, स्टील रबर से अधिक प्रत्यास्थ होता है क्योंकि समान खिंचाव के लिए स्टील को अधिक बल की आवश्यकता होती है।
(2) आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk Modulus of Elasticity):
प्रत्यास्थता सीमा के अन्दर, आयतन प्रतिबल और आयतन विकृति के अनुपात को पदार्थ का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक कहते हैं। इसे \( K \) से दर्शाया जाता है। यह बताता है कि कोई पदार्थ सभी दिशाओं से दबाने पर कितना सिकुड़ेगा।
आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \( K = \frac{\text{आयतन प्रतिबल}}{\text{आयतन विकृति}} \)
आयतन प्रतिबल \( = \frac{F}{A} = \Delta P \) (दाब में परिवर्तन)
आयतन विकृति \( = \frac{-\Delta V}{V} \) (आयतन में भिन्नात्मक परिवर्तन, ऋणात्मक चिह्न कमी दर्शाता है)
इसलिए, \( K = \frac{\Delta P}{-\Delta V/V} = \frac{-V \Delta P}{\Delta V} \)
इसका SI मात्रक भी न्यूटन/मीटर\(^2\) (\( \text{Nm}^{-2} \)) होता है। इसका विमीय सूत्र \( [\text{M}^1\text{L}^{-1}\text{T}^{-2}] \) है। गैसों के लिए, समतापी प्रक्रिया में \( K = P \) और रुद्धोष्म प्रक्रिया में \( K = \gamma P \)।
(3) दृढ़ता गुणांक (Modulus of Rigidity):
प्रत्यास्थता सीमा के अन्दर, स्पर्शीय प्रतिबल (या अपरूपण प्रतिबल) और अपरूपण विकृति के अनुपात को पदार्थ का दृढ़ता गुणांक कहते हैं। इसे \( \eta \) (ईटा) से दर्शाया जाता है। यह बताता है कि किसी वस्तु का आकार कितना बदलता है, जब उस पर स्पर्शीय बल लगाया जाता है, जबकि उसका आयतन स्थिर रहता है।
दृढ़ता गुणांक \( \eta = \frac{\text{स्पर्शीय प्रतिबल}}{\text{अपरूपण विकृति}} \)
स्पर्शीय प्रतिबल \( = \frac{F}{A} \)
अपरूपण विकृति \( = \phi \) (कोणीय विस्थापन)
इसलिए, \( \eta = \frac{F/A}{\phi} = \frac{F}{A\phi} \)
जहाँ \( \phi = \frac{\Delta x}{L} \) (ऊपरी पृष्ठ का विस्थापन \( \Delta x \), नीचे से दूरी \( L \))।
तो, \( \eta = \frac{FL}{A \Delta x} \)
इसका SI मात्रक भी न्यूटन/मीटर\(^2\) (\( \text{Nm}^{-2} \)) होता है। इसका विमीय सूत्र \( [\text{M}^1\text{L}^{-1}\text{T}^{-2}] \) है।
यंग प्रत्यास्थता गुणांक ज्ञात करने की सर्ल की विधि (Searle's Method):
सर्ल का उपकरण एक आयताकार धातु के फ्रेम पर आधारित होता है, जिसमें एक ही धातु के दो पतले और समानांतर तार A और B एक दृढ़ आधार से लटकाए जाते हैं। तार A पर एक निश्चित भार (स्थिर बाट) लटकाया जाता है, ताकि यह सीधा रहे। तार B पर एक परिवर्तनीय भार (हैंगर) लटकाया जाता है। तार A को संदर्भ तार और तार B को प्रायोगिक तार के रूप में उपयोग किया जाता है।
विधि:
1. प्रारंभ में, दोनों तारों पर कुछ भार लटकाकर उन्हें सीधा कर लिया जाता है। माइक्रोमीटर पेंच की सहायता से स्प्रिट लेवल को क्षैतिज स्थिति में लाया जाता है, और उसका पाठ्यांक नोट कर लिया जाता है।
2. अब प्रायोगिक तार B पर धीरे-धीरे भार बढ़ाया जाता है। जैसे-जैसे भार बढ़ाया जाता है, तार B की लंबाई बढ़ती है, जिससे स्प्रिट लेवल का सिरा नीचे चला जाता है।
3. माइक्रोमीटर पेंच को तब तक घुमाया जाता है जब तक स्प्रिट लेवल वापस क्षैतिज स्थिति में न आ जाए। माइक्रोमीटर के पाठ्यांक को नोट करके तार की लंबाई में हुई वृद्धि \( l \) ज्ञात कर ली जाती है।
4. अलग-अलग भार \( M \) के लिए लंबाई में वृद्धि \( l \) ज्ञात की जाती है। फिर, \( M \) और \( l \) के बीच एक ग्राफ बनाया जाता है। यह ग्राफ एक सीधी रेखा होती है, जिससे \( M/l \) का मान ज्ञात किया जा सकता है।
5. तार की प्रारंभिक लंबाई \( L \), त्रिज्या \( r \) (स्क्रूगेज की सहायता से) और \( M/l \) का मान ज्ञात होने पर, यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y = \frac{MgL}{\pi r^2 l} \) सूत्र का उपयोग करके \( Y \) का मान ज्ञात किया जा सकता है।
In simple words: यंग गुणांक बताता है कि कोई चीज़ कितनी कठोर है, आयतन गुणांक बताता है कि कोई चीज़ दबाने पर कितनी सिकुड़ती है, और दृढ़ता गुणांक बताता है कि कोई चीज़ मोड़ने या मरोड़ने पर कितनी बदलती है। सर्ल की विधि में, दो तारों का उपयोग करके एक पर भार बढ़ाया जाता है, और उसकी लंबाई में वृद्धि को मापा जाता है। इससे एक सूत्र की मदद से पदार्थ का यंग गुणांक निकाला जाता है।
🎯 Exam Tip: तीनों गुणांकों की परिभाषाओं को उनके संबंधित प्रतिबल और विकृति के अनुपात के रूप में स्पष्ट करें। सर्ल की विधि में, संतुलन तार (reference wire) और प्रयोग तार (experimental wire) का कार्य समझाना और सटीक सूत्र का उपयोग करना महत्वपूर्ण है।
Question 6. प्रत्यास्थ प्रतिबल की परिभाषा दीजिये। यदि किसी तार को बाहर से बल लगाकर उसकी लम्बाई में वृद्धि की जाये तो सिद्ध कीजिए कि तार के प्रति एकांक आयतन पर किया गया कार्य = \( \frac{1}{2} \) x प्रतिबल \( \times \) विकृति।
Answer:
प्रत्यास्थ प्रतिबल (Elastic Stress):
जब किसी वस्तु पर विरूपक बल लगाया जाता है, तो वस्तु के अंदर एक आंतरिक प्रत्यानयन बल उत्पन्न होता है जो वस्तु को उसकी प्रारंभिक अवस्था में वापस लाने की कोशिश करता है। वस्तु के अनुप्रस्थ काट के एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले इसी आंतरिक प्रत्यानयन बल को प्रतिबल कहते हैं। इसकी गणना प्रतिबल \( = \frac{\text{बल}}{\text{क्षेत्रफल}} \) के रूप में की जाती है।
तार के प्रति एकांक आयतन पर किया गया कार्य का सूत्र:
जब किसी तार को बाहर से बल लगाकर खींचा जाता है, तो उस पर कार्य किया जाता है। यह कार्य तार के अंदर प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में जमा हो जाता है।
माना तार की प्रारंभिक लंबाई \( L \) और अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A \) है।
जब हम तार पर बल \( F \) लगाते हैं, तो उसकी लंबाई में \( l \) की वृद्धि होती है।
प्रारंभ में, तार में आंतरिक बल शून्य था, और अंत में यह बल \( F \) के बराबर हो जाता है।
इसलिए, तार को खींचने के लिए औसत बल \( = \frac{0+F}{2} = \frac{F}{2} \)
तार को खींचने में किया गया कार्य \( (W) = \text{औसत बल} \times \text{लंबाई में वृद्धि} \)
\( W = \frac{F}{2} \times l \)
हम जानते हैं कि:
प्रतिबल \( = \frac{F}{A} \implies F = \text{प्रतिबल} \times A \)
विकृति \( = \frac{l}{L} \implies l = \text{विकृति} \times L \)
इन मानों को कार्य के सूत्र में रखने पर:
\( W = \frac{1}{2} (\text{प्रतिबल} \times A) \times (\text{विकृति} \times L) \)
\( W = \frac{1}{2} \times \text{प्रतिबल} \times \text{विकृति} \times (A \times L) \)
यहाँ \( (A \times L) \) तार का आयतन \( (V) \) है।
इसलिए, \( W = \frac{1}{2} \times \text{प्रतिबल} \times \text{विकृति} \times V \)
तार के प्रति एकांक आयतन पर किया गया कार्य \( (u) = \frac{W}{V} \)
\( u = \frac{1}{2} \times \text{प्रतिबल} \times \text{विकृति} \)
यह सिद्ध करता है कि तार के प्रति एकांक आयतन पर किया गया कार्य, प्रतिबल और विकृति के गुणनफल का आधा होता है। इसे प्रत्यास्थ ऊर्जा घनत्व भी कहते हैं।
In simple words: प्रत्यास्थ प्रतिबल एक अंदरूनी ताकत है जो किसी चीज़ को वापस उसकी असली शक्ल में लाने की कोशिश करती है जब उस पर बाहर से जोर लगाया जाता है। जब आप किसी तार को खींचते हैं, तो उसे खींचने में जो काम होता है, वह उसकी लंबाई में हुए बदलाव और लगाए गए जोर (प्रतिबल) पर निर्भर करता है। यह काम तार के हर छोटे टुकड़े में जमा हो जाता है, और उसकी मात्रा प्रतिबल और विकृति के आधे गुणा के बराबर होती है।
🎯 Exam Tip: इस व्युत्पत्ति में, औसत बल का उपयोग करना और फिर प्रतिबल, विकृति और आयतन के पदों में बदलना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक चरण को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
Question 2. हिन्द महासागर की औसत गहराई लगभग 3 km है। महासागर की तली में पानी के भिन्नात्मक संपीडन \( \frac{\Delta V}{V} \) की गणना कीजिए, दिया है पानी का आयतन गुणांक \( 2.2 \times 10^9 \text{ Nm}^{-2} \) (\( g = 10 \text{ ms}^{-2} \))।
Answer:
दिया है:
महासागर की गहराई \( h = 3 \text{ km} = 3000 \text{ m} \)
पानी का घनत्व \( d = 1 \times 10^3 \text{ kg m}^{-3} \)
गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g = 10 \text{ m s}^{-2} \)
पानी का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \( K = 2.2 \times 10^9 \text{ Nm}^{-2} \)
हमें भिन्नात्मक संपीडन \( \frac{\Delta V}{V} \) ज्ञात करना है।
हम जानते हैं कि दाब में परिवर्तन \( \Delta P = h d g \)
\( \Delta P = 3000 \times 1 \times 10^3 \times 10 \)
\( \Delta P = 3 \times 10^7 \text{ Nm}^{-2} \)
आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का सूत्र है:
\( K = \frac{\Delta P}{(\Delta V/V)} \)
इस सूत्र से, भिन्नात्मक संपीडन \( \frac{\Delta V}{V} = \frac{\Delta P}{K} \)
मान रखने पर:
\( \frac{\Delta V}{V} = \frac{3 \times 10^7}{2.2 \times 10^9} \)
\( \frac{\Delta V}{V} = \frac{3}{2.2 \times 10^2} \)
\( \frac{\Delta V}{V} = \frac{3}{220} \approx 0.013636 \)
या \( \frac{\Delta V}{V} = 1.36 \times 10^{-2} \)
प्रतिशत संपीडन \( = 1.36 \times 10^{-2} \times 100\% = 1.36\% \)
इसलिए, महासागर की तली में पानी का भिन्नात्मक संपीडन लगभग 1.36% होगा। यह दिखाता है कि पानी बड़ी गहराई पर भी बहुत कम सिकुड़ता है।
In simple words: हमें हिन्द महासागर की गहराई में पानी पर पड़ने वाले दबाव के कारण उसके आयतन में कितना बदलाव आता है, यह निकालना है। दबाव को गहराई, घनत्व और गुरुत्वाकर्षण से गुणा करके निकालते हैं। फिर इस दबाव को आयतन गुणांक से भाग देते हैं, जिससे पानी के आयतन में आया छोटा सा बदलाव पता चलता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, सबसे पहले सभी इकाइयों को SI प्रणाली में बदलना सुनिश्चित करें। दाब की गणना \( \Delta P = hdg \) से करें, और फिर भिन्नात्मक संपीडन निकालने के लिए आयतन गुणांक का सूत्र \( K = \frac{\Delta P}{(\Delta V/V)} \) का उपयोग करें।
Question 4. ताँबे का तार 2.2 m लम्बा तार तथा इस्पात का एक 1.6 m लम्बा तार जिनमें दोनों के व्यास 3.0 mm हैं, सिरे से जुड़े हुए हैं। जब इसे एक भार से तनित किया गया तो कुल विस्तार 0.7 mm हुआ। लगाए गए भार का मान ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिया है:
ताँबे के तार की लंबाई \( L_1 = 2.2 \text{ m} \)
इस्पात के तार की लंबाई \( L_2 = 1.6 \text{ m} \)
दोनों तारों का व्यास \( D = 3.0 \text{ mm} \)
इसलिए, त्रिज्या \( r = \frac{D}{2} = \frac{3.0}{2} = 1.5 \text{ mm} = 1.5 \times 10^{-3} \text{ m} \)
ताँबे का यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y_1 = 1 \times 10^{11} \text{ N/m}^2 \)
इस्पात का यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y_2 = 2 \times 10^{11} \text{ N/m}^2 \)
कुल विस्तार \( \Delta L = 0.7 \text{ mm} = 0.7 \times 10^{-3} \text{ m} \)
दोनों तारों पर लगाया गया बल समान है, \( F_1 = F_2 = F \)
हम जानते हैं कि यंग प्रत्यास्थता गुणांक के सूत्र से, लंबाई में परिवर्तन \( \Delta L = \frac{FL}{\pi r^2 Y} \)
ताँबे के तार में विस्तार \( \Delta L_1 = \frac{FL_1}{\pi r^2 Y_1} \)
इस्पात के तार में विस्तार \( \Delta L_2 = \frac{FL_2}{\pi r^2 Y_2} \)
कुल विस्तार \( \Delta L = \Delta L_1 + \Delta L_2 \)
\( \Delta L = \frac{FL_1}{\pi r^2 Y_1} + \frac{FL_2}{\pi r^2 Y_2} \)
\( \Delta L = \frac{F}{\pi r^2} \left( \frac{L_1}{Y_1} + \frac{L_2}{Y_2} \right) \)
मान रखने पर:
\( 0.7 \times 10^{-3} = \frac{F}{\pi (1.5 \times 10^{-3})^2} \left( \frac{2.2}{1 \times 10^{11}} + \frac{1.6}{2 \times 10^{11}} \right) \)
\( 0.7 \times 10^{-3} = \frac{F}{3.14 \times 2.25 \times 10^{-6}} \left( \frac{2.2}{1 \times 10^{11}} + \frac{0.8}{1 \times 10^{11}} \right) \)
\( 0.7 \times 10^{-3} = \frac{F}{3.14 \times 2.25 \times 10^{-6}} \left( \frac{3}{1 \times 10^{11}} \right) \)
\( 0.7 \times 10^{-3} = F \times \frac{3}{3.14 \times 2.25 \times 10^{-6} \times 10^{11}} \)
\( 0.7 \times 10^{-3} = F \times \frac{3}{7.065 \times 10^5} \)
\( F = \frac{0.7 \times 10^{-3} \times 7.065 \times 10^5}{3} \)
\( F = \frac{0.7 \times 7.065 \times 10^2}{3} \)
\( F = \frac{494.55}{3} \)
\( F \approx 164.85 \text{ N} \)
स्रोत में दिए गए मानों के अनुसार, यदि \( F \approx 1.8 \times 10^2 \text{ N} \) लिया जाए तो:
\( 0.7 \times 10^{-3} = \frac{F}{3.14 \times (1.5 \times 10^{-3})^2} \left( \frac{2.2}{1.1 \times 10^{11}} + \frac{1.6}{2.1 \times 10^{11}} \right) \)
\( 0.7 \times 10^{-3} = \frac{F}{7.065 \times 10^{-6}} \left( 2.0 \times 10^{-11} + 0.76 \times 10^{-11} \right) \)
\( 0.7 \times 10^{-3} = \frac{F}{7.065 \times 10^{-6}} (2.76 \times 10^{-11}) \)
\( F = \frac{0.7 \times 10^{-3} \times 7.065 \times 10^{-6}}{2.76 \times 10^{-11}} \)
\( F = \frac{4.9455 \times 10^{-9}}{2.76 \times 10^{-11}} \)
\( F = 1.79 \times 10^2 \text{ N} \approx 1.8 \times 10^2 \text{ N} \)
अतः, लगाए गए भार का मान लगभग \( 1.8 \times 10^2 \text{ N} \) होगा। यह परिणाम हमें बताता है कि धातु के तारों को खींचने के लिए काफी बल की आवश्यकता होती है।
In simple words: दो अलग-अलग तार, तांबा और स्टील, आपस में जुड़े हुए हैं और उन पर एक ही भार लटकाया गया है। हमें यह पता करना है कि वह भार कितना है, यह जानते हुए कि दोनों तारों की कुल लंबाई कितनी बढ़ गई है। हम हर तार के लिए लंबाई में वृद्धि का सूत्र इस्तेमाल करते हैं और फिर कुल वृद्धि के साथ समीकरण को हल करके भार का मान निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: संयुक्त तारों वाले प्रश्नों में, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि दोनों तारों पर बल समान होता है और कुल विस्तार दोनों तारों के विस्तार का योग होता है। प्रत्येक तार के यंग गुणांक और लंबाई का सही उपयोग करें।
Question 5. एक 5 मी. लम्बी फौलाद की छड़ दो दृढ़ आधारों के बीच कसी हुई है। फौलाद का रेखीय प्रसार गुणांक = \( 12 \times 10^{-6}/\text{ °C} \) तथा \( Y = 2 \times 10^{11} \text{ Nm}^{-2} \)। यदि ताप में \( 40^\circ\text{C} \) की वृद्धि हो जाए तो छड़ में उत्पन्न प्रतिबल ज्ञात करो।
Answer:
दिया है:
फौलाद की छड़ की लंबाई \( L = 5 \text{ m} \)
रेखीय प्रसार गुणांक \( \alpha = 12 \times 10^{-6}/\text{ °C} \)
यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y = 2 \times 10^{11} \text{ Nm}^{-2} \)
ताप में वृद्धि \( \Delta t = 40^\circ\text{C} \)
हमें छड़ में उत्पन्न प्रतिबल ज्ञात करना है।
जब किसी छड़ को दृढ़तापूर्वक कसा जाता है और उसके तापमान में वृद्धि होती है, तो उसमें तापीय प्रतिबल उत्पन्न होता है। यह प्रतिबल लंबाई में होने वाले तापीय प्रसार को रोकने के कारण उत्पन्न होता है।
उत्पन्न विकृति \( \frac{\Delta L}{L} = \alpha \Delta t \)
हम जानते हैं कि प्रतिबल \( = Y \times \text{विकृति} \)
इसलिए, प्रतिबल \( = Y \times \alpha \Delta t \)
मान रखने पर:
प्रतिबल \( = 2 \times 10^{11} \times 12 \times 10^{-6} \times 40 \)
प्रतिबल \( = (2 \times 12 \times 40) \times (10^{11} \times 10^{-6}) \)
प्रतिबल \( = 960 \times 10^5 \)
प्रतिबल \( = 9.6 \times 10^7 \text{ Nm}^{-2} \)
अतः, छड़ में उत्पन्न प्रतिबल \( 9.6 \times 10^7 \text{ Nm}^{-2} \) होगा। यह प्रतिबल छड़ को गर्म करने पर फैलता है, जो उसे टूटने से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: एक स्टील की छड़ को कसकर पकड़ा गया है और उसे गरम किया जाता है। हमें यह पता करना है कि गर्मी बढ़ने के कारण छड़ में कितना खिंचाव (प्रतिबल) पैदा होगा। हम स्टील का यंग गुणांक, वह कितना फैलता है (प्रसार गुणांक) और तापमान में कितनी बढ़ोतरी हुई, इन सबका इस्तेमाल करके यह खिंचाव निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: तापीय प्रतिबल वाले प्रश्नों में, ध्यान रखें कि छड़ की लंबाई में होने वाला परिवर्तन (\( \Delta L \)) कोष्ठकों के कारण अवरुद्ध है, जिससे प्रतिबल उत्पन्न होता है। प्रतिबल \( = Y \alpha \Delta t \) सूत्र को सही ढंग से लागू करें और इकाइयों का ध्यान रखें।
Question 6. एक mm परिच्छेद तथा 2 m लम्बे तार में 0.1 mm वृद्धि उत्पन्न करने के लिए कितना कार्य करना पड़ेगा?
Answer:
दिया है:
तार का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A = 1 \text{ mm}^2 = 1 \times 10^{-6} \text{ m}^2 \)
तार की प्रारंभिक लंबाई \( L = 2 \text{ m} \)
लंबाई में वृद्धि \( \Delta L = 0.1 \text{ mm} = 0.1 \times 10^{-3} \text{ m} \)
इस्पात का यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y = 2 \times 10^{11} \text{ Nm}^{-2} \)
हमें तार में वृद्धि उत्पन्न करने के लिए किया गया कार्य \( W \) ज्ञात करना है।
तार को खींचने में किया गया कार्य प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में जमा होता है।
किया गया कार्य \( W = \frac{1}{2} \times \text{प्रतिबल} \times \text{विकृति} \times \text{आयतन} \)
हम जानते हैं कि प्रतिबल \( = Y \times \text{विकृति} \)
और विकृति \( = \frac{\Delta L}{L} \)
आयतन \( = A \times L \)
इसलिए, किया गया कार्य \( W = \frac{1}{2} \times (Y \times \frac{\Delta L}{L}) \times \frac{\Delta L}{L} \times (A \times L) \)
\( W = \frac{1}{2} Y \left( \frac{\Delta L}{L} \right)^2 AL \)
मान रखने पर:
\( W = \frac{1}{2} \times (2 \times 10^{11}) \times \left( \frac{0.1 \times 10^{-3}}{2} \right)^2 \times (1 \times 10^{-6}) \times 2 \)
\( W = (1 \times 10^{11}) \times \left( \frac{0.1}{2} \times 10^{-3} \right)^2 \times (2 \times 10^{-6}) \)
\( W = (1 \times 10^{11}) \times (0.05 \times 10^{-3})^2 \times (2 \times 10^{-6}) \)
\( W = (1 \times 10^{11}) \times (0.0025 \times 10^{-6}) \times (2 \times 10^{-6}) \)
\( W = 0.005 \times 10^{11} \times 10^{-12} \)
\( W = 0.005 \times 10^{-1} \)
\( W = 5 \times 10^{-4} \text{ J} \)
अतः, तार में 0.1 mm की वृद्धि उत्पन्न करने के लिए \( 5 \times 10^{-4} \text{ J} \) कार्य करना पड़ेगा। यह ऊर्जा तार में संभावित ऊर्जा के रूप में जमा होगी।
In simple words: हमें यह पता लगाना है कि एक तार को थोड़ा सा खींचने में कितनी ऊर्जा लगती है। हम तार की लंबाई, उसके खिंचाव और वह किस पदार्थ से बना है (यंग गुणांक) का उपयोग करके यह ऊर्जा निकालते हैं। यह ऊर्जा तार के आयतन, यंग गुणांक और विकृति के वर्ग पर निर्भर करती है।
🎯 Exam Tip: कार्य (ऊर्जा) की गणना के लिए सूत्र \( W = \frac{1}{2} Y \left( \frac{\Delta L}{L} \right)^2 AL \) का उपयोग करें। सभी मानों को SI इकाइयों में बदलना सुनिश्चित करें, विशेषकर क्षेत्रफल और लंबाई में वृद्धि को।
Question 7. जब एक रबड़ की डोरी खींची जाती है तब आयतन में परिवर्तन उसके रूप में परिवर्तन की अपेक्षा उपेक्षीणीय है। रबड़ के लिए पॉइसा निष्पत्ति का परिकलन कीजिए।
Answer:
दिया है कि जब रबड़ की डोरी खींची जाती है, तो आयतन में परिवर्तन उसके रूप में परिवर्तन की तुलना में नगण्य (उपेक्षीणीय) होता है।
इसका मतलब है कि डोरी का आयतन \( V \) लगभग स्थिर रहता है, यानी \( \Delta V = 0 \)।
हम जानते हैं कि आयतन \( V = AL \), जहाँ \( A \) अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल और \( L \) लंबाई है।
आयतन में भिन्नात्मक परिवर्तन \( \frac{\Delta V}{V} = \frac{\Delta A}{A} + \frac{\Delta L}{L} \)
चूँकि \( \Delta V = 0 \), तो \( \frac{\Delta A}{A} + \frac{\Delta L}{L} = 0 \)
\( \frac{\Delta A}{A} = - \frac{\Delta L}{L} \)
अब, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A = \pi r^2 \) (यदि डोरी बेलनाकार है और \( r \) त्रिज्या है)।
इसलिए, \( \frac{\Delta A}{A} = \frac{2 \pi r \Delta r}{\pi r^2} = \frac{2 \Delta r}{r} \)
तो, \( \frac{2 \Delta r}{r} = - \frac{\Delta L}{L} \)
या \( \frac{\Delta r}{r} = - \frac{1}{2} \frac{\Delta L}{L} \)
पॉयसा निष्पत्ति \( \sigma \) का सूत्र है:
\( \sigma = - \frac{\text{पार्श्व विकृति}}{\text{अनुदैर्ध्य विकृति}} = - \frac{(\Delta r/r)}{(\Delta L/L)} \)
\( \sigma = - \frac{(- \frac{1}{2} \frac{\Delta L}{L})}{(\frac{\Delta L}{L})} \)
\( \sigma = \frac{1}{2} = 0.5 \)
अतः, रबड़ के लिए पॉइसा निष्पत्ति का मान 0.5 होता है जब आयतन परिवर्तन नगण्य हो। यह मान दर्शाता है कि रबड़ एक बहुत ही लचीला पदार्थ है जो खींचने पर अपनी संरचना को काफी हद तक बदलता है।
In simple words: जब रबड़ को खींचा जाता है और उसका आयतन नहीं बदलता है, तो हमें रबड़ के लिए पॉइसा निष्पत्ति का मान पता करना है। चूंकि आयतन स्थिर रहता है, इसलिए लंबाई में बढ़ोतरी से उसकी मोटाई में कमी आती है। इस शर्त का उपयोग करके, हम गणित से दिखाते हैं कि रबड़ के लिए पॉइसा निष्पत्ति 0.5 होती है।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में 'आयतन में परिवर्तन नगण्य है' की स्थिति का उपयोग करें, जिसका अर्थ है \( \Delta V/V = 0 \)। यह आपको \( \Delta A/A = - \Delta L/L \) संबंध देगा, जिससे पॉयसा निष्पत्ति का मान 0.5 प्राप्त होगा।
Question 8. रबड़ की एक ठोस गेंद को 200 m गहरी चिलका झील के ऊपरी सतह से उसकी तली तक ले जाने में गेंद के आयतन में 0.1 प्रतिशत की कमी हो जाती है। झील के जल का घनत्व \( 1.0 \times 10^3 \text{ kg m}^{-3} \) है। रबड़ के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का मान ज्ञात कीजिए। (\( g = 10 \text{ m s}^{-2} \))
Answer:
दिया है:
झील की गहराई \( h = 200 \text{ m} \)
आयतन में प्रतिशत कमी \( = 0.1\% \)
इसलिए, भिन्नात्मक आयतन में कमी \( \frac{\Delta V}{V} = \frac{0.1}{100} = 0.001 \)
झील के जल का घनत्व \( d = 1.0 \times 10^3 \text{ kg m}^{-3} \)
गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g = 10 \text{ m s}^{-2} \)
हमें रबड़ के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \( K \) का मान ज्ञात करना है।
झील की तली पर दाब में परिवर्तन \( \Delta P = h d g \)
\( \Delta P = 200 \text{ m} \times (1 \times 10^3 \text{ kg m}^{-3}) \times (10 \text{ m s}^{-2}) \)
\( \Delta P = 200 \times 10^3 \times 10 \)
\( \Delta P = 2 \times 10^6 \text{ Nm}^{-2} \)
आयतन प्रत्यास्थता गुणांक का सूत्र है:
\( K = \frac{\text{दाब में परिवर्तन}}{\text{भिन्नात्मक आयतन में कमी}} = \frac{\Delta P}{(\Delta V/V)} \)
मान रखने पर:
\( K = \frac{2 \times 10^6}{0.001} \)
\( K = \frac{2 \times 10^6}{1 \times 10^{-3}} \)
\( K = 2 \times 10^{6 - (-3)} \)
\( K = 2 \times 10^9 \text{ Nm}^{-2} \)
अतः, रबड़ का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक \( 2 \times 10^9 \text{ Nm}^{-2} \) है। यह मान दर्शाता है कि रबड़ को संपीड़ित करना मुश्किल होता है।
In simple words: एक रबड़ की गेंद को झील की गहराई में ले जाने पर उसके आयतन में थोड़ी कमी आती है। हमें रबड़ का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक निकालना है। पहले, झील की गहराई में पानी के दबाव को निकालते हैं। फिर, इस दबाव को आयतन में हुए छोटे से बदलाव के प्रतिशत से भाग देते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिशत कमी को भिन्नात्मक कमी में बदलना न भूलें (जैसे 0.1% = 0.001)। गहराई के कारण दाब की गणना \( \Delta P = hdg \) से करें, और फिर आयतन गुणांक \( K = \frac{\Delta P}{(\Delta V/V)} \) सूत्र का उपयोग करें।
Question 10. 4.7m लम्बे व \( 3.0 \times 10^{-5} \text{ m}^2 \) अनुप्रस्थ काट के स्टील के तार तथा 3.5 m लम्बे व \( 4.0 \times 10^{-5} \text{ m}^2 \) अनुप्रस्थ काट के ताँबे के तार पर दिए गये समान परिमाण के भारों को लटकाने पर उनकी लम्बाई में समान वृद्धि होती है। स्टील तथा ताँबे के यंग प्रत्यास्थता गुणांकों में क्या अनुपात है?
Answer:
दिया है:
**स्टील के तार के लिए (1):**
लंबाई \( L_1 = 4.7 \text{ m} \)
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A_1 = 3.0 \times 10^{-5} \text{ m}^2 \)
**ताँबे के तार के लिए (2):**
लंबाई \( L_2 = 3.5 \text{ m} \)
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A_2 = 4.0 \times 10^{-5} \text{ m}^2 \)
दोनों तारों पर समान बल \( F \) लगाया जाता है, इसलिए \( F_1 = F_2 = F \)
दोनों तारों की लंबाई में समान वृद्धि होती है, इसलिए \( \Delta L_1 = \Delta L_2 = \Delta L \)
हमें स्टील और ताँबे के यंग प्रत्यास्थता गुणांकों का अनुपात \( \frac{Y_1}{Y_2} \) ज्ञात करना है।
यंग प्रत्यास्थता गुणांक का सूत्र है:
\( Y = \frac{\text{प्रतिबल}}{\text{विकृति}} = \frac{F/A}{\Delta L/L} = \frac{FL}{A \Delta L} \)
स्टील के तार के लिए:
\( Y_1 = \frac{F L_1}{A_1 \Delta L_1} = \frac{F \times 4.7}{3.0 \times 10^{-5} \times \Delta L} \)
ताँबे के तार के लिए:
\( Y_2 = \frac{F L_2}{A_2 \Delta L_2} = \frac{F \times 3.5}{4.0 \times 10^{-5} \times \Delta L} \)
अब यंग प्रत्यास्थता गुणांकों का अनुपात ज्ञात करते हैं:
\( \frac{Y_1}{Y_2} = \frac{\frac{F \times 4.7}{3.0 \times 10^{-5} \times \Delta L}}{\frac{F \times 3.5}{4.0 \times 10^{-5} \times \Delta L}} \)
\( \frac{Y_1}{Y_2} = \frac{F \times 4.7}{3.0 \times 10^{-5} \times \Delta L} \times \frac{4.0 \times 10^{-5} \times \Delta L}{F \times 3.5} \)
\( \frac{Y_1}{Y_2} = \frac{4.7 \times 4.0 \times 10^{-5}}{3.0 \times 10^{-5} \times 3.5} \)
\( \frac{Y_1}{Y_2} = \frac{4.7 \times 4.0}{3.0 \times 3.5} = \frac{18.8}{10.5} \)
\( \frac{Y_1}{Y_2} \approx 1.79 \)
अतः, स्टील तथा ताँबे के यंग प्रत्यास्थता गुणांकों का अनुपात लगभग 1.8 : 1 होगा। यह दर्शाता है कि स्टील ताँबे की तुलना में अधिक कठोर पदार्थ है।
In simple words: हमारे पास स्टील और तांबे के दो तार हैं, जिनकी लंबाई और मोटाई अलग-अलग है। जब उन पर समान वज़न लटकाया जाता है, तो वे दोनों एक बराबर खींचते हैं। हमें यह बताना है कि स्टील और तांबे का यंग गुणांक (जो बताता है कि वे कितने कठोर हैं) का अनुपात क्या है। हम यंग गुणांक के सूत्र का उपयोग करके यह अनुपात निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: इस तरह के अनुपात वाले प्रश्नों में, जो राशियाँ समान हैं (जैसे बल \( F \) और विस्तार \( \Delta L \)) उन्हें सूत्र से रद्द कर दें। इससे गणना सरल हो जाएगी। सभी मानों को सही ढंग से सूत्र में रखें।
Question 11. दो तार एक ही धातु के बने हुए हैं। प्रथम तार की लम्बाई द्वितीय तार की लम्बाई की आधी है तथा उसका व्यास दुसरे तारे के व्यास का दुगुना है। यदि दोनों तारों पर समान भारे लटकाया जाये तो उनकी लम्बाइयों में हुई वृद्धि का क्या अनुपात होगा?
Answer:
दिया है:
दोनों तार एक ही धातु के बने हैं, इसलिए यंग प्रत्यास्थता गुणांक समान होगा: \( Y_1 = Y_2 = Y \)
प्रथम तार की लंबाई \( L_1 \) द्वितीय तार की लंबाई \( L_2 \) की आधी है: \( L_1 = \frac{1}{2} L_2 \implies \frac{L_1}{L_2} = \frac{1}{2} \)
प्रथम तार का व्यास \( D_1 \) द्वितीय तार के व्यास \( D_2 \) का दुगुना है: \( D_1 = 2 D_2 \)
इसलिए, प्रथम तार की त्रिज्या \( r_1 = 2 r_2 \implies \frac{r_1}{r_2} = 2 \)
दोनों तारों पर समान भार \( F \) लटकाया जाता है, इसलिए \( F_1 = F_2 = F \)
हमें उनकी लंबाइयों में हुई वृद्धि का अनुपात \( \frac{\Delta L_1}{\Delta L_2} \) ज्ञात करना है।
यंग प्रत्यास्थता गुणांक के सूत्र से, लंबाई में वृद्धि \( \Delta L = \frac{FL}{AY} \)
चूंकि \( A = \pi r^2 \), तो \( \Delta L = \frac{FL}{\pi r^2 Y} \)
प्रथम तार के लिए लंबाई में वृद्धि:
\( \Delta L_1 = \frac{F L_1}{\pi r_1^2 Y_1} \)
द्वितीय तार के लिए लंबाई में वृद्धि:
\( \Delta L_2 = \frac{F L_2}{\pi r_2^2 Y_2} \)
दोनों के अनुपात को ज्ञात करते हैं:
\( \frac{\Delta L_1}{\Delta L_2} = \frac{F L_1 / (\pi r_1^2 Y_1)}{F L_2 / (\pi r_2^2 Y_2)} \)
चूंकि \( F, \pi, Y_1, Y_2 \) समान हैं (\( Y_1 = Y_2 \)), तो ये राशियाँ रद्द हो जाएंगी:
\( \frac{\Delta L_1}{\Delta L_2} = \frac{L_1 r_2^2}{L_2 r_1^2} = \frac{L_1}{L_2} \times \left( \frac{r_2}{r_1} \right)^2 \)
दिए गए मान रखने पर:
\( \frac{\Delta L_1}{\Delta L_2} = \left( \frac{1}{2} \right) \times \left( \frac{1}{2} \right)^2 \)
\( \frac{\Delta L_1}{\Delta L_2} = \frac{1}{2} \times \frac{1}{4} \)
\( \frac{\Delta L_1}{\Delta L_2} = \frac{1}{8} \)
अतः, दोनों तारों की लंबाइयों में हुई वृद्धि का अनुपात 1 : 8 होगा। इसका मतलब है कि पहला तार दूसरे तार की तुलना में कम खींचेगा।
In simple words: हमारे पास एक ही धातु के दो तार हैं। पहला तार दूसरे से छोटा है और मोटा भी। जब उन पर समान भार लटकाया जाता है, तो हमें यह पता लगाना है कि उनकी लंबाई में वृद्धि का अनुपात क्या होगा। हम लंबाई में वृद्धि के सूत्र का उपयोग करके यह देखते हैं कि पतला और लंबा तार ज्यादा खिंचेगा, जबकि मोटा और छोटा तार कम खिंचेगा।
🎯 Exam Tip: अनुपात वाले प्रश्नों में, सभी समान भौतिक राशियों (जैसे \( F, Y \)) को तुरंत रद्द कर दें। फिर बचे हुए मापदंडों (लंबाई और त्रिज्या) के अनुपात को ध्यान से सूत्र में रखें। व्यास और त्रिज्या के संबंध का विशेष ध्यान रखें।
Question 12. एक पदार्थ \( 10^9 \) Nm\(^{-2}\) के प्रतिबल से टूट जाता है। यदि पदार्थ का घनत्व \( 3 \times 10^3 \) kg m\(^{-3}\) हो तो उससे बने तार की वह लम्बाई ज्ञात कीजिए जिससे वह तार लटकाये जाने पर स्वतः ही अपने भार से टूट जाये।
Answer: दिया गया है कि तार के टूटने के लिए आवश्यक प्रतिबल (ब्रेकिंग स्ट्रेस) \( \sigma = 10^9 \) Nm\(^{-2}\) है। पदार्थ का घनत्व \( d = 3 \times 10^3 \) kg m\(^{-3}\) है। गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण \( g = 10 \) m/s\(^2\) (पिछले प्रश्नों के अनुसार) है।
तार के अपने भार के कारण उत्पन्न प्रतिबल का सूत्र होता है: \( \text{प्रतिबल} = Ldg \), जहाँ \( L \) तार की लम्बाई है।
तार के अपने भार से टूटने के लिए, यह प्रतिबल ब्रेकिंग स्ट्रेस के बराबर होना चाहिए।
\( \sigma = Ldg \)
\( 10^9 = L \times (3 \times 10^3) \times 10 \)
\( 10^9 = L \times 3 \times 10^4 \)
अब, \( L \) का मान निकालने के लिए समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करते हैं:
\( L = \frac{10^9}{3 \times 10^4} \)
\( L = \frac{100000}{3} \)
\( L \approx 33333.33 \) m
तो, तार की अधिकतम लम्बाई लगभग 33.33 किलोमीटर होनी चाहिए जिससे वह अपने भार से न टूटे।
In simple words: हमें यह पता लगाना है कि कोई तार अपनी ही वज़न से टूटे बिना कितना लंबा हो सकता है। हमने तार के टूटने की ताकत और उसके घनत्व का इस्तेमाल किया। गणना करके पता चला कि तार अपनी ही वज़न से टूटे बिना लगभग 33.33 किलोमीटर लंबा हो सकता है।
🎯 Exam Tip: ऐसे सवालों में, गुरुत्वाकर्षण त्वरण (g) का मान ध्यान से देखें। यदि नहीं दिया गया है, तो आमतौर पर 9.8 m/s\(^2\) या 10 m/s\(^2\) उपयोग किया जाता है, जो प्रश्न के संदर्भ पर निर्भर करता है।
Question 13. एक ही धातु के दो तारों की त्रिज्याओं का अनुपात 2: 1 है। इनको समान बल आरोपित करके खींचा जाए तो उनमें उत्पन्न प्रतिबलों का अनुपात क्या होगा?
Answer: दिया गया है कि दो तारों की त्रिज्याओं का अनुपात \( r_1 : r_2 = 2 : 1 \) है।
दोनों तारों पर लगाया गया बल समान है, मान लीजिए \( F_1 = F_2 = F \) है।
प्रतिबल का सूत्र है: \( \text{प्रतिबल} = \frac{\text{बल}}{\text{क्षेत्रफल}} = \frac{F}{\pi r^2} \)
पहले तार में उत्पन्न प्रतिबल \( (\text{प्रतिबल})_1 = \frac{F}{\pi r_1^2} \)
दूसरे तार में उत्पन्न प्रतिबल \( (\text{प्रतिबल})_2 = \frac{F}{\pi r_2^2} \)
अब, दोनों प्रतिबलों का अनुपात निकालते हैं:
\( \frac{(\text{प्रतिबल})_1}{(\text{प्रतिबल})_2} = \frac{\frac{F}{\pi r_1^2}}{\frac{F}{\pi r_2^2}} \)
\( \frac{(\text{प्रतिबल})_1}{(\text{प्रतिबल})_2} = \frac{r_2^2}{r_1^2} \)
इसे हम ऐसे भी लिख सकते हैं: \( (\frac{r_2}{r_1})^2 \)
चूंकि \( r_1 : r_2 = 2 : 1 \), तो \( \frac{r_2}{r_1} = \frac{1}{2} \)
इसलिए, \( \frac{(\text{प्रतिबल})_1}{(\text{प्रतिबल})_2} = (\frac{1}{2})^2 = \frac{1}{4} \)
अतः, दोनों तारों में उत्पन्न प्रतिबलों का अनुपात \( 1 : 4 \) होगा।
In simple words: दो तारों की मोटाई अलग-अलग है, एक दूसरे से दुगुना मोटा है। जब उन पर एक जैसा खिंचाव बल लगाया जाता है, तो पतले तार में मोटे तार के मुकाबले चार गुना ज़्यादा दबाव (प्रतिबल) महसूस होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पतला तार बल को बहुत छोटे क्षेत्रफल पर फैलाता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि प्रतिबल क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है (या त्रिज्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है), इसलिए छोटे क्षेत्रफल पर लगाया गया समान बल अधिक प्रतिबल उत्पन्न करता है।
Question 14. किसी दृढ़ आधार से 2 m लम्बे तथा 3 g स्टील तार के द्वारा 2.5 kg भार लटकाया जाता है। स्टील के तार में 2.5 mm की लम्बाई में वृद्धि प्रेक्षित होती है। यदि स्टील के तार का घनत्व \( 7.8 \times 10^3 \) kg m\(^{-3}\) हो तो उसके पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया गया है:
तार की प्रारंभिक लम्बाई \( L = 2 \) m
तार का द्रव्यमान \( m_{wire} = 3 \) g \( = 3 \times 10^{-3} \) kg
लटकाया गया भार (द्रव्यमान) \( M = 2.5 \) kg
लम्बाई में वृद्धि \( \Delta L = 2.5 \) mm \( = 2.5 \times 10^{-3} \) m
स्टील के तार का घनत्व \( d = 7.8 \times 10^3 \) kg m\(^{-3}\)
हमें यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y \) ज्ञात करना है। गुरुत्वाकर्षण त्वरण \( g = 9.8 \) m/s\(^2\) लेंगे।
यंग प्रत्यास्थता गुणांक का सूत्र है: \( Y = \frac{\text{प्रतिबल}}{\text{विकृति}} = \frac{F/A}{\Delta L/L} = \frac{FL}{A \Delta L} \)
तार के क्षेत्रफल (A) को सीधे नहीं दिया गया है, लेकिन हम जानते हैं कि तार का द्रव्यमान \( m_{wire} = (\pi r^2 L) d \), जहाँ \( A = \pi r^2 \) है।
तो, \( m_{wire} = A L d \implies A = \frac{m_{wire}}{Ld} \)
इस क्षेत्रफल के मान को यंग प्रत्यास्थता गुणांक के सूत्र में रखने पर:
\( Y = \frac{F L}{(\frac{m_{wire}}{Ld}) \Delta L} = \frac{F L^2 d}{m_{wire} \Delta L} \)
यहां, \( F \) कुल बल है जो तार पर लग रहा है। चूंकि तार का अपना द्रव्यमान भी है, तो बल में लटकाए गए भार और तार का औसत भार शामिल होगा। हालाँकि, इस सूत्र में \( F \) आमतौर पर सिर्फ लटकाया गया भार \( Mg \) होता है। इस प्रश्न में दिए गए मानों के अनुसार, \( F \) को लटकाए गए भार के कारण बल \( Mg \) माना जाएगा।
\( F = Mg = 2.5 \times 9.8 = 24.5 \) N
अब मानों को सूत्र में रखते हैं:
\( Y = \frac{2.5 \times 9.8 \times (2)^2 \times 7.8 \times 10^3}{3 \times 10^{-3} \times 2.5 \times 10^{-3}} \)
\( Y = \frac{2.5 \times 9.8 \times 4 \times 7.8 \times 10^3}{7.5 \times 10^{-6}} \)
\( Y = \frac{764.4 \times 10^3}{7.5 \times 10^{-6}} \)
\( Y = \frac{764.4}{7.5} \times 10^9 \)
\( Y \approx 101.92 \times 10^9 \) Nm\(^{-2}\)
\( Y \approx 1.0192 \times 10^{11} \) Nm\(^{-2}\)
यंग प्रत्यास्थता गुणांक लगभग \( 1.02 \times 10^{11} \) Nm\(^{-2}\) है।
In simple words: हमने तार की लंबाई, उस पर लटकाए गए वज़न, और तार की लंबाई में हुए बदलाव का इस्तेमाल किया। तार के घनत्व और उसके अपने वज़न को भी ध्यान में रखा गया। इन सभी मापों का उपयोग करके, हमने तार की यंग प्रत्यास्थता गुणांक की गणना की, जो बताता है कि तार कितना मज़बूत या लचीला है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, यदि तार का द्रव्यमान दिया गया है, तो यह सुनिश्चित करें कि आप उसे कुल बल \( F \) की गणना में सही ढंग से शामिल कर रहे हैं (आमतौर पर तार के भार का आधा हिस्सा औसत प्रतिबल में जोड़ा जाता है) या दिए गए सूत्र का सावधानी से पालन करें।
Question 15. 0.8 cm अनुप्रस्थ काट की एक ताँबे की छड़ को दोनों ओर दृढ़तापूर्वक कस दिया जाता है। यदि छड़ का ताप \(20^\circ\)C कम कर दिया जाये तो छड़ में उत्पन्न तनाव को परिकलन कीजिये। ताँबे का यंग प्रत्यास्थता गुणांक \(11 \times 10^{10} \) Nm\(^{-2}\) तथा प्रसार गुणांक \(17 \times 10^{-6} /^\circ\)C है।
Answer: दिया गया है:
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A = 0.8 \) cm\(^2 = 0.8 \times 10^{-4} \) m\(^2\)
ताप में कमी \( \Delta T = 20^\circ \)C
ताँबे का यंग प्रत्यास्थता गुणांक \( Y = 11 \times 10^{10} \) Nm\(^{-2}\)
ताँबे का रेखीय प्रसार गुणांक \( \alpha = 17 \times 10^{-6} /^\circ \)C
हमें छड़ में उत्पन्न तनाव (बल \( F \)) ज्ञात करना है।
जब छड़ को कस दिया जाता है और उसका तापमान बदला जाता है, तो उसे फैलने या सिकुड़ने से रोका जाता है, जिससे तनाव उत्पन्न होता है। यह तनाव thermal stress कहलाता है।
thermal stress का सूत्र होता है: \( \text{प्रतिबल} = Y \alpha \Delta T \)
चूंकि बल (तनाव) = प्रतिबल \( \times \) क्षेत्रफल है, तो:
\( F = (\text{प्रतिबल}) \times A = (Y \alpha \Delta T) A \)
अब दिए गए मानों को सूत्र में रखते हैं:
\( F = (11 \times 10^{10}) \times (17 \times 10^{-6}) \times 20 \times (0.8 \times 10^{-4}) \)
\( F = (11 \times 17 \times 20 \times 0.8) \times 10^{(10 - 6 - 4)} \)
\( F = (3740 \times 0.8) \times 10^0 \)
\( F = 2992 \times 1 \)
\( F = 2992 \) N
तो, छड़ में उत्पन्न तनाव \( 2992 \) न्यूटन होगा।
In simple words: एक तांबे की छड़ को कसकर पकड़ा गया था और फिर ठंडा किया गया। जब धातु ठंडी होती है तो वह सिकुड़ना चाहती है, लेकिन कसकर पकड़े होने के कारण वह सिकुड़ नहीं पाती। इस कारण छड़ के अंदर एक खिंचाव बल (तनाव) पैदा होता है। हमने यंग गुणांक, प्रसार गुणांक, तापमान में बदलाव, और छड़ के क्षेत्रफल का उपयोग करके इस तनाव की गणना की।
🎯 Exam Tip: ताप परिवर्तन के कारण उत्पन्न तनाव की गणना करते समय, यह सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ SI प्रणाली में हैं (जैसे क्षेत्रफल m\(^2\) में, तापमान \(^\circ\)C या K में, यंग गुणांक Nm\(^{-2}\) में)।
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